1
00:00:02,520 --> 00:00:06,600
तो जय श्री राम सभी

2
00:00:06,600 --> 00:00:10,760
को आज हमने एक विशेष सेशन रखा है

3
00:00:10,760 --> 00:00:14,840
यह उनके लिए जो समर्थन प्रकट करना चाहते

4
00:00:14,840 --> 00:00:18,920
हैं और उनको ठीक प्रकार

5
00:00:18,920 --> 00:00:22,920
से समय नहीं दे पाते हैं और हम प्रयास करेंगे कि इस

6
00:00:22,920 --> 00:00:28,920
प्रकार की चर्चा का आयोजन साप्ताहिक रूप से हम कर

7
00:00:28,960 --> 00:00:33,600
सके आने से पहले आचार्य श्री से बात हो रही थी

8
00:00:33,600 --> 00:00:37,640
आचार्य श्री जो है प्रयागराज वाले आप लोगों ने उनका चैनल अगर सब्सक्राइब

9
00:00:37,640 --> 00:00:43,640
नहीं किया हो तो आप लोग कर ले

10
00:00:46,040 --> 00:00:51,520
और कई बातें थी जिसमें

11
00:00:51,520 --> 00:00:57,520
कि मार्गदर्शन प्राप्त हुआ उनका

12
00:00:57,640 --> 00:01:01,840
तो सनसनी खेज वाला आज नहीं है लाइव आप लोग सनसनी

13
00:01:01,840 --> 00:01:06,000
खेज के इंतजार में रहते होंगे आज कौन सा तड़कता बकता मसालेदार

14
00:01:06,000 --> 00:01:10,280
लाइव होने वाला है पर आज जो है वो

15
00:01:10,280 --> 00:01:14,280
सौहार्द पूर्ण चर्चा के निमित्त हमने रखा है यदि कोई भी

16
00:01:14,280 --> 00:01:18,440
समर्थन प्रकट करना चाहते हैं जो हमारे कार्यों से संतुष्ट

17
00:01:18,440 --> 00:01:22,520
हैं तो उनका आभार व्यक्त करने के लिए हमने आज की चर्चा रखी

18
00:01:22,520 --> 00:01:26,560
है लिंक आपको दिया जा रहा है अगर

19
00:01:26,560 --> 00:01:30,600
कोई लाइव जुड़ना चाहते हैं आकर के और जो है विचार प्रकट

20
00:01:30,600 --> 00:01:34,840
करना चाहते हैं क्वेश्चंस के लिए नहीं है य लाइव और ना

21
00:01:34,840 --> 00:01:38,960
ही वैचारिक मतभेद के निमित्त है

22
00:01:38,960 --> 00:01:42,960
यह लाइव है जो समर्थन प्रकट करना चाहते

23
00:01:42,960 --> 00:01:48,120
हो वह आ सकते हैं और आकर के अपने विचार व्यक्त कर सकते

24
00:01:48,120 --> 00:01:52,480
हैं क्योंकि होता क्या है कि जो हमारी वैचारिक मतभेद

25
00:01:52,480 --> 00:01:57,200
के निमित चर्चा हो रही होती है उस चर्चा

26
00:01:57,200 --> 00:02:01,320
के मध्य में या फिर उसके लास्ट में व तरीके से

27
00:02:01,320 --> 00:02:06,000
प्रॉपर समर्थकों की बात हो नहीं पाती वहां पर

28
00:02:06,000 --> 00:02:10,120
तो इसलिए विशेष रूप से आज उन्हीं के लिए रखा है कि जो भी है वह

29
00:02:10,120 --> 00:02:14,240
आ सकते हैं जब तक कोई नहीं आ रहा है तब तक हम लोग भगवत गीता की कुछ

30
00:02:14,240 --> 00:02:20,240
बातें करेंगे भगवत गीता

31
00:02:36,000 --> 00:02:40,040
एक वो जो प्रश्न आता है कि ईश्वर ऐसा कैसे कर सकते हैं

32
00:02:40,040 --> 00:02:44,080
वैसा कैसे कर सकते हैं क्या ईश्वर बुराई वाले कार्य भी कर सकते

33
00:02:44,080 --> 00:02:48,160
तो इस बारे में हम लोग कई बार बात कर चुके हैं कि जब ईश्वर ने बुराई

34
00:02:48,160 --> 00:02:52,360
को बना दिया तो अगर बुराई करना पाप है या उसका

35
00:02:52,360 --> 00:02:56,400
दोष ईश्वर को लग सकता है तो बुराई को बनाने का दोष भी ईश्वर को

36
00:02:56,400 --> 00:03:00,920
लग जाता जैसे आर्य समाज की तरफ से प्रकार का

37
00:03:00,920 --> 00:03:05,280
कई बार बताया जाता

38
00:03:05,280 --> 00:03:09,520
है भाई वह ऐसा कर सकता है वैसा कर सकता है मगर आज हम भगवत

39
00:03:09,520 --> 00:03:13,600
गीता में इसका वो दिया गया है वह

40
00:03:13,600 --> 00:03:17,240
हम आज जो है बात करते हैं उस बारे

41
00:03:17,240 --> 00:03:21,360
में 2.17 से लेकर के 31 तक इस बात

42
00:03:21,360 --> 00:03:24,800
का उत्तर दिया है

43
00:03:24,800 --> 00:03:28,880
भगवान कि जब कोई मुक्त हो जाता है उसकी

44
00:03:28,880 --> 00:03:33,040
सम दृष्टि हो जाती है तो उसको कार्य जो है कर्म वो

45
00:03:33,040 --> 00:03:37,120
लिप्त नहीं कर सकते हैं ना तो फिर होने वाला

46
00:03:37,120 --> 00:03:41,120
फायदा पहुंचेगा ना ही ना होने से

47
00:03:41,120 --> 00:03:45,800
नुकसान 2.17 हम लोग देखते क्या

48
00:03:45,800 --> 00:03:50,680
लि भगवान 2.17 से लेकर

49
00:03:50,680 --> 00:03:54,720
के 2.31 तक अर्जुन को यही समझा रहे हैं कि ना कोई

50
00:03:54,720 --> 00:04:00,200
मरता है ना कोई मारता है है ना

51
00:04:00,200 --> 00:04:05,000
देखिए जैसे हम लोग कई बार भगवान का निर्णय

52
00:04:05,000 --> 00:04:09,320
इस बा इस आधार पर करते हैं ईश्वर का निर्णय कि अगर ईश्वर

53
00:04:09,320 --> 00:04:13,440
है तो य मर क्यों रहा है ईश्वर है भला वो बलि लेगा इस बात पर

54
00:04:13,440 --> 00:04:17,760
भी होता है बलि का खंडन बलि इस उसम दिया गया है बली भेंट

55
00:04:17,760 --> 00:04:21,960
जो भी है वो एक अलग चैप्टर है कि बली एक परिस

56
00:04:21,960 --> 00:04:26,120
विधि है जीवन में जब तमो गुण की प्रधानता

57
00:04:26,120 --> 00:04:30,160
के कारण मास मांसाहार आदि जैसा आचरण हो

58
00:04:30,160 --> 00:04:32,360
रहा है तो उसका संकुचन

59
00:04:32,360 --> 00:04:36,840
कैसे हो व उससे निवृत कैसे हो उसका उसमें परवन है बलि

60
00:04:36,840 --> 00:04:41,080
इत्यादि तो वो बात एक अलग है मगर ईश्वर के

61
00:04:41,080 --> 00:04:45,080
रहते ईश्वर क्या बलि की व्यवस्था कर सकता है ऐसा कैसे कह सकता

62
00:04:45,080 --> 00:04:49,120
है तो जब हम यह कहते कि ईश्वर किसी

63
00:04:49,120 --> 00:04:53,440
निर्दोष को निर्दोष का प्राण या बेजन

64
00:04:53,440 --> 00:04:57,480
का इस तरह की पंक्तिया कहते हैं पहली बात बताइए कि जब वो अपनी

65
00:04:57,480 --> 00:05:01,680
मृत्यु मर रहा होता है पशु मैं भी बलि का विरोधी हूं इस पर मैं

66
00:05:01,680 --> 00:05:05,760
वीडियो लाऊंगा पर आज बात कुछ और संदर्भ में है कि क्या

67
00:05:05,760 --> 00:05:09,880
ईश्वर को इस पैरामीटर पर हमें नापना चाहिए कि उसके रहते कोई मर

68
00:05:09,880 --> 00:05:14,480
क्यों रहा है उसके द्वारा किसी की बलि की व्यवस्था कैसे हो गई

69
00:05:14,480 --> 00:05:18,600
तो उस पर मैं बात कर रहा हूं कि यह आधार नहीं होना चाहिए ईश्वर की ईश्वर होता

70
00:05:18,600 --> 00:05:23,240
को समझने क्यों नहीं होना चाहिए

71
00:05:23,240 --> 00:05:27,320
क्योंकि मान लीजिए कि ईश्वर ने कहीं पर किसी

72
00:05:27,320 --> 00:05:31,440
की रक्षा नहीं की है जैसे लोग कहते हैं कि वहां

73
00:05:31,440 --> 00:05:35,760
पर रेप हुआ वो हुआ जब वो अपनी मृत्यु मर रहा है तब भी तो ईश्वर

74
00:05:35,760 --> 00:05:40,160
उसे बचा सकता है वो बलि नहीं हो रही उसकी उसके साथ कोई दुष्कर्म

75
00:05:40,160 --> 00:05:44,240
नहीं हो रहा मगर जब वह अपनी मृत्यु मर रहा है 80 साल प 90 साल

76
00:05:44,240 --> 00:05:47,360
प तो तब भी तो ईश्वर उस मृत्यु को रोक

77
00:05:47,360 --> 00:05:51,480
सकता है तो क्या आप ईश्वर का अर्थ इस बात में समझते हैं

78
00:05:51,480 --> 00:05:55,480
कि किसी मृत्यु नहीं होगी मृत्यु होना बंद हो जाएगा संसार में कोई भी

79
00:05:55,480 --> 00:05:59,880
प्राणी मरेगा नहीं क्योंकि जब भी वो मरेगा उसमें ईश्वर का दोष आ जाएगा ईश्वर

80
00:05:59,880 --> 00:06:04,080
दोष आ जाएगा भाई ईश्वर ईश्वर के रहते मृत्यु क्यों हो रही है इसका

81
00:06:04,080 --> 00:06:08,280
अर्थ यह है कि ईश्वर का आधार य नहीं है

82
00:06:08,280 --> 00:06:14,280
कि किसी की मृत्यु होनी है कि नहीं होनी है बेज मान है कि क्या

83
00:06:14,680 --> 00:06:19,880
है आयुष जी है आयुष

84
00:06:19,880 --> 00:06:25,880
जी आप

85
00:06:26,720 --> 00:06:32,720
आइए इनका आ नहीं रहा ऑप्शन आयुष जी ऊपर आने

86
00:06:46,160 --> 00:06:48,800
का

87
00:06:48,800 --> 00:06:52,840
तो ईश्वर का अर्थ इसमें नहीं है कि कोई भी

88
00:06:52,840 --> 00:06:57,040
मरेगा नहीं ईश्वर है तो मरना बंद हो जाए लोग ऐसा

89
00:06:57,040 --> 00:07:01,680
कुछ नहीं तो क्या है

90
00:07:01,680 --> 00:07:05,720
कि ईश्वर है तो उसको बचा क्यों नहीं रहा है ईश्वर है तो बलि के लिए कैसे

91
00:07:05,720 --> 00:07:09,880
कह सकता है तो यह आधार नहीं है ईश्वर

92
00:07:09,880 --> 00:07:14,400
की ईश्वर होता को समझने का अब इसको कैसे समझे

93
00:07:14,400 --> 00:07:19,120
ईश्वर अर्जुन को क्या बता रहे हैं दो 17 में अविनाशी

94
00:07:19,120 --> 00:07:23,120
तो उसको जान जिससे यह संपूर्ण संसार व्याप्त है इस अविनाशी का

95
00:07:23,120 --> 00:07:27,280
विनाश कोई भी नहीं कर सकता ठीक है अविनाशी जानने

96
00:07:27,280 --> 00:07:31,640
में ना आने वाला और नित्य रहने वाला शरीर के शरीर के

97
00:07:31,640 --> 00:07:36,080
यह देह अंत वाले कहे गए हैं

98
00:07:36,080 --> 00:07:40,240
इसलिए अर्जुन तुम युद्ध करो जो मनुष्य इस अविनाशी शरीर

99
00:07:40,240 --> 00:07:44,240
को मारने वाला मानता है और जो मनुष्य इसको मरा समझता

100
00:07:44,240 --> 00:07:48,400
है वह दोनों ही इसको नहीं जानते क्या खंडन कर दिया

101
00:07:48,400 --> 00:07:52,680
ना यानी कि मृत्यु मारने वाला मरने

102
00:07:52,680 --> 00:07:57,640
वाला और मारा जाने वाला है ना

103
00:07:57,640 --> 00:08:01,800
इसमें ऐसा समझने वाला उसको यहां पर क्या कह दिया कि वो

104
00:08:01,800 --> 00:08:06,200
नहीं जानता है अज्ञानी कह दिया भगवान क्यों कहा हमारे

105
00:08:06,200 --> 00:08:10,480
लिए कोई मर रहा है कोई किसी को मार रहा है हमारे

106
00:08:10,480 --> 00:08:15,200
लिए ईश्वर की दृष्टि से वास्तविकता कुछ और है

107
00:08:15,200 --> 00:08:16,760
नहीं मर रहा है ना कोई मर रहा

108
00:08:16,760 --> 00:08:21,120
है ना कोई मार रहा है ईश्वर की दृष्टि में

109
00:08:21,120 --> 00:08:25,320
यह किसी का मरना यह सब चीजें कुछ नहीं है नथिंग यह आपको समझना

110
00:08:25,320 --> 00:08:29,760
हो और अगर है तो वो ईश्वर ईश्वर नहीं है

111
00:08:29,760 --> 00:08:34,320
वो प्रभावित हो रहा है यहां के प्रपंच से सांसारिक प्रपंच से

112
00:08:34,320 --> 00:08:38,360
जो मुसलमान जो इस्लामिक लोग ये क्लेम करते हैं कि तुम्हारा ईश्वर कैसा है

113
00:08:38,360 --> 00:08:42,360
उसी की कुरान में लिखा हुआ है तुम्हारा

114
00:08:42,360 --> 00:08:46,600
ईश्वर कैसा है वो तो वहां पर भी है यहां पर भी है सब जगह य कैसा ईश्वर है गंदगी में भी

115
00:08:46,600 --> 00:08:52,040
उसी के उसम लिखा हुआ है यह संसार जो है उसके लिए खेल

116
00:08:52,040 --> 00:08:56,160
है ठीक है इसके

117
00:08:56,160 --> 00:09:00,240
आगे क्या कहा भगवान ने यह शरीर ना कभी जन्मता है ना

118
00:09:00,240 --> 00:09:04,520
मरता है तो वास्तविकता क्या है जो ईश्वर को पता है कि शरीर में रहने वाला

119
00:09:04,520 --> 00:09:08,640
जो देही है व नित्य है वो ना कभी जन्म लेता है ना मरता है

120
00:09:08,640 --> 00:09:12,760
तथा यह उत्पन्न होकर फिर होने वाला नहीं है यह जन्म रहित है नित्य

121
00:09:12,760 --> 00:09:16,920
निरंतर रहने वाला तो भगवान अर्जुन को सिखा रहे हैं कि इसमें

122
00:09:16,920 --> 00:09:20,960
मरने और ना मरने में सम बुद्धि रखो क्योंकि

123
00:09:20,960 --> 00:09:25,200
ना कोई वास्तविकता यही है कि ना कोई मर र ना कोई मार रहा है अब जब वोह अर्जुन को सिखा

124
00:09:25,200 --> 00:09:29,760
रहे हैं तो क्या वह खुद इस बात से प्रभावित होने चाहिए

125
00:09:29,760 --> 00:09:32,720
कि कौन मर रहा है कौन नहीं मर रहा

126
00:09:32,720 --> 00:09:36,720
तो इसलिए इस आधार पर ईश्वर को नहीं आकना चाहिए कि भाई

127
00:09:36,720 --> 00:09:40,840
वह बलि के कैसे कर सकते हैं उनके रहते किसी की मृत्यु कैसे हो सकती है रेप कैसे

128
00:09:40,840 --> 00:09:45,360
हो सकता है वह सम बुद्धि है मुक्त है वह वस्तुतः

129
00:09:45,360 --> 00:09:49,720
आत्मा के साथ कुछ नहीं हो रहा है जो वास्तविक जो पहचान है

130
00:09:49,720 --> 00:09:54,440
जीव की उसके साथ कुछ नहीं हो रहा है इसलिए वह समबुद्ध है उन चीजों को लेकर

131
00:09:54,440 --> 00:09:57,600
और

132
00:09:57,600 --> 00:10:01,880
सुनिए शरीर के जाने नहीं मरा जाता

133
00:10:01,880 --> 00:10:05,960
हमको लगता है कि हम मर रहे हैं या कोई मर रहा है आप लोग

134
00:10:05,960 --> 00:10:11,160
अपना चेहरा दिखाए दक्ष प्रताप

135
00:10:11,160 --> 00:10:15,160
सिंह जी जय श्री राम

136
00:10:15,160 --> 00:10:19,320
शम जी नहीं नहीं प्रश्न के लिए

137
00:10:19,320 --> 00:10:23,800
नहीं है आज आप अभी हमने शुरू मेंही बताया किसलिए

138
00:10:23,800 --> 00:10:28,000
है प्रश्न के लिए नहीं है आप हमारा नंबर

139
00:10:28,000 --> 00:10:32,400
नोट कर लीजिए 74 8369 इस पर फॉर्म

140
00:10:32,400 --> 00:10:36,840
भरेंगे तो इस पर आपको फॉर्म मिल जाएगा करने पर

141
00:10:36,840 --> 00:10:40,920
वहां पर फॉर्म आएगा वैचारिक मतभेद के निमित्त चर्चा उसको भर

142
00:10:40,920 --> 00:10:45,120
दीजिएगा हम लोग लाइव आपसे बात करेंगे ठीक है

143
00:10:45,120 --> 00:10:51,120
जय

144
00:10:57,000 --> 00:11:01,520
श तो सम बुद्धि हो गई यहां पर

145
00:11:01,520 --> 00:11:06,080
मृत्यु और जीवन में सम बुद्धि तो यह जो

146
00:11:06,080 --> 00:11:10,280
हम लोग कनेक्ट है क्योंकि बॉडी से और ये सांसारिक प्रपंच से

147
00:11:10,280 --> 00:11:14,760
और हमारे लिए यह सब रियलिटी है इसलिए हम लोग प्रभावित होते हैं हमारे लिए किसी का

148
00:11:14,760 --> 00:11:18,960
मरना और जीने जीने में अंतर आता है और भगवान इस भाव से ही आपको

149
00:11:18,960 --> 00:11:23,160
दूर करने के लिए भगवत गीता में सिखा रहे हैं अर्जुन को कि सम

150
00:11:23,160 --> 00:11:28,000
बुद्धि रखो मरने मारने में कोई अंतर नहीं है ना कोई मर रहा है ना कोई मार रहा है

151
00:11:28,000 --> 00:11:31,200
तो क्या है आगे क्या बोल

152
00:11:31,200 --> 00:11:35,280
हैं जो मनुष्य इस शरीर को अविनाशी नित्य

153
00:11:35,280 --> 00:11:39,360
जन्म रहित और अव्य जानता है वह कैसे किसको मारे

154
00:11:39,360 --> 00:11:42,240
और कैसे किसको

155
00:11:42,240 --> 00:11:47,240
मरवाएगी

156
00:11:47,240 --> 00:11:51,280
गु इसीलिए जो जगतगुरु जी का एक वचन है बहुत इंपॉर्टेंट

157
00:11:51,280 --> 00:11:55,680
है क्या जिसको आत्मा का ज्ञान हो जाता है उसको

158
00:11:55,680 --> 00:12:00,840
भय बहुत कम हो जाता है ये सब अध्यात्म शास्त्र क्यों है

159
00:12:00,840 --> 00:12:05,000
आपके जीवन में जो भय है ना वो कम हो जाता है भय रहित होते

160
00:12:05,000 --> 00:12:09,160
चले जाते हैं आप यह जो डर लग रहा है यह छिन जाएगा वो

161
00:12:09,160 --> 00:12:13,360
छिन जाएगा आपका जो पर्सपेक्टिव है दुनिया को देखने का बदल जाता है और जब

162
00:12:13,360 --> 00:12:17,440
पर्सपेक्टिव बदलता है तो आपका लौकिक जीवन भी बहुत सुख और समृद्धि से

163
00:12:17,440 --> 00:12:21,920
व्यतीत होता है चैन से व्यतीत होता है क्योंकि आपका

164
00:12:21,920 --> 00:12:26,280
उसको देखने का पर्सपेक्टिव चेंज हो गया पर्सपेक्टिव

165
00:12:26,280 --> 00:12:30,320
आपका पूरा चेंज हो जाता है अब जब आत्मा का ज्ञान होना ज्ञान हो गया ना

166
00:12:30,320 --> 00:12:34,520
कोई मरता ना कोई मारता है एक एग्जांपल लीजिए आप जैसे

167
00:12:34,520 --> 00:12:38,800
हमको यह पता चल गया कि कण कण में ईश्वर है ईश्वर भी ईश्वर ही अनेक

168
00:12:38,800 --> 00:12:43,120
रूपों में वो हो रहा है तो क्या होता है कि हम

169
00:12:43,120 --> 00:12:47,360
जब एक जगह बात क कि सब में ईश्वर को देखो सम

170
00:12:47,360 --> 00:12:51,600
सम दृष्टि रखो सब में ईश्वर को देखो ईश्वर में सबको देखो

171
00:12:51,600 --> 00:12:55,760
तो क्या हो रहा है कि आप जा रहे हैं अब इस ज्ञान को लेने

172
00:12:55,760 --> 00:12:59,960
के बाद जब आप चल रहे हैं सड़क पर तो क्या हो रहा है कि कोई को बिना सिग्नल

173
00:12:59,960 --> 00:13:02,320
दिए किसी ने लेफ्ट गाड़ी

174
00:13:02,320 --> 00:13:06,600
मोड़ दी अपनी किसी ने दाहिने

175
00:13:06,600 --> 00:13:10,680
हाथ पर अपनी गाड़ी मोड़ दी बिना आपको सिग्नल दिए और आप एकदम से आपकी जो है

176
00:13:10,680 --> 00:13:14,680
अव्यवस्थित हो गया आपका मामला तो ज्यादातर आपके

177
00:13:14,680 --> 00:13:18,680
मन में क्या आएगा यह भी भगवान का अंश है

178
00:13:18,680 --> 00:13:23,160
यह भी मेरी तरह है फसा हुआ है गलती हो रही है इसके

179
00:13:23,160 --> 00:13:27,240
घर में भी क्लेश होंगे प्रपंच होंगे यह प्राइमरी थॉट

180
00:13:27,240 --> 00:13:31,240
आपके अंदर आने लगेगा आपका उनके प्रति जो है उदार भाव हो

181
00:13:31,240 --> 00:13:36,120
जाएगा शष्ण हो जाएंगे प्रेम भाव आएगा सबके प्रति

182
00:13:36,120 --> 00:13:39,800
यह है समाज निर्माण वाला

183
00:13:39,800 --> 00:13:43,880
ज्ञान समय आने पर अति हो जाने पर दंड भी दिया जाएगा मगर

184
00:13:43,880 --> 00:13:48,160
जो प्राथमिक वो है उसमें क्या आएगा दया करुणा यह भी

185
00:13:48,160 --> 00:13:52,280
देखिए माया में फसा हुआ एक व्यक्ति जो अपने घर के परेशानियों में चला जा रहा

186
00:13:52,280 --> 00:13:56,400
है उस ध्यान ना होने के कारण प्रज्ञा शक्ति कमजोर होने के कारण

187
00:13:56,400 --> 00:14:00,800
इसने बिना हथ दिए जो है अपनी गाड़ी को मोड़ दिया नहीं तो

188
00:14:00,800 --> 00:14:04,960
अगर यह चीजें नहीं होंगी अध्यात्म तो क्या होगा यह वाली जो सम दृष्टि

189
00:14:04,960 --> 00:14:08,960
की भावना है वह आप पाना संभव नहीं है उसके चांसेस फिर

190
00:14:08,960 --> 00:14:13,040
कम हो जाते हैं फिर क्या होगा मन में उसके प्रति गुस्सा आएगा गाली

191
00:14:13,040 --> 00:14:17,480
निकलेगी कैसे इसने गाड़ी मोड़ दी यहां से वहां तो यह अध्यात्म

192
00:14:17,480 --> 00:14:23,480
शास्त्र कैसे समाज और राष्ट्र का निर्माण करते हैं इसको भी

193
00:14:24,000 --> 00:14:28,120
समझिए मनुष्य जैसे पुराने कपड़ों को छोड़कर नए कपड़े धारण करता

194
00:14:28,120 --> 00:14:32,400
है ऐसे ही ही पुराने शरीरों को छोड़कर नए शरीर को धारण

195
00:14:32,400 --> 00:14:36,640
करती यह वो पर्सपेक्टिव है जो भगवान देख रहे हैं इसलिए

196
00:14:36,640 --> 00:14:40,960
भगवान विचलित नहीं होते हैं यह मर रहा है वो मर रहा है हम विचलित

197
00:14:40,960 --> 00:14:45,760
होते हैं क्योंकि हम शरीर के कारण यहां से जुड़ गए हैं

198
00:14:45,760 --> 00:14:49,920
और यह हमें केवल थ्योर कली पता चल रहा है कि हम आत्मा है अभी भी हमारे

199
00:14:49,920 --> 00:14:54,200
शरीर के जो कर्मेंद्रियां ज्ञानेंद्रियां उनके द्वारा जो हमें प्राप्त हो रहा है

200
00:14:54,200 --> 00:14:58,200
जो सूचनाएं हमको मिल रही है वो इतनी प्रबल है कि ये थ्योर कली

201
00:14:58,200 --> 00:15:02,280
जान लेने के बाद अभी भी हम इतने इतना ज्यादा कनेक्ट इस संसार

202
00:15:02,280 --> 00:15:07,040
से कि इस संसार से आने वाली सूचनाओं की वास्तविकता से जुड़ गए

203
00:15:07,040 --> 00:15:13,040
और मुक्ति क्या है इन सूचनाओं से प्रभावित ना होने की स्थिति मुक्ति

204
00:15:13,240 --> 00:15:17,360
है ठीक है तो यह अभी

205
00:15:17,360 --> 00:15:21,520
मैं आपको बताऊंगा सम बुद्धि रखने की बात कोई

206
00:15:21,520 --> 00:15:25,800
आया क्या कोई नहीं है ठीक है आगे

207
00:15:25,800 --> 00:15:31,800
चलते हैं

208
00:15:43,560 --> 00:15:47,720
शस्त्र इस शरीर को काट नहीं सकते तो भगवान यहां पर हमें

209
00:15:47,720 --> 00:15:51,880
सम बुद्धि रहने के लिए ही बता रहे हैं कि शस्त्र इस शरीर

210
00:15:51,880 --> 00:15:56,320
को काट नहीं सकते अग्नि इसको जला नहीं सकती नैनम छिंदंति सण

211
00:15:56,320 --> 00:16:01,120
नैनम दहति पावक ना चैनले अ न शोष मारता

212
00:16:01,120 --> 00:16:05,120
तो आप लोग जानते ही होंगे यह शरीर काटा नहीं जा सकता यह

213
00:16:05,120 --> 00:16:09,480
जलाया नहीं जा सकता यह गीला नहीं किया जा सकता है सुखाया नहीं जा सकता कारण

214
00:16:09,480 --> 00:16:14,360
कि यह नित्य रहने वाला सब में परिपूर्ण अचल स्थिर स्वभाव वाला है

215
00:16:14,360 --> 00:16:19,840
सनातन है शाश्वत है

216
00:16:19,840 --> 00:16:24,240
शरीर आत्मा जो है वह सनातन है शाश्वत

217
00:16:24,240 --> 00:16:28,440
है तो भगवान यह जानते हैं भगवान आपको इस रूप में जानते

218
00:16:28,440 --> 00:16:32,440
हैं उ इसलिए फर्क नहीं पड़ता है आपके साथ ये सब चीजें हो रही है

219
00:16:32,440 --> 00:16:36,600
भगवान आपके इस रूप को जानते हैं जैसे कि घर

220
00:16:36,600 --> 00:16:41,440
में जब बहुत छोटा कोई शिशु होता है तो वह क्या करता

221
00:16:41,440 --> 00:16:45,440
है वो कुछ ऐसी चीजों

222
00:16:45,440 --> 00:16:49,480
के लिए रो रहा होता है जो आपकी दृष्टि में मायने नहीं

223
00:16:49,480 --> 00:16:53,480
रखती हो सकता है वह दूर वही सूर्य को

224
00:16:53,480 --> 00:16:57,520
देख के कहे मुझे आम चाहिए रोने लग जाए आप जानते

225
00:16:57,520 --> 00:16:59,000
हो सूर्य सूर्य

226
00:16:59,000 --> 00:17:03,040
आम नहीं है ऐसी बहुत सी चीजें शिशु करता है कभी-कभी

227
00:17:03,040 --> 00:17:07,160
तो वह गुस्से में आकर के अपने माता-पिता को अभिभावक गणों को घूंसा

228
00:17:07,160 --> 00:17:11,200
मारने लगता है कुछ नौच खाने लगता है और जो अभिभावक होते

229
00:17:11,200 --> 00:17:15,440
हैं व हस रहे होते हैं तो क्या अभिभावक बुरे हैं गलत है

230
00:17:15,440 --> 00:17:19,760
दोषी है नहीं उनका पर्सपेक्टिव जो है व्यापक

231
00:17:19,760 --> 00:17:23,920
है वह जानते हैं सच्चाई की वह जो बच्चा जो रो रहा है वोह अज्ञानता

232
00:17:23,920 --> 00:17:28,240
के कारण रो रहा है इसलिए वो हसते हैं इसलिए वो शांत रहते हैं

233
00:17:28,240 --> 00:17:32,360
इसलिए कंपैरेटिव टू शिशु जो अभिभावक होते हैं वह स्थिर होते

234
00:17:32,360 --> 00:17:37,320
हैं इसी प्रकार से हमारे कंपेरिजन में जो ईश्वर है

235
00:17:37,320 --> 00:17:41,360
व नित्य स्थिर सनातन

236
00:17:41,360 --> 00:17:47,320
है फ्लकचुएट नहीं होता क्योंकि उसको वास्तविकता मालूम है

237
00:17:47,320 --> 00:17:51,320
आपकी यह सब चीजें अच्छाई बुराई य फसना मरना

238
00:17:51,320 --> 00:17:55,400
जीना और सारे जो कर्म कुकर्म यह

239
00:17:55,400 --> 00:17:59,920
सब जो हो रहे है ये हमारे पर्सपेक्टिव से हो रहे हैं अच्छ अच्छाई और बुराई

240
00:17:59,920 --> 00:18:05,920
ईश्वर तो देख रहा है ना कहीं कुछ नहीं हो रहा है सब खेल

241
00:18:07,160 --> 00:18:11,080
है

242
00:18:11,080 --> 00:18:15,160
तो सनातन है यह देही

243
00:18:15,160 --> 00:18:19,160
प्रत्यक्ष नहीं दिखता है यह चिंतन का विषय नहीं है शाश्वत कुमार जी जय

244
00:18:19,160 --> 00:18:23,880
श्री राम जय श्री राम गुरुजी

245
00:18:23,880 --> 00:18:28,240
यह निर्विकार कहा जाता है इस देही को जानकर शोक नहीं करना चाहिए

246
00:18:28,240 --> 00:18:32,440
अब ली यहां भगवान ने कह दिया शोक नहीं करना चाहिए जब उसके साथ

247
00:18:32,440 --> 00:18:36,760
कुछ हो ही नहीं रहा है तो अर्जुन को वह क्या बता रहे हैं

248
00:18:36,760 --> 00:18:41,560
कि जब तूने इसको देही को जान लिया तो अब तुझे शोक नहीं करना चाहिए

249
00:18:41,560 --> 00:18:45,840
कि कौन मरा कौन

250
00:18:45,840 --> 00:18:50,040
कटा फिर क्या अगर तुम इस देही को नित्य पैदा

251
00:18:50,040 --> 00:18:54,200
होने वाला अथवा नित्य मरने वाला भी मानो तो भी तुम्हें इस प्रकार का शोक

252
00:18:54,200 --> 00:18:58,240
नहीं करना चाहिए कारण कि पैदा हुए की मृत्यु होगी तो

253
00:18:58,240 --> 00:19:02,680
इसका मत मतलब जब किसी को मारा जा रहा है तो उससे भी प्रभावित नहीं होना चाहिए

254
00:19:02,680 --> 00:19:06,680
यह बात भगवान बता रहे हैं समत्व बु बुद्धि सम सम

255
00:19:06,680 --> 00:19:10,960
दृष्टि लाने की बात भगवान यहां कह रहे हैं अतः निवारण

256
00:19:10,960 --> 00:19:15,000
नहीं हो सकता अत इस विषय में तुम शोक नहीं करना चाहिए सभी प्राणी

257
00:19:15,000 --> 00:19:18,400
जन्म से पहले

258
00:19:18,400 --> 00:19:22,400
अप्रकृतिक थे सब और मरने

259
00:19:22,400 --> 00:19:26,560
के बाद फिर अपक हो जाएंगे आज नहीं तो कल तो इस विषय

260
00:19:26,560 --> 00:19:30,720
में भी नहीं लाना चाहिए कि इसलिए भी प्रत नहीं होना चाहिए कि किसने किसको मारा किसने

261
00:19:30,720 --> 00:19:34,720
क्या किया केवल बीच में ही प्रकट दिखते हैं अत इसमें शोक करने की

262
00:19:34,720 --> 00:19:39,000
बात ही क्या है प्रभावित होने की बात क्या जब वह अर्जुन को सिखा

263
00:19:39,000 --> 00:19:43,200
रहे हैं कि शोक मत कर प्रभावित मत हो तो आप क्या सोचते हैं कि भगवान

264
00:19:43,200 --> 00:19:47,320
को प्रभावित होना चाहिए यह सब उनसे उनके लिए जो

265
00:19:47,320 --> 00:19:51,480
बोलते हैं अरे तुम्हारा ईश्वर कैसा है जो ऐसा कर सकता है वैसा कर सकता है

266
00:19:51,480 --> 00:19:54,800
यह सब बातें उनके लिए

267
00:19:54,800 --> 00:19:58,960
है ईश्वर अगर यहां होने वाले प्रपंच से ऊंच

268
00:19:58,960 --> 00:20:03,080
नीच के भेद से अच्छाई बुराई के भेद से प्रभावित

269
00:20:03,080 --> 00:20:07,400
हो रहा है तो वह ईश्वर नहीं है क्योंकि वह मुक्त नहीं है वह प्रभावित

270
00:20:07,400 --> 00:20:11,840
हो रहा है और यदि प्रभावित नहीं हो रहा है तो उसके लिए सब चीजें इक्वल

271
00:20:11,840 --> 00:20:15,960
है और उसी इक्वलिटी को प्राप्त करना ही तो मोक्ष

272
00:20:15,960 --> 00:20:20,280
है इसीलिए वह बता रहे मोक्ष का रास्ता

273
00:20:20,280 --> 00:20:24,560
कोई इस शरीर को आश्चर्य से देखता है और वैसे ही कोई

274
00:20:24,560 --> 00:20:28,680
दूसरा इसका आश्चर्य की तरह वर्णन करता है तथा

275
00:20:28,680 --> 00:20:32,680
ने कोई इसको आश्चर्य की तरह सुनता है और इसको सुनकर

276
00:20:32,680 --> 00:20:33,560
भी कोई

277
00:20:33,560 --> 00:20:39,200
नहीं जानता अर्थात वह

278
00:20:39,200 --> 00:20:43,400
दुर्विजय 29 वा श्लोक था इसके

279
00:20:43,400 --> 00:20:47,560
बाद अपने छात्र धर्म को देखकर भी तुम्हें विकम अर्थात कर्तव्य कर्म

280
00:20:47,560 --> 00:20:51,680
से विचलित नहीं होना चाहिए अब यहां छात्र धर्म की बात ले आए

281
00:20:51,680 --> 00:20:55,880
तो हर तरह से व उसको बता रहे हैं कि किसी भी प्रकार से पकड़ लो

282
00:20:55,880 --> 00:21:00,320
युद्ध से तुम्हें मुंह नहीं फेरना चाहिए क्योंकि ना कोई मरता ना कोई मारता है

283
00:21:00,320 --> 00:21:04,440
अगर तुम मरने और जन्म लेने वाला मान भी रहे हो तो पहले भी व नहीं

284
00:21:04,440 --> 00:21:08,440
था बाद में भी नहीं रहेगा अगर आज तुम उसको नहीं मारते हो अपने कर्तव्य

285
00:21:08,440 --> 00:21:12,920
का पालन नहीं भी करते हो तो कल को व उस स्थिति में पहुंचना है बस आज तुम

286
00:21:12,920 --> 00:21:17,080
अपने कर्तव्य का पालन करके धर्म के पथ पर चलकर अपनी अपना जो साधन

287
00:21:17,080 --> 00:21:21,280
है वह सिद्ध करोगे विचलित नहीं होना चाहिए धर्म

288
00:21:21,280 --> 00:21:25,480
में युद्ध से बढ़कर छत्रीय के लिए दूसरा कोई कल्याण काक मार्ग नहीं है ये बहुत

289
00:21:25,480 --> 00:21:29,480
अच्छी चीज है धर्म मय युद्ध से बढ़कर

290
00:21:29,480 --> 00:21:33,920
क्षत्रिय के लिए कोई दूसरा कल्याण काक कर्म नहीं है कभी-कभी

291
00:21:33,920 --> 00:21:38,280
कुछ विधर्मी जो सनातन विरुद्ध तंत्र इस तरह के

292
00:21:38,280 --> 00:21:42,520
आरोप लगाते हैं कि गीता है यह उसका जवाब

293
00:21:42,520 --> 00:21:46,560
है गीता युद्ध करने को कहती है मगर कौन सा

294
00:21:46,560 --> 00:21:48,880
धर्म मय धर्म क्या

295
00:21:48,880 --> 00:21:52,920
है वो नियम जिनके कारण कोई

296
00:21:52,920 --> 00:21:57,600
मनुष्य जान पाता है कि माता है बहन है पत्नी है इसमें अंतर कर पाता है

297
00:21:57,600 --> 00:22:01,720
तो धर्मम क्या हुआ उन नियमों की रक्षा नहीं

298
00:22:01,720 --> 00:22:05,720
करेंगे तो लुप्त हो जाएंगे मानव मानव नहीं रहेगा मनुष्य मनुष्य

299
00:22:05,720 --> 00:22:11,720
नहीं रहेगा माता बहन और पत्नी में अंतर बंद हो

300
00:22:11,840 --> 00:22:15,880
जाएगा तो धर्मम युद्ध के लिए गीता कहती

301
00:22:15,880 --> 00:22:19,880
है सिर्फ युद्ध के लिए नहीं कहती

302
00:22:19,880 --> 00:22:24,120
अपने आप यह 31 तक का था हो गया तो इसमें

303
00:22:24,120 --> 00:22:29,640
सम बुद्धि की बात की है और

304
00:22:29,640 --> 00:22:35,640
[संगीत]

305
00:22:39,720 --> 00:22:43,840
एक चीज और बस मैं दो मिनट लूंगा फिर मैं आपको सुन लूंगा ब दो

306
00:22:43,840 --> 00:22:49,840
मिनट

307
00:22:50,600 --> 00:22:54,720
और सम दृष्टि से धर्म धर्म युक्त जो युद्ध

308
00:22:54,720 --> 00:22:59,200
है वह पाप नहीं है सम दृष्टि अगर

309
00:22:59,200 --> 00:23:05,200
आपकी ना आपको जीत की लालसा है ना हार का

310
00:23:05,200 --> 00:23:11,160
भय ये 2 38 में कहा है भगवान

311
00:23:11,160 --> 00:23:15,640
ने कर्म फल में अनासक्त होकर कर्म करने वाला

312
00:23:15,640 --> 00:23:19,920
श्रेष्ठ है कर्म फल में जो अनासक्त है वो

313
00:23:19,920 --> 00:23:24,400
कर्म करने वाला श्रेष्ठ है भगवान ने कहा और जो भगवान

314
00:23:24,400 --> 00:23:28,520
लिप्त नहीं होते हैं वो देखिए क्या कह रहे हैं भगवान चार न में क्या कह रहे हैं

315
00:23:28,520 --> 00:23:33,080
भगवान के जन्म और कर्म की दिव्यता

316
00:23:33,080 --> 00:23:37,120
को जानने वा जानना ही तत्व ज्ञान भगवान के जन्म और

317
00:23:37,120 --> 00:23:41,200
कर्म जो उनके कर्म है उनको मनुष्य जैसा कर्म करने वाला

318
00:23:41,200 --> 00:23:45,680
समझना गलत है उनकी दिव्यता को जानने वाला तत्व ज्ञानी है

319
00:23:45,680 --> 00:23:49,840
और क्या कह रहे हैं कि 41

320
00:23:49,840 --> 00:23:53,920
में कह रहे हैं सृष्टि आदि कर्म का कर्ता होने पर भी ये लोग

321
00:23:53,920 --> 00:23:58,800
कहते हैं ना कि इकोन के लोग कहते हैं कि सबका कारण

322
00:23:58,800 --> 00:24:02,880
कुछ कहते हैं कि सबका कारण जो है कृष्ण है मूल कृष्ण है

323
00:24:02,880 --> 00:24:07,120
तो जब सबका कारण कृष्ण है तो यह बात प्रभुपाद जी ने भी कही कि रास्कल

324
00:24:07,120 --> 00:24:12,120
का कारण भी कृष्ण है रेपिस्ट का कारण भी कृष्ण है मेरे

325
00:24:12,120 --> 00:24:16,160
भाई दुनिया की ऐसी कोई भी चीज जिसका कारण कृष्ण

326
00:24:16,160 --> 00:24:20,560
नहीं है अगर है दुनिया में तो फिर कृष्ण ईश्वर नहीं

327
00:24:20,560 --> 00:24:24,680
है अगर कुरान के द्वारा प्रतिपादित होने वाले ईश्वर

328
00:24:24,680 --> 00:24:26,280
को ईश्वर माना जा रहा है

329
00:24:26,280 --> 00:24:30,480
तो अगर वो यह कह रहा है कि मैंने तान का मैं कारण नहीं हूं उसमें

330
00:24:30,480 --> 00:24:35,360
शैतान है ना जो भटका है कुरान के अनुसार तो अगर वोह कुरान

331
00:24:35,360 --> 00:24:39,360
का ईश्वर जो है शैतान का कारण नहीं तो ईश्वर कैसा कोई दुनिया में कोई चीज है

332
00:24:39,360 --> 00:24:44,000
जिस पर उसकी सत्ता नहीं है वो ईश्वर नहीं है सर्वव्यापक

333
00:24:44,000 --> 00:24:48,280
सर्व शक्तिमान आर समाज का ईश्वर अगर

334
00:24:48,280 --> 00:24:52,440
उसका बुराई पर सत्ता नहीं है उसकी तो वह ईश्वर है

335
00:24:52,440 --> 00:24:56,520
क्या ईश्वर नहीं है फिर वो तो यहां

336
00:24:56,520 --> 00:25:00,520
क्या कहा जा रहा है ईश्वर के लिए कि सृष्टि

337
00:25:00,520 --> 00:25:04,640
आदि कर्म का करता होने पर भी मुझ अविनाशी को तू

338
00:25:04,640 --> 00:25:08,720
अकता जान क्यों जान फल

339
00:25:08,720 --> 00:25:12,960
में आसक्ति ना होने के कारण भगवान को फल से कोई आसक्ति नहीं वह कुछ कर रहे

340
00:25:12,960 --> 00:25:17,000
बस कर रहे हैं उनको ना फल से कोई मतलब है ना नुकसान से ना

341
00:25:17,000 --> 00:25:23,000
भय है ना लाभ है ना लाभ है ना हानि का भय

342
00:25:23,600 --> 00:25:28,360
तो तो क्या कह रहे हैं कि फल में आसक्ति ना होने से

343
00:25:28,360 --> 00:25:32,440
भगवान पर किसी भी कर्म का कर्म के कर्ता होने का दोष नहीं

344
00:25:32,440 --> 00:25:37,760
लगता बात खत्म हो गई वो कर्म मुझे लिप्त नहीं कर

345
00:25:37,760 --> 00:25:42,600
सकते भगवान ने ये भी कहा है कि उनको कर्म जो है लिप्त नहीं

346
00:25:42,600 --> 00:25:48,600
करते कहां कहा है बता देता

347
00:25:52,120 --> 00:25:56,320
हूं कामना संकल्प आसक्ति रहित कर्म करने वाला ही

348
00:25:56,320 --> 00:26:02,320
ज्ञानी है

349
00:26:06,600 --> 00:26:10,760
हां यह चार बा मेंही लिखा है कि

350
00:26:10,760 --> 00:26:15,000
फल में आसक्ति ना होने से भगवान पर किसी भी

351
00:26:15,000 --> 00:26:19,000
कर्म के कर्ता होने का दोष नहीं लगता और उन्हें कर्म जो

352
00:26:19,000 --> 00:26:23,680
है लिप्त नहीं कर सकते तो भगवान को आप समझिए भगवान सर्वव्यापक

353
00:26:23,680 --> 00:26:27,840
है ईश्वर है वो अब बात येय आती है कि जब ईश्वर

354
00:26:27,840 --> 00:26:31,880
में सबको ईश्वर में अच्छाई बुराई सब कुछ है तो हम ईश्वर की

355
00:26:31,880 --> 00:26:36,200
भक्ति क्यों कर रहे हैं तो पहली बात यह है कि

356
00:26:36,200 --> 00:26:40,360
आप यह जो आपकी जीवन में जो फ्लकचुएशन हो रहा

357
00:26:40,360 --> 00:26:44,400
है जो आप प्रभावित हो रहे हैं सुख और दुख से उससे मुक्त होने के लिए आपको

358
00:26:44,400 --> 00:26:48,560
ऐसी ही किसी यह जो आपके अंदर प्यास है इससे मुक्त होने

359
00:26:48,560 --> 00:26:52,960
की इस प्यास का विषय वही ईश्वर हो सकता है जो इस प्रभाव

360
00:26:52,960 --> 00:26:56,960
से मुक्त हो वो है इसलिए आप उसकी भक्ति

361
00:26:56,960 --> 00:27:01,840
कर रहे हो अगर वो मुक्त नहीं है तो आपको मुक्त कहां से कराएंगे

362
00:27:01,840 --> 00:27:07,840
जो खुद मुक्त नहीं है वो आपको मुक्त कहां से

363
00:27:08,440 --> 00:27:12,760
कराएगा इस्लाम का ईश्वर प्रभावित होता है बाइबल का ईश्वर प्रभावित

364
00:27:12,760 --> 00:27:16,920
होता है तो वो आपकी इस मुक्ति का विषय नहीं है

365
00:27:16,920 --> 00:27:21,880
कि सुनामी आएगी तो घबरा गए प्रलय आई तो घबरा गए

366
00:27:21,880 --> 00:27:25,960
जो वास्तविक संत लोग हैं उनके पास जब आप जाएंगे ना कि

367
00:27:25,960 --> 00:27:30,280
हमारे पेट में किडनी खराब हो गई है यह हो गया वो हो गया है हमारे

368
00:27:30,280 --> 00:27:34,360
कैंसर हो गया है हम मरने वाले हैं हम क्या करें कोई तंत्र विद्या बताओ

369
00:27:34,360 --> 00:27:38,800
वास्तविक संत आपको यह सब नहीं बताएंगे कि हम चमत्कार

370
00:27:38,800 --> 00:27:43,240
से आपको सही कर दे हो सकता है उनके पास चमत्कारिक शक्तियां हो नहीं बताएंगे क्या

371
00:27:43,240 --> 00:27:47,280
बताएंगे आत्मा का ज्ञान व आपको बताएंगे ना

372
00:27:47,280 --> 00:27:51,280
तू कभी मरता है ना कभी मारा जाता है यह है संत

373
00:27:51,280 --> 00:27:55,520
व आपको बताएंगे नन छिंदंति सत्रा नन दती पाव का वो इतना

374
00:27:55,520 --> 00:27:59,840
आपको यह वाला ज्ञान देंगे कि जिस कि आपके अंदर य जो भय

375
00:27:59,840 --> 00:28:04,560
जो कुंठा है वो खत्म होती चली जाएगी

376
00:28:04,560 --> 00:28:09,240
और जिसके कारण जितने भी दिन आप उस भौतिक जीवन को जिएंगे वह

377
00:28:09,240 --> 00:28:14,320
आपका संतोष पूर्ण हो जाएगा यह होते हैं

378
00:28:14,320 --> 00:28:18,480
सं उनको आवश्यकता नहीं है किसी तंत्र से आपका वह चमत्कारिक रूप

379
00:28:18,480 --> 00:28:22,920
से आपकी वो चीजें ठीक करने की वो केवल भगवत गीता के श्लोक पढ़ेंगे

380
00:28:22,920 --> 00:28:23,640
अगर बुद्धि

381
00:28:23,640 --> 00:28:28,120
में आपके आता गया तो फिर आपका यह जो नैनम

382
00:28:28,120 --> 00:28:32,320
ति सस्त्र नन दती पावा कहा है ये आपके घुस जाएगा

383
00:28:32,320 --> 00:28:37,080
और फिर आपका ये जो भय हो रहा है विचलित हो रहा है प्रभावित हो रहे हैं सब चीजें खत्म हो

384
00:28:37,080 --> 00:28:43,080
जाएंगे यह होते हैं

385
00:28:43,800 --> 00:28:46,080
संत

386
00:28:46,080 --> 00:28:50,480
तो ये चर्चा थी भगवत गीता पर जी शाश्वत

387
00:28:50,480 --> 00:28:54,520
कुमार जी जय श्री राम राजा जी जय श्री राम मैं अभी आपसे बात करता हूं शाश्वत

388
00:28:54,520 --> 00:28:59,520
कुमार जी जय श्री राम जी प्रणाम जी जी

389
00:28:59,520 --> 00:29:03,720
ज जैसे आपने बताया की

390
00:29:03,720 --> 00:29:07,800
की चोरी हो या राम हो जो भी हो उनका भी कारण कृष्ण जी

391
00:29:07,800 --> 00:29:12,440
ही है तो तो फिर

392
00:29:12,440 --> 00:29:16,960
वोह तो आपने बिल्कुल सही बोला तो फिर उसका

393
00:29:16,960 --> 00:29:20,920
उसके बाद का क्या

394
00:29:20,920 --> 00:29:26,280
होगा पह बात तो य है

395
00:29:26,280 --> 00:29:31,240
किय जो चर्चा रखी है प्रश्नोत्तरी के लिए रखी नहीं है

396
00:29:31,240 --> 00:29:35,720
जी जी यह रखी है कि अगर

397
00:29:35,720 --> 00:29:39,720
कोई संतुष्ट है हमारे कार्यों से तो वह आकर के अपने

398
00:29:39,720 --> 00:29:45,000
विचार प्रकट कर सकते हैं मैं तो पूरा संतुष्ट हूं गुरुजी

399
00:29:45,000 --> 00:29:49,400
क्योंकि संतुष्ट क्या आपका य सानिध्य प्राप्त

400
00:29:49,400 --> 00:29:54,080
आपके जैसा ही मैं भी बनने का प्रयास कर रहा हूं तो

401
00:29:54,080 --> 00:29:58,440
अच्छी बात है मगर प्रश्नों के लिए नहीं था फिर आप क्लास

402
00:29:58,440 --> 00:30:02,560
आ सकते आज ऐसा होता है कि कंटेंट को लेकर चलते

403
00:30:02,560 --> 00:30:06,800
हैं उसम दिक्कत आ जाती है जैसे हम लेकर चले आजन वालो से चर्चा

404
00:30:06,800 --> 00:30:10,960
अब कोई व्यक्ति उस टाइटल से सर्च करेगा स्कन वालो से चर्चा खोल के देखेगा

405
00:30:10,960 --> 00:30:14,960
अब उसम हो क्या रहा है स्न वाला पा मिनट था 10 मिनट था और

406
00:30:14,960 --> 00:30:19,120
उसके बाद वो कंटेंट यह हो रहा है कि उसमें कोई आ रहा है समर्थन कर रहा है या कोई

407
00:30:19,120 --> 00:30:23,320
आ रहा है आ समाज के संदर्भ में प्रश्न पूछ रहा है तो कंटेंट उसको मैनेज कैसे करें

408
00:30:23,320 --> 00:30:29,320
लाइव को य दिक्कत आती है चलिए पूछिए आपने पूछा तो

409
00:30:29,520 --> 00:30:34,400
जी शमा कीजिए गुरुजी बस बोलिए बोलिए प्रश् बोलिए

410
00:30:34,400 --> 00:30:38,400
जी मेरा तो जी संतुष्टि से

411
00:30:38,400 --> 00:30:42,440
ही लेके इसको मैं प्रश्न को घुमा रहा था

412
00:30:42,440 --> 00:30:46,480
कि यदि ईश्वर चाहे जैसे कि अगर चोरी

413
00:30:46,480 --> 00:30:50,760
का भी जो जो पावर है वह भी का जो कारण

414
00:30:50,760 --> 00:30:54,760
व भी अगर ईश्वर ही है फॉर एग्जांपल

415
00:30:54,760 --> 00:30:58,760
तो यदि ईश्वर चाहे तो हमें हमारा दिमाग को उस तरह से

416
00:30:58,760 --> 00:31:02,920
प्रोग्राम भी कर सकते हैं कि हमें चोरी भी सही लगे

417
00:31:02,920 --> 00:31:07,320
तो मब कर सकते हैं

418
00:31:07,320 --> 00:31:11,480
बिल्कुल क्योंकि जैसा आपने बोला कि गलत तो दुनिया में

419
00:31:11,480 --> 00:31:15,760
दुनिया में जो चोर है उसमें 90 पर चोर तो यही सोचते

420
00:31:15,760 --> 00:31:20,280
हैं ना कि क्या कहते हैं मैं जो कर रहा हूं वो सही कर रहा हूं

421
00:31:20,280 --> 00:31:24,440
हां 90 पर तो यही सोचते हैं ना बहुत कम चोर ऐसे होंगे

422
00:31:24,440 --> 00:31:28,920
जो अपने आप को पापी समझते हुए चोरी करते होंगे ठीक है

423
00:31:28,920 --> 00:31:33,200
तो उन चोरों का माइंड किसने किसके कंट्रोल में है भगवान के कंट्रोल में

424
00:31:33,200 --> 00:31:37,800
ये भगवान के पर्सपेक्टिव से ये खेल है हा मनोरंजन

425
00:31:37,800 --> 00:31:42,320
ये खेल है एक तमाशा और उसमें

426
00:31:42,320 --> 00:31:44,680
जैसे हम लोग कोई खेल खेलते हैं जैसे मान लीजिए

427
00:31:44,680 --> 00:31:48,920
कार चल रही है हमारी खेल वीडियो गेम खेल रहे हैं उस कार

428
00:31:48,920 --> 00:31:53,600
जब हमारी चल रही है तो उसमें आने वाला जो गड्ढा है

429
00:31:53,600 --> 00:31:58,880
उसका निर्माता कौन है उस वीडियो गेम को चालू करने वाले हम

430
00:31:58,880 --> 00:32:03,240
उसमें जो कार में चल रहा है वो कौन है वो भी हम ही है उसमें जो गड्ढे

431
00:32:03,240 --> 00:32:07,280
आ रहे हैं जो हम बच रहे हैं जिनसे हमें बचना है वो भी हम ही है

432
00:32:07,280 --> 00:32:11,360
तो ये इस तरह से है भगवान एक भगवान का रूप है

433
00:32:11,360 --> 00:32:15,880
कारण कि वो सबका कारण है मूल ठीक है

434
00:32:15,880 --> 00:32:20,080
फिर एक कारण है भगवान का जो सगुण साकार स्वरूप होता है जो जो आपकी

435
00:32:20,080 --> 00:32:24,680
मुक्ति का मार्ग प्रशस्त करता है तो भगवान का जो ये वाला जो रूप होता है

436
00:32:24,680 --> 00:32:28,720
जो मोक्ष दायक होता है और जो वेदों की सीमा द्वारा सीमा में होता

437
00:32:28,720 --> 00:32:32,960
है यह हमारे अनुकरण अनुसरण भजन का विषय होता

438
00:32:32,960 --> 00:32:37,000
है जैसे मैंने कई बार बता जल है वह सब जगह व्याप्त है

439
00:32:37,000 --> 00:32:41,360
नमी नमी इत्यादि के रूप में वायुमंडल में व्याप्त है मगर वह हमारे व्यवहार

440
00:32:41,360 --> 00:32:45,600
का विषय नहीं है हमारे व्यवहार का विषय क्या है जो हमारे कर पात्र

441
00:32:45,600 --> 00:32:50,240
में आ जाए अथवा हमारे चुल्लू में आ जाए हमारे

442
00:32:50,240 --> 00:32:55,080
हमारे पात्र में आ जाए गिलास में आ जाए वो पानी हमारे व्यवहार का विषय हो

443
00:32:55,080 --> 00:32:59,080
जाता तो इसी प्रकार से भगवान का जो रूप वेदों की सीमा

444
00:32:59,080 --> 00:33:00,040
में आ गया

445
00:33:00,040 --> 00:33:04,080
सनातन शास्त्रों की सीमा में आ गया सनातन धर्म की सीमा में आ गया वो

446
00:33:04,080 --> 00:33:08,280
हमारे भजन का विषय वैसे तो कण

447
00:33:08,280 --> 00:33:13,120
कण में दुनिया में ईश्वर है मगर वो पार मार्थी रूप से व्यावहारिक रूप से तो

448
00:33:13,120 --> 00:33:17,440
हमें यह दिख रहा है हम भी अडॉप्ट नहीं कर पाए हमने थ्योर कली जान लिया पृथ्वी

449
00:33:17,440 --> 00:33:21,600
गोल है मगर हमारे शरीर के कारण हम अडॉप्ट नहीं कर पाए तो क्या हो रहा

450
00:33:21,600 --> 00:33:25,680
है हमसे बिहेव हमें चपटा ही करना पड़ेगा तो जब हम चपटा देख रहे

451
00:33:25,680 --> 00:33:29,680
हैं हमें चपटा दिख रहा है तो चप करके ही हम उस गोव को

452
00:33:29,680 --> 00:33:34,000
प्राप्त कर सकते हैं तो भेद का निर्वाह करके ही अभेद

453
00:33:34,000 --> 00:33:38,960
तक पहुंचना है इसी तो भेद का जो जो

454
00:33:38,960 --> 00:33:43,280
जो दो मुख्य पॉइंट है स्तंभ है

455
00:33:43,280 --> 00:33:47,400
शास्त्रों के वह है धर्म और ब्रह्म सनातन शास्त्रों

456
00:33:47,400 --> 00:33:51,640
के दो मुख्य स्तंभ है धर्म और ब्रह्म तो धर्म का आधार

457
00:33:51,640 --> 00:33:55,800
है द्वैत क्योंकि यहां व्यवहार हो रहा है धर्म का आधार

458
00:33:55,800 --> 00:34:00,440
है द्वैत और ब्र का आधार है अद्वैत मार्ग

459
00:34:00,440 --> 00:34:04,520
रास्ता है द्वैत और उसका जो प्राप्त व्य है

460
00:34:04,520 --> 00:34:09,480
डेस्टिनेशन व है अवत ठीक

461
00:34:09,480 --> 00:34:11,720
है

462
00:34:11,720 --> 00:34:15,200
जी आपको कोई विचार भी प्रकट करने आए थे प्रश्न

463
00:34:15,200 --> 00:34:19,520
ही पूछने आए थे नहीं गुरुजी एक और बात यह था

464
00:34:19,520 --> 00:34:24,480
कि जैसे अभी आजकल बहुत सारे माइथोलॉजी राइटर है जो

465
00:34:24,480 --> 00:34:28,520
जो मॉडर्न सो कॉल्ड है उनसे हम कितना बचना चाहिए

466
00:34:28,520 --> 00:34:32,840
जैसे अमीश त्रिपाठी जी हो गई हो गए और भी ये सब उनसे हम

467
00:34:32,840 --> 00:34:37,280
कितना बचना चाहिए क्योंकि व वे लोग तो अ

468
00:34:37,280 --> 00:34:41,600
क्या कहते मुझे लगता है कि अपने फायदे के लिए

469
00:34:41,600 --> 00:34:45,640
क्योंकि परंपरागत जो गुरु है जो संप्रदाय से जो

470
00:34:45,640 --> 00:34:50,000
गुरु है उनसे जुड़ना बहुत ज्यादा जरूरी है जैसे आपने बताया

471
00:34:50,000 --> 00:34:54,680
और लोग उनसे ना जुड़ के क्योंकि कहने की स्पिरिचुअलिटी

472
00:34:54,680 --> 00:34:58,920
यानी ये जो अध्यात्म का जो विषय है इस परे इसको

473
00:34:58,920 --> 00:35:02,960
पकड़ के बिजनेस बना लेना बहुत आसान है इस इसको पकड़

474
00:35:02,960 --> 00:35:07,600
के कोई भी अपने आप को गुरु प्रोक्लेम कर सकता है क्योंकि

475
00:35:07,600 --> 00:35:11,640
क क्योंकि देखिए मेडिकल का किताब हो या इंजीनियरिंग का

476
00:35:11,640 --> 00:35:16,520
किताब हो या किसी चीज का किताब हो उसको लिखने के लिए आपको एक क्वालिफिकेशन चाहिए

477
00:35:16,520 --> 00:35:20,560
लेकिन स्पिरिचुअलिटी पर अध्यात्म पर अध्यात्म एक ऐसा विषय

478
00:35:20,560 --> 00:35:24,920
है कि इस परे आपको किसी का कोई क्वालिफिकेशन नहीं चाहिए बस

479
00:35:24,920 --> 00:35:28,960
आप कुछ भीड़ इकट्ठा कर लीजिए और और अपने आप को या

480
00:35:28,960 --> 00:35:30,200
तो आईआईटी बोल दीजिए

481
00:35:30,200 --> 00:35:34,440
या तो कुछ बोल दीजिए और उस पर अपने आप को गुरु बोल दीजिए और दो

482
00:35:34,440 --> 00:35:38,720
दो चार किताब ग्रंथ पढ़ के अपना एक वर्जन छाप लीजिए

483
00:35:38,720 --> 00:35:42,880
और आप माइथोलॉजी बन जाएंगे तो इन सब लोगों से

484
00:35:42,880 --> 00:35:47,040
बचना जरूरी है क्योंकि मुझे ऐसा लग बचने का रास्ता यही

485
00:35:47,040 --> 00:35:51,160
है बचने का रास्ता यही है कि

486
00:35:51,160 --> 00:35:55,320
अक्सर ऐसा होता है कि जब हमारे लोगों के सामने या

487
00:35:55,320 --> 00:35:59,360
परंपरा प्राप्त जो स्टूडेंट्स है शिष्य है परंपरा प्राप्त आचार्यों के

488
00:35:59,360 --> 00:36:03,880
सामान्य शिष्य बिल्कुल लौकिक दुनिया से भौतिक दुनिया से कनेक्ट है

489
00:36:03,880 --> 00:36:09,880
और वो उन्होंने शिष्यवृत्ती

490
00:36:28,360 --> 00:36:33,200
आप यह कहे कि राम का अध्ययन आपने कहां से किया बस

491
00:36:33,200 --> 00:36:37,240
परंपरा प्राप्त प्रामाणिक आचार्य से आपने अध्ययन किया है कि नहीं

492
00:36:37,240 --> 00:36:41,360
किया है अगर किया है तो आप आक्षेप लगाने के लिए ऑथराइज है

493
00:36:41,360 --> 00:36:45,680
अगर नहीं किया है तो जिन शास्त्रों में आप जिन शास्त्रों के आधार पर आप राम इत्यादि

494
00:36:45,680 --> 00:36:50,120
पर आक्षेप लगा रहे हैं श्री राम पर श्री कृष्ण पर आप आक्षेप लगा रहे हैं हमारे शास्त्रों

495
00:36:50,120 --> 00:36:54,160
पर कुछ बोल रहे हैं उन्हीं शास्त्रों में परंपरा प्राप्त आचार्य के पास जाने की

496
00:36:54,160 --> 00:36:59,120
बातें सिद्ध है अब वो आपसे ये कह सकता है कि आप तो उनके शिष्य हो

497
00:36:59,120 --> 00:37:03,360
तो आप ही बता दो तो हमारा जवाब ये होगा हम उनके शिष्य

498
00:37:03,360 --> 00:37:07,440
हैं मगर हमने यह सब उनसे नहीं पढ़ा है हमने यह पढ़ लिया है कि परंपरा

499
00:37:07,440 --> 00:37:11,680
प्राप्त गुरु से ही धर्म का ज्ञान लेना है

500
00:37:11,680 --> 00:37:15,920
तो आप अगर कोई भी बात बता रहे हैं आक्षेप के रूप में तो वह आपकी परंपरा प्राप्त

501
00:37:15,920 --> 00:37:19,920
आचार्य से होनी चाहिए और अगर नहीं लिया तो जाइए पहले उनसे कन्फर्म करिए तब

502
00:37:19,920 --> 00:37:24,800
आप करके हम पर आक्षेप लगाइए हमारे साम बात खम

503
00:37:24,800 --> 00:37:28,920
हम क्यों ऐसा सोचते हैं कि हर बात का बिल्कुल ब मोबाइल परही

504
00:37:28,920 --> 00:37:33,560
हमको जो है श्लोक क्रमांक वगैरह सब कुछ मिल जाए सिर्फ एक बात याद रखो

505
00:37:33,560 --> 00:37:37,600
परंपरा कहां से ज्ञान प्राप्त किया भाई अगर किसी को

506
00:37:37,600 --> 00:37:41,720
आप डॉक्टरी के विषय में बात करने के लिए स्वीकार करेंगे तो इस बात पर करेंगे

507
00:37:41,720 --> 00:37:43,480
ना कि उसके पास व

508
00:37:43,480 --> 00:37:47,960
सर्टिफिकेट है कि नहीं डॉक्टरी का उसने कहां से डॉक्टरी पास आउट की है

509
00:37:47,960 --> 00:37:53,400
मेडिकल साइंस उसने कहां से अध्ययन किया ये जिन भाई साहब की आप बात कर रहे

510
00:37:53,400 --> 00:37:55,680
हैं

511
00:37:55,680 --> 00:37:59,960
प्रशांत सो कॉल्ड चार तो इनकी आप बात

512
00:37:59,960 --> 00:38:04,320
आप देखिए ये अपनी भौतिक जो इनकी शिक्षा

513
00:38:04,320 --> 00:38:08,320
है उसके द्वारा अपने अपना प्रभाव उत्पन्न करने के लिए

514
00:38:08,320 --> 00:38:12,400
बताते हैं कि मैं वो वहां से फलान से हू आई आई

515
00:38:12,400 --> 00:38:16,840
पता नहीं कहां से किया है है ना मैं इतनी जगह से हूं

516
00:38:16,840 --> 00:38:20,920
मगर अपनी जो आध्यात्मिक शिक्षा है वो छुपाते हैं कि हमने कहां से ग्रहण किया

517
00:38:20,920 --> 00:38:24,920
क्योंकि कहीं से किया ही नहीं सब अपने से है सब कुछ वो

518
00:38:24,920 --> 00:38:29,080
नहीं बताए मतलब भौतिक शिक्षा इतनी इंपॉर्टेंट है जो लोगों को बताई

519
00:38:29,080 --> 00:38:33,400
जाए कि भैया मैंने आईआईटी कहां से आईआईटी एन हूं मैं मगर धार्मिक

520
00:38:33,400 --> 00:38:37,440
शिक्षा आध्यात्मिक शिक्षा इंपोर्टेंट नहीं है जो बताई जाए कि मैंने कहां

521
00:38:37,440 --> 00:38:41,440
से पढ़ा वो खुद ही बता रहे हैं ना और वैसे उनके लिए

522
00:38:41,440 --> 00:38:46,320
अद्वैत सब बेकार है कूड़ा है आईआईटी वगैरह कूड़ा

523
00:38:46,320 --> 00:38:51,120
है मगर कूड़े को वो यूज कर रहे अपने लिए प्रभाव उत्पन्न करने

524
00:38:51,120 --> 00:38:55,160
में उनके ही अनुसार जो कूड़ा है उस कूड़े का उपयोग कर

525
00:38:55,160 --> 00:38:58,600
रहे हैं अपने लिए प्रभाव को उत्पन्न करने में और वा उनके

526
00:38:58,600 --> 00:39:02,840
अनुसार जो वाकई में जिसकी जिसका महत्व है उस पर कोई बात नहीं

527
00:39:02,840 --> 00:39:06,840
कि मेरा गुरु कौन है मेरी परंपरा क्या है मैं जो बता रहा हूं ज्ञान दे रहा हूं यह

528
00:39:06,840 --> 00:39:11,040
कहां से मुझे प्राप्त हुआ है कुछ नहीं आदि शंकराचार्य जी को रोल मॉडल मानेंगे

529
00:39:11,040 --> 00:39:16,240
मगर उनका ही लिखा हुआ क जगह खुद ही खंडित कर देंगे कोई प्रमाणिक बात नहीं

530
00:39:16,240 --> 00:39:21,720
है जी राम शरण स्मार्थ जी जय श्री राम जय

531
00:39:21,720 --> 00:39:25,790
जगन्नाथ धन्यवाद गुरुजी जी

532
00:39:25,790 --> 00:39:28,280
[संगीत]

533
00:39:28,280 --> 00:39:32,480
जी बहुत बहुत अनंत साधुवाद आपको

534
00:39:32,480 --> 00:39:36,800
आवाज आ रही है मेरी जी आ रही है

535
00:39:36,800 --> 00:39:41,080
बहुत बहुत साधुवाद बहुत अच्छा कार्य कर रहे हैं आप भगवान

536
00:39:41,080 --> 00:39:45,080
आद्य शंकराचार्य की चर विजय हो उनके

537
00:39:45,080 --> 00:39:49,560
सिद्धांतों की विजय हो और समस्त

538
00:39:49,560 --> 00:39:54,160
समाज भगवान आचार्य के सिद्धांतों

539
00:39:54,160 --> 00:39:58,640
के नीचे आए उनका अनुसरण करे

540
00:39:58,640 --> 00:40:03,600
यही भावना और बहुत बहुत साधुवाद

541
00:40:03,600 --> 00:40:09,040
सब प्रकार से आपका समर्थन करते हैं

542
00:40:09,040 --> 00:40:14,080
आज आवश्यकता इस बात की है

543
00:40:14,080 --> 00:40:18,920
कि सनातन समाज यह समझे

544
00:40:18,920 --> 00:40:23,120
कि सनातन धर्म का मूल जो है वह स्मार्थ

545
00:40:23,120 --> 00:40:29,120
परंपरा ही है स्मार्थ परंपरा में ही

546
00:40:29,360 --> 00:40:33,640
भिन्न भिन्न देवताओं में भेद नहीं किया जाता

547
00:40:33,640 --> 00:40:37,640
यहां एक तत्व के ही विभिन्न रूपों को हम मानते हैं

548
00:40:37,640 --> 00:40:41,840
और सबको समान मानते हैं तो मुझे ऐसा लगता है कि

549
00:40:41,840 --> 00:40:45,920
सबको स्मार्थ तो होना ही चाहिए भले व वैष्णव

550
00:40:45,920 --> 00:40:50,080
स्मार्थ हो अथवा व सव स्मार्थ हो अथवा

551
00:40:50,080 --> 00:40:54,400
वह गाण पति स्मार्थ हो परंतु उसको

552
00:40:54,400 --> 00:40:58,600
स्मार्थ परंपरा का ही अ करना चाहिए शास्त्रों की विधि

553
00:40:58,600 --> 00:41:03,000
तो यही है यदि आप स्मार्थ ना होते हुए स्वयं को वैष्णव

554
00:41:03,000 --> 00:41:07,280
घोषित कर रहे हैं तो आप अस्त्रीय बात कर रहे हैं जी

555
00:41:07,280 --> 00:41:11,880
कोई भी जैसे कोई भी जैसे

556
00:41:11,880 --> 00:41:15,880
सनातनी या हिंदू होते हुए ही ब्राह्मण क्षत्रिय वै सूद की संज्ञा को

557
00:41:15,880 --> 00:41:20,760
प्राप्त कर सकता है इसी प्रकार से कोई भी स्मार्थ होते हुए ही वैष्णव

558
00:41:20,760 --> 00:41:25,200
सवत सर या नपद हो सकता है यह शास्त्रीय

559
00:41:25,200 --> 00:41:29,240
बा ये शास्त्रीय विषय है साथ ही

560
00:41:29,240 --> 00:41:33,920
एक बात और हिंदू समाज को स्पष्ट तौर पर समझना

561
00:41:33,920 --> 00:41:38,280
चाहिए कि सनातन धर्म का मूल वर्ण

562
00:41:38,280 --> 00:41:42,640
व्यवस्था है व भी जन्मना जो वर्ण व्यवस्था

563
00:41:42,640 --> 00:41:47,160
है वही सनातन धर्म का मूल है जहां

564
00:41:47,160 --> 00:41:51,480
इस व्यवस्था का उे दन कर दिया जाएगा वहा सनातन

565
00:41:51,480 --> 00:41:56,080
धर्म केवल आभासी धर्म मात्र रह जाएगा इसलिए

566
00:41:56,080 --> 00:41:59,280
सबको

567
00:41:59,280 --> 00:42:03,720
सबको बिल्कुल नि भ्रांत होकर के वर्ण व्यवस्था

568
00:42:03,720 --> 00:42:07,800
का अनुशीलन करना चाहिए और स्वधर्म का पालन

569
00:42:07,800 --> 00:42:12,200
करना चाहिए यह मुझे लगता है भगवान कहते हैं गीता में स्वधर्म

570
00:42:12,200 --> 00:42:17,200
निधन श्रे पर धर्म भया भया

571
00:42:17,200 --> 00:42:22,480
तो वहां कोई उस समय धर्म तो था ही अन्य कोई पंथ तो थे

572
00:42:22,480 --> 00:42:27,880
नहीं बात कही तो धर्म क्या है

573
00:42:27,880 --> 00:42:32,080
वास्तविकता तो यह है कि हम

574
00:42:32,080 --> 00:42:36,160
केवल अन्य पंथ से जो कु पंथ है

575
00:42:36,160 --> 00:42:40,880
उनसे स्वयं को विलग करने के लिए ही सनातन धर्म

576
00:42:40,880 --> 00:42:45,000
अथवा हिंदू शब्द हमारी मजबूरी है हमारी बाता

577
00:42:45,000 --> 00:42:49,840
जोड़ना पड़ता अन्यथा धर्म शब्द ही

578
00:42:49,840 --> 00:42:54,280
पर्याप्त एक मात्र धर्म शब्द ही प्यात है

579
00:42:54,280 --> 00:42:58,400
और धर्म के लक्षण जहा वेदों के अनुसार और स्मृतियों के

580
00:42:58,400 --> 00:43:02,560
अनुसार घटित होते हैं वही धर्म है जहां स्मृतियों

581
00:43:02,560 --> 00:43:06,840
के अनुसार अथवा पूर्व मांसा के अनुसार धर्म

582
00:43:06,840 --> 00:43:11,080
के लक्षण घटित नहीं होते वह प अधर्म

583
00:43:11,080 --> 00:43:15,960
है तो जो जिसे हम सनातन धर्म कहते सनातन

584
00:43:15,960 --> 00:43:19,280
उसकी विशेषता

585
00:43:19,280 --> 00:43:23,360
है विशेषण हैय बात है

586
00:43:23,360 --> 00:43:27,720
उसका मूल जो है व वव हैम गुरु कपा से एक उदाहरण

587
00:43:27,720 --> 00:43:32,560
हमको प्राप्त हुआ था प्रवचन हम जब सुन रहे थे गुरुदेव के

588
00:43:32,560 --> 00:43:36,960
तो वहां से हमको एक उदाहरण प्राप्त हुआ था कि

589
00:43:36,960 --> 00:43:41,560
उन्होंने कहा कि पहले केवल ही

590
00:43:41,560 --> 00:43:46,280
हुआ करता था पहले केवल घी था

591
00:43:46,280 --> 00:43:50,440
और मार्केट में जब ये डालडा वनस्पति

592
00:43:50,440 --> 00:43:54,480
य तरह तरह के नाम वाले घी आ गए जब नकली आ गया यह वाला आ गया वो वाला आ

593
00:43:54,480 --> 00:43:58,520
गया तो फिर अब जो है लगाना पड़ता है दुकान पर

594
00:43:58,520 --> 00:44:02,840
जाकर बोलना पड़ता है भैया देसी घी दे दो दे घी

595
00:44:02,840 --> 00:44:07,280
सही है और इसके बाद जब जरसी

596
00:44:07,280 --> 00:44:11,400
शास्त्र मेंब अध्ययन करते हैं तो केवल घी आता है बिल्कुल

597
00:44:11,400 --> 00:44:15,480
बिल्कुल यही दे की आवश्यकता वहा नहीं है मगर

598
00:44:15,480 --> 00:44:19,520
क्या है कि हमको बोलना पड़ता है भैया शुद्ध देसी घी अब शुद्ध भी आगे लगाना पड़

599
00:44:19,520 --> 00:44:23,720
रहा है आजल शुद्ध देसी घी इसमें यह

600
00:44:23,720 --> 00:44:28,400
बात स्पष्ट करनी इसलिए आवश्यक है क्योंकि आज जो है

601
00:44:28,400 --> 00:44:32,480
ना कु शिक्षा के कारण से लोग

602
00:44:32,480 --> 00:44:34,520
भ्रांत है सोचते

603
00:44:34,520 --> 00:44:38,720
हैं कि यह धर्म हम हम हिंदू धर्म वाले हैं सामने वाला अन

604
00:44:38,720 --> 00:44:43,160
फलाना का वो भी तो धर्म है यह भ्रांति

605
00:44:43,160 --> 00:44:47,720
है वो नहीं अधर्म है

606
00:44:47,720 --> 00:44:52,240
धर्मा भास है री समझ

607
00:44:52,240 --> 00:44:57,760
धर्मास भी नहीं है अधर्म है

608
00:44:57,760 --> 00:45:01,760
असल में देखिए यह बात तो इस सिद्ध हो जाती है सीधी

609
00:45:01,760 --> 00:45:05,840
सी बात है कि धर्म है ईश्वर को प्राप्त करने के निमित्त व्यवस्था

610
00:45:05,840 --> 00:45:10,840
तो जहां पर ईश्वर ईश्वर होगा सर्वशक्तिमान

611
00:45:10,840 --> 00:45:15,400
वो कहला सकता उसको प्राप्त करने की व्यवस्था धर्म कहला सकती है

612
00:45:15,400 --> 00:45:19,760
अब वहा पर व ईश्वर ईश्वर नहीं है वो ईश्वरा भास है

613
00:45:19,760 --> 00:45:24,560
व ईश्वरा भास तो वो धर्मास हो गया उसको प्राप्त कराने की

614
00:45:24,560 --> 00:45:28,680
विधि अच्छा मैं थोड़ा सा इनको लूगा य काफी देर से आए हैं

615
00:45:28,680 --> 00:45:34,680
सज्जन राम पांडे जी जय श्री

616
00:45:35,560 --> 00:45:41,120
राम जी बोले जय श्री राम सुन

617
00:45:41,120 --> 00:45:45,320
जी एक्चुअली मैं आपको जब ये राम मंदिर

618
00:45:45,320 --> 00:45:49,360
का जो प्रकरण स्टार्ट हुआ था तो जब हमारे शंकराचार्य जी को

619
00:45:49,360 --> 00:45:53,400
जो भाजपा आईटी शैलियों ने काफी आलोचना

620
00:45:53,400 --> 00:45:57,440
करनी स्टार्ट करी थी मेरे ल से उस टाइम से आपने वीडियो बनाने स्टार्ट करे थे लाइ

621
00:45:57,440 --> 00:46:01,520
अंकु शर्मा और अजीत भारती के ऊपर आपने एक दो कमेंट करे थे

622
00:46:01,520 --> 00:46:06,440
अपने रील्स के माध्यम से तो उस टाइम से मैं आपको फॉलो कर रहा हूं बट

623
00:46:06,440 --> 00:46:10,440
उसके बाद से जब पर्टिकुलर आप एक क्या बोलते

624
00:46:10,440 --> 00:46:14,680
है प्लेटफॉर्म के थ्रू आए आप मार्केट मतलब य प तो

625
00:46:14,680 --> 00:46:18,680
एक दो बात पहले समझने में मेरे को भी दिक्कत आ रही थी कि आप किस टॉपिक पर

626
00:46:18,680 --> 00:46:23,080
बात कर रहे हैं और कितनी गुढ़ तरीके से बात कर रहे हैं जो तर्क शक्ति है आपकी

627
00:46:23,080 --> 00:46:27,440
वो अतुलनीय है मतलब माइंड ब्लोइंग आप बोल सकते हैं उसको

628
00:46:27,440 --> 00:46:31,440
कोई भी बंदा आएगा अगर उसके अंदर में थोड़ा सा भी बुद्धि क्षमता

629
00:46:31,440 --> 00:46:35,440
होगी ना उसको समझने के लिए तो इजी में समझ जाएगा आपको कि आप

630
00:46:35,440 --> 00:46:39,440
क्या कहना चाह रहे हैं क्या समझाना चाह रहे हैं बट अब जैसे संत रामपाल

631
00:46:39,440 --> 00:46:43,440
जी के जो चेले हैं आपके जो उनके जो फॉलोवर्स है उनके माइंड में य सब बातें

632
00:46:43,440 --> 00:46:47,520
नहीं घुसने की बट आप कंटीन्यू सली आप इसको ऐसे ही

633
00:46:47,520 --> 00:46:50,680
लगातार सेशन करते रहिए हा बेचैनी

634
00:46:50,680 --> 00:46:54,840
तो है उनके जो फॉलोवर्स है चाहे जो उनको

635
00:46:54,840 --> 00:46:59,160
जो उनके चेले है प्रॉपर में मैं बस आपसे ये कहने आ रहा था कि

636
00:46:59,160 --> 00:47:03,360
जैसे कि कुछ चीजें हैं जो मेरे को भी थोड़े से गिल्ट

637
00:47:03,360 --> 00:47:07,360
फील करती है जैसे कि मान के चलिए कि जो इंटेलेक्चुअल एक भाव

638
00:47:07,360 --> 00:47:11,720
होना चाहिए ना एक प्रॉपर यूट्यूब के अंदर तो थोड़ी सी

639
00:47:11,720 --> 00:47:15,840
क्या बोलते हैं उसको जैसे कि अ एक डायलॉग मारते हैं आप बोलते हैं कि मत

640
00:47:15,840 --> 00:47:20,160
फड़ो चक्कर में कोई नहीं है टक्कर में तो इस टाइप की जो बातें है ना तो

641
00:47:20,160 --> 00:47:24,360
थोड़ा एरोगेंस टाइम में लगता है फील होता है तो मैं आपसे बस यही

642
00:47:24,360 --> 00:47:28,400
रिक्वेस्ट करना आया था कि थोड़े से इसको और इंटेलेक्चुअल तरीके से

643
00:47:28,400 --> 00:47:32,760
इसको हम कंटिन्यू करते इसको देखते थोड़ प्रोफेशनल हो जाए

644
00:47:32,760 --> 00:47:37,720
बिल्कुल बिल्कुल मैं प्रोफेशन की बात कर रहा था अब

645
00:47:37,720 --> 00:47:42,560
यह जो बातें कही जाती है वो

646
00:47:42,560 --> 00:47:46,560
उनका कोई मीनिंग नहीं होता है मगर कहनी इसलिए पड़ती है कि

647
00:47:46,560 --> 00:47:50,880
सामने वाले की ओर से लगातार प्रहार हो रहे हैं

648
00:47:50,880 --> 00:47:55,840
तो हम कौन सी कौन मर्यादा में रहते

649
00:47:55,840 --> 00:47:59,960
हुए मदा को ना लाते हुए कौन से वो पंक्ति बोले

650
00:47:59,960 --> 00:48:04,360
कि सामने वाले को चुबे अब जैसे दूसरा तो बोल जा रहा है व

651
00:48:04,360 --> 00:48:05,840
हज करने गए थे तोता

652
00:48:05,840 --> 00:48:09,840
बन के अदि शंकराचार्य है ना वो

653
00:48:09,840 --> 00:48:13,960
क्योंकि अधर्म का तो कोई वही नहीं है ना सीमा वो कितना भी गिर सकता है

654
00:48:13,960 --> 00:48:18,040
मगर हमें गिरना भी है तो झरने की तरह गिरना है तो उसके लिए कि

655
00:48:18,040 --> 00:48:22,240
भाई कौन सी ऐसी पंक्ति बोल सकते हैं जिससे की वो चुप भी जाए और

656
00:48:22,240 --> 00:48:27,320
अपनी मर्यादा को ना लाे वो

657
00:48:27,320 --> 00:48:31,920
इनकी बात देख लीजिए लोग हमेशा बात ही करेंगे पंडे पोंगा

658
00:48:31,920 --> 00:48:35,920
यह जो अलंकार समाजी है पौराणिक पंडे वो इस तरह से

659
00:48:35,920 --> 00:48:41,160
ही बात करते शैली ही उनकी यही है है ना

660
00:48:41,160 --> 00:48:44,840
भांड शब्द का उपयोग करेंगे

661
00:48:44,840 --> 00:48:48,840
प तो इसलिए कि अगर आपके पास कुछ ऐसा

662
00:48:48,840 --> 00:48:52,920
है जो आप निर्विवाद रूप से नि संकोच रूप से किसी के लिए बोल रहे

663
00:48:52,920 --> 00:48:56,920
हो तो हमारे पास मर्यादा के अंदर रहते हुए

664
00:48:56,920 --> 00:49:01,040
चीज जो आपको हम मर्यादा बिना लाे हुए चुबा देंगे मगर फिर भी आपने

665
00:49:01,040 --> 00:49:05,080
याद दिलाया तो प्रयास करूंगा हालांकि अगला जो वीडियो आ रहा है उसम

666
00:49:05,080 --> 00:49:09,160
ये है अगला वीडियो आरहा है उसम य

667
00:49:09,160 --> 00:49:13,200
है नहीं क्या होता है जो लो बाग अभी क्या

668
00:49:13,200 --> 00:49:17,720
है हमारे व बहुत कम है लिमिटेड वप है जो हमारा प्लेटफार्म

669
00:49:17,720 --> 00:49:20,960
है हा जो नए लोग आएंगे वो अलग ले सकते हैं इसको

670
00:49:20,960 --> 00:49:25,000
घमंड है अहंकार है इस तरह से जा सकते हैं वो

671
00:49:25,000 --> 00:49:29,440
क्योंकि उन्होने पिछली क्या हुआ क्या हु

672
00:49:29,440 --> 00:49:33,640
जो लोग एक्चुअल में समझने के लिए आ रहे हैं उनको इस तरीके की मिस अंडरस्टैंडिंग

673
00:49:33,640 --> 00:49:37,840
ना हो य इस भाई के अंदर में ऐसी बिहेवियर ऐसी बातें करता

674
00:49:37,840 --> 00:49:41,880
है और उसको समझाने के लिए आप उनको अच्छे से कुछ एग्जांपल दे सकते हैं

675
00:49:41,880 --> 00:49:45,960
उदाहरण दे सकते हैं अच्छा इससे एक चीज और याद आया मेरे को जब आ समाज

676
00:49:45,960 --> 00:49:50,000
के नाम लिया आपने अलंकारी समाज का मैं कुछ टाइम पहले आज से

677
00:49:50,000 --> 00:49:54,080
दो तीन साल पहले की बात बता रहा हूं 20141 की बात बता रहा हूं काफी

678
00:49:54,080 --> 00:49:58,760
टाइम हो गया मैं बहुत अच्छी तरीके सेन प्रभाव में आ चुका था

679
00:49:58,760 --> 00:50:02,800
और अपने घर में आकर कुतर्क करने लग जाता था तर्क करने लग जाता था अपने

680
00:50:02,800 --> 00:50:07,080
मम्मी पापा से अपने जो रिलेटिव थे जबक वो बताते थेरे

681
00:50:07,080 --> 00:50:11,120
आर्य समाज मतलब आर्य समाज का नाम उससे पहले मैं जानते भी नहीं था लेकिन जो

682
00:50:11,120 --> 00:50:15,280
जैसे अंकुर शर्मा हो गया अक अंकुर आर्या हो गया एक ये

683
00:50:15,280 --> 00:50:19,520
हो गया आपका र हरियाणा का ही रहने वाला है उसका नाम मैं भूल रहा हूं डंके की चोट

684
00:50:19,520 --> 00:50:23,680
प उसका टैगलाइन है उसके वीडियो का याद नहीं आ रहा

685
00:50:23,680 --> 00:50:27,880
उसका नाम क्या है उसके प्रभाव में आ गया था मैं अग्नि त िक

686
00:50:27,880 --> 00:50:32,560
है तो थोड़ा सा साइंटिफिक बातें रखते हैं तो उनके प्रभाव में भी आ गया था मैं

687
00:50:32,560 --> 00:50:36,120
बट काफी टाइम पहले मैं जब सुनने लग गया आपने सनातन समाज

688
00:50:36,120 --> 00:50:40,480
के जो साधु संत महात्मा है जैसे निगहा चार्य जी है पता नहीं आप जानते कि नहीं जानते निग

689
00:50:40,480 --> 00:50:45,040
चार्य जी जानते हैं आप निग चार्य के बारे में जी जी

690
00:50:45,040 --> 00:50:49,360
जी तो उनको जब मैंने सुनना स्टार्ट किया जब वो त तक से शास्त्र

691
00:50:49,360 --> 00:50:53,720
को प्रमाणित करने लग गए तो मेरे को जितने भी त कथावा

692
00:50:53,720 --> 00:50:57,720
गुरु है मैं बोलना नहीं चाहूंगा इतने बड़ प् फम से बट

693
00:50:57,720 --> 00:51:01,760
है जो कथा के नाम प ऐसे अपना बाबागिरी चमका रहे हैं उनका

694
00:51:01,760 --> 00:51:06,000
उन्होंने खंडन स्टार्ट करना स्टार्ट करा जो उनमें से एक बहुत फेमस

695
00:51:06,000 --> 00:51:10,200
बाबा है जो शंकराचार्य को भी मतलब ललकार रहे थे कि आप

696
00:51:10,200 --> 00:51:14,560
शंकराचार्य जी संस्कृत में मेरे से पाच मिनट में भी शास्त्रास नहीं कर सकते

697
00:51:14,560 --> 00:51:18,880
ऐसे ऐसे जो बाबा है जो झूठ के नाम पर अपना मार्केट चला रहे हैं जो

698
00:51:18,880 --> 00:51:22,960
राम मंदिर के प्रकरण में भी वो बोलते थे कि मेरे ही

699
00:51:22,960 --> 00:51:27,040
मेरा ही श्रेय है राम मंदिर को निर्माण कराने में मैंने ही प्रमाणित किया है राम

700
00:51:27,040 --> 00:51:31,200
मंदिर को जबकि जो वहां के हाई कोर्ट के जो जज साहब थे उनका

701
00:51:31,200 --> 00:51:35,560
नाम था मेरे ख्याल से सुधीर अग्रवाल जी वो खुले प्लेटफार्म

702
00:51:35,560 --> 00:51:39,680
से उनके जो वक्तव्य है उनको नकारा था पर

703
00:51:39,680 --> 00:51:44,000
फिर भी ये सुधरने वाले नहीं है बाकी जो निगरा चारी को फॉलो

704
00:51:44,000 --> 00:51:48,160
करना स्टार्ट करा था जो शास्त्र की जो प्रामाणिकता है जो गुण रहस्य है

705
00:51:48,160 --> 00:51:51,360
वो त से तर्क के आधार पर उन्होने समझाना स्टार्ट किया

706
00:51:51,360 --> 00:51:55,480
तब मैं कम बैक किया अने वापस किया हा यार येच हो सकता है

707
00:51:55,480 --> 00:51:59,560
उसके बाद जो हमारे गुरुजी है पूरी के शंकराचार्य जी

708
00:51:59,560 --> 00:52:03,680
उनके वक्तव्य को सुन ल उम तो जैसे मैं अब को सुन रहा

709
00:52:03,680 --> 00:52:08,280
था जी कह रहा अग्नि ने को जो आर्य समाज के है

710
00:52:08,280 --> 00:52:12,680
तो वो साइंटिफिक तरीके से मत वेद को बिल्कुल साइंस बना दिया उन्होने

711
00:52:12,680 --> 00:52:16,720
ये मैटर है ये है वो है फिर जब मैंने पूरी शंकराचा को सुनना स्टार्ट

712
00:52:16,720 --> 00:52:21,120
किया तो मैंने बोला ये तो एक कदम आगे है मतलब जो रहस्य

713
00:52:21,120 --> 00:52:25,160
बताते हैं वेद के और जो

714
00:52:25,160 --> 00:52:29,200
पाच तत्व है जो डिफाइन करते हैं पाच को उस तरीके

715
00:52:29,200 --> 00:52:33,440
से फिर मैंने बोला कि यार ये तो बिल्कुल अद्भुत है तो फिर मैंने वहां से कम बैक किया

716
00:52:33,440 --> 00:52:37,680
और फिर आपको फॉलो किया आप जैसे जितने भी सनातनी लोग है जो एक्चुअल

717
00:52:37,680 --> 00:52:41,760
में सनातन को फॉलो करते हैं उनको मैंने फॉलो करना स्टार्ट किया आप बहुत अच्छा

718
00:52:41,760 --> 00:52:45,920
कार्य कर रहे हो अतुल नहीं है आपका मैं माइंड बलो बहुत ज्यादा मतलब

719
00:52:45,920 --> 00:52:49,960
प्रभावित हूं आपसे मैं सच्ची बता रहा हूं आप चार पाच दिन तक आप आते

720
00:52:49,960 --> 00:52:53,960
भी नहीं है तो फिर मैं वेट करता हूं वीडियो का यार वीडियो नहीं आ र क्या

721
00:52:53,960 --> 00:52:58,200
आ ग क्या हो गया तो इस तरीके से मतलब एडिक्शन हो गया आपके प्रति

722
00:52:58,200 --> 00:53:02,800
ई वीडियो नहीं आ र तो वो वाला हाल हो गया है

723
00:53:02,800 --> 00:53:07,800
बाकी मेरा बस थोड़ा सा सुझाव है थोड़ से

724
00:53:07,800 --> 00:53:11,720
हम इस पर विचार अवश्य

725
00:53:11,720 --> 00:53:15,800
करेंगे जो भी गेस्ट आ रहे माना उनको नहीं आता है कुछ भी नहीं आता है

726
00:53:15,800 --> 00:53:19,920
उनको बस सुन लीजिए क्योंकि वो जाक बाद में प्रोपेट करते है प्रोपेगेंडा

727
00:53:19,920 --> 00:53:24,160
करते हैं इसम मैं आपको एक बात कहूंगा

728
00:53:24,160 --> 00:53:28,320
कि देखिए कुछ भी आप कर ले प्रोपेट तो

729
00:53:28,320 --> 00:53:32,400
करेंगे ही पहली बात कुछ भी कर लीजिए व

730
00:53:32,400 --> 00:53:36,480
तो कुछ ना कुछ करेंगे ही दूसरी बात य है कि मुझे इन

731
00:53:36,480 --> 00:53:40,720
परिस्थितियों में वो क्या कहते हैं उसको एक वो दिखता

732
00:53:40,720 --> 00:53:44,920
होगा आपको कि भाई य डोमिनेट करते हैं डोमिनेट सामने वाले तो

733
00:53:44,920 --> 00:53:49,040
किन परिस्थितियों में करना पड़ता है यह ऐसे है जैसे

734
00:53:49,040 --> 00:53:53,600
कहीं पर कोर्ट में केस चल रहा है खून का मुकदमा चल रहा है

735
00:53:53,600 --> 00:53:57,600
ठीक है एक अपराधी जो दोषी है

736
00:53:57,600 --> 00:54:01,600
जिसके ऊपर उसका हत्या का आरोप है वो कटग

737
00:54:01,600 --> 00:54:05,800
में खड़ा हुआ है अब जो अधिवक्ता

738
00:54:05,800 --> 00:54:09,880
है जो विपक्ष का अधिवक्ता है जो यह सिद्ध करना चाहता

739
00:54:09,880 --> 00:54:14,280
है कि इसी ने मर्डर किया है इसी ने हत्या की है

740
00:54:14,280 --> 00:54:18,280
और दूसरा एक अधिवक्ता है जो उसका पक्ष लेने के लिए खड़ा हुआ है कटघरे में जो

741
00:54:18,280 --> 00:54:22,280
व्यक्ति खड़ा है उसका पक्ष लेने के लिए कि नहीं इसने हत्या नहीं की है

742
00:54:22,280 --> 00:54:23,160
अब जब कोर्ट

743
00:54:23,160 --> 00:54:28,040
केस शुरू हो रहा है तो शुरू में य वाला अधिवक्ता

744
00:54:28,040 --> 00:54:32,280
जो जो उसको हत्यारा सिद्ध करना चाहता है वो क्या दिखा

745
00:54:32,280 --> 00:54:36,360
रहा है कोर्ट के कोर्ट में फोटोस दिखा रहा है

746
00:54:36,360 --> 00:54:40,880
और फोटोस में यह दिखा रहा है कितनी निर्ममता से हत्या हुई है

747
00:54:40,880 --> 00:54:45,400
अब यह बताइए क्या केस इस बारे में है कि कितनी निर्ममता

748
00:54:45,400 --> 00:54:49,440
से हत्या हुई या इस बारे में हत्या की किसने केस

749
00:54:49,440 --> 00:54:53,720
इस बारे में हत्या की किसने मगर वो क्या दिखा रहा है कोर्ट को कितनी

750
00:54:53,720 --> 00:54:57,960
निर्ममता से हत्या हुई इससे क्या हो विषय

751
00:54:57,960 --> 00:55:03,920
तो है नहीं दूसरा विषय मगर वह क्यों दिखा रहा है कि यह जो निर्ममता

752
00:55:03,920 --> 00:55:09,920
है यह जो निर्ममता है

753
00:55:10,680 --> 00:55:14,760
यह यह जो नि निर्ममता है इससे जो

754
00:55:14,760 --> 00:55:19,320
है प्रभावित हो जाए कोर्ट कैंपस पूरा और विशेष तौर पर जग

755
00:55:19,320 --> 00:55:23,320
और एक मतलब पहले से ही एक अंडरस्टैंडिंग उसके मन

756
00:55:23,320 --> 00:55:27,440
में बन जाए कि यह दोषी है नफरत एक क्रिएट हो जाए उसमें

757
00:55:27,440 --> 00:55:31,760
इतनी बेरहमी से मारा गया है मरने वाले को कि यह सिद्ध

758
00:55:31,760 --> 00:55:35,760
नहीं हुआ कि इसी ने मारा है फिर भी उसके प्रति एक वैमनस्यता का

759
00:55:35,760 --> 00:55:39,960
भाव उत्पन्न हो जाए यह फोटो दिखाने का पीछे यही

760
00:55:39,960 --> 00:55:44,320
एक वो है इसी प्रकार से जो लोग यहां पर आते हैं जब उनसे

761
00:55:44,320 --> 00:55:48,520
एक कट टू कट बात हो रही होती है बहुत सौहार्द पूर्वक सिर्फ

762
00:55:48,520 --> 00:55:52,560
सीधे सधे जवाब देते चले और चीज आगे बढ़ती चली जाएंगी मगर वो

763
00:55:52,560 --> 00:55:57,440
क्या करते हैं कहीं का श्लोक बोलेंगे संस्कृत दिखाएंगे

764
00:55:57,440 --> 00:56:02,000
कहीं का कोई र वाणी बोलेंगे अब उससे कोई मतलब नहीं है

765
00:56:02,000 --> 00:56:06,320
मगर उससे क्या हो रहा है कि सुनने वालों के कानों में जाने के कारण

766
00:56:06,320 --> 00:56:10,480
क्योंकि सुनने वाले जो है सभी लोग अभी उतने बिल्कुल प्रेजेंस ऑफ

767
00:56:10,480 --> 00:56:14,480
माइंड के साथ नहीं बैठे हुए हर व्यक्ति अपनी अपनी स्थिति में बैठा हुआ है कोई

768
00:56:14,480 --> 00:56:18,800
कहीं पर सुन रहा है कोई बस में बैठा हुआ सुन रहा है कोई कहीं पर सुन रहा है सुन रहा है

769
00:56:18,800 --> 00:56:23,120
तो उसको क्या होगा कि जब वो उनके पास बातों का उत्तर

770
00:56:23,120 --> 00:56:26,560
नहीं होता और वो कबीर की वाणी वो दोहे के साथ

771
00:56:26,560 --> 00:56:30,560
के साथ गा के सुना देते हैं उससे क्या होता है व्यक्ति के मन में प्रभाव

772
00:56:30,560 --> 00:56:34,640
उत्पन्न करते हैं अपना बस और कुछ नहीं प्रभाव उत्पन्न किया

773
00:56:34,640 --> 00:56:38,800
सुनने वाले के मन में ये गया कि भाई इसकी बात में बड़ा दम है क्योंकि इसने अभी अभी

774
00:56:38,800 --> 00:56:43,040
संस्कृत के पांच श्लोक बोले हैं उससे कोई मतलब नहीं है वहां पर उसने कबीर

775
00:56:43,040 --> 00:56:47,080
की वाणी बोली है बड़ी अच्छी काव्य रचना उसम सुनाई दे रही है उससे कोई मतलब

776
00:56:47,080 --> 00:56:51,200
नहीं है विषय नहीं है वो विषय उत्तर देना था जो उत्तर नहीं दिया जा रहा है

777
00:56:51,200 --> 00:56:55,280
तो जब वो लोग ऐसा कर रहे होते हैं तो मुझे फिर वहां पर उनको

778
00:56:55,280 --> 00:56:59,320
बोलना पड़ता है कि ये मत करो आप केवल विषय पर

779
00:56:59,320 --> 00:57:03,360
रहो तो इसमें ऐसा लगता है इसमें ऐसा लगता है कि मैं

780
00:57:03,360 --> 00:57:07,640
सामने वाले को बोलने नहीं दे रहा हूं अगर वह विषय को ना बदले और यह

781
00:57:07,640 --> 00:57:11,840
व्यर्थ का अपना प्रभाव उत्पन्न करने के लिए यह जैसे कल एक भाई

782
00:57:11,840 --> 00:57:15,960
साहब आए थे बात चल रही है कि क्या प्रभुपाद

783
00:57:15,960 --> 00:57:19,960
जी ने गलत बोला झूठ बोला यह पूछा जा रहा है आप विश्वास

784
00:57:19,960 --> 00:57:24,280
करते वो संस्कृत के श्लोक बोल रहे भागवत के

785
00:57:24,280 --> 00:57:28,360
इनका वही हाल है वो जो मंडन मि जो तोता था ना वो भी संस्कृत अच्छी खासी बोल

786
00:57:28,360 --> 00:57:32,600
लेता था मब उनको थोड़ी माना जाएगा

787
00:57:32,600 --> 00:57:36,760
ये हाल है वो डू तो वाली हाल है इन लोगों का कि हा बस आके अपना

788
00:57:36,760 --> 00:57:41,080
प्रमाण साबित करना है मैं देखता रहता हूं आपका वीडियो वो कांसेप्ट है हमारा

789
00:57:41,080 --> 00:57:41,580
बट

790
00:57:41,560 --> 00:57:45,640
मैं फिर भी मेरे कोब कभी कभी लगता है कि मतलब बोलने का मौका देना चाहिए था

791
00:57:45,640 --> 00:57:49,840
एक बार उनको बात रखने की मौका देना चाहिए था इसीलिए मैंने अपने बात रख

792
00:57:49,840 --> 00:57:53,920
हा थोड़ देख के और अा एक चीज एक क्वेश्चन

793
00:57:53,920 --> 00:57:56,640
था मेरे मन में

794
00:57:56,640 --> 00:58:00,840
एक एक क्वेश्चन ली आपका एक वीडियो देख रहा था मैं

795
00:58:00,840 --> 00:58:05,280
जो वो मुस्लिम बंधु के चैनल पर किया था आपने मैसेंजर

796
00:58:05,280 --> 00:58:09,480
के आईडी से राइट तो उनके

797
00:58:09,480 --> 00:58:13,520
साइड से जैसे की हम बात रखते हैं कि भगवान कुछ भी कर सकता है भगवान

798
00:58:13,520 --> 00:58:17,720
सर्व शक्तिमान है तो हालांकि आपने वहां पर नेट

799
00:58:17,720 --> 00:58:22,480
तो किया था मैंने देखा था कि वो इटेट इरिटेशन मोड में जा रहे थे जो

800
00:58:22,480 --> 00:58:26,920
माइक में जो बंदे नहीं दिखाई दे रहे थे वो तो काफी इरिटेट हो गया था बंदा

801
00:58:26,920 --> 00:58:30,960
दूसरा जो फेस टू फेस जिसके चैनल पर आप गए थे वो अपने एक

802
00:58:30,960 --> 00:58:35,000
बात रखा था तो उसने यही एक क्वेश्चन किया था तो

803
00:58:35,000 --> 00:58:39,440
वो मैं ठीक से देख नहीं पाया थाहे मेरे को समझ में नहीं आया जैसे

804
00:58:39,440 --> 00:58:43,480
किने प्रप उसका उसम जितने भीय उत्पन्न हो

805
00:58:43,480 --> 00:58:47,600
सकते हैं उसका हमने वीडियो बनाया है आप पीछे जाइए हमारी वीडियो

806
00:58:47,600 --> 00:58:51,800
में तो क्वेश्चन आंसर रखे उस वीडियो प आप देखेंगे

807
00:58:51,800 --> 00:58:56,280
संतुष्ट हो जाएंगे

808
00:58:56,280 --> 00:59:00,320
उसका टाइटल है वाई सनातन सुप्रीम ऐसे करके एक वीडियो

809
00:59:00,320 --> 00:59:04,320
है भगवे में क्या खास है उसम मुक्ती जी की फोटो भी है

810
00:59:04,320 --> 00:59:08,440
मुफती थे ना वहा पर यासर अलजी क्या नाम

811
00:59:08,440 --> 00:59:12,520
है उनकी फोटो भी है उसम तो आप वो पीछे जाइए

812
00:59:12,520 --> 00:59:16,760
हमारी लिस्ट है जो वीडियोस की उसको देखिए उसम हमने जो उनका एक एक चीज है

813
00:59:16,760 --> 00:59:20,760
कहां कहा पर वो फसे कहां कहा पर वो अपनी बातें सिद्ध नहीं कर पाए तो उन

814
00:59:20,760 --> 00:59:26,760
चीजों को हमने वहा दिखाया है सारे उत्तर दि मैंने देखे हुए हैरा

815
00:59:27,040 --> 00:59:31,280
बट जो सेशन आपने जो देखा है ना

816
00:59:31,280 --> 00:59:35,320
उसी सेशन को लेकर के हमने फिर एक वीडियो बनाया है सारी बातें

817
00:59:35,320 --> 00:59:40,040
अपनी रखी है वो आप देखिए जसे क्या भगवान

818
00:59:40,040 --> 00:59:44,160
अपने एेंस को खत्म कर सकता है अपने ए से बाहर जा सकता है

819
00:59:44,160 --> 00:59:48,240
उस तरीके से वहा क्वेन रा किया था उन्होने तो उसी का आंसर

820
00:59:48,240 --> 00:59:52,640
आपको समझने आया था मतलब इस ब में क्या आप

821
00:59:52,640 --> 00:59:56,800
है दो पर्सपेक्टिव है परमा में

822
00:59:56,800 --> 01:00:00,880
ईश्वर अपने एक्जिस्टेंस से बाहर नहीं जा सकता परमार्थ में ईश्वर

823
01:00:00,880 --> 01:00:04,920
किसी को किसी के साथ अन्याय नहीं कर सकता यानी

824
01:00:04,920 --> 01:00:08,920
कि परमार्थ में एक तरीके से अगर अभी कहा जाए तो परमार्थ में ईश्वर

825
01:00:08,920 --> 01:00:11,320
जो है आपके अनुसार जो वाणी है

826
01:00:11,320 --> 01:00:15,400
उसके अनुसार वो सीमित हो रहा है ठीक है मगर वो हो

827
01:00:15,400 --> 01:00:19,680
कहां पर रहा है परमार्थ में व्यवहार में क्या होगा कि भाई

828
01:00:19,680 --> 01:00:25,680
व्यवहार में भगवान कृष्ण के रूप में आएंगे अपने एसिस्टेंसिया

829
01:00:26,160 --> 01:00:30,400
ये कृष्ण भगवान है वो शरीर में नहीं है एेंस छोड़ दिया यही तो है

830
01:00:30,400 --> 01:00:34,800
तो व्यवहार में वो कुछ भी कर सकते हैं और परमार्थ में

831
01:00:34,800 --> 01:00:39,000
जो परमार्थ जो है वो व्यवहार का अ विषय है व्यवहार का विषय

832
01:00:39,000 --> 01:00:43,040
नहीं है अब बात ये आती कहीं ना कहीं तो हो ही रहा है तो सीमित

833
01:00:43,040 --> 01:00:47,240
तो हो रहा है आपका भी तो बात ये आती है कि जो परमार्थ है उसका बोध

834
01:00:47,240 --> 01:00:51,480
आपको कब कब हुआ परमार्थ का बोध ही आपको

835
01:00:51,480 --> 01:00:56,400
तब होता है जब आपने व्यवहार में किसी को स्वीकार कर लिया कि ईश्वर

836
01:00:56,400 --> 01:01:00,400
है समझ रहे हैं परमार्थ का तब तक

837
01:01:00,400 --> 01:01:04,600
परमार्थ का तब तक एक्जिस्टेंस नहीं है आपके लिए जब तक आपने

838
01:01:04,600 --> 01:01:08,720
किसी को ईश्वर नहीं माना तो जब आपने किसी को ईश्वर मान

839
01:01:08,720 --> 01:01:12,920
लिया तो फिर वो परमार्थ में सीमित है निश्चित है बाधित है आपके

840
01:01:12,920 --> 01:01:17,120
शब्दों के अनुसार हालांकि वो इन व्यवहारों का विषय नहीं है वो तो

841
01:01:17,120 --> 01:01:21,480
प्राप्त का विषय मात्र है वाणी का अ विषय है मगर फिर भी

842
01:01:21,480 --> 01:01:26,360
आपकी आपकी भाषा में व निश्चित है सीमित है बाधित है सब कुछ है मगर

843
01:01:26,360 --> 01:01:30,480
आपने जब ईश्वर इसको मान लिया है तो वहां पर बाधित इत्यादि होने

844
01:01:30,480 --> 01:01:34,640
से उसको ईश्वर ना मानना आपका सिद्ध नहीं होगा और अगर

845
01:01:34,640 --> 01:01:38,960
आपने उसके अनुसार इसको खंडन कर दिया कि नहीं क्योंकि वह परमार्थ में बाधित

846
01:01:38,960 --> 01:01:43,240
है इसलिए मैं व्यवहार में उसे ईश्वर नहीं मानता तो जैसे ही आपने

847
01:01:43,240 --> 01:01:47,280
यह कहा कि व्यवहार में जो है व मैं उसे ईश्वर नहीं मानता तो अगर

848
01:01:47,280 --> 01:01:51,520
फिर आपसे पूछा जाएगा कि क्यों नहीं मानते तो आप कहोगे परमार्थ के कारण

849
01:01:51,520 --> 01:01:56,040
तो आपसे य पूछा जाएगा क्या परमार्थ एजिस्ट करता है

850
01:01:56,040 --> 01:02:00,760
आप अगर ईश्वर को नहीं मानते तो परमार्थ एजिस्ट ही नहीं करता है

851
01:02:00,760 --> 01:02:05,040
परमार्थ एस्ट तब करता है जब आपने ईश्वर को ईश्वर माना तो इसका संक्षिप्त

852
01:02:05,040 --> 01:02:09,120
उत्तर यह है कि ईश्वर का कुछ भी कर

853
01:02:09,120 --> 01:02:13,200
सकने वाला इस व्यवहारिक जगत में होना आवश्यक है व्यवहारिक

854
01:02:13,200 --> 01:02:17,360
जगत यह जो दुनिया हमें दिख रही है आज हमें किस ईश्वर की आवश्यकता

855
01:02:17,360 --> 01:02:21,400
है बारिश ज्यादा हो रही तो कम हो जाए अगर कोई व्यक्ति ईश्वर

856
01:02:21,400 --> 01:02:25,440
को मानता ही नहीं है तो उसके लिए परमार्थ अस्तव रखता है क्या कि वहां क्या हो रहा है

857
01:02:25,440 --> 01:02:30,320
क्या नहीं हो रहा उससे उसको मतलब नहीं है उसको यहां पर कोई कंट्रोलर चाहिए

858
01:02:30,320 --> 01:02:34,840
यहां पर पावरफुल चाहिए यहां पर अल माइटी चाहिए माइटी गॉड सर्वशक्तिमान

859
01:02:34,840 --> 01:02:39,000
चाहिए यहां प उ तो यहां जो व्यवहार व्यवहार में सब कुछ

860
01:02:39,000 --> 01:02:41,920
कर सके वो ईश्वर सर्वशक्तिमान है

861
01:02:41,920 --> 01:02:46,160
वो ईश्वर सर्व शक्तिमान है परमार्थ जो है वो केवल प्राप्ति का विषय है वहां

862
01:02:46,160 --> 01:02:50,200
व्यवहार का विषय नहीं है वो क क ये जो क्रिया वाली बात है ना

863
01:02:50,200 --> 01:02:54,280
वहां क्रिया की बात ही नहीं है वोसेफ प्राप्त हो सकता है तो ये बात

864
01:02:54,280 --> 01:02:58,480
है अब इसको ऐसे समझ लीजिए शॉर्ट एग्जांपल मैंने कई बार अपने वीडियो में बताया

865
01:02:58,480 --> 01:03:02,480
हालाकि कि एक सोता हुआ व्यक्ति यह नहीं कह सकता कि वो किसी

866
01:03:02,480 --> 01:03:06,640
के आवाज देने से जाग गया क्योंकि अगर

867
01:03:06,640 --> 01:03:10,920
वह सुन रहा है तो उसका सोना सिद्ध नहीं होता और अगर वह सो रहा है तो उसका

868
01:03:10,920 --> 01:03:15,040
सुनना सिद्ध नहीं होता तो इसी

869
01:03:15,040 --> 01:03:19,520
प्रकार अगर कोई व्यक्ति ईश्वर को ईश्वर मानता है तो परमार्थ

870
01:03:19,520 --> 01:03:23,640
के आधार पर ईश्वर को ना मानना सिद्ध नहीं होता और अगर परमार्थ

871
01:03:23,640 --> 01:03:28,080
के आधार पर वो ईश्वर को नहीं मानता है तो उसका परमार्थ

872
01:03:28,080 --> 01:03:31,280
को जानना सिद्ध नहीं

873
01:03:31,280 --> 01:03:36,400
होता इसको ब बार बार अगर सुनेगा

874
01:03:36,400 --> 01:03:40,560
सामान शंकराचार्य जीते रहते हैं सोने वाले उदाहरण देते

875
01:03:40,560 --> 01:03:44,880
है य नास्को के लिए देते हैं मे ल से जो नाक है

876
01:03:44,880 --> 01:03:48,880
को मतलब नहीं मानते हैं उसके लिए व एपल य बताते

877
01:03:48,880 --> 01:03:52,960
हैं सुनता रहते चलिए शिवान जी बहुत बहुत धन्यवाद आपका

878
01:03:52,960 --> 01:03:57,600
आप ऐसे ही लगे रहिए और

879
01:03:57,600 --> 01:04:01,760
आज धरातल पर आप जुड़िए धरातल पर किस प्रकार

880
01:04:01,760 --> 01:04:05,960
से हम कार्य कर सके इस इसके लिए आप जो है जुड़े

881
01:04:05,960 --> 01:04:10,080
केवल यही तक सीमित ना रखे आपका समर्थन इन सब बातों का

882
01:04:10,080 --> 01:04:14,280
परवन इन सब बातों का जो परवन है वह है हिंदू

883
01:04:14,280 --> 01:04:18,480
राष्ट्र संगोष्ठी एक बहुत आवश्यक एक

884
01:04:18,480 --> 01:04:22,560
प्रकल्प है गुरुदेव का कि हमारे मठ मंदिरों को हम शिक्षा

885
01:04:22,560 --> 01:04:26,840
रक्षा सेवा का केंद्र बनाए तो आपके घर के निकट जो भी मंदिर

886
01:04:26,840 --> 01:04:30,920
हो उसमें जो है बैठना प्रारंभ करें साप्ताहिक रूप से इसी को उन्होंने कहा

887
01:04:30,920 --> 01:04:35,000
है कि संगोष्ठी करिए हिंदू राष्ट्र नहीं तो राष्ट्रोदय राष्ट्र

888
01:04:35,000 --> 01:04:39,160
उत्कर्ष के नाम से करें मगर एक संगोष्ठी जो है हिंदुत्व के उत्थान के

889
01:04:39,160 --> 01:04:43,240
लिए निकट जो मंदिर हो उसमें करें तो ये सब जितना

890
01:04:43,240 --> 01:04:47,840
भी प्रचार प्रसार हो रहा है इन सबका प्रचार प्रसार

891
01:04:47,840 --> 01:04:51,960
उस गोष्ठी में कि हमारे हर दो किलोमीटर प एक मंदिर

892
01:04:51,960 --> 01:04:56,040
ऐसा हो एक बात करना चाहता हूं मैं मैं समझ गया जी एक मिनट

893
01:04:56,040 --> 01:05:00,320
मेरे को टाइम दीजिए जैसे कि मैंने आपको बताया कि मैं काफी टाइम से फॉलो

894
01:05:00,320 --> 01:05:04,480
करता हूं शंकराचार्य जी को भी आपको भी संगोष्ठी और जो ग्राउंड लेवल

895
01:05:04,480 --> 01:05:08,840
प जो बात करने की काम करने की जो बात कर रहे हैं बहुत

896
01:05:08,840 --> 01:05:12,680
से बहुत सालों पहले मैंने बहुत प्रयास किए थे

897
01:05:12,680 --> 01:05:16,920
लेकिन मैं एक अपने हिंदू समाज के अंदर में जो एक कुंठा

898
01:05:16,920 --> 01:05:21,080
भाव उत्पन्न है ना जो उनके जो मतलब पूरा का पूरा हिंदू

899
01:05:21,080 --> 01:05:25,240
समाज राजनीतिकरण का शिकार हो चुका है आज के टाइम प राजनीति

900
01:05:25,240 --> 01:05:29,320
से हटना चाह रहा है जो भी है उनके लिए अब जैसे कि एक

901
01:05:29,320 --> 01:05:33,400
बात बताऊ जैसे इस्लाम है चाहे जो

902
01:05:33,400 --> 01:05:37,960
क्रिश्चन है आज के सिनेरियो में उनके लिए क्या है वहां प क्या है

903
01:05:37,960 --> 01:05:42,160
कि उनके लिए एक ही व्यक्ति श्रेष्ठ है एक ही बुक उनके

904
01:05:42,160 --> 01:05:46,360
लिए प्रायोरिटी है ठीक है उसी तरह 2014

905
01:05:46,360 --> 01:05:50,400
के बाद से 2014 के बाद से हां तक मैंने ऑब्जर्व

906
01:05:50,400 --> 01:05:54,560
करने स्टार्ट किया हिंदू समाज के लिए एक ही व्यक्ति

907
01:05:54,560 --> 01:05:58,960
श्रेष्ठ हो गया है जिनका नाम है हमारे माननीय प्रधानमंत्री जी है

908
01:05:58,960 --> 01:06:03,680
और उनके एक ही पार्टी उनके लिए सर्वश्रेष्ट हो गई है

909
01:06:03,680 --> 01:06:07,840
जा रहे मैं यही पर आपको थोड़ा सा क्षमा चाहूंगा मुझे रोकना पड़ेगा जो कहने जा रहे हैं

910
01:06:07,840 --> 01:06:12,040
ठीक है समझ रहे हैं मगर इस बात को ऐसे हम लोग खत्म

911
01:06:12,040 --> 01:06:16,680
करें क्योंकि अन भी अन्य को भी लेना है और काफी समय हो गया हम

912
01:06:16,680 --> 01:06:20,960
तो इस बात को बस एक विचार के साथ समाप्त कर सकते हैं भगवान

913
01:06:20,960 --> 01:06:25,640
ने कहा कर्मन वादी कारते मा फले कदा

914
01:06:25,640 --> 01:06:28,840
ये बात है बक बात

915
01:06:28,840 --> 01:06:33,040
क एक अपने दिल की बात आपको बताया था शेयर किया था मैंने ऐसे नहीं

916
01:06:33,040 --> 01:06:37,160
बहुत प्रयास कि लेकिन क्या होता है जो हमारे राजा बाबू

917
01:06:37,160 --> 01:06:41,440
है हम उनको राजा बाबू बोलते हैं ठीक है वो राजा बाबू का कुकृत्य

918
01:06:41,440 --> 01:06:46,200
को जब आप फॉलो करना स्टार्ट करेंगे ना तो है

919
01:06:46,200 --> 01:06:50,320
देखिए उनके जो फॉलोअर्स इत्यादि है

920
01:06:50,320 --> 01:06:54,320
वो किस तरह से उनका प्रचार कर रहे हैं क्या नहीं कर रहे मगर

921
01:06:54,320 --> 01:06:58,400
जब कोई व्यक्ति मंच होता है ना तो उसके साथ बहुत सारी

922
01:06:58,400 --> 01:07:02,600
दिक्कतें होती है कि उसको क्या बोलना है क्या नहीं बोलना है तो वो उनका पर्सपेक्टिव

923
01:07:02,600 --> 01:07:07,760
हो सकता है हम लोग यहां उनकी विवेचना नहीं करेंगे और

924
01:07:07,760 --> 01:07:12,560
बात नहीं कर र मैं विवेचना की बात नहीं कर रहा हूं मैं हिंदू समाज के अंदर

925
01:07:12,560 --> 01:07:16,680
जो उनके प्रति जो भावना उत्पन्न हो चुकी है ना मैं उनके बारे में आपको शेयर

926
01:07:16,680 --> 01:07:21,320
करहा ब्लाइली ब्लाइली जो फॉलो करने वाली भावना है वो गलत

927
01:07:21,320 --> 01:07:25,760
है देश कोला वो पूरे मैं मोटा मोटा में कहना चाह रहा हूं

928
01:07:25,760 --> 01:07:29,840
ये पता है ये क्या हो रहा है य ये ये लोग डिपेंड जो होते

929
01:07:29,840 --> 01:07:34,200
जा रहे डिपेंड मतलब कि हमें कुछ करना ही नहीं है सब कुछ वही करें ये ये जो भावनाए

930
01:07:34,200 --> 01:07:38,240
गलत है ये उनके लिए भी हानिकारक है इन

931
01:07:38,240 --> 01:07:42,440
पर वो डिपेंड हो रहे हैं उनके लिए भी हानिकारक है ये वही

932
01:07:42,440 --> 01:07:44,000
मैं कह रहा हूं कि राजनीति के

933
01:07:44,000 --> 01:07:48,400
शिकार हो चुके हैं हिंदू समाज कोई कांग्रेसी है कोई भाजपाई है कोई सपाई है कोई

934
01:07:48,400 --> 01:07:52,440
अन्य पार्टी के कोई हिंदू नहीं है मैं आपको सची बताऊ कोई हिंदू भावना

935
01:07:52,440 --> 01:07:56,880
से सोच ही नहीं रहा है जो उनके मुद्दे होने चाहिए अरे अभी जो अभिमत

936
01:07:56,880 --> 01:08:01,160
सरान सरस्वती जी है इतना बड़ा गो ध्वज का यात्रा निकाल रहे हैं

937
01:08:01,160 --> 01:08:05,440
उनके बारे में कोई बात नहीं करता उनके जो मुद्दे होने चाहिए जैसे मंदिर

938
01:08:05,440 --> 01:08:09,600
है हमारे इतने बड़े बड़े मंदिर सरकार के अधीन में है उनके लिए

939
01:08:09,600 --> 01:08:13,760
कोई वोट नहीं मांगता उनके लिए कोई मुद्दा नहीं उठाता ऐसे बहुत से सारे कार्य

940
01:08:13,760 --> 01:08:17,800
है जो होने चाहिए हिंदू मुद्दों के आधार पर लेकिन कोई उसके टॉपिक पर बात नहीं

941
01:08:17,800 --> 01:08:21,920
करना चाहता बस राजा बाबू की जय जयकार करो और आने वाला देखिएगा

942
01:08:21,920 --> 01:08:25,920
आने वाले कुछ टाइमों में यह इनके पूजा पाठ और

943
01:08:25,920 --> 01:08:31,920
स्टार्ट हो चुके है ऐसे ऐसे क्या बता चलिए रहने

944
01:08:33,280 --> 01:08:37,280
दीजिए क मवादी कार माले कदाचना और

945
01:08:37,280 --> 01:08:41,720
यथा संभव जितना हो सकता है जिस अंश में हो सकता है उतना कार्य करें

946
01:08:41,720 --> 01:08:46,360
और नंबर पासम आपसे

947
01:08:46,360 --> 01:08:50,880
सग करते अवश जय श्री राम

948
01:08:50,880 --> 01:08:55,520
बकल पहले कौन आए थे ओम प्रकाश होता जी आए थे

949
01:08:55,520 --> 01:08:59,680
जी होता जी जय श्री

950
01:08:59,680 --> 01:09:03,960
राम जी भाई श्री मात्र नम

951
01:09:03,960 --> 01:09:08,600
जी जी उड़ीसा से हूं और

952
01:09:08,600 --> 01:09:12,040
भगवान शंकराचार्य

953
01:09:12,040 --> 01:09:16,240
श अच्छा एक जगह रुक जाते कक आप है वीडियो

954
01:09:16,240 --> 01:09:20,480
आपका डिस्टर्ब हो रहा है एक जगह रुक जाए

955
01:09:20,480 --> 01:09:24,360
की थ

956
01:09:24,360 --> 01:09:28,400
अभ जी जी बोलिए अभी रिसेंटली क्या

957
01:09:28,400 --> 01:09:32,480
हुआ था कि सग से हमारे घर में हमारे माता जी है और वो

958
01:09:32,480 --> 01:09:36,600
जगन्नाथ जी के बहुत बड़े भक्त है तो उनके कहने पर गए थे

959
01:09:36,600 --> 01:09:40,680
हम तुलसी माला लेने के लिए गए थे इसकन मंदिर कक

960
01:09:40,680 --> 01:09:44,880
यहां पर पास में नहीं है कुछ ऐसा मतलब जहां से संग्रह कर सके वो वाला

961
01:09:44,880 --> 01:09:49,440
तो जब वहां पर गए थे तो वहां पर उपनयन संस्कार हो रहा था

962
01:09:49,440 --> 01:09:53,440
ठी है ना उपन संस्कार वहां पर हो रहा था और वो मतलब कैसे डाल

963
01:09:53,440 --> 01:09:57,680
र जो जने होता है हमारा जो जने वो तो परंपरिक आता है लेकिन

964
01:09:57,680 --> 01:10:01,920
उनका जो नहीं होता है वो लाइन बाय लाइन ख खड़ा हो के रहते है 10 12 बंदे

965
01:10:01,920 --> 01:10:06,040
वन बाय वन बिना कोई मंत्र के आवश्यकता नहीं है हरे कृष्णा जब से वन बाय वन वन

966
01:10:06,040 --> 01:10:10,120
बाय वन आगे बढ़ते चलो हो गया तुम्हारा जन तो ये हो गया उसके

967
01:10:10,120 --> 01:10:14,120
बाद उन्होंने मुझे देखा उन्होने बोला क्या दीक्षा लेने आए हो

968
01:10:14,120 --> 01:10:19,000
तो उस समय वो त्रिपुंड लगा था मेरे माथे प

969
01:10:19,000 --> 01:10:23,080
तो मैंने बोला नहीं दीक्षा नहीं तो

970
01:10:23,080 --> 01:10:29,080
मायावादी परंपरा से हूं आपके हिसाब से मेरी ओर से भूल

971
01:10:29,480 --> 01:10:33,640
दिया उने ठीक है बैठी है मतलब समझाने लगे थोड़ा बैठी य

972
01:10:33,640 --> 01:10:37,720
पर ठीक है बैठ जाते बात करते हैं थोड़ा व बोलते हैं

973
01:10:37,720 --> 01:10:41,880
शिव जी का पूजा करते हो जरूर करते हैं शौक से करते हैं हमारे पिताजी

974
01:10:41,880 --> 01:10:46,240
भी करते हैं तो बोले की शंकराचार्य

975
01:10:46,240 --> 01:10:50,240
जी से मतलब जी नहीं बोले उनसे वो दीक्षा ले हो

976
01:10:50,240 --> 01:10:55,800
आप हा लिए काफी हो गया चार पाच साल हो गया लेते हुए

977
01:10:55,800 --> 01:11:00,000
तो फिर उन्होंने बोले कि ठीक है वो तो मतलब जो उनका परंपरा

978
01:11:00,000 --> 01:11:04,800
है वो उनके हिसाब से उनका जो परंपरा है व बरा मायावादी है और

979
01:11:04,800 --> 01:11:08,800
अगर आप उनके हिसाब से आते हो तो आप वैष्णव निंदा करते

980
01:11:08,800 --> 01:11:12,920
हो मतलब हमारे जो गुरु जी है वो वैष्णव निंदक है उनके हिसाब

981
01:11:12,920 --> 01:11:17,160
से हमने बोला ऐसा क्यों कि क्योंकि वो राम

982
01:11:17,160 --> 01:11:21,480
मंदिर के विरोध में थे मतलब हमारे मन में कुछ डालने लगे वहा पर

983
01:11:21,480 --> 01:11:26,360
हम बोला ठीक है तो इतना बड़ा जगन्नाथ मंदिर संभाल रहे जगन्नाथ मंदिर

984
01:11:26,360 --> 01:11:30,440
अधिव कौन है महादेव है क्या जगन्नाथ मंदिर अधिव व

985
01:11:30,440 --> 01:11:34,600
तो विष्णु ही है तो अगर सबसे दुनिया के सबसे

986
01:11:34,600 --> 01:11:38,800
बड़े वैष्णव मंदिर का आचार्य खुद बोल र है मतलब

987
01:11:38,800 --> 01:11:42,960
जगन्नाथ जी के भक्ति करने के लिए तो आप य कैसे क सकते हैं कि वो वैष्णव

988
01:11:42,960 --> 01:11:44,600
विरोध हो ग पहली बात तो

989
01:11:44,600 --> 01:11:48,920
दूसरी बात आप बोल रहे हैं कि जो वैष्णव नाम यथा शभु

990
01:11:48,920 --> 01:11:53,840
आपका जो प्रचलित वाड है तो

991
01:11:53,840 --> 01:11:58,160
अगर वो सबसे बड़े भक्त है मतलब भगवान कृष्ण के

992
01:11:58,160 --> 01:12:02,240
तो उनका एक भी फोटो आपके इसक मंदिर में नहीं है सबसे बड़ा भक्त

993
01:12:02,240 --> 01:12:06,280
है फिर भी आप एक भी फोटो नहीं आपके मंदिर में लेकिन

994
01:12:06,280 --> 01:12:10,520
प्रभुपाद जी केहे चैतन्य महाप्रभु है ठीक है वो भी आपके पूजन

995
01:12:10,520 --> 01:12:14,680
है लेकिन महादव के उनसे तो छोटा नहीं हो सकता ना भक्त

996
01:12:14,680 --> 01:12:18,760
के हिसाब से तो उनका फोटो क्यों नहीं लगाते नहीं नहीं वो सबसे

997
01:12:18,760 --> 01:12:22,840
बड़े भक्त नहीं है य आपकी ये आपका मिथ्या मिथ्या है ये वो

998
01:12:22,840 --> 01:12:27,560
उनके लिए सबसे बड़े भक्त नहीं वो कहने को यूज करते ववा नाम यथा

999
01:12:27,560 --> 01:12:31,680
क्योंकि 262 में उन्होंने बता दिया कि वो जो है इंद्रियों के वशीभूत है

1000
01:12:31,680 --> 01:12:35,840
और इत्यादि इत्यादि है और वह केवल अपनी बात को

1001
01:12:35,840 --> 01:12:40,480
रखते हुए चीजों को यूज करते हैं कंक्लूजन

1002
01:12:40,480 --> 01:12:45,000
को यूज अपनी बातों के जैसे कि अगर आदि शंकराचार्य

1003
01:12:45,000 --> 01:12:51,000
जी

1004
01:12:52,920 --> 01:12:57,160
मायावादी को वो कहते हैं उन्होंने फैलाया भज गोविंदम

1005
01:12:57,160 --> 01:13:01,600
अरे भाई तो तुम ही तो कह रहे हो वो गलत फैलाने आए थे भज गोविंदम गलत है

1006
01:13:01,600 --> 01:13:05,600
क्या भज गोविंदम गलत है क्या या तो यह कहो

1007
01:13:05,600 --> 01:13:10,240
कि वो गलत फैलाने नहीं आए थे या फिर यह कहो कि भज गोविंदम नहीं फैलाया उन्होंने

1008
01:13:10,240 --> 01:13:14,400
दोनों चीजों का आलंबन कैसे लेते हो भाई इतना बड़ा दोगलापन कैसे आया कहां

1009
01:13:14,400 --> 01:13:18,520
से सीखा य प्रॉब्लम है बहुत बड़ी मैं

1010
01:13:18,520 --> 01:13:23,480
एक बात क्लियर कर दूं उस समय थोड़ा सा ध्यान था इधर की

1011
01:13:23,480 --> 01:13:27,560
ओर देखते रहना पड़ता है क्योंकि आज वो गोष्ठी

1012
01:13:27,560 --> 01:13:31,600
भी है साप्ताहिक गोष्ठी जो हमारे य होती है अभी कुछ देर

1013
01:13:31,600 --> 01:13:36,040
पहले जो सज्जन आए थे पांडे जी वह शायद अप्रत्यक्ष रूप से मैंने ध्यान नहीं दिया

1014
01:13:36,040 --> 01:13:40,640
राम भद्राचार्य जी के बारे में बात कर रहे थे तो हमने

1015
01:13:40,640 --> 01:13:44,760
जो हमारे परंपरा प्राप्त जो आचार्य हैं परंपराओं से जुड़े हुए हैं उनके लिए उनकी कभी

1016
01:13:44,760 --> 01:13:48,800
समीक्षा नहीं करते हैं अपने चैनल पर और प्रत्यक्ष रूप से यदि हुई

1017
01:13:48,800 --> 01:13:53,240
है तो हमारे चैनल पर तो उसके लिए क्षमा प्रार्थी भी है

1018
01:13:53,240 --> 01:13:57,360
जितने अंश में हमने एक बनाया भी था मगर बहुत सम्मान के साथ

1019
01:13:57,360 --> 01:14:01,560
हमने उसमें भी प्रश्न ही पूछा था हमने समीक्षा नहीं की थी अपनी ओर से केवल

1020
01:14:01,560 --> 01:14:05,720
प्रश्न पूछा था वो भी एक वीडियो बना कर के जब उन्होंने ये वक्तव्य दे

1021
01:14:05,720 --> 01:14:07,920
दिया था कि चारों शंकराचार्य में

1022
01:14:07,920 --> 01:14:12,080
से कोई भी नहीं है जो पांच मिनट भी मुझसे जो है संस्कृत में बात कर सके

1023
01:14:12,080 --> 01:14:16,120
तो इस इस वक्तव्य के

1024
01:14:16,120 --> 01:14:20,240
उसमें जिज्ञासा जो हुई क्योंकि राम के भक्त है

1025
01:14:20,240 --> 01:14:24,360
और रामानंद संप्रदाय से हैं तो हम कहीं से भी उनका वो नहीं

1026
01:14:24,360 --> 01:14:28,360
कर सकते हैं और बहुत बड़े भी हैं और वह आचार्यों के स्तर की

1027
01:14:28,360 --> 01:14:32,400
बात होती है मगर एक शिष्य के रूप से ही हमने प्रश्न किया

1028
01:14:32,400 --> 01:14:36,720
था और मर्यादा में रहते हुए तो ऐसा कहीं भी

1029
01:14:36,720 --> 01:14:41,360
अगर अप्रत्यक्ष रूप से भी उनके लिए कोई समीक्षा हुई है तो उसके लिए

1030
01:14:41,360 --> 01:14:46,120
हम जो है क्षमा प्रार्थी है कि हमारे चैनल के माध्यम से हुई

1031
01:14:46,120 --> 01:14:50,400
और वैसे उन्होंने भी शायद मेरे ख्याल से नाम नहीं लिया था इस कारण से

1032
01:14:50,400 --> 01:14:54,680
हमारा भी ध्यान नहीं गया उर खर जी ओम प्रकाश जी

1033
01:14:54,680 --> 01:14:59,120
जी उसके बाद वहा पर बज रहा था हमारा जो जगन्नाथ अष्टकम होता है ना

1034
01:14:59,120 --> 01:15:03,440
गुरुजी का तो वहा पर व जगन्नाथ अष्टकम बज रहा था

1035
01:15:03,440 --> 01:15:07,520
तो हमने बोला अच्छा ये किसने लिखा तो बो वल्लभाचार्य

1036
01:15:07,520 --> 01:15:11,560
ने लिखा बो वल्लभाचार्य का देन है और

1037
01:15:11,560 --> 01:15:16,040
शंकराचार्य बस फला रहे ने बो मतलब ये कैसा बात हो गया मतलब

1038
01:15:16,040 --> 01:15:20,160
बरा दोला बात हो ग पह बात तो उसके बाद आ गया वहां पर एक

1039
01:15:20,160 --> 01:15:23,200
महिला थी वोकन की थी और किसकी थी मैंने नहीं

1040
01:15:23,200 --> 01:15:27,200
वो नहीं जानता ठीक से तो उन्होंने योज्य पवित्र उनके

1041
01:15:27,200 --> 01:15:31,400
ऊपर वहां पर डाला हुआ था उन्होंने और न जो

1042
01:15:31,400 --> 01:15:35,640
जो वहां पर है जो पुजारी है वो तो ब्राह्मण तो नहीं है जन्म से वो

1043
01:15:35,640 --> 01:15:39,880
जो मछली वगैरह पकड़ते हैं ना तो

1044
01:15:39,880 --> 01:15:44,000
उन्हीं बरने से कोई आते हैं और व वहां पर ब्राह्मण बनक पूजा करते हैं सेवा देते

1045
01:15:44,000 --> 01:15:48,240
हैं वकन मंदिर में तो उन्होंने बोला योज

1046
01:15:48,240 --> 01:15:54,240
तो स्त्रियों के लिए भी है बोला ठीक है यज्ञ में

1047
01:15:57,880 --> 01:16:02,160
गंजी कर उसके बाद गंज कर के हमार आचार्य

1048
01:16:02,160 --> 01:16:06,240
है जिनके बाद ज भी संस्कार किए है उन्होने उनके पास उनको

1049
01:16:06,240 --> 01:16:10,560
रहना पड़ेगा जो नियम है उसको भी तो पालन करना पड़ेगा ना

1050
01:16:10,560 --> 01:16:15,040
तोव क्या पालन कि इना लंबा बा ले रहे व पर

1051
01:16:15,040 --> 01:16:19,080
फिर दूसरा बा हो गया हमारा आ गया रामानंद

1052
01:16:19,080 --> 01:16:23,120
संप्रदाय है बोल हमारे लिए प्रामाणिक है

1053
01:16:23,120 --> 01:16:27,200
हमने बोला ठीक है तो तुलसीदास भी तो आपके लिए प्रामाणिक हो ग ना उसके

1054
01:16:27,200 --> 01:16:31,280
उस हिसाब से तो उन्होंने बोला हम तुलसीदास जी को बहुत मानते

1055
01:16:31,280 --> 01:16:35,520
हैं और वो प्रामाणिक है पूरा अगर वो प्रामाणिक है तो उन्होंने

1056
01:16:35,520 --> 01:16:39,760
अष्टकम लिखा था रुद्राष्टकम बोल के मैं एक बात कहना

1057
01:16:39,760 --> 01:16:43,880
चाहूंगा ओम प्रकाश जी हम लोग इसका सेशन रखेंगे स्कन

1058
01:16:43,880 --> 01:16:48,200
के लेकर के आपके किस तरह के वो है अभी हम लोग थोड़ा सा

1059
01:16:48,200 --> 01:16:52,880
वो वाली बातें यहां पर ले रहे हैं जो समर्थक है और

1060
01:16:52,880 --> 01:16:57,480
वो अपने विचार व्यक्त नहीं कर पाते हैं तो थोड़ा सा मैं आपको यहां पर इंटरप्ट करूंगा

1061
01:16:57,480 --> 01:17:01,520
कि हम लोग किसी दिन रखेंगे न पर चर्चा करेंगे एक आप

1062
01:17:01,520 --> 01:17:05,640
हमारा नंबर उस पर व करें तो आप उसमें डिटेल वाला फॉर्म है वो आप भर

1063
01:17:05,640 --> 01:17:10,120
दीजिएगा ठीक है हम लोग किसी दिन रखेंगे आपके साथ तो

1064
01:17:10,120 --> 01:17:13,200
अच्छा लगा आपने आपने इस प्रकार से भी एक समर्थन

1065
01:17:13,200 --> 01:17:17,400
ही प्रस्तुत किया है और आप रहे अभी आप जाए ना

1066
01:17:17,400 --> 01:17:21,520
अगर समय मिला तो अभी अंत में आपके साथ थोड़ी बाकी की चर्चा हम कर लेंगे काफी

1067
01:17:21,520 --> 01:17:25,880
देर से जो प्रतीक्षा में है तो उनको जरा मैं एक एक एक

1068
01:17:25,880 --> 01:17:30,280
मिनट जी जी जी बोलिए बोलिए

1069
01:17:30,280 --> 01:17:34,760
बोलिए जी जी और एक बात आ रही है हमारा यहां पर हमारा

1070
01:17:34,760 --> 01:17:38,960
एक कुलदेवी का मंदिर है यहां पर तो उसे हम अभी केंद्र

1071
01:17:38,960 --> 01:17:42,960
बनाने के लिए शुरू किए है क्योंकि इस एरिया में मैं अकेला हूं जो गुरुजी का शिष्य हूं और यहां पर कोई

1072
01:17:42,960 --> 01:17:47,360
नहीं है वैसे यहां पर हमारा एक वो चल रहा है अभी गोरख

1073
01:17:47,360 --> 01:17:51,400
आदि का अभी कुछ सजन कोई थे व

1074
01:17:51,400 --> 01:17:55,680
बहुत प्रभावी थे शंकराचार्य जी से और अ

1075
01:17:55,680 --> 01:18:00,120
दुर्गा पूजा था तो उनका पुजारी में था व कर्म के हिसाब से

1076
01:18:00,120 --> 01:18:04,680
तो वो वहां पर ब प्रभावित हुए और बोल रहे थे ठीक है हमारे

1077
01:18:04,680 --> 01:18:07,880
य

1078
01:18:07,880 --> 01:18:13,880
जोर आवाज आवाज आपकी क्लियर नहीं आ रही

1079
01:18:20,800 --> 01:18:26,200
है देवा जी देवा कुमार जी बताए

1080
01:18:26,200 --> 01:18:30,920
जय श्री राम जय श्री राम मेरा एक प्रश्न था

1081
01:18:30,920 --> 01:18:35,720
की महिलाओ प्रश्न के लिए नहीं है यह सेशन

1082
01:18:35,720 --> 01:18:39,880
आपने खामखा इतनी प्रतीक्षा की किस लिए

1083
01:18:39,880 --> 01:18:44,000
बताइएगा अभी हमने आपको बताया ना आप शुरू से देख रहे हैं

1084
01:18:44,000 --> 01:18:48,120
वाली चर्चा तो प्रश्नों के लिए नहीं

1085
01:18:48,120 --> 01:18:54,120
है नहीं सुना आपने

1086
01:18:56,000 --> 01:19:02,000
संतोष कुमार

1087
01:19:05,120 --> 01:19:09,360
जी संतोष कुमार अभी आपसे

1088
01:19:09,360 --> 01:19:13,360
ही फोन पर बात हुई थी क्या हमारी यह चर्चा

1089
01:19:13,360 --> 01:19:17,480
अभी किस विषय पर हो रही है य लाइव प आपसे पूछ रहा

1090
01:19:17,480 --> 01:19:21,920
हूं कि अभी आपसे कुछ समय पहले हमारी बात हुई है

1091
01:19:21,920 --> 01:19:27,920
क्या अभी मैं

1092
01:19:28,680 --> 01:19:32,800
सीधा आंसर नहीं देंगे क्योंकि किसी ना किसी प्रकार से

1093
01:19:32,800 --> 01:19:36,840
वो जैसे विश्वामित्र जी यज्ञ करते थे मैं आपसे पूछ रहा हूं आपसे अभी

1094
01:19:36,840 --> 01:19:41,000
हमारी फोन पर बात हुई है क्या पले हा

1095
01:19:41,000 --> 01:19:45,880
जी हा तो आप यह जो चर्चा है यह

1096
01:19:45,880 --> 01:19:50,400
वैचारिक मतभेद के लिए नहीं है आप फॉर्म भरिए फिर आराम से आइए

1097
01:19:50,400 --> 01:19:56,400
ठीक है क्यों अपना समय व्यर्थ कर रहे हैं

1098
01:19:57,120 --> 01:20:02,080
अब हम लेते हैं देवा कुमार जी भी प्रश्न लेकर आए थे

1099
01:20:02,080 --> 01:20:06,080
उनको भी हटाइए और संतोष कुमार जी को भी

1100
01:20:06,080 --> 01:20:10,040
हटा देते

1101
01:20:10,040 --> 01:20:14,840
हैं हा सिद्धांत जी को ले

1102
01:20:14,840 --> 01:20:18,920
लीजिए यह चर्चा किस विषय में मैं सभी को याद दिला द

1103
01:20:18,920 --> 01:20:23,200
दर्शकों को कि जो लोग हमारे कार्य

1104
01:20:23,200 --> 01:20:27,280
से संतुष्ट है व अपने विचार प्रकट करें इस बारे में है क्योंकि हम उनके

1105
01:20:27,280 --> 01:20:31,560
विचार ले नहीं पाते हैं कई बार तो यदि इस

1106
01:20:31,560 --> 01:20:35,760
इन विचारों को प्रकट करने हेतु आप आ रहे हैं तो आप जुड़े अन्यथा आप

1107
01:20:35,760 --> 01:20:41,760
ना जुड़े आज

1108
01:20:43,640 --> 01:20:48,280
तो जी जय हिंद जी जय श्री

1109
01:20:48,280 --> 01:20:53,000
राम जय श्री राम आवाज आ रही है मेरी

1110
01:20:53,000 --> 01:20:57,160
जी जी कुछ दिनों से आपके वीडियोस में देखता

1111
01:20:57,160 --> 01:21:01,240
हूं और काफी अच्छा लगता है क्योंकि शुरुआती दौर से

1112
01:21:01,240 --> 01:21:05,360
अद्वैत वेदांत मेरा जो है वो मतलब उसमें इंटरेस्ट

1113
01:21:05,360 --> 01:21:09,560
रहा है और आमतौर पर जो

1114
01:21:09,560 --> 01:21:13,800
कुछ अलग-अलग जगह पर हम जाते हैं तो हिंदू धर्म के बारे में अलग-अलग भ्रांतियां

1115
01:21:13,800 --> 01:21:17,840
रहती है उनमें से सबसे ज्यादा मुझे

1116
01:21:17,840 --> 01:21:21,920
भगवान आदि शंकराचार्य का जो अद विधांत है काफी क्लोज

1117
01:21:21,920 --> 01:21:26,040
लगता है और उनसे मैं काफी रिलेट कर पाता हूं अपनी सारी जो बातें

1118
01:21:26,040 --> 01:21:30,120
है और कहीं कहीं सभी चीजों का आंसर जो है वो मुझे

1119
01:21:30,120 --> 01:21:34,200
ढूंढना होता है तो वहीं पर ढूंढता हूं क्योंकि बाकी सब जगह पर

1120
01:21:34,200 --> 01:21:38,360
कोई ना कहीं कांट्रडिक्शन मुझे लगता है कि हो जाता है

1121
01:21:38,360 --> 01:21:42,600
तो आप जो काम कर रहे हैं वो बहुत अच्छा ही है और

1122
01:21:42,600 --> 01:21:46,960
आपको शुभकामनाए भी देता हूं क्योंकि अद्वैत मतलब

1123
01:21:46,960 --> 01:21:51,200
इस परंपरा से बहुत कम लोग जो है वोह इंटरनेट

1124
01:21:51,200 --> 01:21:55,200
पर ऊपर इस तरीके से वीडियोस बनाते हैं और रखते

1125
01:21:55,200 --> 01:21:58,720
क्य बाकी परंपरा के ऐसे बहुत सारे लोग है जो अपने वीडियोस डालते हैं

1126
01:21:58,720 --> 01:22:02,960
लाइव स्ट्रीम करते हैं और अपनी अलग अलग चीजों

1127
01:22:02,960 --> 01:22:07,080
पर बनाते लेकिन वेदांत दर्शन या भगवान आदि

1128
01:22:07,080 --> 01:22:11,520
शंकराचार्य के जो विचार है जो कि मूलभूत हमारे

1129
01:22:11,520 --> 01:22:15,720
विचार आते हैं तो उनके ऊपर बहुत कम ऐसे लोग हैं जो बात करते

1130
01:22:15,720 --> 01:22:19,880
हैं तो आप इस चीज को लेकर सोशल मीडिया के ऊपर आते

1131
01:22:19,880 --> 01:22:24,120
हैं क्योंकि आज की जो जनरेशन है वो ज्यादातर टाइम अपना सोशल

1132
01:22:24,120 --> 01:22:28,480
मीडिया ऊपर ही बिता द तो ऐसे में बहुत सारे भ्रम

1133
01:22:28,480 --> 01:22:32,840
होते हैं तो अगर उनको सही दिशा मिलती है और मार्गदर्शन

1134
01:22:32,840 --> 01:22:37,040
मिलता है तो बेहद बहुत ही अच्छी बात होगी

1135
01:22:37,040 --> 01:22:41,160
और काफी दिनों से आपके वीडियोस देखता हूं तो अच्छा लगता

1136
01:22:41,160 --> 01:22:45,480
है कि आप इस परंपरागत जो हमारे

1137
01:22:45,480 --> 01:22:49,600
चीज हैं वह आप सभी को बताते हैं

1138
01:22:49,600 --> 01:22:53,720
और आमतौर पर जो आपने कहते

1139
01:22:53,720 --> 01:22:57,840
हैं कि गुरु ग्रंथ और गोविंद तीन चीजों का जो

1140
01:22:57,840 --> 01:23:01,920
साथ में लेकर चलना वो भी जरूरी है क्योंकि बिना

1141
01:23:01,920 --> 01:23:06,200
गुरु के अगर आप जाएंगे तो शास्त्रों में भी कंफ्यूजन हो जाती है

1142
01:23:06,200 --> 01:23:10,600
बहुत सारे शास्त्र है और खास करके पुराणों के ऊपर

1143
01:23:10,600 --> 01:23:14,000
जो है वो बहुत सार ब्रह्म समाज में आज भी फैल

1144
01:23:14,000 --> 01:23:18,240
रहे हैं तो ऐसे में अगर एक गुरु होता है तो वो मार्गदर्शन

1145
01:23:18,240 --> 01:23:22,520
देता है और जीवन में आपको आगे बढ़ने के लिए प्रोत्साहन

1146
01:23:22,520 --> 01:23:26,880
मतलब वो एक मिल पाता है तो मेरा एक आपसे

1147
01:23:26,880 --> 01:23:31,120
ये अनुग्रह था कि आप जो एक ऐसे ग्रंथ की

1148
01:23:31,120 --> 01:23:35,600
नामावली के कौन-कौन से प्रमाणिक ग्रंथ है तो एक वीडियो आप जरूर बनाइए

1149
01:23:35,600 --> 01:23:39,680
कि ऐसे कौन सा ग्रंथ है हम पढ़ सकते जो बिगनर

1150
01:23:39,680 --> 01:23:43,760
के लिए वैसे में एक बार वो एकात्म धाम में

1151
01:23:43,760 --> 01:23:47,880
चन मिशन जी का जो रहता है उनमें से ग्रंथ की लिस्ट मैंने बनाई थी

1152
01:23:47,880 --> 01:23:52,400
लेकिन और भी अगर कोई अच्छे ग्रंथ है जो कि

1153
01:23:52,400 --> 01:23:57,000
अवत जो हमारी जो सिद्धांत को समझने के लिए

1154
01:23:57,000 --> 01:24:01,200
जो सिद्धांत मूलभूत सिद्धांत क्या है उनको परर भी अगर आप समय

1155
01:24:01,200 --> 01:24:05,200
मिले तो एक वीडियो जरूर बनाएगा कि कौन कौन से ग्रंथ है व

1156
01:24:05,200 --> 01:24:09,360
शुरुआती समय में पढ़ने चाहिए इन सब चीजों को बेसिक जानने

1157
01:24:09,360 --> 01:24:13,520
के लिए और बाकी सब बहुत ही अच्छा है आप

1158
01:24:13,520 --> 01:24:17,720
जो काम कर रहे उसके लिए आपको शुभकामनाए बहुत

1159
01:24:17,720 --> 01:24:20,240
बहुत आभार

1160
01:24:20,240 --> 01:24:26,160
आप और यही कहेंगे कि धरातल पर भी थोड़ा सा

1161
01:24:26,160 --> 01:24:29,400
सिद्धांत शर्मा जी मैं आपको लेने से

1162
01:24:29,400 --> 01:24:33,400
पहले संदेश देना चाहूंगा कि कुछ

1163
01:24:33,400 --> 01:24:37,560
ऐसे स्वयं को अद्वैत कहने वाले हैं

1164
01:24:37,560 --> 01:24:43,560
जो वैष्णवास्त्र

1165
01:24:54,440 --> 01:24:58,440
वास्तविक तौर पर मैं उनको नकली कहूंगा तो इनसे थोड़ा सा अपने आप

1166
01:24:58,440 --> 01:25:04,440
को बचाएं क्योंकि जितने भी

1167
01:25:14,880 --> 01:25:20,880
वैष्णवास्त्र

1168
01:25:21,480 --> 01:25:25,840
गुरु हैं शंकराचार्य इन्होंने कभी इस तरह की चीज नहीं सिखाई हमें

1169
01:25:25,840 --> 01:25:30,480
बल्कि हमने तो देखा है कि वह इतना ज्यादा आदर सम्मान करते हैं

1170
01:25:30,480 --> 01:25:34,840
कि अलग से इस विषय पर बात करने का कोई औचित्य नहीं बच जाता

1171
01:25:34,840 --> 01:25:38,880
है जब हमारे गुरुदेव ही कह रहे हैं कि मैं ऐसा

1172
01:25:38,880 --> 01:25:43,400
कोई कार्य नहीं कर सकता जिसमें प्रत्यक्ष अथवा अप्रत्यक्ष रूप से किसी

1173
01:25:43,400 --> 01:25:49,400
जो

1174
01:25:53,240 --> 01:25:57,480
वैष्णवास्त्र कर सकते हैं तो अगर परंपरा

1175
01:25:57,480 --> 01:26:01,640
प्राप्त शिष्य है शंकराचार्य के तो आपको उस

1176
01:26:01,640 --> 01:26:07,640
रूप में निर्णायक रूप से इसे मानना चाहिए और

1177
01:26:23,240 --> 01:26:27,480
वैष्णवास्त्र एक दूसरे के प्रति सम्मान की भावना होनी चाहिए जी

1178
01:26:27,480 --> 01:26:31,520
सिद्धांत शर्मा जी जय श्री राम जय श्री

1179
01:26:31,520 --> 01:26:36,640
राम शिवांश जी पहले तो आपके चरणों में कोटि कोटि

1180
01:26:36,640 --> 01:26:40,880
प्रणाम अरे नहीं आप इतना अच्छा काम कर रहे हैं और

1181
01:26:40,880 --> 01:26:45,000
कई सारे लोग हैं जो इस चीज को जानते हुए भी नहीं करना चाहते हैं

1182
01:26:45,000 --> 01:26:49,200
डर की वजह से कि कहीं कोई कुछ कर ना दे कहीं कोई कुछ मार ना दे

1183
01:26:49,200 --> 01:26:53,400
इसीलिए कई सारे लोग फसुक पर करते हैं य सारी चीजें और आईडी अपनी गुप्त

1184
01:26:53,400 --> 01:26:57,400
रखते हैं कि कोई आई दूसरी हो मेरी तो वो इस तरह से करते हैं आप खुले आम कर रहे हैं

1185
01:26:57,400 --> 01:27:01,480
ये सारे काम तो हम लोगों को काफी कुछ सीखने को मिल रहा है मैंने आपको

1186
01:27:01,480 --> 01:27:05,560
करीब दो या तीन महीने से फॉलो करना शुरू किया है जब मैं निग्रह चार्य

1187
01:27:05,560 --> 01:27:08,320
जी को ए अपने गुरुदेव मानता हूं एक तरह से

1188
01:27:08,320 --> 01:27:12,880
और उन उनकी एक पोस्ट आई थी निग चार जी की कि देखिए अभी

1189
01:27:12,880 --> 01:27:17,840
मतलब आर्य समाज के लोग जो है अब आपसे क्या कहते हैं ये

1190
01:27:17,840 --> 01:27:22,040
डिस्कशन वगैरह नहीं करना चाहते आपके ऊपर कुछ निकाल दिया था उन्होंने

1191
01:27:22,040 --> 01:27:26,160
वो पोस्ट डाली हा तो निगरा चार्य जी ने ये पोस्ट डाली

1192
01:27:26,160 --> 01:27:30,240
थी वहां से मैंने फिर आपको फॉलो करना शुरू किया क्योंकि मैं तीन साल से निगरा चार्य जी से जुड़ा

1193
01:27:30,240 --> 01:27:34,280
हुआ हूं और उन्हीं की मतलब जो जितनी भी मतलब में मेरे अधिकार में

1194
01:27:34,280 --> 01:27:38,520
चीजें हैं और जितना भी मैं मतलब फॉलो कर पाता हूं उतना

1195
01:27:38,520 --> 01:27:43,160
उनको मानता हूं उतनी उनकी बातें सुनता हूं और उन्हीं के थ्रू मैं आपसे जुड़ पाया था

1196
01:27:43,160 --> 01:27:47,240
और आपसे केवल यही कहना चाहूंगा कि मतलब आपने जो काम कर रहे हैं

1197
01:27:47,240 --> 01:27:51,280
बहुत अच्छा कर रहे हैं और एक तो क्या है कि हम लोगों

1198
01:27:51,280 --> 01:27:55,280
को कई सारे हिंदुओं को यह चीज नहीं पता है कि तो वर्ण व्यवस्था

1199
01:27:55,280 --> 01:27:59,280
के बारे में और दूसरा उनको यह नहीं पता कि हम किस आचार्य से जुड़े हमारी कुल

1200
01:27:59,280 --> 01:28:03,760
परंपरा क्या है हमारे कुल देवी क्या है कुल देवता क्या है कुल भैरव क्या है

1201
01:28:03,760 --> 01:28:07,880
लोगों को इसके बारे में बिल्कुल भी नॉलेज नहीं है और वो क्या करते हैं कि वो टीवी देखते

1202
01:28:07,880 --> 01:28:11,920
हैं कहीं किसी के साथ जुड़ जाएंगे कहीं किसी के साथ जुड़ जाएंगे उनको मानने लगेंगे जबकि अपने

1203
01:28:11,920 --> 01:28:15,960
कुल परंपरा को लोग पालन नहीं करते य चीज मैंने आपसे और निगरा चार जी से दोनों

1204
01:28:15,960 --> 01:28:20,000
से सीखी कि अपने कुल परंपरा से जो प्राप्त आचार्य उनके साथ जुड़िए और

1205
01:28:20,000 --> 01:28:23,440
वर्ण व्यवस्था का क्या हैमा जी मैं आपको बोलूंगा आपने वर्ण

1206
01:28:23,440 --> 01:28:27,480
व्यवस्था के वि मैं काफी अच्छे से समझाया तो मैं उसी को जब भी मैं कुछ अगर मुझसे कोई

1207
01:28:27,480 --> 01:28:31,600
बोलता है कि अरे क्या हो गया अगर किसी ने ठाकुर ने किसी से बनिए

1208
01:28:31,600 --> 01:28:35,600
से विवाह कर लिया यह सब बोल दिया तो मैं आपके आपका जो वीडियो का

1209
01:28:35,600 --> 01:28:39,760
जो मैंने आपसे सीखा है उसी के थ्रू मैं उनको समझाता हूं और जो मैंने जो मेरे

1210
01:28:39,760 --> 01:28:43,760
दोस्त है ब्राह्मण मित्र उनके थ्रू जो मैंने जाना है इसके आगे क्या परिणाम होते हैं

1211
01:28:43,760 --> 01:28:47,800
मतलब आध्यात्मिक क्या परिणाम होते है जैसे पिंडदान उनकी जो मतलब संतान होगी वो

1212
01:28:47,800 --> 01:28:52,080
पिंडदान वगैरह नहीं कर पाएगी हमारे जो पूर्वज होंगे वो नरक गामी हो जाएंगे श्राप देंगे

1213
01:28:52,080 --> 01:28:56,360
मतलब हमारी जो आने वाली पीढ़ उसका ना निश्चित है तो यह सारी चीजें

1214
01:28:56,360 --> 01:29:00,440
मैंने आपके थ्रू और हमारे जो ब्राह्मण मित्र है जो निग्रह चार जी है आपके थ्रू

1215
01:29:00,440 --> 01:29:04,480
सीखी हुई है तो आपका जो कार्य है मैं बोलूंगा कि मतलब बहुत अच्छा आप कार्य कर रहे

1216
01:29:04,480 --> 01:29:08,720
हैं और इसी तरह से आप करते रहिए और एक और चीज है जो स्पन

1217
01:29:08,720 --> 01:29:12,800
के विषय में लोगों को नहीं पता है लोग स्पन के विषय में भी मतलब बोलते हैं

1218
01:29:12,800 --> 01:29:16,800
कि रे नहीं यह बहुत अच्छे हैं इस तरह से ये काम करते हैं अब उनसे उनकी कई सारी

1219
01:29:16,800 --> 01:29:21,320
वीडियोस है वो यह बोलते हैं कि अल्लाह क्या कहते हैं अल्लाह और जीसस हमारे

1220
01:29:21,320 --> 01:29:25,320
मतलब क्या श्री कृष्ण भगवान के समान है और आप शिव जी

1221
01:29:25,320 --> 01:29:29,400
के बारे में उनसे पूछोगे तो शिव जी के बारे में बोलते हैं कि नहीं शिव जी छोटे है शिव

1222
01:29:29,400 --> 01:29:33,600
जी भक्त है मतलब आप अल्लाह को और जीसस को शिव जी से ऊपर रख रहे हैं जबकि

1223
01:29:33,600 --> 01:29:37,760
शिव जी आप जानते हैं ख आप शंकर परंपरा से हैं और मतलब शिव जी क्या मायने रखते

1224
01:29:37,760 --> 01:29:38,520
हम लोगों के लिए

1225
01:29:38,520 --> 01:29:42,840
और वो शिव जी के विषय में जब से हमने

1226
01:29:42,840 --> 01:29:46,880
इकोन से सवाल पूछना चालू किया है कि कृष्ण अल्लाह

1227
01:29:46,880 --> 01:29:50,880
को एक क्यों कहते हो तो इसन उसका उत्तर देने के लिए यह

1228
01:29:50,880 --> 01:29:54,960
बोलने लगते हैं कि अरे वो उन्होंने भी तो अलोक निषद को स्वीकार कर

1229
01:29:54,960 --> 01:29:59,000
लिया तो इन सब बातों का केवल एक ही उत्तर प्राप्त

1230
01:29:59,000 --> 01:30:03,240
होता है ऑफिशियल उन्होंने खंडन किया कुरान

1231
01:30:03,240 --> 01:30:07,240
का कुरान की सीमा का ईश्वर अवतार नहीं ले सकता

1232
01:30:07,240 --> 01:30:11,480
बाधित है क्या आपने ऑफिशियल कहीं खंडन किया है कुरान की

1233
01:30:11,480 --> 01:30:15,720
कुरान का कहीं नहीं किया उन्होने नहीं किया

1234
01:30:15,720 --> 01:30:19,720
आप उनके जो फॉलोअर्स है जिनम अभी भी शंकराचार्य

1235
01:30:19,720 --> 01:30:24,040
है उनके जो फॉलोअर्स है जो अपने आप को स्कोन समझन

1236
01:30:24,040 --> 01:30:30,040
समझते हैं मगर उनमें अभी भी शंकराचार्य है प्रमाणिक

1237
01:30:33,080 --> 01:30:39,080
वैष्णवास्त्र

1238
01:30:41,640 --> 01:30:45,920
है कितना भी आप लोग इधर उधर से कैसे भी पकड़ लो प्रत्यक्ष

1239
01:30:45,920 --> 01:30:50,000
प्रमाण आपको दे दिया गया कि कुरान और बाइबल का खंडन प्राप्त है शंकराचार्य

1240
01:30:50,000 --> 01:30:52,920
जी के द्वारा

1241
01:30:52,920 --> 01:30:57,360
ठीक

1242
01:30:57,360 --> 01:31:02,240
इसको इस बात का आलंबन लिया जाता है इसी तरीके से

1243
01:31:02,240 --> 01:31:06,320
जी तो मैं यही यही कहना शवा आप जो कार्य कर रहे

1244
01:31:06,320 --> 01:31:10,920
हैं य बहुत अच्छा कार्य कर रहे हैं और यही चाहूंगा मैं कि आप ज्यादा से ज्यादा जो

1245
01:31:10,920 --> 01:31:15,120
जैसे जो हिंदू है और जो हमारे दूसरी कम्युनिटी के मतलब दूसरी

1246
01:31:15,120 --> 01:31:19,160
कम्युनिटी मतलब दूसरी जाति के जो लोग हैं जैसे क्षत्रिय है वैस्य

1247
01:31:19,160 --> 01:31:23,200
हैं और शूद्र जाति से भी जो है उनको भी जोड़िए आप मैं तो जितना

1248
01:31:23,200 --> 01:31:27,520
ज्यादा हो सक सब जुड़े हैं सब जुड़े हैं अभी देखिए गुरुदेव

1249
01:31:27,520 --> 01:31:31,600
के जहां प्रवचन होते हैं ब्राह्मण क्षत्रिय वैश शूद्र सब सुनते हैं वहां पर भंडारा

1250
01:31:31,600 --> 01:31:35,760
होता है ब्राह्मण क्षत्रिय वैश्य शूद्र सब खाते हैं हमारी जो हिंदू राष्ट्र संगोष्ठी

1251
01:31:35,760 --> 01:31:40,160
होती है उसमें ब्राह्मण क्षत्रिय वैश शूद्र सब कार्य करते हैं यह तो केवल

1252
01:31:40,160 --> 01:31:44,320
इस पर तो रोटियां सेकने वाले हैं जो प्रचार तंत्र में वो रोटियां

1253
01:31:44,320 --> 01:31:48,840
सेकते हैं धरातल पर आप देखोगे तो सब कुछ सब जगह हो रहा है

1254
01:31:48,840 --> 01:31:53,160
ठीक है बहुत बहुत अच्छा लगा आपका वक्तव्य सु जय श्री राम आप

1255
01:31:53,160 --> 01:31:57,360
जी धन्यवाद आप अवनीश दीक्षित जी जय

1256
01:31:57,360 --> 01:31:59,640
श्री

1257
01:31:59,640 --> 01:32:04,120
राम आपका जी शिवांश भाई जय श्री राम कैसे हैं

1258
01:32:04,120 --> 01:32:08,200
आप जी जी कृपा मेरा यही मेरा एक

1259
01:32:08,200 --> 01:32:12,440
ही विचार है आपके प्रति कि यह जो आपका कार्य है बड़ा ही सराहनीय

1260
01:32:12,440 --> 01:32:16,600
है बस यह कार्य अनवरत चलता रहे यही श्री राम

1261
01:32:16,600 --> 01:32:20,600
से प्रार्थना रहेगी जो वैदिक मार्ग पर प्रशस्त है और

1262
01:32:20,600 --> 01:32:24,840
गृहस्थ आश्रम में प्रशस्त है तो वो मति भ्रम ना हो उनका उसको लेकर

1263
01:32:24,840 --> 01:32:28,840
यह कार्य आपका अनवरत जारी रहे आभार

1264
01:32:28,840 --> 01:32:32,960
आपका आभार और एक एक आपसे निवेदन रहेगा कि आपकी

1265
01:32:32,960 --> 01:32:37,040
जो वो आपका काव्य जो है आपकी कविता वो धरातल

1266
01:32:37,040 --> 01:32:41,280
पर कब आएगी उसका बड़ा इंतजार है हम लोगों को

1267
01:32:41,280 --> 01:32:46,240
इसकी सूचना कब तक हम लोगों को प्राप्त हो

1268
01:32:46,240 --> 01:32:50,400
जाएगी उस पे हम लोग कर रहे हैं उसको अच्छे से बनाने का

1269
01:32:50,400 --> 01:32:55,720
प्रयास जी जल्दी आपको सुनने को मिलेगा

1270
01:32:55,720 --> 01:33:00,280
बहुत सारे कार्य करने के लिए अगले माह लखनऊ आ रहे हैं

1271
01:33:00,280 --> 01:33:04,800
जगतगुरु शंकराचार्य जी तो व भी हई में भी कार्यक्रम

1272
01:33:04,800 --> 01:33:08,840
हरदोई में भी कार्यक्रम लिया गया है शायद जनवरी में 14 या 15

1273
01:33:08,840 --> 01:33:12,880
तारीख के बाद आगमन रहेगा उनका ज गुरुदेव

1274
01:33:12,880 --> 01:33:17,200
और मुझे लगे य तो ध्यान आ गया तो मैं यह बता दूं जी

1275
01:33:17,200 --> 01:33:21,200
गुरुदेव का एक एप्लीकेशन आ गया गोवर्धन मट का इसमें उनकी इंफॉर्मेशन रहती

1276
01:33:21,200 --> 01:33:25,200
कि अब गुरुदेव इस समय कहां मिलेंगे तो हमसे बजाय फोन

1277
01:33:25,200 --> 01:33:29,480
करके अपना समय और वो नष्ट करने से बचे वो एप्लीकेशन डाउनलोड कर ले

1278
01:33:29,480 --> 01:33:33,600
उसम और भी बहुत सी चीज प्रकल्प चल रहे हैं अच्छा रहेगा वहां से आपको

1279
01:33:33,600 --> 01:33:37,840
सब कुछ प्राप्त हो जाएगी जानकारी बहुत

1280
01:33:37,840 --> 01:33:42,240
बहुत आभार आपका शुक्रिया जी

1281
01:33:42,240 --> 01:33:46,760
विनय जी जय श्री राम जय श्री राम शिवान

1282
01:33:46,760 --> 01:33:51,280
जी जैसे मैंने वो आपका टाइटल देखा तो मुझे लगा कि

1283
01:33:51,280 --> 01:33:55,560
अप्रिशिएट तो करना ही चाहिए इतना इतना ऐसा

1284
01:33:55,560 --> 01:33:59,880
कार्य तो शायद ही कोई कर रहा है पूरे हमारे समाज में

1285
01:33:59,880 --> 01:34:01,360
और जब मैंने आपको

1286
01:34:01,360 --> 01:34:05,360
स्टार्टिंग में देखा तो मुझे ऐसा लगा कि ऐसे डायरेक्ट

1287
01:34:05,360 --> 01:34:09,440
टेंपल के अंदर घुस के डायरेक्ट उनको चैलेंज करना मतलब बहुत ही

1288
01:34:09,440 --> 01:34:13,480
बड़ा बड़ा कार्य है ऐसे कोई करता नहीं किसी के

1289
01:34:13,480 --> 01:34:17,800
हिम्मत नहीं है तो उ उस वक्त से मैं आपको फॉलो करने लग गया और जैसे

1290
01:34:17,800 --> 01:34:22,040
जैसे देखता गया कि सब सब के सब बाकी के जितने भी तथागत समाजी है समाझ

1291
01:34:22,040 --> 01:34:27,040
लोग है बाकी तथा गति संप्रदाय जो बताते अपने आपको

1292
01:34:27,040 --> 01:34:31,040
वो वो जवाब नहीं दे पाते जभी भी प्रश्न करते

1293
01:34:31,040 --> 01:34:35,400
जैसे कि हम सबको पता है कि अद्वैत को जो सत्य

1294
01:34:35,400 --> 01:34:39,520
है उसको कोई हरा नहीं सकता इसलिए उनके पास कोई जवाब

1295
01:34:39,520 --> 01:34:43,520
ही नहीं जवाब भी नहीं मिलता तो मुझे एक्चुअली बहुत

1296
01:34:43,520 --> 01:34:47,960
ही एक चीज बताना है कि ऐसे

1297
01:34:47,960 --> 01:34:52,120
कुछ जो सीरियस लोग है जिनको धर्म को जानना है

1298
01:34:52,120 --> 01:34:56,520
या फिर जो डिबेट कर सकते हैं अच्छे से जाके जैसे आपके जैसे

1299
01:34:56,520 --> 01:35:00,600
जैसे हम लोग कहते हैं कि पारस मण जो होता है वो लोखंड को

1300
01:35:00,600 --> 01:35:05,280
छूने से मतलब लोहे को छने से सोना बना देता है

1301
01:35:05,280 --> 01:35:09,280
लेकिन पारस मण लोहे को पारस नहीं बना

1302
01:35:09,280 --> 01:35:13,600
सकता तो ठीक उसी तरह आप आपके जैसे

1303
01:35:13,600 --> 01:35:17,320
कोई ऐसा कोई तैयार होना चाहिए जो बहुत

1304
01:35:17,320 --> 01:35:21,360
सब जगह सब जगह जाके ऐसे चैलेंज करना चाहिए इ लोगों को

1305
01:35:21,360 --> 01:35:25,400
ताकि य जो बकवास चीज चल रहा सब खत्म हो जाए जल्द से

1306
01:35:25,400 --> 01:35:29,480
जल्द तो यही निवेदन है कि जो सीरियस लोग है उनके लिए

1307
01:35:29,480 --> 01:35:33,720
आप कुछ अलग क्लास या फिर अलग

1308
01:35:33,720 --> 01:35:37,880
सेशन में उनको आप जोड़िए और उनको तैयार कीजिए नहीं क्ला हम लोग

1309
01:35:37,880 --> 01:35:42,040
इसी उद्देश्य से चला रहे कि हर घर में एक धर्म रक्षक हो

1310
01:35:42,040 --> 01:35:46,760
जो युक्ति और प्रमाण के साथ अपने धर्म की रक्षा करने में वैचारिक

1311
01:35:46,760 --> 01:35:51,080
जो क्रांति लाने के लिए सामर्थ्य मान हूं

1312
01:35:51,080 --> 01:35:55,320
मगर इसमें क्या होता है कि जब भी हम लोग बात

1313
01:35:55,320 --> 01:35:59,680
करते हैं तो कई लोग इसमें एक भ्रांति ले आते हैं अपने मन में

1314
01:35:59,680 --> 01:36:04,160
विशेष तौर पर विपक्षी जो लोग हैं जो सहमत नहीं है कि

1315
01:36:04,160 --> 01:36:08,320
भाई ये जो है अपनी वर्चस्व होता के लिए लड़ रहा है अपने

1316
01:36:08,320 --> 01:36:12,760
अपने मत का वो लाना चाहता है कि दयानंद

1317
01:36:12,760 --> 01:36:17,280
जी को मत मानो और जो है शंकराचार्य को मानो ये एक दिक्कत है

1318
01:36:17,280 --> 01:36:21,920
मोटिव समझने के लिए है कि हम सर्वशक्तिमान

1319
01:36:21,920 --> 01:36:25,960
ईश्वर का प्रचार कर रहे हैं अगर कोई ऐसा सिद्धांत

1320
01:36:25,960 --> 01:36:30,200
है जो शंकराचार्य का नहीं है और वहां से सर्व

1321
01:36:30,200 --> 01:36:32,440
शक्ति मत्ता सिद्ध हो जाए धर्म

1322
01:36:32,440 --> 01:36:36,680
की शाश्वता सिद्ध हो जाए मोक्ष की परम स्वतंत्रता सिद्ध

1323
01:36:36,680 --> 01:36:40,720
हो जाए तो मैंने कई बार यह कहा है कि आप वो सिद्धांत हमें दे दीजिए हम

1324
01:36:40,720 --> 01:36:44,960
उसी को लेके चलेंगे हमें हमें अपने संप्रदाय की वर्चस्व

1325
01:36:44,960 --> 01:36:49,240
की कोई लड़ाई नहीं है हार या जीत की लड़ाई लड़ाई नहीं है यह है धर्म

1326
01:36:49,240 --> 01:36:53,240
रक्षा हमें अपने धर्म को संगठित करना है और संगठित

1327
01:36:53,240 --> 01:36:57,320
करने लिए अका सिद्धांत चाहिए जिसको काटा ना जा

1328
01:36:57,320 --> 01:37:01,720
सके ऐसा सिद्धांत दीजिए काटा जा सकेगा

1329
01:37:01,720 --> 01:37:05,720
तो दिक्कत आ जाएगी तो अगर आपके पास है तो दे

1330
01:37:05,720 --> 01:37:09,960
दीजिए हम उसी का प्रचार करें हमारा यह रहता है हमारा जो देखि व व्यक्तिगत

1331
01:37:09,960 --> 01:37:14,040
है कि हमारी आस्था किसम निष्ठा किसम हम अपनी प्रैक्टिसिंग कैसे

1332
01:37:14,040 --> 01:37:18,480
कर रहे हैं मगर समाज को राष्ट्र को धर्म को मानवता को

1333
01:37:18,480 --> 01:37:22,560
कौन सा सिद्धांत बचा सकता है उसके लिए हम लोग लड़ रहे

1334
01:37:22,560 --> 01:37:26,600
हैं हमारा इससे म मतलब नहीं है कि हमारी आस्था क्योंकि शंकराचार्य की है तो इसलिए

1335
01:37:26,600 --> 01:37:31,000
हम आदि शंकराचार्य जी का प्रचार कर रहे हैं हम वो चीज लेकर नहीं चल रहे हम

1336
01:37:31,000 --> 01:37:35,440
समाज को संगठित कैसे करें बिखरे हुए सनातन समाज को

1337
01:37:35,440 --> 01:37:39,600
बराबर कैसे करें हर कदम पर एक नया मत है हर

1338
01:37:39,600 --> 01:37:43,680
कदम पे इस कारण से वो जब हम जाकर के बात

1339
01:37:43,680 --> 01:37:47,560
करते हैं कि कोई नहीं है चक्कर में मत प्रकर में हमारा वहां पर भाव ये

1340
01:37:47,560 --> 01:37:51,680
होता है कि हम सार्वभौम सिद्धांतों को कह रहे हैं हम शंकराचार्य की वहां

1341
01:37:51,680 --> 01:37:55,880
पर वर्चस्व स्थापित नहीं कर रहे वो बात और है कि ऐसे अकाट्य

1342
01:37:55,880 --> 01:38:00,040
सिद्धांत उन्हीं से प्राप्त है वो बात एक अलग विषय है मगर

1343
01:38:00,040 --> 01:38:04,080
हम अकाट्य सिद्धांतों का प्रचार कर रहे हैं हर तरह से बात को

1344
01:38:04,080 --> 01:38:08,200
अका रूप से रख दो सारे विधर्मी वही हार जाएंगे अभी कुछ दिनों

1345
01:38:08,200 --> 01:38:12,240
पूर्व देखिए एक महिला आई थी वो अच्छी खासी व्याख्याता थी

1346
01:38:12,240 --> 01:38:16,320
अपने पक्ष मु पाच मिनट लगे उन्होंने क्विट कर

1347
01:38:16,320 --> 01:38:21,120
दिया क्यों किया साका सिद्धांत रखेंगे

1348
01:38:21,120 --> 01:38:25,120
कोई बात आएगी नहीं तुम्हारे यहां कितने विवाह होते कितने नहीं होते हैं ऊंच

1349
01:38:25,120 --> 01:38:29,160
नीच ये सब जो आजकल जैसे कई और भी इस्लाम

1350
01:38:29,160 --> 01:38:33,680
के खंडन में बहुत से चैनल चल रहे हैं तो वहां पर जो खंडन होता है वो

1351
01:38:33,680 --> 01:38:37,720
इस प्रकार से होता है तुम्हारे य स्त्रियों के साथ ये

1352
01:38:37,720 --> 01:38:42,040
किया जाता है वो किया जाता है ये है वो है यही सब बातों पर होता है

1353
01:38:42,040 --> 01:38:46,240
मगर इन सब बातों का बिंदु वहां खत्म हो जाता है जब दयानंद जी से पूछा

1354
01:38:46,240 --> 01:38:50,920
गया सत्यार्थ प्रकाश में पूर्व पक्ष के रूप में वहां पर एक बात आई

1355
01:38:50,920 --> 01:38:55,040
कि भाई ये जो नियोग की प्रक्रिया है य मुझे व्यभिचार जैसी लग

1356
01:38:55,040 --> 01:38:59,080
रही है ठीक है तो दयानंद

1357
01:38:59,080 --> 01:39:02,560
जी का वहा पर उत्तर है कि तुम्हें जो विवाह आदि की

1358
01:39:02,560 --> 01:39:06,840
प्रक्रिया है कि विवाह होना चाहिए यह कहां से प्राप्त हुई है धर्म

1359
01:39:06,840 --> 01:39:10,960
से ईश्वर से ईश्वर ही कह रहा है नियोग हो सकता है

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01:39:10,960 --> 01:39:15,120
ईश्वर ही कहर नियो हो सकता है तो फिर वहां पर य सवाल नहीं रह गया कि वय

1361
01:39:15,120 --> 01:39:19,200
विचार है जब ईश्वर ने कहा विवाह विवाह है तो ईश्वर ने कहा नियोग व्यभिचार

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01:39:19,200 --> 01:39:23,440
नहीं है तो आपको मानना पड़ेगा व्यभिचार नहीं है तो हम जब तक

1363
01:39:23,440 --> 01:39:27,560
निचले लेवल की लड़ाई लड़ते रहेंगे अरे तुम्हारे यहां तो स्त्रियों के साथ य होता है वो होता

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01:39:27,560 --> 01:39:31,600
है इनका कभी अंत नहीं होगा क्योंकि अंत में बात य भाई ईश्वर

1365
01:39:31,600 --> 01:39:36,080
ने कहा है यह चीज गलत नहीं है बराबर है ना

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01:39:36,080 --> 01:39:40,080
मल को पना ईश्वर ईश्वर है कि नहीं अगर

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01:39:40,080 --> 01:39:44,600
इस पर हम बात करेंगे तो मर्यादा के अंदर रहते हुए आपत्ति

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01:39:44,600 --> 01:39:49,000
जनक शब्दों के इस्तेमाल के बिना भी हम सामने वाले को ढक्कन कर सकते

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01:39:49,000 --> 01:39:53,360
बराबर है है ना तो इसलिए अ

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01:39:53,360 --> 01:39:57,120
सितो को हम लेकर चल रहे हैं

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01:39:57,120 --> 01:40:01,640
जी वैभव शुक्ला जी जय श्री राम

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01:40:01,640 --> 01:40:05,960
जय श्री राम शिवांस जी जी मैं

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01:40:05,960 --> 01:40:10,200
बहुत समय से आपको फॉलो कर रहा हूं जी लगभग मब

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01:40:10,200 --> 01:40:14,240
काफी समय हो गया तो अभी यहां मैं ग्वालियर पर हूं हमने यहां पर

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01:40:14,240 --> 01:40:17,920
आदित्यवानी जो है प्रारंभ की है अच्छा तो

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01:40:17,920 --> 01:40:21,920
अभी हा हाभी हमारे दो कार्यक्रम ही

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01:40:21,920 --> 01:40:26,080
हुए पिछले संडे को हुआ था और एक संडे को अभी गुरुदेव

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01:40:26,080 --> 01:40:30,280
मथुरा में थे तो वहां पर भी जाना हुआ था हमारा एक्चुअली

1379
01:40:30,280 --> 01:40:34,840
वृंदावन में हरिहर आश्रम में वहां पर भी रुके दो दिन

1380
01:40:34,840 --> 01:40:39,320
मैं भी गया था 13 और 14 को मैं भी

1381
01:40:39,320 --> 01:40:43,640
अच्छा 13 14 को आप वहां थे मैं गया था 15 को अच्छा

1382
01:40:43,640 --> 01:40:47,680
तो 15 को हम शाम को पहुंचे थे 16 1 और मतलब 17

1383
01:40:47,680 --> 01:40:51,720
की शाम को रात में निकल आए थे इस प्रकार से जो कार्यक्रम

1384
01:40:51,720 --> 01:40:56,320
रहा तो अभी यहां पर जो है प्रकल्प प्रारंभ किया

1385
01:40:56,320 --> 01:41:00,480
है इसमें जैसे आज हमने हनुमान चालीसा का जो है पाठ किया था

1386
01:41:00,480 --> 01:41:04,680
उसका अर्थ सहित किया और जो राम भद्राचार्य जी द्वारा आरोप

1387
01:41:04,680 --> 01:41:09,160
प्रत्यारोप जो है वो लगाए जा रहे हैं उनका भी जो खंडन किया वहां पर अरे

1388
01:41:09,160 --> 01:41:13,160
उसका रिस्पांस भी अच्छा रहा देखिए आचार्यों के

1389
01:41:13,160 --> 01:41:17,520
उतर की बात आचार्यों तक ही रहने दी देखिए गुरुदेव से देखिए गुरु जी क्या सिखाते

1390
01:41:17,520 --> 01:41:22,360
हैं नहीं नहीं उसम हमने वो नहीं वैसा नाम नहीं लिया था किसी का

1391
01:41:22,360 --> 01:41:24,720
बस

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01:41:24,720 --> 01:41:28,960
य नाम ले लिया ठीक ठीक ठीक ठीक गुरुदेव

1393
01:41:28,960 --> 01:41:33,000
है उनसे जब ये प्रश्न किया गया कि क्या इसमें यह वाली लाइन ऐसे से

1394
01:41:33,000 --> 01:41:37,200
ऐसे है तो गुरुदेव ने कहा परंपरा से क्या प्राप्त है तो

1395
01:41:37,200 --> 01:41:41,480
उन्होने कहा परंपरा से तो य प्राप्त फिर लोग कोशिश

1396
01:41:41,480 --> 01:41:45,720
करने लगे नाम लेने की कि अरे फलाने तो ऐसा कह रहे हैं तो गुरुदेव

1397
01:41:45,720 --> 01:41:49,960
ने नहीं नहीं यह सब नहीं परंपरा से क्या तो गुरुदेव ने रोक दिया

1398
01:41:49,960 --> 01:41:54,240
गुरुदेव व्यक्तित्व की व्यक्तिगत समीक्षा नहीं ही करने का

1399
01:41:54,240 --> 01:41:59,440
कहते हैं व्यक्तिगत समीक्षाओं से बचे सिद्धांतों की समीक्षा करें सिद्धांतों बात

1400
01:41:59,440 --> 01:42:03,480
करें बिल्कुल बिल्कुल तो यही वहां पर अपन ने रखा

1401
01:42:03,480 --> 01:42:08,240
मत और कुछ जो प्राचीन पांडु लिपियां भी देखी थी

1402
01:42:08,240 --> 01:42:12,320
तो उनमें भी जो है वो मूल पाठ जो परंपरा से प्राप्त है वही वाला है

1403
01:42:12,320 --> 01:42:16,360
तो वो भी हमने शेयर कर दिया था तो वही चीज आई थी तो

1404
01:42:16,360 --> 01:42:20,480
उसका बड़ा अच्छा रहा तो ऐसे ही और प्रकार के कार्यक्रम और जो है आयोजित करने के लिए

1405
01:42:20,480 --> 01:42:24,560
सोच रहे हैं हम तो जैसे लखनऊ में भी आप चला व किस प्रकार

1406
01:42:24,560 --> 01:42:28,640
के कार्यक्रम होते हैं और क्या क्या चीज होती है आप बताएंगे थोड़ा मार्गदर्शन

1407
01:42:28,640 --> 01:42:32,960
कर बारे में आद वाहिनी में कैसे काम कर पा रहे हैं

1408
01:42:32,960 --> 01:42:37,640
उसके लिए हम लोग अपना अनुभव शेयर करते हैं उसम हम लोग उस मीटिंग में आप जुड़िए

1409
01:42:37,640 --> 01:42:41,440
होगी तो आप कनेक्ट

1410
01:42:41,440 --> 01:42:45,480
होंगे नहीं मैं आपसे कनेक्टेड नहीं हूं मेरे पास नंबर सेव है

1411
01:42:45,480 --> 01:42:48,240
आपका आप ये वाले नंबर

1412
01:42:48,240 --> 01:42:52,480
कर दीजिए तो कनेक्ट हो जाइए तो हम लोग उसम थोड़ा सा आदान प्रदान

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01:42:52,480 --> 01:42:56,600
करेंगे 740 8301 बोलिए

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01:42:56,600 --> 01:43:02,600
नंबर ये सामने आ रहा है स्क्रीन 740

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01:43:07,000 --> 01:43:13,000
8369 चलिए आभार आप सभी का आने का

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01:43:14,920 --> 01:43:20,920
समय जिन्होंने फॉर्म भर दिया है थोड़ा प्रतीक्षा कर ले

1417
01:43:21,640 --> 01:43:26,600
और जी आपका विनय जी अगर कुछ शेष हो तो बताए

1418
01:43:26,600 --> 01:43:30,840
तो फ आवाज नहीं आ रही भाई साब मेरी आवाज

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01:43:30,840 --> 01:43:35,400
आ रही है हा आपका आवाज कट रहा है नहीं नहीं

1420
01:43:35,400 --> 01:43:39,440
नहीं आवाज कट रही है

1421
01:43:39,440 --> 01:43:43,600
अच्छा जी भाई

1422
01:43:43,600 --> 01:43:47,800
साहब पता नहीं कारण ही ऐसा हो रहा है रुक जाइए एक बार मैं मूव

1423
01:43:47,800 --> 01:43:53,800
हो जाता हूं फिर आता हूं

1424
01:44:05,520 --> 01:44:09,720
अब आवाज आ रही है आ रही है परफेक्ट

1425
01:44:09,720 --> 01:44:14,280
जी विन जी कुछ आपका शेष है बोलने को तो बताइए

1426
01:44:14,280 --> 01:44:18,840
बताए उतना ही बोलना था कि ऐसे स्ट्रंग डर

1427
01:44:18,840 --> 01:44:23,560
तयार होने चाहिए वही सबसे

1428
01:44:23,560 --> 01:44:27,560
के बारे में चैत महाप्रभु ने बताया है उत्तम अधिकारी वही है भक्ति में

1429
01:44:27,560 --> 01:44:31,800
जो तर्क से तर्को प्रतिष्ठा ऐसे लोक आया

1430
01:44:31,800 --> 01:44:35,800
है सबसे हो ही जो त तक देके सामने वाले

1431
01:44:35,800 --> 01:44:39,800
को शांत कर सके वही उत्तम अधिकारी च

1432
01:44:39,800 --> 01:44:45,720
महाप ने गु

1433
01:44:45,720 --> 01:44:51,720
बोलते कटते चले जाते हैं

1434
01:44:52,040 --> 01:44:56,360
सुनने करेंगे कि जितना

1435
01:44:56,360 --> 01:45:00,720
हो सके आपके रूप में और जो वैभव शुक्ला जी इनके रूपों में

1436
01:45:00,720 --> 01:45:05,360
जगह जगह धर्म रक्षक तैयार हो और इसीलिए जो

1437
01:45:05,360 --> 01:45:09,600
गोष्ठी का प्रकल्प है ना कि आपके घर पर आप जहां रहते हैं उसके

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01:45:09,600 --> 01:45:13,720
पास में कहीं पर आप जो है साप्ताहिक रूप से बैठ

1439
01:45:13,720 --> 01:45:18,000
रहे हो वहा हनुमान चालीसा का पाठ इत्यादि जैसा कि वैभव शकला

1440
01:45:18,000 --> 01:45:22,320
जी ने तो इसमें जो भी जवाइन करना चाहते हैं गोष्ठी वाले प्रकल्प

1441
01:45:22,320 --> 01:45:26,480
में और हमारी सहायता हम जितना हो सकता है मार्गदर्शन करेंगे

1442
01:45:26,480 --> 01:45:30,560
तो वो जुड़ सकते हैं नंबर हमने दिया है नामा स्त्र चालू है

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01:45:30,560 --> 01:45:35,000
नामजप में जुड़े सुबह नंबर दे दिया है भाई साहब आपको मैसेज कर दिया है मैंने

1444
01:45:35,000 --> 01:45:38,680
जी जी जी ठीक है ये

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01:45:38,680 --> 01:45:43,400
गो क र जी

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01:45:43,400 --> 01:45:47,520
अच्छा क्या बोल रहे हैं मैं पूछ

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01:45:47,520 --> 01:45:51,720
रहा था गोष्ठी कब होती है अपनी ये आदित्यवानी को लेके गोष्ठी

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01:45:51,720 --> 01:45:55,840
आज अभी है 4 बजे मैं यहां से निकलूंगा और वहां

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01:45:55,840 --> 01:45:59,840
पहुंच ठीक है हमें जॉइन करेंगे अच्छा अच्छा ठीक है भाई साहब

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01:45:59,840 --> 01:46:04,120
हम जवाइन करेंगे हां ठीक है फिर

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सभी को लिंक भेज दीजिएगा जॉइनिंग वगैरह की जी जी जी जय श्री राम

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01:46:08,400 --> 01:46:12,440
हा हा मैं आपको प्राप्त हो जाएग जी सभी को जय श्री राम

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01:46:12,440 --> 01:46:16,560
समय देने के लिए सबका आभार और इस प्रकार का हम रखेंगे साप्ताहिक

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01:46:16,560 --> 01:46:20,560
रूप से कि जो संतुष्ट है वो आकर के साता है कि

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अर्ध मासिक या मासिक रूप से कि वो

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01:46:24,720 --> 01:46:26,920
स्त्रिया नाम जप में क्या करें

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01:46:26,920 --> 01:46:31,040
जनक सुता जग जननी जानकी अतिशय प्रिय करुणा निदान की ताके

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जुग पद कमल बनाव जा सु कृपा निर्मल मति पाव

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गायत्री मंत्र का रूपांतरण है तुलसीदास

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01:46:39,800 --> 01:46:44,000
जी द हा ब ठीक है

1461
01:46:44,000 --> 01:46:48,000
सभी को जय श्री राम जय श्री राम जय श्री राम जय
