1
00:00:02,360 --> 00:00:08,360
तो सभी को जय श्री

2
00:00:08,440 --> 00:00:12,600
राम आज मैं एक विशेष चर्चा के लिए

3
00:00:12,600 --> 00:00:16,320
आप लोगों के सामने उपस्थित हुआ

4
00:00:16,320 --> 00:00:20,360
हूं अभी बहुत गंभीर विषय है

5
00:00:20,360 --> 00:00:24,680
यह और जिस पर हम लोग हम लोगों की जो

6
00:00:24,680 --> 00:00:28,800
फाउंडेशन है ना आहवान की हिंदू राष्ट्र अभियान की

7
00:00:28,800 --> 00:00:32,960
या जो भी है वह इस विषय पर ही टिकी हुई

8
00:00:32,960 --> 00:00:37,240
है हमें क्यों विवश होना पड़ा हमें क्यों चैनल डालना

9
00:00:37,240 --> 00:00:42,200
पड़ा हमें क्यों आप लोगों के बीच आना पड़ा हमें क्यों

10
00:00:42,200 --> 00:00:46,240
बताना पड़ा कि कौन सी शिक्षाएं ऐसी हैं भिन्न-भिन्न तंत्रों की जो

11
00:00:46,240 --> 00:00:50,800
बांट रही हैं हमें क्यों मूलभूत पांच सिद्धांतों को

12
00:00:50,800 --> 00:00:55,000
निकाल के बाहर सबके सामने सूत्रा क्मक शैली में

13
00:00:55,000 --> 00:00:59,280
रखने की आवश्यकता पड़ी यह सब चीजें आज जो

14
00:00:59,280 --> 00:01:04,120
आज के इस विषय में मैं आपसे बात करने आया हूं

15
00:01:04,120 --> 00:01:08,600
आपसे वो लोग जो कहीं भी

16
00:01:08,600 --> 00:01:12,600
किसी भी अंश में थोड़ा सा भी समर्थन रखते हैं आज मैं

17
00:01:12,600 --> 00:01:16,720
उनको अपनी बात कहने आया हूं हालांकि बात सभी

18
00:01:16,720 --> 00:01:18,040
के लिए है

19
00:01:18,040 --> 00:01:22,160
जो सकारात्मक दृष्टि से देखना चाहे वह देख सकता है फिर

20
00:01:22,160 --> 00:01:26,520
वोह भले ही वह भी क्यों ना हो जिस पर हमने प्रश्न किए हैं

21
00:01:26,520 --> 00:01:30,240
या वो भी क्यों ना हो जिनके हमने

22
00:01:30,240 --> 00:01:36,240
शंकाओं के थोड़ा बहुत किसी अंश में समाधान प्रस्तुत किए

23
00:01:38,440 --> 00:01:42,480
हैं अभी ल ही की बात है

24
00:01:42,480 --> 00:01:46,600
बहुत ज्यादा दिन नहीं हुए हैं संत वेशभूषा

25
00:01:46,600 --> 00:01:50,600
में हिंदुत्व की तरफ से ज्वलंत

26
00:01:50,600 --> 00:01:54,600
कारी भाषा में हिंदुत्व का पक्ष

27
00:01:54,600 --> 00:02:00,600
रखने वाले एक यति नरसिंहानंद जी हैं

28
00:02:01,440 --> 00:02:05,600
जो प्रामाणिक कहां से हैं कैसे हैं उस पर हम लोग समीक्षा के लिए

29
00:02:05,600 --> 00:02:10,480
यहां पर नहीं है मगर हिंदुत्व का वह पक्ष रखते हैं था सामर्थ

30
00:02:10,480 --> 00:02:14,920
जो उनके दृष्टिकोण में चीजें होती हैं व कहते हैं और

31
00:02:14,920 --> 00:02:19,920
निडर निर्भग हो कर के अपनी बात को रखते हैं

32
00:02:19,920 --> 00:02:24,360
उन्होंने अभी कुछ दिन पूर्व एक विवादास्पद

33
00:02:24,360 --> 00:02:28,960
हल्का आपत्ति जनक कोई पंक्ति कह दी है

34
00:02:28,960 --> 00:02:32,960
जिसके कारण उनके विरुद्ध संवैधानिक कारवाई भी हो गई तो मैं उस

35
00:02:32,960 --> 00:02:37,880
पक्ष में नहीं जाना चाहूंगा कि उन्होंने वह सही कहा था या गलत कहा

36
00:02:37,880 --> 00:02:42,000
था है ना वह समीक्षा हमारी करने का कोई वो

37
00:02:42,000 --> 00:02:46,200
नहीं औचित्य क्योंकि उस पर जो कानूनी कारवाई है सरकार ने अपना एक्शन ले लिया

38
00:02:46,200 --> 00:02:50,480
है वो चीजें हो रही है मगर इसके बाद

39
00:02:50,480 --> 00:02:54,880
क्या होता है इसके बाद

40
00:02:54,880 --> 00:03:00,880
अभी जो कुछ दिन पूर्व बंगाल में जो हाल था

41
00:03:01,520 --> 00:03:05,960
हिंदुओं का बंगाल में बंगाल मतलब

42
00:03:05,960 --> 00:03:10,640
बांग्लादेश की बात कर रहा हूं फिलहाल तो बांग्लादेश में

43
00:03:10,640 --> 00:03:14,920
य जो नवरात्रि पूजन है इसको लेकर के

44
00:03:14,920 --> 00:03:19,000
कितनी सारी चीजें चली हैं आपको मालूम ही होगा

45
00:03:19,000 --> 00:03:22,920
मगर यह जो चीज

46
00:03:22,920 --> 00:03:26,960
हुई इसके बाद जो हमारे जो माता

47
00:03:26,960 --> 00:03:31,000
का मंदिर है दसना मंदिर वहां पर शस्त्रों

48
00:03:31,000 --> 00:03:35,240
की संख्या में आता तां ने आक्रमण कर

49
00:03:35,240 --> 00:03:39,600
दिया हां आता ताई ही कहेंगे ना

50
00:03:39,600 --> 00:03:43,600
वह लोग जो शांति प्रिय का शांति प्रिय कहे जाते हैं आता

51
00:03:43,600 --> 00:03:47,640
तां के रूप में परिवर्तित हो जाते हैं समय आने पर

52
00:03:47,640 --> 00:03:51,920
तो आता तां के रूप में उन्होंने सीधे-सीधे मंदिर पर जो है आक्रमण बोल

53
00:03:51,920 --> 00:03:56,240
दिया और वह उनके विचार

54
00:03:56,240 --> 00:04:01,000
इससे स्पष्ट हो जाते हैं कि वह जो आता तां की जो सेना जो भीड़

55
00:04:01,000 --> 00:04:05,560
है जो आपके मंदिर को नष्ट करने आ रही है

56
00:04:05,560 --> 00:04:11,040
उस भीड़ में छोटे-छोटे बालक भी

57
00:04:11,040 --> 00:04:16,600
हैं जो हाथ में पत्थर लेकर के आए

58
00:04:16,600 --> 00:04:20,680
हैं और वह तो वहां

59
00:04:20,680 --> 00:04:24,800
पर महिलाएं थी नवरात्र चल रहा है

60
00:04:24,800 --> 00:04:28,920
वहां पर महिलाएं थी वहां पर बच्चे थे

61
00:04:28,920 --> 00:04:33,280
है ना वो तो पुलिस थी प्रशासन था थोड़ा बहुत

62
00:04:33,280 --> 00:04:37,440
वो भी कब तक है नहीं पता अन्यथा पता नहीं कौन-कौन सा अनर्थ होता

63
00:04:37,440 --> 00:04:41,480
वहां पर तो

64
00:04:41,480 --> 00:04:45,720
जो हमारे जो हम हिंदू हैं

65
00:04:45,720 --> 00:04:49,840
जो मैं कई बार आप लोगों से कहता हूं कि हमें आवश्यकता है हाथी

66
00:04:49,840 --> 00:04:54,520
बनकर बैठने की मैं फिर यहां पर एक बात दिला दूं कि यहां पर मैं

67
00:04:54,520 --> 00:04:58,640
आक्रमण करने के निमित्त आपको नहीं समझा रहा हूं कि आपको कोई

68
00:04:58,640 --> 00:05:02,840
आक्रमण करना है मगर यदि आपके ऊपर कोई आक्रमण होता

69
00:05:02,840 --> 00:05:06,840
है तो आप अपने हृदय पर हाथ रखकर बताइए क्या आप अपनी

70
00:05:06,840 --> 00:05:10,960
सुरक्षा के लिए तैयार हैं क्या आपके पास कोई

71
00:05:10,960 --> 00:05:15,320
कोई ऐसा प्रोटोकॉल है जिसको आप उपयोग

72
00:05:15,320 --> 00:05:19,640
में ला सके अपनी सुरक्षा के

73
00:05:19,640 --> 00:05:24,160
लिए जो भीड़ आज दसना मंदिर पहुंची

74
00:05:24,160 --> 00:05:28,280
यह क्या गारंटी है कि वह भीड़ आपके दरवाजे तक नहीं आएगी आप यही तो सोच रहे

75
00:05:28,280 --> 00:05:31,960
हो जब पहले जब बांग्लादेश में हो रहा है

76
00:05:31,960 --> 00:05:36,000
तो हिंदू ये सोच रहा है कि अरे हमें क्या करना हम तो भारत में सुरक्षित

77
00:05:36,000 --> 00:05:40,160
है अब बंगाल में हो गया दसना मंदिर में हो गया

78
00:05:40,160 --> 00:05:44,920
अब भी यही सोचना उत्तर प्रदेश वाले के अरे क्या हो गया नॉर्थ ईस्ट में हुआ हमें क्या करना है

79
00:05:44,920 --> 00:05:48,920
तो आप लोग उस वही

80
00:05:48,920 --> 00:05:52,960
बिजली में बैठा हुआ नहीं होता है जो व्यक्ति नीचे आते समय डर लगता है तो आंखें बंद

81
00:05:52,960 --> 00:05:57,040
कर लेता है तो क्या आप लोग उसी तरीके से स्वयं को मान

82
00:05:57,040 --> 00:06:01,080
करके बैठे हो कि नहीं हम तो नीचे जाते टाइम आंखें बंद कर लेंगे

83
00:06:01,080 --> 00:06:05,160
हमारा इतना कर्तव्य बस आंखें बंद करने का या आप इस इंतजार में

84
00:06:05,160 --> 00:06:09,400
हो कि वह जब जो ज्वाला है ना वह आग आग

85
00:06:09,400 --> 00:06:14,240
की लपटे जब आपके गेट पर बिल्कुल भम भम भम भम करके जलने लगेंगी उस

86
00:06:14,240 --> 00:06:19,200
दिन आप सक्रिय होगे उस दिन आज ये सोचोगे

87
00:06:19,200 --> 00:06:23,200
कि हमको अपनी सुरक्षा के बारे में सोचना चाहिए

88
00:06:23,200 --> 00:06:27,400
जो देखो वही केवल एक आस पर बैठा

89
00:06:27,400 --> 00:06:32,120
है हिंदुओं की बात कर रहा हूं सारे हिंदुओं की

90
00:06:32,120 --> 00:06:36,480
अधिकांश ता आप लोग डिपेंड है

91
00:06:36,480 --> 00:06:40,560
कि मोदी जी करेंगे भाई भगवान भी उसी की मदद करते हैं जो स्वयं

92
00:06:40,560 --> 00:06:44,880
की मदद करता है आप अगर बिल्कुल भी कोई

93
00:06:44,880 --> 00:06:47,120
ऐसी शैली ऐसी नीति

94
00:06:47,120 --> 00:06:51,320
नहीं अपनाएंगे कि समय आने पर हम अपना हम अपनी

95
00:06:51,320 --> 00:06:55,520
सुरक्षा कर सके तो यह बहुत गंभीर विषय है आता

96
00:06:55,520 --> 00:06:59,920
ताई का आज इतना हो गया कि वह हमारी माता के मंदिर पर आक्रमण कर सके

97
00:06:59,920 --> 00:07:04,160
कल को इतना भी हो जाएगा कि वह आपके गेट पर आ सके और

98
00:07:04,160 --> 00:07:08,680
आता आइयो की आपको खासियत पता है ना

99
00:07:08,680 --> 00:07:13,040
पता है ना मातृ शक्तियों के साथ क्या होता है बच्चों

100
00:07:13,040 --> 00:07:17,720
के साथ क्या होता है ये सब पता है ना खासियत

101
00:07:17,720 --> 00:07:21,720
आपको तो वो जो विप्लव पूर्ण

102
00:07:21,720 --> 00:07:26,680
वातावरण है और जो वो भयानक भयावह दृश्य है ना

103
00:07:26,680 --> 00:07:31,040
उनसे आप अपने आप को अछूता मत समझिए

104
00:07:31,040 --> 00:07:35,880
यही कहने के लिए मैंने आज यह लाइव स्ट्रीम रखी

105
00:07:35,880 --> 00:07:40,520
है और हम लोग जो अपने

106
00:07:40,520 --> 00:07:44,600
चैनल पर आकर के यहां पर जो यह

107
00:07:44,600 --> 00:07:48,680
जो प्रश्न करते हैं लोगों से या कुछ

108
00:07:48,680 --> 00:07:53,480
ऐसी बातें जिन पर हम पॉइंट आउट करते हैं उसका कारण यही है

109
00:07:53,480 --> 00:07:57,520
कोई निराकार को माने साकार को माने कोई डजन मैटर कोई

110
00:07:57,520 --> 00:08:01,560
विष्णु को माने कृष्ण को माने मैटर रामपाल को भी

111
00:08:01,560 --> 00:08:02,440
माने वो भी मैटर

112
00:08:02,440 --> 00:08:07,120
नहीं करता है अगर वक्त आने पर हम लोग एक जगह खड़े हो जाए

113
00:08:07,120 --> 00:08:11,680
तो मगर प्रॉब्लम क्या है

114
00:08:11,680 --> 00:08:16,200
प्रॉब्लम यही है कि जब दसना मंदिर पर अटैक होगा तो रामपाल

115
00:08:16,200 --> 00:08:19,080
वाले लोग नहीं

116
00:08:19,080 --> 00:08:23,760
जाएंगे आर्य समाज वाले नहीं जाएंगे अस्था

117
00:08:23,760 --> 00:08:27,880
भर दी गई अनाथा मूर्ति

118
00:08:27,880 --> 00:08:33,000
को बचाने वह हिंदू जाएगा जो मूर्ति में विश्वास रखता

119
00:08:33,000 --> 00:08:37,120
होगा और आप लोग

120
00:08:37,120 --> 00:08:41,400
पिछले कई सालों से मैं देख रहा हूं कि

121
00:08:41,400 --> 00:08:45,480
हमारे यहां पर उन पर जोग बनाए जाते हैं य जो आता तां का जो

122
00:08:45,480 --> 00:08:49,480
कम्युनिटी है उस पर जोग बनाए जाते हैं यह वह कुछ इस तरह के जोग

123
00:08:49,480 --> 00:08:53,640
बना कर के ट मैसेजेस फॉरवर्ड करके यह सब

124
00:08:53,640 --> 00:08:57,800
करके हम लोग यह समझते हैं कि हम लोग

125
00:08:57,800 --> 00:09:01,840
यह समझने लगते हैं हमने बहुत बड़ा काम कर लिया हमने जो है 5000 लोगों का ग्रुप

126
00:09:01,840 --> 00:09:05,840
बना लिया है हजारों लोगों को हम मैसेज भेज देते हैं मुझसे बहुत कई

127
00:09:05,840 --> 00:09:09,880
लोग ऐसे मिलते हैं जो मुझे कहते मैंने बहुत सारे ग्रुप बना रखे और जैसे ही

128
00:09:09,880 --> 00:09:14,000
कोई मैसेज आता है उसको इतने हिंदुओं तक भेजता हूं इतने हिंदुओं तक भेजता हूं कि पूछो

129
00:09:14,000 --> 00:09:17,760
नहीं हमने यह तीर मार लिया है

130
00:09:17,760 --> 00:09:22,760
ट वरियर बन कर के रह गए हम लोग ट वरियर

131
00:09:22,760 --> 00:09:26,760
जब घर की मातृशक्ति की गरमा को भंग किया जा रहा होगा तो ट पर

132
00:09:26,760 --> 00:09:32,760
फॉरवर्ड कर देना उस मैसेज को

133
00:09:33,520 --> 00:09:37,680
वास्तविकता क्या है पता है आपको हमारी

134
00:09:37,680 --> 00:09:42,560
वास्तविकता आज यह है कि कहने को हम बहुसंख्यक हैं हम स्वतंत्र हैं

135
00:09:42,560 --> 00:09:46,760
परंतु वास्तविकता में हम परतंत्र है

136
00:09:46,760 --> 00:09:51,080
तत्व हम परतंत्र है केवल

137
00:09:51,080 --> 00:09:55,480
दिख रहा है सतह पर के हम स्वतंत्र है वास्तविकता

138
00:09:55,480 --> 00:09:59,600
आज यह है कि अगर मेरे घर के आसपास

139
00:09:59,600 --> 00:10:03,640
कहीं पर मंदिर पर आक्रमण होता है सपोज

140
00:10:03,640 --> 00:10:07,720
ट वो शिव का मंदिर है शिव जी की वहां पर शिवलिंग

141
00:10:07,720 --> 00:10:11,800
स्थापित है और आक्रमण होता है तो जिस

142
00:10:11,800 --> 00:10:16,520
तरीके से हमारा आज का ढांचा है तानाबाना

143
00:10:16,520 --> 00:10:20,600
है उसके अनुसार स्थिति यह है कि जब मंदिर को बचाने

144
00:10:20,600 --> 00:10:24,920
के लिए मैं जाऊंगा शहरों की बात कर रहा हूं अभी भी रूरल एरियाज में जहां पर हिंदू

145
00:10:24,920 --> 00:10:29,120
है रूरल हां जो ज्यादा पढ़ लिख गए समृद्ध

146
00:10:29,120 --> 00:10:32,800
हो गए या तो नास्तिक हो गए और या या वोह

147
00:10:32,800 --> 00:10:36,840
कहां फसे मैं अभी आपको बता रहा हूं जो समृद्ध हो गए

148
00:10:36,840 --> 00:10:40,840
ज्यादा वो इंटेलेक्चुअल हो गए इंटेलेक्चुअल बुद्धिमान

149
00:10:40,840 --> 00:10:44,840
तो वो कहां पहुंचे हैं जब मैं दरवाजा

150
00:10:44,840 --> 00:10:48,880
खटखटा रहा हूं ना जाकर के तो उनके यहां

151
00:10:48,880 --> 00:10:53,320
पर देख रहा हूं मैं कह रहा हूं शिव मंदिर पर आक्रमण हो गया चलिए बचाइए शिव मंदिर को

152
00:10:53,320 --> 00:10:57,400
तो उन्होंने कहा हमारे यहां तो पहले मूर्तियां बहुत सारी थी अब तो हम

153
00:10:57,400 --> 00:11:01,560
एक ही मूर्ति रखते हैं अब हम नहीं रखते दूसरी बहुत सारे भगवानों

154
00:11:01,560 --> 00:11:05,680
की मूर्ति और जिस मूर्ति को रखते हैं उसके लिए हम प्रयत्न

155
00:11:05,680 --> 00:11:10,240
करेंगे बचाने के लिए वो तुम्हारी मूर्ति वो भगवान नहीं

156
00:11:10,240 --> 00:11:14,240
है बैठो चुपचाप तोड़ दिया एक भाई

157
00:11:14,240 --> 00:11:18,640
को हमारे फिर दूसरा

158
00:11:18,640 --> 00:11:22,840
दरवाजा हम तो मूर्ति मानते ही नहीं है

159
00:11:22,840 --> 00:11:26,920
मूर्ति होती नहीं है हम तो बिल्कुल मुस्लिमों जैसी हमारी

160
00:11:26,920 --> 00:11:31,360
चीजें हैं ईश्वर के विषय कार्य

161
00:11:31,360 --> 00:11:37,360
प्रणाली अगर देखें तो हमारी मुस्लिमों जैसी है ईश्वर के विषय

162
00:11:37,560 --> 00:11:41,800
में फिर तीसरा चले जाए चले गए भैया

163
00:11:41,800 --> 00:11:45,840
तो वहां निकले के यह जो सारे तुम

164
00:11:45,840 --> 00:11:50,040
जो ग्रंथ पढ़ रहे हो य सब गलत है हमारे पास प्रतिदिन

165
00:11:50,040 --> 00:11:54,960
नित्य प्रति भगवान की स्वयं ब्रह्मा जी की आकाशवाणी आती है

166
00:11:54,960 --> 00:11:59,360
प्रजापति की आकाशवाणी आती है और वह देती है धर्म

167
00:11:59,360 --> 00:12:03,680
की सही

168
00:12:03,680 --> 00:12:09,640
शिक्षा चौथा चल चौथे चले गए विदों में प्रमाण

169
00:12:09,640 --> 00:12:15,640
है यह हमारी स्थिति है वास्तविक स्थिति हमारी यह

170
00:12:15,680 --> 00:12:19,960
है ले देकर उस मंदिर को बचाने पता है कौन सा हिंदू

171
00:12:19,960 --> 00:12:24,040
पहुंचेगा या तो वह हिंदू जो

172
00:12:24,040 --> 00:12:28,040
कहीं ना कहीं जड़ों से जुड़ा हुआ है या

173
00:12:28,040 --> 00:12:32,400
वो हिंदू जो अज्ञानी है जिसको अपने धर्म के बारे में कुछ नहीं पता

174
00:12:32,400 --> 00:12:36,440
नाम पता है बस अभी उसके सिद्धांत कुछ नहीं है

175
00:12:36,440 --> 00:12:40,720
या तो वो उन 10 पर में आएगा वो जो पूर्ण रूप से सनातन वैदिक

176
00:12:40,720 --> 00:12:45,560
आर हिंदू कहलाएंगे या वो उन उन 70

177
00:12:45,560 --> 00:12:49,640
70 50 पर में आएगा जो अभी मतलब उनका कोई सिद्धांत

178
00:12:49,640 --> 00:12:52,880
का निर्माण नहीं हुआ है ये दो प्रकार के हिंदू वहां पहुंचते

179
00:12:52,880 --> 00:12:57,400
हैं कभी भी और जितने भी हमारे और सक्षम सामर्थ्य

180
00:12:57,400 --> 00:13:01,560
वान जो हिंदू हैं यह इंटेलेक्चुअल के नाम

181
00:13:01,560 --> 00:13:05,760
पर बुद्धिमता के नाम पर समृद्धि के नाम पर इस तरह से बढ़

182
00:13:05,760 --> 00:13:11,080
चुके हैं खत्म हो चुके

183
00:13:11,080 --> 00:13:15,640
हैं यह हमारी स्थिति है

184
00:13:15,640 --> 00:13:20,040
और अगर हम लोग तैयार नहीं हुए अगर हमने अभी भी

185
00:13:20,040 --> 00:13:24,640
अपनी चीजें जहां पर जिसकी जो गलती है जो कमी है उसको दूर करते हुए

186
00:13:24,640 --> 00:13:29,200
एकत्व की बात नहीं की संगठित होने का प्रयास नहीं किया

187
00:13:29,200 --> 00:13:33,240
तो बैठे रहिए बैठे रहिए वो जो

188
00:13:33,240 --> 00:13:37,280
आग बांग्लादेश में लगी है वह जो आग बंगाल में लगी है आप

189
00:13:37,280 --> 00:13:43,280
यह मत सोचिए व आपके घर तक आ नहीं सकती

190
00:13:45,360 --> 00:13:49,480
है आप बस पिछले

191
00:13:49,480 --> 00:13:54,080
हम जोक बनाएंगे भैया आता तां पर जब आप जोक बना रहे थे ना

192
00:13:54,080 --> 00:13:58,360
तब वो लोग तैयारी कर रहे थे आपको तोड़ा कैसे जाए बहुत सारे टुकड़ों

193
00:13:58,360 --> 00:14:02,440
में कैसे बांट जाए कैसे आपकी जो जड़त वाली जो शिक्षा उससे

194
00:14:02,440 --> 00:14:06,560
आपको दूर कर दिया जाए आप जोक बनाइए आप ट मैसेजेस फॉरवर्ड

195
00:14:06,560 --> 00:14:10,640
करिए वह यह करेंगे उन्होंने अपनी यह तैयारी

196
00:14:10,640 --> 00:14:14,680
की है आज अगर आप

197
00:14:14,680 --> 00:14:19,520
आपकी स्थिति यह है कि आपको कोई चाटा मार के चाटा मार देगा ना

198
00:14:19,520 --> 00:14:23,600
आपको आप कुछ नहीं कर पाओगे एस ए हिंदू

199
00:14:23,600 --> 00:14:29,360
मगर आपने अगर किसी शांति प्रिय व्यक्ति के मार दिया चाटा

200
00:14:29,360 --> 00:14:34,160
तो क्या होगा आधे घंटे के अंदर वहां पर इतने लोग इकट्ठा हो जाएंगे

201
00:14:34,160 --> 00:14:38,400
जिसका आपके पास जिसका कोई समाधान नहीं होगा उस स्थिति का क्यों

202
00:14:38,400 --> 00:14:42,600
है यह क्योंकि आप लोग सेंट्रलाइज नहीं

203
00:14:42,600 --> 00:14:47,160
हो केंद्रीय कृत नहीं है सब बटे हुए हैं

204
00:14:47,160 --> 00:14:51,160
अपनी अपनी ढपली अपना अपना राग बताने भी जाओ

205
00:14:51,160 --> 00:14:55,520
इस तरह से हम सेंट्रलाइज हो सकते हैं चलो यह विकल्प

206
00:14:55,520 --> 00:15:00,040
मत लो तुम दे दो ऐसा विकल्प जिसको सब मान ले नहीं है

207
00:15:00,040 --> 00:15:01,040
जो

208
00:15:01,040 --> 00:15:05,040
है उसको तो हम छोड़ के बैठे हैं हमारे मन में विष घोल दिया गया ठीक

209
00:15:05,040 --> 00:15:09,360
है मगर जब हमसे कोई चीज हटाई गई है जिसके कारण हम सेंट्रलाइज

210
00:15:09,360 --> 00:15:13,440
नहीं हो पा रहे हैं तो कम से कम वैकल्पिक कोई चीज तो दे देते जिसके नीचे हिंदू

211
00:15:13,440 --> 00:15:17,440
हो जाए कोई है वैकल्पिक हमें

212
00:15:17,440 --> 00:15:21,480
केंद्रित करने वाला शास्त्रोक्त को हमने ठुकरा दिया है

213
00:15:21,480 --> 00:15:25,640
राम मंदिर प्राण प्रतिष्ठा मोदी विरोध कांग्रेसी

214
00:15:25,640 --> 00:15:29,640
है यह सब करके हमने शास्त्रो जो हमें प्राप्त था जो

215
00:15:29,640 --> 00:15:35,560
हमें एक कर सकता था बांध सकता था वो हमने ठुकरा दिया

216
00:15:35,560 --> 00:15:39,760
है अब क्या हमको हमसे जब वो

217
00:15:39,760 --> 00:15:44,520
छीना गया है तो क्या हमारे पास कोई वैकल्पिक स्त्रोत

218
00:15:44,520 --> 00:15:48,720
है नहीं है क्योंकि अन्य जितने भी हैं

219
00:15:48,720 --> 00:15:53,040
वह कहीं ना कहीं से खंडित हो जाएंगे किसी को अगर खड़ा करना भी चाहो

220
00:15:53,040 --> 00:15:57,920
कि मान लीजिए जिन्होंने जो शास्त्रोक्त जो

221
00:15:57,920 --> 00:16:01,840
स्त्रोत है उसको ठुकरा

222
00:16:01,840 --> 00:16:06,120
दिया कि जो हमारे सार्वभौम आचार्य

223
00:16:06,120 --> 00:16:11,000
पद है जो उसको ठुकरा दिया कि वह ऐसे हैं वह वैसे हैं

224
00:16:11,000 --> 00:16:15,000
ठीक है उसके विकल्प में क्या हमको ऐसा दिया गया बल्कि

225
00:16:15,000 --> 00:16:16,720
हमको यह शिक्षाएं

226
00:16:16,720 --> 00:16:21,280
दी जाती हैं कि सनातन धर्म में सार्वभौम की तो बात ही नहीं है

227
00:16:21,280 --> 00:16:25,560
कोई तो जब हम इस बात पर अड़े रहेंगे कि सनातन

228
00:16:25,560 --> 00:16:30,480
धर्म में सार्वभौम चीजों की कोई बात ही नहीं है जिसका जैसा मन वो मानो

229
00:16:30,480 --> 00:16:34,760
तो पहली बात तो यह है कि जिसका जैसा मन है जब वो मानना ही है तो भाई मुस्लिमों

230
00:16:34,760 --> 00:16:38,800
की क्यों ना मान ले क्रिश्चन की क्यों ना मान ले बौद्धों की क्यों

231
00:16:38,800 --> 00:16:43,040
ना मान ले इसी की डपली क्यों बजाए फिर सनातन

232
00:16:43,040 --> 00:16:47,040
की जिसका जैसा मन मानो अजीत भारती जी का एक वीडियो

233
00:16:47,040 --> 00:16:51,480
आया था ना कि मैं नहीं देखा सनातन में कोई एक सार्वभौम विचारधारा

234
00:16:51,480 --> 00:16:55,960
हो सर्वोच्च की कोई वही नहीं है हमारे यहां

235
00:16:55,960 --> 00:17:00,640
अरे भाई जब सर्वोच्च की कोई वही नहीं है तो हम लोग कि चीज पर अड़े

236
00:17:00,640 --> 00:17:05,600
अड़े किस चीज पर कुछ भी सर्वोच्च नहीं है वेद सर्वोच्च नहीं

237
00:17:05,600 --> 00:17:09,800
है भगवान भी सर्वोच्च नहीं है कोई सर्वोच्च नहीं है तो

238
00:17:09,800 --> 00:17:13,920
किस चीज के लिए अड़े हुए हो तो मुझे ऐसा लग

239
00:17:13,920 --> 00:17:18,480
रहा है कि हम लोग अड़े हुए हैं आंखों पर पट्टी बांध

240
00:17:18,480 --> 00:17:23,160
करके और अड़ने का हमारा तरीका क्या है

241
00:17:23,160 --> 00:17:27,480
माध्यम क्या है हमारा अने का सोशल मीडिया वरियर

242
00:17:27,480 --> 00:17:30,120
लास्ट समय

243
00:17:30,120 --> 00:17:32,440
वह हमारा तरीका है

244
00:17:32,440 --> 00:17:36,440
और जो लोग हमें अड़ा रहे हैं कि भैया आपको

245
00:17:36,440 --> 00:17:40,640
जो है यह हमारे धर्म में कोई ऐसी अवधारणा है ही नहीं जिसके लिए अ

246
00:17:40,640 --> 00:17:44,680
अड़ जाए कि नहीं साहब यह तो नहीं हो सकता ऐसी कोई अवधारणा नहीं जिसका

247
00:17:44,680 --> 00:17:48,920
जो मन वो माने तो उनके उनके पर्सपेक्टिव

248
00:17:48,920 --> 00:17:53,040
से क्या महसूस होता है कि भैया यह हमसे जो हमारी सार्वभौम चीजें सर्वोच्च वाली

249
00:17:53,040 --> 00:17:57,040
चीजें वो अलग हटा कर के यह कहते हुए कि हमारे पास सार्वभौम

250
00:17:57,040 --> 00:18:01,400
चीजें नहीं है सर्वोच्च चीजें नहीं है स्व को उसी जगह पर ख्या पित कर रहे

251
00:18:01,400 --> 00:18:06,600
हैं जब हमने सबकी बात को यह कहते हुए ठुकरा दिया

252
00:18:06,600 --> 00:18:10,720
कि हमारे यहां सार्वभौम या सर्वोच्च की कोई व्याख्या ही नहीं

253
00:18:10,720 --> 00:18:14,880
है तो उसी जगह पर एट द सेम टाइम हमने

254
00:18:14,880 --> 00:18:19,560
जो यह व्यक्ति बोल रहा है हमारे यहां पर यह नहीं है उसको सार्वभौम बना दिया

255
00:18:19,560 --> 00:18:24,200
उसी

256
00:18:24,200 --> 00:18:28,280
समय तो आप करते रहो इंतजार जोग

257
00:18:28,280 --> 00:18:32,640
बनाते ट वारियर बनते रहो और यह आता ताई जो है

258
00:18:32,640 --> 00:18:37,360
यह अपनी भीड़ को धीरे-धीरे पैदल मार्च करते हुए आपके घर तक आएंगे

259
00:18:37,360 --> 00:18:42,240
और फिर करना उस समय ट जब भीड़ बाहर खड़ी हो तो ट

260
00:18:42,240 --> 00:18:46,360
करना ट करना मैंने 5000 लोगों को संदेश भेज दिया

261
00:18:46,360 --> 00:18:50,440
है बहुत तगड़ा संदेश भेजा है 10000

262
00:18:50,440 --> 00:18:54,560
लोगों को फॉरवर्ड किया है सोशल मीडिया का मैं

263
00:18:54,560 --> 00:18:59,360
सबसे बड़ा क्रांतिकारी हूं

264
00:18:59,360 --> 00:19:04,400
सोशल मीडिया केवल एक माध्यम

265
00:19:04,400 --> 00:19:09,040
है आप लोगों को एक दूसरे से कनेक्ट करने का

266
00:19:09,040 --> 00:19:13,120
उसको अपनी ताकत बनाइए उसको अपनी कमजोरी मत

267
00:19:13,120 --> 00:19:17,360
बनाइए अंतिम विकल्प नहीं है वह

268
00:19:17,360 --> 00:19:22,600
जो जगतगुरु शंकराचार्य जी हैं वह भी यह बात कहते हैं

269
00:19:22,600 --> 00:19:26,760
कि नभ मार्ग जो है इंटरनेट का जो मार्ग

270
00:19:26,760 --> 00:19:30,760
है उससे केवल संदेश आने जाने के लिए अपनी बातें

271
00:19:30,760 --> 00:19:35,000
लोगों तक पहुंचाने के

272
00:19:35,000 --> 00:19:39,200
लिए उसके बाद आपका भू मार्ग पर वह चीजें क्रियान्वित होनी

273
00:19:39,200 --> 00:19:43,280
चाहिए आप बताओ आप अभी धर्म रक्षा के लिए

274
00:19:43,280 --> 00:19:47,480
गोष्ठी कर लो कि भाई हम लोग एक चर्चा करना चाह रहे हैं जैसे अभी मैं आप लोगों

275
00:19:47,480 --> 00:19:51,560
से चर्चा कर रहा हूं है ना एक चर्चा

276
00:19:51,560 --> 00:19:55,560
करना चाह रहे हैं आप जो ट मैसेज

277
00:19:55,560 --> 00:20:00,400
भेजते हो धर्म रक्षा के लिए टाइटल यही रखना धर्म रक्षा के निमित्त चर्चा

278
00:20:00,400 --> 00:20:04,880
आप में से कितने हैं जो 100 लोगों को बुला सकते हैं उस चर्चा के

279
00:20:04,880 --> 00:20:09,120
लिए आप लोग हजारों लोगों को मैसेज भेजते हो

280
00:20:09,120 --> 00:20:13,200
ना 10 आ जाए तो बहुत बड़ी बात है धर्म रक्षा के नाम

281
00:20:13,200 --> 00:20:17,240
प और पार्टी रख देना 100 बुलाओगे तो

282
00:20:17,240 --> 00:20:21,280
150 आ

283
00:20:21,280 --> 00:20:26,360
जाएंगे आपको अभी भी कोई फर्क नहीं पड़ता आप सोते

284
00:20:26,360 --> 00:20:31,000
रहोगे यही हिंदुत्व है आपका कल एक

285
00:20:31,000 --> 00:20:35,880
पटना के एक वकील साहब से बात हुई अधिवक्ता है हाई कोर्ट

286
00:20:35,880 --> 00:20:40,000
में उन्होंने मुझे बताया उससे तो मेरे रोंगटे खड़े

287
00:20:40,000 --> 00:20:44,240
हो गए एक उन्होंने चर्चा बताई दूसरे

288
00:20:44,240 --> 00:20:48,480
उनके समकक्ष जो अधिवक्ता थे उनसे

289
00:20:48,480 --> 00:20:52,720
उन्होंने चर्चा बताई कि क्या कहते हैं

290
00:20:52,720 --> 00:20:56,920
मैं कह रहा था कि भाई अपने थोड़ा सा हमें एकजुट हो कर के रहना

291
00:20:56,920 --> 00:21:01,240
चाहिए आपस में सामंजस्य बिठाना चाहिए

292
00:21:01,240 --> 00:21:05,320
और अगर नहीं करेंगे तो कल को हम लोग सब अपना धर्म परिवर्तन

293
00:21:05,320 --> 00:21:09,520
कर ले फिर तो या तो अपनी स्त्रियों को अपने बच्चों को ऐसा ऐसा होते हुए देख

294
00:21:09,520 --> 00:21:12,720
देखने के लिए तैयार

295
00:21:12,720 --> 00:21:16,920
रहे क्योंकि आता ताहियो का कुछ नहीं पता है ना वह किस रूप में किस शक्ल

296
00:21:16,920 --> 00:21:21,040
में किस समुदाय से बिलोंग करता है तो हमें कम से कम

297
00:21:21,040 --> 00:21:25,200
एक दूसरे के साथ जुड़ के रहने की तो आवश्यकता है ना तो पता

298
00:21:25,200 --> 00:21:29,600
है वो जो अधिवक्ता है सामने से क्या जवाब दिया क्या

299
00:21:29,600 --> 00:21:33,760
फर्क पड़ता है हिंदू बन के रहो या कुछ और बन के रहो

300
00:21:33,760 --> 00:21:37,920
जीवन जीना है मज्जा नी

301
00:21:37,920 --> 00:21:41,920
लाइफ मज्जा नहीं लाइफ होना चाहिए बस

302
00:21:41,920 --> 00:21:46,440
यही है वास्तविकता हमारे धर्म की अधिकांशत समाज में

303
00:21:46,440 --> 00:21:50,800
धर्म लुप्त हो चुका है धर्म के प्रति निष्ठा लुप्त हो चुकी है और सच्चाई

304
00:21:50,800 --> 00:21:55,720
यह है कि वह जो निष्ठा लुप्त हो गई है तब भी आप चैन से थोड़ी ना

305
00:21:55,720 --> 00:22:00,480
रहोगे जहां धर्म नहीं होता वहां पर विस्फोट

306
00:22:00,480 --> 00:22:05,400
होता है तो आप यह सोचोगे आप चैन से रहोगे

307
00:22:05,400 --> 00:22:09,440
नहीं रह पाओगे यह भूल है आपकी जहां

308
00:22:09,440 --> 00:22:13,680
धर्म होता है वहीं पर आपको चैन

309
00:22:13,680 --> 00:22:19,680
मिल सकता है सुख मिल सकता है शांति मिल सकती

310
00:22:25,840 --> 00:22:29,880
है अभी मैं वीडियो को जब पूरा हो जाएगा

311
00:22:29,880 --> 00:22:33,880
ना तो यहां पर भी कुछ लोग आएंगे यहां पर आकर वो

312
00:22:33,880 --> 00:22:38,480
कहेंगे अरे हमारी लड़ाई नहीं है ये तो ब्राह्मणों की लड़ाई है

313
00:22:38,480 --> 00:22:43,760
ब्राह्मणों का मामला है इसका मामला है उसका मामला यह क्या है यह स्ट्रेटजी

314
00:22:43,760 --> 00:22:47,840
है जो इतने सालों से बनाई गई है और हमने क्या बनाया

315
00:22:47,840 --> 00:22:52,240
है ट ग्रुप हमने बनाए है वो ब्रॉडकास्ट चैनल ट

316
00:22:52,240 --> 00:22:57,040
में फेसबुक आईडी हमने यह किया है

317
00:22:57,040 --> 00:23:01,080
और ज्यादा बोलोगे तो जो बना लिए हैं मगर

318
00:23:01,080 --> 00:23:05,240
जो ये ट वरियर्स हैं इनसे कह

319
00:23:05,240 --> 00:23:09,640
दो कि अभी आ जाओ भाई यहां मंदिर है

320
00:23:09,640 --> 00:23:13,680
आप लोग मान लीजिए कि आसपास के शहरों में ही रह रहे हैं जो इस समय सुन रहे हैं मैं उन्हीं की बात

321
00:23:13,680 --> 00:23:17,920
कर रहा हूं उनको अभी कह दिया जाए कि आ

322
00:23:17,920 --> 00:23:22,440
जाओ तो क्या

323
00:23:22,440 --> 00:23:26,600
निकलेगा मुझे यहां जाना है मुझे वहां जाना है मुझे यह

324
00:23:26,600 --> 00:23:30,840
करना है भाई जिस दिन आक्रमण होगा ना इस तरह से जो भीड़ आई

325
00:23:30,840 --> 00:23:36,840
है उस दिन यह कहने का टाइम भी नहीं मिलेगा कि मुझे कहां जाना

326
00:23:36,840 --> 00:23:41,040
है अभी समय है संगठन

327
00:23:41,040 --> 00:23:47,040
की शक्ति बनाइए संगठन की

328
00:23:47,440 --> 00:23:51,680
शक्ति समय है नीचे

329
00:23:51,680 --> 00:23:56,000
संघ का बल ऊपर ईश्वर का बल यह दो ही चीजें हमारे पास हैं वरना

330
00:23:56,000 --> 00:24:00,080
जितने भी संत गण है जितने भी वरिष्ठ अधिकारी

331
00:24:00,080 --> 00:24:04,240
गण है सब जगह पर यही है कि भैया हमें अब

332
00:24:04,240 --> 00:24:08,600
एकत्व संगठित होकर के रहने की और अपनी सुरक्षा की दृष्टि से मजबूत

333
00:24:08,600 --> 00:24:12,920
होकर रहने की आवश्यकता है हमें लड़ाई किसी से करने नहीं जाना है

334
00:24:12,920 --> 00:24:17,240
आक्रमण किसी के ऊपर नहीं करना है मगर कम से कम ऐसे बन के तो

335
00:24:17,240 --> 00:24:21,320
रहो कि सामने वाला तुम्हारे बारे में कुछ गलत करने

336
00:24:21,320 --> 00:24:27,320
को सोचे तो 100 बार सोचे पहले

337
00:24:30,040 --> 00:24:34,680
अभी साईं मंदिर का अभियान एक शुरू हुआ था पता नहीं अभी व

338
00:24:34,680 --> 00:24:39,120
उसमें है कि नहीं साईं मंदिर से चांद मिया की जो

339
00:24:39,120 --> 00:24:43,440
ऐसे मंदिर जिसमें साईं के नाम से वह चांद मिया नामक जो

340
00:24:43,440 --> 00:24:47,600
मूर्तियां स्थापित है वहां से

341
00:24:47,600 --> 00:24:51,600
पहले वाराणसी में हुआ फिर लखनऊ में भी हुआ

342
00:24:51,600 --> 00:24:56,200
अब उस अब उसमें य आर समाज वाले

343
00:24:56,200 --> 00:25:00,880
या स्कोन वाले या ब्रह्मा कुमार वाले क्यों नहीं हो रहे शामिल

344
00:25:00,880 --> 00:25:05,000
चांद बिया नाम के व्यक्ति की मूर्तियां जो हिंदू मंदिरों में लगी है

345
00:25:05,000 --> 00:25:09,120
उसमें क्यों नहीं हो रहे शामिल क्योंकि वो शंकराचार्य

346
00:25:09,120 --> 00:25:13,320
के द्वारा बताई गई बात है शंकराचार्य के द्वारा

347
00:25:13,320 --> 00:25:17,880
जो ये भेद खोला गया था द्वारका पीठ के मान शंकराचार्य थे जो

348
00:25:17,880 --> 00:25:22,200
कि वो जो है वास्तविकता में साई वो जो साई है वो चांद बिया

349
00:25:22,200 --> 00:25:26,400
थ और हमारे मंदिरों में उनकी जगह नहीं है अगर किसी को को व्यक्तिगत

350
00:25:26,400 --> 00:25:30,400
आस्था है उनके उनके लिए हो

351
00:25:30,400 --> 00:25:34,400
मगर उसको सार्वजनिक रूप से जहां हमारे राम है जहा हमारे कृष्ण है वहां

352
00:25:34,400 --> 00:25:38,480
उनके बगल में पैर पर पैर रख कर के राम जी का विग्रह कभी भी देखिए

353
00:25:38,480 --> 00:25:42,920
आप मंदिर में खड़े हैं भगवान खड़े होते

354
00:25:42,920 --> 00:25:45,560
हैं वहां साई क्या है

355
00:25:45,560 --> 00:25:51,480
बैठे हैं पैर के ऊपर पैर रख कर के बैठे

356
00:25:51,480 --> 00:25:55,480
हैं अभी भी समय है

357
00:25:55,480 --> 00:26:00,120
अपने लिए अपने परिवार के लिए

358
00:26:00,120 --> 00:26:04,440
अपने खानदान के लिए अपने गली मोहल्ले नगर देश राष्ट्र

359
00:26:04,440 --> 00:26:08,280
के लिए धर्म के लिए

360
00:26:08,280 --> 00:26:12,320
सोचिए अ ये जो साई का अभियान भी चला है वाराणसी के एक व्यक्ति

361
00:26:12,320 --> 00:26:16,600
की मेरे पास तस्वीर आई जो उसमें प्रमुखता से थे उनको

362
00:26:16,600 --> 00:26:20,640
तुरंत उनके खिलाफ कोई कानूनी कारवाई कर दी गई वो अपना आप गायब है साई मंदिर

363
00:26:20,640 --> 00:26:24,720
अभियान ठप क्यों भाई वक्त आने पर तो हम

364
00:26:24,720 --> 00:26:28,840
एक हो जाते हैं ना आप ही लोग कहते हैं ना ये समय आपस में लड़ने का नहीं है यह करने

365
00:26:28,840 --> 00:26:32,920
का है वो करने का है भेज दो ना भैया कहां गए वो

366
00:26:32,920 --> 00:26:37,480
भयंकर योद्धा मैं बहुत धरातल पर कार्य करता हूं

367
00:26:37,480 --> 00:26:41,880
आजा आर्या भेजो उनको

368
00:26:41,880 --> 00:26:46,520
क्यों नहीं जा रहे साई मंदिर वाली भीड़ में तुम नहीं जाएंगे

369
00:26:46,520 --> 00:26:50,560
क्योंकि हमें मंदिरों में जाना ही नहीं है हमारी किताबों में तो मूर्ति पूजा को

370
00:26:50,560 --> 00:26:54,800
अधर्म कह दिया गया है पाप कह दिया गया है हम क्यों करें वहां जाकर के रक्षा ऊपर

371
00:26:54,800 --> 00:26:58,840
से हमारा सबसे बड़ा शत्रु उसके द्वारा खुला गया बयान है

372
00:26:58,840 --> 00:27:03,560
भैया शंकराचार्य

373
00:27:03,560 --> 00:27:09,480
क्यों जाए यह रामपाल वाले भी कहते हैं हम भी सनातनी

374
00:27:09,480 --> 00:27:13,560
है वो बात अलग है कि इनका भी जो भगवान है वह सातव आसमान पर

375
00:27:13,560 --> 00:27:18,800
बैठता है बात अलग है मगर

376
00:27:18,800 --> 00:27:23,000
हम भी सनातनी है जाओ हटवा

377
00:27:23,000 --> 00:27:27,800
वहां से साई की मूर्ति को तुम अपनी व्यक्तिगत आस्था रखो जहां रखनी है

378
00:27:27,800 --> 00:27:31,960
लड़ो नहीं लड़ो ग क्योंकि वहां से प्रेम खत्म हो चुका

379
00:27:31,960 --> 00:27:36,240
है यह किया है यह किया है विरोधियों

380
00:27:36,240 --> 00:27:40,600
ने इतने सालों में आज आप

381
00:27:40,600 --> 00:27:45,000
आपके ही हाथों से आपके घर में आग लगवाई जा रही है और

382
00:27:45,000 --> 00:27:49,080
उस पर लोग हाथ सेक रहे हैं फिर भी आप लोगों को कुछ भी समझ में

383
00:27:49,080 --> 00:27:53,320
नहीं आ रहा

384
00:27:53,320 --> 00:27:57,440
है कुछ नहीं समझ में आ रहा है मार

385
00:27:57,440 --> 00:28:01,600
डालो एक दूस को लड़ो

386
00:28:01,600 --> 00:28:06,360
अपने घर में आग लगाओ वाह सर्दी में हाथ ताने को मिल गया यह सोचो

387
00:28:06,360 --> 00:28:11,120
क्योंकि आपको सुचवा जा रहा है आपकी प्रोग्रामिंग ऐसी हो गई

388
00:28:11,120 --> 00:28:15,520
है और अगर कोई यह नगन सत्य कहने के लिए निकले

389
00:28:15,520 --> 00:28:19,560
वो बहुत बड़ा विरोधी है क्या हिंदुओं को आपस में बांट

390
00:28:19,560 --> 00:28:22,800
रहा है हिंदू बटा हुआ

391
00:28:22,800 --> 00:28:26,840
है हिंदू मरा हुआ है बांटने

392
00:28:26,840 --> 00:28:30,040
की बात भी दूर है

393
00:28:30,040 --> 00:28:34,440
मरा हुआ है बिका हुआ

394
00:28:34,440 --> 00:28:39,320
है इंदौर में जो हमने प्रदर्शन किया था

395
00:28:39,320 --> 00:28:44,080
बांग्लादेशी हिंदुओं के लिए व बांग्लादेशी हिंदू कौन थे

396
00:28:44,080 --> 00:28:48,160
इसकन वाले और हमने वहां से मैसेज भी दिया था कि हम यहां

397
00:28:48,160 --> 00:28:52,360
पर अलग अलग नहीं

398
00:28:52,360 --> 00:28:56,520
है वहां पर उस प्रदर्शन के दूसरे ही दिन एक

399
00:28:56,520 --> 00:29:00,600
मीटिंग हुई मीटिंग में सब आए जो

400
00:29:00,600 --> 00:29:04,680
जितने भी स्वयं को कर्मठ के रूप में प्रस्तुत

401
00:29:04,680 --> 00:29:08,800
करते हैं वह सब आए वहां पर

402
00:29:08,800 --> 00:29:12,800
मैंने अपनी ओर से योजना भी बताई जो गुरुदेव के द्वारा बताई जाती

403
00:29:12,800 --> 00:29:16,960
है कि हर घर से एक

404
00:29:16,960 --> 00:29:21,080
रुप एक घंटा उस क्षेत्र के लिए निकले उस

405
00:29:21,080 --> 00:29:25,400
क्षेत्र को डेवलप करो जहां पर उस क्षेत्र को किला बनाओ दुर्ग बनाओ

406
00:29:25,400 --> 00:29:29,480
जो आपका जहां पर आप रह रहे हो वहां पर आप दो

407
00:29:29,480 --> 00:29:34,240
किलोमीटर के एरिया में एक मंदिर देखो वहां पर उस

408
00:29:34,240 --> 00:29:38,280
क्षेत्र के सभी लोग साप्ताहिक रूप से एकत्रित हो और वहां पर

409
00:29:38,280 --> 00:29:42,400
हिंदू राष्ट्र संगोष्ठी हो जिसमें कि हम व संगोष्ठी

410
00:29:42,400 --> 00:29:46,720
के नाम से क्या हो कि आप लोग हर सप्ताह में एक बार आजकल

411
00:29:46,720 --> 00:29:49,600
क्या हो गया जितना समृद्ध क्षेत्र है बगल वाले

412
00:29:49,600 --> 00:29:53,880
का नाम तक नहीं पता है व्यक्ति को नाम भी नहीं पता मेरे बगल में कौन

413
00:29:53,880 --> 00:29:59,560
है यह स्थिति है शहरों की नगरों की

414
00:29:59,560 --> 00:30:03,840
तो इस माध्यम से इन गोष्ठियों के माध्यम से एक दूसरे

415
00:30:03,840 --> 00:30:08,240
से मिल लो एक दूसरे की मदद कर लो एक दूसरे से सामंजस्य

416
00:30:08,240 --> 00:30:12,280
बिठा कर के उस मंदिर को उस मंदिर का विकास करो उसको अपना दुर्ग

417
00:30:12,280 --> 00:30:16,800
बनाओ शिक्षा रक्षा सेवा का केंद्र बनाओ

418
00:30:16,800 --> 00:30:21,880
यह सारी चीजें जब मैंने वहां पर दे दी और

419
00:30:21,880 --> 00:30:25,920
और भी कुछ चीजें थी तो मेरी चीजें तो स्वीकार नहीं

420
00:30:25,920 --> 00:30:30,560
की गई भाई ठीक है वो

421
00:30:30,560 --> 00:30:34,680
एक मीटिंग किसी और दल के द्वारा हो रही थी मैं वहां पर अपने एक आगंतुक के रूप

422
00:30:34,680 --> 00:30:38,680
में वहां पहुंचा था तो मैंने वहां पर ऐसे ऐसी चीजें रखी कुछ लोगों ने स्वीकार

423
00:30:38,680 --> 00:30:42,680
की तो उन्होंने वो चालू कर दिया है इंदौर में मगर

424
00:30:42,680 --> 00:30:46,680
जो वहां के प्रमुख थे उनका अपना एक अभियान था अच्छा वहां आने वाले

425
00:30:46,680 --> 00:30:50,960
लोग रो रहे थे कि बांग्लादेश में क्या हो रहा है मातृ शक्तियों

426
00:30:50,960 --> 00:30:55,080
के साथ क्या हो रहा है देखा नहीं जाता है रो तक रहे थे और बहुत

427
00:30:55,080 --> 00:30:59,160
गुस्से में थे ऐसा गुस्सा कि पूछो नहीं मुझे लगा

428
00:30:59,160 --> 00:31:04,000
अब तो क्रांति आने वाली है अभी आधे एक घंटे में उन सबको सुन के

429
00:31:04,000 --> 00:31:04,720
और लास्ट

430
00:31:04,720 --> 00:31:08,760
में जो वहां के प्रमुख थे उन्होंने ही कहा कि कल हम सब लोग वहां चौराहे पर खड़े

431
00:31:08,760 --> 00:31:12,800
होकर के हस्ताक्षर करेंगे देखिए सबसे पहली बात तो क्या है कि

432
00:31:12,800 --> 00:31:17,040
इतना सब होने के बाद भी हमारा जो निर्णय निकल रहा है वह कहां तक सीमित

433
00:31:17,040 --> 00:31:21,040
है हम लोग हस्ताक्षर कर रहे हैं हस्ताक्षर हम वहां खड़े

434
00:31:21,040 --> 00:31:25,040
होंगे हस्ताक्षर करेंगे इसी बात पर कि बांग्लादेश में जो हो रहा है गलत

435
00:31:25,040 --> 00:31:29,360
हो रहा है बस और उसके लिए भी

436
00:31:29,360 --> 00:31:33,480
एक व्यक्ति खड़ा एक व्यक्ति कह रहा है एक व्यक्ति कहता है कि जो रो रहा

437
00:31:33,480 --> 00:31:37,600
था तो दो मिनट पहले वो व्यक्ति कहता है कि

438
00:31:37,600 --> 00:31:41,720
मैं कल नहीं आ पाऊंगा क्योंकि मेरी ट्रेन की टिकट बुक है वहां शादी है कहीं

439
00:31:41,720 --> 00:31:46,280
पे मुझे जो है वहां जाना है ट्रेन की टिकट बुक है

440
00:31:46,280 --> 00:31:50,600
भाई घर जल रहे है जलने दो मेरी ट्रेन की टिकट बुक है

441
00:31:50,600 --> 00:31:55,120
मैं कैसे उसको चेंज कर दूं मैं कैसे अपना रिजर्वेशन कैंसिल कर दूं

442
00:31:55,120 --> 00:32:00,000
मैं तो बढ़िया खाते पीते एसी के डब्बे में जाऊंगा ना वहां तक

443
00:32:00,000 --> 00:32:04,120
और दूले राजा बन कर के वहां फोटो खिंचवा हंगा

444
00:32:04,120 --> 00:32:08,760
मुझे कोई मतलब नहीं है ठीक है वो मैं रो लिया वह अच्छा है वो सब कर लिया मैंने

445
00:32:08,760 --> 00:32:14,200
हां मैं वरियर बहुत बड़ा हूं ट

446
00:32:14,200 --> 00:32:20,200
का तो मेरा आप सबसे निवेदन है

447
00:32:20,400 --> 00:32:24,560
कि आप जो है आंखें बंद करके मत रहिए

448
00:32:24,560 --> 00:32:29,280
मैं हाथ जोड़ कर के आप लोगों से कह रहा हूं एकत्रित होना शुरू करिए

449
00:32:29,280 --> 00:32:33,360
एकत्रित होने का बहुत सरल तरीका है आपको कहीं और नहीं जाना

450
00:32:33,360 --> 00:32:37,480
है जहां आप रहते हैं वहां से शुरुआत करिए आप किसी से कोई

451
00:32:37,480 --> 00:32:41,840
लेना देना नहीं है और यदि आप करना चाहते हैं तो आप संपर्क

452
00:32:41,840 --> 00:32:46,120
कर सकते हैं हमारा यथा सामर्थ्य जो होगा आपको गाइड कर पाने

453
00:32:46,120 --> 00:32:49,200
का वह हम

454
00:32:49,200 --> 00:32:53,200
करेंगे मगर उस क्षेत्र की जो चीजें हैं

455
00:32:53,200 --> 00:32:59,200
उसको आपको ही देखना है

456
00:32:59,800 --> 00:33:04,040
यति जी ने कुछ कह दिया हजारों की सरकारी कारवाई

457
00:33:04,040 --> 00:33:08,120
भी हो गई उसके बाद भी भैया हमारी इतनी वह

458
00:33:08,120 --> 00:33:13,640
है क्षमता हम यह कर सकते हैं माता के मंदिर पर हम करेंगे वह भी नवरात्र में

459
00:33:13,640 --> 00:33:17,880
देखो और तुम लोग कुछ नहीं हो तुम लोग तो मरे हुए हो बिके

460
00:33:17,880 --> 00:33:22,000
हुए हो किससे बिके हुए हो अपने संसाधनों से

461
00:33:22,000 --> 00:33:26,600
सुख से भोग से वो भोग भी नहीं रहेगा

462
00:33:26,600 --> 00:33:30,880
अधर्म की एक खास है अधर्म जो व्यक्ति

463
00:33:30,880 --> 00:33:34,280
अधर्म को पलने देता है

464
00:33:34,280 --> 00:33:39,000
ना जो व्यक्ति अधर्म को पलने देता है

465
00:33:39,000 --> 00:33:43,320
अंत तो गत्वा उसकी स्थिति सबसे

466
00:33:43,320 --> 00:33:47,440
निचले स्तर की होती है वो सोचता है कि मैं सही कर लू सही कर लू

467
00:33:47,440 --> 00:33:52,000
सही कर लूं मगर होते होते जब एक बड़े ओवरव्यू

468
00:33:52,000 --> 00:33:56,240
में अपने आप को देखता है अपनी लाइफ को देखता है अपने जीवन को देखता है तो उसको दिखाई

469
00:33:56,240 --> 00:34:02,240
देता है कि मैंने बहुत कीड़े जैसी जीवन कोल जिया

470
00:34:06,120 --> 00:34:10,800
है तो करिए आप लोग वेट करिए

471
00:34:10,800 --> 00:34:15,000
आपके पास दो ही विकल्प है शादियों में जाइए आपका

472
00:34:15,000 --> 00:34:19,200
हफ्ते में एक दिन का ऑफिस कैंसिल नहीं हो सकता है हफ्ते में एक ही दिन तो मिलता

473
00:34:19,200 --> 00:34:23,280
है यह बहुत यह बहुत बार मुझे सुनाई देता है हफ्ते में एक

474
00:34:23,280 --> 00:34:27,320
ही दिन तो मिलता है हफ्ते में हमें एक

475
00:34:27,320 --> 00:34:31,400
ही दिन मिलता है तो उस दिन हम वह अपने पूरे हफ्ते के काम करें कि आपके

476
00:34:31,400 --> 00:34:37,400
साथ व हिंदू राष्ट्र संगोष्ठी में

477
00:34:41,080 --> 00:34:45,480
आए लड़ाई ब्राह्मणों की है साईं मंदिर को बचाने हम क्यों

478
00:34:45,480 --> 00:34:50,400
जाएंगे यह देख लो यह जो भीड़ है ना

479
00:34:50,400 --> 00:34:55,040
यह कोई बाहर दूसरे देश की नहीं है भीड़

480
00:34:55,040 --> 00:35:01,040
भारत में है यह भीड़

481
00:35:02,160 --> 00:35:06,760
और करते रहो व वरियर मैसेज फॉरवर्ड करते रहो

482
00:35:06,760 --> 00:35:11,440
लोगों को जोड़ो

483
00:35:11,440 --> 00:35:16,160
और जोड़ते रहो नए नए ब्रॉडकास्ट में ग्रुप बना

484
00:35:16,160 --> 00:35:20,160
लो और करते रहो काम अपना वह लोग काम जमीन

485
00:35:20,160 --> 00:35:24,240
पर कर रहे हैं जमीन पर आप लोग हवा में

486
00:35:24,240 --> 00:35:29,480
करते रहो जमीन उनकी आप हवा में

487
00:35:29,480 --> 00:35:33,640
उड़ना जो जमीन पर काम करेगा जमीन उसके पास

488
00:35:33,640 --> 00:35:37,880
आप हवा में उड़ो अरे भाई हमने किसी का कुछ

489
00:35:37,880 --> 00:35:42,120
छीना हमने कभी किसी को हम तो हमेशा सदैव इतने शेषण

490
00:35:42,120 --> 00:35:46,880
रहे जो कोई आ गया कहीं से भी कैसे भी उसको गले से लगाया

491
00:35:46,880 --> 00:35:50,880
यह उसी का ही तो आज यह परिणाम है जो आज हम

492
00:35:50,880 --> 00:35:54,920
लोग अपने ही अपनी ही मिट्टी में खड़े अपनी धरती पर

493
00:35:54,920 --> 00:36:00,600
खड़े होकर के हमारे सबके मन में भ क्यों है यह

494
00:36:00,600 --> 00:36:06,080
भय क्या गलती थी हमारी सबको गले से

495
00:36:06,080 --> 00:36:10,080
लगाना और आज स्थिति यह हो गई है कि हम अपने अस्तित्व को भी मिटा

496
00:36:10,080 --> 00:36:14,280
देंगे हम लोग इतने भोगी हो गए हैं अपनी जड़ों

497
00:36:14,280 --> 00:36:18,080
को भुला देंगे हम लोग इतने बड़े लालची हो गए हैं

498
00:36:18,080 --> 00:36:22,080
मगर हम अपने अस्तित्व के लिए

499
00:36:22,080 --> 00:36:26,200
कुछ नहीं करेंगे माताएं बहने

500
00:36:26,200 --> 00:36:31,000
अरे जरा देख उनके चेहरों

501
00:36:31,000 --> 00:36:35,880
को अपने घर की मातृ शक्तियों को एक बार देख

502
00:36:35,880 --> 00:36:40,360
लो सह नहीं पाओगे या शायद सह

503
00:36:40,360 --> 00:36:44,960
लो हो सकता है इतने इतने

504
00:36:44,960 --> 00:36:50,960
गिर चुके

505
00:36:51,520 --> 00:36:55,960
हो ऐसे ऐसे रोबोटिक लोग हैं इतनी गंभीर

506
00:36:55,960 --> 00:37:01,960
बात में भी अपने बचकानी बुद्धि वाले कमेंट कर रहे

507
00:37:13,960 --> 00:37:18,040
हैं जिसको सक्रिय होना हो अपने क्षेत्र में

508
00:37:18,040 --> 00:37:22,240
कार्य करना हो और उसको हमसे कोई सहायता

509
00:37:22,240 --> 00:37:26,480
चाहिए उसके पास यदि खुद का प्रोटोकॉल है कोई दिक्कत नहीं है अपने प्रोटोकॉल

510
00:37:26,480 --> 00:37:30,880
को यूज करिए अगर सहायता चाहिए तो हम यथा

511
00:37:30,880 --> 00:37:35,280
सामर्थ्य आपको सहायता देने का प्रयास करेंगे भैया

512
00:37:35,280 --> 00:37:39,800
किसी को चाहिए कोई किसी से नहीं जुड़ना है

513
00:37:39,800 --> 00:37:43,880
जो व्यक्ति जो व्यक्ति अपने बारे में अपने

514
00:37:43,880 --> 00:37:47,880
परिवार के बारे में सोच रहा है ना रक्षा के बारे में वह

515
00:37:47,880 --> 00:37:52,080
व्यक्ति शंकराचार्य का सैनिक है भले ही आप उस उनके

516
00:37:52,080 --> 00:37:57,600
द्वारा प्रतिपादित होने वाले सिद्धांत है व मानो या ना मानो

517
00:37:57,600 --> 00:38:01,640
अगर आप अपने बारे में सोच रहे हैं ना अपने घर की सुरक्षा के बारे में तो

518
00:38:01,640 --> 00:38:05,760
आप आदित्य वाहिनी के सैनिक हैं यह कहा था

519
00:38:05,760 --> 00:38:11,760
हमारे गुरुदेव ने यह कहा था जगतगुरु शंकराचार्य

520
00:38:15,480 --> 00:38:21,480
ने बैठे रहो वेट करो

521
00:38:35,640 --> 00:38:39,960
रामचरित मानस जब जलाई जाएगी कितने आर समाजी जाएंगे रामचरित

522
00:38:39,960 --> 00:38:44,000
मानस को बचाने एक भी नहीं गीता प्रस गोरखपुर

523
00:38:44,000 --> 00:38:48,280
की किताबें तो सब उनके लिए मिलावटी है वो क्यों जाए नहीं

524
00:38:48,280 --> 00:38:52,600
जाएंगे शिव मंदिर को बचाने कितने कितने जाएंगे इस कौन से

525
00:38:52,600 --> 00:38:56,800
एक भी नहीं एक भी नहीं

526
00:38:56,800 --> 00:39:00,880
भगवान नहीं है क्या क्या फर्क पड़ता है उनकी मूर्ति टूट रही है हम क्यों अपना देह को

527
00:39:00,880 --> 00:39:04,960
कष्ट दे भाई एसी में बैठे हैं सामने बढ़िया टीवी चल रहा

528
00:39:04,960 --> 00:39:10,360
है जब कहा जाएगा तो हम लोग माला जाप कर

529
00:39:10,360 --> 00:39:14,680
लेंगे और वक्त आने पर हीन आचरण भी कर देंगे ये पटना

530
00:39:14,680 --> 00:39:18,840
का आपने देखा ही ना क्या हुआ वहां

531
00:39:18,840 --> 00:39:22,880
जो यह कहते हैं कि वो वैष्णव से वो ब्राह्मण से ऊंचा बन जाता है ये सब

532
00:39:22,880 --> 00:39:28,840
भाई ब्राह्मण का और वैष्णव का क्या मतलब है एक ब्राह्मण भी तो वैष्णव हो सकता है

533
00:39:28,840 --> 00:39:33,160
और एक वैष्णव भी तो ब्राह्मण हो सकता है क्यों कंपेयर कर रहे हो उससे भी ऊंचा हो जाए

534
00:39:33,160 --> 00:39:37,200
कंपेरिजन आप डाल रहे हैं लोगों के मन में ब्राह्मण एक अलग

535
00:39:37,200 --> 00:39:41,400
चीज है और वैष्णव एक अलग चीज है मगर आप उस

536
00:39:41,400 --> 00:39:47,360
दोनों के साथ कंपेयर कर रहे

537
00:39:47,360 --> 00:39:52,040
हैं एक वैष्णव कभी ऐसा नहीं कर सकता देख लो

538
00:39:52,040 --> 00:39:58,040
भाई माला जाप किया होगा तभी तो अध्यक्ष बनाया था ना पटना में

539
00:40:10,880 --> 00:40:15,080
चलिए ठीक है अगर किसी

540
00:40:15,080 --> 00:40:19,200
को सक्रिय होना है अपने क्षेत्र में तो हो जाइए

541
00:40:19,200 --> 00:40:23,280
अभी समय है कुछ नहीं बिगड़ा है कर्मण्य वादी कारस मा

542
00:40:23,280 --> 00:40:27,400
फलेशु कदाचना जब तक नौका डूबती नहीं तब तक

543
00:40:27,400 --> 00:40:31,480
हमारा काम है खेते रहना खेते रहना खेती है

544
00:40:31,480 --> 00:40:35,720
कुछ नहीं बिगड़ा है हमारे साथ श्री रगुनाथ तो किस बात की चिंता हम

545
00:40:35,720 --> 00:40:39,880
है एक हो जाइए भाइयों किसी चीज किसी कारण से रक्षा के नाम

546
00:40:39,880 --> 00:40:43,880
पर एक हो

547
00:40:43,880 --> 00:40:49,000
जाइए 7408

548
00:40:49,000 --> 00:40:53,200
30169 संगठित होइए संगठित होने के लिए

549
00:40:53,200 --> 00:40:57,480
यदि कोई दिशा निर्देश की आवश्यकता है जुड़ने की आपको लगता है कि हमें जुड़ना चाहिए

550
00:40:57,480 --> 00:41:02,080
एक दूसरे से कनेक्ट होना चाहिए

551
00:41:02,080 --> 00:41:06,280
तो हमसे संपर्क कर सकते हैं आदित्य वाहिनी

552
00:41:06,280 --> 00:41:10,760
का गोवर्धन मठ का ऐप है सबसे पहले उसे डाउनलोड

553
00:41:10,760 --> 00:41:15,520
कर लीजिए अगर आपको संगठित होकर के राष्ट्रीय स्तर पर कार्य करना है

554
00:41:15,520 --> 00:41:19,720
गोवर्धन मट का ऐप है अभी नया लच हुआ है उसको

555
00:41:19,720 --> 00:41:23,800
आप डाउनलोड करिए उसमें सारी जानकारी व फॉर्म भरी आदित्य वाहिनी

556
00:41:23,800 --> 00:41:29,360
से जुड़ने के लिए और

557
00:41:29,360 --> 00:41:33,360
कार्य करिए भाई और यह वीडियो खत्म होने के बाद ना पहले

558
00:41:33,360 --> 00:41:37,440
अपने घर में जाकर के जो जो मातृ शक्तियां हो उनको देखिएगा पहले और सोचिए जो

559
00:41:37,440 --> 00:41:43,440
सब मैंने कहा

560
00:41:47,200 --> 00:41:51,200
है जय श्री राम
