1
00:00:03,280 --> 00:00:08,360
सभी को जय श्री

2
00:00:08,360 --> 00:00:12,440
राम जैसा कि आप जानते हैं हम पिछले कई दिनों

3
00:00:12,440 --> 00:00:16,640
से लगातार जो रामपाल

4
00:00:16,640 --> 00:00:20,640
दास जी के द्वारा फैलाई जा रही जो

5
00:00:20,640 --> 00:00:24,800
सो कॉल्ड धर्म की व्याख्या है धर्म ब्रम की

6
00:00:24,800 --> 00:00:29,040
व्याख्या उस पर अलग-अलग दृष्टिकोण से प्रकाश डालने का प्रयास

7
00:00:29,040 --> 00:00:33,160
कर रहे हैं कि जो लोग थोड़ा भी

8
00:00:33,160 --> 00:00:36,480
जिनमें कॉमन सेंस

9
00:00:36,480 --> 00:00:38,880
है

10
00:00:38,880 --> 00:00:44,880
और जो थोड़ा भी सकारात्मकता से देखने का प्रयास करते हैं चीजों

11
00:00:45,040 --> 00:00:49,280
को तो उनको समझ में आएंगी अवश्य रूप से य सब

12
00:00:49,280 --> 00:00:54,000
बातें उस पर हम प्रकाश डाल रहे हैं

13
00:00:54,000 --> 00:00:58,520
और जैसे कल एक भाई साहब जो पहले आए थे

14
00:00:58,520 --> 00:01:02,680
हालांकि सत्य तक पहुंचने के लिए मेहनत करनी पड़ती

15
00:01:02,680 --> 00:01:06,000
है मगर फिर

16
00:01:06,000 --> 00:01:08,200
भी

17
00:01:08,200 --> 00:01:12,560
वो घुमा नहीं रहे थे उतना ज्यादा बातों को और अंततोगत्वा

18
00:01:12,560 --> 00:01:16,640
उन्होंने कुछ चीजों को कुछ तत्वों को स्वीकार भी किया था सबसे

19
00:01:16,640 --> 00:01:19,000
पहले जुड़े थे

20
00:01:19,000 --> 00:01:23,080
जो व्यक्ति कल आने वाले थे जय

21
00:01:23,080 --> 00:01:27,680
श्री राम हर जी जो सज्जन कल आने वाले थे

22
00:01:27,680 --> 00:01:32,400
जिनका फोटो लगा हुआ था थंबनेल में

23
00:01:32,400 --> 00:01:37,040
वह दुर्भाग्यवश किसी कारण से जुड़ नहीं

24
00:01:37,040 --> 00:01:40,320
पाए

25
00:01:40,320 --> 00:01:44,440
और ना जुड़ पाने के कारण

26
00:01:44,440 --> 00:01:49,000
उनको शायद असहज लगा और पता नहीं क्या-क्या आया उनके दिमाग में तो

27
00:01:49,000 --> 00:01:53,520
उन्होंने काफी तैयारी की थी ऐसा मुझे बताया गया उनके

28
00:01:53,520 --> 00:01:57,520
द्वारा जब वोह कल नहीं जुड़ पाए तो आज उनसे सुबह फिर से बात हुई

29
00:01:57,520 --> 00:02:02,240
तो उन्होंने कहा कि भाई कोई साधना चैनल है

30
00:02:02,240 --> 00:02:06,320
उसका हम प्लॉट अरेंज कर लेते हैं आप उस पर आ जाइए

31
00:02:06,320 --> 00:02:10,400
साधना चैनल प तो हमने क यदि साधना चैनल व आप लोगों

32
00:02:10,400 --> 00:02:14,400
का नहीं है तो हम अवश्य रूप से आ जाएंगे क्योंकि मेरे ख्याल

33
00:02:14,400 --> 00:02:20,400
से इन लोगों ने अपना भी एक साधना चैनल बना

34
00:02:22,200 --> 00:02:26,400
लिया अभी एक मैंने सज्जन का मैसेज देखा यहां पर आते ही

35
00:02:26,400 --> 00:02:31,840
कि देखा रामपाल की ताकत शिवांश

36
00:02:31,840 --> 00:02:36,240
भाग गया

37
00:02:36,240 --> 00:02:40,440
भाई हम लोगों के रक्त में कुछ

38
00:02:40,440 --> 00:02:44,760
दूसरी चीजें बहती है आप सिर्फ पाखंड दिखाते हैं

39
00:02:44,760 --> 00:02:49,160
गीता को मानने का हमारे रक्त में बहती है

40
00:02:49,160 --> 00:02:53,320
गीता भगवत गीता आपका केवल पाखंड है आपके लिए

41
00:02:53,320 --> 00:02:57,400
तो प्रमाण है नहीं वो प्रमाण आपका कबीर सागर है वो भी कितना है कितना नहीं

42
00:02:57,400 --> 00:03:03,400
है वो बात की बात है तो

43
00:03:03,560 --> 00:03:07,640
हम मर सकते हैं हार

44
00:03:07,640 --> 00:03:12,440
नहीं सकते भाग नहीं सकते है ना

45
00:03:12,440 --> 00:03:17,200
ठीक है तो आप आइए

46
00:03:17,200 --> 00:03:21,240
यदि आप भगोड़े नहीं है तो आइए सामने कुछ बातें करें कुछ तथ

47
00:03:21,240 --> 00:03:25,400
करें त पर बात कर सैद्धांतिक चर्चा करते ही नहीं जितन से

48
00:03:25,400 --> 00:03:30,240
भी सिद्धांति चर्चा हमने छेड़ी है भले ही वो आर्य समाज

49
00:03:30,240 --> 00:03:34,400
भले ही वो इकन भले ही वो ये रामपाल वाले सब

50
00:03:34,400 --> 00:03:38,520
लोग अपना अपना बैठ कर के अपना अपना एक रूम बनाया उसमें अकेले में

51
00:03:38,520 --> 00:03:42,680
सामने नहीं जाना भैया शिवांश से डर लगता है आवान से डर

52
00:03:42,680 --> 00:03:46,960
लगता है सामने नहीं जाना है अकेले अपना एक रूम देखले

53
00:03:46,960 --> 00:03:51,000
कुंडी लगी है नहीं कुंडी लगी है कि नहीं कुंडी देख के कुंडी लगी है कि नहीं कुंडी

54
00:03:51,000 --> 00:03:55,560
लगने के बाद हम लोग अपना बनाएंगे और बोलेंगे बढ़िया

55
00:03:55,560 --> 00:04:00,600
और जनता जो है ताली ठोके गी वाह वाह वाह वाह वाह

56
00:04:00,600 --> 00:04:04,640
जनता ली ताली ठोके गी अर्ज किया है वाह वाह वा वा अमा

57
00:04:04,640 --> 00:04:08,680
शुरू तो करने दो वो वाला हाल है

58
00:04:08,680 --> 00:04:13,000
आर्य समाज यों से हमने बात की उन्होंने आज

59
00:04:13,000 --> 00:04:17,120
तक ना तो अपनी परंपरा प्रस्तुत की अंततोगत्वा इस पर आ गए

60
00:04:17,120 --> 00:04:18,920
कि हमें पर परमेश्वर से डायरेक्ट

61
00:04:18,920 --> 00:04:23,000
ज्ञान मिला है इसकन वालों से

62
00:04:23,000 --> 00:04:27,080
बात की अल्लाह और कृष्ण समान तो शिव और कृष्ण में भेद

63
00:04:27,080 --> 00:04:31,320
क्यों वैष्णवास्त्र तो प्योर वैष्णव बनो

64
00:04:31,320 --> 00:04:36,240
राघवाचार्य जी को सुनो कहां करते अल्लाह और

65
00:04:36,240 --> 00:04:42,080
कृष्ण

66
00:04:42,080 --> 00:04:46,160
अच्छा

67
00:04:46,160 --> 00:04:50,200
और रामपाल वालों कि से बात की तो ना

68
00:04:50,200 --> 00:04:54,440
तो ईश्वर को सर्वशक्तिमान सिद्ध करने के विषय में

69
00:04:54,440 --> 00:04:58,520
सिद्ध अगर ईश्वर को वैसा मान ले जैसा हम बता रहे तो उससे

70
00:04:58,520 --> 00:05:02,800
होने वाली जो हानि अपने हिसाब से ही सब कल्पित कर लिया मना कल्पित

71
00:05:02,800 --> 00:05:07,400
तरीके से सब आरोप कि भाई ऐसा ईश्वर है वैसा ईश्वर है

72
00:05:07,400 --> 00:05:13,400
ऐसा ईश्वर कहेंगे तो वह नास्तिक हो

73
00:05:14,680 --> 00:05:19,360
जाएंगे अब इस पर आ गए हम कुंडी वाले नहीं है

74
00:05:19,360 --> 00:05:23,680
तो भाई जितना आपकी वह है

75
00:05:23,680 --> 00:05:27,920
ओड़ने वाली चादर उतने पैर पसार ना भाई

76
00:05:27,920 --> 00:05:32,240
फ बड़ी बड़ी बड़ी डी क्यों ते हो फर

77
00:05:32,240 --> 00:05:37,880
है ना नहीं हानी चाहिए

78
00:05:37,880 --> 00:05:41,880
तो अब जैसे आर समाजी से हमने बात की

79
00:05:41,880 --> 00:05:45,920
आपकी परंपरा क्या है कैसे आए वेदा आदि शास्त्र आप तक कोई

80
00:05:45,920 --> 00:05:50,440
उत्तर नहीं अंत तो परमेश्वर ने दिया वो बात और है कि बजान

81
00:05:50,440 --> 00:05:54,520
जी से ज्ञान लिया दो साल यह हुआ वो हुआ वो बात और है कि आप स्वयं

82
00:05:54,520 --> 00:06:00,360
भी अभी तक कहते रहे कि हमारी परंपरा ब्रह्मा से चलती है अब डायरेक्ट

83
00:06:00,360 --> 00:06:03,320
ज्ञान दे गए

84
00:06:03,320 --> 00:06:07,400
वो तो इस बारे में कोई चर्चा नहीं होगी इसकी परंपरा

85
00:06:07,400 --> 00:06:11,560
क्या है किसका ईश्वर सर्वशक्तिमान है नहीं है इस

86
00:06:11,560 --> 00:06:15,720
बारे में कोई शिवांश जी की संस्था का रजिस्ट्रेशन नंबर क्या

87
00:06:15,720 --> 00:06:19,760
है बताएंगे भैया हमारा रजिस्ट्रेशन नंबर जिनको

88
00:06:19,760 --> 00:06:23,920
मालूम होना चाहिए मालूम है और ऐसा

89
00:06:23,920 --> 00:06:28,280
कोई ना तो सनातन सिद्धांत है और ना ही कानून

90
00:06:28,280 --> 00:06:29,800
है कि अगर हम

91
00:06:29,800 --> 00:06:33,960
चला रहे तो उस पर लिख करके बैठे अगर हम कोई

92
00:06:33,960 --> 00:06:38,320
भी कभी भी कहीं पर भी कोई बात कर रहे तो वहां पर रजिस्ट्रेशन नंबर हो पैन कार्ड नंबर

93
00:06:38,320 --> 00:06:43,040
हो जहां आवश्यक होगा

94
00:06:43,040 --> 00:06:47,160
दिखाएंगे आप अपना अस्तित्व सिद्ध नहीं कर पा रहे हैं

95
00:06:47,160 --> 00:06:51,160
ऋषि उवाच नाम से पहले प्रोपेगेंडा फैलाते

96
00:06:51,160 --> 00:06:55,440
हैं उसके बाद शंकराचार्य के मठ

97
00:06:55,440 --> 00:06:59,600
में जाकर के माथा पीटते हैं लिखित में क्षमा याचना

98
00:06:59,600 --> 00:07:04,360
करते हैं उसके बाद फिर आ कर के उनको फिर अभद्र भाषा शैली का उपयोग करते हैं उनके

99
00:07:04,360 --> 00:07:08,400
लिए अपना नाम बदल लेते हैं आपका वास्तविक नाम क्या है पब्लिक को नहीं

100
00:07:08,400 --> 00:07:12,440
पता है और आप लोगों से उनकी वास्तविकता पूछ रहे

101
00:07:12,440 --> 00:07:16,680
हैं तो आपका कोई अस्तित्व

102
00:07:16,680 --> 00:07:20,760
ही नहीं है जो आप ये बोल रहे हो कि भा यह दिखाओ वो दिखाओ भाई कोई आएगा

103
00:07:20,760 --> 00:07:24,920
ठीक ठाक व्यक्ति तो दिखाएंगे हम

104
00:07:24,920 --> 00:07:28,960
आपके प्रति कोई उत्तरदाई नहीं है कि आप हमसे कुछ भी पूछते रहे हम आपको बताते

105
00:07:28,960 --> 00:07:33,120
रहे आप सिद्ध करिए अपना कि आप यू हैव

106
00:07:33,120 --> 00:07:37,600
समथिंग यू आर समथिंग व सिद्ध करिए आप प्रूव करिए

107
00:07:37,600 --> 00:07:41,600
है ना बकवास बातें जब सिद्धांति सब

108
00:07:41,600 --> 00:07:45,040
सिद्धांत नहीं रह गए तो यही तो करेंगे

109
00:07:45,040 --> 00:07:49,920
भाई जैसे क्रिश्चन मिशनरीज होती हैं

110
00:07:49,920 --> 00:07:54,120
वो यदि अपना काम कर रही होती है कि भाई हमें जो है धर्म प्रवर्तन कराना

111
00:07:54,120 --> 00:07:58,200
ये कराना कोई व्यक्ति उनके रास्ते का कांटा बनने

112
00:07:58,200 --> 00:08:02,520
लगता है तो जब उनके पास सामने से चीजें

113
00:08:02,520 --> 00:08:06,760
नहीं होती है कुछ करने के लिए तो क्या करते हैं ये आक्षेप

114
00:08:06,760 --> 00:08:10,760
लगा दो वो आक्षेप लगा दो इसमें फसा दो वो फसा दो वही तो कर रहे हैं

115
00:08:10,760 --> 00:08:15,680
यही चेहरा तो सामने लाना है सनातन का चोला ओड़कर

116
00:08:15,680 --> 00:08:20,080
क्रिश्चन जैसे काम करने वाले कौन लोग

117
00:08:20,080 --> 00:08:22,600
हैं

118
00:08:22,600 --> 00:08:27,720
यही सामने लाना है

119
00:08:27,720 --> 00:08:33,720
तो जिनको मालू होना चाहिए उनको मालूम है

120
00:08:34,160 --> 00:08:38,240
और आपके कहे पर हम उसको प्रदर्शित नहीं

121
00:08:38,240 --> 00:08:42,400
करेंगे हमें जहां पर प्रदर्शित करना होगा जहां के लिए उत्तरदाई

122
00:08:42,400 --> 00:08:47,760
है हम प्रदर्शित करने के लिए वहां करेंगे ठीक है

123
00:08:47,760 --> 00:08:52,320
और इसके लिए वचन है हमारा चाहे जो हो जाए

124
00:08:52,320 --> 00:08:56,360
करते रहो कोशिश आप अपने आप को सिद्ध करिए

125
00:08:56,360 --> 00:09:00,240
कि हमें आपके समक्ष वो रखना अनिवार्य है

126
00:09:00,240 --> 00:09:04,400
अगर हमने आपके समक्ष रख दिया चलिए मान लेते हैं तो आपका

127
00:09:04,400 --> 00:09:08,520
जोय कथन है कि वोह सबको मालूम होना चाहिए सार्वजनिक होना चाहिए तो

128
00:09:08,520 --> 00:09:12,600
क्या संसार के प्रत्येक मनुष्य को मालूम पड़ जाएगा अगर हमने अपने

129
00:09:12,600 --> 00:09:16,800
यटू चैनल पर दिखा भी दिया उसको हमने आपको बता दिया

130
00:09:16,800 --> 00:09:21,000
नहीं पड़ेगा ना तो वो बात तो तब भी लागू होती सबको नहीं मालूम है इसका

131
00:09:21,000 --> 00:09:25,120
अर्थ यह है कि जिसको मालूम होना चाहिए उसको मालूम होना चाहिए आपको

132
00:09:25,120 --> 00:09:29,920
मालूम हो या ना हो डजन मैटर

133
00:09:29,920 --> 00:09:32,960
यू आर नथिंग टू

134
00:09:32,960 --> 00:09:37,120
मी है ना और आप तो अपनी संस्था के लिए कुछ

135
00:09:37,120 --> 00:09:41,000
नहीं है मेरे लिए क्या

136
00:09:41,000 --> 00:09:45,080
होंगे यह भाई साहब आने वाले थे अब ये

137
00:09:45,080 --> 00:09:49,720
देखिए धर्मा आचरण इनका कहते हैं कि

138
00:09:49,720 --> 00:09:53,920
जो कबीर पंथ है उसको फॉलो करने वाले लोगों में सात्विकता

139
00:09:53,920 --> 00:09:57,920
होती है यह नशा यह सब छोड़ देते हैं मगर आचरण

140
00:09:57,920 --> 00:10:03,920
में तो नहीं दिखता है इनकी भाषा देखिए कैसी है दिखाइए

141
00:10:04,680 --> 00:10:09,400
भैया भाषा दिखाइए इनकी क्या लिखते हैं ये

142
00:10:09,400 --> 00:10:14,960
यही सिखाया है कबीर

143
00:10:14,960 --> 00:10:20,280
ने कबीर ने इनको क्या सिखाया वोह

144
00:10:20,280 --> 00:10:25,600
देखिए रामपाल दास जी ने जेल धाम से क्या सिखाया

145
00:10:25,600 --> 00:10:30,000
है ये इनका व नंबर मत शो करो भले

146
00:10:30,000 --> 00:10:36,000
हो सके तो नंबर रहने

147
00:10:39,240 --> 00:10:43,400
दो यह हमको जब इनका बस नहीं चला

148
00:10:43,400 --> 00:10:47,480
और शायद वैसे इनसे बात हो हो गई थी कि साधना चैनल पर आएंगे पर

149
00:10:47,480 --> 00:10:51,760
शायद साधना चैनल का इनका मामला बैठ नहीं होगा तो जब य विवश

150
00:10:51,760 --> 00:10:55,760
हो गए और इन्होंने हमारी चीजें देखी तो फिर ये हमको गाली

151
00:10:55,760 --> 00:11:00,240
गलोज वाली भाषा में मैसेज कर रहे हैं और गाली गलो

152
00:11:00,240 --> 00:11:04,280
लिख किसके लिए रहे हैं भगवत पाद आदि शंकराचार्य भगवान के

153
00:11:04,280 --> 00:11:09,040
लिए हमने आज तक कभी रामपाल दास जी को गालियां दी

154
00:11:09,040 --> 00:11:12,080
नहीं

155
00:11:12,080 --> 00:11:17,400
दी तो यह इनकी चैट है

156
00:11:17,400 --> 00:11:21,720
जिसमें यह अभद्र आचरण अपना प्रस्तुत

157
00:11:21,720 --> 00:11:25,600
कर रहे हैं वही तथाकथित

158
00:11:25,600 --> 00:11:31,600
जो गीता को मानने के पाखंड द्वारा एकत्रित कि

159
00:11:31,880 --> 00:11:36,360
और रामपाल दास जी को प्रामाणिक मान्य के रूप में

160
00:11:36,360 --> 00:11:41,880
एकत्रित किया

161
00:11:41,880 --> 00:11:46,320
है

162
00:11:46,320 --> 00:11:50,560
अच्छा ऋषि दस जी आए हैं इन्होंने फॉर्म भरा था

163
00:11:50,560 --> 00:11:54,880
कल ऋषि दस जी को स्टेज पर ले लेता हूं

164
00:11:54,880 --> 00:11:59,400
और संदीप जी भी जुड़ गए हैं जय श्री राम जी

165
00:11:59,400 --> 00:12:03,520
जय श्री राम जय श्री राम ऋषि दस जी आप अपना फेस दिखाए तो

166
00:12:03,520 --> 00:12:08,160
आपसे बात हो कैसे हो प्रभु जी

167
00:12:08,160 --> 00:12:12,800
बस बस कृपा है राम की जी हा

168
00:12:12,800 --> 00:12:17,400
ऋषि दस जी जय श्री

169
00:12:17,400 --> 00:12:23,400
राम अन म्यूट कर दीजिए ना

170
00:12:32,680 --> 00:12:36,680
हां ऋषि दस जी कैसे हैं आप एक

171
00:12:36,680 --> 00:12:41,320
मिनट देख किसी का विषय से हट कर

172
00:12:41,320 --> 00:12:45,640
के विषय से हट कर के अनर्गल बातें करना

173
00:12:45,640 --> 00:12:49,640
जिन पर बात हो ही नहीं रही है उन बातों पर बात करना जैसे

174
00:12:49,640 --> 00:12:53,680
कल हमने जब यह सिद्ध किया कि तुलसीदास जी

175
00:12:53,680 --> 00:12:58,320
के ही द्वारा हनुमान जी की भक्ति भी मोक्ष दायक है

176
00:12:58,320 --> 00:13:02,400
तो फिर वो तुरंत उसने विषय बदला है

177
00:13:02,400 --> 00:13:06,680
ना उसने वहा से यह नहीं कहा यह बात तो आपने सही कही ऐसे नहीं

178
00:13:06,680 --> 00:13:10,840
फिर उसने विषय बदला तो विषय से हट कर के

179
00:13:10,840 --> 00:13:15,520
बात करने से ही सिद्ध हो जाता है कि व्यक्ति के पास अपने सिद्धांत

180
00:13:15,520 --> 00:13:19,840
नहीं है अब स्कोन वाले क्या कर रहे हैं कि

181
00:13:19,840 --> 00:13:24,480
शिवांश नारायण द्विवेदी पहले ऐसे रहता था भाई मेरे शट देखो ना

182
00:13:24,480 --> 00:13:29,160
जाकर मैं पहले कैसा दिखता था कैसा जीवन था

183
00:13:29,160 --> 00:13:33,680
वो सब आपको दिखेगा मैंने डाला है अपने अपने जीवन को डाला है कि मैं कैसे बना

184
00:13:33,680 --> 00:13:37,800
ऐसा भैया वो यह बातें नहीं कर रहे एक मिनट मैं आपको लूंगा

185
00:13:37,800 --> 00:13:42,560
रशी जी वो जो लोग है रामपाल गैंग

186
00:13:42,560 --> 00:13:46,720
और ये इकन वाले इकोन का जो ग्रुप है

187
00:13:46,720 --> 00:13:47,760
रामपाल दास

188
00:13:47,760 --> 00:13:52,240
जी का ग्रुप है और आर समाज का ग्रुप है सैद्धांतिक बातें नहीं है

189
00:13:52,240 --> 00:13:56,240
वो यह नहीं बता रहे चैनल पर कि शरीर शाश्वत है वो नीचे

190
00:13:56,240 --> 00:14:01,040
आ रहा है तो उसको सर्वशक्तिमान कैसे सिद्ध कर इस पर बात नहीं कर रहे

191
00:14:01,040 --> 00:14:05,320
वो इस पर बात कर रहे हैं कि वह यह कर रहा है उसकी संस्था का रजिस्ट्रेशन नंबर

192
00:14:05,320 --> 00:14:09,840
नहीं है व पहले ऐसा दिखता था वो वहां गया तो उसकी बातें हुई

193
00:14:09,840 --> 00:14:13,960
उसके साथ यह हुआ यह सब बातें कर

194
00:14:13,960 --> 00:14:18,120
रहे वह अपने को प्रूव नहीं कर रहे भाई यह सब बातें करने

195
00:14:18,120 --> 00:14:22,400
से ज्यादा से ज्यादा आप क्या कर लेंगे मुझे गलत ही तो सिद्ध

196
00:14:22,400 --> 00:14:28,400
कर लेंगे मेरे गलत होने से आप सही सिद्ध हो जाएंगे

197
00:14:30,520 --> 00:14:34,600
अपने को सही सिद्ध करो ना भाई आर्य समाज से पूछा

198
00:14:34,600 --> 00:14:38,640
ईश्वर को अवाद सिद्ध करो तो वो बता रहा है शंकराचार्य ने भी यह किया

199
00:14:38,640 --> 00:14:42,720
है शंकराचार्य से पढ़ाई किसने इन्होने

200
00:14:42,720 --> 00:14:47,360
अरे भाई शंकराचार्य ने क्या किया क्या नहीं किया तुम अपने ईश्वर को अबाध लिमिटलेस

201
00:14:47,360 --> 00:14:52,240
सिद्ध करो लिमिट नहीं होनी चाहिए उसकी कोई रामपाल दास

202
00:14:52,240 --> 00:14:56,640
के फॉलोअर से पूछा तुम अपने ईश्वर को अवाद सिद्ध करो लिमिटलेस

203
00:14:56,640 --> 00:15:00,800
सिद्ध कर दो अपने ईश्वर को लिमिटलेस लिमिट नहीं होनी चाहिए

204
00:15:00,800 --> 00:15:05,040
सब बातें करेंगे घुमा कर के इधर की उधर की मगर ईश्वर आज

205
00:15:05,040 --> 00:15:09,240
तो एक बहुत अच्छी बात बताता हूं और

206
00:15:09,240 --> 00:15:13,480
इसी प्रकार से इसकन वाले व लिमिट पर बात नहीं करेंगे

207
00:15:13,480 --> 00:15:17,640
ईश्वर सर्वशक्तिमान परम स्वतंत्र मोक्ष शाश्वत धर्म पर बात ही नहीं

208
00:15:17,640 --> 00:15:21,640
होगी अब यह बता रहे हैं कि जो परमेश्वर ने जो ज्ञान

209
00:15:21,640 --> 00:15:25,720
दिया है आर समाज को वो डायरेक्ट दिया य ये 100 स साल

210
00:15:25,720 --> 00:15:29,720
पहले अब बात यह है इनका ज्ञान यद सनातन

211
00:15:29,720 --> 00:15:34,120
है शाश्वत है तो भाई उस ज्ञान का अस्तित्व होना

212
00:15:34,120 --> 00:15:38,160
चाहिए उसके कुछ अस्व पहले का भी

213
00:15:38,160 --> 00:15:42,520
होना चाहिए वो तो कोई अस्तित्व है नहीं

214
00:15:42,520 --> 00:15:45,680
यह सारी चीज है सबका रोना

215
00:15:45,680 --> 00:15:49,920
है सब अलग अलग तरीके से व्यंग बनाएंगे

216
00:15:49,920 --> 00:15:53,920
चेहरा बिगाड़ बिगाड़ करके व रील्स बनाएंगे सब कर लेंगे

217
00:15:53,920 --> 00:15:57,920
ईश्वर सर्वशक्तिमान है धर्म

218
00:15:57,920 --> 00:16:01,960
हमारा शाश्वत है और मोक्ष हमारा परम स्वतंत्र है

219
00:16:01,960 --> 00:16:07,960
इस पर बात नहीं करेंगे इससे भाग

220
00:16:08,160 --> 00:16:14,160
जाएंगे अच्छा आज जरा मैं

221
00:16:15,200 --> 00:16:19,520
एक कहां गए ऋषि दास

222
00:16:19,520 --> 00:16:25,520
जी

223
00:16:32,240 --> 00:16:36,400
यह भाई साहब कह रहे हैं कि आपसे जब प्रमाण मांगा जाता

224
00:16:36,400 --> 00:16:40,520
है परमाणु मांगा जाता है परमाणु तो हम नहीं दे पाएंगे भाई मगर

225
00:16:40,520 --> 00:16:44,680
प्रमाण की बात जब आती है कि जब प्रमाण मांगा जाता है तो

226
00:16:44,680 --> 00:16:48,920
प्रमाण हम कभी देने से पीछे नहीं हटते मगर बात यह है कि

227
00:16:48,920 --> 00:16:53,000
प्रमाण देने के मूल में क्या है जब भी हम कोई प्रमाण प्रस्तुत

228
00:16:53,000 --> 00:16:57,320
करेंगे तो आप वहां से भागेंगे दूसरी चीज पर जाएंगे तो देने का फायदा

229
00:16:57,320 --> 00:17:00,040
क्या है

230
00:17:00,040 --> 00:17:04,200
कुछ भी हम प्रमाण दे दे मैं कह रहा हूं शिव पुराण में शिव जी ने कह दिया मैं परम

231
00:17:04,200 --> 00:17:08,240
ब्रह्म हूं हो गया प्रमाण अब इसको मानोगे नहीं

232
00:17:08,240 --> 00:17:12,920
मानोगे तो फायदा क्या प्रमाण प्रमाण खेलने का

233
00:17:12,920 --> 00:17:17,200
बात तो इसकी है ना कि सीधे तुम्हा तुमको जो उसका अर्थ है तुमने

234
00:17:17,200 --> 00:17:21,200
क्या माना क्या नहीं माना वह अलग हटाओ अब तो तुम दे क्या रहे हो दुनिया

235
00:17:21,200 --> 00:17:24,840
को वह बताओ तुम क्या दुनिया को सर्वशक्तिमान

236
00:17:24,840 --> 00:17:29,800
ईश्वर दे रहे हो तुम क्या दुनिया को परम स्वतंत्र मोक्ष दे रहे

237
00:17:29,800 --> 00:17:32,360
तुम क्या दुनिया को सनातन धर्म दे रहे हो

238
00:17:32,360 --> 00:17:36,600
बस सिंपल दे रहे हो तो मुझे अपने साथ ले चलो कल से मैं प्रचार

239
00:17:36,600 --> 00:17:40,840
प्रचारक हो जाऊंगा और जानते ही हो ना

240
00:17:40,840 --> 00:17:45,080
जब मैं प्रचार करूंगा तो क्या होगा

241
00:17:45,080 --> 00:17:49,120
इतना तो मानते

242
00:17:49,120 --> 00:17:53,800
होगे तो वोह जो भाई साहब

243
00:17:53,800 --> 00:17:57,840
थे कल जो आए थे जो जिसमें हमने हनुमान जी की बातें की

244
00:17:57,840 --> 00:18:01,840
थी संदीप जी जो भाई साहब थे कल

245
00:18:01,840 --> 00:18:07,080
ऑन कर लीजिए जब तक वो नहीं आ रहे आ गए

246
00:18:07,080 --> 00:18:11,080
क्या अब यह बात पूरी कर ले पले जो भाई साहब थे वो जो आए

247
00:18:11,080 --> 00:18:15,760
थे वो अमित दास इन्होने तीन चार दिन पहले

248
00:18:15,760 --> 00:18:20,680
हमको लाइव स्ट्रीम में बेवकूफ कह दिया था

249
00:18:20,680 --> 00:18:25,000
अच्छा तो हमने जब इन्होने बेवकूफ कहा था तो इनको हमने हटा दिया था लाइव स्ट्रीम

250
00:18:25,000 --> 00:18:29,680
से उसके बाद इनका अगले दिन फोन आया हा

251
00:18:29,680 --> 00:18:34,480
उसके बाद इनका अगले दिन फोन आया जी और

252
00:18:34,480 --> 00:18:38,600
फोन में बोलते कि मुझे दोबारा आना है आपकी लाइफ में मैंने कहा पहले आपको हाथ जोड़ के माफी

253
00:18:38,600 --> 00:18:43,240
मांगनी पड़ेगी तब आ सकते बकल ठीक है बक ठीक है तो

254
00:18:43,240 --> 00:18:47,240
बड़ी देर तक फिर उसी फोन कॉल पर ये बात करते रहे कि यहां यह लिखा है वहा

255
00:18:47,240 --> 00:18:47,740
वो

256
00:18:47,360 --> 00:18:51,440
लिखा है मैंने फोन कॉल पर इनको सिद्ध किया कि

257
00:18:51,440 --> 00:18:55,800
अगर तुम्हारे अनुसार 15 एक में जो

258
00:18:55,800 --> 00:19:00,280
उल्टे वृक्ष की व्याख्या बताई जा रही है हालांकि वहा को जानने वाला लिखा है

259
00:19:00,280 --> 00:19:04,560
और वेदों के अनुसार भगवत प्राप्ति है नहीं वेदों में इनके अनुसार

260
00:19:04,560 --> 00:19:08,680
पूरी बात नहीं है इनके अनुसार वेदों में पूरी बात नहीं है ठीक

261
00:19:08,680 --> 00:19:12,720
है तो फिर उल्टे वृक्ष की व्याख्या करने वाले को वेदों

262
00:19:12,720 --> 00:19:17,640
को जानने वाला कहा और वेदों को जानने वाले को यह कह रहे हैं वो तत्वदर्शी

263
00:19:17,640 --> 00:19:21,640
है ये ना उसके अंदर भी इनका अधूरा ज्ञान है उसम

264
00:19:21,640 --> 00:19:25,680
इन्होंने जैसे बोल जड़ तक का ज्ञान दिया हुआ है अब इनसे कोई

265
00:19:25,680 --> 00:19:29,760
पूछ ले ना कि जड़ जड़ किस बीज से हुआ तो इनको होगा उसके बाद

266
00:19:29,760 --> 00:19:33,800
वो बीज किस पदार्थ का बना हु या किस उस का बना वो भी नहीं पता और

267
00:19:33,800 --> 00:19:38,280
बीज डालने वाला कौन है सारा कुछ गीताज में लिखा हु लेकिन गीता जी को मानना नहीं है

268
00:19:38,280 --> 00:19:40,640
क्यों

269
00:19:40,640 --> 00:19:45,240
भगवा जहा इनके मंतव्य के विपरीत जाएंगी चीज

270
00:19:45,240 --> 00:19:49,680
वहां पर यह तुरंत काल ने बोला है या अनुवादक की गलती

271
00:19:49,680 --> 00:19:54,200
दो या तो काल ने बोला है या अनुवादक की गलती है

272
00:19:54,200 --> 00:19:58,360
अच्छा वो बात पूरी कर लू तो जब इससे फोन पर कन्वर्शन होने

273
00:19:58,360 --> 00:20:02,480
लगी अमित दास से तो अमित दास

274
00:20:02,480 --> 00:20:06,680
ने अमित दास को मैंने फोन पर ही प्रूफ किया उसको मानना पड़ा

275
00:20:06,680 --> 00:20:10,720
कि हां जो फाइनल अथॉरिटी है धर्म और अधर्म का

276
00:20:10,720 --> 00:20:14,960
ज्ञान देने वाली वह वैराग्य होना चाहिए उसम वैराग होना प्रमाण

277
00:20:14,960 --> 00:20:19,160
दे दिया मैंने गीता ही मैंने कहा यह वाला पलट यह लाओ यह देखो यह सन्यास लिखा

278
00:20:19,160 --> 00:20:23,280
है यह वैराग्य लिखा है उसने फोन पर ही

279
00:20:23,280 --> 00:20:27,400
जो है उसको जो है ये हो गया अब मैंने कहा

280
00:20:27,400 --> 00:20:31,600
कि तो फिर आओगे फिर आप अब तक तैयार था उसके

281
00:20:31,600 --> 00:20:35,600
बाद क्या हुआ जब यह वैराग वगैरा समझ गया तो उसके बाद

282
00:20:35,600 --> 00:20:39,680
15 मिनट के पहले बोला मैं एक मिनट अपनी अथॉरिटी से बात कर लू जरा

283
00:20:39,680 --> 00:20:43,880
फोन काटा 15 20 मिनट बाद मैंने इनको फोन लगाया

284
00:20:43,880 --> 00:20:48,200
आ रहे हो तो बोले कि नहीं नहीं हमें ऊपर से ऑर्डर

285
00:20:48,200 --> 00:20:52,360
आया है कि अब आप लोग उसकी स्ट्री में मत जाना कोई ज्ञानी व्यक्ति

286
00:20:52,360 --> 00:20:57,080
जाएगा और या फिर उनसे कहो कि हमसे डायरेक्ट संपर्क करे वो जो

287
00:20:57,080 --> 00:21:01,560
एक उन्होंने फोन नंबर दि भया मैंने उस पर मैसेज छोड़ रखा है अभी तक कोई रिप्लाई नहीं आया

288
00:21:01,560 --> 00:21:05,800
है तो ये उस उस समय तक की कहानी थी अब

289
00:21:05,800 --> 00:21:10,000
कल जो व्यक्ति आया वही दोबारा हमने वो भूल गए हम कि इनसे माफी

290
00:21:10,000 --> 00:21:14,040
मंगवानी है हम ये भूल गए स्मरण नहीं रहा तो वो व्यक्ति जब कल

291
00:21:14,040 --> 00:21:17,600
दोबारा आया तो पहले हमने अपनी

292
00:21:17,600 --> 00:21:21,880
हनुमान जी वाली बात उससे कंफर्म करवा ली शांत हो गया उसके बाद वो

293
00:21:21,880 --> 00:21:26,240
कंफर्म करने की बजाय वो इस पर आ गया कि तीन गुणों की भक्ति

294
00:21:26,240 --> 00:21:30,760
वो भी हमने कंफर्म की हमने कंफर्म की मगर

295
00:21:30,760 --> 00:21:34,800
चैप्टर कैसे बदल नहीं नहीं वो हम बात करेंगे वो है आज का मुद्दा है

296
00:21:34,800 --> 00:21:39,040
वो वो हम बात करेंगे उस मगर उसने चालाकी

297
00:21:39,040 --> 00:21:43,200
क्या की कि मैं इसको एक्सेप्ट ना करूं अपनी जो बात यहां

298
00:21:43,200 --> 00:21:47,840
छोटी हो रही है और तुरंत मैं ऐसा चैप्टर खोल दू जिस पर इनका ध्यान चला जाए

299
00:21:47,840 --> 00:21:52,120
हम लोग वहां भी गए वहां भी उसको बोला उसके बाद जब उसने वहां

300
00:21:52,120 --> 00:21:56,320
हमें बिजी कर लिया उसके बाद बात सुननी नहीं है उसको हटाना पड़ा

301
00:21:56,320 --> 00:22:00,360
अब वो व्यक्ति सुबह फोन करके कहता है पता है क्या अब वो व्यक्ति

302
00:22:00,360 --> 00:22:04,720
ये कहता है मैं आपकी स्ट्रीम में दोबारा आऊंगा मैंने कहा ठीक है

303
00:22:04,720 --> 00:22:08,920
माफी मांगनी पड़ेगी वो बोला माफी तो मैं मांगूंगा मगर हम ईश्वर

304
00:22:08,920 --> 00:22:13,200
पर बात नहीं करेंगे किस पे करेंगे ईश्वर

305
00:22:13,200 --> 00:22:17,200
पे हमारी बात ईश्वर पर नहीं होगी मतलब अब तक

306
00:22:17,200 --> 00:22:21,840
यह इतना हमने कर दिया है कि ईश्वर पर बात करने लायक

307
00:22:21,840 --> 00:22:26,040
रामपाल दास को फॉलो करने वाला व्यक्ति नहीं बचा नहीं

308
00:22:26,040 --> 00:22:30,360
बचा तो फिर बाकी रहे क्या फिर हमके रह क्या जब ईश्वर

309
00:22:30,360 --> 00:22:32,720
नहीं है तो धर्म कहां से बचा

310
00:22:32,720 --> 00:22:36,720
मैंने कहा भाई ईश्वर के बिना धर्म का अस्तित्व ही नहीं है जो हम

311
00:22:36,720 --> 00:22:40,880
लोग इतनी डिस्कशन कर रहे हैं लिए कर रहे हैं ये भी तो बात है ना

312
00:22:40,880 --> 00:22:45,120
आप नया ईश्वर लेके आए हो जो ब्रह्मा विष्णु महेश को मंदिरों में पूजा

313
00:22:45,120 --> 00:22:49,320
जा रहा है वो आपके हिसाब से गलत है आप एक नया ईश्वर लेके आए हो

314
00:22:49,320 --> 00:22:54,000
अब आप कह रहे हो मैं ईश्वर पर बात नहीं करूंगा मैं इस पर बात करूंगा चूड़ी बछिया कंगन

315
00:22:54,000 --> 00:22:58,200
बिंदी इन पर बात करूंगा हालांकि हम उसमें भी चित्त करेंगे ऐसा

316
00:22:58,200 --> 00:23:03,560
नहीं करर मगर य टॉपिक बदले

317
00:23:03,560 --> 00:23:08,480
क्यों चलिए इनको लेते हैं

318
00:23:08,480 --> 00:23:14,480
ऋषि ऋषि जी तो नहीं

319
00:23:17,200 --> 00:23:21,320
आ वाली बात इनके सामने करेंगे आ गए

320
00:23:21,320 --> 00:23:25,840
वो अमित दास जो है जिनकी बात हो रही

321
00:23:25,840 --> 00:23:29,120
मूट कर

322
00:23:29,120 --> 00:23:33,920
तो यह ऋषि दास जी तो चले गए फिलहाल अमित दास जी दोबारा आ गए बैक इन

323
00:23:33,920 --> 00:23:39,920
एक्शन जी हा अमित दास

324
00:23:40,160 --> 00:23:45,080
जी मा जय श्री राम भाई कैसे हो

325
00:23:45,080 --> 00:23:50,520
जय श्री राम जय श्री राम संदीप

326
00:23:50,520 --> 00:23:55,080
जीवांश भाई से उस बात के लिए क्षमा मांगता हूं

327
00:23:55,080 --> 00:24:00,080
जिस शब्द से शिवांश भाई को कष्ट हुआ नहीं

328
00:24:00,080 --> 00:24:04,200
जिस शब्द से नहीं आपने कुछ गलत कहा था अपनी

329
00:24:04,200 --> 00:24:08,760
गलती को एक्सेप्ट करिए मुझे तो आप ये भी कह सकते हो भाई उसको बुरा लग गया हो तो सॉरी

330
00:24:08,760 --> 00:24:12,800
वो नहीं आप अपनी गलती एक्से करिए आप ही को

331
00:24:12,800 --> 00:24:16,920
मैं कह रहा हूं जिस दिन मैंने आपसे आपको नहीं

332
00:24:16,920 --> 00:24:21,000
पता है क्या आपने क्या कहा था आप य कए मैंने गलत शब्द बोले थे

333
00:24:21,000 --> 00:24:27,000
उसके लिए सॉरी

334
00:24:29,000 --> 00:24:34,680
शुरुआत में जो हमारी वार्ता हो रही थी तब आपने मुझे स्टीम

335
00:24:34,680 --> 00:24:38,720
से आप आप अब स्टेज पर नहीं है

336
00:24:38,720 --> 00:24:44,600
आपने क्षमा नहीं मांगी आने के बाद दूसरी बातें की आप जा सकते

337
00:24:44,600 --> 00:24:48,640
हैं राम शरण राम

338
00:24:48,640 --> 00:24:54,640
जी

339
00:24:57,320 --> 00:25:01,560
शरण राम जी शरण स्मार्थ जी शिवाजी

340
00:25:01,560 --> 00:25:05,760
गिरी एक मिनट राम जी मैं आपसे बात करता हूं शिवाजी

341
00:25:05,760 --> 00:25:09,800
गिरी बताए जय श्री राम

342
00:25:09,800 --> 00:25:12,760
अन म्यूट कर दीजिए

343
00:25:12,760 --> 00:25:17,360
इनको अब आप जाइए अमित जी अब आपसे बात नहीं होगी

344
00:25:17,360 --> 00:25:23,360
आपने आकर के क्षमा मांगने की बजाय बातों को फिर उलझाना शुरू

345
00:25:25,760 --> 00:25:29,920
किया जी श शिवजी गिरी जी

346
00:25:29,920 --> 00:25:34,240
ये अन म्यूट कर दिया बोलिए शिवजी शिवाजी

347
00:25:34,240 --> 00:25:40,240
आवाज नहीं आ रही आप अन म्यूट कर लीजिए

348
00:25:41,440 --> 00:25:46,520
अपना अपना अन म्यूट कर र अन म्यूट आपने म्यूट कर रखा है अपने

349
00:25:46,520 --> 00:25:51,440
को हा अभी हुआ था

350
00:25:51,440 --> 00:25:55,680
हा सर मुझे एक बात जाननी है आपका

351
00:25:55,680 --> 00:26:01,680
परिचय बताइए पहले जय श्री राम राम

352
00:26:02,840 --> 00:26:07,080
बोलिए तो मुझे र अध्याय

353
00:26:07,080 --> 00:26:11,080
आप अपना परिचय बता रहे थे परिचय मैं

354
00:26:11,080 --> 00:26:15,200
शिवाजी गिरी हूं आगे बताइए अध्यात्मिक बैकग्राउंड क्या

355
00:26:15,200 --> 00:26:20,520
है आपका मैं तो बचपन से ओम का जाप करता

356
00:26:20,520 --> 00:26:24,880
हूं आप रामपाल दास जी के पक्ष को

357
00:26:24,880 --> 00:26:28,960
यहां रखने आए हैं या नहीं नहीं नहीं पले नहीं था अभी छ

358
00:26:28,960 --> 00:26:33,040
महीने से मैं जुड़ा ह वहां प इसलिए आपको बात करनी थोड़ी सी नहीं है तो

359
00:26:33,040 --> 00:26:37,360
अगर आपको कोई जानकारी लेनी है तो आप क्लासेस में आइए अगर आपको

360
00:26:37,360 --> 00:26:41,480
यहां हमारी किसी बात को गलत ठहराना है तो वो गलत बात बोली हमने जो बोली

361
00:26:41,480 --> 00:26:45,760
है बस मैं आपको गलत कहां से बोल रहा हूं अ

362
00:26:45,760 --> 00:26:49,920
आपको आप क्लास में आइएगा हमने क्लास के लिए नंबर दे रखा है वहां आइएगा

363
00:26:49,920 --> 00:26:54,160
प्रश्न पूछने के लिए वहा आइए मैं रामपाल जी का रामपाल

364
00:26:54,160 --> 00:26:58,520
जी महाराज का भक्त हूं लेकिन मुझे एक बताइए आप मुझे थोड़ा सा नहीं क्या रामपाल

365
00:26:58,520 --> 00:27:02,560
रामपाल जी के आप अगर भक्त है तो रामपाल दास जी ने लिखा

366
00:27:02,560 --> 00:27:06,680
है कि भाई गीता में पा पर

367
00:27:06,680 --> 00:27:11,720
ज्ञान काल का है यह मानते हैं

368
00:27:11,720 --> 00:27:15,800
आप 5 पर तो नहीं सुना दो पर सुना

369
00:27:15,800 --> 00:27:18,120
दो पर ज्ञान गंगा पढ़ी

370
00:27:18,120 --> 00:27:22,240
है आपने हा पढ़ी नान पढी

371
00:27:22,240 --> 00:27:26,320
है हा तो सुनिए तो मेरी बात मैं आपसे क्या बात करना चाह

372
00:27:26,320 --> 00:27:30,360
सुनि मेरी बात आपने गीता तेरा

373
00:27:30,360 --> 00:27:34,360
ज्ञान अमृत पढ़ी है क्या अरे भाई साहब मेरी बात तो

374
00:27:34,360 --> 00:27:38,520
सुनी आप मैं क्या बात करने चाता आपसे हम बात ही करने तो बैठे

375
00:27:38,520 --> 00:27:42,760
हैं आप कह रहे हैं कि मैं रामपाल का भक्त हूं अब मैं आपसे पूछ रहा हूं

376
00:27:42,760 --> 00:27:46,960
यदि आप रामपाल के भक्त है तो क्या आप मानते

377
00:27:46,960 --> 00:27:51,960
हैं कि गीता का 5 पर ज्ञान काल ने दिया है गलत

378
00:27:51,960 --> 00:27:56,040
है का उसने उसम अंदर बात हो

379
00:27:56,040 --> 00:28:00,200
गए ना कि मैं काल हूं ये बात हो ग पढ़ा मैंने गीता

380
00:28:00,200 --> 00:28:05,720
पहले कभी नहीं पढ़ा था हमने लेकिन अभी प पढ़ा ता

381
00:28:05,720 --> 00:28:10,120
गीता मानते हैं मैंने वेद पढ़े गीता प

382
00:28:10,120 --> 00:28:13,680
गीता में 700 लोक

383
00:28:13,680 --> 00:28:18,440
है गीता में 700 लोक है 700

384
00:28:18,440 --> 00:28:23,160
5 पर यानी बात

385
00:28:23,160 --> 00:28:27,600
एक मिनट बहुत छोटी सी बात है यानी कि गीता में आपके हिसाब से 35

386
00:28:27,600 --> 00:28:31,920
जो मंत्र 35 श्लोक है वो गलत है बाकी

387
00:28:31,920 --> 00:28:33,120
के 665 जो

388
00:28:33,120 --> 00:28:37,320
श्लोक है वो सही है गीता

389
00:28:37,320 --> 00:28:41,720
बाद में आई वेद पहले है मुझे वेद का जानकारी

390
00:28:41,720 --> 00:28:46,240
वेद का वेद का आपको जानना है यजुर्वेद का यजुर्वेद

391
00:28:46,240 --> 00:28:50,480
का जानना है शलोक को मानते हैं हा

392
00:28:50,480 --> 00:28:56,120
मानता वेद गीता सब सही है पूरा मानते थोड़ा थोड़ा मानते

393
00:28:56,120 --> 00:29:00,440
हैं अभी देखो जो श्लोक है तो सही है श्लोक सही है सारे लेकिन

394
00:29:00,440 --> 00:29:04,960
अनुवाद थोड़ा सा गलत हो गया है अनुवाद गलत हो गया है

395
00:29:04,960 --> 00:29:09,040
अच्छा थोड़ा थोड़ा क हो गया तो आपको कैसे

396
00:29:09,040 --> 00:29:13,720
पता चलेगा कि अनुवाद किसका सही है आपने संस्कृत पढ़ी है क्या

397
00:29:13,720 --> 00:29:18,120
संस्कृत तो नहीं पढ़ी लेकिन मैंने मतलब संस्कृत मतलब

398
00:29:18,120 --> 00:29:23,480
ये करने के लिए बुक आता है ना उससे मैंने मेल किया है तो थोड़ा

399
00:29:23,480 --> 00:29:28,840
सा एक का मेल किया है क्या

400
00:29:28,840 --> 00:29:33,680
किसका दो एक का मेल किया है क्या

401
00:29:33,680 --> 00:29:38,120
रे का मुझे बताना पहले उतना नहीं ऋगवेद का

402
00:29:38,120 --> 00:29:42,520
भा हम आपसे यजुर्वेद की बात तब करें जब यह समझ ले कि आप

403
00:29:42,520 --> 00:29:46,560
वेदों को मानते हैं पूरा की नहीं मानते हैं

404
00:29:46,560 --> 00:29:48,320
मानते हा अब

405
00:29:48,320 --> 00:29:52,440
मैं आपसे पूछ रहा हूं की कल एक भाई साहब आए

406
00:29:52,440 --> 00:29:56,440
थे वो यह बोल रहे थे कि हम गीता और वेद को

407
00:29:56,440 --> 00:30:00,960
आपसे आपसे ो ज्यादा नॉलेजेबल थे वो नॉलेज थी उनके पास

408
00:30:00,960 --> 00:30:05,120
रामपाल दास जी की ओर से उन्होंने बोला कि हम

409
00:30:05,120 --> 00:30:09,440
गीता और वेद को पूरा का पूरा प्रमाण नहीं मानते

410
00:30:09,440 --> 00:30:14,160
हैं हम प्रमाण मानते हैं कबीर सागर को और

411
00:30:14,160 --> 00:30:18,160
जितनी बातें कबीर सागर से मैच खाती है उतनी बातें

412
00:30:18,160 --> 00:30:22,680
हम वेद की मानते हैं देखिए अभी गीता

413
00:30:22,680 --> 00:30:26,880
में गीता में या तो आप सही कह रहे हो सुनिए

414
00:30:26,880 --> 00:30:31,040
या तो आप सही कह रहे हो गीता में एक ही मंत्र बोला है ओ

415
00:30:31,040 --> 00:30:35,200
मंत्र है खाली गीता में ओ मंत्र जाप करने को बोला है और वेद में भी

416
00:30:35,200 --> 00:30:40,000
एक ही मंत्र है ओम का जाप करने के लिए बोला है भाई साब देखिए

417
00:30:40,000 --> 00:30:44,240
देखिए भाई साहब देखिए जो मैं जो कह रहा हूं उसको समझने

418
00:30:44,240 --> 00:30:49,200
का प्रयास करिए वेद में लिखी हुई हर बात आपके लिए

419
00:30:49,200 --> 00:30:53,640
प्रमाण है कि नहीं है यह बताइए

420
00:30:53,640 --> 00:30:58,000
हर बात वेद में ऋग्वेद में लिखा है

421
00:30:58,000 --> 00:31:02,240
कवि का मतलब क्या मानते हैं आप कवि

422
00:31:02,240 --> 00:31:03,320
कबीर देव लिखा

423
00:31:03,320 --> 00:31:07,480
है लेकिन उसके अंदर ये हो गया कवि किया उन्होने नहीं

424
00:31:07,480 --> 00:31:11,840
क्या कवि का मतलब परमात्मा है ना हा परमात्मा

425
00:31:11,840 --> 00:31:15,920
है कवि परमात्मा बराबर है कबीर का मतलब परमात्मा और आपके लिए परमात्मा

426
00:31:15,920 --> 00:31:20,120
है आपका जो कबीर दास है देखो

427
00:31:20,120 --> 00:31:24,320
संस्कृत अलग है संस्कृत आपने अरे भैया मैं आपके

428
00:31:24,320 --> 00:31:28,400
हिसाब से ही बात कर रहा हूं मैं आपकी जो संस्कृत आप स्कार होगे

429
00:31:28,400 --> 00:31:32,640
वही बात कर रहा हूं अभी मैं बदल नहीं रहा तो कवि का अर्थ

430
00:31:32,640 --> 00:31:37,240
है कवि का अर्थ है परमात्मा

431
00:31:37,240 --> 00:31:41,680
और आपके लिए वो परमात्मा है कबीर ठीक है कबी कबीर देव

432
00:31:41,680 --> 00:31:45,880
वेदों में वेदों में कबीर देव क कबीर देव भी है और कवि

433
00:31:45,880 --> 00:31:50,800
भी है कबीर देव भी है और कवि भी है हा

434
00:31:50,800 --> 00:31:54,800
ठीक है तो कवि का अर्थ परमात्मा है कि नहीं

435
00:31:54,800 --> 00:31:58,920
ये पूछ रहा हूं हां है ना हां जो

436
00:31:58,920 --> 00:32:03,200
कविता में तो सुन लो सुन लो सुन लो वहां

437
00:32:03,200 --> 00:32:07,640
पर लिखा है ऋग्वेद में दूसरे मंडल के

438
00:32:07,640 --> 00:32:11,960
23 में सूक्त के पहले मंत्र में लिखा है कवियों

439
00:32:11,960 --> 00:32:16,080
का कवि यानी कि कभी एक नहीं है संसार में

440
00:32:16,080 --> 00:32:18,520
बहुत है यानी आप

441
00:32:18,520 --> 00:32:22,560
जो परमा सुन लो सुन लो सुन लो जिसको आप परमात्मा

442
00:32:22,560 --> 00:32:26,840
कहते हैं वो परमात्मा एक नहीं है बहुत सारे हैं

443
00:32:26,840 --> 00:32:31,040
आपके वाले और परमात्मा का परमात्मा लिखा हुआ

444
00:32:31,040 --> 00:32:33,920
है

445
00:32:33,920 --> 00:32:38,480
गणपति नहीं गणपति को कैसे करेंगे हम परमात्मा

446
00:32:38,480 --> 00:32:42,480
अरे भाई वेद में लिखा है वेद को मानोगे कि नहीं वो कैसे करोगे बाद की बात

447
00:32:42,480 --> 00:32:46,600
है वेद में लिखा है मानोगे कि नहीं यजुर्वेद अध्याय

448
00:32:46,600 --> 00:32:50,680
4 शलोक 17 में आप मैं पूछ रहा हूं वेद में

449
00:32:50,680 --> 00:32:54,960
लिखा है कवियों का कवि गणपति है मानोगे कि

450
00:32:54,960 --> 00:32:58,960
नहीं कवि का कवि पूर्ण परमात्मा लिखा

451
00:32:58,960 --> 00:33:03,600
है वहां पे कवि का मतलब तुमने क्या बताया क्या है

452
00:33:03,600 --> 00:33:07,760
अरे अलग अलग लिखा कवि और कबीर देव वा यानी कि यानी कि

453
00:33:07,760 --> 00:33:12,680
कहीं प कवि का अर्थ कुछ और है और कहीं पर कवि का अर्थ परमात्मा है

454
00:33:12,680 --> 00:33:16,960
कबीर देव और कवि का अर्थ अलग है कवि ने आपसे पूछा

455
00:33:16,960 --> 00:33:21,560
कवि का अर्थ परमात्मा है कि नहीं आपने बोला हां है

456
00:33:21,560 --> 00:33:25,840
कवि कवि कवि कवि जो आपने अभी बोला है भाई साहब झूठ

457
00:33:25,840 --> 00:33:30,200
का झूठ का खेल यहां ना खेले हम आपको हटाएंगे झूठ बोलोगे हटाएंगे

458
00:33:30,200 --> 00:33:33,640
आप अपने गुरुदेव की कसम खाके कहिए आप

459
00:33:33,640 --> 00:33:37,800
सौगं खाइए रामपाल दास जी की कि आपने नहीं बोला कि कवि का अर्थ

460
00:33:37,800 --> 00:33:42,000
परमात्मा है चलो कवि के आगे देव लिखा रहेगा

461
00:33:42,000 --> 00:33:46,040
क मैंने आपसे अलग से पूछा कबीर देव अलग और कवि

462
00:33:46,040 --> 00:33:51,000
और सुनो तुम्हारी आपकी किताबों में कवि का अर्थ भी परमात्मा ही लिखा

463
00:33:51,000 --> 00:33:55,280
है दिखाऊ ज्ञान गंगा से

464
00:33:55,280 --> 00:33:59,880
मुझे युद का अर्थ पता है ना उना यु मैं बताऊंगा मैं बताऊंगा

465
00:33:59,880 --> 00:34:04,040
यजुर्वेद का अर्थ में बताऊंगा पहले आप यह प्रूव करिए कि आप वेद

466
00:34:04,040 --> 00:34:08,160
को पूरा मानते हैं आप पूरा मानते हैं ना हम क्यों नहीं मानेंगे

467
00:34:08,160 --> 00:34:12,160
पूते तो मैं आपको बता रहा हूं दूसरा

468
00:34:12,160 --> 00:34:16,680
मंडल दूसरा मंडल 2 मंत्रवा

469
00:34:16,680 --> 00:34:20,840
सूक्त और पहला मंत्र कवियों का कवि है गणपति इसको मानते

470
00:34:20,840 --> 00:34:25,280
हो कि नहीं कवि के आगे देव लिखा है क्या नहीं लिखा है

471
00:34:25,280 --> 00:34:29,960
अभी तुमने बोला था कि कवि का अर्थ भी परमात्मा है

472
00:34:29,960 --> 00:34:34,200
लेकिन वहां पर नहीं लिखा ना देव नहीं लिखा है ना यानी कि कवि का अर्थ

473
00:34:34,200 --> 00:34:38,320
परमात्मा नहीं है हर जगह अरे

474
00:34:38,320 --> 00:34:42,400
भाई साहब य वाल अलग बात अलग कर रहे वहां पे कौन सा

475
00:34:42,400 --> 00:34:46,720
अलग बात है मुझे बताओ ना कवि का अर्थ क्या है कबीर देव

476
00:34:46,720 --> 00:34:49,240
अलग है और कवि अलग है

477
00:34:49,240 --> 00:34:53,360
अच्छा केवल जहां पर कबीर देव आएगा वहां पर परमात्मा है जहां कभ आएगा

478
00:34:53,360 --> 00:34:57,360
वहां पर परमात्मा नहीं है सु बात जैसे यु का यजुर्वेद

479
00:34:57,360 --> 00:35:01,440
का यज किया है उन्होने मैं आपसे जो पूछ रहा हूं मैं आपकी ये सब

480
00:35:01,440 --> 00:35:05,800
चीज जानता हूं भाई साहब कोई नई बातें नहीं कर रहे हो आप मेरे सामने

481
00:35:05,800 --> 00:35:10,400
आपकी ये सब चीज जानता हूं सु सुनिए

482
00:35:10,400 --> 00:35:14,640
मेरी बात सुनिए मैं मैं आपसे पूछ रहा हूं मैं

483
00:35:14,640 --> 00:35:19,520
आपसे यह पूछ रहा हूं भाई साहब कि जो

484
00:35:19,520 --> 00:35:23,840
कबीर देव है केवल उसी का अर्थ परमात्मा है कवि का अर्थ परमात्मा

485
00:35:23,840 --> 00:35:28,120
नहीं है कहां के शॉर्टकट में लिखा

486
00:35:28,120 --> 00:35:32,360
उन्होंने लिखा है जिसका उधर सा मैंने आपसे पूछा केवल

487
00:35:32,360 --> 00:35:36,960
कबीर देव का अर्थ परमात्मा है कवि का अर्थ परमात्मा नहीं है बोलो

488
00:35:36,960 --> 00:35:41,120
कवि का अर्थ भी परमात्मा होता है होता है अगर

489
00:35:41,120 --> 00:35:45,360
कवि का अगर कवि का अर्थ परमात्मा है तो वहा खता

490
00:35:45,360 --> 00:35:49,760
है कवियों का कवि है गणपति कबीर कबीर

491
00:35:49,760 --> 00:35:54,280
और कबीर देव रहेगा तो कवि का अर्थ परमात्मा नीचे जो उन्होने किया अनुवाद ग

492
00:35:54,280 --> 00:35:58,760
मैं बोल तो रहा हूं यानी कि जब कबीर देव कबीर देव लिखा तभी परमात्मा

493
00:35:58,760 --> 00:36:03,080
है केवल कवि होगा तो परमात्मा नहीं है कबीर

494
00:36:03,080 --> 00:36:04,640
कबीर भया

495
00:36:04,640 --> 00:36:09,720
क्षमा चाहता हूं आपसे क्षमा भैया आपसे हा

496
00:36:09,720 --> 00:36:13,920
जोड़ आपका मैं जो प्रश्न पूछ रहा आपका उत्तर ही नहीं

497
00:36:13,920 --> 00:36:18,040
आपके पास बोलिए आप अपना प्रश्न बोलते जाइए

498
00:36:18,040 --> 00:36:22,480
अध्याय 4 शलोक 17 का क्या उत्तर है मुझे बताइए

499
00:36:22,480 --> 00:36:27,600
यजुर्वेद अध्याय 4 क्या लिखा है उसम बोलिए

500
00:36:27,600 --> 00:36:32,080
बोल रहा है कि मैं ब्रह्म हूं ब्रह्म लोक में रहता हूं वो पूर्ण परमात्मा

501
00:36:32,080 --> 00:36:37,040
वहां रहता है ऊपर दिव लोक में रहता है वो कौन है पूण परमात्मा कौन है वो

502
00:36:37,040 --> 00:36:41,400
ब्रह्मा विष्णु महेश भगवती और गणेश वो

503
00:36:41,400 --> 00:36:46,040
पूर्ण पर ब्रह्म बोल रहा है ऐसा

504
00:36:46,040 --> 00:36:50,080
हा शिव पुराण पढ़ेंगे तो वहां अलग बात हो गई

505
00:36:50,080 --> 00:36:54,440
एक ही ईश्वर स्वयं को पांच अलग अलग रूपों में प्रकट करता

506
00:36:54,440 --> 00:36:58,200
है अभी हम

507
00:36:58,200 --> 00:37:02,320
सब हम सबको एक ही मान रहे देखिए आपने प्रश्न पूछा

508
00:37:02,320 --> 00:37:06,840
देखिए आपने प्रश्न पूछा मुझे कितनी देर लगी जवाब देने में

509
00:37:06,840 --> 00:37:11,320
कितनी देर लगी नहीं मुझे आपसे प्रश्न पूछा जा रहा है

510
00:37:11,320 --> 00:37:15,720
तो आधा घंटा लग गया मगर आप अपनी बात सेही मुक रहे

511
00:37:15,720 --> 00:37:20,080
हैं आपने बोला कवि का अर्थ परमात्मा होता है

512
00:37:20,080 --> 00:37:24,120
अब आप कह रहे नहीं कवि का अर्थ परमात्मा नहीं होता है देखो

513
00:37:24,120 --> 00:37:28,280
ऊपर जो मेन लोक है वहां पर कबीर लिखा है कबीर कबीर

514
00:37:28,280 --> 00:37:32,520
देव कबीर लिखा है लेकिन अ या कवि का अर्थ परमात्मा

515
00:37:32,520 --> 00:37:37,040
नहीं होता है कबीर देव का अर्थ परमात्मा होता है मेरे भाई बोलो ना इस बात

516
00:37:37,040 --> 00:37:41,960
को अभी आप तो अलग बात कर रहे भैया

517
00:37:41,960 --> 00:37:46,760
ठीक है आप जा सकते

518
00:37:46,760 --> 00:37:50,880
हैं राम जी मैं आपको दो मिनट सुनता हूं फिर किसी और व्यक्ति

519
00:37:50,880 --> 00:37:55,000
को ले लेंगे आप बताए कोई विशेष बात हो तो बता दीजिए अन

520
00:37:55,000 --> 00:38:00,000
म्यूट कर लीजिए आप अपना

521
00:38:00,000 --> 00:38:04,200
जी राम श्रीराम जय श्री राम सभी को

522
00:38:04,200 --> 00:38:08,200
आप जारी रखिए बात तो नहीं है महत्वपूर्ण य है कि

523
00:38:08,200 --> 00:38:12,600
जो आ रहे चर्चा हो इसलिए उस समय आया

524
00:38:12,600 --> 00:38:16,720
कोई था नहीं को अच्छा एक चीज बस

525
00:38:16,720 --> 00:38:20,880
ध्यान रखा करिए वैसे तो ध्यान है जैसे जब जिससे बात हो रही हो

526
00:38:20,880 --> 00:38:25,040
केवल व अपना ऑन रखे अगर अन म्यूट है भी तो म्यूट कर ले वो

527
00:38:25,040 --> 00:38:29,160
बाद में हम लोग जब वो बनाते है ना री तो दिक्कत आती उसम

528
00:38:29,160 --> 00:38:33,240
और एक चीज और की हो सकता है किसी को लेते टाइम अचानक से

529
00:38:33,240 --> 00:38:37,560
गलती से आउट हो जाए तो अन्यथा मत ना लीजिएगा

530
00:38:37,560 --> 00:38:41,560
उस बात अनथा कोई बात नहीं है य

531
00:38:41,560 --> 00:38:46,280
कोई हम अपने अहंकार की पुष्टि के लिए यहां नहीं है

532
00:38:46,280 --> 00:38:50,400
धर्म केलिए हमारा आपका आड़

533
00:38:50,400 --> 00:38:54,520
नहीं आएगा ऐसी कोई बात नहीं रोहिताश

534
00:38:54,520 --> 00:39:00,520
कुमार ड टू स्टेज

535
00:39:01,920 --> 00:39:06,000
संदीप जी एक बहुत माइनस एक बहुत महीन पॉइंट बोला है मैंने

536
00:39:06,000 --> 00:39:10,120
पकड़ा है इनका कहना है कि वेद गीता में मैं दिखा देता

537
00:39:10,120 --> 00:39:16,120
हूं इस बात को फिर बात

538
00:39:24,280 --> 00:39:30,280
कर साधु

539
00:39:33,280 --> 00:39:36,120
यहां क्या

540
00:39:36,120 --> 00:39:41,320
है सिर्फ ये राम पाली ही मात्र

541
00:39:41,320 --> 00:39:45,560
नहीं सनातन के दूष अनेक तत्व

542
00:39:45,560 --> 00:39:49,920
जो है भारतवर्ष में उत्पन्न हुए हैं

543
00:39:49,920 --> 00:39:54,440
ये है इनका इनकी

544
00:39:54,440 --> 00:39:58,560
बुक है ये और इसमें पेज नंबर 38

545
00:39:58,560 --> 00:40:04,560
प इन्होंने ये कहा

546
00:40:09,320 --> 00:40:13,600
है पेज नंबर 38 गीता

547
00:40:13,600 --> 00:40:16,640
में दो प्रकार का ज्ञान

548
00:40:16,640 --> 00:40:20,640
है ठीक है गीता में दो प्रकार का

549
00:40:20,640 --> 00:40:24,640
ज्ञान है और इसमें ये लिख रहे हैं

550
00:40:24,640 --> 00:40:28,840
कि 5 प्र गीता ज्ञान दाता यानी काल जो ब्रह्म

551
00:40:28,840 --> 00:40:33,200
इनके अनुसार जो एक कैरेक्टर का ताना बाना बुना गया

552
00:40:33,200 --> 00:40:37,240
है वो जो है काल

553
00:40:37,240 --> 00:40:41,360
का है तो वह हमें मानने योग्य नहीं है वह काल का अपना मत है

554
00:40:41,360 --> 00:40:45,520
अब बात य आती है कि भगवत गीता में 700

555
00:40:45,520 --> 00:40:49,840
श्लोक है है ना तो 700 श्लोक

556
00:40:49,840 --> 00:40:54,520
का अगर

557
00:40:54,520 --> 00:40:58,600
हम परसेंटेज निकाले 5 प्र तो

558
00:40:58,600 --> 00:41:02,800
आएगा 35 35 जी जी

559
00:41:02,800 --> 00:41:07,240
तो 35 श्लोक केवल गलत है इनके हिसाब से

560
00:41:07,240 --> 00:41:11,280
अब हमको केवल करना इतना है कि जिसमें श्री

561
00:41:11,280 --> 00:41:16,200
कृष्ण की परब्रह्म सिद्ध हो रही हो व मच पावरफुल सिद्ध हो रहे हो

562
00:41:16,200 --> 00:41:20,280
उतने श्लोक हमें ढूंढने है अगर वो 35 से एक भी ज्यादा है तो यह इनके

563
00:41:20,280 --> 00:41:24,600
तथाकथित तत्वदर्शी की वाणी हो गई गलत

564
00:41:24,600 --> 00:41:28,760
तो कोई आए भैया य उसके साथ हम बैठेंगे वो बताए कौन सा गलत

565
00:41:28,760 --> 00:41:32,840
है कौन सा गलत है अगर वो परसेंटेज ज्यादा होने लगी क्योंकि

566
00:41:32,840 --> 00:41:37,800
भगवत गीता में केवल 35 श्लोक नहीं है श्री कृष्ण के लिए

567
00:41:37,800 --> 00:41:41,960
बहुत से लोक है हां से व सुप्रीम

568
00:41:41,960 --> 00:41:46,360
अथॉरिटी सिद्ध होते हैं सर मैंने पा मिनट का टाइम

569
00:41:46,360 --> 00:41:50,720
पा मिनट का टाइम दे दो मेरे को ना बस थोड़ा जाना है मैंने

570
00:41:50,720 --> 00:41:54,760
बात कर रहे थे ना येभी बात कर रहे थे जो कवि के ऊपर ये

571
00:41:54,760 --> 00:41:58,800
कवि कबीर देव की बात कर रहे थे ना इनसे मैं पूछना चाहता हूं कि जब ये

572
00:41:58,800 --> 00:42:02,800
व्रज शब्द दिखाते हैं तो डिक्शनरी खोल के दिखाते हैं ना जब ये व्रज दिखाते डिक्शनरी

573
00:42:02,800 --> 00:42:06,800
खोलेंगे ये डिक्शनरी वो डिक्शनरी तो ये कबीर देव या कवि शब्द

574
00:42:06,800 --> 00:42:09,760
दिखाने के लिए डिक्शनरी कहां चली जाती है इनकी रामपाल

575
00:42:09,760 --> 00:42:14,200
की डिक्शनरी उस समय कहां चली गई थी उस समय कवि का कबीर दास क्यों नहीं दिखाया गया भाई

576
00:42:14,200 --> 00:42:18,600
इसका मतलब है दाल में काला है जब आप हर जगह डिक्शनरी

577
00:42:18,600 --> 00:42:23,000
खोल खोल रहे हो मन की बात रखते है

578
00:42:23,000 --> 00:42:27,400
अपने मन की बात रखते है वो कुल मिला के सुनिए

579
00:42:27,400 --> 00:42:32,120
हम कितनी भी यहां पर मगज मारी कर ले अंत में आना इस

580
00:42:32,120 --> 00:42:36,760
रामपाल क्या कह रहे और कबीर सागर क्या कह रहा है इस

581
00:42:36,760 --> 00:42:40,760
आनार दोबारा आको बोलना ्र शब्द आप कहा से दिखाते हो बोले

582
00:42:40,760 --> 00:42:44,880
डिक्शनरी से कवि का शब्द कबीर देव का शब्द कबीर दास दिखाओ किसी भी वर्ड

583
00:42:44,880 --> 00:42:49,000
की शिवराम सेपर कोई री तो नहीं है दिखा

584
00:42:49,000 --> 00:42:52,720
दे हम मान जाएंगे बात खत्म

585
00:42:52,720 --> 00:42:56,120
हम रोहिता

586
00:42:56,120 --> 00:43:00,800
कुमार हा जी जय श्री राम जय श्री

587
00:43:00,800 --> 00:43:05,240
राम आप आ चुके हैं पहले

588
00:43:05,240 --> 00:43:09,280
नहीं जी मैं शि तो नहीं डिबेट सुनता हूं और हम सबको उस एक

589
00:43:09,280 --> 00:43:15,200
परम सत्य की और पूर्ण परमात्मा की खोज है डिबेट सुनता हूं श नहीं

590
00:43:15,200 --> 00:43:19,240
अभी अच्छा नहीं आने का प्रयोजन क्या है

591
00:43:19,240 --> 00:43:23,240
आपका लाइव से जुड़ने का प्रयोजन क्या है वो तो आप सुनते तो वहां भी

592
00:43:23,240 --> 00:43:25,600
आप दर्शक बनक सुनही रहे थे

593
00:43:25,600 --> 00:43:28,160
हा हा

594
00:43:28,160 --> 00:43:32,440
मेरा लाइव आने का प्रयोजन यह था कि अगर हम वेद शास्त्रों को और ग्रंथों

595
00:43:32,440 --> 00:43:37,040
को साइड में रख दिया जाए हेलो जी सुन रहा

596
00:43:37,040 --> 00:43:41,480
हूं अगर अपने जो वेद ग्रंथ है शास्त्र है इनको एक बार

597
00:43:41,480 --> 00:43:45,520
साइड में रख दिया जाए अगर हम ऐसे ही तुलना किया हम ऐसे ही तुलना करें जो

598
00:43:45,520 --> 00:43:49,640
जीवित है जीवित प्रमाण है जैसे कि मगर में लीला की कबीर साहिब ने व

599
00:43:49,640 --> 00:43:54,040
स शरीर चले गए थे वहा पर मस्जिद बनी हुई है मंदिर बनी हुई है

600
00:43:54,040 --> 00:43:58,160
मीटर की दूरी प तो क्यों बनी हुकार में कुछ हुआ प्रमाण कुछ

601
00:43:58,160 --> 00:44:02,160
जीवित प्रमाण है तभी तो बनी हुई है वो अच्छा हिंदू मुसलमान आप एक

602
00:44:02,160 --> 00:44:06,600
बात बताइए एक बात बताइए आप कि

603
00:44:06,600 --> 00:44:12,360
आपने कहा कि अगर हम इनको वेद शास्त्रों को हटा दे

604
00:44:12,360 --> 00:44:16,520
और जो हमें ये बिल्डिंग वगैरह प्रत्यक्ष रूप से प्राप्त है वो

605
00:44:16,520 --> 00:44:20,560
बनी हुई है उसको तो देख ले कम से कम ठीक है अब ये

606
00:44:20,560 --> 00:44:24,920
बताइए कि आपको कैसे पता कि वो जो मजार

607
00:44:24,920 --> 00:44:28,920
है मस्जिद है या मंदिर है वो कबीर जी का ही

608
00:44:28,920 --> 00:44:33,040
है कैसे पता व कबीर अब ऐसे पता है

609
00:44:33,040 --> 00:44:38,000
क्योंकि य हमारे जो ग्रंथ है उन प्रमाण है

610
00:44:38,000 --> 00:44:41,400
आ ग्र अभी तो

611
00:44:41,400 --> 00:44:47,400
ह हम अपने ग्रंथ को हटा दे आपके वाले पकड़ ले

612
00:44:47,760 --> 00:44:51,880
बा हर एक वेद ग्रंथ गवाही दे रहा है कबीर साहिब पूण परमात्मा

613
00:44:51,880 --> 00:44:56,000
है और शुरुआत से हुई थी

614
00:44:56,000 --> 00:45:00,200
अब मैं आपसे रहा ह कि कवियों का कवि गणपति कहा

615
00:45:00,200 --> 00:45:06,200
जा रहा है मानोगे वेद

616
00:45:07,240 --> 00:45:11,240
में देखो मेरे पास तो मेरे पास अभी स् खुद

617
00:45:11,240 --> 00:45:16,040
गीता है गीता में बताओ कौन आपको दिखा दिया अभी के अभी

618
00:45:16,040 --> 00:45:20,320
अभी के अभी आपको दिखा दिया कयो का

619
00:45:20,320 --> 00:45:25,960
गणपति है मानोगे कि नहीं दिखाओगे

620
00:45:25,960 --> 00:45:30,040
खागा अब तो दिखाओगे तभी तो मानूंगा ऐसे कैसे मान दिखाओ तो

621
00:45:30,040 --> 00:45:34,560
अरे तो मैं पूछ रहा हूं कि आपके अंदर वेदों के लिए कितनी प्रमाणिकता स्वीकार

622
00:45:34,560 --> 00:45:38,880
है मैं आपसे एक बात पूछ र प्रमाण स्वीकार है जो आप दिखाओगे

623
00:45:38,880 --> 00:45:44,880
परा वेद का एक एक वचन स्वीकार

624
00:45:45,040 --> 00:45:49,520
है हेलो हेलो

625
00:45:49,520 --> 00:45:53,520
आते हैं जिज्ञासु बनके फिर धीरे से

626
00:45:53,520 --> 00:45:59,520
अपना असली रंग आता है सामने

627
00:46:00,960 --> 00:46:06,720
चले गए भैया लग रहा है चले गए आउट हो

628
00:46:06,720 --> 00:46:11,640
गए राहुल यादव जी आप आइए

629
00:46:11,640 --> 00:46:15,880
जय श्री राम जय श्री राम जय श्री राम प्रभु

630
00:46:15,880 --> 00:46:21,040
मैं यह बोलना चाहता था प्रभु के

631
00:46:21,040 --> 00:46:25,240
यह जो काल की बात करते हैं तो

632
00:46:25,240 --> 00:46:29,240
वो काल कौन है इसके बा ब बता सकते हैं काल कौन से काल

633
00:46:29,240 --> 00:46:33,800
की बात कर रहे हैं उसम गीता जी में थोड़ी मैंने भी पढ़ी है इसी कारण में

634
00:46:33,800 --> 00:46:39,800
चर्चा करने के लिए पूछ रहा था आपसे पर वो उससे पहले ही चले

635
00:46:39,920 --> 00:46:44,280
गई अगर यह बोल रहे हैं कि भगवान श्री कृष्ण

636
00:46:44,280 --> 00:46:49,240
जी ने गीता का ज्ञान क उन देखिए ये सब व्यर्थ की बातें है

637
00:46:49,240 --> 00:46:53,320
यह सब व्यर्थ की बात है आप कितना भी कर लीजिए अंत

638
00:46:53,320 --> 00:46:57,560
में बात ये आएगी हम वेदों को ही नहीं मानते हम गीता को ही नहीं मानते

639
00:46:57,560 --> 00:47:00,040
जाएंगे तो अब लोग कहते हैं

640
00:47:00,040 --> 00:47:04,040
ना मैंने पीछे शास्त्र रखे मैं वो क्यों नहीं खोलता अरे भैया मैं खोलूंगा

641
00:47:04,040 --> 00:47:08,200
तो उससे मतलब क्या है तो मैं तो सीधे अंत वाली बात करूं ना जो अंत में करनी

642
00:47:08,200 --> 00:47:12,480
है एक कहानी है एक कहानी है एक

643
00:47:12,480 --> 00:47:16,480
लड़का पकड़ के मछली पकड़ रहा होता है एक

644
00:47:16,480 --> 00:47:20,840
लड़का तो वहां पर एक समृद्ध व्यक्ति आता

645
00:47:20,840 --> 00:47:24,960
है और कोई कार से आता है बहुत महंगी सी एक

646
00:47:24,960 --> 00:47:29,080
बचपन में सुनी थी स्कूल में एक कान तो वह एक

647
00:47:29,080 --> 00:47:33,440
आता है और गाड़ी रोकता है

648
00:47:33,440 --> 00:47:37,520
और कोट पेंट टाई में था बहुत बाबूजी बनकर आया था हालांकि जो

649
00:47:37,520 --> 00:47:41,640
इस प्रकार के व्यक्तित्व होते हैं अगर पास से जाकर के देखो तो इनका

650
00:47:41,640 --> 00:47:46,000
जो सोच का लेवल होता है बहुत ही निम्न स्तर का होता है

651
00:47:46,000 --> 00:47:50,000
वास्तविकता में यह लोग शुद्ध और पवित्र स्थिति में नहीं घूमते हैं जो यह

652
00:47:50,000 --> 00:47:54,600
वाले होते हैं केवल दिखने में बहुत टचन टॉप दिखते हैं र

653
00:47:54,600 --> 00:47:58,920
पॉइंट बैक टू द पॉइंट तो एक लड़का जो है तालाब के किनारे मछली

654
00:47:58,920 --> 00:48:03,000
पकड़ रहा होता है वहां पर एक महंगी गाड़ी से एक सज्जन आता है वोह

655
00:48:03,000 --> 00:48:07,920
भी अपना कांटा वाटा निकाल कर के और जो है मछली पकड़ने लगता

656
00:48:07,920 --> 00:48:11,960
है तो वह बड़े घमंड में था पैसे के उसके पास बहुत

657
00:48:11,960 --> 00:48:15,040
समृद्धि थी तो वह अपने उस लड़के

658
00:48:15,040 --> 00:48:19,280
से कहता है कितनी मछली पकड़ लेते हो डेली तो वो लड़का

659
00:48:19,280 --> 00:48:23,560
कहता है मैं एक मछली डेली पकड़ता हूं तो बोलता

660
00:48:23,560 --> 00:48:28,280
है तुम ना बेवकूफ हो तुम

661
00:48:28,280 --> 00:48:32,480
बुद्धि नहीं है तुम्हारे अंदर तुम इतनी मछली रोज पकड़ो

662
00:48:32,480 --> 00:48:36,800
उसको फलाने मच्छी बाजार में बेचो वहां से इतना मिलेगा

663
00:48:36,800 --> 00:48:40,960
उससे यह काम करो उससे वह काम करो उससे वह काम करो वह

664
00:48:40,960 --> 00:48:45,000
सब करके धीरे धीरे धीरे धीरे तुम्हारी बिल्डिंग बन जाएगी तुम

665
00:48:45,000 --> 00:48:49,120
करोड़पति हो जाओगे बहुत बड़े बिजनेसमैन बन जाओगे

666
00:48:49,120 --> 00:48:53,240
और मैंने ऐसे ही बिजनेस खड़ा किया था अपना ऐसे ही मछली

667
00:48:53,240 --> 00:48:57,240
से शुरुआत की थी और देखो पूरा बिजनेसमैन बन के फिर

668
00:48:57,240 --> 00:49:01,280
एक दिन तुम सुकून से आना मेरी तरह यहां पर और मछली

669
00:49:01,280 --> 00:49:05,720
पकड़ना तो वो लड़का कहता है मैं वही तो कर रहा

670
00:49:05,720 --> 00:49:10,080
हूं मैं आज वही तो कर रहा हूं जो आप इतनी

671
00:49:10,080 --> 00:49:14,880
उधेड़बुन के बाद आकर के वो कर रहे हो मैं आज वही कर रहा

672
00:49:14,880 --> 00:49:19,000
हूं तो कौन हुआ बुद्धिमान वही वाली बात है

673
00:49:19,000 --> 00:49:23,240
कि मैं जो शास्त्र इत्यादि हैं मुझे मालूम है यह

674
00:49:23,240 --> 00:49:27,400
पूरी तरीके से प्रमाण नहीं मानते गीता और वेद को कल बोला उन्होंने कि हमारे

675
00:49:27,400 --> 00:49:30,960
लिए जो प्रमाण है वो

676
00:49:30,960 --> 00:49:35,240
कबीर सागर है और वह भी नहीं निकलेगा कबीर सागर में भी कुछ ना कुछ ऐसी चीजें

677
00:49:35,240 --> 00:49:40,000
निकल आएंगी कि वो रामपाल के अगेंस्ट जब जाने लगेगी तो वहा पेन चलेगा

678
00:49:40,000 --> 00:49:44,080
वहा पेन चल जाएगा यह जो है काल नहीं

679
00:49:44,080 --> 00:49:48,480
अकाल है यह सब पन चले हैं कबीर सागर में

680
00:49:48,480 --> 00:49:52,640
तो इसलिए पहले शास्त्र को स्वीकार करते हो

681
00:49:52,640 --> 00:49:57,840
वह स्वीकार करो फिर शास्त्र की बात करो

682
00:49:57,840 --> 00:50:03,840
अब हम लेते हैं कोई है

683
00:50:04,600 --> 00:50:10,240
नहीं 46 प्रवीण

684
00:50:10,240 --> 00:50:14,800
जी हेलो आवाज आ रही है जय श्री राम बताइए

685
00:50:14,800 --> 00:50:19,840
हां तो मुझे एक बात बताइए कि आपका इष्ट देव कौन है

686
00:50:19,840 --> 00:50:24,040
आपका परिचय क्या है मैं मेरा नाम प्रवीण

687
00:50:24,040 --> 00:50:28,600
है और मैं संत रामपाल जी महाराज जी का फॉलो ठीक है

688
00:50:28,600 --> 00:50:33,960
हा तो हां तो मुझे यह पूछना है कि आपका ईष्ट देव कौन

689
00:50:33,960 --> 00:50:38,120
है हम लोग पूछेंगे मगर जब हम बात कर रहे हैं ईट

690
00:50:38,120 --> 00:50:42,280
देव की या धर्म की या ईश्वर की तो पहले हम जान ले कि आपके

691
00:50:42,280 --> 00:50:47,240
लिए कौन सी चीज प्रामाणिक है और कौन सी नहीं है ठीक

692
00:50:47,240 --> 00:50:51,640
है है ना अब मुझे आप ये बताइए कि

693
00:50:51,640 --> 00:50:55,640
क्या कोई भी वेद वेद को आप पूरी पूरा का

694
00:50:55,640 --> 00:50:59,720
पूरा प्रमाणिक मान एक एक बात उसकी स्वीकार करेंगे या कुछ बातें

695
00:50:59,720 --> 00:51:03,920
छोड़ देंगे एक मिनट पहले बताओ कि आप पहले मेरे उत्तर

696
00:51:03,920 --> 00:51:08,800
का बात वो तो आगे की बात है ना वो आगे की बात है

697
00:51:08,800 --> 00:51:12,840
अगर वो आपको जानना है मेरे इट कौन है ये आपको जानना है

698
00:51:12,840 --> 00:51:16,840
तो मैंने अपने वीडियो में बहुत बार बता भी रखा है अच्छा तो

699
00:51:16,840 --> 00:51:19,680
एक बार बता दो क्योंकि मैंने ना आपका पूरा स्टार्टिंग से वीडियो

700
00:51:19,680 --> 00:51:24,400
देखे नहीं है ठीक है इसलिए एक आपको देखना

701
00:51:24,400 --> 00:51:28,480
चाहिए अभी बात ये हो रही है आप य पर कोई पक्ष रखने

702
00:51:28,480 --> 00:51:32,480
आए रामपाल जी का या नहीं रखने आए मेरे इट राम है

703
00:51:32,480 --> 00:51:37,120
अच्छा आपके राम है हा मतलब आपके

704
00:51:37,120 --> 00:51:41,400
विष्णु जी आप बोल रहे हो जैसे की करेक्ट

705
00:51:41,400 --> 00:51:45,560
हा विष्णु स्वरूप राम जी अच्छा तो तो आप उनके कोई

706
00:51:45,560 --> 00:51:49,640
मंत्र वगैरह भी करते होंगे जैसे की अगर कोई देवताओं के मंत्र भी होते हैं

707
00:51:49,640 --> 00:51:53,680
जिनसे उनके प्राप्ति हो सकती है आप उसम बिलीव कर देखिए आपका आगे

708
00:51:53,680 --> 00:51:57,800
बढ़ गया ना आपने एक प्रश्न पूछा मैंने जवाब दिया अब

709
00:51:57,800 --> 00:52:01,840
आप पहले जब आप बात कर रहे धर्म और ईश्वर की तो आप अपना धर्म का

710
00:52:01,840 --> 00:52:05,920
क्राइटेरिया बताइए क्या आप वेद को पूरा का पूरा स्वीकार करते हैं

711
00:52:05,920 --> 00:52:10,040
या नहीं करते हैं वैसे जो रामपाल तंत्र

712
00:52:10,040 --> 00:52:14,320
है वो नहीं करता है क्यों नहीं करता है क्योंकि कबीर सागर का वो कोई दोहा

713
00:52:14,320 --> 00:52:18,400
दिखाता है जिसमें वेद पड़े पर भेद ना जाने वेद से जो मैं प्राप्त

714
00:52:18,400 --> 00:52:22,840
हो जाऊ तो यह है वो ऐसा कोई दोहा है आपका यानी कि वेदों

715
00:52:22,840 --> 00:52:28,200
से परमेश्वर प्राप्त नहीं होता है यह मानना है आपका

716
00:52:28,200 --> 00:52:32,280
देखो आप जो बोल रहे हो ना वो आधा सच है आधा गलत

717
00:52:32,280 --> 00:52:36,520
बोल रहे हो देख के मंत्र को स्वीकार

718
00:52:36,520 --> 00:52:40,720
करते हैं भाई साहब कि नहीं करते हैं यह बताइए देखो यहां

719
00:52:40,720 --> 00:52:44,720
पर कोई भी चीज न जीरो में नहीं जा आपके प्रश्न का

720
00:52:44,720 --> 00:52:48,800
कितना क्लियर कट जवाब दिया मैंने हा मैं अभी दे रहा ना आपके प्रश्न

721
00:52:48,800 --> 00:52:52,840
का उतर भैया आप वेद को पूरा स्वीकार

722
00:52:52,840 --> 00:52:56,880
करते हो या अधूरा हा तो आपका प्रश्न है

723
00:52:56,880 --> 00:53:00,880
कि आप मैं उसको ट्रूली पूरा मानता हूं या पार्ली मानता हूं या फिर

724
00:53:00,880 --> 00:53:04,920
नहीं मानता हूं यह आप पूछ रहे हो करेक्ट आप पहले तो एक जगह बैठ के बात करिए भाई

725
00:53:04,920 --> 00:53:09,080
साहब एक जगह बैठ जाइए फिर बात कर मैं

726
00:53:09,080 --> 00:53:13,160
एक्चुअली बाहर आया हूं हा तो मैं आपको य

727
00:53:13,160 --> 00:53:17,400
पूछ रहा था तो आप मेरे को ये पूछ रहे थे राइट तो मैं यह बोल रहा हूं मेरा उत्तर

728
00:53:17,400 --> 00:53:21,720
मतलब गुरुजी ने ऐसा बताया है कि वेद जो है वो सच

729
00:53:21,720 --> 00:53:25,800
है राइट वेद हो गए कुरान शरीफ हो गया बाइबल हो गया यह

730
00:53:25,800 --> 00:53:29,880
सब ये सब भगवान की दी हुई चीज है राइट उन्होंने दी हुई है राइट

731
00:53:29,880 --> 00:53:33,920
तो ये सच है बट इसमें जैसे जैसे समय आगे आया इसमें मैनिपुलेशन

732
00:53:33,920 --> 00:53:37,920
हुए हैं राइट इसमें चेंस हुए है कुछ वानिया मैनिपुलेट हुई है राइट

733
00:53:37,920 --> 00:53:42,320
क्योंकि बहुत पहले या आज जो वेद उपलब्ध है

734
00:53:42,320 --> 00:53:43,400
यानी की आज जो वेद

735
00:53:43,400 --> 00:53:47,640
उपलब्ध है उसम मिलावट हो चुकी है देखो मिलावट हो चुकी है

736
00:53:47,640 --> 00:53:51,640
कुछ वानिया सही है कुछ वाण में मिलावट हो चुकी है यानी कि आज

737
00:53:51,640 --> 00:53:55,640
जो वेद उपलब्ध है उसम मिलावट हो चुकी है कुछ वाणिया सही

738
00:53:55,640 --> 00:53:59,640
है कुछ वाणिया कुछ मंत्र गलत है करेक्ट

739
00:53:59,640 --> 00:54:03,760
अच्छा अब ये बताइए अब ये बताइए कौन सा मंत्र

740
00:54:03,760 --> 00:54:07,760
लेना है मि वही बोल रहा इसमें

741
00:54:07,760 --> 00:54:11,880
एक और चीज है इसम संस्कृत जो है उसका जो ट्रांसलेशन

742
00:54:11,880 --> 00:54:15,960
है ट्रांसलेशन की बात बाद में करेंगे ना मैं अभी मंत्र की बात कर रहा

743
00:54:15,960 --> 00:54:20,000
हूं ट्रांसलेशन की बात बाद में करेंगे अभी मंत्र कौन सा लेना है कौन सा नहीं

744
00:54:20,000 --> 00:54:24,000
लेना है इसका आधार क्या होगा अच्छा अभी सुनो

745
00:54:24,000 --> 00:54:28,320
अभी मैं आपको बात बताता उसका आधार कौन हो जो ऐसा संत

746
00:54:28,320 --> 00:54:32,480
हो जिसको जो जो एक ऐसा सोर्स होना चाहिए जो कि ऑथेंटिक

747
00:54:32,480 --> 00:54:36,520
हो जो कि ज्ञान दे सके समझ रहे हो मैं क्या बोल रहा हूं आप बै

748
00:54:36,520 --> 00:54:40,880
आप चीज पढ़ रु आप चीज पढ़ देखिए ऐसी बात बोलिए

749
00:54:40,880 --> 00:54:45,200
जो हम प्रमाण जिसको मान सके ऐसी बात बोलिए

750
00:54:45,200 --> 00:54:49,440
आपके अनुसार ज्ञान दे सके व रामपाल है हमारे अनुसार ज्ञान

751
00:54:49,440 --> 00:54:53,680
दे सके वो राहुल शर्मा है अब बताइए क्या करें सही है मैं वही बोल रहा हूं

752
00:54:53,680 --> 00:54:57,840
आपकी बात कोई क्यों मानेगा हा वही बोल रहा सब ओपिनियन अलग है सबको

753
00:54:57,840 --> 00:54:58,520
एक को एक

754
00:54:58,520 --> 00:55:02,920
चीज को देखने का नजरिया अलग है मैं वही बोल रहा हूं तो आप तो

755
00:55:02,920 --> 00:55:07,000
जो सुनो सुनो एक मिनट कंप्लीट करने दो जो 7 अत जो होता है

756
00:55:07,000 --> 00:55:11,120
उसको सारे इसका ज्ञान होता है करेक्ट ना कि ओनली हिंदू धर्म का

757
00:55:11,120 --> 00:55:15,120
अभी रुको मैं क्या बोल रहा हूं अभी आप एक मिनट रुकना अभी आप अपन हिंदू

758
00:55:15,120 --> 00:55:19,480
हो के हिंदू को श्रेष्ठ मारते हैं मैं खुद हिंदू हूं राइट तो हम हिंदू को श्रेष्ठ मानते हैं

759
00:55:19,480 --> 00:55:23,640
हम बात क्यों मानी जाए कि जो सच्चे जो

760
00:55:23,640 --> 00:55:27,800
सच्चे संत होते हैं उन्हें सारे उनका ज्ञान होता है हां करेक्ट

761
00:55:27,800 --> 00:55:31,840
रुको तो सही अभी हम मानव है तो हमने इतनी जाति मिनट मैं आपकी बात

762
00:55:31,840 --> 00:55:35,840
य क्लियर कर दूं कल रात को खुदा का भेजा

763
00:55:35,840 --> 00:55:39,880
हुआ फरिश्ता मेरे पास आया था मुझे कुछ ज्ञान देक गया है और मैं उसको

764
00:55:39,880 --> 00:55:43,880
लिख रहा हूं यह मालूम होगा रामपाल दास जी

765
00:55:43,880 --> 00:55:47,880
को अब वो खुदा का फरिश्ता आया है या

766
00:55:47,880 --> 00:55:52,000
फिर डीम आया है फ डेविल आपको पता होगा कि इस दुनिया तो ये उनको

767
00:55:52,000 --> 00:55:56,360
वो जो जो सच्चा जो तत्वदर्शी संत है उसको तो पता होगा ना कौन

768
00:55:56,360 --> 00:56:00,600
आया कौन नहीं आया हां उनको तो सब पता है

769
00:56:00,600 --> 00:56:04,760
आपको क्या करना है उनको मतलब भी बला के तो फिर अभी देखो हम भाई

770
00:56:04,760 --> 00:56:09,040
सुनिए हर दो दिन में एक नया कल्ट शुरू हो रहा है दुनिया के अंदर

771
00:56:09,040 --> 00:56:13,120
हर दो से तीन दिन में ये कोई पैरामीटर नहीं है कि जो सच्चा

772
00:56:13,120 --> 00:56:13,720
संत होगा

773
00:56:13,720 --> 00:56:17,960
उसको वो सारे उसने वो ग्रंथ जो नए ग्रंथ लिखे जा रहे हैं मन गणन

774
00:56:17,960 --> 00:56:22,200
उन सबका उसने पी रखा हो ज्ञान सुनो आपको एक चीज पता है कि बाइबल

775
00:56:22,200 --> 00:56:26,640
और कुरान शरीफ में कितने वर्सेस कितने वर्सेस मैनिपुलेटेड है

776
00:56:26,640 --> 00:56:30,680
वने दिए हैमन ने कितने मतलब कितने शैतान

777
00:56:30,680 --> 00:56:35,040
की वाणी है उसमें आपको पता है अब मैं आपसे पूछ रहा हूं

778
00:56:35,040 --> 00:56:40,240
अब मैं आपसे पूछ रहा हूं आपके अनुसार

779
00:56:40,240 --> 00:56:44,560
जो वेदों का ज्ञान है आज

780
00:56:44,560 --> 00:56:49,040
के टाइम में जो वेद हमें प्राप्त है उसके कुछ विपरीत

781
00:56:49,040 --> 00:56:53,760
ज्ञान कबीर सागर में है कि नहीं है

782
00:56:53,760 --> 00:56:58,000
देखो अब एक बात बताता हूं इससे पहले देखा हर बात को

783
00:56:58,000 --> 00:57:02,280
हर बात को टस्ट करके ही बोलना है ट्विस्ट करके नहीं बोलना है देखो ये चार वेद

784
00:57:02,280 --> 00:57:06,640
है ठीक है जो कि ब्रह्मा जी के स्टार्टिंग से जो भी आए थे जो कि उनके स्वास

785
00:57:06,640 --> 00:57:10,880
जो भी है लाइक सागर मंथन हुआ था चार वेद आए थे ठीक है तो इसमें एक और वेद

786
00:57:10,880 --> 00:57:14,880
है जो कि पांचवा वेद है उसको बोलते हैं सूक्ष्म वेद हां ठीक

787
00:57:14,880 --> 00:57:19,000
है तो ये वेद मिसिंग है चारों वेदों में से तो जो ज्योति निरंजन

788
00:57:19,000 --> 00:57:23,200
है जो कि आपको गोरखनाथ जी के जो गुरु थे बो अलक निरंजन

789
00:57:23,200 --> 00:57:28,360
सुनिए सुनिए सुनि लिए प्रमाण देखो

790
00:57:28,360 --> 00:57:30,200
मैं

791
00:57:30,200 --> 00:57:34,880
सुनन ले गलत आप गलत कर मैं आपकी बात सुनता हूं लेकिन आप सुन के नहीं

792
00:57:34,880 --> 00:57:39,200
ले संपत कर रहा हूं आपके लिए जो प्रामाणिक शास्त्र

793
00:57:39,200 --> 00:57:44,880
है वो कबीर सागर है

794
00:57:44,880 --> 00:57:49,000
राइट रुको रुको रुको मैं क्या बोल रहा हूं ये जितने भी वेद गीता

795
00:57:49,000 --> 00:57:53,320
है इनका ज्ञान सही है पूरा नहीं अरे इनम तो मिलावट हो गई

796
00:57:53,320 --> 00:57:57,200
प्रमाणिक नहीं है आपके लिए

797
00:57:57,200 --> 00:58:01,280
बो फिर से बोल रहा हूं आप वन या जीरो प मत जाओ आप पार्शल

798
00:58:01,280 --> 00:58:05,280
में आओ आप आप पूरा उसको या फिर एक्स्ट्रीम एंड प मत लेके जाओ मैं बोल रहा हूं आपको

799
00:58:05,280 --> 00:58:09,320
मैं फिर से बोल रहा हूं सुनो मैं ध्यान से क्या बोल रहा हूं मैं ये बोल रहा हूं कि जितने भी अपने

800
00:58:09,320 --> 00:58:13,440
हिंदू धर्मों में चार वेद और जो सारांश है गीता वो गलत

801
00:58:13,440 --> 00:58:17,760
नहीं है वो सही है और कुछ वानिया गलत है और और सुनो

802
00:58:17,760 --> 00:58:21,840
कुछ वाणिया गलत है ना गु हेलो एक मिनट एक मिनट

803
00:58:21,840 --> 00:58:26,320
कुछ मंत्र गलत है कि नहीं है वेद के आपके हिसाब से देखो

804
00:58:26,320 --> 00:58:31,040
मंत्र गलत नहीं है मंत्र मैनिपुलेटेड हुए हैं उनके ट्र

805
00:58:31,040 --> 00:58:35,120
इसका मतलब आज जो वेद हमें प्राप्त है आज जो वेद हमें प्राप्त है

806
00:58:35,120 --> 00:58:39,320
वो आपके हिसाब से व वो वेद नहीं है जो वहां से चले थे

807
00:58:39,320 --> 00:58:43,520
ईश्वर से उसमें बदलाव हो चुका है नहीं नहीं नहीं

808
00:58:43,520 --> 00:58:45,200
बदलाव हो चुका है अभी

809
00:58:45,200 --> 00:58:49,360
उसका बदलाव कितना हुआ 80 पर हुआ है 90 पर हुआ है 99

810
00:58:49,360 --> 00:58:53,480
पर हुआ है 95 वी डोंट नो हमको नहीं पता कितना परसेंट बदलाव हु

811
00:58:53,480 --> 00:58:57,720
आप क्या मानते हो कितना परसेंट हुआ तत्वदर्शी

812
00:58:57,720 --> 00:59:01,760
मैंने अभी तक तो गुरुजी मुझे सु पगा फिर क्लेम करने

813
00:59:01,760 --> 00:59:05,800
वाले कौन होते हैं वेद में इतना मैशन हुआ

814
00:59:05,800 --> 00:59:10,120
आप कौन होते वही मैनिपुलेशन हुआ है

815
00:59:10,120 --> 00:59:14,480
कबीर सागर में मैनिपुलेशन हो गया हा बोहा

816
00:59:14,480 --> 00:59:18,880
सुन कबीर सागर गुरु नेकी बात क्यों मानी जाए भाई

817
00:59:18,880 --> 00:59:22,880
सुनिए पले पहले मेरी बात सुन लीजिए अष्टा विकृति को जानते

818
00:59:22,880 --> 00:59:27,000
हैं आप नहीं नहीं जानता कबीर सागर

819
00:59:27,000 --> 00:59:31,240
को सुरक्षित रखने का कि उसमें एक भी मंत्र मिलाया ना जा सके एक भी मंत्र

820
00:59:31,240 --> 00:59:35,640
हटाया ना जा सके इसका तरीका क्या है

821
00:59:35,640 --> 00:59:39,720
बताइए मतलब कबीर सागर में से क्या बोल रहे हो आप एक भी मंत्र हटाया ना

822
00:59:39,720 --> 00:59:43,880
कबीर सागर के मंत्रों में मिलावट ना हो सके दोहे हैं जो उनमें

823
00:59:43,880 --> 00:59:47,920
मिलावट चौपाइयों में मिलावट ना हो सके इसका सुरक्षा

824
00:59:47,920 --> 00:59:52,080
व्यवस्था क्या है क्या वोह शास्त्रों में वर्णित है

825
00:59:52,080 --> 00:59:56,200
आपके शास्त्रों में मेरे नहीं रामपाल ने कुछ ऐसा लिखा

826
00:59:56,200 --> 01:00:00,320
पाल दास जी ने कुछ ऐसा लिखा कि भैया ऐसे सुरक्षित होगी कबीर सागर

827
01:00:00,320 --> 01:00:04,440
की वाणी देखो इसलिए तो हा वही मैं बता रहा हूं इसलिए

828
01:00:04,440 --> 01:00:08,720
तो गरीब दास जी जो लास्ट आए थे उनकी वाणी कर नहीं है सुनो

829
01:00:08,720 --> 01:00:13,000
सुनो जो यही है हां बोलिए

830
01:00:13,000 --> 01:00:17,000
बोलिए इसका कोई देखो जैसे जैसे जनरेशन आगे जाती है इसमें चेंजेज होते

831
01:00:17,000 --> 01:00:21,120
रहेंगे तो जो लास्ट जो सोर्स ऑफ ट्रुथ है वो है गरीब दास जी की वाणी

832
01:00:21,120 --> 01:00:25,520
जो अमर ग्रंथ साहिब उसमें जो वाणिया लिखी है जो कबीर सागर में भी कुछ

833
01:00:25,520 --> 01:00:29,520
वाणि काल ने रा फेरी की है ठीक है मैं ये बोल रहा हूं जो गरीब

834
01:00:29,520 --> 01:00:33,520
दास जी का जो अमृतवाणी पढ़ोगे आप यानी कि गरीब

835
01:00:33,520 --> 01:00:37,680
दास जी की वाणी जो है वो भी आपके लिए पूरी की पूरी बिल्कुल क्लियर

836
01:00:37,680 --> 01:00:41,800
कट नहीं है कौन बोला कौन बोला आपने क उसम भी किया

837
01:00:41,800 --> 01:00:45,800
है आप सुन लो पहले ढंग से मैं क्या बोल रहा हूं कबीर सागर

838
01:00:45,800 --> 01:00:49,800
आप सुन लो पहले कबीर सागर मैनिपुलेटेड है कुछ कुछ गरीब दास जी के

839
01:00:49,800 --> 01:00:51,080
बाने में कोई मैनिपुलेशन

840
01:00:51,080 --> 01:00:55,120
नहीं है ठीक है अगर एक मिनट मैं क्लियर कर लू मैं एक मिनट

841
01:00:55,120 --> 01:00:59,200
क्लियर कर लू आपके लिए जो मेन सबसे प्रामाणिक

842
01:00:59,200 --> 01:01:03,880
ग्रंथ है वह है गरीब दास जी का

843
01:01:03,880 --> 01:01:07,920
हां ठीक है वही है

844
01:01:07,920 --> 01:01:12,040
हां हा ठीक है क्या उसमें कोई ऐसी सुरक्षा की व्यवस्था

845
01:01:12,040 --> 01:01:17,240
की गई है कि कोई मंत्र हटाया ना जा सके कोई मंत्र लगाया ना जा

846
01:01:17,240 --> 01:01:21,280
सके ठीक है बट ये ऐसा करना क्यों है अरे मैं पूछ रहा हूं आपसे

847
01:01:21,280 --> 01:01:25,400
भाई इसमें कुछ जीत हार की बात नहीं है मैं पूछ रहा हूं देखो

848
01:01:25,400 --> 01:01:29,400
एक्चुअली वो ग्रंथ काफी बड़ा है तो वो एक्चुअली वो मैंने

849
01:01:29,400 --> 01:01:34,000
पूरा भी अरे भाई आप आरोप लगा रहे है कि वेदों में

850
01:01:34,000 --> 01:01:38,040
वेदों में मिलावट हो चुकी है वेद के मंत्र कई सारे बदले

851
01:01:38,040 --> 01:01:42,440
जा चुके हैं ठीक है ठीक है

852
01:01:42,440 --> 01:01:46,600
तो अब जब आप यह कह रहे कि वेदों में मिलावट हो चुकी है उसमें

853
01:01:46,600 --> 01:01:50,680
मंत्र बदले जा चुके तो मैं आपसे पूछ रहा हूं कि कबीर सागर में मिलावट नहीं होती

854
01:01:50,680 --> 01:01:54,720
है इसका क्या प्रमाण है कैसे माने कि कबीर सागर

855
01:01:54,720 --> 01:01:58,920
में मिलावट नहीं हुई ए कबीर सागर नहीं वो आपका क्या है गरीब

856
01:01:58,920 --> 01:02:03,240
दास जी का गरीब दास जी का अच्छा तो गरीब इसका प्रमाण ये है

857
01:02:03,240 --> 01:02:06,800
कि उसमें एक ऐसी भी वाणी की है कि जब 5500

858
01:02:06,800 --> 01:02:10,920
जब कबीर साहिब की के कबीर सागर में वाणी है जब 5500 बीत जाएंगे

859
01:02:10,920 --> 01:02:15,240
कलयुग में मेरा संत आएगा ठीक है कलयुग में मेरा दास आएगा ठीक है

860
01:02:15,240 --> 01:02:19,280
तो वो इस ज्ञान को परखे वो ये बताएगा इसमें से कौन सी

861
01:02:19,280 --> 01:02:23,440
वानियां सही है गलत है वो है संत रामपाल जी महाराज तो वो सिंगल सोर्स ऑफ ट्रुथ

862
01:02:23,440 --> 01:02:27,560
है जो कि पीछे वाले के सारे बताएंगे कौन सा गलत है कन सही है नहीं है आपको

863
01:02:27,560 --> 01:02:31,600
कुछ क्वे पूछ ठीक है ठीक है सुनिए सुनिए सुनिए सुनिए यहां प उत्तर ले

864
01:02:31,600 --> 01:02:36,360
लीजिए कु क्वे जब आपने बताया जो गरीब दास जी का

865
01:02:36,360 --> 01:02:40,840
ग्रंथ है उसके अनुसार 5000 साल में ये होगा वो होगा वो संत आएंगे बताएंगे ठीक

866
01:02:40,840 --> 01:02:45,280
है ऐसे ही वेदों में उनकी सुरक्षा के लिए बताया गया

867
01:02:45,280 --> 01:02:49,880
कि वेदों का ज्ञान बताने वाला सन्यासी होगा परंपरा प्राप्त होगा

868
01:02:49,880 --> 01:02:54,000
समस्त स्तुति स्मृति शास्त्रों में सामंजस्य की शिक्षा देता होगा

869
01:02:54,000 --> 01:02:58,640
और अंततोगत्वा व अपने शिष्य का संशय दूर कर

870
01:02:58,640 --> 01:03:03,160
दे तो वो उस वाणी के आधार पर जो आज के आचार्य

871
01:03:03,160 --> 01:03:07,320
हैं हमारे वो बोल रहे हैं कि नहीं वेद

872
01:03:07,320 --> 01:03:11,880
के मंत्र हमें अभी भी प्राप्त है जो है वो शुद्ध है अब

873
01:03:11,880 --> 01:03:16,000
बताइए ठीक है भाई आपके देखो यहां प देखो मैं चीज बताता हूं अब बात

874
01:03:16,000 --> 01:03:20,040
आती है विश्वास अब बात आती विश्वास आपको उस पर

875
01:03:20,040 --> 01:03:21,840
विश्वास है हमें इस पर विश्वास

876
01:03:21,840 --> 01:03:26,120
है आप कहिए आप कहिए कि कबीर भगवान है

877
01:03:26,120 --> 01:03:30,160
पर गरीब दास ग्रंथ के अनुसार वेदों की बात आप करने वाले

878
01:03:30,160 --> 01:03:34,880
कोई नहीं होते क्योंकि आपके लिए वेद पूरी तरीके से प्रमाण नहीं

879
01:03:34,880 --> 01:03:39,280
है आप कहिए कि भगवान है कबीर

880
01:03:39,280 --> 01:03:43,800
पूजा करिए पर यह लिखिए कि गरीब दास की वाणी प्रमाण है

881
01:03:43,800 --> 01:03:48,120
और कबीर दास भगवान है यह वेद और गीता का आलंबन

882
01:03:48,120 --> 01:03:52,200
मत लो अब मुझे बताओ बो

883
01:03:52,200 --> 01:03:56,280
अब ये बात हो गई अब मैं एक चीज क्लियर करलू पूछता आप आपने

884
01:03:56,280 --> 01:04:00,440
पूछा अभी मेरी बारी है मेरी बारी है अभी अल्टरनेट जा है

885
01:04:00,440 --> 01:04:04,440
अ नहीं नहीं नहीं मैं नहीं पूछ रहा मैंने पहला पूछा दूसरा आपने मैं पूछता हूं सुन पूछो

886
01:04:04,440 --> 01:04:08,640
मेरे को आपने मंत्र नहीं बताया आप कौन सा मंत्र करते हो ठीक है

887
01:04:08,640 --> 01:04:12,680
आप आपने बता अच्छा क्यों बताऊ इसका

888
01:04:12,680 --> 01:04:16,840
इसका क्वेश्चन का इस क्वेश्चन की वैल्यू तो बताओ मुझे इससे आपका

889
01:04:16,840 --> 01:04:21,040
क्या परिपेक्ष है वैल्यू इसलिए कि जो मंत्र है

890
01:04:21,040 --> 01:04:25,960
उससे ही मोक्ष होता है जैसे गुरुजी ने हमें बताया है

891
01:04:25,960 --> 01:04:29,960
पास श में लिखा है जो मंत्र करते हैं उससे मोक्ष होता है गायत्री मंत्र करते हैं

892
01:04:29,960 --> 01:04:34,240
मोक्ष होता है अच्छा तो गायत्री मंत्र करते हो आप

893
01:04:34,240 --> 01:04:36,840
हां अच्छा तो आप गायत्री मंत्र करते

894
01:04:36,840 --> 01:04:40,920
हो लेकिन यार श्री कृष्ण ने जो भगवत गीता लिखी आप जो अवतार बोलते

895
01:04:40,920 --> 01:04:45,040
हो उसमें तो यार कहीं प नहीं गीता की बात मत लाइए

896
01:04:45,040 --> 01:04:49,240
जब हम प्रमाण दिखाएंगे तो आप कहोगे काल ने बोला है आप

897
01:04:49,240 --> 01:04:53,640
अपनी बात अपने पास रखिए आप तो भगवान सिद्ध करिए कबीर को

898
01:04:53,640 --> 01:04:58,440
गीता ब बात पूछ रहा हूं नहीं

899
01:04:58,440 --> 01:05:03,920
आप मत पूछो आप मत पूछो आप इसका उत्तर दो फिर पूछना पहले उतर

900
01:05:03,920 --> 01:05:08,600
संतुष्ट वही बोल रहा हूं आप बो गायत्री मंत्र आपने जैसे बोला

901
01:05:08,600 --> 01:05:12,800
लेकिन गायत्री मंत्र जो है आप बोलते हो ना जो भी ओम से स्टार्ट होता है व मंत्र

902
01:05:12,800 --> 01:05:16,840
मुझे भी पता है लेकिन आप भगवत गीता पढ़ोगे आप जैसे बोल र हो विष्णु को

903
01:05:16,840 --> 01:05:21,400
मानते हो राइट तो श्री कृष्ण जी को भी मानते होंगे आप मानते कि नहीं बिल्कुल बिल्कुल

904
01:05:21,400 --> 01:05:25,920
भगवत गीता तो भगवत गीता उन्होंने लिखी और भगवत गीता कोई आसा इतना

905
01:05:25,920 --> 01:05:30,080
मतलब आप हल्के में नहीं ले सकते उसमें जो उसका मंत्र बताया है वह

906
01:05:30,080 --> 01:05:34,120
बताया ओम और जो पूर्ण परमात्मा मंत्र बताया सुन लो वो

907
01:05:34,120 --> 01:05:38,360
है ओम तत् सत ओ आप पहले बताइए ये ओम

908
01:05:38,360 --> 01:05:42,480
क्या है और ये ओम तत् सत क्या है और एक और आगे सुनना जो

909
01:05:42,480 --> 01:05:46,480
कुरान शरीफ है उसमें लिखा है एन कीन काफ उस जो गुरुजी

910
01:05:46,480 --> 01:05:50,680
ने बताया वही मैं आपको बोल रहा हूं यह मेरा ज्ञान नहीं है गुरुजी का ज्ञान है और मैं बिल्कुल भी

911
01:05:50,680 --> 01:05:51,840
उसका ता हं

912
01:05:51,840 --> 01:05:55,960
प्रश्न पूरा हो गया हा बताए प्रश्न पूरा हो गया हां

913
01:05:55,960 --> 01:06:00,080
बताइए प्रश्न पूरा हो गया जो भगवत गीता है वो किसने

914
01:06:00,080 --> 01:06:03,280
लिखी

915
01:06:03,280 --> 01:06:07,480
है नहीं आप उत्तर दीजिए ना मेरे को अरे मैं आपसे उत्तर

916
01:06:07,480 --> 01:06:11,680
ही उत्तर ही दूंगा मैं किसने लिखी है भगवत गीता वो वो सुनो

917
01:06:11,680 --> 01:06:15,680
आप जो प्रश्न पूछ रहे हैं आप उसका ही उत्तर देते देते देते आओ

918
01:06:15,680 --> 01:06:19,800
और वहां पर आना जहां पर वो मैंने आपको जो प्रश्न पूछा ना मंत्र का उसका मेरे को

919
01:06:19,800 --> 01:06:23,800
मैं भाई साहब उसी पर बोलूंगा मैं आपसे कन्फर्म कर रहा हूं आपकी जानकारी में

920
01:06:23,800 --> 01:06:28,720
भगवत गीता किसने लिखी है नहीं यार उतना तो यार मैंने

921
01:06:28,720 --> 01:06:33,000
मुझे बो वो मुझे मुझे इतना जानना नहीं है मुझे सिर्फ ये जानना है कि मंत्र क्या है बता दो

922
01:06:33,000 --> 01:06:37,080
बस जानना नहीं है आपको पता नहीं है पता नहीं है चलो समझ

923
01:06:37,080 --> 01:06:41,160
लो आप पता नहीं है समझ लो मतलब पता है समझ लो पता नहीं

924
01:06:41,160 --> 01:06:45,200
है ठीक है क्योंकि सही क्या है समझना

925
01:06:45,200 --> 01:06:49,360
क्या है आप सही बता दो वो समझ लूगा मेरे को इससे मतलब नहीं है किसने

926
01:06:49,360 --> 01:06:53,600
लिखा है क्या लिखा है मे अपन ये जानते पता

927
01:06:53,600 --> 01:06:57,680
ऐसे बोलो ना नहीं पता नहीं पता नहीं पता बता दो और ये भी बताना जो मैंने प्रश्न

928
01:06:57,680 --> 01:07:01,680
पूछ इसके बाद बताऊंगा चीज बता बाद मैं एक

929
01:07:01,680 --> 01:07:06,200
एक चीज बताऊंगा सुनिए धैर्य के

930
01:07:06,200 --> 01:07:10,560
साथ जो भगवत गीता है वह महाभारत

931
01:07:10,560 --> 01:07:14,560
का अंश है ठीक है यार आप टाइम मत वेस्ट करो वो मेरे

932
01:07:14,560 --> 01:07:19,000
को पता है यार अर्जुन ने जो उसम पूरा पता है आप वो मत बताओ खा

933
01:07:19,000 --> 01:07:23,280
हैसले आओगे आप ठीक है आपका आंसर

934
01:07:23,280 --> 01:07:27,520
दूंगा अगर आपके पास धैर्य हो तो अबकी ठीक

935
01:07:27,520 --> 01:07:31,560
ठीक है चता है महाभारत का महाभारत को

936
01:07:31,560 --> 01:07:35,600
लिखने वाले हैं वेदव्यास वेदव्यास जी ने केवल

937
01:07:35,600 --> 01:07:39,720
महाभारत नहीं लिखी है वेदव्यास जी ने

938
01:07:39,720 --> 01:07:44,040
18 महापुराण भी लिखे है पुराना भी लिख है महापुराण

939
01:07:44,040 --> 01:07:48,280
में से एक पुराण है देवी भागवत जिसका मैं रेफरेंस दे रहा हूं ठीक

940
01:07:48,280 --> 01:07:52,400
है उसमें लिखा हुआ है गायत्री मंत्र

941
01:07:52,400 --> 01:07:58,400
को जपने से मोक्ष मिलता है ठीक

942
01:07:58,440 --> 01:08:02,480
है तो हो गया मेरा गायत्री मंत्र सिद्ध अच्छा

943
01:08:02,480 --> 01:08:06,560
मतलब आप ये बोल रहे हो कि आप देवी भागवत जो बोल रहे

944
01:08:06,560 --> 01:08:10,720
हो आप उसको आप सोर्स मतलब वो आप सोर्स ऑफ ट्रुथ लोगे उसको और

945
01:08:10,720 --> 01:08:15,000
वो मंत्र के लिए बहुत जगह पर है मैंने आपको एक रेफरेंस दिया है

946
01:08:15,000 --> 01:08:19,160
श्री कृष्ण भगवान ने क्या कहा अपने

947
01:08:19,160 --> 01:08:21,880
लिए मंत्रों में मैं गायत्री

948
01:08:21,880 --> 01:08:27,200
हूं अच्छा ठीक है

949
01:08:27,200 --> 01:08:31,480
गायत्री मंत्र को जपने से मोक्ष मिलता है लिखा है

950
01:08:31,480 --> 01:08:35,480
ठीक है नमः शिवाय को जपने से मोक्ष मिलता है लिखा

951
01:08:35,480 --> 01:08:39,480
है नमः शिवाय तो एक मिनट रुको नमः शिवाय

952
01:08:39,480 --> 01:08:43,640
या फिर उसके आगे ओम भी लगाओगे मतलब सिर्फ नमः शिवाय

953
01:08:43,640 --> 01:08:47,880
या फिर ओम भी भाई साहब आपका मैंने उत्तर

954
01:08:47,880 --> 01:08:52,160
दे दिया है कि गायत्री मंत्र से मोक्ष मिलता है कि नहीं मिलता है आपको दिखाऊं मैं देवी भागवत

955
01:08:52,160 --> 01:08:56,240
से आप विषयात ना कर दिखाने की जरूरत नहीं आपको दिखाने की जरूरत नहीं मैं आपको

956
01:08:56,240 --> 01:09:00,360
हम सीधे आ जाते हैं आपको इन शास्त्रों पर पूरा भरोसा नहीं है

957
01:09:00,360 --> 01:09:04,840
अब सुनिए अब रुके कैसे आपने सवाल कर लिया मैंने उत्तर दे दिया अब सुनिए

958
01:09:04,840 --> 01:09:08,960
हा तो सुनो तो सही उत्तर तो दे दिया संतुष्टि नहीं है तो सही अब

959
01:09:08,960 --> 01:09:13,000
आप बोल रहे हो कि 18 पुराण है देखो हमारे गुरुजी

960
01:09:13,000 --> 01:09:17,000
ने ऐसा बनाया बताया है कि सबसे जो अरे भैया तुम अपने गुरु जी का अपने पास

961
01:09:17,000 --> 01:09:21,360
रखो ना भाई कर गुरुजी ने क्या बताया अपना

962
01:09:21,360 --> 01:09:25,400
मैं अपना ज्ञान नहीं बोलता हूं मेरे गुरुजी का ज्ञान बोलता मुझे नहीं चाहिए तुम्हारा ज्ञान तुम अपनी

963
01:09:25,400 --> 01:09:29,520
टॉप जो सबसे टॉप जो चार वेद और भगवत गीता है

964
01:09:29,520 --> 01:09:33,560
इससे जो भी मिलन नहीं खाता है वो सबको नेगलेक्ट

965
01:09:33,560 --> 01:09:36,880
कर दो क्योंकि सुनो अ तो अगर वेद

966
01:09:36,880 --> 01:09:41,120
से जो तुम्हारा वो गरीब दास का ग्रंथ है वो मेल नहीं खाएगा तो नेगलेक्ट

967
01:09:41,120 --> 01:09:45,240
कर दोगे नहीं वो तो एक्सटेंडेड वर्जन है वो तो सूक्ष्म वेद

968
01:09:45,240 --> 01:09:49,400
है ना चारों वेद के आगे वाला वेद इसम पर

969
01:09:49,400 --> 01:09:53,520
ठीक है एक मिनट एक मिनट एक मिनट अब सुनो अब तुमने जब ये बात

970
01:09:53,520 --> 01:09:58,120
बोली वो एक्ड वर्धन है एक मिनट एक्सटेंड वर्जन है ठीक

971
01:09:58,120 --> 01:10:02,320
अब यह बताओ नहीं रुको रुको बताता हूं

972
01:10:02,320 --> 01:10:06,320
रुको रुको भाई मैं पूछ रहा हूं आपने कहा एक्ड

973
01:10:06,320 --> 01:10:10,560
वर्जन है वो एक्सेंड वर्जन प बात हो रही है एक मिनट भैया

974
01:10:10,560 --> 01:10:15,160
आपको बात करनी है आपको बात करनी है भाई साब आपको हगा

975
01:10:15,160 --> 01:10:19,240
अब एक्सेंड वर्जन बात होगी पहले ठीक है ठीक बोलो

976
01:10:19,240 --> 01:10:24,320
चलो कर लेते चलो बता दो

977
01:10:24,320 --> 01:10:29,560
सुनो

978
01:10:29,560 --> 01:10:33,600
ल जि धर्म को मानते वो सनातन है

979
01:10:33,600 --> 01:10:37,800
कि नहीं सनातन सनातन नहीं आदि

980
01:10:37,800 --> 01:10:42,160
सनातन मानते आदि सनातन सनातन से भी आ सनातन

981
01:10:42,160 --> 01:10:46,240
का क्या अर्थ है आद सनातन और सनातन में क्या

982
01:10:46,240 --> 01:10:50,360
अंतर है बताइए सनातन से भी पहले जो आता उसको आदि सनातन

983
01:10:50,360 --> 01:10:55,600
बोलते हैं सनातन का अर्थ क्या है

984
01:10:55,600 --> 01:11:00,800
सनातन का अर्थ यार सनातन अर्थ देखो

985
01:11:00,800 --> 01:11:04,800
यार लोगों पर सनातन का अर्थ नहीं पता

986
01:11:04,800 --> 01:11:08,960
है आए बात करने यहां पर

987
01:11:08,960 --> 01:11:13,920
तरस आता है ले चिप लिया अपने मलाई का

988
01:11:13,920 --> 01:11:19,200
बता दो आप बता

989
01:11:19,200 --> 01:11:25,200
दो घट के पी लो

990
01:11:27,240 --> 01:11:31,320
सनातन का अर्थ होता है जो नित्य हो

991
01:11:31,320 --> 01:11:35,680
जिसकी ना शुरुआत है ना अंत है देखो आपको दे

992
01:11:35,680 --> 01:11:39,760
लगाने का कोई अ ब आपको देख के आपको तामसिक लग रहे हो आप तो

993
01:11:39,760 --> 01:11:44,080
एकदम गुस्से बात नहीं करनी आपको आपको डर लग रहा है ताम सिकता

994
01:11:44,080 --> 01:11:48,640
से आप जा सकते हैं

995
01:11:48,640 --> 01:11:54,640
जाइए जाइए भाई साब जय श्री राम

996
01:11:55,560 --> 01:11:58,080
आपको आना

997
01:11:58,080 --> 01:12:02,760
है यह विषय से हटकर बातें ना

998
01:12:02,760 --> 01:12:07,280
करिएगा बोलिए हां

999
01:12:07,280 --> 01:12:11,640
सनातन का अर्थ है जो कभी बदलता

1000
01:12:11,640 --> 01:12:15,680
नहीं है जो परिवर्तनशील नहीं है और जिसका

1001
01:12:15,680 --> 01:12:20,000
ना आदि है ना अंत है शाश्वत नित्य

1002
01:12:20,000 --> 01:12:24,320
स्थाई उसको कहते हैं सनातन तो अगर सनातन

1003
01:12:24,320 --> 01:12:28,440
शब्द है तो व अपने आप में पर्याप्त है उसके आगे आदि लगाने

1004
01:12:28,440 --> 01:12:32,480
की आवश्यकता नहीं हैा समझ रहे क्योंकि वो

1005
01:12:32,480 --> 01:12:36,920
उसकी शुरुआत कहीं से नहीं हो रही वो सदैव था है और रहेगा ठीक

1006
01:12:36,920 --> 01:12:41,160
है अब सुनिए अब आप जिस धर्म का

1007
01:12:41,160 --> 01:12:45,400
पालन कर रहे हैं वो बदलने वाला है या ना बदलने

1008
01:12:45,400 --> 01:12:49,480
वाला है बदलने वाले का मतलब समझ लीजिए जैसे आज हम कह

1009
01:12:49,480 --> 01:12:53,720
रहे हैं कि हम माता बहन

1010
01:12:53,720 --> 01:12:57,920
से विवाह नहीं करते यह धर्म है ठीक है

1011
01:12:57,920 --> 01:13:02,120
तो कल को यह बदलेगा नहीं ही यही रहेगा

1012
01:13:02,120 --> 01:13:06,160
इसको कहते हैं ना बदलना तो क्या आपका धर्म ना बदलने

1013
01:13:06,160 --> 01:13:11,680
वाला है क्या आपका धर्म सदैव था है और

1014
01:13:11,680 --> 01:13:16,000
रहेगा मतलब जो ये बोल रहे हो धर्म जो हम जो हम जो फॉलो कर

1015
01:13:16,000 --> 01:13:20,160
जिसको आप पालन कर रहे हैं जिसका बेस जो है वो गरीब दास

1016
01:13:20,160 --> 01:13:24,200
है तो बेसिकली ये जो हम फॉलो कर रहे आपसे मैंने भाई साब

1017
01:13:24,200 --> 01:13:28,320
पूछ हैन आपका धर्म सनातन है या नहीं है सनातन

1018
01:13:28,320 --> 01:13:31,400
है

1019
01:13:31,400 --> 01:13:35,440
सनातन तो सनातन है सुनो सनातन है इसलिए तो

1020
01:13:35,440 --> 01:13:39,720
पंच देवी को पंच देव पूछ रहा हं करके

1021
01:13:39,720 --> 01:13:43,440
वो आप बताते जाइए बस अभी

1022
01:13:43,440 --> 01:13:47,520
आप तो गरीब दास जी ने जो ज्ञान दिया है

1023
01:13:47,520 --> 01:13:51,880
वो ज्ञान 600 वर्ष पूर्व आया कितने वर्ष पूर्व

1024
01:13:51,880 --> 01:13:56,160
आया गरीब दास जी ने जो ज्ञान दिया है वो

1025
01:13:56,160 --> 01:14:01,600
हा कुछ होंगे कुछ होंगे साल

1026
01:14:01,600 --> 01:14:05,640
पहले कबीर के बाद आया हा यस

1027
01:14:05,640 --> 01:14:10,600
रीब जीने साल पहले ज्ञान दिया एक्ड

1028
01:14:10,600 --> 01:14:13,640
मुझे डेट नहीं पता

1029
01:14:13,640 --> 01:14:18,000
ला आपका जो धर्म है व तो उसकी तो शुरुआत हो रही है

1030
01:14:18,000 --> 01:14:22,040
वर्ष पूर्व सेय धर्म नहीं है ना

1031
01:14:22,040 --> 01:14:26,080
क्या है थ है क्या है वो

1032
01:14:26,080 --> 01:14:26,880
धर्म ये धर्म

1033
01:14:26,880 --> 01:14:31,240
कैसे हो गया अरे भैया धर्म होता क्या है यह बताओ

1034
01:14:31,240 --> 01:14:35,240
चलो मैंने तो आपको बोला सुनो मैं क्या बोल रहा अरे धर्म की परिभाषा

1035
01:14:35,240 --> 01:14:39,280
बताओ सुनो तो सही को तो बोलने तो दो आप

1036
01:14:39,280 --> 01:14:43,280
भाई साहब आपने कहा गरीब दास जी की जो ग्रंथ है उसम लिखा

1037
01:14:43,280 --> 01:14:47,480
है कि वो धर्म नहीं है आपका वो प्रमाण है धर्म

1038
01:14:47,480 --> 01:14:51,720
होता क्या है बता ख बोला सनातन है सनातन है बोल रहा आपको

1039
01:14:51,720 --> 01:14:55,800
पूछ रहा हं भाई साहब आपके लिए गरीब दास जो बात

1040
01:14:55,800 --> 01:15:00,160
है यह एक्सटेंडेड वर्जन है यानी कि कोई और धर्म था

1041
01:15:00,160 --> 01:15:04,560
पूरा पुरानी ग्रंथावली चली आ रही थी उसमें 250 वर्ष पूर्व एक्सटेंड

1042
01:15:04,560 --> 01:15:08,560
वर्जन सूक्ष्म वेद के रूप में आपका प्रकट हुआ है यानी

1043
01:15:08,560 --> 01:15:13,000
कि यहां पे आपके अनुसार धर्म बदल गया हम

1044
01:15:13,000 --> 01:15:17,040
ठीक है अब जो एक्ड कैसे बदला ऐसे उसमें ऐड हो गया

1045
01:15:17,040 --> 01:15:21,200
ना नित्य स्थाई जो जैसा था जो जैसा

1046
01:15:21,200 --> 01:15:25,240
था है और रहेगा कोई बदलाव नहीं वो है सनातन मगर

1047
01:15:25,240 --> 01:15:29,360
आपका बदल गया अब आप कह रहे हो कि भैया वो शास्त्र

1048
01:15:29,360 --> 01:15:33,520
बदला है धर्म नहीं बदला ठीक है अच्छा शास्त्र बदला है धर्म

1049
01:15:33,520 --> 01:15:37,600
नहीं बदला अब आप ये बता दो आपके अनुसार धर्म की परिभाषा क्या है

1050
01:15:37,600 --> 01:15:41,720
ठीक है अभी मैं बोलूंगा तो थोड़ा सुन लेना बीच में इंटरप्ट मत करना क्योंकि आप क्या करते हो क्वे

1051
01:15:41,720 --> 01:15:42,220
धर्म

1052
01:15:42,040 --> 01:15:46,120
की परिभाषा बोलेंगे तो सुन मैं बता रहा हूं हां बता रहा हूं सुनो अभी

1053
01:15:46,120 --> 01:15:50,360
आपने बोला एक्सटेंड किया है ठीक है अभी आपने बोला डे एक्सटेंट किया है इसलिए अलग

1054
01:15:50,360 --> 01:15:54,640
है ठीक है तो फिर अभी एक चीज बताता हूं अभी देखो आपने बोला

1055
01:15:54,640 --> 01:15:58,760
जैसे मैं बोल रहा हूं कि ये सनातन है ठीक है और अभी अपनी

1056
01:15:58,760 --> 01:16:02,800
जो ह्यूमन कॉग्निटिव एबिलिटी होती है इंटेलिजेंस जो होता है वो भगवान के हाथ में

1057
01:16:02,800 --> 01:16:07,200
होता है मानते हो कि नहीं अपनी एक एक बताओ जो कॉग्निटिव दिमाग की क्षमता होती है सोचने की

1058
01:16:07,200 --> 01:16:11,320
उसकी एक लिमिट होती है मानते हो कि नहीं ठीक है तो

1059
01:16:11,320 --> 01:16:15,920
बोलते जाइए मैं सुन रहा हूं हां हां तो उसके जो आपका जो

1060
01:16:15,920 --> 01:16:20,360
दिमाग की जो क्षमता है अगर वो ऊपर के स्तर पे जब पहुंच जाएगी

1061
01:16:20,360 --> 01:16:24,360
तब आप इस जो पांचवें वेद को है तब आप समझ पाओगे क्योंकि

1062
01:16:24,360 --> 01:16:28,440
आप अभी आपसे यानी कि आप यानी कि आपके

1063
01:16:28,440 --> 01:16:32,560
अनुसार अभी आप पांचवे वेद को बता नहीं सकते क्या नहीं बता सकते

1064
01:16:32,560 --> 01:16:36,640
अभी पूरा कंप्लीट तो करने दो आप वही तो करते हो आप ना लोगों को इंटरप्ट करते हो और बीच

1065
01:16:36,640 --> 01:16:40,760
में से क्वेश्चन पूछ लेते हो अब हमें बो क्योंकि लोग क्योंकि लोग विषय से

1066
01:16:40,760 --> 01:16:44,920
हटकर बातें करते हैं अब मैं विषय साब मैंने आपसे पूछा आपने

1067
01:16:44,920 --> 01:16:49,000
कहा कि जो वो शास्त्र है जो ऐड किया है आपने वो धर्म

1068
01:16:49,000 --> 01:16:53,520
नहीं है तो अब मैं आपसे पूछ रहा हूं धर्म की परिभाषा क्या है सिंपल

1069
01:16:53,520 --> 01:16:57,440
बताइए धर्म की परिभाषा और आपको ना पता हो तो मैं

1070
01:16:57,440 --> 01:17:02,160
बताऊं बता दो आप बता दो आपको नहीं पता

1071
01:17:02,160 --> 01:17:06,160
है नहीं पता मुझको बताओ आप आप यहां

1072
01:17:06,160 --> 01:17:09,440
क्या करने आए

1073
01:17:09,440 --> 01:17:11,800
हैं

1074
01:17:11,800 --> 01:17:15,920
गए डर गए क्या कर रहे हो आप चलिए

1075
01:17:15,920 --> 01:17:20,200
गए हू मैं य आ आगे आगे

1076
01:17:20,200 --> 01:17:24,240
मैं डरा नहीं हूं आपने अपने व से कि एक लास्ट मैं आपको एक बता

1077
01:17:24,240 --> 01:17:29,040
अच्छा आपसे धर्म की परिभाषा पूछ रहा हूं आप य क्या करने आए

1078
01:17:29,040 --> 01:17:33,200
आप तत्वदर्शी संत के शिष्य है आपको

1079
01:17:33,200 --> 01:17:38,000
धर्म का नहीं पता है क्या क्या होता है धर्म व्ट इ धर्म

1080
01:17:38,000 --> 01:17:42,080
अभी आपने इससे बोला कि सनातन एक जो चीज भाई मैं जो बात कर

1081
01:17:42,080 --> 01:17:48,080
रहा उससे क्यों हट रहे हो इसीलिए तो इट करता

1082
01:17:48,440 --> 01:17:52,520
ह धैर्य से सुनो धर्म क्या है और वो तुम्हारा गरीब धर्म क्यों

1083
01:17:52,520 --> 01:17:57,160
है सुनो हा बता मनुष्य की

1084
01:17:57,160 --> 01:18:02,040
जीव की चाह का वास्तविक विषय सच्चिदानंद

1085
01:18:02,040 --> 01:18:07,000
स्वरूप परमेश्वर को परिभाषित कर सकने वाले

1086
01:18:07,000 --> 01:18:11,840
शास्त्र द्वारा सच्चिदानंद स्वरूप परमेश्वर

1087
01:18:11,840 --> 01:18:15,960
को प्राप्त कराने वाली विधि विधान का नाम धर्म

1088
01:18:15,960 --> 01:18:20,680
है अच्छा समझ में आया विधि विधान

1089
01:18:20,680 --> 01:18:25,200
क्या आया विधि विधान आपका कहना ये है

1090
01:18:25,200 --> 01:18:29,600
कि वहां से जो विधि विधान चला आ रहा है षष्टि के अनादि से

1091
01:18:29,600 --> 01:18:34,400
उसमें अभी हमने एक्सटेंडेड वर्जन डाला है

1092
01:18:34,400 --> 01:18:38,440
ठीक है एक्सटेंडेड कुछ ऐसे विधि विधान थे जो पहले

1093
01:18:38,440 --> 01:18:42,960
नहीं थे अभी 2 स साल पहले आपने डाल

1094
01:18:42,960 --> 01:18:47,040
दिए तो विधि विधान बढ़ गए ना एक्ड

1095
01:18:47,040 --> 01:18:51,680
हो ग ना तो इसका उत्तर यही तो दिया मैंने आपको क्या देखो

1096
01:18:51,680 --> 01:18:55,800
देखो के अनुसार ने कहा मनुष्य

1097
01:18:55,800 --> 01:18:59,800
की जो प्रज्ञा शक्ति होती है आपके भैया आपको जानकारी थोड़ी कम है

1098
01:18:59,800 --> 01:19:04,000
सुन लो आपने कहा मनुष्य की प्रज्ञा शक्ति के अनुसार

1099
01:19:04,000 --> 01:19:08,280
बार-बार ऐसे करने की आवश्यकता है है मगर वो

1100
01:19:08,280 --> 01:19:12,400
जो पहले से अनादि शास्त्र है ना वेद जो पहले से

1101
01:19:12,400 --> 01:19:16,520
आ रहे हैं उनकी सीमा के अंदर रहेंगे उनके

1102
01:19:16,520 --> 01:19:20,960
बाहर नहीं जाएंगे यानी कि कोई आचार ये बोला

1103
01:19:20,960 --> 01:19:26,920
ये बोला किसने आपको ये कहां पे लिखा है सुन लो सुनलो ये

1104
01:19:26,920 --> 01:19:31,080
कहीं मैं हर बात को लिखा दिखा दूंगा हर बात को लिखा

1105
01:19:31,080 --> 01:19:35,440
दिखा दूंगा हर बात अभी मैं जो बोल रहा हूं उसको पूरा हो जाने दो

1106
01:19:35,440 --> 01:19:39,600
ठीक है जैसे कोई आचार्य आए पहले भाई वेदों को समझने के लिए

1107
01:19:39,600 --> 01:19:44,200
बहुत व्यक्ति के पास प्रज्ञा शक्ति थी समझ लिया फिर

1108
01:19:44,200 --> 01:19:48,200
प्रज्ञा शक्ति कम हुई तो कोई आचार्य आ गए उन्होंने वेदों का निचोड़ कर

1109
01:19:48,200 --> 01:19:52,240
दिया रामायण लिख दी फिर कोई आचार्य आ गए

1110
01:19:52,240 --> 01:19:56,240
उन्होंने देखा कलयुग में और ज्यादा भ्रष्ट होने मामला तो व्यास

1111
01:19:56,240 --> 01:19:58,240
जी आ गए उन्होंने महाभारत लिख दी 18

1112
01:19:58,240 --> 01:20:02,520
पुराण लिख दिए वेदों का प्रकरण कर दिया यह तो सीमित

1113
01:20:02,520 --> 01:20:06,520
है मगर यदि हम यह कह रहे हैं कि हम कुछ ऐसा दे रहे

1114
01:20:06,520 --> 01:20:10,560
हैं जो अभी तक नहीं था तो यह जो हम दे रहे हैं

1115
01:20:10,560 --> 01:20:15,040
इसके साथ में जिस जो हम प्राप्त कर रहे हैं वो सनातन नहीं है फिर

1116
01:20:15,040 --> 01:20:19,680
वो तो 2 स वर्ष पूर्व निर्मित हो रहा है

1117
01:20:19,680 --> 01:20:23,840
अब आप बताइए कि आप जिस धर्म को फॉलो कर रहे हैं 50 वर्ष

1118
01:20:23,840 --> 01:20:28,640
पूर्व उस ड हुआ है वेदों में वो सनातन कैसे

1119
01:20:28,640 --> 01:20:32,720
है कितना मगज मारी करनी पड़ती है भाई आवाज कट गई थी आपकी

1120
01:20:32,720 --> 01:20:36,920
हां हां समझ में आ गया मेरे को तो आप बोल रहे हो एक्सटेंडेड वर्जन है राइट ये एक्सटेंडेड

1121
01:20:36,920 --> 01:20:40,960
किया हुआ है जो कि आप बोल रहे हो कि जो पहले से लि तो मैं वही पूछ रहा हूं क्या ये

1122
01:20:40,960 --> 01:20:45,000
जो ऋषियों ने ऐसा कहा है कि चारही वेद फाइनल है इसके बाद कोई वेद नहीं है

1123
01:20:45,000 --> 01:20:49,000
इसके ऊपर कोई ज्ञान नहीं है ठीक है सुनो जो वेद प्रा हु ये

1124
01:20:49,000 --> 01:20:53,080
मुझसे लिखा हुआ चाहते हैं तो ये भी तो लिखना पड़ेगा आपको आप अगर

1125
01:20:53,080 --> 01:20:57,240
मुझसे लिखा हुआ चाहते हैं तो आपको यह लिखा दिखाना पड़ेगा कि गरीब

1126
01:20:57,240 --> 01:21:01,360
दास जी आएंगे सूक्ष्म वेद

1127
01:21:01,360 --> 01:21:05,680
देंगे बो दोनों की पॉसिबिलिटी नहीं है दोनों की पॉब

1128
01:21:05,680 --> 01:21:09,800
दोनों की पॉसिबिलिटी नहीं है तो मैं तो आपसे ये पूछ रहा हूं सनातन की परिभाषा

1129
01:21:09,800 --> 01:21:13,800
के अनुसार आपका धर्म सनातन है कि नहीं मैं ये पूछ रहा हूं

1130
01:21:13,800 --> 01:21:18,040
सनातन है आपका धर्म तो वर्ष जो देवी देवता

1131
01:21:18,040 --> 01:21:22,040
की साधना करते हैका धर्म वर्ष पूर्व

1132
01:21:22,040 --> 01:21:26,920
अस्तित्व में आया सनातन सिद्ध करो अनादि

1133
01:21:26,920 --> 01:21:30,920
सिद्ध करो उसे देखो पहली बात धर्म

1134
01:21:30,920 --> 01:21:35,040
अग अगर आपको मैं प्रमाण दे भी दूंगा तो उससे प्राप्त होने वाला

1135
01:21:35,040 --> 01:21:39,080
जो धर्म सनातन थोड़ी ना होगा मेरे को एक बात बता एक चीज हा

1136
01:21:39,080 --> 01:21:43,600
सुन बताता हं आपको उत्तर बता आपने प्रमाण मा एक मिनट आपने

1137
01:21:43,600 --> 01:21:47,840
प्रमाण मागा आपने एक मिनट मिट एक मिनट मैं क्लियर कर दू

1138
01:21:47,840 --> 01:21:51,880
आपने एक प्रमाण मांगा कि मुझे प्रमाण दे दो कि इन चारों वेदों

1139
01:21:51,880 --> 01:21:56,000
के बाद अब कुछ नहीं आएगा ठीक है अगर प्रमाण आपको दे दूंगा तो

1140
01:21:56,000 --> 01:22:00,640
मैं तो खुद अपने धर्म को सनातन विरुद्ध सिद्ध करूंगा

1141
01:22:00,640 --> 01:22:04,760
क्योंकि हा और क्या अगर मैं आपको ये बता दूं कि भैया आएगा

1142
01:22:04,760 --> 01:22:08,800
अगर आप अपने धर्म को अगर आप अपने धर्म को सुनो अगर आप अपने

1143
01:22:08,800 --> 01:22:13,080
धर्म को ये मानते हैं कि अनादि नहीं कलयुग में भी कुछ आएगा वो

1144
01:22:13,080 --> 01:22:16,440
सनातन सिद्ध करो आप कैसे सनातन हा

1145
01:22:16,440 --> 01:22:20,640
तो इसीलिए मैं कहता हूं ना हिंदू की रोध

1146
01:22:20,640 --> 01:22:24,760
सिद्ध कर रहा देखो आप दवी तक पढ़े हो ना 10

1147
01:22:24,760 --> 01:22:29,560
तक पढ़े हो तो 10थ के बाद 12थ होता है आपको ये पता है

1148
01:22:29,560 --> 01:22:33,600
तो 10थ में जो फाउंडेशन बनता है सुनो मान लो समझ लो एग्जाम का बीच

1149
01:22:33,600 --> 01:22:37,720
में मत बोलना मैं पल रहा हूं भाई आपने जो नियम दिए हैं गरीब द

1150
01:22:37,720 --> 01:22:41,840
में वो नए नियम हैल आप क्योंकि

1151
01:22:41,840 --> 01:22:46,040
बकवास बात पास समय नहीं है इतना और भी लोग है आप अपने

1152
01:22:46,040 --> 01:22:50,120
धर्म को सनातन सिद्ध करिए अगर थ के बाद 12थ आता है सुनो

1153
01:22:50,120 --> 01:22:54,120
तो जो 12थ में जो पढ़ाई कराई जा रही है वो सनातन पढ़ाई नहीं

1154
01:22:54,120 --> 01:22:58,360
है क्यों भाई अगर द

1155
01:22:58,360 --> 01:23:02,400
में अगर दवी के समय अगर दसवी के समय वो

1156
01:23:02,400 --> 01:23:06,520
अस्तित्व में नहीं थी 12वी के समय अस्तित्व में आई है तो व

1157
01:23:06,520 --> 01:23:10,680
सनातन पढ़ाई नहीं है यही अंतर है सनातन में

1158
01:23:10,680 --> 01:23:14,800
और ये भौतिक शास्त्रों में आपने डिक्लेयर भी कर दिया

1159
01:23:14,800 --> 01:23:18,960
मतलब आपने मेरा एजाम भाई

1160
01:23:18,960 --> 01:23:22,960
आप आप जाइए अध्यन करके दोबारा वापस आइए आपके पास अभी

1161
01:23:22,960 --> 01:23:27,040
नहीं है चीजों को समझना बताना रुक जाओ मैं सुन रहा हूं आपकी बात मैं सुन रहा हूं आपकी बात सुन

1162
01:23:27,040 --> 01:23:31,360
रहे हो आप ये सिद्ध करो अगर आपने माना कि 250

1163
01:23:31,360 --> 01:23:31,860
वर्ष

1164
01:23:31,720 --> 01:23:35,800
पूर्व आपका एक ग्रंथ आता है जो पीछे से जो

1165
01:23:35,800 --> 01:23:40,080
अनादि शास्त्र है उसमें ऐड हो जाता है नया जो अब तक अस्तित्व

1166
01:23:40,080 --> 01:23:44,720
में नहीं था वो आपने दे दिया तो फिर यह सनातन कैसे हुआ

1167
01:23:44,720 --> 01:23:48,720
हां सुनो अभी जो गरीब जी की वाणिया है उसमें

1168
01:23:48,720 --> 01:23:52,880
हम लोग तीन टाइम का पाठ करते हैं ठीक है औरस हम तीन सुनो सुनो

1169
01:23:52,880 --> 01:23:56,920
अभी मेरी उत्तर सुनो उसम हम देवी देवताओं को जो

1170
01:23:56,920 --> 01:24:01,120
भी देवी देवता है हिंदू धर्म के आप वाणी में आपको भेज दूंगा उसमें नाम लिखे

1171
01:24:01,120 --> 01:24:05,480
हुए हैं उनके उनके नाम लिखे हुए सुनो और जितने

1172
01:24:05,480 --> 01:24:09,680
भी पूछ रहा हं गरीब दस जी ने 2 वर्ष

1173
01:24:09,680 --> 01:24:13,800
पूर्व कुछ नया दिया जो पहले से नहीं था

1174
01:24:13,800 --> 01:24:18,040
दिया ना नया ठीक है हा तो फिर अब आपका धर्म

1175
01:24:18,040 --> 01:24:22,640
सनातन कैसे रह गया तो वही बता रहा हूं

1176
01:24:22,640 --> 01:24:26,720
आ गया तो बात खम हो बता रहे हो तुम अरे आप सुन

1177
01:24:26,720 --> 01:24:30,760
ही नहीं रहे हो मैं क्या बोल रहा हूं पहले क तो करने दो मुझे कर

1178
01:24:30,760 --> 01:24:34,800
पहले पूरा बोलने दो मेरे को ठीक है आपको क्या प्रूफ करना है कि सनातन

1179
01:24:34,800 --> 01:24:38,800
है या नहीं ठीक है तो सनातन में क्या होता है मुख्य पांच देवी

1180
01:24:38,800 --> 01:24:43,160
देवताओ की पूजा करते हो आप लोग करेक्ट जो हिंदू धर्म में होती है पाच देवी देव सनातन

1181
01:24:43,160 --> 01:24:46,960
में मुख्य पांच देवी देवता ही नहीं है बहुत सी बातें है सनातन धर्म

1182
01:24:46,960 --> 01:24:51,040
ग्रंथों की एक विस्तृत एक विस्तृत नियमावली है वेदा

1183
01:24:51,040 --> 01:24:55,440
आदि शास्त्रों की सीमा में केवल एक

1184
01:24:55,440 --> 01:24:59,440
देव मुख बहुत स चीज है जो आप आप ये

1185
01:24:59,440 --> 01:25:03,520
कह रहे हो सुनो आप ये जो कह रहे हो कि क्या

1186
01:25:03,520 --> 01:25:07,600
कहते हैं पित्रों को तर्पण करना ये सब बकवास है और

1187
01:25:07,600 --> 01:25:11,120
उसमें भरभर के मंत्र है वेदों

1188
01:25:11,120 --> 01:25:15,120
में ठीक है तो हो गया ना बात

1189
01:25:15,120 --> 01:25:19,240
आ गई यहां पे सुनो मेरी बात आ गई ना यहां पे कुछ चीजें मैनिपुलेटेड है तो ये

1190
01:25:19,240 --> 01:25:23,520
उसमें से एक पार्ट समझ लो आप जो आप वा पार्ट

1191
01:25:23,520 --> 01:25:26,320
विश्

1192
01:25:26,320 --> 01:25:30,320
वि आपने तो आपने तो स्टार्टिंग में बोला जी कि मैनिपुलेटेड है हा

1193
01:25:30,320 --> 01:25:34,400
मानते हो ठीक है मानते मैं मानता हूं मैंने आपकी बात को

1194
01:25:34,400 --> 01:25:38,840
दुर्जन तोष न्याय से सुना था मैंने आपकी बात को दुर्जन

1195
01:25:38,840 --> 01:25:43,320
तोष न्याय से सुना था ठीक है समझते

1196
01:25:43,320 --> 01:25:47,400
क्या तो इशारे को समझो जो मैं बोल रहा हूं वही है जो मैं बोल रहा हूं

1197
01:25:47,400 --> 01:25:51,520
करप्टेड हुई है वो वही मैं ये नहीं कह रहा हूं मैं ये कह रहा

1198
01:25:51,520 --> 01:25:55,720
हूं आपने खुद ये स्वीकार किया कि भैया 250 साल

1199
01:25:55,720 --> 01:25:59,920
पहले गरीब दास जी ने एक ग्रंथ लिखा उसमें वह बातें

1200
01:25:59,920 --> 01:26:04,520
लिखी जो अब तक नहीं थी हम

1201
01:26:04,520 --> 01:26:08,560
ठीक है तो फिर आपका धर्म सनातन नहीं रहा

1202
01:26:08,560 --> 01:26:12,600
इसको नोट करो अ भाई उसमें जो विधि दी है विधि दी सुन लो पहले

1203
01:26:12,600 --> 01:26:16,600
पूरा मैं पूरा बोलने तो तो मुझे विधि दी है जो अपने

1204
01:26:16,600 --> 01:26:21,000
मुख के पास देव है ये मानते हो कि नहीं पाच देव है या नहीं जो मुख्य है हां

1205
01:26:21,000 --> 01:26:25,680
तो उस साधना बता री बात

1206
01:26:25,680 --> 01:26:29,680
मुझे एक बात बताओ मैं तुम्हारी बात प क्यों विश्वास करूं कि जो ये

1207
01:26:29,680 --> 01:26:33,800
वेद है जिन पर मैं विश्वास करता हूं ये बदल दिए गए और तुम्हा तुम

1208
01:26:33,800 --> 01:26:37,920
जो कह रहे हो वो सही है मैं इसको क्यों मान लू उसके लिए

1209
01:26:37,920 --> 01:26:41,480
मुझे तत्वदर्शी को तत्वदर्शी मानना पड़ेगा ना उसके

1210
01:26:41,480 --> 01:26:45,560
लिए मुझे उसके लिए मुझे तुम्हारे गरीब दास वाले ग्रंथ को ग्रंथ मानना पड़ेगा

1211
01:26:45,560 --> 01:26:50,080
ना मैं नहीं मानता मैं नहीं मानता एग्रीड तो वही

1212
01:26:50,080 --> 01:26:54,240
मैं वही बोल रहा हूं सबके ओपिनियन अलग है सब लोग एक नजर को अलग वैसे देखते

1213
01:26:54,240 --> 01:26:58,320
इसीलिए मैं कह रहा था इसीलिए मैं इसीलिए शुरू से कह रहा था ग्रंथों की बात

1214
01:26:58,320 --> 01:27:02,320
मत करो अब मैं आपसे पूछ रहा हूं मैं आपसे पूछ रहा

1215
01:27:02,320 --> 01:27:06,680
बिना ग्रंथ के पूछा अबरी ब आप अल्टरनेट

1216
01:27:06,680 --> 01:27:11,000
चल रहा है अल्टरनेट चल रहा है ठीक है ग्रंथ से मत पूछना अब ग्रंथ से मत पूछना

1217
01:27:11,000 --> 01:27:15,000
क्योंकि सबके ओपिनियन अलग अलग है सबका विश्वास अलग अलग है आपका विश्वास

1218
01:27:15,000 --> 01:27:19,040
है गरीब दास प मेरा विश्वास है वेद प ठीक है ठीक

1219
01:27:19,040 --> 01:27:23,120
है मैं पूछता से नहीं पूछता हूं ठीक है मैं क्वेन पूछता हूं ठीक है

1220
01:27:23,120 --> 01:27:27,120
पूछो अ तो एक बात बताओ

1221
01:27:27,120 --> 01:27:31,160
तो आप आप मोक्ष को कैसे डिफाइन करते हो आप मोक्ष

1222
01:27:31,160 --> 01:27:35,240
की परिभाषा क्या समझते हो मोक्ष बोते आप इसके बाद इसके बाद

1223
01:27:35,240 --> 01:27:39,680
मैं तुमसे पूछूंगा मोक्ष की परिभाषा क्या है सुनो बताओ आप

1224
01:27:39,680 --> 01:27:43,840
संसार के प्रत्येक जीव में मैं आपको प्रमाण नहीं दे रहा हूं मगर

1225
01:27:43,840 --> 01:27:47,880
ये इसका पंक्ति का एक हिस्सा है इसलिए बोल रहा हूं ठीक है असतो मा

1226
01:27:47,880 --> 01:27:52,160
सद गमाया तमसो मा ज्योतिर गमाया

1227
01:27:52,160 --> 01:27:53,320
मतु मा

1228
01:27:53,320 --> 01:27:57,320
मतम गमाया मुझे सत से असत की ओर

1229
01:27:57,320 --> 01:28:01,560
ले चलो मुझे मृत्यु से अमरता की ओर ले

1230
01:28:01,560 --> 01:28:03,000
चलो मुझे

1231
01:28:03,000 --> 01:28:07,080
अंधकार से उजाले की ओर ले चलो इन तीनों

1232
01:28:07,080 --> 01:28:11,240
का जो निचोड़ है वही मोक्ष है यानी कि एक

1233
01:28:11,240 --> 01:28:15,880
नास्तिक व्यक्ति के अंदर भी जो सत चित आनंद

1234
01:28:15,880 --> 01:28:20,200
की प्यास है उसका परवन जिस सच्चिदानंद स्वरूप

1235
01:28:20,200 --> 01:28:26,200
स्थिति और परमेश्वर में होता है उस स्थिति को मोक्ष कहते

1236
01:28:26,600 --> 01:28:31,000
मतलब अभी अभी तो मतलब आप अभी आपने थोड़ा संस्कृत में बोला तो मतलब आपका

1237
01:28:31,000 --> 01:28:35,120
आपका कहने का मतलब यह है कि आप एक ऐसे स्टेट पर जाओगे

1238
01:28:35,120 --> 01:28:39,760
जहां पर आप परमात्मा को मिल जाओगे करेक्ट हा हा

1239
01:28:39,760 --> 01:28:44,880
कर परमात्मा परमात्मा में मिल जाओगे या फिर परमात्मा को मिल

1240
01:28:44,880 --> 01:28:49,120
जाओगे परमात्मा में मिल जाएंगे परमात्मा में मिल जाएंगे

1241
01:28:49,120 --> 01:28:53,120
मतलब उनको मतलब परमात्मा मिल जाएंगे फमले मतलब आप

1242
01:28:53,120 --> 01:28:57,160
फॉर्मलेस की बात कर जिसका जो निराकार रूप है वो बता बात कर रहे हो आप

1243
01:28:57,160 --> 01:29:01,160
क्योंकि जो व्यवहार में नहीं आ सकता मतलब थोड़ा

1244
01:29:01,160 --> 01:29:05,280
बताओ मतलब व्यवहार में मतलब मतलब एक्चुअली मेरा हिंदी मतलब इतना ये नहीं व्यवहार में मतलब जो

1245
01:29:05,280 --> 01:29:09,400
जिसका फॉर्म नहीं है जो मतलब शेप में दिखता वो बोल र जो व्यवहार का वाणी

1246
01:29:09,400 --> 01:29:13,480
का आंखों का कर्मेंद्रियों का विषय नहीं है

1247
01:29:13,480 --> 01:29:18,040
मतलब वही फॉर्म में नहीं है फॉर्मलेस है इसका मतलब आप बोल रहे हो

1248
01:29:18,040 --> 01:29:22,120
कह सकते वही तो चीज हो गई फॉर्मलेस मतलब निराकार निराकार तो आप

1249
01:29:22,120 --> 01:29:26,640
निराकार में मिल जाओगे आप ये बोल रहे हो में करे ठीक है

1250
01:29:26,640 --> 01:29:31,320
तोय ये आपका डेफिनेशन आप बोल रहे हो कि आप निराकार में मिल जाओगे लास्ट में मोक्ष में

1251
01:29:31,320 --> 01:29:35,520
ठीक है तोय आपका डेफिनेशन है हा ये लास्ट डेफिनेशन

1252
01:29:35,520 --> 01:29:39,600
है आपका हा अच्छा ठीक है

1253
01:29:39,600 --> 01:29:44,120
तो वही चीज है तोय तो गलत हो गया य तो गलत बोल रहे हो कैसे

1254
01:29:44,120 --> 01:29:48,240
कैसे क्योंकि आप य बोल रहे हो आप निराकार में मिल जाओगे ठीक

1255
01:29:48,240 --> 01:29:52,240
है हा तो आपका परमात्मा क्या है आपका जो विष्णु है

1256
01:29:52,240 --> 01:29:56,520
व साकार है निराकार है एक ही परम तत्व

1257
01:29:56,520 --> 01:30:00,800
स्वयं को पांच अलग अलग रूपों में प्रकट करता है यदा

1258
01:30:00,800 --> 01:30:04,200
यदा धर्म

1259
01:30:04,200 --> 01:30:07,000
भारता

1260
01:30:07,000 --> 01:30:11,120
धम व लेवल पर हो समझ गया बात

1261
01:30:11,120 --> 01:30:16,480
सुभ देखने आपने एक प्रश्न किया मैंने उत्तर

1262
01:30:16,480 --> 01:30:20,520
दिया उतर नहीं आया उतर उत्तर वो नहीं आया

1263
01:30:20,520 --> 01:30:25,800
जिससे आप संतुष्ट नहीं हुए दूध का दूध पानी का पानी नहीं हुआ ठीक

1264
01:30:25,800 --> 01:30:29,840
है आपसे प्रश् प्रश्न नहीं कंटिन्यू करिए कंटिन्यू करिए आप बोले

1265
01:30:29,840 --> 01:30:34,000
कि पांच फर्मों में जो आपके जो देव आप जो बोल रहे हो विष्णु जी पांचों फॉर्म

1266
01:30:34,000 --> 01:30:38,040
में आके फॉर्म में आते हैं राइट समझ सही जो

1267
01:30:38,040 --> 01:30:42,040
करेक्ट मैं बोल रहा हूं फॉर्म में आते हैं तो वही मैं पूछ रहा हूं कि आप बोल रहे हो पांचों

1268
01:30:42,040 --> 01:30:46,080
फॉर्म में आते हो करेक्ट अलग अलग फॉर्म तो ये जो है जो आप बोल रहे हो तो अहम

1269
01:30:46,080 --> 01:30:50,080
ब्रह्मास्मि की तरफ तो नहीं बोल रहे आप इशारा कर रहे कि मैं

1270
01:30:50,080 --> 01:30:54,280
ही ब्रम हूं नहीं मैं ही ब्र हूं

1271
01:30:54,280 --> 01:30:58,720
यह परमार्थ का विषय है व्यवहार का नहीं

1272
01:30:58,720 --> 01:31:03,000
हां नहीं नहीं नहीं नहीं आप इसकी बात तो नहीं कर रहे ना कि मैं ही ब्रह्म हूं क्योंकि सुनो

1273
01:31:03,000 --> 01:31:07,760
अगर आप परमात्मा पर मिल जाओगे तो आप वही बन जाओगे

1274
01:31:07,760 --> 01:31:12,400
अगर आप उसम मिल रहे हो तो आप उसका पार्ट हो गए ना आप वही बन गए

1275
01:31:12,400 --> 01:31:16,560
नान तो आप मनुष्य की लेवल की जो स्टेट है वो ब्रम लेवल

1276
01:31:16,560 --> 01:31:21,200
की स्टेट पर पहुंच जाओगे सही या गलत सही है

1277
01:31:21,200 --> 01:31:22,920
सही है सही

1278
01:31:22,920 --> 01:31:26,960
है अच्छा तो ये सही है तो मेरे को एक बात बताओ

1279
01:31:26,960 --> 01:31:31,040
यार जो जो अपने वेदों में ऐसा क्यों लिखा है यार

1280
01:31:31,040 --> 01:31:35,280
कि देखो ग्रंथ की बात मत करो ठीक

1281
01:31:35,280 --> 01:31:39,280
है मत करना ठीक है ठीक है ठीक चलो फिर मेरा हो

1282
01:31:39,280 --> 01:31:43,760
गया ये प्रश्न आपने बो दिया पूछ रहा

1283
01:31:43,760 --> 01:31:48,120
सुनो मैं पूछ रहा हूं अब तुम्हारा हो गया है अब मैं पूछ रहा हूं अब एक मिनट

1284
01:31:48,120 --> 01:31:52,440
एक मिनट एक मिनट अब मैं पूछूंगा अब मैं पूछूंगा

1285
01:31:52,440 --> 01:31:55,040
आपके अकॉर्डिंग

1286
01:31:55,040 --> 01:31:59,560
क्या आप जिस भगवान को भगवान मानते हो वह सर्वशक्तिमान

1287
01:31:59,560 --> 01:32:03,680
है या नहीं हां

1288
01:32:03,680 --> 01:32:07,560
है है और वो साकार

1289
01:32:07,560 --> 01:32:11,560
है देखो अब साकार

1290
01:32:11,560 --> 01:32:15,840
और निराकार इसमें दो इसमें यह जो चीजें है जो साकार निराकार

1291
01:32:15,840 --> 01:32:20,040
वाली वह काफी कॉम्प्लिकेटेड चीज है ठीक है तो इसमें मैं आंसर नहीं दूंगा

1292
01:32:20,040 --> 01:32:24,400
यस और नो में क्योंकि क्योंकि सुनो क्योंकि मतलब आपको नहीं पता है

1293
01:32:24,400 --> 01:32:28,600
है पता पता है मुझे पता है बट मुझे

1294
01:32:28,600 --> 01:32:32,760
मुझे मेरे पास ना इतना बोलने के लिए कुछ नहीं है अभी

1295
01:32:32,760 --> 01:32:37,000
कि मैं आपको प्रूफ कर सकू मुझे प्रूफ नहीं चाहिए आप मानते

1296
01:32:37,000 --> 01:32:37,920
हो वो बताओ

1297
01:32:37,920 --> 01:32:42,280
मुझे प्रूफ नहीं चाहिए आपको जो घोंट के पिलाया गया वो बताओ मुझे प्रूफ

1298
01:32:42,280 --> 01:32:46,600
नहीं चाहिए जो मानते हो वो बताओ ठीक है परमात्मा

1299
01:32:46,600 --> 01:32:50,600
साकार साकार है हां

1300
01:32:50,600 --> 01:32:54,680
साकार अब मुझे बताओ कि जिस कबीर

1301
01:32:54,680 --> 01:32:58,000
की आप फोटो लगाते

1302
01:32:58,000 --> 01:33:02,080
हो भाई साब मैं आपके ईश्वर को सर्वशक्ति मत्ता

1303
01:33:02,080 --> 01:33:06,600
की बात कर रहा हूं आप एक क्वे

1304
01:33:06,600 --> 01:33:10,760
कबीर को जिस रूप में जानते हैं उसका वही रूप सतलोक

1305
01:33:10,760 --> 01:33:15,000
में बैठता है या कोई और रूप है जिस कबीर

1306
01:33:15,000 --> 01:33:19,280
को जानते हो मतलब अभी तो मैंने तो उनका मतलब एक्चुअली फम नहीं देखा

1307
01:33:19,280 --> 01:33:23,280
एकली क्या फम है मतलब जो आपनो चित्र दिखा

1308
01:33:23,280 --> 01:33:27,520
जाते ये सब नकली है नहीं ये नकली नहीं है इट्स

1309
01:33:27,520 --> 01:33:31,840
लाइक वो एक बोलते है ना अपन किसी चीज को एक करति में दिखा

1310
01:33:31,840 --> 01:33:36,480
देते कि ऐसे रूप में है तो एजेक्ट वो नहीं है मतलब प्रसा वो नहीं है

1311
01:33:36,480 --> 01:33:40,520
वो नहीं कह रहा एट वो नहीं कह रहा कहने का मतलब आपको यह तो बताया

1312
01:33:40,520 --> 01:33:45,000
गया है ना कि सतलोक से वो सीधा य आते हैं

1313
01:33:45,000 --> 01:33:49,360
कि रूप को बदल लेते हैं हल्का रूप करके आते हैं क्योंकि उनका

1314
01:33:49,360 --> 01:33:53,960
हका करते बदलते तो नहीं हैते तो

1315
01:33:53,960 --> 01:33:58,160
बदलते तो नहीं है रूप

1316
01:33:58,160 --> 01:34:02,200
नहीं रूप देखो परमात्मा एक टाइम पर कितने ही रूप में आके मनुष्य

1317
01:34:02,200 --> 01:34:06,280
जन्म मैं आपसे भाई साहब एक एक करके बात कर रहा हूं आपका ईश्वर

1318
01:34:06,280 --> 01:34:10,520
अभी सर्वशक्तिमान सिद्ध नहीं होगा दो मिनट बाद दो मिनट बाद आपका ईश्वर

1319
01:34:10,520 --> 01:34:15,040
सर्वशक्तिमान सिद्ध नहीं होगा आप मुझे अपने प्रश्न मुझे अपने प्रश्न पर पहुंचने

1320
01:34:15,040 --> 01:34:19,200
दे अभी मैं कह रहा हूं आपका जो ईश्वर है वो सतलोक

1321
01:34:19,200 --> 01:34:23,360
से आता है अपने जो अपना जो तेज है उसको थोड़ा कंट्रोल कर लेता है जिससे

1322
01:34:23,360 --> 01:34:28,600
कि आप की जो चमड़े की आंखें है वो उन्हे देख सके ठीक

1323
01:34:28,600 --> 01:34:32,840
है क्या उसका व जो रूप है वह शाश्वत

1324
01:34:32,840 --> 01:34:37,440
है शाश्वत मतलब जरा बताइए आप शाश्वत म

1325
01:34:37,440 --> 01:34:42,240
कभी ना बदलने वाला कभी ना कभी नष्ट नहीं होता

1326
01:34:42,240 --> 01:34:46,440
ठीक है तो आप बोल रहे जो कभी नष्ट नहीं होता ब्रह्मा विष्णु

1327
01:34:46,440 --> 01:34:50,520
महेश तो नाशवान इसलिए है ब्रह्मा विष्णु महेश नाशवान आपके

1328
01:34:50,520 --> 01:34:54,920
अनुसार इसलिए है क्योंकि उनका शरीर नष्ट हो जाता है तत्व से तो वो भी अविनाशी

1329
01:34:54,920 --> 01:34:59,400
है ना आत्मा तो सब अविनाशी है

1330
01:34:59,400 --> 01:35:03,520
ब्रह्मा विष्णु महेश भी अविनाशी है ना देखो मैं आत्मा की बात

1331
01:35:03,520 --> 01:35:08,400
कर रहा हूं मैं हा आत्मा के रूप में ब्रह्मा विष्णु महेश अविनाशी है ना

1332
01:35:08,400 --> 01:35:08,960
शरीर रूप

1333
01:35:08,960 --> 01:35:13,040
में ब्रह्मा विष्णु अविनाशी मैं पूछ रहा हूं आत्मा के रूप में ब्रह्मा विष्णु महेश

1334
01:35:13,040 --> 01:35:17,320
अविनाशी है ना सारी आत्मा अविनाशी नहीं है मैं पूछ

1335
01:35:17,320 --> 01:35:21,440
रहा हूं ब्रह्मा विष्णु जब आपको सारी आत्मा अविनाशी है तो ब्रह्मा विष्णु महेश

1336
01:35:21,440 --> 01:35:25,800
को बोलने में दिक्कत हो रही है क्या कर करे कर करेक्ट बोल लो सही है हा

1337
01:35:25,800 --> 01:35:30,280
सही है तो ब्रह्मा विष्णु महेश आपके अनुसार

1338
01:35:30,280 --> 01:35:34,880
उनसे निम्न इसलिए क्योंकि व नाशवान है उनका शरीर

1339
01:35:34,880 --> 01:35:38,960
है ना हा इसका मतलब यह माना जाए कबीर का शरीर

1340
01:35:38,960 --> 01:35:41,560
नाशवान नहीं

1341
01:35:41,560 --> 01:35:46,000
है हां तो आप एक मिनट य पर शरीर में भी दो पार्ट आ जाएंगे

1342
01:35:46,000 --> 01:35:50,880
ठीक है एक तो शरीर हो गया एक तो नूरी शरीर हो

1343
01:35:50,880 --> 01:35:56,000
गया हमलोग बोलते एल और उसके अंदर वाले शरीर जो भी है

1344
01:35:56,000 --> 01:36:00,080
ठीक यहां पर जो शरीर आया था कबीर का वो ओरिजनल

1345
01:36:00,080 --> 01:36:04,160
था या कोई और शरीर आया था यह बताओ कौन सा यहां पर शरीर

1346
01:36:04,160 --> 01:36:08,240
आया था व हा वो ओरिजिनल शरीर था या कोई और शरीर

1347
01:36:08,240 --> 01:36:12,320
था देखो यार अभी जो शरीर जो आया किसी भी बात

1348
01:36:12,320 --> 01:36:16,600
का सीधा जवाब है नहीं देखो यार या मैं पूछ रहा हूं जो नीचे

1349
01:36:16,600 --> 01:36:20,600
धरती पर कबीर आए थे वो किसी गर्भ से नहीं जन्मे

1350
01:36:20,600 --> 01:36:24,560
थे आपके अनुसार वो स शरीर परमात्मा नीचे आता

1351
01:36:24,560 --> 01:36:28,600
है तो वह परमात्मा का सही रूप था या गलत रूप

1352
01:36:28,600 --> 01:36:32,600
था जो नीचे आया था पूरा रूप नहीं था क्योंकि वो रूप को हल्का

1353
01:36:32,600 --> 01:36:36,840
करके आए थे रूप हल्का करके आया शरीर तो वही था ना

1354
01:36:36,840 --> 01:36:40,880
नहीं देखो वही बोल रहा हूं हल्का देख आपको विजन शरीर

1355
01:36:40,880 --> 01:36:45,080
को चेंज किया क्या मैं आपको बताऊ जैसे हम देख रहे उनकी दाढ़ी है उनका यहां

1356
01:36:45,080 --> 01:36:49,240
से य तक कंधा है उनके ये है ऊपर भी वही शरीर है ऐसा ही

1357
01:36:49,240 --> 01:36:53,600
है या बदला हुआ है ऐसा ही शरीर है

1358
01:36:53,600 --> 01:36:57,760
ऐसा ही है यानी वो अपने तेज को कंट्रोल करके वो अपने

1359
01:36:57,760 --> 01:37:01,960
तेज को कंट्रोल करके नीचे आता है करेक्ट करेक्ट ठीक है करेक्ट

1360
01:37:01,960 --> 01:37:06,120
हा अब आपने कहा कि उसका शरीर कभी नष्ट नहीं होता कभी वो

1361
01:37:06,120 --> 01:37:10,840
शाश्वत है वो कभी बदलता नहीं है शाश्वत

1362
01:37:10,840 --> 01:37:14,960
अब मैं पूछ रहा हूं यदि कबीर सर्वशक्तिमान

1363
01:37:14,960 --> 01:37:19,800
है तो क्या वह पहाड़ बन सकता

1364
01:37:19,800 --> 01:37:24,000
है पर बनना क्यों है यह बता दो आप पहले

1365
01:37:24,000 --> 01:37:28,160
सृष्टि क्यों बनाई उसने अच्छा ठीक है तो खुद पहाड़

1366
01:37:28,160 --> 01:37:32,200
बन स क्या आवश्यकता थी पूछ रहा हूं कोई आवश्यकता थी क्या

1367
01:37:32,200 --> 01:37:36,600
उसे प्यासा था वो ठीक है

1368
01:37:36,600 --> 01:37:40,280
तो आप बोल रहे हो आप बोल रहे हो कि पहाड़ बन सकता है क्या

1369
01:37:40,280 --> 01:37:44,400
वो परमात्मा खुद पहाड़ बन सकता है तो इसका आंसर डिपेंड करेगा किस चीज प डिपेंड करता

1370
01:37:44,400 --> 01:37:48,600
है सिचुएशन क्या हैच ें सिशन मान लो मैं इसम

1371
01:37:48,600 --> 01:37:54,480
नहीं जाऊंगा मैं पूछ रहा हूं किसी भी सिच बन सकता है बनकता

1372
01:37:54,480 --> 01:37:58,880
सिचुएशन शरीर बदल गया शरीर कैसे बदल गया क्यों शर

1373
01:37:58,880 --> 01:38:03,080
शाश्वत है ना वो तो शाश्वत कार् क्या है शाश्वत का अर्थ

1374
01:38:03,080 --> 01:38:07,200
क्या है रूप चेंज कर लिया अरे मेरे भाई अभी वो दो

1375
01:38:07,200 --> 01:38:12,120
फिट के कंधे थे अब वो 50 किलोमीटर का पहाड़ है

1376
01:38:12,120 --> 01:38:16,120
तो ये दो फिट के कंडे से 50 किलोमीटर का पहाड़ बन गया बदला कि

1377
01:38:16,120 --> 01:38:20,120
नहीं बदला हां बदला ना तो फिर तो बदल गया शाश्वत कहां से

1378
01:38:20,120 --> 01:38:24,280
रहा वो तो शाश्वत तो वही मैं बोल रहा हूं सिचुएशन मैंने बोला ना इससे

1379
01:38:24,280 --> 01:38:28,480
पहले सिचुएशन प डिपेंड करता अरे भाई या तो सुनो या तो वो शाश्वत

1380
01:38:28,480 --> 01:38:34,040
नहीं है और या फिर वो अपना शरीर नहीं बदल सकता

1381
01:38:34,040 --> 01:38:38,040
हम ठीक है क्योंकि जितनी देर वो पहाड़ बनेगा उतनी देर उसका

1382
01:38:38,040 --> 01:38:42,040
वो जो शरीर था वो नष्ट माना गया

1383
01:38:42,040 --> 01:38:46,080
उसका अस्तित्व नहीं है जड़ है हा तो हा तो सुनो अभी उत्तर सुन

1384
01:38:46,080 --> 01:38:50,240
लो इसका यानी वो जो रूप हमें दिख रहा था या तो हमें मानना पड़ेगा

1385
01:38:50,240 --> 01:38:54,520
यह रूप वास्तविक नहीं था उसका तत्व से कोई और रूप है

1386
01:38:54,520 --> 01:38:55,480
तो शरीर तो इसका

1387
01:38:55,480 --> 01:39:00,160
भी बदलाव हो रहा है नित्य नहीं है शरीर शाश्वत नहीं है शरीर

1388
01:39:00,160 --> 01:39:04,160
सुन लो मेरा उत्तर उत्तर सुन लो यहां जब परमात्मा आए थे कबीर जी जो 15

1389
01:39:04,160 --> 01:39:09,280
15 सेंचुरी में ठीक है तब वो जब यहां पे आए

1390
01:39:09,280 --> 01:39:13,280
थे भाई साहब मुझे नहीं सुनना मैं काफी देर आपके

1391
01:39:13,280 --> 01:39:17,800
साथ बिता चुका हूं मैं आपसे जो पूछ रहा हूं या तो वो शाश्वत

1392
01:39:17,800 --> 01:39:22,680
नहीं है या फिर वो सर्वशक्तिमान नहीं है आप मुझे बताए बता रहा

1393
01:39:22,680 --> 01:39:26,800
बता रहा कि जो परमात्मा 15 सेंचुरी में आए थे वो

1394
01:39:26,800 --> 01:39:31,160
वो खुद ही आए थे और वो एक टाइम पर मल्टीपल प्लेसेस पर रह सकते

1395
01:39:31,160 --> 01:39:35,200
एक टाइम प मल्टीपल प्ले मल्टीपल प्लेसेस में रह सकते हैं तो मैं आपसे पूछ रहा

1396
01:39:35,200 --> 01:39:39,400
हूं ना यानी कि वो जो तत्व है वो कुछ और है वो जो दिख रहा है वो कुछ और है

1397
01:39:39,400 --> 01:39:43,520
नहीं नहीं नहीं आप देखो मैं वही बोल रहा हूं अगेन कॉग्निटिव एबिलिटी मैं बोल रहा हूं कि आपकी

1398
01:39:43,520 --> 01:39:47,600
क्षमता जो है सोचने की वो इतनी है कि आप बोल रहे हो या तो है या तो नहीं है

1399
01:39:47,600 --> 01:39:53,600
तो वो आपके दिमाग की क्षमता है तो उसको

1400
01:39:55,200 --> 01:39:59,200
दे आपको धर्म का मतलब नहीं पता सनातन का मतलब नहीं पता चले आए यहां

1401
01:39:59,200 --> 01:40:03,360
पर बात करने अब आप जा सकते हैं अब आप जा सकते हैं अभी देखो आप बात

1402
01:40:03,360 --> 01:40:06,360
नहीं कर रहे

1403
01:40:06,360 --> 01:40:12,360
पूरी पका लेते हैं भाई पका लेते हैं

1404
01:40:32,120 --> 01:40:36,200
इतनी मेहनत करके जीरो से लेकर आना अंत में उसी बात प

1405
01:40:36,200 --> 01:40:40,440
है कि मोक्ष है कि नहीं धर्म शाश्वत है कि नहीं

1406
01:40:40,440 --> 01:40:44,520
और ईश्वर सर्व शक्तिमान है कि नहीं इतना सब

1407
01:40:44,520 --> 01:40:48,520
घुमा फिरा करके वह वेद वाणी है बड़ी अच्छी सी प्यारी सी भाषा बड़ी अच्छी सी

1408
01:40:48,520 --> 01:40:53,760
प्यारी सी आवाज में और आना अंत में उसी पर है

1409
01:40:53,760 --> 01:40:58,800
जी थोड़ा सा आप लोग बोल लीजिए क्योंकि मैं थक गया हूं

1410
01:40:58,800 --> 01:41:03,000
बोलिए जय श्री राम भाई जी जय

1411
01:41:03,000 --> 01:41:07,000
श्री राम भैया आप इनसे जो बात कर

1412
01:41:07,000 --> 01:41:11,080
रहे हो इन्होंने केवल गुरु बाणी सुनी है

1413
01:41:11,080 --> 01:41:15,160
कभी खुद अध्ययन नहीं किया हम तो

1414
01:41:15,160 --> 01:41:19,200
यह आके आपसे सीधा डिबेट कर रहे हैं कि हां हम य प छा जाएंगे हमारी बात

1415
01:41:19,200 --> 01:41:23,480
सुनी जाएगी और हमारी बात को मान

1416
01:41:23,480 --> 01:41:27,480
को सनातन का अर्थ नहीं पता आ करके क्लेम कर रहे कि वेदों में मिलावट

1417
01:41:27,480 --> 01:41:31,560
हुई है अबे भाई जिसको वेदों पर विश्वास है वो व्यक्ति

1418
01:41:31,560 --> 01:41:35,560
सनातनी है कहो हम हिंदू नहीं है सनातनी नहीं

1419
01:41:35,560 --> 01:41:39,720
इनके लिए वेद बहुत दूर की बात है इनको गुरु का ही अर्थ पूछ लो जिन

1420
01:41:39,720 --> 01:41:44,040
जिनसे इन्होने ज्ञान लिया है इन् उसका ही ज्ञान

1421
01:41:44,040 --> 01:41:48,720
नहीं पता तो इनके लिए तो वेद बहुत दूर की बात है बिल्कुल बिल्कुल

1422
01:41:48,720 --> 01:41:54,720
इनका इनका एक एक वो है कबीर ग्रंथा

1423
01:41:54,840 --> 01:41:58,840
इनके लिए कबीर अगर भगवान है तो इनसे पूछो कि कबीर जी

1424
01:41:58,840 --> 01:42:03,800
अपने एक दोहे में क्यों कहते हैं कि कबीर कुत्ता में राम का और मोती मेरा

1425
01:42:03,800 --> 01:42:08,400
नाम य यह उसको भी कह देंगे उसम मैनिपुलेशन हो

1426
01:42:08,400 --> 01:42:13,040
गया हर वो चीज हर वो चीज जो रामपाल

1427
01:42:13,040 --> 01:42:17,080
दास के विरुद्ध होगी अगर गरीब दास की भी विरुद्ध हो जाएगी तो उसको भी कह

1428
01:42:17,080 --> 01:42:21,080
देंगे मैनिपुलेशन हो गया अरे भैया ठीक है तुमको विश्वास है

1429
01:42:21,080 --> 01:42:26,440
मैनिपुलेशन हो गया वो धर्म है हमको नहीं विश्वास है हमें

1430
01:42:26,440 --> 01:42:30,560
अपने ये केवल संत कबीर दास जी का मुखौटा बनाकर केवल अपना

1431
01:42:30,560 --> 01:42:34,680
ही अपना प्रचार कर रहे हैं ये केवल रामपाल की भक्ति कर रहे कबीर दास जी की

1432
01:42:34,680 --> 01:42:38,920
नहीं कर रहे नहीं कर रहे हा इनका

1433
01:42:38,920 --> 01:42:42,920
इनका मोटिव य है येमा सना धनी बातो को मनवाने

1434
01:42:42,920 --> 01:42:47,080
के लिए 600 साल पहले के मंदिर दिखा रहे हैं हम इनको 7000 वर्ष पूर्व का राम सेतु

1435
01:42:47,080 --> 01:42:51,360
दिखा रहे वो नहीं मानेंगे नहीं मानेंगे भैया नहीं मानेंगे ये भैया

1436
01:42:51,360 --> 01:42:55,360
सनातन धर्म के अंदर वो दीमक जो धीरे धीरे धीरे धीरे इसको

1437
01:42:55,360 --> 01:42:59,800
खा रहे हैं यही चोला उतारने तो निकला हूं

1438
01:42:59,800 --> 01:43:03,960
मैं भैया पूरा समर्थन है हमारा तो आपके साथ में हम आपके

1439
01:43:03,960 --> 01:43:08,720
साथ है नंद पांडे जी जय श्री राम

1440
01:43:08,720 --> 01:43:14,680
जय श्री राम भैया मैं आपका वीडियो कुछ एक दो हफ्ते से दे

1441
01:43:14,680 --> 01:43:19,120
आवाज आ रही है तो मैं छत्तीसगढ़

1442
01:43:19,120 --> 01:43:23,520
से हूं यहां य कबीर पंथ वालो का कबीर पंथ आपने सुना ही होगा नाम

1443
01:43:23,520 --> 01:43:27,920
तो जितने क ट चल रही है

1444
01:43:27,920 --> 01:43:31,960
नहीं वो शायद रिजनल कबीर पं की बात कर रहे हैं

1445
01:43:31,960 --> 01:43:36,080
ओरिजनल मा माड़ जो कबीर पंथ है

1446
01:43:36,080 --> 01:43:40,200
इससे रिलेटेड जितने जय गुरुदेव पंत ये सब है जो कबीर को परमात्मा

1447
01:43:40,200 --> 01:43:41,480
मानते हैं सबका

1448
01:43:41,480 --> 01:43:46,200
यही हाल हैया में इतने है इनके चेले की क्या परेशान

1449
01:43:46,200 --> 01:43:48,640
दर्द करके

1450
01:43:48,640 --> 01:43:52,680
रख भ्रमित कर रहे हैं वेद शास्त्र गीता के अर्थ को अनर्थ

1451
01:43:52,680 --> 01:43:56,720
करते अभी आप भया मेरा पहला कहना ये है

1452
01:43:56,720 --> 01:44:00,720
कि आपका यदि वेद से सिलेक्टिव वेद से

1453
01:44:00,720 --> 01:44:05,000
सिलेक्टिव भी नहीं है कुल मिलाकर आपका जो ग्रंथ है व है कबी वो गरीब दास वाला

1454
01:44:05,000 --> 01:44:09,080
ठीक है आपका गरीब दास के अनुसार अगर कबीर भगवान है आप

1455
01:44:09,080 --> 01:44:13,360
खुब कहो गरीब दास में प्रमाण है और कबीर भगवान

1456
01:44:13,360 --> 01:44:17,960
है खुब कहो आप फिर वेदों को प्रमाण क्यों लाते हो

1457
01:44:17,960 --> 01:44:22,160
और जब वेदों को मानना है तो पूरा मानो हम

1458
01:44:22,160 --> 01:44:26,240
जिसे बताएंगे मैनिपुलेट है मैनिपुलेट कौन करे कौन सिद्ध करेगा मैनिपुलेट

1459
01:44:26,240 --> 01:44:30,280
है तत्वदर्शी तत्वदर्शी कौन सिद्ध करेगा कि वो तत्वदर्शी है गीता गीता को

1460
01:44:30,280 --> 01:44:34,520
कौन सिद्ध करेगा कि वो है गीता परही तो आक्षेप लगाया आपने

1461
01:44:34,520 --> 01:44:38,640
कि उसम मिलावट हो गई है काल ने बोल दिया फिर गीता के आधार

1462
01:44:38,640 --> 01:44:42,720
पर तत्वदर्शी कैसे सिद्ध होगा कोई और आधार लाओ अब वो आधार

1463
01:44:42,720 --> 01:44:48,440
लाएंगे चमत्कार हमारा हमें नहीं विश्वास है उस चलिए

1464
01:44:48,440 --> 01:44:53,120
जाइए इनको जितना हया का नाम इसलिए लेते हैं

1465
01:44:53,120 --> 01:44:59,080
कि उनकी दाल गल पाए हिंदुओं के बीच में जी जी

1466
01:44:59,080 --> 01:45:03,080
बक ना उनका धर्म सनातन देखो कह रहे हैं 2 स साल पहले जो

1467
01:45:03,080 --> 01:45:07,320
गरीब दास आई ग्रंथ वो हमारा धर्म है वो हमारा

1468
01:45:07,320 --> 01:45:11,320
शास्त्र है तो जब 2 स साल पहले तुम्हारा एक नया

1469
01:45:11,320 --> 01:45:15,880
धर्म बन रहा है तो क्यों जोड़ रहे हो अपने आप को सनातन से

1470
01:45:15,880 --> 01:45:20,040
सिद्धि नहीं कर पाओगे सनातन अपने आप को सनातन तभी सिद्ध कर पाओगे जब

1471
01:45:20,040 --> 01:45:24,320
आप वेद का विरोध ना करो

1472
01:45:24,320 --> 01:45:28,360
संसार का कोई भी तंत्र स्वयं को सनातन सिद्ध नहीं कर सकता वेदों का

1473
01:45:28,360 --> 01:45:30,920
विरोध

1474
01:45:30,920 --> 01:45:34,920
करके शिवांश भैया इसीलिए इसीलिए

1475
01:45:34,920 --> 01:45:38,960
जो व्यासपीठ है ना वो व्यासपीठ देखो अध्ययन

1476
01:45:38,960 --> 01:45:43,640
कोई भी कर सकता पढ़ कोई भी सकता है लेकिन वक्ता केवल ब्राह्मण को क्यों बनाया गया

1477
01:45:43,640 --> 01:45:47,920
है जो त्रिकाल संध्या करने वाला ब्राह्मण है जो पूर्ण ब्रह्म

1478
01:45:47,920 --> 01:45:52,000
भगवान में लीन है उसी को वक्ता क्यों बनाया क्योंकि वही अर्थ का बिल्कुल सही

1479
01:45:52,000 --> 01:45:57,240
सटीक अर्थ बता सकता अर्थ का अनर्थ नहीं

1480
01:45:57,240 --> 01:46:01,240
करेगा और यह लोग है अ इनका पहले

1481
01:46:01,240 --> 01:46:05,360
ये तो देख लो भैया सामने जो व्यास पीठ पर बैठा है वह व्यक्ति कौन है कहां

1482
01:46:05,360 --> 01:46:09,560
से व्यवस्था है कौन से गुरु से दीक्षित है उसका गुरु ज्ञान गुरु परंपरा

1483
01:46:09,560 --> 01:46:13,920
कौन सी है कौन सा ज्ञान को व पालन कर रहा है अरे खुद उसके चरित्र

1484
01:46:13,920 --> 01:46:18,000
में क्या है कितना वो कर रहा है पहले वो तो देख ले

1485
01:46:18,000 --> 01:46:21,000
मैं ये कह रहा हूं

1486
01:46:21,000 --> 01:46:25,360
कि ये ये कहते हैं

1487
01:46:25,360 --> 01:46:29,360
भा कबीर सागर को भी मना कर दिया कल जो आए थे व कबीर

1488
01:46:29,360 --> 01:46:33,440
सागर पर कह रहे थे कि हमारे लिए कबीर सागर प्रमाण आज इन्होने कबीर सागर को

1489
01:46:33,440 --> 01:46:37,480
मना कर दिया कल को यह कहेंगे हम तो कबीर को भी नहीं मानते उनसे भी ऊपर कोई

1490
01:46:37,480 --> 01:46:40,600
दूसरे कबीर है

1491
01:46:40,600 --> 01:46:44,640
र अब देखो इन्होंने कहा अपना अपना विश्वास है अरे

1492
01:46:44,640 --> 01:46:48,840
भैया अपना अपना विश्वास है तो तुम हमें क्यों थोप रहे हो कि वेदों में प्रमाण है और तुम गलत

1493
01:46:48,840 --> 01:46:53,160
भक्ति कर रहे हो गलत भक्ति

1494
01:46:53,160 --> 01:46:57,520
तुम ये सिद्ध करो ना कि तुम जो कर रहे हो वो सब वैदिक

1495
01:46:57,520 --> 01:47:01,600
है जब तुमसे ये कहने जाएंगे तो तुम कहोगे इतने वेद गलत

1496
01:47:01,600 --> 01:47:05,720
है तो इसका मतलब वोह भी तुम्हारा मनमुक हो गया

1497
01:47:05,720 --> 01:47:10,080
ना तुम्हारा जो वो है मामला वैदिक नहीं है गरीब दसिक

1498
01:47:10,080 --> 01:47:14,280
है गरीब दसिक मामला है आपका वैदिक नहीं है

1499
01:47:14,280 --> 01:47:18,480
वैद वेदों के नाम पर तो तुम अपनी जनसंख्या बढ़ा रहे हो

1500
01:47:18,480 --> 01:47:22,480
हिंदू नहीं हो सनातनी नहीं हो जो

1501
01:47:22,480 --> 01:47:25,520
वेद कोई उंगली उठा

1502
01:47:25,520 --> 01:47:29,960
दे भैया वेदों की तो यह महीना महिमा है कि अगर

1503
01:47:29,960 --> 01:47:34,120
साक्षात परमेश्वर आ जाए और वेद की किसी

1504
01:47:34,120 --> 01:47:38,280
बात को गलत ठहरा दे तो भी एक बार को अस्वीकार्य है कि वेद

1505
01:47:38,280 --> 01:47:42,760
गलत नहीं हो सकते हैं बिल्कुल है क्योंकि

1506
01:47:42,760 --> 01:47:47,000
वेद अरुष है जब बुद्ध के रूप में भगवान विष्णु

1507
01:47:47,000 --> 01:47:51,640
आए तो बुद्ध को भगवान माना मगर

1508
01:47:51,640 --> 01:47:56,280
उनकी जो वेद विरुद्ध मान्यता थी उसको स्वीकार नहीं किया

1509
01:47:56,280 --> 01:48:00,280
बिल्कुल नहीं कर बता रहा आपको

1510
01:48:00,280 --> 01:48:05,000
वेदों में मिलावट क्यों नहीं हो सकती उसको सुन लीजिए अकृति

1511
01:48:05,000 --> 01:48:09,440
क्या है एक छोटा सा ग्रंथ है

1512
01:48:09,440 --> 01:48:15,440
वेद दिग दर्शन इसमें अष्टा विकृति का सूत्र दिया है

1513
01:48:16,120 --> 01:48:20,520
अकृति ये जहां से वेद आ रहे ऋषि परंपरा से ही अ विकृति

1514
01:48:20,520 --> 01:48:26,520
आ रही है क्या होती है

1515
01:48:31,760 --> 01:48:37,760
269 अगर इसको सरल भाषा में समझाऊं तो

1516
01:48:54,240 --> 01:49:00,240
अष्टा विकृति

1517
01:49:07,800 --> 01:49:12,360
में इसमें यह विकृति का पूरा चैप्टर है

1518
01:49:12,360 --> 01:49:17,760
और इसमें बताया गया है कि वेदों के मंत्र कैसे सुरक्षित रहते

1519
01:49:17,760 --> 01:49:21,760
हैं अब इसमें है क्या मैं आपको

1520
01:49:21,760 --> 01:49:25,880
सरल भाषा में बताऊ वेद के मंत्र को

1521
01:49:25,880 --> 01:49:29,880
बीच में से लेफ्ट की तरफ एक व्यक्ति याद

1522
01:49:29,880 --> 01:49:34,000
करेगा बीच में से राइट की तरफ दूसरा व्यक्ति

1523
01:49:34,000 --> 01:49:38,360
याद करेगा ऐसे कर कर के आठ प्रकार

1524
01:49:38,360 --> 01:49:43,600
से वेद के मंत्रों को तोड़ मरोड़ करके याद किया जाता है अष्ट

1525
01:49:43,600 --> 01:49:47,680
विकृति खराब तरीके से सीधे सधे नहीं गलत

1526
01:49:47,680 --> 01:49:51,720
तरीके से तोड़ मरोड़ के तो

1527
01:49:51,720 --> 01:49:55,880
जब यह याद किया जाता है तो उसके बाद ये गुरु शिष्य परंपरा में वो

1528
01:49:55,880 --> 01:49:59,920
गलत तरीके से जिसने जिस तरीके से याद किया है उन तरीकों के नाम है

1529
01:49:59,920 --> 01:50:03,960
क्या क्या नाम है जटा माला सिखा रेखा ध्वज

1530
01:50:03,960 --> 01:50:08,440
दंड रथ घन ये आठ प्रकार की विकृतियां

1531
01:50:08,440 --> 01:50:09,440
आठ

1532
01:50:09,440 --> 01:50:13,720
प्रकार से तोड़ मरोड़ के वेद के मंत्रों को याद किया जाता है उसके बाद

1533
01:50:13,720 --> 01:50:17,840
गुरु अपने शिष्य को वो गलत तरीके से रटा आता है तो

1534
01:50:17,840 --> 01:50:21,880
आपने सुना होगा वो घन पाठी ब्राह्मण है वो जटा पाठी ब्राह्मण है ऐसे

1535
01:50:21,880 --> 01:50:26,280
सुनने में आया हो बकुल इसका मतलब वो उस गुरु शिष्य परंपरा में

1536
01:50:26,280 --> 01:50:30,280
है जिसमें कि वो जटा वाले तरीके से वेद मंत्र को याद

1537
01:50:30,280 --> 01:50:34,520
किया गया है ठीक है अब होगा क्या कि जब भी कभी ऐसा होगा

1538
01:50:34,520 --> 01:50:38,680
कि इसमें कोई मंत्र मिलाया गया है कि नहीं मिलाया गया यह चेक करना है

1539
01:50:38,680 --> 01:50:42,760
तो वो जो आठ परंपराएं चल रही है

1540
01:50:42,760 --> 01:50:47,440
जटा माला घन वाली वो आठों आएंगे

1541
01:50:47,440 --> 01:50:51,520
उनके जो वंशज होंगे वो आएंगे गुरु शिष्य परंपरा से और

1542
01:50:51,520 --> 01:50:55,760
फिर वो आकर के अपना अपना वह जो पीस है मंत्र

1543
01:50:55,760 --> 01:51:00,040
का जो अंश है उनका वो लगाएंगे अगर वो फिट बैठा सही

1544
01:51:00,040 --> 01:51:04,080
से तो तो मंत्र ओके है और फिट

1545
01:51:04,080 --> 01:51:08,760
नहीं बैठा तो यह मिलावट इस

1546
01:51:08,760 --> 01:51:13,080
सुरक्षा व्यवस्था का इस सुरक्षा व्यवस्था का

1547
01:51:13,080 --> 01:51:17,400
विदेशियों तक ने सम्मान किया है मैं कले जैसे सनातन

1548
01:51:17,400 --> 01:51:23,200
विरोधियों ने की वेदों में मिलावट करना बहुत

1549
01:51:23,200 --> 01:51:24,880
संभव नहीं है

1550
01:51:24,880 --> 01:51:28,880
अब मैं य क्याकी गरीब दास वाणी में

1551
01:51:28,880 --> 01:51:34,080
ऐसा कोई सुरक्षा व्यवस्था की है क्या शास्त्र को सुरक्षित रखने के

1552
01:51:34,080 --> 01:51:39,200
लिए ऐसा कुछ नहीं बल्कि

1553
01:51:39,200 --> 01:51:43,640
मिलाव कबीर सागर मैंने पढ़ है बक रखा बहुत बड़ा क्या क्या

1554
01:51:43,640 --> 01:51:48,440
मिला को आद मे को दिया मिलावट उसम उसम लेखक उसला

1555
01:51:48,440 --> 01:51:52,720
ना य

1556
01:51:52,720 --> 01:51:56,840
कबीर सागर उसम नहीं आया इतना मिला उन

1557
01:51:56,840 --> 01:52:01,080
मूर्खों से क्या बात करने के लाय ही

1558
01:52:01,080 --> 01:52:06,040
प्रमाण नाम पहले हमें एक बात समझनी होगी

1559
01:52:06,040 --> 01:52:10,200
सनातनी किसे कहते हैं समझना होगा जो

1560
01:52:10,200 --> 01:52:14,480
सृष्टि के मतलब जो शास्त्र अनादि

1561
01:52:14,480 --> 01:52:19,040
है उन पर प्रमाण बुद्धि रखने वाला सनातनी

1562
01:52:19,040 --> 01:52:23,840
है और शास्त्र कौन से अनादि है वेद

1563
01:52:23,840 --> 01:52:27,840
जो व्यक्ति जिस रूप में भी वेद प्राप्त है उस

1564
01:52:27,840 --> 01:52:31,840
पर प्रमाण बुद्धि रखता है कि इसका

1565
01:52:31,840 --> 01:52:37,080
जो मंत्र है वह बिल्कुल सटीक है प्रमाण बुद्धि रखने

1566
01:52:37,080 --> 01:52:40,120
वाला सनातनी है हिंदू है

1567
01:52:40,120 --> 01:52:44,360
अब यदि कोई कहे कि मैं वेद की सीमा के बाहर भी कुछ नियम है एक्सटेंड

1568
01:52:44,360 --> 01:52:48,360
वर्जन जैसे अभी भाई साहब आए थे तो इनका धर्म क्या हुआ

1569
01:52:48,360 --> 01:52:52,560
कि ा स साल पहले का जो ग्रंथ आया वो प्लस

1570
01:52:52,560 --> 01:52:56,760
वेद के वो मंत्र जो इसमें समा पाए वेद में वो नहीं समा

1571
01:52:56,760 --> 01:53:00,920
रहा है वेद के वो मंत्र जो इसमें समा पाए तो इनका जो धर्म निर्मित हुआ

1572
01:53:00,920 --> 01:53:05,320
कहां से हुआ 250 वर्ष पूर्व तो क्या

1573
01:53:05,320 --> 01:53:09,560
हुआ इनका धर्म सनातन नहीं रहा 250

1574
01:53:09,560 --> 01:53:13,680
वर्षीया धर्म हो गया अब 250 वर्षीया

1575
01:53:13,680 --> 01:53:18,040
उसमें क्या दिक्कत है इसको भी समझो धर्म शाश्वत क्यों होना

1576
01:53:18,040 --> 01:53:22,080
चाहिए अगर धर्म किसी देश काल परिस्थिति में उत्पन्न

1577
01:53:22,080 --> 01:53:26,520
हो रहा ठीक है इसका मतलब

1578
01:53:26,520 --> 01:53:30,680
कि उसी वो जो 250 वर्ष पूर्व जो चीजें चल रही थी उसी

1579
01:53:30,680 --> 01:53:35,440
के अनुसार वो गलत हो रही थी जैसे मान लीजिए

1580
01:53:35,440 --> 01:53:40,040
कि हम यह मान ले कि इस्लाम जो है वो सनातन नहीं

1581
01:53:40,040 --> 01:53:44,560
है इसका अर्थ क्या है कि आज अगर उनके यहां मूर्ति पूजा

1582
01:53:44,560 --> 01:53:48,640
मान्य नहीं है और जिसके लिए हम जान भी दे

1583
01:53:48,640 --> 01:53:52,960
रहे हैं मर रहे हैं बचाने के लिए अपने नियमों को

1584
01:53:52,960 --> 01:53:55,560
कल को बदल जाएंगे

1585
01:53:55,560 --> 01:53:59,600
हम बेकारी ड़ ऊपर वाले ने कह दिया अब

1586
01:53:59,600 --> 01:54:04,120
मूर्ति पूजा अलाउ है 5 101 में

1587
01:54:04,120 --> 01:54:08,320
यह कहा गया कि ज्यादा सवाल ना करिए नहीं तो आपके

1588
01:54:08,320 --> 01:54:12,400
लिए वह वाले नियम खोल दिए जाएंगे जो पहले थे

1589
01:54:12,400 --> 01:54:16,800
और जिनके कारण लोग बागी हो गए थे

1590
01:54:16,800 --> 01:54:21,520
तो नियम बंद कर दिए है ना

1591
01:54:21,520 --> 01:54:26,040
वो खुद कह रहे दो 187 में रोजों

1592
01:54:26,040 --> 01:54:30,240
में स्त्री संघ पहले अलाउ

1593
01:54:30,240 --> 01:54:34,400
नहीं था मगर किसी दिन जब उनकी

1594
01:54:34,400 --> 01:54:39,040
परिस्थिति ऐसी पड़ गई कि उनको स्त्री संग करना ही था

1595
01:54:39,040 --> 01:54:43,080
तो फिर ऊपर वाले से आदेश आ गया कि आज से अलाउ है तोय क्या

1596
01:54:43,080 --> 01:54:47,480
हुआ जो कल तक गलत था वह आज सही हो गया

1597
01:54:47,480 --> 01:54:51,600
तो ये इसलिए धर्म सनातन होना चाहिए कि व्यक्ति की

1598
01:54:51,600 --> 01:54:55,600
उसमें बुद्धि हो सके यह बदलेगा नहीं अगर वह बदलने

1599
01:54:55,600 --> 01:54:59,720
वाला है तो व्यक्ति की उसको पालन करने में बुद्धि क्यों होगी

1600
01:54:59,720 --> 01:55:03,840
क्यों करे वो पालन हो सकता है कल ही बदल जाए

1601
01:55:03,840 --> 01:55:07,960
क्यों मानू मैं क्यों सामने खड़ी हुई तीन स्त्रियों में मैं अंतर

1602
01:55:07,960 --> 01:55:10,760
करू हो सकता है कल को यही कह दे

1603
01:55:10,760 --> 01:55:14,760
आ करके कि भैया आज से नियम हमने गरीब दास का नया ग्रंथ आया उसको चेंज

1604
01:55:14,760 --> 01:55:18,800
कर रहे हैं अब अंतर नहीं है माता बहन और पत्नी

1605
01:55:18,800 --> 01:55:22,680
में नास्तिक हो गए

1606
01:55:22,680 --> 01:55:26,960
शाश्वत होना आवश्यक है जो किसी भी देश काल परिस्थिति में प्रभावित

1607
01:55:26,960 --> 01:55:31,240
ना हो नित्य स्थाई जो आदि मध्यान सत्य

1608
01:55:31,240 --> 01:55:33,760
हो माने

1609
01:55:33,760 --> 01:55:38,040
हा शिवाजी गिरी चेहरा

1610
01:55:38,040 --> 01:55:42,080
दिखाइए भाई साहब शिवाजी गिरी

1611
01:55:42,080 --> 01:55:46,400
आज शिवाजी गिरी से रहा नहीं जा रहा है कमेंट में बहुत छका

1612
01:55:46,400 --> 01:55:50,440
लगाते हैं बातों

1613
01:55:50,440 --> 01:55:54,800
का चले गए ठीक है भैया ली होता

1614
01:55:54,800 --> 01:55:58,920
हूं कहां से भैया कहां से आप नंद पांडे जी

1615
01:55:58,920 --> 01:56:02,920
छतीसगढ़ कोरबा से इधर य रामपाल वालो का बहुत है इनसे मेरा डेली चलते

1616
01:56:02,920 --> 01:56:07,160
रहता है कुछ ना कुछ सा शब्दों को लेकर के अभी

1617
01:56:07,160 --> 01:56:11,200
अभी अभी हम अभी हम इसमें जो अभी तक हमने मेहनत की है

1618
01:56:11,200 --> 01:56:15,200
ना अभी तक जो परिश्रम किया उसका एक संक्षिप्तीकरण वाला

1619
01:56:15,200 --> 01:56:19,360
वीडियो लेकर आएंगे अभी आज इन्होने क्या मान लिया

1620
01:56:19,360 --> 01:56:22,480
कि एक्सटेंडेड वर्जन

1621
01:56:22,480 --> 01:56:26,600
ठीक है धर्म वो जो अनादि धर्म था वो था मगर अभी कलयुग

1622
01:56:26,600 --> 01:56:30,720
में 50 वर्ष पूर्व एक्सटेंडेड वर्जन आया है हमारे यहां पर

1623
01:56:30,720 --> 01:56:34,840
कोई एक्सटेंडेड वर्जन नहीं आता है जो भी है व वेद की सीमा

1624
01:56:34,840 --> 01:56:37,840
में व्याख्या होती है

1625
01:56:37,840 --> 01:56:42,480
बस जब लोगों को समझने में दिक्कत आने लगी तो भगवान आ गए

1626
01:56:42,480 --> 01:56:46,680
और भगवान ने आकर उसको क्लियर कर दिया पहले रामायण

1627
01:56:46,680 --> 01:56:50,720
आ गई फिर दिक्कत आई महाभारत आ गई अब दिक्कत आएगी

1628
01:56:50,720 --> 01:56:55,120
तो आगे बैठे हैं तो हमारे यहां वो नहीं है जो बदलता है एक्सटेंड

1629
01:56:55,120 --> 01:57:00,880
वर्जन नया वर्जन आ

1630
01:57:00,880 --> 01:57:06,880
गया धर्म प्रो मैक्स

1631
01:57:18,560 --> 01:57:22,560
अल्ट्रा अच्छा एक चीज और है येय बात कहते

1632
01:57:22,560 --> 01:57:27,280
हैं कि दिमाग का दिमाग समझ नहीं सकता हम भी तो यही कह रहे हैं

1633
01:57:27,280 --> 01:57:31,320
कि जो एक पार मार्थी ईश्वर है वह हमारी

1634
01:57:31,320 --> 01:57:35,440
इंद्रियों का ज्ञान इंद्रियों का कर्म इंद्रियों का विषय नहीं है आप बना रहे हो

1635
01:57:35,440 --> 01:57:39,720
उसे विषय आप कह रहे हो यहां से शुरू हो रहा है य खत्म हो रहा है

1636
01:57:39,720 --> 01:57:43,880
आप कह रहे हो उसकी सफेद दाढ़ी है आप कह रहे हो उसके दो कान है आप बना

1637
01:57:43,880 --> 01:57:47,920
रहे हो विषय हम हम ये कह रहे हैं कि

1638
01:57:47,920 --> 01:57:52,160
भैया एक रूप भगवान का ऐसा है जो हमारी ज्ञान

1639
01:57:52,160 --> 01:57:56,360
जो हमारी सीमा से परे है ठीक है वो हमारे व्यवहार

1640
01:57:56,360 --> 01:58:00,400
का अ विषय वाणी का अ विषय है और फिर वही भगवान एक ऐसा रूप लेता

1641
01:58:00,400 --> 01:58:04,440
है जो हमारी वाणी का विषय हो जाए तो ये बात जो

1642
01:58:04,440 --> 01:58:08,680
है यही बात देखो वो भी कहते हैं अचिंत है यही बात कहते

1643
01:58:08,680 --> 01:58:13,600
हैं स्कोन वाले जब वो अटकने लगते तो अचिंत और

1644
01:58:13,600 --> 01:58:16,160
तब तक जब तक हम प्रश्न नहीं करते तब तक

1645
01:58:16,160 --> 01:58:20,680
ईश्वर ऐसा है ईश्वर ऐसा है ईश्वर ऐसा है भाई ईश्वर की डेफिनेशन

1646
01:58:20,680 --> 01:58:24,400
निश्चित वाली आप दे रहे हो

1647
01:58:24,400 --> 01:58:28,520
जो निश्चित डेफिनेशन है वह आप दे रहे हो कि व यहां से शुरू होता है यहां

1648
01:58:28,520 --> 01:58:32,600
पर खत्म होता है आपने दी जैसे ही आप उसे साकार कर रहे हो कि

1649
01:58:32,600 --> 01:58:36,880
उसका अंतिम स्वरूप साकार है तो आपने ईश्वर की निश्चित डेफिनेशन

1650
01:58:36,880 --> 01:58:41,160
दे दी जब निश्चित डेफिनेशन आप दोगे ईश्वर की तो

1651
01:58:41,160 --> 01:58:45,640
दिक्कत आएगी कि वह बाधित हो जाएगा ढेर सारे नियमों से

1652
01:58:45,640 --> 01:58:49,640
तो इसलिए ईश्वर के दो स्वरूप है एक अनिश्चित

1653
01:58:49,640 --> 01:58:53,640
व्यवहार में ना सकने वाला फिर एक निश्चित वो अपने

1654
01:58:53,640 --> 01:58:58,120
आप को सजन करता है तब वो बाधित नहीं होगा कुछ भी करके दिखा देगा

1655
01:58:58,120 --> 01:59:02,160
तो पावरफुल कौन हुआ पावरफुल कौन हुआ ब्रह्मा

1656
01:59:02,160 --> 01:59:06,720
विष्णु महेश जितनी बार कहो कुछ भी बन जाए हा

1657
01:59:06,720 --> 01:59:11,040
बकुल कौन हुआ पावरफुल आपका जो कबीर है वह

1658
01:59:11,040 --> 01:59:15,840
शाश्वत शरीर वाला है उसमें हथौड़ा भी मारोगे टूटेगा नहीं

1659
01:59:15,840 --> 01:59:20,000
तो वो छोटा नहीं हो सकता वो बड़ा नहीं हो सकता वो पहाड़

1660
01:59:20,000 --> 01:59:24,160
नहीं बन सकता ढेर सारी चीज या तो बता दो और अगर

1661
01:59:24,160 --> 01:59:28,240
बन सकता है तो फिर वो शाश्वत मत कहो उसको वो कहो फिर

1662
01:59:28,240 --> 01:59:31,200
आपको ये मानना पड़ेगा कि यह जो कबीर दिख रहा है यह वास्तविक

1663
01:59:31,200 --> 01:59:35,320
स्वरूप नहीं है क्योंकि य बदल रहा है सत्य क्या होता है जो बदले

1664
01:59:35,320 --> 01:59:40,360
ना बिल्कुल नित्य स्थाई सत्य क्या होता है जो बदले

1665
01:59:40,360 --> 01:59:45,680
ना अब बहुत ज्यादा टाइम नहीं है हमारे पास

1666
01:59:45,680 --> 01:59:49,840
तो जिसको वेदों में प्रमाण कबीर भगवान

1667
01:59:49,840 --> 01:59:54,680
बताना हो या फिर फ एक बात और थी

1668
01:59:54,680 --> 01:59:58,800
ब्रह्मा विष्णु महेश कबीर के बराबर सर्वशक्तिमान नहीं

1669
01:59:58,800 --> 02:00:02,880
है इस पर बात करेंगे कोई आना चाहे इसके संबंध में बात करने तो आ

1670
02:00:02,880 --> 02:00:08,880
सकता है आपको आना है भाई साहब गॉड

1671
02:00:10,320 --> 02:00:15,280
कवि सत सा संगत जी जय श्री राम

1672
02:00:15,280 --> 02:00:19,400
जय श्री अरे संगत जी आप जैसे ये

1673
02:00:19,400 --> 02:00:23,440
बताते रहते हैं कि कबीर जी राम जी अभी मैंने मैंने एक

1674
02:00:23,440 --> 02:00:27,440
वो लिया है चैप्टर आपको इस चैप्टर के बारे में बात करनी है नहीं तो हम फिर किसी

1675
02:00:27,440 --> 02:00:31,600
दिन बात करेंगे नहीं नहीं एक ही सवाल पूछना था अभी देख रहा था आपका

1676
02:00:31,600 --> 02:00:35,720
ये अभी अभी अभी अभी नहीं अभी हम फिर किसी दिन बात करेंगे क्योंकि

1677
02:00:35,720 --> 02:00:39,720
अभी दो घंटे हो चुके मुझे बोलते बोलते एक ही बात बताइए के

1678
02:00:39,720 --> 02:00:43,800
वो एक से बात नहीं होगी ना भाई अगर मैं उत्तर नहीं दे पाया तो फिर आप जाक

1679
02:00:43,800 --> 02:00:48,400
के रील काट के बनाओगे देखो यहां शिवांश उत्तर नहीं दे

1680
02:00:48,400 --> 02:00:52,400
पाया जगत बखान ने आदि राम कोई बिरला जाने

1681
02:00:52,400 --> 02:00:57,440
क्यों नहीं आप बात बताते कबीर जी ने ये भी वाणी बोली

1682
02:00:57,440 --> 02:01:01,480
है वो वो वाणी बोल देते हो वो वाणी बोल देते

1683
02:01:01,480 --> 02:01:05,560
हो के कुत्ता राम जो वो बोलते हो अभी

1684
02:01:05,560 --> 02:01:09,840
कबीर जी की बोली थी आदि राम कोई बिल बिल्ला जाने तो आदि राम आपके अनुसार

1685
02:01:09,840 --> 02:01:14,200
क्या है आदि राम क्या है आदि राम कबीर परमेश्वर

1686
02:01:14,200 --> 02:01:18,200
जी है अरे ईश्वर है कि

1687
02:01:18,200 --> 02:01:22,680
नहीं कबीर परमेश्वर जिनको कबीर देव कहा गया है

1688
02:01:22,680 --> 02:01:25,600
आदि राम आपके अनुसार आदि राम भी ईश्वर

1689
02:01:25,600 --> 02:01:29,720
है ना जी जी जी परमेश्वर अरे परमेश्वर है

1690
02:01:29,720 --> 02:01:33,720
ना जी जी आपने अपनी किताबों में कहीं लिखा

1691
02:01:33,720 --> 02:01:37,880
वेदों में प्रमाण है आदि राम भगवान है दा

1692
02:01:37,880 --> 02:01:41,880
तो जी पंजाब से है जहां जिनको परमात्मा अब

1693
02:01:41,880 --> 02:01:47,880
आप ऐसा करना भाई साहब आप आना दोबारा किसी दिन दो घंटे हो चुके ठीक

1694
02:01:48,960 --> 02:01:53,040
है जिसको भी कोई र मतभेद के निमित्त

1695
02:01:53,040 --> 02:01:57,320
चर्चा करनी है कबीर को वेदों के अनुसार सिद्ध

1696
02:01:57,320 --> 02:02:01,600
करना है कि वह भगवान है

1697
02:02:01,600 --> 02:02:05,720
वेदों के अनुसार गीता के अनुसार आप

1698
02:02:05,720 --> 02:02:10,120
हां अपने आप को सनातनी सिद्ध करना है राम पालियो

1699
02:02:10,120 --> 02:02:15,000
के लिए बोल रहा हूं रामपाल वालों के लिए और

1700
02:02:15,000 --> 02:02:19,200
अपने आप को गीता और वेद को

1701
02:02:19,200 --> 02:02:23,200
मानने वाला सिद्ध करना है सनातन को मानने वाला

1702
02:02:23,200 --> 02:02:28,000
सिद्ध करना है सनातन धर्मी सिद्ध करना है सर्वशक्तिमान ईश्वर

1703
02:02:28,000 --> 02:02:32,200
को मानने वाला सिद्ध करना है परम स्वतंत्र मोक्ष को मानने वाला

1704
02:02:32,200 --> 02:02:36,320
सिद्ध करना है तो वह कल एक बजे आ सकता है कल

1705
02:02:36,320 --> 02:02:40,360
एक बजे हम लाइव होंगे और

1706
02:02:40,360 --> 02:02:40,860
विशेष

1707
02:02:40,840 --> 02:02:45,720
रूप से आयोजित करना है तो आप नंबर नोट कर लीजिए

1708
02:02:45,720 --> 02:02:50,040
740

1709
02:02:50,040 --> 02:02:55,840
8369 ठीक है

1710
02:02:55,840 --> 02:02:59,920
हम क्यों माने भाई कि वेदों में मिलावट हो गई है आपका मानना है हमारा

1711
02:02:59,920 --> 02:03:04,720
मानना नहीं है महादेव

1712
02:03:04,720 --> 02:03:08,360
जय श्री राम

1713
02:03:08,360 --> 02:03:12,720
महादेव जी इनसे यह पूछिए पूछा कीजिए कि

1714
02:03:12,720 --> 02:03:18,720
वेदों में मिलावट हो गई है इनको कैसे पता चला यह पूछिए पूछा कीजिए

1715
02:03:18,960 --> 02:03:23,000
इनसे वो कुल मिलाकर उनका उत्तर एक भगवान बैठा

1716
02:03:23,000 --> 02:03:28,360
है इनके पास जो कहेगा वही वही में मिलावट हम क्यों माने भाई

1717
02:03:28,360 --> 02:03:33,240
न पता कैसे चला पता कैसे चला यह

1718
02:03:33,240 --> 02:03:37,360
पूछिए ऐसे चला कि जो गरीब दास में जो लिखा

1719
02:03:37,360 --> 02:03:41,760
है वह वेद में नहीं लिखा है

1720
02:03:41,760 --> 02:03:46,480
तो इससे यह सिद्ध थोड़ी होता है कि वेदों में मिलावट हो गई

1721
02:03:46,480 --> 02:03:52,400
यह तो कोई इनसे पूछे ना इनकी इनकी बुद्धि में बात घुसे ना

1722
02:03:52,400 --> 02:03:55,880
जब तक हम किसी एक निश्चित प्रमाण बुद्धि पर नहीं आएंगे

1723
02:03:55,880 --> 02:04:00,000
तो आप हमें कुछ सिद्ध नहीं कर पाएंगे अपना धर्म का विषय ऐसा है

1724
02:04:00,000 --> 02:04:04,080
नहीं ज जैसे अभी वो एक व्यक्ति आए थे वो कह रहे

1725
02:04:04,080 --> 02:04:08,120
थे कि आप अपना अपना चेहरा रिवील

1726
02:04:08,120 --> 02:04:12,120
कर लीजिए क्योंकि हमने चैनल की एक मर्यादा रखी है कि हम चेहरे के

1727
02:04:12,120 --> 02:04:16,520
साथ ही बात करते हैं उसमें बात यह है कि अगर आपको हम नहीं

1728
02:04:16,520 --> 02:04:19,960
आपको अगर हम नहीं कहेंगे

1729
02:04:19,960 --> 02:04:24,240
नाय चेहरा में पहले दिखा रहा था वभी क्या है य पास में बिजली

1730
02:04:24,240 --> 02:04:28,440
का काम चल रहा है तो बारबार लाइट जा रही है और आ रही है तो वो दिक्कत हो रही है कोई नहीं

1731
02:04:28,440 --> 02:04:32,520
एक बार दिखा दीजिए उसके बाद बंद कर लीजिएगा एक बार मैंने पहले दिखा

1732
02:04:32,520 --> 02:04:36,600
दिया था चेहरा पहले दिखा दिया अभी क्या लाइट नहीं इस वजह से दिक्कत हो रही है

1733
02:04:36,600 --> 02:04:41,040
कोई नहीं एक बार कैमरा आप ऑन कर

1734
02:04:41,040 --> 02:04:45,040
लीजिए भाई शिवास जय श्री राम

1735
02:04:45,040 --> 02:04:47,440
जय श्री

1736
02:04:47,440 --> 02:04:51,720
राम सात्विक जी आप ऐसा करिए आप दोबारा आ जाइए

1737
02:04:51,720 --> 02:04:55,760
अभी क्योंकि फिर नहीं तो फिर वो भेदभाव का वो

1738
02:04:55,760 --> 02:04:59,880
आ जाएगा आप दोबारा मुझे बस एक ही एक ही बात कहनी थी

1739
02:04:59,880 --> 02:05:03,880
मेरे को बस एक ही बात कहनी थी बोलिए

1740
02:05:03,880 --> 02:05:07,920
नहीं ये बार-बार ऐसा बोलते हैं कि आसमानी किताबों को बीच में ले आते

1741
02:05:07,920 --> 02:05:12,000
हैं समझ रहे आसमानी किताब उसमें भी मैनिपुलेशन हो गया

1742
02:05:12,000 --> 02:05:16,080
उसमें भी मैनिपुलेशन हो गया इन्होंने एक बात

1743
02:05:16,080 --> 02:05:20,080
अच्छी की इन्होंने एक बात अच्छी की अपना अपना ओपिनियन अपना

1744
02:05:20,080 --> 02:05:24,760
अपना विश्वास हां भई हमारा वेदों में विश्वास है

1745
02:05:24,760 --> 02:05:28,800
तुम्हारा रामपाल में है तुम अच्छे वहां बने रहो फिर हमको ये

1746
02:05:28,800 --> 02:05:33,200
मत बताओ कि वेदों में प्रमाण कबीर भगवान है नहीं तो

1747
02:05:33,200 --> 02:05:37,240
जो आसमानी किताब का खुदा है वो तो ये कहता है ना कि इसकी हिफाजत मैं करता हूं तो

1748
02:05:37,240 --> 02:05:42,840
उसमें बदलाव कैसे आ वो उसम हां वो उसमें भी कहते हैं वो मैनिपुलेशन

1749
02:05:42,840 --> 02:05:46,880
है नहीं नहीं वो मैनिपुलेशन है लेकिन फिर ये लोग इस चीज को भी

1750
02:05:46,880 --> 02:05:51,200
सनातन नहीं है इसलिए तो बोल देते ये लोग अगर किसी जिहादी बहादी ने सुन लिया तो दिक्कत

1751
02:05:51,200 --> 02:05:53,520
आ जाएगी

1752
02:05:53,520 --> 02:05:56,080
हां यह बात है

1753
02:05:56,080 --> 02:06:00,360
तो यय नहीं बोलते ना इतना चिल्ला चिल्ला के कुरान में प्रमाण है कबीर भगवान

1754
02:06:00,360 --> 02:06:02,800
नहीं तोसे

1755
02:06:02,800 --> 02:06:07,600
बोसे इन्ह ऐसे बोल दिया कीजिए कि ये क्लिप

1756
02:06:07,600 --> 02:06:13,600
जिहादी लोग भी सुन सुन सकते हैं इसलिए सोच समझ के [संगीत]

1757
02:06:14,240 --> 02:06:18,880
बोलिए जब उनसे सवाल पूछने की बात आई तो मैं बताऊंगा

1758
02:06:18,880 --> 02:06:23,320
नहीं सुना था एक्सटेंडेड ग्रंथ हा

1759
02:06:23,320 --> 02:06:27,440
हा एक्सटेंडेड ग्रंथ अपना अपना ओपिनियन अरे भाई

1760
02:06:27,440 --> 02:06:31,520
जब अपना अपना ओपिनियन है तो तुम हमें क्यों बता रहे होगे तुम शास्त्र सम्मत भक्ति

1761
02:06:31,520 --> 02:06:35,600
नहीं करते हो कुछ ओपिनियन ही नहीं शास्त्र सम्मत भक्ति उसे कहते

1762
02:06:35,600 --> 02:06:39,600
हैं कि जिस शास्त्र के बारे में बात हो रही है उसको पूरा का

1763
02:06:39,600 --> 02:06:44,000
पूरा माना जाए उतना नहीं कि रामपाल ने जितना

1764
02:06:44,000 --> 02:06:48,080
बताया उतना माना जाए तो रामपाल सम्मत

1765
02:06:48,080 --> 02:06:52,240
भक्ति आप कर रहे हो हम वेद समत शास्त्र सम्मत भक्ति करते उसे

1766
02:06:52,240 --> 02:06:56,800
कहते हैं सनातनी और आप अपना नाम सोच लो क्या रखना है

1767
02:06:56,800 --> 02:07:01,160
जी अमित स्वामी जी मैं कुछ कहना चाहता हूं भाई जी

1768
02:07:01,160 --> 02:07:05,480
बोलिए क्या हाल है आपके पहले तो थम्स अप टू

1769
02:07:05,480 --> 02:07:09,560
यू बहुत अच्छा काम कर रहे हैं आप और

1770
02:07:09,560 --> 02:07:11,280
मेन बात क्या है

1771
02:07:11,280 --> 02:07:15,840
जैसे मैं हरियाणा से हूं ठीक है तो मेरे

1772
02:07:15,840 --> 02:07:20,000
हरियाणा प्रदेश में ना जो रामपाल नाम की काली छाया

1773
02:07:20,000 --> 02:07:24,880
है ना वो बहुत ज्यादा फैल रही है बहुत ज्यादा है हरियाणा

1774
02:07:24,880 --> 02:07:29,280
एक्चुअल में इनको जो चीज यह लोग प्रमाण मांगते हैं वेदों

1775
02:07:29,280 --> 02:07:33,360
से गीता से या कहीं और से

1776
02:07:33,360 --> 02:07:37,680
इनको कोई लेना देना नहीं है यह जनता मूर्ख बन चुकी है ऑलरेडी

1777
02:07:37,680 --> 02:07:41,880
बन चुकी है और वह क्या कहते हैं ना ब्रेन वश वो हो चुका है

1778
02:07:41,880 --> 02:07:45,920
उनकी समझ में नहीं आएगा साक्षात

1779
02:07:45,920 --> 02:07:49,920
अच्छा एक बात बताइए मैं आपको एक उत्तर दूं इस बारे में

1780
02:07:49,920 --> 02:07:53,920
आपने बहुत अच्छी बात याद दिलाई कुरान और हम में क्या फर्क है

1781
02:07:53,920 --> 02:07:58,400
इस्लाम और हम में क्या फर्क है बताइए हमें फर्क यही है

1782
02:07:58,400 --> 02:08:02,560
हम अपने शास्त्रों से हम इस्लाम को मानने हा हम

1783
02:08:02,560 --> 02:08:06,680
इस्लाम को मानने वाले क्यों नहीं है हम इस्लामी क्यों नहीं कहलाते वो

1784
02:08:06,680 --> 02:08:10,960
सनातनी क्यों नहीं कहलाते पता है क्यों नहीं कहलाते क्योंकि जबकि

1785
02:08:10,960 --> 02:08:14,960
उसमें भी यही बात लिखी है कुरान में कि

1786
02:08:14,960 --> 02:08:19,080
मुझसे पहले य जो कुरान से पहले बहुत से धर्म ग्रंथ आए मगर उनमें मिलावट

1787
02:08:19,080 --> 02:08:23,520
हो गई है तो इस्लाम इस्लाम

1788
02:08:23,520 --> 02:08:26,360
इसलिए कि वह यह मानता है कि वेदों में मिलावट हो चुकी

1789
02:08:26,360 --> 02:08:30,360
है और हम वैदिक इसलिए हैं कि हम यह मानते

1790
02:08:30,360 --> 02:08:34,640
कि आज भी हमारा जो धर्म था है और रहेगा बदला नहीं

1791
02:08:34,640 --> 02:08:37,920
गया व

1792
02:08:37,920 --> 02:08:42,200
सनातनी अगर ऐसा ही हो तो फिर इस्लाम हो जाए हम लोग इस्लाम

1793
02:08:42,200 --> 02:08:46,920
तो इनसे 1400 साल पहले आया 14 1500 साल पहले

1794
02:08:46,920 --> 02:08:51,720
ऐसे ही किसी चमत्कारी देवता की बात माननी है तो वहा भी कहा जा रहा हैया

1795
02:08:51,720 --> 02:08:56,640
आया था डायरेक्ट उसने हमको ज्ञान

1796
02:08:56,640 --> 02:09:00,840
दिया यह एकचल में क्या है ना रामपाल के आने

1797
02:09:00,840 --> 02:09:05,240
से पहले इस को कोई नहीं जानता था

1798
02:09:05,240 --> 02:09:09,320
इसका इतना इशू नहीं था का आदेश नहीं था जबक मुस्लिम धर्म

1799
02:09:09,320 --> 02:09:14,000
के अनुयाई जीव हिंसा करते हैं यह देख लो

1800
02:09:14,000 --> 02:09:18,000
अब मोहम्मद ने क्या कहा है व कुरान है

1801
02:09:18,000 --> 02:09:22,240
कुरान को य पूरा मानेंगे नहीं जब कुरान से व देंगे देखो

1802
02:09:22,240 --> 02:09:26,560
मोहम्मद ने अनुमति दी तो ये तो मिलावट है कि मिलावट क्यों है

1803
02:09:26,560 --> 02:09:32,560
अच्छा एक बात यह भी आती

1804
02:09:32,680 --> 02:09:36,680
है यह इनका प्रवचन है एक बात

1805
02:09:36,680 --> 02:09:41,400
यह भी आती है कि अगर हम कह रहे हैं

1806
02:09:41,400 --> 02:09:45,440
कि यह जो ग्रंथ है इसमें मिलावट हो गई है मिलावट में हैय ठीक

1807
02:09:45,440 --> 02:09:50,400
है यानी कि इसमें कहां सच है कहां झूठ हमें नहीं पता

1808
02:09:50,400 --> 02:09:54,960
ठीक तो यह तो हमारे लिए वो वेद है नहीं जो वहां से चला

1809
02:09:54,960 --> 02:09:59,280
अब क्या हमारे पास कहीं पर वो वाला वेद है

1810
02:09:59,280 --> 02:10:03,280
जिसमें मिलावट ना हुई हो पॉइंट

1811
02:10:03,280 --> 02:10:07,320
की बात क्या हमारे पास वो वाला वेद है जिसम मिलावट नहीं हुई

1812
02:10:07,320 --> 02:10:11,440
हो नहीं है कुल मिलाकर के यही यही यही है जो है

1813
02:10:11,440 --> 02:10:15,560
ठीक है अब अगर यही है और इसमें हम लोग मिलावट की वो

1814
02:10:15,560 --> 02:10:20,320
दृष्टि रख रहे हैं तो अप प्रत्यक्ष रूप से हम कह रहे हैं

1815
02:10:20,320 --> 02:10:24,360
कि वेद है ही नहीं वेदों

1816
02:10:24,360 --> 02:10:28,520
का अस्तित्व है ही नहीं क्योंकि इसमें तो मिलावट है

1817
02:10:28,520 --> 02:10:32,560
इसमें कहां मिलावट है कहा नहीं मिलावट है इसका कोई आधार नहीं क्योंकि वेद ही सबका आधार

1818
02:10:32,560 --> 02:10:36,600
है हम रामपाल दास के आधार पर इसम सिलेक्ट नहीं कर सकते

1819
02:10:36,600 --> 02:10:40,640
कि इसम वेद के मंत्र कौन से हैं कौन से नहीं रामपाल कौन से गुरु परंपरा से पड़ा

1820
02:10:40,640 --> 02:10:44,840
हुआ है रामपाल तो खुद ही अनपढ़ है आप फिर बोलोगे रामपाल क्या जानता गुरु

1821
02:10:44,840 --> 02:10:47,840
परंपरा को ना जिसने कभी व्याकरण का मुह

1822
02:10:47,840 --> 02:10:51,920
देखा ना कभी कभी कुछ देखा जितना रटा टाया हमने लिखाया

1823
02:10:51,920 --> 02:10:56,280
उ उन्होंने उतना अंगुली से दिखा दिया कबीर मैंने साफ और सीधी बात बता

1824
02:10:56,280 --> 02:11:00,320
उनको कबीर कोई भगवान नहीं है एक कवि थे गरीब दास जी कहां

1825
02:11:00,320 --> 02:11:04,680
वो लिखे हु एक कवि थे जिन्होंने कवि लिख दी किसका भगवान नहीं किसका

1826
02:11:04,680 --> 02:11:08,680
कुछ नहीं अपने आप य इन्होने एक ढोंग पाखंड बना रखा है वेद को ये

1827
02:11:08,680 --> 02:11:12,840
मानते ही नहीं गीता को उका कोई प्रमाण ही नहीं क्यों गीता का नाम लेते ये इन लोगों

1828
02:11:12,840 --> 02:11:17,200
को तो शर्म आनी चाहिए वेद में वेद वेद का इनसे सूत्र पूछिए वेद किसने

1829
02:11:17,200 --> 02:11:21,760
शब्दों से मिलकर बना है वेद का निर्वचन करिए वेद में संधि विच्छेद

1830
02:11:21,760 --> 02:11:26,440
और वेद की परिभाषा बताए कभी पूछ शवा भाई जीसे

1831
02:11:26,440 --> 02:11:30,440
य क्या जानते आज एक अच्छा पॉइंट

1832
02:11:30,440 --> 02:11:34,560
मिला है वेद में मिलावट हो गई तो हम इनसे कहेंगे बिना

1833
02:11:34,560 --> 02:11:39,360
मिलावट वाले वेद

1834
02:11:39,360 --> 02:11:41,680
है

1835
02:11:41,680 --> 02:11:46,560
बनाला इस मतलब सनातन धर्म है ही

1836
02:11:46,560 --> 02:11:51,280
नहीं लाइव टेलीकास्ट कर सबसे देखते जन

1837
02:11:51,280 --> 02:11:55,280
कहां इनको ज्ञान है ज्ञान का तो इनको ज्ञान का तो इनके बुद्धि में तो भूसा भ

1838
02:11:55,280 --> 02:11:59,480
रखा है किसका ज्ञान है इनको कबीर भगवान है कबीर भगवान

1839
02:11:59,480 --> 02:12:03,680
है चिलाते चिलाते बस ऐसे रह जा सनातन कहा सनातन से मैंने इनको

1840
02:12:03,680 --> 02:12:07,880
यही बता दि तुम वेद से बिल्कुल तुम कबीर सागर में इसलिए मानते है ये

1841
02:12:07,880 --> 02:12:12,000
नहीं बोलो वेद में भगवान है वेद में लिखा है कबीर भगवान है कहीं नहीं है

1842
02:12:12,000 --> 02:12:16,440
बिल्कुल नहीं है गीता की व्याख्या अपने आप करते हैं

1843
02:12:16,440 --> 02:12:20,680
कौन सी गीता कौन से कौन से अर्थ का अर्थ कर रहे हो भाई ये कल

1844
02:12:20,680 --> 02:12:24,720
आपसे रहा था ना वो आपने कहा कि व रगुण और सतोगुण उनको

1845
02:12:24,720 --> 02:12:28,760
क्या समझ में आएगा अब जो व्यक्ति स्कूल नहीं गया जो कुछ नहीं गया जिसको गुरु

1846
02:12:28,760 --> 02:12:32,800
का कभी मुख नहीं देखा उन्होने तो रामपाल को देखा जो रामपाल ही खुद

1847
02:12:32,800 --> 02:12:37,440
जिसे पूछ लिया जाए अभी सबके 10 आदमियों के सामने में संस्कृत में

1848
02:12:37,440 --> 02:12:41,640
अभी शास्त्रार्थ कि जाए वो क्या बता पाएगा उसने तो हिंदी

1849
02:12:41,640 --> 02:12:45,720
में लिखा हुआ बता दिया हमारे में पांच क्लास वाला बच्चा भी बता देगा हिंदी में ये लिखा

1850
02:12:45,720 --> 02:12:50,040
हुआ है अरे समझना नहीं कुछ नहीं दुनिया को बेवकूफ

1851
02:12:50,040 --> 02:12:54,400
बनाने का बड़ा एजेंट पकड़ रखा इन्होने कबीर भगवान है कौन से उसम है

1852
02:12:54,400 --> 02:12:58,600
कबीर सा को हम सनातनी मानते ही नहीं है उन्होंने लिखा है कबीर वाणी

1853
02:12:58,600 --> 02:13:02,760
कोका सम्मान करते हैं कबीर दास जी नि भक्ति श के क है

1854
02:13:02,760 --> 02:13:07,160
और राम जी को अपना आराध्य मानते थे वो निर्गुण भक्ति शाखा में निर्गुण

1855
02:13:07,160 --> 02:13:11,160
भगवान निर्ग इनको तो बुद्धि में आएगा नहीं रामपाल रामपाल

1856
02:13:11,160 --> 02:13:17,160
रामपाल कौन होता है रामपाल से पहले तो कभी चर्चा हुई

1857
02:13:17,360 --> 02:13:21,480
नहीं जेल को भी धाम बना दिया उन्होने जेल भीम बना

1858
02:13:21,480 --> 02:13:25,640
दिया अरे ु जेल में अपने आरोप गंभीर आरोप की धारा

1859
02:13:25,640 --> 02:13:30,080
लगी है उसको बता रहे भगवान है शर्म नहीं आती लोगों को

1860
02:13:30,080 --> 02:13:34,160
इनको तो पकड़ के फिर केस करना चाहिए कि हमारे मैंने यही

1861
02:13:34,160 --> 02:13:40,160
कह दिया य गीता और वेद को प्रमाण बिल्कुल भी ना

1862
02:13:43,280 --> 02:13:47,320
माने वो वाला एक बार स्क्रीनशॉट दिखा दीजिए जो कमेंट

1863
02:13:47,320 --> 02:13:51,320
आया था ना एक एक कमेंट आया था वन

1864
02:13:51,320 --> 02:13:57,320
दिखा दीजिए इनको ऐसे नहीं मानने वाले इनको

1865
02:13:57,760 --> 02:14:02,080
तो जी बोलिए आका आदेश चौ जी भैया

1866
02:14:02,080 --> 02:14:06,240
मुझे खाली बस काल के बारे में एक प्रमाण देना था बस और कुछ नहीं जो यह लोग

1867
02:14:06,240 --> 02:14:10,360
कहते कालवान के बारे थ बताना

1868
02:14:10,360 --> 02:14:13,120
था

1869
02:14:13,120 --> 02:14:15,920
कुछ

1870
02:14:15,920 --> 02:14:21,240
थो जी बोलिए भैया

1871
02:14:21,240 --> 02:14:25,320
जी मुझे मुझे खाली बस ये जो रामपाल जी के जो

1872
02:14:25,320 --> 02:14:29,400
अनुयाई लोग हैं जो बोलते काल के बारे में तो

1873
02:14:29,400 --> 02:14:33,560
मैं विष्णु पुराण पढ़ रहा था उसके दूसरे अध्याय में ही 24 से लेकर 32

1874
02:14:33,560 --> 02:14:37,560
लोक तक बताया गया है कि काल कौन है काल जो है वह विष्णु के ही

1875
02:14:37,560 --> 02:14:41,960
रूप है जो कि जो कि पुरुष और प्रधान

1876
02:14:41,960 --> 02:14:46,200
और पुरुष जब युग परिवर्तन होता

1877
02:14:46,200 --> 02:14:51,840
है तब वो काल जो है वह रूप भगवान विष्णु काल के रूप लेते हैं

1878
02:14:51,840 --> 02:14:56,000
मगर व बात आएगी अय बोल तो रहे हैं मैनिपुलेशन अब मैनिपुलेशन

1879
02:14:56,000 --> 02:15:00,040
पर बात आ गई है अभी य अगली दो तीन स्म में इनको

1880
02:15:00,040 --> 02:15:04,240
मैं ये मनवा दूंगा कि हिंदू नाम का सनातन नाम का धर्म है ही नहीं

1881
02:15:04,240 --> 02:15:08,280
ये ये बोलेंगे अभी अभी देखते जाओ आज यहां पर

1882
02:15:08,280 --> 02:15:12,280
आ गए मिलावट हुई है अब जो अगली स्ट्रीम होगी ना उसमें हम लोग

1883
02:15:12,280 --> 02:15:16,520
यहां पहुंचेंगे य कहेंगे सनातन कोई धर्म नहीं बचा वो

1884
02:15:16,520 --> 02:15:21,000
होगा किसी जमाने में अब नहीं है य ये बोलेंगे जैसे इन्होने बोला

1885
02:15:21,000 --> 02:15:25,120
कि हां भैया वो सर्वशक्तिमान नहीं जैसे इन्होंने बोला

1886
02:15:25,120 --> 02:15:29,600
कि अपना अपना ओपिनियन जैसे उन्होंने बोला ज्ञान से ज्ञान कटता है जैसे इन्होंने

1887
02:15:29,600 --> 02:15:31,920
बोला क्या कहते

1888
02:15:31,920 --> 02:15:36,320
हैं आज बोला ना एक्सटेंडेड वर्जन ऐसे ही

1889
02:15:36,320 --> 02:15:40,400
आने वाले कुछ दिनों में मैं इनके मुख से बुलवा आंगा कि सनातन

1890
02:15:40,400 --> 02:15:44,680
का अस्तित्व नहीं है दुनिया में सनातन

1891
02:15:44,680 --> 02:15:49,040
नाम का कोई धर्म नहीं है ये बोलेंगे देखना

1892
02:15:49,040 --> 02:15:54,640
अगर ये आते रहे ऐसे

1893
02:15:54,640 --> 02:15:58,680
पाखंड ऐसे ही खुल जाएगा अगर ये आते रहे तो इनकी बिल्कुल

1894
02:15:58,680 --> 02:16:03,520
साफ सूपड़ा साफ सनातन विरोधी जो इनका चेहरा है व सामने आ जाएगा

1895
02:16:03,520 --> 02:16:07,800
जी एक और प्रश्न था भैया

1896
02:16:07,800 --> 02:16:11,800
शिवा भैया जी आप किसी चैनल प गए थे

1897
02:16:11,800 --> 02:16:16,920
क्या यही वाली मामले को लेके मैं

1898
02:16:16,920 --> 02:16:21,000
हा नहीं मैंने इनका देखा था

1899
02:16:21,000 --> 02:16:25,200
कोई लाइव कर रहे थे उसमें कोई व्यक्ति वहां जाकर के बिना चेहरे के वहा

1900
02:16:25,200 --> 02:16:29,480
बोला कि भाई यहां तो काल इनको कहा जा रहा है उन्हो उन्होने

1901
02:16:29,480 --> 02:16:33,720
उसको हटा दिया नहीं मैं नहीं था विष्णु पुराण

1902
02:16:33,720 --> 02:16:37,800
पढ़ रहा था तो मुझे वो म मिला दूसरे अध्याय में कि जो काल है वह

1903
02:16:37,800 --> 02:16:41,800
विष्णु के ही जैसे मतलब कृष्ण जी है उसी तरीके से व

1904
02:16:41,800 --> 02:16:45,840
स्वरूप है बहुत बहुत

1905
02:16:45,840 --> 02:16:46,960
जगह काल कहा गया

1906
02:16:46,960 --> 02:16:51,120
भगवान को बहुत जगह बहुत हमने जो पीडीएफ

1907
02:16:51,120 --> 02:16:55,240
उसमें हमने प्रमाण दिया है काल कहां कहा कहा गया भगवान तो ये

1908
02:16:55,240 --> 02:16:59,360
मानती क्यों नहीं है भैया इन्हें मानना भी तो चाहिए ना फिर क्योंकि ये उतना मानेंगे

1909
02:16:59,360 --> 02:17:03,360
जितना रामपाल ने डिसाइड किया इनके लिए वेद शास्त्र

1910
02:17:03,360 --> 02:17:07,440
प्रमाणिक नहीं है फिर भी ये हिंदू है फिर भी ये सनातनी है और रामपाल

1911
02:17:07,440 --> 02:17:11,560
जी खुद को ही परमात्मा बताते इनका धर्म क्या है गरीब दास के द्वारा लिखा

1912
02:17:11,560 --> 02:17:15,680
ग्रंथ रामपाल के द्वारा बताया गया धर्म इनका धर्म है दो

1913
02:17:15,680 --> 02:17:19,880
250 साल पहले जो अस्तित्व में आया है मगर सनातन से जोड़ने के लिए वेदों को

1914
02:17:19,880 --> 02:17:24,000
चिपका लेते हैं भाई हमें दिखाओ वो वाले वेद जिससे हम

1915
02:17:24,000 --> 02:17:28,040
पता कर सके कि यह वाले वेद में यह मंत्र है जो यह वाले इसमें गलत लिखे तब तो हम

1916
02:17:28,040 --> 02:17:32,080
पता करें हमें दूध का दूध पानी का पानी तो दिखाओ वरना जो

1917
02:17:32,080 --> 02:17:36,080
है उसको तुम कह रहे हो कि गलत है इसमें कहीं मिलावट है कहीं नहीं है

1918
02:17:36,080 --> 02:17:40,160
तो इसका मतलब यह नहीं कहा जा सकता है कि कौन सा सही है कौन सा नहीं तो

1919
02:17:40,160 --> 02:17:44,200
फिर उसके किसी भी मंत्र के आधार पर हम अपनी बात को सिद्ध नहीं कर सकते कि इस मंत्र के

1920
02:17:44,200 --> 02:17:48,440
आधार पर यह सही है ये नहीं कर सकते फिर जब गलत

1921
02:17:48,440 --> 02:17:52,720
है तो सब कुछ गलत हो गया इनका सिंपल है भैया

1922
02:17:52,720 --> 02:17:56,720
रामपाल नाम की टूथपेस्ट बेचने के लिए इनको अमिताभ बच्चन का सहारा चाहिए

1923
02:17:56,720 --> 02:18:00,920
इन्होंने अमिताभ बच्चन बनाया है वेदों को

1924
02:18:00,920 --> 02:18:02,120
शिवांश भया मेरा एक लास्ट

1925
02:18:02,120 --> 02:18:06,160
प्रश्न था शिवांश भैया एक लास्ट मेरा प्रश्न था मुझे

1926
02:18:06,160 --> 02:18:10,440
मुझे सिर्फ ये पूछना था अगर मुझे जगतगुरु श्री

1927
02:18:10,440 --> 02:18:14,760
जो पूरी पीठाधीश्वर है शंकराचार्य जी उनसे मुझे मतलब अगर वेद

1928
02:18:14,760 --> 02:18:19,320
शास्त्र का अध्ययन करना है तो किस प्रकार से मैं क्या मुझे क्या करना होगा

1929
02:18:19,320 --> 02:18:23,680
चातुर्मास में उनकी छाए लगती है हां वहां

1930
02:18:23,680 --> 02:18:28,120
प जाना शुरू करिए चातुर्मास में

1931
02:18:28,120 --> 02:18:32,240
चातुर्मास अभी लगी थी कक्षाएं उसमें रहना था

1932
02:18:32,240 --> 02:18:36,640
और पूरी तरीके से अध्ययन करना मुझे वेद शास्त्र का जो भी है

1933
02:18:36,640 --> 02:18:40,760
पूरी तरीके से उनके सानिध्य के जो अन्य आचार्य गण है वह

1934
02:18:40,760 --> 02:18:44,800
कराते हैं वह मेनली दो चातुर्मास होते हैं दो महीने

1935
02:18:44,800 --> 02:18:48,840
वो आपको वो देंगे उसमें पर्याप्त होगा बहुत आगे

1936
02:18:48,840 --> 02:18:53,640
का ज्ञान मिलता है 740 830 189

1937
02:18:53,640 --> 02:18:58,040
हमारा संपर्क सूत्र है जिसको भी किसी वैचारिक

1938
02:18:58,040 --> 02:19:04,040
मतभेद के निमित्त चर्चा करनी हो वह आ सकता है

1939
02:19:06,320 --> 02:19:10,600
और ईश्वर सर्वशक्तिमान नहीं है मोक्ष परम स्वतंत्र नहीं है धर्म

1940
02:19:10,600 --> 02:19:14,880
शाश्वत नहीं है और भक्ति इनकी मनम

1941
02:19:14,880 --> 02:19:19,280
है क्योंकि यह शास्त्र में कहीं नहीं लिखा है कि शास्त्र

1942
02:19:19,280 --> 02:19:24,440
में मिलावट हो चुकी है शास्त्र में कहीं नहीं लिखा है कि ज्ञान से ज्ञान

1943
02:19:24,440 --> 02:19:28,520
कटेगा श बात एक मिनट

1944
02:19:28,520 --> 02:19:32,600
इसको पूरा कर लू और इनका दीक्षा सिस्टम भी

1945
02:19:32,600 --> 02:19:36,960
मनमुक है सब मनमुक

1946
02:19:36,960 --> 02:19:42,960
है जय श्री राम

1947
02:19:44,080 --> 02:19:48,160
श बोलिए बोलिए धर्म

1948
02:19:48,160 --> 02:19:50,840
अधर्म

1949
02:19:50,840 --> 02:19:55,400
नारायण साक्षात स्वयंभू रिति सुषमा

1950
02:19:55,400 --> 02:19:59,480
वेद ने जिन कर्मों को करने की आज्ञा दी है उनका

1951
02:19:59,480 --> 02:20:04,320
पालन करना धर्म है और जो दप

1952
02:20:04,320 --> 02:20:09,440
वेने जिन कर्मों को ना करने को कहा है वो धर्म

1953
02:20:09,440 --> 02:20:13,480
है वेदो नारायण साक्षात वेद तो

1954
02:20:13,480 --> 02:20:17,560
साक्षात नारायण है इसमें हमको एक मूल

1955
02:20:17,560 --> 02:20:21,880
मंत्र याद रखना पड़ेगा वो पता है क्या है हिंदू

1956
02:20:21,880 --> 02:20:26,560
वह है जो यह कहता है तस्मा

1957
02:20:26,560 --> 02:20:30,760
शास्त्रम प्रमाणम हिंदू वो है

1958
02:20:30,760 --> 02:20:34,760
अगर आपको यह कहना है कि वेद में मिलावट हो गई है वो भी

1959
02:20:34,760 --> 02:20:37,880
शास्त्र से

1960
02:20:37,880 --> 02:20:41,960
दिखाओ जी जी जी बिलक क्योंकि वो तुम्हारी मन की बात

1961
02:20:41,960 --> 02:20:46,320
है हम क्यों माने हमारे लिए शास्त्र प्रमाण

1962
02:20:46,320 --> 02:20:50,640
है तुम मानते हो वो हो गई मैनिपुलेशन हम नहीं मानते वही

1963
02:20:50,640 --> 02:20:55,160
ू है जिसका धर्म अभी भी जीवित है वह हिंदू है

1964
02:20:55,160 --> 02:20:59,080
और जो यह कह रहा मेरा धर्म बदल गया मर गया यह हो गया वो हो गया

1965
02:20:59,080 --> 02:21:05,080
वो हिंदू नहीं है सनातनी नहीं है कुछ और

1966
02:21:05,920 --> 02:21:10,400
है ठीक है भैया अभी भजन का टाइम हो गया तो फिर मैं जाता हूं

1967
02:21:10,400 --> 02:21:14,400
ठीक है ठीक है श्री राम ठीक है पंडित जी आप

1968
02:21:14,400 --> 02:21:20,400
कुछ कह लीजिए आप कुछ बोल रहे थे आप

1969
02:21:20,880 --> 02:21:23,720
जय श्री

1970
02:21:23,720 --> 02:21:28,000
राम मैं कह रहा था भैया

1971
02:21:28,000 --> 02:21:32,360
एक मिनट हर्ष जी एक मिनट सूरज प्रकाश जी आप अपना

1972
02:21:32,360 --> 02:21:36,160
म्यूट खोल

1973
02:21:36,160 --> 02:21:40,160
लीजिए मा बोलिए मैं ये कह रहा था वो

1974
02:21:40,160 --> 02:21:44,200
सांग पांग को तो पढ़ते नहीं है कुछ एकांकी शब्दों को ढूंढ

1975
02:21:44,200 --> 02:21:48,280
करके ले आते हैं फ उसी को दुनिया को दिखाते रहते हैं संपूर्ण

1976
02:21:48,280 --> 02:21:52,640
ज्ञान तो उनका कुछ आधार है ही नहीं शिवास जी आपकी बड़ी हिम्मत है

1977
02:21:52,640 --> 02:21:56,640
हम जैसे तो अपना आप खो बैठते हैं हम तो आपको बहुत

1978
02:21:56,640 --> 02:22:00,920
सन शक्ति है एक के पीछे लगे जा हम जिसको मना करें कि भाई त

1979
02:22:00,920 --> 02:22:05,000
वो होता ना बच्चा की पी नहीं कर नहीं कर नहीं कर जब करे गए तो मार तो पड़ेगी

1980
02:22:05,000 --> 02:22:09,280
पड़ेगी ज हमने कह दिया तुम पहले सांगोपांग को पढ़िए कुछ एकांकी शब्दों

1981
02:22:09,280 --> 02:22:13,480
को ही पढ़ के मत आओ पहले पूरा ज्ञान रखो उन्होंने सिर्फ गीता में उतना

1982
02:22:13,480 --> 02:22:17,520
लाइन वो कर दिया पूरी गीता को नहीं पढ़ी उनको क पूछ को देखो एक

1983
02:22:17,520 --> 02:22:21,520
अन्य उनसे कोई श्लोक पूछ करके तो देखो वेद का कोई और

1984
02:22:21,520 --> 02:22:25,600
ही चीज उठा लो कुछ नहीं बता पाएंगे बस जितना रटा हुआ ज्ञान है जितना उनको

1985
02:22:25,600 --> 02:22:29,720
रामपाल ने बताया है जैसे रामपाल पता नहीं कौन सा कहां से पढ़ के आया

1986
02:22:29,720 --> 02:22:34,080
खुद आप कहेंगे हमारे चैनल पर ऐसे कह रहे हैं खुद कभी गुरु परंपरा

1987
02:22:34,080 --> 02:22:38,240
की नहीं गुरु के शरण में नहीं गया खुद अज्ञानी है खुद अनपढ़ है

1988
02:22:38,240 --> 02:22:42,240
मैं तो खूब बोलता हूं इसमें कोई वो नहीं है अरे अपने को जेल में से नहीं

1989
02:22:42,240 --> 02:22:46,520
छुड़ा पा रहे हो जो तुम्हारे पर कानून की धाराए है तभी तो तुम जेल में बंद

1990
02:22:46,520 --> 02:22:50,600
हो यह शाश्वत सत्य है कि नहीं है और हम

1991
02:22:50,600 --> 02:22:51,200
चले तुम ज्ञान

1992
02:22:51,200 --> 02:22:55,480
देने सनातन को सनातन को भ पूजा मत करो ये मत करो ब्राह्मण ये पाखंडी

1993
02:22:55,480 --> 02:22:59,520
है अरे सबसे बड़े पाखंडी तो आप लोग हैं हमें ये कहते हैं वो लोग और

1994
02:22:59,520 --> 02:23:03,680
ब्राह्मणों के सशक्त विरोधी ब्राह्मणों के तो इतने विरोधी हैं

1995
02:23:03,680 --> 02:23:07,800
वो चैनल में भी देख रहा था तो आपके विषय में व क्या चर्चा हो रही थी वो

1996
02:23:07,800 --> 02:23:12,000
एक लड़का रहता है लखनऊ में उसने पहले जिम खोला हुआ था पर वो लाइव नहीं देख

1997
02:23:12,000 --> 02:23:16,000
रहा तो उसका जिम का काम बंद हो गया आजकल वो एक चैनल चला रहा है य

1998
02:23:16,000 --> 02:23:20,120
प धर्म का और वहां उल्टा सुल्लर है अब देखो मेरा कितना भाई

1999
02:23:20,120 --> 02:23:24,240
है आपका सही है बिल्कुल अच्छा है आप पर धैर्य है इतना क्या

2000
02:23:24,240 --> 02:23:28,440
आप इतना मतलब सबके साथ अपना जो ये भगवान ने आपको अपना

2001
02:23:28,440 --> 02:23:32,560
खपा रहे हैं हमारे बस की थोड़ी ना है हम थोड़ी ना समझा पाएंगे इनको हम

2002
02:23:32,560 --> 02:23:36,640
तो दो टूक क्या करें भाई जी आपका आपको तो बहुत

2003
02:23:36,640 --> 02:23:42,640
हृदय से प्रणाम करता हूं आपके पैर मिलते मैं उनको दंडवत करता

2004
02:23:42,640 --> 02:23:47,920
आपको इनको समझाइए बिल्कुल

2005
02:23:47,920 --> 02:23:52,640
ठीक है ये सनातनी वो आए थे

2006
02:23:52,640 --> 02:23:56,760
गिरी नाम के भाई आप कल आ जाइएगा

2007
02:23:56,760 --> 02:24:02,760
शिवाजी गिरी

2008
02:24:03,840 --> 02:24:07,960
जी अध 40 का मजी ग जी आप

2009
02:24:07,960 --> 02:24:12,040
यजुर्वेद नहीं पहले आप यह सिद्ध करिए कि आप उसको प्रमाण मानते

2010
02:24:12,040 --> 02:24:16,560
हैं कि नहीं मानते हैं तब बात करेंगे

2011
02:24:16,560 --> 02:24:20,600
मानता क मानते हैं ये तो शुरू में आए वही

2012
02:24:20,600 --> 02:24:25,280
तो है ये हा ये तो आ चुके इनको

2013
02:24:25,280 --> 02:24:29,360
हटाओ उनको भी जरा रहने दो बताते हैं उनको फिर

2014
02:24:29,360 --> 02:24:33,440
अरे रहन दो छोड़ी अब हो गया दो ढाई घंटे हो गए भाई सर में दर्द होने

2015
02:24:33,440 --> 02:24:37,560
लगता है इनसे बात क्या होती है बात होती है हर व्यक्ति

2016
02:24:37,560 --> 02:24:41,600
से जीरो से बात करो आना ह उसी जगह पे है हा

2017
02:24:41,600 --> 02:24:45,640
कल मेरी भी तब में आना उसी फिर भी

2018
02:24:45,640 --> 02:24:49,640
मैं देख रहा था कल वायरल था तो मैं फिर भी मैंने आपका पूरा शो देखा

2019
02:24:49,640 --> 02:24:53,920
हिम्मत नहीं हुई फिर भी देख तो लो आज आज के उसम क्या विषय

2020
02:24:53,920 --> 02:24:58,000
में क्याय अपना जाते और सुबह 4:30 बजे

2021
02:24:58,000 --> 02:25:02,240
ही उठना है हर हाल में तो रात में लेट हो जाते हैं कई बार

2022
02:25:02,240 --> 02:25:02,960
तो नींद

2023
02:25:02,960 --> 02:25:07,120
भी पूरी नहीं हो पाती है और यह समय इसलिए रखते

2024
02:25:07,120 --> 02:25:12,000
हैं क्योंकि सब लोग फ्री होते तो ज्यादा लोगों तक हमारा चीज पहुंचती है

2025
02:25:12,000 --> 02:25:16,600
यह समय इसलिए रखना आवश्यक होता है तो

2026
02:25:16,600 --> 02:25:21,080
हमने कुछ भाई है जो कहते हैं कि हमने आपके चैनल

2027
02:25:21,080 --> 02:25:25,280
की एक बात देखिए आपने यह कभी नहीं कहा हमारा चैनल जो है सब्सक्राइब करिए लाइक करिए

2028
02:25:25,280 --> 02:25:29,760
शेयर करिए लाइक शेयर सबब हमारा

2029
02:25:29,760 --> 02:25:33,960
फोकस रहता है सार्वभौम सिद्धांत पर बात करना इधर अगर

2030
02:25:33,960 --> 02:25:38,000
ये सब बातें मन में चलने लगे ना कि हमको अर्निंग कैसे करनी

2031
02:25:38,000 --> 02:25:42,040
है हम भी चार पांच तरह की मिक्स करने वाली बात है सिद्धांतों

2032
02:25:42,040 --> 02:25:46,320
को बोलने लगे अभी देखिए अभी हम वर्ण व्यवस्था का विरोध करने लगे चैनल खूब चलने

2033
02:25:46,320 --> 02:25:50,360
लगेगा वर्ण व्यवस्था का विरोध करने लगे परंपरा प्राप्त

2034
02:25:50,360 --> 02:25:55,000
आचार्यों का विरोध करने लगे चैनल चलने लगेगा

2035
02:25:55,000 --> 02:25:59,040
ये कलयुग है कलयुग में ऐसा ही है जहां पर सत्य कहो वहां पर हम वहीं पर

2036
02:25:59,040 --> 02:26:03,440
आदमी दरकिनार हो जाता है उसके खिलाफ बहुत हो जाएंगे तो ये कलयुग का प्रथम

2037
02:26:03,440 --> 02:26:07,720
सिद्धांत है आप भारत आप देखिए

2038
02:26:07,720 --> 02:26:12,000
अलंकार समाधि हों का आर समाधि हों का एक प्रतिनिधि प्रतिनिधि है

2039
02:26:12,000 --> 02:26:16,480
गौतम खट्टर हम वो समय पड़ने पर शंकराचार्य

2040
02:26:16,480 --> 02:26:18,200
को प्रमाण के रूप में यूज करते

2041
02:26:18,200 --> 02:26:22,000
हैं अ वो बा

2042
02:26:22,000 --> 02:26:26,040
फिर समय पढ़ने में भागेश्वर चले जाते हैं भागेश्वर वाले कौन है

2043
02:26:26,040 --> 02:26:30,280
पापी भागेश्वर वाले कौन है अधर्मी कौन कह रहा है उनकी

2044
02:26:30,280 --> 02:26:34,480
किताब कौन सी किताब जिसको व बेच रहे हैं जिसको व बेच

2045
02:26:34,480 --> 02:26:38,840
रहे हैं वही किताब कह रही है

2046
02:26:38,840 --> 02:26:42,640
हा एक टाइम

2047
02:26:42,640 --> 02:26:46,720
पर हा तो ऐसे हम लोग नहीं है

2048
02:26:46,720 --> 02:26:50,960
हम तो सिद्धांत वादी लोग हैं कि संबंध

2049
02:26:50,960 --> 02:26:55,000
का त्याग भी करना पड़ जाए तो कर देंगे मगर सिद्धांतों का त्याग नहीं करेंगे

2050
02:26:55,000 --> 02:26:59,160
सिद्धांत वादी लोग यह कैसे सिद्धांत है पांच पा मिनट में बदलते

2051
02:26:59,160 --> 02:27:03,160
अपने सिद्धांत अभी यजुर्वेद लेके आएंगे हमसे पूछने फिर हम

2052
02:27:03,160 --> 02:27:07,960
इनसे पूछेंगे ये तो काल ने बोल दियाल राम

2053
02:27:07,960 --> 02:27:12,280
कह र अब मैं इनसे कह रहा हूं य तो काल ने बोल दिया अब बोलो

2054
02:27:12,280 --> 02:27:16,320
जहां जहां कभ आया है वहा वहा काल ने बोला क्या करें बताओ अब भगवान

2055
02:27:16,320 --> 02:27:20,440
नहीं रहे तुम्हारे कबीर जहां जहां कभ

2056
02:27:20,440 --> 02:27:24,600
व काल ने बोल दिया मिलावट है वो अब तुम्हारा

2057
02:27:24,600 --> 02:27:28,680
कबीर भगवान नहीं रह गया तो

2058
02:27:28,680 --> 02:27:32,800
पहले यह सिद्ध करना होगा आपको कि आप वेदों को मानते हो प्रमाण

2059
02:27:32,800 --> 02:27:33,320
तब तो यह

2060
02:27:33,320 --> 02:27:37,360
बात होगी कि वेद में यहां लिखा है वहा लिखा है जैसे

2061
02:27:37,360 --> 02:27:41,920
कल राम चरित मानस में ले दिया प्रतो ले जो नाम हमारा नताले

2062
02:27:41,920 --> 02:27:46,320
आरा वो तो खूब घुमा रहे खूब दिखा रहे हैं अब

2063
02:27:46,320 --> 02:27:50,400
आपने हा वहा पर दर किनार हो गए अरेम

2064
02:27:50,400 --> 02:27:55,080
मानस प्रमाण भी तो दे रहा है भक्ति का वो क्यों नहीं मान रहे हो तुम

2065
02:27:55,080 --> 02:27:59,640
क वाल्मीकि को माने अे भैया ना मानने के लिए रामचरित

2066
02:27:59,640 --> 02:28:03,840
मानस और मानने के लिए ना मानने के लिए तुलसीदास और मानने

2067
02:28:03,840 --> 02:28:06,440
के लिए वाल्मीकि

2068
02:28:06,440 --> 02:28:10,440
वाह चलिए समात करते आप लोग धरातल पर सहयोग

2069
02:28:10,440 --> 02:28:15,200
करें अगर कर सकते हैं तो

2070
02:28:15,200 --> 02:28:19,280
य अमित जी आप भी अगर कुछ सहयोग करना चाहते हैं तो इस नंबर

2071
02:28:19,280 --> 02:28:23,840
पर संपर्क करिए 7408

2072
02:28:23,840 --> 02:28:28,160
30169 हर्ष जा जी बो बो बोलिए आप काफी देर से हैं अपनी बारी

2073
02:28:28,160 --> 02:28:32,320
का इंतजार कर रहे हैं आप जी जय श्री राम राधे

2074
02:28:32,320 --> 02:28:36,320
राधे हरे कृष्ण राधे राधे जी

2075
02:28:36,320 --> 02:28:40,560
जी आज मैं ना देख रहा था एक चैनल जो कि आप ही का वीडियो

2076
02:28:40,560 --> 02:28:44,680
को कट करके ना अलग तरीके से दिखा रहा था तो

2077
02:28:44,680 --> 02:28:48,360
मैंने उस पर कमेंट किया तो वो लोग बोलने लगे कि ब्रह्मा

2078
02:28:48,360 --> 02:28:52,600
विष्णु महेश सब नाशवान है तो

2079
02:28:52,600 --> 02:28:56,960
हम उसमें जब पूछ लिए उनसे कि क्या ब्रह्मा विष्णु महेश का तत्व

2080
02:28:56,960 --> 02:29:01,080
हमारे जैसा है मनुष्य जैसा तो फिर उसके बारे में कुछ नहीं बोले

2081
02:29:01,080 --> 02:29:05,320
चीटी और हाथ चीटी और हाथी लोग

2082
02:29:05,320 --> 02:29:09,600
का भी पूजा करने के लिए बोल देते कि जब ऐसा पूछते हैं ना अद्वैत

2083
02:29:09,600 --> 02:29:13,800
का सिद्धांत जब सामने आता है तो तो बोलते चीटी का पूजा कर लो

2084
02:29:13,800 --> 02:29:17,840
लेकिन जब वहां पर तत्व का बात आता है तो फिर लोग कुछ नहीं बोलते

2085
02:29:17,840 --> 02:29:22,480
उनको उतना ज्ञान है ही नहीं जिसे तत्व को बारे में बता पाए

2086
02:29:22,480 --> 02:29:28,360
अधिकांश लोग को देख ही

2087
02:29:28,360 --> 02:29:34,160
लिया ठीक है अनिल जी बताइए जय श्री

2088
02:29:34,160 --> 02:29:36,920
राम

2089
02:29:36,920 --> 02:29:41,520
ज समझ में नहीं आए इतना डेविड मैंने सुन लिया लेकिन

2090
02:29:41,520 --> 02:29:45,720
रामपाल का मेरे को य अभी समझ में आया कि इनका भगवान है

2091
02:29:45,720 --> 02:29:50,040
कन कहीं तो कोई भगवान बन जाए क तो र

2092
02:29:50,040 --> 02:29:54,280
ब क कबीर बन जाते हैं बन जाते

2093
02:29:54,280 --> 02:29:59,160
अग अगर कबीर ये कह रहे हैं कि आदि राम कोई विरला

2094
02:29:59,160 --> 02:30:03,360
जाना तो तुमने कभी कहा कि वेदों में प्रमाण है और आदि

2095
02:30:03,360 --> 02:30:07,360
राम भगवान है दुकान बंद हो

2096
02:30:07,360 --> 02:30:11,480
जाएगी वही तो है भाई ये आदि राम वो

2097
02:30:11,480 --> 02:30:15,720
राम नहीं है जिसको हम मानते हैं तुम कहना चालू करो आदि गणेश

2098
02:30:15,720 --> 02:30:21,560
भगवान है आदि शिव भगवान है आदि राम भगवान

2099
02:30:21,560 --> 02:30:25,600
नहीं कहेंगे जब आदि राम भी भगवान है

2100
02:30:25,600 --> 02:30:30,000
ईश्वर है परमेश्वर है कहो दिक्कत हो जाएगी

2101
02:30:30,000 --> 02:30:34,080
वेदों में प्रमाण है आदि राम भगवान है बोलो

2102
02:30:34,080 --> 02:30:39,120
कुछ नहीं है कोई नियम

2103
02:30:39,120 --> 02:30:43,160
नहीं हम भी बताते रहते होराम चार है मैंने

2104
02:30:43,160 --> 02:30:47,240
क हमारे तो एक राम है तुम्हारे लिए तो चार लिए कितने भी हो सकते हैं

2105
02:30:47,240 --> 02:30:51,320
तुमरा कोही नहीं है ये देखो इनके इनके

2106
02:30:51,320 --> 02:30:55,880
आश्रम तक हमारी खबर पहुंच चुकी है

2107
02:30:55,880 --> 02:31:00,080
देखो ठीक तो है इनके आश क्या कह रहे आश्रम

2108
02:31:00,080 --> 02:31:04,200
वाले उनको उनको भी खींचो कि शिवांश नारायण द्विवेदी से बच

2109
02:31:04,200 --> 02:31:08,520
के रहो वीडियो देखना बंद कर दो वीडियो

2110
02:31:08,520 --> 02:31:13,000
देखोगे तो जेल धाम की यात्रा नहीं करोगे

2111
02:31:13,000 --> 02:31:17,040
फिर भैया अभी तो जेल धाम तक की खबर पहुंचना बाकी

2112
02:31:17,040 --> 02:31:21,160
है मेरे ख्याल से जेल धाम भी जाएंगे अभी खबर मुझे लगता है कि वो खुद

2113
02:31:21,160 --> 02:31:25,760
इनसे परेशान होंगे जो वहां जेल धाम में बैठे हैं

2114
02:31:25,760 --> 02:31:29,760
ना वो तो इनके पढ़े भाई मैंने नहीं कहा है तुम

2115
02:31:29,760 --> 02:31:34,160
ये सब करो बार मेरे नाम पर उन्होंने कहा है भाई

2116
02:31:34,160 --> 02:31:38,560
जी पहली बात तो मैं येसे सिर्फ इतना जानना चाहता हूं रामपाल

2117
02:31:38,560 --> 02:31:43,120
के अनुयायियों से कि किसी से

2118
02:31:43,120 --> 02:31:47,280
इन्होंने ज्ञान लिया है तो भाई उसको अगर वो अपने

2119
02:31:47,280 --> 02:31:51,520
आप को संत कह रहे हैं तो संत का एक चरित्र होता है मर्यादा होती है

2120
02:31:51,520 --> 02:31:54,880
उसको क्यों नहीं समझ रहे तो क्यों जेल में पड़ा है

2121
02:31:54,880 --> 02:31:59,600
वो कोई संत नहीं कोई संत नहीं संत के नाम पर झूठा

2122
02:31:59,600 --> 02:32:01,920
आडंबर

2123
02:32:01,920 --> 02:32:06,000
फला 37 साल के थे तब गरीब दास का नाम सुना

2124
02:32:06,000 --> 02:32:11,350
था उससे पहले खुद रामपाल हनुमान चालीसा पढ़ते

2125
02:32:11,350 --> 02:32:16,000
[हंसी]

2126
02:32:16,000 --> 02:32:20,280
थे कुछ ना करना भक्ति

2127
02:32:20,280 --> 02:32:24,280
करते थे और गरीब दास को जब जान लिया तब वेद विरुधि वेद

2128
02:32:24,280 --> 02:32:28,400
विरोध गीता विरोध पुराण विरोध और सत्य भक्ति

2129
02:32:28,400 --> 02:32:32,920
करने लगे फिर जब गरीब दास को जान गए ऐसा भैया

2130
02:32:32,920 --> 02:32:37,000
य रामपा रामपाल दास जी ने स्वयं बोली य बात कि मैं

2131
02:32:37,000 --> 02:32:41,200
37 साल की अब वो परमात्मा है मगर

2132
02:32:41,200 --> 02:32:45,400
37 साल की उम्र लग गई उसको हनुमान चालीसा से वहां तक पहुंचने में गरीब दास शुद्ध

2133
02:32:45,400 --> 02:32:49,600
ज्ञान तक पहुंचने में अभी अभी शिवांश भाई जी आपने बात कही थी अपने

2134
02:32:49,600 --> 02:32:54,000
चैनल चैनल के लिए कि अगर मैं अपने आचार्यों का विरोध करना शुरू कर दूं

2135
02:32:54,000 --> 02:32:58,480
शास्त्रों का विरोध करना शुरू कर दूं तो आपकी प्रसिद्धि बहुत जल्दी बढ़ेगी इनका

2136
02:32:58,480 --> 02:33:02,880
भी वही हाल है तो इनका भी वही हाल है उसने हमारे शास्त्रों का

2137
02:33:02,880 --> 02:33:07,000
अपमान करना शुरू करा और जो छोटे मतलब जो जिनको बुद्धि

2138
02:33:07,000 --> 02:33:10,200
नहीं है जिनको समझ नहीं है उन्होंने

2139
02:33:10,200 --> 02:33:14,280
इनकी बात को पकड़ना शुरू कर दिया मिल गया सुनो ये कहां जाते

2140
02:33:14,280 --> 02:33:18,600
हैं अपना ज्ञान देने जहां गरीब हो जहां झुग झोपड़ी देखी मैंने दिल्ली में भी

2141
02:33:18,600 --> 02:33:22,920
वहां पोस्टर लगाएंगे विशाल भंडारा फ वहा अपना किताब देंगे अब बेचारे

2142
02:33:22,920 --> 02:33:27,160
तो गांव के होते हैं थोड़ा बहुत कहा अपने काम किताब देखो कबीर

2143
02:33:27,160 --> 02:33:31,400
भगवान है मैं एक दिन इंदिरा पार्क गया था कहीं इंदिरा पार्क दिल्ली

2144
02:33:31,400 --> 02:33:35,760
में तो वहां एक घर में घुस के कह रहे किताब देखो पर मैं गाड़ी में था मैंने

2145
02:33:35,760 --> 02:33:39,840
किसी के यहां जाना था मुझे लेट हो रहा था मैं उतरता नहीं तो मुझे सु पूजा का समय

2146
02:33:39,840 --> 02:33:44,000
था किताब दिखा रहे हैं देखो कबीर भगवान है तुम अं भक्ति

2147
02:33:44,000 --> 02:33:48,360
करते हो तुम कौन ये भक्ति छोड़ो विशाल भंडारा है गुरु जी का य

2148
02:33:48,360 --> 02:33:52,600
मुंडका में खाने आओ इन्होने लोगों का ऐसे ब्रेन वश

2149
02:33:52,600 --> 02:33:54,720
किया

2150
02:33:54,720 --> 02:33:58,880
है मिलेगी इनकी बुद्धि छोटी है एक बात

2151
02:33:58,880 --> 02:34:03,200
शास्त्र भी कहते कि मांगत मांगत मान घ प्रीत घटे त घर जाए

2152
02:34:03,200 --> 02:34:07,280
ओ के संग बध घटे क्रोध घटे मन के समझाय ो के संग

2153
02:34:07,280 --> 02:34:11,480
बैठते हैं इनकी बुद्धि छोटी है को ज्ञान दे रहे हैं

2154
02:34:11,480 --> 02:34:15,640
इन्होने चार पाच लेडीज परफेक्ट कर रखी है दो चार

2155
02:34:15,640 --> 02:34:19,720
वो जड है व बस उनको पता नहीं कितने

2156
02:34:19,720 --> 02:34:23,760
तनखा मिलती है वो घर घर जाकर व अच्छे बनियों के कोई बनियों को देख

2157
02:34:23,760 --> 02:34:25,320
लो कोई का कोई नहीं

2158
02:34:25,320 --> 02:34:29,440
होगा अच्छा व्यक्ति कोई इनके झांसे में नहीं आने वाला वही आएगा जो गांव का है

2159
02:34:29,440 --> 02:34:33,800
गरीब है जो इधर महल जो थोड़ा इन चीजों से वंचित है तोय

2160
02:34:33,800 --> 02:34:38,000
उनका उनको विचारों को बोले विशाल भंडारा है भंडारे में आओ तुम देखो कितना माल

2161
02:34:38,000 --> 02:34:42,120
पुआ बना हुआ है और है ही हमारे थोड़ा है तो ये उनका ब्रेन वश जल्दी

2162
02:34:42,120 --> 02:34:46,160
से कर लेते हैं बाद बाद में जाके वही कोई अच्छा व्यक्ति देख लो कोई इनके पास

2163
02:34:46,160 --> 02:34:51,080
होगा कोई वही हैय सारे ऐसे ही तो जनसंख्या बढी सर

2164
02:34:51,080 --> 02:34:55,160
हां बढ़ी रही है हर जगह पहुच जा देव भूमि में एक जगह

2165
02:34:55,160 --> 02:34:59,280
आ गए थे वहा तो हम भी हरिद्वार में कहीं गए हुए वहा

2166
02:34:59,280 --> 02:35:03,400
एक लेडीज किताब दिखा रही वहा फिर मैंने इनको मतलब कहा मैंने कहा वो

2167
02:35:03,400 --> 02:35:07,480
तो मेरी नजर पड़ने कहा रुको रुको फिर वहा पर झड़प हो गई थोड़ा से अब क्या

2168
02:35:07,480 --> 02:35:11,640
करें कितना समझाए इन लोगों ने इतना वो दुराचार

2169
02:35:11,640 --> 02:35:16,200
फैला रखा है मैं तो साफ कह रहा मैं एक बात कहूंगा कि मैंने

2170
02:35:16,200 --> 02:35:20,320
मतलब मैं एकस जिस कंटेंट के बारे में हम लोग बात कर रहे ना उस

2171
02:35:20,320 --> 02:35:24,360
पर ये बात करें कि ऐसा हो

2172
02:35:24,360 --> 02:35:28,880
सकता था कि मैं केवल जब भी आते

2173
02:35:28,880 --> 02:35:33,160
तो मैं सीधे सर्वशक्तिमान जो एक ऐसा अकाट्य

2174
02:35:33,160 --> 02:35:37,280
सिद्धांत है जिसके सामने कोई नहीं टिक सकता कोई भी आ जाए संसार बिल्कुल आपका

2175
02:35:37,280 --> 02:35:41,080
बहुत सही बिल्कुल बहुत तार्किक इतना त

2176
02:35:41,080 --> 02:35:45,200
आचार्यों का विरोधी होगा वो सर्वशक्तिमान वाले सिद्धांत के आगे

2177
02:35:45,200 --> 02:35:49,760
दो मिनट नहीं टिकेगा नहीं टगा मगर

2178
02:35:49,760 --> 02:35:54,320
मैंने दूसरे दूसरे टॉपिक क्यों उठाए

2179
02:35:54,320 --> 02:35:59,400
क्यों उठाए कि गीता में 5 पर

2180
02:35:59,400 --> 02:36:03,680
काल है ना ब्रह्मा विष्णु महेश अविनाशी यह सब पॉइंट

2181
02:36:03,680 --> 02:36:07,760
मैंने क्यों उठाए इसलिए उठाए कि इनकी हर पोल को

2182
02:36:07,760 --> 02:36:11,840
खोलना है खोलना है जितनी पोल इन्होने फैला के रखे

2183
02:36:11,840 --> 02:36:16,240
हैं उन सबको खोलना है वरना य अपने उसको बरगला जाएंगे व्यक्ति

2184
02:36:16,240 --> 02:36:20,280
को अरे वो वो तो पागल है वो ऐसे कोई करता

2185
02:36:20,280 --> 02:36:24,400
है ईश्वर की बात कि वो एक सब कुछ कर सकता है ईश्वर क्या बुरा ही कर सकता है

2186
02:36:24,400 --> 02:36:28,560
तो मैंने हर पोल को इसीलिए खोल रहा हूं अब जैसे धीरे धीरे अ

2187
02:36:28,560 --> 02:36:32,840
ये वेदों को मानने और ना मानने वाले सिद्ध हो गए अभी थोड़े ही दिन में ये

2188
02:36:32,840 --> 02:36:37,120
अभी जैसे आज एक्सटेंडेड धर्म बना दिया अब कल परसों में सनातन

2189
02:36:37,120 --> 02:36:41,280
को ना मानने वाले हिंदू धर्म को ना मानने वाले सिद्ध हो जाएंगे

2190
02:36:41,280 --> 02:36:45,680
थोड़े ही दिन में अगर ये आ गए तो ये सिद्ध होंगे

2191
02:36:45,680 --> 02:36:49,800
और नहीं तो ये आए नहीं नहीं तो ये सिद्ध हो जाएंगे

2192
02:36:49,800 --> 02:36:51,960
सो

2193
02:36:51,960 --> 02:36:55,360
सम है

2194
02:36:55,360 --> 02:36:56,360
ना

2195
02:36:56,360 --> 02:37:00,760
मानने वाले सिद्ध हो गए क्या कहते

2196
02:37:00,760 --> 02:37:04,800
सर्वशक्तिमान को ना मानने वाले सिद्ध हो गए परम स्वतंत्र को ना मानने वाले

2197
02:37:04,800 --> 02:37:08,840
सिद्ध हो गए सब कुछ भगवान को ना मानने वाले

2198
02:37:08,840 --> 02:37:11,880
सिद्ध हो गए

2199
02:37:11,880 --> 02:37:15,960
तो अभी अभी जब ये दो तीन स्ट्रीम में आएंगे और तो

2200
02:37:15,960 --> 02:37:20,080
ये पहले होंगे सनातन को ना मानने वाले उसके बाद जब

2201
02:37:20,080 --> 02:37:24,200
ये सनातन को ना मानने वाले सिद्ध हो जाएंगे तो फिर ये हो जाएंगे

2202
02:37:24,200 --> 02:37:28,360
ईश्वर को ना मानने वाले अच्छा में

2203
02:37:28,360 --> 02:37:32,360
तो जी एक अनुरोध और है मैं

2204
02:37:32,360 --> 02:37:36,560
इस काम को भी कर रहा हूं पर इसके लिए कोई क कोर्ट में वकील में जैसे

2205
02:37:36,560 --> 02:37:40,640
हम लोग चंदन की डिब्बी होता है उस पर भगवान शंकर की फोटो

2206
02:37:40,640 --> 02:37:44,920
होती है फ हम चंदन लिया तो डिब्बी को फेंक दिया कई चीजें कपूर

2207
02:37:44,920 --> 02:37:49,040
है सरस्वती जी की मैं कहता हूं उसम नाम लिखो पर फोटो किसी भगवान की नहीं

2208
02:37:49,040 --> 02:37:53,240
होनी इस भी थोड़ा काम करना है और हम कई

2209
02:37:53,240 --> 02:37:57,360
हवन सामग्री होते है वहा पर भगवान का बक प्रतिबिंब विग्रह लगा रहता

2210
02:37:57,360 --> 02:38:01,800
है हवन सामग्री का पैकेट फ उसको

2211
02:38:01,800 --> 02:38:07,000
दिया सब बंद होना चाहि

2212
02:38:07,000 --> 02:38:11,440
नामन की कहीं पर भी नहीं होनी चाहिए

2213
02:38:11,440 --> 02:38:15,440
अनिल कुमार जी बोले आप लोग अपना माइक

2214
02:38:15,440 --> 02:38:19,560
म्यूट कर लीजिए बस अनिल कुमार जी को और सुनले फिर हम लोग

2215
02:38:19,560 --> 02:38:23,920
आज को प्रोसीड करेंगे आप लोग चारों लोग हमसे संपर्क

2216
02:38:23,920 --> 02:38:28,160
करिएगा एक प्रकल्प है उसके लिए हमें आप सबकी सहायता चाहिए जय

2217
02:38:28,160 --> 02:38:32,160
शर्मा जी आप भी करिएगा अनिल कुमार जी आप भी हर जी आप तो है ही

2218
02:38:32,160 --> 02:38:36,320
संपर्क में और पंडित जी आप भी एक प्रकल्प है उसमें थोड़ा

2219
02:38:36,320 --> 02:38:40,520
थोड़ा सा सब सबकी सहायता चाहिए अजय तिवारी जी आप भी जुड़

2220
02:38:40,520 --> 02:38:44,920
गए जी जय श्री राम

2221
02:38:44,920 --> 02:38:48,920
मेरा एक विचार है मैं वो परसों के लाइव

2222
02:38:48,920 --> 02:38:53,040
से संबंधित है तो अभी इस विषय के तो बाहर से ही है लेकिन मैं

2223
02:38:53,040 --> 02:38:57,120
लास्ट में वो विचार रखना चाहूंगा आप पहले इनकी बात पूरी सुन ले क्या

2224
02:38:57,120 --> 02:39:01,440
कह रहे हैं अनिल कुमार जी बताए जय श्री

2225
02:39:01,440 --> 02:39:05,600
राम जय श्री राम क रहा एक

2226
02:39:05,600 --> 02:39:09,720
हमारे देश की है ना हिंदुओं की विडंबना है कि आज केत हर

2227
02:39:09,720 --> 02:39:13,840
घर में ना कोई शास्त्र नहीं पढ़ता ना किसी के पास शास्त्र है आज

2228
02:39:13,840 --> 02:39:18,120
हमारे पास किसी के पास शास्त्र होता ना कि हर कोई पढ़े उस चीज का शास्त्रों कोई अध्ययन

2229
02:39:18,120 --> 02:39:22,160
करे ना ये चीज नत ना और इस चीज के लिए य लोग हैना

2230
02:39:22,160 --> 02:39:26,280
ब्रेन बस करने में इनको आसानी होती है अगर य हम हर

2231
02:39:26,280 --> 02:39:30,400
घर में अपने हिंदू में

2232
02:39:30,400 --> 02:39:34,520
सनातन न प्र चालू कर देना इस चीज की कभी नौबत नहीं आएगी इस

2233
02:39:34,520 --> 02:39:38,560
चीज कादा कभी नहीं उए सबसे ब

2234
02:39:38,560 --> 02:39:44,560
समस्या

2235
02:39:45,320 --> 02:39:49,440
सना शास्त्र नहीं परंपरा प्राप्त गुरु

2236
02:39:49,440 --> 02:39:53,560
इस समस्या का निवारण है

2237
02:39:53,560 --> 02:39:58,080
शास्त्र की आड़ में ही तो ये गोरख धंधे चल रहे

2238
02:39:58,080 --> 02:40:02,320
हैं शास्त्र में ही तो यह सब मैनिपुलेशन करके और अपनी चीजें

2239
02:40:02,320 --> 02:40:06,360
करके और यह सब तभी तो चल रहा है तो शास्त्र की नहीं लोगों

2240
02:40:06,360 --> 02:40:10,600
को हमें यह बताना है कि जिससे भी धर्म सुनो वो परंपरा

2241
02:40:10,600 --> 02:40:14,960
प्राप्त आचार्य हो प्रामाणिक परंपरा प्राप्त अगर

2242
02:40:14,960 --> 02:40:19,040
व्यक्ति परंपरा प्राप्त आचार्य तक पहुंच गया तो वह सही शास्त्रों तक

2243
02:40:19,040 --> 02:40:23,200
प जाएगा सही शास्त्रों तक पहुंच जाएगा सही धर्म

2244
02:40:23,200 --> 02:40:27,560
तक पहुंच जाएगा हिंदू जो बिखरा हुआ है इतने सारे गुटबाजी में

2245
02:40:27,560 --> 02:40:30,240
सब एक हो

2246
02:40:30,240 --> 02:40:34,320
जाएगा तो शास्त्र तो है ही मगर

2247
02:40:34,320 --> 02:40:37,440
गुरु गोविंद और ग्रंथ स्कंद पुराण में वचन

2248
02:40:37,440 --> 02:40:40,960
है

2249
02:40:40,960 --> 02:40:46,400
कि मनुष्य चाहे चारों वेद

2250
02:40:46,400 --> 02:40:50,680
पले सारे पुराण पढ़ ले सारे उपनि पढ़ ले

2251
02:40:50,680 --> 02:40:56,680
जप तप व्रत दान पुण्य कर्म तीर्थ दान

2252
02:40:57,440 --> 02:41:02,000
यज्ञ यह सब कुछ व्यर्थ है अगर आपका कोई प्रामाणिक

2253
02:41:02,000 --> 02:41:06,080
आचार्य गुरु नहीं है तो इसी वजह

2254
02:41:06,080 --> 02:41:11,000
से अब महाभारत में तो ये लिखा है

2255
02:41:11,000 --> 02:41:15,080
अब जैसे मैं पूछ रहा हूं कि आप वेदों का प्रमाण दो के मिलावट कहां हुई तो

2256
02:41:15,080 --> 02:41:19,960
मैं मान लू अ प्रमाण तो है नहीं उनकी बात तो मानना पड़ेगा

2257
02:41:19,960 --> 02:41:24,040
अब मैं मैं प्रमाण दे रहा हूं कि भैया जो महाभारत है उसम लिखा है

2258
02:41:24,040 --> 02:41:28,040
महाभारत में य लिखा है कि जो कहता

2259
02:41:28,040 --> 02:41:32,800
है कि वेद में कुछ मिलावट हो गई है शास्त्रों में मिलावट हो गई राक्षस है

2260
02:41:32,800 --> 02:41:37,120
मैं तो उसे मानूंगा महाभारत में लिखा

2261
02:41:37,120 --> 02:41:41,800
है जी अजय तिवारी जी जय श्री राम बोले अपनी

2262
02:41:41,800 --> 02:41:46,520
बात आपके जैसे लाइव वो भी चला रहे हैं एमपी फास्ट में

2263
02:41:46,520 --> 02:41:51,080
जी हेमंत करके कोई हेमंत कुमार

2264
02:41:51,080 --> 02:41:52,480
अच्छी बात है हमारा ही

2265
02:41:52,480 --> 02:41:56,640
प्रचार होगा वो भी जी वो

2266
02:41:56,640 --> 02:42:01,240
भी हमारा ही प्रचार वो रामपाल के उसम चला रहे हैं

2267
02:42:01,240 --> 02:42:05,480
मतलब आपको चकर देने के लिए ठीक है तो होगा

2268
02:42:05,480 --> 02:42:09,720
अच्छी बात है वो वो सामने नहीं आएंगे फोन नहीं करेंगे शिवांश जी

2269
02:42:09,720 --> 02:42:13,800
मैं आगरा आता हूं आप भी आगरा आ जाइए वहां पर बीच में बैठ कर के चर्चा हो

2270
02:42:13,800 --> 02:42:19,320
जाए इतना नहीं है

2271
02:42:19,320 --> 02:42:23,320
र रटा बे हुए वही वो एमपी एमपी फस्ट का ही कल

2272
02:42:23,320 --> 02:42:27,480
मैं लाइव देख रहा था पीछे हरि चद्दर थी

2273
02:42:27,480 --> 02:42:31,760
और एक जनाब बैठ कर के वहां बातें कर रहे थे कोई

2274
02:42:31,760 --> 02:42:36,000
युवक गया वहां पूछा कि वो तो वे शिव पुराण में तो काल लिखा

2275
02:42:36,000 --> 02:42:40,120
है शिवजी को शिवजी को महाकाल लिखा है तो युवक

2276
02:42:40,120 --> 02:42:44,120
का जवाब ही नहीं दिया हटा ही दिया शांत

2277
02:42:44,120 --> 02:42:49,360
हो गया गायब हो गया युव जवाब नहीं है ना उनके पास

2278
02:42:49,360 --> 02:42:53,480
जवाब नहीं जहां पर काल लिखा

2279
02:42:53,480 --> 02:42:57,520
है ना काल वहां प पीपल का वृक्ष भी बलाया उसम

2280
02:42:57,520 --> 02:43:01,760
अक्षरों में उ भी बोला है वहां प कई तर कई उने

2281
02:43:01,760 --> 02:43:05,760
दिया है अपना कि मैं इंद्र में देवता

2282
02:43:05,760 --> 02:43:07,840
में इंद्र हूं इससे का

2283
02:43:07,840 --> 02:43:12,080
इन लोग वो नहीं देखते हैं खाली एक ही दे रखा है काड देख रखा है बस ओम

2284
02:43:12,080 --> 02:43:16,560
का अक्षर देख रखा है दूसरा कोई तीसरा कोई दे देखा नहीं

2285
02:43:16,560 --> 02:43:21,000
ये समस्या है देख तो फाइनल

2286
02:43:21,000 --> 02:43:24,960
फाइनल कंक्लूजन यही है

2287
02:43:24,960 --> 02:43:28,960
कि आपको उन्हे तत्वदर्शी मानना है मानो

2288
02:43:28,960 --> 02:43:33,120
वो गीता के आधार पर तत्वदर्शी नहीं है आपको

2289
02:43:33,120 --> 02:43:37,320
कबीर को भगवान मानना है मानो वो वेद के अनुसार भगवान नहीं है सिंपल

2290
02:43:37,320 --> 02:43:41,400
खतम बात आपको कभ जो गरीब दास है उस ग्रंथ

2291
02:43:41,400 --> 02:43:46,360
को धर्म मानना है मानो मर वो सनातन धर्म नहीं है

2292
02:43:46,360 --> 02:43:51,520
वैदिक धर्म नहीं है जी शर्मा जी

2293
02:43:51,520 --> 02:43:55,520
बताइए भैया मेरे तो अभी शिव पुराण का आपने वर्णन करा तो

2294
02:43:55,520 --> 02:43:59,720
शिव पुराण संबंधित एक मेरे को चर्चा याद आ गई किसी के साथ चल रही

2295
02:43:59,720 --> 02:44:03,760
थी तो वो था मेरी डिबेट

2296
02:44:03,760 --> 02:44:07,840
चल रही थी मास भक्षण के ऊपर मैं यह कह रहा हूं कि भैया नहीं खाना चाहिए

2297
02:44:07,840 --> 02:44:12,480
सामने वाला कह रहा खाना चाहिए तो उसने क्या बोला कि अरी लोग तो खाते हैं सब

2298
02:44:12,480 --> 02:44:16,840
मैंने कहाय तुमने कहा पढ़ा री लोग खाते हैं तो कहता है

2299
02:44:16,840 --> 02:44:21,040
कि शिव पुराण में कथा आती है कि जब भगवान

2300
02:44:21,040 --> 02:44:23,240
अकासर का वध करते हैं

2301
02:44:23,240 --> 02:44:27,600
और शुक्राचार्य जी बाकी दत्य को मृत संजीव

2302
02:44:27,600 --> 02:44:31,600
द्वारा जीवित करते हैं तो इससे तंग होकर महादेव ने शुक्राचार्य

2303
02:44:31,600 --> 02:44:35,920
जी को निगल लिया था और भगवा

2304
02:44:35,920 --> 02:44:40,760
शुक्राचार्य जी भगवान के उदर में जो है शिव सहस्त्र की

2305
02:44:40,760 --> 02:44:45,080
साधना करते हैं नाम करते हैं तो उसमें एक नाम आता है शव भोजन

2306
02:44:45,080 --> 02:44:49,160
भगवान शिव का तो उन्होंने शव का अर्थ निकाला है

2307
02:44:49,160 --> 02:44:53,240
की लाश खाने वाले तो मैं आपसे पूछना चाहता हूं कि ये

2308
02:44:53,240 --> 02:44:57,560
जो अर्थ निकाला है यह क्या ठीक है क्योंकि मैंने इसका

2309
02:44:57,560 --> 02:45:01,720
उतर दिया था देखिए वो प्रसंग वस देखना देखना होता है मगर

2310
02:45:01,720 --> 02:45:06,400
एक बात मैं बता दूं जो सूत्रा क्मक शैली में अगर कहे

2311
02:45:06,400 --> 02:45:10,880
तो विभिन्न सुति स्मृति शास्त्रों के अनुसार मांसाहार के संबंध में

2312
02:45:10,880 --> 02:45:15,120
जो निचोड़ है हम इस पर वीडियो बनाने वाले हैं प्रॉपर प्रमाणों

2313
02:45:15,120 --> 02:45:19,120
के साथ मगर जो निचोड़ है वो ये है कि

2314
02:45:19,120 --> 02:45:23,440
सनातन धर्म के अनुसार अ विधि पूर्वक मास खाना

2315
02:45:23,440 --> 02:45:27,840
गलत है और अमुक अमुक स्थिति में अमुक

2316
02:45:27,840 --> 02:45:32,000
अमुक विधियों का आलंबन लेते हुए अमुक अमुक

2317
02:45:32,000 --> 02:45:36,600
कारणों से मास खाने की अनुमति है अधिकार

2318
02:45:36,600 --> 02:45:38,320
नहीं अनुमति और

2319
02:45:38,320 --> 02:45:42,680
अधिकार में अंतर होता है प्राण रक्षा के निमित्त करना है आपके

2320
02:45:42,680 --> 02:45:47,240
यहां पर परंपरा ही है कि उसमें मास खाते चले आ रहे हो वो आपकी वो

2321
02:45:47,240 --> 02:45:52,160
प्रवृत्ति है जैसे जो लोग उत्तर प्रदेश में

2322
02:45:52,160 --> 02:45:56,600
जन्म लेते हैं वह जब तक रोटी नहीं खाएंगे उत्तर

2323
02:45:56,600 --> 02:46:00,960
प्रदेश वाले उत्तर भारतीय तो उनकी जो आतो को संतुष्टि

2324
02:46:00,960 --> 02:46:05,560
नहीं मिलती है ऐसे ही अगर पूर्वांचल में जाएंगे

2325
02:46:05,560 --> 02:46:09,800
वहां पर जब तक वह चावल नहीं खाएंगे तब तक आपको जो है

2326
02:46:09,800 --> 02:46:14,000
आतो को संतुष्टि नहीं मिलेगी कुछ अधूरा है जिनका ऐसे

2327
02:46:14,000 --> 02:46:18,040
कुल वंश में जन्म हो गया जहां पर प्रॉपर धर्म युक्त चीजें

2328
02:46:18,040 --> 02:46:22,040
नहीं थी मगर वहां पर जन्म हो गया और

2329
02:46:22,040 --> 02:46:26,040
वहां की प्रवृत्ति है बचपन से उनको मांस खिलाया गया तो उनकी प्रवृत्ति है

2330
02:46:26,040 --> 02:46:30,600
अब इस प्रवृत्ति से निकले कैसे क्योंकि अंततोगत्वा

2331
02:46:30,600 --> 02:46:34,600
मास का त्याग ही करना है तभी आप मोक्ष की ओर

2332
02:46:34,600 --> 02:46:38,920
अग्रसर होंगे आप भगवान की ओर अग्रसर

2333
02:46:38,920 --> 02:46:43,200
तभी होंगे जब मास का आप त्याग करेंगे तो यदि आपकी प्रवृति

2334
02:46:43,200 --> 02:46:47,200
भी है तो उसको कैसे करना है यदि आपको प्राण की रक्षा के लिए

2335
02:46:47,200 --> 02:46:51,400
मास का उपयोग करना पड़ रहा है तो कैसे करना है तो अमुक अमुक स्थिति

2336
02:46:51,400 --> 02:46:53,560
में अमुक अमुक विधियों का आलंबन लेकर

2337
02:46:53,560 --> 02:46:57,600
ही करना है अब इस आलंबन से क्या होगा जिसकी आदत पड़ी हुई

2338
02:46:57,600 --> 02:47:01,720
है बेरोक टोक मांस खाने की उस पर

2339
02:47:01,720 --> 02:47:05,800
एक लगाम लग जाएगी कि तुमको ऐसे ही खाना

2340
02:47:05,800 --> 02:47:10,040
है उसके कारण क्या होगा कि वो विधि विधान

2341
02:47:10,040 --> 02:47:14,760
इतने जटिल होते हैं इतने जटिल होते हैं कि

2342
02:47:14,760 --> 02:47:19,000
उसका जो मांसाहार नि निर्वात रूप से

2343
02:47:19,000 --> 02:47:23,040
निर्विवाद रूप से चल रहा था वह उसमें संकुचन

2344
02:47:23,040 --> 02:47:27,440
आने लगेगा उसके मासा आहार में जब वह विधि पूर्वक खाएगा अ

2345
02:47:27,440 --> 02:47:31,840
विधि पूर्वक तो पाप है और विधि पूर्वक जब वह खाएगा

2346
02:47:31,840 --> 02:47:35,960
विधि पूर्वक जो शास्त्रों द्वारा विधि स्वीकार है उसके पूर्वक जब वो

2347
02:47:35,960 --> 02:47:40,520
खाएगा तो उसको इतने से मास के लिए इतनी सारी

2348
02:47:40,520 --> 02:47:45,200
मेहनत करनी पड़ जाएगी इसको कहते हैं परिसंघ विधि

2349
02:47:45,200 --> 02:47:49,680
व्यक्ति के जीवन में जो उसकी प्रवृत्ति है उससे दूर करने के लिए य जो तकनीक

2350
02:47:49,680 --> 02:47:53,800
है उसी का नाम धर्म है जैसे कि भागवत में एक वचन

2351
02:47:53,800 --> 02:47:58,040
आया है भागवत में कहा गया कि मैंने

2352
02:47:58,040 --> 02:48:02,080
तुझे यह जो मास मद और मैथु है इस तरह की प्रवृत्ति के साथ

2353
02:48:02,080 --> 02:48:06,160
ही बनाया है मगर इस प्रवृत्ति से

2354
02:48:06,160 --> 02:48:09,000
निकलना ही मोक्ष है इन प्रवृत्तियों

2355
02:48:09,000 --> 02:48:13,200
से जीत जाना इंद्रियों को जीत जाना ही मोक्ष है

2356
02:48:13,200 --> 02:48:17,560
तो इनसे जीते कैसे कि तेरे अंदर की जो प्रवृत्तियां है

2357
02:48:17,560 --> 02:48:23,000
उन प्रवृत्तियों का उपयोग तू

2358
02:48:23,000 --> 02:48:27,040
धर्मानुसार के विषय में भी धर्म की जो लगाम है उस

2359
02:48:27,040 --> 02:48:31,280
मांसाहार को कम करने के लिए खत्म करने के लिए नष्ट

2360
02:48:31,280 --> 02:48:35,640
करने के लिए उस लगाम का दुरुपयोग करते हैं लोग

2361
02:48:35,640 --> 02:48:40,600
कि भैया वहां तो यह दे दिया गया है इसलिए अब तो हम खुब खाएंगे जैसे

2362
02:48:40,600 --> 02:48:45,000
ही आप खुब खाने लगे तो आप वो वेद सम्मत या शास्त्र सम्मत मांस

2363
02:48:45,000 --> 02:48:49,720
नहीं खा रहे हैं आप वहां पर अधर्म कर रहे हैं पाप कर रहे हैं

2364
02:48:49,720 --> 02:48:54,440
विधि पूर्वक खाएंगे तो कुछ ही दिनों में आपका मन उचट नहीं

2365
02:48:54,440 --> 02:48:58,440
लगेगा जैसे वैराग्य कैसे आता है व्यक्ति के जीवन

2366
02:48:58,440 --> 02:49:02,560
में जब वह भोग करने के लिए

2367
02:49:02,560 --> 02:49:06,760
किसी भी स्त्री के साथ खुला छोड़ दो तो कभी उसके जीवन से

2368
02:49:06,760 --> 02:49:11,400
स्त्री को लेकर के व जो आसक्ति कम होगी

2369
02:49:11,400 --> 02:49:15,640
वह उसमें और गर्त में जाता जाएगा मगर उस पर एक लगाम लगा

2370
02:49:15,640 --> 02:49:20,000
दी गई विवाह कि ये तुम्हारी स्त्री है भोग

2371
02:49:20,000 --> 02:49:24,160
की दृष्टि से केवल इसी को देखना है तो वो परिस

2372
02:49:24,160 --> 02:49:28,520
विधि हो गई तो इसी प्रकार से

2373
02:49:28,520 --> 02:49:32,640
जी मांस खाने वाला व्यक्ति ना आप जो बात कह रहे हो वो

2374
02:49:32,640 --> 02:49:36,640
इतनी स्वीकार नहीं करेगा नहीं वो नहीं करेगा तो वो अधर्मी

2375
02:49:36,640 --> 02:49:41,080
है एक मिनट वो ये कहेगा देखो खाते तो है ना

2376
02:49:41,080 --> 02:49:45,360
वो ये कह देगा तुर देखो खाते तो है ना अ कैसे भी खाते हैं भैया

2377
02:49:45,360 --> 02:49:49,360
मेरे मेरा सिर्फ विचार है या मेरा भाव है जो मैं आपके सामने रख रहा

2378
02:49:49,360 --> 02:49:53,680
हूं बात ये है कि शव भोजन केवल शव मतलब लाश ही नहीं होता

2379
02:49:53,680 --> 02:49:58,440
है वो तो ठीक है वो आप कह रहे हैं प्रसंग देखना

2380
02:49:58,440 --> 02:50:02,800
पड़ेगा शास्त्रों में ये भी है कि जिसने कभी

2381
02:50:02,800 --> 02:50:06,920
धर्म धर्म के रास्ते पर चला पुण्य नहीं करा किसी की हेल्प नहीं

2382
02:50:06,920 --> 02:50:10,920
करी किसी को खुशी नहीं बांटी भगवान के कभी दर्शन नहीं करे तो

2383
02:50:10,920 --> 02:50:15,160
वह व्यक्ति लाश के ही समान है सब समान ही है तो

2384
02:50:15,160 --> 02:50:19,440
ऐसे व्यक्ति द्वारा ऐसे व्यक्ति द्वारा भगवान

2385
02:50:19,440 --> 02:50:23,440
शिव पर अगर गलती से भी एक जल की बूंद भी गिर जाए तो भी

2386
02:50:23,440 --> 02:50:27,920
भगवान उसको स्वीकार कर लेते हैं तो य भावा

2387
02:50:27,920 --> 02:50:32,040
ये था किय इसको कहा गया शव भोजन इसमें मतलब वो नहीं हुआ कि

2388
02:50:32,040 --> 02:50:36,280
भगवान खाते हैं यह गलत व्याख्या हो जाएगी

2389
02:50:36,280 --> 02:50:39,320
क रहे हो देखो ऐसा भी है य जो यह अघोरी वाली

2390
02:50:39,320 --> 02:50:44,120
बात बताई इसमें भी एक यह वाली बात है

2391
02:50:44,120 --> 02:50:48,400
कि जो दक्ष जी का यज्ञ हो रहा था उसमें सती

2392
02:50:48,400 --> 02:50:52,560
मा माता ने अपनी आहुति दे दी थी तो उसके बाद शिव गणों

2393
02:50:52,560 --> 02:50:56,800
ने विष्णु गणों को श्राप दिया था विष्णु गणों ने शिव गणों को श्राप दिया था

2394
02:50:56,800 --> 02:51:00,880
उस श्राप से मुक्त होने के लिए शिव

2395
02:51:00,880 --> 02:51:04,880
जी ऐसे शास्त्रों की रचना करते हैं जिसमें कि

2396
02:51:04,880 --> 02:51:08,960
आप मास मध्य मैथुन इन

2397
02:51:08,960 --> 02:51:13,400
सब का आलंबन लेते हुए पूजा करेंगे पूजा

2398
02:51:13,400 --> 02:51:17,640
मास म मैथुन जैसी चीजों का आलंबन लेते हुए

2399
02:51:17,640 --> 02:51:21,760
तो ऐसे शास्त्रों की रचना का परवन क्या कि उन्हें श्राप य

2400
02:51:21,760 --> 02:51:25,920
मिला था कि तुम मास मद मैथुन इनका उपयोग करोगे

2401
02:51:25,920 --> 02:51:29,920
पूजा के समय भगवान की पूजा के समय तो ऐसे शास्त्र लिख

2402
02:51:29,920 --> 02:51:34,080
दिए कि कि किसी तरीके से इनके जीवन में अब श्राप

2403
02:51:34,080 --> 02:51:38,280
तो लग गया है तो इनका जन्म तो होगा तो किसी

2404
02:51:38,280 --> 02:51:42,680
तरीके से इनके जीवन में भगवन नाम बना रहे तो उन्होंने ऐसे शास्त्र लिख

2405
02:51:42,680 --> 02:51:46,880
दिए जो जिसमें भगवन नाम के साथ में किसी तरीके

2406
02:51:46,880 --> 02:51:50,960
से मास यह सब चीज जोड़ी जा सके मगर देवी भागवत में

2407
02:51:50,960 --> 02:51:54,800
ये आया कि जो

2408
02:51:54,800 --> 02:51:59,600
अपना भला चाहते हैं उनको आगम शास्त्र

2409
02:51:59,600 --> 02:52:03,800
ये जो कापालिक शास्त्र रचे गए इनमें इनका

2410
02:52:03,800 --> 02:52:07,840
वही अंश स्वीकार करना चाहिए जो वैदिक हो जो वेद

2411
02:52:07,840 --> 02:52:11,960
विरुद्ध अंश हो उसको स्वीकार नहीं करना चाहिए ये आगम

2412
02:52:11,960 --> 02:52:16,680
शास्त्रों के लिए देवी भागवत में वचन आए हैं और भी कई जगह आए

2413
02:52:16,680 --> 02:52:20,680
तो कुल मिलाकर के बात वही है कि यह भी ऐसे भी शास्त्र रचे भगवान

2414
02:52:20,680 --> 02:52:25,720
ने जो किसी देश काल परिस्थिति में रचे गए तो वह सनातन

2415
02:52:25,720 --> 02:52:30,080
शास्त्र नहीं है यानी कि उन शास्त्रों के अनुसार

2416
02:52:30,080 --> 02:52:34,960
मास खाने वाला सनातन ही नहीं है

2417
02:52:34,960 --> 02:52:39,080
समझ रहे हैं ना वो किसी देश काल परिस्थिति में

2418
02:52:39,080 --> 02:52:43,080
रचे गए शास्त्र है तो वो किसी परिस्थिति के लिए

2419
02:52:43,080 --> 02:52:47,880
रचे गए वो सनातन शास्त्र नहीं है तो उनके अनुसार

2420
02:52:47,880 --> 02:52:52,080
मास खा रहा है जो कि मैं इन शास्त्रों को मानता हूं

2421
02:52:52,080 --> 02:52:56,120
यह भी शिव जी ने रचे हैं उन शास्त्रों के अनुसार जो मांस खा रहा है

2422
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उन शास्त्रों के अनुसार वो भी सनातन नहीं है वो सनातन की सीमा से वो

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सनातन को मान सनातन शास्त्रों को मानने वाला वहां पर सिद्ध नहीं होरहा

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तो ऐसे है ठीक है और बाकी फिर हम इस पर एक विस्तृत वीडियो

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लाएंगे एक एक चीज का

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प्रमाण और तर्क के सहित हम लोग बात करेंगे बाकी सभी

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को जय श्री राम आने का बहुत-बहुत धन्यवाद ढ़ प

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सोचा लाइव स्म बंद कर देंगे मगर हो गया धीरे धीरे

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10 ब मिनट गला बैठ चुका है जी आज मेरा फिर टॉपिक रह

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जाएगा अगली बार रखता हूं क में

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राजा प्राचीन वरी का आख्यान है वो भी बली करते थे बलि प्रथा

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थी नारद जी ने उनको भी समझाया आप उसको पढ़ लेना

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देखिए मनुष पति में एक वो आया है

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मास खाने को त्याग देना 100

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वर्षों तक तक लगातार प्रतिवर्ष जो आप स्मेद यज्ञ

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करोगे उतना फल मिलेगा तो

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धर्म ये नहीं धर्म के द्वारा मास को प्रोत्साहन नहीं है

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मगर बिल्कुल नहीं है जैसे मान लीजिए कि मेरे घर के आसपास

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आसपास कोई मुस्लिम है जो हिंदू लोगों को मास बेच

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कर के बहुत पैसे अर्न कर रहा है और मुझे मालूम

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है कि इसका जो उपयोग है वो कहीं गलत जगह कर रहा है इस पैसे

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का अब मैं अगर यह सोचू कि भाई

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मैं अपने हिंदुओं को समझाऊ कि मांस मत खाओ ठीक है तो इसमें

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समय लगेगा है ना हो सकता है पूरा एरा निकल

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जाए पूरी पीढ़ी एक निकल जाए हो सकता है व सब के सब ना माने मगर

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यह जो समस्या जनरेट हो रही है कि हम हिंदुओं का पैसा ही वहां जा रहा है उससे

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हमारा ही इंतजाम हो रहा है तो मैंने इसमें क्या किया मैं

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मैंने ढूंढा कि कहीं तमिलनाडु में छत्तीसगढ़ में कोई हिंदू

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है जो मास बेचता है और मैं उसको कहा भाई तू यहां दुकान खोल

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ले जिससे कि हिंदू का पैसा हिंदू के पास जाए मैंने यह सोच करके

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वह दुकान खुलवा दी तो क्या मैं स्वयं शाकाहारी हूं

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मैं कहता हूं कि मांस खाना निम्न काम है है ना तो क्या

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मैं वह दुकान खुलवा करके मांसाहार को प्रोत्साहन देने

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वाला कहला हंगा क्या बिल्कुल कहलाओगे कहलाओगे

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नहीं कहला नहीं कहलाओगे कैसे

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ऐसे कि द व यदि कोई आपके काटा

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भी चब दे तो वह भी हिंसा है

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मगर आपके हितार्थ आपके तार्थ यदि

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आपका कोई मास भी काट ले डॉक्टर वह हिंसा

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नहीं कहलाए गी तो य जानते

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हुए भी उसको य पैसा दे रहे हैं कि भाई इसका कार्यक्षेत्र

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यह

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है इस पर हम लोग बात करेंगे इस हम लोग बात करेंगे

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ठीक है तो आने के लिए सभी को जय श्री राम

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धनवाद ह हर महादेव और

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आप लोग नतल पर जुड़े 74

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सहायता जो करना चाहते हैं व अवश्य जुड़े और सहायता करे अजय तिवारी

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जी भी और शर्मा जी सूरज प्रकाश जी

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जय श्रीम j
