1
00:00:03,280 --> 00:00:08,280
सभी को जय श्री

2
00:00:08,280 --> 00:00:13,200
राम आशा करते हैं आप सब कुशल मंगल

3
00:00:13,200 --> 00:00:17,840
होंगे और जैसा कि अभी

4
00:00:17,840 --> 00:00:22,600
कुछ दिनों से एक धारा बनी हुई है

5
00:00:22,600 --> 00:00:26,720
जिसमें की रामपाल जी के द्वारा

6
00:00:26,720 --> 00:00:32,200
जो

7
00:00:32,200 --> 00:00:37,880
धाक शिक्षा का प्रचार प्रसार किया जा रहा है

8
00:00:37,880 --> 00:00:42,000
तो उस पर हम लोग प्रकाश डालने का प्रयास कर रहे हैं कि वह कितना

9
00:00:42,000 --> 00:00:46,160
मानने योग्य है कितना नहीं मानने योग्य है उसकी वास्तविकता

10
00:00:46,160 --> 00:00:50,400
को हम बाहर लाने का प्रयास कर रहे हैं

11
00:00:50,400 --> 00:00:55,080
और पिछले कई दिनों से इस बारे में लगातार कोई ना

12
00:00:55,080 --> 00:00:59,080
कोई वीडियो लाइव या चर्चा आपको देखने

13
00:00:59,080 --> 00:01:05,080
को मिलती है

14
00:01:07,640 --> 00:01:11,920
तो जो हमारे आज

15
00:01:11,920 --> 00:01:16,000
के रामपाल जी की तरफ से जो आने वाले हैं बात करने

16
00:01:16,000 --> 00:01:21,800
के लिए वो 8 बजे आएंगे तब तक हम

17
00:01:21,800 --> 00:01:26,480
कुछ पूर्व में जो चीजें हो चुकी है उस पर हम डिस्कस कर

18
00:01:26,480 --> 00:01:30,480
लेंगे जी ज जय श्री राम सभी को ज श्रीराम

19
00:01:30,480 --> 00:01:36,480
सनातनी जिस जी हर हर महादेव हर हर शंकर

20
00:01:38,560 --> 00:01:42,680
जी हां बौद्ध लोगों

21
00:01:42,680 --> 00:01:44,960
को

22
00:01:44,960 --> 00:01:49,200
भी उनकी तरफ से कोई ऐसा व्यक्ति मिलता नहीं है जो

23
00:01:49,200 --> 00:01:53,440
इस तरह से प्रत्यक्ष वार्ता कर करता हो मगर

24
00:01:53,440 --> 00:01:57,800
समय निकालेंगे

25
00:01:57,800 --> 00:02:01,840
और आपने स्पन पर वीडियो लाना बंद कर दिया

26
00:02:01,840 --> 00:02:05,120
मेरे पास एक बहुत लंबी लिस्ट

27
00:02:05,120 --> 00:02:09,320
है रफ लिखा हुआ है बहुत लंबी

28
00:02:09,320 --> 00:02:14,000
लिस्ट है वीडियोस की बहुत सारे चैप्टर्स है

29
00:02:14,000 --> 00:02:18,000
बहुत सारा काम धरातल पर भी बहुत सारे काम

30
00:02:18,000 --> 00:02:22,200
कर रहे हैं तो अभी

31
00:02:22,200 --> 00:02:28,040
जो मैं आधा घंटे पहले आया हूं उसका मुख्य कारण

32
00:02:28,040 --> 00:02:32,320
अ कुछ बातें हैं जो मैं वैसे कई बार अपने लाइव

33
00:02:32,320 --> 00:02:36,880
में बताता भी आया हूं मगर एक बार फिर से

34
00:02:36,880 --> 00:02:41,840
प्रकाश डाल देता हूं कि जैसे कल हमने एक व्यक्ति

35
00:02:41,840 --> 00:02:47,600
को हटाया था उसकी अनुमति के

36
00:02:47,600 --> 00:02:51,920
बिना तो उस व्यक्ति को की लिखी हुई कोई किब होगी ना

37
00:02:51,920 --> 00:02:56,000
उसमें भी कोई ना कोई एक लाइन ऐसी होगी जो मानव कल्याण

38
00:02:56,000 --> 00:03:01,400
के लिए सिद्ध हो जाएगी तो क्या हम उसको पवित्र ग कहेंगे

39
00:03:01,400 --> 00:03:06,280
सब मानव कल्याण सिद्ध हेतु है लेकिन उस नहीं समझ पाए संचार

40
00:03:06,280 --> 00:03:10,560
समझ नहीं पाए आप हा

41
00:03:10,560 --> 00:03:14,000
यह आपने वीडियो देखा

42
00:03:14,000 --> 00:03:18,000
इसमें हम लोग जब चर्चा के लिए आए चर्चा का मतलब होता है कि हम

43
00:03:18,000 --> 00:03:22,720
अपनी बात बताए और सामने वाला अपनी बात बताए

44
00:03:22,720 --> 00:03:27,280
कम से कम निर्णायक ना बने हम अभी तक अपने किसी भी

45
00:03:27,280 --> 00:03:32,080
चर्चा में निर्णायक नहीं बने मगर सामने

46
00:03:32,080 --> 00:03:36,320
वाला पता नहीं कौन सा धर्मा आचरण उसको सिखाया जाता है हालांकि कहते

47
00:03:36,320 --> 00:03:40,360
स्वयं को धर्म धर्मावलंबी है मगर वह देखने में आचरण में

48
00:03:40,360 --> 00:03:44,520
दिखाई नहीं देता है जब हम किसी के साथ चर्चा कर रहे हैं चर्चा

49
00:03:44,520 --> 00:03:48,760
का मतलब ही है कि हम लोग किसी बिंदु पर नहीं पहुंचे हो सकता है आपका व्यक्तिगत

50
00:03:48,760 --> 00:03:52,760
कोई बिंदु हो जिस पर आप मानते हो कि आप पहुंचे हुए हैं तो उसको आप

51
00:03:52,760 --> 00:03:57,160
अपनी जहां पर आप है जहां पर व चर्चा का मंच नहीं है वहां पर

52
00:03:57,160 --> 00:04:01,200
आप रखें मगर जब हम तर्क और प्रमाण तथ्यों

53
00:04:01,200 --> 00:04:05,240
पर बात कर रहे हैं तो आप निर्णय सुनाने वाले होते कौन है

54
00:04:05,240 --> 00:04:09,880
वहां पर कोई बात नहीं हो रही थी शंकराचार्य की

55
00:04:09,880 --> 00:04:13,880
या रामपाल जी की भी कोई बात नहीं हो रही थी हमने आज तक अपनी वीडियो में कहा है कि

56
00:04:13,880 --> 00:04:18,080
रामपाल जी यह क्या कहते हैं चर्चा के समय हमने कहा

57
00:04:18,080 --> 00:04:22,280
कि रामपाल जी जो है वो निर्णय सुनाया किसी प्रकार से

58
00:04:22,280 --> 00:04:26,520
हम कभी भी कोई भी बात को आरोपित नहीं करते

59
00:04:26,520 --> 00:04:29,320
हैं कि ये लो प्रश्न उठाते हैं

60
00:04:29,320 --> 00:04:34,080
अपना अपना पक्ष रखते हैं कि अगर आप यह कह रहे हो तो यह फिर इसका क्या

61
00:04:34,080 --> 00:04:38,600
करें तो यह चर्चा में निर्णायक बन कर के और अभद्र

62
00:04:38,600 --> 00:04:42,800
तरीके से बात करने पर जब हमने प्रतिक्रिया दी तो इस पर लोगों का कहना

63
00:04:42,800 --> 00:04:47,560
है कि भा आप सामने वाले को सुनते नहीं हो तो सुन कर के क्या करें

64
00:04:47,560 --> 00:04:52,320
अपने पिता समान अपने दादा समान गुरु के बारे में अभद्र भाषा

65
00:04:52,320 --> 00:04:56,920
अभद्र अमर्यादित भाषा शैली सुने बैठ कर के

66
00:04:56,920 --> 00:05:01,400
इसलिए उसको सामने वाले को सुने और यह करना

67
00:05:01,400 --> 00:05:05,680
भी हमारे तो आचरण में भी हम प्रयास करते हैं कि वो शास्त्रोक्त बात

68
00:05:05,680 --> 00:05:09,720
रहे यह करना भी जैसे जैसे हमने कल एक बात कही इसको लात मार के

69
00:05:09,720 --> 00:05:14,920
निकालो बाहर तो यह करना भी शास्त्र बोलते

70
00:05:14,920 --> 00:05:19,000
हैं गुरु की निंदा करने वाले को कि अगर

71
00:05:19,000 --> 00:05:25,000
जीवा ना काट सको तो उसको वहां से भगा

72
00:05:25,400 --> 00:05:27,680
दो भगा ना सको तो खुद

73
00:05:27,680 --> 00:05:31,720
हट जाओ तो निंदा वाली बात आई क्यों नहीं

74
00:05:31,720 --> 00:05:35,800
आनी चाहिए थी जो कल एक भाई

75
00:05:35,800 --> 00:05:39,960
साहब नेपाल से जुड़े हुए थे हालांकि दोनों ही नेपाल से

76
00:05:39,960 --> 00:05:45,960
थे

77
00:05:46,120 --> 00:05:50,280
तो उनको हमने लगभग एक ही प्रश्न के लिए लगभग

78
00:05:50,280 --> 00:05:54,720
एक घंटे का टाइम दिया था एक घंटे

79
00:05:54,720 --> 00:05:58,760
बार-बार बारबार हमको वही

80
00:05:58,760 --> 00:06:04,320
ये भाई साहब

81
00:06:04,320 --> 00:06:08,920
इनको इसमें हमें कोई संचय नहीं लेकिन इसमें ज्ञान

82
00:06:08,920 --> 00:06:13,720
किस तरह के दिया गया किसने दिया गया है

83
00:06:13,720 --> 00:06:17,960
ये कैसे बताओ गीता से ज्ञान से ज्ञान कटेंगे

84
00:06:17,960 --> 00:06:22,000
ना तभी गीता से मिलेगा ना अरे क्या

85
00:06:22,000 --> 00:06:25,280
दिमाग खराब है

86
00:06:25,280 --> 00:06:29,680
क्या जो सही अनुवाद किया तो उसको क जो मिस्टेक किया

87
00:06:29,680 --> 00:06:33,680
पूछ रहा हूं मैं पूछ रहा हूं मैं पूछ रहा हूं क्या रामपाल जी की एक

88
00:06:33,680 --> 00:06:37,880
भी बात आप काट सकते हैं क्या क्योंकि पूरा सत्य

89
00:06:37,880 --> 00:06:42,040
बताता तो काटने योग्य नहीं है जो जहां पे कोई भी मिस्टेक करेगा वो काटने

90
00:06:42,040 --> 00:06:46,440
योग्य है सीध वो मिस्टेक बता कौन रहा है आपको मेरे भाई

91
00:06:46,440 --> 00:06:50,680
कोई प्रामाणिक सुनिए सुनिए मेरी बात सुनिए जैसे

92
00:06:50,680 --> 00:06:54,840
जब आपको ये लगा कि गीता में कुछ चीजें गलत है तो इसका

93
00:06:54,840 --> 00:06:59,040
मतलब ये गीता आपके लिए प्रॉपर प्रमाण नहीं है आपने वेद

94
00:06:59,040 --> 00:07:03,160
को ले आए वेद आपके लिए प्रमाण है अब जब वेद में भी आप ऐसा

95
00:07:03,160 --> 00:07:07,440
सोच रहे उस किसीने कुछ गलत लिख दिया होगा

96
00:07:07,440 --> 00:07:11,560
अगर वेद को भी आप ऐसा सोच रहे उसम किसी ने कुछ गलत लिख दिया

97
00:07:11,560 --> 00:07:15,600
होगा तो इसका मतलब है वेदों का भी वेरिफिकेशन आप किसी

98
00:07:15,600 --> 00:07:19,480
और से करते हैं वेद में क्या गलत है क्या सही

99
00:07:19,480 --> 00:07:25,280
है उसका वेरिफिकेशन किसी और से करते हैं वो

100
00:07:25,280 --> 00:07:29,520
कोई सुनि तो सही जो चीज एक शास्त्र में लिख

101
00:07:29,520 --> 00:07:33,720
ही चीज अन्य शास्त्र में ख लिखी है

102
00:07:33,720 --> 00:07:39,720
ये कहा लिखा है

103
00:07:42,640 --> 00:07:47,120
जैसे या कोई और शास्त्र पुराण है कौन सा

104
00:07:47,120 --> 00:07:51,160
शास्त्र मैं गीता को भी मानता हूं वेद को भी मानता हूं कुरान

105
00:07:51,160 --> 00:07:55,320
को भी मानता हूं बाइबल को भी मानता हूं क्योंकि सबकी भगवान एक

106
00:07:55,320 --> 00:08:01,040
है उस चारों ग्रंथ में एक परमात्मा की ज्ञान द हुई

107
00:08:01,040 --> 00:08:05,880
आप टाइमिंग पर जरा नजर डालिए कि कहां से कहां तक यह व्यक्ति

108
00:08:05,880 --> 00:08:10,160
जो प्रश्न पूछा जा रहा है उस प्रश्न का उत्तर ना देते

109
00:08:10,160 --> 00:08:14,800
हुए बात को घुमा रहा है तो

110
00:08:14,800 --> 00:08:18,800
कुल मिलाकर के कितनी देर किसी को टाइम दिया

111
00:08:18,800 --> 00:08:23,600
जाए कितनी बार एक ही प्रश्न को रिपीट किया जाए

112
00:08:23,600 --> 00:08:29,600
यह एक सोचने वाली बात हो जाती है

113
00:08:30,000 --> 00:08:34,680
अच्छा इसमें

114
00:08:34,680 --> 00:08:38,840
एक आप दृश्य ध्यान करिएगा जब उसने मुझसे पूछा

115
00:08:38,840 --> 00:08:43,120
कि त्रिलोकीनाथ किसे कहते हैं तो मैंने

116
00:08:43,120 --> 00:08:47,360
बात को घुमाया नहीं चाहता तो मैं भी घुमा सकता

117
00:08:47,360 --> 00:08:51,440
था बहुत देर तक घुमा सकता था कि

118
00:08:51,440 --> 00:08:55,480
त्रिलोकी का अर्थ क्या है उसमें संधि कैसे होगी और बहुत

119
00:08:55,480 --> 00:08:59,920
तरीके हैं घुमाने के सीधे बोला भाई त्रिलोकीनाथ तो तीनों को कहते हैं

120
00:08:59,920 --> 00:09:04,080
तीनों को जगह जगह पर कहीं ना कहीं त्रिलोकीनाथ बोला गया है तीनों लोगों का

121
00:09:04,080 --> 00:09:08,080
स्वामी तो कट टू कट बात आप

122
00:09:08,080 --> 00:09:12,320
कभी भी देखिएगा जब हमसे कोई सवाल पूछा जाता है तो हम उसका

123
00:09:12,320 --> 00:09:16,640
उत्तर देते हैं ना कि इधर उधर साइड वाइड से जो है इसीलिए

124
00:09:16,640 --> 00:09:21,240
आपको य आपने देखा होगा कि हमारा अपने पक्ष को प्रस्तुत करना

125
00:09:21,240 --> 00:09:25,760
कम समय में दिखा होगा क्यों क्योंकि हम बात को घुमाते नहीं है बहुत देर

126
00:09:25,760 --> 00:09:30,160
तक और यह भाई साहब जब इनसे पूछा जा रहा है कि

127
00:09:30,160 --> 00:09:34,440
एक शास्त्र में कुछ लिखा है दूसरे शास्त्र में कुछ लिखा है

128
00:09:34,440 --> 00:09:38,520
और उन दोनों में आपस में जो चीजें मिल रही है केवल वही मानने की है जो

129
00:09:38,520 --> 00:09:42,760
नहीं मिल रही है वह नहीं मानने की है क्या यही सिद्धांत है आपका

130
00:09:42,760 --> 00:09:45,160
शास्त्र को मानने और ना मानने के विषय

131
00:09:45,160 --> 00:09:51,160
में तो भाई साहब नहीं बता पा रहे हैं

132
00:10:00,560 --> 00:10:04,600
और इतना सब होने के बाद अंततोगत्वा जब

133
00:10:04,600 --> 00:10:08,800
हमें उसे हटाना पड़ जाता है वह हमारा प्रश्न नहीं समझ पा रहा है और इधर

134
00:10:08,800 --> 00:10:13,520
उधर की बात कर रहा है ज्ञान से ज्ञान कटेगा यह कहां लिखा है

135
00:10:13,520 --> 00:10:17,760
यह कहां का नियम है ज्ञान से ज्ञान कटेगा

136
00:10:17,760 --> 00:10:21,960
यह नियम कहां का है गीता में लिखा है

137
00:10:21,960 --> 00:10:26,080
वेद में लिखा है भाई हमारे शास्त्रों में तो ये लिखा

138
00:10:26,080 --> 00:10:30,160
है यदि दो विपरीत शिक्षाएं हैं परस्पर विरुद्ध है तो दोनों धर्म

139
00:10:30,160 --> 00:10:34,360
या तो दोनों का अर्थ ऐसा निकाल लो कि एक ही आंसर आए और या फिर दोनों

140
00:10:34,360 --> 00:10:38,920
दोनों धर्म को अपना लो यह शास्त्र में लिखा है काटने का कहां से हो गया

141
00:10:38,920 --> 00:10:42,960
अगर हम किसी की एक बात को काट रहे हैं तो उस पर विश्वास होना हमारा

142
00:10:42,960 --> 00:10:47,120
सिद्ध नहीं होता हमारे लिए प्रमाण कुछ और है जिसके आधार पर हम उसमें चुनाव कर रहे हैं

143
00:10:47,120 --> 00:10:51,320
कहां सही है कहां गलत है मतलब उस शास्त्र से पहले हमारे पास

144
00:10:51,320 --> 00:10:55,600
कोई नियमावली है जिससे हम यह जांच रहे हैं कि इस शास्त्र के अंदर

145
00:10:55,600 --> 00:10:59,600
कौन सी बात हमारे लिए सही है और कौन सी सही नहीं है

146
00:10:59,600 --> 00:11:00,520
तो वह नियमावली

147
00:11:00,520 --> 00:11:05,200
जो है वह उसका आधार है जैसे ये लोग कहते हैं दावा करते हैं

148
00:11:05,200 --> 00:11:09,320
कि भाई शास्त्र सम्मत भक्ति हम लोग करते

149
00:11:09,320 --> 00:11:13,320
हैं तो कहां रह गई शास्त्र सम्मत भक्ति शास्त्र में यह है क्या ज्ञान

150
00:11:13,320 --> 00:11:18,920
से ज्ञान कटेगा अगर गीता में एक जगह कुछ कहा जा रहा है दूसरी जगह कुछ कहा जा रहा है

151
00:11:18,920 --> 00:11:23,400
तो वह दूसरी जगह वाले से पहली वाली बात कट जाएगी दूसरी बात

152
00:11:23,400 --> 00:11:27,960
अगर दूसरी वाली से पहली बात कट रही है तो पहली से भी तो दूसरी कट रही है

153
00:11:27,960 --> 00:11:32,880
तो फिर वही बात क्यों जाए सेलेक्ट करके जो आप कह रहे हो

154
00:11:32,880 --> 00:11:37,080
क्योंकि वह तत्वदर्शी संत है और तत्वदर्शी

155
00:11:37,080 --> 00:11:41,080
संत कैसे प्रसिद्ध हुआ गीता से अरे भाई गीता की

156
00:11:41,080 --> 00:11:45,280
तो कौन सी बात माननी है कौन सी नहीं माननी है यही तो हमें पता करना है तो

157
00:11:45,280 --> 00:11:49,320
जब तक उसकी यह चीज सिद्ध नहीं हुई कि हमें इसकी कौन सी बात माननी कौन सी नहीं माननी

158
00:11:49,320 --> 00:11:54,560
तो उसके आधार पर किसी को तत्वदर्शी कैसे मान

159
00:11:54,560 --> 00:11:58,640
लोगे तो कुल मिलाकर के यह है कि शास्त्रों में

160
00:11:58,640 --> 00:12:02,720
शास्त्र इनके लिए प्रमाण नहीं है क्योंकि ये पूरी तरीके से शास्त्रों पर

161
00:12:02,720 --> 00:12:06,760
विश्वास नहीं करते हैं इनके अपने विश्वास हैं इन्होंने अपनी ए बी सीडी कहीं से

162
00:12:06,760 --> 00:12:10,880
सीखी इन्होंने अपना व्रज शब्द का अर्थ कहीं से लिखा उसके अनुकूल

163
00:12:10,880 --> 00:12:15,000
जो अर्थ निकल रहा होगा शास्त्रों का ये वो मानेंगे और बाकी सब जो विपरीत अर्थ निकल रहे

164
00:12:15,000 --> 00:12:19,120
होंगे उसको कह देंगे काल ने लिखा है या ऋषियों की अपना मन से कह दिया

165
00:12:19,120 --> 00:12:23,240
या जो भी है मानने लायक नहीं है भाई अगर तत्वदर्शी

166
00:12:23,240 --> 00:12:27,360
ये निर्णय करेगा शास्त्र में कौन सी चीज माननी है कौन सी नहीं माननी है तत्वदर्शी

167
00:12:27,360 --> 00:12:31,360
को तत्वदर्शी बनाया किसने उसी शास्त्र ने जिस

168
00:12:31,360 --> 00:12:35,640
जो जिस शास्त्र का निर्णय तत्वदर्शी कर रहा है

169
00:12:35,640 --> 00:12:39,920
वाह तो अब इनकी

170
00:12:39,920 --> 00:12:44,160
एक बात आती है कि वेद में कहीं पर

171
00:12:44,160 --> 00:12:48,320
भी क प्लस बी प्लस र कबीर

172
00:12:48,320 --> 00:12:52,680
भगवान

173
00:12:52,680 --> 00:12:56,800
है क प्लस बी प्लस र

174
00:12:56,800 --> 00:13:00,880
कबीर भगवान है ऐसा कहीं नहीं लिखा ठीक है

175
00:13:00,880 --> 00:13:05,080
अब यह भाई साहब क्या करते हैं अपनी बातों को सिद्ध करने के लिए

176
00:13:05,080 --> 00:13:09,520
रामचरित मानस लाते हैं और रामचरित मानस में

177
00:13:09,520 --> 00:13:13,520
बजरंग बली के बारे में बताते हैं कि जो हमारा मुख देख लेता है

178
00:13:13,520 --> 00:13:18,680
पहले एक पूरा दिन में तो वह जो

179
00:13:18,680 --> 00:13:22,880
है क्या कहते हैं उसका पूरे दिन उसको भोजन

180
00:13:22,880 --> 00:13:26,880
नहीं मिलता है और

181
00:13:26,880 --> 00:13:31,120
अब यहां पर सवाल य उठता है कि इन्होंने यह जो

182
00:13:31,120 --> 00:13:36,240
तुलसीदास जी का ज्ञान है यह कहां से प्राप्त

183
00:13:36,240 --> 00:13:42,240
किया तुलसीदास जी का ज्ञान इन्होंने कहां से प्राप्त

184
00:13:43,360 --> 00:13:47,600
किया जाहिर सी बात है अपना मनमुक किया अब बात

185
00:13:47,600 --> 00:13:51,680
मनमुक आती है यह भले ही परंपरा

186
00:13:51,680 --> 00:13:55,800
को नहीं मानते हैं वो तो मानते थे तो उनके रेफरेंस

187
00:13:55,800 --> 00:13:59,840
से अगर हम कोई बात उठा रहे हैं तो हमें ये जानना होगा कि उनकी परंपरा

188
00:13:59,840 --> 00:14:04,040
के आचार्यों ने उस बात को माना है कि नहीं माना है

189
00:14:04,040 --> 00:14:08,120
नहीं माना है मगर फिर भी ये अपना रेफरेंस अब जैसे मान लीजिए कि आज की

190
00:14:08,120 --> 00:14:12,280
तारीख आज की डेट में अब क्योंकि ये तत्वदर्शी है तो किसी

191
00:14:12,280 --> 00:14:16,360
के द्वारा भी कही जा रही बात का अर्थ क्या है वो वो व्यक्ति नहीं बताएगा

192
00:14:16,360 --> 00:14:20,400
वो ये बताएंगे क्योंकि ये तत्वदर्शी है तत्वदर्शी क्यों है क्योंकि गीता

193
00:14:20,400 --> 00:14:24,400
में लिखा है और गीता में जो बात है वो मानने लायक कौन सी मा कौन सी नहीं है

194
00:14:24,400 --> 00:14:30,320
वो तत्वदर्शी तय करेंगे और तत्वदर्शी कौन है कौन तय करेगा गीता तय करेगी

195
00:14:30,320 --> 00:14:34,840
है ना तो यह जेल धाम से चलता है सब

196
00:14:34,840 --> 00:14:39,040
इनकी जो बातें हैं हम लोग हम लोग क्यों एक एक चीज को पकड़ रहे हैं हमने

197
00:14:39,040 --> 00:14:43,120
लगभग सभी बातों का प्रतिकार प्रस्तुत कर

198
00:14:43,120 --> 00:14:47,760
दिया है मगर अब सामना सामने रखते हुए क्यों एक एक बात को खोल रहे जैसे हमने

199
00:14:47,760 --> 00:14:52,000
अपने कई वीडियोस में केवल इस बात पर बात की वेदों बहुत

200
00:14:52,000 --> 00:14:56,160
पिछले छह सात वीडियो लाइव हुए जिसमें कि पूछा गया कि कबीर

201
00:14:56,160 --> 00:14:58,560
भगवान है यह बताओ कैसे कबीर

202
00:14:58,560 --> 00:15:02,720
कहां लिख लिखा है क प्लस बी प्लस रा कबीर

203
00:15:02,720 --> 00:15:06,840
कहां लिखा है कि भगवान तो कई लाइव इसी बात प ठीक

204
00:15:06,840 --> 00:15:11,280
है एक एक टॉपिक को हम इसीलिए ले रहे हैं उसमें देर लगेगी मगर

205
00:15:11,280 --> 00:15:15,520
कंक्लूजन निकल के आएगा जैसे अय उसकी बात ज्यादा नहीं करते लाइव में आते हैं तो

206
00:15:15,520 --> 00:15:19,720
वेदों में प्रमाण है कबीर भगवान पहले करते थे अब उस पर पीछे

207
00:15:19,720 --> 00:15:23,760
हट चुके सर्वशक्तिमान की तो बात ही छोड़ दो सर्वव्यापक सर्व शक्तिमान

208
00:15:23,760 --> 00:15:28,480
हो तो कभी नहीं होगी अच्छा फिर उसके बाद दूसरी बात आई थी

209
00:15:28,480 --> 00:15:32,520
कि ने बोला है कि नहीं बोला है है ना उस

210
00:15:32,520 --> 00:15:37,520
पर भी अब ज्यादा बात नहीं अब शास्त्र पर जब बात आई तो

211
00:15:37,520 --> 00:15:41,680
शास्त्र जब शास्त्र में बात आई तो अब धीरे-धीरे देखिएगा थोड़े दिन

212
00:15:41,680 --> 00:15:46,200
में शास्त्र को भी छोड़ देंगे ये बोलने लगेंगे कि भाई हम तो

213
00:15:46,200 --> 00:15:50,200
जो कबीर वाणी है उसके आधार पर सब मानते हैं तत्व दसी मानते हैं

214
00:15:50,200 --> 00:15:54,240
ये करते हैं वो करते हैं मगर प्रॉब्लम क्या है ना कि जो कबीर वाणी इत्यादि

215
00:15:54,240 --> 00:15:58,440
है जो कबीर जी के ग्रंथ है उनमें भी कुछ ऐसी बातें लिखी हुई है जो इनको

216
00:15:58,440 --> 00:16:04,440
काटती है उन परे तो हम बाद में बात

217
00:16:05,200 --> 00:16:09,200
करेंगे तो इसीलिए एक एक टॉपिक को पकड़ रहे हैं जैसे पहले पकड़ा

218
00:16:09,200 --> 00:16:13,480
था वेद क्या वेदों में कहीं कबीर भगवान है लिखा है अब वह चैप्टर

219
00:16:13,480 --> 00:16:17,520
इनका क्लोज हो चुका है अभी दूसरे चैप्टर अच्छा यह कहते क्या है इनको नोट

220
00:16:17,520 --> 00:16:21,560
करते जाइएगा कि हम शास्त्र सम्मत भक्ति करते हैं

221
00:16:21,560 --> 00:16:25,640
और शास्त्र में शास्त्र के अनुसार कबीर भगवान नहीं है

222
00:16:25,640 --> 00:16:30,320
शास्त्र के अनुसार इनका दीक्षा कार्यक्रम नहीं है के अनुसार

223
00:16:30,320 --> 00:16:34,400
कौन सी बात माननी है ज्ञान से ज्ञान कट होगा यह भी शास्त्र सम्मत नहीं है यह

224
00:16:34,400 --> 00:16:38,520
अपना ज्ञान है कल वो भी बोला कि अपना ज्ञान है और जो दीक्षा

225
00:16:38,520 --> 00:16:42,720
वाले टाइम पर भी व्यक्ति को बोलना पड़ गया था य अपने मन से किया है और

226
00:16:42,720 --> 00:16:46,920
कबीर भगवान है उसमें भी व्यक्ति ने एक ना एक ने बोल दिया था कि हा ये अपने मन से किया

227
00:16:46,920 --> 00:16:52,920
है तो जब मन आ गया तो शास्त्र सतता कहां रह

228
00:16:53,040 --> 00:16:57,040
गई तो इसलिए एक एक बाल की खाल निकालने के लिए वो

229
00:16:57,040 --> 00:17:01,120
जो आपको जो माथा पच्ची वाले जो दश वो दिखाई देते हैं आशा करता

230
00:17:01,120 --> 00:17:07,120
हूं सकारात्मक जो दृष्टिकोण से अगर आप देखेंगे तो

231
00:17:07,240 --> 00:17:11,960
उन स्थितियों को समझ पाएंगे

232
00:17:11,960 --> 00:17:14,480
अब इसके

233
00:17:14,480 --> 00:17:18,560
बाद हमने नहीं कहा कि भाई जो निर्णय

234
00:17:18,560 --> 00:17:23,000
निर्णायक बात थी हमने कभी नहीं कहा आरोपित नहीं किया कि भैया तुम अज्ञानी

235
00:17:23,000 --> 00:17:27,160
हो यह है वो है ऐसा आरोपित कभी नहीं किया मगर ये हमारे ही

236
00:17:27,160 --> 00:17:31,600
चैनल पर आकर के लाइव बैठ कर के और जो जगतगुरु शंकराचार्य हैं

237
00:17:31,600 --> 00:17:36,440
उनके बारे में अब शब्द बोल रहे हैं कि उसको ज्ञान नहीं था यह सब पता है क्यों है

238
00:17:36,440 --> 00:17:40,600
यह सब इसलिए है आसान किसी के लिए भी आज के डेट में बोल

239
00:17:40,600 --> 00:17:44,920
देना क्योंकि वह मैक्स मलर था ना उसने अपनी

240
00:17:44,920 --> 00:17:49,000
किस किसी को एक पत्र लिखा था हिंदुओं को

241
00:17:49,000 --> 00:17:53,480
अगर खत्म करना है तो

242
00:17:53,480 --> 00:17:59,480
आप हिंदुओं की शिक्षा व्यवस्था को नष्ट कर दो

243
00:18:00,200 --> 00:18:04,200
जो परंपरा प्राप्त जो शिक्षा व्यवस्था है हमारे यहां गुरु शिष्य परंपरा प्राप्त

244
00:18:04,200 --> 00:18:08,320
उसको नष्ट कर दो आज आम जन समाज य जानता ही नहीं

245
00:18:08,320 --> 00:18:12,480
है कि आचार्य किसी को आचार्य के रूप में स्वीकार करने

246
00:18:12,480 --> 00:18:16,720
के लिए उसका परंपरा से होना आवश्यक

247
00:18:16,720 --> 00:18:20,880
है ये किसी को नहीं मालूम है आम जन को यह सब चीज

248
00:18:20,880 --> 00:18:25,440
नहीं मालूम और

249
00:18:25,440 --> 00:18:30,160
इसको बंद कर दो भाई इसको बंद कर दो खोलना नहीं इधर से

250
00:18:30,160 --> 00:18:32,920
है ना

251
00:18:32,920 --> 00:18:36,960
तो आम जन को नहीं मालूम है कि

252
00:18:36,960 --> 00:18:41,040
हमारा जो आचार्य है वो परंपरा से ही होना चाहिए तो

253
00:18:41,040 --> 00:18:45,080
यह शिक्षा व्यवस्था में वार है आज इतने तंत्र इस तरीके का

254
00:18:45,080 --> 00:18:49,880
तंत्र खड़ा हो गया है कि अ

255
00:18:49,880 --> 00:18:54,000
कोई भी आकर के जो सार्वभौम निर्णायक आचार गद्दिया है उनके लिए

256
00:18:54,000 --> 00:18:58,040
कुछ भी बोल सकता है स्वतंत्र है सब कोई डर नहीं है कोई

257
00:18:58,040 --> 00:19:02,040
भय नहीं है क्यों शिक्षा व्यवस्था पर

258
00:19:02,040 --> 00:19:04,720
वार करना

259
00:19:04,720 --> 00:19:09,560
था और किया गया अच्छे से

260
00:19:09,560 --> 00:19:13,880
इतने आचार्य खड़ा कर दिए इतने तंत्र बना दिए

261
00:19:13,880 --> 00:19:15,440
आजय देखिए आप कोई

262
00:19:15,440 --> 00:19:19,440
भी कुछ भी बोलने के लिए फ्री है पिछले 100 डे स साल की कहानी है

263
00:19:19,440 --> 00:19:24,640
ये नहीं तो ऐसा भी शासन हुआ करता था जब

264
00:19:24,640 --> 00:19:29,280
जो राजा होता था शासक होता था उसके जो गुरु होते

265
00:19:29,280 --> 00:19:34,160
उस राष्ट्र के जो गुरु होते थे उनके लिए कुछ भी बोल पाना

266
00:19:34,160 --> 00:19:38,240
मृत्यु का भय हो जाता

267
00:19:38,240 --> 00:19:43,040
था और यह जो ज्ञान से ज्ञान काटने की बात

268
00:19:43,040 --> 00:19:47,080
है जाहिर सी बात है जो स्कोन के लोग हैं वह अपने आप को

269
00:19:47,080 --> 00:19:51,160
श्रेष्ठ समझते होंगे रामपाल वालों से आर समाज वाले भी

270
00:19:51,160 --> 00:19:55,960
श्रेष्ठ समझते होंगे अपने आप मगर अगर मूल में आओगे

271
00:19:55,960 --> 00:20:00,520
तो आप में और उनमें क्या भेद रहा रामपाल ज्ञान से ज्ञान काट रहा है

272
00:20:00,520 --> 00:20:04,760
आप भी कहीं पर भी अपने मन से प्रक्षिप्त कह देते हो स्कन

273
00:20:04,760 --> 00:20:09,000
वाले भी यही करते हैं यह जो है वो भ्रम फैलाने के लिए काट

274
00:20:09,000 --> 00:20:13,120
दो स्न वाले भी यही करते हैं कुल मिलाकर के कान को कैसे भी

275
00:20:13,120 --> 00:20:17,240
पकड़ो एक ही एक ही सोर्स ऑफ इंफॉर्मेशन से

276
00:20:17,240 --> 00:20:21,240
आप अपने व्यक्तिगत मत के द्वारा चयन

277
00:20:21,240 --> 00:20:25,280
करते हो कि कौन सी चीज को मानना है कौन सी चीज को नहीं मानना है इसका मतलब

278
00:20:25,280 --> 00:20:29,520
आपके धर्म और अधर्म का निर्णय कहीं और से हो रहा है

279
00:20:29,520 --> 00:20:30,760
हो सकता है वह आपका

280
00:20:30,760 --> 00:20:35,200
जो बचपन से आपकी जो आपको जो संस्कार मिले उससे हो रहा है स्वविवेक

281
00:20:35,200 --> 00:20:39,200
से हो रहा है अपने मन से हो रहा है क्योंकि हमने जहां पर भी वह हमारे

282
00:20:39,200 --> 00:20:43,200
अकॉर्डिंग नहीं है वह हमने कह दिया य

283
00:20:43,200 --> 00:20:47,720
भैया यह प्रक्षिप्त यह जो है भ्रम फैलाने के लिए कहा है

284
00:20:47,720 --> 00:20:52,640
और यह जो है काल ने कहा है शास्त्रों से कैसे

285
00:20:52,640 --> 00:20:56,800
बचे एक कह रहा है काल ने कहा है

286
00:20:56,800 --> 00:21:01,120
एक कह रहा है यह व्यास जी ने भ्रम फैलाने के लिए कहा है

287
00:21:01,120 --> 00:21:05,680
और एक कह रहा है यह जो है मिला दिया गया है पिछले जो

288
00:21:05,680 --> 00:21:09,800
हमारे ऊपर जो आक्रमण हुए थे उसमें मिला दिया गया भाई मिला दिया गया है

289
00:21:09,800 --> 00:21:13,800
तो आप वो तो लाओ जिसमें मिला हुआ ना हो आपको कैसे

290
00:21:13,800 --> 00:21:18,440
पता चला कि मिला दिया गया है कि हमें हमारा स्वविवेक है

291
00:21:18,440 --> 00:21:22,600
ईश्वर किसी को मारने को थोड़ी ना कहेगा ईश्वर देवर के साथ

292
00:21:22,600 --> 00:21:26,760
नियोग करने को कह देगा बहन

293
00:21:26,760 --> 00:21:31,480
के पति के साथ नियोग ने को कह देगा वहां पर ये नियम अप्लाई हो जाएगा

294
00:21:31,480 --> 00:21:35,600
कि जिस धर्म ने आपको यह बताया है कि अच्छा

295
00:21:35,600 --> 00:21:39,600
और बुरा क्या होता है वही बता रहा है कि नियोग आप कर सकते हो वहां पर

296
00:21:39,600 --> 00:21:44,320
य तर्क नहीं आएगा कि ये जो व विचार जैसा लग रहा

297
00:21:44,320 --> 00:21:46,040
है आपके धर्म

298
00:21:46,040 --> 00:21:50,240
और अधर्म का निर्णय ईश्वर ने किया है तो ईश्वर ही कह रहा है कि आप नियोग कर सकते

299
00:21:50,240 --> 00:21:54,280
हो यह तर्क है वहां पर सत्यार्थ प्रकाश में

300
00:21:54,280 --> 00:21:58,680
तो जब ईश्वर के विरोध में व्यक्तिगत तर्क नहीं लगा सकते उसी से हमारा धर्म

301
00:21:58,680 --> 00:22:02,880
धर्म का निर्णय है तो आप यह लाइने नहीं बोल सकते

302
00:22:02,880 --> 00:22:06,880
फिर कि ईश्वर किसी का किसी की प्राणों

303
00:22:06,880 --> 00:22:10,920
की आहुति कैसे ले सकता है यह लाइन नहीं बोल सकते दूसरे तर्क हो सकते हैं वो

304
00:22:10,920 --> 00:22:15,120
लाने चाहिए आप किसी बात को ना

305
00:22:15,120 --> 00:22:19,360
मानने के लिए आपके धर्म और अधर्म का पहले से कहीं से निर्णय है उसको आप अप्लाई

306
00:22:19,360 --> 00:22:23,840
करते हैं व तब आप निर्णय करते हैं तो क्या अंतर रह गया इसकन

307
00:22:23,840 --> 00:22:29,480
आर्य समाज और ये रामपाल में

308
00:22:29,480 --> 00:22:33,720
हमारे विरोध में टीम बिठाई गई है जो यह चेक करती है कि इनकी तरफ

309
00:22:33,720 --> 00:22:37,720
से कई बार हो जाता है जैसे अभी मैंने अपने एक लाइव में बोल दिया

310
00:22:37,720 --> 00:22:42,440
था कि आत्मा अनित्य है भाव था कि नित्य है मगर मुह से निकल गया अनित्य

311
00:22:42,440 --> 00:22:46,520
तो अब भैया उस पर भी कटिंग बना लेना

312
00:22:46,520 --> 00:22:50,800
इस तरह की जो वस्तुनिष्ठ कहीं पर जो एडिटिंग करते समय कुछ मंत्र

313
00:22:50,800 --> 00:22:55,320
का क्रमांक गलत हो गया कि ऋग्वेद का 3 53 आ की जगह वो कुछ और हो गया

314
00:22:55,320 --> 00:22:59,320
तो उसकी उसका चवा उड़ा दो भाई और ऐसा

315
00:22:59,320 --> 00:23:01,120
नहीं है कि इनके यहां

316
00:23:01,120 --> 00:23:05,120
ऐसा नहीं हुआ है सत्या प्रकाश के बारे में

317
00:23:05,120 --> 00:23:09,120
करीब जहां तक मेरी जानकारी 50 से ज्यादा बार उसमें संशोधन

318
00:23:09,120 --> 00:23:13,160
हो चुका है इसकन का तो वह खुद

319
00:23:13,160 --> 00:23:17,320
कहते हैं वह जो पुराना वर्जन है भगवत गीता का उसका नया आ रहा है आज

320
00:23:17,320 --> 00:23:23,320
पुराना वर्जन आ ही नहीं रहा है है ना

321
00:23:24,840 --> 00:23:29,080
और तो इस तरह की जो वस्तुनिष्ठ चीज है उनको उठा

322
00:23:29,080 --> 00:23:33,120
कर के अब क्योंकि सैद्धांतिक वो तो रहा नहीं सिद्धांत

323
00:23:33,120 --> 00:23:37,320
भैया आप सिद्ध करो कि आपका ईश्वर सर्वशक्तिमान है

324
00:23:37,320 --> 00:23:41,640
कितनी बार मैंने बोल दिया सर्वशक्तिमान सिद्ध करो मुझे अपने साथ ले

325
00:23:41,640 --> 00:23:45,720
चलो कितनी बार बोल दिया

326
00:23:45,720 --> 00:23:50,160
मैंने कई बार कई बार

327
00:23:50,160 --> 00:23:54,720
ईश्वर को सर्वशक्तिमान कहो मेरी व्यक्तिगत धारणा जो भी रहेगी

328
00:23:54,720 --> 00:23:59,000
मैं आपको आपके साथ खड़ा मिलूंगा सर्वशक्तिमान होना चाहिए बाधित

329
00:23:59,000 --> 00:24:03,120
नहीं होना चाहिए ईश्वर तो इस पर तो बात बनी नहीं

330
00:24:03,120 --> 00:24:07,480
तो क्या करेंगे ऋग्वेद के मंत्र जो है दिखाएंगे

331
00:24:07,480 --> 00:24:11,600
कि इन्होंने वहा ऋगवेद का मंत्र भाई कई वीडियोस में हो जाता है हमें पता भी है

332
00:24:11,600 --> 00:24:17,600
कि हमसे ये वाली गलती होगई पर हम उसको

333
00:24:19,480 --> 00:24:23,520
कटवर्क गलत हो सकता है मगर ऐसा नहीं है कि वो शास्त्रों

334
00:24:23,520 --> 00:24:28,760
में वो वचन है ही नहीं और एक बौखलाया

335
00:24:28,760 --> 00:24:33,320
अभी मुझे याद आ गया एक ब बौखलाया हुआ अलंकारी जिसकी

336
00:24:33,320 --> 00:24:37,760
रातों में हमने नींद उड़ा रखी है वो खटिया

337
00:24:37,760 --> 00:24:41,760
से रात के दो दो तीन-तीन बजे आजकल जाग जाता है क्योंकि

338
00:24:41,760 --> 00:24:45,920
उसको नींद नहीं आती है क्यों नहीं आती आवान आहवान को उत्तर क्या

339
00:24:45,920 --> 00:24:49,960
दें तो सैद्धांतिक उत्तर तो रहे नहीं तो

340
00:24:49,960 --> 00:24:54,160
यही उत्तर दोगे तुम्हारी संस्था का वो क्या है अरे भाई मैं क्यों बताऊं

341
00:24:54,160 --> 00:24:59,280
तुम्हें संस्था का क्यों बताऊं संस्था का ये

342
00:24:59,280 --> 00:25:04,160
यह संस्था का मेरे पास सब कुछ है

343
00:25:04,160 --> 00:25:09,760
मैं आपको क्यों बताऊं क्रमांक वगैरह नहीं

344
00:25:09,760 --> 00:25:14,440
बताऊंगा पैन कार्ड में अपने साथ लेकर घूमता हूं संस्था

345
00:25:14,440 --> 00:25:18,520
मगर तुम होते कौन हो मुझसे पूछने वाले कि अपने संस्था का वो

346
00:25:18,520 --> 00:25:22,560
बताओ मेरा भाई कोई अधिकारी हो कौन हो मैं परतंत्र

347
00:25:22,560 --> 00:25:28,560
क्या तुम्हारा तुम जब पूछोगे तो मैं संस्था का वो दिखा दूं तुमको पैन कार्ड

348
00:25:30,560 --> 00:25:34,840
ये लोग नंबर नहीं बताऊंगा दिख रहा

349
00:25:34,840 --> 00:25:39,520
है संस्था का है देख लो नहीं बताऊंगा

350
00:25:39,520 --> 00:25:43,840
नंबर अरे हो कौन तुम यार जो मुझसे आक पूछोगे

351
00:25:43,840 --> 00:25:47,920
संस्था का रजिस्ट्रेशन क्रमांक बताओ जब कोई

352
00:25:47,920 --> 00:25:52,040
ऑथराइज अथॉरिटी जो बॉडी है वह प्रश्न करेगी कि आप अपना दिखाइए तो

353
00:25:52,040 --> 00:25:56,120
हम दिखाएंगे ना अरे तुमको तो तुम्हारी संस्था वाले नहीं पहचानते जिनका

354
00:25:56,120 --> 00:26:00,840
तुम लेटर दिखा रहे हो वो कह हम उसको नहीं जानते

355
00:26:00,840 --> 00:26:04,840
तुमको अपना माथा पीटना पड़ता है करण करण अर्जुन में जो राखी थी

356
00:26:04,840 --> 00:26:08,960
ना माथा पीटती है शिवलिंग पर जाकर के ऐसे माथा पीटना पड़ता है

357
00:26:08,960 --> 00:26:13,000
तुम्हें शंकराचार्य के जाकर के य आवान

358
00:26:13,000 --> 00:26:18,320
से बचा लो भैया किसी तरीके से आवान से बचा

359
00:26:18,320 --> 00:26:22,360
लो तुम्हें अपने चैनल का नाम बदलना पड़ता

360
00:26:22,360 --> 00:26:26,400
है हमसे तुम प्रश्न कर रहे हो आवान धर्म रक्षार्थ कैसे लिखा है तुमने

361
00:26:26,400 --> 00:26:30,680
कैसे लिख लिया है धर्म सम्राट ऑफिशल

362
00:26:30,680 --> 00:26:35,880
है रजिस्ट्रेशन इसका तुम्हारा तुम कौन हो

363
00:26:35,880 --> 00:26:40,320
भाई हु इज द हेल आर

364
00:26:40,320 --> 00:26:44,320
यू जो हम तुमको तुमको उत्तर दे कि मेरा रजिस्ट्रेशन

365
00:26:44,320 --> 00:26:48,320
नंबर इतना है मुझको एक आपने पत्र दिया मैंने आपको पत्र के

366
00:26:48,320 --> 00:26:52,400
माध्यम से उत्तर दे दिया जब हमें ऐसा लगेगा कि आपको

367
00:26:52,400 --> 00:26:56,720
जो है ऑथराइज लेटर हेड पर लिखना है उसमें पंजीकरण

368
00:26:56,720 --> 00:27:00,840
क्रमांक डालना है हमें लगेगा तो हम हम स्वतंत्र होकर करेंगे

369
00:27:00,840 --> 00:27:04,320
वह

370
00:27:04,320 --> 00:27:08,480
कार्य मर जाएंगे मगर अपनी स्वतंत्रता का हनन

371
00:27:08,480 --> 00:27:13,200
नहीं होने देंगे समझे भूपति

372
00:27:13,200 --> 00:27:17,360
हो आए बड़े अगर सात दिनों में तुमने यह नहीं किया

373
00:27:17,360 --> 00:27:22,000
वह नहीं

374
00:27:22,000 --> 00:27:26,000
किया स्वयं को मनुवादी समझते हो वैदिक समझते

375
00:27:26,000 --> 00:27:30,640
हो पाला नहीं पड़ा है वास्तविक मनुवाद द

376
00:27:30,640 --> 00:27:34,680
सारी गलतफहमी दूर हो जाएगी प्रत्यक्ष

377
00:27:34,680 --> 00:27:39,000
सामना होगा ना जिस दिन सारे जितने

378
00:27:39,000 --> 00:27:43,560
भी भ्रम पाल रखे हैं वो सब दूर हो

379
00:27:43,560 --> 00:27:47,720
जाएंगे हा सिद्धांत की बात नहीं रह गई

380
00:27:47,720 --> 00:27:52,160
यह बात रह गई है कि भैया वो शिवांश नारायण द्विवेदी अपनी संस्था का वो दिखाए

381
00:27:52,160 --> 00:27:56,280
हो कौन भाई तो किसने तुम्हें अथॉरिटी दी है जो हम तुमको दिखाए

382
00:27:56,280 --> 00:28:02,280
जाकर के अरे भाई जब कोई पूछेगा तो बता

383
00:28:03,840 --> 00:28:08,120
देंगे हल्के में ले रखा है

384
00:28:08,120 --> 00:28:12,480
गुरुदेव की लाइब्रेरी में कानून की किताब भी पढ़ी थी हमने

385
00:28:12,480 --> 00:28:16,760
समझे बचपन गुजरा है कोर्ट में

386
00:28:16,760 --> 00:28:21,560
न्यायालय में विद्यालय से जब छुट्टी होती थी ना

387
00:28:21,560 --> 00:28:26,320
तो माता जी का कार्यालय था न्यायालय वहां से चाबी लेने जाते

388
00:28:26,320 --> 00:28:30,920
थे और जो न होते थे व में चॉकलेट खिलाते

389
00:28:30,920 --> 00:28:36,920
थे टॉफी खिलाते

390
00:28:38,920 --> 00:28:43,440
थे पूछते थे दूध

391
00:28:43,440 --> 00:28:48,560
पियोगे आइसक्रीम खाओगे खेले

392
00:28:48,560 --> 00:28:52,800
हम न्यायालय में तो

393
00:28:52,800 --> 00:28:56,880
यह सारी चीजें जो है ना हो सकता है कि

394
00:28:56,880 --> 00:29:01,080
आप अब तक बहुत खेल खेलते आए हो लोगों के साथ

395
00:29:01,080 --> 00:29:05,560
कानून का भय दिखा दिखा करके खेल इस बार भी अच्छा खेला है आपने

396
00:29:05,560 --> 00:29:09,920
आदमी गलत चुन लिया है समझ रहे हो तो अपने

397
00:29:09,920 --> 00:29:13,920
अपनी जेब में रखा करो य सब चीज कि हम यह कर देंगे वो

398
00:29:13,920 --> 00:29:17,920
कर देंगे कानून का भय दिखा रहे हो कानून केवल तुम्हारा

399
00:29:17,920 --> 00:29:21,920
नहीं है झूठे

400
00:29:21,920 --> 00:29:26,120
व्यक्ति को रख कर के और जो है ड्रामा करते

401
00:29:26,120 --> 00:29:32,040
हो तर्क वितर्क करते हो उसके साथ अपने आदमी को बिठा कर

402
00:29:32,040 --> 00:29:36,160
के अपने वीडियो में लाइव में बोल रहे हैं वो

403
00:29:36,160 --> 00:29:40,440
व्यक्ति पूछ रहा है कि भाई वो शंकराचार्य जी ने साकार विवेक

404
00:29:40,440 --> 00:29:44,600
चूड़ामणि में माना है हमने विवेक चूड़ामणि के मणि का जो

405
00:29:44,600 --> 00:29:48,640
वो दिया था रेफरेंस वो दिया था कि उन्होंने परमार्थ की बात की उसमें

406
00:29:48,640 --> 00:29:52,760
तो परमार्थ की बात नहीं की वो जो पूछने गया है वहां

407
00:29:52,760 --> 00:29:55,200
उससे वो पूछ रहा है

408
00:29:55,200 --> 00:29:59,200
कि भाई साहब ये शंकराचार्य जी ने तो

409
00:29:59,200 --> 00:30:03,200
साकार की बात की है विवेक चुना मणी में तो फिर वो ड्रामा करके बोल

410
00:30:03,200 --> 00:30:08,680
रहा हैय आपको किसने बताया करपात्री जी के शिष्य

411
00:30:08,680 --> 00:30:12,720
है यही करो यह यह आपकी प्रत्यक्ष हार

412
00:30:12,720 --> 00:30:16,720
ही तो है और क्या है यह जब आपको झूठ का

413
00:30:16,720 --> 00:30:21,080
आलंबन लेना पड़ गया अपनी बात को रखने के लिए हा

414
00:30:21,080 --> 00:30:25,120
यह सब एक रजिस्ट्रेशन दिखाओ यह करना पड़ रहा है

415
00:30:25,120 --> 00:30:31,120
तो इसका मतलब है कि आपके पास आपकी सिद्धांतों का नहीं है

416
00:30:31,200 --> 00:30:35,320
दमखम अभी भी सोचते हो अरे भाई किसके लिए लड़ रहे हो एक बार

417
00:30:35,320 --> 00:30:39,360
अंतरात्मा में झांक तो सही किससे लड़ रहे हो

418
00:30:39,360 --> 00:30:43,600
भाई है तुम्हारे सब क्यों लड़ रहे हो क्योंकि मैंने

419
00:30:43,600 --> 00:30:48,120
कुछ अगर बोल दिया है तो मैं उसी को सत्य सिद्ध करके दिखाऊंगा

420
00:30:48,120 --> 00:30:54,120
चाहे मुझे झूठ का ही सहारा क्यों ना लेना पड़े

421
00:30:59,720 --> 00:31:05,720
करवा लेना कटिंग विश्राम चौधरी

422
00:31:06,480 --> 00:31:12,480
जी फेस दिखाए विश्राम

423
00:31:20,280 --> 00:31:24,440
जी विश्राम जी फेस दिखाएं

424
00:31:24,440 --> 00:31:30,440
आप सुन पा रहे हैं

425
00:31:41,280 --> 00:31:46,800
उनका नेट दिक्कत कर रहा

426
00:31:46,800 --> 00:31:50,840
है अब भाई अभी तक बोलते रहे अलंकार

427
00:31:50,840 --> 00:31:55,680
वाले हमारी परंपरा ब्रह्मा से चलती है ब्रह्मा से चलती है

428
00:31:55,680 --> 00:31:59,840
और अब आ गए इस पर के वो डायरेक्ट ज्ञान भगवान ने दिया है ना बृजनंदन

429
00:31:59,840 --> 00:32:04,240
ये है देखो ये है इसीलिए

430
00:32:04,240 --> 00:32:08,640
पुरेते हैं अब आ गई मोहम्मद वाली बात डायरेक्ट

431
00:32:08,640 --> 00:32:12,640
भगवान ने वो फरिश्ता भेजा वहां पे यहां पे इनको भगवान ने ज्ञान दे दिया समाधि हो

432
00:32:12,640 --> 00:32:17,360
कर के ऐसे थोड़ी बात चलेगी सामना जिस दिन होगा उस दिन डिफीट खाओगे

433
00:32:17,360 --> 00:32:21,440
ये तर्क चलेंगे थोड़ी ना वो अकेले बैठ कर के कार्बो टारगेट गेम खेल

434
00:32:21,440 --> 00:32:25,520
लो अच्छा है मुंगेरी लाल के असीन सपनों में खोए

435
00:32:25,520 --> 00:32:29,960
रहो कि हमारे पास बहुत बढ़िया जब सामना

436
00:32:29,960 --> 00:32:34,160
होगा तो हर बात की वह आपकी जो आधुनिक गर्गी

437
00:32:34,160 --> 00:32:38,600
थी ना व बोल रही थी बाल की खाल होती नहीं है

438
00:32:38,600 --> 00:32:42,680
क्या बाल है और क्या खाल है यह कौन डिसाइड करेगा तो हम

439
00:32:42,680 --> 00:32:45,840
निकालेंगे ना बाल की

440
00:32:45,840 --> 00:32:50,280
खाल विश्राम जी आपका नेट नहीं आ रहा है आप नेट लेकर के

441
00:32:50,280 --> 00:32:54,640
आए और केदार धाम जी है

442
00:32:54,640 --> 00:33:00,640
आप जो है

443
00:33:00,760 --> 00:33:03,800
केदार धाम

444
00:33:03,800 --> 00:33:09,800
जी अपना फेस दिखाएं

445
00:33:48,160 --> 00:33:52,200
विश्राम जी फेस दिखाएं तब तक

446
00:33:52,200 --> 00:33:56,760
आप पब्लिक कर दीजिए कोई और आना चाहे तो व आ जाएगा

447
00:33:56,760 --> 00:34:02,760
कबीर पंथ तरफ से अगर कोई आना चाहता है तो आ सकता

448
00:34:07,720 --> 00:34:12,080
है कबीर पंथी वो वाले नहीं कबीर

449
00:34:12,080 --> 00:34:18,080
पंथी रामपाल वाले जेल धाम से जिनके ऑर्डर आते

450
00:34:21,440 --> 00:34:25,680
हैं इस समय जो

451
00:34:25,680 --> 00:34:30,160
जेल धाम है जहां पर इनके अनुसार रामपाल

452
00:34:30,160 --> 00:34:34,640
जी हैं वह इनके लिए तीर्थ स्थान है जेल धाम रामपाल

453
00:34:34,640 --> 00:34:38,960
जी का अनुगमन करने वाले वहां जाना बड़ा पुण्य का काम

454
00:34:38,960 --> 00:34:44,960
है अकॉर्डिंग टू रामपाल दास जी के

455
00:34:45,680 --> 00:34:51,080
फॉलोअर्स है

456
00:34:51,080 --> 00:34:55,280
ना तो रामपाल दास जी के कोई अगर जवाइन करना चाहे

457
00:34:55,280 --> 00:35:00,160
तो जवाइन करें तब तक कोई अगर करना चाहे तो

458
00:35:00,160 --> 00:35:04,480
पंडित लोकी जी अगर आपके पास समय हो तो आप आ जाए

459
00:35:04,480 --> 00:35:09,800
हमारे पास बहुत सी चीजें हैं आज बताने के लिए मगर

460
00:35:09,800 --> 00:35:14,040
जब कोई आ जाएगा तभी हम उसको बताना चाह रहे हैं

461
00:35:14,040 --> 00:35:18,760
यह दिया है आप जवाइन कर

462
00:35:18,760 --> 00:35:23,040
लीजिए यह यह तीर्थ क्षेत्र भी लिखा होगा तत्वदर्शी

463
00:35:23,040 --> 00:35:27,080
ने कि जेल धाम भी एक धाम है क्योंकि इतने वर्ष तक वहां पर

464
00:35:27,080 --> 00:35:30,080
भगवान

465
00:35:30,080 --> 00:35:33,360
वह भगवान

466
00:35:33,360 --> 00:35:37,920
जो अजर नहीं है

467
00:35:37,920 --> 00:35:41,920
उनका उनके भी वृद्धावस्था आ रही है धीरे-धीरे चश्मा लगाते

468
00:35:41,920 --> 00:35:45,960
ही हैं एक चेहरा उनका फड़कता है बात करते करते ऐसे

469
00:35:45,960 --> 00:35:51,960
करके ऐसे करके चेहरा फड़कता है उनका तो यह सब क्या

470
00:35:52,360 --> 00:35:56,640
है तकनीकी दिक्कतें है ना शरीर में आ रही

471
00:35:56,640 --> 00:36:00,760
है मगर ठीक है वहां क्योंकि इनके अनुसार भगवान है

472
00:36:00,760 --> 00:36:06,760
वो तो रहे थे काफी दिनों

473
00:36:09,720 --> 00:36:14,800
तक मैं तो सुनके दंग रह गया उस दिन जब बोला

474
00:36:14,800 --> 00:36:18,840
कि जेल धाम अरे भाई यह तो मुझे लगता है

475
00:36:18,840 --> 00:36:24,840
इन्होंने नहीं बोला होगा तत्वदर्शी जी ने उन्होने नहीं बोला

476
00:36:25,520 --> 00:36:29,640
हो केदार जी आप अगर अपना चेहरा दिखा पाए तो यहां पर

477
00:36:29,640 --> 00:36:34,240
प्रतीक्षा करें अन्यथा आप

478
00:36:34,240 --> 00:36:40,240
जाइए जो भी व्यक्ति आ रहा है वह अपना चेहरा

479
00:36:44,520 --> 00:36:48,920
दिखाए दीपक राव जी जय श्री राम जय श्री राम राधे

480
00:36:48,920 --> 00:36:53,120
राधे राधे े भाई मैं रेवाड़ी हरियाणा

481
00:36:53,120 --> 00:36:57,120
से हूं बस मैं ये कहना चाहता हूं आप मतलब बहुत अच्छा काम कर रहे हो ऐसे करते रहो

482
00:36:57,120 --> 00:37:01,440
धर्म का आपके साथ है जी आभार आप और मैं

483
00:37:01,440 --> 00:37:06,040
एक एक एक क्वेश्चन और था बोलिए

484
00:37:06,040 --> 00:37:10,120
जो मतलब प्रेम भक्ति करते हैं मतलब भगवान

485
00:37:10,120 --> 00:37:14,200
का नाम जब एक निराकार और साकार मतलब दूसरी वो प्रेम भक्ति करते हैं नाम जप

486
00:37:14,200 --> 00:37:18,360
और वो उन्हें तो भगवान के मतलब नाम में से ही वो साक्षात्कार हो जाता है तो जो दूसरी

487
00:37:18,360 --> 00:37:22,360
भक्ति उन्हें मतलब क्या कैसे साक्षात्कार होता है मतलब उन्हें भी देखिए

488
00:37:22,360 --> 00:37:24,920
भवान दिखते हैं फर जो भगवान

489
00:37:24,920 --> 00:37:28,360
की जो अ

490
00:37:28,360 --> 00:37:32,560
निराकार और अद्वैत रूप है जो भगवान का यह

491
00:37:32,560 --> 00:37:36,560
दोनों रूप केवल जानने के लिए है कि आपके

492
00:37:36,560 --> 00:37:40,680
माइंड के एक कोने में य बात होनी चाहिए मगर फिर आपको

493
00:37:40,680 --> 00:37:45,440
फोकस करना होता है द्वैत प और

494
00:37:45,440 --> 00:37:49,600
क्या कहते हैं साकार यह केवल एक माइंड के आपके कोने में होना

495
00:37:49,600 --> 00:37:53,760
चाहिए कि हां अंत तो गत्वा ये है उसको फिर उस पर ध्यान

496
00:37:53,760 --> 00:37:58,320
नहीं देना इसी को ने कहीं पर चिंत कहा है उस पर ध्यान

497
00:37:58,320 --> 00:38:03,040
क्योंकि उस पर ध्यान दोगे तो आप भक्ति नहीं कर पाओगे

498
00:38:03,040 --> 00:38:07,040
भक्ति में आपको प्रॉब्लम आएगी तो इसको जानना आवश्यक है

499
00:38:07,040 --> 00:38:11,160
इसको जानोगे नहीं तो उसको आप सर्वशक्तिमान नहीं कह पाओगे वह

500
00:38:11,160 --> 00:38:15,360
आपको ईश्वर नहीं लगेगा जैसे अगर य

501
00:38:15,360 --> 00:38:19,680
यह वाली इंफॉर्मेशन आप कट कर दो तो ईश्वर बाधित हो जाएगा जब ईश्वर बाधित

502
00:38:19,680 --> 00:38:24,160
हो जाएगा तो आपकी जो भक्ति की भावना है उसके प्रति वो प्रति नहीं रह जाएगी

503
00:38:24,160 --> 00:38:28,240
वो डिफीट खाएगी और भावना डिफीट खाएगी तो का जो

504
00:38:28,240 --> 00:38:32,400
निष्ठा है वो कम हो जाएगी भटके परेशान

505
00:38:32,400 --> 00:38:36,560
इसलिए यह एक ऐसी सच्चाई है जिसको जानने के बाद उसम ताला लगा

506
00:38:36,560 --> 00:38:40,160
करके रख देना है उस पर ध्यान नहीं देना है अब

507
00:38:40,160 --> 00:38:44,320
यह जो बैलेंस बनाने वाली बात है यह आती है आपका मन

508
00:38:44,320 --> 00:38:48,440
लग रहा है चाहे नहीं लग रहा है रट्टा मारो

509
00:38:48,440 --> 00:38:52,440
जितना भगवत चरित्र पढ़ो रामचंद्र जी आए ऐसा

510
00:38:52,440 --> 00:38:56,440
ऐसा किया वो चरित्र पढ़ो तो इस सच्चाई से फिर आपका ध्यान

511
00:38:56,440 --> 00:39:00,880
हटेगा अच्छा है ना आपके मन के कोने में है

512
00:39:00,880 --> 00:39:04,880
आपके मन के कोने में है वो सच्चाई मगर उससे आपको ध्यान हटा ये थोड़ा

513
00:39:04,880 --> 00:39:08,920
सा कठिन होता है इसीलिए ये गुण विषय

514
00:39:08,920 --> 00:39:13,280
कठिन होता है कि भाई वो निराकार है तो ये हमारे

515
00:39:13,280 --> 00:39:18,320
उसका विषय नहीं होता है व्यवहार का अद्वैत

516
00:39:18,320 --> 00:39:22,360
इसलिए उसको जानना आवश्यक है सर्व शक्ति मत्ता के लिए उसके

517
00:39:22,360 --> 00:39:26,480
बाद एक कुंडी में ताला लगा के रख देना है और फिर हमको इसको ध्यान देना

518
00:39:26,480 --> 00:39:30,480
है ये सामने भगवान अलग है मैं अलग फिर इस

519
00:39:30,480 --> 00:39:35,080
पर धन इसको मना नहीं कर सकते क्योंकि

520
00:39:35,080 --> 00:39:39,120
क्यों इसको मना इसलिए नहीं कर सकते इसको हटा भगवान

521
00:39:39,120 --> 00:39:43,160
सर्व शक्तिमान सि नहीं होंगे वो बाधित हो जाएंगे जब

522
00:39:43,160 --> 00:39:47,760
वो बाधित हो जाएंगे तो भगवान सिद्ध नहीं होंगे फिर व

523
00:39:47,760 --> 00:39:52,240
जो का विषय जो मोक्ष का विषय वो नहीं सिद्ध होगा

524
00:39:52,240 --> 00:39:55,360
इसलिए दोनों चीजों को बैलेंस बनाना है कि

525
00:39:55,360 --> 00:39:59,440
इसका यूज कैसे करना है और इसको कैसे करना यही

526
00:39:59,440 --> 00:40:04,040
सम कई ऐसी सइया है हा

527
00:40:04,040 --> 00:40:08,600
कई ऐसी सच्चा होती है जो हम जानते हुए भी उसको एक तरफ कोने में रख देते

528
00:40:08,600 --> 00:40:13,520
हैं कई ऐसी सच्चाई होती है और अपने जीवन को आगे बढ़ाते

529
00:40:13,520 --> 00:40:17,640
है ना ऐसी एक सच्चाई है कि आप इसको जान लो और एक कुंडी में बंद

530
00:40:17,640 --> 00:40:21,880
कर दो और फिर आगे सामने भगवान को प्रत्यक्ष रख कर के आप

531
00:40:21,880 --> 00:40:26,000
भगवत बज लग जाओ जितना लगोगे जितना लगोगे जितना लगोगे उतना ही

532
00:40:26,000 --> 00:40:30,120
आपका वो सुगम होता जाएगा भगवत चरित्र पढ़ो बाली को मारा

533
00:40:30,120 --> 00:40:34,200
ये किया वो किया सुंदरता उनका कंधा यहां से यहां तक था वो उनका

534
00:40:34,200 --> 00:40:38,400
जो वक्ष स्थल ता चौड़ा था और माचो पर्सनालिटी थी या भगवान श्री कृष्ण

535
00:40:38,400 --> 00:40:42,880
का अलग वर्णन है इतना सुंदर रूप था तो ये सब पढ़ोगे तो इसको

536
00:40:42,880 --> 00:40:46,920
धीरे धीरे धीरे धीरे आपका इस पर ध्यान जाना कम हो जाएगा

537
00:40:46,920 --> 00:40:51,320
फिर और लंबा आपका वो हो जाएगा जब जी

538
00:40:51,320 --> 00:40:55,520
एक चीज एक चीज और थी ये जो भगवान श्री राम और कृष्ण भगवान ये थे इनकी मतलब किशोरावस्था

539
00:40:55,520 --> 00:40:59,920
थी ना इनकी नहीं बढ़ती थी मल जैसे उम्र मतलब 16 17 साल तक ही थी ना इनकी

540
00:40:59,920 --> 00:41:04,160
किशोर किशोर अच्छा किशोर अवस्था का शरीर था

541
00:41:04,160 --> 00:41:08,520
आयु तो बहुत थी मगर इनका शरीर वहीं तक होता है किशोर अवस्था तक

542
00:41:08,520 --> 00:41:10,440
अच्छा ठीक है भाई धन्यवाद

543
00:41:10,440 --> 00:41:14,640
आप अच्छा लगा बात करके बहुत प्र सही है सही

544
00:41:14,640 --> 00:41:18,640
समझ आपकी वीडियो देख के ऐसा है कि अब मतलब कोई ऐसा तर्क मिल

545
00:41:18,640 --> 00:41:23,000
जाता है आप ऐसा तर्क देते हो आपकी वीडियो देख के ये सीख जाता कि कोई मतलब ऐसे बहस करा ना उसको

546
00:41:23,000 --> 00:41:27,560
कर सके मतलब सामना ऐसा मतलब कॉन्फिडेंस आता है थोड़ा बहुत

547
00:41:27,560 --> 00:41:31,960
हा बहस नहीं बहस नहीं भगवत चर्चा कहिए

548
00:41:31,960 --> 00:41:36,320
बहस नहीं भगवत चर्चा कहिए सत्संग कहिए

549
00:41:36,320 --> 00:41:40,480
और उसका जो परवन है वह सकारात्मकता में हो

550
00:41:40,480 --> 00:41:44,520
ना कि नकारात्मकता में सकारात्मक में लेकिन पहले जैसे कोई भाई भगवान

551
00:41:44,520 --> 00:41:48,560
की बेज्जती कर दिया करता हमारे सामने कोई धर्म की तो हम मतलब बोल नहीं पता थोड़ी

552
00:41:48,560 --> 00:41:53,320
आपकी वीडियो देख पता लगे कैसे हैंडल करना है क्या मतलब है थोड़ा

553
00:41:53,320 --> 00:41:57,520
इसके लिए और भी अच्छा है आप क्लासेस में आइए प्रत्येक रविवार

554
00:41:57,520 --> 00:42:01,760
सुबह 8 बजे आयोजित होती है व फॉर्म भर दीजिए तो और स्टेप

555
00:42:01,760 --> 00:42:06,120
बाय स्टेप हम मतलब वहा बात करते हैं तो अच्छा रहेगा स्क्रीन पर नंबर आएंगे

556
00:42:06,120 --> 00:42:10,200
उसके उस हा उस कर दीजिए आपको फॉर्म मिल जाए भर

557
00:42:10,200 --> 00:42:16,200
दीजिएगा ठीक है जय श्री राम राधे राधे ध जय

558
00:42:17,560 --> 00:42:22,360
श्रीम विकास मिश्र जी

559
00:42:22,360 --> 00:42:27,280
आप ही है जिनसे बात हो रही थी

560
00:42:27,280 --> 00:42:31,560
हां हां इसमें नाम पता नहीं कैसे चेंज होगा मेरा

561
00:42:31,560 --> 00:42:35,720
तो विकास चौधरी विकास चौधरी शरण ये नाम

562
00:42:35,720 --> 00:42:41,720
है ना विश्राम विश्राम चौधरी

563
00:42:42,480 --> 00:42:46,920
शरण मेरा राजकुमार मिश्रा नाम है और इसमें नाम पता नहीं कैसे

564
00:42:46,920 --> 00:42:52,920
लिख जा रहा है अच्छा जी बताइए जय श्री

565
00:42:55,520 --> 00:42:59,680
राम हम राम राम मैं आपके वीडियो

566
00:42:59,680 --> 00:43:04,120
तो कई वसे आपको देखा हूं वीडियो

567
00:43:04,120 --> 00:43:08,440
इसमें आप संत रामपाल जी महाराज के जो श

568
00:43:08,440 --> 00:43:12,720
शमिल होते हैं आप एक जगह ठहर के बात करिए हिलते

569
00:43:12,720 --> 00:43:16,910
हिलते बात मत करिए

570
00:43:16,910 --> 00:43:22,910
[संगीत]

571
00:43:28,640 --> 00:43:33,360
हां पूछ आप रामपाल जी के श

572
00:43:33,360 --> 00:43:38,760
है रामपाल जी के शिष्य आप हा

573
00:43:38,760 --> 00:43:43,320
हा तो मैं आपसे एक बात यह पूछूंगा कि प्रमाण

574
00:43:43,320 --> 00:43:47,640
का मतलब क्या मानते हैं

575
00:43:47,640 --> 00:43:51,920
आप प्रमाण मतलब जिसको जसे हमने

576
00:43:51,920 --> 00:43:57,920
जैसे हमने कहा कि फलानी चीज हमारे लिए प्रमाण है इसका अर्थ क्या है

577
00:44:03,160 --> 00:44:07,480
प्रमाण काथ यह होता है कि जिसको विश्वास नहीं है उसको प्रमाण दिखाना

578
00:44:07,480 --> 00:44:11,520
पड़ता है जिसको विश्वास है गुरु के

579
00:44:11,520 --> 00:44:15,560
जाता है उसको प्रमाण की जरूरत नहीं नहीं नहीं प्रमाण की जरूरत

580
00:44:15,560 --> 00:44:19,640
जरूरत नहीं पूछ रहा प्रमाण किसे कहते हैं आप

581
00:44:19,640 --> 00:44:24,320
प्रमाण हम किसे कहेंगे यह हमारे लिए प्रमाण है

582
00:44:24,320 --> 00:44:28,480
प्रमाण का अर्थ क्या है आपके लिए प्रण आप कहना क्या चाहते

583
00:44:28,480 --> 00:44:32,520
हो प्रमाण को किसम प्रमाण चाहिए हमको प्रमाण

584
00:44:32,520 --> 00:44:36,560
नहीं चाहिए हमको यह जानना है कि आप प्रमाण का अर्थ क्या

585
00:44:36,560 --> 00:44:38,960
लेते

586
00:44:38,960 --> 00:44:42,960
हैं प्रमाण का अर्थ मतलब की जो नाम जिसम मिल

587
00:44:42,960 --> 00:44:47,160
जाए उसको प्रमाण कहते हैं जिस चीज

588
00:44:47,160 --> 00:44:51,520
की आप खोज कर रहे हो अगर उसम

589
00:44:51,520 --> 00:44:55,520
वो चीज मिल जाती है तो उसको प्रमाण कहते हैं देखिए मैं आपको प्रमाण आप

590
00:44:55,520 --> 00:44:59,800
समझ नहीं पा रहे मेरा प्रश्न मैं आपको समझा दू

591
00:44:59,800 --> 00:45:02,880
जैसे कि हमने कहा रामपाल जी ने जो बात

592
00:45:02,880 --> 00:45:06,920
कही वह हमारे लिए

593
00:45:06,920 --> 00:45:11,320
प्रमाण उन्होंने कोई बात कही तो इसका मतलब व सत्य

594
00:45:11,320 --> 00:45:16,240
यही तो होता है प्रमाण का अर्थ कि और कोई होता

595
00:45:16,240 --> 00:45:20,280
है नहीं प्रमाण तो देखो हर धर्म गुरु अपने हिसाब

596
00:45:20,280 --> 00:45:24,520
से प्रमाण दे भा जितने भी धर्म धर्म

597
00:45:24,520 --> 00:45:28,680
कहा से आ गया धम कहां से आ गया

598
00:45:28,680 --> 00:45:33,360
मैंने सिर्फ प्रमाण बोला है ना प्रमाण हो सकता है ए बी सीडी का हो

599
00:45:33,360 --> 00:45:37,640
प्रमाण हो सकता है कोर्ट का हो संविधान का हो उसम धर्म कहां से आ गया हा

600
00:45:37,640 --> 00:45:41,760
तो हां तो आप ये बताइए प्रमाण मांग रहे हो

601
00:45:41,760 --> 00:45:45,840
मैं मांग नहीं रहा हूं मैं मांग नहीं रहा हूं मैं आपसे क्लियर कर रहा

602
00:45:45,840 --> 00:45:50,040
हूं कि आपकी जानकारी में प्रमाण क्या है जैसे कि

603
00:45:50,040 --> 00:45:54,080
मैंने कहा कि मैं भारतीय

604
00:45:54,080 --> 00:45:58,360
प्रशासन के द्वारा जो आधार कार्ड उपलब्ध कराया जाता है उसको प्रमाण मानता

605
00:45:58,360 --> 00:46:02,440
हूं ठीक है ठीक है तो अब

606
00:46:02,440 --> 00:46:06,800
अगर मैं आपसे आपका नाम पूछूंगा आपने कहा कि मेरा नाम राजकुमार मिश्र

607
00:46:06,800 --> 00:46:10,920
है ठीक है तो जब मैं आपसे आपका नाम पूछूंगा मैं कहूंगा कि

608
00:46:10,920 --> 00:46:15,160
नहीं मुझे प्रमाण दिखाओ तो आप अगर अपना आधार कार्ड दिखाएंगे मुझे

609
00:46:15,160 --> 00:46:17,960
तो मैं उसको मान ल आधार कार्ड में लिखा है तो

610
00:46:17,960 --> 00:46:22,040
फिर तो आपका नाम राजकुमार मिश्र ही है समझ गए यह प्रमाण

611
00:46:22,040 --> 00:46:27,560
की परिभाषा है सरल ठीक है [संगीत]

612
00:46:27,560 --> 00:46:31,720
बराबर ठीक है ना प्रमाण का अर्थ

613
00:46:31,720 --> 00:46:35,840
यह है कि यदि हम किसी चीज को प्रमाण मानते हैं तो

614
00:46:35,840 --> 00:46:40,840
हम उसकी किसी बात को ठुकरा नहीं

615
00:46:40,840 --> 00:46:44,600
सकते क्या यह बात सही

616
00:46:44,600 --> 00:46:48,920
है हा प्रमाण जिस चीज का मानते हो अगर व का प्रमाण

617
00:46:48,920 --> 00:46:53,200
है तो उसको स्वीकारना पड़ेगा हम अगर

618
00:46:53,200 --> 00:46:57,680
किसी चीज को मानते हैं तो प्रमाण

619
00:46:57,680 --> 00:47:01,920
मानते हैं तो हम उसकी किसी भी चीज को जैसे हम आप रामपाल

620
00:47:01,920 --> 00:47:06,040
जी को प्रमाण मानते हैं तो रामपाल जी की किसी बात को आप

621
00:47:06,040 --> 00:47:10,280
यह नहीं डाउट नहीं कर सकते कि नहीं यह हमारे भले के लिए नहीं होगी

622
00:47:10,280 --> 00:47:16,280
कर सकते हैं क्या आप डाउट डाउट करते

623
00:47:16,840 --> 00:47:21,640
हैं नहीं कर डाउट नहीं करते

624
00:47:21,640 --> 00:47:27,000
ना किसी भी बात पर डाउट करते हैं क्या

625
00:47:27,000 --> 00:47:31,120
तो जब से हम लोग जुड़े हैं तब से हमसे कोई ना

626
00:47:31,120 --> 00:47:35,120
प्रमाण हम लोग देखते हैं वो करते हैं हा हमको विश्वास है कि

627
00:47:35,120 --> 00:47:40,080
हा भाई एक दो प्रमाण देखे भी तोव सत्य है तो

628
00:47:40,080 --> 00:47:44,160
वो ग्रंथों की बात बाद में करेंगे अभी हम केवल ये कर रहे हैं क्लियर कर रहे

629
00:47:44,160 --> 00:47:48,320
हैं कि प्रमाण का अर्थ क्या होता है प्रमाण का अर्थ य होता है

630
00:47:48,320 --> 00:47:52,560
कि जिसको हमने कह दिया कि यह इसकी बात हमारे लिए प्रमाण है पत्थर

631
00:47:52,560 --> 00:47:56,600
की लकीर है उसकी किसी बात को किसी भी

632
00:47:56,600 --> 00:48:00,680
बात को हमय डाउट नहीं कर सकते कि नहीं झूठ है सच पता

633
00:48:00,680 --> 00:48:04,920
लगाएंगे अगर हमने य कहा झूठ सच पता इसका मतलब वो

634
00:48:04,920 --> 00:48:09,720
व्यक्ति हमारे लिए वह वस्तु हमारे लिए प्रमाण नहीं

635
00:48:09,720 --> 00:48:13,720
है यह मानते

636
00:48:13,720 --> 00:48:19,040
हा जो प्रमाण चीज है उसको मानेंगे जो प्रमाण नहीं है उसको नहीं

637
00:48:19,040 --> 00:48:23,280
मा हा तो आपके

638
00:48:23,280 --> 00:48:27,440
लिए प्रामाणिक शास्त्र कौन सा है इसकी

639
00:48:27,440 --> 00:48:32,840
एक भी बात को आप मना नहीं करोगे कि नहीं ये मैं नहीं

640
00:48:32,840 --> 00:48:37,440
मानूंगा अब प्रमाण शास्त्र जैसे अपने

641
00:48:37,440 --> 00:48:42,440
कोई है जिसको आप पूरा का पूरा मानते हो

642
00:48:42,440 --> 00:48:46,720
अपना जो कबीर साहिब का जो ग्रंथ है वो है

643
00:48:46,720 --> 00:48:51,200
और कबीर कबीर का ग्रंथ आप प्रमाण मानते हो

644
00:48:51,200 --> 00:48:55,440
है ना वेद गीता को प्रमाण नहीं मानते

645
00:48:55,440 --> 00:48:59,600
नहीं नहीं उनको भी मानते क्योंकि पूरा का पूरा

646
00:48:59,600 --> 00:49:03,680
एक भी बात को ठुकराना नहीं है हमको

647
00:49:03,680 --> 00:49:07,880
हम किसी भी चीज को ठुकराते थोड़ी है जो अपने चीज की मतलब की है जो वेद

648
00:49:07,880 --> 00:49:11,880
में जो मतलब कीज है वो ले लिए जो गीता में मतलब की चीज है वो ले

649
00:49:11,880 --> 00:49:15,920
लिए हा अपने को डाउट है कि भाई उसम ये चीज नहीं मिल रही

650
00:49:15,920 --> 00:49:20,000
है तो उसम दिक्कत यानी की यानी कि प्रमाणिक चीज

651
00:49:20,000 --> 00:49:23,080
पर भी डाउट हो सकता

652
00:49:23,080 --> 00:49:27,200
है प्रमाणित उस पर कैसे डाउट होगा जब प्रमाणित है तो

653
00:49:27,200 --> 00:49:31,440
आप ही तो कह रहे हो कि हम वेद गीता को प्रमाणिक मानते हैं मगर फिर कह रहे हो

654
00:49:31,440 --> 00:49:35,960
कि हम अगर डाउट होगा तो नहीं मानेंगे या तो वो प्रमाणिक

655
00:49:35,960 --> 00:49:40,400
नहीं है या फिर डाउट नहीं हो सकता कुछ और जैसे

656
00:49:40,400 --> 00:49:44,400
है उसम अगर जो जो परमात्मा की बात

657
00:49:44,400 --> 00:49:47,880
मेल खाता है वो बात मानने योग्य है बाकी इसका

658
00:49:47,880 --> 00:49:51,960
मतलब कुछ कोई भी कारण हो मगर वो पूरी तरीके से

659
00:49:51,960 --> 00:49:57,960
प्रमाण नहीं है ना वेद गीता आपके लिए

660
00:50:01,960 --> 00:50:06,240
प्रमाण देखो आप यह कहना आप कहना क्या चाहते हो मेरे हिसाब

661
00:50:06,240 --> 00:50:10,520
से तो देखो हम लोग गुरुजी से जुड़े हैं परमात्मा से जुड़े हैं

662
00:50:10,520 --> 00:50:14,600
देखिए जैसे अभी आपने कहा मैं आपको समझा दूं मैं क्या कहना चाहता हूं जैसे

663
00:50:14,600 --> 00:50:20,480
अभी आपने कहा हम गुरु जी के ऊपर डाउट नहीं कर सकते कहा

664
00:50:20,480 --> 00:50:25,770
ना हम यह नहीं सोच सकते कि इनकी कोई बात जो है गलत हो सकती है

665
00:50:25,770 --> 00:50:29,880
[संगीत] बोलिए हा

666
00:50:29,880 --> 00:50:34,360
कोई बात नहीं गलत हो सकती

667
00:50:34,360 --> 00:50:38,840
क्या कोई स भी बात गलत नहीं हो सकती परमात्मा के नि

668
00:50:38,840 --> 00:50:43,240
क्या रामपाल जी की बातों में आपकी ऐसी बुद्धि है कि हम डिसाइड

669
00:50:43,240 --> 00:50:47,800
करेंगे इनकी कौन सी बात माननी है कौन सी नहीं माननी है

670
00:50:47,800 --> 00:50:51,840
नहीं हम अपने अपने कुछ अपने उसम

671
00:50:51,840 --> 00:50:55,840
से डिसाइड नहीं कर सकते कि बात माननी जो उन्होने आदेश दे दिया वही

672
00:50:55,840 --> 00:50:59,960
हमको मानने है वही सत्य है यह है प्रमाण

673
00:50:59,960 --> 00:51:02,960
ये आप अपने गुरु को प्रमाण मानते हैं क्या

674
00:51:02,960 --> 00:51:07,480
ऐसी ही बुद्धि आपकी वेद और गीता के लिए

675
00:51:07,480 --> 00:51:11,680
है हा अरे जब जो

676
00:51:11,680 --> 00:51:16,440
गुरु जीने आदेश दे दिया वो गीता वेद में मिलता है पूछ

677
00:51:16,440 --> 00:51:20,600
रहा भाई साहब भाई साहब आप कितने अच्छे से बात कर रहे हैं बहुत

678
00:51:20,600 --> 00:51:25,000
अच्छे व्यक्ति है आप मैं पूछ रहा हूं आपसे जैसी बुद्धि आपकी

679
00:51:25,000 --> 00:51:29,480
रामपाल दास जी के लिए है कि हम उसमें यह नहीं सोच सकते

680
00:51:29,480 --> 00:51:33,520
कि कहीं पर रामपाल दास जी गलत भी बोल सकते हैं

681
00:51:33,520 --> 00:51:39,200
क्या वैसे ही बुद्धि वेद और गीता के लिए

682
00:51:39,200 --> 00:51:43,360
है हा बुद्धि वैसे यानी की वेद और

683
00:51:43,360 --> 00:51:47,680
गीता की किसी बात को आप टकरा नहीं सकते किसी भी बात को

684
00:51:47,680 --> 00:51:51,680
कि यहां पर काल ने बोल दिया होगा यहां पर इसने झूठ लिख दिया

685
00:51:51,680 --> 00:51:57,680
होगा किसी भी बात को आप ठुकरा नहीं सकते

686
00:51:57,920 --> 00:52:00,560
नहीं ठुकरा

687
00:52:00,560 --> 00:52:04,800
सकते हा चाहे गीता में हो चाहे वेद

688
00:52:04,800 --> 00:52:08,800
में हो जो भी लिखा है एक भी एक भी

689
00:52:08,800 --> 00:52:13,120
बात को एक भी बात को आप टकराएंगे नहीं

690
00:52:13,120 --> 00:52:17,120
नहीं नहीं नहीं हम लोग क्यों ठुकराए हम जब कोई से भी

691
00:52:17,120 --> 00:52:21,360
ग्रंथ को ठुकराना नहीं चाहिए हा गुरु जी जो आदेश देते हैं कि भा देखिए

692
00:52:21,360 --> 00:52:25,640
राना चाहिए देखिए देखिए आप देखिए मैं बताऊ अपना क्लियर

693
00:52:25,640 --> 00:52:30,240
आपके लिए जैसे बाइबल भी प्रमाण है जहां तक मैं जानता हूं है ना

694
00:52:30,240 --> 00:52:34,680
बाइबल प्रमाण है ना आपके लिए देखो

695
00:52:34,680 --> 00:52:39,040
मानव धर्म के हिसाब से तो बाबल प्रमाण भाई साहब

696
00:52:39,040 --> 00:52:43,080
मैंने पूछा आप बाइबल को भी प्रमाण मानते हैं ना वो

697
00:52:43,080 --> 00:52:48,560
भी एक प्रमाण के तौर पर है कुरान भी प्रमाण है आपके लिए

698
00:52:48,560 --> 00:52:52,640
प्रमाण तो हम मैं अभी आपसे

699
00:52:52,640 --> 00:52:54,640
कह नहीं रहा हूं मैं वेद

700
00:52:54,640 --> 00:52:58,840
जो बाइबल और कुरान है इसको मैं प्रमाण

701
00:52:58,840 --> 00:53:02,960
नहीं मानता हूं यह मेरे लिए प्रमाण नहीं है तो

702
00:53:02,960 --> 00:53:07,040
उसमें क्या लिखा है क्या नहीं लिखा है वो मैं डिसाइड करूंगा कौन

703
00:53:07,040 --> 00:53:11,200
सी चीज सही है कौन सी चीज गलत है इस आधार पर के वेद वेदों

704
00:53:11,200 --> 00:53:15,360
के द्वारा निर्धारित गीता के द्वारा निर्धारित जो सीमा है उससे मैच खा रही

705
00:53:15,360 --> 00:53:18,060
है कि

706
00:53:18,060 --> 00:53:23,160
[संगीत] नहीं है ना

707
00:53:23,160 --> 00:53:27,160
हा मगर वेद और गीता के लिए मेरी बुद्धि नहीं

708
00:53:27,160 --> 00:53:31,200
है कि उसकी किसी चीज के लिए मैं यह कह दूं

709
00:53:31,200 --> 00:53:35,520
कि यह वाली बात गलत है अब यह बताइए

710
00:53:35,520 --> 00:53:39,560
क्या ऐसी बुद्धि है आपकी गीता और वेद के लिए कि कोई

711
00:53:39,560 --> 00:53:45,560
भी बात को मैं मना नहीं करूंगा कि नहीं यह वाली बात नहीं मानूंगा दूसरी वाली बात

712
00:53:47,240 --> 00:53:51,400
मानूंगा जो प्रमाणित चीज है उसको कोई नकार थोड़ी सकता है ना हम नकार

713
00:53:51,400 --> 00:53:55,640
सकते हैं ना आप नकार सकते हैं तो भैया इनको दिखा

714
00:53:55,640 --> 00:54:01,640
दो जरा वासद वाला शलोक वासुदेव वाला श्लोक

715
00:54:06,960 --> 00:54:12,960
दिखाओ वासुदेव वाला श्लोक दिखा दीजिए

716
00:54:31,840 --> 00:54:35,280
हां बड़ा

717
00:54:35,280 --> 00:54:39,720
करिए यह भगवत गीता के दवे अध्याय का 37 वा श्लोक

718
00:54:39,720 --> 00:54:45,120
है इसमें लिखा हुआ

719
00:54:45,120 --> 00:54:49,520
है आपको दिख रहा है विशाल

720
00:54:49,520 --> 00:54:53,600
मिश्रा जी हा थोड़ा क्लियर कम दिख रहा

721
00:54:53,600 --> 00:54:58,000
है दिख रहा है प बाद में चेक कर

722
00:54:58,000 --> 00:55:02,120
लीजिएगा भगवत गीता का दसवा अध्याय

723
00:55:02,120 --> 00:55:06,160
37 वा श्लोक है इसमें वृषण वंश में

724
00:55:06,160 --> 00:55:10,520
वासुदेव अर्थात मैं स्वयं तेरा सखा पांडवों में धनंजय

725
00:55:10,520 --> 00:55:14,560
अर्थात तू मुनियों में वेद व्यास और कवियों में शुक्राचार्य कभी

726
00:55:14,560 --> 00:55:18,480
भी मैं ही हूं

727
00:55:18,480 --> 00:55:22,600
और इसमें एक श्लोक और था जो मैंने

728
00:55:22,600 --> 00:55:26,600
कल आपको दिया था वो भी आप दिखा दीजिए जो कल

729
00:55:26,600 --> 00:55:32,600
दिए थे

730
00:55:35,120 --> 00:55:41,120
श्लोक ऐसे ही कटिंग करके दिए

731
00:55:44,200 --> 00:55:50,200
थे संभवत सातव अध्याय के थे

732
00:56:11,080 --> 00:56:16,520
सातवा अध्याय और सातवा

733
00:56:16,520 --> 00:56:20,600
श्लोक मुझसे भिन्न दूसरा कोई भी

734
00:56:20,600 --> 00:56:24,320
परम कारण नहीं

735
00:56:24,320 --> 00:56:29,120
है यह भगवत गीता में बोला जा रहा है

736
00:56:29,120 --> 00:56:34,240
भगवान श्री कृष्ण कह रहे हैं मुझसे भिन्न

737
00:56:34,240 --> 00:56:38,640
दूसरा कोई भी परम कारण नहीं है यानी

738
00:56:38,640 --> 00:56:42,840
कि जो यह बात बोल रहा है उससे बड़ा कोई

739
00:56:42,840 --> 00:56:47,040
नहीं है दुनिया में संसार में ब्रह्मांड में

740
00:56:47,040 --> 00:56:52,920
पूरे जगत में अब इस बात को आप मानते हैं कि

741
00:56:52,920 --> 00:56:58,040
नहीं भगवान विष्णु जी बोल रहे हैं हां

742
00:56:58,040 --> 00:57:02,080
भगवान श्री कृष्ण बोल रहे हैं विष्णु जी के जो रूप है या श्री

743
00:57:02,080 --> 00:57:06,080
कृष्ण बोल रहे हैं डायरेक्ट विष्णु जी बोल रहे हैं कुछ भी समझ लीजिए विष्णु और कृष्ण में

744
00:57:06,080 --> 00:57:10,320
अंतर नहीं है ये बोल रहे हैं

745
00:57:10,320 --> 00:57:14,480
कि मुझसे भिन्न संसार में दूसरा कोई भी परम कारण

746
00:57:14,480 --> 00:57:20,480
नहीं है मुझसे बड़ा कोई नहीं है यह श्री कृष्ण बोल रहे

747
00:57:22,120 --> 00:57:26,320
हैं श्री कृष्ण बड़े हैं ना कई देव

748
00:57:26,320 --> 00:57:30,320
बड़े मैं कह रहा हूं श्री कृष्ण से यहां पे यह बोल

749
00:57:30,320 --> 00:57:34,920
रहे हैं कि मुझसे बड़ा कोई भी नहीं है हाथ

750
00:57:34,920 --> 00:57:39,000
वो कृष्ण जी के उसम काल भगवान

751
00:57:39,000 --> 00:57:43,320
प्रवेश करके बोल ही रहे हैं पूरा गीता का ज्ञान बोल रहे हैं काल भगवान

752
00:57:43,320 --> 00:57:47,680
ये बात कौन बोल रहा है काल काल भगवान अलग है ना कृष्ण से ये

753
00:57:47,680 --> 00:57:51,800
ये ओम भगवान बोल रहा है ओम भगवान जो ब्रह्मांड का मालिक है ना वो बोल रहा

754
00:57:51,800 --> 00:57:55,960
है उनके शरीर में 1000 जो भुजा आप देख रहे हो जो फोटो

755
00:57:55,960 --> 00:58:00,160
में बोल रहा आपकी बात में समझ गया

756
00:58:00,160 --> 00:58:04,360
समझ गया आपकी बात आप ये कह रहे हो कि जो काल है जो

757
00:58:04,360 --> 00:58:08,520
जिसको आप सदाशिव भी कहते हो काल को है ना ब्रह्म भी कहते हो

758
00:58:08,520 --> 00:58:13,160
है ना के शरीर से बोल रहे

759
00:58:13,160 --> 00:58:17,640
वो श्री कृष्ण के शरीर में आकर बोल रहे हैं ठीक है

760
00:58:17,640 --> 00:58:21,640
ठीक है तो इसका मतलब अगर यह भी मान ले

761
00:58:21,640 --> 00:58:25,720
कि काल बोल रहा है तो काल यह कह रहा है मुझसे बड़ा

762
00:58:25,720 --> 00:58:29,200
कोई नहीं

763
00:58:29,200 --> 00:58:33,480
है यानी काल ही सबसे बड़ा ईश्वर

764
00:58:33,480 --> 00:58:38,600
है काल तो यहां इस ब्रह्मांड का मालिक वो सबसे बड़ा है ही

765
00:58:38,600 --> 00:58:42,880
ले ये भी लास्ट में तो व भी बोल रहा है ना कि अगर अर्जुन तुझे

766
00:58:42,880 --> 00:58:47,000
सुख शांति चाहिए तू तत्वदर्शी संत के शरण में जा वो

767
00:58:47,000 --> 00:58:51,040
भी मेरा पूज्य देवता है वो तो ये भी बता रहा है ना वो तो यहां के लिए बोल

768
00:58:51,040 --> 00:58:54,240
रहा

769
00:58:54,240 --> 00:58:58,520
है मैं ये कह रहा हूं मैं यह कह रहा हूं इस लाइन

770
00:58:58,520 --> 00:59:03,120
को क्या करें माने के झूठ माने क्या करें नहीं

771
00:59:03,120 --> 00:59:07,440
यह बात सत्य है व जो जहां तक उसकी सीमा है अब

772
00:59:07,440 --> 00:59:12,120
दरोगा मुझसे दूसरा कोई परम कारण नहीं

773
00:59:12,120 --> 00:59:16,360
है मैं ही संपूर्ण जगत का सूत्र

774
00:59:16,360 --> 00:59:20,400
हूं मूल कारण हूं मुझसे परम मुझसे बड़ा

775
00:59:20,400 --> 00:59:26,400
कोई नहीं है वो यह कह रहा है

776
00:59:26,800 --> 00:59:31,080
इसमें क्या है कि आप आप जो बोल रहे हो वह अपने

777
00:59:31,080 --> 00:59:36,000
स्तर पर जहां पर उसकी रेंज है अब

778
00:59:36,000 --> 00:59:40,120
मुख्यमंत्री र आप इस लाइन को मानोगे की नहीं

779
00:59:40,120 --> 00:59:44,400
मानोगे उससे बड़ा कोई नहीं है यह बताओ सीध बात

780
00:59:44,400 --> 00:59:48,560
अगर वह ऐसा बोल रहा है तो फिर लास्ट में गीता जी के अध्याय

781
00:59:48,560 --> 00:59:52,760
के लास्ट में क्यों बोल रहा है कि क रहा कह रहा हूं वो

782
00:59:52,760 --> 00:59:56,960
जो बोल रहा है उसका हम ऐसा अर्थ निकालेंगे से दोनों का मेल

783
00:59:56,960 --> 01:00:01,160
हो जाए मगर मगर अगर आप अलग अलग

784
01:00:01,160 --> 01:00:05,240
अर्थ निकाल रहे हैं तो मैं यह कह रहा हूं कि उसको क्यों माने इसको क्यों ना

785
01:00:05,240 --> 01:00:09,320
माने और वो छोड़ दो अगर इसको नहीं मानते तो फिर यह हमारे

786
01:00:09,320 --> 01:00:13,480
लिए प्रमाण नहीं हुई है गीता जो है हमारे लिए प्रमाण इसकी एक बात भी हमने

787
01:00:13,480 --> 01:00:17,480
अगर गलत कह दी तो यह हमारे लिए प्रमाण नहीं है क्योंकि

788
01:00:17,480 --> 01:00:21,560
हमने इसकी दूसरी बात से वो बात मैच नहीं खा रही

789
01:00:21,560 --> 01:00:26,040
के अनुसार आपको शायद मालूम होना चाहिए भगवत गीता में

790
01:00:26,040 --> 01:00:31,280
प्रकार का ज्ञान है एक तो व जब क जी उनके रूप में बोल

791
01:00:31,280 --> 01:00:33,920
रहेता

792
01:00:33,920 --> 01:00:38,320
में बात सुनो आप मेरी बात सुनो भगवत

793
01:00:38,320 --> 01:00:41,840
गीता में दो प्रकार का ज्ञान है एक तरफ तो व युद्ध करवाने

794
01:00:41,840 --> 01:00:45,880
के लिए कृ भगवान के रूप में काल भगवान बोल रहा है कि त युद्ध कर ले अर्जुन

795
01:00:45,880 --> 01:00:50,520
तेरे अगर तू जीत गया तो त य का फर्ग

796
01:00:50,520 --> 01:00:54,560
भोगा ी बात आप मुझे बताए

797
01:00:54,560 --> 01:00:58,920
भाई साब लिखा है कि गीता में दो प्रकार का ज्ञान

798
01:00:58,920 --> 01:01:03,160
है दो प्रकार का ज्ञान है कहा लिखा लिखा नहीं लेकिन अपने

799
01:01:03,160 --> 01:01:06,840
आप बुद्धि से सोचिए

800
01:01:06,840 --> 01:01:10,920
स्वयं यानी कि आप अपनी बुद्धि से डिसाइड करेंगे कि कहां

801
01:01:10,920 --> 01:01:15,120
सही है कहां गलत है अपने मन से

802
01:01:15,120 --> 01:01:17,760
भाई देश

803
01:01:17,760 --> 01:01:22,160
करता रामपाल जी की बातों में आप अपनी बुद्धि

804
01:01:22,160 --> 01:01:28,160
लगाएंगे कि उनकी कौन सी बात माननी कौन सी नहीं माननी है

805
01:01:28,280 --> 01:01:32,400
ऐसा है अभी आपने कहा था जो हमारे लिए प्रमाण है उसकी हर बात

806
01:01:32,400 --> 01:01:36,440
प्रमाण है अब आप कह रहे हो अपनी बुद्धि लगाएंगे तो मनम हो गया यह

807
01:01:36,440 --> 01:01:40,680
कहना बंद करो कि हम शास्त्र सम्मत भक्ति करते हैं

808
01:01:40,680 --> 01:01:44,080
आप आपका क

809
01:01:44,080 --> 01:01:48,120
ठीक सकता जन बता रहा है कह सकता है कि

810
01:01:48,120 --> 01:01:52,240
मैं यहां का मालिक हूं या तीनों लोको का मैं मालिक हूं ब्रह्मांड

811
01:01:52,240 --> 01:01:56,120
का मालिक हूं मेरे य

812
01:01:56,120 --> 01:02:00,240
जो लिखा है वो झूठ लिखा है काल काल से भी बड़ा कोई परम

813
01:02:00,240 --> 01:02:04,240
कारण है मगर यहां पर काल ने झूठ बोला है व काल

814
01:02:04,240 --> 01:02:08,600
फिर क्यों कह रहा है कि भाई अर्जुन ं चाहिए तो दूसरे परमात्मा की शरण

815
01:02:08,600 --> 01:02:12,880
में जा ये भी बता रहा है

816
01:02:12,880 --> 01:02:16,920
अभी आपसे देखिए आपसे मैं अभी यह कह रहा हूं मैं अभी

817
01:02:16,920 --> 01:02:20,960
आपसे यह कह रहा हूं कि जो

818
01:02:20,960 --> 01:02:25,120
काल है उसने यहां पर आगे जाकर के सही बोला है

819
01:02:25,120 --> 01:02:29,720
आपके हिसाब से यहां गलत बोला है

820
01:02:29,720 --> 01:02:34,400
ना य सही बोल रहा है

821
01:02:34,400 --> 01:02:38,440
यछ आपसे मैं आपसे पूछ रहा हूं यह सच है या

822
01:02:38,440 --> 01:02:42,440
झूठ है बस ये बताइए मेरी

823
01:02:42,440 --> 01:02:46,480
बात आप समझो वह यहां भी सच बोल रहा है जो लास्ट में है वहां भी सच

824
01:02:46,480 --> 01:02:50,560
बोल रहा है वो यह बोल रहा है कि मेरे 2 ब्रहमांड में जितने भी जीव है

825
01:02:50,560 --> 01:02:54,880
वो सब मेरे रिमोट से चलते हैं मैं यहां का राजा हूं मेरे से उत्पत्ति होती है

826
01:02:54,880 --> 01:02:59,200
यह देवता और जितने भी नर नर ये मानव ये मुझे

827
01:02:59,200 --> 01:03:03,800
ये मेरे से उत्पन्न हुए हैं य पू परमात्मा की जानकारी बता ही नहीं सकते

828
01:03:03,800 --> 01:03:08,200
इसलिए जितने यहां का पूरा संपत्ति का तीनों लो

829
01:03:08,200 --> 01:03:13,080
का ब्रह्मांड का यहां का मैं मालिक हूं अगर अर्जुन तुझे तद

830
01:03:13,080 --> 01:03:17,160
चाहिए या तो इसलिए इसलिए मुझे दिक्कत होती

831
01:03:17,160 --> 01:03:21,920
है पूरा बोल देंगे मगर जो मुद्दे की बात है वो नहीं

832
01:03:21,920 --> 01:03:26,120
बोलेंगे मैं मुद्दे के बात बोल य

833
01:03:26,120 --> 01:03:30,120
काल ने झूठ ही तो बोला जब वो यह कह रहा है कि मुझसे

834
01:03:30,120 --> 01:03:34,920
परम कोई नहीं हैय कहा

835
01:03:34,920 --> 01:03:39,320
मुझसे बड़ा मूल कारण कोई नहीं है हा

836
01:03:39,320 --> 01:03:44,480
कुछ अटकल बाजी उसने की है युद्ध करवाने के लिए

837
01:03:44,480 --> 01:03:45,480
कुछ

838
01:03:45,480 --> 01:03:50,040
कुछ की है ना कुछ अटकल बाजी की है ना

839
01:03:50,040 --> 01:03:54,440
हा कुछ अटल बाजी उसने इस मतलब भगवत गीता में कहीं पर

840
01:03:54,440 --> 01:03:58,600
ऐसा लिखा है जो मानने योग्य नहीं है और

841
01:03:58,600 --> 01:04:02,760
यह बात आप मानने योग्य नहीं है तो फिर भगवत गीता आपके

842
01:04:02,760 --> 01:04:07,480
लिए प्रमाण नहीं सिद्ध हुई आपने कहा था जिसको मानेंगे पूरा मानेंगे

843
01:04:07,480 --> 01:04:11,880
आपने कहा था ना प्रमाण वो है जिसको

844
01:04:11,880 --> 01:04:16,080
प्रमाण व है प्रमाण वो है

845
01:04:16,080 --> 01:04:20,360
प्रमाण वो है जिसको आप मानो तो पूरा मानो आप ही ने कहा

846
01:04:20,360 --> 01:04:26,360
जैसे रामपाल प्रमाण है ऐ नहीं है उसम

847
01:04:27,040 --> 01:04:31,040
रामपाल प्रमाण है नहीं भाई साहब मैं जो पूछ रहा

848
01:04:31,040 --> 01:04:35,040
बताइए रामपाल प्रमाण है कि नहीं हा वो तो परमात्मा है

849
01:04:35,040 --> 01:04:39,120
व तो प्रमाण है ही प्रमाण है ना क्या उसकी बातो में कर सकते

850
01:04:39,120 --> 01:04:43,040
हैं कि इतनी मानेंगे इतनी नहीं मानेंगे

851
01:04:43,040 --> 01:04:47,320
देखो अगर मैं आपको उदाहरण के तौर पर एक बात आपको समझाता

852
01:04:47,320 --> 01:04:51,400
मुझे उदाहरण मत बताइए पहले मुझे बताए अगर अगर वो

853
01:04:51,400 --> 01:04:55,720
आपके लिए देखिए अगर वो आपके लिए प्रमाण है तोरा

854
01:04:55,720 --> 01:04:59,920
मानेंगे या अधूरा मानेंगे रामपाल की बात कर रहा हूं भाई

855
01:04:59,920 --> 01:05:04,160
किसी को विश्वास नहीं है तो हमारे लिए जो उसम प्रमाण की चीज है हमने वो निकाल

856
01:05:04,160 --> 01:05:08,320
लिया जैसे परमा अरे भाई यानी अगर

857
01:05:08,320 --> 01:05:12,560
तुम अगर तुम अपने मन से सोच रहे हो कि इसमें कोई चीज हमारे लिए

858
01:05:12,560 --> 01:05:16,640
नहीं है इसका मतलब तुम्हारे लिए कोई और नियमावली प्रमाण

859
01:05:16,640 --> 01:05:20,760
है जिसके आधार पर तुम यह डिसाइड करोगे कि इसमें कौन सी चीज हमारे

860
01:05:20,760 --> 01:05:24,880
लिए है और कौन सी चीज नहीं है हां तो

861
01:05:24,880 --> 01:05:29,720
जो हमारे गुरु बताते उस जो अपने लिए चीज है वो नि

862
01:05:29,720 --> 01:05:33,840
गु यानी की आपके सुनो यानी कि आपके गुरु जी

863
01:05:33,840 --> 01:05:38,080
के अनुसार य डिसाइड होगा गीता में कहां सही है गलत है भगवत

864
01:05:38,080 --> 01:05:43,080
गीता से मोक्ष नहीं होगा यह क्लियर बात है

865
01:05:43,080 --> 01:05:47,600
हो अब सुन लो भैया यह है इनके अंदर की बात

866
01:05:47,600 --> 01:05:51,600
जो कहते हैं सद ग्रंथों में लिखा है

867
01:05:51,600 --> 01:05:55,640
सुन लेना अरे भाई जब

868
01:05:55,640 --> 01:05:59,680
भव गीता से मोक्ष नहीं होना है और क्या कहते किससे मोक्ष नहीं

869
01:05:59,680 --> 01:06:03,680
होना वेदों से मोक्ष नहीं होना है तो यह क्यों चिल्लाते हो वेदों

870
01:06:03,680 --> 01:06:07,920
में प्रमाण है कबीर भगवान है ये चिल्लाओ तर्शी प्रमाण है कबीर भगवान

871
01:06:07,920 --> 01:06:11,920
है परमात्मा की महिमा है प्रमाण

872
01:06:11,920 --> 01:06:16,120
है ही नहीं ना अपने मन से आप कहते हो हम श समत बात कर रहे

873
01:06:16,120 --> 01:06:20,360
हैं अब मुझे लिखा दिखा दो कि भगवत गीता

874
01:06:20,360 --> 01:06:25,720
में अगर दो अलग अलग बातें हो रही है तो दोनों में से एक को मानना एक को नहीं मानना है

875
01:06:25,720 --> 01:06:29,800
ये क सबसे सीधी बात है मैं आपको पा मिनट में बता

876
01:06:29,800 --> 01:06:34,080
देता हूं है व उल लेता हूं रुको

877
01:06:34,080 --> 01:06:38,880
नहीं नहीं नहीं ओम तत् पत यही तीन है य

878
01:06:38,880 --> 01:06:43,080
ईश्वर परमेश्वर ये तीन परमात्मा है ये जो आप बोल रहे

879
01:06:43,080 --> 01:06:47,280
ना काल काल ये ई है ईश्वर व भाई साहब देखिए

880
01:06:47,280 --> 01:06:51,440
आप अपने जो चीज देके आए हैं हम उसम पूछ ही नहीं रहे हम

881
01:06:51,440 --> 01:06:55,920
आपसे हम ये कह रहे हैं यह कहां लिखा है कि अगर भगवत

882
01:06:55,920 --> 01:06:58,440
में दो अलग अलग जगह दो बातें हो रही है

883
01:06:58,440 --> 01:07:04,440
तो हम इसको मानेंगे इसको नहीं मानेंगे एक को मानेंगे दूसरे को नहीं मानेंगे

884
01:07:04,560 --> 01:07:09,520
य पूरी भगवत गीता में आप जो है लास्ट के

885
01:07:09,520 --> 01:07:13,760
आपसे भाने आपसे पूछ है

886
01:07:13,760 --> 01:07:17,800
मैंने आपसे य पूछा है भाई साहब की अगर भगवत

887
01:07:17,800 --> 01:07:21,800
गीता में दो प्रकार की बातें लिखी है तो एक को मानना है एक को नहीं मानना है

888
01:07:21,800 --> 01:07:26,160
यह कहा लिखा है

889
01:07:26,160 --> 01:07:30,800
जो उसम मानने अपने योग्य है वो मानना है जो मानने योग्य नहीं है उसको नहीं मानेंगे

890
01:07:30,800 --> 01:07:35,280
अब जो कोई कह रहा है अर्जुन

891
01:07:35,280 --> 01:07:39,440
ये ये जो मानने योग्य नहीं है ये जो सिद्धांत

892
01:07:39,440 --> 01:07:43,880
है यह कहीं तो लिखा होगा कि अपने मन से करोगे

893
01:07:43,880 --> 01:07:47,960
अब उसम लि मानने योग नहीं है क लिखा है क्या जो मानने योग्य

894
01:07:47,960 --> 01:07:52,160
नहीं होगा वो हम नहीं मानेंगे इसका

895
01:07:52,160 --> 01:07:56,400
कहां लिखा है मैं लिखा हुआ बताता हूं आपको वो

896
01:07:56,400 --> 01:08:02,400
व्यास स्मिति का मैंने अभी प्रमाण भेजा था व [संगीत]

897
01:08:03,280 --> 01:08:07,520
खोलिए आप मु का भेजा था एक मिनट भाई साहब एक

898
01:08:07,520 --> 01:08:11,880
मिनट व्यास स्मति का भेजा था मैं

899
01:08:11,880 --> 01:08:16,040
इतना इसलिए बड़ रहा हूं कि इनकी यह वास्तविकता सामने आ सके

900
01:08:16,040 --> 01:08:20,240
कि इनके लिए वेद और गीता प्रमाण नहीं है ये नाटक करते

901
01:08:20,240 --> 01:08:24,480
हैं उसको प्रमाण मानने का ये देखो

902
01:08:24,480 --> 01:08:29,040
पढ़ना आएगा नहीं संभवत व्यास स्मृति

903
01:08:29,040 --> 01:08:33,600
पहला अध्याय पांचवा वचन है जहां परस्पर विरुद्ध

904
01:08:33,600 --> 01:08:37,960
जचने वाली दोनों प्रकार की बातें उपलब्ध होती हैं वहां

905
01:08:37,960 --> 01:08:42,800
दोनों को धर्म मानना चाहिए लो

906
01:08:42,800 --> 01:08:47,120
यह प्रमाण है आपके लिए यह व्यास जी लिख रहे हैं

907
01:08:47,120 --> 01:08:53,120
जिन्होंने गीता लिखी है

908
01:08:56,760 --> 01:09:00,920
आप कहना क्या चाहते हो कि संत रामपाल जी महाराज का ज्ञान

909
01:09:00,920 --> 01:09:05,080
मतलब व्यर्थ है व्यर्थ है बेसलेस

910
01:09:05,080 --> 01:09:09,520
यह मैं कहना चाहता हूं आप मैं कहना नहीं वाला था आपने पूछा तो बता दिया

911
01:09:09,520 --> 01:09:13,800
अब मैं आपसे पूछ रहा हूं आपके

912
01:09:13,800 --> 01:09:18,400
अ ब्रह्मा विष्णु महेश जो है व अविनाशी है कि नहीं

913
01:09:18,400 --> 01:09:23,160
है नावान नावान

914
01:09:23,160 --> 01:09:27,480
अब ये बताइए कि जो प्राणी है भगवान

915
01:09:27,480 --> 01:09:31,520
सृष्टि की रचना कैसे करते हैं शुरू में आपके य सृष्टि रचना में

916
01:09:31,520 --> 01:09:35,600
बताया गया ना सृष्टि रचना कैसे होती है

917
01:09:35,600 --> 01:09:39,800
ऐसा है परमात्मा ने हमारे ने बोल दिया है कि ब्रह्मा विष्णु महेश

918
01:09:39,800 --> 01:09:43,960
भी आ जाएंगे ना तो संत रामपाल जी महाराज के चेले को डगम नहीं कर पाएंगे

919
01:09:43,960 --> 01:09:48,280
जो आप आके य सर्वानंद की तरह

920
01:09:48,280 --> 01:09:52,360
किताबों को रख कुछ और रहा

921
01:09:52,360 --> 01:09:56,640
मैं आपको बोल रहा हूं जाने इनको हटाओ हटाओ

922
01:09:56,640 --> 01:10:02,640
इनको हटाओ अब आप अब आप बात सुनना नहीं चाहते हो

923
01:10:03,080 --> 01:10:07,280
ना व्यक्ति क्रोध में आ चुके हैं भाई

924
01:10:07,280 --> 01:10:11,320
साहब देखिए क्रोध में आएंगे हम आपको ऊपर नहीं लेंगे आप तरीके

925
01:10:11,320 --> 01:10:16,120
से बात करेंगे आप अगर इस तरह से भविष्यवाणियां बताएंगे या

926
01:10:16,120 --> 01:10:21,360
यह जो गुरुरा कर के बात कर रहे हैं य सब मत करिए ऊपर आ जाइए स

927
01:10:21,360 --> 01:10:25,560
सम्मान कोई गलत थोड़ी बोल रहे है लेकिन आप थोड़ा आपका

928
01:10:25,560 --> 01:10:29,920
लजा बदल गया था आपका लहजा जो है बदल गया था हम अपने च

929
01:10:29,920 --> 01:10:33,920
हम अपने चैनल पर ये नहीं चाहते कि कोई अपशब्द हमारे बारे में आपके बारे में

930
01:10:33,920 --> 01:10:38,040
य रह जाए बोल भी नहीं रहे आपका

931
01:10:38,040 --> 01:10:42,080
लहजा बदल गया था ना भाई साहब जनता को दिख रहा रुक जाओ एक मिनट

932
01:10:42,080 --> 01:10:46,200
आपको कमेंट दिखाते इनका बोलने का ढंग बदला

933
01:10:46,200 --> 01:10:51,200
था या नहीं बदला था आप जरा कमेंट करके

934
01:10:51,200 --> 01:10:55,320
बताइए कमेंट करके बताइए इनका बोलने का ंग बदल गया था कि नहीं

935
01:10:55,320 --> 01:10:59,960
अभ ऐसा लग रहा था कि नहीं कि यह कुछ गलत बोलने वाले

936
01:10:59,960 --> 01:11:03,440
हैं यह

937
01:11:03,440 --> 01:11:07,640
देखो ठीक है और कोई बता दो यह देखो

938
01:11:07,640 --> 01:11:11,280
पढ़ो भैया

939
01:11:11,280 --> 01:11:14,680
पढ़ा बदला

940
01:11:14,680 --> 01:11:18,800
था और देखो ये जी पढ़ रहे हैं

941
01:11:18,800 --> 01:11:22,800
कि नहीं इसलिए हमने कहा कि देखो

942
01:11:22,800 --> 01:11:26,840
कोई भी गलत बात आप बोलो इससे पहले हम आपको ना पड़ेगा

943
01:11:26,840 --> 01:11:30,960
गलत बात मत बोलो तरीके से बात करो त्मक अब बात य आती

944
01:11:30,960 --> 01:11:36,480
है हम आप कहा बात बोले गलत बो हम यही

945
01:11:36,480 --> 01:11:40,760
बो देखो गुरु परमात्मा होता है गुरु पूर्ण ब्रम

946
01:11:40,760 --> 01:11:45,560
होता है मैं आपसे पूछ रहा हूं ब्रह्मा विष्णु

947
01:11:45,560 --> 01:11:48,400
ब्रह्मा विष्णु

948
01:11:48,400 --> 01:11:53,200
महेश आपको जो है आप उनको कहते हैं अविनाशी नहीं है

949
01:11:53,200 --> 01:11:57,560
वो नाशवान ब्रह्मा विष्णु अब जो परमेश्वर

950
01:11:57,560 --> 01:12:01,720
है वो सृष्टि की रचना कैसे करता है थोड़ा मुझे बताइए मुझे पता है वो कैसे

951
01:12:01,720 --> 01:12:05,880
करता है आपको पता है तो बता दीजिए नहीं तो मैं बताऊ आपके अनुसार कबीर ने

952
01:12:05,880 --> 01:12:06,380
सृष्टि

953
01:12:06,320 --> 01:12:10,360
की रचना कैसे की वो बताइए जब वो

954
01:12:10,360 --> 01:12:14,400
अकेला तक आते है ज्ञान गंगा पुस्तक आते है आप

955
01:12:14,400 --> 01:12:18,680
जो इतना पुस्तक है ज्ञान गंगा पुस्तक लीजिए उसम पूरा विस्तार

956
01:12:18,680 --> 01:12:22,880
से बताया हु आपको नहीं पता है हमको सब पता

957
01:12:22,880 --> 01:12:26,880
है आप ज्ञान पुस्तक लीजिए उस पढ आपको पूरा प्रमाण के

958
01:12:26,880 --> 01:12:31,480
साथ में आपको भा मैं इसलिए पूछ रहा हूं आपसे

959
01:12:31,480 --> 01:12:35,640
कि उसमें मेरी जानकारी में यह है कि कबीर जब अकेले

960
01:12:35,640 --> 01:12:39,640
थे तो उनके अंदर एक से दो होने की इच्छा आई

961
01:12:39,640 --> 01:12:43,640
ठीक है और इसी भावना से उन्होंने जो

962
01:12:43,640 --> 01:12:49,600
है जीवों को बना दिया ऐसा ही

963
01:12:49,600 --> 01:12:53,840
है ऐसा ही है ना हा तो टोटल

964
01:12:53,840 --> 01:12:57,880
कितने प्रकार के है एक तो परम तत्व हो गया

965
01:12:57,880 --> 01:13:02,200
कबीर 16 तत्व जैसे है 16 तत्व

966
01:13:02,200 --> 01:13:06,760
है 16 तत्व में से अविनाशी कौन-कौन सा तत्व

967
01:13:06,760 --> 01:13:10,960
है अविनाशी तो वही पूर्ण परमात्मा है बाकी

968
01:13:10,960 --> 01:13:15,680
अविनाशी जो सतलोक में है वो अविनाशी है बाकी यहां जितने भी सात

969
01:13:15,680 --> 01:13:19,760
संग ब्रह्मांड के जो है ब्रह्मांड के है जितने भी जीव है वो

970
01:13:19,760 --> 01:13:23,960
अविनाशी नहीं है क्यों जीव के लिए तो ये रामपाल जी ने बोला

971
01:13:23,960 --> 01:13:27,320
है कि वो अविनाशी है

972
01:13:27,320 --> 01:13:31,600
किनके लिए बो जीव के लिए यहां

973
01:13:31,600 --> 01:13:35,720
के जीव कोई अविनाशी नहीं है सब जी जीव कोई चार

974
01:13:35,720 --> 01:13:40,240
पा थोड़ी है जीव अविनाशी है उनके शरीर

975
01:13:40,240 --> 01:13:44,360
अविनाशी नहीं है शरीर अविनाशी नहीं है जीव अविनाशी है अब

976
01:13:44,360 --> 01:13:48,440
य जो ब्रह्मा विष्णु महेश है यह किसम आते हैं जीव में

977
01:13:48,440 --> 01:13:52,760
आते हैं या जीव से ऊपर में आते हैं या जीव से भी गते

978
01:13:52,760 --> 01:13:55,200
में आते हैं

979
01:13:55,200 --> 01:14:00,560
यह भी जीव में ही है जैसे अपन पैदा

980
01:14:00,560 --> 01:14:04,800
होते यानी कि जिस तरीके से जीव अविनाशी है वैसे ही ब्रह्मा विष्णु महेश

981
01:14:04,800 --> 01:14:09,480
भी अविनाशी है खाली शरीर ली शरीर व होता है

982
01:14:09,480 --> 01:14:13,600
शरीर का चेंज होता है अ शरीर च होता है मगर व त रूप से

983
01:14:13,600 --> 01:14:15,920
अना

984
01:14:15,920 --> 01:14:19,920
है शरीर चेंज होता है मगर तत्व रूप से वो अविनाशी है

985
01:14:19,920 --> 01:14:22,400
ब्रह्मा विष्णु

986
01:14:22,400 --> 01:14:25,920
महेश बोलो

987
01:14:25,920 --> 01:14:30,560
बताओ बताओ बोल के बताओ ब्रह्मा विष्णु महेश भी अविनाशी

988
01:14:30,560 --> 01:14:35,280
है ब्रह्मा विष्णु महेश य अविनाशी नहीं

989
01:14:35,280 --> 01:14:39,760
है यह भी

990
01:14:39,760 --> 01:14:44,080
सब नासन मेरे भाई अगर ब्रह्मा विष्णु महेश

991
01:14:44,080 --> 01:14:48,320
आपके अनुसार जीव है ब्रह्मा विष्णु महेश आपके अनुसार

992
01:14:48,320 --> 01:14:52,680
जीव है जीव तो

993
01:14:52,680 --> 01:14:56,760
जीव तो अविनाशी कहा है ना अरे

994
01:14:56,760 --> 01:15:01,240
देखो मैं आपको उदाहरण के तौर पर बताता हूं जैसे एक मिट्टी का घड़ा

995
01:15:01,240 --> 01:15:05,280
होता है वह तुरंत गिरते ही फूट जाता है उसी तरह अपने जितने भी

996
01:15:05,280 --> 01:15:09,640
देवी देवता है यह समझो स्टील है इनको भी जंग लगेगा यह भी मरेंगे

997
01:15:09,640 --> 01:15:14,040
लेकिन यह अभी नहीं मरेंगे हमको हम तो उनके ने

998
01:15:14,040 --> 01:15:18,240
आप पूछा कि शरीर नष्ट होते हैं ब्रह्मा विष्णु महेश

999
01:15:18,240 --> 01:15:22,760
तत्व से अविनाशी है यह पूछ रहा हूं मैं है कि नहीं है

1000
01:15:22,760 --> 01:15:27,040
उनके शरीर पूरे नष्ट हो जाते हैं व लाख पूछ रहा

1001
01:15:27,040 --> 01:15:31,560
तव से मैं पूछ रहा हूं तत्व से अविनाशी है कि नहीं

1002
01:15:31,560 --> 01:15:36,240
है तत्व से अना तो है ही ना व है

1003
01:15:36,240 --> 01:15:41,040
यानी ब्रह्मा विष्णु महेश भी अविनाशी

1004
01:15:41,040 --> 01:15:45,320
है अना नहीं है वो दिक्कत

1005
01:15:45,320 --> 01:15:49,560
है ना जन्म मृत तो है ही उनकी भी लेकिन

1006
01:15:49,560 --> 01:15:54,080
बहुत देर में होती है ना उन म आप

1007
01:15:54,080 --> 01:15:58,320
आपके जी ने बताया कि जीव अविनाशी

1008
01:15:58,320 --> 01:16:03,200
है ठीक है ये जीव अविनाशी है

1009
01:16:03,200 --> 01:16:07,320
हा तो ब्रह्मा विष्णु महे नहीं है ब्रह्मा विष्णु महेश

1010
01:16:07,320 --> 01:16:11,480
की भी उनकी भी आत्मा मरती थोड़ी है वो तो दूसरी योनी पकड़ लेती है जैसे अपन लोगों

1011
01:16:11,480 --> 01:16:15,480
की मरते हैं दूस मतलब ब्रह्मा विष्णु महेश भी तत्व से अविनाशी

1012
01:16:15,480 --> 01:16:19,720
है ना बोलो इस बात को तत्व

1013
01:16:19,720 --> 01:16:24,240
से ब्रह्मा विष्णु महेश भी अविनाशी है बोलो

1014
01:16:24,240 --> 01:16:28,440
बोलो हा तो भी है पूरा

1015
01:16:28,440 --> 01:16:33,400
बोलो तत्व से ब्रह्मा विष्णु महेश अविनाशी

1016
01:16:33,400 --> 01:16:39,400
है तत्व थोड़ी अविनाशी है

1017
01:16:39,480 --> 01:16:43,840
हा जो आत्मा है जो तत्व है व तो अविनाशी है ही

1018
01:16:43,840 --> 01:16:47,920
वो तो गधे के भी नहीं मरती आत्मा मैं आपसे य पूछ

1019
01:16:47,920 --> 01:16:52,280
रहा हूं आपसे पूछ रहा हूं तत्व से ब्रह्मा विष्णु महेश अविनाशी

1020
01:16:52,280 --> 01:16:55,520
है कि नहीं यह बोलो

1021
01:16:55,520 --> 01:16:59,640
तत्व से तो है जैसे अपन लोग भी तत्व से ही है तो एक बार आप कृपा

1022
01:16:59,640 --> 01:17:04,000
करके बोल दीजिए तत्व से ब्रह्मा विष्णु महेश अविनाशी है बोल

1023
01:17:04,000 --> 01:17:08,160
दीजिए बोलिए तो तत्व से तो अविनाशी

1024
01:17:08,160 --> 01:17:12,280
है ही ना जैसे अपन लोग त अ आपसे निवेदन कर रहा

1025
01:17:12,280 --> 01:17:16,720
हूं एक बार इस सत्य को पूरा बोल दीजिए की तत्व

1026
01:17:16,720 --> 01:17:21,040
से ब्रह्मा विष्णु महेश अविनाशी है वो कभी नहीं मरते

1027
01:17:21,040 --> 01:17:25,680
बोलिए सत्य बात है ना बोलिए

1028
01:17:25,680 --> 01:17:29,960
तत्व मतलब आत्मा नहीं मरती हा तत्व से ब्रह्मा

1029
01:17:29,960 --> 01:17:34,160
विष्णु महेश अविनाशी है उनका कभी अंत

1030
01:17:34,160 --> 01:17:37,400
नहीं

1031
01:17:37,400 --> 01:17:41,800
होता उनका तो अंत होगा यार त से मतलब

1032
01:17:41,800 --> 01:17:46,080
वो तो मर जाएंगे तो फिर दूसरे ब्रह्म महे आएंगे ना नहीं बोल

1033
01:17:46,080 --> 01:17:50,320
पाएंगे नहीं बोल पाएंगे जीव को बोल लेंगे मगर ब्रह्मा विष्णु

1034
01:17:50,320 --> 01:17:54,840
महेश को बोलने में दिक्कत आएगी अरे भाई वो भी मरेंगे

1035
01:17:54,840 --> 01:17:58,880
व भी मरेंगे तो दूसरे ब्रह्मा विष्णु महेश आएंगे ऐसा आपसे

1036
01:17:58,880 --> 01:18:02,880
भाई साब ये पूछ रहा हूं तव से ब्रह्मा विष्णु महेश

1037
01:18:02,880 --> 01:18:07,000
अविनाशी है कि नहीं यह पूछ रहा हूं

1038
01:18:07,000 --> 01:18:12,440
से तो वो भी है ब्रह्मा वो भी

1039
01:18:12,440 --> 01:18:17,280
है आप एक बार बोलो तत्व से ब्रह्मा विष्णु महेश

1040
01:18:17,280 --> 01:18:20,160
अविनाशी नहीं

1041
01:18:20,160 --> 01:18:26,160
है त्व ब्रह्मा वि मना नहीं

1042
01:18:27,160 --> 01:18:31,360
त से ब्रह्मा विष्णु महेश अविनाशी नहीं है

1043
01:18:31,360 --> 01:18:35,440
मैं रामपाल दास जी का शिष्य बोल रहा हूं

1044
01:18:35,440 --> 01:18:39,760
तत्व से ब्रह्मा विष्णु महेश अविनाशी नहीं

1045
01:18:39,760 --> 01:18:43,960
है आप तत्व किसको बोलते हो आत्मा को बोलते हो

1046
01:18:43,960 --> 01:18:48,400
हा बिल्कुल को बोलते हो

1047
01:18:48,400 --> 01:18:52,640
हा आप किसको बोलते हो तव वही

1048
01:18:52,640 --> 01:18:57,160
मैं समझ नहीं पा रहा था आत्मा तव को बोलते हो ना आप ये बोलो

1049
01:18:57,160 --> 01:19:01,240
मैं रामपाल दास जी का शिष्य सुनिए मैं रामपाल

1050
01:19:01,240 --> 01:19:05,240
दास जी का शिष्य यह बोल रहा हूं कि तत्व से

1051
01:19:05,240 --> 01:19:08,720
ब्रह्मा विष्णु महेश

1052
01:19:08,720 --> 01:19:12,800
अविनाशी है नाशवान नहीं

1053
01:19:12,800 --> 01:19:15,600
है

1054
01:19:15,600 --> 01:19:20,560
बोलो ब्रह्मा विष्णु महिष को छोड़ो हम सब भी आत्मा

1055
01:19:20,560 --> 01:19:24,800
अजर अमर है आत्मा कभी नहीं मरती है वो भी बोल लेना वो भी बोल लेना

1056
01:19:24,800 --> 01:19:29,480
आत्मा भी अरमर है आप वो भी बोल लेना मगर आप ये बोलो पहले

1057
01:19:29,480 --> 01:19:33,960
मैं रामपाल दास जी का मैं रामपाल

1058
01:19:33,960 --> 01:19:38,240
दास जी का शिष्य बोल रहा हूं कि तत्व से ब्रह्मा

1059
01:19:38,240 --> 01:19:44,240
विष्णु महेश अविनाशी है

1060
01:19:44,240 --> 01:19:47,400
बोलिए

1061
01:19:47,400 --> 01:19:51,480
बोलिए दिया अरे भाई एक बार ऐसे बोल दीजिए ना

1062
01:19:51,480 --> 01:19:55,760
कि मैं संत रामपाल दास जी का शिष्य आज

1063
01:19:55,760 --> 01:20:01,760
यह बोल रहा हूं कि तत्व से ब्रह्मा विष्णु महेश अविनाशी

1064
01:20:03,240 --> 01:20:07,480
है तत्व से तो व भी अविनाशी है ब्रह्मा विष्णु महेश तो अविनाशी

1065
01:20:07,480 --> 01:20:11,600
है ही हा तो ऐसे पूरा बोल दीजिए जिससे की लोगों

1066
01:20:11,600 --> 01:20:15,680
को पता चले कौन बोल रहा है मैं संत रामपाल दास जी का

1067
01:20:15,680 --> 01:20:20,240
शिष्य आज यह बोल रहा हूं कि तत्व से ब्रह्मा विष्णु महेश

1068
01:20:20,240 --> 01:20:26,240
अविनाशी है बोलिए

1069
01:20:26,400 --> 01:20:30,400
त् से जितने ब्रह्मा विष्णु महेश अविनाशी है भाई साहब

1070
01:20:30,400 --> 01:20:34,520
पीछे का तो बोलिए मैं रामपाल दास जी का शिष्य आज

1071
01:20:34,520 --> 01:20:38,800
ये बोल रहा हूं कि तत्व से ब्रह्मा विष्णु महेश अविनाशी

1072
01:20:38,800 --> 01:20:42,880
है बोलिए आपको आपको शॉर्टकट में बता दिया है

1073
01:20:42,880 --> 01:20:46,920
समझने वाले समझ जाएंगे नहीं नहीं आपको यह

1074
01:20:46,920 --> 01:20:52,800
सत्य जो है आप बोलिए तब हम आगे

1075
01:20:52,800 --> 01:20:56,800
बढ़ेंगे अगर ये बात सत्य है तो बोलने में घबराहट कैसी

1076
01:20:56,800 --> 01:21:01,640
अपनी पहचान बताइए और बोल दीजिए

1077
01:21:01,640 --> 01:21:06,640
मैं तो बता रहा हूं ना जितने भी ब्रह्मांड में जीव है सब नाशवान

1078
01:21:06,640 --> 01:21:10,640
है आज मैं बोल रहा हूं मैं बोल रहा

1079
01:21:10,640 --> 01:21:15,000
हूं आज मैं संत रामपाल दास जी का शिष्य बोल

1080
01:21:15,000 --> 01:21:21,000
आज यह बता रहा हूं कि तत्व से ब्रह्मा विष्णु महेश अविनाशी है

1081
01:21:26,000 --> 01:21:30,000
तत्व से जितने भी आत्माएं हैं इस काल लोक में

1082
01:21:30,000 --> 01:21:34,840
सब अविनाश भाई साहब आपको ब्रह्मा विष्णु महेश आप यह बताइए

1083
01:21:34,840 --> 01:21:38,920
आपकी जो किताबे है उसमें क्या छपा रहता है बार बार बार बार य बातें

1084
01:21:38,920 --> 01:21:43,000
बोली जाती है क्या कि जी जीव जो है जीव का शरीर मरता है

1085
01:21:43,000 --> 01:21:47,080
ये होता है व जीव के बारे में बात होती है ये बात होती ब्रह्मा विष्णु महेश नाशवान

1086
01:21:47,080 --> 01:21:51,120
नाशवान नाशवान तो आज ब्रह्मा विष्णु महेश की जो सच्चाई है

1087
01:21:51,120 --> 01:21:55,320
वो आप बोलिए कि मैं संत रामपाल दस जी का शिष्य

1088
01:21:55,320 --> 01:21:59,720
आज ये बता रहा हूं कि ब्रह्मा विष्णु महेश अविनाशी

1089
01:21:59,720 --> 01:22:04,000
है यह बोलिए ना और फिर आपको जो बोलना है वो भी बोलिए

1090
01:22:04,000 --> 01:22:08,040
कोई दिक्कत नहीं ये मोटी मोटी लाइन है इसको बोल दीजिए उसके बाद अपना जो

1091
01:22:08,040 --> 01:22:12,040
बोलना है बोलिए मैं सं

1092
01:22:12,040 --> 01:22:16,200
रामपाल जी महाराज का जो शि बोल रहा हूं जितने भी ब्रह्मा

1093
01:22:16,200 --> 01:22:20,800
विष्णु महे के आत्माएं हैं वो अविनाशी आत्माएं अविनाशी

1094
01:22:20,800 --> 01:22:24,920
है शरीर मरते हैं उनके मैं आपसे पूछ रहा हूं आत्मा को तव

1095
01:22:24,920 --> 01:22:29,280
नहीं कहते क्या आप आत्मा को ही तत्व बोलते

1096
01:22:29,280 --> 01:22:33,520
तो आप बोलिए कि मैं संत रामपाल दास जी का शिष्य

1097
01:22:33,520 --> 01:22:37,600
आज य बोल रहा हूं कि ब तत्व से ब्रह्मा विष्णु महेश

1098
01:22:37,600 --> 01:22:43,600
अविनाशी है

1099
01:22:44,000 --> 01:22:48,720
बोलिए मैं संत रामपाल जी महाराज के बोल रहा

1100
01:22:48,720 --> 01:22:53,440
हूं ब्रह्मा विष्णु महेश के जो आत्मा तत्व है वो

1101
01:22:53,440 --> 01:22:57,840
अविनाशी हां ठीक है चलो बहुत बढ़िया

1102
01:22:57,840 --> 01:23:02,360
चलो अब मैं आपसे बोल रहा हूं अब मैं आपसे पूछ रहा हूं

1103
01:23:02,360 --> 01:23:06,600
आपने मान लिया कि तत्व से ब्रह्मा विष्णु महेश का नाश नहीं

1104
01:23:06,600 --> 01:23:10,840
होता अब मैं आपसे पूछ रहा हूं कि कबीर इसलिए

1105
01:23:10,840 --> 01:23:15,000
श्रेष्ठ है क्योंकि ब्रह्मा विष्णु महेश का तो शरीर नाशवान है

1106
01:23:15,000 --> 01:23:20,920
मगर कबीर का शरीर नाशवान नहीं

1107
01:23:20,920 --> 01:23:25,240
है हेलो हेलो उनका शर नावान

1108
01:23:25,240 --> 01:23:29,320
नहीं हा अच्छा यह बताइए वो जैसे वहा

1109
01:23:29,320 --> 01:23:33,400
सतलोक में रहते वैसे ही आते हैं ना नीचे उसी शरीर के साथ आते हैं शरीर

1110
01:23:33,400 --> 01:23:37,560
बदल के आते हैं व तो बहुत

1111
01:23:37,560 --> 01:23:41,600
कम अपने जैसे चर्म दृष्टि उनको देख सके हिब

1112
01:23:41,600 --> 01:23:45,720
से यहा पर आते हैं सतलोक में उनका स्वरूप है कने का

1113
01:23:45,720 --> 01:23:49,960
मलब है शरीर ही रहता है य माया रूप में आते हैं

1114
01:23:49,960 --> 01:23:54,160
या वास्तविक रूप में आते हैं जो हमने उनका शरीर

1115
01:23:54,160 --> 01:23:58,600
दे व असली है या नकली

1116
01:23:58,600 --> 01:24:03,000
है अभी जो वर्तमान में पूछ रहे हो

1117
01:24:03,000 --> 01:24:07,200
मैं कबीर जी की बात कर रहा हूं रामपाल जी की नहीं हमारे

1118
01:24:07,200 --> 01:24:11,320
लिए तो वही परमात्मा है हम कबीर जी जाते कबीर

1119
01:24:11,320 --> 01:24:15,320
जी जिस शरीर में आए थे वह सत्य है या असत्य है

1120
01:24:15,320 --> 01:24:19,680
व झूठा शरीर है कि असली शरीर है कबीर

1121
01:24:19,680 --> 01:24:24,400
जी को हमने तो देखा नहीं था रामपाल जी महाराज

1122
01:24:24,400 --> 01:24:28,960
शर दे फोटो आप जो फोटो देखी

1123
01:24:28,960 --> 01:24:33,120
है फोटो तो नकली है उनकी कोई फोटो काल्पनिक सब बनाए

1124
01:24:33,120 --> 01:24:37,320
हुए हैं कोई सर प मु मतलब आपने आपको

1125
01:24:37,320 --> 01:24:42,040
नहीं पता कि कबीर जी कैसे दिखते थे साकार ईश्वर का आपको नहीं

1126
01:24:42,040 --> 01:24:46,080
पता नहीं दिखते थे तो मनुष्य शरीर के जैसे ही थे

1127
01:24:46,080 --> 01:24:50,320
व तो काल्पनिक फोटो बनाए हुए य यानी वो जब यहां नीचे

1128
01:24:50,320 --> 01:24:55,160
आते हैं तो अपने वास्तविक स्वरूप में ही आते हैं वास्तविक

1129
01:24:55,160 --> 01:24:59,200
रूप में नहीं आते हैं वो अपना जिस हिसाब

1130
01:24:59,200 --> 01:25:03,280
से इंसान उनको देख सके एकदम नॉर्मल व अपने वो

1131
01:25:03,280 --> 01:25:07,440
अपने तेज को कम कर लेते हैं वो ठीक है तेज को कम कर लेते हैं मगर ऐसा

1132
01:25:07,440 --> 01:25:11,760
तो नहीं है दूसरा स धारण करते हो नहीं

1133
01:25:11,760 --> 01:25:13,680
दूसरा शरीर दूसरा

1134
01:25:13,680 --> 01:25:17,680
शरीर तो ार नहीं करते ना दूसरा अरे वो

1135
01:25:17,680 --> 01:25:22,160
एक से अनेक भी हो सकते हैं एक भी रह सकते हैं

1136
01:25:22,160 --> 01:25:26,960
आपसे भाई साब पूछ रहा हूं जिस शरीर में व वहां पर बैठे

1137
01:25:26,960 --> 01:25:31,160
हैं वोह उसी शरीर में नीचे आते हैं या शरीर बदल के आते

1138
01:25:31,160 --> 01:25:35,320
हैं बस इतना बता दी शरीर बदल के आएंगे क्योंकि

1139
01:25:35,320 --> 01:25:39,400
अपन तेज को कम करके आएंगे शरीर तो उनका वही रहेगा लेकिन तेज को

1140
01:25:39,400 --> 01:25:43,800
कम करके आए शरीर बदल के नहीं आएंगे ना

1141
01:25:43,800 --> 01:25:47,960
नहीं नहीं शरीर बदल के नहीं आएंगे पक्का

1142
01:25:47,960 --> 01:25:52,560
आपने तेज तेज को कम करके यहां पर आ जाएंगे लेकिन शरीर बदल

1143
01:25:52,560 --> 01:25:57,280
नहीं शरीर बदल नहीं आएंगे ये पक्का है

1144
01:25:57,280 --> 01:26:01,920
ना शरीर शरीर वही है जो सतलोक आश्रम में सतलोक

1145
01:26:01,920 --> 01:26:05,960
वो शरीर वही है जो सतलोक में है बस तेज को कम

1146
01:26:05,960 --> 01:26:10,360
कर लिया नीचे आ गए शरीर चेंज नहीं किया ठीक है

1147
01:26:10,360 --> 01:26:14,600
अब ये बताइए कि वो नीचे आ गए तो जो नीचे कबीर

1148
01:26:14,600 --> 01:26:19,280
आए हैं जो ये कबीर हमें दिख रहे हैं ये सर्वशक्तिमान

1149
01:26:19,280 --> 01:26:21,720
है या

1150
01:26:21,720 --> 01:26:26,880
नहीं हम सर्वशक्तिमान

1151
01:26:26,880 --> 01:26:30,880
सर्वशक्तिमान सक्तिमान यानी कि ये सब कुछ कर

1152
01:26:30,880 --> 01:26:34,640
सकते

1153
01:26:34,640 --> 01:26:39,000
हैं हां कर सकते हैं करते भी है इनका शरीर

1154
01:26:39,000 --> 01:26:44,080
इनका शरीर इनका शरीर शाश्वत है

1155
01:26:44,080 --> 01:26:48,360
ना शाश्वत का अर्थ पता है आपको क्या होता है

1156
01:26:48,360 --> 01:26:52,480
हां कभी नाश में ना आने वाला श कभी नाश में ना

1157
01:26:52,480 --> 01:26:57,920
आने वाला कभी बदलने ना वाला [संगीत]

1158
01:26:57,920 --> 01:27:02,880
हां जैसा शरीर है वैसा ही रहेगा वैसे ही

1159
01:27:02,880 --> 01:27:07,040
हा अब यह बताइए वो शाश्वत

1160
01:27:07,040 --> 01:27:11,120
शरीर में नीचे आ गए हैं तेज को कम करके थोड़ा फोकस उन्होंने कम

1161
01:27:11,120 --> 01:27:15,240
कर दिया शाश्वत शरीर में वो नीचे आ गए अब हमें आप यह

1162
01:27:15,240 --> 01:27:21,240
बात बताइए क्या वोह हाथी बन सकते हैं या

1163
01:27:21,720 --> 01:27:25,880
नहीं वो उनकी महिमा व अब हाथी बने

1164
01:27:25,880 --> 01:27:30,600
या कुछ और बने सर्वशक्तिमान है कि नहीं हां सर्वशक्तिमान

1165
01:27:30,600 --> 01:27:34,760
का मतलब ही यही होता है कोई सा भी रूप धारण कर सकते हैं कोई सा भी

1166
01:27:34,760 --> 01:27:39,280
कार्य कर सते आप तो कह रहे हो उनका शरीर ऐसा है जो बदल नहीं

1167
01:27:39,280 --> 01:27:43,360
सकता या तो वो रूप धारण नहीं कर सकते या फिर उनका

1168
01:27:43,360 --> 01:27:47,360
शरीर बदलने वाला हो गया नाशवान हो गया अब आप शरीर का पूछ

1169
01:27:47,360 --> 01:27:52,080
रहे है तो रूप बदलने का पूछ रहे हो अब उदाहरण

1170
01:27:52,080 --> 01:27:56,080
जब आ जब वो आती बनेंगे जब वो हाथी बनेंगे तो

1171
01:27:56,080 --> 01:28:00,160
मेकअप करेंगे क्या ओरिजनल हाथी

1172
01:28:00,160 --> 01:28:04,360
वाला शरीर में शरीर बना सकते हैं अपने शरीर को कि

1173
01:28:04,360 --> 01:28:09,040
नहीं वो सब कुछ कर सकते हैं जैसे अपने देवता हैर

1174
01:28:09,040 --> 01:28:13,240
बदलने वाला हो गया ना फिर उनका शरीर बदलने वाला स

1175
01:28:13,240 --> 01:28:17,440
हो गया अरे ऐसा नहीं है आप तो गलत पूछ

1176
01:28:17,440 --> 01:28:21,480
रहे हो क्यों पूछ रहा हू गलत अब अपने रूप में

1177
01:28:21,480 --> 01:28:25,600
भी रह सकते हैं कुछ भी सवन मतलब होता है अपने भी रूप में र

1178
01:28:25,600 --> 01:28:29,640
सकते हैं दूसरे का रूप भी धारण कर सकते हैं अगर वो रूप धारण कर

1179
01:28:29,640 --> 01:28:33,960
सकते हैं दूसरा तो उनका जो शरीर जिसे आप शाश्वत कह रहे हो व शाश्वत

1180
01:28:33,960 --> 01:28:36,760
नहीं रहा क्योंकि वो बदल सकता है आप कह रहे

1181
01:28:36,760 --> 01:28:40,760
हो शाश्वत भी है आपको समझाना

1182
01:28:40,760 --> 01:28:44,920
बहुत मुश्किल है परमात्मा ही आपको समझा सकते हैं चलिए ठीक

1183
01:28:44,920 --> 01:28:50,920
है आने के लिए बहुत बहुत आभार आपसे बात करके अच्छा लगा

1184
01:28:56,440 --> 01:28:59,520
नीरज शर्मा

1185
01:28:59,520 --> 01:29:05,520
जी विकास मिश्र जी को हटा दीजिए जी

1186
01:29:06,200 --> 01:29:10,360
जी जय श्री राम हेलो

1187
01:29:10,360 --> 01:29:14,400
जी जय श्री राम व क्लियर है हां

1188
01:29:14,400 --> 01:29:18,600
जी क्लियर है अब देखिए हमने अभी तक क्याक

1189
01:29:18,600 --> 01:29:22,800
किया एक सराइज कर दू नीरा जी को एक मिनट में ले लीजिएगा हमने

1190
01:29:22,800 --> 01:29:28,800
पहले य सिद्ध किया अच्छा नेट अटक रहा है तो मैं लीव करके दोबारा आता हूं

1191
01:29:58,200 --> 01:30:02,200
अब मैं एक सराइज कर देता हूं मैंने अभी क्या क्या बातें की है हम भी

1192
01:30:02,200 --> 01:30:06,280
यही कहते हैं कि लीला पूर्वक ब्रह्मा विष्णु महेश शरीर धारण करते

1193
01:30:06,280 --> 01:30:10,280
हैं और शरीर छोड़ते भी मगर तात्विक रूप से उनका नाश

1194
01:30:10,280 --> 01:30:14,560
कभी नहीं होता है अब इनमें और हम में अंतर क्या रहा यह जो लीला

1195
01:30:14,560 --> 01:30:18,640
करते हैं जो शरीर धारण करते हैं उसको छोड़ना और

1196
01:30:18,640 --> 01:30:23,360
उसमें रहना वो उनकी इच्छा से होता है उनको पता होता है

1197
01:30:23,360 --> 01:30:27,680
कि हम अजर अमर है मगर जो बद्ध जीव है अविद्या

1198
01:30:27,680 --> 01:30:32,120
के कारण अज्ञानता के कारण उनमें और इनमें यही अंतर है कि वह अविद्या

1199
01:30:32,120 --> 01:30:36,280
से ग्रसित है उनको यह सब नहीं पता है उनको लगता है कि हम मर जाएंगे

1200
01:30:36,280 --> 01:30:40,360
इसीलिए भगवान उनको बताते हैं कि नैनम छिंदंति शस्त्राणि नैनम धरति

1201
01:30:40,360 --> 01:30:44,600
पाव का न चन क्लेप न शोष मारुत अब

1202
01:30:44,600 --> 01:30:49,320
तत्व से ब्रह्मा विष्णु महेश कभी भी नष्ट नहीं होते

1203
01:30:49,320 --> 01:30:53,680
ठीक है मगर इनका कहना है कि कबीर इसलिए श्रेष्ठ

1204
01:30:53,680 --> 01:30:57,800
है क्योंकि उनका शरीर कभी नष्ट नहीं होता अब बात ये आती है कि

1205
01:30:57,800 --> 01:31:01,960
अगर उनका शरीर कभी नष्ट नहीं होता और जिस शरीर में वो नीचे

1206
01:31:01,960 --> 01:31:06,560
दिखाई दिए हैं वही शरीर ऊपर सतलोक में है तो फिर ये बाधित ईश्वर है

1207
01:31:06,560 --> 01:31:10,560
ये सब कुछ ना कर सकने वाला ईश्वर है यह रूप नहीं बदल पाएगा अपने हाथ

1208
01:31:10,560 --> 01:31:13,200
को लंबा नहीं कर पाएगा अपना साइज नहीं बढ़ा सकता छोटा

1209
01:31:13,200 --> 01:31:17,360
नहीं कर सकता इतनी सारी बाधाएं लगेंगी इसके ऊपर के पूछो नहीं क्योंकि

1210
01:31:17,360 --> 01:31:21,560
वो जड़ वो बिल्कुल शाश्वत शरीर है उसमें कोई बदलाव नहीं होना

1211
01:31:21,560 --> 01:31:26,200
चाहिए ठीक है तो ब्रह्मा विष्णु महेश

1212
01:31:26,200 --> 01:31:32,200
को ये हमारा नेट अटक रहा है अब बताइए क्या

1213
01:31:38,360 --> 01:31:44,360
करें एक बार फिर से जाकर आते हैं

1214
01:32:41,560 --> 01:32:42,060
अब

1215
01:32:41,800 --> 01:32:47,800
आ रहा है नेट ठीक

1216
01:32:48,640 --> 01:32:52,760
से तो मैं समरा कर रहा था

1217
01:32:52,760 --> 01:32:55,520
कि

1218
01:32:55,520 --> 01:33:00,040
सबसे पहले क्या है कि शास्त्रों में अपने हिसाब से मनमुक

1219
01:33:00,040 --> 01:33:04,080
रूप से चयन करना इसका कहीं नहीं बल्कि विरोध किया गया है

1220
01:33:04,080 --> 01:33:08,120
कहीं इसका प्रमाण नहीं है कि ऐसा करेंगे अगर ऐसा कर रहे हैं तो अपने मन से

1221
01:33:08,120 --> 01:33:12,320
कर रहे हैं और अगर कर रहे हैं तो फिर इनकी जो चीजें है वो शास्त्र सम्मत

1222
01:33:12,320 --> 01:33:16,440
सिद्ध नहीं होती वो रामपाल सम्मत हो सकती है या इन्होंने अपना कोई ग्रंथ

1223
01:33:16,440 --> 01:33:20,440
लिखा हो वो सम्मत हो सकती है मगर शास्त्र य जो वेद आदि शास्त्र

1224
01:33:20,440 --> 01:33:24,760
है गीता वेद और पुराण इनके सम्मत नहीं

1225
01:33:24,760 --> 01:33:27,640
दूसरी बात

1226
01:33:27,640 --> 01:33:31,920
कि हमने यह सिद्ध किया कि ये जो बोला जाता

1227
01:33:31,920 --> 01:33:36,000
है कि ब्रह्मा विष्णु महेश भी अविनाशी नहीं है तत्ता वो अविनाशी

1228
01:33:36,000 --> 01:33:40,280
यही बात हम भी कहते लीला पूर्वक शरीर धारण करते छोड़ते मगर

1229
01:33:40,280 --> 01:33:44,640
इनका कहना है कि कबीर जो है वह जो है

1230
01:33:44,640 --> 01:33:48,640
उसका शरीर नष्ट नहीं होता जब शरीर नष्ट नहीं होता और वो उसको यहां

1231
01:33:48,640 --> 01:33:52,880
ले आते हैं या तो वो ऐसा शरीर हो जिसको हम कभी देख ना सके जीते जी

1232
01:33:52,880 --> 01:33:57,000
तो भी वही बात हो गई निर्गुण निराकार वाली जो हमारे

1233
01:33:57,000 --> 01:34:01,040
कर्मेंद्रियों का ज्ञानेंद्रियों का विषय ना हो व्यवहार में ना आ सकने वाला रूप

1234
01:34:01,040 --> 01:34:05,360
ईश्वर का तो वो ठीक है मगर ये तो वहां साकार बैठा

1235
01:34:05,360 --> 01:34:09,840
साकार ही नीचे आ रहा है साकार नीचे आ रहा है शाश्वत है तो यह तो ब्रह्मा

1236
01:34:09,840 --> 01:34:14,360
विष्णु महेश से भी गया बता ईश्वर हो गया क्योंकि इसका शाश्वत शरीर है उसको बदल नहीं सकता

1237
01:34:14,360 --> 01:34:18,800
इसका हाथ लंबा नहीं हो सकता कंधे चौड़े नहीं हो सकते अपने

1238
01:34:18,800 --> 01:34:23,000
शरीर को ये हनुमान जी की तरह बड़ा नहीं कर सकता छोटा नहीं कर सकता जैसा वहां है वैसा

1239
01:34:23,000 --> 01:34:27,720
ही रहेगा तो शाश्वत कहां रहा शरीर बदल रहा है

1240
01:34:27,720 --> 01:34:32,520
और अगर बदलने वाले कोय शाश्वत ना माने

1241
01:34:32,520 --> 01:34:36,640
तो मान लीजिए कि मानव देह में दिख रहा है कबीर और

1242
01:34:36,640 --> 01:34:41,080
उसके बाद य हाथी बन गए कबीर अभी मानव जैसे दिख रहे हैं हाथी

1243
01:34:41,080 --> 01:34:45,320
बन गए उतनी देर के लिए देह नाश हो गई इसका अस्तित्व नहीं

1244
01:34:45,320 --> 01:34:49,440
रहा अगर ये बदलने वाले को वो नहीं मानते

1245
01:34:49,440 --> 01:34:54,400
तो अगर बदल भी रहा है तो उतनी देर इसका अस्तित्व नहीं रहा जितनी देर हाथ फॉर्म में आया

1246
01:34:54,400 --> 01:34:58,400
तो यह तो ब्रह्मा विष्णु महेश से भी ज्यादा गया बीता ईश्वर

1247
01:34:58,400 --> 01:35:02,600
हो गया कबीर के रूप में क्योंकि वह बहुत सारे

1248
01:35:02,600 --> 01:35:06,920
काम है जो नहीं कर सकता संसार के मगर ब्रह्मा

1249
01:35:06,920 --> 01:35:11,840
विष्णु महेश कुछ भी कर सकते हैं अवाद

1250
01:35:11,840 --> 01:35:12,340
जितने

1251
01:35:12,200 --> 01:35:16,360
कहो उतने शरीर बदल दे फटाफट फटाफट

1252
01:35:16,360 --> 01:35:21,400
यह है ईश्वर का किसी भी नियम के नीचे ना आ सकने वाला

1253
01:35:21,400 --> 01:35:24,960
अवाद ईश्वर

1254
01:35:24,960 --> 01:35:29,080
ऐसा ही जो जैसा यहां कबीर है ऐसा ही ईश्वर स्कोन का भी

1255
01:35:29,080 --> 01:35:33,080
है सेम ऐसा ही ईश्वर स्कोन का

1256
01:35:33,080 --> 01:35:37,440
जैसे वहां बैठे हैं वैसे ही व नीचे आएंगे बस व नाम कृष्ण है

1257
01:35:37,440 --> 01:35:41,960
इतना हमारे ऊपर उन्होंने जो है वोह

1258
01:35:41,960 --> 01:35:44,200
कर

1259
01:35:44,200 --> 01:35:48,480
दिया जो है क्या कहते हैं उसको आपका

1260
01:35:48,480 --> 01:35:53,760
महान वो शब्द आ नहीं रहा रबली

1261
01:35:53,760 --> 01:35:58,160
कृतज्ञ हो गए हम उन्होंने हमें जो है दया कर दी हमारे ऊपर

1262
01:35:58,160 --> 01:36:02,280
कम से कम नाम नहीं बदला उनका बाकी वह क्वालिटी

1263
01:36:02,280 --> 01:36:06,520
वाइज वही है हां जी कौन है

1264
01:36:06,520 --> 01:36:12,520
नीरज शर्मा जी आ

1265
01:36:12,550 --> 01:36:14,960
[संगीत]

1266
01:36:14,960 --> 01:36:19,120
जाइए आपकी जो पिक्चर

1267
01:36:19,120 --> 01:36:23,760
है वो बहुत रुक रुक के आ रही है

1268
01:36:23,760 --> 01:36:28,120
इंटरनेट का प्रॉब्लम है तो इंटरनेट

1269
01:36:28,120 --> 01:36:34,120
जहां पर हो वहां से आइए

1270
01:36:41,160 --> 01:36:47,160
आप आप दोबारा आइए जब इंटरनेट में

1271
01:36:47,720 --> 01:36:51,760
हो कोई और है जो चेहरे के साथ आ रहे हैं राज शुक्ल

1272
01:36:51,760 --> 01:36:56,040
जी और एक तो वही नहीं दिखा अपना चेहरा किक फ्रॉम स्टूडियो कर देते हैं सात्विक

1273
01:36:56,040 --> 01:37:02,040
नाम है

1274
01:37:07,520 --> 01:37:11,720
इनका कहां गए भाई वेदों में प्रमाण है कभी कबीर भगवान

1275
01:37:11,720 --> 01:37:17,000
है सारा निकल गया निकल गई सारी

1276
01:37:17,000 --> 01:37:20,920
एकड़ी यही जि आले आए

1277
01:37:20,920 --> 01:37:26,920
थे गब्बर के कैर से आजादी

1278
01:37:46,040 --> 01:37:50,080
लाने देखा इसको कहते हैं

1279
01:37:50,080 --> 01:37:54,400
ज्यादा शास्त्रों की बात नहीं करके चीजें बिल्कुल साफ हो

1280
01:37:54,400 --> 01:37:58,840
गई ब्रह्मा विष्णु महेश अविनाशी नहीं

1281
01:37:58,840 --> 01:38:03,160
है यह लोग बोलते रहते दिन भर आज

1282
01:38:03,160 --> 01:38:07,360
बोला ब्रह्मा विष्णु महेश भी अविनाशी है इन्हीं के

1283
01:38:07,360 --> 01:38:13,360
अनुसार बुलवा

1284
01:38:13,720 --> 01:38:17,960
लिया कहां है

1285
01:38:17,960 --> 01:38:23,560
भाई जेल धाम वाले लोग कहां है

1286
01:38:23,560 --> 01:38:28,200
जिनका तीर्थ जेल धाम है वह कहां है वोह लोग आए ऊपर

1287
01:38:28,200 --> 01:38:32,240
आप ही के लोगों ने बताया वो जेल धाम है एक अमित दास जी

1288
01:38:32,240 --> 01:38:35,040
आए थे वो बोले

1289
01:38:35,040 --> 01:38:39,080
थे जेल धाम वाले लोग ऊपर आए देखिए आज कितनी अच्छे

1290
01:38:39,080 --> 01:38:43,680
से बात हुई कोई हुआ क्या क्योंकि व्यक्ति

1291
01:38:43,680 --> 01:38:47,720
ने कट टू कट बात की अगर थोड़ा बहुत इधर उधर हुआ भी तो समझाने पर

1292
01:38:47,720 --> 01:38:51,720
आ गए विषय पर ईश्वर लीला

1293
01:38:51,720 --> 01:38:56,160
क्यों करता है ईश्वर सृष्टि क्यों बनाता है

1294
01:38:56,160 --> 01:39:01,520
यह उसका स्वरूप भूत लक्षण

1295
01:39:01,520 --> 01:39:05,600
है सृष्टि बनाना लीला करना उसका सब स्वरूप

1296
01:39:05,600 --> 01:39:10,120
भूत लक्षण है ईश्वर के लिए कुछ भी आवश्यक

1297
01:39:10,120 --> 01:39:12,760
नहीं

1298
01:39:12,760 --> 01:39:18,760
है क्या जो कबीर जिसको आप मानते

1299
01:39:21,440 --> 01:39:26,160
हैं जिसको आप कबीर मानते हैं

1300
01:39:26,160 --> 01:39:30,320
वो जब सृष्टि बनाता है तो उसको

1301
01:39:30,320 --> 01:39:34,600
दिक्कत होती है कोई परेशानी होती इसलिए सृष्टि

1302
01:39:34,600 --> 01:39:39,480
बनाता है क्या कमी होती किसी चीज की नहीं

1303
01:39:39,480 --> 01:39:43,680
व आपके अनुसार भी वह उसका स्वरूप भूत लक्षण है

1304
01:39:43,680 --> 01:39:48,600
वह ईश्वर ईश्वर इसीलिए है क्योंकि वह ऐसा करता है

1305
01:39:48,600 --> 01:39:53,560
अगर हम यह कह देंगे कि वो क्यों बनाता है तो उसका ईश्वर होना ही सिद्ध नहीं होगा

1306
01:39:53,560 --> 01:39:59,560
फिर हमारा प्रश्न गलत हो जाएगा कि ईश्वर लीला क्यों करता है ईश्वर सृष्टि क्यों बनाता

1307
01:40:00,400 --> 01:40:05,480
है पहले ईश्वर तो सिद्ध करो उसे बिना सृष्टि बनाए

1308
01:40:05,480 --> 01:40:11,480
बिना सृष्टि बनाए ईश्वर को ईश्वर सिद्ध

1309
01:40:17,840 --> 01:40:21,880
करो हां जी नीरज जी अब आपका ठीक

1310
01:40:21,880 --> 01:40:25,310
आ रहा है आपका

1311
01:40:25,310 --> 01:40:29,720
[संगीत] नाम तो स्क्रीन पर आ ही रहा होगा

1312
01:40:29,720 --> 01:40:33,880
सर नीर शर्मा जी मैं

1313
01:40:33,880 --> 01:40:39,880
संत रामपाल जी महाराज का शिष्य हूं

1314
01:40:40,040 --> 01:40:44,040
अच्छा जी आप ही के पास से कानपुर से आप

1315
01:40:44,040 --> 01:40:48,640
लखनऊ से

1316
01:40:48,640 --> 01:40:50,840
हैं

1317
01:40:50,840 --> 01:40:56,480
हां तो आप तो यही आ जाते चर्चा होती लखनऊ

1318
01:40:56,480 --> 01:40:57,480
में

1319
01:40:57,480 --> 01:41:02,040
मैंने कल भी आपकी एक डिबेट सुनी थी जिस सं

1320
01:41:02,040 --> 01:41:06,040
संत रामपाल जी महाराज के शिष्य से आप सवाल पूछ रहे थे कि

1321
01:41:06,040 --> 01:41:10,280
क्या गीता को आप पूर्ण तरह से पूर्णत सत्य मानते

1322
01:41:10,280 --> 01:41:15,280
हैं वेद को आप पूर्णत सत्य मानते हैं प्रमाण रूप में या

1323
01:41:15,280 --> 01:41:20,120
नहीं अगर उसकी कुछ बातों को आप सत्य मानते हैं

1324
01:41:20,120 --> 01:41:25,080
तो फिर वह प्रमाण कैसे तो शिवांश

1325
01:41:25,080 --> 01:41:29,080
भाई संत रामपाल जी महाराज को कोई जरूरत नहीं थी वेद और

1326
01:41:29,080 --> 01:41:33,160
गीता को खोलने की या 18 पुराणों को खोलने

1327
01:41:33,160 --> 01:41:37,440
के मैं इसको चालू करने से पहले आपसे पहले

1328
01:41:37,440 --> 01:41:41,560
परमा प्रमाण की परिभाषा पूछ रहा हूं

1329
01:41:41,560 --> 01:41:45,600
प्रमाण का अर्थ क्या है प्रमाण का अर्थ जिससे

1330
01:41:45,600 --> 01:41:49,680
सिद्ध किया जाए जिसे ये सिद्ध कर दिया जाए

1331
01:41:49,680 --> 01:41:53,960
प्रमाण का अर्थ य है अगर हम किसी चीज को प्रमाण मानते हैं तो तो उसको

1332
01:41:53,960 --> 01:41:59,960
हम कहीं पर भी उस पर डाउट नहीं कर सकते उसकी सारी चीजें हमारे लिए सत्य

1333
01:42:00,200 --> 01:42:04,200
है आपके लिए संत रामपाल की जो वाणी है वो प्रमाण है

1334
01:42:04,200 --> 01:42:08,360
कि नहीं बिल्कुल वाणी उनकी प्रमाण है एक एक वाणी प्रमाण

1335
01:42:08,360 --> 01:42:12,480
प्रमाण है अब क्या हम उसम बुद्धि रख सकते हैं क्या इसकी भी कोई बात गलत हो सकती

1336
01:42:12,480 --> 01:42:16,760
है ना मानने योग हो सकती है नहीं हो सकती तो ऐसी

1337
01:42:16,760 --> 01:42:20,920
बुद्धि अगर है आपकी किसी ग्रंथ में वो ग्रंथ आपके लिए

1338
01:42:20,920 --> 01:42:24,960
प्रमाण अगर ऐसी बुद्धि नहीं तो जिस बुद्धि

1339
01:42:24,960 --> 01:42:29,040
के आधार पर आप ये जांच कर रहे हो कि इसमें कहां सही है कहां गलत है वो

1340
01:42:29,040 --> 01:42:33,640
बुद्धि प्रमाण है वो ग्रंथ आपके लिए प्रमाण नहीं है ठीक है

1341
01:42:33,640 --> 01:42:37,640
देख जब आप ये कहते हो यह बात क्यों उठाई मैंने जब आप ये

1342
01:42:37,640 --> 01:42:41,760
कहते हो कि हम जो है शास्त्र सम्मत भक्ति बता रहे

1343
01:42:41,760 --> 01:42:45,840
लोगों को समझना मेरी बात जी तो और हम

1344
01:42:45,840 --> 01:42:49,960
लोग शास्त्र सम्मत भक्ति नहीं कर रहे हैं मगर आप भी शास्त्र

1345
01:42:49,960 --> 01:42:53,960
समत भक्ति नहीं कर रहे हो आप रामपाल जी स भ कर रहे हो या

1346
01:42:53,960 --> 01:42:58,000
आपकी कोई सूक्ष्म वेद होगा उसके समत भक्ति कर रहे हो मगर

1347
01:42:58,000 --> 01:43:02,280
शास्त्र समत भक्ति आपकी भी नहीं है क्योंकि आप भी कुछ चीज अपने मन से डिसाइड

1348
01:43:02,280 --> 01:43:06,440
कर रहे हो यहां से रामपाल दास जी के अनुसार या कबीर वाणी इत्यादि

1349
01:43:06,440 --> 01:43:10,560
के अनुसार आप भी डिसाइड कर रहे हो अपने मन से तो आपका यह कहना गलत

1350
01:43:10,560 --> 01:43:15,080
हुआ कि आप शास्त्र सम्मत भक्ति दिखा रहे हो गीता वेद पुराण अगर आपके शास्त्र

1351
01:43:15,080 --> 01:43:19,480
शिवांश भाई मैं यह जानना चाहता हूं शिवांश भाई मैं यह जानना चाहता हूं कि शास्त्र

1352
01:43:19,480 --> 01:43:24,440
कितने हैं एक चीज क्लियर कर लीजिए पहले

1353
01:43:24,440 --> 01:43:27,600
अच्छा ठीक है क्लियर की आप

1354
01:43:27,600 --> 01:43:31,880
आपकी भक्ति शास्त्र सम्मत है कि नहीं

1355
01:43:31,880 --> 01:43:35,880
है इसीलिए तो मैंने आपसे य सवाल पूछा था कि क्या आप

1356
01:43:35,880 --> 01:43:40,080
य बताइए कि शस्त्र आपकी है आपके अनुसार

1357
01:43:40,080 --> 01:43:44,720
कौन कन से शास्त्र प्रमाण है

1358
01:43:44,720 --> 01:43:49,120
प्रमाण जसे रामपाल जी की वाणी श जैसे रामपाल

1359
01:43:49,120 --> 01:43:53,160
जी की वाणी प्रमाण है वैसे ही कौन से शास्त्र आपके

1360
01:43:53,160 --> 01:43:57,240
ये प्रमाण है हमारे लिए अगर आप अगर

1361
01:43:57,240 --> 01:44:01,240
आप शास्त्र की बात करें तो हमारे लिए सिर्फ एक ही है

1362
01:44:01,240 --> 01:44:05,400
जो प्रमाणित है कबीर सागर या कबीर साहब से रिलेटेड जितने

1363
01:44:05,400 --> 01:44:05,920
भी ग्रंथ

1364
01:44:05,920 --> 01:44:10,680
है वो रिलेटेड है भया ठीक है बहुत बढ़िया न हो

1365
01:44:10,680 --> 01:44:13,840
एक बार एक बार और बो

1366
01:44:13,840 --> 01:44:17,920
सु हमारे लिए सिर्फ एक श प्रमा साग प्रमाण है कबीर सागर

1367
01:44:17,920 --> 01:44:22,000
कबीर सागर कबीर सागर कबीर सागर प्रमाण है

1368
01:44:22,000 --> 01:44:26,120
और सुनिए शिवांश भाई अगर आपने इस बात को मनवा लिया है हम

1369
01:44:26,120 --> 01:44:30,280
मानने के लिए तैयार है और है इसलिए मानने के लिए तैयार है अब आगे सुनिए

1370
01:44:30,280 --> 01:44:34,360
आप कि संत रामपाल जी महाराज को कोई जरूरत जब कोई

1371
01:44:34,360 --> 01:44:38,360
जरूरत नहीं थी वेद और गीता में घुसने के

1372
01:44:38,360 --> 01:44:42,640
लिए नहीं क रहा मैं उन आरोप नहीं लगा रहा कि आप क्यों घुसे शास्त्र

1373
01:44:42,640 --> 01:44:47,400
में मैं आरोप नहीं लगा रहा अब बात अब बात य आती है

1374
01:44:47,400 --> 01:44:51,960
कि जब आपके लिए शास्त्र एक ही शास्त्र प्रमाण है कबीर सागर

1375
01:44:51,960 --> 01:44:56,200
और वो हमारे लिए प्रमाण नहीं है इतना तो मानोगे हमारे लिए आपका कबीर

1376
01:44:56,200 --> 01:45:00,280
सागर प्रमाण नहीं है आपके लिए जी ये प्रमाण नहीं है

1377
01:45:00,280 --> 01:45:04,720
ठीक है जी तो अब हम लोग शास्त्र से बात ही नहीं कर रहे

1378
01:45:04,720 --> 01:45:08,880
नहीं नहीं सुनिए तो पहले अब आप एक बात बताइए डिबेट में डिबेट

1379
01:45:08,880 --> 01:45:13,280
में डिबेट में दूसरा पक्ष बात रखेगा या नहीं या सिर्फ आप अपनी ही बात रखोगे

1380
01:45:13,280 --> 01:45:17,560
रखिए रखिए बात रखिए अपनी कभी भी संत रामपाल

1381
01:45:17,560 --> 01:45:21,080
जी महाराज को मैं बात पूरी कर लूं उसके बाद आप बोले तो मेहरबानी होगी

1382
01:45:21,080 --> 01:45:25,280
वरना मैं डिस्कशन को मैं ही बीच में छोड़ दू क्योंकि मैंने जो है आपको देखा है कि

1383
01:45:25,280 --> 01:45:29,480
आप डिस्कशन में निकाल देख बात कर तुरंत हंगा व्यर्थ

1384
01:45:29,480 --> 01:45:33,520
की बात म कर व्यर्थ की बात कैसे हो सकती ठीक ह रहा ठीक है

1385
01:45:33,520 --> 01:45:36,000
हटाना

1386
01:45:36,000 --> 01:45:40,120
पड़ेगा इसलिए इसलिए मुझे हटाना पड़ता

1387
01:45:40,120 --> 01:45:44,120
है अब यहां पर क्या बोलेंगे य सारी चीज बोल कर के चले

1388
01:45:44,120 --> 01:45:50,120
जाएंगे और फिर इसकी कटिंग करेंगे

1389
01:45:54,760 --> 01:45:58,840
विषय पर रहिए बात को दूसरी बातों को य मत बोलिए

1390
01:45:58,840 --> 01:46:02,680
अपने चैनल पर

1391
01:46:02,680 --> 01:46:07,320
बोलिएगा चले गए ठीक है

1392
01:46:07,320 --> 01:46:11,720
हो गया आज इनका जय जय हो गई संदीप जी हा

1393
01:46:11,720 --> 01:46:16,360
जी जय श्री जय श्री राम आज इन्होने खुल के कह दिया

1394
01:46:16,360 --> 01:46:20,440
कि हमारे लिए गीता वेद पुराण जो है वो प्रमाण नहीं

1395
01:46:20,440 --> 01:46:24,600
है हमारे लिए एक ही प्रमाण है कबीर सागर बताओ इनका

1396
01:46:24,600 --> 01:46:28,640
कितना कितना बुरा हाल है इनका इसका मतलब हैय अगेंस्ट है

1397
01:46:28,640 --> 01:46:32,200
सारे मतलब इसका

1398
01:46:32,200 --> 01:46:36,280
मतलब फिर तो इनसे बात ही करके फायदा नहीं फिर गीता ऐसा

1399
01:46:36,280 --> 01:46:40,320
ना मेरे को तो ऐसा लग रहा है इन लोगों पर केस डालना पड़ेगा कोर्ट के अंदर

1400
01:46:40,320 --> 01:46:44,400
जिस से य लोग छेड़छाड़ करते हैं ना कोर्ट में

1401
01:46:44,400 --> 01:46:49,560
केस डाल के इनको वहा घसीट के वहा इनका काम करना पड़ेगा मेरे को ऐसा लग रहा

1402
01:46:49,560 --> 01:46:53,720
है अब इसकी हम इसकी ल एंगे

1403
01:46:53,720 --> 01:46:57,880
जो इन्होने दो बातें बोली है आज एक व्यक्ति ने बहुत अच्छा काम किया बोला ब्रह्मा

1404
01:46:57,880 --> 01:47:02,360
विष्णु महेश अविनाशी है जी जी जी जी जी

1405
01:47:02,360 --> 01:47:06,960
ब्रह्मा विष्णु महेश अविनाशी है जी वो है ही है उसम

1406
01:47:06,960 --> 01:47:11,040
अनली है नीर जी आपको आना है

1407
01:47:11,040 --> 01:47:17,040
आपको आना है नीर

1408
01:47:18,320 --> 01:47:22,520
जी व्यर्थ की बातें ना बोलिएगा व्यर्थ की बातें

1409
01:47:22,520 --> 01:47:26,560
छोड़ नहीं नहीं हमने हमने कौन सी वने चैनल प

1410
01:47:26,560 --> 01:47:30,600
जाके खूब बोलिएगा कि आप ऐसा करते वैसा करते यहां प मत बोलिए आप विषय की

1411
01:47:30,600 --> 01:47:34,680
बात करिए जैसे कि अभी अभी हम आपकी बात

1412
01:47:34,680 --> 01:47:38,680
सुन रहे थे कि ब्रह्मा विष्णु महेश अविनाशी है उन भगत जी ने साब अभी हम

1413
01:47:38,680 --> 01:47:42,920
लोग बात कर रहे थे कि आप कबीर सागर को प्रमाण मानते हैं बिल्कुल

1414
01:47:42,920 --> 01:47:46,960
मानते हैं वो बात प आइए वहां से चालू करिए ठीक है

1415
01:47:46,960 --> 01:47:51,000
उसी बात से हम चालू करते हैं कि जिस तरीके से संत रामपाल जी महाराज को कोई भी

1416
01:47:51,000 --> 01:47:55,040
जरूरत नहीं थी वेद गीता और पुराण को उठाने की लेकिन कबीर

1417
01:47:55,040 --> 01:47:58,320
सागर के अंदर जब कबीर जी खुद क्लेम कर रहे हैं कि

1418
01:47:58,320 --> 01:48:02,520
वेद मेरा भेद है पर मैं ना मिलू वेदन के माही

1419
01:48:02,520 --> 01:48:03,880
जोन वेद से मैं मिलू

1420
01:48:03,880 --> 01:48:08,000
यह वेद जानते ना कबीर साहब खुद इस चीज का क्लेम कर रहे

1421
01:48:08,000 --> 01:48:12,080
हैं कि वेद मेरा भेद है वेद मेरा ही भेद बताते हैं कि

1422
01:48:12,080 --> 01:48:16,120
उस वो परमात्मा उस सनातन यानी शाश्वत

1423
01:48:16,120 --> 01:48:20,320
लोक से रिपीट कर रहे हैं आप अगली बात बोलिए आपने एक बार बोल लिया भेद मेरा भेद

1424
01:48:20,320 --> 01:48:24,480
है आप अगली बात बोलिए रिपीट मत करिए सुनिए हां

1425
01:48:24,480 --> 01:48:28,800
कि वो परमात्मा सतलोक से सह शरीर चलके बालक

1426
01:48:28,800 --> 01:48:33,400
रूप में एक कमल के पुष्प पर मिलता है

1427
01:48:33,400 --> 01:48:37,560
दंपति को और उसके बाद जो परवरिश की लीला होती है वह

1428
01:48:37,560 --> 01:48:41,760
कुंवारी गाय के दूध से होती है यह

1429
01:48:41,760 --> 01:48:46,280
वेद में प्रमाण है इस चीज का अब आप मंडल नंबर पूछे

1430
01:48:46,280 --> 01:48:50,400
या भा साहब देखिए प्रमाण आप उस चीज को कहिए प्रमाण

1431
01:48:50,400 --> 01:48:54,440
आप उस चीज को कहिए जिसे आप पूरा स्वीकारें जो आपके कबीर सागर

1432
01:48:54,440 --> 01:48:57,920
सेती है

1433
01:48:57,920 --> 01:49:02,080
जो ये सनातनी नहीं मानते हिंदू नहीं मानते

1434
01:49:02,080 --> 01:49:06,120
कि जो कबीर सागर से मैच खाएगी वेद की केवल उतनी बात माननी है यह

1435
01:49:06,120 --> 01:49:10,520
आप मानते हैं यह हम पर मत थोप हम नहीं मानते

1436
01:49:10,520 --> 01:49:15,640
यह कबीर सागर में कबीर साहब कह रहे हैं कि वेद कते

1437
01:49:15,640 --> 01:49:19,200
ज कबीर सागर मानती होगी हम नहीं मानते

1438
01:49:19,200 --> 01:49:23,400
हमारे लिए प्रमाण वेद है वेद आप के लिए प्रमाण

1439
01:49:23,400 --> 01:49:28,080
है तो ठीक है वेद में अगर यह लिखा हुआ है कि उस

1440
01:49:28,080 --> 01:49:32,640
शिशु की जो लीला होती है वह कुंवारी गाय के दूध से होती है

1441
01:49:32,640 --> 01:49:36,640
और वो कवियों की तरह भूमिका निभाता है तो आप मुझे ये

1442
01:49:36,640 --> 01:49:40,760
बता दीजिए कि वो कौन हुए ब्रह्मा विष्णु महेश राम

1443
01:49:40,760 --> 01:49:45,720
कृष्ण गणे

1444
01:49:45,720 --> 01:49:49,800
कोर ठीक है अब मैं बोलू बोलिए प्रश्न हो गया

1445
01:49:49,800 --> 01:49:54,320
आपका मैं कह रहा हूं अगर

1446
01:49:54,320 --> 01:49:58,480
होता क उतर नहीं देते आप क्यों कबीर

1447
01:49:58,480 --> 01:50:04,480
आपको बात नहीं करनी है समझ गए बात नहीं करनी

1448
01:50:05,800 --> 01:50:10,080
आपको भैया आइए योगेश जी इनको हटा दीजिए इनकी आवश्यकता

1449
01:50:10,080 --> 01:50:14,360
नहीं है भाई देखिए मान लिया वेद में प्रमाण नहीं है कबीर

1450
01:50:14,360 --> 01:50:18,480
भगवान है यह कबीर को प्रमाण ये वेद को प्रमाण

1451
01:50:18,480 --> 01:50:22,840
नहीं मानते हैं यह वेद का उपयोग करते हैं अपनी कबीर वाण

1452
01:50:22,840 --> 01:50:28,840
को सिद्ध करने के

1453
01:50:29,200 --> 01:50:35,200
लिए दूसरी बातों को य मत बोलिए अपने चैनल पर

1454
01:50:35,960 --> 01:50:39,960
बोलिएगा चले ग ठीक है यह कहां से आ रही

1455
01:50:39,960 --> 01:50:43,000
है

1456
01:50:43,000 --> 01:50:47,280
आ आपके य चल रहा है क्याय योगेश

1457
01:50:47,280 --> 01:50:51,560
जी शायद यही से आ यही से आवाज

1458
01:50:51,560 --> 01:50:57,560
को आवाज जी को हो रहा

1459
01:50:59,600 --> 01:51:05,600
है बताइए आपका परिचय जय श्री

1460
01:51:05,720 --> 01:51:09,160
राम

1461
01:51:09,160 --> 01:51:13,600
बोलिए श्री हरिवंश ज

1462
01:51:13,600 --> 01:51:18,000
श्री हरिवंश मे को इतना ही कहना था कि रामपाल

1463
01:51:18,000 --> 01:51:22,640
वाले नहीं मानेंगे इनको सिर्फ कबीर वानी चलाना और

1464
01:51:22,640 --> 01:51:26,680
मनना नहीं है हमें उनकी बात बाहर लानी है

1465
01:51:26,680 --> 01:51:30,960
उन्होंने कहा वेद और वो हमारे लिए प्रमाण नहीं है अब वो हमारे

1466
01:51:30,960 --> 01:51:35,280
धर्म ग्रंथों से जिनको वह खुद प्रमाण नहीं मानते उनसे वह बात दिखाएंगे

1467
01:51:35,280 --> 01:51:39,600
जिससे उनका कबीर वाणी सिद्ध हो रही हो हम क्यों माने

1468
01:51:39,600 --> 01:51:44,360
भाई कि वेद की केवल उतनी बात माननी है जितनी बात कबीर से मैच

1469
01:51:44,360 --> 01:51:48,520
खाए क्यों माने हम यह भी तो देखेंगे कि शिव जी को क्या कहा

1470
01:51:48,520 --> 01:51:52,800
गया ब्रह्मा जी को क्या कहा गया अगर तुम कवि का अर्थ परम

1471
01:51:52,800 --> 01:51:57,200
ले रहे हो तो कवियों का कवि गणपति कहा गया इसको छोड़ देंगे क्या

1472
01:51:57,200 --> 01:51:58,400
अगर दो जगह

1473
01:51:58,400 --> 01:52:02,560
दो तरह की स्मृति है अभी मैंने दिखाया अगर दो स्मति

1474
01:52:02,560 --> 01:52:06,720
है दो स्मृति है तो उन दोनों को मानना पड़ेगा धर्म आप एक

1475
01:52:06,720 --> 01:52:10,800
को भी काट नहीं सकते तो हमें ज्ञान देने तब आना

1476
01:52:10,800 --> 01:52:14,960
वेद और पुराण का गीता का जब आप एक चीज को भी

1477
01:52:14,960 --> 01:52:19,360
काटो नहीं फिर देना ज्ञान

1478
01:52:19,360 --> 01:52:23,560
इनका एक ही प्रमाण है आखरी रामपाल और कोई प्रमाण

1479
01:52:23,560 --> 01:52:27,640
हां प्रमाण रामपाल है हमसे कहते हैं शास्त्र समत भक्ति

1480
01:52:27,640 --> 01:52:31,840
और जब इनसे पूछोगे तुम्हारी चीज कैसे वो कबीर सागर से वो सागर

1481
01:52:31,840 --> 01:52:36,240
जो हमने कभी देखा नहीं जो हमने कभी पढ़ा नहीं हमें उससे कोई मतलब नहीं है अरे ठीक है भैया

1482
01:52:36,240 --> 01:52:42,240
तुम अपनी कबीर वो कबीर सा सागर समत भक्ति

1483
01:52:43,080 --> 01:52:49,000
करो अमित जी दोबारा जो पहले एक बार आ चुके

1484
01:52:49,000 --> 01:52:53,560
हैं आपको आना है ऊपर दास जी

1485
01:52:53,560 --> 01:52:58,720
नहीं आना है तो क्यों जवाइन किया

1486
01:52:58,720 --> 01:53:04,720
है जवाइन क्यों किया है

1487
01:53:05,600 --> 01:53:10,080
फिर विश्राम सारण जी अपना चेहरा

1488
01:53:10,080 --> 01:53:14,840
दिखाए जी योगेश जी आप कुछ कह रहे थे बताए

1489
01:53:14,840 --> 01:53:18,880
मैं कह रहा था कि इनका सिफ एक ही प्रमाण आखरी राम पर और कुछ नहीं है बस यही

1490
01:53:18,880 --> 01:53:22,960
बता र और नाटक करते हैं कि हम वेद को प्रमाण मानते हैं हां

1491
01:53:22,960 --> 01:53:27,120
नाटक वेदों में प्रमाण है कबीर भगवान है भाई जब यह हो गया

1492
01:53:27,120 --> 01:53:31,120
कि आप वेदों को प्रमाण नहीं मानते तो क्या बात कर रहे हो बात खत्म हो गई आप मानो कबीर की

1493
01:53:31,120 --> 01:53:35,400
पूजा करो हम हमारे पास तब आओ

1494
01:53:35,400 --> 01:53:41,400
जब वेदों को प्रमाण मानते

1495
01:53:42,600 --> 01:53:48,600
हो जी हटा लीजिए मैसेज पढ़ लिया

1496
01:53:48,760 --> 01:53:52,800
होगा जब वेदों में प्रमाण बुद्धि हो सनातनी किसे

1497
01:53:52,800 --> 01:53:56,840
कहा जाता है जिसकी वेदों में प्रमाण बुद्धि

1498
01:53:56,840 --> 01:54:00,880
हो प्रमाण बिल्कुल सही बात है सर इनको

1499
01:54:00,880 --> 01:54:05,000
यह पूछो वेदों में अगर यह वेदों को मानते हैं तो वहां पर तो लिखा हुआ कि

1500
01:54:05,000 --> 01:54:09,960
परमात्मा अजर है और यह कबीर दास तो बूढ़े बाबा है इनका

1501
01:54:09,960 --> 01:54:15,760
बाल प

1502
01:54:15,760 --> 01:54:19,960
रहे यह कल हम पोस्टर ला रहे हैं कबीर जी का बड़ा सा उसको हाथ में लेकर

1503
01:54:19,960 --> 01:54:23,960
बताएंगे कि भैया बाल सफेद क्यों हो रहे हैं बिल्कुल बिल्कुल सही

1504
01:54:23,960 --> 01:54:28,040
बात है सर ये मतलब अन्न ससरी घुमा रहे हैं चीज को कभी कहते हैं वो कुछ खाते नहीं

1505
01:54:28,040 --> 01:54:32,240
है कुछ पीते नहीं है मतलब इवन यहां तक कह देते वो उनको मतलब हकते

1506
01:54:32,240 --> 01:54:36,280
भी नहीं थे वो ऐसी बेवकूफ वाली बातें करते हैं भाई देखिए देखिए मैं एक बात क्लियर

1507
01:54:36,280 --> 01:54:40,440
कर दूं हमारी बात ये हो रही थी कि वेदों

1508
01:54:40,440 --> 01:54:44,520
के अनुसार कबीर भगवान है कि नहीं आप क्यों ताल ठोकते

1509
01:54:44,520 --> 01:54:48,520
हो आपने कह दिया जितनी बात हमारी कबीर सागर से

1510
01:54:48,520 --> 01:54:52,680
मैच खाएगी उतनी बात जो है हम वेदों की मानते हैं

1511
01:54:52,680 --> 01:54:56,800
बाकी नहीं मानते तो बात खत्म हो गई के लिए प्रमाण नहीं है तो क्योंकि

1512
01:54:56,800 --> 01:54:57,600
हम आपको दिखाएंगे

1513
01:54:57,600 --> 01:55:02,120
गणपति भगवान है मना कर देंगे

1514
01:55:02,120 --> 01:55:06,200
आप संदीप जी आप जो है लाइव में तब आइए जब आप गाड़ी रोक

1515
01:55:06,200 --> 01:55:09,880
लीजिए कहीं

1516
01:55:09,880 --> 01:55:14,320
प तो जी आगे बो

1517
01:55:14,320 --> 01:55:18,480
मेरे को सवाल पूछना कि इनका जैसे राम कुछ खिला देता है तो इनका बुद्धि काम

1518
01:55:18,480 --> 01:55:22,760
करना बंद कर देते है इनका कुछ हो सकता है नहीं नहीं वो व्यक्तिगत आरोप

1519
01:55:22,760 --> 01:55:26,800
मत लगाइए वो सब बातें हम नहीं करते वो क्या करते क्या नहीं करते

1520
01:55:26,800 --> 01:55:32,800
छोड़ वो सब व्यक्तिगत है वो कैसे होता है क्या होता है वो ठीक

1521
01:55:37,360 --> 01:55:41,640
है भाई अभिषेक वर्मा नाम का कोई अभद्र कमेंट

1522
01:55:41,640 --> 01:55:46,280
कर रहा है उसका जो है

1523
01:55:46,280 --> 01:55:50,320
समय उसको जो है डिलीट कर दीजिए रिमूव कर हाइड फ्रॉम चैनल

1524
01:55:50,320 --> 01:55:56,320
कर दीजिए उल्टे सीधे वो कर रहा है हां ठीक

1525
01:55:58,440 --> 01:56:03,080
है जी बताइए गश

1526
01:56:03,080 --> 01:56:07,400
जी ठीक है आज एक बढ़िया चीज हुई है अब कभी और कोई व्यक्ति आएगा

1527
01:56:07,400 --> 01:56:11,640
तो अब वेद पुराण उस पर बात नहीं होनी है वो यहां ये लिखा वहा वो लिखा

1528
01:56:11,640 --> 01:56:15,960
है अरे भैया एक बात नहीं मानोगे दूसरी मानोगे और उसका आधार

1529
01:56:15,960 --> 01:56:19,960
क्या है मालूम है कबीर सागर भी आधार नहीं है उसका उसका

1530
01:56:19,960 --> 01:56:24,480
आधार है सिंगल पॉइंट एजेंडा रामपाल दास जी

1531
01:56:24,480 --> 01:56:28,640
कबीर सागर में भी जो बात होंगी रामपाल जी के विरुद्ध वो नहीं मानेंगे

1532
01:56:28,640 --> 01:56:32,640
अभी कह दिया उन्होने कि हमारे लिए वो प्रमाण है उसमें भी

1533
01:56:32,640 --> 01:56:38,640
कुछ बातें ऐसी निकल आएंगी जो इन्हीं के विरुद्ध हो

1534
01:56:49,800 --> 01:56:53,880
जाएंगी इनको यह बात मालूम है ना कबीर सागर में प्रमाण

1535
01:56:53,880 --> 01:56:58,040
है कबीर भगवान है बोलेंगे तो हमसे कोई नहीं जुड़ेगा जब

1536
01:56:58,040 --> 01:57:02,160
हम हाथी पर बैठ के चिल्लाए गे वेदों में प्रमाण है हमारी शास्त्र सम्मत भक्ति है

1537
01:57:02,160 --> 01:57:06,280
जबक मनम कीी भक्ति है गीता में क्या सही है क्या गलत है कैसे

1538
01:57:06,280 --> 01:57:10,280
डिसाइड करेंगे हम डिसाइड करेंगे अपने मन से वेदों में क्या सही

1539
01:57:10,280 --> 01:57:14,440
है क्या गलत है कैसे डिसाइड करेंगे अपने मन से डिसाइड करेंगे

1540
01:57:14,440 --> 01:57:18,680
गीता में ही लिखा है तेरे लिए धर्म और अधर्म के विषय

1541
01:57:18,680 --> 01:57:22,880
में एक मात्र शास्त्र प्रमाण है तो अगर आप ये कह रहे ज्ञान से ज्ञान

1542
01:57:22,880 --> 01:57:28,080
को काटेंगे तो लिखा लिखा दिखाओ शास्त्र में

1543
01:57:28,080 --> 01:57:32,080
आप एक ज्ञान के आधार पर अपने मंसूबों का

1544
01:57:32,080 --> 01:57:36,360
महल नहीं बना सकते आपको समस्त समस्त जितनी

1545
01:57:36,360 --> 01:57:42,360
भी बातें उसम कही गई है उनका निजोर निकाल करके तब अपनी बात को रखना

1546
01:57:50,040 --> 01:57:54,040
है चक्र पानी जी तीसगढ़ से

1547
01:57:54,040 --> 01:57:58,320
जय श्री राम आज का नजारा आपके लिए अच्छा होगा

1548
01:57:58,320 --> 01:58:02,560
जय श्री राम मैं दो तीन दिन से लगातार देख रहा हूं

1549
01:58:02,560 --> 01:58:06,600
आज का बहुत अच्छा है आज का बहुत अच्छा था आज

1550
01:58:06,600 --> 01:58:10,960
निष्कर्ष प्राप्त हुआ है जी जी जी जी अच्छा लोग

1551
01:58:10,960 --> 01:58:14,960
यह लोग क्या है ना यह लोग कुछ लाइनों को

1552
01:58:14,960 --> 01:58:19,160
य लोग रटे हैं इन लोगों का मूल ग्रंथ क्या है

1553
01:58:19,160 --> 01:58:23,360
कि जो वीडियो है य वगैरह है उसमें जो लाइन है ना बस

1554
01:58:23,360 --> 01:58:27,600
उनको रटे हैं इसके आगे कुछ नहीं जानते जन गंगा इनको

1555
01:58:27,600 --> 01:58:32,160
हा इनको यदि बताया जाए कि भगवत गीता तुमने कितनी बार पढ़ा है

1556
01:58:32,160 --> 01:58:36,160
तो व इस चीज को नहीं बताएंगे वह जीवन में कोई भी

1557
01:58:36,160 --> 01:58:40,800
मैं तो चैलेंज करहा करता हूं कोई भी इनका जितने भी

1558
01:58:40,800 --> 01:58:44,800
शिष्य होंगे है ना तो वह कोई भी भगवत गीता को नहीं

1559
01:58:44,800 --> 01:58:48,840
पढ़ा होगा आज मैंने इनका एक

1560
01:58:48,840 --> 01:58:54,840
न्यूज चैनल देखा एमपी पा जी जी

1561
01:58:56,040 --> 01:59:00,800
उसम सब्सक्राइबर्स है करीब डेढ़

1562
01:59:00,800 --> 01:59:05,000
लाख जी जी और व्यूज आते हैं वीडियो पर आज मैंने

1563
01:59:05,000 --> 01:59:09,040
देखा था एक दो एक दो दिन हो चुके हैं वीडियो को व्यूज आए थे उसमें डेढ़

1564
01:59:09,040 --> 01:59:13,240
दो हजार अच्छा हा जी जी अब

1565
01:59:13,240 --> 01:59:18,120
बात ये है कि उसमें कोई वो भी मेरे बारे में चर्चा कर रहे हैं वहां प

1566
01:59:18,120 --> 01:59:22,120
ऐसे ही लाइव अब उसमें क्या कर रहे हैं कोई व्यक्ति यहां

1567
01:59:22,120 --> 01:59:26,400
से कुछ जान करके वहां गया प्रश्न करने जी जी

1568
01:59:26,400 --> 01:59:30,560
कोई व्यक्ति यहां से जाना जी जी जी कि भाई शास्त्र

1569
01:59:30,560 --> 01:59:35,360
में कोटि रुद्ध समता में शिवजी को भी महाकाल कहा गया है

1570
01:59:35,360 --> 01:59:39,360
अब वो कह रहे हैं कि शिवजी अलग है काल अलग है

1571
01:59:39,360 --> 01:59:43,440
ठीक है व अब उसको भी काल कहा गया

1572
01:59:43,440 --> 01:59:47,680
शिव जीी को उनको भी कहा गया महाकाल कहा गया

1573
01:59:47,680 --> 01:59:51,720
तो जब उसने पूछा कि यहां तो ये हो रहा है वो हो रहा है तो बिना किसी वो

1574
01:59:51,720 --> 01:59:55,880
कोई बात भी नहीं थी झगड़े भगड़े की जैसे होता है ना कि माहौल गर्म

1575
01:59:55,880 --> 02:00:00,520
हो गया तो हटाया जाता है वो कुछ नहीं

1576
02:00:00,520 --> 02:00:04,760
वो ऐसी कोई वो बिना बिना बोले धीरे से धीरे से को

1577
02:00:04,760 --> 02:00:08,920
आदमी वहा से गायब हो गया जो बोल रहा था महाकाल

1578
02:00:08,920 --> 02:00:11,040
क्या बोले अच्छा व एक आदमी

1579
02:00:11,040 --> 02:00:15,480
है जो मतलब वही बोलता है एक भाई साहब कह रहे हैं

1580
02:00:15,480 --> 02:00:19,720
कि रामचरित वाला क्लियर कर दो मैं सो मैं क्लियर है मगर

1581
02:00:19,720 --> 02:00:23,920
हम इसको किसी कबीर पंक्ति के समक्ष क्लियर

1582
02:00:23,920 --> 02:00:27,960
करेंगे इसलिए अभी रोका हुआ है अभी इसको ओपन कर देंगे

1583
02:00:27,960 --> 02:00:31,960
ना तो फिर उस दिन व आनंद नहीं प्राप्त होगा आपको तो अभी

1584
02:00:31,960 --> 02:00:36,200
और रुक जाइए आने दीजिए किसी ना किसी दिन वो मामला खोलेंगे

1585
02:00:36,200 --> 02:00:41,080
रामचरित मानस वाला हनुमान जी वाला जी चक्र पानी

1586
02:00:41,080 --> 02:00:45,120
जी अच्छा मेरा एक थोड़ा विचार यह था कि जैसे

1587
02:00:45,120 --> 02:00:49,280
यह लोग वीडियो बनाते हैं ना कि वो दिखा करके यह पेज में यह लिखा

1588
02:00:49,280 --> 02:00:53,480
हुआ है तो आपकी तरफ से उसी का

1589
02:00:53,480 --> 02:00:58,080
प्रतिकार जो श्लोक में उन्होंने यह बताया उस

1590
02:00:58,080 --> 02:01:03,800
प पिछले कुछ आप देखिए उसम यही चल

1591
02:01:03,800 --> 02:01:07,920
रहा जी जी उसम शर्ट्स में जो बैकग्राउंड म्यूजिक दिए हैं

1592
02:01:07,920 --> 02:01:12,200
आप बहुत ज्यादा मतलब क्योंकि उससे

1593
02:01:12,200 --> 02:01:16,600
लोग थोड़ा सा इरिटेट हो जाते हैं तो जो मूल बात है जो हम

1594
02:01:16,600 --> 02:01:20,720
बता रहे हैं या इंडिकेट कर रहे हैं उसका साउंड ज्यादा रहे बैकग्राउंड ठीक

1595
02:01:20,720 --> 02:01:24,800
है अपनी जगह तो मैं एक बार ऐसे मैसेज भी किया था थोड़ा बैकग्राउंड ज्यादा

1596
02:01:24,800 --> 02:01:26,120
है उसको

1597
02:01:26,120 --> 02:01:30,320
स्लो किया जाए अच्छा दूसरा चीज हा दूसरा चीज जो स्पीड से

1598
02:01:30,320 --> 02:01:34,320
बिल्कुल दिखा देते फटाफट फटाफट तो वो भी नहीं मतलब आराम से

1599
02:01:34,320 --> 02:01:39,080
मि एक मिनट की सीमा है ना वहां अच्छा

1600
02:01:39,080 --> 02:01:43,800
एक मिनट की सीमा में यही दिखाना या तो फिर पूरा वीडियो बनाना पड़ेगा

1601
02:01:43,800 --> 02:01:47,800
सब टाइम मेहनत सब टाइम टाइम ज्यादा लगेगा

1602
02:01:47,800 --> 02:01:51,920
ओके ओके भाई कोई आना चाहता है

1603
02:01:51,920 --> 02:01:56,080
रामचरित मानस वाले मामले पर बात करने के लिए देखिए कबीर सर्वशक्तिमान

1604
02:01:56,080 --> 02:02:00,320
नहीं है आपकी दीक्षा शास्त्र सम्मत नहीं है

1605
02:02:00,320 --> 02:02:04,400
आपका जो तत्वदर्शी का चयन है वह शास्त्र सम्मत नहीं है

1606
02:02:04,400 --> 02:02:08,680
और आपका गीता में ज्ञान को काटना यह शास्त्र सम्मत

1607
02:02:08,680 --> 02:02:12,680
नहीं है मनम है सब यह सब तो सिद्ध हो गया

1608
02:02:12,680 --> 02:02:17,000
और हां ब्रह्मा विष्णु महेश अविनाशी है आपका

1609
02:02:17,000 --> 02:02:22,320
व्यक्ति बोल गया अब बात आती है कि कोई आना चाहता है वो

1610
02:02:22,320 --> 02:02:26,360
रामचरित मानस वाले मामले पर जो अभी उठाया गया है कि हनुमान जी का जो चेहरा देख

1611
02:02:26,360 --> 02:02:31,040
लेता है वह जो

1612
02:02:31,040 --> 02:02:37,040
है हा अनिल कुमार जी जय श्री

1613
02:02:37,120 --> 02:02:43,120
राम जय श्री राम

1614
02:02:43,120 --> 02:02:47,320
जी बससे ही मैंने कि काफी दिन से मैं भी

1615
02:02:47,320 --> 02:02:53,320
आना चाह रहा था ना लाभ के लिए मैं आज मैं मौका मिल गया

1616
02:02:55,480 --> 02:02:59,560
मैं भी फिर आ गया अच्छा मैं ये कहना

1617
02:02:59,560 --> 02:03:05,560
चाह रहा हूं

1618
02:03:06,920 --> 02:03:11,840
जी अरे भाई यह देखो रामपाल

1619
02:03:11,840 --> 02:03:15,920
जी के पास पवित्र ज्ञान है इसलिए उनके ज्ञान से कट जाता

1620
02:03:15,920 --> 02:03:20,200
है जब कबीर साहब जी अब के आप मूल ज्ञान चर्चा करेंगे तब सारी दुनिया

1621
02:03:20,200 --> 02:03:24,520
ज्ञान समा जाएगा अरे भाई ये तुम मानते हो हमारे लिए

1622
02:03:24,520 --> 02:03:28,600
प्रमाण नहीं है रामपाल हमारे लिए हमारे शास्त्र

1623
02:03:28,600 --> 02:03:32,720
प्रमाण है यह आप मानते

1624
02:03:32,720 --> 02:03:37,080
हो हमारे कोई आचार्य ऐसे नहीं है जो गीता वेद पुराण में से कहते

1625
02:03:37,080 --> 02:03:41,240
गलत है वो गलत है अगर कहेंगे तो हमारे आचार्य नहीं है

1626
02:03:41,240 --> 02:03:45,520
समस्त सुति स्मति शास्त्रों में सामंजस्य की शिक्षा देने वाला

1627
02:03:45,520 --> 02:03:49,560
आचार्य है साधु सम्मत धर्म है मत्स पुराण में

1628
02:03:49,560 --> 02:03:55,200
लिखा हैय जी अनिल कुमार जी

1629
02:03:55,200 --> 02:03:59,840
बोलिए मैं य कहना चाह य लोग है ना रामपाल वाले

1630
02:03:59,840 --> 02:04:05,840
पता नहीं कहां से ज्ञान पता नहीं से लाते है इनकी

1631
02:04:09,360 --> 02:04:14,360
आ अच्छा मैं एक बात जरा कह दू

1632
02:04:14,360 --> 02:04:18,880
हमारे विभिन्न प्रकार के प्रकल्प चल रहे हैं जो हमें

1633
02:04:18,880 --> 02:04:22,920
इन प्रकल्प में जैसे स् में सप्शन लेना है जो

1634
02:04:22,920 --> 02:04:27,240
हमें इन प्रकल्प में मदद करना चाहे आर्थिक

1635
02:04:27,240 --> 02:04:31,240
तौर पर या हमारे जो धर्म रक्षा अभियान चल रहे हैं उनसे जुड़ना चाहे नामा

1636
02:04:31,240 --> 02:04:35,560
स्त्र से जुड़ना चाहे कक्षाओं से जुड़ना चाहे या फिर वैचारिक

1637
02:04:35,560 --> 02:04:39,720
मतभेद के निमित्त चर्चा करना चाहे नाम जप अभियान जो चला रहे हैं उससे

1638
02:04:39,720 --> 02:04:44,000
जुड़ना चाहे इन सबके लिए आप हमें व कर सकते हैं ट

1639
02:04:44,000 --> 02:04:48,200
नंबर है 7483 186

1640
02:04:48,200 --> 02:04:52,320
इसपे आप करें मैं जड़ाऊ

1641
02:04:52,320 --> 02:04:57,360
अच्छा अच्छा आप जुड़े अच्छी बात उसम जुड़ा हूं मैं

1642
02:04:57,360 --> 02:05:01,560
उसम जुड़ा हूं क टाइम मिलता है तो आ जाता हूं कभी नहीं आ

1643
02:05:01,560 --> 02:05:05,560
पाता जी जी कोशिश करें निर कल तो आया था लेकिन

1644
02:05:05,560 --> 02:05:09,680
आज नहीं आ पाया हा जी बताइए आप

1645
02:05:09,680 --> 02:05:13,720
कोश तो जा रती निरंतर ले

1646
02:05:13,720 --> 02:05:18,160
जी जी बताइए कता कुछ ऐसी है ना कुछ इनकी गलतिया आपको

1647
02:05:18,160 --> 02:05:22,240
बता दू आपने ध्यान नहीं दिया हो इनकी गलतियों पर

1648
02:05:22,240 --> 02:05:24,440
एक जगह है ना जो अध्याय

1649
02:05:24,440 --> 02:05:28,600
है ना 16 अध्याय में 15 अध्याय में उसमें लिखा

1650
02:05:28,600 --> 02:05:33,960
है कि पुरुष और

1651
02:05:33,960 --> 02:05:38,120
जीवा मा के बारे में तो इन लोगों ने क्या कर रखा

1652
02:05:38,120 --> 02:05:42,280
है उसमें जीवात्मा जो पुरुष है ना जिसमें दो तरह के जीव

1653
02:05:42,280 --> 02:05:46,320
है एक पुरुष एक प्रकृति तो उन लोगों ने क्या कर रखा उससे उस

1654
02:05:46,320 --> 02:05:50,480
जगह पर भगवान बोल रखा है अब ये बताओ पुरुष अगर जीवन भगवान

1655
02:05:50,480 --> 02:05:54,760
हो गया ये भगवान कौन है आपने

1656
02:05:54,760 --> 02:05:58,760
साद उसमें ध्यान देना कि इनकी इनकी जो मिला के देखोगे आप तो आपको कुछ

1657
02:05:58,760 --> 02:06:02,920
समझ में आ जाएगा कि इन लोगों ने क्या कर रखा है और एक आपको

1658
02:06:02,920 --> 02:06:07,080
और बता दूं हमारे यहां एक लेडीस है जो मतलब

1659
02:06:07,080 --> 02:06:11,120
इसी में रामपाल वाल में जुड़ी हुई है तो उन लोगों क्या कर

1660
02:06:11,120 --> 02:06:15,200
रखा है उनको ऐसे भ्रमित कर रखा है और कि उनके है

1661
02:06:15,200 --> 02:06:19,200
ना जब उनके सत्संग में जाते हैं ना मिलने जाते हैं ना तो उसम उन

1662
02:06:19,200 --> 02:06:23,640
लोगों के ना बीच तरवा जाते है

1663
02:06:23,640 --> 02:06:28,960
जो स्त्री का स्वाग होता है

1664
02:06:28,960 --> 02:06:34,000
ना तोव ना उसम जाते हैं तो बीच उतरवा

1665
02:06:34,000 --> 02:06:38,120
जाते लोग समझ नहीं आती है कि य तो हमारा

1666
02:06:38,120 --> 02:06:42,720
व्यक्तिगत संबंध है ना ये कहना चाह रहे हाथ के कय

1667
02:06:42,720 --> 02:06:46,720
वो चीज संध है सिंधूर सिंदूर वगैरह

1668
02:06:46,720 --> 02:06:51,640
लगाना मना कर देते हैं

1669
02:06:51,640 --> 02:06:55,680
संबंध है एक चीज बताओ मिला वही रक्षा बंधन कर रखा है

1670
02:06:55,680 --> 02:07:00,400
कि भाई बहन का संबंध है ना इसको रक्षा बंधन में उसको

1671
02:07:00,400 --> 02:07:04,560
उसको रामपाल जी को मानो उनको रक्षा बंदर पहनाओ रक्षा का

1672
02:07:04,560 --> 02:07:08,680
उसका राखी का पहनाओ अब एक चीज बताओ अब हम आप

1673
02:07:08,680 --> 02:07:12,800
है ठीक है अब हम आपको एक चीज एग्जांपल

1674
02:07:12,800 --> 02:07:17,520
दे रहा हूं अब आप है हम है ठीक है तो हम आपको एक

1675
02:07:17,520 --> 02:07:21,760
के मैं आप मेरे को एक थप्पड़ मारो तो हम आपस में तो एक नि

1676
02:07:21,760 --> 02:07:26,160
करेंगे कि अभी आपस में समाधान करेंगे और वो होता है बहन भाई के

1677
02:07:26,160 --> 02:07:30,280
संबंध बहन भाई एक रक्षा के लिए उसको रक्षा बंधन उस

1678
02:07:30,280 --> 02:07:35,160
राखी बांधती है ये लोगों ने क्या कर रखा है उसको रामपाल जी को

1679
02:07:35,160 --> 02:07:38,640
राखी रामपाल जी को राखी बा पता नहीं कहां

1680
02:07:38,640 --> 02:07:42,880
कहा से क्या कर और उतरवाना सीधा

1681
02:07:42,880 --> 02:07:47,640
सधा इस बात का दतक है कि वो अब्राम

1682
02:07:47,640 --> 02:07:52,120
जो आचरण है उसमें ले जा रहे हैं सात

1683
02:07:52,120 --> 02:07:56,280
आसमान पर बैठता ही है है ना एक जगह बैठ के दुनिया को ऑपरेट

1684
02:07:56,280 --> 02:08:00,760
करता ही है ईश्वर ब्रिक हो रहा है मामला अरे

1685
02:08:00,760 --> 02:08:04,880
वो वो ये भी चाहते हैं कि जो मुस्लिम धर्म के लोग हैं

1686
02:08:04,880 --> 02:08:09,360
वो लोग भी इस चीज को थोड़ा सा फॉलो करें देख ये जो है इनका

1687
02:08:09,360 --> 02:08:13,520
आ रहा है रामपाल की शिक्षाओं में ने बहू को कर दिया

1688
02:08:13,520 --> 02:08:18,040
नास्तिक परेशान परिवार बागेश्वर दरबार की

1689
02:08:18,040 --> 02:08:23,520
दरबार में पहुंच गया इसको देखा

1690
02:08:23,520 --> 02:08:28,440
आपकी आवाज कट रही है जी संदीप जी आप बोले

1691
02:08:28,440 --> 02:08:32,640
जी जी सर पता क्या है इनके दिमाग ना इस तरीके से हैक हो रखे

1692
02:08:32,640 --> 02:08:36,720
हैं जैसे दुर्योधन का दिमाग हैक नहीं सामने श्री कृष्ण जी भी आ गए

1693
02:08:36,720 --> 02:08:40,760
तब भी उसको पता लगा इनका दिमाग इस तरीके से हैक हुआ बड़ा कुछ तो

1694
02:08:40,760 --> 02:08:44,760
लोग इनम से निकल गए हैं जैसे जैसे हम लोगों के प्रयासों से आप लोगों के

1695
02:08:44,760 --> 02:08:48,760
प्रयासों से ना कई लोग इनके चंगुल से निकल भी चुके हैं ऐसी बात नहीं कई हमारे पास फ प आते

1696
02:08:48,760 --> 02:08:52,960
हैं कई लोग निकल चुके हैं उन्होंने ना मिलान किया भाई साहब एक

1697
02:08:52,960 --> 02:08:53,880
ये दया नाम

1698
02:08:53,880 --> 02:08:57,880
से एक कमेंट कर रहे हैं अवद्र है ये आर्य समाज जीयों के बारे में इनको हटा

1699
02:08:57,880 --> 02:09:01,880
दीजिए रिमूव कर दीजिए गलत बातें बोल रहे हैं आर्य

1700
02:09:01,880 --> 02:09:05,880
समाज के बारे में इनका ना दिमाग इस तरीके से हैक हुआ पड़ा है कि ये

1701
02:09:05,880 --> 02:09:09,880
ना इनकी सोचने समझने की क्षमता खत्म हो चुकी है इनको ना कसमें दे रखी होती है जब ये जाते

1702
02:09:09,880 --> 02:09:14,040
हैं ना वहां पे तो इनको कसमें देते हैं जैसे भी कसमें दे दी तुमने तुम्हें

1703
02:09:14,040 --> 02:09:18,120
इसकी कसम है उसकी कसम है तुमने इनके खिलाफ बिल्कुल नहीं बोलना तो इनका माइंड ऐसे ब्रेन

1704
02:09:18,120 --> 02:09:22,280
वश कर देते हैं जैसे आप देखते हैं ना दूसरे उसमें करते हैं ब्रेन वॉश कर देते तो जाकर

1705
02:09:22,280 --> 02:09:26,320
वो जाकर क्या कर देता है बन जाते है कई बार उस तरीके

1706
02:09:26,320 --> 02:09:30,520
का इनका माइंड मेकप कर रखा हैसा सिस्टम

1707
02:09:30,520 --> 02:09:34,760
बना हुआ है आज वडियो देखा था कि आपकी

1708
02:09:34,760 --> 02:09:38,880
जरा सी भी मेरे प्रति मेरी बातों में जरा सी भी अगर

1709
02:09:38,880 --> 02:09:44,880
शंका बुद्धि हो गई तो इसका मतलब समझ लो काल आ गया है रेस

1710
02:09:44,960 --> 02:09:48,960
हा काल आ गया और अब तुम्हारा जो मोक्ष नहीं हो सकता तुम फस

1711
02:09:48,960 --> 02:09:53,440
जाओ जरा सा भी सोचना म प्रति गीता के प्रति सोचो

1712
02:09:53,440 --> 02:09:57,560
वेद के प्रति सोचो मेरे प्रति मत सोचना जेल

1713
02:09:57,560 --> 02:10:01,920
धाम सोचना अगर मैं जेल में रह तो बिल्कुल सही बो

1714
02:10:01,920 --> 02:10:06,880
बता जी जी इनका ब्रेन बहुत तगड़ा

1715
02:10:06,880 --> 02:10:10,840
अरे किया जाता है

1716
02:10:10,840 --> 02:10:15,120
हेलो एक एक वाकया हुआ है एक इन्हीं

1717
02:10:15,120 --> 02:10:19,480
का राम भक्त का रामपाल का ही भक्त था

1718
02:10:19,480 --> 02:10:23,520
उसके पिताजी जो है शित नहीं थे और वह मरणासन की

1719
02:10:23,520 --> 02:10:27,600
स्थिति में थे तो वो लोग उनका परिवार लगा हुआ था कि यह दीक्षा ले

1720
02:10:27,600 --> 02:10:31,640
ले अगर यह दीक्षा ले लेंगे तो इनकी जो है मृत्यु के बाद

1721
02:10:31,640 --> 02:10:35,960
फिर से इनको जो है मानव शरीर मिल जाएगा इतना

1722
02:10:35,960 --> 02:10:39,960
पावर है दीक्षा में उनकी अपनी पावर

1723
02:10:39,960 --> 02:10:45,960
खतम हो रख मतलब गजब का ये लोग जो है ऐसे

1724
02:10:49,320 --> 02:10:53,400
अ एक दे दूं कि एक बार आपने देखा हो

1725
02:10:53,400 --> 02:10:57,440
एक सीरियल चाणक्य नहीं चाणक्य नीति उसमें

1726
02:10:57,440 --> 02:11:01,560
क्या करता है जो अशोक सम्राट है ना तो एक टाम है ना ऐसा फस

1727
02:11:01,560 --> 02:11:05,680
जाता है तो उसको है ना जब धनानंद के ऊपर आक्रमण करता है ना तो वो

1728
02:11:05,680 --> 02:11:10,480
सोचता है कि डायरेक्ट आक्रमण कर देता है तो एक बार एक

1729
02:11:10,480 --> 02:11:14,600
उसकी किसी कुटिया में जाके मां और बेटे ना खाना खा रहे

1730
02:11:14,600 --> 02:11:18,720
थे तो उसे मां ने उसके लिए खीर बनाई जब वो खीर

1731
02:11:18,720 --> 02:11:22,760
बनाई है ना तो वो है तो वो क्या करता है

1732
02:11:22,760 --> 02:11:27,080
गर्म होते बीच में हाथ डाल देता है तो जब उसने मां ने बोला

1733
02:11:27,080 --> 02:11:31,240
अरे ये क्या कर रहा है ये तो ये तो वो साट से खाना

1734
02:11:31,240 --> 02:11:35,840
ठंडी कर कर के ठीक है बीच में तो क्यों खा रहा है तो वो

1735
02:11:35,840 --> 02:11:40,080
उसी चक्कर में वो चाणक वहां पर बैठा था मैं चंद्रगुप्त बैठा था उस चाणक्य

1736
02:11:40,080 --> 02:11:44,360
ने सोचा ये तो मैं बहुत बड़ी गलती कर रहा हूं अगर मैं है ना चारों तरफ

1737
02:11:44,360 --> 02:11:48,520
से अगर मैं आक्रमण करूंगा थोड़ा-थोड़ा करके तो तो मैं धन

1738
02:11:48,520 --> 02:11:52,600
के ऊपर है ना अपना विजय प्राप्त कर लूंगा और बीच में तो

1739
02:11:52,600 --> 02:11:57,080
लड़ाई लड़ता रहू मैं कभी नहीं चाणक्य को मैं कभी जीत नहीं आस कर

1740
02:11:57,080 --> 02:12:01,200
पाऊंगा वही इन लोगों ने कर रखा है कि पहले है ना उल्टा

1741
02:12:01,200 --> 02:12:04,560
सीधा जो है ना भ्रम दूर करो उसके बाद है ना

1742
02:12:04,560 --> 02:12:08,560
जो है ना अपना धर्म के शास्त्र है ना उनके ऊपर आक्रमण करोगे तो हमारे

1743
02:12:08,560 --> 02:12:12,760
लिए आसान होगा अगर हम डायरेक्ट किसी का आकम कर देंगे

1744
02:12:12,760 --> 02:12:16,880
तो नहीं होगा तो वही है ना इन लोगों ने नीति चला रखी है ड़ा

1745
02:12:16,880 --> 02:12:21,680
छोटा छोटा खत्म करो पहले जो गांव के लोग है ना

1746
02:12:21,680 --> 02:12:25,840
में उनको पता नहीं होता है व कभी शास्त्र पढ़ते नहीं है उनको पता कुछ होता

1747
02:12:25,840 --> 02:12:30,520
नहीं क्या करें क्या ना करें मानोगे नहीं मिनट अल जी

1748
02:12:30,520 --> 02:12:34,600
आप लोग मानो या नाना मानो गुरु गोविंद ग्रंथ की कृपा

1749
02:12:34,600 --> 02:12:38,720
से इनके जो प्रचलित भोज थे

1750
02:12:38,720 --> 02:12:43,000
ना नारे उन परे हमने वार कर दिया है

1751
02:12:43,000 --> 02:12:47,200
जी जी बिल्कुल सही है जैसे इनका एक नारा था वेदों में प्रमाण

1752
02:12:47,200 --> 02:12:52,080
है कबीर भगवान है अब कोई नहीं आ कर के बोल रहा जी जी

1753
02:12:52,080 --> 02:12:56,240
हो गए इनका एक नारा आज हमने ध्वस्त किया कि

1754
02:12:56,240 --> 02:13:00,520
ब्रह्मा विष्णु महेश नाशवान है इन्हीं से बुलवाया

1755
02:13:00,520 --> 02:13:05,120
ब्रह्मा विष्णु महेश अविनाशी तत्व से अविनाशी

1756
02:13:05,120 --> 02:13:09,200
जी ब सही है है ना इनका एक नारा था कि हम लोग जो

1757
02:13:09,200 --> 02:13:13,760
है शास्त्र सम्मत भक्ति करते हैं और ये लोग मनमुक भक्ति करते हैं हम लोग

1758
02:13:13,760 --> 02:13:17,800
अब यही बोल रहे कि हम मनम भक्ति करते हैं हम अपने मन से निर्णय लेते

1759
02:13:17,800 --> 02:13:19,600
हैं ये इनके नारे

1760
02:13:19,600 --> 02:13:23,800
थे ये इस तरह के नेटिव चलाए जाते हैं जो बार बार बार बार बोलते

1761
02:13:23,800 --> 02:13:28,720
रहो तो लोगों के कान में पड़ पड़ के प्रमाण हो जाए हमने उसी पर चोट किया

1762
02:13:28,720 --> 02:13:32,720
और अब इनका जो है धीरे धीरे वो सारे जो इनके नैरेटिव है वो धूल में मिल

1763
02:13:32,720 --> 02:13:36,920
गए अभी और भी मिले थोड़े दिन पहले की बात है

1764
02:13:36,920 --> 02:13:40,960
इन्होंने क्या करा कि जैसे यह जो लोगों को बुलाते हैं ना इन्होंने क्या

1765
02:13:40,960 --> 02:13:45,000
करा कि रामपाल के कच्छे बनियान उसके गमछे वोने इनको

1766
02:13:45,000 --> 02:13:49,720
बोल दिया कि हां तुम लोगों ने खरीदने है और अपने ये फोटो फ्रेम करके लगाने हैं

1767
02:13:49,720 --> 02:13:53,680
मतलब इनको सा

1768
02:13:53,680 --> 02:13:57,800
नहीं पता सर अब मैं ये है येभी रिसेंट बता रहा हूं

1769
02:13:57,800 --> 02:14:01,800
ये लगभग पा छ महीने पहले की बात है उसके उसका आपको

1770
02:14:01,800 --> 02:14:06,520
वो भेजूंगा उस ये पीले पेज के ऊपर ये डालते हैं येलो पेज

1771
02:14:06,520 --> 02:14:10,640
छोड़िए र वो हमारे पास जब सैद्धांतिक हमारे वो है तो हमें क्या करना

1772
02:14:10,640 --> 02:14:14,640
है ये अपनी व्यक्तिगत इनका क्या है क्या नहीं है हमारे पास सिद्धांत

1773
02:14:14,640 --> 02:14:18,840
है उनसे ही हम लड़ेंगे जी बिल्कुल बिल्कुल सही बात है

1774
02:14:18,840 --> 02:14:22,880
नहीं इससे इनकी काट की जा सकती है ना हम लोग मूर्ति पूजा कर रहे हैं तुम कच्छे पूज

1775
02:14:22,880 --> 02:14:27,080
रहे हो हम तो तुमसे बहुत बेटर हैं य ये बात है

1776
02:14:27,080 --> 02:14:31,240
हमें पता नहीं है इस बारे में कैसा होता हैका पीला पेज

1777
02:14:31,240 --> 02:14:36,080
मेरे पर्चा पड़ा वो भेजूंगा आपको वो देखना उस लिखा हुआ गमछे

1778
02:14:36,080 --> 02:14:40,080
हमने पूछा तुमने इतने सारे बेच दिए इनको करोड़ों कितने डाले उसने आज तक

1779
02:14:40,080 --> 02:14:44,200
रामपाल ने इतने इतनी इतनी 70 साल की उम्र में कितने कच्छे डाल लेगा कितने बनिया डाल

1780
02:14:44,200 --> 02:14:48,480
लेगा बंदा तुमने करोड़ों कच्छे भेज मारे कहां से आए हैं वो और चप्पल चपल

1781
02:14:48,480 --> 02:14:52,600
के जोड़े अभी हम लोगों ने न चार चैप्टर समाप्त किए एक

1782
02:14:52,600 --> 02:14:56,800
करके एक करके अभी जितने इन्होने चैप्टर खोल रखे हैं सब

1783
02:14:56,800 --> 02:15:01,160
पर एक एक करके बात करेंगे मैं कल से शास्त्र के पीछे इसीलिए पड़ा कल

1784
02:15:01,160 --> 02:15:05,360
बहुत देर मगज मारी करनी पड़ी मगर मैं शास्त्र के पीछे इसलिए पड़ा

1785
02:15:05,360 --> 02:15:11,360
कि मैं इनसे कबूल

1786
02:15:12,200 --> 02:15:16,400
करवाऊंगी 50 से 60 पर ध्वस्त हो चुके अंदर सेय

1787
02:15:16,400 --> 02:15:20,440
अंदर से खत्म हो चुके हैं क्योंकि इसके पा ता नहीं आप शास्त्र

1788
02:15:20,440 --> 02:15:24,480
से पू बात करते हो इनके पास त्र की अकल नहीं है ये फर्क होता है

1789
02:15:24,480 --> 02:15:28,480
का आपने तो पीछे सारा सिस्टम रखा हुआ ना अपने पास इनके पास एक

1790
02:15:28,480 --> 02:15:32,520
ही बुक है बस उसी के पीछे पड़े रहते आप य 50 बुक से एक मिनट में रेफरेंस निकाल

1791
02:15:32,520 --> 02:15:36,640
देते हो इनके बस की बात नहीं है और

1792
02:15:36,640 --> 02:15:40,280
जिसने पड़े होंगे वही तो निकाल

1793
02:15:40,280 --> 02:15:44,280
पाएगा ये बात हो जा चक्र पानी जी आपको

1794
02:15:44,280 --> 02:15:48,600
मैं संपर्क करने वाला था आप जो है

1795
02:15:48,600 --> 02:15:52,920
ये जो हमारा ये प्रकल्प है ना थोड़ा सा योगदान में आए

1796
02:15:52,920 --> 02:15:57,120
स्ट्रीम का चल रहा है एक दो दिन से बोल कल

1797
02:15:57,120 --> 02:16:02,040
कल हम सुने है तो हमारे दिमाग में है जी जी

1798
02:16:02,040 --> 02:16:06,680
जी वो रहेगा उसका दिक्कत नहीं जी जी

1799
02:16:06,680 --> 02:16:10,840
जरूरी भी है सर जरूरी भी है बहुत ज्यादा जरूरी है एक इसीलिए

1800
02:16:10,840 --> 02:16:15,280
मतलब जो काम करने का तरीका है वो यही है कि एक चैप्टर खोल लिया

1801
02:16:15,280 --> 02:16:19,280
अब उसको बंद मत करो जब तक वो बिल्कुल क्लियर बाहर ना आ जाए नहीं

1802
02:16:19,280 --> 02:16:23,600
बिल्कुल सर बिल्कुल हम लोग की वो और रहेगी भी हर तरह से रहेगी कोई

1803
02:16:23,600 --> 02:16:27,360
कल हमने शास्त्र का इसीलिए छेड़ा उससे खूब एक डेढ़ घंटे मगज

1804
02:16:27,360 --> 02:16:31,760
मारी करनी पड़ी मगर तब ये समझ में आ गया अब इसको शास्त्र पर ही हम लोग

1805
02:16:31,760 --> 02:16:35,800
क्लियर आज देखिए वो व्यक्ति आक के ये नहीं बोल रहा हमारे लिए प्रमाण है हमारे लिए पवित्र

1806
02:16:35,800 --> 02:16:40,320
धर्म ग्रंथ है सद ग्रंथ हैय सब बोलना बंद बोलना बंद हो गए

1807
02:16:40,320 --> 02:16:44,440
हमारे लिए एक ही धर्म ग्रंथ है कबीर सागर बोल दिया जी

1808
02:16:44,440 --> 02:16:48,560
जी जी इसका मतलब है इनके लिए बस वो काम चला है ना वही तो लोगों को भ्रमित

1809
02:16:48,560 --> 02:16:52,680
करने के लिए बो यार कबीर सागर में प्रमाण

1810
02:16:52,680 --> 02:16:56,720
है और कबीर भगवान है हमारे वेदों में क्या लिखा है क्या नहीं लिखा

1811
02:16:56,720 --> 02:17:00,720
तुम क्यों बता रहे हो उस दिन बताओ जिस दिन पूरा मानो उसको

1812
02:17:00,720 --> 02:17:05,560
होते कौन तुम बताने बकुल इसम करेक्ट बात है

1813
02:17:05,560 --> 02:17:10,640
हमारी बात है भाई हम दे किसे पढ़ना किससे नहीं पढ़ना

1814
02:17:10,640 --> 02:17:14,640
है इन्होने बना र आप सच के

1815
02:17:14,640 --> 02:17:18,800
साथ सच के साथ

1816
02:17:18,800 --> 02:17:22,880
सागर में प्रमाण है और कवीर भगवान है जिसको मानना होगा

1817
02:17:22,880 --> 02:17:27,080
मान ले हा क्यों बना रहे जनता को

1818
02:17:27,080 --> 02:17:31,640
जी जी जी वेद गीता की बात ही मत करो ना जब उसमें तुम्हारा नाम ही नहीं है तो फिर किस लिए बात करते हो

1819
02:17:31,640 --> 02:17:35,720
अरे नाम नहीं है प्रमाण नहीं है और तुम खुद वेद को प्रमाण

1820
02:17:35,720 --> 02:17:40,000
नहीं मानते तो दूसरे से क्यों कह रहे हो कि तू इसको प्रमाण मान बिल्कुल बिल्कुल

1821
02:17:40,000 --> 02:17:42,680
जब तुम उसे प्रमाण नहीं मानते

1822
02:17:42,680 --> 02:17:46,720
तो तुम क्यों कह रहे हो दूसरे को तू इस इस लाइन को जो ये मेरी बताई हुई

1823
02:17:46,720 --> 02:17:50,960
लाइन है जैसा मैं अर्थ कर रहा हूं उस अर्थ के साथ इस लाइन को तू

1824
02:17:50,960 --> 02:17:55,040
मान ले बाकी सब लाइनों को छोड़ दे बाकी लाइने छोड़ दे ये तो गलत

1825
02:17:55,040 --> 02:18:01,040
बात है ना यह बात बिल्कुल सही

1826
02:18:02,800 --> 02:18:06,960
आपके चलिए फिर आने का सबका आभार और समय

1827
02:18:06,960 --> 02:18:11,040
देने का भार आज हमने फिर से दो तीन पॉइंट निकाल लिए अभी तक

1828
02:18:11,040 --> 02:18:15,080
हम लोग इस उस पर कंक्लूजन पर पहुंचे हैं इनका जो

1829
02:18:15,080 --> 02:18:19,360
दीक्षा चल रहा है वो शास्त्र सम्मत नहीं है मनमुक है

1830
02:18:19,360 --> 02:18:23,640
वेदों में कहीं नहीं लिखा है कबीर भगवान है कबीर जो है

1831
02:18:23,640 --> 02:18:27,800
इनके अनुसार जो कबीर है क्योंकि वो स शरीर नीचे आता है

1832
02:18:27,800 --> 02:18:32,200
और ऊपर भी स शरीर है वो सर्वशक्तिमान नहीं है व

1833
02:18:32,200 --> 02:18:35,840
और क्योंकि वो क

1834
02:18:35,840 --> 02:18:39,960
नहीं एक मिनट क्योंकि वह कण कण में नहीं है तो

1835
02:18:39,960 --> 02:18:44,080
वह सर्वव्यापक रूप से सर्व सामर्थ वान नहीं है

1836
02:18:44,080 --> 02:18:48,120
और इनका य जो गीता में कहीं की बात को लेना कहीं

1837
02:18:48,120 --> 02:18:52,240
की बात को ना लेना यह भी इनका मनम है शास्त्र य नहीं बोलते वेद

1838
02:18:52,240 --> 02:18:56,280
और पुराण गीता य नहीं बोलती कि आपको जितना अच्छा

1839
02:18:56,280 --> 02:18:57,720
लगे उतना ले लो जितना समझ

1840
02:18:57,720 --> 02:19:01,760
में ना आए वो मत लो यह कहीं नहीं बोलती

1841
02:19:01,760 --> 02:19:05,840
बोलती है यदि दो विपरीत बात तो दोनों धर्म है या तो उसको

1842
02:19:05,840 --> 02:19:10,240
समझ लो या दोनों को ले लो ठीक

1843
02:19:10,240 --> 02:19:14,280
है जी जी जी जी और क्या है और एक और बात प

1844
02:19:14,280 --> 02:19:17,200
हम लोग पहुंचे हैं

1845
02:19:17,200 --> 02:19:21,400
कि शास्त्रों का चयन मनमुक है दीक्षा लेना

1846
02:19:21,400 --> 02:19:25,520
मन्मुख है और हां एक और कंक्लूजन प

1847
02:19:25,520 --> 02:19:29,400
पहुंच गए हम लोग कि

1848
02:19:29,400 --> 02:19:33,880
अ क्या कहते हैं एक कंक्लूजन और है कि इनके लिए वेद

1849
02:19:33,880 --> 02:19:38,160
पुराण गीता प्रमाण नहीं है यही मुझे बस

1850
02:19:38,160 --> 02:19:42,440
ये बहुत मैं पिछले दो तीन दिन से मैं इस पर वर्क कर रहा था कि अब इनसे

1851
02:19:42,440 --> 02:19:46,520
ये मनवाना है कि वेद और गीता पुराण आपके लिए ठीक है ठीक

1852
02:19:46,520 --> 02:19:50,720
है गीता वेद पुराण आपके लिए जो है

1853
02:19:50,720 --> 02:19:56,520
वो नहीं है इसका मतलब है ये लोग अधर्म के रास्ते पे हैं

1854
02:19:56,520 --> 02:20:00,560
हां कोई आना चाहता है सिद्ध करने अब देखो

1855
02:20:00,560 --> 02:20:05,360
शास्त्र की बात तो रह नहीं गई ठीक है अब

1856
02:20:05,360 --> 02:20:09,440
अब जो असली पावर है ना क्योंकि शास्त्रों में आप भटका होगे इधर करोगे

1857
02:20:09,440 --> 02:20:12,720
उधर करोगे उधर ये वो करोगे अब जो असली सार्वभौम

1858
02:20:12,720 --> 02:20:16,720
सिद्धांत है अब उस परे बात होगी आ जाओ कबीर को

1859
02:20:16,720 --> 02:20:20,720
सर्वशक्तिमान सिद्ध कर दो बस बिल्कुल बिलकुल सही बात है बिल्कुल

1860
02:20:20,720 --> 02:20:24,800
रामपाल की ज्ञान गंगा के अनुसार रामपाल वालों की

1861
02:20:24,800 --> 02:20:28,840
जो ज्ञान गंगा पुस्तक है उसके अनुसार कबीर को ईश्वर

1862
02:20:28,840 --> 02:20:33,240
सिद्ध कर दो सर्वशक्तिमान सिद्ध कर दो आ जाओ बिल्कुल उनकी

1863
02:20:33,240 --> 02:20:38,480
कला कलाए गिनाए कलाए कितनी कलाए थी उनके अंदर वो भी गिनाए हमारे को व

1864
02:20:38,480 --> 02:20:43,800
क कोई तो होगा जिसने

1865
02:20:43,800 --> 02:20:48,280
इतना ग्रहण किया होगा निष्ठा पूर्वक

1866
02:20:48,280 --> 02:20:51,840
जी जी जी

1867
02:20:51,840 --> 02:20:55,920
नास्तिक बाद का खंडन कर दो जो धर्म आप मान

1868
02:20:55,920 --> 02:21:00,000
रहे हो कबीर सागर का उसको शाश्वत सिद्ध कर दो और कबीर सागर

1869
02:21:00,000 --> 02:21:04,160
के ईश्वर को सर्वशक्तिमान सिद्ध कर दो आ जाओ जी बिल्कुल

1870
02:21:04,160 --> 02:21:06,800
सही बात

1871
02:21:06,800 --> 02:21:11,280
है आ रहे क्या आना

1872
02:21:11,280 --> 02:21:15,560
है आना है आना है हा

1873
02:21:15,560 --> 02:21:19,760
बोलिए मैं ये कहना चाह रहा हूं कि संत रामपाल

1874
02:21:19,760 --> 02:21:23,960
जी महाराज ने सबका ब्रेन वस कर रखा है आपने

1875
02:21:23,960 --> 02:21:28,160
कहा सबका ब्रेन बस कर रखा है भाई मेरे अभी हमारा

1876
02:21:28,160 --> 02:21:32,320
चैप्टर यह है आपसे हम यह बात करेंगे कि क्या

1877
02:21:32,320 --> 02:21:36,920
रामपाल दास जी के अनुसार परिभाषित होने वाला ईश्वर

1878
02:21:36,920 --> 02:21:41,120
सर्वशक्तिमान है कि नहीं बस बाकी बात

1879
02:21:41,120 --> 02:21:45,200
कर लेे मैं वेद का ना वेद की

1880
02:21:45,200 --> 02:21:49,600
बात कर रहा हूं ना ही मैं जो सदियों से

1881
02:21:49,600 --> 02:21:53,680
सतयुग द्वापर से जो आज तक पंडितों ने

1882
02:21:53,680 --> 02:21:57,760
नहीं रेन बस कर पाया वह एक क्षण में रामबास जी महाराज में ऐसा

1883
02:21:57,760 --> 02:22:03,520
क्या था जो उन्होंने कर दिया ऐसा कुछ नहीं

1884
02:22:03,520 --> 02:22:08,880
है भैया पंडितो ने शुरू से ही

1885
02:22:08,880 --> 02:22:14,880
आप जाइए भैया आप जा

1886
02:22:16,640 --> 02:22:20,840
सकते अगर सीता माता का अप ण

1887
02:22:20,840 --> 02:22:26,040
हो गया तो राम जी जो है निर्बल हो गए

1888
02:22:26,040 --> 02:22:30,040
है ना सीता माता का अगर अपरण हो गया

1889
02:22:30,040 --> 02:22:34,440
तो राम जी अपरण हो गए अब मैं पूछ रहा हूं कि

1890
02:22:34,440 --> 02:22:39,520
रामपाल जी जेल चले गए तो क्या रामपाल जी निर्बल हो

1891
02:22:39,520 --> 02:22:43,920
गए लीला लीला कहोगे ना अपनी बारी आने

1892
02:22:43,920 --> 02:22:48,920
पर वो बात नहीं करोगे कि कबीर भगवान है उसम फस

1893
02:22:48,920 --> 02:22:52,920
जाओगे फिर आ जाती इनकी 600

1894
02:22:52,920 --> 02:22:56,960
साल हो गए आपके कबीर को आए हुए और कितन

1895
02:22:56,960 --> 02:23:01,440
कहां तुमने बदल लिया क्या बदल लिया बताओ जी जी

1896
02:23:01,440 --> 02:23:05,560
देश का प्रधानमंत्री तुम्हें मानता है क्या जिस कोर्ट

1897
02:23:05,560 --> 02:23:10,240
में बेल के लिए अप्लाई करते हो वो मानता है क्या कोर्ट आपको भगवान

1898
02:23:10,240 --> 02:23:14,480
बिल्कुल सही बात है ग आपकी ताकत करो कंट्रोल

1899
02:23:14,480 --> 02:23:18,800
उनके ब्रेन को इसलिए कहता हूं व्यर्थ बातें ना करो फिर उसम ढोल

1900
02:23:18,800 --> 02:23:23,080
का पोल निकल आएगा वोह उदाहरण देते हैं कि भगवान

1901
02:23:23,080 --> 02:23:27,200
कृष्ण भी तो जेल में पैदा हुए थे तो मैं उनसे यही

1902
02:23:27,200 --> 02:23:31,320
कहता हूं कि वो जो छोटे बढ है जिस जेल

1903
02:23:31,320 --> 02:23:35,880
में पैदा हुए थे उस जेल को कंट्रोल करने वाले को मार दिया

1904
02:23:35,880 --> 02:23:40,800
था जी जी जी में पैदा हुए थे तु मार दो

1905
02:23:40,800 --> 02:23:43,720
क मारोगे

1906
02:23:43,720 --> 02:23:47,960
बताओ सर वो तो सेकंडो के लिए आए और सेकंड में निकल गए इनको स्पेशल

1907
02:23:47,960 --> 02:23:51,280
घर से निकाल के व डाला

1908
02:23:51,280 --> 02:23:55,280
ये नहीं समझ में आता नहीं मैं कह रहा हूं

1909
02:23:55,280 --> 02:23:59,480
जिस जेल में वो जन्म ली जिस जेल में वो जन्म लिया था

1910
02:23:59,480 --> 02:24:03,760
उन्होंने उस जेल को जेल का जो नियंता था शासक

1911
02:24:03,760 --> 02:24:08,240
था उसको मार दिया था बिल्कुल मार दिया आप क्यों नहीं मार

1912
02:24:08,240 --> 02:24:12,760
देते आपके अंदर नहीं है क्या पावर

1913
02:24:12,760 --> 02:24:17,920
व मारना क्या एक सिपाही से वहां नहीं लड़

1914
02:24:17,920 --> 02:24:23,280
पाए जेल के नहीं लड़

1915
02:24:23,280 --> 02:24:27,440
पाए किताबों में तोन उड़ने की आपको

1916
02:24:27,440 --> 02:24:31,640
भाई साब मैं तो यह भी कहता हूं कभी कभी लोग जो है चमत्कार को नमस्कार करने लगते

1917
02:24:31,640 --> 02:24:35,640
हैं कल एक व्यक्ति आया वो बोला कि उन्होने मरे हुए को जिंदा कर दिया

1918
02:24:35,640 --> 02:24:39,800
था अभी आप भक्त माल उठा लो भक्त माल ले आओ

1919
02:24:39,800 --> 02:24:44,280
इतने संतो के इतने चमत्कार है कि पूछो नहीं मान लो

1920
02:24:44,280 --> 02:24:48,920
भगवान हम हम तो यह कहते कि मान लिया तुम्हारे

1921
02:24:48,920 --> 02:24:53,000
जो जिसको तुम भगवान उसम चमत्कार है मगर

1922
02:24:53,000 --> 02:24:57,040
नहीं लिखा है चमत्कार जो करेगा वो ईश्वर होगा एक ना इन्होने एक

1923
02:24:57,040 --> 02:25:01,960
नकली कहानी बना रखी उन्होने भैसे से मंत्र बुलवा लिया है ना

1924
02:25:01,960 --> 02:25:06,080
हमने श्री राम जी ने कितने कितने करोड़ों वानर के बुख से

1925
02:25:06,080 --> 02:25:10,640
जय श्री राम निकलवा दिया उससे ऊपर बात करो राक्षस के

1926
02:25:10,640 --> 02:25:15,000
जय श्री राम निकलवा दिया उस बात करो नहीं नहीं

1927
02:25:15,000 --> 02:25:19,000
कुवारी कबीर दास जी कबीर दास जी कुवारी गाय

1928
02:25:19,000 --> 02:25:23,000
का दूध पिए हैं वो तो न

1929
02:25:23,000 --> 02:25:27,440
क किया हु तो एक एक से

1930
02:25:27,440 --> 02:25:31,480
कहानी अब यह जो कहते हैं कि कुमारी गाय का दूध पिए

1931
02:25:31,480 --> 02:25:32,960
यह ठीक है इन सब

1932
02:25:32,960 --> 02:25:36,960
पर हम काउंटर कर सकते हैं सर दूध पीना जो है

1933
02:25:36,960 --> 02:25:41,200
क्या मैं तोय क अगर कबीर जी के अलावा किसी

1934
02:25:41,200 --> 02:25:45,280
और ने भी कुमारी गाय का दूध पी लिया तो कुत्ता बिल्ली भी

1935
02:25:45,280 --> 02:25:49,280
पी सकता है दू उसम क्या दिक्कत है दूध पीने में क्या दिक्कत है कुत्ता बिल्ली प सकता

1936
02:25:49,280 --> 02:25:53,800
है नहीं ऐसा तो भाई ऐसे तो गोरखनाथ

1937
02:25:53,800 --> 02:25:58,120
जी भी जो है भैसे जो है मंत्र बुलवा दिए थे तो गोरखनाथ

1938
02:25:58,120 --> 02:26:02,720
जी को भगवान बोल दिया

1939
02:26:02,720 --> 02:26:06,960
जाए प्रमाण देंगे देखिए वो आपसे अपनी बात तो मनवा

1940
02:26:06,960 --> 02:26:11,080
लेंगे देखो देखो ऐसा हुआ हम लोग हम लोग सत्यवादी है

1941
02:26:11,080 --> 02:26:15,240
तो हम मान लेंगे ठीक है शास्त्र में लिखा है जब आप प्र मार देंगे शास्त्रों

1942
02:26:15,240 --> 02:26:19,440
से ये तो काल ने बोला है गय

1943
02:26:19,440 --> 02:26:23,520
बात परफेक्ट है बात सही कह रहे बिल्कुल ये तो अनुवाद गलत है तो फिर मतलब क्या

1944
02:26:23,520 --> 02:26:27,680
रहा शास्त्रों की बात करने का जहां तक इनका मंतव्य शिद्ध

1945
02:26:27,680 --> 02:26:31,760
होता ये बोल रहे थे कबीर सागर जो है हमारे लिए प्रमाण है जरा वो

1946
02:26:31,760 --> 02:26:36,520
दिखा दीजिए कबीर सागर में कहां पेन चलाया रामपाल जी ने

1947
02:26:36,520 --> 02:26:40,720
कबीर सागर भी प्रमाण नहीं है ओनली सिंगल

1948
02:26:40,720 --> 02:26:44,720
पॉइंट एजेंडा रामपाल जी प्रमाण है वो बताएंगे कहां क्या

1949
02:26:44,720 --> 02:26:48,600
है बस कौन सी बात सही कौन सी बात गलत

1950
02:26:48,600 --> 02:26:52,600
अब उनको ये कबीर वाणी तो आ जाएगी क्योंकि वो हिंदी अक्षरों

1951
02:26:52,600 --> 02:26:56,880
से है हिंदी शब्द है उसम संस्कृत में आपका कैसे अधिकार

1952
02:26:56,880 --> 02:27:00,960
हो गया ना आपको व्याकरण आती है ना पाणिनीय सूत्र पढ़ा आपको कहां से अधिकार आ

1953
02:27:00,960 --> 02:27:05,480
गया संस्कृत में बताने का कि य अनुवाद ने गलत कर दिया याय कर दिया है

1954
02:27:05,480 --> 02:27:09,480
आपने ना पढ़ा ना कुछ पढ़ा कौन

1955
02:27:09,480 --> 02:27:13,480
से अधिकार से आप कहेंगे कि मैं जो संस्कृत का सही अर्थ मैं बताऊंगा और वो गलत बता रहे

1956
02:27:13,480 --> 02:27:17,640
हैं अच्छा रामपाल जी ने ब्रज का अर्थ क्या लिखा है वो आज मैंने आपको

1957
02:27:17,640 --> 02:27:22,280
भेजा था रामपाल जी की गीता है देखिए क्या लिखा है

1958
02:27:22,280 --> 02:27:28,240
दिखाइए जरा रामपाल जी की

1959
02:27:28,240 --> 02:27:32,440
गीता यह भी देख लो भैया अगर कोई

1960
02:27:32,440 --> 02:27:36,520
कबीर पंथी हो तो वह देख लो

1961
02:27:36,520 --> 02:27:41,480
अरे तो सामने आ जाओ ना भैया मीना मालविया जी आप ही आ जाओ

1962
02:27:41,480 --> 02:27:45,960
सिद्ध करो वेद पुराण गीता को

1963
02:27:45,960 --> 02:27:50,240
भैया देखिए

1964
02:27:50,240 --> 02:27:56,240
इसमें लिखा है ब्रज का

1965
02:27:59,200 --> 02:28:03,600
अर्थ मेरी शरण में आओ

1966
02:28:03,600 --> 02:28:08,200
लो यह कभी य ये रामपाल जी की गीता

1967
02:28:08,200 --> 02:28:13,160
है और इन्होंने ही अपनी गीता में लिख रखा है मेरी शरण में आओ

1968
02:28:13,160 --> 02:28:19,160
देख लो

1969
02:28:21,040 --> 02:28:25,040
देखिए क्या लिखा हैते समस्त प्रकार के धर्मों का

1970
02:28:25,040 --> 02:28:29,120
परित्याग करो और मेरी शरण में आओ मैं समस्त पापों

1971
02:28:29,120 --> 02:28:33,520
से तुम्हारा उद्धार कर दूंगा डरो मत लो

1972
02:28:33,520 --> 02:28:37,640
आओ अब अब बताओ अब तो आपकी तो

1973
02:28:37,640 --> 02:28:43,640
प्रमाण बुद्धि है रामपाल जी में अब क्या करोगे ब्रज का

1974
02:28:44,280 --> 02:28:48,600
अर्थ होने परित्याग का भी सर इन्होने परित्याग

1975
02:28:48,600 --> 02:28:52,640
का अर्थ भी गलत किया उसम उन्होने देखो शब्द कुछ अलग किया हुआ इन्होने परित्याग

1976
02:28:52,640 --> 02:28:57,200
में परित्याग का मतलब होता है छोड़ देना लेकिन इन्होने बोला हुआ मल की उसको

1977
02:28:57,200 --> 02:29:01,280
अर्पण करने को बोल रहा है वहां पर वर्ल्ड का इन्होने गलत इस्तेमाल किया हुआ है

1978
02:29:01,280 --> 02:29:05,600
अरे भैया क वो लो कहा गए विदों में प्रमाण

1979
02:29:05,600 --> 02:29:10,040
ओ कबीर जी भगवान है कहां गए

1980
02:29:10,040 --> 02:29:14,560
कहां है भाई आओ वि में प्रमाण दिखाओ विद

1981
02:29:14,560 --> 02:29:18,560
में आराधना आप सर ध्यान से देखना

1982
02:29:18,560 --> 02:29:23,440
वो जो परित्याग पर शब्द है ना उसका भी इन्होने गलत इस्तेमाल किया हा

1983
02:29:23,440 --> 02:29:27,840
भैया जय श्री राम बताइए जी सर नमस्ते

1984
02:29:27,840 --> 02:29:31,960
सर नमस्ते यार जय श्रीराम बोलने

1985
02:29:31,960 --> 02:29:36,080
में क्या जाहा जय श्री राम बोल दो भाई नमस्ते क्यों बाबू

1986
02:29:36,080 --> 02:29:40,120
रामदास संत रामपाल जी महाराज के शिष्य मैं समझ रहा हूं मैं जय श्री

1987
02:29:40,120 --> 02:29:45,000
राम बोलता ही इसीलिए हूं कि मैं सामने वाले को समझ सकू कौन आया है

1988
02:29:45,000 --> 02:29:49,080
मैं बोलता ही जय श्री राम में क्या दिक्कत है राम नाम सत्य

1989
02:29:49,080 --> 02:29:53,160
बोल दो कोई दिक्कत नहीं कर सकते हैं उसम कौन सी बड़ी बात चलो

1990
02:29:53,160 --> 02:29:57,600
ठीक है ठीक है चलो कोई नहीं ऐसे य पड़ी ना करें जी

1991
02:29:57,600 --> 02:30:01,720
बोलिए आपका सुनाम बाबू

1992
02:30:01,720 --> 02:30:06,160
रामदास मेरा नाम है बाबू रामदास बाबू रामदास

1993
02:30:06,160 --> 02:30:11,120
जी यह अभी कुछ दिनों से एक चर्चा चल रही है आपके द्वारा

1994
02:30:11,120 --> 02:30:15,120
कि रामचरित मानस में लिखा है हनुमान जी खुद कह

1995
02:30:15,120 --> 02:30:19,120
रहे हैं कि जो सुबह सुबह मेरा चेहरा देख लेता है

1996
02:30:19,120 --> 02:30:23,120
वो जो है पूरे दिन उसको खाना नहीं मिलता है तो

1997
02:30:23,120 --> 02:30:27,480
इसका अर्थ है कि हनुमान जी की भक्ति करना गलत है हनुमान चालीसा

1998
02:30:27,480 --> 02:30:31,720
इत्यादि का पाठ करना गलत है आप इसको सत्य मानते

1999
02:30:31,720 --> 02:30:35,720
हैं सर मैं इसके बारे में

2000
02:30:35,720 --> 02:30:40,400
कुछ नहीं कहूंगा मैं आपसे कुछ जानना चाहता हूं कि आप हमें बताइए

2001
02:30:40,400 --> 02:30:44,480
हां बोलिए हम हम संत रामपाल जी महाराज के भक्तों के

2002
02:30:44,480 --> 02:30:48,600
और आप लोगों के बीच में विरोध क्यों हो रहा है भाई अगर मान लीजिए

2003
02:30:48,600 --> 02:30:51,080
जो चीज सच्चाई है विरोध हो रहा है

2004
02:30:51,080 --> 02:30:55,320
कि वह वेदों को ना मानने का नाटक करते हैं वेदों

2005
02:30:55,320 --> 02:30:59,320
को मानते नहीं है वेद में लिखा है

2006
02:30:59,320 --> 02:31:03,360
शास्त्र में कि दो अलग-अलग बातें अगर है दोनों को

2007
02:31:03,360 --> 02:31:07,640
मानना पड़ेगा या तो दोनों का ऐसा अर्थ निकालना पड़ेगा

2008
02:31:07,640 --> 02:31:11,720
कि एक हो जाए वो कहते हैं इसको मत मानो इसको

2009
02:31:11,720 --> 02:31:16,160
मानो इसलिए विरोध है बताए एक

2010
02:31:16,160 --> 02:31:20,840
एक सुटी का भी एक सुटी का भी अगर आपने विरोध कर दिया

2011
02:31:20,840 --> 02:31:25,080
तो आप नास्तिक हो इसलिए विरोध है देखिए

2012
02:31:25,080 --> 02:31:29,320
हम आप बात से सम है कि अगर या हम लोगों में कमी है

2013
02:31:29,320 --> 02:31:33,360
या आप लोगों में कमी है तो इस बात को हम लोग अगर आपस में बैठ करर चर्चा

2014
02:31:33,360 --> 02:31:37,360
कर लिया जाए कि कहां पर कमी है

2015
02:31:37,360 --> 02:31:41,880
अब मैं बताऊ आपको अब मैं बताऊ आपको कमी का सीधा सा रास्ता

2016
02:31:41,880 --> 02:31:46,560
है जिसका ईश्वर सर्वशक्तिमान है वो सही है

2017
02:31:46,560 --> 02:31:50,600
जिसका ईश्वर सर्वशक्तिमान नहीं है वो गलत है ईश्वर

2018
02:31:50,600 --> 02:31:54,960
ईश्वर को ईश्वर सिद्ध करने के लिए उसका सर्व

2019
02:31:54,960 --> 02:31:59,000
शक्तिमान होना आवश्यक है इतना तो मानते हो जी हम लोग

2020
02:31:59,000 --> 02:32:03,040
मानते हैं हर हर किसी व्यक्ति को मोक्ष प्राप्ति करना है

2021
02:32:03,040 --> 02:32:06,080
तो भाई मोक्ष प्राप्त मोक्ष का अर्थ

2022
02:32:06,080 --> 02:32:10,280
क्या मानते हो आप बताओ मोक्ष का मतलब यह होता है कि हमेशा

2023
02:32:10,280 --> 02:32:14,480
के लिए जन्म मृत्यु से छुटकारा प्राप्त करना हा जो

2024
02:32:14,480 --> 02:32:18,760
भौतिक त्रिविध पाप है उनसे छुटकारा प्राप्त कर लेना

2025
02:32:18,760 --> 02:32:23,040
सत चित स चिता आनंद है ना मोक्ष

2026
02:32:23,040 --> 02:32:27,360
और आपके अनुसार मोक्ष कहां पर है

2027
02:32:27,360 --> 02:32:31,440
देखिए संत रामपाल जी महाराज ने जो भी ज्ञान अपना बताए

2028
02:32:31,440 --> 02:32:36,280
हैं देखिए देखिए देखिए देखिए हमको अब आप शास्त्र का नाम मत लीजिए

2029
02:32:36,280 --> 02:32:40,520
आप सिर्फ ये बताइए संत रामपाल जी के अनुसार मोक्ष कहां पर है

2030
02:32:40,520 --> 02:32:44,760
तत चित आनंद कहां पर है बताइए सतलोक

2031
02:32:44,760 --> 02:32:48,880
है सतलोक यानी कि जब सतलोक पहुंच जाएंगे तो कोई भी ऐसी

2032
02:32:48,880 --> 02:32:52,920
आस मन रहेगी मुझे पाना है मुझे यह करना है खुश हो

2033
02:32:52,920 --> 02:32:56,440
जाएंगे हम सदा के लिए

2034
02:32:56,440 --> 02:33:01,440
जी है ना अच्छा यहां पर लोग आए कैसे

2035
02:33:01,440 --> 02:33:05,560
जीव कैसे आए थे सतलोक में ही थे ना

2036
02:33:05,560 --> 02:33:09,680
जी सर जी इसका तो सृष्टि रचना आपने ज्ञान गंगा से पढ़े ही

2037
02:33:09,680 --> 02:33:13,880
है तो इसको जदा बताने की जरूरत नहीं है मैं आपसे पूछ रहा

2038
02:33:13,880 --> 02:33:18,080
हूं जीव य आने से पहले सबसे पहले सतलोक में ही था ना

2039
02:33:18,080 --> 02:33:20,800
जी सर जी

2040
02:33:20,800 --> 02:33:21,360
रे

2041
02:33:21,360 --> 02:33:25,440
जितने भी समस्त जी यानी कि सतलोक में भी सतलोक में

2042
02:33:25,440 --> 02:33:29,920
था सतलोक सतलोक में था तो ऐसा क्या हुआ

2043
02:33:29,920 --> 02:33:34,520
कि उनको यहां आना पड़ गया जीव को बताइए

2044
02:33:34,520 --> 02:33:39,000
मैं बताऊं जी बताइए मैं

2045
02:33:39,000 --> 02:33:43,480
मैं बताऊ जी जी बताइए बताइए

2046
02:33:43,480 --> 02:33:47,600
हां जब काल कुछ कर रहा था

2047
02:33:47,600 --> 02:33:52,040
जब काल वहां पर कुछ कर रहा था उसको देख कर के जीव प्रभावित

2048
02:33:52,040 --> 02:33:56,120
होने लगे उसकी ओर आकर्षित होने लगे यही सच्चाई है

2049
02:33:56,120 --> 02:34:00,200
ना जी जी और उनके मन में लालसा आने लगी

2050
02:34:00,200 --> 02:34:04,560
उसको फॉलो करने की काल को फॉलो करने की जी

2051
02:34:04,560 --> 02:34:08,600
ठीक है आपके अनुसार तलोक वो है जहां पर कोई

2052
02:34:08,600 --> 02:34:12,720
लालसा बाकी नहीं रह जाती वहां

2053
02:34:12,720 --> 02:34:16,720
पर हमारे जी वहां पर हमारे गुरु जी ने बताया है कि

2054
02:34:16,720 --> 02:34:21,320
वहां पर शब्द से हर चीज उपलब्ध हो जाता है वहां पर जि चीज की

2055
02:34:21,320 --> 02:34:25,480
मैं पूछ रहा हूं मैं पूछ रहा हूं कोई लालसा बाकी रह जाती है

2056
02:34:25,480 --> 02:34:29,560
मन में अतृप्त रह जाती है किसी चीज की कि नहीं रह जाती मोक्ष का मतलब

2057
02:34:29,560 --> 02:34:33,800
है कि कोई भी अतृप्त ना रह जाए जरा भी किसी भी तरह

2058
02:34:33,800 --> 02:34:36,360
का वो ना हो कि मेरे को अभी यह पाना

2059
02:34:36,360 --> 02:34:40,720
है वो है मोक्ष अब ये बताइए सतलोक में वैसा मोक्ष

2060
02:34:40,720 --> 02:34:44,880
है क्या सतलोक में मोक्ष है वहां पर आपको किसी भी प्रकार

2061
02:34:44,880 --> 02:34:49,720
का कोई संकट कोई कमी नहीं रगी अरे मेरे भाई जो मैं पूछ रहा हूं वो बताओ

2062
02:34:49,720 --> 02:34:53,760
कोई कमी लगती है क्या सतलोक में कोई चीज की लालसा होती

2063
02:34:53,760 --> 02:34:58,520
है क्या सतलोक जाने के बाद कि अरे अरे हमें वो पाना है

2064
02:34:58,520 --> 02:35:02,640
नहीं रता कोई कमी नहीं रता तो फिर हमको काल के

2065
02:35:02,640 --> 02:35:06,680
लिए यह लालसा क्यों आ रही है कि भैया मुझे उसके उसके साथ

2066
02:35:06,680 --> 02:35:10,800
जाना उसके पीछे जाना है सर इसे

2067
02:35:10,800 --> 02:35:14,880
आपने हमारे गुरु जी के ज्ञान गंगा से तो पढ़े ही है इसको हमको ज्यादा बताने की जरूरत

2068
02:35:14,880 --> 02:35:19,680
नहीं है अब आपसे हम एकज और जानना चाहते हैं देखिए

2069
02:35:19,680 --> 02:35:23,720
नहीं नहीं पहले इसको क्लियर करो पहले इसको क्लियर करो अभी अभी अभी क्लियर

2070
02:35:23,720 --> 02:35:28,120
करो आपने कहा कि उसका ज्ञान सही होगा जिसका मोक्ष होगा

2071
02:35:28,120 --> 02:35:32,200
आपने कहा मोक्ष वो है जहां पर किसी प्रकार की लालसा किसी प्रकार की तपती

2072
02:35:32,200 --> 02:35:36,680
ना हो वहां पहुंच गए तो मोक्ष है अब मैं कह रहा हूं जो आप मोक्ष दे रहे हो सतलोक

2073
02:35:36,680 --> 02:35:40,880
है सतलोक में उनको लालसा हो रही है तो क्या वो मोक्ष रहा क्या

2074
02:35:40,880 --> 02:35:44,920
सतलोक पहुंचना अच्छा ठीक है मानते

2075
02:35:44,920 --> 02:35:49,080
हैं मान लीजिए कि उनको लालसा क्या मानते हैं भाई साहब आप क्या मानते

2076
02:35:49,080 --> 02:35:51,400
हैं बताइए

2077
02:35:51,400 --> 02:35:55,520
मैं बताऊंगा आप क्या मानते हैं मान लीजिए हम मानते हैं

2078
02:35:55,520 --> 02:35:59,640
कि वहां जाने पर मोक्ष नहीं हुआ अब हम इस बात को स्वीकार करते हैं आपके अनुसार

2079
02:35:59,640 --> 02:36:04,040
हम पूछना चाहते हैं कि आप लोग

2080
02:36:04,040 --> 02:36:08,400
जिसके अनुसार से आप लोग मक्ष कराते हैं क्या उससे मोक्ष होता है इसका मार्ग

2081
02:36:08,400 --> 02:36:12,640
हमें बताइए आप होता है बहुत होता है देखिए

2082
02:36:12,640 --> 02:36:16,840
हमें आपका जोय ये गरुड़ पुराण जो है मैंने इसको अध

2083
02:36:16,840 --> 02:36:20,960
भाई साब भाई साहब देखिए देखिए प्रमाण की बात तब करिए

2084
02:36:20,960 --> 02:36:25,240
जब जो पूरा माने आप हमें हमारी चीजों

2085
02:36:25,240 --> 02:36:29,240
के लिए मत बताइए य ये लिखा है पूरा मानो तो बताओ

2086
02:36:29,240 --> 02:36:33,400
ठीक है हमने आपको कबीर सागर तो नहीं बताया कि पूरा मानो उसको आप

2087
02:36:33,400 --> 02:36:37,640
मानते हो इसलिए हमने पूछा उससे आपका आपका ग्रंथ

2088
02:36:37,640 --> 02:36:41,840
को पूरा मानते हैं उसमें हमारे आपके बीच में हम ये चाहते हैं कि दूरी ना हो जो सच्चाई

2089
02:36:41,840 --> 02:36:46,200
है सबके साथ सच्चाई दूरी दूरी सुनिए दूरी इसलिए है

2090
02:36:46,200 --> 02:36:50,240
क्योंकि आपकी तरफ से पाखंड होता है कि वेद में प्रमाण है

2091
02:36:50,240 --> 02:36:54,240
कबीर भगवान है आज तक नहीं दिखाया कि वेदों में कहां लिखा है कि कबीर भगवान है

2092
02:36:54,240 --> 02:36:58,320
दूसरी बात वेदों का मानने वाला होने का मतलब होता है कि

2093
02:36:58,320 --> 02:37:02,640
उसकी हर बात को मानना जैसे रामपाल दास जी की बात को मानने

2094
02:37:02,640 --> 02:37:06,480
का मतलब होता है मानने वाले का मतलब होता है रामपाल दास जी

2095
02:37:06,480 --> 02:37:10,560
की हर बात को मानना जी और अगर आप उनकी पूरी बातें

2096
02:37:10,560 --> 02:37:14,640
नहीं मान रहे हो थोड़ी मान रहे हो थोड़ी नहीं मान रहे हो तो इसका मतलब रामपाल दास जी आपके

2097
02:37:14,640 --> 02:37:18,680
लिए प्रमाण नहीं है उसी प्रकार से यदि आप वेदों की

2098
02:37:18,680 --> 02:37:22,920
बात यदि आप वेदों की बात पूरी मान रहे हो पू और कुछ

2099
02:37:22,920 --> 02:37:27,080
नहीं मान रहे हो तो फिर वो भी आपके लिए प्रमाण नहीं है इसलिए दूरी

2100
02:37:27,080 --> 02:37:31,560
है जिस दिन आप ये कह के आएंगे मैं वेद को पूरा मानता हूं उस दिन हम आपसे

2101
02:37:31,560 --> 02:37:35,680
शास्त्र में आपको समझा देंगे यह प्रमाण है ये प्रमाण है ये प्रमाण है

2102
02:37:35,680 --> 02:37:39,680
कितने तो प्रमाण दिए देखिए भाई सुनो

2103
02:37:39,680 --> 02:37:43,960
सुनो एक ही परम ब्रह्म को कहीं पर ब्रह्म कह दिया गया है

2104
02:37:43,960 --> 02:37:48,280
कहीं पर काल भी कहा गया है और लीला पूर्वक कहीं पर उ

2105
02:37:48,280 --> 02:37:52,280
उन लोगों ने यह भी कहा है मेरी तो देह नष्ट होती है मगर अपनी इच्छा से

2106
02:37:52,280 --> 02:37:56,360
होती है ईश्वर की इच्छा से होती है हम लोगों की देह

2107
02:37:56,360 --> 02:38:00,520
नष्ट अपनी इच्छा से नहीं होती हमारे कंट्रोल में नहीं है

2108
02:38:00,520 --> 02:38:04,600
अच्छा व ईश्वर क्या निराकार है क्या वो व्यवहार

2109
02:38:04,600 --> 02:38:08,840
में ना आ सकने वाला है हम इन आंखों से उसे देख नहीं सकते इन

2110
02:38:08,840 --> 02:38:14,840
कानों से उसे सुन नहीं सकते इन हाथों से उसे छू नहीं सकते वो

2111
02:38:15,960 --> 02:38:19,960
ऐसात है इस बात इस बात से सहमत है कि वह किसी

2112
02:38:19,960 --> 02:38:24,280
के सामने दर्शन नहीं देगा वो व्यवहार में ना सकने

2113
02:38:24,280 --> 02:38:28,600
वाला है फिर वह अपना एक रूप बनाता है जिससे कि हम उसकी भक्ति

2114
02:38:28,600 --> 02:38:32,880
कर सके सजन सर्जन करता है अपना तो क्या आया

2115
02:38:32,880 --> 02:38:37,520
कि तत् मानम सजाम में हम मैं अपना सृजन करता हूं

2116
02:38:37,520 --> 02:38:43,400
क्यों करते हैं परित प्राणाया साधु नाम विनाया

2117
02:38:43,400 --> 02:38:47,400
चुकता साधु भक्तों के उद्धार के लिए दुष्टों के

2118
02:38:47,400 --> 02:38:51,480
विनाश के लिए स करते ठीक

2119
02:38:51,480 --> 02:38:56,080
है यह मेरी थ्योरी है जो आपको बता रहा हूं आपकी संतुष्टि के लिए तो

2120
02:38:56,080 --> 02:39:00,360
वह आता है रूप बना कर के राम कृष्ण का रूप बना कर के आता है हा

2121
02:39:00,360 --> 02:39:05,120
हा बिल्कुल

2122
02:39:05,120 --> 02:39:09,360
प्रमाण हमने पीडीएफ प्रमाण हमने पीडीएफ में ढेर सारे

2123
02:39:09,360 --> 02:39:13,600
दे रखे हैं जी पहला

2124
02:39:13,600 --> 02:39:17,680
प्रमाण तो मैं बोलही रहा हूं पहला प्रमाण तो मैं बोलही रहा हूं कि

2125
02:39:17,680 --> 02:39:22,400
मैं अजन्मा अविनाश होते हुए भी संपूर्ण

2126
02:39:22,400 --> 02:39:27,400
भूतों का ईश्वर होते हुए भी

2127
02:39:27,400 --> 02:39:31,520
अपनी योग माया को अधीन करके प्रकट होता हूं अपना

2128
02:39:31,520 --> 02:39:35,640
सृजन करता हूं लो हो गया प्रमाण अच्छा

2129
02:39:35,640 --> 02:39:39,840
अच्छ गीता में बताइए की गीता का ज्ञान आप लोगों ने बोलते हैब

2130
02:39:39,840 --> 02:39:44,720
आपको गीता से क्यों चाहिए आपको गीता में भरोसा है

2131
02:39:44,720 --> 02:39:49,400
जी भरोसा है आप बीता

2132
02:39:49,400 --> 02:39:53,720
आप लोग बोलते हैं कि कृष्ण भगवान नहीं बोला है हम भी सहमत है लेकिन इसका प्रूफ भाई

2133
02:39:53,720 --> 02:39:57,800
आप लोग दिखाएंगे तब तो कोई समत होगा कि नहीं हकीकत गीता का ज्ञान कृष्ण भगवान ने ही

2134
02:39:57,800 --> 02:40:01,800
बोला है आपको गीता प भरोसा है कि नहीं बिल्कुल अका रूप से बताइए

2135
02:40:01,800 --> 02:40:05,960
तब तो पूछिए मेहनत करवाइए बकल बिल्कुल गीता में भरोसा है

2136
02:40:05,960 --> 02:40:10,360
हम गीता गुरु जी ने हमारे ये देखो इधर देखो

2137
02:40:10,360 --> 02:40:15,040
यजुर्वेद 31 19 ईश्वर अजन्मा है

2138
02:40:15,040 --> 02:40:19,640
फिर भी अपनी माया द्वारा अनेक रूप बनाकर विचर है

2139
02:40:19,640 --> 02:40:20,140
और यही

2140
02:40:20,120 --> 02:40:24,760
बात 3538 में भी लिखी है

2141
02:40:24,760 --> 02:40:29,080
ऋग्वेद कि ईश्वर अपनी माया द्वारा अनेक रूप बनाकर

2142
02:40:29,080 --> 02:40:32,120
विचर

2143
02:40:32,120 --> 02:40:36,400
है जिस प्रकार एक दीप से सैकड़ों दीप जला

2144
02:40:36,400 --> 02:40:40,600
दिए जाते हैं वैसे ही एक ही परमात्मा यत्र

2145
02:40:40,600 --> 02:40:46,600
तत्र सर्वत्र लाना भैया सामने जरा

2146
02:40:52,240 --> 02:40:56,360
जिस प्रकार एक दीप से सैकड़ों दीप जला दिए

2147
02:40:56,360 --> 02:41:01,800
जाते हैं वैसे ही एक ही परमात्मा यत्र तत्र

2148
02:41:01,800 --> 02:41:05,920
सर्वत्र सर्व रूपों में संकल्प योग से विलस होता

2149
02:41:05,920 --> 02:41:09,920
है उसी को कहीं पर ब्रह्म कहीं पर परम

2150
02:41:09,920 --> 02:41:14,040
ब्रह्म कहीं पर परमात्मा कहीं पर काल भी कहते हैं

2151
02:41:14,040 --> 02:41:18,640
ऐसा नहीं है काल भी कहते हैं

2152
02:41:18,640 --> 02:41:24,640
और इस बात को मैं आपको निरुक्त और ऋग्वेद से दिखाता

2153
02:41:31,110 --> 02:41:35,440
[संगीत]

2154
02:41:35,440 --> 02:41:40,120
हूं चलो ऋग्वेद अभी नहीं खोलेंगे रात हो रही है

2155
02:41:40,120 --> 02:41:44,160
निरुक्त काफी है इसको जानते हैं आप क्या होता है ये चले

2156
02:41:44,160 --> 02:41:47,600
गए क्या वो भाई

2157
02:41:47,600 --> 02:41:51,920
साहब वो भाई चले ग क्या निरुक्त पहली

2158
02:41:51,920 --> 02:41:55,880
बार सुने हैं ना

2159
02:41:55,880 --> 02:41:59,920
नाम वेद और गीता इसके अलावा जानते नहीं शास्त्र

2160
02:41:59,920 --> 02:42:04,640
कितने होते हैं यह देखिए बिना बताए चले ही गए

2161
02:42:04,640 --> 02:42:10,640
जितना रटा दिया गया बस उतना रटते हैं

2162
02:42:11,120 --> 02:42:15,280
बस राम ने नहीं

2163
02:42:15,280 --> 02:42:20,280
नहीं राम ना कहे भैया राम ना कहे

2164
02:42:20,280 --> 02:42:24,280
जय श्री राम जय श्री राम इसको देखो इसको क्या

2165
02:42:24,280 --> 02:42:29,240
कहते हैय क्या है जी नमस्कार

2166
02:42:29,240 --> 02:42:33,560
नमस्कार यय जो है नि निरुक्त व

2167
02:42:33,560 --> 02:42:37,800
है जिसमें वैदिक इसको कहते वैदिक

2168
02:42:37,800 --> 02:42:42,200
डिक्शनरी नि अगर आपको वेद के शब्दों

2169
02:42:42,200 --> 02:42:46,560
का अर्थ करना है तो व अर्थ कहां से देखेंगे इसमें से देखेंगे

2170
02:42:46,560 --> 02:42:50,560
अब देखिए इसमें क्या कहा गया है परम ब्रह्म और

2171
02:42:50,560 --> 02:42:56,560
अक्षर इत्यादि के बारे में क्या कहा गया है

2172
02:42:57,040 --> 02:43:01,200
इसमें यह सब चीजें तो कभी सुनने को ही नहीं मिली होंगी वही

2173
02:43:01,200 --> 02:43:04,840
नहीं जानते होंगे जो जेल धाम में बैठे

2174
02:43:04,840 --> 02:43:09,640
हैं वही नहीं जानते हो जेल

2175
02:43:09,640 --> 02:43:13,640
धाम उस दिन जो जेल धाम उन्होने बोला ना परसों जो आपको बेवकूफ बोल के

2176
02:43:13,640 --> 02:43:17,720
चले गए थे मेरे को तो बहुत हंसी आई

2177
02:43:17,720 --> 02:43:21,760
सुनके मेरी अगला वीडियो बनाओ अगला वीडियो

2178
02:43:21,760 --> 02:43:25,800
जो बनाओ उसका टैग यही रखो भैया जेल धाम से ऑपरेट जेल दम से मिलती

2179
02:43:25,800 --> 02:43:30,200
है दीक्षा नया तीर्थ भारत का जेल

2180
02:43:30,200 --> 02:43:34,480
धाम मेरा सर पेट दुख गया था उसने हस हसके

2181
02:43:34,480 --> 02:43:40,080
ये देखिए इसमें अक्षर के बारे में बताया गया है

2182
02:43:40,080 --> 02:43:45,040
अक्षर देख लीजिए रामपाल वालों भाई

2183
02:43:45,040 --> 02:43:49,160
अक्षर नहीं मानेंगे उनको हरियाली अरे

2184
02:43:49,160 --> 02:43:53,920
तो भाई किसी भी चीज का अर्थ करोगे किस हिसाब से जब ये डिक्शनरी बोल रही है

2185
02:43:53,920 --> 02:43:58,880
व अंदर चैट में है लेकिन वो अभी भी अपनी बातें ही लिखे जा रहे

2186
02:43:58,880 --> 02:44:03,240
हैं उनको आपके प्रमाणों से पड़ेगा 00 शिवा

2187
02:44:03,240 --> 02:44:07,840
जी नमस्कार आपको बीच में इटर करने के लिए माफ चाहूंगा

2188
02:44:07,840 --> 02:44:11,840
जी जी बोलिए मेरा प्रश्न राम पालियो से है अगर सुन

2189
02:44:11,840 --> 02:44:12,340
रहे

2190
02:44:12,080 --> 02:44:16,280
हैं तो मैं एक ही प्रश्न पूछूंगा कि परमाण

2191
02:44:16,280 --> 02:44:20,440
की परिभाषा क्या है परमाण मानते क्या हो आपके लिए उन्होंने एक शब्द

2192
02:44:20,440 --> 02:44:25,320
बोला था कि ज्ञान की दृष्टि से देखो

2193
02:44:25,320 --> 02:44:29,360
तो ज्ञान क्या संधि विच्छेद क्या है ज्ञान उसके आधार

2194
02:44:29,360 --> 02:44:32,800
पर ज्ञान का अर्थ

2195
02:44:32,800 --> 02:44:37,120
बताओ दूसरी बात कबीर दास जी लिख के गए

2196
02:44:37,120 --> 02:44:40,280
हो तो कतड़पत

2197
02:44:40,280 --> 02:44:44,840
ख जाऊ कबीरा मेरा नाम तो उन्होने तो भक्ति

2198
02:44:44,840 --> 02:44:48,040
में राम

2199
02:44:48,040 --> 02:44:52,120
का मतलब जिनको आप पूर्ण ब्रह्म परमेश्वर

2200
02:44:52,120 --> 02:44:56,440
कह रहे हो उन कोई है जब उनसे ऊपर कोई है तो

2201
02:44:56,440 --> 02:45:00,840
मतलब पूर्ण ब्रहम तो है ही नहीं जो ब्रम को ये कहने की आवश्यकता

2202
02:45:00,840 --> 02:45:05,480
क्यों पड़ी पूर्ण ब्रहम को कि भाई राम का कुत्ता हूं

2203
02:45:05,480 --> 02:45:09,600
दूसरी बात गीता प ये बोलते हैं कि गीता राम कृष्ण ने नहीं

2204
02:45:09,600 --> 02:45:13,600
कही काल ने कही थी जबकि काल तो ये तो आप स्वयं

2205
02:45:13,600 --> 02:45:17,760
बोल चुके हैं काल तो भगवान कृष्ण के पुत्र है राम के पुत्र है ये तो उत्तर

2206
02:45:17,760 --> 02:45:22,120
कांड वाल्मीकि रामायण स्ट बिल्कुल बिल्कुल बिल्कुल

2207
02:45:22,120 --> 02:45:26,240
यह देखिए कबीर दास जी अभी इसको लेते हैं पहले अमित दास

2208
02:45:26,240 --> 02:45:27,080
जी से थोड़ी बात कर

2209
02:45:27,080 --> 02:45:31,120
ले एक मिनट हटा दो अमित दास जी

2210
02:45:31,120 --> 02:45:35,440
रामचरित मानस के बारे में फैलाया जा रहा है कि हनुमान

2211
02:45:35,440 --> 02:45:35,940
जी का जो

2212
02:45:35,920 --> 02:45:40,320
मुख देख लेता है सुबह सुबह उसको दिन भर भोजन नहीं मिलता

2213
02:45:40,320 --> 02:45:41,880
इसलिए हनुमान जी की

2214
02:45:41,880 --> 02:45:45,960
भक्ति करना व्यर्थ है आपके अनुसार आप इस बात को मानते

2215
02:45:45,960 --> 02:45:49,040
हैं या नहीं मानते

2216
02:45:49,040 --> 02:45:53,440
मैं इस बात को इसलिए मानता हूं क्योंकि वहां पर लिखा है

2217
02:45:53,440 --> 02:45:57,440
ठीक है ठीक है ठीक है इसका मतलब यदि कोई अपने बारे में

2218
02:45:57,440 --> 02:46:01,440
इस तरह की बात बोलेगा तो क्योंकि वह खुद बोल रहा है अपने बारे

2219
02:46:01,440 --> 02:46:05,520
में तो हम उसको नहीं मानेंगे उसकी पूजा करना व्यर्थ है क्योंकि वो खुद बता रहा है कि मैं

2220
02:46:05,520 --> 02:46:09,800
ऐसा हूं है ना हां क्योंकि ये ये महान

2221
02:46:09,800 --> 02:46:13,880
व्यक्तियों की पहचान होती है वोह अपने आप को छोटा ही बताते हैं तो

2222
02:46:13,880 --> 02:46:17,920
हनुमान जी भी तो महान होंगे इसलिए बता दिया विश्वास मत करो इस बात

2223
02:46:17,920 --> 02:46:22,200
पर क्योंकि वो स्वयं श्री राम के भक्त हैं

2224
02:46:22,200 --> 02:46:26,320
और इसलिए वो बता रहे हैं कि भाई मैं तो उनका भक्त मैं अपनी

2225
02:46:26,320 --> 02:46:30,400
मक्ष के लिए राम जी की भक्ति कर रहा हूं मैं

2226
02:46:30,400 --> 02:46:34,400
यह कह रहा हूं यानी कि हनुमान जी की भक्ति की जा सकती है व्यर्थ

2227
02:46:34,400 --> 02:46:38,640
नहीं है उनकी भक्ति नहीं

2228
02:46:38,640 --> 02:46:42,640
किसी भी वेदों में और किसी भी शास्त्रों में लिखा भी तो नहीं है

2229
02:46:42,640 --> 02:46:47,080
ना हनुमान जी की भक्ति करने से मोक्ष होगा लि दिखा दिया मान लोगे

2230
02:46:47,080 --> 02:46:51,080
बदल दोगे अपना निर्णय मानूंगा बिल्कुल निर्णय

2231
02:46:51,080 --> 02:46:55,120
बदल सुनो निर्णय में निश्चित ही बदल दूंगा अगर आप दिखा

2232
02:46:55,120 --> 02:46:57,120
देते हैंते

2233
02:46:57,120 --> 02:47:01,360
अभी दिखाते रते हा क्यों क्यों

2234
02:47:01,360 --> 02:47:06,040
यह रामचरित मानद नहीं है शास्त्र नहीं है

2235
02:47:06,040 --> 02:47:11,520
ये और चारों वेदों का निचोड़ गीता में

2236
02:47:11,520 --> 02:47:15,560
नहीं वेद की मा अभी आपने हनुमान जी की भक्ति मैं

2237
02:47:15,560 --> 02:47:20,880
कह रहा हूं हनुमान जी की भक्ति ना करने के लिए प्रमाण आपने कहां से

2238
02:47:20,880 --> 02:47:25,440
दिया क्योंकि हनुमान जी स्वयं कह रहे की

2239
02:47:25,440 --> 02:47:29,480
देखो देखो भैया देखो भैया मेरा गला मत चलो ठीक है

2240
02:47:29,480 --> 02:47:34,080
मैंने आपकी बात मानी आप कह रहे हैं कि हनुमान जी हनुमान

2241
02:47:34,080 --> 02:47:39,000
जीनो मत मानो एक एक करके चलेंगे कर

2242
02:47:39,000 --> 02:47:43,080
च मैं करूंगा मैं सही करूंगा मैं एक बात निका

2243
02:47:43,080 --> 02:47:47,160
लूंगा भाई थोड़ टाइम तो दो मुझे दो बातें नहीं रहेगी एक ही

2244
02:47:47,160 --> 02:47:49,960
रहेगी ठीक

2245
02:47:49,960 --> 02:47:54,040
जैसे कि किसी महान व्यक्ति ने अपने लिए कह दिया कि मैं तो छोटा

2246
02:47:54,040 --> 02:47:58,080
हूं बेकार हूं तो उसकी बात को हम ऐसे माने कि महान व्यक्ति ने कहा है

2247
02:47:58,080 --> 02:48:02,400
मगर वास्तविकता में तो इसकी भक्ति सार्थक है ऐसा सोचे

2248
02:48:02,400 --> 02:48:04,800
या ना

2249
02:48:04,800 --> 02:48:09,000
सोचे जब भी कोई महान व्यक्ति यह कहता है कि

2250
02:48:09,000 --> 02:48:12,360
मेरी भक्ति करने से लाभ नहीं होगा मैं खुद

2251
02:48:12,360 --> 02:48:16,520
राम जी की शरण में हूं हां तो यह अगर कोई और

2252
02:48:16,520 --> 02:48:20,640
ये अगर वो कह रहे इसलिए उनकी भक्ति करना बेकार है ठीक है

2253
02:48:20,640 --> 02:48:24,960
तो उनकी भक्ति करने ठीक

2254
02:48:24,960 --> 02:48:29,120
अब मैं आपको दिखाता हूं अब मैं आपको दिखाता हूं कि कबीर कह रहे हैं मैं कुत्ता

2255
02:48:29,120 --> 02:48:33,160
हूं राम का वह राम की शरण में है तो

2256
02:48:33,160 --> 02:48:37,200
उनकी भक्ति करना बेकार है और रामपाल दास

2257
02:48:37,200 --> 02:48:41,800
खुद कह रहे हैं कि मैं दो कड़ी का हूं

2258
02:48:41,800 --> 02:48:46,520
यह देखो कबीर दास कह रहे हैं मैं राम का कुत्ता हूं

2259
02:48:46,520 --> 02:48:49,280
मेरा नाम मुतियार

2260
02:48:49,280 --> 02:48:53,320
मेरे गले में राम नाम का पट्टा बंधा हुआ है रस्सी बंधी हुई है

2261
02:48:53,320 --> 02:48:56,080
ऊपर

2262
02:48:56,080 --> 02:49:00,760
करिए ऊपर करिए हां

2263
02:49:00,760 --> 02:49:04,880
मेरे स्वामी राम जिधर मुझे तो फिर

2264
02:49:04,880 --> 02:49:09,560
अब कबीर दास जी की भक्ति क्यों करें यह तो कह रहे हैं

2265
02:49:09,560 --> 02:49:13,720
और वह दिखा दो भाई रामपाल दास अपने बारे में क्या कहते

2266
02:49:13,720 --> 02:49:19,720
हैं

2267
02:49:21,000 --> 02:49:25,280
अभिमान नहीं परमात्मा का लिखा हुआ सब

2268
02:49:25,280 --> 02:49:29,640
लेख सब ज्ञान उन्हीं का दिया हुआ दास तो केवल एक लाउड

2269
02:49:29,640 --> 02:49:34,320
स्पीकर का काम कर रहा है आप तक पहुचाने स्पीकर

2270
02:49:34,320 --> 02:49:38,440
आपको जगाने के लिए बुला कर के मुझे कहा कि आज के

2271
02:49:38,440 --> 02:49:42,680
बाद तू नाम देगा रे सिर पर हार दिया मेरे

2272
02:49:42,680 --> 02:49:46,920
पसीना आ गया सारे शरीर में कि मैं दो कोड़ी का जीव और इतने

2273
02:49:46,920 --> 02:49:51,600
पवित्र परमात्मा की करो दो कौड़ी का जीव

2274
02:49:51,600 --> 02:49:57,600
पाल दास ने ये कहा कि वो दो कौड़ी के जीव

2275
02:49:57,720 --> 02:50:01,960
है जगाने के लिए बुला कर केने

2276
02:50:01,960 --> 02:50:07,120
के लिए कुत्ते का काम करर आपको जने के लिए कुत्ते का काम करर

2277
02:50:07,120 --> 02:50:11,880
आपको कुत्ते का काम कर रहा है

2278
02:50:11,880 --> 02:50:16,360
रामपाल दास जी ने अपने लिए कह दिया मैं दो कौड़ी का हूं

2279
02:50:16,360 --> 02:50:20,400
जीव हूं और का काम कर रहा

2280
02:50:20,400 --> 02:50:25,720
हूं तो इनकी भक्ति भी बेकार हो गई

2281
02:50:25,720 --> 02:50:29,760
बोलो भैया जी वो संकेत कर रहे हैं कि परमात्मा की

2282
02:50:29,760 --> 02:50:34,160
सरण में कुता बन रहना चाहिए कर रहे हैं हां

2283
02:50:34,160 --> 02:50:38,280
तो हनुमान जी की भक्ति लिखी है रामायण में हां लिखी है बताता

2284
02:50:38,280 --> 02:50:42,680
हूं कहां लिखी है बताता हूं खाओ हनुमान

2285
02:50:42,680 --> 02:50:47,320
चालीसा का आखरी लाइन क्या है भैया आप लोगों का एक

2286
02:50:47,320 --> 02:50:51,480
लाइन मि एक मिनट एक मिनट अरे यार जब मुझसे बोल

2287
02:50:51,480 --> 02:50:55,680
रहे हो दिखाओ तो दिखाने दो ना इन लोगों की एक टैग लाइन

2288
02:50:55,680 --> 02:50:59,760
है कि बंदी छोड़ इसका अर्थ क्या है भाई आप लोगों बताओ एक मिनट मैं विशाल

2289
02:50:59,760 --> 02:51:03,800
भाटिया जी आपको लूंगा यह लोग कहते हैं जय हो बंदी छोड़ बंदी छोड़

2290
02:51:03,800 --> 02:51:08,040
का मतलब क्या है मुक्ति ना

2291
02:51:08,040 --> 02:51:12,400
बंदी छोड़ का मतलब क्या है अमित जी इनको जरा ऑन करो बंदी छोड़ का मतलबी

2292
02:51:12,400 --> 02:51:13,400
छोड़

2293
02:51:13,400 --> 02:51:17,480
बता रहा बता रहा बंदी छोड़ का अर्थ यह है कि पांच

2294
02:51:17,480 --> 02:51:21,560
तत्व तीन गुण से शरीर बना हुआ है और बंधा हुआ है

2295
02:51:21,560 --> 02:51:25,800
इस बंदिश से निकलने के लिए कहते कि बंदी छोड़ परमात्मा

2296
02:51:25,800 --> 02:51:29,920
की जय यानी कि बंदी छोड़ परमात्मा का

2297
02:51:29,920 --> 02:51:34,440
बंदी छोड़ने का मतलब है कि मुक्ति हा

2298
02:51:34,440 --> 02:51:38,440
हा अब भैया तुलसीदास जी ने हनुमान चालीसा के

2299
02:51:38,440 --> 02:51:42,720
लास्ट में क्या लिखा जो सत बार पाठ कर जोई

2300
02:51:42,720 --> 02:51:44,840
छूटा

2301
02:51:44,840 --> 02:51:49,600
बंदी छूटा बंदी

2302
02:51:49,600 --> 02:51:55,600
बंदी वो तो तुलसीदास ने

2303
02:51:55,760 --> 02:52:00,600
अप जी की रामायण मानेंगे हम तो

2304
02:52:00,600 --> 02:52:04,920
तो फिर तो फिर हनुमान जी को ना मानने के लिए एक मिनट

2305
02:52:04,920 --> 02:52:09,160
हनुमान जी को ना मानने के लिए रामचरित मानस का प्रमाण क्यों

2306
02:52:09,160 --> 02:52:13,360
दिया हनुमान जी को मानने के लिए तुम्ह वेद चाहिए वाल्मीकि

2307
02:52:13,360 --> 02:52:17,520
चाहिए और ना मानने के लिए तुम्ह रामचरित मानस चाहिए बोलो बोलो

2308
02:52:17,520 --> 02:52:20,120
बोलो

2309
02:52:20,120 --> 02:52:24,280
ति करने से हमें मोक्ष होगा हनुमान जी को

2310
02:52:24,280 --> 02:52:28,680
ना मानने के लिए वाल्मीकि रामायण का प्रमाण दिया आपने

2311
02:52:28,680 --> 02:52:33,720
हां कहां दिया अब

2312
02:52:33,720 --> 02:52:37,920
रुको तुम्हारा मुह बंद कराते ही रहेंगे वाल्मीक

2313
02:52:37,920 --> 02:52:42,760
रामायण संस्कृत में लिखा है इसलिए नहीं पढ़ पाए

2314
02:52:42,760 --> 02:52:46,760
के सामने इनका खंडन करू एक मिनट एक मिनट अब ये

2315
02:52:46,760 --> 02:52:52,760
भैया शिव पुराण को तो मानोगे हेलो शिव

2316
02:52:54,080 --> 02:52:58,280
पुराण अरे बोलो भैया हा बोल

2317
02:52:58,280 --> 02:53:04,000
रहा आधी मानेंगे आधी नहीं मानेंगे

2318
02:53:04,000 --> 02:53:07,400
हा जैसे

2319
02:53:07,400 --> 02:53:11,480
बोलते चद समता हनुमान जी का इसमें

2320
02:53:11,480 --> 02:53:15,760
बताया जा रहा है पूरा अध्याय शिव जी का हनुमान के रूप में

2321
02:53:15,760 --> 02:53:18,720
अवतार

2322
02:53:18,720 --> 02:53:22,960
शिव जी का हनुमान के रूप में अवतार और उनके चरित्र का

2323
02:53:22,960 --> 02:53:27,320
वर्णन ठीक है रुद्र समता

2324
02:53:27,320 --> 02:53:31,320
पूरा उनका जब चरित्र बन बता दिया इन्होंने शुरू से लेकर आखिर तक

2325
02:53:31,320 --> 02:53:35,680
क्या किया लास्ट में उन्होंने क्या कहा मालूम है जो

2326
02:53:35,680 --> 02:53:39,800
सावधान होकर भक्ति पूर्वक

2327
02:53:39,800 --> 02:53:45,680
हनुमान जी की भक्ति पूर्वक इसे सुनता है भक्ति करता

2328
02:53:45,680 --> 02:53:49,880
है उसका क्या होता है वो इस लो में सभी सुखों को

2329
02:53:49,880 --> 02:53:54,200
भोग कर अंत में परम मोक्ष को प्राप्त करता

2330
02:53:54,200 --> 02:53:58,360
है जय श्री राम हो गया

2331
02:53:58,360 --> 02:54:03,880
बंदी छूट गया अब मैं

2332
02:54:03,880 --> 02:54:08,720
आपसे अमित पहले बताओ य मानोगे कि नहीं

2333
02:54:08,720 --> 02:54:09,600
पहले

2334
02:54:09,600 --> 02:54:13,920
सुनो नहीं पहले य बताओ आपकी बात मानूंगा

2335
02:54:13,920 --> 02:54:19,520
अगर मेरा एक डाउट क्लियर कर देते हो तो उसके बाद अगला

2336
02:54:19,520 --> 02:54:24,160
मैं आपको वचन देता हूं यदि मेरा एक डाउट क्लियर कर दिया

2337
02:54:24,160 --> 02:54:28,200
तो मैं संत रामपाल जी महाराज को छोड़ दूंगा

2338
02:54:28,200 --> 02:54:32,360
वचन देता हूं अच्छा चलो ठीक है चलो पूछो चलो

2339
02:54:32,360 --> 02:54:36,640
आपका आप आप मैं यही देखता हूं कि आप मुझे यह

2340
02:54:36,640 --> 02:54:42,640
बताइए ब्रह्मा विष्णु महेश क्या यह गुण

2341
02:54:42,680 --> 02:54:46,680
है रगुण ब्रह्मा बमा विष्णु महे

2342
02:54:46,680 --> 02:54:51,240
ब्रह्मा सुनिए जब ईश्वर रजोगुण कार्य

2343
02:54:51,240 --> 02:54:55,240
करता है तो व विष्णु कहलाता है जब ईश्वर नहीं

2344
02:54:55,240 --> 02:54:59,520
जब ईश्वर सतो गुण कार्य करता है तो विष्णु कहलाता है रजोगुण

2345
02:54:59,520 --> 02:55:03,880
कार करता है तो ब्रह्मा कहलाता है और तमो गुण कार्य करता है

2346
02:55:03,880 --> 02:55:08,080
सुनो मैंने मैंने वचन दिया मैंने वचन दिया है कि

2347
02:55:08,080 --> 02:55:12,360
आज मेरे प्रश्नों का यदि आपने दे दिया उत्तर मैं

2348
02:55:12,360 --> 02:55:16,440
छोड़ दूंगा भक्ति उनकी तो मैं दे तो रहा हूं अगर मेरे डाउट क्लियर कर

2349
02:55:16,440 --> 02:55:21,240
देते हो तो गुण भी कहीं कहीं कहा गया है मगर उसका परवन

2350
02:55:21,240 --> 02:55:24,840
इस बात में है कि उत्पत्ति स्थिति और

2351
02:55:24,840 --> 02:55:29,440
समार उत्पत्ति का अर्थ है रजोगुण कार्य ब्रह्मा जी

2352
02:55:29,440 --> 02:55:33,440
स्थिति का अर्थ है सतो गुणी कार्य विष्णु जी

2353
02:55:33,440 --> 02:55:37,560
और समार का अर्थ है तमो गुण का शिव जीी एक

2354
02:55:37,560 --> 02:55:41,600
ही ईश्वर जब रजो गुण का करता है तो ब्रह्मा सतो

2355
02:55:41,600 --> 02:55:45,840
गुण का कर रहा है तो विष्णु और तमो गुण का कर रहा है तो

2356
02:55:45,840 --> 02:55:48,880
शिव कहला रहा है

2357
02:55:48,880 --> 02:55:53,000
बो आपने आपने यह माना कि रजोगुण सतोगुण और

2358
02:55:53,000 --> 02:55:57,320
तमोगुण ब्रह्मा विष्णु महेश है अरे

2359
02:55:57,320 --> 02:56:01,480
भाई वो वो जब वो जब सृष्टि का उत्पत्ति

2360
02:56:01,480 --> 02:56:05,720
स्थिति समार का कार्य करते हैं उस रूप में उन्हें कहा गया है कि वो गुण गुण

2361
02:56:05,720 --> 02:56:09,840
भी है मगर इसके साथ ही साथ इसके साथ

2362
02:56:09,840 --> 02:56:14,600
ही साथ वो परम ब्रह्म भी है वो परम

2363
02:56:14,600 --> 02:56:18,920
ब्रह्म मान लिया मैं प्रमाण दे रहा हं क्लियर

2364
02:56:18,920 --> 02:56:22,920
करोगे कर रहा हूं ड क्लियर कर रहा हूं प्रमाण

2365
02:56:22,920 --> 02:56:27,040
दे रहान प्रमाण दे रहान अरे भाई

2366
02:56:27,040 --> 02:56:31,440
प्रमाण दे रहा हूं सुनो य गुण वाला

2367
02:56:31,440 --> 02:56:35,520
प्रमाण दोगे अच्छी बात है जो प्रश्न पूछ रहा हूं उस प्रश्न को तो

2368
02:56:35,520 --> 02:56:39,640
क्लियर होने दो हां वो गुण भी है और बोलो

2369
02:56:39,640 --> 02:56:40,140
गुण

2370
02:56:40,040 --> 02:56:44,480
भी है हा ब्रह्मा विष्णु महेश में सतोगुण रजोगुण

2371
02:56:44,480 --> 02:56:48,680
और तमोगुण गुण है ब्रह्मा विष्णु महेश

2372
02:56:48,680 --> 02:56:53,320
में नहीं वो स्वयं ही सब कुछ है एक ही त परम

2373
02:56:53,320 --> 02:56:57,560
ठीक है ठीक है तो फिर गीता गीता अध्याय सात के

2374
02:56:57,560 --> 02:57:01,600
श्लोक नंबर 12 से 13 में उनकी पूजा करने के लिए

2375
02:57:01,600 --> 02:57:05,680
रजोगुण तमोगुण की पूजा करने वाले मनुष्य में नीच और दूषित कर्म

2376
02:57:05,680 --> 02:57:09,680
करने वाले क्यों कहा गया है इसलिए कहा गया है कि वहा पर

2377
02:57:09,680 --> 02:57:13,720
जब रजोगुण तमोगुण सतोगुण की बात हो रही है तो वो प्राणियों की बात हो

2378
02:57:13,720 --> 02:57:18,400
रही है परम [प्रशंसा]

2379
02:57:18,400 --> 02:57:22,560
य हो गया कि हमें ब्रह्मा विष्णु महेश की पूजा नहीं करनी चाहिए यह

2380
02:57:22,560 --> 02:57:26,720
आप कह रहे हो यह आप कह रहे हो

2381
02:57:26,720 --> 02:57:30,760
गीता क रही है भैया जी गीता क रही है भगवत

2382
02:57:30,760 --> 02:57:34,960
गीता कह रही है विष्णु महेश

2383
02:57:34,960 --> 02:57:38,960
की पूजा करने वाले मनु दूषित कर्म करने वाले होते हैं

2384
02:57:38,960 --> 02:57:42,960
अरे तो ब्रह्मा विष्णु महेश अगर गुण है तो साथ ही साथ परम ब्रह्म

2385
02:57:42,960 --> 02:57:47,120
भी तो है वो भी तो लिखा है हा तो उस

2386
02:57:47,120 --> 02:57:51,920
परम ब्रम की बारे में गीता अध के शलोक

2387
02:57:51,920 --> 02:57:55,400
नंबर में कहा गया है हे अर्जुन वो परमात्मा

2388
02:57:55,400 --> 02:57:59,560
तो अन है चुप करो शिवांशी

2389
02:57:59,560 --> 02:58:03,680
सुनिए अब मुझे दो मिनट जाना है तो मुझे थोड़ी देर हो रही है तो मुझे बस दो

2390
02:58:03,680 --> 02:58:08,440
मिनट दे दीजिए दो मिनट बस ठीक है

2391
02:58:08,440 --> 02:58:12,440
हा पहले य बात पूरी कर लू एक बात पूरी करलो

2392
02:58:12,440 --> 02:58:16,440
प्लीज यह नहीं तो रह जाएगी गुण वाली बात पूरी

2393
02:58:16,440 --> 02:58:20,600
कर लो उसको केवल अपनी बात बोल के जाना था स्टेज

2394
02:58:20,600 --> 02:58:25,040
प आपने शिव पुराण से दिखाया वो नहीं माना नहीं

2395
02:58:25,040 --> 02:58:30,000
एक बात बताइए अगर कहीं पर लिखा है कि वह गुनातीत है

2396
02:58:30,000 --> 02:58:34,160
सभी गुणों से परे हैं और कहीं पर लिखा है कि वह गुण है

2397
02:58:34,160 --> 02:58:39,080
तो गुण वाली बात को क्यों मानेंगे और गुनातीत वाली बात को क्यों नहीं मानेंगे

2398
02:58:39,080 --> 02:58:43,120
बात तो वही है ना वो दो लोक

2399
02:58:43,120 --> 02:58:47,120
के अलावा रा अधूरा मानोगे सुने ही नहीं

2400
02:58:47,120 --> 02:58:51,720
है दो श्लोक

2401
02:58:51,720 --> 02:58:55,880
वही मि एक मिनट में इनका गुणात बता दूं जरा क

2402
02:58:55,880 --> 02:59:00,360
लिखा है व सभी गुणों से परे हैं वो दिखा

2403
02:59:00,360 --> 02:59:06,040
दू हा विदेश संहिता में लिखा है यह

2404
02:59:06,040 --> 02:59:08,520
देखिए विष्णु भगवान के लिए लिखा

2405
02:59:08,520 --> 02:59:12,520
है भगवान माया के गुणों से रहित है अनंत

2406
02:59:12,520 --> 02:59:16,720
है सृष्टि स्थिति और प्रलय के लिए रजोगुण सतोगुण एवं

2407
02:59:16,720 --> 02:59:21,080
तमोगुण माया के तीन गुण उनकी इच्छा से उनके द्वारा

2408
02:59:21,080 --> 02:59:27,080
स्वीकार किए जाते हैं श्रीमद् भागवत दो पा

2409
02:59:27,120 --> 02:59:31,200
18 इसके बाद शिव जी किसी भी प्रकार

2410
02:59:31,200 --> 02:59:35,640
के गुण से रहित है वह एवं वही सृष्टि की उत्पत्ति

2411
02:59:35,640 --> 02:59:39,840
पालन और समार तीनों करते हुए विश्व और शिव नाम धारण

2412
02:59:39,840 --> 02:59:44,000
करते हैं अतः इस प्रकार भी शिवजी की श्रेष्ठता

2413
02:59:44,000 --> 02:59:48,280
बताने वाले शास्त्र तामसिक नहीं है और

2414
02:59:48,280 --> 02:59:52,440
भगवती देखो भगवती सगुणा या निर्गुणा केवल कार्य भेद

2415
02:59:52,440 --> 02:59:56,640
से प्रतीत होती है जिस परम पुरुष को त्रिगुणा तीत

2416
02:59:56,640 --> 03:00:00,760
कहा गया है वही उत्पत्ति स्थिति समार का कार्य संपादन

2417
03:00:00,760 --> 03:00:04,920
करने वाली माया महा माया अर्थात भगवती है देवी भागवत

2418
03:00:04,920 --> 03:00:09,360
नन 34 से 37 तो लीला

2419
03:00:09,360 --> 03:00:13,960
भेद से यह गुणों को धारण करते हैं मगर वस्तुत

2420
03:00:13,960 --> 03:00:18,320
तत्ता यह परम ब्रह्म भी है गुणों से परे भी हैं

2421
03:00:18,320 --> 03:00:22,320
इसलिए इनके गुणों से पड़े वाले रूप

2422
03:00:22,320 --> 03:00:25,840
की पूजा की जाती है

2423
03:00:25,840 --> 03:00:30,840
सिंपल समझ गए समझ गए कि

2424
03:00:30,840 --> 03:00:34,920
नहीं समझ गए भैया जी इनको सुनो

2425
03:00:34,920 --> 03:00:39,720
हां ठीक है आपको नहीं समझ में आएगा आपके लिए प्रमाण है क्या

2426
03:00:39,720 --> 03:00:43,760
गीता गीता प्रमाण है क्या नहीं कंफ्यूज

2427
03:00:43,760 --> 03:00:48,600
में इसलिए हूं आपने कहा उस परम ब्रम की पूजा

2428
03:00:48,600 --> 03:00:52,760
आपने फिर फिर हम रग की भक्ति क्यों या इनको क्यों

2429
03:00:52,760 --> 03:00:56,800
लेते हो भाई क्यों लेते हो इनको क्यों लेते हो इन्ह मेरे भाई

2430
03:00:56,800 --> 03:01:01,000
हटाओ इन्ह जाइए भैया आप अपने घर जाइए ब वो

2431
03:01:01,000 --> 03:01:07,000
जेल धाम यात्रा करिए वहां दर्शन करिए तीर्थ करिए वहां

2432
03:01:08,600 --> 03:01:12,760
जाके एक ही व्यक्ति लीला पूर्वक अगर मैं कहीं

2433
03:01:12,760 --> 03:01:17,600
पर किसी ऑफिस का या किसी जगह का पर वो हूं

2434
03:01:17,600 --> 03:01:21,640
क्या कहते हैं बॉस मैं ही कहीं जाकर के किसी सेवक के रूप

2435
03:01:21,640 --> 03:01:25,760
में भी दिख सकता हूं अब मैं अगर सेवक दिख गया तो मैं मेरी जो

2436
03:01:25,760 --> 03:01:31,000
वहां पर जो स्वामित्व है वो खत्म हो गया

2437
03:01:31,000 --> 03:01:35,040
अजीब बात है और कुल मिला कर के अगर गीता मान

2438
03:01:35,040 --> 03:01:38,320
रहे हो तो पूरा पूरा मानो

2439
03:01:38,320 --> 03:01:44,320
ना आधा अधूरा क्यों मान रहे

2440
03:01:46,280 --> 03:01:50,800
हो जी बोलिए विश्वजीत सिंह जी

2441
03:01:50,800 --> 03:01:54,960
बना लेना कट कर लेना भाई जी सत श्री काल

2442
03:01:54,960 --> 03:01:58,120
जी वा

2443
03:01:58,120 --> 03:02:02,520
जी एक व्यक्ति यह कह रहा है चलो आज शिवांस

2444
03:02:02,520 --> 03:02:06,680
हार गया ठीक है अब इससे क्या पता चलता

2445
03:02:06,680 --> 03:02:11,320
है यह मानता है कि आज से पहले सारे लोग ध्वस्त हुए

2446
03:02:11,320 --> 03:02:15,560
थे ठीक है और इसी व्यक्ति ने आज से पहले कई बार कहा

2447
03:02:15,560 --> 03:02:21,200
कि तुझे ज्ञान नहीं तू हार गया

2448
03:02:21,200 --> 03:02:26,160
तो ये झूठ भीरी नहीं जी आ रही

2449
03:02:26,160 --> 03:02:30,240
बोलिए अपना सत श्री अकाल जी

2450
03:02:30,240 --> 03:02:33,720
सारन

2451
03:02:33,720 --> 03:02:37,000
जीन पंजाबी

2452
03:02:37,000 --> 03:02:41,480
नहीं पंजाबी नहीं आती भाई साब हिंदी

2453
03:02:41,480 --> 03:02:46,360
आती मैं सुन रहा था आपका य प

2454
03:02:46,360 --> 03:02:50,720
बड़ा बिया अच्छा अ विचार लगा आपका बड़े अच्छे से

2455
03:02:50,720 --> 03:02:54,960
आप बता रहे हैं उसके लिए बड़ा बधिया

2456
03:02:54,960 --> 03:02:59,040
है ना जी ते मैं भी इनके हमारे गांव में भी

2457
03:02:59,040 --> 03:03:04,080
है संत रामपाल जी इनके शिष्य

2458
03:03:04,080 --> 03:03:09,000
हैं तो मैं भी आपसे एक सवाल है जी जिदा

2459
03:03:09,000 --> 03:03:13,520
आप बात कर रहे हैं तो आप क्या रामपाल

2460
03:03:13,520 --> 03:03:18,280
जी से दीक्षित है क्या नहीं नहीं मुनके विचार

2461
03:03:18,280 --> 03:03:22,600
उनके विचार अच्छे लगते हैं सुनने लगा था मैं भी तो आपसे

2462
03:03:22,600 --> 03:03:27,280
अ देख रहा हूं चर्चाएं हो रही है आपकी उनके साथ में

2463
03:03:27,280 --> 03:03:31,360
अच्छे विचार लग रहे थे तो आपसे देख रहे चर्चा

2464
03:03:31,360 --> 03:03:34,900
होती है तो

2465
03:03:34,900 --> 03:03:38,640
[संगीत]

2466
03:03:38,640 --> 03:03:43,400
स प्राप्ति ना तो यह शंका भी मोक्ष की प्राप्ति

2467
03:03:43,400 --> 03:03:47,840
कैसे हो सकती है तो जो गुरु ग्रंथ साहिब जी है

2468
03:03:47,840 --> 03:03:52,040
के उस वो गुरु ग्रंथ साहिब जी का तो सुना होगा

2469
03:03:52,040 --> 03:03:56,200
आपने जी मोक्ष की प्राप्ति कैसे

2470
03:03:56,200 --> 03:04:01,040
हो सकती है जी उसके लिए क्या करना पड़ता है

2471
03:04:01,040 --> 03:04:05,320
राम कृष्ण की भक्ति करने से मोक्ष की प्राप्ति हो जाती

2472
03:04:05,320 --> 03:04:09,520
है क्या जाप करना पड़ता है नाम क्या

2473
03:04:09,520 --> 03:04:13,760
कौन से नाम का जाप राम नाम का जाप करिए

2474
03:04:13,760 --> 03:04:18,000
शिव नाम का जाप करिए कृष्ण नाम का जाप करिए हरे कष्णा

2475
03:04:18,000 --> 03:04:22,600
हरे कृष्णा कृष्ण कृष्ण हरे हरे हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे ये करिए

2476
03:04:22,600 --> 03:04:26,960
ओ ठीक है और को जी

2477
03:04:26,960 --> 03:04:31,440
बस और भी है और भी उपाय

2478
03:04:31,440 --> 03:04:35,440
हैं राम नाम का जाप करना है आप जो

2479
03:04:35,440 --> 03:04:40,000
है कहीं पर गाड़ी रोक लीजिए फिर बात करिए गाड़ी चलाते चलाते

2480
03:04:40,000 --> 03:04:44,080
कुछ कोई नहीं गा

2481
03:04:44,080 --> 03:04:48,200
घटना निती आपके साथ मुझे लग रहा

2482
03:04:48,200 --> 03:04:53,120
है आप बस चला रहे हैं आपके साथ को ट्रक चलाना

2483
03:04:53,120 --> 03:04:53,640
ट्रक चला

2484
03:04:53,640 --> 03:04:59,640
रहे हैं कहां पे हैं आप अमेरिका में है जी हा अमेरिका में है

2485
03:04:59,760 --> 03:05:03,760
यस विश्वजीत जी य बताओ गुरु ग्रंथ

2486
03:05:03,760 --> 03:05:08,120
साहिब में लिखा हुआ है एक ओंकार सतनाम इसका मतलब क्या है

2487
03:05:08,120 --> 03:05:12,120
एक ओंकार का मतलब है जी एक ओंकार का संकेतक

2488
03:05:12,120 --> 03:05:16,120
शब्द है मतलब के उसमें लिखा है नहीं नहीं

2489
03:05:16,120 --> 03:05:20,200
एक कोकार ही सत्य नाम है उसमें लिखा हुआ है ये चीज और यही चीज गीता जी में लिखा

2490
03:05:20,200 --> 03:05:24,240
हुआ है विष्णु जी बोला मैं ही एक ओंकार हूं आपको पता है इस बात

2491
03:05:24,240 --> 03:05:28,840
का नहीं इसका तो सुना एक विष्णु जी ने कहा

2492
03:05:28,840 --> 03:05:33,080
हंत नानक जी ने ये बोला है कि एक ओंकार ही सतनाम है उन्होने स्पेशल

2493
03:05:33,080 --> 03:05:38,720
एक ओंकार सतनाम कर्ता पुर्ख ये सारा बोला हुआ है ना उने ये तो पता होगा आपको

2494
03:05:38,720 --> 03:05:42,720
लपर की सिफत सला में बोला है ना गीता जी में विष्णु जी

2495
03:05:42,720 --> 03:05:47,000
ने ये बात बोली कि एक ओंकार मैं ही हूं अच्छा ठीक

2496
03:05:47,000 --> 03:05:51,080
जी जी जी गुरु ग्रंथ साहिब और से एक ओंकार का ही आप जाप

2497
03:05:51,080 --> 03:05:55,200
करो तो उससे ही मोक्ष हो जाएगा वहा पर भी आप विष्णु भगवान को

2498
03:05:55,200 --> 03:05:59,360
ओमकार है उसी का रूप परिवर्तित करते हुए भगवन नाम दिए गए हैं

2499
03:05:59,360 --> 03:06:03,920
राम कृष्ण क्योंकि जो जो प्रणवा अक्षर है

2500
03:06:03,920 --> 03:06:08,400
उसमें सबका अधिकार नहीं हो पाता जिने इत्यादि का मर्यादा का पालन करना पड़ता

2501
03:06:08,400 --> 03:06:09,400
है

2502
03:06:09,400 --> 03:06:13,480
इसलिए भगवान ने कलयुग में सरल करने के लिए नाम जप दे

2503
03:06:13,480 --> 03:06:18,280
दिया कि प्रणव का उच्चारण करना सबके लिए बस की बात नहीं

2504
03:06:18,280 --> 03:06:22,320
तो आप जो है नाम जब कहीं भी कर सकते हैं ट्रक में बैठ

2505
03:06:22,320 --> 03:06:26,400
कर के भी कर सकते हैं अपनी उंगली में आप जहां पर

2506
03:06:26,400 --> 03:06:30,400
भी आपको समय मिले उंगलियों से गिन सकते हैं सबसे उत्तम होता है कि माला

2507
03:06:30,400 --> 03:06:34,640
से गिन ले अगर नहीं गिन पा रहे उंगलियों से गिन ले या फिर जपा काउंटर

2508
03:06:34,640 --> 03:06:39,120
भी आता उस पर भी गिन सकते हैं जय

2509
03:06:39,120 --> 03:06:43,400
आपने बोला राम राम कृष्ण कृष्ण शिव शिव इसका

2510
03:06:43,400 --> 03:06:48,120
गीता जी में प्रमाण है कहीं भी इसके जाप से मुक्ति होगी

2511
03:06:48,120 --> 03:06:52,120
दूसरे अनेक शास्त्रों में प्रमाण है नहीं गीता जी में है

2512
03:06:52,120 --> 03:06:56,400
जी कहीं नहीं गीता गीता जी गीता जी कहां से निकली

2513
03:06:56,400 --> 03:07:01,280
है य बताइए किसने लिखी है गीता

2514
03:07:01,280 --> 03:07:05,680
गीता महाभारत से मैं बता

2515
03:07:05,680 --> 03:07:09,760
रहा गीता जो है महाभारत से निकली ना हा जी

2516
03:07:09,760 --> 03:07:14,120
महाभारत किसने लिखी है वेदव्यास जी ने

2517
03:07:14,120 --> 03:07:18,320
वेदव्यास जी ने ही 18 महापुराण लिखे उन्ही

2518
03:07:18,320 --> 03:07:22,560
18 महापुराण में जगह जगह राम कृष्ण शिव इन नामों

2519
03:07:22,560 --> 03:07:25,240
का महिमा गान है

2520
03:07:25,240 --> 03:07:29,680
ठीक है ठीक है ठीक है मल

2521
03:07:29,680 --> 03:07:33,000
गीता जी में नहीं हैगा तो

2522
03:07:33,000 --> 03:07:37,200
आप भाई सारी बातें गीता जी में होंगी क्या कोई

2523
03:07:37,200 --> 03:07:41,440
चीज कहीं पर है कोई चीज कहीं पर है इतने सारे शास्त्र य ही थोड़ी ना

2524
03:07:41,440 --> 03:07:45,560
है ठीक है नवीर जी आप कब

2525
03:07:45,560 --> 03:07:49,560
से जाप करना शुरू करेंगे नहीं जाप तोही करी द जी

2526
03:07:49,560 --> 03:07:53,800
पाठ भी करी पाठ भी करते हैं जाप भी करते हैं

2527
03:07:53,800 --> 03:07:58,280
नहीं आप गीता जी में निष्ठा दिखा रहे हैं ना तो इसलिए पूछ रहा हूं मैं

2528
03:07:58,280 --> 03:08:02,560
कि गीता जी जिन्होंने लिखी है वेद व्यास जी उन्होंने ही 18 महापुराण

2529
03:08:02,560 --> 03:08:06,600
भी लिखे हैं और उसमें उन्होंने जगह जगह भगवन नाम का वर्णन

2530
03:08:06,600 --> 03:08:10,960
किया है जैसे अभी मैंने आपको बताया शिव पुराण में हनुमत

2531
03:08:10,960 --> 03:08:15,120
चरित्र का वो लिखा है कि अगर आप हनुमत चरित्र का वो करेंगे यानी हनुमान चालीसा

2532
03:08:15,120 --> 03:08:19,320
इत्यादि का पाठ करेंगे डेली तो आप मुक्ति हो जाएगी शिव

2533
03:08:19,320 --> 03:08:23,680
पुराण में लिखा है शिव पुराण क्या है 18 महापुराण 18

2534
03:08:23,680 --> 03:08:28,200
महापुराण क्या है कि जब वेदव्यास जी ने महाभारत

2535
03:08:28,200 --> 03:08:32,360
की रचना कर ली वेदों के चार टुकड़े कर दिए प्रकरण

2536
03:08:32,360 --> 03:08:36,360
कर लिया वेदों का वेदांग को वेदांग का प्रथक्करण

2537
03:08:36,360 --> 03:08:40,320
कर लिया उसके बाद उनको यह लगा कि अभी भी भक्ति के बारे में

2538
03:08:40,320 --> 03:08:45,160
लिखना बाकी है तो उन्होंने 18 महापुराण की रचना

2539
03:08:45,160 --> 03:08:50,360
की यह भागवत में लिखा है श्रीमद्

2540
03:08:50,360 --> 03:08:54,840
भागवत ठीक है भाई साहब अब आप गाड़ी चलाज

2541
03:08:54,840 --> 03:08:59,720
मर्जी के भक्ति जिस मर्जी की नहीं

2542
03:08:59,720 --> 03:09:04,520
शास्त्र शास्त्र की सीमा में शास्त्र में जो जो विकल्प

2543
03:09:04,520 --> 03:09:08,600
शास्त्र में शास्त्र में जो जो विकल्प दिए गए हैं उनमें

2544
03:09:08,600 --> 03:09:13,240
से किसी एक विकल्प की भक्ति करना ही शास्त्र समत भक्ति है

2545
03:09:13,240 --> 03:09:18,040
तस्मा शास्त्रम प्रमाणम भगवत गीता

2546
03:09:18,040 --> 03:09:22,240
साब बोल रहे थे ना एकम का के बारे में तो

2547
03:09:22,240 --> 03:09:27,120
गुरु ग्रंथ साहिब जी तो इनकी ब्रह्मा विष्णु महेश की भक्ति का खंडन करता

2548
03:09:27,120 --> 03:09:31,440
है ब्रह्मा विष्णु महेश कार्य रूप से

2549
03:09:31,440 --> 03:09:35,480
सुनिए ब्रह्मा विष्णु महेश का लीला रूप से जो उनका रूप

2550
03:09:35,480 --> 03:09:39,520
है उनकी भक्ति करने को भले ही मना करता हो मगर जो उनका

2551
03:09:39,520 --> 03:09:43,520
परम ब्रह्म रूप है जहां पर शिव जी कह रहे हैं मैं ही परम ब्रह्म

2552
03:09:43,520 --> 03:09:47,680
हूं प्रणव के द्वारा जाना जाने वाला मैं ही हूं शिव

2553
03:09:47,680 --> 03:09:52,080
जी ने भी कहा है राम ने भी कहा है विष्णु भगवान ने भी कहा है

2554
03:09:52,080 --> 03:09:55,360
ओमकार के द्वारा जो जाने

2555
03:09:55,360 --> 03:09:59,440
जाने वाले हैं वह कौन है विष्णु

2556
03:09:59,440 --> 03:10:03,600
तो आप उनके उस रूप की ना भी करो जो उनका लीला रूप है हम तो उसी

2557
03:10:03,600 --> 03:10:07,760
की करते हैं क्योंकि वह सरल होती है भक्ति आप उनकी कर लो जो

2558
03:10:07,760 --> 03:10:12,320
उनका वैसा रूप है परम ब्रह्म वाला रूप

2559
03:10:12,320 --> 03:10:16,920
क्योंकि वह परम ब्रह्म ही इस रूप में आया है

2560
03:10:16,920 --> 03:10:21,800
हम हमारी मुक्ति को सरल करने के

2561
03:10:21,800 --> 03:10:22,800
लिए

2562
03:10:22,800 --> 03:10:26,840
मैं और ब्रह्म एक ही है तो भी

2563
03:10:26,840 --> 03:10:30,960
माया रूपी कार्य कारण की उपाधि भेद से हमारा

2564
03:10:30,960 --> 03:10:35,400
प्रतिबिंब प्रथक प्रथक दिखाई देने लगता है

2565
03:10:35,400 --> 03:10:39,680
दोबारा पढ़ लीजिए मैं और ब्रह्म एक ही है

2566
03:10:39,680 --> 03:10:43,920
तो भी माया रूपी कार्य कारण की उपाधि

2567
03:10:43,920 --> 03:10:44,680
भेद से

2568
03:10:44,680 --> 03:10:49,000
कार्य कारण मतलब एक तो कारण मैं ही सबका और

2569
03:10:49,000 --> 03:10:53,120
दूसरा कार्य कार्य करते समय वह लीला भद से दिखते हैं कि

2570
03:10:53,120 --> 03:10:57,320
ब्रह्मा विष्णु महेश एक एक सतोगुण कार्य कर रहे रजोगुण कार्य

2571
03:10:57,320 --> 03:11:01,520
कर रहे हैं कार्य कारण की उपाधि वेद

2572
03:11:01,520 --> 03:11:07,520
से हमारा प्रतिबिंब प्रथम प्रथक पतक

2573
03:11:10,520 --> 03:11:16,520
है बणी माधव जी आप क्लासेस में आइएगा

2574
03:11:17,680 --> 03:11:21,760
चलिए अब कोई है नहीं मुझे लगता है बहुत समय

2575
03:11:21,760 --> 03:11:27,120
हो गया तीन घंटे से ज्यादा की स्ट्रीम हो चुकी है सबका आने के लिए

2576
03:11:27,120 --> 03:11:31,120
आभार और शुभंकर पारिजात जी

2577
03:11:31,120 --> 03:11:36,360
बोलिए आप सुन नहीं पाए ह

2578
03:11:36,360 --> 03:11:40,720
जी बो था कि हम नास्त्र जो है

2579
03:11:40,720 --> 03:11:44,840
ना उसके लिए फॉर्म भरे थे लेकिन अभी तक जवाइन नहीं

2580
03:11:44,840 --> 03:11:49,120
हुए यह सब बातें तो आप कर देते इसके लिए

2581
03:11:49,120 --> 03:11:53,280
लाइव में आने की आवश्यकता नहीं है आपने बोल दिया है किस

2582
03:11:53,280 --> 03:11:57,520
नाम से भरा है आपने यही नाम से ठीक है मैं बोल दूंगा

2583
03:11:57,520 --> 03:12:01,920
आपको तुरंत जोड़ लि मैं ही जड़वा दूंगा प्रकाश

2584
03:12:01,920 --> 03:12:06,200
जी जय श्री राम नमस्कार

2585
03:12:06,200 --> 03:12:10,560
जी देख लिया

2586
03:12:10,560 --> 03:12:15,200
आरही हैरी जी बोलिए नमस्कार बोलिए

2587
03:12:15,200 --> 03:12:19,200
हा आपने श चार्य जी का नाम लिया

2588
03:12:19,200 --> 03:12:23,600
था और आपको

2589
03:12:23,600 --> 03:12:27,800
अभी जो विषय चल रहे हैं उससे रिलेटेड अगर बात करनी तो कर लीजिए तीन घंटे

2590
03:12:27,800 --> 03:12:31,880
12 मिनट की स्ट्रीम हो चुकी है मैं थक चुका हूं अब सोने का समय हो गया है आपका

2591
03:12:31,880 --> 03:12:32,920
हो सकता है भी जागना

2592
03:12:32,920 --> 03:12:36,960
हो हमें सुबह 4:30 बजे लगना रहता है आप जो विषय चल

2593
03:12:36,960 --> 03:12:41,280
रहा है उसमें आपको कुछ समझ ना आया हो तो आप पूछ लीजिए

2594
03:12:41,280 --> 03:12:45,800
नहीं तो फटाफट इसको क्लोज करें जी जी मुझे भी जाना है

2595
03:12:45,800 --> 03:12:49,880
देखिए मैं चार्य जी के बारे में कर रहा हूं बात

2596
03:12:49,880 --> 03:12:54,360
आपको सुन लीजिए आप नहीं सते

2597
03:12:54,360 --> 03:12:58,400
अभी बात चल रही है क्या कबीर भगवान है क्या

2598
03:12:58,400 --> 03:13:02,480
वेदा आदि शास्त्र रामपाल जी के लिए प्रामाणिक है क्या

2599
03:13:02,480 --> 03:13:06,880
वेदा शास्त्रों के अनुसार कबीर भगवान है सिद्ध होता है

2600
03:13:06,880 --> 03:13:10,920
क्या रामपाल दास के द्वारा बताई जाने वाली भक्ति शास्त्र सम्मत

2601
03:13:10,920 --> 03:13:15,000
है वेदा शास्त्र सम्मत क्या उनके द्वारा दी जाने वाली जो दीक्षा

2602
03:13:15,000 --> 03:13:19,040
है व शास्त्र सम्मत है देखिए हम

2603
03:13:19,040 --> 03:13:23,760
इसको नकारते हैं हम जो भी

2604
03:13:23,760 --> 03:13:27,960
बिल्कुल नहीं है जो भगवान शंकराचार्य कहेंगे

2605
03:13:27,960 --> 03:13:32,800
उसी के अनुरूप हमें मानना होगा हमारे सबसे बड़े

2606
03:13:32,800 --> 03:13:36,960
सबसे बड़े गुरु शंकराचार्य उनका अपमान

2607
03:13:36,960 --> 03:13:41,240
किसी भी हालत में हम नहीं सहन कर सकते राम मंदिर के दौरान हमने

2608
03:13:41,240 --> 03:13:45,600
देखा किस तरह से उन लोगों ने अपमान किया यह हमारे बहुत

2609
03:13:45,600 --> 03:13:48,680
आघात पहुंचा है

2610
03:13:48,680 --> 03:13:52,720
आज भी वह संघर्ष कर रहे हैं गौ यात्रा के ऊपर

2611
03:13:52,720 --> 03:13:56,840
आप जानते होंगे कितनी वह हर राज्य के अंदर गए

2612
03:13:56,840 --> 03:14:01,640
हैं और इसी गंदी राजनीति ने

2613
03:14:01,640 --> 03:14:05,720
गौ माता को अभी तक कटने पर मजबूर किया हुआ है

2614
03:14:05,720 --> 03:14:10,240
और यह लोग अलग-अलग पंथ चला कर के दुनिया को बेवकूफ

2615
03:14:10,240 --> 03:14:14,360
बना रहे हैं एक तरफ अंबेडकर वाद

2616
03:14:14,360 --> 03:14:17,800
दूसरी तरवा

2617
03:14:17,800 --> 03:14:21,920
जब आप समर्थक है तो यहां मंच पर आकर के ऐसे क्यों बोल रहे कि हमें

2618
03:14:21,920 --> 03:14:26,320
प्रश्न करना हैसे शंकराचार्य जी के बारे में और जब समर्थक

2619
03:14:26,320 --> 03:14:30,320
है तो जो शंकराचार्य बोलते हैं जय श्री राम

2620
03:14:30,320 --> 03:14:34,320
उसका उत्तर आप जय श्री राम ना दे कर के नमस्कार क्यों बोल रहे

2621
03:14:34,320 --> 03:14:37,680
हैं

2622
03:14:37,680 --> 03:14:41,680
देखिए शंकराचार्य जब सभा में आते हैं तो सबसे पहले बोलते

2623
03:14:41,680 --> 03:14:45,880
श्री राम जय राम जय जय राम

2624
03:14:45,880 --> 03:14:50,120
जब आप उनके समर्थ है तो आपको बोलना चाहिए था जय श्री राम के उत्तर

2625
03:14:50,120 --> 03:14:54,480
में जय श्री राम देखिए जय श्री राम भगवान

2626
03:14:54,480 --> 03:14:58,880
राम तो हमारे हृदय में है उसको मैं भाह आडंबर

2627
03:14:58,880 --> 03:15:03,160
के साथ प्रकट करूं मेरे को इतनी उचित नहीं है इसका मतलब आपके

2628
03:15:03,160 --> 03:15:07,480
अनुसार शंकराचार्य आडंबर करते हैं शंकराचार्य भगवान

2629
03:15:07,480 --> 03:15:11,720
ने कभी भी आडंबर नहीं किया वो स में आके

2630
03:15:11,720 --> 03:15:15,840
सबसे पहले बोलते हैं श्री राम जय राम जय

2631
03:15:15,840 --> 03:15:19,840
जय राम जी मेरे को मेरे को

2632
03:15:19,840 --> 03:15:24,080
पता है लेकिन आपने क्या अभिवादन किया था उस समय मेरे

2633
03:15:24,080 --> 03:15:28,080
को ध्यान नहीं तो ऐसे बोलिए ऐसे मत

2634
03:15:28,080 --> 03:15:32,320
बोलिए आड है ऐसे मत बोलिए आडंबर है आप ये बोलिए

2635
03:15:32,320 --> 03:15:36,560
मुझे ध्यान नहीं जी शायद मैं उसको सुना नहीं होगा लेकिन ऐसा

2636
03:15:36,560 --> 03:15:41,040
कोई भी मैं इतनी मूर्खता नहीं दिखाऊंगा कि आप राम राम करेंगे

2637
03:15:41,040 --> 03:15:45,920
हमारी किसी बात से शवा जी मुझे इजाजत दीजिए जय श्री राम

2638
03:15:45,920 --> 03:15:48,880
अभी जरा

2639
03:15:48,880 --> 03:15:52,880
मेरा केवल ये प्रश्न था आराधना जी आराधना जी आपका नाम क्या है आराधना

2640
03:15:52,880 --> 03:15:56,960
जी आपका नाम क्या है मैंने बताया था आपको

2641
03:15:56,960 --> 03:16:01,160
मेरा डाटा कम रहने की वजह से कट गया था दोबारा आया हूं हट स्पोर्ट चालू करके

2642
03:16:01,160 --> 03:16:05,200
नाम क्या है आपका बाबू राम दास है बाबू राम

2643
03:16:05,200 --> 03:16:09,400
दास जी अब आप अगली बार आइएगा आज मत आइए अब समय

2644
03:16:09,400 --> 03:16:13,400
हो गया कोई बात न घंटे 16 मिनट हो गए आप कल

2645
03:16:13,400 --> 03:16:18,360
आ जाइएगा हो सका तो ड नोट कर लीजिए

2646
03:16:18,360 --> 03:16:22,360
उस आप एक नंबर नोट कर लीजिए उस ट कर दीजिए हम जब अगली बार

2647
03:16:22,360 --> 03:16:26,640
आएंगे तो आपको लिंक दे मान मान्यवर मेरा आपसे यही निवेदन

2648
03:16:26,640 --> 03:16:31,000
है कि आप लोगों को जागरूक करें

2649
03:16:31,000 --> 03:16:37,000
यह आपका कर्तव्य है आप बड़े प्रखंड विवान

2650
03:16:40,480 --> 03:16:44,480
भाईब प्रकाश जी आपको अगर कोई बात हमसे कहनी है तो हमारा

2651
03:16:44,480 --> 03:16:49,040
ट नंबर नोट करिए वहां पर हमसे क जो भी आपको मार्गदर्शन

2652
03:16:49,040 --> 03:16:53,320
करना है परामर्श देना है हम वहां पर आपसे बात करेंगे ठीक है प्रकाश

2653
03:16:53,320 --> 03:16:57,520
जी विशाल भाटिया जी बताइए ट नंबर

2654
03:16:57,520 --> 03:17:02,240
ले लीजिए प्रकाश जी को दे दीजिए प्रकाश जी 74836

2655
03:17:02,240 --> 03:17:06,360
इस पर आप संपर्क करिए हमें बताइए आपको क्या लगता है हमें क्या करना चाहिए

2656
03:17:06,360 --> 03:17:11,120
ठीक है जय श्री राम जय श्री राम शिवा जी

2657
03:17:11,120 --> 03:17:15,240
जी तो मैं बहुत दे सेना पक्ष कुछ प्रस्तुत करना

2658
03:17:15,240 --> 03:17:19,240
चाहता था और आज हनुमान जी बात हो रही है हनुमान जी मैं भी खुद हनुमान

2659
03:17:19,240 --> 03:17:23,400
एक हनुमान भक्त हूं वो हनुमान जी पर सवाल उठाए थे तो मेरा भी हक बनता है अपने इष्ट के लिए

2660
03:17:23,400 --> 03:17:27,480
बोलने का जी जी बोलिए बोलिए अभी

2661
03:17:27,480 --> 03:17:31,520
और भी कभ पंती है एक कभ पंती है विशाल वर्मा

2662
03:17:31,520 --> 03:17:35,600
के नाम से वो भी है मैं उसको अगर वो आ सकता है तो आए ठीक

2663
03:17:35,600 --> 03:17:40,240
है मैं अपनी कुछ बात मैं आज इनका एक खंडन करने वाला

2664
03:17:40,240 --> 03:17:44,400
हूं अब जैसे इन्होने कौन कौन कौन आना

2665
03:17:44,400 --> 03:17:48,640
चाहता है कौन नाम लिया चाता मतलब कमेंट

2666
03:17:48,640 --> 03:17:52,720
कर र है वो आप अपनी बात बोलिए

2667
03:17:52,720 --> 03:17:55,760
व तो देखि आप चाहे जो कर ले

2668
03:17:55,760 --> 03:17:59,840
वह जो बोलना है उनको वही बोलेंगे हम जो

2669
03:17:59,840 --> 03:18:04,400
बिगड़ चुके उनको सुधार नहीं सकते बस बिगड़ने से बचा सकते

2670
03:18:04,400 --> 03:18:08,640
हम बिगड़ने से बचा सकते हैं बस बो लोग समझ सकते हैं

2671
03:18:08,640 --> 03:18:11,840
मूर्खों को नहीं समझा जा

2672
03:18:11,840 --> 03:18:16,280
सकता देखिए आप कि आप किसी अज्ञानी को

2673
03:18:16,280 --> 03:18:20,320
सही सकते किसी मूर्ख को भी सही कर सकते हैं मगर जिसने

2674
03:18:20,320 --> 03:18:24,640
मूर्ख रहने की कसम खाई हो उसको

2675
03:18:24,640 --> 03:18:29,840
नहीं कर सकते उसने कसम खा ली मुझे ऐसे ही रहना है जी

2676
03:18:29,840 --> 03:18:33,960
बताइए पहली बात में कहना चाहूंगा कि अब जैसे भगवान श्री राम है इनको

2677
03:18:33,960 --> 03:18:38,120
यह लोग अलग अलग मानते हैं कि कि हम हम लोग तो दशरत नंदन राम

2678
03:18:38,120 --> 03:18:42,360
की पूजा करते हैं असली राम तो कोई और है ये लोग एक

2679
03:18:42,360 --> 03:18:46,880
एक चौपाई कोई अपनी डालते हैं राम राम सब जगत बखान आदि राम कोई बि

2680
03:18:46,880 --> 03:18:50,960
ने ठीक है कि मतलब वो कोई और राम है वो कबीर

2681
03:18:50,960 --> 03:18:55,400
जी है तो मैं इनसे पूछना चाहता हूं यह लोग रामचरित मानस पर अभी बहुत बोल रहे थे ना ये लोग

2682
03:18:55,400 --> 03:18:59,840
आप राम चित मानस का बालकांड पढ़ेंगे ना राम चित मानस के बालकांड

2683
03:18:59,840 --> 03:19:04,520
में जब भगवान शिव से माता पार्वती राम कथा सुनने को

2684
03:19:04,520 --> 03:19:08,520
कहती है ना तो वो भगवान शिव से पूछते हैं कि आप

2685
03:19:08,520 --> 03:19:10,840
रामचरित मास पढ़ उसमें लिखा हुआ है

2686
03:19:10,840 --> 03:19:15,040
जो इनके फॉलोवर्स है ना शलोक वाले वो ध्यान से सुने जो राम जी को अलग मानते हैं

2687
03:19:15,040 --> 03:19:19,120
सुनिए रामचंद से बहुत उछल रहे हो ना तो

2688
03:19:19,120 --> 03:19:23,360
उसमें माता पाती भगवान शिव से पूछती है कि आप जिस राम का ध्यान करते हैं

2689
03:19:23,360 --> 03:19:27,600
वह दशरथ नंदन राम है या कोई और राम है जिनका वेदों में यश गाया गया है

2690
03:19:27,600 --> 03:19:31,720
वो दशरत पुत्र है कि कोई और राम है और अगर दशरत पुत्र राम ही भगवान राम

2691
03:19:31,720 --> 03:19:35,880
है तो व ब्रह्म कैसे अगर वह भगवान थे परमात्मा थे तो व सीता जी के लिए मन में इधर

2692
03:19:35,880 --> 03:19:40,160
उधर क्यों भटकते फिरे और एक दूसरा भी वर्णन

2693
03:19:40,160 --> 03:19:44,720
आता है राम चित मानस के उत्तर कांड में जब

2694
03:19:44,720 --> 03:19:49,000
मेघनाथ का नागपाश राम जी को लगता है राम रावण युद्ध में

2695
03:19:49,000 --> 03:19:53,080
तो जब गरुड़ जी जो उनकी सहायता के लिए आते हैं वो तो नागपाश काट देते हैं वो चले

2696
03:19:53,080 --> 03:19:57,080
भी जाते हैं लेकिन वो बाद में गरुड़ जी को मोह हो जाता है कि भगवान श्री राम अगर

2697
03:19:57,080 --> 03:20:01,240
वो विष्णु ही है वो परमात्मा है तो वो एक राक्षस के नाग पाश से क्यों

2698
03:20:01,240 --> 03:20:05,360
उसके उससे क्यों प्रभावित हुए खुद उसकी काट वो उन्होंने क्यों नहीं निकाली तो

2699
03:20:05,360 --> 03:20:09,520
पहले नारद जी के पास गए नारद जी ने गौर जी को कहा आप शिव जी के पास जाओ

2700
03:20:09,520 --> 03:20:13,600
शिव जी ने कहा कि मानसरोवर में कासुंडी जी रहते

2701
03:20:13,600 --> 03:20:18,440
हैं जो बहुत से वृद्ध पक्षियों को राम कथा सुनाते हैं आप उनके पास जाइए

2702
03:20:18,440 --> 03:20:22,560
आपको उनकी आपको आपके सारे शंकाओं का समाधान मिल जाएगा

2703
03:20:22,560 --> 03:20:26,000
तो जो भगवान शिव ने माता पार्वती को जो उपदेश दिया था

2704
03:20:26,000 --> 03:20:30,000
जो बताया था राम जी के बारे में कि वोह कौन से राम है और जो का घुंडी

2705
03:20:30,000 --> 03:20:34,240
जी ने उनको गरुड़ जी को जवाब दिया कि अगर वो परमात्मा तो उन्होने ये सब ऐसी

2706
03:20:34,240 --> 03:20:38,600
चीजें क्यों की तो जो इन्होंने जो बातें की जो खंडन किए भगवान शिवने

2707
03:20:38,600 --> 03:20:42,720
का जी ने ये लोग अगर रामचरित मास में अगर उसको पढ़ लेते ना इनको पता चल

2708
03:20:42,720 --> 03:20:47,440
जाता कि राम कौन है ये लोग ऐसे राम राम में भेद नहीं करते

2709
03:20:47,440 --> 03:20:51,880
वो तो कालने बोली है वो उनके अनुसार काल ने बोली है

2710
03:20:51,880 --> 03:20:55,880
क्या बात कर रहे हैं वो उके लिए प्रमाण केवल

2711
03:20:55,880 --> 03:21:00,080
रामपाल की वाणी है उनके लिए प्रमाण कबीर सागर भी नहीं है

2712
03:21:00,080 --> 03:21:04,160
तो जब वो आपको बताएंगे कि इसको मान लो गीता से और तुम

2713
03:21:04,160 --> 03:21:08,520
कहोगे यह क्या लिखा है यह गलत है अरे तो इसको क्यों माने

2714
03:21:08,520 --> 03:21:13,000
अगर दूसरी चीज गलत है तो यह भी तो गलत हो सकता है

2715
03:21:13,000 --> 03:21:19,000
मैं आपको जी आपकी बात पूरी हो गई तो मैं कुछ दिखाना चाह रहा

2716
03:21:19,480 --> 03:21:23,640
देखो य विशाल बमा जी बोल कांडी कबीर परमेश्वर के भक्त है लो भाई कहां लिखा

2717
03:21:23,640 --> 03:21:27,760
है बताओ जरा कहा लिखा है अपने मन से वो मनम

2718
03:21:27,760 --> 03:21:31,760
भक्ति है उनकी सामने कमेंट लिखने से कुछ नहीं होगा मेरे

2719
03:21:31,760 --> 03:21:36,320
सवाल का जवाब दो सामने आ का अर्थ बताया गया

2720
03:21:36,320 --> 03:21:40,800
है अक्षर का अर्थ निरुक्त रवा अध्याय

2721
03:21:40,800 --> 03:21:44,920
दसवा खंड अक्षर अक्षर का अर्थ य पर निरुक्त

2722
03:21:44,920 --> 03:21:49,760
ने किया है पर आत्मा परम ब्रह्म

2723
03:21:49,760 --> 03:21:54,000
ठीक है और इसमें उन्होंने उदाहरण भी दिया है ऋग्वेद

2724
03:21:54,000 --> 03:21:58,680
पहला मंडल 164 वा सूक्त और 39

2725
03:21:58,680 --> 03:22:03,320
वा मंत्र उसमें अक्षर शब्द आया अक्षरे

2726
03:22:03,320 --> 03:22:07,880
परमे तो अक्षरे परमे का अर्थ उन्होंने वहां किया है परम अक्षर

2727
03:22:07,880 --> 03:22:11,880
अक्षर का अर्थ भी परम अक्षर है अक्षरे परमे का अर्थ

2728
03:22:11,880 --> 03:22:15,960
भी परम अक्षर है अक्षर का अर्थ ब्रह्म भी है अक्षर का अर्थ

2729
03:22:15,960 --> 03:22:20,800
परम ब्रह्म भी है अब

2730
03:22:20,800 --> 03:22:25,520
हम अक्षर का अर्थ हमने सिद्ध कर लिया निरुक्त से

2731
03:22:25,520 --> 03:22:29,520
कि अक्षर का अर्थ परम ब्रह्म भी है परमात्मा भी है और क्या

2732
03:22:29,520 --> 03:22:33,600
कहते हैं वो भी है ब्रह्म यह ब्रह्म परम

2733
03:22:33,600 --> 03:22:37,640
अक्षर और परम अक्षर ब्रह्म में कोई अंतर नहीं है अब हम राम

2734
03:22:37,640 --> 03:22:41,640
जी को सिद्ध कर लेते हैं मैं सि कने वाला हूं

2735
03:22:41,640 --> 03:22:46,040
मेरे पास आनंद रामायण है इनकी चीज का खंडन करना मेरे को

2736
03:22:46,040 --> 03:22:50,160
ये बार मुझे भी मिला है इसी साल का अंक है ना हा इस

2737
03:22:50,160 --> 03:22:54,160
वर्ष का अंक है कल्या मैं यहा सेरा अक्षर दिखा दू

2738
03:22:54,160 --> 03:22:58,160
बस राम जी के लिए हा हा दिखाइए देखो विशाल

2739
03:22:58,160 --> 03:23:02,280
वर्मा देखो जरा तुम भी कमेंट लिखने से कुछ नहीं होगा सामने आ जाओ

2740
03:23:02,280 --> 03:23:07,400
कमेंट लिखना आसान होता है आप प्रभावित ना

2741
03:23:07,400 --> 03:23:11,480
हो आप सशक्त उसमें है आपका पल्ला

2742
03:23:11,480 --> 03:23:15,480
भारी है उन लोगों ने आज ब्रह्मा विष्णु महेश को अविनाशी मान

2743
03:23:15,480 --> 03:23:19,520
लिया भक्ति अपनी मनमुक मान ली

2744
03:23:19,520 --> 03:23:23,560
दीक्षा मनमुक मान ली हर बात तो उनकी खंडित खंड रही

2745
03:23:23,560 --> 03:23:27,640
बक्स में बोल रहे हैं हमको मनमुक लिख रहे हैं वो लोग कमेंट में तो वो

2746
03:23:27,640 --> 03:23:31,840
तो अच्छा आप क्या दिखा दोगे जो मान जाएंगे कि नहीं मनमुक नहीं

2747
03:23:31,840 --> 03:23:36,000
हम सामने वाले को निरुत्तर और निराधार कर सकते हैं निरुत्तर कर देंगे

2748
03:23:36,000 --> 03:23:41,560
चुप हो जाएगा व्यक्ति और कितने हुए य पर

2749
03:23:41,560 --> 03:23:46,600
चुप मानना कुछ है नहीं इनको बस बातें बना लो इनसे

2750
03:23:46,600 --> 03:23:51,320
युद्ध कांड में आ जाते हैं जब वह सीता माता को ले आते हैं वो

2751
03:23:51,320 --> 03:23:55,440
ब्रह्मा जी स्तुति करते हैं ना व पढ़ा मैंने हा वही दिखा दूं

2752
03:23:55,440 --> 03:23:59,520
मैं इनको जरा एक मिनट बस दिखाइए भैया अब माने ना माने

2753
03:23:59,520 --> 03:24:05,520
इनकी किस्मत दिखा दीजिए अलग

2754
03:24:10,440 --> 03:24:15,360
से

2755
03:24:15,360 --> 03:24:19,520
624 विशाल बर्मा जी अंग्रेजी में कुछ मत लिखिए आ जाइए सामने हम बता देते

2756
03:24:19,520 --> 03:24:23,960
हैं आपके सवाल का जवाब आराम से अरे आप प्रभावित ना होइए मैं कह तो रहा हूं उससे

2757
03:24:23,960 --> 03:24:28,920
आप क्यों प्रभावित हो रहे हैं वो बहुत बोलते हैं

2758
03:24:28,920 --> 03:24:32,960
हां भैया तो हमने देखा कि अक्षर का अर्थ

2759
03:24:32,960 --> 03:24:37,000
परम ब्रह्म भी है परमात्मा भी है सब कुछ है

2760
03:24:37,000 --> 03:24:41,280
ब्रह्म भी है और यहां पर श्री राम को वाल्मीकि रामायण

2761
03:24:41,280 --> 03:24:46,880
के

2762
03:24:46,880 --> 03:24:52,880
सपत दश

2763
03:24:53,480 --> 03:24:57,640
सत 17 में

2764
03:24:57,640 --> 03:25:01,880
सर्ग के और 14 श्लोक में

2765
03:25:01,880 --> 03:25:06,280
अक्षर ब्रह्म लिखा है अक्षर का अर्थ निरुक्त से

2766
03:25:06,280 --> 03:25:10,360
किया हमने परम ब्रह्म और नीचे अनुवादक ने भी

2767
03:25:10,360 --> 03:25:13,080
परम ब्रह्म लिखा

2768
03:25:13,080 --> 03:25:17,240
है ठीक है मनमुक इसे नहीं कहते हैं

2769
03:25:17,240 --> 03:25:21,320
ये है शास्त्र सम्मत जी है मेरे पास ये देखिए

2770
03:25:21,320 --> 03:25:26,040
मैंने पढ़ा हुआ है ये देखिए जी जी

2771
03:25:26,040 --> 03:25:30,120
अब मैं खंडन दिखाऊ जी इन्होंने

2772
03:25:30,120 --> 03:25:34,160
एक भ्रांति फैलाई है कि अब इन्होने तो अब इन्होंने हनुमान जी को भी कबीर

2773
03:25:34,160 --> 03:25:38,400
जी का भक्त बना डाला इन लोगों ने ठीक है अब ये एक कहानी बताते हैं कि रामायण

2774
03:25:38,400 --> 03:25:43,720
में कबी जी कुता कह रहे हैं बता

2775
03:25:43,720 --> 03:25:48,080
इसलिए दिखानी है मुझे बहुत अच्छा मौका हाथ लगा मेरे

2776
03:25:48,080 --> 03:25:52,080
तो इन्होंने यह बताया कि जब हनुमान जी एक बार समुद्र से

2777
03:25:52,080 --> 03:25:56,280
पार कर रहे हो समुद्र लंका से वापस जब जा रहे थे ना

2778
03:25:56,280 --> 03:26:00,320
भारत में सीता जी से मिलने के बाद तो उनको रास्ते में एक

2779
03:26:00,320 --> 03:26:04,800
टापू दिखता है उस टापू में एक ऋषि बैठे होते हैं

2780
03:26:04,800 --> 03:26:08,800
ठीक है अब वो ऋषि और समुद्र और ऋषि के साथ कुछ बंदर

2781
03:26:08,800 --> 03:26:13,040
बैठे होते हैं ठीक है तो हनुमान जी को लगा मैं थोड़ा ठका हूं प्यास बुजा लू

2782
03:26:13,040 --> 03:26:17,200
वो ऋषि के पास आते हैं एक कमंडल है वो उसमें कहते हैं मैं अपनी एक मुद्र यहां प रख के जा र

2783
03:26:17,200 --> 03:26:21,280
हूं जो सीता मैया ने उनको दी थी तो मुद्रिका रखी वो स्नान करने

2784
03:26:21,280 --> 03:26:25,280
गए इतने में कुछ बंदर जो बैठे हुए थे एक बंदर आया वो उस मुद्रिका को

2785
03:26:25,280 --> 03:26:29,400
लेकर उस कमंडल में डाल दिया फिर जब हनुमान जी जब स्नान वगैरह करके

2786
03:26:29,400 --> 03:26:33,400
वापस आए तो मैंने पूछा कि मेरी मुद्रिका का है ऋषि ने ऐसे इशारा कर

2787
03:26:33,400 --> 03:26:37,560
दिया कि मुद्रिका इसमें इसमें है तो जब हनुमान जी ने उस कमंडल में चेक

2788
03:26:37,560 --> 03:26:41,760
किया ना जाने इतनी कितनी सारी मुद्रिका हनुमान जी ऐसे निकाल रहे

2789
03:26:41,760 --> 03:26:45,760
तो भी वो अनगिनत मुद्रिका उसमें निकलती जाई थी तो हनुमान जी

2790
03:26:45,760 --> 03:26:49,840
ने पूछा की कितनी मुद्रिका है तो उन्होंने वो ऋषि ने कहा कि

2791
03:26:49,840 --> 03:26:54,280
संसार में जितनी जितनी बार भगवान श्री राम आए उतनी उतनी बार हनुमान जी

2792
03:26:54,280 --> 03:26:58,440
सीता माता की खोज करते हुए लंका से आ तो ये तब की मुद्रिका बहुत

2793
03:26:58,440 --> 03:27:03,160
स आई है हनुमान जी ने पूछा कितनी मुद्रिका है वो ऋषि ने कहा

2794
03:27:03,160 --> 03:27:07,440
कि जितनी बार हनुमान जी आए हैं जितनी बार श्री राम जी आए हैं उतनी मत्री

2795
03:27:07,440 --> 03:27:11,640
काए हैं तो वो उनका अंत

2796
03:27:11,640 --> 03:27:15,800
अंत ना पा सके तो हनुमान ने सोचा कि संसार में कितने कितनी बार प्रभु श्री राम

2797
03:27:15,800 --> 03:27:20,040
जी आए तो फिर मैं किस गिनती में हूं यह सोच के वो आगे चले जाते

2798
03:27:20,040 --> 03:27:23,800
हैं तो अब इन लोगों का मानना होता है कि वो जो ऋषि है वोह कबीर

2799
03:27:23,800 --> 03:27:27,920
जी थे जो ऋषि के रूप में हनुमान जी को असली ज्ञान देने आए थे फ वो हनुमान

2800
03:27:27,920 --> 03:27:31,960
जी पहचान गए कि ये असली राम है तो फिर वो उ उन्हीं की भक्ति में लग गए फ

2801
03:27:31,960 --> 03:27:36,000
और उनको हनुमान जी को मोक्ष हो गया अब मैं देखो इसका कैसे खंडन दिखाता

2802
03:27:36,000 --> 03:27:40,120
हूं यह मेरे पास है आनंद रामायण ये पहले मुझे लगा कि आनंद

2803
03:27:40,120 --> 03:27:44,320
रामायण का तो कॉपी नहीं है क्योंकि ये सेम जो स्टोरी जो है ये मैंने उसमें पढ़ी है गीता

2804
03:27:44,320 --> 03:27:48,320
प्रस का एक अंक आता है हनुमान अंक आपने पढ़ा होगा तो उसमें

2805
03:27:48,320 --> 03:27:52,520
मेरे को दिखी तो मैं उसमें लिखा है कि वो कथा आनंद रामायण से संकलित

2806
03:27:52,520 --> 03:27:56,840
है मुझे लगा किय आनंद रामायण की कॉपी तो नहीं कर रहे हैं फिर मैंने आनंद रामायण ली

2807
03:27:56,840 --> 03:28:01,040
मैंने इसमें पढ़ा और मुझको एक कबीर पंथी का एक वीडियो

2808
03:28:01,040 --> 03:28:05,160
दिखा उसने उसने आनंद रामायण पूरा लाक दिखाया और बस इतना

2809
03:28:05,160 --> 03:28:09,640
दिखाया कि हनुमान जी को मुद्रिका नहीं मिली और वो आगे चले गए लेकिन उसके आगे क्या हुआ वो

2810
03:28:09,640 --> 03:28:14,280
नहीं दिखाया उसके आगे जब आप पढ़ोगे ना तो इनकी बात बिल्कुल झूठी हो जाएगी

2811
03:28:14,280 --> 03:28:18,480
बताता हूं कैसे ये मैं इसमें पढ़ के सुनाता हूं जब श्री राम

2812
03:28:18,480 --> 03:28:22,800
जी को जब श्री राम जी को हनुमान जी पूरा मैसेज वो दे देते हैं तो

2813
03:28:22,800 --> 03:28:26,840
उनकी प्रशंसा करते हु हनुमान जी को श्री राम जी गले लगाते हैं और श्री राम जी यहां पर

2814
03:28:26,840 --> 03:28:30,920
देखिए क्या कह रहे हैं इस संसार में तुम हे हनुमान इस संसार

2815
03:28:30,920 --> 03:28:35,160
में तुम धन्य हो मुझ परमात्मा मुझ परमात्मा का लिंगन

2816
03:28:35,160 --> 03:28:38,880
प्राप्त होना संसार में अति दुर्लभ है हे कपी श्रेष्ठ तुम मेरे

2817
03:28:38,880 --> 03:28:42,920
भक्त हो और मुझे अत्यंत प्रिय हो ठीक है य श्री राम जी

2818
03:28:42,920 --> 03:28:47,320
कह रहे हैं कि मुझ परमात्मा का लिंगन मिलना दुर्लभ है रामायण में से

2819
03:28:47,320 --> 03:28:51,720
फिर हनुमान जी ने की जब प्रशंसा की तब उसके बाद हनुमान जी

2820
03:28:51,720 --> 03:28:55,920
तदनंतर भयभीत होकर अत्यंत कांपते हुए हनुमान जी ने श्री राम जी को अपने

2821
03:28:55,920 --> 03:29:00,120
अपराध के विषय में मुद्रिका के कमंडल में जाने का वृतांत और मुनि का कहा

2822
03:29:00,120 --> 03:29:04,240
वचन सब कुछ उन्हें क्या सुनाया कि कितनी बार राम आए हनुमान आए उतनी मुद्रिका है यह

2823
03:29:04,240 --> 03:29:08,400
सब सुनने के बाद भगवान हस पने श्री राम जी और उन्होंने मारुती से कहा

2824
03:29:08,400 --> 03:29:12,400
हे प्रिय हनुमान वो मैं ही था मैं ही मार्ग में मुनि रूप धारण करके

2825
03:29:12,400 --> 03:29:16,520
तुम्हारे गर्भ को समाप्त करने के लिए मैंने वो लीला की थी मतलब उस हनुमान

2826
03:29:16,520 --> 03:29:20,520
जी को एक वो थोड़ा सा एक गर्भ सा हो गया था तो उन्होंने कहा कि वो मुनि के रूप में वो मैं

2827
03:29:20,520 --> 03:29:24,600
ही था यह देखो जिस अंगूठी को तुम लेकर आए हो वो पहले से ही मेरे हाथ की

2828
03:29:24,600 --> 03:29:28,600
कनिष्का उंगली में है तब श्री राम जी के हाथ में उंगली में उस

2829
03:29:28,600 --> 03:29:32,760
राम नाम से अंकित मुद्रिका को देखकर हनुमान जी ने उनको प्रणाम किया

2830
03:29:32,760 --> 03:29:36,800
उनका जो अभिमान था वो जाता रहा और उन्होंने श्री राम जी को साक्षात विष्णु ही समझा

2831
03:29:36,800 --> 03:29:41,120
यह माना कि इन्हीं की कृपा से मुझ में ये बल पहुचा है तो अब यहां पे तो उन्होंने

2832
03:29:41,120 --> 03:29:45,160
उसकी कॉपी कर दी और बोल दिया कि वो मुनि जो थे वो कबीर जी थे और मैंने यहां

2833
03:29:45,160 --> 03:29:49,200
से आपको दिखा दिया कि मुनि श्री राम जी थे उन्होंने श्री राम जी ने खुद हनुमान जी को बोला कि वो

2834
03:29:49,200 --> 03:29:53,520
मुझे तुम्हारा गर्भ हरण करना था उनको शास्त्र आपको को उतना दिखाना

2835
03:29:53,520 --> 03:29:54,160
है जिससे

2836
03:29:54,160 --> 03:29:58,320
वो अपनी बात सिद्ध कर सके बस बाकी उन्ह शत्र से कोई मतलब

2837
03:29:58,320 --> 03:30:02,840
नहीं है ये भाई साहब पूछ रहे हैं भाई जब आपके राम समृत

2838
03:30:02,840 --> 03:30:06,880
थे तो बाली को छुपके क्यों मारा इसके बहुत सारे

2839
03:30:06,880 --> 03:30:11,400
जवाब है मगर मैं आपसे पूछता हूं कि आपके कबीर जब समरथ

2840
03:30:11,400 --> 03:30:15,520
थे तो रामानंदाचार्य जी को गुरु क्यों बनाया

2841
03:30:15,520 --> 03:30:19,840
क्यों उनके पास शिक्षा

2842
03:30:19,840 --> 03:30:24,040
लेने इसका जवाब जब दोगे तो उसी में आपको आपके प्रश्न

2843
03:30:24,040 --> 03:30:28,360
का जवाब भी मिल जाएगा जी बोलिए एक प्रश्न और पूछते

2844
03:30:28,360 --> 03:30:32,440
य लोग अगर शिवजी सशक्ति मान थे तो जो भस्मासुर को शप दिया कि वो

2845
03:30:32,440 --> 03:30:36,560
जिस पर अपना हाथ रखेगा वो भस्म हो जाएगा तो जब शिवजी पर हाथ रखे दरा तो शिवजी

2846
03:30:36,560 --> 03:30:40,840
खुद क्यों भाग चले तो इसका कुछ आप जवाब देंगे

2847
03:30:40,840 --> 03:30:46,200
इनको भागे क्यों भागे क

2848
03:30:46,200 --> 03:30:50,280
वो हाथ डालने आ रहा था ना शिव जी के ऊपर तो आप पूछ रहे

2849
03:30:50,280 --> 03:30:54,320
हो वो क्यों भागे ये उन लोगों का प्रश्न है मेरा नहीं है वो पूछ

2850
03:30:54,320 --> 03:30:58,440
रहे ईश्वर वही है जो कुछ भी कर सकता

2851
03:30:58,440 --> 03:31:03,400
है ईश्वर के ऊपर किसी भी प्रकार का नियम नहीं लग सकता है

2852
03:31:03,400 --> 03:31:07,840
तो ईश्वर भागेगा भी ईश्वर रोएगा भी ईश्वर

2853
03:31:07,840 --> 03:31:09,520
राज भी रचाए

2854
03:31:09,520 --> 03:31:13,640
ईश्वर मनुष्य दृष्टि से सोचा जा सकने वाला ऐसा कोई कार्य नहीं है जो नहीं

2855
03:31:13,640 --> 03:31:17,920
कर सकता उसी का नाम ईश्वर है सत्यम

2856
03:31:17,920 --> 03:31:22,240
ज्ञान अनंतम ब्रम सत्यम ज्ञानम

2857
03:31:22,240 --> 03:31:26,280
अनंतम ब्रम अनंत है अगर हमने रोक

2858
03:31:26,280 --> 03:31:30,400
लगा दी कि वो भाग नहीं सकता तो यह

2859
03:31:30,400 --> 03:31:34,680
भी अंत है यह भी एक सीमा है वह सब कुछ करके

2860
03:31:34,680 --> 03:31:38,720
दिखाएगा उसी का नाम ईश्वर है ये राम

2861
03:31:38,720 --> 03:31:42,840
चित मास एक सेकंड रु किगा है मैंने जो अभी आपको मैंने

2862
03:31:42,840 --> 03:31:46,840
जो अभी आपको बताया कि पार्वती मैया ने उनसे पूछा शिव जी से

2863
03:31:46,840 --> 03:31:51,080
कि आप जिन राम जी का ध्यान करते हैं राम रामती रामती रमे राम मनोरम यह श्लोक

2864
03:31:51,080 --> 03:31:55,160
उनका प्रसिद्ध है शिव जी का तो वो दशरत नंद नाम है की कोई और राम

2865
03:31:55,160 --> 03:32:01,160
है तोय मैं कुछ इसमें आपको दिखा रहा हूं ठीक है एक

2866
03:32:02,160 --> 03:32:06,200
सेकंड एक मिनट रुगा बस

2867
03:32:06,200 --> 03:32:11,000
अरे इसका भी वही जवाब है कि जब वो सर सर

2868
03:32:11,000 --> 03:32:16,120
सार्थवाह अपने आप उनके पास सारा ज्ञान था तो गुरु के पास क्यों गए

2869
03:32:16,120 --> 03:32:20,120
[संगीत] अब यह कहेंगे लीला थी

2870
03:32:20,120 --> 03:32:24,200
उनको गुरु की आवश्यकता नहीं थी ऐसे ही लीला थी उनको भागने की आवश्यकता

2871
03:32:24,200 --> 03:32:30,200
नहीं

2872
03:32:30,840 --> 03:32:35,360
थी यह देखिए मुझको मिल गया यह देखिए अभय

2873
03:32:35,360 --> 03:32:39,560
मैं उस रामचरित मानस के उस प्रसंग में पहुंचा हूं जब पार्वती जी ने पूछा राम कथा सुनाने

2874
03:32:39,560 --> 03:32:43,880
के लिए प्रश्न किया भगवान शिव ने उनको पार्वती माता को अप्रिशिएट बहुत किया

2875
03:32:43,880 --> 03:32:47,920
लेकिन अब आगे भगवान शिव बोलते हैं एक बात नहीं मोही

2876
03:32:47,920 --> 03:32:52,120
सुहानी जत भी मोह बस क भवानी तुम जो कहा राम को आना ज शति

2877
03:32:52,120 --> 03:32:56,120
गाव धरी मुनि ध्याना हे पार्वती एक बात मुझे तुम्हारी अच्छी

2878
03:32:56,120 --> 03:33:00,240
नहीं लगी यद्यपि व तुमने मोह के वश होकर ही कही है तुमने जो यह कहा कि वे राम

2879
03:33:00,240 --> 03:33:04,320
कोई और है जिन्हे वेद गाते मुजन जिनका ध्यान करते हैं तो

2880
03:33:04,320 --> 03:33:08,520
अब इसमें आगे देखिए अब आगे जो कह रहे हैं ना शिवजी उन लोगों के लिए कह रहे हैं जो राम राम

2881
03:33:08,520 --> 03:33:12,800
में ही भेद करते हैं य बोलते हैं ना दश नंदन राम कोई और आदि राम कोई बिल्ला

2882
03:33:12,800 --> 03:33:16,840
जाने अब देखिए यहां प क्या कह रहे हैं शिव जी जो मोह रूपी पिशाच के

2883
03:33:16,840 --> 03:33:17,340
द्वारा

2884
03:33:17,160 --> 03:33:21,160
ग्रस्त है पाखंडी है भगवान के चरणों से विमुख है और जो झूठ

2885
03:33:21,160 --> 03:33:25,720
सच कुछ भी नहीं जानते ऐसे अधम मनुष्य ही इस तरह की बातें कहते सुनते हैं

2886
03:33:25,720 --> 03:33:29,960
जो अज्ञानी मूर्ख अंधे और भाग्यहीन है और जिन्हें मन रूपी दप

2887
03:33:29,960 --> 03:33:34,120
पर विषय रूपी काई जमी हुई है जो व्यभिचारी चली और बड़े कुटिल

2888
03:33:34,120 --> 03:33:38,400
है और जिन्होंने कभी स्वप्न में भी संत समाज के दर्शन नहीं

2889
03:33:38,400 --> 03:33:42,600
किए जिनको निर्गुण सगुण का कुछ भी विवेक नहीं है जो अनेक मन

2890
03:33:42,600 --> 03:33:46,720
गंत बातें बका करते हैं जो श्री हरि की माया के वश में होकर जगत

2891
03:33:46,720 --> 03:33:50,840
में भ्रम से फिरते हैं उनके लिए कुछ भी कह डालना संभव है

2892
03:33:50,840 --> 03:33:54,840
अपने में अपने हृदय में ऐसा विचार कर संदेश छोड़ दो और श्री राम जी के चरणों को

2893
03:33:54,840 --> 03:33:59,040
भजो हे पार्वती सगुण और निर्गुण में कुछ भी भेद नहीं है

2894
03:33:59,040 --> 03:34:03,200
मुनि पुराण पंडित और वेद भी ऐसा ही कहते हैं जो निर्गुण अलख

2895
03:34:03,200 --> 03:34:07,240
और अजन्मा है वह भक्तों के प्रेम वश सगुण हो जाता है जो निर्गुण है वो

2896
03:34:07,240 --> 03:34:11,520
सगुण कैसे जैसे जल और ओले में कोई भेद नहीं है श्री राम सच्चिदानंद

2897
03:34:11,520 --> 03:34:15,560
स्वरूप सूर्य है वहां मोह रूपी रात्रि का लवलेश भी नहीं है वे स्वभाव

2898
03:34:15,560 --> 03:34:19,560
से से ही प्रकाश रूप और शरण शव्य युक्त भगवान है वहां जो विज्ञान

2899
03:34:19,560 --> 03:34:23,680
रूपी प्रात काल भी नहीं होता है हर शोक

2900
03:34:23,680 --> 03:34:27,960
ज्ञान अज्ञान अहं और अभिमान ये सब जीव के धर्म है श्री रामचंद्र

2901
03:34:27,960 --> 03:34:32,200
जी तो व्यापक ब्रह्म परमानंद स्वरूप परात्पर प्रभु और पुराण पुरुष है

2902
03:34:32,200 --> 03:34:36,320
इस बात को सारा जगत जानता है जो पुरुष

2903
03:34:36,320 --> 03:34:40,600
प्रसिद्ध है प्रकाश के भंडार हैं सब रूपों में प्रकट है जीव माया

2904
03:34:40,600 --> 03:34:44,760
और जगत के स्वामी है वे रघुकुल मणि श्री रामचंद्र जी वे रघुकुल

2905
03:34:44,760 --> 03:34:49,840
मणि श्री रामचंद्र जी ही मेरे स्वामी है ऐसा कहकर भगवान शिव ने उनको मस्तक

2906
03:34:49,840 --> 03:34:53,640
नवाया बताओ बहुत

2907
03:34:53,640 --> 03:34:58,480
बढ़िया ठीक है तो सभी को आने के लिए आभार

2908
03:34:58,480 --> 03:35:02,640
और इसी प्रकार से बने रहे कमेंट्स के माध्यम से ही हमारा

2909
03:35:02,640 --> 03:35:06,640
प्रचार करते रहे इसी तरीके से उसका एंगेजमेंट बढ़ाते

2910
03:35:06,640 --> 03:35:10,960
रहे हमारा इसमें लाभ ही

2911
03:35:10,960 --> 03:35:15,200
है और आज बहुत सारे तथ्य पकड़ में आ गए

2912
03:35:15,200 --> 03:35:19,320
हम इन्होंने मान लिया वेद आदि शास्त्रों को प्रमाण

2913
03:35:19,320 --> 03:35:23,320
नहीं मानते हैं इनका वो नाटक कबीर को ईश्वर नहीं मानते ये

2914
03:35:23,320 --> 03:35:27,400
लोग बस वो तो बाद की बात है और यह आज तक

2915
03:35:27,400 --> 03:35:31,400
नहीं दिखा पाए कि वेद में कहां लिखा है कबीर भगवान है ऐसे तो कमेंट बॉक्स में

2916
03:35:31,400 --> 03:35:35,480
लिखते हैं ऋगवेद इतना मंडल इतना सूक्त तो बो

2917
03:35:35,480 --> 03:35:40,280
ब सामने अब नहीं बोल रहे अब नहीं बोलेंगे अब बंद हो गया इनका बोलना

2918
03:35:40,280 --> 03:35:44,640
ईश्वर इनका ईश्वर भी बाधित है सर्वशक्तिमान नहीं बहुत सारे काम वो नहीं कर

2919
03:35:44,640 --> 03:35:47,240
सकता रूप नहीं बदल सकता हाथ

2920
03:35:47,240 --> 03:35:51,280
को लंबा नहीं कर सकता शरीर को छोटा बड़ा नहीं कर सकता कुछ

2921
03:35:51,280 --> 03:35:55,840
भी नहीं कर सकता अच्छा और क्या है

2922
03:35:55,840 --> 03:35:59,840
कि इनकी जो दीक्षा ले रहे हैं वह भी शास्त्र सम्मत नहीं है

2923
03:35:59,840 --> 03:36:04,960
यह जो दीक्षा ले रहे हैं वो भी शास्त्र सम्मत नहीं है और

2924
03:36:04,960 --> 03:36:09,160
इनके द्वारा ज्ञान से ज्ञान को काटना वो शास्त्र सम्मत नहीं है अगर एक जगह गीता

2925
03:36:09,160 --> 03:36:13,240
में कुछ लिखा है और दूसरी जगह से उसका विरोध हो रहा है तो उनमें

2926
03:36:13,240 --> 03:36:17,280
से कौन सी बात को मानोगे कौन सी बात को नहीं मान हो ग यह निर्णय आप

2927
03:36:17,280 --> 03:36:21,600
कौन होते हो करने वाले मनमुक निर्णय हो गया ना

2928
03:36:21,600 --> 03:36:26,320
ये मनमुक हो गया यह मनमुक भक्ति है चलिए

2929
03:36:26,320 --> 03:36:30,720
सभी को जय श्री राम रामाय राम भद्र रामचंद्र रघुनाथा

2930
03:36:30,720 --> 03:36:34,720
नाथ सीता पते नमः जय श्री राम जय श्री राम जय श्री राम
