1
00:00:02,880 --> 00:00:08,120
तो सभी को जय श्री

2
00:00:08,120 --> 00:00:13,360
राम आशा करते हैं आप सभी लोग कुशल मंगल

3
00:00:13,360 --> 00:00:17,880
होंगे आपकी आज की जो लाइव स्ट्रीम में बहुत

4
00:00:17,880 --> 00:00:22,360
विशेष है और विशेषता का कारण यह है कि अभी तक

5
00:00:22,360 --> 00:00:25,520
हमने स्पेशली

6
00:00:25,520 --> 00:00:29,640
रामपाल की जो स्टडी है पूरा उसका निचोड़

7
00:00:29,640 --> 00:00:34,320
क्या है है उसकी आज थोड़ा सा उस पर बात करेंगे तो आपको

8
00:00:34,320 --> 00:00:38,400
सूत्रा क्मक शैली में काफी चीजें पता चल जाएंगी सूत्रा क्मक शैली

9
00:00:38,400 --> 00:00:42,560
इसलिए कि नॉलेज जो होती है वो हमें मिलती रहती

10
00:00:42,560 --> 00:00:46,720
है कि यहां ये लिखा है वहां वो लिखा है मगर जब तक

11
00:00:46,720 --> 00:00:50,960
वह एक संक्षिप्त विवरण में हमारे पास नहीं आती तो हम सरलता से उसका उपयोग

12
00:00:50,960 --> 00:00:55,880
नहीं कर पाते तो आज हम उस शैली में

13
00:00:55,880 --> 00:01:00,720
बात करेंगे सूत्रा क्मक शैली में कि हमें

14
00:01:00,720 --> 00:01:06,080
कौन-कौन से ऐसे सूत्र मिले हैं जिनके आधार

15
00:01:06,080 --> 00:01:08,360
पर

16
00:01:08,360 --> 00:01:12,560
रामपाल वालों का जो वास्तविकता है उनकी

17
00:01:12,560 --> 00:01:17,520
जो वह आपको समझ में आ जाती है

18
00:01:17,520 --> 00:01:18,520
तो

19
00:01:18,520 --> 00:01:24,520
हम लोग शुरू करेंगे

20
00:01:32,000 --> 00:01:36,080
हम लोग शुरू करेंगे सबसे पहले जो

21
00:01:36,080 --> 00:01:40,120
रामपाल के द्वारा परिभाषित प्रतिपादित होने वाला जो

22
00:01:40,120 --> 00:01:42,240
ईश्वर

23
00:01:42,240 --> 00:01:46,600
है उसकी सर्व सामर्थ्य पर सर्व

24
00:01:46,600 --> 00:01:50,560
व्यापकता पर

25
00:01:50,560 --> 00:01:54,560
और वह कितना क्रेडिबिलिटी है उसकी क्योंकि इनका

26
00:01:54,560 --> 00:01:59,200
कहना है कि एक पांचवा वेद और है सूक्ष्म वेद

27
00:01:59,200 --> 00:02:02,240
वो उन्होने

28
00:02:02,240 --> 00:02:06,800
लिखा सबसे पहली बात है कि रामपाल

29
00:02:06,800 --> 00:02:10,920
दास जी के द्वारा जो प्रतिपादित होने वाला ईश्वर है वह कण

30
00:02:10,920 --> 00:02:14,960
कण में नहीं है अब्राम जो आइडल जीी

31
00:02:14,960 --> 00:02:19,360
है उसके अनुसार जो वहां का जो भी देवी देवता टाइप का जो ईश्वर है

32
00:02:19,360 --> 00:02:23,600
उसके अनुसार यह भी किसी सातव आसमान नाम

33
00:02:23,600 --> 00:02:27,520
की जगह पर बैठता है

34
00:02:27,520 --> 00:02:32,000
और वहां बैठ कर के पूरी दुनिया को ऑपरेट करता है

35
00:02:32,000 --> 00:02:36,200
अब इसमें सवाल वही आ जाता है जो हम हर बार पूछते

36
00:02:36,200 --> 00:02:41,560
हैं रामपाल वालों से

37
00:02:41,560 --> 00:02:45,760
कि अगर वह पूरे ब्रह्मांड

38
00:02:45,760 --> 00:02:50,920
में सर्वव्यापक नहीं है बराबर रूप से

39
00:02:50,920 --> 00:02:55,000
तो फिर उसकी जो सत्ता है उसमें

40
00:02:55,000 --> 00:02:59,120
अंतर आएगा जहां पर वह स्वयं बैठा है वहां पर सत्ता ज्यादा होगी

41
00:02:59,120 --> 00:03:03,320
और जहां पर व स्वयं नहीं है उसकी शक्ति है जो कि यह कहते हैं कि वह

42
00:03:03,320 --> 00:03:08,600
नहीं उसकी शक्ति पूरे पूरे ब्रह्मांड में व्याप्त

43
00:03:08,600 --> 00:03:12,760
तो हां शायद 72 आसमान होंगे 72 आसमान

44
00:03:12,760 --> 00:03:17,120
होंगे इस बारे में ज्यादा क्लेरिटी नहीं मगर हा वह किसी एक

45
00:03:17,120 --> 00:03:21,240
विशेष परि विशेष जगह पर स्थान पर बैठता

46
00:03:21,240 --> 00:03:23,960
है

47
00:03:23,960 --> 00:03:28,560
तो जब वह हर जगह समान रूप से व्याप्त नहीं है

48
00:03:28,560 --> 00:03:32,640
तो इसका म मतलब है कि उसकी जो सत्ता है वह कहीं पर कम

49
00:03:32,640 --> 00:03:36,640
और कहीं पर ज्यादा है इसका अर्थ है कि वह सर्वव्यापक

50
00:03:36,640 --> 00:03:40,760
समान रूप से नहीं है वह बाधित है सीमित है

51
00:03:40,760 --> 00:03:44,960
जितना वह अपने सतलोक में बैठ कर के या व जो 7वा आसमान है सातवा आसमान

52
00:03:44,960 --> 00:03:49,160
है वहां पर बैठ कर के जितना पावरफुल है उसकी उतनी पावर यहां

53
00:03:49,160 --> 00:03:53,240
पर नहीं है दूसरी जगह इसके साथ ही साथ दूसरा

54
00:03:53,240 --> 00:03:58,000
दार्शनिक वाला प्रश्न य आता है कि जहां पर वो कबीर

55
00:03:58,000 --> 00:04:02,000
अनंत अनादि से बैठे हैं

56
00:04:02,000 --> 00:04:06,280
वो जगह किसने बनाई क्योंकि वो तो वहां पर बैठे हैं उनसे

57
00:04:06,280 --> 00:04:10,360
बाहर है वो जगह तभी तो वहां बैठे हैं तो वह जगह किसने

58
00:04:10,360 --> 00:04:14,400
बनाई यह प्रश्न हो जाता है तो अगर इसमें देखा जाए

59
00:04:14,400 --> 00:04:18,440
अगर हमें यह मानना पड़ेगा कि अगर वह जो कबीर है वह कहीं पर बैठा

60
00:04:18,440 --> 00:04:22,720
हुआ है ईश्वर तो

61
00:04:22,720 --> 00:04:26,800
वह जहां पर बैठा है वो जगह उसने नहीं बनाई यानी

62
00:04:26,800 --> 00:04:30,920
कि प्रकृति को उसने बनाया नहीं है अब जब प्रकृति को उसने

63
00:04:30,920 --> 00:04:35,720
बनाया नहीं है तो उसमें सवाल यह आ जाएगा

64
00:04:35,720 --> 00:04:38,960
कि यहां पर जो ईश्वर है वह सर्वोच्च रचयिता सिद्ध नहीं

65
00:04:38,960 --> 00:04:43,000
होगा वह एक कुहार की तरीके से सिद्ध होगा जो

66
00:04:43,000 --> 00:04:47,160
मिट्टी लेकर घड़ा बनाता है एक कुमार क्या होता है

67
00:04:47,160 --> 00:04:51,480
घड़ा तो बनाता है मगर वह घड़े का सर्वोच्च रचयिता नहीं

68
00:04:51,480 --> 00:04:55,600
होता है क्यों नहीं होता है क्योंकि घड़े को बनाने के लिए जो मटेरियल

69
00:04:55,600 --> 00:04:59,840
है वो उसने नहीं बनाया उस मटेरियल को

70
00:04:59,840 --> 00:05:03,920
उसने प्राप्त किया वो पहले से उपलब्ध था ठीक इसी प्रकार अगर हम

71
00:05:03,920 --> 00:05:07,920
यह मानेंगे कि कबीर जो है 72 में या सातवे आसमान पर कहीं

72
00:05:07,920 --> 00:05:11,600
बैठा है

73
00:05:11,600 --> 00:05:15,720
तो उसने जो है प्रकृति को नहीं बनाया जहां वो

74
00:05:15,720 --> 00:05:20,080
बैठा उसने उस जगह को नहीं बनाया यानी स्पेस इत्यादि उसका निर्माण नहीं है

75
00:05:20,080 --> 00:05:24,240
तो जब निर्माण उसका नहीं है तो फिर हमें यह भी मानना पड़ेगा कि

76
00:05:24,240 --> 00:05:28,560
उसने कुम्हार की तरह केवल शेप दिया है मटेरियल

77
00:05:28,560 --> 00:05:32,960
उसको मिला पहले से उसने उसको शेप दिया है तो सर्व

78
00:05:32,960 --> 00:05:37,040
सर्व सर्वोच्च रचयिता सिद्ध नहीं होगा अब इसके

79
00:05:37,040 --> 00:05:41,080
बाद आगे हमारा जो फेवरेट जो

80
00:05:41,080 --> 00:05:45,840
सबसे ज्यादा हम लोग जिसका प्रचार प्रसार कर रहे हैं वह सवाल आ जाता है

81
00:05:45,840 --> 00:05:49,880
कि क्या रामपाल जी के द्वारा

82
00:05:49,880 --> 00:05:54,440
प्रतिपादित परिभाषित होने वाला जो ईश्वर है वह सर्वशक्तिमान है कि नहीं सर्व

83
00:05:54,440 --> 00:05:58,800
सामर्थ वान है कि नहीं तो जैसे अन्य जितने भी और

84
00:05:58,800 --> 00:06:03,120
विरोधी सनातन विरुद्ध तंत्र है उसी प्रकार से

85
00:06:03,120 --> 00:06:07,280
इनका भी ईश्वर बाधित हो जाता है क्योंकि यह जिस

86
00:06:07,280 --> 00:06:11,400
रूप में वहां बैठता है सतलोक में उसी शरीर

87
00:06:11,400 --> 00:06:15,680
को लेकर के य नीचे आता है व्यवहारिक हो जाता है अव्यावहारिक लोक

88
00:06:15,680 --> 00:06:19,720
जो केवल प्राप्त का विषय है वहां पर जो उसकी बॉडी है व उस

89
00:06:19,720 --> 00:06:23,720
बॉडी को लेकर नीचे आ जाता है और जब वह नीचे आ जाता है तो

90
00:06:23,720 --> 00:06:27,760
फिर वह बाधित हो जाता है क्यों बाधित हो

91
00:06:27,760 --> 00:06:31,880
जाता है क्योंकि वो अपनी दे को परिवर्तित नहीं कर पाएगा और यदि परिवर्तित कर

92
00:06:31,880 --> 00:06:36,280
पा रहा है तो इसका मतलब जो वास्तविक तत्व है वो कुछ और है उसकी बॉडी जो है वो ट्रांसफॉर्मेबल

93
00:06:36,280 --> 00:06:40,880
है शाश्वत नहीं है उसकी बॉडी तो दोनों में से

94
00:06:40,880 --> 00:06:45,360
एक चीज हम पकड़ पाएंगे यह बात हो जाती है

95
00:06:45,360 --> 00:06:49,800
इसीलिए व्यवहार में ना आ सकने वाले रूप को व्यवहारिक मत बनाओ

96
00:06:49,800 --> 00:06:53,920
और व्यवहारिक रूप को व्यवहार में ना आ सकने वाले रूप का स्थान मत दो

97
00:06:53,920 --> 00:06:58,120
ये हमेशा ध्यान तो ये तीन हो गए अब इससे

98
00:06:58,120 --> 00:07:02,560
रिलेटेड एक चीज और है जो सूक्ष्म वेद है मैंने बात की थी क्रेडिबिलिटी

99
00:07:02,560 --> 00:07:06,560
तो अब यह कहते हैं कि हमारा जो वेद और वेदा आदि जो

100
00:07:06,560 --> 00:07:09,600
शास्त्र है उनसे ईश्वर के बारे में मालूम पड़ता है मगर

101
00:07:09,600 --> 00:07:13,640
उसे प्राप्त करने के बारे में नहीं मालूम पड़ता या फिर ईश्वर के बारे में मालूम

102
00:07:13,640 --> 00:07:17,640
नहीं पड़ता सॉरी उसको प्राप्त करने के बारे में मालूम पड़ता है इनमें से

103
00:07:17,640 --> 00:07:21,760
कोई एक चीज है इनके द्वारा जो कही जाती है दोनों में से

104
00:07:21,760 --> 00:07:26,040
जो एक चीज बाकी रह जाती है वो इनको सूक्ष्म वेद से प्राप्त होती है

105
00:07:26,040 --> 00:07:30,160
इनका जिसको ये जोय कबीर दास जी के नाम से जो कहते

106
00:07:30,160 --> 00:07:34,280
हैं कि उन्होंने उन्होंने जो लिखा है वो सूक्ष्म

107
00:07:34,280 --> 00:07:38,560
वेद है अब बात य आ जाती है कि हम उन शास्त्रों

108
00:07:38,560 --> 00:07:42,640
को मानते हैं जिन्हें ईश्वर ने भी रचा नहीं है वो उसी

109
00:07:42,640 --> 00:07:46,680
तरह से विद्यमान है ईश्वर की सांस के रूप में जिस तरह से ईश्वर

110
00:07:46,680 --> 00:07:51,360
विद्यमान है मगर प्रॉब्लम यह है कि जो

111
00:07:51,360 --> 00:07:56,040
यह जो क्या कहते हैं

112
00:07:56,040 --> 00:08:00,560
कबीर के द्वारा जो लिखे गए ग्रंथ है वो कबीर ने लिखे हैं और कबी कौन है

113
00:08:00,560 --> 00:08:04,800
कबीर इनके अनुसार वह है जिसने दुनिया बनाई दुनिया बनाई इसका अर्थ

114
00:08:04,800 --> 00:08:08,920
है कि कबीर ने ही राक्षस भी बनाए कबीर नहीं ही देवता भी बनाए कबीर

115
00:08:08,920 --> 00:08:13,560
नेही झूठों को भी बनाया है कबीर नहीं सच्च को भी बनाया यानी कि अच्छाई और बुराई

116
00:08:13,560 --> 00:08:17,640
दोनों को निर्मा दोनों का निर्माता कबीर है तो जब कबीर झूठों को बना रहा

117
00:08:17,640 --> 00:08:21,880
है तो उसकी क्रेडिबिलिटी वही खत्म हो जाती है इसका मतलब उसके द्वारा लिखा

118
00:08:21,880 --> 00:08:24,640
गया कोई अगर ग्रंथ है तो उस पर हम विश्वास

119
00:08:24,640 --> 00:08:28,640
नहीं कर सकते क्योंकि वो उसने झूठ बोलने वालों

120
00:08:28,640 --> 00:08:32,720
को बनाया है वह चाहता है कि दुनिया में कोई हो

121
00:08:32,720 --> 00:08:36,720
झूठ बोलने वाला वह चाहता है कि दुनिया में लोग भ्रमित भी हो

122
00:08:36,720 --> 00:08:40,720
तो जब भ्रमित होने के लिए उसने व्यवस्था की है तो क्या

123
00:08:40,720 --> 00:08:44,840
गारंटी है कि यह जो सूक्ष्म वेद लिख कर के उसने व्यवस्था नहीं की है यह

124
00:08:44,840 --> 00:08:46,560
प्रश्न आ जाता है तो जो

125
00:08:46,560 --> 00:08:50,160
आवान के जो पांच मूल सिद्धांत

126
00:08:50,160 --> 00:08:54,200
है पहला कि संसार का प्रत्येक मनुष्य

127
00:08:54,200 --> 00:08:58,720
भगवान को ही ढूंढ रहा है फिर वो भले ही स्वयं को नास्तिक ही क्यों ना कहता हो दूसरा

128
00:08:58,720 --> 00:09:02,760
ईश्वर वही जो कुछ भी कर सकता है तीसरा ईश्वर के विषय

129
00:09:02,760 --> 00:09:07,040
में केवल वही शास्त्र प्रमाणिक जिन्ह ईश्वर ने भी ना रचा हो चौथा

130
00:09:07,040 --> 00:09:11,640
ज्ञान वही जो परंपरा से प्राप्त हो और पांचवा अगर

131
00:09:11,640 --> 00:09:16,040
सोशलाइज दृष्टि से देखे तो पांचवा सिद्धांत है रामो विग्रहवां धर्म

132
00:09:16,040 --> 00:09:20,280
श्री राम धर्म का साक्षात स्वरूप है यदि आपको कुछ भी नहीं पता है जैसा

133
00:09:20,280 --> 00:09:24,880
जैसा श्री राम ने किया वैसा वैसा करते जाइए और जो

134
00:09:24,880 --> 00:09:27,440
शास्त्रों

135
00:09:27,440 --> 00:09:32,360
की क्रेडिबिलिटी को करने के लिए सत्यापित करने के लिए जो

136
00:09:32,360 --> 00:09:36,480
पांचवा सिद्धांत है ऑब्लिक में है वो वो क्या है

137
00:09:36,480 --> 00:09:40,800
कि परंपरा तो कौन सी परंपरा सार्वभौम गुरु परंपरा शंकराचार्य

138
00:09:40,800 --> 00:09:44,880
परंपरा यह पांच मूल सिद्धांत है जिनका हम प्रचार

139
00:09:44,880 --> 00:09:49,080
प्रसार कर रहे हैं आवान के द्वारा तो हम लोग बहुत ज्यादा इधर उधर

140
00:09:49,080 --> 00:09:54,280
नहीं जाते हैं इन्हीं पांच में से कुछ तीन या चार सिद्धांतों में

141
00:09:54,280 --> 00:09:58,720
जो ठीक नहीं होते हैं जिसके सिद्धांत अकाट्य नहीं होते हैं सिद्धांत

142
00:09:58,720 --> 00:10:02,800
वो यही जो है वो हल्का हो जाता है उसकी

143
00:10:02,800 --> 00:10:08,800
बातें जो है कमजोर हो जाती है ठीक है तो यह तो थी दार्शनिक

144
00:10:09,040 --> 00:10:13,200
का अब इसके बाद हम आगे चले कि एक क्लेम किया वैसे

145
00:10:13,200 --> 00:10:17,880
हमने इनके बहुत से क्लेम बहुत से क्लेम का निवारण करते हुए एक संक्षिप्त

146
00:10:17,880 --> 00:10:21,960
छह वीडियोस की सीरीज बना चुके हैं मगर जो नहीं उसमें बात आई

147
00:10:21,960 --> 00:10:22,460
उसको

148
00:10:22,240 --> 00:10:27,000
हम यहां लेंगे कि एक इनके द्वारा बात फैलाई जाती

149
00:10:27,000 --> 00:10:31,160
है एक इनके द्वारा बात फलाई जाती है

150
00:10:31,160 --> 00:10:35,160
कि यदि दुर्गा जी से जन्म हो रहा है ब्रह्मा विष्णु

151
00:10:35,160 --> 00:10:39,240
महेश का तो फिर वह उनके पति कैसे हो सकते हैं यानी कि दुर्गा

152
00:10:39,240 --> 00:10:43,840
माता के जो पति है जिसको शिव कहा गया है वह कोई और है क्योंकि

153
00:10:43,840 --> 00:10:48,000
ब्रह्मा विष्णु महेश को तो उन्होंने स्वयं उत्पन्न किया है तो

154
00:10:48,000 --> 00:10:52,360
इस बारे में मैं बताना चाहूंगा देवी भागवत में

155
00:10:52,360 --> 00:10:56,480
माता खुद बता रही है माता के दो रूप है

156
00:10:56,480 --> 00:11:00,600
एक जो व्यवहार में ना आ सकने वाला रूप है परम तत्व के रूप

157
00:11:00,600 --> 00:11:04,720
में और दूसरा कार्य कोटि का कार्य करने वाला

158
00:11:04,720 --> 00:11:08,400
लीला में आ जाने वाला रूप

159
00:11:08,400 --> 00:11:12,920
तो जिसको भगवान शिव की पत्नी के रूप में

160
00:11:12,920 --> 00:11:17,040
खित किया गया जिस रूप को वोह माता का

161
00:11:17,040 --> 00:11:21,160
लीला वाला रूप है वो परम तत्व वाला रूप नहीं है जिसने ब्रह्मा विष्णु महेश

162
00:11:21,160 --> 00:11:25,240
को जन्म दिया इसको हम लोग सिद्ध कर लेते हैं इस बात को

163
00:11:25,240 --> 00:11:31,240
कि देवी भागवत में कह रही है माता कि

164
00:11:44,840 --> 00:11:48,840
तत्त वह ना ही स्त्री है ना ही पुरुष है

165
00:11:48,840 --> 00:11:52,960
और ना ही नपुंसक है यानी कि जिसने ब्रह्मा विष्णु महेश को उत्पन्न किया

166
00:11:52,960 --> 00:11:58,240
है उनको उनका महिमा का गान करने के लिए

167
00:11:58,240 --> 00:12:02,240
उनकी उनकी स्तुति करने के लिए जरूर कहा गया है कि आपने हमें जन्म

168
00:12:02,240 --> 00:12:06,480
दिया आप मां हो मगर तत्त वो जो तत्व परम तत्व

169
00:12:06,480 --> 00:12:10,560
जो परम सत्ता है उसने ब्रह्मा विष्णु महेश को बायोलॉजिकली जन्म

170
00:12:10,560 --> 00:12:14,720
नहीं दिया है वो निर्माता है वो कारण जो

171
00:12:14,720 --> 00:12:18,760
जिसको कहीं पर शिव कहा गया है जिस परम तत्व को कहीं पर विष्णु कहा गया है जिस

172
00:12:18,760 --> 00:12:22,880
परम तत्व को उसी को यहां पर देवी मां के रूप में ख्या पित किया गया

173
00:12:22,880 --> 00:12:27,280
है मगर यह देवी मां का रूप खुद यह बता रहा बताया जा रहा है यहां पर

174
00:12:27,280 --> 00:12:31,680
कि भगवती ना ही स्त्री है ना ही पुरुष है और ना ही नपुंसक ही है

175
00:12:31,680 --> 00:12:36,440
तो जिनसे ब्रह्मा विष्णु महेश की उत्पत्ति हो रही है वो

176
00:12:36,440 --> 00:12:40,960
स्त्री पुरुष इत्यादि कोई महिला नहीं है

177
00:12:40,960 --> 00:12:45,320
जिससे कि उनको यह कहा जाए कि भाई ये तो इनके पुत्र हैं वो किसी की माता सिद्ध

178
00:12:45,320 --> 00:12:49,560
नहीं होती बायोलॉजिकल जिस तरीके से प्रूव करते हैं उस तरीके से

179
00:12:49,560 --> 00:12:53,640
व्यावहारिक रूप से तो जिस परम तत्व ने ब्रह्मा विष्णु महेश

180
00:12:53,640 --> 00:12:57,800
को उत्पन्न किया वो परम तत्व ये है वो ना ही स्त्री है वो ना ही पुरुष

181
00:12:57,800 --> 00:12:59,920
है और वो ना ही नपुंसक

182
00:12:59,920 --> 00:13:04,120
ही है वो सिर्फ है मगर वो स्त्री पुरुष नपुंसक कुछ नहीं वो

183
00:13:04,120 --> 00:13:08,280
व्यवहार में ना आ सकने वाला है वाणी का अ विषय है जिसकी व्याख्या

184
00:13:08,280 --> 00:13:12,960
भी ना की जा सके वो वो है उसके बाद यही परम तत्व लीला पूर्वक

185
00:13:12,960 --> 00:13:17,320
एक देह धारण करता है एक रूप धारण करता है मां दुर्गा का

186
00:13:17,320 --> 00:13:21,480
और तब मां दुर्गा शिव जी की पत्नी बनती ठीक है

187
00:13:21,480 --> 00:13:25,480
तो अब यहां पर यह वाली चीज नहीं होती कि शिव जी उनके पुत्र है तो उनसे ही

188
00:13:25,480 --> 00:13:29,480
विवाह कैसे हो जाए उन्होंने उनका निर्माण किया है यही बात ब्रह्मा

189
00:13:29,480 --> 00:13:33,720
सरस्वती के विवाह में भी है कि ब्रह्मा जी ने सरस्वती माता को बायोलॉजिकली

190
00:13:33,720 --> 00:13:37,800
जन्म नहीं दिया उनका निर्माण किया है और लोगों

191
00:13:37,800 --> 00:13:41,800
को समझ में आए य उत्पत्ति स्थिति समार तो इसमें ऐसी भाषा उपयोग में ली

192
00:13:41,800 --> 00:13:46,600
जाती है कि मां है वो ये है मगर वो परम तत्व के रूप में आप

193
00:13:46,600 --> 00:13:51,240
अगर हम परम तत्व परम तत्व करते रहेंगे तो हम उसके प्रति व्यवहारिक नहीं हो पाएंगे

194
00:13:51,240 --> 00:13:55,320
इसलिए उसके लिए कोई ना कोई एक शब्द रखना पड़ेगा उस शब्द के रूप

195
00:13:55,320 --> 00:13:59,800
में कहीं पर उस परम तत्व को विष्णु बोला जाता है कहीं पर कृष्ण बोला जाता

196
00:13:59,800 --> 00:14:04,040
कहीं पर माता के रूप में ख्या पित किया जाता है तो ऐसे वही परम तत्व जो एक

197
00:14:04,040 --> 00:14:08,320
परमेश्वर है वही ब्रह्मा विष्णु महेश के भगवती और गणेश के रूप में

198
00:14:08,320 --> 00:14:12,800
वह अपने आप को प्रकट कर देता है व्यवहारिक हो जाता है तो यह बात हो

199
00:14:12,800 --> 00:14:15,200
गई अब इसके बाद एक बात आती

200
00:14:15,200 --> 00:14:21,200
है कि इनका कहना है कि जो ब्रह्मा विष्णु महेश है

201
00:14:23,360 --> 00:14:28,040
वो जो ब्रह्मा विष्णु महेश है वो

202
00:14:28,040 --> 00:14:32,080
अविनाशी नहीं है उनकी जो देह है वो पांच

203
00:14:32,080 --> 00:14:36,120
तत्वों से बनी हुई है ऐसा देवी भागवत मेंहा तो सबसे पहली बात तो

204
00:14:36,120 --> 00:14:40,160
यह है कि ईश्वर वही है जो कुछ भी कर सकता है तो ईश्वर वो है जो अपनी देह का

205
00:14:40,160 --> 00:14:44,240
नाश भी कर सकता है तो ब्रह्मा विष्णु महेश यदि अपनी देह का नाश करके दिखा रहे हैं तो

206
00:14:44,240 --> 00:14:48,480
इसमें तो हमें गर्व होना चाहिए कि वो कुछ भी करके दिखा रहा है जब चाहे तब अपनी

207
00:14:48,480 --> 00:14:52,720
इच्छा से दूसरी बात ये है कि ब्रह्मा विष्णु महेश भी उसी तरीके

208
00:14:52,720 --> 00:14:56,960
से हैं जैसे माता भगवती है जैसे एक परम तत्व के रूप में

209
00:14:56,960 --> 00:15:01,040
और एक लीला पूर्वक तो लीला पूर्वक वाला जो उनका रूप

210
00:15:01,040 --> 00:15:05,200
होता है ब्रह्मा विष्णु महेश का वो उसको चाहे तो कभी भी

211
00:15:05,200 --> 00:15:09,360
नष्ट कर सकते यह कर सकते वो कर सकते आ जा सकते हैं और

212
00:15:09,360 --> 00:15:13,400
एक रूप है उनका परम तत्व के रूप में जहां पर उन्हें अविनाशी भी कहा गया है

213
00:15:13,400 --> 00:15:19,400
कई जगह अविनाशी कहा गया है एक दो जगह का मैं विवरण आपको दे देता

214
00:15:20,440 --> 00:15:24,600
हूं जैसे ब्रह्मा विष्णु और शंकर

215
00:15:24,600 --> 00:15:25,800
रूप से जगत की उत्पत्ति

216
00:15:25,800 --> 00:15:30,200
स्थिति एवं संहार कारण विकार रहित अविनाशी परमात्मा

217
00:15:30,200 --> 00:15:34,760
अविनाशी परमात्मा सर्वदा एक रस सर्व विजय भगवान वासुदेव विष्णु

218
00:15:34,760 --> 00:15:36,160
है ठीक

219
00:15:36,160 --> 00:15:40,160
है अब अच्छा इसके साथ ही साथ एक बात और जैसे

220
00:15:40,160 --> 00:15:44,400
हमने दुर्गा माता से उत्पन्न होना देखा ब्रह्मा विष्णु महेश का वैसे

221
00:15:44,400 --> 00:15:48,560
ही इनसे ब्रह्मा विष्णु महेश से भी मां भगवती भी उत्पन्न होती

222
00:15:48,560 --> 00:15:54,240
है दूसरे कल्पों में जैसे

223
00:15:54,240 --> 00:15:58,440
कि जैसे कि शिव

224
00:15:58,440 --> 00:16:02,800
पुराण में देवी की उत्पत्ति हो रही है किससे शिवजी

225
00:16:02,800 --> 00:16:07,160
से और भागवत पुराण में देवी की उत्पत्ति हो रही है

226
00:16:07,160 --> 00:16:11,440
कृष्ण भगवान से देवी भागवत में ठीक है नौवे स्कंद में

227
00:16:11,440 --> 00:16:15,680
तो इसलिए एक ही परम तत्व लीला पूर्वक

228
00:16:15,680 --> 00:16:19,840
कभी पहले ब्रह्मा विष्णु महेश को प्रकट कर रहा है खुद देवी

229
00:16:19,840 --> 00:16:24,080
बन जा रहा है फिर वही पर परम तत्व कभी देवी

230
00:16:24,080 --> 00:16:28,080
को शिव गणेश ब्रह्मा को उत्पन्न कर रहा है और खुद विष्णु बन जा रहा है

231
00:16:28,080 --> 00:16:32,160
फिर इसी तरीके से वही परम तत्व कभी शिव बन जा रहा है पहले और बाकी सबको

232
00:16:32,160 --> 00:16:36,160
उत्पन्न कर रहा है तो यह चीज है जिसको आपको समझ लेना

233
00:16:36,160 --> 00:16:40,160
चाहिए और कभी भी रामपाल वालों से बातचीत हो तो उन्हें भी यह

234
00:16:40,160 --> 00:16:44,240
समझाने का प्रयास करना चाहिए अब इसमें एक बात आ जाती

235
00:16:44,240 --> 00:16:48,440
है कि जब हम यह कहते हैं अब यहां से इनकी उधेड़

236
00:16:48,440 --> 00:16:51,160
बुंद शुरू हो जाती है कि

237
00:16:51,160 --> 00:16:55,480
जब हम यहां पर इनसे यह कहते हैं कि

238
00:16:55,480 --> 00:16:59,720
यह ब्रह्मा विष्णु महेश लीला पूर्वक यह करते

239
00:16:59,720 --> 00:17:03,840
हैं अपनी देह का नाश करके भी दिखा देते हैं मगर यही ब्रह्मा विष्णु महेश भगवती और गणेश परम

240
00:17:03,840 --> 00:17:08,000
तत्व के रूप में भी विराजमान तो ये कहते हैं नहीं वो जो परम तत्व है वो

241
00:17:08,000 --> 00:17:12,320
आदि शिव है आदि राम है आदि गणेश है यह सब आदि

242
00:17:12,320 --> 00:17:16,400
आदि लगा के कर देते तो मेरे भाई आदि शिव

243
00:17:16,400 --> 00:17:21,080
ही सही आदि गणेश ही सही आदि राम ही सही इनका नाम तो है

244
00:17:21,080 --> 00:17:25,200
स्पष्ट रूप से वेदों में पुराणों में तुमने कभी कहा

245
00:17:25,200 --> 00:17:29,240
वेदों में प्रमाण है शिवजी भगवान है आदि वाले वो शिवजी अलग है वाले

246
00:17:29,240 --> 00:17:33,440
नहीं है जिनको हम पूछ रहे हैं क्यों नहीं कहते जिसका प्रमाण क्लियर कट

247
00:17:33,440 --> 00:17:37,680
कहीं भी नहीं है भगवान के रूप में उसको तुम मैच करा करा करके

248
00:17:37,680 --> 00:17:41,680
कहते हो कि वेदों में प्रमाण है और कबीर भगवान और जिसका

249
00:17:41,680 --> 00:17:45,880
प्रमाण क्लियर कट है कि शिवजी भगवान है तुम भी कह रहे हो कि वो आदि

250
00:17:45,880 --> 00:17:50,000
वाले हैं वो परम तत्व है परमेश्वर है परम ब्रह्म है और वही कबीर है अरे

251
00:17:50,000 --> 00:17:54,040
तो वही उसको कबीर के रूप में क्यों कबीर को उसके रूप में बोलो ना

252
00:17:54,040 --> 00:17:58,480
उसको कबीर के रूप में क्यों कबीर को उसके रूप में बोलो ना जिसका

253
00:17:58,480 --> 00:18:02,720
उसम में नाम है वेद में उस नाम को बोलो अपनी टैगलाइन को बदलो

254
00:18:02,720 --> 00:18:06,560
वेदों में प्रमाण है शिवजी भगवान है ये शिवजी वो वाले शिवजी

255
00:18:06,560 --> 00:18:10,680
नहीं है तुम्हारे अनुसार जिन्हें हम मानते व बाद वो हम अगले उसमें कर

256
00:18:10,680 --> 00:18:14,680
लेंगे मगर फिलहाल ये बात आती है ब्रह्मा विष्णु महेश भगवती

257
00:18:14,680 --> 00:18:18,840
और गणेश का वेद में नाम है तुम्हारे हिसाब से ब्रह्मा विष्णु

258
00:18:18,840 --> 00:18:23,080
महेश भगवती और गणेश वो वाले नहीं है जिनकी हम पूजा करते हैं

259
00:18:23,080 --> 00:18:27,440
मगर जो भी है इनका नाम क्यों नहीं बोलते तुम कि ब्रह्मा

260
00:18:27,440 --> 00:18:31,600
विष्णु महेश वे में प्रमाण है ब्रह्मा विष्णु महेश भगवती

261
00:18:31,600 --> 00:18:37,280
और गणेश भगवान है नहीं बोल बोल पाओगे अच्छा

262
00:18:37,280 --> 00:18:41,360
अब बात ये आती है इससे अगला चरण ये हो जाता है

263
00:18:41,360 --> 00:18:45,480
कि इनका कहना है कि उनकी देह नष्ट हो जाती है और यह है वो है

264
00:18:45,480 --> 00:18:49,840
चलिए मैंने आपको दोनों चीजें दिखा दी कि हां भैया देह नष्ट होने वाला रूप भी बता दिया

265
00:18:49,840 --> 00:18:54,000
और नष्ट ना होने वाला रूप भी बता दिया अब आप कबीर के बारे में

266
00:18:54,000 --> 00:18:58,000
कहां लिखा है कि उसकी देह नष्ट नहीं होती उसके लिए आपको अपना

267
00:18:58,000 --> 00:19:02,160
मन गणन ग्रंथ लाना पड़ेगा जो कि लोगों के लिए प्रमाण

268
00:19:02,160 --> 00:19:06,840
नहीं है आप दिखाओ कहां लिखा है कि कबीर की देह नष्ट नहीं होती

269
00:19:06,840 --> 00:19:11,000
आप जब भी दिखाओगे वह कवि के रूप में दिखाओगे कवि कबीर स्पष्ट

270
00:19:11,000 --> 00:19:15,120
रूप से कहीं पर लिखा है कि कबीर की देह नष्ट नहीं होती मैंने आपको

271
00:19:15,120 --> 00:19:19,880
दिखा दिया विष्णु अविनाशी है आप ऐसे दिखाओ कबीर अविनाशी है

272
00:19:19,880 --> 00:19:21,960
नहीं दिखा पाओगे ठगा

273
00:19:21,960 --> 00:19:26,560
है ना इसके बाद आप यह कहते हो कि

274
00:19:26,560 --> 00:19:30,760
कवि का अर्थ कबीर है अगर कवि का अर्थ कबीर है तो वेदों में लिख

275
00:19:30,760 --> 00:19:34,880
के आया है कि कवियों का कवि गणपति है कवि का अर्थ

276
00:19:34,880 --> 00:19:39,320
अगर कबीर है तो वेदों में लिख के आया है कि कवियों का कवि गणपति

277
00:19:39,320 --> 00:19:43,560
है तो आप यह क्यों नहीं कहते कि गणपति जो है कबीर का भी कबीर है परमात्मा

278
00:19:43,560 --> 00:19:48,000
का भी परमात्मा है या फिर वेदों में प्रमाण है गणपति भगवान

279
00:19:48,000 --> 00:19:52,240
यह क्यों नहीं कहते इसको कहते दोगलापन इसको कहते पक्षपात

280
00:19:52,240 --> 00:19:58,240
हीनता ना होन भाई लाइट

281
00:19:59,040 --> 00:20:03,080
है ना तो यह हो गया दूसरी बात अब आ जाते हैं आपके

282
00:20:03,080 --> 00:20:07,120
नामकरण संस्कार पर आप कहते हैं कि वेदों में जो

283
00:20:07,120 --> 00:20:11,200
कवि कहा गया है उसी को हम लोग कबीर

284
00:20:11,200 --> 00:20:15,200
कहते हैं अच्छा अब इस बारे में कोई व्याकरण संबंधी

285
00:20:15,200 --> 00:20:19,200
कोई भी ग्रामेटिकल कोई नियमावली आपने नहीं दिखाई उसके

286
00:20:19,200 --> 00:20:23,760
बाद फिर आप आगे कह देते कि कवि उसके बाद विसर्ग उसके बाद देव

287
00:20:23,760 --> 00:20:27,960
कबीर देव जो विसर्ग के कारण वहां पर रा उत्पन्न हो गया तो कबीर देव आ गया

288
00:20:27,960 --> 00:20:32,240
तो कबीर देव वेदों में जो कबीर देव आया वही कबीर देव है अब ये कबीर

289
00:20:32,240 --> 00:20:36,360
कबीर कैसे बना आपके पास कोई जवाब ठीक है हमारे पास हम

290
00:20:36,360 --> 00:20:40,400
जिसे भगवान कह रहे हैं उसका नाम है अच्छा दूसरी बात

291
00:20:40,400 --> 00:20:44,480
अब बात ये आती है जैसे आप यह कह देते हो कि जिसकी हम पूजा करते हैं

292
00:20:44,480 --> 00:20:48,520
ब्रह्मा विष्णु महेश भगवती गणेश यह वो वाले ब्रह्मा विष्णु महेश भगवती गणेश

293
00:20:48,520 --> 00:20:52,920
नहीं है जिनकी वेदों में बात हो रही है मगर नहीं

294
00:20:52,920 --> 00:20:56,960
भागवत पुराण में स्पष्ट लिखा है वेदों द्वारा जानने योग्य जो

295
00:20:56,960 --> 00:21:01,120
विष्णु है वही है शिव पुराण में लिखा है वेदों द्वारा जानने

296
00:21:01,120 --> 00:21:05,120
योग्य जो शंकर है उनकी बात हो रही है गणेश जी

297
00:21:05,120 --> 00:21:09,240
के बारे में लिखा है वेदों द्वारा जो जानने योग्य हैं उनकी बात हो रही तो हमने

298
00:21:09,240 --> 00:21:13,440
तो सिद्ध हमने तो प्रामाणिक जो शास्त्र जिनको आप भी प्रामाणिक

299
00:21:13,440 --> 00:21:14,120
मानते हो उसमें

300
00:21:14,120 --> 00:21:18,280
सिद्ध कर लिया कि हम जिस ब्रह्मा विष्णु महेश भगवती और गणेश को पूज रहे हैं वही

301
00:21:18,280 --> 00:21:22,560
ब्रह्मा विष्णु गणेश है जिनकी वेदों में बात हो रही है मगर आपने कहां

302
00:21:22,560 --> 00:21:26,640
लिखा दिखाया कि जिस कबीर को आप पूछ रहे हैं वो वही वाले

303
00:21:26,640 --> 00:21:30,640
कबीर है जिनकी वेदों में बात हो रही है नहीं दिखा पाओगे

304
00:21:30,640 --> 00:21:35,840
इसके बाद अगला चरण क्या है

305
00:21:35,840 --> 00:21:40,080
कि वही वाली बात कि अगर वेदों में मान लो कबीर

306
00:21:40,080 --> 00:21:44,240
आ गया मैं कह रहा हूं कबीर आ गया वेदों में ठीक है अब यह बताओ

307
00:21:44,240 --> 00:21:48,600
कि यह कबीर आप ही वाला कबीर क्यों माना जाए तो आप यह कहते हो

308
00:21:48,600 --> 00:21:52,960
कि कवियों के आचरण किए क्या किसी और ने हा भैया

309
00:21:52,960 --> 00:21:57,040
शास्त्र लिखे हैं भगवान गणेश ने जाकर देखो

310
00:21:57,040 --> 00:22:01,480
भगवान गणेश ने भी गणेश ने भी शास्त्रों की रचना की है दूसरी

311
00:22:01,480 --> 00:22:05,720
बात कवि का जो अर्थ लिया गया है वोह सर्वज्ञ लिया गया है वो

312
00:22:05,720 --> 00:22:09,720
कविता करने वाला नहीं लिगा लिया गया है तो सर्वज्ञ तो यह है विष्णु शिव

313
00:22:09,720 --> 00:22:14,080
शंकर सब तीसरी बात कि अगर आप कि भैया

314
00:22:14,080 --> 00:22:18,200
क्योंकि ब्रह्मा विष्णु महेश कवि नहीं थे इसलिए कबीर वो हो जाएगा वही

315
00:22:18,200 --> 00:22:22,400
वाला जिसकी बात वेदों में हो रही नहीं भाई कोई भी आके कह देगा कि ब्रह्मा

316
00:22:22,400 --> 00:22:26,600
विष्णु महेश भगवती और गणेश ने कविता नहीं की मैंने कविता की है मेरा नाम कबीर

317
00:22:26,600 --> 00:22:29,160
है इसलिए मेरी बात हो रही है वेद में ये कौन सी बात भाई

318
00:22:29,160 --> 00:22:33,200
जब तक कोई ठोक के ये नहीं कह देगा कि फलाने देश

319
00:22:33,200 --> 00:22:37,280
काल में जो पहचाना जाएगा कोई शास्त्र ऐसा वर्णन

320
00:22:37,280 --> 00:22:41,440
नहीं कर देगा कि वह जो होगा वह कविता भी करेगा अगर हम मान

321
00:22:41,440 --> 00:22:45,480
ले आपकी बात तब है आपकी ही बात को मान ले जब तक

322
00:22:45,480 --> 00:22:49,760
कोई शास्त्र ऐसा वर्णन नहीं करेगा कि भैया फलाना वाला

323
00:22:49,760 --> 00:22:53,760
फलानी जगह का जो कबीर है वही है जिसकी वेदों में बात हो रही है बहुत हो

324
00:22:53,760 --> 00:22:59,760
जाएंगे नहीं तो कोई भी आ जाएगा मेरा नाम कबीर है मैं भी कविता करता हूं लो

325
00:23:00,040 --> 00:23:04,200
है ना तो यह बात हो गई अब इसके

326
00:23:04,200 --> 00:23:08,360
बाद एक बात का जवाब हमने देही दिया जो ब्रज वाली बात है

327
00:23:08,360 --> 00:23:12,720
कल शॉर्ट ट पर भी आ जाएगा आज इग्राम पर डाल दिया है ब्रज

328
00:23:12,720 --> 00:23:16,760
शब्द का अर्थ जो बताया गया है उसमें कि वहां आप

329
00:23:16,760 --> 00:23:20,840
लोग यह दावा करते हो कि व्रज शब्द का अर्थ है कि भगवान कह रहे हैं उसकी

330
00:23:20,840 --> 00:23:25,120
शरण में जा व्रज शब्द का अर्थ आना और जाना

331
00:23:25,120 --> 00:23:29,200
दोनों है अब वो आपका वाक्य क्या है उसके

332
00:23:29,200 --> 00:23:33,600
अनुसार आपको उसका अर्थ लेना पड़ेगा आना या जाना जो भी है जैसे

333
00:23:33,600 --> 00:23:37,640
तीन बेर खाती थी वो तीन बेर खाती है इसमें बेर शब्द

334
00:23:37,640 --> 00:23:41,720
दो बार आया दोनों बार अलग अर्थ है एक ही शब्द के दो अर्थ है तो हमें

335
00:23:41,720 --> 00:23:44,280
देखना पड़ेगा लिखने वाले से प्रसंग अनुसार

336
00:23:44,280 --> 00:23:48,280
समझना पड़ेगा कि बेर शब्द का कहां पर कौन सा अर्थ है तो

337
00:23:48,280 --> 00:23:52,480
यहां पर जो ब्रज शब्द आया है उसका अर्थ आना इसलिए लेना पड़ेगा

338
00:23:52,480 --> 00:23:56,600
क्योंकि वहां पीछे जो कहा मा मेकम शरणम

339
00:23:56,600 --> 00:24:01,040
वो वहां पर भगवान श्री कृष्ण कह रहे हैं मेरी मुझ परमात्मा की शरण

340
00:24:01,040 --> 00:24:05,120
में तो वहां पर जाना नहीं शरण में जा वहां

341
00:24:05,120 --> 00:24:09,200
पर आ आना सिद्ध हो जाएगा दूसरी बात ये जो

342
00:24:09,200 --> 00:24:13,440
अर्थ है ये परंपरा से प्राप्त है जिस परंपरा

343
00:24:13,440 --> 00:24:17,560
से हमें भगवत गीता वेद शास्त्र प्राप्त होते हैं उन्हीं पर उसी उन्हीं परंपराओं

344
00:24:17,560 --> 00:24:21,920
से ये अर्थ भी प्राप्त है तो प्रामाणिक भी हो गया तार्किक भी हो गया और प्रामाणिक

345
00:24:21,920 --> 00:24:25,960
भी हो

346
00:24:25,960 --> 00:24:30,160
गया तो कुल मिलाकर के कबीर को भगवान

347
00:24:30,160 --> 00:24:34,960
बनाने के लिए आपके पास कोई भी ठोस प्रमाण नहीं है

348
00:24:34,960 --> 00:24:39,000
यह सारी सूत्रा क्मक शैली में मैंने आपको वर्णन

349
00:24:39,000 --> 00:24:43,920
करने करने का प्रयास किया

350
00:24:43,920 --> 00:24:47,960
और जैसे आप कहते हो कि क्या

351
00:24:47,960 --> 00:24:52,000
गीता में लिखा है कहीं पर कि यह गीता श्री कृष्ण नहीं बोली है जब वहां पर लिखा

352
00:24:52,000 --> 00:24:56,480
है श्री कृष्ण बोल रहे हैं उनके लिए आ रहा है श्री भगवान उवाच भगवान ने कहा

353
00:24:56,480 --> 00:25:01,000
तो अलग से जिस रूप में आप चाहते हो उस रूप में लिखा क्यों होना चाहिए

354
00:25:01,000 --> 00:25:05,160
मगर चलो इसको थोड़ी देर के लिए मान लेते हैं कि श्री कृष्ण के लिए नहीं बोला

355
00:25:05,160 --> 00:25:09,560
हमारे पास पस प्रमाण है उसके मगर हम उसके बाद आपसे

356
00:25:09,560 --> 00:25:13,720
पूछते हैं कि आपने जो दावा किया है कि गीता को भगवान श्री कृष्ण

357
00:25:13,720 --> 00:25:18,560
ने नहीं उनके शरीर में काल ने बोला है वो कहां लिखा है दिखा दोगे

358
00:25:18,560 --> 00:25:22,600
नहीं दिखा पाओगे ठेंगा अपनी सारी बातें मन

359
00:25:22,600 --> 00:25:26,760
ग्रंथ लगा लो और दूसरा वाला जब प्रामाणिक बातें कहे

360
00:25:26,760 --> 00:25:30,800
तो उस पर यह नहीं ये कैसे ये नहीं य कैसे उसमें भी जब कोई बात

361
00:25:30,800 --> 00:25:34,960
सिद्ध हो जाए तो दूसरा चैप्टर खोल दो

362
00:25:34,960 --> 00:25:39,120
भाई आपने दिखाया लिखा कहीं पर कि यह जो है काल ने बोली है श्री कृष्ण

363
00:25:39,120 --> 00:25:42,800
ने नहीं बोली नहीं दिखा

364
00:25:42,800 --> 00:25:46,920
पाओगे और गीता का 5 पर

365
00:25:46,920 --> 00:25:50,960
दिखाओ कहां लिखा है गीता का 5 पर गीता का महात्मा हम

366
00:25:50,960 --> 00:25:54,960
आपको दिखा देंगे पद्म पुराण में जगह जगह पर गीता का महात्म

367
00:25:54,960 --> 00:26:00,960
खूब लिखा हुआ है

368
00:26:01,560 --> 00:26:06,360
तो यह सब बातें हैं यह सब आपकी जो अन्याय शुता पक्षपात

369
00:26:06,360 --> 00:26:10,400
पक्षपाती दृष्टिकोण यह सब आपका छलकाता है इसके

370
00:26:10,400 --> 00:26:14,400
साथ ही साथ अगर आप यह भी मान लो कि भगवान श्री कृष्ण नहीं

371
00:26:14,400 --> 00:26:18,400
काल नहीं बोली तो हम यह भी आपके शास्त्रों से सिद्ध कर देंगे कि जो जिस काल ने बोली

372
00:26:18,400 --> 00:26:22,480
है वह काल भी श्री कृष्ण ही है उस काल के बारे में विष्णु

373
00:26:22,480 --> 00:26:26,480
पुराण में जगह जगह में बताया जा रहा है राम गीता में बताया जा

374
00:26:26,480 --> 00:26:30,200
रहा है वो राम राम ही काल है

375
00:26:30,200 --> 00:26:34,520
श्री कृष्ण ही काल है सिद्ध कर देंगे और बोलो

376
00:26:34,520 --> 00:26:38,720
तो यह सारी चीजें हैं आप अपने लिए कोई प्र

377
00:26:38,720 --> 00:26:42,720
हा सबसे बड़ी बात कि आप कबीर कबीर को कबीर

378
00:26:42,720 --> 00:26:46,880
इसलिए कहते हो क्योंकि हमने कृष्ण को काना कह दिया हमने कृष्ण को काना

379
00:26:46,880 --> 00:26:51,000
कहा मगर यह दावा कभी नहीं किया कि वेदों में प्रमाण है काना भगवान

380
00:26:51,000 --> 00:26:55,520
जब हम वेदों की बात करेंगे तो हम कहेंगे वेदों में प्रमाण है विष्णु भगवान उसका अवतार

381
00:26:55,520 --> 00:26:57,880
है हम कहेंगे शति में प्रमाण

382
00:26:57,880 --> 00:27:02,000
है कृ भगवान है उनका उनका वो है ये क काना

383
00:27:02,000 --> 00:27:06,600
तो हमने अपने भक्ति में कह दिया वो प्रमाणिक थोड़ी ना हो गया

384
00:27:06,600 --> 00:27:11,240
और दूसरी बात हम तो आपकी नजरों में मनमुक भक्ति करने वाले हैं ना

385
00:27:11,240 --> 00:27:15,320
तो आप हमें एस ए प्रमाण कैसे यूज कर सकते हैं

386
00:27:15,320 --> 00:27:19,680
आप हमें प्रमाण दिखाइए कि कबीर को कबीर कैसे बनाया आपने

387
00:27:19,680 --> 00:27:23,760
हमारे आधार पर चलेंगे तो हमारे आधार पर ब्रह्मा विष्णु महेश को क्यों नहीं मान रहे अगर

388
00:27:23,760 --> 00:27:27,800
हम आपके लिए प्रमाण है तो दूसरी बात और इसमें एक और

389
00:27:27,800 --> 00:27:32,320
बात है कि भाई वो दिखा दीजिए जरा

390
00:27:32,320 --> 00:27:36,600
चली रहने दीजिए वो दिखाइए मत मैं ऐसे ही बता देता हूं शास्त्र

391
00:27:36,600 --> 00:27:40,600
में कहीं पर कवि रस्तु के लिए कबीर आया

392
00:27:40,600 --> 00:27:44,680
है आगम शास्त्र में तो अब कवि रस्तु के लिए

393
00:27:44,680 --> 00:27:48,680
कबीर अनुवादक ने अनुवाद कर दिया कबीर के रूप में मगर अगर उसको

394
00:27:48,680 --> 00:27:52,800
आप प्रमाण मानेंगे तो उसको उसको तो पूरा मानना पड़ेगा उसमें क्या आया

395
00:27:52,800 --> 00:27:57,480
है कबीर के लिए कि वो प्रहलाद के अवतार थे वो

396
00:27:57,480 --> 00:28:01,640
राम के भक्त थे रामानंदाचार्य के शिष्य थे तो अगर उसको

397
00:28:01,640 --> 00:28:05,760
आप प्रमाण मानेंगे तो बाकी की चीजों को मानना पड़ेगा वहा भगवान थोड़ी ना कहा जा रहा है कबीर को

398
00:28:05,760 --> 00:28:09,840
वो वाला कबीर वो वाला कवि से कबीर कहां बना

399
00:28:09,840 --> 00:28:13,280
जो कि भगवान है आपका यहां तो भक्त है वो भगवान

400
00:28:13,280 --> 00:28:18,040
के और भविष्य पुराण में हमें उनका जन्म प्राप्त है

401
00:28:18,040 --> 00:28:23,520
रामानंदाचार्य के शिष्य के रूप में और राम भक्त के रूप में

402
00:28:23,520 --> 00:28:27,800
आदि राम अगर है उनका कोई दूसरा राम है तो भाई

403
00:28:27,800 --> 00:28:32,320
ये तो कहो कि वेदों में प्रमाण है और राम भगवान है कहो ना

404
00:28:32,320 --> 00:28:36,440
जिसका नाम नहीं है उसका नाम क्यों ले रहे हो जो नाम है वो लो ना

405
00:28:36,440 --> 00:28:41,000
फस जाओगे लोग तो दिक्कत हो जाएगी

406
00:28:41,000 --> 00:28:45,040
तो यह मैंने कुछ आपको एक संक्षिप्त विवरण बताया

407
00:28:45,040 --> 00:28:51,040
कौन आए हैं मैं देख लेता हूं मयंक कुमार जी

408
00:28:51,800 --> 00:28:56,520
हैं जय श्री राम मयंक कुमार जी आप आ चुके

409
00:28:56,520 --> 00:29:01,440
श्रम हां सर एक बारही आया था मैं

410
00:29:01,440 --> 00:29:05,440
कहां से है मैं राजस्थान जयपुर से

411
00:29:05,440 --> 00:29:10,000
हूं अच्छा रामपाल जी के फॉलोअर है आप

412
00:29:10,000 --> 00:29:14,680
नहीं जी बताइए मैं तोय

413
00:29:14,680 --> 00:29:19,080
रामपाल जी जो महाराज जी है ये कबीर साहब के बारे में ये एक्चुअली

414
00:29:19,080 --> 00:29:23,320
क्या कबीर साहब को एक मोहरा बना रखे हैं लोगों ने जबक

415
00:29:23,320 --> 00:29:27,440
कबीर साहब अच्छे संत हुए हैं अभ इनको

416
00:29:27,440 --> 00:29:32,080
देखा जाए तो कबीर साहब एक निर्गुण भक्ति धारा के संत रहे थे

417
00:29:32,080 --> 00:29:36,200
अच्छा रामपाल जी रामपाल जी उनको सगुण भक्ति धारा में बताते हैं

418
00:29:36,200 --> 00:29:40,200
कि कबीर साहब खुद भगवान है जबकि कबीर साहब तो खुद ही कहते हैं

419
00:29:40,200 --> 00:29:45,320
कि मैं कुत्ता राम का

420
00:29:45,320 --> 00:29:49,960
मतम फिर वो राम कौन सा है

421
00:29:49,960 --> 00:29:54,200
हां अरे भाई अगर ईश्वर को आप ऐसे हंसी खेल

422
00:29:54,200 --> 00:29:58,600
बना दोगे ऐसे साकार कर दोगे जैसे ये कर रहे हैं ईश्वर साकार है

423
00:29:58,600 --> 00:30:03,400
मगर जैसे यह कर रहे हैं ऐसे कर दोगे तो ईश्वर ईश्वर ही नहीं रह जाएगा

424
00:30:03,400 --> 00:30:07,480
हर कोई आ कर के उसको बाधित कर देगा मुसलमानों का मुसलमान उसको

425
00:30:07,480 --> 00:30:11,760
वादित कर देंगे आर्य समाज उसको वादित कर सब वादित कर देगा उसकी

426
00:30:11,760 --> 00:30:15,760
बिल्कुल बकिया उधर जाएंगी अगर आप ऐसे ईश्वर

427
00:30:15,760 --> 00:30:19,760
को डिफाइन कर देंगे तो अभी कबीर साहब के

428
00:30:19,760 --> 00:30:23,960
जैसे अपन देखे कबीर साहब की शिक्षा में कबीर साहब के जो जैसे

429
00:30:23,960 --> 00:30:28,080
अपन उनको भक्त बोले संत रदास जी है संत पीपा जी है

430
00:30:28,080 --> 00:30:32,320
यह सब निर्गुण भक्ति धारा के रहे इन्होंने परमात्मा

431
00:30:32,320 --> 00:30:36,560
को निराकार बताया अब जब यह कबीर साहब को साकार

432
00:30:36,560 --> 00:30:41,200
बताते हैं तो ये किस आधार पर यानी कि परमात्मा

433
00:30:41,200 --> 00:30:45,520
दोनों रूप होते हैं हा दोनों रूप होते हैं और जो सर्वव्यापी

434
00:30:45,520 --> 00:30:49,560
परमात्मा है जो हमारी नजरों की उसम सीमा में नहीं आ सकता है

435
00:30:49,560 --> 00:30:53,720
वह परमात्मा हमारी नजरों की सीमा में आने वाला रूप लेता है

436
00:30:53,720 --> 00:30:59,120
सजाम में हम रूप होता है वो वो अपना सृजन करता है

437
00:30:59,120 --> 00:31:00,440
बिल्कुल तो

438
00:31:00,440 --> 00:31:04,600
यह सारा संक्षिप्त विवरण है इसके अलावा एक संक्षिप्त विवरण में और देना चाह रहा

439
00:31:04,600 --> 00:31:08,720
था तत्वदर्शी का तो तत्वदर्शी का संक्षिप्त विवरण यह

440
00:31:08,720 --> 00:31:13,200
है कि पहली बात तो यह है कि जहां पर 15.1

441
00:31:13,200 --> 00:31:17,320
में यह कहा गया है कि जो संसार रूपी उल्टे वृक्ष की व्याख्या कर

442
00:31:17,320 --> 00:31:21,600
दे वह तत्वदर्शी नहीं कहा गया है वहां पर

443
00:31:21,600 --> 00:31:26,320
44 में अगर तत्वदर्शी के पास जाने की बात हो रही है तो 15.1

444
00:31:26,320 --> 00:31:30,720
में ये नहीं कहा गया है कि उल्टे वृक्ष के रूप की व्याख्या करने वाला

445
00:31:30,720 --> 00:31:34,800
तत्वदर्शी है वहां पर कहा गया है वेदों को जानने वाला क्या कहा

446
00:31:34,800 --> 00:31:38,880
गया है वेदों को जानने वाला और इनके हिसाब से

447
00:31:38,880 --> 00:31:43,160
वेदों को जानना तत्व ज्ञान नहीं है क्योंकि अभी उसने सूक्ष्म वेद को नहीं जाना है

448
00:31:43,160 --> 00:31:47,440
उचार पांचवे वेद को नहीं जाना है तो वेदों को जानने वाला

449
00:31:47,440 --> 00:31:51,480
कहा गया है तत्वदर्शी तत्व ज्ञानी नहीं कहा गया है उसमें

450
00:31:51,480 --> 00:31:57,480
तत्वदर्शी शब्द नहीं है इनके ही तरीके से चलो मगर

451
00:31:58,280 --> 00:32:02,800
अगर यह वेदों को जानने वाले को तत्वदर्शी मानते हैं

452
00:32:02,800 --> 00:32:07,000
तो वेदों को जानने वाले को देवी भागवत में कहा गया है कि जो देवी

453
00:32:07,000 --> 00:32:11,920
को परमात्मा के रूप में जान जाता है वह वेदों को जानने वाला

454
00:32:11,920 --> 00:32:16,080
है अगर वेदों को जानने वाला तत्वदर्शी है

455
00:32:16,080 --> 00:32:20,120
तो देवी भागवत में कहा गया है स्पष्ट रूप से य तो अंदाजा लगा रहे हैं क्योंकि उसने उल्टे

456
00:32:20,120 --> 00:32:24,400
वृक्ष की व्याख्या कर दी अंदाजा नहीं है वहा स्पष्ट लिखा है कि जो देवी

457
00:32:24,400 --> 00:32:29,360
को परमात्मा के रूप में परम ब्रह्म के रूप में जान है वही

458
00:32:29,360 --> 00:32:33,600
जो है वेदों को जानने वाला है और वेदों को जानने वाले को यह तत्वदर्शी

459
00:32:33,600 --> 00:32:37,960
मान रहे हैं तो मान ले कि तत्वदर्शी कौन है जो माता को

460
00:32:37,960 --> 00:32:41,960
परब्रह्म के रूप में स्वीकार करता हो दूसरी बात और आगे चलते

461
00:32:41,960 --> 00:32:46,000
हैं बहुत सारे पॉइंट है 15.3 में

462
00:32:46,000 --> 00:32:50,040
उल्टे वृक्ष को जान जाने के बाद उस उल्टे वृक्ष की जो जड़ है

463
00:32:50,040 --> 00:32:54,240
उसको काटने के लिए उस तत्वदर्शी के पास एक हथियार होना

464
00:32:54,240 --> 00:32:58,440
चाहिए जिसकी बात की जा रही है 15.3 में वो कौन सा हथियार

465
00:32:58,440 --> 00:33:02,560
है वैराग्य सन्यास 6.2 में भी

466
00:33:02,560 --> 00:33:06,600
यही बात की जा रही है परमात्मा के साथ योग कौन कर सकता है जिसके पास

467
00:33:06,600 --> 00:33:10,640
सन्यास हो हमने वो ब्रह्मचारी आचार्य बनता है वो तो कल दिखाई

468
00:33:10,640 --> 00:33:13,600
दिया तो कुल मिलाकर के अगर तत्वदर्शी ये

469
00:33:13,600 --> 00:33:17,960
कह रहे उल्टे वृक्ष की व्याख्या करने वाला तो भैया उसके पास वैराग्य होना चाहिए

470
00:33:17,960 --> 00:33:22,240
सन्यास होना चाहिए ब्रह्मचर्य होना चाहिए कहां है दूसरी बात

471
00:33:22,240 --> 00:33:26,400
जो आप दिखा रहे हो वहां प उसको तत्वदर्शी नहीं वेदों को जानने वाला कहा गया वेदों को जानने वाला

472
00:33:26,400 --> 00:33:30,400
कौन है जो माता को भगवती व परम ब्रह्म के रूप में स्वीकार कर ले अब बताओ

473
00:33:30,400 --> 00:33:34,560
क्या करोगे कहीं से भी कोई एक चीज ऐसी नहीं है जो इनकी

474
00:33:34,560 --> 00:33:38,640
सिद्ध हो जाए कोही एक चीज

475
00:33:38,640 --> 00:33:43,200
बिल्कुल तो इनका तत्वदर्शी होना भी सिद्ध नहीं होता है और वेदों को मनुस्मृति

476
00:33:43,200 --> 00:33:47,360
को सबको ले लेंगे कि वेद अथर्ववेद 11 पा

477
00:33:47,360 --> 00:33:51,400
16 ब्रह्मचारी आचार बनता है और उसके बाद मनुस्मृति 12वां

478
00:33:51,400 --> 00:33:55,720
अध्याय 112 से 114 धर्म में संशय होने पर अधिष्ठाता

479
00:33:55,720 --> 00:34:00,240
ब्रह्मचारी को बनाए ठीक है और इसके

480
00:34:00,240 --> 00:34:04,480
बाद ज्ञान प्राप्त होता है परंपरा से भगवत गीता चार

481
00:34:04,480 --> 00:34:08,960
दो बहुत जगह लिखा है न 16 परंपरा की बात बहुत जगह हो रही है

482
00:34:08,960 --> 00:34:13,040
और मंड कोप निषद में हो रही है परंपरा की बात निरुक्त में

483
00:34:13,040 --> 00:34:17,560
हो रही है तो सुति शास्त्र इनको का मना कर दोगे निरुक्त में हो रही है

484
00:34:17,560 --> 00:34:22,200
शति शास्त्र में हो रही है परंपरा की बातें तो

485
00:34:22,200 --> 00:34:26,360
जो ऋषि महा ऋषि गण है वो अपनी परंपरा बता रहे हैं मगर इनकी परंपरा चालू हो रही

486
00:34:26,360 --> 00:34:28,760
है कहां से कबीर से और कबीर जिससे ज्ञान ले रहे

487
00:34:28,760 --> 00:34:32,880
हैं उसकी बात ये लोग कह रहे कबीर ने उनको दिखावा किया था कबीर देखो

488
00:34:32,880 --> 00:34:36,880
जब दिखावा कर सकता है इन्हीं के अनुसार गुरु के पास

489
00:34:36,880 --> 00:34:40,920
जाने का दिखावा किया वास्तविकता में उन्होंने वो गुरु के पास नहीं गए

490
00:34:40,920 --> 00:34:45,240
तो दिखावा कर सकता है उनकी वाणी को प्रमाण कैसे मान रहे हो फ

491
00:34:45,240 --> 00:34:49,360
खत्म हो गई वाणी जब वोह छल कर सकता है तो आपके साथ जब

492
00:34:49,360 --> 00:34:53,600
छल करेगा तो आपको बताएगा क्या भाई जिसके

493
00:34:53,600 --> 00:34:57,880
साथ छल करेगा तो उसको बता के करेगा मैं तेरे साथ

494
00:34:57,880 --> 00:35:02,600
कर र उसको तो खुब कहेगा मैंने सबसे छल किया पर तुझसे नहीं कर रहा हूं

495
00:35:02,600 --> 00:35:07,200
ऐसे ही तो कहेगा तो यह बात हो गई

496
00:35:07,200 --> 00:35:13,200
इसीलिए हम अपौरुषेय

497
00:35:17,280 --> 00:35:22,120
कोई हिला नहीं सकता है कोई दुनिया का

498
00:35:22,120 --> 00:35:28,120
ऐसा नहीं है जो हिला जाए यह है हमारे सनातन सिद्धांत

499
00:35:40,160 --> 00:35:44,320
कबीर शब्द का विवेचन हो गया दुर्गा माता का पति पति होना

500
00:35:44,320 --> 00:35:49,040
और वह उनसे उत्पन्न होना वह कर दिया इसके अलावा हमने

501
00:35:49,040 --> 00:35:53,120
कवि नाम पर बहुत अच्छे से बात कर ली है और यह

502
00:35:53,120 --> 00:35:57,640
काल ने बोला कि नहीं बोला ये सब बातें हमने अच्छे से कर ली

503
00:35:57,640 --> 00:36:01,760
जैसे भैया देखा जाए तो ये बोलते हैं कि कबीर साहब जो

504
00:36:01,760 --> 00:36:05,840
लहर तारा ना लहर ताला तालाब था

505
00:36:05,840 --> 00:36:10,160
उसमें पत्ते पर बैठ ग तो इस आधार पर भगवान कैसे हो गए ऐसे तो राजस्थान

506
00:36:10,160 --> 00:36:14,280
का एक संत हुआ था संत दादू दयाल जी वो भी साबरमती

507
00:36:14,280 --> 00:36:18,280
नदी में संदूक में मिले थे तो क्या वो भी अपने आप में भगवान बन

508
00:36:18,280 --> 00:36:22,280
गए जिस चीज का यदि सिर पैर ना हो तो इसका मतलब ये थोड़ी

509
00:36:22,280 --> 00:36:26,720
ना है कि वो भगवान माना जाएगा जी

510
00:36:26,720 --> 00:36:30,760
कोई तो उस जय श्री राम

511
00:36:30,760 --> 00:36:32,960
जय श्री राम भैया जी

512
00:36:32,960 --> 00:36:37,080
भैया मैं आपके वीडियोस देखता रहता हूं एक और एक पाकिस्तानी

513
00:36:37,080 --> 00:36:41,600
यूट्यूब है जिन्होंने इस्लाम छोड़ दिया है और वो नास्तिक है

514
00:36:41,600 --> 00:36:45,680
तो वो अपने चैनल प वो बुला के डिबेट करते हैं कि आप जो है भगवान को

515
00:36:45,680 --> 00:36:49,680
प्रूफ कीजिए तो सर हम चाहते हैं कि एक बार आप उनसे एक बार आप वार्तालाप

516
00:36:49,680 --> 00:36:53,760
करें तो आप हमारे चैनल का

517
00:36:53,760 --> 00:36:58,800
नंबर और दे दीजिए तो हम उनसे संपर्क कर लेंगे

518
00:36:58,800 --> 00:37:03,120
बात कर ले क्योंकि मैंने उनका देखा है वो जो मां दुर्गा

519
00:37:03,120 --> 00:37:08,400
के जो पोस्टर और व ऐसे अद चित्र बनाते रहते हैं

520
00:37:08,400 --> 00:37:12,400
अगसे कर पहले तो क्षमा मांगे हम

521
00:37:12,400 --> 00:37:17,000
उनके लिए वीडियो बना देंगे उनके कुतर को को तोड़ करके

522
00:37:17,000 --> 00:37:21,080
भाई जो व्यक्ति आपकी मां को गाली देगा

523
00:37:21,080 --> 00:37:25,240
उससे आप बात कैसे करोगे उसको तो पहले दूसरे तरीके से पूजा अर्चना

524
00:37:25,240 --> 00:37:29,360
होगी ना उसकी तो पूजा अर्चना नहीं कर रहे तो कम से कम इतना तो बना ले कि उससे

525
00:37:29,360 --> 00:37:34,280
दूर रहे स्कंद पुराण में एक वचन आया है

526
00:37:34,280 --> 00:37:39,320
कि जो जी आपके गुरुदेव की निंदा करता

527
00:37:39,320 --> 00:37:44,160
है मतलब गाली लोज देना सैद्धांतिक वो

528
00:37:44,160 --> 00:37:48,480
करना तर्क वितर्क करना एक अलग बात है मगर गाली गलोज देना

529
00:37:48,480 --> 00:37:52,840
जो आपके गुरुदेव के साथ अभद्र आचरण ऐसा मर्यादित आचरण करे

530
00:37:52,840 --> 00:37:57,720
उसकी अगर पहली नंबर बात तो है कि जीवा काट दो

531
00:37:57,720 --> 00:38:02,040
काट सको तो उसको वहां से भगा दो और उतना

532
00:38:02,040 --> 00:38:06,760
भी दम नहीं है तो खुद भग जाओ वहा मत ो

533
00:38:06,760 --> 00:38:10,920
तो मां भी तो हमारी गुरु है जी वही

534
00:38:10,920 --> 00:38:15,120
भैया जी वो जैसे बहुत लोग जैसे उनके पोस्टर देख के उनसे बात करने

535
00:38:15,120 --> 00:38:19,240
के लिए जाते हैं तो वो उनको खुद को इतना जो है वेद और शास्त्र

536
00:38:19,240 --> 00:38:23,240
का इतना इम नहीं है तो वो उनके जो कटाक्ष उन वो

537
00:38:23,240 --> 00:38:27,480
इतना हमारे चैनल का वो दे दो और बता दो भैया यन

538
00:38:27,480 --> 00:38:31,560
चैलेंज करते हैं आप इनसे बात कर लीजिए मगर

539
00:38:31,560 --> 00:38:35,720
बात येय उन्होने ऐसा कर रखा है कि क्या बताए आप

540
00:38:35,720 --> 00:38:39,960
लिंक दीजिएगा देखेंगे ठीक है भया

541
00:38:39,960 --> 00:38:44,920
ऐसे गंदे व्यक्ति के साथ मंच साझा नहीं करना चाहिए ना

542
00:38:44,920 --> 00:38:48,960
वैसे तो वो इस्लाम की ज्यादा बात करते हैं लेकिन वो कभी कभार सनातन धर्म पर भी

543
00:38:48,960 --> 00:38:53,080
वो लोग वीडियो बना देते हैं वो कभी देखते तो अच्छा नहीं लगता

544
00:38:53,080 --> 00:38:59,080
है तो वही

545
00:38:59,560 --> 00:39:03,680
तो कोई है जो आएगा वेदों में प्रमाण कबीर को भगवान

546
00:39:03,680 --> 00:39:06,280
सिद्ध

547
00:39:06,280 --> 00:39:10,560
करें पार्वती

548
00:39:10,560 --> 00:39:16,160
पटेल जी पार्वती पटेल जी बताइए जय श्री

549
00:39:16,160 --> 00:39:22,160
राम

550
00:39:23,760 --> 00:39:29,760
नम बोलिए नमस्ते जय श्री

551
00:39:29,960 --> 00:39:35,160
राम मैं संत रामपाल जी महाराज का शिष्य हूं

552
00:39:35,160 --> 00:39:40,400
अच्छा कब

553
00:39:40,400 --> 00:39:46,400
से 2019 से 22 अक्टूबर से नाम दिख लिया

554
00:39:46,440 --> 00:39:52,440
हू बताइए कौन सा चैप्टर खोलना है आपको

555
00:40:03,280 --> 00:40:07,320
बोलिए आप पहले एक जगह स्थिर हो जाइए फिर बात करिए

556
00:40:07,320 --> 00:40:11,400
और थोड़ा प्रकाश में आ जाइए रोशनी में आ

557
00:40:11,400 --> 00:40:15,440
जाइए ठीक रोशनी में आके दोबारा से आप बात करें तब तक हम

558
00:40:15,440 --> 00:40:21,000
इनसे बात कर लेते हैं राजकुमार हिंदू

559
00:40:21,000 --> 00:40:25,400
जी जय श्री राम जय श्री राम जय श्री राम

560
00:40:25,400 --> 00:40:29,720
जी बताइए मैं तो यही कहूंगा सर जी कि जैसे कि

561
00:40:29,720 --> 00:40:35,720
रामपाल के जो भक्त है अध्याय नंबर

562
00:40:36,400 --> 00:40:40,440
दसवा अपने भागवत गीता में लिखा हुआ है उसमें

563
00:40:40,440 --> 00:40:44,880
भी प्रमाण है कि कवि जो कवि है वोह कबीर

564
00:40:44,880 --> 00:40:47,800
नहीं

565
00:40:47,800 --> 00:40:52,560
है वहां पर इतनी जगह प्रमाण है कि कवि

566
00:40:52,560 --> 00:40:55,120
कबीर कैसे

567
00:40:55,120 --> 00:40:59,120
कहेंगे नहीं इन्होने उसको चिल्लाया इतना है कि लोगों

568
00:40:59,120 --> 00:41:03,760
को लगने लगा जैसे ब्रेन वश के टाइम पर चिल्लाया जाता है ना कोई गलत चीज

569
00:41:03,760 --> 00:41:07,760
तो इन्होंने उसको चिल्लाया इतना है कि कोई यह ढूंढना भूल ही गया कि वास्तविकता में

570
00:41:07,760 --> 00:41:11,840
कभी कबीर है ही नहीं मगर हमने चिल्लाना चालू कर दिया कि वेदों में

571
00:41:11,840 --> 00:41:16,040
प्रमाण है कबीर साहब भगवान है मेरी बात सुनो इनकी

572
00:41:16,040 --> 00:41:20,520
वजह से चलो कुछ भी है बट क्या है कि इन्हो के मैंने

573
00:41:20,520 --> 00:41:24,560
इतने वीडियो देखे तो मेरे को भी ऐसा लगा कि हां मेरे को

574
00:41:24,560 --> 00:41:28,560
इसके बारे में जानना चाहिए तो मैंने सारे ग्रंथ है

575
00:41:28,560 --> 00:41:33,480
जो पीडीएफ फॉर्म में लिए उनको पढ़ा मगर जो इनकी

576
00:41:33,480 --> 00:41:36,000
तरह पढ़ेंगे वो इन्हीं की तरह समझेंगे और अपनी

577
00:41:36,000 --> 00:41:40,920
जो अलग भावना से पढ़ेंगे वो अपनी तरह हम समझेंगे इस चीज को

578
00:41:40,920 --> 00:41:45,200
क्योंकि दो भावना होती है वो होती है कि हां वही है जो बताते

579
00:41:45,200 --> 00:41:49,880
हैं वोह देखते हैं तो वही देखेंगे मगर

580
00:41:49,880 --> 00:41:54,400
अगर अपन अपने हिसाब से पढ़ेंगे या अपने शास्त्रों के अनुसार पढ़ेंगे तो वो ऑटोमेटिक

581
00:41:54,400 --> 00:41:58,560
अपन को लगेगा कि यार गलत है मगर क्या आदमी

582
00:41:58,560 --> 00:42:02,760
क्या कर रहा है कि आजकल उ वो जो कुछ श्लोक दे दिए

583
00:42:02,760 --> 00:42:06,960
कुछ तो उसी को देख रहा है और कुछ देख ही नहीं रहा उसके ऊपर का श्लोक नीचे का श्लोक

584
00:42:06,960 --> 00:42:11,120
देख ही नहीं

585
00:42:11,120 --> 00:42:15,440
रहा भाई वेद पढ़ना है तो फिर उसको पूरा

586
00:42:15,440 --> 00:42:19,600
पढ़ो मेरे को कम से कम महीना भर लगा

587
00:42:19,600 --> 00:42:23,800
है एक पूरा जैसे मैंने ज्यादा गहरा से नहीं पढ़ा बट

588
00:42:23,800 --> 00:42:28,000
जैसे कि उसका भावार्थ भावार्थ पढ़ा है पूरा

589
00:42:28,000 --> 00:42:32,000
प्रत्येक वेद का अपने शिव पुराण का विष्णु पुराण का और अपना

590
00:42:32,000 --> 00:42:36,000
य श्रीमद् भागवत का तो मुझे कहीं पर मिला ही

591
00:42:36,000 --> 00:42:40,120
नहीं कि भाई अपन को कोई डाउट ही नहीं हुआ अपने लिए तो सब

592
00:42:40,120 --> 00:42:44,720
वही भगवती गणेश सब एक ही मतलब

593
00:42:44,720 --> 00:42:48,760
सब एक है अभी इन्होंने पता नहीं रामपाल को सबसे

594
00:42:48,760 --> 00:42:53,000
बड़ी हसी किस बात पर आती है कि और लोगों ने धर्म

595
00:42:53,000 --> 00:42:57,160
के नाम पर जो अधर्म फैलाया वो

596
00:42:57,160 --> 00:43:01,240
पहले वेद लिए फिर उसका अर्थ कम से कम लिखा खुद

597
00:43:01,240 --> 00:43:05,400
लिखा गलत अर्थ गु कोई भी शास्त्र लिया तो उसका अर्थ

598
00:43:05,400 --> 00:43:09,440
खुद लिखा गलत उसके बाद उसको छपवा किताब के

599
00:43:09,440 --> 00:43:13,600
रूप में बेचा भी मगर इन्होंने तो वो भी नहीं किया है कि अपने

600
00:43:13,600 --> 00:43:17,600
वेद के भाष्य लिख दिए हो अपना पुराण पुराण का अर्थ लिख दिया

601
00:43:17,600 --> 00:43:21,840
हो गीता का अर्थ वो भी नहीं किया इय आज भी वेद आदि

602
00:43:21,840 --> 00:43:26,480
शास्त्रों के लिए डिपेंड उसी पर करते हैं जो पहले छपे हुए रखे

603
00:43:26,480 --> 00:43:30,480
इन्होने म ले अपना वाला एक

604
00:43:30,480 --> 00:43:34,600
इतनी मेहनत कहां से करे भाई संस्कृत भी तो आनी चाहिए हमारे

605
00:43:34,600 --> 00:43:38,800
यहां पर प्रोग्राम था इनका तो मैं क्या थाने में गया था

606
00:43:38,800 --> 00:43:42,800
मैं खुद गया था मेरे साथ कोई गया भी नहीं मैंने 10 पाच आदमियों

607
00:43:42,800 --> 00:43:46,920
को इस चीज के बारे में बताया तो सारे गए फिर थाने में हमने वहां रिपोर्ट दर्ज कराई दूसरे

608
00:43:46,920 --> 00:43:51,080
दिन इनका प्रोग्राम बंद हो गया मगर कोई कोशिश ही नहीं करता ना कि क्या हो रहा है अपन को क्या मतलब

609
00:43:51,080 --> 00:43:55,200
है सब यह सोचते हैं और भोले बाले

610
00:43:55,200 --> 00:43:59,560
लोग फसते चले जाते हैं बस अब मैं जब थाने में गया तो थानेदार

611
00:43:59,560 --> 00:44:03,560
ने भी यही बोला कि भाई आप मेरे को प्रमाण दिखा दो सुबह मेरे पास भी पुस्तक देने आए थे

612
00:44:03,560 --> 00:44:09,560
तो मैंने ले ली मैंने पढ़ी

613
00:44:10,960 --> 00:44:16,960
नहीं बी एस जय श्री राम

614
00:44:17,360 --> 00:44:23,360
भैया तो बोलिए पार्वती पटेल

615
00:44:24,600 --> 00:44:30,600
जी क्या आप बानते हैं वेदों में प्रमाण है और कबीर भगवान

616
00:44:30,600 --> 00:44:36,600
है जी जी मैं मानता हूं कहां लिखा

617
00:44:39,880 --> 00:44:45,880
है जी वेद में भी लिखा है और ना

618
00:44:46,960 --> 00:44:51,000
जो भी भगवान है अरे वेद में कहां लि

619
00:44:51,000 --> 00:44:57,000
और कहां बताया और कहां लिखा है

620
00:44:57,520 --> 00:45:02,120
मेरे याद नहीं लेकिन लिखा है बोल रहा हू अरे

621
00:45:02,120 --> 00:45:08,120
यार आए

622
00:45:09,960 --> 00:45:13,960
क्यों कबीर जी रामपाल रामपाल वालों

623
00:45:13,960 --> 00:45:19,960
के मित्र हो या शत्रु

624
00:45:22,200 --> 00:45:28,200
हो रही

625
00:45:28,760 --> 00:45:33,400
बोलो भाई नाम दीक्षा लिया हूं तो मित्र हुआ ना बोला

626
00:45:33,400 --> 00:45:37,560
अरे तो मित्र हुए तो मित्र कई बार ऐसे भी होते हैं ना जो गलत जगह

627
00:45:37,560 --> 00:45:41,720
पहुंच करके नुकसान करा देते हैं अब आप यहां पर आए हो और ऐसे

628
00:45:41,720 --> 00:45:47,720
वक्तव्य दे रहे हो कि मैं मानता हूं मैं याद नहीं है भाई आए क्यों

629
00:45:50,000 --> 00:45:54,880
फिर चलो बताओ था जो आप बोल रहे हो कि

630
00:45:54,880 --> 00:45:59,000
मतलब आप बोल रहे हो कि ब्रह्म ही

631
00:45:59,000 --> 00:46:05,000
आ आचार्य बनता है बोलके मतलब बोलते हो नहीं

632
00:46:05,400 --> 00:46:09,280
हां क्या करूं

633
00:46:09,280 --> 00:46:13,360
इसका आप आप

634
00:46:13,360 --> 00:46:17,560
जैसे आप सुखदेव ऋषि को जानते हो ना आपका भाई साहब सुनो आपका

635
00:46:17,560 --> 00:46:21,800
नेटवर्क सही नहीं आ रहा है आप पहले तो एक ऐसी जगह पर रहो जहां

636
00:46:21,800 --> 00:46:26,040
पर आप हिलो नहीं आप नच नच के तो बात कर रहे हो

637
00:46:26,040 --> 00:46:30,240
ऊपर से आपका नेट नेक भी सही नहीं आ रहा है आप जाओ दोबारा

638
00:46:30,240 --> 00:46:34,400
आना ठीक है दोबारा आ जाना ले लेंगे आपको और कोई

639
00:46:34,400 --> 00:46:37,520
है

640
00:46:37,520 --> 00:46:39,880
क्या

641
00:46:39,880 --> 00:46:44,000
हेलो रामपाल जी का मैंने ब हा

642
00:46:44,000 --> 00:46:48,200
एक मिनट एक मिनट आप स्टेज प आ गए क्या हा जी बोलिए

643
00:46:48,200 --> 00:46:52,320
जय श्री राम जय शी श्री राम जय श्री

644
00:46:52,320 --> 00:46:56,360
राम जय श्रीराम रामपाल जी का मैंने बहुत सारा बायोडाटा निकाला है

645
00:46:56,360 --> 00:47:00,360
अपने सनातन धर्म को इतना हानि पहुंचा रहा

646
00:47:00,360 --> 00:47:04,400
है सबको धर्म भ्रष्ट किया जा रहा है एक एक हर ग्रंथ

647
00:47:04,400 --> 00:47:08,440
से उसने पॉइंट निकाल के और ऐसा भ्रमित किया गया

648
00:47:08,440 --> 00:47:11,960
है हर ग्रंथ

649
00:47:11,960 --> 00:47:16,040
से हर ग्रंथ से सारे प्रमाण है मेरे पास

650
00:47:16,040 --> 00:47:20,120
मैं अपना नंबर भेजता हूं और आपको प्रमाण देता हूं उन्होंने कैसे

651
00:47:20,120 --> 00:47:24,200
भ्रमित को खुद को भगवान मान रहे हैं कबीरदास जी का एक

652
00:47:24,200 --> 00:47:28,360
लिखा हुआ है कि 5505 वर्ष बीतेगा

653
00:47:28,360 --> 00:47:32,680
कलयुग तब मेरा अंशा उतार होगा लेकिन अभी कलयुग

654
00:47:32,680 --> 00:47:36,680
को 5505 वर्ष हुआ भी नहीं है और उसके नीचे यह

655
00:47:36,680 --> 00:47:41,000
भी लिखा है कि उस शरीर की छाया नहीं होगी

656
00:47:41,000 --> 00:47:46,000
यह चीज इनको बताई नहीं है छुपाई गई है

657
00:47:46,000 --> 00:47:50,080
हर ग्रंथ से ऐसे भ्रमित किया गया अरे भाई सबसे बड़ी

658
00:47:50,080 --> 00:47:52,560
बात तो यह है कि

659
00:47:52,560 --> 00:47:57,240
भगवान जो होते वो अजर होते हैं अजर अजर

660
00:47:57,240 --> 00:48:01,360
अजर अजर कबीर है कबीर की आप फोटो देखो बाल

661
00:48:01,360 --> 00:48:05,600
सफेद ठीक है जी और भगवान के

662
00:48:05,600 --> 00:48:09,760
भक्त इनको देख लो आप यह कहां से आपको 16 साल

663
00:48:09,760 --> 00:48:14,000
के लग रहे हैं जो भगवान के अवतार है उनका वर्णन आता है 16

664
00:48:14,000 --> 00:48:18,040
साल जी हा हा किशोर

665
00:48:18,040 --> 00:48:23,120
ये कहां से आपको लग र है कि ये जो है

666
00:48:23,120 --> 00:48:27,520
16 साल के हैं इनके भी बाल सफेद हो रहे हैं इनकी भी आख

667
00:48:27,520 --> 00:48:31,960
ही है उनके बारे में भी मैंने निकाला पहलाद

668
00:48:31,960 --> 00:48:35,960
जी का अवतार कबीरदास जी का ला जी भगत अपन होली

669
00:48:35,960 --> 00:48:40,000
मनाते हां उनका अवतार है और वो राम के भक्त थे श्री राम

670
00:48:40,000 --> 00:48:44,280
के भक्त थे राम जी के हां बहुत बड़े भक्त थे हां बिल्कुल सही

671
00:48:44,280 --> 00:48:48,600
बात है जी बहुत सारी जानकारी निकाली

672
00:48:48,600 --> 00:48:52,640
है और इनका प्रचार हर जगह फैल रहा है मैं अभी महाराष्ट्र

673
00:48:52,640 --> 00:48:57,520
में हूं इचल करण जी महाराष्ट्र में हूं कोई बात

674
00:48:57,520 --> 00:49:01,560
सुनिए कोई बात नहीं मेरी बात मेरी बात सुनिए प्रचार हर

675
00:49:01,560 --> 00:49:06,240
जगह फैल जाने दीजिए वो एक कहावत है कि

676
00:49:06,240 --> 00:49:07,560
झुंड में वार

677
00:49:07,560 --> 00:49:10,400
करने वाला शेर नहीं ठग होता है

678
00:49:10,400 --> 00:49:14,720
झुंड में वार करने वाला शेर नहीं ठग होता है

679
00:49:14,720 --> 00:49:18,840
और दुश्मन अगर कायदे का हो तो ही उसे मारने का मजा

680
00:49:18,840 --> 00:49:20,760
अलग होता है अलग

681
00:49:20,760 --> 00:49:24,760
होता है जी जी ठीक है तो जब तक

682
00:49:24,760 --> 00:49:29,360
और मैंने जब तक जो हमारी समस्या है वो एक रहद रूप

683
00:49:29,360 --> 00:49:33,400
धारण नहीं करेगी तो कैसे हिस्ट्री लिखी जाएगी कि भैया ऐसा ऐसा

684
00:49:33,400 --> 00:49:38,160
हो गया था उसको फिर ऐसे ऐसे सही किया गया हिस्ट्री तभी बनेगी

685
00:49:38,160 --> 00:49:42,160
जब जो समस्या हो वो भी एक विकराल रूप धारण कर ले तो इससे हमें

686
00:49:42,160 --> 00:49:46,960
डिमोटिवेट नहीं होना है यह तो हमारे लिए प्रोत्साहन है कि सामने

687
00:49:46,960 --> 00:49:51,200
हजारों की संख्या में कौरव खड़े हो और अर्जुन अकेला पांच पांडवों के साथ बोले

688
00:49:51,200 --> 00:49:55,360
कि प्रभु इसको कैसे हम लोग करेंगे तो भगवान कहेंगे कर्मन वादी

689
00:49:55,360 --> 00:49:59,600
कार से मा फले सु जी तो

690
00:49:59,600 --> 00:50:03,800
ऐसा कोई दिक्कत नहीं है और फिर अपने ही भाई है भटक गए थोड़ा थोड़ा

691
00:50:03,800 --> 00:50:08,040
उनको अपने भा अपने भाइयों को भ्रमित किया गया अपने हिंदू धर्म

692
00:50:08,040 --> 00:50:12,040
वालो को सबको भ्रमित किया गया मैं आज गया इनके

693
00:50:12,040 --> 00:50:16,080
जहां नाम दीक्षा है वहां पर आज मैं गया हूं और वहां की सारी रिकॉर्डिंग करके

694
00:50:16,080 --> 00:50:20,320
लाया हूं वहां का पूरा फोटो निकाल के लाया हूं मैं डायरेक्ट उनको

695
00:50:20,320 --> 00:50:24,400
फोन किया मैं बोला मुझे नाम दीक्षा चाहिए बोल रहे आ जाइए मुझे लेने के लिए

696
00:50:24,400 --> 00:50:28,560
आ गए और लेकर गए तुरंत नाम दीक्षा ऐसा होता है

697
00:50:28,560 --> 00:50:32,640
अंदर एक रूम में लेकर गए उधर टीवी चालू किया गया और

698
00:50:32,640 --> 00:50:35,760
रामपाल जी का व चालू किया गया पांच मंत्र बताता

699
00:50:35,760 --> 00:50:39,840
है वो उसमें से अपनी देवी भागवत में वो सब मंत्र भी बताते

700
00:50:39,840 --> 00:50:44,520
हैं और मुस्लिम धर्म का भी मंत्र बताता है सोहम करके

701
00:50:44,520 --> 00:50:48,920
सुनो जी स्वेता सत्र उपनिषद में

702
00:50:48,920 --> 00:50:53,200
दूसरे अध्याय के 26 में मंत्र में लिखा है ना तस्य रोगो

703
00:50:53,200 --> 00:50:57,400
न जरा प्राप्त योगा

704
00:50:57,400 --> 00:51:01,720
योगा अगनि मयम शरीर और इसका अर्थ क्या है योगा

705
00:51:01,720 --> 00:51:05,840
अग्नि मय शरीर प्राप्त होने पर योगी को ना रोग होते हैं

706
00:51:05,840 --> 00:51:09,960
ना बुढ़ापा व्यापत है और ना ही मृत्यु प्रभावित करती है

707
00:51:09,960 --> 00:51:14,120
तो जी अजर होता उनके मछे दाढी य सब नहीं

708
00:51:14,120 --> 00:51:18,320
आती नहीं आती है कि अवस्था रहती है उनकी जी

709
00:51:18,320 --> 00:51:22,320
जी आगे श्रीमद भागवत में आया है पहला

710
00:51:22,320 --> 00:51:27,320
स्कंद सवा अध्याय 19 वा अध्याय और 26

711
00:51:27,320 --> 00:51:31,560
इसमें क्या आया है जी कि राजा परीक्षित को श्रीमद् भागवत सुनाने

712
00:51:31,560 --> 00:51:35,560
जब सुखदेव जी पहुंचे तो वह 16 वर्ष के

713
00:51:35,560 --> 00:51:39,680
सुकुमार दिख पड़ते थे उनके चरण हस्त उरु भुजाएं कंधे

714
00:51:39,680 --> 00:51:43,720
और कपोल तादुर कोमल जान पड़ते थे वो हमेशा 16

715
00:51:43,720 --> 00:51:47,800
वर्ष के दिखाई देते हैं भगवान अगर राम और की आज

716
00:51:47,800 --> 00:51:50,800
भी मूर्ति आप देखो हमारे मंदिरों में तो कहीं भी

717
00:51:50,800 --> 00:51:55,120
वो दाढी मूच वाली मूर्तियां नहीं होती है होती है अगर है

718
00:51:55,120 --> 00:51:59,520
तो वो अशा स्त्रीय है अगर है तो व है भगवान

719
00:51:59,520 --> 00:52:04,280
का अवतार होता है पूर्ण अवतार वो हमेशा 16 वर्ष वाला रहता

720
00:52:04,280 --> 00:52:08,440
है जी बकुल अब मैं एक बात क रहा

721
00:52:08,440 --> 00:52:13,240
आपने अच्छा याद दिलाया इनका दीक्षा वाला मामला

722
00:52:13,240 --> 00:52:18,080
पॉइंट बताना भूल गया था अभी जो मैंने शुरू का आधा घंटा जो

723
00:52:18,080 --> 00:52:22,920
संक्षिप्त विवरण दिया था मैंने उसम ये भी एक बात थी

724
00:52:22,920 --> 00:52:27,000
की इनका जो दीक्षा प्रोग्राम है वो भी बहुत अटपटा

725
00:52:27,000 --> 00:52:31,040
वो भी अशा स्त्रीय पू तरीके से कहते हुआ

726
00:52:31,040 --> 00:52:35,120
बहुत बड़ा कहते य कि हम गलत है हम अशा स्त्रीय भक्ति

727
00:52:35,120 --> 00:52:39,160
करते हैं जबक हमारे पास परंपरा है गुरु परंपरा है परंपरा

728
00:52:39,160 --> 00:52:43,680
प्राप्त शास्त्र है हम मगर गलत करते हैं और इन्होंने संस्कृत

729
00:52:43,680 --> 00:52:47,760
नहीं पढ़ी है ब्रज का अर्थ इन्होने ये जाना नहीं कि

730
00:52:47,760 --> 00:52:51,840
कहा लिखा कहा नहीं लिखा ू दिया खैर ठीक है

731
00:52:51,840 --> 00:52:56,560
कबीर नाम है ही नहीं कहीं भी नहीं एक भी शास्त्र में मगर मगर

732
00:52:56,560 --> 00:53:00,680
मगर ये जो है ये कहते हैं कि हमारी जो इस समय

733
00:53:00,680 --> 00:53:04,760
गुरु दीक्षा हो रही है वो कैसे हो रही है कि गुरु को पता ही नहीं है मैं आज

734
00:53:04,760 --> 00:53:05,840
किसी को दीक्षा दे रहा

735
00:53:05,840 --> 00:53:10,040
हूं हा गुरु को 10 दिन बाद पता लग रहा

736
00:53:10,040 --> 00:53:14,680
है गुरु दे रहा दा गुरु कहां से दे रहा है दीक्षा बताइए

737
00:53:14,680 --> 00:53:18,840
गुरु ने क पेन ड्राइव लगा

738
00:53:18,840 --> 00:53:23,080
के ऐसे हा ये भी य सिद्ध नहीं कर पाए

739
00:53:23,080 --> 00:53:27,280
कि भाई गुरु दीक्षा कैसे संभव हो जाएगी गुरु दीक्षा

740
00:53:27,280 --> 00:53:31,120
कैसे हो जाएगी

741
00:53:31,120 --> 00:53:35,800
जी शुभंकर शुभंकर पारिजात जी

742
00:53:35,800 --> 00:53:41,480
जय श्री राम हर हरर

743
00:53:41,480 --> 00:53:45,640
महादव आपके व क्या ठंड पड़ने लगी क्या काफी भारी

744
00:53:45,640 --> 00:53:49,960
भरकम कपड़े पहने जी

745
00:53:49,960 --> 00:53:54,400
जी बता उड़ी से हम तो आए थे बस ऐसे ही

746
00:53:54,400 --> 00:54:00,400
आपके दर्शन करने के लिए

747
00:54:02,520 --> 00:54:06,560
भाई कोई आना चाहता हो कबीर वाला भगवान सिद्ध करे जो

748
00:54:06,560 --> 00:54:10,360
भगवान कबीर को

749
00:54:10,360 --> 00:54:14,520
तो आ सकता है यहां पर स्वागत

750
00:54:14,520 --> 00:54:18,840
है

751
00:54:18,840 --> 00:54:22,960
उसका कुल मिला कर के वेद में पुराणों में कहीं

752
00:54:22,960 --> 00:54:26,960
भी कबीर को स्पष्ट रूप से यह नहीं कहा कि वो अविनाशी है स्पष्ट रूप से

753
00:54:26,960 --> 00:54:31,160
ये नहीं कहा कि उसकी देह जो है वो पांच तत्वों की नहीं बनी है स्पष्ट

754
00:54:31,160 --> 00:54:35,240
रूप से ये नहीं कहा कि वो भगवान है स्पष्ट रूप से उसका जिक्र ही नहीं है

755
00:54:35,240 --> 00:54:39,360
कहीं और यह कहते हैं कि हम जिस कबीर को पूछ रहे हैं वो वही कबीर

756
00:54:39,360 --> 00:54:43,360
है जिसका वेद में बात हो और अपनी बातों

757
00:54:43,360 --> 00:54:47,560
को बिना शास्त्र के आधार पर अपने जो है मनमुक व्याख्या सिद्ध करते हैं

758
00:54:47,560 --> 00:54:51,840
शास्त्र में जिनका प्रमाण है कि अविनाशी है ये परम तत्व हैय परम ब्रह्म

759
00:54:51,840 --> 00:54:55,840
है तो वहां पर शास्त्र लिखने वाले ने गलत लिख दिया है ये कह ते

760
00:54:55,840 --> 00:54:59,920
वो जी ने अपने मन की बात लिख दी है और ये अपने मन की बात जो कर रहे हैं

761
00:54:59,920 --> 00:55:04,000
वो नहीं वहां प जो व्यास जी है जिन्होंने बातें लिखी है वो गलत

762
00:55:04,000 --> 00:55:08,160
लिखी तो इनके पास कोई आधार नहीं है मगर कैसे

763
00:55:08,160 --> 00:55:12,560
पूरा एक तंत्र खड़ा हो गया है जो मैंने देखा है कि

764
00:55:12,560 --> 00:55:17,120
अभी तक जितने भी आए हैं उसमें से 90 पर थोड़ा इलिटरेसी

765
00:55:17,120 --> 00:55:17,680
की तरफ वाले

766
00:55:17,680 --> 00:55:21,840
लोग है मतलब जिनका पढ़ाई शैक्षिक अध्ययन बहुत वीक है तो

767
00:55:21,840 --> 00:55:25,840
जो इस तरह इस लाइन के जो लोग है वो आसानी से प्रभावित

768
00:55:25,840 --> 00:55:29,840
हो जाते होंगे पढ़े लिखे भी होंगे इनके यहां मगर

769
00:55:29,840 --> 00:55:33,880
ज्यादा संख्या अभी तक जो मैंने देखी तो उनका जो शैक्षिक स्तर था वो

770
00:55:33,880 --> 00:55:39,640
बहुत बहुत ज्यादा अल्प था कल जो जैसे एक आए थे बोले में 2004

771
00:55:39,640 --> 00:55:43,760
से कबीर कबीर की पूजा कर रहा हूं रामपाल जी से मैंने

772
00:55:43,760 --> 00:55:47,920
दीक्षा ले रखी है और बोला कि मैंने पूछा

773
00:55:47,920 --> 00:55:51,960
कि क्या कबीर सर्वशक्तिमान सर्वव्यापक

774
00:55:51,960 --> 00:55:55,960
है बोला हां है मैंने फिर पूछा सर्वव्यापक है बोला

775
00:55:55,960 --> 00:56:01,960
हां अच्छा सर्वव्यापक का अर्थ क्या है यह नहीं

776
00:56:02,400 --> 00:56:06,680
पता तो ऐसे तो लोग उनकी

777
00:56:06,680 --> 00:56:10,960
वो एक दो दिन में आज फोन आया था उनका दोबारा

778
00:56:10,960 --> 00:56:15,160
कि मैं दोबारा आना चाहता हूं व बोले कि ठीक है मैंने

779
00:56:15,160 --> 00:56:19,480
कहा ठीक है आ जाइए मगर पहले आके आपको क्षमा मांगनी होगी हाथ जोड़ करके

780
00:56:19,480 --> 00:56:23,680
क्योंकि उन्होंने एक गलत शब्द उपयोग किया था

781
00:56:23,680 --> 00:56:27,680
कि क्या कहते हैं ये बेवकूफ हो

782
00:56:27,680 --> 00:56:32,680
तुम आप बेवकूफ हो ऐसे बोला

783
00:56:32,680 --> 00:56:36,680
तो जब हमने कहा क्षमा मांगनी होगी तो ठीक है मैं

784
00:56:36,680 --> 00:56:40,880
क्षमा मांग लूंगा मगर आज मैं अपने प्रश्न करूंगा आज

785
00:56:40,880 --> 00:56:45,120
आपकी बा आपकी बातें नहीं होंगी मैं अपने प्रश्न करूंगा तो मैंने कहा ठीक है कर लेना

786
00:56:45,120 --> 00:56:49,440
मगर मुझे बताओ कल किसके प्रश्न थे परंपरा तुमने

787
00:56:49,440 --> 00:56:53,640
पूछी परंपरा तुमने पूछी ब्रह्मचारी आचार्य बनता

788
00:56:53,640 --> 00:56:57,720
है वो तुमने पूछा शुरुआत किसने की पूछने की

789
00:56:57,720 --> 00:57:01,760
आपने ब्रह्मचारी आचार्य बनता है परंपरा तुमने पूछी ब्रज का

790
00:57:01,760 --> 00:57:05,920
भी तुमने पूछा ब्रज का भी आपने पूछा आपके

791
00:57:05,920 --> 00:57:09,920
सवाल थे हम उसका आपको उत्तर दे रहे थे और फिर भी आज कह

792
00:57:09,920 --> 00:57:14,330
र हो कि मेरे सवाल होंगे आपके नहीं तो जब मैंने ऐसे उनके सा और उनको

793
00:57:14,330 --> 00:57:19,680
[संगीत]

794
00:57:19,680 --> 00:57:23,800
मैंने उनको मैंने फिर यह याद दिलाया कि

795
00:57:23,800 --> 00:57:27,920
आप जिसको तत्वदर्शी कह रहे हो उसी त को एक श्लोक छोड़ कर के

796
00:57:27,920 --> 00:57:32,000
कहा जा रहा है कि तत्वदर्शी जो के पास वैराग्य

797
00:57:32,000 --> 00:57:36,120
रूपी हथियार होता है 15.3 में

798
00:57:36,120 --> 00:57:41,560
मैं दिखाता हूं

799
00:57:41,560 --> 00:57:45,640
आपको यह कुछ भी सिद्ध नहीं होती इनकी एक बात ऐसी नहीं है

800
00:57:45,640 --> 00:57:50,320
जो सिद्ध हो जाए एक बात देखिए पहले

801
00:57:50,320 --> 00:57:54,520
इतना समझ लीजिए कि 4 34 में कहा गया है

802
00:57:54,520 --> 00:58:00,520
कि वो उस उस विन यज के ज्ञान को तू तत्वदर्शी के पास जाकर

803
00:58:06,160 --> 00:58:10,240
ले अब हम लोग देखते हैं

804
00:58:10,240 --> 00:58:14,240
कि तत्वदर्शी के बारे में क्या 15.1 में बात हो रही है

805
00:58:14,240 --> 00:58:18,320
पहली बात तो यह है कि अगर मैंने आज उल्टे वृक्ष के रूप

806
00:58:18,320 --> 00:58:24,320
में कुछ अपनी मनगण व्याख्या कर दी तो मैं भी तत्वदर्शी हो जाऊंगा

807
00:58:25,120 --> 00:58:29,160
क्या उल्टे वृक्ष के रूप में प्रकृति रूपी संसार की जो

808
00:58:29,160 --> 00:58:33,240
व्याख्या करनी होगी उसके लिए वेदा शास्त्र द्वारा जो

809
00:58:33,240 --> 00:58:37,360
नियम बताए गए हैं उसकी सीमा में करनी होगी ऐसे थोड़ी ना कि किसी ने भी

810
00:58:37,360 --> 00:58:41,600
देख भाई उल्टा वृक्ष है इसके पाच इसके जो तने है पेड़ है पत्ते हैं

811
00:58:41,600 --> 00:58:45,600
यह रामपाल जी है कबीर है यह है वो ऐसे अपने मन से कोई भी कर दे वो

812
00:58:45,600 --> 00:58:51,560
तत्वदर्शी हो गया क्योंकि उसने उल्टे वृक्ष की बात की है यह कहा कहा का नियम

813
00:58:51,560 --> 00:58:57,560
भाई तो पवा अध्याय हम लोग लेते हैं

814
00:59:23,600 --> 00:59:26,120
देखिए देखिए

815
00:59:26,120 --> 00:59:30,440
वेद जिसके पत्ते कहे गए हैं उस संसार रूप वृक्ष

816
00:59:30,440 --> 00:59:33,720
को जो पुरुष मूल सहित तत्व से जानता

817
00:59:33,720 --> 00:59:38,160
है वह वेद के तात्पर्य को जानने वाला है वेद के तात्पर्य

818
00:59:38,160 --> 00:59:42,480
को जो उस वृक्ष को जानता है अच्छे से

819
00:59:42,480 --> 00:59:46,520
वो तत्वदर्शी नहीं है जो वृक्ष के तत्व को

820
00:59:46,520 --> 00:59:50,600
जानता है वह वेद के तात्पर्य को जानने वाला है

821
00:59:50,600 --> 00:59:54,800
और अगर फिर भी इसको तत्वदर्शी मान लिया जाए ये पहले

822
00:59:54,800 --> 00:59:59,040
देख लीजिए वेद वेद को जानने वाला कहा गया है तत्वदर्शी नहीं कहा गया देख लीजिए

823
00:59:59,040 --> 01:00:03,080
आप लोग क्या लिखा है वेद

824
01:00:03,080 --> 01:00:06,760
को जानने वाला

825
01:00:06,760 --> 01:00:11,720
लिखा वेद को जानने वाला तत्वदर्शी नहीं लिखा है ठीक

826
01:00:11,720 --> 01:00:15,960
है हालाकि वेद को जानने वाला तत्वदर्शी होता है मगर

827
01:00:15,960 --> 01:00:20,080
हम जब इन्हीं की बात ले रहे तो इन्हीं की बातों से चलेंगे

828
01:00:20,080 --> 01:00:24,120
है ना तो तत्वदर्शी नहीं लिखा है वेद को जानने वाला लिखा है

829
01:00:24,120 --> 01:00:29,000
अब वेद को जानने वाले पास क्या होना चाहिए यह 15.3

830
01:00:29,000 --> 01:00:33,320
में बताया गया है क्या होना

831
01:00:33,320 --> 01:00:37,480
चाहिए यह देखिए यहां से जरा भैया पढ़ दीजिए इसलिए

832
01:00:37,480 --> 01:00:43,480
से आप देख रहे हो तो इसलिए से पढ़िए

833
01:00:44,400 --> 01:00:49,040
इसलिए इसलिए इस हां

834
01:00:49,040 --> 01:00:53,200
उधर लेके

835
01:00:53,200 --> 01:00:57,200
जाइए देखा हा इसलिए इस

836
01:00:57,200 --> 01:01:03,160
अंता ममता और वासना रूप अति

837
01:01:03,160 --> 01:01:07,400
दृढ़ मूलो वाले संसार रूप पीपल के वृक्ष

838
01:01:07,400 --> 01:01:11,640
को दृढ़ वैराग्य रूप

839
01:01:11,640 --> 01:01:16,040
वैराग्य हां ण वैराग्य रूपी शस्त्र

840
01:01:16,040 --> 01:01:20,080
से काटकर हां कौन सा शस्त्र होना

841
01:01:20,080 --> 01:01:24,640
चाहिए वैराग्य रूप तो अगर इनके हिसाब से 15.1

842
01:01:24,640 --> 01:01:29,240
में तत्वदर्शी है तो तत्वदर्शी के पास कौन सा शस्त्र होना चाहिए

843
01:01:29,240 --> 01:01:33,320
वैराग्य कहां है वैराग्य भाई है तो

844
01:01:33,320 --> 01:01:37,320
सही जेल में है ना वो वैराग्य तो वहा प हा तो उससे

845
01:01:37,320 --> 01:01:42,000
पहले वैराग्य नहीं था अब वैराग्य आ गया 6.2 भी देख

846
01:01:42,000 --> 01:01:46,120
लीजिए योगी किसको कहा गया है ब्रह्म को जानने वाले

847
01:01:46,120 --> 01:01:48,800
योगी को क्या कहा गया है 6.2

848
01:01:48,800 --> 01:01:54,800
देखिए

849
01:01:56,880 --> 01:02:00,960
जिसको सन्यास कहते हैं उसी को

850
01:02:00,960 --> 01:02:05,440
तू योग जान परमात्मा के साथ जो योग अपना जोड़ करने वाला

851
01:02:05,440 --> 01:02:10,200
कौन होगा जिसके पास सन्यास होगा

852
01:02:10,200 --> 01:02:14,240
यह 6.2 में लिखा है सीधा सधा सन्यास लिखा है

853
01:02:14,240 --> 01:02:19,400
और कहीं जाने की आवश्यकता ही नहीं है तो ना तो इनके

854
01:02:19,400 --> 01:02:23,560
जो जो तत्वदर्शी सिद्ध होते हैं क्योंकि सन्यासी

855
01:02:23,560 --> 01:02:27,720
ब्रह्मचारी नहीं है समस्त सुति स्मृति शास्त्रों में सामंजस

856
01:02:27,720 --> 01:02:32,120
की शिक्षा नहीं देते हैं संशय दूर नहीं करते हैं कहां से हो गए तत्वदर्शी कहां

857
01:02:32,120 --> 01:02:38,080
से हो गए

858
01:02:38,080 --> 01:02:42,120
आचार भाई परम और हरि ओम दास आप लोग

859
01:02:42,120 --> 01:02:46,600
अपना चेहरा दिखाएंगे तो आपसे बात होगी एक के सपना

860
01:02:46,600 --> 01:02:52,600
है सपना भाटिया

861
01:02:56,400 --> 01:03:00,920
सपना भाटिया जी को जरा ऊपर ले

862
01:03:00,920 --> 01:03:05,560
लीजिए स्ट्रीम में ले लीजिए इन्ह

863
01:03:05,560 --> 01:03:10,880
मुझे ऑप्शन नहीं दिख रहा

864
01:03:10,880 --> 01:03:15,200
है सपना जी आपका चेहरा रिवील

865
01:03:15,200 --> 01:03:21,200
करें हम बात उन्हीं से करते हैं जो अपना चेहरा लेकर

866
01:03:22,400 --> 01:03:27,320
आए आप अपना विषय बता सकते हैं बिना चेहरा दिखाए

867
01:03:27,320 --> 01:03:31,320
उनका नेट सही नहीं अच्छा ठीक है

868
01:03:31,320 --> 01:03:36,560
भाई हिंदू भाई आप आइए राजकुमार

869
01:03:36,560 --> 01:03:40,600
हिंदू जी सर जी सर जी गुरुजी

870
01:03:40,600 --> 01:03:44,640
जी मेरा तो कहना यही है कि मैं क्या है कि जैसे कि

871
01:03:44,640 --> 01:03:49,480
अपने एक फाइनेंस कंपनी में काम करता हूं

872
01:03:49,480 --> 01:03:54,200
तो मेरे को बहुत सारे कस्टमर भी मिलते हैं

873
01:03:54,200 --> 01:03:58,520
मेरा तो एक ही मानना है कि मैं किसी भी समाज से परत

874
01:03:58,520 --> 01:04:02,600
नहीं करता पानी पीने में वहां पर मगर मुझको यह दिखते हैं मेरा

875
01:04:02,600 --> 01:04:06,720
तो यही है कि मैं इनके घर का तो पानी भी नहीं पीता

876
01:04:06,720 --> 01:04:10,840
और अपन को कुछ ना कुछ ऐसा करना पड़ेगा इनके लिए जैसे कि लोग क्या

877
01:04:10,840 --> 01:04:15,040
है कि पता नहीं यह सोचते हैं कि हमने कोई और कर

878
01:04:15,040 --> 01:04:19,280
लेगा जहां भी इनके प्रोग्राम होते किताबे बांटते तो बाटने

879
01:04:19,280 --> 01:04:23,440
से उनको कोई रोकता ही नहीं है ये

880
01:04:23,440 --> 01:04:28,160
चाहते को कोई और रोकेगा तो इसके लिए किसी ना किसी

881
01:04:28,160 --> 01:04:32,160
हां हां मैंने आपका देखा है मैंने भी इतनी जगह

882
01:04:32,160 --> 01:04:38,160
इनका विरोध किया है जिसकी कोई हद नहीं

883
01:04:41,600 --> 01:04:45,720
है इनके चक्कर में दो तीन बार मतलब भारी

884
01:04:45,720 --> 01:04:49,720
हो गया उसका अब क्या बताऊ आपको

885
01:04:49,720 --> 01:04:55,720
पार्वती पटेल वापस आ गए

886
01:04:56,920 --> 01:05:02,920
भाई साहब आप फिर अंधेरे में इतना

887
01:05:03,280 --> 01:05:07,320
ज्यादा मतलब लाइट साइड मु करता हूं तो अच्छा सा इनकी

888
01:05:07,320 --> 01:05:11,600
जिंदगी में अधरा है उजाला होगा ही

889
01:05:11,600 --> 01:05:16,040
नहीं आप भाई साहब किसी और दिन आइएगा अच्छे से आपके नेटो

890
01:05:16,040 --> 01:05:22,040
रोशनी हो ठीक है

891
01:05:26,440 --> 01:05:29,160
ठीक

892
01:05:29,160 --> 01:05:33,200
है तो और कोई है नहीं जो आ सके

893
01:05:33,200 --> 01:05:37,520
ऑलमोस्ट हमने एक एक बात का संदर्भ

894
01:05:37,520 --> 01:05:43,520
बता दिया

895
01:05:46,920 --> 01:05:51,000
है कहीं पर आपने यह नहीं दिखाया कि कबीर का जो शरीर है व पाच

896
01:05:51,000 --> 01:05:57,000
तव का नहीं सारी पीडीएफ है बहुत सारी हा

897
01:06:05,800 --> 01:06:09,880
थक जाते बोलते

898
01:06:09,880 --> 01:06:13,880
बोलते बिल्कुल मेरे पास क्या प सारे

899
01:06:13,880 --> 01:06:17,720
तो हम चाहते हैं कि सभी लोगों को यह

900
01:06:17,720 --> 01:06:21,960
पहुंचे जब तक कोई नहीं आ रहा है मैं अपने एक

901
01:06:21,960 --> 01:06:25,960
बात बता दूं अभी रिसेंटली एक मैंने

902
01:06:25,960 --> 01:06:30,560
वीडियो देखा था जिसमें कि

903
01:06:30,560 --> 01:06:35,760
यह आर्य समाज को फॉलो करने वाले ये

904
01:06:35,760 --> 01:06:39,800
है गौतम खट्टर

905
01:06:39,800 --> 01:06:43,920
तो गौतम खट्टर जी का मैंने वीडियो देखा था वो मंच पर चढ़ कर के और चिल्ला

906
01:06:43,920 --> 01:06:48,120
रहे थे कि आज कोई भी ऐसा मौलवी नहीं होगा जो दूसरे मौलवी को क्रिटिसाइज

907
01:06:48,120 --> 01:06:52,320
करता हो आज कोई भी ऐसा पादरी नहीं होगा जो दूसरे

908
01:06:52,320 --> 01:06:56,320
पादरी को क्रिटिसाइज करता हो मगर सनातन धर्म के जो सर्वोच्च गद्दी

909
01:06:56,320 --> 01:07:00,320
पर बैठे हैं वह शंकराचार्य आज एक दूसरे की छीट कसी

910
01:07:00,320 --> 01:07:05,520
कस रहे इस तरीके से मतलब

911
01:07:05,520 --> 01:07:10,080
जो है मंच पर जाकर के शंकराचार्य और उनके जो गतिविधियां

912
01:07:10,080 --> 01:07:14,120
होती है उन पर आक्षेप लगाना और आक्षेप लगाने के

913
01:07:14,120 --> 01:07:18,360
रूप में ही अपने आप को वहां पर नेतृत्व करने वाले

914
01:07:18,360 --> 01:07:21,800
के रूप में स्थापित करने का प्रयास

915
01:07:21,800 --> 01:07:27,800
कर अनमोल

916
01:07:27,800 --> 01:07:33,080
अनमोल जी चेहरा दिखाएं परम जी चेहरा

917
01:07:33,080 --> 01:07:37,160
दिखाएं तो सबसे पहले मैंने अपनी एक लास्ट लाइव स्ट्रीम में भी

918
01:07:37,160 --> 01:07:42,120
बताने का प्रयास किया था कि यह जो कुछ लोग हैं

919
01:07:42,120 --> 01:07:47,800
अनमोल राणा जय श्री

920
01:07:47,800 --> 01:07:53,800
राम आवाज नहीं आ रही

921
01:07:53,920 --> 01:07:59,920
आपकी तो

922
01:08:02,480 --> 01:08:06,520
हमने अपनी एक लाइव स्ट्रीम में बताया था कि

923
01:08:06,520 --> 01:08:11,040
कुछ लोग ऐसे हैं जो जिनका अस्तित्व जो है

924
01:08:11,040 --> 01:08:16,920
किसी को व्यक्तिगत रूप

925
01:08:16,920 --> 01:08:21,080
से क्रिटिसाइज करके और सामने वाले को पजेस करते

926
01:08:21,080 --> 01:08:25,600
हैं जैसे एक हो गए मैंने देखा कि

927
01:08:25,600 --> 01:08:30,000
भी कुछ ऐसी नेगेटिव थिंकिंग वाली बात समाज ने तुमको यह दिया है फेमिनिज

928
01:08:30,000 --> 01:08:34,080
म के आधार पर या हर चीज को क्र साइज करना जो समाज में पहले

929
01:08:34,080 --> 01:08:38,160
से चीज है उनको क्रिटिसाइज करना इसी प्रकार का य चल

930
01:08:38,160 --> 01:08:42,160
रहे हैं ये जो आचार्य प्रशांत है जो परंपरा प्राप्त जो चीज है

931
01:08:42,160 --> 01:08:46,480
उनको क्रिटिसाइज करना और ऐसी बातें करना वो बातें बताना

932
01:08:46,480 --> 01:08:50,600
लोगों को जो लोग अपने बारे में जानते बस जब उसको बहुत अच्छे

933
01:08:50,600 --> 01:08:54,720
शब्दावली में बहुत अच्छी पंक्तियों में भावपूर्ण तरीके से सुनते हैं तो वो

934
01:08:54,720 --> 01:08:59,200
कृतज्ञ हो जाते सुनाने वाले के और उसी प्रकार की स्ट्रेटजी पर

935
01:08:59,200 --> 01:09:03,560
यह आर्य समाज का तो अस्तित्व ही खड़ा है पूरा परंपरा प्राप्त जो

936
01:09:03,560 --> 01:09:07,800
सिद्धांत उनका विरोध करने के नाम पर आर समाज में ज्यादातर लोगों

937
01:09:07,800 --> 01:09:11,840
की जो भर्ती होती है व ऐसे ही होती है कि स्त्रियों का जने नहीं होता शूद्रों का जन नहीं

938
01:09:11,840 --> 01:09:15,920
होता हम जन करा रहे हैं यह फलाना फलाना आ जाओ आ जाओ हम करा देंगे

939
01:09:15,920 --> 01:09:19,920
तो वो सब बातें में नहीं जाऊंगा यह जो गौतम

940
01:09:19,920 --> 01:09:24,240
खट्टर जी है इनको मैं आज थोड़ा सा रिप्लाई दे रहा हूं

941
01:09:24,240 --> 01:09:28,440
कि जैसे सबसे पहले बात तो आपने यह कहा कि दुनिया में कोई मौलवी

942
01:09:28,440 --> 01:09:32,760
नहीं होगा जो दूसरे मौलवी को किसी गलत बात पर गलत

943
01:09:32,760 --> 01:09:36,840
कहे तो यह तो आपका गलत बात है आप केवल वहां

944
01:09:36,840 --> 01:09:40,920
पर जनता के जो मन है जनता का सुनने वाली जनता का उसके

945
01:09:40,920 --> 01:09:44,960
मन पर अपना आधिपत्य जमाने के लिए ऐसे भाव में बोल रहे हैं कि

946
01:09:44,960 --> 01:09:49,000
वह आपकी सुनकर मदस हो जाए वाह वाह वाह वाह क्या बोल रहा है कितना इसके अंदर

947
01:09:49,000 --> 01:09:53,160
आग है हमारे हिंदू धर्म के लिए और इस आग

948
01:09:53,160 --> 01:09:57,680
में वो इतना उलझ जाए कि यह सोच भूल ही जाए कि जो बोल रहा है बिल्कुल कुतर्क

949
01:09:57,680 --> 01:10:03,680
है बिल्कुल निराधार है

950
01:10:04,120 --> 01:10:08,200
कैसे कि ऐसा नहीं है कि दुनिया में कोई मौलवी

951
01:10:08,200 --> 01:10:12,440
दूसरे मौलवी के बारे में कुछ अगर गलत बात उसको लगती है तो वो बोलता नहीं है ख

952
01:10:12,440 --> 01:10:16,760
बोलता है दूसरी बात क्या शंकराचार्य

953
01:10:16,760 --> 01:10:20,760
जी हाथी पर चढ़ कर के रोज यह बोल रहे हैं क्या कि फलाने जो है शंकराचार्य

954
01:10:20,760 --> 01:10:24,800
नहीं है ये है वो है अरे भैया एक बार कहीं पर इंटरव्यू हुआ

955
01:10:24,800 --> 01:10:28,960
तो उन्होंने जो उनको जो उनके दृष्टिकोण से उनको सिद्धांत है उनके अनुसार उन्होंने कोई वक्तव्य

956
01:10:28,960 --> 01:10:33,080
दे दिया कोई शंकराचार्य एक दूसरे की आए दिन बुराई नहीं कर रहा तुम जरूर

957
01:10:33,080 --> 01:10:37,200
कर रहे हो तुम जरूर उस बात को बुना करके अपनी वोटिंग कमाना चाह

958
01:10:37,200 --> 01:10:41,800
रहे हो और तीसरी बात तुमने कहा

959
01:10:41,800 --> 01:10:46,000
अब इसको छोड़ दे क्या आर्य समाज में एक दूसरे की सीटा कसी

960
01:10:46,000 --> 01:10:48,280
नहीं होती है जो

961
01:10:48,280 --> 01:10:52,520
एक नस्क है कौन है अग्निवेश है

962
01:10:52,520 --> 01:10:56,720
जो विदेशों में सबसे ज्यादा जिन्होंने आर समाज का प्रचार कि दो दल

963
01:10:56,720 --> 01:11:00,760
बन गए थे क्या कहते हैं ये खूब क्रिटिसाइज किया

964
01:11:00,760 --> 01:11:04,760
गया उनको आर्य समाज अरे अभी मैंने देखा हवन यज्ञ की

965
01:11:04,760 --> 01:11:10,760
और बात में ही एक दूसरे की वो चल रही थी कि तुम गलत कर रहे हो य

966
01:11:10,880 --> 01:11:15,040
फिर भाई जहां गलत जो चीज हो रही है अधर्म

967
01:11:15,040 --> 01:11:19,240
हो रहा है आपके दृष्टिकोण से वहां मौन रहना

968
01:11:19,240 --> 01:11:23,480
है और यदि रहना है तो उसका निर्णय कौन करेगा

969
01:11:23,480 --> 01:11:27,640
ठीक है अब अगला पॉइंट आ जा आपने कहा कि आप सनातन धर्म की सर्वोच्च गद्दी

970
01:11:27,640 --> 01:11:32,080
पर बैठे हैं तो अगर सर्वोच्च गद्दी पर व बैठे हैं

971
01:11:32,080 --> 01:11:36,080
तो इसका अर्थ है कि क्या करना है और क्या नहीं करना है इसके निर्णय करने

972
01:11:36,080 --> 01:11:40,440
वाले वह है तो आप कौन होते हो य प्रश्न करने वाले

973
01:11:40,440 --> 01:11:44,520
और अगर प्रश्न करना है और आप मानते हो कि सनातन धर्म की

974
01:11:44,520 --> 01:11:48,600
सव सर्वोच्च गद्दी में बैठे हैं तो क्या आप उनके मठ में गए

975
01:11:48,600 --> 01:11:52,720
पूछने ऐसा क्यों कर रहे हैं जितने लोग इस तरीके से

976
01:11:52,720 --> 01:11:56,720
शंकराचार्य के नाम पर अपनी चीजों को सुनाते हैं वो क्या कभी

977
01:11:56,720 --> 01:12:01,480
शंकराचार्य के मठों में जाते हैं ये पूछने

978
01:12:01,480 --> 01:12:03,400
कि गुरुदेव ऐसा क्यों

979
01:12:03,400 --> 01:12:08,080
हो रहा है या आपकी भाषा में जो भी उनके लिए संबोधन हो

980
01:12:08,080 --> 01:12:12,080
नहीं क्योंकि आपको सॉल्यूशन चाहिए ही नहीं ना

981
01:12:12,080 --> 01:12:16,120
जैसे आतंकवादी है ना टेररिस्ट उनसे कह दिया जा भाई

982
01:12:16,120 --> 01:12:20,320
कश्मीर ले लो पूरा भारत ले लो हम मुसलमान हो जाते हैं सब कुछ कर लो पूरी दुनिया

983
01:12:20,320 --> 01:12:24,520
को मुसलमान बना देते हैं तो वो टेररिस्ट मानेंगे नहीं

984
01:12:24,520 --> 01:12:28,840
नहीं हम तो तुम्हे कच्चा जवाए गे अब

985
01:12:28,840 --> 01:12:32,960
है ना अगर उनके अनुसार पूरी दुनिया हो गई आज की तारीख

986
01:12:32,960 --> 01:12:37,280
में तो उनको सुकून मिल जाएगा नहीं मिलेगा उनको तो विप्लव

987
01:12:37,280 --> 01:12:41,280
ही चाहिए इसी प्रकार से आपको समाधान नहीं चाहिए कि शंकराचार्य

988
01:12:41,280 --> 01:12:45,480
क्या और क्यों कर रहे हैं क्या शंकराचार्य हिंदू राष्ट्र के लिए पूरे भारत में भ्रमण

989
01:12:45,480 --> 01:12:49,480
नहीं कर रहे क्या मुक्तेश्वरा जी गौ माता राष्ट्र माता

990
01:12:49,480 --> 01:12:53,720
के लिए पूरे भारत में नहीं गमन कर रहे कितने उन्होंने अभी पिछले

991
01:12:53,720 --> 01:12:58,560
छ महीनों में कितने भाषण दे एक दूसरे के विरोध में बताइए

992
01:12:58,560 --> 01:13:03,240
या भारती कृष्ण तीर्थ जी ने दे दिया हो या जो

993
01:13:03,240 --> 01:13:07,640
यह द्वारका पीठ के नाम से ख्या पित है और क्या कहते हैं ज्योतिष

994
01:13:07,640 --> 01:13:12,360
पीठ के नाम से ख्या पित है इन्होंने दे दिया हो या पुरी पीठ वालों ने दे दिया हो

995
01:13:12,360 --> 01:13:16,720
कब दिया बताइए पिछले छ महीने में कोई वक्तव्य दिया है क्या

996
01:13:16,720 --> 01:13:19,320
आप उनके नाम पर रोटिया सेकी

997
01:13:19,320 --> 01:13:23,480
हां कांग्रेस और नरसिंहा राव द्वारा जो खड़े किए गए ये

998
01:13:23,480 --> 01:13:27,720
जो है नकली शंकराचार्य प्र पयो जिनका

999
01:13:27,720 --> 01:13:31,880
शंकराचार्य जो आचार्य गण है उनसे भी कोई संबंध नहीं शिक्षा दीक्षा

1000
01:13:31,880 --> 01:13:35,960
कहां से वो भी नहीं पता ऐसे खड़े

1001
01:13:35,960 --> 01:13:40,200
किए शंकराचार्य को अगर नकली शंकराचार्य को

1002
01:13:40,200 --> 01:13:44,200
क्या कहते हैं वो नमाज पढवा वाले शंकराचार्य को अगर मना

1003
01:13:44,200 --> 01:13:49,640
कर रहे हैं तो वह आपको बुरा लग रहा

1004
01:13:49,640 --> 01:13:54,320
है तो हम इस तरीके के व्यक्तिगत कटाक्ष करते नहीं है आर

1005
01:13:54,320 --> 01:13:58,640
समाज में भी दू की छटा कसी होती है और सबसे

1006
01:13:58,640 --> 01:14:03,160
बड़ी बात आप खड़े होने किसके पास जा रहे हो यह भी देखो

1007
01:14:03,160 --> 01:14:07,280
आप कह रहे हो अभी थोड़े दिन पहले यह जो यति

1008
01:14:07,280 --> 01:14:11,440
नरसिंहानंद जी है हम उनके बिल्कुल सपोर्ट में खड़े हैं ज आवश्यकता

1009
01:14:11,440 --> 01:14:15,640
होगी खड़े होंगे मगर यति नर सिमान जी है जो इन्होंने कुछ दिनों

1010
01:14:15,640 --> 01:14:20,160
पूर्व कोई बली का आयोजन किया था क्यार समाज ने उसे क्रिसा

1011
01:14:20,160 --> 01:14:24,200
नहीं किया था हो गए थे खड़े साथ में और आज आप

1012
01:14:24,200 --> 01:14:28,360
लोग यति नरसिंहानंद जी के यति नरसिंहानंद जी के

1013
01:14:28,360 --> 01:14:32,640
पास जाकर के खड़े होकर के वोट कमा रहे हो हिंदूवादी होने का अपना

1014
01:14:32,640 --> 01:14:34,440
चैनल चलाने का अपना

1015
01:14:34,440 --> 01:14:38,880
अपनी प्रसिद्धि पाने के लिए हा

1016
01:14:38,880 --> 01:14:43,320
कितने लोगों को शारीरिक युद्ध का प्रशिक्षण दे दिया आपने स्वयं

1017
01:14:43,320 --> 01:14:47,400
सिवाय इसके के मंचों पर जा जा कर के जो परंपरा प्राप्त जो चीजें उनको क्रिटिसाइज करने

1018
01:14:47,400 --> 01:14:51,400
के अवतार को क्रिटिसाइज करा लो मूर्ति को क्रिटिसाइज करा लो

1019
01:14:51,400 --> 01:14:55,680
जनव को स्त्रियों के जनव के रूप में परंपरा प्राप्त आचार्य क्रिटिसाइज

1020
01:14:55,680 --> 01:14:59,680
करा लो और शंकराचार्य को क्रिसा करा लो यही तो है

1021
01:14:59,680 --> 01:15:03,680
और दोगले पन की हद देखो आपकी जब आपसे साई

1022
01:15:03,680 --> 01:15:07,720
के बारे में पूछा जाता है तो साई के लिए आप बोलते हो कि हमारे जो

1023
01:15:07,720 --> 01:15:11,800
सबसे बड़े गुरु है ना शंकराचार्य वो साई को नहीं मानते अपनी बात को प्रूफ

1024
01:15:11,800 --> 01:15:16,080
करने के लिए शंकराचार्य को ऐसे प्रूफ यूज करते हैं और

1025
01:15:16,080 --> 01:15:20,080
उसके बाद शंकराचार्य पर ही आक्षेप लगाते हैं उनकी प्रमाणिक तर पर उनकी

1026
01:15:20,080 --> 01:15:24,360
बातों पर कितने ले उस किताब को बेचते

1027
01:15:24,360 --> 01:15:28,480
हो उस का प्रचार करते हो जिस किताब में शंकराचार्य का के

1028
01:15:28,480 --> 01:15:32,760
बारे में बुराई लिखी हुई है उनके सिद्धांतों की काट की गई है और फिर शंकराचार्य

1029
01:15:32,760 --> 01:15:37,920
के सिद्धांतों के आधार पर ुद पब्लिसिटी कमाते हो क्या दोगलापन है

1030
01:15:37,920 --> 01:15:42,440
भाई हा फिर

1031
01:15:42,440 --> 01:15:46,560
कहां खड़े हो मूर्ति पूजक के पास वो तो पापी है उसको बताया

1032
01:15:46,560 --> 01:15:49,680
नहीं आपने हमारे लिए निराकार

1033
01:15:49,680 --> 01:15:53,720
वादी पापी नहीं है तुम्हारे लिए मूर्ति पूजक पापी

1034
01:15:53,720 --> 01:15:56,000
है

1035
01:15:56,000 --> 01:16:00,160
हमारे लिए भगवान के निराकार स्वरूप को स्वीकार करने

1036
01:16:00,160 --> 01:16:04,560
वाला हमारा भाई है तुम्हारे लिए

1037
01:16:04,560 --> 01:16:08,760
अवतार को स्वीकार करने वाला पापी है अधर्मी है

1038
01:16:08,760 --> 01:16:13,840
कौन है कौन है सनातन को नुकसान पहुंचाने

1039
01:16:13,840 --> 01:16:19,840
वाला कभी अंतर आत्मा में खड़े होकर के शीशे में देखना

1040
01:16:28,720 --> 01:16:32,840
अभी बंगाल में इतने हिंदू मारे जा रहे थे इतनी मार काट हो रही थी य

1041
01:16:32,840 --> 01:16:35,400
हो रही थी

1042
01:16:35,400 --> 01:16:39,480
मगर राम भद्राचार्य जी ने एक जगह मूर्ति पूजा अवतारवाद

1043
01:16:39,480 --> 01:16:43,720
के लिए जरा सा बोल दिया तो उनके पास बहुत टाइम निकल आया पूरे राम

1044
01:16:43,720 --> 01:16:48,040
भद्राचार्य जी के लिए अनशन करने का वो

1045
01:16:48,040 --> 01:16:52,920
बाहर आंदोलन खड़ा करने का उनके विरोध में

1046
01:16:52,920 --> 01:16:57,000
बंगाल के लिए करने का टाइम नहीं था समय की बात है जिस समय बंगाल में हिंदू मर रहे

1047
01:16:57,000 --> 01:17:01,880
थे कितने जुलूस निकाले कितनी शोभा यात्रा निकाल

1048
01:17:01,880 --> 01:17:04,760
दी कोई नहीं राम

1049
01:17:04,760 --> 01:17:09,000
भद्राचार्य क्या विरोध करने के लिए आपने जरूर तमाशा

1050
01:17:09,000 --> 01:17:13,120
किया बात मत करना फालतू की

1051
01:17:13,120 --> 01:17:17,120
निरर्थक बातें आपके जो वही

1052
01:17:17,120 --> 01:17:22,040
वाली बात मैंने बताई थी ना वो वाह वाह वाह वाह शुरू तो करने दो

1053
01:17:22,040 --> 01:17:26,240
वही हाल है आप लोगों का भीड़ बैठ जाती है और

1054
01:17:26,240 --> 01:17:30,280
साइकोलॉजी की किताब में लिखा है भीड़ के बुद्धि नहीं होती सामने

1055
01:17:30,280 --> 01:17:34,520
भीड़ बैठ जाती है और उसको आपने कोई जुलत कारी बात बता दी

1056
01:17:34,520 --> 01:17:38,800
हो सकता है वह भीड़ व मुनव्वर फारूकी की भीड़ थी ना वहा

1057
01:17:38,800 --> 01:17:42,880
उन्हीं के राम सीता का मजाक उड़ा रहे भीड़ अस रही है वही है वही आपकी भीड़

1058
01:17:42,880 --> 01:17:47,040
है ना तथ्य ना तर्क ना प्रमाण

1059
01:17:47,040 --> 01:17:51,400
बस एक हीरो दिख रहा है जत कारी बातें करने

1060
01:17:51,400 --> 01:17:57,320
वाला क्या बात है

1061
01:17:57,320 --> 01:18:02,000
जिस दिन प्रत्यक्ष वार्ता होगी ना जब तक दूर हो

1062
01:18:02,000 --> 01:18:06,600
तब तक खूब मुंगेरी लाल के हसीन सपनों की दुनिया में डूबे रहो

1063
01:18:06,600 --> 01:18:10,680
कभी अगर प्रत्यक्ष वार्ता हुई तो दृश्य बदल

1064
01:18:10,680 --> 01:18:14,680
जाएगा वास्तविकता से सामना होगा उस दिन

1065
01:18:14,680 --> 01:18:19,320
आपका खूब अपनी प्रसिद्धि को इस समय बुना लो

1066
01:18:19,320 --> 01:18:23,320
प्रसिद्धि को पोषित करो पापियों के पास

1067
01:18:23,320 --> 01:18:29,320
जा रहे हैं

1068
01:18:35,320 --> 01:18:39,400
जी उस समय मैंने देखा जब यह बांग्लादेश में हो रहा

1069
01:18:39,400 --> 01:18:43,640
था कुछ भले आर्य समाजी ऐसे थे जो उस समय कुछ भले

1070
01:18:43,640 --> 01:18:48,040
आर्य समाजी जो बोल रहे हैं भाई तुम रा राम भद्राचार्य में इतना ध्यान क्यों दे रहे हो

1071
01:18:48,040 --> 01:18:52,160
बंगाल के लिए बोलो ना ऐसे थे कुछ मगर मैंने देखा

1072
01:18:52,160 --> 01:18:56,160
कि उस समय बंगाल के लिए कुछ करने वाला नहीं वहा आप सड़को

1073
01:18:56,160 --> 01:19:00,800
पर उतर आए राम भद्राचार्य ने इतने वीडियो बना डाले उसी दौरान

1074
01:19:00,800 --> 01:19:04,680
बात करते हैं सनातन रक्षा

1075
01:19:04,680 --> 01:19:08,800
की अरे मूर्ति को तो तुम खुद तुवाना चाहते हो मंदिरों को तो तुम

1076
01:19:08,800 --> 01:19:12,360
खुद तुवाना चाहते हो क्यों बेचते हो ऐसी किताबें जिसमें लिखा

1077
01:19:12,360 --> 01:19:16,600
है कि मूर्तियों की आवश्यकता नहीं है और जब तुम ऐसी

1078
01:19:16,600 --> 01:19:20,600
मेंटालिटी खुद फैला रहे हो तो फिर उस मूर्ति को बचाने कौन से

1079
01:19:20,600 --> 01:19:26,160
मुंह से जा रहे हो यार तुम

1080
01:19:26,160 --> 01:19:30,320
मतलब व्यक्ति को वैचारिक तौर पर तो नपुंसक बना दो कि नहीं मूर्ति किसी

1081
01:19:30,320 --> 01:19:34,480
काम की नहीं है और फिर दिखावा करो देखो हम तुम्हारी मूर्ति बचाने आए

1082
01:19:34,480 --> 01:19:40,480
इसलिए तुम हमारी सत्यार्थ प्रकाश

1083
01:19:42,680 --> 01:19:46,720
पढ़ो हां भाई कोई है

1084
01:19:46,720 --> 01:19:51,240
देखिए हरि ओम दास है बोल रहे थे

1085
01:19:51,240 --> 01:19:56,280
अनमोल जी आइए बताइए हरिओम दास जी चेहरा दिखाए

1086
01:19:56,280 --> 01:20:00,360
अनमोल राणा जय श्री राम हा जी मेरा एक

1087
01:20:00,360 --> 01:20:04,360
क्वेश्चन था जी य आप अभी मैं देख रहा था आपका यह

1088
01:20:04,360 --> 01:20:08,400
तो आप कह रहे थे गुरु जो होना चाहिए वह वैराग्य वाला

1089
01:20:08,400 --> 01:20:11,200
होना चाहिए जो वैरागी

1090
01:20:11,200 --> 01:20:15,280
हो आप किसके शिष्य है यह बताइए जी मैं तो

1091
01:20:15,280 --> 01:20:19,480
हिंदू हूं आप किसके शिष्य है

1092
01:20:19,480 --> 01:20:23,560
आपको आप हिंदू कैसे हो चलो यही बताओ

1093
01:20:23,560 --> 01:20:27,480
कैसे हिंदू की परिभाषा क्या है आपकी किस आधार पर कह

1094
01:20:27,480 --> 01:20:31,720
रहे हो हिंदू हम सनातन धर्म को फॉलो

1095
01:20:31,720 --> 01:20:36,400
करते हैं इस वजह से सनातन धर्म की परिभाषा क्या है आपकी

1096
01:20:36,400 --> 01:20:40,520
परिभाषा यह मेरा एक क्वेश्चन है देख रहा था तो आपका वीडियो

1097
01:20:40,520 --> 01:20:45,760
आ गया तो मैंने सोचा मेरे क्वेश्चन आपसे पूछ लू

1098
01:20:45,760 --> 01:20:50,280
कि जो गुरु वैरागी होना चाहिए ठीक है तो क्या

1099
01:20:50,280 --> 01:20:54,320
आप अपना जो क्वेश्चन है वो हमें लिख करके भेजिएगा हम आपको वैसे देंगे जवाब

1100
01:20:54,320 --> 01:20:58,640
य अभी हम बात कर रहे हैं कि अगर कोई संत रामपाल

1101
01:20:58,640 --> 01:21:02,640
का फॉलोअर है तो वह आए और हमारी किसी बात से उसको विरोध है तो विरोध

1102
01:21:02,640 --> 01:21:06,640
करे क्वेश्चन आंसर्स का वीडियो रखेंगे अभी नहीं है वो

1103
01:21:06,640 --> 01:21:10,880
ठीक है होता क्या है क्वे आंसर के नाम पर वही विरोध करने वाले आते

1104
01:21:10,880 --> 01:21:14,880
हैं और विरोध करने वाले क्वेश्चन आंसर करने वाले के

1105
01:21:14,880 --> 01:21:19,080
रूप में आते हैं और अपने पक्ष को साबित मतलब

1106
01:21:19,080 --> 01:21:24,040
वो यह सिद्ध करते हैं कि अगर हारू तो सिर्फ मैं हारू

1107
01:21:24,040 --> 01:21:28,080
और अगर जीत जाऊ तो मेरा वो अगर सफल

1108
01:21:28,080 --> 01:21:32,160
हो तो असफल हो तो केवल मैं असफल हू और अगर सफल हो गया तो मेरा

1109
01:21:32,160 --> 01:21:36,320
जो पीछे कुटुंब है वो सफल हो जाए तो इस वजह से

1110
01:21:36,320 --> 01:21:40,640
मेरा तो ये है सि गुरु तो वैरागी हो ग ठीक है तो

1111
01:21:40,640 --> 01:21:42,480
उसके शिष्य है वो भी वैरागी होने चाहिए

1112
01:21:42,480 --> 01:21:46,520
अगर भगवान को पाना है तो फिर या नहीं या बिना वैरागी

1113
01:21:46,520 --> 01:21:51,360
भी हो सकता है मैंने आपको क्या कहा आपने सुना नहीं

1114
01:21:51,360 --> 01:21:55,440
मैंने तो सुन लिया अब एक बारी आप बता दीजिए दोहरा रहे हो ना जब

1115
01:21:55,440 --> 01:21:59,960
आपने सुन लिया तो आप दोहरा क्यों रहे हो फिर आप मानोगे नहीं जो मैं कह रहा हूं ऐसा

1116
01:21:59,960 --> 01:22:04,000
है मैंने आपको ये कहा कि आप किसी और दिन

1117
01:22:04,000 --> 01:22:08,360
हम क्वेश्चन आंसर रखेंगे हम इसमें ऐसे डायरेक्ट क्वेश्चन आंसर नहीं रखते

1118
01:22:08,360 --> 01:22:12,360
हैं आप आइएगा उस दिन क्वेश्चन करिएगा ठीक है हम

1119
01:22:12,360 --> 01:22:16,480
लोग रखेंगे या फिर आपको जल्दी है तो आप हमारा ग्रुप है टेलीग्राम

1120
01:22:16,480 --> 01:22:21,200
ग्रुप है वहां जाइए ये क्वेश्चन लिख दीजिए आपको जवाब पहुंच जाएगा लिखित में

1121
01:22:21,200 --> 01:22:25,200
ठीक है ठीक ये जो लाइव स्ट्रीम है उसम हमय ले रहे कि

1122
01:22:25,200 --> 01:22:29,440
हम रामपाल वालों की जो शिक्षा है उसका हम प्रतिकार किया हमने

1123
01:22:29,440 --> 01:22:33,440
यहां पर पक्ष रखा वास्तविकता क्या है वो रखा तो हम यह आमंत्रित कर

1124
01:22:33,440 --> 01:22:37,640
रहे हैं कि कोई जो अगर उसको इस जो हम बता रहे उससे दिक्कत

1125
01:22:37,640 --> 01:22:43,640
है तो वह आए और

1126
01:22:44,680 --> 01:22:50,680
बताए

1127
01:22:52,120 --> 01:22:56,480
ठीक चलिए फिर आज राम

1128
01:22:56,480 --> 01:23:00,560
रामपाल वाले कोई नहीं आ रहा आज क्या बात डर रहे हैं सो

1129
01:23:00,560 --> 01:23:04,760
गए उनके पास कु बचा नहीं ना हर बात का तो तोड़ मिल

1130
01:23:04,760 --> 01:23:08,800
तोड़ मिल गया अब बोले क्या करके अब देखो

1131
01:23:08,800 --> 01:23:12,840
शुरू में आप देखो कुछ लोग आते थे ना वेद में लिखा कभी कभी अब

1132
01:23:12,840 --> 01:23:17,400
बोलना बंद कर दिया है देखो आप पिछली कुछ लाइव स्ट्रीम देखना

1133
01:23:17,400 --> 01:23:21,520
अब वो आक के वो नहीं बोलते वेदों में प्रमाण है दूसरी बातें बोलते हैं वेदों में प्रमाण है कबीर

1134
01:23:21,520 --> 01:23:25,720
भगवान है गायब हो गया इस स्लोगन बात

1135
01:23:25,720 --> 01:23:29,760
खोज के लाते इस स्लोगन के पीछे ही हम

1136
01:23:29,760 --> 01:23:34,000
पढ़े थे शुरू से ये जो इन्होंने बना लिया था मैंने क्योंकि

1137
01:23:34,000 --> 01:23:38,800
पिछले साल जब वो मेले वाला जो वो बात हुई थी

1138
01:23:38,800 --> 01:23:42,880
तब से कोई वीडियो चले ना चले वोह चलता रहता था और उसमें क्या होता

1139
01:23:42,880 --> 01:23:47,000
रहता था कि वह ऐसे ऐसे गंदे गंदे कमेंट करते रहते थे

1140
01:23:47,000 --> 01:23:51,280
और म जैसे कुछ मेंटली डिस्टर्ब हो एक ही कमेंट

1141
01:23:51,280 --> 01:23:55,400
वेदों में प्रमाण है कबीर साहब भगवान है ब्रह्मा विष्णु महे और

1142
01:23:55,400 --> 01:23:59,480
ब्रह्मा विष्णु महेश अविनाशी नहीं है दुर्गा ये

1143
01:23:59,480 --> 01:23:59,980
दुर्गा

1144
01:23:59,880 --> 01:24:04,280
से उत्पन्न हुए हैं और ब्राह्मण काल का

1145
01:24:04,280 --> 01:24:10,160
काल सतयुग के राक्षस और कलयुग में

1146
01:24:10,160 --> 01:24:14,360
ब्राह्मण है ना ये तो लाइव स्ट्रीम अभी लाइव

1147
01:24:14,360 --> 01:24:18,560
चल रहा है ना तो उसम क्वेश्चन जरूर लिखेंगे वेदों में प्रमाण कबीर साहब

1148
01:24:18,560 --> 01:24:23,040
पता नहीं मानते नहीं मगर बहुत कम हो गया है बहुत कम हुआ है 90

1149
01:24:23,040 --> 01:24:27,440
पर उसमें वो आया क्योंकि अब इनको उसम उस बात में दम नहीं दिख रही है

1150
01:24:27,440 --> 01:24:31,520
पहले इनको लगता था हमने किला काढ लिया अब उसको खोदा गया तो

1151
01:24:31,520 --> 01:24:35,600
निकला चुहिया इनको लगता था हमने पहाड़ तोड़ लिया

1152
01:24:35,600 --> 01:24:40,840
अब उस पहाड़ को टोला गया तो उसमें तो चुइया है

1153
01:24:40,840 --> 01:24:45,120
हां विशाल भाटिया जी जी मैं अभी एक सेकंड

1154
01:24:45,120 --> 01:24:49,320
रुकेगा मैं आ रहा हूं है मैं इधर ही हूं दो

1155
01:24:49,320 --> 01:24:53,840
मिनट बस मैं बस आ रहा हूं

1156
01:24:53,840 --> 01:24:58,120
मुझे आ जाओ आ जाओ आ जाओ

1157
01:24:58,120 --> 01:25:02,320
देख प्र को

1158
01:25:02,320 --> 01:25:06,280
जा आवाज आपकी आ रही

1159
01:25:06,280 --> 01:25:10,360
है अरे कहां गए कहां गए सब के सब पंडित

1160
01:25:10,360 --> 01:25:13,760
जी आ जाइए आप तो आ

1161
01:25:13,760 --> 01:25:17,400
जाइए पंडित लोकी

1162
01:25:17,400 --> 01:25:23,320
जी अरे कहां गए भाई

1163
01:25:23,320 --> 01:25:27,720
मुझे पूरा गांव खाली हो गया क्या

1164
01:25:27,720 --> 01:25:33,720
कहां गए वेदों में प्रमाण है कबीर भगवान है आओ

1165
01:25:53,240 --> 01:25:57,720
ना अब ये ये कहेंगे थोड़े दिनों बाद वेदों में नहीं

1166
01:25:57,720 --> 01:26:02,400
सूक्ष्म वेद में प्रमाण है कबीर भगवान है ये कहो ठीक है

1167
01:26:02,400 --> 01:26:06,560
फिर इसको किसी और दि लपेटे में लेंगे सूक्ष्म वेद तो इनका खुद का ही लिखा

1168
01:26:06,560 --> 01:26:10,960
हुआ है ना तो हा खुद का लिखा खुद

1169
01:26:10,960 --> 01:26:16,000
चीज में तो खुद कुछ भी प्रमाण कर देंगे इसमें क्या है

1170
01:26:16,000 --> 01:26:17,520
हमने इतनी बार कहा

1171
01:26:17,520 --> 01:26:21,560
इनके जो ट्यूबर्स हैं कि भाई हमारे चैनल पर मत आओ आपको लगता है

1172
01:26:21,560 --> 01:26:25,600
कि हम हटा देते हैं बिना मर्जी के कोई बीच का चैनल

1173
01:26:25,600 --> 01:26:29,600
ढूंढ लेंगे या बीच की जगह ढूंढ लेंगे आ जाओ आप लोग

1174
01:26:29,600 --> 01:26:33,960
जो वीडियो बना रहे हो तो सामना नहीं कर सकते

1175
01:26:33,960 --> 01:26:38,120
जो इनके यूट्यूब है जो वीडियो बना रहे हैं एक है एकम

1176
01:26:38,120 --> 01:26:42,480
एव द्वितीयं एक है

1177
01:26:42,480 --> 01:26:46,640
फैक्ट विथ अभिषेक वीडियो बना लेंगे बंद कमरे में बैठ

1178
01:26:46,640 --> 01:26:51,120
के सामना करने में सब ढीला हो जाता

1179
01:26:51,120 --> 01:26:55,440
है अरे आओ ना भाई मैंने तो यह भी कहा हमारे चैनल पर आवश्यक

1180
01:26:55,440 --> 01:26:59,720
नहीं है आप संपर्क करो कोई बीच की चीज निकाल ली

1181
01:26:59,720 --> 01:27:03,840
जाएगी इतना डर है सोचिए इतना

1182
01:27:03,840 --> 01:27:06,080
भय

1183
01:27:06,080 --> 01:27:10,160
है दूर दूर बैठे हो करके वीडियो बना लेंगे

1184
01:27:10,160 --> 01:27:14,320
सामना करने नहीं आएंगे मालूम है कि पूरा जो ताना बाना

1185
01:27:14,320 --> 01:27:18,440
है खोकला है नीचे का सब बेस लड़े

1186
01:27:18,440 --> 01:27:22,520
किस पे किस परे सामना करें नहीं ये पता है कि ये रामपाल जी

1187
01:27:22,520 --> 01:27:27,000
महाराज को बचाने में लगे हुए हैं कुछ

1188
01:27:27,000 --> 01:27:31,400
महाराज क रहा रामपाल मैं अ ये कह रहा हूं रामपाल महाराज

1189
01:27:31,400 --> 01:27:32,520
जी बचना चाहते

1190
01:27:32,520 --> 01:27:36,880
हैं कि नहीं यह भी तो सोचिए भाई उनके नाम से चल रहा

1191
01:27:36,880 --> 01:27:41,000
है कौन दीक्षा के लिए प्रूव कर रहा है कोई सबूत नहीं

1192
01:27:41,000 --> 01:27:45,040
है कि दीक्षा कैसे देनी है कैसे नहीं देनी है इस बारे में कल उस बंदे

1193
01:27:45,040 --> 01:27:49,160
ने खुद कहा रामपाल जी का कहीं पर ऐसी कोई वीडियो नहीं

1194
01:27:49,160 --> 01:27:54,480
है जिसमें उन्होंने कहा हो कि मैं दीक्षा इस तरीके से दूंगा

1195
01:27:54,480 --> 01:27:58,480
क्या पता उनको पता भी ना हो कि उनके नाम से दीक्षा दी जा रही है

1196
01:27:58,480 --> 01:28:02,560
और यह बोलते हैं कि जो भी लोग इनसे दीक्षा

1197
01:28:02,560 --> 01:28:06,680
लेते हैं वीडियो पहली बात तो जब दीक्षा दे रहे तब गुरु को पता ही

1198
01:28:06,680 --> 01:28:12,680
नहीं है मैं किसी को दीक्षा दे रहा

1199
01:28:13,720 --> 01:28:18,160
हूं और दूसरी बात मदेव

1200
01:28:18,160 --> 01:28:22,520
दूसरी बात क्या है एक मिनट दूसरी बात कि

1201
01:28:22,520 --> 01:28:26,600
यह पूरा डाटा कैसे जाता होगा रामपाल जी

1202
01:28:26,600 --> 01:28:30,760
के पास कि आपने इस महीने इतने लोगों को दीक्षा दी है इतनी इतनी

1203
01:28:30,760 --> 01:28:34,800
तो गड्डी बन जाती होगी इनके अनुसार तो बहुत है करोड़ों लोग है इस समय जो

1204
01:28:34,800 --> 01:28:38,960
प्रतिदिन दीक्षा ले रहे हैं तो महीने भर का डाटा इतना हो जाता होगा फिर

1205
01:28:38,960 --> 01:28:43,440
उसको ये लोग लेके जाते होंगे वहां जेल में वो जेल नहीं जेल धाम

1206
01:28:43,440 --> 01:28:47,640
कल उसने बोला था जेल धाम तो जेल धाम में वो लेके जाते होंगे

1207
01:28:47,640 --> 01:28:51,640
अब जेल धाम में भैया वो कैसे उसको एक एक को पहचानते होंगे

1208
01:28:51,640 --> 01:28:55,680
मेरा शिष्य है और मैंने इसको भी शक्षा दी अच्छा इसको

1209
01:28:55,680 --> 01:28:59,880
भी अच्छा इसको भी दे दी सबको कैसे उसको मेंटेन

1210
01:28:59,880 --> 01:29:03,960
करते होंगे गुरु शिष्य का कैसा संबंध है जिसमें गुरु को पता ही नहीं

1211
01:29:03,960 --> 01:29:08,040
चल रहा है और क्या प्रैक्टिकल दिख रहा है इसमें समझ नहीं आ रहा जी टिया

1212
01:29:08,040 --> 01:29:12,120
जी बोलिए जय श्री राम जय श्री राम

1213
01:29:12,120 --> 01:29:16,120
सभी को जय श्री राम पिछली

1214
01:29:16,120 --> 01:29:20,280
बार भी जुड़ने आया था मैं जुड़ नहीं पाया था तो एक प्रमाण में दिखाने

1215
01:29:20,280 --> 01:29:24,440
वाला जैसे देवी भागवत है उसमें दिखाते हैं कि विष्णु जी कहते हैं देवी से कि हम जन्म

1216
01:29:24,440 --> 01:29:28,560
मृत्यु होती है हम अविनाशी नहीं है है ना अब एक पुराण

1217
01:29:28,560 --> 01:29:29,060
है मेरे

1218
01:29:28,880 --> 01:29:33,040
पास 18 पुराणों में सबसे पहला पुराण ब्रह्म पुराण है यह देखिए यह

1219
01:29:33,040 --> 01:29:37,200
ब्रह्म पुराण है और जो उनके फस है वो भी देखें गीता

1220
01:29:37,200 --> 01:29:41,200
प्रस और संक्षिप्त है और सबसे पहला पुराण है ये अब मैं इस पुराण

1221
01:29:41,200 --> 01:29:45,360
से आपको वो दिखाऊंगा कि इसमें भगवान विष्णु क्या कह रहे हैं ठीक है देखिए मैं आपको

1222
01:29:45,360 --> 01:29:47,920
दिखाता हूं

1223
01:29:47,920 --> 01:29:52,080
रुकिए इसमें इसमें भगवान विष्णु ने कुछ और बात

1224
01:29:52,080 --> 01:29:55,760
कही हुई है

1225
01:29:55,760 --> 01:30:01,000
सेकंड ये देखिए [संगीत]

1226
01:30:01,000 --> 01:30:05,000
मुझको हा अब ये

1227
01:30:05,000 --> 01:30:09,080
ब्रह्म पुराण पेज नंबर 166

1228
01:30:09,080 --> 01:30:13,200
मैं यहां से पढ़ूंगा इसमें देखिए भगवान विष्णु क्या कह रहे हैं आप सब सुनिए

1229
01:30:13,200 --> 01:30:17,240
जो इनके फॉलो है वो भी देखिए सबसे पहला पुराण दिखा रहा हूं गीता प्रेस का

1230
01:30:17,240 --> 01:30:21,600
और संक्षिप्त है य है देखो सब के सब जो फॉलोवर्स

1231
01:30:21,600 --> 01:30:25,640
है रामपाल जी के वो तो खास के देख भगवान विष्णु यहां पर कह रहे

1232
01:30:25,640 --> 01:30:30,400
हैं जो उनके भक्त थे महाराज इंद्रद जिन्होंने जगन्नाथ जी का मंदिर बनवाया था पुरी

1233
01:30:30,400 --> 01:30:34,920
में महाराज इदमन अवंती देश के राजा थे

1234
01:30:34,920 --> 01:30:39,200
उन्होंने जो मंदिर उनको बनवाया था तो भगवान विष्णु जो है उनको स्वप्न में आकर दर्शन देते

1235
01:30:39,200 --> 01:30:43,400
हैं उनसे पता है क्या बोलते हैं भगवान विष्णु यहां पर इस ब्रह्म पुराण में मैं इसम

1236
01:30:43,400 --> 01:30:43,900
पढ़ के सुना

1237
01:30:43,880 --> 01:30:46,840
रहा हूं भगवान विष्णु कह रहे हैं मैं

1238
01:30:46,840 --> 01:30:51,120
देवता यक्ष दैत्य देवराज इंद्र ब्रह्मा अथवा रुद्र

1239
01:30:51,120 --> 01:30:55,200
नहीं हूं मुझे पुरुषोत्तम समझो भगवान विष्णु कह मैं समस्त

1240
01:30:55,200 --> 01:30:59,560
लों की पीड़ा दूर करने वाला अनंत बल पौरुष से संपन्न और संपूर्ण

1241
01:30:59,560 --> 01:31:03,600
भूतों का आराध्य हूं मेरा कभी अंत नहीं होता ये देख रहे

1242
01:31:03,600 --> 01:31:07,640
हैं कह रहे हैं मेरा कभी अंत नहीं होता विष्णु जी कह रहे हैं जिसका सब

1243
01:31:07,640 --> 01:31:11,640
शास्त्रों में उल्लेख किया जाता है सब शास्त्रों में जिसका उल्लेख किया

1244
01:31:11,640 --> 01:31:15,640
जाता है वेदांत ग्रंथों में वर्णन मिलता है जिसे योगी जन ज्ञान गम्य

1245
01:31:15,640 --> 01:31:19,400
एवं वासुदेव कहते हैं वह परमात्मा मैं ही हूं

1246
01:31:19,400 --> 01:31:23,560
मैं कौन विष्णु जी विष्णु जी कह रहे हैं कि मेरा कभी अंत नहीं होता और

1247
01:31:23,560 --> 01:31:27,880
वे में जिसका वर्णन उल्लेख मिलता है सब शास्त्रों में वो परमात्मा मैं ही हूं

1248
01:31:27,880 --> 01:31:32,760
यहां पर विष्णु जी कह रहे हैं सबसे पहला

1249
01:31:32,760 --> 01:31:36,960
पुराण अब ये पता है क्या कहेंगे इस पर ये वो विष्णु

1250
01:31:36,960 --> 01:31:41,720
नहीं है हा हा तो अब इसके आगे पढ़ के बताता हूं

1251
01:31:41,720 --> 01:31:46,080
ये देखिए अब जो इंद्र दमन है ना महाराज इंद्रम इसमें वो

1252
01:31:46,080 --> 01:31:50,160
स्तुति करते हैं भगवान वासुदेव का ये वचन सुनकर राजा के शरीर में रोमांच

1253
01:31:50,160 --> 01:31:54,720
हो आया इस प्रकार स्तोत्र गान करते हुए कहते हैं लक्ष्मी कांत लक्ष्मीकांत

1254
01:31:54,720 --> 01:31:59,000
कौन लक्ष्मीपति लक्ष्मीकांत आपको नमस्कार है श्रीपति आपके दिव्य

1255
01:31:59,000 --> 01:32:03,160
विग्रह पर पीत यानी पीतांबर वस्त्र शोभा पाता है आप लक्ष्मी प्रदान

1256
01:32:03,160 --> 01:32:07,200
करने वाले और लक्ष्मी के स्वामी है आप आदि पुरुष सबके ईश्वर

1257
01:32:07,200 --> 01:32:11,320
और सब और मुख वाले निष्कल एवं सनातन परम देव है आपको मेरा

1258
01:32:11,320 --> 01:32:15,480
प्रणाम है अब यह देखिए आगे इसमें कह रहे सबसे लास्ट में आप देव

1259
01:32:15,480 --> 01:32:19,520
देवेश्वर वरदाता व्यापक सर्व लोकेश्वर मोक्ष

1260
01:32:19,520 --> 01:32:23,920
के साधक तथा अविनाशी अविनाशी भगवान विष्णु है

1261
01:32:23,920 --> 01:32:27,920
अविनाशी भगवान विष्णु है आपको मेरा प्रणाम है ये देखि य पर आगे बोल दिया आप

1262
01:32:27,920 --> 01:32:32,880
विष्णु जी है सबसे पहला

1263
01:32:32,880 --> 01:32:34,520
जिसको वेदों में बताया गया

1264
01:32:34,520 --> 01:32:38,640
है भागवत में भी आया है ना ये कि वेदों से

1265
01:32:38,640 --> 01:32:42,920
जानने योग्य कौन है भगवान विष्णु

1266
01:32:42,920 --> 01:32:47,200
य देखिए भागवत में बताऊ आपको पहला पुराण हैय संक्षिप्त

1267
01:32:47,200 --> 01:32:51,560
है गीता प्रस का संप हा जो उनको पसंद है रामपाल जी

1268
01:32:51,560 --> 01:32:55,800
को पहले पुराण में बोल रामपाल जी को संक्षिप्त

1269
01:32:55,800 --> 01:32:59,800
बहुत पसंद है वो क्योंकि क्योंकि गीता

1270
01:32:59,800 --> 01:33:04,600
ब श्लोक के साथ छापते नहीं थी ना देवी भागवत उनके समय में तो वो सारी

1271
01:33:04,600 --> 01:33:08,680
थ्योरी गीता प्रस के आधार परही लिख गए हैं अब तो

1272
01:33:08,680 --> 01:33:13,040
ये सबसे पहला पुराण है इसलिए पहले पुराण में लिखा है विदव में प्रमाण है ओए

1273
01:33:13,040 --> 01:33:18,920
श्री हरि भगवान है और कबीरदास उ श्री हरि के भक्त है

1274
01:33:18,920 --> 01:33:23,240
हा मैं एक बात बता रहा था आपको

1275
01:33:23,240 --> 01:33:29,240
कि

1276
01:33:31,000 --> 01:33:37,000
विष्णु भगवान की बात बता रहा

1277
01:33:39,200 --> 01:33:43,240
था इसमें तो कोई डाउट ही नहीं है कि भगवान विष्णु परब्रह्म है मैंने

1278
01:33:43,240 --> 01:33:47,280
पुराणों को पढ़ना स्टार्ट किया है तो यह सबसे पहला पुराण आता है तो अभी इसको

1279
01:33:47,280 --> 01:33:51,520
पढ़ रहा तो इसमें व्यास जी ने सबसे लास्ट में यह बताया कि यह पुराण विष्णु जी से संबंध रखता

1280
01:33:51,520 --> 01:33:55,520
है हा श्रीमद भागवत

1281
01:33:55,520 --> 01:33:59,600
जय जगनाथ य ये

1282
01:33:59,600 --> 01:34:03,880
देखिए ये ब्रह्म पुराण का पेज नंबर 10 देखिए जहा से स्टार्ट

1283
01:34:03,880 --> 01:34:08,320
हो रहा है मैं इसम से बता रहा हूं को

1284
01:34:08,320 --> 01:34:12,840
एक मिनट वेदों को जानने वाले को तत्वदर्शी कहा गया ठीक है

1285
01:34:12,840 --> 01:34:16,960
15 प 153 में को जानने

1286
01:34:16,960 --> 01:34:21,080
वाले को वेदों को जानने वाले को इनके अनुसार तत्वदर्शी

1287
01:34:21,080 --> 01:34:25,440
है अब वेदों को जानने वाले को देवी भागवत में कहा गया है

1288
01:34:25,440 --> 01:34:30,320
जो माता को परब्रह्म मान लेता है व वेदों को जानने वाला ठीक

1289
01:34:30,320 --> 01:34:36,320
है यह श्रीमद् भागवत महापुराण है और

1290
01:34:37,800 --> 01:34:43,800
इसका श्रीमद भागवत दो पा

1291
01:34:47,480 --> 01:34:50,080
15

1292
01:34:50,080 --> 01:34:53,800
अध्याय स्कंद दो

1293
01:34:53,800 --> 01:34:59,800
और उसका पांचवा

1294
01:35:01,760 --> 01:35:06,600
अध्याय पांचवा अध्याय और पवा श्लोक

1295
01:35:06,600 --> 01:35:09,680
15 से आ जाते

1296
01:35:09,680 --> 01:35:14,400
हैं वेद जो है किसके परायण है नारायण

1297
01:35:14,400 --> 01:35:18,400
के वेद किसके परायण है वेद किसके लिए है भगवान विष्णु

1298
01:35:18,400 --> 01:35:24,400
के देवता भी नारायण के ही अंगों में कल्पित हुए हैं

1299
01:35:24,440 --> 01:35:28,960
समवन इ ट्राइम टू एंटर देवता भी

1300
01:35:28,960 --> 01:35:33,120
भगवान देवता भी भगवान नारायण के अंगों में कल्पित

1301
01:35:33,120 --> 01:35:37,400
हुए समस्त यज्ञ भी नारायण की प्रसन्नता के लिए है समस्त यज्ञ मतलब

1302
01:35:37,400 --> 01:35:41,400
यज्ञ मतलब होता है धर्म सभी धर्म भगवान

1303
01:35:41,400 --> 01:35:45,920
की प्रसन्नता के लिए हैं नारायण विष्णु

1304
01:35:45,920 --> 01:35:50,240
और सारी तपस्या नारायण की ओर ले जाने वाली

1305
01:35:50,240 --> 01:35:53,920
है और

1306
01:35:53,920 --> 01:35:54,420
सभी

1307
01:35:54,320 --> 01:35:58,600
प्रकार का जो वैदिक ज्ञान है उसके द्वारा

1308
01:35:58,600 --> 01:36:03,040
कौन जाने जाते हैं नारायण

1309
01:36:03,040 --> 01:36:07,120
कहां कबीर जाने जाते हैं भाई कबीर तो जानते हैं नारायण

1310
01:36:07,120 --> 01:36:11,880
को जाने नहीं जाते हैं

1311
01:36:11,880 --> 01:36:16,080
अ स्कंद पुराण है ना मेरे पास अभी स्कंद पुराण तो नहीं है ये गीता

1312
01:36:16,080 --> 01:36:20,120
प कार्तिक और वैशाख का महात्म है ये छोटी पुस्तिका है

1313
01:36:20,120 --> 01:36:24,280
इसमें जो स्कंद पुराण है उसमें कार्तिक मास का अभी मास चल रहा

1314
01:36:24,280 --> 01:36:28,360
है ना उसका एक महात्म दिया गया है यहां पर भगवान श्री कृष्ण जो

1315
01:36:28,360 --> 01:36:32,480
है वो जो उनकी पटरानी में एक सत्यभामा जी जो थी उनको वो

1316
01:36:32,480 --> 01:36:37,280
कार्तिक मास की महिमा बतलाते हुए कहते हैं भगवान कृष्ण इसमें कह रहे हैं

1317
01:36:37,280 --> 01:36:41,360
कार्तिक मास में स्कंद पुराण में लिया गया है इसमें लिखा है

1318
01:36:41,360 --> 01:36:45,520
सूर्य शिव गणेश विष्णु तथा शक्ति के उपासक भी मुझे ही प्राप्त

1319
01:36:45,520 --> 01:36:49,880
होते हैं मुझे किसको भगवान श्री कृष्ण को श्री कृष्ण खुद कह रहे हैं जैसे वर्षा

1320
01:36:49,880 --> 01:36:54,120
का जल सब ओर से समुद्र में ही आ जाता है उसी प्रकार पांचों

1321
01:36:54,120 --> 01:36:58,200
के उपासक मेरे ही पास आ जाते हैं मैं एक ही हूं तथापि

1322
01:36:58,200 --> 01:37:02,680
लीला के अनुसार भिन्न भिन्न ना नाम धारण करके पांच रूपों में प्रकट हू

1323
01:37:02,680 --> 01:37:06,960
ठीक उसी तरह जैसे कोई देवदत्त नामक एक ही व्यक्ति पुत्र पिता आदि भिन्न

1324
01:37:06,960 --> 01:37:09,320
भिन्न नामों से पुकारा जाता है भगवान श्री

1325
01:37:09,320 --> 01:37:12,840
कृष्ण कह रहे स्कंद पुराण

1326
01:37:12,840 --> 01:37:16,880
में और अगर वो देवी भागवत में अगर ये विष्णु देवी की

1327
01:37:16,880 --> 01:37:20,880
स्तुति करें तो उसमें कोई बड़ी बात नहीं है क्योंकि वहा देवी को श्रेष्ठ ब बताया गया है

1328
01:37:20,880 --> 01:37:26,640
इतनी सी बात पता नहीं इनको कहा इसमें कबीर कबीर पता नहीं कहां दिखता है ये पुराणों

1329
01:37:26,640 --> 01:37:30,880
में भाई देवी भागवत में देवी बनी है विष्णु पुराण में विष्णु जी

1330
01:37:30,880 --> 01:37:34,920
हर पुराण में अल यहां देख कार्य कारण की बात भी हो रही है भगवान के

1331
01:37:34,920 --> 01:37:39,000
जो अलग-अलग रूप होते हैं कारण रूप होता है कार्य रूप होता है लीला रूप होता है उसकी

1332
01:37:39,000 --> 01:37:43,360
भी यहां प बात हो रही है बहुत बढ़िया बहुत बढ़िया मगर विशाल भाटिया जी मेरी एक शिकायत

1333
01:37:43,360 --> 01:37:47,520
है आपसे जी क्या आप

1334
01:37:47,520 --> 01:37:51,960
जब भी परब्रह्म लेकर आते हैं वो श्री हरि वाली लाते हैं

1335
01:37:51,960 --> 01:37:56,520
वो मैं श्री राम जी का कुे दिख रहा

1336
01:37:56,520 --> 01:38:00,560
है नहीं नहीं मैं मैं भी शिव और विष्णु में

1337
01:38:00,560 --> 01:38:04,680
एक ही मानता हूं ऐसी कोई बात नहीं अच्छा अच्छा अा अच्छा अच्छा नहीं मुझे लगा थोड़ा

1338
01:38:04,680 --> 01:38:08,840
सा कोई बात नहीं वो विष्णु में भी शिव है

1339
01:38:08,840 --> 01:38:12,840
मगर मैंने देखा आप आज तक जितने प्रमाण लेके आए हो उसमें विष्णु

1340
01:38:12,840 --> 01:38:16,920
की सुप्रीम एसी है कृष्ण की सुप्रीम एसी है शिवजी

1341
01:38:16,920 --> 01:38:21,200
की भी है मैंने शिवपुराण से भी दिखा चुका हूं आपको अच्छा अच्छा मजा कर रहा हूं मज

1342
01:38:21,200 --> 01:38:25,760
पहली बार जब आया था जी जी

1343
01:38:25,760 --> 01:38:29,000
जी संदीप बत्रा

1344
01:38:29,000 --> 01:38:35,000
जी जय श्री राम जय श्री

1345
01:38:37,720 --> 01:38:43,720
राम आपकी आवाज नहीं आ

1346
01:38:43,840 --> 01:38:48,600
रही बत्रा जी माइक अन म्यूट कीजिए हां बोलिए आप जी हो गया

1347
01:38:48,600 --> 01:38:51,640
अब आवाज आ रही है

1348
01:38:51,640 --> 01:38:56,440
जी आवाज आ रही है आपको जी जी आ रही है आ रही है

1349
01:38:56,440 --> 01:39:00,560
मैंने यह कहा कि आप जो ये सर धर्मिल

1350
01:39:00,560 --> 01:39:04,760
की ये मैंने अपने लाइफ में पहली बार देखा कि आप इतना इन फ्रंट होके

1351
01:39:04,760 --> 01:39:08,920
आप आ रहे हो तो मेरे को बहुत ही अच्छा लगा बोला अंदर

1352
01:39:08,920 --> 01:39:13,120
से म तप लगा के वाकई कोई ना कोई मतलब परमात्मा ने अपना बंदा भेजा

1353
01:39:13,120 --> 01:39:17,680
है आपको और वाकई इनको वि धर्मं को धोने का काम कर रहे हैं

1354
01:39:17,680 --> 01:39:20,640
बिल्कुल

1355
01:39:20,640 --> 01:39:24,680
इसने की बात ना बोले ये कर अपने जो भाई है जो भटक

1356
01:39:24,680 --> 01:39:28,800
गए हैं उनको वापस लाने के लिए उनके दिमाग का शोधन कर रहे

1357
01:39:28,800 --> 01:39:32,840
हैं तो अच्छा रहेगा मगर जी जी जीय ये

1358
01:39:32,840 --> 01:39:36,880
हमें ध्यान रखना है कि सनातन की रक्षा जो है वह केवल लाइव

1359
01:39:36,880 --> 01:39:40,960
स्ट्रीम तक सीमित नहीं है हमें अपने मठ मंदिरों

1360
01:39:40,960 --> 01:39:45,240
को अपने आसपास शिक्षा रक्षा का सेवा का दुर्ग बनाए जिससे

1361
01:39:45,240 --> 01:39:49,680
कि य जो हुआ ये हुआ क्यों है यह हुआ इसलिए कि ये जो

1362
01:39:49,680 --> 01:39:53,680
ये जो शिक्षा है ये लोगों तक नहीं पहुंची जी उसका

1363
01:39:53,680 --> 01:39:58,080
फायदा उठाया गया तो अगर हमको एक अच्छा समाज

1364
01:39:58,080 --> 01:40:02,120
तैयार करना है राष्ट्र का निर्माण करना है तो हमको इस शिक्षा को

1365
01:40:02,120 --> 01:40:06,680
आम जन तक पहुंचाना है उसके लिए ही हमारे मट मंदिरों को

1366
01:40:06,680 --> 01:40:10,760
उस छोटे से विद्यालय के रूप में ख्या पित करें हम लोग

1367
01:40:10,760 --> 01:40:14,760
कि एक ही ईश्वर पांच रूप लेता है भगवान साकार भी है

1368
01:40:14,760 --> 01:40:18,800
निराकार भी है ईश्वर वही है जो कुछ भी कर सकता है जन

1369
01:40:18,800 --> 01:40:23,360
वही प्रमाणिक जो परंपरा से प्राप्त हो बच्चे बच्चे को रटा हम वहां से

1370
01:40:23,360 --> 01:40:27,440
एक्चुअल में जहां हम लोकल में जहां पर

1371
01:40:27,440 --> 01:40:32,360
है वहां पूरे आसपास के क्षेत्र में बोर्ड लगे हैं

1372
01:40:32,360 --> 01:40:35,640
तरह तरह के उसम बोर्ड में लिखा गया कि संडे को यहां

1373
01:40:35,640 --> 01:40:39,720
पर आना है आपको संडे को आपको यहां पर आना है मैं जो ये समझ पाया हू ना

1374
01:40:39,720 --> 01:40:44,480
इनका भी कहां पर लोग ना मतलब मिसगाइडेड कैसे हैं कि जैसे ना लोग

1375
01:40:44,480 --> 01:40:48,560
थोड़ा ना मतलब अधूरे ज्ञान की वजह से हो जाता है य नहीं कि हर एक को किसी को भी पूरा

1376
01:40:48,560 --> 01:40:52,680
ज्ञान नहीं होता अब जैसे कोई सकार मान रहा है कोई निराकार मान रहा है अभी अगोचर की

1377
01:40:52,680 --> 01:40:56,880
बात नहीं अगोचर का मतलब है जो नजर नहीं आता है तो कहने का भाव

1378
01:40:56,880 --> 01:41:01,320
इन्होंने इनको ना समझ नहीं आया इस चीज को कि परमात्मा तो कुछ भी कर सकते हैं वो तो

1379
01:41:01,320 --> 01:41:05,480
चाहे वो सकार रूप में आ सकते हैं निराकार भी है वो अगोचर भी है इस

1380
01:41:05,480 --> 01:41:09,640
चीज को समझने में थोड़ा सा जैसे आर्या समाज जी है आर्या समाज जी एक बात को पकड़

1381
01:41:09,640 --> 01:41:13,800
के बैठे हैं कि जी हमने तो निराकार की बात करनी है जबकि

1382
01:41:13,800 --> 01:41:18,240
वो जब भी बात करेंगे गीता जी के 12वें अध्याय में उन्होंने स्पेशली बोला है कि निराकार

1383
01:41:18,240 --> 01:41:22,520
भी मैं ही हूं और साकार भी मैं ही हूं पर वो लोग ना समझना नहीं चाहते प्रॉब्लम

1384
01:41:22,520 --> 01:41:26,520
ये है सबसे बड़ी प्रॉब्लम एक ये है इसमें भी और

1385
01:41:26,520 --> 01:41:30,720
एक प्रॉब्लम है जैसे रामो विग्रहवां

1386
01:41:30,720 --> 01:41:35,240
धर्म जी जी जी ये तो आर समाजी भी मानते हैं

1387
01:41:35,240 --> 01:41:38,480
जी जी जी

1388
01:41:38,480 --> 01:41:42,640
जी किसी बहस चल गई सुनिए तो

1389
01:41:42,640 --> 01:41:46,680
इतनी बात इतनी बात आर समाजी भी मानते हैं कि रामो विग्रहवां

1390
01:41:46,680 --> 01:41:51,000
धर्मा ठीक है जी राम धर्म का साक्षात

1391
01:41:51,000 --> 01:41:55,040
स्वरूप है जी उन्होने राम को धर्म

1392
01:41:55,040 --> 01:41:59,040
समझते हुए फॉलो किया नहीं किया

1393
01:41:59,040 --> 01:42:03,040
क्योंकि राम स्वयं ज्ञान लेने जाते हैं गुरु

1394
01:42:03,040 --> 01:42:07,240
के पास जी बिल्कुल जाते के पास इनका

1395
01:42:07,240 --> 01:42:11,880
जो ज्ञान है वो अपना है वो गुरु का ज्ञान नहीं है

1396
01:42:11,880 --> 01:42:16,000
जी जी जी जी राम जी ने शिवलिंग पूजा भी की थी जिस समय

1397
01:42:16,000 --> 01:42:20,000
उन्होंने जब वो युद्ध में गए उस सम उने शिवलिंग रामेश्वरम बना हुआ उन्होने शिवलिंग

1398
01:42:20,000 --> 01:42:24,360
की भी पूजा की थी उस सम तो यह एक दिक्कत

1399
01:42:24,360 --> 01:42:28,480
है जहां पर सामर्थ वान गुरुओं से दूरी हो जाती है और

1400
01:42:28,480 --> 01:42:32,600
मनमुक गुरु बनने लगते वहां समाज में इस तरह का अनुवाद होने लगता है मगर

1401
01:42:32,600 --> 01:42:37,000
कोई बात नहीं हम लोग हम और आप मिलकर के ये

1402
01:42:37,000 --> 01:42:41,000
उठाएंगे और आगे लेकर समाज के एक थे वो

1403
01:42:41,000 --> 01:42:45,160
कहते बहस कर रहे थे मूर्ति पूजा के ऊपर हमने बोला आप भी साकार पूजा

1404
01:42:45,160 --> 01:42:49,320
ही कर रहे हो जैसे आप ये ये बनाते हो जहा पर हवन हवन कुंड

1405
01:42:49,320 --> 01:42:53,720
होता है हवन कुंड साकार पूजाही है हवन तो बनाया

1406
01:42:53,720 --> 01:42:57,840
पू निराकार तो ये होगा कि आप आसमान को पूज रहे हो जिसका कोई आकार नहीं है

1407
01:42:57,840 --> 01:43:01,960
आकार नहीं या हवा को पूज रहे हो अगोचर निराकार हो गया वो समय लेकिन

1408
01:43:01,960 --> 01:43:06,080
आप कर तो हवन कु से परमात्मा को वो प्रकट करने की बात कर रहे हो

1409
01:43:06,080 --> 01:43:10,600
और गीता जी में लिखा हुआ कि जो हवन हवन कुंड भी मैं ही और उसकी आतिया

1410
01:43:10,600 --> 01:43:14,840
भी मैं ही हूं व श्री कृष्ण जी ने श्री विष्णु जी ने श्री कृष्ण

1411
01:43:14,840 --> 01:43:18,960
जी के रूप में आके बोला य चीज को इनको य समझ एक बहुत

1412
01:43:18,960 --> 01:43:23,160
एक बहुत साधारण सी बात है कि

1413
01:43:23,160 --> 01:43:27,280
आर समाज ने वेदा आदि शास्त्रों की उन स्थितियों को

1414
01:43:27,280 --> 01:43:31,720
उन स्तुति हों को भी स्वीकार किया जिन स्तुति हों में भगवान

1415
01:43:31,720 --> 01:43:35,720
की भक्ति करते हुए उनसे कुछ प्राप्त करने के निमित्त प्रार्थना हो रही

1416
01:43:35,720 --> 01:43:40,040
है आ समाज का सिद्धांत है कि भक्ति का फल नहीं देता

1417
01:43:40,040 --> 01:43:44,040
भगवान भक्ति करने से केवल इतना मिलता है कि उसके गुण आप

1418
01:43:44,040 --> 01:43:48,280
में आएंगे आप अच्छे हो जाओगे ठीक मगर

1419
01:43:48,280 --> 01:43:52,400
भगवान आपको भक्ति के स्वरूप कुछ ऐसे प्रदान आपके मांगने से नहीं करता

1420
01:43:52,400 --> 01:43:57,040
तो जब कुछ देता नहीं है तो फिर मांगा क्यों जा रहा है

1421
01:43:57,040 --> 01:44:01,240
व्यर्थ का कार्य क्यों कराया जा रहा है एक एक पॉइंट पर बात होगी ना

1422
01:44:01,240 --> 01:44:05,360
तो गायत्री मंत्र जो है गायत्री मंत्र का जो अर्थ

1423
01:44:05,360 --> 01:44:08,760
है कि सच्चिदानंद स्वरूप परमेश्वर

1424
01:44:08,760 --> 01:44:12,920
मुझे आप सत बुद्धि की ओर प्रेरित करे

1425
01:44:12,920 --> 01:44:17,160
प्रचोदय अब क्या है य भगवान से भक्ति करते हुए

1426
01:44:17,160 --> 01:44:21,160
कुछ कर देने की कामना कर रहे हैं तो अकॉर्डिंग टू

1427
01:44:21,160 --> 01:44:25,280
आर समाज का लॉ वो जो गायत्री मंत्र है उसको स्वीकार

1428
01:44:25,280 --> 01:44:29,280
नहीं होना चाहिए उनसे बल्कि ये भी बहस हुई वो कहते आप शिवलिंग पर दूध

1429
01:44:29,280 --> 01:44:33,320
डालते हो हमने कहा आप जो हवन कुंड में जो घी वेस्ट कर रहे हो इसका मतलब वेस्टेज है वो भी

1430
01:44:33,320 --> 01:44:37,760
चीज अगर आप ऐसे बोलते हो तो फिर वो चुप कर ग कुछ और समझाना चाह रहे हैं

1431
01:44:37,760 --> 01:44:42,720
मतलब समझने की बात होती है

1432
01:44:42,720 --> 01:44:46,800
अब अब बात ऐसी है कि आर समाज के अनुसार भगवान की

1433
01:44:46,800 --> 01:44:51,000
भक्ति होनी कैसी चाहिए जिसमें केवल भगवान का महिमा मंडन हो

1434
01:44:51,000 --> 01:44:55,000
हे सर्वव्यापी तुम परमेश्वर हो हे तुम ऐसे हो हे तुम ऐसे हो

1435
01:44:55,000 --> 01:44:59,080
जिसमें भगवान का केवल गान किया हो मगर उनसे कोई भी चीज मांगी

1436
01:44:59,080 --> 01:45:03,280
ना जाए अगर मांग लिया तो व आर्य समाज के सिद्धांत के विरुद्ध

1437
01:45:03,280 --> 01:45:07,480
है अच्छा हा और गायत्री

1438
01:45:07,480 --> 01:45:11,560
मंत्र में मांगा जाता है भगवान हमको य करो तो गायत्री

1439
01:45:11,560 --> 01:45:16,320
मंत्र तो उनके अनुसार गलत है फिर प्रॉब्लम यही है

1440
01:45:16,320 --> 01:45:21,960
और उसी को फ्री में बाटना उनकी ड़ की हड्डी

1441
01:45:21,960 --> 01:45:26,000
है मैत्री मंत्र उनके सिद्धांत के अनुसार नहीं

1442
01:45:26,000 --> 01:45:30,120
है मगर उसी को फ्री में हर हर

1443
01:45:30,120 --> 01:45:34,120
किसी को बांट देने पर ही उनका वो है पूरा खड़ा हुआ है साम्राज्य

1444
01:45:34,120 --> 01:45:38,160
जो भी है मैं तो हैरान य होता हूं आपना कोई भी किसी कोई भी

1445
01:45:38,160 --> 01:45:42,160
वो उठाकर देख लो कोई भी धर्म की बात करते हैं धर्म तो नहीं मजहब की बात

1446
01:45:42,160 --> 01:45:46,240
करते हैं हर मजहब के अंदर पत्थर पत्थर पूजन हो रहा है कोई

1447
01:45:46,240 --> 01:45:50,600
लड़के बुत की पूजा कर रहा है कोई उसको चूम रहा है कोई कोई अपनी

1448
01:45:50,600 --> 01:45:55,160
जैसे मान लो गुरु ग्रंथ साहिब है उसको गुरु मानते हैं है तो वो भी सकार पूज ना

1449
01:45:55,160 --> 01:46:00,960
लेकिन यह बात मानते नहीं है लोग भाई वैकल्पिक वैकल्पिक

1450
01:46:00,960 --> 01:46:03,080
भवान

1451
01:46:03,080 --> 01:46:07,080
के हम मूर्ति को गुरु रूप में मानते हैं हम मूर्ति को जैसे मान

1452
01:46:07,080 --> 01:46:11,120
लो कोई भी ध्यान लगाएगा तो अंदर कोई मूर्ति तो बनेगी ना कुछ ना कुछ ध्यान में लाना पड़ेगा कि

1453
01:46:11,120 --> 01:46:15,480
परमात्मा का स्वरूप य है यह लोग समझते नहीं है

1454
01:46:15,480 --> 01:46:19,680
भ भगवान का वैकल्पिक स्वरूप तो हर किसी ने कहीं ना कहीं

1455
01:46:19,680 --> 01:46:23,680
माना है जैसे अगर आप को ले लो

1456
01:46:23,680 --> 01:46:28,400
वो कहता है कि नहीं इस्लाम की कोई मूर्ति नहीं बन सकती उसको कुछ नहीं ठीक है

1457
01:46:28,400 --> 01:46:32,400
मगर उसके यहां पर जो भावनाए है फिर इस्लाम

1458
01:46:32,400 --> 01:46:37,080
को मानने वालों की वो जुड़ जाती है मोहम्मद जी

1459
01:46:37,080 --> 01:46:38,080
से

1460
01:46:38,080 --> 01:46:43,320
वो चांद के उंगली से टुकड़े कर वो दिखता ही नहीं तो उंगली से टुकड़े कैसे हो गए

1461
01:46:43,320 --> 01:46:47,400
अच्छा सुनिए क्या फिर जुड़ जाए क्या फिर वहां

1462
01:46:47,400 --> 01:46:51,600
पर वैकल्पिक अवतार क्या हो गया ये जो मजारे बनी हुई है

1463
01:46:51,600 --> 01:46:56,040
ये हो गया वैकल्पिक यहां माता र पैर हरवाते

1464
01:46:56,040 --> 01:47:00,240
सेवा करते हैं वहां जाकर के एक्चुअल में मुझे ना जो लगता

1465
01:47:00,240 --> 01:47:04,240
है ये टारगेट सिर्फ मूर्ति पूजा हम लोगों की टारगेट करते हैं ये ये ना करें हम

1466
01:47:04,240 --> 01:47:08,280
लोग कर ले ये क्या मतलब हुआ इस गलत बात है ना वैकल्पिक इनके यहां भी

1467
01:47:08,280 --> 01:47:12,320
अच्छा एक बात ये कहते हैं कि जब वो ईश्वर की वो मूर्ति हो

1468
01:47:12,320 --> 01:47:16,480
सकती है तो फर जीसस की भी पूजा करोगे तुम या आर समा जीी कहते हैं

1469
01:47:16,480 --> 01:47:20,480
जीसस की मूर्ति की पूजा भी करोगे क्योंकि वो कण कण में है

1470
01:47:20,480 --> 01:47:24,880
तो इसलिए जीसस की पूजा करोगे तो भाई अगर भगवान

1471
01:47:24,880 --> 01:47:28,880
कड़कड़ में है तो तुम्हारा तुम भी सर्वव्यापी मानते हो कड़कड़ में है

1472
01:47:28,880 --> 01:47:32,920
दुनिया में फ जो भी नाम है सब ईश्वर के ही है जो

1473
01:47:32,920 --> 01:47:37,360
भी नाम है सब ईश्वर के ही है तो तुम प्रणव में क्यों रुक गए हो

1474
01:47:37,360 --> 01:47:41,560
तुम भी अपना लो को दूसरा नाम लोगों में नॉलेज की दिक्कत

1475
01:47:41,560 --> 01:47:45,920
होती है जैसे हम कहते ना कण कण में परमात्मा है उल्टा परमात्मा में कण कण है उल्टा

1476
01:47:45,920 --> 01:47:50,480
परमात्मा ने बोला कि मेरे मेरे बाहर कुछ भी नहीं है बाहर मैं ही हूं सारा

1477
01:47:50,480 --> 01:47:53,160
य और उने अंदर सट की ना

1478
01:47:53,160 --> 01:47:56,960
होती है

1479
01:47:56,960 --> 01:48:00,960
थ अध्याय 10 में लास्ट के शलोक में अध्याय 10

1480
01:48:00,960 --> 01:48:04,960
लास्ट शलोक में बोला ये जितना भी सारा सिस्टम है सारा मेरे अंदर ही

1481
01:48:04,960 --> 01:48:09,160
है कय एक अंश मात्र जितना भी पूरी सृष्टि है जितना

1482
01:48:09,160 --> 01:48:13,440
जी आप कुछ कह रहे जय श्री राम बोलिए बोल लिए जय श्री राम बोल बत

1483
01:48:13,440 --> 01:48:17,480
जी थोड़ा सा सुन लीजिए परमात्मा में ही सृष्टि है और सृष्टि में

1484
01:48:17,480 --> 01:48:21,480
भी परमात्मा है दोनों बात है आप एक को सही एक को गलत

1485
01:48:21,480 --> 01:48:25,520
नहीं क परमात्मा के अंदर बात वाता

1486
01:48:25,520 --> 01:48:30,160
ये है ये मैं शब्द तो अगर बहुत दर्शन की गहराई में जाएंगे

1487
01:48:30,160 --> 01:48:34,280
तो मैं शब्द उचित ही नहीं है वास्तविकता य है परमात्मा ही

1488
01:48:34,280 --> 01:48:38,280
सृष्टि है और सृष्टि ही परमात्मा है बकुल स्वरूप स्वरूप

1489
01:48:38,280 --> 01:48:42,560
भू जैसे शिव पुराण में चचन आया कि भगवान ने अपनी स्वरूप

1490
01:48:42,560 --> 01:48:46,840
भूता प्रकट को प्रकट किया स्वरूप भूत मतलब अगर हम

1491
01:48:46,840 --> 01:48:51,200
यह कह देंगे कि भगवान में सृष्टि है तो भगवान खोखले है

1492
01:48:51,200 --> 01:48:55,200
तभी तो सृष्टि उनके अंदर है और अगर यह कह देंगे सट

1493
01:48:55,200 --> 01:48:59,600
में भगवान है तो सृष्ट खोक ली है तो स्वरूप भूत है

1494
01:48:59,600 --> 01:49:05,600
एक दूसरे जी सूरज प्रकाश जी जय श्री

1495
01:49:05,760 --> 01:49:08,320
राम आवाज नहीं आ रही माइक ऑन

1496
01:49:08,320 --> 01:49:12,760
कर लीजिए सूरज जी माइक ऑन कीजिए आप अपना उसके बाद बोलिए सुजीत

1497
01:49:12,760 --> 01:49:16,920
जी आप बिहार से जुड़े हा जी हा है तो हम

1498
01:49:16,920 --> 01:49:21,080
बिहार से ही है सुजीत उपाध्याय जी

1499
01:49:21,080 --> 01:49:25,800
जी जी गुरु भाई हमारे बिल्कुल बिल्कुल अरे

1500
01:49:25,800 --> 01:49:30,120
आज हम पहली बार आपको देख रहे हैं जय जगन्नाथ जय जगन्नाथ

1501
01:49:30,120 --> 01:49:34,240
जी जय जगन्नाथ जी जी सूरज प्रकाश

1502
01:49:34,240 --> 01:49:39,840
जी एक मिनट हम आपका माइक सही कर

1503
01:49:39,840 --> 01:49:43,840
दे जी बोलिए हां अब बोलिए जय श्री राम

1504
01:49:43,840 --> 01:49:47,840
भाई जी जय श्री राम जय श्री रामका भाई जी

1505
01:49:47,840 --> 01:49:51,920
आप बहुत अच्छा कार्य कर रहे हैं और अपने मतलब की अच्छा

1506
01:49:51,920 --> 01:49:55,920
मतलब की मैं हर बार सुनता हूं जब मुझे

1507
01:49:55,920 --> 01:49:59,920
टाइम लगता है मैंने कह रहा हम तो नहीं समझा पाए पर आप अच्छी तरह

1508
01:49:59,920 --> 01:50:03,920
से समझा पाए हम तो समझा समझा के थक गए थे हमने तो छोड़

1509
01:50:03,920 --> 01:50:07,920
दिया था आप कहते हैं कि हम मंगलवार को कहते हैं कि सभी जितने

1510
01:50:07,920 --> 01:50:12,440
भी सनातन भाई हैं सब मंदिर में आए जुड़िए पर परंतु

1511
01:50:12,440 --> 01:50:16,720
बार-बार कहने पर भी दो चार कट्टे होंगे हम सनातन में कमी

1512
01:50:16,720 --> 01:50:20,880
क्या है एकता का बहुत बड़ा अभाव सब अपने इतने कामों में बिजी

1513
01:50:20,880 --> 01:50:23,440
रहते भाई जी कितना कहो कितना भी कहो

1514
01:50:23,440 --> 01:50:27,520
पर तब जाकर 10 जुड़ेंगे 10 में से अगले दिन पांच अब्सेंट हो

1515
01:50:27,520 --> 01:50:31,680
जाएंगे और हनुमान चालीसा का हमने यहां पर पाठ भी रखा था हम

1516
01:50:31,680 --> 01:50:35,760
हिंदू उससे भी काफी जुड़े रहे मैंने कहा मैं पहले भी आपसे मिला

1517
01:50:35,760 --> 01:50:39,840
हुआ हूं एक बार आपसे जो दिल्ली में मैंने कहा हम नहीं समझा पाए रामपाल

1518
01:50:39,840 --> 01:50:44,000
जी ने जो आपने बहुत अच्छा कर रहे हैं उसके लिए मैं आपका आभार व्यक्त करता हूं

1519
01:50:44,000 --> 01:50:48,000
हम तो सड़कों पर ही वो हमसे बहुत बड़ते थे कि भाई बद में हमने कहा

1520
01:50:48,000 --> 01:50:52,880
कहीं प्र ग गलत व्याख्या निराधार इसका कोई अर्थ ही नहीं

1521
01:50:52,880 --> 01:50:57,000
कोई अर्थ ही नहीं जिसका अर्थ ही भी अर्थ है तो क्या समझाए अब

1522
01:50:57,000 --> 01:51:01,120
आपने समझाया तो 100 में से 5 परट को लगता है और

1523
01:51:01,120 --> 01:51:05,880
तब भी 95 पर वाले नहीं मानते क्या आप सही कह रहे

1524
01:51:05,880 --> 01:51:10,160
जी जी जी औरन पर इतनी गलत व्याख्या

1525
01:51:10,160 --> 01:51:14,240
इतनी गलत चर्चा मतलब पता नहीं कहां से वो ले आते हैं कहां

1526
01:51:14,240 --> 01:51:18,680
से कॉन्फिडेंस लेवल देखो आप उनका मैं तो कहता इतना आत्मविश्वास

1527
01:51:18,680 --> 01:51:22,920
हमारा हम हमें भी नहीं है अपने ऊपर जितना आत्मविश्वास उनके अंदर

1528
01:51:22,920 --> 01:51:27,720
है झूठ बोलने में ये भी

1529
01:51:27,720 --> 01:51:31,760
ये हरि हर गुरुदेव के दृश्य है पूरे भारत

1530
01:51:31,760 --> 01:51:35,880
में जो भ्रमण करते हैं हिंदू राष्ट्र के लिए हम सब

1531
01:51:35,880 --> 01:51:38,560
हिंदुओं को एक करना चाहते हैं गुरुदेव को

1532
01:51:38,560 --> 01:51:43,200
सुनते हैं गु समय मिलता है गुरुदेव को जरूर सुनते हैं

1533
01:51:43,200 --> 01:51:47,680
हा तो आप सबसे यही निवेदन है कि अपने जो

1534
01:51:47,680 --> 01:51:53,240
धर्म रक्षा की भावना है उसको यहीं तक सीमित ना होने दे बकल

1535
01:51:53,240 --> 01:51:57,640
आप अपने गली मोहल्ले की रक्षा के बारे में सबसे पहला प्रणाम

1536
01:51:57,640 --> 01:52:01,760
है कि साप्ताहिक एक मीटिंग हिंदुओं की शुरू कर दीजिए आपके घर

1537
01:52:01,760 --> 01:52:05,880
के पास जो मंदिर हो उसमें एक साता मीने

1538
01:52:05,880 --> 01:52:10,200
बिल्कुल कर रखी थी मीटिंग मंगलवार को शाम को मीटिंग तो रखी थी

1539
01:52:10,200 --> 01:52:14,360
गुरुदेव ने कहानी सुनाई थी आप जो बात बता रहे हैं उसके संबंध में गुरुदेव

1540
01:52:14,360 --> 01:52:18,920
ने बहुत अच्छी कहानी कही थी कथा थी वो वो मैं आपको बता रहा

1541
01:52:18,920 --> 01:52:23,080
हूं एक बार एक नाविक जो था वह गंगा

1542
01:52:23,080 --> 01:52:27,160
नदी में सवारियों को सवारी करवा रहा था

1543
01:52:27,160 --> 01:52:31,280
गंगा मां की सर करवा रहा था अचानक से उसमें

1544
01:52:31,280 --> 01:52:36,240
बाढ़ आ गई तो जो सवारी थी ना

1545
01:52:36,240 --> 01:52:40,320
उसको तैरना नहीं आता था नाविक को तैरना आता

1546
01:52:40,320 --> 01:52:44,440
था तो नाविक ने यह सोचा कि मैं जो

1547
01:52:44,440 --> 01:52:48,680
है काम करता हूं यह लोग तो बच नहीं पाएंगे क्योंकि यह लोग तो तैरना आता

1548
01:52:48,680 --> 01:52:52,720
नहीं है मुझे तैरना आता है मैं अपनी जान बचा लेता हूं तो ना जो

1549
01:52:52,720 --> 01:52:53,640
है यह सोच

1550
01:52:53,640 --> 01:52:57,720
करके क्योंकि उनको तैरना नहीं आता है तो मैं काम खत्म मैं अपनी जान बचा लेता हूं

1551
01:52:57,720 --> 01:53:02,000
वो कूद गया नदी अपने बचने के लिए मगर वह

1552
01:53:02,000 --> 01:53:06,240
बच नहीं पाया बाढ़ इतनी भयंकर थी कि वह भी जो है वो

1553
01:53:06,240 --> 01:53:10,800
भी उसकी देह का नाश हो ही गया अब यह लोग जो सवारी थी

1554
01:53:10,800 --> 01:53:14,800
वो और यह नाविक यह तीनों

1555
01:53:14,800 --> 01:53:18,800
चारों लोग पहुंचे यमराज जी के दरबार में यमराज

1556
01:53:18,800 --> 01:53:22,800
जी ने कहा जो सवारी थी उसको देख कर के गंगाजल में

1557
01:53:22,800 --> 01:53:27,000
गया है इनको सीधे स्वर्ग भेज दो और

1558
01:53:27,000 --> 01:53:31,360
इसको नरक में भेजो नाविक को तो वो नाविक

1559
01:53:31,360 --> 01:53:35,360
कहता है गंगाजल तो मेरे मुंह में भी गया है तो

1560
01:53:35,360 --> 01:53:39,400
यमराज जी कहते हैं गंगाजल मुह में गया व हम

1561
01:53:39,400 --> 01:53:43,480
बाद में देखेंगे भले आदमी जब तक नौका डूबती नहीं

1562
01:53:43,480 --> 01:53:47,480
तब तक तुम्हारा काम था खेते रहना खेते रहना

1563
01:53:47,480 --> 01:53:51,520
बिल्कुल तुमने अपनी प्राणों की रक्षा को प्राथमिकता देने के चक्कर में अपने

1564
01:53:51,520 --> 01:53:55,920
कर्तव्य से मुख मोड़ लिया बकुल बिल्कुल सही

1565
01:53:55,920 --> 01:54:00,040
बिल्कुल सही इसी भाव को भगवान ने कहा अर्जुन

1566
01:54:00,040 --> 01:54:04,240
से कर्मन निवादी का रस्ते मा फले सु कदाचन

1567
01:54:04,240 --> 01:54:08,360
तो हमें ये सिखाया गया है कि गोष्ठी में मंदिर में एक आदमी भी ना आए

1568
01:54:08,360 --> 01:54:08,860
तुम अकेले

1569
01:54:08,840 --> 01:54:12,320
हो तो भी गोष्ठी

1570
01:54:12,320 --> 01:54:17,000
करो वृक्ष हो भले कड़े हो घने हो बड़े

1571
01:54:17,000 --> 01:54:21,000
एक पत्र छाऊ भी मांग मत बिल्कुल मैं तो

1572
01:54:21,000 --> 01:54:25,360
हर जगह क्या बोलू मैं मेरे को तो मेरे तो फेक

1573
01:54:25,360 --> 01:54:29,520
भी बंद रहा मुझे बहुत धमकियां भी आने लग गई थी और मुझे तो बहुत रात

1574
01:54:29,520 --> 01:54:33,560
को भी फोन आने लग गए थे 12 एक एक बजे हमारी धर्म पत्नी बोलती है छोड़ दो

1575
01:54:33,560 --> 01:54:37,880
आप आप तो मरोगे हमें भी मरवाओ गी मुझे इतने मतलब

1576
01:54:37,880 --> 01:54:42,240
की मुझे इतने धमकी भरे फोन आते थे हर जगह मेरा फ

1577
01:54:42,240 --> 01:54:46,600
बंद हो गया था चक्कर में अ क्या करें

1578
01:54:46,600 --> 01:54:50,760
आप अच्छी तरह से कर रहे हैं आप अ एक बताने का आपका मैं आपसे

1579
01:54:50,760 --> 01:54:54,760
ब बिल्कुल खुश हू एक प्रसन्नता है कि आप प्रसन्नता से इस

1580
01:54:54,760 --> 01:54:58,800
काम को कर रहे हैं और सनातन को आगे लेकर के चल रहे हैं मैं भी

1581
01:54:58,800 --> 01:55:03,000
समझाता हूं जहा य सनातन ही क्यों इन चक्र

1582
01:55:03,000 --> 01:55:07,400
में पड़े हुए हो समझा समझा मैंने कहा हम तो थक गए

1583
01:55:07,400 --> 01:55:12,160
जीी क र जी धमकियां क मतलब समझे

1584
01:55:12,160 --> 01:55:16,560
नहीं जैसे कई बार जो अहम

1585
01:55:16,560 --> 01:55:20,720
अपने ही भाई साथी लोग है उनसे भी कई बार बस हो जाती

1586
01:55:20,720 --> 01:55:26,040
थी तो बोलते थे वहां आ जाओ

1587
01:55:26,040 --> 01:55:30,520
समझ ग होंगे वहा पर मिलो हमसे हम ये कर देंगे वो कर देंगे

1588
01:55:30,520 --> 01:55:34,720
हमने कहा भैया जो सत्य है सत्य छुपने से नहीं छुपने वाला हमें जो बोलना

1589
01:55:34,720 --> 01:55:38,920
है हम तो बोलेंगे हम तो अ रहे मुझको

1590
01:55:38,920 --> 01:55:43,240
तो यह भी नहीं कहते वहा मिल

1591
01:55:43,240 --> 01:55:48,080
लो अपना लोकेशन भेजो फिरने

1592
01:55:48,080 --> 01:55:52,960
शिवा जी तो सीधे भि गए देख के हैरान रह गया कैसे

1593
01:55:52,960 --> 01:55:57,400
के लिए एक ही जगह

1594
01:55:57,400 --> 01:56:01,680
की बमने दे ील किने

1595
01:56:01,680 --> 01:56:07,240
का क्या कर गुरु से मिलती है

1596
01:56:07,240 --> 01:56:13,240
के चरण में जा हिमत और बल

1597
01:56:17,680 --> 01:56:21,720
सबब र्म हमारी रक्षा करेगा

1598
01:56:21,720 --> 01:56:25,920
तो की रक्षा के लिए तत्पर है

1599
01:56:25,920 --> 01:56:29,920
जिस मेले में वो लगा हुआ था इनका कैप रामपाल वालों का जिस

1600
01:56:29,920 --> 01:56:34,200
मेले में कैंप लगा था उस मेले में एक

1601
01:56:34,200 --> 01:56:38,400
इवेंट भी चल रहा था जहां पर इवेंट

1602
01:56:38,400 --> 01:56:42,640
भी चल रहा था तो इनका स्टॉल लगा दूसरा दर दूर

1603
01:56:42,640 --> 01:56:46,840
इवेंट चल रहा तो उसमें सिंगिंग हो रही है डांसिंग हो रही है य सब चल रहा है वहां जनता

1604
01:56:46,840 --> 01:56:51,040
बैठ के अपना मनोरंजन कर रही है तो जब मैंने इनका स्टॉल

1605
01:56:51,040 --> 01:56:55,160
देखा उस मेले में तो मेरे पास एक पोर्टेबल स्पीकर है

1606
01:56:55,160 --> 01:56:59,200
वो मैंने मंगा लिया अच्छा वो लेकर मैं उस इवेंट

1607
01:56:59,200 --> 01:57:04,880
में घुस गया और जैसे उसम ा प्रोग्राम बंद

1608
01:57:04,880 --> 01:57:09,480
हुआ मैं इस तरफ से माइक पर चिल्ला रहा हूं हिंदुओ

1609
01:57:09,480 --> 01:57:13,520
तुम नपुंसक हो जी य

1610
01:57:13,520 --> 01:57:17,760
बैठ डास देख रहे हो और तुम्हारी मां के बारे में किताब बेची

1611
01:57:17,760 --> 01:57:22,360
जा रही है कि दुर्गा का पति य है दुर्गा का पति वो है तुमको

1612
01:57:22,360 --> 01:57:26,360
नहीं आ रही बिल्कुल भीय मेरे पास वहा की थोड़ी सी रिकॉर्डिंग

1613
01:57:26,360 --> 01:57:31,840
है वीडियो रिकॉर्डिंग वहा के सब जो प्रबंधक थे

1614
01:57:31,840 --> 01:57:35,920
मुझको मतलब मेरे साथ जो है हाई टाइप की करने के लिए आ

1615
01:57:35,920 --> 01:57:40,040
ग हो मेरे साथ य पर गाड़ी के स्टैंड पर मुझे बहुत लोगों

1616
01:57:40,040 --> 01:57:44,120
ने उधर उनकी साइड मुंड का मुंड का एक जग है एक सतलोक आश्रम

1617
01:57:44,120 --> 01:57:48,160
वहा है मैं तो अकेला पड़ गया मेरे से बहुत भीड़ गए और बस

1618
01:57:48,160 --> 01:57:52,160
पर गाड़ी के स्टैंड पर बहुत दल हो गया

1619
01:57:52,160 --> 01:57:56,400
वो कम से कम 50 60 लोग आ गए फिर इधर से भी लोग थे मैंने कहा देखो ऐसा

1620
01:57:56,400 --> 01:58:00,520
जो सत्य है मैं तो सत्य कह रहा हूं बिल्कुल नहीं वेद में मैंने कहा ये वो दिखाने लग गई व

1621
01:58:00,520 --> 01:58:05,000
किताबे बांट रहे थे वो ज्ञान गंगा पता नहीं कौन सी गंगा मैंने कहा ये बिल्कुल निरर्थक है

1622
01:58:05,000 --> 01:58:09,200
बिल्कुल बेकार है बेकार है सारे मैं तो डंके की चोट प कह रहा हूं बो कहां

1623
01:58:09,200 --> 01:58:13,400
है ये है वहां का बाइबल में ये लिखा वही अपने क्या बोलू मैं गलत

1624
01:58:13,400 --> 01:58:17,640
व्याख्यान कर रहे थे तो मैं तो कई जगह से भिड़ गया अब क्या

1625
01:58:17,640 --> 01:58:19,920
बताऊ ये झुंड में गिदों की तरह

1626
01:58:19,920 --> 01:58:23,960
आते हैं मैंने भी देखा है चीज हां और किताबे कहीं भी

1627
01:58:23,960 --> 01:58:28,120
बांटने लग जाएंगे कहीं भी बाट बस पर मेट्रो में

1628
01:58:28,120 --> 01:58:32,160
कहीं भी स्टंड पर आपसे ना रिक्वेस्ट है जबसे

1629
01:58:32,160 --> 01:58:36,400
मिलो ना आप कम से कम ना मतलब की होने चाहिए बंदे कम से कम 50 ऐसे

1630
01:58:36,400 --> 01:58:40,680
मिला करो आप अकेले मत मिला करो जी अच्छा

1631
01:58:40,680 --> 01:58:45,600
एक बात कहना चाह रहा हूं जो लोग हमारा समर्थन कर रहे हैं बकुल

1632
01:58:45,600 --> 01:58:49,840
सम यह जो स्ट्रीम यार्ड पर हम लाइव स्ट्रीम करते हैं

1633
01:58:49,840 --> 01:58:53,880
और हम इसको चाहते हैं कि इसको आगे करते रहे जिससे लोगों के मन में सही

1634
01:58:53,880 --> 01:58:58,040
बातें पहुंचे तो इसम का साल भर का सब

1635
01:58:58,040 --> 01:59:02,320
लेना हो पढ़ लिखा होगा जो जानने वाला होगा

1636
01:59:02,320 --> 01:59:06,320
व्या आपकी बात को समझ पाएगा अनथा उ

1637
01:59:06,320 --> 01:59:10,320
तना भी सिर पट आया था फायदा य होता

1638
01:59:10,320 --> 01:59:14,440
है जो लोग फसने के कगार पर होते वो बच जाते हैं जो

1639
01:59:14,440 --> 01:59:18,960
फसने के कगार होते वो बच जाते

1640
01:59:18,960 --> 01:59:23,040
हैं एक बात एक बात कहलू जरा कि हमको जो

1641
01:59:23,040 --> 01:59:27,080
है यह जो स्ट्रीम यार्ड है इसका साल भर का सब्सक्रिप्शन

1642
01:59:27,080 --> 01:59:31,160
है शायद मेरे ख्याल से 18 से 19000 का है तो हमको

1643
01:59:31,160 --> 01:59:35,040
यह लेना है जिससे कि हम इस पर अपनी लाइव स्ट्रीम कर सके तो

1644
01:59:35,040 --> 01:59:39,080
अगर जो लोग इच्छुक है हमारी सहायता कर सकते हैं मासिक रूप से थोड़ा थोड़ा

1645
01:59:39,080 --> 01:59:43,560
सा पे कर दे हम लोग उसका पेमेंट कुछ एक बार में हो करके उसकी इंस्टॉलमेंट

1646
01:59:43,560 --> 01:59:47,640
बन जाती है तो जो लोग सहायता करना चाहते हैं वो हमसे संपर्क

1647
01:59:47,640 --> 01:59:51,760
करें हम एक ग्रुप बना देंगे उसके लिए उसमें आप जो है मासिक रूप

1648
01:59:51,760 --> 01:59:55,760
से छोटी छोटी सी राशि अगर देंगे तो हमारा ये सब्जेक्शन आ

1649
01:59:55,760 --> 01:59:59,840
जाएगा है ना आप ना मेड कर ना करेंगे अवश्य

1650
01:59:59,840 --> 02:00:04,080
अवश्य मेरे बहुत सारे मित्र हैं अच्छे विद्यालय परंपराओं से

1651
02:00:04,080 --> 02:00:08,160
हम लोग आप ये हमारा नंबर है जो भी इस

1652
02:00:08,160 --> 02:00:12,240
तरह से आर्थिक रूप से मदद करना चाहे इस मामले में आपका नंबर है

1653
02:00:12,240 --> 02:00:16,560
आपका नंबर मेरे पास है जी जी जी व नंबर हां हा अच्छा

1654
02:00:16,560 --> 02:00:20,600
अच्छा अच्छा अच्छा आप आप आपसे अभिवादन प्राप्त होते हैं

1655
02:00:20,600 --> 02:00:24,600
हमको हां जी और आप इस कार्य को निरंतर जारी रखें बिल्कुल

1656
02:00:24,600 --> 02:00:28,880
रुकना नहीं है आपने इसको छेड़ा है तो जो अंत है वही वही जाकर

1657
02:00:28,880 --> 02:00:33,160
रुकना है बिल्कुल इस कार्य को निरंतर करना है

1658
02:00:33,160 --> 02:00:37,160
मैं अपने बारे में एक बात बताऊं कि मैं

1659
02:00:37,160 --> 02:00:41,200
मैं जो है धर्म रक्षा के लिए

1660
02:00:41,200 --> 02:00:45,400
भूखा घूम रहा था भूखा मैं इतना तड़प उठाता

1661
02:00:45,400 --> 02:00:49,480
अंत आत्मा से कि मैं जो है फाड़ खाऊ यह जो धर्म

1662
02:00:49,480 --> 02:00:50,120
को नष्ट करने

1663
02:00:50,120 --> 02:00:55,040
वाले लोग है अब उसके बाद भूका घूमते घूमते

1664
02:00:55,040 --> 02:00:59,240
मैंने भगवान की बहुत भक्ति करी मतलब ऐसी नहीं कि कोई महापुरुष

1665
02:00:59,240 --> 02:01:04,040
जितनी मगर बहुत भगवान का नाम लिया और

1666
02:01:04,040 --> 02:01:08,360
लगभग मैंने दो तीन महीने नाम बस उनका लिया होगा ठीक प्रकार से

1667
02:01:08,360 --> 02:01:12,400
तीन चार महीने और मेरे जीवन में गुरुदेव प्रकट हो

1668
02:01:12,400 --> 02:01:16,440
गए वही बिल्कुल वही आप भक्ति को

1669
02:01:16,440 --> 02:01:20,480
जब मैं देखने जा रहा हूं गुरुदेव को मैं सिर्फ यह देखने जा रहा हूं कि मैं

1670
02:01:20,480 --> 02:01:24,640
शंकराचार्य को आज देख गा बस मुझे नहीं पता था वहां से मुझे मिलने क्या वाला

1671
02:01:24,640 --> 02:01:28,680
है मैं केवल जो वो लिख के गए ना आदि शंकराचार्य

1672
02:01:28,680 --> 02:01:32,800
के जो इस गद्दी में बैठेगा वो मुझ शिव का रूप मान्य होगा मैं

1673
02:01:32,800 --> 02:01:36,840
उसको देखने जा रहा हूं कि वो शंकराचार्य को मैं आज देखूंगा इन आंखों से

1674
02:01:36,840 --> 02:01:41,000
पागलों की तरह बकुल ब पहु और

1675
02:01:41,000 --> 02:01:45,080
द संकल्प आपका संकल्प जरूर पूर्ण होगा जी जी जब

1676
02:01:45,080 --> 02:01:49,680
मैं वहां पहुंचा और मैंने उनको देखा मैं अपने कॉपी में दो चार

1677
02:01:49,680 --> 02:01:53,680
अपनी नोटबुक में प्रश्न भी लिख के ले गया पूछूंगा और वहां ऐसे

1678
02:01:53,680 --> 02:01:57,680
हालत खराब हुई उनको मैंने देखा आंसू बह रहे हैं और पूछने का दम

1679
02:01:57,680 --> 02:02:01,760
नहीं रहा उसके बाद मुझे वहां से सब कुछ मिल

1680
02:02:01,760 --> 02:02:05,280
गया जो मैंने सोचा नहीं था कि मुझे यहां से क्या

1681
02:02:05,280 --> 02:02:09,520
क्या मिलना है मुझे मिला वहां पर सार्वभौम

1682
02:02:09,520 --> 02:02:13,520
सिद्धांत ऐसा सिद्धांत जिको काटा ना जा सके

1683
02:02:13,520 --> 02:02:17,680
मुझे मिला वहां से कि यह सारे जो तंत्र

1684
02:02:17,680 --> 02:02:21,960
बन रहे हैं फल रहे फूल रहे जो समस्या हिंदुओं की इसकी रक्षा

1685
02:02:21,960 --> 02:02:26,560
कैसे होगी एक ही उसका उपाय है हिंदू राष्ट्र

1686
02:02:26,560 --> 02:02:30,640
मैं तबतक मैं तब तक ऊपर ऊपर काम काम करना चाहता था

1687
02:02:30,640 --> 02:02:34,840
मुझे नहीं पता था एटली क्या करना है हां यह पता चल गया था कि लोगों

1688
02:02:34,840 --> 02:02:39,360
को प्रमाणिक आचार के बारे में बताना है यह पता चल गया मगर

1689
02:02:39,360 --> 02:02:43,560
जो गुरुदेव से वाक्य मिला हर हिंदू सेना हो हर हिंदू

1690
02:02:43,560 --> 02:02:47,640
सनातनी हो यह जो वाक्य मिला मतलब मुझे समझ में आया कि

1691
02:02:47,640 --> 02:02:51,960
भाई करना क्या है एटली तो मेरा

1692
02:02:51,960 --> 02:02:56,240
जो जीवन है मैंने एक दिन और भी बताया था मतलब इतना संतुष्ट

1693
02:02:56,240 --> 02:03:00,480
हो गया जीवन से उस दिन वहां पर गुरुदेव के दर्शन सार्वभौम

1694
02:03:00,480 --> 02:03:04,640
सिद्धांत और जीवन का लक्ष्य तो अब कुछ शेष

1695
02:03:04,640 --> 02:03:08,760
नहीं रह गया कि मुझको जो है फलाने कपड़े लाने हैं फलाना बंगला बनाना

1696
02:03:08,760 --> 02:03:13,600
है फलाना मेरा जीवन का एक ही उद्देश्य है सिंगल पॉइंट

1697
02:03:13,600 --> 02:03:17,920
एजेंडा सर सिद्धांतों का प्रचार धर्म की

1698
02:03:17,920 --> 02:03:20,560
रक्षा बिल्कुल धर्म की रक्षा हमारा

1699
02:03:20,560 --> 02:03:24,680
बिल्कुल सर्वप्रथम सं विल्प है ये हम भी निरंतर लगे हुए हैं आप बहुत

1700
02:03:24,680 --> 02:03:28,680
अच्छा कार्य कर रहे हैं और आप जितने भी पाखंड है अब आप बोलोगे

1701
02:03:28,680 --> 02:03:32,840
इनको तो दूर करना बहुत जरूरी है जब तक पैर में कांटा रहता है वो

1702
02:03:32,840 --> 02:03:37,000
दुख दुखी करता है जब उसको निकाल दो तो आदमी को शांति मिलती है

1703
02:03:37,000 --> 02:03:41,520
है कि नहीं तो ये इस प्रकार ही है ये सनातन में ये जब लकड़ी पर

1704
02:03:41,520 --> 02:03:46,000
लग जाता ना क्या लगता है तो दीमक तो ये दीमक की तरह है ये भी

1705
02:03:46,000 --> 02:03:50,400
जब तक इसको साप किया जाए परमाण सहित तब तक ये

1706
02:03:50,400 --> 02:03:54,400
धीरे धीरे धीरे धीरे वाह बहुत अच्छा कार्य कर रहे हैं बहुत बढ़िया

1707
02:03:54,400 --> 02:03:58,520
हम बिल्कुल शकरा हम भी है उत्तराखंड भूमि के है शंकराचार्य जी की भूमि

1708
02:03:58,520 --> 02:04:01,320
के है

1709
02:04:01,320 --> 02:04:07,320
और शंकराचार्य के परम उपासक

1710
02:04:07,480 --> 02:04:11,920
है प्रकार अपना दृ संकल्प करि आपको भगवान

1711
02:04:11,920 --> 02:04:16,040
जरूर आपको आगे का मार्ग करेगा हम भी आपसे कुछ सीख रहे

1712
02:04:16,040 --> 02:04:20,240
हैं ये नहीं आप हमें भी सीखने को मिल रहा है ऐसी बात हमें

1713
02:04:20,240 --> 02:04:24,480
भी सीखने को मिल रहा है और हमारे गुरुदेव भी कहते हैं जहां बेटा सीखने

1714
02:04:24,480 --> 02:04:28,760
को मिलो वहा सीखो हमारे पूज्य पाद गुरुजी पारा सर जी है आप जानते

1715
02:04:28,760 --> 02:04:33,520
होंगे आज कथा का उसम उनका और गुरु जी के कितने अच्छे परम

1716
02:04:33,520 --> 02:04:37,600
मतलब की गुरुजी को व अपना वो मानते हैं गुरु मानते हैं हमारे

1717
02:04:37,600 --> 02:04:41,640
गुरुदेव तो गुरु जी को परम मानते ज उनकी कथा थी

1718
02:04:41,640 --> 02:04:45,680
परास आध्यात्म पीठ का उद्घाटन था तो गुरुदेव को

1719
02:04:45,680 --> 02:04:49,920
विया हु था तो हम तो सुंदर प

1720
02:04:49,920 --> 02:04:54,080
जी हा बिल्कुल

1721
02:04:54,080 --> 02:05:00,080
बकल ले को बुला लो रामपाल के आ जाएगा है नहीं कोई

1722
02:05:00,280 --> 02:05:04,640
आसपास इतना गलत व्याख्या रामपाल

1723
02:05:04,640 --> 02:05:10,640
वासे अंदर इतना कॉन्फिडेंस लेवल नहीं है जिन

1724
02:05:13,720 --> 02:05:19,720
जी

1725
02:05:19,800 --> 02:05:23,920
गल सनातन ध

1726
02:05:23,920 --> 02:05:28,600
जी एक मिनट लोकी जी कुछ बोल रहे हैं जरा सुन लो जी जी थोड़ा रुक जाइए

1727
02:05:28,600 --> 02:05:32,840
साइड कमेंट में प्रश्न पूछने है कुछ लोग वो सनातन धर्म डिकोडेड करके चैनल

1728
02:05:32,840 --> 02:05:36,920
था यश कोई यश नाम के व्यक्ति का तो उसके

1729
02:05:36,920 --> 02:05:41,480
बारे में आप कुछ क्या कुछ जानते हैं क्या तो बता दीजिए अगर आप जानते हैं तो मुझे जो

1730
02:05:41,480 --> 02:05:45,520
लास्ट में न्यूज उनके बारे में प्राप्त है वो ये है कि उनके ऊपर

1731
02:05:45,520 --> 02:05:49,600
एक केस हुआ था जिसका आर्य समाज की ओर से कराया गया था

1732
02:05:49,600 --> 02:05:53,640
यह न्यूज मिली थी मुझे और उसके बाद व बेल वेल पर बाहर आ गए

1733
02:05:53,640 --> 02:05:57,840
थे उनका नंबर है मेरे पास मगर व

1734
02:05:57,840 --> 02:06:02,200
मतलब नॉट चेबल रहता है ट पर कांटेक्ट किया है

1735
02:06:02,200 --> 02:06:06,280
पर वो नॉट चेबल रहता है वोह फ्रॉड केस

1736
02:06:06,280 --> 02:06:09,920
हुआ था एक हमको भी जानकारी है उसके बारे

1737
02:06:09,920 --> 02:06:13,960
में हां कुछ था मामला जो

1738
02:06:13,960 --> 02:06:18,240
केस हम लोगों पर हुआ था वैसा ही केस करके उन लोगों को कोर्ट में बुलाया

1739
02:06:18,240 --> 02:06:22,960
गया अच्छा वो लोग वो लोग वो लोग जल्दी में एंटीसिपेटरी

1740
02:06:22,960 --> 02:06:27,240
बेल लेने चले गए उसके चक्कर में पकड़े

1741
02:06:27,240 --> 02:06:32,080
गए हमने हमने तो अच्छे से मंगा लिया माफीनामा

1742
02:06:32,080 --> 02:06:38,080
रगड़ जी जी ठीक है रमेश

1743
02:06:38,360 --> 02:06:42,480
प्रजापति बस अब बैक अप करते

1744
02:06:42,480 --> 02:06:46,720
हैं दो घंटे हो चुके हम लोगों के है ना

1745
02:06:46,720 --> 02:06:51,800
जी जी जी बोलिए

1746
02:06:51,800 --> 02:06:55,920
बना है मेरे बगल में आर्य समाजिक गायत्री मंत्र का हम बोल उच्चारण नहीं

1747
02:06:55,920 --> 02:06:59,920
करना वेद का मंत्र है जिस प्रकार समझाना हो वो भी वर्ण व्यवस्था को

1748
02:06:59,920 --> 02:07:04,000
नहीं मानते वर्ण व्यवस्था में बड़े कुतर्क करेंगे वर्ण व्यवस्था पर बड़ा

1749
02:07:04,000 --> 02:07:08,240
कुतर्क रहता है उनका भी और कुछ नहीं उनको मतलब की

1750
02:07:08,240 --> 02:07:12,400
व अपना मन अपने अपने आप व्याख्या करके जो वेद

1751
02:07:12,400 --> 02:07:16,600
में है वो महाभाष्य किया है स्वामी जी ने उसी और अपने हिसाब से शास्त्र

1752
02:07:16,600 --> 02:07:20,680
के हिसाब से नहीं अपने हिसाब से व्याख्या करना अपने हिसाब से व्याख्या को

1753
02:07:20,680 --> 02:07:24,960
प्रस्तुत करना चलिए चलिए प्रोफेट

1754
02:07:24,960 --> 02:07:30,200
कबीर साहब कुछ क्या कमेंट कर रहे हैं इनको

1755
02:07:30,200 --> 02:07:34,280
क्या कबीर दस अरे भाई साप और बिू

1756
02:07:34,280 --> 02:07:40,280
शेरो को काटा नहीं करते दूर ही दूर से रंग कर निकल जाते

1757
02:07:41,120 --> 02:07:45,480
हैं वेदों में प्रमाण है कबीर साहेब भगवान है प्रोफेट

1758
02:07:45,480 --> 02:07:49,920
कबीर साहेब लिख रहे हैं रमेश प्रजा जी बहुत से

1759
02:07:49,920 --> 02:07:55,000
कर नकी बात सुन लेते रमेश प्रजापति जी

1760
02:07:55,000 --> 02:07:59,840
बोले जी शिवांश भैया जी हेलो

1761
02:07:59,840 --> 02:08:04,800
जय श्री आवाज आ रही है आपकी बोलिए बोलिए जय श्री राम बोलिए

1762
02:08:04,800 --> 02:08:09,000
सर साहब बोलिए मैं ये कहना चाहता

1763
02:08:09,000 --> 02:08:13,720
हूं कि आप बहुत झूठ बोलते हैं किसे आश्रम में जो कि ये

1764
02:08:13,720 --> 02:08:17,880
आपके नाच गाना डांस दिखा रहा था हमारे आश्रम में कहां

1765
02:08:17,880 --> 02:08:22,880
पर आप देखें ये चीज को अरे कहां बोला उन्होने मैंने कब

1766
02:08:22,880 --> 02:08:27,520
बोला क कबीर साब वाले मच

1767
02:08:27,520 --> 02:08:30,840
उने क्या

1768
02:08:30,840 --> 02:08:34,880
बोला मिनट मिट मिनट मिनट

1769
02:08:34,880 --> 02:08:38,960
इनको म्यूट करो एक मिनट भैया मैं अभी आपको सुन रहा क्या बोल क्या

1770
02:08:38,960 --> 02:08:44,320
बोला था क्या किस बारे में बात कर रहे आप बताइए

1771
02:08:44,320 --> 02:08:48,800
आपसे अरे अरे इनको म्यूट करो भैया

1772
02:08:48,800 --> 02:08:53,040
अरे वो यह कह रहे हैं कि अभी आप थोड़ी देर पहले जब बता रहे थे कि एक स्पीकर लेकर

1773
02:08:53,040 --> 02:08:57,360
जाते थे जब वो भगवती रामपाल

1774
02:08:57,360 --> 02:09:01,360
वालो का इवेंट नहीं था वो वो मेले में एक दूसरा कार्यक्रम हो रहा था

1775
02:09:01,360 --> 02:09:05,360
मेले में कई कार्यक्रम होते हैं ना रामपाल वालों

1776
02:09:05,360 --> 02:09:09,680
का स्टॉल अलग लगा है और वह कार्यक्रम अलग है वो

1777
02:09:09,680 --> 02:09:13,760
रामपाल वालों का कार्यक्रम नहीं था मैं तो वहां पर गया था

1778
02:09:13,760 --> 02:09:17,800
जो जो नॉर्मल हिंदू थे उनको यह बताने के लिए

1779
02:09:17,800 --> 02:09:22,040
कि तुम्हारी दुर्गा मां के बारे में किताबें

1780
02:09:22,040 --> 02:09:26,240
बेची जा रही है वहा रामपाल वाले नहीं थे मैं रामपाल वाले होते तो वहा

1781
02:09:26,240 --> 02:09:31,000
उनको जगाने क्यों जाता वहा तो उनसे मैं तर्क वितर्क करता भाई

1782
02:09:31,000 --> 02:09:36,560
समझ रहे हो नहीं समझ

1783
02:09:36,560 --> 02:09:40,520
रहे एक

1784
02:09:40,520 --> 02:09:45,000
मिनट जी हा बोलिए रामपाल

1785
02:09:45,000 --> 02:09:49,160
वालो का कार्यक्रम नहीं था वो रामपाल वालों

1786
02:09:49,160 --> 02:09:53,400
का कार्यक्रम नहीं था वो वो वहां जैसे मेले में केवल एक ही चीज

1787
02:09:53,400 --> 02:09:57,680
नहीं होती है ना कई चीजें होती है तो मेले में एक स्टॉल रामपाल वालों

1788
02:09:57,680 --> 02:10:01,720
का था वो जब मैंने देखा तो मैं वहां जो दूसरा एक कार्यक्रम हो रहा

1789
02:10:01,720 --> 02:10:05,880
था वहां गया वहां के हिंदुओं को मैंने बोला कि तुम लोग कैसे

1790
02:10:05,880 --> 02:10:10,080
लोग हो तुम्हारी मां के बारे में कोई उल्टी सीधी किताबें लिख कर के छाप

1791
02:10:10,080 --> 02:10:14,200
रहा है और तुम यहां पर अपना मनोरंजन कर रहे हो ये हुआ था वो

1792
02:10:14,200 --> 02:10:19,120
रामपाल वालों का कार्यक्रम नहीं था वो वो मेले वालों का कार्यक्रम था

1793
02:10:19,120 --> 02:10:23,120
ठीक है ठीक है इसके अतिरिक्त आपको कुछ कना है तो बोलिए प्रजापति जी

1794
02:10:23,120 --> 02:10:26,000
क्या क

1795
02:10:26,000 --> 02:10:31,480
रहे क्या प्रजापति जी वास्तव में प्रजापति वाली पोजीशन में बैठे

1796
02:10:31,480 --> 02:10:36,280
हैं ब ब ऐसा कोई

1797
02:10:36,280 --> 02:10:40,680
बोलिए बोलिए प्रजापति जी समझे

1798
02:10:40,680 --> 02:10:44,920
नहीं शायद ठीक है समझ गए अब उनके पास अब

1799
02:10:44,920 --> 02:10:49,000
कुछ गुस्से में ऐसा नहीं है आपकी

1800
02:10:49,000 --> 02:10:51,600
घरमा की रक्षा भी हम करेंगे चिंता ना

1801
02:10:51,600 --> 02:10:55,720
करें ऐसा मत सोचिए आप ऐसा

1802
02:10:55,720 --> 02:10:59,880
मत सोचिए अभी देखिए कुछ दिन पहले क्रिश्चियन आया था बोला

1803
02:10:59,880 --> 02:11:03,960
कि मैं इनकी इनकी पोल खोलने आया हूं राम पालियो

1804
02:11:03,960 --> 02:11:08,040
की ऐसे बोला वो तो हमने उनको मना कर दिया कि हम देखो हमारा

1805
02:11:08,040 --> 02:11:12,040
आपस में जो भी हो मगर हम बाहर वाले से अपने भाइयों की

1806
02:11:12,040 --> 02:11:16,040
बुराई नहीं सुनेंगे यहां बैठ कर के मना कर दिया ब बक फिर

1807
02:11:16,040 --> 02:11:20,120
हमने भी कहा फिर हमने उससे ये भी कहा तुमको अगर

1808
02:11:20,120 --> 02:11:25,080
अपना ईश्वर स सिद्ध करना हो तो बताओ

1809
02:11:25,080 --> 02:11:29,160
फर हमने ये कहा हमने कहा अगर बाइबल के ईश्वर को सर्वशक्तिमान

1810
02:11:29,160 --> 02:11:33,200
सिद्ध कर दो तो आओ उसके लिए खुला निमंत्रण अपने

1811
02:11:33,200 --> 02:11:37,320
भाई अपने भाई है व हमारा आपस का मामला है

1812
02:11:37,320 --> 02:11:41,920
तुम कौन होते हो य आ कर के भैया जो है हम अपने भाइयों की बुराई सुने तुमसे

1813
02:11:41,920 --> 02:11:47,640
तो हमने मना कर दिया आप ऐसे ऐसे मत सोचिए ठीक

1814
02:11:47,640 --> 02:11:53,640
है प्रोफेट

1815
02:11:55,240 --> 02:11:59,280
दीक्षित जी बहुत परेशान हो रहे हैं एक बंदा है

1816
02:11:59,280 --> 02:12:03,280
रामपाल जी की तरफ से बोल रहा है कि गल में सर्च करो वर्तमान में सच्चा

1817
02:12:03,280 --> 02:12:07,600
संत कौन है अभी यह थोड़े दिनों बाद कहने लगे वेदों में नहीं गल

1818
02:12:07,600 --> 02:12:13,000
में प्रमाण है कबीर साहब भगवान

1819
02:12:13,000 --> 02:12:17,920
है हद हो

1820
02:12:17,920 --> 02:12:22,000
गई चलिए फिर बढ़ाते हैं कोई संघ वालों

1821
02:12:22,000 --> 02:12:26,440
का रोग है गल से

1822
02:12:26,440 --> 02:12:30,760
दिखाएंगे ठीक है आने के लिए बहुत बहुत धन्यवाद सभी का

1823
02:12:30,760 --> 02:12:35,000
सुजीत जी आप जुड़े बहुत अच्छा लगा गुरु भाई हमारे और पंडित

1824
02:12:35,000 --> 02:12:39,200
सूरज प्रकाश जी आपका भी बहुत-बहुत आभार संदीप जी आपका विशेष रूप

1825
02:12:39,200 --> 02:12:43,480
से आभार आपने समय दिया इतना और हम लोगों ने जो स्ट्रीम

1826
02:12:43,480 --> 02:12:47,520
यार्ड के बारे में बताया है उसके लिए आप लोग एक मासिक रूप से छोटी छोटी सहायता

1827
02:12:47,520 --> 02:12:51,520
कर द तो हम एक ग्रुप बना देंगे तो उसमें इसका जो है स्ट्रीम का हमें

1828
02:12:51,520 --> 02:12:56,000
सब्सक्रिप्शन लेना है क्योंकि इसमें पिक्चर क्वालिटी भी खराब आती है बिना सब्सक्रिप्शन

1829
02:12:56,000 --> 02:13:00,200
के और दूसरी बात और भी कई सारी सर्विसेस है जिनका हम यूज

1830
02:13:00,200 --> 02:13:04,240
नहीं कर पाते हैं तो आज सुबह ही जो हमारे टेक्निकल जो सहायक

1831
02:13:04,240 --> 02:13:08,480
थे वो बता रहे थे हा तो ऐसे करके हा जो भी सहायता

1832
02:13:08,480 --> 02:13:10,280
करना चाहते हैं उना

1833
02:13:10,280 --> 02:13:14,320
नंबर हमारा नोट कर ले जी का थोड़ा सा परिचय दीजिए

1834
02:13:14,320 --> 02:13:18,360
तो जी पंडित फ्लोके जी थोड़ा

1835
02:13:18,360 --> 02:13:22,640
परिचय करा दीजिए आप अपने ये आपके गुरु भाई

1836
02:13:22,640 --> 02:13:26,800
हा वो तो समझ में आ रहा है पहले से ही लेकिन एक

1837
02:13:26,800 --> 02:13:30,920
मिनट जो भी आर्थिक रूप से सहयोग वाले प्रक प्रकल्प

1838
02:13:30,920 --> 02:13:35,000
में जुड़ना चाहते हैं य स्ट्रीम यार्ड इत्यादि के निमित्त तो

1839
02:13:35,000 --> 02:13:39,000
वह इसमें ट करें और उनको जो

1840
02:13:39,000 --> 02:13:45,000
है जोड़ दिया जाएगा आर्थिक रूप से सहायता वाले ग्रुप में

1841
02:13:45,160 --> 02:13:49,480
74836 ठीक है जी इनका परिचय आप ही बता

1842
02:13:49,480 --> 02:13:53,880
दीजिए लोकी जी पंडित जी

1843
02:13:53,880 --> 02:13:58,160
मैं भी गुरु भाई हूं और मैं शिवांश जी की तरह ही

1844
02:13:58,160 --> 02:14:02,360
धर्म से जुड़ा हूं क्योंकि हम दोनों में एक ही कॉमन चीज है वो है गुरुदेव

1845
02:14:02,360 --> 02:14:07,120
सबसे पहला कॉमन चीज और उसके बाद फिर सब बहुत सारी समानताएं मिलती

1846
02:14:07,120 --> 02:14:11,360
गई और फिर मुझे लगा कि फिर मैं भी सोच रहा था कि इनको

1847
02:14:11,360 --> 02:14:15,400
सपोर्ट करूं जैसे भी हो सकता था मैंने यथाशक्ति किया

1848
02:14:15,400 --> 02:14:19,480
और उसके बाद अब चल रहा है बस धर्म की रक्षा चल रही

1849
02:14:19,480 --> 02:14:23,480
है साथ में और क्या यही कहां से

1850
02:14:23,480 --> 02:14:25,280
है मैं

1851
02:14:25,280 --> 02:14:29,560
मैं दिल्ली से हूं एनसीआर से तो दिल्ली से

1852
02:14:29,560 --> 02:14:33,600
मैं दिल्ली में कार्यरत हूं मैं एमएनसी

1853
02:14:33,600 --> 02:14:37,600
में करता ठीक व्यक्तिगत बत

1854
02:14:37,600 --> 02:14:42,200
व्यक्तिगत जानकारिया फिर हो जाए ठीक है

1855
02:14:42,200 --> 02:14:46,760
इलिए जय श्री राम सभी को जय श्री राम नारायण

1856
02:14:46,760 --> 02:14:51,160
जय श्री राम हर हर महादेव ह ह हर महादेव

1857
02:14:51,160 --> 02:14:55,400
अच्छा हां एक जाते जाते बात कर दूं मैं किसी

1858
02:14:55,400 --> 02:14:59,640
को भी किसी प्रकार का वैचारिक मतभेद हो इस नंबर पर संपर्क करें धर्म

1859
02:14:59,640 --> 02:15:03,720
रक्षा के लिए स शरीर सहयोग करना हो इस नंबर पर

1860
02:15:03,720 --> 02:15:07,760
संपर्क करें नामा स्त्र हमारा नाम जब चल रहा है डेली लोग जुड़

1861
02:15:07,760 --> 02:15:11,800
रहे हैं बहुत अच्छा हो रहा है सवा सवा घंटे रामधुन में शिव धुन

1862
02:15:11,800 --> 02:15:16,160
में हम लोग हो जाते हैं उसमें जुड़ सकते हैं 1515 मिनट में 1515

1863
02:15:16,160 --> 02:15:20,400
मिनट के पांच राउंड दिन भर में और अगर एक बार में करना है तो सवा घंटे

1864
02:15:20,400 --> 02:15:24,520
का एक एक जो सवा घंटे वाला करते हैं उसमें स्वयं मैं रहता हूं

1865
02:15:24,520 --> 02:15:28,640
और बाकी 1515 मिनट के जो होते हैं उसमें जो है अलग अलग

1866
02:15:28,640 --> 02:15:33,480
गुरु भाई है वह सहयोग करते हैं जी इसके साथ ही साथ

1867
02:15:33,480 --> 02:15:37,480
दिवाली के विषय में दिवाली कब बनानी है इसके बारे में इसके

1868
02:15:37,480 --> 02:15:40,520
विषय में जो हमारे प्रामाणिक आचार्य उनका वीडियो

1869
02:15:40,520 --> 02:15:45,400
आ गया है वह वीडियो देख सकते हैं धर्म और

1870
02:15:45,400 --> 02:15:49,600
धर्म और ब्रह्म को लेकर के कोई भी जिज्ञासा है तो उसके लिए गोवर्धन

1871
02:15:49,600 --> 02:15:53,600
मठ का चैनल अपना प्रश्न लिखिए में

1872
02:15:53,600 --> 02:15:58,000
और वहां आगे लिख दीजिए पूरी शंकराचार्य तो ज्यादातर संभावना

1873
02:15:58,000 --> 02:16:02,240
है आपके प्रश्न का उत्तर आ जाएगा और यह

1874
02:16:02,240 --> 02:16:07,000
आचार्य श्री का चैनल है इस पर विधि

1875
02:16:07,000 --> 02:16:11,800
विधि निषेध इत्यादि के बारे में बहुत अच्छी जानकारियां सारी है प्रामाणिक

1876
02:16:11,800 --> 02:16:16,120
तो आप इसको फॉलो करें यहां पर सुने आचार्य श्री को

1877
02:16:16,120 --> 02:16:21,440
और एक मेरे पास प्रश्न बहुत आता है कि गुरु दीक्षा

1878
02:16:21,440 --> 02:16:25,520
लेनी है तो गुरु दीक्षा के लिए यही है कि

1879
02:16:25,520 --> 02:16:29,720
एक उपवत और एक धोती धारण करके गुरुदेव

1880
02:16:29,720 --> 02:16:33,840
के सामने आपको तब खड़ा होना है जब उनका सुबह वाला प्रवचन पूरा

1881
02:16:33,840 --> 02:16:37,840
हो चुका होगा आपने अपना नाम लिखा दिया होगा और गुरुदेव

1882
02:16:37,840 --> 02:16:42,000
आपको देख कर के जब आप जब आप पर गुरुदेव की दृष्टि पड़े तो आप पारंपरिक

1883
02:16:42,000 --> 02:16:46,240
वेशभूषा में हो पाश्चात्य वेशभूषा में ना हो

1884
02:16:46,240 --> 02:16:50,440
और इसके लिए कोई शुल्क नहीं है कोई आपको बाध्यता

1885
02:16:50,440 --> 02:16:55,280
नहीं है कि आपको यह लेकर जाना है बस पारंपरिक बेस में होना चाहिए आपको

1886
02:16:55,280 --> 02:16:55,880
और

1887
02:16:55,880 --> 02:17:00,120
गुरुदेव का प्रवास कहां रहता है इसके लिए और भी अन्य कई प्रकार की

1888
02:17:00,120 --> 02:17:04,200
सुविधाएं गोवर्धन मट पप आ गई है वो डाउनलोड कर

1889
02:17:04,200 --> 02:17:08,880
लीजिए उसमें आपको गुरुदेव के प्रवास की जानकारी मिलती रहेगी

1890
02:17:08,880 --> 02:17:13,480
ठीक है यह जो एक जी

1891
02:17:13,480 --> 02:17:17,640
यह जो प्रोफेट कबीर साहेब एक ये कमेंट कर रहे

1892
02:17:17,640 --> 02:17:21,680
हैं कमेंट को आप ब्लॉक नहीं कर सकते हैं क्या वो

1893
02:17:21,680 --> 02:17:26,280
करते वो करते रहेंगे वो कुछ ना कुछ वो एक से एक कमेंट करेंगे

1894
02:17:26,280 --> 02:17:30,400
भाई देखिए क पर आक्षेप कर रहे हैं इनके लिए इसके लिए इन पर

1895
02:17:30,400 --> 02:17:34,840
बहुत कड़ा करवाई हम कर सकते हैं

1896
02:17:34,840 --> 02:17:39,040
अरे ये लोग ऐसे ही गुरुदेव के लिए अपशब्द कहना इनको

1897
02:17:39,040 --> 02:17:43,160
गुरुदेव के लिए पड़ सकता है बहुत भारी

1898
02:17:43,160 --> 02:17:47,160
पड़ सकता है अगर ये सब ये सब लिख रहे हैं तो इनको खोज करके हम पहले हम तो

1899
02:17:47,160 --> 02:17:51,360
आपके लाइव पर कुछ नहीं बोलना चाहते हैं लेकिन

1900
02:17:51,360 --> 02:17:55,600
ली आईडी वाले हैं और इनका स्तर गिरना भाषा का

1901
02:17:55,600 --> 02:17:59,720
इससे यह प्रूफ होता है कि इनके पास सिद्धांत नहीं है अपनी

1902
02:17:59,720 --> 02:18:03,920
चीजों को बचाने के लिए हम आज भी अपनी मर्यादा पर क्यों

1903
02:18:03,920 --> 02:18:08,080
टिके हैं क्योंकि हमें आवश्यकता नहीं लेकिन साठ समाचर

1904
02:18:08,080 --> 02:18:11,000
भी है वो हम पूरा तरह से फॉलो करते हैं आप तो जानते

1905
02:18:11,000 --> 02:18:15,080
ही है रायण करेंगे करेंगे करेंगे करेंगे

1906
02:18:15,080 --> 02:18:19,280
इसीलिए तो आपसे संपर्क किया था हमने ठीक है सभी को जय श

1907
02:18:19,280 --> 02:18:22,840
जी सूरज जी कुछ कहना

1908
02:18:22,840 --> 02:18:26,920
अन म्यूट करिए सूरज जी कोट पंडित जी आप

1909
02:18:26,920 --> 02:18:31,120
म्यूट है एक मिनट एक मिनट जनता को

1910
02:18:31,120 --> 02:18:35,480
दिशा भ्रमित कर रहे हैं इनकी जो किताब

1911
02:18:35,480 --> 02:18:39,560
इनकी संपूर्ण जानकारी करके इनके गलत व्याख्यान के द्वा बैन होना

1912
02:18:39,560 --> 02:18:44,520
चाहिए संपूर्ण रूप से बैन होना चाहिए तुम अपना लिखिए

1913
02:18:44,520 --> 02:18:48,560
रा हो तब होगा वो सब अभी नहीं होने वाला है अभी आप जितना

1914
02:18:48,560 --> 02:18:52,360
जगा सकते हैं जितन को बचा सकते

1915
02:18:52,360 --> 02:18:56,520
बहिए वही कर हम तो बचा ही रहे भाई जी से

1916
02:18:56,520 --> 02:19:00,560
जदा गुरुदेव के अभियान का यही लक्ष्य है कि जितने

1917
02:19:00,560 --> 02:19:04,920
बच जाए उतने ठीक है बाकी सबका बंटाधार होना ही है

1918
02:19:04,920 --> 02:19:08,920
बु थोड़ा शप है अभी भी बस बुद्धि का खेल है जिनकी

1919
02:19:08,920 --> 02:19:13,080
बुद्धि में थोड़ा वो है धर्म संस्कार इत्यादि संस्कार

1920
02:19:13,080 --> 02:19:17,120
नाम के व है तो ठीक है जब तक बुद्धि में एक

1921
02:19:17,120 --> 02:19:21,280
और बात है एक और बात है जो लोग

1922
02:19:21,280 --> 02:19:25,360
नहीं मान रहे हैं वो भी मानेंगे बस महत्व बुद्धि की बात है

1923
02:19:25,360 --> 02:19:26,520
समय अभी उनके

1924
02:19:26,520 --> 02:19:30,520
मस्तिष्क में किसी और चीज के प्रति महत्व है वो उसको मान रहे

1925
02:19:30,520 --> 02:19:34,920
हैं जब अधिक महत्व बुद्धि हो जाएगी असली

1926
02:19:34,920 --> 02:19:38,920
विज्ञान के प्रति असली धर्म के प्रति असली ईश्वर के प्रति अपने आप लोग

1927
02:19:38,920 --> 02:19:43,000
मानेंगे उसके लिए अच्छे से आपको जानकारी रहनी चाहिए ताकि

1928
02:19:43,000 --> 02:19:47,000
आप लोगों को बता सके आशा करते हैं उम्मीद करते हैं प्रभु से कि सद्बुद्धि

1929
02:19:47,000 --> 02:19:51,520
आए भगवान इनको जरूर जल्दी से जल्दी सद्बुद्धि दे

1930
02:19:51,520 --> 02:19:55,600
वो हमारा आपका धर्म है ना हम लोग ब्राह्मण है हम लोग आप उसको बताइए सही से

1931
02:19:55,600 --> 02:19:59,920
तोव जानेगा जानेगा तो मानेगा बिल्कुल बिल्कुल चलिए

1932
02:19:59,920 --> 02:20:05,040
चलिए सभी को जय श्री राम आने के लिए समय देने के लिए सबको आभ श्री राम

1933
02:20:05,040 --> 02:20:09,240
नारायण महादव हरर महादेव शव

1934
02:20:09,240 --> 02:20:13,240
शंभु
