1
00:00:24,160 --> 00:00:28,160
तो कल की लाइव स्ट्रीम में जो एक बंदा

2
00:00:28,160 --> 00:00:32,760
आया था पहली बार मुझे ऐसा लग रहा था कि कोई पढ़ा लिखा व्यक्ति आया है ठीक

3
00:00:32,760 --> 00:00:36,920
ठाक ये मैं कहूंगा कि रामपाल दास जी की ओर से वो कल

4
00:00:36,920 --> 00:00:41,160
पहला एक संभ्रांत व्यक्ति आया था अब

5
00:00:41,160 --> 00:00:45,160
उनसे चर्चा के हमने लगभग मेरे ख्याल से एक घंटे उनसे चर्चा की

6
00:00:45,160 --> 00:00:48,680
होगी

7
00:00:48,680 --> 00:00:52,880
और हमारी आवाज अटक रही है

8
00:00:52,880 --> 00:00:57,640
दोबारा जाके दोबारा

9
00:00:57,640 --> 00:01:03,640
ह अभी भी अटक रही है आवाज

10
00:01:06,400 --> 00:01:12,400
आवाज अटक रही है

11
00:01:13,920 --> 00:01:18,880
क्या सही से आ रही है ठीक

12
00:01:18,880 --> 00:01:23,040
है तो उसको हम थोड़ा समरा इज

13
00:01:23,040 --> 00:01:28,040
करेंगे कल जो उस प्रवीण नाम के व्यक्ति से बात

14
00:01:28,040 --> 00:01:32,480
हुई अब यह होता निष्कर्ष तक आने में कन्फ्यूजिंग

15
00:01:32,480 --> 00:01:36,600
इतना हो जाता है बीच में बहुत सारे स्टेटमेंट होते हैं जो आते हैं फिर हम उन पर बात

16
00:01:36,600 --> 00:01:41,600
करते हैं नहीं करते हैं यह सब चीज बहुत सारी हो जाती जिसकी वजह

17
00:01:41,600 --> 00:01:45,960
से निष्कर्ष दिखाई नहीं देता कई बार कि

18
00:01:45,960 --> 00:01:50,080
क्या निष्कर्ष निकला उस कन्वर्सेशन का अच्छा उसके अंत में

19
00:01:50,080 --> 00:01:54,160
जब हमने उन्हें निकाल दिया तो जाहिर सी बात है कि जो लोग

20
00:01:54,160 --> 00:01:58,280
जिन लोगों ने कभी समर्थन नहीं किया तार्किक रूप से

21
00:01:58,280 --> 00:02:02,360
तार्किक बातों का तो उनको एक पॉइंट मिलता है कि भा आपने उन्हें क्यों निकाल

22
00:02:02,360 --> 00:02:06,520
दिया कि वो तो सही बात कर रहे थे मतलब वो अमर्यादित नहीं

23
00:02:06,520 --> 00:02:10,560
हो रहे थे मतलब कोई अगर अमर्यादित नहीं हो रहा है तो उससे

24
00:02:10,560 --> 00:02:13,400
हम लगातार 10 10 दिन तक बात करते रहे

25
00:02:13,400 --> 00:02:17,880
क्या जब व्यक्ति सामने वाला ऐसी बात कर रहा है

26
00:02:17,880 --> 00:02:22,240
कि कुछ कोई जो चीजें हैं जो अभी 50 वर्ष पूर्व आई

27
00:02:22,240 --> 00:02:27,160
है और वो ऐड कर दी गई

28
00:02:27,160 --> 00:02:31,160
उन वेदा आदि शास्त्रों में जिनमें इनके अनुसार मिलावट हुई है कहां क मिलावट हुई है

29
00:02:31,160 --> 00:02:35,440
वो उनको पता नहीं है तो वो ठीक है वो एक अलग एंगल

30
00:02:35,440 --> 00:02:39,480
हो गया कहां कहा मिलावट हुई है वो एक अलग बात है उसका क्या प्रमाण है क्यों माना जाए मिलावट

31
00:02:39,480 --> 00:02:43,920
हुई है कि नहीं हुई मगर इनका यह तो मानना है कि

32
00:02:43,920 --> 00:02:48,840
250 वर्ष पूर्व एक नई ग्रंथावली आती है उसमें भी बहुत सारा

33
00:02:48,840 --> 00:02:53,040
वो है डिस्प्यूट है कि जिसने

34
00:02:53,040 --> 00:02:57,640
वो ग्रंथावली लिखी है वो क्या कह रहा है या फिर उसमें भी हम

35
00:02:57,640 --> 00:03:01,680
उसमें भी इनका कहना है कि रामपाल दास जी को दिव्य शक्तियां प्राप्त

36
00:03:01,680 --> 00:03:05,960
हुई तो उन्होंने ये निचोड़ निकाला कि इस गरीब दास नामक

37
00:03:05,960 --> 00:03:10,280
जो ग्रंथ है उसमें से कितना लेना है और कितना नहीं लेना है उसम भी डिस्प्यूट

38
00:03:10,280 --> 00:03:14,320
है वो गरीब दास का भी एज इट इज नहीं है वो रामपाल दास जी

39
00:03:14,320 --> 00:03:19,080
को सही जितना लगेगा उतना ही है कुल मिला के बात तो वही हो गई कि

40
00:03:19,080 --> 00:03:23,640
जितना वेद में से ठीक लगेगा उतना है तो कुल मिला के इनका जो प्रमाण है

41
00:03:23,640 --> 00:03:27,640
वो प्रमाण ना तो गरीब दास का ग्रंथ है ना वेदा

42
00:03:27,640 --> 00:03:28,680
शास्त्र है ना पुराण

43
00:03:28,680 --> 00:03:32,960
है ना गीता है ना उपनिषद है इनका

44
00:03:32,960 --> 00:03:38,040
जो प्रमाण है वह रामपाल दास जी की वाणी

45
00:03:38,040 --> 00:03:42,280
है तो इनको कहना यह चाहिए कि वेदों में प्रमाण

46
00:03:42,280 --> 00:03:47,040
है और रामपाल दास जी भगवान

47
00:03:47,040 --> 00:03:51,040
है यह जो लाइन है इनकी

48
00:03:51,040 --> 00:03:55,160
यह निराधार है वेदों में प्रमाण है कबीर दास जी भगवान

49
00:03:55,160 --> 00:03:59,520
है वेदों में प्रमाण है रामपाल दास भगवान है नहीं इनको कहना

50
00:03:59,520 --> 00:04:03,960
ये चाहिए कि रामपाल प्रमाण है

51
00:04:03,960 --> 00:04:08,200
कबीर भगवान है जेल धाम में बैठा रामपाल

52
00:04:08,200 --> 00:04:13,000
प्रमाण है कबीर भगवान इनको यह सब कहना चाहिए

53
00:04:13,000 --> 00:04:17,640
मगर फिर इनकी दुकाने नहीं चलेंगी इनकी दाल नहीं गलेगी

54
00:04:17,640 --> 00:04:21,680
इनको स्वयं को अगर किसी प्रकार से

55
00:04:21,680 --> 00:04:26,280
सिद्ध करना है तो इनको अपने आप को वेदों से जोड़ना पड़ेगा

56
00:04:26,280 --> 00:04:30,280
और बाद में यह रहस्य निकलेगा जब ज्यादा आप पॉइंट करोगे

57
00:04:30,280 --> 00:04:34,360
ज्यादा आप क्वेश्चनिंग करोगे तब ये रहस्य निकल कर के आएगा कि भाई वेद

58
00:04:34,360 --> 00:04:38,520
तो इनके लिए प्रमाण है ही नहीं है

59
00:04:38,520 --> 00:04:42,560
ना तो जिसके लिए वेद प्रमाण नहीं है जो

60
00:04:42,560 --> 00:04:44,080
अनादि शास्त्र

61
00:04:44,080 --> 00:04:48,400
हमारे धर्म ग्रंथ है जिसके लिए वह प्रमाण नहीं

62
00:04:48,400 --> 00:04:53,200
है तो फिर वह स्वयं को सनातनी किस आधार पर कह रहा है

63
00:04:53,200 --> 00:04:57,880
पहली बात दूसरी बात ये आ जाती है

64
00:04:57,880 --> 00:05:02,320
कि जब कोई व्यक्ति ये कहता है कि वेदों में मिलावट हो गई है

65
00:05:02,320 --> 00:05:06,640
ठीक है तो जब वो यह कह रहा है तो उसको

66
00:05:06,640 --> 00:05:10,880
शुद्ध बिना मिलावट वाले वेद भी दिखाने पड़ेंगे यह देखो बिना बलाव

67
00:05:10,880 --> 00:05:15,760
वाले वेद ये हैं तो क्या

68
00:05:15,760 --> 00:05:20,360
ऐसा बिना मिलावट वाला कोई वेद है आपके पास क्योंकि जो वेद है

69
00:05:20,360 --> 00:05:24,360
जिस स्वरूप में है उसको आप मना कर रहे हो और बिना मिलावट वाला प्रस्तुत नहीं कर

70
00:05:24,360 --> 00:05:28,400
रहे हो तो क्या कर रहे हो जब वेद में कोई एक बात आप कह रहे

71
00:05:28,400 --> 00:05:32,880
हो कि मिलावट है तो फिर जो पब्लिकेशन

72
00:05:32,880 --> 00:05:37,320
उसे छाप रहा है एक जगह गलत छाप रहा तो दूसरी जगह भी छाप सकता है

73
00:05:37,320 --> 00:05:41,320
है ना तो जो वेद में आपने कहा कि वेद

74
00:05:41,320 --> 00:05:45,440
में मिलावट है या धर्मशास्त्रों में मिलावट है कहीं पर आपने तीन

75
00:05:45,440 --> 00:05:49,520
प्रकार से आक्षेप लगाए आपने उपलब्ध शास्त्रों

76
00:05:49,520 --> 00:05:53,680
पर तीन प्रकार से एक काल ने कह दिया होगा

77
00:05:53,680 --> 00:05:57,760
दूसरा मिलावट है य मंत्र प्रक्षिप्त है श्लोक है व आर समाज

78
00:05:57,760 --> 00:06:00,120
का जो तरीका है

79
00:06:00,120 --> 00:06:04,200
तीसरा अनुवाद गलत है पंत्र गलत नहीं है

80
00:06:04,200 --> 00:06:08,680
अनुवाद गलत है तो पहली बात तो यह रामपाल वाले जो फॉलोअर्स

81
00:06:08,680 --> 00:06:12,760
है उन्हीं के बीच में यह संशय है कि अनुवादक ने

82
00:06:12,760 --> 00:06:17,200
गलत अर्थ किया है या मंत्र ही गलत

83
00:06:17,200 --> 00:06:21,520
है तो अगर अनुवादक ने गलत अर्थ किया

84
00:06:21,520 --> 00:06:25,600
है अगर अनुवादक ने गलत अर्थ किया है

85
00:06:25,600 --> 00:06:31,600
तो सही अर्थ आप बताओ कि जहां आ रहा है

86
00:06:31,600 --> 00:06:35,800
कवियम कवि नाम गणपति उसका क्या अर्थ

87
00:06:35,800 --> 00:06:39,880
निकाला जाए आपके अनुसार सही और अगर मंत्र गलत

88
00:06:39,880 --> 00:06:45,880
है तो आपने जैसे ही वेद के किसी एक भी मंत्र को गलत

89
00:06:46,640 --> 00:06:50,640
कहा तो क्या होगा कि

90
00:06:50,640 --> 00:06:54,720
उसका जो सोर्स है उसकी प्रमाणिकता पर उंगली उठ

91
00:06:54,720 --> 00:06:59,120
जाएगी कि भाई यह जो जहां से वेद हम ले रहे हैं

92
00:06:59,120 --> 00:07:03,240
उसका अगर एक भी मंत्र गलत है आप तो एक नहीं आप तो कई मानते हो

93
00:07:03,240 --> 00:07:07,240
तो कई मंत्र अगर गलत है तो जो एक जगह गलत हो सकता

94
00:07:07,240 --> 00:07:11,800
है तो दूसरी जगह भी हो सकता है तो अगर

95
00:07:11,800 --> 00:07:15,840
एक भी मंत्र गलत है तो वह उस पूरे वेद में कहां पर सही लिखा है

96
00:07:15,840 --> 00:07:20,080
कहां पर गलत लिखा है इसका फिर निर्णय लेने के लिए हमको

97
00:07:20,080 --> 00:07:24,240
कोई और आलंबन लेना पड़ेगा जो हमारे लिए प्रमाण हो उसमें हम चुनाव

98
00:07:24,240 --> 00:07:28,760
ना कर सकते हो कि इसमें भी सही और गलत का संदेह संदेहास्पद बुद्धि ना हो

99
00:07:28,760 --> 00:07:33,000
वेद के प्रति संदेहास्पद बुद्धि है यदि आपकी तो पहली बात तो आप वैदिक

100
00:07:33,000 --> 00:07:37,200
नहीं है सनातन नहीं है क्योंकि आपकी बुद्धि संदेहास्पद है प्रमाण

101
00:07:37,200 --> 00:07:41,200
बुद्धि नहीं है वेद में कि हम इसकी एक भी लाइन को मना

102
00:07:41,200 --> 00:07:45,200
नहीं कर सकते हम इसे नहीं मानते ठीक है तो आप

103
00:07:45,200 --> 00:07:46,640
वैदिक नहीं है सनातनी नहीं

104
00:07:46,640 --> 00:07:51,280
है अब जैसे इसका उदाहरण है कि रामपाल

105
00:07:51,280 --> 00:07:55,600
को गुरु कहने वाले रामपाल में संदेहास्पद बुद्धि

106
00:07:55,600 --> 00:07:59,600
नहीं रख सकते उसमें प्रमाण बुद्धि रखनी

107
00:07:59,600 --> 00:08:03,720
पड़ेगी कि एक एक बात अक्षरस सही है अन्यथा फिर वो गुरु पर

108
00:08:03,720 --> 00:08:07,920
अविश्वास होने का दोष लग जाएगा तो

109
00:08:07,920 --> 00:08:11,920
जिस प्रकार से रामपाल के ऊपर आपकी प्रमाण बुद्धि है वैसी

110
00:08:11,920 --> 00:08:16,040
प्रमाण बुद्धि अगर वेद प है तो आप वह देखें तो आप हिंदू है

111
00:08:16,040 --> 00:08:20,560
तो आप सनातनी है क्यों क्योंकि यह जो शास्त्र है

112
00:08:20,560 --> 00:08:25,280
यह अनादी है ये थे हैं और रहेंगे

113
00:08:25,280 --> 00:08:29,280
तभी आप सनातनी है इन शास्त्रों को मानने वाले के रूप में आप सनातनी

114
00:08:29,280 --> 00:08:32,800
है

115
00:08:32,800 --> 00:08:36,920
अब जब आपने शास्त्र के एक जगह पर दोष

116
00:08:36,920 --> 00:08:41,000
लगा दिया कि भैया इसमें मिलावट हो गई है पहली बात तो यह है कि यह

117
00:08:41,000 --> 00:08:45,480
आप पहली बार नहीं कह रहे हैं यह जो दोष लगा है

118
00:08:45,480 --> 00:08:49,960
या आप नए नहीं है यह दोष जितने भी सनातन विरुद्ध विचार धाराए

119
00:08:49,960 --> 00:08:54,320
उत्पन्न होती है वह यही दोष लगाती है वेदों पर तब अपना व ताना बाना बनती

120
00:08:54,320 --> 00:08:58,560
है इस्लाम में भी यही कहा गया है कि

121
00:08:58,560 --> 00:09:03,120
कुरान से पह पहले बहुत सारे ईश्वर के भेजे हुए ग्रंथ आए हैं

122
00:09:03,120 --> 00:09:07,320
मगर उन सब में मिलावट हो गई है मगर कुरान की रक्षा

123
00:09:07,320 --> 00:09:11,840
स्वयं ऊपर वाला करता है इसलिए कुरान में मिलावट नहीं हो सकती

124
00:09:11,840 --> 00:09:16,040
इसलिए वो जो पहले ग्रंथ आ चुके हैं उन सब ग्रंथों की वही बातें

125
00:09:16,040 --> 00:09:20,040
मान्य होंगी जो कुरान में लिखी हुई बातों से मैच करेंगी

126
00:09:20,040 --> 00:09:24,040
वही आपने किया कि वेदों की लिखी हुई वही बातें मान्य होंगी

127
00:09:24,040 --> 00:09:28,240
जो रामपाल के द्वारा गरीब दास के ग्रंथ के द्वारा भी नहीं उसमें डिस्प्यूट है

128
00:09:28,240 --> 00:09:32,880
जो रामपाल के द्वारा स्वीकार्य होंगी वही बातें माननी होंगी

129
00:09:32,880 --> 00:09:36,880
दूसरी बात यह है तो यहां से एक बात आई कि वेदों

130
00:09:36,880 --> 00:09:41,560
में प्रमाण बुद्धि नहीं है तो वैदिक नहीं है हिंदू नहीं है सनातनी नहीं है

131
00:09:41,560 --> 00:09:45,600
दूसरा एक बात ये होती है कि जब आप यह कह देते हैं कि एक जगह

132
00:09:45,600 --> 00:09:47,800
गलत है तो वो सब जगह गलत हो सकता है

133
00:09:47,800 --> 00:09:51,800
कहीं पर भी हो सकता है तो ऐसे

134
00:09:51,800 --> 00:09:55,840
में जब हम वास्तविक वेद जो आपके अनुसार वास्तविक

135
00:09:55,840 --> 00:10:00,160
है जिसमें मिलावट नहीं है वो हम जब प्रस्तुत नहीं कर रहे हैं तो क्या हो रहा है

136
00:10:00,160 --> 00:10:04,520
उसमें हम अप्रत्यक्ष रूप से कह रहे हैं कि सनातन

137
00:10:04,520 --> 00:10:08,720
धर्म नाम का जो धर्म है वैदिक धर्म वो नष्ट हो चुका है उसका

138
00:10:08,720 --> 00:10:13,640
आज कोई अस्तित्व के लिए कोई व्यवहारिक उसकी सामग्री प्राप्त नहीं है

139
00:10:13,640 --> 00:10:17,800
हम यह कहते हैं सनातन धर्म का अस्तित्व नहीं क्योंकि जो अस्तित्व

140
00:10:17,800 --> 00:10:22,520
दिखा अस्तित्व को प्रदर्शित करने वाली जो सामग्री है

141
00:10:22,520 --> 00:10:26,520
उसकी विश्वसनीयता पर हमने उंगली उठा दी अब

142
00:10:26,520 --> 00:10:30,600
वो एक जगह गलत है तो वो दूसरी जगह भी गलत हो सकता है यह तो रही

143
00:10:30,600 --> 00:10:34,640
एक बात कि मिलावट कहने वाला जो मिलावट

144
00:10:34,640 --> 00:10:38,920
कह रहा है वह वैदिक नहीं है सनातनी नहीं है

145
00:10:38,920 --> 00:10:42,960
क्योंकि वह वेदों के विरुद्ध किसी और सो

146
00:10:42,960 --> 00:10:47,120
सोर्स ऑफ इंफॉर्मेशन के आधार पर वेदों में चयन प्रक्रिया

147
00:10:47,120 --> 00:10:51,240
कर रहा है कि कहां सही है कहां गलत है ठीक है तो इस

148
00:10:51,240 --> 00:10:55,400
तरह का मिलावट का आक्षेप करने वाला वैदिक सनातनी हिंदू नहीं है यह

149
00:10:55,400 --> 00:11:00,240
सच्चाई आ गई सामने फिर दूसरी सच्चाई

150
00:11:00,240 --> 00:11:04,920
आई कि

151
00:11:04,920 --> 00:11:08,920
अ यदि आप यह आक्षेप लगा रहे हैं कि उसमें

152
00:11:08,920 --> 00:11:13,000
मिलावट है और यह प्रस्तुत नहीं कर रहे कि सही वाला यह है तो आप

153
00:11:13,000 --> 00:11:17,080
बिना बोले यह कह रहे हैं अप्रत्यक्ष रूप से कह रहे हैं कि सनातन नाम का

154
00:11:17,080 --> 00:11:21,080
धर्म आज अस्तित्व में नहीं है आज वह सभी है

155
00:11:21,080 --> 00:11:25,400
जो किसी विशेष देश काल परिस्थिति में उत्पन्न हुए गरीब दास या कबीर

156
00:11:25,400 --> 00:11:29,440
सागर या कुरान बाइबल इत्यादि यह सब जो

157
00:11:29,440 --> 00:11:33,520
किसी देश काल परिस्थिति में उत्पन्न होने वाली विचार धाराए है

158
00:11:33,520 --> 00:11:38,040
निय मावलिया है वही आज अस्तित्व में है जो

159
00:11:38,040 --> 00:11:42,120
अनादि धर्म ग्रंथ है मानवता के लिए वेद

160
00:11:42,120 --> 00:11:46,280
शस्त्र उन पर आपने आक्षेप लगा दिया और ओरिजिनल वाला

161
00:11:46,280 --> 00:11:52,280
आपके अनुसार है नहीं तो वह जो

162
00:11:53,440 --> 00:11:57,600
है आपने अप्रत्यक्ष रूप से अवैध होना

163
00:11:57,600 --> 00:12:02,080
स्वयं को सिद्ध कर दिया अब एक बात आती है

164
00:12:02,080 --> 00:12:06,480
यह दो चीजें तो निकल आई तीसरी चीज क्या निकली

165
00:12:06,480 --> 00:12:10,640
तीसरी चीज य निकली इस बात से कि आपने कह

166
00:12:10,640 --> 00:12:14,960
दिया कि भाई वेद में मिलावट है तो वेद में कहां पर मिलावट

167
00:12:14,960 --> 00:12:19,040
है कहां पर नहीं मिलावट है यह सिद्ध कैसे होगा तो सिद्ध होने

168
00:12:19,040 --> 00:12:23,320
के लिए वेदों को वेरीफाई करने के लिए आप कोई तीसरा पक्ष लाएंगे

169
00:12:23,320 --> 00:12:28,120
अब आप लाएंगे गरीब दास अब आप लाएंगे कबीर सागर अब आप लाएंगे

170
00:12:28,120 --> 00:12:32,160
रामपाल तो इन तीनों को वेदों को प्रमाण

171
00:12:32,160 --> 00:12:36,200
मानने वाला व्यक्ति नहीं मानता कि यह आकर के डिसाइड

172
00:12:36,200 --> 00:12:40,320
करेंगे कौन सा मंत्र लेना है कौन सा नहीं लेना है वो होंगे ईश्वर आपके अनुसार

173
00:12:40,320 --> 00:12:44,360
ईश्वर होंगे हमारे अनुसार नहीं है

174
00:12:44,360 --> 00:12:48,680
तो फिर आप यह कैसे कह सकते हैं अच्छा

175
00:12:48,680 --> 00:12:53,480
इनको प्रमाण मानने के लिए आप क्या कहोगे गीता में लिखा है तत्वदर्शी

176
00:12:53,480 --> 00:12:57,600
434 अरे भैया उसमें ही आगे क्या लिखा है श्री कृष्ण

177
00:12:57,600 --> 00:13:01,880
को परमात्मा के रूप में स्वीकार करने वाला तत्व ज्ञानी है 435

178
00:13:01,880 --> 00:13:06,640
में ही लिखा है खैर उस बात को भी छोड़ दो नहीं तो यहां से विषय से भटक जाएंगे

179
00:13:06,640 --> 00:13:08,680
तो क्या होगा कि

180
00:13:08,680 --> 00:13:12,720
जब आपने यह कह दिया कि गीता में कौन सा मंत्र सही है कौन सा मंत्र सही नहीं है

181
00:13:12,720 --> 00:13:17,000
यह तत्वदर्शी बताएगा तो तत्वदर्शी को गीता थोड़ी ना सिद्ध करेगी

182
00:13:17,000 --> 00:13:21,400
क्योंकि गीता की अपनी प्रामाणिकता भी सिद्ध नहीं हुई

183
00:13:21,400 --> 00:13:26,000
गीता की अपनी प्रामाणिकता वेद की अपनी प्रमाणिकता आपके अनुसार सिद्ध नहीं हुई

184
00:13:26,000 --> 00:13:30,160
फिर आप वेद के किसी मंत्र के आधार पर तत्वदर्शी कैसे सिद्ध कर दोगे

185
00:13:30,160 --> 00:13:35,480
पहले ये तो सिद्ध करो कि इसका ये वाला मंत्र मानना है ये वाला नहीं मानना

186
00:13:35,480 --> 00:13:39,480
है जब आप ये चीज सिद्ध कर लेंगे कि ये वाला मानना है

187
00:13:39,480 --> 00:13:43,680
ये वाला नहीं मानना है उसके बाद आप ये कह सकते हैं कि हां भाई ये जो मानने

188
00:13:43,680 --> 00:13:48,440
वाले मंत्र है उन मानने वाले मंत्रों के अनुसार वो तत्वदर्शी है

189
00:13:48,440 --> 00:13:52,480
मगर आप तो पहले उसको तत्वदर्शी कह रहे हो फिर उसी से मनवा रहे हो कि ये वाला मंत्र मानना ये

190
00:13:52,480 --> 00:13:56,920
वाला नहीं मानना है ठीक है अब बात आती है

191
00:13:56,920 --> 00:14:01,360
कि आपने कहा कि मनमुक भक्ति जो लोग

192
00:14:01,360 --> 00:14:07,360
ब्रह्मा विष्णु महेश की भक्ति करते हैं जो

193
00:14:07,760 --> 00:14:11,880
लोग मंत्र गायत्री मंत्र इत्यादि पढ़ते हैं यह लोग मनम भक्ति

194
00:14:11,880 --> 00:14:15,960
करते हैं भाई मनम कौन है जो अपने मन से यह कह रहा

195
00:14:15,960 --> 00:14:20,160
है कि इसमें मिलावट हुई है हमको प्रमाण दो मिलावट

196
00:14:20,160 --> 00:14:24,480
हुई है किसने करी कब करी कैसे करी प्रमाण दो मनम

197
00:14:24,480 --> 00:14:28,480
बातें तो यह है ना प्रमाण दो मिलावट

198
00:14:28,480 --> 00:14:31,320
का

199
00:14:31,320 --> 00:14:35,560
और अब आप मानते हैं कि इसका प्रमाण है कबीर सागर इसका

200
00:14:35,560 --> 00:14:39,760
प्रमाण है कबीर व गरीब दास या इसका प्रमाण है रामपाल

201
00:14:39,760 --> 00:14:44,120
तो मेरे भाई एक बात समझ लो सनातन में और सनातन विरुद्ध

202
00:14:44,120 --> 00:14:48,280
जितने भी तंत्र है उन सब में एक ही अंतर

203
00:14:48,280 --> 00:14:52,440
है क्या कि सनातन उन धर्म ग्रंथों को मानता

204
00:14:52,440 --> 00:14:57,000
है जो धर्म ग्रंथ यह नहीं कहते कि मुझे ईश्वर ने रचा

205
00:14:57,000 --> 00:15:01,440
ईश्वर की सांस के रूप में है अभी आगे आएगा पार्ट सांस के रूप में है

206
00:15:01,440 --> 00:15:05,800
यह धर्म ग्रंथ यह क्लेम नहीं करते हैं इसलिए हमारी निष्ठा है इनम इसलिए हमारा विश्वास

207
00:15:05,800 --> 00:15:10,080
है आस्था है क्योंकि बधार उपनिषद दो चर 10

208
00:15:10,080 --> 00:15:14,160
इनको ईश्वर ने रचा नहीं है ईश्वर के स्वरूप सांस के रूप में विद्यमान

209
00:15:14,160 --> 00:15:18,440
है ईश्वर की सांस के रूप में है कब कब से है जब से ईश्वर

210
00:15:18,440 --> 00:15:22,600
है इनको ईश्वर ने रचा नहीं अनादि हैय यह

211
00:15:22,600 --> 00:15:23,120
ग्रंथ

212
00:15:23,120 --> 00:15:27,320
ये कहते हैं हमको किसी ने रचा नहीं तो तर्क की पराकाष्ठा क्योंकि

213
00:15:27,320 --> 00:15:31,680
अगर रच देगा तो काल को बनाने वाला भी ईश्वर है आपके

214
00:15:31,680 --> 00:15:35,760
अनुसार जब काल को बनाने वाला भी ईश्वर है बुराई को

215
00:15:35,760 --> 00:15:39,840
बनाने वाला भी ईश्वर है तो फिर उसके द्वारा लिखा गया जो ग्रंथ

216
00:15:39,840 --> 00:15:43,920
है गरीब दास का मान लो या कबीर वाणी कबीर सागर मान लो या

217
00:15:43,920 --> 00:15:48,400
रामपाल मान लो आज की तारीख में जो रामपाल बोल रहे हैं जब भगवान

218
00:15:48,400 --> 00:15:52,560
आपके अनुसार वो भगवान है तो वो तो भटका भी रहा है ना

219
00:15:52,560 --> 00:15:57,200
काल को बना के उसकी वाणी पर भरोसा कैसे

220
00:15:57,200 --> 00:16:01,320
करोगे ठीक है तो आप उस पर निर्भर भी नहीं

221
00:16:01,320 --> 00:16:06,000
हो सकते इसकी चयन प्रक्रिया पर पहली बात तो यह कि चयन प्रक्रिया के लिए

222
00:16:06,000 --> 00:16:10,360
रामपाल और गरीब दास को क्यों माने इसका कोई

223
00:16:10,360 --> 00:16:14,560
आपके पास लॉजिक नहीं है ना ही तर्क

224
00:16:14,560 --> 00:16:18,760
है ना प्रमाण है प्रमाण दिखाओ हर बात में प्रमाण मांगते हो ना प्रमाण

225
00:16:18,760 --> 00:16:23,400
दिखाओ कहां मिलावट हुई हम ऐसा कोई प्रमाण दिखाओ जिसको हम मान सके

226
00:16:23,400 --> 00:16:27,400
अब भैया तुमने जो जिसको हम प्रमाण मानते हैं उसकी प्रमाणिकता पर उंगली उठा दी

227
00:16:27,400 --> 00:16:31,520
तो हम तुम्हारी बात क्यों मानेंगे

228
00:16:31,520 --> 00:16:35,800
जब तुम वेदों के विरुद्ध हो गए जब तुम वेद के विरुद्ध

229
00:16:35,800 --> 00:16:39,880
व्यक्तिगत तर्क मान्य मिलावट करने वाले राक्षस

230
00:16:39,880 --> 00:16:43,880
व्यास स्मृति एक पा व्यक्तिगत तकमान शति के विरोध

231
00:16:43,880 --> 00:16:47,920
में शुटी की निंदा करने वाला कि यह जो वेद में लिखी हुई

232
00:16:47,920 --> 00:16:52,280
शुटी है यह गलत है मिलावट है यह निंदा करने वाला वेद विरोधी

233
00:16:52,280 --> 00:16:55,880
नास्तिक दो 11

234
00:16:55,880 --> 00:17:00,240
मनुस्मृति ठीक है तो इन्होंने क्या

235
00:17:00,240 --> 00:17:04,480
किया है काल का बना के कुल मिलाकर के गुथ गुथी करके पहले

236
00:17:04,480 --> 00:17:08,520
वेदों से व्यक्ति को आकर्षित करते हैं जब व्यक्ति आकर्षित होकर इनकी

237
00:17:08,520 --> 00:17:12,720
टीम का खिलाड़ी बन जाता है तब उसको यह बताते हैं कि वेद भी मिलावटी

238
00:17:12,720 --> 00:17:17,520
है वेद वेद जो है वो नहीं है प्रमाण प्रमाण तो एक मात्र वो है

239
00:17:17,520 --> 00:17:21,520
संभवत जिनके स्नान से बचे हुए पानी को हम लोग पीते हैं प्रमाण तो

240
00:17:21,520 --> 00:17:25,840
वो है तो

241
00:17:25,840 --> 00:17:29,880
इतनी बात हो गई अब इसके बाद ये हो गया कि भैया वो

242
00:17:29,880 --> 00:17:34,680
व्यक्ति जो प्रवीण था प्रवीण पर वापस आ जाते हैं उसने

243
00:17:34,680 --> 00:17:38,720
कहा कि अगर आप उसको नहीं मानते हैं गरीब दास के आधार पर

244
00:17:38,720 --> 00:17:42,840
आप वेदों का चयन नहीं कर सकते हैं हम वेदों के आधार पर गरीब दास का चयन

245
00:17:42,840 --> 00:17:46,680
करेंगे भाई क्या बात कर रहे हो हम वेदों के आधार पर चेक करेंगे

246
00:17:46,680 --> 00:17:51,120
कि रामपाल कितना सच बोल रहा है कितना झूठ बोल रहा है वो वैदिक

247
00:17:51,120 --> 00:17:55,160
है ईश्वर भी आकर के अगर कहेंगे कि वेदों वेदों को

248
00:17:55,160 --> 00:17:59,440
मत मानो मुझे मानो तो हम वेदों को मानेंगे क्योंकि ईश्वर

249
00:17:59,440 --> 00:18:03,880
वो है जो कुछ भी कर सकता है ईश्वर अवाद है सर्वशक्तिमान

250
00:18:03,880 --> 00:18:08,360
है यह पूरा संसार अच्छाई बुराई हर चीज उसने बनाई

251
00:18:08,360 --> 00:18:12,560
है उसकी इच्छा के बाहर कुछ नहीं होता शायद आपका

252
00:18:12,560 --> 00:18:17,360
ईश्वर ऐसा होगा जिसकी इच्छा के बाहर बुरे कार्य होते होंगे

253
00:18:17,360 --> 00:18:21,560
है ना तो फिर प्रवीण से प्रवीण ने एक बात

254
00:18:21,560 --> 00:18:25,840
कही कि भाई अपना अपना फिर वो है ओपिनियन तो भाई

255
00:18:25,840 --> 00:18:30,080
जब अपना अपना ओपिनियन है तो फिर तुम अपना ओपिनियन आग ठोप क्यों रहे हो वेदों

256
00:18:30,080 --> 00:18:34,320
में प्रमाण है मान लो मेरी बात और कबीर भगवान है

257
00:18:34,320 --> 00:18:38,480
यह तो तुम्हारा ओपिनियन है ना भाई तुम तो वेदों को प्रमाण ही नहीं मानते

258
00:18:38,480 --> 00:18:42,640
हो और अगर वेदों को मानते हो प्रमाण एक मिनट एक मिनट इसको अभी

259
00:18:42,640 --> 00:18:47,360
थोड़ा सा रुक जाइए मैं जो बात चल रही है उसको कंक्लूजन

260
00:18:47,360 --> 00:18:51,560
तो वेदों को प्रमाण ही नहीं मानते हो तो आप वेदों

261
00:18:51,560 --> 00:18:56,000
को प्रमाण बता कर के अपनी बात क्यों मनवाने आ रहे हो जब सबका अपना अपना ओपिनियन है

262
00:18:56,000 --> 00:19:00,000
भाई हम वेद को मार रहे हैं हमें वेद को मानने दो तुम कभी सागर को मान रहे हो कबीर सागर को

263
00:19:00,000 --> 00:19:02,160
मान

264
00:19:02,160 --> 00:19:03,160
मानो

265
00:19:03,160 --> 00:19:07,160
और यह खूब चिल्ला चिल्ला के कहो कबीर सागर प्रमाण है कबीर भगवान

266
00:19:07,160 --> 00:19:11,200
है गरीब दास प्रमाण है रामपाल भगवान है रामपाल प्रमाण है

267
00:19:11,200 --> 00:19:15,520
जेल धाम प्रमाण है और रामपाल भगवान है यह सब खुब कहो किसने

268
00:19:15,520 --> 00:19:19,560
रोका है मगर आपने अपने ग्रंथों पर क्या लिखा

269
00:19:19,560 --> 00:19:23,680
वेदों में प्रमाण गीता तेरा ज्ञान अमृत ये क्या है

270
00:19:23,680 --> 00:19:28,160
व्यक्ति को मूर्ख बनाने का तरीका जिनमें आपकी खुद की प्रमाण

271
00:19:28,160 --> 00:19:30,720
बुद्धि नहीं

272
00:19:30,720 --> 00:19:35,080
अब आप आते हो य बताने देखो देखो वेदों में प्रमाण है कबीर भगवान है भाई

273
00:19:35,080 --> 00:19:39,120
तुम्हारा वाला सेलेक्ट किया हुआ मंत्र क्यों माने

274
00:19:39,120 --> 00:19:43,160
प्रमाण के रूप में जब तुम खुद कह रहे हो कि इसमें मिलावट हुई है तो यह जो मंत्र

275
00:19:43,160 --> 00:19:47,280
है जिससे तुम अपने व्यक्ति को भगवान सिद्ध कर रहे हो तत्वदर्शी सिद्ध

276
00:19:47,280 --> 00:19:51,520
कर रहे हो य यह वाला मंत्र तुम्हारे द्वारा चुना जाने वाला क्यों माने

277
00:19:51,520 --> 00:19:55,600
क्योंकि गरीब दास में लिखा है तो गरीब दास को हम नहीं

278
00:19:55,600 --> 00:19:59,680
मानते क्योंकि रामपाल ने कहा है वो भगवान है क्योंकि रामपाल को हम

279
00:19:59,680 --> 00:20:04,280
नहीं मानते पहले हमें मनवा उसके बाद

280
00:20:04,280 --> 00:20:09,880
इस मंत्र के आधार पर प्रमाण देना पहले उसको मनवा तो

281
00:20:09,880 --> 00:20:13,960
सही ठीक है तो यह बातें

282
00:20:13,960 --> 00:20:18,160
हो गई अब इसके बाद क्या हुआ यह व्यक्ति जो आया था

283
00:20:18,160 --> 00:20:22,160
प्रवीण य व्यक्ति सनातनी सिद्ध नहीं हुआ

284
00:20:22,160 --> 00:20:26,160
और एक चीज और है कि सनातन धर्म की व्याख्या

285
00:20:26,160 --> 00:20:30,280
क्या है ये समझ लीजिए एक तो है कि आत्मा सनातन है भगवान

286
00:20:30,280 --> 00:20:34,320
सनातन है ठीक है तत्व से सब सनातन है

287
00:20:34,320 --> 00:20:38,600
वो चीज हो गई मगर सनातन धर्म का मतलब क्या है सनातन

288
00:20:38,600 --> 00:20:42,920
धर्म का मतलब है वो नियमावली जो इस माया रूपी

289
00:20:42,920 --> 00:20:46,920
संसार में फंसे हुए जीव को यहां से मुक्ति

290
00:20:46,920 --> 00:20:50,960
दिलाने में सहायता करती है वो नियमावली वो विधि

291
00:20:50,960 --> 00:20:55,320
वो धर्म सनातन है वेदा आदि शास्त्रों के रूप में

292
00:20:55,320 --> 00:20:59,320
ठीक है अब बात ये आती है कि कुछ लोग

293
00:20:59,320 --> 00:21:03,880
कहते हैं कि अभी आगे आएगा लोग उस पर बात करेंगे कुछ लोग कहते हैं कि

294
00:21:03,880 --> 00:21:08,560
सबका धर्म अलग अलग होता है वो धर्म अलग अलग होता है मगर वो लिखा हुआ है

295
00:21:08,560 --> 00:21:12,640
सनातन धर्म ग्रंथावली में जो धर्म समय समय पर अलग अलग होता

296
00:21:12,640 --> 00:21:16,760
है जैसे जब कोई व्यक्ति पुत्र है तो उसका धर्म अलग हो गया जब वह पति

297
00:21:16,760 --> 00:21:21,040
बना तो पत्नी के प्रति धर्म अलग हो गया यह सब जो अलग अलग हो रहा है

298
00:21:21,040 --> 00:21:25,080
द्वापर में अलग हो गया सतयुग में ये अलग अलग जो हो रहा है यह व्यवस्था उसमें

299
00:21:25,080 --> 00:21:29,240
लिखी हुई है और वो जो नियमावली है वो सनातन है उसको

300
00:21:29,240 --> 00:21:33,520
कभी देश काल परि स्थिति में नहीं रचा गया वो सनातन है तो उस नियमावली

301
00:21:33,520 --> 00:21:37,960
को जो अलग-अलग विषय वस्तु स्थिति में अप्लाई

302
00:21:37,960 --> 00:21:42,000
होती है मगर वो एक बार जो लिखी गई है उस नियमावली को मानने

303
00:21:42,000 --> 00:21:46,720
वाला सनातनी है सनातन हर कोई है तत्व से

304
00:21:46,720 --> 00:21:50,920
मगर उस नियमावली को मानने वाला जो सनातन है जिसको कभी रचा

305
00:21:50,920 --> 00:21:55,280
नहीं गया कि कौन सी देश काल परिस्थिति में तुम्हें क्या करना है उस नियमावली को

306
00:21:55,280 --> 00:21:59,480
मानने वाला व्यक्ति सनातनी है क्योंकि वो जो वह जो नियमावली है

307
00:21:59,480 --> 00:22:02,440
वह भी सनातन है

308
00:22:02,440 --> 00:22:07,200
अनादि यह सारी चीजें प्राप्त हो गई अब लास्ट में वह व्यक्ति इस पर आया

309
00:22:07,200 --> 00:22:11,200
कि तुम्हारा मंत्र कौन सा है है ना

310
00:22:11,200 --> 00:22:15,400
तुम्हारा मंत्र कौन सा है इस पर मैंने कहा कि क्यों बताऊं इसका अर्थ

311
00:22:15,400 --> 00:22:19,520
क्या है कि मंत्र जो है जो मिलता है गुरु से वह किसी को बताया नहीं जाता

312
00:22:19,520 --> 00:22:24,320
है सिंपल आप लोग जब दीक्षा देते हो चाहे

313
00:22:24,320 --> 00:22:28,520
कन्या हो चाहे युवा मातृ शक्ति हो चाहे कोई भी उसको

314
00:22:28,520 --> 00:22:32,520
अकेले कमरे में ले जाते हो और टीवी चला कर के दिखाते हो और

315
00:22:32,520 --> 00:22:36,600
पता नहीं क्या है क्या नहीं है अकेले ले जाते हो कमरे में कोई

316
00:22:36,600 --> 00:22:40,160
उस समय दूसरा नहीं होता है नहीं तो तुम बता दो वीडियो सार्वजनिक

317
00:22:40,160 --> 00:22:44,160
कर दो जो दिखाते हो सब कर दोगे इस बात का राय का पहाड़ बना रहे है कि

318
00:22:44,160 --> 00:22:48,280
कौन सा मंत्र बताया मैंने तब भी वो जो

319
00:22:48,280 --> 00:22:52,280
मंत्र था गायत्री मंत्र का नाम लिया मैंने गायत्री मंत्र पढ़

320
00:22:52,280 --> 00:22:56,640
के नहीं बता दिया कि कौन सा मंत्र है गायत्री मंत्र नाम है उसका

321
00:22:56,640 --> 00:23:00,800
ठीक है तो इस पर आक्ष हो गया अब जब शास्त्रों की बात एक तरफ

322
00:23:00,800 --> 00:23:05,760
हो जाती है तो बात ये आती है क्या

323
00:23:05,760 --> 00:23:09,960
जो गरीब दास नामक जो ग्रंथ है उसका प्योर नाम

324
00:23:09,960 --> 00:23:14,080
मुझे नहीं पता या रामपाल की वाणी को धर्म

325
00:23:14,080 --> 00:23:18,160
के रूप में स्वीकार करना मोक्ष के रूप मोक्ष

326
00:23:18,160 --> 00:23:22,800
दिलवाने वाली वाणी के रूप में स्वीकार करना क्या तार्किक है

327
00:23:22,800 --> 00:23:26,920
नहीं है क्यों नहीं है पहली बात वो किसी देश

328
00:23:26,920 --> 00:23:31,000
काल परिस्थिति में रचित है किसी के द्वारा रचित

329
00:23:31,000 --> 00:23:35,560
है अगर वह भगवान के द्वारा रचित है तो उस पर वह खुद क्रेडिबल

330
00:23:35,560 --> 00:23:39,680
उसमें आ जाती है क्योंकि भगवान सब कुछ बना रहा

331
00:23:39,680 --> 00:23:44,120
है भगवान राक्षसों को भी बना रहा है तो भगवान

332
00:23:44,120 --> 00:23:48,400
की रची हुई अगर है किसी देश काल परिस्थिति में वह प्रमाण

333
00:23:48,400 --> 00:23:51,120
कैसे होगी

334
00:23:51,120 --> 00:23:55,840
बताइए भगवान ही तो है जो विलनस को बना रहा है दुनिया में

335
00:23:55,840 --> 00:23:59,920
पहली बात दूसरी बात अब इस पर आ जाते कि मान भी लिया जाए

336
00:23:59,920 --> 00:24:04,240
कि उसको प्रमाण मानना है तो क्या उसके द्वारा मिलने वाला ईश्वर

337
00:24:04,240 --> 00:24:08,400
सर्वशक्तिमान है धर्म तो शाश्वत नहीं रहा तीन तीन बिंदु हमने

338
00:24:08,400 --> 00:24:12,600
पकड़े हैं हमेशा सदैव इन तीन बिंदुओं पर आधारित बातें

339
00:24:12,600 --> 00:24:16,800
होती है हमारी कौन सी तीन बिंदु सर्वशक्तिमान ईश्वर परम स्वतंत्र

340
00:24:16,800 --> 00:24:20,840
मोक्ष शाश्वत धर्म सिंपल तो

341
00:24:20,840 --> 00:24:26,840
क्या है कि

342
00:24:29,000 --> 00:24:33,040
जब हम कहते हैं कि चलो मान लिया कि वह शाश्वत नहीं है

343
00:24:33,040 --> 00:24:37,160
वह ग्रंथावली जो लिखी गई है या जो रामपाल की वाणी है वह शाश्वत

344
00:24:37,160 --> 00:24:41,200
नहीं है आज किसी देशकाल परिस्थिति में आ रही है और

345
00:24:41,200 --> 00:24:45,560
भले ही चलो वह भटका भी सकता है मगर हमसे सच बोल रहा है यह भी मान लिया

346
00:24:45,560 --> 00:24:49,680
भले ही वह भटका भी सकता है मगर हमसे सच बोल रहा है यह भी मान

347
00:24:49,680 --> 00:24:54,120
लिया थोड़ी देर दुर्जन तोष नय अब भाई

348
00:24:54,120 --> 00:24:58,600
मिलने वाली जो चीजें है वो तो वो होनी चाहिए जिनके लिए धर्म का अस्तित्व

349
00:24:58,600 --> 00:25:02,640
है व्यक्ति धर्म का पालन व्यक्ति के जीवन में धर्म का अस्तित्व क्यों

350
00:25:02,640 --> 00:25:06,720
है क्योंकि उसको चाहिए मोक्ष मोक्ष का साधक क्या

351
00:25:06,720 --> 00:25:11,640
है मोक्ष का साधन क्या है सर्वशक्तिमान ईश्वर

352
00:25:11,640 --> 00:25:16,240
तो सर्वशक्तिमान ईश्वर है क्या अबाध

353
00:25:16,240 --> 00:25:20,400
किसी भी नियम के नीचे ना आने वाला फिर इस पर बात होगी

354
00:25:20,400 --> 00:25:24,440
जब मैंने यह प्रश्न पूछा तो वो व्यक्ति कहने लगा जब मैंने कहा

355
00:25:24,440 --> 00:25:29,040
कि बताओ भाई सर्वशक्तिमान ईश्वर है क्या वो ऐसे आता है पहले तो वो गड़बड़ा आया बोला

356
00:25:29,040 --> 00:25:33,040
नहीं ये मैं नहीं बताऊंगा अब देखो मैंने कहा था मंत्र नहीं बताते मंत्र

357
00:25:33,040 --> 00:25:37,200
की जो बात होती कि भाई हर व्यक्ति को कान में मिलता है गुरु से मिलता है वो क्यों ऐसे

358
00:25:37,200 --> 00:25:41,320
सार्वजनिक बोले बता दिया राम का मंत्र बता दिया गायत्री मंत्र

359
00:25:41,320 --> 00:25:45,400
उसको बोल के नहीं बताया जाता है सार्वजनिक रूप से सिर्फ

360
00:25:45,400 --> 00:25:49,680
इतने के लिए अब वो क्या कह रहा है कि नहीं नहीं मैं क्योंकि उस गड़बड़ है उसको सनातन

361
00:25:49,680 --> 00:25:53,760
का अर्थ नहीं पता उसको धर्म की परिभाषा नहीं पता है और अब वो जब ईश्वर

362
00:25:53,760 --> 00:25:57,760
की बात हो रही है कि उसका ईश्वर कैसा है तो उसको वो भी नहीं पता है

363
00:25:57,760 --> 00:26:01,800
बताने से मना कर रहा है फिर जैसे तैसे करके जब हमने ये

364
00:26:01,800 --> 00:26:05,960
बता लिया कि भाई वो ईश्वर वहां से य आता है तो जब हमने काउंटर क्वेश्चन

365
00:26:05,960 --> 00:26:09,960
किया इसको समझिए जब हमने काउंटर क्वेश्चन

366
00:26:09,960 --> 00:26:14,040
किया तो व यह कह रहा है कि आपकी समझ में नहीं आएगा भाई ईश्वर का एक

367
00:26:14,040 --> 00:26:18,760
रूप ऐसा है जो हमारे व्यवहार का विषय नहीं है सिर्फ उसको प्राप्त किया जा सकता है

368
00:26:18,760 --> 00:26:23,080
जैसे कि एनर्जी का सोर्स है भोजन भोजन के लिए हम व्यवहार

369
00:26:23,080 --> 00:26:26,640
कर सकते हैं कैलोरी जो भोजन से प्राप्त होती है उसके लिए

370
00:26:26,640 --> 00:26:30,640
व्यवहार नहीं कर सकते उसको हम डिस्क्राइब नहीं कर सकते तो ईश्वर का एक

371
00:26:30,640 --> 00:26:34,800
रूप ऐसा है जिसको केवल प्राप्त किया जा सकता है जो व्यवहार का विषय नहीं है और

372
00:26:34,800 --> 00:26:38,800
एक दूसरा रूप ऐसा है जो वो व्यवहारिक हो जाता है जिसको

373
00:26:38,800 --> 00:26:43,320
जिसके लिए व्यवहार करके हम वहां तक पहुंच पाते हैं तो

374
00:26:43,320 --> 00:26:47,480
उसको व्यवहारिक रूप में तो आप ला रहे हो ना नीचे एज इट इज जैसा

375
00:26:47,480 --> 00:26:51,680
वहा है वैसा ही य है आप उसको समझने में आने वाला बना

376
00:26:51,680 --> 00:26:55,800
के य ला रहे हो और जब समझने में आने वाला बना के यहां ला रहे हो कि जैसा व है वैसा

377
00:26:55,800 --> 00:27:00,040
ही य है तो फिर आपका ही एक सत उससे टूट रहा है

378
00:27:00,040 --> 00:27:04,280
क्या टूट रहा है आपने कहा कि वो शाश्वत है ट्रांसफॉर्मेबल नहीं है

379
00:27:04,280 --> 00:27:08,480
परिवर्तनशील नहीं है तो परवत या तो मत कहो कि व परिवर्तनशील

380
00:27:08,480 --> 00:27:12,520
नहीं है मत कहो और अगर परिवर्तनशील नहीं है कह रहे हो तो फिर

381
00:27:12,520 --> 00:27:18,520
यह मत कहो कि वह जो है सर्वशक्तिमान

382
00:27:18,600 --> 00:27:22,760
है परिवर्तनशील मान लिया अगर परिवर्तनशील मानोगे

383
00:27:22,760 --> 00:27:27,200
तो व शाश्वत नहीं है और परिवर्तनशील नहीं है तो वो सर्वशक्तिमान

384
00:27:27,200 --> 00:27:31,240
नहीं तो उसको ना उसका जो ना समझ

385
00:27:31,240 --> 00:27:35,240
में आने वाला रूप है उसको आप कह रहे हो कि मैं जानता हूं और वह समझ

386
00:27:35,240 --> 00:27:39,320
में आने वाला है और आपने यहां लाकर खड़ा कर दिया अब आपने लाके खड़ा

387
00:27:39,320 --> 00:27:41,760
किया तो आप ही का एक सिद्धांत टूटा कि वो

388
00:27:41,760 --> 00:27:45,760
सर्वशक्तिमान है कि नहीं उस परे आक्षेप आ गया वो ये कर सकता है कि

389
00:27:45,760 --> 00:27:49,800
नहीं भाई मान लीजिए कि छ फीट है उनका कद अब

390
00:27:49,800 --> 00:27:54,000
मैं कहूं क्या वो इतना बड़ा हो सकता है तो अगर

391
00:27:54,000 --> 00:27:58,760
वो हो सकते हैं तो यानी कि उनका वो जो शरीर है छ फीट का वो शाश्वत नहीं है

392
00:27:58,760 --> 00:28:03,000
सिंपल वो ट्रांसफॉर्म हो रहा है और जितनी और जितनी

393
00:28:03,000 --> 00:28:07,520
देर वो छोटे कद में है उतनी देर जो उनका स्वरूप था

394
00:28:07,520 --> 00:28:11,560
जिसको अभी तक हम कह रहे थे कि ओरिजिनल स्वरूप है जितनी

395
00:28:11,560 --> 00:28:15,640
देर वो छोटा छोटे स्वरूप में रहे उतनी देर वो नष्ट हो गया वो शरीर उसका अस्तित्व नहीं

396
00:28:15,640 --> 00:28:20,400
है जितनी देर वो ये

397
00:28:20,400 --> 00:28:24,440
हुआ तो अगर आप आपने उसको निश्चित उस

398
00:28:24,440 --> 00:28:28,600
समझ में ना आने वाले रूप को आपने समझ में ना आने वाला बना केर खड़ा किया

399
00:28:28,600 --> 00:28:33,120
जिससे आप ही के द्वारा बताया गया एक रूल टूट गया ईश्वर सर्वशक्तिमान है

400
00:28:33,120 --> 00:28:37,680
और ऐसा ही होगा जब भी परंपरा प्राप्त आचार्यों के विरुद्ध

401
00:28:37,680 --> 00:28:41,800
आप बातें करोगे आपका ईश्वर बाधित हो जाएगा सर्व

402
00:28:41,800 --> 00:28:46,440
सामर्थ्य वान नहीं रहेगा पहाड़ नहीं बन पाएगा

403
00:28:46,440 --> 00:28:51,800
शेर नहीं बन पाएगा नरसिंह अवतार नहीं ले

404
00:28:51,800 --> 00:28:56,080
पाएगा सब कुछ करने वाला नहीं होगा आपका ईश्वर

405
00:28:56,080 --> 00:28:57,000
आ जाना कभी

406
00:28:57,000 --> 00:28:59,320
भी

407
00:28:59,320 --> 00:29:03,320
कर देना सिद्ध तो जब हमने पहले तो उनका जो ग्रंथों की भूल भुलैया

408
00:29:03,320 --> 00:29:07,440
है ग्रंथों पर बात करो ग्रंथों तो जब मेहनत करके हम ग्रंथों

409
00:29:07,440 --> 00:29:11,520
की भूल बलैया से बाहर आए और हमने कहा अब ग्रंथ में बात करनी नहीं है हो गया

410
00:29:11,520 --> 00:29:15,640
अपना अपना ओपिनियन हो गया अब सीधे इस पर आते हैं कि तुम गैर हिंदू हो

411
00:29:15,640 --> 00:29:20,200
और मैं हिंदू हूं यही तो हो गया तुम अवद हो और मैं वैदिक हूं

412
00:29:20,200 --> 00:29:24,360
तुम गैर सनातनी हो और मैं सनातनी हूं यानी

413
00:29:24,360 --> 00:29:28,520
कि तुम इस्लाम बाइबल इस्लाम ईसाई इनके

414
00:29:28,520 --> 00:29:32,600
जैसे हो और मैं वही हूं सनातनी अब बात आती है क्या तुम्हारे

415
00:29:32,600 --> 00:29:36,600
द्वारा बताया जाने वाला जो धर्म और ब्रह्म है उसको माना जाए कि नहीं

416
00:29:36,600 --> 00:29:40,840
तो इसके लिए सर्वशक्तिमान की जांच करनी है उसके बाद बात होती तो मोक्ष की जांच

417
00:29:40,840 --> 00:29:45,360
करनी है पर पहले तो व्यक्ति यह कह रहा है कि मैं बताऊंगा ही नहीं और जब

418
00:29:45,360 --> 00:29:50,760
बात फस गई तो वो यह कह रहा है

419
00:29:50,760 --> 00:29:54,960
कि ऐसे नहीं होता है यह है तो ये नहीं है ये है तो ये नहीं है कहां लिखा

420
00:29:54,960 --> 00:29:59,240
है ये है तो ये नहीं है कितनी बार मैंने सिद्ध किया कि आपकी जो बात

421
00:29:59,240 --> 00:30:03,320
है मनम है मिलावट मनम रामपाल को क्यों माने मनम गरीब

422
00:30:03,320 --> 00:30:07,320
दास को क्यों माने मनम अब आप कह रहे हो कि भैया यह

423
00:30:07,320 --> 00:30:11,400
जो है आपने उसको साकार भी बना दिया फिर कह रहे हो समझ में

424
00:30:11,400 --> 00:30:15,960
नहीं आएगा तो यह सब बातें आपकी मनम

425
00:30:15,960 --> 00:30:19,960
तो ये सब चीज जब वो इस पर अटका कि नहीं नहीं ऐसे नहीं होता है कि

426
00:30:19,960 --> 00:30:24,320
ऐसा है तो ऐसा नहीं है ऐसा है तो ऐसा नहीं है तब हमने उसको जब एक

427
00:30:24,320 --> 00:30:28,400
घंटे दे दिए थे व्यक्ति को एक डेढ़ घंटा उसके बाद उसे हटाया उसके बाद

428
00:30:28,400 --> 00:30:32,400
भी आक्षेप कर रहे हैं मनमुक मनमुक खूब बातें करने के बाद भी

429
00:30:32,400 --> 00:30:36,440
आक्षेप ये कर रहे हैं कि ये जो गलत

430
00:30:36,440 --> 00:30:40,440
हटा दिया उस व्यक्ति को भाई उस व्यक्ति को हमें बहुत पहले हटा देना चाहिए था जब उसने

431
00:30:40,440 --> 00:30:44,480
ये कहा था कि मुझे सनातन का नहीं पता जब तुम्हें सनातन का अर्थ नहीं

432
00:30:44,480 --> 00:30:48,520
पता है तो तुम क्यों कह रहे हो कि हम सनातन धर्म को मानते हैं

433
00:30:48,520 --> 00:30:51,560
पता करो फिर

434
00:30:51,560 --> 00:30:55,640
मानो तुम्हें पता ही नहीं है जब सनातन कार्थ तो तुमने कहा कैसे

435
00:30:55,640 --> 00:30:59,720
कि हम सनातन धर्म को मानते हैं जैसे उस दिन वो आया एक यह पढ़े लिखे लग रहे

436
00:30:59,720 --> 00:31:04,280
थे और वो अनपढ़ लग रहा था वो बोलता है अमित दास

437
00:31:04,280 --> 00:31:06,040
वो बोलता है

438
00:31:06,040 --> 00:31:10,800
कि सर्वव्यापक है ईश्वर जो है सर्वव्यापक

439
00:31:10,800 --> 00:31:15,120
है फिर मैंने पूछा सर्वव्यापक का अर्थ समझ रहे हो इस मैंने उसकी

440
00:31:15,120 --> 00:31:19,240
परीक्षा लेने के लिए नहीं पूछा था ये प्रश्न मैंने अपना क्वेश्चन तैयार

441
00:31:19,240 --> 00:31:23,800
करने के लिए उससे क्लियर किया कि सर्वव्यापक का अर्थ इसको पहले क्लियर कर दूं

442
00:31:23,800 --> 00:31:28,800
तो मैंने उससे पूछा वो बोलता है सर व्यापक का अर्थ पता नहीं इसका मतलब

443
00:31:28,800 --> 00:31:33,440
मतलब आंखों पर पट्टी बांध करके सर मार रहे हो ना दीवारों में

444
00:31:33,440 --> 00:31:37,920
और ऐसे लोगों से हम घंटे घंटे डेढ़ डेढ़ घंटे बात कर रहे हैं उनको समय दे रहे हैं

445
00:31:37,920 --> 00:31:42,080
जिससे कि उनके कुतर को को काट सके सच्चाई सामने ला सके उसके

446
00:31:42,080 --> 00:31:46,080
बाद उसे हटा रहे हैं जब वो कुतर कुतर कुतर को ऐसा कुतर खुद

447
00:31:46,080 --> 00:31:50,160
की बात को काट रहा है परिवर्तनशील नहीं है मगर वह पहाड़

448
00:31:50,160 --> 00:31:55,360
बन सकता है समझ रहे हो बदलता नहीं है मगर वो बदल सकता

449
00:31:55,360 --> 00:32:00,200
है खुद ही ये बात बोल रहे हैं

450
00:32:00,200 --> 00:32:04,200
तो मनमुक चीजें खुद करते हो और हमको बोलते हो कि

451
00:32:04,200 --> 00:32:08,240
मनमुक तो अब एक भाई साहब है

452
00:32:08,240 --> 00:32:12,680
जो हमारा दिखा दिखा करके

453
00:32:12,680 --> 00:32:16,760
वहां पर एक किसी व्यक्ति को पूर्वाग्रह

454
00:32:16,760 --> 00:32:20,800
के रूप में सामने बिठा लेते हैं हरी चद्दर इस्लामिक कलर की

455
00:32:20,800 --> 00:32:24,800
चद्दर पीछे लगा लेते हैं हालांकि वो होता

456
00:32:24,800 --> 00:32:29,120
क्या है कि जो व्यक्ति के मूल में होता है व न केन प्रकार

457
00:32:29,120 --> 00:32:33,680
उसके साथ आ ही जाता है अब इनके मूल में इस्लाम है

458
00:32:33,680 --> 00:32:37,840
इनके मूल में सातव आसमान पर बैठने वाला इस्लामिक ईश्वर

459
00:32:37,840 --> 00:32:41,880
जैसा तानाबाना है तो क्या है वो हरी कलर की

460
00:32:41,880 --> 00:32:46,560
चद्दर पीछे लगी मिलेगी आपको उसमें एक आदमी बैठा हुआ

461
00:32:46,560 --> 00:32:50,640
बातें कर रहा होगा अब इनको इनका धेय है कि

462
00:32:50,640 --> 00:32:54,960
हमें नहीं दिखाना है कि हम इस्लाम को मानते हैं मगर वो इस्लामिक चीजें

463
00:32:54,960 --> 00:32:59,320
इनकी बातों में इनके आचरण में इनके आसपास वो होंगी रिफ्लेक्ट

464
00:32:59,320 --> 00:33:04,080
होंगी उसकी फोटो खींच लो आप आपको लगेगा दरगाह में बैठा व्यक्ति

465
00:33:04,080 --> 00:33:08,560
हरिचंद्र जो पीछे है हालांकि वह हरि चद्दर का परवन

466
00:33:08,560 --> 00:33:12,640
किसम है व ग्रीन बैग हटाने के लिए जो आता है ना स्क्रीन ग्रीन

467
00:33:12,640 --> 00:33:15,400
स्क्रीन लगा देते हैं पीछे मगर

468
00:33:15,400 --> 00:33:19,520
अब वो भाई मैंने कहा ना वो रिफ्लेक्ट होती है वो चीज

469
00:33:19,520 --> 00:33:23,720
इनकेन प्रकार आपको मजबूर कर दिया जाएगा कि आपका जो मूल

470
00:33:23,720 --> 00:33:27,880
है वो लोगों को दिखाई पड़ने लगे तो अब हम उनके जो उन्होंने वहा क्या

471
00:33:27,880 --> 00:33:32,480
किया कि हमारी बातों को ले लेकर के और

472
00:33:32,480 --> 00:33:36,640
क्या कहते हैं कि उसने यह कहा एक व्यक्ति सामने आ गया उसने यह कहा तो

473
00:33:36,640 --> 00:33:40,720
वो जो भाई साहब है थोड़े अधेड़ उम्र के हैं चश्मा

474
00:33:40,720 --> 00:33:45,800
लगाते हैं तो उन्होंने

475
00:33:45,800 --> 00:33:49,800
कहा कि आवान यह कहता है तो वो अपने कुतर में जवाब

476
00:33:49,800 --> 00:33:53,840
दे रहे हैं और वो सामने वाला व्यक्ति सेटिस्फाइड होता दिखाई दे रहा है और

477
00:33:53,840 --> 00:33:58,240
फिर ताली बजा रहा वाह वाह वाह वाह वाह वाह भैया कभी सामने तो आओ

478
00:33:58,240 --> 00:34:02,440
तब पता चलेगा किसमें कितना है दम है

479
00:34:02,440 --> 00:34:06,600
ना तो अभी हम देखते हैं उनके कुतर क्या क्या थे दिखाइए भैया

480
00:34:06,600 --> 00:34:12,600
जरा दो चार कुत दिखाइए

481
00:34:15,680 --> 00:34:21,680
उनके

482
00:34:24,520 --> 00:34:29,000
न तो वहा पर जो भगत जी जुड़े हुए थे

483
00:34:29,000 --> 00:34:33,600
कोई अमित दास करके

484
00:34:33,600 --> 00:34:38,160
जी उने काफी कुछ जब सवाल किए उसे तो

485
00:34:38,160 --> 00:34:42,560
सवाल किए प्रमाण के ऊपर तो उसने फिर रिमूव कर दिया

486
00:34:42,560 --> 00:34:46,600
को ऐसा ही होता है अब एक मिनट

487
00:34:46,600 --> 00:34:50,600
यहां पर जरा एक मिनट रुकिए प्रमाण क्या है जब

488
00:34:50,600 --> 00:34:54,640
तुम्हारे लिए प्रमाण वेद है ही नहीं तो वेद और

489
00:34:54,640 --> 00:34:58,640
पुराण पर बात क्यों करें अरे भैया तो यह कह रहे हो कि इसमें

490
00:34:58,640 --> 00:35:03,880
मिलावट हुई है हम थोड़ी ना कह रहे हम तो उसकी एक एक चीज को मानने वाले हैं

491
00:35:03,880 --> 00:35:08,040
ना तो फिर जब तुम उसे प्रमाण नहीं मानते तो प्रमाण मान क्यों

492
00:35:08,040 --> 00:35:12,120
रहे हो क्या रामपाल ने बताया वो सही है रामपाल को हम नहीं मानते

493
00:35:12,120 --> 00:35:16,800
भाई तुम मानते हो चलिए बढ़ाइए आगे

494
00:35:16,800 --> 00:35:21,240
तो जब ऐसा कुतर

495
00:35:21,240 --> 00:35:25,240
करेगा मानने की ना मानने की स्थिति

496
00:35:25,240 --> 00:35:30,000
में बात रखता है तो उ देता है बोलने नहीं देता है

497
00:35:30,000 --> 00:35:34,240
हा बोलने नहीं देता है अब

498
00:35:34,240 --> 00:35:38,520
अगर हमने आपको स्टेज पर ले लिया है तो तीन

499
00:35:38,520 --> 00:35:42,560
चार साल तक हम आपके साथ तीन चार साल नहीं अनंत कालीन

500
00:35:42,560 --> 00:35:46,600
क्योंकि तुम तो य कभी कहोगे नहीं कि कबीर भगवान नहीं

501
00:35:46,600 --> 00:35:50,960
है रामपाल भगवान नहीं है क्योंकि तुमने तो पानी पी लिया है

502
00:35:50,960 --> 00:35:55,440
इसलिए आप तो कभी कहोगे नहीं तो

503
00:35:55,440 --> 00:36:00,120
हम हम आप उसन जाता

504
00:36:00,120 --> 00:36:04,200
देखिए मैं बताऊ भगत जी मैं उसके चैनल पर लाइव जा सकता हूं लेकिन

505
00:36:04,200 --> 00:36:08,720
मैं जान बूझ के नहीं जाता हूं क्योंकि मैं अपनी बात रखना चाहता हूं तब वो रखने नहीं देता है

506
00:36:08,720 --> 00:36:13,800
क्यों मैं देखता हूं भक्तो कोम कर देता है बोलने नहीं देता है बस

507
00:36:13,800 --> 00:36:18,080
गुमरा यह भाई साहब कह रहे हैं कि वह मेरे चैनल में उसके चैनल पर इसलिए

508
00:36:18,080 --> 00:36:22,080
नहीं जाता हूं पूरा कर दो इनकी बात य चैनल वाली चैनल पर ना

509
00:36:22,080 --> 00:36:26,720
जाने वाली पूरी करलो ता है लोगों को इसलिए

510
00:36:26,720 --> 00:36:31,840
यदि उसको है तो हमारे चैनल पे आए ना वो लाइव हम उसको लाइव

511
00:36:31,840 --> 00:36:35,960
लाते पहली बात ये है कि आज मुझे पता चला कि आपने कहा

512
00:36:35,960 --> 00:36:36,460
यदि

513
00:36:36,240 --> 00:36:40,520
उसको आना है तो हमारे चैनल पर आए ना लाइव भाई मैंने अब तक जितने

514
00:36:40,520 --> 00:36:44,560
वीडियोस बनाए हैं कबीर वालों को लेके और लगभग मैंने जितन

515
00:36:44,560 --> 00:36:49,480
को भी लेकर जितने वीडियो बनाया हर वीडियो में नंबर दिया है

516
00:36:49,480 --> 00:36:54,200
क्या उंगलियां काप रही है क्या टच करने में शिवांश द्विवेदी का

517
00:36:54,200 --> 00:36:58,320
नंबर कांप रही है क्या मिलाओ नंबर भैया

518
00:36:58,320 --> 00:37:02,440
हमारे चैनल पर आ जाओ कब कहा तुमने किससे

519
00:37:02,440 --> 00:37:06,520
कहा तुमने मुझे क्या पता भैया तुम

520
00:37:06,520 --> 00:37:10,520
मेरे सपनों में आओगे

521
00:37:10,520 --> 00:37:15,160
क्या दूसरी बात यह है कि हमने कई बार कहा

522
00:37:15,160 --> 00:37:19,440
अगर तुम तो हमें पूरा पूरा देख रहे हो ना क्योंकि तुम बता रहे हो कि हम क्या क्या करते हैं

523
00:37:19,440 --> 00:37:23,480
तो इसका मतलब तुम हमें पूरा देख रहे हो कि हम क्या क्या करते हैं तो

524
00:37:23,480 --> 00:37:27,560
हमने उसमें यह भी कहा था कि भाई अगर चैनल की

525
00:37:27,560 --> 00:37:32,240
बात पड़ेगी कि किसके चैनल पर आना है तो कोई बीच का रास्ता निकाला

526
00:37:32,240 --> 00:37:36,280
जाएगा है गुर्दा बीच का रास्ते पर बात

527
00:37:36,280 --> 00:37:40,280
करने का गुर्दा है कोई बीच का चैनल ढूंढ लेते हैं जो दो

528
00:37:40,280 --> 00:37:44,400
लोगों की आपस में बात करवाता हो ऐसा कोई चैनल ढूंढ लेते

529
00:37:44,400 --> 00:37:48,520
हैं कई चैनल्स होते हैं ऐसे ऐसा कोई

530
00:37:48,520 --> 00:37:52,800
चैनल ढूंढ लेते हैं उस पर आप आ जाओ हम भी आ जाए और गुरदा सुनो अगर

531
00:37:52,800 --> 00:37:56,840
रहते हो मुंबई में तो बीच का एक प्रणाम देख लेते हैं मैं

532
00:37:56,840 --> 00:38:01,000
इधर से इंदौर पहुंच जाऊंगा आप उधर से इंदौर आ जाओ आ जाओ मैदान में आधा

533
00:38:01,000 --> 00:38:05,680
आधा दोनों यात्रा करेंगे आ जाओ गुरदा

534
00:38:05,680 --> 00:38:09,760
है गुरदा केवल अपनी

535
00:38:09,760 --> 00:38:14,440
कायरता को छिपाने का प्रयास है यह कुछ कह रहे हैं

536
00:38:14,440 --> 00:38:20,440
राहुल जी इनकी अन म्यूट करिए राहुल जी

537
00:38:20,840 --> 00:38:24,920
को जय श्री राम जय श्री

538
00:38:24,920 --> 00:38:29,200
राम जी भाई भैया जी एक बात है

539
00:38:29,200 --> 00:38:34,040
गीता का जो 18 अध्याय का 62 वा श्लोक है

540
00:38:34,040 --> 00:38:38,160
नहीं नहीं वो अभी हम आएंगे अभी टॉपिक अलग चल रहा है अलग चल रहा

541
00:38:38,160 --> 00:38:42,360
है हा जी जी अभी हम आएंगे ठीक है

542
00:38:42,360 --> 00:38:45,960
तो वो लाइए जरा स्क्रीन दोबारा

543
00:38:45,960 --> 00:38:49,960
उनकी तो भाई आप पहली बात

544
00:38:49,960 --> 00:38:54,320
तो मैंने अपना फोन नंबर दिया था कि अगर चैनल को लेकर के कोई दिक्कत

545
00:38:54,320 --> 00:38:58,360
है कि आप हमारे चैनल पर नहीं आ आना चाहते हैं तो आप हमसे

546
00:38:58,360 --> 00:39:02,360
संपर्क करिए कोई बीच का रास्ता निकाला जाएगा हम इधर से आएंगे तुम उधर

547
00:39:02,360 --> 00:39:06,520
से आ जाना मगर दूर ही

548
00:39:06,520 --> 00:39:10,680
दूर से अपने कक्ष में बैठ कर के इस्लामिक चद्दर पीछे लगा कर के वीडियो

549
00:39:10,680 --> 00:39:13,600
बनाओगे

550
00:39:13,600 --> 00:39:17,680
बस एक फोन नंबर तक डायल करने का आपका वोह

551
00:39:17,680 --> 00:39:21,720
नहीं है साहस कि फोन कर लो

552
00:39:21,720 --> 00:39:26,160
आप लोगों से अच्छे तो वोह हैं जो दण विश्वास रखते हैं रामपाल दास जी में

553
00:39:26,160 --> 00:39:30,200
तो व आते हैं जबकि वह कोई ज्ञानी नहीं है और

554
00:39:30,200 --> 00:39:34,560
आप लोग जो शीर्ष में बैठे हो केवल अपने महिमा मंडन

555
00:39:34,560 --> 00:39:38,560
में बैठे हुए हो ट चलाने के लिए आप

556
00:39:38,560 --> 00:39:42,720
लोगों में साहस नहीं हुआ अभी तक कि आप लोग संपर्क कर

557
00:39:42,720 --> 00:39:46,960
पाते बात करते हैं व हमारे चैनल पर अरे भाई यही बात बोल देते तुम

558
00:39:46,960 --> 00:39:51,160
हमको फोन करके कि हमारे चैनल पर आ जाओ हम बात

559
00:39:51,160 --> 00:39:55,520
करते नंबर देते अपना हमने तो कैसे खुली खुला छूट नंबर दे रखा

560
00:39:55,520 --> 00:39:59,600
है इसको कहते हैं गुरु गोविंद ग्रंथ का बल य ऐसे

561
00:39:59,600 --> 00:40:03,880
ही नहीं आता है जब पीछे वास्तविकता होती है ना तब आता

562
00:40:03,880 --> 00:40:08,240
है जिसको लगता है ना कि अब मैं सत्य पर खड़ा

563
00:40:08,240 --> 00:40:13,080
हूं मैं इसके लिए अपने प्राण त्याग सकता हूं तब आता है यह बल

564
00:40:13,080 --> 00:40:18,920
नहीं तो व्यक्ति ऐसे ही हरि चद्दर लगा के अकेले कमरे बैठ के बातें छोक

565
00:40:18,920 --> 00:40:23,040
है करो ना संपर्क आते हैं बीच के चैनल पर और ज्यादा

566
00:40:23,040 --> 00:40:27,520
चैनल में दिक्कत है तो सीधे वन ऑन वन आते हैं न

567
00:40:27,520 --> 00:40:28,760
वन अभी

568
00:40:28,760 --> 00:40:32,760
इनके कुतर्क देखिए आगे मानते हो तो उसको पूरा

569
00:40:32,760 --> 00:40:37,280
मानो जी आधा क्यों मानते हो

570
00:40:37,280 --> 00:40:41,360
देखिए यदि कोई टीचर पढ़ा रहा है मैं आपसे

571
00:40:41,360 --> 00:40:45,360
मैं बताता हूं मैं उसके बारे की एक बात बताता हूं जैसे कोई भी

572
00:40:45,360 --> 00:40:49,760
टीचर पढ़ाता है किसी के जीवन में उदाहरण तौर पर यदि सिलेबस

573
00:40:49,760 --> 00:40:53,760
से वो पढ़ा रहा है पढ़ाते शब्द में कहीं वो गलती हो जाती है तो ऐसा तो है नहीं

574
00:40:53,760 --> 00:40:58,320
कि वो टीचर गलत हो गया हम

575
00:40:58,320 --> 00:41:02,600
यदि वो पढ़ रहा है कहीं को उससे गलती हो जाती है तो वो

576
00:41:02,600 --> 00:41:06,680
दोबारा उसको बताता है कि ये गलत हो गया या ऐसा नहीं होना चाहिए या फिर दूसरा

577
00:41:06,680 --> 00:41:10,760
कोई टीचर आ जाए जानकार वो बताए कि नहीं यहां पर ये नहीं था यहां पर ऐसा होना

578
00:41:10,760 --> 00:41:16,560
था तो क्या वो टीचर गलत हो जाएगा या फिर वो पूरा सिलेबस गलत हो जाएगा

579
00:41:16,560 --> 00:41:20,680
बताइए पूरा सिलेबस नहीं गलत होगा जितना आंसर गलत दिया हुआ है उतना ही

580
00:41:20,680 --> 00:41:23,920
आंसर गलत

581
00:41:23,920 --> 00:41:28,160
हो चलो बस बस बस अब देखिए

582
00:41:28,160 --> 00:41:33,840
यहां इन्होंने क्या किया है सबसे पहली बात

583
00:41:33,840 --> 00:41:37,840
तो अगर हमारे शास्त्र अनादि है और ईश्वर

584
00:41:37,840 --> 00:41:42,160
प्रदत्त है ईश्वर से हैं तो एक सामान्य

585
00:41:42,160 --> 00:41:47,800
टीचर जिससे गलती होना संभव है उसकी तुलना किससे कह कर रहे

586
00:41:47,800 --> 00:41:51,920
हैं भगवान से जो कि कौन है इनके

587
00:41:51,920 --> 00:41:56,440
अनुसार कवि है कवि का अर्थ क्या है सर्वज्ञ है सब कुछ जानता है

588
00:41:56,440 --> 00:42:00,480
भाई जो सब कुछ जानता है उससे गलती नहीं होती है पहली बात तो यह

589
00:42:00,480 --> 00:42:05,200
ईश्वर से गलती होना स्वीकार कर रहे हैं उसके बाद इन्होंने क्या

590
00:42:05,200 --> 00:42:09,200
कहा कि अगर वह कुछ गलत लिख देता है तो

591
00:42:09,200 --> 00:42:13,440
मेरे भाई आपको देने से पहले वह उसमें सही करेगा

592
00:42:13,440 --> 00:42:17,680
पहली बात तो यह कि उससे गलती होना संभव नहीं है और अगर गलती

593
00:42:17,680 --> 00:42:22,000
हो भी रही है तो वह उसको सही करेगा देने से पहले आपको

594
00:42:22,000 --> 00:42:26,440
क्या बात कर रहे हो ईश्वर है ना यार वो गलत हो गया गलत ही दे देगा

595
00:42:26,440 --> 00:42:30,520
वो जानता जबक वो सर्वज्ञ है हा उसके

596
00:42:30,520 --> 00:42:34,840
बाद क्या कह रहे हो आगे के दूसरा टीचर आकर के वो कर देगा

597
00:42:34,840 --> 00:42:38,840
इसका मतलब अगर दूसरा टीचर है पहली बात तो ये है वो जो दूसरा आया

598
00:42:38,840 --> 00:42:39,800
है

599
00:42:39,800 --> 00:42:43,840
रामपाल उसको तुम दूसरा ईश्वर मानते हो हम

600
00:42:43,840 --> 00:42:48,520
नहीं मानते हैं पहले उसको ईश्वर तो सिद्ध

601
00:42:48,520 --> 00:42:52,800
करो दूसरी बात ये है कि अगर दूसरे टीचर के आधार

602
00:42:52,800 --> 00:42:57,400
पर आप पहले टीचर की वाणी को करेक्ट कर रहे हो दूसरे टीचर के आधार पर

603
00:42:57,400 --> 00:43:01,480
आप तो नहीं कर रहे दूसरे टीचर ने किया इसका मतलब वो जो पहला

604
00:43:01,480 --> 00:43:05,520
टीचर है आपके लिए प्रमाणिक नहीं है वो जो दूसरा टीचर आया है

605
00:43:05,520 --> 00:43:09,520
वह आपके लिए प्रामाणिक है क्योंकि उसके आधार पर

606
00:43:09,520 --> 00:43:14,040
आपने इसमें रद्द बदल किया आप मुझे बताओ

607
00:43:14,040 --> 00:43:18,880
क्या रामपाल को लेकर के भी आपके मन में संदेहास्पद बुद्धि है क्या

608
00:43:18,880 --> 00:43:23,200
यह भी कुछ गलत कह सकते हैं वो बात और है कि आप लोग चिल्लाते

609
00:43:23,200 --> 00:43:27,400
रहते हो कि वज्र का वो जो ब्रज

610
00:43:27,400 --> 00:43:31,480
का अर्थ है वो है जाना और भाई साहब इन्हीं की

611
00:43:31,480 --> 00:43:35,600
गीता में लिख दिया 18 66 में ब्रज का अर्थ आना अब वो कैसे हुआ

612
00:43:35,600 --> 00:43:39,640
इनसे गलती हो गई अपनी बात को काट दिया बात की बात मगर इन्होंने ही

613
00:43:39,640 --> 00:43:44,160
अपनी गीता में प्रमाण दे दिया कि रामपाल से गलती हो सकती

614
00:43:44,160 --> 00:43:48,200
है तो अगर आप यह सोच रहे हो कि वेदा दि शास्त्रों में

615
00:43:48,200 --> 00:43:52,200
किसी से कोई गलती हो गई है ईश्वर

616
00:43:52,200 --> 00:43:54,800
से गलती हो गई है तो उसको बदलेगा कौन जिससे खुद

617
00:43:54,800 --> 00:43:58,880
से गलती हो रही है इसीलिए भाई हम उन शास्त्रों

618
00:43:58,880 --> 00:44:02,960
को मानते हैं जिनको किसी ने रचा ही नहीं है ईश्वर ने भी नहीं रचा मगर

619
00:44:02,960 --> 00:44:07,080
हम तो बात ये कर रहे हैं कि अगर वो ईश्वर से प्रदत्त है तो पहली बात तो ईश्वर से गलती नहीं

620
00:44:07,080 --> 00:44:11,200
हो सकती आप मानो अपने ईश्वर को ऐसा जो गलत चीजें दे देगा उसके

621
00:44:11,200 --> 00:44:15,240
बाद उसको क्योंकि वो सर्वज्ञ है जानबूझकर वो आपको गलत दे रहा

622
00:44:15,240 --> 00:44:19,280
है और उसके बाद आप किसी और से उसको वेरीफाई करवा

623
00:44:19,280 --> 00:44:23,320
रहे हो तो इसका मतलब आपके लिए वो जो जिससे आप वेरीफाई करा रहे हो वो आपके लिए

624
00:44:23,320 --> 00:44:27,520
प्रमाण है तो प्रमाण वो आपके लिए है रामपाल

625
00:44:27,520 --> 00:44:31,520
हमारे लिए प्रमाण नहीं है हिंदुओं के लिए सनातन वैदिक

626
00:44:31,520 --> 00:44:35,640
आर्य हिंदुओं के लिए रामपाल जो जेल धाम में बैठा हुआ

627
00:44:35,640 --> 00:44:39,240
है वह प्रमाण नहीं

628
00:44:39,240 --> 00:44:43,840
है इसको डालो अपनी उसमें कुपड़ी

629
00:44:43,840 --> 00:44:48,160
में ठीक है कि दूसरा टीचर दूसरा टीचर यानी कि दूसरा ईश्वर

630
00:44:48,160 --> 00:44:52,360
का दूसरा रूप ईश्वर का या दूसरा ईश्वर वो तुम कहते हो कि वो दूसरा

631
00:44:52,360 --> 00:44:56,480
ईश्वर है तुम कहते हो कि दूसरा टीचर है हम नहीं मानते

632
00:44:56,480 --> 00:45:02,480
ना जब पहले उसको हमारे लिए दूसरा टीचर सिद्ध तो

633
00:45:04,120 --> 00:45:08,320
करो और जो लोग यह कहते हैं मिलावट हो गई इसमें एक बात और

634
00:45:08,320 --> 00:45:12,360
है मिलावट हो गई इनके अनुसार वेद शस्त्र

635
00:45:12,360 --> 00:45:16,360
दिए तो ईश्वर ने ईश्वर को नहीं पता था कि जो जिसको मैं दे

636
00:45:16,360 --> 00:45:20,560
रहा हूं मिलावट करेगा कि नहीं करेगा या यह अपने से आगे

637
00:45:20,560 --> 00:45:24,800
यह समझ पाएगा कि नहीं समझ पाएगा कि यह वाला व्यक्ति मिलावट करेगा कि नहीं

638
00:45:24,800 --> 00:45:28,800
करेगा ईश्वर ने दिए मान भगवान ने

639
00:45:28,800 --> 00:45:33,240
दिए आप उसको कबीर कहते हैं कबीर ने दिए ब्रह्मा जी को ठीक है

640
00:45:33,240 --> 00:45:37,320
ब्रह्मा जी ने दिए वशिष्ठ जी को तो ब्रह्मा जी को नहीं मालूम था वशिष्ठ जी परिवर्तन

641
00:45:37,320 --> 00:45:41,480
कर देंगे चुनाव करना गलत था अगर ब्रह्मा जी का वशिष्ठ जी पर

642
00:45:41,480 --> 00:45:45,520
चुनाव करना गलत था तो फिर कबीर का ब्रह्मा जी को चुनाव

643
00:45:45,520 --> 00:45:49,560
करना गलत था कबीर गलत हो गया जब आप कहते ना मिलावट हो

644
00:45:49,560 --> 00:45:54,200
गई सोच के बोलो वो दोष सीधा जाएगा कबीर पर

645
00:45:54,200 --> 00:45:55,200
लगेगा

646
00:45:55,200 --> 00:45:59,320
ईश्वर पर लगेगा वो दोष मिलावट का ईश्वर को

647
00:45:59,320 --> 00:46:04,480
ईश्वर ने क्यों ऐसे व्यक्ति पर विश्वास किया जो धूर्त था

648
00:46:04,480 --> 00:46:08,800
कैसे भी पकड़ लो मत पड़ो चक्कर

649
00:46:08,800 --> 00:46:12,960
में हां अब आगे इ वो ये कहता है कि नहीं पूरा ही

650
00:46:12,960 --> 00:46:17,080
गलत मानो या फर या पूरा सही मानो जो भी लिखा बात भगत जी ये है

651
00:46:17,080 --> 00:46:21,160
सिर्फ ये बोलने नहीं देता क्योंकि अभी भगत जी ने एक सवाल उससे पूछा था कि आप

652
00:46:21,160 --> 00:46:25,920
कौन सा मंत्र जाप करते हो तो बोले मैं क्यों बताऊ हां बिल्कुल

653
00:46:25,920 --> 00:46:30,480
मंत्र उसने उसने कह दिया मैं गायत्री मंत्र जाप करता हूं

654
00:46:30,480 --> 00:46:34,920
जी मैं गायत्री मंत्र जाप करता हूं फिर भगत जी ने उससे जो है वो लिया

655
00:46:34,920 --> 00:46:39,240
रिफरेंस भगवत गीता का कि भगवत गीता में तो श्री कृष्ण ने अपना एक ओम

656
00:46:39,240 --> 00:46:43,400
मंत्र बताया है और परम अक्षर ब्रम के लिए ओम तत्सत कहा है और

657
00:46:43,400 --> 00:46:47,640
उसी चीज को कुरान में एन सन काफ कहा गया है कर अब

658
00:46:47,640 --> 00:46:52,200
उसने गीता छोड़ दी अब वो देवी भागवत

659
00:46:52,200 --> 00:46:56,400
बस गरी पहली बात तो यह है

660
00:46:56,400 --> 00:47:00,640
कि मैं पहले ही बता चुका कि क्या यह लोग अपने मंत्र

661
00:47:00,640 --> 00:47:04,640
को सार्वजनिक करते हैं वह वीडियो जो अकेले कमरे में अंधेरे कमरे में

662
00:47:04,640 --> 00:47:07,240
जाकर के दिखाते

663
00:47:07,240 --> 00:47:10,200
हैं जैसे आपत्ति जनक फिल्में देखी जाती

664
00:47:10,200 --> 00:47:15,480
हैं उस तरीके से मंत्र को जा करर के वहां टीवी पर देखते हैं जाकर के

665
00:47:15,480 --> 00:47:19,560
क्या यह उस चीज को पब्लिक करते हैं क्या जो मुझसे कह

666
00:47:19,560 --> 00:47:23,960
रहे हैं कि तुम अपना गुरु मंत्र बता दो हमको और

667
00:47:23,960 --> 00:47:28,040
यह गुरु मंत्र से मतलब क्या है जब आप भगवत

668
00:47:28,040 --> 00:47:32,040
गीता को मानते ही नहीं हो रामपाल के अनुसार यह चुनाव करते हो

669
00:47:32,040 --> 00:47:36,080
रामपाल जिसको कहेगा यह मेरा प्रमाण है देख तो रामपाल पर आप विश्वास

670
00:47:36,080 --> 00:47:40,560
कर रहे हो और विश्वास के आधार पर आप भगवत गीता में सेलेक्ट सिलेक्टिव हो रहे

671
00:47:40,560 --> 00:47:44,560
हो तो वही वाली बात कि रामपाल को पहले आप सिद्ध करो

672
00:47:44,560 --> 00:47:48,880
कि इसको हम प्रमाणिक क्यों मान ले अब आप कहोगे आपके ग्रंथों

673
00:47:48,880 --> 00:47:53,920
से प्रमाणिक है भाई आपने ही कहा कि इन ग्रंथों में मिलावट हो रही

674
00:47:53,920 --> 00:47:59,920
है और यदि हम मानेंगे तो पूरा मानते

675
00:48:01,640 --> 00:48:04,520
अब बात आती है

676
00:48:04,520 --> 00:48:08,560
कि गीता भगवान ने वो कहा है प्रणव तत्सत

677
00:48:08,560 --> 00:48:13,040
मगर क्या यह कहा है कि इसका इतनी बार डेली जाप करना है इससे वो मिलता है

678
00:48:13,040 --> 00:48:17,080
उन्होंने ब्रह्म के नाम के रूप में बताया ठीक है ईश्वर के नाम

679
00:48:17,080 --> 00:48:21,240
के रूप में प्रणव तत्सत बताया मगर क्या यह कहा इसका जाप करना

680
00:48:21,240 --> 00:48:25,440
है कहां लिखा है जाप करने के बारे में मैं जो बता रहा हूं गायत्री

681
00:48:25,440 --> 00:48:29,680
मंत्र या शिव जी का मंत्र या कृष्ण जी का मंत्र

682
00:48:29,680 --> 00:48:33,680
राम जी का मंत्र इनका लिखा है जाप करो फलानी माला

683
00:48:33,680 --> 00:48:38,480
पर जाप करो ये सब लिखा है कहां लिखा है जाप करने के बारे

684
00:48:38,480 --> 00:48:42,800
में वो नाम बताया उन्होंने और उनका

685
00:48:42,800 --> 00:48:46,880
जो परवन है इसमें होता है वो जो

686
00:48:46,880 --> 00:48:51,160
तत्सत है ना प्रणव तत्सत उसका परवन होता है

687
00:48:51,160 --> 00:48:55,240
श्री ब्रह्मा श्री

688
00:48:55,240 --> 00:48:59,440
ब्रह्मर्पनम हुए ऐसा नहीं है कि उसको मगर उसको एक निष्ठ

689
00:48:59,440 --> 00:49:03,880
होता से जो हम किसी भगवान के किसी रूप का जब वर्णन

690
00:49:03,880 --> 00:49:08,440
वो कर रहे होते स्पेसिफिकली उसके लिए जाप का विधान नहीं दिया उसका

691
00:49:08,440 --> 00:49:12,480
उसको यूज करते हैं हम भी तत्सत को

692
00:49:12,480 --> 00:49:16,800
मगर स्पेसिफिकली अपने ईस्ट की भक्ति

693
00:49:16,800 --> 00:49:21,080
करने के लिए उसका विधान शास्त्रों ने नहीं किया

694
00:49:21,080 --> 00:49:25,080
है अगर किया है तो दिखा दो कि श्री कृष्ण की

695
00:49:25,080 --> 00:49:29,320
भक्ति करने के लिए या तुम अनुसार कबीर की भक्ति करने के लिए काल की भक्ति

696
00:49:29,320 --> 00:49:33,840
करने के लिए क्या उस मंत्र का जाप करो माला पर लेकर के लिखा है

697
00:49:33,840 --> 00:49:37,960
क्या मनमुक भक्ति तो तुम लोग करते हो और कहते हो कि मनमुक भक्ति

698
00:49:37,960 --> 00:49:42,440
करते

699
00:49:42,440 --> 00:49:46,600
हैं चलिए और एक एक कुतर्क

700
00:49:46,600 --> 00:49:50,720
और था रुक जाइए एक कुतर्क और था सीधा वो चला गया देवी भागवत प क्यों

701
00:49:50,720 --> 00:49:55,080
भाई जिस वेदव्यास ने यह लिखा है

702
00:49:55,080 --> 00:49:59,800
भगवत गीता उसी व्यास ने लिखा है

703
00:49:59,800 --> 00:50:03,960
ना देवी भागवत और देवी भागवत के प्रमाण तुम

704
00:50:03,960 --> 00:50:08,720
नहीं देते क्या अलग-अलग अलग

705
00:50:08,720 --> 00:50:14,720
अलग जगह से संकलित करते हुए अपनी बात को नहीं रखते

706
00:50:15,720 --> 00:50:19,840
क्या कि वो देवी भागवत में चला गया तो देवी भागवत जि

707
00:50:19,840 --> 00:50:24,040
जिन वेदव्यास जी ने महाभारत लिखी है उन्हीं वेदव्यास जी

708
00:50:24,040 --> 00:50:28,840
ने क्या कहते हैं देवी भागवत लिखी है

709
00:50:28,840 --> 00:50:32,960
तो उसमें मुझे रबली याद था वैसे अनेका अनेक जगह गायत्री मंत्र का विधान

710
00:50:32,960 --> 00:50:37,520
अनेका अनेक जगह मगर मुझे उसमें याद था तो मैंने एक प्रमाण दे

711
00:50:37,520 --> 00:50:41,840
दिया तो देवी भागवत पर क्यों गया भाई क्यों ना जाए तुम्हारे

712
00:50:41,840 --> 00:50:46,160
लिए चयन प्रक्रिया है रामपाल जो देश जेल धाम में बैठता है उसके

713
00:50:46,160 --> 00:50:50,160
अनुसार शास्त्रों का चयन करो मंत्रों का चयन करो श्लोकों का चयन

714
00:50:50,160 --> 00:50:55,040
करो और अभी भी मैं कह रहा हूं

715
00:50:55,040 --> 00:50:59,200
दावे के साथ आप आ सक आपकी जो

716
00:50:59,200 --> 00:51:04,000
यह बात है ना कि 5 पर इसको भी गलत सिद्ध कर

717
00:51:04,000 --> 00:51:08,040
देंगे ठीक है चलिए

718
00:51:08,040 --> 00:51:13,920
चलाइए आगे

719
00:51:13,920 --> 00:51:17,640
चलाइए

720
00:51:17,640 --> 00:51:21,720
उसता जहा पर प्रमाण पूछा गया वहा पर बता यदि तू

721
00:51:21,720 --> 00:51:25,760
वेदों को मानता है और गीता जी को मानता है तो पले

722
00:51:25,760 --> 00:51:30,280
रोक दो जहां पर प्रमाण पूछा गया है वहां पर बताय कौन डिसाइड करेगा

723
00:51:30,280 --> 00:51:34,800
यह डिसाइड आप क्यों करेंगे जब हमारे पास 18 पुराण

724
00:51:34,800 --> 00:51:39,320
चार वेद 108 उपनिषद या उनमें से प्रमुख 11 उपनिषद

725
00:51:39,320 --> 00:51:43,720
और स्मृतियां है महाभारत रामायण इत्यादि के रूप में

726
00:51:43,720 --> 00:51:48,120
तो आप कौन होते हैं उसमें सीमा करने वाले कि जहां पर मांगा गया वहां

727
00:51:48,120 --> 00:51:52,240
दिखा मैं आपसे कह दूं ऋग्वेद के पहले सूक्त

728
00:51:52,240 --> 00:51:58,240
के पहले मंत्र मेंे प्रमाण दिखा दो कबीर का रामपाल का दिखा दोगे

729
00:52:05,160 --> 00:52:09,400
चलिए बता कृष्ण भगवान की त क कृष्ण भगवान ने बताया

730
00:52:09,400 --> 00:52:13,840
है ता राधे राधे बताया तो गीता में कही मेंशन करके बताया ओम नमवा

731
00:52:13,840 --> 00:52:18,720
राधे राधे या गायत्री म क लिखा है गीताज में

732
00:52:18,720 --> 00:52:22,800
गीता जी के अंदर कहीं नहीं है

733
00:52:22,800 --> 00:52:25,120
गने

734
00:52:25,120 --> 00:52:29,160
क्या जब मैं कहूंगा कि भाई तुम गीता जी के अंदर दिखा

735
00:52:29,160 --> 00:52:33,160
दो कि कबीर भगवान है यह लिखा है क्या

736
00:52:33,160 --> 00:52:37,200
तो तुम उसमें अपनी बातें घुमाओ ना दूसरे शास्त्रों को लाओगे

737
00:52:37,200 --> 00:52:41,200
कबीर सागर को लाओगे सूक्ष्म वेद को लाओगे अभी आता हूं सूक्ष्म वेद

738
00:52:41,200 --> 00:52:45,280
पर भी अपना तो वह शास्त्र भी ले आएंगे

739
00:52:45,280 --> 00:52:49,800
जिनको सनातन धर्म ग्रंथावली में शामिल ही नहीं किया गया

740
00:52:49,800 --> 00:52:53,920
और हम वेदव्यास जी वेदव्यास जी के द्वारा रचित दूसरे ग्रंथों

741
00:52:53,920 --> 00:52:59,920
को लाएंगे तो तू गीता जी में दिखा इतने भाई पैदल हो क्या अकल

742
00:53:01,000 --> 00:53:05,360
से चलिए और यह सब जो है नाम जाप

743
00:53:05,360 --> 00:53:09,640
नाम जाप की महिमा यह सब ब्रह्म वैवर्त पुराण

744
00:53:09,640 --> 00:53:13,680
जो 18 महापुराण है उनमें से किसी ना किसी पुराण में गणेश जी का मंत्र

745
00:53:13,680 --> 00:53:17,760
राम जी का मंत्र हनुमान जी का मंत्र और यह हरे

746
00:53:17,760 --> 00:53:22,400
कृष्ण हरे राम वाला मंत्र सब में लिखा हुआ है चलाइए वेदव्यास

747
00:53:22,400 --> 00:53:26,520
जी ने गीता लिखी और इसके बाद उनने पुराण भी

748
00:53:26,520 --> 00:53:30,760
लिखे 18 पुराण भी लिखे तो पुराणों में कहीं ना कहीं तो लिखा होगा तो उसने फ

749
00:53:30,760 --> 00:53:34,760
श्रीमद देवी भागवत पुराण में लेके चला गया वो कहीं

750
00:53:34,760 --> 00:53:39,480
ना कहीं नहीं लिखा है भाई मुझे वर्ली याद था इसलिए बोला मैं दिखा देता हूं

751
00:53:39,480 --> 00:53:45,480
कहीं ना कहीं नहीं लिखा है

752
00:53:57,920 --> 00:54:02,080
कच्ची गोलिया नहीं खेलते हैं कहीं ना कहीं नहीं लिखा है

753
00:54:02,080 --> 00:54:06,280
ठीक है बताते

754
00:54:06,280 --> 00:54:10,800
हैं आपने सब लगता है वह पीडीएफ पढ़ने का

755
00:54:10,800 --> 00:54:15,160
भी वो नहीं किया थोड़ा सा कर

756
00:54:15,160 --> 00:54:19,560
लेते गायत्री मंत्र का महात्म है देवी भागवत बारवा

757
00:54:19,560 --> 00:54:23,760
स्कंध तीसरा अध्याय और 25 वा श्लोक

758
00:54:23,760 --> 00:54:29,760
खोल लेता हूं देवी भागवत देख पाओ तो देख

759
00:54:31,160 --> 00:54:37,120
पाओ बावा

760
00:54:37,120 --> 00:54:41,120
अध्याय देवी भागवत से तुम प्रमाण लाओ कि

761
00:54:41,120 --> 00:54:45,200
वो सतयुग के जो राक्षस थे वो ब्राह्मण है तो कोई दिक्कत

762
00:54:45,200 --> 00:54:49,240
नहीं है तुम प्रमाण लाओगे ब्रह्मा विष्णु महेश का आविर्भव और

763
00:54:49,240 --> 00:54:53,240
तिरो भाव होता है तो कोई दिक्कत नहीं है दूसरा

764
00:54:53,240 --> 00:54:58,840
लाए तो गलत है

765
00:54:58,840 --> 00:55:03,440
इसको बैन कर दो पियूष वादवानी को यह मूर्ख व्यक्ति कुछ ना

766
00:55:03,440 --> 00:55:09,440
कुछ विघ्न डाला करता है राक्षसों की

767
00:55:20,240 --> 00:55:24,240
तरह एकादश बारवा स्कंद यह देख

768
00:55:24,240 --> 00:55:28,680
लो भैया बड़ा है थोड़ा दिखाने में दिक्कत आएगी

769
00:55:28,680 --> 00:55:32,360
ये देखो

770
00:55:32,360 --> 00:55:34,800
ये

771
00:55:34,800 --> 00:55:39,520
खा गायत्री मंत्र की महिमा

772
00:55:39,520 --> 00:55:44,240
बारवा स्कंद द्वादश स्कंद ठीक है अब इसमें दिखाते हैं

773
00:55:44,240 --> 00:55:49,280
मोक्ष मिलता है कि नहीं इससे ठीक

774
00:55:49,280 --> 00:55:55,280
है प्र संख्या 1696

775
00:55:57,680 --> 00:56:02,200
आप लोगों नेय जो लाइव स्ट्रीम की है ना बच्चों वाली चुन्नू मुन्नू वाली

776
00:56:02,200 --> 00:56:06,240
इससे बहुत कुछ हमें कंटेंट दे दिया आपने कहने को

777
00:56:06,240 --> 00:56:10,360
लोगों को बताने को और क्या क्या तथ जाएंगे सामने आपने गुड़

778
00:56:10,360 --> 00:56:14,560
गोवर कर दिया मैं कहता तो हूं 100 मूर्ख दो

779
00:56:14,560 --> 00:56:18,560
मित्रों से अच्छा एक बुद्धिमान शत्रु होता है

780
00:56:18,560 --> 00:56:22,560
जितना तुमने मटिया मेट किया है रामपाल दास जी को

781
00:56:22,560 --> 00:56:26,840
उतना हमने नहीं किया हम कई कई जगह उनकी हसी उड़ने से बचा लेंगे

782
00:56:26,840 --> 00:56:30,920
मगर तुम लोग क्योंकि मूर्खता की हद है तो तुम

783
00:56:30,920 --> 00:56:35,280
लोग और ज्यादा वो करोगे सत्यानाश

784
00:56:35,280 --> 00:56:40,400
उन्हीं

785
00:56:40,400 --> 00:56:46,400
का अभी जो जो कहा अभी सब चलेगा देखना

786
00:57:02,360 --> 00:57:08,360
12 13 12 3 25

787
00:57:22,720 --> 00:57:28,720
1696 ध्यान

788
00:57:53,680 --> 00:57:57,880
ये देखो 12 3 25 इसको

789
00:57:57,880 --> 00:58:02,120
पढ़ने और सुनने से शस्त्रों गोदान का फल

790
00:58:02,120 --> 00:58:06,120
प्राप्त होता है इस कवच को धारण करने से मनुष्य सब पाको से मुक्त होकर

791
00:58:06,120 --> 00:58:10,120
परम ब्रह्म पद को प्राप्त कर लेता है इसमें संशय नहीं है मोक्ष

792
00:58:10,120 --> 00:58:15,560
प्राप्त होता है यह सब कुछ लिखा है इसमें देख लो

793
00:58:15,560 --> 00:58:19,640
भैया थोड़ा बड़ा है हम लोग व संक्षिप्त

794
00:58:19,640 --> 00:58:23,800
वाला नहीं पढ़ते हैं ना केवल हिंदी हिंदी

795
00:58:23,800 --> 00:58:27,920
श्लोकों के साथ पढ़ते हैं अगर पढ़ने में आया तो देख लेना

796
00:58:27,920 --> 00:58:32,360
वरना चेक कर लेना बारवा स्कंद तीसरा अध्याय गायत्री

797
00:58:32,360 --> 00:58:36,600
मंत्र के जाप से मोक्ष प्राप्त होता है जाप से अब

798
00:58:36,600 --> 00:58:42,600
आप दिखाओ तत्सत का जाप कहां लिखा है

799
00:58:45,520 --> 00:58:49,560
दिखाओगे अब

800
00:58:49,560 --> 00:58:53,560
बा करके वो गुरु बनना चाहता है और

801
00:58:53,560 --> 00:58:58,120
लोग उसे गुरु बनाने में प्रमोट कर रहे हैं

802
00:58:58,120 --> 00:59:02,120
मैंने जाने कितनी बार अपनी लाइव में जाने कितनी बार यह

803
00:59:02,120 --> 00:59:06,160
कहा कि मेरे प्रति गुरु भाव ना रखें आचार्य भाव ना

804
00:59:06,160 --> 00:59:10,280
रखे तो यह तो फिर आप कुछ भी आप वो लगा दो मैं मैं आप

805
00:59:10,280 --> 00:59:14,560
पर य कह सकता हूं कि आप जो है कई स्त्रियों

806
00:59:14,560 --> 00:59:18,640
के साथ गमन करना चाहते हैं लो अब यह जब तुक्का

807
00:59:18,640 --> 00:59:22,720
ही मारना तो पता नहीं क्या क्या मारा जा सकता है आप जो है फिल्म

808
00:59:22,720 --> 00:59:27,520
स्टार बनना चाहते हैं आप जो है रामपाल यादव बनना चाहते हैं

809
00:59:27,520 --> 00:59:31,560
आप जो है मुंगेरी लाल के हसीन सपनों की दुनिया में खोए रहना चाहते हैं जब तुक्का

810
00:59:31,560 --> 00:59:35,560
मारना है तो कुछ भी मार सकते हैं आप जो है

811
00:59:35,560 --> 00:59:39,760
रामपाल दास जी का नुकसान करना चाहते हैं वहां भी उनको जेल धाम में भी चैन

812
00:59:39,760 --> 00:59:43,760
से नहीं रहने देना चाहते हैं अब जब तुक्का लगाना

813
00:59:43,760 --> 00:59:47,800
है ना बिना सिर पैर की बात करनी इसका कोई आधार नहीं है प्रमाण रहित

814
00:59:47,800 --> 00:59:52,000
कुछ भी बोलो चलिए बढ़ाइए आगे पूरी

815
00:59:52,000 --> 00:59:55,040
तरह

816
00:59:55,040 --> 00:59:59,120
से भगत जी ये और जैसे सनातन के विषय में बात

817
00:59:59,120 --> 01:00:03,320
होती है कि सनातन धर्म के लिए जब बात की थी उसने

818
01:00:03,320 --> 01:00:07,520
तो भगत जी ने ये बताया था कि हम गरीब दास जी का जो अमर

819
01:00:07,520 --> 01:00:10,640
ग्रंथ

820
01:00:10,640 --> 01:00:15,600
है 18 पुराण और छह शास्त्र सभी चीज उसर

821
01:00:15,600 --> 01:00:19,680
भगत जी ने ये कह दिया कि ये 250 साल पहले हुआ लेकिन भगत जी ने ये नहीं बताया उसने

822
01:00:19,680 --> 01:00:24,080
पूछा कि कहीं ऐसा लिखा है वेदों में कहीं ऐसा लिखा है या कहीं उपनिषद

823
01:00:24,080 --> 01:00:28,320
में लिखा है कि वो ज्ञान को दोबारा बताने

824
01:00:28,320 --> 01:00:32,720
वाला आएगा लेकिन इन्होने बताया नहीं इनको बताना चाहिए था कि हां हमारे

825
01:00:32,720 --> 01:00:36,800
जो कबीर ग्रंथ है कबीर सागर में स्पष्ट लिखा हुआ है कि इस ज्ञान कोब बिगाड़ दिया

826
01:00:36,800 --> 01:00:41,040
जाएगा नकली धर्म गुरुओ के द्वारा बिगाड़ दिया जाएगा तो पुनः प्रकट करेगा

827
01:00:41,040 --> 01:00:45,080
वो हम या तो हम ही चल के आएगा या हमारा कोई अंश आएगा उसे पुन

828
01:00:45,080 --> 01:00:50,360
प्रकट करेगा वहां पर लिखा है ना इस बात को बताया नहीं अगर

829
01:00:50,360 --> 01:00:54,400
वो वो कबीर सागर को मानता ही नहीं है बोले मैं कबी कबीर सागर को मानता

830
01:00:54,400 --> 01:00:58,400
ही नहीं हूं नहीं कबीर वो कबीर सागर को नहीं मानता तो

831
01:00:58,400 --> 01:01:02,400
अन कह देंगे हम तुम्हारा श्रीमत देवी पुराण नहीं मानते अ बताइए कैसे

832
01:01:02,400 --> 01:01:07,160
होगा फिर हम गीता जी को नहीं मानते हैं तो फिर वो

833
01:01:07,160 --> 01:01:10,360
बोलेगा एक मिनट इसको

834
01:01:10,360 --> 01:01:15,480
जरा एक बार और सुनाइए अगर वो ये कहेगा यहां से

835
01:01:15,480 --> 01:01:20,160
कबीर सागर को मानता ही नहीं है बोले मैं कबी कबीर सागर को मानता ही नहीं

836
01:01:20,160 --> 01:01:24,560
क वो कबीर सागर को नहीं मानता तो अ कह देंगे हम तुम्हारा श्रीम

837
01:01:24,560 --> 01:01:29,360
देवी पुराण नहीं मानते हैं बताइए कैसे होगा फिर हम गीता जी को नहीं मानते

838
01:01:29,360 --> 01:01:33,440
हैं ठीक है तो भाई तुमको

839
01:01:33,440 --> 01:01:37,560
नहीं मानना है तो मत मानो ना हम थोड़ी ना आए तुम्हारे पास

840
01:01:37,560 --> 01:01:41,560
ये कहने कि कबीर सागर में प्रमाण है और राम भगवान है

841
01:01:41,560 --> 01:01:45,760
हम थोड़ी ना आ रहे तुम्हारे पास ये कहने कि कबीर सागर में प्रमाण है और ब्रह्मा विष्णु महेश

842
01:01:45,760 --> 01:01:50,120
भगवान है तुम आ रहे हो वेदों को वेदों में प्रमाण है तुम लेके आ रहे हो

843
01:01:50,120 --> 01:01:54,120
नहीं मानते उतनी ही बात मानने योग्य है जितनी

844
01:01:54,120 --> 01:01:58,440
वेदों की सीमा में हो गीता की सीमा में हो गीता को वेरीफाई कबीर

845
01:01:58,440 --> 01:02:02,480
सागर नहीं करेगा गीता को गीता वेद को वेरीफाई आपका वो गरीब दास

846
01:02:02,480 --> 01:02:07,440
नहीं करेगा गीता को वेरीफाई आपका वो रामपाल नहीं

847
01:02:07,440 --> 01:02:11,480
करेंगे उनको वेरीफाई ये करेंगे गीता और वेद

848
01:02:11,480 --> 01:02:15,520
तब हिंदू है तब सनातनी है तस्मा

849
01:02:15,520 --> 01:02:20,360
शास्त्रम प्रमाणम भगवत गीता 1624

850
01:02:20,360 --> 01:02:24,840
इसको कह देना ये आउट ऑफ व है यही तो मैं कहूंगा

851
01:02:24,840 --> 01:02:25,360
5

852
01:02:25,360 --> 01:02:29,560
पर श्लोक निकाल लो गीता से उसके बाद मैं हराऊ

853
01:02:29,560 --> 01:02:33,960
क्या बात करते हो आप गिन लो 5 पर श्लोक

854
01:02:33,960 --> 01:02:38,200
उसके बाद तो नहीं कह पाओगे ना काल ने बोला है फिर हम बात

855
01:02:38,200 --> 01:02:42,200
करेंगे इतना इतना गुर्दा है चुन

856
01:02:42,200 --> 01:02:46,520
लो 35 श्लोक 700 में से 35 श्लोक

857
01:02:46,520 --> 01:02:50,600
चुन लो उसके बाद की बची हुई जो भगवत गीता होगी उस पर हम आपको

858
01:02:50,600 --> 01:02:53,560
मात

859
01:02:53,560 --> 01:02:58,000
करेंगे ठीक है कितना कितना

860
01:02:58,000 --> 01:03:02,040
छूट दी आपको तो फिर

861
01:03:02,040 --> 01:03:06,160
कबीर सागर के नाम पर हम यह नहीं कह रहे कि राम भगवान

862
01:03:06,160 --> 01:03:10,440
है हमारे लिए हमारे वेद पुराण उपनिषद पर्याप्त है

863
01:03:10,440 --> 01:03:14,600
आप कह रहे हो आपका जो ग्रंथ है कबीर सागर को छोड़ कर के आप कह

864
01:03:14,600 --> 01:03:20,600
रहे हो वेदों में प्रमाण है कबीर भगवान है

865
01:03:33,520 --> 01:03:37,880
हम थोड़ी ना आए आपके पास वेदों को वेदों को मनवाने के लिए

866
01:03:37,880 --> 01:03:42,080
तुम आ रहे हो हमने बुलाया क्या आपको कौन पूछ रहा है तुम्हे भाई लेके बैठो

867
01:03:42,080 --> 01:03:48,080
अपना कबीर सागर एक तरफ

868
01:03:48,240 --> 01:03:52,320
हा राम सरीखे राम है संत सरीखे

869
01:03:52,320 --> 01:03:57,840
संत नाम सरीखा नाम है आदि नहीं

870
01:03:57,840 --> 01:04:01,920
अंत यह देखो आप कहते हो वेदों

871
01:04:01,920 --> 01:04:06,160
में प्रमाण है और कबीर साहब भगवान है जब पूछोगे

872
01:04:06,160 --> 01:04:10,160
कहां है कि कवि कवि का मतलब तो सर्वज्ञ कवियों की तरह आचरण करने

873
01:04:10,160 --> 01:04:14,160
वाला है यह सब स्पष्ट लिखा नहीं दिखाओगे

874
01:04:14,160 --> 01:04:18,320
कि कबीर कहां लिखा है मगर तुम्हारे कबीर सागर में तो राम लिखा

875
01:04:18,320 --> 01:04:22,680
है

876
01:04:22,680 --> 01:04:28,680
हा अच्छा

877
01:04:34,160 --> 01:04:40,160
क्या लिखा है कबीर परमेश्वर

878
01:04:40,680 --> 01:04:44,720
ऐसा कबीर परमेश्वर

879
01:04:44,720 --> 01:04:48,720
ऐसा अविगल राम है लो राम

880
01:04:48,720 --> 01:04:53,640
शब्द कितनी बार आ रहा है तुम दिखाओ कबीर कहां आ रहा है लिखा हुआ

881
01:04:53,640 --> 01:04:56,920
बस करिए ठीक है

882
01:04:56,920 --> 01:05:01,880
अब वो चला दीजिए इन लोगों का कुतर्क

883
01:05:01,880 --> 01:05:06,600
नामा इन लोगों का कुतर्क नामा प्ले करिए

884
01:05:06,600 --> 01:05:11,360
आनंद आ रहा है ना व्यक्ति खुद बोल रहा है कि हम भी नहीं माने ये आस्था है

885
01:05:11,360 --> 01:05:15,560
जिनको ये सद ग्रंथ कहते हैं पवित्र कहते हैं हम नहीं कहते कभी

886
01:05:15,560 --> 01:05:19,960
सागर को सद ग्रंथ पवित्र होंगे मगर हम उनको प्रमाण

887
01:05:19,960 --> 01:05:24,040
की दृष्टि से प्रस्तुत नहीं करते

888
01:05:24,040 --> 01:05:28,200
यह करते हैं और इन्होने जो एक बात कही सनातन इन्होंने एक बात

889
01:05:28,200 --> 01:05:33,120
और कही सनातन मैंने पहले ही बता दिया

890
01:05:33,120 --> 01:05:37,240
इन्होंने सनातन पर आक्षेप लगाया कि भाई एक क्या कहते हैं एक

891
01:05:37,240 --> 01:05:41,320
जो व्यक्ति है वो एक तरफ कुछ हो रहा है

892
01:05:41,320 --> 01:05:45,680
एक तरफ कुछ हो रहा है उसका यह धर्म है कि वो धर्म है भाई अगर ऐसे व्यक्ति

893
01:05:45,680 --> 01:05:49,680
के अपने ओपिनियन से धर्म बदलने लगेगा तो जिसका विवाह नहीं

894
01:05:49,680 --> 01:05:53,720
हो रहा है वो अगर बलात्कार करने लग जाएगा तो वो कह देगा मेरा विवाह

895
01:05:53,720 --> 01:05:57,840
नहीं हो रहा था मेरा धर्म बला करना तो मान लोगे उसकी

896
01:05:57,840 --> 01:06:02,000
बात भले ही व आपके घर की मातृ शक्ति क्यों ना हो जिसका

897
01:06:02,000 --> 01:06:06,120
जो पीड़ा है उसका धर्म है भाई ऐसे नहीं होता है

898
01:06:06,120 --> 01:06:10,160
धर्म धर्म और अधर्म का निर्णय क्या होता है तेरे लिए कर्तव्य और

899
01:06:10,160 --> 01:06:14,160
अ कर्तव्य के विषय में एक मात्र शास्त्र प्रमाण है

900
01:06:14,160 --> 01:06:17,040
तो वह जो बदल जो हर स्थिति के लिए जो अलग

901
01:06:17,040 --> 01:06:21,520
अलग धर्म है ना मैंने पहले ही बताया वो धर्म जो है अलग अलग

902
01:06:21,520 --> 01:06:25,880
वो निश्चित कर दिया गया है एक ही बार में अब वो बदल

903
01:06:25,880 --> 01:06:30,080
नहीं वो है सनातन कि वोह देश

904
01:06:30,080 --> 01:06:34,400
काल परिस्थिति से बदल रहा फिर तो व हो गया ना इस्लाम और यह सब हो गया बदलने

905
01:06:34,400 --> 01:06:38,720
वाला ठीक है तो एक य बात हो गई

906
01:06:38,720 --> 01:06:42,760
एक बात उन्होने और कही गरीब सागर जहां राम

907
01:06:42,760 --> 01:06:46,920
जी के लिए बताया जा रहा है उसको कबीर बोल दिया दूसरी जगह राम

908
01:06:46,920 --> 01:06:51,800
का अर्थ श्री राम से जोड़ रहे हैं ठीक है

909
01:06:51,800 --> 01:06:55,880
यह इनकी मिलावट है अब भाई आपके लिए तो ना कबीर

910
01:06:55,880 --> 01:07:00,200
सागर है नाी गरीब सागर है कौन सा है वो देख लेना जहां

911
01:07:00,200 --> 01:07:04,240
पर राम की बात हो रही है वहां पर आपने जोड़ दिया कि

912
01:07:04,240 --> 01:07:08,960
वह राम की नहीं कबीर की बात हो रही है अपने मन से क्यों

913
01:07:08,960 --> 01:07:13,000
रामपाल और रामपाल मान मान्य क्यों क्योंकि गरीब सागर कह रहा

914
01:07:13,000 --> 01:07:17,120
है क्योंकि कबीर सागर कह रहा है कबीर सागर में गलती कौन बता रहा है रामपाल और

915
01:07:17,120 --> 01:07:21,600
रामपाल को सत्यापित कौन कर रहा है कबीर अरे भाई

916
01:07:21,600 --> 01:07:27,600
तुमने लोगों के लिए बना दिया भुल बुलया

917
01:07:27,840 --> 01:07:32,200
गरीब सागर में क्या सही है क्या गलत है यह बताएंगे रामपाल

918
01:07:32,200 --> 01:07:36,200
रामपाल क्यों सही है यह बताएगा

919
01:07:36,200 --> 01:07:41,120
गरीब सागर या कबीर सागर जो भी है हा

920
01:07:41,120 --> 01:07:44,920
हां गरीब सागर

921
01:07:44,920 --> 01:07:47,680
अच्छा

922
01:07:47,680 --> 01:07:51,920
तो अगर अगर अगर

923
01:07:51,920 --> 01:07:55,920
जैसे भगवत गीता अगर भगवत गीता का एक भी श्लोक िप

924
01:07:55,920 --> 01:08:00,600
मानते हो और वह अभी संशोधन का विषय है

925
01:08:00,600 --> 01:08:05,000
चयन का विषय है तो फिर उसके आधार पर आप

926
01:08:05,000 --> 01:08:09,080
रामपाल को तत्वदर्शी कैसे सिद्ध कर सकते हैं पहले सिद्ध तो करिए कितने

927
01:08:09,080 --> 01:08:12,600
श्लोक मानने कितने नहीं

928
01:08:12,600 --> 01:08:16,600
मानने भाई साहब मैं अभी लेता हूं अभी आपको मेरी कुछ बातें रह गई

929
01:08:16,600 --> 01:08:21,320
है अभी हटा दीजिए ना लेंगे आपको लेंगे हां

930
01:08:21,320 --> 01:08:26,360
अब मैं बात करता हूं इन्होंने एक बात कही कि

931
01:08:26,360 --> 01:08:30,800
भगवत पाद आदि शंकराचार्य भगवान ने सूक्ष्म

932
01:08:30,800 --> 01:08:35,040
वेद को स्वीकार किया है पहली बात तो यह समझो

933
01:08:35,040 --> 01:08:39,520
कि सूक्ष्म वेद कहा किसको जा रहा है ऐसा नहीं

934
01:08:39,520 --> 01:08:43,080
जिसको जानते ना हो नहीं तो वो कहते अज्ञात

935
01:08:43,080 --> 01:08:47,200
वेद सूक्ष्म का अर्थ यह नहीं होता है कि हम जिसको जानते नहीं

936
01:08:47,200 --> 01:08:51,440
है छोटा होता है क्या होता है छोटा तो

937
01:08:51,440 --> 01:08:56,440
सूक्ष्म वेद का जो उन्होंने उपयोग किया है वो किसके लिए किया

938
01:08:56,440 --> 01:09:01,720
वेद बीज ओमकार के लिए

939
01:09:01,720 --> 01:09:05,920
तो देखो भैया पहली बात तो य अपनी जानकारी दुरुस्त कर ले

940
01:09:05,920 --> 01:09:10,560
कि इन्होंने जोलोक कोट किया है 42 नंबर

941
01:09:10,560 --> 01:09:14,920
वह 42 नहीं है यह इनकी अल्पज्ञ है

942
01:09:14,920 --> 01:09:19,120
ममना अनुशासनम में 42 नंबर का कोई

943
01:09:19,120 --> 01:09:23,360
लोक नहीं है अभी हमने कुछ दिन पहले एक ग्रंथ दिखा दिया था उसमें केवल

944
01:09:23,360 --> 01:09:27,400
ममना अनुशासनम नहीं था उसमें और भी चीजें

945
01:09:27,400 --> 01:09:31,440
थी जो गोवर्धन मट से छपता है तो उसमें जो गोवर्धन

946
01:09:31,440 --> 01:09:35,840
मट से आज के आचार्य द्वारा संकलित जो चीजें हैं उसमें 43

947
01:09:35,840 --> 01:09:39,880
में नंबर पर आज के आज के जो आचार्य गण है उन्होंने कोट किया

948
01:09:39,880 --> 01:09:45,880
है उस मंत्र को और उसका अर्थ भी बताया है दिखा दीजिए

949
01:09:46,600 --> 01:09:51,800
भैया दिखा दीजिए कि सूक्ष्म वेद का मतलब क्या बताया

950
01:09:51,800 --> 01:09:56,600
उन्होंने यह जो ग्रंथ है इसमें मठ अनुशासनम

951
01:09:56,600 --> 01:10:01,320
एक चैप्टर है इसको आदि शंकराचार्य जी ने लिखा है

952
01:10:01,320 --> 01:10:05,640
बाकी क्या जो चीजें हैं कि गुरु वंश दिग दर्शन सेतु

953
01:10:05,640 --> 01:10:11,640
मनु सासनम यह सब आदि शंकराचार्य जी ने नहीं लिखा है य सब

954
01:10:49,840 --> 01:10:54,040
तो मठमन म अनुशासनम आदि शंकराचार्य जी ने अवश्य

955
01:10:54,040 --> 01:10:58,080
लिखा मगर इसमें जिस जहां से वो श्लोक कोट किया गया

956
01:10:58,080 --> 01:11:01,760
है वह 43 नंबर का श्लोक है और उसमें वह क्या

957
01:11:01,760 --> 01:11:05,920
कह रहे हैं वो दिखा दीजिए मैं यहां से दिखा देता हूं

958
01:11:05,920 --> 01:11:09,080
43 नंबर

959
01:11:09,080 --> 01:11:13,160
का व स्क्रीन पर ला दीजिए जरा आपको भेजा था

960
01:11:13,160 --> 01:11:17,320
मैंने यह है इस चैप्टर का नाम नाम है

961
01:11:17,320 --> 01:11:21,040
शेषम नाए और

962
01:11:21,040 --> 01:11:25,280
इसमें 42 इन्होने शायद गलती से पढ़ लिया होगा

963
01:11:25,280 --> 01:11:29,320
उसके नीचे 43 है वहां पर लिखी है सूक्ष्म वेद की बात और

964
01:11:29,320 --> 01:11:33,360
उसके नीचे सूक्ष्म वेद के नीचे लिखा भी है कि क्या इसका

965
01:11:33,360 --> 01:11:38,120
अर्थ है सूक्ष्म वेद का ठीक है

966
01:11:38,120 --> 01:11:42,240
तो सूक्ष्म वेद का अर्थ है वेद बीज अब

967
01:11:42,240 --> 01:11:46,520
वेद बीज क्यों क्योंकि वह छोटा अगर वेदों का सबसे

968
01:11:46,520 --> 01:11:51,360
छोटा स्वरूप सबसे सूक्ष्म स्वरूप है वेदों का वो क्या है

969
01:11:51,360 --> 01:11:55,640
ओमकार क्योंकि सबसे पहले वेद वेद बीज ओमकार

970
01:11:55,640 --> 01:11:59,760
के रूप में ही प्रकट होते हैं तो भैया वो दिखा दो

971
01:11:59,760 --> 01:12:03,840
शास्त्रों का कहां पर लिखा है वेद बीज ओमकार के बारे में दिखा

972
01:12:03,840 --> 01:12:09,840
दो इनको

973
01:12:17,440 --> 01:12:21,480
प्रमाण ना ना सबसे ये

974
01:12:21,480 --> 01:12:26,240
ये तो वो प्रमाण है सबसे पहला प्रमाण मैंने दिया होगा आपको

975
01:12:26,240 --> 01:12:32,240
वो दिखाइए वेद बीज ओमकार

976
01:12:45,760 --> 01:12:50,320
है यह भाई साहब अजीत सिंह राजपूत जो है यह लगातार

977
01:12:50,320 --> 01:12:54,360
कमेंट कर रहे हैं कुतर्क भरे और कुछ नहीं है भाई

978
01:12:54,360 --> 01:12:58,520
आप हमारे प्रमाण को उपस्थित क्यों कर रहे हो हम तो गलत

979
01:12:58,520 --> 01:13:02,600
करते हैं ना आप कह रहे हैं कि भैया

980
01:13:02,600 --> 01:13:06,720
आप लोग बजरा को बजरंग क्यों कहते हो हम

981
01:13:06,720 --> 01:13:12,400
तो गलत करने वाले हैं

982
01:13:12,400 --> 01:13:16,440
ना अरे भाई ऊपर पीछे जाइए मैंने अभी अभी आपको सारे

983
01:13:16,440 --> 01:13:22,440
प्रमाण भेजे हैं सबसे पहले प्रमाण के बाद सेकंड नंबर का प्रमाण वही

984
01:13:24,120 --> 01:13:30,120
है चेक करके

985
01:13:44,320 --> 01:13:49,200
देखिए हां ये बड़ा करिए

986
01:13:49,200 --> 01:13:54,120
इसको हां मैं पढ़ देता हूं क्या लिखा है इसमें

987
01:13:54,120 --> 01:14:00,120
ओमकार के

988
01:14:17,320 --> 01:14:22,080
बा मांड को उपनिषद एक ऊपर जाइए जरा

989
01:14:22,080 --> 01:14:26,480
मांड को उपनिषद एक कठोपनिषद एक 15 श्रीमद्

990
01:14:26,480 --> 01:14:30,640
भागवत 11 17 11 श्रीमद् भागवत 12

991
01:14:30,640 --> 01:14:34,920
छ 39 श्रीमद् भागवत 126 41

992
01:14:34,920 --> 01:14:39,520
और गोपथ ब्राह्मण यह जो ओमकार

993
01:14:39,520 --> 01:14:43,760
यह एक अक्षर सब कुछ है और इसी एक अक्षर की व्याख्या समस्त

994
01:14:43,760 --> 01:14:47,760
वेद है ठीक है सब वेद जिस पद

995
01:14:47,760 --> 01:14:51,920
का वर्णन करते हैं जिसके लिए समस्त तप किए जाते हैं तथा ब्रह्मचर्य

996
01:14:51,920 --> 01:14:56,840
आदि व्रत धारण किए जाते हैं वह पद संक्षेप में केवल

997
01:14:56,840 --> 01:15:01,040
संक्षेप सूक्ष्म संक्षेप

998
01:15:01,040 --> 01:15:05,120
समझ गए ना संक्षेप संक्षेप में केवल

999
01:15:05,120 --> 01:15:09,400
यह ओमकार है यह एक अक्षर है षष्टि के आरंभ में प्रणव

1000
01:15:09,400 --> 01:15:13,640
ही वेद था इसके अनंतर तीन मात्रा वाला ओमकार उत्पन्न

1001
01:15:13,640 --> 01:15:18,000
हुआ जो समस्त मंत्रों उपनिषदों का सनातन वेद बीज छोटा

1002
01:15:18,000 --> 01:15:22,520
सबसे वेदों का सबसे छोटा स्वरूप सूक्ष्म स्वरूप वो क्या है ओमकार

1003
01:15:22,520 --> 01:15:26,520
आपके अनुसार कुछ और होगा यह पर उनके अनुसार है जो

1004
01:15:26,520 --> 01:15:30,960
जिनसे जिनसे वेद आते हैं उनके अनुसार

1005
01:15:30,960 --> 01:15:32,360
वेद बीज ब्रह्मा जी ने

1006
01:15:32,360 --> 01:15:36,480
ओम इस अक्षर को देखा जी हटा दीजिए और भी

1007
01:15:36,480 --> 01:15:40,680
मैंने प्रमाण दिए हैं इस बारे में अब अब

1008
01:15:40,680 --> 01:15:44,680
बात करते हैं कि आदि शंकराचार्य भगवान ने पांचवा

1009
01:15:44,680 --> 01:15:48,680
वेद किसे माना है और हमारे शास्त्रों ने पांचवा वेद किसे

1010
01:15:48,680 --> 01:15:52,760
माना है तो वो पांचवा वेद किसे माना है दिखाना शुरू

1011
01:15:52,760 --> 01:15:58,760
करिए

1012
01:16:02,200 --> 01:16:06,360
अगर कोई गाली दे रहा है तो आप लोग बोल दिया करिए और उसको

1013
01:16:06,360 --> 01:16:10,600
गाली वाले को बैन कर दिया जाएगा आप लोग गाली ना दे

1014
01:16:10,600 --> 01:16:15,120
गिरो मगर उस झरने की तरह जो गिर के भी अपनी सुंदरता नहीं खोने

1015
01:16:15,120 --> 01:16:19,120
देता यह देखिए चांदो उपनिषद में लिखा है सात एक दो

1016
01:16:19,120 --> 01:16:23,200
में पांचवा वेद क्या है ंद

1017
01:16:23,200 --> 01:16:28,160
उपनिषद सा एक

1018
01:16:28,160 --> 01:16:32,360
स्क्रीन पर भी देखते रहियो मैं पढ़ के भी सुना देता हूं क्या

1019
01:16:32,360 --> 01:16:36,640
है पांचवा वेद कौन सा है क्या पांचवा वेद कहीं कभी

1020
01:16:36,640 --> 01:16:40,880
सागर है हर तरह से बखिया उड़ेंगे भाई क्या

1021
01:16:40,880 --> 01:16:46,880
बात कर रहे हो

1022
01:17:11,680 --> 01:17:16,120
सात एक दो में पांचवा वेद कहा गया है छंद उपनिषद

1023
01:17:16,120 --> 01:17:22,120
में किसको

1024
01:17:25,120 --> 01:17:31,120
पुराण को और अगला

1025
01:17:35,200 --> 01:17:41,200
दिखाइए क्या लिखा है छंद

1026
01:17:41,720 --> 01:17:45,480
और

1027
01:17:45,480 --> 01:17:51,480
चतुर्वेद अगला दिखाइए पुराण के बारे में

1028
01:17:56,960 --> 01:18:01,200
हां ये क्या है बृहदारण्यक उपनिषद दो

1029
01:18:01,200 --> 01:18:05,480
च 11 इसमें भी पांचवा वेद

1030
01:18:05,480 --> 01:18:09,560
माना गया है पंचम वेदा नाम वेदम तो

1031
01:18:09,560 --> 01:18:14,160
पांचवा वेद पुराण है चतुर्थ

1032
01:18:14,160 --> 01:18:18,880
चतुर्थ मिति सस पुराण पंचम वेदा नाम

1033
01:18:18,880 --> 01:18:23,680
वेदम ठीक है चलिए और बढ़ी आगे

1034
01:18:23,680 --> 01:18:28,080
और दिखाइए अगला न दोग उपनिषद सात एक चार हो ही गया

1035
01:18:28,080 --> 01:18:32,440
तो ऐसे करके अनेक अनेक प्रमाण है अब सीधे वो महाभारत

1036
01:18:32,440 --> 01:18:36,760
वाला दिखा दीजिए एक मैंने छोटा सा भेजा था आपको

1037
01:18:36,760 --> 01:18:42,760
जिसमें वो

1038
01:18:43,280 --> 01:18:47,320
अ लिखा है कि जो वेद का अर्थ है वो जो

1039
01:18:47,320 --> 01:18:51,960
इतिहास पुराण है उनकी सीमा में रहकर करना

1040
01:18:51,960 --> 01:18:55,960
चाहिए नहीं तो जो श्रुति है वो वो डरती है कि

1041
01:18:55,960 --> 01:19:01,960
कोई मेरा गलत अर्थ ना कर दे यह वहां कहा गया

1042
01:19:01,960 --> 01:19:06,440
है यह देखिए वेदार्थ की व्याख्या

1043
01:19:06,440 --> 01:19:11,200
यह लिखा है आदि पर्म महाभारत में पहला

1044
01:19:11,200 --> 01:19:16,480
अध्याय और 64 वा श्लोक

1045
01:19:16,480 --> 01:19:20,520
इतिहास वेदार्थ की व्याख्या वेदों का अर्थ इतिहास

1046
01:19:20,520 --> 01:19:24,920
और पुराणों के सीमा में करना चाहिए अ

1047
01:19:24,920 --> 01:19:28,960
श्रुत व्यक्तियों से वेद इसलिए भयभीत रहता है कि

1048
01:19:28,960 --> 01:19:33,120
यह कहीं मेरे अर्थों का अर्थ ना कर दे अप श्रुत

1049
01:19:33,120 --> 01:19:37,160
मतलब जिन्होंने टियो का ज्यादा ज्ञान नहीं किया है ज्यादा अध्ययन नहीं

1050
01:19:37,160 --> 01:19:41,320
किया है थोड़ा बहुत सुना शियों को तो उनसे वेद भभ रहता है

1051
01:19:41,320 --> 01:19:45,480
दिखाया जा रहा है कि आपको वेदों की व्याख्या पुराणों की सीमा

1052
01:19:45,480 --> 01:19:49,880
में करनी है कबीर सागर की सीमा में नहीं

1053
01:19:49,880 --> 01:19:54,000
गरीब सागर की सीमा में नहीं जेल धाम निवासी रामपाल की सीमा

1054
01:19:54,000 --> 01:19:59,760
में नहीं

1055
01:19:59,760 --> 01:20:04,000
है ना और चलिए हां

1056
01:20:04,000 --> 01:20:08,040
अब हम यह बता दे हमने बता दिया सूक्ष्म वेद क्या

1057
01:20:08,040 --> 01:20:12,360
है ओम प्रणवा ओमकार और

1058
01:20:12,360 --> 01:20:16,440
पांचवा वेद क्या है पुराण इतिहास

1059
01:20:16,440 --> 01:20:20,520
पुराणा ब्याम और अब बात करते

1060
01:20:20,520 --> 01:20:24,920
हैं कि शंकराचार्य की जब आप बात कर रहे हैं कि आदि शंकराचार्य जी ने य माना

1061
01:20:24,920 --> 01:20:29,080
बात आ गई जब शंकराचार्य की बात ले रहे हो तो शंकराचार्य ने

1062
01:20:29,080 --> 01:20:35,080
आगे क्या कहा है देख लो दिखा दो

1063
01:20:36,200 --> 01:20:40,360
भैया वायु पुराण

1064
01:20:40,360 --> 01:20:44,440
में एक श्लोक आया है यह वाला

1065
01:20:44,440 --> 01:20:49,640
नहीं अभी ये वाला नहीं इससे पहले

1066
01:20:49,640 --> 01:20:55,280
वाला वायु पुराण में एक श्लोक आता है ब्रह्मा कृते योगे पूज्य

1067
01:20:55,280 --> 01:20:59,320
त्रेता याम यज्ञ उते द्वापर पूज्यते

1068
01:20:59,320 --> 01:21:02,200
विष्णु रहम

1069
01:21:02,200 --> 01:21:07,640
पूज तुस वर्प वायु पुराण दो 32

1070
01:21:07,640 --> 01:21:12,560
21 इसमें आया है

1071
01:21:12,560 --> 01:21:16,640
कि यह देख लीजिए वायु पुराण दो 3 21

1072
01:21:16,640 --> 01:21:20,720
इसमें क्या आया है भगवान शंकर कह रहे हैं कि गुरु

1073
01:21:20,720 --> 01:21:24,720
के रूप में ब्रह्मा जो

1074
01:21:24,720 --> 01:21:29,120
सतयुग था उसमें ब्रह्मा पूज्य थे गुरु के रूप में और त्रेता

1075
01:21:29,120 --> 01:21:34,000
में वशिष्ठ पूज्य थे और द्वापर में व्यास

1076
01:21:34,000 --> 01:21:38,440
पूज्य थे और कलयुग में मैं महेश्वर पूज्य

1077
01:21:38,440 --> 01:21:43,280
हूं ठीक है उसके बाद

1078
01:21:43,280 --> 01:21:47,360
फिर कह रहे हैं शंकराचार्य भगवत पाद आदि शंकराचार्य जो कि उनके अवतार

1079
01:21:47,360 --> 01:21:51,480
है शंकर भगवान के ये हम किसी और दिन और कई वीडियोस में बना चुके हैं और अगर

1080
01:21:51,480 --> 01:21:55,480
मांगा जाएगा तो अलग से प्रमाण अलग से देंगे मगर फिलहाल भगवत पाद आदि

1081
01:21:55,480 --> 01:21:59,600
शंकराचार्य कह कि मैं शिव

1082
01:21:59,600 --> 01:22:03,640
का रूप जो हूं शंकराचार्य मैं जगतगुरु हूं खोलिए इसी को इसी वाले

1083
01:22:03,640 --> 01:22:07,800
पृष्ठ को दोबारा खोलिए मठमन

1084
01:22:07,800 --> 01:22:12,000
मनु शस में 77 नंबर के वर्ष में

1085
01:22:12,000 --> 01:22:16,200
भगवत पाद आदि शंकराचार्य वायु पुराण के अनुसार बोल रहे हैं

1086
01:22:16,200 --> 01:22:20,920
यह जरा बड़ा कर दो इतना जस्ट सबसे लास्ट जो श्लोक है उससे पहले वाला

1087
01:22:20,920 --> 01:22:25,200
हा सतयुग में स्वयं ब्रह्मा ता में

1088
01:22:25,200 --> 01:22:27,560
विष्णु द्वापर में व्यास

1089
01:22:27,560 --> 01:22:31,760
देव विश्व गुरु थे इस कलयुग में मैं शंकराचार्य

1090
01:22:31,760 --> 01:22:36,280
जगत गुरु हूं जगतगुरु शब्द समझ लेना

1091
01:22:36,280 --> 01:22:41,160
जो मनमुक जगतगुरु लिखते हो ना यह देख लो

1092
01:22:41,160 --> 01:22:44,760
शास्त्र सम्मत जगत गुरु कौन

1093
01:22:44,760 --> 01:22:48,800
है तो जगत गुरु कौन है कलयुग का जब

1094
01:22:48,800 --> 01:22:53,440
आप सूक्ष्म वेद का प्रमाण लेने आ गए हो शंकराचार्य के पास

1095
01:22:53,440 --> 01:22:57,600
तो वो बता रहे हैं जगतगुरु कौन है शंकराचार्य जगतगुरु

1096
01:22:57,600 --> 01:23:01,720
है और वो यहां यह नहीं लिख रहे कि जगतगुरु

1097
01:23:01,720 --> 01:23:06,600
कबीर है या जगतगुरु रामपाल है जेल धाम निवासी

1098
01:23:06,600 --> 01:23:10,640
वह जगतगुरु नहीं है यहां बोल रहे हैं मैं शंकराचार्य जगतगुरु

1099
01:23:10,640 --> 01:23:15,000
हूं अब उसके बाद उनकी पीठ पर बैठने वाला जगतगुरु क्यों हो गया

1100
01:23:15,000 --> 01:23:20,600
यह दिखा दो अब दिखाओ वाला श्वेता सत्र उपनिषद

1101
01:23:20,600 --> 01:23:26,160
वाला दिखाओ जब

1102
01:23:26,160 --> 01:23:30,240
उनका सूक्ष्म वेद मानना है उनकी यह बातें नहीं माननी

1103
01:23:30,240 --> 01:23:34,240
मीठा मठा गप गप कड़वा कड़वा ठू यह देखो क्या कह रहे

1104
01:23:34,240 --> 01:23:38,560
हैं शंकराचार्य अभी उन्होंने बता दिया मैं शंकर का अवतार जगतगुरु

1105
01:23:38,560 --> 01:23:42,800
हूं अब बता रहे हैं मेरे द्वारा स्थापित पीठ पर आरूढ़

1106
01:23:42,800 --> 01:23:47,040
लक्षण संपन्न सन्यासी परमेश्वर में और इस

1107
01:23:47,040 --> 01:23:51,200
शति के अनुसार मुझ शिव का रूप अर्थात शंकराचार्य

1108
01:23:51,200 --> 01:23:55,280
शिव स्वरूप ही मान्य है इसलिए कहा जाता आता है उस पीठ पर

1109
01:23:55,280 --> 01:23:59,520
बैठने वाले को शंकराचार्य समझ गए तो जगतगुरु कौन हुआ

1110
01:23:59,520 --> 01:24:03,520
नो रामपाल जगतगुरु रामपाल

1111
01:24:03,520 --> 01:24:07,800
नहीं है जगतगुरु ये है क्योंकि तुमने

1112
01:24:07,800 --> 01:24:11,840
इनको माना ना क्योंकि ये सूक्ष्म वेद कह रहे हैं अब एक बात कह लेते हैं यह बातें तुम

1113
01:24:11,840 --> 01:24:15,920
मानोगे नहीं इनकी फिर आ जाओगे किय तो सिलेक्शन रामपाल करेंगे कौन सा मानना है कौन सा

1114
01:24:15,920 --> 01:24:20,520
नहीं मानना है अरे भैया रामपाल जब सिलेक्शन करेंगे तो फिर वही बात आ जाती है

1115
01:24:20,520 --> 01:24:24,560
फिर इसकी किसी भी बात को प्रमाण कैसे मान ले जब इसकी अभी

1116
01:24:24,560 --> 01:24:29,040
यह सिलेक्ट हुआ ही नहीं कि कौन सी सही है कौन सा गलत

1117
01:24:29,040 --> 01:24:33,080
है अब बात आ जाती है कि चलो मान लिया उन्होंने सूक्ष्म

1118
01:24:33,080 --> 01:24:35,960
वेद कह दिया मगर वह सूक्ष्म

1119
01:24:35,960 --> 01:24:40,240
वेद कबीर सागर यह कैसे सिद्ध होगा कबीर सागर कहा

1120
01:24:40,240 --> 01:24:44,920
क्या हम तुम्हारी दुर्जन तोष न्याय भी मानेंगे हर तरह से बात

1121
01:24:44,920 --> 01:24:48,920
करेंगे अगर उन्होंने सूक्ष्म वेद कह दिया और जो

1122
01:24:48,920 --> 01:24:53,040
आचार्य उन्होंने नहीं आज के जो आचार्य गण है उन्होंने लिखा है पहले अपनी

1123
01:24:53,040 --> 01:24:57,040
वो ठीक कर लो तो आज के आचार्य ने लिखा है

1124
01:24:57,040 --> 01:25:01,160
मगर मैं कह रहा हूं कि चलो मान लेते हैं थोड़ी देर मेरी जानकारी गलत है और आपकी

1125
01:25:01,160 --> 01:25:05,360
सही है उन्होंने सद लिखा है उसका ग जो अर्थ है वह आज

1126
01:25:05,360 --> 01:25:09,560
के आचार्यों ने गलत कर रखा है तो सूक्ष्म वेद का अर्थ कबीर सागर

1127
01:25:09,560 --> 01:25:13,640
है यह तुम तय करने वाले कौन होते हो भाई

1128
01:25:13,640 --> 01:25:19,640
हमें प्रमाण तो लाओ कि हम तुम्हारी बात

1129
01:25:20,800 --> 01:25:25,120
माने रामपाल दास जी भी आपकी ये नॉलेज अल्प ज्ञान

1130
01:25:25,120 --> 01:25:29,280
अल्पज्ञ देख कर के सब माथा पीट रहे होंगे ये क्या कह दिया तुम लोगों

1131
01:25:29,280 --> 01:25:33,400
ने कि अगर तुम अगर हमारे कबीर सागर को नहीं मानते हो तो हम भी तुम्हारे वेद

1132
01:25:33,400 --> 01:25:37,400
गीता को नहीं मानते यही सद ग्रंथ है तुम्हारे जिनको अगर

1133
01:25:37,400 --> 01:25:41,440
कोई गलत व्यक्ति आपके अनुसार मैं गलत हूं आपके अनुसार अगर मैंने

1134
01:25:41,440 --> 01:25:45,600
कबीर सागर को छोड़ दिया तो आप अपने सद ग्रंथों को छोड़ दोगे

1135
01:25:45,600 --> 01:25:51,600
पवित्र धर्म ग्रंथों को छोड़ दोगे पवित्र है ना सद ग्रंथ है ना

1136
01:25:52,080 --> 01:25:56,520
हां वो केवल एक सहारा है अपना

1137
01:25:56,520 --> 01:26:00,520
परचम लहराने का उसमें कोई श्रद्धा नहीं है उसमें

1138
01:26:00,520 --> 01:26:05,160
कोई निष्ठा नहीं है उसमें कोई प्रमाण बुद्धि नहीं है

1139
01:26:05,160 --> 01:26:09,160
एक बार वो सीन दिखा दो दोबारा से जो अभी अभी आए होंगे वो देख नहीं पाए होंगे वो वाला

1140
01:26:09,160 --> 01:26:13,240
सीन दिखा दो क्या कह रहे हैं वो उनके लिए कि

1141
01:26:13,240 --> 01:26:17,400
अगर वो कह दे कि हम कबीर सागर को नहीं मानते भाई हम आ रहे हैं क्या

1142
01:26:17,400 --> 01:26:22,160
कि मानो हमारे वेद पुराण को तुम आ रहे हो कि मानो हमारे कबीर को

1143
01:26:22,160 --> 01:26:26,640
उसके आधार पर अपने वेद पुराणों को मानना बंद दो

1144
01:26:26,640 --> 01:26:30,920
नकली धर्म गुरु के द्वारा बिगाड़ दिया हमारा

1145
01:26:30,920 --> 01:26:36,920
कोई इस बात को

1146
01:26:37,880 --> 01:26:41,880
बया कबीर सागर को नहीं मानता तो अप क हम तुमरा

1147
01:26:41,880 --> 01:26:46,680
श्रीम देवी पुराण नहीं मानते बताइए कैसे होगा नहीं मानते

1148
01:26:46,680 --> 01:26:50,720
ये है यह सच्चाई हमें बाहर लानी

1149
01:26:50,720 --> 01:26:55,120
थी जो यह कहते हैं ना पवित्र ज्ञान गंगा ता तेरा ज्ञान

1150
01:26:55,120 --> 01:27:01,120
अमृत हो गया अब अमृत नहीं

1151
01:27:03,200 --> 01:27:08,200
रहा तुम्हारा हमारा हो गया ना

1152
01:27:08,200 --> 01:27:12,400
इसको कहते दूध का दूध और पानी का पानी

1153
01:27:12,400 --> 01:27:16,400
तो ज्यादातर जो बातें हैं वो हम कर चुके हैं पुराणों की

1154
01:27:16,400 --> 01:27:20,680
प्रमाणिकता दे दी पांचवे वेद के रूप में बता दिया सूक्ष्म वेद की परिभाषा

1155
01:27:20,680 --> 01:27:24,680
दे दी आदि शंकराचार्य जी ने और क्या-क्या कहा है यह बता दिया

1156
01:27:24,680 --> 01:27:28,960
उस कुतर की को क्यों हटाया यह भी बता दिया और यह

1157
01:27:28,960 --> 01:27:33,320
जो अल्पज्ञ शिष्य जो

1158
01:27:33,320 --> 01:27:37,480
अपने उनका नाश कर रहे हैं रामपाल

1159
01:27:37,480 --> 01:27:41,760
एंड कंपनी का तो वोह जो है

1160
01:27:41,760 --> 01:27:46,200
उनकी मूर्खता का प्रमाण दे दिया उन्होंने और

1161
01:27:46,200 --> 01:27:50,480
गुर्दे की बात भी कर दी

1162
01:27:50,480 --> 01:27:53,040
हां गुरुदेव अवनीश जी कह रहे

1163
01:27:53,040 --> 01:27:55,160
हैं

1164
01:27:55,160 --> 01:27:59,320
अवनीश जी कह रहे हैं इन्होंने शंकराचार्य जी को भी हरा दिया मुगरी लाल

1165
01:27:59,320 --> 01:28:03,480
के आसीन सपने भैया कोई भी देख सकता है सब लोग फ्री है

1166
01:28:03,480 --> 01:28:07,640
देखने के

1167
01:28:07,640 --> 01:28:11,800
लिए अरे आपसे अच्छे तो य अमित दास और ये जो

1168
01:28:11,800 --> 01:28:16,640
ऋषि दास जो आते हैं ना चैनल पर इनम कम से कम गुर्दा तो है

1169
01:28:16,640 --> 01:28:20,800
थोड़ा बहुत विचारों को मालूम रहता तब भी आते हैं नहीं हम अपने रामपाल दास के लिए जाएंगे

1170
01:28:20,800 --> 01:28:25,200
हम अपने जो है कबीर के लिए जाएंगे आप लोगों से अच्छे हैं

1171
01:28:25,200 --> 01:28:30,400
जो ग्रीन चंदर ब लगा कर के आप जो है टीपू सुल्तान बन रहे हो

1172
01:28:30,400 --> 01:28:34,440
चलिए हमने बहुत सारी तार्किक बातें कर ली उस लड़के को

1173
01:28:34,440 --> 01:28:38,640
क्यों हटाया उत्तर दे दिया क्यों हटाया था क्योंकि

1174
01:28:38,640 --> 01:28:42,960
वह लड़का वो देखिए हम कब हटाते हैं जब हमें

1175
01:28:42,960 --> 01:28:47,320
जो बात कहनी है हमने कह दी आपको जो बात कहनी है आपने कह दी

1176
01:28:47,320 --> 01:28:51,800
और आप ऐसी बात कह रहे जो आप ही की बात आप ही से कट रही है

1177
01:28:51,800 --> 01:28:56,600
सबसे बेकार वक्ता कौन होता है जिसकी बात उसी बात से कटती है

1178
01:28:56,600 --> 01:29:00,680
अब जब या तो आप मान लो कि भाई मैं इस चीज इमें से एक चीज को मानता

1179
01:29:00,680 --> 01:29:04,840
हूं तभी तो हम आगे बढ़े और क्या

1180
01:29:04,840 --> 01:29:08,200
वहां पर हम लोग तीन तीन चार चार साल तक स्ट्रीम करते रहे

1181
01:29:08,200 --> 01:29:12,240
और तुम कहते रहो नहीं वोह बदल नहीं सकता मगर बदल सकता है

1182
01:29:12,240 --> 01:29:16,280
और बदल नहीं सकता मगर बदल सकता है तुम टेप रिकॉर्ड चालू कर लो हम अपनी स्ट्रीम चलाते

1183
01:29:16,280 --> 01:29:20,280
रहे और अगर हटा दिया तो भाई उसने तो मर्यादा का

1184
01:29:20,280 --> 01:29:24,480
उल्लंघन किया नहीं था उसको क्यों हटाया भाई आप लोग देखो

1185
01:29:24,480 --> 01:29:28,600
तो वो कह रहा है कि वो बदल नहीं सकता मगर वो पर्वत बन सकता है मगर वो शेर

1186
01:29:28,600 --> 01:29:33,000
बन सकता है या तो बदल नहीं सकता और या फिर वो शेर नहीं बन सकता

1187
01:29:33,000 --> 01:29:37,160
दोनों में से डिसाइड कर लो क्या कर सकते हो और अगर समझ

1188
01:29:37,160 --> 01:29:41,600
नहीं सकते ईश्वर को तो फिर ईश्वर को समझने वाले रूप में यहां मत लाओ

1189
01:29:41,600 --> 01:29:45,960
मनुष्यों के बीच में वो जहां है वहां रहने दो उसका अवतार

1190
01:29:45,960 --> 01:29:50,080
आने दो उसका सगुण साकार स्वरूप आने दो उसका

1191
01:29:50,080 --> 01:29:54,080
जो अव्यावहारिक निर्गुण निराकार रूप है उसको वही रहने दो फिर यहां मत लाओ फिर

1192
01:29:54,080 --> 01:29:58,320
तुम हो जाओगे हमारे जैसे ठीक है

1193
01:29:58,320 --> 01:30:02,480
चलो अब कोई आना चाहता है भैया आ जाए तो हां थोड़ा सा संदीप

1194
01:30:02,480 --> 01:30:07,920
जी मैं काफी देर हो गई बोल बोल के जो है थोड़ा विश्राम ले लू आप लोग थोड़ा संभालिए

1195
01:30:07,920 --> 01:30:13,920
बताइए मैं जरा पानी ले आऊ पीने के

1196
01:30:14,640 --> 01:30:18,720
लिए कैसे हैं राहुल जी बढ़िया

1197
01:30:18,720 --> 01:30:22,720
जी बढ़िया आप बताइए शिवास जी ने तो ना इनकी जो है

1198
01:30:22,720 --> 01:30:26,880
ना बोलते बंद कर दिए है

1199
01:30:26,880 --> 01:30:30,880
कितना अगर शास्त्र ज्ञान हो अब इनकी वजह से कई लोग मेरे हिसाब

1200
01:30:30,880 --> 01:30:36,880
से वापसी कर जाएंगे जिस ज्ञान दे

1201
01:30:37,280 --> 01:30:42,720
रहे रिवर्स हो ग यस सनातन धर्म में आ

1202
01:30:42,720 --> 01:30:46,800
जाए नलेज कम है य जो रामपाल ने इनको ऐसा

1203
01:30:46,800 --> 01:30:50,800
घुमाया हुआ है इनका दिमाग है किया हु सम

1204
01:30:50,800 --> 01:30:55,080
कर क्या य प्रॉब्लम इन्होने बिना व्याकरण

1205
01:30:55,080 --> 01:30:59,880
की दृष्टि से शास्त्रों को समझने का प्रयास किया है और ये मनगण है स

1206
01:30:59,880 --> 01:31:03,960
अभी एक छोटा सा एपल व्याकरण का इसम कोई रोल ही नहीं है हा

1207
01:31:03,960 --> 01:31:08,360
एक गीता जी अध्याय सा ब 25 में लिखा हुआ है जो लोग मुझे अविनाशी

1208
01:31:08,360 --> 01:31:12,760
और जन्मा नहीं मानते तो मैं योग माया से उनके लिए छिपा रहता हूं

1209
01:31:12,760 --> 01:31:16,920
तो इन्होंने योग माया प लगाया कि वो जैसे

1210
01:31:16,920 --> 01:31:20,920
जैसे शरीर है मेरा तो इनको शरीर से छुपा दिया वो शरीर से छुपे

1211
01:31:20,920 --> 01:31:25,280
रहते हैं जबक योग माया का अर्थ तो ये होता है कि जैसे दुर्योधन

1212
01:31:25,280 --> 01:31:29,440
माया से उसका भ्रमित था वो

1213
01:31:29,440 --> 01:31:29,940
इनके दिमाग

1214
01:31:29,880 --> 01:31:34,080
में यह भर है वो छुपा रहता है छुपा रता शरीर से छुपा रहता है जब श्री कृष्ण

1215
01:31:34,080 --> 01:31:38,160
जी तो सामने ही थे लेकिन योया नेसा

1216
01:31:38,160 --> 01:31:43,440
माया हु उस भी दुधन के साथ मिले हुए उनका योग

1217
01:31:43,440 --> 01:31:47,480
माया भगवान नहीं मानता था तो इसने जो है

1218
01:31:47,480 --> 01:31:51,680
उ रहने का योग माया से सरल भाषा में क छिपे रहने

1219
01:31:51,680 --> 01:31:56,400
का अर्थ इतना मात्र है व्यक्ति को उनकी परब्रह्म

1220
01:31:56,400 --> 01:32:00,400
समझ में नहीं आती है य बिल्कुल ठीक है

1221
01:32:00,400 --> 01:32:04,400
उन्होने बल्कि 7 ब 15 में यही बोला फिर ज्ञान

1222
01:32:04,400 --> 01:32:08,560
माया द पहले शास्त्र आया कि पहले व्याकरण आया भाई

1223
01:32:08,560 --> 01:32:12,560
और ये उका रिवर्स उनको बता देता है कि ये कुछ और कहानिया बना के के

1224
01:32:12,560 --> 01:32:14,760
ऊपर

1225
01:32:14,760 --> 01:32:19,240
मूर्ख पहले शास्त्र आया की व्याकरण आया

1226
01:32:19,240 --> 01:32:23,280
किसी भी भाषा को शुद्ध रूप से समझने के लिए सीखने के लिए व्याकरण की

1227
01:32:23,280 --> 01:32:27,560
आवश्यकता शास्त्र जो है शास्त्र पहले आया

1228
01:32:27,560 --> 01:32:31,920
और फिर उसको समझने के लिए आगे समझाने के लिए

1229
01:32:31,920 --> 01:32:36,560
आगे भाष्य ने भाष्य लिखे हैं उनमें से एक है निरुक्त जी

1230
01:32:36,560 --> 01:32:40,600
जी संदीप जी एक अध्याय नौ श्लोक 26 में उन्होंने क्लियर

1231
01:32:40,600 --> 01:32:44,760
बताया है कि जो भी मुझे फल फूल पत्ती वगैरह जो मुझे अपने भाव

1232
01:32:44,760 --> 01:32:45,260
से

1233
01:32:44,880 --> 01:32:48,960
प्रकट करता है या भाव से देता है तो मैं स्वयं प्रकट होकर उसको खाता हूं

1234
01:32:48,960 --> 01:32:53,080
ये चीज नहीं दिखाता ये वैसे कहता है वो छुपा रहता है इसके

1235
01:32:53,080 --> 01:32:57,120
दिमाग में कि वो उसने शरीर रूपसे भी

1236
01:32:57,120 --> 01:33:01,280
नहीं दिखाते परमात्मा ने बोला भोग लगाता

1237
01:33:01,280 --> 01:33:05,440
है अच्छे रूप से म मेरे को तो स्वयं प्रकट हो उसको ता

1238
01:33:05,440 --> 01:33:09,520
ह 9 ब में बोला ने मूर्खता पूर्ण

1239
01:33:09,520 --> 01:33:14,920
बात अधूरा जन उसकी से प्रॉब्लम आ जाती

1240
01:33:14,920 --> 01:33:19,080
हैले य फस गए असल में भोले है सच

1241
01:33:19,080 --> 01:33:23,800
बताऊ तो ये दया के पात्र है दया आती है

1242
01:33:23,800 --> 01:33:27,920
जी बात सही कह रहे हैं कल जो मैंने उससे पूछा व्यक्ति से प्रवीण जी से

1243
01:33:27,920 --> 01:33:32,200
पूछा कि धर्म क्या जब तुम कह रहे हो कि वो धर्म है ये है वो

1244
01:33:32,200 --> 01:33:36,200
इतनी बातें बताने आए हो तो धर्म क्या है सनातन क्या

1245
01:33:36,200 --> 01:33:40,960
है तो मुझे तरस आया उस व्यक्ति प तरस

1246
01:33:40,960 --> 01:33:45,080
आता वो व्यक्ति लड़ने मरने को तैयार है किस चीज के लिए जिस

1247
01:33:45,080 --> 01:33:49,240
चीज को वो जानता नहीं है सर बुद्धि दुधन वाली है ना उसके साथ

1248
01:33:49,240 --> 01:33:53,280
जो मिले रा गया सारा इनकी बुद्धि उस

1249
01:33:53,280 --> 01:33:58,040
तरीके की है ना दुर्योधन बुद्धि है इनकी उन्होने

1250
01:33:58,040 --> 01:34:00,520
अगर रूप में आए

1251
01:34:00,520 --> 01:34:04,520
तो शंका का समाधान हो सकता है ले ये

1252
01:34:04,520 --> 01:34:09,120
भर करके आते फिर किसी भी चीज को मानने प्रयास नहीं करते

1253
01:34:09,120 --> 01:34:11,880
एक

1254
01:34:11,880 --> 01:34:16,000
अध्याय अध्याय 14 शलोक 27 में दिया है कि मैं ही सनातन धर्म

1255
01:34:16,000 --> 01:34:20,240
का आधार हूं और पर परब्रह्म का आधार भी मैं ही हूं उन्होंने

1256
01:34:20,240 --> 01:34:24,280
इतना क्लियर कट बोला हुआ है फिर भी इनकी बुद्धि के अंदर ये चीज घुसती नहीं है

1257
01:34:24,280 --> 01:34:28,280
अरे वो तो इनको काल ने बोला है ना तो काल ने

1258
01:34:28,280 --> 01:34:32,360
बोला है और कैसे पता काल ने बोला है कैसे पता काल ने

1259
01:34:32,360 --> 01:34:36,680
बला रामपाल ने बोला है रामपाल कौन है तत्वदर्शी तत्वदर्शी किसने

1260
01:34:36,680 --> 01:34:40,680
किया गीता ने चक्कर काटते इधर से उर इधर

1261
01:34:40,680 --> 01:34:45,280
से उधर भाई जब गीता गीता जब गीता संदेहास्पद

1262
01:34:45,280 --> 01:34:49,560
हो गई तो फिर उसके किसी शलोक के आधार पर हम

1263
01:34:49,560 --> 01:34:53,680
किसी को तत्वदर्शी कैसे सिद्ध कर लेंगे पहले तो

1264
01:34:53,680 --> 01:34:58,160
गता को प्रमाणिक बनाओ और फिर शक और या फ

1265
01:34:58,160 --> 01:35:02,480
रामपाल को प्रमाणिक बनाओ फिर गीता में आके वो करो जी

1266
01:35:02,480 --> 01:35:08,480
जी श्री राम जय श्री राम

1267
01:35:08,680 --> 01:35:13,280
ज रामपाल जी का चैनल देख रहे थे आज आपकी चर्चा

1268
01:35:13,280 --> 01:35:19,280
आज जी नारायण जी के चैनल में नहीं जाना है बिल्कुल भी नहीं

1269
01:35:20,880 --> 01:35:25,160
हम समे और खा

1270
01:35:25,160 --> 01:35:29,400
कुछ भी नहीं लिखा हुआ है तो चे सेही कमेंट

1271
01:35:29,400 --> 01:35:33,480
लिखा फिर मुझे लेट हो रहा था और आप वहा कोई चर्चा

1272
01:35:33,480 --> 01:35:37,720
नहीं थी सिर्फ आपका ही भाई था आपकी चर्चा थी आज से बोला हम अपने लोगों

1273
01:35:37,720 --> 01:35:42,160
को कभी नहीं भेजेंगे व डिबेट में

1274
01:35:42,160 --> 01:35:48,160
इसीलिए कते उसकी ट में जाओ मत अपनी डिबेट खुद करो ना

1275
01:35:49,680 --> 01:35:55,680
अ इसीलिए तो हम कहते उसकी डिबेट में जाओ मत अप ट

1276
01:35:57,800 --> 01:36:01,920
करो इसीलिए तो हम कहते उसकी डिबेट में जाओ मत अपनी डिबेट

1277
01:36:01,920 --> 01:36:06,160
खुद करो बस करो बस

1278
01:36:06,160 --> 01:36:11,560
इकी डिबेट रही

1279
01:36:11,560 --> 01:36:15,640
फिर मेरे विचार जी से मिल रहे हैं मेरे विचार आप सबसे

1280
01:36:15,640 --> 01:36:21,640
मिल रहे हैं तो डिबेट रही

1281
01:36:22,040 --> 01:36:26,040
कहां बना लोगे अपना ही उत्तर पक्ष बना लोगे अब मुझे नहीं लगता

1282
01:36:26,040 --> 01:36:30,560
पूर्व पक्ष का भी मतलब मालूम होगा क्या है हमने तो दिखा दिया

1283
01:36:30,560 --> 01:36:35,040
सारा प्रमाण प्रम तो शिवांश जी माने ही नहीं

1284
01:36:35,040 --> 01:36:39,280
यह जो इनके अनुसार गीता का ज्ञान जो काल दे रहा है वो काल कौन

1285
01:36:39,280 --> 01:36:44,080
है यमराज जी है क्या अपने वाले पता नहीं

1286
01:36:44,080 --> 01:36:48,200
क्योंकि हमारे का यमराज जी है वो इनकी एक

1287
01:36:48,200 --> 01:36:52,320
अलग फेंटेसी कहानी है पूरी उसमें बड़ा

1288
01:36:52,320 --> 01:36:56,400
रूप से बताया गया है हमारे जो ब्रह्मा विष्णु महेश मा भगवती उनके

1289
01:36:56,400 --> 01:37:01,080
बारे में सब फैंटेसी कहानिया है आपको

1290
01:37:01,080 --> 01:37:04,800
मैं तोसे मैंने क यमराज जी उतर के आए

1291
01:37:04,800 --> 01:37:08,840
थे वही काल है और उससे ऊपर हमारे महाकाल है

1292
01:37:08,840 --> 01:37:13,000
परंतु उनका सपड़ा साफ करना बहुत जरूरी है अध्यात्म

1293
01:37:13,000 --> 01:37:17,080
के लिए सपड़ा साफ नहीं करना है इनके भ्रामक शिक्षाओं का

1294
01:37:17,080 --> 01:37:21,960
काट करनी है उनको हटाना है बिल्कुल कहां

1295
01:37:21,960 --> 01:37:26,240
है भाई जेल धाम वाले सतलोक वाले कहां है आए अच्छा

1296
01:37:26,240 --> 01:37:30,920
उनको ले लो एक वो आए थे भाई साहब दिख भी नहीं रहे हैं

1297
01:37:30,920 --> 01:37:33,960
एक भाई साहब आए

1298
01:37:33,960 --> 01:37:38,000
थे कबीर कहां गए जो वो आए थे ना

1299
01:37:38,000 --> 01:37:43,280
कबीर इज गॉड हां सर

1300
01:37:43,280 --> 01:37:45,440
ये

1301
01:37:45,440 --> 01:37:49,480
हेलो ये ना 11 ब 32 का रेफरेंस देते हैं कहते वहां पर उन्होंने

1302
01:37:49,480 --> 01:37:53,800
बोला हुआ है मैं काल हूं जबक उन्होंने वहां प बोला है मैं बड़ा हुआ

1303
01:37:53,800 --> 01:37:59,480
उन्होने ये शब्द यूज किया बड़ा हुआ का बड़ा हुआ उन्होने फ्यूचर दिखाया

1304
01:37:59,480 --> 01:38:04,040
यने अब ज्यादा नहीं आएंगे वो अब वो समझ गए

1305
01:38:04,040 --> 01:38:09,160
नहीं नहीं जिनकी माता जी ने निष्ठा

1306
01:38:09,160 --> 01:38:13,400
पूर्वक मतलब पान कराया होगा निष्ठा पूर्वक वो लोग

1307
01:38:13,400 --> 01:38:17,600
आएंगे और जो कायर होंगे आएंगे मैंने

1308
01:38:17,600 --> 01:38:23,600
लिक भेजा हुआ है आपको जिसम उनकी डिबेट हुई है

1309
01:38:23,800 --> 01:38:27,880
ये डिबेट संदीप जी को कुछ बताना है संदीप जी आप बोल लीजिए एक

1310
01:38:27,880 --> 01:38:31,880
मिनट सब लोग अपना म्यूट कर लीजिए संदीप जी बोल लीजिए जी 11 ब

1311
01:38:31,880 --> 01:38:36,000
में इन्होंने बताया ना उन्होंने बोला है वहां पर मैं बड़ा हुआ काल हूं तो बड़ा

1312
01:38:36,000 --> 01:38:40,080
हुआ काल का अर्थ यह है कि उन्होंने जब जिस समय वो अर्जुन सामने था ना उन्होने अर्जुन

1313
01:38:40,080 --> 01:38:44,160
को अपना अपना आगे का रूप दिखाया था भविष्य काल दिखाया था देखो ये सारे मेरे

1314
01:38:44,160 --> 01:38:48,360
अंदर जा रहे हैं तुम नाम मात्र खड़े हो तुम सिर्फ तुमने श्रेय

1315
01:38:48,360 --> 01:38:52,520
लेना है इस चीज का तो उन्होंने अपना जो भविष्य काल स्वरूप दिखाया था यह बात इनको

1316
01:38:52,520 --> 01:38:56,560
समझ नहीं आती ूटी क्योंकि परमात्मा भूत भी है और

1317
01:38:56,560 --> 01:39:01,000
वर्तमान भी और भविष्य मैं इनको एक वो कह रहा हूं

1318
01:39:01,000 --> 01:39:05,360
कि इनकी बात को में गीता में से 5 प्रत जो ज्ञान है

1319
01:39:05,360 --> 01:39:09,640
जो इनके अनुसार काल ने दिया है उसको आप हटा दीजिएगा

1320
01:39:09,640 --> 01:39:13,760
उसके बाद जो गीता के श्लोक बनेंगे बचे बचेंगे उससे

1321
01:39:13,760 --> 01:39:14,720
ही मैं इनकी बातें

1322
01:39:14,720 --> 01:39:19,000
खत्म कर दूंगा फिर ये तो ये नहीं कह पाएंगे गलत काहा है फिर तो नहीं कह पाएंगे

1323
01:39:19,000 --> 01:39:23,160
काल काल ने कहा है 35 श्लोक चुन लो कौन-कौन से

1324
01:39:23,160 --> 01:39:27,280
हैं बता दो वो मैं नहीं कोट करूंगा दूसरे करूंगा और तुम जो तुम्हारी

1325
01:39:27,280 --> 01:39:31,280
जो बात सब नाबूत हो जाए आ जा आ

1326
01:39:31,280 --> 01:39:35,960
जाओ गलत कौन सा है यह भी नहीं पता नहीं लगेगा जी

1327
01:39:35,960 --> 01:39:40,360
जी फर तो हो गया काल वा निकाल द बाकी सब सही है

1328
01:39:40,360 --> 01:39:44,800
काल वाले निकाल वसे इनको आज तक य नहीं पता होगा निकालने कौन से है

1329
01:39:44,800 --> 01:39:48,480
इनको

1330
01:39:48,480 --> 01:39:53,760
यय गता जी के शलोक रेरस देते ब का

1331
01:39:53,760 --> 01:39:57,760
आप 15 ब को बार एक बार निकालिए 15 बछ में

1332
01:39:57,760 --> 01:40:01,800
क्या लिखा हुआ है उसम ना ये लिखा हुआ है इन्होने अपना

1333
01:40:01,800 --> 01:40:05,840
बोला हुआ है के आप आपने जो पूजा करनी हम लोगों

1334
01:40:05,840 --> 01:40:10,000
के लिए बोला हुआ आपने जो पूजा करनी है परमात्मा की नारायण स्वरूप में करनी है

1335
01:40:10,000 --> 01:40:14,280
और नारायण स्वरूप उने य बताया वो नारायण है जिनसे जो आपका

1336
01:40:14,280 --> 01:40:18,280
जितनी जितना य संसार है जिनसे म चला है या जिनसे पैदा

1337
01:40:18,280 --> 01:40:22,320
हुआ है 15 ब में लिखी हुई

1338
01:40:22,320 --> 01:40:26,600
है गीता और फिर 15 ब

1339
01:40:26,600 --> 01:40:30,800
में मैं आपको एक बात इनकी बता रहा जो गुण की बात करते

1340
01:40:30,800 --> 01:40:36,640
हैं स गुण की बात

1341
01:40:36,640 --> 01:40:40,680
करते 10 ब में क्लियर लिखा हुआ है यह जितना भी

1342
01:40:40,680 --> 01:40:44,760
संसार है मेरा अंश मात्र है कहते हैं अंश मात्र

1343
01:40:44,760 --> 01:40:48,760
तो इनको इतनी छोटी छोटी य इनको दिक्कत है क्योंकि इनको मिलान

1344
01:40:48,760 --> 01:40:53,920
किया नहीं है ना इनको किसी ने बताया कि मिलान ऐसे होगा

1345
01:40:53,920 --> 01:40:57,120
व इसम माहिर है

1346
01:40:57,120 --> 01:41:01,160
मिला जरा गुण के बारे में बता रहा हूं एक कोट करते

1347
01:41:01,160 --> 01:41:05,360
हैं जो गुणों की भक्ति करते हैं वो जो है

1348
01:41:05,360 --> 01:41:09,800
उनका नर उनका अच्छा नहीं होता है तो गुण के बारे में य लिखा

1349
01:41:09,800 --> 01:41:13,800
है जो सत्व गुण से उत्पन्न होने वाले भाव है

1350
01:41:13,800 --> 01:41:18,320
भाव और रजो गुण से तथा तमो गुण से उत्पन्न होने वाले भाव

1351
01:41:18,320 --> 01:41:22,440
है उन सबको त मुझसे ही होने वाले जान क्यों भगवान

1352
01:41:22,440 --> 01:41:26,440
ने सब कुछ बनाया तो जो चीज तुम्ह बाने वाली है वो भी भगवान

1353
01:41:26,440 --> 01:41:32,320
ने ही बनाई भगवान ने कहाय मेरी माया बहुत जटिल

1354
01:41:32,320 --> 01:41:36,760
है किसी के बज रहा फन बज रहा है क्या हो रहा है

1355
01:41:36,760 --> 01:41:41,320
हा म्यूट कर लीजिए म्यूट कर

1356
01:41:41,320 --> 01:41:46,160
लीजिए हा इसके बाद क्या है

1357
01:41:46,160 --> 01:41:50,200
कि गुणों के कार्य रूप सात्विक राजस और तामस इन तीनों प्रकारों

1358
01:41:50,200 --> 01:41:51,760
के भाव से यह सब

1359
01:41:51,760 --> 01:41:55,760
संसार प्राणी समुदाय मोहित हो रहा है तो माया जो है भगवान की

1360
01:41:55,760 --> 01:41:59,840
है तो व्यक्ति जो सत और तम से मोहित हो रहा है तो वो भगवान

1361
01:41:59,840 --> 01:42:04,280
से उत्पन्न चीज है अच्छा क्योंकि यह अलौकिक अर्थात

1362
01:42:04,280 --> 01:42:08,560
अ अति अद्भुत त्रिगुण मय मेरी माया बड़ी दुस्स है परंतु

1363
01:42:08,560 --> 01:42:12,600
जो पुरुष केवल मुझको ही निरंतर बचते हैं वह इस माया को

1364
01:42:12,600 --> 01:42:16,640
पार कर जाते हैं जो गुणों में फस रहे हैं जो

1365
01:42:16,640 --> 01:42:20,640
गुणों में फस रहे हैं उनको पार कैसे करते हैं

1366
01:42:20,640 --> 01:42:26,640
मेरी वॉइस नहीं आ रही क्या क्लियर क्लियर है

1367
01:42:27,720 --> 01:42:31,800
जो जो गुणों में जो गुणों में फंस रहे हैं वो

1368
01:42:31,800 --> 01:42:36,040
पार कैसे करते हैं उस माया को मेरी भक्ति करके जो

1369
01:42:36,040 --> 01:42:40,240
मुझको निरंतर भजते हैं ये कितने श्लोक निकालेंगे 5 पर में कितने

1370
01:42:40,240 --> 01:42:45,080
श्लोक आते हैं 35 निकाल दो उसके बाद भी श्री कृष्ण की महिमा मिल जाएगी

1371
01:42:45,080 --> 01:42:49,080
जी जी जी ये कहते हैं माया

1372
01:42:49,080 --> 01:42:55,080
के द्वारा जिनका ज्ञान माया के द्वारा यह जो त्रिगुण

1373
01:42:55,120 --> 01:42:59,520
इनके दवारा जिनका ज्ञान हरा जा चुका है ऐसे असुर

1374
01:42:59,520 --> 01:43:03,720
स्वभाव वाले लोग मुझको नहीं भजते

1375
01:43:03,720 --> 01:43:07,760
मू लो मूर्ख लोग और सुनो एक

1376
01:43:07,760 --> 01:43:11,960
अच्छा प्रमाण तो रह गया वो महाभारत का प्रमाण दिखा दो जरा जो

1377
01:43:11,960 --> 01:43:16,680
ग्रंथों में मिलावट के लिए क्या दिखाते हैं महाभारत क्या कहती है

1378
01:43:16,680 --> 01:43:20,800
जो ग्रंथों में प्रक्षिप्त होने की बात है ये मिला दिया गया है हमारे

1379
01:43:20,800 --> 01:43:25,200
शास्त्रों ने हर व्यवस्था की है त स्मात शास्त्र प्रमाणम

1380
01:43:25,200 --> 01:43:29,640
और व्यक्तिगत तर्क मान्य आपको कुछ भी शास्त्र के बाहर जाना ही नहीं है

1381
01:43:29,640 --> 01:43:33,720
हर चीज शास्त्र से है तो जो मिलावट

1382
01:43:33,720 --> 01:43:37,720
का आरोप लगाते हैं मैं दिखाना स्मरण नहीं रहा था मुझे वो दिखा दीजिए

1383
01:43:37,720 --> 01:43:41,720
महाभारत का सबसे लास्ट

1384
01:43:41,720 --> 01:43:42,720
सबसे पहला या

1385
01:43:42,720 --> 01:43:48,680
लास्ट होगा यह देखिए इसमें

1386
01:43:48,680 --> 01:43:53,120
देखिए धर्म द्रोही मनुष्य

1387
01:43:53,120 --> 01:43:57,120
शास्त्रों की प्रामाणिकता पर डाका डालते हैं

1388
01:43:57,120 --> 01:44:02,040
उन्हें अग्रह और अमान्य बताते हैं

1389
01:44:02,040 --> 01:44:06,600
वह अर्थ ज्ञान से शून्य मनुष्य अर्थशास्त्र

1390
01:44:06,600 --> 01:44:10,880
की विषमता मिथ्या प्रचार करते हैं और आगे इन्हीं

1391
01:44:10,880 --> 01:44:15,240
को दंड देने की बात हो रही है निरंतर शास्त्र के दोष देखने

1392
01:44:15,240 --> 01:44:19,240
वाले लोग शास्त्रों की मर्यादा को लूटते हैं

1393
01:44:19,240 --> 01:44:23,600
और यह कहा करते हैं कि यह प्रासंगिक नहीं है आज के टाइम में

1394
01:44:23,600 --> 01:44:27,880
समझ गए यह महाभारत में कहा गया है आप

1395
01:44:27,880 --> 01:44:32,360
मिलावट है इस बात का प्रमाण नहीं दे पाए हमने

1396
01:44:32,360 --> 01:44:36,560
मिलावट का दोष लगाने वाले को गलत ठहरा दिया शास्त्रों

1397
01:44:36,560 --> 01:44:41,000
से यह होता है शास्त्र सतता इसको कहते हैं और

1398
01:44:41,000 --> 01:44:45,040
मनम कीी तुम्हारी बातें प्रमाण लाओ मिलावट

1399
01:44:45,040 --> 01:44:49,280
हुई है उसका जी जी जो प्रमाण है उसकी

1400
01:44:49,280 --> 01:44:54,680
ऊपर तुमने जब आक्षेप लगा दिया तो दुनिया का कोई भी प्रमाण प्रमाणिक नहीं रह

1401
01:44:54,680 --> 01:44:57,800
जी एक इनके दिग शास्त्रों में कौन

1402
01:44:57,800 --> 01:45:01,880
सी बात किस उद्देश्य से और क्यों लिखी गई है जब तक इसका पता

1403
01:45:01,880 --> 01:45:06,120
नहीं होगा तो शास्त्र अगर आज के टाइम में कोई गीता प्रेस

1404
01:45:06,120 --> 01:45:10,800
या कोई भी प्रेस एक श्लोक गलत कर देती है पप देती है

1405
01:45:10,800 --> 01:45:15,000
इसका निर्णय करने वाला परंपरा प्राप्त वो आचार्य होगा

1406
01:45:15,000 --> 01:45:19,160
जिसने उस शास्त्र को उससे लिया है जिसने उस शास्त्र को सबसे

1407
01:45:19,160 --> 01:45:23,520
पहले व्यवहारिक सामग्री के रूप में उत किया था

1408
01:45:23,520 --> 01:45:27,800
जी जी वो केवल बता सकता है वो केवल य

1409
01:45:27,800 --> 01:45:31,880
निर्णय करने वाला है कि हा भाई यह मैंने अपने गुरु से नहीं पढ़ा यह वाला जो लोक है

1410
01:45:31,880 --> 01:45:35,880
अतिरिक्त बस कल मैंने बताया था गुरु शिष्य परंपरा से कैसे जटा

1411
01:45:35,880 --> 01:45:41,880
माला पाठ के रूप में आते हैं मंत्र हमारे पास जी जी

1412
01:45:41,920 --> 01:45:46,000
य गु की बात चल रही थ गु में

1413
01:45:46,000 --> 01:45:50,080
होते अब इनके दिमाग में क्या भ सगुण विष्णु

1414
01:45:50,080 --> 01:45:56,080
और क देते हैं

1415
01:45:56,720 --> 01:46:00,560
जोड़ देते उनको इनको

1416
01:46:00,560 --> 01:46:04,560
य हमारे अंदर जैसे हम अच्छा काम करते हैं कोई मालो कोई धर्म का

1417
01:46:04,560 --> 01:46:08,600
काम करते हैं सा होते हैं तो य रामपाल केब से इनको त्याग देना

1418
01:46:08,600 --> 01:46:12,720
चाहि गु को म कोई भी सीधा काम नहीं करना चाहिए हिब से लेकिन मर्ख

1419
01:46:12,720 --> 01:46:18,360
कोय नहीं पता कर रहे इनके हिब

1420
01:46:18,360 --> 01:46:24,360
सेे देनी चाहिए इनके दिमाग में

1421
01:46:24,520 --> 01:46:28,920
गय त्रण को सधा ब्रह्मा विष्णु महेश से

1422
01:46:28,920 --> 01:46:34,920
देखिए ब्रह्मा विष्णु महेश क्या है ब्रह्मा विष्णु

1423
01:46:35,400 --> 01:46:39,520
महेश जो उत्पत्ति स्थिति और समार नामक कत है उसका

1424
01:46:39,520 --> 01:46:43,720
निर्वाह करते हैं तो इन गुणों को स्वेच्छा से धारण

1425
01:46:43,720 --> 01:46:47,960
करते हैं अब अगर य कहा जाए कि इनके अंदर य गुण

1426
01:46:47,960 --> 01:46:52,120
है इसलिए इनकी भक्ति नहीं होनी चाहिए तो पहली बात तो य है अगर

1427
01:46:52,120 --> 01:46:57,080
इनके अंदर गुण है तो इनके लिए यह भी लिखा है कि मैं परम ब्रह्म हूं

1428
01:46:57,080 --> 01:47:01,160
ठीक है तो परम ब्रह्म भी है दूसरी बात अगर

1429
01:47:01,160 --> 01:47:05,440
आप यह मानते हो कि इस दुनिया की रचना कबीर ने की है

1430
01:47:05,440 --> 01:47:09,520
तो सतो गुण रजो गुण और तमो गुण जीव और

1431
01:47:09,520 --> 01:47:14,320
प्रकृति की रचना किसने की किसने की

1432
01:47:14,320 --> 01:47:18,800
कबीर ने कीय जो गुण आए निकल के बार कहां से आए

1433
01:47:18,800 --> 01:47:22,920
कहां से निकल के आए गुण जो निकल के आए

1434
01:47:22,920 --> 01:47:26,920
कहां से आए वो चाहता था ना कि इस दुनिया में हो

1435
01:47:26,920 --> 01:47:30,920
बुद्धि थी ना उसके अंदर इस दुनिया में हो तमोगुण चीजें

1436
01:47:30,920 --> 01:47:35,000
रजोगुण चीज तो इसके हिसाब से अगर य मना किया जा

1437
01:47:35,000 --> 01:47:39,040
रहा है अगर यहां पर यह मना किया जा रहा है कि रजोगुण जिसके अंदर होगा या

1438
01:47:39,040 --> 01:47:43,280
तमो गुण जिसके अंदर होगा या जिससे गुण निर्गत होंगे उसकी भक्ति

1439
01:47:43,280 --> 01:47:49,280
नहीं करनी है आपके अनुसार कबीर की भक्ति नहीं करनी है मैम

1440
01:47:49,800 --> 01:47:54,160
राहु जी सर तीनों गुणों को त्यागने का

1441
01:47:54,160 --> 01:47:58,600
था जैसे मिनट शमा

1442
01:47:58,600 --> 01:48:04,080
जितने भी

1443
01:48:04,080 --> 01:48:08,920
आपके संदीप जी आपकी आवाज आगे पीछे हो रही है

1444
01:48:08,920 --> 01:48:13,320
हा बोलिए बोलिए जैसे उन्होंने जो

1445
01:48:13,320 --> 01:48:17,840
तीन गुणों को त्यागने की बात की है ना उसका अर्थ यह है कि जो हमारे अंदर जितनी भी भावनाए

1446
01:48:17,840 --> 01:48:22,200
है जितने भी अच्छे काम करते हैं जितने भी गलत होते हैं वो सारे परमात्मा को समर्पण

1447
01:48:22,200 --> 01:48:26,320
करने 66 में य चीज क्लियर की हुई है लेकिन इनको बोल दिया गया

1448
01:48:26,320 --> 01:48:30,560
य ब्रह्मा विष्णु महेश को त्याग दो यह कितना गलत इनको म समझाया हुआ

1449
01:48:30,560 --> 01:48:34,760
देखो अरे मनम मनम सब कुछ बात

1450
01:48:34,760 --> 01:48:39,760
इंटरप्रिटेशन मनम है उनकी रामपाल र्

1451
01:48:39,760 --> 01:48:44,200
जी जय शर्मा न गुणों को अगर य त्याग देंगे

1452
01:48:44,200 --> 01:48:48,560
तीनों गुणों को अगर त्याग देंगे ब्रह्मा विष्णु महेश को त्याग देंगे हम ब्रह्मा

1453
01:48:48,560 --> 01:48:53,040
विष्णु महेश की बात ना करें केवल गुण की बात करते हैं कि सतो रजो और तमो को

1454
01:48:53,040 --> 01:48:57,960
तो ये कौन से गुण में जाएंगे कौन से गुण में जाएंगे फिर

1455
01:48:57,960 --> 01:49:02,040
और रही बात ये सृष्टि त्रिगुणात्मक है मतलब इसमें

1456
01:49:02,040 --> 01:49:04,800
तीनों गुणों के आधीन है ये सृष्टि तो सांस

1457
01:49:04,800 --> 01:49:09,000
लेना बंद कर दो दे दो अपने कबीर को पूरा

1458
01:49:09,000 --> 01:49:13,200
मत लो सास रोक लो अपनी सास जब तक आप जब तक आप

1459
01:49:13,200 --> 01:49:17,240
एक शरीर धारी हो जब तक आप एक मानव देह में प्राणी की देह

1460
01:49:17,240 --> 01:49:21,280
में हो तब तक आपको इनमें से इन तीनों गुणों से

1461
01:49:21,280 --> 01:49:25,360
ओत प्रोत रहना ही है जी जी सर

1462
01:49:25,360 --> 01:49:29,520
वहां पर आत्म समर्पण की बात है ना आत्म समर्पण करके आप कार्य करो जो भी करना है मेन

1463
01:49:29,520 --> 01:49:34,040
बात ये थी मतलब जो बेसिक काम था मैं कहूंगा

1464
01:49:34,040 --> 01:49:38,720
जेल जाना जेल जाना कौन सा गुण है

1465
01:49:38,720 --> 01:49:42,760
यात्रा करना कौन सा गुण है कोई अच्छा धावक है कोई अच्छा

1466
01:49:42,760 --> 01:49:46,880
दौड़ सकता तो ये कौन सा ब्रह्मा विष्णु महेश कौन सा गुण है ये वाला बो

1467
01:49:46,880 --> 01:49:50,920
अजीब सी बातें है इनकी अब मान लो मैंने कोई धर्म कार्य कर लिया

1468
01:49:50,920 --> 01:49:54,920
मैं तो ये कह रहा हूं अगर अगर सतर और तम की भक्ति नहीं

1469
01:49:54,920 --> 01:49:59,080
करनी है या जिसके अंदर सतर और तम है उसकी भक्ति नहीं करनी है कबीर की भक्ति

1470
01:49:59,080 --> 01:50:03,320
करना बंद कर दो क्योंकि काल को उसी ने बनाया माया प्रकृति

1471
01:50:03,320 --> 01:50:07,560
को उसी ने बनाया बंद कर दो बिल्कुल ठीक बात है बकुल

1472
01:50:07,560 --> 01:50:11,560
ठीक बात है इसीलिए मैं मैं इसीलिए वो जो लॉजिक

1473
01:50:11,560 --> 01:50:15,600
है ना उनकी इसीलिए रखता हूं य शास्त्रों से इनको कोई मतलब नहीं है

1474
01:50:15,600 --> 01:50:20,040
बोल दिया कि हम नहीं मानते बोल दिया हा

1475
01:50:20,040 --> 01:50:24,120
इसीलिए मैं तर्क प आता हूं तो तक प आता हूं तो पीछे अरे पंडित जी पीछे ग्रंथ रख

1476
01:50:24,120 --> 01:50:28,360
के उठाते क्यों नहीं अरे भैया तुमको मानना है नहीं तुम्हारी श्रद्ध है नहीं

1477
01:50:28,360 --> 01:50:32,440
तुम वो रट के आए हो मानेंगे बाकी के शलोक प्रक्षिप्त इन्होने नहीं

1478
01:50:32,440 --> 01:50:36,600
रखे है इसलिए नहीं उठाते ना है ही नहीं देख

1479
01:50:36,600 --> 01:50:40,920
जय शर्मा जी को सुनले काफी देर से बो बात है हमारे शास्त्र में

1480
01:50:40,920 --> 01:50:45,200
बात है अगर हम खुद स्वाध्याय करते हैं उसका अध्ययन करते हैं तो कई

1481
01:50:45,200 --> 01:50:51,200
बार हम ऐसा को मिल जाता है कि एक शास्त्र कुछ बात कह रहा है तो वही दूस

1482
01:50:54,920 --> 01:50:59,080
लेकिन उसको समझ हमारे हमारे हमारे अंदर हमारे शास्त्र के प्रति पूर्ण श्रद्धा

1483
01:50:59,080 --> 01:51:04,080
है कि हम उसको गलत नहीं मानते हैं उसका कोई दूसरा तर्क

1484
01:51:04,080 --> 01:51:08,200
जरूर हो हम उस दृष्टि से नहीं देख पा रहे हैं व्यास जी ने

1485
01:51:08,200 --> 01:51:12,200
ब्रह्म सूत्र में लेकिन ये लोग

1486
01:51:12,200 --> 01:51:16,200
व्यास जी ने ब्रह्म सूत्र

1487
01:51:16,200 --> 01:51:19,880
में 2 पव

1488
01:51:19,880 --> 01:51:23,960
2.1 में लिख दिया है संदर्भ है आगे पीछे

1489
01:51:23,960 --> 01:51:28,520
हो सकता है मगर है क्या है कि व्यक्तिगत तर्क

1490
01:51:28,520 --> 01:51:32,600
अमान्य जैसे मैंने कहा ये जो है ये श्लोक

1491
01:51:32,600 --> 01:51:36,640
जो है मिलावट है अब ये मिलावट के लिए कोई वो तो है नहीं प्रमाण ये व्यक्ति

1492
01:51:36,640 --> 01:51:40,880
की अपनी बात है ठीक है अमान्य दूसरी बात व्यास स्मृति

1493
01:51:40,880 --> 01:51:44,960
में और दो 14 मनुस्मृति में कहा गया

1494
01:51:44,960 --> 01:51:49,480
कि अगर हमारे शास्त्रों में दो जगह दो अलग अलग बातें आ रही है

1495
01:51:49,480 --> 01:51:53,520
तो या तो उनको निचोड़ करके एक चीज निकाल लो और यदि

1496
01:51:53,520 --> 01:51:57,760
नहीं निचोड़ निकल पा रहा है तो दोनों चीजें धर्म है

1497
01:51:57,760 --> 01:52:02,480
दोनों चीज धर्म व्यास स्मति एक पा

1498
01:52:02,480 --> 01:52:06,760
और दो कहा जाओ हम अपनी हर बात शास्त्र से बोलते

1499
01:52:06,760 --> 01:52:10,200
हैं और तुम अपनी हर बात मन से बोलते हो और कहते

1500
01:52:10,200 --> 01:52:14,520
हो कि तुम शास्त्र सम्मत हो और हम मनमुक है

1501
01:52:14,520 --> 01:52:18,600
जी जी यही तो बात है शवास भाई जी अगर य केवल अपने शास्त्र से बोले

1502
01:52:18,600 --> 01:52:23,600
तब जाट सुंदर सिं नायक यम कर

1503
01:52:23,600 --> 01:52:27,720
स्मर वाला ब कमेंट कर रहेको हटा दीजिए बन कर दीजिए एक

1504
01:52:27,720 --> 01:52:32,160
ही कमेंट बारबार रिपीट कर रहे इनको

1505
01:52:32,160 --> 01:52:36,440
ह अगर यह लोग अपने शास्त्रों को ले ना केवल अपने कबीर

1506
01:52:36,440 --> 01:52:40,520
पंथी से ही बोले कि भैया हम यहां से बात कर रहे बात लिखी है तब जा

1507
01:52:40,520 --> 01:52:43,720
डिबेट का कोई

1508
01:52:43,720 --> 01:52:48,230
फायदा बो य विचार नहीं रखने ना

1509
01:52:48,230 --> 01:52:53,880
[संगीत]

1510
01:52:53,880 --> 01:52:58,280
जी कबीर दास जी को भी नहीं मानते कबीर दास जी निर्गुण निराकार के

1511
01:52:58,280 --> 01:53:02,720
वो मानते थे ये तो मानते नहीं निर्गुण निराकार कोय कहते सकार है

1512
01:53:02,720 --> 01:53:07,160
वैसे अगर बात करें सुनते अब एक बात देखिए अरेने

1513
01:53:07,160 --> 01:53:12,000
ये तो बोलना ही था एक बात देखिए कि जी

1514
01:53:12,000 --> 01:53:16,000
अपने फॉलोअर्स को खुश करने के लिए ये बात बोली जाती है

1515
01:53:16,000 --> 01:53:20,320
रामपाल की तरफ से कि रामपाल जी अपनी अपनी मर्जी

1516
01:53:20,320 --> 01:53:24,320
से जेल में गए ठीक है हां जेल धाम में और रामपाल जी

1517
01:53:24,320 --> 01:53:28,320
बोलते हैं कि मुझे फसाया गया है फसाया गया ये बात सही है ये बात

1518
01:53:28,320 --> 01:53:32,560
सही है अब अब बताओ कौन बोल रहा

1519
01:53:32,560 --> 01:53:36,760
है तुम अगर ये कहो ना तुम अगर ये तुम्हारी बात है

1520
01:53:36,760 --> 01:53:40,760
तुम अगर ये कहो तुम अगर य एक मिनट एक मिनट

1521
01:53:40,760 --> 01:53:44,760
अगर तुम ये कहो कि रामपाल दास जी से गलती नहीं हो

1522
01:53:44,760 --> 01:53:49,200
सकती तो तुम ऐसे काम कर रहे हो कि तुम ही खुद सिद्ध कर रहे हो कि उनसे गलती हो गई

1523
01:53:49,200 --> 01:53:53,360
क्यों वो कह रहे है मुझे वो कह रहे है मुझे फसाया गया तुम कह रहे

1524
01:53:53,360 --> 01:53:57,800
हो अपनी मर्जी से गए मर्जी से गए

1525
01:53:57,800 --> 01:53:58,760
अच्छा मर्जी से

1526
01:53:58,760 --> 01:54:03,080
गए हैं मैं भी सारी चीज आ जाती है इसका मतलब उन्होंने जानबूझ

1527
01:54:03,080 --> 01:54:07,200
के ऐसा कोई काम किया कि जेल धाम की यात्रा करनी पड़े करनी पड़ इसका मतलब वो आरोप

1528
01:54:07,200 --> 01:54:11,240
झूटे नहीं है म सीबीआई

1529
01:54:11,240 --> 01:54:15,440
जांच करवाओ भाई जब वो अपनी मर्जी से ग तो सीबीआई जांच क्या करनी है तुमने

1530
01:54:15,440 --> 01:54:19,240
भाई

1531
01:54:19,240 --> 01:54:23,520
हां भाई साहब ये तुलना भी तो किससे कर रहे हैं परमेश्वर

1532
01:54:23,520 --> 01:54:27,800
से कृष्ण से सही बात उनसे तुलना कर रहे अरे वो

1533
01:54:27,800 --> 01:54:31,920
अपनी कृष्ण तो जेल में रहे कहां जेल में प्रकट

1534
01:54:31,920 --> 01:54:36,400
होके तुरंत बाहर निकल गए मैं तो कह रहा हूं कि भैया कृष्ण

1535
01:54:36,400 --> 01:54:40,560
जो है वो वो उन्होंने जिसने उसको

1536
01:54:40,560 --> 01:54:44,880
जेल में डाला था उसको मार डाला ठीक

1537
01:54:44,880 --> 01:54:48,880
है आप जो है मार डाला सर

1538
01:54:48,880 --> 01:54:52,880
असल में ये रामपाल जी पिक के अवतार है पिक के सही बात है

1539
01:54:52,880 --> 01:54:56,400
ये पंड का नाम सुना

1540
01:54:56,400 --> 01:55:00,440
आपने भगवान एक ये कमेंट आ रहा है इसको मैं रिप्लाई कर

1541
01:55:00,440 --> 01:55:04,960
दूं भैया कई बार ये बात बोली है अपने वीडियोस

1542
01:55:04,960 --> 01:55:09,280
में कि आप हमारे भाव को ना बदले हुए खुद शर्ट्स

1543
01:55:09,280 --> 01:55:13,440
बनाइए जैसे अपोजिट वाले भी जो वो करते

1544
01:55:13,440 --> 01:55:14,240
हैं

1545
01:55:14,240 --> 01:55:18,240
भाव को बदल बदले नहीं अगर हम यह बात कह रहे कट पिट करके ऐसा ना कर दे

1546
01:55:18,240 --> 01:55:24,040
कि हम कहने कुछ कहा कुछ था और आपने कटकट कर के बदल ही दिया

1547
01:55:24,040 --> 01:55:28,160
भा सम वो तो भाव बदलेंगे नहीं मगर हम उनको

1548
01:55:28,160 --> 01:55:32,320
भी अला कर रहे आप हमारे ख शर्ट बनाइए खब रील बनाइए

1549
01:55:32,320 --> 01:55:36,560
अला है कोई स्क नहीं भेजेंगे खब बनाइए

1550
01:55:36,560 --> 01:55:40,840
बस ऐसा ना कगा हम कह रहे शंकर भगवान को हम मानते हैं मगर

1551
01:55:40,840 --> 01:55:45,960
आप जो कटपट करके ऐसा कर दो हम कबीर को मानते

1552
01:55:45,960 --> 01:55:50,240
हैं बाकी समर्थको को तो पूरी छूट है जो आप पॉजिटिव बनाने वाले

1553
01:55:50,240 --> 01:55:54,280
आप तो खूब बनाइए आपको बना खूब कहीं

1554
01:55:54,280 --> 01:55:58,600
पर भी डालिए कैसे भी यूज करिए खूब डालिए

1555
01:55:58,600 --> 01:56:03,160
बस जो हमने नहीं किया नहीं अपोजिशन वालों जो अपोजिट

1556
01:56:03,160 --> 01:56:07,360
वाले हैं जो विरोधी है या जो सहमत नहीं है

1557
01:56:07,360 --> 01:56:11,520
उनके लिए य वक्तव्य है कि आप जो है उसम यह ना करिएगा कि हमने कहा कुछ और आपने

1558
01:56:11,520 --> 01:56:15,720
जो है कट पिट करके ऐसा दिखा दिया देखो ये कह रहा है ये ना जी

1559
01:56:15,720 --> 01:56:19,920
सर मुझे ना जा थोड़ा इजाजत दीजिए मुझे जय श्री राम

1560
01:56:19,920 --> 01:56:24,320
जय श्री राम जय श्री राम जय शी जम

1561
01:56:24,320 --> 01:56:28,360
जय श राम जय जय श्रिया राम इसमें एक गीता का ये

1562
01:56:28,360 --> 01:56:33,680
श्लोक कोट करते हैं 18 62 ये मेन श्लोक कोट करते

1563
01:56:33,680 --> 01:56:37,800
हैं तमेव शरणम स

1564
01:56:37,800 --> 01:56:41,920
कितनी ी यात्रा हो गई है एक मिनट

1565
01:56:41,920 --> 01:56:45,920
राहुल जी बोल रहे कुछ राहुल जी बोलिए ये गीता का एक

1566
01:56:45,920 --> 01:56:50,240
श्लोक कोट करते हैं तमेव शरणम गच्छ सर्व भावे भारत

1567
01:56:50,240 --> 01:56:54,800
तत प्रसादा पराम शांति नम प्राप्ति

1568
01:56:54,800 --> 01:56:58,800
शाश्वतम तू सर्व भाव से उस ईश्वर की ही शरण में चला जा

1569
01:56:58,800 --> 01:57:01,120
तो ये यहां पर भ्रमित करते हैं कि यह

1570
01:57:01,120 --> 01:57:05,480
भगवान श्री कृष्ण के अलावा कोई और ईश्वर है उसकी शरण में चले जा ऐसा कुछ

1571
01:57:05,480 --> 01:57:09,760
प्रेरित करते हैं पर उन्होने इसका पिछला

1572
01:57:09,760 --> 01:57:13,800
लोक है परंतु उन्होंने इसका पिछला श्लोक नहीं पढ़ा

1573
01:57:13,800 --> 01:57:18,120
कि किसको बोल रहे हैं ईश्वर सर्व भूता नाम हृद

1574
01:57:18,120 --> 01:57:22,160
ब्रम सर्व भूता यंत्र रूढ़ माया इसका पिछ

1575
01:57:22,160 --> 01:57:26,320
लोक है 18 61 कि हे

1576
01:57:26,320 --> 01:57:30,400
अर्जुन ईश्वर संपूर्ण प्राणियों के हृदय में रहता है

1577
01:57:30,400 --> 01:57:34,520
तो संपूर्ण प्राणियों के हृदय में जो ईश्वर स्थित है उसकी शरण

1578
01:57:34,520 --> 01:57:38,520
में जाने को कहा है भगवान जी ने 15 प में

1579
01:57:38,520 --> 01:57:42,600
15 अध्याय के 15 श्लोक में कहा है कि सर्वस्य चाह हृद

1580
01:57:42,600 --> 01:57:47,040
सनि मतमति ज्ञानम पोहन हे अर्जुन संपूर्ण प्राणियों

1581
01:57:47,040 --> 01:57:51,040
में ईश्वर रूप मैं ही हूं ईश्वर

1582
01:57:51,040 --> 01:57:55,040
रूप में स्थित मैं ही हूं तो पूराने पढ़ना

1583
01:57:55,040 --> 01:57:59,720
नहीं है और एक शलोक करके कर श

1584
01:57:59,720 --> 01:58:03,800
ते उस भैया उसम एक बात और है वेद में

1585
01:58:03,800 --> 01:58:09,040
प्रमाण है तो उसम भगवान य भी कह रहे कि वेद सर्वेद

1586
01:58:09,040 --> 01:58:13,360
वेदांत कृत वेद विदेह चा उसके पहले बोल समस्त वेदों

1587
01:58:13,360 --> 01:58:16,240
के द्वारा मुझे जाना जाता है वेद का कर्ता

1588
01:58:16,240 --> 01:58:21,120
भी मैं ही हूं और वेदों के द्वारा जानने योग भी मैं ही हूं वेद

1589
01:58:21,120 --> 01:58:25,520
सर्वे वेदांत कत वेद विधे चा फिर सर्वस्व

1590
01:58:25,520 --> 01:58:30,400
चाह मतमति ज्ञान मोहन बिल्कुल पविता

1591
01:58:30,400 --> 01:58:34,800
य वाली बात देती है कालने लिखी वो पवित्र नहीं है ढ

1592
01:58:34,800 --> 01:58:39,200
है पवित्र नहीं है वो अगर शिवांश नारायण द्विवेदी कबीर

1593
01:58:39,200 --> 01:58:43,200
सागर को नहीं मानेगा तो यह की जो पवित्रता है

1594
01:58:43,200 --> 01:58:48,080
मिट जाएगी इनके लिए तग्र दिखावे के लिए कहते हैं

1595
01:58:48,080 --> 01:58:52,520
भाई अगर मैं किसी को माता कहता हूं किसी को पिता कहता हूं तो कोई

1596
01:58:52,520 --> 01:58:57,240
अगर अगर कोई ऐसी कोई बात कर देगा कोई सामने वाला

1597
01:58:57,240 --> 01:59:01,280
और मैं किसी को माता मानता हूं कोई पिता मानता हूं कोई सामने वाला

1598
01:59:01,280 --> 01:59:05,360
ऐसी बात कर देगा जो मेरे लिए अप्रिय है तो मैं जिसको माता मानता हूं जिसको पिता

1599
01:59:05,360 --> 01:59:09,520
मानता हूं व बदल जाएगा

1600
01:59:09,520 --> 01:59:13,800
क्या हम क्या किसी और की वजह से माता पिता डिसाइड करते हैं क्या

1601
01:59:13,800 --> 01:59:17,840
इनकी इनकी इनके शास्त्र इनका ज्ञान इनकी

1602
01:59:17,840 --> 01:59:22,280
जो विद्या है वो काल की कुए में जाती है के

1603
01:59:22,280 --> 01:59:26,720
शास्त्र हर गली काल के कुए में है और हमारी

1604
01:59:26,720 --> 01:59:30,000
महाकाल

1605
01:59:30,000 --> 01:59:34,520
के मैं बताहा आर्य समाज का बिगड़ा हुआ वर्जन

1606
01:59:34,520 --> 01:59:38,800
है आर्य समाज का थर्ड क्लास वर्जन है रामपाल आर्य

1607
01:59:38,800 --> 01:59:43,080
का नहीं है ये कौन का बिगड़ा हुआ वर्जन

1608
01:59:43,080 --> 01:59:47,160
य कन का बिगड़ा हुआ वर्जन जैसे न

1609
01:59:47,160 --> 01:59:51,200
का जो ईश्वर है वो कहीं एक जगह बैठता है

1610
01:59:51,200 --> 01:59:56,040
ठीक है इनका भी ईश्वर किसी एक जगह बैठता है वो सब जगह

1611
01:59:56,040 --> 02:00:01,920
शक्ति के रूप में उसकी शक्ति के रूप में दत भाव आ जाएगा नहीं तो

1612
02:00:01,920 --> 02:00:05,960
और मोक्ष यहां पर आने का कारण क्या है

1613
02:00:05,960 --> 02:00:10,000
दोनों का सेम है वहां पर लोगों के मन में कुछ ऐसा

1614
02:00:10,000 --> 02:00:14,240
हुआ कि हमें कुछ करना है इसलिए यहां आए नहीं तो पहले वही थे गोलोक

1615
02:00:14,240 --> 02:00:18,680
मेंही थे सब के सब ऐसे ये लोग भी पहले सतलोक में ही थे मगर कुछ

1616
02:00:18,680 --> 02:00:22,920
मन में आ गया इसलिए आना पड़ गया हां सब

1617
02:00:22,920 --> 02:00:24,720
सिस्टम वैसा ही है दूसरी बात

1618
02:00:24,720 --> 02:00:28,760
उनका भी ईश्वर जैसा वहा सतलोक में वो जैसा गोलोक

1619
02:00:28,760 --> 02:00:32,800
में वैसा ही एस इट आता है नीचे और फिर आ जाता है

1620
02:00:32,800 --> 02:00:37,520
तो बाधित हो जाता है इनका भी ईश्वर जैसा सतलोक में

1621
02:00:37,520 --> 02:00:42,400
वैसे ही नीचे आता है और फिर नीचे आता है तो बाधित हो जाता

1622
02:00:42,400 --> 02:00:46,760
[संगीत] है अच्छा इन का क्या है शिवांस भाई

1623
02:00:46,760 --> 02:00:51,200
जी अब इनकी कट्टर बुद्धि है इन्होंने इस

1624
02:00:51,200 --> 02:00:55,360
कोन के अलावा कोई दूसरा ग्रंथ पढ़ना ही नहीं है इनको य बोला

1625
02:00:55,360 --> 02:00:59,440
जाता है कि तुम्हें किसी भी और आचार्य की कोई भी पुस्तक कोई भी बात

1626
02:00:59,440 --> 02:01:03,880
कोई भी वो नहीं पढ़ना है जो इस कन से प्रकाशित है या जो श्रीला प्रभुपाद

1627
02:01:03,880 --> 02:01:08,200
ने लिख दी है वही तुम्हें पढ़नी है अब इनसे

1628
02:01:08,200 --> 02:01:12,480
पूछा जाए मेरी एक किसी वैष्णव से बात हुई थी इस विषय

1629
02:01:12,480 --> 02:01:16,720
में और वो गड़ ही था तो मैंने पूछा कि भ

1630
02:01:16,720 --> 02:01:20,960
श्रीमद् भागवत को लेकर मुझे पढ़नी थी तो मैंने क मैंने गीता

1631
02:01:20,960 --> 02:01:25,240
गोरक प्रेस की मंगा तो उन्होने बोला कि मेरे पास थी मैंने कहा नहीं मेरे

1632
02:01:25,240 --> 02:01:29,280
को गड कभ आना चाहते क्योंकि मेरे को आज आज जो

1633
02:01:29,280 --> 02:01:33,800
है हिंदू राष्ट गोष्ठी होती है तो मुझे 3:30

1634
02:01:33,800 --> 02:01:37,800
बजे सा 35 पर जाना ही होगा तो गड इस कवि को ले लेते

1635
02:01:37,800 --> 02:01:39,760
हैं वो कुछ बातें अगर ऐसी करते

1636
02:01:39,760 --> 02:01:45,000
हैं कि कुछ काम की है तो देखते

1637
02:01:45,000 --> 02:01:49,080
हैं है उनको भी ले लेना

1638
02:01:49,080 --> 02:01:53,160
कौन है स साब संगत जी जय

1639
02:01:53,160 --> 02:01:57,200
श्री कृष्ण जय श्री रामम दस का

1640
02:01:57,200 --> 02:02:02,760
नाम परम दास है का मोबाइल रिपीट हो रहा है

1641
02:02:02,760 --> 02:02:08,720
हा कोई कोई जी अब आप थोड़ा सा स्स

1642
02:02:08,720 --> 02:02:12,800
ड़ क्या कहते हैं

1643
02:02:12,800 --> 02:02:16,720
भैया है

1644
02:02:16,720 --> 02:02:20,800
ना किसको लेने को बोल रहे हैं अविनाश शुक्ला

1645
02:02:20,800 --> 02:02:24,000
जी

1646
02:02:24,000 --> 02:02:29,040
सब लोग अपने माइक मूट कर नारायणय

1647
02:02:29,040 --> 02:02:32,080
एक मिनट एक मिनट

1648
02:02:32,080 --> 02:02:34,560
मिनट

1649
02:02:34,560 --> 02:02:40,560
आप आप भी अपना माइक मूट करिए कबीर देव

1650
02:02:41,480 --> 02:02:45,600
जी हेलो हेलो नारायण

1651
02:02:45,600 --> 02:02:51,600
जी श जी नहीं रुक जा ये आवाज ट क्यों आ रही है

1652
02:02:53,160 --> 02:02:57,280
नहीं इधर तो नहीं आ रही अब आ रही है क्या

1653
02:02:57,280 --> 02:03:01,360
अब नहीं आ रही अविनाश जी आप चालू करिए अविनाश

1654
02:03:01,360 --> 02:03:06,120
जी अपना जी नारायण जी नारायण नारायण

1655
02:03:06,120 --> 02:03:10,440
नारायण क्षमा चाहता हूं कि मैं किसी कारण बस चेहरा नहीं दिखा सकता बत्रा

1656
02:03:10,440 --> 02:03:14,560
जी भली भाती जानते हैं मुझे ना वो जानते हैं मगर बात

1657
02:03:14,560 --> 02:03:18,680
ये है कि समझिए हमने यहां पर एक मर्यादा बनाई हुई

1658
02:03:18,680 --> 02:03:24,040
है उसके ता

1659
02:03:24,040 --> 02:03:28,200
जी जी दो मिनट बस अपनी बात रखूंगा ये जो

1660
02:03:28,200 --> 02:03:32,400
अभी आप गरीब दास जी का जो आपने खोला हुआ था थोड़ी देर पहले है ना

1661
02:03:32,400 --> 02:03:36,440
और यह जो रामपाल के दास कहते हैं कि ये अंतिम वेद सूक्ष्म वेद

1662
02:03:36,440 --> 02:03:40,560
हैय सबसे आखरी वाणी है इसी गरीब दास की वाणी में

1663
02:03:40,560 --> 02:03:44,760
एक अंग है अनुभव दास ने स्पष्ट कहा

1664
02:03:44,760 --> 02:03:48,960
है कृष्ण भगवान गीता कथी लेकिन ये उसको भी नहीं मानेंगे तो

1665
02:03:48,960 --> 02:03:53,040
यह तो अपने परंपरा द्रोही हुए कि नहीं हुए आप खोल कर

1666
02:03:53,040 --> 02:03:57,280
देख लीजिए अभी आप मिला लीजिए ने दावा नहीं किया कि कृष्ण

1667
02:03:57,280 --> 02:04:01,800
भगवान ने गीता नहीं व भी क चला चुके हैं

1668
02:04:01,800 --> 02:04:06,440
ठीक अना जी मैं क्षमा चाहूंगा थोड़ा सा आप जो है

1669
02:04:06,440 --> 02:04:08,360
हम लोग बात करेंगे आपकी बात जो आपने द

1670
02:04:08,360 --> 02:04:14,360
है हम लोग बात

1671
02:04:15,560 --> 02:04:19,840
करें जो गरीब दास जी की वा है

1672
02:04:19,840 --> 02:04:23,320
सा संगत जी

1673
02:04:23,320 --> 02:04:27,480
जो गरीब दास जी की वाणी है मुझे रिपीट आ रही

1674
02:04:27,480 --> 02:04:33,480
मैं एक मिनट लीव करके दोबारा आता

1675
02:04:45,200 --> 02:04:49,240
हूं हां जी अब बोलिए गड

1676
02:04:49,240 --> 02:04:52,480
इ कबीर देव

1677
02:04:52,480 --> 02:04:57,560
हा

1678
02:04:57,560 --> 02:05:01,720
जी माइक अन म्यूट कर लीजिए सत

1679
02:05:01,720 --> 02:05:05,960
साब संगत जी सभी को जैसे आप संत

1680
02:05:05,960 --> 02:05:10,280
रामपाल जी महाराज जी के बारे में कहते हैं कि उनको

1681
02:05:10,280 --> 02:05:14,280
गीता नहीं पता है उनको ग्रंथों के बारे में नहीं पता है ऐसे कहते हैं

1682
02:05:14,280 --> 02:05:18,600
दास का नाम परमप्रीत दास है होशियारपुर से हैं पंजाब

1683
02:05:18,600 --> 02:05:22,640
से तो अभी जो संत रामपाल जी दूसरा

1684
02:05:22,640 --> 02:05:26,760
मंत्र देते हैं सतनाम तो

1685
02:05:26,760 --> 02:05:31,680
वोह जो गीता अध्याय 17 श्लोक 23

1686
02:05:31,680 --> 02:05:35,920
भाई साहब आपने पहले तोय मुझे मेरी आवाज

1687
02:05:35,920 --> 02:05:40,000
क्य आ रही है समझ नहीं पा रहा आप लोगों को रिपीट हो रही है

1688
02:05:40,000 --> 02:05:44,160
क्या आवाज नहीं नहीं इधर ठीक है बिल्कुल मेरी आवाज

1689
02:05:44,160 --> 02:05:48,400
रिपीट तो नहीं हो रही आप लोगों को अब नहीं हो रही अभी

1690
02:05:48,400 --> 02:05:54,080
तक हो रही थी क्या हो रहा थाय अब फि व

1691
02:05:54,080 --> 02:05:59,600
व अब अब रिपीट हो रही है अब नहीं हो

1692
02:05:59,600 --> 02:06:03,720
रही हा

1693
02:06:03,720 --> 02:06:06,640
जी

1694
02:06:06,640 --> 02:06:11,600
हेडफोन अरे आवाज क्लियर नहीं आएगी फिर

1695
02:06:11,600 --> 02:06:15,640
आ जाएगी क्लियर हम लोग बिना हेड फोन की बात कर रहे हैं

1696
02:06:15,640 --> 02:06:19,720
आवाज आहीर देखिए आप जो है शायद आपने स्ट्रीम देखी

1697
02:06:19,720 --> 02:06:23,760
नहीं है अगर आप भगवत गीता से य सिद्ध करेंगे

1698
02:06:23,760 --> 02:06:27,760
कोई भी कोई भी बात आपको पहले बताना पड़ेगा कि

1699
02:06:27,760 --> 02:06:32,560
भगवत गीता को आप पूर्णतया प्रमाणिक मानते हो कि नहीं मानते हो

1700
02:06:32,560 --> 02:06:37,000
अरे संगत जी ऐसा है कि जो गीता का ज्ञान है

1701
02:06:37,000 --> 02:06:41,280
जैसे गुरु जी सत्संग बते वो एक तो पारब्रह्म का

1702
02:06:41,280 --> 02:06:46,160
है एक काल ब्रम जसे ये किसने बताया

1703
02:06:46,160 --> 02:06:50,520
है गीता अध्याय 15 के श्लोक 16 और 17

1704
02:06:50,520 --> 02:06:54,960
में तीन तीन पुरुष बए चर पुरुष अक्ष

1705
02:06:54,960 --> 02:06:59,040
पुरुष परम अक्षर पुरुष उत्तम पुरुष अभी जो बात बोली है

1706
02:06:59,040 --> 02:07:03,240
कि दो लोगों ने बोला है यह बात कहां लिखी है

1707
02:07:03,240 --> 02:07:07,560
वो बताइए अभी पहले

1708
02:07:07,560 --> 02:07:11,680
ये बात तो सुनो पहले ये बात बता साब जब आप गीता की बात कर रहे

1709
02:07:11,680 --> 02:07:16,320
हैं तो आपने एक बात कर दी कि गीता में दो लोगों ने बात की है यह कहां लिखा है

1710
02:07:16,320 --> 02:07:18,840
बो दो लोगों का ज्ञान है दो

1711
02:07:18,840 --> 02:07:24,840
प्रमा दो लोगों का ज्ञान है वो कहा

1712
02:07:25,240 --> 02:07:30,160
यही बता रखा है उत्तम पुरुष परमात्मा उदार

1713
02:07:30,160 --> 02:07:36,160
उत्तम पुरुष है कोई अन्य

1714
02:07:40,320 --> 02:07:46,200
है शलोक क्रमांक बता

1715
02:07:46,200 --> 02:07:50,320
कौन भाई साब एक मिनट जब कोई बात छी उसको

1716
02:07:50,320 --> 02:07:54,560
पूरी करेंगे जब कोई बात छेड़

1717
02:07:54,560 --> 02:08:00,080
झूठ

1718
02:08:00,080 --> 02:08:04,200
की मिनट शलोक कमा बोलिए 15

1719
02:08:04,200 --> 02:08:07,600
के में

1720
02:08:07,600 --> 02:08:12,200
परमा का हा का

1721
02:08:12,200 --> 02:08:16,360
निकालने आप निकालिए जब तक है कि

1722
02:08:16,360 --> 02:08:20,440
जो संत रामपाल जी

1723
02:08:20,440 --> 02:08:24,720
है एकको निकाल लेने दो एक मिनट डिस्कशन कर रहे हैं एक मिनट रु

1724
02:08:24,720 --> 02:08:28,800
मिनट मिनट बता रहा बात सुनिए सर दो मिनट बा एक

1725
02:08:28,800 --> 02:08:34,800
मिनट रुको एक मिनट 15 अध्याय और

1726
02:08:37,920 --> 02:08:42,160
देखो इसमें इन्होंने कहा कि वोह परमेश्वर तो कोई अन्य

1727
02:08:42,160 --> 02:08:46,800
ही है ठीक है क्या लिखा है

1728
02:08:46,800 --> 02:08:50,840
सुन लो सुन लो इन दोनों से उत्तम

1729
02:08:50,840 --> 02:08:55,000
पुरुष तो अन्य ही है जो तीनों लोकों में प्रवेश करके सबका

1730
02:08:55,000 --> 02:08:59,400
धारण पोषण करता है एवं अविनाशी परमेश्वर और परमात्मा

1731
02:08:59,400 --> 02:09:03,680
इस प्रकार कहा गया है ठीक उसके बाद इन्होंने क्या कहा

1732
02:09:03,680 --> 02:09:07,760
कि मैं नाशवान जड़ वर्ग क्षेत्र से अगले श्लोक

1733
02:09:07,760 --> 02:09:12,000
में सर्वथा अतीत हू अविनाशी जी जीवात्मा से

1734
02:09:12,000 --> 02:09:16,480
भी उत्तम हूं कहा ना इन दोनों से उत्तम तो अविनाशी

1735
02:09:16,480 --> 02:09:20,760
जीवात्मा से भी उत्तम हूं इसलिए लोक में और वेद

1736
02:09:20,760 --> 02:09:24,800
में भी पुरुषोत्तम नाम से प्रसिद्ध हूं हाज

1737
02:09:24,800 --> 02:09:29,520
संगत जी यही बात लोक वेद से दार से मैं पुरुषोत्तम प्रसिद्ध हूं

1738
02:09:29,520 --> 02:09:33,880
अरे मेरे भाई मैं ही हूं मैं ही हूं वो पुरुषोत्तम

1739
02:09:33,880 --> 02:09:38,600
बात बताओ अगर अविनाशी ये हुए हैं तो जो गीता अध्याय दो के द

1740
02:09:38,600 --> 02:09:42,800
पांच शायद बोला है अर्जुन देखो भैया मेरी बात सुनो पहले तो

1741
02:09:42,800 --> 02:09:46,960
पहले तो ये मान लो इसके साथ आप वेद को

1742
02:09:46,960 --> 02:09:51,440
पूरा मानते हो अधूरा मानते हो पहले बताओ दास पहले

1743
02:09:51,440 --> 02:09:53,520
बात आप दास की सुनो तभी बताऊ

1744
02:09:53,520 --> 02:09:57,880
अरे भाई क्योंकि जब मैं प्रमाण दूंगा तो आप कहोगे काल ने बोला है दिक्कत

1745
02:09:57,880 --> 02:10:02,400
य है बात तो सुनो मैं पूछ रहा हूं वेद को पूरा मानते हो अधूरा

1746
02:10:02,400 --> 02:10:06,520
मानते हो पहले इसका जवाब दो अ मैं पूछ रहा हूं वेद को

1747
02:10:06,520 --> 02:10:11,040
पूरा मानते हो अधूरा मानते हो दास मानता है जो परमात्मा जिन

1748
02:10:11,040 --> 02:10:11,800
वेद को

1749
02:10:11,800 --> 02:10:16,480
वेद को वेद को पूरा मानते हो अधूरा मानते हो इसका जवाब दो पहले

1750
02:10:16,480 --> 02:10:20,760
वेद को जो अच्छा लगता है वो मानता हूं गीता मानता हूं गीता गीता गीता

1751
02:10:20,760 --> 02:10:24,880
ज्यादा गीता गीता तो उसम तो काल ने कह दिया ना जहां

1752
02:10:24,880 --> 02:10:29,360
जहां मैं कुछ बोलूंगा वो तुम कहोगे काल ने कहा है

1753
02:10:29,360 --> 02:10:33,400
नहीं नहीं अी अच्छा सुनो अच्छा ये बता दो सुनो ये बता दो

1754
02:10:33,400 --> 02:10:37,640
ये बता दो गीता में जो 5 पर काल ने कहा है वो कौन-कौन से श्लोक

1755
02:10:37,640 --> 02:10:41,960
है वो बता दो ये एक बात पहले अभी जब क्वेश्चन

1756
02:10:41,960 --> 02:10:46,200
पुट करता हूं तो आप बो भाई क्वेश्चन मैं क्वेश्चन तब लूंगा तुमसे

1757
02:10:46,200 --> 02:10:50,280
जब मुझे यह पता हो कि तुम्हें जवाब कहां से देना है उसी में ही

1758
02:10:50,280 --> 02:10:54,360
आपके सवाल का जवाब अरे यार तुम क्यों बताओ भाई मुझे एक निश्चित डायमीटर

1759
02:10:54,360 --> 02:10:58,560
तो दो कि तुमको इससे जवाब देना है तुम जहां से भी मैं खोलूंगा

1760
02:10:58,560 --> 02:11:02,720
उसको कह दोगे कि ये काल का बोला हुआ है ज गीता

1761
02:11:02,720 --> 02:11:06,960
जी में लिखा है कि अर्जुन ते और मेरे एक मिनट एक मिनट

1762
02:11:06,960 --> 02:11:11,040
एक मिनट एक मिनटन आपने कहा कि वेद को

1763
02:11:11,040 --> 02:11:15,040
मैं उतना मानता हूं आपने कहा वेद को मैं उतना मानता हूं जितना मुझे

1764
02:11:15,040 --> 02:11:19,040
अच्छा लगता है कहा ना जो चाहिए जो हम

1765
02:11:19,040 --> 02:11:23,320
चाहिए अभी जैसे मैं पूछ देखो भाई अभी आपने अभी आपने

1766
02:11:23,320 --> 02:11:27,560
कहा है कि इसीलिए चिल्लाना पड़ता है इसीलिए अच्छे से बात हो सकती

1767
02:11:27,560 --> 02:11:31,760
है मगर नहीं आपने अभी य बात कही वेद को मैं उतना मानता

1768
02:11:31,760 --> 02:11:35,760
हूं जितना मुझे अच्छा लगता है क्योंकि

1769
02:11:35,760 --> 02:11:41,760
गीता में लिखा गया है मुझे ये बताओ ये कहीं लिखा है

1770
02:11:42,920 --> 02:11:47,200
क्या के फल से आगे निकल जाता है मैं आपको शास्त्र

1771
02:11:47,200 --> 02:11:51,280
का प्रमाण दे रहा हूं कि अगर दो जगह दो अलग अलग बातें लिखी है तो

1772
02:11:51,280 --> 02:11:56,200
दोनों को मानना है मानोगे सर आप बातो को

1773
02:11:56,200 --> 02:12:00,320
आप मुझे ये प्रमाण दे दो भाई कि मैं जितना मुझे अच्छा लगेगा

1774
02:12:00,320 --> 02:12:04,480
उतना वेद मानना चाहिए यह प्रमाण अरे बात अभी अभी

1775
02:12:04,480 --> 02:12:08,680
ये तो बताओ गीता में जो तत्व ज्ञान है गीता में लिखा है जिसको तव

1776
02:12:08,680 --> 02:12:12,760
ज्ञान हो जाता नहीं है पहले बात सुनो जो गीता में लिखा

1777
02:12:12,760 --> 02:12:16,800
है जिसको तत्व ज्ञान हो जाता हैब मेरी बात सुनो आप मेरी एक बात सुनो

1778
02:12:16,800 --> 02:12:21,360
भाई भाई साहब मैं आपको एक बात बोल रहा हूं नहीं रहा हूं सुनलो आप पहले

1779
02:12:21,360 --> 02:12:25,560
सेलेक्ट कर लो कि गीता में कौन-कौन से श्लोक

1780
02:12:25,560 --> 02:12:29,720
काल ने कहे हैं बस वो मुझे बता दो उसके बाद अपना

1781
02:12:29,720 --> 02:12:33,720
प्रश्न करो पहले मुझे बता दो कौन-कौन से श्लोक काल ने कहे

1782
02:12:33,720 --> 02:12:37,760
हैं पहले ये तो बताओ फ फिर दो बातें कांट्रडिक्ट हो गई

1783
02:12:37,760 --> 02:12:41,800
एक पास से कह रहे अविनाशी कंट्रा ट

1784
02:12:41,800 --> 02:12:46,080
नहीं हुई है भाई साहब एक मिनट कंट्रा ट नहीं हुई है आप अगर सुनना

1785
02:12:46,080 --> 02:12:51,920
चाहोगे तो हम समझाएंगे आपको सुनना है नहीं नहीं पूछ

1786
02:12:51,920 --> 02:12:56,720
बता रहा बता रहा हूं जो अविनाशी परम ब्रह्म है

1787
02:12:56,720 --> 02:13:00,920
जो अविनाशी परम ब्रह्म है जो व्यवहार में नहीं आ सकता

1788
02:13:00,920 --> 02:13:05,320
है सुनना नहीं है

1789
02:13:05,320 --> 02:13:11,320
जो नानक देव जी तो जानते होंगे नानक देव

1790
02:13:17,680 --> 02:13:21,720
जी भाई साहब इनको म्यूट रखिएगा थोड़ी देर आप मेरी

1791
02:13:21,720 --> 02:13:26,000
बात सुनिए मुझे कुछ कहना है आपसे ध्यान से ठीक है आप मुझसे

1792
02:13:26,000 --> 02:13:30,040
गीता को लेकर प्रश्न क्यों कर रहे हैं क्योंकि आप

1793
02:13:30,040 --> 02:13:34,080
गीता को प्रमाण मानते हैं फिर मैं गीता को खोलता हूं आपको जवाब देने

1794
02:13:34,080 --> 02:13:38,160
के लिए उसके बाद आप कहते हो जब मैं आपको जवाब देता हूं

1795
02:13:38,160 --> 02:13:42,240
कि यह तो काल ने कहा है ठीक है तो मैं

1796
02:13:42,240 --> 02:13:46,320
मेहनत वहां करूना जब मुझे पहले पता हो काल ने कहां कहा कहा

1797
02:13:46,320 --> 02:13:51,440
है पहले आप मुझे ये बता दीजिए कि काल ने 35

1798
02:13:51,440 --> 02:13:55,680
वो जगह कौन सी है जो काल ने बोला है फिर मैं आपको जो जवाब

1799
02:13:55,680 --> 02:14:00,360
दूंगा वो काल के बोले हुए से बाहर से जवाब दूंगा पहली बात

1800
02:14:00,360 --> 02:14:05,240
दूसरी बात मैंने आपसे पूछा जब आप यह बात बोलते हो

1801
02:14:05,240 --> 02:14:07,520
कि क्या कहते हैं

1802
02:14:07,520 --> 02:14:11,680
ये यहां पर जो है दो ज्ञान है एक काल का ज्ञान है एक परमात्मा का ज्ञान

1803
02:14:11,680 --> 02:14:15,680
है ये कहते हो यह बात गीता में कहीं लिखी नहीं है ठीक है

1804
02:14:15,680 --> 02:14:19,800
दूसरी बात आप कहते हो कि वेदों को मैं उतना मानूंगा जितना

1805
02:14:19,800 --> 02:14:23,880
मुझे अच्छा लगेगा यह भी कहीं पर शास्त्र सम्मत नहीं है शास्त्रों में

1806
02:14:23,880 --> 02:14:28,200
नहीं लिखा है कि शास्त्रों को उतना मानो जितना अच्छा लगे बाकी छोड़ दो मनम

1807
02:14:28,200 --> 02:14:32,280
कीी बात तीसरी बात अगर आप यह कहते हो कि भाई कहीं

1808
02:14:32,280 --> 02:14:36,280
कुछ लिखा कहीं कुछ लिखा है इसलिए दो तरह का ज्ञान है नहीं इस बारे

1809
02:14:36,280 --> 02:14:40,720
में शास्त्र कहते हैं कि जब दो तरह का ज्ञान हो तो दोनों धर्म है

1810
02:14:40,720 --> 02:14:44,760
शास्त्र य नहीं कहते एक को काल का बोल दो एक को किसी और का बोल दो

1811
02:14:44,760 --> 02:14:48,840
एक को मत मानो शास्त्र नहीं कहते शास्त्र कहते हैं कि जब

1812
02:14:48,840 --> 02:14:52,840
दो अलग अलग तरह की बातें हो तो दोनों

1813
02:14:52,840 --> 02:14:56,840
शास्त्र य नहीं कहते कि अगर दो तरह की बातें है तो उसको काल

1814
02:14:56,840 --> 02:15:00,960
का बोल दो और इसमें अगर आप कोई अलग तर्क देते

1815
02:15:00,960 --> 02:15:05,400
तो शास्त्र कहते हैं व्यक्तिगत तर्क

1816
02:15:05,400 --> 02:15:09,560
अमान्य अगर शास्त्रों के विरोध में आप कुछ कह रहे हैं जो

1817
02:15:09,560 --> 02:15:13,680
शास्त्र में नहीं लिखा है मन गंत कह रहे हैं तो

1818
02:15:13,680 --> 02:15:17,880
वोह अमान्य है संगत जी अभी दास को भी दो मिनट टाइम

1819
02:15:17,880 --> 02:15:21,920
दो हा बोलो अभी अभी

1820
02:15:21,920 --> 02:15:22,800
जब कहते

1821
02:15:22,800 --> 02:15:26,960
रामपाल जी को जी ज्ञान नहीं है ऐसे अभी एक बात बताओ जो नानक

1822
02:15:26,960 --> 02:15:31,200
देव जी हुए सिख धर्म में प्रथम गुरु भाई साहब

1823
02:15:31,200 --> 02:15:36,120
मैंने जो विषय चल रहा है उस विषय पर बात करिए आप मुझे यह बताइए

1824
02:15:36,120 --> 02:15:40,280
आप मुझे य बताइए कि काल ने वो कहा है ज्ञान

1825
02:15:40,280 --> 02:15:44,880
यह गीता में लिखा है क्या दो तरह

1826
02:15:44,880 --> 02:15:49,360
कान लिए गुरु नानक की आवश्यकता नहीं है मुझे मेरे भाई

1827
02:15:49,360 --> 02:15:52,560
मुझे गता

1828
02:15:52,560 --> 02:15:57,360
गुरु नानकता नहीं है गीता वे

1829
02:15:57,360 --> 02:16:01,360
संगत जी जिनको परमात्मा उनका ज्ञान भी प्रमाणित माना जाता है

1830
02:16:01,360 --> 02:16:05,680
आपने शंकर जी का ज्ञान कहां से लिया भाई साहब

1831
02:16:05,680 --> 02:16:09,960
पहले ये बताओ शकर जी का ज्ञान कहां से लिया

1832
02:16:09,960 --> 02:16:14,880
शंकर जी का शंकर जी का

1833
02:16:14,880 --> 02:16:20,880
कहां से लिया मैं अभी आपको एक बात बता रहा हूं रुक जाओ

1834
02:16:22,000 --> 02:16:26,600
अभी एक जी नानक देव जी की वाणी

1835
02:16:26,600 --> 02:16:32,600
है सुनने ते जग स भेद बचारे सोजन

1836
02:16:41,520 --> 02:16:45,760
पूरा अब आपसे आप ही की भाषा में बात करनी पड़ेगी

1837
02:16:45,760 --> 02:16:51,160
ठीक है

1838
02:16:51,160 --> 02:16:55,240
यहां पर एक मिनट मिनट अभी मैं आपसे

1839
02:16:55,240 --> 02:16:59,480
आप ही की भाषा बात कर रहा हूं ये लिखा हुआ है गीता तेरा ज्ञान

1840
02:16:59,480 --> 02:17:03,680
अमृत और इसमें रामपाल दास जी लिख रहे हैं

1841
02:17:03,680 --> 02:17:07,840
कि ऊपर को मूली यहां पर मूल लिखा है गलती

1842
02:17:07,840 --> 02:17:12,760
से लिख गया है व मूली लिखना चाह रहे हैं य ऊपर को मूली वाला

1843
02:17:12,760 --> 02:17:16,960
नीचे को तीनों गुण यहां पर गुण गलती से लिख गया है

1844
02:17:16,960 --> 02:17:20,960
गुण लिखा है व खाने वाला गुण होता है ना जो वो लिखा है य पर

1845
02:17:20,960 --> 02:17:25,040
ऊपर को मूली वाला नीचे को तीन प्रकार के गुण गुण होता

1846
02:17:25,040 --> 02:17:29,280
है ना मीठा वाला वो रूपी शाखा वाला उल्टा लटका

1847
02:17:29,280 --> 02:17:33,280
हुआ संसार रूपी पीपल यहां पर जो अंग्रेजी का पीपल

1848
02:17:33,280 --> 02:17:37,000
होता है ना जनता वो लिखा है वो हिंदी में गलत लिख दिया वो पीपल का वृक्ष

1849
02:17:37,000 --> 02:17:41,120
नहीं है जनता का वृक्ष है अब इसे जो है क्या कहा

1850
02:17:41,120 --> 02:17:45,640
गया है इसे जो है बोल रहे हो क्या

1851
02:17:45,640 --> 02:17:49,720
क्या ये जान बूझ के बोल रहे हो अरे भाई मुझे सिद्ध करो ना कि मैं

1852
02:17:49,720 --> 02:17:53,760
गलत बोल रहा हूं मैं भी तो क सकता तुम जानबूझ के बोल

1853
02:17:53,760 --> 02:17:57,800
रहे हो जो हमारा ज्ञान मुझे

1854
02:17:57,800 --> 02:18:01,960
करो य उन्होने मल लिखा है उने

1855
02:18:01,960 --> 02:18:06,840
य उन्होने य मल नहीं मल लिखा है मैं कह रहा

1856
02:18:06,840 --> 02:18:11,480
करो य एक पहली बात मट करो भैया

1857
02:18:11,480 --> 02:18:15,520
इनको म्यूट करो भाषा में उत्तर देना पड़ेगा

1858
02:18:15,520 --> 02:18:19,400
म्यूट करो

1859
02:18:19,400 --> 02:18:23,600
सुनो बो ऐसे बा च अरे भाई अन म्यूट मत होने

1860
02:18:23,600 --> 02:18:27,880
दो इनको म्यूट करो रुक जाओ अभी सुनो मैं आपको अवसर

1861
02:18:27,880 --> 02:18:31,960
दूंगा सुनो यहां पर ये लोग ये कह

1862
02:18:31,960 --> 02:18:36,080
रहे हैं कोई भी कोई भी पेज निकाल सकता हूं मैं कोई भी पेज निकाल

1863
02:18:36,080 --> 02:18:41,040
सकता हूं उसका मैं अर्थ बता सकता हूं देखो कैसे बताते हैं अर्थ

1864
02:18:41,040 --> 02:18:45,160
यहां पर ये संपूर्ण सृष्टि रचना में कह रहे हैं जो

1865
02:18:45,160 --> 02:18:49,240
निर्विकार जिन्होंने मांस शराब तंबाकू सेवन करना

1866
02:18:49,240 --> 02:18:53,360
त्याग दिया है अन्य बुराइयों रहित है अन्य

1867
02:18:53,360 --> 02:18:57,440
बुराइयों रहित गलती से हो गया है अन्य बुराइयों सहित है कहा है

1868
02:18:57,440 --> 02:19:01,760
उन्होंने अन्य बुराइयों रहित गलती से हो गया है अन्य बुराइयों

1869
02:19:01,760 --> 02:19:05,920
सहित है कहा है उन्होंने क्या कहा है अन्य बुराइयों से सहित

1870
02:19:05,920 --> 02:19:09,920
है देव स्वरूप भक्त आत्मा है

1871
02:19:09,920 --> 02:19:13,960
मतलब कि इनके लिए भक्त स्वरूप आत्माएं कौन सी है

1872
02:19:13,960 --> 02:19:18,720
जो बुराइयों से सहित है जिनके पास क्या क्या होना चाहिए मास

1873
02:19:18,720 --> 02:19:22,720
शराब तंबाकू सेवन ये सब जिसके

1874
02:19:22,720 --> 02:19:26,720
पास होगा वो इनके लिए देव स्वरूप भक्त आत्मा है मानोगे

1875
02:19:26,720 --> 02:19:30,720
कि नहीं बताओ आप जानबूझ के उल्ट बोल ता मैं भी

1876
02:19:30,720 --> 02:19:34,760
वही कह रहा हूं कि आप जानबूझ के बोल रहे हो जो

1877
02:19:34,760 --> 02:19:39,360
जो दास बोल रहा है कह रहा हूं के आप जानबूझ के बोल रहे हो

1878
02:19:39,360 --> 02:19:43,640
आपको उसका पेज नंबर बताऊंगा वाणी में चेक कर सकते हैं अरे भाई उस पेज

1879
02:19:43,640 --> 02:19:47,720
की व्याख्या आपने कि है ना वो कहां से आई है वताब

1880
02:19:47,720 --> 02:19:51,760
आपके पास अरे नहीं नहीं हमने नहीं की व पहले की हुई

1881
02:19:51,760 --> 02:19:54,840
है जो जो अपने

1882
02:19:54,840 --> 02:20:00,840
करते किसने की है

1883
02:20:02,520 --> 02:20:07,080
जोल नाम बताओ आप खुद चेक कर सकते

1884
02:20:07,080 --> 02:20:11,120
हो य प्रमाण देरहे हो हमको नाम बताइए

1885
02:20:11,120 --> 02:20:15,280
आप प्रमाण वही तो कहा आ वेबसाइट खुल जाएगी व नाम

1886
02:20:15,280 --> 02:20:19,320
चेक कर लेना किसी के भी कोई भी देख सकते है कौन

1887
02:20:19,320 --> 02:20:22,240
सी किताब हैन

1888
02:20:22,240 --> 02:20:26,680
कौन सी किताब है नाम बताओ मैं अभी यही निकालू नाम बताओ

1889
02:20:26,680 --> 02:20:31,080
क्वेश्चन पूछा था कि अरे भाई किताब का नाम बताओ मैं निकालता

1890
02:20:31,080 --> 02:20:35,360
हूं किताब बताओ नाम किताब का बोल रहा हूं पले सुन तो लो हां

1891
02:20:35,360 --> 02:20:39,400
बोलो एक ग्रंथ साहिब की वाणी है 1037 सफे

1892
02:20:39,400 --> 02:20:43,400
प लिखा हुआ है किसकी वाणी है ग्रंथ साहिब जो अपने नानक देव

1893
02:20:43,400 --> 02:20:48,120
जी की णी ग्रंथ साहब की वाणी नहीं 18 पुराण स्मृति

1894
02:20:48,120 --> 02:20:49,920
वेद उपनिषद इनमें से दो

1895
02:20:49,920 --> 02:20:54,440
प्रमाण जो नानक देव जी की वाणी है वो भी

1896
02:20:54,440 --> 02:20:58,680
जो गीता के जो उल्टा भाई साहब हमने जो

1897
02:20:58,680 --> 02:21:02,840
बताया है सनातन जो शास्त्र है उनसे आपके पास प्रमाण हो तो बताओ अगर

1898
02:21:02,840 --> 02:21:07,080
नहीं है तो आप अच्छा लगा आप आए आप जा सकते हैं आपके

1899
02:21:07,080 --> 02:21:11,720
अकेले के नहीं है सभी मानव मात्र के है ठीक है क्योंकि सभी

1900
02:21:11,720 --> 02:21:16,200
मानव मात्र के है वो पता चल जाएगा कितना मानते हो समझे

1901
02:21:16,200 --> 02:21:20,600
कितना कितना समान करते हो एक बात बताओ

1902
02:21:20,600 --> 02:21:24,760
जिस को देखो मैंने अपनी बहुत सी बातें बता

1903
02:21:24,760 --> 02:21:29,320
दी मेरे को जाना भी है चार बजे कहीं पहुंचना है अब मैं तुमको पूछ रहा हूं

1904
02:21:29,320 --> 02:21:33,680
अगर तुमने कहा कि वेद में ये भगवत गीता को तुम मानते हो

1905
02:21:33,680 --> 02:21:37,880
और दो प्रकार का ज्ञान है अरे

1906
02:21:37,880 --> 02:21:43,880
यार यह भाई ये बिल्कुल वो है क्या मैं बताऊं

1907
02:21:45,960 --> 02:21:50,040
ये इनको म्यूट रहने दो मैं स्टेज पर ले रहा हूं

1908
02:21:50,040 --> 02:21:54,480
इनके साथ जल्दी से हम लोग पूरा करेंगे अभी आपकी आवाज नहीं आ रही है

1909
02:21:54,480 --> 02:21:58,800
आपने कहा कि मैं वेद को तना इनकी आवाज बंद करो

1910
02:21:58,800 --> 02:22:03,240
भैया क्यों करते हो जब दूसरे की बात आप क्योंकि आप

1911
02:22:03,240 --> 02:22:07,440
विषय से हट के बात कर रहे हो हम लोगों के लिए गुरु नानक जी के लिए

1912
02:22:07,440 --> 02:22:11,800
ग्रंथ साहब के लिए सम्मान है मगर हम उतनी ही चीजें उनकी लेंगे

1913
02:22:11,800 --> 02:22:15,800
जो हमारे वेदा शास्त्रों की सीमा में होंगी समझ

1914
02:22:15,800 --> 02:22:19,840
रहे हैं आप ये मानेंगे नहीं मानेंगे नहीं

1915
02:22:19,840 --> 02:22:24,560
ये नहीं मानेंगे

1916
02:22:24,560 --> 02:22:29,800
इनको म सेक एक सेकंड इनसे बात करने दो

1917
02:22:29,800 --> 02:22:34,480
सर आप मंदिरों में आरती रोज पढ़ते हो ना पार

1918
02:22:34,480 --> 02:22:38,520
सुने बात करेंगे व सुनना नहीं है उनको उनको

1919
02:22:38,520 --> 02:22:44,520
अपनी बात बोल

1920
02:22:48,200 --> 02:22:54,200
त लेना

1921
02:22:57,600 --> 02:23:01,880
शिवाज सुन आप अपनी बात बोल दो सुन रहे हैं

1922
02:23:01,880 --> 02:23:06,760
जी जी जी अरे श लेकर के नहीं आते जिज्ञासा लेकर के नहीं आते

1923
02:23:06,760 --> 02:23:11,480
ये अपना जन देने आते इधर सर एक

1924
02:23:11,480 --> 02:23:15,560
मिनट सेकंड ये आप इनको बता रहे हो ये बस 15 ब

1925
02:23:15,560 --> 02:23:21,320
इनके दिमाग में घुसा हु नाने 18 पढ़ 19 पढ जो आप पढ़ रहे पढ़ना नहीं चाह रहे

1926
02:23:21,320 --> 02:23:25,320
न लो के अंदर प्रवेश करने की बा

1927
02:23:25,320 --> 02:23:29,520
जी जी बोलिए सर ये कह रहे तीनों लो में प्रवेश करके धारण करता है

1928
02:23:29,520 --> 02:23:33,840
इनसे यह पूछो तीनों लोको में प्रवेश किसने किया था तीनों लोको में प्रवेश

1929
02:23:33,840 --> 02:23:38,040
जो है जो हमारे भ श्री विष्णु जी ने जब बली जी के समय पर तीनों लोको

1930
02:23:38,040 --> 02:23:39,560
में प्रवेश किया था तो उन्होंने

1931
02:23:39,560 --> 02:23:43,600
यह चीज साबित की हुई है य तीनों लो में प्रवेश कबीर दास को घुसा रहे हैं यह क्या

1932
02:23:43,600 --> 02:23:47,760
मतलब है भाई संदीप जी एक

1933
02:23:47,760 --> 02:23:51,920
बात आपको याद दिलाना चाहूंगा जो उनकी गग लाइन है वो है

1934
02:23:51,920 --> 02:23:56,360
हम उतना मानेंगे जितना हमें अच्छा लगेगा तो कहां से हम बामन

1935
02:23:56,360 --> 02:24:01,000
का प्रमाण दे देंगे हम हम जो है जहा कहीं कहीं प

1936
02:24:01,000 --> 02:24:05,040
गीता में काल ने बोल दिया है तो जहां पर भी हम प्रमाण देंगे वही पर काल

1937
02:24:05,040 --> 02:24:09,560
ने बोला होगा तो हम कहां से प्रमाण दे दे तो पहले

1938
02:24:09,560 --> 02:24:13,800
हमें बता तो दे इतनी कृपा तो कर दे कि भैया ये ये चीज ये 35

1939
02:24:13,800 --> 02:24:19,800
श्लोक है गीता के ये हम नहीं मानते बाकी सब सही है अब दो तुम प्रमाण

1940
02:24:21,120 --> 02:24:25,440
मैं सौगंध खा के कह रहा हूं जो बाकी के बचे हुए 665

1941
02:24:25,440 --> 02:24:29,640
लोक होंगे उन्हीं पर य पूरा तंत्र तसने कर

1942
02:24:29,640 --> 02:24:33,680
दूंगा सर आपको एक बात बताता हूं अभी इन्होने आपसे कुछ बात कर रहे थे

1943
02:24:33,680 --> 02:24:38,400
जबी इन्होने बोला 15 ब 18 में एक शब्द आता है लोको वेद च व

1944
02:24:38,400 --> 02:24:42,400
वहां पर तो इनको यह समझाया गया लोक वेद का मतलब है जो संसार बातें है

1945
02:24:42,400 --> 02:24:46,720
जबक वहां पर लिखा हुआ है लोको वेद लोक और वेद में

1946
02:24:46,720 --> 02:24:50,880
इन्होंने उसको जो समझाया हुआ संसारी बात कर दि है शब्द

1947
02:24:50,880 --> 02:24:55,280
नहीं है वहा पर ऐसे समझाया हु इनको म

1948
02:24:55,280 --> 02:24:59,320
च को तो हटा ही दिया लोक वेद का मतलब जसे सुनी सुनाई बात ऐसे इनके

1949
02:24:59,320 --> 02:25:03,360
दिमाग में सेट अप किया हुआ हैय चक्कर है

1950
02:25:03,360 --> 02:25:07,360
इनका जवाब सुनने नहीं आते वो सिर्फ अपना सवाल रखने आते

1951
02:25:07,360 --> 02:25:11,800
हैं फिर हम जो भी जवाब देंगे काल मन की काल मन से काल

1952
02:25:11,800 --> 02:25:15,960
मन से काल मन से भाई जवाब होना चाहिए ही नहीं

1953
02:25:15,960 --> 02:25:21,640
कहां से जवाब जहा से भी जवाब देंगे काल काल काल और

1954
02:25:21,640 --> 02:25:25,720
मुझे अच्छा लगेगा अब उनके लिए वो उनको अच्छा लगेगा

1955
02:25:25,720 --> 02:25:29,760
फिर सर कंस के दिमाग में ना काल ही घुसा हुआ तभी श्री कृष्ण जी

1956
02:25:29,760 --> 02:25:33,960
ने उसको ठोका था इसलिए काल के चक्र में इनको समझ नहीं आती है च चलिए

1957
02:25:33,960 --> 02:25:36,600
चलिए चलिए चलिए

1958
02:25:36,600 --> 02:25:40,640
ठीक है अब जो है हम लोग फिर आएंगे

1959
02:25:40,640 --> 02:25:45,040
लाइव किसी और के साथ पर पहले हमें कुछ चीज फिक्स करनी होंगी

1960
02:25:45,040 --> 02:25:50,600
पहले हमें कुछ चीजें फिक्स करनी होगी हां जी

1961
02:25:50,600 --> 02:25:54,720
बहुत बहुत धन्यवाद है आपकी वजह से ना हम लोग इस प्लेटफार्म प आए

1962
02:25:54,720 --> 02:25:58,880
हैं और इनकी जो है हम लोग बहुत ही अच्छे तरीके से ऐसी तैसी कर पा रहे हैं वरना ये चीज

1963
02:25:58,880 --> 02:26:03,200
बहुत मुश्किल हो पा रही अगर पेन से काटना शुरू किया जाए

1964
02:26:03,200 --> 02:26:07,240
तो इस पूरे ग्रंथ का ऐसा निचोड़ निकाला जा सकता है

1965
02:26:07,240 --> 02:26:11,800
जो इनके पूरे कथानक के विरुद्ध हो जी जी

1966
02:26:11,800 --> 02:26:15,960
बकुल अब मेरी बात क्यों नहीं मानोगे मैं भी कह दूंगा

1967
02:26:15,960 --> 02:26:20,400
मेरे पास जो है भगवान ने शक्ति दी है रात में मैं भी कह दूंगा दो चार लोग बोल

1968
02:26:20,400 --> 02:26:25,880
हां भाई मैंने देखा था बिल्कुल बिल्कुल सही बात

1969
02:26:25,880 --> 02:26:30,240
है सर आपका जो प्रयास है ना बहुत हट के प्रयास है

1970
02:26:30,240 --> 02:26:34,360
मेरे को लगता है कि इनके जितने भी शिष्य है ना लगभग जितना आपका

1971
02:26:34,360 --> 02:26:39,240
प्रयास है इनके 70 80 पर शिष्य तो आपके शिशे बन जाएंगे मुझे लग रहा है

1972
02:26:39,240 --> 02:26:43,240
20 पर का तो कोई इलाज नहीं है 20 30 पर का कोई इलाज नहीं है लेकिन 70 पर

1973
02:26:43,240 --> 02:26:45,880
आपके शिशे बन

1974
02:26:45,880 --> 02:26:50,280
जाएंगे देखो अब यहां पर ये कह रहे हैं देखिए यहां पर

1975
02:26:50,280 --> 02:26:52,600
यह कह रहे रामपाल दास

1976
02:26:52,600 --> 02:26:56,960
जी इसलिए यहां पर ब्राह्मण का यह गलती हो गई इनसे

1977
02:26:56,960 --> 02:27:01,240
ब्राह्मण लिख दिया है ये गलती हो गई है ब्राह्मण का अर्थ जो है अक्षर

1978
02:27:01,240 --> 02:27:05,800
ब्रह्म है

1979
02:27:05,800 --> 02:27:09,880
बताओ सर इनके दिमाग में एक सेट कि हु इसका अर्थ यही है तो दूसरा अर्थ

1980
02:27:09,880 --> 02:27:12,800
हो नहीं सकता

1981
02:27:12,800 --> 02:27:17,000
जबक इनको जवाब नहीं सुनना है उनको केवल प्रश्न करना है

1982
02:27:17,000 --> 02:27:21,320
प्रश्न करने के बाद जब जवाब दिया जाएगा मैनिपुलेशन की बात है

1983
02:27:21,320 --> 02:27:25,400
काल ने बोला है अरे भैया तो करे क्या आए क्यों जवाब नहीं सुनना

1984
02:27:25,400 --> 02:27:29,560
तो जितना मैंने बोला है तना मेरी जो निश्चित

1985
02:27:29,560 --> 02:27:33,680
लकीर खीची है उसम से दो अच्छा वो लकीर खींचो वो नहीं

1986
02:27:33,680 --> 02:27:39,680
खीचू सर

1987
02:27:41,720 --> 02:27:45,920
यत गल लिक पब

1988
02:27:45,920 --> 02:27:50,480
करण संत ने वाणी में ीरा और मनरा लिखा हुआ है लेकिन

1989
02:27:50,480 --> 02:27:56,480
जी संत नहीं है इसलिए गलती कर रहे हैं

1990
02:27:56,480 --> 02:28:00,640
और हायह देखिए रामपाल

1991
02:28:00,640 --> 02:28:03,240
जी

1992
02:28:03,240 --> 02:28:07,440
कबीरा सर जो नानक देव जी की बात कर रहे नानक देव जी का जो व

1993
02:28:07,440 --> 02:28:13,440
स्टार्टिंग का व है ना उने पता क्या बोला है एक ओंकार

1994
02:28:13,880 --> 02:28:19,880
सतनाम एक बार य पब्लिक कर दीजिए लिंक को पब्लिक कर दीजिए

1995
02:28:21,880 --> 02:28:26,200
नानक देव जी ने बोला है नानक देव जी ने बोला है एक ओंकार

1996
02:28:26,200 --> 02:28:30,280
सतनाम और यही बात गीता जी में लिखी ओंकार मैं ही हूं श्री विष्णु जी ने

1997
02:28:30,280 --> 02:28:36,280
बोला तो फिर कनेक्ट हो तो रहा और कैसे कनेक्ट करना

1998
02:28:38,320 --> 02:28:42,400
है देखिए यहां पर जितने भी रामपाल

1999
02:28:42,400 --> 02:28:48,400
जी के शिष्य आए ा ले जानने की इच्छा से

2000
02:28:50,440 --> 02:28:54,840
पंडित जी अपना ज्ञान देने और नहीं सुनने के लिए

2001
02:28:54,840 --> 02:28:59,080
किसी का समय खराब करने के लिए ना आए इनने

2002
02:28:59,080 --> 02:29:03,200
बड़ी लेकर आए जानने की इच्छा लेकर के आए नहीं पता

2003
02:29:03,200 --> 02:29:07,680
है तो शवा जी से भी पूछ सकते किका हमें नहीं पता बताइए और

2004
02:29:07,680 --> 02:29:13,440
आर देख

2005
02:29:13,440 --> 02:29:17,480
जी गोविंद गुरुकुल जी आपसे मैं एक चर्चा बस करना चाहता

2006
02:29:17,480 --> 02:29:21,520
हूं उसके बाद फिर हम लोग लाइव करेंगे साथ में एक मुझे आपसे टेलीफोन की

2007
02:29:21,520 --> 02:29:26,000
एक छोटी सी बात करनी है फिर हम लोग आएंगे लाइव है ना

2008
02:29:26,000 --> 02:29:30,160
एक मैं बात कह रहा था कि देखिए व्यक्ति आता है प्रश्न लेके

2009
02:29:30,160 --> 02:29:34,280
भाई यहां ये क्यों लिखा है वहा वो क्यों लिखा है अा ठीक है जी तो हम उसका जवाब

2010
02:29:34,280 --> 02:29:38,640
देते हैं देखो भाई यहां ये इसलिए लिखा है ये ऐसा है य ऐसा है क्योंकि यय

2011
02:29:38,640 --> 02:29:42,720
लिखा है ये तो काल ने बोला है अच्छा चलो

2012
02:29:42,720 --> 02:29:47,080
य यहां से छोड़ देते वेद प चलते हैं वेद में ये लिखा है

2013
02:29:47,080 --> 02:29:52,960
अरे ये तो मेरे को अच्छा ही नहीं लग रहा ये

2014
02:29:52,960 --> 02:29:57,160
माते तो चलो गीता प वापस आ जाते एक काम करो वो जो जहा

2015
02:29:57,160 --> 02:30:01,360
जहा प काल ने बोला है वो हमें बता दो जिससे की हम उ

2016
02:30:01,360 --> 02:30:05,520
वहा से जवाब दे जहा पर कालने ना बला हो नहीं नहीं ये मैं नहीं बता

2017
02:30:05,520 --> 02:30:09,680
कालने बोला पता नहीं है यब इनको ढूंढना

2018
02:30:09,680 --> 02:30:15,080
पड़ेगा अच्छे से सभी को मिलकर अपने शलोक लेके आ जाना

2019
02:30:15,080 --> 02:30:20,600
जिसने निष्ठा पूर्वक [हंसी]

2020
02:30:20,600 --> 02:30:24,840
शलोक लेके आइए और फिर गीता की बात करिए इनका

2021
02:30:24,840 --> 02:30:28,880
ना कबीर देव और कविन के अंदर ना कबीर दास को ढूंढ रहा है ऐसा जैसे आलू

2022
02:30:28,880 --> 02:30:32,920
बुखारे के अंदर आलू को ढूंढ रहे है आलू बुखारे को आलू बोलने

2023
02:30:32,920 --> 02:30:37,040
से वो सब्जी नहीं वो नहीं बन जाएगा सब्जी नहीं बन जाएगा इनको अकल

2024
02:30:37,040 --> 02:30:41,840
नहीं आती इस बात की आइए पंडित जी कुछ बात कहनी थी आपको

2025
02:30:41,840 --> 02:30:46,320
सर अब दारुण शब्द ना दारुण दारुण में ये दारू ढूंढ लेंगे ऐसे लोग है

2026
02:30:46,320 --> 02:30:50,880
ये मैंने भी तो आइएगा आप लाइव ना

2027
02:30:50,880 --> 02:30:54,880
मैंने मूल में मूल ही ढूंढ तो लिया मैं भी देखो इतना इतना

2028
02:30:54,880 --> 02:30:58,880
ढूंढ दूंगा ब्राह्मण में मैं ब्राह्मण ढूंढ दूंगा

2029
02:30:58,880 --> 02:31:03,440
ये लोग कैलाश में केला ना ढूंढ ले अब

2030
02:31:03,440 --> 02:31:07,600
भैया जी अगर आप अब लाइव आएंगे तो किसी एक शास्त्र पर ही चर्चा करनी

2031
02:31:07,600 --> 02:31:08,100
है गीता

2032
02:31:07,960 --> 02:31:11,960
पर ही चर्चा करनी है सबसे पहले तो अगर अगर शास्त्र की बात करनी

2033
02:31:11,960 --> 02:31:15,960
है तो ये पहले बताए वो 35 श्लोक कौन से हैं और

2034
02:31:15,960 --> 02:31:20,200
अगर आना है फिर भी आइए मगर फिर शास्त्र प बात नहीं होगी

2035
02:31:20,200 --> 02:31:24,720
फिर बात होगी ईश्वर सर्व शक्तिमान है कि नहीं बकक

2036
02:31:24,720 --> 02:31:29,040
शास्त्र नहीं होगी अगर शास्त्र प करनी है तो आप ये लेके आइए 35

2037
02:31:29,040 --> 02:31:33,080
लोक कौन से गीता के जी जी जी शत्र

2038
02:31:33,080 --> 02:31:37,360
साथ लेकर के आइए जी जी और

2039
02:31:37,360 --> 02:31:43,360
वेद को कहां पर नहीं मानना कहां मानना यह भी लेके आइए और

2040
02:31:46,800 --> 02:31:51,080
क्यों शास्त्र को कहां प मानना

2041
02:31:51,080 --> 02:31:55,160
है कहां नहीं मानना है ये सब व्याख्या लेके आइए अन्यथा शस्त्र लेके

2042
02:31:55,160 --> 02:31:59,440
मत आइए हम आपको जो है वैसे ही सामान्य

2043
02:31:59,440 --> 02:32:04,000
तरीके से सामान्य व्यक्ति की तरीके से आपसे हम बात कर लेंगे

2044
02:32:04,000 --> 02:32:08,680
जी जी जीकी जी चलिए सभी को जय श्री राम समय देने के लिए

2045
02:32:08,680 --> 02:32:13,280
और जी जी जय श्री राम जय श्री राम आपका ल से बहुत बहुत धन्यवाद श

2046
02:32:13,280 --> 02:32:17,320
जी बहुत-बहुत धन्यवाद बहुत-बहुत धन्यवाद जय श्री राम

2047
02:32:17,320 --> 02:32:21,480
आज का वो दश्य बढ़िया रहा जो मैंने जब दिखाया ना मली मूल को मूली

2048
02:32:21,480 --> 02:32:26,440
करके य क्या हो रहा क्या हो रहा

2049
02:32:26,440 --> 02:32:30,640
है का प ी में कैसे आ गया यह कैलाश

2050
02:32:30,640 --> 02:32:35,080
में केला

2051
02:32:35,080 --> 02:32:40,080
ढूंढ जय श्री राम जय श्री

2052
02:32:40,080 --> 02:32:44,720
राम और सभी लोग आमंत्रित है किसी कोई भी

2053
02:32:44,720 --> 02:32:49,040
किसी भी प्रकार से सहमत ना हो तो वो आ सकता है हमसे

2054
02:32:49,040 --> 02:32:53,800
संपर्क करें अगर उसको यहां आने में कोई डर है कोई बीच का चैनल ढूंढा जाएगा

2055
02:32:53,800 --> 02:32:57,800
अगर चैनल पर आने में डर है इंटरनेट पर डर है तो कोई

2056
02:32:57,800 --> 02:33:02,760
बीच का स्थान ढूंढा जाएगा संपर्क करिए गुर्दा

2057
02:33:02,760 --> 02:33:08,040
दिखाइए बा गुर्दा दिखाइ संपर्क करिए

2058
02:33:08,040 --> 02:33:12,400
74836 ट

2059
02:33:12,400 --> 02:33:16,440
करिए और नास्त्र से जुड़िए हम लोग

2060
02:33:16,440 --> 02:33:20,440
नाम जप कर रहे हैं सब लोग साथ में मिलकर के जो समर्थक है वो ईश्वर का

2061
02:33:20,440 --> 02:33:24,440
बल एकत्रित करें नामा स्त्र से जुड़िए

2062
02:33:24,440 --> 02:33:28,640
और अगर क्लासेस से जुड़ना है तो टप करिए इसी नंबर

2063
02:33:28,640 --> 02:33:32,760
पर और अगर धर्म रक्षा अभियान में साथ निभाना है कंधे से कंधा मिलकर

2064
02:33:32,760 --> 02:33:36,880
मिलाकर चलना है तो आप धर्म रक्षा अभियान के लिए भी ट

2065
02:33:36,880 --> 02:33:41,000
कर सकते हैं ठीक सभी को जय

2066
02:33:41,000 --> 02:33:47,000
श्री राम जय जय श्री राम जय जय श्री

2067
02:33:48,720 --> 02:33:52,720
राम m
