1
00:00:02,800 --> 00:00:07,040
सभी को जय श्री

2
00:00:07,040 --> 00:00:11,200
राम अभी जो आगंतुक है आज जो

3
00:00:11,200 --> 00:00:16,000
आने वाले हैं वो आए नहीं है और

4
00:00:16,000 --> 00:00:20,000
आशा करता हूं कि आप लोगों का जो कार्तिक

5
00:00:20,000 --> 00:00:24,320
मास का प्रारंभ हुआ है वह सभी के लिए शुभ रहा होगा और

6
00:00:24,320 --> 00:00:28,960
सभी जो पावन पर्व आने वाला है

7
00:00:28,960 --> 00:00:33,080
मल्लिका सब उसको मनाने के लिए अच्छे से आप सबके

8
00:00:33,080 --> 00:00:39,080
घर में तैयारियां चल रही होंगी

9
00:01:25,080 --> 00:01:29,200
तो आज हमारी जो चर्चा होने वाली है

10
00:01:29,200 --> 00:01:33,320
वो एक भाई साहब है जिनका यह कहना है कि

11
00:01:33,320 --> 00:01:36,360
जो मां भगवती

12
00:01:36,360 --> 00:01:40,560
है वही सबका कारण बीज है संसार

13
00:01:40,560 --> 00:01:44,720
वक्ष का और उनसे [संगीत] भिन्न

14
00:01:44,720 --> 00:01:49,280
ब्रह्मा विष्णु महेश इत्यादि है यह

15
00:01:49,280 --> 00:01:53,880
सभी परम ब्रह्म नहीं है कारण ब्रह्म नहीं

16
00:01:53,880 --> 00:01:58,240
है तो अनन्य होता के भाव

17
00:01:58,240 --> 00:02:02,520
से इस बा लिया जा सकता है अपने ईस्ट के प्रति सब

18
00:02:02,520 --> 00:02:06,520
में ईस्ट को देखो और सबको अपने ईस्ट

19
00:02:06,520 --> 00:02:10,640
में देखो पर हमें जैसा कि

20
00:02:10,640 --> 00:02:16,640
बताया गया है कि वॉइस बहुत कम

21
00:02:17,120 --> 00:02:21,760
है दबा रहा हूं

22
00:02:21,760 --> 00:02:25,200
क्या

23
00:02:25,200 --> 00:02:31,200
तो वॉइस ठीक आ रहा है क्या

24
00:02:31,840 --> 00:02:37,840
कोई बताएगा कमेंट करके आवाज ठीक आ रही

25
00:02:39,680 --> 00:02:43,840
है अच्छा ठीक है वैभव जी ने कहा था कि वॉइस

26
00:02:43,840 --> 00:02:46,640
बहुत कम

27
00:02:46,640 --> 00:02:50,520
है

28
00:02:50,520 --> 00:02:56,520
तो अनन्य के भाव से बात ठीक है

29
00:02:57,280 --> 00:03:01,320
कि मा भगवती सेही सबकी पति है कक भगवती

30
00:03:01,320 --> 00:03:05,480
ही विष्णु है भगवती ही शिव मगर यदि हम भगवती को अलग मान रहे

31
00:03:05,480 --> 00:03:09,560
हैं विष्णु को अलग मान रहे हैं तो फिर यह वाली चीज नहीं आ

32
00:03:09,560 --> 00:03:13,760
पाएगी और अनंतता का भाव भी ठीक है मगर उसके लिए

33
00:03:13,760 --> 00:03:18,120
भी कम से कम एटलीस्ट जो हमारे सनातन

34
00:03:18,120 --> 00:03:22,120
धर्म को सनातन धर्म की बात करने वाली जो परंपराएं है उसम व्यक्ति हो

35
00:03:22,120 --> 00:03:28,120
दीक्षित हो तो समझ में आता है मगर जो ये

36
00:03:28,320 --> 00:03:32,720
है ये परंपरा से नहीं है संभवत

37
00:03:32,720 --> 00:03:36,800
तो ऐसे में फिर सवाल उठता है कि इनकी जो

38
00:03:36,800 --> 00:03:41,160
चीज है वो अपने मन से मनमुक चीज इसमें

39
00:03:41,160 --> 00:03:45,960
की अनन्य नहीं अन्यों के प्रति हीन भावना ही है

40
00:03:45,960 --> 00:03:50,000
अगर ऐसा है तो आज चे हम बात करेंगे और एक बात आती

41
00:03:50,000 --> 00:03:54,160
है कई बार की आप केवल वैष्णव

42
00:03:54,160 --> 00:03:58,280
से ही बात क्यों करते हैं वैष्णव अपराध क्यों करते हैं

43
00:03:58,280 --> 00:04:02,400
इसकन के बार आप कटाक्ष करके या प्रश्न खड़े

44
00:04:02,400 --> 00:04:06,400
करके आप वैष्णव अपराध कर रहे हैं इस तरह की बातें आती

45
00:04:06,400 --> 00:04:10,520
है और यह भी कहते हैं कि सव और सा से आप कभी नहीं करते तो

46
00:04:10,520 --> 00:04:14,640
आज अगर य भाई साहब आते तो एक अच्छा उदाहरण मिलेगा देखने को कि

47
00:04:14,640 --> 00:04:19,600
हम पक्षपात विहीन बात करते हैं

48
00:04:19,600 --> 00:04:24,200
और वैष्णव से प्रश्न करने वाली अगर बात बात की

49
00:04:24,200 --> 00:04:30,200
जाए तो

50
00:04:30,600 --> 00:04:35,440
स्कन क्या है शील प्रभुपाद जी के सिद्धांतों पर

51
00:04:35,440 --> 00:04:39,760
चलने का दावा करने वाली संस्था ठीक है

52
00:04:39,760 --> 00:04:43,880
यन अब यदि स्कोन पर प्रश्न करके हम वैष्णव अपराध

53
00:04:43,880 --> 00:04:48,520
कर रहे हैं और हम वैष्णव नहीं है क्योंकि हम वैष्णव

54
00:04:48,520 --> 00:04:53,200
पर प्रश्न कर रहे क्यक उनके हिसाब से वैव

55
00:04:53,200 --> 00:04:57,400
तो उसम फिर एक क्वेश्चन आ जाता है किन के शल प्रभुपाद

56
00:04:57,400 --> 00:05:01,520
जी के ही जो शिष्य गण है उन ही आपस में एक दंद है

57
00:05:01,520 --> 00:05:05,640
त्विक को लेकर के अभी कुछ समय पहले हरे कृष्णा सेंटर

58
00:05:05,640 --> 00:05:09,680
वाले आए थे तो कुछ अंशों में यह भी इकोन का विरोध करते हैं

59
00:05:09,680 --> 00:05:14,560
स्न की चीजों पर प्रश्न उठाते हैं और इकोन भी

60
00:05:14,560 --> 00:05:18,960
जोद है इन पर प्रश्न उठाते पर य सब चलता है

61
00:05:18,960 --> 00:05:23,400
तो अब क्या यह वैष्णव अपराध नहीं है और अगर वैष्णव अपराध है

62
00:05:23,400 --> 00:05:27,320
तो जो कर रहा है क्या व वैव नहीं

63
00:05:27,320 --> 00:05:33,320
है इसका अर्थ है

64
00:05:34,280 --> 00:05:38,560
कि बात धर्म और अधर्म की है न्याय

65
00:05:38,560 --> 00:05:42,720
और अन्याय की है नीति और अनीति की

66
00:05:42,720 --> 00:05:46,720
है अब किसी ने खुद को अगर वैष्णव घोषित कर दिया तो इसका अर्थ

67
00:05:46,720 --> 00:05:51,080
ये नहीं है कि वो अगर कोई मर्यादा का उल्लंघन

68
00:05:51,080 --> 00:05:55,200
करते हुए कोई कार्य करेगा तो अगर उस पर प्रश्न किया जाएगा तो वैष्णव का भंग

69
00:05:55,200 --> 00:06:00,560
हो रही है उससे

70
00:06:00,560 --> 00:06:06,560
आवाज कम

71
00:06:25,680 --> 00:06:29,880
है तो मैं एक बार जाके वापस आ जाता हूं क्योंकि

72
00:06:29,880 --> 00:06:35,240
आवाज कहा जा रहा है कि कम

73
00:06:35,240 --> 00:06:39,400
है कुछ लोग कह रहे आवाज सही है फिर भी एक बार देख लेते

74
00:06:39,400 --> 00:06:45,400
हैं कुछ दिक्कत होगी

75
00:06:48,240 --> 00:06:53,040
तो लीव का ऑप्शन कहां पर

76
00:06:53,040 --> 00:06:57,120
है आवाज सही बता रहे हैं लोग क्या

77
00:06:57,120 --> 00:07:00,920
करें फिर

78
00:07:00,920 --> 00:07:06,080
तो भाई साहब आ नहीं रहे हैं काफी देर हो चुकी है

79
00:07:06,080 --> 00:07:12,080
ध्वनि स्पष्ट नहीं है अब लीजिए

80
00:08:06,880 --> 00:08:12,880
अब आवाज ठीक आ रही

81
00:08:14,480 --> 00:08:18,600
है चलिए आप ऐसा करिए कि लिंक को सार्वजनिक कर दीजिए जब तक

82
00:08:18,600 --> 00:08:23,400
वह नहीं आ रहे तब तक कोई अन्य अगर आना चाहता हो ध्यान रखिए

83
00:08:23,400 --> 00:08:27,880
कि जिन पर हमने प्रश्न खड़े किए हैं वही आए नास्तिक हो रामपाल

84
00:08:27,880 --> 00:08:33,880
वाले हो कन से हो आर्य समाज से हो

85
00:08:35,240 --> 00:08:39,280
और ईश्वर का अस्तित्व सर्व सामर्थ्य परम

86
00:08:39,280 --> 00:08:43,440
स्वतंत्र मोक्ष और शाश्वत धर्म के बारे में ही

87
00:08:43,440 --> 00:08:47,760
हम प्रचार कर रहे हैं अगर कोई आना चाहता

88
00:08:47,760 --> 00:08:51,880
है

89
00:08:51,880 --> 00:08:56,080
उसको शंकराचार्य के विरोध में ईश्वर को

90
00:08:56,080 --> 00:09:00,120
सर्वशक्तिमान सिद्ध कर सकते हैं तो आप आए आपका

91
00:09:00,120 --> 00:09:02,680
स्वागत

92
00:09:02,680 --> 00:09:08,680
है

93
00:09:10,880 --> 00:09:13,120
और

94
00:09:13,120 --> 00:09:17,680
हां बात यह भी है कि एक तो मेरा मोबाइल बिजी बिजी हो जाता है

95
00:09:17,680 --> 00:09:23,680
एक बार ट्राई करता हूं जाके आप लोग वेट करिए फिर

96
00:12:13,280 --> 00:12:14,280
हम

97
00:12:14,280 --> 00:12:18,600
तो अभी हमने उनको एक बार और मैसेज किया है

98
00:12:18,600 --> 00:12:22,640
शायद उनमें से कोई आए और हमने एक बहुत अच्छा सा

99
00:12:22,640 --> 00:12:26,960
वीडियो बना दिया है भगवान के अवतार

100
00:12:26,960 --> 00:12:31,960
के ऊपर यह हमने लिंक दे दिया है कोई

101
00:12:31,960 --> 00:12:36,040
अगर चर्चा के निमि वैचारिक मतभेद को लेकर चर्चा

102
00:12:36,040 --> 00:12:40,120
हो उसके निमित्त अगर आना चाहे तो आ सकता है प्रश्न पूछने के लिए ना

103
00:12:40,120 --> 00:12:45,680
आए किसी बात को काउंटर करने के लिए

104
00:12:45,680 --> 00:12:51,040
आए हां आशुतोष जी आपको अ

105
00:12:51,040 --> 00:12:55,320
पीडीएफ ये प्रोवाइड हो जाएगा ये पीडीएफ है यह पीडीएफ

106
00:12:55,320 --> 00:13:00,080
वहां पर है जो रामपाल जी

107
00:13:00,080 --> 00:13:04,440
के लिए हमने छह पार्ट बनाए हैं ना

108
00:13:04,440 --> 00:13:08,760
रामपाल का जो जो प्रलाप है उसको धस

109
00:13:08,760 --> 00:13:13,120
किया था उसम छह वीडियो बनाए थे उसम अंतिम जो छवा वीडियो है

110
00:13:13,120 --> 00:13:17,160
उसमें यह है पीडीएफ वहां से आप डाउनलोड कर

111
00:13:17,160 --> 00:13:21,760
सकते ठीक है तो

112
00:13:21,760 --> 00:13:26,120
बात कर रहा था वैष्णव की कि क्या

113
00:13:26,120 --> 00:13:30,560
स्कन की ऐसी चीजें जो

114
00:13:30,560 --> 00:13:35,560
विवादित है आपत्ति जनक है उन पर प्रश्न करना

115
00:13:35,560 --> 00:13:40,360
या उनको लेकर के जागरूकता लाना उन चीजों को लेकर के क्या

116
00:13:40,360 --> 00:13:45,160
यह वैष्णव अपराध है तो अभी कुछ समय पूर्व

117
00:13:45,160 --> 00:13:49,880
हालांकि स्कोन ने नहीं सिखाया जाहिर सी बात है कोई नहीं सिखाता

118
00:13:49,880 --> 00:13:53,880
मगर कुछ समय पूर्व स्कोन के द्वारा नियुक्त एक

119
00:13:53,880 --> 00:13:58,240
पदाधिकारी है उनके बारे में बहुत सारी आपत्ति जनक

120
00:13:58,240 --> 00:14:02,960
विवादास्पद बातें बाहर आई मैं उनको यहां पर बताना नहीं चाहता मगर

121
00:14:02,960 --> 00:14:07,120
फिर भी क्या उन आपत्ति जनक बातों पर यदि हम उस

122
00:14:07,120 --> 00:14:11,360
व्यक्ति को पॉइंट आउट करें तो क्या व स्पन को पॉइंट आउट करना

123
00:14:11,360 --> 00:14:15,560
होगा उस व्यक्ति को पॉइंट आउट करें तो क्या

124
00:14:15,560 --> 00:14:19,640
वैष्णव को पॉइंट आउट करना होगा तो जिस प्रकार से

125
00:14:19,640 --> 00:14:23,760
उस व्यक्ति को पॉइंट आउट करने जिस जिस

126
00:14:23,760 --> 00:14:27,840
प्रकार से उस व्यक्ति के आधार पर उस व्यक्ति को पॉइंट आउट करते

127
00:14:27,840 --> 00:14:31,920
समय पूरे पूरे इकोन को आधार नहीं बनाया जा सकता इसी प्रकार

128
00:14:31,920 --> 00:14:35,920
से यदि हम स्कोन की बात कर रहे हैं तो पूरी की पूरी वैष्णव पर आक्षेप

129
00:14:35,920 --> 00:14:41,920
नहीं है व वैष्णव का में तो मैं स्वयं भी आ जाता हूं

130
00:15:00,440 --> 00:15:04,600
मुझे लगता नहीं है कि आज कोई सार्थक चर्चा हो पाएगी क्योंकि जिनको

131
00:15:04,600 --> 00:15:08,600
आना था वह आ नहीं रहे हैं और हमने

132
00:15:08,600 --> 00:15:13,520
लिंक को पब्लिक भी किया है पर कोई जुड़ नहीं रहा है

133
00:15:13,520 --> 00:15:18,600
दोबारा से कर दिया गया है लिंक पब्लिक अगर कोई वैचारिक मतभेद के

134
00:15:18,600 --> 00:15:22,680
निमित्त आ सकता है तो आए

135
00:15:22,680 --> 00:15:26,840
शंकराचार्य के विरुद्ध सनातन के विरुद्ध प्रामाणिक

136
00:15:26,840 --> 00:15:31,640
आचार्यों के विरुद्ध वेदा आदि शास्त्रों के

137
00:15:31,640 --> 00:15:35,840
विरुद्ध अपने ईश्वर को सर्वशक्तिमान और यदि नास्तिक

138
00:15:35,840 --> 00:15:41,840
है तो स्वयं को मानव सिद्ध करे

139
00:15:42,440 --> 00:15:46,560
आगे कहीं कोई अलंकार समास

140
00:15:46,560 --> 00:15:51,040
से हो या क्राव यानी स्कन से हो

141
00:15:51,040 --> 00:15:55,760
आ सकता

142
00:15:55,760 --> 00:16:00,600
है बहुत जल्द हम लोग एक

143
00:16:00,600 --> 00:16:05,280
बड़ा महा संगम लेकर के आ रहे हैं जिसमें कि हम

144
00:16:05,280 --> 00:16:11,280
करीब 100 से 150 आपत्ति जनक ग्रंथ जिसमें की

145
00:16:12,280 --> 00:16:16,400
अ जिसमें की मिलावट की गई है भगवत गीता के श्लोक वही

146
00:16:16,400 --> 00:16:21,080
है मगर मिलावट कर दी गई ब्रह्मर्पनम

147
00:16:21,080 --> 00:16:27,080
में

148
00:16:29,080 --> 00:16:33,640
या कोमती मां की गोद में हम समर्पित कर देंगे

149
00:16:33,640 --> 00:16:37,840
सम्मान क्योंकि उसमें भगवान की प्रति प्रति भी बनी हुई है

150
00:16:37,840 --> 00:16:41,840
छवियां है और गलत तरीके से सनातन धर्म को प्रस्तुत किया जा

151
00:16:41,840 --> 00:16:47,840
रहा है तो इस तरह का एक आपको देखने को

152
00:16:55,920 --> 00:17:00,320
मिलेगा कोई रामपाल वाला भी नहीं आ रहा है

153
00:17:00,320 --> 00:17:04,640
वेदों में प्रमाण है कबीर भगवान है

154
00:17:04,640 --> 00:17:08,840
अब इन्होंने रामपाल वालों ने एक चीज और ढूंढ लिए कहीं

155
00:17:08,840 --> 00:17:13,480
कबीर जी का वर्णन दिया है जो उसमें भविष्य पुराण

156
00:17:13,480 --> 00:17:17,600
इत्यादि तो वहां से ला रहे हैं देखो यहां कबीर कबीर को

157
00:17:17,600 --> 00:17:21,720
शायद कबीर बाना है जो भी है मगर वहां यह ध्यान नहीं दे रहे कि वहां किस कबीर

158
00:17:21,720 --> 00:17:25,760
की बात हो रही है जो प्रहलाद जी का दूसरा जन्म

159
00:17:25,760 --> 00:17:29,880
बताया गया है उस कबीर की बात हो रही है या फिर राम भक्त

160
00:17:29,880 --> 00:17:34,200
कबीर की बात हो रही विष्णु भक्त कबीर की बात हो रही तो वो तो नहीं मानते प्रमाण

161
00:17:34,200 --> 00:17:38,240
नहीं मानते तो नहीं मानते आप अपना प्रमाण बताइए अच्छा एक चीज

162
00:17:38,240 --> 00:17:42,360
बहुत हसी वाली आती है मुझे कबीर पंथिया को लेकर के

163
00:17:42,360 --> 00:17:44,240
कबीर पंथी नहीं सॉरी रामपाल

164
00:17:44,240 --> 00:17:48,640
पंथी कवि पंती तो ऐसे नहीं रामपाल जैसे

165
00:17:48,640 --> 00:17:53,000
तो एक चीज मुझे बहुत सी आती है

166
00:17:53,000 --> 00:17:57,000
पहले कहते हैं कि तुम शास्त्र शास्त्रो चित भक्ति नहीं कर

167
00:17:57,000 --> 00:18:01,280
रहे हो मनमुक भक्ति कर रहे हो हम तुम्हें शास्त्र उचित भक्ति

168
00:18:01,280 --> 00:18:05,400
बता रहे हैं उसके बाद जब उनसे पूछा जाता है कि

169
00:18:05,400 --> 00:18:09,480
कबीर या कबीर देव कबीर कैसे बन गया तो बोलते हैं

170
00:18:09,480 --> 00:18:13,520
कि तुम भी तो कान्हा को तुम भी तो कृष्ण को

171
00:18:13,520 --> 00:18:18,320
कान्हा बना देते हो अरे भैया हमारे विरोध में ही तो आप खड़े हुए हो

172
00:18:18,320 --> 00:18:22,320
क्योंकि हम शास्त्र उचित कार्य नहीं कर रहे हैं तो आप हमारा ही आधार क्यों ले

173
00:18:22,320 --> 00:18:28,320
रहे हो और अगर हमारा आधार लेना है तो पूरा लो

174
00:18:28,920 --> 00:18:33,080
आपके लिए प्रमाण नहीं है ना तो प्रमाण आपके लिए

175
00:18:33,080 --> 00:18:37,080
वेद है शास्त्र है हमारा आधार बना कर के आप ये कैसे कह

176
00:18:37,080 --> 00:18:41,680
सकते हैं कि आप यह सही कर रहे हैं कृष्ण को काना बना रहे हैं

177
00:18:41,680 --> 00:18:47,680
यह बहुत बड़ा एक झोल

178
00:18:49,040 --> 00:18:53,240
है हमने कर लिया है मगर क्या करें वो जुड़

179
00:18:53,240 --> 00:18:58,920
नहीं पा रहे उनके पास कोई दिक्कत है शायद इंटरनेट की प्रॉब्लम है शायद

180
00:18:58,920 --> 00:19:04,280
चलिए फिर मुझे लगता है कि व्यर्थ का समय गवाना बेकार

181
00:19:04,280 --> 00:19:09,040
है ऑफ करते हैं इसको आज कोई आ भी नहीं रहा है खैर

182
00:19:09,040 --> 00:19:13,040
मैं मां भगवती के

183
00:19:13,040 --> 00:19:17,080
बारे में बता दूं कि देखिए

184
00:19:17,080 --> 00:19:21,800
सबसे पहले तो एक बात आती है कुछ लोग यह कहते हैं कि ब्रह्मवर्त

185
00:19:21,800 --> 00:19:26,080
पुराण में भगवान श्री कृष्ण की ही परब्रह्म

186
00:19:26,080 --> 00:19:30,240
सिद्ध है मगर ऐसा नहीं है ब्रह्म व पुराण में ही

187
00:19:30,240 --> 00:19:34,880
गणपति खंड में भगवान गणेश की परब्रह्म भी सिद्ध है

188
00:19:34,880 --> 00:19:39,040
13 अध्याय के 43 से 53 श्लोक के बीच

189
00:19:39,040 --> 00:19:43,040
में विष्णु भगवान गणपति जी का पूजन कर रहे हैं

190
00:19:43,040 --> 00:19:43,960
और उसी चैप्टर में

191
00:19:43,960 --> 00:19:48,000
आगे य भी बताया गया कि वह कारण ब्रह्म के रूप में भी है गणपति

192
00:19:48,000 --> 00:19:52,040
और कार्य ब्रह्म के रूप में लीला रूप लीला पूर्वक वो

193
00:19:52,040 --> 00:19:56,320
उत्पन्न होते हैं किससे हिमाचल पुत्री से हिमाचल

194
00:19:56,320 --> 00:20:00,760
नंदिनी यानी कि पार्वती माता तो उनके द्वारा उत्पन्न दिखाई

195
00:20:00,760 --> 00:20:05,080
जाते तो इसमें विष्णु भगवान द्वारा गणेश जी को संसार का मूल

196
00:20:05,080 --> 00:20:09,160
कहा गया है तक में ना आ सकने वाला व्यवहार में ना आ सकने

197
00:20:09,160 --> 00:20:15,160
वाला और यह सारी चीजें

198
00:20:15,800 --> 00:20:20,720
हैं अच्छा अगर देवी भागवत की बात करें

199
00:20:20,720 --> 00:20:24,720
तो देवी भागवत में ही भगवान श्री कृष्ण से उत्पत्ति दिखाई

200
00:20:24,720 --> 00:20:28,760
गई है

201
00:20:28,760 --> 00:20:33,520
माता की भी और शिव पुराण

202
00:20:33,520 --> 00:20:37,520
में शिव जी से उत्पत्ति दिखाई गई है माता की तो

203
00:20:37,520 --> 00:20:41,680
जिस प्रकार भगवती से उत्पन्न हो रहे हैं ब्रह्मा विष्णु महेश उसी प्रकार ब्रह्मा विष्णु

204
00:20:41,680 --> 00:20:45,800
महेश से भी उत्पत्ति दिखाई दे रही है वस्तुतः जो उत्पत्ति जहां से हो रही

205
00:20:45,800 --> 00:20:50,680
है वो परम तत्व एक है उसमें कोई वो नहीं है वो ना

206
00:20:50,680 --> 00:20:55,320
स्त्री है ना पुरुष है जैसे माता से जब दिखाई दे रही है

207
00:20:55,320 --> 00:20:59,360
उत्पत्ति संसार की तो उसमें माता कह रही है एक जगह मैं ना स्त्री

208
00:20:59,360 --> 00:21:03,760
हूं ना जो वो रूप है उनका जो कारण ब्रह्म वाला निर्गुण

209
00:21:03,760 --> 00:21:07,800
कह र ना तो स्त्री है ना पुरुष है ना नपुंसक ही है वो खुद कह रही है

210
00:21:07,800 --> 00:21:11,800
इसी प्रकार से सबके बारे में बात हुई है जब वो मूल के बारे

211
00:21:11,800 --> 00:21:15,800
में बात की जाती है उसके बाद फिर वो कभी गणेश बन के पहले

212
00:21:15,800 --> 00:21:19,800
प्रकट हो जाते हैं और बाकी सब उनके परक इत्यादि के रूप में

213
00:21:19,800 --> 00:21:23,880
और फिर कभी वो कार्य ब्रह्म में जब उत्पन्न

214
00:21:23,880 --> 00:21:27,960
होते तो माता भी इसी तरीके से होती है मगर हम यह कह दे कि नहीं सिर्फ माता से

215
00:21:27,960 --> 00:21:32,000
ही उत्पन्न हुआ है संसार ये कहना गलत है परम तत्व है

216
00:21:32,000 --> 00:21:36,680
उसको कहीं पर माता कहा गया है कहीं पर विष्णु कहीं पर शिव कहीं पर गणेश

217
00:21:36,680 --> 00:21:40,840
कहीं पर ब्रह्मा भी कहा गया सौर्य भी कहा भी कहा सूर्य भी कहा

218
00:21:40,840 --> 00:21:43,920
गया अब इसमें एक बात और आती है जैसे मुझे

219
00:21:43,920 --> 00:21:47,960
किसी ने आज एक तर्क दिया कि हम

220
00:21:47,960 --> 00:21:52,400
शैव पुराण क्यों पढ़े वो तो शैव केंद्रिक तो कोई शक्त

221
00:21:52,400 --> 00:21:56,560
पुराण क्यों पढ़े भाई शाक्त

222
00:21:56,560 --> 00:22:00,840
आप जन्म से हैं या फिर शक्ति

223
00:22:00,840 --> 00:22:05,120
के प्रति आस्था होने के कारण आप शाप

224
00:22:05,120 --> 00:22:09,840
अगर आप जन्म से थे तो उसका कारण क्या था

225
00:22:09,840 --> 00:22:14,200
तो शक्त कुल में जन्म लिया है इसलिए आप केवल वो शाक्त

226
00:22:14,200 --> 00:22:18,360
पुराण पढ़ेंगे या फिर क्योंकि आप शक्ति के रूप में ईश्वर

227
00:22:18,360 --> 00:22:22,760
को स्वीकार करते हैं इसलिए आप शाक्त पुराण पढ़ते हैं वो तो लॉजिकल

228
00:22:22,760 --> 00:22:26,920
सिद्ध नहीं होता है क्योंकि जब आप जब तक आपकी निष्ठा हुई

229
00:22:26,920 --> 00:22:30,160
नहीं है शास्त्र पढ़ने पहले

230
00:22:30,160 --> 00:22:34,640
तो तब तक तो आपके लिए सनातन धर्म के जितने भी प्रामाणिक ग्रंथ है वो सब इक्वल होने चाहिए

231
00:22:34,640 --> 00:22:39,120
तो फिर आप शिव पुराण को क्यों नहीं मानेंगे क्यों नहीं उसम आस्था दिखाएंगे उन्हीं

232
00:22:39,120 --> 00:22:43,280
वेदव्यास जी ने वो लिखा है श्रीमद् देवी भागवत उन्ही ने शिव पुराण लिखा है ये

233
00:22:43,280 --> 00:22:47,560
गलत बात है इसी प्रकार के प्रलाप का फायदा उठाती

234
00:22:47,560 --> 00:22:51,880
है ये संस्थाए इसकन इत्यादि

235
00:22:51,880 --> 00:22:56,200
टाइप कि देखो वो सात भी तो ऐसा कर रहा है अरे भाई अपने

236
00:22:56,200 --> 00:23:01,080
ईस्ट में अपनी अनंतता रखिए

237
00:23:01,080 --> 00:23:05,200
अपने इष्ट में अनन्य होता का भाव रखिए मगर बाकियों

238
00:23:05,200 --> 00:23:09,440
को उन्हीं का रूप देखिए ना मां भगवती ही यहां पर खड़ी

239
00:23:09,440 --> 00:23:13,600
हो गई

240
00:23:13,600 --> 00:23:17,720
है शिव बन के

241
00:23:17,720 --> 00:23:22,440
मैं एक बार आलो पी माता के मंदिर

242
00:23:22,440 --> 00:23:26,760
गया आप कभी प्रयागराज जाएंगे तो वहां पर आपको बड़ा अच्छा मिलेगा आज

243
00:23:26,760 --> 00:23:30,920
भी भगवत पाद शंकराचार्य जी की प्रतिमा है उनके नाम

244
00:23:30,920 --> 00:23:34,920
से एक पूरा चौराहा है व लोपी माता के मंदिर गया वही

245
00:23:34,920 --> 00:23:39,000
पास मेंही था उसमें मैं जब

246
00:23:39,000 --> 00:23:43,440
अंदर प्रवेश कर रहा था तो एक दिव्य अनुभूति सी हो रही थी वहां पर

247
00:23:43,440 --> 00:23:47,600
दिव्य अनुभूति और वह अनुभूति क्या थी

248
00:23:47,600 --> 00:23:51,600
नगाड़े बज रहे हैं जैसे इसी समय ईश्वर

249
00:23:51,600 --> 00:23:56,280
अवतरित हो रहा है और जब मैं अंदर पहुंचा

250
00:23:56,280 --> 00:24:00,720
तो नगाड़े बसते बसते माता की आर हो रही थी अब मुझे क्या दिख रहा है

251
00:24:00,720 --> 00:24:04,920
कि प्रभु श्री राम कितने सुंदर रूप में यहां पर विराजमान है मां भगवती

252
00:24:04,920 --> 00:24:10,240
के रूप ऐसा भाव लाने में क्या प्रॉब्लम

253
00:24:10,240 --> 00:24:15,400
मां भगवती ही विराजमान है शिव के रूप

254
00:24:15,400 --> 00:24:21,400
में एक हो जाएगा सनातन हम जो पटे हुए

255
00:24:26,320 --> 00:24:31,440
हैं ये बात आप सही कह

256
00:24:31,440 --> 00:24:35,560
वो श्री राम भक्त बन गए हैं धीरे धीरे कई लोगों के फोन आए मेरे पास

257
00:24:35,560 --> 00:24:39,840
कबीर पंयो के और उनको बड़ी जागरूकता हो गई है सुधर रहे

258
00:24:39,840 --> 00:24:44,440
हैं थोड़ा भी तर्कशील व्यक्ति है तो वो जो है

259
00:24:44,440 --> 00:24:48,680
यह कोई आए हैं लिंगु मी

260
00:24:48,680 --> 00:24:53,080
आप अपना चेहरा

261
00:24:53,080 --> 00:24:57,240
दिखाए पना लो ल क्या नाम

262
00:24:57,240 --> 00:25:01,400
चेहरा दिखाए तो आना है ये बात क्लियर समझ लीजिए

263
00:25:01,400 --> 00:25:07,400
बिना चेहरे के हम लोग बात नहीं करते

264
00:25:10,440 --> 00:25:13,440
हैं

265
00:25:13,440 --> 00:25:17,520
अ तो कई लोगों फोन आया और क्लास में भी जुड़

266
00:25:17,520 --> 00:25:21,520
रहे हैं रामपाल को फॉलो करने वाले और

267
00:25:21,520 --> 00:25:25,720
कईयों की बुद्धि खुली है स्कोन वालों का भी कई कई लोगों का फोन आया है

268
00:25:25,720 --> 00:25:30,240
और जो भी थोड़ा बहुत तर्कशील है

269
00:25:30,240 --> 00:25:34,600
ध्यान देगा वो समझेगा चीज और जो

270
00:25:34,600 --> 00:25:40,600
कसम खाकर बैठा है कि नहीं मुझे जो है

271
00:25:41,440 --> 00:25:45,520
जो मुझे जो है बस मैंने

272
00:25:45,520 --> 00:25:49,640
जो एक बार स्वीकार कर लिया मैं उसके विरुद्ध नहीं जाऊ मैं तो आज भी कहता हूं आप

273
00:25:49,640 --> 00:25:53,640
ईश्वर को बाधित मत कहिए धर्म को बदलने वाला

274
00:25:53,640 --> 00:25:57,720
मत कहिए और मोक्ष को परतंत्र मत कहिए

275
00:25:57,720 --> 00:26:00,400
अंत

276
00:26:00,400 --> 00:26:04,760
और मैं भले ही गुरु

277
00:26:04,760 --> 00:26:08,840
भाव है आदि शंकराचार्य जी के प्रति परंपरा के प्रति सब कुछ

278
00:26:08,840 --> 00:26:12,840
है मैं अपना व्यक्तिगत वो निर्वाह करता रहूंगा मगर मैं

279
00:26:12,840 --> 00:26:16,960
आपका प्रचार करूंगा सर्वशक्तिमान ईश्वर

280
00:26:16,960 --> 00:26:20,120
ईश्वर बाधित नहीं होना

281
00:26:20,120 --> 00:26:24,240
चाहिए सर्वशक्तिमान ईश्वर परम स्वतंत्र मोक्ष

282
00:26:24,240 --> 00:26:29,560
शाश्वत धर्म तीन चीजें मुझे दीजिए मैं चलूंगा आपके साथ

283
00:26:29,560 --> 00:26:33,880
कहां चलना है बताइए ईश्वर वादित नहीं होना चाहिए क्रिश्चन

284
00:26:33,880 --> 00:26:38,640
जैसा नहीं होना चाहिए कहीं एक जगह बैठा है

285
00:26:38,640 --> 00:26:42,640
वह तर्क देते हैं तुम्हारा ईश्वर कैसा है जो कुछ भी अरे भाई जहां पर अपराध हो रहा है वहां

286
00:26:42,640 --> 00:26:46,640
तुम्हारे ईश्वर की सत्ता नहीं है क्या

287
00:26:46,640 --> 00:26:50,600
यह तर्क देते हैं कौन

288
00:26:50,600 --> 00:26:54,760
ईसाई तुम्हारे ईश्वर की सत्ता है कि नहीं

289
00:26:54,760 --> 00:26:57,240
तो क्यों नहीं रोक देता

290
00:26:57,240 --> 00:27:01,440
का ईश्वर की दृष्टि में जो हमारे लिए अच्छा बुरा

291
00:27:01,440 --> 00:27:05,640
है वो उसके लिए अच्छा बुरा नहीं है ईश्वर ईश्वर इसीलिए है

292
00:27:05,640 --> 00:27:10,120
क्योंकि उसके लिए भी अच्छा बुरा यदि मायने रखता होता तो वो ईश्वर ही कैसा

293
00:27:10,120 --> 00:27:14,240
वो तो दुखी होगा और होता भी है ई का ईश्वर तो व ईश्वर कैसा

294
00:27:14,240 --> 00:27:18,320
ईश्वर सिद्धि नहीं होती

295
00:27:18,320 --> 00:27:22,760
वहा आज फॉर्म भरा था

296
00:27:22,760 --> 00:27:27,160
लेकिन जान नहीं पाया कि आपको मिला नहीं

297
00:27:27,160 --> 00:27:31,480
मैं बहुत ज्यादा आपके क्लासेस अटेंड करने

298
00:27:31,480 --> 00:27:35,960
आपने फॉर्म भरा है तो हमारी टीम आपसे संपर्क करेगी जरूर

299
00:27:35,960 --> 00:27:39,960
चिंता ना करें ठीक है आप चिंता ना

300
00:27:39,960 --> 00:27:43,400
करें आपसे संपर्क किया

301
00:27:43,400 --> 00:27:47,640
जाएगा तो आपको मानना पड़ेगा

302
00:27:47,640 --> 00:27:51,720
कि यह जो ईसाई है उनकी बात कर रहा हूं ईसाइयों

303
00:27:51,720 --> 00:27:56,040
का कहना है कि उनका ईश्वर किसी एक जगह पर बैठा हुआ है वही

304
00:27:56,040 --> 00:28:00,920
इस्लाम की तरह और वहां से व ट करता है वो कण कण में नहीं है

305
00:28:00,920 --> 00:28:04,960
उसकी शक्ति कण कण में है तो पहली बा तो

306
00:28:04,960 --> 00:28:09,600
अगर वो कण कण में नहीं है उसकी शक्ति है मगर उसकी सत्ता तो सिद्ध

307
00:28:09,600 --> 00:28:12,440
है कि वहां पर उसकी सत्ता है जहां गलत

308
00:28:12,440 --> 00:28:16,560
कार्य हो रहे हैं व होने दे रहा है और गलत कार्यों को करने वाले को व बना रहा

309
00:28:16,560 --> 00:28:21,360
है उसको मालूम है कि रेप करेगा फिर भी वो बना रहा है

310
00:28:21,360 --> 00:28:26,000
तो मूल में कौन

311
00:28:26,000 --> 00:28:30,240
गा हा ईश्वर हुआ अब आपका

312
00:28:30,240 --> 00:28:35,120
ईश्वर ऐसा होगा जो शायद भविष्य ना देख पाता

313
00:28:35,120 --> 00:28:39,280
हो अब आप कह दोगे फ्री विल दी है

314
00:28:39,280 --> 00:28:43,320
इसी प्रकार फ्री विल दी है उसकी इच्छा है ना ना दो ना फ्री विल गलत काम

315
00:28:43,320 --> 00:28:47,480
करने से रोक दो ईश्वर के लिए व अच्छाई और बुराई

316
00:28:47,480 --> 00:28:51,520
नहीं है क्योंकि अगर ईश्वर के लिए भी कुछ अच्छाई और बुराई होगी तो ईश्वर भी प्रताड़ित

317
00:28:51,520 --> 00:28:55,680
होगा दुखी होगा और यदि वो भी दुखी हो रहा है तो व आपको सुखी

318
00:28:55,680 --> 00:28:59,560
करने वाला कैसे सिद्ध होगा फिर

319
00:28:59,560 --> 00:29:05,560
हैरी पॉटर जी अपना चेहरा

320
00:29:12,400 --> 00:29:17,040
दिखाएं अब इसके बाद क्या बात आती है

321
00:29:17,040 --> 00:29:21,680
कि अब बात करते हैं वो जरा दार्शनिक ता प उनका कहना है

322
00:29:21,680 --> 00:29:25,720
ईसाई और इस्लाम का कि ईश्वर जो है हमारा कण कण में

323
00:29:25,720 --> 00:29:29,800
नहीं है वो तो एक जगह बैठा है उसकी शक्ति कण कण में है ठीक है

324
00:29:29,800 --> 00:29:34,080
अगर आप यह कह रहे हो कि उसकी वो नहीं है उसकी शक्ति कण कण में है इसका मतलब

325
00:29:34,080 --> 00:29:38,440
आपने यह माना

326
00:29:38,440 --> 00:29:42,480
कि शक्ति ईश्वर से अलग है क्योंकि

327
00:29:42,480 --> 00:29:47,080
ईश्वर नहीं है शक्ति है दो पदार्थ आपने मान लिए शक्ति और ईश्वर

328
00:29:47,080 --> 00:29:51,120
अब जाहिर सी बात है जब शक्ति है और ईश्वर है

329
00:29:51,120 --> 00:29:55,200
तो शक्ति जो है ईश्वर के कंपेरटिवली कहीं ना कहीं

330
00:29:55,200 --> 00:29:59,240
वीक है तभी तो अलग है रा सर्वगुण संपन्न है

331
00:29:59,240 --> 00:30:03,280
अगर तो वो तो ईश्वर ही हो गया फिर कहीं ना कहीं कुछ

332
00:30:03,280 --> 00:30:07,480
डिफेक्ट है शक्ति में तभी वह उसमें कमी

333
00:30:07,480 --> 00:30:12,120
है तो फिर हमें क्या मानना पड़ेगा हमें यह मानना पड़ेगा

334
00:30:12,120 --> 00:30:16,480
अगर दो तत्व मान लिए कि जहां कण कण में ईश्वर

335
00:30:16,480 --> 00:30:20,600
नहीं है उसकी शक्ति है वहां पर ईश्वर की उतनी सत्ता

336
00:30:20,600 --> 00:30:24,760
नहीं है जहां पर ईश्वर स्वयं है तो

337
00:30:24,760 --> 00:30:27,760
क्या हुआ ईश्वर

338
00:30:27,760 --> 00:30:31,800
की जो सत्ता है वो फ्लकचुएट हो रही है ईश्वर जहां स्वयं खड़ा है

339
00:30:31,800 --> 00:30:36,200
वहां पर तो ज्यादा है पावर जहां

340
00:30:36,200 --> 00:30:40,320
वो है तो यानी सर्व सामा समान रूप से एक रस

341
00:30:40,320 --> 00:30:45,320
उसकी शक्ति सत्ता सब जगह नहीं है फिर क्या होगा

342
00:30:45,320 --> 00:30:49,400
अगर आपको यह यह कहना है कि जहां पर मैं नहीं हूं

343
00:30:49,400 --> 00:30:53,720
वहां भी मेरी उतनी सत्ता जहां पर मैं हूं तो तो आप शाश्वत

344
00:30:53,720 --> 00:30:58,040
हो पाएंगे और अगर आप ये कह देंगे वहां पर

345
00:30:58,040 --> 00:31:02,200
मेरे उतनी सत्ता नहीं है तो तो आप शाश्वत ईश्वर नहीं कहला सकते

346
00:31:02,200 --> 00:31:06,200
और अगर आपने यह मान लिया

347
00:31:06,200 --> 00:31:10,360
ईश्वर को शाश्वत रूप से सर्वशक्तिमान सामर्थ्य मान सिद्ध करने के लिए

348
00:31:10,360 --> 00:31:14,480
आपको मानना पड़ेगा फिर कि जहां पर मैं नहीं हूं वहां पर

349
00:31:14,480 --> 00:31:18,600
भी मेरी उतनी ही सत्ता है जितनी जहां पर मैं हूं वहां पर है

350
00:31:18,600 --> 00:31:23,200
तो फिर क्या हुआ जब हमने यह मान लिया तो क्या

351
00:31:23,200 --> 00:31:27,920
हुआ आपको यह मानना पड़ेगा कि आप ही वहां पर अकट

352
00:31:27,920 --> 00:31:32,320
रूप से हैं शक्ति के रूप में हो गया कण

353
00:31:32,320 --> 00:31:36,400
का में आ गए फस जाओगे भैया मत पढ़ो

354
00:31:36,400 --> 00:31:40,440
चक्कर में कोई नहीं है टक्कर आपको कह रहा हूं

355
00:31:40,440 --> 00:31:42,880
इस्लाम और

356
00:31:42,880 --> 00:31:47,240
ईसाई वाले बाइबल वाले आप आइए ना ईश्वर

357
00:31:47,240 --> 00:31:51,280
को अबाध सिद्ध करिए अबाध सिंपल मैं नहीं आपके

358
00:31:51,280 --> 00:31:55,360
वो क्वेश्चन उठाऊंगा कि वहां बहन से विवाह क्यों होता है ये है वो है

359
00:31:55,360 --> 00:31:59,440
वो सब क्वेश्चन नहीं वो सब काम नहीं है अपने पास सवाल

360
00:31:59,440 --> 00:32:03,440
सैद्धांतिक प्रश्न ईश्वर सर्वशक्तिमान है

361
00:32:03,440 --> 00:32:07,480
क्या है तो आ जाइए मैं सनातन

362
00:32:07,480 --> 00:32:11,720
धर्म छोड़ दूंगा वैदिक धर्म छोड़ दूंगा

363
00:32:11,720 --> 00:32:16,320
सनातन का विरोध करने वाले तंत्रों के द्वारा प्रतिपादित होने वाले ईश्वर को

364
00:32:16,320 --> 00:32:21,240
सर्वशक्तिमान मिलने वाले मोक्ष को परम स्वतंत्र और

365
00:32:21,240 --> 00:32:26,080
अनुकरण किए जाने वाले धर्म को शाश्वत सिद्ध कर दो तोड़

366
00:32:26,080 --> 00:32:30,120
दूंगा नहीं हो पाएगा कोई नहीं है टक्कर

367
00:32:30,120 --> 00:32:34,880
में अब य इस समय सनातन की बात कर रहा हूं

368
00:32:34,880 --> 00:32:39,560
इस समय ली बात नहीं करर अंकर परंपरा

369
00:32:39,560 --> 00:32:44,000
या जो परंपरा प्राप्त आचार है अब तो पूरे सनातन

370
00:32:44,000 --> 00:32:50,000
की बात कर कोई नहीं है टक्कर में मत पड़ो

371
00:32:50,400 --> 00:32:54,760
चक्कर नहीं कर पाओ इसलिए

372
00:32:54,760 --> 00:32:58,040
अब आज कोई एक उ पटांग बात कर रहा था कोई

373
00:32:58,040 --> 00:33:02,120
पता नहीं बहरूपिया था कोई क्योंकि मैंने देखा नहीं

374
00:33:02,120 --> 00:33:06,680
ज्यादातर उ पटांग बात कर रहा था तो क्या है कि

375
00:33:06,680 --> 00:33:10,840
सांप और बिच्छू शेरों को काटा नहीं करते दूर

376
00:33:10,840 --> 00:33:15,160
ही दूर से रंग कर निकल जाते हैं वो वाली बात अब यहां पर

377
00:33:15,160 --> 00:33:20,080
लिंक दिया जा रहा है तो देखो कोई नहीं आ रहा

378
00:33:20,080 --> 00:33:24,120
और कमेंट सेक्शन में आप देखो जा कर के यह है वो आई

379
00:33:24,120 --> 00:33:28,360
एम राइट करके एक आईडी है जब मैंने उससे कुछ तार्किक सवाल कर दिए

380
00:33:28,360 --> 00:33:31,920
अभद्रता प उतर

381
00:33:31,920 --> 00:33:37,920
आए

382
00:33:49,960 --> 00:33:54,400
तो आज का अना व्यर्थ रहा वो एक्चुअली छत्तीसगढ़

383
00:33:54,400 --> 00:33:59,240
के रहने वाले हैं और वहां जो है

384
00:33:59,240 --> 00:34:03,560
नेटवर्क का शायद इशू रहा हो वैसे मैंने उनसे कंफर्म किया था कि आप जहां पर वहां नेटवर्क

385
00:34:03,560 --> 00:34:07,640
आता है कि नहीं तो उन्होंने बोला कि आता है

386
00:34:07,640 --> 00:34:12,240
और मेरे घर के पास एक दो किलोमीटर प टॉवर भी

387
00:34:12,240 --> 00:34:16,520
है तो किसी को आना हो चर्चा के लिए तो आ सकते हैं कोई आया

388
00:34:16,520 --> 00:34:18,800
है

389
00:34:18,800 --> 00:34:24,800
रोनी रोनी जी चेहरा दिखाएं

390
00:34:25,440 --> 00:34:31,440
अपना चेहरा दिखाएं रोनी जी

391
00:34:37,600 --> 00:34:43,600
रोनी जी आप हमें दिख नहीं रहे

392
00:34:46,400 --> 00:34:50,760
हैं गायत्री चंद जी बात कर रहे हैं शिवांश

393
00:34:50,760 --> 00:34:55,160
भाई जुड़ नहीं पा रहा हूं ईमेल की वजह से सभी पुराण रामायण

394
00:34:55,160 --> 00:34:59,240
को लेकर बैठा हूं पहली बार मुझे मेरे ईमेल धोखा

395
00:34:59,240 --> 00:35:03,520
दे रहा है शायद सेटिंग में गड़बड़

396
00:35:03,520 --> 00:35:07,680
है अच्छा आप ही आने वाले थे

397
00:35:07,680 --> 00:35:11,840
क्या आप ही आने वाले थे य

398
00:35:11,840 --> 00:35:17,840
ये गायत्री चंदन नाम की आईडी आपकी

399
00:35:20,680 --> 00:35:26,680
है अब बताइए क्या करें

400
00:35:30,120 --> 00:35:34,280
तो वैसे मैं आप सबको याद दिला दूं आज आपने एक वीडियो देखा होगा बहुत हार्ट टचिंग लगा

401
00:35:34,280 --> 00:35:38,800
था मुझे वह दृश्य तो इसलिए मैंने कहा कि उसको आपको दिखाना

402
00:35:38,800 --> 00:35:42,920
चाहिए हम सब लोग मिलकर के सुबह सुबह नाम जप करते हैं

403
00:35:42,920 --> 00:35:48,200
भगवान का तो आप सनातन

404
00:35:48,200 --> 00:35:52,400
परंपरा प्राप्त जो शास्त्र है

405
00:35:52,400 --> 00:35:56,640
उसमें प्रमाण बुद्धि रखने वाला कोई भी व्यक्ति है वह हमारे साथ आ सकता

406
00:35:56,640 --> 00:36:02,280
है निष्ठा रखता है उनके प्रति व आ सकता है और नाम जप कर

407
00:36:02,280 --> 00:36:06,040
सकता

408
00:36:06,040 --> 00:36:10,160
राष्ट्र यह प्रणव की छवि दिख

409
00:36:10,160 --> 00:36:14,480
रही है इनके आईडी में वो आए थे शायद आर्य

410
00:36:14,480 --> 00:36:17,520
समाज से

411
00:36:17,520 --> 00:36:21,640
होंगे जी वो हार्ट टचिंग

412
00:36:21,640 --> 00:36:25,760
दृश्य लगा मुझे कि आप लोगों को शेयर करना चाहिए तो

413
00:36:25,760 --> 00:36:29,800
इसलिए हमने शेयर किया तो आप आप लोग भी नाम जप में जुड़िए अगर हमारे

414
00:36:29,800 --> 00:36:34,680
साथ नहीं जुड़ पा रहे हैं तो इतना तो कहूंगा कि भगवान की भक्ति करना शुरू

415
00:36:34,680 --> 00:36:39,160
करिए राम नाम का जप कृष्ण नाम का जप शिव नाम का जप

416
00:36:39,160 --> 00:36:44,640
मां दुर्गा के नाम का जप श्री गणेश जी के नाम का

417
00:36:44,640 --> 00:36:48,840
जप जो भी आपके इट उसी से सनातन

418
00:36:48,840 --> 00:36:53,200
को बहुत शक्ति मिलेगी

419
00:36:53,200 --> 00:36:57,960
और अगर हमारे साथ में आकर के कर सकते हैं तो और भी अच्छा है

420
00:36:57,960 --> 00:37:02,080
क्योंकि विप्लव की स्थितियां बन रही है तो हमें संगठित

421
00:37:02,080 --> 00:37:08,080
होकर रहने की बहुत आवश्यकता है

422
00:37:22,320 --> 00:37:28,320
और इनके पास जो आने वाले थे उनके पास शायद

423
00:37:39,080 --> 00:37:43,520
ब्राह्मण को नगन हो केर नहाना क्यों नहीं चाहिए हा मनुस्मृति

424
00:37:43,520 --> 00:37:48,080
में कहा गया है जिन कार्यों को करते समय छिपाने का भाव उत्पन्न

425
00:37:48,080 --> 00:37:52,280
हो उसे कम से कम किया गया धर्म के द्वारा कम से

426
00:37:52,280 --> 00:37:58,280
कम नगन के नहाने में भी छिपाने के भाव वाली बात है

427
00:37:58,560 --> 00:38:02,760
तो छिपाने का भाव उत्पन्न कम से कम हो ब्राह्मण

428
00:38:02,760 --> 00:38:07,360
के जीवन में जिससे कि उसकी प्रज्ञा शक्ति अपग्रेड होती

429
00:38:07,360 --> 00:38:11,440
रहे जितना उसकी प्रज्ञा शक्ति अच्छी होगी वह धर्म

430
00:38:11,440 --> 00:38:16,360
को धारण कर पाएगा दूसरों को धारण करवाने के

431
00:38:16,360 --> 00:38:20,560
निमित्त इस कारण से व प्रज्ञा शक्ति का बहुत महत्व है सारा

432
00:38:20,560 --> 00:38:24,600
सारी चीज उस ही है प्रज्ञा शक्ति आपकी वो जो

433
00:38:24,600 --> 00:38:28,840
चेतना शक्ति है कितनी तो इसीलिए

434
00:38:28,840 --> 00:38:33,160
नग नोकर नहाना झूठ बोलना निंदा करना य सब चीज

435
00:38:33,160 --> 00:38:39,160
छुपाने वाले भाव उत्पन्न

436
00:38:45,320 --> 00:38:49,360
करती एक बार और दे दीजिए लाइव स्ट्रीम का लिंक आपको दिया गया है

437
00:38:49,360 --> 00:38:55,360
कोई आना चाहता है किसी भी प्रकार की चर्चा के निमित्त तो आ सकता है

438
00:39:02,440 --> 00:39:06,920
ब्रह्मा सरस्वती विवाह के बारे में कोई पूछ

439
00:39:06,920 --> 00:39:11,760
रहे ब्रह्मा सरस्वती विवाह के लिए

440
00:39:11,760 --> 00:39:15,880
एक उदाहरण देता हूं मैं आपको जैसे मान लीजिए हम कोई ऐसी

441
00:39:15,880 --> 00:39:20,040
सब्जी बनाए कि जिसमें

442
00:39:20,040 --> 00:39:24,840
की दूध और पनीर दोनों का यूज

443
00:39:24,840 --> 00:39:29,400
ऐसी सब्जिया बनती है दूध भी डलता है

444
00:39:29,400 --> 00:39:33,440
अब क्या है कि पनीर क्या है दूध से उत्पन्न है

445
00:39:33,440 --> 00:39:37,880
तो इसको भी व्यवहारिक दृष्टि से दूध की पुत्री कहा जा सकता है

446
00:39:37,880 --> 00:39:42,120
तो जो सरस्वती माता है वह ब्रह्मा जी की बायोलॉजिकल डॉटर

447
00:39:42,120 --> 00:39:46,240
नहीं है समय जो मैथ सृष्टि है उसकी तो रचना ही

448
00:39:46,240 --> 00:39:50,400
नहीं हुई ना व बायोलॉजिकल वाला मामला नहीं है मगर

449
00:39:50,400 --> 00:39:55,240
व्यावहारिक दृष्टि से उनको पुत्री कहा गया क्योंकि व उनसे

450
00:39:55,240 --> 00:39:59,400
उत्पन्न सचित रसने य

451
00:39:59,400 --> 00:40:03,200
तो आ चुके हैं लगता है

452
00:40:03,200 --> 00:40:07,720
पहले राम राम भैया क्या कर रहे

453
00:40:07,720 --> 00:40:10,040
हो

454
00:40:10,040 --> 00:40:14,320
जी मैं एक अपना व जो चल रहा था उसको जरा पूरा कर लू

455
00:40:14,320 --> 00:40:19,200
पूरा कर लीजिए

456
00:40:19,200 --> 00:40:23,280
तो जो सरस्वती जी है व ब्रह्मा जी से उत्पन्न नहीं है

457
00:40:23,280 --> 00:40:27,760
मगर व्यवहार की दृष्टि से उनको उनकी पुत्री कहा गया

458
00:40:27,760 --> 00:40:32,120
अब अब वो क्योंकि पनीर जैसे उत्पन्न है दूध

459
00:40:32,120 --> 00:40:36,200
से इसलिए पनीर भी डॉटर जैसी हुई अब एक कढ़ाई

460
00:40:36,200 --> 00:40:40,200
में अगर इनको डाला गया तो यह इनका समागम है तो यही है

461
00:40:40,200 --> 00:40:44,840
ब्रह्मा सरस्वती विवाह और फल स्वरूप प्राप्त क्या हुआ

462
00:40:44,840 --> 00:40:49,040
दूध पनीर रूपी संतान दूध पनीर की सब्जी रूपी संतान

463
00:40:49,040 --> 00:40:53,080
उसी प्रकार से ब्रह्मा सरस्वती विवाह से प्राप्त

464
00:40:53,080 --> 00:40:57,760
क्या हो रहा है सृष्टि संतान रूपी सृष्टि और

465
00:40:57,760 --> 00:41:02,480
इसका जो आदि भौतिक अर्थ है वह है कि शास्त्रों

466
00:41:02,480 --> 00:41:06,560
में सूर्य को ब्रह्मा कहा गया सूर्य जो है

467
00:41:06,560 --> 00:41:12,560
ब्रह्मा ही ब्रह्मा ही है प्रजापति ब्रह्मा सूर्य को कहा गया

468
00:41:18,160 --> 00:41:23,200
तो सूर्य जब सर्दियों के दिनों में उगता

469
00:41:23,200 --> 00:41:27,560
है तो सूर्य देव के आने से पहले ही आकाश

470
00:41:27,560 --> 00:41:31,760
में एक लालिमा छा जाती है वह लालिमा सूर्य

471
00:41:31,760 --> 00:41:35,880
के कारण उत्पन्न हो रही है उस लालिमा को यहां पर कहा गया

472
00:41:35,880 --> 00:41:40,080
सरस्वती सरस्वती जी ने उस लालिमा का रोल प्ले किया है

473
00:41:40,080 --> 00:41:45,000
और ब्रह्मा जी ने सूर्यदेव का रोल प्ले

474
00:41:45,000 --> 00:41:49,000
इसके बाद जैसे जैसे सूर्य निकलता

475
00:41:49,000 --> 00:41:53,200
है तो लालिमा जो है आगे बढ़ती तो इसको क्या कहा गया सूर्य पीछे

476
00:41:53,200 --> 00:41:57,400
पीछे लालिमा आगे आगे ब्रह्मा जी पीछे पीछे सुस्ती आगे

477
00:41:57,400 --> 00:42:01,600
तो ये और फल स्वरूप क्या होता है कि जो सूर्य के प्रभाव

478
00:42:01,600 --> 00:42:06,360
से जो वायुमंडल में जो

479
00:42:06,360 --> 00:42:10,560
वाष्प व्याप्त है वही ठंड के दिनों में संगत होकर

480
00:42:10,560 --> 00:42:14,560
के कोरे के रूप में बरसती है

481
00:42:14,560 --> 00:42:18,680
तो यह क्या हो गया ब्र ब्रह्मा सरस्वती का समागम और

482
00:42:18,680 --> 00:42:22,880
कोरा रूपी संतान य भागवत में दिया गया है य वाली व्याख्या कि कोरा

483
00:42:22,880 --> 00:42:27,920
हुआ जब जब ब्रह्मा जी ने अपने शरीर को त्यागा

484
00:42:27,920 --> 00:42:31,960
वहां पर ये वाली स्टोरी कि ब्रह्मा जी ने जब मरीच जो पुत्र

485
00:42:31,960 --> 00:42:33,640
थे उनके

486
00:42:33,640 --> 00:42:37,640
उन उनके समझाने पर ब्रह्मा जी ने

487
00:42:37,640 --> 00:42:42,480
अपने शरीर को त्याग दिया अब यहां देखिए सबसे पहली बात कि यहां से अधर्म

488
00:42:42,480 --> 00:42:46,680
का उद्भव क्यों नहीं हो रहा है कि अगर उस स्टोरी में दिखाया जा रहा है कि

489
00:42:46,680 --> 00:42:50,760
पिता पुत्री के पीछे जा रहा है तो आफ्टर ऑल वो गिल्ट पूर्वक उसके मन

490
00:42:50,760 --> 00:42:55,080
में पश्चाताप हो रहा है और वो जो है अपने देह का नाश करके दिखा रहा

491
00:42:55,080 --> 00:42:59,160
है तो पहली बात ये हो गई मोरल आपको गलत नहीं मिला स्टोरी

492
00:42:59,160 --> 00:43:04,080
से दूसरी बात ये हो गई कि उन्होंने बहुत छोटी सी लीला के द्वारा और

493
00:43:04,080 --> 00:43:08,520
रोचक तरीके से वो जो सूर्य उसका वो था वो दिखा दिया

494
00:43:08,520 --> 00:43:13,160
आदि भौतिक अर् और जब वो

495
00:43:13,160 --> 00:43:17,280
भागवत में ही आया है कि जब वह अपना शरीर का त्याग करते हैं तो वह चारों और

496
00:43:17,280 --> 00:43:21,520
अंधेरा छा जाता है कोरे के रूप में तो वो कोरा रूपी संतान

497
00:43:21,520 --> 00:43:25,560
प्राप्त हुई ये ब्रह्मा सस्ती के विवाह का वो है इसको हम प्रमाण

498
00:43:25,560 --> 00:43:29,560
के साथ अलग से एक वीडियो में ले भी ले लिखा हुआ है हमारे पास बहुत लंबी लिस्ट

499
00:43:29,560 --> 00:43:34,120
है वीडियो बनाने की बहुत सारे संशय है जी

500
00:43:34,120 --> 00:43:38,800
बताइए सचित जी जी जय श्रीराम

501
00:43:38,800 --> 00:43:42,800
जय श्री राम भया भैया मेरे को मेरा परिचय

502
00:43:42,800 --> 00:43:47,040
बोल लीजिए कि मैं एक मैं एक विद्यार्थी

503
00:43:47,040 --> 00:43:48,920
हूं कंप्यूटर साइंस

504
00:43:48,920 --> 00:43:53,160
और एआई का कोरिया में अभी मैं पढ़ता हूं तो

505
00:43:53,160 --> 00:43:57,560
मेरे को धर्म से रिलेटेड थोड़ा बहुत क्या है संशय हुए हैं तो

506
00:43:57,560 --> 00:44:01,600
उनका आपका जो आपका जो पक्ष है वो मैं जानना चाह

507
00:44:01,600 --> 00:44:06,000
रहा हूं बताइए ठीक है तो

508
00:44:06,000 --> 00:44:10,040
एक चीज मैंने देखी कि जो शंकर परंपरा है और

509
00:44:10,040 --> 00:44:14,080
जो राघवाचार्य जी की परंपरा है उसमें गौतम बुद्ध को

510
00:44:14,080 --> 00:44:18,320
अवतार नहीं मानते हैं पुरी शंकराचार्य जी की एक चलचित्र

511
00:44:18,320 --> 00:44:22,520
है उसमें आप उने स्पष्ट बोला ये चीज

512
00:44:22,520 --> 00:44:26,720
लेकिन कुछ दूसरी परंपराएं हैं जैसे उदाहरण के लिए

513
00:44:26,720 --> 00:44:31,520
मैं आप को देता हूं कि जो बध गया के जो मंदिर था

514
00:44:31,520 --> 00:44:35,680
1925 में योगीराज जी ने

515
00:44:35,680 --> 00:44:40,440
शुरुआत ही गलत हो गई है हा भया गौतम बुद्ध दो हुए

516
00:44:40,440 --> 00:44:44,760
हैं पुरी शंकराचार्य जी और जो शंकर परंपरा है

517
00:44:44,760 --> 00:44:49,240
वो बुद्ध को अवतार मानती है मगर उस बुद्ध को नहीं

518
00:44:49,240 --> 00:44:53,560
जिसके कारण जिसके शिक्षाओं में मिलावट करके या जो भी है

519
00:44:53,560 --> 00:44:58,280
यह बौद्ध मत स्टार्ट हुआ है वो बुद्ध नहीं

520
00:44:58,280 --> 00:45:02,920
दो बुद्ध हुए हैं जो विष्णु का अवतार है वो ब्राह्मण कुल में जन्मे

521
00:45:02,920 --> 00:45:03,920
और

522
00:45:03,920 --> 00:45:07,960
उनका जो समय काल था वो अलग था और जो सिद्धार्थ जो गौतम

523
00:45:07,960 --> 00:45:12,120
जी वाले जो बुद्ध है सिद्धार्थ वाले इनका समय काल

524
00:45:12,120 --> 00:45:16,160
अलग है दोनों का जो देश है उत्पन्न होने का वो

525
00:45:16,160 --> 00:45:20,240
भी अलग है एक इधर नेपाल में हुए

526
00:45:20,240 --> 00:45:24,280
हैं ये सिद्धार्थ वाले और उनका जो है कीकट देश सिद्ध

527
00:45:24,280 --> 00:45:28,920
होता है तो एक ग्रंथ है

528
00:45:28,920 --> 00:45:31,600
आक्षेप

529
00:45:31,600 --> 00:45:36,840
परिहार पुरी शंकराचार्य जी का उसमें उन्होंने

530
00:45:36,840 --> 00:45:42,280
यह पूरा दिया है हा व ठीक है

531
00:45:42,280 --> 00:45:46,600
माना व बुद्ध जी को अवतार माना यह ठीक है

532
00:45:46,600 --> 00:45:50,600
आपके अनुसार है कि एक ब्राह्मण कुल में कीकट देश में कोई बुद्ध

533
00:45:50,600 --> 00:45:55,000
हुए थे जो अवतार है लेकिन कुछ परंपराओं

534
00:45:55,000 --> 00:45:59,120
का मानना है कि जो जो नेपाल वाले वही

535
00:45:59,120 --> 00:46:03,360
उसके अवतार है उसका वो लोग प्रमाण देते

536
00:46:03,360 --> 00:46:07,720
मानना है कि विष्णु जी भगवान नहीं है कुछ का य भी मानना है शिवजी भगवान नहीं है कुछ

537
00:46:07,720 --> 00:46:12,520
मान प्रमाण शास्त्रों से वो लोग देते हैं आपको

538
00:46:12,520 --> 00:46:15,320
एकता

539
00:46:15,320 --> 00:46:17,560
देखि

540
00:46:17,560 --> 00:46:22,080
कि मुख्यमंत्री जो होते हैं या

541
00:46:22,080 --> 00:46:26,280
किसी भी व्यवस्था में सर्वोच्च पद की अवधारणा

542
00:46:26,280 --> 00:46:30,400
होती क्यों ये बताइ अरे व वो चीज भैया मैं

543
00:46:30,400 --> 00:46:34,440
मानता हूं तो वो मैं पूछ रहा हूं मैं पूछ रहा हूं

544
00:46:34,440 --> 00:46:38,560
सर्वोच्च पद की अवधार सर्वोच्च पद की अवधारणा होती

545
00:46:38,560 --> 00:46:43,400
क्यों है कि उनके अनुयाई उनके नियम को माने

546
00:46:43,400 --> 00:46:48,040
मतलब कोई उनके अनुयाई नहीं सर्वोच्च पद की अवधारणा

547
00:46:48,040 --> 00:46:52,600
उसम कोई चुनाव थोड़ी ना होता है राष्ट्रपति हम लोग क्या चुन सकते हैं राष्ट्रपति जो है स है

548
00:46:52,600 --> 00:46:57,160
जब वोट पड़ेंगे तब पड़ेंगे आज तो राष्ट्रपति जो कहेगा वो करना पड़ेगा ना

549
00:46:57,160 --> 00:47:01,680
ठीक है बहुत सारे मुख्यमंत्री हैं उनकी अवधारणाएं अलग-अलग है

550
00:47:01,680 --> 00:47:06,040
मगर सर्वोच्च पद की अवधारणा होती ही इसलिए है जिससे

551
00:47:06,040 --> 00:47:10,160
कि हम एक मत पर आ पाए बाय बुक और बाय

552
00:47:10,160 --> 00:47:14,160
क्रुक ओके हम लोग बिखरे हुए ना रहे

553
00:47:14,160 --> 00:47:18,400
किसी भी टीम की जो जीत है वो इस पर निर्भर करती है वहा कैप्टनशिप है

554
00:47:18,400 --> 00:47:23,200
कि नहीं आप किसी ऐसी टीम की कल्पना करेंगे जो बिना कैप्टन के

555
00:47:23,200 --> 00:47:27,280
हो तो जब तक हम इस चीज पर रहेंगे ये कह रहा

556
00:47:27,280 --> 00:47:30,880
है वो ये कह रहा है हमको आप वैकल्पिक ही सही

557
00:47:30,880 --> 00:47:35,320
मैं नहीं कह रहा हूं शंकराचार्य को मानो जबकि शंकराचार्य का जो सार्व बहुमत

558
00:47:35,320 --> 00:47:39,560
है वो शास्त्रों से प्रमाण से युक्ति और प्रमाण दोनों

559
00:47:39,560 --> 00:47:43,800
से सिद्ध है मगर मैं फिर भी रहा आपका परिपेक्ष

560
00:47:43,800 --> 00:47:47,960
एक श्लोक प क्या है मेरे को मेरे को पता है कि आप यह बोलेंगे कि

561
00:47:47,960 --> 00:47:53,960
वो बुद्ध अवतार अलग है वो मेरे को भी पता है मेरे को बस

562
00:47:54,400 --> 00:47:58,440
एक आपसे लोग क्या है हम लोग आवान क्या

563
00:47:58,440 --> 00:48:02,640
है समझ लीजिए हम लोग सैद्धांतिक उन्मूलन करते

564
00:48:02,640 --> 00:48:06,720
हैं जो वस्तुनिष्ठ प्रश्न है वस्तुनिष्ट

565
00:48:06,720 --> 00:48:10,800
प्रश्न प वस्तुनिष्ट प्रश्न का मतलब है

566
00:48:10,800 --> 00:48:15,000
ये जो है कि बुद्ध जो है भगवान है कि नहीं हम

567
00:48:15,000 --> 00:48:19,320
है ना वही वाले बुद्ध इससे आपके धर्म ब्रह्म पर क्या आंच आ रही है बताइए मुझे

568
00:48:19,320 --> 00:48:23,440
कुछ नहीं आएगी हम लोग इस पर चर्चा करते हैं जिससे कि धर्म और

569
00:48:23,440 --> 00:48:27,680
ब्रह्म प आच आए हम समझ रहे हैं आप इससे कोई आंच

570
00:48:27,680 --> 00:48:31,800
नहीं आनी है जैसे कि मान लीजिए अभी कोई यहां पर आए अचानक

571
00:48:31,800 --> 00:48:36,400
से मुझसे कह दे मुझे मालूम है कि शिखा का महत्व क्या है साइंटिफिकली

572
00:48:36,400 --> 00:48:40,480
और आध्यात्मिक पूर्वक मगर थोड़ी देर के लिए मान लीजिए मुझे नहीं मालूम

573
00:48:40,480 --> 00:48:44,640
और कोई आ कर के कह दे शिखा क्यों बानते हैं ठीक है ठीक है

574
00:48:44,640 --> 00:48:45,960
इससे मैं

575
00:48:45,960 --> 00:48:49,960
यह भी कह सकता हूं भाई मुझे नहीं पता यह वस्तुनिष्ठता है इससे मेरे

576
00:48:49,960 --> 00:48:54,800
धर्म ब्रम पर कोई आंच नहीं आ रही अच्छा अगर मुझे नहीं पता है

577
00:48:54,800 --> 00:48:59,160
धर्म ब्रम पर आच कब आएगी ईश्वर है कि निराकार है द्वैत है क्या अद्वैत

578
00:48:59,160 --> 00:49:03,400
है व्यवहार क्या है परमार्थ क्या है शक्ति है अगर उसकी शक्ति कण

579
00:49:03,400 --> 00:49:08,000
कण में है यह सब धर्म ब्रह्म पर आच आने वाली बात ये सब तो

580
00:49:08,000 --> 00:49:12,120
ये सब तो वो चीज है जो हम जब हम निष्ठावान किसी गुरु परंपरा

581
00:49:12,120 --> 00:49:16,280
के प्रति गुरुओ के प्रति हो गए तो वहां स्व अध्ययन स्वविवेक और

582
00:49:16,280 --> 00:49:20,440
भक्ति का बल साथ में और यह सब आपको ग्रहण होता रहेगा आजी

583
00:49:20,440 --> 00:49:24,800
आपको मिल जाएगा कल को कोई और प्रश्न आएगा जो वस्तुनिष्ट होगा

584
00:49:24,800 --> 00:49:29,000
है ना मगर होता क्या कि जब हम निष्ठावान हो जाते हैं आस्थावान हो

585
00:49:29,000 --> 00:49:33,040
जाते हैं उसमें और अभी की स्थिति में जब हम नहीं है उसमें

586
00:49:33,040 --> 00:49:37,040
अंतर यह होता है कि तब जब हमारे पास ये वाले प्रश्न आते हैं ना

587
00:49:37,040 --> 00:49:41,040
वस्तुनिष्ठता वाले तो हमारे मन में एक संतोष

588
00:49:41,040 --> 00:49:45,120
होता है कि जब मैं गुरु के पास जाऊंगा तो वहां से मुझे इसका सटीक उत्तर मिल

589
00:49:45,120 --> 00:49:49,160
जाएगा ठीक है और जब हमारी निष्ठा नहीं है आस्था नहीं है

590
00:49:49,160 --> 00:49:53,440
तो य हमें सर्फ परेशान करते हैं हमारे पास इसका वो संतोष हमें

591
00:49:53,440 --> 00:49:57,880
नहीं मिलता है कि इसका उत्तर मुझे मिलेगा कि नहीं ठीक है

592
00:49:57,880 --> 00:50:01,240
ठीक है तो आप एक बार जैसे आपने दूसरे

593
00:50:01,240 --> 00:50:05,320
का पक्ष पढ़ा है मैंने आपको बुक का नाम बताया है कि आक्षय परिहार

594
00:50:05,320 --> 00:50:09,440
वाला मेरे पास है रखा है यह ग्रंथ आप पढ़िए मैं देखता हूं आपको

595
00:50:09,440 --> 00:50:15,440
दिखा सकू

596
00:50:31,000 --> 00:50:35,440
ये इसमें है उन्होंने दिया है एक बार आप इस पर टाइम बताइए

597
00:50:35,440 --> 00:50:39,520
और आपको नहीं मिले तो हमें लिख के भेजिए वस्तुनिष्ट प्रश्नों के लिए यहां पर चर्चा करने की

598
00:50:39,520 --> 00:50:43,920
कोई आवश्यकता ही नहीं हैसे आपके धर्म और ब्रह्म पर कोई फर्क नहीं

599
00:50:43,920 --> 00:50:48,160
पड़ना प्रॉब्लम तब आती है भगवान अवतार ले सकता है या

600
00:50:48,160 --> 00:50:52,320
नहीं अगर वो सर्वशक्तिमान वो तो वो तो अधर्म

601
00:50:52,320 --> 00:50:56,320
भी कर सकते हैं अगर अधर्म के मार्ग भी दे सकते हैं अगर कौन

602
00:50:56,320 --> 00:51:00,400
सर सर्वशक्तिमान अगर भगवान सर्वशक्तिमान है तो व तो अधर्म का मार्ग भी दे

603
00:51:00,400 --> 00:51:04,560
सकते हैं जितने अंश में वो अधर्म का मार्ग देंगे उतने अंश में

604
00:51:04,560 --> 00:51:09,120
हमारे लिए अनुकरणीय अनुसरण पूजनीय नहीं होंगे हम कह देंगे रूपिया

605
00:51:09,120 --> 00:51:13,120
है कोई व्यवहार में जैसे की मैंने एक बार आपको

606
00:51:13,120 --> 00:51:16,280
बताया था उदाहरणार्थ हनुमान जी

607
00:51:16,280 --> 00:51:20,800
के लिए प्रसिद्ध है कि वो बाल ब्रह्मचारी थे ठीक है

608
00:51:20,800 --> 00:51:25,000
अब हनुमान जी को भी ईश्वर का स्वरूप ही कहा गया है अवतार माना गया ईश्वर का

609
00:51:25,000 --> 00:51:30,240
ठीक है तो अब हम ये कहेमान क्या हनुमान जी सब कुछ कर सकते

610
00:51:30,240 --> 00:51:34,800
हैं अगर सब कुछ कर सकते हैं तो क्या वो विवाह कर सकते हैं

611
00:51:34,800 --> 00:51:38,960
तो व्यवहारिक रूप से उनका विवाह ना करना सिद्ध है अब क्या होगा

612
00:51:38,960 --> 00:51:43,000
कि भाई वही ईश्वर हनुमान बन रहा है वही ईश्वर शिव बन रहा है वही ईश्वर कृष्ण बन

613
00:51:43,000 --> 00:51:47,000
रहा है तो ईश्वर आया उसने हमें बताया देख मैं भाई गधा

614
00:51:47,000 --> 00:51:51,400
है मेरे पास देख पहाड़ तोड़ के दिखा दूं मैं हनुमान हूं हमने कहा ठीक है

615
00:51:51,400 --> 00:51:55,520
अब मैं विवाह कर रहा हूं तुम हनुमान नहीं हो हनुमान तो

616
00:51:55,520 --> 00:51:59,760
वो है जो रामायण द्वारा प्रतिपादित है और जो बाल ब्रह्मचारी है

617
00:51:59,760 --> 00:52:03,760
हम मना कर देंगे यही तो कहानी बुद्ध की है देख भाई मैं

618
00:52:03,760 --> 00:52:07,840
ईश्वर हूं मैं विष्णु का अवतार हूं यज्ञों को मत मान

619
00:52:07,840 --> 00:52:11,960
यज्ञों को मत कर वेदों को मत मान नहीं भैया हम आपको

620
00:52:11,960 --> 00:52:16,160
नहीं मानेंगे ठीक है तो

621
00:52:16,160 --> 00:52:20,160
वही वाली बात है जल सर्वत्र व्याप्त

622
00:52:20,160 --> 00:52:24,200
है मगर हमारी प्यास जल का वो रूप बुझाता है जो हमारी

623
00:52:24,200 --> 00:52:28,880
व्यवहार की सीमा में आ जाए जो वैद शास्त्र

624
00:52:28,880 --> 00:52:31,720
सनातन शास्त्र संबध जो मोक्ष का मार्ग दिखाए

625
00:52:31,720 --> 00:52:35,800
वो जो रूप हो वो हमारे लिए अनुकरणीय अनुसरण पूजनीय होता

626
00:52:35,800 --> 00:52:40,000
है भजनी होता है ठीक और बाकी वो तो असीमित है

627
00:52:40,000 --> 00:52:44,120
सब जगह ठीक है ना हा

628
00:52:44,120 --> 00:52:48,560
हमारे अंदर भी वही है मगर हमारे अंदर वाले रूप को भी हम नहीं ध्या सकते व्यवहारिक

629
00:52:48,560 --> 00:52:52,600
नहीं है हमारे अंदर भी वही है ईश्वर मगर

630
00:52:52,600 --> 00:52:56,760
हमारे अंदर वाले चलो वो सब छोड़ दोगे वो कर सकता है कि नहीं इतना

631
00:52:56,760 --> 00:53:01,040
तो मानना पड़ेगा ना इतना तो लगभग हर अच्छे जितने भी सम्मान प्राप्त दर्शन

632
00:53:01,040 --> 00:53:05,120
उन्होंने माना है ईश्वर तुम्हारे अंदर है हां

633
00:53:05,120 --> 00:53:10,000
है ना ऐसे कहीं ना कहीं आ जाती बात इकोन वाले भी कहते तुम्हारे हृदय में ईश्वर

634
00:53:10,000 --> 00:53:14,000
है द्वैत को मानने वाले अगर हृदय में ईश्वर है तो जब

635
00:53:14,000 --> 00:53:18,200
आप कोई गलत कार्य कर रहे हैं तो वो हृदय का ईश्वर भी उसमें इवॉल्व

636
00:53:18,200 --> 00:53:22,200
हो गया ना तो यह वाली बात है

637
00:53:22,200 --> 00:53:26,720
कि ईश्वर तो सब जगह समान रूप से व्याप्त है आप

638
00:53:26,720 --> 00:53:30,880
का भजनी रूप उसका कौन सा है वो जो आपके व्यवहार की सीमा

639
00:53:30,880 --> 00:53:35,000
में आ अब जैसे जब जल पीते हैं तो व्यवहार की सीमा कहां

640
00:53:35,000 --> 00:53:39,200
से क्या पैरामीटर होता है गिलास या हमारे हाथ

641
00:53:39,200 --> 00:53:43,360
है ना यह व्यवहार की सीमा हो गई इसी प्रकार से जब ईश्वर की बात होती

642
00:53:43,360 --> 00:53:47,000
है तो व्यवहार की सीमा क्या है वे

643
00:53:47,000 --> 00:53:51,120
की को ईश्वर के वर की भी कोई सीमा तो तो होनी नहीं परमार्थ

644
00:53:51,120 --> 00:53:55,280
में नहीं होगी वहार में हमारे लिए

645
00:53:55,280 --> 00:53:59,880
हमारे लिए हम किस व्यवहार की सीमा में उसको ग्रहण करेंगे

646
00:53:59,880 --> 00:54:03,960
हमारी सीमा क्या है वेद तो हम ईश्वर के उस रूप को

647
00:54:03,960 --> 00:54:07,960
ग्रहण करेंगे जो वेद की सीमा में हमारे लिए व्यवहारिक हो जाए

648
00:54:07,960 --> 00:54:12,360
ठीक धर्म की सीमा में हमारे लिए व्यवहारिक हो जाए ठी

649
00:54:12,360 --> 00:54:18,360
ठीक है कोई आए हैं देख लेते हैं सम्राट

650
00:54:21,880 --> 00:54:26,640
दास सम्राट दास जी जय श्री राम जय श्री राम

651
00:54:26,640 --> 00:54:30,640
मैं सवाल करना चाहता था आपने कुछ स्टेटमेंट दी थी तो उसके रिगार्डिंग में सवाल

652
00:54:30,640 --> 00:54:34,920
करना चाहता था आपका परिचय मैं सम्राट दास मैं

653
00:54:34,920 --> 00:54:39,040
शील गोत्र का हूं और शंकर मत से ही मैं मतलब

654
00:54:39,040 --> 00:54:43,040
रिलेट करता हूं और वही अध्ययन करता हूं तो आप सवाल क्यों कर रहे

655
00:54:43,040 --> 00:54:47,600
हैं क्योंकि आप कुछ मेरे को लगा आपने कुछ गलत बोला है करके ना

656
00:54:47,600 --> 00:54:52,440
ऐसे दो चीज आपने कुछ बोली है जो मैच नहीं कर रही थी

657
00:54:52,440 --> 00:54:56,440
तो इसलिए बात करू करके

658
00:54:56,440 --> 00:55:00,960
जैसे कि यानी कि विरोध नहीं है आप यहां पर

659
00:55:00,960 --> 00:55:05,280
कमी बताने आए हैं हां उस तरह से मान सकते हैं

660
00:55:05,280 --> 00:55:09,400
तो आपको तो यहां नहीं आना चाहिए था आप हमसे व्यक्तिगत रूप से संपर्क

661
00:55:09,400 --> 00:55:13,520
कर सकते थे आपके गप में भी जुड़ा हूं पर मेरे को पता नहीं चलता कि आपका नंबर

662
00:55:13,520 --> 00:55:19,120
कौन सा है तो मैं आपसे डायरेक्टली क्या बात मतलब किस तरह से वो संपर्क

663
00:55:19,120 --> 00:55:23,200
74836 अच्छा पे मैं वैसे टेलीग्राम प जुड़ा हुआ

664
00:55:23,200 --> 00:55:27,200
था आपसे ना तो वहां पे मैंने बहुत डीजे सम्राट कहां

665
00:55:27,200 --> 00:55:31,280
के दीक्षित है आप मैं दीक्षित नहीं हूं मेरे वो गुरु है मतलब

666
00:55:31,280 --> 00:55:35,760
जो ज्ञान के गुरु है मैंने ऐसे नाम दीक्षा नहीं ली है तो

667
00:55:35,760 --> 00:55:37,360
ऋषिकेश में रहता

668
00:55:37,360 --> 00:55:41,560
कौन गुरु है आपके कैलाश आश्रम सुना आपने

669
00:55:41,560 --> 00:55:45,760
नहीं नहीं सुना ऋषिकेश का मसे फेमस आश्रम है तो

670
00:55:45,760 --> 00:55:49,800
वो वेदांत प ही करते हैं तो उनके ही एक आचार्य है जिनसे मैं

671
00:55:49,800 --> 00:55:54,040
क्लासेस लेता हूं ब्रह्मसूत्र प बताइए आप समस्या क्या है

672
00:55:54,040 --> 00:55:58,040
हा तो समस्या य है कि अपने दो चीज बोली ब्रम जी भाव में

673
00:55:58,040 --> 00:56:02,120
है ठीक है और एक आप चीज बोलते हैं कि परमार्थिक में

674
00:56:02,120 --> 00:56:06,440
अद्वैत और व्यवहारिक में द्वैत तो य दो चीजों को लेकर मेरे को

675
00:56:06,440 --> 00:56:11,480
वो है यह किस तरह से आप वो कह रहे

676
00:56:11,480 --> 00:56:15,520
हैं आप शंकर मत वाले हैं आपने अध्ययन किया है शंकर मत

677
00:56:15,520 --> 00:56:19,520
का हां जी हा जी चल रहा है मतलब वो तो जिस दिन पूरा हो गया वो तो

678
00:56:19,520 --> 00:56:24,160
मैं फिर मुक्त हो जाऊंगा चलिए ठीक है मगर इसमें

679
00:56:24,160 --> 00:56:28,440
वो भाव कहां है कि आपकी कोई मुझे गलत लगी आपको

680
00:56:28,440 --> 00:56:32,600
समझ में ना आना अलग चीज है और गलत लगना अलग चीज है

681
00:56:32,600 --> 00:56:36,800
जो द चीज बोलते वहार में दत मतलब शंकर

682
00:56:36,800 --> 00:56:40,880
शंकराचार्य जी कहा पर कह रहे की व्यवहार में दत आपने

683
00:56:40,880 --> 00:56:46,760
सक्तिमान वाला वीडियो देख लिया होगा हा नहीं अभी आपने

684
00:56:46,760 --> 00:56:50,840
परसे मैंने इसका जवाब दे दिया है आपके लिए बेहतर होगा वो

685
00:56:50,840 --> 00:56:53,080
वीडियो हमने बना दिया वो देखिएगा

686
00:56:53,080 --> 00:56:57,160
उसम प्रमाण भी दिए एक प्रमाण आपको दिखा देता हूं शंकराचार्य जी

687
00:56:57,160 --> 00:57:01,160
कहां दे रहे लोगों ने तो बेवकूफी की है वीडियो बना के क्योंकि अपने

688
00:57:01,160 --> 00:57:05,280
वो रामानंदी के साथ बैठे थे विश वालो के साथ आप बोल रहे थे कि हम

689
00:57:05,280 --> 00:57:10,250
सेम है मेरे को लगता कि मतलब रामानंदी हम सेम नहीं

690
00:57:10,250 --> 00:57:12,520
[संगीत]

691
00:57:12,520 --> 00:57:16,680
है आपने आप अगर वो

692
00:57:16,680 --> 00:57:20,800
देखिए जो गुरुदेव के वचन है व हम मुदत कर रहे हैं स सत्य

693
00:57:20,800 --> 00:57:24,800
सता की क्रमिक अभिव्यक्ति जो द से

694
00:57:24,800 --> 00:57:29,400
किसी की यात्रा स्टार्ट हो द्वैत पूरी होती है मतलब

695
00:57:29,400 --> 00:57:33,480
वही है अभी मैं

696
00:57:33,480 --> 00:57:39,160
आपको आदि शंकराचार्य जी का वो बता रहा

697
00:57:39,160 --> 00:57:44,640
हूं क्या था वोह चैप्टर एक चैप्टर एक का

698
00:57:44,640 --> 00:57:50,640
था कौन सी किताब में

699
00:57:57,080 --> 00:58:01,760
उन्होंने बहुत बड़ी गलती कर दी है वो वाला जो वीडियो बनाया है

700
00:58:01,760 --> 00:58:05,880
नहीं किसी और का वीडियो नहीं देखा अभी आप उनके साथ बैठे थे ना

701
00:58:05,880 --> 00:58:10,000
विशेष किशोर कुछ करके नाम था उनका श्री संप्रदाय

702
00:58:10,000 --> 00:58:14,080
वाले जो थे उनके साथ आप बैठे थे उनके साथ चर्चा हो रही थी आपने शायद वो वाला वीडियो देखा

703
00:58:14,080 --> 00:58:18,120
है ना इसम उन्होंने बात कही है शंकराचार्य जी ने व्यवहार परमार्थ की बात

704
00:58:18,120 --> 00:58:22,280
कहां पर की है मतलब द्वैत की बात कहां पर करी है

705
00:58:22,280 --> 00:58:26,360
आर समाज का वीडियो देखा है आपने अभी आपका दिन

706
00:58:26,360 --> 00:58:30,480
पहले का वीडियो था जिसमें आप इनके साथ बैठे थे विशद वालो श्री

707
00:58:30,480 --> 00:58:34,680
संपद का भाष्य है दिख रहा है हां

708
00:58:34,680 --> 00:58:38,680
जी हां जी इसमें लिखा हुआ

709
00:58:38,680 --> 00:58:42,680
है व्यवहारिक भेद हां

710
00:58:42,680 --> 00:58:46,880
जी हां जी सही है और ज्ञान हां

711
00:58:46,880 --> 00:58:50,880
जी सही ज्ञान द्वारा व्यवहारिक भेद और

712
00:58:50,880 --> 00:58:54,920
ज्ञान द्वारा मोक्ष का प्रदर्शन तो व्यवहारिक

713
00:58:54,920 --> 00:58:58,920
भेद जब अलग हो गया वहा मोक्ष की बात हो रही परमार्थ की बात हो रही है इसमें

714
00:58:58,920 --> 00:59:02,960
परमार्थ के बारे में बहुत सारे व है हम जब व्यवहार की बात कर रहे हैं तो आप बोल

715
00:59:02,960 --> 00:59:07,240
रहे हैं कि भक्ति को व्यवहार मान रहे कि जो सब भेद है

716
00:59:07,240 --> 00:59:11,360
जो ईश्वर और हम में भेद है वो व्यवहार के लिए है और यहां इन्होंने यही लिखा

717
00:59:11,360 --> 00:59:12,200
है

718
00:59:12,200 --> 00:59:16,200
देखिए परमात्मा को अद्वितीय मानने पर तो जीव और

719
00:59:16,200 --> 00:59:20,240
ईश्वर का भी विभाग ना रहने से

720
00:59:20,240 --> 00:59:24,480
कुछ सुतिया जो है असंगत हो जाएंगी परमात्मा को

721
00:59:24,480 --> 00:59:29,080
अद्वितीय मतलब मान लेने से कि हम और वह अलग नहीं है

722
00:59:29,080 --> 00:59:33,160
तो कुछ सुटिया है वो असंगत हो जाएंगी उनका विरोध हो जाएगा शियों

723
00:59:33,160 --> 00:59:37,200
का तो उनका शयों का परवन किसम है तो उसमें

724
00:59:37,200 --> 00:59:41,680
क्या लिखा है उनका परवन किसम है कि ऐसा

725
00:59:41,680 --> 00:59:45,800
करके व्यवहार व्यवहारा अवस्था में उपाधि वश

726
00:59:45,800 --> 00:59:49,920
जीव और ईश्वर विभाग दिखला करर जीव और ईश्वर

727
00:59:49,920 --> 00:59:54,640
विभाग दिखला करर श्रुति परमात्मा के विज्ञान से अमृत

728
00:59:54,640 --> 00:59:58,920
अमृत की प्राप्ति प्रदर्शित करती है मतलब व्यक्ति का जो अमृत

729
00:59:58,920 --> 01:00:03,480
है उसको प्रदर्शित करती है जीव और ईश्वर में

730
01:00:03,480 --> 01:00:08,200
भेद दिखला ये आदि शंकराचार्य जी का कोट

731
01:00:08,200 --> 01:00:11,760
ये वो है

732
01:00:11,760 --> 01:00:15,920
शप हा बहुत बोला है भगवत

733
01:00:15,920 --> 01:00:20,560
गीता में बोला है दूस अध्याय का पढ़िए

734
01:00:20,560 --> 01:00:25,040
67 से लेकर 69 तक 67 से लेकर 69 तक

735
01:00:25,040 --> 01:00:27,240
तो व्यवहार परमार्थ की बात की

736
01:00:27,240 --> 01:00:31,280
है पूरे में ही की है जगह जगह की है व्यवहार परमार्थ वो तो ठीक है वो समझ आ रहा

737
01:00:31,280 --> 01:00:35,320
है ना कि वो बोल रहे है कि जो मिथ्या में है और जो सत्य है उसको

738
01:00:35,320 --> 01:00:39,680
वो उस तरह से देख रहे हैं कि व्यवहार और परमार्थ पर वो द

739
01:00:39,680 --> 01:00:43,840
नहीं नहीं नहीं व्यवहार के लिए जीव और ईश्वर का

740
01:00:43,840 --> 01:00:47,920
भिन्नता व्यवहार कैसा करें जीव और ईश्वर अलग अलग

741
01:00:47,920 --> 01:00:52,000
है और प्राप्त क्या होगा फल स्वरूप जीव ईश्वर

742
01:00:52,000 --> 01:00:56,760
की एकता पर द्वैत नहीं हुआ ना फिर भी

743
01:00:56,760 --> 01:01:00,840
क्यों जब जीव और ईश्वर अलग अलग मान लिया वहार में तो दत हो गया ना क्योंकि

744
01:01:00,840 --> 01:01:05,240
जीव जो है वो तो मिथ्या हुआ ना वो एक तत्व नहीं है ना मिथ्या

745
01:01:05,240 --> 01:01:11,240
कहां से है व्यवहार में थोड़ी मिथ्या है

746
01:01:11,480 --> 01:01:15,800
म मुक्त मुक्त की दृष्टि से वो मिथ्या है

747
01:01:15,800 --> 01:01:20,280
यहां जो जो हम लोग है हमारी दृष्टि से मिथ्या थोड़ी ना है

748
01:01:20,280 --> 01:01:24,680
दो विषय है सनातन शास्त्रों के दो विषय है

749
01:01:24,680 --> 01:01:28,960
एक है धर्म और एक है ब्रह्म ब्रह्म का आधार

750
01:01:28,960 --> 01:01:33,080
है अद्वैत धर्म का आधार है द्वैत धर्म

751
01:01:33,080 --> 01:01:37,480
यानी की किसके साथ क्या करना है धर्म यानी की किसके साथ क्या करना है

752
01:01:37,480 --> 01:01:41,800
हा जी तोके साथ क्या करना में तो अनगिनत हो गया ना उसम द्वत नहीं हुआ

753
01:01:41,800 --> 01:01:46,920
या तो हो ग दो हो गए

754
01:01:46,920 --> 01:01:51,160
मत जैसे अंधेरा है ठीक है अंधेरा बस रोशनी का अभाव

755
01:01:51,160 --> 01:01:55,160
है अंधेरा दूसरा तत्व नहीं है अरे भाई वो परमार्थ वो सब

756
01:01:55,160 --> 01:01:59,240
बाहर से है जो फसा हुआ उसकी बात करो अभी

757
01:01:59,240 --> 01:02:03,320
आपके लिए पृथ्वी चपटी है कि गोल है

758
01:02:03,320 --> 01:02:07,400
व वो बात अलग है ठीक है अलग क्यों है जिनको समझ आ गया

759
01:02:07,400 --> 01:02:11,400
व तो गोल है नहीं है गोल व्यवहार क्या करेंगे

760
01:02:11,400 --> 01:02:15,560
व्यवहार क्या करेंगे एमप्लीफाई क्या करेंगे आपको समझ आ

761
01:02:15,560 --> 01:02:19,920
गया आपको समझ में आ गया आपको समझ में आ गया

762
01:02:19,920 --> 01:02:24,080
पथवी गल है क्या आप गल

763
01:02:24,080 --> 01:02:26,840
फॉलो कर रहे हैं मतलब हम चपटा

764
01:02:26,840 --> 01:02:31,080
चपटा समझ नहीं रहे हैं ठीक है मतलब वो अगर कोई सोच रहा है ना कि गोल है व्यवहार

765
01:02:31,080 --> 01:02:35,480
क्या कर रहे हैं आपको थ्योर कली मालूम पड़ गया है कि पृथ्वी गोल है

766
01:02:35,480 --> 01:02:39,480
आप व्यवहार कैसा कर रहे हैं उसके साथ मतलब गोल का ही व्यवहार

767
01:02:39,480 --> 01:02:44,200
हो रहा है ठीक है व्यवहार कहां होहा

768
01:02:44,200 --> 01:02:48,400
व अच्छा तो आप ये बताइए मुझे आप कहां रहते

769
01:02:48,400 --> 01:02:52,560
हैं ऋषिकेश में ऋषिकेश में यानी

770
01:02:52,560 --> 01:02:56,680
उत्तर भारत हम अच्छा

771
01:02:56,680 --> 01:03:00,880
ऋषि केश से हिमाचल हिमाचल

772
01:03:00,880 --> 01:03:05,000
के लिए दिशा दिखाइए मुझे कहां है हा नॉर्थ की तरफ

773
01:03:05,000 --> 01:03:09,000
हुआ नहीं नहीं उंगली दिखाई उंगली कन्याकुमारी

774
01:03:09,000 --> 01:03:13,560
के लिए दिखाईए कन्याकुमारी पीछे की तरफ अब य आपने

775
01:03:13,560 --> 01:03:17,600
ये जो उंगली की है य ऐसे होनी चाहिए थी ऐसे

776
01:03:17,600 --> 01:03:21,680
तो वही वही तो मैं बता रहा हूं ना मतलब जो हम पता ठीक है

777
01:03:21,680 --> 01:03:25,800
आप व्यवहार करते हैं ठीक है अभी दर्शको ने देख लिया है यह बात आपकी

778
01:03:25,800 --> 01:03:30,240
जो है व्यवहारिक नहीं है आप जो है गोल व्यवहार नहीं करते हैं

779
01:03:30,240 --> 01:03:34,280
किसी को भी रास्ता दिखाएंगे आप सुनिए यह सत्य नहीं है ये झूठ की लड़ाई

780
01:03:34,280 --> 01:03:38,480
है और आप मुझे नहीं लगता कि आप शंकर परंपरा के प्रति निष्ठावान है

781
01:03:38,480 --> 01:03:41,960
क्योंकि आप कह रहे हैं मैं उ गोल व्यवहार करता हूं पृथ्वी के साथ नहीं

782
01:03:41,960 --> 01:03:46,040
करते हैं ये झूठ है अगर आप करते हैं तो ठीक है जनता ने आपको

783
01:03:46,040 --> 01:03:50,080
देखा है जनता सोच लेगी सही जो

784
01:03:50,080 --> 01:03:54,120
जो सोच र है कि वो मतलब एक बंदा है जिसने सोचा ही नहीं चपटा है या गोल

785
01:03:54,120 --> 01:03:58,200
है वो जिसने सोचा नहीं वो भी गोल व्यवहार कर रहा

786
01:03:58,200 --> 01:04:02,560
है नहीं चपटा व्यवहार कर रहा है आप

787
01:04:02,560 --> 01:04:07,320
इसको छोड़ दीजिए इसको छोड़ दीजिए आत्मा अविनाशी

788
01:04:07,320 --> 01:04:11,400
है आत्मा कैसे अविनाशी होगी अविनाशी नहीं

789
01:04:11,400 --> 01:04:15,520
है मतलब अविनाशी नाश को उल्टा होता है मतलब

790
01:04:15,520 --> 01:04:20,080
नाश नहीं होता जिसका कभी नाश नहीं हो सकता हा आत्मा अविनाशी हा

791
01:04:20,080 --> 01:04:24,720
अविनाशी है ना आपका मौलिक स्वरूप क्या

792
01:04:24,720 --> 01:04:29,080
है आत्मा ही है तो अभी

793
01:04:29,080 --> 01:04:33,680
आप जब यह जानते हैं कि मैं मारा नहीं जा सकता

794
01:04:33,680 --> 01:04:37,800
तो क्या व्यवहार में आ गया आपके हा यही ना अद्वैत क्यों बताया उन्होंने

795
01:04:37,800 --> 01:04:42,320
ना उपासना के लिए बताया मैं आपको पूछ रहा हूं ये व्यवहार में आ गया आपके

796
01:04:42,320 --> 01:04:46,680
वही ना जब तक हम जी वही जी भाव मैं वही कह रहा हूं व्यवहार

797
01:04:46,680 --> 01:04:51,000
में करने के लिए द्वैत है और अंतिम रूप से प्राप्त होने के लिए

798
01:04:51,000 --> 01:04:55,120
अद्वैत है वही मैं बोल रहा हूं ना देखो अगर हम

799
01:04:55,120 --> 01:04:57,200
बोलते देखिए देखिए आप

800
01:04:57,200 --> 01:05:01,280
गोल व्यवहार करते हैं पृथ्वी के साथ ये हमको आपने बताया आप

801
01:05:01,280 --> 01:05:05,400
किसी दिन क्लास में आइए हम लोग क्लास में वैसे

802
01:05:05,400 --> 01:05:09,400
आप जो आपने जो अपने बारे में बताया वो तो सिद्ध नहीं हो रहा है वो निष्ठा तो पता

803
01:05:09,400 --> 01:05:13,640
चल नहीं रही है आपकी कि मैं शंकराचार्य को फलो

804
01:05:13,640 --> 01:05:17,800
अब पता नहीं आपका क्या रूप है खैर आप गोल व्यवहार करते हैं पृथ्वी के साथ

805
01:05:17,800 --> 01:05:21,880
और दूसरी बात यह है कि हमने

806
01:05:21,880 --> 01:05:26,280
जो अपनी बातें आपको बतानी थी वो बता दी है

807
01:05:26,280 --> 01:05:30,320
नहीं मिल रही है तो उसके लिए हम कुछ नहीं कर सकते दूसरा स्टेटमेंट आपने बोला था कि

808
01:05:30,320 --> 01:05:34,440
ब्रह्म जीव भाव में है हम वो किसी

809
01:05:34,440 --> 01:05:38,640
और दिन हम ले लेंगे किसी और दिन लेंगे कोई और भी आ गया है

810
01:05:38,640 --> 01:05:42,760
हम किसी और दिन लेंगे ठीक है ठीक है और आप जो

811
01:05:42,760 --> 01:05:48,760
है इनका अध्ययन करिए आदि शंकराचार्य जी आपके गुरु है

812
01:05:51,960 --> 01:05:56,000
ना मुझे लगता नहीं है कि निष्ठावान है कुछ अपने

813
01:05:56,000 --> 01:06:00,240
बारे में गलत बोल रहे हैं शायद जो भी है आप जवाइन

814
01:06:00,240 --> 01:06:04,120
करिएगा क्लासेस उसमें आइएगा बात

815
01:06:04,120 --> 01:06:10,120
करेंगे राहुल जी अपना चेहरा

816
01:06:13,600 --> 01:06:17,880
दिखाएं हां जीी सर जय श्री राम बताइए राहुल

817
01:06:17,880 --> 01:06:22,240
जी जय श्री राम नहीं जैसे आप मेरी आवाज मुझे रिपीट

818
01:06:22,240 --> 01:06:26,040
सुनाई दे रही है

819
01:06:26,040 --> 01:06:30,200
तो फिर कैसे करू माइक तो ऑन करना पड़ेगा मुझे एक बार जाके दोबारा

820
01:06:30,200 --> 01:06:36,200
आइए

821
01:06:41,560 --> 01:06:46,640
आप मतलब मुझे ऐसा लगता है कि व्यक्ति को

822
01:06:46,640 --> 01:06:50,720
आजकल लोगों को सच से मतलब नहीं है किसी

823
01:06:50,720 --> 01:06:54,880
को चुप कराने से किसी को नीचा दिखाने से अपने

824
01:06:54,880 --> 01:06:59,760
को ऊंचा दिखाने से इससे मतलब सच्चाई से मतलब नहीं है

825
01:06:59,760 --> 01:07:03,760
बंदे से मैं पूछ रहा हूं कि आप व्यवहार में क्या करते

826
01:07:03,760 --> 01:07:08,120
हैं पृथ्वी के साथ तो व कह रहे कि मैं गोल व्यवहार करता हूं किसी को रास्ता दिखाते

827
01:07:08,120 --> 01:07:12,280
तो यूं दिखाते हैं और जब मैंने कहा कि रास्ता दिखाओ तो

828
01:07:12,280 --> 01:07:15,080
सीधा दिखा

829
01:07:15,080 --> 01:07:19,080
दिया क्या बात है मोटरसाइकिल चलाते हैं तो व

830
01:07:19,080 --> 01:07:25,080
मौत के कुए वाली मोटरसाइकिल चलाते हैं

831
01:07:30,040 --> 01:07:33,040
पता नहीं क्या बात है

832
01:07:33,040 --> 01:07:37,240
भाई राहुल जी आइए चेहरा दिखाइए

833
01:07:37,240 --> 01:07:42,000
राहुल जी

834
01:07:42,000 --> 01:07:46,120
जी से राहुल जीन

835
01:07:46,120 --> 01:07:50,320
से हाज आप लीड हटा

836
01:07:50,320 --> 01:07:56,240
दीजिए आप

837
01:07:56,240 --> 01:07:59,040
अभी

838
01:07:59,040 --> 01:08:03,080
बोलिए बो जैसे द्वैत अद्वैत की बात की थी शंकर

839
01:08:03,080 --> 01:08:07,200
संप्रदाय में तो अद्वैत फिसत सिद्धांत का पालन किया

840
01:08:07,200 --> 01:08:11,320
जाता है दत कहा से आ गया आपने शंकर संप्रदाय

841
01:08:11,320 --> 01:08:15,720
के बारे में अध्यन कहां से किया है शंकर

842
01:08:15,720 --> 01:08:19,840
संप्रदाय के बारे में तो मैंने य सुना है कि अद

843
01:08:19,840 --> 01:08:25,840
ब्रह्म और परब्रह्म एक है व इस हो जाता है

844
01:08:26,120 --> 01:08:30,120
जाता प्रभुपाद जी की बु यह

845
01:08:30,120 --> 01:08:34,840
तो गलत बात है प्रभुपाद जी की क्यों ये तो गलत बात

846
01:08:34,840 --> 01:08:39,160
है नहीं प्रभुपाद जी की बुक्स में आपको चैतन्य महाप्रभु

847
01:08:39,160 --> 01:08:43,360
की भविष्य बताइए कि मैं

848
01:08:43,360 --> 01:08:47,640
कोई इसकन के विरोधी द्वारा कोई बुक छाप दी जाए और

849
01:08:47,640 --> 01:08:51,640
उसके आधार पर मैं अपने यह बना लू कि आपके यहां यह होता है

850
01:08:51,640 --> 01:08:55,680
तो क्या य आपकी नजरों में उचित है कोई

851
01:08:55,680 --> 01:09:00,040
और बुक से बात नहीं कर रहा मैं शास्त्र से ही बात कर रहा हूं श्रीमद् भागवत च

852
01:09:00,040 --> 01:09:04,120
प्रभुपाद जी की बुक से मैंने अध्ययन किया है प्रभुपाद जी ने उसम

853
01:09:04,120 --> 01:09:08,840
टिप्पणी दी है लेकिन वो श्रीमद् भागवत भाई साहब मैंने आपसे एक प्रश्न पूछा कि आपके

854
01:09:08,840 --> 01:09:12,880
इकन के लिए यदि कोई विरोधी अपने

855
01:09:12,880 --> 01:09:17,120
मंतव्य की सिद्धि करने के लिए उसम कुछ का कुछ कुछ का कुछ लिख दे तो

856
01:09:17,120 --> 01:09:21,600
उसके आधार पर मैं अपने निर्णय कर लूं कि स्कन ऐसा है क्या ये सही

857
01:09:21,600 --> 01:09:26,040
है देख इकन की जो बुक होती है

858
01:09:26,040 --> 01:09:30,280
अगर मैं अगर मैं अगर मैं आदि

859
01:09:30,280 --> 01:09:34,400
शंकर अगर मैं इकोन को लेकर के कोई भी टिप्पणी करने वाला हूं या इकोन

860
01:09:34,400 --> 01:09:38,680
के किसी भी सिद्धांत से मुझे दिक्कत है या विरोध है

861
01:09:38,680 --> 01:09:41,360
तो वह तब मुझे होना चाहिए जब मैं उसको

862
01:09:41,360 --> 01:09:45,520
बिल्कुल जो मुझे समझ में आ रहा है जो मुझे बताया जा रहा है उसको मैं उनके

863
01:09:45,520 --> 01:09:49,520
प्रामाणिक लोगों द्वारा बिल्कुल वो कर लूं कि

864
01:09:49,520 --> 01:09:53,760
हां जो मैं समझ रहा हूं वही सही है जैसे कि फॉर एग्जांपल स्कोन

865
01:09:53,760 --> 01:09:58,160
ने अपनी जो बुक है आत्म साक्षात्कार का

866
01:09:58,160 --> 01:10:03,040
विज्ञान उसमें कई जगह कृष्ण अल्ला को एक

867
01:10:03,040 --> 01:10:09,040
कहा ठीक है और जो

868
01:10:09,240 --> 01:10:13,360
कृष्ण यह वाली बुक है जो लीला

869
01:10:13,360 --> 01:10:17,440
पुरुषोत्तम श्री कृष्ण है ना एक बुक है ना

870
01:10:17,440 --> 01:10:21,560
कृष्णा नाम कृष्णा नाम की बुक है उसमें तो पेज को खोलते ही

871
01:10:21,560 --> 01:10:25,800
फ्रंट पेज में जो भूमिका आती है उसमें कोई अंग्रेजी

872
01:10:25,800 --> 01:10:29,840
मूल का व्यक्ति है उसके द्वारा वहां पर भूमिका में लिखा गया है कि कृष्ण

873
01:10:29,840 --> 01:10:34,040
अल्लाह और जवा एक है ये मैंने इस कौन की किताबों से पढ़

874
01:10:34,040 --> 01:10:38,640
लिया मगर फिर भी मैं शांत नहीं हुआ

875
01:10:38,640 --> 01:10:42,640
मैं शांत नहीं हुआ सुनिए मैं शांत नहीं हुआ मैंने

876
01:10:42,640 --> 01:10:47,360
अपना निर्णय नहीं किया नहीं पहले मैं इकोन मंदिर गया इकोन

877
01:10:47,360 --> 01:10:51,800
मंदिर जाकर के इकोन के द्वारा नियुक्त जो प्रामाणिक आपके शिक्षक हैं

878
01:10:51,800 --> 01:10:55,960
उनके सामने बैठा बाकायदा और मैंने पूछा कि कृष्ण अल्लाह

879
01:10:55,960 --> 01:10:56,520
का क्या मामला

880
01:10:56,520 --> 01:11:01,000
है तो उन्होंने बिल्कुल ठोस तरीके से कहा कृष्ण अल्लाह और यहोवा

881
01:11:01,000 --> 01:11:05,680
एक है और कृष्ण और शिव एक नहीं

882
01:11:05,680 --> 01:11:10,240
तो यह तरीका है अपने किसी मैं कुल मिलाकर के

883
01:11:10,240 --> 01:11:14,320
हमें उन बातों पर बात करनी चाहिए जो सामने वाला स्वीकार कर रहा हो मेरी

884
01:11:14,320 --> 01:11:18,320
किताबों का मिस इंटरप्रिटेशन करके आपको कुछ पढ़ा दिया गया आपने कुछ पढ़ लिया

885
01:11:18,320 --> 01:11:22,440
उन परे नहीं बात करनी चाहिए उन बात जैसे आप स्वीकार कर रहे

886
01:11:22,440 --> 01:11:26,480
हैं कि कृष्ण जो है वो परमात्मा है और व

887
01:11:26,480 --> 01:11:30,920
अल्लाह है और व सेम य आप स्वीकार कर रहे तो हम इस पर कटाक्ष

888
01:11:30,920 --> 01:11:36,080
कर सकते हैं इस पर हम क्वेश्चन कर सकते हैं और

889
01:11:36,080 --> 01:11:40,240
अभी मैं औरन इस चीज को स्वीकार नहीं करता कि

890
01:11:40,240 --> 01:11:44,280
अल्लाह जो होवा एक है हम यह कहते अखिल ब्रह्मांड का नायक

891
01:11:44,280 --> 01:11:49,000
है जब भगवान द अध्याय के आ लोक में कह रहे सर्व प्रभ

892
01:11:49,000 --> 01:11:53,120
स मतवा भज

893
01:11:53,120 --> 01:11:57,120
बुव आध्यात्मिक सृष्टि हो य भौतिक सृष्टि है वो मेरे से ही प्रकट

894
01:11:57,120 --> 01:12:01,120
होती है तो वो कहते हैं कि अल्लाह ने सब कुछ किया है तो मैं बोला अल्लाह

895
01:12:01,120 --> 01:12:05,400
वही है है तुम अल्लाह कहते हो हम कृष्ण कहते हैं तो

896
01:12:05,400 --> 01:12:09,960
कृष्ण को ही स्वीकार कर लो आप अपना जो अधिकृत थोड़ा

897
01:12:09,960 --> 01:12:14,600
सा बताए कि आप क्या है इस कन में क्या आपका वो है

898
01:12:14,600 --> 01:12:18,640
मैं इस कन इस कन को फॉलो करता हूं सात आठ साल से और

899
01:12:18,640 --> 01:12:22,680
मैं एक बात बता अब आप एक बात बताइए जब स्कोन

900
01:12:22,680 --> 01:12:26,840
का अधिकृत व्यक्ति कह रहा है कृष्ण अल्लाह जवा

901
01:12:26,840 --> 01:12:31,160
एक है और आप कह रहे हो कि नहीं य नहीं मानता दूसरी बात

902
01:12:31,160 --> 01:12:35,280
दूसरी बात अगर अल्लाह को अपना

903
01:12:35,280 --> 01:12:39,520
प्रश्न पूछ रहा हूं मैं अपना प्रश्न पूछ रहा हूं भाई साब मैं अपना प्रश्न पूछ रहा हूं अगर

904
01:12:39,520 --> 01:12:43,520
अल्लाह को क्योंकि अल्लाह को मानने वाले सुप्रीम

905
01:12:43,520 --> 01:12:47,840
मानते हैं अल्लाह को तो इस नजर से आप लोग कह देते हो कि कृष्ण

906
01:12:47,840 --> 01:12:51,200
और अल्लाह एक है ठीक है जबक

907
01:12:51,200 --> 01:12:55,200
आप मानते नहीं हो कि कृष्ण अल्ला एक है मगर क्योंकि उसको मानने वाले उसको

908
01:12:55,200 --> 01:12:59,360
सुप्रीम मानते हैं उस सुप्रीम की दृष्टि से आप कह देते हो तो शिव

909
01:12:59,360 --> 01:13:03,600
को मानने वाले भी तो एक मिनट एक मिनट शिव को मानने

910
01:13:03,600 --> 01:13:07,760
वाले भी तो शिव को सुप्रीम मानते हैं उस दृष्टि से आप क्यों नहीं कह देते

911
01:13:07,760 --> 01:13:11,960
शिव और कृष्ण एक है दूसरी बात दूसरी

912
01:13:11,960 --> 01:13:16,000
बात मैं आपको एक बात बताऊ अब अधिकृत व्यक्ति की बात बता दूं एक

913
01:13:16,000 --> 01:13:20,880
मिनट एक मिनट अधिकृत व्यक्ति की बात बता दूं मैं कि

914
01:13:20,880 --> 01:13:25,360
जैसे लोग आजकल आरोप लगा रहे हैं कि भाई वो उन्होंने अलो उपनिषद पर बात की

915
01:13:25,360 --> 01:13:31,040
या लोप निषद को वो नकारा नहीं यह सब आरोप चल रहे हैं

916
01:13:31,040 --> 01:13:35,120
या तरह तरह की मिथ्या भाई कौन से स्टेज

917
01:13:35,120 --> 01:13:40,200
पर खड़े होकर के इसकन के किसी व्यक्ति ने सीधे-सीधे

918
01:13:40,200 --> 01:13:44,360
कुरान के ईश्वर का खंडन किया

919
01:13:44,360 --> 01:13:48,560
कि वो ईश्वर नहीं है पुरान के द्वारा प्रतिपादित किया क्या कहीं

920
01:13:48,560 --> 01:13:52,680
कहीं किसी बुक में छापा है क्या कुरान का ईश्वर ईश्वर नहीं

921
01:13:52,680 --> 01:13:57,280
है जो अवतार नहीं नहीं है

922
01:13:57,280 --> 01:14:01,360
इसकन वालों को कोई दिक्कत नहीं है देवी देवताओं की उपासक उपासना करो

923
01:14:01,360 --> 01:14:05,760
इस्लाम धर्म में सिख हो तो गुरुद्वारे जाओ इसकन

924
01:14:05,760 --> 01:14:09,920
का तो यही है कि भागवत और श्रीमद् भगवत गीता के हिसाब से एकला ईश्वर

925
01:14:09,920 --> 01:14:14,120
कृष्ण आर सवत जार जैसे नछ कर नित्र

926
01:14:14,120 --> 01:14:18,360
अच्छ जगना अच्छा श्री भागवत श्रीमद

927
01:14:18,360 --> 01:14:22,920
भागवत आप किसकी पढ़ते हैं प्रभुपाद जी की ही पढ़ते हैं

928
01:14:22,920 --> 01:14:27,240
श्रीमद् भागवत मैंने गीता गोरखपुर की पड़ी है नहीं नहीं

929
01:14:27,240 --> 01:14:31,600
गीता प्र छोड़ दीजिए श्रीमद भागवत में क्या

930
01:14:31,600 --> 01:14:35,720
आपकी श्रीमद् भागवत वो श्रीमद भागवत है जो चेतन महाप्रभु

931
01:14:35,720 --> 01:14:40,480
मानते थे जी प्रभु जी

932
01:14:40,480 --> 01:14:43,000
जी हां

933
01:14:43,000 --> 01:14:46,320
जीने चैतन्य महाप्रभु ने श्रीमद्

934
01:14:46,320 --> 01:14:50,480
भागवत इनकी पढ़ थी शीला प्रभुपाद जी की किसकी

935
01:14:50,480 --> 01:14:54,520
पड़ी थी शीला प्रभुपाद जी ने अपना

936
01:14:54,520 --> 01:14:58,760
कोई कोई टिप्पणी अपनी कोई टीका नहीं द है उसम प्रभुपाद

937
01:14:58,760 --> 01:15:02,840
जी ने सारे आचा जब अपना नहीं दिया तो लिखा ही क्यों वही वाली फ्रेश

938
01:15:02,840 --> 01:15:08,240
करके छाप देते हैं के जो आचार्य पह पूरी बात सुन

939
01:15:08,240 --> 01:15:12,400
लीजिए का जो मत है वह सारे आचार्यों का मत है परंपरा में जितने

940
01:15:12,400 --> 01:15:16,600
भी आचार्य उन मेरे भाई मैं आपसे यह पूछ रहा हूं कि चैतन्य

941
01:15:16,600 --> 01:15:20,680
महाप्रभु श्रीमद् भागवत किसकी पढ़ते थे

942
01:15:20,680 --> 01:15:25,000
चैतन्य महाप्रभु ने हमको रिकमेंड किया श्रीधर स्वामी

943
01:15:25,000 --> 01:15:29,480
की टी हां विश्वनाथ ठाकुर की टीका श्रीधर स्वामी

944
01:15:29,480 --> 01:15:33,560
श्रीधर स्वामी ने जो लिखा है भागवत में श्रीधर स्वामी

945
01:15:33,560 --> 01:15:38,040
ने जो लिखा है वही लिखा है क्या प्रभुपाद जी ने

946
01:15:38,040 --> 01:15:42,480
श्रीधर स्वाही मैं बोल रहा हूं प्रभुपाद जी की जो भागवत प टीका है

947
01:15:42,480 --> 01:15:46,680
उसम एक आचार्यों की टीका नहीं है उसको कंपाइल किया ई साहब भाई

948
01:15:46,680 --> 01:15:50,760
साहब प्रश्न मेरा यह है चैतन्य महाप्रभु ने सभी

949
01:15:50,760 --> 01:15:55,040
आचार्यों का नाम लिया श्रीमद् भागवत के लिए या श्रीधरी टीका

950
01:15:55,040 --> 01:15:59,320
का नाम लिया है दोनों का लिया श चैतन्य महाप्रभु शिष्य

951
01:15:59,320 --> 01:16:01,960
सनातन गोस्वामी पाद उनकी भी टीका है

952
01:16:01,960 --> 01:16:06,200
रूप गोस्वामी की चैतन्य महाप्रभु

953
01:16:06,200 --> 01:16:10,480
ने किसका नाम लिया कि मैं भागवत किससे समझ पाया हूं यह

954
01:16:10,480 --> 01:16:14,760
बताइए चैतन्य महाप्रभु ने तो भागवत का

955
01:16:14,760 --> 01:16:19,040
चैतन्य महाप्रभु को तो भागवत समझ लेकिन महाप्रभु ने रिकमेंड किया है कि श्रीधर

956
01:16:19,040 --> 01:16:23,120
स्वामी की टीका नहीं रिकमेंड नहीं किया है उन्होने कहा है कि

957
01:16:23,120 --> 01:16:27,600
उन्होंने कहा है कि मैं समझ पाया भागवत को

958
01:16:27,600 --> 01:16:31,840
श्रीधर स्वामी के द्वारा ऐसा कुछ नहीं है श्रीधर स्वामी

959
01:16:31,840 --> 01:16:36,800
की टीका नहीं पढ़ते नहीं मैं आपको प्रमाण बताऊ मैं आपको प्रमाण बताऊ

960
01:16:36,800 --> 01:16:40,880
भागवत पढ़ते थे वो अपने अतरंग जो पूछ

961
01:16:40,880 --> 01:16:44,920
रहा हूं मैं उसका जवाब दीजिए मैं आपको प्रमाण बताऊ मैं

962
01:16:44,920 --> 01:16:48,960
वही बोल रहा हूं आपर स्वामी की टीका प आवश्यकता चैतन्य महा

963
01:16:48,960 --> 01:16:52,960
को नहीं है चैतन्य महाप स्वयं भगवान है चैतन्य महाप ने िक

964
01:16:52,960 --> 01:16:57,080
किया है हम जैसे लोगों के पूछ रहा हूं भाई साहब अगर वो कुछ कह रहे

965
01:16:57,080 --> 01:17:01,240
हैं तो उसको आप सत्य मानेंगे या नहीं मानेंगे बकल मानेंगे

966
01:17:01,240 --> 01:17:05,520
तो वो ये कह रहे मैं भागवत को समझ पाया हूं व्यवहारिक

967
01:17:05,520 --> 01:17:09,720
सत्य य है कि चैतन्य महाप्रभु ने निर्भरता दिखाई श्रीधर

968
01:17:09,720 --> 01:17:13,800
स्वामी के ऊपर ये आपका वर स हो गया जैसे

969
01:17:13,800 --> 01:17:16,960
कि आप जन्माष्टमी क्यों बनाते हैं बताइए

970
01:17:16,960 --> 01:17:21,160
श्रीधर स्वामी की टीका चैतन्य महाप्रभु ने पढ़ी यह प्रमाण

971
01:17:21,160 --> 01:17:25,240
कहीं नहीं मिलता है हमको चैतन्य चैता में चैतन्य महाप्रभु से संबंधित किसी

972
01:17:25,240 --> 01:17:29,760
ठीक है मैं अभी प्रमाण दिखा दे रहा हूं आपको मैं अभी आपको प्रमाण दिखा दे रहा हूं

973
01:17:29,760 --> 01:17:35,760
मैं प्रमाण दिखा दे रहा हूं

974
01:18:23,080 --> 01:18:26,240
हम

975
01:18:26,240 --> 01:18:32,240
श्री चैतन्य चरता मृत है

976
01:18:32,760 --> 01:18:37,280
उसमें तीन सा 114

977
01:18:37,280 --> 01:18:41,680
में वल्लभाचार्य जी कह रहे हैं श्रीधर स्वामी के अगेंस्ट

978
01:18:41,680 --> 01:18:45,760
वल्लभाचार्य सुद्धा दत वाले यह आपकी चेतन

979
01:18:45,760 --> 01:18:49,760
चरता मृत है इस कौन से शक्ति है श्रीधर स्वामी जो कुछ

980
01:18:49,760 --> 01:18:54,200
भी पढ़ते हैं उसकी व्याख्या परिस्थिति के अनुसार ही करते हैं इसलिए

981
01:18:54,200 --> 01:18:58,240
उनकी व्याख्या में एक रूपता नहीं है मतलब कुल मिलाकर के य वो विरोध कर

982
01:18:58,240 --> 01:19:02,360
रहे हैं उन्हें प्रमाणित नहीं माना जा सकता

983
01:19:02,360 --> 01:19:06,880
इस प्रमाणित ना माने जाने के जवाब

984
01:19:06,880 --> 01:19:11,040
में चेतन चरता मृत में 115 से 116 तक

985
01:19:11,040 --> 01:19:15,080
वह कहते हैं चैतन्य महाप्रभु

986
01:19:15,080 --> 01:19:19,320
एक कर्कश मुस्कान के साथ श्री चैतन्य महाप्रभु ने

987
01:19:19,320 --> 01:19:23,360
कहा जो कोई श्रीधर स्वामी की अवेल करता

988
01:19:23,360 --> 01:19:27,360
है उसे व्या में गिना जाना चाहिए यानी

989
01:19:27,360 --> 01:19:31,360
कि जो श्रीधर स्वामी का टीका प्रमाणिक नहीं मानेगा उसे वैश्या में

990
01:19:31,360 --> 01:19:35,480
गिना जाएगा और आगे ये भी कहा है इसी में इन्होने कि जो भी

991
01:19:35,480 --> 01:19:39,720
कोई लिखेगा वो गलत ही होगा जो सीदर के विरोध में होगा जरा सा भी वो गलत

992
01:19:39,720 --> 01:19:41,440
होगा मेरे हिसाब से

993
01:19:41,440 --> 01:19:46,120
ठीक है और जो विरोध कर रहा वो व में गिना जाना चाहिए

994
01:19:46,120 --> 01:19:50,160
अच्छा इस बयान को सुनकर सभी को संतोष हुआ आगे वो कह रहे हैं

995
01:19:50,160 --> 01:19:55,160
मैं श्रीधर स्वामी की कृपा से भागवत को समझ पाया हूं

996
01:19:55,160 --> 01:19:59,400
यह स्पष्ट लिखा है 3 सा 133 से 135

997
01:19:59,400 --> 01:20:03,480
में और वो बंगाली भाषा में भी बता दूं मुझे पढ़ना नहीं आता मगर कोशिश

998
01:20:03,480 --> 01:20:07,720
करता हूं बंगाली भाषा में व क्या कहा है श्रीधर स्वामी प्रसाद

999
01:20:07,720 --> 01:20:11,920
भागवत जानी जगत गुरु श्रीधर स्वामी गुरु कारी मणि

1000
01:20:11,920 --> 01:20:16,440
श्रीधर उ पारे गर्वे किछु लिख अर्थ व्यस्त लिखना

1001
01:20:16,440 --> 01:20:20,480
सेही लोके न मवे श्री धरेर

1002
01:20:20,480 --> 01:20:25,240
अनुगती य करे लिखना सब सवा लोक मान्या करी करिवा ग्रह

1003
01:20:25,240 --> 01:20:29,840
यह सब बंगाली है क्या है मतलब मैं सही से उच्चारण नहीं कर पाया शायद

1004
01:20:29,840 --> 01:20:33,920
तो श्रीधर स्वामी की कृपा से मैं भागवत को जानता

1005
01:20:33,920 --> 01:20:38,240
हूं क्या है श्रीधर स्वामी प्रसाद भागवत जानी बंगाल

1006
01:20:38,240 --> 01:20:42,320
बंगाली में मैं मानता हूं कि व ब्रह्मांड के आध्यात्मिक

1007
01:20:42,320 --> 01:20:46,320
गुरु है जगत गुरु है जगत गुरु कितना प्रमाणिक माना उन्होंने

1008
01:20:46,320 --> 01:20:50,400
श्रीधर स्वामी को तो अब मैं पूछ रहा हूं कि प्रभुपाद जी की जो टीका

1009
01:20:50,400 --> 01:20:55,760
है वो श्रीधर स्वामी के बिल्कुल साथ में है कि जरा बहुत थोड़ा बहुत विरोध भी है

1010
01:20:55,760 --> 01:20:56,840
साथ में

1011
01:20:56,840 --> 01:21:00,960
है और भी आचार और भी आचार का मत विरोध

1012
01:21:00,960 --> 01:21:05,360
तो नहीं है चाहे जितने आचार्य का श्रीधर स्वामी का विरोध तो नहीं है

1013
01:21:05,360 --> 01:21:11,360
नहीं है ना ठीक है अब हम निकालते हैं

1014
01:21:24,780 --> 01:21:27,000
[संगीत]

1015
01:21:27,000 --> 01:21:31,120
बहुत लेट आए आप सारी एनर्जी डिप्लीट हो चुकी

1016
01:21:31,120 --> 01:21:35,320
उसके बाद आए बा कोई बात नहीं फिर समय मिलेगा

1017
01:21:35,320 --> 01:21:38,290
फिर दोबारा चर्चा कर

1018
01:21:38,290 --> 01:21:42,400
[संगीत] लेंगे आप ब्रह्मचारी तो नहीं

1019
01:21:42,400 --> 01:21:46,400
है नहीं सर मैं ब्रह्मचारी नहीं हूं लेकिन मैं ब्रह्मचारी बनने

1020
01:21:46,400 --> 01:21:49,240
वाला

1021
01:21:49,240 --> 01:21:53,520
हूं ईश्वर सर्वशक्तिमान है कि नहीं इसन का

1022
01:21:53,520 --> 01:21:57,720
बक क सर्वशक्तिमान है इकोन का क्या है

1023
01:21:57,720 --> 01:22:01,880
आपका न के द्वारा कन के द्वारा परिभाषित

1024
01:22:01,880 --> 01:22:06,360
होने वाला ईश्वर तो कुरान का भी है व हमारा थोड़ी ना

1025
01:22:06,360 --> 01:22:10,760
एकला ईश्वर कृष्ण स कृष्ण सर्वशक्तिमान है

1026
01:22:10,760 --> 01:22:16,760
तो सब कुछ कर सकते हैं बकल सब कुछ कर

1027
01:22:26,040 --> 01:22:30,120
श्रीमद भागवत में आठवा

1028
01:22:30,120 --> 01:22:36,120
स्कंद सातवा अध्याय

1029
01:22:41,000 --> 01:22:47,000
[संगीत]

1030
01:22:57,560 --> 01:23:01,000
आठवा

1031
01:23:01,000 --> 01:23:07,000
स्कंद सातवा

1032
01:23:09,640 --> 01:23:14,600
अध्याय ये धर स्वामी की टीका

1033
01:23:14,600 --> 01:23:20,600
ठीक है ठीक है

1034
01:23:52,400 --> 01:23:55,800
कर

1035
01:23:55,800 --> 01:23:59,960
त्रिलोकी की अभिनति के लिए सती देवी के साथ कैलाश पर्वत

1036
01:23:59,960 --> 01:24:04,120
पर बैठे हुए मुनियों ने मुनियों के अभिमत और उन सबों की मुक्ति

1037
01:24:04,120 --> 01:24:08,400
के लिए तपस्या करने वाले शिव जी की प्रजापति हों ने स्तुति करने

1038
01:24:08,400 --> 01:24:12,480
करते हुए प्रणाम किया अब आगे शिव जी की परब्रह्म के

1039
01:24:12,480 --> 01:24:16,760
बारे में बात हो रही है हे देव देव महादेव

1040
01:24:16,760 --> 01:24:20,800
भूतात्मा भूत भावन त्रैलोक्य दहना

1041
01:24:20,800 --> 01:24:25,560
विषत शरणा पना न पही य का

1042
01:24:25,560 --> 01:24:29,920
उनका श्रीधर स्वामी का टीका हे देवताओं

1043
01:24:29,920 --> 01:24:34,240
के भी आराध्य महादेव हे समस्त प्राणियों के आत्मन और उनको

1044
01:24:34,240 --> 01:24:38,320
जीवन प्रदान करने वाले त्रैलोक्य को भस्म कर देने वाले विश्व से

1045
01:24:38,320 --> 01:24:42,360
हम शरणागत की आप रक्षा करें

1046
01:24:42,360 --> 01:24:46,400
श्री हरि के पराक्रम से निर्गुण और सगुण दोनों प्रकार के शिव

1047
01:24:46,400 --> 01:24:50,600
जी की स्तुति करने वाले प्रजापति हों ने उन दोनों में नाम मात्र का अंतर

1048
01:24:50,600 --> 01:24:54,920
ही माना नाम का अंतर माना

1049
01:24:54,920 --> 01:24:58,960
अंतर संपूर्ण जगत के बं एवं मोक्ष के एक मात्र

1050
01:24:58,960 --> 01:25:03,200
नियामक आप ही है शिव इसलिए ज्ञानी

1051
01:25:03,200 --> 01:25:07,640
पुरुष शरणागत के कष्ट को दूर करने वाले सबों

1052
01:25:07,640 --> 01:25:11,640
के स्वामी आप ही की अर्चना करते हैं लो इसके बाद

1053
01:25:11,640 --> 01:25:17,640
उन्होने आगे लिख दिया अपनी

1054
01:25:23,320 --> 01:25:27,520
गुणमककुम स्वतः सिद्ध ज्ञानवान आप ब्रह्मा विष्णु और शिव की संज्ञा

1055
01:25:27,520 --> 01:25:31,680
को धारण करते हैं कौन शिवजी

1056
01:25:31,680 --> 01:25:36,400
क्या यहां पर प्रभुपाद ने प्रभुपाद जी ने माना है

1057
01:25:36,400 --> 01:25:40,520
कि शिव जी ब्रह्मा विष्णु महेश का रूप धारण करते हैं अपनी माया

1058
01:25:40,520 --> 01:25:44,680
शक्ति के द्वारा उन्होंने कह दिया ये जो स्तुति है विष्णु भगवान

1059
01:25:44,680 --> 01:25:48,840
की है उन्होंने कह दिया य माया

1060
01:25:48,840 --> 01:25:52,840
की जगह दिव्य शक्ति है माया को हटा दिया माया से थोड़ी दिक्कत है

1061
01:25:52,840 --> 01:25:56,960
चलो ठीक है कोई बात नहीं मगर यहां पर बात

1062
01:25:56,960 --> 01:26:01,000
हुई है शिव जी की और उन्होंने सीधे लिख दिया यहां यह

1063
01:26:01,000 --> 01:26:05,040
जो स्थिति वस्तुत विष्णु के लिए ये तो

1064
01:26:05,040 --> 01:26:07,640
विरोध हो

1065
01:26:07,640 --> 01:26:10,440
गया अब इसको कैसे समझे

1066
01:26:10,440 --> 01:26:14,560
अब प्रभुपाद जी हमारे जितने भी वैष्णव आचार्य हैं सब तत्व

1067
01:26:14,560 --> 01:26:19,200
की दृष्टि से समझते हैं तत्व अलग है चार तत्व य

1068
01:26:19,200 --> 01:26:23,520
आपने श्रीधर स्वामी का मैंने आपको कोट करके बताया है

1069
01:26:23,520 --> 01:26:27,920
क्या आपको सिखाया गया है कि ब्रह्मा विष्णु महेश एक है क्योंकि श्रीधर

1070
01:26:27,920 --> 01:26:32,360
स्वामी ये सिखा रहे हैं कि ब्रह्मा विष्णु महेश एक है ब्रह्मा

1071
01:26:32,360 --> 01:26:36,440
विष्णु महेश एक नहीं है भाई साहब मैं आपसे ये नहीं पूछ रहा वो एक है

1072
01:26:36,440 --> 01:26:40,720
कि नहीं मैं आपसे पूछ रहा हूं आपको ये सिखाया गया है

1073
01:26:40,720 --> 01:26:44,960
नहीं सिखाया गया है और एक भी नहीं है नहीं तो ये श्रीधर स्वामी यही सिखा रहे हैं

1074
01:26:44,960 --> 01:26:49,240
अब आप इनके पक्ष में है कि नहीं है नहीं

1075
01:26:49,240 --> 01:26:53,600
नहीं है तो चैतन्य महाप्रभु जिनको प्रमाणिक मान रहे हैं जिनको जगतगुरु

1076
01:26:53,600 --> 01:26:57,880
मान रहे हैं जिनके द्वारा वो भागवत को समझ रहे हैं आप जो है उनके

1077
01:26:57,880 --> 01:27:02,360
विरुद्ध चीजों को स्वीकार करते हैं नहीं

1078
01:27:02,360 --> 01:27:06,640
आदि शंकराचार्य आदि शंकराचार्य जो है भाई साहब आदि

1079
01:27:06,640 --> 01:27:10,680
शंकराचार्य जी की बात नहीं हो रही य बात हो रही है चैतन्य महाप्रभु ने सीदर स्वामी को

1080
01:27:10,680 --> 01:27:14,960
माना वो बताइए आप उसी का आंसर दे रहा हूं मैं आपको

1081
01:27:14,960 --> 01:27:19,200
आदि शंकराचार्य है वो स्वयं शिव जी है शिवजी से अभिन्न

1082
01:27:19,200 --> 01:27:23,360
है शिवजी से अलग तो नहीं शंकराचार्य लेकिन

1083
01:27:23,360 --> 01:27:25,440
जो वो सिद्धांत लेकर आया

1084
01:27:25,440 --> 01:27:29,600
अद्वैत सिद्धांत देखिए आप जो है अगर

1085
01:27:29,600 --> 01:27:34,040
व्यर्थ की चर्चा करेंगे मुझे आपको कट करना पड़ेगा चैतन्य

1086
01:27:34,040 --> 01:27:38,280
महाप्रभु ने भागवत को कहां से समझा यह बताइए

1087
01:27:38,280 --> 01:27:42,440
चैतन्य महाप्रभु ने भागवत को अपने अतरंग जो परिकर थे उनके

1088
01:27:42,440 --> 01:27:47,280
साथ बैठक महाप्रभु पड़ा करते मतलब सीदर स्वामी से नहीं समझा

1089
01:27:47,280 --> 01:27:51,320
सीदर स्वामी की टीका को महाप्रभु बिना पढ़े ही जानते थे

1090
01:27:51,320 --> 01:27:55,400
वो जो मैं आपसे पूछ रहा स्वामी से समझे कि नहीं

1091
01:27:55,400 --> 01:28:00,200
समझे नहीं समझे नहीं

1092
01:28:00,200 --> 01:28:04,360
समझे नहीं समझे तो यानी कि यहां पर जो उन्होंने कहा है वो

1093
01:28:04,360 --> 01:28:08,800
लीला मात्र है झूठ लिखा है झूठ नहीं लिखा है

1094
01:28:08,800 --> 01:28:12,920
महाब ने रिकमेंड किया है कि श्रीधर स्वामी की टीका भाई साहब

1095
01:28:12,920 --> 01:28:17,080
वो रिकमेंड नहीं कह रहे हैं वो ये कह रहे हैं कि मैं उनसे समझा हूं

1096
01:28:17,080 --> 01:28:21,120
इसको क्या करें और ये ट्रांसलेशन

1097
01:28:21,120 --> 01:28:25,320
भी आपका आपका कौन का ट्रांसलेशन है एज इट इज

1098
01:28:25,320 --> 01:28:29,600
चलो मान लीजिए मान लीजिए उन्होंने सीख लिया चलो श्रीधर

1099
01:28:29,600 --> 01:28:33,760
स्वामी की टीका से सीख लिया मैं वही चीज बता रहा था शंकराचार्य जी

1100
01:28:33,760 --> 01:28:37,960
ने सिद्धांत दिया है शंकराचार्य जी के सिद्धांत भाई साहब एक एक करके

1101
01:28:37,960 --> 01:28:40,440
चलिए एक एक चीज क्लियर कीए प्लीज एक

1102
01:28:40,440 --> 01:28:44,520
एक चीज आप मुझे बताइए चैतन्य महाप्रभु के द्वारा आ

1103
01:28:44,520 --> 01:28:49,280
रहा ज्ञान आप दे रहे हैं या फिर अपना दे रहे हैं चैतन्य महाप्रभु के नाम

1104
01:28:49,280 --> 01:28:54,160
पर महाप्रभु का ही ज्ञान दे रहे हैं उसके बाद

1105
01:28:54,160 --> 01:28:58,840
जन तो चैतन्य महाप्रभु का ज्ञान तो वो है जो श्रीधर स्वामी का ज्ञान

1106
01:28:58,840 --> 01:29:03,000
है यह सिद्ध हो गया नहीं

1107
01:29:03,000 --> 01:29:09,000
नहीं ऐसा नहीं है बिल्कुल भी

1108
01:29:09,440 --> 01:29:13,800
बता एक जरा बात क्लियर कर ले इसमें यह कहा है कि जो भी उनके विरोध

1109
01:29:13,800 --> 01:29:18,240
में लिखेगा वह वैश्या के समान होगा तो

1110
01:29:18,240 --> 01:29:22,400
इतनी बात ये मानते हैं उनकी चेतन महाप्रभु की कि

1111
01:29:22,400 --> 01:29:26,400
नहीं बिल्कुल मान तो सीदर

1112
01:29:26,400 --> 01:29:30,720
स्वामी से विरोध है कि नहीं है आपकी जो पढ़ रहे हैं इस समय आप भागवत

1113
01:29:30,720 --> 01:29:34,720
किसने किसने लिखी मुझे नहीं पता नहीं है विरोध

1114
01:29:34,720 --> 01:29:38,760
विरोध नहीं है बिल्कुल एक है तो ब्रह्मा विष्णु महेश आप भी मानते

1115
01:29:38,760 --> 01:29:42,880
हो एक है नहीं है नहीं है तो ये तो मान

1116
01:29:42,880 --> 01:29:47,360
रहे हैं श्रीधर स्वामी की टीका जो आप पढ़ रहे हैं अब

1117
01:29:47,360 --> 01:29:51,360
कैसे मैं मानू कि वो ठीक है कि नहीं है अा एक बात बए अच्छा

1118
01:29:51,360 --> 01:29:55,400
एक बात बताइए प्रभुपाद जी की टीका पढ़ रहे मैं आपको कैसे मानू

1119
01:29:55,400 --> 01:29:55,900
कि

1120
01:29:55,520 --> 01:29:58,760
आप प्रभुपाद जी की पढ़ रहे

1121
01:29:58,760 --> 01:30:02,880
हैं अब मैं कैसे बताऊ कि आप आपको

1122
01:30:02,880 --> 01:30:07,240
कैसे मैं समझाऊ कि मैं प्रभुपाद सिंपल सी बात है

1123
01:30:07,240 --> 01:30:11,760
इकोन की अगर किसी किताब को पढ़ने का क्लेम करेंगे तो इकोन

1124
01:30:11,760 --> 01:30:15,880
के जो अधिकृत लोग होंगे इकोन के जो अधिकृत परंपरा होगी उससे जुड़े हुए लोग

1125
01:30:15,880 --> 01:30:19,880
यह कह देंगे कि भैया हा भया यह वाली जो है हमारी है तो ये श्रीधर

1126
01:30:19,880 --> 01:30:23,960
स्वामी कहां के है अभ आपको जो शक है कि हम प्रभुपाद जी की

1127
01:30:23,960 --> 01:30:28,240
प रहे नहीं पढ़ रहे लेकिन आपको भी तो श है अब शंकराचार्य

1128
01:30:28,240 --> 01:30:32,240
शंकराचार्य वालो सेही आप पूछोगे भैया आप शंकराचार्य जी का पढ़

1129
01:30:32,240 --> 01:30:36,320
रहे नहीं प रहे तो आप बताओगे अच्छा चलिए

1130
01:30:36,320 --> 01:30:41,120
ठीक मान लीजिए स्वामी की जो टी पहा

1131
01:30:41,120 --> 01:30:45,520
नहीं है लेक्चर सुनते हैं प्रभुपाद जी के मुख से हमने सुना है खुद

1132
01:30:45,520 --> 01:30:49,240
ऑडियो लेक्चर

1133
01:30:49,240 --> 01:30:53,240
है बमा नहीं शर स्वामी

1134
01:30:53,240 --> 01:30:57,320
के लिए सुना है वो बताइए भाई साहब श्रीधर

1135
01:30:57,320 --> 01:31:01,320
स्वामी के टीका में से कई श्लोक

1136
01:31:01,320 --> 01:31:05,520
है जो प्रभुपाद जी ने अपनी टीका में डाले हैं

1137
01:31:05,520 --> 01:31:10,320
बस मतलब नहीं है क्या एक जगह भी विरोध है क्या

1138
01:31:10,320 --> 01:31:14,480
विरो ऐसे तो बहुत ऐसे बहुत सी चीज आपकी सबसे मिल

1139
01:31:14,480 --> 01:31:18,880
जाएंगी उससे मतलब नहीं है एक भी जगह विरोध है क्या

1140
01:31:18,880 --> 01:31:22,880
विरोध प्रभुपाद जी ने कहीं नहीं किया अरे तो य ये कह रहे ब्रह्मा

1141
01:31:22,880 --> 01:31:26,920
विष्णु महेश एक है इसका क्या करें आप तो सीधे सधे लिख दे रहे हो विष्णु

1142
01:31:26,920 --> 01:31:31,120
की बात हो रही है इन्होने नहीं लिखा विष्णु की बात हो रही इन्होने लिखा इन्होने लिखा है शिव

1143
01:31:31,120 --> 01:31:35,120
की बात हो रही शंकर की बात हो रही महादेव की बात हो रही है वही तो मैं बोल रहा

1144
01:31:35,120 --> 01:31:39,240
हूं तीनों एक कैसे हो गए आप बता दीजिए मुझे आपके बात है

1145
01:31:39,240 --> 01:31:43,400
अभी मैं पूछ रहा हूं आप इसको मानते हैं कि नहीं श्रीधर स्वामी को प्रमाण

1146
01:31:43,400 --> 01:31:47,440
मानते है कि नहीं को मानता हूं आप सीधी सधी प्रभुपाद जी को खंडित

1147
01:31:47,440 --> 01:31:51,440
कर रहे तो आप अपने हिब सेरे को समझा दीजिए कि ब्रह्मा विष्णु महेश एक कैसे हैं

1148
01:31:51,440 --> 01:31:55,520
भाई साहब मैं फिलहाल अभी हम प्रमा प बात कर रहे हैं हम लोग तर्क पर भी बात

1149
01:31:55,520 --> 01:31:59,520
करेंगे अभी एकएक करके चल रहे हैं अभी मैंने आपको बताया श्रीधर

1150
01:31:59,520 --> 01:32:03,680
स्वामी कह रहे हैं महादेव की स्तुति हो रही है आपकी बुक कह रही है कि विष्णु

1151
01:32:03,680 --> 01:32:04,360
की स्तुति हो रही

1152
01:32:04,360 --> 01:32:08,400
है तो पहले बात तो विरोध हो गया जब विरोध हो गया तो चैतन्य

1153
01:32:08,400 --> 01:32:12,760
महाप्रभु कह रहे हैं कि जो विरोध करेगा वो वैश्या है उसे वैश्य में गिना जाना चाहिए

1154
01:32:12,760 --> 01:32:16,920
तो क्या आप गिने गे पता नहीं श्रीधर स्वामी

1155
01:32:16,920 --> 01:32:21,800
के तो कई श्लोक यहां पर प्रभुपाद जी ने दिए हैं उसमें तो हमको

1156
01:32:21,800 --> 01:32:26,440
एक सुनिए अगर ठीक है आप ठीक है आप कर

1157
01:32:26,440 --> 01:32:30,720
आप इस विरोध को चेक कर लीजिएगा फिर आइएगा आप इस विरोध को चेक कर लीजिए

1158
01:32:30,720 --> 01:32:34,800
फिर आइए पता नहीं से काम नहीं चलता है ना पता

1159
01:32:34,800 --> 01:32:39,440
नहीं से काम नहीं चलता है आप इस सुनिए आप इस विरोध को चेक कर लीजिए

1160
01:32:39,440 --> 01:32:43,840
फिर आप आ जाइए नहीं नहीं नहीं नहीं ऐसा है

1161
01:32:43,840 --> 01:32:48,000
कि प्रभ को ले ले प्रभुपाद जी के गुरु को ले ले या पूरे गड़िया

1162
01:32:48,000 --> 01:32:52,080
वैष्णव संप्रदाय को ले ले पद्म पुराण में भी ये श्लोक आता है मैं श्लोक दे

1163
01:32:52,080 --> 01:32:56,280
सकता हूं उन सबके जवाब है मेरे पास

1164
01:32:56,280 --> 01:33:00,840
इस समय में बात कर रहा हूं श्रीधर स्वामी ने यहां पर

1165
01:33:00,840 --> 01:33:05,080
भगवान शंकर की स्तुति मानी और आपके

1166
01:33:05,080 --> 01:33:09,240
पास जो भागवत है उसमें उन्होंने विष्णु की स्तुति मानी

1167
01:33:09,240 --> 01:33:13,880
अब मुझे बताइए किय विरोध है श्री

1168
01:33:13,880 --> 01:33:17,960
दव स्कंद का 91 अध्याय का 50 श्लोक खोलिए उसम श्रीधर स्वामी

1169
01:33:17,960 --> 01:33:19,600
ने क्या कहा है

1170
01:33:19,600 --> 01:33:24,040
अरे तो उससे क्या मतलब है मेरे भाई सीदर स्वामी ने जगह जगह पर

1171
01:33:24,040 --> 01:33:28,240
ऐसी बात कई जगह मिल जाएगी जो आपके सुनिए ऐसे तो

1172
01:33:28,240 --> 01:33:33,480
ऐसे तो कृष्ण की भक्ति करने को आदि शंकराचार्य जी ने भी कहा है तो मान लो उनको

1173
01:33:33,480 --> 01:33:38,440
प्रमाण हा तो प्रमाण मान लिया हमने उसको

1174
01:33:38,440 --> 01:33:43,200
भज गोविंद प्रमाण मानोगे तो पूरा मानोगे अट न्याय करोगे

1175
01:33:43,200 --> 01:33:47,240
प्रमाण मानोगे पूरा नहीं मानोगे ना

1176
01:33:47,240 --> 01:33:51,680
तो ये तो पूरा मानने को कह रहे है ना चैतन्य महाप्रभु

1177
01:33:51,680 --> 01:33:55,880
आपने तोय है ते हो कि

1178
01:33:55,880 --> 01:34:00,120
नहीं आपने तो आपके सिद्धांत य है किछ

1179
01:34:00,120 --> 01:34:04,360
र चैतन्य महाप्रभु को पूरा मानते हो या अधूरा मानते

1180
01:34:04,360 --> 01:34:08,480
हो गणेश को बरा बड़ा कहा है तो निष्कर्ष

1181
01:34:08,480 --> 01:34:12,480
क्या निकला निष्कर्ष तो आपके हिसाब से ये निकला कि सबको ही भगवान बना दो

1182
01:34:12,480 --> 01:34:16,800
तो ब्रम तो एक ही है ना अने भाई साहब मैं आपसे य प कुतर्क

1183
01:34:16,800 --> 01:34:20,800
सुनने के लिए नहीं बैठा हूं अगर आप अपने मन की बातें बोलने आए तो क्षमा कीजिएगा

1184
01:34:20,800 --> 01:34:25,360
मुझे आपसे बातें बंद करनी पड़ेगी नहीं कर रहा

1185
01:34:25,360 --> 01:34:29,520
रही है फिर भी आप वहा पर अपनी चीज आपको अपनी चीज प्रचारित करनी है कहीं

1186
01:34:29,520 --> 01:34:33,920
और जा कर के करिए आप मुझे बताइए चैत महाप्रभु

1187
01:34:33,920 --> 01:34:34,760
को पूरा मानते हैं

1188
01:34:34,760 --> 01:34:39,040
अधूरा मानते हैं मानते हैं पूरा मानते

1189
01:34:39,040 --> 01:34:43,040
वो कह रहे हैं सीदर स्वामी का विरोध मत करो करोगे तो वैश्या हो

1190
01:34:43,040 --> 01:34:47,320
जाओगे मानते हैं इस बात को कि नहीं मानते हैं बकुल मानते हैं लेकिन

1191
01:34:47,320 --> 01:34:51,640
धर स्वामी की जो टीका आप पढ़ रहे हैं शायद वो चैतन्य महाप ने पढ़ी

1192
01:34:51,640 --> 01:34:55,880
हो अच्छा तो फिर आप यह बता दीजिए श्रीधर स्वामी

1193
01:34:55,880 --> 01:35:00,160
की जो शिक्षा है उसका आपने आपके य परंपरा प्राप्त

1194
01:35:00,160 --> 01:35:04,200
अध्ययन किया गया है उनके शिष्यों से पढ़ाई की है आपने श्रीधर स्वामी के

1195
01:35:04,200 --> 01:35:08,320
शिष्य से स्वामी के प्रामाणिक शिष्य

1196
01:35:08,320 --> 01:35:13,160
से आपने अध्ययन किया उनका चलिए हम लोग तो गलत पढ़ रहे

1197
01:35:13,160 --> 01:35:17,240
हैं गौड़ वैष्णव आचार्य के प्रमाणिक आचार्य चैतन्य

1198
01:35:17,240 --> 01:35:21,560
महा केने पूछ रहा श्रीधर स्वामी के प्रामाणिक

1199
01:35:21,560 --> 01:35:25,840
शिष्यों से आपने भागवत अर्थ लिया कि नहीं लिया

1200
01:35:25,840 --> 01:35:30,040
नहीं हमने वैष्णव वाद लिया है खाली तो फिर अरे

1201
01:35:30,040 --> 01:35:36,040
क्यों लिया भाई वो श्रीधर स्वामी कह रहे हैं क्या मैं वैष्णव वादी हूं

1202
01:35:36,400 --> 01:35:40,560
केवल श्रीधर स्वामी वैष्णव वादी नहीं कह रहे हैं अपने आप को वही

1203
01:35:40,560 --> 01:35:44,640
मैं बोल रहा था आपने मेरे कोया तो फिर आपने मैं आपसे पूछ रहा हूं अगर आपका

1204
01:35:44,640 --> 01:35:48,680
यह मानना है कि हम जो टीका पढ़ रहे हैं वो गलत है ठीक है थोड़ी देर के लिए मान

1205
01:35:48,680 --> 01:35:53,040
लेते हैं आपने श्रीधर स्वामी की अगर भागवत आपने आपको जाननी

1206
01:35:53,040 --> 01:35:57,400
है कि हमारे पास वही भागवत है कि नहीं जो चैतन्य महाप्रभु ने स्वीकार की है

1207
01:35:57,400 --> 01:36:01,560
तो आपको अध्ययन कहां जाकर करना होगा श्रीधर स्वामी की परंपरा में

1208
01:36:01,560 --> 01:36:05,880
ना किया है देखो श्रीधर स्वामी और शंकराचार्य

1209
01:36:05,880 --> 01:36:09,920
की परम उनके दोनों के ज्ञान में दोनों फर्क फर्क तो कोई मिलेगा नहीं क्योंकि एक

1210
01:36:09,920 --> 01:36:14,280
ही संप्रदाय से है दोनों इसम मैं क्या करू

1211
01:36:14,280 --> 01:36:18,560
आपके जिनको आप प्रमाण मानते हैं चैतन्य महाप्रभु वो इनको प्रमाण

1212
01:36:18,560 --> 01:36:22,560
मान रहे हैं मैं क्या करू इसमें मेरे भाई कि उनके सिद्धांत क्या है

1213
01:36:22,560 --> 01:36:26,560
क्या नहीं है पहले आप इसको नाय करिए कि मैं चैतन्य महाप्रभु को

1214
01:36:26,560 --> 01:36:30,840
इतने अंशों में नहीं मानता तब तो हम आगे बढ़े वही

1215
01:36:30,840 --> 01:36:34,880
मैं बोल रहा हूं कि आदि शंकराचार्य ने गीता महात्मा एकम श

1216
01:36:34,880 --> 01:36:39,440
चैतन्य महा प्रभु प्रभु ने यह कहा है कि श्रीमद भागवत प्रमाणिक

1217
01:36:39,440 --> 01:36:43,560
है श्रीधर स्वामी की उनके विरोध में जो भी लिखा जाएगा वह गलत

1218
01:36:43,560 --> 01:36:47,880
होगा तो अब अब आपके पास जो श्रीमद् भागवत है

1219
01:36:47,880 --> 01:36:52,120
वो सीदर स्वामी की है कि नहीं आपको पता है कि नहीं पता है

1220
01:36:52,120 --> 01:36:56,160
देखो मैं इस चीज से कन्फर्म नहीं श्रीधर स्वामी शंकर संप्रदाय

1221
01:36:56,160 --> 01:37:00,160
थे आपको ये शुरू में ही कह देना चाहिए था कि मैं कंफर्म

1222
01:37:00,160 --> 01:37:04,280
नहीं हूं इस मामले में वो श्री शंकर संप्रदाय से हैं

1223
01:37:04,280 --> 01:37:08,360
या वैष्णव संप्रदाय से हैं मैं ये पूछ के कंफर्म करके आपको बता

1224
01:37:08,360 --> 01:37:12,680
ये कंफर्म करिएगा वो शंकराचार्य थे अपने समय के मेरे भाई शंकराचार्य

1225
01:37:12,680 --> 01:37:17,680
चलो मान लिया पहली बात सुनो पह पहली बात सुन

1226
01:37:17,680 --> 01:37:22,080
लो एक वैष्णव हो सकता हैन क्या

1227
01:37:22,080 --> 01:37:26,240
सुनो शर स्वामी मैं जो बोल रहा हूं मैं जो बोल रहा हूं वो सुनो

1228
01:37:26,240 --> 01:37:30,520
श्रीधर स्वामी वही है सब जानते हैं ये भी कहते हैं वो शंकर संप्रदाय के थे मायावादी

1229
01:37:30,520 --> 01:37:34,720
थे ये भी कहते हैं आपके य इकन वाले इसकन के ही जाके

1230
01:37:34,720 --> 01:37:39,040
पूछना वो मानते हैं कि वो शंकराचार्य भी थे वो मायावादी भी थे मगर वो ये कहते हैं

1231
01:37:39,040 --> 01:37:43,200
कि वो अंदर से वैष्णव थे बताते नहीं थे किसी को यानी

1232
01:37:43,200 --> 01:37:47,240
कि वो झूठ बोलते थे पहली बात तो ये हो गया शंकराचार्य प भी ऐसा ही

1233
01:37:47,240 --> 01:37:51,840
आरोप लगाओगे आप वो भी वो भी भक्त थे भगवान के मायावादी

1234
01:37:51,840 --> 01:37:56,000
विरोध आरोप लगा दिया ऐसा अरे भक्त तो मैं भी हूं

1235
01:37:56,000 --> 01:38:00,080
भक्त तो शंकराचार्य है आप मध्य लीला

1236
01:38:00,080 --> 01:38:04,320
का मध्य मध्य लीला छठ अध्याय 167

1237
01:38:04,320 --> 01:38:07,280
नंबर शलोक लिए देखिए विषयात मत करें

1238
01:38:07,280 --> 01:38:11,280
विषयात ना करें मैं अभी आपसे पूछ रहा हूं मैंने आपसे य

1239
01:38:11,280 --> 01:38:15,480
पूछा है कि श्रीधर स्वामी की जो शिक्षा है आपके पास श्रीधर

1240
01:38:15,480 --> 01:38:19,480
स्वामी के परंपरा प्राप्त शिष्यों के द्वारा आई है या अपने मन

1241
01:38:19,480 --> 01:38:23,640
से आ गई है मनम तरीके से

1242
01:38:23,640 --> 01:38:29,160
आद शंकर श्रीधर स्वामी के हमको बकायदा लोक के साथ प्रभुपाद जी ने

1243
01:38:29,160 --> 01:38:32,320
ट सारे

1244
01:38:32,320 --> 01:38:36,320
शलोक नहीं सारे श

1245
01:38:36,320 --> 01:38:40,400
कौन बात है भाईब आप कैसी बात कर रहे होतक वाली कि उन्होंने अगर दो

1246
01:38:40,400 --> 01:38:45,200
चार लोक उत कर दिए शलोक उत कर दिए तो उन्होंने कॉपी कर लिया

1247
01:38:45,200 --> 01:38:48,040
सीर स्वामी

1248
01:38:48,040 --> 01:38:52,440
को तो फरे

1249
01:38:52,440 --> 01:38:56,720
केवल केवल एक लोक में भी अगर विरोध हो गया तो व विरोध होता

1250
01:38:56,720 --> 01:39:00,880
है हम भी सुनिए स्वान होता है ना जो स्वान

1251
01:39:00,880 --> 01:39:05,040
और हम में ढेर सारी समानताएं है तो उन समानता के कारण यह हो गया कि हम

1252
01:39:05,040 --> 01:39:09,440
भी स्वान के जैसे ही है आप आप आप

1253
01:39:09,440 --> 01:39:13,560
जो है दांतो से चबा के खाना खाते हो ना इतने अंश में आप

1254
01:39:13,560 --> 01:39:17,560
में और स्वान में समानता हो गई ना तो क्या ये मान लिया जाए स्वान

1255
01:39:17,560 --> 01:39:22,360
और आप एक ही होय बात

1256
01:39:22,360 --> 01:39:26,360
है किसी दो अंश में किसी तीन अंश में समानता होने से समान हो

1257
01:39:26,360 --> 01:39:30,440
गए भा तो बोहा पूरी तरीके से कॉपी नहीं

1258
01:39:30,440 --> 01:39:34,760
होगा जब तक कहीं भी एक लेश मात्र का भी विरोध नहीं होगा

1259
01:39:34,760 --> 01:39:39,720
तब यह माना जाएगा कि हा यह श्रीधर स्वामी की शिक्षा [प्रशंसा] है

1260
01:39:39,720 --> 01:39:43,800
परब्रह्म की परिभाषा क्या देते हैं परब कौन पहले

1261
01:39:43,800 --> 01:39:47,800
इस चीज को क्लियर करिए कि वो क्या है क्या नहीं है

1262
01:39:47,800 --> 01:39:51,840
वो बताइए आप खुल के पहले इस विषय में जो विषय चल र है वैष्णव

1263
01:39:51,840 --> 01:39:56,000
थे या शंकर संप्रदाय मैं कंफर्म करके आपको बताऊंगा यहां पर बात क्लोज

1264
01:39:56,000 --> 01:40:00,200
होती है कंफर्म करूंगा फिर मैं आपसे बात करूंगा इस बारे हा

1265
01:40:00,200 --> 01:40:04,400
ठीक है अभी आपका क्या है कि परब्रह्म

1266
01:40:04,400 --> 01:40:08,560
तो क्या स्पन के द्वारा प्रतिपादित होने वाला जो ईश्वर है

1267
01:40:08,560 --> 01:40:13,160
वो सर्वशक्तिमान है य सर्वशक्तिमान है

1268
01:40:13,160 --> 01:40:17,840
अच्छा आपके य पर एक वो है मान्यता

1269
01:40:17,840 --> 01:40:23,840
कि श्री कृष्ण जैसे गोलोक धाम में रहते वहां से उठके एज इट आते हैं

1270
01:40:25,400 --> 01:40:30,360
तो श्री कृष्ण के ऊपर कोई भी नियम लागू होता है या नहीं होता है

1271
01:40:30,360 --> 01:40:34,640
बिल्कुल नियम लागू नहीं होता सर्व नियंता है सर्व नियामक

1272
01:40:34,640 --> 01:40:38,880
है ना वो जी अच्छा

1273
01:40:38,880 --> 01:40:43,480
तो उनकी जो देह है वह सनातन है शाश्वत है क्या है

1274
01:40:43,480 --> 01:40:47,880
शरीर उनका सनातन है शाश्वत है

1275
01:40:47,880 --> 01:40:52,480
शाश्वत का अर्थ क्या है शाश्वत

1276
01:40:52,480 --> 01:40:56,640
का अर्थ यह हो गया कि वो बदलता नहीं है

1277
01:40:56,640 --> 01:41:01,120
वैसा ही रहता है नित्य स्थाई

1278
01:41:01,120 --> 01:41:06,480
नित स्थाई किसी भी दे काल परिस्थिति में ना बदलने

1279
01:41:06,480 --> 01:41:10,720
वाला हा ये कह सकते हैं लेकिन भगवान अपनी लीला

1280
01:41:10,720 --> 01:41:14,760
को करने के लिए कुछ भी हो सकता है भगवान कर

1281
01:41:14,760 --> 01:41:19,040
एक करके आगे चलेंगे एक एक करके आगे चलेंगे उनका

1282
01:41:19,040 --> 01:41:24,120
शरीर उनका शरीर बदलता है कि नहीं बदलता है यह बताइए

1283
01:41:24,120 --> 01:41:29,040
बदल भी सकता है नहीं भी बदल सकता है भगवान की अपनी शक्ति तो फिर वो शाश्वत कहां रहा

1284
01:41:29,040 --> 01:41:33,760
तो शाश्वत ही है ना शाश्वत का मतलब दिव्य सच्चिदानंद

1285
01:41:33,760 --> 01:41:37,920
का मतलब अभी आपने बताया जो बदलता नहीं है हा जो बदलता

1286
01:41:37,920 --> 01:41:40,720
नहीं है मतिक नहीं होता है आध्यात्मिक

1287
01:41:40,720 --> 01:41:45,000
होता है अरे मेरे भाई अभी आपने बताया बदलता नहीं है अब आप कह रहे हो बदलता

1288
01:41:45,000 --> 01:41:49,120
है वही मैं बोल रहा हूं कि भगवान छोटे

1289
01:41:49,120 --> 01:41:53,520
रूप में भी प्रकट हो सकते हैं बढ़ता हुआ भी दिख सकता है शरीर भगवान का ये कहना पड़ेगा

1290
01:41:53,520 --> 01:41:57,560
उनका जो शरीर है व शाश्वत नहीं है चेंज हो रहा है वो वो कर सकते

1291
01:41:57,560 --> 01:42:02,160
सब कुछ ठीक है अच्छी बात है आप तो हमारी जगह गोलोक

1292
01:42:02,160 --> 01:42:06,360
के तीन पार्ट है एक मथुरा तो उनको शाश्वत मत कहो

1293
01:42:06,360 --> 01:42:10,760
शरीर को और या फिर या फिर वो फिर

1294
01:42:10,760 --> 01:42:14,840
बदलने वाले नहीं है दोनों में से एक मान लो वही

1295
01:42:14,840 --> 01:42:20,840
मैं बोल रहा हूं तर्क से भगवान को नहीं समझ सकते हम जन्म

1296
01:42:21,480 --> 01:42:25,560
कर्म समते तो फिर आप यहां पर क्यों आए हैं तर्क

1297
01:42:25,560 --> 01:42:29,840
से समझाने ही आए ना क्यों आए अंडरस्टैंडिंग तर्क से

1298
01:42:29,840 --> 01:42:34,080
तर्क से किस लेवल तक जाना है किस लेवल तक नहीं जाना है यह कौन डिसाइड करेगा

1299
01:42:34,080 --> 01:42:38,560
आप डिसाइड करेंगे जो आपके डायरेक्टली जो मिस अंडरस्टैंडिंग

1300
01:42:38,560 --> 01:42:42,680
है इसन को लेके वब अंडरस्टैंडिंग की बात खत्म हो गई तक

1301
01:42:42,680 --> 01:42:47,400
करना ही नहीं है तर्क करना ही नहीं है ू स्टॉप द ट्रेन पुल द चेन

1302
01:42:47,400 --> 01:42:51,720
मैं तर्क नहीं कर रहा हूं कर रहे आप य आए क्यों थे

1303
01:42:51,720 --> 01:42:55,800
सीधे कह दे तर्क से इसलिए आया हूं तर्क से नहीं समझा जा सकता भगवान को बात खत्म

1304
01:42:55,800 --> 01:43:00,040
अचिंत है भाई साहब सुनिए ये जो सुनिए

1305
01:43:00,040 --> 01:43:04,280
ये जो ये जो अचिंत और अनिर्वचनीय जो शब्द होते हैं इनका

1306
01:43:04,280 --> 01:43:08,320
आलंबन लिया जाता है ऐसा नहीं नहीं लिया जाता मगर वहां पर नहीं जब

1307
01:43:08,320 --> 01:43:12,320
हम अपनी ही बात को खंडित कर रहे हो और फिर जब हमसे पूछा जाए तो

1308
01:43:12,320 --> 01:43:16,440
तुम्हारी बात खंडित हो रही है तो हम कहते अचिंत है अरे भैया

1309
01:43:16,440 --> 01:43:20,600
कुछ चीजें है जो हमारे तर्क में नहीं आ सकती व्यवहार में नहीं आ सकती जो हम उसको

1310
01:43:20,600 --> 01:43:24,800
जो है स्पेसिफाई नहीं कर सकते शब्दों में वो तो प्राप्त है मगर

1311
01:43:24,800 --> 01:43:29,200
आप सुनिए भगवान को आपने क्या कहा

1312
01:43:29,200 --> 01:43:33,200
शब्द कृ से जोड़ भी रहे फिर बोल रहे सक्ति मैं

1313
01:43:33,200 --> 01:43:36,960
पूछ रहा हूं भगवान को आप तर्क से नहीं समझ सकते सुनिए

1314
01:43:36,960 --> 01:43:41,160
मैं मैं प्रश्न आपसे कर रहा हूं आपने कहा भगवान को आप तर्क से नहीं समझ सकते आप

1315
01:43:41,160 --> 01:43:45,240
ही तो बता रहे हो भगवान का कंधा है भगवान के वो है आप ही

1316
01:43:45,240 --> 01:43:49,920
तो भगवान को तर्क से समझने में आने वाला बता रहे हो रहे

1317
01:43:49,920 --> 01:43:54,040
भगवान का जो मौलिक रूप है वो तर्क से समझने में ना आने वाला है आप कह

1318
01:43:54,040 --> 01:43:58,240
रहे हो भगवान एट चे आते हैं तो ए इट नीचे आते तो उनको

1319
01:43:58,240 --> 01:44:03,000
आंखों का विषय आप बना रहे हो उनको छूने का विषय आप बना रहे हो

1320
01:44:03,000 --> 01:44:07,000
बनाएंगे भगवान साकार है निराकार नहीं है अरे तो

1321
01:44:07,000 --> 01:44:11,000
नहीं है तो फिर आपने उनको तर्क से समझने वाला बना दिया ना फिर ये क्यों कह रहे हो तर्क

1322
01:44:11,000 --> 01:44:15,240
से समझ में नहीं आ सकते

1323
01:44:15,240 --> 01:44:19,320
मतलब लोगों ने आपको सुन लिया लोगों ने आपको सुन लिया आप कह

1324
01:44:19,320 --> 01:44:23,440
रहे हैं कि वो परस्पर वो जो है सनातन शरीर है उनका और

1325
01:44:23,440 --> 01:44:27,480
वो जो है उनका शरीर बदलता भी है अब ये लोग डिसाइड कर लेंगे आपने

1326
01:44:27,480 --> 01:44:31,600
क्या बातें की है यहां पे ठीक है ठीक है ठीक है वो डिसाइड कर लेंगे

1327
01:44:31,600 --> 01:44:35,680
मैं एक चीज बोल रहा था आपको मैं एक चीज और बोल

1328
01:44:35,680 --> 01:44:38,600
रहा था

1329
01:44:38,600 --> 01:44:42,680
बोलिए कि भगवा आपने बोल रहे हैं कि तर्क से समझ लिया तर्क

1330
01:44:42,680 --> 01:44:46,880
से नहीं समझाने श्रीमद् भागवत में भगवान के रूप का वर्णन तो बता रहे उनकी दो आंखे

1331
01:44:46,880 --> 01:44:50,960
हैं दो पैर है ये क्या है व्यवहार में आ सकने वाला तर्क में आ सकने वाला ईश्वर हो

1332
01:44:50,960 --> 01:44:55,680
गया आप समझा करते र्क में ला रहे हो

1333
01:44:55,680 --> 01:44:59,680
खैर करते हैं भक्तों के साथ देखिए वो बात रिपीट मत करिए हो गई लोगों

1334
01:44:59,680 --> 01:45:03,960
ने सुन लिया वो अपना डिसाइड करेंगे किसका क्या रहा आपने

1335
01:45:03,960 --> 01:45:08,280
एक बात में ये कहा कि मैं पढ़ के आऊंगा जान के आऊंगा दूसरी बात में आपने ये कहा

1336
01:45:08,280 --> 01:45:14,080
कि भैया वो सनातन तो है ना बदलने वाला तो है मगर वो बदलता

1337
01:45:14,080 --> 01:45:18,680
है मैंने यह नहीं बोला तो आपने वादित कर दिया ना भगवान

1338
01:45:18,680 --> 01:45:24,680
को आपने ही वादित कर दिया ना भगवान को नहीं ब सकता

1339
01:45:24,800 --> 01:45:28,960
उनका शरीर बदल नहीं सकता उनका शरीर ब नहीं सता

1340
01:45:28,960 --> 01:45:30,240
बदल सकता है मैं ये नहीं कह

1341
01:45:30,240 --> 01:45:34,960
रहा कि वो गोलोक में जैसे रहते वैसे आते हैं मैं ये नहीं कह रहाय

1342
01:45:34,960 --> 01:45:38,960
नहीं कह रहा सुनिए मैं ये नहीं कह रहा कि वो अपने शाश्वत शरीर

1343
01:45:38,960 --> 01:45:42,960
में य आते हैं मैं ये नहीं कह रहा वो अपने शरीर में आते हैं

1344
01:45:42,960 --> 01:45:47,240
व्यवहारिक शरीर में और वो कुछ भी कर सकते हैं वो अपने शाश्वत

1345
01:45:47,240 --> 01:45:51,320
शरीर में य नहीं आते मैं ये नहीं कह रहा शाश्वत शरीर में आते आप कह

1346
01:45:51,320 --> 01:45:55,600
रहे हो देखो शाश्वत शरीर में भगवान आते हैं

1347
01:45:55,600 --> 01:45:59,760
मैं फिर भी वही कह रहा हूं में ले आओगे तो जगह जगह

1348
01:45:59,760 --> 01:46:03,920
इतनी जगह बाद होगा पूछो नहीं

1349
01:46:03,920 --> 01:46:08,000
शाश्वत शरीर में आ मेरी बात सुन ली श शरीर में शाश्वत

1350
01:46:08,000 --> 01:46:12,080
का अर्थ होता है कभी ना बदलने वाला शास्त्रों से सिद्ध है नित्य स्थाई होता

1351
01:46:12,080 --> 01:46:16,480
है शाश्वत कार् और वो

1352
01:46:16,480 --> 01:46:20,480
बालक के रूप में शिशु रूप में फिर वो किशोर होते हैं फिर वो बड़े

1353
01:46:20,480 --> 01:46:24,760
होते हैं शाश्वत कहां रहा शरीर भगवान

1354
01:46:24,760 --> 01:46:29,080
कृष्ण के आध्यात्मिक जगत में तीन लोग है गोलोक के तीन पाठ है जिनको

1355
01:46:29,080 --> 01:46:33,440
मथुरा द्वारका और गोलोक वृंदावन में विभाजित किया गया

1356
01:46:33,440 --> 01:46:37,440
है अब तो आप ऐसे भी कह दोगे कि चैतन्य महा स् कृष्ण

1357
01:46:37,440 --> 01:46:41,600
नहीं है कृष्ण तो मुरलीधर बा म

1358
01:46:41,600 --> 01:46:45,440
कर की बात मत करिए पॉइंट

1359
01:46:45,440 --> 01:46:50,560
प रहिए आप व्यर्थ की बात आप कर रहे हैं तर्क आप कर रहे उसका

1360
01:46:50,560 --> 01:46:54,800
जवा जवाब दे रहा बो और कोई बात है इस विषय से हट

1361
01:46:54,800 --> 01:46:59,160
कोई बात और है इस विषय से हटके

1362
01:46:59,160 --> 01:47:03,160
कोई और बात है आपकी नहीं इस

1363
01:47:03,160 --> 01:47:07,200
विषय पर बात कर लेते हैं ना पहले क्लियर कर लेते वो हो गया ना आप निर्णायक

1364
01:47:07,200 --> 01:47:11,320
मत बनिए वो जनता देख लेगी क्या कह रहे आप मैंने क्या कहा

1365
01:47:11,320 --> 01:47:15,520
आप निर्णायक मत बनिए आपका निर्णय सुनने के लिए मैं आपको यहां नहीं रख सकता

1366
01:47:15,520 --> 01:47:21,520
जय श्री

1367
01:47:21,840 --> 01:47:27,840
राम कोई शिव भक्त है यहां पर जो आए

1368
01:47:29,280 --> 01:47:33,400
हैं चलिए अब नेक्स्ट टाइम रखेंगे ठीक ठाक रहा

1369
01:47:33,400 --> 01:47:37,440
आज का भी शिवांश नारायण द्विवेदी आपको चुनौती है भाई आपको

1370
01:47:37,440 --> 01:47:42,280
चुनौती है दुनिया में संसार में

1371
01:47:42,280 --> 01:47:46,440
रामपाल का कोई भी ऐसा शिष्य हो जो आकर

1372
01:47:46,440 --> 01:47:50,480
के जो कबीर थे उनको भगवान सिद्ध कर दे वो वाला

1373
01:47:50,480 --> 01:47:54,520
जो तुम बता रहे हो उस रूप में वेदों में प्रमाण है कबीर भगवान

1374
01:47:54,520 --> 01:47:58,600
है पूरे संसार में कोई भी एक ऐसा व्यक्ति हो कोई ऐसा

1375
01:47:58,600 --> 01:48:02,720
माइका लाल हो कोई तो होगा ना माइका लाल जो आएगा किसी माने

1376
01:48:02,720 --> 01:48:06,240
तो ऐसा जना होगा ना किसी

1377
01:48:06,240 --> 01:48:10,920
को जो सिद्ध कर दे

1378
01:48:10,920 --> 01:48:16,920
तो भेजिए स्वागत है उनका ठीक है

1379
01:48:34,160 --> 01:48:37,920
बहुत बड़ा तोड़

1380
01:48:37,920 --> 01:48:43,920
है पंडित फ्लोकी जी आप आ

1381
01:48:44,480 --> 01:48:48,680
जाइए पंडित फ्लोकी जी अरे पंडितलो

1382
01:48:48,680 --> 01:48:53,320
ू स्टेज कहां है पंडित जी महादेव

1383
01:48:53,320 --> 01:48:57,800
कैमरा नहीं चल रहा है मेरा मैं वही देख रहा हूं क्या दिक्कत आ गई है लगता है नया खरीदना

1384
01:48:57,800 --> 01:49:02,120
पड़ेगा मैं तो बस अंत में यही बोलने आया था जब

1385
01:49:02,120 --> 01:49:06,400
आप चैलेंज कर रहे थे तो भाई

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01:49:06,400 --> 01:49:11,120
क्या जगत कोई मत प चक्कर में कोई नहीं है टक्कर में

1387
01:49:11,120 --> 01:49:15,400
दो डायलॉग होते हैं एक तो ये तो लास्ट में उससे पहले एक और

1388
01:49:15,400 --> 01:49:19,400
कि जिसकी माता ने निष्ठा से दुख लाया हो वो

1389
01:49:19,400 --> 01:49:24,040
आए और चर्चा करे ये रामपाल वालों के लिए है ठीक है कोई भी

1390
01:49:24,040 --> 01:49:28,320
पूरे संसार में इसीलिए अंत में पता नहीं कहां

1391
01:49:28,320 --> 01:49:32,600
चले गए फैक्ट विद अभिषेक है एकम अद्वितीय है

1392
01:49:32,600 --> 01:49:36,800
यह सब लोग क्या व वन साइडेड गेम खेलना ही जानते हैं क्या मैदान

1393
01:49:36,800 --> 01:49:41,400
में आओना भाई कभी नहीं

1394
01:49:41,400 --> 01:49:46,200
आे कभी नहीं

1395
01:49:46,200 --> 01:49:50,280
आएंगे अकेले ही कर पाते हैं जो कर पाते हैं जहां पर शिवांश

1396
01:49:50,280 --> 01:49:54,440
हो ना वहां पर बोलने के लिए य तुम गलत बोल रहे हो आओ भैया जरा

1397
01:49:54,440 --> 01:49:58,680
आमने सामने करो मगर मुझे वो डायलॉग याद आ जाता है कि सांप और बिच्छू

1398
01:49:58,680 --> 01:50:04,680
शेरों को काटा नहीं करते दूरी दूर से रैंकर निकल जाते

1399
01:50:05,200 --> 01:50:09,240
हैं तो वो एक बात है ये जो भाई साहब

1400
01:50:09,240 --> 01:50:15,200
अभी आए थे इनकी बातें आपने

1401
01:50:15,200 --> 01:50:19,320
देखी यार ये मैं मुझे पता है क्या लग रहा है अब मैं बहुत

1402
01:50:19,320 --> 01:50:23,680
ज्यादा वीक हो रहा है स्कोन मुझे लग रहा है कि स्कोन वालों के लिए मुझे अध्ययन

1403
01:50:23,680 --> 01:50:29,680
करके उन्हें कुछ देना पड़ेगा बहुत वीक आर्गुमेंट वो लोग पेश करने लगे

1404
01:50:30,800 --> 01:50:34,800
हैं मुझे उनका अध्ययन करके उनको देना पड़ेगा भाई तुम

1405
01:50:34,800 --> 01:50:38,880
यह बोला करो थोड़ा तो बराबरी का सा दिखा करे ना ले दे के बात उसी प

1406
01:50:38,880 --> 01:50:43,160
आ जाती है ना ईश्वर स शक्तिमान है ना तुम्हारा धर्म शाश्वत है क्यों क्योंकि चैतन्य

1407
01:50:43,160 --> 01:50:47,160
महाप्रभु ने कुछ और धर्म बताया था आप कुछ और धर्म बता रहे

1408
01:50:47,160 --> 01:50:51,320
हो वो जगतगुरु कह रहे हैं श्रीधर स्वामी को

1409
01:50:51,320 --> 01:50:55,480
फिर यहां आ कर के कह देते तो हमें इस बारे में पता नहीं है भगवान है

1410
01:50:55,480 --> 01:50:59,680
भगवान है अगर चेतन महाप्रभु भगवान है तो फिर उनकी अगर

1411
01:50:59,680 --> 01:51:03,760
भगवान है उनकी इस भगवान है इसलिए उनके कहे हुए को प्रमाण नहीं माना जा

1412
01:51:03,760 --> 01:51:07,840
सकता तो फिर किसी भी बात को नहीं माना जा सकता वही बात क्यों जो आपको अच्छी लग

1413
01:51:07,840 --> 01:51:11,960
रही है बिल्कुल बिल्कुल मैं यह कह रहा हूं

1414
01:51:11,960 --> 01:51:16,000
कि वो अपना एक लाइन सोच के आए थे तीन दो बार

1415
01:51:16,000 --> 01:51:20,200
ट्राई कर चुके थे वो कौन सा कि गो लोक तीन भाग में बटा

1416
01:51:20,200 --> 01:51:24,400
हुआ है अंत में उनको बोला ही बिना ठीक बिना

1417
01:51:24,400 --> 01:51:28,800
किसी मतलब बेस के बस उनको बोलना था और

1418
01:51:28,800 --> 01:51:32,960
वो किस बात का तर्क किसी बात का तर्क नहीं मतलब कहीं

1419
01:51:32,960 --> 01:51:37,160
से भी जरा मैं श्रीमद् भागवत में क्या लिखा

1420
01:51:37,160 --> 01:51:42,240
है उन्होंने मैं जरा दिखा दूं इन्होंने वहां विरोध कैसा किया है

1421
01:51:42,240 --> 01:51:45,960
जी एक बात देखिए यदि ये

1422
01:51:45,960 --> 01:51:50,280
ये कहेंगे कि आप जो टीका पढ़ रहे हैं वो श्रीमद उनका नहीं है श्रीधरी टीका

1423
01:51:50,280 --> 01:51:55,160
तो फिर इनको ये दावा करना होगा कि हमने जो अध्ययन किया श्रीमद् भागवत का

1424
01:51:55,160 --> 01:51:59,160
वह जो है हमने परंपरा से किया है इनको यह दावा करना पड़ेगा जब

1425
01:51:59,160 --> 01:52:03,840
यह दावा कर दोगे तो आपकी परंपरा शंकराचार्य से जुड़ जाएगी शीर स्वामी से जुड़ जाएगी

1426
01:52:03,840 --> 01:52:07,840
आपकी यह वाली परंपरा खत्म हो जाएगी मधवा चार कहां से भागोगे

1427
01:52:07,840 --> 01:52:11,920
भाई कोई रास्ता है ही नहीं इसीलिए कहता हूं

1428
01:52:11,920 --> 01:52:16,200
मत पढ़ो चक्कर में कोई नहीं है टक्कर में

1429
01:52:16,200 --> 01:52:22,200
मैं दिखाता हूं मेरे पास इस कन की भागवत भी है

1430
01:52:58,960 --> 01:53:04,960
लोग कहते होंगे कितनी तैयारी करके रहता

1431
01:53:11,320 --> 01:53:15,680
है क रहा एकम सब कुछ एकदम सामने रेडी टू सर्व

1432
01:53:15,680 --> 01:53:19,720
हाय यह लोग कहते होंगे यार यह कितना बड़ा वाला है ये हमारी

1433
01:53:19,720 --> 01:53:24,440
भागवत भी रखे बैठा है हां भैया आपकी भागवत जी

1434
01:53:24,440 --> 01:53:26,800
रखे

1435
01:53:26,800 --> 01:53:30,800
और ये अभी हमारे गुरु भाइयों का अनुग्रह हुआ तो यह

1436
01:53:30,800 --> 01:53:35,400
प्राप्त हो गई उनके सहयोग से ईश्वर की कृपा से

1437
01:53:35,400 --> 01:53:40,280
यह देखिए इसकन की भागवत भी रखते हैं हम

1438
01:53:40,280 --> 01:53:45,640
है ना बहुत बढ़िया अष्टम स्कंद

1439
01:53:45,640 --> 01:53:51,640
सातवा अध्याय जी

1440
01:53:54,440 --> 01:53:58,800
अब देखते हैं भैया श्रीधर स्वामी का कितना वो है अब श्रीधर स्वामी का

1441
01:53:58,800 --> 01:54:03,120
परंपरा प्रात अध्यन बता देंगे तो य श्रीधर स्वामी के परंपरा प्राप्त स हो जाएंगे

1442
01:54:03,120 --> 01:54:07,960
य मायावादी हो जाएंगे स्वयं क्या करें करे तो करे क्या कहां

1443
01:54:07,960 --> 01:54:12,960
भागे य ऐसा राता फैला के रखा

1444
01:54:12,960 --> 01:54:18,960
है कहो कि हमने उनका प्रमाणिक वो किया अन

1445
01:54:20,200 --> 01:54:24,640
कहो नहीं एकली शुरू में मानेंगे ना कि हां

1446
01:54:24,640 --> 01:54:28,640
बिल्कुल उन्हीं का ही है लेकिन जब तर्क आने लग जाएंगे तो फिर ऐसी बातें आती है कि

1447
01:54:28,640 --> 01:54:32,840
तक क्यों कर रहे हैं तर्क से नहीं सिद्ध होंगे अा सुनिए

1448
01:54:32,840 --> 01:54:37,000
इसम भी एक बहुत रोचक बात है जब ये लोग अचिंत कहते हैं भाई जब तुम

1449
01:54:37,000 --> 01:54:41,120
पर क्वेश्चन आया तो तुम अचिंत कह रहे हो फिर तुम ही कह रहे हो भगवान की दो आंखें है दो पैर है दो

1450
01:54:41,120 --> 01:54:45,240
ये क्या है तर्क मिला दिया तुमने जी फिर अचिंत कहां रहे भगवान

1451
01:54:45,240 --> 01:54:49,240
अचिंत तो रखो ना उन्हे हम भी तो य कह रहे हैं व्यवहार में नहीं आ

1452
01:54:49,240 --> 01:54:53,680
सकते वो तुम व्यवहार में आने वाला बता रहे हो फिर तुमसे क्वेश्चन चिंत

1453
01:54:53,680 --> 01:54:58,240
भगवान आपने भगवान को कह दिया भगवान की दो आंखें ये है वो है

1454
01:54:58,240 --> 01:55:02,320
अभी दिन में मुझसे कोई कह रहा था य कैसा ब्रह्म जो माया से ढक जाता है मैंने

1455
01:55:02,320 --> 01:55:06,840
उससे क्वेश्चन किया भगवान श्री कृष्ण वस्त्र पहनते हैं कि नहीं बोले पहनते हैं

1456
01:55:06,840 --> 01:55:09,480
तो जितनी जगह वस्त्र है उनका ओरिजिनल स्किन दिखाई देती

1457
01:55:09,480 --> 01:55:13,680
है क्या नहीं दिखाई देती तो वो तो ढक गए वस्त्रों से ढक गए यहां

1458
01:55:13,680 --> 01:55:19,680
तो ब्रह्म माया से ढक रहा है फिर

1459
01:55:20,040 --> 01:55:26,040
बकुल वो भागा भागा भाई तेजी से

1460
01:55:30,440 --> 01:55:34,640
भागा मैं बैक स्टेज हो जा रहा हूं बार-बार

1461
01:55:34,640 --> 01:55:39,320
कैमरा चालू करते ही पता नहीं क्या गड़बड़ आ हो गई है

1462
01:55:39,320 --> 01:55:43,720
कैमरा इ ऑन नहीं कर पा रहा हूं मैं श्री राम

1463
01:55:43,720 --> 01:55:49,360
जय राम जय जय [संगीत]

1464
01:55:49,360 --> 01:55:53,480
राम तो ये आप ये वही श्लोक दिखा रहे है ना जो उस समय उनको दिखा रहे

1465
01:55:53,480 --> 01:55:57,560
थे जब देखिए यहां 22 में श्लोक में इन्होंने अपना

1466
01:55:57,560 --> 01:56:02,040
मंतव्य घुसे दिया वास्तव में विष्णु ही

1467
01:56:02,040 --> 01:56:06,280
सारे सौभाग्य के पालन पोषण हारे हैं यदि मनुष्य विष्णु

1468
01:56:06,280 --> 01:56:10,360
की शरण ग्रहण करता है तो सबकी शरण ग्रहण हो जाती है उन्होंने ऐसा

1469
01:56:10,360 --> 01:56:14,960
इसलिए किया क्योंकि व भौतिक संसार सृष्टि के शिव जी के माध्यम से ये सब घु सड़ दिया

1470
01:56:14,960 --> 01:56:19,400
और अंत में कह दिया यह सब जो बातें हैं जो हो रही है वास्तव

1471
01:56:19,400 --> 01:56:24,560
में विष्णु जी के लिए ही हो रही है

1472
01:56:24,560 --> 01:56:29,840
लेकिन ऐसा तो श्रीत स्वामी जी ने कहा नहीं

1473
01:56:29,840 --> 01:56:33,840
ना यहां पर इन्होंने यह बात लिखी ही नहीं अपने तात्पर्य

1474
01:56:33,840 --> 01:56:38,640
में कि शिवजी ब्रह्मा विष्णु महेश बनते हैं

1475
01:56:38,640 --> 01:56:42,760
नहीं लिखी दिक्कत है ना शिव जी की पावर

1476
01:56:42,760 --> 01:56:46,800
शिव जी का शिव जी की परब्रह्म

1477
01:56:46,800 --> 01:56:52,600
स्वीकार करने में दिक्कत है प्रॉब्लम है सारा सिस्टम मिल जाएगा

1478
01:56:52,600 --> 01:56:56,920
आपको याद है वृंदावन में राम जब रामायण देख रहे थे

1479
01:56:56,920 --> 01:57:01,000
तो वहां पर भी भगवान राम के

1480
01:57:01,000 --> 01:57:05,680
बारे में ही बात हो रही थी ना उनकी परब्रह्म के बारे में

1481
01:57:05,680 --> 01:57:09,680
बदल दिया हां बदल देते हैं रामायण

1482
01:57:09,680 --> 01:57:14,200
में कई जगह बदला है

1483
01:57:14,200 --> 01:57:18,880
तो ये इसमें कह दिया इन्होंने देखिए वहां लिखा है कि शिवजी

1484
01:57:18,880 --> 01:57:23,000
ब्रह्मा विष्णु महेश बनके शृष्टि की उत्पत्ति स्थिति

1485
01:57:23,000 --> 01:57:27,160
और समार को संभालते हैं और

1486
01:57:27,160 --> 01:57:31,280
इन्होंने क्या लिख दिया कि ब्रह्मा जी सजन करते हैं शिव

1487
01:57:31,280 --> 01:57:35,560
जी समार करते हैं किंतु ब्रह्मा तथा शिव दोनों ही विष्णु के अवतार हैं साता

1488
01:57:35,560 --> 01:57:39,880
वेष अवतार है उन्हें सर्वव्यापी विष्णु के ही समान विशेष शक्ति प्राप्त

1489
01:57:39,880 --> 01:57:44,000
रहती है अतः जब भी रक्षा के लिए शिव जी की स्तुति की जाती है तो

1490
01:57:44,000 --> 01:57:48,240
वास्तव में भगवान विष्णु के लिए होती है हो गया

1491
01:57:48,240 --> 01:57:52,800
विरोध हो गया क्या करोगे अब

1492
01:57:52,800 --> 01:57:57,280
आप कह दो हमने जो हमारा जो अध्ययन है वह परंपरा से हुआ है सीदर

1493
01:57:57,280 --> 01:58:02,160
स्वामी की अगर ऐसा कहोगे तो हो गए तुम शंकर मत वाले

1494
01:58:02,160 --> 01:58:08,160
बिल्कुल र कोई

1495
01:58:08,840 --> 01:58:13,440
हमारे गेस्ट आए हैं अशोक

1496
01:58:13,440 --> 01:58:17,720
सुथ जी आप अपना परिचय दे दीजिए विषय दे दीजिए

1497
01:58:17,720 --> 01:58:21,880
और हमारा नंबर नोट कर लीजिए आज हम आपको नहीं दे पाएंगे क्योंकि 10 बज

1498
01:58:21,880 --> 01:58:25,920
10 मिनट हो चुका है और सुबह हमको प्रातः काल जल्दी

1499
01:58:25,920 --> 01:58:30,080
उठना रहता है आपका परिचय क्या है

1500
01:58:30,080 --> 01:58:34,960
जय श्री राम शिवान जी जय श्री राम

1501
01:58:34,960 --> 01:58:40,080
मैं जोधपुर से बोल रहा हूं जी जी

1502
01:58:40,080 --> 01:58:44,080
बोलिए कई दिनों से मैं आपकी चर्चाएं सुन रहा हूं बहुत

1503
01:58:44,080 --> 01:58:48,520
अच्छा काम कर रहे हो आप धन्यवाद आपका

1504
01:58:48,520 --> 01:58:53,760
आभार ये मैं थो

1505
01:58:53,760 --> 01:58:55,000
मेरा थोड़ा अनुभव कई

1506
01:58:55,000 --> 01:58:59,000
सालों से सभी को सुन रहा हूं लेकिन जो आपसे जो मैंने सुना है वह कभी

1507
01:58:59,000 --> 01:59:03,400
किसी से नहीं सुना है आपका ज्ञान समझ

1508
01:59:03,400 --> 01:59:07,520
मतलब क्या कहे अरे भैया ऐसा कुछ नहीं है ऐसा

1509
01:59:07,520 --> 01:59:12,440
मत कहो घबराहट होने लगती है नहीं नहीं

1510
01:59:12,440 --> 01:59:16,800
इतने से इने से गुरुदेव के पास जगत गुरुओ के पास जाइए

1511
01:59:16,800 --> 01:59:21,080
कभी इतने से कुछ नहीं है नथिंग लेकिन

1512
01:59:21,080 --> 01:59:25,320
हमारे जिस को ज्ञान समझ में आए ना व वही वही मान है

1513
01:59:25,320 --> 01:59:29,480
क्या कि आप मैं भी पहले भेद करता था कि वो

1514
01:59:29,480 --> 01:59:33,840
कोई क्या बोलता कोई किसी भगवान को बोलता कोई किसी को बड़ा बोलता किसी को छोटा बोलता

1515
01:59:33,840 --> 01:59:39,480
जिस तरह से आपने समझाया ना तो कोई नहीं समझा सकता ऐसा मेरा अनुभव

1516
01:59:39,480 --> 01:59:44,000
है ये लेकिन वान

1517
01:59:44,000 --> 01:59:48,520
वाले हैं रामपाल वाले हैं इनको तो कभी समझ में नहीं आएगा

1518
01:59:48,520 --> 01:59:52,720
ये इनका ब्रेन वश पूरा हो चुका है इनको नहीं आएगा क्योंकि अी इनका विवाह

1519
01:59:52,720 --> 01:59:56,960
हो चुका है वो वाली बात है ना विवाह हो गया तो अब

1520
01:59:56,960 --> 02:00:01,160
दो तरीके के लोग होते हैं एक तो या तो आर या पार का फैसला लेते हैं जब

1521
02:00:01,160 --> 02:00:05,200
पता चला कि जिससे विवाह हुआ है वो त्रिया चरित्र है तो

1522
02:00:05,200 --> 02:00:09,280
दो तरीके के लोग होते हैं एक तो ठोस बदलाव लाते हैं परिवर्तन मैं निर्णय

1523
02:00:09,280 --> 02:00:10,040
लेता हूं कि

1524
02:00:10,040 --> 02:00:14,240
मैं गलत चीज का साथ नहीं दूंगा दूसरे होते हैं जो उसको ढकने में लग जाते हैं

1525
02:00:14,240 --> 02:00:18,440
नहीं नहीं नहीं त्रिया चरित्र नहीं है तो यह बात

1526
02:00:18,440 --> 02:00:23,680
हम कह सकते हैं कि इट्स बेटर ट केयर देन

1527
02:00:23,680 --> 02:00:27,840
क्यर जो हा चीजों को देख लेंगे जो अभी जुड़े

1528
02:00:27,840 --> 02:00:31,920
नहीं है वो तो जुड़ गए तो अपनी रक्षा करने में लगे रहेंगे जब यहां पर कोई

1529
02:00:31,920 --> 02:00:36,200
बात घुस नहीं ही होगी तो अपने आप को कह द अचिंत हैय भाई भगवान को पहले

1530
02:00:36,200 --> 02:00:40,320
आपने चिंता में ला दिया फिर कह रहे हो अचिंत आप ही तो भगवान

1531
02:00:40,320 --> 02:00:44,800
को कह रहे हो भगवान समझ में आ रहा है भगवान दिखाई दे रहा है

1532
02:00:44,800 --> 02:00:48,880
भगवान जो है यही उसका मौलिक स्वरूप हम भी भगवान दिखाई देने वाला मानते

1533
02:00:48,880 --> 02:00:52,880
हैं मगर एक और रूप है जो जो व्यवहार

1534
02:00:52,880 --> 02:00:56,960
में नहीं आ सकता हो सकता है दिखाई भी देता हो मैं यह भी कह रहा हूं व्यवहार में नहीं

1535
02:00:56,960 --> 02:01:00,960
आ सकता हमारी आंखों का विषय नहीं हो सकता हमारे कानों का विषय एक

1536
02:01:00,960 --> 02:01:05,000
वो रूप है वो प्राप्त है और जो वो है एज इट इज य नहीं

1537
02:01:05,000 --> 02:01:09,040
आता यहां आता है व्यवहारिक हो जाता है तो वो जो व्यवहार में ना आ सकने वाला

1538
02:01:09,040 --> 02:01:13,320
रूप है वह व्यवहार में आ सकने वाला रूप धारण करके मनुष्यों

1539
02:01:13,320 --> 02:01:17,880
के बीच में आता है क्यों आता है परित प्राणाया साधु नाम

1540
02:01:17,880 --> 02:01:22,200
साधु भक्तों के उद्धार के लिए मैं भी एक छोटा

1541
02:01:22,200 --> 02:01:25,360
शिव भक्ति हूं और मैं शिवजी

1542
02:01:25,360 --> 02:01:29,400
को सब कुछ मानता हूं लेकिन अभी समझ में आ गया सब कुछ ईश्वर अपना

1543
02:01:29,400 --> 02:01:33,480
अपना रूप अलग अलग नाम से बनकर आते हैं वो राम कृष्ण जो

1544
02:01:33,480 --> 02:01:37,680
भी है ब्रह्मा सब एक ही है व ईश्वर एक ही परम तत्व है वह

1545
02:01:37,680 --> 02:01:41,680
सब अपने को भेद दिखता है वर में आने के कारण अब सब

1546
02:01:41,680 --> 02:01:45,720
में आप शिव को देखिए अगर कहीं पर राम जी के मंदिर पहुंच जाए तो वहा भी

1547
02:01:45,720 --> 02:01:49,800
शिव को देखिए शिव जी खड़े धनुष लेकर के कितना मतलब

1548
02:01:49,800 --> 02:01:53,800
अगर इस चीज को हम धारण करेंगे चलो तो शास्त्रोक्त तारक

1549
02:01:53,800 --> 02:01:57,960
वो सब बातें छोड़ दो मगर सोचिए कि हमारे जो सनातन

1550
02:01:57,960 --> 02:02:02,080
धर्म का समाज है उसकी कैसी स्थिति होगी कितनी सुंदर स्थिति होगी

1551
02:02:02,080 --> 02:02:05,480
विवाद खत्म हो

1552
02:02:05,480 --> 02:02:09,480
जाएंगे ब गया इतना

1553
02:02:09,480 --> 02:02:13,560
बढ़ गया इतना मतलब हर कोई मनमानी कर रहा है गलत गलत गलत विचार

1554
02:02:13,560 --> 02:02:17,760
रहा है हिंदू धर्म को इतना बद हमा हमारी एक चीज

1555
02:02:17,760 --> 02:02:23,360
देखिए कि हमारा अस्तित्व क्या है जो स्मार्ट है

1556
02:02:23,360 --> 02:02:28,000
जो पांचों परमेश्वर के रूप को स्वीकार करते उनकी क्या स्थिति है

1557
02:02:28,000 --> 02:02:32,280
अगर विष्णु मंदिर पर कोई बात आएगी कोई जाए या ना

1558
02:02:32,280 --> 02:02:37,080
जाए हम जाएंगे वैष्णव तो जाएंगे ही

1559
02:02:37,080 --> 02:02:41,720
विष्णु मंदिर पर बात आएगी तो हम जाएंगे वैष्णव जाएंगे और हम जाएंगे

1560
02:02:41,720 --> 02:02:45,760
सात मंदिर पर बात आएगी तो सात जाएंगे हम

1561
02:02:45,760 --> 02:02:49,760
जाएंगे हा और शिव मंदिरों पर शव मंदिर

1562
02:02:49,760 --> 02:02:53,920
पर बात आएगी तो शव जाएंगे हम जाएंगे सौर मंदिर पर बात आएगी

1563
02:02:53,920 --> 02:02:58,160
तो सौर जाएंगे हम जाएंगे नपत मंदिर पर बात होगी नपत

1564
02:02:58,160 --> 02:03:02,440
जाएंगे हम जाएंगे तो हमें तो हर जगह अगर कोई निराकार

1565
02:03:02,440 --> 02:03:06,680
को मानने वाला जो समाज है जो स्वयं को सनातन से जुड़े हुए वेदों में प्रमाण

1566
02:03:06,680 --> 02:03:10,840
बुद्धि रखता है हमें उसकी भी उसके लिए भी खड़ा होना है फिर

1567
02:03:10,840 --> 02:03:15,080
वो भले आर समाज क्यों ना हो क्योंकि उसकी वेदों में प्रमाण बुद्धि

1568
02:03:15,080 --> 02:03:19,240
है इतनी बात प हम उसके भी साथ खड़े होंगे अगर निराकार मंदिरो

1569
02:03:19,240 --> 02:03:20,920
पर हमला होगा

1570
02:03:20,920 --> 02:03:25,160
हा सबसे जदा तो मेरे को इ इन रामपाल जी वाले लोगों को देखकर

1571
02:03:25,160 --> 02:03:29,760
बहुत मतलब गणा होती है कि इतने कुछ भी समझ नहीं इतना आप

1572
02:03:29,760 --> 02:03:33,840
भाई है भगवान से प्रार्थना करते हैं कि सुधर जाए

1573
02:03:33,840 --> 02:03:37,880
इन्होने कोई शास्त्रों का अध्ययन नहीं सिर्फ रामपाल की किताबें पढ़ी है और अपना

1574
02:03:37,880 --> 02:03:41,960
ब्रेन वश कर लिया मतलब इनको कुछ भी समझ में नहीं आता है अगर कबीर कबीर

1575
02:03:41,960 --> 02:03:47,960
साहब खुद बता दे ना तो भी ये नहीं मानने वाले हैं कि ये भगवान नहीं है कबीर

1576
02:03:48,280 --> 02:03:53,000
साहब अच्छा लगा भाव व्यक्त किए बहुत अच्छा लगा और

1577
02:03:53,000 --> 02:03:57,040
और नोट कर लीजिए और धरातल पर जो सहायता हो सकती है

1578
02:03:57,040 --> 02:04:01,080
वो करने के लिए जुड़िए नाम जप अभियान से जुड़िए हम सब लोग नाम जप करते

1579
02:04:01,080 --> 02:04:05,760
हैं जुड़े मैं आपसे बहुत बढिया हाड़ बहुत

1580
02:04:05,760 --> 02:04:09,880
बढ ये मेरे को मतलब एक भ्रम और डाउट होता है कि ये जो

1581
02:04:09,880 --> 02:04:14,200
रामपाल जी है कबीर कबीर पंथी है जो भी लोग है वह मतलब हमारे हिंदू

1582
02:04:14,200 --> 02:04:18,320
शास्त्रों को वेदों को नहीं मानते ये बोलते हैं कि इनमें कुछ नहीं है काल का लोग है

1583
02:04:18,320 --> 02:04:23,840
जीवों को फसा के रखा है और हमें मतलब सत लोग जाना है

1584
02:04:23,840 --> 02:04:27,920
और मानते नहीं वो मानने का दिखावा करते किसी

1585
02:04:27,920 --> 02:04:32,240
की भक्ति नहीं करनी है और मंत्रों से जब से तब से मतलब कोई किसी का कल्याण

1586
02:04:32,240 --> 02:04:36,080
नहीं होने वाला है ये ऐसा बताते हैं जी लेकिन ये

1587
02:04:36,080 --> 02:04:40,160
सब गलत लगता है मेरे को अगर कुछ गलत होता तो

1588
02:04:40,160 --> 02:04:44,360
हमारे वेद पुराण शास्त्र ऐसे थोड़ी लिखे जाते सब

1589
02:04:44,360 --> 02:04:48,600
में सब में गुड र से छुपा हु कोई समझ नहीं पाता हर कोई बुद्धिहीन

1590
02:04:48,600 --> 02:04:53,000
समझ नहीं पाता है चलिए ठीक

1591
02:04:53,000 --> 02:04:57,120
फिर आपसे चर्चा होती है आने के लिए

1592
02:04:57,120 --> 02:05:02,840
हो आप बहुत-बहुत धन्यवाद बहुत-बहुत शुभकामना जय श्री राम जय श्री

1593
02:05:02,840 --> 02:05:06,840
राम सभी को जय श्री राम
