1
00:00:03,010 --> 00:00:09,010
[संगीत]

2
00:00:12,040 --> 00:00:16,200
तो सभी को जय श्री राम

3
00:00:16,200 --> 00:00:20,400
और आज हमारे साथ

4
00:00:20,400 --> 00:00:25,160
हैं आप इनको शायद जानते हो गोविंद गुरुकुल

5
00:00:25,160 --> 00:00:30,160
के नाम से इनके सोशल मीडिया पर अकाउंट है

6
00:00:30,160 --> 00:00:34,240
और यह हमारे साथ एक बार चर्चा में आ भी

7
00:00:34,240 --> 00:00:37,520
चुके हैं

8
00:00:37,520 --> 00:00:41,600
तो आज हम लोग जो आपको विषय पता ही होगा

9
00:00:41,600 --> 00:00:45,600
कि जो रामपाल की जो भक्ति है रामपाल के द्वारा बताई जाने

10
00:00:45,600 --> 00:00:49,840
वाली वो मनमुक इसी के निमित्त

11
00:00:49,840 --> 00:00:54,640
हम इस मंच पर आए हैं यद्यपि पूर्व में

12
00:00:54,640 --> 00:00:58,760
गुरुकुल गोविंद जी के कुछ कार्य ऐसे रहे या जो भी रहा तो इन्होंने

13
00:00:58,760 --> 00:01:03,960
अपने आप को तब से कुछ परिवर्तन काफी किया है परिवर्तन लाए अपने आप में

14
00:01:03,960 --> 00:01:08,360
और ऐसा भी है कि हमारे और इनके

15
00:01:08,360 --> 00:01:12,600
जो विचार है बिल्कुल हर पॉइंट पर बिल्कुल एकमत नहीं भी है

16
00:01:12,600 --> 00:01:16,720
फिर भी जो जगतगुरु है जो कपाती जी महाराज हैं उन्होंने एक

17
00:01:16,720 --> 00:01:18,280
डेडलाइन दी थी

18
00:01:18,280 --> 00:01:22,560
कि अंततोगत्वा जो वेद में प्रमाण बुद्धि रखेगा चुटियों

19
00:01:22,560 --> 00:01:27,320
में प्रमाण बुद्धि रखेगा वो एक तरफ होनी चाहिए अगर

20
00:01:27,320 --> 00:01:31,320
बात उससे हो रही है जो वेद में श्रुति हों में प्रमाण बुद्धि नहीं रखते हैं

21
00:01:31,320 --> 00:01:37,320
या फिर उसमें दोष दृष्टि रखते हैं संदेहास्पद दृष्टि रखते

22
00:01:38,440 --> 00:01:41,440
हैं

23
00:01:41,440 --> 00:01:45,480
और इस लाइव का उद्देश्य इस लाइव का

24
00:01:45,480 --> 00:01:49,520
उद्देश्य वही है कि जो आजकल चल रहा है

25
00:01:49,520 --> 00:01:53,880
एक क्रम है कि हम लोग एक निश्चित

26
00:01:53,880 --> 00:01:57,880
बिल्कुल बाल की बिल्कुल एक एक बात का बाहर ले आए

27
00:01:57,880 --> 00:02:01,960
कि भाई आखिरकार कौन-कौन सी जगह पर जो

28
00:02:01,960 --> 00:02:06,080
रामपाल के द्वारा रामपाल के फॉलोअर्स के द्वारा अब रामपाल के द्वारा मैं नहीं

29
00:02:06,080 --> 00:02:10,520
कहूंगा कि रामपाल के द्वारा फैलाया हुआ रामपाल के जो फॉलोअर्स

30
00:02:10,520 --> 00:02:14,880
हैं जो रामपाल के नाम पर अब जो तंत्र चला रहे हैं उनके द्वारा

31
00:02:14,880 --> 00:02:19,000
जो बताया जाने वाला जो धर्मा भास

32
00:02:19,000 --> 00:02:23,320
है उसकी सच्चाई बाहर लाना उसी का एक क्रम उसी में एक क्रमिक

33
00:02:23,320 --> 00:02:27,360
वो है अभिव्यक्ति और मैं

34
00:02:27,360 --> 00:02:32,280
बता रहा था गुरुकुल गोविंद जी के बारे में और हमारे बारे में तो

35
00:02:32,280 --> 00:02:33,400
यह बात मैंने जैसा

36
00:02:33,400 --> 00:02:37,720
कि कहा कि यद्यपि हर दृष्टिकोण से हर मान

37
00:02:37,720 --> 00:02:41,720
बिंदुओं पर हमारा एक मत होना नहीं है ऐसा मगर

38
00:02:41,720 --> 00:02:45,960
क्योंकि वेदों में पूर्ण रूप से परमाण बुद्धि है

39
00:02:45,960 --> 00:02:50,440
तो इस कारण से जब बात किसी ऐसे व्यक्ति से होगी

40
00:02:50,440 --> 00:02:54,520
जो यह कहेगा कि अ

41
00:02:54,520 --> 00:02:58,680
हम वेद को उतना मानेंगे जितना हमें अच्छा लगेगा या फिर कोई

42
00:02:58,680 --> 00:03:02,800
और आ करर के बताएगा कि के वेद के कौन से मंत्र लेने हैं कौन से नहीं तो जब ऐसे किसी से बात

43
00:03:02,800 --> 00:03:06,880
होगी तो वेद में प्रमाण बुद्धि वाले हम साथ में हो जाे और

44
00:03:06,880 --> 00:03:10,960
इस प्रयास में भी है हम लोग कि आगे चलकर के अंततोगत्वा

45
00:03:10,960 --> 00:03:14,960
हम एक मत हो जाएं और यह प्रयास हमारा सबके

46
00:03:14,960 --> 00:03:19,320
लिए भी है हम आर्य समाज से भी कहते हैं

47
00:03:19,320 --> 00:03:23,320
कि भाई वो जो बीच की स्थिति वाली चर्चा है

48
00:03:23,320 --> 00:03:27,400
उसके लिए वो आए यहां पर आकर के करें कि कैसे धर्म की रक्षा हो

49
00:03:27,400 --> 00:03:31,640
सकती है अगर स्कन विदेशों में जाकर

50
00:03:31,640 --> 00:03:36,600
के धर्म का प्रचार कर रहा है तो हम उसमें दोष दृष्टि नहीं रख रहे हैं

51
00:03:36,600 --> 00:03:40,600
अगर वह धर्म का प्रचार कर रहा है लोगों को वेदों से जोड़ रहा है अगर उसमें

52
00:03:40,600 --> 00:03:44,800
कोई गलत बात हो रही है तो हम उसके लिए हैं हम उसके लिए टोक हैं

53
00:03:44,800 --> 00:03:48,600
तो हम वेदों में प्रमाण बुद्धि रखने वाले जब

54
00:03:48,600 --> 00:03:52,920
बात होगी किसी ऐसे से जो वेदों में वेदों को कस्टमाइज

55
00:03:52,920 --> 00:03:56,960
होकर के स्वीकार है या वेदों का ही खंडन करता है किसी भी एक श्रुति का

56
00:03:56,960 --> 00:04:01,200
खंडन कर देता है तो उससे जब बात होती है तो हम वेदों में प्रमाण

57
00:04:01,200 --> 00:04:03,920
बुद्धि रखने

58
00:04:03,920 --> 00:04:07,720
वाले एक तरफ हो जाएंगे

59
00:04:07,720 --> 00:04:11,800
और तो अब मैं चाहूंगा गुरु गुल गोविंद जी से कि आप थोड़ा सा

60
00:04:11,800 --> 00:04:15,920
अपने बारे में बता दे जी जी जी

61
00:04:15,920 --> 00:04:20,880
तो जैसा की पहले बा आपकी आवाज नहीं आ रही एक

62
00:04:20,880 --> 00:04:24,920
मिनट आप म्यूट तो नहीं है फिर आपकी आवाज क्यों नहीं आ रही

63
00:04:24,920 --> 00:04:30,920
अभी अभी आ रही आवाज नहीं आ रही आवाज अच्छा एक सेकंड रुक

64
00:04:33,440 --> 00:04:39,440
अभी मेरी आवाज आ रही आवाज नहीं आ रही

65
00:04:39,600 --> 00:04:43,680
आवाज अभी आ रही अभी बोलिए एक बार आप लीव करके दोबारा आ

66
00:04:43,680 --> 00:04:47,840
जाइए आपको आ रही है हां हमें

67
00:04:47,840 --> 00:04:53,840
नहीं आ रही है क्यों नहीं आ रही

68
00:04:54,640 --> 00:05:00,640
भाई एक मिनट अब बोलिए

69
00:05:11,370 --> 00:05:17,370
[संगीत]

70
00:05:19,120 --> 00:05:23,120
जी तो अभी आप आही मेरी आवाज जी

71
00:05:23,120 --> 00:05:27,280
आ रही है ठीक तो परिचय पहले मैं दे देता हूं अपना जैसा

72
00:05:27,280 --> 00:05:30,200
कि हुआ कि

73
00:05:30,200 --> 00:05:34,360
पहले की बात हुई अतीत में कुछ ऐसी बातें हुई जो कि बड़ी अफसोस जनक

74
00:05:34,360 --> 00:05:38,560
भी है ठीक है और शिक्षा भी लेने की

75
00:05:38,560 --> 00:05:42,640
जरूरत है कि किस मौके पर कितना बोलना चाहिए और कहां

76
00:05:42,640 --> 00:05:47,040
से कदम वापस ले लेने चाहिए ठीक है तो जो मैंने

77
00:05:47,040 --> 00:05:51,280
गलतियां की ठीक है जैसा कि बताया जाता है वह यह है कि कभी

78
00:05:51,280 --> 00:05:55,280
भी एक सीमा से आगे जाकर ना किसी सत्पुरुष के लिए बोलना है और

79
00:05:55,280 --> 00:05:59,760
ना ही किसी देवी देवता के लिए एक सीमा से बढ़कर कोई भी बात होनी चाहिए

80
00:05:59,760 --> 00:06:04,120
यदि लगता है दिशा एक मतलब एक

81
00:06:04,120 --> 00:06:08,320
बातचीत एक ऐसी दिशा में जा रही जहां केवल अभद्रता ही प्राप्त होने वाली

82
00:06:08,320 --> 00:06:12,520
है आपको भी और सामने वालों को भी तब हमें उस चीज से कदम पीछे

83
00:06:12,520 --> 00:06:16,560
हटा लेने चाहिए जैसे कि सोशल मीडिया पर मेरे बारे में यह देखा भी

84
00:06:16,560 --> 00:06:20,760
गया कि किस प्रकार की बातें जो है निंदनीय बातें जो होती है वह

85
00:06:20,760 --> 00:06:24,760
भी हुई चलिए वोह एक इतिहास था शिक्षा जो व्यक्ति

86
00:06:24,760 --> 00:06:28,920
किसी भी चीज से ले लेता है उसके लिए वो उसका कार्य निरर्थक नहीं चला

87
00:06:28,920 --> 00:06:33,000
जाता ठीक है तो जैसे कि लक्ष्मण जी

88
00:06:33,000 --> 00:06:34,360
को भी शिक्षा दे रहे हालांकि

89
00:06:34,360 --> 00:06:38,440
हम तो लक्ष्मण नहीं है मैं भी एक रामायण का प्रसंग सुना रहा हूं लक्ष्मण

90
00:06:38,440 --> 00:06:42,440
जी को शिक्षा दे रहे हैं ना भगवान कि तुम क्यों माता को अकेला छोड़कर चले

91
00:06:42,440 --> 00:06:46,680
आए मेरे पास ठीक है तो उनसे जो गलती हुई

92
00:06:46,680 --> 00:06:50,680
अब हम उससे पूरी शिक्षा ले रहा है समाज कि नहीं जो बड़े

93
00:06:50,680 --> 00:06:54,880
भाई ने कहा है या ज्ञानी पुरुष ने कहा है उस कार्य को

94
00:06:54,880 --> 00:06:59,120
बिल्कुल बिना किसी शंका के हमें करना है ठीक है तो

95
00:06:59,120 --> 00:07:03,440
यही बात होती है कामाख्या देवी के बारे में वो बातचीत थी

96
00:07:03,440 --> 00:07:07,640
वहां पर कुछ हद से आगे जाने की प्रयास किया मैंने भी किया और भी लोगों

97
00:07:07,640 --> 00:07:11,680
ने किया तो उससे कुछ त्रुटियां भी हुई और उससे फिर कुछ हमें सबक भी

98
00:07:11,680 --> 00:07:15,800
लेना चाहिए ठीक है तो उसके लिए जो है जितने भी लोग देख रहे हैं उनसे

99
00:07:15,800 --> 00:07:19,960
मैं क्षमा प्रार्थी भी हूं ठीक है परंतु आपको यह बात जाननी चाहिए कि मैंने

100
00:07:19,960 --> 00:07:24,000
सबक सीखा है यदि सबक नहीं सीखा तब

101
00:07:24,000 --> 00:07:28,040
वो बात गलत हो जाती है ठीक है तो पहला तो मेरा यह छोटा

102
00:07:28,040 --> 00:07:32,160
सा जो पास्ट था ताकि क्लियर हो जाए ये बताने का वजह बस इतनी

103
00:07:32,160 --> 00:07:36,480
सी है कि इस चैनल के ऊपर कोई भी व्यक्ति कल को उंगली

104
00:07:36,480 --> 00:07:40,480
ना उठा सके ठीक है क्योंकि जगतगुरु श्री जो शंकराचार्य

105
00:07:40,480 --> 00:07:44,960
जी है उनका नाम कहीं ना कहीं इस चैनल से जुड़ा हुआ है मैं शिवास

106
00:07:44,960 --> 00:07:49,080
जी को पहले भी कह चुका हूं मैं बैक एंड पर रहकर भी काम करने को तैयार हूं

107
00:07:49,080 --> 00:07:49,580
लेकिन

108
00:07:49,440 --> 00:07:53,880
इस मिशन में कभी भी मेरी तरफ से कोई भी गड़बड़ नहीं होनी चाहिए चैनल के ऊपर

109
00:07:53,880 --> 00:07:57,880
कोई भी व्यक्ति उंगली नहीं उठाना चाहिए क्योंकि वो मेरी पर्सनल बात है अगर

110
00:07:57,880 --> 00:08:02,000
किसी ने उंगली उठानी है तो वो ट मेरे ऊपर उठा सकता है ठीक है पहली

111
00:08:02,000 --> 00:08:06,000
बात तो ये है दूसरी बात है मैं स्वाध्याय करता हूं

112
00:08:06,000 --> 00:08:10,000
अध्ययन करता हूं थोड़ा बहुत और जो मेरे को देखिए एक तो बात

113
00:08:10,000 --> 00:08:14,400
होती है जो संप्रदायिक सिद्धांत है मैं उन पर बात नहीं करता हूं ठीक है

114
00:08:14,400 --> 00:08:18,440
मैं बात करता हूं जो कि सोशली जैसे कि गीता है तो सोशली हम

115
00:08:18,440 --> 00:08:22,520
इसको कैसे अप्लाई कर सकते हैं और थोड़ा बहुत अपने जीवन में भी सत मार्ग पर ला सकते

116
00:08:22,520 --> 00:08:26,800
हैं ठीक है बस मेरा इतना सही मैं स्वयं से ही स्वाध्याय करता हूं और स्वयं

117
00:08:26,800 --> 00:08:31,040
से ही लोगों को मैं प्रचार भी करता हूं जो भी चीज सोशली चीजों को

118
00:08:31,040 --> 00:08:35,320
इन्फ्लुएंस कर रही बस वहां तक नहीं

119
00:08:35,320 --> 00:08:39,520
यह आपने बहुत अच्छी बात बताई आपने देखिए कुल मिलाकर के जो है भूतकाल

120
00:08:39,520 --> 00:08:43,680
में जो आपसे कुछ त्रुटियां हुई आपने साहस के साथ उसको स्वीकार किया

121
00:08:43,680 --> 00:08:47,880
है पब्लिक के सामने और आपने क्षमा भी मांगी है और हम

122
00:08:47,880 --> 00:08:52,160
भी भगवान से प्रार्थना यही करते हैं कि आगे जाकर के हमारे जो मार्ग

123
00:08:52,160 --> 00:08:56,440
अभी भी थोड़े से थोड़े बहुत जो दूर रह गए हैं या दिख रहे मात्र

124
00:08:56,440 --> 00:09:00,640
हैं वो जाकर के आपस में एक हो जाए मगर मर आज हम बात

125
00:09:00,640 --> 00:09:05,360
करेंगे जो वेदों में जो कस्टमाइजेशन वाले लोग हैं

126
00:09:05,360 --> 00:09:09,680
उनके साथ बात करेंगे जो दिख तो रहे हैं कि हम वेदों को मानने वाले

127
00:09:09,680 --> 00:09:14,160
हम जो शास्त्र सम्मत बात करते हैं और

128
00:09:14,160 --> 00:09:18,840
वह जो है स्वयं कितना शास्त्र सम्मत है

129
00:09:18,840 --> 00:09:22,880
तो आज हम उस पर बात करेंगे और कुछ देर के बाद हम

130
00:09:22,880 --> 00:09:27,720
जोड़ेंगे भी अगर उनका कोई फॉलोअर आना चाहेगा तो ऊपर आए

131
00:09:27,720 --> 00:09:31,840
तो आपका ऐसा क्या एक्सपीरियंस रहा इनके साथ वह

132
00:09:31,840 --> 00:09:36,320
आप पहले बताएं क्योंकि आप मुझे ऐसा मालूम चला कल भी गए हैं

133
00:09:36,320 --> 00:09:40,600
और मैंने उस उनके वहां के कुछ दृश्य देखे तो

134
00:09:40,600 --> 00:09:44,680
हास्यास्पद थे वो दृश्य काफी और ऐसा होता ही

135
00:09:44,680 --> 00:09:49,080
है तो आप थोड़ा सा अपना एक्सपीरियंस बताए आपका क्या जर्नी रही

136
00:09:49,080 --> 00:09:53,720
रामपाल एंड कंपनी के विषय में

137
00:09:53,720 --> 00:09:57,920
रामपाल को बाबा जी को मैं कोई सुनने लगा आज से कोई चार पाच

138
00:09:57,920 --> 00:10:01,960
साल पहले लेकिन कह है ना कि एक

139
00:10:01,960 --> 00:10:06,040
हमारे जो यशस्वी प्रधानमंत्री जी है उन्होंने भी एक नारा दिया था हालांकि य

140
00:10:06,040 --> 00:10:10,080
कोई पॉलिटिकल बात नहीं है कि आपदा में अवसर खोजना ठीक है

141
00:10:10,080 --> 00:10:14,560
तो मेरे को आपदा में अवसर इसी प्रकार मिला कि संदीप संदीप

142
00:10:14,560 --> 00:10:18,720
बत्रा जी शायद आपकी लाइव में जुड़ते हैं वो मेरे को बहुत पहले से जानते हैं मैं उनके

143
00:10:18,720 --> 00:10:20,480
साथ काम किया करता था यही फु

144
00:10:20,480 --> 00:10:24,640
प रामपाल जी के जो है द्वारा तो मेरे को जब इन्हो पता चला

145
00:10:24,640 --> 00:10:28,640
ऐसी ऐसी बातें लिखी हुई है तो मैं मेरे को बड़ा कष्ट हुआ भाई ये क्या है क्या मेरे

146
00:10:28,640 --> 00:10:32,880
हमने मतलब हमारा पूरा धर्म ही झूठ पर बेसिक है यानी मेरा

147
00:10:32,880 --> 00:10:37,000
पूरा जो धर्म है वही झूठा है यानी कि क्योंकि यह तो ग्रंथ खोल के दिखा

148
00:10:37,000 --> 00:10:41,000
रहे हैं ऐसा तो है नहीं कि वो ग्रंथ नहीं दिखा रहे वो तो नेशनल टीवी पर ग्रंथ दिखा

149
00:10:41,000 --> 00:10:45,040
रहे तो मैंने भी अपने ग्रंथ पर घर में दो तीन ग्रंथ ले आए तब मेरे

150
00:10:45,040 --> 00:10:49,400
को जब पूरा पैराग्राफ पढ़ा मैंने कहा यार ये कैसे लोग है मतलब

151
00:10:49,400 --> 00:10:53,440
इतना मोटा ग्रंथ है उसमें से डेढ़ लाइन पढ़ के बोल

152
00:10:53,440 --> 00:10:57,520
रहे हैं कि देखिए जी हमने पूरा का पूरा जो है अध्ययन कर लिया और उसम

153
00:10:57,520 --> 00:11:01,680
इतनी वाहियात भी चीजें बताई गई है जिसका कोई हल नहीं

154
00:11:01,680 --> 00:11:06,120
मतलब कुछ तो सिद्धांति बात कर लो कुछ भी मैंने बस

155
00:11:06,120 --> 00:11:10,280
तब से इनको कोई तीन चार साल हो गए बस एक ही बात कह रहा हूं आज तक रामपाल

156
00:11:10,280 --> 00:11:14,400
जी का कोई भी एक ज्ञान शास्त्र सम्मत सिद्ध कर दीजिए मैं

157
00:11:14,400 --> 00:11:18,440
बहुत दुविधा में हूं ठीक है पूरा मेरे को चाहिए नहीं मेरे

158
00:11:18,440 --> 00:11:22,560
को सिर्फ एक ज्ञान चाहिए वो भी शास्त्र सम्मत आज तक इनसे नहीं देने हो पाया

159
00:11:22,560 --> 00:11:26,640
फिर मैंने इनसे डिबेट्स करी मेरे पास ढाई ढाई तीन-तीन साल तब की भी

160
00:11:26,640 --> 00:11:30,840
डिबेट्स पड़ी हुई है आज की भी पड़ी हुई है फोन करता हूं इनके आश्रम

161
00:11:30,840 --> 00:11:34,840
में फोन काट देते हैं व का मेरा नंबर ब्लॉक कर देते हैं

162
00:11:34,840 --> 00:11:35,560
मेरे फोन

163
00:11:35,560 --> 00:11:39,560
के नंबर ब्लॉक कर देते हैं गालियां देते हैं गंदगी बोलते हैं आगे

164
00:11:39,560 --> 00:11:43,640
से ठीक है मतलब पहले मैंने इनके वहां पर फोन कर लिया फिर मेरे

165
00:11:43,640 --> 00:11:47,640
को कभी दूसरे नंबर से फोन आएगा वो डायरेक्ट मेरे साथ गाली गलोज

166
00:11:47,640 --> 00:11:51,880
करेगा मैंने कहा भाई गाली गलोज करने वाली बात ही नहीं है तुम्हारे ग्रंथों में जब सारी चीजें

167
00:11:51,880 --> 00:11:55,960
लिखी हुई है और वो सारी की सारी ही गलत है ग्रंथों के अनुसार तो इसमें मेरा

168
00:11:55,960 --> 00:12:00,880
क्या लेना देना मैंने सिर्फ एक बार इनसे आप यकीन मानिए

169
00:12:00,880 --> 00:12:05,240
मैंने सिर्फ फोन करके इनसे इतनी बात पूछी कि भाई आविर्भव का मतलब

170
00:12:05,240 --> 00:12:09,360
जन्म और तिरो भाव का मतलब मृत्यु कहां पर लिखा हुआ है ठीक

171
00:12:09,360 --> 00:12:14,360
है आप यकीन मानिए आश्रम का बंदा मेरे को गालियां देना शुरू हो गया फोन के

172
00:12:14,360 --> 00:12:18,560
ऊपर ऑफिशियल लाइन की बात कर रहा हूं जहां पे वो आता है ना कि इनसे बात

173
00:12:18,560 --> 00:12:22,720
करने के लिए ये दबाइए एक दबाइए चार दबाइए चार दबाया बंदे

174
00:12:22,720 --> 00:12:26,760
से मैंने चार पांच बार पूछा वो इतना फ्रस्ट्रेट हो गया दूसरे नंबर से फोन

175
00:12:26,760 --> 00:12:30,840
करके मेरे को गालियां देना शुरू हो गया पहले वहां पर मेरे को गालियां दे रहा फिर दूसरे नंबर से भी फोन करके

176
00:12:30,840 --> 00:12:35,040
गालियां दे रहा है आज तक कोई एक भी

177
00:12:35,040 --> 00:12:39,280
चीज मेरे को इन्होंने शास्त्र सम्मत नहीं बताई जो दुनिया भर का

178
00:12:39,280 --> 00:12:43,440
झूठ है सिर्फ सिर्फ फ्रॉड शुरू से लेकर यह

179
00:12:43,440 --> 00:12:47,440
पुस्तक है मेरे पास इनकी मैं खून के साथ लिख के दे

180
00:12:47,440 --> 00:12:51,720
सकता हूं अभी हम खोल लेंगे यह क्या खून से लिखने वाली कोई बात ही नहीं

181
00:12:51,720 --> 00:12:55,960
है इसमें एक भी बात शास्त्र सम्मत सिद्ध

182
00:12:55,960 --> 00:13:00,160
करने वाले को मैं अभिमन्यु वर्मा मेरा नाम है मैं

183
00:13:00,160 --> 00:13:04,200
000 पेटीएम इनाम दूंगा जो भी इसकी एक भी बात

184
00:13:04,200 --> 00:13:08,400
ग्रंथों से हूबहू बिना मिलावट के ये नहीं कि इसका

185
00:13:08,400 --> 00:13:12,680
वर्ड उठा के उधर रख दिया उधर उठा के इधर कर दिया तुम को मैं कर दिया और उसको आ

186
00:13:12,680 --> 00:13:16,760
को जा कर दिया और खा को पी कर दिया ठीक है एक भी

187
00:13:16,760 --> 00:13:20,920
इसमें कोई ऐसी चीज नहीं है जो प्रमाण सहित हो मैं ये बस कह रहा हूं हां

188
00:13:20,920 --> 00:13:25,200
ठीक है तो अगर कोई कर देता है तो हम अपनाएंगे और उसे भेंट स्वरूप

189
00:13:25,200 --> 00:13:29,280
हम देंगे भी जो उसका बनता होगा ठीक है ना हालांकि पैसे का तो आप

190
00:13:29,280 --> 00:13:33,440
लालच नहीं होगा जितने भी रामपाल जी के शिष्य सुन रहे हैं लेकिन चलिए उससे

191
00:13:33,440 --> 00:13:37,680
कोई ना कोई कार्य तो हल हो जाएगा आपके प्रचार में लग जाएगा वो कार्य प्रचार

192
00:13:37,680 --> 00:13:42,520
कर लेंगे वो भंडारा होता है ना तीन दिन का भंडारा होता है इनका

193
00:13:42,520 --> 00:13:47,000
उसम उसम हो जाएगा चलो डिस्पोजल आ जाए

194
00:13:47,000 --> 00:13:51,360
हज में डिस्पोजल भी बहुत सारा आ जाता है हा नहीं भैया

195
00:13:51,360 --> 00:13:55,360
हम यह कहेंगे कि इन्होंने बहुत सी कुछ

196
00:13:55,360 --> 00:13:59,720
जरूरी जरूरी मुख्य बातें हैं इनके कुछ कुत होते

197
00:13:59,720 --> 00:14:04,000
हैं जैसे मैंने देखा था मुझसे भी

198
00:14:04,000 --> 00:14:07,600
ये कुतर किया इन्होंने कि

199
00:14:07,600 --> 00:14:11,760
जैसे यह पेन है यह पेन वाला कुतर को नेपाली लड़का

200
00:14:11,760 --> 00:14:15,840
है ना जो वो करता है जैसे ये पेन है कल उसको

201
00:14:15,840 --> 00:14:20,080
मैंने नहीं बोलने दिया कल उसको मैंने नहीं बोल मैंने कहा भाई कहता

202
00:14:20,080 --> 00:14:24,360
उदाहरण देने लगा मैंने कहा मैं कौन से शास्त्र से उदाहरण दे रहा बता ग

203
00:14:24,360 --> 00:14:28,360
खो लेता तो उसने बोला जैसे पेन है

204
00:14:28,360 --> 00:14:32,600
अब को जो पेन कहेगा मैं उसको मानूंगा अरे भैया यह पेन

205
00:14:32,600 --> 00:14:36,800
है ये तुमको पहले से पता है और शास्त्र वो है जो तुमको वो चीज

206
00:14:36,800 --> 00:14:40,800
बता रहे हैं जो तुमको नहीं पता है तो शास्त्र को खोलने

207
00:14:40,800 --> 00:14:44,800
से पहले यदि तुमको पता है कि ये पेन है तो तुम्हें

208
00:14:44,800 --> 00:14:49,760
शास्त्र की आवश्यकता क्या पेन को जानने के लिए आवश्यकता ही नहीं है कोई भी हा

209
00:14:49,760 --> 00:14:53,920
और अगर तुम्हारे पास कोई और सोर्स ऑफ इंफॉर्मेशन है जिससे तुम यह तय

210
00:14:53,920 --> 00:14:58,040
कर रहे हो कि यह क्या है तो फिर तुम्हारे को शास्त्र

211
00:14:58,040 --> 00:15:02,160
पर डिपेंड होने की आवश्यकता नहीं है वो जो शास्त्र है तुम्हारे लिए

212
00:15:02,160 --> 00:15:06,240
वो प्रमाण नहीं है तुम्हारे लिए प्रमाण कुछ और है एक वो जो वो

213
00:15:06,240 --> 00:15:10,320
जो चिल्ला के ही बात करते केवल हालांकि चिल्लाता मैं भी हूं

214
00:15:10,320 --> 00:15:14,440
ऐसा नहीं है भाई मैं भी आप आवेश में आ जाता हूं मगर

215
00:15:14,440 --> 00:15:18,600
वो तो ऐसे ऐसे बात करते हैं इससे लगता है कि कुछ कान थोड़े वीक

216
00:15:18,600 --> 00:15:22,680
हैं हां मतलब नॉर्मल भी अगर अगर नॉर्मल भी बात

217
00:15:22,680 --> 00:15:26,960
कर रहे तो ऐसा ही लगता है जैसे बह रहे हो

218
00:15:26,960 --> 00:15:32,480
तो एक बात देख ना

219
00:15:32,480 --> 00:15:36,600
उनका एक तर्क आता है मेरे साथ भी मेरे लिए जब बोल रहे थे तब भी मैंने

220
00:15:36,600 --> 00:15:40,720
देखा और आपसे जब बात कर रहे थे तब भी मैंने देखा

221
00:15:40,720 --> 00:15:45,000
वो बोलते हैं कि भाई 2 प्लसटू अगर कोई फ

222
00:15:45,000 --> 00:15:49,640
लिख देगा गलती से तो हम उसको क्यों मानेंगे भाई आपको कैसे पता चला

223
00:15:49,640 --> 00:15:54,400
आपको कैसे पता चला कि वो 2 प्लट 5 है

224
00:15:54,400 --> 00:15:59,240
आपको यानी कि उस ग्रंथ से पहले से किसी ने बता दिया है कि 2 प्

225
00:15:59,240 --> 00:16:03,320
तो जब बता दिया तो उस ग्रंथ का आलंबन क्यों ले रहे हो उसी के पास जाओ जिसने

226
00:16:03,320 --> 00:16:07,400
ू प् फ बता दिया है यानी कि आपको किसी ने बता दिया कि जो

227
00:16:07,400 --> 00:16:11,400
तत्वदर्शी है व रामपाल है जेल धाम वाला अब आप जो है

228
00:16:11,400 --> 00:16:15,480
गीता में ढूंढने जा रहे हो कि रामपाल को तत्वदर्शी कहां से कहा जा

229
00:16:15,480 --> 00:16:19,520
सकता है यह कौन सी बात है आपको तो पता लग गया ना कि रामपाल

230
00:16:19,520 --> 00:16:23,600
तत्वदर्शी जाओ अपना अब आपको क्या आवश्यकता है वेद और गीता

231
00:16:23,600 --> 00:16:27,720
की और यदि वेद और गीता की आवश्यकता है तो इसका मतलब है कि

232
00:16:27,720 --> 00:16:31,720
आपको नहीं पता है कि पेन है कि नहीं ू प्लस टू कितना होता है ये आपको नहीं

233
00:16:31,720 --> 00:16:35,720
पता है वेद जो ग्रंथ है उनका आलंबन इसलिए नहीं

234
00:16:35,720 --> 00:16:37,800
लिया जाता कि

235
00:16:37,800 --> 00:16:41,880
अपनी धारणाओं को उस ग्रंथ के आलंबन के द्वारा आलंबन लेते

236
00:16:41,880 --> 00:16:45,920
हुए लोगों को बेवकूफ बना सके कि देखो जो हम बोल रहे वो गीता में लिखा

237
00:16:45,920 --> 00:16:50,000
है ग्रंथ का आलंबन इसलिए लिया जाता है कि

238
00:16:50,000 --> 00:16:54,360
ग्रंथ की धारणाओं को लोगों में प्रचारित किया जाए

239
00:16:54,360 --> 00:17:00,360
ना कि अपनी धारणाओं को ग्रंथ के नाम पर प्रचारित किया जाए बिल्कुल

240
00:17:00,800 --> 00:17:05,040
तो यह मैंने देखा उनके उतरक रहते हैं जैसे कल भी एक व्यक्ति

241
00:17:05,040 --> 00:17:09,200
आया था मैंने उसकी एक बात देखी थी उससे मैंने पूछा वेद

242
00:17:09,200 --> 00:17:13,560
को मानते हो कि नहीं वो उसका नाम था

243
00:17:13,560 --> 00:17:17,760
कबीर कबीर इज गॉड मैंने उससे पूछा वेद

244
00:17:17,760 --> 00:17:21,880
को मानते हो कि नहीं बोला जितना मुझे अच्छा लगता है उतना मानता हूं अच्छा

245
00:17:21,880 --> 00:17:25,880
मेले में हम हमारा जब इनसे वो हुआ था

246
00:17:25,880 --> 00:17:30,160
एक तरीके से टकरा भी कहेंगे हा टकरा हुआ था बोला

247
00:17:30,160 --> 00:17:34,160
मैंने कहा मैं लाके दूंगा व मानोगे क्या तो बोला जितना मेरे लिए होगा उतना मान भाई

248
00:17:34,160 --> 00:17:38,440
वो पैरामीटर क्या है क कौन से आप कहते हो शास्त्र सम्मत

249
00:17:38,440 --> 00:17:42,480
फिर बातें अपने मन की करते हो जितना मेरे मानने लायक होगा उतना मानूंगा

250
00:17:42,480 --> 00:17:46,520
जितना मुझे अच्छा लगता है उतना मान तो फिर यह क्यों लिखा है कि वो सारे शास्त्र खोल के

251
00:17:46,520 --> 00:17:50,760
दिखा रहे हैं आप तो अपने मन की बातें जगह जगह पर कर रहे हो कि टीचर

252
00:17:50,760 --> 00:17:53,040
दूसरा आ रहा है शास्त्र में कहां गलत है कहां

253
00:17:53,040 --> 00:17:57,080
सही है वो बताने टीचर दूसरा आ रहा है कौन

254
00:17:57,080 --> 00:18:02,120
सा मंत्र गलत है कौन सा मंत्र काल ने बोला है उसके लिए टीचर दूसरा आ रहा है

255
00:18:02,120 --> 00:18:06,240
और आपको कितना आपको कितना मानना है कितना नहीं मानना है वो मेरे

256
00:18:06,240 --> 00:18:10,240
मन से तय करूंगा तो जब आपको सब कुछ शास्त्रों में अपने

257
00:18:10,240 --> 00:18:14,240
मन से चेक करना है अपने मन से ढूंढ लेना है तो उस भक्ति को शास्त्र

258
00:18:14,240 --> 00:18:18,560
सम्मत भक्ति कहां से कह रहे हो तुम उस भक्ति को मनमुक भक्ति कहोगे ना

259
00:18:18,560 --> 00:18:22,600
यही आज का टॉपिक है व वो बंदा मुझसे वो बंदा मुझसे कहता

260
00:18:22,600 --> 00:18:26,720
है कि मैं वेदों को उतना मानूंगा जितना मुझे अच्छा लगता है और फिर अगली अगले

261
00:18:26,720 --> 00:18:30,800
ही थोड़ी देर बाद मुझसे कहता है कि मैं तुम्हें लिखा दिखा दूंगा शंकर जी उनको

262
00:18:30,800 --> 00:18:34,920
गुरु नानक जी की पूजा करते थे और कहां लिखा दिखाएंगे गुरु ग्रंथ

263
00:18:34,920 --> 00:18:39,160
साहिब में मतलब वो मुझसे एक्सपेक्ट कर रहा है कि मैं गुरु ग्रंथ साहिब

264
00:18:39,160 --> 00:18:43,160
को जहां से व जितना दिखा दे उतना मान लू और और

265
00:18:43,160 --> 00:18:47,280
वह कर क्या रहा है कि जब मैं वेद वेद में लिखा उसे दिखा रहा हूं तो उसम कह रहा जितना मुझे अच्छा

266
00:18:47,280 --> 00:18:51,680
लगे उतना मानूंगा ये इनके लॉजिक है ये

267
00:18:51,680 --> 00:18:55,680
ये इनके राम पालियो के लॉजिक है अगर गुरु ग्रंथ साहब में

268
00:18:55,680 --> 00:18:59,840
वो चीज लिखी है तो भाई किसी पाठी साहब को आमंत्रित करिए

269
00:18:59,840 --> 00:19:04,280
ना अपने साथ लेकर आने को वो बताएंगे ना उसका मतलब क्या है हमें

270
00:19:04,280 --> 00:19:08,200
तो ना फारसी आती है ना पंजाबी पढ़ने आती है ना गुरुमुखी

271
00:19:08,200 --> 00:19:12,560
पढ़ने आती है ठीक है ना हमें तो उसका कुछ पता नहीं

272
00:19:12,560 --> 00:19:16,640
तो अगर आप शब्दों के हेर फेर कर भी दोगे तो हमें क्या पता चलेगा

273
00:19:16,640 --> 00:19:20,640
वहां पर क्या लिखा हुआ है यदि नानक जी कह रहे हैं एक ओमकार

274
00:19:20,640 --> 00:19:24,880
ही सतनाम है कर्ता पुरख अकाल मूरत है मूरत है अजूनी

275
00:19:24,880 --> 00:19:29,000
सैवम गुर प्रसाद जप आद सत जुगा सत है भी सत

276
00:19:29,000 --> 00:19:33,440
हो सा सोचे सोच ना होई जो सोचे लख बार ठीक है

277
00:19:33,440 --> 00:19:37,480
तो बात यह है जब वो एक अपना सर्वप्रथम बता रहे हैं कि

278
00:19:37,480 --> 00:19:41,680
मैं एक ओमकार की ही पूजा करता हूं ठीक है वही सत्य नाम

279
00:19:41,680 --> 00:19:46,000
है वही कर्ता पूरक है अर्थात ईश्वर का वह रूप

280
00:19:46,000 --> 00:19:50,280
जो सच्चिदानंद है ठीक है जो कण कण में व्याप्त

281
00:19:50,280 --> 00:19:54,680
है मैं उसकी पूजा करता हूं ठीक है अब कहीं भी वहां पर

282
00:19:54,680 --> 00:20:00,080
आप कह सकते हो कि साकार को भी नकारा नहीं गया है यह भी बात हम

283
00:20:00,080 --> 00:20:04,120
लेकिन उसका मतलब क्या है वो तो वो होगा ना जो उस परंपरा से चला

284
00:20:04,120 --> 00:20:08,560
आ रहा होगा ठीक है आप कैसे

285
00:20:08,560 --> 00:20:12,720
वो कह देंगे कि भाई वो ये कह रहे हैं या वो कह रहे हैं आप नहीं कह सकते

286
00:20:12,720 --> 00:20:17,120
हैं क्योंकि आप प रहे इसका जो तरीका है तोड़ने का

287
00:20:17,120 --> 00:20:21,280
इसका तरीका हमने कल निकाला कि अब हम बताएंगे रामपाल

288
00:20:21,280 --> 00:20:23,240
दास जी ने क्या कहा है रामपाल

289
00:20:23,240 --> 00:20:27,280
दास वाले नहीं बताएंगे अब हम बताएंगे रामपाल दास ने क्या वो

290
00:20:27,280 --> 00:20:32,160
भक्तों की निशानी क्या है जो वो सब कुछ खींचता है

291
00:20:32,160 --> 00:20:36,400
पता नहीं दुरा चरण भी करता है तो रहित नहीं वो सहित

292
00:20:36,400 --> 00:20:40,520
है हां वो रहित नहीं वो सहित है हम बताएंगे वो तो गलती से प्रिंट हो गया

293
00:20:40,520 --> 00:20:46,520
कोई दो और दो दो और दो पाच लिख देगा तो हम उसको सही ना करें क्या

294
00:20:46,680 --> 00:20:50,880
तो एक बात मैं और आपको पढ़ाता हूं चलिए ज्ञान गंगा प थोड़ी नजर डालते

295
00:20:50,880 --> 00:20:55,000
हैं एक उसको भी चेक कर लेते हैं दरअसल उसमें कौन सा दिव्य ज्ञान है

296
00:20:55,000 --> 00:20:59,120
हा ये जो थ्योर कल बात है इसको चालू करने से पहले एक मैं आपको

297
00:20:59,120 --> 00:21:03,560
एक ध्यान दिलाना चाहूंगा मैंने कई ऐसे वीडियोस देखे हैं रामपाल

298
00:21:03,560 --> 00:21:07,560
दास जी की ओर से फैलाए जाते हैं क्योंकि मैं मैं पता है उनके प्रति थोड़ी थोड़ी

299
00:21:07,560 --> 00:21:12,000
सिंपैथी आने लगी है जो रामपाल दास जी जो कारागार

300
00:21:12,000 --> 00:21:16,120
में है सिंपैथी इसलिए आने लगी क्योंकि मैंने उनका देखा कि वो कहते हैं मुझे फसाया

301
00:21:16,120 --> 00:21:20,160
गया मुझे फसाया गया है और ये लोग उनके जो भक्त कहते हैं अपने आप को वो बाहर

302
00:21:20,160 --> 00:21:24,480
फैलाते हैं वो अपनी मन से गए हैं तो कितना बड़ा तमाचा है उनके ऊपर उनके ही भक्तों

303
00:21:24,480 --> 00:21:28,880
के द्वारा उनके ही शिष्यों के द्वारा आदमी रो रहा है आदमी कह रहा है मुझे फसाया गया है

304
00:21:28,880 --> 00:21:32,920
अच्छा बताइए वहां वहां यह जब कोर्ट में पेशी में जाते होंगे

305
00:21:32,920 --> 00:21:37,080
मैंने अभी वो नहीं देखा इनका चार्ट शीट वगैरह नहीं देखी

306
00:21:37,080 --> 00:21:38,320
जब ये कोर्ट में जाते होंगे

307
00:21:38,320 --> 00:21:43,000
तो यह कहते होंगे हा मैंने किया ये गुना मुझे जेल में डालो

308
00:21:43,000 --> 00:21:47,080
भाई जेल में रहने के लिए आवश्यक है आमी आदमी गुनहगार सिद्ध हो तभी रखेगी

309
00:21:47,080 --> 00:21:51,160
सरकार जेल में एक और चीज ड करता हूं कि

310
00:21:51,160 --> 00:21:55,520
जब देखिए हमें कोई भी चीज न्यूज से पता चलती है हमने

311
00:21:55,520 --> 00:21:59,520
किसी भी कैदी को अपराध करते हुए नहीं देखा है ठीक है ना बि ू से हम

312
00:21:59,520 --> 00:22:03,880
पता चलता है कोर्ट रूम में जब फैसला आया था तब इवन की रामपाल बाबाज जो है

313
00:22:03,880 --> 00:22:07,880
वो रो भी रहे थे वहां खड़े होके उन्होंने जज साहब को कहा भी कि आप कबीर के भक्त हो

314
00:22:07,880 --> 00:22:12,040
मेरे साथ इतना बड़ा वो ना करिए लेकिन जो कानून है वो कानून है

315
00:22:12,040 --> 00:22:16,360
ठीक है दूसरी बात ये भी है कि मेरे पास इस चीज का प्रमाण है अभी आपको दिखाऊंगा

316
00:22:16,360 --> 00:22:20,520
भी सारी जनता भी देखेगी कि उनकी कई बार जमानत भी जो है वो

317
00:22:20,520 --> 00:22:24,640
डिनायल की है बेल जो मिलती है ना थोड़ी दिन के लिए पैरोल वगैरह जो

318
00:22:24,640 --> 00:22:28,680
क्योंकि शायद उनकी बेटी का विवाह था मेरे को पक्का इस बात का नहीं पता इसलिए कोई

319
00:22:28,680 --> 00:22:33,360
कोई भी इस चीज को एज इट इज मत लेना पर उन्होंने अप्लाई जो किया था वो डिनायल

320
00:22:33,360 --> 00:22:37,480
की है क्योंकि उनका जो अपराध है वह बताया जाता है बहुत ज्यादा है क्य पांच

321
00:22:37,480 --> 00:22:41,800
छ बंदे मर गए थे उसमें ठीक है तो ये बात है ये जाच

322
00:22:41,800 --> 00:22:45,920
ये सब जो बातें है मैं क्लियर कर दूं ये सब बातें जो बोल रहे हैं ये जो

323
00:22:45,920 --> 00:22:50,200
ऊपर ऊपर की जानकारियां अन्य य चैनल और सोशल मीडिया प है या न्यूज चैनल्स

324
00:22:50,200 --> 00:22:53,440
में है वहां से है ये जांच का विषय हो सकता है

325
00:22:53,440 --> 00:22:57,480
हम इसकी प्रामाणिकता की को नहीं ले रहे गारंटी कोई कोई भी हमारी कोई गारंटी नहीं

326
00:22:57,480 --> 00:23:01,520
है जो न्यूज कह रही है वो मैं सिर्फ बता रहा हूं न्यूज में हमें ये भी पता

327
00:23:01,520 --> 00:23:05,600
चलता है कि उनकी बेल भी डिनायल

328
00:23:05,600 --> 00:23:09,920
दे रहा है अप्लाई कर रहा है यानी कि वो वहां से बाहर आने का प्रयास

329
00:23:09,920 --> 00:23:14,560
कर रहा है तो ये है बाकी जैसा कि पहले ही कह चुका

330
00:23:14,560 --> 00:23:18,880
किसी भी लीगल कार्य में या कांस्टीट्यूशनल कार्य में हमारा कोई

331
00:23:18,880 --> 00:23:23,400
भी किसी प्रकार का वो नहीं है छेड़छाड़ नहीं है ना ही दखलंदाजी

332
00:23:23,400 --> 00:23:27,480
एक एक रॉक ली है यह कोई प्रश्न कर

333
00:23:27,480 --> 00:23:31,760
रहे हैं मगर इनका प्रश्न लिखकर दे दीजिए लिखिए

334
00:23:31,760 --> 00:23:35,320
तो हम देख ले आपका

335
00:23:35,320 --> 00:23:39,560
प्रश्न तो मैं यह कह रहा था कि मतलब वह रो रहे हैं वह प्रयास

336
00:23:39,560 --> 00:23:43,600
कर रहे हैं कि कैसे मैं इस कारागार से बाहर निकलू वो उनके हिसाब

337
00:23:43,600 --> 00:23:47,640
से ईश्वर का जो भी स्वरूप है वह मैं उसका प्रचार

338
00:23:47,640 --> 00:23:51,760
करूं या मैं अपने घर पर जाऊं मैं अपने घर के बीच में रहूं जाकर

339
00:23:51,760 --> 00:23:55,760
के जो भी और यहां पर उनकी उस दुख का भी

340
00:23:55,760 --> 00:24:00,280
मजाक उड़ा कर के रख दिया इन फॉलोअर्स ने ये करके कि भैया रामपाल

341
00:24:00,280 --> 00:24:04,320
दास तो खुद अपनी इच्छा से वहां पे है बताइए

342
00:24:04,320 --> 00:24:08,320
यह भक्ति है मतलब अपने गुरु जी को भी इन्होंने नहीं छोड़ा

343
00:24:08,320 --> 00:24:08,820
किसी

344
00:24:08,520 --> 00:24:12,880
भी प्रकार से शास्त्र सम्मत शास्त्र सम्मत छोड़ो

345
00:24:12,880 --> 00:24:17,000
मनमुक छोड़ो शास्त्र सम्मत हो अरे भाई अपने गुरु जो रो रहे

346
00:24:17,000 --> 00:24:21,160
हैं जो बाहर आना चाहते हैं जो वहां पर कह रहे हैं कि मुझे फसाया गया है

347
00:24:21,160 --> 00:24:25,200
आप कह रहे हो अपने मन से जी और अच्छा

348
00:24:25,200 --> 00:24:29,280
इसमें मैंने देखा है अब जो तंत्र चल रहा है उनके नाम पर अच्छा

349
00:24:29,280 --> 00:24:33,400
मुझसे कुछ लोगों ने संपर्क किया है इस बारे में कि रामपाल

350
00:24:33,400 --> 00:24:37,600
दास हा रामपाल दास जी के नाम पर अब जो तंत्र चल रहा है उसमें बहुत

351
00:24:37,600 --> 00:24:41,600
सारी चीजें उने बताने की कोशिश की पर

352
00:24:41,600 --> 00:24:45,800
मैंने कई वीडियो ऐसे देखे हैं जो बहुत हास्यास्पद लगते हैं उसमें

353
00:24:45,800 --> 00:24:50,280
क्या होगा एक व्यक्ति बिल्कुल र रट्टू तोते की तरह बिठाया जाएगा

354
00:24:50,280 --> 00:24:54,600
और यह कहा जाएगा वीडियो में जैसे क्रिश्चियन मिशनरी काम करती

355
00:24:54,600 --> 00:24:58,720
बिल्कुल सेम जैसे वो व्यक्ति आया वो

356
00:24:58,720 --> 00:25:03,120
चल नहीं पा रहा है उसके अंदर भूत है वह कुछ कर रहा है और एकदम से उसने हालेलुया किया

357
00:25:03,120 --> 00:25:07,440
और व्यक्ति जो उछलने लगा अभी तक जो चल नहीं पा रहा था वो उछलने

358
00:25:07,440 --> 00:25:11,520
लगा एक्टिंग बिल्कुल साफ पता चलती है भले ही उनके जो

359
00:25:11,520 --> 00:25:15,800
खुद के पोप है वो वहा इंग्लैंड में वल चेयर पर चलते हैं

360
00:25:15,800 --> 00:25:19,880
उनके खुद के पो मगर वो यहां पर जो है वो तुरंत खड़ा होकर चलने

361
00:25:19,880 --> 00:25:24,080
लगता है और इसी प्रकार से एक बिल्कुल रट्टू

362
00:25:24,080 --> 00:25:28,320
तोते की तरह एक व्यक्ति आता है और ये लोग अपनी सभा लगा ले

363
00:25:28,320 --> 00:25:32,520
देते हैं उसमें बैठ कर के और जो है कहते हैं कि ये जो बहुत दूर

364
00:25:32,520 --> 00:25:36,640
दूर से भक्त आए हम लोग य एकत्रित हुए हैं और हम देखेंगे एक

365
00:25:36,640 --> 00:25:40,640
जिज्ञासु है यह कुछ पूछना चाहते हैं यह भी राम की भक्ति करते हैं तो क्या सवाल

366
00:25:40,640 --> 00:25:44,800
है आपका बिल्कुल रटी हुई लाइन जैसे वो पता चल जाता है जब आदमी रट

367
00:25:44,800 --> 00:25:49,280
के आया होता है उसको एक्टिंग का अच्छा वो नहीं होता है भाई अभिनय अभिनय का वो तो है नहीं

368
00:25:49,280 --> 00:25:53,280
कि उस वो शाहरुख खान हो या ये सब अभिनेता है जो ये सब जो

369
00:25:53,280 --> 00:25:57,280
एक्टिंग कर रहे हैं जिनका जो काम ही है एक्टिंग करके और जो है

370
00:25:57,280 --> 00:26:01,600
आजीवक पार्जन ना वो नेता विनेता वो अभिनेता तो है नहीं इस तरह का

371
00:26:01,600 --> 00:26:05,640
फिल्में करने वाला तो क्या कहते

372
00:26:05,640 --> 00:26:10,080
हैं तो क्या करते हैं ये अब वो बोलता है जब उसको जो डायलॉग

373
00:26:10,080 --> 00:26:14,080
दिए जाते हैं डिलीवरी के लिए तो उसके बिल्कुल एक सस्टेंड

374
00:26:14,080 --> 00:26:18,160
बिल्कुल उसमें होते हैं फ्लैट बिल्कुल कोई उसमें भाव नहीं होता कहीं पता चल जाता

375
00:26:18,160 --> 00:26:22,200
है व्यक्ति एक्टिंग कर रहा है थोड़ा भी इंटेलेक्चुअल पर्सन होगा तो पता चल अब वो वहां

376
00:26:22,200 --> 00:26:26,280
पर बोलता है कि मैं पहले ऐसे करता था मैं राम की भक्ति करता था मुझे ये नहीं समझ में आता

377
00:26:26,280 --> 00:26:30,360
कि इतने सारे मतलब वो पूरा पहले से जो इनका पैटर्न है और वो वहां पर फिर इनका

378
00:26:30,360 --> 00:26:34,440
निराकरण करते हैं वो लोग जो आपको कल यह नहीं बता पा रहे थे कि प्रणव मंत्र है कि

379
00:26:34,440 --> 00:26:38,480
नहीं है घंटे भर तक आपने उन्हें ऐसी

380
00:26:38,480 --> 00:26:39,160
बात में परेशान

381
00:26:39,160 --> 00:26:43,640
कर लिया वो आपको ये नहीं बता पा रहे थे कि प्रणव है कि नहीं है और वो

382
00:26:43,640 --> 00:26:47,760
एक बात और थी कहीं आपने कुछ और भी उनको काफी देर तक परेशान किया

383
00:26:47,760 --> 00:26:51,760
था तो वो लोग वहां पर तुरंत उनका शास्त्र सम्मत निराकरण

384
00:26:51,760 --> 00:26:55,960
करते हैं क्यों क्योंकि वो पूरा स्क्रिप्टेड है मामला तो प्रश्न

385
00:26:55,960 --> 00:27:00,280
भी स्क्रिप्टेड है और वो भी स्क्रिप्टेड है तो ऐसे वीडियोस

386
00:27:00,280 --> 00:27:04,480
बनाते हैं और उससे जो थोड़े बहुत भी अभी ज्यादा

387
00:27:04,480 --> 00:27:08,840
जुड़े नहीं है ज्यादा उनको मालूम नहीं है उनको दवाई के नाम पर

388
00:27:08,840 --> 00:27:12,920
भंडारे के नाम पर उनको मदद कर देने के नाम पर उनको जो है

389
00:27:12,920 --> 00:27:17,720
वो प्रभावित करते हैं इन वीडियो से और कहते क्या है ज्ञान चर्चा

390
00:27:17,720 --> 00:27:21,720
ज्ञान चर्चा हमने यह किया हमने शास्त्रों से दिखाया है हमने एक

391
00:27:21,720 --> 00:27:25,760
एक शास्त्रों की बात तो आपने करी थी मगर मैंने कभी यह नहीं देखा

392
00:27:25,760 --> 00:27:29,840
कि इन्होंने जो सनसनी खेज वाले जो वीडियोस के आते हैं वो रामचरित मानस में हनुमान

393
00:27:29,840 --> 00:27:33,840
जी की पूजा करना मना किया गया और ये और वो है ये सनसनी खेज

394
00:27:33,840 --> 00:27:38,200
वाले वीडियो कभी भी किसी दूसरे के तंबू में नहीं होते हैं

395
00:27:38,200 --> 00:27:42,560
अपने ही तंबू में बनते हैं सारे अरे भैया जाओ ना कभी

396
00:27:42,560 --> 00:27:46,600
लखनऊ महोत्सव में कैसे गए थे हम लोग सीना

397
00:27:46,600 --> 00:27:50,600
तान के घुस गए थे आपका तंबू था हम अकेले थे वहां पर बना

398
00:27:50,600 --> 00:27:54,280
था वीडियो आओ ना कभी तंबू तंबू

399
00:27:54,280 --> 00:27:58,480
खेलो अपने ही तंबू में ही

400
00:27:58,480 --> 00:28:02,600
तंबू में अपने आप को विजेता घोषित कर लेते हो फिर कहते जीत गए जीत

401
00:28:02,600 --> 00:28:06,840
गए जीत गए तो ये इनके हाल है ये काम

402
00:28:06,840 --> 00:28:10,840
ये काम दो प्रकार से हो रहा है अगर आप ध्यान दोगे तो एक

403
00:28:10,840 --> 00:28:15,040
होता है एक व्यक्ति जाता है कि भैया ये है मैं राम को मानता

404
00:28:15,040 --> 00:28:19,120
हूं जैसे आपकी बात है ये ये बातें हैं मेरा ये कुछ कल्याण नहीं हो पा रहा या कुछ

405
00:28:19,120 --> 00:28:23,480
भी हो सकता है एज जिज्ञासु जाता है वो ठीक है एक तो एज जिज्ञास

406
00:28:23,480 --> 00:28:27,760
अब आजकल एक नया ड्रामा खेल रहे हैं अपने चैनल के ऊपर दो गुट

407
00:28:27,760 --> 00:28:31,960
बांट लेंगे 10 10 लोगों के वो दोनों इनके बंदे होते हैं वो

408
00:28:31,960 --> 00:28:36,040
ठीक है और एक हमला करेगा अरे क्या तुम्हारा बाबा हमारे देवी देवताओं

409
00:28:36,040 --> 00:28:40,320
के बारे में उल्टा बोलता है ये है वो है तुम्हारा ये करता है वो करता है तुम हमें कन्वर्ट

410
00:28:40,320 --> 00:28:44,400
कर रहे हो यह है वो है फिर वो आगे से आएगा भाई साहब मैं आपको बताता

411
00:28:44,400 --> 00:28:48,840
हूं आज हम आपको बताएंगे ये देखिए पवित्र गीता कहती है अध्याय

412
00:28:48,840 --> 00:28:53,440
16 और 23 और 24 शास्त्र विरुद्ध भक्ति नहीं करनी चाहिए

413
00:28:53,440 --> 00:28:57,600
और ये देखिए लिखा है तत्वदर्शी संत से कल वो व्यक्ति उपदेश

414
00:28:57,600 --> 00:29:01,640
को दीक्षा बता रहा है वो बंदा

415
00:29:01,640 --> 00:29:05,760
उन्होंने कहा 434 में कि तत्वदर्शी व्यक्तियों

416
00:29:05,760 --> 00:29:09,280
को ढूंढ उनके पास जाइए उनसे प्रश्न करिए वो तुम्ह सत्य का उपदेश

417
00:29:09,280 --> 00:29:13,560
देंगे या तत्व का उपदेश देंगे वो क उपदेश उपदेश

418
00:29:13,560 --> 00:29:17,720
का मतलब होता इसी रोने लगे थे

419
00:29:17,720 --> 00:29:22,040
इसम वो रवाई छूट जाती भैया उपदेश को दीक्षा साबित

420
00:29:22,040 --> 00:29:26,040
करो इतनी साधारण बात है मगर इसी

421
00:29:26,040 --> 00:29:29,880
में व चक्कर खा गए

422
00:29:29,880 --> 00:29:33,880
उसम जो इनका जो चेहरा था देखने लायक थाय जो सज्जन है

423
00:29:33,880 --> 00:29:38,840
जो चिल्ला कर ही बोलते हैं सामान्य उनका चेहरा

424
00:29:38,840 --> 00:29:42,880
देखने एक गांव के बेचारे भोले भाले लोग होते हैं

425
00:29:42,880 --> 00:29:46,920
अब उनको वो क्या इनसे बहस करेंगे ठीक है उनको जाकर बोल

426
00:29:46,920 --> 00:29:50,960
दिया कि यहां पर बोल रहे की तत्वदर्शी से तुम दीक्षा ले लो वो भी बेचारा

427
00:29:50,960 --> 00:29:55,280
देख रहा हा गीता में तो बात तो सही लिखी हुई है यहां पर उसको उपदेश का दीक्षा

428
00:29:55,280 --> 00:29:59,720
बना दिया उसने दीक्षा ले ली जाकर और दीक्षा

429
00:29:59,720 --> 00:30:04,200
अगर वो ले लेता है तो बस उसका काम हो जाता है वहीं पर

430
00:30:04,200 --> 00:30:08,360
धीरे धीरे हां धीरे धीरे ये

431
00:30:08,360 --> 00:30:12,520
व्यक्ति के मन में इतना अहंकार और इतनी नफरत भर देते

432
00:30:12,520 --> 00:30:16,720
हैं श्री राम श्री कृष्ण के बारे में मेरा दिल जानता है मैं अभी

433
00:30:16,720 --> 00:30:20,760
टैबलेट लाऊंगा अंदर से और आपको स्क्रीनशॉट दिखाऊंगा वो

434
00:30:20,760 --> 00:30:24,280
व्यक्ति राम श्री राम श्री कृष्ण को गालियां देते हैं और इतनी

435
00:30:24,280 --> 00:30:28,520
अभद्र गालियां देते हैं इतनी अभद्रता उनके बारे में बोलते हैं कि यदि

436
00:30:28,520 --> 00:30:32,560
सामने हो तो भाई मैं तो उसको अच्छी तरीके से सबक सिखाऊ क्योंकि दुष्ट को दंड

437
00:30:32,560 --> 00:30:36,720
देना चाहिए ठीक है ताकि वह और अभद्रता आगे ना बढ़े

438
00:30:36,720 --> 00:30:40,760
धीरे धीरे सॉफ्टली उसका माइंड वश इस हद तक किया जाता है अब बेचारा

439
00:30:40,760 --> 00:30:46,760
गांव का व्यक्ति उसको उपदेश कह के उन्होंने दीक्षा दिलवा देते हैं ठीक

440
00:30:47,360 --> 00:30:51,400
है तो यह बात है आप कमेंट पढ़िए मैं बस एक

441
00:30:51,400 --> 00:30:55,520
मिनट में अपनी बात खत्म कर रहा हूं जी जी जी शुरू करते

442
00:30:55,520 --> 00:30:59,680
हैं वेदों से शुरू करते हैं से और खत्म पता कहां

443
00:30:59,680 --> 00:31:03,840
पर जाके करते हैं अपने संप्रदाय की लिखी हुई किताब प और उसको भी यहां पर लिख

444
00:31:03,840 --> 00:31:08,080
रहा है कि वो फर्जी किताब है वो भी मिलाफ ना

445
00:31:08,080 --> 00:31:12,200
वो जाते हैं सीधे जेल धाम शुरू करेंगे वेद से

446
00:31:12,200 --> 00:31:16,520
और वेद से गीता पुराण और कुरान बाइबल होते हुए

447
00:31:16,520 --> 00:31:20,840
सारा वो पहुंचते हैं सीधे जेल दम उसमें रास्ते में कबीर

448
00:31:20,840 --> 00:31:25,040
सागर भी आएगा और गरीब दास जी का लिखा हुआ ग्रंथ भी आ जाएगा हो सकता है गुरु

449
00:31:25,040 --> 00:31:29,320
नानक भी आ जाए और अंत में होते होते होते जेल

450
00:31:29,320 --> 00:31:33,680
दम तो वही वही बात है आप पहले अपनी बात कंप्लीट

451
00:31:33,680 --> 00:31:38,120
करिए अगर आप कहते हैं तो थोड़ा सा ज्ञान गंगा पुस्तक को खोलते हैं मुझे लगता है कि

452
00:31:38,120 --> 00:31:39,840
समय है हमारे पास

453
00:31:39,840 --> 00:31:44,000
ठीक है अभी मैं एक क्वेश्चन ले लू य काफी देर से कोई क्वेश्चन कर रहे

454
00:31:44,000 --> 00:31:48,200
हैं ये बस उसके बाद हम जो है ले

455
00:31:48,200 --> 00:31:52,200
लेंगे ठीक आप करिए मैं कर बताइए

456
00:31:52,200 --> 00:31:56,840
क्वेश्चन क्या है आपका बहुत देर से आपने कहा है कि क्वेश्चन ले

457
00:31:56,840 --> 00:32:01,120
लीजिए परमार्थ से सब जगत मिथ्या है तो वेदा आदि

458
00:32:01,120 --> 00:32:05,320
शास्त्र भी मिथ्या ही हुए सृष्टि की रचना कौन

459
00:32:05,320 --> 00:32:09,440
करता है सगुण या निर्गुण अगर हमारे

460
00:32:09,440 --> 00:32:13,440
लिए तो सगुण ही कर रहे हैं सृष्टि की रचना

461
00:32:13,440 --> 00:32:17,840
और जो वेद आदि शास्त्र है जो

462
00:32:17,840 --> 00:32:22,040
वह माया का वह हिस्सा है जिसका आलंबन लेकर के माया से मुक्त

463
00:32:22,040 --> 00:32:26,480
हुआ जा सकता है जैसे कि एरोप्लेन या स्पेसशिप

464
00:32:26,480 --> 00:32:30,720
क्या है व पृथ्वी का वो अंश है जिसका

465
00:32:30,720 --> 00:32:35,320
आलंबन लेकर के हम पृथ्वी से उड़ सकते हैं जिस तरह से

466
00:32:35,320 --> 00:32:39,480
पृथ्वी पर गिरा हुआ व्यक्ति पृथ्वी का ही आलंबन लेता है

467
00:32:39,480 --> 00:32:43,760
उठ खड़ा होने के लिए इसी प्रकार

468
00:32:43,760 --> 00:32:48,440
से जो हवाई जहाज जिसको आकाश में उड़ना होता है

469
00:32:48,440 --> 00:32:52,800
उसको भी आकाश में उड़ने के लिए

470
00:32:52,800 --> 00:32:54,880
क्या कहते हैं धरती

471
00:32:54,880 --> 00:32:58,920
पर ही पहले दौड़ता है फिर व आकाश में उड़ने लायक बन पाता है

472
00:32:58,920 --> 00:33:03,360
ठीक है तो वेदा दि शास्त्र

473
00:33:03,360 --> 00:33:07,520
जो भगवान है उनकी दृष्टि से वो

474
00:33:07,520 --> 00:33:12,080
है एक रूप है ना मगर

475
00:33:12,080 --> 00:33:16,240
उन वो माया का वो हिस्सा है जिसका आलंबन लेकर के आप माया को पार

476
00:33:16,240 --> 00:33:20,360
कर सकते हो जैसे जैसे जो ईश्वर का अवतार

477
00:33:20,360 --> 00:33:24,680
होता है सगुण साकार ईश्वर का अवतार वो भी अगर ईश्वर की दृष्टि

478
00:33:24,680 --> 00:33:29,480
से देखो तो क्या है उनका भी वो वैसा ही है अस्तित्व मगर

479
00:33:29,480 --> 00:33:33,520
वह हमारे लिए वास्तविक है हमारे लिए सत्य है और वह उसका

480
00:33:33,520 --> 00:33:37,640
वह अंश है जिसका आलंबन लेकर के हम इसको पार

481
00:33:37,640 --> 00:33:43,240
कर सकते हैं भव सागर को ठीक

482
00:33:43,240 --> 00:33:48,640
है जी गोविंद जी

483
00:33:48,640 --> 00:33:52,840
बताइए यहां पे ना मैं एक चीज अब रखना

484
00:33:52,840 --> 00:33:56,840
चाहूंगा क्योंकि मैंने लाइटिंग भी ठीक कर रही है सारा कुछ ठीक कर लिया अब ठीक है

485
00:33:56,840 --> 00:34:00,840
आप लोग क्लास में आया करिए जुड़ा करिए सब बहुत रोचक बातें

486
00:34:00,840 --> 00:34:05,080
धीरे-धीरे आपको पता चलती रहेंगी क्लासेस में जुड़ जाइए जी गोविंद

487
00:34:05,080 --> 00:34:09,520
जी बोलिए तो इसमें ना थोड़ा सा खोल लेते हैं इसको क्योंकि

488
00:34:09,520 --> 00:34:14,040
मुख्यता तो यही है ना जिससे लोग चीजें जान रहे हैं इनके बारे में

489
00:34:14,040 --> 00:34:18,360
तो मुझे लगता है कि डायरेक्ट उस परे बात करनी चाहिए क्योंकि वही बात है कि आप

490
00:34:18,360 --> 00:34:22,480
पत्ते कितने भी काट दीजिए परंतु जड़ जब तक है तब तक तो

491
00:34:22,480 --> 00:34:26,720
कार्य चलता रहेगा उसका मैं देखता हूं यदि यहां पर कोई चेंज

492
00:34:26,720 --> 00:34:31,280
हो सकता है एंगल इसका मुश्किल ही है वैसे

493
00:34:31,280 --> 00:34:35,320
इसका एंगल नहीं चेंज होता शायद आपको बुक दिखानी तो आप बैक कैमरा

494
00:34:35,320 --> 00:34:40,320
कर सकते हैं अपने

495
00:34:40,320 --> 00:34:44,800
में या पेज नंबर बता देंगे तो चल जाएगा

496
00:34:44,800 --> 00:34:49,040
हां इनकी रामपाल जी की जो पुस्तक है ना मैं चाहूंगा

497
00:34:49,040 --> 00:34:53,440
आप एक बार उसको जरा खोलिए एक सेकंड मैं इसको एडजस्ट करलू फिर मैं देखूंगा जब मैं लैपटॉप

498
00:34:53,440 --> 00:34:58,840
से कभी जुडा तो मैं खुद ही शेयर कर दूंगा इसका पेज नंबर है 15

499
00:34:58,840 --> 00:35:03,360
यह आती है भक्ति मर्यादा के अंतर्गत है कर्मकांड

500
00:35:03,360 --> 00:35:07,480
के विषय में है ये पेज नंबर 15 है रोमन वाला नहीं

501
00:35:07,480 --> 00:35:11,560
वो जो नॉर्मल वाला होता है पितृ पूजा निषेध में आता है ये कर्म

502
00:35:11,560 --> 00:35:14,720
कांड के विषय में सत्य

503
00:35:14,720 --> 00:35:19,040
कथा तो यदि इसमें हम पढ़े तो यहां पर लिखा

504
00:35:19,040 --> 00:35:23,240
है मैं पहले थोड़ा सा इसको दिखा देता हूं ये यहां पर आप देख सकते

505
00:35:23,240 --> 00:35:27,320
हैं इसको ठीक है इसमें लिखी हुई है देखिए कितनी सत्य कथा

506
00:35:27,320 --> 00:35:31,440
है कि मेरे यानी संत रामपाल दास जी के पूज्य गुरुदेव

507
00:35:31,440 --> 00:35:35,560
स्वामी राम देवानंद जी महाराज को 16 वर्ष की आयु में किसी महात्मा

508
00:35:35,560 --> 00:35:39,640
के सत्संग सुनने से वैराग्य हो गया था एक दिन वह खेतों

509
00:35:39,640 --> 00:35:44,000
में गए हुए थे पास में वन था वन में जाकर किसी मृत जानवर की हड्डियों

510
00:35:44,000 --> 00:35:48,040
के पास उन्होंने अपने कपड़े फार करर फेंक जाते हैं और स्वयं महात्मा जी

511
00:35:48,040 --> 00:35:52,080
के साथ चले जाते हैं उनकी खोज हुई तो उनके घर वालों ने देखा कि वन

512
00:35:52,080 --> 00:35:55,400
में हड्डियों के पास फटे हुए कपड़े पड़े हैं उन्होंने सोचा

513
00:35:55,400 --> 00:35:59,680
कि किसी जंगली जानवर ने उन्हें खा लिया है उन कपड़ों तथा हड्डियों को उठाकर

514
00:35:59,680 --> 00:36:03,880
घर लेकर आते हैं और अंतिम संस्कार उनका कर देते हैं उसके बाद

515
00:36:03,880 --> 00:36:08,000
13वीं आदि छ माही करते हैं फिर श्राद शुरू हो जाते हैं

516
00:36:08,000 --> 00:36:12,200
तो यहां पर यह पता चलता है कि उन्होंने फिर आकर बताया कुछ साल बाद

517
00:36:12,200 --> 00:36:16,280
वह वापस घर आए फिर उन्होंने बताया कि हड्डियां पड़ी थी तो हमने सोचा कि

518
00:36:16,280 --> 00:36:20,960
किसी जंगली जानवर का वो सिस्टम पड़ा हुआ है वहां प ठीक है

519
00:36:20,960 --> 00:36:25,840
तो फिर मैंने मेरे पूज्य गुरुदेव छोटे भाई की प

520
00:36:25,840 --> 00:36:29,920
पेज नंबर एक बार और बता दीजिए शायद 15 बताया था आपने हां 15 नंबर

521
00:36:29,920 --> 00:36:34,000
है भक्ति मर्यादा के अंतर्गत आता है पितृ

522
00:36:34,000 --> 00:36:38,080
पूजा का निषेध नाम से एक चैप्टर है चार नंबर पर पित पूजा

523
00:36:38,080 --> 00:36:42,160
निषेध है ठीक उसी के अंदर उसी के अंतर्गत आती है

524
00:36:42,160 --> 00:36:46,520
कर्म कांड के विषय में सत्य कथा जी सतयुग

525
00:36:46,520 --> 00:36:52,520
के वर्तमान हा इसके नीचे इसके नीचे

526
00:36:54,320 --> 00:36:58,520
आइए आइए आइए आते जाइए देख रहा हूं अभी

527
00:36:58,520 --> 00:37:02,640
बहुत आगे अभी तो यह रोमन वाले हैं अभी आगे एक नंबर से शुरू

528
00:37:02,640 --> 00:37:06,720
होना है आगे जाके अच्छा वो वो वाली डिजिट आ

529
00:37:06,720 --> 00:37:10,720
जाएगी हां ये भक्ति मय भक्ति मर्यादा है

530
00:37:10,720 --> 00:37:14,760
ना इसके नीचे आए आ जाइए आ जा आ आ 15

531
00:37:14,760 --> 00:37:20,760
नंबर पेज पर आइए याय देख लीजिए यहीं पर लिखा होगा पित पूजा निषेध

532
00:37:32,720 --> 00:37:36,600
बस अब अगला वही

533
00:37:36,600 --> 00:37:40,680
है 15 नहीं आया अभी 15

534
00:37:40,680 --> 00:37:44,880
तो निकल गया कर्म कांड की सत्य कथा हा कर्म कांड के विषय में सत्य

535
00:37:44,880 --> 00:37:49,280
कथा इसको जूम कर लीजिए अगर करना है तो ये कर्मकांड

536
00:37:49,280 --> 00:37:54,080
में ही है ये पित पितृ पूजा निषेध नहीं नहीं कर्म कांड के विषय में सत्य

537
00:37:54,080 --> 00:37:58,560
कथा अच्छा यही खोलना है ना यही पढ़ रहे हैं हां है

538
00:37:58,560 --> 00:38:02,040
हा जूम कर लीजिए

539
00:38:02,040 --> 00:38:06,680
थोड़ा वो हां ठीक है पढ़िए जी

540
00:38:06,680 --> 00:38:10,680
तो इसमें यह बताया गया कि संत रामपाल जी के गुरु जी एक

541
00:38:10,680 --> 00:38:14,720
बार चले जाते हैं कहीं जंगल में तो उनको वैराग्य हो जाता है किसी महात्मा की

542
00:38:14,720 --> 00:38:18,920
कथा सुनने के बाद यानी कि उनसे पहले भी तत्वदर्शी संत हुआ करते थे यह बात

543
00:38:18,920 --> 00:38:24,320
स्वीकार करनी पड़ेगी पहले ठीक है सत्य दर्शी एक नहीं हो

544
00:38:24,320 --> 00:38:28,360
सकता तो पहली बात यह आती है कि वो घर से चले जा 16 साल की उम्र

545
00:38:28,360 --> 00:38:33,040
में कोई जानवर था उसके पास जाते जाते उसकी हड्डियों के पास अपने कपड़े फेंक जाते हैं तो घर वाले जाके

546
00:38:33,040 --> 00:38:37,200
उनका वही पिंडदान आदि श्राद कर देते हैं

547
00:38:37,200 --> 00:38:41,600
फिर कई सालों बाद वो लौट कर आते हैं ये इसमें कथा है आप अगर आप डिटेल में पढ़ेंगे

548
00:38:41,600 --> 00:38:45,800
तो मैं सिर्फ यह पूछना चाहता हूं भाई

549
00:38:45,800 --> 00:38:50,120
एक ऐसा व्यक्ति जिसके परसेंट जिसके पास 10 पर भी आंखों

550
00:38:50,120 --> 00:38:51,880
की दृष्टि होगी ना

551
00:38:51,880 --> 00:38:56,720
वो भी पहचान जाएगा इंसान का स्केलेटन कौन सा है और जानवर का स्केलेटन

552
00:38:56,720 --> 00:39:01,240
कौन सा है ठीक है हां एक बात हो सकती है

553
00:39:01,240 --> 00:39:05,400
कि जानवर ने जब उस जानवर को खाया होगा किसी ने तो उसने सफा

554
00:39:05,400 --> 00:39:09,440
चट कर दिया होगा बिल्कुल उसको मतलब क्लीन बिल्कुल बिल्कुल

555
00:39:09,440 --> 00:39:13,520
क्लीन ना उसकी पूछ वहां पर पड़ी होगी ना कुछ पड़ा होगा ठीक है

556
00:39:13,520 --> 00:39:17,960
उसका म पता ही नहीं चल सकता एक इ

557
00:39:17,960 --> 00:39:22,440
मैं कहता हूं यदि व्यक्ति कोई दुर्भाग्यवश यदि कोई दृष्टि हीन भी है ना

558
00:39:22,440 --> 00:39:26,600
तो वो हाथ लगा के बता देगा यह हड्डिया जानवर की है ठीक है

559
00:39:26,600 --> 00:39:30,680
और यह ह मनुष्य की है तो गुरुदेव

560
00:39:30,680 --> 00:39:34,840
जी कोय या इनके परिवार वालों को इतनी बात नहीं पता चली और आपने सत्य

561
00:39:34,840 --> 00:39:38,840
कथा बना दिया इसको ये कौन सी सत्य कथा है भाई जो मैं तो जान

562
00:39:38,840 --> 00:39:42,840
मैं तो जाता हूं अक्सर सुबह जहां पार्क में मैं ध्यान करने जाता हूं या जो भी माला जाप

563
00:39:42,840 --> 00:39:47,120
करने जाता हूं वहां पर मेरे को जाते जाते मंदिर के पास कई बार हड्डी मिली है इतनी

564
00:39:47,120 --> 00:39:51,440
इतनी बड़ी हड्डी होती है वहां पर पड़ी ई मेरे को पता चल जाता है जानवर की हड्डी

565
00:39:51,440 --> 00:39:55,680
ठीक है ये कौन सी हड्डिया थी मतलब वो कौन सा जानवर था कोई व्यक्ति यदि मेरे को बता

566
00:39:55,680 --> 00:40:01,200
सके कौन सा ऐसा जानवर हो जिसकी हड्डिया हूबहू इंसानों जैसी

567
00:40:01,200 --> 00:40:05,480
होती कथा बनाइए अच्छी बात है कथा बनानी चाहिए

568
00:40:05,480 --> 00:40:07,000
ठीक है अति अच्छी

569
00:40:07,000 --> 00:40:11,200
बात है कथा बना ऐसी बनाइए ना जिसमें कुछ तो अकल लगे यही कह देते

570
00:40:11,200 --> 00:40:16,040
कि वहां कोई व्यक्ति अन्य मरा हुआ पड़ा था उसकी हड्डियों के पास कपड़े फेंक

571
00:40:16,040 --> 00:40:20,200
थे जानवर जब किसी को खाता है ना तो व सफा चट

572
00:40:20,200 --> 00:40:24,520
नहीं कर जाता उसको बिल्कुल इसमें मैं एक बात इसमें

573
00:40:24,520 --> 00:40:28,680
मैं एक बात कहूंगा इस बात में कि मैंने यह देखा

574
00:40:28,680 --> 00:40:33,040
है कि रामपाल दास जी के नाम से जो चीजें फैलाई जा रही है इस समय

575
00:40:33,040 --> 00:40:37,840
या कबीर दास जी के नाम से जो चीजें फैलाई जा रही है

576
00:40:37,840 --> 00:40:41,840
उसको जो उसमें वो जो चीजें फैला रहे हैं उसमें

577
00:40:41,840 --> 00:40:46,360
वो लोग मेहनत बिल्कुल नहीं कर रहे हैं कि थोड़ा हम मेहनत करके चीजें करें

578
00:40:46,360 --> 00:40:50,760
तो जिससे कि थोड़ा बहुत तो हमारी चीजें कहीं पर सिद्ध हो सके

579
00:40:50,760 --> 00:40:54,880
मेहनत किए बिना ही बिल्कुल मतलब दिन दहाड़े आंखों में मिर्ची

580
00:40:54,880 --> 00:40:59,360
झक रहे दिन दहाड़े ये लो ये लो जैसे आप

581
00:40:59,360 --> 00:41:03,440
देखोगे कुछ समय पहले नाप तोल करके वो चलता

582
00:41:03,440 --> 00:41:07,920
रहता था जब भी कभी आप उसको खोलो तो उसम व व

583
00:41:07,920 --> 00:41:12,120
व देर हो रही है अभी ऑर्डर करें नहीं तोय ऑर्डर निकल जाएगा ऐसे चलता रहता था केवल

584
00:41:12,120 --> 00:41:16,120
केवल टीवी का मुझे याद नाल प आता था नापतोल

585
00:41:16,120 --> 00:41:20,960
प तो उसम हमको खोलते ही पता लगता था कि बेवकूफ बनाया जा रहा

586
00:41:20,960 --> 00:41:22,560
है

587
00:41:22,560 --> 00:41:27,600
ल ये आंख का चश्मा है इसके य

588
00:41:27,600 --> 00:41:32,360
करो सोचो मत ऑर्डर कर दो जल्दी ऐसे रहता था तो

589
00:41:32,360 --> 00:41:36,400
तो मैं मन में सोचता था भाई बेवकूफ भी बनाना वो

590
00:41:36,400 --> 00:41:40,520
00 का फोन नर्मल ही होता था उनका लेकिन उसको इसमें है ब्लूटूथ

591
00:41:40,520 --> 00:41:45,280
जिससे आप ये भी सुन सकते ब्लूटूथ से आप जदी कर

592
00:41:45,280 --> 00:41:49,720
तो मुझे वही मैं उस समय उनके लिए नापतौल वालों के लिए सोचता था अपने मन में

593
00:41:49,720 --> 00:41:53,800
कि भाई अगर तुमको किसी को बेवकूफ ही बनाना है तो थोड़ा ऐसे तो

594
00:41:53,800 --> 00:41:57,960
बनाओ कि लगे हां भाई कि हा वो बेवकूफ बनाने के लिए हम ऐसा कर रहे

595
00:41:57,960 --> 00:42:02,120
हैं मतलब आप बेवकूफ भी बनाओगे तो खुल्लम खुल्ला बताते

596
00:42:02,120 --> 00:42:06,120
हुए बनाओगे कि हम बेवकूफ बना रहे हैं अब जिसको बनना

597
00:42:06,120 --> 00:42:10,120
है वो बन लो आगे पर मेरे को अभी ये समझ नहीं आया जैसे

598
00:42:10,120 --> 00:42:14,120
आप भी पढ़े लिखे व्यक्ति है ये कौन सा जानवर होता है जो

599
00:42:14,120 --> 00:42:18,160
हूबहू इंसान जैसा होता है मैं वही तो कह रहा हूं कि

600
00:42:18,160 --> 00:42:22,320
भाई काल को वही की वही पहन भाई कुछ दिखा तो दो बगल

601
00:42:22,320 --> 00:42:26,320
में कि नहीं इसकी पांडुलिपि ये वाली है जिसमें ये अकाल है इसमें मिस प्रिंट हो

602
00:42:26,320 --> 00:42:30,520
गया है तब ये काल नहीं अकाल है कोई उसके पीछे बेस नहीं कुछ

603
00:42:30,520 --> 00:42:34,600
नहीं यह काल नहीं अकाल है उसी विष्णु पुराण को पढ़ रहे हो उसी

604
00:42:34,600 --> 00:42:37,720
विष्णु पुराण में लिख यह बोलते हैं

605
00:42:37,720 --> 00:42:41,720
सब अनपढ है रामपाल से पहले अच्छा इनके वो गुरु भी अनपढ़

606
00:42:41,720 --> 00:42:46,120
थे जिनका वो कंकाल तो वो

607
00:42:46,120 --> 00:42:50,160
क्या कहते हैं ये मुझे नहीं लगता ये वचन रामपाल की रामपाल

608
00:42:50,160 --> 00:42:56,160
दास जी के होंगे यह वचन इनके हैं जो

609
00:43:02,920 --> 00:43:06,920
तो यह अगर यह करते भी हैं तो

610
00:43:06,920 --> 00:43:11,200
इस तरह से करते हैं कि मतलब उसमें बिल्कुल भी मेहनत उस पर उस पर इरिटेशन

611
00:43:11,200 --> 00:43:15,520
होती है कि भाई सामने वाले को लगे तो कि हां भाई हम कुछ मेहनत

612
00:43:15,520 --> 00:43:19,640
करके बेवकूफ बना रहे हैं अपनी बात को रख रहे हैं तो यह मैंने एक

613
00:43:19,640 --> 00:43:23,720
अपनी वीडियो में कहा भी था कि 00 ग्राम मिर्चा झोक दो सीधे पेन से काट

614
00:43:23,720 --> 00:43:28,480
दो मतलब कोई होता है जिसको अगर वेदों का गलत विचार करना है

615
00:43:28,480 --> 00:43:32,600
ठीक है तो वह क्या करेगा कि पूरा वेदों का अपने अनुसार वह अर्थ लिखेगा

616
00:43:32,600 --> 00:43:37,000
फिर उसको पब्लिकेशन में जाएगा पब्लिश करवाएगा इतना भी नहीं

617
00:43:37,000 --> 00:43:41,000
उसी गीता प्रेस की बुक को ले लो विष्णु पुराण में जहां लिखा है

618
00:43:41,000 --> 00:43:45,080
काल के लिए परब्रह्म आ गया तो वो ये गलत लिख दिया अबे भैया

619
00:43:45,080 --> 00:43:49,080
जब छापने वाला गलत लिख रहा है लिखने वाला गलत लिख रहा है उसका आपने कोई बेस नहीं

620
00:43:49,080 --> 00:43:52,760
चेक किया कैसे चेक नहीं किया कहां से नहीं किया तो आप कहीं

621
00:43:52,760 --> 00:43:57,280
पर भी पेन अगर चलाने वाले हो गए हो तो फिर आपका

622
00:43:57,280 --> 00:44:01,520
उसको प्रमाण के रूप में प्रस्तुत करना कैसे स्वीकार किया जा सकता है इतनी

623
00:44:01,520 --> 00:44:06,000
सी बात नहीं अभी हम अभी

624
00:44:06,000 --> 00:44:10,120
मैंने जैसे कल किया वो रहित नहीं सहित है इन्होंने भक्तों

625
00:44:10,120 --> 00:44:14,280
को भ इन्होंने किन भक्तों को माना है जो मास मध्य मैथुन

626
00:44:14,280 --> 00:44:18,400
नशा यह सब जो स्वीकार करते हैं जिनके साथ अब मैं यह करने

627
00:44:18,400 --> 00:44:22,520
लग नहीं उन्होने यह किया है यह तो मिस प्रिंट हो गया रहित हो गया जो अब ये क्या कर

628
00:44:22,520 --> 00:44:26,680
लेंगे अब ये यह कहेंगे कि भैया वो बदल तो सकता है क्योंकि व

629
00:44:26,680 --> 00:44:32,680
बता प् फ नहीं होता है तो इसमें 2 प् 5 आप बता रहे हो तो इसलिए

630
00:44:33,200 --> 00:44:37,240
गलत एक और बात मैं य प ड करता हूं जैसे आपने कहा था ना कि भाई

631
00:44:37,240 --> 00:44:41,320
पेन से क्यों काट रहे हो अपना एक ग्रंथ ही छपवा लीजिए हा तो

632
00:44:41,320 --> 00:44:45,360
यहां एक बंदा है ए एस दास नाम से फैक्ट फुल डिबेट

633
00:44:45,360 --> 00:44:49,560
है पता नहीं क्या नाम है उसका उसने एक वीडियो डाली मतलब इतनी इरिटेटिंग

634
00:44:49,560 --> 00:44:53,560
बात मैंने जिंदगी में कभी नहीं सुनी जो उसने इसका लॉजिक दिया है कहता भाई एक

635
00:44:53,560 --> 00:44:57,880
बात बताइए क्या दो शब्दों के लिए हम पूरा ग्रंथ अपना

636
00:44:57,880 --> 00:45:02,160
तुम पूरा ग्रंथ कहां मान रहे हो भाई तुम डेढ़

637
00:45:02,160 --> 00:45:06,280
लाइन मान रहे हो अगर कोई व्यक्ति सुन रहा है उनकी टीम में उसने हमारी इस बात

638
00:45:06,280 --> 00:45:07,760
के विरोध में ये बात

639
00:45:07,760 --> 00:45:12,200
कही उसने हमारी इस बात के विरोध में हां कही है उसने मैं

640
00:45:12,200 --> 00:45:16,240
वीडियो भेजूंगा अरे भाई मैं कह रहा हूं तुम ना एक दो वर्ड नहीं मान

641
00:45:16,240 --> 00:45:20,400
रहे ना तुम पूरे चैप्टर में से डेढ़ लाइन मा मांग रहे हो ठीक

642
00:45:20,400 --> 00:45:24,640
है तुम मान रहे हो डेढ़ लाइन को पूरी तो तुम्हें पूरी बुक

643
00:45:24,640 --> 00:45:28,800
अपनी छपवा ही पड़ेगी क्योंकि तुम ने पूरे के पूरे चैप्टर को मना

644
00:45:28,800 --> 00:45:32,800
किया फिर पूरी की पूरी संहिता को मना किया फिर पूरे के

645
00:45:32,800 --> 00:45:36,800
पूरे तुमने ग्रंथ को मना किया है क्योंकि शिव पुराण में शिव की

646
00:45:36,800 --> 00:45:40,840
आराधना भरी पड़ी है ठीक है तो यह तुम बचकानी

647
00:45:40,840 --> 00:45:44,840
हरकत छोड़ दो कि भाई एक लफ्ज के लिए एक लज है तो

648
00:45:44,840 --> 00:45:49,120
चलो एक लज मान लेते हो बाकी सारा ग्रंथ मानते हो तुम कभी नहीं मानते

649
00:45:49,120 --> 00:45:55,120
भाई तुम कुछ नहीं मानते अभी हमने क्या किया है

650
00:45:57,120 --> 00:46:01,280
की जो भगवत गीता है हमने एक जानबूझ के एक चीज कही

651
00:46:01,280 --> 00:46:05,360
इनकी जो भगवत गीता है उसमें भगवत गीता का अर्थ

652
00:46:05,360 --> 00:46:09,360
करते समय उन्होंने लिखा 18 66 में कि देखिए इकोन

653
00:46:09,360 --> 00:46:14,200
वालों ने किस तरह से शब्दों में तो माना शब्दार्थ करते समय तो माना

654
00:46:14,200 --> 00:46:18,920
कि व्रज का अर्थ जाना होता है मगर अनुवाद करते समय

655
00:46:18,920 --> 00:46:23,880
लिख दिया व्रज का अर्थ आना यह उन्होंने वहा कही य बात

656
00:46:23,880 --> 00:46:28,320
जो इनकी भगवत गीता है अब

657
00:46:28,320 --> 00:46:32,360
क्या कहते हैं इकोन का तो मामला सभी जानते हैं भाई उसने एक श्लोक में

658
00:46:32,360 --> 00:46:36,480
नहीं कई श्लोक में ऐसा करा है कि ब्रह्म का अर्थ ब्रह्म लिख दिया

659
00:46:36,480 --> 00:46:40,600
मगर नीचे जब वो आया क्या कहते हैं अनुवाद तो उसमें लिख दिया

660
00:46:40,600 --> 00:46:45,080
कि ब्रह्म का अर्थ है कृष्ण भावना भावित यानी की इकोन

661
00:46:45,080 --> 00:46:49,160
वो तो खैर उसका काम है मगर वहां पर जब उन्होंने य बात कही फिर उन्होंने

662
00:46:49,160 --> 00:46:53,320
ये देखिए स्कोन का श्लोक एज इट इज हम यहां पर लिख रहे हैं तो उन्होंने इकोन का श्लोक लिख दिया

663
00:46:53,320 --> 00:46:57,320
अब हमने यह बात कह दी कि इकोन का जो श्लोक

664
00:46:57,320 --> 00:47:01,760
है वो स्कोन का नहीं है हमने कहा कि यह देखिए

665
00:47:01,760 --> 00:47:06,160
जो रामपाल दास है उन्होंने भी अपनी भगवत गीता में व्रज का अर्थ आना

666
00:47:06,160 --> 00:47:10,160
किया है अब यह लोग आकर के हमको बताएंगे कि नहीं नहीं

667
00:47:10,160 --> 00:47:12,160
वो तो उन्होंने स्न का वो दिखाया है

668
00:47:12,160 --> 00:47:16,320
हम कहेंगे वो तो काल ने लिखा है वो तो गलत गलती से छप गया है व

669
00:47:16,320 --> 00:47:20,400
वो रामपाल दास जी ने नहीं लिखा है वो गलती से छप गया है बोलो क्या

670
00:47:20,400 --> 00:47:24,760
करोगे 18 66 में 18 66

671
00:47:24,760 --> 00:47:29,080
में इन्होंने इस्कोन का श्लोक उठा

672
00:47:29,080 --> 00:47:33,280
के छाप दिया है यह दिखाने के लिए कि इकन वालों ने ब्रज का अर्थ

673
00:47:33,280 --> 00:47:37,280
गलत लिखा है ठीक है मगर वहां

674
00:47:37,280 --> 00:47:41,280
पर जो यह वाली बात है कि ये कन का श्लोक हम यहां दिखा रहे हैं यह वाली

675
00:47:41,280 --> 00:47:45,280
बात ये हमको बताने आएंगे तो हम यह कहेंगे कि भाई वो तो

676
00:47:45,280 --> 00:47:49,280
गलती से प्रिंट हो गया है आप हमें सिद्ध कर दो ये जो है

677
00:47:49,280 --> 00:47:54,680
रामपाल दास जी ने ही लिखा है कर पाएंगे

678
00:47:54,680 --> 00:47:58,680
सिद्धि नहीं अगर आप बात को अगर आप

679
00:47:58,680 --> 00:48:02,720
जब हमारी प्रमाण बुद्धि नहीं रह जाती किसी पे तो हम कहीं भी उसमें

680
00:48:02,720 --> 00:48:06,880
कुछ भी कर सकते हैं किसी भी बात नहीं मैं पहली बात तोय

681
00:48:06,880 --> 00:48:10,920
पूछता हूं आपको इतना दौड़ भाग करने की आवश्यकता क्या है कभी आप इकन के

682
00:48:10,920 --> 00:48:15,040
यहां पर घुस जाते हो कभी आप आर्य समाज में घुस जाते हो अरे भाई

683
00:48:15,040 --> 00:48:19,120
तुम यह बताओ तुम एक चित क्या तुम इसकन की सारी की सारी

684
00:48:19,120 --> 00:48:23,240
बात मानते हो अगर तुम इकान की सारी बात नहीं मानते हो तो भाई

685
00:48:23,240 --> 00:48:28,480
यह बात अगर उन्होंने गलत लिखी तो इसमें ढंडोरा किस बात का पीट रहे

686
00:48:28,480 --> 00:48:32,480
गलत हा तुम तुम तुम्हारे अनुसार इस कन की सारी फिलोसोफी

687
00:48:32,480 --> 00:48:36,560
ही गलत है तो तुम एक चीज क्या दिखा रहे हो ठीक है ना या

688
00:48:36,560 --> 00:48:40,600
तो ऐसा होना तुम्हारे अनुसार स्न गलत है तो स्कन की किसी

689
00:48:40,600 --> 00:48:44,760
एक बात को आप प्रमाण के रूप में कैसे ला सकते हो इसके लिए

690
00:48:44,760 --> 00:48:49,040
ना एक गलत शब्द यूज होता है लेकिन वह हमें करना नहीं है ठीक है

691
00:48:49,040 --> 00:48:53,200
समझने वाले समझ गए होंगे कौन जा जा के लोगों के घर में घुसता है बारबार ठीक

692
00:48:53,200 --> 00:48:57,440
है ना नहीं इसको हम लोग एक कहावत से जोड़ सकते हैं

693
00:48:57,440 --> 00:49:01,520
इसकी ईट उसका रोड़ा भानुमती का कुनबा जोड़ बिल्कुल

694
00:49:01,520 --> 00:49:05,520
बस वही है अपना क्या है मतलब अगर तुम्हें वेदों

695
00:49:05,520 --> 00:49:09,840
के ही नाम पर प्रचार करना है तो आ जाओ ना फिर वैदिक सभ्यता के पास

696
00:49:09,840 --> 00:49:14,120
हर एक व्यक्ति को कोई भी पंथ हो कोई भी हो आकर यही बताए

697
00:49:14,120 --> 00:49:18,160
ग देखियो आपके वेदों में हमारे पंथ का जिक्र है आपके वेदों

698
00:49:18,160 --> 00:49:22,200
में हमारे देवताओं का जिक्र है आपके वेदों में हमारे फलाने महापुरुष का

699
00:49:22,200 --> 00:49:26,320
जिक्र है तो आ जाओ ना भाई हम तो आमंत्रित कर रहे हैं आपको आ

700
00:49:26,320 --> 00:49:30,320
जाइए फिर ठीक है और कल इनके फॉलोअर्स

701
00:49:30,320 --> 00:49:34,720
ने कल इनके फॉलोअर्स ने एक छुरा और घूप दिया पीठ में

702
00:49:34,720 --> 00:49:38,760
रामपाल दास जी के क्या छुरा घोपा कि अगर तुम कबीर

703
00:49:38,760 --> 00:49:42,760
सागर को नहीं मानते तो हम भी नहीं मानते तुम्हारे उसको गीता वेद पुराण को हा

704
00:49:42,760 --> 00:49:47,120
हां हां ये रामपाल दास जी के पीठ में छुड़ है

705
00:49:47,120 --> 00:49:51,120
बिल्कुल क्योंकि उन्होंने अपनी पुस्तक में उन्होंने तो हमेशा

706
00:49:51,120 --> 00:49:55,320
ही कहा है कि गीता मेरे लिए सर्वोच्च प्रमाण है और वेद मेरे लिए सर्वोच्च

707
00:49:55,320 --> 00:49:59,560
प्रमाण है ठीक है और बाकी इनकी कितनी

708
00:49:59,560 --> 00:50:03,600
आप कह सकते हो कि बुद्धि कैसी है कि कहते हैं कि भाई जो बात गीता में

709
00:50:03,600 --> 00:50:07,800
नहीं लिखी हुई वो हम नहीं मानते चाहे वो पुराणों में लिखी है या फिर वो वेदों

710
00:50:07,800 --> 00:50:12,000
में नहीं लिखी तो हमने अरे भाई तुम पुराणों की कोई भी बात सिद्ध कर दीजिए वेदों

711
00:50:12,000 --> 00:50:16,160
में से कौन सी कथा दिखाओगे मेरे को वेदों में से है कोई कथा जो

712
00:50:16,160 --> 00:50:20,160
पुराणों में लिखी हो और वेदों में भी लिखी हो या गीता में भी लिखी हो ठीक

713
00:50:20,160 --> 00:50:24,360
है भावार्थ भावार्थ के साथ में लिखी हुई है कुछ

714
00:50:24,360 --> 00:50:24,960
कई कथाएं

715
00:50:24,960 --> 00:50:29,000
हैं जैसे ब्रह्मा सरस्वति मैं वेदों की बात पुराणों से कर

716
00:50:29,000 --> 00:50:33,120
रहा हूं कहते पुराणों को हम नहीं मानते हमारे लिए सर्वोच्च वेद है तो

717
00:50:33,120 --> 00:50:37,160
वेद में दिखा दीजिए भाई वो कहां पर कह रहे कि हम तो तुम्हारी संताने हैं वो

718
00:50:37,160 --> 00:50:41,200
कह रही है तुम्हारी संतान हूं क्योंकि यह तो

719
00:50:41,200 --> 00:50:45,520
कहीं वेद में है नहीं तो मतलब जिस भी चीज से तुम्हारी दुकानदारी चल जाएगी तुम उसको स्वीकार

720
00:50:45,520 --> 00:50:50,160
करोगे मैं तो खु क सकते भद में नहीं है वो रूपांतरण

721
00:50:50,160 --> 00:50:54,200
शाब्दिक भेद से मगर हां ये लोग एक चुनाव करते हैं कि मुझे जहां

722
00:50:54,200 --> 00:50:58,240
पर मेरे रामपाल दास जी या उनके नाम से प्रचारित होने

723
00:50:58,240 --> 00:51:02,640
वाली शिक्षा जहां से मैच खा जाए उसको प्रमाण के रूप में हम दे देंगे

724
00:51:02,640 --> 00:51:06,800
मैं ये कहने मैं ये कहने का प्रयास कर रहा हूं कि पूरी कथा

725
00:51:06,800 --> 00:51:11,400
तो आपको नहीं मिलेगी ना किसी भी वेद में पूरी की पूरी कथा जो है

726
00:51:11,400 --> 00:51:15,400
नहीं मिलेगी क्योंकि हमें उसका क्या मिल जाएगा हमें

727
00:51:15,400 --> 00:51:19,840
उससे कुछ ऐसा जो उसके अंदर भाव छिपा है वो वेदों में मिलेगा ही

728
00:51:19,840 --> 00:51:24,320
क्योंकि है तो आखिर सारा ज्ञान वेदों से ही आ रहा है ठीक है ना तो

729
00:51:24,320 --> 00:51:28,720
ये बात है मैं इनको बस इतनी बात कहता हूं आपके लिए देवी भागवत

730
00:51:28,720 --> 00:51:33,080
पुराण है ठीक है प्रमाण आपका सारा का सारा पंथ ही उस पर टिका हुआ है

731
00:51:33,080 --> 00:51:37,080
ठीक है क्या आपको पता है ब्रह्मा विष्णु महेश जी के

732
00:51:37,080 --> 00:51:40,000
माता-पिता कौन है दुर्गा जी की दादी जी कौन

733
00:51:40,000 --> 00:51:44,400
है ये करते हैं ना ऐसे कहां से आया देवी भागवत से आइए

734
00:51:44,400 --> 00:51:48,520
देवी भागवत खोल के चर्चा कर लेते हैं ठीक है उसमें क्या दिक्कत है

735
00:51:48,520 --> 00:51:53,200
उसमें भी दिक्कत हो रही है कह रहे कि नहीं भाई हम बस इतना ही मानेंगे इसको

736
00:51:53,200 --> 00:51:57,280
अरे तो तो फिर तुम हमसे क्यों मनवा रहे हो कि तुम जो चाहते हो

737
00:51:57,280 --> 00:52:01,400
वो हम मान ले ठीक है ना जब तुम उसको अपने अनुसार

738
00:52:01,400 --> 00:52:05,400
मानते हो तो फिर हमसे क्यों चाहते हो कि सिर्फ तुम जितना मानते

739
00:52:05,400 --> 00:52:10,200
हो उतना ही हम मान ले हम तो पूरा मानते हैं ना तुम तुम उतना ही मानो

740
00:52:10,200 --> 00:52:14,480
अच्छा अब आज का जो टॉप

741
00:52:14,480 --> 00:52:18,800
पूरा जी जी और कुछ आप अगर ज्ञान गंगा से कुछ इनका

742
00:52:18,800 --> 00:52:22,800
ज्ञान थोड़ा सा निकालना चाहे नहीं तो हम किसी को जोड़ ले

743
00:52:22,800 --> 00:52:27,200
नहीं तो हम किसी को जोड़ जोड़ ले हा अभी जोड़ेंगे बस एक बात करके हम

744
00:52:27,200 --> 00:52:31,440
कुछ और अगर ज्ञान ये जहां से भक्ति मर्यादा शुरू हो रही है ना

745
00:52:31,440 --> 00:52:35,880
उसी के पिछले पेज पर एक बात दी गई है ये है भाई

746
00:52:35,880 --> 00:52:39,920
बाले वाली साखी है एक ठीक है ये कोई जैसे कथाएं होती है

747
00:52:39,920 --> 00:52:44,200
ना पुराणों की वैसे ही है भाई बाले वाली साखी इसमें

748
00:52:44,200 --> 00:52:48,280
देखिए पेज की फोटो दे रखी है उसकी पूरी की पूरी जैसे मतलब की वो

749
00:52:48,280 --> 00:52:52,520
ग्रंथ होगा उसकी ये फोटो दे दी है इन्होंने ठीक है इसमें लिखा हुआ

750
00:52:52,520 --> 00:52:55,960
है कि जो है वो

751
00:52:55,960 --> 00:53:00,480
एक सेकंड वो पंजाब की धरती पर आएगा ठीक है और बटाला

752
00:53:00,480 --> 00:53:04,640
में होगा कहने लगे नहीं यह पंजाब गलती से छप गया है य

753
00:53:04,640 --> 00:53:08,800
पंजाब नहीं यहां हरियाणा लिखना था और यह बटाला नहीं य बरवाला

754
00:53:08,800 --> 00:53:13,160
है यह बटाला नहीं य बरवाला है ठीक है

755
00:53:13,160 --> 00:53:17,520
तोय सब गलती से हो जाता है जब ये गलत छपा

756
00:53:17,520 --> 00:53:21,680
हुआ है तो ओरिजिनल मैनु स्क्रिप्ट की फोटो खींच के डाल देते यहा पर

757
00:53:21,680 --> 00:53:25,840
हां ओरिजिनल दिखा दो गलत गया गलत है सही कहां

758
00:53:25,840 --> 00:53:29,840
प है तो थे नहीं उस जमाने में आज से 500 साल पूर्व तो आप थे नहीं

759
00:53:29,840 --> 00:53:34,080
ठीक है तो इसकी कोई मैनु स्क्रिप्ट होगी ना उनके पास वो तो होती है 500 साल पुरानी

760
00:53:34,080 --> 00:53:38,320
तो मनुस्क्रिप्ट होती है ठीक है तो ये बटाला

761
00:53:38,320 --> 00:53:42,680
का बरवाला पंजाब का उन्होंने कर दिया हरियाणा कहते

762
00:53:42,680 --> 00:53:46,840
वहां पर सीमा ही नहीं थी पंजाब का सीधे हरियाणा बिल्कुल

763
00:53:46,840 --> 00:53:50,960
डायरेक्ट विदाउट कोई वो सुपर फास्ट जाती है ना वो छोटे

764
00:53:50,960 --> 00:53:55,240
छो मैं तो चलो पंजाब और हरियाणा मैं कह रहा हूं हो सकता

765
00:53:55,240 --> 00:53:59,320
है किसी जमाने में एक धरती मानी जा सकती हो मैं कह रहा हूं जो

766
00:53:59,320 --> 00:54:03,720
काल है उसको अकाल कैसे कर सकते हो भाई विलोम

767
00:54:03,720 --> 00:54:07,720
शब्द बना अरे पर ये भी तो देखिए ना कि 500

768
00:54:07,720 --> 00:54:11,240
साल पहले तो इकट्ठा था ही वो

769
00:54:11,240 --> 00:54:15,560
ठीक है ना तोय ये कौन सी साइंस है भाई क्या टेक्टोनिक

770
00:54:15,560 --> 00:54:19,640
प्लेट जो है वो अलग अलग थी उसकी एक साथ मिलके वो ऐसे ऐसे करके एक

771
00:54:19,640 --> 00:54:23,920
दूसरे में समा गई बीच में ठीक है तो आप अपनी बात रखी

772
00:54:23,920 --> 00:54:28,240
ले लीजिए किसी को लेना है तो ये आए हैं शायद ये

773
00:54:28,240 --> 00:54:32,640
पंडित फ्लोकी जी है एक तो इनको ले लेते हैं ड टू स्टेज

774
00:54:32,640 --> 00:54:36,800
और एक ले लेते हैं महादेव पहाड़ी

775
00:54:36,800 --> 00:54:40,920
महादेव महादेव पहाड़ी जी आ जाइए

776
00:54:40,920 --> 00:54:45,040
और भाई अमित दास यह यहां

777
00:54:45,040 --> 00:54:49,200
से हैं अमित दास जो कई बार आ चुके हैं

778
00:54:49,200 --> 00:54:53,360
एक दो बार अभद्रता भी कर चुके हैं अमित दास जी सर्वप्रथम

779
00:54:53,360 --> 00:54:57,360
आप जो है क्षमा याचना करें आपने जो ता उसको

780
00:54:57,360 --> 00:55:03,360
लिए हर हर महादेव सभी लोगों [संगीत] को

781
00:55:03,720 --> 00:55:07,640
मिनट तो

782
00:55:07,640 --> 00:55:11,920
शमाता जी जी अब बोलिए अमित जी सब शांत रहिएगा शश भाई

783
00:55:11,920 --> 00:55:16,040
शिवांश भाई जी मैं आपसे क्षमा चाहता हूं जो अभद्रता

784
00:55:16,040 --> 00:55:20,440
से मैंने आपसे बात की उसके लिए मैं दिल से क्षमा चाहता

785
00:55:20,440 --> 00:55:24,480
हूं चलो ठीक है माफ किया हमने क्षमा किया

786
00:55:24,480 --> 00:55:26,680
अच्छा

787
00:55:26,680 --> 00:55:31,560
जी पहाड़ी जी बोले अभी अमित जी आपसे बात करते

788
00:55:31,560 --> 00:55:36,720
हैं कल आपसे बात हुई थी शाम को

789
00:55:36,720 --> 00:55:41,760
आपसे फन बात हुई

790
00:55:41,760 --> 00:55:45,760
आप इस समय मलेशिया में जी जी

791
00:55:45,760 --> 00:55:50,280
जी जी अच्छा अच्छा जी जी जी प कुछ

792
00:55:50,280 --> 00:55:56,280
मैंने एक दो तीन हफ्ते पहले आपने एक बात कही थी कि हम इस संसार में

793
00:55:56,400 --> 00:56:00,560
उसके अब अज्ञान के कारण हम दुख भोगते हैं मतलब दुख का अनुभव करते

794
00:56:00,560 --> 00:56:04,560
हैं तो सामने वाले बंदे ने यह पूछा था जैसे हम

795
00:56:04,560 --> 00:56:08,760
कोई लोहे की रोट पकड़ ले गर्म तो उसके क्या में दुख नहीं होगा

796
00:56:08,760 --> 00:56:12,960
तो आपने उसका जवाब दिया था पर मैं सोचता था कि शास्त्रों में लिखा है नहीं लिखा

797
00:56:12,960 --> 00:56:17,120
है पर हाय वाकई में हमारे शास्त्रों में लिख रखा है ऋग्वेद

798
00:56:17,120 --> 00:56:21,440
में आपने जो बात कही वो बात ऋग्वेद में लिख रखी है मंडल

799
00:56:21,440 --> 00:56:25,600
एक सक्त 164 मंत्र 37

800
00:56:25,600 --> 00:56:29,640
38 में लिख रखा है कि समस्त विश्व में हूं बात को

801
00:56:29,640 --> 00:56:33,680
मैं नहीं जान पाया क्योंकि मैं मूल चित्त एवं अविद्या से बदा

802
00:56:33,680 --> 00:56:37,800
हुआ था तथा बहु मूर्ख मन से संसार में दुखों का अनुभव

803
00:56:37,800 --> 00:56:41,840
करता था करता हूं मुझे जब ज्ञान का पहली

804
00:56:41,840 --> 00:56:46,200
बार अनुभव होता है तभी मैं शब्द का अर्थ समझ पाता हूं जो आपने बात बोली

805
00:56:46,200 --> 00:56:50,360
थी हमारे वेदों में लिखी हुई है जी

806
00:56:50,360 --> 00:56:54,640
उन्होने परमाण माना ये तो ये बोल देंगे ना काल ने लिखा

807
00:56:54,640 --> 00:56:57,600
है ये तो बो

808
00:56:57,600 --> 00:57:02,920
जो भी बात इनके विरुद्ध जाएगी काल काल काल

809
00:57:02,920 --> 00:57:06,920
उसम प्रमाण और वेदों में प्रमाणित क्या करेंगे जो

810
00:57:06,920 --> 00:57:11,120
वेदों में ढूंढने पर नहीं मिलेगा लेंस लेकर ढूंढोगे तो नहीं मिलेगा वेदों में प्रमाण

811
00:57:11,120 --> 00:57:15,760
है ओए जी बोलिए गोविंद जी

812
00:57:15,760 --> 00:57:20,000
एक मिनट पहाड़ी जी एक मिनट पंडित पंडित फ्लोकी

813
00:57:20,000 --> 00:57:24,000
जी आपका शायद नाम है पंडित जी आपको प्रणाम है सबसे पहले तो आप तो

814
00:57:24,000 --> 00:57:28,200
धारी है आप तो थोड़ा हमसे ज्यादा ही ज्ञान रखते होंगे ठीक है

815
00:57:28,200 --> 00:57:32,280
मैं एक आपको फोटो दिखा रहा हूं वो बताइएगा य आपको क्या लग रहा है ये

816
00:57:32,280 --> 00:57:37,400
किसकी फोटो हो सकती

817
00:57:37,400 --> 00:57:41,440
है यह कोई जानवर है भैया जानवर तो है

818
00:57:41,440 --> 00:57:45,520
जानवर हैना ऐसा तो नहीं कि कल को आपको यह कहीं पड़ी हुई मिल जाए मेरी

819
00:57:45,520 --> 00:57:49,680
टीशर्ट मिल जाए तो मेरा पिंडन करवा देंगे

820
00:57:49,680 --> 00:57:54,400
आप नहीं नहीं ऐसे कैसे कर कितनी सल

821
00:57:54,400 --> 00:57:58,400
बात है जानवर की हड्डी और इंसान की हड्डी में कोई फर्क और

822
00:57:58,400 --> 00:58:03,000
किसको नहीं आ रहा जो घर वाले हैं इनके ठीक है जो कि वो

823
00:58:03,000 --> 00:58:07,040
अच्छे खासे पढ़े लिखे भी होंगे ठीक है कि इसके पास में अपनी

824
00:58:07,040 --> 00:58:11,960
य टीशर्ट र् संत के घर के लोग थे

825
00:58:11,960 --> 00:58:16,080
वो उने ये चीज देखकर और उनकी कमीज इसके

826
00:58:16,080 --> 00:58:20,840
पास देखकर धोती आदि देखकर उनका पिंड दान कर दिया

827
00:58:20,840 --> 00:58:25,000
बताइए मेरी यहां पर ये कहीं टीशर्ट दिख जाए किसी को मोटरसाइकिल

828
00:58:25,000 --> 00:58:29,000
के ऊपर पड़ी हुई और वो देखे भाई मोटरसाइकिल के ऊपर इसकी टीशर्ट पड़ी

829
00:58:29,000 --> 00:58:33,120
है यानी कि यह मोटरसाइकिल वही बंदा है चलो चल के मैं इसका पिंड दान

830
00:58:33,120 --> 00:58:37,160
कर रता हूं क्योंकि जितना आंख वाले को जानवर की हड्डी

831
00:58:37,160 --> 00:58:41,240
में फरक दिखाई देना उतना ही उसको मोटरसाइकिल में भी फर्क दिखाई देगा य कितना है इतना ही

832
00:58:41,240 --> 00:58:45,840
अंतर है यह अच्छा अच्छा अच्छा कहानी ऐसी रचो

833
00:58:45,840 --> 00:58:50,080
कहानी ऐसी रचो कि चार आदमियों का ब्लड प्रेशर

834
00:58:50,080 --> 00:58:52,480
वैसे ही डाउन हो जाए उसको पढ़ के कि भाई इसका मैं

835
00:58:52,480 --> 00:58:57,120
क्या जवाब दू इसका कोई जवाब होना भी चाहिए नहीं होना चाहिए मे पट

836
00:58:57,120 --> 00:59:01,360
आप मुझे एक बात याद आ रही मेरे बचपन की अब वो

837
00:59:01,360 --> 00:59:05,400
थोड़ा आज का व्यक्तित्व और जो किशोर अवस्था में

838
00:59:05,400 --> 00:59:09,560
जो चीज थी वो थोड़ा अलग है मगर मैं बताऊंगा आज मेरा

839
00:59:09,560 --> 00:59:14,040
एक मित्र हुआ करते थे वो क्या करते थे कि

840
00:59:14,040 --> 00:59:18,040
अब संभवत जो एक किशोर अवस्था होती है सबके मन में आता है कि हमारा

841
00:59:18,040 --> 00:59:22,440
प्रेम प्रसंग चले ऐसा हो वैसा हो तो

842
00:59:22,440 --> 00:59:26,480
जो मेरे एक मित्र थे वो क्या करते थे कि खुद फ शर्ट

843
00:59:26,480 --> 00:59:30,680
पहने है ठीक है शर्ट में छेद हो रहा है

844
00:59:30,680 --> 00:59:34,920
और मातृ शक्ति को किसी को रिझाने के लिए बोल रहे हैं ऐसे जैसे ही मातृ

845
00:59:34,920 --> 00:59:39,800
शक्ति आसपास से निकली होता है ना कि वो कैसे

846
00:59:39,800 --> 00:59:44,040
रिए तो जैसे ही कोई मातृ शक्ति पास से जा रही है

847
00:59:44,040 --> 00:59:48,080
तो फोन पर बात करते हु हा मेरे वो 00 कब देगा

848
00:59:48,080 --> 00:59:52,080
मेरेज कब देगा मेरे अब शर्ट खुद की फटी है सामने

849
00:59:52,080 --> 00:59:56,280
से और फोन प कह रहा है मेरे 500 बेज दे मुझे इसको गिफ्ट

850
00:59:56,280 --> 01:00:00,280
देना है उसको गिफ्ट अपना मतलब वो अपना अर्थ की संपन्नता दिखाने

851
01:00:00,280 --> 01:00:04,520
के लिए किसी को रिझाने के लिए अब मैं उससे जब वो निकल

852
01:00:04,520 --> 01:00:07,640
जाती निकल जाती तो मैं कहता उसका कॉलर

853
01:00:07,640 --> 01:00:11,840
पकड़ के अपने मित्र का अरे भाई झूठ बोलना है तो ऐसा बोल

854
01:00:11,840 --> 01:00:15,960
जो सामने को लगे कि थोड़ा बहुत पच पाए सही बात है सही

855
01:00:15,960 --> 01:00:20,000
बात है तेरी खुद की शर्ट पटी हुई है तेरी खुद की फेंट पटी हुई है और

856
01:00:20,000 --> 01:00:24,400
तू हजारों लाखों की बातें कर रहा है करोड़ों की बातें कर रहा

857
01:00:24,400 --> 01:00:28,520
है वो वाली बात ही है मेरे को ये बिल्कुल समझ नहीं आ रहा

858
01:00:28,520 --> 01:00:32,600
वो कौन सा जानवर देखा होगा उन्होंने जो कि बिल्कुल हूबहू इंसान की तरह दिख

859
01:00:32,600 --> 01:00:36,840
रहा था ठीक है वो कौन कैसा मतलब भेड़िया तो नहीं हो सकता हिरण

860
01:00:36,840 --> 01:00:41,000
भी नहीं हो सकता गोरिला तो जंगल में ऐसे पाए नहीं जाते वो तो बहुत घने

861
01:00:41,000 --> 01:00:45,160
जंगलों में पाए जाते हैं तो क्या लगता है पंडित जी आपको वो कौन सा जानवर

862
01:00:45,160 --> 01:00:49,200
रहा होगा आपको या शिवांश जी आपको क्या लगता है कौन सा जानवर रहा होगा जिसकी 6

863
01:00:49,200 --> 01:00:53,240
फुट 55 फीट हाइट होती हो मुझे लगता है कि जो

864
01:00:53,240 --> 01:00:58,000
उस समय के वो जो इंसान रहे वो जानवरों जैसे ही होंगे

865
01:00:58,000 --> 01:01:02,200
इसलिए मैच हो गया तो इसका अर्थ य हुआ कि व

866
01:01:02,200 --> 01:01:06,600
धर्म विहीन होंगे ना वो पशु पशु योनि में उत्पन्न होने वाले शायद मनुष्य

867
01:01:06,600 --> 01:01:10,760
हो जो पशु शरीर होता हो तब वो मैच खा सकता है भाई चमत्कार

868
01:01:10,760 --> 01:01:14,960
तो हो ही सकता है कुछ भी हो सकता है ठीक है पहाड़ी पर ये देखिए ना

869
01:01:14,960 --> 01:01:19,000
यहां तो फिर यह बात माननी पड़ेगी कि जिनकी ये बात कर रहे प्रसंग

870
01:01:19,000 --> 01:01:22,680
का वो हुबहू वैसे ही थे पशु योनि के वाले के समान ही तभी

871
01:01:22,680 --> 01:01:26,840
तो इतनी समानता उनको दिखी होगी ना भाई इसमें

872
01:01:26,840 --> 01:01:31,400
ये तो समझ समझ के जो ना समझे मेरी समझ में वो ना समझ वाली बात है

873
01:01:31,400 --> 01:01:35,560
मगर इसको हम एडमिट नहीं करेंगे कन्फर्म नहीं करेंगे जी पड़ी

874
01:01:35,560 --> 01:01:39,680
जी बोलिए बिलकुल एक लास्ट बात कह के मैं खत्म

875
01:01:39,680 --> 01:01:43,720
करूंगा उसके बाद अमित जी को मौका दीजिएगा ये गाय

876
01:01:43,720 --> 01:01:47,840
के ऊपर वीडियो बनाई थी इन लोगों ने कि हम लोग जो है गाय की पूजा

877
01:01:47,840 --> 01:01:52,200
करते हैं उनके मूत्र की पूजा करते हैं तो हमारे वेदों में ही

878
01:01:52,200 --> 01:01:56,320
अमित जी मैं आपसे कहना चाहूंगा आप खुद को कट्टर सनातन कहते हो हमारे

879
01:01:56,320 --> 01:02:01,000
वेदों में अथर्व वेद में कह रखा है जो पुरुष पुरुष ऋ सहित

880
01:02:01,000 --> 01:02:05,440
ब्राह्मणों को देवता के निमित गोदान नहीं करता है व अपनी संतान विक्रय

881
01:02:05,440 --> 01:02:11,440
करने वाला होता है से भी न हो जाता है अब

882
01:02:13,200 --> 01:02:19,200
बताइए अरे वो तो पेन चलेगा ना उस

883
01:02:22,680 --> 01:02:26,800
पर अभी अमित जी अभी लेंगे देखिए अब

884
01:02:26,800 --> 01:02:30,800
जो है हम लोग एक बीच बीच में आपकी वो कहानिया सुनते रहेंगे

885
01:02:30,800 --> 01:02:34,920
गोविंद जी मगर अब बीच बीच में लेंगे आपको अब अब

886
01:02:34,920 --> 01:02:39,800
जो है एक बात पूछते हैं कि भाई एक बहुत बड़ी

887
01:02:39,800 --> 01:02:44,640
एक बेस है आपका अमित दास जी की

888
01:02:44,640 --> 01:02:48,920
जो भगवत गीता में जो ज्ञान बोला है वह

889
01:02:48,920 --> 01:02:52,960
काल ने बोला है ठीक है और दो प्रकार

890
01:02:52,960 --> 01:02:57,040
का ज्ञान है एक परमात्मा का ज्ञान है और और एक काल का ज्ञान है काल

891
01:02:57,040 --> 01:03:01,280
का ज्ञान लेने लायक नहीं है और परमात्मा

892
01:03:01,280 --> 01:03:05,280
का ज्ञान लेने लायक है ठीक है मानते हैं ना

893
01:03:05,280 --> 01:03:09,440
इतना है ना ठीक है अब आप हमें ये सिद्ध

894
01:03:09,440 --> 01:03:13,600
कर दीजिए कि एक तो उसमें दो प्रकार का ज्ञान है एक परमात्मा का

895
01:03:13,600 --> 01:03:17,880
और दूसरा काल का और एक कि उसमें काल ने बोला

896
01:03:17,880 --> 01:03:22,800
है तो पहले काल ने बोला है ये सिद्ध करिए

897
01:03:22,800 --> 01:03:26,840
तो मैं आपको यह बताना चाहूंगा कि जो जो

898
01:03:26,840 --> 01:03:28,360
जो श्लोक जो गुरु

899
01:03:28,360 --> 01:03:33,200
जी हमारे बताते हैं कि कृष्ण भगवान तो वहां पहले से ही विराजमान थे

900
01:03:33,200 --> 01:03:37,320
तो फिर उस उस समय उस श्लोक में यह शब्द क्यों आया

901
01:03:37,320 --> 01:03:41,440
कि हे अर्जुन मैं इस समय इन सब प्राणियों को खाने के लिए

902
01:03:41,440 --> 01:03:46,080
प्रकट हुआ हूं तो ये श्लोक का अर्थ क्या होता है

903
01:03:46,080 --> 01:03:50,160
ठीक है अगर इस लोक लोक एक मिनट मैं

904
01:03:50,160 --> 01:03:54,160
आपकी बात का उत्तर दे रहा हूं क्या ये कोई सनातन सिद्धांत है

905
01:03:54,160 --> 01:03:58,240
कि अगर उन्होंने जी जी एक मिनट एक

906
01:03:58,240 --> 01:04:02,680
मिनट मैंका उतर देय

907
01:04:02,680 --> 01:04:07,080
जाना सत

908
01:04:07,080 --> 01:04:11,200
जाना मुझे आप ये बताइए ऐसा कुछ बताइए जिसका अर्थ

909
01:04:11,200 --> 01:04:15,200
ये निकलता हो कि उसम जो है काल ने बोला अगर आपने बताया

910
01:04:15,200 --> 01:04:19,200
कि ऐसा क्यों आया तो यह तो आपने क्वेन पर क्वेश्चन किया अगर आपका

911
01:04:19,200 --> 01:04:23,280
क्वेश्चन का उत्तर मेरे पास नहीं भी है तो भी यह सिद्ध नहीं होगा

912
01:04:23,280 --> 01:04:27,520
कि वो काल ने बोला है आपको यह सिद्ध करना वो काल ने बोला है

913
01:04:27,520 --> 01:04:31,680
अगर कोई ऐसी चीज है जो समझ में नहीं आ रही है तो उसके लिए आपको

914
01:04:31,680 --> 01:04:35,800
समझना है मगर उसका अर्थ यह नहीं है कि व काल ने बोला है पहली बात दूसरी

915
01:04:35,800 --> 01:04:39,840
बात य है कि जब वो तत्वदर्शी

916
01:04:39,840 --> 01:04:44,400
है तो अपने आप को कुत्ता दो कौड़ी का

917
01:04:44,400 --> 01:04:48,320
यह रामपाल क्यों कह रहे

918
01:04:48,320 --> 01:04:52,800
हैं हेलो हेलो हेलो

919
01:04:52,800 --> 01:04:56,520
हेलो

920
01:04:56,520 --> 01:05:00,920
अमित आपकी आवाज आ रही है आवाज आ रही है

921
01:05:00,920 --> 01:05:05,320
आ रही आरही रही हा आपके जो तत्वदर्शी है

922
01:05:05,320 --> 01:05:09,400
जो सब कुछ जानते हैं उन्होंने अपने आप को कुत्ता दो कौड़ी का

923
01:05:09,400 --> 01:05:13,840
क्यों बोला हा मैं इसका उत्तर देना चाहूंगा

924
01:05:13,840 --> 01:05:18,320
क्योंकि वो इसलिए कह रहे हैं कि गुरु की शरण में ऐसे रहना चाहिए

925
01:05:18,320 --> 01:05:23,000
अरे भाई कह तो झूट रहे ना वो सत्य तो नहीं है ना कुत्ते तो नहीं है ना

926
01:05:23,000 --> 01:05:27,040
वो ये आपके हिसाब से है कि जानवरों

927
01:05:27,040 --> 01:05:31,160
में सबसे वफादार प्राणी कुत्ता होता है तो इसलिए गुरु

928
01:05:31,160 --> 01:05:35,200
की शरण में वफादार बन के रहना चाहिए मैं कह रहा हूं कह तो झूठ

929
01:05:35,200 --> 01:05:38,960
रहे हैं ना कि वास्तव में कुत्ते

930
01:05:38,960 --> 01:05:42,960
हैं झूठ कह रहे हैं ना ये एक उदाहरण दे

931
01:05:42,960 --> 01:05:47,160
रहे हैं झूठ या सच नहीं है ये ये लीला पूर्वक कह रहे हैं

932
01:05:47,160 --> 01:05:51,280
वो ये उदाहरण के तौर पर कह रहे हैं ये कोई झूठ या सच नहीं है

933
01:05:51,280 --> 01:05:55,880
ये क्यों नहीं है झूठ या सच या तो उसको बिल्कुल परफेक्ट सुनो

934
01:05:55,880 --> 01:06:00,320
या तो उसको या तो उसको परफेक्ट बिल्कुल मानना है कि वो

935
01:06:00,320 --> 01:06:04,400
कुत्ते हैं और या फिर ये कहा जाएगा कि वो लीला पूर्वक

936
01:06:04,400 --> 01:06:08,880
कह रहे हैं कि मैं कुत्ता हूं वस्तुतः वो कुत्ते नहीं है

937
01:06:08,880 --> 01:06:12,080
अभी लाइव में आपसे कोई प्रश्न कर रहा था तो जिसका

938
01:06:12,080 --> 01:06:16,120
आपने उदाहरण दिया कोई गाड़ी का कुछ एरोप्लेन का उदाहरण दिया

939
01:06:16,120 --> 01:06:20,400
तो मैं उसको सत्य मानू कि एरोप्लेन और ये सत्य मानू

940
01:06:20,400 --> 01:06:24,560
सत्य सत्य एरोप्लेन आकाश में तभी उड़ता है जब वो पहले

941
01:06:24,560 --> 01:06:28,920
धरती पर दौड़ता है तो सकते भैया जी उदाहरण तो किसी

942
01:06:28,920 --> 01:06:33,040
का भी दे सकते हैं ना अरे मेरे भाई जब उन्होंने

943
01:06:33,040 --> 01:06:37,200
उदाहरण दिया था कि मैं कुत्ता हूं उन्होंने य बोला उन्होंने व ये नहीं बोला

944
01:06:37,200 --> 01:06:42,760
कि मैं उदाहरण दे रहा हूं उन्होंने बोला कि

945
01:06:42,760 --> 01:06:46,840
मैं उन्होंने ये नहीं बोला कि मैं उदाहरण दे रहा हूं

946
01:06:46,840 --> 01:06:51,040
यह तो आप लगा रहे हो ना तो अब मुझे अब मुझे

947
01:06:51,040 --> 01:06:55,600
बताओ कि या तो आप यह मानोगे कि वो लीला थी और या फिर ये मानोगे

948
01:06:55,600 --> 01:06:59,720
कि वो जो है क्या कहते कुत्ते हैं तो आप या तो लीला मान लो या

949
01:06:59,720 --> 01:07:03,720
उनको कुत्ता मान लो यह तो गुरु के वचन है गुरु

950
01:07:03,720 --> 01:07:06,280
ही

951
01:07:06,280 --> 01:07:10,600
जाने बात रही है तो गुरु के चचन है गुरु ही जाने अब सुनो

952
01:07:10,600 --> 01:07:14,800
लीला पूर्वक भगवान श्री कृष्ण एक जगह खड़े हैं जहा गुरु जहा अर्जुन

953
01:07:14,800 --> 01:07:19,680
खड़ा है ठीक है हेलो हेलो

954
01:07:19,680 --> 01:07:23,680
उतर सुनलो लीला पूर्वक भगवान श्री कृष्ण जिससे की

955
01:07:23,680 --> 01:07:27,360
अर्जुन उनको देख समझ सके इसलिए

956
01:07:27,360 --> 01:07:31,520
लीला पूर्वक भगवान श्री कृष्ण अर्जुन के समक्ष खड़े हैं वस्तुतः

957
01:07:31,520 --> 01:07:35,600
तो वो सर्वज्ञ सर्वव्यापी है और इसीलिए

958
01:07:35,600 --> 01:07:39,600
उनका विराट स्वरूप भी अलग हो जाता है वस्तुत अब मैं आपको

959
01:07:39,600 --> 01:07:43,640
पूछ रहा हूं की इसका अर्थ यह कहां निकलता है

960
01:07:43,640 --> 01:07:47,880
कि वह ज्ञान काल ने बोला है यह बताओ आपको

961
01:07:47,880 --> 01:07:51,880
मेरी बात समझ में नहीं आएगी व मैं जानता हूं आप तो यह बताओ कि

962
01:07:51,880 --> 01:07:57,120
अगर कंट्रक्शन है तो उसका अर्थ यह कहा निकलता है किन ने बोला

963
01:07:57,120 --> 01:08:01,160
है यह शास्त्र में कहा लिखा है कि अगर कांट्रडिक्शन हो जाए तो

964
01:08:01,160 --> 01:08:05,200
व काल का समझ लेना तो फिर उसे समझाइए ना हमें

965
01:08:05,200 --> 01:08:09,480
आपका आप सनातन धर्म की रक्षा करने के लिए बैठ सनातन

966
01:08:09,480 --> 01:08:13,720
धर्म की र समझना चाहता

967
01:08:13,720 --> 01:08:17,840
मेरी बात समझ अगर मैंने अपनी बात कह दी अब आपको मना

968
01:08:17,840 --> 01:08:22,040
ही करना है तो हम उस अटके थोड़ी आप तो यह बताओ वो ज्ञान काल

969
01:08:22,040 --> 01:08:26,280
ने बोला यह कहा लिखा है अगर दो बात वि हो जाए

970
01:08:26,280 --> 01:08:30,480
तो हम आपको शास्त्र से दिखा रहे हैं कि अगर दो बातें विपरीत हो जाए तो दोनों

971
01:08:30,480 --> 01:08:34,480
को सत्य मानना है एक मिनट अगर दो बातें विपरीत हो जाए तो दोनों

972
01:08:34,480 --> 01:08:38,720
को सत्य मानना है यह हम आपको शास्त्र से दिखा रहे हैं आप शास्त्र से दिखा

973
01:08:38,720 --> 01:08:42,960
दो कि दो बातें विपरीत हो जाए तो उसका अर्थ मान लेना कि काल ने

974
01:08:42,960 --> 01:08:47,040
बोला तो मैं यही पूछना चाह रहा मैं यही पूछना चाह

975
01:08:47,040 --> 01:08:51,560
रहा हूं जिस व्यक्ति जो व्यक्ति अगर मैं यहां पर खड़ा हूं और

976
01:08:51,560 --> 01:08:55,880
मेरे अंदर बजरंगबली ने आके यह कहा कि हे

977
01:08:55,880 --> 01:09:00,280
मैं अभी प्रकट हुआ हूं और मुझे यह कार्य करके रहूंगा

978
01:09:00,280 --> 01:09:04,520
मैं तो लोक य लिखा हुआ था लोक उसका मुझे

979
01:09:04,520 --> 01:09:09,760
आधार बताइए मैं आधार जानना चाहता हूं किस आधार

980
01:09:09,760 --> 01:09:14,600
सुनि मैं आपको बारबार बताता हं आप सुनते नहीं है सुनिए

981
01:09:14,600 --> 01:09:18,920
भगवान के दो स्वरूप है एक प्रात

982
01:09:18,920 --> 01:09:23,200
जो सर्वशक्तिमान सर्वव्यापक व्यवहार में ना आ सकने वाला स्वरूप

983
01:09:23,200 --> 01:09:27,280
है एक वो स्वरूप है उस स्वरूप अजन्म अविनाशी

984
01:09:27,280 --> 01:09:31,480
है ठीक है फिर वही वही स्वरूप जब सृष्टि

985
01:09:31,480 --> 01:09:35,600
करता है तो सृष्टि करते टाइम वो अपने अपने

986
01:09:35,600 --> 01:09:40,480
अनुसार मनुष्यों के बीच में व्यवहारिक रूप धारण करता है

987
01:09:40,480 --> 01:09:44,640
वो जो अजन्मा अविनाशी परमेश्वर है वो फिर मनुष्यों

988
01:09:44,640 --> 01:09:48,760
के बीच में आता है व्यवहारिक स्वरूप धारण करके तो जब

989
01:09:48,760 --> 01:09:52,760
वो यह कह रहा है कि तेरे और मेरे बहुत से जन्म हो चुके हैं तो उसका

990
01:09:52,760 --> 01:09:56,840
अर्थ है वो जो व्यवहारिक स्वरूप मैंने कई बार ले लिया मैं अजन्मा विनाशी हूं वो बोल

991
01:09:56,840 --> 01:09:58,320
भी रहे हैं मैं अजन्मा

992
01:09:58,320 --> 01:10:02,360
विनाशी हूं फिर भी मैं यहां पर अपनी योग माया को योग

993
01:10:02,360 --> 01:10:06,640
माया को अपने अधीन करके प्रकट होता हूं अब इसको मैं एक एग्जांपल से समझाता हूं

994
01:10:06,640 --> 01:10:10,680
योग माया एग्जांपल जैसे मान लीजिए कि आपने एक वीडियो

995
01:10:10,680 --> 01:10:14,920
गेम बनाया वीडियो गेम ठीक है वीडियो गेम आपने चालू

996
01:10:14,920 --> 01:10:19,000
किया खेलने के लिए आप बाहर बैठे हुए हो अच्छे से

997
01:10:19,000 --> 01:10:23,000
बैठे हुए हो आप में कुछ नहीं हो रहा है वीडियो गेम के अंदर आप

998
01:10:23,000 --> 01:10:27,480
एक प्लेयर के रूप में कई बार जाते हो वो प्लेयर जो है

999
01:10:27,480 --> 01:10:31,480
वो जो जिस प्लेयर के रूप में जाते हो व कई बार उसका जो आविर्भव तिरो

1000
01:10:31,480 --> 01:10:35,480
भाव वीडियो गेम के अंदर होता रहता है मगर आपका जो बाहर आप बैठे

1001
01:10:35,480 --> 01:10:39,560
हो वीडियो गेम से उसका आविर्भव तिरो भाव कभी नहीं होता इसी

1002
01:10:39,560 --> 01:10:44,120
इसी बात के लिए भगवान ने बोला कि मैं अजन्मा अविनाशी होते हुए भी

1003
01:10:44,120 --> 01:10:48,160
अपनी योग माया यानी वो वीडियो गेम की दुनिया उसको अधीन करके

1004
01:10:48,160 --> 01:10:52,280
प्रकट होता हूं क्यों होता हूं कि वीडियो गेम के अंदर जो व्यक्ति फसा हुआ

1005
01:10:52,280 --> 01:10:56,720
है उसको बचाने के लिए उसको उससे निकालने के लिए उसकी करने के लिए परणया

1006
01:10:56,720 --> 01:11:01,120
साधु नाम विनाश आया चता

1007
01:11:01,120 --> 01:11:05,520
अब यह हमने इतनी एक्सप्लेनेशन दे दी अब आप हमें य बताइए कि अगर आपको हमारी

1008
01:11:05,520 --> 01:11:09,680
एक्सप्लेनेशन पसंद नहीं भी है आपको समझ में

1009
01:11:09,680 --> 01:11:14,880
नहीं भी आ रही है तो इसका

1010
01:11:14,880 --> 01:11:19,240
अने किने

1011
01:11:19,240 --> 01:11:23,840
एकरी समझ में आया सुनो तो सही देखिए

1012
01:11:23,840 --> 01:11:27,840
आप ये बात बोलिए आपने उसका अर्थ काल

1013
01:11:27,840 --> 01:11:32,080
कहां से लिया यह बताइए बस आपने जिस तरीके

1014
01:11:32,080 --> 01:11:36,480
से एक्सप्लेन किया मेरी समझ में आ गया तो इसका अर्थ यह हुआ

1015
01:11:36,480 --> 01:11:40,680
कि वहां पर पहले से दो भगवान विराजमान है

1016
01:11:40,680 --> 01:11:45,160
कहां दो भगवान यह कहां से समझ में आया आपको

1017
01:11:45,160 --> 01:11:49,360
भगवान से हो मेरे को मेरे को इनसे थोड़ी देर बात

1018
01:11:49,360 --> 01:11:53,720
करने दीजिए सिर्फ दो मिनट ठीक है इनके दो भगवान वाला कंसेप्ट मैं

1019
01:11:53,720 --> 01:11:57,960
क्लियर करता हूं और बाकी सबका भी हो जाएगा अमित जी जरा स्क्रीन पर ध्यान

1020
01:11:57,960 --> 01:12:02,360
से देखिएगा ठीक है यहां पर अर्जुन य पूछ रकी स्क्रीन फीज

1021
01:12:02,360 --> 01:12:07,160
है गुरु गोविंद जी आपकी स्क्रीन फ्रीज है नहीं नहीं वो

1022
01:12:07,160 --> 01:12:11,520
फन दिखा फ प दिखा ये भगवत

1023
01:12:11,520 --> 01:12:15,640
गीता का वह श्लोक है जिसका आप हवाला देते हैं यहां पर सुनिए ध्यान

1024
01:12:15,640 --> 01:12:19,960
से मुझे बतलाइए कि आप उग्र रूप वाले कौन है

1025
01:12:19,960 --> 01:12:24,000
तो अर्जुन यह नहीं कह रहा कि आप कौन हो मैं आपको पहचानता ही

1026
01:12:24,000 --> 01:12:28,760
नहीं आप आए कहां से वो रूप की बात कर रहा है आपका इतना

1027
01:12:28,760 --> 01:12:30,200
उग्र रूप कौन है

1028
01:12:30,200 --> 01:12:34,480
सुनिए मैं आपको ध्यान से अपनी तरफ से भी एक्सप्लेन कर देता हूं क्योंकि आपके संशय

1029
01:12:34,480 --> 01:12:38,800
है ठीक है मेरी माता मेरे को पहचानती है डेली देखती है ठीक है

1030
01:12:38,800 --> 01:12:43,000
एक दिन मैं कोई सर पर जामा ड़ लेता हूं कोई माला टांग

1031
01:12:43,000 --> 01:12:47,040
लेता हूं और कुछ ऐसा मुख पर लगा लेता हूं जैसे वि भूत आदि लगा लेता

1032
01:12:47,040 --> 01:12:51,280
हूं तो माता पूछेगी ना आप कौन हो भाई ठीक है

1033
01:12:51,280 --> 01:12:55,640
क्या माता मेरे को नहीं पहचानती परंतु माता मेरे उस रूप को नहीं प नती

1034
01:12:55,640 --> 01:13:00,000
है जो मैं धर के उनके सामने खड़ा हूं इस वक्त ठीक है समझ आ गया ये

1035
01:13:00,000 --> 01:13:04,080
ठीक है तो वो यह नहीं पूछ रहा आप कौन हो मैं जानता ही नहीं ठीक है पहली बात ये क्लियर

1036
01:13:04,080 --> 01:13:08,080
हुई ठीक है आप उग्र रूप वाले उग्र रूप ठीक

1037
01:13:08,080 --> 01:13:12,200
है दूसरा जो आप पूछ रहे हैं नाय काल कोई और व्यक्ति है जो उनके अंदर घुस

1038
01:13:12,200 --> 01:13:16,520
गया था ठीक है काल है और विसर्ग जुड़ा हुआ है और महाकाल

1039
01:13:16,520 --> 01:13:20,960
आगे लिखा हुआ है ठीक है इसकी एक्सप्लेनेशन आपके बाबा जी देते हैं

1040
01:13:20,960 --> 01:13:25,320
कि ये इस वक्त सारे संसार को खाने के लिए आया हुआ है या

1041
01:13:25,320 --> 01:13:29,320
यह सारे संसार को निगलने के लिए आया हुआ है ठीक है तो

1042
01:13:29,320 --> 01:13:33,320
उनको लगा कि शायद ये कोई और ही व्यक्ति है ठीक है लेकिन

1043
01:13:33,320 --> 01:13:37,480
अब इस काल के बारे में जानना है दरअसल ये है कौन है ठीक है तो चलिए

1044
01:13:37,480 --> 01:13:41,480
आपको मैं ग्रंथ से पढ़ा देता हूं आपकी शंका जो है ना वो मिट नहीं

1045
01:13:41,480 --> 01:13:45,280
चाहिए क्योंकि हम चाहते हैं आपका मात्र कल्याण हमें

1046
01:13:45,280 --> 01:13:49,280
आपसे एक रुपया रुकिए रुकिए जब मैं खत्म कर लूंगा तब आपको बोलने का पूरा मौका

1047
01:13:49,280 --> 01:13:53,280
देगा ठीक है शास्त्रों के बीच में नहीं बोलने दूंगा ठीक है उसके लिए क्षमा मांगूंगा

1048
01:13:53,280 --> 01:13:57,520
पहले ये है श्री पद्म पुराण ठीक है

1049
01:13:57,520 --> 01:14:01,720
यह पद्म पुराण है इसके अंदर श्री विष्णु सहस्त्र नाम के अंदर चलते

1050
01:14:01,720 --> 01:14:06,120
हैं ठीक है और देखते हैं काल कौन है ठीक है यह देखिए ये पढ़िए

1051
01:14:06,120 --> 01:14:10,360
जरा ठीक है यह कौन है यह वैसा ही काल है और विसर्ग जुड़ा

1052
01:14:10,360 --> 01:14:14,560
हुआ है आगे काल है और विसर्ग जुड़ा हुआ है ठीक है तो इसकी

1053
01:14:14,560 --> 01:14:18,720
एक्सप्लेनेशन क्या है भगवान का एक नाम या एक रूप काल भी है

1054
01:14:18,720 --> 01:14:22,800
ठीक है युग वर्ष मास पक्ष

1055
01:14:22,800 --> 01:14:27,080
आदि रूप से संपूर्ण विश्व को अपना ग्रास बनाने

1056
01:14:27,080 --> 01:14:31,320
वाले काल पद वाच्य यमराज ठीक है

1057
01:14:31,320 --> 01:14:35,680
तो जो गीता में कह रहे हैं ना कि मैं सारी सृष्टि को अपना ग्रास बनाने वाला हूं आदि

1058
01:14:35,680 --> 01:14:40,080
आदि तो वो कृष्ण ही कह रहे हैं प्रमाण है हमारे पास पद्म

1059
01:14:40,080 --> 01:14:44,680
पुराण जहां पर उनकी पूरी की पूरी लीला है उनका स्वरूपों का वर्णन है

1060
01:14:44,680 --> 01:14:48,840
ठीक है और भी जितने आपने नाम दे रखे हैं ना वो सारे के सारे

1061
01:14:48,840 --> 01:14:53,000
श्री कृष्ण के ही अर्थात विष्णु के ही रूप है ठीक है तो आप इसको

1062
01:14:53,000 --> 01:14:57,280
समझिए आज से आपको ये याद रहेगा यह संक्षिप्त पद्म पुराण है

1063
01:14:57,280 --> 01:15:00,560
इसके भीतर उत्तरखंड है उत्तरखंड के अंदर

1064
01:15:00,560 --> 01:15:05,480
कौन सा वाला ये अध्याय है यह भी आप देख लीजिए आपको ऐसा ना लगे कि हम आपको कोई

1065
01:15:05,480 --> 01:15:09,560
सीधा सीधा विष्णु सहस्त्र नाम आप पढ़िए उसका श्लोक बता दीजिए आई

1066
01:15:09,560 --> 01:15:14,400
थिंक 40 4 का का ये वाला कौन सा श्लोक

1067
01:15:14,400 --> 01:15:18,520
हैय मैं बता रहा हूं नाम कीर्तन की महिमा तथा श्री

1068
01:15:18,520 --> 01:15:22,520
विष्णु सहस्त्र नाम स्त्रोत का वर्णन है उत्तरखंड के

1069
01:15:22,520 --> 01:15:26,880
अंतर्गत आता है ये ठीक है समझ आई तो अपने पवित्र ग्रंथों

1070
01:15:26,880 --> 01:15:30,960
को पढ़िए ताकि कोई भी आपको डेढ़ लाइन पढ़ा कर ना डेढ़ शाना

1071
01:15:30,960 --> 01:15:35,240
ना समझे अब आपको अब आपको मैं एक फाइनलाइज उत्तर दे दूं

1072
01:15:35,240 --> 01:15:40,280
एक फाइनलाइज उत्तर आपको दे दूं आप

1073
01:15:40,280 --> 01:15:46,200
जो जीव है जीव के रूप में आप अजन्म और अविनाशी हो कि

1074
01:15:46,200 --> 01:15:50,480
नहीं जीव के रूप में तो मैं मैं

1075
01:15:50,480 --> 01:15:54,560
मैं अब क्लियर नहीं होगे देखो आई ना बात आर या पार की जब

1076
01:15:54,560 --> 01:15:57,800
बात

1077
01:15:57,800 --> 01:16:02,240
मेरी तो जन्म मृत्यु होती मैं समझ नहीं पाया जो आपने पूछा

1078
01:16:02,240 --> 01:16:06,360
मेरी तो जम के बाबा जी का वीडियो दिखा दूं मैं आपको जिसम

1079
01:16:06,360 --> 01:16:10,040
वो कह रहे हैं जीव जो है वो अविनाशी

1080
01:16:10,040 --> 01:16:14,040
है जीव जो अविनाशी है तो जीव जो आत्मा आत्मा है वो

1081
01:16:14,040 --> 01:16:18,080
अविनाशी है तो हा तो आपका वस्तु वास्तविक

1082
01:16:18,080 --> 01:16:22,360
स्वरूप क्या है ये पांच तत्व का

1083
01:16:22,360 --> 01:16:26,640
शरीर वास्तविक स्वरूप हैय ये नहीं है गलत

1084
01:16:26,640 --> 01:16:30,680
जवाब ये वास्तविक स्वरूप है आपका तो फिर पा

1085
01:16:30,680 --> 01:16:35,320
शरीर नट मतलब आपका एकचल

1086
01:16:35,320 --> 01:16:39,320
जोलोक में जी वास्तविक शरीर के साथ जाओगे या जीवात्मा

1087
01:16:39,320 --> 01:16:43,720
के रूप में जाओगे आत्मा के रूप में जाएंगे हम तो

1088
01:16:43,720 --> 01:16:48,280
वास्तविक वास्तविक क्या हुआ स्वरूप आपका जीवात्मा

1089
01:16:48,280 --> 01:16:52,680
तो फिर आमा के रूप में आप अविनाशी

1090
01:16:52,680 --> 01:16:55,480
हो कि नहीं

1091
01:16:55,480 --> 01:16:59,560
हो ना फिर भी जन्म लेते हो ऐसे ही

1092
01:16:59,560 --> 01:17:03,720
भगवान ने कहा था कि मैं भी अजन्मा विनाशी होते हुए भी तेरे और

1093
01:17:03,720 --> 01:17:08,400
मेरे कई जन्म हो सके अर्जुन भी था ना वहा प अर्जुन भी था ना

1094
01:17:08,400 --> 01:17:12,600
अर्जुन के भी तो कई जन्म बता रहे हैं तो वहा दोनों दोनों अजन्म

1095
01:17:12,600 --> 01:17:13,280
थे

1096
01:17:13,280 --> 01:17:17,400
दोनों के कई जन्म हो चुके हैं सिर्फ इतना अंतर है अर्जुन नहीं जानता है

1097
01:17:17,400 --> 01:17:21,720
कि मैं जन्मा अविनाशी हूं और कृष्ण भगवान जानते हैं विद्या

1098
01:17:21,720 --> 01:17:26,080
और अविद्या अर्जुन अर अर्जुन

1099
01:17:26,080 --> 01:17:30,120
वो वीडियो गेम के अंदर फसा हुआ प्राणी है जिसको

1100
01:17:30,120 --> 01:17:34,720
बचाने जो वीडियो गेम के बाहर जो वीडियो गेम खेल रहा है वो जाता है

1101
01:17:34,720 --> 01:17:39,280
उन्हीं के बीच का रूप धारण करके ठीक है अब देखिए

1102
01:17:39,280 --> 01:17:43,800
हमने आपको यथा सामर्थ प्रयास किया है कि आप यह दो दोहरी

1103
01:17:43,800 --> 01:17:48,440
बातों का अर्थ समझ सके मगर अब मूल क्वेश्चन प आइए

1104
01:17:48,440 --> 01:17:52,720
कि आपने काल का अर्थ कैसे ले लिया इन दोहरी

1105
01:17:52,720 --> 01:17:57,160
बातों का अगर आपको हमारी बातें समझ नहीं आई है जो नहीं आए

1106
01:17:57,160 --> 01:18:03,000
कसम खा के रखे है तो नहीं आए

1107
01:18:03,000 --> 01:18:07,120
का पानी प भी मुझसे

1108
01:18:07,120 --> 01:18:11,120
गलती हो गई उसको भी हटा दीजिए मैं एक भी बात ऐसी आपको नहीं दूंगा कि आप

1109
01:18:11,120 --> 01:18:15,240
विषय को बदल सके अब मैं आपसे पूछ रहा हूं काल का अर्थ कैसे

1110
01:18:15,240 --> 01:18:19,440
लिया बस वो बताओ मैं यह कह रहा हूं

1111
01:18:19,440 --> 01:18:23,800
पानी पियो जान कोई दूसरी बात

1112
01:18:23,800 --> 01:18:27,960
सु फिर मुझ पर वो लगता है आपको विषय बदलना है अब मैं बोल

1113
01:18:27,960 --> 01:18:28,640
रहा हूं

1114
01:18:28,640 --> 01:18:32,880
काल का अर्थ कहां से लिया वो बताओ देखो

1115
01:18:32,880 --> 01:18:37,000
पहला तो भगवत गीता हो गया बना प्रश्न

1116
01:18:37,000 --> 01:18:41,360
एक बार अपना प्रश्न आपके समक्ष

1117
01:18:41,360 --> 01:18:45,440
एक बार प्रश्न क्लियर कर दूं अगर उसमें दो बातें आ

1118
01:18:45,440 --> 01:18:49,680
भी रही है अलग अलग तो शास्त्रों ने कहा है दोनों को मानो तुमको

1119
01:18:49,680 --> 01:18:53,840
अगर श्री कृष्ण एक जगह नॉर्मल दिख रहे हैं दूसरी जगह भगवान दिख रहे हैं दोनों

1120
01:18:53,840 --> 01:18:57,880
को मानो ठीक शास्त्रों ने तो ये कहा फिर भी अगर

1121
01:18:57,880 --> 01:19:02,200
आपको लग रहा है कि कंट्रक्शन है विरोधाभास है तो इस विरोधाभास

1122
01:19:02,200 --> 01:19:06,880
का अर्थ काल कैसे हो गया मुझको यह बताइए चलिए

1123
01:19:06,880 --> 01:19:11,440
क्योंकि उसमें दो अलग अलग बातें हो जाती है ना पहली बात मेरी

1124
01:19:11,440 --> 01:19:15,560
पूछ रहा हूं दो अलग बातो का लिखा

1125
01:19:15,560 --> 01:19:19,560
है आपको ये बलग बात हो रही है दो

1126
01:19:19,560 --> 01:19:23,720
अलग बातें हो रही है वो मुझे समझ में आ रहा है कि आप ये कह रहे

1127
01:19:23,720 --> 01:19:27,800
हो काल मैं पूछ रहा हूं दो अलग बातों

1128
01:19:27,800 --> 01:19:32,040
का अर्थ काल लेना है यह सनातन धर्म के कौन से सिद्धांत में लिखा

1129
01:19:32,040 --> 01:19:36,320
है यह बताइए आपने शिव पुराण में वो प्रसंग

1130
01:19:36,320 --> 01:19:40,320
तो सुना ही होगा जहां ब्रह्मा ब्रह्मा जी और विष्णु जी में युद्ध हुआ

1131
01:19:40,320 --> 01:19:43,760
था हां सुना

1132
01:19:43,760 --> 01:19:47,760
है ना हां तो वहां पर वहां पर जब

1133
01:19:47,760 --> 01:19:51,840
ब्रह्मा और विष्णु का युद्ध हुआ था तो शिव भगवान ने वहां पर

1134
01:19:51,840 --> 01:19:56,360
बहुत बड़ा स्तंभ खड़ा कर दिया था अग्नि

1135
01:19:56,360 --> 01:20:00,800
स्तंभ तो अग्नि स्तंभ में शिव भगवान ने

1136
01:20:00,800 --> 01:20:04,960
ब्रह्मा और विष्णु से यह कहा कि तुम अपने आप को ईश्वर

1137
01:20:04,960 --> 01:20:09,000
समझ बैठे तुम अपने आप को ईश्वर समझ बैठे जबक

1138
01:20:09,000 --> 01:20:13,080
यह तीन लोग तुम्हारे नहीं है इस पूरी संपत्ति का मालिक तो

1139
01:20:13,080 --> 01:20:17,320
मैं [संगीत] हूं आपने फिर आपने

1140
01:20:17,320 --> 01:20:21,400
फिर विषय बदल दिया देखा इसलिए इनसे बात नहीं करते आपसे पूछ

1141
01:20:21,400 --> 01:20:26,480
जा र क्या कर रहे हो आप एक और बता

1142
01:20:26,480 --> 01:20:30,600
अगर बमा मेरी बात मेरी बात पूरे खम होने

1143
01:20:30,600 --> 01:20:35,000
दी हम ये पूछ रहे इसका भी हमारे पास आंसर

1144
01:20:35,000 --> 01:20:39,840
है इसका भी आंसर है हम ये पूछ रहे हैं

1145
01:20:39,840 --> 01:20:43,840
हा अंतिम मौका दे दीजिए इनको अंतिम मौका आप अपनी बात पूरी कर लीजिए अगर

1146
01:20:43,840 --> 01:20:47,920
य बात सिद्ध नहीं हो गया तो फिर यह जलेबी बनाने का मौका नहीं मिलेगा ना आपको ना

1147
01:20:47,920 --> 01:20:52,000
आज के बाद किसी को भी अंतिम आपके पास मौका है ये वन एंड ओनली चांस

1148
01:20:52,000 --> 01:20:56,200
बोलिए देखो अगर ऐसा ऐसा ही है देखो

1149
01:20:56,200 --> 01:20:58,840
पहले मैं एक आपसे स्पष्ट और साफ बात कहना चाह रहा

1150
01:20:58,840 --> 01:21:03,000
हूं कि ऐसा नहीं है कि गुरु मैंने बना लिया

1151
01:21:03,000 --> 01:21:08,000
है तो उस पर मैं डट गया हूं पहली बात आप इस

1152
01:21:08,000 --> 01:21:12,040
बात नहीं नहीं मेरी बा या तो आप सनातन धर्म करने के लिए र

1153
01:21:12,040 --> 01:21:16,760
रक्षा नहीं करने के लिए बैठे हो अगर रक्षा करने के लिए बैठे हो तो मेरी बात क्लियर

1154
01:21:16,760 --> 01:21:21,000
कीजिए भाई बाकी बात में

1155
01:21:21,000 --> 01:21:25,080
सुनिए सुनिए सुनिए सुनिए हम यहां पर क्यों है मैं आपकी

1156
01:21:25,080 --> 01:21:29,160
बात समझ गया मैं आपको बताता हूं एक मिनट

1157
01:21:29,160 --> 01:21:33,160
रुक जाइए रुक जाइए मैं आपकी बात समझ गया संक्षिप्त में समझ लेता हूं

1158
01:21:33,160 --> 01:21:37,360
मेरे भाई मैं आपकी बात समझ गया मैं संक्षिप्त में समझ लेता हूं

1159
01:21:37,360 --> 01:21:41,360
हम यहां पर इसलिए नहीं बैठे हैं कि अमित दास हमसे क्लास

1160
01:21:41,360 --> 01:21:45,600
लेने आया है समझो अमित दास हमारी

1161
01:21:45,600 --> 01:21:51,600
किसी बात का विरोध मेरे जो क्वेश्चन कन्फ्यूज है अरे मेरे भाई

1162
01:21:52,920 --> 01:21:57,200
इनको अरे शिवांश जी म्यूट हो गए आप म्यूट

1163
01:21:57,200 --> 01:22:01,320
है म्यूट है शिवांश जी म्यूट म्यूट

1164
01:22:01,320 --> 01:22:05,600
आप म्यूट है हम लोग यहां पर इसलिए नहीं बैठे हैं

1165
01:22:05,600 --> 01:22:09,800
कि अमित दास यहां पर हमसे क्लास लेने आया है यह जो लाइव

1166
01:22:09,800 --> 01:22:13,800
स्ट्रीम चल रही है इस बात के लिए चल रही है कि रामपाल दास का

1167
01:22:13,800 --> 01:22:18,160
एक फॉलोअर यह बताने आया है कि रामपाल की शिक्षा सही है

1168
01:22:18,160 --> 01:22:22,280
और तुम लोग गलत हो ठीक है आपका एक संशय था

1169
01:22:22,280 --> 01:22:26,360
वो हमने यथा सामर्थ प्रयास किया आपके पता पता नहीं समझ में आया कि नहीं आया अब

1170
01:22:26,360 --> 01:22:30,800
दूसरा संशय का मैं एक बार और जवाब दे रहा हूं जो कंट्रक्शन आपने कहा

1171
01:22:30,800 --> 01:22:35,120
ठीक है सृष्टि की रचना एक बार नहीं हुई है

1172
01:22:35,120 --> 01:22:39,440
सिव पुराण में ही कल्प भेद भी दिया गया है ठीक है

1173
01:22:39,440 --> 01:22:43,880
षष्टि की रचना एक बार नहीं हुई है तो जो परम तत्व है किसी

1174
01:22:43,880 --> 01:22:47,960
बार कभी सृष्टि करता है तो वह शिव के रूप में

1175
01:22:47,960 --> 01:22:51,960
अपने आप को ईश्वर के रूप में ख्या पित करता है और बाकी जो ब्रह्मा

1176
01:22:51,960 --> 01:22:56,080
विष्णु ब्रह्मा विष्णु और भगवती और गणेश का जो रूप होता

1177
01:22:56,080 --> 01:23:00,200
है वह उनके परिकर के रूप में हो जाते हैं तो उस सृष्टि में जब वह

1178
01:23:00,200 --> 01:23:04,240
बात करते हैं आपस में तो शिवजी यह कहते हैं कि

1179
01:23:04,240 --> 01:23:08,320
तुम अपने आप को ईश्वर समझ बते वो गलत है ठीक है

1180
01:23:08,320 --> 01:23:12,960
और अगली ही सृष्टि जब करते हैं तो वो उसमें अपने आप को परम तत्व को

1181
01:23:12,960 --> 01:23:16,960
विष्णु नाम से खपत करते हैं तो उस विष्णु नाम से ख्या पित

1182
01:23:16,960 --> 01:23:21,320
होने वाली सृष्टि में जो बाकी के ईश्वर के रूप है वो

1183
01:23:21,320 --> 01:23:25,520
शिव ब्रह्मा भगवती और गणेश ये फिर उनके परिकर

1184
01:23:25,520 --> 01:23:29,800
के रूप में नजर आते हैं ऐसे ही ये पांच रूपों के अंदर वो सृष्टि

1185
01:23:29,800 --> 01:23:33,880
में कल्प भेद से आपको सारे पुराणों में मिलता रहेगा

1186
01:23:33,880 --> 01:23:38,040
कल्प भेद सृष्टि की रचना एक बार नहीं हुई है एक

1187
01:23:38,040 --> 01:23:42,080
ही परम तत्व कभी सृष्टि की रचना करता है तो विष्णु नाम से

1188
01:23:42,080 --> 01:23:46,200
अपने आप को बताता है कभी सृष्टि की रचना करता है तो शिव नाम से अपने

1189
01:23:46,200 --> 01:23:50,520
आप को बताता है यह कल्प भेद होता है ये कल्प वेद भी उन्हीं पुराणों

1190
01:23:50,520 --> 01:23:54,840
में लिखा है जिन पुराणों में आपने जिन पुराणों से आप रेफरेंस

1191
01:23:54,840 --> 01:23:59,280
दे रहे हो ठीक है समझ में आया

1192
01:23:59,280 --> 01:24:03,440
वही तो जानना चाह रहा हूं कि जो ब्रह्मा विष्णु महेश से परे है

1193
01:24:03,440 --> 01:24:07,520
वो परमात्मा कौन है सच अरे मेरे भाई

1194
01:24:07,520 --> 01:24:11,560
मैंने बताया अभी तो बस समझाया सचिदानंद स्वरूप परमेश्वर

1195
01:24:11,560 --> 01:24:15,840
परम तत्व अपने आप को ब्रह्मा विष्णु महेश के रूप में प्रकट

1196
01:24:15,840 --> 01:24:20,040
करता है अब आप दोबारा ये अगर रिपीट करेंगे क्वेश्चन

1197
01:24:20,040 --> 01:24:23,360
तो फिर मैं आपको हटाऊ ठीक है

1198
01:24:23,360 --> 01:24:26,680
ठीक है ठीक है

1199
01:24:26,680 --> 01:24:31,480
सुनिए अब आपके तीन सवाल हो गए अब आप

1200
01:24:31,480 --> 01:24:35,600
ला और फाइनल भैया एक मिनट एक मिनट

1201
01:24:35,600 --> 01:24:39,720
अब आपके तीन सवाल हो चुके और शुरू से वो अटका हुआ है अगर

1202
01:24:39,720 --> 01:24:44,000
दो तरह की बातें हो रही है शास्त्रों में तो उसका अर्थ

1203
01:24:44,000 --> 01:24:48,000
काल है यह कैसे सिद्ध हुआ बस यह बताइए अब आप उत्तर

1204
01:24:48,000 --> 01:24:52,160
दीजिए भाई साहब क्योंकि आप जिज्ञासु बनने के नाम

1205
01:24:52,160 --> 01:24:56,160
पर अपने गुरु की बात को ऊंचा रखने

1206
01:24:56,160 --> 01:25:02,160
आए हैं ठीक है आप जो है उत्तर

1207
01:25:02,440 --> 01:25:06,440
दीजिए बात का उतर नहीं देना चाह रहे नहीं

1208
01:25:06,440 --> 01:25:10,880
हमें नहीं देना आपको देना है क्या अब हो गया आपको देना है क्या

1209
01:25:10,880 --> 01:25:14,960
आपके पास है काल कैसे सिद्ध होता है काल काल है कि

1210
01:25:14,960 --> 01:25:20,600
नहीं करो काल है

1211
01:25:20,600 --> 01:25:24,800
नहीं गीता में दो जगह दो बात हो गई तो उसका अथ लेना

1212
01:25:24,800 --> 01:25:28,920
है ये बताओ अमित जी मैं इनको अमित जी मेरी बात सुनी आपने

1213
01:25:28,920 --> 01:25:33,000
अभी कहा ना कि ब्रह्मा विष्णु महेश अलग है तो परमात्मा कौन है

1214
01:25:33,000 --> 01:25:37,320
जहां आप शक्ति स्तंभ की वो बात कर रहे हैं ना वहीं प लिखा हुआ है कि शिव

1215
01:25:37,320 --> 01:25:41,320
से ही ये सारे लोग प्रकट होते हैं वहां प क्लियर तो लिखा हुआ

1216
01:25:41,320 --> 01:25:45,320
है कि शिव परमात्मा है तो अब आपको कौन सा मतलब कि उसके ऊपर माइकल जैक्सन

1217
01:25:45,320 --> 01:25:49,760
के जब तक वो ऑटोग्राफ नहीं देगा तब तक नहीं मानोगे आप तो तो शिव परमात्मा

1218
01:25:49,760 --> 01:25:53,760
है तो फिर राम जी की भक्ति क्यों कराते हैं तो वो उनकी इच्छा

1219
01:25:53,760 --> 01:25:57,880
है ना उनकी इा चलो इसका आसर देता हूं इसका आर

1220
01:25:57,880 --> 01:26:02,560
देता इा कैसे वो इच्छा लिखी भी तो होगी

1221
01:26:02,560 --> 01:26:06,680
मैं देता हूं मैं देता हूं सुनो ईश्वर किसी भी प्रकार

1222
01:26:06,680 --> 01:26:10,840
के नियम से बाधित नहीं है ईश्वर कुछ भी कर सकता

1223
01:26:10,840 --> 01:26:14,920
है ईश्वर उसे कहते हैं व पप ईश्वर नहीं है अब

1224
01:26:14,920 --> 01:26:17,720
मैं कह रहा हूं तत्वदर्शी संत यदि रामपाल

1225
01:26:17,720 --> 01:26:22,000
है तो अपने को कुत्ता क्यों कह रहे हैं बताओ वो उदाहरण

1226
01:26:22,000 --> 01:26:26,280
दे रहे थे ऐसे ही व उदाहरण भ का

1227
01:26:26,280 --> 01:26:28,640
भक्त

1228
01:26:28,640 --> 01:26:32,640
बनो जब ईश्वर अपनी इच्छा से सब कुछ कर सकता है यानी कि

1229
01:26:32,640 --> 01:26:37,280
वो पाप भी कर सकता है आपका ार

1230
01:26:37,280 --> 01:26:41,560
नहीं है आपका ई में भागीदार नहीं है

1231
01:26:41,560 --> 01:26:46,640
वो धर्म के दायरे में रह सब कुछ कर सकते है बात तो

1232
01:26:46,640 --> 01:26:50,680
समझो भैया जीने बो र्म के दरे में सब कुछ

1233
01:26:50,680 --> 01:26:55,000
कर सकता है

1234
01:26:55,000 --> 01:26:59,000
हमने शुरू से एक प्रश्न लिया है अमित जी हमने शुरू से एक प्रश्न

1235
01:26:59,000 --> 01:27:03,000
लिया है कि कौन सी बात इनम से अभी तक आपने कौन सी बात

1236
01:27:03,000 --> 01:27:07,080
बोली है जिससे यह सिद्ध हो जाए कि भगवत गीता का जो ज्ञान है वो

1237
01:27:07,080 --> 01:27:13,080
काल ने दिया है श्री कृष्ण ने नहीं दिया है

1238
01:27:14,520 --> 01:27:18,800
बोलो बता रहा हरी बात सुनते

1239
01:27:18,800 --> 01:27:23,000
भाई साहब आप आप बोल ही नहीं रहे आप विषय को ब रहे

1240
01:27:23,000 --> 01:27:26,160
आपसे बारबार

1241
01:27:26,160 --> 01:27:30,360
आप आंसर दो आपकी कौन सी बात ऐसी है जिसका

1242
01:27:30,360 --> 01:27:34,360
अर्थ जो है काल निकलता है आपकी कौन सी बात ऐसी है

1243
01:27:34,360 --> 01:27:38,760
जिसका अर्थ काल निकलता है आप आंसर दो अपने वो

1244
01:27:38,760 --> 01:27:43,440
एक वन हैता का ज्ञान काल ने बोला उसको सिद्ध करो

1245
01:27:43,440 --> 01:27:47,520
बस ना तो मैं मैं जो बताऊंगा मैं जो आपको

1246
01:27:47,520 --> 01:27:51,760
बताऊ आपको अगर आपने कुछ और बोला तो हमें

1247
01:27:51,760 --> 01:27:55,760
आपको हटाना पड़ेगा आप काल

1248
01:27:55,760 --> 01:27:59,840
ठीक है मैं जो मैं जो आपको बताऊंगा या तो उसे पूरा

1249
01:27:59,840 --> 01:28:04,280
सुन लेना नहीं तो ना समझ में आए तो श्लोक क्रमांक

1250
01:28:04,280 --> 01:28:08,600
क्रमांक शास्त्र आप शास्त्र का नाम बताइए बस

1251
01:28:08,600 --> 01:28:10,280
कौन से शास्त्र में लिखा

1252
01:28:10,280 --> 01:28:14,360
है कि अगर दोहरी बात हो रही है अगर वह ईश्वर स्वयं को कह रहा

1253
01:28:14,360 --> 01:28:18,360
है कि मैं भक्त हूं अगर ईश्वर कह रहा है कि तुम तुम ईश्वर नहीं हो दूसरा

1254
01:28:18,360 --> 01:28:22,840
ईश्वर का रूप कह रहा है इनमें से कौन सी बात का अर्थ है कि वो गीता का ज्ञान

1255
01:28:22,840 --> 01:28:26,880
काल ने बोला है बोलो अगर श्लोक क्रमांक शास्त्र

1256
01:28:26,880 --> 01:28:31,360
का नाम बोले तो ही बोलिए अन्य कोई वे की बात ना बोले

1257
01:28:31,360 --> 01:28:37,200
लोक क सुनि सुनि

1258
01:28:37,200 --> 01:28:41,240
रामायण शास्त्र की बात रामायण

1259
01:28:41,240 --> 01:28:45,480
बोलिए बोलिए रामायण आगे रामायण में

1260
01:28:45,480 --> 01:28:50,160
बालकांड के श्लोक नंबर 13 में

1261
01:28:50,160 --> 01:28:54,520
वहां पर लिखा हुआ है कि जिसके जिससे

1262
01:28:54,520 --> 01:28:59,080
अनेको ब्रह्मा अनेको विष्णु जन्मते और मरते हैं

1263
01:28:59,080 --> 01:29:05,080
पहला दूसरा दूसरा बता रहा हूं दूसरा

1264
01:29:06,360 --> 01:29:10,360
दूसरा पहले वाले में भया जी या तो

1265
01:29:10,360 --> 01:29:15,040
मुझे हटाइए नहीं तो पूरी बात सुनिए बोलो बोलो बोलो

1266
01:29:15,040 --> 01:29:19,080
दूसरा देवी भागवत पुराण पा बया

1267
01:29:19,080 --> 01:29:24,960
बाल कांड का कौन सा बताया बालकांड का नंबर 143

1268
01:29:24,960 --> 01:29:29,240
जिसमें ऐसे नेति नेती कुछ लोक आता है स

1269
01:29:29,240 --> 01:29:34,080
अब दस दूसरा सु अब दूसरा सुनि दूसरा

1270
01:29:34,080 --> 01:29:38,200
देवी भागवत पुराण पांचवा स्कंद लोक नंबर पेज

1271
01:29:38,200 --> 01:29:42,360
नंबर हैरे अरे भया पहले आप सर्ग

1272
01:29:42,360 --> 01:29:46,880
बताइए बालकांड का कौन सा सर्ग है वो बताओ

1273
01:29:46,880 --> 01:29:52,520
बालकांड का सर्ग है जिसमें नेति नेति कुछ करके

1274
01:29:52,520 --> 01:29:57,360
है कर श्लोक आता है नंबर बताओ नंबर

1275
01:29:57,360 --> 01:30:01,400
नंबर बताओ 143 143 सग भाई इसमें

1276
01:30:01,400 --> 01:30:05,720
सर्ग 143 वा सर्ग कहां है इसमें बालकांड बा बालकांड

1277
01:30:05,720 --> 01:30:09,920
में बालकांड में 11 टोटल बाल कांड

1278
01:30:09,920 --> 01:30:15,640
में 143 मा सर्ग है ही

1279
01:30:15,640 --> 01:30:20,120
नहीं बालकांड में 143 है बालकांड

1280
01:30:20,120 --> 01:30:24,160
में 147 सर्ग है ही नहीं

1281
01:30:24,160 --> 01:30:28,560
बाल में ही सर्ग है उसम 111 सर्ग है

1282
01:30:28,560 --> 01:30:32,680
से 143 सॉरी पेज नंबर बता रहा हूं

1283
01:30:32,680 --> 01:30:37,600
सॉरी सॉरी पेज नंबर पेज नंबर बता रहा

1284
01:30:37,600 --> 01:30:41,840
सॉरी पेज नंबर बता रहा हूं

1285
01:30:41,840 --> 01:30:46,320
र तोते वाली पढ़ाई है इसीलिए गलत होती है अरे 143

1286
01:30:46,320 --> 01:30:50,400
नबर मैंने पेज खोला है इसका श्लोक नंबर बोलिए जरा श्लोक

1287
01:30:50,400 --> 01:30:55,840
में उसम नेति नेति करके लोक होगा इसम नेति नेति करके

1288
01:30:55,840 --> 01:30:58,560
हो आप बताइ

1289
01:30:58,560 --> 01:31:04,000
कौन का मतलब कण जी में

1290
01:31:04,000 --> 01:31:08,080
कास आप उसे पूरा तो पढ़िए आप

1291
01:31:08,080 --> 01:31:12,960
उसे पढ़िए तो सही

1292
01:31:12,960 --> 01:31:18,280
पूरा और मते एक मिनट मिनट गोविंद जी आपको मिल

1293
01:31:18,280 --> 01:31:22,520
गया कहा परन कौन सा है

1294
01:31:22,520 --> 01:31:24,680
नबर

1295
01:31:24,680 --> 01:31:28,760
6वा स 6वा राजा जनक का

1296
01:31:28,760 --> 01:31:33,400
राम लक्ष्मण का सत्कार करके उ अरे भाई

1297
01:31:33,400 --> 01:31:37,800
मैं ये कह रहा हूं एक मिनट बालकांड का

1298
01:31:37,800 --> 01:31:43,800
166 वा सर्ग है पेज

1299
01:31:44,400 --> 01:31:49,720
है थोड़ी देर में

1300
01:31:49,720 --> 01:31:55,360
य पता नहीं वहा श्रीराम जी की बात हो रही है अभी से पता नहीं

1301
01:31:55,360 --> 01:32:01,360
वो हम बात कर देंगे एक एक

1302
01:32:01,440 --> 01:32:07,440
मिनट आप मुझे वो सही क्रमांक बताइए सर्ग का

1303
01:32:08,480 --> 01:32:14,480
66 हा मैं बता रहा बता रहा बता रहा पूरा ही बता रहा

1304
01:32:15,080 --> 01:32:19,320
आपको ये यह वो है जब राजा लेकर जाते हैं उनको धनुष

1305
01:32:19,320 --> 01:32:24,720
दिखाने के लिए

1306
01:32:24,720 --> 01:32:28,920
मैं बताता हूं ये ् रामायन की बात तो नहीं कर रहे कहीं जो प आते सुबह

1307
01:32:28,920 --> 01:32:33,240
सुबह रामपाल जी के ग्रुप

1308
01:32:33,240 --> 01:32:38,440
में राजा जनक का विश्वामित्र और राम लक्ष्मण का

1309
01:32:38,440 --> 01:32:43,160
सत्कार वही यही है 143 नंबर पेज यही है

1310
01:32:43,160 --> 01:32:47,440
इसमें श्लोक इसमें श्लोक क्रमांक कौन सा है

1311
01:32:47,440 --> 01:32:51,760
मेरे में कोई और है अब 1 कुछ और चल रहा है मेरे में तो

1312
01:32:51,760 --> 01:32:56,560
50 चल रहा है वो वाली है संस्कृत हिंदी वाली

1313
01:32:56,560 --> 01:33:00,800
रामायण नहीं नहीं मेरे

1314
01:33:00,800 --> 01:33:05,160
पास संक्षिप्त की बात कर रहे इसलिए दिक्कत हो रही है इनके गुरुजी

1315
01:33:05,160 --> 01:33:11,160
संक्षिप्त ही पढ़ते हैं मैं सबको बता देना भया शलोक क्रमांक बताओ

1316
01:33:13,080 --> 01:33:19,080
भाई ट खोलिए ट यहां पर नहीं मिलेगा वो

1317
01:33:24,680 --> 01:33:28,960
संदीप जी जानते बी पहले से इनका सारा ज्ञान से ही

1318
01:33:28,960 --> 01:33:33,040
आता स में य सब ऐसी कोई बात नहीं क ति नीति वाली

1319
01:33:33,040 --> 01:33:37,360
ति नेति है तो तुलसीदास जी ने कही है मुझे लेकिन

1320
01:33:37,360 --> 01:33:41,760
वाल्मीकि राता है वाल्मी रामायण में और रामचरित

1321
01:33:41,760 --> 01:33:47,760
मानस में क्या अंतर होता वाल्मीकि रामायण बोल रहे है कौन सा बोल रहे

1322
01:33:48,640 --> 01:33:51,760
हो

1323
01:33:51,760 --> 01:33:55,880
रामा ति ति के बारे में गोस्वामी तुलसीदास जी ने

1324
01:33:55,880 --> 01:34:00,200
अच्छे से समझाया है यह भी नहीं वो भी नहीं नेति नीति का अर्थ य होता है भगवान

1325
01:34:00,200 --> 01:34:04,560
राम का बता रहे थे जब वो लेकिन वो बालकांड में है आप आप रामायण

1326
01:34:04,560 --> 01:34:10,560
बोल रहे हैं एक मिनट ये वीडियो प्ले कर रहे हैं प्ले

1327
01:34:10,600 --> 01:34:15,240
करिए अच्छा राम अच्छा रामचरित मानस है

1328
01:34:15,240 --> 01:34:19,440
ना श्री राम बाल रामचरित मानस के बालकांड में

1329
01:34:19,440 --> 01:34:23,840
143 नं मिनट पज करो भया मिनट प

1330
01:34:23,840 --> 01:34:28,040
करो जरा आपको यह नहीं पता है आप यहां पर धर्म और धर्म की व्याख्या के लिए आए

1331
01:34:28,040 --> 01:34:32,160
हो आपको यह नहीं पता है कि रामचरित मानस क्या है और रामायण

1332
01:34:32,160 --> 01:34:36,880
क्या है पता है क्या

1333
01:34:36,880 --> 01:34:42,120
खोलो इनका इनका खोलो जरा मु मु खोलो इनका

1334
01:34:42,120 --> 01:34:46,320
बोलो रामायण के बाल ब

1335
01:34:46,320 --> 01:34:50,840
रामायण के बाल भाई साहब प्रश्न सुनिए

1336
01:34:50,840 --> 01:34:55,040
प्रश्न सुनिए पहले प्रश्न सुनिए आप ने ग्रंथ का नाम बताया

1337
01:34:55,040 --> 01:34:59,560
रामायण हम लोग यहां रामायण में मु मार रहे हैं जिस पर रामायण लिखा है

1338
01:34:59,560 --> 01:35:03,600
और और आप ग्रंथ कौन सा खुलवा रहे हो फिर रामचरित मान उसमें

1339
01:35:03,600 --> 01:35:08,360
लिखा है क्या रामायण उसम रामायण लिखा है क्या

1340
01:35:08,360 --> 01:35:12,720
इनकी रामायण पर लिखी हुई है इसलिए इनको नहीं पता रामायण और रामचरित

1341
01:35:12,720 --> 01:35:16,840
मानस में अंतर क्या होता है जरा पूछिए इनसे श्लोक जो ग्रंथ का आप रेफरेंस दे रहे

1342
01:35:16,840 --> 01:35:21,280
हो वो ग्रंथ रामचरित मानस है और दो दिन पहले आपने कहा है

1343
01:35:21,280 --> 01:35:25,200
कि रामचरित मानस को हम नहीं मानेंगे

1344
01:35:25,200 --> 01:35:29,360
आपका ही मैंने नहीं कहा नहीं नहीं मैंने कहा नहीं

1345
01:35:29,360 --> 01:35:33,440
मैंने कहा कि वाल्मीकि रामा वाल्मीकि जी का रामायण मानेंगे हमने

1346
01:35:33,440 --> 01:35:38,840
ये कहा था रामाय अरे तो ये वाल्मीकि का नहीं है मेरे भाई

1347
01:35:38,840 --> 01:35:43,600
अंधे ये वाल्मीकि का नहीं है बालकांड

1348
01:35:43,600 --> 01:35:48,120
बाल्मी का नहीं है बाल्मीकि से रें

1349
01:35:48,120 --> 01:35:52,200
चलो रामायण नहीं आपने आपने तो बात को पता नहीं क्या कर

1350
01:35:52,200 --> 01:35:56,480
दिया न मैंने कर दिया अभी दो दिन पहले तुमने कहा हम तुलसीदास

1351
01:35:56,480 --> 01:35:57,160
को नहीं मानेंगे हम

1352
01:35:57,160 --> 01:36:01,280
बाल्मीकि के रामायण को मानेंगे अब तुलसीदास का रेफरेंस क्यों दे रहे हो

1353
01:36:01,280 --> 01:36:05,280
या यानी कि मैंने बता दिया ब्रह्मा विष्णु महेश की जन्म मृत्यु होती

1354
01:36:05,280 --> 01:36:09,600
है तो आपने बात को ही घुमा दिया मिनट मिट सुनो

1355
01:36:09,600 --> 01:36:13,680
बहुत बढ़िया ये इसीलिए आते हैं ये इसीलिए आते

1356
01:36:13,680 --> 01:36:18,440
हैं देख रहे हो सुनि देवी भागवत पुराण

1357
01:36:18,440 --> 01:36:22,440
पह मांगिए कि आपने जो कहा है वो गलत कहा है बोलिए अब आप

1358
01:36:22,440 --> 01:36:26,600
पहले बोलिए कि आपने कहा कि आपने बता दिया ब्रह्मा विष्णु महेश

1359
01:36:26,600 --> 01:36:31,120
की जन्म मृत्यु होती है और इसलिए हमने बात को घुमाया इसको सिद्ध

1360
01:36:31,120 --> 01:36:35,160
करिए नहीं नहीं नेती नेती का मतलब जन्म मृत्यु होता है

1361
01:36:35,160 --> 01:36:39,240
ये कौन से इन्होने व्याकरण से कौन सी डिक्शनरी से पढ़ा है बताइए जरा शिवाजी

1362
01:36:39,240 --> 01:36:43,480
इनसे हमने शुरू से एक प्रश्न किया है कि

1363
01:36:43,480 --> 01:36:47,680
आप केवल यह बताइए कौन सी बात का अर्थ यह निकलता

1364
01:36:47,680 --> 01:36:51,680
है कि गीता का ज्ञान काल ने बोला है श्री कृष्ण ने नहीं बोला है

1365
01:36:51,680 --> 01:36:54,880
ठीक है

1366
01:36:54,880 --> 01:36:58,960
बमा विष्णु महे की जन्म मृत्यु होती है तो इसका

1367
01:36:58,960 --> 01:37:03,000
अर्थ मैंने आपको मैंने आपको पांच बार बता दिया

1368
01:37:03,000 --> 01:37:07,600
जन्म मृत्यु तुम्हारी भी होती है फिर भी तुम अविनाशी हो कि नहीं यह बताओ

1369
01:37:07,600 --> 01:37:13,600
हो कि नहीं कौन सुख भोगा सक

1370
01:37:14,120 --> 01:37:18,280
में ये शरीर खाएगा जन्म मृत्यु जन्म मृत्यु

1371
01:37:18,280 --> 01:37:22,400
से ही छुटकारा पाना है आप यही समझिए हमें

1372
01:37:22,400 --> 01:37:26,440
जन्म मृत्यु नहीं चाहिए आप भाई साहब आपको

1373
01:37:26,440 --> 01:37:30,680
क्या चाहिए नहीं चाहिए हमें मतलब नहीं है आपको अब अगर यह आंसर

1374
01:37:30,680 --> 01:37:34,840
देना हो कि काल का अर्थ कैसे निकलता है तो आप बताइए

1375
01:37:34,840 --> 01:37:39,160
नहीं तो आप जाइए शास्त्र का कोई प्रमाण है

1376
01:37:39,160 --> 01:37:43,200
कि अगर ब्रह्मा विष्णु महेश मृत्यु वाले हैं उनका जन्म

1377
01:37:43,200 --> 01:37:47,520
और मरण होता है तो इसका मतलब भगवत गीता का जो ज्ञान है वो काल ने दिया

1378
01:37:47,520 --> 01:37:51,800
कृष्ण नहीं दिया आप यही बताइए जब उनकी जन्म

1379
01:37:51,800 --> 01:37:55,840
मृत्यु होती है तो अगर वो जन मृत्यु को प्राप्त होते हैं

1380
01:37:55,840 --> 01:38:00,320
तो उसका अर्थ काल कैसे निकला ये बताओ

1381
01:38:00,320 --> 01:38:04,360
ये बताओ काल लिखा है ना काल

1382
01:38:04,360 --> 01:38:08,440
जो शब्द आता है बोलिए लोकी लोकी जी को बोलने दीजिए दो मिनट रुक

1383
01:38:08,440 --> 01:38:10,000
जाइए दो मिनट दीजिए ठीक

1384
01:38:10,000 --> 01:38:14,000
है आपकी बात मैं समझ गया हूं

1385
01:38:14,000 --> 01:38:18,160
आप यह बताइए कि आप रामचरित मानस में से बता रहे हैं या रामायण

1386
01:38:18,160 --> 01:38:22,360
में से बता रहे हैं क्योंकि रामचरित मानस आप नहीं मानते हैं आप वाल्मीकि रामायण मानते हैं ना

1387
01:38:22,360 --> 01:38:27,320
रामचरित मानस नहीं मानते जीय बता ब कर बो मैंने

1388
01:38:27,320 --> 01:38:31,320
मैंने अब मैं आपको बता रहा हूं अगर रकी जी रकी भैया

1389
01:38:31,320 --> 01:38:35,320
क्या नाम है आपका पंडित जी क्या नाम है आपका

1390
01:38:35,320 --> 01:38:39,680
हा बोलिए मैं अभी दो मिनट दो मिनट सिर्फ आपसे

1391
01:38:39,680 --> 01:38:44,280
शांति से प्रश्न पूछना चाहता हूं दो ही मिनट है आप

1392
01:38:44,280 --> 01:38:48,280
हा दोही मिनट बस ओनली फॉर दो मिनट उसके बाद मैं खुद चला जाऊ आप

1393
01:38:48,280 --> 01:38:53,680
मुझे रेफरेंस दीजिए प्रश्न नहीं वो रेफरेंस दीजिए रामायण काया

1394
01:38:53,680 --> 01:38:58,080
मैं रेफरेंस ही दे रहा हूं आपको कि जब बालकांड

1395
01:38:58,080 --> 01:39:02,080
में लिखा हुआ है कि ब्रह्मा और विष्णु महेश की

1396
01:39:02,080 --> 01:39:06,560
जिनसे ब्रह्मा और विष्णु जन्म लेते हैं

1397
01:39:06,560 --> 01:39:11,000
बालकांड के पेज नंबर 143

1398
01:39:11,000 --> 01:39:15,000
कौन से वाल्मीकि रामायण के कमन रामायण के रामचरित मानस के कौन से रामायण

1399
01:39:15,000 --> 01:39:19,160
में लिखा है यह बताइए वाल्मिक रामायण की

1400
01:39:19,160 --> 01:39:23,640
वाल्मी रामाय में नहीं लिखा है

1401
01:39:23,640 --> 01:39:26,960
वाल्मी में नहीं लिखा

1402
01:39:26,960 --> 01:39:31,080
हैने पेज नंबर और बालकांड बता दिया तो आपने

1403
01:39:31,080 --> 01:39:35,200
ये बता दिया कि वो है नहीं अरे तो अरे आप बुक

1404
01:39:35,200 --> 01:39:39,760
दिखाओ ना बुक दिखाओ मैं दिखा रहा हूं मैं आपको बुक दिखा रहा

1405
01:39:39,760 --> 01:39:44,400
बुक तो आपके पास भी है ना हा तो दिखा रहा

1406
01:39:44,400 --> 01:39:47,320
बाल

1407
01:39:47,320 --> 01:39:52,240
बाल नंबर देख नहीं देख भाई

1408
01:39:52,240 --> 01:39:56,320
पेज नंबर च चलो ठीक है देवी देवी

1409
01:39:56,320 --> 01:40:00,960
भागवत पुराण पांचवा स्क श्लोक नंबर 766

1410
01:40:00,960 --> 01:40:04,320
में लिखा

1411
01:40:04,320 --> 01:40:08,680
हुआ मेरी स्क्रीन दिख रही है आपकी तो स्थि आपकी

1412
01:40:08,680 --> 01:40:13,800
स्थिति ऐसी है बता मेरी स्क्रीन दिख रही है

1413
01:40:13,800 --> 01:40:17,520
आपको जा

1414
01:40:17,520 --> 01:40:22,320
143 नहीं आप वोली बक दिखा नहीं

1415
01:40:22,320 --> 01:40:26,640
रहे को कंटेंट लेना है इसको और कुछ नहीं करना है इसको हटाओ यहां से

1416
01:40:26,640 --> 01:40:30,720
हटाओ अरे भाई ये क्या ये क्या लिखा हुआ है ये क्या लिखा है हटा दिया हटा दिया

1417
01:40:30,720 --> 01:40:34,800
हटा दिया उनको हटा दिया वो कंटेंट लेने आए हैं बस और कुछ नहीं है

1418
01:40:34,800 --> 01:40:39,600
वो कंटेंट हटा दीजिए भैया इनको हटा दीजिए सर हटा दीजिए

1419
01:40:39,600 --> 01:40:43,680
सर मैंने इनकी प्रॉब्लम बताता हूं क्या है एक्चुअल में क्या हुआ है ये जो बात बोल

1420
01:40:43,680 --> 01:40:47,880
रहे है ना वहां पर ये लिखा हुआ है श्री राम जी के मतलब श्री राम जी के थ्रू

1421
01:40:47,880 --> 01:40:52,080
ना श्री ब्रह्मा विष्णु महेश जी का जो आविर्भाव होता है उनसे मतलब ये चीज लिखी

1422
01:40:52,080 --> 01:40:56,240
हुई है ये इनको अरे अरे तो तो संदीप

1423
01:40:56,240 --> 01:41:00,640
जी हमने संदीप जी हमने कितनी बार बता दिया कि उसी ईश्वर के कभी

1424
01:41:00,640 --> 01:41:04,840
वो पहले राम बन जाता है विष्णु बन जाता है ब्रह्मा विष्णु महेश को दिखा देता है

1425
01:41:04,840 --> 01:41:09,120
वही ईश्वर कभी विष्णु बन जाता है फिर बाकियों को दिखा देता है कितनी बार बताया

1426
01:41:09,120 --> 01:41:13,160
अब हम यह पूछ रहे हैं कि आपको हमारी बात अगर समझ में नहीं आ रही है ठीक

1427
01:41:13,160 --> 01:41:17,880
है मगर इस बात का अर्थ काल कैसे निकलता है यह समझाओ

1428
01:41:17,880 --> 01:41:19,680
मगर वोह बारबार दूसरे दूसरे

1429
01:41:19,680 --> 01:41:23,680
वही उदाहरण वही रिपीट वही जो जो

1430
01:41:23,680 --> 01:41:27,800
वाला उरण है एक दिया दो दिया तीन दिया बारबार

1431
01:41:27,800 --> 01:41:31,800
वही उदाहरण रिपीट कर रहा है अलग अलग जगह से जिसका हम बार बार जवाब दे

1432
01:41:31,800 --> 01:41:35,920
रहे भाई तू ये बता कि अगर कांट्रडिक्शन है तो

1433
01:41:35,920 --> 01:41:40,560
उसका अर्थ काल कैसे आ गया यह बता ये नहीं बताएंगे वो

1434
01:41:40,560 --> 01:41:44,720
नया उ काल कोई अलग है क्या काल कोई

1435
01:41:44,720 --> 01:41:48,800
अलग है सिद्ध करिए कृष्ण का ही नाम काल बता दिया

1436
01:41:48,800 --> 01:41:53,240
दिया समस्या य रेफरेंस क्या देना है

1437
01:41:53,240 --> 01:41:57,440
इन्हें ही नहीं पता अब मैं अभी स्क्रीन शेयर करके बैठा था तो कह रहे बालकांड

1438
01:41:57,440 --> 01:42:01,480
नहीं है ये ये कोई और है क्यों कोई और है क्योंकि उनको इसमें जो है ना फंट समझ में

1439
01:42:01,480 --> 01:42:05,480
नहीं आ रहा है मतलब ये बुद्धि की संकीर्णता देखिए

1440
01:42:05,480 --> 01:42:09,600
कि फंट समझ में नहीं आ रहा है क्योंकि संस्कृत में लिखा है तो ये कुछ गड़बड़ है ये वो नहीं है

1441
01:42:09,600 --> 01:42:13,600
अरे मैं तो ये कहूंगा लोकी जी कि भाई ये पृष्ठ संख्या

1442
01:42:13,600 --> 01:42:18,000
अगर बोलेंगे और हमारे पास अगर गीता प्र की ना होकर बनारस की हुई

1443
01:42:18,000 --> 01:42:22,000
बम्बे प्रकाशन की हुई तो इनके पास यानी कि प्रमाण ही नहीं है हमारी

1444
01:42:22,000 --> 01:42:26,600
प्रमाण प्रमाण नहीं है क्योंकि इनको प्रश् संख्या सिखाई गई

1445
01:42:26,600 --> 01:42:30,720
है अमित भाई अगर आप सुन रहे हो ना ध्यान से सुनो जो आप वो पेज

1446
01:42:30,720 --> 01:42:34,800
बता रहे हो ना वहां पर ये लिखा हुआ है वो श्री राम जी से वहां से प्रकट होते हैं श्री

1447
01:42:34,800 --> 01:42:38,800
ब्रह्मा श्री विष्णु श्री महेश जी य बात को धन मैं अपनी बात

1448
01:42:38,800 --> 01:42:43,080
पूरी कर देता हूं जो आप नेति नीति की बात कर रहे हैं वह रामचरित

1449
01:42:43,080 --> 01:42:47,200
मानस में है वो तुलसीदास जी ने कही है जहां पर नेति नेति की जो बात हो रही है वह

1450
01:42:47,200 --> 01:42:51,880
भगवान राम के बारे में कह रहे हैं यह भी नहीं है वो भी नहीं है नेति नेति

1451
01:42:51,880 --> 01:42:56,160
मतलब यहां पर वो राम जी की जो परम ब्रह्म को बता रहे हैं तुलसीदास गोमी तुलसीदास

1452
01:42:56,160 --> 01:43:00,720
जी इसलिए वो नेति नेति की बात करहे ने शब्द है ना ये

1453
01:43:00,720 --> 01:43:04,800
पढ़ा है बचपन से पढ़ रहे हैं हम ये नेति नेति भगवान के लिए यूज किया गया है

1454
01:43:04,800 --> 01:43:08,920
ये भी नहीं वो भी नहीं ये भी नहीं मैं तो ये कहता हूं मैं तो एक बात ये

1455
01:43:08,920 --> 01:43:13,000
कहता हूं कि अगर चलो इनको रामचरित मानस के आधार पर मानना है तो राम

1456
01:43:13,000 --> 01:43:17,480
को मान लो कहा तो जा रहा है राम को भगवान मान लो हमें कोई दिक्कत नहीं है

1457
01:43:17,480 --> 01:43:21,600
वैष्णव हो जाओ मान लो भैया मगर उसको जब

1458
01:43:21,600 --> 01:43:25,680
जब राम की बात आएगी तो राम मखा द और से ब्रह्मा

1459
01:43:25,680 --> 01:43:29,800
विष्णु महेश की बात आएगी तो उनका आ क और से दिखाएंगे और

1460
01:43:29,800 --> 01:43:33,840
कुल मिलाकर के जब सबका आ हो गया तो अपना एक लाकर गाड़ दिया

1461
01:43:33,840 --> 01:43:38,320
काल या उसका कबीर अरे भाई वो सबूत तो दो

1462
01:43:38,320 --> 01:43:42,320
चलो ठीक है यह सब लोग आविर्भव तिरो भाव होता है मगर इसका

1463
01:43:42,320 --> 01:43:46,440
अर्थ यह कहां से निकलता है कि काल काल ने कहा

1464
01:43:46,440 --> 01:43:50,080
इसका अर्थ यह तो बताओ कि वो श्री कृष्ण से अलग कोई काल

1465
01:43:50,080 --> 01:43:54,680
है यह तो बताओ

1466
01:43:54,680 --> 01:43:58,880
इनके दिमाग में रावण बैठा हुआ यहां प ये रावण और क बैठे समझ पाएंगे

1467
01:43:58,880 --> 01:44:03,200
इनकी बुद्धि ऐसी है दुर्योधन बुद्धि है कैसे समझ शुरू से केवल शुरू

1468
01:44:03,200 --> 01:44:07,480
से केवल एक प्रश्न बोला कि भगवत गीता का ज्ञान काल ने बोला

1469
01:44:07,480 --> 01:44:12,360
है यह कहां से सिद्ध हो रहा है मगर नहीं बताएंगे वो

1470
01:44:12,360 --> 01:44:16,440
उदाहरण बदलते जाएंगे जी जी जी मैं

1471
01:44:16,440 --> 01:44:20,440
काल के लिए इनका पेन चलाया हुआ वाला ज्ञान बता रहा हूं आपको

1472
01:44:20,440 --> 01:44:24,440
जहा इन्होने पेन चलाया है वो दिखा रहा हूं 10 ब

1473
01:44:24,440 --> 01:44:28,560
महाकाल भी बोला वो दिखाते नहीं है साले अच्छा खुद के लिए बोल रहा

1474
01:44:28,560 --> 01:44:32,640
है मैं जन्मा विनाशी देखो खुद के लिए

1475
01:44:32,640 --> 01:44:35,320
बोल

1476
01:44:35,320 --> 01:44:39,680
अविनाशी तोर मिलेगा सतलोक

1477
01:44:39,680 --> 01:44:44,600
आश्रम में जो खजूर मिलेगा क्या क्या मिलेगा उसका सुख कौन सा

1478
01:44:44,600 --> 01:44:48,840
वो बोलेगा य ी सा शरीर भोगा

1479
01:44:48,840 --> 01:44:54,040
वहा का व स खीर म खीर

1480
01:44:54,040 --> 01:44:58,760
स्पेशल खीर होती तो जेलम में मिलती होगी नहीं

1481
01:44:58,760 --> 01:45:03,080
मिलती नेट पर सर्च करो रामपाल के नहाए दूध की खीर

1482
01:45:03,080 --> 01:45:05,920
आपको नेट पर सारा दिखेगा वहा पर

1483
01:45:05,920 --> 01:45:09,920
य व खाते प्रबलम है

1484
01:45:09,920 --> 01:45:13,920
मीन व पर द जाती तने भी प रामपाल जी

1485
01:45:13,920 --> 01:45:17,920
स्नान करते थे सुबह दूध से और उनका

1486
01:45:17,920 --> 01:45:21,960
बना जाती थय

1487
01:45:21,960 --> 01:45:25,960
नेट दिखा दूं अभी सर्च करके सर गल करो

1488
01:45:25,960 --> 01:45:30,360
अभी करो रामपाल के नहाए दूध की खीर सतलोक आश्रम देखिए

1489
01:45:30,360 --> 01:45:34,360
अ मैं अपनी बात पूरी कर देता हूं तो जो अमित जी बोल के गए

1490
01:45:34,360 --> 01:45:38,600
थे 144 उनको यही नहीं पता कि पहली बात तो उनको ये नहीं पता कि रामचरित

1491
01:45:38,600 --> 01:45:43,320
मास है रामायण है रामायण रामायण का 144 पेज नंबर बता रहे हैं जिस नेती नेती

1492
01:45:43,320 --> 01:45:47,480
दोहे की बात कर रहे हैं वो बालकांड का 144 दोहा

1493
01:45:47,480 --> 01:45:51,680
है पेज भी नहीं है दोहा है लेकिन उन्हें यही नहीं पता कि पेज है कि दोहा

1494
01:45:51,680 --> 01:45:56,040
है ठीक है पहली बात दूसरी बात जो सॉरी दोहा कह रहा हूं चौपाई है

1495
01:45:56,040 --> 01:46:00,320
क्षमा करिएगा चौपाई है वो और वह चौपाई है नेति नेति जी वेद

1496
01:46:00,320 --> 01:46:04,960
निरूपा निजानंद निरूपा दि अनुपा मतलब इसका अर्थ है कि जिन्हें वेद

1497
01:46:04,960 --> 01:46:09,000
वेद नेति नेति यानी यह भी नहीं वह भी नहीं ये भी नहीं य भी

1498
01:46:09,000 --> 01:46:10,600
नहीं वो कह कर निरूपण

1499
01:46:10,600 --> 01:46:14,840
करते हैं जो आनंद स्वरूप है जो उपाधि रहित है

1500
01:46:14,840 --> 01:46:19,080
जो अनुपम है एवं जिसके अंश से अनेक शिव ब्रह्मा और विष्णु

1501
01:46:19,080 --> 01:46:20,800
भगवान प्रकट होते हैं यहां

1502
01:46:20,800 --> 01:46:25,760
पर यह बात हो रही है जो कि राम मानस के बालकांड के 144

1503
01:46:25,760 --> 01:46:29,760
चौपाई है ना पेज नंबर है रामायण का ना श्लोक है

1504
01:46:29,760 --> 01:46:33,840
ना सर्ग है ठीक है और दो दिन पहले तो आपको पता ही है कि

1505
01:46:33,840 --> 01:46:37,840
बोल रहे थे कि मैं रामचरित मानस मानता नहीं हूं मैं मानता हूं इस

1506
01:46:37,840 --> 01:46:42,040
मैं इसम जो है ये बात बोलूंगा कि सबसे पहले

1507
01:46:42,040 --> 01:46:46,440
तो देख लीजिए कि काल कौन है सबसे पहले देख लीजिए कि काल कौन है

1508
01:46:46,440 --> 01:46:51,120
विष्णु भगवान के बारे में बात हो रही है प्रथम अंश

1509
01:46:51,120 --> 01:46:55,840
अध्याय दो और उसका 14 से

1510
01:46:55,840 --> 01:46:58,600
15

1511
01:46:58,600 --> 01:47:04,600
श्लोक 14 से 15 श्लोक

1512
01:47:05,400 --> 01:47:09,400
है यहां पे काल इनको काल भी कहा जा रहा है

1513
01:47:09,400 --> 01:47:13,640
भगवान को और वही इन सब व्यक्त कार्य

1514
01:47:13,640 --> 01:47:18,000
और अव्यक्त जगत रूप से तथा इसके साक्षी पुरुष

1515
01:47:18,000 --> 01:47:22,200
और महा काण काल ये देखिए महा

1516
01:47:22,200 --> 01:47:25,800
काण काल दिख रहा है

1517
01:47:25,800 --> 01:47:30,560
क्या नहीं दिख रहा दिख रहा है दिख रहा है दिख रहा है दिख रहा है दिख रहा हैली

1518
01:47:30,560 --> 01:47:34,560
रहा कारण काल के रूप से स्थित है अब यहां से इन्होंने काल ले लिया

1519
01:47:34,560 --> 01:47:38,640
उसके बाद इसी इसी रूप में जब भगवान का नाम काल बताया गया तो

1520
01:47:38,640 --> 01:47:42,720
आगे बताया जा रहा है परम ब्रह्म परम ब्रह्म भी है

1521
01:47:42,720 --> 01:47:46,760
दिख रहा है अब यहां पर ये कहते हैं कि

1522
01:47:46,760 --> 01:47:51,040
ये तो गलती हो गई इससे छापने वाले से अब अगर

1523
01:47:51,040 --> 01:47:55,880
ऐसे गलती करने लगेंगे तो इनकी ज्ञान गंगा में कितनी गलती निकालू

1524
01:47:55,880 --> 01:48:00,000
मैं कि वो भक्त कहते हैं जो मास मध्य

1525
01:48:00,000 --> 01:48:04,000
मैथुन के सहित हो रहित नहीं भक्त उन्हें कहते हैं अब बताओ

1526
01:48:04,000 --> 01:48:08,560
सिद्ध कर दो भैया ठीक है काल को

1527
01:48:08,560 --> 01:48:12,640
काल को ही विष्णु भगवान कहा गया है काल को ही श्री राम

1528
01:48:12,640 --> 01:48:13,720
कृष्ण भी कहा गया

1529
01:48:13,720 --> 01:48:17,800
है ठीक है पहली बात दूसरी बात ये है कि अब बात आती है रामचरित

1530
01:48:17,800 --> 01:48:21,920
मानस की उसमें भी देख लो दो दिन पहले ऐसी व्यक्ति का वो है

1531
01:48:21,920 --> 01:48:26,040
कि मैं च मा मैं तुलसीदास जी की नहीं मानूंगा मैं वाल्मीकि की मानूंगा उस

1532
01:48:26,040 --> 01:48:30,320
पर अपना शर्ट चल रहा है वायरल हो रहा है आज ये वक्ति क्या कह रहा है

1533
01:48:30,320 --> 01:48:34,560
आज य व्यक्ति दोगले पन की भी हद होती है जब

1534
01:48:34,560 --> 01:48:39,280
श्री जब ब्रह्मा विष्णु में जब अपनी बात सिद्ध करनी हो तो तुलसीदास

1535
01:48:39,280 --> 01:48:43,400
और जब सामने वाले की वो हो रही हो काट करनी

1536
01:48:43,400 --> 01:48:47,720
हो तो बाल्मीकि रामायण ये दो सही रेफरेंस नहीं बताना

1537
01:48:47,720 --> 01:48:53,000
हैनी चाबी भरी पालने उतना चले खिलोना

1538
01:48:53,000 --> 01:48:57,240
143 143 कर रहे हो वो क्या 143 है हम लोग रामायण खोल रहे

1539
01:48:57,240 --> 01:49:01,880
रामचरित मानस की चौपाई बोल रहे हो वो क्या 143 है वही नहीं समझ में आ रहा

1540
01:49:01,880 --> 01:49:05,880
जय श्री और तो अब अंततोगत्वा अगर अंततोगत्वा

1541
01:49:05,880 --> 01:49:10,160
मैं कई बार दिखा चुका हूं मगर इसमें फिर से दिखा देता हूं एक बार मैं यही

1542
01:49:10,160 --> 01:49:14,160
नहीं सोच पा रहाय रामायण में तो मिल ही नहीं रहा एकवा

1543
01:49:14,160 --> 01:49:19,000
अंततोगत्वा में आपको वो भी बता दूं युद्ध कांड

1544
01:49:19,000 --> 01:49:23,120
में भगवान को परम ब्रह्म बोला गया श्री राम कोही मान

1545
01:49:23,120 --> 01:49:27,240
लो वाल्मीकि को मानते हो तो मान लो मगर वाल्मीकि को ना मानने

1546
01:49:27,240 --> 01:49:28,760
के लिए फिर दूसरा ग्रंथ लाओगे कि

1547
01:49:28,760 --> 01:49:32,880
उसमें देखो ये कहा जा रहा है ठीक है कंट्रा क्शन है मान लिया

1548
01:49:32,880 --> 01:49:37,040
मान लिया ओए अब तू यह तो बता दे कि काल इसका अर्थ कहां से आता

1549
01:49:37,040 --> 01:49:41,520
है मैं वही पूछ रहा हूं नेती नेती का मतलब

1550
01:49:41,520 --> 01:49:45,680
श्री कृष्ण के अंदर कोई काल घुस गया था ये कौन सी महिमा

1551
01:49:45,680 --> 01:49:50,160
है भाई कौन सा ये महिमा है ये खीर की

1552
01:49:50,160 --> 01:49:54,280
महिमा ये खीर की महिमा है इनके मैं ना इनके

1553
01:49:54,280 --> 01:49:58,360
दरअसल अब सुन रहा हूं सारी की सारी बातें इनके चैनल सुन रहा हूं मेरे को लगता है अपने आप

1554
01:49:58,360 --> 01:50:02,360
से मेरे को एक ् ग्रंथ लिखना पड़ेगा खुद ही इनके बयान लेकर ना वो

1555
01:50:02,360 --> 01:50:06,680
् ग्रंथ मेरे को खुद ही लिखना पड़ेगा सारा का सारा अरे कल आप विश्वास

1556
01:50:06,680 --> 01:50:10,680
नहीं करेत को मतलब रामचरित मानस में नेती नेती

1557
01:50:10,680 --> 01:50:14,960
लिखा हुआ तो कृष्ण जी के अंदर काल घुस गया कल रात

1558
01:50:14,960 --> 01:50:18,960
को बंदे हैं नशेड़ी वो भी करते हैं कभी कभी हालाकि नहीं करना

1559
01:50:18,960 --> 01:50:23,160
चाहिए देखिए हमारी बात

1560
01:50:23,160 --> 01:50:27,360
बात बता दूं अगर कहीं पर उनका आविर्भव रो भाव हो रहा है शास्त्र

1561
01:50:27,360 --> 01:50:31,400
में ठीक है कहीं पर उनको अजन्मा विनाशी कहा जा रहा है शास्त्र

1562
01:50:31,400 --> 01:50:35,640
में तो शास्त्रों ने यह कहा है ठोक के अगर उसमें

1563
01:50:35,640 --> 01:50:39,720
दो तरह की बातें निकल रही जिसका आप एक मतलब नहीं निकाल पा रहे हो

1564
01:50:39,720 --> 01:50:44,080
दोनों बातें धर्म है दोनों बातें माननी

1565
01:50:44,080 --> 01:50:45,080
है

1566
01:50:45,080 --> 01:50:51,080
इस रूप में भी मानना आविर्भाव का मतलब जन्म

1567
01:50:55,440 --> 01:51:00,600
जो आपके बाबा वही मेरे पास है जी

1568
01:51:00,600 --> 01:51:05,160
एक्चुअल में पता क्या है यह लोग जो परमात्मा को समझने की बात करते हैं ना

1569
01:51:05,160 --> 01:51:09,320
इसमें तो नहीं लिखा हैसा ये देखिए और आपके बंदे

1570
01:51:09,320 --> 01:51:13,400
मेरे को आश्रम वाले गालिया देते हैं मैं मैं मैं यहां प एक

1571
01:51:13,400 --> 01:51:18,160
बात कहूंगा ये देखो भाई यहां पे एक मि

1572
01:51:18,160 --> 01:51:22,280
आविर्भव का मतलब वो ग पर मिलता है जी आपकी आवाज कट रही है एक

1573
01:51:22,280 --> 01:51:26,720
एक एक मिनट रुक जाइए लीव करके दोबारा आ जाइए गोविंद जी

1574
01:51:26,720 --> 01:51:30,720
एक बार दोबारा आ जाइए तब

1575
01:51:30,720 --> 01:51:35,040
तक हम बात करते हैं इनकी भगवत गीता की इनकी भगवत गीता में इन्होंने ब्रज

1576
01:51:35,040 --> 01:51:39,040
का अर्थ आना लिया है आना अब अगर यह

1577
01:51:39,040 --> 01:51:43,160
यह कहते हैं कि नहीं यह कारण था वो कारण था तो वह तो भैया छापने वाले

1578
01:51:43,160 --> 01:51:47,400
की गलती है आप जो है दिखा दीजिए हमको कि उन्होंने उन्होंने

1579
01:51:47,400 --> 01:51:52,640
उन्होंने वो लिखा है जो आप दिखा रहे हो ठीक है जी

1580
01:51:52,640 --> 01:51:57,360
सर ये बरा कार् तो सहारा लेना भी होता है लेकिन इन्होने माना नहीं ना वो

1581
01:51:57,360 --> 01:52:00,240
दर्शन करना भी होता है बहुत अर्थ होते हैं

1582
01:52:00,240 --> 01:52:04,360
दर्शन करना भी होता है जी जी जी और मैं मैं

1583
01:52:04,360 --> 01:52:08,480
दिखा रहा हूं श्री राम की परम ब्रह्म

1584
01:52:08,480 --> 01:52:13,280
जी इन्होने कुतर्क करना है

1585
01:52:13,280 --> 01:52:17,360
अगर आपको यही मानना है तो मान लो देखिए इनकी हर

1586
01:52:17,360 --> 01:52:21,480
बात का जवाब है कि ऐसा क्यों हो रहा है वैसा क्यों हो रहा है सब कुछ है शास्त्र

1587
01:52:21,480 --> 01:52:25,520
सम्मत है मगर जब हम कुछ बता देंगे तो तुरंत कद के दूसरा ग्रंथ

1588
01:52:25,520 --> 01:52:29,640
खोल देंगे ये क्यों है फिर अच्छा वो भी हमने बता दिया कि दो जगह

1589
01:52:29,640 --> 01:52:34,080
दो प्रकार की बातें है तो दोनों धर्म है मान लो राम जी को

1590
01:52:34,080 --> 01:52:38,560
आविर्भव त्र भाव वाला भी मान लो अविनाशी भी मान लो मान लो मगर नहीं

1591
01:52:38,560 --> 01:52:42,600
हम एक तीसरी बात लाएंगे जो शास्त्र में है ही नहीं कि वह काल बोल

1592
01:52:42,600 --> 01:52:47,400
रहा था उससे भी बड़ा कोई परमेश्वर है कबीर हम तीसरी बात लाएंगे

1593
01:52:47,400 --> 01:52:51,440
को परमात्मा पता समझ आ रहे बताता क्या कारण है ये लोग परमात्मा

1594
01:52:51,440 --> 01:52:55,560
को लेते हैं जैसे बटा दादा ऐसे समझते हैं लेकिन

1595
01:52:55,560 --> 01:52:59,680
उनका जो समझने का असली तरीका है ना जैसे हम ये तत्व

1596
01:52:59,680 --> 01:53:03,760
होते है ना जैसे पंच तत्व में आसमान होता है आसमान में बादल काले भी है सफेद

1597
01:53:03,760 --> 01:53:08,120
भी है नीले भी है है तो बादल ही ना ये लोग म इस तरीके से नहीं समझते

1598
01:53:08,120 --> 01:53:13,360
दूसरे तरीके समझते संसार तरीके से समझने की कोशिश करते हैं ऐसे समझ नहीं आते

1599
01:53:13,360 --> 01:53:15,400
परमात्मा नहीं शिवान जी वो

1600
01:53:15,400 --> 01:53:19,400
क्या बोलते हैं अपना उनका भी तो था ना श्री स सनत कुमार

1601
01:53:19,400 --> 01:53:23,440
कुमारों का और नारद जी का भी तो है संवाद जिसम

1602
01:53:23,440 --> 01:53:27,520
परता बता रहे हैं भगवान नारद जी बता रहे है ना परता भगवान

1603
01:53:27,520 --> 01:53:31,520
राम की हां वो बता रहे हैं मगर अभी

1604
01:53:31,520 --> 01:53:35,720
मैं वो वाला निकाल रहा हूं जो युद्ध कांड में है

1605
01:53:35,720 --> 01:53:39,760
ना युद्ध कांड में श्री राम

1606
01:53:39,760 --> 01:53:43,960
के पास देवताओं का आगमन 624 अगर

1607
01:53:43,960 --> 01:53:48,080
आप स्क्रीन पर दे सकते हैं तो दे दीजिए पेज नंबर 624 मैं

1608
01:53:48,080 --> 01:53:54,080
दे देता हूं वाल्मीकि रामायण द्वितीय खंड

1609
01:53:54,480 --> 01:53:58,640
वाल्मीकि रामायण वाल्मीकि रामायण में तो खुद काल

1610
01:53:58,640 --> 01:54:02,680
कह रहे कि मैं मैं आपसे उत्पन्न हुआ हं मैं आपका ही रूपं श्री राम

1611
01:54:02,680 --> 01:54:07,400
से कह रहे हैं आपका पुत्र हुआ

1612
01:54:07,400 --> 01:54:11,480
मैं कर रहा हूं शीराम क रहे मैंने तुम स्मरण किया था मैंने

1613
01:54:11,480 --> 01:54:15,880
तुम मेरी मेरी इच्छा से आए हो इधर मेरी स्क्रीन दिख रही है

1614
01:54:15,880 --> 01:54:20,560
ना जी जी दिख रही है आप आप दिख रहे हो अभी

1615
01:54:20,560 --> 01:54:24,320
तो अभी आप दिख

1616
01:54:24,320 --> 01:54:29,120
चलिए मैं पढ़ के बता देता हूं ये देखिए

1617
01:54:29,120 --> 01:54:33,240
ना श्लोक नंबर 13 मैं पढ़ देता

1618
01:54:33,240 --> 01:54:37,440
हूं श्लोक नंबर 13 यहां पर

1619
01:54:37,440 --> 01:54:41,640
ब्रह्मा जी बोल रहे हैं आप चक्र धारण करने वाले

1620
01:54:41,640 --> 01:54:45,760
सर्व समर्थ पहले तो इस इस पॉइंट पर बहुत ध्यान दिया करें सब

1621
01:54:45,760 --> 01:54:49,800
सर्व समर्थ सर्व समर्थ वो है जो

1622
01:54:49,800 --> 01:54:54,400
भगवान भी बनेगा जो भक्त भी बने जिसका जो

1623
01:54:54,400 --> 01:54:58,760
यहां इस माया रूपी संसार में प्रपंच में आएगा अभिर भाव भी होगा रो

1624
01:54:58,760 --> 01:55:03,160
भाव भी होगा वो है सर्व सामर्थ वान इसको अपनी खोपड़ी में डालो

1625
01:55:03,160 --> 01:55:07,200
अन्यथा क्या होगा अगर इनसे वो ऐसा नहीं है तो फिर वो

1626
01:55:07,200 --> 01:55:09,720
सर्व सामर्थ्य वान नहीं है

1627
01:55:09,720 --> 01:55:14,360
मगर तत्व वो क्या है तत्व आगे बोल रहे हैं

1628
01:55:14,360 --> 01:55:18,560
कि आप अविनाशी परम ब्रह्म है 14 नंबर में और यहां

1629
01:55:18,560 --> 01:55:23,240
पर राम के लिए हां युद्ध कांड

1630
01:55:23,240 --> 01:55:27,800
सीधे पृष्ठ संख्या अगर गीता प्रेस का है तो 624 625 नहीं

1631
01:55:27,800 --> 01:55:33,360
श्लोक बता दीजिए 14 है ना हा 14 नंबर

1632
01:55:33,360 --> 01:55:37,440
शलोक तो इसमें इसमें ब्रह्मा जी बोल रहे हैं कि आप

1633
01:55:37,440 --> 01:55:41,480
अविनाशी परम ब्रह्म है सृष्टि के आदि मध्य

1634
01:55:41,480 --> 01:55:46,000
और अंत में सत्य रूप से विराज विद्यमान है आप

1635
01:55:46,000 --> 01:55:50,320
ही परम धर्म है आप ही विश्वक

1636
01:55:50,320 --> 01:55:54,480
सेन तथा चार भुजाधारी श्री हरि है तो यहां पर विष्णु

1637
01:55:54,480 --> 01:55:58,520
भगवान भी अविनाशी हो गए राम के रूप में हरि

1638
01:55:58,520 --> 01:56:02,800
है ना और कल एक बंदा एक बात बोल रहा था कि लोक

1639
01:56:02,800 --> 01:56:06,920
वेद लोक वेद में आप ही वो है परम तत्व जब मैंने

1640
01:56:06,920 --> 01:56:11,240
उसको बताया था कि वो ये कहते हैं ना कि मुझसे जो क्षर

1641
01:56:11,240 --> 01:56:15,400
पुरुष अक्षर पुरुष और व वो सबसे जो पुरुषोत्तम है वो अलग

1642
01:56:15,400 --> 01:56:19,440
ही है कोई तो मैंने अगले ही श्लोक में बताया था भगवान कह रहे कि मैं ही हूं बोल रहा

1643
01:56:19,440 --> 01:56:23,960
वो लोक वेद में लोक वेद अच्छा भैया जो बताते हो

1644
01:56:23,960 --> 01:56:24,840
कबीर के बारे

1645
01:56:24,840 --> 01:56:29,040
में वह क्या परलोक वेद से बताते हो क्या

1646
01:56:29,040 --> 01:56:33,200
लोक वेद से ही तो बताते हो जो लों का वे

1647
01:56:33,200 --> 01:56:37,360
लों में जिसको वेद संज्ञा प्राप्त है जिन शास्त्रों को उन्हीं

1648
01:56:37,360 --> 01:56:41,840
के आधार पर तो बोलते हो तो क्या हो गया लोक वेद तुम कोई आसमानी

1649
01:56:41,840 --> 01:56:46,160
किताब से बताते हो क्या लोक के अंदर जो

1650
01:56:46,160 --> 01:56:50,480
ग्रंथ है उसी के आधार पर तो हमारी और आपकी बात हो रही है वरना जाओ इंद्र के यहां

1651
01:56:50,480 --> 01:56:54,840
अभी तुम्हारा देह का नाश कर लो जाओ व वहां चिल्लाओ और विद में प्रमाण

1652
01:56:54,840 --> 01:56:59,880
है ओए कबीर नहीं भगवान है गणेश जी भगवान

1653
01:56:59,880 --> 01:57:04,200
है तो आ गए हैं मेरे ख्याल से तो यहां हमने दे दिया

1654
01:57:04,200 --> 01:57:08,280
कि अगर आपको वाल्मीकि रामायण को मानना है तो वाल्मीकि रामायण को मान लो

1655
01:57:08,280 --> 01:57:12,480
कोई दिक्कत नहीं है राम जी यहां पर परम ब्रह्म के रूप में विराजमान है

1656
01:57:12,480 --> 01:57:16,640
वाल्मीकि रामायण में ठीक है राम जी को मान लो

1657
01:57:16,640 --> 01:57:20,720
कोई दिक्कत नहीं है मगर आप यह नहीं कर सकते कि यह मानेंगे ये

1658
01:57:20,720 --> 01:57:24,880
नहीं मानेंगे जहां से अपनी बात कर बल अ और कौन सी बात जो

1659
01:57:24,880 --> 01:57:29,320
शास्त्र में है ही नहीं जो हम मुंह से बोल रहे हैं भाई शास्त्र में तो दिखाओ

1660
01:57:29,320 --> 01:57:33,840
कि अगर दो तरह की बातें हो रही है तो उसका अर्थ है कि काल है

1661
01:57:33,840 --> 01:57:39,680
यह तो दिखाओ ये यही नहीं दिखाएंगे बाकी सब

1662
01:57:39,680 --> 01:57:41,120
करेंगे

1663
01:57:41,120 --> 01:57:45,560
अ एक मिनट गोविंद जी को ले ले एट टू स्टेज

1664
01:57:45,560 --> 01:57:50,080
और अभी लेते हैं बाकी लोगों को ले लेते हैं चलिए

1665
01:57:50,080 --> 01:57:54,120
ले सबको लेते हैं मिनट भाई साहब वो कहां गए वो आए

1666
01:57:54,120 --> 01:57:59,560
थे क्या अभी रामपाल जी वाले नहीं नहीं नहीं आए

1667
01:57:59,560 --> 01:58:05,560
थे शुभम उपाध्याय जी बोले जय श्री

1668
01:58:05,560 --> 01:58:10,000
राम जय श्री राम भैया जी

1669
01:58:10,000 --> 01:58:14,040
जी मैं यही कह रहा हूं कि इनको सिर्फ सत संत

1670
01:58:14,040 --> 01:58:18,320
रामपाल जी को मानना है आप इनको कितना भी प्रमाण दे दो कितना

1671
01:58:18,320 --> 01:58:22,520
भी कुछ दे दो ये बस अपनी बात को स करना भाई

1672
01:58:22,520 --> 01:58:27,440
ये इस समय उनके भी दुश्मन है उनकी कही हुई बातों का ही खंडन कर रहे हैं

1673
01:58:27,440 --> 01:58:31,480
आजकल ये इस समय उनके शत्रु बन गए हैं ये मैं बता रहा हूं आपको

1674
01:58:31,480 --> 01:58:35,720
इस समय संत रामपाल जी वहां पर दुखी होंगे जेल धाम में

1675
01:58:35,720 --> 01:58:40,480
वो कह रहे हैं मुझे बाहर निकालो यह कह रहे हैं कि वो अपनी मर्जी से है वही रुकने

1676
01:58:40,480 --> 01:58:46,480
दो हां जी दिखाइए

1677
01:58:49,680 --> 01:58:54,000
वीडियो बाल कांड में दो 147 में आप देखिए

1678
01:58:54,000 --> 01:58:58,000
जी यहां पर क्या दिखाया गया है नेति नेति

1679
01:58:58,000 --> 01:59:02,320
जही वेद निरूपा निजानंद निरूपा अनुपा

1680
01:59:02,320 --> 01:59:06,920
शभु बरं विष्णु भगवाना उपज जासु अंसते नाना

1681
01:59:06,920 --> 01:59:08,800
जिन्ह वेद नेति नेती

1682
01:59:08,800 --> 01:59:13,280
यह भी नहीं यह भी नहीं कहकर निरूपण करते हैं जो आनंद स्वरूप

1683
01:59:13,280 --> 01:59:17,600
उपाधि रहित और अनुपम है एवं जिनके अंश से अनेको

1684
01:59:17,600 --> 01:59:21,280
शिव ब्रह्मा और विष्णु भगवान प्रकट होते हैं

1685
01:59:21,280 --> 01:59:25,360
अब देखिए इसमें स्पष्ट रूप से बताया गया है कि मनु और सतरूपा

1686
01:59:25,360 --> 01:59:29,520
जो सतयुग में हुए हैं उनके ज्ञान का आप लेवल देखिए वो क्या यहां प

1687
01:59:29,520 --> 01:59:33,960
इसमें राम मानस में उनके बारे में बताया गया है वो

1688
01:59:33,960 --> 01:59:38,520
के बारे में बात कर रहे हैं जिनके एक अंश से सिर्फ अनेको

1689
01:59:38,520 --> 01:59:44,520
ब्रह्मा और विष्णु भगवान प्रकट

1690
01:59:45,720 --> 01:59:49,760
हो तो इस पर तो हमने जवाब दे ही दिया ये

1691
01:59:49,760 --> 01:59:54,520
अननेसेसरी रहा इसका तो हमने ने उत्तर दे ही दिया है

1692
01:59:54,520 --> 01:59:58,680
भाई जिसको वहां पर नेति नेति प्राप्त करने

1693
01:59:58,680 --> 02:00:02,760
योग्य बताया जा रहा है या यह भी नहीं वो भी नहीं ऐसा कहा जा रहा है वो

1694
02:00:02,760 --> 02:00:07,080
स्वयं श्री राम है और यह बात भी कि आपकी

1695
02:00:07,080 --> 02:00:11,080
व्याख्या पूरी तरीके से करने में हम असमर्थ है महिमा गान करते हैं ना

1696
02:00:11,080 --> 02:00:15,160
कि मैं तुम्हारी व्याख्या नहीं अभी अभी देखो मैंने बोला ना महिमा गान करते समय वो क्या बोल

1697
02:00:15,160 --> 02:00:19,440
र है मैं कुत्ता हूं तो क्या मान ले कुत्ता ऐसे ही महिमा

1698
02:00:19,440 --> 02:00:23,560
गान करते समय बोला जाता है भाई मगर वहां पर तो वो एज इट

1699
02:00:23,560 --> 02:00:27,560
इज बोला है और वो जब बोल रहे हैं तो उदाहरण दे रहे हैं वो जब बोल

1700
02:00:27,560 --> 02:00:31,640
रहे तो वो कुत्ते नहीं है व दो कौड़ी के नहीं है मगर इन्होंने बोल

1701
02:00:31,640 --> 02:00:35,640
दिया कि हमारा भी आविर्भव होता है त्र भाव होता है अरे देख लो वो खुद कह रहे हैं आविर्भव होता

1702
02:00:35,640 --> 02:00:36,280
है तो भाई

1703
02:00:36,280 --> 02:00:40,480
वो भी तो खुद कह रहे हैं कि कुत्ते हैं कुत्ते की पूजा करोगे आप

1704
02:00:40,480 --> 02:00:45,080
मगर मैं नहीं मानता कि वो कुत्ते हैं आप जैसी बात कर रहे हो आपके लॉजिक के अनुसार

1705
02:00:45,080 --> 02:00:51,080
आप गलत कर रहे हो

1706
02:00:52,840 --> 02:00:57,080
हमें लगभग दो घंटे पूरे हो चुके हैं अभी तक मेरे को समझ

1707
02:00:57,080 --> 02:01:01,200
नहीं आया है कि नेती नेती से श्री कृष्ण

1708
02:01:01,200 --> 02:01:06,000
जी के भीतर काल कैसे चला गया मैं समझ नहीं पा रहा हूं एकली

1709
02:01:06,000 --> 02:01:10,000
तो या इससे काल सिद्ध कैसे हो जाता और ये काल कौन है

1710
02:01:10,000 --> 02:01:14,800
जरा किसी ग्रंथ से कोई मेरे को बताएगा अगर रामपाल जी का अभय देखिए एक बात

1711
02:01:14,800 --> 02:01:18,840
कि कहीं कहीं पर इन्होंने अपनी म मर्जी से

1712
02:01:18,840 --> 02:01:23,440
कहीं कबीर कर दिया है राम को

1713
02:01:23,440 --> 02:01:27,680
कहीं राम कर दिया अपनी मन मर्जी से सब पूरा बिना शास्त्र

1714
02:01:27,680 --> 02:01:31,720
के प्रमाण के और कहते क्या है सारे शास्त्र खोल के दिखा दिए

1715
02:01:31,720 --> 02:01:35,720
और जब पूछो कि भैया काल कहां से आया इसमें

1716
02:01:35,720 --> 02:01:40,040
अगर तुम्हें कोई बात शास्त्र की समझ नहीं आ रही है तो इसका

1717
02:01:40,040 --> 02:01:45,640
अर्थ काल होता है यह सनातन का कौन सा सिद्धांत

1718
02:01:45,640 --> 02:01:49,640
है यह ् का सिद्धांत है रॉक ली

1719
02:01:49,640 --> 02:01:51,280
जी आप जो कह रहे हैं वो हम

1720
02:01:51,280 --> 02:01:55,520
पूछ चुके इसके बारे में उन्होंने प्रारंभ में ही बातें हुई

1721
02:01:55,520 --> 02:01:59,520
थी तो धारा टूट जाएगी तो बार-बार बीच में उन्हीं

1722
02:01:59,520 --> 02:02:03,840
बातों को ना उठाए हम लोग आश्वस्त होकर ही आए हैं चर्चा

1723
02:02:03,840 --> 02:02:07,240
के लिए ठीक

1724
02:02:07,240 --> 02:02:11,280
है हां तो अब हम ले लेते हैं या आप कोई दृष्टांत बीच

1725
02:02:11,280 --> 02:02:15,280
में दे दीजिए थोड़ा सा लाइट हो जाए माहौल अभी वो कंटेंट लेने आए थे थोड़ा

1726
02:02:15,280 --> 02:02:19,280
गर्म गर्मी बढ़ गई है तो आप कुछ बता दीजिए ज्ञान गंगा से

1727
02:02:19,280 --> 02:02:23,280
तो थोड़ा सा लाइट हो जाए से थोड़ा माहौल लाइट हो

1728
02:02:23,280 --> 02:02:27,520
जाता है क्योंकि बड़ी शक्ति है ना इसमें तो ये देखिए ठीक है इसमें

1729
02:02:27,520 --> 02:02:32,160
मैं आपको एक और नई अजूबा दिखाता हूं मैं यहां पर मतलब

1730
02:02:32,160 --> 02:02:36,920
इसमें से निकल रहे हैं धड़ाधड़ निकले ही जा रहे हैं पता नहीं क्यों निकल रहे हैं

1731
02:02:36,920 --> 02:02:40,960
यहां पर एक स्त्री है वो व्याख्या कर रही है बाबा रामपाल जी की

1732
02:02:40,960 --> 02:02:44,960
सुनिए ध्यान से ठीक है अच्छा ये कौन है इसके बारे में बता देता

1733
02:02:44,960 --> 02:02:49,600
हूं अमेरिका की महिला है भविष्यवक्ता फ्लोरेंस की

1734
02:02:49,600 --> 02:02:54,000
महत्त्वपूर्ण भविष्यवाणी है ठीक है तो फ्लोरेंस

1735
02:02:54,000 --> 02:02:58,320
ने अपनी भविष्यवाणियों में कई बार जिक्र किया है द फॉल ऑफ सेंसेशनल

1736
02:02:58,320 --> 02:03:02,600
कल्चर नाम की अपनी पुस्तक में उन्होंने लिखा है ठीक है अब ये पुस्तक

1737
02:03:02,600 --> 02:03:06,920
आपको मिलेगी नहीं कहीं ठीक है व के अलावा ठीक है

1738
02:03:06,920 --> 02:03:11,280
जब मैं ध्यान लगाती हूं तो एक ये क्षमा करिए ये वाली इसकी

1739
02:03:11,280 --> 02:03:15,440
बुक नहीं है इसने ये वाली बुक लिखी है इसलिए इसको राइटर बताया जा रहा है जिसमें

1740
02:03:15,440 --> 02:03:19,600
इसने भविष्यवाणी की है वो मैं पुस्तक का नाम बता देता हूं गोल्डन

1741
02:03:19,600 --> 02:03:23,680
लाइट ऑफ न्यू एरा ये ना आपको ग प मिलेगी ना आपको बाजार

1742
02:03:23,680 --> 02:03:27,920
में मिलेगी ये आपको े मिलेगी ठीक है जब मैं ध्यान लगाती

1743
02:03:27,920 --> 02:03:31,960
हूं तो अक्सर एक संत को देखती हूं गौर वर्ण का

1744
02:03:31,960 --> 02:03:35,960
है सफेद बाल है उसके मुख पर ना दाढ़ी है ना मूछ है उस संत के

1745
02:03:35,960 --> 02:03:40,080
ललाट पर गजब का तेज होता है उनके ललाट पर आकाश से एक

1746
02:03:40,080 --> 02:03:44,120
नक्षत्र की किरणें बरसती हैं मैं देखती हूं कि

1747
02:03:44,120 --> 02:03:48,520
वह संत अपनी कल्याणकारी विचारधारा तथा सत चरित्र प्रबल अनुयायियों

1748
02:03:48,520 --> 02:03:52,800
की शक्तियों से संपूर्ण विश्व में नए ज्ञान का प्रकाश

1749
02:03:52,800 --> 02:03:56,880
फैला रहे हैं सबसे पहले ये जान लीजिए कि यह बाबा रामपाल जी की बात नहीं हो रही

1750
02:03:56,880 --> 02:04:01,040
क्यों नहीं हो रही है यह मैं आपको बता देता हूं ठीक है हमने अपने से कुछ नहीं बोलना

1751
02:04:01,040 --> 02:04:05,240
है क्योंकि हमारे ऊपर कोई बात नहीं आनी चाहिए हम बोलेंगे प्रमाणों के आधार

1752
02:04:05,240 --> 02:04:09,920
पर ये जो यहां पर लिखा हुआ है कि सत चरित है ये

1753
02:04:09,920 --> 02:04:14,280
बाबा रामपाल जी का क्यों नहीं है कितने लोग मेरे को बताएंगे

1754
02:04:14,280 --> 02:04:18,560
कि बाबा रामपाल जी के आश्रम में महिलाओं के शौचालय

1755
02:04:18,560 --> 02:04:21,960
में कैमरे लगवाए जाते थे ठीक है कितने लोगों ने ने ये

1756
02:04:21,960 --> 02:04:26,040
बात पढ़ी है या मैं न्यूज दिखाऊं ऑफिशियल चलिए वो बात छोड़ी है

1757
02:04:26,040 --> 02:04:30,200
वो रहने दीजिए हा ठीक है तो मैं ये बता रहा हूं फ्लोरेंस फ्लोरेंस

1758
02:04:30,200 --> 02:04:34,400
नाम की ऐसी कोई भी आपको राइटर नहीं मिलेगी ठीक है

1759
02:04:34,400 --> 02:04:38,440
ना ही द गोल्डन राइज ऑफ न्यू एरा नाम से कोई पुस्तक है

1760
02:04:38,440 --> 02:04:42,560
ठीक है मैं एक बात और ऐड कर देता हूं मैं इसमें एक बात और ऐड कर देता

1761
02:04:42,560 --> 02:04:46,680
हूं वो कौन से सिद्धांत है जिससे एगजैक्टली रामपाल दास जी

1762
02:04:46,680 --> 02:04:50,760
को ही यह मान लिया जाए कि उसका अर्थ ये है वो कौन से सिद्धांत

1763
02:04:50,760 --> 02:04:54,920
ये कौन सा सिद्धांत है कि बुक है कहां पे ये वाली ये बुक

1764
02:04:54,920 --> 02:04:59,400
कहां पे है मैं बताता हूं क्या हुआ था इनके ही एक मेरे को

1765
02:04:59,400 --> 02:05:03,600
होता होगा हां मैं एक्स फॉलोअर था इनका उसने मेरे को बताया

1766
02:05:03,600 --> 02:05:07,800
था कि एक बार हम कहीं बैठे हुए थे तो किसी उनके बड़े ने बताया

1767
02:05:07,800 --> 02:05:11,840
था कि वो उसने वो आती है ना स्कूल में प्रेजेंटेशन देने कोई टीचर्स वगैरह आते

1768
02:05:11,840 --> 02:05:15,920
हैं बच्चों के लिए जो प्रैक्टिस वगैरह करते हैं तो उन्होंने अपने से वो

1769
02:05:15,920 --> 02:05:20,360
लिखकर अपनी उसमें एक बनाया था उन्होंने क्या नाम है

1770
02:05:20,360 --> 02:05:25,040
यही लगा लीजिए कोई कॉलम कह लीजिए कुछ भी कह लीजिए

1771
02:05:25,040 --> 02:05:29,120
वो उन्होंने अपने से लिखा था वो कहीं कोई ऑफिशियल चीज नहीं

1772
02:05:29,120 --> 02:05:33,240
है ना यह कोई पुस्तक है कहीं गल पर य आपको पुस्तक नहीं मिलेगी

1773
02:05:33,240 --> 02:05:37,000
और इन्होंने इतनी सी बातों पर मेरी जो है चैनल की

1774
02:05:37,000 --> 02:05:41,040
वीडियोस डिलीट करवाई है क्योंकि मैंने रिसर्च की मैंने खोजा मेरे को कहीं

1775
02:05:41,040 --> 02:05:45,200
मिली नहीं अब पर मिलेंगी वो ट है नहीं इनके पास ठीक अरे

1776
02:05:45,200 --> 02:05:49,320
मैं बताऊ वो बुक जो है इनके द्वारा पूजित होने वाले ईश्वर

1777
02:05:49,320 --> 02:05:53,400
से ज्यादा सामर्थ्य वान होगी तो उसने अपना भाव कर लिया होगा अ प्रकट

1778
02:05:53,400 --> 02:05:57,800
हो गई होगी हो सकता है

1779
02:05:57,800 --> 02:06:01,880
आ भाव का अर्थ क्या है अगर ब्रह्म दृष्टि से देखे तो केवल दिखना और

1780
02:06:01,880 --> 02:06:06,200
ना दिखना केव प्रकट अब भैया ये सामर्थ

1781
02:06:06,200 --> 02:06:10,320
इनके अनुसार यह सामर्थ्य उसम नहीं है ईश्वर में आवि भाव त्र भाव

1782
02:06:10,320 --> 02:06:14,520
का मगर उस बुक में है जो गायब हो गई है तो बुक भी ज्यादा

1783
02:06:14,520 --> 02:06:18,880
साम हो गई रामपाल बाबा जी का अगर कोई चेला है तो वो

1784
02:06:18,880 --> 02:06:22,880
कब मेरे को बताएगा य बुक कहां पर है य प्रकाश कहां प हुई थी और

1785
02:06:22,880 --> 02:06:26,960
मैं कहां से इसको खरीद सकता हूं क्योंकि मेरे को खने की बड़ी इच्छा है इसकी थोड़ा सा

1786
02:06:26,960 --> 02:06:31,360
टी आर पहाड़ी जी को सुन लेते हैं फिर एक ब एक लोग हैं यहां पर

1787
02:06:31,360 --> 02:06:35,600
कृष्ण कुमार करके उनको हम ले लेंगे आप रामपाल की तरफ से है ना कृष्ण

1788
02:06:35,600 --> 02:06:40,120
कुमार जी रामपाल जी की तरफ से है ना

1789
02:06:40,120 --> 02:06:44,280
नहीं केवल हां या ना ऐसे करिए

1790
02:06:44,280 --> 02:06:49,000
हां ठीक ठीक लेते हैं अभी आप

1791
02:06:49,000 --> 02:06:52,120
जी हां मैं एक बात का और खंडन करना

1792
02:06:52,120 --> 02:06:56,120
चाहूंगा इनके जो इन् ना

1793
02:06:56,120 --> 02:07:00,280
हनुमान जी को जो ज्ञान बोध कराया था कबीर दास जी ने मुनींद्र

1794
02:07:00,280 --> 02:07:04,400
रूप में वो कहां से पहाड़ी जी मैं एक बात कहूंगा

1795
02:07:04,400 --> 02:07:08,440
हम लोग यहां पर जब बातें करते हैं तो हम उसे कभी भी खंडन

1796
02:07:08,440 --> 02:07:12,560
नहीं कहते हैं हम लोग कहते हैं चर्चा उसके बारे में मैं आपको

1797
02:07:12,560 --> 02:07:16,640
बताऊंगा कि इनका जो पक्ष है उसको ना मानने के संबंध

1798
02:07:16,640 --> 02:07:20,760
में मैं अपनी एक बात रखना चाहूंगा ऐसे आप कर सकते हैं जी बोलिए तो

1799
02:07:20,760 --> 02:07:24,760
कुछ वीडियो में मैंने में देखी तो आनंद रामायण का य

1800
02:07:24,760 --> 02:07:29,000
सर्ग नौ है एक आनंद रामायण करके एक है उसमें दिखाते हैं कि हनुमान

1801
02:07:29,000 --> 02:07:33,240
जी जब लंका से लंका दहन करके माता सीता की मुद्रिका

1802
02:07:33,240 --> 02:07:37,520
लेकर जब वापस आते हैं तो उनको प्यास लगती है तो पानी पीने के लिए कहीं

1803
02:07:37,520 --> 02:07:41,520
नीचे उतरते हैं वोह आकाश मार्ग से तो देखते हैं कि एक कुटिया है

1804
02:07:41,520 --> 02:07:45,640
सामने और वहां एक मुनि है तो उनसे बोलते

1805
02:07:45,640 --> 02:07:50,080
हैं कि यह मेरी मुद्रिका है यहां पर रख दो मैं पानी पीने जा रहा हूं तो पानी पीने

1806
02:07:50,080 --> 02:07:54,120
जाते हैं वो इतने में एक अंदर आके जो मुद्रिका होती है वो उनके कमंडल

1807
02:07:54,120 --> 02:07:58,840
में डाल देता है अब हनुमान जी जाते हैं व कमंडल में हाथ डालते हैं

1808
02:07:58,840 --> 02:08:03,040
तो उसमें ढेर सारी मुद्रिका निकलती है तो यह

1809
02:08:03,040 --> 02:08:07,120
कैसे हुआ हनुमान जी पूछते हैं मुनि से तो मुनि बोलते हैं कि हुआ ऐसा

1810
02:08:07,120 --> 02:08:11,280
कि तेरे जैसे तो लाखों हनुमान यहां आ गए तेरे जैसे और तेरे जैसे

1811
02:08:11,280 --> 02:08:16,000
लाखों राम यहां आ चुके हैं

1812
02:08:16,000 --> 02:08:20,160
तो यह बात होती है तो उसके बाद वहां से हनुमान जी च चले जाते हैं

1813
02:08:20,160 --> 02:08:24,280
तो बाद में क्या होता है कि एक जब लास्ट में सबको पुरस्कृत कर

1814
02:08:24,280 --> 02:08:28,520
रहे होते हैं श्री राम जी तो हनुमान जी को भी एक मोतियों

1815
02:08:28,520 --> 02:08:32,600
की माला देते हैं शायद ये प्रसंग है तो मोतियों

1816
02:08:32,600 --> 02:08:36,640
की माला क्या करते तोड़ देते हैं तो सीता माता इसमें गुस्सा हो जाती इनके कहानी

1817
02:08:36,640 --> 02:08:40,840
के अनुसार बता रहा हूं में रामपाल जी के कहानी के अनुसार कि

1818
02:08:40,840 --> 02:08:44,960
वो गुस्सा हो जाते हैं और सीता मैया उनको गाली देने लगती तू बंदर का बंदर ही रह

1819
02:08:44,960 --> 02:08:49,040
गया तुझे अकल नहीं है तो हनुमान जी को गुस्सा आ गया

1820
02:08:49,040 --> 02:08:52,840
कि मैंने इतना इनके लिए कुछ किया और

1821
02:08:52,840 --> 02:08:57,800
जल भाई साब अभी आपसे कुछ पूछा नहीं जा रहा है भाई साहब आप कैसे बोल रहे हैं

1822
02:08:57,800 --> 02:09:02,000
जंगल कुछ पूछा नहीं जा रहा है जंगल की तरफ चले

1823
02:09:02,000 --> 02:09:06,080
बात होगी आपसे भी बात होगी यह लोग ये

1824
02:09:06,080 --> 02:09:10,200
लोग ये लोग जवाब देने नहीं आते हैं यह लोग यहां आते हैं

1825
02:09:10,200 --> 02:09:14,200
कि देखो मैं वहां पर यह बोलना चाहता हूं वहां जाकर यह बोल द भाग जाऊ मेरा

1826
02:09:14,200 --> 02:09:18,480
काम हो गया तो जंगल

1827
02:09:18,480 --> 02:09:22,120
की तरफ वो चले जाते हैं तो वहा बैठ सोचते कि

1828
02:09:22,120 --> 02:09:26,200
मैंने इतना कुछ किया श्री राम जी के लिए सीता माता के लिए पर उन्होंने मेरे को

1829
02:09:26,200 --> 02:09:30,240
यह पुरस्कार दिया कि मेरे को गाली दी इतने में कोई ऋषि आए

1830
02:09:30,240 --> 02:09:34,360
वहां पर तो ऋषि ने बोला बेटा कैसे हो हनुमान बोले मैं बढ़िया

1831
02:09:34,360 --> 02:09:38,440
हूं बो अयोध्या में राम आए हुए हैं मैं वहां गया था मेरे साथ ऐसा

1832
02:09:38,440 --> 02:09:42,760
हुआ तो मुनि ने बोला तुम कौन से राम की बात कर रहे हो बोले

1833
02:09:42,760 --> 02:09:46,840
मैं तो अपने प्रभु श्री राम जी की बात कर रहा हूं जो अविनाशी है तो मुनि ने

1834
02:09:46,840 --> 02:09:51,800
कहा कि मैं तो उस राम को जानता हूं जो अविनाशी है

1835
02:09:51,800 --> 02:09:55,840
पर तुम्हारा राम तो ये जन्म मरता रहता है तो

1836
02:09:55,840 --> 02:09:59,840
हनुमान जी बोलते यह बात तो मुझे किसी ऋषि ने भी कही थी बाद में पहले बोले हां बेटा

1837
02:09:59,840 --> 02:10:03,840
मैं वही हूं मैं वही कबीर हूं तो यह प्रकरण

1838
02:10:03,840 --> 02:10:08,520
ले रखा कहां से यह प्रकरण ले रखा उन्होंने

1839
02:10:08,520 --> 02:10:13,000
आनंद रामायण के सर्ग न में है ये तो ये

1840
02:10:13,000 --> 02:10:17,000
सेम कहानी है ये सेम ऐसा पर इन्होंने जो कैरेक्टर है वो बदल दिया

1841
02:10:17,000 --> 02:10:21,440
है वहां मुनींद्र नहीं लिखा वहां मुनि लिखा है और वो मुनि रूप

1842
02:10:21,440 --> 02:10:25,560
में कौन थे श्रीराम ही थे जब उन्होंने जब दोबारा डरते हुए हनुमान जी

1843
02:10:25,560 --> 02:10:30,160
जब गए उनके पास उन्होंने वो गर्व रूपी अपना वृतांत

1844
02:10:30,160 --> 02:10:34,240
सुनाया कि मुद्रिका मेरी यहां च

1845
02:10:34,240 --> 02:10:37,160
कमंडल में चले गए मैं भूल गया तब श्री

1846
02:10:37,160 --> 02:10:41,640
राम जी ने हसते हुए कहा हनुमान जी से कि जो मैंने जो आपने मुनींद्र

1847
02:10:41,640 --> 02:10:45,880
रूप देखा वो मैंने ही बीच में नाटक रचा था कौतुक रचा था मैंने तेरा

1848
02:10:45,880 --> 02:10:50,080
तुम्हारा जो तुम्हें जो घमंड हो गया था इसलिए मैंने वो तुम्हारा

1849
02:10:50,080 --> 02:10:54,200
घमंड तोड़ने के लिए रचा था देखो जो तुम मुद्रिका लाए थे मेरे

1850
02:10:54,200 --> 02:10:59,120
उंगली में है यह तो यह कहानी कहां से ली आनंद रामायण

1851
02:10:59,120 --> 02:11:03,200
सेय अभी हमारे जो एक समर्थक

1852
02:11:03,200 --> 02:11:07,280
है सहयोगी है वो विशाल भाटिया जी उन्होंने भीय पूरा कथानक कभी

1853
02:11:07,280 --> 02:11:11,400
दो दिन पहले सुनाया था आनंद रामायण का उन्होने दिखाया थाय मेरे

1854
02:11:11,400 --> 02:11:14,200
पास है आनंद

1855
02:11:14,200 --> 02:11:18,320
रामायण बकुल सही एक बार दिखा दीजिए इनको

1856
02:11:18,320 --> 02:11:22,360
अगर आप उसके माध्यम से स्क्रीन के माध्यम से दिखा दे तो इनके जो फॉलोवर है

1857
02:11:22,360 --> 02:11:26,560
उनको पता चलेगी यह प्रसंग कहां से ले रखा है सर्ग न

1858
02:11:26,560 --> 02:11:30,680
है और लास्ट के लास्ट में सर्ग कांड

1859
02:11:30,680 --> 02:11:35,560
कौन सा है कांड कौन सा है सर्ग सर्ग इसम सर्ग

1860
02:11:35,560 --> 02:11:39,880
नाइन सर्ग नान 300 से लेकर

1861
02:11:39,880 --> 02:11:44,800
398 999 ना वहां से इनकी कहानी शुरू होती है लास्ट

1862
02:11:44,800 --> 02:11:48,880
के एक मिनट

1863
02:11:48,880 --> 02:11:53,120
तो

1864
02:11:53,120 --> 02:11:58,960
कांड नहीं इसम सर्ग है नहीं कांड है

1865
02:11:58,960 --> 02:12:03,080
न चलिए खैर वो है उसमें वो

1866
02:12:03,080 --> 02:12:07,400
ढूंढने का विषय देर लगेगी मिल

1867
02:12:07,400 --> 02:12:11,720
जाएगा जी बनाना

1868
02:12:11,720 --> 02:12:15,880
जी जी जी चलिए इनको ले लेते हैं अब इनसे पूछते हैं भैया

1869
02:12:15,880 --> 02:12:20,120
काल काल ने कैसे बोला बताओ हां

1870
02:12:20,120 --> 02:12:24,960
भैया ऑन करिए

1871
02:12:24,960 --> 02:12:29,680
अपना आपका

1872
02:12:29,680 --> 02:12:34,560
नाम मेरा नाम क नाम कृष्ण

1873
02:12:34,560 --> 02:12:39,320
कुमार कहां से है जयपुर जयपुर

1874
02:12:39,320 --> 02:12:43,760
और दीक्षा कब ली आपने मुझे दो साल हो

1875
02:12:43,760 --> 02:12:47,840
गए दो साल हो गए तब वो मतलब वहां थे जेल

1876
02:12:47,840 --> 02:12:51,840
धाम में या कहां थे य पांडी

1877
02:12:51,840 --> 02:12:55,840
कहां गए ऐसा है भाई साहब आप

1878
02:12:55,840 --> 02:12:59,400
जा सकते हैं

1879
02:12:59,400 --> 02:13:03,560
जाइए हटा दो भैया इनको हटा दो य ये अलग भाव से आए

1880
02:13:03,560 --> 02:13:08,800
इनको हटा दो सुना नहीं क्या बोला इन्होने

1881
02:13:08,800 --> 02:13:12,960
यार पाखंडी बोल रहे पाखंडी मैंने बस

1882
02:13:12,960 --> 02:13:17,240
उससे इतनी सी बात पूछनी थी कि रामपाल जी का आपने कौन सा ज्ञान देखा कि आपने उसकी

1883
02:13:17,240 --> 02:13:23,240
दीक्षा ले ली इसने यहीं पर खत्म हो जा

1884
02:13:23,400 --> 02:13:27,520
नहीं कुछ पूछना चाह रहे थे मेरे से शायद अरे

1885
02:13:27,520 --> 02:13:31,680
ठीक देखिए वो चर्चा के लिए नहीं आए समझिए इस बात को

1886
02:13:31,680 --> 02:13:36,040
वो पता लग जाता है जब व्यक्ति आता है वो चर्चा के लिए आया किसके लिए आया है

1887
02:13:36,040 --> 02:13:39,800
वो आए है कि हम य कुछ ऐसा

1888
02:13:39,800 --> 02:13:45,800
करते कर कर आप अपनी बात

1889
02:13:46,360 --> 02:13:50,440
करिए हाय सर्वशक्तिमान राम सेतु पुल का

1890
02:13:50,440 --> 02:13:55,280
निर्माण सर्वशक्तिमान परमेश्वर कबीर साहब जी के आशीर्वाद से हुआ था

1891
02:13:55,280 --> 02:13:59,640
और यह सर्वशक्तिमान ईश्वर वह है जो अपने साकार

1892
02:13:59,640 --> 02:14:03,920
स्वरूप का आविर्भव तिरोभाव नहीं कर सकता पहाड़ नहीं बन सकता लंबा

1893
02:14:03,920 --> 02:14:08,080
नहीं हो सकता छोटा नहीं हो सकता मोटा नहीं हो सकता कुछ भी

1894
02:14:08,080 --> 02:14:14,080
नहीं हो

1895
02:14:15,240 --> 02:14:19,280
सकता

1896
02:14:19,280 --> 02:14:23,400
सूक्ष्म हाय की वेबसाइट खुली हुई है जगतगुरु रामपाल की ठीक

1897
02:14:23,400 --> 02:14:28,480
है हटा लीजिए तो इन्होने इन्होने रेफरेंस क्या लिखा हुआ है

1898
02:14:28,480 --> 02:14:34,480
नीचे क्या

1899
02:14:35,320 --> 02:14:39,600
रेफरेंस सूक्ष्म वेद राम सेतु ले राम सेतु वाले प्रसंग में इन्होने

1900
02:14:39,600 --> 02:14:44,760
रेफरेंस क्या लिखा हुआ है नीचे चेक कर लेते हैं थोड़ा सा लिखा

1901
02:14:44,760 --> 02:14:48,800
कुछ कुछ कुछ नहीं है वो सब मन की बातें है को

1902
02:14:48,800 --> 02:14:53,120
कोई रेफ मे को पता ना ये वाला ग्रंथ

1903
02:14:53,120 --> 02:14:55,960
है

1904
02:14:55,960 --> 02:14:59,960
ये कोई और आना चाहता हो संभ्रांत तरीके से अगर यह बताना

1905
02:14:59,960 --> 02:15:03,960
चाहता हो कि गीता का वेद गीता का जो ज्ञान है वह काल ने दिया है तो आ कर

1906
02:15:03,960 --> 02:15:06,280
के

1907
02:15:06,280 --> 02:15:10,320
बताए कोई तो होगा किसी माता ने

1908
02:15:10,320 --> 02:15:14,520
तो ऐसा पुत्र जना होगा जिसने उनका वो

1909
02:15:14,520 --> 02:15:18,720
लिया हो उनका नाम दान लिया हो एलईडी टीवी से कोई

1910
02:15:18,720 --> 02:15:23,000
तो होगा माइका लाल जो आए बताएगा कि हा

1911
02:15:23,000 --> 02:15:27,240
वो जो वो जो काल है

1912
02:15:27,240 --> 02:15:31,320
वो काल की जो वो है व्याख्या वो सही है वो शस्त्र

1913
02:15:31,320 --> 02:15:35,560
सम्मत है वही तो होगा हम जानना चाहते भाई आज हम जिज्ञासु बन

1914
02:15:35,560 --> 02:15:40,080
गए हमने आज तक कितनी बार आपके प्रश्न सुने हैं

1915
02:15:40,080 --> 02:15:44,120
अभी उसने पांच बार विरोधाभास दिखाने के लिए उदाहरण दिए ना मगर उसने ये

1916
02:15:44,120 --> 02:15:48,200
नहीं बताया कि इन विरोधा भाष का अर्थ काल कहां से है नेति

1917
02:15:48,200 --> 02:15:52,480
नीति का अर्थ काल कहां से है नहीं

1918
02:15:52,480 --> 02:15:56,520
मेरा एक प्रश्न है दीक्षा दीक्षा हो रही है

1919
02:15:56,520 --> 02:16:00,560
एलईडी से ग्रंथ आ रहे हैं से

1920
02:16:00,560 --> 02:16:05,040
तो ये क्या चल रहा है भाई मेरे को कोई समझा देगा

1921
02:16:05,040 --> 02:16:09,600
सुनि प्रमाण दि प्रमाण दिए जा रहे आजकल एक चीज और चल गई है

1922
02:16:09,600 --> 02:16:11,280
कमेंट में मैं देखता हूं

1923
02:16:11,280 --> 02:16:17,280
आजकल क्या बोला जाता है गल करके देख लो सबसे बड़ा संत कौन है

1924
02:16:17,640 --> 02:16:21,880
रामपाल अब ग भी प्रमाण हो गया दीक्षा

1925
02:16:21,880 --> 02:16:25,920
दीक्षा दीक्षा हो रही है एलईडी से ध्यान से समझिए दीक्षा हो रही है

1926
02:16:25,920 --> 02:16:30,160
एलईडी से ठीक है ग्रंथ आ रहे हैं से

1927
02:16:30,160 --> 02:16:34,560
और शास्त्रार्थ हो रहा है ग से भाई ये कौन सा डिजिटल

1928
02:16:34,560 --> 02:16:39,080
धर्म है नया मेरे को कोई समझाएगा व बोला तो था उन्होने डिजिटल इंडिया

1929
02:16:39,080 --> 02:16:43,960
लेकिन य डिजिटल धर्म कैसे बन गया समझ नहीं आया

1930
02:16:43,960 --> 02:16:48,000
यही समस्या है ना जब रूट्स जो आपके जड़ जब मजबूत नहीं होती

1931
02:16:48,000 --> 02:16:52,680
है तो यही समस्या आती है इनकी काल वाली बात ना गीता से

1932
02:16:52,680 --> 02:16:57,240
खंडन हो जाता है श्री कृष्ण जी ने

1933
02:16:57,240 --> 02:17:02,360
अध्याय अपनी विभूति बता दिया

1934
02:17:02,360 --> 02:17:06,960
चार रेफरेंस देना नहीं आ रहा है रेफरेंस देना नहीं आ रहा है

1935
02:17:06,960 --> 02:17:11,040
रामचरित मानस का रामायण बता रहे हैं चौपाई को पेज नंबर बता

1936
02:17:11,040 --> 02:17:15,680
रहे हैं इ यही नहीं पता रामचरित मानस की चौपाई है कि उसका पेज नंबर है

1937
02:17:15,680 --> 02:17:19,680
क्या है क्या मतलब आदमी उसी में आ घं लग

1938
02:17:19,680 --> 02:17:23,880
जाता लेकिन जब ति नीति बोल दिया ना तभी

1939
02:17:23,880 --> 02:17:26,520
मैं समझ गया था कि यह रामायण है ही नहीं वाल्मीकि

1940
02:17:26,520 --> 02:17:30,760
रामायण नहीं है रामचरित मानस से ले रहे हैं लेकिन फिर भी उनकी बात

1941
02:17:30,760 --> 02:17:34,800
खुद नहीं पता नहीं य में वीडियो बनाई

1942
02:17:34,800 --> 02:17:39,400
है इन लोगों ने अभी जो दिखाया था यह इसका कंटेंट यह है कि

1943
02:17:39,400 --> 02:17:43,400
श्री राम य यहां पर श्री राम की बात नहीं हो रही है ना सीता माता की बात हो रही है

1944
02:17:43,400 --> 02:17:47,560
यहां पर हो रही है कबीर दास की बात की इनसे समर्थ प्रभु कोई और है बिल्कुल

1945
02:17:47,560 --> 02:17:51,040
जरूर जरूर

1946
02:17:51,040 --> 02:17:55,280
डायरेक्ट लिखा हुआ है आप मुझे याद नहीं आ रहा जो ये रामायण

1947
02:17:55,280 --> 02:17:59,600
के महात्म जो लिखा हुआ है इसमें वाल्मीकि रामायण में गीता से मिल जाएगा आपको जो महात्म

1948
02:17:59,600 --> 02:18:03,680
में लिखा हुआ है उसमें कौन सा पुराण है मुझे पुराण बकुल अभी ध्यान नहीं आ रहा है

1949
02:18:03,680 --> 02:18:07,960
उसमें सनत कुमार और नारद जी का संवाद है आपस में

1950
02:18:07,960 --> 02:18:11,960
उसम साफ साफ नारद जी बता रहे हैं कि भगवान राम परब्रह्म परमेश्वर

1951
02:18:11,960 --> 02:18:16,040
है ऐसे बोल के ठीक है आप

1952
02:18:16,040 --> 02:18:20,840
अथर्ववेद का राम रहस्य उपनिषद उठाइए जिसमें उसमें

1953
02:18:20,840 --> 02:18:25,080
तारक ब्रह्म बताया है उनको तारक मतलब भगवान राम का नाम लेने से ही

1954
02:18:25,080 --> 02:18:29,200
तर जाता है व्यक्ति उसको तारक ब्रह्म बताया सीधा ब्रम बताया

1955
02:18:29,200 --> 02:18:33,320
उपनिषद बता रहा हूं आपको वेदों से इस तरह से चीज

1956
02:18:33,320 --> 02:18:37,400
लेकिन के बे इनकी बात है

1957
02:18:37,400 --> 02:18:41,960
मैं आपको उपनिषद के बारे में बता देता हूं कि उपनिषद पूरा ऋषियों का अपना ज्ञान है

1958
02:18:41,960 --> 02:18:46,440
उसका कोई लेना देना नहीं है इसलिए हम मान

1959
02:18:46,440 --> 02:18:51,200
य समस्या है वो मान लिया पुराण नहीं मानना है

1960
02:18:51,200 --> 02:18:55,360
रामचरित नहीं मानना है लेकिन अपना प्रमाण रामचरित मानस से ही देना है क्यों क्योंकि

1961
02:18:55,360 --> 02:18:59,440
संस्कृत समझ में आएगी नहीं ठीक है अब अवधि है उसम थोड़े बहुत कुछ शब्द

1962
02:18:59,440 --> 02:19:03,440
समझ में आ सकते हैं उसकी प्रोटी ज्यादा है तो इसलिए मुझे प्रमाण जो है वो रामचरित मानस से

1963
02:19:03,440 --> 02:19:07,480
ही देना है लेकिन यह बोलना है कि मैं रामचरित मानस को नहीं मानता मैं रामायण को मानता हूं

1964
02:19:07,480 --> 02:19:11,600
इसलिए तो मतलब कोई भी बात जो मैच नहीं करती है ठीक है यही

1965
02:19:11,600 --> 02:19:16,160
यही यही मैं कह रहा हूं देखिए बात ये है के जितनी क्वेश्चन

1966
02:19:16,160 --> 02:19:20,280
पूछेंगे उसके जवाब हम शास्त्रों से जब देंगे तो ये

1967
02:19:20,280 --> 02:19:24,360
कह काल ने बोला है यह अनुवाद गलत है और यह जो है

1968
02:19:24,360 --> 02:19:28,520
मिलावट है श्लोक तो हम तो अपनी कोई बात कहने लायक है ही नहीं क्योंकि भैया

1969
02:19:28,520 --> 02:19:32,720
हम तो गुलाम है इनके हम इनके गुलाम है मगर कम

1970
02:19:32,720 --> 02:19:36,800
से कम मगर कम से कम भैया भगवान के नाम

1971
02:19:36,800 --> 02:19:40,880
पर जिसको तुम मानते हो उसके नाम पर यह तो ब जा बता जाओ कि तुम्हारी जो

1972
02:19:40,880 --> 02:19:45,040
बात है वो शास्त्र से कैसे प्रूव होती है हमारी कोई बात को अलग हटा

1973
02:19:45,040 --> 02:19:49,160
दो सब गलत अब भैया बताओ आपकी बात कहां से प्रूव होती

1974
02:19:49,160 --> 02:19:53,400
है आपने काल कैसे बोला

1975
02:19:53,400 --> 02:19:58,760
तो प्रकाश बिश्नोई जी

1976
02:19:58,760 --> 02:20:03,080
बताइए हा सभी साथियों को नमस्कार स्टूडियो

1977
02:20:03,080 --> 02:20:07,480
में आया मैं आपके जी नमस्कार जय श्री राम

1978
02:20:07,480 --> 02:20:13,200
हर हर महादेव राम राम जय श्री राम राम

1979
02:20:13,200 --> 02:20:17,320
राम अच्छा लग रहा है करीबन यह जो चर्चा हो रही है

1980
02:20:17,320 --> 02:20:21,320
मैं देख पा रहा हूं करीबन समय परडे देखता हूं आपका

1981
02:20:21,320 --> 02:20:25,560
वीडियो जो सेव होता है दो ढाई घंटे चार घंटे का उस दिन भी रात को मैं दो

1982
02:20:25,560 --> 02:20:29,800
बजे तक आपका पूरा रिपीट देखा था होनी चाहिए सभी

1983
02:20:29,800 --> 02:20:34,240
आत्माओं को जागरूकता आनी चाहिए समय भी है अभी वो जो जागरूकता

1984
02:20:34,240 --> 02:20:38,280
का आप अच्छा प्रश्न पूछ ऐसा भी प्रश्न पूछना

1985
02:20:38,280 --> 02:20:43,320
चाहिए हर किसी से कि का सन कान का होए तोय

1986
02:20:43,320 --> 02:20:47,440
जो काल के काल की बात कर रहे हो ना आप जो काल

1987
02:20:47,440 --> 02:20:50,800
ब्रम

1988
02:20:50,800 --> 02:20:55,160
तो मेरा सर जी इतना तो अनुभव नहीं है जब से मैं संत रामपाल

1989
02:20:55,160 --> 02:20:59,840
से जुड़ा हूं तब से यह जो है ब्रह्म काल का जो है मैंने

1990
02:20:59,840 --> 02:21:04,600
यह जो जन दिया है क्योंकि सर मैं तो मोबाइल बिजनेसमैन

1991
02:21:04,600 --> 02:21:09,080
मुंबई में रहता हूं और

1992
02:21:09,080 --> 02:21:14,360
घर परिवार में थोड़ा कहना मतलब छिड़ ये जो है अटपटा

1993
02:21:14,360 --> 02:21:18,440
जैसे ज्ञानी की तरह था जब से संत रामपाल जी के चरण

1994
02:21:18,440 --> 02:21:23,320
में आए तो बहुत कुछ मेरे को चेंस हुआ अपने आप में

1995
02:21:23,320 --> 02:21:27,560
जैसे यत्र का जो रहता है ना वो सारे मेरे

1996
02:21:27,560 --> 02:21:31,720
क एक मिनट रोकूंगा आपको ऐसे हमारे पास भी बहुत

1997
02:21:31,720 --> 02:21:36,560
से लोग हैं जिन्होंने ब्रह्मा विष्णु महेश की सुनिए

1998
02:21:36,560 --> 02:21:40,800
ऐसे हमारे पास भी बहुत से लोग हैं आपसे संख्या में कहीं ज्यादा

1999
02:21:40,800 --> 02:21:44,960
है जिनका भगवान की सद भक्ति कर कर के भला हुआ

2000
02:21:44,960 --> 02:21:48,960
ठीक है इसलिए अब बात ये आएगी कि जब मैं अपनी बातें

2001
02:21:48,960 --> 02:21:53,320
कहूंगा तो आपको उस पर विश्वास नहीं होगा जाहिर सी बात है

2002
02:21:53,320 --> 02:21:57,400
तो आप यह अपेक्षा क्यों करते हैं कि जब आप अपनी बात बताएंगे तो हमें आप

2003
02:21:57,400 --> 02:22:01,600
पर विश्वास हो जाए इसलिए यहां पर सिर्फ

2004
02:22:01,600 --> 02:22:05,720
वह बात करें जिसको आप भी माने और हम भी माने समझ रहे

2005
02:22:05,720 --> 02:22:06,220
ऐसी

2006
02:22:06,000 --> 02:22:10,520
बातें बोले तेरे लिए कर्तव्य और अ कर्तव्य

2007
02:22:10,520 --> 02:22:14,680
के विषय में एकमात्र शास्त्र प्रमाण है

2008
02:22:14,680 --> 02:22:18,920
तो हम यहां बैठे हैं शास्त्र पर बात करने किसके जीवन में क्या घटित

2009
02:22:18,920 --> 02:22:23,120
हुआ है इसके लिए आप किसी और अपने वो चैनल ही है उस पर जाइए अच्छे

2010
02:22:23,120 --> 02:22:27,160
से बताइए मेरे साथ ऐसा होता था नापतोल वाला वो दोबारा से वीडियो तो उस

2011
02:22:27,160 --> 02:22:31,320
परे आप जाइए अच्छे से बताइए आप यहां पर यह बताइए

2012
02:22:31,320 --> 02:22:35,400
कि जो भगवत गीता है अगर उसमें विरोधाभास आ भी

2013
02:22:35,400 --> 02:22:39,480
रहा है हमारे पास शास्त्रों का वचन है कि अगर शास्त्रों

2014
02:22:39,480 --> 02:22:43,880
में विरोधाभास दिखे तो दोनों को मानना कट किसी को मत करना

2015
02:22:43,880 --> 02:22:48,080
ठीक है मगर आप यह बताइए कि आपने अगर

2016
02:22:48,080 --> 02:22:52,240
यह कहा कि विरोधाभास है तो उसका का अर्थ काल कैसे

2017
02:22:52,240 --> 02:22:56,600
हो गया यह हमें बता दीजिए बस शास्त्र का कौन सा सिद्धांत है

2018
02:22:56,600 --> 02:23:00,600
जो यह कह रहा है कि एक तरफ अगर वो कृष्ण जो है जन्म अविनाशी है

2019
02:23:00,600 --> 02:23:04,720
और दूसरी तरफ कह रहे हैं कि मेरा जन्म मृत्यु होता है मैं जन्म लेता हूं दो

2020
02:23:04,720 --> 02:23:08,800
बातें कांट्रडिक्ट कर रही है इसलिए आपने तीसरी चीज डाली कि ये जो ज्ञान है वो काल

2021
02:23:08,800 --> 02:23:13,120
ने दिया है वो काल ने दिया है उसका रेफरेंस दे दीजिए शास्त्र से जी

2022
02:23:13,120 --> 02:23:17,360
सर ये तो श्री कृष्ण खुद बोलता है ना कि मैं काल हूं अी

2023
02:23:17,360 --> 02:23:21,400
प्रवेश हुआ हूं गता में खुद ही वो बोलता है

2024
02:23:21,400 --> 02:23:25,520
अरे भाई श्री कृष्ण ही काल है यह तो हमने आपको बता दिया विष्णु

2025
02:23:25,520 --> 02:23:29,520
पुराण से बता दिया गीता से आप जब यह कह रहे हो कि वह कृष्ण

2026
02:23:29,520 --> 02:23:33,720
से अलग काल है व सिद्ध करो आप श्री कृष्ण से

2027
02:23:33,720 --> 02:23:37,760
अलग कोई काल है वह सिद्ध करो वो तो अभी

2028
02:23:37,760 --> 02:23:42,240
सर्च आपको चर्चा के लिए तो फिर इनका भंडा है संत रामपाल जी का 151

2029
02:23:42,240 --> 02:23:46,280
को नजदीक में आप आ जाइए व भैया भंडार हम भी कराते हैं हर रविवार को

2030
02:23:46,280 --> 02:23:50,640
कल भी हुआ था आने वाला संडे फिर होगा आप आमंत्रित है आप आ जाइएगा

2031
02:23:50,640 --> 02:23:54,720
बता दीजिएगा या आप ऐसा करो ऐसा करो वो तीन दिन का

2032
02:23:54,720 --> 02:23:59,080
आप अटेंड कराओ और वहां पूछ आओ कि वो जो विरोधाभास

2033
02:23:59,080 --> 02:24:03,200
है तो उसका अर्थ काल कैसे निकला और यह पूछ

2034
02:24:03,200 --> 02:24:07,200
आओ कि शास्त्र कह रहे हैं अगर विरोधाभास हो तो दोनों मानना आपको

2035
02:24:07,200 --> 02:24:11,400
प्रमाण दे दूं मैं विरोधा भास का वैसे अभी मैंने दिया है अगर आपने

2036
02:24:11,400 --> 02:24:15,760
पिछले वीडियो देखे तो उसम मैंने दिया है में फिर से देख लूंगा कोई दिक्कत

2037
02:24:15,760 --> 02:24:21,320
नहीं समय का है प्रभाव तो मैं ज्यादा समय नहीं लूंगा आपका जी

2038
02:24:21,320 --> 02:24:25,600
और आप अपनी जो आपबीती है आपके बहुत सारे चैनल हैं उन परे जाइए

2039
02:24:25,600 --> 02:24:29,680
आप अच्छे से बताइए पहले मैं ऐसा था फिर ऐसा हो गया ऐसे आता है वो

2040
02:24:29,680 --> 02:24:34,000
जो नेटवर्क मार्केटिंग कंपनियां भी होती है वो भी ये वाली स्ट्रेटजी अपनाती

2041
02:24:34,000 --> 02:24:36,400
है एमवे और ये बहुत

2042
02:24:36,400 --> 02:24:40,440
सी ऐसी कंपनी है व इस तरह से पहले मैं ऐसा था वैसा हो गया फिर मैं

2043
02:24:40,440 --> 02:24:44,520
ऐसा करने लगा फिर मेरे पास गाड़ी आ गई कोट पेंट टाइ में आ गया पान की दुकान

2044
02:24:44,520 --> 02:24:48,560
से मैं छप्पर फाड़ के हो गया तो वो सब है होता है दुनिया में

2045
02:24:48,560 --> 02:24:52,880
मगर वो वो मैं बोल के बताता हूं आपको वो ऐसे बोलता

2046
02:24:52,880 --> 02:24:56,960
ना वो एक टूल की आथ थी उसका भी यही होता पहले फटे फटीचर हाल होते थे फिर

2047
02:24:56,960 --> 02:25:01,000
उसके पास एक ड्रिल मशीन आ फिर वाओ मेरे दोस्त मैक ने एक दिन

2048
02:25:01,000 --> 02:25:05,280
मेरे को बताया क्या तुम्हारे पास है अल्टीमेट टूल किट मैंने

2049
02:25:05,280 --> 02:25:09,360
कहा यह क्या होता है तो वो बोलने लगा बेटा एक बार अजमा कर तो देखो तुम्हारी जिंदगी

2050
02:25:09,360 --> 02:25:13,440
सेट हो जाएगी और वो टूल किट लेता है उसके कपड़े भी सिल जाते हैं सारे

2051
02:25:13,440 --> 02:25:17,440
और एक जो महिला शक्ति है वो भी उसके पास आके खड़ी

2052
02:25:17,440 --> 02:25:21,680
हो जाती तो ये आता था पर की जरूरत को पूरा

2053
02:25:21,680 --> 02:25:26,280
कर एशियन स्काई शॉप

2054
02:25:26,280 --> 02:25:30,360
मनुस्मृति दूसरा अध्याय मनुस्मृति शायद आपको नहीं पता

2055
02:25:30,360 --> 02:25:34,560
होगी मैं जानता हूं मनुस्मृति नहीं पता है मगर अगर आप

2056
02:25:34,560 --> 02:25:38,760
अगर आप मनुस्मृति को मना कर देते हैं ना तो आपको फिर यह मानना

2057
02:25:38,760 --> 02:25:42,880
पड़ेगा कि जो भी व्यक्ति मनुस्मृति को मना करता है उसको

2058
02:25:42,880 --> 02:25:47,320
यह मानना पड़ेगा कि वह अवैध संतान है किसी की क्योंकि मनुस्मृति

2059
02:25:47,320 --> 02:25:51,360
में विवाह के नियम है ठीक है अगर वैसे तो राम जी

2060
02:25:51,360 --> 02:25:51,860
ने

2061
02:25:51,520 --> 02:25:55,640
माना कृष्ण जी ने माना मनु को मनुस्मृति को मनुस्मृति वो

2062
02:25:55,640 --> 02:26:00,080
ग्रंथ है जिसमें सबसे पहले वेद की व्याख्या कर दी मनु महाराज ने वेदों की

2063
02:26:00,080 --> 02:26:04,080
तो मनुस्मृति में दो दूसरे अध्याय के 14वें श्लोक में लिखा

2064
02:26:04,080 --> 02:26:08,520
हुआ है जहां दो श्रुति आपस में विरोध

2065
02:26:08,520 --> 02:26:12,920
कर रही हो इसको अगर पढ़ सके तो जहां

2066
02:26:12,920 --> 02:26:17,760
दो श्रुति आपस में विरोध कर रही हो

2067
02:26:17,760 --> 02:26:22,200
तो ऐसे में दोनों को ही मानना धर्म

2068
02:26:22,200 --> 02:26:26,320
है सिंपल अगर आपको हमारा वो मतलब

2069
02:26:26,320 --> 02:26:31,160
समझ में नहीं आ रहा है विरोधाभास का जो हम बता रहे हैं हमने बारबार बताया

2070
02:26:31,160 --> 02:26:35,400
कि जैसे कि मैंने जो संसार बनाया है उसके बाहर भी मैं हूं

2071
02:26:35,400 --> 02:26:39,680
और उसके अंदर भी मैं हूं उसके अंदर जब मैं जाता हूं तो मैं प्रकट

2072
02:26:39,680 --> 02:26:43,680
और अपक होता हूं उसके लिए भगवान ने कहा तेरे और मेरे कई जन्म

2073
02:26:43,680 --> 02:26:47,720
हो चुके हैं मगर मैं बाहर से अजन्मा और अविनाशी भी

2074
02:26:47,720 --> 02:26:51,920
हूं अरे भाई सिंपल बात है जब जीव रूप में आत्मा रूप

2075
02:26:51,920 --> 02:26:56,240
में प्रत्येक जो जितनी भी वो कहते ना पुण्य आत्माओ

2076
02:26:56,240 --> 02:27:00,440
क्या कहते हैं पुण्य आत्माओं कहते हैं ना आपका नाम तो नहीं लेते

2077
02:27:00,440 --> 02:27:04,680
रामपाल जी क्या लेते हैं पुण्य आत्माओ आत्मा आपका वास्तविक

2078
02:27:04,680 --> 02:27:06,800
स्वरूप आत्मा है जो कभी नष्ट नहीं हो सकता

2079
02:27:06,800 --> 02:27:11,120
आत्मा की दृष्टि से आप अविनाशी हो और यह मनुष्य

2080
02:27:11,120 --> 02:27:15,280
की दृष्टि जो कि आपका नकली स्वरूप है यह वास्तविक स्वरूप नहीं है इस दृष्टि

2081
02:27:15,280 --> 02:27:19,400
से आपके जन्म मरण हो चुके हैं ठीक है ऐसे ही भगवान एक जगह अपना

2082
02:27:19,400 --> 02:27:23,760
वो व्यवहार स्वरूप बता रहे हैं जिसमें वो अपना आर भाव तिरो भाव बता रहे

2083
02:27:23,760 --> 02:27:28,440
तेरे और मेरे कई जन्म हो चुके हैं तू नहीं जानता पर मैं जानता हूं यही अंतर है

2084
02:27:28,440 --> 02:27:32,760
ईश्वर और हम में यही अंतर है वो सर्वज्ञ है वो सब जानता है और हम नहीं जानते इसीलिए

2085
02:27:32,760 --> 02:27:36,760
हम बंधन में है और इ इसी अज्ञानता के बंधन

2086
02:27:36,760 --> 02:27:40,880
से छूट जाना बंदी छोड़ छूट ही बंदी

2087
02:27:40,880 --> 02:27:45,720
महा सुख होई है ना वही परमधाम की प्राप्ति

2088
02:27:45,720 --> 02:27:50,240
तो ये हमने बता दिया मगर अब ये समझ में नहीं आया है क्योंकि कोई व्यक्ति जो आया

2089
02:27:50,240 --> 02:27:54,280
प्रश्न करने वो प्रश्न करने नहीं आया वो कुछ जानने नहीं आया है वो तोप

2090
02:27:54,280 --> 02:27:58,280
चलाने आया है वो तोप जिसमें बारूद नहीं है

2091
02:27:58,280 --> 02:28:02,560
गोला नहीं है पष्ट संख्या है

2092
02:28:02,560 --> 02:28:06,560
तो अब जो व्यक्ति समझने नहीं आया है तोप चलाने आया वो क्या कहेगा नहीं

2093
02:28:06,560 --> 02:28:10,800
यह तो फिर वो एक और कहानी खोल देगा एक और कहानी खोल देगा

2094
02:28:10,800 --> 02:28:15,400
मगर वह यह नहीं बताएगा चलो मान लिया विरोधाभास है तब भी विरोधाभास

2095
02:28:15,400 --> 02:28:19,400
में दोनों को मानने को कहा गया पहली बात और अगर

2096
02:28:19,400 --> 02:28:21,800
मान लो य भी तुम नहीं मानते हो कि

2097
02:28:21,800 --> 02:28:26,160
यह विरोधाभास वाली जो बात कही जा रही है शास्त्रों में यह मिलावट है चलो

2098
02:28:26,160 --> 02:28:30,200
मान लिया ओ एक और चीज मान ली तो यह तो बता दो कि काल

2099
02:28:30,200 --> 02:28:34,400
कौन से जगह से निकल आया यह तो बताना पड़ेगा

2100
02:28:34,400 --> 02:28:38,480
कि वह श्री कृष्ण ने नहीं बोला श्री कृष्ण से अलग किसी काल

2101
02:28:38,480 --> 02:28:42,880
ने बो अलग काल भी मैं ही हूं तो ठीक है

2102
02:28:42,880 --> 02:28:47,080
श्री कृष्ण ही काल है वो अनेक शास्त्रों में विष्णु काल है शिवजी काल है

2103
02:28:47,080 --> 02:28:51,120
माता भी काल है क्योंकि एक ही सत्ता एक ही

2104
02:28:51,120 --> 02:28:55,120
परम सत्ता है जो विभिन्न रूपों में प्रकट होती है ब्रह्मा विष्णु महेश

2105
02:28:55,120 --> 02:28:59,200
भगवती और गणेश मगर अगर आप कह रहे हो श्री कृष्ण से अलग

2106
02:28:59,200 --> 02:29:03,440
कोई काल है तो वह अर्थ कहां से निकल रहा है वो बताए श्री

2107
02:29:03,440 --> 02:29:07,480
कृष्ण से अलग कोई काल अच्छा एक

2108
02:29:07,480 --> 02:29:11,640
अब यह तो काफी देर हो गया एक टॉपिक बहुत

2109
02:29:11,640 --> 02:29:15,960
ज्यादा अपेक्षित है वह क्या है कि

2110
02:29:15,960 --> 02:29:20,200
यह लोग बोलते ये बोला गया है ज्ञान गंगा में

2111
02:29:20,200 --> 02:29:24,240
तेरा ज्ञान अमृत में बोला गया है 38 नंबर पेज पर और ज्ञान गंगा

2112
02:29:24,240 --> 02:29:28,360
में कहां बोला गया वो आप बताएंगे कि गीता का 5

2113
02:29:28,360 --> 02:29:32,480
प्र ज्ञान जो है व काल ने अपना ज्ञान दे दिया है वो गलत मतलब वो मानने

2114
02:29:32,480 --> 02:29:36,520
योग्य नहीं है ठीक है तो वह 5 प्रत कौन-कौन

2115
02:29:36,520 --> 02:29:37,020
से

2116
02:29:37,000 --> 02:29:41,120
श्लोक है इन्होंने यह नहीं बताया तो यह हमें वो 35

2117
02:29:41,120 --> 02:29:45,240
श्लोक बता दे उसके बाद हम अपनी 635 श्लोकों से बात

2118
02:29:45,240 --> 02:29:47,880
को सिद्ध कर

2119
02:29:47,880 --> 02:29:52,120
लेंगे बाकी की गीता तो ए इट मानोगे ना बाकी

2120
02:29:52,120 --> 02:29:56,160
की गीता तो पूरी की पूरी परमात्मा की है गीता

2121
02:29:56,160 --> 02:30:00,400
मानेंगे चार वेद चार वेद में मैंने आपको बता दिया

2122
02:30:00,400 --> 02:30:04,440
चारों आप वेद को मानते हैं आप तो सज्जन व्यक्ति दिख रहे हैं आप चार वेद को

2123
02:30:04,440 --> 02:30:08,560
मानते हैं ऋग्वेद में दूसरे मंडल में

2124
02:30:08,560 --> 02:30:13,480
अच्छा कवि कार्थ कबीर मानते हैं कि नहीं मानते हैं

2125
02:30:13,480 --> 02:30:17,600
कवि कार्थ परमात्मा मानते हैं कि नहीं मानते हैं उसम

2126
02:30:17,600 --> 02:30:21,880
मनुष्य भी लिखा है मित्र भी लिखा सु नहीं आप क्या मानते

2127
02:30:21,880 --> 02:30:26,280
हो ये बताओ कवि का हम कबीर देव मानते हैं कबीर साब

2128
02:30:26,280 --> 02:30:30,400
कबीर देव यानी परम परमात्मा ठीक है तो ऋग्वेद

2129
02:30:30,400 --> 02:30:33,480
के दूसरे मंडल

2130
02:30:33,480 --> 02:30:37,840
में क्या कहते हैं 23 में सूक्त के पहले

2131
02:30:37,840 --> 02:30:41,920
मंत्र में लिखा है कवि जो है वो एक नहीं है

2132
02:30:41,920 --> 02:30:45,960
कवि बहुत सारे हैं तो कवि अगर परमात्मा है तो वो

2133
02:30:45,960 --> 02:30:49,960
आप जिसको परमात्मा कह रहे हो वो बहुत सारे हैं और उनका बॉस

2134
02:30:49,960 --> 02:30:53,320
कौन है पता है क्या लिखा है ऋग्वेद

2135
02:30:53,320 --> 02:30:57,520
दूसरा दूसरा मंडल 2 सूक्त पहला मंत्र

2136
02:30:57,520 --> 02:31:02,320
उनका बॉस है कवियों का कवि गणपति

2137
02:31:02,320 --> 02:31:06,640
गणेश अब तीन चीजें हो गई या तो आप कवि का अर्थ परमात्मा

2138
02:31:06,640 --> 02:31:10,840
मत मानो कबीर मत मानो ठीक है और या फिर आपको यह कहना

2139
02:31:10,840 --> 02:31:15,560
पड़ेगा कि मैं वेद को नहीं मानता यहां पर बताइए नहीं नहीं

2140
02:31:15,560 --> 02:31:20,520
मानते क्यों नहीं मानते पर हमारे गुरु जी बोलते आदि गणेश

2141
02:31:20,520 --> 02:31:24,800
अरे मेरे भाई आदि गणेश है तो आपने कहीं पर लिखा है क्या वेदों

2142
02:31:24,800 --> 02:31:29,040
में प्रमाण है आदि गणेश भगवान है नहीं वेदों में तो गणेश

2143
02:31:29,040 --> 02:31:33,080
आप बता रहे ना अरे तो आदि गणेश बोलते

2144
02:31:33,080 --> 02:31:37,120
हैं ना आपके गुरुदेव आदि गणेश अनासी

2145
02:31:37,120 --> 02:31:41,240
पर आदि मैं कह रहा हूं आदि गणेश जो है आपको यह

2146
02:31:41,240 --> 02:31:45,480
बोलना चाहिए ना वेदों में प्रमाण है आदि गणेश भगवान है बोलो बोलो

2147
02:31:45,480 --> 02:31:49,880
नहीं जी वेद में तो बो जो वेदों में अभी तो बोला आपने

2148
02:31:49,880 --> 02:31:53,880
हमारे गुरु जी बताते आदि गणेश है अभी बोला ना तो बोलो

2149
02:31:53,880 --> 02:31:58,240
वेदों में प्रमाण है आदि गणेश भगवान है बोल दो एक बार चलो

2150
02:31:58,240 --> 02:32:02,640
बोल दो वेद वेदों में तो यही प्रमाण है कबीर साब भगवान

2151
02:32:02,640 --> 02:32:07,440
ये ये है देखिए ये है डबल स्टैंडर्ड अभी अभी खुद आपने माना

2152
02:32:07,440 --> 02:32:08,440
कि वो जो बात हो रही

2153
02:32:08,440 --> 02:32:12,480
है आदि गणेश की हो रही है हमको एक बार यही लाइन सुना दो वेदों

2154
02:32:12,480 --> 02:32:17,040
में प्रमाण है परमात्मा के तो अनेक नाम

2155
02:32:17,040 --> 02:32:21,040
मैं तो ठीक है एक बार यह नाम भी बोल दो ना वेदों में प्रमाण है आदि

2156
02:32:21,040 --> 02:32:25,560
गणेश भगवान है बोल दो में तो प्रमाण

2157
02:32:25,560 --> 02:32:29,680
वेदों में प्रमाण है कबीर भगवान है जैसे आदि गणेश वेदों में नहीं लिखा

2158
02:32:29,680 --> 02:32:33,680
है तो मैं कैसे बोलू आप बता रहे अभी

2159
02:32:33,680 --> 02:32:38,520
तो आपने बोला गणेश गणपति लिखा तो है

2160
02:32:38,520 --> 02:32:42,680
यह गणेश गणपति यह वाला नहीं ना शंकर वाला नहीं क रहा

2161
02:32:42,680 --> 02:32:46,880
मैं कह रहा हूं जो वाला आप मानते हो वही वाला बोलो वेदों

2162
02:32:46,880 --> 02:32:51,560
में प्रमाण है यह वाला नहीं यह वाला नहीं व वाला गणपति भगवान है

2163
02:32:51,560 --> 02:32:55,760
बोलो भाई जी ये जो जो स्टूडियो में चला

2164
02:32:55,760 --> 02:32:59,920
रहे हो तो य हमको भी वापस ऐसे जवाब हम कैसे देंगे जो हमारे गुरु जी की आज्ञा

2165
02:32:59,920 --> 02:33:04,200
में हम रहते हैं वैसे अपनी मनमर्जी

2166
02:33:04,200 --> 02:33:08,240
जवाब नहीं देना है तो आप आ क्यों रहे हैं आप क्यों अपने गुरुजी के पीठ में चुरा

2167
02:33:08,240 --> 02:33:12,520
गप रहे हैं आकर नहीं नहीं ऐसी बात नहीं गलत

2168
02:33:12,520 --> 02:33:17,280
पक्ष हल्का करने क्यों आना चाहिए नहीं आना चाहिए जब आप मजबूत हो तब आना चाहिए

2169
02:33:17,280 --> 02:33:21,520
जब आप मजबूत हो शास्त्र के बल से तो आना चाहिए अच्छी

2170
02:33:21,520 --> 02:33:23,560
बात कर रहे हैं जब हमें और तैयार होंगे

2171
02:33:23,560 --> 02:33:27,560
हमारे भगत भी और बहुत है समय आएगा उसके हिसाब से य खुलासा हो जाएगा

2172
02:33:27,560 --> 02:33:31,640
मैं तो कह ही रहा हूं कि कोई तो माई का लाल ऐसा हो कोई तो मां का जना

2173
02:33:31,640 --> 02:33:35,840
ऐसा हो भाई कहां गए वो सब जो कहते हैं कि वेदों में प्रमाण

2174
02:33:35,840 --> 02:33:40,240
है कबीर भगवान है एक जगह नहीं दिखा पाए आज तक हर चीज शास्त्र

2175
02:33:40,240 --> 02:33:44,640
के विरुद्ध वेदों में प्रमाण है कबीर भगवान है कहीं नहीं लिखा

2176
02:33:44,640 --> 02:33:50,040
और दीक्षा कैसे होती है एडी कहते हो हमसे बड़ा कोई ज्ञानी नहीं है

2177
02:33:50,040 --> 02:33:56,040
स

2178
02:33:56,200 --> 02:34:00,400
लोग लाइ टाम आज के लिए नहीं

2179
02:34:00,400 --> 02:34:04,400
है मरु कीवा गलत थी

2180
02:34:04,400 --> 02:34:08,400
हो सक है रा टूट जाएगी फिर फिर भूल

2181
02:34:08,400 --> 02:34:13,280
जाऊंगा यह लोग कहते हैं कि जो गणपति की बात हो रही है वहा

2182
02:34:13,280 --> 02:34:18,240
वो गणपति नहीं है वो आदि गणपति है आदि गणेश है तो वो बोल दो भाई

2183
02:34:18,240 --> 02:34:24,240
भाई जिसका नाम स्पष्ट वो बोलो बा की बात बाद

2184
02:34:28,960 --> 02:34:33,160
करेंगे गीता में तो तीन पुरुष बताए ना उत्तम पुरुष अन्य

2185
02:34:33,160 --> 02:34:37,280
जो परमात्मा ति

2186
02:34:37,280 --> 02:34:41,520
उतारते फिर आ गए फिर आ गए अब गीता का प्रमाण

2187
02:34:41,520 --> 02:34:46,640
मैं दूं अब गीता का प्रमाण मैं

2188
02:34:46,640 --> 02:34:50,800
दू गीता का प्रमाण मैं दूं

2189
02:34:50,800 --> 02:34:54,800
अभी आपने कहा था वेदों को मानते हैं आप वेदों को मानते हैं कि

2190
02:34:54,800 --> 02:34:57,360
नहीं मानते

2191
02:34:57,360 --> 02:35:01,400
हैं वेद को मानते हैं ना चारों वेद को मानते हैं और पांचवा बो

2192
02:35:01,400 --> 02:35:05,720
रहा हूं दूसरे अ दूसरे मंडल के पांचवा वेद

2193
02:35:05,720 --> 02:35:09,960
भी है ना वो तो आपको मालूम है कि नहीं है ले पाच वेद चार

2194
02:35:09,960 --> 02:35:14,200
वेद बताओ चार वेद को मानते हैं कि नहीं मानते हैं

2195
02:35:14,200 --> 02:35:19,280
अभी भाई अभी वर्तमान में जो समय हैय

2196
02:35:19,280 --> 02:35:23,400
मिनट अभी आप अटेंप्ट मत करिए जुड़ने का

2197
02:35:23,400 --> 02:35:27,680
अभी आप अटेंप्ट मत करिए जुड़ने का अभी यहां फुल है

2198
02:35:27,680 --> 02:35:31,800
जब यहां से खाली होगा स्टूडियो तब हम लेंगे किसी को अभी अटेंप्ट

2199
02:35:31,800 --> 02:35:36,040
मत करिए वो ब्लॉक कर दीजिए ना वो जो

2200
02:35:36,040 --> 02:35:40,680
वो जो लिंक है उसको ब्लॉक कर दीजिए वो बार-बार स्क्रीन पर आ रहा है शो हो रहा

2201
02:35:40,680 --> 02:35:43,960
है आप ज श्री

2202
02:35:43,960 --> 02:35:48,080
राम को ज्यादा रा मानते देखिए भाई साब देखिए आपको मैं आपकी

2203
02:35:48,080 --> 02:35:52,400
आपको आपकी मैं एक समरी बताऊं मैं भी जय श्रीराम

2204
02:35:52,400 --> 02:35:56,520
को मामा रहता था येता होती साब भाई

2205
02:35:56,520 --> 02:36:01,080
साहब मैं आपको आपकी एक समरी बताऊ आप जब आए यहां एक भले मानुष बनके आए

2206
02:36:01,080 --> 02:36:05,080
आपने कहा कि आप लोग बहुत अच्छा काम कर रहे हैं जागरूकता आ रही हमें भी अच्छा लगा

2207
02:36:05,080 --> 02:36:09,480
उसके बाद बात शुरू हुई एक मिनट शास्त्र की बात शुरू हुई

2208
02:36:09,480 --> 02:36:14,360
जब हमने कहा काल कहां लिखा है तो आपने छोटी सी बात कही

2209
02:36:14,360 --> 02:36:18,560
कि जो है काल तो स्वयं श्री कृष्ण ने स्वयं को कहा है फिर हमने

2210
02:36:18,560 --> 02:36:22,760
पूछा कि अलग वाला काल कहां लिखता है तो आपके पास उत्तर नहीं आपने

2211
02:36:22,760 --> 02:36:26,800
स्वयं बताया कि हम वेदों को मानते हैं आपने स्वयं बताया

2212
02:36:26,800 --> 02:36:30,920
कि हम वेदों को मानते हैं अभी बीच में मत बोलिए भाई साहब अभी बीच में मत बोलिए

2213
02:36:30,920 --> 02:36:35,160
मुझे पूरा कर ले दीजिए आपने स्वयं बताया कि हम वेदों को मानते हैं

2214
02:36:35,160 --> 02:36:39,600
फिर मैंने वेदों से रेफरेंस दिया कि

2215
02:36:39,600 --> 02:36:43,680
जो वेदों के अनुसार कभ एक नहीं है बहुत

2216
02:36:43,680 --> 02:36:47,840
सारे हैं और कवियों का कवि जो है 2 2 एक में लिखा

2217
02:36:47,840 --> 02:36:51,880
है कि कवि क नाम जो है वह है कौन

2218
02:36:51,880 --> 02:36:56,240
गणपति भगवान वाल्मीकि रामायण में जो

2219
02:36:56,240 --> 02:36:59,280
कवीश्वर है वाल्मीकि रामायण में कवियों

2220
02:36:59,280 --> 02:37:04,240
का ईश्वर कहा गया है लिखने वाले वाल्मीकि

2221
02:37:04,240 --> 02:37:09,200
कवियों का ईश्वर अगर व वो रचना कवि

2222
02:37:09,200 --> 02:37:13,280
पोयम करने वाले को तो सबसे बड़ी पोयम जो आदि आदि काव्य हमारा

2223
02:37:13,280 --> 02:37:17,880
वो वाल्मीकि रामायण है उसको लिखने वाले वाल्मीकि है

2224
02:37:17,880 --> 02:37:22,000
और यह बात लिखी है जो किय कवीश्वर है वाल्मीकि

2225
02:37:22,000 --> 02:37:26,480
यह कहां लिखी है आनंद रामायण में पूर्ण का पूर्ण कान

2226
02:37:26,480 --> 02:37:30,480
में आनंद रामायण में पूर्ण कांड महात्मा में ये बात

2227
02:37:30,480 --> 02:37:34,800
लिखी हुई है कि कवीश्वर कौन है अगर वो वाला कवि देखे जिसने काव्य रचना

2228
02:37:34,800 --> 02:37:39,280
की काव्य रचना करने वाला कवि तो कवियों का ईश्वर है

2229
02:37:39,280 --> 02:37:43,280
वाल्मीकि जी और अगर सर्वज्ञ सर्व सामर्थ

2230
02:37:43,280 --> 02:37:47,320
वान कवि देखें सर्वज्ञ सर्व सामर्थ्य वान कवि

2231
02:37:47,320 --> 02:37:52,040
देखें तो वो है गणपति क्यों कि ये लिखा है

2232
02:37:52,040 --> 02:37:54,160
गणा

2233
02:37:54,160 --> 02:37:59,000
नाम ये ऋग्वेद का मंत्र है ठीक

2234
02:37:59,000 --> 02:38:03,080
है बिल्कुल ऋग्वेद का

2235
02:38:03,080 --> 02:38:07,360
मंत्र है और इसमें लिखा है कि कवियों का कवि जो है गणपति

2236
02:38:07,360 --> 02:38:11,400
है अब आप कहते हैं कि सूक्ष्म वेद एक और है ठीक है पहली

2237
02:38:11,400 --> 02:38:14,400
बात तो ये आएगी कि वो सूक्ष्म वेद आपका कबीर

2238
02:38:14,400 --> 02:38:18,520
सागर है यह आपको शास्त्र से सिद्ध करना पड़ेगा दूसरी बात ये

2239
02:38:18,520 --> 02:38:24,440
आती है कि अगर उसमें कुछ और लिखा भी होगा तो क्या आप इसको नहीं

2240
02:38:24,440 --> 02:38:28,480
मानोगे तो क्या आप इसको नहीं

2241
02:38:28,480 --> 02:38:32,640
मानोगे अगर उसम कुछ और लिखा भी है तो क्या आप

2242
02:38:32,640 --> 02:38:36,760
उसको नहीं मानोगे मानेंगे नहीं स्टेप वाइज सब मानेंगे क्यों

2243
02:38:36,760 --> 02:38:41,200
नहीं मानेंगे तो आपने मान लिया आदि गणेश भगवान है

2244
02:38:41,200 --> 02:38:45,520
आदि गणेश भगवान है पूर्ण परमात्मा आदि गणेश बता रहे अविनाशी

2245
02:38:45,520 --> 02:38:49,960
तो बोलो बोलो वेदों में प्रमाण है आदि गणेश भगवान है बोल दो

2246
02:38:49,960 --> 02:38:54,000
ऐसे नहीं बोलेंगे जब हमारे ठीक है भाई साहब ठीक है

2247
02:38:54,000 --> 02:38:58,760
आप पूछ के आइए गुरुजी से जय श्री

2248
02:38:58,760 --> 02:39:03,600
राम कृष्ण कुमार जी को हटा दो इन्होने पाखंडी बोल के अपना वह

2249
02:39:03,600 --> 02:39:09,600
खत्म कर दिया है

2250
02:39:12,400 --> 02:39:16,560
मामला शिवजी आ गिरी

2251
02:39:16,560 --> 02:39:20,600
अपना चेहरा दिखाए अब गोविंद जी थोड़ी देर आप करिएगा क्योंकि मैं

2252
02:39:20,600 --> 02:39:24,760
थोड़ा सा वो होने लगता हूं और इनको सिर्फ यह बात पूछनी है

2253
02:39:24,760 --> 02:39:28,960
काल बताइए आप क्या

2254
02:39:28,960 --> 02:39:33,240
बताओ बताइए भैया भाई साहब आप चेहरा दिखाइए

2255
02:39:33,240 --> 02:39:38,040
पहले भाई साहब मैं काल के बारे में थोड़ी जानकारी

2256
02:39:38,040 --> 02:39:42,640
चेहरा दिखाए पहले निकल ग

2257
02:39:42,640 --> 02:39:47,640
चलिए गए

2258
02:39:47,640 --> 02:39:51,680
नारायण श्री राम म भाई मुझे वो बहुत हंसी वाली

2259
02:39:51,680 --> 02:39:55,680
बात आती है कि वो जो मेरे मित्र थे बचपन में वो रिझाने

2260
02:39:55,680 --> 02:39:59,760
के लिए क्या करते थे हां एक करोड़ रुपए ट्रांसफर कर रहा हूं और शर्ट बड़ी हुई

2261
02:39:59,760 --> 02:40:04,200
है बिल्कुल पर पर दिक्कत ये है ना मेरी

2262
02:40:04,200 --> 02:40:08,240
मेरी शर्ट भी ठीक है और मैं 000 देने को भी तैयार हूं तब भी कोई

2263
02:40:08,240 --> 02:40:12,520
नहीं ले रहा मेरे से देखिए मेरी किस्मत कितनी बुरी

2264
02:40:12,520 --> 02:40:15,000
है

2265
02:40:15,000 --> 02:40:21,000
चलिए सर जी आप हेलो

2266
02:40:21,360 --> 02:40:25,800
आवाज श्रीराम शिवजी राम राम आदि

2267
02:40:25,800 --> 02:40:29,600
राम हा भैया

2268
02:40:29,600 --> 02:40:33,680
बोलिए बोलिए काल काल काल ने बोला

2269
02:40:33,680 --> 02:40:39,680
है श्री कृष्ण ने नहीं बोला है वो सिद्ध करिए

2270
02:40:40,800 --> 02:40:44,840
बसौन है रहता कैसा है ये प्रभु जी

2271
02:40:44,840 --> 02:40:48,920
काल कौन है कहां रहता कैसा है ये किस ग्रंथ से है यह काल

2272
02:40:48,920 --> 02:40:53,000
की स्टोरी है सारी की सारी कब पैदा हुआ कृष्ण जी ने

2273
02:40:53,000 --> 02:40:57,000
गीता बोली आपके आपके हिसाब से बराबर है मेरे

2274
02:40:57,000 --> 02:41:01,040
हिसाब से वो तो हम करेंगे ना चर्चा ये काल

2275
02:41:01,040 --> 02:41:05,880
है प्रश् मछ आप अपनी बात बताइए गीता का ज्ञान

2276
02:41:05,880 --> 02:41:10,640
भगवान श्री कृष्ण ने नहीं काल ने दिया है यह कैसे सिद्ध होगा बताओ

2277
02:41:10,640 --> 02:41:15,000
देख वेदों का ज्ञान किसने दिया बताओ मेरे को वेदों

2278
02:41:15,000 --> 02:41:20,640
का ज्ञान अप है उपनिषद दो च

2279
02:41:20,640 --> 02:41:24,720
वे स सवाल के सवाल के जवाब

2280
02:41:24,720 --> 02:41:28,720
में सवाल नहीं आपके पास अगर है सिद्ध करने को या

2281
02:41:28,720 --> 02:41:32,840
यह सवाल है तो वो बताओ जो सिद्ध करने को है

2282
02:41:32,840 --> 02:41:37,000
महाभारत में जब अर्जुन ने कृष्ण जी को पूछा था तो मुझे वो ज्ञान

2283
02:41:37,000 --> 02:41:41,560
जो गीता जी ज्ञान आपने दिया फिर से मुझे बता दो तो कृष्णा जी ने क्यों नहीं दिया ज्ञान

2284
02:41:41,560 --> 02:41:45,600
बोले मुझे क्यों नहीं बताया दिया ना

2285
02:41:45,600 --> 02:41:49,840
दिया तो शायद आपने वो प्रसंग अच्छे से पढ़ नहीं होगा

2286
02:41:49,840 --> 02:41:54,160
उन्होने यह कहा है कि तब मैं योग अवस्था में स्थित था ठीक है और योगेश्वर

2287
02:41:54,160 --> 02:41:55,840
किसको कहा गया है योग का ईश्वर

2288
02:41:55,840 --> 02:42:00,160
कौन है बताइ गीता शिवांश भाई मुझे जो

2289
02:42:00,160 --> 02:42:04,440
क्वेश्चन पूछ रहे हैं उनको अभी याद है लेकिन मैं अभी कल बात करूंगा

2290
02:42:04,440 --> 02:42:08,480
तो मुझे क्यों नहीं बता सकते कि मैंने आपको क्या पूछ ठीक

2291
02:42:08,480 --> 02:42:12,960
इसका उत्तर दे दू आप यह बताइए कि जब रामपाल

2292
02:42:12,960 --> 02:42:17,000
यह बोलते हैं मैं कुत्ता हूं तो भूल जाते हैं कि मैं इंसान भी हूं

2293
02:42:17,000 --> 02:42:21,200
अरे हम तो सब य भगवान भगवान जब वो बोलते है कि मैं दो कौड़ी

2294
02:42:21,200 --> 02:42:25,200
का हूं एक मिनट जब वो बोलते हैं कि मैं दो कौड़ी का हूं तो

2295
02:42:25,200 --> 02:42:29,440
क्या भूल जाते हैं कि मैं जो है तत्वदर्शी हूं उनके मर्जी

2296
02:42:29,440 --> 02:42:33,560
से कहां बोल रहे उनके मर्जी से नहीं बोल रहे कुछ वो जो शास्त्र मिलेगा वही बता रहे

2297
02:42:33,560 --> 02:42:38,120
है ना मैं आपको पूछ रहा हूं रामपाल जब य बोलते हैं कि मैं कुत्ता हूं

2298
02:42:38,120 --> 02:42:42,280
तो हम क्या माने वोह कुत्ता है या हम ये माने कि वोह तत्वदर्शी है

2299
02:42:42,280 --> 02:42:46,320
बताइए तत्व संत है तो फिर वोय जो बोल रहे हैं

2300
02:42:46,320 --> 02:42:50,440
कुत्ता उसको क्या माने तत्व है सारे

2301
02:42:50,440 --> 02:42:54,840
भाई साब मैंने आपसे पूछा मैंने आपसे पूछा कि

2302
02:42:54,840 --> 02:42:59,000
तत्वदर्शी जो है जो आपके रामपाल बोलते हैं मैं कुत्ता हूं

2303
02:42:59,000 --> 02:43:03,240
तो हम यह माने कि वो कुत्ते हैं या फिर हम यह माने कि वह

2304
02:43:03,240 --> 02:43:07,600
तत्वदर्शी है आप बताइए देखिए गीता अध्याय

2305
02:43:07,600 --> 02:43:11,000
32 में बोला है कि देखो देखो अभी अभी जो बात चल रही

2306
02:43:11,000 --> 02:43:15,160
है वो बताओ जो उन्होंने अपने को कुत्ता कहा वो कुत्ता मानते हो तत्वदर्शी मानते

2307
02:43:15,160 --> 02:43:19,920
हो ये बताओ पहले अरे वो तो भगवान के लिए बोला मैं तो काम

2308
02:43:19,920 --> 02:43:24,160
कुत्ता माने कि नहीं माने अब तो आप तो बोलते कबीर

2309
02:43:24,160 --> 02:43:28,280
साहब भी कुत्ता थे ऐसे बात कर रहे आप तो मैं अभी पूछ रहा हूं रामपाल

2310
02:43:28,280 --> 02:43:32,440
जी अपने को कुत्ता बोलते हैं उनको कुत्ता माने कि तत्वदर्शी माने

2311
02:43:32,440 --> 02:43:36,920
हम बहुत बहुत हम रेस्पेक्ट करते हैं उनका मगर आप लोग बताइए लॉजिक जो दे रहे हो

2312
02:43:36,920 --> 02:43:41,120
करते आप उनको नीचे दिखाने के लिए काम कर रहे खाली बस इतना कर भाई साहब

2313
02:43:41,120 --> 02:43:45,200
मैंने आपसे प्रश्न पूछा है आपने प्रश्न पर प्रश्न कर दिया फिर भी मैंने आपको लॉजिकल

2314
02:43:45,200 --> 02:43:49,320
उत्तर दिया आपको ये मानना पड़ेगा आपको य मान

2315
02:43:49,320 --> 02:43:53,680
पड़गा वो भगवान की लीला है भगवान ने बोल दिया

2316
02:43:53,680 --> 02:43:58,240
ऐसे ही भगवान की लीला है उन्होंने बोल दिया वस्तुत

2317
02:43:58,240 --> 02:44:02,480
तत्व आपके लिए भगवान है ऐसे ही तत्व

2318
02:44:02,480 --> 02:44:08,480
श्री कृष्ण जी ने वह ज्ञान दिया

2319
02:44:09,720 --> 02:44:13,720
मगर बाद में क रहा दुर्जन तोष

2320
02:44:13,720 --> 02:44:17,760
न्याय से मान लिया कि उनको याद नहीं था अब आप मुझे बता

2321
02:44:17,760 --> 02:44:21,880
दीजिए श्री कृष्ण के याद ना होने से ये कहां लिखा है कि

2322
02:44:21,880 --> 02:44:26,440
वो ज्ञान काल ने दिया बस इसपे पकड़ो इनको ये कुछ भी बताए

2323
02:44:26,440 --> 02:44:30,880
उसका अर्थ काल पूछो काल कहां से

2324
02:44:30,880 --> 02:44:34,880
आया मैंने आपके भाई साहब भाई साहब देखिए आप ये आरोप लगाते

2325
02:44:34,880 --> 02:44:38,880
कि मैं म्यूट करता हूं म्यूट मुझे इसलिए करना पड़ता है कि आप विषय पर बात

2326
02:44:38,880 --> 02:44:43,600
नहीं करते आप विषय पर बात नहीं करेंगे मुझे आपको हटाना पड़ेगा

2327
02:44:43,600 --> 02:44:47,760
मैं आपसे पूछ रहा हूं अगर श्री कृष्ण भगवान ने वो ज्ञान नहीं दिया

2328
02:44:47,760 --> 02:44:51,800
वो भूल गए ठीक है मगर उसका अर्थ यह कहां से आया कि वो ज्ञान

2329
02:44:51,800 --> 02:44:56,320
जो है श्री कृष्ण से अलग किसी काल ने दिया है बताइए

2330
02:44:56,320 --> 02:45:00,320
श्री कृष्ण अर्जुन ने पूछा था आप मुझे फिर से दे दो अर्जुन कृष्ण

2331
02:45:00,320 --> 02:45:04,360
जी बोले कि मुझे अब मैं नहीं दे सकता भाई साहब आपसे मैं आपकी बात

2332
02:45:04,360 --> 02:45:08,560
को सुन लिया और मैंने उसका लॉजिकल उत्तर भी दे दिया कि आप आपके जो व

2333
02:45:08,560 --> 02:45:12,760
वो है वो कहते हैं मैं कुत्ता हूं मैं दो कौड़ी का हूं ठीक है मगर

2334
02:45:12,760 --> 02:45:16,800
फिर भी आप उनको फिर भी आप उनको दो कोड़ी का कुत्ता नहीं मानते

2335
02:45:16,800 --> 02:45:20,840
आप उनको तत्वदर्शी और भगवान मानते हैं इसी प्रकार से लीला

2336
02:45:20,840 --> 02:45:24,800
पूर्वक श्री कृष्ण ने यह बात कही कि मुझे वो ज्ञान उस समय

2337
02:45:24,800 --> 02:45:28,840
में योग अवस्था में था और वो ज्ञान मैंने दिया अब नहीं है लीला

2338
02:45:28,840 --> 02:45:33,080
पूर्वक ठीक है ये हमने आंसर दे दिया एक मिनट एक मिनट एक मिनट

2339
02:45:33,080 --> 02:45:37,200
एक मिनट एक मिनट अब जब मुझे मैं आंसर दे रहा हूं तो देने दीजिए अब क्या

2340
02:45:37,200 --> 02:45:41,240
है कि आपको यह आंसर पसंद नहीं आया ठीक है आप

2341
02:45:41,240 --> 02:45:45,440
हमें यह बताइए अगर वो श्री कृष्ण भगवान ने ऐसा कह दिया

2342
02:45:45,440 --> 02:45:49,880
कि वह ज्ञान मैं भूल गया हूं या मैं मुझे स्मरण नहीं है इसका

2343
02:45:49,880 --> 02:45:54,120
अर्थ यह कहां से आया कि गीता में जो ज्ञान है

2344
02:45:54,120 --> 02:45:59,520
वह देने वाला काल कोई अलग है श्री कृष्ण से

2345
02:45:59,520 --> 02:46:03,520
बताओ मेरी बात सुनि आप मैं क्या बात करर आपसे

2346
02:46:03,520 --> 02:46:08,440
उसका आंसर गीता में ही है क्या है शलोक क्रमांक बता

2347
02:46:08,440 --> 02:46:13,200
शलोक क्रमांक बो शलोक कमा देखना

2348
02:46:13,200 --> 02:46:17,680
पड़ेगा मेरे पास गीता है उसम बोला

2349
02:46:17,680 --> 02:46:22,400
काल काल अरे तो वो तो वो तो कृष्ण बोल रहे हैं ना

2350
02:46:22,400 --> 02:46:26,480
कृष्ण ही तो बोल रहे हैं ना मैं काल हूं कृष्ण की बात आपको कौन सी माननी

2351
02:46:26,480 --> 02:46:31,200
है मैं भूल गया कि मैं काल हूं आप यह बताइए कि

2352
02:46:31,200 --> 02:46:35,200
श्री कृष्ण से अलग कोई काल है यह कहां लिखा है श्री कृष्ण

2353
02:46:35,200 --> 02:46:39,240
से अलग यह गीता में कहा लिखा है श्री

2354
02:46:39,240 --> 02:46:40,080
कृष्ण जी

2355
02:46:40,080 --> 02:46:44,200
अगर वोह ज्ञान देते तो अर्जुन जब पूछता था तोय क लिखा है जो

2356
02:46:44,200 --> 02:46:48,280
आप तर्क दे रहे हैं श्री कृष्ण जी अगर वो ज्ञान देते तो अगर अर्जुन जब पूछता

2357
02:46:48,280 --> 02:46:52,560
तोय ना कहते कि मैं भूल गया यह कहां लिखा है कि इसका अर्थ होगा काल

2358
02:46:52,560 --> 02:46:56,680
यह कहां लिखा है गीता मिली

2359
02:46:56,680 --> 02:47:00,800
क काल हूं भाई साहब अरे भाई साहब आपने अभी एक तर्क

2360
02:47:00,800 --> 02:47:04,920
दिया श्री कृष्ण जी अगर वो ज्ञान देते तो फिर जब

2361
02:47:04,920 --> 02:47:09,520
अर्जुन उनसे पूछता तो वो यह ना कहते हालांकि इसका उत्तर है कि

2362
02:47:09,520 --> 02:47:14,440
रामपाल दास जी अगर तत्वदर्शी है तो अपने आप को कुत्ता नहीं कहेंगे

2363
02:47:14,440 --> 02:47:18,600
ठीक है मगर मैं आपकी बात मान रहा हूं कि श्री कृष्ण भगवान

2364
02:47:18,600 --> 02:47:22,680
जी अगर वो ज्ञान देते तो अर्जुन से ये ना कहते कि अब मैं वो ज्ञान नहीं दे सकता जबकि

2365
02:47:22,680 --> 02:47:26,680
उन्होंने वहां यह कहा है कि वहां पर भी जहां आप बात कह रहे हो कि मैं वो ज्ञान नहीं दे

2366
02:47:26,680 --> 02:47:30,680
सकता वहां प उन्होंने ये कहा मैंने तुझे वो ज्ञान दिया था वहां ये नहीं कहा था

2367
02:47:30,680 --> 02:47:34,800
कि किसी और ने दिया वहां उन्होंने महाभारत में ये नहीं कहा किसी और ने दिया

2368
02:47:34,800 --> 02:47:38,840
एक मिनट मेरी बात पूरी हो जाने दीजिए मेरी बात पूरी हो जाने दीजिए वहां उन्होंने ये

2369
02:47:38,840 --> 02:47:43,560
नहीं कहा कि किसी और ने दिया उन्होंने बताया मैंने तुझे कैसे दिया पर यह स्वीकार किया मैंने ही दिया

2370
02:47:43,560 --> 02:47:47,720
ये तो नहीं कहा किसी और ने दिया आप मुझे बता दो श्री कृष्ण

2371
02:47:47,720 --> 02:47:52,360
आप मुझे बता दो श्री कृष्ण से अलग कोई काल ने वह ज्ञान दिया

2372
02:47:52,360 --> 02:47:55,920
यह कहां लिखा है शास्त्र में

2373
02:47:55,920 --> 02:48:00,240
बस अभी आप थोड़ा चुप बैठ अगर आप शलोक क्रमांक

2374
02:48:00,240 --> 02:48:04,280
बोलेंगे शास्त्र का नाम बोलेंगे तो हम लोग चलेंगे आगे वरना हम

2375
02:48:04,280 --> 02:48:08,520
आपको हटाना पड़ेगा आप हमें लोक क्रमांक शास्त्र का नाम

2376
02:48:08,520 --> 02:48:12,760
बोलिए आपने कमेंट किया था इसके जिसने

2377
02:48:12,760 --> 02:48:17,720
मा का वापस आएंगे इसलिए मैं वापस आया

2378
02:48:17,720 --> 02:48:22,240
आपने भैया इनको हटा दो हटा दो इनको भाई साहब

2379
02:48:22,240 --> 02:48:26,320
इनको इसीलिए आना था इनके मतलब इनको ये दिखाने

2380
02:48:26,320 --> 02:48:30,320
आना हैता कृप करके कृपया करके मेरे को दो मिनट सुनिए मैं इसका

2381
02:48:30,320 --> 02:48:34,560
उत्तर दे देता हूं संक्षेप में ठीक है पहले तो भगवान श्री

2382
02:48:34,560 --> 02:48:39,040
कलिए आ सकते हैं मगर आक के अपनी बात को सिद्ध नहीं कर

2383
02:48:39,040 --> 02:48:43,160
सकते यह ये बता रहे हैं मैंने मां का दूध पिया इस लिए आ सकता

2384
02:48:43,160 --> 02:48:47,200
हूं मगर अपनी बात के लिए प्रूफ मेरे पास नहीं है हमने कहा था

2385
02:48:47,200 --> 02:48:51,520
कि कोई तो माई का लाल होगा जो आकर के यह जो बात है

2386
02:48:51,520 --> 02:48:55,560
जो उनका पक्ष है रामपाल दास जी का उसको सिद्ध करेगा

2387
02:48:55,560 --> 02:48:59,600
आप शास्त्र से सिद्ध कर दो कि वो गीता काल ने बोली है और जहां

2388
02:48:59,600 --> 02:49:03,720
का आप रेफरेंस दे रहे हो वो वहां पर श्री

2389
02:49:03,720 --> 02:49:07,760
कृष्ण स्वयं स्वीकार कर रहे हैं कि वो ज्ञान मैंने तुझे दिया था वो कह रहे मैंने

2390
02:49:07,760 --> 02:49:11,520
दिया था तब तो उनके अंदर काल नहीं है इनके अनुसार

2391
02:49:11,520 --> 02:49:15,640
आप मुझे वो बता दीजिए आ पर मेरे पास पूरी महाभारत है आप

2392
02:49:15,640 --> 02:49:19,960
मुझे वो बताइए उसका रेफरेंस उसका रेफरेंस खोलिए

2393
02:49:19,960 --> 02:49:24,800
आप लास्ट वाला जो उसका वो है अंग है महाभारत

2394
02:49:24,800 --> 02:49:30,080
का षष्ठ खंड छठा खंड

2395
02:49:30,080 --> 02:49:36,080
खोलिए उसमें ही उत्तर छुपा हुआ

2396
02:49:39,920 --> 02:49:45,920
है महाभारत के

2397
02:49:47,160 --> 02:49:53,160
अंतर्गत महा भ छवा

2398
02:49:54,960 --> 02:49:59,280
खंड इसके अंदर में आपको बता रहा हूं एक सेकंड पर्व आपको बता देता हूं

2399
02:49:59,280 --> 02:50:03,400
पहले ठीक अश्वमेध पर्व खोलिए

2400
02:50:03,400 --> 02:50:07,560
अश्वमेध पर्व खोलिए पेज नंबर मेरे यहां

2401
02:50:07,560 --> 02:50:12,000
है 793 एक मिनट आया मिल जागा

2402
02:50:12,000 --> 02:50:16,440
आपका सम वाला है नहीं नहीं मेरा पूरा

2403
02:50:16,440 --> 02:50:20,600
वारा वा श्लोक श्लोक सहित श्लोक

2404
02:50:20,600 --> 02:50:24,640
सहित श्लोक सहित हा फिर आप ही बता दीजिए कोई दिक्कत नहीं

2405
02:50:24,640 --> 02:50:29,040
हा फिर मैं बता रहा हूं ध्यान से देखिए यहां पर यहां पर अर्जुन

2406
02:50:29,040 --> 02:50:33,200
पूछ रहा है क्या कह रहे हैं ध्यान से सुनिए एक बार रेफरेंस

2407
02:50:33,200 --> 02:50:37,280
दे दीजिए मैंने स्क्रीन शेयर किया है मैं बाकी लोग भी देख लेंगे कौन सा है हा हा इसको थोड़ा

2408
02:50:37,280 --> 02:50:43,280
जूम करिए और इसमें से अश्वमेध पर्व

2409
02:50:43,280 --> 02:50:47,280
खोलिए अश्व मेदान पर्व इसी के

2410
02:50:47,280 --> 02:50:51,440
अंदर अश्वमेध पर्व आएगा और इसी के अंतर्गत अनु गीता पर्व लिखा

2411
02:50:51,440 --> 02:50:57,080
होगा अनु गीता पर्व भी लिखा होगा साथ

2412
02:50:57,080 --> 02:51:00,920
में आगे चलते रहिए

2413
02:51:00,920 --> 02:51:05,520
अनु खोलिए इसका प्रथम अध्याय खोलिए प्रथम

2414
02:51:05,520 --> 02:51:09,680
अध्याय य ठीक है अनु

2415
02:51:09,680 --> 02:51:15,680
गीता पर्व ठीक है एक

2416
02:51:17,160 --> 02:51:21,280
सेकंड मैं पहुच रहा वहा पर ये आ गया है

2417
02:51:21,280 --> 02:51:23,440
मेरे

2418
02:51:23,440 --> 02:51:28,760
पास इसका प्रथम पर्व खोल लि ना

2419
02:51:28,760 --> 02:51:32,920
आपने अध मैं बता रहा इसम य

2420
02:51:32,920 --> 02:51:37,160
सवे अध्याय से शुरू होता है इसके अंदर सवा अध्याय मैंने प्रथम अध्याय

2421
02:51:37,160 --> 02:51:40,960
बोलती गलती

2422
02:51:40,960 --> 02:51:46,480
से वही ला अध्याय

2423
02:51:46,480 --> 02:51:50,720
खोलिए बोलिए श्लोक नंबर तो यहीं

2424
02:51:50,720 --> 02:51:54,760
से ये शुरू होता है मैं आपको बता देता हूं कहां पर है इसका

2425
02:51:54,760 --> 02:51:59,400
आपने श्लोक नंबर खोलना है वासुदेव उवाच से ठीक है

2426
02:51:59,400 --> 02:52:04,160
यहां पर भगवान श्री कृष्ण बता रहे

2427
02:52:04,160 --> 02:52:09,000
हैं नौ नंबर श्लोक से नौ नंबर श्लोक

2428
02:52:09,000 --> 02:52:13,200
हा श्रा वाला यही है शलोक हा पढ़ि

2429
02:52:13,200 --> 02:52:19,200
ये है ना अर्जुन उस समय तु अत्यंत गोपनीय हा

2430
02:52:21,200 --> 02:52:25,960
तो मैं पढ़ता हूं एक बार फिर आप भी पढ़िए देखिए पढ़िए पढ़िए आप भी पढ़िए

2431
02:52:25,960 --> 02:52:30,200
कहने लगे अर्जुन उस समय मैंने तुम्हें अत्यंत गोपनीय ज्ञान का श्रवण

2432
02:52:30,200 --> 02:52:34,600
करवाया था मैंने पहली बात तो क्लियर हो गई आपकी ठीक है अपने

2433
02:52:34,600 --> 02:52:38,680
स्वरूप भूत सनातन पुरुषोत्तम तत्व का परिचय दिया था तो जो

2434
02:52:38,680 --> 02:52:42,920
परमात्मा तत्व वहां पर बताया जा रहा है वो श्री कृष्ण का है

2435
02:52:42,920 --> 02:52:47,120
ठीक है और शुक्ल कृष्ण गति का निरूपण करते हुए

2436
02:52:47,120 --> 02:52:51,120
संपूर्ण नित्य लोकों का भी वर्णन किया था किंतु तुमने जो अपनी नासमझी के

2437
02:52:51,120 --> 02:52:55,240
कारण उपदेश को याद नहीं रखा यह मुझे बहुत अप्रिय है उन बातों का

2438
02:52:55,240 --> 02:52:59,640
पूरा पूरा स्मरण होना संभव नहीं जान पता ध्यान से सुनिए अभी आगे है

2439
02:52:59,640 --> 02:53:03,800
ठीक है निश्चय ही तुम बड़े श्रद्धा हीन हो तुम्हारी बुद्धि मंद जान पड़ती

2440
02:53:03,800 --> 02:53:08,320
है धनंजय अब मैं उस उपदेश को जो का तो नहीं कह सकता सुनिए क्यों

2441
02:53:08,320 --> 02:53:12,800
सुनिए क्यों भगवत गीता का अध्याय नंबर 18 है

2442
02:53:12,800 --> 02:53:17,400
श्लोक नंबर सत में इसकी पूरी व्याख्या है उन्होंने क्यों नहीं कहा इसको

2443
02:53:17,400 --> 02:53:19,520
भगवत गीता अध्याय 18 67

2444
02:53:19,520 --> 02:53:23,640
नंबर श्लोक में क्या कह रहे हैं सुनिए इदम ते ना

2445
02:53:23,640 --> 02:53:27,840
अपत काय ना अभय कदाच न कदाच

2446
02:53:27,840 --> 02:53:32,440
न अ भक्ता है ये तुझे ये गीत रूप गीता रूप रहस्यमय

2447
02:53:32,440 --> 02:53:36,640
उपदेश किसी भी काल में ना तो तप से रहित मनुष्यों से कहना

2448
02:53:36,640 --> 02:53:40,640
चाहिए ना भक्ति से रहित और ना ही बिना सुनने की इच्छा वाले

2449
02:53:40,640 --> 02:53:44,720
में या उससे या दोष दृष्टि रखता है उससे कभी नहीं कहना चाहिए

2450
02:53:44,720 --> 02:53:48,920
यानी कि जो श्रद्धा ना रखता हो तो यहां पर तो पहले ही बताया गया इसीलिए

2451
02:53:48,920 --> 02:53:52,920
तो कह रहे हैं कि तुम श्रद्धा हीन हो इसलिए मैं तुम्हें उपदेश नहीं दे सकता और सबसे अच्छी बात

2452
02:53:52,920 --> 02:53:57,320
तो ये सबसे अच्छी बात तो यह है यहां पर बार-बार वो कह रहे मैंने कहा है

2453
02:53:57,320 --> 02:54:01,560
मैंने ही कहा है ये देखिए दोबारा आ गया उस समय योग युक्त

2454
02:54:01,560 --> 02:54:06,000
होकर मैंने ही वो बात कही थी लो भैया फलो फ्लोकी

2455
02:54:06,000 --> 02:54:11,440
जी फटाफट फटाफट सारे प्रमाण खोल देते हैं स्क्रीन

2456
02:54:11,440 --> 02:54:15,600
पर उस समय योग युक्त होकर मैंने परमात्मा तत्व का वर्णन

2457
02:54:15,600 --> 02:54:21,600
किया था अब किसने किया वर्णन श्री

2458
02:54:22,000 --> 02:54:26,040
मि प्रश्न पूछ भैया यहां तो काल नहीं था इनके अंदर

2459
02:54:26,040 --> 02:54:30,320
हेलो शिवजी गिरी जी हा एक प्रश्न

2460
02:54:30,320 --> 02:54:34,400
एक छोटा सा चीज रह गई आपने पढ़ा ना यहां पे लेकिन एक चीज छोटी सी आपने

2461
02:54:34,400 --> 02:54:38,960
स्किप कर दि है उस समय योग युक्त होकर मैंने ठीक है परमात्मा

2462
02:54:38,960 --> 02:54:43,080
तत्व का वर्णन किया था उस विषय का ज्ञान कराने के लिए प्राचीन इतिहास वण

2463
02:54:43,080 --> 02:54:47,120
उनको यदि प्राचीन इतिहास भी सारा का सारा याद था ठीक है तो

2464
02:54:47,120 --> 02:54:51,240
उनको गीता तो भूलने का सवाल ही पैदा उन्होंने तो कहा उस वक्त मैं योग युक्त था अब आप अपनी

2465
02:54:51,240 --> 02:54:55,400
बात रखिए अब मैं ये पूछ रहा हूं भाई आपके हिसाब से

2466
02:54:55,400 --> 02:54:59,640
यहां पर तो काल नहीं बोल रहा है उनके अंदर से काली बोल रहा

2467
02:54:59,640 --> 02:55:03,960
है परमात्मा मतलब परमात्मा की जानकारी दी

2468
02:55:03,960 --> 02:55:08,040
अर पूछ रहा हूं भाई साहब आप अब बदल रहे हो बात को बात चल

2469
02:55:08,040 --> 02:55:12,160
रही है काल ने बोला कि नहीं बोला यहां पे बोल रहे

2470
02:55:12,160 --> 02:55:16,160
है कि मैंने बोला यहां प श्री कृष्ण बोल रहे हैं मैंने बोला

2471
02:55:16,160 --> 02:55:20,320
अब काल है उनके अंदर कि नहीं है ये बताइए इस समय काल है कि नहीं

2472
02:55:20,320 --> 02:55:24,440
और काल है तो आपका कहना है कि वो भूल नहीं सकता है वो तो यहां

2473
02:55:24,440 --> 02:55:26,760
पर भूल कह रहा है सुनि

2474
02:55:26,760 --> 02:55:30,840
कृष्ण जी कभी ऐसा नहीं बोले कि मैं काल हूं कभी नहीं बोलते थे गीता

2475
02:55:30,840 --> 02:55:34,920
अरे मेरे भाई यहां प वो बोल रहे हैं मैंने बोला जहां

2476
02:55:34,920 --> 02:55:39,000
से आप यह उदाहरण दे रहे हो कि अर्जुन अर्जुन के पूछने पर

2477
02:55:39,000 --> 02:55:43,240
उन्होंने कहा कि अब मैं वो ज्ञान तुझे नहीं दे सकता तो उन्होंने कहा कि वो मैंने बोला

2478
02:55:43,240 --> 02:55:47,360
था वो उन्होंने एडमिट किया मैंने वो ज्ञान बोला था

2479
02:55:47,360 --> 02:55:51,440
आप मानते हो मतलब जैसा के तैसा क्यों नहीं दे

2480
02:55:51,440 --> 02:55:55,520
सकते बाप वापस वो अरे भाई मैं ये पूछ रहा

2481
02:55:55,520 --> 02:56:00,960
हूं उन्होंने ये कहा ना यहां पे कि मैंने बोला था

2482
02:56:00,960 --> 02:56:05,000
वो फिर क्यों बो नहीं आएगा समझ में भैया इनको समझ

2483
02:56:05,000 --> 02:56:09,240
में नहीं आएगा इनको कुछ भी कर दो इनको समझ में नहीं आएगा

2484
02:56:09,240 --> 02:56:13,880
और मैं तो आपसे ये पूछ रहा हूं कि यह सब कुछ गलत है

2485
02:56:13,880 --> 02:56:18,360
आप मुझे ये बता दो कि अगर श्री कृष्ण अगर

2486
02:56:18,360 --> 02:56:22,640
शी भल ग अगर श्री कृष्ण दोबारा वो ज्ञान

2487
02:56:22,640 --> 02:56:26,200
नहीं दे सकते भाई

2488
02:56:26,200 --> 02:56:31,560
साहब सु सुना अगर श्री कृष्ण

2489
02:56:31,560 --> 02:56:36,040
अगर के ऊपर कोई परमात्मा है

2490
02:56:36,040 --> 02:56:40,600
अब आप परमात्मा पर आ गए बात आपसे पूछी जा रही है

2491
02:56:40,600 --> 02:56:44,640
अगर आप अगर श्री कृष्ण यहां पर वो दवारा नहीं दे

2492
02:56:44,640 --> 02:56:48,720
सकते तो इसका अर्थ यह है कि वहां पर ने

2493
02:56:48,720 --> 02:56:52,920
दिया यह कहां पर लिखा है पहली बात

2494
02:56:52,920 --> 02:56:56,920
दूसरी बात यदि वह भूल सकता है तो यहां पर भी आपको मानना पड़ेगा

2495
02:56:56,920 --> 02:57:01,000
क्योंकि श्री कृष्ण कह रहे हैं कि वह ज्ञान मैंने तुझे दिया

2496
02:57:01,000 --> 02:57:07,000
था मैंने तुझे दिया

2497
02:57:08,240 --> 02:57:12,280
था कबीर सागर मिलावट कैसे हुई कबीर गरीब

2498
02:57:12,280 --> 02:57:18,280
सागर नहीं हुई मिलावट जैसे के तैसे कबीर ञान क्यों नहीं दिया गया

2499
02:57:20,080 --> 02:57:25,920
यह कैसे भूल गए

2500
02:57:25,920 --> 02:57:31,920
भाई

2501
02:57:32,280 --> 02:57:36,280
बताइए अब आपके पास कोई शास्त्र का प्रमाण है तो बता

2502
02:57:36,280 --> 02:57:40,360
दीजिए कि गीता का ज्ञान श्री कृष्ण ने नहीं काल

2503
02:57:40,360 --> 02:57:44,960
ने बोला है देखो गीता अध्याय 11

2504
02:57:44,960 --> 02:57:49,000
3 32 में देखिए वहां प लिखा है मैं काल हूं

2505
02:57:49,000 --> 02:57:53,640
अरे भाई मैं काल हूं य भी तो कह रहे मैंने कहा श्री कृष्ण ही काल है

2506
02:57:53,640 --> 02:57:57,720
आप यह बताइए श्री कृष्ण से श्री कृष्ण से अलग काल

2507
02:57:57,720 --> 02:58:02,280
ने दिया वो बताइए श्री क

2508
02:58:02,280 --> 02:58:07,240
बोलेंगे श्री कृष्ण से अलग किसी काल ने दिया वो ज्ञान वो

2509
02:58:07,240 --> 02:58:11,240
बताइए अगर हमारा भगवान हम काल बोलता है मैं

2510
02:58:11,240 --> 02:58:15,240
सब लोग ख लोग हम लोग भिर चुके आपकी बात आपने बोल

2511
02:58:15,240 --> 02:58:19,240
दी हमारी बात हमने बोल दी अब जनता डिसाइड कर ले कौन सही कह रहा था कौन

2512
02:58:19,240 --> 02:58:23,280
गलत कह रहा था आप अब जा सकते ठीक है ठीक है आपके समझ में नहीं आएगा

2513
02:58:23,280 --> 02:58:28,880
मेरा ध्यान

2514
02:58:28,880 --> 02:58:34,080
आप यह इसलिए आते हैं कि यह यह बोल के जा

2515
02:58:34,080 --> 02:58:38,200
सके आपकी समझ में नहीं आएगा यह वो सब बोल के जा सके

2516
02:58:38,200 --> 02:58:42,280
इसलिए आते हैं इनके पास और कुछ नहीं है बोलने को ये अंत में यह कहना

2517
02:58:42,280 --> 02:58:46,560
चाहते हैं ठीक है एक चीज भया

2518
02:58:46,560 --> 02:58:50,640
आपकी समझ में नहीं आएगा तो फिर मैं कह रहा हूं भाई कोई आ जाए यहां

2519
02:58:50,640 --> 02:58:54,720
पर जो ये बता दे कि भगवत गीता का ज्ञान श्री

2520
02:58:54,720 --> 02:58:58,720
कृष्ण ने नहीं काल ने दिया है जहां का आप रेफरेंस दे रहे

2521
02:58:58,720 --> 02:59:02,720
हो वहां पर तो लिखा है श्री कृष्ण स्वयं बोल रहे हैं मैंने ही दिया था

2522
02:59:02,720 --> 02:59:06,800
बात ही खत्म और कुछ बात ही मत करो वहां उसी लाइन

2523
02:59:06,800 --> 02:59:10,800
में जिस श्लोक का यह उदाहरण ले रहे हैं उसी श्लोक में लिखा है

2524
02:59:10,800 --> 02:59:14,960
कि मैंने वो ज्ञान तुझे ऐसे वैसे कैसे भी दिया और कुछ बात जैसे ही हम लोग

2525
02:59:14,960 --> 02:59:19,280
ज्यादा चैप्टर खोल लेंगे ना तो एक देखेंगे कि मैं हाहा पर

2526
02:59:19,280 --> 02:59:23,280
विषय को बदल सकता हूं जैसे इन्होने परमात्मा का देख लिया अब

2527
02:59:23,280 --> 02:59:27,360
अलग परमात्मा इसलिए हमें ध्यान रखना होगा इनको विषय

2528
02:59:27,360 --> 02:59:30,760
बदलने का मौका ना

2529
02:59:30,760 --> 02:59:33,520
दे

2530
02:59:33,520 --> 02:59:38,240
इसमें भाई जी देखो श्रीम

2531
02:59:38,240 --> 02:59:42,720
श्रीमद भागवत पुराण में द्वितीय स्कंद के सवे

2532
02:59:42,720 --> 02:59:46,920
अध्याय में स्कंद के सवे अध्याय

2533
02:59:46,920 --> 02:59:51,000
में लास्ट बार ज जब गीता का उपदेश दिया था श्री कृष्ण भगवान जी ने

2534
02:59:51,000 --> 02:59:55,120
वो उद्धव जी को दिया था तो छठे श्लोक

2535
02:59:55,120 --> 02:59:59,240
में देखोगे उसमें लिख रहे हैं कि प्रिय उद्धव तुम प्रश्न का

2536
02:59:59,240 --> 03:00:01,000
मर्म समझने वालो में शिरोमणि

2537
03:00:01,000 --> 03:00:05,000
हो जिस समय कुरुक्षेत्र में कौरव पांडव का युद्ध छिड़ा हुआ

2538
03:00:05,000 --> 03:00:09,360
था उस समय शत्रुओं से युद्ध के लिए तत्पर अर्जुन मुझसे

2539
03:00:09,360 --> 03:00:11,960
यही प्रश्न किया

2540
03:00:11,960 --> 03:00:16,080
था गीता का ज्ञान इधर भी दिया किसको उद्धव जी

2541
03:00:16,080 --> 03:00:20,720
को श्रीमन भागवत पुराण द्वितीय खंड

2542
03:00:20,720 --> 03:00:25,120
स्कंद 11 और सवा

2543
03:00:25,120 --> 03:00:29,120
अध्याय इसका प्रमाण तो आपको कुर्म पुराण में भी

2544
03:00:29,120 --> 03:00:33,200
मिल जाएगा ईश्वर गीता उसमें वो भी मिल जाएगा वहां पर क्योंकि वहां पर लिखा

2545
03:00:33,200 --> 03:00:37,200
है गुरु परंपरा से ये भगवान श्री कृष्ण को प्राप्त हुआ और उनके द्वारा अर्जुन

2546
03:00:37,200 --> 03:00:41,400
को प्राप्त हुआ यहां प क

2547
03:00:41,400 --> 03:00:45,720
आप कहां की बात कर रहे हैं भैया वो श्रीमद् भागवत में श्रीमद भागवत

2548
03:00:45,720 --> 03:00:49,960
पुराण में द्वितीय द्वितीय खंड में 11वां स्कंद है और सवा

2549
03:00:49,960 --> 03:00:55,400
अध्याय भगवान की विभूतियों का वर्णन

2550
03:00:55,400 --> 03:00:59,680
पाठ उद्धव जी को ज्ञान दे रहे हैं उपदेश दे रहे हैं लास्ट

2551
03:00:59,680 --> 03:01:04,280
बार जब दिया था गीता का ज्ञान दिया श्रीमद

2552
03:01:04,280 --> 03:01:09,800
भागवत द्वितीय द्वितीय खंड 11वां

2553
03:01:09,800 --> 03:01:13,280
स्कंद सवा

2554
03:01:13,280 --> 03:01:17,480
अध्याय द्वितीय खंड वो 11वां स्कंद काफी है सवा

2555
03:01:17,480 --> 03:01:21,680
अध्याय ठीक है अध भगवान की विभूतियों का वर्णन

2556
03:01:21,680 --> 03:01:25,800
ठीक है एक से लेकर छ तक के तुम आप पढ़ लीजिए जो श्लोक है शुरू

2557
03:01:25,800 --> 03:01:30,400
से एक

2558
03:01:30,400 --> 03:01:36,400
मिनट एक

2559
03:01:40,480 --> 03:01:44,680
मिनट इसमें भी अपने विभूतियों का वर्णन कर रहे हैं ये

2560
03:01:44,680 --> 03:01:50,680
कि मैं ही काल हूं य भी कह रहे हैं [संगीत]

2561
03:01:55,040 --> 03:01:58,600
गवा

2562
03:01:58,600 --> 03:02:02,880
स्कंद आगे बोलते हैं सावा

2563
03:02:02,880 --> 03:02:08,680
स्वा अध्याय सवा अध्याय सवा

2564
03:02:08,680 --> 03:02:13,000
अध्याय लोकी जी की सर्वे बी फस्ट है भाई सारे ग्रंथ आ जाते

2565
03:02:13,000 --> 03:02:15,840
स्क्रन

2566
03:02:15,840 --> 03:02:19,920
पर उद्धव जी पूछ रहे हैं श्री कष्ण

2567
03:02:19,920 --> 03:02:24,040
जी से हा उद्धव वाज ठीक है हे भगवान आप साक्षात

2568
03:02:24,040 --> 03:02:28,040
पर परम ब्रह्म है ना आपका आद है

2569
03:02:28,040 --> 03:02:32,360
ना अंत है आप आवरण मैं पढ़ता हूं

2570
03:02:32,360 --> 03:02:36,880
ना आपका आदि है ना अंत है रहित है अद्वितीय

2571
03:02:36,880 --> 03:02:40,880
है तत्व है समस्त प्राणियों और पदार्थों की उत्पत्ति

2572
03:02:40,880 --> 03:02:44,920
स्थिति रक्षा और प्रलय के कारण भी आप ही है लोगों

2573
03:02:44,920 --> 03:02:49,120
ने अपने मन इंद्रियों को वश में नहीं किया ब्रह्म पुरुष भी करते हैं बड़े

2574
03:02:49,120 --> 03:02:53,160
बड़े अंतरात्मा है अपने आप प्राणी माया से ऐसे मोहित

2575
03:02:53,160 --> 03:02:57,960
हो रहे हैं अचिंत फिर श्री कृष्ण ने कहा भगवान ने कहा

2576
03:02:57,960 --> 03:03:00,480
प्रिय उद्धव तुम प्रश्न का मर्म समझने वालो में

2577
03:03:00,480 --> 03:03:04,560
शिरोमणि हो जिस समय कुरुक्षेत्र में मैं कौरव

2578
03:03:04,560 --> 03:03:08,560
पांडवों का युद्ध छिड़ा हुआ था उस समय

2579
03:03:08,560 --> 03:03:11,560
शत्रुओं से युद्ध के लिए तत्पर अर्जुन ने

2580
03:03:11,560 --> 03:03:15,680
मुझ से यही प्रश्न किया था अब लो भाई श्री कृष्ण ने

2581
03:03:15,680 --> 03:03:18,200
कहा

2582
03:03:18,200 --> 03:03:22,240
श्री कृष्ण ने कहा जो विभूतियां गीता

2583
03:03:22,240 --> 03:03:26,880
में बता रखी वही विभूति य भी बता रखी है मैं ही काल कह रहे देखो आगे

2584
03:03:26,880 --> 03:03:31,000
हा अर्जुन के मन में ऐसी धारणा हुई सब युक्तियां मैं मारने वाला हूं

2585
03:03:31,000 --> 03:03:35,000
उस समय अर्जुन से मुझ यही प्रश्न किया था जो तुम कर रहे हो मैं ही

2586
03:03:35,000 --> 03:03:39,320
इन समस्त प्राणियों और पदार्थों के रूप में हूं इनकी उत्पत्ति

2587
03:03:39,320 --> 03:03:43,320
स्थिति प्रलय का कारण भी हूं गतिशील पदार्थों में मैं गति

2588
03:03:43,320 --> 03:03:47,920
हूं अपने अधीन करने वालों में मैं काल हूं

2589
03:03:47,920 --> 03:03:53,920
क्या बात है वही काल

2590
03:03:55,520 --> 03:03:59,720
है काल रू एक और रेफरेंस आ रहा है अग्नि

2591
03:03:59,720 --> 03:04:03,760
पुराण से तब तक आप अपनी बात जारी रखिए अग्नि पुराण से एक और रेफरेंस दे रहा हूं आप अपनी बात

2592
03:04:03,760 --> 03:04:07,960
जान जारी रखिए अब आगे

2593
03:04:07,960 --> 03:04:11,960
तो उन्होंने बहुत सी बातें फिर कही है एकादश उद्र में नीली लोहित

2594
03:04:11,960 --> 03:04:16,120
राम का रुद्र हूं बहुत बहुत चीज है पूरी

2595
03:04:16,120 --> 03:04:20,400
गीता बता रखी है उनको जो योग है उ योग के बारे में बता रखा है यह ध्यान

2596
03:04:20,400 --> 03:04:24,520
योग ये सांख योग ये भक्ति योग

2597
03:04:24,520 --> 03:04:28,720
सब चीज बता रखा जी जी अच्छा इसमें जो

2598
03:04:28,720 --> 03:04:32,720
समय काल है वोह महाभारत घटित हो चुकी

2599
03:04:32,720 --> 03:04:37,120
है है ना तो फिर अब ये भी बात खत्म हो गई कि उनको स्मरण

2600
03:04:37,120 --> 03:04:41,160
नहीं था बिल्कुल उनको स्मरण नहीं था वो

2601
03:04:41,160 --> 03:04:45,720
बात भी चली गई अब यहां पर बो

2602
03:04:45,720 --> 03:04:49,080
राजा राय जी

2603
03:04:49,080 --> 03:04:53,160
सार नाम का अध्याय है अग्नि पुराण के अंतिम अध्याय में गीता सार

2604
03:04:53,160 --> 03:04:57,080
नाम काम अध्याय

2605
03:04:57,080 --> 03:05:01,720
है एक मिनट य प्रमाण देख ले जरा अग्नि पुराण का एक

2606
03:05:01,720 --> 03:05:06,440
मिनट गीता सार 800

2607
03:05:06,440 --> 03:05:11,880
51 37

2608
03:05:11,880 --> 03:05:16,080
ठीक क्लियर लिखा सब कुछ

2609
03:05:16,080 --> 03:05:20,120
बक बकुल मैं आ रहा कह रहा हूं

2610
03:05:20,120 --> 03:05:24,920
पेज

2611
03:05:24,920 --> 03:05:29,320
नंबर 8 52 43

2612
03:05:29,320 --> 03:05:34,080
आ गया 47 ये रहा गीता

2613
03:05:34,080 --> 03:05:38,200
सार अग्नि पुराण अग्निदेव ने कहा अब

2614
03:05:38,200 --> 03:05:42,520
मैं गीता का सार बतला रहा हूं थोड़ा बड़ा कर देता

2615
03:05:42,520 --> 03:05:46,600
हूं अब य यहां से देखिए अब मैं गीता का सार बतला

2616
03:05:46,600 --> 03:05:51,160
रहा हूं जो गीता का सर्वोत्तम अंश है

2617
03:05:51,160 --> 03:05:55,320
इससे भोग तथा मो करने वाली गीता शास्त्र का

2618
03:05:55,320 --> 03:05:59,760
उपदेश पूर्व काल में भगवान श्री

2619
03:05:59,760 --> 03:06:03,800
कृष्ण ने अर्जुन को दिया यही है ना

2620
03:06:03,800 --> 03:06:08,680
जिसमें श्री भगवान भगवान श्री कृष्ण ने बोला हे अर्जुन

2621
03:06:08,680 --> 03:06:13,560
किसी मरे अथवा जीवित मनुष्य के विषय में शोक नहीं करना

2622
03:06:13,560 --> 03:06:17,600
चाहिए शरीर धारी आत्मा अजन्मा

2623
03:06:17,600 --> 03:06:22,040
हा अजन्मा अजर अमर एवं

2624
03:06:22,040 --> 03:06:26,160
अभेद है ठीक फिर इसके

2625
03:06:26,160 --> 03:06:30,280
बाद अत उसके लिए शोक त्याग

2626
03:06:30,280 --> 03:06:35,400
देना चाहिए विषयों का चिंतन

2627
03:06:35,400 --> 03:06:39,560
करने वाले पुरुष के की विषयों में आसक्ति हो जाती

2628
03:06:39,560 --> 03:06:44,680
है तो ये तो इसमें क्या बता रहे हैं गोविंद जी

2629
03:06:44,680 --> 03:06:48,840
आप ये लिखा तो है भगवान श्री क ने अर्जुन को य ज्ञान

2630
03:06:48,840 --> 03:06:52,920
दिया था बता तो रहे हैं य पर स्पष्टता हा हा बता वो तो स्पष्ट तो यही

2631
03:06:52,920 --> 03:06:57,360
लिख दिया ना दूसरे लोक के लोक के दूसरी लाइन में लिख दिया वाले

2632
03:06:57,360 --> 03:07:01,680
ये देखिए मोक्ष प्रदान करने वाले गीता शास्त्र का उपदेश पूर्व काल में भगवान

2633
03:07:01,680 --> 03:07:06,040
श्री कृष्ण ने ने अर्जुन

2634
03:07:06,040 --> 03:07:10,240
को दिया लिखा हुआ है य पर य तो पढ़ रहा हूं आगे प्रमाण एक और प्रमाण

2635
03:07:10,240 --> 03:07:14,280
हमारे पास आ गया ये देखिए पुराण में जाना है

2636
03:07:14,280 --> 03:07:20,280
तो वहा भी चले जाइए पूर्म पुराण

2637
03:07:21,920 --> 03:07:26,160
मैंने ट किया है महाभारत का प्रमाण जिसम भीष्म

2638
03:07:26,160 --> 03:07:30,520
पिता से कह रहे हैं श्री कृष्ण ही परमेश्वर है और काल है ने

2639
03:07:30,520 --> 03:07:34,560
मार्क करके भेजा दिखा वो तो भरे पड़े

2640
03:07:34,560 --> 03:07:40,560
हैं व तो भरे पड़े बहुत सारा

2641
03:07:44,800 --> 03:07:49,320
है अच्छ अ देखिए

2642
03:07:49,320 --> 03:07:53,400
जि विग नाम का है कौन सा

2643
03:07:53,400 --> 03:07:57,680
है आपको कि उसके अंतर्गत यह है

2644
03:07:57,680 --> 03:08:01,920
कौन सा है कौन सा है कुण पुराण का वो दीजिए मुझे

2645
03:08:01,920 --> 03:08:05,960
रेफरेंस ऊपरी ऊपरी विभाग नाम से एक ना होगा

2646
03:08:05,960 --> 03:08:10,560
यहां पर विग ठीक ठीक ठीक समझ गया समझ समझ

2647
03:08:10,560 --> 03:08:14,760
गया ऊपरी विभाग ठीक है आगे

2648
03:08:14,760 --> 03:08:20,560
इसके अंदर आ जाइए गवे अध्याय में शद

2649
03:08:20,560 --> 03:08:24,560
11 योग योग की जो अष्टांग योग के बारे में बता रहे हैं

2650
03:08:24,560 --> 03:08:30,560
हा हा हाही वही वही आइए ठीक है

2651
03:08:30,560 --> 03:08:36,440
26 ये लीजिए आ गया मैं 286

2652
03:08:36,440 --> 03:08:37,440
हैय

2653
03:08:37,440 --> 03:08:42,160
कोई बात नहीं कोई बात नहीं 2686 तो होता है

2654
03:08:42,160 --> 03:08:46,320
हा हा बताइए इसमें आएंगे

2655
03:08:46,320 --> 03:08:52,320
हम मैं एक मिनट आपको पढ़ के सुना देता हूं अंत में है

2656
03:08:58,520 --> 03:09:02,560
ये पेज नंबर बता दीजिए मुझे मैं वही बता

2657
03:09:02,560 --> 03:09:06,080
रहा दो मिनट

2658
03:09:06,080 --> 03:09:09,040
देय

2659
03:09:09,040 --> 03:09:13,040
नम इसमें इसमें क्या है क्या बता रहे हैं हा मैं

2660
03:09:13,040 --> 03:09:18,560
बता रहा हूं इसके अंतर्गत आप आएंगे पेज नंबर 26

2661
03:09:18,560 --> 03:09:22,680
में ठीक है यहां पर

2662
03:09:22,680 --> 03:09:26,680
31 वा नंबर से आप पढ़ना शुरू करिए य आप कहे तो मैं पढ़ देता हूं

2663
03:09:26,680 --> 03:09:31,800
131 से 131 ना

2664
03:09:31,800 --> 03:09:37,160
क्षमा करिएगा 125 से पढ़िए 125 से

2665
03:09:37,160 --> 03:09:41,880
125 यानी वे वे मुनि गण भी देवों के आदि देवेश्वर

2666
03:09:41,880 --> 03:09:46,320
महेश्वर को भूता समस्त प्रपंच के मूल कारण नारायण

2667
03:09:46,320 --> 03:09:50,520
को नमस्कार अपने स्थानों की ओर चले गए महामुनि

2668
03:09:50,520 --> 03:09:54,560
भगवान सनत कुमार ने सवर्त को

2669
03:09:54,560 --> 03:09:58,800
ईश्वरीय ज्ञान यानी शिव का ज्ञान ज्ञान का उपदेश

2670
03:09:58,800 --> 03:10:04,080
प्रदान किया उन्होंने भी वह ज्ञान सत्यव्रत को दिया

2671
03:10:04,080 --> 03:10:08,480
योगेंद्र सनन ने महर्षि पुलह को प्रजापति पुल

2672
03:10:08,480 --> 03:10:12,680
ने गौतम को अच्छा य गुरु परंपरा बता रहे हैं ईश्वरीय ज्ञान प्रदान

2673
03:10:12,680 --> 03:10:16,680
किया अंगिरा ने वेदों के ज्ञाता भ भरद्वाज को

2674
03:10:16,680 --> 03:10:22,360
और कपिल ने जयगी स्वय तथा

2675
03:10:22,360 --> 03:10:24,120
पंच शिख को

2676
03:10:24,120 --> 03:10:28,120
वह ज्ञान दिया सभी श को वह ज्ञान

2677
03:10:28,120 --> 03:10:32,160
दिया सभी तत्वों के दृष्टा मेरे पिता पराशर ने ने भी

2678
03:10:32,160 --> 03:10:36,440
वह परम ज्ञान सनक से प्राप्त किया और उनसे

2679
03:10:36,440 --> 03:10:40,640
वाल्मीकि ने प्राप्त किया प्राचीन काल में अर्धनारीश्वर

2680
03:10:40,640 --> 03:10:44,680
भगवान शंकर के अंश से उत्पन्न महायोगी वामदेव जी

2681
03:10:44,680 --> 03:10:49,080
ने मुझसे कहा जो साक्षात विना कधी रुद्र स्वरूप

2682
03:10:49,080 --> 03:10:53,080
है तो इसके आगे पढ़ हा देवकी

2683
03:10:53,080 --> 03:10:57,800
के पुत्र हरि भगवान नारायण ने भी देवकी के पुत्र

2684
03:10:57,800 --> 03:11:01,880
यानी भगवान श्री कृष्ण की बात हो रही है यहां पर भगवान हरि नारायण

2685
03:11:01,880 --> 03:11:05,960
ने भी स्वयं साक्षात अर्जुन का य उत्तम ज्ञान प्रदान किया व

2686
03:11:05,960 --> 03:11:10,160
सेम ज्ञान की बात हो रही है जो जो कैसे कैसे उस ज्ञान को दिया जा रहा है जब मैंने

2687
03:11:10,160 --> 03:11:14,520
वामदेव रुद्र से इस श्रेष्ठ ज्ञान को प्राप्त किया

2688
03:11:14,520 --> 03:11:18,840
वही ज्ञान ये वही ज्ञान की बात हो रही है जो भगवान

2689
03:11:18,840 --> 03:11:22,920
श्री कृष्ण ने ने नारायण ने स्वयं साक्षात अर्जुन को जो ज्ञान प्रदान किया वही

2690
03:11:22,920 --> 03:11:26,960
ज्ञान फिर वामदेव रुद्र भगवान से उन्होंने

2691
03:11:26,960 --> 03:11:31,360
न्हों प्राप्त किया ये किसकी बात बता रहे हैं ये ये किसका हुआ चा है ये

2692
03:11:31,360 --> 03:11:35,480
कौन बता भगवान ये सनत कुमार बता रहे हैं भगवान

2693
03:11:35,480 --> 03:11:39,120
श्री शिव ने कहते हैं कि प्रथम ता गीता का उपदेश

2694
03:11:39,120 --> 03:11:43,360
दिया ईश्वर गीता इसका नाम है और यही उपदेश यही क्योंकि

2695
03:11:43,360 --> 03:11:48,240
चार तो मुख्य योग है इसी का उपदेश भगवान श्री कृष्ण ने अर्जुन को दिया

2696
03:11:48,240 --> 03:11:54,240
दिया दिया हा ये है ठीक है य भी रेफरेंस आ गया और

2697
03:11:55,040 --> 03:11:59,200
बता लास्ट मेरा प्रमाण है एक लास्ट मेरा प्रमाण है

2698
03:11:59,200 --> 03:12:03,520
भग के अंतर्गत पवा अध्याय और पवा शलोक

2699
03:12:03,520 --> 03:12:08,360
है भगवत गीता के [संगीत] अंतर्गत

2700
03:12:08,360 --> 03:12:13,160
हा बताइए पवा अध्याय पवा अध्याय पवा शलोक

2701
03:12:13,160 --> 03:12:18,080
खो लिया अध्याय खोल लि खोया

2702
03:12:18,080 --> 03:12:18,580
मैं ही

2703
03:12:18,560 --> 03:12:22,960
सब प्राणियों के हृदय में अंतर्यामी रूप से स्थित हूं

2704
03:12:22,960 --> 03:12:27,760
मुझसे ही स्मृति ज्ञान और अपोहन होता है

2705
03:12:27,760 --> 03:12:32,200
सब वेदों द्वारा मैं ही जानने योग्य हूं तथा वेदांत

2706
03:12:32,200 --> 03:12:33,480
का कर्ता और वेदों को

2707
03:12:33,480 --> 03:12:37,720
जानने वाला भी मैं ही हूं अपोहन का

2708
03:12:37,720 --> 03:12:42,600
अर्थ क्या है मैं आप बताएंगे मे को थोड़ साहन

2709
03:12:42,600 --> 03:12:46,600
अपोहन का अर्थ अपोहन अपोहन का अर्थ है विचार के द्वारा बुद्धि

2710
03:12:46,600 --> 03:12:51,160
में रहने वाले संशय यानी या

2711
03:12:51,160 --> 03:12:55,640
एक तरीके से माया मोह माया मोह हा

2712
03:12:55,640 --> 03:13:00,240
मैं भी पढ़ देता हूं को हने का

2713
03:13:00,240 --> 03:13:04,280
नाम एक मैंने भेजा माया मोह को हटाने का नाम

2714
03:13:04,280 --> 03:13:08,360
अपोहन है ये लिखा हुआ है ना यहां पर देखिए य देखि अपोहन का

2715
03:13:08,360 --> 03:13:12,400
अर्थ यानी अपोहन क्या है अपन नंबर दो है ना इसका अर्थ नीचे लिखा हुआ

2716
03:13:12,400 --> 03:13:17,120
है विचार के द्वारा बुद्धि में रहने वाले संशय विपर्यय

2717
03:13:17,120 --> 03:13:21,480
आदि दोषों का को हटाने का नाम अपोन है

2718
03:13:21,480 --> 03:13:25,600
अपन तो या अब

2719
03:13:25,600 --> 03:13:29,760
अगर ये काल कह रहे हैं अगर यहां पर काल है तो यहां पर काल के बारे

2720
03:13:29,760 --> 03:13:33,880
में भी ये कह रहे हैं काल के भाई सर्व वेदों का तात्पर्य परमेश्वर को

2721
03:13:33,880 --> 03:13:38,040
जानने का है इसलिए सब वेदों द्वारा जानने योग्य मैं

2722
03:13:38,040 --> 03:13:42,360
ही हूं वेदों को जानने वाला भी मैं ही हूं

2723
03:13:42,360 --> 03:13:48,200
वेदों द्वारा जानने वाला भी मैं ही हूं अब बताओ

2724
03:13:48,200 --> 03:13:50,120
शिवा

2725
03:13:50,120 --> 03:13:54,160
भैया प वो मैंने हा वो दिखा दीजिए जरा

2726
03:13:54,160 --> 03:13:58,440
मैंने ट किया है आपको अच्छा मुझे किया क्या

2727
03:13:58,440 --> 03:14:02,680
आपको नहीं आपको नहीं उनको दिया है भीष्म पितामह

2728
03:14:02,680 --> 03:14:06,960
कह रहे पांडवों से भीष्म पितामह 12 महा भागवत में एक पितामह

2729
03:14:06,960 --> 03:14:12,960
भीष्म वैसे बहुत सारा है मैंने एक ही भेजा है बहुत लंबा है

2730
03:14:20,600 --> 03:14:25,120
नाराय ये कोई बोल रहा है कि

2731
03:14:25,120 --> 03:14:29,240
गरीब दास की वाणी में लिखा है गीता का ज्ञान श्री कृष्ण ने ही दिया

2732
03:14:29,240 --> 03:14:33,240
है लो हा य लिखा हुआ है य लिखा हुआ है मैंने खुद पढ़ा है

2733
03:14:33,240 --> 03:14:37,560
अपनी आंखों से तो पेन चला होगा फिर तो व

2734
03:14:37,560 --> 03:14:42,440
फर तो पन

2735
03:14:42,440 --> 03:14:47,280
चलागा सुमित जी बहुत वेट कर रहे थे

2736
03:14:47,280 --> 03:14:51,760
गा जो काल की डेफिनेशन इन लोगों ने कुछ अलग तरीके से दे रखी है

2737
03:14:51,760 --> 03:14:55,880
काल कौन है य उससे तो नहीं मानेंगे पुराणों से इनको आप वेदों से दिखा

2738
03:14:55,880 --> 03:14:59,960
देना अथर्ववेद उवा कांड 53 54

2739
03:14:59,960 --> 03:15:04,000
पूरा वर्णन है काल रूपी परमात्मा

2740
03:15:04,000 --> 03:15:09,640
का वेदों को तो मानेंगे

2741
03:15:09,640 --> 03:15:14,520
देखिए बा मवाना नहीं है

2742
03:15:14,520 --> 03:15:20,520
क्योंकि हमें केवल दर्शको को दिना है इनका

2743
03:15:20,680 --> 03:15:24,480
ठीक कौन सा कांड

2744
03:15:24,480 --> 03:15:28,960
हैवान 19 19 और

2745
03:15:28,960 --> 03:15:33,840
सुत 53 और 54 दोनों में पूरा न है दोनों में दोनों केतो

2746
03:15:33,840 --> 03:15:38,200
में मंत्र में रें हो जाएंगे

2747
03:15:38,200 --> 03:15:42,440
इतने रेफरेंस हो जाएंगे अगली बार लोग काल का नाम नहीं लेंगे

2748
03:15:42,440 --> 03:15:47,160
अब ये दूसरे टॉपिक प आएंगे जब आएंगे तब इसको ना नहीं कर सकते

2749
03:15:47,160 --> 03:15:50,880
कोय ये तो

2750
03:15:50,880 --> 03:15:55,600
उस एक एक जो मैंने भेजा है भीषमा जो कह रहे

2751
03:15:55,600 --> 03:15:57,880
दिखाइए अरे अगर

2752
03:15:57,880 --> 03:16:01,880
यह पुराणों को नहीं मानेंगे तो मैं इनकी बुक खोल के दिखा दूंगा ना बाबा रामपाल

2753
03:16:01,880 --> 03:16:07,880
जी ने पुराणों को माना है ये कौन होते हैं ना मानने वाले

2754
03:16:08,600 --> 03:16:13,200
य कभी कभी झटके में भी क जाएंगे हम रामपाल को भी नहीं मानते

2755
03:16:13,200 --> 03:16:17,560
ये झटके में भी क जाएंगे जैसे अभी कल बो भी

2756
03:16:17,560 --> 03:16:23,320
बस उसी दिन का इंतजार है मेरे को बस उसी दिन का इंतजार है मेरे

2757
03:16:23,320 --> 03:16:27,560
हैदराबाद हैदराबाद में हैदराबाद में आयर समाज से एक साल

2758
03:16:27,560 --> 03:16:31,760
किया था पंडित माधवाचार्य शास्त्री जी ने तो उसम उन्होंने बोला कि अगर तुम

2759
03:16:31,760 --> 03:16:35,920
हमको कहते हो कि हम मूलती पूजा करते हैं तो अगर तुम दयानंद सती को

2760
03:16:35,920 --> 03:16:40,040
के फोटो को जरा उस पर लात मारो तो उस विद्वान ने जो राज समाजी था

2761
03:16:40,040 --> 03:16:44,960
उसने उस दयानंद जी की फोटो पर जूतो से मारा था व

2762
03:16:44,960 --> 03:16:49,120
बात लिखा है क पंचक कल पढ़ रहा था उसम लिखा हुआ

2763
03:16:49,120 --> 03:16:55,120
है वो भे अच्छा बताने लायक

2764
03:16:56,000 --> 03:16:58,200
है

2765
03:16:58,200 --> 03:17:02,240
वो नवीन जी मैंने आपको एक ट किया है वो जरा

2766
03:17:02,240 --> 03:17:06,760
दिखा दीजिए शो कर दीजिए अपने

2767
03:17:06,760 --> 03:17:10,840
नंबर से किया है

2768
03:17:10,840 --> 03:17:16,840
[संगीत]

2769
03:17:23,640 --> 03:17:27,640
हां जी राजा जी आपका वाला है हां पढ़िए

2770
03:17:27,640 --> 03:17:31,840
इसको बड़ा करके थोड़ा बड़ा कर पडि

2771
03:17:31,840 --> 03:17:35,920
जी पढ़िए पंडित जी यह सब लोग राजा

2772
03:17:35,920 --> 03:17:40,160
यह सब राजा लोग युद्ध के मुहाने पर काल के द्वारा मारे

2773
03:17:40,160 --> 03:17:44,360
गए हैं हम भी काल से ही मारे गए हैं क्योंकि

2774
03:17:44,360 --> 03:17:48,680
काल ही परमेश्वर है जो काल के स्वरूप

2775
03:17:48,680 --> 03:17:53,240
को जानता है वह काल के थपेड़े खाकर भी शोक नहीं करता

2776
03:17:53,240 --> 03:17:57,440
श्री कृष्ण ही लाल नेत्रों वाले दंड धारी

2777
03:17:57,440 --> 03:18:01,680
सनातन काल है वाह लो

2778
03:18:01,680 --> 03:18:06,600
बहुत सुंदर कितना रेफरेंस है भैया

2779
03:18:06,600 --> 03:18:11,480
किसकी भक्ति है सा उनकी जो ये बताई

2780
03:18:11,480 --> 03:18:15,560
नहीं है जति निरंजन कौन हैय ज्योति

2781
03:18:15,560 --> 03:18:21,560
निरंजन कौन है पता है

2782
03:18:23,680 --> 03:18:28,000
छोटी बात

2783
03:18:28,000 --> 03:18:32,040
आपवा भया मैं आपको एक बुक भेजने वाला हूं जो बहुत दिनों

2784
03:18:32,040 --> 03:18:36,200
से मैं खोज रहा था आज मिल गई है वह है पश्चिम

2785
03:18:36,200 --> 03:18:40,280
बंगाल के बहुत बड़े योगी संत हुए श्री विजय कृष्ण गोस्वामी उनके शिष्य कुदा

2786
03:18:40,280 --> 03:18:44,320
नंद ब्रह्मचारी वो प्राण योग से अलग अलग लोको में चले

2787
03:18:44,320 --> 03:18:48,520
जा सकते थे और उ डायरी लिखी है बहुत ही फेमस संत समाज में अपने गुरु

2788
03:18:48,520 --> 03:18:52,600
जी के सा संस्मरण का तो उसमें उन्होने नरक लोक की यात्रा की है और

2789
03:18:52,600 --> 03:18:56,840
वहा पर व दयानंद से मिले व लिखा है उन्होने अच्छा

2790
03:18:56,840 --> 03:19:01,080
और उसम उन्होने बोला दयानंद आपके लिए क्या कर सकता हूं तो दयानंद

2791
03:19:01,080 --> 03:19:06,080
ने बोला कि मैं अपने कर्मों का फल भोग रहा हूं ने दो मुझे

2792
03:19:06,080 --> 03:19:10,920
कांड 19 19 खोलिए सक्त 53 कांड 19 खोलिए पहले

2793
03:19:10,920 --> 03:19:15,040
खोल रहा खोल वो भेजूंगा आपको चलता

2794
03:19:15,040 --> 03:19:19,720
हर में मुलाकात उन्होने नरक में मुलाकात हुई है

2795
03:19:19,720 --> 03:19:23,840
अच्छा कांड 19 कौन सा है 53

2796
03:19:23,840 --> 03:19:26,640
53 और 54 दोनों में है पूरे

2797
03:19:26,640 --> 03:19:31,280
व्याख्या कर रखी काल काल उसमें कि काल कौन

2798
03:19:31,280 --> 03:19:35,480
है मंत्र रहने दीजिए मंत्र मत शो करिए हम लोग यहां से पढ़ देंगे

2799
03:19:35,480 --> 03:19:41,480
रहने दी हटा दिया मैंने

2800
03:19:45,640 --> 03:19:49,720
ह इसीलिए अवॉइड करा था र्वेद खोलना वेद खोलने

2801
03:19:49,720 --> 03:19:53,840
में थोड़ी समस्या है श्रीराम

2802
03:19:53,840 --> 03:19:59,320
हां भाई ये तो काल सूक्त है

2803
03:19:59,320 --> 03:20:03,480
पूरा उसका भावार्थ पढ़ दीजिए में

2804
03:20:03,480 --> 03:20:07,480
काल को विभिन्न रूपों को काल के विभिन्न रूपों को माध्यम

2805
03:20:07,480 --> 03:20:11,640
से वर्णित किया गया है काल का और इसमें बताया जा रहा

2806
03:20:11,640 --> 03:20:14,720
है काल संपूर्ण

2807
03:20:14,720 --> 03:20:18,880
जग काल संपूर्ण को अनन काल

2808
03:20:18,880 --> 03:20:23,160
रूप परमेश्वर सप्त रश्मी

2809
03:20:23,160 --> 03:20:27,800
सब कुछ काल ही है अविनाशी अजर लो

2810
03:20:27,800 --> 03:20:32,000
लो भाई वेद में आ गया मगर अब बात ये है यह मानेंगे

2811
03:20:32,000 --> 03:20:36,640
नहीं अब ये सूक्ष्म वेद पर चले जाएंगे

2812
03:20:36,640 --> 03:20:40,680
अरे में नहीं कम से कम 30 से 40 मंत्रों में व्याख्या

2813
03:20:40,680 --> 03:20:44,920
कर रखी है दो सूक्तो में 5 और हा हां बिल्कुल

2814
03:20:44,920 --> 03:20:49,040
चलिए बढ़िया है और संकलन बढ़ गया जी

2815
03:20:49,040 --> 03:20:53,400
चलिए हम सुमित दास को ले लेते हैं सुमित दास ड

2816
03:20:53,400 --> 03:20:57,720
टू स्टेज हो गए मैं जी नमस्कार

2817
03:20:57,720 --> 03:21:01,840
आप अपनी स्क्रीन बंद कर दीजिए एक स्क्रीन खुली हुई है ना वो

2818
03:21:01,840 --> 03:21:06,480
हटा दीजिए मेरी खुली है अरे अरे सुमित दास

2819
03:21:06,480 --> 03:21:10,720
आपने शायद फॉर्म भरा था दो चार दिन पहले उसके बाद आप नॉट चेबल

2820
03:21:10,720 --> 03:21:14,400
हो गए थे भरा था क्या नहीं कोई फॉर्म नहीं

2821
03:21:14,400 --> 03:21:18,600
भरा फॉर्म नहीं भरा अच्छा तो आपके गुरु

2822
03:21:18,600 --> 03:21:22,920
रामपाल जी हैं हा

2823
03:21:22,920 --> 03:21:27,120
दीक्षा कब हुई

2824
03:21:27,120 --> 03:21:31,520
आपकी दीक्षा कब हुई आपकी

2825
03:21:31,520 --> 03:21:35,880
नाम दीक्षा मैंने 2012 में ली थी तीन साल का होते मैं 2012

2826
03:21:35,880 --> 03:21:39,880
में तीन साल का हुआ था तब मैं नाम तीन साल की

2827
03:21:39,880 --> 03:21:43,920
आयु में आपने नाम दीक्षा ली थी गोविंद जी कुछ कहना चाह रहे

2828
03:21:43,920 --> 03:21:46,640
हैं पूछिए

2829
03:21:46,640 --> 03:21:50,920
भाई साहब आपने रामपाल जी का वो कौन सा ज्ञान ऐसा देखा जिसको देखने के बाद आपने

2830
03:21:50,920 --> 03:21:55,800
उनका जो है दीक्षा ग्रहण कर ली मैं वो ज्ञान जानना चाहता हूं कोई

2831
03:21:55,800 --> 03:21:59,800
एक मेरी माता जी थी मम्मी जी वो उन्होंने

2832
03:21:59,800 --> 03:22:03,880
2005 से नाम लिया था लेकिन मैं जैसे मम्मी जी ने मेरे

2833
03:22:03,880 --> 03:22:08,680
को नाम दिलाया फिर धीरे धीरे मैंने बड़ा हो करके ग्रंथ वेद समझे थे

2834
03:22:08,680 --> 03:22:12,680
हा उन्होंने मतलब आपको कौन सा ऐसा ज्ञान दिया जो आपने दीक्षा उनसे

2835
03:22:12,680 --> 03:22:16,680
जारी रखी मतलब छोड़ी नहीं उनकी नाम दीक्षा ये कोई ज्ञान मेरे को एक कोई

2836
03:22:16,680 --> 03:22:20,760
ज्ञान दिया होगा ना उन्होने जैसे आप ज्ञान की बात

2837
03:22:20,760 --> 03:22:24,880
कर रहे हैं ज्ञान सभी वेद शास्त्रों पर आधारित ज्ञान है ना कोई

2838
03:22:24,880 --> 03:22:30,880
एक बताइए क्या कोई एक बताइए

2839
03:22:30,920 --> 03:22:34,960
ना आपकी आवाज अच्छे से नहीं आ रही क्या पूछ वो

2840
03:22:34,960 --> 03:22:38,960
पूछ रहे हैं कि उनके द्वारा दिया गया कोई एक ज्ञान

2841
03:22:38,960 --> 03:22:43,680
ऐसा बताइए जो वेद शास्त्रों पर आधारित हो वेद पर

2842
03:22:43,680 --> 03:22:47,680
नहीं पुराणों पर भी चलेगा मेरे लिए अभी जो आपने टॉपिक चला रखा

2843
03:22:47,680 --> 03:22:50,120
है काल

2844
03:22:50,120 --> 03:22:54,520
वाला चलो चलो ठीक है काल प ले लेते शायद हमको जवाब मिल जाए

2845
03:22:54,520 --> 03:22:58,520
शायद हमको जवाब मिल जाए भाई आया शेर का बच्चा एक ही अच्छा ठीक है कोई

2846
03:22:58,520 --> 03:23:02,560
बात नहीं मगर हां मैं कहूंगा भाई कुछ भी बात

2847
03:23:02,560 --> 03:23:06,640
करने से पहले मैं अप्रिशिएट करूंगा आपने साहस दिखाया क्योंकि

2848
03:23:06,640 --> 03:23:10,640
वह लोग जो अपने आप को रक्षक कहते हैं ज्ञानी कहते

2849
03:23:10,640 --> 03:23:14,920
हैं वो लोग पीठ दिखा रहे हैं मुंह छिपा रहे हैं मगर आपने साहस

2850
03:23:14,920 --> 03:23:18,960
दिखाया इसके लिए को जन्म देने वाली मां को मेरा प्रणाम

2851
03:23:18,960 --> 03:23:22,960
है क्योंकि उसने एक साहसी को जन्म दिया जिसने यहां

2852
03:23:22,960 --> 03:23:27,080
तक आने का वोह तो लिया अब आगे आप क्या करते हैं वो बात एक अलग है

2853
03:23:27,080 --> 03:23:31,880
जी बताइए जी तो कौन सा वो एक ऐसा ज्ञान

2854
03:23:31,880 --> 03:23:36,640
है काल की बात हो रही है आप देखिए हमारा प्रश्न स्पष्ट है

2855
03:23:36,640 --> 03:23:40,800
गीता में जो ज्ञान दिया है वो भगवान श्री कृष्ण ने नहीं

2856
03:23:40,800 --> 03:23:45,080
दिया है वो उनसे अलग किसी काल ने दिया है

2857
03:23:45,080 --> 03:23:46,640
तो यह कहां पर

2858
03:23:46,640 --> 03:23:50,720
कहां से सिद्ध होता है वो आप शास्त्र का प्रमाण हमें दे दीजिए

2859
03:23:50,720 --> 03:23:54,920
जसे मैं इसके प्रमाण के लिए बात करू गीता 11

2860
03:23:54,920 --> 03:23:59,240
लोक 32 में लिखा है लोगों का नाश करने वाला बढ़ावा मकाल

2861
03:23:59,240 --> 03:24:03,280
हूं इस समय स्थित यो योद्धा लोग है वे सब तेरे

2862
03:24:03,280 --> 03:24:07,280
बिना इन लोगों को नष्ट करने के लिए प्रवत हुआ

2863
03:24:07,280 --> 03:24:11,280
हूं इसलिए जो प्रति पक्षियों की

2864
03:24:11,280 --> 03:24:15,400
सेना में भी नहीं रहेंगे अर्थात तेरे युद्ध ना करने से भी इन सबका

2865
03:24:15,400 --> 03:24:18,240
नाश हो जाएगा

2866
03:24:18,240 --> 03:24:22,640
सवाल ये है आपने मेरा सवाल सवाल यह है ये

2867
03:24:22,640 --> 03:24:26,640
काल सुनिए सुनिए सुनिए सुनि यह देखिए हमने बहुत

2868
03:24:26,640 --> 03:24:30,640
सारे प्रमाण दिए हैं कि जो काल जिसे कहा जा रहा है वह कृष्ण को ही

2869
03:24:30,640 --> 03:24:34,680
कहा जा रहा है मगर अगर आप य वो वाले प्रमाण हमारे नहीं अभी देख

2870
03:24:34,680 --> 03:24:37,720
रहे थे आप नहीं देख रहे

2871
03:24:37,720 --> 03:24:41,720
थे भाई साब कुछ बोल रहा हूं मैं कुछ बोल रहा हूं मैंने आपकी बात बहुत

2872
03:24:41,720 --> 03:24:45,880
प्यार से सुनी मेरा प्रश्न यह है कि हमने इस बारे में बहुत

2873
03:24:45,880 --> 03:24:49,960
से प्रमा दे दिए कि वो जो काल है वो कृष्ण ही है आपको वो

2874
03:24:49,960 --> 03:24:54,480
नहीं मानने बात की बात है वो बात की बात है अभी आप मुझे यह बताइए

2875
03:24:54,480 --> 03:24:58,760
कृष्ण यह कहां लिखा है कि वो जो ज्ञान है कृष्ण से

2876
03:24:58,760 --> 03:25:01,840
अलग काल ने दिया है अलग यह शब्द कहां

2877
03:25:01,840 --> 03:25:06,640
पर है वो कृष्ण ने नहीं बल्कि काल ने दिया यह कहां लिखा

2878
03:25:06,640 --> 03:25:10,840
है यह तो कृष्ण की 11

2879
03:25:10,840 --> 03:25:15,320
श्लोक 32 जो है उसम स्पष्ट लिखा है मैं बड़ा हुआ महाकाल हूं

2880
03:25:15,320 --> 03:25:19,320
लेकिन प्रित हुआ हू लेकिन श्री कृष्ण जी जो

2881
03:25:19,320 --> 03:25:24,120
थे वो तो अर्जुन के साथ बहुत समय से वार्तालाप कर

2882
03:25:24,120 --> 03:25:28,680
अच्छा अच्छा एक बात बताओ एक बात बताओ एक बात बताओ

2883
03:25:28,680 --> 03:25:33,040
एक बात बताओ अगर कबीर जी यहां पर तुम्हारे बीच में आ जाएंगे

2884
03:25:33,040 --> 03:25:37,080
आए भी थे ठीक है आए थे ना

2885
03:25:37,080 --> 03:25:41,320
आए थे कि नहीं आए थे 600 वर्ष पूर्व आए थे आए थे ठीक है

2886
03:25:41,320 --> 03:25:45,720
अब उसे अगर क्या वो अपने शरीर को बड़ा कर सकते हैं द

2887
03:25:45,720 --> 03:25:50,080
सर वाला 20 सर वाला भगवान

2888
03:25:50,080 --> 03:25:54,120
कुछ भी कर सकता है यानी कि जब वह बड़ा करेंगे

2889
03:25:54,120 --> 03:25:58,440
तो क्या वह तुमसे यह बात कह सकते हैं कि मैं इस समय बड़ा हुआ वो हूं

2890
03:25:58,440 --> 03:26:02,440
बड़ा किया है मैंने अपने आपको भगवान कभी भी अपने आपको को महाकाल

2891
03:26:02,440 --> 03:26:06,600
नहीं कह सकता और दूसरी बात मिनट मिनट मिनट समझ

2892
03:26:06,600 --> 03:26:11,000
गया आप बता दीजिए कहां पर लिखा है भगवान कभी अपने आप को महाकाल

2893
03:26:11,000 --> 03:26:15,200
नहीं कह सकता कहां लिखा है बताइए भगवान कभी

2894
03:26:15,200 --> 03:26:16,840
अपने आप को महाकाल कह सकता है

2895
03:26:16,840 --> 03:26:20,960
ये कि कहां प लिखा है शास्त्र की प्रमाण दीजिए

2896
03:26:20,960 --> 03:26:25,040
महाकाल अपने आपको काल भगवान अपने आपको काल नहीं कह सकता

2897
03:26:25,040 --> 03:26:29,160
कहां लिखा है सबसे पहले मैं एक

2898
03:26:29,160 --> 03:26:33,240
ब भाई साब देखिए बात की बात होगी बात की

2899
03:26:33,240 --> 03:26:37,360
बात आपने कहा भगवान अपने आप को काल नहीं कह सकता कहां

2900
03:26:37,360 --> 03:26:40,960
लिखा

2901
03:26:40,960 --> 03:26:45,080
है अभी मेरे को बोल बोलने दिया जाए क्या

2902
03:26:45,080 --> 03:26:49,200
भाई साहब शास्त्र के नाम से बात शुरू करिए नहीं तो मानिए कि इसके बारे

2903
03:26:49,200 --> 03:26:53,720
में मेरे पास कोई प्रमाण नहीं है शास्त्र के नाम से बात शुरू करिए

2904
03:26:53,720 --> 03:26:57,880
शास्त्र का नाम बोलिए आप अगर शास्त्र

2905
03:26:57,880 --> 03:27:01,920
का नाम बोलेंगे तो बोलिए अन्यथा रहने दीजिए राम राम श्याम श्याम शास्त्र का

2906
03:27:01,920 --> 03:27:05,800
नाम

2907
03:27:05,800 --> 03:27:10,000
बताइए आपको प्यार से सम रहा एक बार आपको सामान्य भाषा

2908
03:27:10,000 --> 03:27:14,080
में समझा रहा हंब आपको होना होगा आपको

2909
03:27:14,080 --> 03:27:18,400
चुप होना होगा आपको चुप हो हो मेरी बात समझिए आपने

2910
03:27:18,400 --> 03:27:22,760
अभी एक सिद्धांत दिया परमेश्वर कभी अपने आप को काल

2911
03:27:22,760 --> 03:27:26,800
नहीं बोल सकता ठीक यह सिद्धांत दिया आपने यह

2912
03:27:26,800 --> 03:27:31,920
सिद्धांत कहां पर लिखा है बताइए

2913
03:27:31,920 --> 03:27:36,080
हमें अब जो आपका अगला वर्ड होगा अब आपका अगला वर्ड होगा

2914
03:27:36,080 --> 03:27:40,240
वो शास्त्र का नाम होना चाहिए या फिर यह बता दीज कह दीजिए

2915
03:27:40,240 --> 03:27:45,120
कि नहीं यह मुझे नहीं पता कि शास्त्र में कहां लिखा है तो हम आगे बात करें

2916
03:27:45,120 --> 03:27:47,240
बताइए

2917
03:27:47,240 --> 03:27:51,720
यह स्पष्ट नहीं लिखा है शास्त्रों में आपको नहीं पता

2918
03:27:51,720 --> 03:27:56,080
आपको नहीं पता कि शास्त्र में कहां लिखा है स्पष्ट

2919
03:27:56,080 --> 03:28:00,240
नहीं लिखा है शा में स् नहीं स्पष्ट का मतलब होता है कि आपके

2920
03:28:00,240 --> 03:28:04,440
पता है मगर वह मिट गया सई उसकी धुली पड़ गई

2921
03:28:04,440 --> 03:28:08,640
है आपको पता है कि कहां है मगर वह सई धुल गई है भैया

2922
03:28:08,640 --> 03:28:12,720
वह अटेंप्ट कर रहे हैं कुछ करो बारबार मेरी स्क्रीन पर आ जाते है वो रिक्वेस्ट

2923
03:28:12,720 --> 03:28:17,440
आ जाती है वो नहीं होगा

2924
03:28:17,440 --> 03:28:21,760
ये कॉमन सी बात है भगवान अपने

2925
03:28:21,760 --> 03:28:25,920
आप देखिए देखिए देखिए सुमित जी आप मेरे सामने छोटे हो

2926
03:28:25,920 --> 03:28:30,000
मैं आपको बेटा कहूंगा सुमित बेटा जो शास्त्र का आप

2927
03:28:30,000 --> 03:28:34,120
जब यह बात करते हैं कि शास्त्र हमारी जो भक्ति है वह शास्त्र सम्मत

2928
03:28:34,120 --> 03:28:38,680
है हमारी सारी बातें शास्त्र

2929
03:28:38,680 --> 03:28:42,800
की अपने आपको महाकाल नहीं कह सकते यह

2930
03:28:42,800 --> 03:28:46,880
शास्त्र में यदि नहीं लिखा है तो आपको यह मान

2931
03:28:46,880 --> 03:28:51,480
इतनी बात हमारी शास्त्रों के बाहर है मनम है

2932
03:28:51,480 --> 03:28:55,880
इतनी बात हमारी शास्त्रों के बाहर की बात है मन्मुख बात है बेटा मानना पड़ेगा

2933
03:28:55,880 --> 03:29:00,040
अगर आपके पासर पास

2934
03:29:00,040 --> 03:29:06,040
प्रमाण सुन पहले इसको खत्म करेंगे तब सुनूंगा पहले इसको पूरा

2935
03:29:07,240 --> 03:29:11,360
करेंगे मैं पहले अपना क्लियर कर लू आपको किस बारे में जवाब देना

2936
03:29:11,360 --> 03:29:17,360
है कि ईश्वर अपने आप को महाकाल या काल नहीं

2937
03:29:18,520 --> 03:29:22,560
का प्रमाण देना है आपका अगला जो वर्ड होगा वह शास्त्र

2938
03:29:22,560 --> 03:29:26,680
का निकलना चाहिए या फिर आपको यह बोलना है कि

2939
03:29:26,680 --> 03:29:30,880
नहीं भाई इतने अंश में हमारी जो बात है व मनमुक जैसे अभी आपने कहा कॉमन

2940
03:29:30,880 --> 03:29:34,960
सी बात है ठीक है आपके लिए

2941
03:29:34,960 --> 03:29:39,080
जो कॉमन है हमारे लिए कॉमन नहीं है हमारे लिए जो कॉमन है आपके

2942
03:29:39,080 --> 03:29:43,200
लिए कॉमन नहीं है आप जो है जैसा

2943
03:29:43,200 --> 03:29:47,320
कि बताया गया मैं कंफर्म नहीं हूं आप उनका नहाया हुआ खीर खा लेंगे

2944
03:29:47,320 --> 03:29:51,320
हमारे लिए वो कॉमन नहीं है और हम जो है गोबर की पूजा

2945
03:29:51,320 --> 03:29:55,400
करते हैं वो आपने र की बात की देखिए

2946
03:29:55,400 --> 03:30:00,200
भाई साब विषयात मत करिए विषयात प मत जाइए भाई साहब भाई साहब

2947
03:30:00,200 --> 03:30:04,280
भाई इनको भाई म्यूट करो भैया भैया वो मैं अपनी बात खत्म कर रहा हूं

2948
03:30:04,280 --> 03:30:08,360
आप मुझे विषय पर रहिए वह मैं बात अपनी खत्म कर रहा हूं मैं आपसे कह

2949
03:30:08,360 --> 03:30:12,480
रहा हूं जो आपके लिए कॉमन है सुन लो बेटा बेटा सुन लो अभी आपकी

2950
03:30:12,480 --> 03:30:16,600
आवाज नहीं आ रही अभी आप म्यूट हो अभी आप म्यूट हो बेटा

2951
03:30:16,600 --> 03:30:20,960
अभी आप म्यूट हो अभी आप म्यूट

2952
03:30:20,960 --> 03:30:22,400
हो अभी

2953
03:30:22,400 --> 03:30:26,400
मेरी बात सुन लो मैं आपको उदाहरण दे रहा था कि जो हमारे लिए कॉमन

2954
03:30:26,400 --> 03:30:30,720
है वोह आपके लिए कॉमन नहीं है जो आपके लिए कॉमन है

2955
03:30:30,720 --> 03:30:35,440
वो हमारे लिए कॉमन नहीं है इसीलिए भगवान श्री कृष्ण ने

2956
03:30:35,440 --> 03:30:40,120
लोगों के बीच में कॉमन को लेकर के लड़ाई ना हो एक बात कही थी

2957
03:30:40,120 --> 03:30:44,440
भगवत गीता सवा अध्याय 24 वा श्लोक तेरे लिए

2958
03:30:44,440 --> 03:30:49,160
कर्तव्य और अ कर्तव्य के विषय में एक मात्र

2959
03:30:49,160 --> 03:30:53,200
शास्त्र प्रमाण है आप हमें शास्त्र

2960
03:30:53,200 --> 03:30:57,320
से दीजिए प्रमाणम ईश्वर ईश्वर जो है अपने

2961
03:30:57,320 --> 03:31:01,480
को महाकाल नहीं कह सकता अन्यथा यह बात कहिए कि

2962
03:31:01,480 --> 03:31:05,720
इतने अंश में जो हमारी भक्ति है वो मनमुक है तो हम आगे

2963
03:31:05,720 --> 03:31:10,000
चले अन्यथा आपका आने के लिए धन्यवाद फिर किसी दिन अगले चैप्टर में मिलेंगे

2964
03:31:10,000 --> 03:31:14,040
बहुत लोग हैं बात करने के लिए बताइए आप

2965
03:31:14,040 --> 03:31:18,440
स्पष्ट एक तो मनमुक नहीं कह सकते पहले मेरा जवाब पूरा नहीं हुआ

2966
03:31:18,440 --> 03:31:22,520
आपने कहा कि ये कहीं नहीं लिखा है आपने खुद

2967
03:31:22,520 --> 03:31:26,680
कहा होने दीजिए स्पष्ट मेरा जवाब जो

2968
03:31:26,680 --> 03:31:30,720
शास्त्र का प्रमाण देना है भाई साहब आपको शास्त्र का प्रमाण देना है

2969
03:31:30,720 --> 03:31:34,760
हां या ना में बता दीजिए शास्त्र का प्रमाण है आप सुनने के

2970
03:31:34,760 --> 03:31:37,560
लिए इसलिए तैयार नहीं है क आप आपका

2971
03:31:37,560 --> 03:31:42,240
आने के लिए धन्यवाद आने के लिए धन्यवाद आपका आने के लिए धन्यवाद

2972
03:31:42,240 --> 03:31:46,280
भाई है या नहीं अंत में बात होती क्या है ना देखो मैं

2973
03:31:46,280 --> 03:31:50,280
इनको क्यों हटाता हूं य समझो यह जाने से पहले कोई सीन क्रिएट

2974
03:31:50,280 --> 03:31:54,480
करना चाहते हैं यह कोई ऐसा दृश्य

2975
03:31:54,480 --> 03:31:58,720
बनाना चाहते हैं जाने से पहले कि हमारी बाबाई हो या उसका रील

2976
03:31:58,720 --> 03:32:02,760
काट करके हम लोगों को दिखाए इसलिए वो बात बोलने से पहले

2977
03:32:02,760 --> 03:32:08,240
जब यह निरस्त हो जाते निरुत्तर हो जाते निराधार हो जाते हैं तब मैं इनको हटाता

2978
03:32:08,240 --> 03:32:12,800
हूं जब इनसे शास्त्र पूछा जा रहा है कहां लिखा है

2979
03:32:12,800 --> 03:32:17,360
सिद्धांत क्यों दिया और अगर दिया तो मानो कि मैंने गलत बोल दिया

2980
03:32:17,360 --> 03:32:22,200
या वो भक्ति मेरी मनमुक है मान लो फिर आगे चलते

2981
03:32:22,200 --> 03:32:25,080
हैं

2982
03:32:25,080 --> 03:32:29,080
भैया और जो ये खीर वाली बात है भैया यह लोगों के

2983
03:32:29,080 --> 03:32:33,080
द्वारा बताई जा रही है हम इसमें कोई कंफर्म नहीं है यह जांच का विषय

2984
03:32:33,080 --> 03:32:37,200
है कि खीर खाई जा और मैंने वहां कॉमन के उदाहरण के लिए दिया था

2985
03:32:37,200 --> 03:32:41,200
और भी कोई कॉमन के उदाहरण के लिए दे सकता हूं जैसे तत्व आपके

2986
03:32:41,200 --> 03:32:45,240
लिए रामपाल जी तत्वदर्शी संत है आपके लिए

2987
03:32:45,240 --> 03:32:49,840
कॉमन बात हमारे लिए नहीं है हम नहीं मानते उन्हें तत्वदर्शी हो

2988
03:32:49,840 --> 03:32:54,280
गया खीर का उदाहरण हटा दो ठीक है

2989
03:32:54,280 --> 03:32:58,640
यह अटेंप्ट अभी मत अटेंप्ट अभी ना करें अभी यह जो स्टूडियो

2990
03:32:58,640 --> 03:33:04,640
है फुल है अटेंप्ट अभी ना

2991
03:33:04,840 --> 03:33:07,120
करें

2992
03:33:07,120 --> 03:33:11,200
जी चलिए अब स्ट्रीम को पूरा करते हैं साढ़े तीन घंटे की

2993
03:33:11,200 --> 03:33:16,400
हो चुकी है और आज ये लोग यह नहीं बता पाए कि

2994
03:33:16,400 --> 03:33:20,600
काल का जवाब काल का विवरण कहां

2995
03:33:20,600 --> 03:33:26,600
दिया है तब तक गोविंद गुरकुल जी आप बात

2996
03:33:29,160 --> 03:33:33,160
करें अभी जैसे जो छोटा भाई आया था

2997
03:33:33,160 --> 03:33:37,320
ना हमारा मैं आपको एक बात बताता हूं जितने भी जो लोग टीनेजर

2998
03:33:37,320 --> 03:33:41,400
है खास करके ठीक है उनमें जोश ज्यादा होता है लेकिन दिक्कत उनके लिए

2999
03:33:41,400 --> 03:33:45,440
बहुत होती है हम जो सारे जने बैठे हैं ना सारे तीन तीन चार चार

3000
03:33:45,440 --> 03:33:49,800
घंटे पता है हम क्यों बैठे हुए हैं पंडित जी बैठे हैं हमारे

3001
03:33:49,800 --> 03:33:53,800
प्रभु जी जो एडमिन है यहां पर ठीक है शिवांश भाई बैठे हुए हैं हम

3002
03:33:53,800 --> 03:33:57,800
इसलिए बैठे हुए हैं ताकि आपको शास्त्र खोलकर आपके शास्त्र

3003
03:33:57,800 --> 03:34:02,040
पढ़ा सके ठीक है तो हमें अपना दुश्मन ना समझिए

3004
03:34:02,040 --> 03:34:06,160
यदि हम आपको अपना दुश्मन समझते ना तो हर एक प्रकार से केवल आपको नीचा

3005
03:34:06,160 --> 03:34:10,160
दिखाते छोटे-छोटे बच्चे भी आते हैं ना यदि तो हम उनसे पूरी

3006
03:34:10,160 --> 03:34:14,240
बात करते हैं ठीक है ऐसा नहीं उनको जग जोड़ के हम भगा देते

3007
03:34:14,240 --> 03:34:18,440
हैं सारे ग्रंथों के प्रमाण देते हैं सारे तर्क वितर्क करते हैं लेकिन

3008
03:34:18,440 --> 03:34:19,920
जो व्यक्ति य समझे कि यह

3009
03:34:19,920 --> 03:34:24,000
लोग तो वेले हैं य साढ़े तीन चार घंटे ऐसे ही फूक देते हैं अपने

3010
03:34:24,000 --> 03:34:28,040
तो मैं बस अपने उन लोगों से कहना चाहूंगा जो हमारे छोटे भाई बहन हम

3011
03:34:28,040 --> 03:34:32,040
आपके लिए कदर नहीं करते ना तो इतने ग्रंथ ना हम खरीदते

3012
03:34:32,040 --> 03:34:36,040
ना हम उनको खोलते ना उनके रेफरेंसेस ढूंढते ना

3013
03:34:36,040 --> 03:34:40,240
पर टैग लगाते ना उनको हाईलाइट से मार्क करते हम कुछ नहीं करते

3014
03:34:40,240 --> 03:34:44,400
हम केवल आपके साथ झगड़ा करते हम आपको बस यह बता रहे हैं कि

3015
03:34:44,400 --> 03:34:48,600
जो जो ग्रंथों में सत्य के प्रमाण है ना वहां से आपको

3016
03:34:48,600 --> 03:34:52,680
बस एक डेढ़ श्लोक दे दिया गया है परंतु एक डेढ़ बात

3017
03:34:52,680 --> 03:34:56,680
सुनकर आप किसी फैसले पर नहीं पहुंच सकते क्योंकि यह अन्याय है

3018
03:34:56,680 --> 03:35:01,480
जज को जाकर यदि कोई बोल दे कि हां मैंने इसको देखा इसने मारा

3019
03:35:01,480 --> 03:35:05,800
तो क्या वह मेरे को खून के इल्जाम में अंदर कर दे यानी वह फैसले पर पहुंच जाए नहीं पहुंचेगा

3020
03:35:05,800 --> 03:35:09,920
ना क्या मारा कब मारा किसने मारा

3021
03:35:09,920 --> 03:35:13,960
पता चले कि मैंने तो उसको खाली कंकड़ मारा था ठीक है तो बात

3022
03:35:13,960 --> 03:35:18,440
चल रही थी मर्डर की तो उसने मेरे को अंदर बुद्धि

3023
03:35:18,440 --> 03:35:22,520
और विवेक से ध्यान से यह बातों को सोचिए कोई भी विषय पूरा

3024
03:35:22,520 --> 03:35:26,680
जाना जाता है तभी उसका निर्णय होता है यह तर्क संगत

3025
03:35:26,680 --> 03:35:30,920
और बुद्धि संगत बात है अपने कोई यदि आपका मित्र है ना जो थोड़ा

3026
03:35:30,920 --> 03:35:35,000
भी स्याना है उससे पूछ लीजिए वो भी आपको यही बात बोलेगा ठीक है यह मेरा

3027
03:35:35,000 --> 03:35:39,040
संदेश था आप सब लोगों के लिए हम आपके शत्रु नहीं है हम

3028
03:35:39,040 --> 03:35:43,080
किसी के शत्रु नहीं है ना इकन ना आर्य समाज

3029
03:35:43,080 --> 03:35:47,120
हम सबको अपने साथ लेकर चलना चाहते हैं इसलिए यहां पर बैठे हुए

3030
03:35:47,120 --> 03:35:53,120
यही मेरा पूरा का पूरा संदेश

3031
03:35:55,720 --> 03:35:59,880
था मनीष जी आए हैं मनीष जी अपना

3032
03:35:59,880 --> 03:36:03,280
परिचय जय श्री

3033
03:36:03,280 --> 03:36:07,520
राम जय श्री राम अनूट कर लीजिए भैया

3034
03:36:07,520 --> 03:36:11,960
जय सियाराम जय श्री राम जय श्री राम शिवांशु

3035
03:36:11,960 --> 03:36:16,000
भैया मुझे जानते हैं और मैं राम चौधरी 952 नंबर है

3036
03:36:16,000 --> 03:36:20,080
मेरे ओ हो हो हो अच्छा अच्छा अच्छा अरे बड़ा बहुत

3037
03:36:20,080 --> 03:36:24,240
बढ़िया बहुत बढ़िया अरे वो काल का बात कर रहे अनन्य

3038
03:36:24,240 --> 03:36:28,280
भक्त राम जी के श्री राम जी के अनन्य भक्त है और

3039
03:36:28,280 --> 03:36:32,400
मुझे इनसे जलेस होती है मुझे लगता है ये ज्यादा बड़े भक्त है तो थोड़ा सा जलस भी होता

3040
03:36:32,400 --> 03:36:36,400
हूं मैं इनसे बहुत सुंदर बहुत

3041
03:36:36,400 --> 03:36:40,520
सुंदर मेरा वो बताया काल की बात कर रहे थे तो

3042
03:36:40,520 --> 03:36:44,560
भगवान शिव ने महारामायण के पांच सर्ग में लिखा है कि देवी

3043
03:36:44,560 --> 03:36:48,720
जो काल महाकाल भगवान के दोनों दंड स्वरूप है जो काल महाकाल

3044
03:36:48,720 --> 03:36:50,280
रूप में होकर है ना इन दुष्टों

3045
03:36:50,280 --> 03:36:54,280
को दंड देते हैं महा रामायण में मेरे पास प्रमाण भी अभी मैं

3046
03:36:54,280 --> 03:36:56,560
दे देता

3047
03:36:56,560 --> 03:37:02,560
आपको इसका लिखा हुआ है गदा श्र महा कालो यम

3048
03:37:07,240 --> 03:37:11,320
डांड आवाज कट गई आप महारामायण वशिष्ठ की बात कर रहे

3049
03:37:11,320 --> 03:37:16,600
हैं क्या जो वाल्मीकि जी द्वारा

3050
03:37:16,600 --> 03:37:20,640
विशेष ग्रंथ है सुनो भगवान

3051
03:37:20,640 --> 03:37:24,680
का राम जी का अवतार कल के रामायण में लिखा हुआ अलग अलग कल्पों में अलग अलग

3052
03:37:24,680 --> 03:37:28,920
तरीके है ये बात आप भी जानते हम भी जानते भगवान

3053
03:37:28,920 --> 03:37:33,080
श्री राम है पर परम भगवान इसलिए है कि वो अलग अलग कल्पों

3054
03:37:33,080 --> 03:37:37,120
में जैसे भगवान विष्णु से होते हुए अवतार ले लेते है कभी दुर्गा देवी से अवतार ले लेते हैं

3055
03:37:37,120 --> 03:37:41,160
क्योंकि ो वो मानव रूप में तो सबके भक्त बन जाते हैं लेकिन वो

3056
03:37:41,160 --> 03:37:45,480
सबके ईश्वर भी है उनका कोई आदि नहीं है इसका कारण यह है कि अब मैंने

3057
03:37:45,480 --> 03:37:49,960
महारामायण में इसलिए बात किया भगवान शंकर ने परब्रह्म रामायण महारा

3058
03:37:49,960 --> 03:37:54,280
माता पार्वती को महारामायण सुनाई थी ना कनक भवन महाराज की जिसमें 9 महारास

3059
03:37:54,280 --> 03:37:58,560
हुआ था एक महारास बच गया था जो वृंदावन में भगवान श्री कृष्ण ने पूरा

3060
03:37:58,560 --> 03:38:02,680
किया था 99 महारास सतरा कलप के प्रथम अवंतर में भगवान श्री

3061
03:38:02,680 --> 03:38:05,280
राम का जब अवतार हुआ था उस समय पूरा किया था

3062
03:38:05,280 --> 03:38:09,440
उन्होंने और एक महाराज जयंत के कारण छूट गया था तो उसम

3063
03:38:09,440 --> 03:38:13,720
लिखा हुआ है ये बात वहां पर और कवि के बारे में लिखा हुआ वहां पर महारामायण

3064
03:38:13,720 --> 03:38:17,760
में देवी पार्वती क भी कवि महाकवि प्रभु श्री राम ही है और

3065
03:38:17,760 --> 03:38:21,800
कोई नहीं है क्योंकि रामायण है एक मानते हो आप

3066
03:38:21,800 --> 03:38:25,960
पुराणों में देखो हम मानते भगवान के सभी रूपों का वर्णन किया गया है लेकिन परब्रह्म

3067
03:38:25,960 --> 03:38:29,960
का वर्णन अलग से रामायण में क्यों किया गया अलग-अलग तरीके से भगवान शंकर अपने

3068
03:38:29,960 --> 03:38:34,000
तरीके से अपने इष्ट का वर्णन करते हैं काग संत जी अपनी तरीके से अपने इष्ट का वर्णन करते हैं

3069
03:38:34,000 --> 03:38:38,000
यानी अलग-अलग तरीके से वर्णन किया है देखो ब्रह्म रामायण भी आती है दुर्गा रामायण

3070
03:38:38,000 --> 03:38:42,280
भी आती है हनुमान जी के रामायण को आती है सुनते अलग-अलग रामायण है तो इसलिए

3071
03:38:42,280 --> 03:38:47,760
राम जी के बारे में मतलब उनका हर रूप है ना अलग-अलग तरीके

3072
03:38:47,760 --> 03:38:52,080
से जी मैं एक बात कहूंगा यहां पे

3073
03:38:52,080 --> 03:38:56,600
कि अभी एक बात पूछी जा रही है कि वाई

3074
03:38:56,600 --> 03:39:00,720
हिंदू आर फाइटिंग ये इनाया

3075
03:39:00,720 --> 03:39:04,720
करके कोई आईडी है उससे पूछी जा रही है वाई हिंदू आर फाइटिंग

3076
03:39:04,720 --> 03:39:08,800
तो मैं उनसे पूछना चाहूंगा कि हिंदुओं की परिभाषा क्या होगी

3077
03:39:08,800 --> 03:39:12,840
क्या हिंदू वो है जो अल्लाह की तरह सातवें आसमान पर

3078
03:39:12,840 --> 03:39:17,080
कबीर को बिठा है और अल्लाह के जैसा ईश्वर क्या हिंदू वो है हिंदू

3079
03:39:17,080 --> 03:39:20,320
की परिभाषा वह है या फिर

3080
03:39:20,320 --> 03:39:25,240
वेदों में प्रमाण बुद्धि रखने वाला हिंदू है

3081
03:39:25,240 --> 03:39:29,480
कौन है हिंदू और अगर मान लीजिए कि वह भटका

3082
03:39:29,480 --> 03:39:33,560
हुआ हिंदू है तो उसी को तो हम भटकने से बचाने का प्रयास कर रहे हैं

3083
03:39:33,560 --> 03:39:36,920
हम कौन सा लठ मार रहे

3084
03:39:36,920 --> 03:39:41,920
हैं एक एक भाई साहब अभी भी पूछ रहे हैं कि

3085
03:39:41,920 --> 03:39:46,080
क्या जो ईश्वर है उसकी उसकी व माता के गर्भ

3086
03:39:46,080 --> 03:39:50,160
से जन्म नहीं ले सकता भाई जीव भी माता

3087
03:39:50,160 --> 03:39:54,200
के गर्भ से जन्म नहीं ले सकता अगर वास्तविक उसका देखे तो

3088
03:39:54,200 --> 03:39:58,280
जो जीव है आत्मा वह भी माता के गर्भ से जन्म नहीं ले

3089
03:39:58,280 --> 03:40:03,000
सकती आत्मा तो अजन्मी है आत्मा के लिए शब्द आया ना जन्म

3090
03:40:03,000 --> 03:40:07,040
तो फिर जन्म कैसे हो रहा है उसका तो ये मानना पड़ेगा कि एक आपका

3091
03:40:07,040 --> 03:40:11,680
तात्विक रूप है पर्थ स्वरूप आत्मा है और व्यवहारिक

3092
03:40:11,680 --> 03:40:17,640
स्वरूप उस रूप में आप जन्म लेते हो

3093
03:40:17,640 --> 03:40:22,280
और इसी प्रकार से ईश्वर का तात्विक स्वरूप है अजन्मा

3094
03:40:22,280 --> 03:40:26,280
अविनाशी मगर फिर भी वह अपने साधु भक्तों के उद्धार के लिए व्यवहारिक

3095
03:40:26,280 --> 03:40:30,880
हो जाते हैं सरल हो जाते हैं भक्त बन के प्रकट हो जाते हैं रक्षक बन के प्रकट हो जाते हैं

3096
03:40:30,880 --> 03:40:35,080
भाई बन के प्रकट हो जाते हैं इनको पता ही नहीं है

3097
03:40:35,080 --> 03:40:39,160
सीधा जवाब नहीं दे पाएंगे संदीप जी हम इनसे ऐसे गुण तत्व

3098
03:40:39,160 --> 03:40:43,400
वाले सवाल पूछ लेंगे तो हमें चार घंटे लग जाएंगे अपना सवाल

3099
03:40:43,400 --> 03:40:46,240
समझाने में

3100
03:40:46,240 --> 03:40:50,600
इनको नहीं पता इनका अंतिम प्रमाण क्या

3101
03:40:50,600 --> 03:40:54,800
है तो इसलिए ऐसे ऐसे सवाल ना पछवा हमसे

3102
03:40:54,800 --> 03:40:59,920
कि हमें अपना सर दूसरे दिन मुंडवाना पड़ जाए

3103
03:40:59,920 --> 03:41:04,160
तो मैं यह कह रहा था अब दोबारा आ जाते हैं आज काल की हमने पूछी चार

3104
03:41:04,160 --> 03:41:08,440
पांच लोगों से पूछी भाई गीता जो है काल ने बोली है श्री कृष्ण से अलग

3105
03:41:08,440 --> 03:41:12,440
काल ने बोली है क्योंकि जहां से आप रेफरेंस दे रहे हैं वहां से वो श्री कृष्ण

3106
03:41:12,440 --> 03:41:16,560
के साथ सिद्ध हो रहा है वो श्री कृष्ण ही है और इसके अलावा हमने

3107
03:41:16,560 --> 03:41:20,840
अथर्ववेद अनेका अनेक प्रमाण दे दिए कि श्री कृष्ण

3108
03:41:20,840 --> 03:41:25,280
और काल में कोई अंतर नहीं है वह श्री कृष्ण ही काल है राम है शिव है सब है ठीक

3109
03:41:25,280 --> 03:41:29,720
अब आप अलग होने का प्रमाण हमें दे दीजिए शास्त्र से अच्छा हमारे

3110
03:41:29,720 --> 03:41:32,960
प्रमाण तो आप नहीं मानोगे ठीक है हम मान लेंगे

3111
03:41:32,960 --> 03:41:37,160
हमें आप शास्त्र से प्रमाण दे दीजिए कि वह जो

3112
03:41:37,160 --> 03:41:43,160
काल है वह श्री कृष्ण नहीं है दे दीजिए प्रमाण

3113
03:41:45,400 --> 03:41:48,120
जय श्री

3114
03:41:48,120 --> 03:41:52,360
राम ये शिवाजी गिरी क्यों आ गए आप तो अभी चले गए थे ना

3115
03:41:52,360 --> 03:41:55,440
आप क्यों आ गए

3116
03:41:55,440 --> 03:41:59,760
वापस सात्विक गौतम जी अपना फेस दिखाए

3117
03:41:59,760 --> 03:42:04,120
नहीं तो अब फिर इस स्ट्रीम को बढ़ाएंगे क्योंकि बहुत देर हो गई लगभग 5

3118
03:42:04,120 --> 03:42:08,200
बजे से चल रही है और पौने बज

3119
03:42:08,200 --> 03:42:13,120
रहा है इस समय तो बढ़ाना होगा दिवाली का टाइम है सबके घर में वो

3120
03:42:13,120 --> 03:42:17,120
सफाई चल रही होगी मेरे ख्याल से और तेरस की तैयारियां चल रही

3121
03:42:17,120 --> 03:42:21,680
होंगी जो लोग भी देख रहे हैं जो समर्थक है

3122
03:42:21,680 --> 03:42:25,760
उनको मैं कहूंगा भाई कि केवल टब

3123
03:42:25,760 --> 03:42:29,880
पर जुड़ने से कुछ नहीं होगा सबसे पहले कुछ करना है तो भगवान के नाम का जप

3124
03:42:29,880 --> 03:42:34,720
शुरू कर दीजिए भगवान का नाम लेना शुरू कर दीजिए केवल

3125
03:42:34,720 --> 03:42:38,720
शास्त्र का बल दिखाने से कुछ नहीं होगा केवल दंब भरने

3126
03:42:38,720 --> 03:42:42,840
से कुछ नहीं होगा तो नाम जब से जुड़िए बहुत

3127
03:42:42,840 --> 03:42:47,080
अच्छा अभियान चल रहा है बहुत अच्छी अच्छी बातें भी होती उसम थोड़ी बहुत वहां पर

3128
03:42:47,080 --> 03:42:48,520
गल मीट में हमारी

3129
03:42:48,520 --> 03:42:52,560
और एकत्व आ रहा है नाम जप अभियान में दिन भर में

3130
03:42:52,560 --> 03:42:56,640
पांच राउंड हम करते हैं पंच देवों का नाम जप और सुबह एक बार मैं

3131
03:42:56,640 --> 03:43:00,640
स्पेशल वाला वो लेता हूं सेशन जिसमें की नाम जप हम लोग

3132
03:43:00,640 --> 03:43:04,680
सवा घंटे का एक साथ करते हैं श्री राम के नाम का तो जो भी भाई

3133
03:43:04,680 --> 03:43:08,960
बहन जुड़ना चाहते हैं उसमें और अपने आप को अनुशासित करना चाहते

3134
03:43:08,960 --> 03:43:13,040
हैं भगवन नाम जप से तो आप उससे जुड़ सकते हैं उसके

3135
03:43:13,040 --> 03:43:17,120
लिए आपको 7483 869 इस नंबर पर

3136
03:43:17,120 --> 03:43:21,800
ट मात्र करना है इसके अलावा

3137
03:43:21,800 --> 03:43:26,080
इसके अलावा यदि किसी प्रकार का वैचारिक मतभेद

3138
03:43:26,080 --> 03:43:30,240
है माता जी वाला साहस है

3139
03:43:30,240 --> 03:43:34,960
तो आप आए और सिद्ध करें कि गीता का ज्ञान जो है वो

3140
03:43:34,960 --> 03:43:39,200
श्री कृष्ण से अलग काल ने दिया था श्री कृष्ण से अलग

3141
03:43:39,200 --> 03:43:43,240
काल ने ठीक है दूसरी बात धर्म रक्षा अभियान के लिए

3142
03:43:43,240 --> 03:43:48,160
जुड़ना चाहते हैं तो जुड़े और अगर

3143
03:43:48,160 --> 03:43:52,160
एक क्लासेस में जुड़ना चाहते हैं तो जुड़ सकते हैं उसी नंबर पर ट करके आपको सारी

3144
03:43:52,160 --> 03:43:56,240
चीजें प्राप्त हो जाएंगी चौथी बात धर्म के

3145
03:43:56,240 --> 03:44:00,280
जो विधि विषयक प्रश्न होते हैं इनके संबंध में जो आचार्य राम शंकर शुक्ल जी

3146
03:44:00,280 --> 03:44:03,720
हैं पूज्य कपात जी महाराज के कृपा पात्र

3147
03:44:03,720 --> 03:44:07,720
शिष्य उनका चैनल है आचार्य राम शंकर शुक्ल जी के नाम से ही वो

3148
03:44:07,720 --> 03:44:11,880
आप सब्सक्राइब कर ले तो आपको दिवाली कौन से दिन है जन्माष्टमी कौन से दिन है और

3149
03:44:11,880 --> 03:44:16,040
यह जो विधि विषयक प्रश्न होते हैं उनके उत्तर वहां आपको मिलते रहेंगे और

3150
03:44:16,040 --> 03:44:20,120
धर्म और ब्रह्म विषयक जो प्रश्न आते हैं यह

3151
03:44:20,120 --> 03:44:24,360
चैनल देख लीजिए आचार्य राम शंकर शुक्ल जी का चैनल है और इस

3152
03:44:24,360 --> 03:44:29,520
पर विधि विषयक प्रश्न जो है उनके उत्तर प्राप्त हो जाएंगे आपको

3153
03:44:29,520 --> 03:44:34,080
और जो धर्म और ब्रह्म के प्रश्न आपके अंदर आते हैं

3154
03:44:34,080 --> 03:44:38,200
उसके लिए अपना सवाल टाइप करें यूट्यूब पर कि भैया

3155
03:44:38,200 --> 03:44:42,200
यह क्या है एक जगह विष्णु बड़े हैं कि शिव बड़े हैं कि कोई बड़ा नहीं है कि

3156
03:44:42,200 --> 03:44:46,320
इसमें फसने से अच्छा है सामर्थ वान गुरुओं के के सानिध्य में पहुंचे वो क्या

3157
03:44:46,320 --> 03:44:50,960
है अपना सवाल डाला और आगे लिख दिया पूरी शंकराचार्य तो

3158
03:44:50,960 --> 03:44:55,040
गुरुदेव ने लगभग साढे हजार प्रश्नों के उत्तर दिए हुए

3159
03:44:55,040 --> 03:44:59,040
हैं य पर अवेलेबल है तो आपका उत्तर ज्यादातर में

3160
03:44:59,040 --> 03:45:03,160
से एक आपको वहा मिल जाएगा गुरुदेव से दीक्षा लेनी है उनका

3161
03:45:03,160 --> 03:45:07,200
जो चैनल है वो गोवर्धन मठ के नाम से है गुरुदेव से दीक्षा लेनी है

3162
03:45:07,200 --> 03:45:11,640
उनके दर्शन करने हैं या फिर किसी भी प्रकार से गुरुदेव के

3163
03:45:11,640 --> 03:45:15,720
से आपको पता करना है जुड़ना है वहां मठ से डायरेक्ट तो गोवर्धन

3164
03:45:15,720 --> 03:45:18,720
मट की एप्लीकेशन है उस पर

3165
03:45:18,720 --> 03:45:23,000
गुरुदेव कहां रहते हैं कहां चल रहे हैं वो सारा उसम वृतांत रहता है उनका

3166
03:45:23,000 --> 03:45:27,040
वो एप्लीकेशन आप लोग डाउनलोड कर ले उस एप्लीकेशन को डाउनलोड करके

3167
03:45:27,040 --> 03:45:31,080
आपको सारी गतिविधियां उनकी पता चलती रहेंगी और बहुत अच्छी अच्छे और भी चीज आपको वहां

3168
03:45:31,080 --> 03:45:35,160
से प्राप्त हो जाएंगे एट द एंड एट द एंड आपको यह

3169
03:45:35,160 --> 03:45:39,320
ध्यान रखना है कि नाम जब सबसे पहले

3170
03:45:39,320 --> 03:45:43,520
है इन सब चीजों में इन सब चीजों में भगवन नाम का जप

3171
03:45:43,520 --> 03:45:47,840
सबसे पहले है त वो आपके अंदर बल आ पाएगा जो आज

3172
03:45:47,840 --> 03:45:52,120
के समय में इतनी विपरीत विपरीत परिस्थितियों से आप जूझ

3173
03:45:52,120 --> 03:45:56,240
पाओ अनथा धर्म का नाश हो रहा है

3174
03:45:56,240 --> 03:46:01,160
हमें आपकी आवश्यकता है हमारे सभी हिंदू भाई बहनों की

3175
03:46:01,160 --> 03:46:05,360
धर्म को बचाना होगा धर्म की रक्षा करनी होगी

3176
03:46:05,360 --> 03:46:09,520
और इसलिए सबसे पहले कुछ नहीं करिए अगर वहां ना मास्त्र

3177
03:46:09,520 --> 03:46:13,880
से नहीं जुड़ना है आप अपने घर में सवा घंटे की भक्ति का बल एकत्र

3178
03:46:13,880 --> 03:46:18,240
कर लीजिए सवा घंटे की भक्ति का सबसे

3179
03:46:18,240 --> 03:46:22,480
प्राथमिकता से आप आलंबन ले जी अब आए

3180
03:46:22,480 --> 03:46:26,840
हैं सात्विक जी है सात्विक जी जय श्री

3181
03:46:26,840 --> 03:46:31,360
राम महादेव जय श्री राम फोटो आपकी नहीं चलिए

3182
03:46:31,360 --> 03:46:34,480
चलिए कोई बात नहीं बताइए

3183
03:46:34,480 --> 03:46:39,360
मैं ये कहना चाहता था

3184
03:46:39,360 --> 03:46:43,880
हेलो आवाज आ रही है जी जी बोलिए

3185
03:46:43,880 --> 03:46:47,920
जी मैं कह य जो रामपाल जी कहते हैं कि 5 पर

3186
03:46:47,920 --> 03:46:50,880
गान काल ने दिया

3187
03:46:50,880 --> 03:46:54,920
है हेलो वेदों में

3188
03:46:54,920 --> 03:46:59,560
कबीर को वेदों में य कबीर को कबीर बताते हैं

3189
03:46:59,560 --> 03:47:03,960
हा है ना तो जैसे कुर्म पुराण

3190
03:47:03,960 --> 03:47:09,880
के पांचवे अध्याय में 21 वा श्लोक

3191
03:47:09,880 --> 03:47:14,120
है वो तो वो तो यह कहता है कि वो तो यह कहता

3192
03:47:14,120 --> 03:47:19,040
है कि कबीर जो है वही काल है

3193
03:47:19,040 --> 03:47:21,560
अच्छा

3194
03:47:21,560 --> 03:47:25,600
हा पूर्म पुराण पांचवा

3195
03:47:25,600 --> 03:47:29,800
अध्याय शलोक कौन सा अध्याय पाचवा

3196
03:47:29,800 --> 03:47:35,800
अध्याय 21 वा श्लोक अच्छा एक मिनट

3197
03:47:36,490 --> 03:47:39,000
[प्रशंसा]

3198
03:47:39,000 --> 03:47:45,000
निकालते हेलो एक बात बताए

3199
03:47:45,520 --> 03:47:49,880
आपको आपको गलती लगी है शायद यहां पर ना 2 ही श्लोक है केवल

3200
03:47:49,880 --> 03:47:54,040
पांचवे अध्याय में शायद अध्याय

3201
03:47:54,040 --> 03:47:58,800
कोई और होगा भैया 21 वावा 21

3202
03:47:58,800 --> 03:48:04,640
एक मिनट एक मिनट पांचवा अध्याय

3203
03:48:04,640 --> 03:48:09,000
ना हां है है है है मैं पढ़ के सुना देता हूं

3204
03:48:09,000 --> 03:48:13,160
आप निकालिए ब्रह्मा रुद्र नारायण आदि बहुत

3205
03:48:13,160 --> 03:48:17,280
भगवान एक ही है जो ई का तथा कवि कहलाता है ऐसा वेद

3206
03:48:17,280 --> 03:48:21,320
का अभिमत है जी नहीं नहीं श्लोक पढ़िए श्लोक

3207
03:48:21,320 --> 03:48:25,920
के आखरी तीन वर्ड पढ़िए बस पढ़ रहा हूं

3208
03:48:25,920 --> 03:48:31,640
भगवान भगवानी काल कविति

3209
03:48:31,640 --> 03:48:36,000
श्रुति कवि इति शति

3210
03:48:36,000 --> 03:48:39,120
हा

3211
03:48:39,120 --> 03:48:45,120
कवि लो भाई ये तो बहुत बड़ा व है

3212
03:48:46,200 --> 03:48:50,280
इसको मैं टैग कर रहा हूं आप चिंता मत करिए मैं साथ साथ सारी चीज टग कर रहा हूं आप चिंता मत

3213
03:48:50,280 --> 03:48:56,280
करिएगा जब भी ढूंढना होगा मेरे को बोल दीजिएगा जी

3214
03:48:57,520 --> 03:49:01,720
जी देखिए इसमें क्या होता है कि जैसे

3215
03:49:01,720 --> 03:49:06,000
य लोग भविष्य पुराण को भी प्रक्षिप्त कह देते हैं कि कई विद्यान विद्वान

3216
03:49:06,000 --> 03:49:08,920
प्रक्षिप्त बताते

3217
03:49:08,920 --> 03:49:13,000
हैं हेलो जी जी बोलिए आपकी आवाज

3218
03:49:13,000 --> 03:49:17,240
आ जैसे भविष्य पुराण की जो कथाए होती है ना ये जैसे

3219
03:49:17,240 --> 03:49:22,240
किसी विशेष कल्प की शैली को प्रधान बनाया जाता है इनम

3220
03:49:22,240 --> 03:49:26,240
जैसे पद्म कल्प की जो शैली है वो वो श्रीमद् भागवत

3221
03:49:26,240 --> 03:49:30,280
में वर्णित है और सारस्वत कल्प की शैली देवी भागवत में वर्णित है उस

3222
03:49:30,280 --> 03:49:34,680
इस प्रकार से जैसे अघोर ईशान रथ आदि कल्प होते

3223
03:49:34,680 --> 03:49:38,960
हैं तो उस हिसाब से देखा जाए ना तो

3224
03:49:38,960 --> 03:49:43,120
जो हमारे जो ऋषि मषि होते थे ना आउट ऑफ द टाइम लाइन जाकर

3225
03:49:43,120 --> 03:49:45,880
देखते थे

3226
03:49:45,880 --> 03:49:46,640
बिल्कुल

3227
03:49:46,640 --> 03:49:50,760
तो आउट ऑफ द टाइमलाइन जाके देख लेते थे जैसे वेदव्यास जी उन्होंने

3228
03:49:50,760 --> 03:49:54,920
पहले से कल की पुराण लिख दिया अरे वाल्मीकि

3229
03:49:54,920 --> 03:49:59,080
जी ने भी तो लिख दिया सब उत्तरकांड में हां तो बस वही

3230
03:49:59,080 --> 03:50:03,880
तो है ना तो ये उस चीज को कैसे प्रक्षित बताते हैं हम

3231
03:50:03,880 --> 03:50:09,880
कौन सा वो कहा गया है हां ये

3232
03:50:12,640 --> 03:50:18,200
श्लोक स्क्रीन शेयर कर दीजिए

3233
03:50:18,200 --> 03:50:24,040
श्लोक क्रमांक क्या बोला आपने

3234
03:50:24,040 --> 03:50:28,040
21 21 अध्याय कौन सा है बिल्कुल

3235
03:50:28,040 --> 03:50:32,880
बिल्कुल य कवि आ रहा है बिल्कुल एकदम स्पष्ट

3236
03:50:32,880 --> 03:50:36,920
है पांचवा पाचवा अध्याय 40 य

3237
03:50:36,920 --> 03:50:41,080
आरहा है कवि ति शति शति के द्वारा जिसको कवि कहा गया

3238
03:50:41,080 --> 03:50:45,200
है वही काल है लो काल

3239
03:50:45,200 --> 03:50:51,200
और कवि कहे जाते हो

3240
03:50:51,280 --> 03:50:55,600
गया यह लिखा हुआ है ना काल कवि इतनी शति

3241
03:50:55,600 --> 03:51:00,840
काल ही कवि है यह लिखा है कवि रिति

3242
03:51:00,840 --> 03:51:05,480
शति अगर कवि कबीर है तो कबीर तो काल इसका मतलब

3243
03:51:05,480 --> 03:51:11,480
इसका मतलब तो रामपाल जी काल बन के बैठे हुए हैं

3244
03:51:11,520 --> 03:51:15,600
चलिए ठीक है और आज एक सूचना हमें प्राप्त

3245
03:51:15,600 --> 03:51:19,920
हुई थी वह मैं आपको आपके साथ बताना चाहता हूं एक हमारी

3246
03:51:19,920 --> 03:51:24,120
बहन है प्यारी बहन और उनकी आज

3247
03:51:24,120 --> 03:51:28,520
एक उन्होंने बड़ा ही हृदय विदारक बातें बताई मुझे कि

3248
03:51:28,520 --> 03:51:32,840
किस प्रकार से उनका जो पूरा घर परिवार

3249
03:51:32,840 --> 03:51:37,400
है वह रामपाल

3250
03:51:37,400 --> 03:51:39,040
जी के नाम पर जो गलत शिक्षा

3251
03:51:39,040 --> 03:51:43,800
फैलाई जा रही है क्योंकि वोह अब नहीं पता वो वहां से क्या कहना चाहते हैं

3252
03:51:43,800 --> 03:51:48,600
तो उनके नाम जो गलत शिक्षाए फैलाई जाती है उनके कारण उनका ग्रास

3253
03:51:48,600 --> 03:51:52,920
उनका उस बहन का छोटी सी बहन है व उसका पूरा परिवार बन गया था

3254
03:51:52,920 --> 03:51:57,240
और भगवत कृपा से जो हम लोगों के प्रयास है उसने बताया

3255
03:51:57,240 --> 03:52:01,640
आज मुझे उसी नाम नाम जप वाले उसमें

3256
03:52:01,640 --> 03:52:05,640
कि वोह धीरे धीरे अब जो है उसके मन के अंदर उसकी चेतना शक्ति

3257
03:52:05,640 --> 03:52:09,640
वापस आ रही पहले वाली जो वह बिना कुछ सोचे समझे अंद भक्ति करने

3258
03:52:09,640 --> 03:52:14,680
लगा था पूरा परिवार अब उसमें एक वो बीज

3259
03:52:14,680 --> 03:52:18,840
उत्पन्न हो गया है जो उस परिवार को

3260
03:52:18,840 --> 03:52:22,880
तो मुझसे कभी-कभी कोई कोई कुछ कहता है कि तुम यह सब कर रहे

3261
03:52:22,880 --> 03:52:26,920
हो उसे क्या मिला तुम्हे कहता है मैं उससे कहता हूं अगर

3262
03:52:26,920 --> 03:52:31,320
मैंने एक भी एक को भी सही करा ना जीवन में पूरे जीवन में

3263
03:52:31,320 --> 03:52:35,360
एक की भी रक्षा कर ली सही धर्म के मार्ग पर या सही

3264
03:52:35,360 --> 03:52:39,680
जगह से जोड़ा तो मेरा यह जो पूरा अभियान है सार्थक

3265
03:52:39,680 --> 03:52:43,840
मेरे लिए एक भी एक भी क्योंकि धर्म

3266
03:52:43,840 --> 03:52:48,000
की रक्षा जो अर्थ होता है ना वह क्या होता है धर्म

3267
03:52:48,000 --> 03:52:52,800
की रक्षा का अर्थ होता है नारी की रक्षा मातृ शक्ति की

3268
03:52:52,800 --> 03:52:54,360
रक्षा तो हमने

3269
03:52:54,360 --> 03:52:58,720
अपने जीवन में एक भी जगह पर धर्म के सिद्धांतों को सार्वभौम

3270
03:52:58,720 --> 03:53:02,960
सिद्धांतों को बचा लिया तो हमने किसी ना किसी मातृ शक्ति को शोषित

3271
03:53:02,960 --> 03:53:07,080
होने से बचा लिया यह बिल्कुल सत्य

3272
03:53:07,080 --> 03:53:11,400
बात है तो अगर आज देखिए हमारा छोटा सा प्रयास है निमित्त

3273
03:53:11,400 --> 03:53:15,720
मात्र है क्या क्या मायने रखते हैं हम कहां जगतगुरु शंकराचार्य

3274
03:53:15,720 --> 03:53:19,920
कहां इतने बड़े बड़े आचार्य रामानुजाचार्य कोई

3275
03:53:19,920 --> 03:53:24,080
कोई हमारी कोई काउंटिंग ही नहीं है मगर आज उनके

3276
03:53:24,080 --> 03:53:28,160
प्रयासों से उनकी कृपा से गुरुदेव की कृपा से भगवान की नाम जप की महिमा

3277
03:53:28,160 --> 03:53:32,240
से आज एक सूचना प्राप्त होती है कि एक जगह पर

3278
03:53:32,240 --> 03:53:36,520
विष युक्त वातावरण में फस चुका परिवार अब उसमें एक बीज अंकुरित

3279
03:53:36,520 --> 03:53:41,280
हो गया है जहां से वह परिवार वापस लौटने की ओर

3280
03:53:41,280 --> 03:53:45,680
अग्रसर तो यह मिला मुझे यह मिला मुझे

3281
03:53:45,680 --> 03:53:50,680
मैं अब जब रात में सोऊंगा तो सुकून के साथ सोऊंगा कि मैंने यह

3282
03:53:50,680 --> 03:53:53,080
किया

3283
03:53:53,080 --> 03:53:57,120
और इस बारे में ही गुरुदेव अपने एक

3284
03:53:57,120 --> 03:54:01,200
वचन में बोले थे कि उनसे किसी ने खड़े

3285
03:54:01,200 --> 03:54:06,120
होकर के पूछा था कि अरे अगर हमने इनको नहीं मारा

3286
03:54:06,120 --> 03:54:09,480
उनको नहीं मारा तो वह लोग हमें मार डालेंगे तो वहां

3287
03:54:09,480 --> 03:54:13,560
पर गुरुदेव ने यही कहा था कि अगर हिंदू

3288
03:54:13,560 --> 03:54:18,200
यथा साम थ उन्होंने ये नहीं कहा था जाओ बोली बारी लेकर के लड़ो अपनी

3289
03:54:18,200 --> 03:54:22,440
उसके लिए उन्होंने यह कहा था कि अगर

3290
03:54:22,440 --> 03:54:26,520
हिंदू यथा सामर्थ्य दर्शन विज्ञान और व्यवहार की सीमा

3291
03:54:26,520 --> 03:54:30,840
में रहते हुए अपने धर्म का पालन करने लग जाए

3292
03:54:30,840 --> 03:54:34,880
तो जितने सनातन विरोधी तंत्र है

3293
03:54:34,880 --> 03:54:39,080
जितने सनातन की आड़ में सनातन विरोधी तंत्र

3294
03:54:39,080 --> 03:54:43,280
है या सनातन डायरेक्ट सनातन विरोधी है या सनातन की आड़ में सनातन

3295
03:54:43,280 --> 03:54:47,880
विरोधी तंत्र है उन तंत्रों में ऐसे क्रांतिकारी

3296
03:54:47,880 --> 03:54:51,880
उत्पन्न हो जाएंगे जो अपने तंत्र का शोधन कर

3297
03:54:51,880 --> 03:54:57,280
देंगे तो वह जो प्यारी बहन है ना व वही क्रांतिकारी

3298
03:54:57,280 --> 03:55:01,560
है वह अपने परिवार में एक ऐसा क्रांतिकारी

3299
03:55:01,560 --> 03:55:05,600
उत्पन्न कर दिया हम लोगों ने जो अपने परिवार का शोधन

3300
03:55:05,600 --> 03:55:09,720
कर देगा जो अपने उस तंत्र

3301
03:55:09,720 --> 03:55:14,520
में क्रांतिकारी खड़े कर देगा हमें कुछ नहीं करना है

3302
03:55:14,520 --> 03:55:18,680
वाले की नोक पर नहीं गुरुदेव यह भी कहते हैं पूरे विश्व

3303
03:55:18,680 --> 03:55:23,200
को एक दो घंटे की संगोष्ठी के लिए बुला

3304
03:55:23,200 --> 03:55:24,600
लीजिए जो भी

3305
03:55:24,600 --> 03:55:28,760
नेतृत्व करने वाले हो पूरा सब सही हो जाएगा मगर वह

3306
03:55:28,760 --> 03:55:32,840
आएगा नहीं क्यों नहीं आएगा पूरा विश्व क्योंकि उसको शांति चाहिए

3307
03:55:32,840 --> 03:55:36,840
नहीं कुछ लोगों का जीवन यापन अशांति के आधार पर हो

3308
03:55:36,840 --> 03:55:41,040
रहा है वह शांति वाला समय आने नहीं देंगे

3309
03:55:41,040 --> 03:55:45,080
तो इसलिए हमें न देना है कि

3310
03:55:45,080 --> 03:55:49,720
हम क्या कर रहे हैं केवल दम नहीं बनना है कि तुमको यह करना चाहिए

3311
03:55:49,720 --> 03:55:53,760
यह सबका वो था और अगर किसी को

3312
03:55:53,760 --> 03:55:57,880
कोई अपनी बात और कहनी है तो वह कह सकते हैं शिवाजी गिरी आप आ चुके आपको सुन चुके

3313
03:55:57,880 --> 03:56:02,240
आप जा सकते हैं श्री

3314
03:56:02,240 --> 03:56:06,400
राम

3315
03:56:06,400 --> 03:56:10,600
जी ऐसे तो वो महारामायण का श 50

3316
03:56:10,600 --> 03:56:14,760
लोक आता है ना उसमें माता पार्वती भगवान शकर कते

3317
03:56:14,760 --> 03:56:19,040
चार पुरुष है य तो तीन पुरुष की बात करते हैं माहा रामायण में चार पुरुष बताए वो भी भगवान

3318
03:56:19,040 --> 03:56:23,040
के रूप बताए उन्होने देखो मैं आपको बता ही देता हूं स्क्रीन शेयर

3319
03:56:23,040 --> 03:56:27,120
का मेरे पास ऑप्शन नहीं है नहीं तो करही द इसमें माता पार्वती

3320
03:56:27,120 --> 03:56:31,320
आप बोल दो आप बोल दो वो देख लेंगे हम लोग बोल

3321
03:56:31,320 --> 03:56:37,320
दो आप बोल दो

3322
03:56:40,720 --> 03:56:46,720
केवल नेटवर्क इशू आ गया अटक गया

3323
03:56:48,800 --> 03:56:52,960
इनका इसमें क्या है ना अलग अलग कल्पों का वर्णन है जैसे

3324
03:56:52,960 --> 03:56:57,120
हम रो रोज अलग-अलग सब्जी खाते हैं सब्जी

3325
03:56:57,120 --> 03:57:01,240
खाना तो नॉर्मल है ना मतलब रोज खाते हैं लेकिन फिर भी रोज अलग-अलग खाते हैं उस हिसाब

3326
03:57:01,240 --> 03:57:05,520
से अलग-अलग कल्पों में अलग-अलग लीलाएं करते हैं भगवान वो सिस्टम

3327
03:57:05,520 --> 03:57:09,800
है अच्छा और साथ ही साथ इन अलग-अलग लीलाओं के बावजूद भी

3328
03:57:09,800 --> 03:57:14,840
कई जगह इन सबके एकत्व की बात भी कही जाती है कई जगह

3329
03:57:14,840 --> 03:57:19,280
जैसे भगवान शिव बमा वि जाता है

3330
03:57:19,280 --> 03:57:23,120
हा

3331
03:57:23,120 --> 03:57:27,440
अच्छा आज इनकी यह बात नहीं प्रूफ हो पाई

3332
03:57:27,440 --> 03:57:31,600
अगर बैक टू द पॉइंट हो हम लोग तो आज हम लोग बैठे थे कि गीता

3333
03:57:31,600 --> 03:57:36,520
का ज्ञान श्री कृष्ण से अलग किसी काल ने दिया है

3334
03:57:36,520 --> 03:57:40,920
तो आज इनके कई लोग आए मगर उन्होंने सब बातें की घुमाया

3335
03:57:40,920 --> 03:57:45,000
फिराया विषयात करने का प्रयास किया मगर यह नहीं

3336
03:57:45,000 --> 03:57:47,680
बता पाए

3337
03:57:47,680 --> 03:57:51,920
कि वह काल ने अलग किसी श्री

3338
03:57:51,920 --> 03:57:56,280
कृष्ण से अलग किसी काल ने वो ज्ञान दिया है ठीक है अरे 95

3339
03:57:56,280 --> 03:58:00,560
पर भी कभी उसने ही दिया है काल नहीं दिया है पूरा ही काल नहीं दिया है पूरा

3340
03:58:00,560 --> 03:58:04,680
ही काल ने दिया है वो कबीर सिद्ध हो गए हा अच्छा दूसरी

3341
03:58:04,680 --> 03:58:08,880
एक बात मैं ये कह रहा हूं कि भाई आप लोग भी अपने अपने घर में ऐसे क्रांतिकारी

3342
03:58:08,880 --> 03:58:13,040
बने जो वैचारिक क्रांति लाए समाज में हर

3343
03:58:13,040 --> 03:58:17,040
गली मोहल्ले में क्रांतिकारी ऐसा हो जो वैचारिक क्रांति लाए और

3344
03:58:17,040 --> 03:58:21,040
भटकते हुए हमारा जो समाज है बिखराव में पड़ा हुआ है आधे इधर

3345
03:58:21,040 --> 03:58:25,400
चले गए आधे उधर चले गए तो एकत्रित हो संगठित

3346
03:58:25,400 --> 03:58:29,520
हो जिससे की सुरक्षित हो यही हमारा े है एक

3347
03:58:29,520 --> 03:58:33,600
मात्र सिंगल पॉइंट एजेंडा है कि सनातन

3348
03:58:33,600 --> 03:58:37,800
धर्म की सनातन को आस्थान वित समाज की वेदों में प्रमाण बुद्धि

3349
03:58:37,800 --> 03:58:38,300
रखने

3350
03:58:38,120 --> 03:58:42,160
वालों की हमें रक्षा करनी है जो कबीर पंथी हो गए वो

3351
03:58:42,160 --> 03:58:46,920
भी हमारे भाई हैं आर्य समाजी भी हमारे भाई है और हमारे इकन

3352
03:58:46,920 --> 03:58:51,120
वाले भी हमारे भाई हैं सब लोग हमारे भाई हैं जिन बातों के

3353
03:58:51,120 --> 03:58:55,240
कारण हमारे बीच में अलगाव हो रहा है उन बातों को त्याग कर

3354
03:58:55,240 --> 03:58:59,360
अथवा अपनी व्यक्तिगत सीमा में सीमित करके आप लोग

3355
03:58:59,360 --> 03:59:03,400
आगे बढ़ सकते हैं निराकार की पूजा को हम स्वीकार

3356
03:59:03,400 --> 03:59:07,480
करते हैं साकार की पूजा को आर्य समाज नहीं करता वह आ सकते

3357
03:59:07,480 --> 03:59:11,640
हैं वो अपने उसमें रख ले उसे कि नहीं नहीं हम तो निराकार

3358
03:59:11,640 --> 03:59:16,080
की पूजा ही करेंगे हम लोग सब साथ में हो सकते हैं

3359
03:59:16,080 --> 03:59:20,320
इसी प्रकार से कृष्ण की पूजा हम सब करते हैं

3360
03:59:20,320 --> 03:59:25,000
मगर आगे आप लोग जानते ही है खैर इस बात को बारबार खींचने की आवश्यकता नहीं है

3361
03:59:25,000 --> 03:59:29,280
ठीक है आने के लिए समय देने के लिए सभी का आभार और

3362
03:59:29,280 --> 03:59:33,800
विशेष रूप से गोविंद जी सात्विक जी और

3363
03:59:33,800 --> 03:59:37,880
पंडित जी का बहुत बहुत आभार हमारे जी आज उन्होने फटाफट फटाफट सारे

3364
03:59:37,880 --> 03:59:42,600
प्रमाण भी स्क्रीन पर लगा दिए जी ह

3365
03:59:42,600 --> 03:59:46,660
नहीं मेरे पास बहुत से मा मैं पिछले एक साल से इनसे डील कर रहा

3366
03:59:46,660 --> 03:59:49,120
[संगीत]

3367
03:59:49,120 --> 03:59:53,240
हूं जय श्री राम भैया सभी चोट खाए हुए एक

3368
03:59:53,240 --> 03:59:58,240
हो रहे आवान के मंच पर

3369
03:59:58,240 --> 04:00:02,440
जी आप आप सभी को जय श्री राम जी

3370
04:00:02,440 --> 04:00:06,600
मैंने आज का वीडियो मैंने जो लाइव देखा है इसमें

3371
04:00:06,600 --> 04:00:10,800
तो मेरे को पूरा लग रहा था भाई आप तो नहीं आज तो कोई

3372
04:00:10,800 --> 04:00:15,000
रामपाल आपका वीडियो चला गया है अच्छा आ गया आ गया जी दोबारा

3373
04:00:15,000 --> 04:00:19,000
से दोबारा से बोल दीजिए आप जी आप बैकग्राउंड न

3374
04:00:19,000 --> 04:00:23,000
आ रहा है बहुत ज्यादा ये किसी का बैकग्राउंड को

3375
04:00:23,000 --> 04:00:27,080
सब लोग अपना माइक म्यूट कर लीजिए जरा हर्ष जी अभी से आ रहा है आपके

3376
04:00:27,080 --> 04:00:31,160
माइक से आ रहा है आप आप वो निकाल दीजिए ईयरफोन

3377
04:00:31,160 --> 04:00:35,320
लीड निकाल

3378
04:00:35,320 --> 04:00:39,680
दीजिए अन म्यूट करिए अब

3379
04:00:39,680 --> 04:00:45,560
जी आवाज आ रहा है अभी जी आ रहा है बहुत बढ़ बोलिए

3380
04:00:45,560 --> 04:00:50,040
जी भैया आज से मतलब की जो

3381
04:00:50,040 --> 04:00:54,160
यहां पर बैठे हैं ना श्री गोविंद गुरुकुल जी की तरफ से

3382
04:00:54,160 --> 04:00:58,480
अभिमन्यु जी इनके इनसे मैंने बहुत पहले एक बार कांटेक्ट

3383
04:00:58,480 --> 04:01:02,720
किया था वर्णाश्रम धर्म के विषय में जब मेरे को संशय था उस समय में करीबन

3384
04:01:02,720 --> 04:01:07,240
तीन चार साल पहले मैंने उनसे कांटेक्ट किया था उनका नंबर भी है मेरे पास

3385
04:01:07,240 --> 04:01:11,440
लेकिन वो बात किए थे बाद में

3386
04:01:11,440 --> 04:01:15,520
फिर मैंने इनसे जुड़ा था ना जो रामपाल का जो ये करते है ना बहुत

3387
04:01:15,520 --> 04:01:19,560
बढ़िया से रामपाल वालो का व उनसे देख कर के मैंने

3388
04:01:19,560 --> 04:01:23,560
इनसे जुड़ा था बहुत बढ़िया लगा इनका सारा वीडियो मेरे को देख कर के और आज

3389
04:01:23,560 --> 04:01:27,640
का जो जो वीडियो था आपका शिवाज जी सर

3390
04:01:27,640 --> 04:01:32,080
भैया तो वो ना आज प्रमाण

3391
04:01:32,080 --> 04:01:36,200
के लिए स्पेशल बन गया है इतने सारे प्रमाण आज जो देखेगा वीडियो

3392
04:01:36,200 --> 04:01:40,440
ना वो अगर थोड़ा सा भी विवेकी होगा ना विवेकी

3393
04:01:40,440 --> 04:01:44,720
तो वो जरूर सत्य की तरफ आ जाएगा इतना

3394
04:01:44,720 --> 04:01:48,840
बढ़िया था आज का इतना गजब गजब बहुत सारा प्रमाण आज

3395
04:01:48,840 --> 04:01:51,280
देखने को मिल गया

3396
04:01:51,280 --> 04:01:55,440
सभी धुरंधर यहां पर एक साथ बैठ गए और सब मिलकर के उन

3397
04:01:55,440 --> 04:02:00,360
लोगों का तो पूरा बैंड बजा दिया बहुत बढ़िया लगा अ

3398
04:02:00,360 --> 04:02:04,760
चलिए बहुत-बहुत आभार आपका आभार गोविंद जी गुरुकुल

3399
04:02:04,760 --> 04:02:08,800
जी हम चाहेंगे आगे हमारे बीच में सकारात्मक ऐसी चर्चा और होती

3400
04:02:08,800 --> 04:02:12,800
रहे और एफबी इं य पर

3401
04:02:12,800 --> 04:02:17,480
सभी जगह आप लोगी लाइव स्ट्रीम देख पाएंगे क्योंकि सहयोग

3402
04:02:17,480 --> 04:02:22,360
प्राप्त हुआ तो हम लोग यह जो आज आप नया प्रारूप देख रहे होंगे

3403
04:02:22,360 --> 04:02:26,600
लाइव स्ट्रीम का तो वो उसी के कारण है आने

3404
04:02:26,600 --> 04:02:31,160
के लिए सभी को धन्यवाद और अभी भी मैं कहूंगा एक बात बस

3405
04:02:31,160 --> 04:02:35,320
बोलूंगा मैं गोविंद जी को आपसे तो पहले भी चर्चा हुई

3406
04:02:35,320 --> 04:02:39,600
थी शिवान जी की तो मुझे लगा आप दोबारा चर्चा करने आए हैं

3407
04:02:39,600 --> 04:02:45,600
तो इसलिए मैं भी आया था कि इस बार

3408
04:02:47,160 --> 04:02:51,520
इन्होंने प्रारंभ रुकिए गोविंद जी इन्होंने प्रारंभ में संतुष्टि

3409
04:02:51,520 --> 04:02:55,800
जनक वक्तव्य दिए हैं अगर शुरू से देखेंगे ना लाइव को तो आपको मिलेगा

3410
04:02:55,800 --> 04:02:59,840
त हो चुका है दोबारा से बारबार उन्हीं तारों को ना

3411
04:02:59,840 --> 04:03:03,920
छेड़ा जाए चता र आज की लाइव में इन्होंने

3412
04:03:03,920 --> 04:03:08,000
अच्छा अच्छा अच्छा अच्छा आज की लाइव में मुझे लगा पुरानी वाली की बात

3413
04:03:08,000 --> 04:03:12,040
हो रही है मैं मैं एक बात बोल देता हूं ठीक है देखिए

3414
04:03:12,040 --> 04:03:16,600
जी सत्य कार करना है और उस परे चलना

3415
04:03:16,600 --> 04:03:20,720
है ठीक है जी उस परे मेरे को समय लगेगा थोड़ा सा

3416
04:03:20,720 --> 04:03:24,840
ठीक है मे बी लेकिन जब मेरी आंखों के सामने सत्य है कि ईश्वर

3417
04:03:24,840 --> 04:03:29,200
है तो वह सर्वशक्तिमान ही होना चाहिए

3418
04:03:29,200 --> 04:03:33,440
तो इसमें कोई वो क्यों है और जब जैसे कि मैं पिछली बार आया था तो आर्य

3419
04:03:33,440 --> 04:03:37,480
समाज का पक्ष रखने आया था वैसे पूरा नहीं लेकिन जब वो स्वयं कह रहे

3420
04:03:37,480 --> 04:03:41,760
हैं कि हमारी गुरु परंपरा नहीं है तो हम तो खुले दिल से बाहे

3421
04:03:41,760 --> 04:03:46,160
फैला के कह रहे तब भी आप हमारे साथ अपना वैचारिक

3422
04:03:46,160 --> 04:03:50,200
मतभेद साथ पर रख क्यों नहीं आना भाई वो इतने दुष्ट लोग है

3423
04:03:50,200 --> 04:03:54,320
रामपाल की बात नहीं कर रहा मैं स्पेशल इतने दुष्ट लोग हैं ठीक है वो एक

3424
04:03:54,320 --> 04:03:58,440
साथ जुड़े हुए हैं पक्के और हम सिर्फ इतने से मतभेद से एक

3425
04:03:58,440 --> 04:04:02,720
दूसरे से नहीं बिखर चाहे कुछ भी हो जाए ठीक

3426
04:04:02,720 --> 04:04:07,160
है जैसा शवा जी ने बोला की सारे ही भाई है हमारे इसम

3427
04:04:07,160 --> 04:04:12,120
दो राय नहीं है अत धर्म जो है

3428
04:04:12,120 --> 04:04:16,120
उसी के साथ हम चलना है तो भाव से भी देखें और इस बात

3429
04:04:16,120 --> 04:04:20,160
को करपात्री जी ने भी कई बार समझाया बोला है कि घर

3430
04:04:20,160 --> 04:04:24,280
की बात जो होती है वो घर में ही रहनी चाहिए अगर बाहर अगर बात होगी तो फिर

3431
04:04:24,280 --> 04:04:28,600
हमें भी डट के कंधे से कंधा मिलाकर करना पड़ेगा वही महाभारत वाला

3432
04:04:28,600 --> 04:04:32,640
जो अर्जुन और पांडवों के बीच का था वही भाव करपात्री

3433
04:04:32,640 --> 04:04:37,000
जी ने अपने अपने शब्दों से उसको मैसेज

3434
04:04:37,000 --> 04:04:41,000
किया था ट तो वही चीज है और वही बात शिवा जी भी बोलते हैं तो

3435
04:04:41,000 --> 04:04:45,000
मैं बिल्कुल सहमत हूं इस बात से उसे चलिए सभी को

3436
04:04:45,000 --> 04:04:49,200
आने के लिए आभार समय देने के लिए आभार गोविंद जी आपका भी आभार हष जी आपका

3437
04:04:49,200 --> 04:04:53,240
आभार साविक जी का भी आभार और जितने भी सज्जन अभी जुड़े

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04:04:53,240 --> 04:04:57,280
थे यहां पर सभी का आभार और सभी को जय

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04:04:57,280 --> 04:05:01,320
श्री राम और ना जप करें भगवन नाम का जप करें सभी

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04:05:01,320 --> 04:05:05,400
चीजें आपको प्राप्त होने लगेगी क्योंकि भगवान ने कहा है भगवत गीता 92 में

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04:05:05,400 --> 04:05:09,520
क्या कहा है कि तू मेरी में

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04:05:09,520 --> 04:05:14,400
ते प्राप्ति चिंता करूंगा तो बस

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04:05:14,400 --> 04:05:18,400
भगवान की शरण में जाइए सब कुछ मिल जाएगा ज्ञान भी मिल जाएगा

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04:05:18,400 --> 04:05:22,560
भक्ति भी भक्ति करने से ज्ञान भी मिल जाएगा सभी को जय श्री

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04:05:22,560 --> 04:05:26,990
राम

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04:05:26,990 --> 04:05:30,990
[संगीत]
