1
00:00:03,360 --> 00:00:09,360
सभी को जय श्री राम

2
00:00:12,530 --> 00:00:18,530
[संगीत] और जिनके साथ

3
00:00:19,560 --> 00:00:23,800
आज आप एक बार ना लीव करके दोबारा आ जाओ आपकी आवाज थोड़ा

4
00:00:23,800 --> 00:00:29,800
देर बाद आ रही है

5
00:00:33,960 --> 00:00:39,960
उ से बोल दो उधर से ही

6
00:00:48,680 --> 00:00:52,960
आ जय श्री राम सभी

7
00:00:52,960 --> 00:00:55,680
को

8
00:00:55,680 --> 00:00:59,960
आज जो आने वाले थे वह नहीं आए हैं और

9
00:00:59,960 --> 00:01:04,880
रड मली पा मिनट पहले मुझे इन महानुभव का साउंड आ रहा है

10
00:01:04,880 --> 00:01:09,040
क्या साउंड आ रहा है मगर आपका जो चित्र है वो व्यवस्थित

11
00:01:09,040 --> 00:01:13,480
नहीं

12
00:01:13,480 --> 00:01:17,600
है हा भाई इनको देख लीजिएगा स्पैमर्स जो

13
00:01:17,600 --> 00:01:22,040
है उनको 10 मिनट का टाइम आउट इसको देख लीजिएगा जरा

14
00:01:22,040 --> 00:01:25,480
नहीं समझ क्या

15
00:01:25,480 --> 00:01:29,920
बात एक मिनट मैं अभी आपसे बात कर रहा हूं जरा

16
00:01:29,920 --> 00:01:33,800
पहले थोड़ा दर्शकों से बात कर लू

17
00:01:33,800 --> 00:01:39,160
तो भाई नेटवर्क कटकट के आ रहा है

18
00:01:39,160 --> 00:01:45,160
भाई मेरी आवाज कैसी आ रही है सबको बैकग्राउंड पीछे

19
00:01:48,200 --> 00:01:54,200
का मेरी आवाज ठीक आ रही है क्या

20
00:02:06,320 --> 00:02:10,360
अच्छा हमारी आवाज ठीक है तो यह भाई साहब आपका

21
00:02:10,360 --> 00:02:16,360
नेटवर्क ठीक नहीं है लग रहा

22
00:02:16,480 --> 00:02:22,480
है आपसे बोल रहा हूं अमित शाह जी

23
00:02:30,680 --> 00:02:34,960
हां जी मेरा ही शायद नेटवर्क खराब

24
00:02:34,960 --> 00:02:38,320
होहा

25
00:02:38,320 --> 00:02:44,320
है म स्लो स्लो

26
00:02:47,520 --> 00:02:53,520
है मैं कट करके फिर से आता हूं देखता

27
00:02:58,120 --> 00:03:04,120
हूं र सा स्लो है शायद तो मैं फिर से आता हूं कटिंग

28
00:03:05,080 --> 00:03:09,080
करके जी जी आ जाइए आप दोबारा

29
00:03:09,080 --> 00:03:15,080
आ जाइए आप

30
00:04:06,600 --> 00:04:10,760
चलिए तब तक वो आ रहे हैं जब तक एक बार और जुड़ जाते हैं

31
00:04:10,760 --> 00:04:15,280
हेमंत कुमार जी हैड

32
00:04:15,280 --> 00:04:19,800
टू स्टेज अमित शाह हेमंत

33
00:04:19,800 --> 00:04:20,300
जी आपको

34
00:04:20,160 --> 00:04:24,200
लेते हैं थोड़ा इन भाई साहब से बात कर

35
00:04:24,200 --> 00:04:28,520
ले जरा जी

36
00:04:28,520 --> 00:04:31,920
आपका परिचय भाई

37
00:04:31,920 --> 00:04:37,920
साहब मेरा मेरा अमित

38
00:04:37,960 --> 00:04:42,120
दास तो कहां से हैं कैसे हैं कितने वर्ष हो गए जुड़े हुए

39
00:04:42,120 --> 00:04:45,160
रामपाल जी

40
00:04:45,160 --> 00:04:49,240
से ज्यादा दिन नहीं हुआ है 20 में

41
00:04:49,240 --> 00:04:53,240
नाम वैसे तो य प अभी

42
00:04:53,240 --> 00:04:57,360
आकर बहुत देर से समझाओ मेरे उतना ज्ञान पता नहीं

43
00:04:57,360 --> 00:05:01,400
है लेकिन फिर भी मेरे पास जितना ज्ञान है उसी से मैं आपको समझाने का

44
00:05:01,400 --> 00:05:05,520
प्रयत्न करूंगा है ना कि आप जो बात बता रहे हैं वो सही

45
00:05:05,520 --> 00:05:10,680
है कि नहीं वो तो डिबेट में पता चल जाएगा 20 21 मान

46
00:05:10,680 --> 00:05:13,640
लीजिए

47
00:05:13,640 --> 00:05:17,720
अच्छा ये जो

48
00:05:17,720 --> 00:05:22,000
भगवान ने कहा है कि तू

49
00:05:22,000 --> 00:05:26,120
मेरी शरण में आ जा उसके लिए अच्छा सबसे पहले एक बात

50
00:05:26,120 --> 00:05:32,120
ये करते हैं यह पवित्र ग्रंथ का अर्थ क्या है आपके

51
00:05:35,840 --> 00:05:41,840
अनुसार पवित्र ग्रंथ का मतलब क्या है आपके

52
00:05:43,840 --> 00:05:47,960
अनुसार ग्रंथ आपकी आवाज कट रही भाई

53
00:05:47,960 --> 00:05:51,960
साहब आप किसी अच्छी नेटवर्क में जाकर के बात करिए ऐसे बात

54
00:05:51,960 --> 00:05:55,960
नहीं हो पाएगी आपकी आवाज बहुत कट रही है चित्र

55
00:05:55,960 --> 00:05:59,800
भी कट रहा है

56
00:05:59,800 --> 00:06:03,800
नेट ज्यादा हो रहा हैद एक मिनट क्लियर

57
00:06:03,800 --> 00:06:08,160
नहीं आ रहा है क्या नहीं आ रहा

58
00:06:08,160 --> 00:06:12,480
क्लियर क्लियर आ रहा है मगर

59
00:06:12,480 --> 00:06:18,400
आप रुक रुक के आ रहा है

60
00:06:18,400 --> 00:06:22,520
आपका मैं आपसे पूछ रहा हूं यह पवित्र ग्रंथ क्या होता

61
00:06:22,520 --> 00:06:26,680
है पवित्र ग्र चक का तो नेट ही स्लो चलता है शायद इसलिए

62
00:06:26,680 --> 00:06:30,720
हो रहा है हां मैं नेट कट

63
00:06:30,720 --> 00:06:36,080
करके फिर आता हूं नेट कट रहा है

64
00:06:36,080 --> 00:06:42,080
नेट्म दोबारा आ

65
00:06:42,640 --> 00:06:47,440
जा जय

66
00:06:47,440 --> 00:06:51,840
श्री हेमंत खाटी वाड़ा जी

67
00:06:51,840 --> 00:06:56,680
जय श्री राम राम

68
00:06:56,680 --> 00:07:00,760
राम जी बताइए आपका परिचय

69
00:07:00,760 --> 00:07:05,400
मेरा परिचय हेमंत उपाध्याय खयोरा है मेरा नाम

70
00:07:05,400 --> 00:07:09,400
लेकिन संता रामपाल का शिष्य होने के बाद मेरा नाम हेमंत दास

71
00:07:09,400 --> 00:07:13,520
है हेमंत दास

72
00:07:13,520 --> 00:07:17,640
जी ठीक है तो जाहिर सी बात है आप

73
00:07:17,640 --> 00:07:22,760
य यह सिद्ध करने आए हैं कि आप कबीर को भगवान सिद्ध

74
00:07:22,760 --> 00:07:27,080
करेंगे जी हम कबीर को भगवान तो सब अप अपने लेवल के सब भगवान

75
00:07:27,080 --> 00:07:31,320
है लेकिन कबीर को हम सुप्रीम गड मान रहे हैं इतना फरक है भगवान

76
00:07:31,320 --> 00:07:35,520
शकर भी है भगवान बमा वि शर बता अभी मुझे

77
00:07:35,520 --> 00:07:39,640
ये बताइए पवित्र ग्रंथ का मतलब क्या

78
00:07:39,640 --> 00:07:45,240
है पवित्र ग्रंथ मतलब जो शास्त्र में लिखा है उसमें प्रमाणित

79
00:07:45,240 --> 00:07:49,640
है नहीं नहीं शास्त्र आपने

80
00:07:49,640 --> 00:07:51,360
कुछ शास्त्रों को आप पवित्र ग्रंथ

81
00:07:51,360 --> 00:07:56,200
कहते हैं ना जैसे बाइबल कुरान

82
00:07:56,200 --> 00:08:00,600
गीता पवित्र ग्र पवित्र पवित्र पवित्र

83
00:08:00,600 --> 00:08:05,400
क्यों बोल रहे हैं उसे किसी ग्रंथ को हम पवित्र क्यों बोल रहे हैं यह

84
00:08:05,400 --> 00:08:10,200
बताइए हम इसको एक उदाहरण एग्जांपल दिया

85
00:08:10,200 --> 00:08:14,480
आपसे जो किसान होता है ना भगत जी

86
00:08:14,480 --> 00:08:18,720
आपसे हम बो किसान है मकई बो रहे हैं मकई उत्पादन कर रहे

87
00:08:18,720 --> 00:08:22,920
तो उसम तो मकई के बास में व फजूल चीज

88
00:08:22,920 --> 00:08:26,920
भी तो उत्पादन होता है ग में

89
00:08:26,920 --> 00:08:31,320
ग जो क निकालता है तो ग में तो भी तो आता है ना

90
00:08:31,320 --> 00:08:36,560
तो ग नहीं क ग उसको कहेंगे नहीं इसका बाद तो नहीं

91
00:08:36,560 --> 00:08:40,560
होगा गाय नहीं कहेंगे मतलब गौ

92
00:08:40,560 --> 00:08:44,840
में गौ उत्पादन करना है अगर किसान को तो उसमें टना जरूर

93
00:08:44,840 --> 00:08:48,920
होगा अब इसका मतलब गह नहीं कहेंगे ता बात नहीं है

94
00:08:48,920 --> 00:08:53,280
भाई साहब मैं यह कह रहा हूं पवित्र का मतलब क्या है हिंदी

95
00:08:53,280 --> 00:08:57,520
अर्थ क्या है प पवित्र का मतलब पवित्र का मतलब जो

96
00:08:57,520 --> 00:09:01,640
हमारा उ हमारा जीवन के लायक बात है उसम

97
00:09:01,640 --> 00:09:06,680
अमृत तुल्य ज्ञान है पवित्र का अर्थ य होता

98
00:09:06,680 --> 00:09:11,040
जी बोलिए पवित्र का अर्थ क्या होता है

99
00:09:11,040 --> 00:09:15,440
पवित्र का अर्थ क्या होता है मानव जीवन कलण हेतु

100
00:09:15,440 --> 00:09:19,560
है भाई साहब पवित्र का अर्थ बताइए अर्थ आप अपने

101
00:09:19,560 --> 00:09:23,880
अनुसार उसके भाव को मत बताइए पवित्र का अर्थ बताइए पवित्र का मतलब

102
00:09:23,880 --> 00:09:28,120
क्या है जो मानव कल्याण हेतु है कहां

103
00:09:28,120 --> 00:09:30,720
लिखा है

104
00:09:30,720 --> 00:09:35,480
य ये पवित्र का य अर्थ कहा लिखा है

105
00:09:35,480 --> 00:09:39,640
आप बताइए कहा है पवित्र का अर्थ पवित्र का अर्थ

106
00:09:39,640 --> 00:09:43,760
जो शुद्ध हो तो वही शुद्ध है तो वही शुद्ध

107
00:09:43,760 --> 00:09:47,760
होता क हेतु शु का

108
00:09:47,760 --> 00:09:51,760
द है पवित्र है शुद्ध है शुद्ध का अर्थ

109
00:09:51,760 --> 00:09:55,800
क्या समझते हैं आप पवित्र है वही है

110
00:09:55,800 --> 00:09:59,920
एक ही पर्यायवाची नाम है भाई अरे भाई थ उसका

111
00:09:59,920 --> 00:10:05,920
उपयोग करके दिखाओ अपनी आम जीवन शैली में जैसे

112
00:10:07,360 --> 00:10:10,040
की

113
00:10:10,040 --> 00:10:13,400
जसे गीता

114
00:10:13,400 --> 00:10:18,360
अ

115
00:10:18,360 --> 00:10:22,640
प्रमाण हम भी जाति वस्था हम नहीं मानते है

116
00:10:22,640 --> 00:10:26,760
हमरा पिता करते थे ऐसा बात नहीं है

117
00:10:26,760 --> 00:10:31,160
वेशा हमने भी देखा है

118
00:10:31,160 --> 00:10:35,200
अभी मैं आपसे पूछ रहा हूं शास्त्र को मर्म को ना जानकर शास्त्र को जो

119
00:10:35,200 --> 00:10:37,960
मर्म को जानना

120
00:10:37,960 --> 00:10:42,840
चाहिए मैं आपसे पूछ रहा हूं किलिए

121
00:10:42,840 --> 00:10:47,600
शुद्ध का मतलब जैसे कोई वस्त्र है तो उसको शुद्ध कब कहा

122
00:10:47,600 --> 00:10:52,360
जाएगा सफा हो शुद्ध

123
00:10:52,360 --> 00:10:57,280
हो कोई भोजन है व होगा

124
00:10:57,280 --> 00:11:01,600
अच्छा शुद्ध मतलब पवित्र हमारा सारा ग्रंथ

125
00:11:01,600 --> 00:11:06,560
पवित्र है चार वेद 18 पुराण श्रीम भागवता

126
00:11:06,560 --> 00:11:10,720
पवित्र मेरे भाई मैं जो पूछ रहा हू उसे पूछने दो ना

127
00:11:10,720 --> 00:11:15,200
मैं आपसे पूछ रहा हूं कि

128
00:11:15,200 --> 00:11:21,200
कोई भोजन है वह शुद्ध कब

129
00:11:21,200 --> 00:11:25,320
कहलाएगा आप बातों को घुमा के तर्क करे

130
00:11:25,320 --> 00:11:31,320
शास्त्र समध बात करे देखिए शास्त्र का अर्थ होता है

131
00:11:31,880 --> 00:11:34,120
करने

132
00:11:34,120 --> 00:11:39,080
श मैं शास्त्र सम्मत बात करने ही बैठा हूं प्रमाण

133
00:11:39,080 --> 00:11:43,200
है आप ये कहते हो आप ये कहते हो

134
00:11:43,200 --> 00:11:47,280
कि जो गीता वेद पुरान बाइबल यह जो

135
00:11:47,280 --> 00:11:51,760
है यह पवित्र ग्रंथ है पवित्र अब मैं यह जानना चाह रहा हूं कि आप इह

136
00:11:51,760 --> 00:11:56,040
आप आप अगर इन्ह पवित्र कह रहे हैं तो पवित्र का

137
00:11:56,040 --> 00:12:00,080
अर्थ क्या है अगर अगर हम किसी भोजन

138
00:12:00,080 --> 00:12:03,800
को कते

139
00:12:03,800 --> 00:12:08,000
सुनो बोला अब आपने इतनी देर बोला मुझे बोलने दो

140
00:12:08,000 --> 00:12:12,000
ठीक बोलिए जब हम किसी भोजन को पवित्र कहते हैं तो

141
00:12:12,000 --> 00:12:16,000
हम कहते हैं यह भोजन झूठा नहीं है इसमें कोई भी गंदी

142
00:12:16,000 --> 00:12:20,760
चीज नहीं मिली हुई है यह भोजन भगवान को भोग लगाने योग्य शुद्ध है

143
00:12:20,760 --> 00:12:25,280
ठीक जब हम किसी वस्त्र को कहते हैं कि यह बेदाग

144
00:12:25,280 --> 00:12:29,480
वस्त्र है य अभी पवित्र है बिल्कुल किसी से टच भी नहीं हुआ है किसी ऐसी

145
00:12:29,480 --> 00:12:33,480
चीज से जिससे छू जाने के कारण ये जो है इसको

146
00:12:33,480 --> 00:12:37,560
जो है अपवित्र की संज्ञा दी जाए ठीक है अब

147
00:12:37,560 --> 00:12:41,720
दिक्कत यह है कि हम किसी ग्रंथ को पवित्र तब

148
00:12:41,720 --> 00:12:45,720
कहेंगे जब उसमें एक भी चीज ऐसी

149
00:12:45,720 --> 00:12:49,880
ना हो जो अशुद्ध हो जो गलत हो जो मानने योग्य

150
00:12:49,880 --> 00:12:53,880
ना हो जो अनुकरण करने योग्य ना हो जैसे आपने कहा मानव जीवन

151
00:12:53,880 --> 00:12:58,000
के कल्याण हेतु जो ग्रंथ होते हैं उन्हें पवित्र कहा जाता है बढ़िया है मगर

152
00:12:58,000 --> 00:13:02,400
पवित्र अगर हमने कह तो इसका अर्थ य है कि उसमें एक भी बात ऐसी ना हो

153
00:13:02,400 --> 00:13:06,680
जो मानव जीवन के कल्याण के लिए नहीं हो

154
00:13:06,680 --> 00:13:10,680
ठीक है मैंने कह दिया ना आपसे शास्त्र में बहुत

155
00:13:10,680 --> 00:13:16,680
सी बात है बात को गहन उसको

156
00:13:16,800 --> 00:13:21,200
लेना करके चलेंगे अगर हम किसी को

157
00:13:21,200 --> 00:13:25,280
पवित्र कह रहे हैं तो पवित्र का अर्थ हो जाता है

158
00:13:25,280 --> 00:13:29,360
कि उसम कोई भी ऐसा ऐसी बात

159
00:13:29,360 --> 00:13:33,480
नहीं है जो कि मान जैसे आपने कहा क्योंकि मानव कल्याण के लिए है

160
00:13:33,480 --> 00:13:37,520
तो मानव कल्याण के लिए आज आप नर्सरी की क्लास में चले जाओ

161
00:13:37,520 --> 00:13:40,680
नर्सरी की क्लास में वहां पर भी ए बी सी डी

162
00:13:40,680 --> 00:13:44,400
ई एफ जी एच आई जे के एल एम एन ओ पी क्यू आर एस टी डब्लू एक्स वाई

163
00:13:44,400 --> 00:13:48,520
जड यह भी बताया जा रहा है य मानव कल्याण के लिए ही है यह

164
00:13:48,520 --> 00:13:52,640
भी पवित्र ग्रंथ है क्या और दुनिया भर में बहुत

165
00:13:52,640 --> 00:13:56,680
सारे दुनिया भर में बहुत सारे ग्रंथ है किताबें

166
00:13:56,680 --> 00:14:00,760
हैं मानव द्वारा रचित वो सब पवित्र ग्रंथ है क्या उसमें

167
00:14:00,760 --> 00:14:04,480
कहीं नाना कहीं आतंकवादियों की भी लिखी हुई कोई किताब

168
00:14:04,480 --> 00:14:08,640
होगी ना उसमें भी कोई ना कोई एक लाइन ऐसी होगी जो मानव

169
00:14:08,640 --> 00:14:13,160
कल्याण के लिए सिद्ध हो जाएगी तो क्या हम उसको पवित्र

170
00:14:13,160 --> 00:14:17,360
सि है सब मानव कल्याण सिद्ध हेतु है लेकिन

171
00:14:17,360 --> 00:14:21,440
उसके नहीं समझ पाए शंकराचार्य तो समझ नहीं पाए आप कैसे समझ पाएंगे

172
00:14:21,440 --> 00:14:25,520
अरे भाई आपका जो गुरु है सबसे पहली बात अगर तुम कु फालतू

173
00:14:25,520 --> 00:14:30,000
बात बोलोगे हम तुम्ह भगा देंगे यहां से सीधे लात मार भगा

174
00:14:30,000 --> 00:14:36,000
देंगे इनको भगाओ भैया तमीज नहीं

175
00:14:51,080 --> 00:14:57,080
हैना इनको लो अमित जी को लो

176
00:14:58,040 --> 00:15:02,200
ऊपर हां अमित जी जी राम राम भाई राम राम

177
00:15:02,200 --> 00:15:06,320
भाई जय श्री राम आपने सुना जो

178
00:15:06,320 --> 00:15:10,960
भी भाई साहब आपने सुना जो

179
00:15:10,960 --> 00:15:16,640
सुना मैंने नहीं सुना अभी जस्ट

180
00:15:16,640 --> 00:15:20,760
आछ पूछ रहा हूं कि ये

181
00:15:20,760 --> 00:15:25,920
पवित्र ग्रंथ से आपका क्या मतलब होता

182
00:15:25,920 --> 00:15:30,200
है सबसे पहले बात जो लिए परमात्मा

183
00:15:30,200 --> 00:15:34,360
की देन है उसको हम पवित्र गत कहते सबसे पहले बात जो पुरातन

184
00:15:34,360 --> 00:15:38,640
है सबसे परमात्मा की बात मेरे भाई बहुत

185
00:15:38,640 --> 00:15:43,080
से ग्रंथों में मिल जाएगी अभी मैं एक ये जो मेरे पास

186
00:15:43,080 --> 00:15:47,200
है इसमें मैं लिख दू समझ गया मेरे

187
00:15:47,200 --> 00:15:50,240
ठीक

188
00:15:50,240 --> 00:15:54,560
कने जो सबसे पुरातन है वही है पवित्र

189
00:15:54,560 --> 00:15:58,720
ग्रंथ जो वेद है उसके बाद श्रीमद भगवत गीता है

190
00:15:58,720 --> 00:16:02,840
है कहेंगे ना पुरातन का पवित्र से क्या मतलब है किसी राक्षस ने बहुत समय

191
00:16:02,840 --> 00:16:07,240
पहले सृष्ट के गलत बात लिख दी होगी

192
00:16:07,240 --> 00:16:11,760
तो उसको थोड़ी ना पवित्र ग्रंथ कहोगे अरे

193
00:16:11,760 --> 00:16:16,080
वेदों में परमात्मा की ज्ञान दी हुई है

194
00:16:16,080 --> 00:16:20,120
उसमें उससे परमात्मा प्राप्त की जा सकती इसीलिए उसको पवित्र ग्रंथ कहा

195
00:16:20,120 --> 00:16:24,400
गया है जो सबसे पुरातन भगवान का ज्ञान उसम दिया गया भाई

196
00:16:24,400 --> 00:16:30,400
भाई साहब भगवान का ज्ञान भी दे रहा हूं ना आपको मैं इसम लिख दूंगा

197
00:16:30,880 --> 00:16:36,880
आप लिख सते भाई लिखने के लिए तो क्या इसको पवित्र कहोगे

198
00:16:40,920 --> 00:16:45,440
क्या नहीं भा उसको आप लिखेंगे तोसे

199
00:16:45,440 --> 00:16:49,760
मैं आपको अपनी मंशा बता दू शायद आप समझ नहीं पा रहे हो पवित्र ग्रंथ

200
00:16:49,760 --> 00:16:53,800
का अर्थ है जब हम किसी भोजन को पवित्र कहते

201
00:16:53,800 --> 00:16:57,960
कि यह पवित्र है तो उसका अर्थ होता है कि उस भोजन

202
00:16:57,960 --> 00:17:02,120
में एक भी चीज झूठी नहीं है अगर एक दाना भी झूठा है तो वो

203
00:17:02,120 --> 00:17:07,160
पवित्र नहीं है भोजन है क्या है क्या

204
00:17:07,160 --> 00:17:11,840
हां इसी प्रकार से अर्थ में समझ गया

205
00:17:11,840 --> 00:17:16,080
इसी प्रकार से अगर हम किसी वस्त्र को पवित्र कह रहे हैं

206
00:17:16,080 --> 00:17:20,320
पवित्र है इसका मतलब उसमें एक जगह भी ऐसा कोई स्पर्श

207
00:17:20,320 --> 00:17:24,600
नहीं हुआ वस्त्र में जिससे कि उसकी पवित्रता भंग हो जाए उसकी शुद्धता

208
00:17:24,600 --> 00:17:28,960
भंग हो जाए ठीक है ठीक है ठीक है डायरेक्ट मुद्दे प आते ठीक

209
00:17:28,960 --> 00:17:33,080
इसी प्रकार से मैं समझ गया नहीं नहीं सुन लीजिए इसी प्रकार

210
00:17:33,080 --> 00:17:37,120
से कोई व्यक्ति होता है कि इसका चरित्र बहुत ही पवित्र

211
00:17:37,120 --> 00:17:41,760
है बहुत ही शुद्ध है इसका मतलब उसके चरित्र में एक भी दाग नहीं

212
00:17:41,760 --> 00:17:46,040
है यानी कि दाग यानी

213
00:17:46,040 --> 00:17:50,640
यानी की ताग ना होने की स्थिति में हम किसी को पवित्र

214
00:17:50,640 --> 00:17:55,600
या शुद्ध कह सकते हैं तो जब हम ग्रंथ के लिए क रहे

215
00:17:55,600 --> 00:17:56,320
जब हम ग्रंथ

216
00:17:56,320 --> 00:18:00,480
के लिए कह रहे हैं कि पवित्र जब हम ग्रंथ

217
00:18:00,480 --> 00:18:04,680
के लिए कह रहे हैं पवित्र ग्रंथ तो पवित्र अगर लगा दिया तो इसका

218
00:18:04,680 --> 00:18:08,760
मतलब ये है कि उस ग्रंथ में एक भी चीज ऐसी नहीं है जो

219
00:18:08,760 --> 00:18:13,120
मानने योग्य ना हो तो अब ये बताइए

220
00:18:13,120 --> 00:18:17,280
मैं समझ गया मिनट एक मिनट समझ गए

221
00:18:17,280 --> 00:18:21,920
अब मैं आपसे पूछ रहा समझ गए तो अब मैं आपसे पूछ रहा हूं

222
00:18:21,920 --> 00:18:26,120
कि आपके अनुसार गीता वेद कुराण

223
00:18:26,120 --> 00:18:30,280
ये पवित्र ग्रंथ है बाइबल

224
00:18:30,280 --> 00:18:36,040
इसका अर्थ य माना जाए सुनि

225
00:18:36,040 --> 00:18:40,120
आप भगवान सबसे

226
00:18:40,120 --> 00:18:44,280
पले माना इसका अर्थ य माना

227
00:18:44,280 --> 00:18:48,520
जाए यह जो चार नाम है गीता वेद कुरान बाइबल इसमें

228
00:18:48,520 --> 00:18:52,840
एक भी बात ऐसी नहीं है जो कि मानने योग्य ना हो

229
00:18:52,840 --> 00:18:56,560
तभी तो पवित्र कह रहे

230
00:18:56,560 --> 00:19:00,600
हो देखो ब सबके धर्म ग्रंथ अपने

231
00:19:00,600 --> 00:19:04,920
अपने ठ पर प

232
00:19:04,920 --> 00:19:09,040
हो ऐसे नहीं होता है देखिए ऐसे ऐसे नहीं होता है जो

233
00:19:09,040 --> 00:19:13,360
बात चल रही है उस पर रहिए मैंने आपसे पूछा अगर हम किसी को पवित्र

234
00:19:13,360 --> 00:19:17,600
कह रहे तो इसका अर्थ यह है कि उस ग्रंथ में एक भी बात

235
00:19:17,600 --> 00:19:21,920
ऐसी नहीं है जो मानने योग्य ना हो

236
00:19:21,920 --> 00:19:27,720
तभी उसे प मैं आपका बात

237
00:19:27,720 --> 00:19:31,920
समझ जब मैंने आपसे पूछा कि यह आपके लिए चारों ग्रंथ

238
00:19:31,920 --> 00:19:36,000
क्या वही वाले पवित्र है जिनकी कोई भी बात मानने योग्य ना हो ऐसा कोई बात इसमें

239
00:19:36,000 --> 00:19:40,200
नहीं लिखी देख देखो जो हां

240
00:19:40,200 --> 00:19:44,320
इसमें हमें कोई संशय नहीं लेकिन इसमें ज्ञान किस तरह

241
00:19:44,320 --> 00:19:48,440
के दिया गया किसने दिया गया है नेगेटिव ऊर्जा का है कि पॉजिटिव ऊर्जा का

242
00:19:48,440 --> 00:19:52,560
है उस पर डिपेंड पता है जैसे अब नेगेटिव

243
00:19:52,560 --> 00:19:56,760
ऊर्जा कर दिया आप हम समझ रहे पॉजिटिव ऊर्जा का डिपेंड करता है

244
00:19:56,760 --> 00:20:01,120
मैं मैं आपकी बातो को सम मैं थोड़ी देर के लिए उस किता

245
00:20:01,120 --> 00:20:05,160
उस ग्रंथ का अर्थ जो है आपके अनुसार समझ लूंगा मैं अभी आपसे

246
00:20:05,160 --> 00:20:09,240
पूछ रहा हूं कि ये जो पवित्र आप अगर इनको पवित्र कह रहे हो गीता

247
00:20:09,240 --> 00:20:13,440
वेद कुराण बाइबल को तो इसका अर्थ यह है कि इसमें एक भी बात

248
00:20:13,440 --> 00:20:17,680
ऐसी नहीं होनी चाहिए जिसमें जो कि मनुष्य के मानने योग्य

249
00:20:17,680 --> 00:20:23,680
ना हो जो कि उसकी परमात्मा प्राप्ति में सहायक ना

250
00:20:27,640 --> 00:20:32,320
हो ठीक है भाई आपका बात सही है इसमें ज्ञान

251
00:20:32,320 --> 00:20:36,320
परमात्मा प्राप्ति के है लेकिन इसमें इसमें य

252
00:20:36,320 --> 00:20:42,320
भी है एकही साथ में हमें चूज करना होगा कौन से परमात्मा के कौन

253
00:20:42,600 --> 00:20:47,000
नेटिव इसका मतलब ये बेदाग नहीं है

254
00:20:47,000 --> 00:20:51,320
इसमें कुछ ना कुछ गलत भी मिला हुआ है ना मानने योग

255
00:20:51,320 --> 00:20:55,800
भी मिला हुआ है ज्ञान दिया हुआ है

256
00:20:55,800 --> 00:20:59,840
ब्रम ने है ना उसकी परमात्मा का भी

257
00:20:59,840 --> 00:21:04,160
दिया गया जो सबका एक मिनट सबका भगवान एक है उसकी महिमा

258
00:21:04,160 --> 00:21:08,160
सार शरीर सब सर्व ग्रंथ में इसके

259
00:21:08,160 --> 00:21:13,720
लिए भ्रमित क्या सही

260
00:21:13,720 --> 00:21:17,800
है आपसे पवित्र पवित्र देखो

261
00:21:17,800 --> 00:21:22,000
भाई थोड़ा धीरे धीरे चलो ज्यादा जल्दी जल्दी आगे मत भागो

262
00:21:22,000 --> 00:21:26,120
बहुत अच्छे से आप संभ्रांत व्यक्ति है साथ संभ्रांत हो कर के

263
00:21:26,120 --> 00:21:30,120
बात होगी मैं कह रहा हूं आगे आगे जो एक एक बात तसल्ली से

264
00:21:30,120 --> 00:21:34,160
उस बात ठीक है मैं ये कह रहा हूं अगर हम कह रहे हैं

265
00:21:34,160 --> 00:21:38,440
पवित्र ग्रंथ तो इसका अर्थ ये है कि जिसको हमने पवित्र कहा उसके

266
00:21:38,440 --> 00:21:42,520
अंदर कोई भी बात ऐसी नहीं है जो कि मनुष्य द्वारा

267
00:21:42,520 --> 00:21:43,040
मानने

268
00:21:43,040 --> 00:21:47,160
योग्य ना हो क्या ये बात सही है

269
00:21:47,160 --> 00:21:52,320
ये बात सही है लेकिन हमें उसमें चूज करना है कि क्या नेगेटिव

270
00:21:52,320 --> 00:21:57,040
र् मतलब कुछ बातें ऐसी है ना जिनको हमें नहीं मानना है

271
00:21:57,040 --> 00:22:01,120
जब चूज करना है तो इसका मतलब ऐसा है ना कि कुछ बातें

272
00:22:01,120 --> 00:22:05,760
ऐसी है जिनको हमें नहीं मानना

273
00:22:05,760 --> 00:22:09,880
है भगवान ने ज्ञान दि उसम

274
00:22:09,880 --> 00:22:14,040
क्या सही दिया है क्या गलत दिया है उसम तो हम डिसाइड कर सकते

275
00:22:14,040 --> 00:22:18,400
कुछ है जो गलत है ना हा नेगेटिव

276
00:22:18,400 --> 00:22:22,400
ऊर्जा ने दिया है जि नेगेटिव र्जा दि वो गलत कह रहा

277
00:22:22,400 --> 00:22:26,680
हूं कुछ बातें ऐसी है जो गलत है

278
00:22:26,680 --> 00:22:30,920
है ना हा जैसे कि जैसे कि ई जैसे

279
00:22:30,920 --> 00:22:35,600
पूछा है क्या क्यों आप समय व्यर्थ करवाते

280
00:22:35,600 --> 00:22:39,600
हो उदाहरण मैं पूछ रहा हूं थोड़ा ज्ञान

281
00:22:39,600 --> 00:22:44,080
ऐसा है ना जो गलत है आपके अनुसार मानने योग्य नहीं

282
00:22:44,080 --> 00:22:48,880
है हां भाई ऐसा है क्योंकि उसमें नेगेटिव र्जा क्या बोलिए ड

283
00:22:48,880 --> 00:22:53,160
डरे तो जब उसम ऐसा ज्ञान है तो वो पवित्र

284
00:22:53,160 --> 00:22:57,160
कैसे रह गया जब भोजन में एक

285
00:22:57,160 --> 00:22:58,560
खाली भोजन

286
00:22:58,560 --> 00:23:02,720
एक भोजन में थोड़ा सा कौरा झूटा पड़ा है तो

287
00:23:02,720 --> 00:23:07,160
वो पवित्र नहीं रह गया एक सागर के

288
00:23:07,160 --> 00:23:11,160
एक थोड़ी सी बूंद गिरने से पूरा सागर अपवित्र हो जाएगा ऐसा नहीं है उसमें ज्ञान

289
00:23:11,160 --> 00:23:15,200
उस परम परमात्मा के भी दिया हुआ है जिसके कारण उसको कहा

290
00:23:15,200 --> 00:23:20,040
जाता है कितनी बातें गलत होने से

291
00:23:20,040 --> 00:23:24,040
एक बात बताओ मिनी बात एक मिनट कितनी

292
00:23:24,040 --> 00:23:28,120
बातें गलत कितनी बातें गलत होने से उसको अपवित्र माना

293
00:23:28,120 --> 00:23:32,680
जाए और कितनी तक होने से उसको अपवित्र नहीं माना जाएगा

294
00:23:32,680 --> 00:23:36,240
यह पैरामीटर क्या

295
00:23:36,240 --> 00:23:40,400
है हो तो पवित्र माना

296
00:23:40,400 --> 00:23:44,600
जाएगा ज्ञान से ज्ञान को कटा जाएगा जो ज्ञान किसका दिया

297
00:23:44,600 --> 00:23:49,880
हुआ उसी ज्ञान से पता लगेगा कौन सा ज्ञान सही है

298
00:23:49,880 --> 00:23:54,080
किसने सही ज्ञान गलत ज्ञान तो बाद की बात है वो बाद

299
00:23:54,080 --> 00:23:58,680
की बात है मैं क रहा किसी श में

300
00:23:58,680 --> 00:24:02,920
परट ज्ञान सही ना होने पर भी उसको पवित्र

301
00:24:02,920 --> 00:24:06,960
मान लिया जाएगा और कितना परसेंट ज्ञान सही होना आवश्यक

302
00:24:06,960 --> 00:24:11,240
है उसकी पवित्रता के लिए यह बताइए

303
00:24:11,240 --> 00:24:13,760
वो तो हमें नहीं पता लेकिन इतना पता है

304
00:24:13,760 --> 00:24:16,160
जो

305
00:24:16,160 --> 00:24:20,480
परमात्मा देखिए हम लोग ह बात करेंगे

306
00:24:20,480 --> 00:24:25,080
अभी हम बात ये कर रहे कि आप की ओर सेय कहा जाता है

307
00:24:25,080 --> 00:24:29,760
आपके लिए गीता वेद बाइबल पवित्र

308
00:24:29,760 --> 00:24:33,800
तो पवित्रता तब मानी जाएगी जब आपके अनुसार

309
00:24:33,800 --> 00:24:37,800
इसम एक भी चीज ऐसी ना हो जो गलत हो आप कह रहे हैं कि

310
00:24:37,800 --> 00:24:41,880
उसम थोड़ी चीज गलत है फिर भी पवित्र है तो अगर ऐसी बात

311
00:24:41,880 --> 00:24:45,880
है तो ऐसे दुनिया के बहुत से और भी किताबे है जिसमें कुछ चीज गलत

312
00:24:45,880 --> 00:24:51,880
है कुछ चीज सही है क्या वो सब पवित्र धर्म ग्रंथ है आपके

313
00:24:52,000 --> 00:24:56,240
लिए पहले हमें आपको सोचना ये है कि उस ज्ञान

314
00:24:56,240 --> 00:25:00,320
से ज्ञान को काटा जाएगा जो आपको कहने का अथ समझ ग एक बूंद

315
00:25:00,320 --> 00:25:04,400
गिर जाने से क्या पूरा अपवित्र हो गया ऐसा नहीं उसम उसम हमें

316
00:25:04,400 --> 00:25:08,080
संचय नहीं लेकिन

317
00:25:08,080 --> 00:25:12,800
उस बात बताइए एक मिनट एक मिनट

318
00:25:12,800 --> 00:25:17,520
आपके पास एक भोजन की थाली है उसमें ठीक

319
00:25:17,520 --> 00:25:22,240
किसी व्यक्ति ने थूक दिया किसी एक कोने में

320
00:25:22,240 --> 00:25:26,560
क्या व भोजन की थाली आपके लिए ग्रहण करने योग्य है पवित्र

321
00:25:26,560 --> 00:25:30,920
है पूरी की पूरी नहीं है

322
00:25:30,920 --> 00:25:35,160
नहीं है अच्छा थोड़ा अच्छा थोड़ा बचा के कर लेंगे क्या जैसे दाल बनी

323
00:25:35,160 --> 00:25:40,080
है उस दाल मेंही ू गिर गया है उस दाल को फ पिएंगे क्या

324
00:25:40,080 --> 00:25:44,280
आप नहीं पिएंगे भाई नहीं मतलब वो

325
00:25:44,280 --> 00:25:48,760
पवित्र नहीं रह गई मतलब वो पवित्र नहीं रह गई

326
00:25:48,760 --> 00:25:52,920
ठीक है बोलिए आप क्या क्या बोलना वो पवित्र नहीं रह गई ना

327
00:25:52,920 --> 00:25:57,120
तो मेरा कहने का मतलब है कि आपके अनुसार यदि ये जो

328
00:25:57,120 --> 00:26:01,400
भगवत गीता है पवित्र है तो क्या इसके एक एक उसको

329
00:26:01,400 --> 00:26:05,480
मानते हैं यदि नहीं मानते हर चीज को तो फिर इसको पवित्र कहना

330
00:26:05,480 --> 00:26:07,160
गलत है तो अगर

331
00:26:07,160 --> 00:26:11,800
आप यह स्वीकार करें कि हां वो पवित्र नहीं है तो हम आगे बढ़

332
00:26:11,800 --> 00:26:15,880
जाए भाई सबसे पहले इसमें भगवान की परमात्मा की ज्ञान

333
00:26:15,880 --> 00:26:19,960
दिए हुए इसीलिए इसको पवित्र क भगवान परमात्मा की ज्ञान मैं इसम

334
00:26:19,960 --> 00:26:25,960
दे दूंगा और अगले पन्ने पर कुछ और लिख दूंगा ये पवित्र ग्रंथ हो जाएगा

335
00:26:26,600 --> 00:26:30,720
क्या ठीक है आप एक मिनट आप शॉर्टकट में अभी मेरा मोबाइल

336
00:26:30,720 --> 00:26:34,840
का चार्ज कम है मैं डायरेक्ट मुद्दा प आपके तरफ से एक बात कहा जाता है कि

337
00:26:34,840 --> 00:26:39,440
बमा विष्णु करेंगे करेंगे करेंगे पहले

338
00:26:39,440 --> 00:26:43,560
पहले इसकी पवित्रता को प कर लो ये पवित्र ग्रंथ

339
00:26:43,560 --> 00:26:47,560
नहीं है ना तुम्हारे अकॉर्डिंग अच्छा एक बात बताओ जगतगुरु रामपाल

340
00:26:47,560 --> 00:26:51,600
जो आपके तत्वदर्शी है उनकी वाणी आपके लिए पवित्र

341
00:26:51,600 --> 00:26:55,800
है कि नहीं है है ना 100 पर

342
00:26:55,800 --> 00:27:00,080
है उसम कोई संचय नहीं अच्छा तो जब व अच्छा उनकी

343
00:27:00,080 --> 00:27:04,640
किसी भी बात में थोड़ा सा भी आप ऐसा कर सकते यह बात मानने लायक नहीं है

344
00:27:04,640 --> 00:27:08,640
कर सकते हैं इसम संत रामपाल जी महाराज के एक

345
00:27:08,640 --> 00:27:13,000
भी ऐसा शब्द नहीं जिस संचय कर सके ठीक जब वो पवित्र

346
00:27:13,000 --> 00:27:17,080
है तो फिर यह ये कैसे पवित्र हो जाएगा या तो वो पवित्र नहीं है

347
00:27:17,080 --> 00:27:21,400
वो कुछ और है जब वो भी पवित्र है तो यह पवित्र नहीं है क्योंकि

348
00:27:21,400 --> 00:27:22,200
क्योंकि इसमें

349
00:27:22,200 --> 00:27:26,480
कुछ शब्द को मना कर रहे हैं हम मना शब्दों

350
00:27:26,480 --> 00:27:30,800
के नहीं कर रहे जिसम उसम ज गलत जन उस

351
00:27:30,800 --> 00:27:34,920
जन बे बो उसी के बारे में बोल रहा हूं

352
00:27:34,920 --> 00:27:38,920
कि कुछ चीज इसम ऐसी है जो आपको नहीं चाहिए गलत है

353
00:27:38,920 --> 00:27:44,000
नेगेटिव का मतलब क्या है सम

354
00:27:44,000 --> 00:27:48,200
गलत गलत तो वही तो मैं भी कह रहा

355
00:27:48,200 --> 00:27:52,240
उसका कुछ अंश ऐसा है जो कि गलत है तो इसका अर्थ है फिर आप

356
00:27:52,240 --> 00:27:56,400
इसे पवित्र नहीं कह सकते पवित्र तो वो है जैसे आपके

357
00:27:56,400 --> 00:28:01,360
जो गुरु है उनकी वाणी का एक शब्द आपको एज इट स्वीकार

358
00:28:01,360 --> 00:28:05,600
है ना एक मिनट आपके आपके

359
00:28:05,600 --> 00:28:09,800
फिलोसोफी में समझ गया हूं जैसे कि एक उसम

360
00:28:09,800 --> 00:28:13,800
कहीं पर भी व चीज गलत आ गया है तो इसका वो नहीं मैं आपका बात

361
00:28:13,800 --> 00:28:17,640
समझ चुका

362
00:28:17,640 --> 00:28:21,760
कुछ उससे आप अपनी इच्छा के अनुसार सीख सकते

363
00:28:21,760 --> 00:28:25,760
हो मगर वो आपके लिए प्रामाणिक और पवित्र ग्रंथ नहीं

364
00:28:25,760 --> 00:28:31,560
रह गया उससे आप सीख सकते

365
00:28:31,560 --> 00:28:35,600
पवित्र ग्रंथ है परमात्मा की ज्ञान उस दिया

366
00:28:35,600 --> 00:28:39,680
हु है मैंने आपसे पूछा परमात्मा का दिया हुआ जन भी तो बोल

367
00:28:39,680 --> 00:28:43,720
रहा लिख दूंगा जी ओडी गड हो गया

368
00:28:43,720 --> 00:28:47,960
एक मिनट मैं समझ गया कि आपका क उसम कुछ गलत पवित्र हो गया

369
00:28:47,960 --> 00:28:52,160
कहने का अब ये बताओ आपके लिए गीता

370
00:28:52,160 --> 00:28:56,440
पवित्र है या नहीं है है भाई पवित्र है

371
00:28:56,440 --> 00:29:00,520
जब है तो इसका एक शद मानना पड़ेगा और नहीं है तो

372
00:29:00,520 --> 00:29:05,040
फिर हम आगे चलते हम मानते ना भाई

373
00:29:05,040 --> 00:29:11,040
लेकिन आप जैसे की

374
00:29:12,160 --> 00:29:16,440
कोई अरे भाई मैं तो

375
00:29:16,440 --> 00:29:20,800
मैं क्लियर कर रहा हूं गीता प्रेस से चपने

376
00:29:20,800 --> 00:29:25,080
वाली जो भगवत गीता है उसका एक एक शब्द आप मानते हो

377
00:29:25,080 --> 00:29:29,400
हम मानते पहले आप एक बात सु मैं बोला मानता लेकिन आप सुनए कोई

378
00:29:29,400 --> 00:29:33,440
पेन है कोई पेन को इसको जैसे की कोई मैंगो मैंगो का आम

379
00:29:33,440 --> 00:29:37,600
होता है ठीक है कोई उसको सुला लिख दे तो मान्य नहीं है क्योंकि

380
00:29:37,600 --> 00:29:41,720
हम पढ़े लिखे को मैंगो काला कर दे तो उसका अर्थ गलत है डिसाइड

381
00:29:41,720 --> 00:29:45,760
कर सते तो फिर जिसने इसके बारे

382
00:29:45,760 --> 00:29:50,560
में बताया है उसकी वो जो वाणी है पवित्र नहीं कहलाए गी ना

383
00:29:50,560 --> 00:29:55,160
व वि नहीं मिलावट लाएगी मूल

384
00:29:55,160 --> 00:29:59,400
संस्कृत आप इसको जैसे कि मैंगो मैंगो को कोई अनार

385
00:29:59,400 --> 00:30:03,400
बोल दे तो क्या वो गलत नहीं है तो उसको हम नहीं कह सकते गलर जो बोल

386
00:30:03,400 --> 00:30:07,880
रहा है मगर गलत सुनिए भाई गलत है

387
00:30:07,880 --> 00:30:11,880
मगर जो बोल रहा है उसके बारे में गलत बातें उसकी वाणी

388
00:30:11,880 --> 00:30:15,880
को हम पवित्र नहीं कहेंगे फिर कहेंगे मिलावटी है हम

389
00:30:15,880 --> 00:30:20,040
ये कहेंगे इसमें मिलावट है इसकी कुछ बातें इसमें इसकी

390
00:30:20,040 --> 00:30:24,320
कुछ बातें सही है इसकी कुछ बातें गलत है मिलावट कहेंगे पवित्र

391
00:30:24,320 --> 00:30:27,360
नहीं कह सकते जैसे जैसे दाल

392
00:30:27,360 --> 00:30:29,720
में

393
00:30:29,720 --> 00:30:33,840
जैसे दाल में जैसे आपकी दाल में या थाली में कहीं

394
00:30:33,840 --> 00:30:38,560
पर थूक गिर गया तो वो थाली पवित्र नहीं रह गई आप वो

395
00:30:38,560 --> 00:30:42,560
थाली जिस थाली में किसी ने थूक दिया है उस थाली

396
00:30:42,560 --> 00:30:46,560
को आप अपने गुरु को जाकर के उससे भोजन कराएंगे अरे प पहला

397
00:30:46,560 --> 00:30:50,640
भाई आप मेरा बात सुनि में आपके बास उसको उसको आप जो मिसा बट

398
00:30:50,640 --> 00:30:55,040
कते हो उसको मिसा बट नहीं कहते उसको मिस्टेक कहते हैं मिसा बट उसको कहते जो

399
00:30:55,040 --> 00:31:01,040
मिक्सिंग हो गया उसम मिस्टेक हो गया मिस्टेक हो गया

400
00:31:01,560 --> 00:31:05,800
ली में ली में किसी एक कोने

401
00:31:05,800 --> 00:31:09,920
में मिस्टेक से ू गिर गया ठीक है अब

402
00:31:09,920 --> 00:31:14,240
उस ताली का भोजन आप अपने गुरु को कराएंगे या नहीं

403
00:31:14,240 --> 00:31:18,280
कदापि नहीं करे प आप एक बात

404
00:31:18,280 --> 00:31:22,720
सोचिए इसका मतलब अगर इतना था भी उसम कुछ अप भ्रष्ट

405
00:31:22,720 --> 00:31:28,040
हो गई है तो आपके लिए व पूरी थाली जो है पवित्र नहीं रह गई

406
00:31:28,040 --> 00:31:32,600
तो या तोय बोलो आप इसको पवित्र नहीं मानते हैं और या

407
00:31:32,600 --> 00:31:36,640
फिर करो मैं इसको पवित्र मानता हूं लेकिन

408
00:31:36,640 --> 00:31:40,640
जो मूल संस्कृत है आप जैसे कि अनुवाद करता पेन है

409
00:31:40,640 --> 00:31:44,680
इसको स्टिक कर दे पेन का अर्थ होता है कलम अब इसको मैं स्टिक कर दू तो

410
00:31:44,680 --> 00:31:48,760
इसका अर्थ हो जाएगी ल मैं इसको ल बना दूंगा कोई ल कह देगा

411
00:31:48,760 --> 00:31:51,840
इसको तो गलत है कि

412
00:31:51,840 --> 00:31:56,440
नहीं चलो ठीक है अनुवाद करता ने गलती की है

413
00:31:56,440 --> 00:32:00,760
तो आपको ये कैसे पता चलेगा कि अनुवाद करता ने गलती की है

414
00:32:00,760 --> 00:32:04,800
बताओ उसी के ज्ञान से चलेगा ना जो ज्ञान उसम दिया

415
00:32:04,800 --> 00:32:09,000
गया उसी के ज्ञान से जन काट जसे लोहा से लोहा काटा जाता ज्ञान से ज्ञान काटा जाता

416
00:32:09,000 --> 00:32:13,880
बताओ मुझे बने लि जैसे मैंने लिखा

417
00:32:13,880 --> 00:32:17,240
भाई क्या कहते मैंने लिखा

418
00:32:17,240 --> 00:32:21,440
मैट्रिक्स मैंने लिखा मैट्रिक्स ठीक है अब मैट्रिक्स

419
00:32:21,440 --> 00:32:25,520
का अर्थ मैंने लिख दिया फुटबॉल आपको कैसे पता चलेगा कि मैंने

420
00:32:25,520 --> 00:32:29,600
य गलती की है मैट्रिक्स का अर्थ दूसरा होता है इससे

421
00:32:29,600 --> 00:32:34,240
सिद्ध होता है कि वो गलत है सीधी सी बात दूसरा अर्थ आपको कहां से पता

422
00:32:34,240 --> 00:32:38,280
चलेगा क्योंकि हम स्कूल में पढ़े लिखे उसके भी ग्रंथ

423
00:32:38,280 --> 00:32:42,360
में लिखा है पहले भी लिखा है मैस का अर्थ दूसरा है भाई इसका मतलब

424
00:32:42,360 --> 00:32:46,520
कोई ना कोई दूसरा ऐसा ऐसी जगह होगी जहां मैट्रिक्स का सही

425
00:32:46,520 --> 00:32:50,560
अर्थ लिखा हो है ना है ना उस

426
00:32:50,560 --> 00:32:54,760
हा वो भी लिखा क्योंकि आप हम प लिखा उसमें भी आप उसी के सत ग्रंथ में भी लिखा

427
00:32:54,760 --> 00:32:58,880
है तो ले सकते हैं उसी के सत ग्रंथ से सही लि मुझे

428
00:32:58,880 --> 00:33:02,880
बताओ अब मुझे बताओ अगर इस गीता में अनुवादक ने कहीं

429
00:33:02,880 --> 00:33:07,000
कहीं पर गलत लिख दिया है तो वो गीता कहां पर है कौन सी है

430
00:33:07,000 --> 00:33:12,320
जिसम की उसका सही अर्थ लिखा है

431
00:33:12,320 --> 00:33:18,040
बताओ देखिए पढने के बाद

432
00:33:18,040 --> 00:33:22,280
पर वो गीता मैं पूछ रहा हूं वो गीता कहां पर है जिससे

433
00:33:22,280 --> 00:33:28,080
आपने पता किया कि इसमें अनुवादक ने कहीं कहीं गलत कर दिया है

434
00:33:28,080 --> 00:33:32,160
अरे भाई उसी गीता में लिखा है उसी के आधार से कहा जो हम आप पढ़े

435
00:33:32,160 --> 00:33:32,660
लिखे

436
00:33:32,640 --> 00:33:36,680
उस ज्ञान के आधार से क सीध सी बात उस गीता में लिखा उस जन

437
00:33:36,680 --> 00:33:40,680
के आधार जो ज्ञान हमने पढ़ उस ज्ञान के आधार पर

438
00:33:40,680 --> 00:33:46,160
न हो सकते एक

439
00:33:46,160 --> 00:33:51,040
मिनट आप प्रिक बझे आपली

440
00:33:51,040 --> 00:33:53,320
बता

441
00:33:53,320 --> 00:33:57,400
मुझे मुझे आप प्रैक्टिकली बताइए कि भगवत गीता

442
00:33:57,400 --> 00:34:01,400
में जो कोई आपको गलत बात

443
00:34:01,400 --> 00:34:05,400
लग रही है उसके बारे में सही बात आपको कहां से पता

444
00:34:05,400 --> 00:34:11,400
चली वह कौन सी भगवत गीता

445
00:34:13,840 --> 00:34:17,960
है बताइए अरे उसी भगवत गीता से पता चलेगा

446
00:34:17,960 --> 00:34:22,560
ना किस सत कुछ बात गलत है

447
00:34:22,560 --> 00:34:27,280
कहां लिखा है कि इसमें ये वाली बात गलत है अरे उस

448
00:34:27,280 --> 00:34:31,280
उसम व लिखा नहीं है उससे हम समझ सकते कि पेन का अर्थ

449
00:34:31,280 --> 00:34:35,320
स्टिक किया है तो गलत है क्योंकि पेन का अर्थ कलम होता है ना

450
00:34:35,320 --> 00:34:39,400
कि ल कलम पता चल रहा है वो कहा से

451
00:34:39,400 --> 00:34:44,200
चल रहा है जो मैं पूछ रहा च रहा है

452
00:34:44,200 --> 00:34:48,240
गीता से चल पहले अब आप मुझे पहले अब आप मुझे

453
00:34:48,240 --> 00:34:52,320
वो चीज बताइए कि कहां पर गलत है और फिर ये बताइए

454
00:34:52,320 --> 00:34:56,480
कि इसका सही अर्थ देखो गीता में य लिखा है बताओ

455
00:34:56,480 --> 00:35:00,600
एक मिनट एक मिनट पहले एक मिनट पहले आप मेरा बात सुनिए

456
00:35:00,600 --> 00:35:04,680
ठीक है उसके बाद आप बोलिएगा वैसे भी मैं संडे

457
00:35:04,680 --> 00:35:08,960
को आपके लाइव में आने वाले मेरा मोबाइल 15 परही चार्ज है फिर भी मैं डायरेक्ट मुद्दे

458
00:35:08,960 --> 00:35:13,920
प आती डायरेक्ट ठीक है आपकी ओर से सुनने में आता है

459
00:35:13,920 --> 00:35:18,240
या तो पहले बो पहले बोलो कि हम गीता को पवित्र नहीं मानते

460
00:35:18,240 --> 00:35:22,280
नहीं तो इसको ही खत्म करेंगे पहले ऐसे विषयात नहीं

461
00:35:22,280 --> 00:35:28,280
करेंगे भाई मैं पहले प

462
00:35:29,040 --> 00:35:33,120
या तो य कहो मैं इसकी हर चीज को मानता हूं और या फिर य

463
00:35:33,120 --> 00:35:38,360
सिद्ध करो इसकी कुछ चीजों को ना मानते हुए भी य पवित्र कैसे है

464
00:35:38,360 --> 00:35:42,680
बताओ भाई य पवित्र है जो चीज इसम गलत

465
00:35:42,680 --> 00:35:46,760
अनुवाद किया है व इस कोई चीज गलत है तोय पवित्र

466
00:35:46,760 --> 00:35:50,760
कैसे है अगर तुम्हारी भोजन की थाली में कोई चीज गलत है तो वो पवित्र

467
00:35:50,760 --> 00:35:55,040
नहीं है मगर इस किताब में कोई चीज गलत है तो पवित्र कैसे

468
00:35:55,040 --> 00:35:59,160
है एक परिवार में एक सदस्य कोई गलती हो जाएगा इसका अर्थ ये नहीं

469
00:35:59,160 --> 00:36:03,200
कि पूरा सदस्य गलत हो जाएगा ये भी दिमाग लगाइए इसका आप थोड़ी सी

470
00:36:03,200 --> 00:36:07,400
भोजन वाली न परिवार के उस परिवार के ऊपर संदेहास्पद

471
00:36:07,400 --> 00:36:11,760
दृष्टि आ जाएगी अगर एक परर

472
00:36:11,760 --> 00:36:16,000
से अगर एक पर भी आना पड़ेगा

473
00:36:16,000 --> 00:36:20,240
इस अरे मेरे भाई तुम मुझे ये बताओ पवित्र का अर्थ क्या है दोबारा

474
00:36:20,240 --> 00:36:24,480
से हिंदी प आ जाओ पवित्र का अर्थ क्या है ये बताओ मैं बुझ गया भाई आप

475
00:36:24,480 --> 00:36:30,080
जो कहता है आपके मैं समझ चुका है जब एक थाली में हो

476
00:36:30,080 --> 00:36:34,120
पवित्र ग्रंथ नहीं है भाई वो पवित्र ग्रंथ उसम

477
00:36:34,120 --> 00:36:38,200
परमात्मा प्रति के ज्ञान है उस पवित्र ग्रंथ है उसम परमात्मा प्राप्ति के

478
00:36:38,200 --> 00:36:43,000
ज्ञान है परमान लिख दे रहा हूं कबीर इ गड बोलो

479
00:36:43,000 --> 00:36:47,080
लिख द हो गया आप आप लिखोगे नहीं लिखोगे तो

480
00:36:47,080 --> 00:36:51,200
भी वो गड थे है या रहेंगे उसम कोई संश नहीं फर

481
00:36:51,200 --> 00:36:55,400
आपसे बहुत अच्छा लगा आपको बात नहीं करनी है आपको की चर्चा

482
00:36:55,400 --> 00:37:00,040
करनी है जाइए आपसे बात रे मुद्दा पाए मेरे पास टाइम कम है

483
00:37:00,040 --> 00:37:04,040
मुद्दा चल रहा है भगवत गीता को पवित्र मानते हो कि नहीं मानते हो मानते हो

484
00:37:04,040 --> 00:37:08,320
तो सिद्ध करो मानता मैं सिद्ध करता हूं

485
00:37:08,320 --> 00:37:12,360
हा मानते हो तो आप यह बताओ जब उसम कुछ

486
00:37:12,360 --> 00:37:16,400
बातें गलत है तो फिर वो पवित्र कैसे और जो बातें

487
00:37:16,400 --> 00:37:20,600
गलत है उनका गलत होने का प्रमाण आपने कहां से

488
00:37:20,600 --> 00:37:24,720
लिया देखिए जैसे कि ब्रज देख आप जैसे कि उसम

489
00:37:24,720 --> 00:37:28,840
ब्रज शब्द है ठीक है ब्रज शब्द का मैं आपको बता

490
00:37:28,840 --> 00:37:32,920
रहा हूं भैया वो जरा दिखा दो स्क्रीन पर दिखा दो वो कि

491
00:37:32,920 --> 00:37:37,120
मेरे सिवा और कोई परम नहीं है मेरे सिवा

492
00:37:37,120 --> 00:37:41,360
कोई ब्रम नहीं है हां मुझसे और कोई परम नहीं

493
00:37:41,360 --> 00:37:45,560
है क्या मुझसे कोई परम भैया

494
00:37:45,560 --> 00:37:49,640
क्या दिखा दू आपसे नहीं बोल रहा आपसे नहीं

495
00:37:49,640 --> 00:37:53,800
बोल

496
00:37:53,800 --> 00:37:59,560
रहा मेरा प्रश्न का जवाब दीजिए क्या ब्रह्मा विश्

497
00:37:59,560 --> 00:38:04,160
अभी देते रुक जाओ अभी रुक जाओ अभी देते हैं अभी रुक जाओ मेरा

498
00:38:04,160 --> 00:38:08,160
मोबाइल टाइम भी ज्यादा हो गया भाई वैसे भी संडे का आने ही वाला क्योंकि

499
00:38:08,160 --> 00:38:12,960
मैंने आपको में मैसेज भी किया था तो संडे को दोबारा आ जाना

500
00:38:12,960 --> 00:38:17,120
अरे ये वाला नहीं और दिखाए दूसरा दिखा

501
00:38:17,120 --> 00:38:21,240
भाई प मैं आपसे जो प्रश्न करने वाला वो तो पहले

502
00:38:21,240 --> 00:38:25,360
सुन लीजिए आप तो आना है आना ही है उसे आप तो स्वयं ही

503
00:38:25,360 --> 00:38:29,400
करते कि आपसे बड़ा कोई ज्ञानी नहीं तो आया हूं ना मैं ज्ञान ही

504
00:38:29,400 --> 00:38:33,640
तो नहीं हूं लेकिन जितना ज्ञान है उसी से मैं आपको संतुष्ट करने का प्रयत्न कर

505
00:38:33,640 --> 00:38:37,880
देखिए सात नंबर का श्लोक खोलिए मता

506
00:38:37,880 --> 00:38:42,120
पास गीता मेरे पास अभी गीता नहीं ठीक है

507
00:38:42,120 --> 00:38:48,120
हे धनंजय मुझसे भिन्न दूसरा कोई भी परम कारण नहीं है खलिए

508
00:38:52,360 --> 00:38:56,440
इसको सातवा नंबर का श्लोक खोलिए

509
00:38:56,440 --> 00:39:02,440
सातवा अध्याय सातवा

510
00:39:13,080 --> 00:39:17,480
श्लोक मेरी मां समान भगवत गीता को तुम लोगों ने खेल बना

511
00:39:17,480 --> 00:39:21,640
दिया मैंने खेल नहीं बनाया आपने स्वयं अपना अगं

512
00:39:21,640 --> 00:39:25,880
बना आप सामने देखिए स्क्रीन पर क्या आ रहा है ठीक

513
00:39:25,880 --> 00:39:30,600
है भाई हां दिखाइए कोई बात नहीं इसमें पढ़िए क्या लिखा है

514
00:39:30,600 --> 00:39:34,800
हे धनंजय बताइए हे धनंजय मुझसे भिन्न

515
00:39:34,800 --> 00:39:38,960
दूसरा कोई परम कारण नहीं है यह

516
00:39:38,960 --> 00:39:43,120
संपूर्ण जगत सूत्र में सूत्र के मणियों के सदस मुझ

517
00:39:43,120 --> 00:39:47,400
में ही गुठ हुआ है मुझसे भिन्न भगवान श्री कृष्ण

518
00:39:47,400 --> 00:39:52,320
कह रहे हैं मुझसे भिन्न दूसरा कोई परम कारण नहीं

519
00:39:52,320 --> 00:39:56,560
है अब इसको मानते हैं आप नहीं मानते

520
00:39:56,560 --> 00:40:00,960
नहीं नहीं कृष्ण बोल रहे है कि कोई अन्य बोल रहे पहले ये बात डिसीजन करिए

521
00:40:00,960 --> 00:40:04,960
अरे मैं कह रहा हूं कोई अन्य बोल रहा है कोई अन्य बोल रहा है कबीर तो नहीं बोल

522
00:40:04,960 --> 00:40:07,520
रहा ना कोई और

523
00:40:07,520 --> 00:40:11,600
बोल रहा है कबीर तो नहीं बोल रहा मैं आपसे पूछ रहा हूं कोई और

524
00:40:11,600 --> 00:40:15,600
बोल रहा है मान लिया कबीर तो नहीं बोल रहा

525
00:40:15,600 --> 00:40:19,800
ठीक है पहले जवाब देर प बो गीता में आपके अनुसार

526
00:40:19,800 --> 00:40:23,920
गीता को कबीर ने बोला है क्या मैंने ये कब

527
00:40:23,920 --> 00:40:28,000
कहा तो मैं आपसे जो पूछ रहा हूं वो बताओ ना भाई यह जो

528
00:40:28,000 --> 00:40:32,240
बोल रहा है काल है कृष्ण है यह बोल रहा है मुझसे भिन्न दूसरा

529
00:40:32,240 --> 00:40:37,760
कोई परम कारण नहीं है अब बताओ इसको मानते हो कि

530
00:40:37,760 --> 00:40:41,880
नहीं इस आप इसकी अन्य अध्याय से भी इसकी काटे

531
00:40:41,880 --> 00:40:46,080
जा सकते हैं भाई अरे मेरे भाई इसका मतलब यहां पर झूठ

532
00:40:46,080 --> 00:40:50,080
बोल रहा है ना ये अन्य अध्याय से

533
00:40:50,080 --> 00:40:54,160
इसको काटोगे तो एक मिनट एक मिनट

534
00:40:54,160 --> 00:40:58,680
आप आप आपका मेरा जो प्रश्न उसी में आपका जवाब

535
00:40:58,680 --> 00:41:02,880
आपके प्रश्न प आएंगे ये चल रहा है या तो इसको क्लियर करो या तो स्वीकार

536
00:41:02,880 --> 00:41:07,040
करो पवित्र नहीं है तब हम आगे जाएंगे अरे

537
00:41:07,040 --> 00:41:11,040
भाई वो जो लिखा है उसी के ज्ञान से मैं काटता हूं मैं उसको ये नहीं बोलता

538
00:41:11,040 --> 00:41:15,120
वो जो है जब इसको काट दोगे इसको काट दोगे

539
00:41:15,120 --> 00:41:19,200
अगर तो इसका मतलब यहां पर गीता बोलने वाले ने झूठ

540
00:41:19,200 --> 00:41:23,360
बोला है तभी तो कटेगा

541
00:41:23,360 --> 00:41:29,360
अरे भाई वो है ही नहीं तोसे ू बोला है ना

542
00:41:29,720 --> 00:41:34,200
ठीक है भाई व झूठ बोलिए व क्यों मि अपने

543
00:41:34,200 --> 00:41:38,680
अपने भगवान बनो अब सुनो जो व्यक्ति य

544
00:41:38,680 --> 00:41:42,960
ू बोल रहा है जो व्यक्ति य पर झूठ बोल रहा है दूसरी

545
00:41:42,960 --> 00:41:45,000
जगह झूठ नहीं बोलेगा यह

546
00:41:45,000 --> 00:41:49,000
कैसे बताओ गीता से ज्ञान से ज्ञान कटेंगे ना

547
00:41:49,000 --> 00:41:53,280
तभी गीता से मिलेगा ना अरे क्या दिमाग

548
00:41:53,280 --> 00:41:57,440
खराब है क्या

549
00:41:57,440 --> 00:42:01,760
ठ बोल सता है तो दूसरी जगह जब झूठ बोलेगा तो तुमको बता के बोलेगा क्या

550
00:42:01,760 --> 00:42:05,960
कि हा मैं सच बोल रहा हूं ठीक ठीक है जिसको झूठ बोल वो हर जगह झूठ

551
00:42:05,960 --> 00:42:10,000
बोल देगा तुमको कैसे बता वो झूठ नहीं बोल रहा अब मैं बता रहा

552
00:42:10,000 --> 00:42:14,120
हूं जैसे कोई एक डॉक्टर अरे भाई पूर्णत

553
00:42:14,120 --> 00:42:18,240
सत्य बोल सकता है और या फिर अगर उसने

554
00:42:18,240 --> 00:42:22,360
झूठ बोलना चालू कर दिया आपने मान लिया कि झूठ बोलना है तो फिर वो कहां कहां

555
00:42:22,360 --> 00:42:26,360
प झूठ बोल रहा है कुछ नहीं कह सकते अ एक मिनट आपको

556
00:42:26,360 --> 00:42:31,040
उदाहरण से आप आप

557
00:42:31,040 --> 00:42:35,120
ये जो एक मिनट मैं पूछ रहा हूं आप एक काम करिए

558
00:42:35,120 --> 00:42:39,960
ये जो इनसे यहां बोल रहे हैं भगवान श्री कृष्ण आपके अनुसार काल बोल रहा है

559
00:42:39,960 --> 00:42:43,960
तो यहां बोल रहे मुझसे भिन्न दूसरा कोई परम कारण नहीं है ठीक

560
00:42:43,960 --> 00:42:48,760
है अब इसको आप

561
00:42:48,760 --> 00:42:52,920
काटिए गीता के ज्ञान से काटो

562
00:42:52,920 --> 00:42:55,640
गता

563
00:42:55,640 --> 00:42:59,760
केन पहले सुनि जैसे की कोई डॉक्टर है

564
00:42:59,760 --> 00:43:03,800
ठीक है जैसे की कोई ड बोमा बता

565
00:43:03,800 --> 00:43:06,720
और इसको

566
00:43:06,720 --> 00:43:10,760
का आप पले य बात बताइए कि आपके आधार से

567
00:43:10,760 --> 00:43:15,640
गीता जनसे य शलोक कटेगा मेरे

568
00:43:15,640 --> 00:43:21,640
भाई गीता अध दो के शलोक में कहते

569
00:43:23,640 --> 00:43:29,640
जोन हा हा हा

570
00:43:43,200 --> 00:43:45,680
हम

571
00:43:45,680 --> 00:43:49,680
बोलो उस अविनाशी को नाश करने में कोई

572
00:43:49,680 --> 00:43:53,720
समर्थ नहीं है जिससे संपूर्ण जगत

573
00:43:53,720 --> 00:43:57,760
समझ गया पढ़ लिया पढ़ लिया अब ये बताओ

574
00:43:57,760 --> 00:44:02,800
ये यहां पर सच बोल रहा है यह कैसे पक्का हुआ

575
00:44:02,800 --> 00:44:06,920
जो झूठ बोलने वाला है वह दूसरी जगह जहां पर बोलेगा आपको

576
00:44:06,920 --> 00:44:11,040
बता के बोलेगा क्या यहां पर झूठ नहीं बोल रहा हूं

577
00:44:11,040 --> 00:44:15,520
अरे भाई व स्वयं ही जन्म मरम के चक्र में तो झूठ ही बोल रहा है रहा

578
00:44:15,520 --> 00:44:19,520
य सच बोल रहा है ये कैसे पक्का हुआ मेरे भाई ये

579
00:44:19,520 --> 00:44:23,680
झूठ बोल रहा है दो ये सातवे अध्याय के सातवे

580
00:44:23,680 --> 00:44:28,600
श्लोक में झूठ बोल रहा है यहां पर सच बोल रहा है ये तुम्हे कैसे पता

581
00:44:28,600 --> 00:44:32,920
क्योंकि अन्य अन्य लोको में भी अध्याय में भी उसने अपने अन्य को दूसरे

582
00:44:32,920 --> 00:44:36,920
के बारे में वर्णन किया हुआ है तो य अपने बारे में

583
00:44:36,920 --> 00:44:39,440
किया

584
00:44:39,440 --> 00:44:40,440
है

585
00:44:40,440 --> 00:44:46,440
व सब कुछ नहीं है क्योंकि उससे ऊपर अपने अन के बारे

586
00:44:46,800 --> 00:44:51,120
में सुनो य पर अपने को बड़ा कहा और दूसरी जगह

587
00:44:51,120 --> 00:44:55,160
किसी और को बड़ा कहा ठीक है अब आपका कहना है जहा

588
00:44:55,160 --> 00:45:00,000
परने अपने को बड़ा कहा है वो इसने झूठ बोला है ठीक है

589
00:45:00,000 --> 00:45:06,000
बोला है ना झूठ जहा

590
00:45:06,040 --> 00:45:09,720
परने सम

591
00:45:09,720 --> 00:45:14,560
ठीक बंद क्यों करेगा भाई बंद करने तो आते क्यों है नहीं आना

592
00:45:14,560 --> 00:45:18,840
बंद नहीं करना ट कर बोहा

593
00:45:18,840 --> 00:45:23,120
बोल रहा हूं मैं बोल रहा हू की यहां पर उसने झूठ

594
00:45:23,120 --> 00:45:27,320
कहा है तो जहा पर उसने सच बोला है वो

595
00:45:27,320 --> 00:45:31,360
आपको कैसे पता लगा कैसे पता किसने बताया कि यहां यह सच बोल

596
00:45:31,360 --> 00:45:36,080
रहा है यहां ये झूठ बोल रहा है यह किस आधार पर है

597
00:45:36,080 --> 00:45:40,080
उसी गीता ज्ञान देने वाला ने ही बताया अन्य अन्य शलोक में दूस

598
00:45:40,080 --> 00:45:45,120
के बे है मैंने कहीं कहीं पर झूठ बोला है

599
00:45:45,120 --> 00:45:49,320
लिखा नहीं उसी के ज्ञान से उसी के ज्ञान से समझ आ रही है ना वो अपने

600
00:45:49,320 --> 00:45:54,400
से अन्य के बारे में बता र इससे क्या सि होता

601
00:45:54,400 --> 00:45:59,840
है अन वाली बात नहीं

602
00:45:59,840 --> 00:46:04,040
अगर एक जगह प क 50 जगह प क उ मा

603
00:46:04,040 --> 00:46:08,320
लेते अन्य वाली बात जब है तो अन्य वाली बात झूठ

604
00:46:08,320 --> 00:46:12,560
नहीं है और जो अपने बारे में बता रहा है वो झूठ है वो झूठ है यह कैसे पता

605
00:46:12,560 --> 00:46:17,440
किया हो सकता है अनन वाली बात झू एक मिनट

606
00:46:17,440 --> 00:46:21,560
जैसे कि कोई डॉक्टर है ठीक है वो अपने आप डॉक्टर है जो अपने आप डॉक्टर

607
00:46:21,560 --> 00:46:25,880
है वो दूसरो को डॉक्टर नहीं बोल सकता ठीक है दूसरो डॉक्टर है

608
00:46:25,880 --> 00:46:30,400
वो अपने आप डॉक्टर वो झूठ भी बोल सकता है लेकिन जो समझ में आरहा

609
00:46:30,400 --> 00:46:34,960
मैं पूछ रहा हूं अगर उसको आपको गुमराह करना है भटका

610
00:46:34,960 --> 00:46:39,400
है हा तो वो आपको कहीं पर भी भटका सकता

611
00:46:39,400 --> 00:46:44,960
है तो उसने यहां पर सच बोला ये कैसे गारंटी मिलती

612
00:46:44,960 --> 00:46:49,040
है उसी के अन्य अन्य अध्याय में वर्णन किया जैसे कि एक

613
00:46:49,040 --> 00:46:53,320
डॉक्टर पहले आप मेरा बात ध्यान से सुनिए जैसे कि कोई डॉक्टर सु

614
00:46:53,320 --> 00:46:57,320
मैं पूछ रहा हूं कि अगर उसने दो जगहग सच बोला एक जगह

615
00:46:57,320 --> 00:47:01,880
झूठ बोला तो आपको कैसे पता उसने कहां झूठ बोला कहां सच

616
00:47:01,880 --> 00:47:05,920
बोला उसी के ज्ञान से चलेगा ना भाई उसी के ज्ञान तो बता रहा पहले सुनिए

617
00:47:05,920 --> 00:47:09,720
तो सही सुनते बताओ मुझे वो पैरामीटर बताओ

618
00:47:09,720 --> 00:47:14,040
मुझे ये सच कैसे है बताओ

619
00:47:14,040 --> 00:47:18,760
वो अपने से अन्य के बारे में बता रहा है बता रहा है इसका

620
00:47:18,760 --> 00:47:22,840
अर्थ अपने से अन्य के बारे में लिखेगा बताएगा तो वो सच होगा

621
00:47:22,840 --> 00:47:26,920
ये कहां लिखा है व लिखा

622
00:47:26,920 --> 00:47:31,520
बता रहा है वो अपने से के बारे में बता र श्रीमद भगवत

623
00:47:31,520 --> 00:47:36,080
गता जब व्यक्ति अपने से अन्य के बारे में बताएगा

624
00:47:36,080 --> 00:47:40,600
तो वो सच लिखा होगा यह कहां का सिद्धांत

625
00:47:40,600 --> 00:47:44,680
है यह कौन से ग्रंथ में लिखा है कि जब व्यक्ति अपने के बारे में

626
00:47:44,680 --> 00:47:49,280
बोलेगा व झूठ होगा एक मिनट पले आप बात ध्यान से सुनिए

627
00:47:49,280 --> 00:47:53,400
जैसे की मैं डॉक्टर उदाहरण मान लीजिए कोई डॉक्टर है स्व डॉक्टर

628
00:47:53,400 --> 00:47:57,640
है तो दूसरो को डॉक्टर नहीं बोल सकता यदि कोई डॉक्टर नहीं

629
00:47:57,640 --> 00:48:01,840
अपने आप को डॉक्टर बो इस अपने आप को झूठ बोल सकता है लेकिन य

630
00:48:01,840 --> 00:48:07,440
खाय लिखा है ये उ

631
00:48:07,440 --> 00:48:11,880
उ का प्रमाण

632
00:48:11,880 --> 00:48:16,080
प्रमाण सुनि शास्त्र प्रमाण

633
00:48:16,080 --> 00:48:22,080
थ गया आपसे बात करे का प्रमाण दो

634
00:48:22,480 --> 00:48:26,760
शसी बात को झूठ या सच कब माना जाए शस्त्र का प्रमा

635
00:48:26,760 --> 00:48:30,760
म दो यदि वो समरत होता तो कदापि

636
00:48:30,760 --> 00:48:35,240
ये नहीं कहता कि उससे अन्य के बारे में नहीं कदापि नहीं

637
00:48:35,240 --> 00:48:39,280
बता झूठ है तो वो झूठ बोल रहा है अन्य के बारे में झूठ

638
00:48:39,280 --> 00:48:43,320
बोल रहा है वो झूठ है यदि वो झूठ बोलता तो

639
00:48:43,320 --> 00:48:48,160
अपने स के बारे में नहीं बका नियम भाई साहब देखो मनम बातें मत करो

640
00:48:48,160 --> 00:48:52,280
आप बा आप का प्रमाण दो

641
00:48:52,280 --> 00:48:56,400
कि किस आधार पर किसी एक बात को झूठ या किसी एक बात को सच माना

642
00:48:56,400 --> 00:49:00,520
जाए है शस्त्र का प्रमाण पूछ रहा का प्रमाण

643
00:49:00,520 --> 00:49:04,760
है मैंने पूछा का प्रमाण है अरे

644
00:49:04,760 --> 00:49:08,840
है भाई बोलता रहो है इस हम से भी मिला सकते गीता के ज्ञान से भी काट

645
00:49:08,840 --> 00:49:13,040
सकते किसकी ये सब कुछ बात बोल रहे

646
00:49:13,040 --> 00:49:17,080
कि अगर वह अन्य को बड़ा बता रहा है तो व सच नहीं वो जो दूसरी बात

647
00:49:17,080 --> 00:49:21,760
है व सच नहीं हो सकती यह कहां लिखा है

648
00:49:21,760 --> 00:49:25,840
एक मिनट एक मिनट मैं आपकी बात सब कुछ समझ गया आपके आधार से सीधा डायरेक्ट

649
00:49:25,840 --> 00:49:29,960
मुद्दा पाते आपके आधार से श्रीमद भगवत गीता का देने वाला ज्ञान

650
00:49:29,960 --> 00:49:34,080
श्री कृष्ण है वही सब कुछ समरथ यही ना पले यह बात क्लियर कीजिए

651
00:49:34,080 --> 00:49:37,720
मैं आपका आंसर दे रहा हूं आप ही

652
00:49:37,720 --> 00:49:41,840
हा वही है हा वही है बोलो ठीक है मान ले

653
00:49:41,840 --> 00:49:46,160
आपके आधार से श्री कृष्ण ठीक है आप मे को बताइए ब्रह्मा विष्णु

654
00:49:46,160 --> 00:49:50,320
महेश गणेश दुर्गा ब्रम सब एक ही है हा

655
00:49:50,320 --> 00:49:54,360
सीधी से ठीक तो आप मुझे बताइए

656
00:49:54,360 --> 00:49:58,640
त्रिलोकीनाथ किसे कहते हैं बताइए

657
00:49:58,640 --> 00:50:03,080
त्रिलोकी नाथ जो तीनों लोगों का स्वामी हो उसे कहते हैं

658
00:50:03,080 --> 00:50:07,680
तो ब्रह्मा विष्णु महेश को त्रिलोकीनाथ क्यों कहते हैं

659
00:50:07,680 --> 00:50:11,680
क्योंकि वो क्योंकि वो पूरी सृष्टि के कहीं कहीं पर ईश्वर है और

660
00:50:11,680 --> 00:50:16,200
कहीं कहीं प त्रिलोकी नाथ भी नाम है उनका

661
00:50:16,200 --> 00:50:20,320
आप ये पॉइंट गलत हु त्रिलोकी नाथ क्यों कहते है क्योंकि तीन लो का नाथ इसीलिए उसको

662
00:50:20,320 --> 00:50:25,160
त्रिलोकी ऐसा कुछ नहीं मिनट

663
00:50:25,160 --> 00:50:29,200
मिटको देखो बात बात करनी है नहीं आपको बात करनी

664
00:50:29,200 --> 00:50:31,720
नहीं

665
00:50:31,720 --> 00:50:36,640
है मेरी बात सुनो मेरी बात सुनो मेरी बात सुनो

666
00:50:36,640 --> 00:50:40,920
बात सुरी बात सुनो मेरी बात सुनो कोई अगर

667
00:50:40,920 --> 00:50:45,480
देश का प्रधानमंत्री है सुनो कोई अगर देश का प्रधानमंत्री

668
00:50:45,480 --> 00:50:49,480
है तो वह तब भी किसी जमीन का प्लॉट का भी मालिक हो

669
00:50:49,480 --> 00:50:53,040
सकता है ऐसा नहीं है कि वो अगर प्रधानमंत्री

670
00:50:53,040 --> 00:50:59,040
हो गया तो वो किसी बिल्डिंग का ओनर नहीं हो सकता

671
00:50:59,240 --> 00:51:04,080
एक मिट आपकी

672
00:51:04,080 --> 00:51:08,800
प्रश्न अब मैं आपको आपकी बात का जवाब दूंगा पहले आप ये मानिए

673
00:51:08,800 --> 00:51:14,800
मुझे नहीं पता इसम गीता में किसने क्या कहा बोला है

674
00:51:14,960 --> 00:51:19,520
पले आपकी प्रश्न का जवाब ही तो दे रहा सुनने को तैयार नहीं

675
00:51:19,520 --> 00:51:23,600
है तुम मुझे गलत सिद्ध कर भी दोगे तो उससे आपका सही होना

676
00:51:23,600 --> 00:51:28,120
सिद्ध नहीं होता आप अपने को सही सिद्ध करिए आप यह बताइए

677
00:51:28,120 --> 00:51:32,600
कि इसमें आप यह बताइए कि इसमें गीता

678
00:51:32,600 --> 00:51:36,720
में कहां पैसा च कहां पर झूठ बोला है इसका आधार क्या

679
00:51:36,720 --> 00:51:40,720
है ये बताइए मैं आप ही तो आधार तो बता रहा पहले

680
00:51:40,720 --> 00:51:44,840
आप सुनते नहीं आप बोलिए बोलिए बोलिए करते आप सु बोलेंगे तो पहले

681
00:51:44,840 --> 00:51:49,640
सुनिए त्रिदेव किसको कहते हैं श्

682
00:51:49,640 --> 00:51:53,720
जवाब आप अपना जवाब दीजिए आप मुझसे प्रश्न करिए

683
00:51:53,720 --> 00:51:58,640
आप अपना जवाब दीजिए आप जवाब दीजिए मुझे यही प्रश्न

684
00:51:58,640 --> 00:52:03,080
यही प्र जवाब आप उत्तर दीजिए

685
00:52:03,080 --> 00:52:07,120
यही प्रश् जवाब है भाई मेरे मिलने से पहले आपके क्या नियम

686
00:52:07,120 --> 00:52:08,080
थे इसमें किसी

687
00:52:08,080 --> 00:52:13,040
को सच किसी को झूठ मानने के वह

688
00:52:13,040 --> 00:52:17,480
बताइए देखिए भाई यदि व समृत होता

689
00:52:17,480 --> 00:52:22,480
नहीं कता उसकी शरण में जा

690
00:52:22,480 --> 00:52:26,720
कहा व समध नहीं है वो झूठ है उसकी एक बात

691
00:52:26,720 --> 00:52:30,720
कैसे हो सकती है किस आधार पर वो बताओ वो

692
00:52:30,720 --> 00:52:35,280
झूठ है व सम नहीं ठीक है मैं मान लि कृष्ण

693
00:52:35,280 --> 00:52:39,360
तुम्हारे आधार से श्री कृष्ण ब्रह्मा विष्णु महेश गणेश ज सुन

694
00:52:39,360 --> 00:52:43,600
मतलब आपके पास कोई आधार नहीं है आपके पास एक मिनट आपके पास

695
00:52:43,600 --> 00:52:47,720
कोई आधार नहीं है आ बात को

696
00:52:47,720 --> 00:52:51,840
माना जाए अरे आप दे रहा हो जवाब तो दे रहा आप बात में मान लि

697
00:52:51,840 --> 00:52:56,240
ब्रह्मा विष्णु महेश गणेश ब्रम सब एक ही आप एक ही डायरेक्ट मुद्दा प आते आपकी ब्रम

698
00:52:56,240 --> 00:53:00,400
जो है श्री कृष्ण उसकी भी उत्पन्न करने वाला परम अक्षर ब्रम सीधी

699
00:53:00,400 --> 00:53:04,520
सी बात ये वेदों से भी मिलता है इसकी आधार भी हो गया आप बोलिए इस क्या

700
00:53:04,520 --> 00:53:08,800
र अच्छा बोलिए क्या परम अक्षर ब्रह्म अलग है

701
00:53:08,800 --> 00:53:13,080
और ब्रह्म अलग है हा ठीक है क्योंकि परम

702
00:53:13,080 --> 00:53:17,480
ब्रम से ब्रम उत्पन्न हुआ अलग हैसे बा

703
00:53:17,480 --> 00:53:21,520
बल है परमात्मा अलग है नहीं परम

704
00:53:21,520 --> 00:53:23,680
अक्षर ब्रम परमात्मा क

705
00:53:23,680 --> 00:53:28,520
जाता परम अक्षर ब्रम अलग है और परमात्मा अलग है

706
00:53:28,520 --> 00:53:31,280
परमात्मा

707
00:53:31,280 --> 00:53:35,480
परम परमात्मा पूर्ण परमात्मा परम ब्रम ही कहते

708
00:53:35,480 --> 00:53:39,560
पूण परमात्मा को ही कहते लेकिन ब्रम परमात्मा परम

709
00:53:39,560 --> 00:53:43,640
ब्रह्म एक है और ब्रह्म अलग है ब्रहम

710
00:53:43,640 --> 00:53:47,920
परम अक्षर ब्रम अलग है ठीक है स में ब्रह्म और परम

711
00:53:47,920 --> 00:53:53,440
अक्षर ब्रह्म अलग है ठीक है हाय क खा

712
00:53:53,440 --> 00:53:59,440
है एक मिनट क की परम अक्षर ब्रम

713
00:54:00,480 --> 00:54:04,520
से श्रीमद भगवत गीता अध्याय तीन

714
00:54:04,520 --> 00:54:10,160
के प्रमाण नहीं

715
00:54:10,160 --> 00:54:14,360
है यही बात श्रीमत भगवत गीता का वेद में भी लिखा

716
00:54:14,360 --> 00:54:18,560
इसीलिए दोनों समत देता इसका प्रमाण प्रमा

717
00:54:18,560 --> 00:54:22,800
करता है प्रमाणित करता है क्योंकि

718
00:54:22,800 --> 00:54:28,800
यही और ब अलग है बताओ

719
00:54:29,600 --> 00:54:33,600
बताओ विवेद मंडल

720
00:54:33,600 --> 00:54:39,360
ब्रह्म और परम अक्षर ब एक

721
00:54:39,360 --> 00:54:45,360
मिनट एक मिनट वेट कर भाई

722
00:55:09,760 --> 00:55:14,120
मंडल नबर 10 4 मंत्र एक में लिखा है कि ब्रहम को उत्पत्ति

723
00:55:14,120 --> 00:55:18,120
करने वाला कोई अन्य है इससे साबित होता है कि कोई और है

724
00:55:18,120 --> 00:55:20,320
जोसे

725
00:55:20,320 --> 00:55:24,960
जिस क्या लिखा है ब्रम

726
00:55:24,960 --> 00:55:29,000
ब्रम की उत्पत्ति किसी अन्य से हुआ है ब्रम को उत्पन्न

727
00:55:29,000 --> 00:55:35,000
करने वाला कोई अन्य है एक मिनट मैं चेक कर लू

728
00:55:37,680 --> 00:55:42,440
जरा

729
00:55:42,440 --> 00:55:46,680
हा कौन सा हैवे मंडल मेरा चार्ज भी नहीं

730
00:55:46,680 --> 00:55:50,800
है बोलो कौन सा है मंडल नंबर

731
00:55:50,800 --> 00:55:54,440
10 मंत्र

732
00:55:54,440 --> 00:55:58,520
एक मंडल नंबर 10 मंत्र एक

733
00:55:58,520 --> 00:56:02,560
मेरा मोबाइल चार्ज पर आ गया इसलिए बोल रहा हू चार्ज

734
00:56:02,560 --> 00:56:06,760
में लगा रहा आपको चार्ज करके

735
00:56:06,760 --> 00:56:09,280
आना चाहिए

736
00:56:09,280 --> 00:56:13,360
था अरे भाई चार्ज भी लगाकर आपसे बात कर

737
00:56:13,360 --> 00:56:17,520
ठीक है कोई बात नहीं मेरे पास उतना अभी 10 20 मिनट और बात कर सकता हं इसलिए

738
00:56:17,520 --> 00:56:21,560
कोई बात

739
00:56:21,560 --> 00:56:26,280
नहीं लिखा है ऋगवेद मंडल मंडल नंबर

740
00:56:26,280 --> 00:56:30,320
सुक्त 49 मंत्र

741
00:56:30,320 --> 00:56:34,920
एक सक्त 4 मंत्र एक

742
00:56:34,920 --> 00:56:39,080
ब्रम को उत्पत्ति करने वाला कोई अन्य है जिसके अथ उसने वेद किया

743
00:56:39,080 --> 00:56:45,080
है देख सकते हैं

744
00:57:04,320 --> 00:57:08,720
अब इसको खोलने से

745
00:57:08,720 --> 00:57:13,120
पहले मैं एक बात आपसे क्लियर कर दूं कि गीता

746
00:57:13,120 --> 00:57:17,320
में आप उन बातों को मानते हैं जो वेदों के अनुसार होती

747
00:57:17,320 --> 00:57:21,400
है वेद में तो कहीं झूठ कहीं सच नहीं है ना वेद से

748
00:57:21,400 --> 00:57:25,440
मिलती नहीं नहीं मैं पूछ रहा हूं

749
00:57:25,440 --> 00:57:30,000
मैं पूछ रहा हूं वेद में कहीं सच कहीं झूठ तो नहीं है

750
00:57:30,000 --> 00:57:36,000
ना तब तो इसको प्रमाण मानेंगे ना देखिए

751
00:57:40,160 --> 00:57:46,160
भाई ह पर नहीं है

752
00:57:51,600 --> 00:57:56,680
भाई इसको किया होगा व मान नहीं है

753
00:57:56,680 --> 00:58:01,080
ग अरे मेरे भाई तो ये बताएगा कौन इसम किसी ने पेन को लाठी

754
00:58:01,080 --> 00:58:05,680
किया है इसका मतलब इसका कुछ और है

755
00:58:05,680 --> 00:58:09,680
इसका आधार इसका आधार कुछ और नहीं इसका इसका आधार

756
00:58:09,680 --> 00:58:14,680
कॉमन सस है की पेन का अर्थ कलम

757
00:58:14,680 --> 00:58:18,840
होता इसका मतलब ये सब कुछ आप अपने कॉमन सेंस से बनाते हैं

758
00:58:18,840 --> 00:58:22,960
कि वेदों में प्रमाण है ये वो सबका आधार कॉमन सेंस है आपका

759
00:58:22,960 --> 00:58:28,960
अरे भाई

760
00:58:31,520 --> 00:58:36,480
मैं पूछ रहा हूं आपके धर्म और अधर्म का आधार कॉमन सेंस है

761
00:58:36,480 --> 00:58:40,080
जो आपके मन में समझ में

762
00:58:40,080 --> 00:58:44,160
आएगा वो बात नहीं भाई ये तो सोचने विचारने की भी बात है जो

763
00:58:44,160 --> 00:58:48,480
बात गीता में मिलती है वो बात वेद में मिलती है तो सर्वधर्म है ना भाई मैं आपसे

764
00:58:48,480 --> 00:58:52,520
पूछ रहा हूं अगर वेद में कोई बात ऐसी तो नहीं होगी जो थोड़ी झूठ

765
00:58:52,520 --> 00:58:56,360
थोड़ी सच हो

766
00:58:56,360 --> 00:59:00,440
देखिए भाई सबसे पहले बात

767
00:59:00,440 --> 00:59:04,960
पलेर करो हा है वेद में भी है

768
00:59:04,960 --> 00:59:09,200
जो अनुवाद में मिस्टेक किया है है क्या

769
00:59:09,200 --> 00:59:13,280
मैं पूछ रहा हूं वेद में भी है क्या

770
00:59:13,280 --> 00:59:18,080
वो मेरे को पता नहीं भाई अच्छा मतलब आपको

771
00:59:18,080 --> 00:59:22,200
पता नहीं है मगर आप यह क्या इस बारे में क्या कहते हो अगर मैंने

772
00:59:22,200 --> 00:59:26,560
कोई ऐसी बात बताई जो आपके मानने योग्य नहीं हुई

773
00:59:26,560 --> 00:59:30,680
क्या वेद की किसी बात को आप मना कर सकते हो अरे

774
00:59:30,680 --> 00:59:34,680
भाई मैं ज्ञान सेही ज्ञान कटंगा बोलिए तो सही बोलते

775
00:59:34,680 --> 00:59:39,200
जन से जन मत काट मेरे भाई आपके लिए

776
00:59:39,200 --> 00:59:44,440
देखिए जैसे रामपाल है उसकी एक भी बात आप काट सकते हैं

777
00:59:44,440 --> 00:59:49,120
क्या जो सही अनुवाद किया तो उसको जो मिस्टेक

778
00:59:49,120 --> 00:59:51,560
किया रहा हूं मैं पूछ रहा हूं

779
00:59:51,560 --> 00:59:56,040
क्या रामपाल जी की एक भी बात आप काट सकते हैं क्या

780
00:59:56,040 --> 01:00:00,320
क्योंकि पूरा सत्य बताता तो काटने योग्य नहीं है जो जहां पे कोई भी मिस्टेक

781
01:00:00,320 --> 01:00:04,640
करेगा वह काटने योग्य है सीधी सी वो मिस्टेक बता कौन रहा है आपको मेरे

782
01:00:04,640 --> 01:00:08,800
भाई कोई प्रामाणिक सुनिए सुनिए मेरी बात

783
01:00:08,800 --> 01:00:12,800
सुनिए जैसे जब आपको ये लगा कि गीता में कुछ चीजें गलत

784
01:00:12,800 --> 01:00:17,200
है तो इसका मतलब यह गीता आपके लिए प्रॉपर प्रमाण नहीं है

785
01:00:17,200 --> 01:00:21,360
आप ने वेद को ले आए य वेद आपके लिए प्रमाण है अब जब वेद

786
01:00:21,360 --> 01:00:25,400
में भी आप ऐसा सोच रहे हैं उसमें किसी ने कुछ गलत लिख दिया

787
01:00:25,400 --> 01:00:29,480
होगा अगर वेद को भी आप ऐसा सोच रहे उसमें

788
01:00:29,480 --> 01:00:33,760
किसी ने कुछ गलत लिख दिया होगा तो इसका मतलब है वेदों का भी वेरिफिकेशन

789
01:00:33,760 --> 01:00:37,960
आप किसी और से करते हैं वेद में क्या गलत

790
01:00:37,960 --> 01:00:43,960
है क्या सही है उसका वेरिफिकेशन आप किसी और से करते हैं

791
01:00:43,960 --> 01:00:47,960
कोई प सुनिए तो सही जो चीज एक शास्त्र

792
01:00:47,960 --> 01:00:52,240
में लिखी वही चीज अन्य शास्त्र में

793
01:00:52,240 --> 01:00:56,480
खय लिखा है

794
01:00:56,480 --> 01:01:00,640
जैसे कि एक नियम आप बता रहे हो जो नियम आप बता

795
01:01:00,640 --> 01:01:04,760
रहे हो भाड़ में गया अब मैं पूछ रहा हूं वो बताओ जो नियम आप बता रहे हो वो कहा

796
01:01:04,760 --> 01:01:08,800
लिखा है अरे लिखा नहीं जो चीज गीता में मिला

797
01:01:08,800 --> 01:01:12,800
वो तो वो वेद में मिला वही

798
01:01:12,800 --> 01:01:16,800
सुनो जो चीज गीता में लिखी है वही चीज वेद में भी

799
01:01:16,800 --> 01:01:20,880
लिखी है उस चीज को मानेंगे जो चीज गीता में नहीं लिखी

800
01:01:20,880 --> 01:01:24,920
वेद में लिखी है और जो चीज वेद में लिखी है गीता में नहीं लिखी

801
01:01:24,920 --> 01:01:29,080
उन चीजों को छोड़ देंगे जो दोनों में मैच खाएगी व मानेंगे यही

802
01:01:29,080 --> 01:01:33,560
है ना सबसे प आपकी एक बात

803
01:01:33,560 --> 01:01:39,120
आपके

804
01:01:39,120 --> 01:01:45,120
स स प्रश्न

805
01:01:47,440 --> 01:01:51,440
जवाब मैं आपसे य पूछ रहा हूं की भगवत

806
01:01:51,440 --> 01:01:56,360
गीता में जो लिखा है अगर वो वेद में भी लिखा है तो मानोगे

807
01:01:56,360 --> 01:02:01,320
और अगर भगवत गीता में कुछ ऐसा लिखा है जो वेद में नहीं लिखा है तो नहीं मानोगे ठीक

808
01:02:01,320 --> 01:02:07,320
है ठीक है देखिए भाई प

809
01:02:09,000 --> 01:02:15,000
बा

810
01:02:15,200 --> 01:02:19,400
करते महे गणेश ब मैं अभी आपसे

811
01:02:19,400 --> 01:02:23,640
जो बात आपने खुलवाया है वेद मैं आपसे बोल रहा हूं कि गीता

812
01:02:23,640 --> 01:02:27,640
का वेरिफिकेशन वेद करते हैं वेद का वेरिफिकेशन तो कोई नहीं करता या

813
01:02:27,640 --> 01:02:31,920
करता है और करता है तो कौन करता है अरे भा ठीक व नलेज

814
01:02:31,920 --> 01:02:37,920
करता है जो नॉलेज गीता वेद

815
01:02:38,880 --> 01:02:43,920
वही ब्रम को उत्पति करने वाला

816
01:02:43,920 --> 01:02:46,160
परम

817
01:02:46,160 --> 01:02:50,360
जैसे ब्रम को उत्पत्ति करने वाला गीता में भी लिखा है परम अक्ष

818
01:02:50,360 --> 01:02:54,400
ब्र वही बात वेद में लिखा है कि ब्रम को करने वाला कोई और

819
01:02:54,400 --> 01:02:59,040
है वही बात पूछ रहा हूं इसकी वेरिफिकेशन मैं

820
01:02:59,040 --> 01:03:03,360
आपसे ये पूछ रहा हूं देखो अब इधर उधर की बात मत करना

821
01:03:03,360 --> 01:03:07,360
मैं आपसे पूछ रहा हूं कि ये भगवत

822
01:03:07,360 --> 01:03:11,560
गीता है इसमें कहां सही है कहां झूट है इसकी

823
01:03:11,560 --> 01:03:17,000
वेरिफिकेशन जो है आपके अनुसार वेद करते हैं

824
01:03:17,000 --> 01:03:21,000
हां ठीक है आ जाइए आप सामने आ

825
01:03:21,000 --> 01:03:25,440
जाइए बोलिए बोलिए आगे

826
01:03:25,440 --> 01:03:29,640
भाई मैं पूछ रहा हूं कि ये जो भगवत गीता है इसकी वेरिफिकेशन वेद करते

827
01:03:29,640 --> 01:03:30,240
हैं

828
01:03:30,240 --> 01:03:34,600
क्या वेद में भी अगर आप कह रहे हो वेद में भी कुछ ऐसी बातें होंगी

829
01:03:34,600 --> 01:03:38,760
जो नहीं मानने लायक है तो नहीं मानेंगे अब वो नहीं अब वो पता कैसे चलेगा

830
01:03:38,760 --> 01:03:43,080
कि वेद की कुछ बातें नहीं मानने लायक है उसका आधार क्या

831
01:03:43,080 --> 01:03:47,280
है उसकी आधार वेद की ज्ञान है और गीता की ज्ञान है

832
01:03:47,280 --> 01:03:51,320
जो अन्य अन्य शास्त्र में वो ज्ञान मिलती है वो ज्ञान ही आधार है और यानी कि

833
01:03:51,320 --> 01:03:56,120
आपका कहना ये है कि वेद की जो बातें गीता से मैच खाएगी जो

834
01:03:56,120 --> 01:04:00,200
वेद और गीता में इक्वल होगा वो हम मानेंगे जो अलग

835
01:04:00,200 --> 01:04:03,600
अलग होगा वो हम नहीं मानेंगे

836
01:04:03,600 --> 01:04:07,640
कहने का अर्थ जो बात गीता में लिखी जो

837
01:04:07,640 --> 01:04:11,840
बात वेद में भी लिखी वही बात अनन्य शास्त्र में में भी मिलता

838
01:04:11,840 --> 01:04:16,160
है वो सत्य है सीधी सी बात बात भगवान

839
01:04:16,160 --> 01:04:20,680
है भगवान को आप यानी की

840
01:04:20,680 --> 01:04:24,720
जो बात कुरान में भी लिखी होगी जैसे की अरे

841
01:04:24,720 --> 01:04:28,960
रुको एक मिनट जो बात कुरान में भी लिखी होगी गीता

842
01:04:28,960 --> 01:04:33,160
में भी लिखी होगी ऋग्वेद में भी लिखी होगी ठीक

843
01:04:33,160 --> 01:04:37,200
है ऐसी जो बात होगी उसको मानेंगे और जो एक

844
01:04:37,200 --> 01:04:41,920
दूसरे को काटे गी वो नहीं मानेंगे ऐसा

845
01:04:41,920 --> 01:04:45,280
नहीं है मेरे भाई मैं बोला कि जो जन गीता में

846
01:04:45,280 --> 01:04:49,680
लिखी वही ज्ञान वेद में लिखा वही ज्ञान अन्य शास्त्र में भी मिलता है

847
01:04:49,680 --> 01:04:53,800
अरे मैं भी तो यही बोल रहा मैं भी तो यही बोल रहा

848
01:04:53,800 --> 01:04:57,920
हूं मैं भी तो यही जन गता

849
01:04:57,920 --> 01:05:02,680
पुरान बाइबल जो ज्ञान गीता वेद पुरान

850
01:05:02,680 --> 01:05:06,800
बाइबल इन तीनों चारों में एक समान होगा वो ज्ञान मानेंगे

851
01:05:06,800 --> 01:05:10,840
बाकी का नहीं मानेंगे आपके बात

852
01:05:10,840 --> 01:05:16,200
में समझ लेकिन वेद का ज्ञान गीता ज्ञान ऐसा नहीं है देखो आपको हटा

853
01:05:16,200 --> 01:05:20,560
दूंगा अरे भाई हटाना नहीं है मैं तो सं फिर आने

854
01:05:20,560 --> 01:05:24,680
व्यक्ति है आप देखो फालतू बोलोगे बकवास फालतू

855
01:05:24,680 --> 01:05:28,800
बातें अगर करोगे तो तुरंत हटाऊ

856
01:05:28,800 --> 01:05:33,000
वैसे भी आपने इतनी इतनी इतनी माथा पच्ची करवा ली है

857
01:05:33,000 --> 01:05:37,080
इतनी माथा पच्ची कर ली है अच्छे से डोज मिल चुकी है ठीक है

858
01:05:37,080 --> 01:05:41,200
आपकी सच्चाई जनता को दिख रही है कितने पागल अब मैं आपसे जो

859
01:05:41,200 --> 01:05:45,280
पूछ रहा हूं मैं आपसे जो पूछ आपकी आवाज अभी आ नहीं रही है

860
01:05:45,280 --> 01:05:49,920
मैं आपसे यह पूछ रहा हूं कि गीता वेद

861
01:05:49,920 --> 01:05:53,920
कुरान बाइबल इन चारों में जो मैच खाएगा वो हम

862
01:05:53,920 --> 01:05:59,800
मानेंगे और जो मैच नहीं खाएगा वो नहीं माने क्या ये बात सही

863
01:05:59,800 --> 01:06:00,800
है

864
01:06:00,800 --> 01:06:04,840
देखिए पहले कर जो बात पहले आप ध्यान से सुनिए

865
01:06:04,840 --> 01:06:08,840
देखिए सर्वप्रथम ज्ञान से ही ज्ञान कटा जाता है

866
01:06:08,840 --> 01:06:13,120
मेरी आप ध्यान से बात सु जो ज्ञान गीता में लिखी वही ज्ञान

867
01:06:13,120 --> 01:06:17,160
वेद में लिखा है वही ज्ञान अन्य अन्य शास्त्र में लिखा है वो कंफर्म

868
01:06:17,160 --> 01:06:21,200
हो जाता है इससे कि वो ज्ञान सत्य है जो जन बोलता

869
01:06:21,200 --> 01:06:23,420
है

870
01:06:23,420 --> 01:06:27,520
[प्रशंसा]

871
01:06:27,520 --> 01:06:31,200
एक मिनट सुनि सुनना

872
01:06:31,200 --> 01:06:35,680
पड़गा यही तो प्रॉब्लम है आपका आप सुनेंगे नहीं तो क्यों डिबेट में आ

873
01:06:35,680 --> 01:06:41,400
जाते या म्यूट करो

874
01:06:41,400 --> 01:06:46,040
इनको जो बात मैं बोल रहा हूं उसी को आप रिपीट क्यों कर रहे

875
01:06:46,040 --> 01:06:52,040
हो मैंने कुछ अलग बोला है

876
01:06:53,960 --> 01:06:58,160
क्या म्यूट को इनका पहले शांत हो जाइए

877
01:06:58,160 --> 01:07:02,520
पहले शांत हो जाइए शांत हो जाइए अभी मेरा प्रश्न दोबारा सुन लीजिए

878
01:07:02,520 --> 01:07:07,440
इसका उत्तर दीजिएगा दोबारा से पूरी लाइन मत बोलिए

879
01:07:07,440 --> 01:07:11,680
मैं बोल रहा हूं जो ज्ञान गीता वेद कुरान बाइबल सब में एक समान

880
01:07:11,680 --> 01:07:15,680
होगा वो आप मानोगे जो एक समान नहीं होगा वो नहीं मानोगे क्या

881
01:07:15,680 --> 01:07:19,880
ये बात सही है देखिए पहले

882
01:07:19,880 --> 01:07:24,000
इस पे आप मैं आपको यही बोल रहा हूं लेकिन समझ हटाओ

883
01:07:24,000 --> 01:07:28,160
हटाओ बात नहीं कर अ तो डिबेट में क्यों

884
01:07:28,160 --> 01:07:32,720
आते हैं फिर अपने आप को कहते हैं कि देखो देखो देखो फालतू बात करने लगे देखो

885
01:07:32,720 --> 01:07:38,720
अरे इनको म्यूट किया करो यार ये फालतू बोला करे

886
01:07:49,360 --> 01:07:54,080
भैया मैं ये कह रहा हूं अमित जी

887
01:07:54,080 --> 01:07:58,080
मैं ये कह रहा हूं अमित जी जो बात मैं बोल रहा हूं व बात

888
01:07:58,080 --> 01:08:01,720
गलत है

889
01:08:01,720 --> 01:08:05,960
क्या जो बात मैं कह रहा हं व गलत है क्या किसी की बात

890
01:08:05,960 --> 01:08:11,160
गलत है सर मैं ये बोल रहा

891
01:08:11,160 --> 01:08:15,320
हूं मेरा प्रश्न दोबारा सुन लीजिए जो ज्ञान

892
01:08:15,320 --> 01:08:19,480
गीता वेद कुरान बाइबल में मै खाएगा वही

893
01:08:19,480 --> 01:08:23,760
ज्ञान अपनाने योग्य है वो मैच नहीं खाएगा

894
01:08:23,760 --> 01:08:27,960
और विरोध होगा जैसे मान लो गीता का कुछ ऐसा है जो वेद

895
01:08:27,960 --> 01:08:32,080
में नहीं मिल रहा वेद का कुछ ऐसा है जो कुरान में नहीं मिल रहा तो

896
01:08:32,080 --> 01:08:36,880
वो अपनाने योग्य

897
01:08:36,880 --> 01:08:41,120
नहीं जो वेद गीता सम्मत पुराण की तो बात अभी बात

898
01:08:41,120 --> 01:08:45,360
प करूंगा ठीक है जैसे कि मैं एक उदाहरण से समझा रहा समझने का प्रयत्न

899
01:08:45,360 --> 01:08:49,600
कर जैसे कि एक कलम है इसको य कलम कहा गया ठीक है

900
01:08:49,600 --> 01:08:53,680
इसी को वेद में भी कलम कहा गया इसी को भी अन्य शास्त्र में भी कलम कहा

901
01:08:53,680 --> 01:08:57,840
गया ये कंफर्म हो जा है कि ये सबसे है कि सारे शास्त्र में दिए

902
01:08:57,840 --> 01:09:01,920
गए लेकिन ये मैं नहीं कह रहा हूं कि जो चीज अब

903
01:09:01,920 --> 01:09:06,120
ड़ ऐसा भी चीज होता है जो धर लिखा है तो अन

904
01:09:06,120 --> 01:09:10,440
प भी नहीं लिखा होता इसका अ येय नहीं कि वो गलत है अब देखो ज्ञान से ही ज्ञान टा

905
01:09:10,440 --> 01:09:14,440
जाता है जैसे देखो देखो भाई बहुत लंबा बोल रहे हो आप

906
01:09:14,440 --> 01:09:18,760
बहुत लंबा सुनो बहुत लंबा बोल रहे हो अगर पेन

907
01:09:18,760 --> 01:09:22,800
को पेन यहां कहा गया है पेन को पेन यहां कहा गया है पेन को पेन और कहीं भी कहा

908
01:09:22,800 --> 01:09:26,880
गया है ये जो और कहीं बोल रहे हो वो पुराण बाइबल है

909
01:09:26,880 --> 01:09:32,480
या कोई और शास्त्र है ये बताओ पहले तो अब एक मिनट

910
01:09:32,480 --> 01:09:36,320
आप अन्य शास्त्र बोल रहे हो व कुरान बाइबल बोल रहे हो

911
01:09:36,320 --> 01:09:40,440
या कोई और शास्त्र पुराण है कौन सा शास्त्र

912
01:09:40,440 --> 01:09:44,560
मैं गता को भी मानता ह वेद को भी मानता ह कुरान को भी मानता ह

913
01:09:44,560 --> 01:09:48,760
बाइबल को भी मानता हू क्योंकि उस सबकी भगवान एक है उस चारों

914
01:09:48,760 --> 01:09:52,000
ग्रंथ में एक परमात्मा की ज्ञान द हुई इसलिए

915
01:09:52,000 --> 01:09:56,000
मेरे लिए सर्व सब पवित्र ग्रंथ दूसरी

916
01:09:56,000 --> 01:10:01,520
एक बात आप दूसरी य बात सुनना जरूरी है

917
01:10:01,520 --> 01:10:06,160
आपकी भैया इनको हटा दो भाई

918
01:10:06,160 --> 01:10:12,160
हटा

919
01:10:15,040 --> 01:10:19,440
दो जय श्री राम तिलक जय शी

920
01:10:19,440 --> 01:10:23,480
जय श्रीराम कैसे हो मित्र जय श

921
01:10:23,480 --> 01:10:27,800
जी जी बढ़िया ब अभी तो बढ़िया नहीं हूं आपने देखा होगा सर फड़ा

922
01:10:27,800 --> 01:10:32,080
है दीवार से सर इनको ना वापस बुलाओ एक बार

923
01:10:32,080 --> 01:10:38,080
एक मिनट एक मिनट हा इनको वापस

924
01:10:39,800 --> 01:10:43,800
लो अरे भाई संदीप जी मैं उनको

925
01:10:43,800 --> 01:10:47,800
रहने दीजिए वो अपना टेप रिकॉर्ड ही बोलते हैं और कुछ नहीं बोलते हैं मेरे

926
01:10:47,800 --> 01:10:52,600
कहने से एक बार रिक्वेस्ट है आप लो तो सही बार अभी वो है नहीं यहां पर

927
01:10:52,600 --> 01:10:57,160
अच्छा है नहीं चलो कोई बात नहीं अगर आए तो लेना एक

928
01:10:57,160 --> 01:11:01,200
बार तिलक जी का अन म्यूट कर दिया अन

929
01:11:01,200 --> 01:11:04,480
म्यूट कर दो तिलक जी

930
01:11:04,480 --> 01:11:08,480
को कांट अन म्यूट बिकॉज दे चूज टू

931
01:11:08,480 --> 01:11:14,480
म्यूट देम सेल्फ आप आप आप अपना अनूट

932
01:11:14,520 --> 01:11:18,640
करिए महादेव नमन प्रभु जी हजर आपका

933
01:11:18,640 --> 01:11:22,640
मैं ये जो आप मैं तो सत्संग ही बोलता हूं इसको क्योंकि

934
01:11:22,640 --> 01:11:26,800
आप सत्य का रास्ता दिखा र है तो इतना सरल

935
01:11:26,800 --> 01:11:31,480
भाष्य में आप इतना अच्छी तरह से आप जो समझा रहे सबको

936
01:11:31,480 --> 01:11:35,720
तो मैं मानता हूं क्योंकि आपने इतनी सरल शब्द

937
01:11:35,720 --> 01:11:39,760
में इतने अच्छी तरह से हमको समझाया है तो मैं नेपाल से

938
01:11:39,760 --> 01:11:43,880
बिलंग करता हूं और नेपाल में भी रामपाल

939
01:11:43,880 --> 01:11:47,920
का सत्संग में गया था और लो

940
01:11:47,920 --> 01:11:52,160
जो इधर आके सब बोते ही टोन है गुरुजी उसम लोग

941
01:11:52,160 --> 01:11:56,440
का माइंडसेट रेडी है रेडीमेड और आपने ने वो माइंडसेट के अंदर

942
01:11:56,440 --> 01:12:00,520
एक मेन पिलर में आपने हिट कर दिया तो अभी वो लोग गुरु

943
01:12:00,520 --> 01:12:04,560
को बचाते बचाते अपना धर्म धर्म प वो लोग का अभी आंच

944
01:12:04,560 --> 01:12:08,960
आने लगा है तब गुरु को बचाते बचाते अपना धर्म चला जा रहा है अभी

945
01:12:08,960 --> 01:12:13,720
कभी कुरान की तरफ जा रहा है कभी इधर जा रहा है कभी उधर जा रहा है तो

946
01:12:13,720 --> 01:12:17,960
लगता है जो सत्य है सत्य ही है सत्य कभी परिवर्तन चेंज

947
01:12:17,960 --> 01:12:22,080
नहीं होता है आप जो बता रहे जो तत्व ज्ञान का बात करते

948
01:12:22,080 --> 01:12:26,080
हैं ये लोग मगर तत्व ज्ञान की तरफ तो मैं दिखता नहीं है क्योंकि ये

949
01:12:26,080 --> 01:12:29,600
लोग का ना संस्कृत का कोई शास्त्र का ज्ञान है ना

950
01:12:29,600 --> 01:12:33,600
कोई ऐसा चीज है जो वो लोग पढ़ के आया है वो लोग का एक रटी रटाई

951
01:12:33,600 --> 01:12:37,800
आपका जैसा जो लिख के नंबर लिख के आते हैं उसके बारे में उ उसने खुद

952
01:12:37,800 --> 01:12:42,160
ने भी खोल के देखा नहीं है मेरे को ऐसा लगता है तो

953
01:12:42,160 --> 01:12:46,200
अभी ये लोग इनसे मगज मारी करना

954
01:12:46,200 --> 01:12:50,200
देखिए या तो किसी इंटेलेक्चुअल पर्सन से बहुत बुद्धिमान व्यक्ति

955
01:12:50,200 --> 01:12:54,680
हो तो उससे तर्क वितर्क करने में आपको परेशानी हो सकती है

956
01:12:54,680 --> 01:12:58,800
और या फिर कोई बिल्कुल ही ममती हो बिल्कुल ही

957
01:12:58,800 --> 01:13:03,640
उसके उसने जो है उसकी आंखों पर पट्टी बांध ली और दीवार

958
01:13:03,640 --> 01:13:07,640
हो तो या तो उससे आप आपको दिक्कत आ

959
01:13:07,640 --> 01:13:11,680
जाएगी बिल्कुल खाली कोरी किताब हो उससे भी आपको दिक्कत आ जाएगी अब

960
01:13:11,680 --> 01:13:15,800
मैं दो बातें य चल रही थी वह मैं आपको बता दूं जो बातें

961
01:13:15,800 --> 01:13:19,760
चल रही थी वो पूरी कर ले फिर हम आगे बढ़ाते

962
01:13:19,760 --> 01:13:23,880
हैं हमारे शास्त्रों में यह लिखा है

963
01:13:23,880 --> 01:13:28,320
कि यदि दो प्रामाणिक शास्त्रों में अलग-अलग जगह

964
01:13:28,320 --> 01:13:32,480
दो अलग-अलग बातें होंगी तो वह दोनों धर्म

965
01:13:32,480 --> 01:13:36,520
है काट नहीं सकते आप

966
01:13:36,520 --> 01:13:42,520
मना नहीं कर सकते दोनों को मानना होगा

967
01:14:05,640 --> 01:14:10,080
एक एक एक पॉइंट को पकड़ना पड़ता है

968
01:14:10,080 --> 01:14:13,640
देखो

969
01:14:13,640 --> 01:14:16,680
मनुस्मृति

970
01:14:16,680 --> 01:14:20,640
मनुस्मृति सनातन

971
01:14:20,640 --> 01:14:25,720
संविधान इसमें दूसरा अध्याय चवा श्लोक

972
01:14:25,720 --> 01:14:29,800
जहां पर श्रुति हों में ही विरोध

973
01:14:29,800 --> 01:14:34,680
हो वहां पर मनु ने दोनों ही अर्थों को

974
01:14:34,680 --> 01:14:38,760
धर्म माना है यह स्पष्ट

975
01:14:38,760 --> 01:14:42,800
लिखा है आप यह नहीं कर सकते कि अगर कहीं एक जगह कुछ लिखा

976
01:14:42,800 --> 01:14:46,880
है दूसरी जगह कुछ लिखा है तो आप उसको मानोगे इसको नहीं मानोगे

977
01:14:46,880 --> 01:14:50,960
यह नहीं कर सकते क्योंकि अगर ऐसा करोगे तो जिसको आप प्रमाण

978
01:14:50,960 --> 01:14:55,640
मान रहे हो उसी की वाणी आपके लिए अपमा सिद्ध हो जाएगी

979
01:14:55,640 --> 01:14:59,840
तो ऐसी स्थिति में दोनों जगह खत्म हो गया और एक बात

980
01:14:59,840 --> 01:15:03,840
यह भाई साहब यह बात बोल रहे हैं काफी देर से

981
01:15:03,840 --> 01:15:08,000
कि वीता वेद पुराण इनका मतलब है जो सारे शास्त्रों में मिलकर

982
01:15:08,000 --> 01:15:12,160
जो बात आएगी वह हमारे लिए मान्य होगी और जो एक दूसरे

983
01:15:12,160 --> 01:15:16,240
से मैच नहीं खा रही होंगी हालांकि मैंने बारबार बोला हिंदी में कि

984
01:15:16,240 --> 01:15:20,520
एक दूसरे से मैच खाने वाली बात को आप मानेंगे क्या तो वो

985
01:15:20,520 --> 01:15:21,020
उस

986
01:15:20,720 --> 01:15:25,000
बात को एक्सेप्ट कर रहा है मगर खुद पूरी बात लंबी बोल करके दोबारा वही

987
01:15:25,000 --> 01:15:29,120
बोल रहा है मैं उसको क्योंकि बिल्कुल क्लियर कट पूछ रहा हूं तो वो नहीं उलझा करके

988
01:15:29,120 --> 01:15:33,360
दोबारा से बोल रहा है अच्छा अब बात ये है कि अगर

989
01:15:33,360 --> 01:15:37,480
गीता वेद कुरान में कोई ऐसी बात होगी

990
01:15:37,480 --> 01:15:41,680
जो एक दूसरे से मैच नहीं खा रही है तो यह उसको नहीं मानेंगे

991
01:15:41,680 --> 01:15:45,680
इन शॉर्ट ठीक है जो सब में एक जैसी होगी उसको मानेंगे

992
01:15:45,680 --> 01:15:50,000
यह कहां का नियम है यह कहीं सनातन

993
01:15:50,000 --> 01:15:54,040
सिद्धांत नहीं है कि अगर अलग-अलग चीजें लिखी हो कहीं

994
01:15:54,040 --> 01:15:58,040
पर तो उनको मानना नहीं है इसमें तो लिखा है कि अलग अलग

995
01:15:58,040 --> 01:16:02,240
चीजें है वो भी धर्म है दोनों धर्म मनुष

996
01:16:02,240 --> 01:16:06,400
पति और भी कई जगह आया शास्त्रों में अब एक चीज और बता दूं

997
01:16:06,400 --> 01:16:10,760
इनका परम ब्रह्म का खेल जो य कहते हैं ब्रह्म

998
01:16:10,760 --> 01:16:15,680
और परम ब्रम अलग अलग है ठीक है

999
01:16:15,680 --> 01:16:19,760
तो ऋग्वेद में पहली बात तो हमें

1000
01:16:19,760 --> 01:16:24,360
यह समझना होगा कि ऋग्वेद में जो

1001
01:16:24,360 --> 01:16:28,520
शब्द है उन शब्दों का क्या अर्थ लिया

1002
01:16:28,520 --> 01:16:32,520
जाए यह कहां से आएगा किस शब्द का क्या

1003
01:16:32,520 --> 01:16:36,560
अर्थ लिया जाए यह कहां से आएगा

1004
01:16:36,560 --> 01:16:42,560
इसके लिए क्या है तो इसके लिए है निरुक्त

1005
01:16:46,520 --> 01:16:50,640
इसको अगर हम सरल सरल भाषा में कहे तो

1006
01:16:50,640 --> 01:16:55,360
यह वैदिक डिक्शनरी है वैदिक डिक्शनरी

1007
01:16:55,360 --> 01:16:59,600
वैदिक डिक्शनरी का मतलब कि वेद में कौन सा शब्द का क्या अर्थ है

1008
01:16:59,600 --> 01:17:03,840
वो याग वलक जी का यह ग्रंथ है इसमें लिखता है

1009
01:17:03,840 --> 01:17:07,880
अगर आप इसको नहीं मानते तो आपके द्वारा वेदों को

1010
01:17:07,880 --> 01:17:11,920
प्रमाण मानना भी सिद्ध नहीं होता खैर वो तो नहीं मानते प्रमाण जब

1011
01:17:11,920 --> 01:17:16,080
खुद ही कह रहे हैं कि उनकी कुछ बातों को मानेंगे कुछ को नहीं मानेंगे ना

1012
01:17:16,080 --> 01:17:20,160
उनके लिए गीता प्रमाण है ना उनके लिए वेद

1013
01:17:20,160 --> 01:17:24,280
प्रमाण है ना उनके लिए प्रमाण पुराण प्रमाण है फिर

1014
01:17:24,280 --> 01:17:29,000
भी वो को पवित्र ग्रंथ कहते हैं जिससे कि उनकी दुकानों पर बत्ती जलती

1015
01:17:29,000 --> 01:17:34,440
रहे इनकी दुकानों पर बत्ती जलती रहे

1016
01:17:34,440 --> 01:17:38,880
अब निरुक्त में रवे

1017
01:17:38,880 --> 01:17:44,880
चैप्टर के दव 13

1018
01:17:46,600 --> 01:17:51,480
10 दव उसम इन्होने क्लियर कर दिया

1019
01:17:51,480 --> 01:17:57,480
है दसवा अध्याय और

1020
01:18:18,440 --> 01:18:22,480
और दसवा अध्याय और 13वां अध्याय और

1021
01:18:22,480 --> 01:18:28,480
दसवा पाद

1022
01:18:34,800 --> 01:18:39,240
एक दो

1023
01:18:39,240 --> 01:18:45,240
तीन 812

1024
01:19:08,800 --> 01:19:12,840
इसमें इन्होंने बता दिया कि ब्रह्म का अर्थ ही

1025
01:19:12,840 --> 01:19:17,360
परमात्मा है ठीक है

1026
01:19:17,360 --> 01:19:21,640
और परम ब्रह्म परमात्मा और ब्रह्म

1027
01:19:21,640 --> 01:19:25,640
इनमें कोई अंतर नहीं है अब इसका इन्होने उदाहरण भी

1028
01:19:25,640 --> 01:19:30,360
दिया है उदाहरण में इन्होंने दिया है

1029
01:19:30,360 --> 01:19:34,640
ऋगवेद दवा मंडल 164 वा सूक्त

1030
01:19:34,640 --> 01:19:38,640
और 1009 वा 39

1031
01:19:38,640 --> 01:19:44,640
वा मंत्र उसमें क्या

1032
01:19:44,960 --> 01:19:50,960
है 164 वा सूक्त

1033
01:20:02,760 --> 01:20:08,760
जय श्री राम जय श्री

1034
01:20:15,320 --> 01:20:21,320
राम 164 वा सूक्त और 39 वा मंत्र

1035
01:20:29,900 --> 01:20:35,900
[संगीत]

1036
01:20:43,560 --> 01:20:46,960
इसमें

1037
01:20:46,960 --> 01:20:51,480
देखिए ब्रह्म का अर्थ ही परमात्मा लिखा गया

1038
01:20:51,480 --> 01:20:55,800
है ऋग्वेद 1649

1039
01:20:55,800 --> 01:21:00,040
मंत्र तो अब पहली बात तो ये आ गई इसके अलावा

1040
01:21:00,040 --> 01:21:04,720
अनेक जगह पर ब्रह्म परम ब्रह्म इनकी एकता सिद्ध हो रही है

1041
01:21:04,720 --> 01:21:10,720
वो

1042
01:21:12,320 --> 01:21:17,040
कैसे कई जगह देवी मां को भागवत जिसम

1043
01:21:17,040 --> 01:21:21,080
देवी भागवत इसका प्रमाण देते हैं कई जगह देवी मां

1044
01:21:21,080 --> 01:21:25,680
को ब्रह्म और ब्रह्म की शक्ति एक ही है

1045
01:21:25,680 --> 01:21:29,840
कहा गया और ब्रह्म देवी और परम ब्रह्म

1046
01:21:29,840 --> 01:21:33,920
एक है ये भी कहा गया और

1047
01:21:33,920 --> 01:21:38,240
कई जगह शिव जी को परम ब्रह्म कई जगह शिव जी को ब्रह्म तो इससे भी ब्रह्म

1048
01:21:38,240 --> 01:21:42,360
और परम ब्रह्म की एकता सिद्ध हो जाती है एक ही को

1049
01:21:42,360 --> 01:21:46,400
कहीं ब्रह्म और कहीं परम ब्रह्म कहा जा रहा है देवी मां को

1050
01:21:46,400 --> 01:21:50,760
ही ब्रह्म भी कहा जा रहा है देवी मा को ही परम ब्रह्म भी कहा जा रहा है तो इससे भी ब्रह्म

1051
01:21:50,760 --> 01:21:54,960
परम ब्रह्म की एकता सिद्ध हो गई सर ये महिमा

1052
01:21:54,960 --> 01:21:59,040
गान करते समय कहीं कहीं पर तुम परम ब्रह्म

1053
01:21:59,040 --> 01:22:03,040
हो ऐसे कहा जाता है और कहीं कहीं पर सीधा स्पष्ट बोल दिया

1054
01:22:03,040 --> 01:22:07,040
जाता है कि हा भाई ब्रह्म इन को समझने के

1055
01:22:07,040 --> 01:22:11,080
लिए हमें सामर्थ्य वान गुरुओं की आवश्यकता होती है भा य य

1056
01:22:11,080 --> 01:22:15,160
लि है य लिखा है इस क्या करे मगर सामर्थ वान

1057
01:22:15,160 --> 01:22:19,400
गुरु वो है जो ऐसा

1058
01:22:19,400 --> 01:22:23,080
ना कह दे वेद में य गलत लिखा

1059
01:22:23,080 --> 01:22:27,920
है वेद को ही वो मना कर दे

1060
01:22:27,920 --> 01:22:32,000
अगर इतने से भी अंश में आपने वेद को मना कर दिया तो आप नास्तिक

1061
01:22:32,000 --> 01:22:36,280
हो गए सनातन धर्म के अनुसार क्योंकि आपने सुति

1062
01:22:36,280 --> 01:22:40,320
को मना कर दिया है अब बात य आती

1063
01:22:40,320 --> 01:22:44,520
है कि गीता वेद पुरान इनके लिए पवित्र धर्म ग्रंथ नहीं है लोग ढोंग

1064
01:22:44,520 --> 01:22:49,440
करते हैं खामा खा अपनी दुकान चलाने के लिए

1065
01:22:49,440 --> 01:22:53,560
ब्रह्म और परम ब्रह्म में कोई अंतर नहीं है और यह कोई

1066
01:22:53,560 --> 01:22:58,000
सिद्धांत नहीं है है कि अगर चार जगह पर चार अलग-अलग तरीके

1067
01:22:58,000 --> 01:23:02,040
की बात होगी तो उनको नहीं मानेंगे एक जैसी होगी उसी को

1068
01:23:02,040 --> 01:23:06,240
मानेंगे ये सिद्धांत नहीं है सिद्धांत ये है कि अगर

1069
01:23:06,240 --> 01:23:10,520
दो अलग-अलग बातें होंगी वैसे ऐसा होता नहीं है वो एक दूसरे

1070
01:23:10,520 --> 01:23:14,760
का ही सहयोग कर रही होती है अगर हम उनका अर्थ सही करें तो मगर अगर

1071
01:23:14,760 --> 01:23:18,920
होंगी तो लिखा है ठोक के अगर दो अलग बात होंगी तो दोनों

1072
01:23:18,920 --> 01:23:23,080
को मानना पड़ेगा आप ये नहीं कर सकते उसको नहीं मानेंगे

1073
01:23:23,080 --> 01:23:29,080
ठीक है बोलिए राहुल शर्मा

1074
01:23:30,440 --> 01:23:34,480
जी जी बोलिए जय श्री राम

1075
01:23:34,480 --> 01:23:38,640
बताइए श्री राम मैं काफी समय से आपसे जुड़ा हूं आपकी वीडियो

1076
01:23:38,640 --> 01:23:42,640
देखता हूं और समझ रहा हूं ज्ञान चर्चा

1077
01:23:42,640 --> 01:23:46,640
आपकी जो होती है देखता हूं अच्छा और शास्त्र को

1078
01:23:46,640 --> 01:23:50,760
समझने का प्रयास कर रहा हूं अच्छा

1079
01:23:50,760 --> 01:23:55,320
आप भी क्या कहीं किसी प्रकार से रामपाल जी से जुड़े हुए थे क्या

1080
01:23:55,320 --> 01:23:59,480
नहीं नहीं बिल्कुल भी नहीं दूरी है

1081
01:23:59,480 --> 01:24:04,560
से अभी समझ रहे हैं क्याय क्या नहीं

1082
01:24:04,560 --> 01:24:08,840
जी मैं यह बोल रहा था जैसे शरण में जाने को बता रहे

1083
01:24:08,840 --> 01:24:13,040
वर्ज का मतलब जाना बता रहे हैं तो अपन जैसे हिंदी में एक बात बोलते

1084
01:24:13,040 --> 01:24:17,360
हैं उसे रोको मत जाने दो इसका दूसरा अर्थ भी होता है

1085
01:24:17,360 --> 01:24:21,480
उसे रोको मत जाने दो एक बात का दो अर्थ

1086
01:24:21,480 --> 01:24:25,680
भी होता है हिंदी में भी होता है अरे भैया

1087
01:24:25,680 --> 01:24:29,920
आपको अभी आप बाहर से देख रहे हो ना तो आपको बड़ा

1088
01:24:29,920 --> 01:24:34,840
सरल लग रहा है इतना आसान नहीं होता इन लोगों से बात करना

1089
01:24:34,840 --> 01:24:39,560
क्योंकि ये लोग सर सर को बिल्कुल ऐसा बना के आते हैं चिकना

1090
01:24:39,560 --> 01:24:43,600
घड़ा इसके अंदर गोली भी मार दो तो अंदर नहीं जाएगी बात की

1091
01:24:43,600 --> 01:24:45,840
तो बात दूर है

1092
01:24:45,840 --> 01:24:49,920
सही बात है सही बात है वो बाहर से लगता है कि मैं ये बात

1093
01:24:49,920 --> 01:24:54,400
बोल दूं जाके फट से अभी देखो हमारी बात वो हो जाएगी मगर हां

1094
01:24:54,400 --> 01:24:58,560
उनके साथ य आ कर के अपना सर ख पाओगे तब पता लगेगा

1095
01:24:58,560 --> 01:25:02,400
भैया बड़ी टेढ़ी कीर

1096
01:25:02,400 --> 01:25:06,440
है अब इनका एक बात आती है उसको मैं क्लियर

1097
01:25:06,440 --> 01:25:11,480
कर दू ब्रज का अर्थ जोय बताते हैं

1098
01:25:11,480 --> 01:25:15,640
कि ब्रज का अर्थ अगर आना है तो वह तो पहले

1099
01:25:15,640 --> 01:25:19,840
से ही भगवान की शरण में है तो अभी इनका

1100
01:25:19,840 --> 01:25:24,320
कल कोई व्यक्ति आया था वो कह रहा था कि हमारे गुरुजी

1101
01:25:24,320 --> 01:25:28,480
भले ही वहां रहते हैं कमेंट में जाने कहां कि कह रहा था भले

1102
01:25:28,480 --> 01:25:32,640
ही हमारे गुरुजी वहां रहते हैं मगर वो हमारे साथ है हमेशा

1103
01:25:32,640 --> 01:25:36,720
है ना तो जब वोह साथ में है तो इसका

1104
01:25:36,720 --> 01:25:40,880
मतलब आपको अपने गुरु जी के दर्शन करने नहीं जाना है

1105
01:25:40,880 --> 01:25:44,880
कभी नहीं करोगे दर्शन जेल में सड़ सड़ के वो चले

1106
01:25:44,880 --> 01:25:49,600
जाए ऊपर खत्म हो जाए उनकी बॉडी बूढ़े तो हो ही रहे हैं

1107
01:25:49,600 --> 01:25:54,680
है ना वो अजर वाली बात तो है नहीं कि अजर हो खैर

1108
01:25:54,680 --> 01:25:58,840
मगर आप कभी भी उनको देखने तक नहीं जाओगे क्या आप तो पहले

1109
01:25:58,840 --> 01:26:01,000
से ही उनकी शरण में हो

1110
01:26:01,000 --> 01:26:05,200
तो वो वहां पर शरण में आने को यह कहा जा रहा है कि अब तक तू मुझे

1111
01:26:05,200 --> 01:26:09,280
जिस रूप में भी जानता था वह ठीक है अब मेरे को तू जान लिया मैं

1112
01:26:09,280 --> 01:26:13,320
परमात्मा हूं मुझ परमात्मा की शरण में आा मतलब परमात्मा वाले

1113
01:26:13,320 --> 01:26:17,720
भाव के साथ आ पहले तू शरण में था मेरी

1114
01:26:17,720 --> 01:26:21,800
सखा के रूप में था बड़े भाई के रूप में था गुरु के रूप

1115
01:26:21,800 --> 01:26:25,920
में था मेरी शरण में अब तू मुझको परमात्मा समझते हुए मेरी

1116
01:26:25,920 --> 01:26:29,920
शरण में आप आत्मिक तौर पर आत्मा से

1117
01:26:29,920 --> 01:26:33,920
आप अभी तक तू शरीर से था अब अपनी आत्मा से

1118
01:26:33,920 --> 01:26:38,440
आ अंदर से आ तो ये

1119
01:26:38,440 --> 01:26:42,520
इनकी तरफ से मैं दोबारा विनती करूंगा कोई ठीक ठाक व्यक्ति

1120
01:26:42,520 --> 01:26:46,640
जो जिसकी जो बात कम से कम करता जानता हो ठीक

1121
01:26:46,640 --> 01:26:50,880
से वोह आगे आए एक दो मुझे तो कोई लग नहीं रहा

1122
01:26:50,880 --> 01:26:55,120
कोई ठीक ठाक है इसमें कोई मतलब हिले हुए

1123
01:26:55,120 --> 01:26:59,520
हिले हुए ज्यादातर आते हैं क्या मैं बताऊ इनकी दुकान पे मैं जाके आया

1124
01:26:59,520 --> 01:27:03,600
हूं थो इनकी दुकान पे जाके आया हूं पेन

1125
01:27:03,600 --> 01:27:07,600
ड्राइव में उनकी वीडियो बनाई र है रामपाल जी की

1126
01:27:07,600 --> 01:27:11,680
और मंत्र के लिए मेरे को दीक्षा चाहिए अंदर लेकर जाते

1127
01:27:11,680 --> 01:27:16,040
हैं वह वीडियो चालू करते हैं और उसमें पांच मंत्र

1128
01:27:16,040 --> 01:27:20,680
बताते हैं सत सत तीन बार बुलवा हैं वो सब

1129
01:27:20,680 --> 01:27:24,800
यह चल रहा है इनका इनकी आज आज इनसे इतनी

1130
01:27:24,800 --> 01:27:28,960
देर तक माथा पच्ची करने के बाद में ये समझ में आया कि

1131
01:27:28,960 --> 01:27:33,040
ये क्या करते हैं कि जैसे ही हमने किसी एक श्लोक से ब्रह्मा

1132
01:27:33,040 --> 01:27:37,360
विष्णु महेश को परम ब्रह्म सिद्ध किया तो ये किसी दूसरे श्लोक

1133
01:27:37,360 --> 01:27:42,080
से उसको काटेंगे कि देखो यहां पर तो यह लिखा है तो मेरे भाई

1134
01:27:42,080 --> 01:27:46,800
हमको दो जगह दो बातें लिखी है तो उनका ऐसा अर्थ निकालना होगा

1135
01:27:46,800 --> 01:27:51,280
जिसमें एक भी बात कटे ना हम यह नहीं कर सकते

1136
01:27:51,280 --> 01:27:55,280
कि एक इस वाली बात से य वाली बात कट जाए बात अगर आप

1137
01:27:55,280 --> 01:27:59,400
काट रहे हो तो आपके अनुसार फिर उन दोनों बातों

1138
01:27:59,400 --> 01:28:03,680
पर विश्वास होना सिद्ध नहीं होता क्योंकि जो एक जगह गलत

1139
01:28:03,680 --> 01:28:07,840
बात लिखेगा वह दूसरी जगह गलत बात बोलते समय आपको यह

1140
01:28:07,840 --> 01:28:12,240
नहीं बताएगा कि अभी भी मैं गलत बोल रहा हूं कि सही बोल रहा हूं और बताएगा

1141
01:28:12,240 --> 01:28:16,880
तो उस पर आप विश्वास करोगे क्या विश्वास

1142
01:28:16,880 --> 01:28:20,920
जो है क्रेडिबिलिटी खत्म हो जाएगी जैसे ही आपने यह मान लिया कि आदमी

1143
01:28:20,920 --> 01:28:25,920
झूठ बोलता है झूठ

1144
01:28:25,920 --> 01:28:30,000
अगर प्रमाण गीता जी का ज्ञान तो बाद में भी दिया गया है बाद

1145
01:28:30,000 --> 01:28:31,480
में फिर से दिया है य

1146
01:28:31,480 --> 01:28:35,880
जी को भी दिया है अर्जुन जी को फिर से दिया गया माबाद में है अगर प्रमाण

1147
01:28:35,880 --> 01:28:39,920
है तो पूरा प्रमाण है प्रमाण नहीं है तो बिल्कुल

1148
01:28:39,920 --> 01:28:44,600
प्रमाण नहीं है बिल्कुल मत मानो फिर ये मत बोलो गीता पुराण

1149
01:28:44,600 --> 01:28:48,880
वेद सब में लिखा है कबीर भगवान भाई अपना नया लिखो आपका

1150
01:28:48,880 --> 01:28:53,000
आधार हम जानते हैं क्या है आपके लिए गीता तब तक सही है जब तक

1151
01:28:53,000 --> 01:28:57,080
वो रामपाल के विरोध ना हो आपके लिए वेद तब तक सही है जब तक वो

1152
01:28:57,080 --> 01:29:01,200
रामपाल के विरोध में ना हो और रामपाल का और

1153
01:29:01,200 --> 01:29:05,360
जो आपकी जो वो है क्या कहते कबीर वाणी कबीर

1154
01:29:05,360 --> 01:29:09,640
जी की लिखी हुई जो ग्रंथ भी है वह भी तभी तक सही है जब तक वह रामपाल

1155
01:29:09,640 --> 01:29:14,120
के विरोध में उसम भी है उसमें भी लिखा है

1156
01:29:14,120 --> 01:29:18,320
मैं वही कह रहा हूं कुल मिलाकर के सभी धर्म ग्रंथ जितने भी है

1157
01:29:18,320 --> 01:29:22,320
उनकी बातें तब तक सही है जब तक वह रामपाल के विरोध

1158
01:29:22,320 --> 01:29:26,360
में ना हो तो जब रामपाल अंतिम प्रमाण है तो आप

1159
01:29:26,360 --> 01:29:30,360
यह बोलो कि जेल से रामपाल प्रमाण है और

1160
01:29:30,360 --> 01:29:35,120
कबीर जी भगवान है आप ये बोलो

1161
01:29:35,120 --> 01:29:40,080
जेल धाम में प्रमाण है और कबीर भगवान है यह बोलो

1162
01:29:40,080 --> 01:29:44,160
इनकी ना दोगली बातें देखो कितनी है

1163
01:29:44,160 --> 01:29:46,600
ये कबीर दास जी का भी बहुत बड़ा अपमान

1164
01:29:46,600 --> 01:29:50,720
कर रहे हैं लोग बहुत बड़ा अपमान कर रहे हैं उनका

1165
01:29:50,720 --> 01:29:56,720
बड़े ध्यान से सुनिए एक तरफ ये कहते है कबीर जी के माता पिता नहीं है

1166
01:29:58,280 --> 01:30:02,480
एक तरफ कहते कबीर जी के माता-पिता नहीं है और दूसरी तरफ कहते हैं कि रामपाल

1167
01:30:02,480 --> 01:30:06,480
कबीर दास है और जबकि सबको पता है कि उनके मदर

1168
01:30:06,480 --> 01:30:10,560
फादर का नाम नंदलाल है और भक्त मती उनकी माता जी का नाम है तो

1169
01:30:10,560 --> 01:30:14,680
या तो ये माने कि रामपाल कबीर दास नहीं है या फिर माने कि जो

1170
01:30:14,680 --> 01:30:18,720
कबीर दास है वो जन्मा नहीं है ये साले दोनों दोगरी पं दोगला पंती करते

1171
01:30:18,720 --> 01:30:22,800
हैं लोग कबीर कबीर सागर में ये भी लिखा है जो शरीर होगा

1172
01:30:22,800 --> 01:30:27,440
उसकी छाया नहीं होगी शब्दों का उपयोग मत करें बिल्कुल भी किसी के लिए भी

1173
01:30:27,440 --> 01:30:31,720
नहीं भाई 5505 वर्ष होएगा ना तो शरीर

1174
01:30:31,720 --> 01:30:35,760
की छाया नहीं होगी ये भी लिखा है कबीर सागर में मैंने पढ़ा है लेकिन ये

1175
01:30:35,760 --> 01:30:39,840
इनको बताया नहीं है उसकी तो छाया है हम लोग तो

1176
01:30:39,840 --> 01:30:44,040
वो चीज मानेंगे ना जो हमारे धर्म ग्रंथ है जो वेद है गीता है रामायण है हम तो उनको मानेंगे

1177
01:30:44,040 --> 01:30:48,520
हमें क्या लेना कबीर वानी से हमारा कोई लिक नहीं उसमें भी है

1178
01:30:48,520 --> 01:30:52,640
कबीर सागर मैंने पढ़ा है उसको समझना है उसमें भी भगवान के बारे

1179
01:30:52,640 --> 01:30:56,720
में भक्त थे मेरा जो काम करना है मेरा

1180
01:30:56,720 --> 01:31:02,480
काम है ना बहुत टफ होता जा रहा है मैं ये देख रहा हूं

1181
01:31:02,480 --> 01:31:07,120
किसस सब साथ है सब साथ

1182
01:31:07,120 --> 01:31:11,560
है जी जी जी जी जी

1183
01:31:11,560 --> 01:31:15,560
कबीर सागर में लिखा है जी कृष्ण भगवान ने गीता जी सुनाई

1184
01:31:15,560 --> 01:31:19,960
थी अर्जुन जी को यह भी लिखा है राम जी के भक्त

1185
01:31:19,960 --> 01:31:24,320
थे खा प् प्ले स्टोर ड

1186
01:31:24,320 --> 01:31:27,600
कर लीजिए कबीर सागर

1187
01:31:27,600 --> 01:31:31,800
भाई मैंने एक सिपल सी चीज पूछी वो व्यक्ति उसको सच से भागना

1188
01:31:31,800 --> 01:31:35,880
है उसको तो व क्या करे मैंने उससे पूछा कि

1189
01:31:35,880 --> 01:31:40,080
थाली में अगर एक झूठा एक थूक का एक बूंद गिर जाएगा तो वो थाली

1190
01:31:40,080 --> 01:31:44,120
आपकी झूठी हो जाएगी अगर आप भगवत गीता है आपके

1191
01:31:44,120 --> 01:31:48,280
अनुसार उसम कहीं कहीं पर काल ने झूठ बोल दिया है तो व फिर

1192
01:31:48,280 --> 01:31:54,280
पवित्र नहीं रह गई उसम दाग लग गया जी

1193
01:31:55,560 --> 01:31:59,600
इन और इसी प्रकार से वेद ये वेद को भी कह रहे हैं कि

1194
01:31:59,600 --> 01:32:03,840
अन्य अन्य शास्त्रों से मैच खाएगा तब उसको काट देंगे जब तुम हर चीज

1195
01:32:03,840 --> 01:32:08,280
को काट रहे हो तो प्रमाण कौन सी चीज है तुम्हारे लिए जिसको काटो नहीं

1196
01:32:08,280 --> 01:32:12,360
जिसके एक शब्द को भी ना काटो वह प्रमाण कौन सा है

1197
01:32:12,360 --> 01:32:17,320
नहीं बताते सर अभी ना सुर वो है जेल

1198
01:32:17,320 --> 01:32:21,600
धाम वो है जेलम में बैठे हुए रामपाल दास जी अभी

1199
01:32:21,600 --> 01:32:25,600
ना मैं इसकी सुन रहा था अध्याय दो और श्लोक 17 में लिखा हुआ है

1200
01:32:25,600 --> 01:32:30,120
कि उस अविनाशी का कोई भी उसको काट नहीं सकता या उसका कोई विनाश नहीं कर सकता

1201
01:32:30,120 --> 01:32:34,240
वो वो दरअसल उसम सांख्या योग आत्मा के बारे में बताया हुआ है तो ये इतनी

1202
01:32:34,240 --> 01:32:38,520
सी मतलब छोटी सी बात इनके दिमाग में नहीं घुसती यज और आत्मा जो है अध्याय

1203
01:32:38,520 --> 01:32:42,720
10 ब 20 में परमात्मा ने श्री विष्णु जी ने बोला कि मैं ही आत्मा हूं जो आपके अंदर

1204
01:32:42,720 --> 01:32:47,080
बैठा हूं यह छोटी चीज इनको समझ नहीं आती है ऐसा

1205
01:32:47,080 --> 01:32:51,120
है कई बार हम लोग खुद बात करते हुए किसी को समझाते

1206
01:32:51,120 --> 01:32:55,880
हुए जब वो व्यक्ति जानता नहीं है मैं ही वो हूं

1207
01:32:55,880 --> 01:32:59,920
तो वो कहता है वो परमात्मा कौन है कि तू उस परमात्मा तक पहुंचेगा

1208
01:32:59,920 --> 01:33:04,080
मैं तुझे समझा रहा हूं उस परमात्मा में ये है उस परमात्मा में वो है इस

1209
01:33:04,080 --> 01:33:08,480
तरीके से थर्ड पर्सन जो फॉर्म होती

1210
01:33:08,480 --> 01:33:10,640
है उस तरीके से बताते

1211
01:33:10,640 --> 01:33:15,040
हुए सर्व नाम के द्वारा के उस परमात्मा तक जाना है तुझे

1212
01:33:15,040 --> 01:33:19,080
वो परमात्मा सबसे पहले ऐसा है वो परमात्मा ऐसा है अब सुन

1213
01:33:19,080 --> 01:33:24,240
वो परमात्मा मैं ही हूं परमात्मा

1214
01:33:24,240 --> 01:33:30,240
इसका मैं आपको उदाहरण देता

1215
01:33:31,600 --> 01:33:36,400
हूं कल एकवा शलोक देखिए

1216
01:33:36,400 --> 01:33:40,520
आप अरे एक जग वाला शलोक है ना वासुदेव काहा

1217
01:33:40,520 --> 01:33:44,600
है मुझ वासुदेव ऐसे करके बोला है वो अभी मैंने दिया

1218
01:33:44,600 --> 01:33:49,120
था भूल रहा हूं वासुदेव जी वाला श्लोक है मुझ

1219
01:33:49,120 --> 01:33:55,120
वासुदेव की शरण में आजा सातवा अध्याय

1220
01:33:55,880 --> 01:33:59,880
गु जीी मैंने क्या पाया है वो सब य लोग का सत्संग में गया था ना

1221
01:33:59,880 --> 01:34:04,080
सत्संग में मेरे को भी बुलाया था मैं गया था तो मैंने

1222
01:34:04,080 --> 01:34:08,280
वो लोग के साथ बात किया तो खाली वो लोग

1223
01:34:08,280 --> 01:34:12,520
का खाली पॉइंट लिख के रखा है जैसा य मैंने पूछा

1224
01:34:12,520 --> 01:34:16,560
आपने अध्ययन किया है कोई शास्त्र का अ संस्कृत आता

1225
01:34:16,560 --> 01:34:20,720
है संस्कृत में कोई अध्ययन किया है तो किसीने भी आंसर नहीं आता नहीं य लिखा

1226
01:34:20,720 --> 01:34:24,760
है इधर इधर मिलेगा आप ढूंढो मतलब ढूंढ के भी नहीं दिखा

1227
01:34:24,760 --> 01:34:29,200
सकते अब किसी को भी चर्चा में आते है बुक ले कोभी नहीं आते

1228
01:34:29,200 --> 01:34:33,400
वो एक कागज में हुआ इतना इतना लिख के लेके आते है खुद अध्ययन

1229
01:34:33,400 --> 01:34:37,800
करो ना फिर सत्य सत्य कितने दिन छ पोगे एक दिन तो उजागर होएगा

1230
01:34:37,800 --> 01:34:41,920
सत्य तो सत्य है व तो कभी छुपता नहीं है मेरे को

1231
01:34:41,920 --> 01:34:44,840
एक चीज क्या लगता

1232
01:34:44,840 --> 01:34:48,960
हैह से मा के

1233
01:34:48,960 --> 01:34:51,520
प्रति

1234
01:34:51,520 --> 01:34:56,080
ऐसी ये देखिए लिखा है

1235
01:34:56,080 --> 01:35:00,320
दसवा अध्याय आठवा मैं वासुदेव

1236
01:35:00,320 --> 01:35:05,280
ही संपूर्ण जगत की उत्पत्ति का मूल कारण

1237
01:35:05,280 --> 01:35:09,800
हूं मैं वासुदेव ही अब य कृष्ण आ गए ना क

1238
01:35:09,800 --> 01:35:11,000
कृष्ण बोली है कि नहीं बोली

1239
01:35:11,000 --> 01:35:15,000
मैं वासुदेव काल होता तो काल बोलता ना अपने को जो

1240
01:35:15,000 --> 01:35:19,840
इनका वाला काल है मैं वासुदेव

1241
01:35:19,840 --> 01:35:23,960
और यही कहीं और निवा अध्याय

1242
01:35:23,960 --> 01:35:28,040
सवा शलोक निकालिए 1 अध्याय सर 10 ब 10

1243
01:35:28,040 --> 01:35:33,680
ब 19 में देखोगे उने विष्णु जी का भी आ गया है रेफरेंस वहा

1244
01:35:33,680 --> 01:35:39,680
मैं वो तो है वो तो मैं धनु धारियों में राम हूं

1245
01:35:39,760 --> 01:35:44,000
सिवा अध्याय का सवा श्लोक निकालिए

1246
01:35:44,000 --> 01:35:48,000
आप मैंने अभी आपको भेजा था मॉडरेटर जो है

1247
01:35:48,000 --> 01:35:52,000
मैं उनको बोल रहा हूं इस समय आप जरा वो एक जगह पर मैंने आपको अभी

1248
01:35:52,000 --> 01:35:56,120
रेफरेंस भेजे हैं आप वो वासुदेव वाला रेफरेंस जरा

1249
01:35:56,120 --> 01:36:02,120
दिखा

1250
01:36:16,200 --> 01:36:20,480
दीजिए आप कौन सा बोल रहे हैं 13

1251
01:36:20,480 --> 01:36:26,480
13 कावा 13 अध्याय का

1252
01:36:28,880 --> 01:36:34,880
सवा 18 62 भी है

1253
01:36:35,400 --> 01:36:39,640
गीता इसीलिए मुझे इनसे ना शास्त्रों पर बात करने का मन नहीं करता

1254
01:36:39,640 --> 01:36:43,720
है ये लोग कहते हैं वो धर्म ग्रंथ उठा धर्म ग्र अबे भाई उसको तुम प्रमाण कहां मानते

1255
01:36:43,720 --> 01:36:48,120
हो जो मैं उठाऊं उसे इनके पास एक भी धर्म ग्रंथ नहीं है एक भी नहीं है इनके

1256
01:36:48,120 --> 01:36:52,400
पास हां ये देखिए क्या लिखा है पुत

1257
01:36:52,400 --> 01:36:56,520
गई है इनके द नहीं ये वाला नहीं है दूसरा इसमें

1258
01:36:56,520 --> 01:37:00,760
वासुदेव कहां लिखा है वासुदेव लिखा है उसमें शुरू में ही हां ये लिखा

1259
01:37:00,760 --> 01:37:05,400
है लिखा है लिखा है ऊपर करिए ऊपर करिए ऊपर हां

1260
01:37:05,400 --> 01:37:09,840
कौन सा है 37 वा नौवा अध्याय

1261
01:37:09,840 --> 01:37:13,120
शायद एक

1262
01:37:13,120 --> 01:37:17,680
मिनट नहीं नवा तो नहीं हो दसवा अध्याय

1263
01:37:17,680 --> 01:37:22,520
नव दवा अध्याय 37 वा

1264
01:37:22,520 --> 01:37:26,720
श्लोक बृष्ण वंश में वासुदेव

1265
01:37:26,720 --> 01:37:31,000
अर्थात मैं स्वयं तेरा सखा लो

1266
01:37:31,000 --> 01:37:31,500
श्री

1267
01:37:31,480 --> 01:37:35,720
कृष्ण ने नहीं बोली ना यहां भी काल ने झूठ

1268
01:37:35,720 --> 01:37:40,120
बोल दिया भटकाने के लिए जब उसका गीता का

1269
01:37:40,120 --> 01:37:44,320
पा जब गीता का 5 पर ज्ञान

1270
01:37:44,320 --> 01:37:48,440
गलत है तो वो पवित्र कैसे रह गया और अगर 5 पर

1271
01:37:48,440 --> 01:37:52,600
वाला भी पवित्र है तो जो बिल्कुल भी वो गलत ना

1272
01:37:52,600 --> 01:37:57,320
हो कहीं से भी उसको क्या कहोगे और जो

1273
01:37:57,320 --> 01:38:03,320
जो पाच से 6 परट हो जाएगा गलत उसको क्या

1274
01:38:04,360 --> 01:38:08,880
कहोगे कोई और आया है शायद

1275
01:38:08,880 --> 01:38:13,000
मैं निकलता हूं य चर्चा से बड़ा अच्छा

1276
01:38:13,000 --> 01:38:18,080
लगा आपका लक जी बड़ा अच्छा लगा आपने समर्थन प्रकट

1277
01:38:18,080 --> 01:38:22,080
किया सुनता हूं गुरुजी आपका फॉलो करता हूं मैं

1278
01:38:22,080 --> 01:38:26,440
तो हर नोटिफ आने के बाद मैं आता हूं मेरे को इतना अपने

1279
01:38:26,440 --> 01:38:30,600
प्रकाश डाल दिया ना मेरा हृदय में मैं तो मैं मेरे को

1280
01:38:30,600 --> 01:38:34,760
दूसरा जनी दे दिया आपने मेरे को ऐसा लगता है क्योंकि आपने इतना स

1281
01:38:34,760 --> 01:38:38,800
सज तरह से जो समझा र है ना मेरा जिंदगी धन्य हो गया

1282
01:38:38,800 --> 01:38:43,520
आप तो मे मैं तो आपको गुरु ही समझता हूं अरे

1283
01:38:43,520 --> 01:38:47,520
भैया मेरी एक बात सुनते जाइए मैं गुरु नहीं

1284
01:38:47,520 --> 01:38:51,600
हूं गुरु गोविंद ग्रंथ की कृपा से

1285
01:38:51,600 --> 01:38:55,640
बहुत उनका कोई शायद पता नहीं कुछ

1286
01:38:55,640 --> 01:38:59,680
छोटा सा अंश मात्र हूं मुझे गुरु रूप में ना देखें एक

1287
01:38:59,680 --> 01:39:03,760
मुझे आप गुरु भाई समझ सकते हैं या

1288
01:39:03,760 --> 01:39:07,880
गुरु तक पहुंचाने वा पहुंचाना रास्ता दिखाने वाला

1289
01:39:07,880 --> 01:39:12,000
ऐसा कुछ समझिए आचार्य गुरु की संज्ञा मेरे लिए ठीक

1290
01:39:12,000 --> 01:39:16,000
नहीं है मैं उस योग्य नहीं हूं है ना आप ही जैसा

1291
01:39:16,000 --> 01:39:19,880
हूं आप ही के बीच का हूं बस थोड़ा सा इधर की ओर ज्यादा

1292
01:39:19,880 --> 01:39:23,920
बुद्धि लगा ली आपने आपने किसी और क्षेत्र में अच्छे से लगाई

1293
01:39:23,920 --> 01:39:27,920
होगी यह आप सब लोग जो बैठे हो सबने अपने अपने क्षेत्र

1294
01:39:27,920 --> 01:39:32,200
में अच्छे से कहीं ना कहीं बुद्धि लगाई होगी मुझे आपके क्षेत्र के बारे में ज्यादा नॉलेज

1295
01:39:32,200 --> 01:39:36,320
नहीं है मैंने इधर बुद्धि लगा ली ऐसा कुछ नहीं है मेरे

1296
01:39:36,320 --> 01:39:40,560
लिए गुरु भाव ना रखे मैं आप ही के बीच का आपका भाई हू ठीक

1297
01:39:40,560 --> 01:39:45,200
है आपका कृपा सदा हमेशा रहे मैं र

1298
01:39:45,200 --> 01:39:50,360
हर महादेव नमन बोल छूटता हूं फिर फिर मिलेंगे

1299
01:39:50,360 --> 01:39:54,960
जय श्री राम जय शीम

1300
01:39:54,960 --> 01:39:59,680
और मैं यह कहूंगा आपसे कि

1301
01:39:59,680 --> 01:40:03,880
आप धरातल पर भी जुड़े हमारा

1302
01:40:03,880 --> 01:40:08,440
नंबर तो है ही आपके लोगों के पास धरातल पर जुड़ कर के वाहिनी के लिए

1303
01:40:08,440 --> 01:40:12,840
धर्म रक्षा के लिए कार्य अवश्य करें गुरुदेव का देखिए आज

1304
01:40:12,840 --> 01:40:16,960
83 वर्ष की आयु हो चुकी है 82 वर्ष की और इस आयु

1305
01:40:16,960 --> 01:40:21,160
में भी वो लगातार पूरे वर्ष भारत

1306
01:40:21,160 --> 01:40:25,320
भ्रमण करते हैं वो चाहे

1307
01:40:25,320 --> 01:40:29,440
तो जो अन्य कथावाचक है बहुत बड़े-बड़े अच्छे अच्छे

1308
01:40:29,440 --> 01:40:33,560
समृद्ध है प्रसिद्ध है और गुरुदेव भी बहुत बड़े

1309
01:40:33,560 --> 01:40:38,000
बहुत मतलब प्रकांड विद्वान है रामायण के रामायणी

1310
01:40:38,000 --> 01:40:42,160
है बहुत अच्छे वक्ता है रामायण के तो गुरुदेव चाहे तो इस तरह

1311
01:40:42,160 --> 01:40:46,680
से कथा वाचन करके और एक सरल और आसान

1312
01:40:46,680 --> 01:40:51,040
जीवन व्यतीत कर सकते हैं मगर

1313
01:40:51,040 --> 01:40:55,360
81 82 वर्ष की आयु में वृद्धावस्था में पैरों

1314
01:40:55,360 --> 01:40:59,360
का इलाज हो चुका है वल चेयर पर चलना पड़ता है ज्यादातर

1315
01:40:59,360 --> 01:41:03,640
उन्हें और ऐसे में भी वह लगातार यात्रा करते रहते

1316
01:41:03,640 --> 01:41:08,600
हैं किसके लिए हिंदुओं के अस्तित्व और आदर्श की रक्षा के लिए

1317
01:41:08,600 --> 01:41:10,120
तो जब वह

1318
01:41:10,120 --> 01:41:14,160
82 वर्ष की आयु में हार नहीं मान रहे तो हमें

1319
01:41:14,160 --> 01:41:18,240
हार कैसे मान लेनी चाहिए सही बात इस हम लोगों

1320
01:41:18,240 --> 01:41:23,400
को जितना हो सके अपने धरातल पर

1321
01:41:23,400 --> 01:41:27,720
अवश्य प्रयास करना चाहिए अपने धर्म को बचाने का वरना इस तरह की

1322
01:41:27,720 --> 01:41:31,880
जो मिलावट वाली दमक है खा रही है हमारे धर्म को समाज को बहुत

1323
01:41:31,880 --> 01:41:37,880
फैली हुई है बहुत फैली पूरे भारत में फैली हुई है हर

1324
01:41:38,840 --> 01:41:43,240
जगह य महाराष्ट्र में कोल्हापुर में भी पहुंच गई है

1325
01:41:43,240 --> 01:41:47,760
एक कुछ लोग यह कहते हैं कि अगर तू इतना ही विद्वान है तो रामपाल

1326
01:41:47,760 --> 01:41:51,920
जी के पास क्यों नहीं जाता पहली बात तो जब

1327
01:41:51,920 --> 01:41:56,320
ये ये कह देते हैं कि जब तू इतना ही विद्वान है तो रामपाल

1328
01:41:56,320 --> 01:42:00,440
जी के पास क्यों नहीं जाता इसका मतलब इन्होंने माना कि यहां पर

1329
01:42:00,440 --> 01:42:06,200
जो लोग आए हैं वो लोग मुख खाए पहली बात तो यह

1330
01:42:06,200 --> 01:42:10,240
है दूसरी बात यह है रामपाल जी इतने

1331
01:42:10,240 --> 01:42:14,440
विद्वान थे तो किसके पास चले गए थे किसके

1332
01:42:14,440 --> 01:42:19,160
पास चले गए थे किससे शास्त्रार्थ कर लिया

1333
01:42:19,160 --> 01:42:23,360
था और दूसरी बात भाई रामपाल जी के

1334
01:42:23,360 --> 01:42:25,400
जेल धाम में पहुंचने के लिए शास्त्रार्थ

1335
01:42:25,400 --> 01:42:30,320
हेतु पहले तो मुझे कोई क्राइम करना होगा यानी

1336
01:42:30,320 --> 01:42:34,560
कि यानी कि धर्म का धर्म

1337
01:42:34,560 --> 01:42:38,680
के विरुद्ध अधर्म का पालन करना होगा तब तो मैं उनसे श वो

1338
01:42:38,680 --> 01:42:42,720
चर्चा करने पहुच जेल धाम में नाम बड़ा

1339
01:42:42,720 --> 01:42:46,920
अच्छा दिया उन्होने जेल धाम यह कौन से शास्त्र में लिखा

1340
01:42:46,920 --> 01:42:51,080
है यह तो मुझे लगता है ना कुरान में लिखा होगा ना बाइबल में लिखा होगा ना वेद

1341
01:42:51,080 --> 01:42:55,400
में लिखा होगा ना पुराण में लिखा होगा जेलम उनको मंदिरों

1342
01:42:55,400 --> 01:42:59,880
से नफरत है जेल से नहीं है हा 11 11 नियम है

1343
01:42:59,880 --> 01:43:03,960
11 नियम लेते हैं पहले देखा है मैंने पूरा लिस्ट किसी मंदिर में नहीं

1344
01:43:03,960 --> 01:43:08,080
जाना है घर में देवी देवता की फोटो नहीं रहनी चाहिए रामपाल

1345
01:43:08,080 --> 01:43:12,160
जी की फोटो रहनी चाहिए और घी का दीपक जलाना चाहिए 24 घंटा ऐसे ऐसे

1346
01:43:12,160 --> 01:43:16,440
नियम है इनका ये कहते थे मंदिर के अंदर पुजारी

1347
01:43:16,440 --> 01:43:20,480
ताला लगा के रख लेता तो भगवान का भगवान कोर अब ये जब

1348
01:43:20,480 --> 01:43:26,280
जेल में चले तब क्या हो रहा है तब वो जेल में बंद

1349
01:43:26,280 --> 01:43:30,520
ना तिलक लगाना है ना कंटी प कुछ भी नहीं बहुत गरा

1350
01:43:30,520 --> 01:43:34,640
नियम है दे

1351
01:43:34,640 --> 01:43:38,800
बत मिस लीड करते हैं लोग और लोगों

1352
01:43:38,800 --> 01:43:42,960
कोम करना है भ्रमित करके धर्म भ्रष्ट

1353
01:43:42,960 --> 01:43:47,160
करा रहे हैं हा धर्म जी इतनी

1354
01:43:47,160 --> 01:43:51,280
गहराई से हो रहा है इनको वापस

1355
01:43:51,280 --> 01:43:56,200
लाना मुश्किल होगा से मानने को तैयार नहीं

1356
01:43:56,200 --> 01:44:00,240
नहीं कितना हम लोग डिटेल में बात करें वो डिटेल से

1357
01:44:00,240 --> 01:44:04,400
भागते हैं जब आप कोई बात बोलते हो तो हम उस

1358
01:44:04,400 --> 01:44:08,600
बात को ले लेते हैं एक एक शब्द की फिर व्याख्या करते हैं इसको

1359
01:44:08,600 --> 01:44:13,040
व्याख्या करने को कहा जाता मीमांसा हम लोग मीमांसा करने

1360
01:44:13,040 --> 01:44:17,520
बैठ जाते हैं भाई आपने कहा कि सद ग्रंथ पवित्र सद ग्रंथ

1361
01:44:17,520 --> 01:44:21,680
तो पवित्र का मतलब है कि उसमें गंदगी नहीं होनी चाहिए तभी तक वो पवित्र

1362
01:44:21,680 --> 01:44:25,400
है अगर उसम

1363
01:44:25,400 --> 01:44:29,520
गंदा है तो वो पवित्र नहीं है

1364
01:44:29,520 --> 01:44:33,600
तो पवित्र कहना बंद करो गीता तेरा

1365
01:44:33,600 --> 01:44:37,680
ज्ञान अमृत अरे भाई मा लिखो गीता तेरा 95 प्र

1366
01:44:37,680 --> 01:44:41,880
ज्ञान अमृत 5 पर गलत है कोई लेगा इनकी

1367
01:44:41,880 --> 01:44:46,720
गीता बिकना बंद हो जाएगी

1368
01:44:46,720 --> 01:44:51,400
तो कवर पर लिखते हैं बढ़िया बढ़िया और अंदर लिखते हैं

1369
01:44:51,400 --> 01:44:55,840
खंडन जिसके नाम से बेच रहे हैं किताब

1370
01:44:55,840 --> 01:45:00,120
उसी का खंडन जी ह जी जय श्री राम जय

1371
01:45:00,120 --> 01:45:05,080
श्री राम राधे राधे हरे कृष्णा राधे

1372
01:45:05,080 --> 01:45:09,120
राधे जी जी हम यहां पर आपका स्क्रीन

1373
01:45:09,120 --> 01:45:13,520
देखते हैं रोज यहां पर रोज जो आप चलाते हैं लोगों का इतना

1374
01:45:13,520 --> 01:45:17,960
अच्छा से मतलब बहुत कॉमेडी भी लगता है और बहुत

1375
01:45:17,960 --> 01:45:22,000
ज्ञानवर्धक भी होता है और मतलब

1376
01:45:22,000 --> 01:45:26,120
कैसे आखिर ये लोग रामपाल जी के लोग वहां पर चले गए हैं

1377
01:45:26,120 --> 01:45:30,400
मतलब इतना सा भी नहीं है कि जो थोड़ा सा देख ले पढ़ ले अच्छा से

1378
01:45:30,400 --> 01:45:34,640
स्वाध्याय करे वो लोग उतना नहीं करते केवल बोलने आ जाते

1379
01:45:34,640 --> 01:45:39,400
हैं यहीं परले कमजोरी एक ही

1380
01:45:39,400 --> 01:45:40,400
है

1381
01:45:40,400 --> 01:45:45,600
मैं कॉलेज में र बता बोल लीजिए आप

1382
01:45:45,600 --> 01:45:49,600
जी मैं कॉलेज में था ना तो कॉलेज में ना मेरे एक

1383
01:45:49,600 --> 01:45:54,040
मित्र था जो कि रामपाल जी का फॉलोवर था

1384
01:45:54,040 --> 01:45:58,120
और वो बहुत कुछ ही ज्यादा उस चीज के बारे में बोलता

1385
01:45:58,120 --> 01:46:02,120
था ठीक है तो हम कृष्ण जी का

1386
01:46:02,120 --> 01:46:06,440
पूजा करते हैं तो वहां पर बोलता था ये आवाज

1387
01:46:06,440 --> 01:46:12,440
आ रही है कहीं

1388
01:46:18,240 --> 01:46:24,240
से वेणी माधव आप तो आ चुके हैं शायद

1389
01:46:25,520 --> 01:46:29,520
नहीं ऑन करिए अपना अन म्यूट करिए

1390
01:46:29,520 --> 01:46:33,520
एक एक मिनट जय ह जी की बात

1391
01:46:33,520 --> 01:46:37,760
लेले एक मिनट ह जी वापस आ गए जी ह जी बताइए

1392
01:46:37,760 --> 01:46:42,280
जी जो वहा जो मेरे मित्र था ना तो रामपाल जी का फॉलोवर था तो

1393
01:46:42,280 --> 01:46:46,400
बहुत सारा बात बोलता रहता था कि रामपाल

1394
01:46:46,400 --> 01:46:51,360
ही भगवान है रामपाल संत है सत्व दर्शी है तो उनका बात

1395
01:46:51,360 --> 01:46:55,680
हम नहीं मा ने हर जगह देखे तो

1396
01:46:55,680 --> 01:46:59,920
बहुत बुरा लगता था कृष्ण भगवान का भद्र था भद्र टिप्पणी बहुत सारा जगह है

1397
01:46:59,920 --> 01:47:03,960
वो मेरे से बोलता था कि सबको वही दिए हैं

1398
01:47:03,960 --> 01:47:08,840
ज्ञान जैसे माता मीराबाई और वही क्या नाम है

1399
01:47:08,840 --> 01:47:13,080
संत उनके गुरु रविदास जी महाराज तो

1400
01:47:13,080 --> 01:47:17,120
सबको वही ज्ञान दिए ऐसा सा बात बोलते थे दिमाग बहुत ही

1401
01:47:17,120 --> 01:47:21,280
गर्म हो जाता था लेकिन जब हम पूछे उससे कि इसका क्या प्रूफ है कि भाई माता

1402
01:47:21,280 --> 01:47:25,520
मीराबाई उनके पास गई या फिर जो सीधा

1403
01:47:25,520 --> 01:47:30,200
कृष्ण जी का पूरा लिखी है पद सब तो वो कैसे

1404
01:47:30,200 --> 01:47:34,240
रामपाल जी के फॉलोवर हो गई तो उसके बारे में उसके बारे

1405
01:47:34,240 --> 01:47:38,600
में कोई प्रूफ नहीं था उसको फिर हम दोहा सब

1406
01:47:38,600 --> 01:47:40,880
जो राम जी का है रामचरित्र

1407
01:47:40,880 --> 01:47:45,440
मानस वो सब दिखाते थे तो लोग मानता ही नहीं है

1408
01:47:45,440 --> 01:47:49,680
तो वही वही बताने के लिए मेरा य एक्सपीरियंस था कि वो लोग ज्यादा पढ़ता

1409
01:47:49,680 --> 01:47:54,520
नहीं है केवल आकर के जो बहुत हाईटेड

1410
01:47:54,520 --> 01:47:58,600
जो हाईलाइट है ना लोग आपने एक बात देखी जितनी बार मैंने

1411
01:47:58,600 --> 01:48:02,680
उससे कहा वो ऋग्वेद का कौन सा मंत्र है तो उसने शुरू से स्टार्ट किया अंत

1412
01:48:02,680 --> 01:48:06,800
तक जैसे जैसे ऐसे नहीं कहते भाई रेल के बारे

1413
01:48:06,800 --> 01:48:11,640
में अगर पूछ लिया तो रेल गाड़ी च जो चालू करते

1414
01:48:11,640 --> 01:48:15,880
ना पूरी रेल गाड़ी ही चलेगी फिर जी

1415
01:48:15,880 --> 01:48:20,320
अगर मैंने उन्होंने बोल दिया मैंने बोला वो बोले ऋग्वेद दसवा

1416
01:48:20,320 --> 01:48:24,400
मंडल और नंबर कुछ था और

1417
01:48:24,400 --> 01:48:28,400
उसके बाद मंत्र क्रमण मैंने मैंने मैं पूछ रहा हूं

1418
01:48:28,400 --> 01:48:32,440
ऋग्वेद मैंने खोल लिया है दसवा मंडल मैंने खोल लिया है सूक्त

1419
01:48:32,440 --> 01:48:36,680
मैंने बो खोल लिया है अब मुझे मंत्र बताओ तो नहीं मंत्र नहीं बताएंगे

1420
01:48:36,680 --> 01:48:41,400
पीछे से ही आएंगे तो इसको कहते हैं रट विद्या

1421
01:48:41,400 --> 01:48:45,680
उनको सीधे मंत्र का नंबर नहीं आ पाएगा जुबान पे वो पीछे

1422
01:48:45,680 --> 01:48:50,240
से आएंगे तब वो जुबान प आएगा जैसे कुछ चीज हमने

1423
01:48:50,240 --> 01:48:54,320
जैसे कुछ चीजें हमने रटी होती है बचपन से तो उसमें क्या होता है

1424
01:48:54,320 --> 01:48:55,960
रटी हुई चीजों में अगर हम

1425
01:48:55,960 --> 01:49:00,520
कहीं भूल रहे होते तो हम पीछे से दोबारा चालू करते हैं करते हैं

1426
01:49:00,520 --> 01:49:04,680
ना फिर आगे तो इनका वही हैनसे मंत्र पूछोगे

1427
01:49:04,680 --> 01:49:09,440
तो मंत्र नहीं बताएंगे नहीं फ फलाना मंडल फना

1428
01:49:09,440 --> 01:49:12,760
उसके बाद

1429
01:49:12,760 --> 01:49:16,840
यने एक चीज डिसाइड की है कि अब जब

1430
01:49:16,840 --> 01:49:21,240
रामपाल वाला कोई व्यक्ति आएगा तो मैं उससे सीधे बात

1431
01:49:21,240 --> 01:49:25,520
करूंगा ईश्वर सर्व शक्तिमान है ना

1432
01:49:25,520 --> 01:49:29,920
साकार निराकार इन पे इनका मुह धुआ हो जाता है तुरंत

1433
01:49:29,920 --> 01:49:33,960
अगर इन्होने क अगर इन्होंने कहा कि सद ग्रंथों से बात

1434
01:49:33,960 --> 01:49:38,840
करो तो मैं कहूंगा पहले उसको पवित्र सद ग्रंथ सिद्ध कर

1435
01:49:38,840 --> 01:49:42,920
कि आप मानते हो किय पवित्र है बस और कोई नहीं और कोई

1436
01:49:42,920 --> 01:49:47,040
बात नहीं होगी तुम इसको पवित्र सिद्ध कर दो तो मैं इससे बात

1437
01:49:47,040 --> 01:49:51,040
करू अगर तुम्हारे लिए पवित्र है तो इसको

1438
01:49:51,040 --> 01:49:55,240
पवित्र सिद्ध कर दो तो तो मैं इससे बात करूं क्योंकि जितनी बार मैं कोई प्रमाण दिखाऊंगा

1439
01:49:55,240 --> 01:49:59,320
तो अंदर की तरह छलांग माल के दूसरी डाल पे फिर वहां से दूसरी

1440
01:49:59,320 --> 01:50:03,440
डाल पे तीसरी डाल पे ये जो ह भैया कह रहे हैं ना

1441
01:50:03,440 --> 01:50:07,680
जी जी आफ्टर हैंड एक बात आफ्टर हैंड एक बात क्लियर

1442
01:50:07,680 --> 01:50:11,040
हुई कि इनका ये सिद्धांत है कि भाई इसमें जो

1443
01:50:11,040 --> 01:50:15,600
बात होगी हमारे मन मुताबिक नहीं होगी तो हम दूसरी से उसको काटेंगे

1444
01:50:15,600 --> 01:50:19,720
उसमें जो बात हमारे मन मुताबिक नहीं होगी उसको हम उसी से काट देंगे गीता से ही वेद

1445
01:50:19,720 --> 01:50:24,200
की बात भी गीता से काट देंगे तो

1446
01:50:24,200 --> 01:50:28,440
तो यह कहीं का नियम नहीं है कि आप किसी

1447
01:50:28,440 --> 01:50:32,880
दूसरी बात के आधार पर किसी पहली बात को काटो काटने का नियम है ही नहीं

1448
01:50:32,880 --> 01:50:37,120
तो या तो पवित्र सिद्ध करो या काटने का नियम सिद्ध करो तब

1449
01:50:37,120 --> 01:50:41,440
हम जो है आपसे शास्त्रों पर बात करेंगे वरना सीधे सधे

1450
01:50:41,440 --> 01:50:45,800
कबीर को भगवान सिद्ध करो आप रामपाल के अनुसार बात

1451
01:50:45,800 --> 01:50:50,080
खत्म भविष्य पुराण में कबीरदास जी का

1452
01:50:50,080 --> 01:50:55,400
भविष्य पुराण में दिया कबीरदास जी का

1453
01:50:55,400 --> 01:50:57,920
पज नंबर

1454
01:50:57,920 --> 01:51:01,960
पर में है भ पुराण में अध्याय खंड

1455
01:51:01,960 --> 01:51:04,440
दो में

1456
01:51:04,440 --> 01:51:07,840
हैज

1457
01:51:07,840 --> 01:51:12,960
नंबर मैंने दिखाया तो अभी दो दिन

1458
01:51:12,960 --> 01:51:17,080
पहले य ह भया मीरा जीी

1459
01:51:17,080 --> 01:51:21,600
रेफरेंस ले रहे उसम किसी हमारी बहस हुई तो कते

1460
01:51:21,600 --> 01:51:25,760
उने क की भक्ति छोड़ मीरा जी ने तो कबीर दास जी कर ली

1461
01:51:25,760 --> 01:51:29,920
मैं अच्छा लास्ट में जा श्री कृष्ण की मूर्ति कसे

1462
01:51:29,920 --> 01:51:32,760
च

1463
01:51:32,760 --> 01:51:36,880
तो लोग इस कहते हैं कि जब से वो लोग संत

1464
01:51:36,880 --> 01:51:40,920
रामपाल जी के मतलब संत कबीर जी के शरण में गई थी माता मीरा भाई तब

1465
01:51:40,920 --> 01:51:44,960
से व पद लिखना छोड़ दी रे अभी

1466
01:51:44,960 --> 01:51:49,560
जो आए व कहा चले गए उनको दोबारा लीजिए चले गए वो उनको लेने वाला

1467
01:51:49,560 --> 01:51:54,480
था वो तो फाइनल में अपने उनकी मूर्ति में

1468
01:51:54,480 --> 01:51:58,600
जी श्री कृष्ण जी कहां गए भैया अभी

1469
01:51:58,600 --> 01:52:03,200
आए थे जो आप दोबारा जवाइन करें लिंक दे

1470
01:52:03,200 --> 01:52:07,320
दीजिए बस अब और कोई बात नहीं करेंगे अब हम यही

1471
01:52:07,320 --> 01:52:11,360
बात करेंगे कि भैया या तो तुम उसको पवित्र सद ग्रंथ सिद्ध करो

1472
01:52:11,360 --> 01:52:15,920
या अपना यह नियम सिद्ध करो कि एक बात नहीं माननी है दूसरी माननी है किस आधार

1473
01:52:15,920 --> 01:52:20,120
पर ये लोग यह कहते हैं कि हम लोग

1474
01:52:20,120 --> 01:52:24,240
शास्त्रो चित भक्ति करते हैं जबक इनकी सबसे ज्यादा शास्त्रों के विरुद्ध

1475
01:52:24,240 --> 01:52:27,800
है द

1476
01:52:27,800 --> 01:52:32,080
म शलोक का चुनाव मनम और हम शास्त्रों

1477
01:52:32,080 --> 01:52:36,080
के अनुकूल भक्ति करते हैं वाह भैया इनके पास एक भी ग्रंथ नहीं है

1478
01:52:36,080 --> 01:52:40,080
एक भी ग्रंथ नहीं इनके पास इसीलिए मुझे मुझे आनंद उसी

1479
01:52:40,080 --> 01:52:44,800
में आता है सीधे बोलते हैं क्या आपका ईश्वर सर्वशक्तिमान है

1480
01:52:44,800 --> 01:52:50,800
बस उसी पर खत्म हो गया टॉप द ट्रेन पुल चन

1481
01:52:52,560 --> 01:52:56,800
आप एक स्लेट के ऊपर ना ये लिख के रख लो क प्लस बी प्स आर लिखकर दिखाओ

1482
01:52:56,800 --> 01:53:00,880
अपने हमारे वेद और गीता में सामने स्लेट रख दिया करो कि ये स्पेलिंग है ये दिखाओ

1483
01:53:00,880 --> 01:53:04,960
भाई और कुछ नहीं बात करने की जरूरत है इनसे हा

1484
01:53:04,960 --> 01:53:09,200
अगर शास्त्र की बात करनी है अगर शास्त्र की बात करनी है तो ये दिखाओ

1485
01:53:09,200 --> 01:53:13,320
बस और इधर उधर की बात मत करो प्स बी प्स आर

1486
01:53:13,320 --> 01:53:18,960
और साथ में डंडा रख लो क्या अगर झूठ बोलो तो यही से डंडा

1487
01:53:18,960 --> 01:53:24,200
पड़ेगा अरे अभी वो भाई आए थे कहां चले गए

1488
01:53:24,200 --> 01:53:29,520
उनका क्या नाम वेण माधव ण माधव

1489
01:53:29,520 --> 01:53:34,360
मिता जी जी जय श्री राम जय श्री

1490
01:53:34,360 --> 01:53:38,360
राम वेणी माधव जी बताइए

1491
01:53:38,360 --> 01:53:42,400
माधव जय श्री राम मैं एक बात और कहना चाह रहा

1492
01:53:42,400 --> 01:53:46,520
हूं जो भी हमें देख रहे हैं हमारे कुछ प्रकल्प चल रहे हैं जैसे कि अभी

1493
01:53:46,520 --> 01:53:50,960
य पर लाइव स्ट्रीम इंफॉर्मेशन करना और ऐसे पाखंड का

1494
01:53:50,960 --> 01:53:55,040
विरोध करना तो आप लोग यथा सामर्थ छोटा

1495
01:53:55,040 --> 01:53:59,080
छोटा सा अगर आर्थिक सहयोग कर सकते हैं तो आप हमें उसके

1496
01:53:59,080 --> 01:54:04,640
लिए संपर्क करें पर

1497
01:54:04,640 --> 01:54:08,680
74836 वहां पर आप बहुत छोटे से अमाउंट से भी आप मासिक रूप से अगर

1498
01:54:08,680 --> 01:54:12,840
हमारी मदद करेंगे तो हमारी बहुत सहायता हो जाएगी हमें बहुत सारे

1499
01:54:12,840 --> 01:54:16,960
काम करने हैं कार्य करने होते हैं मंदिरों

1500
01:54:16,960 --> 01:54:21,200
में हम लोग गोष्ठी इसी प्रकार से करते हैं कि हिंदुओ में जागरण हो

1501
01:54:21,200 --> 01:54:25,440
स्कूलों में जाकर के हम बच्चों को पढ़ाते भी हैं जिससे कि वह आने

1502
01:54:25,440 --> 01:54:29,520
वाले समय में ऐसे तंत्रों में ना फसे मुस्लिम ना बने

1503
01:54:29,520 --> 01:54:32,680
क्रिश्चन ना बने

1504
01:54:32,680 --> 01:54:36,840
और उनका धर्म परिवर्तन ना हो ब्रेन वश ना कर पाए कोई

1505
01:54:36,840 --> 01:54:41,000
और इसके साथ ही साथ भंडारा इत्यादि आयोजित होता है संस्था

1506
01:54:41,000 --> 01:54:45,040
की ओर से और सबसे बड़ी बात है टू पर अभी हमें जो

1507
01:54:45,040 --> 01:54:49,240
स्ट्रीम यार्ड वगैरह के सब्सक्रिप्शन लेना है इसके अलावा ये इस

1508
01:54:49,240 --> 01:54:53,280
प्रकार की जो चर्चाएं होती है उसको आयोजित करने के लिए कहीं कहीं हम जाते हैं

1509
01:54:53,280 --> 01:54:57,360
यात्रा करते हैं वहां रुकते हैं आना जाना होता है और

1510
01:54:57,360 --> 01:55:01,640
कभी-कभी ऐसा भी होता है कि सामने वाला समय नहीं दे रहा है तो

1511
01:55:01,640 --> 01:55:05,720
उसको यह हमारे विद्यालय में जाकर के जो हम पढ़ाते हैं

1512
01:55:05,720 --> 01:55:10,160
बच्चों को उसका आपको दृश्य दिख रहा होगा तो इन सब प्रकल्प

1513
01:55:10,160 --> 01:55:14,840
को चलाने के लिए अर्थ की आवश्यकता है गौ गोपाष्टमी

1514
01:55:14,840 --> 01:55:19,640
का आयोजन भी करने वाले हैं और गौ माता को लेकर के एक विशेष

1515
01:55:19,640 --> 01:55:23,680
अभियान चलाने वाले हैं तो जो अगर आप छोटी सी राशि से

1516
01:55:23,680 --> 01:55:28,040
सहायता करने की इच्छुक हो इन प्रकल्प में वह करें और उससे

1517
01:55:28,040 --> 01:55:32,200
भी प्राथमिकता है इस बात

1518
01:55:32,200 --> 01:55:36,520
की सबसे ज्यादा प्राथमिकता है कि यदि आप धर्म का धर्म की रक्षा

1519
01:55:36,520 --> 01:55:40,640
करना चाहते हैं तो अपने निकटतम मंदिर में धरातल

1520
01:55:40,640 --> 01:55:44,640
पर उतर करके साप्ताहिक गोष्ठी करिए

1521
01:55:44,640 --> 01:55:49,040
हिंदू रक्षा गोष्ठी अपने लोगों को आमंत्रित करिए

1522
01:55:49,040 --> 01:55:53,680
और वहां पर यह जो इनफॉर्मेटिव बातें हैं वो उनके साझा करिए

1523
01:55:53,680 --> 01:55:58,640
गुरुदेव के वहां पर वीडियोस चलाइए प्रामाणिक आचार्यों के वीडियो

1524
01:55:58,640 --> 01:56:02,800
चलाइए यह देखिए गुरुदेव जो है इस आयु में किस प्रकार से

1525
01:56:02,800 --> 01:56:07,280
यात्रा करते हैं पूरे भारत में सनातन धर्म के सर्वोच्च

1526
01:56:07,280 --> 01:56:11,400
पद पर बैठे बैठने वाले शंकराचार्य हैय देखिए कैसे बैठे

1527
01:56:11,400 --> 01:56:15,520
हुए हैं क्यों बैठे हुए हैं क्योंकि

1528
01:56:15,520 --> 01:56:21,520
इनको चिंता है धर्म की

1529
01:56:23,680 --> 01:56:27,840
है ना तो आप लोग इतना ना करें मगर अपने

1530
01:56:27,840 --> 01:56:31,880
आसपास के मंदिरों में आप लोग अवश्य ही धर्म रक्षा गोष्ठी

1531
01:56:31,880 --> 01:56:36,000
अवश्य करें और जी जी गोष्ठी करने

1532
01:56:36,000 --> 01:56:40,040
में सहायता के लिए जो निर्देशन चाहिए किस प्रकार होनी है

1533
01:56:40,040 --> 01:56:44,200
तो गोवर्धन मठ की ऐप है वहां पर आप जाइए वहां आप

1534
01:56:44,200 --> 01:56:48,760
उसको रजिस्टर्ड कर लेंगे अपना वहां से आपको सारी चीजें उपलब्ध हो जाएंगी

1535
01:56:48,760 --> 01:56:53,800
किसी भी प्रकार की सहायता के लिए आप हमसे संपर्क कर सकते हैं 7408

1536
01:56:53,800 --> 01:56:57,840
30169 यह बहुत आवश्यक है मोबाइल

1537
01:56:57,840 --> 01:57:01,920
ऑन करके लाइव स्ट्रीम में जुड़ना आसान है धरती

1538
01:57:01,920 --> 01:57:06,040
पर उतर करके धर्म रक्षा करना मायने रखता है

1539
01:57:06,040 --> 01:57:10,080
ध्यान रखिए जी वेणी माधव जी बताए जय श्री राम जय श्री

1540
01:57:10,080 --> 01:57:14,080
राम जी मैं मिथिला से हूं मैंने

1541
01:57:14,080 --> 01:57:18,800
आपका एक वीडियो देखा था य पर कि पूरी शंकराचार्य

1542
01:57:18,800 --> 01:57:23,200
जगतगुरु जी से दीक्षा कैसे ले

1543
01:57:23,200 --> 01:57:27,440
उसके बारे में आपने बताया था कि वह जहां भी गोष्ठी

1544
01:57:27,440 --> 01:57:32,200
करते हैं उसके अंत में वहां उनसे दीक्षा ली जा सकती

1545
01:57:32,200 --> 01:57:36,360
है तो हम कैसे पता करें कि वो कहां आने

1546
01:57:36,360 --> 01:57:38,840
वाले हैं मिथिला के क्षेत्र में गोवर्धन

1547
01:57:38,840 --> 01:57:42,960
में गोवर्धन मठ की जो प है उस पर यह

1548
01:57:42,960 --> 01:57:47,280
आता रहता है कि अब गुरुदेव कहां जा रहे हैं तो उस पप को आप डाउनलोड

1549
01:57:47,280 --> 01:57:51,440
कर लीजिए गोवर्धन मठ का चैनल भी है व चैनल टेलीग्राम

1550
01:57:51,440 --> 01:57:56,040
चैनल हमारा चैनल हमारा वहां पर भी आपको य मिल जाएगा गुरुदेव कहां है

1551
01:57:56,040 --> 01:58:02,040
इस समय 26 तारीख को गुरुदेव पहुंच रहे हैं जमशेदपुर

1552
01:58:02,960 --> 01:58:07,240
जमपुर ज्यादा ज्यादा दूर नहीं है वो आपसे वहा आप जा सकते

1553
01:58:07,240 --> 01:58:11,240
हैं मैं जमशेदपुर में रहता हा तो आप जाइए

1554
01:58:11,240 --> 01:58:15,320
दर्शन करिए आपका भाग्य सौभाग्यशाली है आप वैसे मैं

1555
01:58:15,320 --> 01:58:19,400
जगतगुरु जी का प्रवचन हर रोज सुनता हूं उनके कुछ उपनिषदों

1556
01:58:19,400 --> 01:58:25,000
का ब्रह्मसूत्र आदि का भी अध्यन करता हूं

1557
01:58:25,000 --> 01:58:29,240
उनसे आप ये देखिए ये ऐप है

1558
01:58:29,240 --> 01:58:33,240
जो आपको स्क्रीन पर इस समय दिखाई जा रही है यह ऐप है गोवर्धन

1559
01:58:33,240 --> 01:58:37,680
इसको डाउनलोड कर लेंगे आपको सारी सूचनाएं मिलती

1560
01:58:37,680 --> 01:58:41,880
रहेगी जी जी राजकुमार हिंदू जी बताइए

1561
01:58:41,880 --> 01:58:46,120
जय श्री

1562
01:58:46,120 --> 01:58:49,840
राम माइक ऑन

1563
01:58:49,840 --> 01:58:53,920
कर हां मैं तो इस चीज को आगे

1564
01:58:53,920 --> 01:58:58,120
लेकर चलूंगा और मैं आपसे इस बारे में व पर बात भी करूंगा कि

1565
01:58:58,120 --> 01:59:02,200
हमें क्या करना है कैसे क्या जो भी है सारा जितना

1566
01:59:02,200 --> 01:59:07,480
भी मैं हो सकता है उतना तो करूंगा बिल्कुल ठीक

1567
01:59:07,480 --> 01:59:12,280
बहुत नने पास वाले मंदिर

1568
01:59:12,280 --> 01:59:16,320
में बिल्कुल बकुल मैं मंदिर में जो भी होगा वो मैं आपसे

1569
01:59:16,320 --> 01:59:20,560
एक बार बात कर लूंगा प और जो भी आप बोलोगे वैसा करेंगे

1570
01:59:20,560 --> 01:59:25,120
आप जी बहुत बढ़िया धन्यवाद

1571
01:59:25,120 --> 01:59:29,160
हम सबको स्वयं कुछ ना कुछ करना होगा तभी हमारा धर्म

1572
01:59:29,160 --> 01:59:33,680
रक्षित होगा बिलकुल हाथ प हाथ र के बैठने से नहीं होगा

1573
01:59:33,680 --> 01:59:36,800
प्रभु

1574
01:59:36,800 --> 01:59:41,080
जी मैं इधर ही एक संस्कृत विद्यालय में अध्ययन करता

1575
01:59:41,080 --> 01:59:45,080
हूं मैं मेरे पास अधिक समय नहीं रहता मैंने ट

1576
01:59:45,080 --> 01:59:49,600
पर इसी लोगों वाले एक मतलब ट पर आपसे बात की थी

1577
01:59:49,600 --> 01:59:54,240
यही लोगो लगा हुआ था आपका जो यह पुस्तका है तो

1578
01:59:54,240 --> 01:59:58,440
मैं उस पर आपसे बात कर रहा था मैंने कहा कि छोटा मोटा

1579
01:59:58,440 --> 02:00:02,480
जो अध्ययन संबंधी सहयोग हो सकता है मैं कर सकता हूं

1580
02:00:02,480 --> 02:00:06,640
मुझे शलोक हुआ था आपने वो फम भरा है

1581
02:00:06,640 --> 02:00:10,920
आपने धर्म रक्षा के सहयोग का फॉर्म भरा है ना तो आपसे हमारी टीम

1582
02:00:10,920 --> 02:00:15,320
संपर्क करेगी संपर्क करेगी

1583
02:00:15,320 --> 02:00:19,520
क्योंकि जहां धर्म होता है ना वहां मर्यादा होती है तो हम

1584
02:00:19,520 --> 02:00:23,600
अर्थ को लेकर के बहुत ज्यादा संपन नहीं है

1585
02:00:23,600 --> 02:00:27,760
आर्थिक संसाधनों से उतने ज्यादा संपन्न नहीं है तो हर चीज थोड़ा उसमें

1586
02:00:27,760 --> 02:00:31,920
समय लग जाता है इसीलिए आप लोगों से अभी अभी कहा कि थोड़ा थोड़ा

1587
02:00:31,920 --> 02:00:36,160
अगर आप लोग सहयोग करें तो इस अभियान को बहुत बल मिलेगा जैसा

1588
02:00:36,160 --> 02:00:40,280
भी जिसका भी हो आपके पास विकल्प है एक रुप

1589
02:00:40,280 --> 02:00:44,680
प्रतिदिन से लेकर के 1 रप रप जो भी आप

1590
02:00:44,680 --> 02:00:48,760
मतलब मासिक रूप से 31 51 अगर कर सकते हैं तो वो

1591
02:00:48,760 --> 02:00:52,080
कर सकते हैं मगर अगर आप

1592
02:00:52,080 --> 02:00:56,240
थोड़ा सा भी सहयोग करते मगर सबसे ज्यादा आवश्यक यही है कि आप अपने घर के पास

1593
02:00:56,240 --> 02:01:02,240
वाले मंदिर में गोष्ठी करें और वेणी माधव जी आपसे संपर्क किया

1594
02:01:02,520 --> 02:01:06,680
जाएगा बक जब आप गोष्ठी करने जाते हैं तो ये याद

1595
02:01:06,680 --> 02:01:10,880
रखिएगा कोई आए या ना आए आप शंकराचार्य के सैनिक

1596
02:01:10,880 --> 02:01:15,360
है और आपका काम है धर्म की रक्षा आपको वहां पर बैठना

1597
02:01:15,360 --> 02:01:20,040
है चाहे कोई आए या ना आए है ना

1598
02:01:20,040 --> 02:01:26,040
जी जी धीरे धीरे लोग जुड़ेंगे

1599
02:01:27,440 --> 02:01:31,560
हा एक साथ धीरे-धीरे जुड़ेंगे लोग हमसे एक साथ तो जुड़

1600
02:01:31,560 --> 02:01:36,400
नहीं सकते कोई भी जी जी अजय विशाल भाटिया जी

1601
02:01:36,400 --> 02:01:39,240
अजय तिवारी

1602
02:01:39,240 --> 02:01:45,240
जी बोलिए विशाल जी कहां

1603
02:01:47,640 --> 02:01:53,560
गए अच्छा ज्यादा लोग हो गए हैं क्या कुछ लोग हटाने पड़े

1604
02:01:53,560 --> 02:01:58,960
ठीक है जिनकी बात पूरी हो गई हो वो थोड़ा सा स्टेज खाली कर

1605
02:01:58,960 --> 02:02:03,160
दे इनकी बात पूरी हो गई हो ठीक है

1606
02:02:03,160 --> 02:02:08,040
अब जोड़ लेते हैं विशाल

1607
02:02:08,040 --> 02:02:12,120
जी जय श्री राम

1608
02:02:12,120 --> 02:02:16,440
जी विशाल जय श्री राम जी व जो आप

1609
02:02:16,440 --> 02:02:20,640
जिस अभियान की बात कर रहे थे मेरा एक अनुरोध है

1610
02:02:20,640 --> 02:02:24,720
कि आप एक बार मैं कानपुर में रहता हूं

1611
02:02:24,720 --> 02:02:28,880
तो हमारे यहां कानपुर में हनुमान जी का एक पॉपुलर एक

1612
02:02:28,880 --> 02:02:33,040
मंदिर है पंकी मंदिर आपने सुना होगा मैं दर्शन किए वहा कई

1613
02:02:33,040 --> 02:02:37,160
बार किए है दर्शन अरे वाह तो

1614
02:02:37,160 --> 02:02:41,320
आप एक बार वहां पर आए और जो जितने भी सनातनी

1615
02:02:41,320 --> 02:02:42,720
लोग है मैं चाहता हूं एक बार

1616
02:02:42,720 --> 02:02:47,160
सब कुछ संबोधन कुछ करें तो हा आप जो है आयोजन कर लीजिए

1617
02:02:47,160 --> 02:02:52,200
हम वहां पहुंचेंगे ठीक है अच्छा

1618
02:02:52,200 --> 02:02:56,200
एक चीज के लिए मैं आपको हृदय से आभार व्यक्त करना चाहूंगा जो अभी आपने आज सुबह एक ज्रज

1619
02:02:56,200 --> 02:03:00,320
को व्रज शब्द को लेकर जो आपने रील पोस्ट की थी आपने टा पर

1620
02:03:00,320 --> 02:03:04,320
जी जी मैं ना एक चीज आपको दिखाने वाला हूं

1621
02:03:04,320 --> 02:03:09,360
यह मेरे पास भगवत गीता है ये

1622
02:03:09,360 --> 02:03:13,600
तो यही जो गवा अध्याय है ना आप जब भगवत गीता

1623
02:03:13,600 --> 02:03:17,720
का जो प्रत्येक अध्याय है ना आप जब उसके लास्ट में पढ़ेंगे तो उसमें लिखा होता है ओम तत्स

1624
02:03:17,720 --> 02:03:21,760
श्रीमद् भगवत गीता सुनिस ब्रह्म विद्या योगशास्त्र

1625
02:03:21,760 --> 02:03:25,760
श्री कृष्ण अर्जुन संवाद ठीक है तो आप जा एक एक अध्याय के

1626
02:03:25,760 --> 02:03:29,880
बाद आपको य अध्याय मिलेगा ये तो नहीं लिखा काल अर्जुन संवाद सभी अध्या में यही लिखा

1627
02:03:29,880 --> 02:03:33,120
हुआ है कृष्ण अर्जुन

1628
02:03:33,120 --> 02:03:37,360
संवाद बकुल है ना बात य देखो य तो एक छोटा

1629
02:03:37,360 --> 02:03:41,640
सा फैदान है मगर कुल मिलाकर बात यह है इनसे शास्त्रों

1630
02:03:41,640 --> 02:03:46,560
पर बात अब करनी नहीं है पहले शास्त्र को सिद्ध करो कि आप शास्त्र को शास्त्र मानते हो

1631
02:03:46,560 --> 02:03:50,680
शास्त्र को आप प्रमाणिक मानते हो तब तो बात करें क्योंकि हम जो बताएंगे आप

1632
02:03:50,680 --> 02:03:54,800
तुरंत दूसरा छलांग मार के मोगली बन

1633
02:03:54,800 --> 02:03:58,000
जाओगे आपको शास्त्र नहीं मानना है

1634
02:03:58,000 --> 02:04:02,120
शास्त्र में वो देखना है कि हमारी बात कहां पर लिखी है बस बिल्कुल

1635
02:04:02,120 --> 02:04:06,120
बिल्कुल बस वो मानना है यह देखो ये सबसे ज्यादा

1636
02:04:06,120 --> 02:04:11,880
मैंने य वाली गीता दिखाते संधि विच्छेद वाली दिख रही है आपको

1637
02:04:11,880 --> 02:04:15,920
ये यही मेरे पास है यही मेरे पास है जय दयाल गोविंद का जी

1638
02:04:15,920 --> 02:04:20,200
की होगी हा उन्हीं की है ये मेरे पास तत्व

1639
02:04:20,200 --> 02:04:24,520
भी है साधक संजीवनी भी है प्रभु संजीनी भी है गीता प्रबोधनी

1640
02:04:24,520 --> 02:04:28,760
भी है अच्छा मैं एक बात कह रहा था कि हम लोग य जो लाइव

1641
02:04:28,760 --> 02:04:32,960
रखते हैं जी जोय लाइव

1642
02:04:32,960 --> 02:04:37,200
रखते हैं इसके लिए जो लोग जुड़े हुए हैं वह कमेंट कर दे

1643
02:04:37,200 --> 02:04:41,680
कौन सा समय उनके लिए सुलभ है दो

1644
02:04:41,680 --> 02:04:45,920
पाच छ या आठ क्योंकि रात रात में बहुत ज्यादा

1645
02:04:45,920 --> 02:04:50,080
लेट हो जाता है तो आप जो है कौन सा समय

1646
02:04:50,080 --> 02:04:54,160
आपके लिए उपयुक्त है मैं

1647
02:04:54,160 --> 02:04:58,600
बस एक अपनी बात रखूं फिर मैं जी विशाल जी बोलिए अब

1648
02:04:58,600 --> 02:05:02,720
ये देखिए ये लोग गीता का ये दिखाते हैं कि मैं काल बोल रहा हूं श्री

1649
02:05:02,720 --> 02:05:06,800
कृष्ण का ये जो अब ये वही 11वां अध्याय मैंने खोला उसका मैं

1650
02:05:06,800 --> 02:05:10,920
ये 35 श्लोक मैंने खोला है उसमें लिखा

1651
02:05:10,920 --> 02:05:13,120
है संज उवाच तत्वा

1652
02:05:13,120 --> 02:05:16,280
वचनं

1653
02:05:16,280 --> 02:05:20,600
केशवसुत धारी अर्जुन ने हाथ जोड़कर उनको नमस्कार करके

1654
02:05:20,600 --> 02:05:24,600
यहां पे संजय कह रहे हैं केशव भगवान के ठीक है संजय

1655
02:05:24,600 --> 02:05:29,080
हुवा में ना हा 11 अध्याय का येय

1656
02:05:29,080 --> 02:05:33,120
35 लोक ये लोग यह बोलते हैं कि श्री कृष्ण के शरीर

1657
02:05:33,120 --> 02:05:38,040
में काल ने आकर बोलिए तो वही तो कह रहे

1658
02:05:38,040 --> 02:05:42,040
सुनो अब य केशव कह र शास्त्र के ऊपर

1659
02:05:42,040 --> 02:05:46,360
बात करने का तरीका ये है कि पहला तरीका

1660
02:05:46,360 --> 02:05:50,560
यह है कि पहली बात तो आप साबित करो कि आपके लिए पवित्र प्रमाणिक

1661
02:05:50,560 --> 02:05:54,800
है दूसरी बात यह है कि यह सनातन

1662
02:05:54,800 --> 02:05:59,160
सिद्धांत दिखाओ कि अगर यहां यह लिखा होगा य य लिखा होगा तो नहीं मानोगे

1663
02:05:59,160 --> 02:06:03,240
अलग अलग बातों को छोड़ दोगे तीसरा स्ट्रेटजी

1664
02:06:03,240 --> 02:06:08,240
यह भी है इनसे बात करने की अब कि

1665
02:06:08,240 --> 02:06:12,360
जैसे यह कह रहे हैं कि जो इनकी बात है वह सही

1666
02:06:12,360 --> 02:06:17,640
है तो अब जैसे यह करते हैं कि भाई तुमने य य बात बोली य तो यह कह

1667
02:06:17,640 --> 02:06:21,640
रहे जो स्ट्रेटजी य अपना रहे तुरंत दूसरी डल पर बैठने

1668
02:06:21,640 --> 02:06:25,840
के लिए तो हम भी तो कर सकते हैं वो चीज तो ये बात है इनका

1669
02:06:25,840 --> 02:06:28,120
मतलब इनका जो माइंड है वो

1670
02:06:28,120 --> 02:06:32,120
ऐसा पत्थर बन चुका है इनका माइंड ऐसा पत्थर बन

1671
02:06:32,120 --> 02:06:36,280
चुका है कि उसमें आप ड्रिल मशीन भी चला दोगे तो अंदर नहीं घुसेगा

1672
02:06:36,280 --> 02:06:40,560
नहीं घुसेगा उस उनको हरियाली नहीं दिखेगी इसीलिए इनका मुंह

1673
02:06:40,560 --> 02:06:45,360
बंद करने के लिए जो सार्वभौम सिद्धांत है उनकी बात मैं करता हूं इसीलिए

1674
02:06:45,360 --> 02:06:49,400
ये कई बार मेरे से बोला जाता है कि तुम शास्त्रों की बात नहीं करते हो शास्त्रों की बात करे क्या

1675
02:06:49,400 --> 02:06:54,160
भाई जब तुम उसको प्रमाण नहीं मानते हो कई बार बोला जाता है

1676
02:06:54,160 --> 02:06:58,640
अब सीधी बात अगर इस पर आ जाए कि क्या कबीर सर्वशक्तिमान

1677
02:06:58,640 --> 02:07:02,640
है अभी देखो अभी यह जो आए थे इतनी देर जो बकवास की इन्होने सब खत्म

1678
02:07:02,640 --> 02:07:06,680
हो जाता सर्व शक्तिमान की बात पर

1679
02:07:06,680 --> 02:07:10,840
हर विरोधी तंत्र नष्ट हो जाएगा बिना शास्त्रों

1680
02:07:10,840 --> 02:07:15,000
पर चर्चा किए ही क्योंकि शास्त्रों खोलेंगे उसमें तुम कहीं प्रमाण

1681
02:07:15,000 --> 02:07:19,240
मानते हो कहीं नहीं मानते हो मगज मारी चार घंटे के बाद निष्कर्ष कुछ नहीं

1682
02:07:19,240 --> 02:07:22,200
कुछ नहीं निष्कर्ष

1683
02:07:22,200 --> 02:07:26,400
चलिए जी अवारी जी बोलिए जी विशाल जी आप बात पूरी कर

1684
02:07:26,400 --> 02:07:30,600
लीजिए इन दिनों अभी ये लोग रामचरित मानस पर आजकल यह लोग बहुत

1685
02:07:30,600 --> 02:07:35,280
बोल रहे हैं इनको राम चित मानस में कबीर दिख गए सुनने में आ रहा है मेरे को

1686
02:07:35,280 --> 02:07:39,440
अभी ये जो एक एक और जो हमारे एक मित्र है भागवत भागवत

1687
02:07:39,440 --> 02:07:43,200
वचन नाम से जो इं पर चैनल चलाते हैं मैं भी

1688
02:07:43,200 --> 02:07:47,320
उनका देखता हूं तो अब जैसे रामचरित मानस का सुंदर कांड है उसमें

1689
02:07:47,320 --> 02:07:51,560
हनुमान जी भीषण को बोलते हैं कि अगर कोई सुबह सुबह हम लोगों का कोई नाम लेता

1690
02:07:51,560 --> 02:07:55,840
तो उसको खाना नहीं मिलता रात लीज नाम हमारा त दिन ताही ना मिले आहारा

1691
02:07:55,840 --> 02:07:59,840
तो इसमें ये लोग बोलते हैं कि क्योंकि हनुमान जी ने कहा कि हमारा सुबह कोई नाम लेता है

1692
02:07:59,840 --> 02:08:04,480
तो उसको खाना नहीं मिलता इसलिए हमको हनुमान जी की पूजा नहीं करनी

1693
02:08:04,480 --> 02:08:08,480
चाहिए जबकि मैंने जहां तक समझे उन्होंने भी बताया कि वहां पर हनुमान

1694
02:08:08,480 --> 02:08:12,520
जी वो अपनी दनता को प्रकट कर रहे हैं जो जैसा उनका स्वभाव

1695
02:08:12,520 --> 02:08:17,040
हैकी उदारता है कि वो ऐसा बता रहे हैं कि भाई

1696
02:08:17,040 --> 02:08:21,120
कि मैं मेरा जो जीवन शैली ऐसी है कि अगर मेरा कोई वो कर

1697
02:08:21,120 --> 02:08:25,200
ले साक्षात्कार तो दिन भर ऐसा होगा मगर वहीं पर

1698
02:08:25,200 --> 02:08:29,680
दूसरी बात यह भी तो है कि जय जय जय हनुमान गोसाई

1699
02:08:29,680 --> 02:08:33,960
कृपा करो गुरुदेव की नाई जो सत बार पाठ कर कोई छूट

1700
02:08:33,960 --> 02:08:38,920
बंदी महा कोई इनका क्या नारा है जय बंदी छोड़

1701
02:08:38,920 --> 02:08:42,920
इनका क्या नारा है और कौन किससे बंदी बंदी किससे

1702
02:08:42,920 --> 02:08:47,720
छूट रही है छूटे ही बंदी महा सुई

1703
02:08:47,720 --> 02:08:51,720
छूट बंदी मई सुंद प

1704
02:08:51,720 --> 02:08:56,080
कह रहे हैं ना उसी सुंदर कांड के मंगलाचरण में हनुमान जी का एक श्लोक गोस्वामी जी ने लिखा है अतुलित

1705
02:08:56,080 --> 02:08:58,280
बलधाम हेम शैला बदेह धनु

1706
02:08:58,280 --> 02:09:02,400
जवन कृषण ज्ञानी नामा अग्र गणम सकल गुण निधानम वान

1707
02:09:02,400 --> 02:09:06,560
राणा दशम रघुपति प्रिय भक्त बात जात नमामि जय श्री

1708
02:09:06,560 --> 02:09:08,920
राम

1709
02:09:08,920 --> 02:09:13,080
ज ठीक है सभी का आभार आप लोग गोष्ठी

1710
02:09:13,080 --> 02:09:17,280
शुरू करिए अगर प्रकल्प से जुड़ना है और

1711
02:09:17,280 --> 02:09:21,800
तो आप जो है व पर हमसे संपर्क करें और

1712
02:09:21,800 --> 02:09:24,480
फिर आते

1713
02:09:24,480 --> 02:09:28,560
हैं जय श्री राम आप कुछ

1714
02:09:28,560 --> 02:09:32,600
कह रहे हैं जी जी मेरा एक कुछ प्रश्न आ

1715
02:09:32,600 --> 02:09:37,480
गया था तो पूछ ले आवाज बहुत कम आ रही है

1716
02:09:37,480 --> 02:09:41,520
आप मैं बोल रहा था कि एक प्रश्न मेरे मन में आ गया

1717
02:09:41,520 --> 02:09:45,880
तो मैं सोचा पूछ लू आपसे अभी हा

1718
02:09:45,880 --> 02:09:50,520
आपने एक बार कहा था अने लाइव स्ट्रीम में शंकरा जी

1719
02:09:50,520 --> 02:09:54,520
ब को मानते

1720
02:09:54,520 --> 02:09:58,920
तो उस पर मेरा ये प्रश्न आ गया था कि बली होता है तो उस पर क्या

1721
02:09:58,920 --> 02:10:03,520
म आप ये बताइए आप यह बताइए

1722
02:10:03,520 --> 02:10:07,600
जैसे मान लीजिए हमारे घर में किसी की कोई रोगी

1723
02:10:07,600 --> 02:10:11,680
हो जाए बहुत ज्यादा और उसको जो है फिश

1724
02:10:11,680 --> 02:10:13,680
यल की आवश्यकता पड़े हदय

1725
02:10:13,680 --> 02:10:17,760
रोग के निवारण के लिए उस स्थिति

1726
02:10:17,760 --> 02:10:21,920
में आप दवाई लाएंगे उनके खाने की लिए नहीं

1727
02:10:21,920 --> 02:10:26,000
खाए आज जो हमारा समाज है शाकाहारी

1728
02:10:26,000 --> 02:10:30,840
होते हुए भी दवाई के रूप में औषधि के रूप में इनके प्रकार

1729
02:10:30,840 --> 02:10:35,120
पशु से निर्मित उत्पाद ले रहा है ले रहा है ना उसी

1730
02:10:35,120 --> 02:10:39,560
पर लगाम लगाने के लिए धर्म के द्वारा बली इत्यादि का प्रावधान है

1731
02:10:39,560 --> 02:10:43,680
इस तरह की स्थिति से निकलने के लिए आज हम

1732
02:10:43,680 --> 02:10:47,840
जो खुला तरीके से ले रहे हैं आज हम जो निर् दंद होकर

1733
02:10:47,840 --> 02:10:52,640
के ले रहे हैं उसी को उन्होंने सिस्टमाइज की धर्म

1734
02:10:52,640 --> 02:10:56,880
ने शंकराचार्य जी ने नहीं शास्त्रों ने उन्होंने

1735
02:10:56,880 --> 02:11:01,440
उसको सिस्टमाइज किया है कि आप ऐसे नहीं ले सकते किसी का मास

1736
02:11:01,440 --> 02:11:06,400
किसी का पशु का वो उसमें भी आपको तरीके से लेना

1737
02:11:06,400 --> 02:11:10,400
होगा वो तरीके का नाम है वो भेंट बली का अर्थ होता

1738
02:11:10,400 --> 02:11:14,480
है भेंट और कहीं कहीं पर इन परंपराओं का जो पालन

1739
02:11:14,480 --> 02:11:16,880
हो रहा

1740
02:11:16,880 --> 02:11:20,880
है जैसे वहां पशुबली होती है तो ऐसा नहीं

1741
02:11:20,880 --> 02:11:25,000
है कि अगर आपको आवश्यकता नहीं है फिर भी आपको पशु बली देनी है वो लोगों

1742
02:11:25,000 --> 02:11:28,760
का अपना वो है चुनाव बली

1743
02:11:28,760 --> 02:11:32,800
का अर्थ है कि वहां पर आप जो है कुछ आटे का गुता

1744
02:11:32,800 --> 02:11:37,080
हुआ भी बना सकते हैं और उसको भी भेंट स्वरूप प्रदान कर सकते हैं बलि

1745
02:11:37,080 --> 02:11:41,240
का अर्थ है शाब्दिक अर्थ भेंट अब कोई उसका दुरुपयोग

1746
02:11:41,240 --> 02:11:45,400
कर रहा है कि बली किसी कारण वश आपको दी गई

1747
02:11:45,400 --> 02:11:50,200
है मगर क्योंकि कारण वश दे दी गई तो अब हम हमेशा करेंगे

1748
02:11:50,200 --> 02:11:54,640
और तो और अगर व्यक्ति केवल बलि के ऊपर ही आश्रित

1749
02:11:54,640 --> 02:11:58,680
हो जाए मास खाने के लिए तो मास खाना बहुत कम हो जाएगा

1750
02:11:58,680 --> 02:12:02,800
दुनिया में क्योंकि बलि देने के लिए बहुत

1751
02:12:02,800 --> 02:12:07,720
बड़े विधि विधान होते हैं बहुत सारे विधि विधान होते हैं

1752
02:12:07,720 --> 02:12:11,960
मगर अगर जो व्यक्ति धर्म के नाम पर बलि देते हुए मांस

1753
02:12:11,960 --> 02:12:16,160
खा रहा है वह धार्मिक इसलिए सिद्ध नहीं होता क्योंकि

1754
02:12:16,160 --> 02:12:20,400
बली के द्वारा मास तो दिया मगर कसाई के द्वारा मास

1755
02:12:20,400 --> 02:12:24,600
मना है मना है तो व्यक्ति

1756
02:12:24,600 --> 02:12:28,600
क्या कर रहा है इधर तो देखो देखो बली बली है बली बली से

1757
02:12:28,600 --> 02:12:32,720
अपने उसको जस्टिफाई कर रहा है मांसाहार को और फिर पूरे साल व

1758
02:12:32,720 --> 02:12:37,040
मांस खा रहा है बिना विधि वाला तो उससे क्या है उसके

1759
02:12:37,040 --> 02:12:41,160
जीवन में अगर वह इस पर आ जाए कि मैं सिर्फ बली का ही मांस खाऊंगा तो

1760
02:12:41,160 --> 02:12:43,800
थोड़े ही दिन में उसकी मास खाने की प्रवृत्ति भी

1761
02:12:43,800 --> 02:12:48,000
नष्ट हो जाएगी क्योंकि बलि देने के लिए तमाम

1762
02:12:48,000 --> 02:12:52,080
सारे विधि विधान होते हैं जैसे मान लीजिए कि

1763
02:12:52,080 --> 02:12:56,720
किसी ने कहा कि मुझे जो है मदरा पान करना

1764
02:12:56,720 --> 02:13:00,760
है तो उसके पिता ने उसको मना नहीं किया

1765
02:13:00,760 --> 02:13:05,240
मना कर देंगे तो विरोधी हो जाएगा बागी हो जाएगा है ना

1766
02:13:05,240 --> 02:13:09,600
तो इसलिए उसके पिता ने उससे कहा एक काम करो 25

1767
02:13:09,600 --> 02:13:14,280
किलोमीटर दूर पैदल जाओ और वहां से पैदल वहां पर तुमको

1768
02:13:14,280 --> 02:13:18,560
एक पैक मिलेगा मदरा का एक ढक्कन मिलेगा उसको

1769
02:13:18,560 --> 02:13:22,880
ले आओ फिर यहां पर लाकर के घी तेल बाती

1770
02:13:22,880 --> 02:13:27,280
यह सब करके पूजन करके उसके बाद ही तुम उसको पीना

1771
02:13:27,280 --> 02:13:31,440
मतलब तुम्हारे सात आ घंटे जो है 10 घंटे नष्ट

1772
02:13:31,440 --> 02:13:35,960
होंगे तब आपको एक घूंट जो है वह पीने को मिलेगी तो इसमें वह बा

1773
02:13:35,960 --> 02:13:40,080
नहीं होगा और उसके मन में धीरे धीरे इस

1774
02:13:40,080 --> 02:13:44,160
परिसंघ विधि के कारण उसके जीवन में मधरा के प्रति

1775
02:13:44,160 --> 02:13:48,480
जो आसक्ति है उसमें न्यूनता आएगी जैसे हमारे

1776
02:13:48,480 --> 02:13:53,200
आज भी हमने देखा होगा कि हम मंगलवार को य मंगलवार को वो नहीं खाते

1777
02:13:53,200 --> 02:13:57,440
हा जी हा जी यह परि संख्या विधि है मंगलवार के

1778
02:13:57,440 --> 02:13:59,360
दिन अपनी

1779
02:13:59,360 --> 02:14:03,480
आसक्ति हों पर लगाम लगाना सीख रहे हैं हम कि हम

1780
02:14:03,480 --> 02:14:08,040
कैसे बिना प्याज लहसुन के रहे या कोई अगर

1781
02:14:08,040 --> 02:14:12,200
कोई और आपत्ति जनक खाद्य पदार्थ ग्रहण करता है

1782
02:14:12,200 --> 02:14:16,240
तो हम उसके बिना कैसे रहे एक दिन हम सीखते हैं यही

1783
02:14:16,240 --> 02:14:20,280
पर संख्या विधि भेंट वो भेंट बली इत्यादि के रूप में दी

1784
02:14:20,280 --> 02:14:25,040
गई जिसका दुरुपयोग लोगों द्वारा किया जाता

1785
02:14:25,040 --> 02:14:29,160
है ठीक है तो इन शॉर्ट अगर सूत्रम

1786
02:14:29,160 --> 02:14:33,280
शैली में बोले तो जो बलि इत्यादि है

1787
02:14:33,280 --> 02:14:37,880
भेंट इत्यादि है वो अधिकार नहीं अनुमति

1788
02:14:37,880 --> 02:14:42,240
है अधिकार नहीं है अनुमति है हमने तुमको अलाउ

1789
02:14:42,240 --> 02:14:46,760
कर दिया इस इस स्थिति में इस इस तरीके से आप खा

1790
02:14:46,760 --> 02:14:50,840
लेना मगर उसने क्या किया कि अनुमति को अधिकार समझ लिया व्यक्ति

1791
02:14:50,840 --> 02:14:54,960
ने ये तो मेरा जन्म सिद्ध अधिकार है

1792
02:14:54,960 --> 02:14:59,280
है ना ये चीज है ठीक है यदि वो

1793
02:14:59,280 --> 02:15:01,400
नियम

1794
02:15:01,400 --> 02:15:06,240
जी यदि वो नियम से भी जाएगा तो उसको मतलब पाप नहीं

1795
02:15:06,240 --> 02:15:10,240
लगेगा नियम से जाएगा मतलब नियम शास्त्रों में

1796
02:15:10,240 --> 02:15:14,280
विधि विधान है उसके हिसाब से अगर तो उसको पाएगा तो

1797
02:15:14,280 --> 02:15:14,780
फिर

1798
02:15:14,480 --> 02:15:18,760
उसको पाप लगेगा कि नहीं लगेगा ये वाला प्रश्न था पाप

1799
02:15:18,760 --> 02:15:23,040
की बात ऐसी है इसको समझ लीजिए

1800
02:15:23,040 --> 02:15:27,360
कि अगर जैसे कुछ कर्म ऐसे होते हैं

1801
02:15:27,360 --> 02:15:31,360
जिसको हम करते हुए अगर विधि विधान से करें तो धर्म की सीमा में

1802
02:15:31,360 --> 02:15:35,400
रहेंगे हालांकि वह कर्म भी आपको त्यागने

1803
02:15:35,400 --> 02:15:39,560
हैं हालांकि उनका पर्यान भी त्यागने में है मगर

1804
02:15:39,560 --> 02:15:44,320
हम विधि विधान में रहेंगे तो हम अधर्मी नहीं कहलाएंगे तो

1805
02:15:44,320 --> 02:15:48,560
इसलिए ही बलि का प्रावधान है कि अगर हम बिना विधि के खाएंगे

1806
02:15:48,560 --> 02:15:53,000
तो पापी हो जाएंगे तो हम धर्म के बाहर रहेंगे जैसे कि किसी हॉस्पिटल

1807
02:15:53,000 --> 02:15:57,240
में हम ये नहीं लिख सकते कि यहां आने वाला कोई रोगी जो है

1808
02:15:57,240 --> 02:16:01,440
कोई भी रोगी ना हो हॉस्पिटल में हम ये लिख देंगे यहां आने

1809
02:16:01,440 --> 02:16:05,480
वाला कोई भी रोगी ना हो तो फिर हॉस्पिटल का अस्तित्व क्या

1810
02:16:05,480 --> 02:16:10,040
है तो धर्म का कार्य है व्यक्ति को यह सिखाना

1811
02:16:10,040 --> 02:16:14,960
कि तुम कैसे भी हो हम तुम्हें ठीक कर देंगे अधर्मी से धर्मी बना देंगे

1812
02:16:14,960 --> 02:16:19,120
इसलिए यह टैग है कि अगर तुम मांस खाने वाले व्यक्ति हो तो

1813
02:16:19,120 --> 02:16:23,280
तुम आ जाओ तुम भी हिंदू हो मगर तुम इस इस तरीके

1814
02:16:23,280 --> 02:16:27,680
से मांस खा सकते हो तो तुम हिंदू नहीं कहलाओगे अधर्मी

1815
02:16:27,680 --> 02:16:29,520
नहीं कहलाओगे और जब

1816
02:16:29,520 --> 02:16:35,520
वह व्यक्ति हिंदू होने के लिए धार्मिक होने के

1817
02:16:35,880 --> 02:16:41,480
लिए गोविंद गुरुकुल जी एक मिनट के लिए बोल रहे हैं शिवान

1818
02:16:41,480 --> 02:16:45,560
जी अब गोविंद गुरुकुल जी ने तो इतना पीछे इतनी

1819
02:16:45,560 --> 02:16:49,880
सारी चीजें कर रखी है अपने बारे में

1820
02:16:49,880 --> 02:16:53,920
बड़ी विपदा है को ऊपर लेने में तो उस हिसाब

1821
02:16:53,920 --> 02:16:57,960
से ये कहा गया है कि ठीक है आप आ जाओ और आप इस

1822
02:16:57,960 --> 02:17:02,080
तरीके से अगर मास खाओगे तो आप हिंदू नहीं कहलाओगे अधर्मी नहीं कहलाओगे

1823
02:17:02,080 --> 02:17:06,960
और जब वह व्यक्ति इस तरीके से खाएगा तो हिंदू होते होते हुए

1824
02:17:06,960 --> 02:17:11,640
धार्मिक होते हुए धीरे-धीरे उसका परवन मांसाहार के छूट जाने में

1825
02:17:11,640 --> 02:17:15,640
क्योंकि अंततोगत्वा क्या कहा गया मनुस्मृति में

1826
02:17:15,640 --> 02:17:19,840
कि मांस खाने को त्याग करने वाला 100 वर्षों

1827
02:17:19,840 --> 02:17:24,280
तक प्रतिवर्ष जो अश्वमेध यज्ञ कराएगा उतना पुण्य मिलता है

1828
02:17:24,280 --> 02:17:28,400
तो परेसान किसम है कि आप अगर त्याग दो वो सबसे श्रेष्ठ है

1829
02:17:28,400 --> 02:17:32,160
निवृत्ति महा

1830
02:17:32,160 --> 02:17:36,600
फला ठीक है जी धन्यवाद

1831
02:17:36,600 --> 02:17:41,200
जय श्री राम जय श्री राम राधे राधे हरे कृष्णा

1832
02:17:41,200 --> 02:17:45,720
धरातल प जुड़िए आप सबसे निवेदन है

1833
02:17:45,720 --> 02:17:51,720
ठीक है सभी को जय श्री राम 10:30 बज चुके हैं और

1834
02:17:59,680 --> 02:18:04,000
वेदों के अनुसार की हुई जो भेंट है या बलि

1835
02:18:04,000 --> 02:18:08,760
है वह गलत ऐसे नहीं है जैसे एक डॉक्टर जो होता

1836
02:18:08,760 --> 02:18:13,120
है कोई अगर आपको कांटा चुबे

1837
02:18:13,120 --> 02:18:17,440
तब भी उसको हिंसा माना जाएगा छोटा सा कांटा

1838
02:18:17,440 --> 02:18:21,480
मगर वहीं पर डॉक्टर आपका मास भी काट लेता है तब भी उसको हिंसा नहीं कहा जाता

1839
02:18:21,480 --> 02:18:25,480
क्यों क्योंकि उसका परव सान हित में है इसी

1840
02:18:25,480 --> 02:18:29,680
प्रकार से जो वेदा दि शास्त्र धर्मशास्त्र है इनके द्वारा

1841
02:18:29,680 --> 02:18:33,680
जो अमुक अमुक स्थितियों में विधान किया गया है बलि

1842
02:18:33,680 --> 02:18:37,840
इत्यादि भेट इत्यादि के रूप में उसका परवन उसके छूट जाने

1843
02:18:37,840 --> 02:18:42,280
में है इस कारण से उसको हम

1844
02:18:42,280 --> 02:18:46,920
यह नहीं कह सकते जो है पाप है या हिंसा है या

1845
02:18:46,920 --> 02:18:47,920
धर्म

1846
02:18:47,920 --> 02:18:53,920
सबसे जरूरी बात है

1847
02:18:56,440 --> 02:19:01,160
सबसे आवश्यक बात यह है कि

1848
02:19:01,160 --> 02:19:05,760
जो लोग बलि का आलंबन लेते हुए मास खाते हैं जो लोग

1849
02:19:05,760 --> 02:19:09,880
वैसे मुझे नहीं लगता कि ऐसे कितने होंगे जो सिर्फ बली का आलंबन लेते हुए मास

1850
02:19:09,880 --> 02:19:14,080
खाते होंगे मगर यदि बलि का आलंबन लेते हुए

1851
02:19:14,080 --> 02:19:18,400
ही मांस खाएंगे तो उसका परिवन भी मास को त्यागने

1852
02:19:18,400 --> 02:19:22,520
में है और अगर आप वैसे ही त्याग सकते हैं

1853
02:19:22,520 --> 02:19:26,520
अपनी इंद्रियों पर नियंत्रण रख सकते हैं तो उत्तम यही है कि आप

1854
02:19:26,520 --> 02:19:29,240
उसको त्याग

1855
02:19:29,240 --> 02:19:34,000
दे जय शर्मा जी बताएं

1856
02:19:34,000 --> 02:19:38,160
हम लोगों के जाने का समय हो गया कोई विशेष बात है तो आप बता दीजिए अन्यथा किसी और दिन

1857
02:19:38,160 --> 02:19:42,760
हम लोग बात कर लेंगे जी बताइए जय श्री राम राधे

1858
02:19:42,760 --> 02:19:47,040
राधे राधे राधे भगवन मेरा तो मेरा तो फलाल

1859
02:19:47,040 --> 02:19:51,200
एक प्रश्न था अभी मेरे पिताजी से कुछ चर्चा चल रही थी तो

1860
02:19:51,200 --> 02:19:55,600
बात यह थी कि पिताजी मेरे बेड बिस्तर पर ही है उनका स्वास्थ्य

1861
02:19:55,600 --> 02:19:59,600
ठीक नहीं है तो सोच क्रिया वगैरह भी उनकी बिस्तर पर ही होती

1862
02:19:59,600 --> 02:20:03,520
है तो अशुद्धि का कारण बना है तो

1863
02:20:03,520 --> 02:20:07,560
नाम जब तो वाचिक वो खूब करते ही है मन से लेकिन परंतु मेरे

1864
02:20:07,560 --> 02:20:11,560
मन में ऐसा भाव आया मैं उनको यह कहूं कि पिताजी माला पर

1865
02:20:11,560 --> 02:20:15,960
भी करो तो उसका हिसाब रहेगा कोई भी एक माला रुद्राक्ष

1866
02:20:15,960 --> 02:20:20,920
हो या तुलसी हो तो उस पर भगवान का स्मरण आप जरूर कीजिए

1867
02:20:20,920 --> 02:20:25,160
जी का एक इस बारे में आप जो है

1868
02:20:25,160 --> 02:20:29,360
हमारा टेलीग्राम चैनल है विधि विषयक प्रश्न है ये

1869
02:20:29,360 --> 02:20:33,360
आप टेलीग्राम चैनल है वहां पर आप जो है यह प्रश्न लिख दीजिएगा तो

1870
02:20:33,360 --> 02:20:37,400
आचार्य श्री से इस बारे में क्या बेस्ट किया जा सकता है वह

1871
02:20:37,400 --> 02:20:41,600
उनका एक प्रामाणिक आदेश हम प्राप्त कर लेंगे वह आपको मिल

1872
02:20:41,600 --> 02:20:45,840
जाएगा इस ट पर आप संपर्क कर लीजिए या फिर आप टेलीग्राम

1873
02:20:45,840 --> 02:20:49,840
चैनल पर आ जाइए आचार्य श्री ने अभी तक जो हमें बताया

1874
02:20:49,840 --> 02:20:53,920
गया है उसमें यह है कि अपने

1875
02:20:53,920 --> 02:20:58,080
मन से कोई माला धारण ना करें तब तक जब तक

1876
02:20:58,080 --> 02:21:02,280
आपके पास यदि कोई माला मतलब गुरु का वो नहीं है सानिध्य तो आप

1877
02:21:02,280 --> 02:21:06,760
स्फटिक की माला का उपयोग कर सकते हैं पिताजी ने

1878
02:21:06,760 --> 02:21:10,760
तो गुरु धारण कर रखे हैं परंतु मैंने उनको एक बात यही

1879
02:21:10,760 --> 02:21:15,440
कही थी पापा कि भगवान का नाम

1880
02:21:15,440 --> 02:21:18,560
तो आप माला प किसी भी अवस्था में जप सकते हैं

1881
02:21:18,560 --> 02:21:22,840
जैसे उसका एक उदाहरण मैंने दिया था कि हम भी कोई भी कर्मकांड

1882
02:21:22,840 --> 02:21:26,920
कराते हैं पूजा में तो स मत्र बो कर सकते हैं पूरी शंकराचार्य

1883
02:21:26,920 --> 02:21:31,160
जी से जगतगुरु जी से मैंने पूछा था तो

1884
02:21:31,160 --> 02:21:35,280
एक माता जी थी व उनके कुछ परेशानी थी तो उन्होंने कहा

1885
02:21:35,280 --> 02:21:39,360
था वो जहां पर उनका सहजता है बैठ पाने

1886
02:21:39,360 --> 02:21:44,080
की या लेट पाने की वहां पर भी व जाप कर सकते हैं

1887
02:21:44,080 --> 02:21:48,440
मगर शुद्धि का शुद्धि शुद्धि के बारे में एक बार आप कंफर्म

1888
02:21:48,440 --> 02:21:52,440
कर लीजिएगा जो आचार्य श्री का चैनल है हमने

1889
02:21:52,440 --> 02:21:56,600
बताया यहां पर कई बार अ प्रयागराज वाले आचार्य श्री

1890
02:21:56,600 --> 02:22:00,640
हैं वो करपात्री जी के कृपा पात्र शिष्य भी है गुरुदेव के गुरु

1891
02:22:00,640 --> 02:22:04,800
भाई हैं वो आपको विधि विषयक बिल्कुल प्रामाणिक प्रामाणिक बातें आपको

1892
02:22:04,800 --> 02:22:09,160
बता देंगे आप हमारे टेलीग्राम चैनल पर ये प्रश्न कर लीजिएगा

1893
02:22:09,160 --> 02:22:13,440
या फिर व के माध्यम से जुड़ जाइएगा तो हम आपको थोड़ा सा

1894
02:22:13,440 --> 02:22:17,560
बता देंगे विधि विषयक में हम यहां पर नहीं

1895
02:22:17,560 --> 02:22:21,600
बोलते हैं क्योंकि विधि विधान जो है बहुत वैसे हैं और

1896
02:22:21,600 --> 02:22:25,600
उसमें बृहद शास्त्रों की व्याख्या है तो उसमें आचार्य की वाणी को ही

1897
02:22:25,600 --> 02:22:30,200
प्रमाण मान के चलते हैं आचार्य जी ने जो बता दिए विधि विधा उसको मानले

1898
02:22:30,200 --> 02:22:34,000
ठीक है तो बहुत धन्यवाद जी

1899
02:22:34,000 --> 02:22:38,080
जी जी जी ये उनका चैनल है देखिए यह उनका चैनल

1900
02:22:38,080 --> 02:22:42,200
है और बहुत ही सरल हृदय के हैं और आप हमसे

1901
02:22:42,200 --> 02:22:46,240
संपर्क करिएगा व पर हा टेलीग्राम चैनल पर आपसे पूछ

1902
02:22:46,240 --> 02:22:50,480
सकते हैं अपना प्रश्न वहा लिख देंगे आपको उत्तर प्राप्त हो जाएगा ठीक है

1903
02:22:50,480 --> 02:22:56,480
ज श्री राम जय श्री राम प्रभु

1904
02:23:00,480 --> 02:23:04,680
जी तो ठीक है फिर पूरी करते

1905
02:23:04,680 --> 02:23:08,680
हैं सभी को जय श्री राम
