1
00:00:00,520 --> 00:00:04,720
अंजलि वो दूसरा ब्लूटूथ चालू करके दि सभी

2
00:00:04,720 --> 00:00:09,880
को जय श्री राम और

3
00:00:09,880 --> 00:00:14,280
जय हम लोग आज समय से आ गए

4
00:00:14,280 --> 00:00:18,440
ऐसा अधिकांश ता होता नहीं हमारे

5
00:00:18,440 --> 00:00:22,640
साथ में रामपाल जी को फॉलो करने वाले एक

6
00:00:22,640 --> 00:00:26,680
महानुभाव है उनका नाम और परिचय य खुद ही

7
00:00:26,680 --> 00:00:32,680
बताएंगे आप थोड़ा सा पास आ जाइए बहुत दूर बैठे

8
00:00:44,320 --> 00:00:49,520
फन

9
00:00:49,520 --> 00:00:53,640
जी तो अपना परिचय लोगों को बता दीजिए कहां

10
00:00:53,640 --> 00:00:58,560
से हैं कैसे हैं [संगीत] आप

11
00:00:58,560 --> 00:01:02,800
मेरा नाम अमित है मैं प्रदेश आज जिला आगरा बा से विलम करता

12
00:01:02,800 --> 00:01:07,280
हूं बा बाह नाम की जगह

13
00:01:07,280 --> 00:01:10,520
हा बाह बटेश्वर

14
00:01:10,520 --> 00:01:14,880
यह इधर ही है ना फतेहाबाद के आसपास हा

15
00:01:14,880 --> 00:01:19,920
फतेहाबाद के आसपास बाहा बटेश्वर

16
00:01:19,920 --> 00:01:23,960
जी ब बटेश्वर तीर्थ

17
00:01:23,960 --> 00:01:29,960
धाम है व

18
00:01:30,200 --> 00:01:34,840
तो आपका क्या स्थान है

19
00:01:34,840 --> 00:01:38,960
रामपाल जी के संबंध में मतलब कैसे

20
00:01:38,960 --> 00:01:44,560
जुड़े हैं कितना एक्सपीरियंस है वह थोड़ा सा बता

21
00:01:44,560 --> 00:01:48,880
दीजिए रामपाल जी महाराज मेरे गुरु हैं और मैं गुरु को भगवान

22
00:01:48,880 --> 00:01:53,320
मानता हूं और मैं काफी समय से उनसे जुड़ा हूं मुझे सतनाम

23
00:01:53,320 --> 00:01:58,280
प्राप्त है कब से जुड़े

24
00:01:58,280 --> 00:02:02,280
हैं मैं 2014 से जुड़ा हुआ

25
00:02:02,280 --> 00:02:06,640
हूं अच्छा तो वहां पर कोई नाम दान केंद्र

26
00:02:06,640 --> 00:02:11,640
है क्या वहां प हमारे आगरा में अभी खुला हुआ

27
00:02:11,640 --> 00:02:16,120
है पारिवारिक जो सदस्य है आपके परिवार के

28
00:02:16,120 --> 00:02:20,240
उनको थोड़ा सा कए शांत रहे थोड़ा सा विघ्न होता है या तो आप

29
00:02:20,240 --> 00:02:24,360
दूसरी जगह हो जाए या उनको दूसरी जगह कर दे

30
00:02:24,360 --> 00:02:28,560
अंजली या तो बाबू लेकर छत पर चली जा नहीं तो फिर मो छत

31
00:02:28,560 --> 00:02:34,560
प जाना पड़ेगा [संगीत]

32
00:02:41,280 --> 00:02:45,520
जी धन्यवाद तो आपके वहां बाह में इसका सेंटर

33
00:02:45,520 --> 00:02:49,560
है क्या नामदान केंद्र हां मेरे यहां पर है नामदान

34
00:02:49,560 --> 00:02:54,000
सेंटर है आगरा जिला में है

35
00:02:54,000 --> 00:02:58,000
अच्छा आगरा जिला में है आगरा जिला

36
00:02:58,000 --> 00:03:01,560
में है

37
00:03:01,560 --> 00:03:05,880
तो ये दीक्षा आपने जब ली थी तब तो आपने डायरेक्ट

38
00:03:05,880 --> 00:03:10,440
उनसे ही ली थी राम रामपाल जी से या कैसे ली थी डायरेक्ट

39
00:03:10,440 --> 00:03:14,480
मैंने गुरुजी से ली थी हरियाणा में जाकर

40
00:03:14,480 --> 00:03:18,520
हरियाणा गए थे अच्छा

41
00:03:18,520 --> 00:03:22,960
तो आजकल दीक्षा कैसे होती है लोगों

42
00:03:22,960 --> 00:03:26,160
की

43
00:03:26,160 --> 00:03:31,080
दीक्षा एलईडी के माध्यम से होती है एलईडी

44
00:03:31,080 --> 00:03:35,360
का माध्यम मतलब मैं समझा नहीं एलईडी

45
00:03:35,360 --> 00:03:39,800
का माध्यम ऐसा है एक वीडियो रिकॉर्ड की गई है गुरु जीी की

46
00:03:39,800 --> 00:03:43,880
जिसमें गुरु जीी अपना नाम दीक्षा दे रहे हैं पूरी वीडियो

47
00:03:43,880 --> 00:03:48,680
बाकायदा बनी हुई है प्रथम नाम दूसरा नाम तीसरा नाम

48
00:03:48,680 --> 00:03:52,880
इस प्रकार से दी जाती है अच्छा तो वह वीडियो

49
00:03:52,880 --> 00:03:57,800
दिखा दिया जाता है और दीक्षा हो जाती है

50
00:03:57,800 --> 00:04:02,160
जी मगर इसमें मतलब मैं अपनी जानकारी

51
00:04:02,160 --> 00:04:07,600
के लिए ही पूछ रहा हूं कि इसमें तो एक दुविधा यह है जैसे हम कहते गुरु

52
00:04:07,600 --> 00:04:11,760
शिष्य आपका तो गुरु शिष्य संबंध

53
00:04:11,760 --> 00:04:15,920
जो है व इससे प्रूफ है क्योंकि आपने डायरेक्ट लिया है मगर जैसे

54
00:04:15,920 --> 00:04:20,120
हम कहते गुरु शिष्य तो आपने किसी को गुरु मान लिया अच्छी बात है

55
00:04:20,120 --> 00:04:26,040
मगर क्या गुरु ने भी आपको शिष्य माना है कि नहीं यह कैसे पता चलता

56
00:04:26,040 --> 00:04:31,200
है क्योंकि जो लोग दीक्षा देते

57
00:04:31,200 --> 00:04:35,400
उन्हें ही अधिकार है यह वीडियो दिखाने का अन्यथा किसी

58
00:04:35,400 --> 00:04:39,600
और को यह अधिकार नहीं है नहीं

59
00:04:39,600 --> 00:04:43,920
नहीं वो तो आप सही कह रहे हैं कि और लोगों को अधिकार नहीं है

60
00:04:43,920 --> 00:04:48,320
तो ऐसा कोई प्रमाण रामपाल जी का है जिसमें उन्होंने

61
00:04:48,320 --> 00:04:53,440
कहा हो कि यह यह लोग दीक्षा देंगे मेरी ओर से मेरा वीडियो दिखा

62
00:04:53,440 --> 00:04:57,840
के एक्चुअली ऐसा है कि हमारे गुरुजी से उनका

63
00:04:57,840 --> 00:05:02,040
संपर्क है सीधा संपर्क है जितने भी ना नांद

64
00:05:02,040 --> 00:05:06,120
इच्छा होते हैं पूरे दिन में एक महीने में तो पूरी डिटेल

65
00:05:06,120 --> 00:05:10,400
उन तक पहुंच जाती है गुरु आपके

66
00:05:10,400 --> 00:05:13,360
जो गुरुजी हैं जिनसे आपने दीक्षा ली है

67
00:05:13,360 --> 00:05:17,480
उनका कोई ऐसा वक्तव्य कोई वीडियो है जिसमें उन्होंने बताया हो कि

68
00:05:17,480 --> 00:05:21,520
मैं जब नहीं रहूंगा तो ये ये लोग मेरा वीडियो दिखा कर के

69
00:05:21,520 --> 00:05:26,360
आपको दीक्षा देंगे मेरे नाम से हां हां है

70
00:05:26,360 --> 00:05:30,400
इस तरह का है है बिल्कुल है पर पड़ा

71
00:05:30,400 --> 00:05:34,480
हुआ है या लिखित में है क्या है वो

72
00:05:34,480 --> 00:05:38,840
य पर नहीं है यह उन लोगों के पास ही वीडियो है जो जिन्हे

73
00:05:38,840 --> 00:05:43,240
अधिकार है वीडियो वीडियो दिखाने का कि प्रथम नाम

74
00:05:43,240 --> 00:05:47,360
नाम दीक्षा वही देंगे नहीं नाम दीक्षा तो

75
00:05:47,360 --> 00:05:51,720
देखिए वो तो गुप्त रखना अच्छी बात है नाम दीक्षा

76
00:05:51,720 --> 00:05:55,960
को वो रखना तो अच्छी बात है कि नाम दीक्षा वाला वीडियो जो है नहीं दिखा रहे मगर

77
00:05:55,960 --> 00:06:00,240
जिसमें वो घोषणा कर रहे हैं कि मेरी ओर से कौन-कौन अधिकृत है

78
00:06:00,240 --> 00:06:04,320
यह वाला जो वीडियो है यह तो समाज को मालूम होना चाहिए

79
00:06:04,320 --> 00:06:09,280
तभी तो व पहचान पाए कि हम जिनसे दीक्षा ले रहे हैं उनको रामपाल जी ने

80
00:06:09,280 --> 00:06:13,360
नियुक्त किया है या नहीं किया है हो सकता है उनके नाम से कोई यूं ही

81
00:06:13,360 --> 00:06:17,560
बांटने लग जाए नहीं सर जी ऐसा कुछ

82
00:06:17,560 --> 00:06:21,600
नहीं है जो लोग नाम दीक्षा दे रहे हैं उनके

83
00:06:21,600 --> 00:06:26,160
पास बाकायदा गुरुजी का मैसेज आता है और उस मैसेज के

84
00:06:26,160 --> 00:06:28,440
वो मैसेज हमारे पास भी

85
00:06:28,440 --> 00:06:32,680
आता है क्योंकि हम हमारे पास जो उनका एक गुप्त

86
00:06:32,680 --> 00:06:36,880
ट पर ग्रुप है उस ग्रुप पर जो मैसेज आता है

87
00:06:36,880 --> 00:06:41,120
पीले पेज पर जो मैसेज आता है वो गुरु जी का ही मैसेज होता है उसे

88
00:06:41,120 --> 00:06:45,120
पढ़ ही गुरुजी कैसे मैसेज भेजते हैं

89
00:06:45,120 --> 00:06:49,120
वो तो इस समय कारावास में है गुरु जी का

90
00:06:49,120 --> 00:06:53,160
संपर्क उनकी पुत्री से है और जो भी

91
00:06:53,160 --> 00:06:57,280
वो आपस में उनकी बात होती है व उनकी पुत्री वो

92
00:06:57,280 --> 00:07:01,360
पीले पेज पर लिखकर बाकायदा उन्हें मैसेज में

93
00:07:01,360 --> 00:07:05,360
डाल देती है तो तो रामपाल जी का कोई ऐसा

94
00:07:05,360 --> 00:07:09,440
वीडियो या ऐसा कोई वसीयत कि मैं मतलब मेरी जो पुत्री होगी

95
00:07:09,440 --> 00:07:13,760
वो मेरा जो है मेरा संदेश आप लोगों तक पहुंचाएगी

96
00:07:13,760 --> 00:07:17,000
ऐसा कुछ

97
00:07:17,000 --> 00:07:21,160
है ऐसा वो जाती है उनकी

98
00:07:21,160 --> 00:07:25,160
गुरुजी से मिलने की वीडियो तो कई सारी है लेकिन यह बोलते हुए

99
00:07:25,160 --> 00:07:31,160
नहीं दिखाया कि मेरी पुत्री ही मेरी सारा संदेश पहुंचाएगी

100
00:07:31,520 --> 00:07:36,280
तो यह खैर एक कमजोर कड़ी है कि अब

101
00:07:36,280 --> 00:07:40,320
पता नहीं वह क्या चाहते हैं वह क्या जान व उनके बीच में क्या

102
00:07:40,320 --> 00:07:44,520
वाद संवाद हो रहा है यह आप डिपेंड करता है कि उनकी

103
00:07:44,520 --> 00:07:48,520
पुत्री पर आपको विश्वास होना चाहिए बस और पुत्री पर विश्वास होने

104
00:07:48,520 --> 00:07:52,560
का कारण यही है कि वह वहां पर आपके जो रामपाल जी है उनके साथ वो

105
00:07:52,560 --> 00:07:56,960
दिख जाती है कई बार आपने देखा होगा ऐसे लोग होते हैं किसी महान

106
00:07:56,960 --> 00:08:02,040
किसी बड़े व्यक्तित्व के साथ जाकर के फोटो खिंचवा ले

107
00:08:02,040 --> 00:08:06,240
ऐसे लोग होते हैं और फिर उस फोटो का गलत फायदा उठाते हैं

108
00:08:06,240 --> 00:08:11,120
तो मैं ये नहीं कह रहा कि उनकी पुत्री गलत बोल रही है मगर एक एक

109
00:08:11,120 --> 00:08:15,320
ठोस अगर उनकी पुत्री के द्वारा रामपाल जी के मैसेजेस

110
00:08:15,320 --> 00:08:19,480
आप लोगों तक आने हैं तो उनकी पुत्री के लिए रामपाल

111
00:08:19,480 --> 00:08:24,000
जी का एक ठोस वक्तव्य कोई वीडियो कोई वसीयत

112
00:08:24,000 --> 00:08:28,240
कोई उसको कहते विल कुछ ऐसा प्रपत्र होना आवश्यक

113
00:08:28,240 --> 00:08:32,280
है अगर जो पुत्री है वह उनके नाम से आपको

114
00:08:32,280 --> 00:08:36,480
मैसेजेस दे रही है तो और फिर भी यह सब हो जाने

115
00:08:36,480 --> 00:08:40,600
के बाद एक बात रह जाती है कि

116
00:08:40,600 --> 00:08:44,600
जिस समय नाम दीक्षा हो रही होती है जब

117
00:08:44,600 --> 00:08:46,680
कोई गुरु के सामने खड़ा होता है तो गुरु

118
00:08:46,680 --> 00:08:50,880
देखता है अपने शिष्य को शिष्य देखता है अपने गुरु को मगर

119
00:08:50,880 --> 00:08:55,640
यह जो दीक्षा हो रही है यह दीक्षा

120
00:08:55,640 --> 00:08:59,960
एलईडी के थ्रू हो रही है और एलईडी के थ्रू

121
00:08:59,960 --> 00:09:04,080
हा एलईडी के थ्रू हो रही तो उसको तो मालूम पड़ रहा है कि भाई ठीक

122
00:09:04,080 --> 00:09:08,240
है रामपाल जी ने मेरे लिए क्या बोला मान मान लेते थोड़ी

123
00:09:08,240 --> 00:09:12,320
देर उसको तो एक मालूम पड़ रहा है मगर रामपाल जी को मालूम ही नहीं पड़

124
00:09:12,320 --> 00:09:17,200
रहा दीक्षा के समय कि इस समय मेरा कोई शिष्य मुझसे दीक्षा ले रहा है

125
00:09:17,200 --> 00:09:21,640
मालूम पड़ रहा है क्या हा गुरु गुरु जीी को बता दिया जाता है ना

126
00:09:21,640 --> 00:09:25,680
उनकी पुत्री के पास जिस समय दीक्षा हो रही होती

127
00:09:25,680 --> 00:09:29,840
उस समय नहीं बताया जाता लाइव उनके

128
00:09:29,840 --> 00:09:33,920
पास जानकारी नहीं जाती उसके पूरे एक हफ्ते की या

129
00:09:33,920 --> 00:09:39,160
एक दिन की या महीने की पूरी जानकारी उनके पास पहुंच जाती

130
00:09:39,160 --> 00:09:43,240
है तो अब मैं इसमें फिर मेरा पहला यह सवाल

131
00:09:43,240 --> 00:09:47,440
है कि आप लोग य क्लेम करते हैं कि जो रामपाल जी को नहीं मानते

132
00:09:47,440 --> 00:09:51,680
हैं वो लोग मनमुक भक्ति करते हैं शास्त्र समत भक्ति

133
00:09:51,680 --> 00:09:55,800
नहीं करते हैं तो अब मुझे बताइए कि जिस प्रकार से दीक्षा दी

134
00:09:55,800 --> 00:10:00,760
जा रही है इसका शास्त्रों में कहां वर्णन है

135
00:10:00,760 --> 00:10:05,680
जिस प्रकार से भक्ति दी जा रही है उसका कहां वर्णन

136
00:10:05,680 --> 00:10:09,760
है ये जो दीक्षा हो रही है इस प्रकार की

137
00:10:09,760 --> 00:10:13,920
दीक्षा का कहां प्रमाण है एलईडी

138
00:10:13,920 --> 00:10:18,000
से गुरु को मालूम पड़ेगा एक महीने बाद एलईडी से दीक्षा

139
00:10:18,000 --> 00:10:22,400
हो जाएगी उसको नाम मिल जाएगा तो यह

140
00:10:22,400 --> 00:10:26,600
प्रक्रिया कहां पर वर्णित है यह

141
00:10:26,600 --> 00:10:30,720
प्रक्रिया कहीं वर्णित नहीं है यह हमारे गुरुजी के बनाए हुए

142
00:10:30,720 --> 00:10:35,000
नियम के अनुसार प्रक्रिया हो रही है मतलब मतलब मन

143
00:10:35,000 --> 00:10:39,360
मनमुक भक्ति है

144
00:10:39,360 --> 00:10:43,480
मनमुल मनमुक हैं ना कि भाई शास्त्र सम्मत बातें नहीं

145
00:10:43,480 --> 00:10:47,600
है जो रामपाल जी को नहीं गुरुजी इस

146
00:10:47,600 --> 00:10:51,760
वक्त रिसेंटली जेल धाम में है तो नाम दीक्षा देने के लिए

147
00:10:51,760 --> 00:10:56,400
को मार्ग नहीं जेल धाम

148
00:10:56,400 --> 00:11:00,040
बिल्कुल अच्छा

149
00:11:00,040 --> 00:11:04,880
ठीक है तो अब मुझे बताइए कि कोई मार्ग नहीं है

150
00:11:04,880 --> 00:11:09,000
इस स्थिति में जो प्रक्रिया आप लोग आलंबन ले रहे हैं उनके नाम

151
00:11:09,000 --> 00:11:13,080
से दीक्षा देने का जो वो फिलहाल में

152
00:11:13,080 --> 00:11:17,200
मैंने तो मेरी बात सुनिए फिलहाल में मैंने लाइव उनसे नाम दीक्षा ली

153
00:11:17,200 --> 00:11:21,400
है और तो मैं बाद में क्या हो रहा है

154
00:11:21,400 --> 00:11:25,480
इससे मुझे कोई मतलब नहीं है फिलहाल नाम से मतलब

155
00:11:25,480 --> 00:11:29,840
उनके नाम से जो दीक्षा ली ली जा रही है ये सब हो रहा

156
00:11:29,840 --> 00:11:34,040
इससे आप सहमत है कि नहीं सहमत है मैं सहमत

157
00:11:34,040 --> 00:11:38,080
तो हूं सहमत है ना तो सहमत है तो आपको उत्तर

158
00:11:38,080 --> 00:11:42,080
तो देना होगा ना आप मुझे प्रमाण बताइए कि उनकी जो

159
00:11:42,080 --> 00:11:46,320
य दीक्षा की प्रक्रिया इस समय चल रही है एलईडी पर वीडियो

160
00:11:46,320 --> 00:11:50,440
देख कर के जिसमें गुरु को पता ही नहीं है उस समय के मेरा मैं किसी को इस समय दीक्षा

161
00:11:50,440 --> 00:11:56,440
दे रहा हूं ये यह शास्त्र में कहां वर्णित

162
00:11:56,640 --> 00:12:00,760
है तो शास्त्रों में जो वर्णित शास्त्रों में जो गुरु को

163
00:12:00,760 --> 00:12:04,800
माना गया है गुरु की जो पहचान बताई गई है वो शास्त्रों

164
00:12:04,800 --> 00:12:09,520
में लिखा हुआ है अभी मैं ये मान के चल रहा हूं

165
00:12:09,520 --> 00:12:13,640
वो तत्वदर्शी है अभी मैंने ये मान लिया अभी मैं ये मान के चल रहा

166
00:12:13,640 --> 00:12:17,360
हूं वो तत्वदर्शी है चलिए

167
00:12:17,360 --> 00:12:21,520
ठीक जिस प्रकार से गुरुजी की गीता में पहचान

168
00:12:21,520 --> 00:12:25,800
बताई गई है उस प्रकार से गुरुजी वो हमारे सिद्ध

169
00:12:25,800 --> 00:12:30,160
होते हैं दूसरा आंसर ये है यदि वो गीता के अनुसार

170
00:12:30,160 --> 00:12:34,240
वह सिद्ध हो गए गुरु तो वह किस प्रकार शिक्षा

171
00:12:34,240 --> 00:12:39,920
दे रहे हैं यह मैटर नहीं रखता यह कहां लिखा

172
00:12:39,920 --> 00:12:44,240
है तो यह कहां भी यह भी कहीं नहीं लिखा है कि गुरु सामने

173
00:12:44,240 --> 00:12:48,600
ही होना चाहिए जब दीक्षा पूरी होगी बिल्कुल लिखा

174
00:12:48,600 --> 00:12:52,800
है कहां लिखा है बिल्कुल लिखा है जहां जहां दीक्षा

175
00:12:52,800 --> 00:12:56,840
हो रही है जहां जहां दीक्षा हो रही है वहां

176
00:12:56,840 --> 00:13:02,840
वहां गुरु सामने है हम आपको प्रमाण दे देते हैं महाभारत

177
00:13:03,760 --> 00:13:07,920
से जहां-जहां दीक्षा हो रही है वहां वहां गुरु

178
00:13:07,920 --> 00:13:10,600
सामने

179
00:13:10,600 --> 00:13:14,720
है एक एक सेकंड थोड़ा सा कॉल आ गया था किसी का थोड़ा

180
00:13:14,720 --> 00:13:18,720
डिस्टर्ब हो गया मैंने आपकी बात सुन नहीं पाई मैं

181
00:13:18,720 --> 00:13:22,840
आपसे प्रमाण देखना चाहता हूं कि गुरु लाइव देगा तभी

182
00:13:22,840 --> 00:13:27,440
नाम दीक्षा पूरी होगी ये कहीं लिखा है हम

183
00:13:27,440 --> 00:13:33,440
चलिए मैं देखता हूं इस बारे में दिखाइए

184
00:14:47,480 --> 00:14:47,980
यह

185
00:14:47,960 --> 00:14:52,160
स्कंद पुराण उमा महेश्वर संवाद

186
00:14:52,160 --> 00:14:57,320
है इसमें गुरु गीता

187
00:14:57,320 --> 00:15:01,360
है ठीक है इसमें बहुत से गुरु के लिए

188
00:15:01,360 --> 00:15:05,720
ऐसे व्यवहार बताए जा रहे हैं जिसमें कि गुरु का साक्षात होना

189
00:15:05,720 --> 00:15:10,000
सामने आवश्यक है हां दिखाइए वो व्यवहार

190
00:15:10,000 --> 00:15:16,000
हो सकता

191
00:15:18,280 --> 00:15:24,280
है स्कंद

192
00:15:25,320 --> 00:15:31,320
पुराण एक दो उदाहरण मैं आपको दे देता हूं

193
00:15:48,120 --> 00:15:52,280
किसी गुरु के सामने शिष्य को पूर्ण मर्यादा व

194
00:15:52,280 --> 00:15:55,720
अनुशासन का पालन करना

195
00:15:55,720 --> 00:15:59,760
चाहिए श्री गुरुदेव के सम श्री

196
00:15:59,760 --> 00:16:04,440
गुरुदेव के समक्ष श्री गुरुदेव के समक्ष

197
00:16:04,440 --> 00:16:08,800
यह है 6 शिष्य को कभी हुंकार शब्द से अब यहां समक्ष

198
00:16:08,800 --> 00:16:12,840
हो गया तो गुरुदेव के लिए जो व्यवहार

199
00:16:12,840 --> 00:16:17,560
हो रहा है वह तभी हो रहा है जब समक्ष है वहां तो उनकी छाया है एलईडी

200
00:16:17,560 --> 00:16:23,000
है जहां पर यह सब हो रहा

201
00:16:23,000 --> 00:16:27,360
है तो जी उसे दिखाइए तो सही मुझे दिखाइए

202
00:16:27,360 --> 00:16:31,640
तो सही कैसे मतलब कैसे दिखाना है आपको मतलब मैंने ये ग्रंथ

203
00:16:31,640 --> 00:16:35,640
दिखा दिया इसका लोक क्रमांक दिखा दिया और क्या दिखाऊ

204
00:16:35,640 --> 00:16:40,320
ऐसे पुस्तक भी दिखा र स्क्रीन पर देखिए

205
00:16:40,320 --> 00:16:44,520
श्री गुरुदेव के समक्ष ओंकार भरे शब्द नहीं कहने

206
00:16:44,520 --> 00:16:48,680
चाहिए य सामने हो गया ना सम

207
00:16:48,680 --> 00:16:53,600
उनकी टीवी के समक्ष नहीं उनके वीडियो के समक्ष नहीं

208
00:16:53,600 --> 00:16:57,920
आपने मेरा क्वेश्चन ये है कि गुरु नाम

209
00:16:57,920 --> 00:17:02,240
दीक्षा जबी पूरी होगी जब गुरु सामने होगा मुझे ये दिखाइए

210
00:17:02,240 --> 00:17:07,120
ये शब्द दिखाइए देखिए ये पैरामीटर आप तय कर रहे हैं

211
00:17:07,120 --> 00:17:11,120
मैं आपको मैं आपको बता रहा हूं मैं आपको बता रहा हूं मैं आपको बता रहा

212
00:17:11,120 --> 00:17:15,160
हूं आपका आंसर दे रहा हूं किसी चीज के होने का प्रमाण चाहिए

213
00:17:15,160 --> 00:17:19,200
होता है ना होने का प्रमाण अगर वो नहीं लिखा है तो उसी से सिद्ध हो गया

214
00:17:19,200 --> 00:17:23,240
कि वो नहीं है तो होने का प्रमाण मैं आप दे रहा हूं कि गुरु

215
00:17:23,240 --> 00:17:27,400
समक्ष होना चाहिए इसमें बहुत जगह लिखा है मैं आपको

216
00:17:27,400 --> 00:17:32,000
उदाहरण के लिए दे दे रहा हूं आप मेरी बात सुनोगे आप दो

217
00:17:32,000 --> 00:17:36,960
मिनट बोलिए यदि

218
00:17:36,960 --> 00:17:38,200
मेरे या

219
00:17:38,200 --> 00:17:42,600
आपके गुरुजी नाम दीक्षा देने के बाद में

220
00:17:42,600 --> 00:17:46,800
और नियम मर्यादा भक्ति बताने के बाद में उनकी

221
00:17:46,800 --> 00:17:50,920
मृत्यु हो जाए तो क्या उनका उनने

222
00:17:50,920 --> 00:17:55,040
जो नाम दीक्षा दी है वह पूरी नहीं होगी नहीं वो

223
00:17:55,040 --> 00:17:59,320
होगी वो सही है मगर बात यह है कि दीक्षा के समय में

224
00:17:59,320 --> 00:18:03,440
मैं आपको एक बड़ा उदाहरण दे दे रहा हूं बड़ा मुझे वही

225
00:18:03,440 --> 00:18:07,900
तो चाहिए दीक्षा के समय जो नाम दीक्षा देगा

226
00:18:07,900 --> 00:18:13,900
[संगीत]

227
00:18:16,480 --> 00:18:21,920
वही महाभारत में भगवान श्री कृष्ण

228
00:18:21,920 --> 00:18:26,280
ने उपमन्यु ऋषि से दीक्षा

229
00:18:26,280 --> 00:18:29,760
ली ठीक है

230
00:18:29,760 --> 00:18:34,000
किससे ली उपमन्यु ऋषि से दीक्षा ली

231
00:18:34,000 --> 00:18:38,320
एलईडी से नहीं ली टीवी से नहीं ली अब आप टीवी

232
00:18:38,320 --> 00:18:41,680
का प्रमाण दिखाइए

233
00:18:41,680 --> 00:18:45,760
मुझे भैया जी मैं आपसे यही जानना चाहता

234
00:18:45,760 --> 00:18:49,760
हूं कि कहीं यह लिखा है कि गुरु जी का

235
00:18:49,760 --> 00:18:53,880
होना सामने लाइव होना अति आवश्यक है या

236
00:18:53,880 --> 00:18:58,240
नहीं अच्छा एक बात बताओ एक बात बताओ

237
00:18:58,240 --> 00:19:00,840
आप

238
00:19:00,840 --> 00:19:05,400
कि गुरुदेव को क्या गाली दी जा सकती है क्या

239
00:19:05,400 --> 00:19:09,800
नहीं दी जा सकती नहीं दी जा सकती ना

240
00:19:09,800 --> 00:19:13,840
गुरुदेव को आजकल जो ये मां बहन की गालियां चल रही है जो मेरे ख्याल से भी

241
00:19:13,840 --> 00:19:18,080
कलयुग में ही बनी होंगी ये पिछले दोढाई हजार सालों में मां बहन की गालियां

242
00:19:18,080 --> 00:19:22,320
ये दी जा सकती है क्या नहीं नहीं

243
00:19:22,320 --> 00:19:26,600
तो आप मुझे लिखा दिखा दोगे आप मुझे लिखा दिखा दोगे कि फलानी फलानी

244
00:19:26,600 --> 00:19:30,600
मां बहन की गालियां जो जो मैं कहूंगा मैं तो इंग्लिश में कहूंगा वह

245
00:19:30,600 --> 00:19:31,640
सब गालियां लिखी

246
00:19:31,640 --> 00:19:36,240
दिखा दोगे शास्त्र में गुरु को नहीं दी जा सकती

247
00:19:36,240 --> 00:19:40,720
गुरु की जो गुरु के प्रति जो मर्यादा है जिस प्रकार से उ

248
00:19:40,720 --> 00:19:44,920
उन उनके लिए जो मर्यादा ख है

249
00:19:44,920 --> 00:19:49,280
शास्त्र में सुनिए शास्त्रों में मर्यादा दी

250
00:19:49,280 --> 00:19:53,640
जाती अपने शब्दों में सीमित कर रहे हैं तो फिर मैं आपसे पूछ रहा हूं

251
00:19:53,640 --> 00:19:57,760
क्या गुरुदेव को इंग्लिश वाली जो गालिया है वो दी जा सकती है अगर शास्त्र

252
00:19:57,760 --> 00:20:01,920
में नहीं लिखा होगा दोगे क्या अपने गुरु को आप इंग्लिश

253
00:20:01,920 --> 00:20:06,040
वाली लि तो इसका मतलब मदा

254
00:20:06,040 --> 00:20:10,080
है बता जाती है शास्त्र में

255
00:20:10,080 --> 00:20:15,960
में म में मर्यादा लिख है भैया

256
00:20:15,960 --> 00:20:19,960
जी नहीं रना मैंने आपको यह बता

257
00:20:19,960 --> 00:20:24,120
दिया कि श्री कृष्ण जो है वो दीक्षा

258
00:20:24,120 --> 00:20:28,240
ले रहे हैं उपमन्यु ऋषि से उपमन्यु ऋषि की

259
00:20:28,240 --> 00:20:32,560
छाया से नहीं उनकी फोटो से नहीं उनके चलचित्र

260
00:20:32,560 --> 00:20:36,760
से नहीं उपमन्यु ऋषि से दीक्षा ले रहे हैं आप मुझे कोई

261
00:20:36,760 --> 00:20:41,160
ऐसा प्रमाण बता दो जहां पर उन्होने छाया से दीक्षा ली हो

262
00:20:41,160 --> 00:20:46,120
जहा उन्होने चलचित्र से दीक्षा ली हो

263
00:20:46,120 --> 00:20:50,160
और और जिससे दीक्षा ले रहे हैं उसको एक महीने बाद पता

264
00:20:50,160 --> 00:20:54,280
चल रहा हो 10 दिन बाद पता चल रहा हो यह ऐसा

265
00:20:54,280 --> 00:20:59,160
कोई प्रमाण मुझे बता दो मैं आपसे बहुत नॉर्मल बात कर रहा हूं

266
00:20:59,160 --> 00:21:03,280
मैं आपसे बता रहा हूं कि कृष्ण भगवान ने सुनिए भगवान

267
00:21:03,280 --> 00:21:07,320
श्री कृष्ण ने उपवन ऋषि से दीक्षा ली तो वहा पर ये नहीं

268
00:21:07,320 --> 00:21:11,320
आया कि छाया से दीक्षा ली चलचित्र से दीक्षा ली वीडियो से

269
00:21:11,320 --> 00:21:15,480
दीक्षा ली एलईडी से दीक्षा ली यय नहीं आया उपमन्यु ऋषि से

270
00:21:15,480 --> 00:21:19,600
दीक्षा ली हो गया अब आप अगर आप यह कहते हो

271
00:21:19,600 --> 00:21:24,520
कि वीडियो से भी हो सकता है तो दिखा दो मुझे कहा लिखा है वीडियो

272
00:21:24,520 --> 00:21:28,640
से वैसे य हमारा

273
00:21:28,640 --> 00:21:31,760
करके हम आगे बढ़

274
00:21:31,760 --> 00:21:32,760
जाएंगे

275
00:21:32,760 --> 00:21:36,960
तो मेरा जो अब आपका जो टॉपिक था वो तो हो चुका

276
00:21:36,960 --> 00:21:41,280
अब मेरा जो प्रश्न है नहीं क्या हो चका

277
00:21:41,280 --> 00:21:45,600
बताओ आपके पास आप क्या हो चुका आपने कहा

278
00:21:45,600 --> 00:21:50,400
टॉपिक हो चुका आपको इस पर बात नहीं करनी है आ

279
00:21:50,400 --> 00:21:54,520
बढ इसका उत्तर नहीं है आपके पास उत्तर है ही नहीं मेरे पास

280
00:21:54,520 --> 00:21:59,080
नहीं अच्छा ठीक है मैं आपसे

281
00:21:59,080 --> 00:22:03,200
मैं आपसे आपके गुरु का नाम जानना चाहता हूं उनकी 10 पीढ़ियों का नाम

282
00:22:03,200 --> 00:22:05,880
जानना चाहता

283
00:22:05,880 --> 00:22:10,480
हूं इसके पीछे का

284
00:22:10,480 --> 00:22:14,680
कारण शुरुआत गुरु से ही होती है

285
00:22:14,680 --> 00:22:18,680
तो गुरु से होती तो गुरुदेव का नाम तो मैं बता दूंगा मगर जो पीछे की 10 पीढ़ि आप

286
00:22:18,680 --> 00:22:21,600
पूछ रहे हैं उसका

287
00:22:21,600 --> 00:22:25,720
कारण भैया जब तक आपने एक वीडियो में यह

288
00:22:25,720 --> 00:22:29,760
बोला था कि गुरु परंपरा जो

289
00:22:29,760 --> 00:22:34,400
शिष्य होगा वही मान्य होगा

290
00:22:34,400 --> 00:22:38,480
तो आप आप इस धारणा को धारण कर चुके हैं या केवल

291
00:22:38,480 --> 00:22:42,680
कटाक्ष के लिए पूछ रहे हैं नहीं इस धारणा को मैं

292
00:22:42,680 --> 00:22:46,840
संपूर्णता धारण कर चुका हूं मतलब गुरु परंपरा से ही होना

293
00:22:46,840 --> 00:22:51,080
चाहिए आपके अनुसार गुरु परंपरा से ही होना चाहिए

294
00:22:51,080 --> 00:22:55,200
अच्छा तो आपके पास परंपरा होगी जाहिर सी बात है रामपाल

295
00:22:55,200 --> 00:23:00,400
जी की बकल है बकुल बताइए

296
00:23:00,400 --> 00:23:04,760
क्वेश्चन तो मैंने भी किया था आपसे मैं

297
00:23:04,760 --> 00:23:10,280
मैं बता दे रहा हूं मेरे पास बहुत है बता

298
00:23:10,280 --> 00:23:15,360
देरहा कितने पीढ़ी पहले के पूछे आपने 10

299
00:23:15,360 --> 00:23:19,920
10

300
00:23:19,920 --> 00:23:23,960
अच्छा आज वर्तमान में जो नाम है वो

301
00:23:23,960 --> 00:23:28,920
य आपको दिख रहा होगा नहीं मुझे पुत नहीं दिखा

302
00:23:28,920 --> 00:23:33,080
पुस्तक में मत दिखाओ आप मुह से ही बता दीजिए नहीं नहीं मैं इसलिए

303
00:23:33,080 --> 00:23:37,120
दिखा रहा हूं कि दर्शक भी देखे वो भी जागरूक हो अगर आपको पसंद नहीं आ

304
00:23:37,120 --> 00:23:41,200
रहा थोड़ी देर आप आखे बंद कर लो ठीक ठीक है ठीक अच्छा

305
00:23:41,200 --> 00:23:46,120
इससे पहले निरंजन देव तीर्थ

306
00:23:46,120 --> 00:23:50,240
जी उससे पहले पूज्य भारती कृष्ण तीर्थ

307
00:23:50,240 --> 00:23:54,360
जी उससे पहले पूज्य मधुसूदन तीर्थ जी

308
00:23:54,360 --> 00:23:58,600
उससे पहले पूज्य दामोदर तीर्थ जी उससे

309
00:23:58,600 --> 00:24:03,200
पहले पूज्य लोकनाथ तीर्थ जी उससे पहले पूज्य

310
00:24:03,200 --> 00:24:08,320
शिव तीर्थ जी उससे पहले पूज्य

311
00:24:08,320 --> 00:24:12,720
रघुमुद्री जी उससे पहले फिर

312
00:24:12,720 --> 00:24:16,880
वही नाम है मधुसूदन तीर्थ जी फिर राम कृष्ण तीर्थ जी फिर रघुनाथ तीर्थ

313
00:24:16,880 --> 00:24:21,080
जी गोविंद तीर्थ जी रामचंद्र तीर्थ जी गोविंद तीर्थ जी

314
00:24:21,080 --> 00:24:25,480
गोपालानंद तीर्थ जी दामोदर तीर्थ जी ऋषिकेश तीर्थ जी

315
00:24:25,480 --> 00:24:29,520
वामदेव तीर्थ जी रघुमुद्री जी मधुसूदन तीर्थ जी

316
00:24:29,520 --> 00:24:33,720
मधुसूदन तीर्थ जी कृष्णानंद तीर्थ जी गोपाल तीर्थ जी हरिहरानंद

317
00:24:33,720 --> 00:24:37,760
तीर्थ जी कामना सानंद तीर्थ जी जनार्दन तीर्थ

318
00:24:37,760 --> 00:24:41,840
जी श्रीधर तीर्थ जी स् पानंद

319
00:24:41,840 --> 00:24:46,040
तीर्थ जी श्री योगानंद तीर्थ जी वेदानंद तीर्थ जी

320
00:24:46,040 --> 00:24:50,560
विद्यानंद तीर्थ जी केशवानंद तीर्थ जी भगु तीर्थ

321
00:24:50,560 --> 00:24:54,800
शंभू तीर्थ बोपदेव तीर्थ जी सोमेश्वर तीर्थ जी शुद्ध बोध

322
00:24:54,800 --> 00:24:58,840
तीर्थ जी ष ष ध्वज तीर्थ जी राम कृष्ण

323
00:24:58,840 --> 00:25:02,040
तीर्थ जी महेश्वर तीर्थ

324
00:25:02,040 --> 00:25:06,360
जी शिवानंद तीर्थ जी विज्ञाना आत्मा वेदांत भास्कर

325
00:25:06,360 --> 00:25:11,000
वेद गर्भ तीर्थ जी परा शंकर ती परा शंकर

326
00:25:11,000 --> 00:25:16,480
तीर्थ जी पुंडरीकाक्ष तीर्थ जी

327
00:25:16,480 --> 00:25:21,360
रघुमुद्री

328
00:25:21,360 --> 00:25:26,560
जी वासुदेव तीर्थ जी गोविंद तीर्थ जी और

329
00:25:26,560 --> 00:25:30,560
बताए आपने शंकराचार्य जी का नाम तो लिया ही

330
00:25:30,560 --> 00:25:34,840
नहीं शंकराचार्य जी तो अभी और पहले है ना अभी और 100 नाम आएंगे

331
00:25:34,840 --> 00:25:39,000
करीब ये मैं पहुंचा हूं यानी कि आप आपकी

332
00:25:39,000 --> 00:25:43,680
पीढ़ी में शंकराचार्य जी आपकी गुरु की प्रणाली में ही है

333
00:25:43,680 --> 00:25:48,120
हां इसी में और पीछे जाएंगे आदि शंकराचार्य आ जाएंगे

334
00:25:48,120 --> 00:25:53,560
हां तो मैं अब मैं बता

335
00:25:53,560 --> 00:25:57,640
दूं अब मैं बता दूं हम

336
00:25:57,640 --> 00:26:03,640
बताइए

337
00:26:05,880 --> 00:26:10,080
प्रेजेंट में तो संत रामपाल जी महाराज

338
00:26:10,080 --> 00:26:14,480
है फिर रामदव फिर राम देवानंद जी महाराज

339
00:26:14,480 --> 00:26:19,000
है उसके बाद संत संत चिदानंद

340
00:26:19,000 --> 00:26:23,680
जी महाराज हैर से पहले के बताइए आप

341
00:26:23,680 --> 00:26:28,840
कबीर से पहले बताइए इनको तो समझता हूं

342
00:26:28,840 --> 00:26:33,800
भैया जी तो मैं आपको मेरे गुरु से 10 पीढ़ी का नाम बता रहा हूं

343
00:26:33,800 --> 00:26:37,920
नहीं मुझे आप कबीर से पीछे की पीढ़ियां बताइ है कबीर अभ 600 साल

344
00:26:37,920 --> 00:26:42,640
पहले हुए थे ना हा तो वो तो परमात्मा ही है वो तो लास्ट

345
00:26:42,640 --> 00:26:47,560
है मतलब आपका जो ज्ञान शुरू हो रहा है कबीर जी से शुरू हो रहा है

346
00:26:47,560 --> 00:26:51,560
बिल्कुल उनसे ही शुरू हो रहा है अच्छा वेद कहां

347
00:26:51,560 --> 00:26:55,560
से आए आपके पास वेद ब्रह्मा

348
00:26:55,560 --> 00:27:00,680
जी ने लिखे वे वो कब आए थे ब्रह्मा जी के लिखे हुए

349
00:27:00,680 --> 00:27:05,600
वेद ब्रह्मा जब सृष्टि की उत्पत्ति हुई तब लिखी

350
00:27:05,600 --> 00:27:08,560
थे तो आप ये जो क्लेम

351
00:27:08,560 --> 00:27:12,680
करते हो वेद में ये जो क्लेम करते

352
00:27:12,680 --> 00:27:16,680
हो वेदों में प्रमाण है क्या कबीर जी ने वेद

353
00:27:16,680 --> 00:27:21,120
लिखे वेद आपको कबीर जी से मिले

354
00:27:21,120 --> 00:27:25,160
वेद हमें ब्रह्मा जी से मिले ब्रह्मा जी

355
00:27:25,160 --> 00:27:30,120
से नहीं किससे मिले वो बताइए ब्रह्मा जी ने आपको हाथ में दिए

356
00:27:30,120 --> 00:27:34,520
क्या ब्रह्मा जी ने आपको ब ब्रह्मा

357
00:27:34,520 --> 00:27:38,720
जी ने ऋषि वाल्मीकि जी ने कई ऋषियों ने जो लिखकर

358
00:27:38,720 --> 00:27:42,760
जो रख गए हमारे लिए कि भाई ये प्रमाण

359
00:27:42,760 --> 00:27:47,040
है इनम जो आप तक कैसे

360
00:27:47,040 --> 00:27:51,240
आए हम तक भाई अगर आप यह पूछोगे कि आपको ए

361
00:27:51,240 --> 00:27:55,320
बी सीडी पता है तो ए बी सीडी आप तक कैसे आई मेरे पास उड़ के थोड़ी

362
00:27:55,320 --> 00:27:59,520
नहीं आएगी कहीं किताबों में लिखी थी गुरु से काम नहीं होता

363
00:27:59,520 --> 00:28:03,520
है भाई साब जैसे देखिए मैं वैसे परंपरा वाली बात छेड़ने नहीं वाला था आपने छेड़ा

364
00:28:03,520 --> 00:28:07,760
है जब बात होती है ठस बात होती है ठोस

365
00:28:07,760 --> 00:28:12,080
हम आपको ठोस बात बोल रहे कोई

366
00:28:12,080 --> 00:28:16,280
नहीं की परंपरा है हमारे पास ब्रह्मा जी तक की परंपरा

367
00:28:16,280 --> 00:28:21,280
भी सुना दूं कहो तो अब आप

368
00:28:21,280 --> 00:28:23,880
बताइए अगर सुनिए आप वेद

369
00:28:23,880 --> 00:28:28,240
लेने जा रहे हैं किसी और के पास और जिससे वेद ले रहे

370
00:28:28,240 --> 00:28:32,400
उस पर भरोसा नहीं है और जिस पर भरोसा है उसने

371
00:28:32,400 --> 00:28:36,760
आपको वेद नहीं दिए चलो जिसने चलो मैं आपसे

372
00:28:36,760 --> 00:28:41,520
मेरी बात हुई थी गुरु प आप वेद कहां से आए यह बात बाद में कर लेना

373
00:28:41,520 --> 00:28:45,800
पहले गुरु तो खत्म कर ले गुरु की बात

374
00:28:45,800 --> 00:28:49,840
अरे परंपरा की बात छेड़ी है ना आपने तो गुरु की बात

375
00:28:49,840 --> 00:28:54,120
खत्म कर ले मेरी 10 पीढ़ी सुन लो या आप एक बात बताइए क्या

376
00:28:54,120 --> 00:28:58,520
आप अपने ईश्वर को मानने के लिए वेदों पर निर्भर है

377
00:28:58,520 --> 00:29:02,560
नहीं है वेद आपके लिए प्रमाण है कि नहीं अच्छा

378
00:29:02,560 --> 00:29:07,520
मैं आपके सवाल का जवाब देता हूं पहली बात ब्रह्मा विष्णु

379
00:29:07,520 --> 00:29:11,800
महेश गणेश भगवान शेरो वाली माता

380
00:29:11,800 --> 00:29:15,840
यह है पंचदेव इनको मैं भली बाती जानता हूं

381
00:29:15,840 --> 00:29:21,840
उनके मंत्र है मेरे पास गुरु द्वारा दिए

382
00:29:21,880 --> 00:29:25,240
हुए

383
00:29:25,240 --> 00:29:29,240
आपरी नहीं विषयात मत करिए हम लोग चलेंगे एक एक एकएक

384
00:29:29,240 --> 00:29:33,520
करके चलेंगे चीजों पे मैं आपसे पूछ रहा हूं कि क्या

385
00:29:33,520 --> 00:29:37,960
आप वेदों को प्रमाण मानते हैं वेदों को अंतिम

386
00:29:37,960 --> 00:29:41,960
प्रमाण मानते हैं बिल्कुल अंतिम प्रमाण मानता

387
00:29:41,960 --> 00:29:46,480
हूं तो वेद आपको किससे मिले हैं ब्रह्मा

388
00:29:46,480 --> 00:29:50,720
मान लीजिए मैं आपको एक एग्जांपल दे रहा हूं मैं ये सवाल क्यों पूछ रहा हूं आप समझ

389
00:29:50,720 --> 00:29:54,880
जाओगे मान लीजिए कि आपने वेद के नाम से छपने

390
00:29:54,880 --> 00:29:59,520
वाली एक ग्रंथ खरीदा मार्केट से ठीक है

391
00:29:59,520 --> 00:30:03,920
आपने खरीदा हो सकता है कि उसमें कोई धर्म का दुश्मन

392
00:30:03,920 --> 00:30:08,520
उसने कोई गलत किताब छाप दी हो और उस पर लिख दिया हो वेद

393
00:30:08,520 --> 00:30:12,600
आप यह कैसे पता करोगे कि यह वही वेद है जो ब्रह्मा जी

394
00:30:12,600 --> 00:30:16,720
से आ रहे हैं यह कैसे पता

395
00:30:16,720 --> 00:30:20,720
करेंगे जो गुरु बताएगा वही हम जानेंगे गुरु

396
00:30:20,720 --> 00:30:25,800
के द्वारा माने तो गुरु गुरु तो आपको वेद दे ही नहीं रहा

397
00:30:25,800 --> 00:30:31,800
ना गुरु हमें वेदों के अनुसार ही भक्ति बता रहा

398
00:30:36,680 --> 00:30:41,360
है कह रहा हूं गुरु आपको वेद नहीं दे रहा ना

399
00:30:41,360 --> 00:30:45,440
गुरु से आपको वेद नहीं मि गुरु हमारे गुरुजी वेदों के अनुसार

400
00:30:45,440 --> 00:30:49,600
ही भक्ति बता रहे हैं कहां पर लिखा है मैं वेदों

401
00:30:49,600 --> 00:30:54,240
के अनुसार बात कर रहा हूं उन्होंने लिखा कि कहीं

402
00:30:54,240 --> 00:30:59,360
नहीं आज तक हमने वेद पढ़े नहीं ना मूर्ख बनाया लोगों ने पंडितो ने मूर्ख बना

403
00:30:59,360 --> 00:31:03,480
पूछ रहा हूं क्या कबीर जी ने अपनी वाणी में कहीं लिखा कि मैं वेदों

404
00:31:03,480 --> 00:31:07,560
की बात बता रहा हूं आपको वो तो क्रिटिसाइज कर रहे हैं

405
00:31:07,560 --> 00:31:12,360
आपके अनुसार कहीं नहीं लिखा

406
00:31:12,360 --> 00:31:16,960
नहीं लिखा तो फिर आप यह क्यों कह र उन्होने वेदों के अनुसार बताया

407
00:31:16,960 --> 00:31:21,560
ये तोब हैन पर विश्वास मान के चल रहा हूं

408
00:31:21,560 --> 00:31:25,560
तो हमारे गुरुजी वेद दिखा के ही ज्ञान बताते हैं भैया जी आप उनकी वीडियो

409
00:31:25,560 --> 00:31:30,120
देखे नहीं क्या भाई वो वेद वेद है ये आपको कैसे पता

410
00:31:30,120 --> 00:31:34,320
कैसे पता आपको वो वेद वेद है

411
00:31:34,320 --> 00:31:39,240
एक सेकंड यह जो भगवत गीता मेरे पास है ना

412
00:31:39,240 --> 00:31:43,320
भगवत गीता आपको दिख रही है हम

413
00:31:43,320 --> 00:31:47,400
ये वास्तव में मैंने भगवत गीता एक ब्राह्मण से ही

414
00:31:47,400 --> 00:31:51,560
प्राप्त की थी उनकी सेवा करके ही यह भगवत गीता मैंने प्राप्त

415
00:31:51,560 --> 00:31:52,560
की

416
00:31:52,560 --> 00:31:56,640
ठीक है फिर उन्होंने फिर मैंने कुछ वीडियो हमारे गुरु जी

417
00:31:56,640 --> 00:32:00,880
की देखी और उन वीडियो में जब इस गीता का मिलान किया

418
00:32:00,880 --> 00:32:04,880
तो बात सही निकली तो इसका अर्थ यही बैठता है कि वो वेद जो

419
00:32:04,880 --> 00:32:09,120
दिखा रहे हैं वो सही है नहीं उसका

420
00:32:09,120 --> 00:32:13,280
जो अर्थ है भगवत गीता का जो अर्थ है यदि ये जो आपने

421
00:32:13,280 --> 00:32:18,040
हाथ में किताब पकड़ी है आप यदि इसको भगवत गीता मानते हैं

422
00:32:18,040 --> 00:32:22,160
तो और यह मानते हैं कि इसमें अक्षरस जो बात लिखी हुई है वोह सत्य

423
00:32:22,160 --> 00:32:26,360
है तो आपको जो यह भगवत गीता प्रदान

424
00:32:26,360 --> 00:32:30,440
कर रहा है आपको उस पर विश्वास होना सिद्ध होता है अगर

425
00:32:30,440 --> 00:32:34,760
आपको विश्वास नहीं है भगवत गीता जिससे मिल रही है उस परे तो फिर

426
00:32:34,760 --> 00:32:40,440
आपका भगवत गीता को भगवत गीता मानना सिद्ध नहीं

427
00:32:40,440 --> 00:32:44,600
होता जब आपको उस जब आपको उस पर विश्वास है भगवत गीता

428
00:32:44,600 --> 00:32:48,680
जो दे रहा है आपका कहना है कि जो भगवत गीता दे रहा है मुझे उस पर विश्वास

429
00:32:48,680 --> 00:32:52,840
है क्या भगवत गीता जिसने दी है उसने कहीं लिखा है

430
00:32:52,840 --> 00:32:55,680
कि कबीर भगवान

431
00:32:55,680 --> 00:32:59,800
है भगवत गीता में लिखा है उसने

432
00:32:59,800 --> 00:33:04,040
लिखा है कबीर भगवान है हिंदी में अर्थ करते समय

433
00:33:04,040 --> 00:33:08,600
अर्थ कर भगवत गीता में

434
00:33:08,600 --> 00:33:12,600
फिलहाल में कबीर शब्द नहीं लिखा लेकिन परमात्मा

435
00:33:12,600 --> 00:33:16,960
का जो अर्थ है वह समझाया है भगवत

436
00:33:16,960 --> 00:33:21,040
गीता में आपके पास भगवत गीता

437
00:33:21,040 --> 00:33:26,040
का कौन सा भाष है जिसको आप प्रमाणिक मानते हैं उठाइए जरा दिखाइए

438
00:33:26,040 --> 00:33:30,360
दिखाइए भैया जी आपने गुरु की बात खत्म कर भैया जी

439
00:33:30,360 --> 00:33:34,440
आप मेरी पहले बात सुनिए आपने गुरु की बात खत्म

440
00:33:34,440 --> 00:33:38,480
करके सीधे दसवीं कक्षा में जाकर गुरु परमात्मा की

441
00:33:38,480 --> 00:33:42,560
बात करना स्टार्ट कर दिया यानी कि आपसे जो भी कोई चर्चा करता

442
00:33:42,560 --> 00:33:47,480
है उसे भ्रमित करके दूसरे चर्चा पर ले जाते हो आप अच्छा

443
00:33:47,480 --> 00:33:51,480
तो क्या करना चाहिए था जहां से हम लोग ह गए

444
00:33:51,480 --> 00:33:55,760
पहले आपको जो गुरु पर ब आपने एक बात कही एक मिनट

445
00:33:55,760 --> 00:33:59,960
मिट एक मिनट एक मिनट आपने एक बात क मैं भ्रमित करके दूसरी जगह ले जाता हूं

446
00:33:59,960 --> 00:34:04,480
तो आप क्या इतने अकल के कच्चे हैं कि मैं आपको भ्रमित कर सकता हूं

447
00:34:04,480 --> 00:34:08,560
तो वही तो मैं मुझे जो जो जो महसूस हो रहा है भ्रमित करने का प्रयास

448
00:34:08,560 --> 00:34:12,840
कर रहे हैं तो मैं आप हमारी बात गुरु से स्टार्ट हुई

449
00:34:12,840 --> 00:34:17,120
आपकी गुरु की जो बात स्टार्ट हुई पहले उ उस

450
00:34:17,120 --> 00:34:21,440
कांसेप्ट को तो क्लियर कर लीजिए अरे उसी को तो क्लियर कर रहा हूं

451
00:34:21,440 --> 00:34:26,360
आप आप ये बता रहे थे गु बता रहा बता रहा

452
00:34:26,360 --> 00:34:30,480
क्लियर कर रहा हूं आपको मैं क्लियर कर रहा हूं आप अपने

453
00:34:30,480 --> 00:34:34,480
गुरु की प्रमाणिकता के लिए कह रहे थे कि गुरुदेव जो बात बोलते हैं वही

454
00:34:34,480 --> 00:34:38,840
इसमें लिखी हुई है आपने गुरु को गुरु अपने तत्वदर्शी को

455
00:34:38,840 --> 00:34:43,280
तत्वदर्शी इसलिए माना है क्योंकि आपके लिए भगवत गीता प्रमाण है

456
00:34:43,280 --> 00:34:47,280
अब अगर प्रमाण है भगवत गीता तो भगवत गीता जिससे आपको मिल रही

457
00:34:47,280 --> 00:34:51,520
है उसकी वाणी आपके लिए प्रमाण है अन्यथा आपके लिए भगवत गीता

458
00:34:51,520 --> 00:34:55,920
का प्रमाण होना सिद्ध नहीं होता भ गीता का

459
00:34:55,920 --> 00:35:00,000
आपके लिए प्रमाण होना सिद्ध नहीं होता तो इसलिए मैंने कहा कि जिससे आपने

460
00:35:00,000 --> 00:35:04,840
भगवत गीता ली है या तो आपने भगवत गीता भी तत्वदर्शी से ही ली होती

461
00:35:04,840 --> 00:35:09,400
भाई वो तो भगवान के अवतार है ना तो गीता प्र क्यों लेके आ रहे हैं भगवत

462
00:35:09,400 --> 00:35:11,200
गीता कर सारे

463
00:35:11,200 --> 00:35:15,360
के भाष कर गीता का भाष्य अब जब आपने देखिए

464
00:35:15,360 --> 00:35:19,600
मैं विनम्रता से ये चर्चा आगे बढ़ाना चाहता हूं क्योंकि मेरे ऊपर

465
00:35:19,600 --> 00:35:23,680
एक डोमिनेटिंग वाला वो लग जाता है तो मैं विनम्रता से आगे बढ़ना चाहता

466
00:35:23,680 --> 00:35:27,760
हूं मैं आपको यह बता रहा हूं कि आपने अपनी गुरु की प्रमाणिकता

467
00:35:27,760 --> 00:35:32,120
के लिए ये कहा कि जो भगवत गीता मेरे पास मुझे एक ब्राह्मण से मिली थी

468
00:35:32,120 --> 00:35:36,200
उसी भगवत गीता के बारे में उन्होंने बात की और मैंने मिलान किया तो वो सब सच

469
00:35:36,200 --> 00:35:40,440
निकला इसलिए मैं मानता हूं कि वो जो है भगवत गीता के अनुसार तत्वदर्शी है प्रमाणिक

470
00:35:40,440 --> 00:35:44,760
है कहा ना ये ठीक तो अगर भगवत

471
00:35:44,760 --> 00:35:48,760
गीता के आधार प आप मेरी बात पूरी हो जाने दीजिए

472
00:35:48,760 --> 00:35:52,920
भाई साब मेरी बात पूरी हो जाने दीजिए आपने भगवत गीता के आधार पर यदि

473
00:35:52,920 --> 00:35:57,400
उनको गुरु माना है इसका अर्थ यह है आपके हाथ में जो किताब है

474
00:35:57,400 --> 00:36:01,480
ये आपके लिए प्रमाण है ठीक है बिल्कुल प्रमाण अगर

475
00:36:01,480 --> 00:36:05,520
इसके आधार पर आपने उन्हें गुरु माना अब ये किताब आपके लिए जब प्रमाण

476
00:36:05,520 --> 00:36:09,760
है इसका अर्थ है कि इसको आपको देने वाला उसकी

477
00:36:09,760 --> 00:36:14,320
बात भी आपके लिए प्रमाण है अगर आपको उस पर भरोसा नहीं

478
00:36:14,320 --> 00:36:18,920
अगर आपको उस पर भरोसा नहीं तो उससे मिली हुई किताब पर भरोसा होना सिद्ध नहीं

479
00:36:18,920 --> 00:36:23,120
होता क्योंकि अगर वो झूठ बोल सकता है तो वो अपनी किताब में आपको झूठे श्लोक

480
00:36:23,120 --> 00:36:27,040
भी दे सकता है आपको फसाने के लिए

481
00:36:27,040 --> 00:36:31,120
ठीक है तो अब बात ये आती है कि जो किताब आपने हाथ में

482
00:36:31,120 --> 00:36:35,400
पकड़ी है उस किताब में केवल श्लोक नहीं है उसम श्लोकों का उस व्यक्ति

483
00:36:35,400 --> 00:36:39,600
ने जिसने आपको किताब दी है अर्थ भी लिखा है उस अर्थ में कहीं

484
00:36:39,600 --> 00:36:43,800
उसने ये कहा है कि कबीर जो है वो जो जो पो पोएट थे

485
00:36:43,800 --> 00:36:48,120
कवि थे रामानंद संप्रदाय से दीक्षित थे उनके शिष्य थे

486
00:36:48,120 --> 00:36:52,960
वो भगवान है उन्होंने कहा है क्या

487
00:36:52,960 --> 00:36:57,960
इस भगवत गीता में पर उस परमात्मा की पहचान बताई

488
00:36:57,960 --> 00:37:01,960
नाम

489
00:37:01,960 --> 00:37:06,120
बताया हां इस अच्छा तत्वदर्शी जो

490
00:37:06,120 --> 00:37:10,840
है आपके इसमें नीचे लेखक का नाम लिखा है क्या कहीं

491
00:37:10,840 --> 00:37:15,280
नीचे लेखक का नाम

492
00:37:15,280 --> 00:37:19,440
गीता अच्छा गीता हिंदी वाली

493
00:37:19,440 --> 00:37:24,280
है मेरे पास भी है गीता सिंपल वाली

494
00:37:24,280 --> 00:37:28,880
इसमें कहीं पर उन्होंने कहीं पर

495
00:37:28,880 --> 00:37:32,960
भी कुछ भी ऐसा है जो तत्वदर्शी कह रहे कि इन्होंने झूठ

496
00:37:32,960 --> 00:37:35,720
लिख दिया

497
00:37:35,720 --> 00:37:39,720
है नहीं कहीं पर ऐसा नहीं है इस गीता में

498
00:37:39,720 --> 00:37:44,800
कहीं पर ऐसा है जो तत्वदर्शी य कह रहे कि उन्होंने झूठ लिख दिया

499
00:37:44,800 --> 00:37:48,960
है नहीं अच्छा 18 66 का अर्थ

500
00:37:48,960 --> 00:37:52,960
खोलिए जरा क्या लिखा है 18

501
00:37:52,960 --> 00:37:58,960
और 66

502
00:38:06,400 --> 00:38:10,200
6

503
00:38:10,200 --> 00:38:14,320
63 64 6 66 जो पुरुष

504
00:38:14,320 --> 00:38:19,000
मुझ में परम प्रेम करके इस परम रहस्य

505
00:38:19,000 --> 00:38:23,480
युक्त गीता शास्त्र को मेरे भक्तों में

506
00:38:23,480 --> 00:38:29,480
कहेगा वह मुझको ही प्राप्त होगा

507
00:38:29,600 --> 00:38:33,640
एक मिनट इसम कोई संदेह नहीं है

508
00:38:33,640 --> 00:38:37,680
एक मिनट एक मिनट वो ब्रज वाला श्लोक कौन सा

509
00:38:37,680 --> 00:38:40,240
है ब्रज

510
00:38:40,240 --> 00:38:44,520
वाला बज वाला शलोक कौन

511
00:38:44,520 --> 00:38:49,160
ब्रज वाला मुझे नहीं पता नहीं पता

512
00:38:49,160 --> 00:38:53,720
पक्का गुरुदेव के चरणों की सौग

513
00:38:53,720 --> 00:38:57,760
भाई नहीं पता इतना क्लियर मुझे नहीं पता कौन सा शलोक ध्यान रहता

514
00:38:57,760 --> 00:39:02,080
ब्रज वाला मैंने कई बार सुना है कि ब्रज वाला ऐसा गीता में

515
00:39:02,080 --> 00:39:06,440
आता है शब्द तो ब्रज माने जाना होता है ना कि आना

516
00:39:06,440 --> 00:39:10,880
होता और मैंने य गल पर भी सर्च मारा तो उसम उसमें भी

517
00:39:10,880 --> 00:39:14,960
जाना ही निकला अच्छा गल पर अगर मैं अभी कोई

518
00:39:14,960 --> 00:39:19,600
चीज अपडेट कर दूं तो उसको आप प्रमाण मान लेंगे रामपाल

519
00:39:19,600 --> 00:39:21,400
अपराधी है द अगर

520
00:39:21,400 --> 00:39:25,440
ग प यह जानकारी मिल जाएगी कि रामपाल अपराधी है

521
00:39:25,440 --> 00:39:29,600
तो उसको मान लेंगे नहीं तो फिर आपके अनुसार व्रज

522
00:39:29,600 --> 00:39:33,600
का शब्द क्या है व्रज का अर्थ क्या है मैं उससे करूंगा

523
00:39:33,600 --> 00:39:37,760
मगर यह बताइए क्या आपके गुरुदेव ने यह कहा है कि इन लोगों ने

524
00:39:37,760 --> 00:39:41,880
जो गीता में अर्थ किया है ब्रज का वो गलत किया

525
00:39:41,880 --> 00:39:45,880
है नहीं मानेंगे आपसे

526
00:39:45,880 --> 00:39:49,880
मैं पूछ रहा हूं कि आपके गुरु ने यह कहा है कि गीता प्रेस वालों

527
00:39:49,880 --> 00:39:54,680
ने व्रज का अर्थ गलत किया है यह पूछ रहा

528
00:39:54,680 --> 00:39:58,680
हूं गलत किया है नहीं ऐसा कोई

529
00:39:58,680 --> 00:40:03,400
वीडियो है ना कोई प्रमाण है ऐसा गुरुजी ने क

530
00:40:03,400 --> 00:40:07,520
भाई कोई अगर देख रहा हो तो मुझे जरा कमेंट में व ब्रज का ब्रज

531
00:40:07,520 --> 00:40:11,800
वाला बताए कौन सा था श्लोक

532
00:40:11,800 --> 00:40:17,800
क्रमां मैं भी देख रहा हूं

533
00:40:36,360 --> 00:40:41,880
चलो इसको तो ढूंढ लेते हैं इसमें और एक ले लेते

534
00:40:41,880 --> 00:40:45,920
हैं भैया जी आपने मेरा जो गुरुजी वाला कांसेप्ट था उसे

535
00:40:45,920 --> 00:40:50,400
चेंज कर को चल रहा है कोई चल रहा है आप लाए आप लाए आप कांसेप्ट

536
00:40:50,400 --> 00:40:54,760
लाए हो गुरुजी का वही चल रहा है आप एक बात

537
00:40:54,760 --> 00:40:58,800
बताइए मैं आपसे एक छोटा सा क् करना चाहता ह क्या

538
00:40:58,800 --> 00:41:04,800
आप मेरा उतर दोगे मैं दूंगा वही तो चल रहा

539
00:41:05,600 --> 00:41:09,520
है वीडियो में य बोला था

540
00:41:09,520 --> 00:41:14,200
आपने गता उठाई थी आपने

541
00:41:14,200 --> 00:41:18,400
की प्रमाणिकता के लिए गीता उठाई थी कि नहीं वही

542
00:41:18,400 --> 00:41:22,440
च अब ये बताइए आपके गुरु ये कहते हैं कि

543
00:41:22,440 --> 00:41:28,440
5 पर ज्ञान जो है गीता में वो काल ने बोल दिया है

544
00:41:28,920 --> 00:41:32,960
क्या इन्होने क माना है जो आपने गीता पकड़ रखी उन्होने माना है क्या

545
00:41:32,960 --> 00:41:38,040
य बात कि अपने मन से बोल दिया है

546
00:41:38,040 --> 00:41:42,680
कालने तो काल भगवान ने बोला है ना

547
00:41:42,680 --> 00:41:46,360
माना है क्या आपने गीता उठाई

548
00:41:46,360 --> 00:41:51,160
है इन्होंने कहीं लिखा भी नहीं है कि कृष्ण भगवान ने बोली

549
00:41:51,160 --> 00:41:55,200
बिल्कुल बिल्कुल बोला है देखलो बताता भवाने बोली

550
00:41:55,200 --> 00:41:59,280
भूमिका पढ़ लो तुम पहले पहले भूमिका नहीं गीता

551
00:41:59,280 --> 00:42:03,440
मेंही दिखाई है ना मुझे अरे तो अरे जो लिख रहा है उसके अर्थ

552
00:42:03,440 --> 00:42:09,440
कर रहा है वो भूमिका भूमिका भी वही लिख रहा है उसम उसने लिखा

553
00:42:13,600 --> 00:42:19,600
[संगीत]

554
00:42:20,760 --> 00:42:26,760
है हम

555
00:42:37,960 --> 00:42:42,000
सबसे पहली बात है श्रीमद् भगवत गीता साक्षात

556
00:42:42,000 --> 00:42:46,440
भगवान की दिव्य वाणी है साक्षात

557
00:42:46,440 --> 00:42:52,440
ठीक उसका यथार्थ में वर्णन किया गया

558
00:42:54,200 --> 00:42:58,600
है इसमें संपूर्ण वेदों का सार है

559
00:42:58,600 --> 00:43:04,000
अब इन्होंने सर्व शास्त्र मय गीता

560
00:43:04,000 --> 00:43:10,000
है गीता भली प्रकार

561
00:43:11,560 --> 00:43:15,640
से गीता को हम स्वयं भगवान से भी बढ़कर कहे तो कोई अति

562
00:43:15,640 --> 00:43:19,800
क्ति नहीं होगी भगवान ने स्वयं कहा मैं गीता के आश्रय में रहता हूं गीता मेरा श्रेष्ठ

563
00:43:19,800 --> 00:43:25,600
घर है तो यहां भगवान भगवान बारबार बोला जा रहा है गीता को बोलने वाले

564
00:43:25,600 --> 00:43:29,680
को गीता बोलने वाला भगवान है तो

565
00:43:29,680 --> 00:43:33,760
वही भगवान गीता परमेश्वर बोला जा परमेश्वर भाई

566
00:43:33,760 --> 00:43:38,960
परमेश्वर परम ब्रह्म वही पर वही परम

567
00:43:38,960 --> 00:43:43,280
परब्रह्म गीता अध्याय 18 के लोक नंबर 63

568
00:43:43,280 --> 00:43:47,360
में परमा भाई साहब इन्होने जो

569
00:43:47,360 --> 00:43:51,760
लिखा है वो आप मानते हैं कि नहीं

570
00:43:51,760 --> 00:43:56,520
मैं जो मैं आपसे अभी ये बोल रहा हूं तो मानता हूं ना आप बताइए ना

571
00:43:56,520 --> 00:44:00,560
मैं हां तो जो इन्होंने लिखा है आप उसको एज इट इज

572
00:44:00,560 --> 00:44:06,360
मानते हैं कि नहीं मानते मेरा प्रश्न आपसे यह था बस इतना

573
00:44:06,360 --> 00:44:10,840
सा हा मैं मान रहा हूं

574
00:44:10,840 --> 00:44:14,840
ना एस इट इज मानते हैं तो यह यह कहा कहा

575
00:44:14,840 --> 00:44:20,840
है इन्होंने कि 5 पर मानने लायक नहीं है वो काल ने अपने मन से बोल दिया

576
00:44:22,240 --> 00:44:26,360
है तो भैया जी तो मैं यही तो जानना चाह रहा

577
00:44:26,360 --> 00:44:31,720
हूं गीता नंबर 18 लोक

578
00:44:31,720 --> 00:44:34,840
नंबर की

579
00:44:34,840 --> 00:44:39,280
जाने ये देखो इसमें कह रहे भगवान अध्याय

580
00:44:39,280 --> 00:44:43,440
में इसमें कह रहे भगवान की क्या कहते

581
00:44:43,440 --> 00:44:47,480
हैं भगवान श्री कृष्ण के दिव्य शरीर में यशोदा मैया ने

582
00:44:47,480 --> 00:44:51,520
बालक रूप भगवान श्री कृष्ण के मुख में भक्त कासुंडी ने भगवान

583
00:44:51,520 --> 00:44:55,640
श्री राम के उदर में समस्त विश्व को देखा था वैसे ही भगवान ने किसी

584
00:44:55,640 --> 00:44:59,880
के भी स्प प्रमाण क दिखाया क्या

585
00:44:59,880 --> 00:45:04,200
आपने ये प्रमाण कहीं दिखाया गीता में कहीं लिखा हुआ है कि ये भगवत

586
00:45:04,200 --> 00:45:08,760
गीता कृष्ण भगवान ने बोली है [संगीत] हां

587
00:45:08,760 --> 00:45:12,440
कहां दिखाया बताइए

588
00:45:12,440 --> 00:45:16,600
दिखाइए भाई भगवत भगवत गीता कृष्ण भगवान ने बोली है

589
00:45:16,600 --> 00:45:20,760
क्यों क्योंकि तो कहीं लिखा अभी मैंने आपको बताया ना अभी अभी

590
00:45:20,760 --> 00:45:25,320
बता रहा हूं अभी बता रहा हूं अभी बता रहा हूं मैंने सुन

591
00:45:25,320 --> 00:45:26,320
हां

592
00:45:26,320 --> 00:45:30,320
देखो यहां पर यह कह रहे हैं कि

593
00:45:30,320 --> 00:45:34,600
भगवान ने स्वयं कहा है क्या कहा है भगवान ने स्वयं कहा

594
00:45:34,600 --> 00:45:38,720
है और तब वो गीता की बात कर रहे मैं गीता के आश्रय में रहता

595
00:45:38,720 --> 00:45:42,800
हूं यह भगवान के बारे में बोल रहे भगवान ने स्वयं कही है भगवत गीता यह बोल

596
00:45:42,800 --> 00:45:47,520
रहे तो बोलने वाले का नाम लिखा हुआ है व भगवान श्री

597
00:45:47,520 --> 00:45:51,560
कृष्ण अरे तो आगे वो जब यहां पर भगवान कह रहे

598
00:45:51,560 --> 00:45:55,640
हैं बोलने वाले को तो आगे भगवान को ही कह रहे हैं ना वहा पर श्री कृष्ण नाम ले रहे

599
00:45:55,640 --> 00:45:59,760
भगवान के लिए यहां पर बोलने वाले को भगवान कह रहे हैं आगे श्री

600
00:45:59,760 --> 00:46:03,800
कृष्ण को भगवान कह रहे हैं तो भगवान हो गए ना श्री

601
00:46:03,800 --> 00:46:07,880
कृष्ण श्री कृष्ण को मैं भी भगवान मानता अच्छा अच्छा आप

602
00:46:07,880 --> 00:46:12,200
एक बात बता दीजिए आप ये बता दीजिए आपने गीता प्रेस

603
00:46:12,200 --> 00:46:16,200
के लिखने वाले से कंफर्म किया कि आपने इसमें जो श्री कृष्ण की बात हो

604
00:46:16,200 --> 00:46:20,400
रही है उनको भगवान माना है या किसी और को माना है यह कन्फर्म कर लिया

605
00:46:20,400 --> 00:46:25,240
आपने हमने तो कर लिया अगली बार

606
00:46:25,240 --> 00:46:29,440
हा वो अगली बार में गीता प्रस वालो के पास जाक मिल के बात कर लूंगा

607
00:46:29,440 --> 00:46:33,880
मैं फिलहाल आपके गुरु के विषय में जा वाले आपके गुरु है

608
00:46:33,880 --> 00:46:38,360
क्योंकि आप कौन से गीता मिली है भैया जी गुरु जी के

609
00:46:38,360 --> 00:46:41,640
जो गीता प्रेस गोरखपुर वाले जिन्होंने पुस्तक

610
00:46:41,640 --> 00:46:45,800
लिखी है वह उनके पास में जाकर वो कंफर्म कर लूंगा

611
00:46:45,800 --> 00:46:49,800
कि वो कृष्ण भगवान ने लिखी है या नहीं लिखी है ये कांसेप्ट

612
00:46:49,800 --> 00:46:54,200
अलग है इसको आप कर लेना सुनिए राम सुखदास

613
00:46:54,200 --> 00:46:58,400
जी थे जिन्होंने साधक संजीवनी लिखी है जिनके सबसे ज्यादा ग्रंथ

614
00:46:58,400 --> 00:47:02,560
पाए जाते हैं गीता प्रस के द्वारा वो साधक

615
00:47:02,560 --> 00:47:07,000
संजीवनी लिखते समय पूज्य शंकराचार्य के साथ रहे

616
00:47:07,000 --> 00:47:11,880
और पूज्य शंकराचार्य को बताया श्री कृष्ण ही भगवान है

617
00:47:11,880 --> 00:47:16,160
हमने तो कन्फर्म कराया त बोल रहे

618
00:47:16,160 --> 00:47:20,360
आपसे मैं यह मानने से कहा इंकार कर रहा हूं श्री कृष्ण भगवान

619
00:47:20,360 --> 00:47:24,640
नहीं है श्री कृष्ण भगवान है

620
00:47:24,640 --> 00:47:28,680
श्री कृष्ण भगवान परम परमेश्वर हां वो

621
00:47:28,680 --> 00:47:33,120
सच्चिदानंद घन ब्रह्म ही है अच्छा

622
00:47:33,120 --> 00:47:37,320
उसका नाम लिखा हुआ है सचन परम ब्रह्म मानते

623
00:47:37,320 --> 00:47:43,320
है क्या श्री कृष्ण को उस सचिदानंद

624
00:47:43,720 --> 00:47:49,000
क्या नहीं नहीं मानते तो यह तो मानते

625
00:47:49,000 --> 00:47:53,080
हैं हा कहीं लिखा होगा ना मानते हैं तो बिल्कुल लिखा

626
00:47:53,080 --> 00:47:59,080
है जगह लिखा है ब दिखाइए

627
00:47:59,600 --> 00:48:04,080
जिसमें यह लिखा हो श्री कृष्ण भगवान स्वयं परब्रह्म है

628
00:48:04,080 --> 00:48:10,080
हा ठीक है बता देता हूं

629
00:48:43,080 --> 00:48:49,080
देवी भागवत नौवा

630
00:48:54,880 --> 00:48:59,160
स्कंद नवा स्कंद श्री कृष्ण

631
00:48:59,160 --> 00:49:03,200
चंद्र परम ब्रह्म की आज्ञा से वह देवी प्रकृति पांच

632
00:49:03,200 --> 00:49:07,320
प्रकार की बन गई परम ब्रह्म भगवती

633
00:49:07,320 --> 00:49:11,400
का पांचवा स्वरूप देवी राधा परमात्मा श्री कृष्ण को प्राणों से

634
00:49:11,400 --> 00:49:15,480
भी प्यारी है मां दुर्गा परमात्मा श्री कृष्ण

635
00:49:15,480 --> 00:49:19,920
की परम भक्त

636
00:49:19,920 --> 00:49:24,160
है मुझे दि भैया जी दिखा दीजिए दिखा तो

637
00:49:24,160 --> 00:49:28,520
दीजिए बोलने से काम नहीं चलेगा मतलब कैसे दिखाऊं

638
00:49:28,520 --> 00:49:32,560
आपको ये ऊपर करके स्क्रीन पर स्क्रीन

639
00:49:32,560 --> 00:49:36,760
पर ऐसे दिखाइए क लिखा हुआ है हा

640
00:49:36,760 --> 00:49:41,080
श्री कृष्ण चंद्र पर परमात्मा श्री कृष्ण

641
00:49:41,080 --> 00:49:45,560
चंद्र परमात्मा की आज्ञा से वह देवी प्रकृति

642
00:49:45,560 --> 00:49:48,800
पांच प्रकार की

643
00:49:48,800 --> 00:49:53,000
आगे बन गई बन गई पर इसमें

644
00:49:53,000 --> 00:49:58,280
यह लिखा है पर ब्रह्म नहीं लिखा परमात्मा की आज्ञा

645
00:49:58,280 --> 00:50:03,600
से अरे श्री कृष्ण चंद्र परमात्मा

646
00:50:03,600 --> 00:50:07,680
हा भैया जी परमात्मा और परब्रह्म अलग अलग है भैया जी

647
00:50:07,680 --> 00:50:09,880
आपका कहना आपका कहने का मतलब

648
00:50:09,880 --> 00:50:14,000
यह है आपका कहने का मतलब यह है कि

649
00:50:14,000 --> 00:50:18,040
जो गीता वाले हैं जो गीता प्रेस गोरखपुर वाले

650
00:50:18,040 --> 00:50:22,080
हैं उनसे बिल्कुल भी वो नहीं है विरोध आपके तत्वदर्शी

651
00:50:22,080 --> 00:50:26,720
संत रामपाल का बिल्कुल विरोध नहीं है

652
00:50:26,720 --> 00:50:31,320
अच्छा तो इन्होंने अपनी हर जगह फोटो पर भगवान श्री कृष्ण क्यों बना रखे हैं

653
00:50:31,320 --> 00:50:35,520
कबीर क्यों नहीं बना रखे भैया जी मैं मैं आपसे मेरा

654
00:50:35,520 --> 00:50:40,840
जो प्रश्न था उसे क्यों काटना चाह रहे हैं मेरा जो प्रश्न है आपने

655
00:50:40,840 --> 00:50:45,080
अरवे में आपने देख के आओगे अगर

656
00:50:45,080 --> 00:50:49,080
अटको तो इसको करो कर्म करके आऊगा मैं

657
00:50:49,080 --> 00:50:53,560
आपसे बोल रहा हूं कि भया संपर्क

658
00:50:53,560 --> 00:50:58,600
किया है हमने सुनिए

659
00:50:58,600 --> 00:51:02,760
1171 एक वीडियो में जो बोला था कि ब्रह्मचारी ही गुरु बनने

660
00:51:02,760 --> 00:51:06,760
के योग्य होता है कहा था कि नहीं ये सुनो रामपाल जी सुनो आप कह रहे हो

661
00:51:06,760 --> 00:51:11,280
ना आप ये कह रहे हो देखो गीता अध्याय 18

662
00:51:11,280 --> 00:51:15,440
62 में गीता ज्ञान बोलने वाले वाला अपने से अन्य

663
00:51:15,440 --> 00:51:19,480
परमेश्वर की शरण में जाने की बात कर रहा है जाने की बात कर रहा है

664
00:51:19,480 --> 00:51:23,760
उसी से संबंधित प्रकरण गीता अध्याय 18 श्लोक 66

665
00:51:23,760 --> 00:51:27,920
में है जिसका अर्थ गलत करके गलत अनुवाद किया गया गलत अनुवाद

666
00:51:27,920 --> 00:51:32,680
लो यह आपके गुरु बोल रहे हैं

667
00:51:32,680 --> 00:51:36,800
मे गुरु मेरे गुरु बोल रहे हैं जो आपने एक वीडियो में बोला

668
00:51:36,800 --> 00:51:42,800
था

669
00:51:47,040 --> 00:51:51,440
अने आपने अभी कहा आपके गुरु का गीता प्र से कोई विरोध

670
00:51:51,440 --> 00:51:56,880
नहीं है नहीं है में

671
00:51:56,880 --> 00:52:01,040
ब्रज शब्द आया है जो उसका आप आधार बनाते हो जो

672
00:52:01,040 --> 00:52:06,160
य हा 18 में ब्रज का

673
00:52:06,160 --> 00:52:10,160
क 66 में संपूर्ण धर्मों को अर्थात

674
00:52:10,160 --> 00:52:14,240
संपूर्ण कर्तव्य कर्मों को मुझ में त्याग कर तू केवल एक मुझ

675
00:52:14,240 --> 00:52:20,240
सर्वशक्तिमान

676
00:52:27,520 --> 00:52:31,680
एक सेकंड घुमाओ भाई कितना घुमाओ

677
00:52:31,680 --> 00:52:35,720
ग मतलब जो जग जाहिर बात है

678
00:52:35,720 --> 00:52:39,920
उसको भी हमको आपको प्रमाण देना पड़ रहा है जो आप खुद मानते हो

679
00:52:39,920 --> 00:52:43,920
और आप 2004 से उनके वो शिष्य तो

680
00:52:43,920 --> 00:52:47,960
आप तो आज तक विरोध में थे गुरु विरोध था आपके अंदर आपके

681
00:52:47,960 --> 00:52:53,920
गुरु कह रहे हैं गीता प्रेस वालों ने गलत अर्थ लिखा

682
00:52:53,920 --> 00:52:58,560
है भैया जी आपने ठीक से ध्यान से पढ़ा नहीं चाहि

683
00:52:58,560 --> 00:53:02,680
ये वाला श्लोक एक बार दोबारा पढ़ लीजिए थोड़ मेरी जो ऑडियंस है

684
00:53:02,680 --> 00:53:07,600
उसे समझ सके

685
00:53:07,600 --> 00:53:12,680
आप संपूर्ण धर्मों को त्याग कर

686
00:53:12,680 --> 00:53:16,720
अर्थात संपूर्ण कर्तव्य कर्मों को मुझ में त्याग कर तू केवल एक

687
00:53:16,720 --> 00:53:22,720
मुझ सर्वशक्तिमान

688
00:53:26,840 --> 00:53:30,840
यह भी मत करना शब्दों का खेल मत खेलना बताओ तो ब्रज

689
00:53:30,840 --> 00:53:34,880
के कितने ब्रज के कितने अर्थ होते हैं आप मुझे य भी

690
00:53:34,880 --> 00:53:39,240
बात की बात है य बात की बात है बासे

691
00:53:39,240 --> 00:53:43,400
हो जाएगी अरे गीता प्रस वालो पर भरोसा है कि नहीं य पूछ

692
00:53:43,400 --> 00:53:47,520
रहा बक

693
00:53:47,520 --> 00:53:52,920
बक आपके अनुस

694
00:53:52,920 --> 00:53:56,960
ख भाई कोई इंसान एक बड़ी पुस्तक

695
00:53:56,960 --> 00:54:01,320
तो क ना कहीं उसकी एई एक गलती रह जाती है इसका मतलब आपको

696
00:54:01,320 --> 00:54:07,320
उन पर अंतिम प्रमाण के रूप में भरोसा नहीं

697
00:54:07,680 --> 00:54:12,120
है अंतिम प्रमाण नहीं है मुझे सब पर

698
00:54:12,120 --> 00:54:17,000
भरोसा अरे भाई तुम क रहे गलत लिख रहे

699
00:54:17,000 --> 00:54:21,160
वो गलत लिख रहे आप क रहे सार र प्रमाण है आप मुझे

700
00:54:21,160 --> 00:54:25,280
ब्रज का अर्थ बता बता दीजिए बताऊंगा आपको

701
00:54:25,280 --> 00:54:30,520
मैं बताऊंगा आपको आप पहले बताओ गीता प्रस प आपको भरोसा है कि

702
00:54:30,520 --> 00:54:34,960
नहीं गीता प्रस पर भरोसा है जिसने इतनी

703
00:54:34,960 --> 00:54:39,400
बड़ी सच्चाई जो सब क ने

704
00:54:39,400 --> 00:54:42,840
कार् गलत लिखा

705
00:54:42,840 --> 00:54:48,840
है आप कह रहे हो कि उन्होंने ब्रज का अर्थ गलत लिखा

706
00:54:49,440 --> 00:54:53,480
है ब्रज का अर्थ गलत ब्रज का ठीक है

707
00:54:53,480 --> 00:54:57,760
संपूर्ण शक्ति में आ जा तो फिर ये जो 62 श्लोक

708
00:54:57,760 --> 00:55:01,760
में कौन से परमात्मा कीया मैं ये नहीं कह रहा हूं एक एक करके आगे चलो

709
00:55:01,760 --> 00:55:05,840
हम लोग बात करेंगे कि ब्रज का सही अर्थ क्या है अभी आप ये बताओ इन

710
00:55:05,840 --> 00:55:10,160
पर भरोसा नहीं है ना इतने से अंश

711
00:55:10,160 --> 00:55:14,920
में ये झूठे है ना आपके लिए अज्ञानी है ना

712
00:55:14,920 --> 00:55:19,480
कौन अज्ञानी ता प्रेस

713
00:55:19,480 --> 00:55:23,520
वाले मैंने ना तो गिस्ता प्रेस वालों को झूठा कहा और ना

714
00:55:23,520 --> 00:55:28,200
ही मैंने अपने गुरुजी को झूठा कहा यदि गीता प्रस वाले

715
00:55:28,200 --> 00:55:33,040
सही लिख रहे हैं तो उन्होंने यह क्यों लिखा गीता अध्याय 62 में

716
00:55:33,040 --> 00:55:37,120
के उस दूसरे परमेश्वर की शरण में जाने जाने के लिए क्य करूंगा ये

717
00:55:37,120 --> 00:55:41,280
मैं य बाद में क्यों करोगे ये क्लियर कीजिए ना अरे इसलिए करूंगा क्योंकि यहां

718
00:55:41,280 --> 00:55:45,440
पे आपके गुरु उनको गलत बोल रहे हैं अब आप चुनाव करो या तो गुरु सही या फिर

719
00:55:45,440 --> 00:55:49,600
ये सही दोनों सही नहीं है आपके गुरु बोल रहे हैं कि उन्होंने गलत अर्थ

720
00:55:49,600 --> 00:55:53,960
लिखा है हम या तो इस चैप्टर को यहां पर छोड़ दो

721
00:55:53,960 --> 00:55:58,520
पढ़ाई करके आना या फिर अटके रहो फालतू बात नहीं

722
00:55:58,520 --> 00:56:03,760
आपके गुरु कह रहे हैं कि गीता प्रेस वालों ने यहां पर गलत

723
00:56:03,760 --> 00:56:08,320
बोला आप बताइए हा

724
00:56:08,320 --> 00:56:12,320
बोला है तो य इसका मतलब य अज्ञानी सिद्ध

725
00:56:12,320 --> 00:56:17,320
हो गए ना कौन

726
00:56:17,320 --> 00:56:22,040
अज्ञानी गीता प्रस वाले संपूर्णता

727
00:56:22,040 --> 00:56:26,040
तो नहीं है अरे अज्ञानी इतने से

728
00:56:26,040 --> 00:56:30,080
हैं हां इतने हो या इतने हो लेकिन पूरे

729
00:56:30,080 --> 00:56:34,360
अज्ञानी नहीं है ठीक है तो जो व्यक्ति एक जगह गलत चीज

730
00:56:34,360 --> 00:56:39,200
लिख सकता है दूसरी जगह लिख सकता है कि नहीं

731
00:56:39,200 --> 00:56:43,920
दूसरी जगह अब जब एक जगह गलत लिख सकता है वो पूरी गीता

732
00:56:43,920 --> 00:56:48,120
नहीं लिख सकता गल अच्छा मतलब आपको केवल इतना

733
00:56:48,120 --> 00:56:53,360
विश्वास है कि इन्होंने केवल यही पर गलत लिखा है और कहीं गलत नहीं लिखा है

734
00:56:53,360 --> 00:56:57,560
ठीक और तो कहीं नहीं गलत होगा गीता में या प्र

735
00:56:57,560 --> 00:57:01,720
में और क भी गलती नहीं होगी भैया जी आप गुरु

736
00:57:01,720 --> 00:57:07,720
वाले कांसेप्ट को क्यों नहीं हार मानो तो आगे

737
00:57:13,920 --> 00:57:18,200
चले गुरु वाला क्लियर कर मैं क्लियर

738
00:57:18,200 --> 00:57:23,920
करूंगा हर चीज

739
00:57:23,920 --> 00:57:27,920
आपने या तो मेरा गुरु वाला क्लियर करिए नहीं

740
00:57:27,920 --> 00:57:32,120
तो इसको खत्म कर दीजिए मैं कर रहा हूं आपने गीता उठाई थी अभी

741
00:57:32,120 --> 00:57:36,240
मैं बोलर हूं आपने कहा ग सब जगह गलत

742
00:57:36,240 --> 00:57:40,320
नहीं होंगे आपने य कहा आपने जो बात

743
00:57:40,320 --> 00:57:46,320
रखी है इसे अभी साइड में रख दीजिए जो मेरा जो आपने

744
00:57:47,480 --> 00:57:51,720
बात में जो बात कही थी गुरु ब्रह्मचारी होना

745
00:57:51,720 --> 00:57:56,960
चाहि मैं आऊंगा मैं उसको लेके

746
00:57:56,960 --> 00:58:01,440
गीता किसने उठाई थी मैंने उठाई थी गीता हाथ में अपने गुरु की

747
00:58:01,440 --> 00:58:05,840
गता किसने उठाई ी किसने उ

748
00:58:05,840 --> 00:58:09,840
तो फिर बात को साइड में रखवा रहे हो तो मुझे प्रॉपर कारण दे दो इसलिए

749
00:58:09,840 --> 00:58:15,840
मैं साइड में रखवा रहा हूं प्रॉपर कारण दोय

750
00:58:17,000 --> 00:58:22,320
बता शरत गुरु से ही ई री

751
00:58:22,320 --> 00:58:26,480
शुरु गुरु के लिए बात कर रहा आपने गीता उई ी

752
00:58:26,480 --> 00:58:31,240
में हम तो गीता से आप अपने गुरु की प्रमाणिकता

753
00:58:31,240 --> 00:58:35,400
दिखा रहे थे तो मैंने गीता पर आपका विश्वास जांचने के लिए यह पूछा

754
00:58:35,400 --> 00:58:39,440
कि क्या इस पर आपको पूरा भरोसा है तो अभी आपका निकल आया कि आपको पूरा

755
00:58:39,440 --> 00:58:43,560
भरोसा नहीं है एक अंश में भरोसा नहीं है अभी मैं आपसे पूछ रहा हूं इसके अलावा मैंने

756
00:58:43,560 --> 00:58:47,800
इनकी गलती आपके गुरु के द्वारा दिखा दी तो

757
00:58:47,800 --> 00:58:51,960
हम हां ठीक है बताइए वो गलती कर सकता

758
00:58:51,960 --> 00:58:56,360
है सही बात है और भी जगह गलती कर सकता है

759
00:58:56,360 --> 00:59:01,760
हां कर सकता होगा आप बताइए इसका मतलब ये आपके लिए प्रमाण नहीं

760
00:59:01,760 --> 00:59:02,760
है

761
00:59:02,760 --> 00:59:06,840
प्रमाण है कैसे प्रमाण है जो व्यक्ति गलती कर

762
00:59:06,840 --> 00:59:11,120
सकता है गलत श्लोक भी तो लिख सकता है हां लिख सकता

763
00:59:11,120 --> 00:59:15,200
है तो फिर प्रमाण कहां रहा लेकिन पूरी

764
00:59:15,200 --> 00:59:19,360
यानी कि आपका कहने का अर्थ है वो इतनी गलती करेगा वो पूरी गलती कर सकता

765
00:59:19,360 --> 00:59:23,360
है कहीं वो उस पर हमारा विश्वास नहीं रह जाता वो कहां

766
00:59:23,360 --> 00:59:27,440
गलती करेगा कहां नहीं करेगा कुछ नहीं पता के कहने का अर्थ यह

767
00:59:27,440 --> 00:59:31,960
है कि जो इंसान चिठी पर गलती करेगा तो व पूरी गीता गलत

768
00:59:31,960 --> 00:59:36,040
लिखेगा कहीं भी गलत लिख देगा छोटी छोटी बहुत सारी गलतियां

769
00:59:36,040 --> 00:59:40,240
कर देगा तू का मैं कर देगा मैं का तू कर देगा मेरे

770
00:59:40,240 --> 00:59:44,960
मेरे गुरु जी ने एक गलती निकाली आप 10 गलतियां निकाल सकते हो

771
00:59:44,960 --> 00:59:49,000
मैं मैं आपके गुरु जी द्वारा ही एक और गलती दिखा देता

772
00:59:49,000 --> 00:59:53,280
हूं और बताओ मुझे नहीं आपके द्वारा मुझे 10

773
00:59:53,280 --> 00:59:57,320
10 गलतियां दिखाइ है मुझे कायम क्यों दिखाऊ कहा लिखा

774
00:59:57,320 --> 01:00:01,400
है सनातन सिद्धांत है क्या तो आप कह रहे

775
01:00:01,400 --> 01:00:06,120
हैं ना कि पूरी गीता गलत लिख सकता है जो वन

776
01:00:06,120 --> 01:00:10,600
सिद्धांत दे देता हूं इसका सनातन सिद्धांत ले लो मत्स

777
01:00:10,600 --> 01:00:14,840
पुराण 145 अध्याय 5वा श्लोक

778
01:00:14,840 --> 01:00:18,040
समस्त सुति स्मति शास्त्रों में जो स्रोत स्मार्थ

779
01:00:18,040 --> 01:00:22,200
धर्म बताया जाता है उसमें सामंजस की शिक्षा ही साधु समम धर्म

780
01:00:22,200 --> 01:00:26,200
है हम ऐसा नहीं कर सकते कि इस श्लोक को माने और दूसरे को

781
01:00:26,200 --> 01:00:30,280
माने जिससे मानेंगे तो पूरा मानेंगे नहीं मानेंगे तो बिल्कुल नहीं मानेंगे

782
01:00:30,280 --> 01:00:34,320
आप ये बताइए रामपाल जी की बात जो आप

783
01:00:34,320 --> 01:00:38,520
मानते हो पूरी मानते हो कि उसम अपने अनुसार चुनाव करते हो य गलती

784
01:00:38,520 --> 01:00:42,680
हो गई पूरी मानता हूं मैं पूरी मानता क्योंकि वो क्योंकि वो आपके लिए

785
01:00:42,680 --> 01:00:46,680
प्रमाण है क्या उसमें उनमें

786
01:00:46,680 --> 01:00:50,680
आपकी ऐसी बुद्धि है कि य इनसे गलती हो सकती है ऐसी बुद्धि है आप

787
01:00:50,680 --> 01:00:55,440
में उनके लिए ऐसा कोई विचार नहीं

788
01:00:55,440 --> 01:00:59,560
क्योंकि वो आपके लिए प्रमाण है तो प्रमाण जिसको हम मानते हैं उसकी किसी

789
01:00:59,560 --> 01:01:03,880
भी चीज को नकार नहीं सकते अगर नकार तो उसके द्वारा बाकी की चीजों

790
01:01:03,880 --> 01:01:08,120
की विश्वसनीयता भंग हो जाती है तो आपको ये मानना

791
01:01:08,120 --> 01:01:12,360
पड़ेगा कि ये आपके लिए प्रमाण नहीं है और

792
01:01:12,360 --> 01:01:16,640
या फिर अध्ययन करके आइएगा तो भैया जी जिसने

793
01:01:16,640 --> 01:01:21,400
ये गोरखपुर से लिखी है तो आपके पास ऐसी कोई गीता है जो प्रमाणित

794
01:01:21,400 --> 01:01:25,560
है बिल्कुल कौन सी भगवत गीता है दिखाई

795
01:01:25,560 --> 01:01:29,640
बिल्कुल है अब यह बताइए आपको 11 16 पर चलना है

796
01:01:29,640 --> 01:01:33,280
या इसी को कंटिन्यू करना है मुझे

797
01:01:33,280 --> 01:01:37,840
गुरु से स्टार्ट किया था गुरु पर ही खत्म करना है हा

798
01:01:37,840 --> 01:01:42,160
तो व 11 16 जाएंगे आपने

799
01:01:42,160 --> 01:01:46,320
जो बोला था आपने यजुर्वेद

800
01:01:46,320 --> 01:01:50,520
में बोला था 11 सा 16 में कि गुरु ब्रह्मचारी

801
01:01:50,520 --> 01:01:54,000
ही होना

802
01:01:54,000 --> 01:01:58,440
चाहिए तो इसके पर मेरा ये प्रश्न प्रश्न ये है

803
01:01:58,440 --> 01:02:03,280
क्या रामचंद्र जी भगवान और श्री कृष्ण भगवान

804
01:02:03,280 --> 01:02:07,680
ने जो गुरु बनाए थे वो सही बनाए या गलत बनाए

805
01:02:07,680 --> 01:02:11,720
सही बनाए तो ग्राम चंद जी भगवान के जो

806
01:02:11,720 --> 01:02:15,800
गु रामचंद्र जी भगवान के जो गुरु थे वो ब्रह्मचारी थे या

807
01:02:15,800 --> 01:02:20,160
नहीं पूछ बताता हूं पर इससे पहले मैं आपका एक आंसर ले लूं

808
01:02:20,160 --> 01:02:24,640
आप इस बात को मानते हैं कि नहीं ब्रह्मचारी होना चाहिए कि नहीं फिर मैं बताऊ

809
01:02:24,640 --> 01:02:28,680
भगवान के गुरुजी ब्रह्मचारी थे या नहीं मैं बता रहा

810
01:02:28,680 --> 01:02:32,720
हूं आपको मैं इसका बता रहा हूं आपता को मानते हो कि नहीं गुरु

811
01:02:32,720 --> 01:02:36,880
ब्रह्मचारी होना चाहिए नहीं मैं नहीं मानता नहीं मानते

812
01:02:36,880 --> 01:02:41,480
ना अब मैं बता देता हूं गृहस्थ होते हुए भी गृहस्थ

813
01:02:41,480 --> 01:02:45,480
होते हुए भी यदि व्यक्ति अमुक अमुक चीजों

814
01:02:45,480 --> 01:02:48,960
का पालन करता है तो वह ब्रह्मचारी

815
01:02:48,960 --> 01:02:53,680
की सीमा में रह सकता है गृहस्थ होते हुए भी मनुस्मृति का

816
01:02:53,680 --> 01:02:58,800
सिद्धांत ब्रह्मचारी का अर्थ क्या है

817
01:02:58,800 --> 01:03:04,480
ब्रह्मचारी का अर्थ जहां से मैंने बोला है ना ब्रह्मचारी ही आचार्य बनता

818
01:03:04,480 --> 01:03:08,600
है ब्रह्मचारी ही आचार्य बनता है

819
01:03:08,600 --> 01:03:13,240
तो ब्रह्मचारी होता कन

820
01:03:13,240 --> 01:03:17,240
है अगर मैं वही पढ़ना होता तो आपसे क्यों बात

821
01:03:17,240 --> 01:03:21,480
करता हा बता देता हूं जो इसका

822
01:03:21,480 --> 01:03:25,760
निकलेगा निचोड़ वो निकलेगा ब्रह्म के लिए आचरण

823
01:03:25,760 --> 01:03:30,040
ने वाला मगर जब इसका व्यवहारिक व्याख्या होगी

824
01:03:30,040 --> 01:03:34,320
तो कोपन मेखला पहनकर ब्रह्मचारी को

825
01:03:34,320 --> 01:03:38,520
ब्रह्मचारी का उपनयन किया जाता है तीन रात्रि तक ब्रह्मचर्य

826
01:03:38,520 --> 01:03:42,600
धारण करने के बाद वो गुरु के यहां रहता है उसके केस मुंडाए

827
01:03:42,600 --> 01:03:46,840
जाते हैं यह सब वही वेद में लिखा है ये सब हुआ था क्या

828
01:03:46,840 --> 01:03:51,120
रामपाल जी का तो यजुर्वेद में आपने जो 11

829
01:03:51,120 --> 01:03:55,480
सा 16 दिखाया था आप वो आगे पीछे आगे

830
01:03:55,480 --> 01:03:59,640
का और पीछे का दोनों का तीनों तीन श्लोक दिखाइए उसका

831
01:03:59,640 --> 01:04:03,840
आगे पीछे और बीच वाला जो श्लोक है वो तीनों मुझे पढ़ बताइ

832
01:04:03,840 --> 01:04:04,340
पूरा

833
01:04:04,040 --> 01:04:10,040
दिखा देता हूं अभी मैं आपको कुछ बता रहा हूं

834
01:04:31,880 --> 01:04:36,080
महादेव महादेव महादेव अरे इनको अथर्ववेद

835
01:04:36,080 --> 01:04:40,240
11 पा 16 दिखाइए तब तक आप जरा अरे यार आपने क्यों बता

836
01:04:40,240 --> 01:04:46,240
दिया मैं तो पूछने आवे में कहां लिखा है पहले आप बताओ 11 सा 16 है कहां

837
01:04:46,360 --> 01:04:50,520
पर 11 16 प इनको ब्रह्मचारी वाला

838
01:04:50,520 --> 01:04:54,640
अच्छा एक मिनट एक मिनट पढ़ने से पहले मैं एक बात कन्फर्म कर लू आपने कहा मैं

839
01:04:54,640 --> 01:04:59,560
नहीं मानता कि चाही आचार्य बनता है ठीक आपने कहा ना

840
01:04:59,560 --> 01:05:03,760
कहा ना तो आप इतने अंश में वेद को नहीं मानते

841
01:05:03,760 --> 01:05:08,560
ना नहीं मानते ना वेद को मानता हूं

842
01:05:08,560 --> 01:05:12,640
क्यों जब उसम लिखा है ब्रह्मचारी आचार बनता है आप कह रहे ब्रह्मचारी आचार बनता मैं

843
01:05:12,640 --> 01:05:17,040
नहीं मानता भैया जी दिखाइए तो सही जब तो मैं मानूंगा

844
01:05:17,040 --> 01:05:21,080
लिखा क्या पढ़ाई करी है यार 2004 से आपने क्या

845
01:05:21,080 --> 01:05:25,280
पढ़ाई मेरा वडियो देखने पढ़ाई की थोड़ी बहुत

846
01:05:25,280 --> 01:05:29,320
भैया दिखा म दिखा

847
01:05:29,320 --> 01:05:33,320
रहा हूं दिखा रहा हूं दिखा रहा हूं दिखा रहा हूं मैं दिखा रहा

848
01:05:33,320 --> 01:05:38,160
हूं

849
01:05:38,160 --> 01:05:43,320
एकादश [संगीत]

850
01:05:43,320 --> 01:05:47,960
हम इनको यही नहीं पता कि यजुर्वेद से कि अथर्ववेद से है

851
01:05:47,960 --> 01:05:52,000
पहले ऋगवेद अवेद यजुर्वेद यजुर्वेद में बोला

852
01:05:52,000 --> 01:05:56,640
था आपने अथर वेद है भाई दोबारा देखना जा

853
01:05:56,640 --> 01:06:00,640
चला दे क्या वीडियो चलाए क्या मैं देख रहा हूं देख रहा हां

854
01:06:00,640 --> 01:06:06,640
सॉरी सॉरी सॉरी अथर लिखा बोला हां ठीक

855
01:06:08,600 --> 01:06:12,000
है

856
01:06:12,000 --> 01:06:18,000
16 श्री राम जय

857
01:06:23,440 --> 01:06:29,440
राम कैसे दिखाऊं इसको स्क्रीन परही करके दिखा

858
01:06:36,280 --> 01:06:42,280
दीजिए

859
01:06:51,400 --> 01:06:57,400
सा एक मिनट रुकिए

860
01:07:04,800 --> 01:07:08,800
सातवा सूक्त है ना और उसका

861
01:07:08,800 --> 01:07:12,800
सवा पांचवे में कने आपने

862
01:07:12,800 --> 01:07:17,360
बोला ता मैंने गलत बोला था

863
01:07:17,360 --> 01:07:21,840
तो गलत क्यों बोला आपने जिससे की कोई व

864
01:07:21,840 --> 01:07:26,000
अधिकृत ना हो जाए 11 सा 16

865
01:07:26,000 --> 01:07:30,200
अरे भाई प्रमाण दिखा रहा हूं आपको 11 में है वो प्रमाण

866
01:07:30,200 --> 01:07:34,880
जो मैं बोल रहा हूं ब्रह्मचारी आचार्य बनता हैता

867
01:07:34,880 --> 01:07:38,880
शब देता उसका फर दिखा दूंगा पले

868
01:07:38,880 --> 01:07:42,640
ली उसके बाद पगा पहले दिखा

869
01:07:42,640 --> 01:07:48,000
दो आप पले प पले

870
01:07:48,000 --> 01:07:52,000
प ब्रचा

871
01:07:52,000 --> 01:07:58,000
वाला ये दिख रहा है क्या लिखा हुआ है अथर वेद

872
01:07:58,880 --> 01:08:03,200
हां ये दिख रहा है स्क्रीनशॉट ले लो भैया इसका बस

873
01:08:03,200 --> 01:08:07,760
बस ज्यादा मत दिखाइए वो मंत्र पढ़ेगा कोई रहने दीजिए आप बस उसकी

874
01:08:07,760 --> 01:08:12,080
हिंदी पढ़ दीजिए ठीक है तो

875
01:08:12,080 --> 01:08:16,280
यह मंत्र जो है वह आचार्य से शुरू होता है ठीक है तो

876
01:08:16,280 --> 01:08:20,680
पहा आचार्य इसके आगे क्या लिखा हुआ है

877
01:08:20,680 --> 01:08:24,720
ब्रह्मचारी यानी आचार्य ब्रह्मचारी होता है

878
01:08:24,720 --> 01:08:28,880
ठीक है आगे तो पढ़ने की आवश्यकता नहीं ये एक सेंटेंस बता दिया आपका क्या

879
01:08:28,880 --> 01:08:33,320
पूरा सूक्त पूरा सूक्त है ब्रह्मचारी का सुन लो कान खोल के सुनो आचार

880
01:08:33,320 --> 01:08:37,600
पहले आचार्य पहले ब्रह्मचारी रहता है फिर

881
01:08:37,600 --> 01:08:41,680
आचार्य बनता है ब्रह्मचारी गृहस्थ बनकर

882
01:08:41,680 --> 01:08:45,920
प्रजापति यानी संतानों संतानों का पालन पोषण करने वाला बनता

883
01:08:45,920 --> 01:08:50,200
है सवा सवा पढ़िए सवा भैया जी पूरा सुन

884
01:08:50,200 --> 01:08:54,440
तो लेने दीजिए अरे 16 प आ जाते हैं सीधे

885
01:08:54,440 --> 01:08:58,640
16 16 ही पढ़ रहा हूं मैं जो आचार्य

886
01:08:58,640 --> 01:09:04,240
आचार्य ब्रह्मचारी होता है और प्रजा का

887
01:09:04,240 --> 01:09:08,360
परिपालय होता है स्वामी होता है यही

888
01:09:08,360 --> 01:09:12,720
है आगे लास्ट में अवत है अवत का मतलब होता ही है होता होता है यानी कि आचार्य

889
01:09:12,720 --> 01:09:16,920
कौन बना ब्रह्मचारी

890
01:09:16,920 --> 01:09:22,160
फर ये पूरा सूक्त ब्रह्मचारी का

891
01:09:22,160 --> 01:09:26,280
है मतलब ये जो सत आपने पहला और

892
01:09:26,280 --> 01:09:30,360
उसके दूसरा वाला पढ़ के बताइए मुझे पीछे से पढ़ दो भैया वो कोपन

893
01:09:30,360 --> 01:09:34,880
मेखला सब आ जाएगा

894
01:09:34,880 --> 01:09:40,360
उसम कौन सा 1 13 पढ़

895
01:09:40,360 --> 01:09:44,400
दूं पढ़ देता हूं अग्नि

896
01:09:44,400 --> 01:09:48,560
सूर्य चंद्र वायु और जल में ब्रह्मचारी सविधा को अर्पित करता है

897
01:09:48,560 --> 01:09:52,880
सविधा की ज्वाला ये तो पूरा वो बता रहे हैं स्टेप्स

898
01:09:52,880 --> 01:09:58,200
सविधा की ज्वाला मैं पता हूं मैं पढ़ता मिनट मैं पढ़ता

899
01:09:58,200 --> 01:10:02,520
हूं आचार्य पाच सूक्त

900
01:10:02,520 --> 01:10:06,520
नंबर पांच एक मैं पढ़ रहा हूं मैं फोल

901
01:10:06,520 --> 01:10:10,880
लिया आपने जो अथर्ववेद में आपने दिखाया कि

902
01:10:10,880 --> 01:10:15,520
ब्रह्मचारी ही आचार्य बनने के योग्य है ब्रह्मचारी

903
01:10:15,520 --> 01:10:19,640
ही आचार्य बनता है ब्रह्मचारी ही आचार्य

904
01:10:19,640 --> 01:10:24,240
बनता है तो जो भगवत गीता में भगवत गीता में

905
01:10:24,240 --> 01:10:28,320
जो भगवत गीता जिसने लिखी है तो उसने शायद यह

906
01:10:28,320 --> 01:10:31,600
गलत लिखा होगा कि

907
01:10:31,600 --> 01:10:35,920
जो उल्टे लटके हुए पीपल के वृक्ष के जो वेद

908
01:10:35,920 --> 01:10:38,880
को बता देगा

909
01:10:38,880 --> 01:10:43,040
वो पूर्ण परमात्मा की जान

910
01:10:43,040 --> 01:10:47,360
अरे मेरे भाई उल्टे पीपल के वृक्ष के रूप में मैं अभी तुमको एक बढ़िया सी

911
01:10:47,360 --> 01:10:51,680
बता दूं कोई तो उससे ये हो जाएगा मैं भी तत्वदर्शी

912
01:10:51,680 --> 01:10:54,240
हूं

913
01:10:54,240 --> 01:10:55,760
एक गु

914
01:10:55,760 --> 01:11:00,440
से पहले आपके गुरुओ ने क्यों नहीं बताया फिर

915
01:11:00,440 --> 01:11:06,440
उस पीपल के क् के विषय

916
01:11:06,880 --> 01:11:11,480
में मिनट मिट मिनट आपने वेटिकन सिटी देखा है

917
01:11:11,480 --> 01:11:16,240
क्या वेटिकन सिटी देखा है क्या आपने नहीं

918
01:11:16,240 --> 01:11:20,400
नहीं देखा तो इसका मतलब वेटिकन सिटी है नहीं इस दुनिया में

919
01:11:20,400 --> 01:11:24,960
अरे भैया उन्होंने बताया आपने नहीं देखा तो इसम हम क्या करें

920
01:11:24,960 --> 01:11:28,920
तो बताना चाहिए ना इतनी सारी

921
01:11:28,920 --> 01:11:33,120
वीडि आपसे जब रामपाल ने ये कहा किसी ने नहीं बताया

922
01:11:33,120 --> 01:11:38,080
तो आपने पूछा जाके आचार्यों से

923
01:11:38,080 --> 01:11:42,440
मैं निरे गुरुओ से मिला हूं रे आचार्य से मिला हूं आपके जो पने

924
01:11:42,440 --> 01:11:46,560
जो चीज नहीं सुनी है नहीं देखी है वो चीज इस दुनिया में अस्तित्व

925
01:11:46,560 --> 01:11:49,920
नहीं

926
01:11:49,920 --> 01:11:54,240
रखती हा रखती है तो इसका मतलब

927
01:11:54,240 --> 01:11:58,360
यह नहीं सिद्ध होता आपने अगर नहीं जाना आपने नहीं सुना तो इसका

928
01:11:58,360 --> 01:12:02,800
मतलब आचार्यों ने उल्टे वृक्ष की व्याख्या की कि नहीं की यह सिद्ध नहीं

929
01:12:02,800 --> 01:12:06,840
होता जितने भी आचार्य नहीं मैं बता रहा हूं ना आपको जितने भी आचार्य

930
01:12:06,840 --> 01:12:12,160
हैं वो ब्रह्मा विष्णु महेश तक ही सीमित है उनसे आगे का ज्ञान नहीं बता

931
01:12:12,160 --> 01:12:16,160
रहे रट विद्या प आ गए हो गया हा

932
01:12:16,160 --> 01:12:20,360
अभी बात चल रही थी 11 पा 16 में लिखा है ब्रह्मचारी

933
01:12:20,360 --> 01:12:25,480
आचार्य बनता है अब ये बता उसको मानते हो कि नहीं

934
01:12:25,480 --> 01:12:31,400
दूसरी बात

935
01:12:31,400 --> 01:12:37,400
जाना ब की

936
01:12:37,840 --> 01:12:41,840
क्या एक मिनट रुक जाओ जब व्यक्ति को मेहनत करके

937
01:12:41,840 --> 01:12:46,400
अवेद खोल के दिखा दिया तो तुरत भगवत गीता में य लिखा अरे भैया

938
01:12:46,400 --> 01:12:50,400
पहले आप इसको मानो मैं इस बात को नहीं मानता ब्रह्मचारी

939
01:12:50,400 --> 01:12:54,440
ही आचार्य बनता है भगवत

940
01:12:54,440 --> 01:12:58,560
गीता की ब्रह्मचारी की जो आपने व्याख्या की करेंगे दूसरी बात पहले

941
01:12:58,560 --> 01:13:02,800
इसको क्लियर करो ब्रह्मचारी आपने जो व्याख्या की थी

942
01:13:02,800 --> 01:13:06,800
वो व्याख्या मेरे गुरु पर गुरु पर सिद्ध होती

943
01:13:06,800 --> 01:13:10,800
है मैं उसकी बात करूंगा मेरे भाई आप पहले मुझे

944
01:13:10,800 --> 01:13:15,480
क्लियर करो ब्रह्मचारी ही आचार्य बनता है इसको मानते हैं कि

945
01:13:15,480 --> 01:13:19,560
नहीं इससे पहले मैं बता दूं क्लियर आपको एक

946
01:13:19,560 --> 01:13:25,280
बता दू इससे पहले मैं ये ब्रम में था आप ब्रह्मचारी

947
01:13:25,280 --> 01:13:28,160
बात करेंगे

948
01:13:28,160 --> 01:13:32,520
ता के अनुसार तत्वदर्शी है कि नहीं हम लोग बात करेंगे

949
01:13:32,520 --> 01:13:36,600
हम लोग बात करेंगे भाई मगर पहले इसको क्लियर करो जब वेद की

950
01:13:36,600 --> 01:13:40,760
बात खोली है तुमने 11 पा 16 चल रहा है तो इसको क्लियर

951
01:13:40,760 --> 01:13:44,880
करो ब्रचा आचार बता मानते हो जवाब

952
01:13:44,880 --> 01:13:46,880
दे रहा

953
01:13:46,880 --> 01:13:51,160
आपने जिस प्रकार ब्रह्मचारी की व्याख्या की थी उस

954
01:13:51,160 --> 01:13:56,400
प्रकार क्या रामपाल जी महाराज में वो गुण नहीं है

955
01:13:56,400 --> 01:14:00,920
रामपाल जी महाराज का कोपन मेखला पहन के जने कहां से हुआ है

956
01:14:00,920 --> 01:14:05,160
बताओ लिखा है उसम लिखा ब्रह्मचारी होता है वो जिसका

957
01:14:05,160 --> 01:14:09,280
कोपन मेखला पहनकर वो जने धारण करता है कहां ज

958
01:14:09,280 --> 01:14:14,600
धारण है जने पहनते है क्या सिखा है क्या ये सब है ब्रह्मचारी

959
01:14:14,600 --> 01:14:19,400
में जने पहने वाला और यय क लिखा हुआ है

960
01:14:19,400 --> 01:14:23,520
नहीं नहीं दिखाइए मुझे कहा लिखा हुआ है दिखा रहा दिखा रहा

961
01:14:23,520 --> 01:14:27,560
नहीं शिवाय इतना बताने की जरूरत नहीं एक चीज बता दी ना पहले

962
01:14:27,560 --> 01:14:31,640
अभी वो बता दो फिर यह बता दो फिर ये बता दो सब हा पहले पहले तुम

963
01:14:31,640 --> 01:14:35,880
ये क्लियर करो क्योंकि जब तुम्हें दिखा देते हो उसके तुम तुरंत गीता प भागते

964
01:14:35,880 --> 01:14:40,080
हो दिखा देंगे तो तत्वदर्शी मानना बंद कर

965
01:14:40,080 --> 01:14:44,320
दोगे क्योंकि मेरे दिखा देंगे तो तत्वदर्शी मानना

966
01:14:44,320 --> 01:14:49,680
बंद कर दोगे नहीं मानेंगे तो

967
01:14:49,680 --> 01:14:53,720
क्यों कह दिखा तुम्हारे लिए ये वेद

968
01:14:53,720 --> 01:14:57,120
प्रमाण नहीं है पाखंड

969
01:14:57,120 --> 01:15:01,200
वेद प्रमाण नहीं है तुम्हारे लिए क्योंकि

970
01:15:01,200 --> 01:15:01,920
कबीर भगवान ने

971
01:15:01,920 --> 01:15:05,720
यह कहा

972
01:15:05,720 --> 01:15:10,840
थामा अच्छा ये भी कह दिया

973
01:15:10,840 --> 01:15:16,840
था और क्या क्या कहा था [संगीत]

974
01:15:16,880 --> 01:15:20,880
उन्होंने क्यों भाई जब नहीं मानना है तो क्यों मेहनत करवाते हो जिससे की

975
01:15:20,880 --> 01:15:24,960
तब तक हम जब तक सिद्ध कर पाए अपने आप को उतना कर ले

976
01:15:24,960 --> 01:15:29,680
बोल खुल जाए तब कहे हम वैदिक नहीं है हम तो भैया वो कबीर सागर को मानने वाले हैं मानो ना भाई

977
01:15:29,680 --> 01:15:35,680
वेदों के आधार पर बात मत करो

978
01:15:36,560 --> 01:15:40,800
हम अच दय नमः गोविंदाय

979
01:15:40,800 --> 01:15:46,800
नमः माधवा

980
01:15:49,960 --> 01:15:54,040
नमः अरे 11 पीछे से जहां से जनेऊ हो रहा है वहां से पढ़ो

981
01:15:54,040 --> 01:15:58,160
ना आप उसम ही है 11 की जरूरत नहीं है ना मैं वो कह रहा हूं अरे प

982
01:15:58,160 --> 01:16:03,720
प दो जो सुनने वाले उनको पता चल जाए

983
01:16:03,720 --> 01:16:08,240
श्रीराम अरे भैया वो जो एक उसकी

984
01:16:08,240 --> 01:16:12,720
दे देता हूं

985
01:16:12,720 --> 01:16:18,720
मैं

986
01:16:23,920 --> 01:16:28,680
अब सूक्त नंबर दो सूक्त नंबर तीन

987
01:16:28,680 --> 01:16:33,930
सूक्त नंबर

988
01:16:33,930 --> 01:16:39,930
[संगीत]

989
01:16:40,800 --> 01:16:46,800
चार हा देख ये है

990
01:16:48,680 --> 01:16:52,880
ब्रह्मचारी विचरण करना विचरण करना देव के मन में लगाने वाला

991
01:16:52,880 --> 01:16:58,400
ये तो पहला दूसरा है

992
01:16:58,400 --> 01:17:03,360
च अनुगामी होना शिवराम आपके जी की डिक्शनरी जरा दिखाए

993
01:17:03,360 --> 01:17:07,360
भाई साहब स्क्रीन पर य

994
01:17:07,360 --> 01:17:11,800
सूक्त ये आपका अनुवाद तीन सूक्त पाच

995
01:17:11,800 --> 01:17:16,080
ब्रह्मचारी को आचार्य अपने ज्ञान गर्भ में धारण

996
01:17:16,080 --> 01:17:20,240
करता है तीन रात्रि के पर्यंत

997
01:17:20,240 --> 01:17:25,040
और फिर मतलब ज्ञान गर्भ यानी की उसम क्या लिखा अपने

998
01:17:25,040 --> 01:17:29,800
क्या बोलेंगे कुल में गुरुकुल में उसको रखता है अपने पास तीन रात्रि तक

999
01:17:29,800 --> 01:17:34,480
ठीक है उसका पोषण करता है ठीक है और

1000
01:17:34,480 --> 01:17:38,480
और फिर उसके पैदा उसके उससे पैदा हुए ज्ञान

1001
01:17:38,480 --> 01:17:42,640
को मतलब देखने के लिए फिर देवता भी आते हैं

1002
01:17:42,640 --> 01:17:46,800
मतलब ऐसा ऐसा प्रोसेस होता है जब वो वापस आता है हा

1003
01:17:46,800 --> 01:17:51,240
ऐसा मतलब कहने का देवता क्या देवता के आने का अर्थ ये है कि

1004
01:17:51,240 --> 01:17:56,320
मब उस ब्रह्मचारी को फिर देवता भी प्रणाम करते हैं जसे गुरुदेव ने बताया ना

1005
01:17:56,320 --> 01:18:00,320
वो स्वयं इंद्र के सामने भी नहीं झुकेगा जब वो प्रक बोलते है लेकिन माता

1006
01:18:00,320 --> 01:18:03,680
आ गई तो दंड सहित झुकना पड़ता है ब्रह्मचारी ना

1007
01:18:03,680 --> 01:18:07,920
हो तो उस सम माता का प्र बता उस समय य चीज है देवता भी आकर य

1008
01:18:07,920 --> 01:18:13,800
करते हैं ये कौन सा श्लोक है यह है तीसरा तीसरा मंत्र

1009
01:18:13,800 --> 01:18:18,040
मंत्र तीसरा मंत्र हा भया य देख लो ब्रज का शब्द अर्थ क्या है

1010
01:18:18,040 --> 01:18:22,440
शिवराम आपके की डिक्शनरी है इसमें ब्रज का अर्थ

1011
01:18:22,440 --> 01:18:26,560
आना पहुंचना दोनों है आना सहारा

1012
01:18:26,560 --> 01:18:30,680
लेना आजा आना ब्रज का अर्थ बता रहे भैया अब

1013
01:18:30,680 --> 01:18:34,880
बताओ आपकी कौन सी डिक्शनरी है ब्रज मुझे

1014
01:18:34,880 --> 01:18:39,240
ब्रज का शब्द दिखा नहीं ब्रज शब्द ठीक से दिखा नहीं दिखा

1015
01:18:39,240 --> 01:18:41,640
दो

1016
01:18:41,640 --> 01:18:47,640
भैया मैं प्रिंट करके लिख देता हूं कुछ अभी

1017
01:19:02,200 --> 01:19:06,480
सब इनको बड़ा करके दिखा दो भैया मिला

1018
01:19:06,480 --> 01:19:10,760
टॉप लेफ्ट में है ऊपर फ उसके अर्थ लिखे हैं उसमें

1019
01:19:10,760 --> 01:19:16,400
ऊपर दिख रहा है आपको टॉप लेफ्ट देखिए बिल्कुल टॉप लेफ्ट में लिखा है

1020
01:19:16,400 --> 01:19:20,800
ब्रज ब लिखा दिखा दिखा

1021
01:19:20,800 --> 01:19:25,640
इसका अर्थ देखिए लाल गोले में क्या लिखा है आना

1022
01:19:25,640 --> 01:19:28,880
सहारा लेना

1023
01:19:28,880 --> 01:19:33,560
पहुंचना बस बस ठीक है अब बताइए भैया

1024
01:19:33,560 --> 01:19:37,560
उसका अर्थ इतना नीचे क्यों लिखा हुआ है पूरा पढ़ने देते ना मुझे

1025
01:19:37,560 --> 01:19:41,720
भैया एक श सत बताइए सनातन सिद्धांत बताइए कि वो

1026
01:19:41,720 --> 01:19:45,760
ऊपर ही लिखा जाएगा फालतू बातें करवा लो

1027
01:19:45,760 --> 01:19:50,640
बस अब अब बैठ के व्याकरण जाएंगे आपको

1028
01:19:50,640 --> 01:19:54,680
बताइए ऊपर लिखा है नीचे लिखा है

1029
01:19:54,680 --> 01:19:58,680
अब आप ये बताओ सब छोड़ो आपके प्रश्नों के जवाब हमने

1030
01:19:58,680 --> 01:20:02,360
खूब दिए अब आप ये बताओ

1031
01:20:02,360 --> 01:20:06,480
कि क्या कबीर यानी कि रामपाल

1032
01:20:06,480 --> 01:20:11,520
दास जी के द्वारा परिभाषित प्रतिपादित होने वाला

1033
01:20:11,520 --> 01:20:16,200
ईश्वर सर्वशक्तिमान सर्वव्यापक है या

1034
01:20:16,200 --> 01:20:20,640
नहीं बिल्कुल सर्वशक्तिमान सर्वव्यापक है

1035
01:20:20,640 --> 01:20:25,760
सर्वव्यापक का अर्थ क्या होता है हम बताइए

1036
01:20:25,760 --> 01:20:29,960
आप बताइए आप सर्वव्यापक

1037
01:20:29,960 --> 01:20:30,760
का अर्थ यह होता

1038
01:20:30,760 --> 01:20:36,600
है कि वह सब कुछ कर सकता है सर्वव्यापक का अर्थ य होता

1039
01:20:36,600 --> 01:20:40,880
है वा स आता है जैसे लोगों पर

1040
01:20:40,880 --> 01:20:44,920
भैया सच में जैसे

1041
01:20:44,920 --> 01:20:47,120
लोगों

1042
01:20:47,120 --> 01:20:50,680
प तो आप बता

1043
01:20:50,680 --> 01:20:54,720
दीजिए तो आपने बो उस

1044
01:20:54,720 --> 01:20:59,120
की तरफ से आर रहे वो सर्व शक्तिमान है

1045
01:20:59,120 --> 01:20:59,620
सब कुछ

1046
01:20:59,480 --> 01:21:03,760
कर सकता है सर्वव्यापक व्यापक का अर्थ क्या होता है मेरे

1047
01:21:03,760 --> 01:21:07,960
भाई देखिए अमित जी जब आपसे पूछा कि आपका ईश्वर सर्वशक्तिमान

1048
01:21:07,960 --> 01:21:12,000
है सर्वव्यापक है आपने बोला हां है तो पूछना

1049
01:21:12,000 --> 01:21:16,000
चाह रहे हैं आपसे हाथ जोड़ के कि सर व्यापक का अर्थ क्या होता है तो आप

1050
01:21:16,000 --> 01:21:20,520
कुछ और बता रहे हैं हा नहीं सर्वव्यापक का अर्थ नहीं

1051
01:21:20,520 --> 01:21:24,680
पता नहीं पता ना यं ही बोल दिया ना

1052
01:21:24,680 --> 01:21:28,920
इसी को कहते हैं अं भक्ति मेरे भाई तो भैया जी आपने ये

1053
01:21:28,920 --> 01:21:32,920
कहा आपने पहले सर्वशक्तिमान क्यों बोला था दोनों

1054
01:21:32,920 --> 01:21:37,480
बोला ना मैंने सर्वशक्तिमान सर्वव्यापक है या नहीं और फिर मैंने जब आपने सर्वशक्तिमान

1055
01:21:37,480 --> 01:21:41,520
कहा तो फिर मैंने क्लियर किया सर्वव्यापक है कि नहीं तो आपने कहा हां है

1056
01:21:41,520 --> 01:21:45,520
अरे भाई बोल दो कि सर्वव्यापक का पहले मुझे अर्थ बताओ फिर मैं कहता हूं कि

1057
01:21:45,520 --> 01:21:49,520
हां है कि नहीं है अभी मैं इंग्लिश में बो मैं

1058
01:21:49,520 --> 01:21:53,520
जबरदस्ती कोई गलत अर्थ नहीं बता रहा मैं आपसे मैं आपसे कह रहा

1059
01:21:53,520 --> 01:21:57,800
हूं जबरदस्ती कोई अर्थ नहीं बता रहा जो मुझे नहीं पता सर्वव्यापक

1060
01:21:57,800 --> 01:21:58,400
का अर्थ

1061
01:21:58,400 --> 01:22:02,760
तो नहीं पता जस्ती उता

1062
01:22:02,760 --> 01:22:06,960
सर्वव्यापक का अथ जब आपको सर्वव्यापक का अर्थ नहीं पता तो आपने क्यों

1063
01:22:06,960 --> 01:22:11,320
कहा हा व सर्वव्यापक भी है

1064
01:22:11,320 --> 01:22:15,560
आप आपने आपने क्यों कहा व सर्वव्यापक

1065
01:22:15,560 --> 01:22:19,760
भी है जब आपको उसका अर्थ नहीं पता अगर

1066
01:22:19,760 --> 01:22:23,960
सोच मैंने कोई गाली दे दी होती जिसका अर्थ

1067
01:22:23,960 --> 01:22:27,960
आपको नहीं पता है और मैं पूछता क्या रामपाल जी है आप बोल देते य भी

1068
01:22:27,960 --> 01:22:33,960
है फिर क्या होता हसते लोग तो

1069
01:22:34,440 --> 01:22:38,440
आप को मिक्स करके क्यों बोल रहे क्या मिक्स

1070
01:22:38,440 --> 01:22:43,080
बोल रहे भाई तो पूछ आपने ये बोला है

1071
01:22:43,080 --> 01:22:49,080
सक्तिमान है सर्वव्यापक है तो एक एक करके क्वेश्चन कीजिए

1072
01:22:49,760 --> 01:22:52,760
ना दोबारा सुनलो दोबारा सुनलो मैंने क्या कहा

1073
01:22:52,760 --> 01:22:57,080
था मैंने पहले कहा क्या रे

1074
01:22:57,080 --> 01:23:01,320
भाई सुन लो सुन लो मैंने कहा क्या रामपाल दास

1075
01:23:01,320 --> 01:23:05,720
जी के द्वारा प्रतिपादित परिभाषित होने वाला जो ईश्वर है वो सर्वशक्तिमान

1076
01:23:05,720 --> 01:23:09,880
सर्वव्यापक है कि नहीं शास्त्रों में जब भी भगवान

1077
01:23:09,880 --> 01:23:13,960
की परम सुनो परम ब्रह्म की बात होती है ऐसे ही होती है सर्वशक्तिमान

1078
01:23:13,960 --> 01:23:19,960
सर्वज्ञ सर्वव्यापक एक साथ अब बोल दो वो भी घुमाते

1079
01:23:21,320 --> 01:23:25,720
हैं आप एक हो जाइए भाईब

1080
01:23:25,720 --> 01:23:29,840
एक जगह स्थिर हो जाइए कोई प पढ़े लिखे

1081
01:23:29,840 --> 01:23:35,200
हो रामपाल जी के शिष्य आना चाहे तो आ सकते भैया वो लाइ वो कर दो

1082
01:23:35,200 --> 01:23:39,240
पब्लिक देखो या तो व्यक्ति बहुत इंटेलेक्चुअल हो

1083
01:23:39,240 --> 01:23:43,560
तब उससे बात करने में दिक्कत हो सकती है बहुत इंटेलेक्चुअल हो उसका

1084
01:23:43,560 --> 01:23:48,400
स्तर या फिर बिल्कुल ही बम हो तब आपके सर में दर्द हो

1085
01:23:48,400 --> 01:23:52,440
जाएगा अब पहले हम इनको यह बताए कि सर्वव्यापक क्या होता है और

1086
01:23:52,440 --> 01:23:56,480
पहले कह दिया हा वो सर्वव्यापक भी है अभी मान लो मेरी जगह कोई

1087
01:23:56,480 --> 01:24:00,600
गलत व्यक्ति होता व मां की बहन की कोई गाली दे देता इनको क्या तुम्हारा

1088
01:24:00,600 --> 01:24:06,600
कभी तुम्हारा जो कबीर है जो रामपाल है वो ऐसा है तोय उसम हां

1089
01:24:07,320 --> 01:24:13,320
है बताइए एक कहावत

1090
01:24:13,320 --> 01:24:17,840
है परमात्मा सर्व शक्तिमान

1091
01:24:17,840 --> 01:24:22,160
है सुन लीजिए आपके भले के लिए एक बात बता रहा हूं

1092
01:24:22,160 --> 01:24:26,320
100 मूर्ख दोस्तों से अच्छा एक बुद्धिमान दुश्मन होता

1093
01:24:26,320 --> 01:24:30,360
है हम बंदरवाल कहानी सुनी है ना आपने

1094
01:24:30,360 --> 01:24:34,640
सुनी है एक राजा था उसका एक बंदर

1095
01:24:34,640 --> 01:24:39,040
था वो राजा से बहुत प्रेम करता था

1096
01:24:39,040 --> 01:24:43,080
एक दिन राजा सो रहा होता है राजा की नाक पर मक्खी बैठ

1097
01:24:43,080 --> 01:24:47,160
जाती है बंदर सोचता है मेरे मित्र की नाक पर मक्खी क्यों

1098
01:24:47,160 --> 01:24:51,280
बैठेगी वो तलवार से उसे काने चलता है ये

1099
01:24:51,280 --> 01:24:55,760
कए बंद कीजिए आपने जो स्याप मैं मैं फला

1100
01:24:55,760 --> 01:24:59,320
मैं भाई साहब मेरी

1101
01:24:59,320 --> 01:25:03,320
बात अभी चलेंगे अभी चलेंगे अब पहले इस कहानी को सुनो

1102
01:25:03,320 --> 01:25:07,480
आपको नहीं पता था जो आपकी आवाज सुनाई नहीं देगी लोगों को अभी यह

1103
01:25:07,480 --> 01:25:11,520
बात मेरी पूरी हो जाने दो फिर बोलना तो जब बंदर

1104
01:25:11,520 --> 01:25:16,600
ने देखा कि राजा की नाक पर मक्खी बैठी हुई है तो बंदर तलवार से उसे काटने

1105
01:25:16,600 --> 01:25:20,640
चला राजा का वहां पर धन था जिसे चुराने के लिए एक

1106
01:25:20,640 --> 01:25:22,320
चोर आया था जिसने देखा

1107
01:25:22,320 --> 01:25:27,280
कि मक्खी को मारने के चक्कर में ये तो राजा कोही मारे दे रहा है

1108
01:25:27,280 --> 01:25:31,520
तो उस चोर ने बंदर को मार कर के राजा की जान बचाई आज

1109
01:25:31,520 --> 01:25:37,200
आप वोह बंदर है और आपकी अपेक्षाकृत मैं वह चोर

1110
01:25:37,200 --> 01:25:43,200
हूं आप वही बंदर

1111
01:25:44,120 --> 01:25:48,920
है खैर अब चलते हैं बात आगे सर्वव्यापक

1112
01:25:48,920 --> 01:25:53,240
का अर्थ है कि क्या इस पूरे संसार के हर

1113
01:25:53,240 --> 01:25:57,240
जगह हर कण में कबीर है या नहीं

1114
01:25:57,240 --> 01:26:01,720
है नी प्र हर जगह भगवान [संगीत]

1115
01:26:01,720 --> 01:26:06,200
है हर जगह है हर जगह

1116
01:26:06,200 --> 01:26:10,200
और मैं अगर आपको वह वीडियो दिखा दूं रामपाल इत्यादि के कड़कड़ में नहीं है

1117
01:26:10,200 --> 01:26:13,440
भगवान उसकी शक्ति

1118
01:26:13,440 --> 01:26:17,560
है भगवान नहीं है उसकी शक् मेरी

1119
01:26:17,560 --> 01:26:21,680
बात सुनो ये तो आपने वही बात कह दी के

1120
01:26:21,680 --> 01:26:25,920
पानी समुद्र में है और य कोई ईट गीली निकल आई

1121
01:26:25,920 --> 01:26:30,760
बाहर तो आप यह कहेंगे कि ईट में समुद्र नहीं है

1122
01:26:30,760 --> 01:26:35,320
ईट में समुद्र ईट में संपूर्ण समुद्र तो नहीं

1123
01:26:35,320 --> 01:26:37,400
है मैं सपोज ट कह रहा

1124
01:26:37,400 --> 01:26:41,440
हूं कि मैंने कपड़ा समुद्र के अंदर बिया

1125
01:26:41,440 --> 01:26:45,600
और उससे बाहर निकाला वो गीला रह गया यानी कि उसका जो

1126
01:26:45,600 --> 01:26:50,560
अंश उसके अंदर आ गया उस अंश

1127
01:26:50,560 --> 01:26:55,880
क कपड़े में समुद्र नहीं है सुनो तो हां

1128
01:26:55,880 --> 01:27:00,520
उसकी उसकी पावर होना या वो होना बात तो एक ही है ना

1129
01:27:00,520 --> 01:27:04,800
अभी ठीक है मैं आपसे दोबारा पूछ लेता हूं क्या जैसे कबीर

1130
01:27:04,800 --> 01:27:09,320
सतलोक में बैठा है जितना ताकतवर है

1131
01:27:09,320 --> 01:27:13,920
उसी रूप में वो कण कण में है कि

1132
01:27:13,920 --> 01:27:18,320
नहीं उनकी शक्ति सारे जग में है वो

1133
01:27:18,320 --> 01:27:22,440
उसी रूप में सब लोगों के शक्ति है यानी कि

1134
01:27:22,440 --> 01:27:28,080
वो नहीं है उनकी शक्ति है

1135
01:27:28,080 --> 01:27:32,360
वो कहीं भी आ जा सकते हैं व अपनी इच्छा से कुछ भी कर सकते हैं और उनकी

1136
01:27:32,360 --> 01:27:36,440
शक्ति सारे जगत में है और

1137
01:27:36,440 --> 01:27:40,520
पूछा है मैंने जो पूछा है वो नहीं है उनकी शक्ति

1138
01:27:40,520 --> 01:27:45,200
है यह मानते हो हा उनकी शक्ति सारे ब्रह्मांड में

1139
01:27:45,200 --> 01:27:49,640
ठीक है अब मुझे य बताओ कि

1140
01:27:49,640 --> 01:27:55,640
उनकी शक्ति में और उनमें अंतर है ना

1141
01:27:55,800 --> 01:27:59,960
उनकी शक्ति में उनमें अंतर है तभी तो कह रहे हो

1142
01:27:59,960 --> 01:28:05,960
कि वो नहीं है उनकी शक्ति

1143
01:28:06,240 --> 01:28:10,240
है हो गया कह तो रहा हूं मैं हा

1144
01:28:10,240 --> 01:28:15,160
अंतर है इसका अर्थ यह है कि जहां पर कबीर बैठे हुए

1145
01:28:15,160 --> 01:28:19,160
हैं जितनी सत्ता कबीर की वहां पर है उतनी

1146
01:28:19,160 --> 01:28:23,360
सत्ता कबीर की वहां पर नहीं है जहां पर वो स्वयं नहीं है उनकी

1147
01:28:23,360 --> 01:28:27,600
शक्ति है

1148
01:28:27,600 --> 01:28:31,640
यह तो बेवकूफी बड़ क्वेश्चन हो गया

1149
01:28:31,640 --> 01:28:36,440
जनता देख रही है कौन बेवकूफ है बंदर कौन है वो भी देखा जनता

1150
01:28:36,440 --> 01:28:40,720
जनता ये तो बात आपने वही कह दी प्रधान नरेंद्र

1151
01:28:40,720 --> 01:28:44,880
मोदी की सत्ता सारे भारत में है और ज बै है वहा नहीं

1152
01:28:44,880 --> 01:28:49,080
है मैं आपसे पूछ बात हो प्रधानमंत्री

1153
01:28:49,080 --> 01:28:53,200
की सत्ता पूरे भारत में है जहा प्रधानमंत्री ब है व उस

1154
01:28:53,200 --> 01:28:57,200
सता नहीं मैं आपको दोबारा क्लियर कर रहा हूं मैं आपको दोबारा

1155
01:28:57,200 --> 01:29:00,120
क्लियर कर रहा करना

1156
01:29:00,120 --> 01:29:04,200
है हम ये कह रहे हैं कि जो उसकी शक्ति है उसमें

1157
01:29:04,200 --> 01:29:08,280
और उसमें अंतर है कबीर में और उसकी शक्ति में

1158
01:29:08,280 --> 01:29:13,760
अंतर है क्या अंतर माना जा सकता

1159
01:29:13,760 --> 01:29:18,120
है उनकी शक्ति में और उनमें जहां वह बैठे

1160
01:29:18,120 --> 01:29:22,320
हैं जितना व देख रहे हैं वह कार्य कर सकते हैं जिस

1161
01:29:22,320 --> 01:29:26,760
प्रकार प्रधानमंत्री नरेंद्र अपने सिंहासन पर बैठा हुआ है

1162
01:29:26,760 --> 01:29:31,120
वहां बैठकर सबको हुकम आदेश दे सकता है

1163
01:29:31,120 --> 01:29:35,120
सुनो प्रधानमंत्री मोदी अभी मुझे मजबूर नहीं

1164
01:29:35,120 --> 01:29:39,120
कर सकता कि मैं उसकी जयकार करू

1165
01:29:39,120 --> 01:29:43,360
इस समय राइट नाउ मगर जो परमेश्वर

1166
01:29:43,360 --> 01:29:49,360
है वो कर सकता है ना कर सकता है कि

1167
01:29:51,000 --> 01:29:55,600
नहीं उन्होने हमें मनुष्य का जन्म दिया है

1168
01:29:55,600 --> 01:29:59,640
ताकि हम इस जन्म में आकर अपनी भक्ति करके मोक्ष प्राप्त करके चले

1169
01:29:59,640 --> 01:30:04,200
जाए यह तो कर्म का लोक है

1170
01:30:04,200 --> 01:30:08,200
अब आ गए जब बात हो रही है कम

1171
01:30:08,200 --> 01:30:12,200
लोग है अपनी इच्छा से अपनी इा से कुछ भी कर सकते

1172
01:30:12,200 --> 01:30:16,200
मैं आपसे कह रहा हूं कि प्रधानमंत्री मोदी जो है यहां

1173
01:30:16,200 --> 01:30:21,240
पर य भगवत गीता रखी हुई है इसको अभी के अभी हवा में उड़ा सकते हैं

1174
01:30:21,240 --> 01:30:25,240
क्या नहीं उड़ा सकते मगर परमेश्वर चाहे

1175
01:30:25,240 --> 01:30:29,280
तो उड़ा सकता है ना उड़ा सकता है तो

1176
01:30:29,280 --> 01:30:33,440
फिर प्रधानमंत्री मोदी का एग्जांपल क्यों दे रहे हो

1177
01:30:33,440 --> 01:30:38,000
प्रधानमंत्री यदि मैं इस देश में कुछ गलत करूंगा क्राइम करूंगा तो वो

1178
01:30:38,000 --> 01:30:42,000
उनके नजर में रहेगा आपसे ठीक है अब निभ नहीं पाएगी

1179
01:30:42,000 --> 01:30:46,040
बहुत देर निभा लिया मैं यह कह रहा हूं मैंने प्रश्न

1180
01:30:46,040 --> 01:30:50,160
ये किया था कि कबीर में और उसकी शक्ति में क्या अंतर

1181
01:30:50,160 --> 01:30:54,240
है कहीं ना कहीं जब आप यह कह रहे हो कि शक्ति अलग है

1182
01:30:54,240 --> 01:30:58,400
कबीर अलग है तो इसका मतलब शक्ति कबीर जितनी ताकतवर

1183
01:30:58,400 --> 01:31:02,520
तो नहीं है ना यानी कि मैं आपको आंसर दे देता

1184
01:31:02,520 --> 01:31:06,080
हूं सही और सटीक यदि कोई शक्ति उनके अंदर

1185
01:31:06,080 --> 01:31:10,680
से निकल रही है वह उनके नियंत्रण में

1186
01:31:10,680 --> 01:31:14,680
है मेरा प्रश्न समझो मेरे भाई मैं किसी

1187
01:31:14,680 --> 01:31:19,280
और में ले जा रहा कबीर परमात्मा यदि

1188
01:31:19,280 --> 01:31:23,280
उनकी शक्ति हर जगह इल्म उनका फैला हुआ है

1189
01:31:23,280 --> 01:31:27,720
तो यानी की शक्ति उनके नियंत्रण में है अरे है

1190
01:31:27,720 --> 01:31:32,000
यानी की शक्ति जो है शक्ति जो है कबीर जी की

1191
01:31:32,000 --> 01:31:36,160
कहीं ना कहीं कम है जितने ताकतवर कबीर

1192
01:31:36,160 --> 01:31:41,640
है उतनी ताकतवर उनकी शक्ति नहीं है तभी तो नियंत्रण में

1193
01:31:41,640 --> 01:31:45,680
है हां हा तो यही

1194
01:31:45,680 --> 01:31:49,760
मैंने कहा कि जहां पर कबीर स्वयं नहीं है उनकी शक्ति

1195
01:31:49,760 --> 01:31:54,000
है वहां पर उनकी सत्ता कबीर की उतनी नहीं है जितनी

1196
01:31:54,000 --> 01:31:58,120
व जहा व स्वय है यही तो कहाने भैया जी आप

1197
01:31:58,120 --> 01:32:02,280
मुझे बिल्कुल निहायत बेवकूफ लग रहे हो आप इसको

1198
01:32:02,280 --> 01:32:06,800
निकल जाइए बहुत देर सर मार लिया आपसे

1199
01:32:06,800 --> 01:32:12,800
हटाइए भैया इनको गुरु चरण दास जी ज श्रीराम

1200
01:32:17,400 --> 01:32:23,400
बताइ आ इंटरनेट वीक है बहुत ज्यादा

1201
01:32:25,800 --> 01:32:29,960
और कोई आना चाहे तो आ जाए जिसके इंटरनेट सही हो वरना इसको फिर

1202
01:32:29,960 --> 01:32:34,120
बढ़ाते हैं काफी देर हो गई है

1203
01:32:34,120 --> 01:32:38,240
यह बात हमने अपने वीडियो में कई बार बता दी है कि अगर हम यह

1204
01:32:38,240 --> 01:32:42,480
कहेंगे कि भगवान कहीं सातव आसमान पर बैठा हुआ है

1205
01:32:42,480 --> 01:32:46,480
और वह नहीं उसकी शक्ति है जगह जगह तो हमें य मानना

1206
01:32:46,480 --> 01:32:50,480
पड़ेगा कि शक्ति और भगवान में अंतर है और जैसे ही हम ये मानेंगे तो

1207
01:32:50,480 --> 01:32:54,880
जो दूसरी एंटिटी बनेगी शक्ति वो कहीं ना कहीं कंपेरटिवली

1208
01:32:54,880 --> 01:32:59,240
टू गॉड वो वीक हो जाएगी और जब वो वीक हो जाएगी

1209
01:32:59,240 --> 01:33:03,560
तो हम यह नहीं कह सकते कि भगवान सर्वत्र एक

1210
01:33:03,560 --> 01:33:07,600
रस होकर के सर्वव्यापी है या उसकी सत्ता सर्वव्यापी

1211
01:33:07,600 --> 01:33:11,640
है नहीं जहां वो बैठा है वहां ज्यादा पावर है और जहां वो

1212
01:33:11,640 --> 01:33:15,720
नहीं है उसकी शक्ति वहा कम पावर है हो गया खंडन

1213
01:33:15,720 --> 01:33:20,040
बाद तो हो गए ना

1214
01:33:20,040 --> 01:33:25,840
भगवान हां भैया कौन आया है

1215
01:33:25,840 --> 01:33:30,280
अमित जी आप जा सकते हैं आपको मर्यादा में रहकर बात करना नहीं आता है

1216
01:33:30,280 --> 01:33:34,440
ठीक है जाइए आप जाइए अंद भक्ति

1217
01:33:34,440 --> 01:33:38,440
करिए बिना अभी वोह तो अच्छा हुआ मैंने सर्वव्यापक पूछा

1218
01:33:38,440 --> 01:33:42,640
था अभी कोई कह देता कि वो बलात्कारी है क्या तो यह कह देते

1219
01:33:42,640 --> 01:33:46,760
कि हां है यही कहते

1220
01:33:46,760 --> 01:33:51,120
तो उनकी गरमा की रक्षा इनके गुरु जो है जिनको ये गुरु मानते हैं उनकी गरमा

1221
01:33:51,120 --> 01:33:55,120
की रक्षा तो मैं कर रहा हूं यहां पे उनके लिए कोई ऐसी चीज चालाकी से मैंने नहीं

1222
01:33:55,120 --> 01:33:59,280
बोली सोचिए मैं बोल सकता था और यह बोल देते हा

1223
01:33:59,280 --> 01:34:03,320
है कोई कोई टिपिकल वर्ड ले आता वर्ड में ले आता हिंदी

1224
01:34:03,320 --> 01:34:07,760
का सर्वव्यापक तो बहुत साधारण वर्ड है बहुत अच्छे अच्छे वर्ड

1225
01:34:07,760 --> 01:34:13,760
है पर स्त्री गामी ना समझ

1226
01:34:14,320 --> 01:34:19,360
पाते अजीब बात है बिल्कुल देना

1227
01:34:19,360 --> 01:34:24,160
चा रामपाल जी की गरिमा की रक्षा करने के लिए

1228
01:34:24,160 --> 01:34:28,480
लोग उनको वो आगे आए और यह संदेश भी प्रचारित

1229
01:34:28,480 --> 01:34:32,560
प्रसारित करें कि जो इस तरह के बिल्कुल बिना पढ़े लिखे टाइप के लोग है

1230
01:34:32,560 --> 01:34:36,760
जिन्ह यह नहीं पता है कि सर्वव्यापक का अर्थ क्या होता है इस तरह के लोगों

1231
01:34:36,760 --> 01:34:40,960
को मना करें कि भाई आप लोग ना जाओ क्योंकि आप जाओगे आप अपनी

1232
01:34:40,960 --> 01:34:45,080
मट्टी तो कुटा होगे ही वहां और हमारी भी कुटा होगे और जो जेल में बैठे जेल

1233
01:34:45,080 --> 01:34:49,440
धाम में बैठे जेल धाम है जेल भी एक धाम है

1234
01:34:49,440 --> 01:34:55,440
ऐसा ही धाम होगा सतलोक

1235
01:34:55,600 --> 01:34:59,960
जाइए भैया अमित जी जय श्री राम

1236
01:34:59,960 --> 01:35:04,560
जय श्री राम जय शी देखाने बहुत देर से दे

1237
01:35:04,560 --> 01:35:08,760
बिल्कुल देख रहा था बहुत देर से आकी मिल गई

1238
01:35:08,760 --> 01:35:12,760
वो साढ़े घंटे जो बिताए थेमा

1239
01:35:12,760 --> 01:35:17,000
मेरे मन में वही प्रश्न आ रहा था मतलब और उसके बाद अभी

1240
01:35:17,000 --> 01:35:21,040
का य जो लास्ट में जब इनको हटाया गया और फिर भी हम मर्यादा में सारी र आज

1241
01:35:21,040 --> 01:35:25,080
तक हमने किसी को गलत नहीं कहा और इन लोगों को पता नहीं क्या हो जाता है

1242
01:35:25,080 --> 01:35:29,120
और ये किसी के भी अपने जो भी संप्रदाय चल रहे हैं

1243
01:35:29,120 --> 01:35:33,280
जो उनके भगत बने घूम रहे हैं उनकी मर्यादा नहीं ख पा रहे समझ

1244
01:35:33,280 --> 01:35:37,320
नहीं आ रहा करना क्या चाते जहा मैं पंकज जी आपको एक संक्षिप्त में

1245
01:35:37,320 --> 01:35:42,640
बात बताऊ जहां पर ईश्वर बाधित होगा वहां पर

1246
01:35:42,640 --> 01:35:48,640
धर्माचक्र स्त हो जाएगा जितना बाधित ईश्वर उतना जो है

1247
01:35:49,800 --> 01:35:53,880
धर्माचक्र के प्रति चला भले ही ले हाथी पर बैठ कर के वो

1248
01:35:53,880 --> 01:35:57,880
ईश्वर है वो ईश्वर है मगर उसके प्रति उतनी आस्था नहीं उत्पन्न हो

1249
01:35:57,880 --> 01:36:01,920
पाती व्यक्ति के अंदर कि वह उसके लिए बिल्कुल अपने आप को

1250
01:36:01,920 --> 01:36:06,000
प्रतिबद्ध करता चला जाए अपने आचरण सुधार ले

1251
01:36:06,000 --> 01:36:10,080
जब सर्वशक्तिमान होता है जहा पर वहीं पर इतने बड़े-बड़े

1252
01:36:10,080 --> 01:36:14,480
त्याग और वैराग्य वाले लोग होते हैं आचार्य

1253
01:36:14,480 --> 01:36:18,600
राम शंकर शुक्ल जी ने दीपावली कौन से दिन मनानी है

1254
01:36:18,600 --> 01:36:22,880
इस बारे में बता दिया है आप लोग उनका वीडियो देख सकते हैं

1255
01:36:22,880 --> 01:36:27,440
क्योंकि इस बार एक चीज आ रही है सामने कि

1256
01:36:27,440 --> 01:36:31,440
दीपावली कौन से दिन मनानी है तो मैं यहां ना बता करके आप लोग

1257
01:36:31,440 --> 01:36:35,520
जाए यह वीडियो है आचार्य राम शंकर शुक्ल जी का

1258
01:36:35,520 --> 01:36:39,680
खुद भी देखे और उन लोगों को पहुंचाए जिनको आपको बताना है

1259
01:36:39,680 --> 01:36:44,560
कि दीपावली कौन से दिन मनानी है बिल्कुल ठीक

1260
01:36:44,560 --> 01:36:50,040
है कौन आ रहा है भाई वेदों में प्रमाण है कबीर भगवान

1261
01:36:50,040 --> 01:36:54,760
है कोई आए भाई चलिए जब तक कोई

1262
01:36:54,760 --> 01:36:59,080
कबीर जी के बारे में जी

1263
01:36:59,080 --> 01:37:03,960
जी आप ही बता दए इनका प्रचार आप ही कर

1264
01:37:03,960 --> 01:37:04,960
दीजिए

1265
01:37:04,960 --> 01:37:09,360
अब यह तो नहीं बता पाए कि शास्त्र में बिल्कुल क्लियर कट लिखा है कबीर

1266
01:37:09,360 --> 01:37:13,120
ये तो नहीं बता पाए अब मैं बताऊंगा

1267
01:37:13,120 --> 01:37:17,160
आज ये कभी बता भी नहीं पाए और मुझे ये मतलब इस तरीके से

1268
01:37:17,160 --> 01:37:21,240
लास्ट में आके ये बात मैंने देखी और मजबूरी में आना पड़ा

1269
01:37:21,240 --> 01:37:25,360
वही चीज बता रहा हमें लिख के बताओ आप ने 2004 से लेकर 20 साल

1270
01:37:25,360 --> 01:37:30,040
करा क्या

1271
01:37:30,040 --> 01:37:34,200
था कबीर 20 वर्ष 20 वर्ष का समय आप समझते

1272
01:37:34,200 --> 01:37:38,200
हो कि 20 वर्ष जो है मतलब अगर अपनी आधुनिक भाषा में भी कुछ भी

1273
01:37:38,200 --> 01:37:42,680
करेंगे तो 20 वर्ष में कहां से कहां तक चीज हो जाती है कुछ नहीं किया इनको सर्वव्यापक

1274
01:37:42,680 --> 01:37:47,000
का अर्थ नहीं मालूम है बताइए भैया वो लिंक देते रहिए बारबार

1275
01:37:47,000 --> 01:37:51,160
लिंक दे दीजिए सर्वव्यापक सर्वव्यापक तो छोड़िए भया लास्ट में अंत

1276
01:37:51,160 --> 01:37:55,400
में आके जो उन्होंने जो अभद्रता करी है इनके

1277
01:37:55,400 --> 01:37:59,560
यहां से य चीज समझ में आ रही है अरे उनको समझ में नहीं आ रहा

1278
01:37:59,560 --> 01:38:03,760
है कुछ कुछ नहीं आ रहा ही है

1279
01:38:03,760 --> 01:38:08,240
की बात तो कबीर पियों से करना ही बेकार होता है बकुल

1280
01:38:08,240 --> 01:38:12,840
उनका हाथ पा ला पड़ जाता है दर्शन की बात करते

1281
01:38:12,840 --> 01:38:17,600
एक बात इसलिए आते हैं कि हमें जो चीज दिखाओ लास्ट

1282
01:38:17,600 --> 01:38:20,400
में सुनो एक बात और बता

1283
01:38:20,400 --> 01:38:24,480
मेरे पास जो मैंने कृष्ण भगवान वाला प्रमाण थाना

1284
01:38:24,480 --> 01:38:28,680
वो मेरे को देवी भागवत बहुत बड़ा है वो खोलना पड़ता मेरे पास

1285
01:38:28,680 --> 01:38:32,680
खुद का लिखा हुआ प्रिंट किया हुआ पीडीएफ था मैंने ये

1286
01:38:32,680 --> 01:38:37,040
दिखाया और उसने इसको मान लिया उसने य नहीं कहा देवी भागवत खोल के

1287
01:38:37,040 --> 01:38:41,080
दिखाओ हालाकि उसम भी लिखा है मगर सोचो इनको

1288
01:38:41,080 --> 01:38:45,120
बेवकूफ बनाना कितना आसान है मैंने यही बोला था बीच में मैं भी कुछ प्रिंट करके

1289
01:38:45,120 --> 01:38:49,920
लिख देता हूं मान लेना उसको फुटबल खेलने मैंने कहा तो

1290
01:38:49,920 --> 01:38:53,960
व अलंकार वालो से मैंने कहा है कि मैं अभी स प्रकाश में

1291
01:38:53,960 --> 01:38:57,960
ये लिख दूं कि भैया उन्होंने माना है दयानंद जी ने कि गिल्ली डंडा

1292
01:38:57,960 --> 01:39:02,200
खेलने से मोक्ष मिलता है तो आप उसको सिद्ध नहीं कर पाओगे आजीवन

1293
01:39:02,200 --> 01:39:06,200
कांटे की नोक पे ये उन्होंने नहीं लिखा क्योंकि गुरु परंपरा को नहीं

1294
01:39:06,200 --> 01:39:10,200
मानते ना बिल्कुल नहीं यह नहीं

1295
01:39:10,200 --> 01:39:14,920
कर पाएंगे हां भैया जय श्री राम गुरु चरण दास

1296
01:39:14,920 --> 01:39:20,920
आपका परिचय हेलो माइक ऑन कर

1297
01:39:21,240 --> 01:39:25,840
मैं आवाज जा रहा है मेरा आर आर

1298
01:39:25,840 --> 01:39:29,920
हेलो जी मेरा आवा मैं संत रामपाल

1299
01:39:29,920 --> 01:39:34,520
जी महाराज जी का अन हूं और मैं बहुत टाइम से

1300
01:39:34,520 --> 01:39:40,080
आप लोग का मैं डिबेट देख रहा था और मैं एक देख रहा

1301
01:39:40,080 --> 01:39:44,680
था का टाइम वेस्ट ना करते हुए आपसे एक बात पूछूंगा सीधे

1302
01:39:44,680 --> 01:39:48,880
आप लोग यह कहते हैं कि आप शास्त्रो चित भक्ति करते

1303
01:39:48,880 --> 01:39:53,440
हैं और जो दूसरे लोग है जो रामपाल को नहीं मानते वो शास्त्र चित भक्ति

1304
01:39:53,440 --> 01:39:57,720
करते हैं आप ये कहते हैं कि वेदों में प्रमाण है कबीर भगवान है

1305
01:39:57,720 --> 01:40:01,800
जी बिल्कुल वो दिखा दीजिए कहां है जी

1306
01:40:01,800 --> 01:40:05,800
एक विवान ये विवान भैया एक काम करते हैं

1307
01:40:05,800 --> 01:40:09,880
ना कि वैसे तो हम तो संत रामपाल जी महाराज जी के नि अनुय फिर भी हमने

1308
01:40:09,880 --> 01:40:14,240
बहुत सारे शास्त्र को

1309
01:40:14,240 --> 01:40:20,240
अपने प्रभु सिंह जी आप तो आ चुके हैं एक

1310
01:40:21,400 --> 01:40:25,640
बार आप म्यूट करिए माइक अन म्यूट करिए इनका

1311
01:40:25,640 --> 01:40:28,280
माइक

1312
01:40:28,280 --> 01:40:32,600
इनका हां जी राम राम जी

1313
01:40:32,600 --> 01:40:36,920
जय श्री राम जय श्री

1314
01:40:36,920 --> 01:40:42,440
राम बताइए वेदों में कहां प्रमाण है कबीर भगवान

1315
01:40:42,440 --> 01:40:46,560
है देखो जी कबीर भगवान है आज से 627

1316
01:40:46,560 --> 01:40:50,560
वर्ष पहले कांशी शहर बनारस में लर त लाब में

1317
01:40:50,560 --> 01:40:54,600
जल के ऊपर कमल के पर प्रक इटर करना

1318
01:40:54,600 --> 01:41:00,440
पड़ेगा जो प्रश्न पूछा उसका उत्तर दीजिए भाई सा वेद

1319
01:41:00,440 --> 01:41:04,720
में भगवान भगवान का मतलब क्या होता है मरे हु को जि

1320
01:41:04,720 --> 01:41:10,720
करहा क पूछ रहा हूं कबीर लिखा है क्या कबीर

1321
01:41:26,360 --> 01:41:30,560
क्या कते आज मैं कुछ रट के आया हूं मैं वो बोलूंगा बस

1322
01:41:30,560 --> 01:41:33,840
छोटे बच्चे की

1323
01:41:33,840 --> 01:41:37,840
तरह भाई एक एक करके चलिए पहले तो यह स्वीकार

1324
01:41:37,840 --> 01:41:42,080
करिए कि हां वेद में नहीं लिखा है कबीर भगवान

1325
01:41:42,080 --> 01:41:46,360
है इसके बाद हम आपकी बात सुनेंगे कि वह भगवान क्यों क्यों माने जाए

1326
01:41:46,360 --> 01:41:50,520
फिर हम उस पर काउंटर करेंगे उन्होंने भगवान का अर्थ बता दिया है मरे

1327
01:41:50,520 --> 01:41:54,920
हुए को जिंदा करने वाला का अर्थ भगवान होता है पता नहीं कौन सा पाणिनी का सूत्र

1328
01:41:54,920 --> 01:41:59,880
लेकर निकालते हैं सुन रहे हैं मेरी बात समझ रहे हैं

1329
01:41:59,880 --> 01:42:03,960
मेरी बात सुन रहे हैं आप बिल्कुल जी सुन रहा हूं मैं

1330
01:42:03,960 --> 01:42:08,080
यह कह रहा हूं एक एक करके चलेंगे पहले अभी बात मैंने बोली है

1331
01:42:08,080 --> 01:42:12,120
क्या वेद में क बीर भगवान है यह

1332
01:42:12,120 --> 01:42:15,560
लिखा है क

1333
01:42:15,560 --> 01:42:19,640
बीर उसके बाद मैं आगे जाऊंगा आपके गुण सुनूंगा भगवान के

1334
01:42:19,640 --> 01:42:23,680
कि भगवान में क्याक गुण आप बता रहे हैं वो है कि नहीं है वो बात की अभी

1335
01:42:23,680 --> 01:42:27,760
हम बात कर रहे हैं क्या वेद में लिखा है क

1336
01:42:27,760 --> 01:42:30,960
बीर भगवान

1337
01:42:30,960 --> 01:42:35,280
है मैं आपसे एक बात पूछता हूं कि कबीर ये

1338
01:42:35,280 --> 01:42:39,680
परमात्मा साकार है या निराकार भगवान साकार

1339
01:42:39,680 --> 01:42:41,400
भी है निराकार भी है एक

1340
01:42:41,400 --> 01:42:45,680
ही परम तत्व पांच रूपों में लीला पूर्वक प्रकट होते हैं ब्रह्मा

1341
01:42:45,680 --> 01:42:50,880
विष्णु महेश भगवती और गणेश जी मैं नहीं

1342
01:42:50,880 --> 01:42:55,240
मानता आपसे दीजिए कृपा करके अरे सर

1343
01:42:55,240 --> 01:42:59,320
पहले मैं पूछ रहा हूं ना आपसे आप बताओ मैं तो अज्ञानी आप ज्ञानी हो

1344
01:42:59,320 --> 01:43:05,320
मैं तो अज्ञानी हूं बता

1345
01:43:05,560 --> 01:43:11,560
दनलो

1346
01:43:12,840 --> 01:43:17,160
दे अरे बोल तो रहा हूं सुन लो भगवान

1347
01:43:17,160 --> 01:43:21,200
साकार भी है निराकार भी है मतलब आपका

1348
01:43:21,200 --> 01:43:25,200
तो वही काम है यह भाई अंधा लेकिन देखता भी है इसे

1349
01:43:25,200 --> 01:43:29,480
देखता ऐसा नहीं है मैं समझा देता हूं आपको जो निर्गुण

1350
01:43:29,480 --> 01:43:33,720
निराकार परमेश्वर है व्यवहार में ना आ सकने वाले रूप में

1351
01:43:33,720 --> 01:43:37,760
वह अवतार लेता है सगुण साकार होता है व्यवहार में

1352
01:43:37,760 --> 01:43:41,800
आ सकने वाले रूप में मैं इसको समझा देता हूं समझ लो जैसे

1353
01:43:41,800 --> 01:43:45,880
बिजली होती है बिजली ठीक है बिजली सर्वत्र

1354
01:43:45,880 --> 01:43:50,280
व्याप्त है धरती में जहां पर भी खड़े हो जाओ वहां बिजली की शक्ति

1355
01:43:50,280 --> 01:43:54,640
है मगर वो ना तो करंट मार रही है

1356
01:43:54,640 --> 01:43:56,600
ना ही वह हमें दिख रही है

1357
01:43:56,600 --> 01:44:00,720
कुछ नहीं दिख रहा है मगर व बिजली की शक्ति वहां पर है यह

1358
01:44:00,720 --> 01:44:04,800
हो गया बिजली का निर्गुण निराकार स्वरूप इसके बाद एक

1359
01:44:04,800 --> 01:44:09,240
प्लांट लगाया जाता है 132 केवी फलाना थर्मल प्लांट थर्मल

1360
01:44:09,240 --> 01:44:13,960
पावर लगाया जाता है वही जो शक्ति है वह उद्योग करके

1361
01:44:13,960 --> 01:44:18,400
तारों में दौड़ने लगती है तो वायर्स में आ गई बिजली

1362
01:44:18,400 --> 01:44:22,520
अभी भी वो दिख नहीं रही है मगर अगर अब आपने उस

1363
01:44:22,520 --> 01:44:26,840
तार को छुआ तो आपको करंट मारेगा तो यह हो गया निर्गुण

1364
01:44:26,840 --> 01:44:31,360
निराकार के बाद सगुण निराकार इसके बाद यही बिजली

1365
01:44:31,360 --> 01:44:35,440
बल्ब के माध्यम से प्रकट हो जाती है दिखने लगता है उसका सगुण

1366
01:44:35,440 --> 01:44:39,440
साकार स्वरूप दिखने लगता है यह हो गया उसका सगुण निराकार इस सगुण

1367
01:44:39,440 --> 01:44:43,520
साकार इस तरह से निर्गुण निराकार सगुण सगुण निराकार

1368
01:44:43,520 --> 01:44:47,520
फिर सगुण साकार इस तरह से भगवान का स्वरूप है आप अगर यह

1369
01:44:47,520 --> 01:44:51,600
कहते हो कि अंततोगत्वा जो ईश्वर बैठा हुआ है वह

1370
01:44:51,600 --> 01:44:56,160
सगुण साकार है आप यह कहते हो तो वो बाधित हो जाएगा

1371
01:44:56,160 --> 01:45:00,200
वह सर्वशक्तिमान नहीं हो सकता

1372
01:45:00,200 --> 01:45:02,800
ठीक है

1373
01:45:02,800 --> 01:45:08,800
और जहां से य बिजली बनी है वो प्लांट तो साकार

1374
01:45:09,760 --> 01:45:13,880
है भाई साहब भाई साहब मैं आपसे कह

1375
01:45:13,880 --> 01:45:17,880
रहा हूं अगर आप गाया वो

1376
01:45:17,880 --> 01:45:22,040
तो साकार है हम लोग हम लोग एक एक करके चलेंगे भाई साहब अभी

1377
01:45:22,040 --> 01:45:26,200
मैंने आपसे पूछा था वेदों में प्रमाण है कबीर भगवान है

1378
01:45:26,200 --> 01:45:30,480
क्या यह बात आप मानते हो कि नहीं

1379
01:45:30,480 --> 01:45:34,800
पहले मेरे मुझे मुझे जवाब नहीं मिला ना भाई

1380
01:45:34,800 --> 01:45:38,320
भगवान साकार है या निराकार

1381
01:45:38,320 --> 01:45:42,520
मतलब को मानते हो कि नहीं शास्त्रों को मानते हो कि नहीं

1382
01:45:42,520 --> 01:45:47,320
मानता हूं गीताजी को भी मानता हूं उपनिषद मानते हो

1383
01:45:47,320 --> 01:45:51,720
सब कुछ मानता हूं अच्छा क्योंकि हमारे

1384
01:45:51,720 --> 01:45:57,440
र्म के ग्र है पिताजी दिखा द भगवान साकार निराकार दोनों

1385
01:45:57,440 --> 01:46:01,520
है हमारे मंदिर बने हुए हैं मंदिरों में मूर्तिया

1386
01:46:01,520 --> 01:46:05,880
न निराकार दोनों भगवान शंकर

1387
01:46:05,880 --> 01:46:10,600
जी की भगवान माता दुर्गा की ये साकार नहीं है क्या

1388
01:46:10,600 --> 01:46:14,960
अरे तो मैं तो कह रहा हूं ना भगवान साकार भी है मैंने कब मना किया साकार नहीं

1389
01:46:14,960 --> 01:46:19,360
है आप तो कह रहे हो निराकार है निराकार से साकार आते

1390
01:46:19,360 --> 01:46:23,400
मैं कैसे मान लू कि अपने आप रेलगाड़ी बन जाएगी रेल गाड़ी को

1391
01:46:23,400 --> 01:46:24,840
बनाने वाला भी तो कोई होता

1392
01:46:24,840 --> 01:46:28,840
है बस को बनाने वाला कोई होता है जहाज को बनाने वाला

1393
01:46:28,840 --> 01:46:33,000
कोई होता है मैं कैसे मान लू कि अपने आप बन जाते हैं तो मैं आपको इसके

1394
01:46:33,000 --> 01:46:37,600
लिए प्रमाण दिखा रहा हूं ना इसीलिए तो प्रमाण होता है

1395
01:46:37,600 --> 01:46:41,680
जब दो व्यक्ति तर्क कर रहे होते तो केवल तर्क से भगवान सिद्ध नहीं होते

1396
01:46:41,680 --> 01:46:45,680
प्रमाण भी चाहि होता है प्रमाण मानोगे हमारे ग्रंथों में

1397
01:46:45,680 --> 01:46:49,680
लिखा है गीता जी में वो परमात्मा शाश्वत लोक में रहता सनातन लोक

1398
01:46:49,680 --> 01:46:54,120
में गीता में यह लिखा है कि भगवान अ भी है अव्यक्त

1399
01:46:54,120 --> 01:46:58,520
की पूजा कठिन होती है लिखा है कि नहीं

1400
01:46:58,520 --> 01:47:01,680
हेलो

1401
01:47:01,680 --> 01:47:06,000
भ लिखा है कि नहीं कुरक्षेत्र में प्रकट

1402
01:47:06,000 --> 01:47:10,240
हुए कौन थे वो मैं पूछ रहा हूं लि नहीं

1403
01:47:10,240 --> 01:47:14,920
अरे मेरे भाई मैं पूछ रहा हूं अव्यक्त लिखा है कि नहीं

1404
01:47:14,920 --> 01:47:18,920
मैं पूछ रहा अ गीता जी में अव्यक्त लिखा है कि नहीं

1405
01:47:18,920 --> 01:47:24,920
लिखा हुआ है लिखा हुआ है पता हैसे दिल्

1406
01:47:25,480 --> 01:47:31,480
अरेल्ली दिल्ली में प्रधानमंत्री न गा में

1407
01:47:31,960 --> 01:47:36,120
प्रधान अनु अनुज जी मूट है नारायण भैया

1408
01:47:36,120 --> 01:47:41,000
इनको ना लीजिएगा दोबारा इनको ना

1409
01:47:41,000 --> 01:47:45,200
लीजिएगा नमस्कार श जी सभी को सादर

1410
01:47:45,200 --> 01:47:49,200
प्रणाम जी जय श्री राम अनुज जी जय श्री राम

1411
01:47:49,200 --> 01:47:53,480
जी बहुत अच्छा काम कर रहे हैं जी आपसे हम बड़े प्रभावित है

1412
01:47:53,480 --> 01:47:57,760
मैं हरियाणा का रहने वाला हूं तो मैं एक बात बताऊंगा एक घटना

1413
01:47:57,760 --> 01:48:03,080
का जिक्र करूंगा आपको मैं जो बहुत प्रसिद्ध

1414
01:48:03,080 --> 01:48:07,200
सतलोक आश्रम जो है त इनका है वहां

1415
01:48:07,200 --> 01:48:11,200
पर किसा हुआ था वय भाई पहले बता दू किसी को

1416
01:48:11,200 --> 01:48:15,240
अदर वाइज ना लगे तो यह

1417
01:48:15,240 --> 01:48:19,360
जो रामपाल के आश्रम में सम्मोहन करने की दवाई दी

1418
01:48:19,360 --> 01:48:23,360
जाती है तो एक हमारी जानकारी में थी को

1419
01:48:23,360 --> 01:48:27,440
दवाई दी गई थी कोई नई लड़की थी मतलब ये आरोप लगाया था

1420
01:48:27,440 --> 01:48:31,520
किसी ने ये किसी ने आरोप लगा आर्य

1421
01:48:31,520 --> 01:48:36,240
समाज महिला थी वो पढ़ी लिखी थी

1422
01:48:36,240 --> 01:48:40,680
उसको उसकी साफ की वो उसकी मतलब फॉलोवर थी

1423
01:48:40,680 --> 01:48:44,960
करीबन 12 1 साल करना बाकी आ है तो उसने

1424
01:48:44,960 --> 01:48:49,640
भैंस को दवाई दे दी थी तो भैंस पर समन क्रिया हो गई थी

1425
01:48:49,640 --> 01:48:53,840
अच्छा वो ख फट करके वो सतलो आम में चली

1426
01:48:53,840 --> 01:48:56,160
गई

1427
01:48:56,160 --> 01:48:57,160
ओ

1428
01:48:57,160 --> 01:49:01,200
रोत में जगह है पुराना सर्च करेंगे तो यह

1429
01:49:01,200 --> 01:49:05,600
बात कन्फर्म भी बता रहा उसम केस भी हुआ

1430
01:49:05,600 --> 01:49:09,760
था जितने इनको इनको क्या किसी

1431
01:49:09,760 --> 01:49:13,960
उसम जेल भी हुई है क्या मतलब सजा हो गई ऐसा है सजा

1432
01:49:13,960 --> 01:49:18,320
तो हो गई आतंकवाद की धारा लगी हुई है आप आरटीआई

1433
01:49:18,320 --> 01:49:23,040
के माध्यम से पता करते

1434
01:49:23,040 --> 01:49:25,360
जिन पर

1435
01:49:25,360 --> 01:49:27,760
की

1436
01:49:27,760 --> 01:49:31,880
प्र अच्छा आतंकवाद की ल

1437
01:49:31,880 --> 01:49:37,160
चलिए छोड़ व्यक्तिगत बातें ना करिए छोड़ हटाइए कोर्ट

1438
01:49:37,160 --> 01:49:41,640
है भाई लौकिक सिद्धांत है कितना क्या है ठीक है हम लोग सैद्धांतिक बातें

1439
01:49:41,640 --> 01:49:47,640
करेंगे आप एक प्रश्न और है

1440
01:49:47,640 --> 01:49:51,760
इगा जैसे नोट पर जो मतलब की हक्ष

1441
01:49:51,760 --> 01:49:56,160
गवर्नर के ठीक है जी तो उसके बाद

1442
01:49:56,160 --> 01:50:00,440
ऑथेंटिकेशन होती है तो इनकी संस्था है क्या हमारे धर्माचार्य में

1443
01:50:00,440 --> 01:50:04,480
उसको वैलिड किया है रगना है नहीं है तो हम इनके

1444
01:50:04,480 --> 01:50:08,400
सिद्धांत क्यों

1445
01:50:08,400 --> 01:50:12,520
माने इनसे यही प्रश्न पूछना मैंने पूछा था इन लोगों से

1446
01:50:12,520 --> 01:50:17,960
कभी यह जवाब नहीं देते भाग

1447
01:50:17,960 --> 01:50:21,960
जाते और सबसे बड़ा य गिरोह है आप ताजुब करेंगे

1448
01:50:21,960 --> 01:50:25,960
लक्ष्मी माता का मंदिर है गोकुल से परली जमुना से परली

1449
01:50:25,960 --> 01:50:30,200
पार वहां पर भी ये लोग पहुंच गए आप हरिद्वार में देखि

1450
01:50:30,200 --> 01:50:35,440
वहां पहुच जा उतर रहा

1451
01:50:35,440 --> 01:50:39,480
है ये एक बड़ा विडंबना है इनको

1452
01:50:39,480 --> 01:50:43,560
मतलब ये कहते कि हम हम तुमको ऑथराइज कौन करर किसने तुम

1453
01:50:43,560 --> 01:50:47,840
परमिशन दी तो ये लोग कहते हैं कि हम तो परमिशन

1454
01:50:47,840 --> 01:50:51,960
सरकार से लेकर के आया तो जब से लेकर के आया मैं किसी पर आरोप नहीं लगा रहा

1455
01:50:51,960 --> 01:50:56,320
मैं इनकी सुनी ई जबानी बोल रहा हूं जो लोग कहते हैं मतलब

1456
01:50:56,320 --> 01:51:00,480
इस पर जांच हो सकती है जांच का विषय है जांच हो सकती

1457
01:51:00,480 --> 01:51:04,560
पुलि जी प्रामाणिक मतलब जो बातें हो

1458
01:51:04,560 --> 01:51:08,560
रही है वो आप बता रहे हो उसको प्रामाणिक नहीं कह रहे हो आप है

1459
01:51:08,560 --> 01:51:12,560
ना जी आप ये देखिए जहां पर जो बड़े बड़े

1460
01:51:12,560 --> 01:51:16,640
जो हाईवेज प होर्डिंग होते हैं वहां प एक दिन का

1461
01:51:16,640 --> 01:51:21,440
किराया 50 हज होर्डिंग का किराया कहां से आ रहा इनके पास

1462
01:51:21,440 --> 01:51:24,120
कौन फाइनेंस कर रहा है एक ब

1463
01:51:24,120 --> 01:51:26,800
परेशानी का सबब

1464
01:51:26,800 --> 01:51:31,160
है चलो आपके पुद को नमन है मैं इसी

1465
01:51:31,160 --> 01:51:35,240
साथ चाहूंगा मैं एक बार फिर से कह रहा हूं अगर वो

1466
01:51:35,240 --> 01:51:39,280
आना चाहे एक बार लास्ट उनको वो दूंगा क्योंकि वह

1467
01:51:39,280 --> 01:51:43,480
ऐसे आ रहे हैं जैसे वह कुछ रट के आए उनको बोलना ही है और टाइम बहुत

1468
01:51:43,480 --> 01:51:48,040
हो चुका है हमने केवल एक व्यक्ति के लिए लिया था यह

1469
01:51:48,040 --> 01:51:52,040
आज का लाइव और अब टाइम हो चुका है तो अगर

1470
01:51:52,040 --> 01:51:56,160
उन्हे करनी है व एक बार और जवाइन करके देख ले

1471
01:51:56,160 --> 01:52:02,160
मगर वह बात करें जो चल रही है टॉपिक से हटक बात ना

1472
01:52:04,560 --> 01:52:10,520
करें आना है तो आ सकते एक बार एक बार दे दीजिए भाई

1473
01:52:10,520 --> 01:52:14,600
उनको धर्मेंद्र कुमार जी आभार आपका सत

1474
01:52:14,600 --> 01:52:19,560
साहिब जी आपको साइंस पढ़ा रहे हैं तो मैं कह रहा हूं को बहुत ज्यादा साइंस पढ़ाना तो आ जाइए

1475
01:52:19,560 --> 01:52:23,920
अभी बात कर लेते हैं

1476
01:52:23,920 --> 01:52:29,920
बस साइड में चैट पर लिखने से थोड़ना

1477
01:52:31,800 --> 01:52:37,800
होगा आना है किसी

1478
01:52:48,640 --> 01:52:54,640
को अरे कोई तो हो जो बता दे वेदों में प्रमाण है कभी भगवान

1479
01:53:07,240 --> 01:53:12,560
है चलिए आज का पूरा करते हैं काफी देर हो

1480
01:53:12,560 --> 01:53:16,560
गई इना चलिए और जो लोग

1481
01:53:16,560 --> 01:53:20,880
नाम जब नाम जब से क्या बोले मैं कह रहा हूं कि आप

1482
01:53:20,880 --> 01:53:25,600
आप क्या बोलते हैं वो जब जब वो लोग पीछे पड़ जाते हैं तो आप

1483
01:53:25,600 --> 01:53:29,760
क्या बोलते इतना मतलब करने की जरत नहीं आपने एक बार दिखाया ब्रह्मचारी

1484
01:53:29,760 --> 01:53:33,800
होता है फिर उसके बाद मुझे चार श्लोक को पीछे दिखाओ चार श्लोक आगे दिखाओ

1485
01:53:33,800 --> 01:53:38,280
तीतर के आगे तीतर दिखाओ तीतर के पीछे तीतर दिखाओ तो मैं मानूंगा तीतर है

1486
01:53:38,280 --> 01:53:42,720
ये नहीं होता मैं जाने से पहले वो

1487
01:53:42,720 --> 01:53:46,800
हां इसको आप लोग जिनको दिवाली के विषय में निर्णय

1488
01:53:46,800 --> 01:53:50,800
करना हो दिवाली कौन से दिन मनानी है मैं दोबारा बता रहा हूं य आज पूजा

1489
01:53:50,800 --> 01:53:54,960
आचार्य श्री का चैनल है इसको देखें और मैं जाते

1490
01:53:54,960 --> 01:53:59,680
जाते आज एक सरप्राइज दे दूं सभी को वो सरप्राइज है

1491
01:53:59,680 --> 01:54:05,440
कि शास्त्रों में कबीर का वर्णन है कहां पर है वो मैं आपको बता रहा

1492
01:54:05,440 --> 01:54:09,600
हूं चलो एट

1493
01:54:09,600 --> 01:54:13,640
लास्ट और दूसरी

1494
01:54:13,640 --> 01:54:17,640
बात शास्त्रों में कम से कम वेदों में नहीं तो शास्त्रों में प्रमाण

1495
01:54:17,640 --> 01:54:21,760
है कबीर है कबीर है पर भगवान नहीं है

1496
01:54:21,760 --> 01:54:26,080
यह देख लो भविष्य पुराण कट रही है

1497
01:54:26,080 --> 01:54:30,160
अभी आवाज आ रही है मेरी नहींन फ्रीज हो गई

1498
01:54:30,160 --> 01:54:36,000
स्क्रीन फ्रीज हो गई है जाके दोबारा आऊ

1499
01:54:36,000 --> 01:54:40,720
क्या कट रही है अभी भी कट रही है

1500
01:54:40,720 --> 01:54:44,720
एक और बात आचार्य राम शंकर शुक्ल जी का जो वो दिखा रहे थे अभी

1501
01:54:44,720 --> 01:54:48,960
उन्होंने वो संध्या वंदन के ऊपर नित्य कर्म के ऊपर भी उन्होंने

1502
01:54:48,960 --> 01:54:53,160
अपने एपिसोड निकाले हैं अभी चार या पांच एपिसोड आ गए तो आप वो भी देख सकते

1503
01:54:53,160 --> 01:54:57,520
हैं जिसे संध्या वंदन सीखना है शास्त्रीय पद्धति से जो है अधिकारी

1504
01:54:57,520 --> 01:55:01,840
उपनयन करने उपनयन होने के बाद तो वहां पर वह आचार्य द्वारा

1505
01:55:01,840 --> 01:55:05,920
नित्य कर्म देखिए नित्य कर्म सीख सकता है शुरू से पूरा

1506
01:55:05,920 --> 01:55:10,280
सिखा रहे हैं वह ठीक है और बिल्कुल प्रामाणिक आचार्य हैं ये

1507
01:55:10,280 --> 01:55:14,480
तो आप इनसे भी सीख सकते

1508
01:55:14,480 --> 01:55:20,480
हैं तो भैया भविष्य पुराण

1509
01:55:20,480 --> 01:55:21,480
में

1510
01:55:21,480 --> 01:55:27,480
यह वर्णन दिया गया है कबीर जी का और क्या लिखा है वो मैं बता देता हूं

1511
01:55:33,560 --> 01:55:39,560
655 हां ऑथेंटिक है ऑथेंटिक

1512
01:55:39,600 --> 01:55:45,280
है आचार्य श्री से कंफर्म किया उसके बाद आपको मैं बता रहा

1513
01:55:45,280 --> 01:55:49,560
हूं मगर उतना ही अंश ऑथेंटिक है जैसे बुद्ध

1514
01:55:49,560 --> 01:55:53,560
भगवान थे मगर ऐसा नहीं है कि के द्वारा कहा जाने वाला

1515
01:55:53,560 --> 01:55:57,600
हर वचन हमने अपना लिया उस तरह से नहीं है ये वे

1516
01:55:57,600 --> 01:56:01,600
है क्या है घटना का होना प्रमाण नहीं होता है उस घटना

1517
01:56:01,600 --> 01:56:05,880
को शास्त्रो चित रूप से स्वीकार किया जाना प्रमाण होता है तो कबीर

1518
01:56:05,880 --> 01:56:10,040
जी हुए हैं यह बात ठीक है इसका जिक्र है हमारे भविष्य

1519
01:56:10,040 --> 01:56:14,320
पुराण में मगर अगर कबीर जी की कोई शिक्षा ऐसी है

1520
01:56:14,320 --> 01:56:18,360
जो वेदा शास्त्र सम्मत सिद्धांतों के विरुद्ध जा रही है तो

1521
01:56:18,360 --> 01:56:22,720
वो कहीं भी ग्रा नहीं है है ना न

1522
01:56:22,720 --> 01:56:26,720
चार जी के ही विरुद्ध जा रही है तो वह किसी भी प्रकार से ग्रहण करने योग फिर नहीं रह

1523
01:56:26,720 --> 01:56:31,080
जाएगी हां उनकी शिक्षाओं का

1524
01:56:31,080 --> 01:56:35,560
ऐसा अर्थ निकल रहा है जिस अर्थ के द्वारा

1525
01:56:35,560 --> 01:56:36,520
वेदानु कूल

1526
01:56:36,520 --> 01:56:41,080
अर्थ है तो वह ग्रहण करने योग्य जैसे अल्लो उपनिषद

1527
01:56:41,080 --> 01:56:45,080
अल्लो उपनिषद का मामला वही है कि जितने अंशों में उसमें अल्ला

1528
01:56:45,080 --> 01:56:49,160
शब्द है या शक्ति तो उतने अंश में हम कह सकते हैं अभ ये जो है जो

1529
01:56:49,160 --> 01:56:53,400
है यह प्रक्षिप्त नहीं है मगर उसम मिलावट भी हुई

1530
01:56:53,400 --> 01:56:57,440
तो उसमें रसूल और ऐसी चीजें भी डाल दी गई तो मिलावट

1531
01:56:57,440 --> 01:57:01,520
भी हुई तो इसीलिए उसको ना तो हम प्रमाणिक कहते पूरी तरीके से ना ही पूरी तरीके से

1532
01:57:01,520 --> 01:57:05,680
विरोध करते हैं है ना इस बात का ध्यान रखें वो वहीं तक

1533
01:57:05,680 --> 01:57:09,760
वहीं तक उसकी बात कोई भी मान मानी जा सकती है जहां तक वो वेदा

1534
01:57:09,760 --> 01:57:13,760
अनुकूल हो अगर वेदों के विरुद्ध कोई बात जा रही है तुरंत वहां पर उतना

1535
01:57:13,760 --> 01:57:17,880
उसा मगर ये नहीं पूरा अलोक निषद ही प्रक्षिप्त है लोक निषद

1536
01:57:17,880 --> 01:57:22,320
है ना उसका वो समर्थन है ना वो है विरोध मगर

1537
01:57:22,320 --> 01:57:26,320
उसके अंदर की अगर किसी ने कोई ऐसी बात मिला दी मान लो कि जो वेद

1538
01:57:26,320 --> 01:57:31,600
विरुद्ध है ही नहीं कुरान को सपोर्ट कर रही है य कर रही है वहां पर वो बिल्कुल प्रक्षिप्त

1539
01:57:31,600 --> 01:57:37,600
है हां

1540
01:57:39,840 --> 01:57:45,280
भाई 600 कौन सा पेज नंबर था

1541
01:57:45,280 --> 01:57:50,080
655 भविष्य पुराण में एक पूरा चैप्टर है जिसमें

1542
01:57:50,080 --> 01:57:54,080
कि इनकी बातें हो रही कौन-कौन है

1543
01:57:54,080 --> 01:57:58,440
वो कबीर नरसरी पीपा

1544
01:57:58,440 --> 01:58:02,760
नानक नित्यानंद इनकी उत्पत्ति है वहां आगे

1545
01:58:02,760 --> 01:58:07,080
धन रदास की भी है और विष्णु

1546
01:58:07,080 --> 01:58:10,160
स्वामी और उनकी भी

1547
01:58:10,160 --> 01:58:16,160
है 655 पर चलते हैं

1548
01:58:27,960 --> 01:58:32,120
गुरु बृहस्पति का यह वचन सुनकर

1549
01:58:32,120 --> 01:58:36,160
वह काशीपुरी के धनपाल नामक वैश्य के घर

1550
01:58:36,160 --> 01:58:40,240
में मूल गंडा योग में पुत्र रूपेण

1551
01:58:40,240 --> 01:58:44,320
उत्पन्न हुआ दोष युक्त काल में जन्म लेने

1552
01:58:44,320 --> 01:58:48,480
के कारण उसके माता-पिता ने उस बालक

1553
01:58:48,480 --> 01:58:53,080
को विंध्यांचल के वन में छोड़ दिया ठीक है

1554
01:58:53,080 --> 01:58:57,560
तभी वहां अलिक नामक मले छाया वह संतान

1555
01:58:57,560 --> 01:59:01,720
हीन था जुलाहे की वृत्ति से जीवन यापन

1556
01:59:01,720 --> 01:59:06,000
करता था वह इस तक्त शिशु को अपने घर ले

1557
01:59:06,000 --> 01:59:10,840
गया यह मधुरानगर नाम से प्रसिद्ध

1558
01:59:10,840 --> 01:59:14,880
हुआ मिल गया प्रमाण और आगे चलकर क्या लिखा

1559
01:59:14,880 --> 01:59:20,880
है इसके बारे में उसने सात वर्ष की आयु तक केवल

1560
01:59:22,120 --> 01:59:26,520
नंद को गुरु माना राम ध्यान में तत्पर हो गया

1561
01:59:26,520 --> 01:59:30,560
किसके ध्यान में राम ध्यान में वह

1562
01:59:30,560 --> 01:59:34,840
अपने हाथ का बना भोजन भगवान को अर्पित करता था

1563
01:59:34,840 --> 01:59:39,120
भगवान ने उसे साक्षात दर्शन दिए थे लो दर्शन

1564
01:59:39,120 --> 01:59:41,720
कर रहे हैं भगवान

1565
01:59:41,720 --> 01:59:46,160
के उसकी कामनाओं को सफल किया तो यह वर्णन है भविष्य

1566
01:59:46,160 --> 01:59:50,160
पुराण भाग दो में और चौखंबा से प्रकाशित है

1567
01:59:50,160 --> 01:59:54,920
जो उसमें अ पेज नंबर पृष्ठ संख्या है 655

1568
01:59:54,920 --> 01:59:59,520
और अध्याय नंबर है 17 ठीक है

1569
01:59:59,520 --> 02:00:03,640
वो भी दिखा दीजिए लोगों को नहीं तो फिर उनको समस्या होगी कहीं से बोल दिया

1570
02:00:03,640 --> 02:00:07,760
मतलब और एक बात और अच्छी है इसमें कबीर से

1571
02:00:07,760 --> 02:00:11,880
कबीर नहीं बना है यह भी ध्यान रखे कबीर से कबीर नहीं

1572
02:00:11,880 --> 02:00:15,880
संस्कृत में जो आया है इनका नाम जब तो वहां पर कबीर

1573
02:00:15,880 --> 02:00:19,200
कबीर इति विख्यात

1574
02:00:19,200 --> 02:00:24,000
कबीर संस्कृत में जब इनका नाम य हुआ है तो व कबीर नहीं हुआ

1575
02:00:24,000 --> 02:00:28,240
यह कबीर से कबीर नहीं बना संस्कृत में जब इनका श्लोक में नाम

1576
02:00:28,240 --> 02:00:32,760
यूज हुआ है तो कबीर इति

1577
02:00:32,760 --> 02:00:36,760
विख्यात दिख रहा है हम हम दिख

1578
02:00:36,760 --> 02:00:37,260
रहा है

1579
02:00:37,200 --> 02:00:41,360
कबीर इति विख्यात और नीचे जो है कहीं

1580
02:00:41,360 --> 02:00:45,520
पे लिखा होगा कि इस नाम से वो प्रसिद्ध हुआ इधर है इधर ये प्रसिद्ध

1581
02:00:45,520 --> 02:00:50,000
हु नीचे है नीचे है दिख रहा है कबीर नाम से प्रसिद्ध हुआ

1582
02:00:50,000 --> 02:00:54,240
बिल्कुल बिल्कुल लिखा हुआ लिखा हुआ यह है सच्चाई आज तक हम पूछते

1583
02:00:54,240 --> 02:00:58,800
रहे दिखाओ वेदों में प्रमाण अरे भैया ब्रह्मा विष्णु

1584
02:00:58,800 --> 02:01:03,000
महेश की दे जो है पांच भूतों से बनी हुई है अरे भैया वही जन में अविनाशी पांच भूतो

1585
02:01:03,000 --> 02:01:07,120
की दे में आ भी जाते हैं और बोलो क्या वो दे धारण नहीं कर सकते पांच भूतों

1586
02:01:07,120 --> 02:01:11,320
वाली अब तुमको यह तो दिखाओ कि कबीर की दे पांच भूतो

1587
02:01:11,320 --> 02:01:15,400
की नहीं है कहां लिखा है उसके लिए तुम कबीर वाणी लाओगे

1588
02:01:15,400 --> 02:01:21,400
अरे शास्त्रों में दिखाओ ना भाई

1589
02:01:26,120 --> 02:01:30,280
यह लोग ऐसे हैं कि सर्वव्यापी है है और

1590
02:01:30,280 --> 02:01:35,440
पूछ लो के वो नहीं पता क्या

1591
02:01:35,440 --> 02:01:40,400
होता चलिए सभी को जय श्री राम बहुत-बहुत धन्यवाद सबने

1592
02:01:40,400 --> 02:01:44,600
जय श्री राम समय दिया और हां नामा

1593
02:01:44,600 --> 02:01:49,280
स्त्र से जुड़िए अगर कोई भी ऐसा व्यक्ति है जो यह सोचता

1594
02:01:49,280 --> 02:01:53,320
है कि मुझे धर्म रक्षा करनी तो धर्म

1595
02:01:53,320 --> 02:01:57,520
रक्षा का जो पहला आधार है वह है ईश्वर का भजन ईश्वर

1596
02:01:57,520 --> 02:02:01,880
का अ ध्यान शुरू करिए नामा

1597
02:02:01,880 --> 02:02:06,080
स्त्र के जरिए अगर जुड़ नहीं पा रहे हैं तो कम से कम अपने ही घर

1598
02:02:06,080 --> 02:02:10,320
पर रह कर के और ईश्वर का ध्यान लगाइए सवा

1599
02:02:10,320 --> 02:02:14,400
घंटे की भक्ति का बल आप में होना चाहिए अभी कुछ दिनों

1600
02:02:14,400 --> 02:02:20,000
पूर्व हमारे ऊपर अलंकार समाज यों ने

1601
02:02:20,000 --> 02:02:25,880
एक अ बात फैलाई थी

1602
02:02:25,880 --> 02:02:29,880
कि ये शंकराचार्य जी

1603
02:02:29,880 --> 02:02:34,400
साकार ईश्वर को नहीं मानते थे और शंकराचार्य

1604
02:02:34,400 --> 02:02:37,920
जी ने व्यवहार और

1605
02:02:37,920 --> 02:02:41,280
परमार्थ व्यवहार और परमार्थ के बारे में कहीं बात नहीं की

1606
02:02:41,280 --> 02:02:45,280
है इस तरह का भी वक्तव्य दिया अलंकार हों ने

1607
02:02:45,280 --> 02:02:49,760
यह सिद्ध करने का प्रयास किया कि शंकराचार्य जी मूर्ति पूजा विरोधी थे

1608
02:02:49,760 --> 02:02:54,000
भगवान की लीला के विरोधी थे यह सब अलंकार हों ने अलंकार

1609
02:02:54,000 --> 02:02:58,280
हों ने यह तक कह दिया कि जो शंकराचार्य जी थे उन्होंने दयानंद जी की

1610
02:02:58,280 --> 02:03:02,560
बात की थी विरोधी नहीं थे तो कुछ मतलब अलंकार हों का एक प्रयास

1611
02:03:02,560 --> 02:03:06,880
है कि अब धीरे से जो परंपरा वाले हैं शंकराचार्य जी उनको अपने से मिला लिया जाए

1612
02:03:06,880 --> 02:03:11,040
इस तरह का कुछ प्रयास है तो इसका निराकरण आज हमने प्रस्तुत कर दिया

1613
02:03:11,040 --> 02:03:15,280
है जिन लोगों ने वीडियो नहीं देखा हो बहुत इनफॉर्मेटिव वीडियो है वह अवश्य देखें

1614
02:03:15,280 --> 02:03:19,360
उसमें हमने टेक्निकली समझाया एक एक पॉइंट जो जो अवतार के

1615
02:03:19,360 --> 02:03:23,760
खंडन में हो सकते हैं उन लेते हुए हमने टेक्निकली समझाया

1616
02:03:23,760 --> 02:03:28,240
है कि अवतार कैसे कैसे होना सिद्ध है तो आप उसको देखें

1617
02:03:28,240 --> 02:03:32,880
बहुत ही अच्छा वीडियो बहुत इनफॉर्मेटिव है तर्क पूर्ण और प्रमाण सहित

1618
02:03:32,880 --> 02:03:37,840
ठीक है जाते जाते मैं कुछ चीजें क्लियर कर

1619
02:03:37,840 --> 02:03:42,080
दूं कि भगवान का जो प्राप्त है

1620
02:03:42,080 --> 02:03:46,080
कुछ लोग कहते हैं अरे भगवान अंत में निर्गुण है निराकार है तो उनका सगुण साग

1621
02:03:46,080 --> 02:03:50,200
की भक्ति क्योंकि निर्गुण निराकार आपके व्यवहार का

1622
02:03:50,200 --> 02:03:54,440
विषय नहीं है मगर भगवान का जो मौलिक

1623
02:03:54,440 --> 02:03:56,280
स्वरूप है वह व्यवहार

1624
02:03:56,280 --> 02:04:00,760
में ना आ सकने वाला है उसको आप निर्गुण कह लो अगर आप साकार

1625
02:04:00,760 --> 02:04:05,440
भी कहोगे तो आपको यह कहना पड़ेगा कि व भौतिक नहीं है आध्यात्मिक

1626
02:04:05,440 --> 02:04:09,440
दे है उसकी अगर उसको व्यवहारिक बना दोगे इन आंखों

1627
02:04:09,440 --> 02:04:13,760
से देखा जा सकने वाला इन हाथों से छुआ जा सकने वाला तो फिर वह बाधित

1628
02:04:13,760 --> 02:04:17,920
हो जाएगा तो आप उसको निर्गुण कह लो आपकी अपेक्षाकृत

1629
02:04:17,920 --> 02:04:22,840
वो आपके ऊपर है हम इस पर नहीं लड़ रहे आपसे है वैसे शास्त्र में निर्गुण

1630
02:04:22,840 --> 02:04:26,920
और उसमें ज्यादा बात करोगे तो निर्गुण सिद्ध होंगे निर्गुण निराकार मगर आप

1631
02:04:26,920 --> 02:04:31,280
उसको साकार कह लो मगर यह मानना पड़ेगा यह जो ज्ञानेंद्रिय कर्मेंद्रिय

1632
02:04:31,280 --> 02:04:35,480
हमें प्राप्त है इनका विषय नहीं है उनकी वो दे तो वही

1633
02:04:35,480 --> 02:04:39,840
तो हो गया कान को कैसे भी पकड़ लो बात वही हो गई

1634
02:04:39,840 --> 02:04:44,000
तो कहां लिखा है बृहदारण्यक उपनिषद दो तीन एक ईश्वर

1635
02:04:44,000 --> 02:04:48,400
दोनों रूपों में है निराकार ब्रह्म के रूप में एवं व्यक्तिगत ईश्वर

1636
02:04:48,400 --> 02:04:52,400
के रूप में भी है वह दोनों उनके व्यक्तित्व के आयाम

1637
02:04:52,400 --> 02:04:56,760
है निराकार ईश्वर की व्याख्या अगर निराकार

1638
02:04:56,760 --> 02:05:00,800
ईश्वर की व्याख्या जाननी हो तो वो स्पेशली आप अलंका के पास जाएंगे तो

1639
02:05:00,800 --> 02:05:04,800
बहुत भर भर के प्रमाण है उनके

1640
02:05:04,800 --> 02:05:09,000
पास केवल निराकार के ही प्रमाण होते हैं तो ईश्वर को ना ऊपर

1641
02:05:09,000 --> 02:05:11,280
से ना मध्य से ना विस्तार से कोई जान सकता है

1642
02:05:11,280 --> 02:05:15,280
जानने में ना आ सकने वाला अगर भगवान साकार हो गया

1643
02:05:15,280 --> 02:05:19,440
तो वो तो जानने में आ रहे हैं ना तो जानने में ना आ सकने वाले रूप की बात तो हो रही

1644
02:05:19,440 --> 02:05:24,960
है यजुर्वेद 408 परमात्मा काया रहित

1645
02:05:24,960 --> 02:05:30,960
है तो भगवान का एक मौलिक स्वरूप है जिसको

1646
02:05:32,000 --> 02:05:36,000
केवल हां भैया आप ही हो बहुत बड़ी बहस करने वाले दीक्षा

1647
02:05:36,000 --> 02:05:40,160
आपने अपनी मन

1648
02:05:40,160 --> 02:05:44,240
गणतयात और कहते हो हम मनम कीी भक्ति करने वाले हैं

1649
02:05:44,240 --> 02:05:48,400
हम तो आपके वो साधारण से प्रश्नों पर बात कर रहे हैं दीक्षा आपने कैसे

1650
02:05:48,400 --> 02:05:52,520
ले ली भाई गुरु को पता नहीं है कि मैं आज किसी को दीक्षा दे रहा

1651
02:05:52,520 --> 02:05:57,080
हूं गुरु को पता ही नहीं है उसको चार दिन के बाद पता लगेगा

1652
02:05:57,080 --> 02:06:01,400
और गुरु ने कहा भी है कि नहीं मेरे नाम से दीक्षा दो य भी यह भी पॉइंट

1653
02:06:01,400 --> 02:06:05,520
है भाई उसने कहीं कटघरे में खड़ा होकर कहा हो कि जज साहब

1654
02:06:05,520 --> 02:06:09,600
मैं जो है यह कहना चाहता हूं कि मेरे नाम से फलाने फलाने जो लोग हैं वह

1655
02:06:09,600 --> 02:06:14,080
आपको मेरे संदेश पहुंचाएंगे ऐसा भी कुछ नहीं है अब

1656
02:06:14,080 --> 02:06:18,080
तत्वदर्शी जी के साथ में अगर उनका वकील खड़ा हो गया कल को वो आके बाहर कहने

1657
02:06:18,080 --> 02:06:22,480
लगा उनके नाम से कोई गलत बात बताने लगा मान लोगे क्योंकि वो उनसे मिल

1658
02:06:22,480 --> 02:06:26,320
आप नहीं मिलते हो यह कौन सा तरीका है और यह तरीका क्या सनातन सिद्धांत

1659
02:06:26,320 --> 02:06:30,680
में लिखा है कि गुरु को पता भी ना चले

1660
02:06:30,680 --> 02:06:34,760
गुरु को पता भी ना चले अरे इनके

1661
02:06:34,760 --> 02:06:38,840
क्यों दिखा रहे हैं आप यह लोग बिल्कुल ऊपर जो

1662
02:06:38,840 --> 02:06:43,200
है इनके हेलमेट लगा हुआ है जिसमें शीशा नहीं है आगे दीवार

1663
02:06:43,200 --> 02:06:49,000
है

1664
02:06:49,000 --> 02:06:52,720
आगे अरे

1665
02:06:52,720 --> 02:06:56,880
शीराम तो क्या है कि आप दीक्षा ले रहे हो मनमुक

1666
02:06:56,880 --> 02:07:00,920
कबीर को कबीर बना रहे हो मनमुक अच्छा एक बात और है ये लोग एक बात और कहते

1667
02:07:00,920 --> 02:07:05,120
हैं वो भी मजेदार बात है ये लोग कहते हैं वो जो राम है वो आदि राम है

1668
02:07:05,120 --> 02:07:09,360
आदि राम कोई बिरला जाने ठीक ये लोग जैसे अभी हमने गणपति

1669
02:07:09,360 --> 02:07:13,880
को ले आया ना तो ये गणपति का वो चलाने लगे ट्रेन वो क्या चला रहे आदि

1670
02:07:13,880 --> 02:07:18,360
गणेश है अरे भाई ठीक है यह गणेश नहीं है

1671
02:07:18,360 --> 02:07:22,680
मगर गणेश तो है तो बोलना शुरू करो वेदों में प्रमाण है गणेश भगवान

1672
02:07:22,680 --> 02:07:26,840
है जो उसमें नाम नहीं है उसको बोल रहे हो जो

1673
02:07:26,840 --> 02:07:30,920
नाम है वो नहीं बोल रहे बोलना शुरू करो वेदों में प्रमाण है विष्णु भगवान

1674
02:07:30,920 --> 02:07:34,920
है वेदों में प्रमाण है शिव भगवान है वेदों में प्रमाण है गणेश भगवान है भले ही वो आपके

1675
02:07:34,920 --> 02:07:39,040
हिसाब से आदि विष्णु आदि शिव यह वाले शिव नहीं पुराणों वाले

1676
02:07:39,040 --> 02:07:41,520
शिव नहीं है वो बात अलग है हम सिद्ध कर लेंगे वही

1677
02:07:41,520 --> 02:07:45,520
है वो बात अलग है मगर अगर आपके हिसाब से वो वाले शिव नहीं

1678
02:07:45,520 --> 02:07:49,680
भी है फिर भी आपको बोलना तो यही पड़ेगा कि वेदों में प्रमाण है

1679
02:07:49,680 --> 02:07:54,000
शिवजी भगवान है वो शिवजी आपके वाली वेदों में प्रमाण

1680
02:07:54,000 --> 02:07:58,160
है विष्णु भगवान है यह बोलना चाहिए कबीर तो कहीं लिखा ही नहीं उसको

1681
02:07:58,160 --> 02:08:02,480
बोल जो लिखा है वो नहीं बोल रहे जब गणपति वहा स्पष्ट लिखा

1682
02:08:02,480 --> 02:08:06,720
है तो बोलो कवियों का कवि गणपति भगवान है वेदों में प्रमाण

1683
02:08:06,720 --> 02:08:10,920
है गणपति भगवान

1684
02:08:10,920 --> 02:08:15,160
है और सुनो जो बात मैंने

1685
02:08:15,160 --> 02:08:19,400
कही है प्रमाण सहित बता दूं आपको ईश्वर व्यवहार

1686
02:08:19,400 --> 02:08:25,400
में नहीं आ सकता यह सब इनके बातें हैं इसके

1687
02:08:27,600 --> 02:08:32,040
बाद इसके बाद एक अच्छी चीज है महाभारत में लिखा

1688
02:08:32,040 --> 02:08:36,080
है सतयुग में सब वह जो व्यवहार में नहीं आ

1689
02:08:36,080 --> 02:08:40,440
सकने वाला परमात्मा का रूप है उसी को बजनी मानते थे उसी में चित्र

1690
02:08:40,440 --> 02:08:44,720
माय रहते थे और फिर वही जो है

1691
02:08:44,720 --> 02:08:48,720
अपनी माया का माया द्वारा अनेक रूप बनाकर विचर

1692
02:08:48,720 --> 02:08:52,840
है यजुर्वेद में लिखा है तो जो मौलिक स्वरूप है उसको

1693
02:08:52,840 --> 02:08:56,880
सतयुग में बजा जाता था और उसके बाद जैसे जैसे प्रज्ञा

1694
02:08:56,880 --> 02:09:00,920
शक्ति कम हो रही तो भगवान उस प्रकार से अपने रूप बनाते हैं जिससे कि लोगों के

1695
02:09:00,920 --> 02:09:05,240
लिए मोक्ष जो है सुलभ हो सके तो यद्यपि ईश्वर अजन्मा है

1696
02:09:05,240 --> 02:09:09,280
फिर भी वे अपनी माया द्वारा अनेक रूप बनाकर विरता है ऋग्वेद में है

1697
02:09:09,280 --> 02:09:13,640
यजुर्वेद में है श्रीमद् भगवत गीता में भी इसी के आधार भगवान ने कहा

1698
02:09:13,640 --> 02:09:17,680
मैं अजन्मा अविनाशी होते हुए भी अपनी प्रकृति

1699
02:09:17,680 --> 02:09:21,920
को अधीन करके योग माया से प्रकट होता हूं तो

1700
02:09:21,920 --> 02:09:26,240
ईश्वर जब कुछ भी कर सकने वाला है तो उस पर यह बाधा

1701
02:09:26,240 --> 02:09:30,400
नहीं है कि वह निर्गुण निराकार होते हुए अपना सगुण साकार स्वरूप कैसे

1702
02:09:30,400 --> 02:09:34,920
बनाएगा जो आप ये बात कह रहे थे भाई साहब अभी आए थे कि

1703
02:09:34,920 --> 02:09:39,280
वो तो कोई भी चीज जो निकलती है वो निराकार से नहीं साकार से ही निकलती है ये लॉ

1704
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हम पर लागू होता है हम पर जो

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प्रकृति के नियमों के अधीन है ईश्वर प्रकृति के नियमों के अधीन नहीं

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है तो क्या है कि वो सर्वशक्तिमान है इसलिए

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वो निर्गुण निराकार से सगुण निराकार भी हो सकता है क्योंकि वह

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सर्व सामर्थ वान है इसीलिए उसको ईश्वर कहते हैं ठीक

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है और अगर वह अनर्गल

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वक्तव्य ना दे रहे होते तो उनको हटाना भी नहीं पड़ता खैर चलिए

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काफी बातें हो गई हमने अपने वीडियो के बारे में बता दिया दीपावली

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पर जो संचय उत्पन्न हो रहा है दीपावली कौन से दिन मनानी

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है उसके बारे में आपको बता दिया है नामा स्त्र से जुड़िए और

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नामा स्त्र में अपने जो ईश्वर आपके

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जो ईस्ट है जिस रूप में आप आप ईश्वर का ध्यान लगा सकते उसमें

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ध्यान लगाइए अगर जुड़ नहीं पा रहे तो अपने घर पर रहकर ही तपो बल एकत्रित

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करिए कलयुग में केवल दो ही चीजें आपके कार्य आ सकती है ऊपर

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02:10:39,200 --> 02:10:43,360
ईश्वर का बल और नीचे संग का बल तो संग के लिए भी

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02:10:43,360 --> 02:10:48,120
नामा स्त्र है और ईश्वर के बल के लिए भी ना मास्त्र है आप जुड़िए

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किसी को भी किसी प्रकार का वैचारिक मतभेद है और वो संयम

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02:10:52,400 --> 02:10:56,560
पूर्वक बात करना चाहता है चर्चा करना चाहता है तो उसका

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02:10:56,560 --> 02:10:58,640
स्वागत है

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7408

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30169 इस नंबर पर ट करिएगा फोन नहीं करिएगा

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02:11:05,640 --> 02:11:09,640
केवल टसप करिएगा आपको एक फॉर्म मिलेगा अपनी रुचि

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02:11:09,640 --> 02:11:15,040
के अनुसार आप फॉर्म भर देंगे नास्त्र से जुड़ना है तो वह

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02:11:15,040 --> 02:11:20,240
फॉर्म वैचारिक मतभेद के निमित चर्चा करनी है तो व फॉर्म

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02:11:20,240 --> 02:11:24,840
और हमारी क्लासेस में आना है तो वो फॉर्म और एक और है

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अगर धर्म रक्षा में साथ निभाना है तो वो फॉर्म ठीक है

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02:11:30,960 --> 02:11:35,840
तो हां इनके यहां कंप्यूटर दीक्षा होती है ये

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एलईडी दीक्षा वेदों में प्रमाण है

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02:11:40,200 --> 02:11:44,320
टीवी वाली भी होती है अच्छा टीवी वाली हां

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हां मुझे पता लगा है ना उसमें क्या होता है कि 75 इंच का पूरा इतना बड़ा टीवी होता है उसमें

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बैठ के सब लोग एक साथ पूरा ले रहे होते हैं बड़ी टीवी लगती है उसमें मैंने प्रश्न भी

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पूछा था मान ले रहा हूं मैं वेदों

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में प्रमाण है टीवी दीक्षा प्रमाण

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है चलिए सभी को जय श्री राम जय

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श्री रामदेव
