1
00:00:02,400 --> 00:00:07,120
तो सभी को जय श्री

2
00:00:07,120 --> 00:00:11,280
राम आज का टॉपिक जैसा कि आपने

3
00:00:11,280 --> 00:00:15,360
देखा ही होगा कि

4
00:00:15,360 --> 00:00:20,120
रामपाल की तरफ से वैसे तो हमने विस्तृत रूप से

5
00:00:20,120 --> 00:00:24,200
एक पूरा छह वीडियोस की सीरीज बना दी है जिसमें

6
00:00:24,200 --> 00:00:30,200
की रामपाल के द्वारा उठाए जाने वाले जितने भी

7
00:00:30,880 --> 00:00:34,960
मिथ्या प्रचार है आक्षेप है उन सबका यथा योग्य

8
00:00:34,960 --> 00:00:39,400
उत्तर दे दिया गया है पर

9
00:00:39,400 --> 00:00:43,760
जो वो सीरीज बनाई थी वह एक इस तरह से बनाई थी कि उसमें आपको कंप्लीट

10
00:00:43,760 --> 00:00:47,880
एक थ्योरी मिल जाए और कम से कम समय में आपको ज्यादा से ज्यादा जानकारी

11
00:00:47,880 --> 00:00:52,000
मिल जाए तो हम धीरे-धीरे करके उसके एक एक चैप्टर

12
00:00:52,000 --> 00:00:57,200
पर जब भी हमें समय मिलेगा तो हम बात

13
00:00:57,200 --> 00:01:01,320
करेंगे आज हमने उसमें से एक टॉपिक उठाया कि उनकी

14
00:01:01,320 --> 00:01:07,000
तरफ से क्लेम किया जाता है कि जो ब्रह्मा विष्णु महेश है

15
00:01:07,000 --> 00:01:11,720
वो अविनाशी नहीं है है ना

16
00:01:11,720 --> 00:01:15,840
और मां दुर्गा से उनका प्रादुर्भाव हुआ है इसलिए वह अविनाशी नहीं

17
00:01:15,840 --> 00:01:19,920
है कहीं स्तुति में उन्होंने ऐसा कह दिया कि हमारा भी जीवन और मरण होता

18
00:01:19,920 --> 00:01:24,000
है यह है वो है इस तरह से उन्होंने कह दिया तो इस कारण

19
00:01:24,000 --> 00:01:28,360
से जो है वो अविनाशी नहीं है अब

20
00:01:28,360 --> 00:01:32,800
इस बारे में एक बहुत फेमस कबीर जी का वह है कि मैं कुत्ता

21
00:01:32,800 --> 00:01:37,040
राम का तो वह सच में कुत्ते थे

22
00:01:37,040 --> 00:01:41,040
या यह एक क्वेश्चन बनता है कि अगर वो

23
00:01:41,040 --> 00:01:46,280
कुछ है उनका इस तरह का दोहा खैर मैं उस पर नहीं जाऊंगा

24
00:01:46,280 --> 00:01:50,320
और हमने जो भी बात बोली है बहुत सोच समझ के बोली

25
00:01:50,320 --> 00:01:54,320
अपनी वीडियोस में जैसे हमारी एक बात हमने बोली कि हम उस कबीर की बात नहीं

26
00:01:54,320 --> 00:01:58,320
कर रहे जो इनके द्वारा पूजित हो रहा है हम उस कबीर की हम उस कबीर की बात

27
00:01:58,320 --> 00:02:02,720
मतलब एक कबीर वो है जि का हम सम्मान करते हैं मगर इनके द्वारा जो पूजित होने वाला

28
00:02:02,720 --> 00:02:07,960
जो कबीर है वो तथा कथित है हमने ऐसा क्यों बोला क्योंकि

29
00:02:07,960 --> 00:02:12,200
जो जिस कबीर को हम जानते हैं वह स्वयं को ईश्वर नहीं कहते थे ठीक

30
00:02:12,200 --> 00:02:16,400
है अब आपके अनुसार उसी कबीर ने आपके अनुसार

31
00:02:16,400 --> 00:02:21,040
उसी कबीर ने अपने आप को ईश्वर भी कहा मगर हम यह नहीं मानते

32
00:02:21,040 --> 00:02:22,040
और अगर

33
00:02:22,040 --> 00:02:26,240
ऐसा कोई कबीर है तो हम उसे वह कबीर नहीं मानते जिसको हम जानते कहने का भाव

34
00:02:26,240 --> 00:02:32,240
हमारा ये है ठीक है

35
00:02:32,560 --> 00:02:38,280
तो आज हम इसी पर बात करेंगे कि

36
00:02:38,280 --> 00:02:42,280
अ क्या ब्रह्मा विष्णु महेश

37
00:02:42,280 --> 00:02:46,480
अविनाशी नहीं है और क्या

38
00:02:46,480 --> 00:02:50,680
केवल ऐसा ही है इतना ही है कि दुर्गा माता से ही उनका प्रादुर्भाव हुआ

39
00:02:50,680 --> 00:02:54,760
है ऐसा तो नहीं हुआ कि दुर्गा

40
00:02:54,760 --> 00:02:59,440
माता का प्रादुर्भाव भी उनसे हो गया हो तो ये सब हम चेक करेंगे आज फैक्ट ऑफिक

41
00:02:59,440 --> 00:03:03,960
मगर इस पॉइंट पर आने से पहले मैं

42
00:03:03,960 --> 00:03:06,320
एक

43
00:03:06,320 --> 00:03:10,600
बहुत जरूरी बात आप लोगों को बताना

44
00:03:10,600 --> 00:03:15,160
चाहूंगा सभी को जय श्री राम लोकेश कुमार जी जय श्री राम

45
00:03:15,160 --> 00:03:19,160
वो जरूरी बात यह है कि अभी यहां आने से जस्ट पहले मुझे किसी का

46
00:03:19,160 --> 00:03:23,840
मैसेज आया और वह बहुत परेशान था

47
00:03:23,840 --> 00:03:27,840
जिसने मुझे मैसेज किया उसमें किसी

48
00:03:27,840 --> 00:03:32,160
पौराणिक घटना को लेकर के कुछ बौद्ध अगामी या फिर नास्तिक

49
00:03:32,160 --> 00:03:36,560
कहे तो ज्यादा अच्छा होगा या फिर यह कहे जो

50
00:03:36,560 --> 00:03:37,800
जिनके पास

51
00:03:37,800 --> 00:03:42,120
ईश्वर का अस्तित्व नहीं है तो ज्यादा अच्छा होगा या फिर यह कहे कि जिनके पास

52
00:03:42,120 --> 00:03:46,520
धर्म नहीं है तो ज्यादा अच्छा होगा या फिर यह कहे कि जिनके पास

53
00:03:46,520 --> 00:03:50,560
माता बहन और पत्नी में अंतर करने वाले सिद्धांत नहीं है तो ज्यादा

54
00:03:50,560 --> 00:03:54,840
अच्छा हो या फिर यह कहे कि जो

55
00:03:54,840 --> 00:03:59,440
मनुष्य नहीं है पशु है पशु ही है तो ज्यादा अच्छा होगा

56
00:03:59,440 --> 00:04:03,720
कुछ इस तरह के लोग थे वह जो

57
00:04:03,720 --> 00:04:07,920
पुराण की किसी देवीय घटना को लेकर के और

58
00:04:07,920 --> 00:04:12,200
उपास उड़ाने का प्रयास कर रहे थे वहां पर एक

59
00:04:12,200 --> 00:04:16,800
कोई कम जानकार व्यक्ति बैठा हुआ

60
00:04:16,800 --> 00:04:21,600
था जो उनकी बातें सुनकर के आहत हो रहा था और उस वीडियो को सुनक

61
00:04:21,600 --> 00:04:25,720
के जो जिस व्यक्ति ने मुझे मैसेज किया वो भी आहत

62
00:04:25,720 --> 00:04:30,000
हुआ तो आप लोग स

63
00:04:30,000 --> 00:04:34,880
ऐसा क्यों सोचते हैं सामान्य कि हम

64
00:04:34,880 --> 00:04:38,920
कोई भी जब हमारे धर्म ग्रंथों पर प्रहार करें आक्षेप करें तो

65
00:04:38,920 --> 00:04:43,600
हम उसका शास्त्रोक्त उत्तर दे दे आप ऐसा क्यों सोचते

66
00:04:43,600 --> 00:04:48,120
आप एक सामान्य हिंदू बन के क्यों नहीं रह सकते

67
00:04:48,120 --> 00:04:52,280
मैं जो कहना चाह रहा हूं अभी थोड़ी देर में आप समझ जाएंगे एक

68
00:04:52,280 --> 00:04:52,880
सामान्य

69
00:04:52,880 --> 00:04:57,000
हिंदू बनना सीखिए सामान्य हिंदू बनकर अपने धर्म की रक्षा कैसे कर सकते हैं मैं आज

70
00:04:57,000 --> 00:05:01,040
वो आपको बताने जा रहा हूं क्या हमेशा आपको सारे श्लोक सारे

71
00:05:01,040 --> 00:05:05,120
मंत्र सारे वह अध्याय क्रमांक य सब रटे होना आवश्यक है

72
00:05:05,120 --> 00:05:09,480
तब आप अपने धर्म के लिए खड़े हो पाओगे तब अपने धर्म की रक्षा कर पाओगे

73
00:05:09,480 --> 00:05:13,760
नहीं ऐसा नहीं है हर व्यक्ति को

74
00:05:13,760 --> 00:05:18,000
स्पाइडरमैन और मिस्टर इंडिया बनने की आवश्यकता नहीं है एक साधारण

75
00:05:18,000 --> 00:05:22,240
व्यक्ति भी अपने धर्म की रक्षा कर सकता है उसको हमेशा नहीं

76
00:05:22,240 --> 00:05:26,560
उस गैजेट की जरूरत हैमो से लड़ते हुए मिस्टर इंडिया अपने गैजेट

77
00:05:26,560 --> 00:05:31,080
को बंद कर देता है कि मैं आपको

78
00:05:31,080 --> 00:05:35,280
एक सामान्य व्यक्ति बनकर आज मुग से क मैं आज तुझे

79
00:05:35,280 --> 00:05:39,440
एक सामान्य व्यक्ति बन कर के हराऊ तो आप यह क्यों चाहते

80
00:05:39,440 --> 00:05:43,600
हैं कि मेरे पास जो है असाधारण शक्तियां आए और उसके बाद में अपने धर्म

81
00:05:43,600 --> 00:05:47,800
की रक्षा करू आप अपने धर्म की रक्षा सामान्य रह के क्यों नहीं कर सकते

82
00:05:47,800 --> 00:05:52,440
हैं कर सकते हैं मैं आज वही आपको बताने वाला हूं

83
00:05:52,440 --> 00:05:56,520
कैसे जब भी कोई आपके धर्म पर प्रहार करेगा

84
00:05:56,520 --> 00:06:00,720
जब भी कोई आपके ईश्वर संबंधित विषयों पर प्रहार करे जब

85
00:06:00,720 --> 00:06:04,720
भी कोई आक्षेप लगाएगा वह भले ही सनातन विरुद्ध

86
00:06:04,720 --> 00:06:07,880
कोई विचारधारा हो पंथ हो मत हो या फिर

87
00:06:07,880 --> 00:06:12,040
सनातन के अंदर रहने वाला ही कोई सनातन

88
00:06:12,040 --> 00:06:16,360
का चोला ओढ करके आक्षेप लगाना लगाने वाला कोई व्यक्ति हो

89
00:06:16,360 --> 00:06:21,000
हर प्रश्न का एक उत्तर है आपके पास

90
00:06:21,000 --> 00:06:26,480
हर प्रश्न

91
00:06:26,480 --> 00:06:30,840
का और वो क्या है

92
00:06:30,840 --> 00:06:34,880
तुम्हारा गुरु कौन है यह है हर प्रश्न

93
00:06:34,880 --> 00:06:38,960
का उत्तर जब बौद्ध

94
00:06:38,960 --> 00:06:43,240
आपसे प्रश्न करेंगे

95
00:06:43,240 --> 00:06:47,280
कि भाई तुम्हारे यहां पर यह हुआ शिव जी का लिंग ऐसे हुआ आप

96
00:06:47,280 --> 00:06:51,520
उनसे सीधे पूछो उसी शिव पुराण में जहां पर य घटनाए

97
00:06:51,520 --> 00:06:55,560
दी गई है उसी शिव पुराण में गुरु तत्व की गुरु का महात्म बताया गया

98
00:06:55,560 --> 00:06:59,560
है अनेका अनेक पुराण में बताया गया है स्कंद पुराण में

99
00:06:59,560 --> 00:07:04,280
बताया गया जिसका गुरु नहीं वो मूर्ख है पशु है तो

100
00:07:04,280 --> 00:07:08,720
हमें नहीं पता कि शिव वाली जो घटना है इसका क्या अर्थ है हमें नहीं पता

101
00:07:08,720 --> 00:07:12,880
ये ब्रह्मा वाली जो घटना है उसका क्या अर्थ है हमें नहीं पता

102
00:07:12,880 --> 00:07:17,120
ये शिव मोहिनी प्रकरण का क्या अर्थ है रास लीला क्या क्या अर्थ है नहीं पता हमें

103
00:07:17,120 --> 00:07:22,080
यह पता है कि इन शास्त्रों को गुरु से पढ़ना है इतना पता

104
00:07:22,080 --> 00:07:26,320
है तो क्या करेंगे सामने वाला जो आक्षेप

105
00:07:26,320 --> 00:07:30,480
कर रहा है उसने गुरु से उसका अध्ययन नहीं किया है उसने किया

106
00:07:30,480 --> 00:07:34,720
है तो उसके गुरु नहीं होंगे परंपरा प्राप्त गुरु

107
00:07:34,720 --> 00:07:38,880
नहीं होंगे उन तो आप उनसे सीधे पूछो

108
00:07:38,880 --> 00:07:43,200
आपका गुरु किस परंपरा से आपने किस परंपरा से शास्त्र का अध्ययन किया बस

109
00:07:43,200 --> 00:07:47,720
इस एक सवाल को आप रट लो कभी भी कोई आप आपके धर्म पर आपके ईश्वर पर

110
00:07:47,720 --> 00:07:51,760
आपके शास्त्रों पर गुरु गोविंद ग्रंथ पर उंगली नहीं उठा

111
00:07:51,760 --> 00:07:55,880
सकता भाई जिस शास्त्र को आप पढ़ रहे हो उसी शास्त्र में लिखा

112
00:07:55,880 --> 00:07:58,440
है इसको गुरु के पास जाओ जाके पढ़ो

113
00:07:58,440 --> 00:08:02,880
यह भी लिखा है कि मनुष्य चाहे चारों वेद पढ़ ले सारे उपनिषद

114
00:08:02,880 --> 00:08:07,560
पढ़ ले स सारे पुराण पढ़ ले जप तप व्रत दान पुण्य कर्म

115
00:08:07,560 --> 00:08:11,560
तीर्थ यज्ञ सब कुछ व्यर्थ है यदि उसका कोई गुरु नहीं है क्योंकि

116
00:08:11,560 --> 00:08:15,560
यह सभी चीजें गुरु के बिना आपकी मति को भ्रष्ट करने

117
00:08:15,560 --> 00:08:21,400
वाली है तो इस एक पॉइंट पर आप क्यों नहीं आ रहे

118
00:08:21,400 --> 00:08:25,480
हो भाई वह यही तो कहेगा कि तुम ही बता दो तुम तो तुम्हारा

119
00:08:25,480 --> 00:08:29,480
तो गुरु है तो आप उससे यह कहो नहीं

120
00:08:29,480 --> 00:08:34,160
मैंने गुरु से ये वाला अध्ययन नहीं किया मैं नहीं बताऊंगा मुझे पता भी होगा तो भी नहीं

121
00:08:34,160 --> 00:08:38,400
बताऊंगा इस इस ये जो शास्त्र तुम पढ़ रहे हो इसका

122
00:08:38,400 --> 00:08:42,760
अर्थ करने का अधिकार इसी शास्त्र ने गुरु को दिया है

123
00:08:42,760 --> 00:08:46,920
तो आपने इसका किस गुरु परंपरा से अध्ययन किया बस इतना

124
00:08:46,920 --> 00:08:50,920
एक प्रश्न अगर आप अपनी पॉकेट में रख के चलेंगे तो एक छोटा

125
00:08:50,920 --> 00:08:54,960
सा बच्चा भी अपने धर्म की रक्षा कर पाएगा जब भी कोई गलत बात

126
00:08:54,960 --> 00:08:59,080
हो सीधे पूछो कौन सी परंपरा से हो किस परंपरा से आपने अध्ययन किया

127
00:08:59,080 --> 00:09:03,400
पूछो और यह जितने

128
00:09:03,400 --> 00:09:07,920
ये द क्या नाम है

129
00:09:07,920 --> 00:09:12,120
साइंटिफिक साइंस जर्नी और यह हिस्ट्री वाला

130
00:09:12,120 --> 00:09:13,480
यह जितने भी है ना इन्होंने

131
00:09:13,480 --> 00:09:17,800
कभी तथ्यात्मक बातों पर बात नहीं की है इनके चैनल मैंने देखा है

132
00:09:17,800 --> 00:09:22,360
बस उठाई गिरी बातें होती रहती निचले स्तर

133
00:09:22,360 --> 00:09:26,720
की निम्न स्तर की बातें होती रहती है भाई इनसे

134
00:09:26,720 --> 00:09:31,160
बस यह पूछ लो कि तुम्हारा धर्म और अधर्म का किस पर आधारित है

135
00:09:31,160 --> 00:09:35,200
उत्तर ही नहीं मिल पाएगा निष्ठा पूर्वक माता

136
00:09:35,200 --> 00:09:39,760
जी ने यदि इनको दूध पिलाया हो तो इनको जाकर बताए कोई

137
00:09:39,760 --> 00:09:43,960
क्या आए हमसे बात करें चेहरा दिखाए कौन सा ऐसा कुकर्म कर बैठे

138
00:09:43,960 --> 00:09:49,000
हो जो अपना चेहरा नहीं दिखा पा रहे हो मुह काला करवा लिया

139
00:09:49,000 --> 00:09:53,000
है और

140
00:09:53,000 --> 00:09:57,080
यदि आपके अंदर सामर्थ्य नहीं है लूले हो गए लंगड़े हो गए

141
00:09:57,080 --> 00:10:01,200
हो एसिड फेंक दिया गया चेहरे पर कुरूप हो गए हो शर्म

142
00:10:01,200 --> 00:10:05,360
आती है लज्जा आती है माता-पिता का नाम नहीं पता शायद इस वजह से नहीं आ पा रहे

143
00:10:05,360 --> 00:10:09,600
हो इनमें से भी अगर कोई बात है तो कोई तो आज तक आपके चैनलों

144
00:10:09,600 --> 00:10:13,760
को देख करके खड़ा हुआ होगा कोई तो माइका लाल ऐसा होगा

145
00:10:13,760 --> 00:10:17,840
जो आकर के सामने से बात कर सकेगा

146
00:10:17,840 --> 00:10:22,200
आए और सामने से बात करे क्या

147
00:10:22,200 --> 00:10:27,040
बौद्ध मत के द्वारा प्रतिपादित होने वाला ईश्वर सर्वशक्तिमान है

148
00:10:27,040 --> 00:10:31,920
मिलने वाला मोक्ष परम स्वतंत्र है

149
00:10:31,920 --> 00:10:36,080
फॉलो किया जाने वाला जो धर्म है वो शाश्वत है यदि

150
00:10:36,080 --> 00:10:40,560
ईश्वर नहीं है मोक्ष नहीं है तो धर्म नहीं है

151
00:10:40,560 --> 00:10:46,560
तो फिर मानवता कहां से

152
00:10:47,960 --> 00:10:52,320
है ठीक है ना तो यह है आप इस पॉइंट

153
00:10:52,320 --> 00:10:56,600
को पकड़ के चलो आपको सारे ग्रंथों को रटने की जरूरत नहीं आपको गुरु

154
00:10:56,600 --> 00:11:00,160
की आवश्यकता है गुरु

155
00:11:00,160 --> 00:11:04,200
जिस दिन आप इसके पीछे पड़ जाएंगे कोई भी आकर के आपकी भावनाओं को आहत नहीं कर

156
00:11:04,200 --> 00:11:08,240
पाएगा सीधे पूछिए कहां से स्टडी किया उसी

157
00:11:08,240 --> 00:11:12,240
में लिखा है गुरु महात्मा शिव पुराण मेंही लिखा है

158
00:11:12,240 --> 00:11:16,880
भागवत पुराण में लिखा है गुरु कौन होना चाहिए सारी

159
00:11:16,880 --> 00:11:21,040
व्याख्या परंपरा प्राप्त गुरु भाई परंपरा चार दो

160
00:11:21,040 --> 00:11:25,800
चर एकती 16 भगवत गीता परंपरा कहां है आपकी

161
00:11:25,800 --> 00:11:29,840
परंपरा और यदि परंपरा नहीं है तो अपने मन से तुम बता रहे

162
00:11:29,840 --> 00:11:35,040
हो हम क्यों माने आपकी बात सब झूठ है

163
00:11:35,040 --> 00:11:39,040
भाई यदि अपने ही मन से है पढ़ाई करनी है तो

164
00:11:39,040 --> 00:11:43,040
आपने पढ़ाई कहां से की अपने मन से की जो भौतिक शिक्षा प्राप्त

165
00:11:43,040 --> 00:11:47,560
की है कहां से प्राप्त की है तो उसके लिए आप गए ना किसी स्कूल में सर्टिफाइड

166
00:11:47,560 --> 00:11:50,680
स्कूल

167
00:11:50,680 --> 00:11:54,720
में किसी दिन होगा आमना सामना अगर इनके

168
00:11:54,720 --> 00:11:59,600
अंदर गुर्दा होगा आमना सामना करने का

169
00:11:59,600 --> 00:12:04,480
नहीं होगा तो ठीक है मुंगेरी लाल के असीन सपनों की दुनिया में ख

170
00:12:04,480 --> 00:12:08,800
र तो ये एक बात है जो हम लोग पांच सिद्धांतों

171
00:12:08,800 --> 00:12:12,800
का प्रचार कर रहे हैं उनमें से एक जो चौथा सिद्धांत है ज्ञान वही प्रमाणिक

172
00:12:12,800 --> 00:12:18,520
जो परंपरा से प्राप्त हो कोई भी व्यक्ति आपके

173
00:12:18,520 --> 00:12:23,280
अ सिद्धांतों पर आपके भावनाओं पर जब

174
00:12:23,280 --> 00:12:27,280
आक्षेप लगाए तो उससे एक ही प्रश्न करो किस

175
00:12:27,280 --> 00:12:31,400
परंपरा से आपने य ज्ञान प्राप्त किया है यदि नहीं किया तो परंपरा

176
00:12:31,400 --> 00:12:35,720
से प्राप्त करना होता है तर्क भी है प्रमाण भी है प्रमाण उस ग्रंथ में तर्क

177
00:12:35,720 --> 00:12:39,960
उसी से पूछ लो थ कहां से पास किया बताएगा स्कूल

178
00:12:39,960 --> 00:12:44,120
का नाम जब आपको अपनी भौतिक शिक्षा का

179
00:12:44,120 --> 00:12:48,120
स्कूल का नाम पता है तो जब आप किसी के मत पंत और धर्म के बारे

180
00:12:48,120 --> 00:12:54,120
में बातचीत कर रहे हैं तो वहां पर स्कूल ऑफ थॉट का नाम क्यों नहीं पता

181
00:13:00,440 --> 00:13:06,440
तो यह

182
00:13:12,960 --> 00:13:17,720
है अब आ जाते हैं सबसे पहले

183
00:13:17,720 --> 00:13:22,440
कि मां भगवती से ही सबका प्रादुर्भाव हुआ आज नौमी भी है

184
00:13:22,440 --> 00:13:26,520
तो सबसे पहले हम शिव पुराण में

185
00:13:26,520 --> 00:13:30,920
बात करेंगे और उस वीडियो में एक शिकायत और थी

186
00:13:30,920 --> 00:13:35,040
कि इन्होंने शास्त्रों को खोल खोल करके नहीं

187
00:13:35,040 --> 00:13:41,040
दिखाया तो आज हम प्रयास करेंगे कि शास्त्रों को खोल खोल करके

188
00:13:41,880 --> 00:13:46,720
दिखाए तो शिव पुराण में रुद्ध समता है

189
00:13:46,720 --> 00:13:50,240
और सृष्ट खंड

190
00:13:50,240 --> 00:13:54,800
है इसमें लिखा हुआ है

191
00:13:54,800 --> 00:14:00,800
षष्टि खंड में चवा श्लोक में पढ़ रहा हूं

192
00:14:01,160 --> 00:14:06,160
वैसे तो जगह-जगह पर इनके

193
00:14:06,160 --> 00:14:11,000
ब्रह्म रूप की व्याख्या है भगवान शिव के मगर यहां पर भी कर देता हूं

194
00:14:11,000 --> 00:14:15,160
जिस परम ब्रह्म के विषय में ज्ञान और अज्ञान से

195
00:14:15,160 --> 00:14:19,920
पूर्ण उक्ति हों इस प्रकार विकल्प किए जाते हैं

196
00:14:19,920 --> 00:14:24,080
उसके कुछ काल के बाद सृष्टि समय आने पर द्वितीय होने की इच्छा

197
00:14:24,080 --> 00:14:28,480
प्रकट की उसके भीतर एक से अनेक होने का संकल्प

198
00:14:28,480 --> 00:14:32,920
उदित हु परम ब्रह्म की बात हो रही है तब उस निराकार

199
00:14:32,920 --> 00:14:37,080
परमात्मा ने अपनी लीला शक्ति से अपने लिए मूर्ति की

200
00:14:37,080 --> 00:14:41,200
कल्पना की तो जो एक ही हम कहते ना

201
00:14:41,200 --> 00:14:45,280
एक ही परम सत्ता स्वयं को पांच अलग-अलग रूपों में प्रकट करती है तो यहां पर

202
00:14:45,280 --> 00:14:49,520
पांच अलग अलग रूपों में प्रकट कर रही है तो अब उनमें से जो

203
00:14:49,520 --> 00:14:53,920
अभी यहां पर किस रूप में प्रकट कर रही है वह मूर्ति संपूर्ण

204
00:14:53,920 --> 00:14:57,320
ऐश्वर्य गुणों से संपन्न सर्वज्ञान मय

205
00:14:57,320 --> 00:15:01,600
शुभ स्वरूपा सर्वव्यापक सर्वर ूपा सर्व दर्शनी सर्व काणी

206
00:15:01,600 --> 00:15:05,680
सबकी एकमात्र वंदनीय सर्वा द्या सब

207
00:15:05,680 --> 00:15:10,000
कुछ देने वाली और संपूर्ण संस्कृतियों का केंद्र थ उस

208
00:15:10,000 --> 00:15:14,080
शुद्ध रूपिणी ईश्वरी मूर्ति की

209
00:15:14,080 --> 00:15:18,280
कल्पना करके वह अद्वितीय अनादि अनंत सर्व प्रकाशक चिन्मय

210
00:15:18,280 --> 00:15:22,960
सर्वव्यापी अविनाशी कौन आया अविनाशी

211
00:15:22,960 --> 00:15:27,600
परब्रह्म अत निहित हो गया जो मूर्ति रहित परब्रह्म है

212
00:15:27,600 --> 00:15:31,600
उसी की मूर्ति चिन्मय आकार भगवान शिव

213
00:15:31,600 --> 00:15:35,760
है अर्वाचीन और प्राचीन विद्वान उन्हीं को

214
00:15:35,760 --> 00:15:39,880
ईश्वर कहते हैं किसको ईश्वर कहते हैं भगवान

215
00:15:39,880 --> 00:15:44,040
शिव को उस समय एका की रहके रहकर

216
00:15:44,040 --> 00:15:48,280
स्वेच्छा अनुसार विहार करने वाले उन सदाशिव

217
00:15:48,280 --> 00:15:52,400
ने अपने विग्रह से स्वयं ही एक स्वरूप भूता शक्ति

218
00:15:52,400 --> 00:15:56,400
की सृष्टि की तो यहां पर

219
00:15:56,400 --> 00:16:00,440
जो भगवती स्वरूप है पर का शक्ति

220
00:16:00,440 --> 00:16:04,680
उनका प्रादुर्भाव शिव से हो रहा है अपने

221
00:16:04,680 --> 00:16:08,760
विग्रह से स्वरूप भूता शक्ति की सृष्टि की

222
00:16:08,760 --> 00:16:12,480
जो उनके अपने श्री अंग से कभी अलग नहीं होने वाली थी अलग

223
00:16:12,480 --> 00:16:16,480
नहीं हो सकती ठीक

224
00:16:16,480 --> 00:16:20,560
है उस पराशक्ति को प्रधान प्रकृति गुणवती

225
00:16:20,560 --> 00:16:25,080
माया बुद्धि तत्व जननी तथा विकार रहित बताया गया है

226
00:16:25,080 --> 00:16:29,440
वह शक्ति अंबिका कही गई उसी को प्रकृति

227
00:16:29,440 --> 00:16:33,520
सर्वेश्वरी त्रिदेव जननी नित्या और मूल कारण भी

228
00:16:33,520 --> 00:16:37,640
कहते हैं सदाशिव द्वारा प्रकट की गई उस शक्ति की आठ

229
00:16:37,640 --> 00:16:41,800
भुजाएं हैं शुभ लक्षणा देवी के मुख की

230
00:16:41,800 --> 00:16:46,000
शोभा यात्रा अब यहां पर आगे यह प्रसंग है तो शिव

231
00:16:46,000 --> 00:16:50,200
महापुराण से हमने सिद्ध किया कि शिव जीी से मां भगवती की

232
00:16:50,200 --> 00:16:54,640
उत्पत्ति हो रही है और इसके साथ ही साथ

233
00:16:54,640 --> 00:16:58,960
हम लोग और शिव जी के पर्र

234
00:16:58,960 --> 00:17:04,670
होने के बारे में यहां से लेते चले अविनाशी होने के बारे में उसके

235
00:17:04,670 --> 00:17:09,360
[संगीत]

236
00:17:09,360 --> 00:17:15,360
लिए हम

237
00:17:49,800 --> 00:17:55,400
शिव पुराण विदेश्वर ममिता और

238
00:17:55,400 --> 00:18:01,400
उसका नौवा अध्याय है

239
00:18:02,680 --> 00:18:06,920
इसमें शिव भगवान अपने रूप के बारे में बता

240
00:18:06,920 --> 00:18:10,920
रहे हैं ब्रह्मा विष्णु महेश ब्रह्मा और विष्णु जी को

241
00:18:10,920 --> 00:18:16,920
तो क्या कह रहे हैं

242
00:18:42,000 --> 00:18:46,160
मेरे कृत्यों को समझना शिव जी बोल रहे हैं य पर मेरे

243
00:18:46,160 --> 00:18:50,360
कृत्य को समझना अत्यंत गहन है तथापि तथापि मैं कृपा

244
00:18:50,360 --> 00:18:55,240
पूर्वक तुम दोनों को उनके विषय में बता रहा हूं हे ब्रह्मा हे

245
00:18:55,240 --> 00:18:59,600
अचत सृष्टि स्थिति संहार तिरो भाव और अनुग्रह

246
00:18:59,600 --> 00:19:03,840
बताते हैं ना कि एक ही ईश्वर स्वयं को पांच अलग अलग रूपों में प्रकट करते हैं

247
00:19:03,840 --> 00:19:07,920
तो ब्रह्मा विष्णु महेश भगवती और गणेश तो सृजन के

248
00:19:07,920 --> 00:19:12,040
उससे वो ब्रह्मा कहलाते हैं जब सृजन करते हैं तो उस कृत

249
00:19:12,040 --> 00:19:16,520
के निर्वाह के कारण व ब्रह्मा कहलाते हैं पालन जब करते हैं

250
00:19:16,520 --> 00:19:18,080
तो उस कृत के निर्वाह

251
00:19:18,080 --> 00:19:22,080
के कारण वह विष्णु कहलाते हैं और संहार करते हैं

252
00:19:22,080 --> 00:19:26,320
तो उस कृत के निर्वाह के कारण वो शिव कहलाते रुद्र कहलाते हैं

253
00:19:26,320 --> 00:19:32,320
इसके अलावा दो और कार्य होते हैं अ यहां पर लिखा

254
00:19:33,760 --> 00:19:38,520
है तिरो भाव और अनुग्रह निग्रह अनुग्रह

255
00:19:38,520 --> 00:19:42,920
तो यह मां भगवती और गणेश के कार्य हो जाते

256
00:19:42,920 --> 00:19:46,960
हैं तो मुझसे पालि होकर सृष्टि का सु स्थिर

257
00:19:46,960 --> 00:19:51,720
रूप से रहना ही उसकी स्थिति कहा गया है उसका विनाशी समार है

258
00:19:51,720 --> 00:19:56,320
ठीक है तो यह सारी चीजें अपने बारे में बता रहे हैं

259
00:19:56,320 --> 00:20:00,440
भगवान शिव यहां पर सृष्टि का जो उदय है

260
00:20:00,440 --> 00:20:06,440
वह शिव जी से हो रहा है

261
00:20:18,440 --> 00:20:24,440
और शिव जी से होने के

262
00:20:26,720 --> 00:20:31,680
बाद अब हम आ जाते सीधे अच्छा

263
00:20:31,680 --> 00:20:35,960
इसमें शिव पुराण में शिव पुराण

264
00:20:35,960 --> 00:20:39,960
में जो तुलसी माता के रूप से

265
00:20:39,960 --> 00:20:44,200
पहले जो उनका पिछला रूप था वृंदा उस रूप में जो

266
00:20:44,200 --> 00:20:48,560
वृंदा माता है वह परब्रह्म के रूप में स्वीकार करती थी शिवजी

267
00:20:48,560 --> 00:20:52,960
को यह कहां लिखा है यह युद्ध समता में लिखा है

268
00:20:52,960 --> 00:20:56,960
ठीक है तुलसी जी तुलसी जी किसकी प्रिय

269
00:20:56,960 --> 00:21:00,960
है विष्णु जी यहां जो हरिहर में भेद

270
00:21:00,960 --> 00:21:05,280
करने वाले वो भी ध्यान से सुने कि युद्ध कंड युद्ध

271
00:21:05,280 --> 00:21:09,880
खंड में शिव पुराण युद्ध खंड और 26 वा अध्याय

272
00:21:09,880 --> 00:21:14,120
उसमें य सब वर्णित है किसी और दिन हम इसको लेंगे अभी

273
00:21:14,120 --> 00:21:18,360
हम देख रहे हैं ब्रह्मा विष्णु महेश अविनाशी है और ब्रह्मा विष्णु महेश

274
00:21:18,360 --> 00:21:22,680
से क्या देवी की उत्पत्ति हुई है या नहीं ठीक है अब हम ले लेते

275
00:21:22,680 --> 00:21:26,160
हैं एक वेल

276
00:21:26,160 --> 00:21:30,680
नोन ग्रंथ है ब्रह्मवर्त पुराण

277
00:21:30,680 --> 00:21:33,440
यह बहुत इंटरेस्टिंग है

278
00:21:33,440 --> 00:21:37,800
क्यों है बताते हैं इसलिए

279
00:21:37,800 --> 00:21:42,240
क्योंकि इसके आधार पर जो

280
00:21:42,240 --> 00:21:46,520
समाजी है अलंकार समाजी वह आक्षेप लगाते

281
00:21:46,520 --> 00:21:50,680
हैं कि इसमें जो है वह रास ला

282
00:21:50,680 --> 00:21:53,880
है इत्यादि इत्यादि

283
00:21:53,880 --> 00:21:58,000
और जो इकोन वाले हैं वह इसके आधार पर बस

284
00:21:58,000 --> 00:22:02,720
ठहराना चाहते हैं कि और कोई मत पढ़ो केवल

285
00:22:02,720 --> 00:22:06,920
ब्रह्म वैवर्त पढ़ लो ब्रह्म वैवर्त में क्योंकि कृष्ण के द्वारा ही सबकी उत्पत्ति

286
00:22:06,920 --> 00:22:11,600
हुई है इसलिए कृष्ण को ही केवल मानो और किसी को मत मानो और किसी को मानोगे

287
00:22:11,600 --> 00:22:15,600
तो मैंने एक वीडियो देखा आज आया था मेरे सामने तो उसमें

288
00:22:15,600 --> 00:22:19,800
बैठ के जनता को कैसे पागल बनाया जाता है मैंने देखा उसमें कि

289
00:22:19,800 --> 00:22:24,040
एक व्यक्ति बोल रहा है कि अगर शिव जीी की पूजा करोगे तो शिवलोक में जाओगे

290
00:22:24,040 --> 00:22:28,040
वहां शिवलोक में जाकर के विष्णु जी के ध्यान हो रहा होगा तो जब

291
00:22:28,040 --> 00:22:33,320
वहां पर ध्यान होना ही है तो यहीं पर कर लो

292
00:22:33,320 --> 00:22:37,400
और नमो भगवते वासुदेवाय यह

293
00:22:37,400 --> 00:22:41,560
सब जो मंत्र है य कृष्ण के लिए ही है ऐसा नहीं कृष्ण के लिए ही है

294
00:22:41,560 --> 00:22:45,880
मगर उस कृष्ण के लिए जो ब्रह्मा विष्णु महेश से अलग नहीं है

295
00:22:45,880 --> 00:22:48,640
उस कृष्ण के लिए नहीं है जो ब्रह्मा विष्णु

296
00:22:48,640 --> 00:22:53,080
महेश से अलग है और अल्लाह के साथ है

297
00:22:53,080 --> 00:22:57,320
उस कृष्ण के लिए नहीं तो

298
00:22:57,320 --> 00:23:03,240
अब यहां पर देख ले

299
00:23:03,240 --> 00:23:07,400
कि भगवान श्री कृष्ण से सबकी उत्पत्ति हो रही है

300
00:23:07,400 --> 00:23:12,120
ब्रह्मवर्त पुराण और इसका है

301
00:23:12,120 --> 00:23:15,120
तीसरा

302
00:23:15,120 --> 00:23:19,200
अध्याय पहले दूसरा दूसरा अध्याय देख लेते इसमें भगवान श्री

303
00:23:19,200 --> 00:23:22,040
कृष्ण

304
00:23:22,040 --> 00:23:26,440
का व्याख्यान हुआ है कि व परब्रह्म है

305
00:23:26,440 --> 00:23:30,920
और एक बात और है कि आपसे जब कोई यह कहता है कि वह अविनाशी

306
00:23:30,920 --> 00:23:35,280
नहीं है वह परब्रह्म नहीं है तो भाई अपने 18 के 18

307
00:23:35,280 --> 00:23:39,560
पुराण किसी ना किसी ब्रह्मा विष्णु महेश भगवती गणेश इनम से किसी ना किसी एक के निमित्त

308
00:23:39,560 --> 00:23:43,640
है तो आप केवल उनका शुरुआत का इंडेक्स देख लोगे ना

309
00:23:43,640 --> 00:23:47,880
खोल के तो उसमें हेडिंग डली होगी यहां पर परब्रह्म की विवेचना हुई है और

310
00:23:47,880 --> 00:23:52,160
उसको खोल के देख लो हर पुराण इनम

311
00:23:52,160 --> 00:23:56,520
इन पांचों में से किसी ना किसी एक को

312
00:23:56,520 --> 00:24:00,920
समर्पित है तो जब आप कोई भी पुराण खोलोगे

313
00:24:00,920 --> 00:24:05,040
तो उसमें केवल वो जो विषय सूची होती है उसमें जाकर

314
00:24:05,040 --> 00:24:09,120
के देख लेना उसी से आपको मिल जाएगा कि इसमें परब्रह्म कहां पर कहा

315
00:24:09,120 --> 00:24:13,160
गया है जिसके निमित्त यह वाला पुराण है ज्यादा आपको अध्ययन

316
00:24:13,160 --> 00:24:17,880
करने की आवश्यकता नहीं पड़ेगी और अगर वो पुराण अवेलेबल ना हो

317
00:24:17,880 --> 00:24:22,360
तो पीडीएफ फॉर्म पर अवेलेबल है वहां से

318
00:24:22,360 --> 00:24:26,360
पढ़ो इन लोगों ने तो गीता प्रेस छपती

319
00:24:26,360 --> 00:24:30,400
नहीं थी तो इन्होंने वो दे भगवती पुराण जो

320
00:24:30,400 --> 00:24:34,440
है देवी भागवत व उसमें पृष्ठ संख्या वाला ही प्रमाण बना दिया भाई

321
00:24:34,440 --> 00:24:37,920
पृष्ठ संख्या प्रमाण नहीं होती है

322
00:24:37,920 --> 00:24:42,360
अध्याय बोला जाता है क्रमांक बोला जाता है तब प्रमाण बनता है

323
00:24:42,360 --> 00:24:47,000
श्लोक क्रमांक बोला जाता है श्लोक क्यों नहीं पता है भगवान है ना

324
00:24:47,000 --> 00:24:51,120
रामपाल जी भगवान है ना तो श्लोक क्रमांक क्यों नहीं पता है जहां

325
00:24:51,120 --> 00:24:55,120
किताब में श्लोक क्रमांक छपा है वहा तो पता है जहां श्लोक क्रमांक

326
00:24:55,120 --> 00:25:01,120
नहीं पता वहा नहीं पता क्यों भाई

327
00:25:08,280 --> 00:25:12,640
एक सवाल और आता है कि भाई वह अवतार है कबीर के और कबीर जो है परब्रह्म

328
00:25:12,640 --> 00:25:16,640
है तो जेल में क्यों है अच्छा अय

329
00:25:16,640 --> 00:25:20,800
बात आती भाई कृष्ण भी तो जेल में हुए थे तो भाई उस समय कंस का शासन

330
00:25:20,800 --> 00:25:25,200
था आपके हिसाब से इस समय कंस का शासन है

331
00:25:25,200 --> 00:25:29,600
क्या और अगर कंस का शासन है तो वध क्यों नहीं कर

332
00:25:29,600 --> 00:25:33,760
रहे कृष्ण तो जन्म लिए थे ना जेल में जैसे ही परिपक्व हुए

333
00:25:33,760 --> 00:25:37,920
जा कंस को मार

334
00:25:37,920 --> 00:25:41,720
दिया नाटक

335
00:25:41,720 --> 00:25:47,320
करवाओ पता नहीं कौन से लोग होते हैं इनकी बात सुन भी लेते

336
00:25:47,320 --> 00:25:51,360
हैं इसमें दूसरा अध्याय है भगवान श्री कृष्ण के रूप में

337
00:25:51,360 --> 00:25:55,440
परब्रह्म का निरूपण हो रहा

338
00:25:55,440 --> 00:26:01,440
है ब्रह्म वत पुराण

339
00:26:10,800 --> 00:26:16,800
गोलोक धाम की व्याख्या हो रही है

340
00:26:33,000 --> 00:26:37,680
श्री नारायण जी यहां पर जो भगवान श्री कृष्ण चंद्र है

341
00:26:37,680 --> 00:26:41,040
उनकी बात कर रहे

342
00:26:41,040 --> 00:26:45,480
हैं आप ही सब कुछ के कारण तथा कर्म के

343
00:26:45,480 --> 00:26:49,480
स्वरूप कारण समूह के सभी कारण के भी कारण कर्म के

344
00:26:49,480 --> 00:26:55,480
कारण आप ही मैं आपकी वंदना करता हूं

345
00:26:59,640 --> 00:27:03,920
आप निष्काम होकर सर्व कामना रूप है तथापि आप ही

346
00:27:03,920 --> 00:27:09,920
कामनाओं के नाशक तथा काम स्वरूप भी हैं

347
00:27:31,920 --> 00:27:36,040
आप ही वेद हैं तथा वेद के फल भी हैं आपसे

348
00:27:36,040 --> 00:27:40,080
बढ़कर कोई नहीं है आप सर्व बीज रूप है सभी लोग

349
00:27:40,080 --> 00:27:44,360
आपसे ही वेदोक्त फल की प्राप्ति कर पाते हैं आप वेदज वेदोक्त

350
00:27:44,360 --> 00:27:48,840
विधान के ज्ञाता है समस्त वेदज के शिरोमणि है मैं आपको

351
00:27:48,840 --> 00:27:52,840
प्रणाम अर्पित करता हूं इस प्रकार भगवान नारायण ने भक्ति

352
00:27:52,840 --> 00:27:56,960
भाव के साथ जो कृष्ण भगवान है उनका स्तव किया और परमात्मा

353
00:27:56,960 --> 00:28:01,800
के आदेश से व उनके स्थित रमणीय रत्न सिंहासन पर बैठ गए

354
00:28:01,800 --> 00:28:05,880
तो यह यहां पर उसके बाद देखिए आगे आ रहा

355
00:28:05,880 --> 00:28:10,520
है दूसरा अध्याय चल रहा है अब यहां पर आगे आ रहा तदनंतर

356
00:28:10,520 --> 00:28:14,680
परमात्मा कृष्ण के वाम पार्श्व

357
00:28:14,680 --> 00:28:19,320
से शुद्ध स्फटिक के समान शुक्ल वर्ण पंचमुख दिगंबर

358
00:28:19,320 --> 00:28:23,320
महादेव महेश्वर अब यहां पर ब्रह्मा विष्णु महेश की जो उत्पत्ति हो रही है वो किससे हो

359
00:28:23,320 --> 00:28:27,600
रही है भगवान श्री कृष्ण से हो रही है वहां पर ब्रह्मा

360
00:28:27,600 --> 00:28:31,840
विष्णु महे की उत्पत्ति कहां से हुई शिव जी से दुर्गा माता की उत्पत्ति कहां से हुई

361
00:28:31,840 --> 00:28:36,200
शिव जी से यहां पर पूरी सृष्टि जो है वोह कृष्ण भगवान से ही उत्पत्ति हो

362
00:28:36,200 --> 00:28:42,200
उत्पत्ति उनकी हो रही है तो

363
00:28:42,680 --> 00:28:46,920
मैं एक ही परम तत्व स्वयं को पांच

364
00:28:46,920 --> 00:28:51,080
अलग-अलग रूपों में प्रकट करता रहता है कभी वो विष्णु बन के सर्वप्रथम

365
00:28:51,080 --> 00:28:55,080
विष्णु रूप में आकर के और वहां से उत्पत्ति कर देता है सबकी कभी

366
00:28:55,080 --> 00:28:59,360
वो शिव रूप में आता है और वहां से सबकी बाकियों की उत्पत्ति कर देता है कभी वो भगवती

367
00:28:59,360 --> 00:29:03,480
रूप में आता है वहां से सबकी उत्पत्ति कर देता है सृष्टि की रचना कई बार हो चुकी

368
00:29:03,480 --> 00:29:07,880
है और केवल एक ब्रह्मांड नहीं है कई ब्रह्मांड उनके

369
00:29:07,880 --> 00:29:12,040
सबके कल्पा कल्प भेद और सृष्टि भेद सेय सारी कथाएं

370
00:29:12,040 --> 00:29:16,040
लिखी हुई है तत्व एक है रूप पांच है उसके

371
00:29:16,040 --> 00:29:22,040
बाद उसके अवतार है

372
00:29:33,440 --> 00:29:37,760
ब्रह्मा जी आ गए इनसे तर अंतर कृष्ण

373
00:29:37,760 --> 00:29:41,840
के नाभी कमल से एक महा तपस्वी कमंडलु धारी वृद्ध प्रकट हो गए

374
00:29:41,840 --> 00:29:45,920
जो ब्रह्मा थे लो अब आप तो कह रहे हैं ना कि

375
00:29:45,920 --> 00:29:50,120
नहीं देवी से इनका प्रादुर्भाव हुआ है नहीं यहां तो कृष्ण से हो रहा है भगवान श्री कृष्ण

376
00:29:50,120 --> 00:29:56,120
चंद्र से हो रहा है अब क्या

377
00:29:56,600 --> 00:30:00,680
होगा अब क्या होगा अब एक अच्छी

378
00:30:00,680 --> 00:30:05,320
बात बताता हूं जिसमें आपको आनंद आएगा थोड़ी

379
00:30:05,320 --> 00:30:09,360
थोड़ा सा थ्योर कल चल रहा है ना इस समय इसलिए मैं आपको वो

380
00:30:09,360 --> 00:30:15,360
बताता

381
00:30:17,720 --> 00:30:21,720
हूं आनंद वाली बात क्या है कि ब्रह्म

382
00:30:21,720 --> 00:30:26,000
वैवर्त पुराण में ही एक विशेष खंड है

383
00:30:26,000 --> 00:30:30,280
जिसको कहते हैं गणपति खंड अब इस ब्रह्मवर्त पुराण के आधार

384
00:30:30,280 --> 00:30:34,320
पर जो है खंडन किया जाता है कि कृष्ण के अलावा सभी जो है

385
00:30:34,320 --> 00:30:38,520
परब्रह्म नहीं है इत्यादि इत्यादि और यह रामपाल वाले तो जानते ही नहीं होंगे

386
00:30:38,520 --> 00:30:42,720
कि ब्रह्मवर्त पुराण दुनिया में है भी कि नहीं इनको तो वही पृष्ट संख्या वाला

387
00:30:42,720 --> 00:30:46,760
जो देवी भागवत है संक्षिप्त वही पता होगा इनकी सारी वीडियो देख लेना

388
00:30:46,760 --> 00:30:50,760
वही मिलेगा रामपाल जी के जितने भी वीडियो होंगे उसमें

389
00:30:50,760 --> 00:30:54,840
सब में वही होगा संक्षिप्त देवी भागवत पृष्ठ संख्या ये

390
00:30:54,840 --> 00:30:58,880
क्योंकि जब वो जेल गए होंगे इस समय जेल में ही है कि नहीं मुझे कंफर्म नहीं

391
00:30:58,880 --> 00:31:03,080
है मगर अगर जानकारी सही तो जब वो जेल गए होंगे तो उससे पहले तक ता प्रस

392
00:31:03,080 --> 00:31:07,320
छाप नहीं रही थी श्लोकों के साथ तो वो संक्षिप्त था उनके पास भाई

393
00:31:07,320 --> 00:31:13,320
वो तो परम ब्रह्म है ना परमेश्वर के रूप है कहां गए श्लोक

394
00:31:17,040 --> 00:31:21,240
क्रमांक आएगा कोई लिंक दे दीजिए भाई

395
00:31:21,240 --> 00:31:24,120
आना हो तो किसी

396
00:31:24,120 --> 00:31:28,320
को हम तो ब्रह्म वैवर्त पुराण में एक खंड

397
00:31:28,320 --> 00:31:32,600
है गणपति खंड और गणपति

398
00:31:32,600 --> 00:31:36,840
खंड में भगवान गणेश को यहीं पर परब्रह्म कहा

399
00:31:36,840 --> 00:31:41,040
गया वो गणेश गणेश तानी उपनिषद अलग है जो गणेश

400
00:31:41,040 --> 00:31:47,040
पुराण है वो अलग है मगर यहीं पर ब्रह्मवर्त में ही गणेश जी

401
00:31:47,440 --> 00:31:50,880
को किया गया

402
00:31:50,880 --> 00:31:55,240
है परब्रह्म कहा गया वो मैं आपको दिखा रहा हूं तो गणपति

403
00:31:55,240 --> 00:32:01,240
खंड 630 नंबर पेज

404
00:32:14,480 --> 00:32:18,520
8 बहुत ज्यादा मेहनत की आवश्यकता नहीं है पांचों

405
00:32:18,520 --> 00:32:22,920
ब्रह्म का जो स्वरूप है पांचों आप

406
00:32:22,920 --> 00:32:27,520
केवल ग्रंथ अरे भाई आपके पास नहीं है ना तो आप

407
00:32:27,520 --> 00:32:32,360
आप आपके घर के आसपास कहीं शॉप तो होगी वहां चले

408
00:32:32,360 --> 00:32:36,680
जाओ वहां चले जाओ वहां जाकर उससे रिक्वेस्ट कर लो जरा हमें खोल

409
00:32:36,680 --> 00:32:40,680
के देख लेने दो पुराण एक एक पुराण खोल के देखते जाओ उसके इंडेक्स में ही लिखा

410
00:32:40,680 --> 00:32:44,520
होगा और इतना करने देंगे व

411
00:32:44,520 --> 00:32:50,520
आप 698 मैं भी पृष्ठ संख्या प आ गया

412
00:33:11,640 --> 00:33:14,720
898

413
00:33:14,720 --> 00:33:20,720
800 यह आ गया 8008

414
00:33:36,480 --> 00:33:42,000
हम यह मंगलाचरण हो रहा है

415
00:33:42,000 --> 00:33:46,200
तो इसमें जो है गणेश जी को परब्रह्म

416
00:33:46,200 --> 00:33:52,200
कहा जा रहा है

417
00:34:11,760 --> 00:34:16,400
तुम शिव तुल्य हो तथा

418
00:34:16,400 --> 00:34:20,400
परमायु तुम्हारे समान परम तुम्हारे तुम मेरे समान पराक्रमी

419
00:34:20,400 --> 00:34:24,560
हो जाओ और तुम यश जगत में व्याप्त रहे हो

420
00:34:24,560 --> 00:34:30,560
और

421
00:34:38,800 --> 00:34:43,520
तो यहां पर गणेश जी तुम परब्रह्म हो

422
00:34:43,520 --> 00:34:47,600
ब्रह्मा विष्णु महेश तुम्हारे बारे में इनका व्याख्यान करना

423
00:34:47,600 --> 00:34:52,360
इनके द्वारा वह संभव नहीं है

424
00:34:52,360 --> 00:34:57,040
तुम परब्रह्म हो सर्वव्यापी हो सर्वेश्वर हो तो ये

425
00:34:57,040 --> 00:35:00,600
गणेश जी के लिए हो

426
00:35:00,600 --> 00:35:04,600
गया यह कौन सा है ब्रह्म वैवर्त पुराण उसमें

427
00:35:04,600 --> 00:35:08,680
गणपति खंड है गणपति खंड यानी तीसरा खंड है

428
00:35:08,680 --> 00:35:14,280
और उसमें दूसरे अध्याय से लेकर के

429
00:35:14,280 --> 00:35:18,280
और दूसरा नहीं आप सीधे इस पर आ जाइए कि

430
00:35:18,280 --> 00:35:22,920
गणेश जी के मंगल हेतु मंगलाचरण गणेश जन्मोत्सव ठीक

431
00:35:22,920 --> 00:35:27,040
है तो यहां पर जहां इनका मंगलाचरण हुआ है जन्मोत्सव हुआ है इसमें

432
00:35:27,040 --> 00:35:31,240
ये सारा को इनका ब्रह्म

433
00:35:31,240 --> 00:35:35,440
गणेश जी का क्या कहते हैं वो मिल

434
00:35:35,440 --> 00:35:39,600
जाएगा परम परब्रह्म का और एक

435
00:35:39,600 --> 00:35:43,720
जगह और मिलेगा 9 ये 13 अध्याय

436
00:35:43,720 --> 00:35:48,120
में मिल जाएगा आपको 915 इसी गणेश

437
00:35:48,120 --> 00:35:52,360
गणपति खंड के 13 अध्याय में मैं आपके सामने

438
00:35:52,360 --> 00:35:56,640
बिल्कुल एक र वीडियो बना रहा हूं पहले से कोई तैयारी नहीं करके बैठा

439
00:35:56,640 --> 00:36:00,720
हूं है ना बिल्कुल रॉ बना रहा हूं एक सामान्य व्यक्ति

440
00:36:00,720 --> 00:36:06,720
की तरह बिल्कुल

441
00:36:21,560 --> 00:36:25,600
915 गणेश जी का मंत्र तक है इसमें

442
00:36:25,600 --> 00:36:30,280
है ना ब्रह्म रूपाय ब्रम गणेशाय

443
00:36:30,280 --> 00:36:34,600
ब्रह्म रूपाय यह सब हे ईश्वर विष्णु कह रहे हैं गणेश

444
00:36:34,600 --> 00:36:39,120
जी के लिए कह रहे विष्णु विष्णु भगवान आप स्वरूप तर्क से परे

445
00:36:39,120 --> 00:36:43,680
हैं आप उसका निरूपण करने में मैं असमर्थ हूं

446
00:36:43,680 --> 00:36:47,800
आप सभी देवगण से प्रवर सिद्ध योगी गण के गुरु सर्व स्वरूप

447
00:36:47,800 --> 00:36:52,520
सर्वेश ज्ञान रसमय आप अव्यक्त अक्षर नित्य सत्य नित्य

448
00:36:52,520 --> 00:36:58,520
नित्य क्या हो गया नित्य का अर्थ क्या हो गया

449
00:36:58,720 --> 00:37:03,000
नित्य का अर्थ क्या हो गया अविनाशी

450
00:37:03,000 --> 00:37:07,320
नित्य सत्य आत्म स्वरूप वायु तुल्य निर्लिप्त अक्षर

451
00:37:07,320 --> 00:37:11,360
तथा सर्व साक्षी हैं सब

452
00:37:11,360 --> 00:37:15,400
मोक्ष देने वाले हैं और यहां पर फिर

453
00:37:15,400 --> 00:37:19,400
पहले विष्णु भगवान ने की फिर शिव जी ने की इसी तरीके से

454
00:37:19,400 --> 00:37:25,080
उसके बाद फिर अन्यों ने

455
00:37:25,080 --> 00:37:30,680
की और विष्णु कृत विष्णु

456
00:37:30,680 --> 00:37:35,720
कृत इस गणपति स्तव को जो समाहित

457
00:37:35,720 --> 00:37:41,720
अ करता है ना

458
00:38:08,560 --> 00:38:12,840
तो विष्णु कृत इस गणपति स्तव को जो समाहित होकर

459
00:38:12,840 --> 00:38:17,000
भक्ति के साथ प्रातः मध्या तथा साय काल

460
00:38:17,000 --> 00:38:21,080
करता है गणेश उसके सभी विघ्नों

461
00:38:21,080 --> 00:38:25,200
का सतत नाश कर देते हैं लो भाई मोक्ष दायक हो गए उसके सभी

462
00:38:25,200 --> 00:38:29,640
कल्याण की वृद्धि हो जाती है व्यक्ति कल्याण जनक हो जाता है

463
00:38:29,640 --> 00:38:34,080
जो इस स्तव को भक्ति पूर्वक यात्रा काल में पढ़ता है उसके सभी अभीष्ट

464
00:38:34,080 --> 00:38:38,200
की सिद्धि हो जाती है निसं सय

465
00:38:38,200 --> 00:38:42,400
और आगे भी अनेकानेक इनका जो है

466
00:38:42,400 --> 00:38:46,440
इसी तरीके से महिमा मंडन हुआ है गणेश जी का तो यह ब्रह्मवर्त

467
00:38:46,440 --> 00:38:50,520
पुराण से हमने जान लिया कि भगवान श्री कृष्ण चंद्र से सृष्टि की रचना हुई ब्रह्मा विष्णु महेश

468
00:38:50,520 --> 00:38:54,600
का प्रादुर्भाव हुआ और शक्ति का भी प्रादुर्भाव हुआ गणेश

469
00:38:54,600 --> 00:38:58,880
जी को इसमें परब्रह्म कहा गया और और अब हम

470
00:38:58,880 --> 00:39:01,320
देख लेते

471
00:39:01,320 --> 00:39:05,520
हैं विष्णु पुराण देख लेते हैं

472
00:39:05,520 --> 00:39:09,680
भगवान श्री कृष्ण ने भगवत गीता में तो कहा ही है कि

473
00:39:09,680 --> 00:39:13,800
मैं अजन्मा अविनाशी होते हुए भी संपूर्ण

474
00:39:13,800 --> 00:39:18,280
भूतों का ईश्वर होते हुए भी ऐसे ही गणेश गीता में गणेश जी ने कहा है

475
00:39:18,280 --> 00:39:22,440
इसी प्रकार से शिव गीता में शिव जी ने कहा है इसी प्रकार से ईश्वर गीता

476
00:39:22,440 --> 00:39:23,720
में कहा गया है राम गीता

477
00:39:23,720 --> 00:39:27,760
में कहा गया है तो इतने इतने भरे पड़े

478
00:39:27,760 --> 00:39:32,320
कहां तक दे इतने प्रमाण है

479
00:39:32,320 --> 00:39:36,560
अब बात य आती कि वहां पर उन्होंने यह क्यों कह दिया कि जन्म मरण

480
00:39:36,560 --> 00:39:40,720
मेरा तो जन्म मरण होता है मैं पूछ रहा हूं कुत्ता क्यों कहा कबीर जी ने अपने

481
00:39:40,720 --> 00:39:44,800
आपको को कुत्ता क्यों कहा कुत्ता

482
00:39:44,800 --> 00:39:47,280
है

483
00:39:47,280 --> 00:39:51,440
क्या नहीं है ना तो क्यों कहा

484
00:39:51,440 --> 00:39:55,440
लीला पूर्वक आप यही कहोगे ना अपने कबीर जी के लिए लीला पूर्वक तो यही लीला

485
00:39:55,440 --> 00:40:00,320
पूर्वक न्याय करो ना यार ऐसे क्यों करते हो

486
00:40:00,320 --> 00:40:03,480
न्याय करो

487
00:40:03,480 --> 00:40:09,480
न्याय अब आ जाते हैं विष्णु भगवान का महिमा मंडन देख लेते

488
00:40:13,880 --> 00:40:18,200
हैं तो श्री पारा सर जी बोल रहे हैं जो ब्रह्मा

489
00:40:18,200 --> 00:40:22,560
और शंकर रूप से जगत की उत्पत्ति और संहार

490
00:40:22,560 --> 00:40:26,600
के कारण है तथा अपने भक्तों को संसार सागर से तारने वाले हैं

491
00:40:26,600 --> 00:40:30,800
उन विकार रहित यह क्या है विष्णु पुराण प्रथम अंश दूसरा अध्याय

492
00:40:30,800 --> 00:40:35,360
में पढ़ रहा हूं उन विकार रहित शुद्ध अविनाशी

493
00:40:35,360 --> 00:40:39,560
कौन है अविनाशी परमात्मा सर्वदा एक रस

494
00:40:39,560 --> 00:40:43,720
सर्व विजय भगवान वासुदेव विष्णु को मैं नमस्कार

495
00:40:43,720 --> 00:40:48,160
विष्णु को नमस्कार है य कबीर का नाम तो नहीं आया भाई

496
00:40:48,160 --> 00:40:52,160
हा कहां है कबीर कबीर का

497
00:40:52,160 --> 00:40:55,480
नाम दिखाओ ना

498
00:40:55,480 --> 00:40:59,720
भाई थ गया प्रमाण दिखाते दिखाते फिर भी उसी तरीके

499
00:40:59,720 --> 00:41:03,840
से बिल्कुल जैसे जूमबीज नहीं होते

500
00:41:03,840 --> 00:41:08,040
हैं उनको कुछ सुनाई नहीं

501
00:41:08,040 --> 00:41:14,040
देगा कोई आए हैं क्या जितेश बारा

502
00:41:15,920 --> 00:41:21,280
जी हां जी जितेश जी जय श्री

503
00:41:21,280 --> 00:41:25,360
राम जय श्री आप आ चुके क्या पहले हां मैं पहले

504
00:41:25,360 --> 00:41:29,680
भी आया मेरे तो वही सवाल है कुछ नहीं नहीं सवाल

505
00:41:29,680 --> 00:41:33,960
नहीं आप यदि कोई काउंटर करने आए तो

506
00:41:33,960 --> 00:41:38,200
बताइए काउंटर यही है कि जैसे आप अभी शास्त्र में पढ़ रहे हैं कहीं

507
00:41:38,200 --> 00:41:42,480
ब्रह्मा जी को सर्वशक्तिमान कहा गया है कहीं शिव जी को कहा गया है

508
00:41:42,480 --> 00:41:46,520
पहले आप अपनी पहचान बताइए आपकी पहचान क्या है आध्यात्मिक दृष्टि

509
00:41:46,520 --> 00:41:51,480
से मतलब आपके पीछे कौन सा सोर्स ऑफ इंफॉर्मेशन है

510
00:41:51,480 --> 00:41:55,520
मैं जिज्ञासु हूं अभी तो नहीं तो जिज्ञासु है तो आप

511
00:41:55,520 --> 00:41:59,600
क्लासेस जवाइन करिए ठीक है आप क्लासे जन करिए आपको

512
00:41:59,600 --> 00:42:03,800
यदि कोई काउंटर करना है हमारी किसी बात को क्योंकि आपके पास क्योंकि कोई मत

513
00:42:03,800 --> 00:42:08,040
है कोई विचार है तो आप बताइए विचार मेरा यही

514
00:42:08,040 --> 00:42:10,840
है कि जैसे आप आपका विचार है कि

515
00:42:10,840 --> 00:42:15,040
आपका कोई विचार है ही नहीं ना क्योंकि आपने अध्ययन किया नहीं क्योंकि आप जिज्ञासु है तो आप पहले

516
00:42:15,040 --> 00:42:19,320
जाइए कहीं पर जाकर के अध्ययन करिए फिर अपना विचार बनाइए फिर उस विचार को लेकर

517
00:42:19,320 --> 00:42:23,560
के आप काउंटर करिए होता क्या है कि जिज्ञासु

518
00:42:23,560 --> 00:42:27,600
के नाम पर आया जाता है और हम जो है तरीके

519
00:42:27,600 --> 00:42:31,960
से यहां पर उस चर्चा के लिए नहीं बैठे हैं हमारी क्लासेस लगती है आप वहां पर आइए

520
00:42:31,960 --> 00:42:37,960
आपकी जिज्ञासा शांत की जाएगी ठीक है ठीक

521
00:42:40,600 --> 00:42:46,400
जी चक्र पाणी

522
00:42:46,400 --> 00:42:52,400
जी आपका चेहरा दिख पाएगा या

523
00:42:57,840 --> 00:43:02,680
जय श्री राम जय श्री राम जय श्री राम भाई साब जय श्री राम

524
00:43:02,680 --> 00:43:07,600
जी आप पहले भी बात हो गई है

525
00:43:07,600 --> 00:43:12,400
मैं जरा इसको पूरा कर लू जो टॉपिक चल रहा है जी जी आप उसको कपलीट

526
00:43:12,400 --> 00:43:16,480
जी जी तो क्या है यहां पर विष्णु

527
00:43:16,480 --> 00:43:20,480
भगवान को कहा जा रहा है विकार रहित शुद्ध अविनाशी परमात्मा सर्वदा

528
00:43:20,480 --> 00:43:24,480
एक रस सर्व विजय भगवान वासुदेव विष्णु को नमस्कार

529
00:43:24,480 --> 00:43:28,600
है जो एक होकर भी नाना रूप वाले हैं

530
00:43:28,600 --> 00:43:32,640
स्थूल है तथा भैया देख लेना विष्णु पुराण है

531
00:43:32,640 --> 00:43:36,760
आ में यह ना कना सद ग्रंथों को नहीं दिखाया विष्णु

532
00:43:36,760 --> 00:43:42,120
पुराण है और पढ़ लिया करो थोड़ा बहुत

533
00:43:42,120 --> 00:43:47,640
फिर नहीं तो चिल्लाते रहते हो वेदों में प्रमाण है ओ वेदों में प्रमाण

534
00:43:47,640 --> 00:43:52,480
है वेदों में प्रमाण है कबीर नहीं भगवान है

535
00:43:52,480 --> 00:43:57,160
जब पूछा जाए कि लिखा हो कहां प्रमाण है कबीर भगवान है

536
00:43:57,160 --> 00:44:01,320
तो फिर कहेंगे भैया वह कवि है कवि से कबीर बना है और

537
00:44:01,320 --> 00:44:01,820
वह

538
00:44:01,560 --> 00:44:05,680
क्या है कबीर कबीर से कबीर देव से कबीर देव बना है

539
00:44:05,680 --> 00:44:09,720
और फिर पूछे कवि कबीर कैसे बना कबीर कबीर कैसे बना

540
00:44:09,720 --> 00:44:13,840
अरे तुम आप जैसे कहते हो ना वो अपने क्या कहते

541
00:44:13,840 --> 00:44:17,920
हो आप कृष्ण को काना कहते हो हमने हम भैया हम यह नहीं कहते कि वेदों

542
00:44:17,920 --> 00:44:22,120
में प्रमाण है काना भगवान है जब वेदों की बात करते तो हम कहते वेदों में प्रमाण है विष्णु

543
00:44:22,120 --> 00:44:26,160
भगवान है हम ये नहीं कहते वेदों में प्रमाण है काना

544
00:44:26,160 --> 00:44:30,200
भगवान है और दूसरी बात तुम्हारे हिसाब से तो हम लोग शास्त्रो चित भक्ति

545
00:44:30,200 --> 00:44:34,280
नहीं कर रहे ना तो तुम हमसे क्यों सीख रहे हो क्या करना

546
00:44:34,280 --> 00:44:38,440
है क्या नहीं करना है आप तो आप तो शास्त्र सम्मत बात करने वाले व्यक्ति

547
00:44:38,440 --> 00:44:42,560
हो ना आपके हिसाब से तो हम शास्त्रों के आधार पर भक्ति नहीं कर रहे ना तो आप

548
00:44:42,560 --> 00:44:46,560
हमारी यह बात क्यों ले रहे हो कि आपने कृष्ण को काना कह दिया यह

549
00:44:46,560 --> 00:44:50,600
क्यों सीख रहे हो शास्त्र से बताओ कबीर कबीर

550
00:44:50,600 --> 00:44:54,680
कबीर कैसे बना कवि कबीर कैसे बना व कबीर है ही नहीं

551
00:44:54,680 --> 00:44:58,840
वैसे कवि है शास्त्र से बताओ हमसे मत सीखो हम

552
00:44:58,840 --> 00:45:02,960
तो आपकी नजरों में आपने कहा ना कि आप शास्त्रों शास्त्रों की

553
00:45:02,960 --> 00:45:07,600
शास्त्रो चित भक्ति नहीं कर रहे हो यही सिखाया गया ना जेल जाने से पहले तक आपको

554
00:45:07,600 --> 00:45:11,720
उसके बाद उन्हीं के वीडियोस को तोड़ मरोड़ के तोड़ मरोड़ के तोड़ मरोड़ के उन्हीं के वीडियोस

555
00:45:11,720 --> 00:45:15,720
को रिपीट किया जाता है और कुछ नहीं कोई नया वीडियो नहीं

556
00:45:15,720 --> 00:45:17,360
बनता उनका

557
00:45:17,360 --> 00:45:21,520
व जो पहले रिकॉर्डेड हो चुके हैं बस वही वीडियो चलते रहते जहां तक मुझे

558
00:45:21,520 --> 00:45:25,640
मालूम है कोई नया वीडियो हो भैया सलाखों के पीछे से तो बात अलग

559
00:45:25,640 --> 00:45:31,640
है मैंने नहीं देखा

560
00:45:35,040 --> 00:45:39,440
तो जो एक होकर भी नाना रूप वाले हैं स्थूल सूक्ष्म

561
00:45:39,440 --> 00:45:43,440
मय है अव्यक्त एवं व्यक्त रूप है तथा

562
00:45:43,440 --> 00:45:47,600
मुक्ति के कारण है किसके कारण है मुक्ति के कारण

563
00:45:47,600 --> 00:45:51,640
यहां कबीर तो नहीं लिखा है मुक्ति के कारण अभी

564
00:45:51,640 --> 00:45:55,920
मैं इस बात पर भी आऊंगा अभी जरा कबीर वाली बात प जरा आज तरीके

565
00:45:55,920 --> 00:46:00,480
से बाल की खाल निका

566
00:46:00,480 --> 00:46:06,480
जो भी आए वह चेहरा लेकर आए अपना अन्यथा उसे ऊपर नहीं लिया जाएगा

567
00:46:07,080 --> 00:46:11,120
इसमें जो विश्वर रूप प्रभु विश्व की उत्पत्ति स्थिति

568
00:46:11,120 --> 00:46:15,400
और समार के मूल कारण है उन परमात्मा विष्णु भगवान को नमस्कार

569
00:46:15,400 --> 00:46:19,440
है यह वाला प्रमाण विष्णु पुराण से

570
00:46:19,440 --> 00:46:23,560
ठीक है अब मैं आपको ऐसा प्रमाण दिखाऊंगा

571
00:46:23,560 --> 00:46:27,800
जिससे आपको ज्यादा संतुष्टि मिलेगी वो प्रमाण कौन सा है

572
00:46:27,800 --> 00:46:33,160
वो भी देख

573
00:46:33,160 --> 00:46:37,640
लो देवी भागवत करते हो ना भाई लो

574
00:46:37,640 --> 00:46:42,040
भाई बड़ा सा देवी भागवत पुराण दिख रहा

575
00:46:42,040 --> 00:46:46,680
है इतना बड़ा देखा है कभी देवी भागवत

576
00:46:46,680 --> 00:46:51,000
नहीं देखा नहीं देखा होगा भाई संक्षिप्त वाला ही देखा है आगे

577
00:46:51,000 --> 00:46:57,000
आ है गीता प्रस से ले लो जाकर के संस्कृत हिंदी छापने लगा है गीता प्र

578
00:46:59,880 --> 00:47:05,880
तो देवी भागवत

579
00:47:13,920 --> 00:47:18,080
में देवी भागवत में पहले आ जाते हैं

580
00:47:18,080 --> 00:47:22,280
नौवे स्कंध प पृष्ठ क्रमांक

581
00:47:22,280 --> 00:47:26,320
मुझे भी पृष्ठ क्रमांक बोलने की आदत हो गई इनको सुन

582
00:47:26,320 --> 00:47:29,760
सुन के

583
00:47:29,760 --> 00:47:35,240
देख लो भैया बहुत बड़ा देवी भागवत है फिर मत

584
00:47:35,240 --> 00:47:41,240
कहना पहली बार देखे होंगे

585
00:47:41,920 --> 00:47:45,920
ये नवम स्कंद आ गया अब इसमें

586
00:47:45,920 --> 00:47:49,960
क्या है

587
00:47:49,960 --> 00:47:54,200
इसमें जो सृष्टि की उत्पत्ति हो रही भगवती

588
00:47:54,200 --> 00:47:58,520
पुराण की बात कर रहा हूं देवी भागवत की बात कर रहा हूं सृष्टि की उत्पत्ति

589
00:47:58,520 --> 00:48:02,640
जो हो रही है इसी में देवी भागवत में कल्प भेद से

590
00:48:02,640 --> 00:48:07,280
किससे हो रही है यदा यदाई धर्मस्य

591
00:48:07,280 --> 00:48:11,400
गन भवती भारता अनम धर्मस्य

592
00:48:11,400 --> 00:48:15,400
तदात्मानं सजाम में हम लीला पुरुषोत्तम

593
00:48:15,400 --> 00:48:21,400
भगवान श्री कृष्ण चंद्र कहते हैं

594
00:48:22,920 --> 00:48:27,440
इन्ह क्या लिखा है भगवान नारायण ने कहा

595
00:48:27,440 --> 00:48:31,680
हे देव ऋषि नारद गणेश माता श्री दुर्गा

596
00:48:31,680 --> 00:48:35,760
लक्ष्मी सरस्वती सावित्री तथा राधा यह पांचों

597
00:48:35,760 --> 00:48:39,760
देवियां प्रकृति कही जाती है क्या कही जाती है

598
00:48:39,760 --> 00:48:44,240
प्रकृति और वहां पर शिव पुराण में प्रकृति का उत्पत्ति

599
00:48:44,240 --> 00:48:48,320
अंबिका की उत्पत्ति किससे हुई शिव जी के द्वारा यहां पर किससे

600
00:48:48,320 --> 00:48:52,480
हुई कृष्ण भगवान से और उधर किससे

601
00:48:52,480 --> 00:48:56,520
हो रही विष्णु पुराण में विष्णु भगवान से ऐसे ही जो ब्रह्म पुराण

602
00:48:56,520 --> 00:49:01,920
है ब्रह्मा जी से ब्रह्मांड पुराण ब्रह्मा जी

603
00:49:01,920 --> 00:49:05,960
से गणेश पुराण गणेश जी से और देवी

604
00:49:05,960 --> 00:49:10,040
पुराण है तो उसमें प्राथमिकता से देवी जी से बाकी कल्प भेद से

605
00:49:10,040 --> 00:49:14,120
जैसे ब्रह्म वैवर्त पुराण में कृष्ण भगवान से उत्पत्ति तो

606
00:49:14,120 --> 00:49:18,840
है मगर गणेश जी को भी कहीं पर क कहा गया है परब्रह्म

607
00:49:18,840 --> 00:49:22,920
इसी प्रकार से भागवत पुराण पूरा समर्पित है कृष्ण भगवान को

608
00:49:22,920 --> 00:49:27,360
मगर उसमें भी शिव जीी को भी कहा गया

609
00:49:27,360 --> 00:49:33,360
परब्रह्म है ना तो ये क्यों कहा जाता है

610
00:49:33,680 --> 00:49:38,160
क्योंकि सृष्टि के निर्माण का जो वोह तत्व है वह एक है

611
00:49:38,160 --> 00:49:42,360
तो वह कल्प भेद से कल्प मतलब एक कल्प में य सृष्टि बनी

612
00:49:42,360 --> 00:49:47,000
अगले कल्प में दोबारा से महाप्रलय से उद्भव हुआ दोबारा से आविर्भाव

613
00:49:47,000 --> 00:49:51,080
हुआ तो वह जो आविर्भाव हुआ कभी उनका मन हुआ विष्णु रूप में पहले

614
00:49:51,080 --> 00:49:55,120
आ गए और विष्णु रूप से सारी सृष्टि कर डाली तो वहां पर विष्णु जी

615
00:49:55,120 --> 00:50:00,040
प्रधानता से दिखे उस चैप्टर में

616
00:50:00,040 --> 00:50:04,040
हम तो क्या है कि यह जो प्रकृति कही

617
00:50:04,040 --> 00:50:08,160
जाती है इन्हीं पर सृष्टि का कार्य अवलंबित है वह

618
00:50:08,160 --> 00:50:12,280
प्रकृति कैसे प्रकट हुई यह बताया जा रहा है ठीक है उस

619
00:50:12,280 --> 00:50:16,560
मूल प्रकृति के लक्षण यह कौन बोल रहा है यह विष्णु भगवान

620
00:50:16,560 --> 00:50:17,520
बोल रहे हैं

621
00:50:17,520 --> 00:50:22,080
उस मूल प्रकृति के लक्षण भली भाति बताने में यद्यपि कोई

622
00:50:22,080 --> 00:50:26,680
समर्थ नहीं हो सकता तथापि मैंने धर्म के मुख से जो कुछ श्रवण किया है

623
00:50:26,680 --> 00:50:31,080
व संक्षेप में बता रहा हूं ध्यान से सुनो पहले प्रकृति

624
00:50:31,080 --> 00:50:35,760
शब्द की तपति सुनो यह सब चीजें तो

625
00:50:35,760 --> 00:50:39,760
व्याकरण संबंधी है वो सर के ऊपर से जाएंगी

626
00:50:39,760 --> 00:50:45,760
तो इसलिए रहने देते हैं आगे चलते हैं क्या

627
00:50:49,360 --> 00:50:53,640
है सृष्टि के आदि में जो देवी विराज रहती है उसे प्रकृति

628
00:50:53,640 --> 00:50:57,720
कहा गया है सृष्टि करने के लिए योग माया का आश्रय लेकर परमात्मा दो

629
00:50:57,720 --> 00:51:01,960
रूपों में विभक्त हो गए वहां क्या कह रहे हैं मैं अपनी योग

630
00:51:01,960 --> 00:51:06,040
माया को अपने अधीन करके भगवत गीता में कह रहे ना यहां क्या कह रहे

631
00:51:06,040 --> 00:51:10,280
हैं कि सृष्टि करने के लिए योग माया का आश्रय लेकर

632
00:51:10,280 --> 00:51:14,400
परमात्मा दो रूपों में विभक्त हो गए उनका आधा दायना

633
00:51:14,400 --> 00:51:17,960
भाग पुरुष और आधा भाग प्रकृति कहा गया

634
00:51:17,960 --> 00:51:22,160
तो अब य अद्वैत भी आएगा देखिए कैसे वे देवी

635
00:51:22,160 --> 00:51:26,160
प्रकृति ब्रह्म स्वरूपा नित्या एवं सनातनी है कौन है

636
00:51:26,160 --> 00:51:30,280
ब्र स्वरूपा नित्या नित्या का अर्थ समझ

637
00:51:30,280 --> 00:51:33,560
रहे हो ना नित्य

638
00:51:33,560 --> 00:51:37,960
अविनाशी प्रकृति भी अविनाशी है नित्या

639
00:51:37,960 --> 00:51:42,280
एवं सनातन है सनातन का मतलब ही है जो किसी भी देश

640
00:51:42,280 --> 00:51:46,400
काल परिस्थिति में प्रभावित ना हो एज

641
00:51:46,400 --> 00:51:51,000
इट इज रहे तो प्रकृति भी व जो देवी है मां भगवती वह भी

642
00:51:51,000 --> 00:51:56,960
सनातनी है परमात्मा के समान सभी गुण है इनम

643
00:51:56,960 --> 00:52:01,280
और क्या है इनमें निहित है इसलिए परम

644
00:52:01,280 --> 00:52:05,480
ज्ञानी योगी जन स्त्री पुरुष का भेद

645
00:52:05,480 --> 00:52:09,640
नहीं मानते दोनों को एक तरह से देखते हैं परब्रह्म

646
00:52:09,640 --> 00:52:14,120
परम ब्रह्म और परम ब्रह्म स्वरूपिणी देवी है जो

647
00:52:14,120 --> 00:52:18,200
उनका कहना है कि सत असत जो कुछ भी दृश्य मान जगत

648
00:52:18,200 --> 00:52:22,520
है वह सब एक ब्रह्म मय है सर्व तंत्र स्वतंत्र

649
00:52:22,520 --> 00:52:26,840
आनंद कंद भगवान श्री कृष्ण चंद्र के मन में

650
00:52:26,840 --> 00:52:31,120
करने की रचना होते ही उनकी मूल प्रकृति परमेश्वरी एका

651
00:52:31,120 --> 00:52:33,080
एक आविर्भव हो

652
00:52:33,080 --> 00:52:37,520
गई सुनाई दिया देवी भागवत में ही

653
00:52:37,520 --> 00:52:41,600
जो सृष्टि की उत्पत्ति है भगवान श्री कृष्ण से हो रही

654
00:52:41,600 --> 00:52:45,920
है अब लगाओ अपनी शरण रामपाल जी के

655
00:52:45,920 --> 00:52:50,000
पास हा और सुनो

656
00:52:50,000 --> 00:52:54,120
इसमें एक खास बात वो क्या है इसमें खास बात ये

657
00:52:54,120 --> 00:52:58,200
है पहली बात तो हम सिद्ध कर चुके सृष्टि हो रही है यह

658
00:52:58,200 --> 00:53:02,440
दुर्गा है और ऐसे ही दुर्गा ऐसी दुर्गा

659
00:53:02,440 --> 00:53:06,760
नहीं यह भी कहोगे वही दुर्गा क्यों है तो सर्वप्रथम जो

660
00:53:06,760 --> 00:53:10,920
उन्होंने पांच रूप धारण किए थे उनमें से सर्वप्रथम जो है वह

661
00:53:10,920 --> 00:53:15,280
रूप है गणेश जननी भगवती दुर्गा का लो

662
00:53:15,280 --> 00:53:19,760
संशय बाकी मत रखना

663
00:53:19,760 --> 00:53:23,760
भैया ये लोग इतने उटांग वीडियो बनाते हैं पता

664
00:53:23,760 --> 00:53:28,280
नहीं वाकई मेंही ऐसा लगता है कि कुछ नो किया है क्या किया है

665
00:53:28,280 --> 00:53:33,120
म हमने जितने भी प्रमाण दिए थे ना उन पर बात ही नहीं की इन्होंने

666
00:53:33,120 --> 00:53:37,400
अपने प्रमाण दिखा दिए अरे भाई वो तो हम तुम्हारे

667
00:53:37,400 --> 00:53:41,440
जो जिन प्रमाणों का सहारा लेकर के तुम अपनी बात कह रहे हो हमने नकारा क्या

668
00:53:41,440 --> 00:53:45,640
उनको कि ये नहीं लिखा है नहीं हमने तो यह कहा

669
00:53:45,640 --> 00:53:49,680
कि यह भी तो लिखा है ऐसी बात कहो

670
00:53:49,680 --> 00:53:53,920
जिसमें दोनों बातों का मान हो ऐसी बात मुंह

671
00:53:53,920 --> 00:53:58,160
से निकालो जिसमें दोनों बातों का मान हो केवल तुम जो एक पॉइंट

672
00:53:58,160 --> 00:54:02,520
पकड़ रहे हो उसकी बात ना हो वरना तो मैं कह दूं कि कबीर कुत्ता

673
00:54:02,520 --> 00:54:06,720
है तो क्या करूं मैं यही मानने लगू क्या परमेश्वर आपके

674
00:54:06,720 --> 00:54:10,880
हिसाब से वह परमेश्वर भी है उन्होंने लिखा है उन्होंने यह भी लिखा है

675
00:54:10,880 --> 00:54:15,200
मैं कुत्ता राम का तो क्या करूं केवल इसी को पकड़ लू

676
00:54:15,200 --> 00:54:19,360
मैं तो क्या कहा जाएगा आज के बाद

677
00:54:19,360 --> 00:54:23,360
वेदों में प्रमाण है और कबीर वाणी

678
00:54:23,360 --> 00:54:29,360
में प्रमाण है और आगे की लाइन क्या होनी चाहिए

679
00:54:30,440 --> 00:54:34,480
बोलने में भी अच्छा नहीं लग रहा है

680
00:54:34,480 --> 00:54:38,560
तो यहां पर सृष्टि उनसे उत्पत्ति हुई और एक खास

681
00:54:38,560 --> 00:54:43,640
बात वह क्या

682
00:54:43,640 --> 00:54:48,080
है 90 नंबर का जो श्लोक है उसमें कहा जा रहा

683
00:54:48,080 --> 00:54:52,080
है कि यह जो देवी है यह

684
00:54:52,080 --> 00:54:56,680
परमात्मा कृष्ण की परम भक्त है लो

685
00:54:56,680 --> 00:55:00,680
ब्रह्मा विष्णु महेश मा पूजा करते थे ना देवी की

686
00:55:00,680 --> 00:55:06,680
यहां तो देवी मां परम भक्त हो

687
00:55:07,120 --> 00:55:12,080
गई अब इसमें एक और चमत्कारिक बात है और

688
00:55:12,080 --> 00:55:16,200
लो भरा पड़ा है भाई बस केवल उठाने की देर है जिसने

689
00:55:16,200 --> 00:55:20,320
शास्त्र उठाए नहीं ना कभी उनको ये लोग बर गलाते हैं उठाने

690
00:55:20,320 --> 00:55:24,440
की देर है यह भी नहीं कि आप सारे पढ़ डालो केवल उठा लो जो आगे

691
00:55:24,440 --> 00:55:28,480
जो विवरणिका होती है उसमें पढ़ लो उसमें ही आपको इतना

692
00:55:28,480 --> 00:55:33,040
भर्ग प्रमाण मिल जाएगा

693
00:55:33,040 --> 00:55:39,040
कि उसमें ही आपको इतना प्रमाण मिल जाएगा कि पूछो

694
00:55:43,760 --> 00:55:48,560
नहीं अब हम आ रहे हैं 1500

695
00:55:48,560 --> 00:55:54,560
67

696
00:55:57,800 --> 00:56:02,240
कोई आया क्या भाई दीपक कुमार

697
00:56:02,240 --> 00:56:07,520
जी अथवा जो अक्षत जी आए हैं य अपना चेहरा लेकर आए अता व्यर्थ

698
00:56:07,520 --> 00:56:11,600
का प्रयास करना बेकार है आप चेहरा लेकर आएंगे तो ही आपसे

699
00:56:11,600 --> 00:56:15,520
बात

700
00:56:15,520 --> 00:56:19,520
होगी यह कौन है यु आर्य तेरे में

701
00:56:19,520 --> 00:56:24,080
दम है तो हां तो आओ ना

702
00:56:24,080 --> 00:56:28,800
भाई यु

703
00:56:28,800 --> 00:56:32,800
आइए आप ऊपर आइए और चेहरा दिखाइए

704
00:56:32,800 --> 00:56:37,040
क्या हुआ कुछ कालिक लगी है चेहरे पर धो लीजिए चेहरा

705
00:56:37,040 --> 00:56:42,480
क्यों नहीं दिखा रहे कुछ हो गया था क्या भूतकाल में आपके

706
00:56:42,480 --> 00:56:46,840
साथ पकड़ लिए गए थे कहीं किसी अपराधिक

707
00:56:46,840 --> 00:56:51,040
कार्य उसमें गतिविधि में पकड़े गए थे क्या चेहरा दिखाइए आइए स्वागत

708
00:56:51,040 --> 00:56:55,280
है आपका सम्मानित जो जगह होती है संभ्रांत जगह

709
00:56:55,280 --> 00:56:59,320
जहां होती है वहां पर सब ब्रांतो की तरह जाइए ना

710
00:56:59,320 --> 00:57:03,720
चोरों से कायरों से बात नहीं करते हम वीरों से बात करते हैं

711
00:57:03,720 --> 00:57:08,080
यदि आपको लगता है कि आप सत्य के पक्षधर है तो उस जो सत्य

712
00:57:08,080 --> 00:57:12,480
है ना जिसकी आप रक्षा कर रहे हैं उससे थोड़ा बल एकत्रित करिए फिर

713
00:57:12,480 --> 00:57:14,920
आइए

714
00:57:14,920 --> 00:57:18,960
क्योंकि यदि आपको लगता है कि जिस सत्य की आप रक्षा कर रहे हैं

715
00:57:18,960 --> 00:57:22,960
उसके लिए अपने प्राणों को भी न्योछावर कर सकते हैं

716
00:57:22,960 --> 00:57:28,960
तो आइए

717
00:57:29,000 --> 00:57:35,000
क्योंकि हम इसी भाव से निकले

718
00:57:40,000 --> 00:57:44,440
हैं यहां कोई बिजनेस करने नहीं बैठे हैं

719
00:57:44,440 --> 00:57:48,480
य हाइपर क्वेस्ट की तरह पहले मूर्ति पूजा का समर्थन

720
00:57:48,480 --> 00:57:52,840
कर दिया मूर्ति पूजा की फोटो डाल दी फिर जो है मूर्ति

721
00:57:52,840 --> 00:57:57,160
पूजा के विरोध करने वालों को अपने चैनल पर बुला बुला के प्रमोट कर दिया

722
00:57:57,160 --> 00:58:02,960
ये बिजनेस है बिजनेस करने नहीं

723
00:58:02,960 --> 00:58:07,680
बैठे सहा नहीं गया था धर्म के ऊपर हो रहे आघात

724
00:58:07,680 --> 00:58:12,400
प्रहार को

725
00:58:12,400 --> 00:58:16,400
देखकर एक अलंकार समाजी आए हुए वो कह रहे हैं दम है तो मुझ में ले मैं

726
00:58:16,400 --> 00:58:20,640
चैलेंज करता हूं और उनके अंदर इतनी दम नहीं है कि माता-पिता से प्राप्त

727
00:58:20,640 --> 00:58:26,640
जो चेहरा है उसको दिखा सके समाज के सामने बताइए

728
00:58:26,920 --> 00:58:31,840
माता-पिता भी लज्जा का भाव अपने अंदर लाएंगे ऐसा हमने कौन किसको

729
00:58:31,840 --> 00:58:35,920
जन्म दे दिया जो ऐसे कार्य करके बैठा है जो अपना चेहरा

730
00:58:35,920 --> 00:58:41,920
तक नहीं दिखा पा रहा है समाज

731
00:58:44,240 --> 00:58:49,080
को यह आ गया अब इसमें क्या है महिषासुर

732
00:58:49,080 --> 00:58:53,080
के वध के लिए दोबारा से देवी का प्रादुर्भाव हो रहा है और कैसे हो

733
00:58:53,080 --> 00:58:57,240
रहा है तो 12वां स्

734
00:58:57,240 --> 00:59:01,360
बारवा स्कं है नहीं दसवा स्कं है बारवा अध्याय

735
00:59:01,360 --> 00:59:07,040
और उसमें श्लोक क्रमांक बता

736
00:59:07,040 --> 00:59:11,520
दूं 15 इस प्रकार सभी देवताओं

737
00:59:11,520 --> 00:59:16,440
के तेज से भगवती महे महेश मदनी देवी का आविर्भाव हुआ लो

738
00:59:16,440 --> 00:59:20,920
तो यहां पर आविर्भाव किससे हो गया

739
00:59:20,920 --> 00:59:25,240
मां भगवती का आविर्भाव किससे हो गया य पर ब्रह्मा विष्णु

740
00:59:25,240 --> 00:59:29,240
महेश और भी अनेकानेक देवताओं के तेज से हो गया लो

741
00:59:29,240 --> 00:59:33,320
इसको कहते हैं ईश्वर वही है जो कुछ भी कर सकता है यदि

742
00:59:33,320 --> 00:59:37,520
ईश्वर किसी नियम के नीचे है ईश्वर किसी नियम के नीचे

743
00:59:37,520 --> 00:59:42,040
है तो वह ईश्वर नहीं है आप यह है हमारा

744
00:59:42,040 --> 00:59:48,040
ईश्वर जो किसी भी नियम के नीचे नहीं आ सकता लाक

745
00:59:55,040 --> 00:59:58,280
दिखाओ

746
00:59:58,280 --> 01:00:02,040
हितेश

747
01:00:02,040 --> 01:00:06,680
जी जी हितेश शर्मा जी नमस्ते

748
01:00:06,680 --> 01:00:10,720
जय श्री राम जय श्री राम ज श्रीम जी भैया

749
01:00:10,720 --> 01:00:14,960
मैं देवी भागवत का ही बताना चाह रहा था कि

750
01:00:14,960 --> 01:00:19,040
जो नवम स्कंद है ना उसमें प्रमाण है कि

751
01:00:19,040 --> 01:00:23,400
शिवजी की अमृता दिखाई गई है उसम

752
01:00:23,400 --> 01:00:27,600
वो तो सभी कई जगह देवी भागवत में केवल वहीं पे नहीं बहुत जगह पे है

753
01:00:27,600 --> 01:00:30,840
बहुत जगह है अमरता

754
01:00:30,840 --> 01:00:35,080
शिवजी बस बहुत सारी जगह मतलब उसको आप गिन नहीं सकते

755
01:00:35,080 --> 01:00:38,120
इतनी जगह

756
01:00:38,120 --> 01:00:44,120
है हा जी तो अभी हम लोग ना

757
01:00:44,120 --> 01:00:48,160
अ अविनाशी हो गया और

758
01:00:48,160 --> 01:00:52,360
मां भगवती का प्रादुर्भाव भी हो गया अब मैं जरा कबीर जो शब्द

759
01:00:52,360 --> 01:00:56,440
है उस परे हम लोग बात करेंगे आप बता दीजिए मैं दिखा दूं आप आए हैं तो आप बहुत

760
01:00:56,440 --> 01:01:01,120
बता बता दीजिए बोल भया ये होगा

761
01:01:01,120 --> 01:01:06,720
श्रीमद् देवी भागवत का नवा स्कंद 21 वा

762
01:01:06,720 --> 01:01:10,840
अध्याय 2 अध्याय जिसमें कृष्ण भगवान से

763
01:01:10,840 --> 01:01:15,200
सृष्टि हो रही है वही है ना

764
01:01:15,200 --> 01:01:19,280
शंख चूड़ नामक देते हैं जो उनका और महादेव जी का

765
01:01:19,280 --> 01:01:22,080
युद्ध होता

766
01:01:22,080 --> 01:01:26,320
है अभी खुला था नौवा अध्याय थोड़ा पहले आ जाते न स्कंद

767
01:01:26,320 --> 01:01:30,560
खोला था ये बड़ा भारी है ना ये पुराण भारी है खोलने

768
01:01:30,560 --> 01:01:34,600
में टाइम लग जाता है इसी कारण

769
01:01:34,600 --> 01:01:38,760
से तो नहीं खोलते लोग और इसी कारण से संक्षिप्त वाला खोल लेते

770
01:01:38,760 --> 01:01:44,760
हैं वो हल्का जाने से पहले इतना कर

771
01:01:46,080 --> 01:01:50,080
जाऊ कहां है भाई निष्ठा पूर्वक

772
01:01:50,080 --> 01:01:54,480
माता जी ने दूध नहीं पिलाया क्या कहां गए विदों में प्रमाण है

773
01:01:54,480 --> 01:02:00,480
ओ कहां

774
01:02:16,600 --> 01:02:21,280
कौन सा इसका स्कंद का कौन सा है अ

775
01:02:21,280 --> 01:02:27,280
कावा अध्याय 21

776
01:02:42,560 --> 01:02:45,880
नौवे स्कंध

777
01:02:45,880 --> 01:02:49,600
का 21

778
01:02:49,600 --> 01:02:51,720
हां

779
01:02:51,720 --> 01:02:57,720
1352 24 से लेकर 27 तक होगा

780
01:03:00,080 --> 01:03:04,160
कौन सा श्लोक है 24 से लेकर

781
01:03:04,160 --> 01:03:08,560
परमात्मा श्री कृष्ण का परम भक्त शंख चूड़ आनंद पूर्वक शयन

782
01:03:08,560 --> 01:03:13,200
करने के बाद ब्रह्म महूरत में ध्यान प्रियो उपरांत अपनी

783
01:03:13,200 --> 01:03:17,400
पुष्प सया से पूर्ववत उठा और स्वक्ष जल से

784
01:03:17,400 --> 01:03:22,280
ये शंख चूड़ का मामला चल रहा है और शिवजी से इसका युद्ध होना है

785
01:03:22,280 --> 01:03:28,280
श्लोक क्रमांक क्या कहा आपने 24 भैया

786
01:03:28,640 --> 01:03:33,320
2 हा तो भया इसमें

787
01:03:33,320 --> 01:03:37,720
मतलब शंख चूड़ की बता

788
01:03:37,720 --> 01:03:41,760
शांत एवं भक्तों के मृत्यु भय को दूर करने में पूर्ण समर्थ है तपस्या का

789
01:03:41,760 --> 01:03:46,120
फल एवं समस्त प्रकार की संपदा हों से उसे भरपूर रखना स्वाभाविक

790
01:03:46,120 --> 01:03:51,000
गुण है वे आशुतोष कहे जाते हैं

791
01:03:51,000 --> 01:03:55,920
हां जी

792
01:03:55,920 --> 01:04:00,040
उस समय भगवान शंकर बट वृक्ष के नीचे विराजमान थे उनका

793
01:04:00,040 --> 01:04:04,200
विग्रह करोड़ों सूर्य के समान चमक रहा था वह योगासन की मुद्रा

794
01:04:04,200 --> 01:04:08,360
में बैठे हुए थे उनका मुख मंडल मुस्कान से भरा था ब्रह्म तेज

795
01:04:08,360 --> 01:04:12,600
से उ भाषित वे इस प्रकार प्रदीप्त हो रहे थे मानो शुद्ध स्टिक

796
01:04:12,600 --> 01:04:17,320
मणि चमक रही हो उनके हाथ में त्रिशूल और पट्टी

797
01:04:17,320 --> 01:04:21,320
तथा शरीर एट वो लाइन क्या है वो

798
01:04:21,320 --> 01:04:25,720
लाइन बता दीजिए मैं ढूंढ ा भैया ये 24 वा है भक्त

799
01:04:25,720 --> 01:04:29,960
मृत्यु हरम शांतम गौरी कांम मनोहर तप साम फल

800
01:04:29,960 --> 01:04:35,000
दाताराम दाताराम सर्व संपदा अपने भक्तों की एक मिनट

801
01:04:35,000 --> 01:04:39,320
में अपने भक्तों की मृत्यु तक को टाल देने वाले शांत स्वभाव

802
01:04:39,320 --> 01:04:43,640
मनोहर तपस्या का फल तथा सभी प्रकार की संप्रदाय

803
01:04:43,640 --> 01:04:47,840
प्रदान करने वाले शीघ्र प्रसन्न होने वाले प्रसाद मुख मंडल वाले

804
01:04:47,840 --> 01:04:53,840
भक्तों पर अनुग्रह करने के लिए व्याकुल विश्वनाथ विश्व बीज विश्वरूप

805
01:04:55,760 --> 01:05:00,280
कारणों के भी कारण नरक समुद्र समुद्र

806
01:05:00,280 --> 01:05:04,320
से पार करने वाले ज्ञान प्रद ज्ञान बीच ज्ञानं था सनातन

807
01:05:04,320 --> 01:05:08,400
उन गोरी पति महादेव को देखकर उस दानेश्वर शंख चूड़ने विमान

808
01:05:08,400 --> 01:05:12,760
से उतरकर सबके साथ वहां विद्यमान शंकर को सिर झुकाकर भक्ति

809
01:05:12,760 --> 01:05:16,800
पूर्ण पूर्वक प्रणाम किया मतलब भैया इसमें बताने का मतलब यह है

810
01:05:16,800 --> 01:05:21,120
कि मृत्यु को भी टाल सकते हैं जो और सनातन लिखा है उनको तो वो

811
01:05:21,120 --> 01:05:26,240
अविनाशी अपने आप हो गे

812
01:05:26,240 --> 01:05:30,680
शाश्वत धर्म स्वरूप ज्ञान के बीज भू और

813
01:05:30,680 --> 01:05:36,680
साक्षात ज्ञानानंद है हा जी

814
01:05:36,840 --> 01:05:39,840
हासे

815
01:05:39,840 --> 01:05:44,120
ब फर आगे आगे जाकर जो न स्कंद का

816
01:05:44,120 --> 01:05:48,360
21 वा श्लोक मतवा अध्याय है उसी का 47

817
01:05:48,360 --> 01:05:52,520
और 48 वा जो श्लोक है वही यह बताया गया है कि शिवजी

818
01:05:52,520 --> 01:05:56,760
मृत्युंजय है और उन्होंने असंख्य प्र देख लिए

819
01:05:56,760 --> 01:06:01,040
अभी तक और आगे भी वह देखेंगे ऐसे करके क्योंकि मेरे पास गीता

820
01:06:01,040 --> 01:06:05,040
प्रस गोरखपुर का है देवी भागवत तो

821
01:06:05,040 --> 01:06:09,400
उससे फर्क पड़ रहा होगा थोड़ा नहीं संस्कृत

822
01:06:09,400 --> 01:06:15,400
श्लोक सेम बोला था आपने वो शब्दार्थ में अंतर

823
01:06:17,200 --> 01:06:21,680
है क्या लिखा है आपने क्या बोला आपने

824
01:06:21,680 --> 01:06:25,800
ये है

825
01:06:25,800 --> 01:06:31,800
47 और 48

826
01:06:33,320 --> 01:06:37,440
वा 2 अध्याय हा

827
01:06:37,440 --> 01:06:42,240
जीी 21 अध्याय में है

828
01:06:42,240 --> 01:06:46,240
47 सॉरी गय 57 से होगा भया य 47 बोल

829
01:06:46,240 --> 01:06:50,240
दिया 57 होगा एक निश्चित

830
01:06:50,240 --> 01:06:54,520
समय पर सभी लोग नष्ट हो जाते हैं यहां से

831
01:06:54,520 --> 01:06:59,000
जी काले नति विश्वानी

832
01:06:59,000 --> 01:07:03,640
काल परम ब्रम परमात्मा से काल की क्षमता की जा सकती है

833
01:07:03,640 --> 01:07:07,800
हा जी उन्हीं की कृपा से मुझे मृत्युंजय होने

834
01:07:07,800 --> 01:07:11,920
का अवसर प्राप्त हुआ क्योंकि जिसे कोई नहीं दे सकता उस प्राकृत

835
01:07:11,920 --> 01:07:16,080
प्रलय को मैं बारबार देखता हूं अतः मेरे विचार से वे

836
01:07:16,080 --> 01:07:21,040
परमेश्वर प्रकृति रूप है उन्हीं को पुरुष भी कहा जाता है तो यहां पर

837
01:07:21,040 --> 01:07:25,800
मेरे ख्याल से इनकी कृष्ण की वंदना हो रही है इनके द्वारा और यह अविनाशी

838
01:07:25,800 --> 01:07:31,680
रहे हां

839
01:07:31,680 --> 01:07:35,880
जी क्योंकि यहां ऐसा लिखा हुआ है कि मृत्युंजय है और साथ में य

840
01:07:35,880 --> 01:07:40,200
लिखा है कि मैंने असंख्य प्राकृत प्रलय देखे हैं तथा आके भी बारबार

841
01:07:40,200 --> 01:07:44,240
देखूंगा और साथ में भैया जैसे आप अद्वैद के लिए बोलते है वैसे यहां

842
01:07:44,240 --> 01:07:49,440
भी लिखा है कि परमेश्वर ही आत्मा है और व ही जीव है तो

843
01:07:49,440 --> 01:07:53,960
अगर परमात्मा की मृत्यु हो रही है तो इसमें तो दुख होना नहीं चाहिए वैसे

844
01:07:53,960 --> 01:07:58,040
भी और परमात्मा ही जीवित है अमर है तो वो तो आपने

845
01:07:58,040 --> 01:08:02,800
पहले ही बताया है कई बार

846
01:08:02,800 --> 01:08:07,520
जी बहुत सारे हैं परमात्मा और

847
01:08:07,520 --> 01:08:11,760
देवी और इनकी एकता का बहुत जगह निरूपण हुआ है

848
01:08:11,760 --> 01:08:15,920
देवी परब्रह्म से भिन्न नहीं है अतु परमेश्वर परमात्मा नित्य सनातन

849
01:08:15,920 --> 01:08:20,320
सच्चिदानंद स्वरूप परमात्मा तत्व ही है लो

850
01:08:20,320 --> 01:08:25,600
ऋगवेद 10 125 में बहुत जगह

851
01:08:25,600 --> 01:08:31,600
गिनते गिनते थक

852
01:08:32,200 --> 01:08:36,200
जाएंगे लेकिन यह पढ़ना नहीं चाहते हैं इनको

853
01:08:36,200 --> 01:08:40,240
यह बताया गया है कि सब काल ने बाकी बोला है जो

854
01:08:40,240 --> 01:08:44,280
हमने बता दिया है वही भर सही है

855
01:08:44,280 --> 01:08:48,480
काल ने बोला है तो ऐसा ग्रंथ बोलो लाओ ना जो काल ने

856
01:08:48,480 --> 01:08:53,080
बिल्कुल ना बोला हो पूर्णत विश्वास होऐ

857
01:08:53,080 --> 01:08:57,680
ग नहीं ते ग्रंथ को क्यों देख रहे काल ने बोल दिया

858
01:08:57,680 --> 01:09:01,840
भाई भगवान के मंदिर में क्या एक एक एक और झूठा रख

859
01:09:01,840 --> 01:09:05,170
दोगे

860
01:09:05,170 --> 01:09:11,170
[संगीत]

861
01:09:14,440 --> 01:09:18,640
क्या अब नवरात्र पूजा रुकवाने वाले

862
01:09:18,640 --> 01:09:22,840
रामपाल के चेले अब लाइव पर क्यों नहीं

863
01:09:22,840 --> 01:09:27,040
आते नहीं है भाई निष्ठा पूर्वक

864
01:09:27,040 --> 01:09:31,160
निष्ठा पूर्वक का अभाव

865
01:09:31,160 --> 01:09:35,320
है अभी अभी तो इसमें भी आएंगे

866
01:09:35,320 --> 01:09:39,320
महाकुंभ में भी पधारेंगे लोग एक भाई साहब आए हैं इनका नाम है

867
01:09:39,320 --> 01:09:44,040
राम कुमार जी जय श्री राम राम कुमार

868
01:09:44,040 --> 01:09:50,040
जी चेहरा

869
01:09:50,520 --> 01:09:56,520
दिखाए चेहरा दिखाए राम कुमार जी

870
01:09:58,400 --> 01:10:04,400
ठीक है हमें हटाना पड़ेगा क्षमा

871
01:10:06,920 --> 01:10:11,000
करिएगा तो अब मैं उस एक टॉपिक पर बात

872
01:10:11,000 --> 01:10:15,280
करूंगा जरा

873
01:10:15,280 --> 01:10:20,240
कि क्या वेदों में जो कवीर शब्द आया है

874
01:10:20,240 --> 01:10:25,600
उसको हम लोग कबीर से जोड़े कि ना जोड़ इस पर आज मैं बात करू

875
01:10:25,600 --> 01:10:29,640
नहीं जोड़ना चाहिए सबसे पहली बात है कि वेदों

876
01:10:29,640 --> 01:10:33,760
में कबीर शब्द नहीं आया है कवि शब्द आया कवि

877
01:10:33,760 --> 01:10:38,680
और जब किसी और शब्द के साथ में लिखा जाता है संधि होती है

878
01:10:38,680 --> 01:10:42,920
उसके कारण वहां पर कबीर रा जो है उद भाषित

879
01:10:42,920 --> 01:10:47,120
हो जाता है कवि का अर्थ है सर्वज्ञ क्रांत

880
01:10:47,120 --> 01:10:51,600
दर्शी सीमाओं के पार भी देख सकने वाला मतलब परमेश्वर का एक गुण है

881
01:10:51,600 --> 01:10:55,680
कवि कवि होना जैसे सर्वशक्तिमान होना

882
01:10:55,680 --> 01:11:00,240
का एक गुण है व्यापक होना सर्वव्यापक होना परमेश्वर का एक वो

883
01:11:00,240 --> 01:11:05,000
है तो इसी तरीके से कवि होना भी

884
01:11:05,000 --> 01:11:05,680
एक गुण

885
01:11:05,680 --> 01:11:09,880
मतलब भगवान की एक शक्ति तो अब बात य आती है

886
01:11:09,880 --> 01:11:14,080
कि पहली बात यह है कि जब

887
01:11:14,080 --> 01:11:18,320
कवि शब्द जो आया है वहां से करेक्ट

888
01:11:18,320 --> 01:11:22,640
कबीर नहीं आ रहा है मगर हम फिर भी कह रहे हैं कि वेदों में प्रमाण है

889
01:11:22,640 --> 01:11:26,760
कबीर भगवान है मगर व पर वेदों में स्पष्ट रूप

890
01:11:26,760 --> 01:11:30,960
से भगवती का आया है देवी का आया है विष्णु

891
01:11:30,960 --> 01:11:35,000
का आया है रुद्र का आया है शिव का आया है गणपति का

892
01:11:35,000 --> 01:11:39,120
आया है स्पष्ट आया है तो यह क्यों नहीं कह रहे कि वेदों में प्रमाण है गणपति

893
01:11:39,120 --> 01:11:43,160
भगवान अब यह यह कहते हैं कि जिस गणपति की बात वेदों में हो रही

894
01:11:43,160 --> 01:11:47,560
है वह गणपति कबीर ही है आदि गणेश

895
01:11:47,560 --> 01:11:51,960
आदि सदाशिव और या फिर आदि

896
01:11:51,960 --> 01:11:56,560
विष्णु आदि राम यह कहते हैं पहली बात तो यह है

897
01:11:56,560 --> 01:12:01,440
कि वोह जो कबीर है वो आदि राम आदि विष्णु आदि

898
01:12:01,440 --> 01:12:06,120
शिव सदाशिव है कि नहीं यह तो बात बाद में हम देखेंगे

899
01:12:06,120 --> 01:12:10,520
पर पहले अभी अभी क्या बात है

900
01:12:10,520 --> 01:12:15,040
अभी की बात यह है कि अगर मान भी लिया जाए

901
01:12:15,040 --> 01:12:19,320
कि है थोड़ी देर के लिए यह मत सोचना कि मान लिया थोड़ी

902
01:12:19,320 --> 01:12:20,760
देर के लिए दुर्जन तोष न्याय

903
01:12:20,760 --> 01:12:25,400
कहते हैं इसे सब नहीं पढा होगा तो थोड़ी देर के लिए अगर मान भी लिया जाए

904
01:12:25,400 --> 01:12:29,760
तो मेरे भाई तुम एक बार कहो तो वेदों में प्रमाण है सदा सेव भगवान है

905
01:12:29,760 --> 01:12:34,080
वेदों में प्रमाण है गणेश जी भगवान है यह क्यों नहीं कहते क्योंकि दिक्कत

906
01:12:34,080 --> 01:12:38,400
हो जाएगी मामला फेल हो जाएगा दुकाने बंद हो जाएंगी दूसरी

907
01:12:38,400 --> 01:12:42,520
बात अब यह कहते हैं अब इसमें इनका काउंटर क्वेश्चन आता है जब

908
01:12:42,520 --> 01:12:47,040
इनसे पूछा जाता है कि कवि को कबीर क्यों कह रहे हो

909
01:12:47,040 --> 01:12:51,360
अब उसमें यह आता है कि जैसे तुम प्यार से कृष्ण को कहाना

910
01:12:51,360 --> 01:12:55,400
कहते हो वैसे ही हम लोग कवि को कबीर कहते हैं तो भाई हम तो

911
01:12:55,400 --> 01:12:59,800
है ना आपकी नजरों में हमारी चीजों को देख के तुम सीखो ग

912
01:12:59,800 --> 01:13:04,520
क्या तुम तो शास्त्रों पर चलने वाले हो ना संक्षिप्त

913
01:13:04,520 --> 01:13:08,560
संक्षिप्त शास्त्र संक्षिप्त शास्त्रों पर चलने वाले हो तो

914
01:13:08,560 --> 01:13:12,840
हमें देख के क्यों सीख रहे हो आपके नियम कहां है कवि

915
01:13:12,840 --> 01:13:16,960
कबीर कैसे बना और हमने कभी नहीं कहा वेदों में प्रमाण है काना भगवान है हम

916
01:13:16,960 --> 01:13:21,000
रस में काना गाते हैं जब हम वेदों की बात करते तो हम कहते वेदों में प्रमाण है

917
01:13:21,000 --> 01:13:26,720
विष्णु भगवान है श्रुति में प्रमाण है कृष्ण भगवान

918
01:13:26,720 --> 01:13:30,720
श्रुति में प्रमाण है रुद्र भगवान है शिव भगवान है हम तो

919
01:13:30,720 --> 01:13:36,000
नहीं कहते काना भगवान है वो तो हम जब गाना गाते गा लेते

920
01:13:36,000 --> 01:13:37,000
हैं

921
01:13:37,000 --> 01:13:41,120
ठीक है तो आप पहली बात तो यह है कि हम

922
01:13:41,120 --> 01:13:45,480
यह कहते नहीं है दूसरी बात य कि आप हमसे कब से सीखने लगे आप तो हमें सिखाने

923
01:13:45,480 --> 01:13:49,480
आए हो ना आप तो हमें सिखाने आए हो ना तो

924
01:13:49,480 --> 01:13:53,840
आप हमसे क्यों सीख रहे हो आपका प्रमाण कहां है

925
01:13:53,840 --> 01:13:58,120
कि कवि को कबीर क्यों कहा जाए इस बारे में हमसे सीखो

926
01:13:58,120 --> 01:14:02,880
तो हमसे बाकी की चीज क्यों नहीं

927
01:14:02,880 --> 01:14:06,920
सीखो अब एक बात और आती है यह लोग कहते हैं

928
01:14:06,920 --> 01:14:10,960
कि परमात्मा ऐसा होगा ऐसे जगमगाए सात में आसमान में बैठ जाएगा यह सब

929
01:14:10,960 --> 01:14:15,000
क्योंकि कबीर ने किया एक अफ्रीका का बच्चा है काले कलर

930
01:14:15,000 --> 01:14:19,800
का उसने भी किया है तो उसको मान ले बताइए

931
01:14:19,800 --> 01:14:24,240
अश्वेत है वो अफ्रीका में नाइजीरिया

932
01:14:24,240 --> 01:14:28,360
में यहां पर रहता है और वो भी वो सारे वो कवि वो

933
01:14:28,360 --> 01:14:33,240
काव्य रचना भी करता है वो वो सारे गुण है उसमें

934
01:14:33,240 --> 01:14:37,280
जो सारे गुण इन्होंने बताए सारे गुण है अब बताओ उसको भगवान

935
01:14:37,280 --> 01:14:41,480
मान लोगे उस किसी भी एंटिटी

936
01:14:41,480 --> 01:14:45,480
को जब वेदों में आने वाले किसी तत्व से जोड़ा

937
01:14:45,480 --> 01:14:49,520
जाएगा तो वहां पर यही वो है इस

938
01:14:49,520 --> 01:14:52,040
ये कैसे सिद्ध होगा कि यही वो है

939
01:14:52,040 --> 01:14:56,360
क्योंकि ये वैसा वैसा काम कर रहा है दिख रहा है इसलिए मान ले नहीं

940
01:14:56,360 --> 01:15:00,400
किसी ना किसी साक्ष्य की आवश्यकता होगी कि हां यही वह है

941
01:15:00,400 --> 01:15:04,600
उसको कहते हैं गुरु जिन परंपरा

942
01:15:04,600 --> 01:15:08,680
प्राप्त आचार्यों से आपको वेदा दि शास्त्र प्राप्त

943
01:15:08,680 --> 01:15:12,920
हुए वही परंपरा प्राप्त आचार्य य बता सकते हैं कि

944
01:15:12,920 --> 01:15:16,920
इन शास्त्रों में दिया गया अवतारों का जो वर्णन है भगवत स्वरूपों का जो वर्णन

945
01:15:16,920 --> 01:15:21,680
है वह भगवत स्वरूप यहां जो संसार में आए हुए व्यक्तित्व उनमें से कौन

946
01:15:21,680 --> 01:15:25,800
है नहीं तो आप प्रमाण बताओ भाई आप कह रहे हो कबीर

947
01:15:25,800 --> 01:15:29,840
के अंदर य क्वालिटिया थी इसलिए वो जो वेदों में बात व जो शास्त्रों में बात हो रही

948
01:15:29,840 --> 01:15:34,040
है व कबीर की हो रही है मैं कह रहा हूं एक और एक और है मेरे पास व्यक्ति

949
01:15:34,040 --> 01:15:38,040
उसकी हो रही है और आदि कवि कौन से कहे

950
01:15:38,040 --> 01:15:42,280
गए हैं वाल्मीकि आदि काव्य कौन सा है संसार

951
01:15:42,280 --> 01:15:47,040
का वाल्मीकि रामायण आदि कभी कहा गया उन्हें जगह जगह

952
01:15:47,040 --> 01:15:51,200
उनको मान लो फिर ईश्वर वाल्मीकी जी को नहीं मान

953
01:15:51,200 --> 01:15:55,160
पाओगे प्रॉब्लम है

954
01:15:55,160 --> 01:15:59,160
तो ना तो तो पहला पहली बात कि कवि और कबीर

955
01:15:59,160 --> 01:16:03,160
में अंतर है कबीर जो रा आ रहा है वह संधि होने के

956
01:16:03,160 --> 01:16:07,400
का कारण आ रहा है अगर कबीर को तुम कबीर कह रहे हो तो कैसे कह रहे हो

957
01:16:07,400 --> 01:16:11,400
हमें देख के कह रहे हो तो हमारी बाकी की बातें क्यों नहीं मान रहे हो हमें देख के कह रहे हो तो हमारे

958
01:16:11,400 --> 01:16:15,600
को तो तुम गलत मानते हो शास्त्रों पर ना चलने वाला मानते हो तो हमसे क्यों सीख

959
01:16:15,600 --> 01:16:18,200
रहे हो कुछ

960
01:16:18,200 --> 01:16:24,200
भी और

961
01:16:27,520 --> 01:16:30,840
जय श्रीी रामे राधे

962
01:16:30,840 --> 01:16:35,200
धे तो हमसे क्यों सीख रहे हो कुछ भी आपको

963
01:16:35,200 --> 01:16:39,840
हमारी आवश्यकता क्यों पड़ रही है आप अपना वो बताओ ना सिद्धांत

964
01:16:39,840 --> 01:16:43,920
जिसके आधार पर आप कबीर को वो कर दो प्रामाणिक नहीं

965
01:16:43,920 --> 01:16:47,960
है उसके बाद मैं मान लेता हूं कि कबीर में वह सारे गुण है

966
01:16:47,960 --> 01:16:52,040
थोड़ी देर के लिए जो आप बता रहे हो मैं मान लेता हूं थोड़ी देर

967
01:16:52,040 --> 01:16:56,240
के लिए वो सारे गुण है फिर भी उसी को क्यों माना जा मैं भी तो कह रहा हूं कि दूसरी

968
01:16:56,240 --> 01:17:01,000
जगह कोई और इंसान ऐसा है फिर उसको क्यों नहीं मानोगे बिल्कुल अभी

969
01:17:01,000 --> 01:17:05,440
पांच लोग और खड़े हो जाएंगे कि हमारी भी जानकारी में हमारे दादाजी 80 साल के उनके दांत

970
01:17:05,440 --> 01:17:09,760
सारे गिर चुके हैं और वो उनके अंदर भी वही सारे गुण है कबीर वाले

971
01:17:09,760 --> 01:17:13,760
वो क्यों नहीं मानोगे इसका मतलब हा हमें

972
01:17:13,760 --> 01:17:17,960
एक जगह आना पड़ेगा जिसकी हम गवाही मान सके वो प्रमाण आपके

973
01:17:17,960 --> 01:17:22,080
पास नहीं है कि यही वो कबीर है जिसके बारे में शास्त्रों बात

974
01:17:22,080 --> 01:17:22,580
समझे

975
01:17:22,480 --> 01:17:26,840
उस दिन आप उस दिन आपके वीडियो में आए थे वो कह रहे थे ना कि जो कवियों

976
01:17:26,840 --> 01:17:30,840
की तरह आचरण करता हो तो कवियों की तरह आचरण कौन करता है अरे भाई तो कवि

977
01:17:30,840 --> 01:17:34,880
तर आचरण तो बहुत लोगों ने किया रादास ने भी कि तुलसीदास

978
01:17:34,880 --> 01:17:38,920
जी ने किया सबने किया मीराबाई ने किया य सब के सब इन सब की वाणी पढ़ी है ब्रह्म

979
01:17:38,920 --> 01:17:42,920
विद्या ही है तुलसीदास जी ने कभी तर आचरण नहीं किया उनकी पूरी वाणी ब्रह्म विद्या ही

980
01:17:42,920 --> 01:17:47,160
तो है और है क्या क्या रादास जी ने कभी जैसा आचरण

981
01:17:47,160 --> 01:17:51,320
नहीं किया क्या सूरदास ने सूर सागर पूरा ग्रंथ बना हुआ उन्होने कवि की तर आचरण नहीं किया

982
01:17:51,320 --> 01:17:57,320
क्या मीराबाई ने कभ की तर आचरण नहीं किया तो फिर क को

983
01:17:58,680 --> 01:18:02,720
जाए बो य किस आधार पर माना जाए कवियों की तर आचरण

984
01:18:02,720 --> 01:18:07,480
जो करता है क बहुत हु बहु ने किया है कवियों

985
01:18:07,480 --> 01:18:12,080
का चंद कबीर से पहले के उनको ही मान लो फर

986
01:18:12,080 --> 01:18:16,560
अरे मैं कह रहा हूं आदि कवि तो हमारे वाल्मीकि रामायण के व है ना

987
01:18:16,560 --> 01:18:20,800
रचता और क्या सबसे आदि क तो रामायण ही है सबसे पहला लोक

988
01:18:20,800 --> 01:18:25,240
ही लिखा वाल्मीकि जीने उनको मान लो भाई एक उनका

989
01:18:25,240 --> 01:18:29,560
जी कबीर दास जी का जो जन्म हुआ है वो किसी

990
01:18:29,560 --> 01:18:33,800
माता पिता के गर्भ से नहीं हुआ वो कमल के फूल से हुआ है तो एक उस विषय

991
01:18:33,800 --> 01:18:37,880
को मा हम भी एक ऐसे व्यक्ति को जानते हैं जिसका जो प्रादुर्भाव हुआ है

992
01:18:37,880 --> 01:18:41,880
कमल के फूल से हुआ है बोलो अब क्या करें हम जानते दूसरा चीज

993
01:18:41,880 --> 01:18:46,000
जो इनकी मृत्यु हुई है तो स शरीर ये गए ये

994
01:18:46,000 --> 01:18:50,360
ये दो विषय को लेके चलते हैं मतलब ऐसे को

995
01:18:50,360 --> 01:18:56,360
जानते हम ऐसे को जानते हैं जो स शरीर गए हैं अब बताइए भाई

996
01:18:57,320 --> 01:19:01,320
देखिए कुल मिला के बात ये आती है किसी की वाणी हमारे लिए प्रमाण

997
01:19:01,320 --> 01:19:05,840
क्यों होगी क्यों माने

998
01:19:05,840 --> 01:19:10,040
ों माने हमारे गुरुजन है जिनसे हमें शास्त्र प्राप्त

999
01:19:10,040 --> 01:19:14,200
हुए उनकी गवाही मान्य होगी अगर हम उनको नहीं मानेंगे तो उन शास्त्रों को कैसे

1000
01:19:14,200 --> 01:19:18,240
मानेंगे शिवांश भैया शिवांश भया कबीर जी के

1001
01:19:18,240 --> 01:19:22,560
बारे में ऐसा भी लिख के आता है कि मसी कागज यो नहीं कलम गई नहीं हाथ

1002
01:19:22,560 --> 01:19:26,800
मतलब कबीर दास जी ने जीवन में कभी ना तो कागज छुआ है ना कलम छुआ है ये प्रमाणिक

1003
01:19:26,800 --> 01:19:30,960
है उन्होंने खद से कुछ लिखा ही नहीं ये आप पढ़ लीजिए बड़े

1004
01:19:30,960 --> 01:19:35,160
बड़े पीएचडी स्कलर लोग होते हैं इस बात को पढ़ते हैं कोट करते हैं इस लाइन को कि मसी

1005
01:19:35,160 --> 01:19:39,400
कागज छु नहीं कलम गई नहीं हाथ हाथ से कभी का कागज छुआ नहीं कलम छुआ

1006
01:19:39,400 --> 01:19:44,160
नहीं तो दूसरे व्यक्ति ने लिखा कबीर सागर जिसने भी लिखा वाला

1007
01:19:44,160 --> 01:19:48,240
वो वाला दोहा बताओ वो उसम जो कबीर कुत्ता राम का वो क्या है बोला उन्होने

1008
01:19:48,240 --> 01:19:52,480
वो दोहा है प्रमाण है कबीरा कुत्ता राम का मतिया मेरो नाम गले

1009
01:19:52,480 --> 01:19:56,920
राम की जेवण जित खोजे तित जा ज ख जाऊ

1010
01:19:56,920 --> 01:20:01,160
उन्होने स् उन्होंने स्वयं को कुत्ता कहा माना

1011
01:20:01,160 --> 01:20:05,440
सु जैसे य ब्रह्मा विष्णु महेश भगवती की पूजा करते समय

1012
01:20:05,440 --> 01:20:09,960
अ अनन्य का भाव के प्रकट करने के लिए कह रहे आईम नथिंग

1013
01:20:09,960 --> 01:20:12,760
मेरा जीवन और मरण होता है वो कह दे रहे हैं ठीक है

1014
01:20:12,760 --> 01:20:16,800
तो उनकी बात को आपने सत्य मान लिया बिल्कुल कि हा भैया य जो है जीवन मरण होता है

1015
01:20:16,800 --> 01:20:20,880
अविनाशी नहीं है बस उसी बात को बाकी सब जगह लिखा विनाशी उससे नहीं अब

1016
01:20:20,880 --> 01:20:25,080
मैं पूछ रहा हूं क्या यहां से जब वो अपने आप को कुत्ता कह रहे तो कुत्ता

1017
01:20:25,080 --> 01:20:29,200
माने उन्हे बताइए हमसे तो नहीं कहा जाएगा कबीर कुत्ता है आप

1018
01:20:29,200 --> 01:20:33,360
क हमने तो बनाया नहीं य दोआ हमने बनाया है क्या और इस

1019
01:20:33,360 --> 01:20:37,760
प्रकार की पंक्तियां इस प्रकार की पंक्तिया से बचते

1020
01:20:37,760 --> 01:20:42,040
हैं हम बोलने से कि हमें ऐसा बोलने की जगह बोलना पड़ जाए

1021
01:20:42,040 --> 01:20:46,360
हमारे सनातन धर्म में तो बड़ा आदर है कबीर जी का हमारे ऐसा माना जाता हैलिए

1022
01:20:46,360 --> 01:20:50,400
मैंने एक अच्छा सुनिए इसीलिए मैंने एक दिन कह दिया कि हम भैया उस कबीर को जानते

1023
01:20:50,400 --> 01:20:54,440
हैं जिसने अपने आप को भगवान नहीं क राम का भक्त तो उसके भी बात का बतंग बना

1024
01:20:54,440 --> 01:20:58,840
र तुम्ह इतना ही नहीं पता हम किस कबीर की पूजा करते हैं अरे भैया तुमने एक नया

1025
01:20:58,840 --> 01:21:03,000
नया कबीर बनाया है तुमने वो कबीर जिसने स्वयं को परमात्मा

1026
01:21:03,000 --> 01:21:07,480
कहा हम नहीं जानते उसे हम उसको जानते जो राम का भक्त था

1027
01:21:07,480 --> 01:21:11,520
जो राम का कुत्ता था अब हमारे यहां

1028
01:21:11,520 --> 01:21:15,520
देवी पुराण में भागवत पुराण में वर्णन है कि देवी दुर्गा जी ने महिषासुर का

1029
01:21:15,520 --> 01:21:20,000
वध किया अब ऐसे भी लोग है क मसर का पूजा करेंगे वो राजा है हमारे

1030
01:21:20,000 --> 01:21:25,600
तो अपने मन से कोई कुछ भी बनाले इसका क्या मतलब है

1031
01:21:25,600 --> 01:21:30,120
की पूजा हो रही है हमारे देश में छत्तीसगढ़ में

1032
01:21:30,120 --> 01:21:34,880
विरोध करते हैं विरोध करते हैं छत्तीसगढ़ में बात

1033
01:21:34,880 --> 01:21:39,160
रहे अपने को भगवान श्री कृष्ण का वंश मानते हैं जी जी

1034
01:21:39,160 --> 01:21:43,880
म की पूजा कर रहे आज मैंने देख

1035
01:21:43,880 --> 01:21:48,160
यादव नाम से देखा था अरे वो महिषासुर की पूजा कर रहे कह रहे

1036
01:21:48,160 --> 01:21:52,280
मसर जी हमारे आराध्य है महिष सर जिनका वध

1037
01:21:52,280 --> 01:21:56,480
किया कह रहे हिंदू लोग अपमान कर रहे हमारे पूर्वज जीय

1038
01:21:56,480 --> 01:22:00,680
है आदिवासी क्षेत्र में है

1039
01:22:00,680 --> 01:22:05,440
दूसरा चीज वो भी विरोध कर रहे

1040
01:22:05,440 --> 01:22:09,800
हैं आ बोते दीपक जी आपका

1041
01:22:09,800 --> 01:22:14,960
परिचय जय श्री

1042
01:22:14,960 --> 01:22:17,680
राम

1043
01:22:17,680 --> 01:22:19,840
क्या

1044
01:22:19,840 --> 01:22:24,760
क्या मेरा नाम दीपक है मैं नोएडा से हूं

1045
01:22:24,760 --> 01:22:29,040
आध्यात्मिक बैकग्राउंड क्या है आपका

1046
01:22:29,040 --> 01:22:35,040
मैं जगतगुरु रामपाल जी महाराज जी के शिष्य

1047
01:22:36,640 --> 01:22:41,240
हूं अच्छा बताइए क्या कहना है आपको

1048
01:22:41,240 --> 01:22:45,840
बो नहीं आपको पूछना क्या है यह बताइए

1049
01:22:45,840 --> 01:22:50,400
या फिर मैं बोलू आपको नहीं पता मुझे क्या पूछना है

1050
01:22:50,400 --> 01:22:54,920
नहीं मैं बोलू क्या फिर कबीर सर्व शक्तिमान है क्या

1051
01:22:54,920 --> 01:22:59,080
नहीं आप जिस प्रश्न परी डिबेट कर रहे थे मैं उसी प्रश्न पर आऊंगा उसी टाइम से मुझे ड

1052
01:22:59,080 --> 01:23:03,520
नहीं किया जा रहा था आप चेहरा लेक नहीं आए थे

1053
01:23:03,520 --> 01:23:07,840
हां हां वो चेहरा उस टाइम में ऐसा है मेरा परमिशन नहीं था ना समस इंटरनेट

1054
01:23:07,840 --> 01:23:12,720
का उससे परमिशन नहीं वो आपका प्रॉब्लम ठीक है ओके

1055
01:23:12,720 --> 01:23:16,720
मैं यह कहता हूं देवी भागवत के तीसरे सेकंड में 123 नंबर

1056
01:23:16,720 --> 01:23:20,600
पेज पर लिखा है मैं ब्रह्मा विष्णु हम सभी के अभ भाव

1057
01:23:20,600 --> 01:23:24,760
माने जन्म तथा त्र भाव माने मृत्यु हुआ करता है क्या यह गलत लिखा है य

1058
01:23:24,760 --> 01:23:29,640
देवी भागवत में मैं पूछ रहा हूं कबीर ने कहा मैं कुत्ता हूं ये गलत है

1059
01:23:29,640 --> 01:23:34,720
कहां पे कहा है मुझे प्रमाण दिखाइए आप इस चीज का प्रमाण दिखाओ भैया इने

1060
01:23:34,720 --> 01:23:38,760
दिखाइए पर वो कबीर सागर में लिखा होना चाहिए बाकी जगह लिखा होगा तो

1061
01:23:38,760 --> 01:23:43,000
मैं नहीं मानूंगा उस चीज को तो फिर ये आपकी प्रॉब्लम है

1062
01:23:43,000 --> 01:23:47,040
आप जिसे प्रमाण मानते हो हम उसे नहीं मानते हम जिसे मानते हैं उसे आप

1063
01:23:47,040 --> 01:23:51,080
नहीं मानते जाइए अपना काम कर कबीर सागर को क्यों प्रमाण माने

1064
01:23:51,080 --> 01:23:55,280
बता अब आप एक काम करिए सुनिए अब आप एक काम करिए जी अब मुझे

1065
01:23:55,280 --> 01:23:59,840
आप वेदों में दिखाइए कि कबीर भगवान है चलिए नहीं आप

1066
01:23:59,840 --> 01:24:03,920
देखिए अभी आप गुलमुल रहे है अभी आप जिस चीज पर डिबेट कर रहे थे उसे पहले दिखाइए

1067
01:24:03,920 --> 01:24:08,000
कबीर जी कहां पर कहते कुत्ता फिर आप इसी चीज को रिकॉर्ड करके डालेंगे कि कबीर जी अपने

1068
01:24:08,000 --> 01:24:12,800
आप को कुत्ता कहता है रामपाल जी के शिष्य ने मान लिया आप मुझे पहले अभी ये प्रमाण दिखाइए

1069
01:24:12,800 --> 01:24:17,640
प्रमाण आपको बोला तो भैया बताओ प्रमाण अभी बताते हैं दिखाइए

1070
01:24:17,640 --> 01:24:22,400
दिखाइए अभी बताते हैं अभी बताते हैं महादेव

1071
01:24:22,400 --> 01:24:26,600
थोड़ा पाच मिनट रुकिए आपको प्रमाण दिखाते कहां लिखा है ओके जी तब

1072
01:24:26,600 --> 01:24:31,160
तक हम दूसरी बात कर ले हां बताइए आप क्या कह रहे

1073
01:24:31,160 --> 01:24:37,160
हा वेदों में प्रमाण है कबीर साहब भगवान है यह बात सही है

1074
01:24:39,160 --> 01:24:43,440
क्या हेलो हेलो जी जी बताइए सुन रहा हूं

1075
01:24:43,440 --> 01:24:47,560
हां बताइए वेदों में प्रमाण है कबीर साहब भगवान है बात सही है

1076
01:24:47,560 --> 01:24:52,080
क्या जी बिल्कुल सही है हां बताइए कहां से सही

1077
01:24:52,080 --> 01:24:57,920
है एक सेकंड पर खा कबीर

1078
01:24:57,920 --> 01:25:02,440
भगवान बताइए कौन से मंत्र में लिखा है कबीर भगवान

1079
01:25:02,440 --> 01:25:06,440
है एक सेकंड रुकिए थोड़ा सा हमारा नेट भी सलो है एक सेकंड हम निकाल के दिखाते

1080
01:25:06,440 --> 01:25:10,640
हैं आपको उनके हा मंत्र नहीं श्लोक चलता

1081
01:25:10,640 --> 01:25:16,640
है उनके हमारे य मंत्र है

1082
01:25:34,640 --> 01:25:39,400
शिवान जी क्षमा चाहूंगा थोड़ा लेट देखा आपका मैसेज अच्छा अच्छा

1083
01:25:39,400 --> 01:25:43,040
कोई बात नहीं कोई बात

1084
01:25:43,040 --> 01:25:48,600
नहीं मैं उनसे कहूंगा

1085
01:25:48,600 --> 01:25:52,680
जो य प्रमाण आया है क्या कबीर वाला बड़ा कर दीजिए

1086
01:25:52,680 --> 01:25:58,680
भाई साहब

1087
01:26:00,400 --> 01:26:04,850
कबीर

1088
01:26:04,850 --> 01:26:10,850
[संगीत]

1089
01:26:14,400 --> 01:26:19,400
ग्रंथावली इसमें तो लिखा हुआ है क्या लिखा

1090
01:26:19,400 --> 01:26:24,320
है पढ मैं हां पढ़िए

1091
01:26:24,320 --> 01:26:28,600
बताऊ कबीर दास जी कहते हैं मैं राम का कुत्ता हूं और

1092
01:26:28,600 --> 01:26:32,640
मेरा नाम मुतियार गले में राम नाम

1093
01:26:32,640 --> 01:26:36,880
की रस्सी पड़ी हुई है और उस रस्सी को पकड़कर मेरे स्वामी राम जिधर

1094
01:26:36,880 --> 01:26:40,920
मुझे घुमाते हैं मैं उधर घूम जाता हूं वाह बात बहुत बढ़िया लिखी

1095
01:26:40,920 --> 01:26:45,120
है उन्होंने कही है तो यहां पे जो शब्दार्थ

1096
01:26:45,120 --> 01:26:49,120
नीचे लिखा हुआ है उसके अर्थ में कुता का अर्थ लिखा है कुत्ता और

1097
01:26:49,120 --> 01:26:53,320
जेवड़ी का अर्थ है जेवरी यानी रस्सी हम अब

1098
01:26:53,320 --> 01:26:59,320
बताइए दीपक जी

1099
01:26:59,360 --> 01:27:05,360
लिखा है यहां पर कबीर दास जी

1100
01:27:06,920 --> 01:27:12,920
ने बताइए दीपक जी जी बता रहा हूं एक

1101
01:27:14,280 --> 01:27:18,320
सेकंड अरे कबीर ने कहीं पर स्वयं को राम का भक्त कहा है

1102
01:27:18,320 --> 01:27:23,080
क्या कि नहीं कहा है नहीं कहीं पर नहीं कहा है राम के भक्त

1103
01:27:23,080 --> 01:27:27,440
अच्छा वो सब मैंने आपने जो दिखाया ये तो

1104
01:27:27,440 --> 01:27:31,600
प्रमाणित ही नहीं था किसी भी बुक में होली बुक्स में लिखा ही नहीं था

1105
01:27:31,600 --> 01:27:35,680
अच्छा तो तुम जो बता रहे हो कि कबीर भगवान है वो कहां से होली बुक

1106
01:27:35,680 --> 01:27:40,080
में है बताओ अभी दिखाते हैं वेद में दिखाएंगे हम ऐसे ऐसी जगह पर नहीं दिखाएंगे

1107
01:27:40,080 --> 01:27:44,400
एक बात बताओ पहले कि तुम्हारी बुक मान्य है और हमारी बुक मान्य

1108
01:27:44,400 --> 01:27:48,480
नहीं है यह किस आधार पर है वेद ना हमारी है ना

1109
01:27:48,480 --> 01:27:52,520
आपकी है यह परमात्मा का है अच्छा उसमें तुम दिखा

1110
01:27:52,520 --> 01:27:56,960
दोगे कि कबीर भगवान है हा हा मुसी में दिखाएंगे कबीर देव भवान

1111
01:27:56,960 --> 01:28:01,120
और कोई और किसी ग्रंथ को मत जोड़ना फिर वेद से ही

1112
01:28:01,120 --> 01:28:05,120
बताना वेद से ही दिखाएंगे ना आपको रुक जा एक मिनट अरे कब दिखाओगे

1113
01:28:05,120 --> 01:28:07,840
भैया दिखाओ

1114
01:28:07,840 --> 01:28:13,040
ना एक

1115
01:28:13,040 --> 01:28:17,280
[संगीत]

1116
01:28:17,280 --> 01:28:21,760
मिनट राम जय राम जय जय

1117
01:28:21,760 --> 01:28:25,480
राम दिखाओ भाई

1118
01:28:25,480 --> 01:28:29,760
क्या हुआ एक से दिखाते आप कमजोर

1119
01:28:29,760 --> 01:28:33,760
हो तुम क्योंकि हमने दे

1120
01:28:33,760 --> 01:28:38,600
है व सब रटे हुए होते हैं

1121
01:28:38,600 --> 01:28:43,560
कबीर सागर की प्रामाणिकता आपको बतानी होगी किस आधार पर प्रमाण मानते हो

1122
01:28:43,560 --> 01:28:48,280
कबीर सागर धर्मदास जी ने लिपि की है कबीर सागर कबीर साने बो

1123
01:28:48,280 --> 01:28:52,680
कौन धम क माने धर्मदास को भाई क्यों माने धर्मदास

1124
01:28:52,680 --> 01:28:58,160
को तो फिर आप क्यों कह रहे हो कबीर सागर किसने लिखी है आपको

1125
01:28:58,160 --> 01:29:02,360
क्या अरे तुम ये कह रहे हो ना हम कबीर ग्रंथावली को नहीं मानते

1126
01:29:02,360 --> 01:29:06,640
हैं हम कबीर सागर को क्यों माने अरे आप

1127
01:29:06,640 --> 01:29:10,640
आप डिपेंड करता है आप मानो चाहे मानो अरे

1128
01:29:10,640 --> 01:29:16,360
तुम ही तो कह रहे हो कि भैया जो ईश्वर के ग्रंथ होंगे उससे मानेंगे

1129
01:29:16,360 --> 01:29:20,360
तो कबीर सागर से आप य सिद्ध कर रहे हो कि कबीर जो है कवि

1130
01:29:20,360 --> 01:29:24,840
थे और उस कवि होने के कारण ही उनको जो है वहा वेदों में नाम है

1131
01:29:24,840 --> 01:29:29,480
सक्षम आधार पर लिखा है

1132
01:29:29,480 --> 01:29:33,640
चलो एक एक करके चलते पहले आप जो कर रहे हो वो करो हमको वेदों में प्रमाण

1133
01:29:33,640 --> 01:29:36,560
दिखाओ कबीर भगवान

1134
01:29:36,560 --> 01:29:40,840
दिखाओ वेद यज यजुर्वेद के मंत्र नंबर पाच में

1135
01:29:40,840 --> 01:29:44,840
सक नंबर एक में लिखा है कबीर साहेब भगवान है

1136
01:29:44,840 --> 01:29:48,920
पढ़ के बताओ प

1137
01:29:48,920 --> 01:29:53,040
आप खुद आप खुद पढ़िए ना हम

1138
01:29:53,040 --> 01:29:57,760
क्यों पढ़े आप पढ़िए आप

1139
01:29:57,760 --> 01:30:02,240
ख देखो ऐसा है भैया देखो मेरे पास समय नहीं है आप अगर

1140
01:30:02,240 --> 01:30:06,280
बात करनी है अपना प्रमाण पढ़ के बताइए एक

1141
01:30:06,280 --> 01:30:10,640
सेकंड फिर मैं पिक्चर निकालू फिर पढ़ के बता पाऊंगा सेक

1142
01:30:10,640 --> 01:30:14,840
हा बताओ कबीर होना चाहिए कबीर कवि नहीं

1143
01:30:14,840 --> 01:30:19,120
हो टा कबीर देव हा

1144
01:30:19,120 --> 01:30:23,120
कबीर देव है ना तो क्यों कर रहे हो बेकार का व्यर्थ समय मालूम है तुमको

1145
01:30:23,120 --> 01:30:27,800
हम लोग क्या कहेंगे उस बारे में फिर भी तुम समय को व्यर्थ नष्ट कर रहे हो

1146
01:30:27,800 --> 01:30:31,800
बता बताओ तुमने वेद कहां से पढ़ रहे हो बस

1147
01:30:31,800 --> 01:30:35,960
ये बताओ कहां से पढ़ रहे हो कौन सी कंपनी का वेद पढ़ रहे हो किस पब्लिकेशन का पढ़ रहे

1148
01:30:35,960 --> 01:30:40,240
हो गीता प्रेस वालो का और किसका है

1149
01:30:40,240 --> 01:30:44,920
छपता है छपती है बु झूठ भी बोलना सिखाया

1150
01:30:44,920 --> 01:30:49,040
जी ने एक मिनट मि मिनट झूठ बोलना सिखाया गया क्या तुम्हारे

1151
01:30:49,040 --> 01:30:53,280
य आप पूछ क्या रहे ये दोबारा से मुझसे क्वे पूछा किस

1152
01:30:53,280 --> 01:30:57,560
कंपनी का छपा हुआ वेद पढ़ रहे हो तुमने बोला गीता प्रेस गीता प्रेस वेद छपती

1153
01:30:57,560 --> 01:31:02,280
नहीं है दिखाओ मुझे वेद कहां है गीता प्रेस का प्रमाण दिखाओ

1154
01:31:02,280 --> 01:31:06,520
अरे नहीं मैं सॉरी पुराणों की बात कर रहा था वेद की बात नहीं कर रहा हूं

1155
01:31:06,520 --> 01:31:11,240
वेद गीता प्रेस का नहीं होता है हा किसका है

1156
01:31:11,240 --> 01:31:15,240
बताओ तो वो मे देखना पड़ेगा मैंने उतना सही से देखा नहीं उसका

1157
01:31:15,240 --> 01:31:19,480
तो देख के आओ बेटा देख के आया करो देख के आओ जाओ

1158
01:31:19,480 --> 01:31:25,480
फिर आना दोबारा ठीक है नहीं चलिए ठीक हा

1159
01:31:29,080 --> 01:31:33,480
कितने घंटे से आया

1160
01:31:33,480 --> 01:31:37,760
ले दे आया कबीर देव उसी की चर्चा हम कर रहे देर से कबीर देव कबीर

1161
01:31:37,760 --> 01:31:40,480
देव

1162
01:31:40,480 --> 01:31:45,480
हाया बताया क का मतलब कबीर होता है

1163
01:31:45,480 --> 01:31:49,560
विष्णु का मतलब पणी अ में बताया गया है शिव का मतलब बताया गया रुद्र का मतलब

1164
01:31:49,560 --> 01:31:53,920
बताया गया है उसी आधार पर आचार ने अथ किया य कबीर

1165
01:31:53,920 --> 01:31:58,080
कौन से भगवान पतंजलि ने महाभाष्य में लिख दिया है क्या कवि का मतलब कबीर

1166
01:31:58,080 --> 01:32:01,200
होता

1167
01:32:01,200 --> 01:32:05,240
है क्याक का गोल है व्याकरण

1168
01:32:05,240 --> 01:32:09,960
गोल तो य व्याकरण सु परंपरा सुन आचार्य

1169
01:32:09,960 --> 01:32:14,000
आचार्य चरणों के परंपरा से पूर्णता सुनने जो

1170
01:32:14,000 --> 01:32:18,280
म दीपक जी आप अपना प्रमाण लेकर आए

1171
01:32:18,280 --> 01:32:23,080
जिसको आप दिखा दिखा सके हमें स्क्रीन पर और अगर

1172
01:32:23,080 --> 01:32:27,200
दिखाने में दित आ रही हो तो अपने प्रमाण को हमें ट कर दीजिए हम आपका दिखा

1173
01:32:27,200 --> 01:32:31,280
देंगे यहां ठीक है संदाय भी है

1174
01:32:31,280 --> 01:32:35,480
कबीर पंथ संप्रदाय जो इनसे अलग है इन लोगों से अलग है लोग इस बात को मानते

1175
01:32:35,480 --> 01:32:39,480
हैर दास जीने लिखा नहीं अपने हाथों से कुछ अपने हाथों से कुछ

1176
01:32:39,480 --> 01:32:44,040
लिखा ही नहीं मसी कागज यो नहीं कलम गई नहीं हाथ

1177
01:32:44,040 --> 01:32:48,160
हा उन्होने काग कलम ु ही नहीं तो फिर जो दूसरे व्यक्ति कबीर

1178
01:32:48,160 --> 01:32:52,360
सागर लिख रहे हैं उनकी आपता किस प्रमाण पर आधारित होगी वो

1179
01:32:52,360 --> 01:32:56,680
आप्त पुरुष है कैसे माना जाए भ्रम

1180
01:32:56,680 --> 01:33:00,680
प्रमाद दीपक सेय कह रहा हूं दीपक अगर आपके पास प्रमाण

1181
01:33:00,680 --> 01:33:05,920
है तो आप हमें व कर सकते हैं नंबर नोट कर लीजिए

1182
01:33:05,920 --> 01:33:09,920
74836 नंबर नोट कर लीजिए इस ट करिए हम आपका प्रमाण य दिखा

1183
01:33:09,920 --> 01:33:14,480
देंगे बिल्कुल य लोग आर्य समाज के थर्ड क्लास वर्जन है

1184
01:33:14,480 --> 01:33:18,560
वो लोग नसे अधिक पढ़े लिखे उनसे थोड़ साथ करने में अ

1185
01:33:18,560 --> 01:33:22,640
एक वीडियो मैंने कहा है आप मैंने उनको कहा अलंकार समाज को

1186
01:33:22,640 --> 01:33:26,680
आप जो एडवांस वर्जन रामपाल रामपाल एंड कंपनी का

1187
01:33:26,680 --> 01:33:32,680
भैया उन लोगों से बात करने थो आनंद आता है थोड़ी सी बुद्धि लगानी पड़ती

1188
01:33:34,160 --> 01:33:38,880
है है देखिए एक दिक्कत ये भी होती है

1189
01:33:38,880 --> 01:33:43,000
कि जब व्यक्ति बिल्कुल ही कोरा कागज होना तब

1190
01:33:43,000 --> 01:33:47,200
भी बुद्धि ज्यादा लगानी पड़ती है तब भी बुद्धि ज्यादा लगानी

1191
01:33:47,200 --> 01:33:51,240
पड़ती है तब बहुत मेहनत करनी पड़ती बिल्कुल ही कोरा कागज अब जैसे

1192
01:33:51,240 --> 01:33:55,360
मान लो ये लोग वेदों की बात कर रहे हैं अभी मैं इनसे निरुक्त की बात करूंगा

1193
01:33:55,360 --> 01:33:59,600
ना ये कहेंगे हम नहीं मानते अब बताओ वेदों को मानने वाला निरुक्त

1194
01:33:59,600 --> 01:34:03,640
को नहीं मानेगा तो कैसे होगा अच्छा एक बात और आप ध्यान रखिएगा वेदों

1195
01:34:03,640 --> 01:34:07,760
को उसी आधार पर मानते हैं जैसे आ समाज के लोग मानते हैं वैसे ही मानते

1196
01:34:07,760 --> 01:34:11,920
हैं आपने जो वीडियो बनाया था ना ग गणा नाम गणपति

1197
01:34:11,920 --> 01:34:16,000
उस मंत्र प तो उस आपके खिलाफ जिसने वीडियो बनाया उसने आर्य मंतव्य

1198
01:34:16,000 --> 01:34:20,600
से पेज डाउनलोड किया उस श्लोक का और अत उसने अपने वीडियो में

1199
01:34:20,600 --> 01:34:21,600
दिखाया

1200
01:34:21,600 --> 01:34:25,720
अरे भाई तो फिर उन्हीं का वो मान लो ना ज उनका मानते हुए दिनेश दास आए भाई

1201
01:34:25,720 --> 01:34:31,720
चेहरा दिखाइए दिनेश

1202
01:34:34,080 --> 01:34:38,160
जी दिखाइए भाई हां भाई

1203
01:34:38,160 --> 01:34:43,040
दिनेश जी बताइए वेदों में प्रमाण है कबीर भगवान है बताइए

1204
01:34:43,040 --> 01:34:48,480
कैसे फ दर्शन दे दिया आपने

1205
01:34:48,480 --> 01:34:53,800
बढ़िया आप भी दर्शन देते रहते हैं तो हम भी आ गए

1206
01:34:53,800 --> 01:34:59,800
बताइए वेदों में प्रमाण कबीर भगवान ने कहां लिखा

1207
01:35:01,640 --> 01:35:04,280
है

1208
01:35:04,280 --> 01:35:08,440
बताइए फिर वही बोलेंगे बता दिया कई बार जो आप पढ़ते हैं

1209
01:35:08,440 --> 01:35:12,480
जो आप पढ़ते हैं वही लिखा हुआ है वो जो कवि लिखा है वो आप कबीर कह रहे

1210
01:35:12,480 --> 01:35:16,830
हो क्या तो ये कवि कबीर क्यों माना जाए ये

1211
01:35:16,830 --> 01:35:21,120
[संगीत] बताइए कबीर ही मान लो कबीर नहीं मानते

1212
01:35:21,120 --> 01:35:25,720
तो कबीर ही मान लो

1213
01:35:25,720 --> 01:35:29,760
मानेंगे वहा प क मेरे प्यारे

1214
01:35:29,760 --> 01:35:33,800
भाई को भगवान नहीं मानते का अन

1215
01:35:33,800 --> 01:35:38,480
किया थोड़ा बहुत हिंदी का व्याकरण संस्कृत की बात नहीं कर रहा हिंदी व्याकरण पढ़े हो कभी देख

1216
01:35:38,480 --> 01:35:42,520
सुनिए सुनिए व्याकरण और

1217
01:35:42,520 --> 01:35:46,800
संस्कृत इस चीज का अध्ययन

1218
01:35:46,800 --> 01:35:51,560
करना किस लिए जरूरी है बताओ

1219
01:35:51,560 --> 01:35:55,720
कबीर जी ने कबीर जी ने तो क व्याकरण का अध्ययन नहीं किया

1220
01:35:55,720 --> 01:36:01,360
तो वो तो भगवान है आप भगवान

1221
01:36:01,360 --> 01:36:05,400
मिटवा मिनट मिनट एक मिनट एक मिनट आपके अनुसार वो भगवान है

1222
01:36:05,400 --> 01:36:09,920
आप भी भगवान हो क्या बता

1223
01:36:09,920 --> 01:36:14,080
रहा एक चीज क्लियर तो करिए आपके अनुसार भगवान

1224
01:36:14,080 --> 01:36:18,320
है आप अपनी तुलना उनसे कर रहे हो आप भी भगवान हो क्या

1225
01:36:18,320 --> 01:36:22,400
मैं बता रहा हूं मैं बता रहा भाई पहले इसको क्लियर कर दो इसको क्लियर

1226
01:36:22,400 --> 01:36:26,880
कर दो फिर बता को करूंगा थोड़ा बोलने दे दो कबीर जी ने कभी कोई शास्त्र

1227
01:36:26,880 --> 01:36:31,200
कभी कोई शिक्षा नहीं ली जैसे कि अभी भा ले भगवान हैके अनुसार

1228
01:36:31,200 --> 01:36:35,320
तो कबीर जी ने तो इसीलिए कह रहे हैं सारी संस्कृत का ज्ञान

1229
01:36:35,320 --> 01:36:39,520
होना जरूरी नहीं है आज हमारे पास ऐसे सॉफ्ट भी उपलब्ध है

1230
01:36:39,520 --> 01:36:43,640
मिनट मिनट मिनट मिट भाई साहब आपने बात

1231
01:36:43,640 --> 01:36:48,240
का जवाब नहीं दिया आप अपनी तुलना कबीर से कर रहे हो यानी कि आप भगवान

1232
01:36:48,240 --> 01:36:54,240
हो अरे हम नहीं कर रहे मैं नहीं कर रहा मैं ये कह रहा

1233
01:36:57,440 --> 01:37:03,440
अरे मेरी बात सुनिए अगर जो अ

1234
01:37:03,920 --> 01:37:08,920
है करने जल्दी ले

1235
01:37:08,920 --> 01:37:12,920
मुझे जवाइन करने दीजिए हा जी जी ब अब आपका कहना

1236
01:37:12,920 --> 01:37:17,120
है कि कवि जो है उसको आप लोग कबीर कहते हैं जी

1237
01:37:17,120 --> 01:37:21,600
जी इसका सनातन सिद्धांत क्या है कि कवि को कबीर कहा

1238
01:37:21,600 --> 01:37:25,800
जाए कबीर मत क कबीर कह लो हम क्यों कहे कबीर

1239
01:37:25,800 --> 01:37:29,960
हम तो कबी कहेंगे ना हम तो हम तो कभी कहेंगे उसको हम कबीर कहते हैं हम

1240
01:37:29,960 --> 01:37:34,600
उसको कबीर कहते हैं हमा इच्छा है कबीर कते क

1241
01:37:34,600 --> 01:37:38,720
यानी एक मिनट एक मिनट यानी कि आप शास्त्र के अलावा भी किसी इच्छा

1242
01:37:38,720 --> 01:37:42,840
के आधार पर भक्ति कर रहे हो जी जी कबीर जी ने कहा है ना

1243
01:37:42,840 --> 01:37:47,640
कबीर जी ने सारे पॉइंट बताए हैं मनम भक्ति कर रहे हो

1244
01:37:47,640 --> 01:37:52,400
मनमुक नहीं कबीर जी हेलो मैं जो पूछ रहा हूं बताओ

1245
01:37:52,400 --> 01:37:56,560
आप मनम ब कर रहे हो नहीं मनमुक

1246
01:37:56,560 --> 01:38:00,720
भक्ति नहीं है आपने ना अपनी इच्छा से कर रहे हैं

1247
01:38:00,720 --> 01:38:05,680
हम अपनी नहीं कबीर जी ने बताया है कि अरे भाई

1248
01:38:05,680 --> 01:38:09,800
वेदों में कहां प्रमाण है वेदों का बताओ वेदों में

1249
01:38:09,800 --> 01:38:12,520
बताओ शास्त्रों में बताओ शास्त्रों

1250
01:38:12,520 --> 01:38:16,800
की भक्ति जिस कबीर जीने बताया

1251
01:38:16,800 --> 01:38:21,000
कबीर जी ने बताया है कि कबीर भगवान है ये मत कहो कि वेदों ने बताया कबीर

1252
01:38:21,000 --> 01:38:25,080
भगवान उस कबीर नेही बताया आगे का ज्ञान अरे तो वो

1253
01:38:25,080 --> 01:38:31,080
कबीर प सिद्ध तो हो कि वो भगवान है तब तो हम उसकी बात मानेंगे

1254
01:38:31,480 --> 01:38:35,680
अरे आप कहते हो ना कि वो कबीर नहीं है आपके कहने

1255
01:38:35,680 --> 01:38:39,960
से मैं ये कहता हूं कि जो जिस कबीर को तुम भगवान कह रहे हो वो कबीर भगवान

1256
01:38:39,960 --> 01:38:43,960
है ही नहीं मैं ये कहता हूं आप मुझे पहले इस

1257
01:38:43,960 --> 01:38:47,960
बात के लिए संतुष्ट करो वेदों के आधार पे कि वो जो कबीर जिसकी

1258
01:38:47,960 --> 01:38:52,080
बात आप मान रहे हो कि वो वही कबीर है जो वेदों में जिसका वर्णन है वो

1259
01:38:52,080 --> 01:38:58,080
कबीर हां वही है

1260
01:38:58,280 --> 01:39:04,280
करो नेटवर्क प्रॉब्लम है

1261
01:39:05,360 --> 01:39:09,560
इनका हा भाई कौन आए है आकाश तिवारी जी

1262
01:39:09,560 --> 01:39:15,560
बोलिए जय श्री राम जी [संगीत]

1263
01:39:16,760 --> 01:39:20,840
राम शीराम बोल के चले गए एक बार पहले भी आए इन्होंने

1264
01:39:20,840 --> 01:39:25,080
कहा था कि कवियों की तरह जो आचरण करता है कवियो क

1265
01:39:25,080 --> 01:39:29,240
की तर बहुत लोग आचरण करते हैं और सुनिए आद कवि कहा

1266
01:39:29,240 --> 01:39:33,680
गया वो कहा गया भगवान गणेश को वाल्मीकि जी को

1267
01:39:33,680 --> 01:39:37,320
गश जी भी कवि

1268
01:39:37,320 --> 01:39:41,560
है लेट कर बातें कोई नहीं करेगा हा भैया लेट कर बातें

1269
01:39:41,560 --> 01:39:45,880
मत करिए आप लोग सभ्यता

1270
01:39:45,880 --> 01:39:48,640
के साथ

1271
01:39:48,640 --> 01:39:51,720
आए

1272
01:39:51,720 --> 01:39:55,960
हेलो दीपक जी अगर ंग

1273
01:39:55,960 --> 01:40:01,960
तो हम आपका यहां शो कर

1274
01:40:02,880 --> 01:40:07,840
देंगे आपने एक लाइन लिखी है कि ब्रह्मा विष्णु

1275
01:40:07,840 --> 01:40:11,920
महेश अविनाशी नहीं है इसका क्या प्रमाण

1276
01:40:11,920 --> 01:40:16,880
है हम बोलिए तो

1277
01:40:16,880 --> 01:40:21,280
इसका तो स्पष्ट प्रमाण है स्वयं इसमें श्रीमद् देवी भागवत

1278
01:40:21,280 --> 01:40:25,360
महापुराण में बताया गया मैं आप मैंने क्या इसमें ये नहीं बताया कि

1279
01:40:25,360 --> 01:40:29,800
वो देवी भागवत में मैं क्या मना कर रहा हूं देवी भागवत में ऐसा नहीं लिखा है जो आप बता रहे हैं

1280
01:40:29,800 --> 01:40:33,800
मैंने मना किया क्या जो देवी भागवत ने दूसरी चीजें लिखी है

1281
01:40:33,800 --> 01:40:37,840
उनका क्या करोगे देखो मत्स पुराण सुनो

1282
01:40:37,840 --> 01:40:41,840
मत्स पुराण 152 वा अध्याय

1283
01:40:41,840 --> 01:40:46,400
45 वा श्लोक समस्त सुति स्मृति शास्त्रों में सामंजस्य

1284
01:40:46,400 --> 01:40:50,640
की शिक्षा धर्म है सामंजस कहां है

1285
01:40:50,640 --> 01:40:52,480
अगर आप ब्रह्मा विष्णु महेश

1286
01:40:52,480 --> 01:40:56,520
को एक जगह मृत्यु वाला मान लोगे और दूसरी जगह अविनाशी कहा

1287
01:40:56,520 --> 01:41:00,560
गया तो दूसरे का खंडन करोगे ना देवी भागवत में ही कहा गया है

1288
01:41:00,560 --> 01:41:05,160
तो ऐसी बात हमें सोचनी सुनो ऐसी बात हमें सोचनी पड़ेगी

1289
01:41:05,160 --> 01:41:09,320
जिसमें की किसी का भी खंडन ना हो यहां पर भी ना हो यहां पर भी ना हो

1290
01:41:09,320 --> 01:41:14,160
तो यहां पर उन्होंने अपनी अनन्य को प्रकट करने के लिए कहा

1291
01:41:14,160 --> 01:41:18,320
जैसे अपनी अनन्य को प्रकट करने के लिए कबीर ने स्वयं

1292
01:41:18,320 --> 01:41:20,640
को कुत्ता

1293
01:41:20,640 --> 01:41:25,560
कहा देखो हम पुराणों में

1294
01:41:25,560 --> 01:41:29,720
जो जैसे एक तो ऋषि ने जो पुराण है

1295
01:41:29,720 --> 01:41:34,600
बताए जाते हैं ऋषियों का अनुभव है लेकिन वो उस अनुभव

1296
01:41:34,600 --> 01:41:38,600
में जो चीज लिखी है उसमें ऋषि

1297
01:41:38,600 --> 01:41:42,960
अनुभव कैसा लिख रहे हैं क्या बात जो

1298
01:41:42,960 --> 01:41:47,080
भगवान बोल यानी कि कहीं कहीं पर आपके अनुसार ऋषि ने गलत लिख

1299
01:41:47,080 --> 01:41:51,560
दिया है और कहीं कहीं पर सही लिखा है देखो

1300
01:41:51,560 --> 01:41:55,640
जैसा उनका ज्ञान था ले था भाई मैं ये

1301
01:41:55,640 --> 01:41:59,680
पूछ रहा हूं आपसे आप गोल गोल बातें ना करें मैं पूछ रहा हूं कि कहीं

1302
01:41:59,680 --> 01:42:03,800
कहीं प आप कह रहे हैं कि ऋषियों ने गलत लिख दिया अपने अनुभव के अनुसार लिख दिया

1303
01:42:03,800 --> 01:42:08,960
है और कहीं कहीं पर उन्होंने सही लिखा है वह आपके लिए उचित

1304
01:42:08,960 --> 01:42:13,040
है उन्होंने अपने अनुभव के हिसाब से लिखा जैसा अरे भाई

1305
01:42:13,040 --> 01:42:17,040
मैं इसीलिए भी दिक्कत होती है मैं हर बार यहां से आने से

1306
01:42:17,040 --> 01:42:21,160
पहले हर बार जब मैं लाइव आता हूं तो पता है मैं क्या सोचता हूं कि

1307
01:42:21,160 --> 01:42:25,440
लोग मुझे बहुत शिकायत करते हैं मैं आक्रामक खेलता

1308
01:42:25,440 --> 01:42:29,640
हूं तो मुझे लोग ये शिकायत करते हैं कि मैं बहुत ज्यादा वैसा

1309
01:42:29,640 --> 01:42:33,800
रहता क सागर लिखा है ना उनका प्रमाण कैसे माना जाए मेरे भाई

1310
01:42:33,800 --> 01:42:37,800
आकाश तिवारी जी हा भम दस जी ने कबीर सागर

1311
01:42:37,800 --> 01:42:42,080
अपने अनुभव से लिखा है ना उसका अनुभव को कैसे प्रमाण माना जाए देखिए

1312
01:42:42,080 --> 01:42:46,960
उनका प्रमाण कई एक जगह है हमारा प्रमाण

1313
01:42:46,960 --> 01:42:50,960
परपरा हा मैं ये कह रहा हूं मैं ये कह रहा हूं पहले इस बात को

1314
01:42:50,960 --> 01:42:55,120
आप मानिए एक मिनट जी एक मिनट पहले इस बात

1315
01:42:55,120 --> 01:42:59,200
को मानिए कि आप यह

1316
01:42:59,200 --> 01:43:03,360
कह रहे हैं कि पुराणों में देवी भागवत में ही उन्होंने कहीं

1317
01:43:03,360 --> 01:43:09,360
कहीं पर गलत लिख दिया है जिसने उसको लिखा

1318
01:43:10,760 --> 01:43:15,520
है हेलो भाई साहब सुनाई नहीं दे रहा क्या

1319
01:43:15,520 --> 01:43:20,280
नहीं सुनाई अरे बोलो बोल रहा हूं हां

1320
01:43:20,280 --> 01:43:24,560
अरे बोल रहा हूं सुनाई पड़ रहा है तो बोलिए आपके हिसाब

1321
01:43:24,560 --> 01:43:28,600
से क्या देवी भागवत को लिखने वाले ने कहीं कहीं पर गलत

1322
01:43:28,600 --> 01:43:33,080
लिखा है कि नहीं बताइए देखिए

1323
01:43:33,080 --> 01:43:37,400
सीधी बात नहीं करेंगे मेरी बात को समझने की कोशिश

1324
01:43:37,400 --> 01:43:41,560
करो भाई मैं बात मैं आपसे एक बहुत साधारण

1325
01:43:41,560 --> 01:43:45,600
प्रश्न पूछ रहा हूं क्या आपके हिसाब से देवी भागवत को लिखने वाले

1326
01:43:45,600 --> 01:43:49,840
ने कहीं कहीं पर गलत लिखा है क्या देखो उन्होंने

1327
01:43:49,840 --> 01:43:54,000
अपने हिसाब से सही लिखा उन्होने सनातन सत्य

1328
01:43:54,000 --> 01:43:58,280
सनातन सत्य लिखा कि नहीं ये पूछ रहा हूं वो छोड़ दो

1329
01:43:58,280 --> 01:44:02,680
सनातन सत्य लिखा या नहीं यह बताओ जो बदलता नहीं है

1330
01:44:02,680 --> 01:44:07,160
ऐसा है कि उन्होंने जो अपना अनुभव लिखा है लेकिन

1331
01:44:07,160 --> 01:44:11,280
उस अनुभव के मतलब वो सत्य नहीं है ना पूर्ण सत्य नहीं

1332
01:44:11,280 --> 01:44:15,280
है ना कहीं कहीं पर उन्होंने अनुभव लिख दिया ना हां वो पूर्ण

1333
01:44:15,280 --> 01:44:19,360
सत्य नहीं है हा ये बताओ कि जब उ वो पूर्ण

1334
01:44:19,360 --> 01:44:23,400
सत्य नहीं है एक जगह लिख रहे हैं कि वो पूर्ण सत्य नहीं लिखने वाले सिद्ध हो गए आपके

1335
01:44:23,400 --> 01:44:25,840
अनुसार ठीक है इसके पीछे क्या

1336
01:44:25,840 --> 01:44:30,120
क्या कारण हो सकते हैं जो पूर्ण सत्य ना लिखे बताओ

1337
01:44:30,120 --> 01:44:34,240
ये ऐसा कारण है क्योंकि जिसने यह सृष्टि

1338
01:44:34,240 --> 01:44:38,360
बनाई वही पूर्ण सत्य जानता है यानी कि

1339
01:44:38,360 --> 01:44:42,440
वो यानी की वो अज्ञानी थे इसलिए कहीं कहीं उन्होंने पूर्ण सत्य

1340
01:44:42,440 --> 01:44:46,560
नहीं लिखा जी जी अज्ञानी ठीक

1341
01:44:46,560 --> 01:44:50,680
जो अज्ञानी है वो यहां पर सही लिख रहा है यह कैसे सिद्ध

1342
01:44:50,680 --> 01:44:54,920
कर रहे हो इसको प्रमाण क्यों मानते हो

1343
01:44:54,920 --> 01:44:59,120
जैसे ये दास अज्ञान है अज्ञानी है बात

1344
01:44:59,120 --> 01:45:03,320
समझना नहीं भैया भैया भैया मैं मैं ये पूछ रहा हूं जब कोई व्यक्ति

1345
01:45:03,320 --> 01:45:08,240
गलत बोल सकता है तो वह यहां पर गलत नहीं बोल रहा यह कैसे सिद्ध होगा

1346
01:45:08,240 --> 01:45:12,720
अगर बोले अगर किसी सुनो अगर किसी की वाणी को किसी की लेखनी

1347
01:45:12,720 --> 01:45:16,840
को हम प्रमाण मानते हैं तो उसके एक शब्द को भी नहीं खंडित

1348
01:45:16,840 --> 01:45:21,200
कर सकते इसी को कहते हैं समस्त सुति

1349
01:45:21,200 --> 01:45:25,200
स्मति शास्त्रों में सामंजस की शिक्षा अगर एक शब्द भी

1350
01:45:25,200 --> 01:45:29,520
हमने मना किया कि ये जो गलत है तो उससे उस लिखने वाले की पूरी क्रेडिबिलिटी

1351
01:45:29,520 --> 01:45:33,800
पर क्वेश्चन आ जाएगा फिर आप उसकी लिखी हुई किसी भी चीज को प्रमाण

1352
01:45:33,800 --> 01:45:39,800
नहीं बता सकते समाज के समक्ष कि ये प्रमाण देखो यहां ये लिखा

1353
01:45:40,040 --> 01:45:41,040
है

1354
01:45:41,040 --> 01:45:45,200
हम नहीं तो अच्छा हमें एक बात बताइए या आप मुझे

1355
01:45:45,200 --> 01:45:49,280
ये बताइए कि आपको कैसे पता चला कि यहां पर इन्होंने सही लिखा है वहां

1356
01:45:49,280 --> 01:45:53,440
उन्होंने गलत लिखा है कैसे किस आधार पर बताइए इस

1357
01:45:53,440 --> 01:45:57,920
आधार से कि वहां स्वयं स्वयं ब्रह्मा

1358
01:45:57,920 --> 01:46:02,240
जी अपनी बात कह रहे हैं अरे तो वहां पर भी तो विष्णु

1359
01:46:02,240 --> 01:46:06,400
जी कह रहे हैं लिखा किसने ब्रह्मा जी तो बात कह रहे

1360
01:46:06,400 --> 01:46:10,800
लिखा किसने वो और जहां विष्णु जी लिख रहे हैं वो आप दिखाइए

1361
01:46:10,800 --> 01:46:14,960
क्या स्वयं विष्णु जीय बात क रहे स् वि स्व विष्णु अभी

1362
01:46:14,960 --> 01:46:19,160
दिखाया था पढ़ा था थोड़ी देर पहले पढ़ दिया था अभी पढ़ दिया स्वयं

1363
01:46:19,160 --> 01:46:25,160
विष्णु बोल रहे हैं क्या कह रहे विष्णु जी

1364
01:46:26,240 --> 01:46:30,280
बताइए तो विष्णु जी कह रहे हैं भगवान श्री कृष्ण से

1365
01:46:30,280 --> 01:46:34,280
देवी मां का वो होता है प्रादुर्भाव विष्णु

1366
01:46:34,280 --> 01:46:38,360
जी कह रहे हैं कि जो कृष्ण भगवान है वो सच्चिदानंद स्वरूप परम ब्रह्म

1367
01:46:38,360 --> 01:46:42,680
है विष्णु जी कह रहे हैं वो सनातन है विष्णु जी कह रहे हैं कि देवी

1368
01:46:42,680 --> 01:46:47,520
मां और जो परम ब्रह्म है वो एक है अलग अलग है ही नहीं अब

1369
01:46:47,520 --> 01:46:53,520
बोलो अच्छा ये कहां लिखा है दिखाइए हमें देख भी तो ले

1370
01:46:54,000 --> 01:46:58,480
नवम स्कंद पढ़ो ना देवी

1371
01:46:58,480 --> 01:47:02,600
रेफरेंस रेफरेंस दे दीजिए रेरस दिखा दीजिए दिखा

1372
01:47:02,600 --> 01:47:06,640
दीजिए दिखा दीजिए नहीं एक बात बताइए अगर दिखा दिया फिर क्या होगा

1373
01:47:06,640 --> 01:47:10,720
उसके बाद क्या है उसके बाद शुरू करेंगे वेद में प्रमाण नहीं है

1374
01:47:10,720 --> 01:47:14,880
और कबीर भगवान नहीं है अभी आप रेफरेंस मत दिखाइए अभी रेफरेंस दिखा

1375
01:47:14,880 --> 01:47:18,880
दिया उसके बाद अभी हम उसके बाद

1376
01:47:18,880 --> 01:47:23,160
क्या होगाय बताइए उसके बाद उसके आपको कसे दिखा

1377
01:47:23,160 --> 01:47:27,400
इसको दिखाऊ कैसे मैं श्लोक क्रमांक बोल देता हूं अपना चेक करते रहना

1378
01:47:27,400 --> 01:47:33,400
और कैसे दिखाऊ मैं आपको श्लोक क्रमांक बोल देता

1379
01:47:34,720 --> 01:47:39,560
हूं मैं स्क्रीनशॉट भेज द आपको मोबाइल नंबर भेजना तिवारी जी अपना

1380
01:47:39,560 --> 01:47:43,760
शिवा जी क्या य मत बोलिए

1381
01:47:43,760 --> 01:47:47,760
य मत य मत बोलिए य मत बोलिए प्राइवेट मैसेज कर दीजिएगा मैं

1382
01:47:47,760 --> 01:47:52,160
ये कह रहा हूं कि शिवा जी मुझे रेफरेंस दे दीजिए रेफरेंस

1383
01:47:52,160 --> 01:47:56,600
भेजू आपको वो तो पीडीएफ में है ना नहीं नहीं वो क्या है

1384
01:47:56,600 --> 01:48:00,960
मुझे वो चाहिए कौन से स्कंध में

1385
01:48:00,960 --> 01:48:05,600
विष्णु [संगीत]

1386
01:48:05,600 --> 01:48:09,880
जी स्कं बता दीजिए तो मैं शायद यहां पर शेयर कर दूंगा ना नौवा

1387
01:48:09,880 --> 01:48:14,240
स्कंद है नौवा तो देवी भागवत का ना हम

1388
01:48:14,240 --> 01:48:18,560
देवी भागवत का मैंने पढ़ा है पूरा वो नौवा स्कंध है

1389
01:48:18,560 --> 01:48:23,080
और पहला ही जो अध्याय है उसी में शुरू है सब अच्छा

1390
01:48:23,080 --> 01:48:26,320
[संगीत]

1391
01:48:26,320 --> 01:48:30,520
करे पीडीएफ डाउनलोड कर लेंगे लेकिन वो ऐसा है ना की गीता प्रेस की जो

1392
01:48:30,520 --> 01:48:36,440
आती है अरे भैया गीता प्रस में अगर ना लिखा हो तब

1393
01:48:36,440 --> 01:48:38,830
बताना

1394
01:48:38,830 --> 01:48:43,000
[संगीत] बताना हमने आज कोई पहली

1395
01:48:43,000 --> 01:48:47,120
हमने आज कोई पहली बार थोड़ी ना बात बताई है इससे पहले बहुत वीडियो

1396
01:48:47,120 --> 01:48:51,720
बना दिए आपको पता ही नहीं आपको देख आना चाहि था

1397
01:48:51,720 --> 01:48:56,240
जी के बे में जो जो बताया था हम उसम

1398
01:48:56,240 --> 01:49:01,280
पढ़ेंगे क्या क्या अच्छा ये है शिव

1399
01:49:01,280 --> 01:49:04,280
[संगीत]

1400
01:49:04,280 --> 01:49:09,560
महापुराण य भैया क्या खोल दिया शिव महापुराण

1401
01:49:09,560 --> 01:49:13,680
रख यह पुराण नहीं है मगर आपको रेफरेंसेस बता रहे हैं देवी

1402
01:49:13,680 --> 01:49:17,760
और परब्रह्म एक है देवी भागवत तीन छ दो मानते हो

1403
01:49:17,760 --> 01:49:20,000
क्या

1404
01:49:20,000 --> 01:49:24,720
हा ये मानते हो क्या देवी और एक

1405
01:49:24,720 --> 01:49:28,880
है मां भगवती की पब्र देवी

1406
01:49:28,880 --> 01:49:33,960
और पर ब्र [संगीत]

1407
01:49:33,960 --> 01:49:38,200
मानता ये मा दुर्गा स्वयं बोल रही है

1408
01:49:38,200 --> 01:49:44,200
मैं और ब्रह्म एक ही है अलग अलग नहीं है परम

1409
01:49:44,480 --> 01:49:50,480
ब्रह्म ब्रह्म

1410
01:49:51,770 --> 01:49:56,280
[संगीत] फ ये निर्गुण तो एक मात्र परमात्मा

1411
01:49:56,280 --> 01:50:02,280
अर्थात देवी ही हैय तो कोई का [संगीत]

1412
01:50:02,400 --> 01:50:07,040
है इस लोक में दुर्गा जी ऊपर करो भैया ऊपर करो

1413
01:50:07,040 --> 01:50:12,520
ऊपर करो ऊपर ऊपर ऊपर ऊपर वापस जाओ

1414
01:50:12,520 --> 01:50:17,760
वापस मैं ऊपर और थोड़ा सा [संगीत]

1415
01:50:17,760 --> 01:50:23,000
ऊपर ये देखिए मैं और ब्रह्म एक ही है मानते हो

1416
01:50:23,000 --> 01:50:27,040
मैं और ब्रह्म एक ही है मैं ब्रह्म

1417
01:50:27,040 --> 01:50:31,440
एक और सनातन है रचना करते समय व दत सनातन

1418
01:50:31,440 --> 01:50:36,160
का अर्थ समझते हो क्या हा हां समझते क्या होता

1419
01:50:36,160 --> 01:50:40,760
है अरे जिसका आदि नात सनातन ही है सबसे

1420
01:50:40,760 --> 01:50:45,080
तो मानते हो देवी को सनातन बिल्कुल मानते हैं देवी

1421
01:50:45,080 --> 01:50:49,520
को देवी सनातन मानते हो यानी अविनाशी नहीं है

1422
01:50:49,520 --> 01:50:53,600
अविनाशी है देवी देवी को अविनाशी मानते

1423
01:50:53,600 --> 01:50:57,640
देवी जी हमारे मतलब जो परमात्मा ने बताया है वो उनका

1424
01:50:57,640 --> 01:51:01,760
एक समय नाश होता है लेकिन इनकी आयु हमारे तुम्हारे जैसी नहीं नहीं नहीं नहीं नहीं

1425
01:51:01,760 --> 01:51:06,480
सनातन का मतलब नाश नहीं होता अब मानते हो कि नहीं मानते

1426
01:51:06,480 --> 01:51:07,480
हो

1427
01:51:07,480 --> 01:51:11,560
नहीं यह मानते इनका एक दिन इनका सनातन मानते

1428
01:51:11,560 --> 01:51:15,960
हो कि नहीं मैं ये पूछ रहा हूं

1429
01:51:15,960 --> 01:51:20,000
सनातन हा सनातन जिसका ना आदि हो ना अंत

1430
01:51:20,000 --> 01:51:24,640
हो हा हा वही आप दिखा रहे थे टॉपिक हटा क्यों दिया

1431
01:51:24,640 --> 01:51:28,680
दिखा तो दिया अरे तो अभी देख कहां पाया मैंने ऊपर

1432
01:51:28,680 --> 01:51:32,720
ही कोई बात नहीं लाइव स्ट्रीम पर वापस देख लेना ठीक

1433
01:51:32,720 --> 01:51:38,120
है आप दोबारा देखिएगा अच्छे

1434
01:51:38,120 --> 01:51:42,320
से हा हा देवी पर्र से ब नहीं

1435
01:51:42,320 --> 01:51:46,440
परमेश्वर परमा अब एक चीज और पूछ रहा हूं यह बड़ा मतलब हास्यास्पद

1436
01:51:46,440 --> 01:51:50,560
लग रहा है एक मिनट हटाओ भैया जरा

1437
01:51:50,560 --> 01:51:54,600
हटा दो स्क्रीन हटा दोसे दूसरा सवा अब यह बताओ आपने कहीं पर एक

1438
01:51:54,600 --> 01:51:59,320
जगह य कहा यह तो ऋषि का अनुभव है ठीक है

1439
01:51:59,320 --> 01:52:03,320
ठीक है जहां पर देवी बोल रही है कि मैं बोल रही हूं

1440
01:52:03,320 --> 01:52:06,720
यह किसने

1441
01:52:06,720 --> 01:52:10,160
लिखा यह लिखा

1442
01:52:10,160 --> 01:52:14,400
किसने यह लिखा तो ऋषि ने है लेकिन यह देवी

1443
01:52:14,400 --> 01:52:18,480
यानी यानी की ऋषि ने ही आपको यह बताया है कि देवी ने कहा

1444
01:52:18,480 --> 01:52:22,520
कि मैं परब्रह्म हूं मैं और ब्रह्म एक है ऋषि नहीं आपको बता

1445
01:52:22,520 --> 01:52:26,640
बताया ऋषि ने आपको ये बताया कि ब्रह्मा जी ने यह कहा

1446
01:52:26,640 --> 01:52:30,800
कि क्या कहते हैं वो ब्रह्मा विष्णु महेश नति को प्राप्त होते

1447
01:52:30,800 --> 01:52:34,920
हैं ऋषि ने ये बताया जी जी तो ऋषि की ही

1448
01:52:34,920 --> 01:52:38,920
लेखनी तो आप प्रमाण मान रहे हो हो सकता है

1449
01:52:38,920 --> 01:52:43,440
कि उसने अज्ञानता वस लिख दिया हो ऐसा देखिए

1450
01:52:43,440 --> 01:52:47,480
अज्ञानता बस अज्ञानता बस वो उन्होंने अपनी

1451
01:52:47,480 --> 01:52:53,480
अज्ञानता बस नहीं लिखा उन्होंने तो अपनी जानकारी के हिसाब से लिखा

1452
01:52:53,560 --> 01:52:57,680
कहीं भी बोल सकता है कबीर सागर किसने लिखा

1453
01:52:57,680 --> 01:53:02,080
है देखिए कबीर सागर धर्मदास जी ने त किया धर्मदास

1454
01:53:02,080 --> 01:53:06,400
जी का अनुभव है ना कबीर ने थोड़ी लिखा है वो धर्मदास जी का अनुभव है ना कबीर

1455
01:53:06,400 --> 01:53:10,440
सागर नहीं तो उस कबीर ने भी लिखा हो तो वो भी तो कबीर का अनुभव है

1456
01:53:10,440 --> 01:53:14,480
हम क्यों माने कबीर का अनुभव अगर आप कबीर को भगवान मानते हो तो कबीर

1457
01:53:14,480 --> 01:53:18,720
ने लिखा नहीं है ना कबीर सागर धर्मदास ने लिखा है धर्मदास का अनुभव है गलत

1458
01:53:18,720 --> 01:53:22,720
लिख सकते राजा राय जी ने बात तो सुनिए

1459
01:53:22,720 --> 01:53:26,720
धर्मदास ने भी लिवत किया है और आज के लगभग ा स साल

1460
01:53:26,720 --> 01:53:30,960
पहले संत हुए गरीब दास जी महाराज उन्होंने भी एक बाणी लिखी

1461
01:53:30,960 --> 01:53:35,360
है पूरा ग्रंथ लिखा है गरीब दास जी के नाम से व उनका अनुभव

1462
01:53:35,360 --> 01:53:39,680
है न उनका अनुभव है

1463
01:53:39,680 --> 01:53:45,080
वही तो बता रहे हैं

1464
01:53:45,080 --> 01:53:49,240
तो बताइए भैया सुनिए इसको टॉप द ट्रेन

1465
01:53:49,240 --> 01:53:53,400
चन करते हैं वेदों में प्रमा कबीर भगवान

1466
01:53:53,400 --> 01:53:58,720
है

1467
01:53:58,720 --> 01:54:04,090
बताइए बस हो गया अरे वो

1468
01:54:04,090 --> 01:54:08,400
[संगीत] तो बताएंगे तुम वही

1469
01:54:08,400 --> 01:54:12,520
बात करोगे तो उस चीज का क्यों ना करे भैया तुम भी तो वही बात रिपीट करने

1470
01:54:12,520 --> 01:54:16,560
आए हो हमें बताओ ना में कबीर लिखा

1471
01:54:16,560 --> 01:54:20,640
आकाश आपसे हाथ और विनती है आपसे हाथ जोड़कर

1472
01:54:20,640 --> 01:54:25,320
विनती है पिली बारया अपने नाम के आगे पहले तिवारी लिखना बंद कर दीजिए

1473
01:54:25,320 --> 01:54:29,960
क्योंकि कलयुग में सब राक्षस है ब्राह्मण आप अपने को राक्षस मानते

1474
01:54:29,960 --> 01:54:34,400
हो देखो वो बताया था जो ये ब्राह्मणों

1475
01:54:34,400 --> 01:54:38,440
में ये जो हम जो ब्राह्मणों में जो प्राया

1476
01:54:38,440 --> 01:54:43,120
पाखंड में लगे रहते हैं ये उनके लिए बताया था थोड़ा लॉजिक सबके लिए बोला

1477
01:54:43,120 --> 01:54:47,320
रामपाल जी ने सबके लिए बोला जब तक हमने ये थ्योरी खोली

1478
01:54:47,320 --> 01:54:51,520
नहीं थी ना तब तक आप लोग यही चिल्लाते थे हर जगह आकर के

1479
01:54:51,520 --> 01:54:56,440
कलयुग ब्रा

1480
01:54:56,440 --> 01:55:02,440
हा अबने

1481
01:55:02,880 --> 01:55:06,960
ों सबको अगर मानने लगेंगे सबको कहने लगेंगे तो अपने घर

1482
01:55:06,960 --> 01:55:11,120
की स्त्रियों को भी मानना पड़ेगा प्रम

1483
01:55:11,120 --> 01:55:15,280
ट कोई ऐसा नहीं है कि हम किसी की गलती देख के या किसी

1484
01:55:15,280 --> 01:55:19,440
से र हम उससे जुड़े आदमी

1485
01:55:19,440 --> 01:55:23,600
साब सुब आपन हमको आप य

1486
01:55:23,600 --> 01:55:27,680
पर प्रवचन ना दीजिए प्लीज जो फैक्ट फुल बात हो रही है वो

1487
01:55:27,680 --> 01:55:31,800
आप बताइए क्या वेदों में य लिखा है कहीं पर की कबीर

1488
01:55:31,800 --> 01:55:36,080
कबीर भगवान है लिखा है कहीं

1489
01:55:36,080 --> 01:55:40,120
अरे क को कबीर कहते हैं एक बात आप कवि को

1490
01:55:40,120 --> 01:55:44,520
कबीर कहते हैं हेलो हेलो आप कवि को कबीर कहते हैं

1491
01:55:44,520 --> 01:55:49,000
जी जी इसका आधार क्या है कवि को कबीर कहने का आधार क्या

1492
01:55:49,000 --> 01:55:53,960
है देखो इसका आधार ये है

1493
01:55:53,960 --> 01:55:58,040
जैसे गांव में किसी का नाम गरीब गांव वाले

1494
01:55:58,040 --> 01:56:02,320
मनम गांव वाले अनपढ होते हैं शास्त्र उचित कार्य नहीं करते हैं

1495
01:56:02,320 --> 01:56:06,480
आपका आधार क्या है वही तो समझ आप शास्त्र

1496
01:56:06,480 --> 01:56:10,480
उचित कार्य ना करने वाले हो क्या अरे मेरी बात तो पहले

1497
01:56:10,480 --> 01:56:12,360
पूरी सुन लीजिए फलिए

1498
01:56:12,360 --> 01:56:16,440
सुन सु सुकी बात बो बोलिए सुन सुना दो सुना दो भैया सुना

1499
01:56:16,440 --> 01:56:20,760
उसी प्रकार हम कबीर को हिंदी में क

1500
01:56:20,760 --> 01:56:23,800
बात नहीं

1501
01:56:23,800 --> 01:56:27,920
अरे वही बात बोली आपने भया

1502
01:56:27,920 --> 01:56:31,960
भैया भैया मैं कैसे आपसे बात करू मैं आपसे ये कह रहा

1503
01:56:31,960 --> 01:56:36,160
हूं जी पूछ रहा हं

1504
01:56:36,160 --> 01:56:40,160
सुनि एक मिनट मिनट मिनट मिनट एक मिनट एक मिनट

1505
01:56:40,160 --> 01:56:44,320
मॉडरेटर जी वो बंद कर दीजिए मतलब बारबार लोग आने का प्रयास कर रहे

1506
01:56:44,320 --> 01:56:48,760
हैं ना और यह फुल है तो मेरी स्क्रीन पर बारबार वो आ रहा है

1507
01:56:48,760 --> 01:56:52,920
उसको बंद कर दीजिए आप मतलब कुछ ऐसा कर दीजिए कि बारबार लोग मतलब अटेंप्ट

1508
01:56:52,920 --> 01:56:57,360
ना कर पाए बारबार मैं यह कह रहा हूं कि

1509
01:56:57,360 --> 01:57:01,680
जो गांव वाले हैं उन्होने शास्त्र नहीं पढ़े होते हैं

1510
01:57:01,680 --> 01:57:05,840
आपने आप शास्त्रों के अनुसार भक्ति कर रहे हैं ना तो

1511
01:57:05,840 --> 01:57:09,920
शास्त्र से बताइए कि कवि कबीर कैसे बना शास्त्र से

1512
01:57:09,920 --> 01:57:14,200
गांव वालों को तो आप पढ़ाने जा रहे हो ब्रह्मा विष्णु महेश भगवान नहीं है कबीर भगवान

1513
01:57:14,200 --> 01:57:18,320
है ये देख शास्त्र में लिखा है तो मुझे शास्त्र से बताइए कि

1514
01:57:18,320 --> 01:57:22,720
कवि कबीर कैसे बना बताइए

1515
01:57:22,720 --> 01:57:27,080
जैसे भाई साहब शास्त्र का नाम बोलिए शास्त्र का नाम जैसे

1516
01:57:27,080 --> 01:57:27,800
नहीं

1517
01:57:27,800 --> 01:57:32,360
हमको वो मत दीजिए हमको उदाहरण मत दीजिए लोगों का

1518
01:57:32,360 --> 01:57:36,480
क्योंकि वो सब लोग आपके अनुसार बेवकूफ है आप लोग लिखते हो कि

1519
01:57:36,480 --> 01:57:40,480
वो क्या कहते हैं ये लोग शास्त्र अनुकूल भक्ति नहीं करते हैं

1520
01:57:40,480 --> 01:57:44,880
सबको नरक में डाल रहे य सब रामपाल के ग्रंथों में सब लिखा हुआ है और रामपाल

1521
01:57:44,880 --> 01:57:49,000
के वीडियो में आता है कि शास्त्रो चित भक्ति नहीं करते हैं तो अपनी शास्त्रो चित

1522
01:57:49,000 --> 01:57:53,640
भक्ति दिखाओ कवि कबीर कैसे बना श द्वारा दिखाओ

1523
01:57:53,640 --> 01:57:57,760
और सुनो हम जिसको भगवान कहते हैं विष्णु

1524
01:57:57,760 --> 01:58:02,000
विष्णु कृष्ण शिव राम इन सबका शास्त्र में लिखा

1525
01:58:02,000 --> 01:58:08,000
है यही भगवान है यही शास्त्र में लिखा [संगीत]

1526
01:58:08,240 --> 01:58:12,240
है हमारे तुम्हारे नहीं आप शास्त्र बताइए

1527
01:58:12,240 --> 01:58:16,640
कौन सा है अब ये जैसे आप नाम पूछ रहे थे

1528
01:58:16,640 --> 01:58:21,120
फिर भाई साब फिर भाई साब मेरे पास देख बहुत सारे लोग वेट कर रहे हैं

1529
01:58:21,120 --> 01:58:25,760
आप मुझे कबीर कैसे बना शास्त्र

1530
01:58:25,760 --> 01:58:29,880
बताइए वही तो हम समझाने की कोशिश कर रहे हैं भाई साब

1531
01:58:29,880 --> 01:58:33,880
शास्त्र का नाम क्यों नहीं बोल रहे शास्त्र आपसे मैं ये पूछ रहा हूं एक

1532
01:58:33,880 --> 01:58:38,920
मिनट शास्त्र है कि नहीं इस मारे में शास्त्र है कि

1533
01:58:38,920 --> 01:58:43,000
नहीं देखिए मेरे पास भाई

1534
01:58:43,000 --> 01:58:47,760
साहब मैं क्या बताऊ

1535
01:58:47,760 --> 01:58:52,200
यार पता है क्या होता है मेरे पास ऐसे मैसेज आते हैं

1536
01:58:52,200 --> 01:58:56,200
कि आप थोड़ा कूल डाउन रहा करिए काम डाउन रहा करिए

1537
01:58:56,200 --> 01:59:00,600
ऐसा का रहा करिए मुझे मतलब अपने ऊपर गलानी होती है

1538
01:59:00,600 --> 01:59:04,640
कि मैं शायद अच्छा आचरण नहीं दे पा रहा हूं समाज के समक्ष और मैं हर

1539
01:59:04,640 --> 01:59:09,000
बार यह प्रण लेता हूं आने से पहले कि मैं आज बहुत ही

1540
01:59:09,000 --> 01:59:13,560
काम मतलब होकर के और जो है शांतिपूर्ण तरीके से

1541
01:59:13,560 --> 01:59:17,880
प्रयास करूंगा मगर भाई जो फ्रंट पर खड़े होते हैं ना बॉर्डर पर

1542
01:59:17,880 --> 01:59:22,080
उनकी स्थिति वही जानते हैं कट्टी मुर्गी का दर्द कट्टी मुर्गी

1543
01:59:22,080 --> 01:59:26,200
नती है उसी तरीके से 10

1544
01:59:26,200 --> 01:59:30,240
बार यहां पर जब कोई बात कह दी जाती है और फिर भी व्यक्ति उसी को टेप रिकॉर्ड को

1545
01:59:30,240 --> 01:59:34,360
वहीं से शुरू करता है तो दिक्कत होती है कब तक सहन करे

1546
01:59:34,360 --> 01:59:38,760
कोई मैं आपसे पूछ रहा हूं सज्जन महाशय महापुरुष

1547
01:59:38,760 --> 01:59:43,080
कि आप किस शास्त्र के आधार पर कवि को कबीर

1548
01:59:43,080 --> 01:59:47,640
कहते हैं शास्त्र है या नहीं है पहले य बता दीजिए है कि नहीं

1549
01:59:47,640 --> 01:59:51,680
शास्त्र है कि नहीं और कुछ मत बोलिए प्लीज पहले क्लियर कर

1550
01:59:51,680 --> 01:59:56,000
दीजिए शास्त्र है कि नहीं उसके बाद हम आपकी सुनेंगे है कि

1551
01:59:56,000 --> 01:59:58,000
नहीं क को कबीर

1552
01:59:58,000 --> 02:00:02,520
मानने के संबंध में शास्त्र है कि नहीं मैं आपसे पूछ रहा हूं फिर से

1553
02:00:02,520 --> 02:00:06,800
कवि को कबीर मानने के संबंध में शास्त्र

1554
02:00:06,800 --> 02:00:10,720
है कि नहीं हां

1555
02:00:10,720 --> 02:00:15,360
कहना देखो सबसे बड़ी चीज ये है भाई साब फिर देखो

1556
02:00:15,360 --> 02:00:19,520
फिर देखो से स्टार्ट फिर देखो से स्टार्ट

1557
02:00:19,520 --> 02:00:22,720
मैं पूछ रहा

1558
02:00:22,720 --> 02:00:26,680
बो पहले ये बता

1559
02:00:26,680 --> 02:00:30,840
दीजिए कवि कवि सुनिए सुनिए सुनिए मैं अपना

1560
02:00:30,840 --> 02:00:34,840
प्रश्न दोहरा दूं कवि को कबीर मानने के

1561
02:00:34,840 --> 02:00:38,920
संबंध में आप शास्त्र है कि नहीं कोई कि कवि

1562
02:00:38,920 --> 02:00:42,960
को कबीर माना जाए इस संबंध में कौन सा शास्त्र है अगर है तो

1563
02:00:42,960 --> 02:00:47,200
बताइए नाम बोलिए देखो मत कहना देखो मत कहना

1564
02:00:47,200 --> 02:00:52,360
देखिए देखो ये नहीं सीधे नाम बोलिए श्यान

1565
02:00:52,360 --> 02:00:57,520
बो बोलने दीजिए इनको बो बोलिए

1566
02:00:57,520 --> 02:01:01,560
शास्त्र कवि को कबीर कहा जाए इस बारे में प्रमाण है

1567
02:01:01,560 --> 02:01:05,600
वेदों में बिल्कुल जी यह कबी को

1568
02:01:05,600 --> 02:01:10,400
कबीर कहा जाए यह प्रमाण नहीं है लेकिन प्रमाण ये है कि कबीर

1569
02:01:10,400 --> 02:01:16,400
प्रमाण शास्त्रों में प्रमाण नहीं है ना कि कवि को कबीर कहा

1570
02:01:16,880 --> 02:01:20,880
जाए अब देखिए इतने बड़े हम तो आचार्य है

1571
02:01:20,880 --> 02:01:26,560
अब जो मत नहीं हो तो फिर उसको भेजो बड़ा हो जा

1572
02:01:26,560 --> 02:01:30,920
प्लीज जय श्रीराम फिर आइएगा बड़े हो जाए तो आइएगा अन्यथा

1573
02:01:30,920 --> 02:01:34,960
किसी और बड़े को भेजिएगा अगली बार आएंगे तो एक पहले कहिए मैं

1574
02:01:34,960 --> 02:01:40,960
बड़ा हो गया और या फिर किसी बड़े को लाइगा जय श्री

1575
02:01:43,760 --> 02:01:48,840
राम हां भाई दीपक कुमार जी ने भेजा

1576
02:01:48,840 --> 02:01:52,840
क्या बीच में कोई आए थे ना अभी शिवांश भैया

1577
02:01:52,840 --> 02:01:57,200
आकाश भी ब्रह्म है लिखा है वेद में आकाश ब्रम

1578
02:01:57,200 --> 02:02:01,560
हा आकाश भी ब्रह्म है इदम इंद्रो सवित राजा

1579
02:02:01,560 --> 02:02:07,560
राजा भी ब्रह्म हैवे का मंत्रम इंद्रो सत

1580
02:02:09,320 --> 02:02:12,560
राजा सर्वज्ञ

1581
02:02:12,560 --> 02:02:16,800
है देखिए कमेंट आ रहा है कि

1582
02:02:16,800 --> 02:02:20,800
नॉलेजेबल पर्सन से बात करिए अब बताओ मैं कहां से ढूंढू

1583
02:02:20,800 --> 02:02:25,200
भाई वो हम ढूंढे आकाश तिवारी जी

1584
02:02:25,200 --> 02:02:30,000
जय श्री राम अरे तो जा आप गए तो थे न

1585
02:02:30,000 --> 02:02:34,960
पर्सन पर्सन के पास गए थे आप तो उन्होंने फोन ही बंद कर दिया

1586
02:02:34,960 --> 02:02:39,000
आज आना कल आना गए थे

1587
02:02:39,000 --> 02:02:43,160
साथ में थे पंडित लोकी जी उन्होंने बंद कर

1588
02:02:43,160 --> 02:02:47,240
दिया सुना था मैंने और हम तैयार थे जाने

1589
02:02:47,240 --> 02:02:51,840
के लिए जब उनको पता लग गया तो बस

1590
02:02:51,840 --> 02:02:57,840
ब टाइट हो गई रा जी आप म्यूट है जी आप जय श्री [संगीत]

1591
02:02:58,400 --> 02:03:02,400
राम जय श्रीराम मुझे तो लगता मुझे तो

1592
02:03:02,400 --> 02:03:06,520
लगता है वो पिछले वा हेलो

1593
02:03:06,520 --> 02:03:10,880
जी अक्ष जी हेलो जी अक्षत

1594
02:03:10,880 --> 02:03:14,960
जी बोलिए हा मुझे तो लगता है कि जो हां जो पीछे आए थे

1595
02:03:14,960 --> 02:03:19,240
वो सिर्फ समय वे कर रहे थे अपना घुमा घुमा

1596
02:03:19,240 --> 02:03:23,440
के बोल रहे थे कब से मैं देख रहा हूं उनको देखिए देखिए देखिए एक

1597
02:03:23,440 --> 02:03:27,680
किसी और को भी ले लेते हैं ये दीपक फिर से आए क्या दीपक कुमार वही है क्या

1598
02:03:27,680 --> 02:03:32,440
ये हां भाई दीपक जी प्रमाण मिल गया

1599
02:03:32,440 --> 02:03:36,520
नहीं मैं प्रमाण आप जो कह रहे कबीर देव कबीर देव

1600
02:03:36,520 --> 02:03:40,680
ही कबीर परमात्मा है उसका वास्तविक नाम कबीर देवी है कलयुग में उनका

1601
02:03:40,680 --> 02:03:45,080
नाम कबीर साहिब होता है आप मुझे बताइए ये कहां से प्रमाणित

1602
02:03:45,080 --> 02:03:50,200
है कि जो कवि है वहां पर वेदों में वही कबीर

1603
02:03:50,200 --> 02:03:54,360
है हम ये कबीर परमेश्वरी क इनका सतलोक में

1604
02:03:54,360 --> 02:03:58,760
कबीर देव नाम है यहां प क बताइए मुझे बताइए कवि को कबीर

1605
02:03:58,760 --> 02:04:02,760
कहां किस आधार पर किस पाणिनीय सूत्र के आधार पर निरुक्त के आधार

1606
02:04:02,760 --> 02:04:07,080
पर कहां कहा गया को आपने कैंसिल किया

1607
02:04:07,080 --> 02:04:11,080
आपको सभी ने बताया आप नहीं मानने वाले इस चीज को है ना तो फिर आए

1608
02:04:11,080 --> 02:04:13,440
क्यों तो आप आप बताइए कि

1609
02:04:13,440 --> 02:04:17,520
कौन से पाणिनी के सूत्र से अष्टाध्यायी सूत्र से निर के सूत्र से आपने कौन से

1610
02:04:17,520 --> 02:04:21,760
व्याकरण के सूत्र से आपने व को ब बना दिया परने

1611
02:04:21,760 --> 02:04:25,960
लोगों को एक बात बता दूं कि कवि जो है शब्द

1612
02:04:25,960 --> 02:04:30,040
आया है वेदों में यदि आपके पास जो वेद का प्रमाण

1613
02:04:30,040 --> 02:04:34,120
है जहां से आप कवि उठा रहे हो या क्या वहां पर कबीर के

1614
02:04:34,120 --> 02:04:38,560
अर्थ में कबीर लिखा है दिखा दो कौन सी पब्लिकेशन

1615
02:04:38,560 --> 02:04:42,840
से आपका वेद छपा है दिखा दो वहां पर अर्थ में लिखा होगा कवि का अर्थ

1616
02:04:42,840 --> 02:04:47,280
सर्वज्ञ या फिर क्या कहते हैं क्रांत दर्शी

1617
02:04:47,280 --> 02:04:51,760
है ना अब बात ये आती है कि यदि आप उसके अर्थ को नहीं मानोगे अपना कबीर

1618
02:04:51,760 --> 02:04:55,840
डालोगे तो आपको उस वेद मंत्र को छापने वाली किताब पर

1619
02:04:55,840 --> 02:04:59,840
विश्वास नहीं है यदि विश्वास नहीं है तो बिल्कुल भी

1620
02:04:59,840 --> 02:05:03,840
विश्वास नहीं होना चाहिए मंत्र उनका अर्थ अपना

1621
02:05:03,840 --> 02:05:07,880
यह नहीं चलेगा पहली बात दूसरी बात जो हमारा

1622
02:05:07,880 --> 02:05:12,040
मेन क्वेश्चन है वह यह है कि फिर भी

1623
02:05:12,040 --> 02:05:16,040
कवि या कवि कबीर कैसे बन रहा है यह

1624
02:05:16,040 --> 02:05:21,840
बताइए आप कैसे बन रहा है

1625
02:05:21,840 --> 02:05:25,920
कबीर कैसे बन रहा है इस बारे में शास्त्र का क्या प्रमाण है जैसे तुम कह

1626
02:05:25,920 --> 02:05:29,920
लेते हो तो हम तो गलत करते हैं हमें क्यों कॉपी कर रहे हो हम तो गलत करते हैं

1627
02:05:29,920 --> 02:05:35,400
आपके हिसाब से हमें कॉपी मत करो और करो तो फिर पूरा

1628
02:05:35,400 --> 02:05:39,400
करो ठीक है तो इनको अब हटा दो दीपक जी के पास और

1629
02:05:39,400 --> 02:05:45,400
कुछ है

1630
02:05:48,800 --> 02:05:53,800
नहीं कट्टर हिंदू है राहुल जी चेहरे के

1631
02:05:53,800 --> 02:05:59,800
साथ गुरु चरण और कट्टर हिंदू जी आप अपना व चेहरा

1632
02:06:01,000 --> 02:06:04,760
दिखाए

1633
02:06:04,760 --> 02:06:08,840
जी राहुल शर्मा जी बताइए आपका परिचय जय

1634
02:06:08,840 --> 02:06:14,840
श्री राम जय श्री राम जय श्री

1635
02:06:17,000 --> 02:06:23,000
राम मैं शास्त्र का अध्ययन कर रहा हूं

1636
02:06:23,520 --> 02:06:27,840
अच्छा तो आपका यहां आने का उद्देश्य

1637
02:06:27,840 --> 02:06:33,840
हमारी बात का प्रतिकार

1638
02:06:39,920 --> 02:06:44,480
है क्या है चले गए

1639
02:06:44,480 --> 02:06:48,840
क्या चले गए दीपक जी आपके पास कोई और प्रमाण

1640
02:06:48,840 --> 02:06:54,840
है तो आपको हम ऊपर ले

1641
02:06:55,680 --> 02:06:59,840
हां प्रमाण है है हां

1642
02:06:59,840 --> 02:07:05,840
या

1643
02:07:06,840 --> 02:07:11,400
ना क्या कर रहे हैं हां

1644
02:07:11,400 --> 02:07:16,120
आप बोल रहे हैं क्या बोल रहे हैं है कि नहीं

1645
02:07:16,120 --> 02:07:20,520
हाथ उठाइए दीपक जी बताइए आप

1646
02:07:20,520 --> 02:07:25,120
लीजिए एक बार ऊपर मैं यह पूछना चाह रहा हूं आप

1647
02:07:25,120 --> 02:07:29,560
जिस हिसाब से प्रमाण देते हैं गणपत मतलब गणेश जी कहां पर

1648
02:07:29,560 --> 02:07:34,440
भाई साहब अभी बात यह हो रही है

1649
02:07:34,440 --> 02:07:39,000
आप आप अभी देखिए विषय मत करिए विषयात

1650
02:07:39,000 --> 02:07:43,120
मत करिए मैं प्रमाण दूंगा आपको विषयात मत करिए अभी विषय

1651
02:07:43,120 --> 02:07:47,520
य चल रहा है क्या कवि को कबीर मानने के संबंध में शास्त्र

1652
02:07:47,520 --> 02:07:51,760
प्रमाण है आपके पास या नहीं अभी

1653
02:07:51,760 --> 02:07:56,000
तो नहीं है लेकिन आप उस देखिए मैं बताऊंगा मैं बताऊंगा पहले इसमें

1654
02:07:56,000 --> 02:08:00,480
आप मैं बताऊंगा आपको दीपक जी मैं बताऊंगा आपको

1655
02:08:00,480 --> 02:08:04,960
मगर आप पहले दूसरी बात ना छेड़ने की बजाय आप यह बताइए

1656
02:08:04,960 --> 02:08:09,040
क्या कवि को कबीर मानने के संबंध में शास्त्र प्रमाण है

1657
02:08:09,040 --> 02:08:10,960
आपके पास अब मैं ऊपर ले रहा हूं

1658
02:08:10,960 --> 02:08:14,960
अगर आपने कोई दूसरी बात बोली तो मैं हटाऊ आपको मैं आपको आपकी बात का

1659
02:08:14,960 --> 02:08:19,360
जवाब भी दे दूंगा जाने से पहले मगर अभी विषय ये चल रहा है

1660
02:08:19,360 --> 02:08:23,760
अभी विषय ये चल रहा है कवि को कबीर मानने के संबंध में कबीर

1661
02:08:23,760 --> 02:08:28,360
को कबीर मानने के संबंध में शास्त्र प्रमाण है आपके पास

1662
02:08:28,360 --> 02:08:32,800
मैं पहले य पूछ रहा हूं हां के ना दूसरी बात नहीं

1663
02:08:32,800 --> 02:08:37,040
दूसरी बात नहीं पहले ये हां के ना दूसरी

1664
02:08:37,040 --> 02:08:41,120
बात नहीं मैं पूछ रहा हूं क

1665
02:08:41,120 --> 02:08:45,280
को हां कहना दीपक जी हां कहना कवि को कबीर

1666
02:08:45,280 --> 02:08:49,000
मानने के संबंध

1667
02:08:49,000 --> 02:08:54,440
में नहीं बोलेंगे नहीं बोलेंगे नहीं बोलेंगे नहीं बोलेंगे

1668
02:08:54,440 --> 02:09:00,440
भैया इनको अब आने ही मत

1669
02:09:02,480 --> 02:09:07,320
देना अभी टॉपिक थोड़ा

1670
02:09:07,320 --> 02:09:12,280
हेलो मेरा भी आपके साथ मत भेत

1671
02:09:12,280 --> 02:09:16,520
है पर वो पिछले बार पिछले बार जैसे आपने इकन

1672
02:09:16,520 --> 02:09:20,520
वाले के साथ जो चर्चा की थी स्कन वाले आए थे गु

1673
02:09:20,520 --> 02:09:24,920
गुरु कौन है आपके

1674
02:09:24,920 --> 02:09:29,360
मेरे गुरु मैं प्रेमानंद जी महाराज को फॉलो कर रहा हूं प्रेमानंद

1675
02:09:29,360 --> 02:09:34,320
महाराज सा है नहीं

1676
02:09:34,320 --> 02:09:38,720
विवाद इस बात पे है कि जो आपने कहा कि

1677
02:09:38,720 --> 02:09:43,440
जो लोक में हम जब सेवा करते हैं तो हमें

1678
02:09:43,440 --> 02:09:47,440
वो दिव्य आनंद नहीं प्राप्त होता जो अनंत अन मतलब जो

1679
02:09:47,440 --> 02:09:51,480
निरंतर रहे अगर आप

1680
02:09:51,480 --> 02:09:55,760
आपके साथ अगर आप अंत तो सुनो प्रेमानंद जी महाराज के पास अच्छे से जाके

1681
02:09:55,760 --> 02:09:59,960
आप पूछ लो अंततोगत्वा वो भी मानते हैं कि धाम और धामी

1682
02:09:59,960 --> 02:10:04,200
को एक मानते होए यदि इस भाव के साथ आप अगर किसी लोक में हो

1683
02:10:04,200 --> 02:10:08,200
धाम और धामी को एक मानते हुए तो ही आप मोक्ष को प्राप्त हुए

1684
02:10:08,200 --> 02:10:12,920
हो अब आपसे मैं एक बात पूछ रहा हूं छोटी सी ठीक है

1685
02:10:12,920 --> 02:10:17,080
आप भक्ति करते हो तो क्यों करते

1686
02:10:17,080 --> 02:10:21,480
हो या भगवान की सेवा करते हो तो क्यों करते भगवत प्राप्ति

1687
02:10:21,480 --> 02:10:26,000
के लिए भगवान को भगवान आपका नेटवर्क

1688
02:10:26,000 --> 02:10:28,520
दिक्कत

1689
02:10:28,520 --> 02:10:34,520
आ भगवान की प्रसन्नता के लिए करते हो

1690
02:10:35,440 --> 02:10:39,480
ना ये टॉपिक छड़ गया तो इसको कंप्लीट कर लेते हैं और रामपाल जी

1691
02:10:39,480 --> 02:10:43,680
के विषय में ही रहेंगे आप जो भक्ति

1692
02:10:43,680 --> 02:10:49,680
जो भक्ति करते हो सेवा करते हो वो भगवान को प्रसन्न करने के लिए करते हो

1693
02:10:49,760 --> 02:10:53,840
ना ठीक है भगवान को प्रसन्न करने के लिए

1694
02:10:53,840 --> 02:10:57,920
करते हो क्या ठीक है उससे आपको मिलता क्या है उनकी प्रसन्नता

1695
02:10:57,920 --> 02:11:01,920
से आपको क्या मिलता है आ आनंद

1696
02:11:01,920 --> 02:11:07,120
आनंद यानी आप अपने लिए भक्ति करते हो भगवान के लिए

1697
02:11:07,120 --> 02:11:11,360
नहीं पर वो मैं अभी उस उच उस तिथि पर नहीं हूं

1698
02:11:11,360 --> 02:11:15,360
पर जो जैसे भक्तों का चरित्र देते तो उसम

1699
02:11:15,360 --> 02:11:20,240
सेवा करने से आपको आनंद मिलता है इसलिए आप भगवान की भक्ति करते हो ना

1700
02:11:20,240 --> 02:11:24,240
है ना या अपने लिए भगवान के लिए नहीं कर रहे हो अंत

1701
02:11:24,240 --> 02:11:28,240
का सुख आपका है नहीं पर सेवा

1702
02:11:28,240 --> 02:11:32,480
करने से भगवान को भी आनंद मिलता है अरे भाई तो उस

1703
02:11:32,480 --> 02:11:37,000
आनंद से आपको आनंद मिल रहा है इसलिए कर रहे हो ना

1704
02:11:37,000 --> 02:11:41,040
केवल भगवान तक सीमित नहीं है ना वो अंत का अनंत तो आपका है

1705
02:11:41,040 --> 02:11:45,640
जैसे मैं अपनी बिटिया से प्रेम करता हूं मैं अपने माताज

1706
02:11:45,640 --> 02:11:49,680
से प्रेम करता हूं मैं अपने भाई से प्रेम करता हूं

1707
02:11:49,680 --> 02:11:50,480
ठीक है

1708
02:11:50,480 --> 02:11:54,480
अगर उसको को अच्छा लगेगा तो मुझे अच्छा लगेगा तो उसको अच्छा

1709
02:11:54,480 --> 02:11:58,520
लगने के लिए मैं बहुत सारे कार्य करता हूं मगर वो सारे कार्यों में

1710
02:11:58,520 --> 02:12:02,560
मैं अपने लिए कार्य कर रहा हूं क्योंकि मुझे अच्छा लग रहा है तो क्या ऐसा

1711
02:12:02,560 --> 02:12:05,760
ही है आपका भगवान के साथ

1712
02:12:05,760 --> 02:12:09,800
संबंध जो जैसे प्रारंभ में हमको ऐसा ही संबंध मानना पड़ता

1713
02:12:09,800 --> 02:12:14,000
है कि हमें आनंद मिल रहा है पर जैसे जैसे स्थिति आती है भक्त की

1714
02:12:14,000 --> 02:12:18,200
उसके बाद एक निश्चित मैं आपको एक चीज और बता दूं

1715
02:12:18,200 --> 02:12:22,200
एक चीज और आपको भगवान आपने कहा भगवत

1716
02:12:22,200 --> 02:12:26,800
प्राप्ति ठीक है तो आप जब धाम में

1717
02:12:26,800 --> 02:12:30,880
पहुंचे तो आप सुखी हो गए ठीक

1718
02:12:30,880 --> 02:12:34,880
है आप सुखी हो गए और भगवान वहां दूर

1719
02:12:34,880 --> 02:12:38,920
बैठे हैं आप दूर बैठे हो मगर आप सुखी हो गए तो इससे तो

1720
02:12:38,920 --> 02:12:43,240
यही माना जाएगा ना कि आपका जो प्रेम था जो भाव था वो अपने

1721
02:12:43,240 --> 02:12:48,600
सुख के लिए था भगवान के लिए नहीं क्योंकि भगवान तो अभी भी आपसे दूर बैठे

1722
02:12:48,600 --> 02:12:52,800
हैं नहीं नहीं नहीं नहीं इसमें बात आपको य समझनी

1723
02:12:52,800 --> 02:12:56,960
पड़ेगी जब भक्त जो भगवत धाम में चला जाता है तो

1724
02:12:56,960 --> 02:13:01,080
अज्ञानी नहीं रहता व ज्ञानी हो जाता है और भगवान खुद बोलते

1725
02:13:01,080 --> 02:13:06,240
है कि हम ब्रह्मा तो हम ब्रह्म से अलग नहीं हो

1726
02:13:06,240 --> 02:13:10,880
सकते भगवान के साथ एकत्व हो जाता है

1727
02:13:10,880 --> 02:13:14,880
क्या नहीं हम भगवान के साथ एकत्व में है यह ज्ञान

1728
02:13:14,880 --> 02:13:20,880
है हम जब एक में रते नकीब सेवा करते उ

1729
02:13:21,400 --> 02:13:25,960
प्रेमानंद जी महाराज जी जो बात बोलते हैं वही हम मानते हैं

1730
02:13:25,960 --> 02:13:30,400
उसी एकत्व को उनके मुख से निकलवाने के लिए मैं ये बातें बोल रहा था

1731
02:13:30,400 --> 02:13:34,720
जैसे आप बोल रहे हैं ना अ ब्रह्मास्मि ऐसे ही अगर वो बोलते

1732
02:13:34,720 --> 02:13:38,800
तो सब सही है मगर वो नहीं मानते हम ब्रह्मा वो

1733
02:13:38,800 --> 02:13:43,480
ज्ञानी वाली बात को नहीं मानते हैं इसलिए उनसे बो बोला था कि वहां पर

1734
02:13:43,480 --> 02:13:47,640
जब तक आपको आम ब्रह्मासि का बोध नहीं होगा जब तक आपको

1735
02:13:47,640 --> 02:13:52,240
ज्ञानी का अज्ञानता से दूर नहीं होगे तब तक मोक्ष मोक्ष नहीं है

1736
02:13:52,240 --> 02:13:56,240
तो वो नहीं मानते हम ब्रह्मास्मि वो नहीं मानते कि हम ज्ञानी हो

1737
02:13:56,240 --> 02:14:00,360
जाते हैं धाम में जाकर के नहीं इसलिए है समझ रहे

1738
02:14:00,360 --> 02:14:04,560
और प्रेमानंद जी महाराज कोई ऐसी बात नहीं बोलते जो शंकराचार्य जी के विरोध में हो

1739
02:14:04,560 --> 02:14:08,840
आदि शंकराचार्य जी के विरोध में हो ठीक है अब हम लोग

1740
02:14:08,840 --> 02:14:13,160
टॉपिक पर आएंगे वास आपका आने के लिए आभार

1741
02:14:13,160 --> 02:14:17,440
आप हमसे वो मत रखिएगा उनका प्र नहीं करते कहीं खंडन शमान जी महाराज

1742
02:14:17,440 --> 02:14:21,480
से जो भी बात बोलते वो सारी बात मानते

1743
02:14:21,480 --> 02:14:25,560
हैं प्रेम जी महाराज उनका सुन लेना एक

1744
02:14:25,560 --> 02:14:30,160
परमार्थ व्यवहार वाला वीडियो है जिसम वो लीला के बारे में बात कर रहे हैं एक है ये वाली

1745
02:14:30,160 --> 02:14:34,320
इसको कहते हैं तामसिक लीला जो यहां भौतिक संसार में हो रही है और एक होती

1746
02:14:34,320 --> 02:14:38,480
है सात्विक लीला जो वैकुंठ लोक इत्यादि में होती है ठीक है

1747
02:14:38,480 --> 02:14:42,760
मगर इस सबसे परे जो ब्रह्म स्वरूप है ब्रह्म के साथ एकत्व

1748
02:14:42,760 --> 02:14:47,160
वो अम ब्रह्मा वाला फील वो जो परम धाम है वहां पर आ जाता है

1749
02:14:47,160 --> 02:14:51,320
समझ गए तो अगर आप परम धाम में जाके अज्ञानता से मुक्त

1750
02:14:51,320 --> 02:14:55,480
हो जा रहे ज्ञानी हो जा रहे भगवान के साथ एकत्व को महसूस कर रहे हैं तो तो आप मुक्त

1751
02:14:55,480 --> 02:14:59,560
है व तो तो आप नित्य लीला में रहिए और धाम और धामी एक

1752
02:14:59,560 --> 02:15:03,880
हो जाते हैं यह भी है तो तो आप रहिए वहा पर और अगर आप

1753
02:15:03,880 --> 02:15:08,040
वहां पर जाकर के भी भगवान से अलग है भगवान से दूर

1754
02:15:08,040 --> 02:15:12,320
भगवान वो बैठे हैं और आपको य फील नहीं हो रहा हम ब्रह्माम आपको वहा

1755
02:15:12,320 --> 02:15:16,360
पर भीय फील नहीं हो रहा तो आप मुक्त नहीं है आपकी वहा सेवा बाधित हो

1756
02:15:16,360 --> 02:15:19,960
जाएगी त सुख नहीं

1757
02:15:19,960 --> 02:15:24,200
रहेगा हां तो कुल मिला कर के आप में और उनमें यही अंतर

1758
02:15:24,200 --> 02:15:28,320
है कि आप ये मानते हो कि वहां पर ज्ञानी हो जाता है आप ये मानते हो वहां हमम

1759
02:15:28,320 --> 02:15:32,600
ब्रह्मास्मि का बोध हो जाता है ये मानते हो आप वो नहीं मानते

1760
02:15:32,600 --> 02:15:36,680
ऐसा वो बोध तो हो जाता है पर भक्त खुद

1761
02:15:36,680 --> 02:15:40,720
से स्वीकार नहीं करता जैसे वहां भी गया तो भगवान की सेवा के लिए

1762
02:15:40,720 --> 02:15:45,080
वो ये ये सब बातें भाई साहब रस के लिए है आप

1763
02:15:45,080 --> 02:15:49,160
महाराज जी से दोबारा पूछना ये सब बातें रस की है

1764
02:15:49,160 --> 02:15:53,320
र की है रस की चीज हैय सब ठीक

1765
02:15:53,320 --> 02:15:58,000
है जय श्री

1766
02:15:58,000 --> 02:16:02,240
राम अक्षय तिवारी जी य जिज्ञासु प्रश्न गुरुदेव भगवान से कीजिए

1767
02:16:02,240 --> 02:16:06,360
ना इस जगह पर थोड़ी की जाती है सब

1768
02:16:06,360 --> 02:16:10,680
बात उस कीजिए ना भास्कर

1769
02:16:10,680 --> 02:16:15,760
दास जय श्री राम राज जी

1770
02:16:15,760 --> 02:16:21,160
ब्राउंड बोलिए भास्कर दास जी [संगीत]

1771
02:16:21,160 --> 02:16:25,760
आध्यात्मिक अ क से है और कितना है ये बता

1772
02:16:25,760 --> 02:16:29,960
दीजिए हमारा आध्यात्मिक मतलब ज्ञान

1773
02:16:29,960 --> 02:16:34,040
तो हमारे गुरु जी के सत्संग से ही है कौन

1774
02:16:34,040 --> 02:16:38,360
गुरु जी हमारे गुरु जी संत रामपाल

1775
02:16:38,360 --> 02:16:42,440
जी महाराज अच्छा ठीक है तो

1776
02:16:42,440 --> 02:16:47,160
आप यहां पर कौन सी बात को रखने आए हैं

1777
02:16:47,160 --> 02:16:51,440
वेदों में प्रमाण है कबीर भगवान है या फिर क्या अच्छा

1778
02:16:51,440 --> 02:16:51,940
एक नई

1779
02:16:51,840 --> 02:16:55,880
चीज पूछता हूं मैं आपसे थोड़ा हट मैं ये पूछ

1780
02:16:55,880 --> 02:17:00,680
रहा हूं क्या इस संसार की प्रत्येक

1781
02:17:00,680 --> 02:17:04,840
वस्तु रामपाल दास के द्वारा बताए जाने वाले ईश्वर ने बनाई

1782
02:17:04,840 --> 02:17:09,200
है पूरा संसार उसी ने बनाया है कबीर ने

1783
02:17:09,200 --> 02:17:11,760
जी बिल्कुल

1784
02:17:11,760 --> 02:17:16,240
अच्छा आसमान खाली जगह सब कुछ उसी ने बनाया

1785
02:17:16,240 --> 02:17:20,480
है स्पेस भी उसी ने बनाया है हां

1786
02:17:20,480 --> 02:17:24,560
हां सब बनाया है स्पेस बनाया एक

1787
02:17:24,560 --> 02:17:29,680
मिनट हां सारा चीज उसम ऋग्वेद में

1788
02:17:29,680 --> 02:17:33,680
प्रमाण मैं अभी पूछूंगा भाई साहब मैं पूछूंगा मैं पूछूंगा आप

1789
02:17:33,680 --> 02:17:37,800
अभी प्रमाण पर मत आइए प्रमाण में पूछा हम लोग बात

1790
02:17:37,800 --> 02:17:42,080
करेंगे प्रमाण की मैं पूछ रहा हूं क्या स्पेस भी कबीर

1791
02:17:42,080 --> 02:17:46,600
नेही बनाया है जी जी सभी कुछ बना है सब कुछ

1792
02:17:46,600 --> 02:17:51,080
जो आप सो स ठीक है अब ये बताइए

1793
02:17:51,080 --> 02:17:56,480
जहां पर कबीर बैठे हैं वो किसने

1794
02:17:56,480 --> 02:18:00,720
बनाया वो तो कबीर जहां बैठे

1795
02:18:00,720 --> 02:18:04,800
हैं वो भी तो कबीर बनाया हुआ वो असंख्य ब्रह्मांड में

1796
02:18:04,800 --> 02:18:07,520
बैठे हैं असं ब्रह्मांड के

1797
02:18:07,520 --> 02:18:11,680
जैसे ये मान लीजिए ये कबीर है ये कहीं पर बैठे हैं तो

1798
02:18:11,680 --> 02:18:16,160
ये जहां पर बैठे हैं वो जगह तो पहले से हो गई ना वो

1799
02:18:16,160 --> 02:18:20,360
कबीर ने नहीं बनाई ना जी कबीर ने नहीं बनाई

1800
02:18:20,360 --> 02:18:24,920
ना हां ऐसा तो ऐसे तो

1801
02:18:24,920 --> 02:18:29,240
इस हिसाब से फिर नास्ति हो

1802
02:18:29,240 --> 02:18:34,080
एक मिनट एक मिनट आप टॉपिक चेंज मत करिए

1803
02:18:34,080 --> 02:18:38,440
पूछ रहा क्या कबीर ने सब कुछ बनाया कबीर ने सब बनाया

1804
02:18:38,440 --> 02:18:44,440
आपने कहा अब मैं पूछ रहा जहा कबीर बैठा है वो जगह किसने

1805
02:18:45,120 --> 02:18:50,840
बनाई जो कबीर जी है उन्होंने सारे ब्रह्मांड की रचना की

1806
02:18:50,840 --> 02:18:54,960
वीर बैठे हैं वो जगह किसने बनाई थोड़ा रोचकता आ

1807
02:18:54,960 --> 02:18:58,960
गई इस प्रश्न से हां बहुत रोचकता आ गई है ये यह

1808
02:18:58,960 --> 02:19:03,000
तो अभी हमको मतलब अभी इतना मेरे को यह बात जो आपने अभी पूछी

1809
02:19:03,000 --> 02:19:07,000
है इसके बारे में भी हमको वेदों से मतलब जानकारी नहीं है इसके बारे

1810
02:19:07,000 --> 02:19:11,280
में प्रमाण नहीं म आपके गुरु ने आपको ये नहीं बनाया बताया एक मिनट

1811
02:19:11,280 --> 02:19:15,360
बताया होगा पर मैंने अभी इतना तो है नहीं कि पूरा ज्ञान है अपन को अभी आप देख ही

1812
02:19:15,360 --> 02:19:21,360
रहे होंगे मैं कितना बड़ा हूं दिख रहा होगा सामने तो मेरे को जितना जन

1813
02:19:21,560 --> 02:19:25,720
मि मिन दोबारा आइए पहले पता

1814
02:19:25,720 --> 02:19:29,960
कर आप अ कर आपको प्रमाण दे रहा हूं ना आप अपनी

1815
02:19:29,960 --> 02:19:35,960
बात रख दे रहे हैं बारबार जो भी आ रहा है आप अपनी बात रख के उसको अलग कर दे

1816
02:19:36,520 --> 02:19:40,600
रहे सुनिए भाई साहब भाई साहब सुनिए पहले आपकी

1817
02:19:40,600 --> 02:19:44,600
आवाज नहीं आ रही है अभी मैं मैं आपसे कुछ बात करना चाह रहा हूं मुझे मालूम है

1818
02:19:44,600 --> 02:19:49,040
कि आप भर के आए टेप रिकॉर्ड वो आपको खाली करना है य रुक जाए

1819
02:19:49,040 --> 02:19:53,120
भा इको अनूट करो भाई मानेंगे नहीं ये छोटे हैं अभी अभी

1820
02:19:53,120 --> 02:19:57,240
इनको अभी इनको ज्ञान नहीं है उतना आपकी आवाज नहीं आ रही

1821
02:19:57,240 --> 02:20:01,440
भाई साहब आपकी आवाज नहीं आ रही मत बोलिए

1822
02:20:01,440 --> 02:20:05,720
इस हिसाब से तो आप आप नास्तिक हो गए ना आपके कौन

1823
02:20:05,720 --> 02:20:10,240
कौन इनको कौन इनको अन म्यूट कर रहा

1824
02:20:10,240 --> 02:20:15,080
है वो अपने आपको को ही कर रहे हैं अन म्यूट

1825
02:20:15,080 --> 02:20:19,120
इनको फोर्स म्यूट करिए भैया

1826
02:20:19,120 --> 02:20:25,120
फोर्स म्यूट कर दिया करिए यह कुछ का कुछ बोलने लगते

1827
02:20:27,840 --> 02:20:33,840
हैं वो क्या कहते हैं

1828
02:20:35,040 --> 02:20:39,120
उसको मुझे बहस करनी है उसको बहस कर द है अनज कुमार

1829
02:20:39,120 --> 02:20:43,800
जी को वो वो केवल वो अपनी जो भर के आए थे

1830
02:20:43,800 --> 02:20:48,800
वो निकालना था आवाज आही आवाज आ रही है मेरी

1831
02:20:48,800 --> 02:20:53,080
हेलो

1832
02:20:53,080 --> 02:20:59,080
मेरी आवाज आ रही है

1833
02:20:59,840 --> 02:21:03,920
आपको यह क्या आया था पोलियो का एडवर्टाइजमेंट

1834
02:21:03,920 --> 02:21:07,920
आया था हां भाई मेरी आवाज आ

1835
02:21:07,920 --> 02:21:12,240
रही हैकी जी आप थोड़ा संभालिए मैं थोड़ा जल पी लू बहुत देर हो गई

1836
02:21:12,240 --> 02:21:16,400
मैं कह रहा हूं आपको आवाज आ रही है मेरी हां मुझे आ रही है आवाज बस

1837
02:21:16,400 --> 02:21:21,280
ठीक है दो बूंद हर बार पोलियो पर जीत रहे बरकरार

1838
02:21:21,280 --> 02:21:25,280
चलो ठीक है बढ़िया है ये भी शुरू कर दिया मैं ये कह

1839
02:21:25,280 --> 02:21:30,120
रहा हूं कि उनको जरा उनको ले उनको ले लीजिए उनको पूछ लीजिए और

1840
02:21:30,120 --> 02:21:34,360
दीजिए थोड़ा संयम रखिए हम आपकी बात सुनेंगे थोड़ा संयम

1841
02:21:34,360 --> 02:21:38,520
रखिए पूरी बात आपकी होने देंगे एक एक करके चलेंगे आप आगे

1842
02:21:38,520 --> 02:21:42,640
मत बढ़ ठीक है जी सुन र है ना

1843
02:21:42,640 --> 02:21:43,140
जी

1844
02:21:42,880 --> 02:21:47,120
जी आगे मत बढ़ ठीक है अब पहली बात मेरा यह कहना है कि

1845
02:21:47,120 --> 02:21:52,080
आपके गुरु ने आपको ये नहीं बताया है कि

1846
02:21:52,080 --> 02:21:56,200
अगर कबीर ने संसार बनाया है तो जहां पर कबीर बैठा है

1847
02:21:56,200 --> 02:22:00,200
बैठे हैं वह जगह किसने बनाई हा तो

1848
02:22:00,200 --> 02:22:04,320
बस किसी को जी आप ब सु इस बारे में नहीं पता है आपको

1849
02:22:04,320 --> 02:22:08,360
इस बारे में अभी नहीं पता है ठीक है आप अगली बार जो है पता करके

1850
02:22:08,360 --> 02:22:12,440
आइएगा दूसरी बात ये है अब आपको आपके प्रश्न का उत्तर दे दूं

1851
02:22:12,440 --> 02:22:16,440
हम नास्तिक नहीं हो रहे हैं जैसे एक मकड़ी अपने अंदर

1852
02:22:16,440 --> 02:22:20,520
से ही निकाल के मटेरियल जाला बनाती है ना ऐसे ही हम

1853
02:22:20,520 --> 02:22:24,520
ईश्वर को मानते हैं जिनका जो ईश्वर जगत बनाता ही नहीं जगत

1854
02:22:24,520 --> 02:22:28,600
बनता भी है इस कारण से श्वर कौन है आप

1855
02:22:28,600 --> 02:22:32,640
वो भी बता दीजिए मुझे हम वो भी ढूंढने का प्रयास करेंगे उस ईश्वर को भी ढूंढने का

1856
02:22:32,640 --> 02:22:36,880
प्रयास करेंगे ब्रह्मा विष्णु महेश भगवती और गणेश इन पांच रूपों में परम

1857
02:22:36,880 --> 02:22:41,120
सत्य अपने आप को प्रकट करते हैं मनुष्यों के समक्ष एक मिनट

1858
02:22:41,120 --> 02:22:45,200
सुनिए मैं भी आपको कुछ प्रमाण देना चाहता हूं जो ब्रह्मा विष्णु

1859
02:22:45,200 --> 02:22:49,240
महेश है इनकी तो खुद की जन्म मृत्यु होती है ये तो आपने प्रमाण में देखा ही होगा बहुत

1860
02:22:49,240 --> 02:22:53,320
पहले नहीं देखा क्या अभी तक आपने ये नहीं देखा ये

1861
02:22:53,320 --> 02:22:57,320
जो चल रहा है इतनी देर से अभी अभी आए हैं आप हां मैं तो अभी आया

1862
02:22:57,320 --> 02:22:57,920
हूं

1863
02:22:57,920 --> 02:23:02,160
तो प्रमाण हम भी तो आपको दे रहे हैं कि वो अविनाशी है उसका क्या करें

1864
02:23:02,160 --> 02:23:07,080
प्रमाण आप देवी भागवत गीता में आप प्रमाण दे देवी भागवत

1865
02:23:07,080 --> 02:23:11,400
देवी देवी भागवत से ही प्रमाण दिया भाई मेरे आप देर से आए

1866
02:23:11,400 --> 02:23:15,680
शुरू से देख देवी भागवत महापुराण में स्कं नंबर तीन पृष्ठ

1867
02:23:15,680 --> 02:23:19,840
नंबर 123 में आप देखिए उस इनको बंद करो

1868
02:23:19,840 --> 02:23:24,000
ये अपना रड खाली करने आए उन्होने इसको देखा नहीं पीछे से हमने

1869
02:23:24,000 --> 02:23:28,200
प्रमाण दिया कि नहीं दिया कम करिए आप दोबारा देख के आइए पूरी

1870
02:23:28,200 --> 02:23:32,360
और जब पूरा ये होमवर्क कर लीजिए पहले अपना फिर आइएगा प्रमाण दे दिया जा चुका है पहले

1871
02:23:32,360 --> 02:23:36,480
ही ठीक है जाके अ सुनिए मैं आपको बता

1872
02:23:36,480 --> 02:23:41,280
द जाने से पहले कहां गए चले गए क्या ठीक है अनुज कुमार जी बोलिए

1873
02:23:41,280 --> 02:23:45,440
राहुल शर्मा जी आ जाइए रामपाल

1874
02:23:45,440 --> 02:23:50,960
के विषय में ही कोई बात हो तो आए

1875
02:23:50,960 --> 02:23:55,160
अनुज कुमार जी को बहस करनी थी ना अच्छा हा

1876
02:23:55,160 --> 02:24:01,160
लिखा हुआ है उन्होंने बस कर अनुज कुमार जी शर्ट पहन के आइए

1877
02:24:01,570 --> 02:24:03,720
[हंसी]

1878
02:24:03,720 --> 02:24:08,200
जाइए शर्ट नहीं है क्या रामपाल

1879
02:24:08,200 --> 02:24:12,240
जी के द्वारा बताई गई भक्ति के अनुसार शर्ट भी गायब हो जाती है व्यक्ति की

1880
02:24:12,240 --> 02:24:18,240
क्या प्रोफेट कबीर साहिब भी आए हैं

1881
02:24:21,280 --> 02:24:25,640
प्रियांशु परमार जी जय श्री राम जय श्री राम भाई

1882
02:24:25,640 --> 02:24:29,680
जी जी आपका परिचय मैं एक एडवोकेट हूं वैसे

1883
02:24:29,680 --> 02:24:33,720
मैं हिस्ट्री वगैरह के बारे में पढ़ता हूं तो काफी दिनों से हम रामल

1884
02:24:33,720 --> 02:24:37,760
का चर्चा आपके में देख रहा था चैनल पर भी पूरी थरी

1885
02:24:37,760 --> 02:24:42,280
को मैंने पढ़ने की कोशिश करी कि यह कबीर शब्द आया कहां से पहली बात तो यह है कि यह

1886
02:24:42,280 --> 02:24:46,320
जो शब्द है व पारसी का शब्द है आप सऊदी अरेबिया में जाएंगे

1887
02:24:46,320 --> 02:24:50,680
दस्ते कबीर द यह सब नाम से डेजर्ट होते हैं वहा पर

1888
02:24:50,680 --> 02:24:54,760
तो वहां से क्योंकि उस वक्त लोधी लोदिया का शासन था तो

1889
02:24:54,760 --> 02:24:58,840
वहां से एक नाम था जो आप पर्शियन से कुरान में

1890
02:24:58,840 --> 02:25:03,160
से देख के उठाया गया जिसका जो मतलब है कुरान

1891
02:25:03,160 --> 02:25:06,080
के हिसाब से कबीर द ग्रेट जिसे

1892
02:25:06,080 --> 02:25:10,120
बोलते हैं हम तो सबसे बड़ा जो ग्रेट कुरान के हिसाब से माना गया वह

1893
02:25:10,120 --> 02:25:14,360
अल्लाह को माना गया है तो जो यह रेफरेंस है वर्ड का वह

1894
02:25:14,360 --> 02:25:18,440
अल्लाह के लिए दिया गया है अब वहीं से रामपाल जी एक वर्ड उठाते

1895
02:25:18,440 --> 02:25:22,560
हैं वो एक थ्योरी प्रोपेट कर करते आप इनके थोड़े बहुत और चैनल देखेंगे तो इन्होंने

1896
02:25:22,560 --> 02:25:26,720
अल कबीर इस्लामिया नाम का चैनल बनाया हुआ है

1897
02:25:26,720 --> 02:25:31,040
अच्छा हां जी तो सबसे बड़ी प्रॉब्लम हम हिंदुओं

1898
02:25:31,040 --> 02:25:35,320
में ये आ रही है मैं काफी दिनों से आपकी वीडियो देख रहा था कि हम देख रहे थे कि हिंदू

1899
02:25:35,320 --> 02:25:39,840
संगठित क्यों नहीं हो पा रहा तो यह पथ भ्रष्ट करने के लिए यह लोग बहुत

1900
02:25:39,840 --> 02:25:43,840
ही अच्छे तरीके से काम कर रहे हैं कि कबीर ही अल्लाह

1901
02:25:43,840 --> 02:25:48,200
है और जो आप देखेंगे कबीर की जो स्टोरी बनाई गई है रामपाल के द्वारा

1902
02:25:48,200 --> 02:25:52,440
क्योंकि ना तो ये आपको गवर्नमेंट की साइड पर देख आप इंडियन गवर्मेंट ओजी कल्चर

1903
02:25:52,440 --> 02:25:56,480
में जाकर देखेंगे वहा पर कोई मगर कबीर दास जी जो

1904
02:25:56,480 --> 02:26:00,720
थे जो वास्तविकता है उनकी उनका नाम वह कबीर कैसे भी पड़ा मगर

1905
02:26:00,720 --> 02:26:04,720
जो कबीर दास जी थे वोह रामानंदाचार्य जी

1906
02:26:04,720 --> 02:26:08,840
के शिष्य बने उन्होंने जो है उनसे दीक्षा शिक्षा दीक्षा प्राप्त

1907
02:26:08,840 --> 02:26:13,080
की जो भी है और एक अच्छा उन्होंने काव्य मतलब राम की भक्ति

1908
02:26:13,080 --> 02:26:17,200
उन्होंने प्रतिपादित की और हमारे आचार्य गण जो है

1909
02:26:17,200 --> 02:26:21,320
उनकी चीजों को अपने उसम लेते हैं उनकी लिखे

1910
02:26:21,320 --> 02:26:25,320
हुए को उन्होने बहुत अच्छी अच्छी चीजें लिखी है मगर ये उनके नाम

1911
02:26:25,320 --> 02:26:29,360
प ये सब वो चला रहे हैं गिरो अब अभी क्या

1912
02:26:29,360 --> 02:26:33,480
है अभी का सीन देखिए जो रामपाल जी है वो स्वयं

1913
02:26:33,480 --> 02:26:37,600
जेल में है वो बना के चले गए जितना वीडियो बनाना था अब

1914
02:26:37,600 --> 02:26:41,800
वो हो सकता है सुधर चुके हो अंदर जाके उनके मन में आ चुका हो मैंने गलत कर दिया

1915
02:26:41,800 --> 02:26:46,000
मगर अब उनके नाम पर जैसे कबीर जी के नाम पर ये चल रहा था अब उनके नाम

1916
02:26:46,000 --> 02:26:50,320
पर ये चल रहा है हो सकता है वो अंदर से कह रहा हो बंद कर दो मेरे चैनल

1917
02:26:50,320 --> 02:26:54,520
मेरे वीडियो तो मत दिखाया करो नहीं नहीं भाई

1918
02:26:54,520 --> 02:26:58,600
जी ऐसा नहीं है क्योंकि रामपाल जी करेंगे नहीं नहीं मेरे से कुछ

1919
02:26:58,600 --> 02:27:03,560
लोगों ने कांटेक्ट किया है इस बारे में वो कहते हैं कि वो हां

1920
02:27:03,560 --> 02:27:07,720
रामपाल जी के बारे में यह कहा गया है मुझसे अब वो कितना सच है कितना झूठ

1921
02:27:07,720 --> 02:27:11,960
है नहीं जानता मगर ऐसा कहा है कुछ लोगों ने रामपाल जी को उनके

1922
02:27:11,960 --> 02:27:16,040
ही लोगों ने फसा रखा है और वह आना नहीं मतलब उनको बाहर नहीं आने

1923
02:27:16,040 --> 02:27:20,240
देना चाहते वो दबाव बनाए हुए हैं जिससे कि उनकी एबेंस में

1924
02:27:20,240 --> 02:27:25,160
ये सारा चलता रहे जो साम्राज्य फैल गया है ना एक हुकूमत

1925
02:27:25,160 --> 02:27:29,240
वो चलती रहे तो वो ऐसा कुछ आया

1926
02:27:29,240 --> 02:27:33,520
मैसेज कितना सत्य है कितना नहीं है नहीं पता देखिए

1927
02:27:33,520 --> 02:27:36,560
वही बात है ना कि अगर हम सत्य जो ईश्वर है उसके अलावा

1928
02:27:36,560 --> 02:27:40,760
किसी और नई थ्योरी को प्रोपागेट करेंगे तो वो पथभ्रष्ट होनी है

1929
02:27:40,760 --> 02:27:44,920
ये इसीलिए तो दिन और रात एक कर रहे हैं कि लोग जो है संगठित

1930
02:27:44,920 --> 02:27:48,920
हो जो प्रामाणिक आचार्य गण है उनकी शरण में जाए

1931
02:27:48,920 --> 02:27:52,120
परंपरा प्राप्त

1932
02:27:52,120 --> 02:27:56,200
बिल्कुल बिल्कुल भाई जी यह जो अभी जो आए थे ना शायद वही कह

1933
02:27:56,200 --> 02:28:02,200
रहे हैं कि अगली बार मैं आऊंगा और सबकी पोल खोल दूंगा लेकिन

1934
02:28:02,320 --> 02:28:08,320
तुम चला ग करने वाला रिमूव कर

1935
02:28:08,600 --> 02:28:12,760
देते ऐसा है वैसा है करके जब आप बात बोलोगे तो रिमूव

1936
02:28:12,760 --> 02:28:16,800
किए जाओगे जो प्रश्न पूछा हां या ना हो सकता है कि नहीं हो सकता उसम

1937
02:28:16,800 --> 02:28:20,880
नहीं बात बोलेंगे देखिए ऐसा है वैसा है

1938
02:28:20,880 --> 02:28:25,080
नहीं तो भरे रहेंगे मैं प्रमाण लाया हूं ना छूटते ही हां हेलो

1939
02:28:25,080 --> 02:28:29,200
अपना परिचय दीजिए परिचय नहीं ऋगवेद में प्रमाण है ये शुरू

1940
02:28:29,200 --> 02:28:33,440
हो जाओ वही पे तुरंत अब अब अब ये लोग वेद की बात नहीं कर रहे आप देखो

1941
02:28:33,440 --> 02:28:38,000
अब ये लोग ऊपर आके वेद नहीं बोलते अब इनका बंद हो गया वेद बोलना

1942
02:28:38,000 --> 02:28:42,200
क्योंकि वो पूछ लिया गया ना कि कबीर कैसे बना अब आवाज नहीं निकल

1943
02:28:42,200 --> 02:28:47,520
रही वेदों के लिए थोड़े दिन में स्लोगन बंद हो जाएगा अबे

1944
02:28:47,520 --> 02:28:51,640
चुप इना एंटरटेन करना ही नहीं था आपको पहले ही बोल थे कौन से व्याकरण

1945
02:28:51,640 --> 02:28:55,640
के सूत्र से आपने कवि को कवि बना दिया या कवि

1946
02:28:55,640 --> 02:29:00,160
को कवि बना दिया इतना बता दीजिए बस अच्छा बीच बीच थोड़ा सा दार्शनिक दार्शनिक

1947
02:29:00,160 --> 02:29:04,880
वाला भी पूछना सही रहता है जैसे ईश्वर सर्वशक्तिमान वो

1948
02:29:04,880 --> 02:29:09,160
वो भी पूछना अच्छा रहता है वो आउट ऑफ सिलेबस हो जाता है उनके लिए आप समझ

1949
02:29:09,160 --> 02:29:14,080
जैसे अभी वाला पूछा इसकी तैयारी होगी एक महीने तक

1950
02:29:14,080 --> 02:29:18,240
जहां कबीर बैठा है वो जगह किसने बनाई बिल्कुल बिल्कुल है

1951
02:29:18,240 --> 02:29:22,280
ना तो उसकी तैया मेरी वच की

1952
02:29:22,280 --> 02:29:24,240
है फसिल की नहीं है

1953
02:29:24,240 --> 02:29:30,240
मैं

1954
02:29:50,160 --> 02:29:54,160
ये सुनिए कि बल्ब आपके सामने हो जाए अभी बल्ब पीछे तो व वो आ

1955
02:29:54,160 --> 02:29:58,400
रहा है फ्लश लो सर लो हा अब बढ़िया है सर

1956
02:29:58,400 --> 02:30:02,840
ये बताइए सर प्रॉब्लम है मेरी एक प्रॉब्लम

1957
02:30:02,840 --> 02:30:08,120
है आपका परिचय दे दीजिए पहले मेरा नाम सर रितिक है

1958
02:30:08,120 --> 02:30:12,400
रितिक तिक आगे तो बोलिए

1959
02:30:12,400 --> 02:30:16,440
तो सर मैं ना मैं ना मसीही हूं मैं क्या

1960
02:30:16,440 --> 02:30:20,800
हो मसी क्रिश्चियन हूं मैं क्रिश्चियन क्रिश्चियन अच्छा

1961
02:30:20,800 --> 02:30:25,120
बताइए तो सर मेरी ना प्रॉब्लम यह थी यह जो है

1962
02:30:25,120 --> 02:30:31,120
कहते है बाइबल में प्रमाण है कबी साहिब भगवान है इनका

1963
02:30:31,840 --> 02:30:36,200
य य भी बाइबल वाला भी है

1964
02:30:36,200 --> 02:30:41,120
तो सर इन प्रॉब्लम पता क्या है बाइबल में पढ़ रखी है मैंने बाइबल बाइबल का ज्ञान

1965
02:30:41,120 --> 02:30:45,280
और जो ज्ञान देते हैं य बिल्कुल अलग साब सुनिए हमें

1966
02:30:45,280 --> 02:30:49,320
क्षमा करिएगा हम यहां पर आपके द्वारा

1967
02:30:49,320 --> 02:30:53,400
कबीर का प्रतिकार नहीं सुनेंगे क्योंकि आप क्रिश्चियन

1968
02:30:53,400 --> 02:30:57,480
है और इस रूप से देखा जाए तो व हमारे भाई है हम यहां

1969
02:30:57,480 --> 02:31:01,600
पर आपके द्वारा उनका खंडन नहीं सुनेंगे क्षमा करिएगा आप कहीं और जाइए और

1970
02:31:01,600 --> 02:31:04,520
ये अपनी बातें

1971
02:31:04,520 --> 02:31:08,640
रखिए हमें प्रॉब्लम नहीं हमें प्रॉब्लम

1972
02:31:08,640 --> 02:31:12,960
उ बहुत बढ़िया बहुत बढ़िया हमें प्रॉब्लम उनसे

1973
02:31:12,960 --> 02:31:17,720
है मगर ऐसा नहीं है कि हम जो है क्रिश्चन के द्वारा भी उनका जो है वो सुने

1974
02:31:17,720 --> 02:31:22,000
जी जी लेकिन य देखि धर्म के साथ जीने में कितना आसान हो जाता है

1975
02:31:22,000 --> 02:31:26,080
जीवन बकुल फिक्स रहता है यही करना है खत्म हो गई बात

1976
02:31:26,080 --> 02:31:30,200
डंके गुरु ने सिखाया परंपरा प्राप्त आचार्य ने सिखाया क्या करें बिल्कुल

1977
02:31:30,200 --> 02:31:34,360
बिल्कुल बिल्कुल संबंधों का त्याग करना पड़ जाए पर सिद्धांत का त्याग

1978
02:31:34,360 --> 02:31:38,520
मत करना बिल्कुल गुरुदेव ने बोला है

1979
02:31:38,520 --> 02:31:42,600
ये मैं एक बात कह दूं उनसे क्रिश्चन से जो आप

1980
02:31:42,600 --> 02:31:47,160
अनुज कुमार जी मैं आपको यह कहना चाहूंगा

1981
02:31:47,160 --> 02:31:48,160
कि

1982
02:31:48,160 --> 02:31:52,240
क्या बाइबल के द्वारा प्रतिपादित होने वाला ईश्वर सर्वशक्तिमान है

1983
02:31:52,240 --> 02:31:56,640
कि नहीं आप आ करके सिद्ध करिए अगर इस बारे में बात करनी हो तो आपका

1984
02:31:56,640 --> 02:32:00,560
स्वागत

1985
02:32:00,560 --> 02:32:06,560
करेंगे लेकिन शिवा जीय क्लिप जरूर निकलवाए ये

1986
02:32:06,600 --> 02:32:11,040
वाली बोल देता हूं नवीन जी नवीन जी अगर सुन रहे हैं तो ध्यान ध्यान

1987
02:32:11,040 --> 02:32:15,840
दीजिएगा यह क्लिप जो है जरूर निकलवाए अनुज कुमार जी

1988
02:32:15,840 --> 02:32:20,080
आपसे बोल रहा हूं बाइबल के द्वारा प्रतिपादित होने वाला

1989
02:32:20,080 --> 02:32:24,720
यदि सर्वशक्तिमान है तो आ सकते हैं आप इसम बात कर सकते

1990
02:32:24,720 --> 02:32:28,760
हैं नारायण आएंगे

1991
02:32:28,760 --> 02:32:33,160
आएंगे हां आएंगे पक्का

1992
02:32:33,160 --> 02:32:36,640
सोच लीजिए हम तो घर से निकले

1993
02:32:36,640 --> 02:32:40,640
ही थे बांध करर सर पे कफन लो जहां हथेली पर

1994
02:32:40,640 --> 02:32:43,920
लिए लो बढ चले हैं ये

1995
02:32:43,920 --> 02:32:44,920
कदम

1996
02:32:44,920 --> 02:32:49,280
अभी छोटे हैं वो आयु में रहने दीजिए

1997
02:32:49,280 --> 02:32:53,400
कह रहे हैं हैकर है ये कह रहे हैं हैकर है ये

1998
02:32:53,400 --> 02:32:59,400
हैकर है

1999
02:33:02,160 --> 02:33:06,320
भैया श्री राम चलिए फिर आज का पूरा करते हैं

2000
02:33:06,320 --> 02:33:10,640
अनुज कुमार जी आप जो है कभी आइए हमारी लाइव स्ट्रीम में

2001
02:33:10,640 --> 02:33:14,640
और बाइबल के द्वारा प्रतिपादित होने वाले ईश्वर को जीव की

2002
02:33:14,640 --> 02:33:18,680
चाह का वास्तविक विषय सिद्ध करिए सच्चिदानंद स्वरूप सिद्ध करिए भगवान सिद्ध

2003
02:33:18,680 --> 02:33:23,200
करिए इस पर बात करेंगे किसी दिन आपसे हा

2004
02:33:23,200 --> 02:33:27,280
और जो रामपाल को फॉलो करने वाले हैं उनके बारे में

2005
02:33:27,280 --> 02:33:31,480
आपको जो भी करना है आप उसमें हम आपकी सहायता नहीं कर सकते हमारे भाई

2006
02:33:31,480 --> 02:33:35,520
है अनुज जी आप क्या बोलते हैं अगर आपको इसके बारे

2007
02:33:35,520 --> 02:33:39,640
में कोई बात करनी है कबीर जी के बारे में तो तो उसके बारे में बात हो चुकी है अगर आपको जो प्रश्न

2008
02:33:39,640 --> 02:33:43,640
किया है सिद्ध करने वाला उस पर कुछ करना है तो आप अभी बोल सकते हैं क्योंकि

2009
02:33:43,640 --> 02:33:47,720
आपको बहुत बड़ी बात कौन सी करनी है वो हमें नहीं पता कौन है प्रोफेट है

2010
02:33:47,720 --> 02:33:51,880
कौन है नहीं अनुज कुमार जी लिख रहे हैं ना साइड चैट में

2011
02:33:51,880 --> 02:33:55,960
मुझे बहुत बड़ी बात करनी है प्रोफेट जी तो परेशान है कब से बोल रहे हैं हमें बुलाइए

2012
02:33:55,960 --> 02:34:01,000
हमें बुलाइए प्रोफेट जी अपना चेहरा नहीं दिखा

2013
02:34:01,000 --> 02:34:05,320
रहे

2014
02:34:05,320 --> 02:34:09,480
चलिए आपके बाल जल् ब था गुरुदेव

2015
02:34:09,480 --> 02:34:13,560
ने बताया था ना न के कि कौरवों और पांडवों

2016
02:34:13,560 --> 02:34:16,320
के बीच में जब युद्ध होता है

2017
02:34:16,320 --> 02:34:20,320
तो वो 100 हम पांच मगर बर का कोई

2018
02:34:20,320 --> 02:34:22,480
आ गया तो हम 105

2019
02:34:22,480 --> 02:34:28,480
हां बिल्कुल ये तो [संगीत]

2020
02:34:29,000 --> 02:34:33,080
है ये बय जी अल्ला उपनिषद के ऊपर ऑलरेडी

2021
02:34:33,080 --> 02:34:37,880
वीडियो बना चुके हैं बना चुका है आवाहन आपको देखना चाहिए आप देख लीजिएगा

2022
02:34:37,880 --> 02:34:42,000
स्टेटस भी ल बना दिया टा प भी मिल जाएगा आपको च अब नहीं लेते किसी

2023
02:34:42,000 --> 02:34:46,160
को हो गया बहुत टाइम हो गया सा बजे से मैं चिल्ला रहा

2024
02:34:46,160 --> 02:34:50,320
हूं हां बहुत ज्यादा आपके जो मुझे

2025
02:34:50,320 --> 02:34:54,760
लग रहा है कि बाल बालके पूरे नुच

2026
02:34:54,760 --> 02:34:58,920
जाएंगे मैं क्या करूं मेरा जो पाला पड़ता है वो दीवारों से पड़ता

2027
02:34:58,920 --> 02:35:02,960
है मैं अपना सर मारता उसम अच्छा नहीं करे तो

2028
02:35:02,960 --> 02:35:07,120
य सब चीज सामने नहीं आए फैक्ट अब जैसे अ यह सोचेंगे जो

2029
02:35:07,120 --> 02:35:11,360
जो लोग थोड़े से थोड़े भी बुद्धिजीवी होंगे व सोचेंगे कबीर

2030
02:35:11,360 --> 02:35:15,400
जहां बैठा है अगर उसने सब कुछ बनाया है तो वो जगह किसने

2031
02:35:15,400 --> 02:35:20,320
बनाई या तो ये मानना पड़ेगा कि उसने सब कुछ नहीं बनाया

2032
02:35:20,320 --> 02:35:24,240
करे है ना य बिल्कुल

2033
02:35:24,240 --> 02:35:28,440
चलिए बहुत लोग वेट कर रहे हैं बाकी आप लोग कैमरा चालू करके

2034
02:35:28,440 --> 02:35:33,400
आएंगे तो फिर आपको लिया जाएगा नहीं तो ऐ कमरा किसी का चालू नहीं बढ़ाते हैं

2035
02:35:33,400 --> 02:35:37,400
आपको नामा स्त्र के बारे में एक बार फिर से बता द हमारा अभियान चल रहा है

2036
02:35:37,400 --> 02:35:41,680
नामजप अभियान उसमें हम दिन भर में पांच बार

2037
02:35:41,680 --> 02:35:45,800
भगवन नाम का स्मरण कर रहे हैं पांचों परमेश्वर का और

2038
02:35:45,800 --> 02:35:49,840
सुबह एक बार राम नाम का जब भी करते हैं उसमें मैं स्वयं होता हूं तो

2039
02:35:49,840 --> 02:35:54,000
हम लोग सीधे सुबह जो करते हैं 5:30 बजे उसमें मैं सवा

2040
02:35:54,000 --> 02:35:58,000
घंटे का जब करता हूं उसमें साथ में जो भाई है काफी लोग जुड़

2041
02:35:58,000 --> 02:36:02,280
रहे हैं आप भी लोग अपने जीवन में सवा घंटे की भक्ति का बल एकत्र

2042
02:36:02,280 --> 02:36:06,520
करने के लिए नामा स्त्र में जवाइन कर सकते हैं उसके लिए

2043
02:36:06,520 --> 02:36:09,760
या फिर किसी भी प्रकार के वैचारिक मतभेद के लिए या फिर हमारी

2044
02:36:09,760 --> 02:36:13,880
जो क्लासेस है उनके लिए या फिर धर्म रक्षा अभियान से जुड़ने के लिए

2045
02:36:13,880 --> 02:36:17,880
आपको एक नंबर है यहां पर 7408 30169

2046
02:36:17,880 --> 02:36:22,240
स्प आपको करना है कॉल मत करना बहुत कॉल आते हैं

2047
02:36:22,240 --> 02:36:26,920
ओनली ना है आपको और हां

2048
02:36:26,920 --> 02:36:31,120
पर अ आपको एक मैसेज प्राप्त हो जाएगा ऑटो

2049
02:36:31,120 --> 02:36:35,360
जनरेटर उसमें ये चार प्रकार के फॉर्म होंगे नामा स्त्र से जुड़ने का धर्म रक्षा अभियान

2050
02:36:35,360 --> 02:36:39,760
से जुड़ने का क्लासेस से जुड़ने का और एक फॉर्म होगा कि

2051
02:36:39,760 --> 02:36:43,960
वैचारिक मतभेद के निमित्त चर्चा तो आपको अपने अनुरूप जो फॉर्म

2052
02:36:43,960 --> 02:36:48,120
हो वो आप भर सकते हैं दूसरी बात यह है कि

2053
02:36:48,120 --> 02:36:52,240
जो जो पूज्य जगतगुरु हैं पूरी पीठ के शंकराचार्य जी उनका

2054
02:36:52,240 --> 02:36:56,720
जो गोवर्धन मठ है उसका ऐप आ गया है सभी उसमें वह ऐप डाउनलोड

2055
02:36:56,720 --> 02:37:00,720
कर द हमारे पास बहुत फोन आते हैं कि भाई गुरुदेव से दीक्षा लेनी

2056
02:37:00,720 --> 02:37:04,800
है कहां जाएं कहां पे हैं तो उस ऐप में गुरुदेव का पूरा प्रोटोकॉल रहता है

2057
02:37:04,800 --> 02:37:08,840
कि गुरुदेव का शिविर इस समय कहां लगा हुआ है उस ऐप को डाउनलोड कर ले उसमें

2058
02:37:08,840 --> 02:37:13,120
भी बहुत सारी चीजें जो आपको जानने को मिल जाएंगी जो भी गुरुदेव

2059
02:37:13,120 --> 02:37:17,320
के दर्शन करना चाहते हो तो उसमें गुरुदेव का पूरा प्रोटोकॉल होता है कि अब गुरुदेव इस समय कहां

2060
02:37:17,320 --> 02:37:21,720
है और उनसे अगला वाला प्रोटोकॉल भी उसमें में होता है तो वो गोवर्धन

2061
02:37:21,720 --> 02:37:25,080
मठ पप जो है वो डाउनलोड कर ले और

2062
02:37:25,080 --> 02:37:29,120
इसके साथ ही साथ रामपाल वालों से मैं कहूंगा कि अगली बार आए

2063
02:37:29,120 --> 02:37:33,520
तो तैयारी करके आए वेदों में प्रमाण अभी तक नहीं बता पाए

2064
02:37:33,520 --> 02:37:37,760
कहां से सिद्ध हुआ कि कबीर भगवान है आप कहते हो कि कवि ही कबीर

2065
02:37:37,760 --> 02:37:41,840
है मगर कवि कबीर है यह आपकी वाणी है शास्त्र नहीं

2066
02:37:41,840 --> 02:37:46,000
है आपके एक बंदे ने यह भी कहा कि वो हमारी इच्छा है तो फिर बात

2067
02:37:46,000 --> 02:37:50,080
ही खत्म हो गई जब तुम स्वयं इच्छा पूर्वक ले रहे

2068
02:37:50,080 --> 02:37:55,120
हो तो तुम दूसरे पर आरोप कैसे लगा सकते हो कि मनमुक भक्ति कर रहे

2069
02:37:55,120 --> 02:37:59,280
हैं शास्त्रो चित भक्ति सिद्ध करो शास्त्र उचित भक्ति

2070
02:37:59,280 --> 02:38:03,440
और एक अलंकारी भी आए थे मुझे ले लो मैं बैंड बजा दूंगा तो उनसे कहूंगा अगली

2071
02:38:03,440 --> 02:38:07,440
बार थोड़ा फेशियल वगैरह करा ले एक वो आता है क्या कहते हैं

2072
02:38:07,440 --> 02:38:11,560
थ उसका टेन बहुत अच्छा होता है उससे कालिक साफ हो जाती

2073
02:38:11,560 --> 02:38:16,120
है तो उससे आप टेन कराए अपने चेहरे पर जाकर के और

2074
02:38:16,120 --> 02:38:20,200
थ का डिटेन अच्छा होता है वो डिटेन करा लीजिए और फिर आइए चेहरा

2075
02:38:20,200 --> 02:38:24,320
दिखा सके इस इस लायक स्वयं को बनाइए तो ठीक है

2076
02:38:24,320 --> 02:38:29,040
इसी के साथ सभी को जय श्री राम करते हैं ज आपका भी बहुत बहुत धन्यवाद फलकी जी आप आए

2077
02:38:29,040 --> 02:38:33,960
और फिर मैं वही बात कहूंगा निष्ठा पूर्वक माता जी ने जिसको भी

2078
02:38:33,960 --> 02:38:38,160
कराया हो तो वो आए और यहां पर बताए कि वेदों में किस प्रकार प्रमाण है

2079
02:38:38,160 --> 02:38:40,200
कि कबीर साहब भगवान है और

2080
02:38:40,200 --> 02:38:44,880
नहीं आप थोड़ा ठीक से नहीं बोलते हैं जिसकी मां ने

2081
02:38:44,880 --> 02:38:49,120
निष्ठा से दुग्ध पान कराया हो वो आए और चर्चा करे

2082
02:38:49,120 --> 02:38:53,200
य और अंत फेस टू फेस

2083
02:38:53,200 --> 02:38:57,640
अंत में मैं आपको एक बार बात बोलना चाहूंगा आपको यह मेरी व्यक्तिगत

2084
02:38:57,640 --> 02:39:01,880
सलाह है व्यक्तिगत मेरा परामर्श है मत

2085
02:39:01,880 --> 02:39:05,920
पढ़ो चक्कर में कोई नहीं है टक्कर जय श्री

2086
02:39:05,920 --> 02:39:09,920
राम जय श्री राम
