1
00:00:04,480 --> 00:00:09,760
सभी को जय श्री

2
00:00:09,760 --> 00:00:13,800
राम आज एक बहुत ही गंभीर विषय पर हम

3
00:00:13,800 --> 00:00:17,840
लोग यहां पर आए हैं आप लोगों के समक्ष

4
00:00:17,840 --> 00:00:23,240
एक संदेश जो हमें

5
00:00:23,240 --> 00:00:28,400
जन समाज में और विशेष

6
00:00:28,400 --> 00:00:32,560
विशेषतः उनको जिनको केंद्र में रख कर के यह चर्चा हम लोग करने

7
00:00:32,560 --> 00:00:36,680
जा रहे हैं उन तक पहुंचाना है अभी क्या

8
00:00:36,680 --> 00:00:41,040
हो रहा है कि जो परंपरा

9
00:00:41,040 --> 00:00:46,040
प्राप्त शुद्ध वैदिक धर्म है सनातन धर्म का जो स्वरूप

10
00:00:46,040 --> 00:00:48,640
है

11
00:00:48,640 --> 00:00:53,040
उसका न केन प्रकार किसी बहाने से

12
00:00:53,040 --> 00:00:57,680
अपमान करना मजाक बनाना फतिया

13
00:00:57,680 --> 00:01:01,720
कसना या फिर उसकी चीजों को नकार ही देना

14
00:01:01,720 --> 00:01:05,960
यह सब बातें इस समय मतलब बहुत आम सी हो गई है अब

15
00:01:05,960 --> 00:01:09,520
ऐसे में करते क्या है लोग

16
00:01:09,520 --> 00:01:13,720
कि जो ऐसे व्यक्तित्व होते हैं

17
00:01:13,720 --> 00:01:17,840
जो उदारवादी हैं या जो आपके ऊपर ध्यान नहीं दे रहे जो कुछ आप करो

18
00:01:17,840 --> 00:01:19,920
तो करते रहो तो ऐसे

19
00:01:19,920 --> 00:01:24,400
सॉफ्ट टारगेट ढूंढता है सॉफ्ट टारगेट सॉफ होते हैं

20
00:01:24,400 --> 00:01:30,400
तो उन्हीं में से एक है अनिरुद्धाचार्य जी

21
00:01:31,200 --> 00:01:35,480
वह बहुत ही सरल तरीके से जितना उनको गुरु गोविंद

22
00:01:35,480 --> 00:01:40,200
ग्रंथ की कृपा से प्राप्त है उसको बहुत ही सरल बिल्कुल

23
00:01:40,200 --> 00:01:44,240
सामान्य विवेक का उपयोग करते हुए सामान्य

24
00:01:44,240 --> 00:01:48,240
भाषा में सामान्य शब्दों में बता

25
00:01:48,240 --> 00:01:52,400
देते हैं और जो चीजें उनको नहीं भी

26
00:01:52,400 --> 00:01:56,520
पता होती हैं तो उसमें भी वह

27
00:01:56,520 --> 00:02:00,720
ऐसा नहीं करते कि दंब भरते हो अगर जैसे को कुछ किसी विषय

28
00:02:00,720 --> 00:02:04,720
में नहीं भी ज्ञात है तो उनसे मतलब वो दम

29
00:02:04,720 --> 00:02:09,320
तो झलकता ही नहीं है कभी मैंने देखा ही नहीं जी

30
00:02:09,320 --> 00:02:14,320
जय श्री राम सुजीत वैष्णव जी आभार

31
00:02:14,320 --> 00:02:18,560
आपका सुजीत जी छोटे भाई हैं इन

32
00:02:18,560 --> 00:02:23,440
इग्राम पर काफी एक्टिव रहते हैं और जो शुद्ध

33
00:02:23,440 --> 00:02:27,600
जी चीजें हैं धर्म की जो सामग्री है वो

34
00:02:27,600 --> 00:02:30,800
वितरित करते हैं

35
00:02:30,800 --> 00:02:34,880
तो इसी बारे में आज हम चर्चा करने आए हैं कि

36
00:02:34,880 --> 00:02:35,380
यह

37
00:02:35,120 --> 00:02:39,200
जो हालात है इसमर इस

38
00:02:39,200 --> 00:02:43,400
पर हम लोग किस तरीके से कार्य कर सकते हैं क्या कर सकते हैं इसका निदान क्या

39
00:02:43,400 --> 00:02:47,400
इसका समाधान क्या हो सकता है अभी

40
00:02:47,400 --> 00:02:51,400
आप देखिए छोटे छो देखिए पहली

41
00:02:51,400 --> 00:02:55,600
बात तो यह चीज है यह उत्पन्न क्यों हो रहा है समाज में यह हास्य

42
00:02:55,600 --> 00:03:00,200
क्यों बनाया जा रहा है आप देखिए बहुत ही मार्मिक दृश्य

43
00:03:00,200 --> 00:03:04,280
कई बार देखने को मिलते हैं जब अनिरुद्धाचार्य जी के लिए बहुत ही

44
00:03:04,280 --> 00:03:08,600
अभद्र तरीके से मजाक वाले मेम्स बना रहे हैं और पहले तो ये कुछ मैचोर

45
00:03:08,600 --> 00:03:12,720
पर्सन ही बनाते थे आजकल तो छोटा बच्चा भी बना रहे

46
00:03:12,720 --> 00:03:16,800
है ये एक बहुत ही खतरे की मतलब हानिकारक है समाज

47
00:03:16,800 --> 00:03:20,960
के लिए बच्चों में जो हमारे परंपरा से जुड़े हुए जो

48
00:03:20,960 --> 00:03:25,840
कथावाचक हैं जो उदारवादी हैं उनके प्रति

49
00:03:25,840 --> 00:03:30,680
क्या मैसेज जा रहा है जो एक छोटा बच्चा भी आज उनका

50
00:03:30,680 --> 00:03:35,160
मजाक बनाने से घबरा नहीं रहा है यह स्थिति आ गई है

51
00:03:35,160 --> 00:03:39,280
और इसमें कहीं ना कहीं एक चीज में यह भी देख रहा

52
00:03:39,280 --> 00:03:44,240
हूं शता जी की

53
00:03:44,240 --> 00:03:48,280
इसमें कहीं ना कहीं एक अभाव या कमी कह ले कि

54
00:03:48,280 --> 00:03:50,360
इनकी भी है अनिरुद्धाचार्य जी

55
00:03:50,360 --> 00:03:54,360
की और इसीलिए मैंने उनको केंद्र में रख कर के आज इस विषय को

56
00:03:54,360 --> 00:03:58,400
उठाए मैंने कई मीम्स देखे उनके ऊपर कि वो

57
00:03:58,400 --> 00:04:04,120
मान लो कुछ भी सरल सरल भाव को व्यक्त करते हुए कर रहे हैं

58
00:04:04,120 --> 00:04:08,240
तो तरह तरह के जोकर बना दिया मतलब जिसको

59
00:04:08,240 --> 00:04:12,480
भी अगर हमारे धर्म का मजाक उड़ाना है तो उसके लिए सबसे पहला

60
00:04:12,480 --> 00:04:17,040
और सबसे सरल सॉफ्ट टारगेट है कि अनिरुद्धाचार्य

61
00:04:17,040 --> 00:04:21,200
जी के बारे में मजाक बना लिया जाए क्योंकि अनचार जी भाई

62
00:04:21,200 --> 00:04:25,480
सरल स्वभाव के हैं वह कह देते हैं कि

63
00:04:25,480 --> 00:04:30,560
ठीक है अगर उसको इस तरीके से उसका रोजी रोटी चल रही तो चलने दो

64
00:04:30,560 --> 00:04:34,880
मगर मैं एक बात यहां पर याद दिलाना चाहूंगा अनुर

65
00:04:34,880 --> 00:04:39,000
अनिरुद्धाचार्य जी को

66
00:04:39,000 --> 00:04:43,200
कि आप भी गुरु भाव रखते हैं पूरी के शंकराचार्य जी के लिए हमने

67
00:04:43,200 --> 00:04:47,880
देखा है आप गए भी हैं कई बार उनका सानिध्य भी आपको प्राप्त है

68
00:04:47,880 --> 00:04:52,040
क्या शंकराचार्य कभी यह बोलते हैं कि आप अपनी

69
00:04:52,040 --> 00:04:56,560
उदारता का स्तर इतना पराकाष्ठा तक पहुंचा दो कि सामने वाला व्यक्ति

70
00:04:56,560 --> 00:05:01,240
आपके अस्तित्व और आदर्श को भी नष्ट करने पर अमादा हो जाए तब भी आप शांत रहो

71
00:05:01,240 --> 00:05:05,360
ऐसा तो नहीं है गुरुदेव ने अपना जो गीता का

72
00:05:05,360 --> 00:05:09,600
सार्वभौम सिद्धांत नामक जो ग्रंथ लिखा है उसमें

73
00:05:09,600 --> 00:05:13,640
जो सबसे स्ट्रोकिंग जो सबसे स्ट्रोकिंग वाला जो

74
00:05:13,640 --> 00:05:18,120
पार्ट है उसमें वही है जो गुरुदेव ख उसमें लिखा है गुरुदेव ने

75
00:05:18,120 --> 00:05:22,280
दो भगवत गीता के श्लोकों को मिलाकर के उसका एक वक्तव्य

76
00:05:22,280 --> 00:05:27,160
वहां पर लिखा है उसका भावार्थ के साथ कि जो उदारता

77
00:05:27,160 --> 00:05:31,160
अपने अस्तित्व और आदर्श पर हावी हो जा नष्ट करने के लिए आमादा हो जाए

78
00:05:31,160 --> 00:05:35,680
वो उदारता नहीं कायरता होती है तो कैसी उदारता है अनचार

79
00:05:35,680 --> 00:05:39,880
जी अभी कुछ समय पूर्व जो आज आपके साथ हो रहा

80
00:05:39,880 --> 00:05:44,760
है यही प्रेम ये देखिए फनियस्ट बाबा

81
00:05:44,760 --> 00:05:48,760
एक्सपोज यह सब टाइटल है इनके और

82
00:05:48,760 --> 00:05:52,840
यह सब और यह ऐसा नहीं है सामर्थ वान है

83
00:05:52,840 --> 00:05:54,080
यह बहुत

84
00:05:54,080 --> 00:05:58,200
सामर्थ मान है अगर ये अपनी पर आ जाए तो इनको बहुत ज्यादा

85
00:05:58,200 --> 00:06:02,240
समय नहीं लगेगा य सब कुछ ठीक करने में ये जो हो रहा है मगर ये

86
00:06:02,240 --> 00:06:06,440
इनकी उदारता है शस्ता है मगर मैं आज इनको

87
00:06:06,440 --> 00:06:10,520
जगाने के लिए यह लाइव चला रहा हूं

88
00:06:10,520 --> 00:06:14,560
यह जो जैसे नारद जी ने जामवंत जी ने मिलकर के हनुमान

89
00:06:14,560 --> 00:06:19,200
जी को पुकारा था ना बजरंग बली कहां गई वो शक्ति विलक्षण

90
00:06:19,200 --> 00:06:23,440
कुछ याद करो अपना पवन सुत बाल पर इसीलिए

91
00:06:23,440 --> 00:06:27,560
लाइव मैंने रखा है कि अनिरुद्धाचार्य जी आपसे

92
00:06:27,560 --> 00:06:32,200
हाथ जोड़ कर के विनम्र निवेदन है मेरा कि इस प्रकार का

93
00:06:32,200 --> 00:06:36,240
इस प्रकार की उदारता का आलंबन ना लीजिए जो आपके अस्तित्व और आदर्श का ही

94
00:06:36,240 --> 00:06:40,280
मजाक बना रही है अभी कुछ समय पूर्व

95
00:06:40,280 --> 00:06:44,760
प्रेमानंद जी महाराज जो है उनका भी मजाक बनाया गया

96
00:06:44,760 --> 00:06:48,920
था जी उनका भी इस तरह से मीम्स वगैरह बन रहे थे कुछ समय पूर्व मगर

97
00:06:48,920 --> 00:06:53,640
क्या हुआ उनकी जो पीआर टीम है बहुत एक्टिव रहती है

98
00:06:53,640 --> 00:06:57,720
और उन्होंने क्या किया तुरंत फुरत जो भी एक्शन लिए जाते

99
00:06:57,720 --> 00:07:02,320
हैं लीगल और ऑफिली जो भी चीज करनी होती उन्होंने फटाफट की

100
00:07:02,320 --> 00:07:06,400
और यह सब कुछ तुरंत की तुरंत व आड़े हाथ

101
00:07:06,400 --> 00:07:09,520
लिया और बंद हो गया

102
00:07:09,520 --> 00:07:13,640
आज उनके जो मीम्स बनने चालू हुए तो बंद हो गए देखिए यह

103
00:07:13,640 --> 00:07:17,840
एक पूरा एक तंत्र है

104
00:07:17,840 --> 00:07:21,880
जो वास्तविक सनातन को नष्ट करना चाहता है वास्तविक

105
00:07:21,880 --> 00:07:25,880
सनातन वर्णाश्रम धर्मी परंपरा प्राप्त ज्ञान पर चलने वाला

106
00:07:25,880 --> 00:07:29,880
इतना सा पता है मगर चल परंपरा पर रहे हा

107
00:07:29,880 --> 00:07:34,000
है ना उससे मतलब नहीं कितना कितनी किस लेवल तक है

108
00:07:34,000 --> 00:07:38,480
मगर परंपरा से जुड़े हुए लोगों पर प्रहार वर्णाश्रम यों पर

109
00:07:38,480 --> 00:07:42,880
प्रहार राम चार परंपरा पर प्रहार शंकराचार्य परंपरा

110
00:07:42,880 --> 00:07:47,600
पर प्रहार मधुवा चार्य परंपरा पर प्रहार परंपरा वादियों से दिक्कत है

111
00:07:47,600 --> 00:07:49,920
दुनिया

112
00:07:49,920 --> 00:07:52,520
को

113
00:07:52,520 --> 00:07:56,520
तो उन्होंने बंद करवा दिया प्रेमानंद जी ने तो क्या आपके

114
00:07:56,520 --> 00:08:00,760
पास सामर्थ्य नहीं है आप इतना सारा

115
00:08:00,760 --> 00:08:04,880
आपके पास इतना सामर्थ्य है कि आप दो दिन के अंदर चाहो तो

116
00:08:04,880 --> 00:08:08,920
इस सबको कंट्रोल कर सकते हो

117
00:08:08,920 --> 00:08:13,040
और जो उनको फॉलो करते हैं मैं उनको भी घसीट

118
00:08:13,040 --> 00:08:17,840
होंगा इसमें कि आप लोग क्या अंधे हैं क्या

119
00:08:17,840 --> 00:08:21,840
या फिर जो आपकी लज्जा वाला भाव है स्वाभिमान वाला भाव

120
00:08:21,840 --> 00:08:24,600
है चलो वह उदारवाद दिखला रहे हैं वह

121
00:08:24,600 --> 00:08:28,600
सहिष्णुता दिखरा रहे हैं आप लोग कैसे मोन हो भाई

122
00:08:28,600 --> 00:08:33,000
जो उनको फॉलो करते हैं मैं उनसे बात कर रहा हूं इस समय

123
00:08:33,000 --> 00:08:37,960
जी अरे जाइए उनको कहिए जाकर के के

124
00:08:37,960 --> 00:08:42,000
उठो और लड़ो अपने

125
00:08:42,000 --> 00:08:47,400
अस्तित्व और आदर्श के

126
00:08:47,400 --> 00:08:51,680
लिए अच्छा इस इसका एक कारण अभी देखिए

127
00:08:51,680 --> 00:08:55,800
यह भी बात है इसमें कि अगर देखा जाए तो ये

128
00:08:55,800 --> 00:08:59,920
जो मजाक बनता है ना ये धार्मिक व्यक्तित्व का या धार्मिक सामग्री

129
00:08:59,920 --> 00:09:04,200
का जो मजाक बनता है ये क्यों बनता है पहली बात तो यह है कि आज

130
00:09:04,200 --> 00:09:08,200
से डेढ़ दो साल से पहले मजाक नहीं

131
00:09:08,200 --> 00:09:12,480
बनता था अब पिछले डेढ़ दो साल में क्या हुआ य आप लोग आकलन

132
00:09:12,480 --> 00:09:16,640
लगा सकते हो क्यों बना क्यों बन रहा है आज आज ये

133
00:09:16,640 --> 00:09:20,800
दूसरे लोगों को विधियों को या लोगों को मजाक बनाने

134
00:09:20,800 --> 00:09:24,880
का मौका क्यों मिल रहा है इसका कारण क्या है यह

135
00:09:24,880 --> 00:09:30,800
आकलन आप स्वयं लगाए पिछले 100 डे स सालों में क्या चीजें हुई है

136
00:09:30,800 --> 00:09:34,800
सनातन का चोला ओढ करके सनातन विरुद्ध कार्य

137
00:09:34,800 --> 00:09:39,520
करने वाले तंत्र अस्तित्व में आ गए बिल्कुल परंपरा

138
00:09:39,520 --> 00:09:40,020
को

139
00:09:39,680 --> 00:09:44,160
ना मानने वाले तंत्र अस्तित्व में आ गए और उन्होंने

140
00:09:44,160 --> 00:09:48,880
थाली में परोस करके दिया है उन्होंने

141
00:09:48,880 --> 00:09:53,680
इन चीजों को थाली में परोस करके दिया है

142
00:09:53,680 --> 00:09:58,040
क्यों 100 1 स साल या 200 साल पहले भी

143
00:09:58,040 --> 00:10:02,160
जो हमारे रिचुअल्स थे जो परंपरा प्राप्त जो हमारी सामग्री थी अध्ययन था यह

144
00:10:02,160 --> 00:10:08,160
सब कुछ अस्तित्व में था मगर मजाल है कि कोई मजाक बना

145
00:10:08,440 --> 00:10:12,440
दे ऐसा कुछ नहीं हो सकता था तब

146
00:10:12,440 --> 00:10:16,600
मगर ये जी इसमें ऐसा

147
00:10:16,600 --> 00:10:20,960
होता है ना कि जो यह जो कुत है ना

148
00:10:20,960 --> 00:10:25,040
जो इस तरह का कार्य करते हैं वह दिमाग में घुसने का कार्य कर

149
00:10:25,040 --> 00:10:29,040
ये होता है उनका पहले धीरे धीरे क्या है मजाक के स्तर पर शुरू करना ठीक है

150
00:10:29,040 --> 00:10:33,200
बहुत बहुत ही फनी लग रहा है अच्छा लग रहा है मतलब की हंसी आ रही है चीज आ रही है फिर

151
00:10:33,200 --> 00:10:37,280
ऐसे करते करते करते करते जब आप उसी चीज को बार बार बार बार बार बार

152
00:10:37,280 --> 00:10:41,320
देखेंगे सुनेंगे देखेंगे सुनेंगे जब रील्स में आपके आते रहेंगे ना तो एक मानसिकता

153
00:10:41,320 --> 00:10:45,320
ऐसी बन जाएगी कि कि यह व्यक्ति ऐसा ही है और फिर

154
00:10:45,320 --> 00:10:49,480
उसको सीरियस लेना बंद कर देंगे तो जितने भी आचार्य हमारे जो है जिनके

155
00:10:49,480 --> 00:10:53,480
साथ इस तरह की चीजें हो रही है ना जिसमें अचार्य जी बिल्कुल है तो

156
00:10:53,480 --> 00:10:54,800
उनके साथ क्या होगा कि एक समय ऐसा

157
00:10:54,800 --> 00:10:58,920
आएगा कि फिर उनको लोग सीरियस लेना बंद कर देंगे और फिर जब जब आचार्यों

158
00:10:58,920 --> 00:11:02,920
को लेना बंद कर देंगे तो धर्म से अपने आप ही अलग हो जाएंगे ठीक है तो

159
00:11:02,920 --> 00:11:07,280
ये बहुत ही मतलब मुझे ऐसा कभी-कभी लगता है कि बहुत ही मब सोच समझ के ये सब चीजें होती है

160
00:11:07,280 --> 00:11:11,400
और बिल्कुल मैं हां मैं जानता हूं कि कई लोग उसमें बह जाते हैं और कई लोग फिर

161
00:11:11,400 --> 00:11:15,440
लाइव फॉलोअर्स के खातिर क्या बोलते हैं वो लोग बनाना शुरू कर देते हैं लेकिन उकी

162
00:11:15,440 --> 00:11:20,120
शुरुआत ऐसे ही होती है ठीक है जैसे मीम बनना फिर डंक मीम बनना

163
00:11:20,120 --> 00:11:25,000
फिर ऐसे ऐसे बनेंगे कि मतलब कि उसमें बिल्कुल एकदम धर्म को एक तरफ छोड़कर

164
00:11:25,000 --> 00:11:29,480
मानवता का एक तरफ छोड़कर बस एकदम उसपे मजाक मस्ती हो रही है ठीक है

165
00:11:29,480 --> 00:11:33,520
तो इस तरह की चीजें होती है और ये बहुत डेंजरस है और ये अभी से नहीं ये जब ये फ

166
00:11:33,520 --> 00:11:38,160
के समय से और कुट के समय से ही शुरू हो गया था कि लोगों के दिमाग पे

167
00:11:38,160 --> 00:11:42,320
अ मतलब कि हावी होना और हावी कैसे होगा जब एक

168
00:11:42,320 --> 00:11:46,800
ही चीज आपके पास बार-बार आपको दिखती रहेगी दिखती रहेगी तो अपने आप हावी होने लग जाएगी

169
00:11:46,800 --> 00:11:50,880
मेरे ऐसे बहुत सारे मित्र हैं जो बिल्कुल जैसे मान लीजिए

170
00:11:50,880 --> 00:11:55,040
कोई एक एक पार्टी के बिल्कुल अगेंस्ट है ठीक है अब

171
00:11:55,040 --> 00:12:00,520
मैं एग्जांपल दे रहा हूं एक कोई एक्स वाई जड लेसे कोई पार्टी है अब क्या हुआ कि

172
00:12:00,520 --> 00:12:04,600
उसके फीड प उसी के बारे में अच्छी चीजें अच्छी चीज ऐसे आने

173
00:12:04,600 --> 00:12:08,920
लगी आने लगी आने लग गई तो अब क्या हुआ कि उसकी पूरी मानसिकता पूरी बदल गई बस उसको लगा

174
00:12:08,920 --> 00:12:10,080
यही सही है क्योंकि

175
00:12:10,080 --> 00:12:14,080
और ये बेसिक ह्यूमन नेचर है कि जब इंफॉर्मेशन आपके पास बैक टू बैक बैक टू बक फ्लो

176
00:12:14,080 --> 00:12:18,160
होगा ना आप जब आपके दिमाग आपके दिमाग में वो घुस जाएगी चीज तो आप उसे

177
00:12:18,160 --> 00:12:22,320
ही सत्य मानने बैठ जाओगे ये बिल्कुल सही है ऐसे ही ब्रेन वश होता है आतंकवादियों

178
00:12:22,320 --> 00:12:26,520
का भी जब उनको एक ही चीज बारबार रिपीट कराई जाती है कराई जाती कराई जाती है वो मानते

179
00:12:26,520 --> 00:12:30,600
कि वही सत है ठीक है तो इसी चीज का जो बुरा और अच्छा दोनों के लिए प्रयोग में

180
00:12:30,600 --> 00:12:34,760
आता है अच्छे में कैसे आता है अच्छे में हमारी सेना के लिए आता है जैसे

181
00:12:34,760 --> 00:12:38,840
सेना में अगर बोल दिया जाए कि आपके कमांडिंग ऑफिसर का ये आदेश है आपको ये मानना है तो मानना

182
00:12:38,840 --> 00:12:43,120
है उसके अंदर भीय बात फीड की गई है लेकिन वो जो सोर्स है मतलब वो जो एम

183
00:12:43,120 --> 00:12:47,160
है वो क्या है वो अच्छे के लिए वो धर्म के लिए है ठीक है और उसी चीज का फायदा

184
00:12:47,160 --> 00:12:51,160
उठा के देखिए यहां पर ये सब चीजें होती है और फिर इसके बाद और ये

185
00:12:51,160 --> 00:12:55,560
बहुत बुरा है देश के लिए इतना बुरा है कि आज आप देख लीजिए

186
00:12:55,560 --> 00:12:59,880
पश्चिम को वेस्ट में क्या हो रहा है टिकटक ने किस तरह से हावी कर लिया है

187
00:12:59,880 --> 00:13:04,720
कि लोग मतलब पागल है उसके पीछे मतलब ऐसा है कि अगर एक दो दिन नहीं चलाएंगे तो एकदम

188
00:13:04,720 --> 00:13:08,960
मतलब साइकिक प्रॉब्लम हो गई है उनको ठीक है ये समस्या और यही समस्या अभी

189
00:13:08,960 --> 00:13:13,560
और वो सिर्फ टिकटक नाम हटाए ना लेकिन ये टेक्नोलॉजी नहीं हटी है

190
00:13:13,560 --> 00:13:17,640
जो जो जैसे ये रील्स आ गई और यह जो अलग अलग करके

191
00:13:17,640 --> 00:13:21,680
ये फु प या ं पे या जितने प्लेटफार्म है उन सब पे तो

192
00:13:21,680 --> 00:13:25,120
समस्या ये आ रही है और इस चीज को बिल्कुल मुझे लगता है

193
00:13:25,120 --> 00:13:29,600
कि फिल्टर करना चाहिए मैं ये नहीं कह रहा हूं कि ये सही नहीं है बिल्कुल बिल्कुल ठीक

194
00:13:29,600 --> 00:13:33,680
और इस सब टेक्नोलॉजी का इस्तेमाल तो बिल्कुल करता हम हम भी करते हैं आप भी करते हैं

195
00:13:33,680 --> 00:13:37,840
आवान भी करता है सब लोग करते हैं इसको सीखने के लिए समझने के लिए अपने विचारों

196
00:13:37,840 --> 00:13:42,240
को फैलाने के लिए सही चीजों को बताने के लिए ठीक है लेकिन फिर उसका दुरुपयोग

197
00:13:42,240 --> 00:13:46,360
फिर इस तरह से होता है तो मेरा भी य मेरा मैं बिल्कुल आपसे

198
00:13:46,360 --> 00:13:50,400
सहमत हूं कि इसमें फिल्टरेशन बहुत बहुत आवश्यक है होना ही चाहिए क्योंकि अगर

199
00:13:50,400 --> 00:13:55,240
वह नहीं होगा तो यह एक बहुत बड़ा अभिशाप बन जाएगा

200
00:13:55,240 --> 00:13:59,400
समाज के लिए तो और यह बिल्कुल भी ठीक नहीं बन

201
00:13:59,400 --> 00:14:03,520
वाला सीन आपने बताया ना यह कुछ दिन पूर्व हमने एक वीडियो

202
00:14:03,520 --> 00:14:07,560
बनाया था उसमें हमने इसको दर्शाया था कि किसी

203
00:14:07,560 --> 00:14:11,640
व्यक्ति को मतलब कोई तंत्र बेन बशिंग कैसे करता है स्लीपर सेल्स तैयार

204
00:14:11,640 --> 00:14:15,960
किए जाते हैं जो जी वो चक्कर काट रहे हैं कि तुम्हें

205
00:14:15,960 --> 00:14:20,080
ये करना है वो तुम्हारा बॉस है वो तुमको वो जो कहेगा वही तुम्हें करना है वो

206
00:14:20,080 --> 00:14:24,320
बार-बार उसके कान में जब वो आवाज जाती है तो एक दिन वो

207
00:14:24,320 --> 00:14:28,480
पता नहीं शुरू क्यों हुई थी कहां से हुई थी मगर एक दिन वो आवाज प्रमाण बन जाती

208
00:14:28,480 --> 00:14:32,840
है उसके लिए हा य यही यही चीज है यही चीज इसी तरीके

209
00:14:32,840 --> 00:14:36,960
से आज क्या हो रहा है कि अनिरुद्धाचार्य जी के रूप में

210
00:14:36,960 --> 00:14:40,160
या अन्य अन्य जो वो चीज हैं उनके

211
00:14:40,160 --> 00:14:44,360
रूप में जो कटाक्ष हो रहे हैं धार्मिक सामग्री पर धार्मिक

212
00:14:44,360 --> 00:14:48,560
उन पर प्रकल्प पर इन कटाक्ष की वजह से धर्म को क्षति बहुत

213
00:14:48,560 --> 00:14:52,920
पहुंच रही है और उसम पूरा टेक्नोलॉजी

214
00:14:52,920 --> 00:14:58,920
का है यही है जैसे इसम अगर बात कहे

215
00:15:00,120 --> 00:15:04,320
आज से डेढ़ दो साल से लेकर पहले से लेकर आज

216
00:15:04,320 --> 00:15:08,640
तक क्या हुआ है क्या अंतर आया है तो इस इन चीजों

217
00:15:08,640 --> 00:15:13,160
का दोष आप किसको दोगे है ना

218
00:15:13,160 --> 00:15:17,320
भाई यह जो स्थिति है जो मजाक बन रहा है धर्म का इसका दोष

219
00:15:17,320 --> 00:15:21,440
आप किसे दोगे सामने वाले को या किसी ऐसे अपने को जिसने

220
00:15:21,440 --> 00:15:25,560
हमारी चीजों को थाली में परोस करके सामने वाले को दे दिया

221
00:15:25,560 --> 00:15:29,320
किसको दोगे इसका दोष

222
00:15:29,320 --> 00:15:33,600
अब इसका दोष आप राजा राम मोहन रॉय को दे दो

223
00:15:33,600 --> 00:15:37,640
आर्य समाज को दे दो या इसी कड़ी में और आते आने वाले

224
00:15:37,640 --> 00:15:41,880
जो तंत्र है मैं तो इसका साक्षात आपको प्रूफ दे दूं अभी के अभी यही

225
00:15:41,880 --> 00:15:46,000
कहीं और किसी ऐतिहासिक घटना में जाने की आवश्यकता ही नहीं है किसी

226
00:15:46,000 --> 00:15:50,080
भी ऐतिहासिक घटना में जाने की आवश्यकता नहीं है मैं जब

227
00:15:50,080 --> 00:15:55,640
मुस्लिम लोगों से बात कर रहा हूं क्या तुम्हारा ईश्वर सर्वशक्तिमान

228
00:15:55,640 --> 00:15:59,800
है एक ऐसा बिंदु जिसकी काट

229
00:15:59,800 --> 00:16:03,920
है ही नहीं पूरे संसार में एक ऐसा बिंदु उस पर मैं विधर्मी

230
00:16:03,920 --> 00:16:08,160
हों से बात कर रहा हूं विधर्मी हों को ताकत देने वाला वहां उस समय पता है कौन है

231
00:16:08,160 --> 00:16:12,320
आर समाज वहां वो लोग मुझसे कह रहे

232
00:16:12,320 --> 00:16:16,480
हैं कि तुम्हारा जो हिंदू है तुम्हारा जो सनातनी भाई है आर

233
00:16:16,480 --> 00:16:20,480
समाजी वो तो खुद कह रहा है ईश्वर अवतार नहीं ले सकता

234
00:16:20,480 --> 00:16:24,640
तो पहले जाओ अपना अपना मामला सुल फिर आना हमारे पास

235
00:16:24,640 --> 00:16:29,160
मैं क्यों आज ये हाथ मुंह धो के पीछे पड़ा सर्वशक्तिमान सोच

236
00:16:29,160 --> 00:16:33,560
सबसे पहले किसके पास गया ना स्कोन के पास ना आर्य समाज के पास

237
00:16:33,560 --> 00:16:37,680
सबसे पहले धर्मिस ही गया था तब उस दिन मुझे

238
00:16:37,680 --> 00:16:41,880
पता चला था कि भाई वास्तव में वर्क कहां करना है

239
00:16:41,880 --> 00:16:44,880
हालांकि वहां पर मैंने अपनी चीजें रखी

240
00:16:44,880 --> 00:16:48,920
कि आर्य समाज की बात क्यों नहीं मान्य है सनातन की तरफ से वह सब

241
00:16:48,920 --> 00:16:53,080
मैंने रखा मगर फिर भी उनको तो बल मिलता है और

242
00:16:53,080 --> 00:16:57,120
और जो मैंने रखाब हा जब एक साधारण हिंदू

243
00:16:57,120 --> 00:17:01,280
को वो चीजें ना पता हो मैंने रखी वहा पर आसानी से व

244
00:17:01,280 --> 00:17:05,400
वहा पर उसका ब्रेन वश हो जाएगा आसानी से वय सोचने लगेगा कि हा भाई हमारा

245
00:17:05,400 --> 00:17:11,400
धर्म कमजोर है कौन परोस के दे रहा है व

246
00:17:11,800 --> 00:17:13,920
कमजोरी

247
00:17:13,920 --> 00:17:19,000
अब यह जो चीज है

248
00:17:19,000 --> 00:17:23,040
कि यह पहले तो यह हो गया कि पिछले 100 डे स वर्षों

249
00:17:23,040 --> 00:17:27,080
में यह जो तथाकथित जो धर्म का प्रचार

250
00:17:27,080 --> 00:17:31,280
करने वाले तंत्र है यह हमारी धार्मिक चीजों का

251
00:17:31,280 --> 00:17:35,720
खिलवाड़ बना कर के प्रस्तुत कर रहे हैं और फिर उस प्रस्तुत

252
00:17:35,720 --> 00:17:39,840
करने का उपयोग दुरुपयोग करते हैं दूसरे लोग

253
00:17:39,840 --> 00:17:44,240
मजाक बनाते हैं भा

254
00:17:44,240 --> 00:17:48,360
अब एक दूसरा पहलू और है वह भी

255
00:17:48,360 --> 00:17:52,360
लगभग इससे मिलता जुलता ही है वह क्या है कि आजक

256
00:17:52,360 --> 00:17:56,960
जिसको देखो वो आचार्य को प्राप्त करने लगा

257
00:17:56,960 --> 00:18:00,760
है बिल्कुल इसको देखो वो

258
00:18:00,760 --> 00:18:04,840
बच्चों को कथावाचक बना के बिठा दिया जने हुआ कि नहीं हुआ नहीं

259
00:18:04,840 --> 00:18:09,040
पता यज्ञ पवित हुआ है कि नहीं हुआ नहीं पता परंपरा

260
00:18:09,040 --> 00:18:13,320
प्राप्त अध्यन हो रहा है कि नहीं हो रहा है नहीं पता मगर

261
00:18:13,320 --> 00:18:17,440
भैया वो अथॉरिटी टाइप से बनकर बैठे

262
00:18:17,440 --> 00:18:22,360
हुए कि हम बताएंगे आपको धर्म बिल्कुल शंकराचार्य नहीं बताएंगे

263
00:18:22,360 --> 00:18:26,360
रामानुजाचार्य नहीं बताएंगे उस परंपरा के प्रामाणिक आचार्य

264
00:18:26,360 --> 00:18:30,880
नहीं बताएंगे वो डले रहेंगे ग गौशाला होगी कहीं

265
00:18:30,880 --> 00:18:35,000
वहां पर गौ माता की सेवा करते हुए व वो ऐसे मिलेंगे

266
00:18:35,000 --> 00:18:39,560
आपको और जो यह इस तरह का जो एक सेना तैयार हो रही

267
00:18:39,560 --> 00:18:44,040
है सनातन के प्रचार के नाम पर एक

268
00:18:44,040 --> 00:18:48,160
तथाकथित सो कॉल्ड अथॉरिटी बनकर के वह बैठ

269
00:18:48,160 --> 00:18:52,880
जाते हैं गद्दी पर स्वयं को व्यास के रूप में प्रस्तुत करते हैं

270
00:18:52,880 --> 00:18:56,880
और वो बताते हैं कि भैया ऐसे नहीं ऐसे अभी कल मैं देख

271
00:18:56,880 --> 00:19:01,120
रहा था कोई मात्र ने ट्वीट कर दिया कि करवा

272
00:19:01,120 --> 00:19:06,000
चौत तो वो तो खैर ट्वीट जो किया वो समाजी

273
00:19:06,000 --> 00:19:10,120
थी कि भूखे रहने से किसी की आयु क्यों बढ़ती

274
00:19:10,120 --> 00:19:14,200
है अब फिर वही बात आ जाएगी कि तुम्हारा

275
00:19:14,200 --> 00:19:15,840
विश्वास विश्वास

276
00:19:15,840 --> 00:19:20,320
और दूसरे का विश्वास नथिंग अंधविश्वास अविश्वास

277
00:19:20,320 --> 00:19:24,360
तुम्हारा विश्वास विश्वास जहां तक जिस सीमा तक तुम्हें विश्वास

278
00:19:24,360 --> 00:19:28,480
है कि गायत्री मंत्र से हम मुक्ति पाएंगे प्रणव के उच्चारण से मुक्ति

279
00:19:28,480 --> 00:19:32,840
पा जहां तक तुम्हारी आस्था है तुम्हारा विश्वास है वहां तक ठीक

280
00:19:32,840 --> 00:19:36,880
है और फास्टिंग की अगर बात कर ले तो साइंटिफिकली

281
00:19:36,880 --> 00:19:40,880
बात करने आ जाना भाई ऐसा नहीं है गुरुदेव

282
00:19:40,880 --> 00:19:45,840
की लाइब्रेरी में साइंस वाली किताब पढ़ाई जाती है

283
00:19:45,840 --> 00:19:49,880
तो जो इस तरह के कटाक्ष करने वाले लोग हैं कि इससे क्या होगा वह क्या

284
00:19:49,880 --> 00:19:53,920
होगा वह आते ही नहीं है बस दूर ही दूर से बैठ कर के

285
00:19:53,920 --> 00:19:57,960
तो फिर मुझे फिर भा बातें याद आती फिर फिर मुझे मेरे ही समर्थक कहते भैया

286
00:19:57,960 --> 00:20:01,760
उससे घमंड बोला मत

287
00:20:01,760 --> 00:20:05,800
करो जी कभी-कभी ऐसा होता है

288
00:20:05,800 --> 00:20:10,000
कि मैं मैं आपको खुद बता दूं कुछ

289
00:20:10,000 --> 00:20:14,040
10 साल पहले जब मैं ऐसे अकाट्य रूप

290
00:20:14,040 --> 00:20:18,520
से अपनी बातों को निरता से बोलने वाले लोगों को देखता था सुनता था

291
00:20:18,520 --> 00:20:22,960
तो मुझे लगता था कि अहंकारी है एक सामान्य

292
00:20:22,960 --> 00:20:27,200
व्यक्ति की दृष्टिकोण से देखो कभी-कभी निर्विवाद

293
00:20:27,200 --> 00:20:31,040
निर्भीक हो करर के सत्य बोलने वाला अहंकारी लगता

294
00:20:31,040 --> 00:20:35,160
है मगर मेरा एक गुरु

295
00:20:35,160 --> 00:20:39,560
कृपा रही माता पिता की कृपा रही आशीर्वाद रहा

296
00:20:39,560 --> 00:20:43,600
भगवत कृपा रही जो बचपन से एक श्री राम के प्रति

297
00:20:43,600 --> 00:20:47,680
बहुत ज्यादा निष्ठा रही तो उसकी वजह से कुछ सिद्धांत वादी

298
00:20:47,680 --> 00:20:51,760
मुझे लगता है कि मैं बना था मैं अपनी अपनी य प्रशंसा नहीं कर रहा हूं

299
00:20:51,760 --> 00:20:55,840
मुझे अपने पर बहुत डाउट रहता है कि भाई मेरे से बहुत सारे पाप

300
00:20:55,840 --> 00:21:00,880
आचरण हो रहे होंगे गलतियां हो रही होंगी

301
00:21:00,880 --> 00:21:05,560
मगर एक निष्ठा की वजह से मुझे ऐसा लगता है कि कुछ सिद्धांत

302
00:21:05,560 --> 00:21:09,800
थे जो लगातार सदैव बने हुए थे और

303
00:21:09,800 --> 00:21:13,800
उनमें से एक सिद्धांत यह था कि जब भी

304
00:21:13,800 --> 00:21:18,080
जीवन में कोई भी विषय वस्तु स्थिति

305
00:21:18,080 --> 00:21:22,680
व्यक्ति आपको गलत लगे तो मैं

306
00:21:22,680 --> 00:21:26,840
इस तरह से सोचता था मन में और अपने मित्रों को कहता भी था साथ

307
00:21:26,840 --> 00:21:30,920
वालों को कि जब भी आप कोई विषय वस्तु स्थिति या व्यक्ति गलत

308
00:21:30,920 --> 00:21:34,920
लग रहा है ऐसा आपको लग रहा है कि गलत है तो सबसे

309
00:21:34,920 --> 00:21:39,160
पहले आप उसके लॉयर बन जाइए आप

310
00:21:39,160 --> 00:21:43,680
लॉयर बन जाइए

311
00:21:43,680 --> 00:21:48,720
और एक मिनट

312
00:21:48,720 --> 00:21:53,200
बस उसके आप लॉयर बनिए और यह सोचिए कि वह आपका क्लाइंट

313
00:21:53,200 --> 00:21:59,200
है आप न्यायालय में खड़े हुए हैं आपको

314
00:21:59,200 --> 00:22:03,560
उसकी उसका जो है केस लड़ना है आपको उसको बचाना है उस पर

315
00:22:03,560 --> 00:22:07,680
केस चल रहा है और वही सारे दोष है जो आप अभी देख रहे थे

316
00:22:07,680 --> 00:22:11,920
उसमें दोष अब आप यह सोचिए कि क्या कोई

317
00:22:11,920 --> 00:22:16,480
ऐसा रास्ता है जिससे वह बच सकता है और जब उसके

318
00:22:16,480 --> 00:22:21,360
एक निष्ठावान एक क्या कहते हैं

319
00:22:21,360 --> 00:22:25,400
पक्षपात विहीन और न्याय

320
00:22:25,400 --> 00:22:29,720
प्रिय लॉयर जो कोई भी धोखा नहीं दे रहा अपने क्लाइंट को ऐसे लॉयर

321
00:22:29,720 --> 00:22:33,800
बनते हुए जब आपको एक भी रास्ता ना मिले ना उसे बचाने

322
00:22:33,800 --> 00:22:37,880
का तब समझना कि वह दोषी है वरना तब

323
00:22:37,880 --> 00:22:42,360
तक किसी को दोषी नहीं स्वीकार करना चाहिए

324
00:22:42,360 --> 00:22:46,400
सबसे पहले जब भी किसी पर किसी में दोष दृष्टि आए तो आप यह

325
00:22:46,400 --> 00:22:50,520
सोचो वो आपका भाई है वह आपका बेटा है वो आपका पिता है

326
00:22:50,520 --> 00:22:54,560
इस दृष्टि से जब उसको देखो और सोचो कि मैं क्या क्या आंकड़े लगा सकता

327
00:22:54,560 --> 00:22:58,640
हूं कौन-कौन से तर्क दे सकता हूं कि यह जो दो

328
00:22:58,640 --> 00:22:59,140
मुझे

329
00:22:58,840 --> 00:23:03,120
इसमें दिख रहा है यह जो है निर्दोष सिद्ध हो सके

330
00:23:03,120 --> 00:23:07,120
और जब ऐसा कोई रास्ता ना मिले उसके बाद हमें किसी

331
00:23:07,120 --> 00:23:11,360
में दोष देखना चाहिए बिल्कुल

332
00:23:11,360 --> 00:23:15,440
तो इस तरह के कुछ छोटे मोटे छोटे मोटे ऐसे कुछ सिद्धांत

333
00:23:15,440 --> 00:23:19,800
रहे जीवन में जिनके कारण जो प्रभु श्री राम के

334
00:23:19,800 --> 00:23:24,200
जो सानिध्य था माता-पिता का आशीर्वाद तो जिनके कारण यह

335
00:23:24,200 --> 00:23:28,520
गुरु कृपा इत्यादि जो है प्राप्त हुई मगर बात

336
00:23:28,520 --> 00:23:34,200
वही है कि इस तरह से पक्षपात विहीन

337
00:23:34,200 --> 00:23:38,800
दृष्टिकोण आज उन लोगों के पास भी नहीं है जो जो डंका

338
00:23:38,800 --> 00:23:42,880
डंका पीटते हैं इस बात का डंका बजाते कि हम बहुत बड़े सनातन प्रचार का

339
00:23:42,880 --> 00:23:45,840
प्रचार करने वाले

340
00:23:45,840 --> 00:23:49,920
हैं और ऐसे लोग

341
00:23:49,920 --> 00:23:54,080
जो शष्ण शता जिनके अंदर विनम्रता

342
00:23:54,080 --> 00:23:58,680
है आप देखिए कभी भी दम नहीं दिखता है कभी भी अ

343
00:23:58,680 --> 00:24:03,360
जी को कभी भी देखिए उनके अंदर कभी आपको दम नहीं दिखेगा

344
00:24:03,360 --> 00:24:07,560
वो बहुत बड़ी बड़ी बातें भी कह रहे होंगे तो कहो उसमें

345
00:24:07,560 --> 00:24:11,640
भी इतना विनम्रता दिखे कि पूछिए नहीं जैसे

346
00:24:11,640 --> 00:24:13,920
कभी कभी किसी बालक

347
00:24:13,920 --> 00:24:18,120
से बात कर रहे हो और जबक उनका व्यक्तित्व ऐसा वैसा नहीं है भाई व चाहे

348
00:24:18,120 --> 00:24:22,440
तो अपने व्यक्तित्व का खूब उपयोग कर सकते अपने दम को प्रस्तुत करने में

349
00:24:22,440 --> 00:24:26,440
अपनी वर्चस्व सिद्ध करने में मगर उन्होंने एक वो बना

350
00:24:26,440 --> 00:24:30,960
के रखा है मगर भैया अनिरुद्धाचार्य जी मेरा आपसे निवेदन

351
00:24:30,960 --> 00:24:35,040
है कि आप अपनी सामर्थ्य को याद

352
00:24:35,040 --> 00:24:39,200
करिए आप कौन हैं किन गुरुओं के शिष्य हैं और किन

353
00:24:39,200 --> 00:24:43,280
गुरुओं की परंपरा को आप आगे बढ़ा रहे हैं सनातन परंपरा को आगे

354
00:24:43,280 --> 00:24:47,600
बढ़ा रहे हैं आप याद करिए स्मरण करिए और

355
00:24:47,600 --> 00:24:51,680
जागिए और कारवाई करिए

356
00:24:51,680 --> 00:24:56,320
यह सब जो आपके विरुद्ध हो रहा है आप चाहे तो इसको कंट्रोल कर सकते

357
00:24:56,320 --> 00:25:01,520
हैं और भैया के जो फॉलोअर्स है

358
00:25:01,520 --> 00:25:06,000
जगाए जाइए जाकर के जगाए इनको इनकी शक्तियों को

359
00:25:06,000 --> 00:25:11,280
भूल गए ये अपनी शक्तियां हनुमान जी की

360
00:25:11,280 --> 00:25:16,200
तरह इनको इनकी शक्तियां याद

361
00:25:16,200 --> 00:25:20,520
दिलाए और ये जो दूसरा पहलू जो मैं आपको बता रहा था दूसरा

362
00:25:20,520 --> 00:25:24,520
पहलू कि भाई कोई बच्चा है वो कथावाचक बनकर बैठा है वो

363
00:25:24,520 --> 00:25:28,560
कथाएं सुना रहा है वो अपने हिसाब से जो मनाए वो धर्म के विषय

364
00:25:28,560 --> 00:25:32,680
में धर्म अधर्म सब कुछ बता दे रहा है फिर कथा वाचिका

365
00:25:32,680 --> 00:25:37,080
है वोह परंपरा से जुड़ी हुई है परंपरा

366
00:25:37,080 --> 00:25:41,520
प्राप्त लोगों से जुड़ी हुई है है ना और

367
00:25:41,520 --> 00:25:45,720
अवतारवाद को मानने वाली है फिर सत्यार्थ प्रकाश के साथ फोटो खिंचा

368
00:25:45,720 --> 00:25:49,880
आती है यह कैसा यह हिंदू हिंदू हिंदू के अंदर वो जो

369
00:25:49,880 --> 00:25:55,760
बाहर वाला सेकुलर हिंदू है वो तो अलग है य ये सेकुलरिज्म

370
00:25:55,760 --> 00:25:59,760
है भाई स्पष्ट वादी सतवादी बनो ना या तो

371
00:25:59,760 --> 00:26:03,920
अवतार को मान लो या मत मानो मैं तो कभी प्रमोशन नहीं कर

372
00:26:03,920 --> 00:26:08,040
सकता ये देखिए ना कि उनका कुछ ना कुछ

373
00:26:08,040 --> 00:26:12,040
तो स्वार्थ होगा कि उनको ऐसा करना पड़ रहा है स्वार्थ यही है गौतम

374
00:26:12,040 --> 00:26:16,040
टट्टर जी की भी फैन फॉलोइंग बहुत लंबी है हमारी भी लंबी है हम

375
00:26:16,040 --> 00:26:20,520
दोनों की मिल जाएगी दोनों की बढ़ जाएगी यही स्वार्थ है हां वही ना

376
00:26:20,520 --> 00:26:25,040
तो अब ये तो ये लेकिन रास्ता धर्म का नहीं है ना

377
00:26:25,040 --> 00:26:29,120
नहीं है अब इसमें ये हो गया आपके लिए प्राथमिकता क्या

378
00:26:29,120 --> 00:26:31,400
है हां

379
00:26:31,400 --> 00:26:35,560
अपनी वो वस्ता अपना वो क्या कहते हैं फेमस

380
00:26:35,560 --> 00:26:39,880
होना या फिर धर्म क्या आपके लिए प्राथमिक

381
00:26:39,880 --> 00:26:44,320
है तो वो पता चल गया बिल्कुल जिसमें कहा जा रहा है जिस पुस्तक

382
00:26:44,320 --> 00:26:48,440
में लिखा है मूर्ति पूजा पाखंड है अधर्म है

383
00:26:48,440 --> 00:26:52,480
राम लीला देखना पाप है ये सब चीजें बताने वाली

384
00:26:52,480 --> 00:26:57,480
लोगों को आप साथ में खड़े होकर के उस

385
00:26:57,480 --> 00:27:01,480
और वो भी आप कोई आप कोई राजनीतिक

386
00:27:01,480 --> 00:27:05,880
व्यक्तित्व नहीं है आपका कि आप वोट मांगने जा रहे हैं आपको सबको खुश करना है

387
00:27:05,880 --> 00:27:10,560
आपको हिंदू को खुश करना है उसमें भी उस हिंदू को खुश करना है जो मूर्ति पूजक है

388
00:27:10,560 --> 00:27:14,640
आपकी पहचान है इस बारे में बिल्कुल हम और

389
00:27:14,640 --> 00:27:18,800
तब भी आप जो है सत्यार्थ प्रकाश को लेकर के प्रमोट कर रहे हो तो ये

390
00:27:18,800 --> 00:27:22,960
एक मुझे वो डायलॉग याद आता है कि ना फलाने से है ना फलाने से है इस देश

391
00:27:22,960 --> 00:27:28,960
में तकलीफ बेईमानों से है बिल्कुल बिल्कुल

392
00:27:32,360 --> 00:27:36,600
येय अब ये समस्या जब उस जगह बैठे हुए लोगों

393
00:27:36,600 --> 00:27:40,680
के साथ में है जब वहां से ही श शोधित नहीं होगी तो

394
00:27:40,680 --> 00:27:44,800
फिर नीचे जो उनके फॉलोअर्स है जो उनके ऊपर अपनी आंख

395
00:27:44,800 --> 00:27:48,920
उठाकर देखते हैं उनको कि इनसे हमें यह प्राप्त होगा ज्ञान प्राप्त

396
00:27:48,920 --> 00:27:53,320
होगा नॉलेज प्राप्त होग अंडरस्टैंडिंग प्राप्त होगी तो जब वही जो सोर्स

397
00:27:53,320 --> 00:27:57,360
बेस ही अगर ऐसा है जब नीव ही ऐसी है तो ऊपर खड़ा हुआ जो

398
00:27:57,360 --> 00:28:01,480
मकान है फिर वो तो फिर हिलेगा ही ना क्योंकि धर्म से तो वो बंधा नहीं है व

399
00:28:01,480 --> 00:28:05,560
मकान उसकी नीव धर्म से नहीं बंधी है उसकी नीव बंधी है कि

400
00:28:05,560 --> 00:28:09,960
फॉलोवर्स बढ़ जाए नाम हो जाए इन सब चीजों से इन मैटेरियलिस्टिक

401
00:28:09,960 --> 00:28:14,400
चीजों से तो फिर तो नीव हिलेगी हिलेगी और जब हिलेगी तो

402
00:28:14,400 --> 00:28:18,800
फिर ऊपर जितना बड़ा अपने जो मकान खड़ा किया है वो ढगा

403
00:28:18,800 --> 00:28:23,160
वो एकदम से ढगा और ढगा तो फिर सबको कष्ट होगा यह समस्या आती

404
00:28:23,160 --> 00:28:27,320
है तो इसलिए मेरा भी यही मानना है कि नीव हमारी वही

405
00:28:27,320 --> 00:28:31,480
परंपरा प्राप्त आचार ही है धर्म की और उसी पर

406
00:28:31,480 --> 00:28:35,560
ही हमारा जीवन जो है खड़ा होता है तो

407
00:28:35,560 --> 00:28:39,560
इस तरह से जो जया किशोरी जी है वह परंपरा

408
00:28:39,560 --> 00:28:43,640
प्राप्त आचार से प्रत्यक्ष ना जुड़ी हो मगर यदि वह पुराण पर बात

409
00:28:43,640 --> 00:28:47,840
कर रही है कथा सुना रही है जाकर के पौराणिक

410
00:28:47,840 --> 00:28:52,160
है ना भगवान की लीलाए सुना रही है जाकर के तो

411
00:28:52,160 --> 00:28:56,200
इसका अर्थ है कि वो गुप्त या प्रकट रूप से कहीं ना कहीं से वो

412
00:28:56,200 --> 00:29:00,240
परंपरा का ज्ञान ही उसमें तोड़ मरोड़ करके उसी पर

413
00:29:00,240 --> 00:29:04,280
सवाल भी उठा रहे हो आपकी ये जो मिलावट कर दी है इन्होने

414
00:29:04,280 --> 00:29:08,640
भाई मिलावट कर द है तो जाओ ना बन जाओ समाजी एक और समाज खोल दो

415
00:29:08,640 --> 00:29:12,960
जया किशोरी समाज खोल दो एक और जया समाज खोल दोने

416
00:29:12,960 --> 00:29:17,080
अंत में नाम ले ही लिया कोशिश कर रहे

417
00:29:17,080 --> 00:29:19,360
थे

418
00:29:19,360 --> 00:29:23,760
नारायण बिल्कुल सही बात है मैं बिल्कुल सहमत हूं आपसे य यही

419
00:29:23,760 --> 00:29:27,880
है इस बारे में कोई अगर अपना विचार रखना चाहता हो तो

420
00:29:27,880 --> 00:29:32,760
भी आ सकता है एक पंकज जी है वो आना चाह रहे हैं शायद आप लिंक दे दीजिए

421
00:29:32,760 --> 00:29:36,920
और भाई इतना सहन मत करो कि

422
00:29:36,920 --> 00:29:41,280
कोई आपकी गरिमा आत्म सम्मान उसको ही कुचल करके चला जाए

423
00:29:41,280 --> 00:29:45,920
मैं फिर कह रहा हूं अनिरुद्धाचार्य जी को मैं बोल रहा हूं उनके फॉलोअर्स को बोल रहा हूं

424
00:29:45,920 --> 00:29:50,400
कि अब जाग जाइए इतना मत सोइए इतना मत सहिष्णु

425
00:29:50,400 --> 00:29:54,560
हो जाइए कोई आपके घर में घुसकर आपके घर की गरिमा आपके

426
00:29:54,560 --> 00:29:58,600
घर के जो सम्मान है उसको सबको रद के चला जाए और आप कहते रहे कि मैं

427
00:29:58,600 --> 00:30:02,880
जो है शष्ण हूं गुरुदेव का वचन याद

428
00:30:02,880 --> 00:30:07,200
करिए गुरु भाव आप भी रखते हैं उनके प्रति सदैव कहते हैं

429
00:30:07,200 --> 00:30:11,240
अरे ओ अर्जुन जो उदारता तेरे अस्तित्व और आदर्श

430
00:30:11,240 --> 00:30:15,280
को नष्ट करने के लिए हावी हो

431
00:30:15,280 --> 00:30:19,880
जाए तुझ पर वोह उदारता नहीं वो कायरता

432
00:30:19,880 --> 00:30:25,880
होती है हृदय की शुद्र दुर्बलता होती

433
00:30:26,000 --> 00:30:30,320
है मुझे तो लगता है पास साधन है

434
00:30:30,320 --> 00:30:34,600
टीम है उनके पास टीम नहीं तो साधन तो उनके पास इतने इतने है कि वो उस

435
00:30:34,600 --> 00:30:38,680
बहुत अच्छा साधन है पता नहीं क्या हनुमान जी की स्थिति हो गई है कि भूल गए कि

436
00:30:38,680 --> 00:30:43,240
कौन है क्या है पता नहीं क्या बात है वही

437
00:30:43,240 --> 00:30:47,400
दो तीन दिन से ज्यादा नहीं लगेंगे कि ये जितने मेम सेम बन रहे सब लोग हिल

438
00:30:47,400 --> 00:30:52,160
जाएंगे मगर पता नहीं क्या बात

439
00:30:52,160 --> 00:30:56,440
एक से अभी एक दोय चैनल अपने आप ही जब स्ट्राइक पड़ेगी

440
00:30:56,440 --> 00:31:00,600
ना दो तीन तीन मिलियन फॉलोवर्स वाले चैनल है प्रेमानंद जी महारा

441
00:31:00,600 --> 00:31:05,520
में ब बहुत बढ़िया कार्य हुआ था इस मामले में कई य चैनल बंद हो गए

442
00:31:05,520 --> 00:31:11,520
और दूसरे सुधर ग हो नहीं

443
00:31:12,720 --> 00:31:17,080
है इसमें मुझे वही आता है कि शायद य अपनी शक्तियां

444
00:31:17,080 --> 00:31:21,400
भूल के बैठे हैं तो आज मैं उनकी शक्तियां जगाने आया हूं अब जागो

445
00:31:21,400 --> 00:31:26,920
हे अंजनी के लाल लंका की ओर प्रस्थान

446
00:31:26,920 --> 00:31:32,920
करो हे भूतकाल के विकट

447
00:31:33,880 --> 00:31:38,160
वीर माता का पता

448
00:31:38,160 --> 00:31:42,160
रामपाल के वेरीफाइड चैनल ने कोई आए पंकज कटारे जी राम

449
00:31:42,160 --> 00:31:46,360
कोई कह रहा है कि रामपाल जी के वेरीफाइड चैनल ने कुछ कमेंट किया

450
00:31:46,360 --> 00:31:50,560
है चैट में एक बार देखेंगे कौन सा है चैनल

451
00:31:50,560 --> 00:31:54,920
बता जी क्या किया है मैं देख

452
00:31:54,920 --> 00:31:59,200
वही देख रहा हूं क्या एम खबर

453
00:31:59,200 --> 00:32:03,240
फास्ट कौन सा है चैनल बता दीजिए एक बार कमेंट्स में एमपी

454
00:32:03,240 --> 00:32:07,720
खबर फास्ट ये है क्या जी जय श्री राम पंकज

455
00:32:07,720 --> 00:32:13,720
जय श्री राम भैया जय श्री राम

456
00:32:13,840 --> 00:32:17,920
बताए यह बात तो आप बिल्कुल सही कह रहे हैं कि प्रेमानंद

457
00:32:17,920 --> 00:32:23,040
जी महाराज की जो आप कह रहे थे और उस पर इतनी जल्दी एक्शन लिया गया

458
00:32:23,040 --> 00:32:25,280
[संगीत]

459
00:32:25,280 --> 00:32:27,960
और आपकी आवाज चली गई है नेट

460
00:32:27,960 --> 00:32:32,160
नहीं आ रहा शायद आप जहां पर है मैं मीनवाइल

461
00:32:32,160 --> 00:32:34,960
एक बार पताका

462
00:32:34,960 --> 00:32:38,960
कमेंट पंकज जी आपकी आवाज कट रही है मैं कह रहा हूं

463
00:32:38,960 --> 00:32:43,320
कि एमपी खबर फास्ट नाम का एक वेरीफाइड चैनल है रामपाल

464
00:32:43,320 --> 00:32:47,400
जी का वो लिख रहे हैं कि मूर्ति पूजा का विरोध किया है

465
00:32:47,400 --> 00:32:51,480
सा सात में भले मूर्ति पूजा का विरोध किया

466
00:32:51,480 --> 00:32:55,520
है भले प्राणी रामायण में लिखा है कलयुग योग ना यज्ञ ना

467
00:32:55,520 --> 00:32:59,600
ज्ञान एक आधार नाम गुण गना ये रामायण में कहां लिखा है रामायण तो संस्कृत

468
00:32:59,600 --> 00:33:04,440
में है जहां तक मेरा ज्ञान है अरे इनको बाद में

469
00:33:04,440 --> 00:33:08,440
देख इनके अपने अल इनके अपने अलग

470
00:33:08,440 --> 00:33:12,640
चला करते सारे जो प्रोटोकॉल्स है अरे मैं एक बात

471
00:33:12,640 --> 00:33:16,840
कह रहा हूं जो मूर्ति पूजा का वेदों द्वारा मूर्ति पूजा का विरोध करते

472
00:33:16,840 --> 00:33:20,960
हैं मैं उनसे एक बात कह रहा हूं कि जो

473
00:33:20,960 --> 00:33:25,160
जिसके द्वारा मूर्ति पूजा वैदिक मूर्ति पूजा का विरोध शुरू हुआ

474
00:33:25,160 --> 00:33:29,400
वो है जनक उसका है आर्य समाज ठीक है

475
00:33:29,400 --> 00:33:33,600
अब आर्य समाज ने क्या किया है कि जहां जहां पर

476
00:33:33,600 --> 00:33:37,640
भगवान के आकार स्वरूप के संदर्भ में बातें हुई

477
00:33:37,640 --> 00:33:41,840
है वेदों में मंत्र आए हैं जब तो वहां पर आर्य समाज

478
00:33:41,840 --> 00:33:43,200
ने कह दिया कि फलाना

479
00:33:43,200 --> 00:33:47,400
अलंकार है यहां पर वास्तव में यहां पर रूप की बात नहीं हो रही है

480
00:33:47,400 --> 00:33:51,400
इसीलिए हम लोग अलंकार समाज कहते हैं उन्ह मगर मैं एक बात कह रहा

481
00:33:51,400 --> 00:33:55,480
हूं भैया कि ठीक है वहां पर वास्तविकता कुछ और है मगर

482
00:33:55,480 --> 00:33:59,760
बात तो हुई ना हुई ना तो समझ लो तुम्हारे

483
00:33:59,760 --> 00:34:03,800
जो भाई है मूर्ति पूजा के अलंकार वाली पूजा कर रहे हैं अपमान

484
00:34:03,800 --> 00:34:07,880
तो मत करो ना भाई वेदों ने भी वो बात की ना अलंकार के

485
00:34:07,880 --> 00:34:12,880
अलंकार के माध्यम से ही सही वेदों ने बात तो की ना

486
00:34:12,880 --> 00:34:16,880
वो तो उतने इसलिए कम से कम यह जो

487
00:34:16,880 --> 00:34:21,280
द द्वैत अद्वैत वाला जो मामला है ना इसमें आचार्य गण एक दूसरे का

488
00:34:21,280 --> 00:34:25,320
सम्मान क्यों करते हैं क्यों करते हैं सम्मान सब

489
00:34:25,320 --> 00:34:29,320
लोगों के हिसाब से सामने वाले का जो सिद्धांत वो अंतिम सत्य

490
00:34:29,320 --> 00:34:33,440
नहीं है हमारा वाला अंतिम सत्य है मगर सम्मान क्यों करते

491
00:34:33,440 --> 00:34:37,600
हैं इसी बात को रखने के लिए कि यह जो धारणा बोल रहा है इस

492
00:34:37,600 --> 00:34:41,680
धारणा को वेद में लिख दिया गया है भले ही

493
00:34:41,680 --> 00:34:46,120
किसी और सत्यता के रूप में दिया गया हो इसलिए एक दूसरे का सम्मान है

494
00:34:46,120 --> 00:34:50,120
कि इसकी वेदों में प्रमाण बुद्धि है मगर

495
00:34:50,120 --> 00:34:54,160
आपके हिसाब से आपने वो एक अलग मैटर है वो अलंकार है कि नहीं है

496
00:34:54,160 --> 00:34:58,360
ईश्वर को आवश्यकता क्या अलंकार लगाने की जब ईश्वर को आवश्यकता

497
00:34:58,360 --> 00:35:02,960
नहीं है अवतार लेने की तो अलंकार लगाने की क्या आवश्यकता है वो सब एक अलग बात

498
00:35:02,960 --> 00:35:07,280
मगर अलंकार के रूप में ही सही मूर्ति पूजा स्वरूप का वर्णन

499
00:35:07,280 --> 00:35:11,400
है तो आपके ही अनुसार बात कर रहा हूं अरे तो भाई जब कोई

500
00:35:11,400 --> 00:35:15,680
कर रहा है तो अपमान तो मत करो उसको समझाओ थोड़ा थोड़ा थोड़ा थोड़ा

501
00:35:15,680 --> 00:35:20,040
बस अपने हिसाब से अपमान तो ना करो ईश्वर के स्वरूप का वर्णन

502
00:35:20,040 --> 00:35:24,240
करने वालों का क्योंकि अगर आप उनका अपमान करोगे तो इन अलंकार को लगाने वाले

503
00:35:24,240 --> 00:35:28,440
का भी अपमान है जिसने ये बात की बकुल अलंकार लगाने

504
00:35:28,440 --> 00:35:32,880
के रूप में आपके अनुसार फिलहाल दुर्जन तोष न आय मैंने स्वीकार

505
00:35:32,880 --> 00:35:37,040
नहीं कर लिया कि वेदों में मूर्ति पूजा नहीं है तो अगर इस भाव से अपमान

506
00:35:37,040 --> 00:35:41,200
हो रहा है अ अलंकार लगाने वाले का तो वेद का अपमान हो गया

507
00:35:41,200 --> 00:35:45,360
का अपमान वेदों ने अलंकार के रूप में सही मूर्ति

508
00:35:45,360 --> 00:35:49,400
का स्वरूप का वर्णन तो किया बिल्कुल आपके

509
00:35:49,400 --> 00:35:53,400
अनुसार अगर मान ले तब जी पंकज कटारी जी

510
00:35:53,400 --> 00:35:57,720
जी भैया जय श्री राम मैं

511
00:35:57,720 --> 00:36:01,960
मीडिया की बात करें आपने भी वो चीज बता ही दी थी और इसमें जो तंत्र

512
00:36:01,960 --> 00:36:06,040
की बात है कि तंत्र कितना भी मजबूत क्यों ना हो आपके

513
00:36:06,040 --> 00:36:10,200
पास भी हर संसाधन है अगर संघ

514
00:36:10,200 --> 00:36:13,440
बल की बात करें जनसंख्या की बात करें और अपनी आम

515
00:36:13,440 --> 00:36:17,440
भाषा में अगर फॉलोअर्स की बात करें तो भारत में अगर केवल धर्म

516
00:36:17,440 --> 00:36:21,440
के प्रचार के लिए और कथावाचक के रूप में आपके पास में इतना बड़ा संघ बल

517
00:36:21,440 --> 00:36:25,600
है और आपके पास इतनी बड़ी टीम है जो हमेशा एक्टिव रहती है लेकिन

518
00:36:25,600 --> 00:36:29,720
इस मामले में जो है क्यों नहीं आगे आ रहे कारण पता नहीं है और इसके

519
00:36:29,720 --> 00:36:33,760
लिए जब तक आप आगे नहीं आएंगे यह तो 24 घंटे का मामला है आप इसको

520
00:36:33,760 --> 00:36:37,760
24 घंटे में खत्म कर सकते हमारे पास इतनी ताकत है

521
00:36:37,760 --> 00:36:41,800
हमें यहां बोलना क्यों पड़ रहा है क्योंकि आप कुछ नहीं कर रहे हम आपके साथ इसीलिए

522
00:36:41,800 --> 00:36:46,080
तो खड़े हैं यह बात आपको समझनी पड़ेगी महाराज

523
00:36:46,080 --> 00:36:50,160
जी जी बिल्कुल सही संसाधन है

524
00:36:50,160 --> 00:36:54,400
और अगर इसमें बात करें कि देखो बाम पंथ मैंने आपको उदाहरण दिया कि ब्रेन

525
00:36:54,400 --> 00:36:58,560
वश कैसे किस तरीके से जैसे पंडित जी ने बोला कि उनको

526
00:36:58,560 --> 00:37:02,800
इस तरीके से बोला जाता मैं आपको एक उदाहरण समझा देता हूं बहुत पुराना उदाहरण है

527
00:37:02,800 --> 00:37:06,880
कि जब कोलगेट इस भारत में लंच किया गया था तो

528
00:37:06,880 --> 00:37:11,680
वहां पर

529
00:37:11,680 --> 00:37:15,880
एक प जी आवाज कट गई आपकी पंकज जी आवाज

530
00:37:15,880 --> 00:37:20,160
फिर से चली गई कोल गट लच से हम लोग दोबारा

531
00:37:20,160 --> 00:37:24,480
बात

532
00:37:24,480 --> 00:37:28,960
करेंगे शुभम जी आए हैं कोई शुभम

533
00:37:28,960 --> 00:37:33,880
जी आप अपना चेहरा रिवील

534
00:37:33,880 --> 00:37:38,800
करें जी शुभम जी जय श्री

535
00:37:38,800 --> 00:37:43,400
राम आवाज नहीं आ रही

536
00:37:43,400 --> 00:37:49,400
आपकी आवाज नहीं आ रही है आप शुभम

537
00:37:49,560 --> 00:37:54,200
जी एक बार जाके दोबारा आइए

538
00:37:54,200 --> 00:37:58,440
हां हेलो जी बोलिए जय श्री

539
00:37:58,440 --> 00:38:02,560
राम जय श्री राम भैया जय श्री राम मैं

540
00:38:02,560 --> 00:38:06,600
इस तरह से कह रहा था कि यह जो मूर्ति पूजा है और मूर्ति पूजा

541
00:38:06,600 --> 00:38:10,680
और आदि अभी अभ्यासक्रम ही उस तर से डिजाइन

542
00:38:10,680 --> 00:38:14,760
किया जा रहा है हम जो सोशल साइंस पढ़ते थे मैं की बात कर रहा हूं

543
00:38:14,760 --> 00:38:19,400
मैं एक स्टूडेंट हूं अभी तो सीए की पढ़ाई कर रहा हूं पर जब हम सोशल साइंस पढ़ते

544
00:38:19,400 --> 00:38:23,400
जिन लोगों ने भारत में मूर्तियों का खंडन किया है

545
00:38:23,400 --> 00:38:27,680
और ऐसे लोग का इतिहास पढ़ाया जा रहा है ना और

546
00:38:27,680 --> 00:38:33,680
जगतगुरु शंकराचार्य और आदि जितने भी

547
00:38:46,800 --> 00:38:51,240
वैष्णवास्त्र ही नहीं है यह तो बहुत बुरी बात है मैं खुद

548
00:38:51,240 --> 00:38:55,520
भी सा माहौल रहा कि जिससे सब से बच सका

549
00:38:55,520 --> 00:38:59,720
हम हमार संध्या वंदन आद से हम पोषित

550
00:38:59,720 --> 00:39:03,760
हो यज्ञ के बाद वरना हम भी इस तरह से बह

551
00:39:03,760 --> 00:39:07,800
जाते और आज का जो युद्ध है जो हम हम पढ़ रहे हैं मैं कॉलेज खुद जाता हूं तो मैं

552
00:39:07,800 --> 00:39:12,000
लोगों को देखता हूं ये जिस तरह से अनुर चार्य जी की बात है

553
00:39:12,000 --> 00:39:16,040
तो उनके सामने तो ने कॉमेडी इतने बन रहे हैं और इस तरह

554
00:39:16,040 --> 00:39:20,200
से धर्म का पूरा मजाक उड़ाया जा रहा है कि हम खुद सहन नहीं कर सकते हम

555
00:39:20,200 --> 00:39:24,240
कहते हैं कि भाई आप फॉलो करो इनको कोई बात नहीं मगर एक बार

556
00:39:24,240 --> 00:39:28,280
शंकराचार्य जी की भी बात मान लो उनको भी वीडियो देख लो तो आपको धर्म

557
00:39:28,280 --> 00:39:32,320
यथारूप मिलेगा उनकी वाणी में से

558
00:39:32,320 --> 00:39:36,320
प्रवाहित होता रहेगा और आपको जो जो

559
00:39:36,320 --> 00:39:40,400
ज्ञान है वह प्राप्त होगा और उससे आप धर्म में पुन आप

560
00:39:40,400 --> 00:39:44,440
वापस से एंटर कर सकोगे वरना इस तरह से तो कुछ समय में भारत के

561
00:39:44,440 --> 00:39:48,640
जितने भी युवा है वह सबके लिए तो अध्यात्म तो एक मजाक

562
00:39:48,640 --> 00:39:52,720
ही बन जाएगा मुझे ऐसा लग रहा है एक आधुनिक

563
00:39:52,720 --> 00:39:57,640
ओ आए इस समय जो तीव्रता से सबका

564
00:39:57,640 --> 00:40:01,720
बने हुए हैं और जो मनाए वो बक रहे हैं अपने मंच से

565
00:40:01,720 --> 00:40:03,120
आधुनिक

566
00:40:03,120 --> 00:40:07,200
न अब वो क्या कर रहे हैं अपने आपको अवती बताते हैं मगर है

567
00:40:07,200 --> 00:40:11,600
ओशो वादी आचरण से ओशो है और बताते हैं हम अद्वैत

568
00:40:11,600 --> 00:40:15,640
है शंकराचार्य वाले हैं उनका उनका यय जो

569
00:40:15,640 --> 00:40:19,720
पूरी की पूरी टीम है ना कहीं ना कहीं यह दिखा रही है कि मैं सनातन

570
00:40:19,720 --> 00:40:23,920
की रक्षक हूं मैं हिंदुत्व की बात करती हूं मगर सबसे बड़ा

571
00:40:23,920 --> 00:40:28,080
जहर हिंदुत्व के लिए यही लोग है सबसे घातक

572
00:40:28,080 --> 00:40:32,320
जहर ये जो ये जो टोली बना बना के अपने

573
00:40:32,320 --> 00:40:36,320
साथ में ले जा रहे हैं जन समाज को इसी के कारण तो आज हम

574
00:40:36,320 --> 00:40:41,240
लोग एकत्रित नहीं है संगठित नहीं

575
00:40:41,240 --> 00:40:45,400
है ये साहब का एक मैंने वीडियो देखा

576
00:40:45,400 --> 00:40:49,440
उसमें इतनी कुतर्क भरी बातें करते हो व लोग वहां पर

577
00:40:49,440 --> 00:40:53,480
वावा वावा भी करते हैं उनके उनके जो

578
00:40:53,480 --> 00:40:57,640
फॉलोअर्स है वो गाना गा रहे हैं जा जा

579
00:40:57,640 --> 00:41:01,920
जात मेरी ब्रह्म और गोत्र मेरा नहीं जात मेरी जीव और गोत्र

580
00:41:01,920 --> 00:41:06,040
मेरा ब्रह्म ऐसे करके गाना गा रहे हैं हा

581
00:41:06,040 --> 00:41:10,480
गिटार बजा के ये कहा मुझे भी देखना है

582
00:41:10,480 --> 00:41:15,280
कल देखा था मैंने ा पर उन्होंने डाला था व जो है

583
00:41:15,280 --> 00:41:18,160
ना युगल किशोर शर्मा जी

584
00:41:18,160 --> 00:41:22,640
भगवत वचन वाले उन्होंने डाला था

585
00:41:22,640 --> 00:41:28,240
तो शुभम जी अभी अभी मैं लेता हूं आपसे दोबारा बात करता हूं

586
00:41:28,240 --> 00:41:32,640
कोई आ गए शायद पंकज जी आ गए

587
00:41:32,640 --> 00:41:37,120
जी पंकज जी एक मिनट में बस बात कर

588
00:41:37,120 --> 00:41:41,360
जी जी बात पूरी कर लू तो वो उसम बता

589
00:41:41,360 --> 00:41:45,840
रहे हैं मूर्ति वाले मामले में की मूर्ति इसलिए

590
00:41:45,840 --> 00:41:49,840
है अब देखो जब जब कोई इंटेलेक्चुअल पर्सन थोड़ा बहुत

591
00:41:49,840 --> 00:41:55,840
भी होगा ना तो इनकी हर बात को काउंटर किया जा सकता है

592
00:41:58,200 --> 00:42:03,920
अभिनव जी आवाज आ रही है म्यूट कर दीजिए अपने आप अभिनव

593
00:42:03,920 --> 00:42:07,960
जी क्या की केवल ये वो वाली बात

594
00:42:07,960 --> 00:42:12,840
होती है हा

595
00:42:12,840 --> 00:42:17,080
केवल केवल वह बात होती है

596
00:42:17,080 --> 00:42:22,960
थोड़ी देर म्यूट कर दीजिए ना अभिनव जी

597
00:42:22,960 --> 00:42:27,560
को केवल वो बात होती है मैं जब छोटा था

598
00:42:27,560 --> 00:42:31,600
तो मैं अपने मित्रों के साथ शरारत करता था वो

599
00:42:31,600 --> 00:42:36,240
शरारत क्या होती थी कि जैसे कभी-कभी कोई मित्र

600
00:42:36,240 --> 00:42:40,240
आया तो वह बैठा मेरे पास तो मैंने यूं ही उसकी

601
00:42:40,240 --> 00:42:44,640
टांग खींचने के लिए मैंने क्या किया मैंने उससे बोला कि तुम

602
00:42:44,640 --> 00:42:49,360
हंसते तो हो मगर तुम्हारी हंसी खोखली है

603
00:42:49,360 --> 00:42:54,080
तुम्हें लोगों ने तुम्हें लोगों ने सारा जीवन बहुत धोखा दिया है

604
00:42:54,080 --> 00:42:58,400
तुम बहुत तुम तुमने सबके साथ वफा की और सबने तुम्हारे

605
00:42:58,400 --> 00:43:02,400
साथ दगा किया है जब मैं ऐसा बोल दू तो वो

606
00:43:02,400 --> 00:43:06,480
मित्र मेरा बिल्कुल कायल हो जाए अरे आपने

607
00:43:06,480 --> 00:43:10,600
कैसी बात बोल दी शिवांश भाई इतनी आपको

608
00:43:10,600 --> 00:43:13,240
कैसे पता चला भाई ये

609
00:43:13,240 --> 00:43:17,320
एक जनरल बात है हर कोई व्यक्ति अपने आप को विक्टिम मानता है ह हर

610
00:43:17,320 --> 00:43:21,640
दूसरा व्यक्ति अपने आप को विक्टिम मानता है मानता

611
00:43:21,640 --> 00:43:25,720
है एक जनरल नॉलेज है और मैंने वही जनरल नॉलेज एक भाव पूर्ण तरीके

612
00:43:25,720 --> 00:43:30,160
से चिपका दी सामने वाला मेरा अनुगामी हो गया

613
00:43:30,160 --> 00:43:34,720
इस ढर्रे पर चलने वाले हैं यह लोग होशो

614
00:43:34,720 --> 00:43:38,800
वादी यह तथाकथित आचार्य प्रशांत वादी इस डरने

615
00:43:38,800 --> 00:43:42,840
पर ऐसी बातें बोलो जिससे व्यक्ति अरे यह तो बिल्कुल

616
00:43:42,840 --> 00:43:46,880
वही बोल रहा है जो मेरे साथ बीतता है भाई तुझे पता था वह बात

617
00:43:46,880 --> 00:43:51,280
उसने वही बात अच्छे तरीके से तेरे सामने पेश कर दी जैसे फेमिनिज्म

618
00:43:51,280 --> 00:43:54,200
वाली बातें

619
00:43:54,200 --> 00:43:58,280
कि यह सब जो वो अपने घर से जाएगी

620
00:43:58,280 --> 00:44:02,480
स्त्रियों का ऐसा होना चाहिए कि उनका जो वही निकाल दिया जाए वो पार्ट निकाल

621
00:44:02,480 --> 00:44:06,520
दिया जाए मैं साइंस से एक वो कहूं अब साइंस से मैं इतना निवेदन करूंगा कि वो

622
00:44:06,520 --> 00:44:10,560
एक काम करे कि जो नारियां है उनका जो संतान को

623
00:44:10,560 --> 00:44:14,640
जन्म देने वाला हिस्सा है उसको बाहर निकाल दे अब नारियां खुश ये कितना अच्छी

624
00:44:14,640 --> 00:44:18,800
बातें कर रहा है मेरे लिए तो ये क्या है आपके पास ओरिजिनल चीजें

625
00:44:18,800 --> 00:44:22,880
तो है नहीं देने के लिए तो आपने

626
00:44:22,880 --> 00:44:28,520
कुछ ऐसी चीजें उठाई जो आपको पता है जन समाज को पता जैसे कभी-कभी कुछ

627
00:44:28,520 --> 00:44:32,760
ऐसे लोग भी फकीर टाइप के मिल जाएंगे जो धुआ हुआ लेकर के चलते हैं

628
00:44:32,760 --> 00:44:37,000
और जा बच्चा जा तेरा ये हो रहा है तेरा नुकसान हो रहा है तो व्यक्ति

629
00:44:37,000 --> 00:44:41,120
तुरंत कनेक्ट हो जाता है क्योंकि वो जनरल बात है उससे तुरंत व्यक्ति

630
00:44:41,120 --> 00:44:45,360
कनेक्ट होता है और उसी को थोड़ा सा वाक पटता वाला व्यक्ति हो सजा

631
00:44:45,360 --> 00:44:49,440
करके अगर बोल दे तो सामने वाला व्यक्ति बस उसम लट्टू हो जाता है

632
00:44:49,440 --> 00:44:53,960
तो यह जितने भी है आधुनिक ये जो नए ओशो है

633
00:44:53,960 --> 00:44:58,360
पुराने ओो ओो के पास क्या था यही था ओो भी करते थे

634
00:44:58,360 --> 00:45:02,400
ऐसी बातें बोलो जिससे जो व्यक्ति को पता है उसके साथ क्या हो रहा है

635
00:45:02,400 --> 00:45:06,520
समाज में क्या हो रहा है उसी को ऐसे बोलो अरे यह तो मेरी बात

636
00:45:06,520 --> 00:45:09,240
करने वाला है और वह इस चक्कर में कि उसने मेरी

637
00:45:09,240 --> 00:45:13,280
बात की वो उसका फॉलोअर बन गया अब वो उसकी बातों को प्रमाण मानने लगेगा अगली

638
00:45:13,280 --> 00:45:17,600
बात है वो उसकी सही है या गलत है डजन मैटर उसने मेरी बात कर दी

639
00:45:17,600 --> 00:45:21,720
मेरे दुख की बात कर दी मेरे दुख को ग्लोरिफाई कर दिया अच्छे से

640
00:45:21,720 --> 00:45:27,080
बस अब ये मैं इसको जो फॉलो करूंगा तो

641
00:45:27,080 --> 00:45:31,120
ये जो प्रशांत है ये क्या बोल रहे हैं

642
00:45:31,120 --> 00:45:35,120
कि भाई मूर्ति इसलिए है कि मूर्ति

643
00:45:35,120 --> 00:45:39,160
के मूर्ति के बाद आप अमूर्त में जा सको ठीक

644
00:45:39,160 --> 00:45:43,160
है मगर वह व्यवहार नहीं है अमूर्त जो है व्यवहार नहीं

645
00:45:43,160 --> 00:45:47,320
है व्यवहार का विषय नहीं है अब वो कह रहे हैं कि सब जगह शिव

646
00:45:47,320 --> 00:45:51,320
है सब जगह शिव है तो मैं यह प्रशांत जी

647
00:45:51,320 --> 00:45:55,480
से ही पूछूंगा वहीं पर खड़ा हंगा सब जगह सेव सम दृष्टि वाला आप बन

648
00:45:55,480 --> 00:46:00,480
जाओ माता बहन पनी में समद ले आओगे क्या

649
00:46:00,480 --> 00:46:04,600
खत्म मगर वहां कोई पूछता ही नहीं है कुछ समय पहले ऐसी

650
00:46:04,600 --> 00:46:08,640
फिल्में आने लगी थी पहले बहुत पहले जो

651
00:46:08,640 --> 00:46:12,720
यह चलचित्र आते थे मनोरंजन के लिए तो उसमें थोड़ा सा

652
00:46:12,720 --> 00:46:16,800
ऐसे ऐसा मजाक होता था कि हसी आए

653
00:46:16,800 --> 00:46:21,000
पहले जो कॉमेडी फिल्में आप देखो तो उनमें ऐसा मजाक होता था

654
00:46:21,000 --> 00:46:24,600
कि आपको हंसी आए मगर उसके बाद अभी मैंने एक दौर देखा

655
00:46:24,600 --> 00:46:28,800
जिसमें की हंसी नहीं आ रही है मर जबरदस्ती लोग हंस रहे हैं थिएटर

656
00:46:28,800 --> 00:46:32,800
में बैठ कर के तो यह जो इनकी बातें होती है

657
00:46:32,800 --> 00:46:37,040
ना ये ऐसे ही कुतर्क होते हैं और वहां पर इनको फॉलो करने वाले ऐसे हा

658
00:46:37,040 --> 00:46:41,200
हा वाह वाह क्या बात कही है चारों तरफ से मूर्त से मुहूर्त में जाने के लिए

659
00:46:41,200 --> 00:46:45,400
ये वो कुतर्क है और कुछ नहीं हैय वही की वही एक

660
00:46:45,400 --> 00:46:49,400
व्यक्ति क्वेश्चन कर दे खड़ा हुआ भैया ये ऐसे है आप कह रहे हो समय शिव

661
00:46:49,400 --> 00:46:53,520
है तो क्या हम लोग ऐसा व्यवहार शुरू कर दे

662
00:46:53,520 --> 00:46:58,040
क्या करोगे आप क्या करते हो अपने घर में जाकर के माता बहनों पत्नी में समदिन

663
00:46:58,040 --> 00:47:02,280
हो कि नहीं रखते हो जब तक आपको यह

664
00:47:02,280 --> 00:47:06,320
व्यवहारिक जीवन प्राप्त है व्यवहारिक देह प्राप्त है भौतिकता प्राप्त

665
00:47:06,320 --> 00:47:10,560
है तब तक आपको भेद का निर्वाह करना है द्वैत का निर्वाह करना है

666
00:47:10,560 --> 00:47:15,000
अद्वैत आपका व्यवहारिक विषय नहीं है जानने

667
00:47:15,000 --> 00:47:20,160
का विषय जरूर है मगर उस पर चलने का विषय नहीं

668
00:47:20,160 --> 00:47:24,200
है तो वो भाई साहब केवल बड़ी-बड़ी बातें

669
00:47:24,200 --> 00:47:28,320
वही वाली बात कि तुम्हारे चेहरे पर जो हंसी है झूठी खोखली अब

670
00:47:28,320 --> 00:47:32,640
व्यक्ति तुरंत मोशनल हो गया बस मैं इसका मैं इसका फॉलोअर

671
00:47:32,640 --> 00:47:36,840
आज से इसने तो ऐसी बात कह दी जो किसी ने नहीं कही आज

672
00:47:36,840 --> 00:47:40,280
तक जी जी प्रशांत

673
00:47:40,280 --> 00:47:44,400
जी पंकज जी बता रहे

674
00:47:44,400 --> 00:47:49,240
थे पले वो पूरी कर लीजिए हा कोलगेट वाली बात आपकी अधूरी थी

675
00:47:49,240 --> 00:47:53,280
मैं वही कह रहा था ना कि ब्रेन वस किस तरीके से किया जाता है कि

676
00:47:53,280 --> 00:47:57,360
कोलगेट जो है हमारी मातृ शक्ति को किस तरीके से उसम दिखाया गया मैंने

677
00:47:57,360 --> 00:48:02,040
बहुत एक वो एक सटीक उदाहरण है समझाने के लिए कि

678
00:48:02,040 --> 00:48:06,080
सांसों की बदबू दातो की सड़न कि जो है ना कि महिला और पुरुष जो

679
00:48:06,080 --> 00:48:10,200
है मातृ शक्ति जो वो पीछे आगे जा रहा है कि जब तक आप कोलगेट नहीं करोगे

680
00:48:10,200 --> 00:48:14,320
आप मेरे पास नहीं आ सकते मतलब इस गंदे तरीके से यहां से शुरुआत

681
00:48:14,320 --> 00:48:18,320
हो चुकी है वामपंथ ने इतना जो है गंदा वो किया हुआ है

682
00:48:18,320 --> 00:48:22,680
और इस तरीके से जो ब्राह्मण जो प्रचार हो रहे हैं कि हमारे

683
00:48:22,680 --> 00:48:26,960
मतलब कि हमारे जो देवी देवताओं के जो चित्र है वो किस तरीके से जो है

684
00:48:26,960 --> 00:48:31,080
चिपकाए जा रहे हैं उस पर बहुत सारे एक्शंस के लिए कारवाही बहुत सारे संगठन

685
00:48:31,080 --> 00:48:35,120
कर रहे हैं और हम सभी भी लोग बोलते हैं सब कुछ करते हैं लेकिन इसमें एक

686
00:48:35,120 --> 00:48:39,320
बात और समझने वाली है कि ब्रेन वॉश इस तरीके से किया जाता है जैसे

687
00:48:39,320 --> 00:48:43,680
मैं एक शब्द का नाम और लूंगा जो नाम है मैडम

688
00:48:43,680 --> 00:48:47,880
इतना घृणित और इतना घटिया शब्द है वो जो आजकल की

689
00:48:47,880 --> 00:48:52,120
जो है मातृ शक्ति के लिए बोलना नहीं चाहिए लेकिन उनको यह बुलवाने में

690
00:48:52,120 --> 00:48:55,360
मतलब गर्व महसूस होता है पहले उस शब्द का जो है

691
00:48:55,360 --> 00:48:59,480
आप अनजाने में कोई चीज बलवा रहे हो समझ में आता है लेकिन आप बड़े बोलते

692
00:48:59,480 --> 00:49:03,520
हो अरे मेरे से कई लोगों ने पूछा अच्छा ये

693
00:49:03,520 --> 00:49:07,640
हमारी बहन को मात जो हमारी बहन है उनको मैडम बोल रहे पहले

694
00:49:07,640 --> 00:49:11,760
बहन का मतलब तो सोचो कि वो आया कहां से यूरोप से आया है वो शब्द जहां

695
00:49:11,760 --> 00:49:16,000
पर जो है परस्त्री गमन और परव पुरुष गमन होता है मिस्टर

696
00:49:16,000 --> 00:49:20,120
और मिसेस जो है ना आप बड़े गर्व के साथ बोलते शी इज माय मिसेस तब मैं उनसे

697
00:49:20,120 --> 00:49:24,320
कहता हूं रियली सी इज योर मिसेस तो इतना मतलब

698
00:49:24,320 --> 00:49:28,440
इस तरीके से ब्रेन वश किया गया है और जे नए आधुनिक वषों

699
00:49:28,440 --> 00:49:32,560
की आप बात कर रहे थे ना यहां पर ये तालियां जो बसती है ना उनको इस तरीके से बोला

700
00:49:32,560 --> 00:49:36,680
जाता है कि म मैडम पहले मादाम का पूरा मतलब समझ लो

701
00:49:36,680 --> 00:49:40,840
क्या सारी स्त्रियां आपकी है तो इतनी सारी चीजें जो है इस तरीके

702
00:49:40,840 --> 00:49:44,880
से हमारे छोटे-छोटे बच्चों के अंदर टेलीविजन के द्वारा ओटीटी के द्वारा

703
00:49:44,880 --> 00:49:48,880
इस तरीके से घुसाया जा रहा है वामपंथ के द्वारा और भैया अभी हमें

704
00:49:48,880 --> 00:49:52,920
जो है काम करने की ये हमें उनसे सीखने की आवश्यकता

705
00:49:52,920 --> 00:49:56,960
है कि वो जिस तरीके से काम कर रहे हैं हमें उसी तरीके से काम

706
00:49:56,960 --> 00:50:02,960
करना होगा संगठित तो हमें होना ही है लेकिन हमें

707
00:50:06,200 --> 00:50:11,840
वो पंकज जी फिर आपकी आवाज चली गई

708
00:50:11,840 --> 00:50:15,080
जी

709
00:50:15,080 --> 00:50:19,760
श्रीम एक क्वेश्चन है मेरा आपसे पंत जी आपने

710
00:50:19,760 --> 00:50:24,000
जो आप बात कर रहे सही है लेकिन आज हम के परिपेक्ष में देखें कि हमारे

711
00:50:24,000 --> 00:50:28,000
घर के आसपास अभी नवरात्र का समय गया तो भगवती की पूजा के

712
00:50:28,000 --> 00:50:32,400
लिए पंडाल लगाए जाते हैं सब किए जाते हैं लेकिन उसी पंडाल के पीछे

713
00:50:32,400 --> 00:50:36,400
व्यक्ति क्या कर रहा है नशे कर रहा है मादक पदार्थों का सेवन कर रहा

714
00:50:36,400 --> 00:50:40,480
है और आगे भगवती की पूजा करता है मेरे घर से कुछ दूरी

715
00:50:40,480 --> 00:50:44,680
पर भगवान शिव राधा कृष्ण के रूप में उनको नचाया जा रहा है

716
00:50:44,680 --> 00:50:48,720
वो परम पिता परमेश्वर की सुनो गणेश की मम्मी ऐसे

717
00:50:48,720 --> 00:50:52,920
गानों पर नचाया जा रहा है और लोग क्या बोलते हैं कि चलो इससे धर्म का ही

718
00:50:52,920 --> 00:50:57,400
कार्य हो रहा है तो हमें इसके बारे में नहीं बोलना चाहिए

719
00:50:57,400 --> 00:51:01,400
इस मैं इसका आपको उत्तर दूंगा पंकज जी की बात पूरी हो जाए जो आप बात कर

720
00:51:01,400 --> 00:51:05,640
रहे थे वो आप पूरी कर लीजिए जी जी मैं मैं इसका भी उत्तर भैया भी दे देंगे

721
00:51:05,640 --> 00:51:09,760
मैं भी दे देता हूं नवरात्रि के ही दिनों की बात है ठीक है अब अभी

722
00:51:09,760 --> 00:51:14,320
मैं शरीर पर दिखा नहीं सकता हूं करीबन 40 से 50 लोगों ने मेरे ऊपर लट मारे

723
00:51:14,320 --> 00:51:18,680
और मैंने वहां विरोध किया था वहां पर अकेले जाकर खड़ा हुआ था कि यहां पर जो है ना

724
00:51:18,680 --> 00:51:22,720
कि यह जलेबी बाई वाले गाने जो हैय हमारी मां भगवती बैठी हु इस तरीके से आप

725
00:51:22,720 --> 00:51:26,720
ये चला रहे हैं ना ये केवल और केवल जो है ना हिंदू धर्म

726
00:51:26,720 --> 00:51:31,720
ही मज बन रहा हा आप

727
00:51:31,720 --> 00:51:34,840
मुसलमानों

728
00:51:34,840 --> 00:51:39,040
होहा एक मिनट पंकज जी ऐसा नहीं है अभी मैं छत्तीसगढ़

729
00:51:39,040 --> 00:51:43,360
रायपुर में था सुबह सुबह मैं निकल रहा था सतलोक आश्रम के लिए

730
00:51:43,360 --> 00:51:47,640
छापा मारी जा मैं जा रहा था वहां पर सतलोक

731
00:51:47,640 --> 00:51:51,720
आश्रम तो वहां पर सुब डीजे डीजे डीजे डीजे डीजे उस

732
00:51:51,720 --> 00:51:56,640
दिन कुछ था इनका अभी निकट की बात है उस दिन इनका कुछ था

733
00:51:56,640 --> 00:52:00,640
तो उस दिन वहां पर हम लोग यही देख रहे देखो यह जो कहा जाता है ना कि हमारे ही

734
00:52:00,640 --> 00:52:05,040
यहां ऐसा होता है ऐसा नहीं है होता हूं दूसरी जगह भी है मगर

735
00:52:05,040 --> 00:52:09,120
उठाया केवल हमारे को जाता है कि हिंदू बेवकूफ है हिंदू धर्म

736
00:52:09,120 --> 00:52:13,240
ऐसा है उसको मानने वाले ऐसे हैं जिससे कि हम अपने ही धर्म को लेकर के

737
00:52:13,240 --> 00:52:19,240
अपने समाज को लेकर के इफरिट

738
00:52:20,040 --> 00:52:24,040
कॉम्प्लेक्शन में नहीं है ठोस उसके पास सिद्धांत नहीं है वो कहीं

739
00:52:24,040 --> 00:52:28,320
ना कहीं उससे ऐसी चीजें होंगी और दूसरे यहां भी होती है ऐसा

740
00:52:28,320 --> 00:52:32,400
नहीं सोचना चाहिए कि हम अपने लिए इरिटी नहीं लानी वो भी करते

741
00:52:32,400 --> 00:52:36,480
हैं डीजे डीजे डीजे इस तरह चल रहा था उनका टेपो

742
00:52:36,480 --> 00:52:40,640
क्या ही रहते ज्यादातर उसकी बात

743
00:52:40,640 --> 00:52:45,160
अभी निकट भविष्य में क्या अभी निकट में कुछ निकल के गया इस्लाम

744
00:52:45,160 --> 00:52:49,520
मानने वालों का कोई त्यौहार था क्या था वो हां

745
00:52:49,520 --> 00:52:52,960
मोहर्रम मोहर्रम

746
00:52:52,960 --> 00:52:56,960
था एक हफ्ते पहले मोहम्मद जी

747
00:52:56,960 --> 00:53:01,040
का जन्मदिन था उस दिन ूब

748
00:53:01,040 --> 00:53:05,200
हमा मैं भोपाल से हं तो हमारे सिटी में सब मनाते

749
00:53:05,200 --> 00:53:09,320
कुछ रहा होगा और इस्लाम के अनुसार व नाच गाना

750
00:53:09,320 --> 00:53:11,520
वगैरा

751
00:53:11,520 --> 00:53:15,880
हरा वो कर रहे हैं मगर वो कर रहे हैं ठीक है

752
00:53:15,880 --> 00:53:20,040
तो ऐसा नहीं है कि उनके य नहीं होता है मगर हम इन चीजों को हमारे

753
00:53:20,040 --> 00:53:26,040
को इरिटी

754
00:53:28,960 --> 00:53:33,080
जो जाति व्यवस्था को लेके होता है मेरा एक दोस्त है वो शुक्रवार

755
00:53:33,080 --> 00:53:37,160
को नवाज पढ़ने जाता है तो दूसरे मुसलमानों की मस्जिदों में नहीं जाता जो

756
00:53:37,160 --> 00:53:41,280
स्पेशली असाइन है उसकी जाति या जो भी है

757
00:53:41,280 --> 00:53:45,480
वो उसी में जाता है और उनको वहां से भगा दिया जाता है अग वो दूसरी जगह जाए लेकिन

758
00:53:45,480 --> 00:53:49,720
आज हमारे य हम तो मंदिर में सबको आने देते हैं वो बोलता है फिर

759
00:53:49,720 --> 00:53:54,640
भाई हमारे में तो ऐसा ही होता है देखिए ऐसा है इसमें ये वाली बात है

760
00:53:54,640 --> 00:53:58,720
जो आपने चीजें कही है अभी इसमें यह वाली बात

761
00:53:58,720 --> 00:54:02,760
है कि दो ठोस उत्तर में

762
00:54:02,760 --> 00:54:06,920
दूंगा जैसे आपने कहा कि पंडाल लगा है उसके पीछे

763
00:54:06,920 --> 00:54:10,920
कुछ हो रहा है तो सबसे पहली बात है कि

764
00:54:10,920 --> 00:54:15,040
यदि कोई बेटा अपने पिता से

765
00:54:15,040 --> 00:54:19,120
छुपकर सिगरेट पी रहा है तो हम यह दोष पिता को

766
00:54:19,120 --> 00:54:23,640
नहीं दे सकते कि पिता ने उसको सिगरेट पीना सिखाया है

767
00:54:23,640 --> 00:54:28,120
वो उसका दोष है जैसे मैं एक बार प्रचार कर रहा

768
00:54:28,120 --> 00:54:32,120
था य आवान की क्लासेस के पर्चे बाट रहा था और पता है मैं कैसे

769
00:54:32,120 --> 00:54:36,120
कर रहा था प्रचार बीच चौराहे पर माइक लेकर के मंदिर था पास में मैं कह

770
00:54:36,120 --> 00:54:40,120
रहा था कि आप आपके बच्चों का धर्म परिवर्तन करा दिया जाता है यह पोर्टेबल एक

771
00:54:40,120 --> 00:54:43,960
स्पीकर था मेरे हाथ में अकेला और मैं ऐसे मा

772
00:54:43,960 --> 00:54:48,080
पर बोल रहा था मैं कि आपके बच्चों का धर्म परिवर्तन करा दिया जाता आप लोग साप्ताहिक

773
00:54:48,080 --> 00:54:52,080
क्लास में अपने बच्चों को भेजे न युवक आए तो उस समय एक

774
00:54:52,080 --> 00:54:56,480
कोई ब्रेन वश कोई बौद्ध मत को अपना चुका

775
00:54:56,480 --> 00:55:00,560
ऐसा हमारा भटका हुआ हिंदू वो आया और

776
00:55:00,560 --> 00:55:04,760
वह आकर के बोलता है कि भाई क्या हिंदू

777
00:55:04,760 --> 00:55:08,960
धर्म को क्यों बचा रहे हो उसम भी तो बहुत सी बुराइयां है मैंने मेरा तुरंत दूसरा

778
00:55:08,960 --> 00:55:13,000
वाला पाठ चालू हो जाता है जैसे ही जैसे ही कोई अटैकिंग

779
00:55:13,000 --> 00:55:17,200
आक्रमण करने आता है तो फिर खून की गति थोड़ा

780
00:55:17,200 --> 00:55:21,520
दूसरे तरीके से बहने लगती तो मैंने तुरंत उसको एक सीधा

781
00:55:21,520 --> 00:55:25,640
हिंदू धर्म में एक कण के बराबर भी कोई बुराई नहीं

782
00:55:25,640 --> 00:55:29,760
है तो उसको यह चीज अहंकार लगी अच्छा

783
00:55:29,760 --> 00:55:34,000
कोई बुराई नहीं है तो उसने मुझे दो चीज गिना दी प्रथा और

784
00:55:34,000 --> 00:55:38,200
दहेज मैंने कहा कहां लिखा है द लो

785
00:55:38,200 --> 00:55:42,560
कहां लिखा है कि सती को जला दो यह धर्म

786
00:55:42,560 --> 00:55:47,480
यह धर्म शास्त्रों ने नहीं कहा है य व्यक्ति अपने मन से कर रहा है

787
00:55:47,480 --> 00:55:51,600
और जो धर्मशास्त्रों ने कहा है वह उपहार के रूप में कहा है

788
00:55:51,600 --> 00:55:55,720
कि जब पिता अपनी बेटी को विदा कर करता है तो

789
00:55:55,720 --> 00:55:59,000
व स्वरूप कुछ देता है मगर उसको दबाब के रूप में

790
00:55:59,000 --> 00:56:03,320
उपयोग करना गलत है और मान नहीं सकते जी हा दबाब

791
00:56:03,320 --> 00:56:07,680
नहीं डालना चाहिए और दवाब डालने को मना किया गया मनुस्मृति

792
00:56:07,680 --> 00:56:11,800
के अनुसार मना किया गया जो लोग अपने पुत्र का

793
00:56:11,800 --> 00:56:16,080
विवाह धन के लालच में करते हैं वो लोग

794
00:56:16,080 --> 00:56:20,120
पाप करते हैं उसको निषेध किया गया उसको तो द का खंडन हो

795
00:56:20,120 --> 00:56:24,280
गया तो यदि कोई ल अब पहली बात तो ये हो गई कि ये दोष हम

796
00:56:24,280 --> 00:56:28,600
इसको नहीं दे सकते दूसरी बात ये है कि

797
00:56:28,600 --> 00:56:33,440
अगर इस तरह की चीजें हम लोग देख रहे हो रही है तो इसमें यह बनता है

798
00:56:33,440 --> 00:56:37,640
कि जैसे हम परचून की दुकानों पर जाते हैं परचून की दुकानों

799
00:56:37,640 --> 00:56:42,000
पर भी भ्रष्ट होती है

800
00:56:42,000 --> 00:56:46,600
यह देखिए पुरी शंकराचार्य जी का उत्तर मैं आपको

801
00:56:46,600 --> 00:56:50,800
ज्यादातर यह कहा करता हूं कि अपने धर्म पर

802
00:56:50,800 --> 00:56:54,960
उठने वाले किसी भी प्रकार के संशय के लिए संशय को कभी मन में ना रहने

803
00:56:54,960 --> 00:56:59,040
दे पहली बात आपको कोई भी संशय है उसको लिख लीजिए एक

804
00:56:59,040 --> 00:57:03,360
नोटबुक बनाइए संशय संशय नाम लिख दीजिए उस नोटबुक का

805
00:57:03,360 --> 00:57:07,560
उस नोटबुक में जब भी कोई संशय आया करे उसको लिख दिया करिए और

806
00:57:07,560 --> 00:57:11,640
फिर सबसे पहले संशय का निराकरण कैसे ढूंढेंगे अपना संशय

807
00:57:11,640 --> 00:57:14,680
लिख दिया पूरी शंकराचार्य ज्यादातर

808
00:57:14,680 --> 00:57:18,840
उम्मीद है ज्यादा से ज्यादा संभावना है कि आपका उत्तर आ जाएगा नहीं है

809
00:57:18,840 --> 00:57:22,840
तो हमें भेजिए हम उसका निराकरण और पता है क्या है

810
00:57:22,840 --> 00:57:27,320
जब आप संशय लिख लेते हैं तो बहुत ज्यादा चांस हो जाते हैं

811
00:57:27,320 --> 00:57:31,440
कि उस संशय का निराकरण आपको स्वतः मिल जाए क्लेरिटी आ

812
00:57:31,440 --> 00:57:35,600
जाती है लिखने में हां अपने ही मेहनत से चिंतन मनन करके मिल जाता है

813
00:57:35,600 --> 00:57:39,640
काफी बार तो और क्या जो गणेश पंडाल और इसका शास्त्रीय

814
00:57:39,640 --> 00:57:43,840
पक्ष है कुछ जो बैठ मैं एक बात पूरी कर लू तीन

815
00:57:43,840 --> 00:57:48,040
पॉइंट्स थे हा तो जो

816
00:57:48,040 --> 00:57:52,040
हम कह रहे हैं कि भाई पंडाल लगा उसके पीछे ऐसा ऐसा हो रहा है पहली बात तो

817
00:57:52,040 --> 00:57:56,960
धर्म नहीं सिखाता कि ऐसा करो मगर लोग कर रहे हैं ऐसा दूसरी बात ये है

818
00:57:56,960 --> 00:58:01,400
कि डॉक्टर है हॉस्पिटल है दुनिया में हॉस्पिटल

819
00:58:01,400 --> 00:58:05,480
में भी भ्रष्टा आचरण होता है मेडिकल साइंस

820
00:58:05,480 --> 00:58:09,560
नहीं सिखाती मगर भ्रष्ट आचरण होता है तो क्या व्यक्ति हॉस्पिटल जाना बंद

821
00:58:09,560 --> 00:58:13,680
कर देगा नहीं पुलिस स्टेशन में

822
00:58:13,680 --> 00:58:18,600
भी भ्रष्टा आचरण होता है तो क्या व्यक्ति पुलिस स्टेशन जाना छोड़ देगा नहीं

823
00:58:18,600 --> 00:58:22,800
परचून की दुकान प भी भ्रष्टा आचरण होता है तो

824
00:58:22,800 --> 00:58:27,480
क्या व्यक्ति सभी परचून की दुकान जाना बंद कर देगा नहीं मगर

825
00:58:27,480 --> 00:58:29,960
इस बहाने से लोग मंदिरों से किनारा

826
00:58:29,960 --> 00:58:34,160
क्यों कर लेते हैं कि वहां तो पंडित ऐसा कर रहा था या उस

827
00:58:34,160 --> 00:58:38,520
पंडाल के पीछे ऐसा हो रहा था क्यों कर पाते हैं क्योंकि

828
00:58:38,520 --> 00:58:42,520
वह जो वहां से मिलने वाला जो फल है ना वह अप्रत्यक्ष

829
00:58:42,520 --> 00:58:46,680
है अव्यक्त है वो फल इस वजह से

830
00:58:46,680 --> 00:58:50,840
निष्ठा ना होने के कारण आस्था का अभाव होने के कारण व्यक्ति को आसान होता

831
00:58:50,840 --> 00:58:54,920
है कि मैं तो वैसे ही मजबूरी में आया था य मुझे कारण मिल गया ना जाने का अब क्या

832
00:58:54,920 --> 00:58:58,920
जाना पर की दुकान पर झक मार के दोबारा जाएंगे अरे उस

833
00:58:58,920 --> 00:59:03,000
पर नहीं जाएंगे तो दूसरी पर जाएंगे मगर ऐसे लोग आपको मिल जाएंगे जो

834
00:59:03,000 --> 00:59:07,200
मंदिर एक मंदिर में किसी में भ्रष्टा आचरण हो गया मंदिर जाना ही बंद कर दिया एक

835
00:59:07,200 --> 00:59:11,560
संत का नाम खराब हो गया संतो की ओर देखना बंद कर दिया य गलत बात

836
00:59:11,560 --> 00:59:15,600
है एक ही लकड़ी से शेर और बकरी को थोड़ी ना आग दोगे

837
00:59:15,600 --> 00:59:19,960
भाई जैसे आपकी एक बेसिक नीड है परचून की दुकान पर जाना पुलिस

838
00:59:19,960 --> 00:59:24,200
पुलिस स्टेशन जाना आपको समझना होगा कि आपकी बेसिक नीड है धर्म

839
00:59:24,200 --> 00:59:28,520
मंदिर संत तो अगर कहीं से कुछ हो गया है उसको शोधन

840
00:59:28,520 --> 00:59:32,560
करिए पता करिए कौन सा सही संत है कौन सा सही मंदिर है उसम ढूंढ उसम

841
00:59:32,560 --> 00:59:37,320
जाइए ये इसका निराकरण है और इसी के लिए प्रामाणिक

842
00:59:37,320 --> 00:59:41,320
संतों का प्रचार बहुत आवश्यक है प्रामाणिक संतो की नियमावली है चार

843
00:59:41,320 --> 00:59:45,400
पांच पॉइंट है वो रटा दो सबको और देखिए

844
00:59:45,400 --> 00:59:49,400
व्यक्ति प्रामाणिक संतो के पास जाएगा उसको कभी धोखा नहीं मिलेगा

845
00:59:49,400 --> 00:59:53,680
प्रामाणिक संतो के पास जाइए संत को संत

846
00:59:53,680 --> 00:59:58,120
के रूप में स्वीकार तब करिए जब उस पर प्रामाणिक जो नियमावली है शास्त्रों

847
00:59:58,120 --> 01:00:02,520
द्वारा बताई गई वो उसमें क्या कहते उस

848
01:00:02,520 --> 01:00:07,480
कसौटी पर खरे उतर जाए तो ये हो

849
01:00:07,480 --> 01:00:11,600
हा तो ये एक चीज होती है कि हमें ऐसे इस इस

850
01:00:11,600 --> 01:00:16,160
आधार पर के अरे पंडाल के पीछे ये हो रहा है हमें इस दृष्टिकोण

851
01:00:16,160 --> 01:00:20,320
को नहीं बनाना चाहिए कि नहीं हम किनारा उसका शोधन करिए जैसे मान

852
01:00:20,320 --> 01:00:25,080
लीजिए आज एक पंक्ति बहुत आती ज जब हम कहते वर्ण अवस्था

853
01:00:25,080 --> 01:00:29,440
तो कहा जाता है मुझसे सवाल किया जाता है वर्ण व्यवस्था की वजह से ही आजकल

854
01:00:29,440 --> 01:00:34,400
सबसे ज्यादा धर्म परिवर्तन हो रहा है ये एक बहुत साधारण सी बात कही जाती है

855
01:00:34,400 --> 01:00:38,560
तो इसका जवाब क्या है आज आप वर्ण व्यवस्था को छोड़ दो

856
01:00:38,560 --> 01:00:43,360
ठीक है कोई बात नहीं आज आप यह

857
01:00:43,360 --> 01:00:47,800
यह पंडित लोकी जी ने परंपरा प्राप्त आचार्य का

858
01:00:47,800 --> 01:00:52,320
विवरण दिया है यह

859
01:00:52,320 --> 01:00:56,680
आपको जो

860
01:00:56,680 --> 01:01:00,920
यह आपको वो नियम है जिनसे आपको

861
01:01:00,920 --> 01:01:04,920
किसी को भी संत के रूप में गुरु के रूप में स्वीकार करना है तो

862
01:01:04,920 --> 01:01:08,960
वर्ण व्यवस्था के ऊपर लोग कटाक्ष करते वर्ण व्यवस्था जो है

863
01:01:08,960 --> 01:01:13,120
वो उसके कारण धन परिवर्तन हो रहा है उसके कारण कश्चन बन रहे हैं

864
01:01:13,120 --> 01:01:17,200
भाई आज आप धर्म आज आपने एक धार्मिक सीमा है

865
01:01:17,200 --> 01:01:21,200
जो हटा दी ठीक है जो मनुष्य

866
01:01:21,200 --> 01:01:25,480
है उसके मूल में भौतिकी होने के कारण उसका जो मेन उद्देश्य

867
01:01:25,480 --> 01:01:30,160
है व कंपशन है वो दूसरी चीज के लिए जाएगा फिर

868
01:01:30,160 --> 01:01:34,160
आज आपने एक मर्यादा हटा दी वर्ण व्यवस्था की अगले दिन उसको ये करना

869
01:01:34,160 --> 01:01:38,280
है मुझे चाचा की लड़कियों से विवाह करना है अब उसको भी हटाओ फिर आपका

870
01:01:38,280 --> 01:01:42,280
कल वक्तव्य ये आएगा कि चचेरी बहनों से शादी ना

871
01:01:42,280 --> 01:01:46,520
होने देने के कारण विस्थापन हो रहा है तो फिर भैया उसको भी हटा देना

872
01:01:46,520 --> 01:01:50,520
फिर और एक मर्यादा हटाना फिर बढ़ता जाएगा वो क्योंकि

873
01:01:50,520 --> 01:01:54,840
मनुष्य तो उसका तो मेन जो वो है वो कंजप्शन में है

874
01:01:54,840 --> 01:01:59,280
और धर्म का लगाम उसकी उस कंजप्शन प

875
01:01:59,280 --> 01:02:03,480
लगाम धर्म मर्यादा तो आप

876
01:02:03,480 --> 01:02:07,400
अपनी वो नहीं कि वो बाढ़ आ गई है तो दो इंच और दो इंच और

877
01:02:07,400 --> 01:02:11,480
बाढ़ का पानी खतरे के निशान तक आ गया तो क्या करें खतरे का निशान और दो इंच

878
01:02:11,480 --> 01:02:15,640
ब दो कान और ये नहीं आवश्यकता है

879
01:02:15,640 --> 01:02:19,920
वर्ण व्यवस्था का जो सही स्वरूप है जो सही शिक्षा है

880
01:02:19,920 --> 01:02:24,000
वो लोगों तक पहुंचा है जो एक भ्रम डाल दिया गया है वर्ण

881
01:02:24,000 --> 01:02:28,280
व्यवस्था के नाम पर ऊंच नीच का व है घणा मूलक

882
01:02:28,280 --> 01:02:32,480
वर्ण व्यवस्था को घणा मूलक बता दिया गया है उसको दूर करना है

883
01:02:32,480 --> 01:02:36,760
और लोगों को बताना है कि वर्ण व्यवस्था गणा मूलक नहीं

884
01:02:36,760 --> 01:02:40,880
व्यवस्था मूलक है है ना

885
01:02:40,880 --> 01:02:46,880
तो यह

886
01:02:47,880 --> 01:02:52,200
है जी अभिनव जी बोलिए नहीं मैं आपसे

887
01:02:52,200 --> 01:02:56,560
यही पूछ था कि जो पंडाल जो लगते हैं ये तो लो बाल गंगाधर

888
01:02:56,560 --> 01:03:00,560
तिलक जी ने चालू किया था मुंबई में गणेश पंडाल से तो

889
01:03:00,560 --> 01:03:04,760
इसका कोई शास्त्रीय पक्ष है कि इसको रखना चाहिए कि नहीं जैसे

890
01:03:04,760 --> 01:03:08,880
सड़को जो हम देखते हैं म मेंा

891
01:03:08,880 --> 01:03:12,960
कर देखिए इसका ये है हो सकता है शास्त्रीय पक्ष हो

892
01:03:12,960 --> 01:03:16,960
भी वस्तु प्रश्न है हो सकता है हो भी हो सकता है ना भी हो मगर

893
01:03:16,960 --> 01:03:21,400
बात ये है अगर हम किसी वैदिक मर्यादा

894
01:03:21,400 --> 01:03:25,920
का उल्लंघन ना करते हुए किसी धर्म की मर्यादा का उल्लंघन

895
01:03:25,920 --> 01:03:30,080
करते हुए अपने भगवान का समारोप बना भी रहे हैं

896
01:03:30,080 --> 01:03:34,120
तो उससे कोई आपत्ति नहीं है भाई पंडाल लग रहा है जब राम जी ब्या

897
01:03:34,120 --> 01:03:38,120
के सीता माता को ला रहे हैं तब क्या हुआ था हाथी खड़े हैं दुदम भी

898
01:03:38,120 --> 01:03:42,160
बज रही है पूरा सड़क सजा दी गई ये भी तो वही है वही चीज तो

899
01:03:42,160 --> 01:03:46,800
है सड़कों पर उतर आए लोग त्यौहार मनाने के लिए तो

900
01:03:46,800 --> 01:03:51,240
उसका दूसरा अगर मर्यादा का उल्लंघन नहीं हो रहा है

901
01:03:51,240 --> 01:03:55,440
व्यवस्था का उल्लंघन नहीं हो रहा है तो इसमें कोई आपत्ति नहीं है कि इस तरह का समारोह बनाया

902
01:03:55,440 --> 01:03:59,920
जाए नहीं क्योंकि जो अंदर विग्रह स्थापित करते हैं वो

903
01:03:59,920 --> 01:04:02,880
तो उसमें स्पर्श कौन को किसको करना चाहिए

904
01:04:02,880 --> 01:04:07,120
किसको नहीं करना चाहिए उसकी कोई मज परपरा प्रात

905
01:04:07,120 --> 01:04:12,040
वो परंपरा प्राप्त आचार्य से दूरी उसका वो है वही

906
01:04:12,040 --> 01:04:16,320
जैसे कि मैं श्री राजेंद्र दास जी के प्रवचन सुनता हूं और गुरुदेव

907
01:04:16,320 --> 01:04:20,360
के स्वामी सरस्वती जी के भी तो उससे बहुत क्लेरिटी आती

908
01:04:20,360 --> 01:04:24,400
है जैसे चांडाल वाली कहानी शंकराचार्य जी की उसको बहुत गले

909
01:04:24,400 --> 01:04:28,440
गलत वे में पोट्रे करते हैं लोग लेकिन अगर कपाती जी

910
01:04:28,440 --> 01:04:32,640
का उस पर उत्तर देखा जाए तो व बहुत मतलब मीनिंगफुल था

911
01:04:32,640 --> 01:04:36,840
कि व्यवहार की दृष्टि से तो अलग ही होगा देखा जाए तो नाली

912
01:04:36,840 --> 01:04:40,840
का पानी भी पानी है और गंगा का पानी भी पानी है पीने न नाली का नहीं

913
01:04:40,840 --> 01:04:45,040
होगा बिल्कुल इसी बात को लेकर मे एक डाउट था कि मैं े

914
01:04:45,040 --> 01:04:49,840
ही मे लड़ाई चलती है थोड़े श्द और फ्रेंड है उनसे

915
01:04:49,840 --> 01:04:54,200
जहा मैं बात करता हूं गीता के पहले अध्याय में भगवान कहते है कि शंकर

916
01:04:54,200 --> 01:04:58,440
य बात आती है न घर प कोई मानता ही नहीं बोलते नहीं ऐसा नहीं होता जन्म

917
01:04:58,440 --> 01:05:03,040
से कुछ नहीं होता उसको मैं घर के में कैसे डिफेंड करू

918
01:05:03,040 --> 01:05:07,200
वो डिफेंड आप देखिए तो धारा बदल जाएगी हम लोग जो बातें कर रहे थे

919
01:05:07,200 --> 01:05:12,000
उसकी डिफेंड करने के लिए सिंपल है दुर्जन तोष न्याय प आ जाइए

920
01:05:12,000 --> 01:05:16,080
अगर जन्म से नहीं मानेंगे कर्म से मानेंगे तो व्यवस्था करके दिखा दीजिए

921
01:05:16,080 --> 01:05:18,320
हम अपना लेंगे सिंपल

922
01:05:18,320 --> 01:05:22,360
बात आप उनसे कहिए आप कमित कर दीजिए

923
01:05:22,360 --> 01:05:26,480
समाज होगा ही नहीं भाई कर्म का अर्थ य है कि

924
01:05:26,480 --> 01:05:30,640
कोई अपने मन मुताबिक कभी भी बदल सके अपना वर्ण तो जब बदल रहा है

925
01:05:30,640 --> 01:05:34,760
तो हम उसके लिए किसी को बाध्य थोड़ी ना कर सकते हैं कि जा

926
01:05:34,760 --> 01:05:38,760
अर्जुन तेरा धर्म रक्षा करना जाक रक्षा कर वो तो कह देगा

927
01:05:38,760 --> 01:05:42,960
अर्जुन मैं कथा करने जा रहा हूं मैं व्यास

928
01:05:42,960 --> 01:05:47,160
ब्यास हो गया हूं लो तो ऐसा तर्क देंगे क्या भगवान

929
01:05:47,160 --> 01:05:51,200
श्री कृष्ण जो वही खड़े खड़े दो मिनट में चूर चूर हो जाए

930
01:05:51,200 --> 01:05:55,280
ये तोम जब ऐसे लोगों से बातचीत हो तब है मैं आपको एक

931
01:05:55,280 --> 01:05:59,400
बात बता रहा था कि वर्णाश्रम धर्म से लोग किनारा

932
01:05:59,400 --> 01:06:03,480
करते हैं पंजाब में सबसे ज्यादा वर्णाश्रम धर्म को ना

933
01:06:03,480 --> 01:06:07,520
मानने वाले लोग हैं सिख ठीक है सबसे ज्यादा धर्म परिवर्तन

934
01:06:07,520 --> 01:06:11,680
कहां है इस समय देख लीजिए वो जो इशू इशू इशू इशू वाले वीडियोस

935
01:06:11,680 --> 01:06:15,720
आप देखते हो सबसे ज्यादा कहां के होते हैं लंगड़ा भी

936
01:06:15,720 --> 01:06:19,920
खड़ा हो जाता है काम करने लगी कहां प होली

937
01:06:19,920 --> 01:06:24,160
में डेरे मिलेंगे नाम भी उनका डेरा कर दिया गया है

938
01:06:24,160 --> 01:06:28,360
ताकि अडॉप्ट हो जाए के लोकल लोगों प डेरे किसके यीशु

939
01:06:28,360 --> 01:06:34,240
मसीह के डेरे ये देखिए ऐसे होता है

940
01:06:34,240 --> 01:06:38,240
परिवर्तन नहीं क्योंकि मैं खुद क्रिश्चन स्कूल का हूं तो वहां पर क्या

941
01:06:38,240 --> 01:06:42,760
क्या सिखाया जाता है मैं क्या ही बोलू आपको हर फ्राइडे

942
01:06:42,760 --> 01:06:47,480
चर्च जाया करते थे हम लोग भी एक टाइम प बंकी

943
01:06:47,480 --> 01:06:51,880
करने लेकिन वहां प ये आदमी इसी प्रन था मोस्ट

944
01:06:51,880 --> 01:06:56,360
की बंक करने के नाम पर क्लास बंक करेंगे तो चर्च में बैठ जाता

945
01:06:56,360 --> 01:06:58,680
देखिए

946
01:06:58,680 --> 01:07:02,760
पजाब सबसे ज्यादा धर्म परिवर्तन देखिए पंजाब में जहां पर वर्ण

947
01:07:02,760 --> 01:07:07,600
व्यवस्था जन्म से जीरो है कोई वर्ण व्यवस्था नहीं है

948
01:07:07,600 --> 01:07:11,880
सबसे ज्यादा और वर्ण व्यवस्था का ना मानने का एक सबसे बड़ी चीज बताऊ

949
01:07:11,880 --> 01:07:16,160
आपको कि वर्ण व्यवस्था में सबसे प्यारी चीज है कि बचपन

950
01:07:16,160 --> 01:07:20,160
से व्यक्ति को पता होता है कि मुझे क्या करना है

951
01:07:20,160 --> 01:07:24,440
क्योंकि व्यक्ति धर्म के अकॉर्डिंग पैसा कमाने

952
01:07:24,440 --> 01:07:28,480
के लिए भोग करने के लिए उसने जन्म नहीं लिया है उसने जन्म लिया है

953
01:07:28,480 --> 01:07:32,840
मनुष्य का मुक्ति के लिए मुक्ति के लिए

954
01:07:32,840 --> 01:07:36,960
जिससे कि वो इन चीजों में परेशान ना हो कि उसको क्या करना है क्या नहीं करना है

955
01:07:36,960 --> 01:07:41,080
खाना कैसे खाना है कहां रहना है वो परेशान ना हो तो वर्ण व्यवस्था

956
01:07:41,080 --> 01:07:46,280
से उसको पहले से ही पता होता मुझे यह करना है तो वह उसमें परेशान नहीं

957
01:07:46,280 --> 01:07:48,520
होता

958
01:07:48,520 --> 01:07:49,520
मुस्लिम

959
01:07:49,520 --> 01:07:55,520
आपका जो रोजगार है वो मुस्लिम अपना रहे जी

960
01:07:55,920 --> 01:08:00,080
सबकी मगर नहीं व्यवस्था को नहीं मानेंगे जन्म से तो क्या हो रहा

961
01:08:00,080 --> 01:08:04,200
है आज देखिए हर जगह प वो डेमो जो डेमोग्राफी जो

962
01:08:04,200 --> 01:08:10,200
घटती जा र

963
01:08:13,560 --> 01:08:17,560
है और जो धर्म के ठेकेदार बनते हैं

964
01:08:17,560 --> 01:08:21,760
वो कहते हैं कि भैया क्या कहते हैं वो

965
01:08:21,760 --> 01:08:27,760
हिंदुओं की दुकान से सामान लो अरे भैया हिंदू बचेगा आदमी तब ना

966
01:08:27,880 --> 01:08:32,600
अवेलेबल है नहीं हिंदू को आपने इतना ज्यादा ब्रेन वश किया है

967
01:08:32,600 --> 01:08:36,600
कि मैंने ऐसे लोग देखे बहुत कट्टर हिंदू आरएसएस से जुड़े हुए

968
01:08:36,600 --> 01:08:40,680
बहुत कट्टर हिंदू भाई देखिए यह मानना पड़ेगा कि

969
01:08:40,680 --> 01:08:45,120
हिंदुत्व है ऐसा नहीं है ु की रक्षा के नाम पर ही आरएसएस है

970
01:08:45,120 --> 01:08:49,280
नाम अब वो शीर्ष में क्या हो रहा है दिशा हीनता है

971
01:08:49,280 --> 01:08:53,400
क्या कर रहे हैं वो समीक्षा नहीं करेंगे मगर जो कट्टर हिंदू है

972
01:08:53,400 --> 01:08:57,680
वो कह रहे मैं अपनी दुकान में नाम लिखवा ना है ज्वेलर्स मैं

973
01:08:57,680 --> 01:09:01,800
एक बार ज्वेलर्स के पास था किसी मीटिंग में तो व अपने आप

974
01:09:01,800 --> 01:09:06,720
पर दुकान का नाम लिखवा रहे थे अब वोह बोले मुझसे

975
01:09:06,720 --> 01:09:11,240
कि मैंने पहले हिंदू को यह कार्य दिया था करने

976
01:09:11,240 --> 01:09:15,280
को हिंदू ने वो कार्य करने में इतना नाटक किया

977
01:09:15,280 --> 01:09:19,560
इतना नाटक किया कि पहले उसने 15 दिन मुझे परेशान कर दिया

978
01:09:19,560 --> 01:09:23,760
और देखो मैंने इसको मुस्लिम को दिया दो दिन में कर रहा है और

979
01:09:23,760 --> 01:09:27,960
कर दिया उसने तो क्या हो रहा है कि आपकी

980
01:09:27,960 --> 01:09:32,240
जो ताकत थी जो शक्ति थी जो

981
01:09:32,240 --> 01:09:36,400
आपकी जो गुणवत्ता थी वह तो आपने कम करवा दी है फिर कह रहे

982
01:09:36,400 --> 01:09:40,400
हो कि नहीं हिंदू सेही रीद ू आज आज स्थिति यह हो चुकी

983
01:09:40,400 --> 01:09:42,960
है कि आपका पूरा

984
01:09:42,960 --> 01:09:47,080
काम पूरा एक दिन कटेगा ही नहीं बिना किसी मुस्लिम

985
01:09:47,080 --> 01:09:51,280
से कोई ना कोई आदान प्रदान किए बिना यह स्थिति है

986
01:09:51,280 --> 01:09:56,640
और य स्थिति क्यों आई है वर्णाश्रम धर्म को ना मानने के कारण

987
01:09:56,640 --> 01:10:00,720
वर्णाश्रम धर्म से जो जीविका होती है जन्म से सुरक्षित होती है

988
01:10:00,720 --> 01:10:04,960
तो जीविका को लेकर के व्यक्ति परेशान नहीं होता भटकता नहीं है

989
01:10:04,960 --> 01:10:10,960
और अपने उस पर ध्यान देता है

990
01:10:13,840 --> 01:10:17,920
धर्म और सबका दोष कहां दिया जाता है शंकराचार्य

991
01:10:17,920 --> 01:10:22,000
को शंकराचार्य क्या कर रहे हैं शंकराचार्य

992
01:10:22,000 --> 01:10:26,280
क्या कर र अरे भाई खड़ा कौन है शंकराचार्य के साथ गौतम खट्टर

993
01:10:26,280 --> 01:10:31,040
जी अभी दो तीन दिन पहले उनका वक्तव्य देखा मैंने

994
01:10:31,040 --> 01:10:35,200
कि शंकराचार्य जो है व दुनिया में कोई

995
01:10:35,200 --> 01:10:39,360
भी ऐसा मुस्लिम नहीं है जो अपने मौलवी को वो कहता हो

996
01:10:39,360 --> 01:10:43,680
दुनिया में कोई भी ऐसा पादरी नहीं है बड़ा वही वाली बात वही अभी ओो

997
01:10:43,680 --> 01:10:47,760
वाली ो वाली बात वही मैंने तुम्हारे चेहरे पर

998
01:10:47,760 --> 01:10:52,080
व जो है मुस्कान देखी है झूटी है धोखा है ये अंदर से तुम खोखले हो

999
01:10:52,080 --> 01:10:56,200
अंदर से तुम बहुत दुखी हो बस वही चीज है आपकी भावनाओं

1000
01:10:56,200 --> 01:10:57,960
के साथ खेलता है व्यक्ति इन शब्दों से

1001
01:10:57,960 --> 01:11:02,320
और कुछ नहीं है अब व्यक्ति को लग कितनी बात कर रहा है यार हमारी भाई

1002
01:11:02,320 --> 01:11:07,280
हम आपको ऐसे मौलवी दिखा दे जो दूसरे मौलवी को क्रिसा कर रहे हैं बताइए

1003
01:11:07,280 --> 01:11:11,440
ऐसे मौलवी दिखा दे और मौलवियों को छोड़

1004
01:11:11,440 --> 01:11:15,920
दो आर समाज के अंदर ही अग्नि

1005
01:11:15,920 --> 01:11:20,160
क्या नाम है अग्निवेश नाम है क्या उनका

1006
01:11:20,160 --> 01:11:24,240
जिन पर पूरा आर समाज जो है दो दो पार्ट में बट

1007
01:11:24,240 --> 01:11:28,920
गया था और विदेशों में सबसे ज्यादा अ समाज का प्रचार करने वाले हैं

1008
01:11:28,920 --> 01:11:33,400
उनका नाम मुझे याद नहीं आ रहा है बवली तो अगर

1009
01:11:33,400 --> 01:11:37,920
अगर आर समाज का अर्थ ये है जिसको गौतम खट्टर फॉलो करते हैं आर

1010
01:11:37,920 --> 01:11:42,120
समाज का अगर अर्थ ये है कि भैया जो आपका दूसरा सनातनी

1011
01:11:42,120 --> 01:11:46,120
होगा व अगर कुछ गलत कर रहा होगा या वो स्पष्ट नहीं होंगी चीज

1012
01:11:46,120 --> 01:11:50,240
उस पर मगर उंगली नहीं उठाएगा तो आपने तो उठाई है यह कैसा दोगलापन

1013
01:11:50,240 --> 01:11:56,240
है भाई अपनी पब्लिसिटी के लिए बड़ी बड़ी बातें हाकने के लिए

1014
01:11:57,640 --> 01:12:01,920
आप कुछ भी झूठ बोलते चले जा रहे हो अच्छा आपसे पूछा जाएगा साई

1015
01:12:01,920 --> 01:12:05,960
को लेकर के क्या व है हमारे शंकराचार्य तो नहीं मानते हैं साई

1016
01:12:05,960 --> 01:12:10,000
को भगवान वहां पर गौतम खट्टर शंकराचार्य को

1017
01:12:10,000 --> 01:12:14,120
मानने वाले हो गए और किताब कौन सी बेच रहे

1018
01:12:14,120 --> 01:12:18,280
हैं किताब कौन सी बेच रहे हैं जिसमें शंकराचार्य शंकराचार्य

1019
01:12:18,280 --> 01:12:22,840
के लिए बुराई गोड़ी पोप

1020
01:12:22,840 --> 01:12:27,120
भांड कितने बुरे बुरे शब्द पुराण को मानने

1021
01:12:27,120 --> 01:12:31,200
वालों के लिए बहुत बुरे बुरे शब्द है

1022
01:12:31,200 --> 01:12:35,240
कैसा दोगलापन है भाई य और आप

1023
01:12:35,240 --> 01:12:39,400
कह रहे हो कि शंकराचार्य जो धर्म की सर्वोच्च गद्दी बैठे भाई

1024
01:12:39,400 --> 01:12:43,560
धर्म की सर्वोच्च गद्दी पर बैठने का अर्थ क्या है यह तो बताओ क्या अर्थ

1025
01:12:43,560 --> 01:12:47,720
है कि धर्म और अधर्म का निर्णय अंततोगत्वा किसके

1026
01:12:47,720 --> 01:12:51,800
हाथ में है शंकराचार्य के हाथ में जब तुम खुद कह रहे हो शंकराचार्य के

1027
01:12:51,800 --> 01:12:56,400
हाथ में ये है क्या करना क्या नहीं करना फिर तुम क्यों समझा रहे हो

1028
01:12:56,400 --> 01:13:00,560
कि क्या करना है क्या नहीं करना है और जितना तुमने

1029
01:13:00,560 --> 01:13:04,840
चिल्लाया माइक प जाकर के क्या शंकराचार्य का एक वीडियो दिखा दो इसमें शंकराचार्य चिल्ला

1030
01:13:04,840 --> 01:13:08,840
रहे हो कि वो जो है वो फलानी पीठ के जो है वो मैं

1031
01:13:08,840 --> 01:13:12,840
वो नहीं है अरे एक बार कहीं पर वक्तव्य दे दिया जो कांग्रेस जिको

1032
01:13:12,840 --> 01:13:17,080
शंकराचार्य बना के घुमा रही है जो ऐसे ऐसे

1033
01:13:17,080 --> 01:13:21,080
तथाकथित लोग जो अल्लाह अकबर के नारे लगा रहे हैं शंकराचार्य स्वयं

1034
01:13:21,080 --> 01:13:26,200
को बताते हुए उनका खंडन चिल्ला चिल्ला के कर रहे हैं

1035
01:13:26,200 --> 01:13:30,360
और आपसी मतभेद का तो नहीं कर रहे इस तरह से जैसे तुमने चिल्लाया हाथी में बैठ

1036
01:13:30,360 --> 01:13:33,280
कर

1037
01:13:33,280 --> 01:13:37,360
के अजीब दोगलापन है भाई

1038
01:13:37,360 --> 01:13:41,400
कुल मिला सी जो अव्यवस्था है

1039
01:13:41,400 --> 01:13:45,560
जो हमारी जो अगली पीढ़ी जो नई पीढ़ी है मॉडर्न जिसको

1040
01:13:45,560 --> 01:13:49,640
कहते हैं वह ऐसे तथाकथित ओशो वादियों के उस में जा रही

1041
01:13:49,640 --> 01:13:53,800
है यह तथाकथित नकली जो स्वयं को अपने आप ही

1042
01:13:53,800 --> 01:13:58,080
आचार्य बना लेते हैं किसने बनाया कौन ने बनाया कुछ नहीं पता ऐसे

1043
01:13:58,080 --> 01:14:02,680
उसम जा रही है तो ये अनास्ता उत्पन्न होने का कारण

1044
01:14:02,680 --> 01:14:07,000
यही है माता पिता को नहीं पता था नाम जो पिछले डेढ़ दो

1045
01:14:07,000 --> 01:14:11,880
वर्षों में जो राजा राम मोहन राय और आर्य समाज जैसे

1046
01:14:11,880 --> 01:14:16,240
जो तंत्र खड़े हो गए जिन्होंने जाति और वर्ण व्यवस्था को आघात पहुंचाया

1047
01:14:16,240 --> 01:14:20,320
उनका परिणाम है कि आज की पीढ़ी जो है परंपरा प्राप्त

1048
01:14:20,320 --> 01:14:24,320
जो शास्त्र सतता ये का वो प्रति भावना धर्म के

1049
01:14:24,320 --> 01:14:28,320
प्रति ये सब गुम होती जा रही जी अभिनव जी

1050
01:14:28,320 --> 01:14:33,040
मेरे मम्मी को खुद नहीं पता था चार पीठ के आचार्य चरणों का नाम

1051
01:14:33,040 --> 01:14:37,120
अब मैं आपसे क्या बोलू क्योंकि इतनी अवे थी नहीं क्योंकि

1052
01:14:37,120 --> 01:14:41,240
आप पॉपुलर करते नहीं आप लाइम लाइट में आते नहीं थे

1053
01:14:41,240 --> 01:14:45,240
क्योंकि जो व्यक्ति धर्म को जानता होगा वही इस पद को जानता

1054
01:14:45,240 --> 01:14:49,360
होगा मर्यादा को जानता होगा लेकिन आजकल हम देखते हैं कि कोई

1055
01:14:49,360 --> 01:14:53,600
भी उठके महंत डैश डैश डैश य महामंडलेश्वर बन

1056
01:14:53,600 --> 01:14:58,520
जाता है खुद ब खुद अथॉरिटी यहां तक कि मैं देखता हूं कि

1057
01:14:58,520 --> 01:15:02,520
कहना तो नहीं चाहिए जो अखाड़ा है अखाड़े जो बनाए गए हैं वो भी कहीं ना

1058
01:15:02,520 --> 01:15:06,520
कहीं कंट करते हैं आचार्य चरणों की बातों से कि वो बोलते

1059
01:15:06,520 --> 01:15:11,400
होंगे तो बोलते होंगे जिसका अभी जो

1060
01:15:11,400 --> 01:15:15,480
जूना अखाड़ा के पीठाधीश्वर है महामंडलेश्वर उन्होने ही राम मंदिर

1061
01:15:15,480 --> 01:15:19,560
के केस में कितना विवाद मतलब कॉन्फ्लेट किया इस बारे में

1062
01:15:19,560 --> 01:15:23,800
कि नहीं आते तो नहीं आए वो जबकि अखाड़े बनाए आचार्य

1063
01:15:23,800 --> 01:15:27,960
चरणों के द्वारा ही थे लेकिन अब वो अपना सो क्यों

1064
01:15:27,960 --> 01:15:32,360
भूल गए देखिए मैं इसमें एक बात कहता हूं अगर चारों पीठ के शंकराचार्य

1065
01:15:32,360 --> 01:15:37,200
के बीच में योजनाओं को लेकर के व्यावहारिक

1066
01:15:37,200 --> 01:15:41,200
जो प्रासंगिक जो बातें उनको लेकर के अगर भेद है भी उनके

1067
01:15:41,200 --> 01:15:43,440
निर्णयों में इससे आपके धर्म और

1068
01:15:43,440 --> 01:15:47,560
ब्रह्म पर कौन सा असर पड़ रहा है बताइए

1069
01:15:47,560 --> 01:15:52,040
अंत अथवा उनका जो मूल स्वरूप है धर्म और ब्रह्म के लिए है

1070
01:15:52,040 --> 01:15:56,120
अगर कोई गौ माता राष्ट्र माता की बात कर रहा कोई हिंदू राष्ट्र की

1071
01:15:56,120 --> 01:16:00,480
बात कर रहा है और इस बात को लेकर के अंतर है दोनों के बीच में तो आपका धर्म

1072
01:16:00,480 --> 01:16:04,480
ब्रम बिगड़ रहा है क्यासे यह केवल एक पॉइंट उठाया जा रहा है

1073
01:16:04,480 --> 01:16:08,840
देखो देखो देखो इनम कितना वो है तो अंतर

1074
01:16:08,840 --> 01:16:12,920
तो मुझे लगता नहीं ना हो उससे

1075
01:16:12,920 --> 01:16:16,040
ज्यादा

1076
01:16:16,040 --> 01:16:20,280
है तो मैं अभी थोड़ा आयुष जी आपको लूंगा

1077
01:16:20,280 --> 01:16:25,640
बताए जय श्री राम जय श्री राम

1078
01:16:25,640 --> 01:16:29,960
जी मैं आपको लगभग छ महीने से सुन रहा था और आपकी बातें

1079
01:16:29,960 --> 01:16:34,000
मुझे बहुत अच्छी लगती है कुछ समय पहले पटना में एक केस हो गया था

1080
01:16:34,000 --> 01:16:38,440
तो आपसे ट पर मेरी बात हुई थी अच्छा

1081
01:16:38,440 --> 01:16:42,880
जी तो मैंने आपको व पर बताया था कि

1082
01:16:42,880 --> 01:16:47,520
आपके बातों को सुन कर के और धर्म के बारे में आपके थ्रू जान करके

1083
01:16:47,520 --> 01:16:51,680
मेरे लाइफ में बहुत अच्छे अच्छे चेंजेज आए हैं और कल आपका सेशन मैंने

1084
01:16:51,680 --> 01:16:55,880
मिस कर दिया था जो आपने बताया था कि आवाहन के का जो लोग संतुष्ट

1085
01:16:55,880 --> 01:16:59,880
है उन्होंने आ करके अपने अपने विचार रखे थे थोड़ा

1086
01:16:59,880 --> 01:17:04,080
बिजी होने के कारण मैंने आज उसके बारे में सुना और जैसे मैंने सेशन देखा

1087
01:17:04,080 --> 01:17:08,200
तो मुझे लगा कि आज मैं जल्द से जल्द आपको जवाइन कर सकू तो मैं यही बताना

1088
01:17:08,200 --> 01:17:12,200
चाहूंगा कि आपके मतलब बातों से और धर्म के बारे

1089
01:17:12,200 --> 01:17:16,520
में जान करके मेरे लाइफ में बहुत पॉजिटिव चेंज आया है पहले मैं बहुत ज्यादा नेगेटिव

1090
01:17:16,520 --> 01:17:20,800
रहता था थोड़ा डिप्रेसो से बात सुन

1091
01:17:20,800 --> 01:17:24,960
करके जैसे कि कंफ्यूज हो गया था जैसे ही आपके बारे में

1092
01:17:24,960 --> 01:17:28,960
ना मैं एक्ली भगवत वचन जिनका वो है

1093
01:17:28,960 --> 01:17:31,200
चैनल है युगल किशोर जी उनके थ्रू

1094
01:17:31,200 --> 01:17:35,560
आपको जान पाया हूं तो जैसे आपके बारे में जाना आपके लाइव स्ट्रीम

1095
01:17:35,560 --> 01:17:39,680
को देखा तो मुझे यह लगा कि आपके अंदर कितनी क्लेरिटी है आपके गुरुदेव के बारे

1096
01:17:39,680 --> 01:17:43,680
में जाना और उसके बाद से मैंने य पर उनका थोड़ा बहुत लेक्चर

1097
01:17:43,680 --> 01:17:47,960
जो भी मुझे लगता है मैंने देखा अभी फिलहाल मैं फाइनल ईयर इंजीनियरिंग में हूं

1098
01:17:47,960 --> 01:17:52,080
और आपके ही लाइव स्ट्रीम और वगैरह को देख कर के भगवान की कृपा

1099
01:17:52,080 --> 01:17:56,240
से ही जो भी हो सके मैं एक मतलब बहुत बड़ी कंपनी

1100
01:17:56,240 --> 01:18:00,480
में हो सकता है जवाइन करने वाला हूं अरे

1101
01:18:00,480 --> 01:18:04,560
बकम प्राथना करें बक प्रभु श्री

1102
01:18:04,560 --> 01:18:08,960
रामना थक कहना चा रहा था आभार

1103
01:18:08,960 --> 01:18:13,040
से मुझे थोड़ भगवत भक्ति के बारे में थोड़ा सा हु इंजीनियरिंग कॉलेज

1104
01:18:13,040 --> 01:18:17,320
में तोय रहता है थ मस्टिक चीजों में ही रहता है थोड़ा बहुत

1105
01:18:17,320 --> 01:18:21,600
और बीच में थोड़ स्न वगर से भी जुड़ गया था ब

1106
01:18:21,600 --> 01:18:27,120
आपकी जैसे लाइव स्ट्रीम गग देखना चालू किया तो मतलब

1107
01:18:27,120 --> 01:18:31,200
आप कहते ही है कि जिसके अंदर थोड़ी सी भी समझ होगी थोड़ा सा वो

1108
01:18:31,200 --> 01:18:35,280
ऑटोमेटिक अने अपने आप को सही करने के पीछे जाएगा मैं भी कोशिश करता

1109
01:18:35,280 --> 01:18:39,400
हूं कि मतलब जितना हो सके अपने स्तर प ही अच्छे

1110
01:18:39,400 --> 01:18:43,480
से अच्छे करके भगवान की भक्ति कर सकूं और साथ के साथ अपना काम भी कर सकू बहुत

1111
01:18:43,480 --> 01:18:46,240
बि फिलहाल तो मैं स्टूडेंट हूं भैया बस आप ऐसी

1112
01:18:46,240 --> 01:18:51,280
कृपा बनाए रखें और आपकी स्ट्रीम्स मैं डेली देखता हूं मुझे बहुत आनंद आता है भया

1113
01:18:51,280 --> 01:18:55,360
अरे बहुत बढ़िया और हमारी प्रार्थना

1114
01:18:55,360 --> 01:18:59,520
आना होगा तो आपसे जरूर मिलूंगा बिल्कुल ब

1115
01:18:59,520 --> 01:19:03,720
भगवान से हमारी प्रार्थना है प्रभु श्री राम आप पर कृपा बनाए और आपको

1116
01:19:03,720 --> 01:19:07,720
आपके लक्ष्य में और उत्तीर्ण करें आपका लक्ष्य

1117
01:19:07,720 --> 01:19:12,840
आपको प्राप्त हो आभार आपका समर्थन प्रकट करने के

1118
01:19:12,840 --> 01:19:15,000
लिए

1119
01:19:15,000 --> 01:19:19,040
जीया आप जो व्यासपीठ है उसकी

1120
01:19:19,040 --> 01:19:23,040
जो मर्यादा है जैसे स्त्रियों को नहीं बैठना चाहिए व्यासपीठ पर लेकिन आज हम

1121
01:19:23,040 --> 01:19:27,200
देखते हैं कि छोटे छोटे बच्चे या बच्चियों को भी हम व्यासपीठ में

1122
01:19:27,200 --> 01:19:31,400
बिठा देते हैं और कथा तो होती नहीं वहां और भजन चलते हैं बस हो

1123
01:19:31,400 --> 01:19:35,480
जाता है जिस कथा उसी का उसी का नतीजा है ना ये

1124
01:19:35,480 --> 01:19:39,600
जो आप देखो जब इस तरह के व्यक्तित्व जाकर के ऑथराइज

1125
01:19:39,600 --> 01:19:44,120
सीट पर बैठ जाते तो क्या होता है जो अमानुष लोग है अमानुष

1126
01:19:44,120 --> 01:19:48,360
पशुता प्रधान लोग मैं अभी नाम नहीं लूंगा ऐसे लोग जो जानवर बनके

1127
01:19:48,360 --> 01:19:52,440
खा जाना चाहते हैं स्त्रियों को मात शक्तियों को रद देना चाहते

1128
01:19:52,440 --> 01:19:56,760
हैं सारे नियम तोड़ देना चाहते हैं ऐसे लोगों का रास्ते का काटा

1129
01:19:56,760 --> 01:20:01,160
कौन है धर्म धर्म का प्रचार प्रसार करने वाले

1130
01:20:01,160 --> 01:20:02,160
लोग

1131
01:20:02,160 --> 01:20:06,160
कि वही हमको रोकेंगे आकर के ये गलत है ये मत करो वो मत करो तो क्या करते

1132
01:20:06,160 --> 01:20:10,280
हैं वो लोग जब उनको धर्म का ऐसा कोई बिंदु मिलता है

1133
01:20:10,280 --> 01:20:14,280
कमजोर लोग कि वो ऑथराइज नहीं है जाके बैठ

1134
01:20:14,280 --> 01:20:18,320
गए उनको पकड़ते हैं बुलाते हैं उनको दिखाते

1135
01:20:18,320 --> 01:20:22,440
हैं कि हमने जो है उनके साथ वार्तालाप की और वो ढेर

1136
01:20:22,440 --> 01:20:26,600
हो गए देखो तो अब क्या हुआ जो जनरेशन है जिसने वो

1137
01:20:26,600 --> 01:20:30,640
वो वीडियो देखा उसका धर्म के प्रति अनास्ता वान होना शुरू

1138
01:20:30,640 --> 01:20:34,800
हुआ और आस्थावान किसके प्रति होना शुरू हुआ जो वो भोगी

1139
01:20:34,800 --> 01:20:39,040
है जिसने जो रोना चाहता है मानवता को कुचल देना चाहता

1140
01:20:39,040 --> 01:20:43,680
है जो नास्तिक है उसकी ओर आस्थावान होना शुरू हुआ क्यों

1141
01:20:43,680 --> 01:20:47,800
क्योंकि हमने ऐसे लोगों को भी व्यास गद्दी पर बैठा कर के

1142
01:20:47,800 --> 01:20:52,200
पूजना शुरू कर दिया जो लोग धर्म को स शुद्ध रूप से बताने में

1143
01:20:52,200 --> 01:20:56,680
सामर्थ वान है ही नहीं इस कारण से क्या हुआ नास्तिकता

1144
01:20:56,680 --> 01:21:00,680
फैलना शुरू हुई और फल स्वरूप क्या हुआ फल स्वरूप

1145
01:21:00,680 --> 01:21:06,320
हुआ दुराचार मात शक्तियों के साथ

1146
01:21:06,320 --> 01:21:10,920
अचरण बलात्कार अपराध पाप

1147
01:21:10,920 --> 01:21:15,720
यह सब क्यों होता है जहां पर धर्म का अभाव हो जाता है वहां ये सब होता है

1148
01:21:15,720 --> 01:21:17,160
तो अभाव लोभ के

1149
01:21:17,160 --> 01:21:21,720
कारण होता है जोध क ऐसा लगता है क्योंकि होता

1150
01:21:21,720 --> 01:21:26,320
है लोभ शुरू हुआ य से हमने किसी बच्चे को

1151
01:21:26,320 --> 01:21:30,720
उसने कुछ श्लोक पढ़ लिए कुछ श्लोक रट लिए कुछ कर दिया उसको बिठा दिया

1152
01:21:30,720 --> 01:21:34,720
ब दिया उसको जब लोग फॉलो करने लगे उसके बाद

1153
01:21:34,720 --> 01:21:39,480
किसी नास्तिक की नजर पड़ी यह बढ़िया है शंकराचार्य को तो मैं नहीं हरा पाऊंगा भाई

1154
01:21:39,480 --> 01:21:43,560
शंकराचार्य के पास जाके तर्क नहीं कर पाऊंगा इसको मैं वीडियो लेकर बना

1155
01:21:43,560 --> 01:21:48,000
लेता हूं वो कुछ बोल सामने पूरा

1156
01:21:48,000 --> 01:21:52,000
पूरी मानवता सुरक्षित है शंकराचार्य जी द्वारा दिए गए जो सिद्धांत है

1157
01:21:52,000 --> 01:21:56,000
भगवत आद शकरा उन सिद्धा की सीमा में अंदर

1158
01:21:56,000 --> 01:22:00,520
रह कर के आज पूरी मानवता सुरक्षित है जिस दिन वो सीमा टूटेगी ना

1159
01:22:00,520 --> 01:22:04,800
ईश्वर वही है जो कुछ भी कर सकता है अवाद सर्वशक्तिमान ईश्वर की

1160
01:22:04,800 --> 01:22:08,840
आप जैसे ही उस सीमा के बाहर जाओगे देखो मानवता भंग

1161
01:22:08,840 --> 01:22:13,240
नास्तिकता चालू धर्म का लो इसलिए

1162
01:22:13,240 --> 01:22:17,240
तो मतलब जो सिद्धांत सिद्धांत उसको भी लोग गलत वे में

1163
01:22:17,240 --> 01:22:21,440
पोट करते हैं कि देखो जब माया जब जगत ही मिथ्या है तो

1164
01:22:21,440 --> 01:22:25,720
उसमें जो भगवान आते हैं वो भी मिथक है ऐसा कुछ लोग

1165
01:22:25,720 --> 01:22:30,520
कते क्योंकि मैं तो वि मानता हं

1166
01:22:30,520 --> 01:22:33,880
जी व्यवहार और परमार्थ का अंतर

1167
01:22:33,880 --> 01:22:38,800
है भगवान अपनी इा से

1168
01:22:38,800 --> 01:22:43,000
आते हैं अपना रूप बनाते हैं लीला करते हैं

1169
01:22:43,000 --> 01:22:46,240
अपनी इच्छा

1170
01:22:46,240 --> 01:22:50,880
से क्योंकि विशिष्ट द्वेत जो है उसमें थोड़ा मेरे को

1171
01:22:50,880 --> 01:22:55,920
मतलब कॉन्फ्लेट नजर आता है अब

1172
01:22:55,920 --> 01:23:01,200
कॉन्ट ऐसा कुछ नहीं है सत्य सता की क्रमिक अभिव्यक्ति

1173
01:23:01,200 --> 01:23:05,400
है जो माधवाचार्य शास्त्री जी है जिन्होंने क्यों लिखी

1174
01:23:05,400 --> 01:23:09,560
है उसमें उन्होंने द्वैत अद्वैत विशिष्ट

1175
01:23:09,560 --> 01:23:14,120
द्वैत इसके बारे में लिखा है कि द्वैत जो है एक किनारा

1176
01:23:14,120 --> 01:23:18,600
है अखंड अपने उस पर खड़ा हुआ ट के

1177
01:23:18,600 --> 01:23:23,440
अवत दूसरा किनारा है अपने उस पर खड़ा हुआ टट के

1178
01:23:23,440 --> 01:23:27,480
और शिता वो नदी है जो दोनों को छूती है ये

1179
01:23:27,480 --> 01:23:31,520
उन्होंने लिखा है छूती है अच्छा जी लेकिन

1180
01:23:31,520 --> 01:23:35,640
य प हम देखें जो वल्लभ कुली है या

1181
01:23:35,640 --> 01:23:39,880
जो पुष्टि मागी है वो तो ना

1182
01:23:39,880 --> 01:23:44,080
शंकराचार्य जी को मानते ना दूसरे आचार्य चरण को मानते हैं वो मतलब

1183
01:23:44,080 --> 01:23:48,760
उनमें मुझे निष्ठा के नाम पर वो कटता दिखाई देती है जो

1184
01:23:48,760 --> 01:23:49,260
जो

1185
01:23:48,920 --> 01:23:53,400
एक हार्मनी है जो सोशल हार्मोनी है उसको वो नकाते हैं ना पंचदेव

1186
01:23:53,400 --> 01:23:57,440
की उपासना में वो लोग कहते हैं नरा यमुना

1187
01:23:57,440 --> 01:24:02,760
जी की पूजा की देखिए ऐसा है

1188
01:24:02,760 --> 01:24:06,840
की बात यह है कि पंच देवो पासना को नहीं मान रहे ठीक

1189
01:24:06,840 --> 01:24:11,040
है पंच देव पासना की धारणा क्या है कि पांचों देवों

1190
01:24:11,040 --> 01:24:15,120
को अपने ईस्ट में स्थापित कर लो जी हे

1191
01:24:15,120 --> 01:24:19,240
ब्रह्मा विष्णु महेश भगवती और गणेश में आप सबकी भक्ति राम के रूप में करने जा रहा हूं

1192
01:24:19,240 --> 01:24:23,240
श रूप में करने रहा मुझे इस रूप में दर्शन दे दीजिए वो

1193
01:24:23,240 --> 01:24:27,320
इस बात को नहीं मा उसे क्या दिक्कत है आप यह समझ लो व जिस रूप में भी भगवान

1194
01:24:27,320 --> 01:24:31,400
को मान रहे हैं आपके इट उनके अंदर है व आपके भगवान

1195
01:24:31,400 --> 01:24:35,680
ईश्वर को मगर दिक्कत तब आती है जब यह भेद

1196
01:24:35,680 --> 01:24:39,960
तो किया जा रहा है मगर उस स्वरूप को जो जो अलग

1197
01:24:39,960 --> 01:24:44,000
किया गया उसको जोड़ दिया अल्ला से अल्ला अल्लाह और

1198
01:24:44,000 --> 01:24:48,400
कृष्ण एक है कृष्ण शिव एक नहीं है कृष्ण अल्लाह एक है दूसरी बात

1199
01:24:48,400 --> 01:24:52,520
निंदा करने के उसको साबित करते जो बाकी स्

1200
01:24:52,520 --> 01:24:56,720
और दूसरी बात वश्रम धर्म को दिया वर्णाश्रम

1201
01:24:56,720 --> 01:25:00,800
धर्म रीड है धर्म की रीड हां कुछ ऐसे

1202
01:25:00,800 --> 01:25:04,200
है कि ये वैष्णव वैष्णव तो वर्णाश्रम धर्म

1203
01:25:04,200 --> 01:25:09,000
क्या होता है वैष्णव तो शादी कर दो ये सिद्धांतों पर भी कुछ संप्रदाय

1204
01:25:09,000 --> 01:25:13,040
चालू हो गए हैं कोई भी पर सिद्धांत है वो ऐसी बात

1205
01:25:13,040 --> 01:25:17,160
जो आचार्य गण है वो ऐसी बात नहीं करते नहीं करते जी लेकिन कुछ है जैसे मैं

1206
01:25:17,160 --> 01:25:21,520
अभी त नहीं लूगा कुछ संगठन है जो इसी टॉपिक प चले

1207
01:25:21,520 --> 01:25:26,120
वो संगठन है तो हम लोग जहां

1208
01:25:26,120 --> 01:25:30,360
उते वैष्णव रूप धारण करेंगे लेकिन मर्यादाओं का अतिक्रमण

1209
01:25:30,360 --> 01:25:34,520
करते जाएंगे ये रमेश प्र प्रजापति कौन है भाई जय

1210
01:25:34,520 --> 01:25:40,520
श्री राम रमेश जी बताइए रामपाल जी की तरफ से है

1211
01:25:42,920 --> 01:25:48,920
क्या जय श्री राम रमेश जी

1212
01:25:49,220 --> 01:25:54,640
[संगीत]

1213
01:25:54,640 --> 01:25:58,680
से आपको एक और शिकायत थी शिकायत तो नहीं लेकिन हां एक

1214
01:25:58,680 --> 01:26:03,240
ये थी कि आपने रामानंदी

1215
01:26:03,240 --> 01:26:07,520
संप्रदाय को रामानु जीी में ही इंक्लूड किया जबक श्री रामानंद संप्रदाय एक प्रथक

1216
01:26:07,520 --> 01:26:11,640
संप्रदाय है नहीं नहीं मैंने नहीं किया आप ध्यान से देखिएगा वीडियो

1217
01:26:11,640 --> 01:26:15,760
आपका रामल वाला देखा था मैंने तो आपने बोला की रामानुज की परंपरा

1218
01:26:15,760 --> 01:26:20,040
में रामानंद जी हुए तो उसको लेकर थोड़ा

1219
01:26:20,040 --> 01:26:24,320
वो तो देखिए ऐसा था कि पहले ऐसा ही माना जाता था

1220
01:26:24,320 --> 01:26:29,120
उसके बाद ये महाकालेश्वर

1221
01:26:29,120 --> 01:26:33,320
में उज्जैन में एक शास्त्रार्थ हुआ था जिस शास्त्रार्थ

1222
01:26:33,320 --> 01:26:37,320
के बाद रामानंदी संप्रदाय यह घोषित करता

1223
01:26:37,320 --> 01:26:41,320
है कि हम रामानुज जी नहीं है अलग है मगर रामानु जी अभी भी यही

1224
01:26:41,320 --> 01:26:47,280
कहते कि हमसे ही निकले हा वो उनको तो कहते हैं

1225
01:26:47,280 --> 01:26:51,280
जबक नहीं कहा जा सकता है क्या होता है इतने सारे लोग खड़े हैं

1226
01:26:51,280 --> 01:26:55,360
तो बहुत से तथ्य को ध्यान में रखना और फिर बोल पाना तो कहीं कहीं

1227
01:26:55,360 --> 01:26:57,960
पर हो जाता है मगर पूरी तरीके से गलत नहीं

1228
01:26:57,960 --> 01:27:02,560
है क्योंकि रामानुज संप्रदाय तो यह कहता है कि वो हमसे ही निकले हैं

1229
01:27:02,560 --> 01:27:06,640
रामानंदी वो ये कहता है कि हमने सिद्ध कर लिया हम अलग है एक

1230
01:27:06,640 --> 01:27:10,840
कोई शास्त्रार्थ हुआ उसके बाद उन्होंने अपने आप को अलग घोषित कर लिया

1231
01:27:10,840 --> 01:27:15,400
और मैं उसके बाद से जब से मुझे वो महाकालेश्वर वाले इतिहास का पता चला

1232
01:27:15,400 --> 01:27:19,680
तो फिर मैं अपने मुख से यह वक्तव्य नहीं देता हूं कि

1233
01:27:19,680 --> 01:27:23,760
क्या कहते हैं वो वो राम संप्रदाय के जैसे अभी

1234
01:27:23,760 --> 01:27:28,000
पि ब रामा रामानुज जी आए थे जो एक

1235
01:27:28,000 --> 01:27:32,200
हमने किया था तो वो बोल रहे थे मगर मैंने ये नहीं कहा था कि नहीं वो

1236
01:27:32,200 --> 01:27:36,600
रामानु जी है क्योंकि उसमें भगवान शिव की भी निंदा करते हैं वो सब

1237
01:27:36,600 --> 01:27:40,960
और अन्य देवी देवताओं की भी निंदा करते हमारा चटर नहीं है

1238
01:27:40,960 --> 01:27:45,280
यह समीक्षाएं वैसे भी हम नहीं करते जो हमारे प्रामाणिक संप्रदाय

1239
01:27:45,280 --> 01:27:49,520
हैं उनकी कोई समीक्षा हम नहीं करते हैं वर्णाश्रम धर्मी है

1240
01:27:49,520 --> 01:27:53,680
परंपरा प्राप्त है सत सता की क्रमिक अभिव्यक्ति है कोई

1241
01:27:53,680 --> 01:27:58,280
समी करने के हम योग्य ही नहीं है योग्य नहीं है सही बिल्कुल रामानुज

1242
01:27:58,280 --> 01:28:02,280
संप्रदाय क्या कर रहे हैं रामानंद संप्रदाय के प्रामाणिक आचार्य क्या कर रहे हम योग्य

1243
01:28:02,280 --> 01:28:06,280
ही नहीं है उस स्तर का हमारे पास ना ज्ञान है ना बुद्धि है ना बल है कुछ नहीं

1244
01:28:06,280 --> 01:28:12,280
नगन तो हम कहां से बात कर ले उस बारे में ठीक

1245
01:28:12,520 --> 01:28:16,560
है चलिए फिर आज का य हम लोग समाप्त करते हैं मैं फिर से

1246
01:28:16,560 --> 01:28:21,080
कहूंगा अनिरुद्धाचार्य जी कि

1247
01:28:21,080 --> 01:28:25,520
कुछ याद करो अपना पवन सुतो बालपन विद्युत की गति

1248
01:28:25,520 --> 01:28:29,760
विद्युत की गति कहां गई है केसरी नंदन कुछ याद करो अपना

1249
01:28:29,760 --> 01:28:34,040
पवन सुत बालपन और उनके जो फॉलोअर्स है उनको

1250
01:28:34,040 --> 01:28:38,560
मैं कहूंगा कि आप जाइए उनकी शक्तियों को जागृत

1251
01:28:38,560 --> 01:28:42,680
करिए अपने अस्तित्व और आदर्श की रक्षा के लिए उठ

1252
01:28:42,680 --> 01:28:46,800
खड़े हुइए अभी नहीं तो कभी नहीं य उदारता

1253
01:28:46,800 --> 01:28:51,080
का त्याग कर दीजिए जो आपके अस्तित्व और आदर्श पर हावी हो रही है

1254
01:28:51,080 --> 01:28:55,320
हाथ जोड़कर विनती है आप आज आगे जाए तो आपके पीछे पीछे

1255
01:28:55,320 --> 01:28:59,400
बहुत सारे ऐसे लोग आपका आपको फॉलो करेंगे जिनके मन

1256
01:28:59,400 --> 01:29:05,400
में यही कुंठा होगी जय श्री

1257
01:29:06,600 --> 01:29:10,600
राम सबका आभार जुड़ने के लिए सभी को जय

1258
01:29:10,600 --> 01:29:14,600
श्री राम
