1
00:00:02,760 --> 00:00:08,760
सभी को जय श्री

2
00:00:18,320 --> 00:00:22,720
राम तो

3
00:00:22,720 --> 00:00:27,600
अभी ये आप लोगों को एक

4
00:00:27,600 --> 00:00:32,200
दुख भरी सूचना मुझे देनी है वो यह है कि

5
00:00:32,200 --> 00:00:36,240
जो हमारी इस चर्चा में आने वाले थे वह अभी लापता

6
00:00:36,240 --> 00:00:40,280
है उन्होंने हमें अपना फोटो दे दिया था

7
00:00:40,280 --> 00:00:44,360
डिटेल्स दे दी थी ओम प्रकाश कुमार यह नाम

8
00:00:44,360 --> 00:00:48,480
उन्होंने बताया था और पहले उन्होंने हमको यह

9
00:00:48,480 --> 00:00:53,680
कहा कि उन्होंने फॉर्म भरते समय उसमें जब उनका

10
00:00:53,680 --> 00:00:58,040
किस पक्ष को प्रस्तुत करने आ रहे हैं ज हमने

11
00:00:58,040 --> 00:01:02,760
व पर एक प्रश्न आता है तो

12
00:01:02,760 --> 00:01:06,840
उसमें उन्होंने लिखा था कि इसकन के पक्ष को

13
00:01:06,840 --> 00:01:12,160
प्रस्तुत करेंगे उनके नाम से

14
00:01:12,160 --> 00:01:16,440
और ऐसा डाउट हुआ कि इस कौन के नहीं है ये और

15
00:01:16,440 --> 00:01:17,920
जिस तरह से उन्होंने उसमें

16
00:01:17,920 --> 00:01:22,680
जहां पर ऑप्शन आता है कि आप किन किन ग्रंथों को प्रामाणिक मानते हैं

17
00:01:22,680 --> 00:01:27,520
उसमें भी उन्होंने लिखा था कि गीता वेद पुराण

18
00:01:27,520 --> 00:01:31,760
यह जो भाषा शैली है ना यह भाषा शैली स्कोन

19
00:01:31,760 --> 00:01:36,080
वालों की नहीं यह

20
00:01:36,080 --> 00:01:40,360
भाषा तो इसलिए हमने कॉल किया

21
00:01:40,360 --> 00:01:44,480
उने और कॉल करके उनको टटोलने का प्रयास किया तो पता

22
00:01:44,480 --> 00:01:47,280
लगा

23
00:01:47,280 --> 00:01:51,440
कि वह जो है पहले उन्होंने

24
00:01:51,440 --> 00:01:56,360
आना कानी की पहले बोले कि हम जो है सवाल पूछने के लिए आ रहे हैं

25
00:01:56,360 --> 00:02:01,400
और अपनी इस चीज को बताने में कि वो रामपाल के

26
00:02:01,400 --> 00:02:07,400
उसके बाद हमने भैया

27
00:02:11,680 --> 00:02:15,960
अगर भाई आप अगर आ रहे

28
00:02:15,960 --> 00:02:19,960
हैं किसके पक्ष को प्रस्तुत करने आ और अगर आप प्रश्न

29
00:02:19,960 --> 00:02:23,520
करने आ रहे हैं तो आप

30
00:02:23,520 --> 00:02:28,600
पहले आवाज कट कट कर आ रही है

31
00:02:28,600 --> 00:02:33,560
ऐसा है क्या आवाज कट कट कर आ रही है य तो वाईफाई है

32
00:02:33,560 --> 00:02:39,560
टोटल शुरू से ही कटकट के आ रही

33
00:02:56,840 --> 00:03:02,120
है अभी ठीक आ रही है

34
00:03:02,120 --> 00:03:08,120
आवाज अब ठीक आ रही

35
00:03:14,040 --> 00:03:20,040
है अच्छा ठीक है अब ठीक आ रही है तो

36
00:03:33,280 --> 00:03:37,280
हां तो पहले वो अपनी पहचान

37
00:03:37,280 --> 00:03:41,600
को छुपाने का प्रयास कर रहे थे

38
00:03:41,600 --> 00:03:43,920
सनातनी

39
00:03:43,920 --> 00:03:47,160
जी सनातनी

40
00:03:47,160 --> 00:03:51,280
ब्रह्मचारी हा सनातनी ब्रह्मचारी जी आपने अपना कैमरा

41
00:03:51,280 --> 00:03:57,280
क्यों ऑफ कर लिया कैमरा ऑन

42
00:03:58,720 --> 00:04:03,800
रखें कोई प्रश्न पूछना था आप तो

43
00:04:03,800 --> 00:04:09,800
पहले

44
00:04:10,920 --> 00:04:15,200
जी चलिए मैं अपनी बात पूरी कर लू सबसे पहले

45
00:04:15,200 --> 00:04:19,240
तो वो अपने बारे में बताने में हिचा रहे थे कि मैं रामपाल को ही मानता हूं

46
00:04:19,240 --> 00:04:23,240
उन्हीं के मत को स्वीकार करता हूं तो मैं फिर वो बोल रहे थे कि मैं प्रश्न करने मैंने कहा प्रश्न करने के

47
00:04:23,240 --> 00:04:27,320
लिए आप वहां पर आइए क्लास में और यदि कभी हम ऐसा

48
00:04:27,320 --> 00:04:31,360
होगा कि प्रश्न उत्तरी करने बैठेंगे तो वहां पर आप आइएगा कोई दिक्कत नहीं है

49
00:04:31,360 --> 00:04:35,400
मगर अभी यह जो हम चला रहे हैं वह है कि किसी

50
00:04:35,400 --> 00:04:39,320
प्रकार के वैचारिक मतभेद के निमित्त

51
00:04:39,320 --> 00:04:45,320
चर्चा

52
00:04:50,520 --> 00:04:54,680
तो तो जब यह हुआ कि वैचारिक मतभेद के निमि चर्चा की बात आई

53
00:04:54,680 --> 00:05:00,680
हमने कहा अगर आपको वैसे प्रश्न करने हैं तो आप जो है क्लास में ही आइए तो फिर उन्होंने

54
00:05:01,400 --> 00:05:05,440
फिर धीरे से बोला ठीक है तो मैं रामपाल जी के पक्ष को रखने

55
00:05:05,440 --> 00:05:10,040
आ रहा हूं लब तब जा कर के उन्हें

56
00:05:10,040 --> 00:05:14,280
हां वह महापुरुष जो है आज वाले जो महापुरुष

57
00:05:14,280 --> 00:05:18,520
हैं वह भी एक मंतव्य के

58
00:05:18,520 --> 00:05:22,600
साथ आए हैं कि हम अपने पक्ष को नहीं रखेंगे और

59
00:05:22,600 --> 00:05:26,640
केवल जो है सामने वाले को काउंटर

60
00:05:26,640 --> 00:05:30,720
करेंगे या फिर हमारा अभी ये जो कंटेंट है ये कंटेंट हमारा है

61
00:05:30,720 --> 00:05:36,720
कि हम बात करने आए हैं वैचारिक मतभेद के निमित्त

62
00:05:43,120 --> 00:05:47,520
चर्चा तो यदि कोई और रामपाल के मत

63
00:05:47,520 --> 00:05:51,880
को डिफेंड करना चाहता हो या रामपाल के पक्ष को बताना चाहता

64
00:05:51,880 --> 00:05:56,640
हो तो वह आ सकता है ऊपर

65
00:05:56,640 --> 00:06:01,440
और

66
00:06:01,440 --> 00:06:06,640
रामपाल के पक्ष को रख सकता है अभी हम लोग

67
00:06:06,640 --> 00:06:10,680
वैसे गए थे स्कंद पुराण लेने जो

68
00:06:10,680 --> 00:06:14,800
12 खंडों में आता है स्कंद पुराण इस

69
00:06:14,800 --> 00:06:19,360
पर बहुत जल्द हम लोग कुछ रिसर्च

70
00:06:19,360 --> 00:06:23,520
लाने वाले आपके सामने स्कंद पुराण हम पढ़ते थे तो

71
00:06:23,520 --> 00:06:27,680
यह संस्कृत हिंदी वाला नहीं मिल पाता था

72
00:06:27,680 --> 00:06:33,000
हां ऐसा ही लगता है कमेंट वीर है

73
00:06:33,000 --> 00:06:37,000
केवल टी आर पहाड़ी जी कमेंट वर बनके रह

74
00:06:37,000 --> 00:06:41,560
गए वहां पर अपनी बात को रटते रहेंगे मगर

75
00:06:41,560 --> 00:06:47,560
ऊपर आने का इसमें सामने आकर के बात करने का साहस नहीं

76
00:06:51,920 --> 00:06:56,160
है आप अध्ययन के लिए अगर फॉर्म

77
00:06:56,160 --> 00:07:02,160
भरा था तो आपसे जल्दी संपर्क किया जाएगा

78
00:07:11,040 --> 00:07:15,080
तो हमारे पास जो था वह छिन्न भिन्न हो गया था स्कंद पुराण तो काफी दिन से

79
00:07:15,080 --> 00:07:19,240
थोड़ी समस्या आ रही थी तो हम लोग यह

80
00:07:19,240 --> 00:07:23,600
संकलन बना ही रहे हैं ग्रंथा का एक परिपूर्ण रूप से बनाने का प्रयास

81
00:07:23,600 --> 00:07:27,640
है कि यथा समर्थ ज्यादा से ज्यादा हमारे पास शास्त्र

82
00:07:27,640 --> 00:07:31,480
उपलब्ध हो

83
00:07:31,480 --> 00:07:35,840
लिंक दे दीजिए निशा पूरा जी हैं

84
00:07:35,840 --> 00:07:41,840
मैं हूं संत रामपाल महाराज जी की भगत आप आकर बात कर सकते

85
00:07:42,520 --> 00:07:46,520
हैं बंदी सोड़ तब तक हम लोग

86
00:07:46,520 --> 00:07:51,560
कुछ और बातें कर लेते जब तक कोई नहीं आ रहा है कोई आया

87
00:07:51,560 --> 00:07:56,160
क्या राजा राय

88
00:07:56,160 --> 00:08:01,560
जी राधे राधे

89
00:08:01,560 --> 00:08:05,880
हमारे एक जानने वाले हैं जो रामपाल जी के शिष्य

90
00:08:05,880 --> 00:08:10,080
है मतलब वो उन्होंने आपसे कुछ कहने के लिए संदेश भेजा

91
00:08:10,080 --> 00:08:14,280
है कह दू बताइए वो कह रहे हैं

92
00:08:14,280 --> 00:08:18,480
कि जब से आपका वीडियो देखा है तब से मन बहुत दुखी रहता है

93
00:08:18,480 --> 00:08:22,960
कारण यह है कि आप जो कह रहे हैं वह बात भी समझ में आ रही है

94
00:08:22,960 --> 00:08:27,040
और उनकी बात भी सुन रहे तो कुछ कुछ समझ में आ ही रही है अब हमें समझ में नहीं

95
00:08:27,040 --> 00:08:31,080
आ रहा कि हम इधर जाए कि उधर जाए में कहावत सुनी थी की धोबी का

96
00:08:31,080 --> 00:08:35,200
स्वान ना घर का ना घाट का इसी व पू में जीवन व्यतीत हो रहा

97
00:08:35,200 --> 00:08:39,560
है मैंने कहा जीवन व वत करने क्या जरूरत है जिस पक्ष में मति

98
00:08:39,560 --> 00:08:43,760
स्थिर हो उस पक्ष में आ जाओ तो ये उनसे आपकी शिकायत है कि अगर आप नहीं आते

99
00:08:43,760 --> 00:08:46,480
तो हमारे दिमाग में इतना भ्रम कोई नहीं डालता कि हम गलत जा

100
00:08:46,480 --> 00:08:50,720
रहे हैं उनके लिए कुछ कहना चाह रहे हैं तो कह

101
00:08:50,720 --> 00:08:52,840
दीजिए

102
00:08:52,840 --> 00:08:57,080
देख मैं आपकी स्थिति जो है वो मैं समझ रहा हूं भाई

103
00:08:57,080 --> 00:09:01,400
साहब ये स्थिति ऐसी है कि जैसे

104
00:09:01,400 --> 00:09:05,760
किसी स्त्री का विवाह हुआ संपन्न हुआ

105
00:09:05,760 --> 00:09:10,160
या फिर किसी पुरुष का विवाह संपन्न हुआ

106
00:09:10,160 --> 00:09:14,200
और विवाह होने के पश्चात कुछ दिनों बाद

107
00:09:14,200 --> 00:09:18,720
या फिर कुछ समय के बाद उनको यह

108
00:09:18,720 --> 00:09:22,720
पता चलता है ज्ञात होता है कि जिनसे उनका विवाह हुआ है

109
00:09:22,720 --> 00:09:26,840
वह त्रिया चरित्र है तो ऐसे में दो

110
00:09:26,840 --> 00:09:31,360
प्रकार के लोग होते हैं पहले होते वो

111
00:09:31,360 --> 00:09:35,400
जो लोक लाज इत्यादि का डर होता है कि

112
00:09:35,400 --> 00:09:39,760
मैं ही तो इसको इनको लेकर के साथ में गया था समाज

113
00:09:39,760 --> 00:09:43,880
के सामने प्रस्तुत किया था अपनी पत्नी के रूप में या मैं ही तो गई थी मैंने समाज

114
00:09:43,880 --> 00:09:48,000
के सामने इनको प्रस्तुत किया था अपने पति के रूप में और इतने साल

115
00:09:48,000 --> 00:09:52,120
हो गए यहां यहां पर लोग हमें जानते हैं साथ में अब मैं किस मुंह

116
00:09:52,120 --> 00:09:56,120
से उनसे कहूंगा कि इन्होंने ऐसी ऐसी चीजें कर दी

117
00:09:56,120 --> 00:10:00,320
हैं अब मैं कैसे समाज को समाज मैं यह जाकर कहूंगा

118
00:10:00,320 --> 00:10:01,480
कि नहीं जिनकी मैं अभी

119
00:10:01,480 --> 00:10:05,840
अभी तक जिनकी मैं प्रशंसा करता था वह प्रशंसा के योग्य नहीं है

120
00:10:05,840 --> 00:10:10,360
तो वहां वास्तव वास्तविकता में मैं झूठा उनके सामने

121
00:10:10,360 --> 00:10:14,400
ठहर तो दो प्रकार के लोग होते हैं कुछ होते हैं जो

122
00:10:14,400 --> 00:10:18,600
इस स्थिति का सामना करने से बचने के लिए उसी

123
00:10:18,600 --> 00:10:23,160
द्वंद में जीते रहते हैं उनको बिल्कुल पता चल गया

124
00:10:23,160 --> 00:10:27,280
कि यह त्रिया चरित्र है मगर उसके बाद भी वो वहां

125
00:10:27,280 --> 00:10:31,680
पर एक ठोस कदम उठाने से डरते हैं

126
00:10:31,680 --> 00:10:35,840
और दूसरे होते हैं सिद्धांत वादी जिनके पास

127
00:10:35,840 --> 00:10:39,840
सिद्धांत होते हैं उनको निर्णय लेने में ज्यादा

128
00:10:39,840 --> 00:10:44,520
परेशानी नहीं आती है यह तो यह या यह तो ये

129
00:10:44,520 --> 00:10:48,520
इधर या उधर बीच के से नहीं हो सिद्धांत वादी जो होते

130
00:10:48,520 --> 00:10:53,040
हैं वो निर्णय लेते हैं कि

131
00:10:53,040 --> 00:10:57,160
जैसे एक बात आती है ना कि संबंधों का त्याग भले ही करना

132
00:10:57,160 --> 00:11:01,720
पड़े मगर सिद्धांत का त्याग ना किया जाए है ना तो

133
00:11:01,720 --> 00:11:07,720
बस इसमें से आप कौन हो इन दोनों में

134
00:11:08,000 --> 00:11:12,920
से और शिवांश भैया ऐसे बहुत से उदाहरण दे गए

135
00:11:12,920 --> 00:11:18,920
हैं फन आ रहा है मिट

136
00:11:23,360 --> 00:11:28,240
वास ऐसे बहुत सारे उदाहरण

137
00:11:28,240 --> 00:11:32,840
है जिन लोगों ने पहले जिज्ञासा पूर्वक संतो के पास गए

138
00:11:32,840 --> 00:11:36,960
और जब उनकी मान्यताएं खंडित हो गई तो फिर उन्होंने

139
00:11:36,960 --> 00:11:41,360
उस पक्ष को स्वीकार कर लिया हम लोगों को भी ईमानदारी पूर्वक अन्वेषण

140
00:11:41,360 --> 00:11:45,400
करने के बाद जो शास्त्र सत बातें हो चीज हो उनको स्वीकार

141
00:11:45,400 --> 00:11:51,400
कर लेना चाहिए

142
00:12:25,400 --> 00:12:29,480
हां आ गए हैं वो जिनसे आज थ

143
00:12:29,480 --> 00:12:33,880
वो आ गए आने वाले

144
00:12:33,880 --> 00:12:37,960
अच्छा हुआ कि मैंने डू नॉट डिस्टर्ब नहीं ऑन किया था फोन में नहीं

145
00:12:37,960 --> 00:12:42,200
तो मुझे कॉल करते र जाते तो मैं यही

146
00:12:42,200 --> 00:12:46,280
कह रहा था कि आपको यह चुनना होगा निर्णय कई बार ऐसा होता है जीवन में ऐसी

147
00:12:46,280 --> 00:12:50,280
परिस्थितियां आती है जब दो गलत कार्य में से हमें

148
00:12:50,280 --> 00:12:54,400
कम गलत को चुनना होता है और कभी कभी ऐसी भी स्थिति आती

149
00:12:54,400 --> 00:12:58,400
है जब दो सही रास्तों में से हमें बेहतर

150
00:12:58,400 --> 00:13:04,400
रास्ते को चु होता है आवाज अटक रही

151
00:13:07,800 --> 00:13:13,800
है वाईफाई तो ऑन

152
00:13:15,160 --> 00:13:19,480
है भैया जैसे मैंने इतिहास सुना है कि मंडन

153
00:13:19,480 --> 00:13:23,640
मिश्र बहुत बड़े मीमांसा थे पूर्व मीमांसा लेकिन जब उन्होंने शंकराचार्य महा

154
00:13:23,640 --> 00:13:27,640
भाग से बात की तो फिर वो वेदांती हो गए थे अपने पक्ष को स्वीकार कर लिया

155
00:13:27,640 --> 00:13:31,800
था उन्होंने जी ऐसे ही मैंने एक और सुना

156
00:13:31,800 --> 00:13:35,960
है सुना क्या जानता हूं पंडित भीम सेन शर्मा थे इटावा वाले व पंडित

157
00:13:35,960 --> 00:13:40,120
शी दयानंद सरस्वती जी के प्रधान शिष्य थे और वह सनातन धर्म का खंडन

158
00:13:40,120 --> 00:13:44,360
करते थे आर्य सिद्धांत अखबार चलाकर बाद में उन्होंने आ समाज को छोड़कर

159
00:13:44,360 --> 00:13:48,600
और सनातन धर्म में आ गए और उन्होंने ब्राह्मण सर्व जो उस समय का प्रचलित हिंदू

160
00:13:48,600 --> 00:13:52,960
धर्म का पत्रिका था उसका संपादन करने लगे और दयानंद स

161
00:13:52,960 --> 00:13:57,840
के ध में आ गए थेसे बहुत उ

162
00:13:57,840 --> 00:14:00,880
शर्मा

163
00:14:00,880 --> 00:14:05,160
उ दयानंद सौती के शिष्य थे देखिए मैंने ज्यादातर

164
00:14:05,160 --> 00:14:11,160
यह देखा है कि वाप

165
00:14:15,200 --> 00:14:20,080
आने अभी मेरी वीडियो अटक रही है

166
00:14:20,080 --> 00:14:26,080
क्या मैं फिर से आता हूं फिर

167
00:15:02,200 --> 00:15:06,440
ओम प्रकाश जी आप आ जाइए अभी

168
00:15:06,440 --> 00:15:11,600
ठीक आ रही है आवाज हा हा

169
00:15:11,600 --> 00:15:15,760
सब अब ठीक आ रही है

170
00:15:15,760 --> 00:15:16,760
ना

171
00:15:16,760 --> 00:15:21,320
तो उनको हमारा यही संदेश दीजिएगा कि वह निर्णय ले

172
00:15:21,320 --> 00:15:25,440
कुंभकरण जो थे एक तरफ

173
00:15:25,440 --> 00:15:29,840
समष्टि का दायित्व था कि किसी अत्याचार

174
00:15:29,840 --> 00:15:33,920
हो रहा है उसको रोके उससे लड़े अत्याचारी

175
00:15:33,920 --> 00:15:38,880
से और एक तरफ व्यक्तिगत धर्म था

176
00:15:38,880 --> 00:15:43,160
कि हमारे भाई के प्रति हम जो है विरुद्ध ना जाए भाई से

177
00:15:43,160 --> 00:15:48,280
तो उन्होंने वहा पर समष्टि की वजह व्यक्तिगत को चुन

178
00:15:48,280 --> 00:15:53,040
लिया संबंध की रक्षा के लिए सिद्धांत का त्याग कर दिया

179
00:15:53,040 --> 00:15:57,200
और वहीं पर प्रहलाद जी थे एक

180
00:15:57,200 --> 00:16:01,400
तरफ सम का था कि नारायण संसार

181
00:16:01,400 --> 00:16:05,880
को दे कि ना दे भक्ति करें कि ना करें आदर्श बने कि ना बने

182
00:16:05,880 --> 00:16:08,920
है ना

183
00:16:08,920 --> 00:16:13,160
और दूसरी तरफ पिता का धर्म था पिता की बात ने

184
00:16:13,160 --> 00:16:17,200
के ना माने तो उन्होंने क्या किया व्यक्तिगत धर्म को

185
00:16:17,200 --> 00:16:21,480
पीछे कर दिया समष्टि का धर्म को अपना लिया तो

186
00:16:21,480 --> 00:16:26,040
सिद्धांत का त्याग नहीं किया संबंध का त्याग कर दिया

187
00:16:26,040 --> 00:16:30,160
अब इनमें से जो भाई साहब है जो जिन्होंने आपको संदेश भेजा

188
00:16:30,160 --> 00:16:31,960
है उनको आप कहिए कि

189
00:16:31,960 --> 00:16:36,040
अब इसमें से आप देख लीजिए कि आपको आप कुंभकरण हो या प्रहलाद आप तय

190
00:16:36,040 --> 00:16:40,680
करिए जी ओम प्रकाश जी आपका स्वागत है जय श्री राम

191
00:16:40,680 --> 00:16:43,480
जय श्री राम

192
00:16:43,480 --> 00:16:47,720
गु तो आपका परिचय बता दीजिए

193
00:16:47,720 --> 00:16:53,160
कौन है कहां से आए हैं किसको मानते

194
00:16:53,160 --> 00:16:57,280
हैं मेरा नाम ओम प्रकाश कुमार है मेरा

195
00:16:57,280 --> 00:17:02,160
मेरा घर झारखंड पड़ता है कहां पे

196
00:17:02,160 --> 00:17:08,160
झारखंड झारखंड

197
00:17:09,530 --> 00:17:15,530
[संगीत] ला अच्छा

198
00:17:40,520 --> 00:17:42,920
ठीक

199
00:17:42,920 --> 00:17:47,000
है तो आप आपका घर झारखंड पड़ता है वह

200
00:17:47,000 --> 00:17:51,080
तो हम समझ रहे हैं आपका जो आध्यात्मिक बैकग्राउंड

201
00:17:51,080 --> 00:17:55,120
बताइए वह क्या है मैं अभी किसी

202
00:17:55,120 --> 00:17:59,240
को नहीं मान रहा हूं आपने बोला ना मैं रामपाल जी को मान

203
00:17:59,240 --> 00:18:04,080
गुरु है वो मेरे मैं उसके तरफ से आपसे बात करना चाहता हूं

204
00:18:04,080 --> 00:18:09,160
नहीं नहीं आपने मुझको बोला ना तभी तो हुआ था हा

205
00:18:09,160 --> 00:18:14,120
रामपाल जी को गुरु मानते हैं ना हा मानते

206
00:18:14,120 --> 00:18:18,320
हैं तो ऐसे बोलो ना खुल के डर है क्या उनको गुरु बताने में

207
00:18:18,320 --> 00:18:22,200
रने का बात नहीं है डरने का

208
00:18:22,200 --> 00:18:24,600
बा नहीं आपने कहा ना मैं अभी किसी

209
00:18:24,600 --> 00:18:28,880
को नहीं मानता हूं आप कह रहे हो गुरु है वो मेरे नहीं अभी मैं उसे

210
00:18:28,880 --> 00:18:33,480
दीक्षा नहीं लिया इसके लिए गुरु भाव है

211
00:18:33,480 --> 00:18:37,640
गुरु भाव है लेकिन अभी लिया नहीं है उससे नहीं तो दीक्षा नहीं लिए

212
00:18:37,640 --> 00:18:41,680
गुरु भाव तो है ना गुरु मानते हो ना

213
00:18:41,680 --> 00:18:47,680
तो यह कहने में डर क्यों लग रहा है

214
00:18:49,240 --> 00:18:53,240
ठीक हा तो गुरुजी मेरा एक प्रश्न

215
00:18:53,240 --> 00:18:57,320
है प्रश्न बात यह है कि काउंटर

216
00:18:57,320 --> 00:19:02,080
हमने किया है कि में प्रमाण है कबीर साहब भगवान है

217
00:19:02,080 --> 00:19:06,120
कबीर को आप भगवान मानते हैं या नहीं मानते यह

218
00:19:06,120 --> 00:19:10,120
बताइए हा वेद के हिसाब से मानते हैं

219
00:19:10,120 --> 00:19:15,040
वेद के हिसाब से मानते हैं वेद में कहां लिखा है कबीर भगवान है

220
00:19:15,040 --> 00:19:19,600
लिखा है अरे कहां लिखा है

221
00:19:19,600 --> 00:19:23,960
में लिखा है वो तो मालूम नहीं है लेकिन उसका जो य में वीडियो देखते हैं तोव हमको

222
00:19:23,960 --> 00:19:28,880
मतलब प्रमाण दिखा देता है तो हम समझ लेते खा है

223
00:19:28,880 --> 00:19:32,880
तो आपको मैं अगर प्रमाण दिखा दूंगा तो आज आप बदल जाओगे

224
00:19:32,880 --> 00:19:37,080
कबीर को भगवान मानना बंद कर दोगे अगर आप प्रमाण दिखा दे वेद

225
00:19:37,080 --> 00:19:40,280
में या गीता में किसी और से नहीं गुरुजी

226
00:19:40,280 --> 00:19:45,000
वेद पुराण गीता इस चीज में अगर क लिखा है तो हम मान सकते

227
00:19:45,000 --> 00:19:49,840
तो आपने हमारे वीडियोस नहीं देखे क्या और कितने वीडियोस देखे आपने हमारे

228
00:19:49,840 --> 00:19:54,000
तो मैं तो आज पहली बार आपका वीडियो देखा तो उसम आपने

229
00:19:54,000 --> 00:19:59,160
गलती कर दी आपको देखना चाहिए था हमने भर भर के प्रमाण बताए

230
00:19:59,160 --> 00:20:03,360
ठीक है पन्नों 50 6 पन्नों की हमने किताब रिलीज कर रखी

231
00:20:03,360 --> 00:20:07,680
है उसको पढ़ लीजिए भरभर के प्रमाण है अगर आप वेद गीता

232
00:20:07,680 --> 00:20:11,800
और पुराण से अगर हमको सिद्ध कर देंगे कि भगवान कौन है उसका नाम क्या

233
00:20:11,800 --> 00:20:15,920
है और कहां रहता है तो हम सर आपको मानने के लिए तयार

234
00:20:15,920 --> 00:20:19,920
है अरे भाई तो मैं कह तो रहा हूं हमने अपने वीडियो में किया है

235
00:20:19,920 --> 00:20:24,080
जाके वीडियो देखना चाहिए था बिना उसको देखे हुए आ गए अब ये बताओ

236
00:20:24,080 --> 00:20:28,200
आपने हमारे वीडियो नहीं देखे रामपाल के देखे हैं हा रामपाल के देखे

237
00:20:28,200 --> 00:20:32,360
हैं तो रामपाल के अनुसार कबीर भगवान है

238
00:20:32,360 --> 00:20:36,640
हां ठीक है तो कबीर

239
00:20:36,640 --> 00:20:41,080
कहां रहते हैं कभीर सतलोक

240
00:20:41,080 --> 00:20:45,480
में रहते हैं सतलोक के

241
00:20:45,480 --> 00:20:49,800
क्या कबीर को आप इस संसार का पूरा संसार को बनाने

242
00:20:49,800 --> 00:20:54,160
वाला मानते हैं हां मानते हैं

243
00:20:54,160 --> 00:20:55,280
संसार की एक एक

244
00:20:55,280 --> 00:21:00,240
चीज उसी ने बनाई है मानते हैं हां हर एक चीज बनाई है

245
00:21:00,240 --> 00:21:04,600
कबीर साकार है ये मानते हैं हां साकार

246
00:21:04,600 --> 00:21:10,400
है जहां पर कबीर बैठे हैं वो जगह किसने

247
00:21:10,400 --> 00:21:15,760
बनाई सतलोक वो खुद ही वो खुद ही बनाए

248
00:21:15,760 --> 00:21:20,760
हैं ये यह मान लीजिए

249
00:21:20,760 --> 00:21:25,000
ये कबीर साहब का शरीर है यह शरीर

250
00:21:25,000 --> 00:21:29,640
है इसका मतलब इसके बाहर कोई जगह है तभी तो ये शरीर है

251
00:21:29,640 --> 00:21:34,440
यह जगह कैसे बन गई किसने बनाई

252
00:21:34,440 --> 00:21:38,600
नहीं गुरुजी मेरा वो प्रश्न नहीं है मैं बोल रहा हूं कबीर

253
00:21:38,600 --> 00:21:42,840
जी ही एक पहली है परमेश्वर कबीर जहां पर बैठे

254
00:21:42,840 --> 00:21:47,000
हैं सतलोक वो सतलोक किसने बनाया बुद वही

255
00:21:47,000 --> 00:21:51,680
बनाया है ना तो सतलोक पहले उनके अंदर

256
00:21:51,680 --> 00:21:56,080
था नहीं नहीं वो एक अविनाशी है व

257
00:21:56,080 --> 00:22:00,240
अ है मैं कह रहा कबीर के शरीर में था

258
00:22:00,240 --> 00:22:06,240
फिर शरीर से बाहर निकाला क्या नहीं वो प्रश्न नहीं है

259
00:22:07,440 --> 00:22:11,560
गुज बोलिए बोलिए आपके पीछे शोर हो रहा

260
00:22:11,560 --> 00:22:17,560
है क्या हा तो आप वहां से दूर

261
00:22:22,920 --> 00:22:28,590
हट अभी भी वीडियो रुक रहा है क्या

262
00:22:28,590 --> 00:22:34,590
[संगीत]

263
00:22:44,880 --> 00:22:48,880
कोई और आ जाए भाई आप कहीं और बैठ

264
00:22:48,880 --> 00:22:54,880
कर के बात करिए फिर आइए आपके पीछे बहुत शोर हो रहा है

265
00:22:59,000 --> 00:23:02,680
जय श्री राम आपका

266
00:23:02,680 --> 00:23:07,480
परिचय मेरा नाम अंचित है बिहार

267
00:23:07,480 --> 00:23:12,160
से बोलिए वेद लेना था वेद

268
00:23:12,160 --> 00:23:18,160
चलिए आध्यात्मिक बैकग्राउंड क्या है

269
00:23:20,000 --> 00:23:24,080
आपका अरे मत आया करो भाई थोड़ा बहुत थोड़ा

270
00:23:24,080 --> 00:23:28,560
देख के तो आया करो किस स्तर की बातें हो रही है क्या हो रहा है

271
00:23:28,560 --> 00:23:34,560
यह तो देखना पड़ेगा हर कोई व्यक्ति आ जा रहा है

272
00:23:34,760 --> 00:23:38,880
बोलिए ओम प्रकाश जी आप किसी सही जगह बैठ कर के बात करिए

273
00:23:38,880 --> 00:23:44,280
जहां शोर ना हो रहा

274
00:23:44,280 --> 00:23:48,440
हो आपकी आवाज नहीं सुनाई दे रही ओम प्रकाश जी किसी सही जगह बैठ

275
00:23:48,440 --> 00:23:54,440
के बात करिए

276
00:23:59,760 --> 00:24:04,280
एक बार ले लेते ऊपर बोलिए

277
00:24:04,280 --> 00:24:08,440
हा बोलिए आप आप सही जगह बैठ के बात करिए तने

278
00:24:08,440 --> 00:24:12,280
शोरगुल के बीच में बात मत

279
00:24:12,280 --> 00:24:16,520
करिए गुरुजी मेरा एक प्रश्न है आपसे प्रश्

280
00:24:16,520 --> 00:24:20,600
बात हो ही थी अभी बात य हो रही थी कि जहा पर कबीर बैठे हैं

281
00:24:20,600 --> 00:24:24,600
वह जगह किसने बनाई वो जगह खुद कबीर

282
00:24:24,600 --> 00:24:28,920
जी बनाए हैं खुद कबीर बनाए

283
00:24:28,920 --> 00:24:33,600
मतलब कबीर कबीर जहां पर खड़े हैं

284
00:24:33,600 --> 00:24:37,760
उनके बाहर पहले जगह है कि नहीं है जहां वो खड़े हैं

285
00:24:37,760 --> 00:24:43,760
जगह पहले से है ना तभी तो वो शरीर

286
00:24:44,400 --> 00:24:48,680
है वो तो बात सही है अरे भाई अगर ये अगर

287
00:24:48,680 --> 00:24:52,760
यह बुक है अगर ये बुक है तो यह बुक बुक के शेप में तब

288
00:24:52,760 --> 00:24:56,840
है जब इसके बाहर जगह है अगर इसके बाहर जगह नहीं है तो य बुक

289
00:24:56,840 --> 00:25:01,520
अपने शेप में कैसे है ठीक है

290
00:25:01,520 --> 00:25:05,520
गुरुजी आपका बात तो कबीर जहां पर बैठे

291
00:25:05,520 --> 00:25:09,640
हैं कबीर जहां पर बैठे हैं वोह जगह किसने बनाई

292
00:25:09,640 --> 00:25:13,920
पता नहीं किसने बनाया पता नहीं पता

293
00:25:13,920 --> 00:25:18,360
नहीं तो इसका अर्थ है कि आपको नहीं पता कबीर भगवान है कि

294
00:25:18,360 --> 00:25:22,360
नहीं ठीक है मेरे को मालूम नहीं है कबीर भगवान है नहीं है लेकिन र

295
00:25:22,360 --> 00:25:26,360
भगवान है कौन उसका नाम क्या है अगर वो भगवान नहीं है तो

296
00:25:26,360 --> 00:25:31,040
कौन भगवान है बमा विष्णु महेश भगवती और

297
00:25:31,040 --> 00:25:35,120
गणेश भगवान तो एक ही होता है गुरुजी इ भगवान एक

298
00:25:35,120 --> 00:25:39,800
भगवान भगवान एक ही है पांच रूपों में प्रकट होता है

299
00:25:39,800 --> 00:25:43,920
जैसे एक बच्चे के पिता होते हैं वह जब उसके साथ

300
00:25:43,920 --> 00:25:47,960
खेल रहे होते हैं तो एक अलग रूप होता है व जब ऑफिस जाते हैं तो एक अलग रूप होता है

301
00:25:47,960 --> 00:25:52,000
व जब दोस्तों के साथ जाते हैं तो अलग रूप होता है वो कहीं पर लड़ाई करते हैं तो अलग

302
00:25:52,000 --> 00:25:58,000
रूप होता है ठीक है आप हमको

303
00:25:59,360 --> 00:26:03,440
प्रमाण प्रमाण हम बहुत सारे दिखा चुके हैं फिलहाल

304
00:26:03,440 --> 00:26:07,680
मैं आपको अभी लाइव में

305
00:26:07,680 --> 00:26:13,320
मैं आपको शिव पुराण से प्रमाण दिखा देता हूं ठीक

306
00:26:13,320 --> 00:26:18,200
है दिखा दू हां दिखा दीजिए गुरुजी बिल्कुल ठीक

307
00:26:18,200 --> 00:26:22,280
है भैया तो क्या शिव पुराण से प्रमाण देखने

308
00:26:22,280 --> 00:26:26,720
के बाद फिर बोलना बंद कर दोगे ना वेदों में प्रमाण है कबीर भगवान है

309
00:26:26,720 --> 00:26:31,440
शिव पुराण में दिखाइए दुर्गा में दिखाइए वेद में

310
00:26:31,440 --> 00:26:35,760
दिखाइए यार तुम बात कैसे कर रहे हो

311
00:26:35,760 --> 00:26:39,840
कैसे बात कर रहे हो तुम हो क्या ठीक है

312
00:26:39,840 --> 00:26:44,000
आप शिव पुराण शिव पुराण में दिखाइए मैंने जो पूछा उसका उत्तर दिया

313
00:26:44,000 --> 00:26:48,280
क्या आपने ठीक है ठीक है गुरुजी आप दिखाइए मेरे को शि

314
00:26:48,280 --> 00:26:52,480
नहीं मैं पूछ रहा हूं अगर मैं दिखा दूंगा उसके बाद क्या

315
00:26:52,480 --> 00:26:56,560
करोगे क्या करेंगे फिर मानेंगे उसे तो

316
00:26:56,560 --> 00:27:00,760
यह बोलोगे वेदों में प्रमाण है जी भगवान है ठीक है ठीक

317
00:27:00,760 --> 00:27:06,760
है पुराना दिखाइए

318
00:27:09,210 --> 00:27:15,210
[संगीत]

319
00:27:21,280 --> 00:27:25,280
हमको पहले एक बार आप गीता को पवित्र मानते

320
00:27:25,280 --> 00:27:29,440
हो ना भगवत गीता को

321
00:27:29,440 --> 00:27:35,440
अरे लो ना उहे ऊपर भाई कहां चले

322
00:27:43,400 --> 00:27:47,520
गए वेदों में प्रमाण नहीं है कबीर साहब भगवान नहीं

323
00:27:47,520 --> 00:27:53,520
है भूल जाइए आपको बहका या गया है

324
00:28:16,160 --> 00:28:22,160
य कहां चले गए

325
00:28:32,240 --> 00:28:38,240
आ

326
00:28:52,010 --> 00:28:55,760
[संगीत]

327
00:28:55,760 --> 00:29:01,760
गए शिवपुराण विदेश्वर समता अध्याय

328
00:29:01,840 --> 00:29:05,840
18 इस चक्रवत भ्रमण की निवृत्ति

329
00:29:05,840 --> 00:29:10,760
के लिए चक्र करता का स्तवन एवं आराधन करना

330
00:29:10,760 --> 00:29:14,800
चाहिए प्रकृति आदि जो आठ पाश बतलाए

331
00:29:14,800 --> 00:29:19,040
गए हैं उनका समुदाय ही महाचक्र है जो प्रकृति से परे

332
00:29:19,040 --> 00:29:23,480
हैं वे परमात्मा शिव है भगवान

333
00:29:23,480 --> 00:29:27,680
महेश्वर ही प्रकृति आदि महाचक्र के कर्ता है

334
00:29:27,680 --> 00:29:33,680
क वे प्रकृति से परे हैं हो

335
00:29:36,840 --> 00:29:41,120
गए शिव परिपूर्ण है भगवान शिव के उद्देश्य

336
00:29:41,120 --> 00:29:45,280
से उनकी पूजा करनी चाहिए मैं

337
00:29:45,280 --> 00:29:49,600
भी क्या मगज मार रहा हूं कोई सुन नहीं रहा है और

338
00:29:49,600 --> 00:29:55,600
सुनेंगे भी तो उनको कुछ समझना है नहीं

339
00:30:14,920 --> 00:30:20,760
75 कहां चले गए वो है नहीं

340
00:30:20,760 --> 00:30:24,840
क्या चले ग सब्जी काटते

341
00:30:24,840 --> 00:30:28,800
काटते बात कर रहे थे आपसे

342
00:30:28,800 --> 00:30:32,880
अपना ना लीजिएगा बहुत मूर्खता हो गई

343
00:30:32,880 --> 00:30:37,120
धर्मेंद्र साक जी आपका परिचय जय श्री राम

344
00:30:37,120 --> 00:30:41,320
मैं सं संत रामपाल जी दास जी का शिष्य हूं और आपसे एक सवाल करना

345
00:30:41,320 --> 00:30:46,440
चाहता हूं आप पहले बताइए कबीर को भगवान मानते हैं या नहीं मानते

346
00:30:46,440 --> 00:30:50,480
हैं मानता हूं बिल्कुल कबीर देव तो भगवान है उसका प्रमाण

347
00:30:50,480 --> 00:30:55,640
भी है कहां पर प्रमाण है

348
00:30:55,640 --> 00:31:00,320
अथर कांड चार अनुवा एक म साथ में कबीर देव लिखा

349
00:31:00,320 --> 00:31:05,080
है कबीर देव लिखा है कि कबीर देव लिखा है

350
00:31:05,080 --> 00:31:09,400
कबीर देव लिखा है कबीर देवों से हम कवि साहिब कहते हैं साहिब

351
00:31:09,400 --> 00:31:13,480
मतलब होता है परमात्मा मैं आपसे जो जो पूछ रहा हूं

352
00:31:13,480 --> 00:31:17,760
वो बताई जाइए प्लीज तो कबीर से आप कबीर किस आधार

353
00:31:17,760 --> 00:31:22,240
पर कहते हैं क्या आधार है कबीर

354
00:31:22,240 --> 00:31:26,360
इस आधार से कहते हैं क्योंकि कुरान में भी कभीर लिखा है वेदों में कभीर

355
00:31:26,360 --> 00:31:30,560
लिखा है बाइबल में कभी लिखा गु ये कह रहे हो

356
00:31:30,560 --> 00:31:34,840
आपका कहना ये है कि वेदों में प्रमाण है कबीर भगवान है तो हमें वेदों

357
00:31:34,840 --> 00:31:35,880
से प्रमाण दो कुरान

358
00:31:35,880 --> 00:31:41,880
कहां से आ गई वेदों से बताओ चना

359
00:31:43,880 --> 00:31:47,880
पड़गा क्या वेद में ऐसा लिखा है कि कुरान के द्वारा

360
00:31:47,880 --> 00:31:52,240
भी हम नियम मानते हैं कहीं लिखा है वेद में

361
00:31:52,240 --> 00:31:56,320
ऐसा नहीं लिखा लेकिन सबको साथ लेकर तो चलना होगा ना तो ये

362
00:31:56,320 --> 00:32:00,480
मन का है ना वेद का नहीं है ना मैं मान लूंगा आपकी बात आप अच्छी बातें कर रहे

363
00:32:00,480 --> 00:32:04,680
हैं मगर पहले बताओ य तो मन की बात है वेद की बात तो नहीं है ना

364
00:32:04,680 --> 00:32:08,840
वेद तो क पूछ रहा देखिए

365
00:32:08,840 --> 00:32:12,960
देखिए मैं पूछ रहा हूं देखिए हम लोग बहुत सारी बातें कर सकते हैं

366
00:32:12,960 --> 00:32:17,600
अगर आप सही से कट टू कट जवाब देंगे तो हम लोग बहुत सारी बातें करेंगे

367
00:32:17,600 --> 00:32:21,680
आपके भी प्रश्न ले लेंगे मगर आप सही से जवाब दीजिए जवाब

368
00:32:21,680 --> 00:32:25,760
से भागि मत वेद में क्या कुरा

369
00:32:25,760 --> 00:32:30,840
वेद मैं पूछ रहा हूं वेद में कुरान को मानने के लिए कहा गया है

370
00:32:30,840 --> 00:32:35,000
क्या ऐसा कहीं नहीं कहा लेकिन मैं आपसे एक सवाल करना चाहता हूं मेरा सवाल

371
00:32:35,000 --> 00:32:39,760
सुन लीजिए आप पुरान में वेद को मानने के लिए कहा गया है क्या

372
00:32:39,760 --> 00:32:43,880
नहीं नहीं कहा मेरी बात सुन लीजिए आप अरे मैं

373
00:32:43,880 --> 00:32:47,920
सुनूंगा एकएक करके सुनूंगा यानी कि ये आपके मन की बात है

374
00:32:47,920 --> 00:32:50,960
वेद की चीज आधी वेद की चीज आधी कुरान

375
00:32:50,960 --> 00:32:55,040
की चीज और जोड़ के अपना इसकी ईट उसका रोड़ ये आपके मन की

376
00:32:55,040 --> 00:32:59,360
बात है ये अ एक सवाल सुन लीजिए आप

377
00:32:59,360 --> 00:33:04,200
भाई साहब पहले इसको डिक्लेयर करिए य आपके मन की बात है कि नहीं है

378
00:33:04,200 --> 00:33:08,240
हां मेरी मन की बात है अब मेरी मेरा सवाल सुली यानी कि आप

379
00:33:08,240 --> 00:33:12,320
जो भक्ति कर रहे हैं वह शास्त्रो चित भक्ति नहीं है मन की भक्ति है मन

380
00:33:12,320 --> 00:33:16,360
मुखी भक्ति है नहीं नहीं बिल्कुल नहीं है मन की भक्ति

381
00:33:16,360 --> 00:33:20,600
अभी आपने कहा मन की बात है हां तो मेरा सवाल

382
00:33:20,600 --> 00:33:26,360
तो सुन लीजिए आप मैं सवाल सुनूंगा पहले मन की बात को क्लियर

383
00:33:26,360 --> 00:33:30,400
करो मन की मन की बात नहीं है देखो अभी आपने

384
00:33:30,400 --> 00:33:34,400
कहा मन की बात है नहीं नहीं पहले बताओ कहा कि नहीं कहा

385
00:33:34,400 --> 00:33:37,760
पहले तो ये क्लियर

386
00:33:37,760 --> 00:33:41,960
करो मेरी बात तो सुनो आप मन की बात नहीं ऐसे नहीं होगी

387
00:33:41,960 --> 00:33:47,320
ना बात आप पहले सच्चाई पर आइए मन की बात कहा कि नहीं कहा

388
00:33:47,320 --> 00:33:51,320
देखो रि ओ सॉरी मैं पूछ

389
00:33:51,320 --> 00:33:57,320
रहा हूं आपने कहा कि य मेरे मन की बात है यह कहा कि नहीं कहा

390
00:33:58,200 --> 00:34:02,600
हां कहा था कहा तो यानी कि

391
00:34:02,600 --> 00:34:06,680
कहा यानी कि शास्त्र में जो चीज नहीं है आपने अपने मन से मानी

392
00:34:06,680 --> 00:34:08,960
हुई

393
00:34:08,960 --> 00:34:13,160
है बोलिए मेरी बात तो सुनिए आप सुत

394
00:34:13,160 --> 00:34:18,120
अभी सुनूंगा जब आप अपनी बातें क्लियर करेंगे मैं आपकी बातें सुनूंगा

395
00:34:18,120 --> 00:34:22,320
मुझे पता है आपके अंदर कुछ है जो आप निकालना चाहते हो उसी कमजोरी

396
00:34:22,320 --> 00:34:27,120
का मैं फायदा उठाऊंगा और आपसे सच बा बलवा पहले

397
00:34:27,120 --> 00:34:30,120
पहले

398
00:34:30,120 --> 00:34:34,240
सच बोलिए भाई साहब आपकी भक्ति साथ सत

399
00:34:34,240 --> 00:34:38,960
नहीं है उसमें आपका मन मिला हुआ है मनमुक भक्ति है

400
00:34:38,960 --> 00:34:43,440
नहीं नहीं बिल्कुल नहीं है मनमुक वेदों में कबीर देव लिखा है उसी को

401
00:34:43,440 --> 00:34:47,680
अब जा सकते हैं भाई साहब अब आप जा सकते हैं या तो देखिए बात होगी तो या तो क्लियर

402
00:34:47,680 --> 00:34:52,200
कट करो बात होगी तो

403
00:34:52,200 --> 00:34:56,840
आप बात होगी तो क्लियर सच्चाई की राह प चलिए

404
00:34:56,840 --> 00:35:01,200
यहां पे झूठा खोखला मत वो मत करिए सिद्ध

405
00:35:01,200 --> 00:35:05,480
सच्चाई पर खड़े रहिए आपने कहा कि ये मेरे मन की बात है

406
00:35:05,480 --> 00:35:09,520
यानी कि आपकी शास्त्र सम्मत भक्ति नहीं है आप

407
00:35:09,520 --> 00:35:15,520
मेरी बात सुनोगे अब नहीं पहले इसको क्लियर करो ना

408
00:35:15,600 --> 00:35:20,280
भाई देखो अब मैं आपको बता देना चाहता हूं कि कभी

409
00:35:20,280 --> 00:35:25,120
देखो नहीं पहले मुझे बताओ शास्त्र सम्मत भक्ति है आपकी

410
00:35:25,120 --> 00:35:29,760
बिल्कुल है तो शास्त्र में लिखा है क्या कुरान को मानो

411
00:35:29,760 --> 00:35:33,920
कुरान में लिखा है क्या वेद को मानो और कुरान लिखा भी में कोई मतलब

412
00:35:33,920 --> 00:35:37,960
नहीं है वेद में लिखा क्या वेदों में लिखा

413
00:35:37,960 --> 00:35:42,040
है कबीर देवो अरे वेद में लिखा है कुरान को मानो कुरान

414
00:35:42,040 --> 00:35:46,000
के आधार पर कबीर मान लो कवि

415
00:35:46,000 --> 00:35:50,160
को देखो वेदों में भी लिखा है कुरान में लिखा है बाइबल

416
00:35:50,160 --> 00:35:54,840
में लिखा है गुरु बो प्रश्न बोलो

417
00:35:54,840 --> 00:35:59,040
अपना हां मैं मैं बोल रहा हूं गीता अध्याय आ

418
00:35:59,040 --> 00:36:03,120
का श्लोक 13 में खा है ओम अक्षम ब्रह्म व्यव माम

419
00:36:03,120 --> 00:36:07,520
अनुसरण प्र परमा गति यानी ब्रह्म

420
00:36:07,520 --> 00:36:12,160
की साधना का एक ओम मंत्र है गीता अध्याय आ के शलोक 13 में लिखा है

421
00:36:12,160 --> 00:36:17,040
ही प्रश् बोलो प्रश्न प्रवचन मत दो

422
00:36:17,040 --> 00:36:21,200
प्रश्न क्या है प्रश्न जी है मेरा कि

423
00:36:21,200 --> 00:36:26,160
ब्रह्म लोक तक सारे लोग नाशवान है हम किसकी भक्ति करें

424
00:36:26,160 --> 00:36:31,840
सारे लोग नाशवान नहीं है भगवान श्री

425
00:36:31,840 --> 00:36:36,800
कृष् ठीक है मैं बता देता हूं आपको

426
00:36:36,800 --> 00:36:41,520
गीता 16 में मैं बता रहा हूं अब सुनो

427
00:36:41,520 --> 00:36:47,520
किसकी भक्ति करें सुन लो हा बताइए

428
00:36:59,400 --> 00:37:04,360
भगवान स्वयं बोल रहे हैं आप ब्रम बोना लोका पुनरा

429
00:37:04,360 --> 00:37:09,120
माम कोते पुनर्जन्म मेरा धाम नाश नहीं होता तते

430
00:37:09,120 --> 00:37:14,040
सूर्य को पावक य गवा धाम पर

431
00:37:14,040 --> 00:37:18,040
व सूर चंद्रमा आदि के प्रकाश की जरूरत नहीं होती व स्वयं प्रकाशित है और

432
00:37:18,040 --> 00:37:22,040
आपके देवी भागवत में भी न स्क के पहले अध्याय में भगवान के धाम के बारे में

433
00:37:22,040 --> 00:37:26,520
बताया गया गोलोक धाम जो नित्य है कभी नाश नहीं

434
00:37:26,520 --> 00:37:30,720
होता मेरी बात सुनियो ऋगवेद

435
00:37:30,720 --> 00:37:34,720
में लिखा है परमात्मा साकार है आप उसको निराकार बोलते हो कैसे

436
00:37:34,720 --> 00:37:39,400
हो सकता है सुनो भाई साहब एक एक करके बात करो

437
00:37:39,400 --> 00:37:44,440
एक एक करके बात करो अभी करेंगे ठीक है अभी

438
00:37:44,440 --> 00:37:47,560
करेंगे बता रहे हैं

439
00:37:47,560 --> 00:37:51,530
आपको सुनिए

440
00:37:51,530 --> 00:37:57,530
[संगीत]

441
00:37:58,280 --> 00:38:04,280
121

442
00:38:06,140 --> 00:38:12,140
[संगीत]

443
00:39:14,920 --> 00:39:16,760
शिव

444
00:39:16,760 --> 00:39:22,240
पुराण पहला

445
00:39:22,240 --> 00:39:26,280
अध्याय अ उसका पांचवा अध्याय और

446
00:39:26,280 --> 00:39:29,640
3 वा

447
00:39:29,640 --> 00:39:33,880
शिवलिंग और शिव की प्रतिमा दोनों के ही

448
00:39:33,880 --> 00:39:38,920
पूजन भोग और मोक्ष की प्राप्ति होती

449
00:39:38,920 --> 00:39:44,920
है बताइए क्या करें

450
00:39:48,080 --> 00:39:51,360
इसका

451
00:39:51,360 --> 00:39:55,400
बोलिए बोलिए मैंने आपसे गीता अध्याय आ के

452
00:39:55,400 --> 00:39:59,560
लोक नंबर 16 में लिखा है कि ब्र सारे लोग नाशवान

453
00:39:59,560 --> 00:40:03,680
है किसकी पूजा करें किस लोक में जाएंगे मैंने

454
00:40:03,680 --> 00:40:07,920
आपको बता दिया ना शिव पुराण में लिखा है शिव की पूजा करना मोक्ष दायक

455
00:40:07,920 --> 00:40:13,280
है क्या वहा लिखा है कि शिव की पूजा करना मोक्ष दायक नहीं है तो

456
00:40:13,280 --> 00:40:17,320
दिखाओ गीता में ना मोय नहीं है

457
00:40:17,320 --> 00:40:21,440
य लिखा है क्या वहा प मैं बता रहा हूं ना सुनो

458
00:40:21,440 --> 00:40:25,520
तो गीता में लिखा है जो देवता को पूछते वो देवताओ को प्राप्त

459
00:40:25,520 --> 00:40:30,000
होते हैं जो सचिदानंद घन ब्रम को पूछता है व उसको प्राप्त होता है

460
00:40:30,000 --> 00:40:34,800
तो शिवजी सचिदानंद घन ब्रम एक मिनट शिवजी सच्चिदानंद

461
00:40:34,800 --> 00:40:39,280
घन ब्रह्म है ये दिखा दूं आपको दिखा दीजिए

462
00:40:39,280 --> 00:40:43,920
दिखा दू ये दिखा दू अच्छा सच्चिदानंद

463
00:40:43,920 --> 00:40:48,600
घन ब्रह्म को परमात्मा परमेश्वर परम ब्रह्म कहते हैं क्या

464
00:40:48,600 --> 00:40:52,840
पूर्ण ब्रम है वो तो पर ब्रम से ही परे है पूर्ण ब्रम पूर्ण

465
00:40:52,840 --> 00:40:54,080
ब्रह्म कहते हैं

466
00:40:54,080 --> 00:40:59,440
क्या परम नहीं कहते

467
00:40:59,440 --> 00:41:05,440
परम नहीं कते

468
00:41:06,280 --> 00:41:12,280
कहते चलो

469
00:41:12,640 --> 00:41:17,760
दिखाता शवा भया

470
00:41:17,760 --> 00:41:22,680
तो बमा जीने भाग

471
00:41:22,680 --> 00:41:28,060
भाग परमानंद ब

472
00:41:28,060 --> 00:41:30,320
[संगीत]

473
00:41:30,320 --> 00:41:34,320
भागवत

474
00:41:34,320 --> 00:41:39,000
मेंही परमात्मा हैव महापुराण

475
00:41:39,000 --> 00:41:44,240
पहला खंड पांचवा अध्याय बावा श्लोक

476
00:41:44,240 --> 00:41:49,160
बताइए शिव ही परमात्मा है और क्या करें

477
00:41:49,160 --> 00:41:53,560
बताइए शिवांश जी आपसे एक बात कहना चाहता हूं कि

478
00:41:53,560 --> 00:41:57,640
परमात्मा का शरीर तो 2 तत्व का नहीं है एक तत्व का है उनका शरीर तो शिव जी

479
00:41:57,640 --> 00:42:01,640
का शरीर 25 तत्व का है मैंने आपसे कहा आप इसको मानते हैं

480
00:42:01,640 --> 00:42:06,400
कि नहीं शिव पुराण को लिखा है यह बताइए पहले बाद में बात करेंगे

481
00:42:06,400 --> 00:42:10,520
इसको मानते हैं कि नहीं मानते खा

482
00:42:10,520 --> 00:42:14,560
है वो परमात्मा है तो ये गलत लिखा है गलत नहीं

483
00:42:14,560 --> 00:42:19,560
लिखा मैं गलत नहीं क रहा मेरी बात समझिए आप शिवजी का शरीर 25

484
00:42:19,560 --> 00:42:25,360
25 तत्व का है शिवजी का शरीर चलो ठीक

485
00:42:25,360 --> 00:42:30,320
है आपने ये बताइए आपका जो परमात्मा है कबीर

486
00:42:30,320 --> 00:42:34,320
वो कितने तत्वों से बना है उसका एक तत्व से

487
00:42:34,320 --> 00:42:38,560
शरीर बना हो नूर तत्व से उसका 25 तत्व का शरीर नहीं है शिवजी का 25 तत्व

488
00:42:38,560 --> 00:42:44,080
का शरीर है ठीक है अब ये बताइए क्या वो सर्वशक्तिमान

489
00:42:44,080 --> 00:42:50,080
है शिवजी शिव जी होही नहीं सकते सचिदानंद सर्वशक्तिमान

490
00:42:50,200 --> 00:42:53,960
है

491
00:42:53,960 --> 00:42:59,960
क भैया राजा भैया आप एक बार वापस आ

492
00:43:03,200 --> 00:43:07,560
जाओ कबीर देव जी कुछ भी कर सकते हैं कुछ भी

493
00:43:07,560 --> 00:43:12,240
कुछ भी कर सकते हैं ठीक है

494
00:43:12,240 --> 00:43:16,320
उनका शरीर नाशवान तो नहीं है नहीं उनका शरीर भी

495
00:43:16,320 --> 00:43:21,000
अविनाशी है और उनका लोक है ना सतलोक वो भी अविनाशी है

496
00:43:21,000 --> 00:43:25,160
सनातन परमधाम है वो हमेशा था है और रहेगा ठीक है ठीक

497
00:43:25,160 --> 00:43:29,440
है अब मैं ये पूछ रहा हूं कि उनका शरीर सनातन

498
00:43:29,440 --> 00:43:33,480
है ना शाश्वत है

499
00:43:33,480 --> 00:43:39,480
ना तो क्या वो हाथी बन सकते हैं

500
00:43:40,360 --> 00:43:44,440
क्या वो कुछ भी कर सकते कुछ भी मैं पूछ रहा

501
00:43:44,440 --> 00:43:48,920
हूं हाथी बन सकते हैं क्या बन सकते हैं हाथी

502
00:43:48,920 --> 00:43:53,640
तो फिर उनका शरीर सनातन कहां से रहा बदल गया

503
00:43:53,640 --> 00:43:57,960
शरीर बदल जाएगा लेकिन सनातन नहीं है ना वो कुछ भी कर सकते हैं सनातन

504
00:43:57,960 --> 00:44:03,640
का मतलब क्या है हमेशा रहने वाला

505
00:44:03,640 --> 00:44:07,680
उस हा सनातन का अर्थ होता

506
00:44:07,680 --> 00:44:11,800
है जिसका ना आदि है ना अंत हमेशा रहने वाला सनातन

507
00:44:11,800 --> 00:44:17,800
का मतलब यह भी होता है जिसमें परिवर्तन नहीं आता है

508
00:44:19,240 --> 00:44:24,600
परिवर्तन परमात्मा तो वैसे कुछ भी कर सकते हैं ना

509
00:44:24,600 --> 00:44:28,640
अरे जब वो कुछ भी कर सकते भा कुछ भी अगर कर सकते

510
00:44:28,640 --> 00:44:33,040
हैं तो व अपने शरीर को बदल सकते हैं क्या

511
00:44:33,040 --> 00:44:37,320
शरीर को बिल्कुल बदल सकते हैं तो फिर उनका शरीर शाश्वत नहीं रहा बदल

512
00:44:37,320 --> 00:44:40,160
सकते

513
00:44:40,160 --> 00:44:44,720
तो या तो उनका शरीर शत

514
00:44:44,720 --> 00:44:49,520
आप एक बार जाके वापस आकी आवा डबल डबल आ रही

515
00:44:49,520 --> 00:44:53,880
है दीवारों से बना

516
00:44:53,880 --> 00:44:58,520
है

517
00:44:58,520 --> 00:45:04,520
50 50 प्राइवेट चैट चल रही

518
00:45:25,160 --> 00:45:29,480
है पहले य लो प्रमाण मा प्रमा प्रमाण

519
00:45:29,480 --> 00:45:34,200
लाने जब आप जाते हो फिर बात चेंज कर देते

520
00:45:34,200 --> 00:45:38,440
हैं सारे प्रमाण है हमारे पास अगर तुम कह रहे हो पूर्ण ब्रह्म तो पूर्ण

521
00:45:38,440 --> 00:45:42,560
ब्रम भी है भागवत में ब्रह्मा जी से कह रहे ना अहो भाग्य महो भाग्य नंद

522
00:45:42,560 --> 00:45:46,720
गोप प्र कम जन मित्रम परमानंद पूर्ण ब्रह्म सनातन

523
00:45:46,720 --> 00:45:51,040
बात इसकी नहीं है प्रमाणों की बात नहीं है जब प्रमाण हम दिखाएंगे तो इनको मानना

524
00:45:51,040 --> 00:45:55,280
नहीं इंटरप्रिटेशन अपनी लगानी है बात इसकी है रत बात बदल

525
00:45:55,280 --> 00:45:59,360
देते है इसीलिए मैं कहता हूं कि प्रमाणों पर बात करना बेकार है इसीलिए

526
00:45:59,360 --> 00:46:01,600
मैं कहता

527
00:46:01,600 --> 00:46:05,930
हू अपने आग कहां चले

528
00:46:05,930 --> 00:46:11,930
[संगीत]

529
00:46:17,040 --> 00:46:23,040
गए आप भी थोड़ा पीछे का ध्यान रखिए

530
00:46:27,480 --> 00:46:32,840
अरे भैया आओ कोई वेदों में प्रमाण कबीर भगवान

531
00:46:32,840 --> 00:46:37,040
दिखाओ चले गए मुझे लग रहा है

532
00:46:37,040 --> 00:46:41,200
वो सोच रहे होंगे कि अगर शरीर शाश्वत है तो फिर कैसे सर्वशक्तिमान सिद्ध करें

533
00:46:41,200 --> 00:46:45,560
या तो यह मान ले कि शाश्वत नहीं

534
00:46:45,560 --> 00:46:49,560
है वैसे मैं बता दूं आपको जो भी जिस

535
00:46:49,560 --> 00:46:54,480
भगवान से संबंध पुराण है उसमें

536
00:46:54,480 --> 00:46:58,520
सबसे पहले उन्हीं का महिमा महिमा मंडन होता वैसे आगे जगह जगह

537
00:46:58,520 --> 00:47:02,840
पर और भी होता है मगर सबसे पहले उन्हीं का महिमा मंडन होता है

538
00:47:02,840 --> 00:47:08,120
जैसे वि विद्वेष जो समता है

539
00:47:08,120 --> 00:47:12,360
उसमें भगवान महेश्वर की स्तुति की है

540
00:47:12,360 --> 00:47:16,640
भगवान शिव की उसमें आप देख सकते हैं उनकी

541
00:47:16,640 --> 00:47:22,640
परब्रह्म 75 नंबर पेज पर है

542
00:47:56,560 --> 00:48:01,040
ये इसमें कह रहे हैं कि जो मेरे शिवलिंग का

543
00:48:01,040 --> 00:48:05,720
निष्कपट भाव से यथोचित पूजन करेगा

544
00:48:05,720 --> 00:48:09,800
छोटू दास भाई चेहरा दिखाए जो भी आ रहे हैं जो

545
00:48:09,800 --> 00:48:13,960
भी निष्कपट भाव से मेरे शिवलिंग का पूजन करेगा उसके फल

546
00:48:13,960 --> 00:48:18,480
का मैं वर्णन कर रहा हूं फिर इस प्रकार से य पर वर्णन होते हुए

547
00:48:18,480 --> 00:48:24,000
आगे भोग और मोक्ष दोनों की प्राप्ति

548
00:48:24,000 --> 00:48:30,000
का दिलवाने वाला बताया है

549
00:48:30,600 --> 00:48:34,800
मैं ही परम ब्रह्म हूं यह डायलॉग आ गया कई बार

550
00:48:34,800 --> 00:48:38,840
लोग कहते हैं कि शिव जी ने कहीं पर कहा नहीं हजारों जगह कहा

551
00:48:38,840 --> 00:48:44,840
होगा भाई ये शिव जी कह रहे हैं देखिए कहां पर शिव पुराण

552
00:48:44,920 --> 00:48:48,960
में मैं ही परम ब्रह्म हूं कल यानी

553
00:48:48,960 --> 00:48:51,320
सगुण और अकल यानी निर्गुण

554
00:48:51,320 --> 00:48:55,400
ये दोनों मेरे ही स्वरूप हैं मेरा स्वरूप ब्रह्म रूप होने के

555
00:48:55,400 --> 00:48:59,440
कारण मैं ईश्वर भी हूं जीवों पर अनुग्रह आदि करना

556
00:48:59,440 --> 00:49:03,800
मेरा कार्य है ब्रह्मा और केशव सबसे बृहत

557
00:49:03,800 --> 00:49:07,360
और जगत की वृद्धि करने के करने वाला होने के कारण मैं ब्रह्म

558
00:49:07,360 --> 00:49:11,480
हूं सर्वत्र समरूप में स्थित और व्यापक होने से ही मैं

559
00:49:11,480 --> 00:49:17,120
ही सबकी सबका आत्मा

560
00:49:17,120 --> 00:49:21,320
हूं मेरे अतिरिक्त दूसरे के किसी के नहीं है

561
00:49:21,320 --> 00:49:25,920
जो जगत संबंधी पांच कृत है वो मेरे ही हैं

562
00:49:25,920 --> 00:49:29,960
मेरे अतिरिक्त किसी दूसरे के नहीं है जिग्नेश जी आप

563
00:49:29,960 --> 00:49:34,760
चेहरा दिखाएंगे तो हम आपको ऊपर ले ले जय श्री राम

564
00:49:34,760 --> 00:49:39,200
जय श्री राम जी बताइए

565
00:49:39,200 --> 00:49:43,480
गीता में सर्व

566
00:49:43,480 --> 00:49:47,640
धर्मा हा माम शरणम बज आप

567
00:49:47,640 --> 00:49:51,840
किसकी ओर से है पहले बताइए अपना परिचय बताइए मैं नागर

568
00:49:51,840 --> 00:49:56,000
ब्राह्मण हूं अच्छा तो

569
00:49:56,000 --> 00:50:00,360
यहां किसका पक्ष प्रस्तुत करने आए आप मैं सनातन धर्म

570
00:50:00,360 --> 00:50:05,560
का पक्ष सनातन धर्म

571
00:50:05,560 --> 00:50:09,600
का बताइए गीता में साफ लिखा

572
00:50:09,600 --> 00:50:14,000
है कृष्ण भगवान ने सर्व धर्मा

573
00:50:14,000 --> 00:50:18,640
पर वो नहीं मानते भाई साहब ये सब चीज कहां है आप वो

574
00:50:18,640 --> 00:50:23,480
अलग से उनको ट्रेनिंग दी जाती है

575
00:50:23,480 --> 00:50:27,520
अलग हा वो ब्रेन वको कुछ उनको कुछ भी में नहीं आता उनको

576
00:50:27,520 --> 00:50:31,800
जो रटा दिया गया बस वही पता है जब वेद की बात करेंगे तो वेद के सपोर्ट

577
00:50:31,800 --> 00:50:36,080
में कुराण आ जाएगा जब पुराण का प्रमाण दिखा देंगे तो उनके 25

578
00:50:36,080 --> 00:50:40,080
तत्व आ जाएंगे जब 25 तत्वों की बात करने लगेंगे तो उनका ईश्वर

579
00:50:40,080 --> 00:50:44,200
सर्व शक्तिमान शाश्वत भी है और जो है वो

580
00:50:44,200 --> 00:50:48,280
अपने आप को बदल भी सकता है अगर उनका इतना बड़ा शरीर है मान

581
00:50:48,280 --> 00:50:52,440
लो ठीक हैने कहा क्या वो चूहा बन सकता है इतना

582
00:50:52,440 --> 00:50:57,600
बड़ा तो जब चूहा बना वो तो कम हुआ ना

583
00:50:57,600 --> 00:51:01,680
बाकी का हिस्सा जो था वो गायब हुआ ना जब वो तभी तो चूहे

584
00:51:01,680 --> 00:51:05,800
बने तो नाश हुआ उसके बाकी के हिस्से का उसके बाकी के हिस्से

585
00:51:05,800 --> 00:51:09,920
का नाश हो गया ना जब वो चूहा बना जी

586
00:51:09,920 --> 00:51:14,080
जी वो कम करना पड़ा ना तो जिसमें चेंजेज आते

587
00:51:14,080 --> 00:51:18,080
हैं उसको सनातन नहीं कहते नहीं कहते सनातन वो जो नित स्थाई

588
00:51:18,080 --> 00:51:20,760
है तो इनका कबीर जो है वो नित

589
00:51:20,760 --> 00:51:24,840
स्थाई नहीं है भाग गए वो यही ढूंढ रहे

590
00:51:24,840 --> 00:51:30,840
होंगे वहां पर कबीर स मान कैसे है इसीलिए नहीं आ

591
00:51:30,920 --> 00:51:35,120
रहे इसीलिए इसीलिए मैं तर्क पर ही बात करता हूं जितने

592
00:51:35,120 --> 00:51:39,240
लोग आते हैं उन पर तर्क पर मैं बात करता हूं इसीलिए प्रमाणों का कोई वैल्यू

593
00:51:39,240 --> 00:51:43,440
नहीं है इसकन के सामने प्रमाण आप रखोगे वो तुरंत किसकी इंटरप्रिटेशन

594
00:51:43,440 --> 00:51:48,360
है अरे भाई जब इंटरप्रिटेशन वाली बात है तो प्रमाण मांग के फायदा क्या है

595
00:51:48,360 --> 00:51:52,440
नहीं जो सही ज्ञान दिया प्रेमानंद जी ने कि आप

596
00:51:52,440 --> 00:51:57,960
प्रेमानंद जी को जो नहीं मानता होगा वो उनको नहीं मानेगा प्रॉब्लम य

597
00:51:57,960 --> 00:52:02,040
कुरान की तो बात नहीं आती फिर भी कुछ प्रमाण ऐसे होते हैं जो अकाट्य होते हैं

598
00:52:02,040 --> 00:52:07,080
उनको नहीं काट पाता आदमी जी जी

599
00:52:07,080 --> 00:52:11,120
भाई इन्होंने शिव पुराण में वेदों में

600
00:52:11,120 --> 00:52:15,560
जगह जगह भर भर के ब्रह्मा विष्णु महेश को परब्रह्म कहा गया सर्वशक्तिमान

601
00:52:15,560 --> 00:52:19,560
कहा गया ईश्वर कहा गया सब कुछ कहा गया मगर यह यह

602
00:52:19,560 --> 00:52:23,720
नहीं बोलेंगे कि वेदों में प्रमाण है शिवजी भगवान है यह वहां

603
00:52:23,720 --> 00:52:27,880
पर जो कवि शब्द आ गया है और कवि से मिलता जुलता शब्द बन गया

604
00:52:27,880 --> 00:52:33,400
कबीर तो यह चिल्लाए कि वेदों में प्रमाण है कबीर भगवान है

605
00:52:33,400 --> 00:52:35,840
अरे शास्त्र को मानना ही नहीं है

606
00:52:35,840 --> 00:52:40,240
शास्त्रों को सही तरीके से इंटरप्रिटेशन नहीं करना है उनको

607
00:52:40,240 --> 00:52:44,320
हां भाई जोगेंदर सिंह जी बताइए जय श्री राम जय

608
00:52:44,320 --> 00:52:49,080
श्री राम आपका परिचय

609
00:52:49,080 --> 00:52:53,720
मेरा नाम सिंह उनाला माच प्रदेश

610
00:52:53,720 --> 00:52:57,920
जी यह तो है ठीक है आध्यात्मिक बैकग्राउंड

611
00:52:57,920 --> 00:53:00,320
है वो भी

612
00:53:00,320 --> 00:53:06,240
बताए मैं भगवान राम को मानता

613
00:53:06,240 --> 00:53:10,920
हूं हेलो आने का कारण

614
00:53:10,920 --> 00:53:16,000
बता य जो रामपाल के भक्त आ रहे

615
00:53:16,000 --> 00:53:20,160
हैं ये कह रहे कि शिव जी की नहीं करना पूजा

616
00:53:20,160 --> 00:53:24,320
नहीं करनी ये अविनाशी नहीं है तो मैं इनसे पूछना चाहता हूं

617
00:53:24,320 --> 00:53:28,440
कि गुरु अपने गुरु मंत्र शिवजी की शिव जी का

618
00:53:28,440 --> 00:53:33,440
मंत्र जपते भक्ति करते शिवजी की

619
00:53:33,440 --> 00:53:37,960
विष्णु की भक्ति शिवजी अविनाशी

620
00:53:37,960 --> 00:53:42,000
है स्पष्ट रूप से लिखा है नहीं मैं मानता

621
00:53:42,000 --> 00:53:46,480
हूं पर ज मानते

622
00:53:46,480 --> 00:53:51,400
कहते ये इनको देखिए ये पहले रामपाल जी को मानते थे

623
00:53:51,400 --> 00:53:57,400
ये इनका नाम जी है अब ये

624
00:53:58,040 --> 00:54:02,200
राधे राधे हा इनको जरा सामने लाइए बीच में

625
00:54:02,200 --> 00:54:06,880
सेंटर में जी बीच में बै करो

626
00:54:06,880 --> 00:54:11,000
रामपा जी को राधे राधे

627
00:54:11,000 --> 00:54:16,680
राधे राधे जय श्री राम जय श्री राम

628
00:54:16,680 --> 00:54:21,720
बताइए बताइए क्या बता रहे

629
00:54:21,720 --> 00:54:25,760
थे पहले मैं भी अज्ञानता व बहुत

630
00:54:25,760 --> 00:54:29,760
मानता था रामपाल जी को है ना ज्ञान

631
00:54:29,760 --> 00:54:33,840
गंगा वगैरा काफी पुस्तक जो पूरा कचरा जो पढ़ के

632
00:54:33,840 --> 00:54:38,080
मैंने इकट किया था मगर प्रेमानंद महाराज जी के सानिध्य

633
00:54:38,080 --> 00:54:42,240
में आके वह सारा जो कचड़ा था वह हमारा एक तरफ हो गया

634
00:54:42,240 --> 00:54:46,240
है है अच्छा हा तो

635
00:54:46,240 --> 00:54:50,240
हम श्री महाराज जी के सा में चलते हैं तो

636
00:54:50,240 --> 00:54:54,280
ऐसे और आपका जो आवाहन करके

637
00:54:54,280 --> 00:54:58,960
जो य चैनल है उ युवाओं को काफी प्रेरणा मिल रही है

638
00:54:58,960 --> 00:55:03,120
है ना और आपकी य चैनल पर मैं काफी वीडियोस देखता

639
00:55:03,120 --> 00:55:07,320
हूं और जो राजा राय है वो मेरे मित्री है

640
00:55:07,320 --> 00:55:11,560
मगर जी जी आप एक धर्म के कार्य

641
00:55:11,560 --> 00:55:16,520
करने में बहुत आगे आके युवाओं को काफी प्रेरणा मिल रही है आपसे

642
00:55:16,520 --> 00:55:20,560
तो आपका शिवांश जी बहुत धन्यवाद करता हूं मैं और

643
00:55:20,560 --> 00:55:24,600
धर्म की रक्षा के लिए आप जो कार्य कर रहे हैं यह बहुत ही

644
00:55:24,600 --> 00:55:28,720
सब के लिए प्रेरणा लायक है तो मैं तो भगवान

645
00:55:28,720 --> 00:55:32,720
से यही प्रार्थना करूंगा कि आपको अधिक से

646
00:55:32,720 --> 00:55:36,920
अधिक बल और अधिक से अधिक ज्ञान प्रदान करें और ऐसे

647
00:55:36,920 --> 00:55:40,960
ही आप धर्म की रक्षा सदैव करते रहे जैसे आप अभी भी कर रहे

648
00:55:40,960 --> 00:55:46,960
हैं राधे राधे चलिए आभार आपका राधे राधे जय श्री

649
00:55:49,680 --> 00:55:54,800
राम मैंने मिलवा दिया आपसे बोला था ना मिलवा दूंगा

650
00:55:54,800 --> 00:55:59,240
जी बहुत [संगीत]

651
00:55:59,240 --> 00:56:03,720
बढ़िया भाई कहीं गलत अगर फस गए हैं

652
00:56:03,720 --> 00:56:08,040
तो सही बात पता चलने पर आपको व बात मान लेनी चाहिए जी ढिल्लन

653
00:56:08,040 --> 00:56:11,920
जी आप कुछ कह रहे थे

654
00:56:11,920 --> 00:56:16,560
बताइए जोगेंदर जी अन म्यूट हो जाइए

655
00:56:16,560 --> 00:56:20,680
पहले जी मैं ये बात कर रहा

656
00:56:20,680 --> 00:56:24,880
था अगर इनका कबीर परमात्मा हैय इनका

657
00:56:24,880 --> 00:56:29,120
रामपार परमात्मा से मिला हुआ है उनका उनके दर्शन किए खुद

658
00:56:29,120 --> 00:56:33,360
परमात्मा है तो ये शिव जी का मंत्र क्यों देते

659
00:56:33,360 --> 00:56:37,760
हैं अपने नाम में बोलते भक्ति

660
00:56:37,760 --> 00:56:42,240
करो ये तो वही बताएंगे मैंने

661
00:56:42,240 --> 00:56:46,320
खुद नाम लिया था इनका मु जबरदस्ती नाम दवाया

662
00:56:46,320 --> 00:56:50,440
गया था चलो हा मुझे जबरदस्ती लेके गए थे कि आप नाम लो ये

663
00:56:50,440 --> 00:56:54,560
हो जाएगा वो इकट्ठे होकर मेरे पास आए थे तो मुझे कह रहे थे आप

664
00:56:54,560 --> 00:56:59,400
नाम लो हो जाएगा ले ज शिवजी की कर रहे

665
00:56:59,400 --> 00:57:04,080
शिवजी के आपका चेहरा भी

666
00:57:04,080 --> 00:57:10,080
दिखे सामने रखिए मोबाइल को

667
00:57:10,160 --> 00:57:15,240
जी एक जगह बैठ जाइए एक जगह बैठ जाइए

668
00:57:15,240 --> 00:57:20,200
ठीक य शिवजी का खंडन करते हैं कि उनकी पूजा नहीं करनी

669
00:57:20,200 --> 00:57:24,280
तो उनका मंत्र मंत्र मंत्र की करते

670
00:57:24,280 --> 00:57:28,560
उनके नाम की

671
00:57:28,560 --> 00:57:32,600
जी े बोलते हैं कि हम इस लोक में फसे हैं

672
00:57:32,600 --> 00:57:36,760
हमने इनका कर्ज उतारना है े जो श्रद होते

673
00:57:36,760 --> 00:57:40,880
हैं जो अपने पितरों का कर्ज उतारते हैं जो उनको मना

674
00:57:40,880 --> 00:57:46,880
करते हैं कि पित्र का शरा नहीं

675
00:57:47,440 --> 00:57:51,600
करने नहीं वो सब बातें तो एक तरफ है इनका कहना है कि शास्त्रों

676
00:57:51,600 --> 00:57:55,720
में नहीं दिया गया कि शिव जी भगवान है अब हमने बता दिया कि मैं ही परम

677
00:57:55,720 --> 00:58:00,320
ब्रह्म हू तो अय भाग

678
00:58:00,320 --> 00:58:04,560
गए अब इनके पास नहीं है राघव

679
00:58:04,560 --> 00:58:08,800
जी बताइए जय श्री राम भैया

680
00:58:08,800 --> 00:58:13,040
जय श्री राम बोलिए भैया मैं आपकी मतलब विचारधारा

681
00:58:13,040 --> 00:58:17,080
से तो पूरी तरह सहमत उसम वो नहीं है मतभेद है बस एक

682
00:58:17,080 --> 00:58:21,560
क्वेश्चन है जो मेरे मन में आता है जो मेरे नास्तिक दोस्त भी कई बार पूछते हैं

683
00:58:21,560 --> 00:58:25,600
कि जैसे जब हम कहते हैं कि भगवान सब कुछ जानता है या ऑल नोइंग

684
00:58:25,600 --> 00:58:29,880
है या त्रि कालज्ञ मतलब क्रिएशन से लेकर डिस्ट्रक्शन

685
00:58:29,880 --> 00:58:34,320
तक तो उनको सब पता होगा उसके बारे में तो फिर भैया फिर हमारी तो फ्री ल एजिस्ट

686
00:58:34,320 --> 00:58:38,360
नहीं करती क्या नहीं करती मतलब

687
00:58:38,360 --> 00:58:42,360
फिर हमारे ऊपर मतलब जब भी हमारी मुक्ति होगी तो उनको पता ही होगा

688
00:58:42,360 --> 00:58:46,720
तो मतलब हम जो कर रहे हैं वो तो पहले से निर्धारित हो गया

689
00:58:46,720 --> 00:58:50,760
बात उसमें ऐसी है व्यवहार और परमार्थ का अंतर

690
00:58:50,760 --> 00:58:55,240
है यह जो भगवान सब कुछ जानते हैं

691
00:58:55,240 --> 00:58:59,680
सब कुछ भविष्य देख सकते हैं यह पार मार्थी दृष्टि से है

692
00:58:59,680 --> 00:59:02,600
आपके व्यवहार में नहीं है तो व्यवहार आपको

693
00:59:02,600 --> 00:59:06,720
उस हिसाब से करना है जो आपको दिख रहा है और जो दिख रहा

694
00:59:06,720 --> 00:59:11,400
है वह यह है कि आपका भविष्य नहीं पता है

695
00:59:11,400 --> 00:59:15,480
उस हिसाब से आपको व्यवहार करना है ठीक है भगवान के

696
00:59:15,480 --> 00:59:19,560
कई लेवल्स है एक लेवल है जो बाहर

697
00:59:19,560 --> 00:59:23,680
बैठ कर के वीडियो गेम देख रहा है ठीक है

698
00:59:23,680 --> 00:59:27,760
और फिर आपकी ही एक जो चेतना है वो अंदर जुड़ी होती है जो

699
00:59:27,760 --> 00:59:31,840
वीडियो गेम में छटपटा रही होती है वीडियो गेम से बाहर निकलने के लिए स्टेजेस

700
00:59:31,840 --> 00:59:35,880
को पार करने के लिए मगर आप भगवान का ही एक रूप वो होता है

701
00:59:35,880 --> 00:59:40,120
जो आपको आपकी वो जो चेतना जो फसी हुई है उसकी मदद करना चाहता

702
00:59:40,120 --> 00:59:44,280
है सुपर पावर्स देकर के देते हैं ना ये कॉइन आ गया वो कॉइन

703
00:59:44,280 --> 00:59:48,320
आ गया तो भगवान के लेवल्स है हम लोग जो भक्ति कर रहे हैं ना भगवान

704
00:59:48,320 --> 00:59:52,360
के इस रूप की भक्ति की जाती है जो व्यवहारिक हो जाता है जो हमें

705
00:59:52,360 --> 00:59:56,440
कॉइन देना चाहता है बाकी उनका एक सर्वज्ञ रूप है फ्लैट

706
00:59:56,440 --> 01:00:00,480
है बिल्कुल कुछ नहीं मतलब जो आपका बाहर जो आपका स्वरूप है जो बाहर

707
01:00:00,480 --> 01:00:04,560
केवल दृष्टा बन के बैठा है जी जो आपसे प्रभावित भी नहीं

708
01:00:04,560 --> 01:00:08,560
हो रहा वो कुछ नहीं एक रस है वो उसको मालूम है कि

709
01:00:08,560 --> 01:00:12,880
मैं जब चाहूं तब इस वीडियो गेम का प्लग इन आउट कर सकता हूं मुझे कोई दिक्कत

710
01:00:12,880 --> 01:00:16,960
नहीं है ठीक है तो हम लोग जो व्यवहार करते हैं भगवान के इस

711
01:00:16,960 --> 01:00:17,600
रूप के प्रति

712
01:00:17,600 --> 01:00:21,720
करते हैं जो हमारी मदद करने वाला रूप है भगवान वही वाली बात कि भगवान

713
01:00:21,720 --> 01:00:26,280
जैसे सर्वज्ञ है पानी के रूप में मगर

714
01:00:26,280 --> 01:00:30,360
हम हमारी प्यास पानी पानी का वो रूप भुजा पाता है

715
01:00:30,360 --> 01:00:35,040
जो हमारे व्यवहार में आ जाए जी पानी नमी के रूप में सब जगह है

716
01:00:35,040 --> 01:00:39,120
और दिखाई देने वाले रूप में भी नाली में मगर तब भी हम

717
01:00:39,120 --> 01:00:43,360
उससे पीते नहीं है ना पीते कौन सा है जो साफ

718
01:00:43,360 --> 01:00:47,520
सुथरा जल जो हमारे पैरामीटर के अकॉर्डिंग हो उस जल को हम पीते हैं इसी प्रकार

719
01:00:47,520 --> 01:00:51,600
से भगवान तो सर्वज्ञ है हर तरह से वही वो है कण कण में

720
01:00:51,600 --> 01:00:55,640
वही है मगर जो वेदों के द्वारा निर्धारित पैरामीटर

721
01:00:55,640 --> 01:01:00,600
है जो मोक्ष दायक बताया गया वेदों के द्वारा हम भगवान के उस रूप का

722
01:01:00,600 --> 01:01:05,680
भजन और अनुकरण अनुसरण करते जी

723
01:01:05,680 --> 01:01:09,720
जी एक और प्रश्न था बस एक छोटा सा प्रश्न था नहीं आप क्लासे

724
01:01:09,720 --> 01:01:13,880
जन करिए यहां पर हम लोग बात करते हैं आइजल डिस

725
01:01:13,880 --> 01:01:17,920
एग्रीमेंट होता है फिर भी आप बोल जैसे

726
01:01:17,920 --> 01:01:22,000
एक और प्रश्न आता है जैसे जब भगवान सब कुछ कर सकते हैं तो फिर एक

727
01:01:22,000 --> 01:01:26,280
कुछ नास्तिक ऐसे भी तर्क करते हैं कि क्या ऐसा समुद्र बना स

728
01:01:26,280 --> 01:01:30,400
जो सूखा हो या ऐसा कोई शादी शुदा आदमी पैदा कर सकते हैं जिसकी शादी ना हुई

729
01:01:30,400 --> 01:01:32,960
हो ऐसे जो लॉजिकली इंपॉसिबल चीज

730
01:01:32,960 --> 01:01:37,360
है बात ये है कि जो लॉजिकली इंपॉसिबल है

731
01:01:37,360 --> 01:01:41,680
ये एक इंफॉर्मेशन है कि वो समुद्र सूखा है

732
01:01:41,680 --> 01:01:46,160
जी जी ये एक इंफॉर्मेशन है उनको आपके मन के अंदर की इंफॉर्मेशन चेंज

733
01:01:46,160 --> 01:01:50,240
करनी है जैसे कि दो और दो पांच नहीं हो सकते चार

734
01:01:50,240 --> 01:01:54,400
ही होते हैं ठीक है अब ये कोई क्रिया थोड़ी ना है दो और दो को पांच

735
01:01:54,400 --> 01:01:58,480
करना ये क्रिया नहीं है ये आपने जो माना हुआ है उसको हमें

736
01:01:58,480 --> 01:02:02,600
बदलना है जी तो उसको बदलने के कई रास्ते हैं

737
01:02:02,600 --> 01:02:07,360
जैसे कि आपको कहां से पता चला कि दो और दो को पांच कहते हैं

738
01:02:07,360 --> 01:02:11,880
आपके ग्रंथों से किताबों से आपके जो शिक्षक है उनसे

739
01:02:11,880 --> 01:02:16,600
ठीक है वही शिक्षक आ कर के आपसे बोल दे भा दो और दो पाच होते मानना

740
01:02:16,600 --> 01:02:20,640
पड़ेगा ठीक है एक तो ये हो गया अब यह बात आती

741
01:02:20,640 --> 01:02:24,800
है क्या वो आपके शिक्षकों को मजबूर कर सकते हैं बोलने के लिए कि नहीं बताइए

742
01:02:24,800 --> 01:02:28,840
कर सकते हैं ठीक है दूसरी बात ये हो गई कि

743
01:02:28,840 --> 01:02:32,880
शिक्षकों की भी आवश्यकता नहीं है आपको ही आपके

744
01:02:32,880 --> 01:02:37,000
ही मन में ये इंफॉर्मेशन डाल दी गई कि भैया दो और दो पांच

745
01:02:37,000 --> 01:02:41,000
होते हैं जी जी डाल दी गई अब वो ये कर सकते हैं कि नहीं कर

746
01:02:41,000 --> 01:02:45,280
कर सकते हैं कर स अच्छा अब एक बात य आएगी कि भगवान जो है वास्तविकता

747
01:02:45,280 --> 01:02:48,680
में नहीं कर रहे हैं ये तो भ्रम फैला रहे हैं

748
01:02:48,680 --> 01:02:52,920
झूठ फैला रहे हैं वास्तव में तो नहीं कर रहे तो यह संसार वास्तविक

749
01:02:52,920 --> 01:02:57,160
कहां है ये संसार भी तो माया

750
01:02:57,160 --> 01:03:01,280
ही है जी जी जी जी वह आपको वही तो दिखा रहे हैं जो

751
01:03:01,280 --> 01:03:05,400
नहीं है माया वही तो दिखा रहे हैं ना ये सब कुछ

752
01:03:05,400 --> 01:03:09,440
जो आपको दिख रहा है भगवान की दृष्टि से सब कुछ माया है आपकी दृष्टि से

753
01:03:09,440 --> 01:03:13,560
नहीं है क्योंकि आप इसमें फसे हुए हो जी ठीक है

754
01:03:13,560 --> 01:03:19,400
ठीक है अब क्लासेस में आइएगा ज

755
01:03:19,400 --> 01:03:24,240
ज अरे भाई वो कहां चले

756
01:03:24,240 --> 01:03:28,280
गए चलिए तब तक हम लोग मोक्ष दय जगहों के बारे में बात कर

757
01:03:28,280 --> 01:03:32,280
लेते हैं मोक्ष दायक पुण्य क्त्रों का

758
01:03:32,280 --> 01:03:38,280
वर्णन 86 नंबर

759
01:03:48,720 --> 01:03:52,760
पेज यह देखिए भैया वो सतलोक

760
01:03:52,760 --> 01:03:56,960
आश्रम तो दूर की बात है यह मोक्ष दायक पुण्य क्षेत्रों का वर्णन

761
01:03:56,960 --> 01:04:01,320
हो रहा है है ना

762
01:04:01,320 --> 01:04:05,560
तो इसमें यही बताया गया है बार-बार कि कौन-कौन से ऐसे

763
01:04:05,560 --> 01:04:09,800
तीर्थ हैं जहां जाने पर जहां स्नान करने पर व्यक्ति को मोक्ष

764
01:04:09,800 --> 01:04:13,800
की प्राप्ति हो जाती है काशी इत्यादि का वर्णन है विदेश्वर समिता

765
01:04:13,800 --> 01:04:17,800
है और उसका शिव पुराण में 12वां

766
01:04:17,800 --> 01:04:23,800
अध्याय

767
01:05:14,600 --> 01:05:18,960
121 कोई आ ही नहीं रहा लगता है

768
01:05:18,960 --> 01:05:24,960
अपना जो टेरर है वो बढ़ता जा रहा है

769
01:05:27,080 --> 01:05:32,120
मान ली क्या हम लोगों की बात मत पढ़ो चक्कर में कोई नहीं है टक्कर

770
01:05:32,120 --> 01:05:36,200
में आरोप लगाते हैं कि जो व्यक्ति बात करने लगता है उसको आप हटा

771
01:05:36,200 --> 01:05:42,200
देते हो अब तो हटाया भी नहीं

772
01:05:44,200 --> 01:05:48,280
है यह इसमें अलग-अलग प्रकार के भगवान के जो

773
01:05:48,280 --> 01:05:52,480
स्वरूप होते हैं कार्य ब्रम कारण

774
01:05:52,480 --> 01:05:56,720
रुद्र वो भी इसमें बताए गए हैं विद्वेष

775
01:05:56,720 --> 01:06:02,720
समता

776
01:06:02,760 --> 01:06:07,040
में वे परमात्मा प्रकट रूप से नव अर्थात शुद्ध

777
01:06:07,040 --> 01:06:10,880
स्वरूप है इसलिए प्रणव कहलाते

778
01:06:10,880 --> 01:06:15,640
हैं साधक को नव अर्थात नवीन शिव स्वरूप कर देता

779
01:06:15,640 --> 01:06:20,560
है इसलिए भी विद्वान पुरुष उसे प्रणव कहते हैं

780
01:06:20,560 --> 01:06:26,560
प्रकट रूप से नव दिव्य परमात्मा ज्ञान प्रकट करता है

781
01:06:48,000 --> 01:06:52,400
और इसी अध्याय में विद्वेष समता और अध्याय

782
01:06:52,400 --> 01:06:58,400
17 में इनके लोक का भी वर्णन

783
01:07:17,920 --> 01:07:22,080
है ध्यान रूपी धर्म में स्थित रहते हैं और सदा

784
01:07:22,080 --> 01:07:26,480
सब पर अनुग्रह किया करते हैं उनका ग्रह सच्चिदानंद

785
01:07:26,480 --> 01:07:30,640
स्वरूप है लो पराशक्ति से युक्त परमेश्वर

786
01:07:30,640 --> 01:07:34,440
शिव निवास करते हैं कहां

787
01:07:34,440 --> 01:07:38,640
पर शिव सम्मत ब्रह्मचर्य लोक है वही

788
01:07:38,640 --> 01:07:42,720
पांच आवरण से युक्त ज्ञानम कैलाश है वहां पर मंडलों

789
01:07:42,720 --> 01:07:46,880
पांच ब्रह्म कलाओं और आदि शक्ति से युक्त आदि लिंग प्रतिष्ठित है उसे

790
01:07:46,880 --> 01:07:51,160
परमात्मा शिव का शिवालय कहा गया है वही पराशक्ति से युक्त

791
01:07:51,160 --> 01:07:55,160
परमेश्वर शिव निवास करते हैं वह सृष्टि पालन समार तिरो

792
01:07:55,160 --> 01:07:59,480
भाव और अनुग्रह इन पांचों कृत्यों में प्रवीण है उनका श्री विग्रह

793
01:07:59,480 --> 01:08:03,720
सच्चिदानंद स्वरूप है वह सदा ध्यान रूपी धर्म

794
01:08:03,720 --> 01:08:08,440
में स्थित रहते हैं सदा सब पर अनुग्रह किया करते हैं वह

795
01:08:08,440 --> 01:08:12,480
स्वात्मा राम और समाधि रूप आसन पर आसीन

796
01:08:12,480 --> 01:08:16,520
हो सुशोभित होते हैं नित्य नैमित्तिक आदि

797
01:08:16,520 --> 01:08:20,600
कर्मों द्वारा देवताओं का यजन करने से भगवान शिव के सराध में कर्म

798
01:08:20,600 --> 01:08:24,800
में मन में लगता है कर्म में मन लगता है क्रिया

799
01:08:24,800 --> 01:08:28,800
आदि जो संबंधी कर्म है उनके द्वारा शिव ज्ञान सिद्ध करें

800
01:08:28,800 --> 01:08:33,000
जिन्होंने शिव तत्व का साक्षात कर लिया है जिन्होंने शिव

801
01:08:33,000 --> 01:08:37,040
तत्व का साक्षात्कार कर लिया है अथवा जिन

802
01:08:37,040 --> 01:08:41,160
पर शिव की कृपा दृष्टि पड़ चुकी है वे सब

803
01:08:41,160 --> 01:08:47,160
मुक्त हैं इसमें संशय नहीं है

804
01:09:12,480 --> 01:09:17,240
तो कोई आ रहा है क्या छोटू दास आप चेहरा दिखा दीजिए और ऊपर आ

805
01:09:17,240 --> 01:09:21,560
जाइए तो यह जब आप पढ़ेंगे ना ब्रह्मवर्त पुराण

806
01:09:21,560 --> 01:09:27,560
भागवत पुराण भगवत गीता और

807
01:09:27,880 --> 01:09:32,600
अगर मॉडरेटर्स कमेंट पढ़ रहे हैं तो मेरी बात प्लीज शिवांश भाई तक पहुंचा दीजिए

808
01:09:32,600 --> 01:09:38,600
क्या बात है

809
01:09:42,840 --> 01:09:46,840
आपकी जी लखनऊ में हमारा ऑफिस है आप आकर के मिल

810
01:09:46,840 --> 01:09:51,000
सकते हैं ऋषभ मिश्रा जी और संपर्क

811
01:09:51,000 --> 01:09:55,720
कर सकते हैं 7408 30169 पर

812
01:09:55,720 --> 01:10:01,720
व

813
01:10:03,520 --> 01:10:07,640
करें पानी पी लेंगे आज

814
01:10:07,640 --> 01:10:11,520
रात को ल भी

815
01:10:11,520 --> 01:10:17,520
है

816
01:10:20,120 --> 01:10:24,320
तो क्लासेस जिसे जवाइन करनी हो वह जवाइन कर सकता

817
01:10:24,320 --> 01:10:30,040
है इस नंबर पर एक ट करना है 7408

818
01:10:30,040 --> 01:10:34,040
30169 जिसको भी तर्क और प्रमाण सहित

819
01:10:34,040 --> 01:10:38,400
अपने धर्म का और गुरुओं द्वारा प्रतिपादित

820
01:10:38,400 --> 01:10:42,480
ज्ञान विज्ञान का प्रारंभिक अध्ययन करना हो हम उसकी उसमें सहायता कर

821
01:10:42,480 --> 01:10:47,400
सकते हैं हम आचार्य नहीं है मगर

822
01:10:47,400 --> 01:10:51,760
आपको वह पैरामीटर दे सकते हैं थोड़ा सा आपको सपोर्ट

823
01:10:51,760 --> 01:10:57,760
कर सकते हैं कि आप सही दिशा में जाएं

824
01:10:59,120 --> 01:11:03,400
जो भी आए चेहरा साथ में लेकर आए चेहरा छोड़कर ना

825
01:11:03,400 --> 01:11:08,720
आए सारे सतलोक वाले जा चुके हैं

826
01:11:08,720 --> 01:11:13,680
सारे रामपाल दास जी के फॉलोअर्स गायब हो गए हैं

827
01:11:13,680 --> 01:11:18,200
जो एक थे चर्चा में वो भी अब गोते खा रहे हैं इस बात को लेकर

828
01:11:18,200 --> 01:11:22,400
के कि क्या कबीर का जो शरीर है

829
01:11:22,400 --> 01:11:27,760
वह नाशवान है कि नहीं है हां

830
01:11:27,760 --> 01:11:31,880
अगर है तो उसको वही बिठा सतलोक में या नीचे मत

831
01:11:31,880 --> 01:11:36,920
लाओ नीचे लाओगे तो हम पकड़ के

832
01:11:36,920 --> 01:11:42,920
उसको शक्तिहीन सिद्ध कर

833
01:11:43,160 --> 01:11:47,200
देंगे जय श्री राम जय श्री राम

834
01:11:47,200 --> 01:11:53,200
खुश रहि बताइए आपका परिचयम

835
01:11:55,920 --> 01:11:58,800
अच्छा कहां

836
01:11:58,800 --> 01:12:03,240
से प हया पंचकुला

837
01:12:03,240 --> 01:12:07,080
हरियाणा

838
01:12:07,080 --> 01:12:13,080
बता कुछ सवाल तो नहीं

839
01:12:17,200 --> 01:12:21,080
हैप किस बारे में

840
01:12:21,080 --> 01:12:25,280
परसेप्शन जैसे हम देव

841
01:12:25,280 --> 01:12:28,000
इस्तेमाल करते

842
01:12:28,000 --> 01:12:32,960
हैं तो दे जैसे

843
01:12:32,960 --> 01:12:37,480
ब्रह्म देव हो जाता है महादेव हो जाता है

844
01:12:37,480 --> 01:12:41,600
जल देव वायु देव मतलब तो

845
01:12:41,600 --> 01:12:45,800
मैं क्या इसे सही मानू की जिस देवता के साथ

846
01:12:45,800 --> 01:12:50,760
देव लगता है व भौतिक रूप

847
01:12:50,760 --> 01:12:55,160
से देव देव के भी कई अर्थ होते हैं

848
01:12:55,160 --> 01:12:59,480
मगर एक बात ये है जैसे अभी मैं बता रहा था ना कारण ब्रह्म कार्य

849
01:12:59,480 --> 01:13:03,680
ब्रह्म सब अंतर जब वही परमेश्वर अपने शिव रूप

850
01:13:03,680 --> 01:13:07,920
में स्थापित होते हैं जैसे य लोग एक डायलॉग मारते हैं वो बहुत भद्दा लगता

851
01:13:07,920 --> 01:13:12,320
है दुर्गा के पति का नाम क्या है ऐसे बोलते

852
01:13:12,320 --> 01:13:17,120
हैं रामपाल वाले हा नीच

853
01:13:17,120 --> 01:13:21,800
नीच पं बोलते बारबार दुर्गा के पति का नाम क्या है

854
01:13:21,800 --> 01:13:26,720
तो जहां पर ब्रह्मा विष्णु महेश से उनकी उत्पत्ति हो रही है

855
01:13:26,720 --> 01:13:30,920
वहीं पर उन्होंने थोड़ी दूर जाकर के अपने बारे में बताया है

856
01:13:30,920 --> 01:13:36,920
दुर्गा माता ने क्या बताया है वह मैं आपको बता देता हूं

857
01:14:11,240 --> 01:14:15,320
देख जैसे कारण रूप से देवी समस्त विश्व की

858
01:14:15,320 --> 01:14:20,240
रचना करती है तो ये उन्होंने बता दिया कारण रूप से

859
01:14:20,240 --> 01:14:24,480
है ना कारण रूप कार्य रूप इसमें भेद आता है जैसे शिव ने कारण

860
01:14:24,480 --> 01:14:28,520
रूप से की रचना की कार रूप में उसका कोई कार किया

861
01:14:28,520 --> 01:14:32,520
तो ये सब अब यहां जहां कार्य वाले हो गए तो वहां पर वो देव लग गया

862
01:14:32,520 --> 01:14:36,680
इस तरह से अंतर आता है उदाहरण मात्र के लिए कह रहा हूं आपको अब देखिए

863
01:14:36,680 --> 01:14:41,160
ये क्या हो रहा है देवी भागवत में तीसरे स्कंध में

864
01:14:41,160 --> 01:14:45,480
छठवें अध्याय में सातवे श्लोक में माता कह रही है

865
01:14:45,480 --> 01:14:49,520
माता के बारे में आया है भगवती ना ही स्त्री है जिस

866
01:14:49,520 --> 01:14:53,640
समय वो कारण ब्रह्म है मूल कारण जिस समय

867
01:14:53,640 --> 01:14:58,440
वो कारण ब्रह्म है वहां उस उस स्वरूप के लिए वर्णन आ रहा है

868
01:14:58,440 --> 01:15:02,480
भगवती ना ही स्त्री है ना ही पुरुष है

869
01:15:02,480 --> 01:15:06,640
और ना ही नपुंसक है तो यहां

870
01:15:06,640 --> 01:15:10,680
क्या हुआ उनका जो परम ब्रह्म वाला है ना तो पुरुष ना स्त्री ना नपुंसक

871
01:15:10,680 --> 01:15:15,120
सिर्फ है सच्चिदानंद स्वरूप परमेश्वर

872
01:15:15,120 --> 01:15:19,280
भगवती तो यहां उसका वर्णन हो गया तो अगर अगर ब्रह्मा

873
01:15:19,280 --> 01:15:23,480
विष्णु महेश की उत्पत्ति इनसे हो रही है तो ये ना तो स्त्री

874
01:15:23,480 --> 01:15:26,360
है ना ही पुरुष है तो ये

875
01:15:26,360 --> 01:15:30,600
किसी की पत्नी सिद्धि नहीं होती हो

876
01:15:30,600 --> 01:15:34,880
ये किसी की पत्नी सिद्ध नहीं होती पत्नी रूप में य लीला करती

877
01:15:34,880 --> 01:15:39,280
है जब कार्य करती है कोई आ कर के खुद ही एक रूप ले लिया पत्नी

878
01:15:39,280 --> 01:15:43,560
किसी की पत्नी बन गई और कार्य करने लगी उस रूप में व शिव की पत्नी होती

879
01:15:43,560 --> 01:15:48,520
मगर उस रूप से मगर उस रूप से ब्रह्मा विष्णु महेश की उत्पत्ति नहीं होती

880
01:15:48,520 --> 01:15:52,680
है उस रूप से ब्रह्मा विष्णु महेश की उत्पति नहीं होती है ब्रह्मा विष्णु

881
01:15:52,680 --> 01:15:58,680
महेश की उत्पत्ति इस रूप से होती है समझ

882
01:16:00,760 --> 01:16:06,320
रहे एक बात है ईश्वर वही है जो कुछ भी कर सकता

883
01:16:06,320 --> 01:16:10,320
है तो यदि वह माता के गर्भ से जन्म नहीं ले सकता

884
01:16:10,320 --> 01:16:14,840
तो व ईश्वर नहीं है यदि व अपनी देह का नाश नहीं कर सकता

885
01:16:14,840 --> 01:16:19,040
तो व ईश्वर नहीं है यदि व अपनी देह को बदल नहीं सकता तो वह

886
01:16:19,040 --> 01:16:23,400
ईश्वर नहीं है यदि व दे का नाश कर सकता है दे को बदल सकता है तो उसका शरीर शाश्वत

887
01:16:23,400 --> 01:16:25,840
नहीं है

888
01:16:25,840 --> 01:16:30,040
है ना जब हमने ईश्वर की शाश्वता को स्वीकार

889
01:16:30,040 --> 01:16:34,080
कर ही लिया है तो उस शाश्वत तत्व को लेकर के बीच में क्यों आ रहे हो लोगों के

890
01:16:34,080 --> 01:16:38,200
बाधित हो जाएगा ईश्वर शाश्वत त

891
01:16:38,200 --> 01:16:42,600
है व्यवहार का विषय नहीं है शाश्वत तो पहुंचने का

892
01:16:42,600 --> 01:16:47,000
विषय शाश्वत तक पहुचा जाता है शाश्वत

893
01:16:47,000 --> 01:16:51,040
के साथ व्यवहार नहीं किया जाता है इन्ह ये

894
01:16:51,040 --> 01:16:55,360
नहीं पता कि कबीर शाश्वत है या क्या है कुछ नहीं पता है

895
01:16:55,360 --> 01:16:59,360
अभी दो चारसे जटल प्रश्न पूछ लेता हूं कि सतलो कबीर

896
01:16:59,360 --> 01:17:03,880
जहां बैठे हैं वो जगह किसने बनाई भाग जाते हैं तुरंत

897
01:17:03,880 --> 01:17:07,960
पूछ लेता हूं अभी कोई आ जाए मैं पूछ लूंगा फ

898
01:17:07,960 --> 01:17:12,200
फिर ड़ की लगा लेंगे बकुल मैं काफी वर्ष

899
01:17:12,200 --> 01:17:15,800
पहले भवती ने य पर क्लियर कर दिया जब

900
01:17:15,800 --> 01:17:20,040
ये लोग पूछे अब कभी किसी से कोई पूछे कि देवी का पति

901
01:17:20,040 --> 01:17:24,160
कौन है दुर्गा का तो क्या बोलोगे दुर्गा जो है जहां

902
01:17:24,160 --> 01:17:28,200
पर दुर्गा से ब्रह्मा विष्णु महेश का जन्म दिखाया है

903
01:17:28,200 --> 01:17:32,200
वो दुर्गा ना ही स्त्री है ना ही पुरुष है ना ही नपुंसक है यह

904
01:17:32,200 --> 01:17:37,400
वहां खुद लिखा है तीसरा स्कंद छवा अध्याय सातवा

905
01:17:37,400 --> 01:17:41,480
श्लोक ठीक है यह सारी चीज

906
01:17:41,480 --> 01:17:45,640
है कोई नहीं आ रहा है एक देव शब्द से भैया

907
01:17:45,640 --> 01:17:49,800
भी कह ना देव शब्द तो भगवान के यज होता है ना एक देवो सर्व

908
01:17:49,800 --> 01:17:54,320
भूते सु गुण एक ही देव समस्त जीवों के जीवात्मा है

909
01:17:54,320 --> 01:17:57,800
देव

910
01:17:57,800 --> 01:18:02,000
बिल्कुल बिल्कुल देव शब्द जो है उनके लिए

911
01:18:02,000 --> 01:18:07,040
भी आता है एक चीज बताऊ मैं आपको

912
01:18:07,040 --> 01:18:10,400
पहली बात तो यह

913
01:18:10,400 --> 01:18:16,400
समझिए इसको पढ़ने में मुझे बहुत टाइम लग जाएगा बहुत टाइम लग जाएगा

914
01:18:16,800 --> 01:18:20,920
मुझे हां यह देख लीजिए बड़ा करके तत्व भगवती ना ही

915
01:18:20,920 --> 01:18:26,440
स्त्री है ना ही पुरुष है और ना ही नपुंसक ही है

916
01:18:26,440 --> 01:18:30,680
अब यह बता रहा था शिव जी की परब्रह्म होता

917
01:18:30,680 --> 01:18:34,920
तो ऋग्वेद में यजुर्वेद में है 16 दो 41 ऋग्वेद बहुत

918
01:18:34,920 --> 01:18:39,120
सारी जगह है जब शिव जी को परम ब्रह्म कह दिया गया फिर

919
01:18:39,120 --> 01:18:43,600
दूसरी जगह वेद में ही शिव जी को देव कहा जा रहा है कहां कहा जा रहा है

920
01:18:43,600 --> 01:18:48,000
स रुद्र स महादेव यह कहां लिखा है अथर्ववेद

921
01:18:48,000 --> 01:18:52,040
13 च च तो जो परब्रह्म

922
01:18:52,040 --> 01:18:56,280
है उसको भी देव कहा गया तो ऐसा नहीं क देव से बाधित कोही

923
01:18:56,280 --> 01:19:00,320
कहा जाएगा परब्रह्म को नहीं कहा जाएगा ऐसा नहीं कह सकते देव

924
01:19:00,320 --> 01:19:04,560
जो है कहीं पर भी लग सकता है कई जगह यूज होता है ब्रह्मा देवा

925
01:19:04,560 --> 01:19:08,800
नाम प्रथमा संभु विश्व कता भवन गोता ब्रह्मा

926
01:19:08,800 --> 01:19:12,960
जी के लिए भी आया देवी और परम

927
01:19:12,960 --> 01:19:17,200
ब्रह्म एक है देवी भागवत तीसरा अध्याय छवा तीसरा

928
01:19:17,200 --> 01:19:21,920
स्कंद छवा अध्याय दूसरा श्लोक तो यह सारी चीजें है आज जो है

929
01:19:21,920 --> 01:19:26,360
बहुत बड़ा एक

930
01:19:26,360 --> 01:19:30,440
कहेंगे कि एक जो है पर्दा फास हुआ है कि बात करते

931
01:19:30,440 --> 01:19:35,000
करते वो चले गए इसीलिए मैं

932
01:19:35,000 --> 01:19:39,080
यह लोग कहते हैं प्रमाण लाओ जब प्रमाण लाते हैं तो प्रमाण को छोड़ के दूसरे प्रश्न पर जाते

933
01:19:39,080 --> 01:19:43,320
हैं तो इसलिए सीधे उस प्रश्न को पकड़ो

934
01:19:43,320 --> 01:19:48,200
सीधे उस प्रश्न को पकड़ा जाए

935
01:19:48,200 --> 01:19:52,760
जी ये जब प्रमाण मांगते हैं जब प्रमाण आप लाते हो तो फिर

936
01:19:52,760 --> 01:19:56,840
क्वेश्चन को चेंज कर देते हैं उसी समय उस पर बात ही नहीं करेंगे अरे

937
01:19:56,840 --> 01:20:01,600
भाई पहले य तो बताओ कि इसको मैं नहीं मानता यह बोलो फिर दूसरी चीज लाओ

938
01:20:01,600 --> 01:20:05,800
मैं इसको नहीं मानता तो हो गई शास्त्र विरुद्ध तो जाओ अपने बना

939
01:20:05,800 --> 01:20:09,880
लो नए शास्त्र तुम्हारी भक्ति तुम्ह मुबारक पर फिर तुम्ह पुराण वेद य

940
01:20:09,880 --> 01:20:14,080
सब मत बात करो और फिर जब तुम बना लोगे नया

941
01:20:14,080 --> 01:20:18,120
फिर हम आएंगे फिर पूछेंगे तुम्हारा ईश्वर स शक्तिमान है कि नहीं

942
01:20:18,120 --> 01:20:22,120
तब फिरत दार्शनिक प्रश्न किया जाएगा

943
01:20:22,120 --> 01:20:26,280
ना पहले हमारे शास्त्र को से

944
01:20:26,280 --> 01:20:32,280
बात कीजिए ना

945
01:20:32,800 --> 01:20:38,440
कबीर

946
01:20:38,440 --> 01:20:44,440
हम है नहीं बा बलिए

947
01:20:48,280 --> 01:20:51,440
कर मंदिर

948
01:20:51,440 --> 01:20:55,760
में देखिए जो भी व्यक्ति स्वयं को धर्म का धर्म

949
01:20:55,760 --> 01:21:00,120
धर्म परायण मानता है धर्म के लिए प्रतिवाद मानता

950
01:21:00,120 --> 01:21:04,360
है अब समय आ चुका है कि आप सभी लोग धरातल

951
01:21:04,360 --> 01:21:08,920
पर अपने अपने धर्म की रक्षा करने का भार उठाएं अपने कंधों पर स्वयं

952
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जहां आप रह रहे हैं वहां पर आसपास के मंदिर को अपने

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घर के आसपास के निकटतम मंदिर को उस जगह का

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केंद्र बनाइए वहां पर साप्ताहिक गोष्ठी करना

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शुरू करिए हिंदुओं को बुलाइए जो

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दर्शन विज्ञान व्यवहार के संबंध

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में जगतगुरु शंकराचार्य जी द्वारा प्रतिपादित जो सिद्धांत है

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उनका उनको वहां पर डिस्कस करिए ईश्वर अवाद

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श्वर सच्चिदानंद स्वरूप परमेश्वर असतो मा सद तमस जोति गम मृत

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मातम गम इन सब पर बात करिए जो सार्वभौम पांच सिद्धांत

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है उन पर बात करिए

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परस्पर सहयोग से वहां पर शिक्षा रक्षा सेवा के प्रकल्प चलाइए

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केवल सोशल मीडिया तक सीमित

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होक के ना रहिए जब आप वहां पर

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यह प्रकल्प चलाएंगे शिक्षा रक्षा और सेवा के शिक्षा मतलब यह ज्ञान

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वहां पर चर्चा करना ग्रंथ अध्ययन करना पठन पाठन करना

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सेवा वहां पर कोई आपने प्रकल्प कर दिया चिकित्सा हेल्थ चेकअप

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करवा दिया या फिर कोई ट्यूशन क्लासेस चालू करवा दी निशुल्क बच्चों को शिक्षा

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देने के लिए या फिर भोजन प्रसाद वितरण करवा दिया

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ठीक है ऐसा कोई प्रकल्प चला सकते हैं

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और इसके अलावा रक्षा रक्षा कैसे कि वहां पर प्रशिक्षित

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करिए अपनी मातृ शक्तियों को बच्चों को बूढ़ों को वो किस प्रकार से

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अपनी रक्षा करें इस प्रकार शिक्षा रक्षा सेवा का केंद्र बनाइए

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अपने गली मोहल्ले जहां पर आप रहते हैं वहां के मंदिरों को

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हिंदू राष्ट्र संगोष्ठी करिए उस गोष्ठी का नाम है हिंदू

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राष्ट्र और इस संबंध में जिस को भी सहायता की आवश्यकता

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01:22:56,480 --> 01:23:02,480
हो हमारे नंबर पर संपर्क करें फॉर्म भरे

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01:23:02,800 --> 01:23:07,040
74836 इस पर ट करेंगे फॉर्म आपको प्राप्त हो

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01:23:07,040 --> 01:23:11,080
जाएगा किसी भी प्रकार की वैचारिक

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01:23:11,080 --> 01:23:16,760
चर्चा करनी हो मतभेद के निमित्त तो आ

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जाइएगा ठीक है सभी को जय श्री राम जल ले रहा हूं हरर

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शंकर जी जय श्री राम
