1
00:00:01,440 --> 00:00:05,520
जय श्री राम सभी को बंधु जनों

2
00:00:05,520 --> 00:00:09,800
को जय श्री राम

3
00:00:09,800 --> 00:00:13,840
और नामा स्त्र बहुत तेजी से चल रहा है लोग जुड़

4
00:00:13,840 --> 00:00:18,800
रहे हैं पूरे भारतवर्ष से आप लोग भी अब जुड़े

5
00:00:18,800 --> 00:00:24,800
नामा स्त्र से और साथ में मिलकर नाम जप करें

6
00:00:32,960 --> 00:00:38,960
आ गए हमारे जो आज के मेहमान

7
00:00:40,640 --> 00:00:45,200
हैं जगत राता दास जी

8
00:00:45,200 --> 00:00:50,040
स्वागत है आपका आप लाइव है आपको इस समय लोग देख रहे

9
00:00:50,040 --> 00:00:54,480
हैं तो आपका स्वागत है जय श्री राम आपको और

10
00:00:54,480 --> 00:00:57,680
हरे

11
00:00:57,680 --> 00:01:02,000
कृष्णा सबसे पहले आप अपने थोड़ा सा परिचय दे दे जिससे कि हमारे

12
00:01:02,000 --> 00:01:06,160
जो दर्शक है श्रोता है व यह जान जाए कि आप

13
00:01:06,160 --> 00:01:10,920
कहां से हैं हमारी बात किससे हो रही है

14
00:01:10,920 --> 00:01:15,200
ओ तो मेरा नाम खित नाम है

15
00:01:15,200 --> 00:01:20,680
आप कान वाला तो नहीं लगाए हैं ना एक लगाया

16
00:01:20,680 --> 00:01:26,680
अगर कान का लगाया बहुत बहुत स्लो आवाज आ रही है

17
00:01:27,560 --> 00:01:32,040
आपकी मैं ब्लूटूथ ऑफ कर देता हूं हा यह सही है

18
00:01:32,040 --> 00:01:36,400
ठीक है जी लेकिन आपका आवाज कम लग रहा

19
00:01:36,400 --> 00:01:41,200
था मेरी आवाज कम लग रही है आपको हा

20
00:01:41,200 --> 00:01:44,960
क्लियर तो है लेकिन साउंड कम लग रहा

21
00:01:44,960 --> 00:01:49,000
है बात नहीं बताइए तो मेरा नाम जगत

22
00:01:49,000 --> 00:01:53,400
राता दास है मैं 99 में इसको जन किया था भुवनेश्वर थोड़ा

23
00:01:53,400 --> 00:01:57,400
थोड़ा सा ना अपनी अप्रोच से आप तेज बोल लीजिए थोड़ा

24
00:01:57,400 --> 00:02:02,360
तेज बोल लेंगे तो अच्छा हो जाएगा

25
00:02:02,360 --> 00:02:06,360
तो मेरा नाम जगत राता दास है उड़ीसा से हूं

26
00:02:06,360 --> 00:02:10,880
मैं भुवनेश्वर जॉइन किया था इसकन तो

27
00:02:10,880 --> 00:02:15,160
अभी मैं इसकन इंडोनेशिया में हूं अगर बोलू तो

28
00:02:15,160 --> 00:02:19,560
अभी क्या है क्या बोला आपने अभी मैं अभी इसकन इंडोनेशिया में

29
00:02:19,560 --> 00:02:23,960
हूं मैं सीधा उड़ीसा में एक सेंटर खोला है जो कि हमारा हम इसकन

30
00:02:23,960 --> 00:02:28,000
से अलग है ठीक है ना आप स् कन से अलग है हां अभी

31
00:02:28,000 --> 00:02:32,080
अलग है अच्छा इंडोनेशिया से ऑपरेटेड स् कन

32
00:02:32,080 --> 00:02:36,240
है आपका नहीं नहीं इसकन इंडोनेशिया सेपरेट जैसे

33
00:02:36,240 --> 00:02:40,720
कल आए थे हरे कृष्णा सेंटर करके ना ऐसे ही अलग

34
00:02:40,720 --> 00:02:44,920
है तो इसका नाम भी इसकन है

35
00:02:44,920 --> 00:02:50,120
इसकन है लेकिन इसकन इंडोनेशिया है ऑर्गेनाइजेशन हम लोग डिफरेंट है इकन

36
00:02:50,120 --> 00:02:54,320
इंडोनेशिया यस तो आपके और उन क्या ऐसा

37
00:02:54,320 --> 00:02:58,480
है इकन इंडोनेशिया इंटरनेशनल फाउंडेशन पूरा नाम ऐसा है

38
00:02:58,480 --> 00:03:02,640
इकन इंडोने इंटरनेशनल फाउंडेशन या तो इधर

39
00:03:02,640 --> 00:03:07,840
ये ओड़ीशा में एक सेंटर खोला है मैं इसको लीड कर रहा हूं अच्छा अच्छा

40
00:03:07,840 --> 00:03:12,120
अच्छा तो तो और क्या बताऊ

41
00:03:12,120 --> 00:03:16,320
बोलिए आपके और उन में क्या डिफरेंसेस है

42
00:03:16,320 --> 00:03:18,280
डिफरेंस है जैसे कल

43
00:03:18,280 --> 00:03:22,960
बात कर रहे थे थोड़ा देख रहा था जैसा कि इस कल में जो है

44
00:03:22,960 --> 00:03:27,080
अग मैं पहले बोल देता हूं कि मैं सबको प्रेयर करता

45
00:03:27,080 --> 00:03:31,680
हूं जितना बचना भक्ता गुरु संत जितना इंडिया सनातन धर्म सबको

46
00:03:31,680 --> 00:03:36,200
अगर मैं कहीं गलत भी हूं तो कहीं हमको सीरियस ना ले और क्षमा करें

47
00:03:36,200 --> 00:03:40,480
क्योंकि मैं मैचर नहीं हो बत ज्यादा फिर भी कुछ बोलना चाहता हूं सुनाई

48
00:03:40,480 --> 00:03:44,600
दे रहा मैं एक काम करता हूं मैं एक बार जाकर दोबारा वापस आता हूं शायद ये मेरी कमी

49
00:03:44,600 --> 00:03:48,960
है क्योंकि लोग बता रहे हैं आपकी आवाज बिल्कुल परफेक्ट आ रही है मैं एक बार फिर आता

50
00:03:48,960 --> 00:03:54,960
हूं ठीक

51
00:04:30,120 --> 00:04:35,000
कृष्णा कृष्णा हरे कृष्णा गोविंदा

52
00:04:35,000 --> 00:04:39,680
गोपाल गिरिधारी नरसिंह मुरा

53
00:04:39,680 --> 00:04:44,800
जय श्री कृष्ण चैतन्य प्रभु नित्यानंद

54
00:04:44,800 --> 00:04:49,560
श बोलिए ठीक है हा बेटर है

55
00:04:49,560 --> 00:04:53,720
तो आप तो जानते होंगे अच्छा मैं बोल रहा था मैं प्रेयर

56
00:04:53,720 --> 00:04:57,760
कर रहा था किसी किसीने मेरा गलती ना पकड़े सीरियस ना ले थोड़ा कुछ

57
00:04:57,760 --> 00:05:02,200
मैं कोशिश करता प्रचार करने कुछ भूल भी हो सकता है और मेरा कंडीशन

58
00:05:02,200 --> 00:05:06,280
है मैं अभी जो वीडियो हो रहा है अगर

59
00:05:06,280 --> 00:05:10,720
मैं जो भी बोलूंगा उसको सपोर्ट करने के लिए आप कुछ काट छट के वीडियो बनाएंगे अ

60
00:05:10,720 --> 00:05:14,680
नहीं बनाएंगे ठीक है ना समझ गए

61
00:05:14,680 --> 00:05:19,480
ना हम आपकी काट छाट नहीं करते हैं बस य

62
00:05:19,480 --> 00:05:23,560
कभी कभी छोटा छोटा काट के फिर आप कुछ वीडियो बनाते ऐसा कोई

63
00:05:23,560 --> 00:05:27,880
भी आप कोई भी ना करना चाहिए मेरा नहीं नहीं नहीं ऐसा है

64
00:05:27,880 --> 00:05:32,000
कि हम आपकी बात को बदलते नहीं है जैसे मान लीजिए

65
00:05:32,000 --> 00:05:36,000
कोई एक बहुत बड़ी कन्वर्सेशन है उसम बीच में कोई एक टॉपिक आया छोटा सा वो

66
00:05:36,000 --> 00:05:40,000
हम करते हैं नहीं मेरा आपसे एक ऑब्जेक्शन क्या है मैं

67
00:05:40,000 --> 00:05:44,160
देख रहा वीडियो की कभी कभी आप इसकन का किताब या इसकन कोई बात लेकर

68
00:05:44,160 --> 00:05:45,200
थोड़ा कुछ आप थ

69
00:05:45,200 --> 00:05:49,200
ऑब्जेक्शन की बात हम करेंगे क्लियर करले पहले एक चीज क्लियर

70
00:05:49,200 --> 00:05:53,520
कर ले कि हम रील्स बनाते हैं मगर हम कभी भी किसी व्यक्ति

71
00:05:53,520 --> 00:05:57,520
के भाव को नहीं बदलते हैं जैसे वो कहना कुछ और चाह रहा था और

72
00:05:57,520 --> 00:06:01,600
हमने काट के ऐसा कर दिया कि वो जो है उसकी बात को झूठ कर दिया

73
00:06:01,600 --> 00:06:05,840
यह हम कभी नहीं करते हैं ऐसा नहीं करते लेकिन थोड़ा तो मज

74
00:06:05,840 --> 00:06:09,880
मजा उड़ाते जैसा करते हैं आप ठीक है ना पता नहीं गलत बात

75
00:06:09,880 --> 00:06:14,280
का विरोध करते हैं अगर वो मजाक दिख रहा है तो बात अलग है

76
00:06:14,280 --> 00:06:18,560
क्या आपको कंडीशन नहीं कर सकता कि मेरा वीडि ऐसा मत करिए

77
00:06:18,560 --> 00:06:22,560
नहीं यह हमारा स्वतंत्रता का वो है इसमें आप

78
00:06:22,560 --> 00:06:26,800
हस्तक्षेप नहीं कर सकते ओके

79
00:06:26,800 --> 00:06:30,840
आपके साथ अगर करेंगे तो अन्यों के साथ अन्याय हो जाएगा पक्षपात हो

80
00:06:30,840 --> 00:06:35,000
जाएगा भेदभाव हो जाएगा इसमें क्या है अगर मैं कुछ बोलू ना आप

81
00:06:35,000 --> 00:06:39,400
फिर रिल नहीं बनाकर छोड़ दीजिए ना मेरा अकेला को जैसे मान लीजिए कि मैंने

82
00:06:39,400 --> 00:06:43,480
आपसे आपका नाम पूछा आपने अपना नाम बता दिया अब हम केवल यही बताना चाह रहे

83
00:06:43,480 --> 00:06:47,680
हैं कि हमारी इनसे बात हुई थी वो इतनी स रील निकाल के बता दी तो इसमें क्या हर्ज है

84
00:06:47,680 --> 00:06:51,680
अगर हम आपको आपकी रील काट दे आपने अपना नाम

85
00:06:51,680 --> 00:06:56,160
बताया कि जगदा जगता

86
00:06:56,160 --> 00:07:00,240
जगत राता आपने अपना नाम बताया और उसके बाद आपने आगे जाकर

87
00:07:00,240 --> 00:07:04,480
के किसी और का नाम बताया घनश्याम तो हम रील काट के आपका जगत

88
00:07:04,480 --> 00:07:08,480
राता हटा दे और घनश्याम लगा दे मेरा नाम जगत राता काट दिया घनश्याम लगा

89
00:07:08,480 --> 00:07:13,240
दिया ये नहीं करते हम मैं समझ गया लेकिन देखिए

90
00:07:13,240 --> 00:07:17,360
आप सुनिए आप भी सनातन धर्म है हिंदू धर्म है ठीक है ना अगर मैं कुछ

91
00:07:17,360 --> 00:07:21,360
गलत बोलूंगा तो आप इसको प्रचार करने का क्या जरूरत है

92
00:07:21,360 --> 00:07:25,680
किसको दिखाने की क्या जरूरत है कि मैं कुछ गलत भी बोल दिया हमारा उद्देश्य ये है कि लोगों

93
00:07:25,680 --> 00:07:30,280
के सामने सच आए कि कौन ऐ

94
00:07:30,280 --> 00:07:34,280
फील करता ऐसा नहीं करना चाहिए क्यों ऐसा करना चाहिए तुम भी मेरा भाई है मैं आपका भाई हूं मैं

95
00:07:34,280 --> 00:07:40,280
कुछ गलत कर दिखा देंगे में ऐसा ही दिखा देंगे ऐसा क्या मेंटी है पता

96
00:07:41,840 --> 00:07:46,040
नहीं आप क रहे आई डोंट लाइक आप मेरे गलत को दिखाए

97
00:07:46,040 --> 00:07:50,320
अगर मैं आपसे क आप गलत कर

98
00:07:50,320 --> 00:07:54,720
मगा रने मनत बना बोल रहा था

99
00:07:54,720 --> 00:07:59,960
मैं आपसे अगर यह कहूं आप गलत करिए मत आई डोंट लाइक फिर

100
00:07:59,960 --> 00:08:04,120
देखो गलत होता है ना भैया नहीं गलती से गलत होना

101
00:08:04,120 --> 00:08:08,120
एक अलग बात है और आप अपने सि बो वही

102
00:08:08,120 --> 00:08:12,880
समझ जैसे अभी कुछ दिनों पूर्व मेरे से किसी ने पूछा कि आत्मा

103
00:08:12,880 --> 00:08:16,960
नित्य है या अनित्य है तो मैंने बोल दिया अनित्य है जबकि मुझे मेरा

104
00:08:16,960 --> 00:08:21,240
भावता नित्य वो एक अलग बात है कि गलती से मेरे मुह से कुछ निकले

105
00:08:21,240 --> 00:08:26,040
और सोच समझ के हम कोई सिद्धांत को

106
00:08:26,040 --> 00:08:30,120
जी तो और क्या बोलना था मुझे आपसे क्वेश्चन

107
00:08:30,120 --> 00:08:34,200
करना है कुछ रिक्वेस्ट करना य सब डिफरेंट डिफरेंट क्वेश्चन रहेगा पता

108
00:08:34,200 --> 00:08:38,240
नहीं कहां जाऊंगा मेरा कितना ब्रेन में क्या आएगा ठीक है ना तो पहले

109
00:08:38,240 --> 00:08:42,360
में सवाल से आप स्टार्ट करता हूं आपके इंट्रोडक्शन में एक बात रह गई

110
00:08:42,360 --> 00:08:46,960
है कि आप में और इनम जो नर्मल न

111
00:08:46,960 --> 00:08:51,040
वाले र क्या हैन

112
00:08:51,040 --> 00:08:55,560
फाउंडड बाय प्रभुपाद आप सब जानते हैं च ठीक है और उसम प्रभुपाद

113
00:08:55,560 --> 00:08:57,040
अकेला सिंगल हैं

114
00:08:57,040 --> 00:09:01,120
सब कुछ किया अकेला गुरु थे लेकिन जाने के बाद में बहुत सारे नंबर्स का

115
00:09:01,120 --> 00:09:05,360
गुरु आए तो बाद में अभी जो चल रहा है स्कन में उसमें स्कन का

116
00:09:05,360 --> 00:09:09,600
जो कमिटी है गवर्निंग बॉडी कमीशन बोलते हैं उसको

117
00:09:09,600 --> 00:09:13,960
ठीक है ना जीबीसी शॉर्टकट में जीबीसी बोलते है तो वही सिलेक्ट

118
00:09:13,960 --> 00:09:18,120
करते हैं कुछ प्रोसेसिंग करते हैं मुझ जो कुछ करना है वही सिलेक्ट करेंगे कभी बैठा

119
00:09:18,120 --> 00:09:22,560
भी सकते हैं नंबर बढ़ा भी सकते हैं कम भी कर सकते हैं सब कुछ उस कमिटी में

120
00:09:22,560 --> 00:09:26,640
पावर है गुरु बनाने का और कुछ भी करने का ठीक

121
00:09:26,640 --> 00:09:31,280
है ठीक है ना और इसमें क्या होता है प्रभुपाद

122
00:09:31,280 --> 00:09:35,320
हमारा हम हम जो फॉलो करते हैं लाइन में हम प्रभुपाद ने

123
00:09:35,320 --> 00:09:39,440
एक गुरु एक उनका डिसाइल गुरु बनने के लिए ऑर्डर दिया था

124
00:09:39,440 --> 00:09:43,640
ठीक है उसके बाद उन्होंने और दूसरा मेरा गुरु को दिया था मेरा गुरु

125
00:09:43,640 --> 00:09:48,000
आभ अभी जो है हमारे इधर इस इंडोनेशिया में एक गुरु परंपरा

126
00:09:48,000 --> 00:09:52,560
उनको ऑर्डर दिया है करने के लिए तो ये जो जीबीसी के

127
00:09:52,560 --> 00:09:56,680
अभी भी हमारे पास लाइव गुरु है जैसा ऋत्विक सिस्टम नहीं

128
00:09:56,680 --> 00:10:00,880
हमारा ठीक है ऋत्विक नहीं समझ ग भी नहीं है समझ

129
00:10:00,880 --> 00:10:05,440
क्लियर हो गया स्कन शैली भी नहीं है और यह जो त्विक सिस्टम है य भी

130
00:10:05,440 --> 00:10:09,840
नहीं हा अभी मैं एक चीज जानना

131
00:10:09,840 --> 00:10:12,360
एक चीज थोड़ा सा कन्फ्यूजिंग हैय

132
00:10:12,360 --> 00:10:16,360
जो जीबीसी के मेंबर्स होते हैं ये कौन लोग होते

133
00:10:16,360 --> 00:10:20,680
हैं सन्यासी होते हैं या कोई ओनर होते हैं सं

134
00:10:20,680 --> 00:10:25,360
थोड़ जीबीसी ऑलरेडी सेटप है प्रद के द्वारा

135
00:10:25,360 --> 00:10:29,360
कुछ मेंबर्स से 30 4 जो भी है

136
00:10:29,360 --> 00:10:33,360
तो वो लोग किसी ड भी कर सकते ड भी कर सकते हैं जो सीनियर हो गया

137
00:10:33,360 --> 00:10:37,480
कुछ मैच हो गया थोड़ नॉलेजेबल पर्सन है कुछ कर सकते हैं समझ ग

138
00:10:37,480 --> 00:10:41,920
नाच मैच पैरामीटर नहीं है जीबीसी में कौन

139
00:10:41,920 --> 00:10:45,920
ऐसा है कि थोड़ा मैचर होना चाहिए थोड़ा नॉलेजेबल होना चाहिए थोड़ा सोसाइटी का

140
00:10:45,920 --> 00:10:50,240
मान सम्मान जो रख सकता है ऐसा कुछ देखकर वो लोग उसको सिलेक्ट करते हैं फिक्स

141
00:10:50,240 --> 00:10:54,320
नहीं है वर्बल बातें है नियम नहीं है कैसे फिक्स करेंगे

142
00:10:54,320 --> 00:10:58,640
जैसे कमिटी जो ट्रस्टी मेंबर्स है जैसे गुरु परंपरा में

143
00:10:58,640 --> 00:11:03,120
जो अंतिम गद्दी में बैठता है वो सन्यासी होता है उसने परंपरागत

144
00:11:03,120 --> 00:11:07,840
शास्त्रों का अध्ययन किया होता है मीमांसा ग्रंथों का प्रस्थानत्रई

145
00:11:07,840 --> 00:11:11,880
का प्रकरण ग्रंथों का और इसके साथ ही

146
00:11:11,880 --> 00:11:16,440
साथ मतलब बहुत सारी उसकी वो होती है तो ऐसे पट

147
00:11:16,440 --> 00:11:21,080
ऐ है में भी ऐसा है गीता है भागवत है चैत च

148
00:11:21,080 --> 00:11:25,360
जोय जीबीसी के मेंबर्स है ये इनकी क्या क्वालिफिकेशन है जो तय कर

149
00:11:25,360 --> 00:11:27,600
रहे एटली मुझे नहीं मालूम

150
00:11:27,600 --> 00:11:31,640
है लेकिन जो आइडिया में कि सीनियर्स होना चाहिए थोड़ा नॉलेजेबल

151
00:11:31,640 --> 00:11:35,640
होना चाहिए अच्छा करेक्टर होना चाहिए कुछ जैसे लगे

152
00:11:35,640 --> 00:11:39,640
तो नहीं होना चाहिए सन्यासी सन्यासी गृहस्था

153
00:11:39,640 --> 00:11:43,840
कोई भी सकता है तो मतलब अंतिम

154
00:11:43,840 --> 00:11:48,160
निर्णायक जो है अगर सन्यासियों का भी अंतिम निर्णायक को जीबीसी में कोई गृहस्थ

155
00:11:48,160 --> 00:11:53,280
प्रवृति मार्ग का व्यक्ति है एक तरीके से

156
00:11:53,280 --> 00:11:57,400
जीबीसी मेंबर्स अंतिम निर्णायक हमारे य वैराग्य

157
00:11:57,400 --> 00:12:02,320
को माना गया ना वैरागी वैराग अंतिम निर्णायक सन्यासी

158
00:12:02,320 --> 00:12:06,360
तो यहां पर गुरु कौन बना रहा है जीबीसी के मेंबर्स जो प्रवृत्ति मार्ग

159
00:12:06,360 --> 00:12:10,520
के हैं तो यह कुछ अजीब नहीं है

160
00:12:10,520 --> 00:12:14,800
उसके बारे में आप उनसे पूछिए हमको नहीं पूछिए हम लोग इसमें थोड़ डिग्री

161
00:12:14,800 --> 00:12:19,600
करके हम सेपरेट हुए हैं जैसा जस्ट समथिंग लाइक

162
00:12:19,600 --> 00:12:25,600
हम लोग कोई कमेटी सिलेक्ट करेंगे हम उनको नहीं मानते हैं हम

163
00:12:26,080 --> 00:12:30,160
लोग इसीलिए तो आप अलग हुए हैं उसकी कोई चीजें

164
00:12:30,160 --> 00:12:34,320
हैं जो आपसे डिफर है तो एक तरीके से आपको ऐसा नहीं लगता एक

165
00:12:34,320 --> 00:12:39,040
कंपनी के जैसी जहां प गुरुओं को एक बिजनेसमैन फिक्स कर रहा है

166
00:12:39,040 --> 00:12:43,120
कि कौन गुरु बनेगा कौन नहीं बनेगा उसमें बहुत बहुत

167
00:12:43,120 --> 00:12:47,200
कुछ बहुत कुछ है जो कि इतना जिस जिस जिस किसी के साथ

168
00:12:47,200 --> 00:12:51,400
बात करने का जरूरत नहीं मैं ऐसा फील करता हूं आप उन्हीं से बातचीत करें कभी

169
00:12:51,400 --> 00:12:55,480
कोई आएंगे तो क्या चल रहा है क्या चल रहे है मैं डिफरेंस बोल दिया उनसे हम किस क्यों अलग

170
00:12:55,480 --> 00:13:00,600
है ठीक मैं समझ रहा हूं आपकी बात हम

171
00:13:00,600 --> 00:13:04,240
ठीक है अच्छा है तो अभी

172
00:13:04,240 --> 00:13:08,520
मैं आपको क्वेश्चन कर बताइए आपका क्या प्रश्न है बताइए अच्छा

173
00:13:08,520 --> 00:13:12,600
मैं पहले आपसे देखो मैं आपको बोला था कि मेरा ऑब्जेक्शन भी

174
00:13:12,600 --> 00:13:16,760
है और क्वेश्चन भी क्लियर करना है मेरा ठीक है तो पहले

175
00:13:16,760 --> 00:13:21,480
मैं आपसे क्वेश्चन करूंगा मैं आपको पकड़ने के लिए भी कोशिश करूंगा कि आप कैसे

176
00:13:21,480 --> 00:13:25,760
कहां ठीक है पकड़ने तो पहले मैं आपसे क्लियर करूंगा एक्चुअली

177
00:13:25,760 --> 00:13:31,360
आप लोग पुलिस कर रही है सॉरी

178
00:13:31,360 --> 00:13:35,720
नहीं सुना नहीं सुना कुछ नहीं फिल्म का डायलॉग मारा बताइए

179
00:13:35,720 --> 00:13:39,720
ओके तो मैं जैसा गेस कर रहा कि आप लोग भगवान निराकार

180
00:13:39,720 --> 00:13:44,440
को मानते हैं ठीक है ना नहीं किसने

181
00:13:44,440 --> 00:13:48,680
कहा गेस कर रहा बोला ना नहीं निराकार

182
00:13:48,680 --> 00:13:52,800
अमेट साकार है अल्टीमेट

183
00:13:52,800 --> 00:13:56,960
तो वाणी का अ विषय है वाणी के द्वारा

184
00:13:56,960 --> 00:14:01,080
उसको बात ही नहीं की जा सकती अल्टीमेट की इसका मतलब

185
00:14:01,080 --> 00:14:05,840
क्या बो अल्टीमेट तो आपका भी निराकार है ना

186
00:14:05,840 --> 00:14:10,040
नहीं हा सिद्ध कर दूंगा मैं हो सकता है

187
00:14:10,040 --> 00:14:14,720
आप सि करें लेकिन हम नहीं मानते ठीक है अचिंत का मतलब क्या है हम

188
00:14:14,720 --> 00:14:19,040
देखि आप जानते हमन वाले हम कृष्ण की मानते है ठीक है ना और क्या बोलरे

189
00:14:19,040 --> 00:14:19,540
बोल तो

190
00:14:19,280 --> 00:14:23,360
रहा अचत का मतलब क्या है मेरा

191
00:14:23,360 --> 00:14:27,880
क्वेश्चन का आंसर क्या दिया अरे आप यह मना कर रहे हो ना कि अल्टीमेट

192
00:14:27,880 --> 00:14:31,880
आपका जो है आप जान हो कौन है अभी आप अल्टीमेट अचिंत

193
00:14:31,880 --> 00:14:36,160
मानते हो कि नहीं अल्टीमेट अंतिम हां रि हा मानते हैं अचिंत

194
00:14:36,160 --> 00:14:40,320
मानते हो ना अचिंत क्वेन का आंसर निकालेंगे ठीक है आप बोलिए अचिंत

195
00:14:40,320 --> 00:14:44,320
का अर्थ क्या है जो कंडीशन

196
00:14:44,320 --> 00:14:48,440
जो माया में गिर के रहता है उसको सोच नहीं सकता है उसको मैं समझता हूं

197
00:14:48,440 --> 00:14:52,440
उसको अचिंत कहते अल्टीमेट आपको नहीं पता

198
00:14:52,440 --> 00:14:56,480
है एजेक्ट वो कैसा है अचत लेकिन किसी को

199
00:14:56,480 --> 00:15:00,520
नहीं पता देखो मैं क्या बोला सुनि कह रहा हूं कि हमारा भी वाणी

200
00:15:00,520 --> 00:15:04,760
का विषय है व्यवहार में ना आ सकने लायक

201
00:15:04,760 --> 00:15:08,800
जानने में ना आ सकने लायक मांड कोप निषद साथ अच्छा ठीक है ठीक

202
00:15:08,800 --> 00:15:12,880
है ठीक है सुने ठीक सु तो किसके लिए अ चिंत है

203
00:15:12,880 --> 00:15:17,000
सबके लिए अ चिंत है ना क्या जब तक हम जीव

204
00:15:17,000 --> 00:15:22,200
भाव को प्राप्त है तब तक अचिंत

205
00:15:22,200 --> 00:15:27,480
है जब तक हम जीव भाव को प्राप्त है तब तक अचिंत

206
00:15:27,480 --> 00:15:30,680
है का

207
00:15:30,680 --> 00:15:34,880
विष्णु पुराण में ख लिखा भी है आप बोल

208
00:15:34,880 --> 00:15:38,960
समझ रहा हूं मैं क्या बोल रहा था हम लोग क्या बोलते इसन हमारा

209
00:15:38,960 --> 00:15:43,240
गड़ पर मैं जितना पढ़ूं मैंने अभी तक जो देखा है

210
00:15:43,240 --> 00:15:47,760
मैंने अभी तक जो इकन का देखा है वो देखा है कि इसकन सब कुछ बोलता है

211
00:15:47,760 --> 00:15:51,880
इधर बोलता है कृष्णा ही है हमारा अल्टीमेट उधर दूसरी ओर बोलता है अचिंत

212
00:15:51,880 --> 00:15:56,400
है अरे भाई या तो अचिंत

213
00:15:56,400 --> 00:16:00,480
कृष्ण मुझसे लीजिए मैं क्या बोलता सुन ली पले ऐसा

214
00:16:00,480 --> 00:16:05,000
करते ठीक से आप बोलिए ठीक से हम बोलेंगे उसके बाद बा करते बहुत

215
00:16:05,000 --> 00:16:09,080
होना चाहिए फायदा नहीं तो

216
00:16:09,080 --> 00:16:13,160
मैं जितना पढ़ समझा हूं कंडीशन हमारे प्रभुपाद

217
00:16:13,160 --> 00:16:19,160
लगाते कंडीशन कंडीशन जिसका फोर डिफेक्ट होता है आपको मालूम

218
00:16:20,440 --> 00:16:25,120
हो समझने में मेहनत करनी पड़ रही है आप क्या बोल रहे दोबारा बोलिए

219
00:16:25,120 --> 00:16:29,760
कंडीशन क मानते जानते कंडीशन

220
00:16:29,760 --> 00:16:34,320
स जो कि माया के अंदर में रहता है

221
00:16:34,320 --> 00:16:38,640
अच्छा जो मुक्ति नहीं जिसको मुक्ति नहीं मिला है जो परफेक्ट नहीं हुआ है

222
00:16:38,640 --> 00:16:42,720
जीव भाव को प्राप्त है बंद मुक्त ब बंद जी बध

223
00:16:42,720 --> 00:16:47,320
जी बोलते हम बध जी भी बोलते जी इनके लिए अचिंत

224
00:16:47,320 --> 00:16:51,440
है लेकिन जो लिबरे सोल होते हैं उनके लिए क्यों

225
00:16:51,440 --> 00:16:55,440
अचिंत होना चाहिए ये मेरा क् उनके लिए क है हम

226
00:16:55,440 --> 00:16:59,440
थोड़ी ना थोड़ी टर सोल है तो

227
00:16:59,440 --> 00:17:03,800
मेरा क्वेश्चन था सिर्फ आपका इंडिविजुअल के लिए नहीं आपका परंपरा में

228
00:17:03,800 --> 00:17:07,920
आपका लाइन में जो फॉलो करते हैं गुरु परंपरा करते हैं

229
00:17:07,920 --> 00:17:11,560
जो सनातन धर्म का रिप्रेजेंट जैसे करते हैं ना तो उनके

230
00:17:11,560 --> 00:17:15,600
हिसाब से आप क्या समझे भगवान क्या है साकार है निराकार या बहुत भी

231
00:17:15,600 --> 00:17:19,840
है और कुछ भी नहीं क्या आप क्या बोलते व्यवहार में ना आ सकने लायक

232
00:17:19,840 --> 00:17:23,920
परमात्मा अपने साधु भक्तों के उद्धार के लिए व्यवहार में आ सकने

233
00:17:23,920 --> 00:17:28,200
लायक रूप लेता है तो इस प्रकार से ईश्वर साकार

234
00:17:28,200 --> 00:17:32,240
और निराकार दोनों हो जाता है जो प्राप्त का विषय

235
00:17:32,240 --> 00:17:36,240
है जिसको सिर्फ प्राप्त किया जा सकता है वह निर्गुण निराकार है

236
00:17:36,240 --> 00:17:40,400
और निर्गुण निराकार को प्राप्त करने का जो रास्ता है

237
00:17:40,400 --> 00:17:44,520
वह उसके लिए हमें भक्ति करनी होती है सगुण साकार की सगुण

238
00:17:44,520 --> 00:17:48,720
साकार की भक्ति करते हैं सगुण साकार से प्यार करते हैं सगुण साकार

239
00:17:48,720 --> 00:17:52,920
के अस्तित्व को स्वीकारते हैं उसके पीछे पीछे चलते हैं तब हमें

240
00:17:52,920 --> 00:17:57,040
निर्गुण निराकार की प्राप्ति होती है तो यही तो आप

241
00:17:57,040 --> 00:18:01,840
क्लियर शॉर्टकट में बोल सकते भगवान निराकार निर्गुण है अल्टीमेटली

242
00:18:01,840 --> 00:18:06,000
भगवान निरा निर्गुण है लेकिन वही रूप ले आते वो जो निर्गुण निराकार है वाणी

243
00:18:06,000 --> 00:18:10,000
का अ विषय है ना वो तो हम के इतना बोलने से

244
00:18:10,000 --> 00:18:13,400
हो गया ना

245
00:18:13,400 --> 00:18:17,480
हा बोलिए साथ साथ में ऐसा भी बोलते शास्त्र में लिखा हु कि भगवान

246
00:18:17,480 --> 00:18:21,600
सच्चिदानंद मय है तो ये किसके लिए बताया गया है निर्गुण निराकार के लिए बताया गया

247
00:18:21,600 --> 00:18:24,600
है ना साकार के लिए बताया

248
00:18:24,600 --> 00:18:30,600
गया सच्चिदानंद हमारे पर्सपेक्टिव से भगवान है बिल्कुल

249
00:18:30,960 --> 00:18:35,120
नहीं मेरा क्वेश्चन था सच्चिदानंदम जो आनंदमय जो होता है वो साकार

250
00:18:35,120 --> 00:18:39,480
रूप में होता है और निर्गुण निराकार रूप में होता है ये फर्क पड़ता है कि

251
00:18:39,480 --> 00:18:43,520
हम सच्चिदानंद किसको किस दृष्टि

252
00:18:43,520 --> 00:18:47,520
से देख रहे हैं सच्चिदानंद वो जो निर्गुण निराकार

253
00:18:47,520 --> 00:18:53,520
उसको प्राप्ति हम इसलिए करेंगे क्योंकि वो सच्चिदानंद है

254
00:18:53,760 --> 00:18:57,920
कौन भगवान जो है सच्चिदानंद है तभी तो हम उन्हें प्राप्त करना

255
00:18:57,920 --> 00:19:02,560
चाहते हैं तो मैं आपको क्वेश्चन किया था कि जो अल्टीमेट

256
00:19:02,560 --> 00:19:06,560
निर्गुण निराकार वही सच्चिदानंद है ना वो पहले से सच्चिदानंद है ना

257
00:19:06,560 --> 00:19:11,040
रूप लेने के बाद सच्चिदानंद होता है पहले से ही सच्चिदानंद

258
00:19:11,040 --> 00:19:15,080
वही तो मैं बोल रहा था आपको तो मेरा क्वेश्चन था सिर्फ आपसे

259
00:19:15,080 --> 00:19:19,120
क्वेश्चन है मेरा माइंड का प्रश्न है मैं क्लास में बोलता हूं डिस्कशन करता हूं दूसरा

260
00:19:19,120 --> 00:19:23,640
से पूछना चाहता हूं जाना चाहता हूं कि कौन क्या सोच रहा है ठीक

261
00:19:23,640 --> 00:19:28,200
तो मेरा क्वेश्चन था कि भगवान अगर निर्गुण निराकार है

262
00:19:28,200 --> 00:19:32,600
तो व आनंदमय भी है तो क्या चीज को लेकर व आनंदमय

263
00:19:32,600 --> 00:19:37,280
है हा इसको मैं बताता हूं आपको आनंद में वो कैसे

264
00:19:37,280 --> 00:19:41,760
और निर्गुण निराकार कैसे जो अब हम उसको निर्गुण निराकार

265
00:19:41,760 --> 00:19:45,880
कह रहे हैं तो यह जो उसका आनंदमय होना है

266
00:19:45,880 --> 00:19:50,160
जो सच्चिदानंद स्वरूप होना है यह उसका गुण नहीं है यह उसका स्वरूप

267
00:19:50,160 --> 00:19:54,160
भूत लक्षण है अधित है ठीक और ये

268
00:19:54,160 --> 00:19:59,160
उसके अंदर है इसीलिए वो हमारा ईश्वर है हमारा जो है लक्ष्य है

269
00:19:59,160 --> 00:20:03,560
यह उसके अंदर है अगर हम इसको क्वेश्चन कर देंगे जैसे आंख क्यों देखती

270
00:20:03,560 --> 00:20:07,560
है अगर आंख देख रही है इसीलिए वो आंख है तो

271
00:20:07,560 --> 00:20:08,960
ईश्वर जो है निर्गुण

272
00:20:08,960 --> 00:20:13,560
निराकार उसका स्वरूप भूत लक्षण है कि वो सच्चिदानंद स्वरूप है हमारे लिए

273
00:20:13,560 --> 00:20:17,720
सच्चिदानंद स्वरूप वो है इसीलिए हम हमारा वो ईश्वर है

274
00:20:17,720 --> 00:20:21,720
अगर हम यह कह दे कि नहीं साहब निर्गुण निराकार वो है तो सही

275
00:20:21,720 --> 00:20:25,840
मगर वह जो है सच्चिदानंद नहीं हो सकता अगर हम यह कह देंगे तो हमारा प्राप्त व्य

276
00:20:25,840 --> 00:20:29,160
कहां से रह जाएगा

277
00:20:29,160 --> 00:20:33,160
मतलब वो ईश्वर ही नहीं रह जाएगा यहां पर वो वाली डेफिनेशन आती है

278
00:20:33,160 --> 00:20:37,640
कि एक सोता हुआ व्यक्ति यह नहीं कह सकता है कि मैं

279
00:20:37,640 --> 00:20:41,800
सुनने के कारण जाग गया अगर हम अगर हम यह कहे ना

280
00:20:41,800 --> 00:20:46,240
कि भाई वो जो है वो निर्गुण है इसलिए हम उसे नहीं मानते

281
00:20:46,240 --> 00:20:50,240
सपोज ट वो निर्गुण है इसलिए हमारी जो भक्ति है उसम मन

282
00:20:50,240 --> 00:20:55,960
नहीं लग रहा बहुत एक जगह वो भी शब्द आया है क्या कहते हैं

283
00:20:55,960 --> 00:21:01,280
ये प्रभुपाद जी ने एक जगह कहा है कि

284
00:21:01,280 --> 00:21:05,640
वो बहुत नीरस है जो अद्वैत है अद्वैतवाद जो है

285
00:21:05,640 --> 00:21:09,640
वो बहुत नीरस है प्रभुपाद जी ने य कहा है तो

286
00:21:09,640 --> 00:21:13,960
अब बात ये आती है वो नीरस कहां पर है वो आपके व्यवहार

287
00:21:13,960 --> 00:21:18,160
में नीरस नहीं है वह प्राप्त व्य और प्राप्त व्य

288
00:21:18,160 --> 00:21:22,280
वाली स्टेज जो पार मार्थी दृष्टि है उसके आधार पर आप उसके प्रति

289
00:21:22,280 --> 00:21:24,160
अनास्ता मान नहीं हो सकते

290
00:21:24,160 --> 00:21:28,160
वो इसलिए नहीं हो सकते कि एक जैसे सोता हुआ

291
00:21:28,160 --> 00:21:32,920
व्यक्ति ये नहीं कह सकता है कि मैं सुन के जाग गया एक सोता हुआ व्यक्ति

292
00:21:32,920 --> 00:21:37,320
ये नहीं कह सकता कि मैं सुन के जाग गया क्योंकि अगर वो सो रहा है तो उसका

293
00:21:37,320 --> 00:21:41,960
सुनना सिद्ध नहीं होगा और अगर वोह सुन रहा है तो उसका सोना सिद्ध नहीं होगा

294
00:21:41,960 --> 00:21:46,600
इसी प्रकार से एक व्यक्ति परमार्थ में ईश्वर क्या है और क्या नहीं है

295
00:21:46,600 --> 00:21:50,680
इसके आधार पर उसके प्रति अनास्ता वान नहीं हो सकता क्योंकि अगर

296
00:21:50,680 --> 00:21:55,080
वह परमार्थ को जान रहा है कि परमार्थ में ईश्वर ऐसा है

297
00:21:55,080 --> 00:21:59,200
तो उसका ईश्वर के प्रति अनास्ता वान होना सिद्ध नहीं होता और अगर

298
00:21:59,200 --> 00:22:03,320
वह ईश्वर को नहीं मान रहा है तो फिर उसके द्वारा ईश्वर

299
00:22:03,320 --> 00:22:07,840
का परमार्थ जानना सिद्ध नहीं होता क्योंकि परमार्थ को जान कहां से रहा है

300
00:22:07,840 --> 00:22:12,080
ईश्वर के द्वारा इसका मैं आपको बताने को प्रयास करूं कि जैसे

301
00:22:12,080 --> 00:22:16,160
मान लीजिए कि हमने कहा कि वहां पर वो निर्गुण है हमने निर्गुण से प्यार नहीं है

302
00:22:16,160 --> 00:22:20,360
हम निर्गुण को नहीं चाहते हैं यह कह दिया ठीक है अब क्या होगा

303
00:22:20,360 --> 00:22:24,360
कि हमने उसको नकार दिया अब आपसे अगर पूछा जाएगा कि आपने उसको

304
00:22:24,360 --> 00:22:29,360
क्यों नकारा क्योंकि वो परमार्थ में निर्गुण था तो बोले कि

305
00:22:29,360 --> 00:22:33,880
वह परमार्थ में निर्गुण है कि सगुण है यह कैसे सिद्ध होता

306
00:22:33,880 --> 00:22:38,000
है कि जब हमने उसको ईश्वर को ईश्वर मान लिया

307
00:22:38,000 --> 00:22:39,160
तब यह सिद्ध होता है

308
00:22:39,160 --> 00:22:43,400
कि व परमार्थ में क्या है और क्या नहीं है तो हम तो ईश्वर को ईश्वर मान ही नहीं रहे

309
00:22:43,400 --> 00:22:47,560
तो अभी भी हमारे पास उसको नकारने का कोई कारण नहीं

310
00:22:47,560 --> 00:22:52,960
बचा आप समझ पा रहे मेरी बात हा ठीक

311
00:22:52,960 --> 00:22:57,520
है तो हो गया आपका हो गया

312
00:22:57,520 --> 00:23:01,680
तो आंसर का दिया आपने हम क्या बोल थे आनंद देख

313
00:23:01,680 --> 00:23:05,720
लिखा है आनंदमय बोल ठीक है ना

314
00:23:05,720 --> 00:23:10,000
तो मेरा क्वेश्चन था कि क्या चीज को लेकर क्या सोच के

315
00:23:10,000 --> 00:23:14,040
क्या देखकर क्या क्या करके ऐसा कुछ एक्सप्लेन नहीं कर सकते

316
00:23:14,040 --> 00:23:18,160
कि य के जितने भी माया रूपी प्रपंच है यहां पर होने वाले

317
00:23:18,160 --> 00:23:23,160
क्लेश से मुक्त है सर्वदा आनंद

318
00:23:23,160 --> 00:23:27,160
है ठीक है मुक्त तो हो गया लेकिन मुक्त होने के बाद कुछ तो

319
00:23:27,160 --> 00:23:31,280
कुछ तो होगा ना जो कि ले कु ये कुछ

320
00:23:31,280 --> 00:23:35,560
तो आप बताइए यह कुछ तो आप बताइए क्या होना

321
00:23:35,560 --> 00:23:39,720
चाहिए यह कुछ तो आप बताइए भाई आनंद का मतलब

322
00:23:39,720 --> 00:23:43,960
है जो जर व्याधि यह सब चीजें है जो प्रपंच माया

323
00:23:43,960 --> 00:23:48,040
रूपी संसार का जो प्रपंच है इनके रोग दोष क्लेश से मुक्त हो गया जो

324
00:23:48,040 --> 00:23:52,080
वह आनंद में हो गया ठीक है जो मुक्त है वह आनंद में हो गया

325
00:23:52,080 --> 00:23:56,080
अब अगर इनसे मुक्त हो जाना आनंद नहीं है तो आपके

326
00:23:56,080 --> 00:24:01,120
अनुसार आनंद क्या है वो बता दीजिए

327
00:24:01,120 --> 00:24:05,280
अच्छा ठीक है हम लोग का हमलोग का जितना

328
00:24:05,280 --> 00:24:09,480
पता नहीं ठीक है क्या बोल र

329
00:24:09,480 --> 00:24:13,800
हम लोग भगवान जैसे मैं बोल रहा आपको मैं जितना पढ़ा है जो समझा

330
00:24:13,800 --> 00:24:18,280
उसके हिसाब से बोल रहा हूं क से कोट करना हमको नहीं आता है ज्यादा

331
00:24:18,280 --> 00:24:22,400
तो मैं जितना समझा इसके अनुसार भगवान का रूप है

332
00:24:22,400 --> 00:24:26,880
ठीक है लेकिन उनका दिव्य रूप है जो स्पिरिचुअल फॉर्म होता

333
00:24:26,880 --> 00:24:31,120
है तो स्पिरिचुअल फॉर्म में फिर

334
00:24:31,120 --> 00:24:35,120
वो अपने को एक्सपेंड करते हैं जैसे कि बलराम के रूप में दूसरा विष्णु

335
00:24:35,120 --> 00:24:39,200
के रूप में या राधा रानी के रूप में लक्ष्मी के रूप में ये सब सब कुछ तो अल्टीमेटली भगवान साथ

336
00:24:39,200 --> 00:24:43,400
ये हम लोग का फिलोसोफी जितना समझाऊ तो उन लोग

337
00:24:43,400 --> 00:24:47,960
के साथ इंटरेक्शन करके अनलिमिटेड राइटी

338
00:24:47,960 --> 00:24:52,040
ऑफ इंटरेक्शन लविंग अफेर जो किसी कहते हैं किसी ने जैसे हनुमान जी

339
00:24:52,040 --> 00:24:56,200
रामचंद्र सेवा करते हैं तो हनुमान का जो मूड है सेवा का मूड देखकर

340
00:24:56,200 --> 00:25:00,520
उनका प्यार देखकर रामचंद्र बहुत खुश होते हैं

341
00:25:00,520 --> 00:25:04,560
तो स मुक्ति से पहले की बात है मैं आपसे मुक्ति पूछ रहा हूं मुक्ति के बाद क्या

342
00:25:04,560 --> 00:25:08,720
आनंद है आपका इसलिए मैं आपको क्या बोल रहा था हम लोग क्या मानते

343
00:25:08,720 --> 00:25:12,880
आपको क्या बो हम लोग मानते भगवान

344
00:25:12,880 --> 00:25:16,160
काम ठीक है भवान का फिगर है उनका सेंसेस

345
00:25:16,160 --> 00:25:20,520
है उनका आख है नाक है कान सब कुछ है ठीक है

346
00:25:20,520 --> 00:25:24,840
लेकिन स्पिरिचुअल हम लोग जैसे मटेरियल पंच तव पय सब चीज नहीं है

347
00:25:24,840 --> 00:25:28,880
ठीक है तो इसलिए वो अपने को अपने से

348
00:25:28,880 --> 00:25:32,880
एक्सपेंड करते हैं दूसरे को दूसरे कोका डिटी अरे भाई मैं आपसे

349
00:25:32,880 --> 00:25:37,640
य पूछ रहा हूं कि आपके अनुसार मुक्ति के बाद आनंद क्या

350
00:25:37,640 --> 00:25:41,880
है आनंद मुक्ति देखिए

351
00:25:41,880 --> 00:25:45,960
सुनते नहीं सुनते समझने की कोशिश कर क्या बोल र खत्म भी नहीं होता बात करना

352
00:25:45,960 --> 00:25:50,040
श कर जी भगवान का फिगर है रूप है उनका सेंसेस

353
00:25:50,040 --> 00:25:54,120
है उनका डिजायर है उनका सब कुछ है कुछ नहीं है जो बोल देंगे तो

354
00:25:54,120 --> 00:25:58,560
भगवान को लिमिटेड कर दे आप जो भी सोचता है

355
00:25:58,560 --> 00:26:04,560
के पास सब कुछ

356
00:26:04,640 --> 00:26:09,280
हैलिए कट अभी ट्रक से हट रहे भाई साहब मैं क्या बताऊ

357
00:26:09,280 --> 00:26:13,440
मैंने आपसे पूछा एक जीवात्मा जो यहां से मुक्त होकर गई

358
00:26:13,440 --> 00:26:17,520
उसको वहां पर ऐसा क्या मिला जो व आनंदित रहेगी सदा

359
00:26:17,520 --> 00:26:23,520
के लिए उसको कृष्णा मिलेगा कृष्णा को प्यार करेगा प्रेम करेगा

360
00:26:23,880 --> 00:26:28,640
अनलिमिट प करना आप मुझे जरा प्यार करना डिफाइन करिए

361
00:26:28,640 --> 00:26:33,040
क्या करेगा प्यार में भन के लिए काम करेगा अपना

362
00:26:33,040 --> 00:26:37,280
प्रभु के लिए काम करेगा जैसे जसे हनुमान जी राम जी की सेवा

363
00:26:37,280 --> 00:26:41,480
करते हैं स्टिंग हनुमान जी राम जी की सेवा ऐसे करते हैं

364
00:26:41,480 --> 00:26:46,000
कि मान लीजिए राम जी को वो तुलसी

365
00:26:46,000 --> 00:26:51,280
पैर दबा रहे हैं या फिर उनके लिए कुछ लेने जा रहे हैं यही तो सेवा

366
00:26:51,280 --> 00:26:55,800
है राम जी चाहेंगे जो राम जी की इच्छा है जो राम

367
00:26:55,800 --> 00:27:00,960
आपके अनुसार जो नित्य आनंद है वो भगवान की सेवा करना है

368
00:27:00,960 --> 00:27:04,960
यस ठीक है हां नित्य है ना

369
00:27:04,960 --> 00:27:09,240
यही है ना नित्या आनंद अब ये बात आती है

370
00:27:09,240 --> 00:27:13,600
कि जब नित्य आनंद भगवान की सेवा करना है और आपने बताया कि मान लीजिए पैर दबाना

371
00:27:13,600 --> 00:27:17,760
सेवा करना है ठीक है ओके ठीक तो

372
00:27:17,760 --> 00:27:20,120
अभी मैं पैर दबा रहा हूं भगवान के

373
00:27:20,120 --> 00:27:24,120
और मैं भगवान के पैर दबा के एक बार दबाया उसके बाद मेरा

374
00:27:24,120 --> 00:27:28,280
हाथ ऊपर आया तभी तो अगली बार दबा ंगा

375
00:27:28,280 --> 00:27:32,520
ऐसे ही है ना सेवा तो जब मैंने दबाया तब तो मुझे आनंद

376
00:27:32,520 --> 00:27:36,520
आया मगर जब मैं ऊपर आया तब तो आनंद नहीं आया खाली हो

377
00:27:36,520 --> 00:27:41,040
गया आनंद ऐसा कैसे आ सकता है

378
00:27:41,040 --> 00:27:45,040
ब्रेक आ रहा है कपलीट प्रोसेस उठाना और दबाना तो कंपलीट प्रोसेस है ना

379
00:27:45,040 --> 00:27:49,640
भाई साहब अरे भाई दबाना अगर आनंदमय

380
00:27:49,640 --> 00:27:53,720
है तो उठाना आनंदमय कैसे हो जाएगा या तो दबाना

381
00:27:53,720 --> 00:27:58,240
आनंदम या उठाना आनंदम अग नहीं उठ तो कैसे दंगे आप

382
00:27:58,240 --> 00:28:02,280
चलिए और कोई ले लेते हैं और कोई सेवा ले लेते हैं जैसे मान लीजिए

383
00:28:02,280 --> 00:28:06,400
टीका लगाना भगवान को तैयार करना यह भी सेवा है भगवान से कुकिंग

384
00:28:06,400 --> 00:28:10,800
करो मैं कुकिंग करो भगवान के लिए ठीक है हां ठीक है तो आपने खाना बना

385
00:28:10,800 --> 00:28:14,800
करन खाएंगे आपने खाना बना मैं जो मार्केटिंग सुनिए मैं

386
00:28:14,800 --> 00:28:18,880
जब मार्केटिंग करूंगा मैं खुशी से मार्केटिंग मैं भगवान के लिए लेके जा रहा हूं बोलके हां

387
00:28:18,880 --> 00:28:23,200
मैं कुकिंग करूंगा मैं मेरा प्रभु खाएगा मेरा हाथ से इस इस सोच के मैं खाऊंगा

388
00:28:23,200 --> 00:28:27,280
बनाऊंगा मैं उनका पट में पसंगा व वहां पे ऐसे वहां

389
00:28:27,280 --> 00:28:31,480
पे ऐसे ही करेंगे मुक्ति में हा गोलोक में कुकिंग

390
00:28:31,480 --> 00:28:35,120
करेंगे तो जैसे आपने आज बनाया बढ़िया सा खाना बनाया

391
00:28:35,120 --> 00:28:39,120
आपने ठीक है तो आपने आज खाना बना दिया और भगवान को खिला

392
00:28:39,120 --> 00:28:43,280
भी दिया ठीक है खिला भी दिया खुद भी खा लिया

393
00:28:43,280 --> 00:28:47,640
इसके बाद अगली बार खाना कब बनेगा

394
00:28:47,640 --> 00:28:51,880
सिर्फ एक ही सेवा नहीं होता है अनलिमिटेड राइटी अनलिमिटेड सर्विस है

395
00:28:51,880 --> 00:28:55,920
अनलिमिटेड सेवा में बीच में ब्रेक आ रहा है ना नो

396
00:28:55,920 --> 00:29:00,120
ब्रेक स्पिरिचुअल व में कुछ ब्रेक नहीं बक देखिए

397
00:29:00,120 --> 00:29:04,480
सुनि सुनि सि मत कर सुनि अभी मैं खाना पकाऊ

398
00:29:04,480 --> 00:29:08,480
बाद में खाना खा गया तो बन कैसे सोएंगे बैठेंगे उनका मुखवास लेना

399
00:29:08,480 --> 00:29:12,240
उनका फैन करना है उनको बात

400
00:29:12,240 --> 00:29:16,280
करना नहीं हो ननप सर्विस उर इधर इधर इधर सब बलक

401
00:29:16,280 --> 00:29:20,320
होता

402
00:29:20,320 --> 00:29:24,400
है कुछ पूछना चाह रहा जैसे आपने उनको खाना परोस दिया ठीक

403
00:29:24,400 --> 00:29:28,440
है खाना परोसने के बाद भगवान खा रहे हैं अब आप

404
00:29:28,440 --> 00:29:32,920
वेट कर रहे हो ना कि अब ये जब सोएंगे तो मैं इनका बिस्तर लगाऊंगा

405
00:29:32,920 --> 00:29:37,680
वेट कर रहे हो

406
00:29:37,680 --> 00:29:42,600
ना आनंद का भाव होगा मैं वेट कर रहा प्रभु के लिए

407
00:29:42,600 --> 00:29:47,240
आप वेट कर रहे हो उसमें भी आनंद है ना क्यों नहीं

408
00:29:47,240 --> 00:29:51,440
वेट कर रहे हो जो आप उसमें आनंद है ना इसका मतलब

409
00:29:51,440 --> 00:29:55,520
इसका मतलब सेवा करना ही आनंद नहीं है वहां केवल खड़े हो अगर आप तो वो

410
00:29:55,520 --> 00:29:59,880
भी आनंद है हां मैं वेट प्रभु जब चाहेंगे मैं उनको सेवा करूंगा

411
00:29:59,880 --> 00:30:03,880
मेरे दिल में उनके लिए अभी भी दिल अगर आप अगर आप केवल वेट कर रहे

412
00:30:03,880 --> 00:30:07,920
हो वहां पहुंच गए अगर गोलोक धाम में वो आनंदमय हो गया आपका भले ही आप

413
00:30:07,920 --> 00:30:11,920
सेवा कर रहे हो नहीं कर रहे भले ही आप सेवा कर रहे हो

414
00:30:11,920 --> 00:30:15,920
नहीं कर रहे हो डजन मैटर देखिए एक सेकंड में बोल रहा

415
00:30:15,920 --> 00:30:19,920
उधर बिना सेवा से कोई एक सेकंड नहीं रहेगा अरे आप ही तो

416
00:30:19,920 --> 00:30:24,240
कह रहे हो कि मैं से अभी आपने कहा वेट कर रहे हो नहीं

417
00:30:24,240 --> 00:30:28,240
वेट करना भी सेवा है क्या बात करते अरे वेट

418
00:30:28,240 --> 00:30:32,240
जब वेट किस चीज का कर रहे हो ये बताओ जरूर जरूर मैं ऑफिसर हूं मेरा प

419
00:30:32,240 --> 00:30:36,520
मेरे लिए वेट कर र आप ये बताओ वेट किस चीज का कर रहे

420
00:30:36,520 --> 00:30:40,560
हो क्योंकि भगवान का नना डिजर कर इच्छा करेंगे तो

421
00:30:40,560 --> 00:30:44,640
नना सेवा करेंगे अगर आप किसी चीज का वेट कर रहे हो तो इसका अर्थ है

422
00:30:44,640 --> 00:30:50,320
कि ऐसा कुछ है जो आपको चाहिए जो अभी नहीं है उसी का तो वेट कर रहे

423
00:30:50,320 --> 00:30:54,880
हो नहीं होने से भी मेरा दिल में तो उनके लिए प्रेम है ना

424
00:30:54,880 --> 00:30:59,040
आप ही तो कह रहे हो मैं वेट कर रहा हूं वेट करने से

425
00:30:59,040 --> 00:31:01,000
आनंदम स्पिरिचुअल में हर कुछ

426
00:31:01,000 --> 00:31:05,240
सच्चिदानंदम होता है बस कज

427
00:31:05,240 --> 00:31:09,600
सेकंड सु एक सेकंड अभी इसको क्लियर करने प्लीज

428
00:31:09,600 --> 00:31:13,640
अगर आप बत आर्मेंट में म जा ठीक है आर्गुमेंट प नहीं

429
00:31:13,640 --> 00:31:17,720
जा रहा हूं मैं ये कह रहा हूं कि अगर आप लज आप जदा ज्यादा लॉजिक

430
00:31:17,720 --> 00:31:18,480
यूज कर लॉजिक

431
00:31:18,480 --> 00:31:22,600
लॉजिक लॉजिक स्पिरिचुअल मीस एवरीथिंग स्पिच अगर आपको

432
00:31:22,600 --> 00:31:26,720
लॉजिक लॉजिक लॉजिक य करके बात खत्म करनी है तो पहले ही कह देते अच तो है ही आपका

433
00:31:26,720 --> 00:31:30,720
आखरी मुकाम नहीं इतना लॉजिक ढूंढने से आपको

434
00:31:30,720 --> 00:31:34,920
कौन समझाएगा इतना तो कोई बात नहीं करते दुनिया जो आदमी होता है ना लॉजिक

435
00:31:34,920 --> 00:31:39,040
का पैरामीटर क्या है कि कितना लॉजिक होना चाहिए और कितना नहीं होना चाहिए इसका क्या पैरामीटर

436
00:31:39,040 --> 00:31:43,600
है आप डिसाइड करेंगे मैं देख रहा जितना वीडियो देख र सब आप डिसाइड करेंगे हम डिसाइड नहीं करेंगे

437
00:31:43,600 --> 00:31:48,360
अरे मैं नहीं कर रहा आपसे पूछ रहा हूं मैं लॉजिक कितना होना चाहिए

438
00:31:48,360 --> 00:31:52,480
देखिए सुने ना सुनिए स्पिरिचुअल वर्ल्ड में

439
00:31:52,480 --> 00:31:56,480
कोई चीज भी टेस्टलेस नहीं होता है कोई कोई चीज भी डिस्ट्रेस

440
00:31:56,480 --> 00:32:00,560
नहीं होता है दुख नहीं होता है टेस्टलेस नहीं होता है अगर आप

441
00:32:00,560 --> 00:32:04,680
भगवान के लिए वो सेवा करने का वेट कर रहे हैं तो तब भी आपको आनंद

442
00:32:04,680 --> 00:32:09,000
मिल रहा है इसका मतलब अगर आप गोलोक धाम केवल पहुंच

443
00:32:09,000 --> 00:32:14,160
गए वह भी आनंदमय है भले ही आप सेवा कर रहे हो या नहीं कर रहे हो डजन

444
00:32:14,160 --> 00:32:18,560
मैटर बिना सवा के उधर कोई नहीं रहेगा

445
00:32:18,560 --> 00:32:22,960
अरे आपने कहा ना कि जब वो मैं इंतजार करूंगा उनका जब वो सोएंगे तो बिस्तर

446
00:32:22,960 --> 00:32:27,280
लगाऊंगा ठीक है और मेरे लिए इंतजार

447
00:32:27,280 --> 00:32:31,560
भी सेवा है मैं इंतजार कर रहा प्रभु जो इच्छा करेगा मैं काम करूंगा अगर इंतजार

448
00:32:31,560 --> 00:32:33,760
सेवा है तो इसका अर्थ है कि इंतजार

449
00:32:33,760 --> 00:32:37,920
में ही शाश्वत सुख आपको मिल रहा है भले ही आपको सेवा करने का अवसर

450
00:32:37,920 --> 00:32:42,520
मिले या ना मिले या तो सेवा अंतिम सुख नहीं है

451
00:32:42,520 --> 00:32:46,920
और अगर सेवा अंतिम सुख है तो इंतजार में सुख नहीं

452
00:32:46,920 --> 00:32:51,040
है ठीक है वो आप आप ऐसा बोलिए हम ऐसा नहीं मानते आप

453
00:32:51,040 --> 00:32:55,560
आप समझाओ ना भैया जैसे आप अगर अंतिम सुख सेवा है आपको कौन समझाएगा

454
00:32:55,560 --> 00:32:59,600
आपको कौन समझाएगा आप ही तो आए हो आपके लिए गरम गरम खाना प

455
00:32:59,600 --> 00:33:03,640
वेट कर रहे है वो आपको वेट करना सेवा नहीं है आपके लिए अरे

456
00:33:03,640 --> 00:33:08,000
अगर अगर सेवा वेट करना भी सेवा है तो इसका मतलब

457
00:33:08,000 --> 00:33:12,760
सेवा करना अंतिम सुख नहीं है ना क्यों नहीं है

458
00:33:12,760 --> 00:33:17,240
अगर अंतिम सुख सेवा है तो वेट करने में वो अंतिम सुख नहीं मिलेगा जो

459
00:33:17,240 --> 00:33:21,920
खड़े होकर आपको सुख मिल रहा है ठीक है होगा सोचते हैं आप ऐसा सोचते हैं

460
00:33:21,920 --> 00:33:26,040
आप ऐसा सोचते अरे तो आपको वेट किस चीज का है फिर जब आपको सब कुछ प्राप्त

461
00:33:26,040 --> 00:33:30,280
है तो आपके मन में आस नहीं होनी चाहिए अगली चीज आए और

462
00:33:30,280 --> 00:33:34,320
जब आपको खड़े होकर के सुख मिल रहा है तो आपके अंदर ठीक है आपको आपको

463
00:33:34,320 --> 00:33:38,520
ऐ ठीक है सुनि अभी बताता आपको अभी याद आया मांड

464
00:33:38,520 --> 00:33:42,520
जी उधर अगर आप अगर अनलिमिटेड काल तक अनंत

465
00:33:42,520 --> 00:33:46,520
काल तक मसाज करते रहेंगे तो चलते ही रहेगा कोई स्टॉप करने वाला नहीं है और

466
00:33:46,520 --> 00:33:49,200
भगवान आपको लो करके

467
00:33:49,200 --> 00:33:53,200
त मसाज कर रहे ठीक है मसाज करने

468
00:33:53,200 --> 00:33:57,840
में भी तो आप मसाज ऐसे ऐसे करेंगे ना इसी को तो कहते हैं मसाज

469
00:33:57,840 --> 00:34:02,320
एक सेकंड भी नहीं फरक पड़ता उसको आप इतना लॉजिक इतना आर्गुमेंट करते सेकंड

470
00:34:02,320 --> 00:34:07,120
नहीं ऐसे ही बात होती है इतनी इतनी चीजों पर बात होती है

471
00:34:07,120 --> 00:34:11,640
ठीक है आप मान उर उर प्रॉब्लम मत इतनी इतनी चीज

472
00:34:11,640 --> 00:34:15,800
बात होती है अगर मसाज करते समय भी प्रेशर जा रहा है

473
00:34:15,800 --> 00:34:20,320
और हट रहा है तो जितनी देर आपका प्रेशर हट रहा है मसाज करते समय

474
00:34:20,320 --> 00:34:24,920
उतनी देर आपको वो नित्यता नहीं रही सुख में सुख फट हो

475
00:34:24,920 --> 00:34:29,920
नहीं ठीक है लेकिन हम लगता है नहीं समझता आपका

476
00:34:29,920 --> 00:34:33,920
आपको नहीं मानना है तो बात अलग है मगर बात तो यही है कि आपने जब

477
00:34:33,920 --> 00:34:38,040
हाथ हटाया म करते ऐसा ही है लेकिन आप

478
00:34:38,040 --> 00:34:42,200
दबाना है तो आपको दबा के रखे रखिए रखिए से आनंद लेना रख के रखिए

479
00:34:42,200 --> 00:34:46,200
उठाना नहीं है मसा हो जाए भी फ्लकचुएशन एक जगह पकड़ लिया तो बस वही

480
00:34:46,200 --> 00:34:50,400
अनंत है जीवन वही अनंत है वो भी हो सकता है स्पिरिचुअल व में वो भी पॉसिबल

481
00:34:50,400 --> 00:34:54,400
है स्पिरिचुअल व में वो भी वो सेवा नहीं है फिर सेवा बताइए

482
00:34:54,400 --> 00:34:58,600
सेवा आपके लिए नहीं है आप समझते नहीं है उधर का दुनिया अलग है इधर भाई साहब

483
00:34:58,600 --> 00:35:02,800
अपनी बातो से हटते जा रहे हैं आप आप सेवा बताइए ना

484
00:35:02,800 --> 00:35:04,280
सेवा होनी चाहिए ना ये क्या मैंने

485
00:35:04,280 --> 00:35:09,000
हाथ रख इसके ज्यादा बात के कोई फायदा नहीं य सब बहुत

486
00:35:09,000 --> 00:35:13,160
आप इतना बात कर और दूसरा कुछ करते हैं आप ही ने तोय टॉपिक

487
00:35:13,160 --> 00:35:17,240
छेड़ा है चलिए बताइए आपने एक

488
00:35:17,240 --> 00:35:21,240
बात कही कि जो हमारा हम श्री कृष्ण को मानते हैं वो जो

489
00:35:21,240 --> 00:35:25,400
है उनका विग्रह है हम भी श्री कृष्ण को ही मानते हैं ऐसा नहीं है मगर

490
00:35:25,400 --> 00:35:29,480
क्या यह बात सच है कि श्री कृष्ण जैसे बैकुंठ में रहते हैं वैसे ही

491
00:35:29,480 --> 00:35:34,480
उठके सीधे सीधे आते हैं आज नीचे धरती

492
00:35:34,480 --> 00:35:38,520
पर हा जैसे बैकुंठ में रहते

493
00:35:38,520 --> 00:35:42,720
हैं वैसे ही आते हैं हमारे बीच में हा ऐसे ही आते एज इट इज है ना यस

494
00:35:42,720 --> 00:35:46,880
एज इट इजस अच्छा यानी कि मतलब अगर हम

495
00:35:46,880 --> 00:35:51,120
जो श्री कृष्ण क्या कहते हैं यहां पर आए थे वही श्री कृष्ण

496
00:35:51,120 --> 00:35:55,760
हमको वहां मिलेंगे ठीक है यस हां ए

497
00:35:55,760 --> 00:36:00,200
कोई अंतर तो नहीं है ना जरा सा भी बिल्कुल हा बोलिए तो नहीं है

498
00:36:00,200 --> 00:36:04,240
नहीं है अच्छा अभी बताइए जो वहां का जो भगवान

499
00:36:04,240 --> 00:36:08,920
का शरीर विग्रह है क्या वह शाश्वत है या

500
00:36:08,920 --> 00:36:13,360
वो नष्ट हो सकता है या बदल सकता है पले बो क्योंकि

501
00:36:13,360 --> 00:36:18,480
सुना वयो में सुना हूं वो शाश्वत ही है सनातन ही

502
00:36:18,480 --> 00:36:19,480
है

503
00:36:19,480 --> 00:36:23,960
शाश्वत है तो शाश्वत की परिभाषा क्या है आपके

504
00:36:23,960 --> 00:36:28,000
अनुसार जो की क्या बोलते

505
00:36:28,000 --> 00:36:32,200
एंड नहीं हो सकता है क्या नहीं हो सकता है

506
00:36:32,200 --> 00:36:36,320
खत्म नहीं हो सकता है खतम नहीं शाश्वत

507
00:36:36,320 --> 00:36:40,320
की परिभाषा ये होती है कि वो परिवर्तनशील नहीं होता है और ये

508
00:36:40,320 --> 00:36:44,400
चेंजलेस चलेस चेंजलेस नहीं भगवान शरीर

509
00:36:44,400 --> 00:36:48,680
चेंजलेस नहीं है सरी चेंजलेस है चेंजलेस

510
00:36:48,680 --> 00:36:52,880
है ना परिवर्तन नहीं होता नहीं तो

511
00:36:52,880 --> 00:36:57,800
अब एक बात बताइए वो आए थे छोटे लला के रूप में

512
00:36:57,800 --> 00:37:01,960
उनका शरीर चेंज हुआ तो यह शरीर शाश्वत कैसे

513
00:37:01,960 --> 00:37:07,960
फ व चेंज दिखता है ऐसा चेंज नहीं होता

514
00:37:08,240 --> 00:37:12,440
भगवान उनका शरीर जो हमें दिख रहा है वो वास्तविक नहीं है दिख रहा

515
00:37:12,440 --> 00:37:16,440
है वास्तविकता कुछ और है नहीं नहीं जो

516
00:37:16,440 --> 00:37:20,640
दिखता है वही है और वास्तविकता भी वही है रियल है तो रियल है तो फिर

517
00:37:20,640 --> 00:37:24,640
चेंज क्यों हो रहा है और चेंज आपको दिखता है दुनिया में जो लीला

518
00:37:24,640 --> 00:37:28,800
करते दिखता है ऐसा अरे तो वो तो फिर तो हमारी जगह आ गए ना हमें

519
00:37:28,800 --> 00:37:32,960
जो दिख रहा है सु मैं आपको एक एग्जांपल दे रहा

520
00:37:32,960 --> 00:37:34,520
हूं पहले का

521
00:37:34,520 --> 00:37:38,880
जो फिल्म आता उसका रील आता था ठीक है

522
00:37:38,880 --> 00:37:43,120
याद है ना देखा है ना कभ रील देखा है ना पहले वा हा हा देखा है देखा है और

523
00:37:43,120 --> 00:37:47,200
रील जो वीडियो आता है वो एक्चुअली क्या है अंदर में क्या होता है सब फोटो होता

524
00:37:47,200 --> 00:37:49,840
है

525
00:37:49,840 --> 00:37:54,120
ना है ना बोलिए बोलिए हा बहुत सारे फोटो

526
00:37:54,120 --> 00:37:58,120
जो उसको जो मूव कराते हैं तो वीडियो जैसा दिखता है लाइफ

527
00:37:58,120 --> 00:38:02,120
दिखता है लेकिन हर फर्म उसम ऐसा ही

528
00:38:02,120 --> 00:38:06,240
रहता है चेंज नहीं होता है एक एक पिक्चर का जो स्टेबल होता है चेंजिंग

529
00:38:06,240 --> 00:38:10,600
नहीं होता है लेकिन जब मूवमेंट करता है तो वो चेंज होता है दिखता है हाथ हिलता है

530
00:38:10,600 --> 00:38:14,680
ता दिखता है यानी किहा है

531
00:38:14,680 --> 00:38:18,840
असत नहीं है हमें जो दिख रहा है

532
00:38:18,840 --> 00:38:23,080
हम जो सोच रहे हैं हम जो जान रहे हैं वो असलियत नहीं है ना

533
00:38:23,080 --> 00:38:27,480
भगवान रूप असलियत है आप ही तो कह रहे देखो आपकी बात

534
00:38:27,480 --> 00:38:32,120
देखो आपने कहा भगवान का शरीर चेंजलेस है वो परिवर्तनशील नहीं है

535
00:38:32,120 --> 00:38:36,320
ठीक है हा अब मैंने जब बताया कि वो लला रूप में आए थे फिर वो

536
00:38:36,320 --> 00:38:40,440
किशोर हुए ठीक है तो उनका शरीर चेंज हुआ उन्होंने

537
00:38:40,440 --> 00:38:44,520
विराट स्वरूप दिखाया चेंज नहीं हुआ नहीं चेंज नहीं हुआ

538
00:38:44,520 --> 00:38:48,800
हमको दिख रहा था उनकी माया थी हां माया

539
00:38:48,800 --> 00:38:49,880
के कारण दिख रहा

540
00:38:49,880 --> 00:38:53,880
था ऐसा ही हम लोग जो मैं जो समझा हूं भगवान के

541
00:38:53,880 --> 00:38:59,880
जगत में भी ऐसा ही करते हैं नंद जस के बाद पास में वो छो ला

542
00:39:00,000 --> 00:39:03,680
रते माया के

543
00:39:03,680 --> 00:39:06,200
कारण

544
00:39:06,200 --> 00:39:10,200
जी नंद जस के लिए है ना स्तन पाई है सब सम इटरनल

545
00:39:10,200 --> 00:39:14,680
स्तन पाई है स्तन पाई समझ गए ब्रेस्ट नहीं

546
00:39:14,680 --> 00:39:19,280
समझा ब्रेस्ट फेड छोटा शिशु है नंद जदा के लिए

547
00:39:19,280 --> 00:39:23,320
अच्छा ठीक है लेकिन जो गाय चरा जाते है वो भी सब

548
00:39:23,320 --> 00:39:29,320
सम इटरनल गाय चरा निकल जाते है ऐसा नहीं कि एक दिन गया और बाद में कभी नहीं जाते

549
00:39:30,320 --> 00:39:35,160
आप बत जदा क आप ऐसा करते सबके साथ

550
00:39:35,160 --> 00:39:39,280
अच्छा ठीक है ऐसा नहीं करना

551
00:39:39,280 --> 00:39:43,360
चाहिए आपको तो पोलाइट होना चाहिए दूस को लो करो बोलने के लिए बोलने के लिए प्रिपर

552
00:39:43,360 --> 00:39:48,680
ज्यादा मत हो दूसरा को सुनने के लिए प्रिपर हो ठीक है ना

553
00:39:48,680 --> 00:39:52,840
आप बोलिए तो न का जो छोटा लाला है वो इटरनल

554
00:39:52,840 --> 00:39:56,840
है सब समय रहता है सनातन है जो डांस करने वाले

555
00:39:56,840 --> 00:40:01,280
है के साथ हो कि उनके सखा के साथ वो भी इटरनल है सुनिए पहले

556
00:40:01,280 --> 00:40:05,400
सुनिए जो मथुरा का कृष्णा वो भी इटरनल है व रू भी सब समय होता

557
00:40:05,400 --> 00:40:09,440
है अभी भी है जो द्वारिका का कृष्णा है वो रूप अभी भी

558
00:40:09,440 --> 00:40:13,440
है जो विष्णु अभी भी है राम अभी भी है राम का

559
00:40:13,440 --> 00:40:17,920
लला रूप अभी भी है अनंत कोटि ब्रह्मांड है अनंत कोटि ब्रह्मांड में

560
00:40:17,920 --> 00:40:22,040
हर लीला अभी भी चल रहा है यह चैतन्य महाप्रभु का बात है मैं नहीं बोल

561
00:40:22,040 --> 00:40:26,080
रहा हूं मैं आपको बोला था एक दिन आप पहले के बा चैत

562
00:40:26,080 --> 00:40:30,120
चन थ प लीजिए लेकिन आप सुनते ही नहीं है चैतन्य महाप्रभु को

563
00:40:30,120 --> 00:40:34,320
मानते हैं सुनि पहले सुनिए बात

564
00:40:34,320 --> 00:40:38,640
मेरी बात सुन लीजिए मैं आपको थोड़ा सुन रहा हूं

565
00:40:38,640 --> 00:40:42,840
री बात सुनिए आपकी बात बात सुना पड़

566
00:40:42,840 --> 00:40:45,320
आपकी बात जब पूरी हो जाए तो मुझे बता दीजिएगा कि

567
00:40:45,320 --> 00:40:49,960
मेरी बात पूरी हो गई बताइए हां ठीक है बताइए ठीक है ना

568
00:40:49,960 --> 00:40:54,160
बोलिए चैतन्य महाप्रभु को आप लोग भी मानते हैं कि आप लोग का परंपरा का आचार्य है

569
00:40:54,160 --> 00:40:58,280
ठीक है प्रमाण बता रहे

570
00:40:58,280 --> 00:41:02,560
हैं मैंने आपसे नॉर्मल पूछा है कि आप मानते क्या है भगवान का शरीर शाश्वत

571
00:41:02,560 --> 00:41:06,560
है या मैं तो समझा रहा हूं बात मत करो सुनिए

572
00:41:06,560 --> 00:41:11,080
मैं जब पूछा तो आंसर दीजिए ठीक है सुनाओ आप

573
00:41:11,080 --> 00:41:15,200
जितना रूप लीजिए हम हम लोग गोड़ बसन लाइन में मैं भाई बहुत छोटा आदमी हूं

574
00:41:15,200 --> 00:41:19,320
ले जितना पढ़ा है मैंसी से बता रहा हूं अगर कहीं गलत है तो गलत हैने

575
00:41:19,320 --> 00:41:23,560
दीजिए ना क्या है आप हमसे ज्यादा आर्गुमेंट ना करिए सुनिए आप बोलिए हम सुनेगा समझने

576
00:41:23,560 --> 00:41:28,320
के लिए कोशिश करिएगा मैं बोलेगा आप सुनने की कोशिश करिएगा अगर कुछ है तो देखते हैं ठीक है

577
00:41:28,320 --> 00:41:32,400
ना तो भगवान का जितना रूप अभी तक है

578
00:41:32,400 --> 00:41:36,560
जितना अवतार में बोल रहा हूं अवतार जितना रूप है विष्णु हो राम हो कृष्णा

579
00:41:36,560 --> 00:41:40,680
हो और क्या बड़ नरसिंह देव जितना अवतार ये हम लोग मानते हैं

580
00:41:40,680 --> 00:41:44,800
अभी भी वो लोग का लीला चल रहा है दूसरा दूसरा ब्रह्मांड में चल रहा है एक ही पृथ्वी एक ही यही

581
00:41:44,800 --> 00:41:48,880
नहीं है कि और दुनिया कोई नहीं है अनंत ब्रह्मांड है अनंत ब्रह्मांड में अभी

582
00:41:48,880 --> 00:41:52,880
भी चल रहा है अभी भी चल रहा है जन्माष्टमी भगन का जन्म हो रहा है कहीं दूध

583
00:41:52,880 --> 00:41:57,440
पी रहे हैं कहीं खेल आगे बढ़ समझ सुनो सुनो सुनो सुनो सुनो सुनो

584
00:41:57,440 --> 00:42:00,560
तो नहीं बोला मैं समझ गया आपकी बात आगे बढ़ी

585
00:42:00,560 --> 00:42:05,280
रिपीट हो रहा है बारबार रिपीट कर र ठीक है बोल क्या करें बोलिए

586
00:42:05,280 --> 00:42:09,280
हां बोलिए आपने कहा कि अनंत कोटि में अनंत

587
00:42:09,280 --> 00:42:13,880
लीलाएं अभी भी चल रही है इसका मतलब भगवान का शरीर एक नहीं है अनंत

588
00:42:13,880 --> 00:42:18,160
है यस अनंत मीस अनंत रूप में ला भगवान

589
00:42:18,160 --> 00:42:22,840
के भगवान का जो मूल शरीर है वो एक नहीं है बहुत सारे भगवान

590
00:42:22,840 --> 00:42:28,840
है ऐसा नहीं है एक ही भगवान है तो

591
00:42:29,360 --> 00:42:33,360
वो जो एक है जो मूल है वही आया था ना नीचे

592
00:42:33,360 --> 00:42:37,360
गोलोक धाम से हां ठीक

593
00:42:37,360 --> 00:42:41,440
है मूल वाला ही आया था ना दूसरा एक एक चीज और

594
00:42:41,440 --> 00:42:46,040
प अगर वो मूल वाला आया है जो बदलता नहीं है जो ट्रा ट्रांसफॉर्मेबल

595
00:42:46,040 --> 00:42:50,080
नहीं है तो वो आया था लाला के साइज में उसके बाद

596
00:42:50,080 --> 00:42:54,320
वो किशोर हुए तो यह ट्रांसफॉर्म हो रहा है फिर व वो तो बदल

597
00:42:54,320 --> 00:42:58,440
रहा है ना नहीं नहीं हो सकता

598
00:42:58,440 --> 00:43:02,680
है लेकिन हम लोग का परंपरा से नहीं मानते हैं ठीक है तो आख पर पट्टी बांध के मानना

599
00:43:02,680 --> 00:43:06,760
पड़ता है क्या भगवान श क छोटे लला

600
00:43:06,760 --> 00:43:10,760
के रूप में आए नहीं हा हमें दिख रहा है भगवान

601
00:43:10,760 --> 00:43:14,920
जी छ करना पड़ेगा आपको हम पूछेगा आपको मैं भी क्वेश्चन करूंगा इसके बारे

602
00:43:14,920 --> 00:43:16,040
में ठीक है ना

603
00:43:16,040 --> 00:43:20,200
आख बंद करके चलना पड़ता है तब अभी मैं आपसे पूछ रहा हूं

604
00:43:20,200 --> 00:43:24,240
कि आपको जब दिख रहा है कि भगवान इस इस तरह से आए हैं

605
00:43:24,240 --> 00:43:28,440
छोटे लला के रूप में हम लोग जन्माष्टमी मनाते हैं तो लड्डू गोपाल

606
00:43:28,440 --> 00:43:32,760
के मूर्ति के साथ जन्माष्टमी का पर्व मनाते हैं और

607
00:43:32,760 --> 00:43:36,840
जो भगवान का एक विग्रह होता है मंदिर में वो होता है वो उनकी किशोरावस्था

608
00:43:36,840 --> 00:43:40,840
वाला तो ये ट्रांसफॉर्मेशन य ट्रांसफॉर्म तो

609
00:43:40,840 --> 00:43:45,000
हम खुद ही मान रहे परिवर्तन हो रहा है दूसरी बात इसको भी छोड़ दीजिए

610
00:43:45,000 --> 00:43:49,280
अगर हम यह कहे अर्जुन ने जब कहा अपना विराट स्वरूप दिखाओ

611
00:43:49,280 --> 00:43:53,360
तो वही खड़े खड़े कृष्ण भगवान ने अपना विराट स्वरूप दिखा दिया जिसको परम सत्य माना

612
00:43:53,360 --> 00:43:57,600
गया उसको ज्यादा बड़ा सत्य माना गया यह दृष्टि

613
00:43:57,600 --> 00:44:01,800
से दिख रहा है तुझे तो अब आप कह रहे हो कि वो अपने ओरिजिनल स्वरूप

614
00:44:01,800 --> 00:44:06,040
में आए थे फिर अर्जुन कह रहा है कि मुझे अपना विराट स्वरूप दिखाओ तो उन्होंने विराट स्वरूप

615
00:44:06,040 --> 00:44:10,280
जो दिव्य दृष्टि जिसको चाहिए देखने के लिए वह स्वरूप उन्होंने दिखाया

616
00:44:10,280 --> 00:44:14,440
ट्रांसफॉर्म भी हो रहा है और इस बात से ये भी सिद्ध हो रहा है कि उनका वह जो स्वरूप

617
00:44:14,440 --> 00:44:18,600
था वह मेन नहीं था मेन स्वरूप तो इसके कंपेरटिवली व वाला था जो विराट

618
00:44:18,600 --> 00:44:24,080
स्वरूप लिया था तो मैं

619
00:44:24,080 --> 00:44:28,120
बोलू आप गीता का पास में है तो

620
00:44:28,120 --> 00:44:31,120
का थोड़ ण नहीं चाहिए

621
00:44:31,120 --> 00:44:35,480
मैं आपसे मांगूंगा प्रमाण अभी तो आप जो मानते हो वो बताओ

622
00:44:35,480 --> 00:44:39,520
मैं क्या बोलना चाहता सुनि तो पहले क्यों बात कर ठीक है

623
00:44:39,520 --> 00:44:43,720
निकालिए जब भगवान अर्जुन ने चाहा कि आपका रूप विश्वरूप दिखाने

624
00:44:43,720 --> 00:44:48,000
के लिए तो भगवान कृष्ण ने विश्वरूप दिखाया हा ठीक है

625
00:44:48,000 --> 00:44:52,640
व उ उन्ही की बॉडी बड़ी हुई थी

626
00:44:52,640 --> 00:44:57,080
वो उन्हीं की बॉडी बड़ी हो गई थी या फिर वो कोई दूसरा ऐसे प्रोजेक्शन

627
00:44:57,080 --> 00:45:01,160
से दिखाया था विराट स्वरूप समथिंग लाइक प्रोजेक्शन क्योंकि

628
00:45:01,160 --> 00:45:05,200
वो सब लरे विश्वरूप ऑलरेडी है उसको दिखाया था मतलब वो जो विश्वरूप दिखाया था वो

629
00:45:05,200 --> 00:45:09,240
माया था एक तरीके से नहीं वो ऑलरेडी है उसको

630
00:45:09,240 --> 00:45:13,280
दिखाया था भगवान ने एक ही ज में ला के दिखाया था बस इतना अरे भाई

631
00:45:13,280 --> 00:45:19,280
वो उनका ओरिजिनल स्वरूप नहीं था ना ओरिजिनल तो ये है ना जो खड़े

632
00:45:21,040 --> 00:45:25,920
हैं तो क्या हुआ तो क्या हुआ

633
00:45:25,920 --> 00:45:30,000
हा अर्जुन को जो दिव्य दृष्टि से दिखाया वो उनका ओरिजिनल स्वरूप नहीं था

634
00:45:30,000 --> 00:45:34,840
बल्कि ओरिजिनल स्वरूप तो वही था जो वो खड़े

635
00:45:34,840 --> 00:45:39,040
थे हां ठीक है तो फिर ठीक है तो यह

636
00:45:39,040 --> 00:45:43,280
जो शरीर है वो बालक बन के आ रहे हैं वो किशोर हो रहे हैं ट्रांसफॉर्म

637
00:45:43,280 --> 00:45:47,360
हो रहा है बदल रहा है परिवर्तनशील तो फिर ये आप कैसे कह रहे हैं सनातन

638
00:45:47,360 --> 00:45:52,080
शरीर हैय अच्छा ठीक है मैं आपको

639
00:45:52,080 --> 00:45:56,080
एक एक एग्जांपल मैं दे दू आप समझ जाओगे एक एग्जांपल मैं दे

640
00:45:56,080 --> 00:45:59,840
दूं आप समझ जाओगे अगर हम

641
00:45:59,840 --> 00:46:04,440
पूछे अगर हम पूछे आपसे क्या इसकन के द्वारा

642
00:46:04,440 --> 00:46:08,800
या आपके द्वारा पूजित होने वाला जो ईश्वर का स्वरूप है

643
00:46:08,800 --> 00:46:13,360
आपने कहा वो जो गोलोक में बैठा है वही है जो कृष्ण भगवान के रूप में आया

644
00:46:13,360 --> 00:46:17,520
हम भी कृष्ण भगवान को ही मानते हैं तो कृष्ण भगवान जो आपके अनुसार जो

645
00:46:17,520 --> 00:46:21,680
यहां पर आते हैं गोलोक से वो उनका शरीर यदि

646
00:46:21,680 --> 00:46:26,440
शाश्वत है तो क्या वो सब कुछ कर सकते हैं

647
00:46:26,440 --> 00:46:30,880
हां वो हाथी बन सकते हैं

648
00:46:30,880 --> 00:46:34,960
जरूर हाथी बन सकते हैं हां क्यों

649
00:46:34,960 --> 00:46:36,360
नहीं बन सकते सर्वशक्तिमान

650
00:46:36,360 --> 00:46:40,360
बन एक ही वार्ड में सब खत्म हो गया तो तो फिर उनका शरीर तो चेंज

651
00:46:40,360 --> 00:46:44,400
हो गया ना शाश्वत कहां रहा

652
00:46:44,400 --> 00:46:48,880
देखिए चेंज हो गया है ना लगता है मैं आपको समझा नहीं सकता हूं मेरा कैपेबिलिटी

653
00:46:48,880 --> 00:46:53,080
नहीं है क्योंकि आप उसी में टिके हुए हो और आप मानते किस टिकना

654
00:46:53,080 --> 00:46:57,400
चाहिए किसम टिकना चाहिए फिर नहीं देखो

655
00:46:57,400 --> 00:47:01,880
आप बोल चेंज हो रहा है लेकिन मैं बो चेंज नहीं हो रहा है जो है उसको दिखाई जा रहा है

656
00:47:01,880 --> 00:47:06,240
आपको जो मतलब वो हाथी है वो दिखा रहे हैं वो

657
00:47:06,240 --> 00:47:11,720
क नहीं है मैं आपको फिल्म का रिल क्या दि क्या बोला

658
00:47:11,720 --> 00:47:16,000
फ इसका मतलब जो हाथी का रूप दिखाया वो माया है

659
00:47:16,000 --> 00:47:20,480
वास्तविकता में व वही खड़े है माया नहीं

660
00:47:20,480 --> 00:47:25,040
तो क्या मैं आपको फिल्म का रिल के बारे में बताया था ठीक है फिर रिपीट करता हूं

661
00:47:25,040 --> 00:47:29,040
प्लीज फिल्म का ल में ना हर एक पिक्चर जो है वो स्टेबल

662
00:47:29,040 --> 00:47:33,040
होता है वो चेंजिंग चेंजलेस चेंजलेस है वो हम लेकिन उसको

663
00:47:33,040 --> 00:47:37,080
मूवमेंट करने से चेंज जैसा दिखता है हमको तो हमें जो दिख

664
00:47:37,080 --> 00:47:41,080
रहा है वो गलत दिख रहा है ना गलत

665
00:47:41,080 --> 00:47:45,240
दिख रहा है लेकिन ये मेटेल एग्जांपल आपको दे रहा हूं मटेरियल एग्जांपल दे रहा आपको

666
00:47:45,240 --> 00:47:49,440
मैं समझ गया आप स्पिरिचुअल नहीं है हां ये रियल

667
00:47:49,440 --> 00:47:51,520
फिम वाले स्पिरिचुअल नहीं है हर तरक

668
00:47:51,520 --> 00:47:55,720
से आप एग्जाम समझाने के लिए बोला जाता है ऐसा नहीं हर तरी हर तरीके

669
00:47:55,720 --> 00:47:57,920
से परफेक्ट

670
00:47:57,920 --> 00:48:01,920
मैं समझा नहीं सकता मैं अचिंत इसी को कहते

671
00:48:01,920 --> 00:48:06,520
हैं हम विग्रह को मानते आप सोचते

672
00:48:06,520 --> 00:48:10,560
जैसे सोते ही बोलू ठीक है ना वैदिक कल्चर में इतना

673
00:48:10,560 --> 00:48:12,080
आर्गुमेंट नहीं करते थोटी

674
00:48:12,080 --> 00:48:16,240
बोलता [हंसी] है

675
00:48:16,240 --> 00:48:21,880
चलिए ठीक है तो आपको क्यों सुन आप सु मैं आपको बोलता मिनट

676
00:48:21,880 --> 00:48:26,040
टाइम ठीक है स्पिरिचुअल जो फम है

677
00:48:26,040 --> 00:48:27,720
न मन इव ही

678
00:48:27,720 --> 00:48:31,720
होता है और वन प्सव वन ही होता है आप जानते हैं मानते

679
00:48:31,720 --> 00:48:36,000
हैं आप भी तो गोल कृष्णा र आएगा फिर भी कृष्णा उधर ही रहेगा

680
00:48:36,000 --> 00:48:40,360
यार क्या है अब क्या बात करते हैं अरे तो हम तो ला ही नहीं रहे ना आप ला रहे हो ना

681
00:48:40,360 --> 00:48:44,360
गोलोक के ला रहे लेकिन ने सु उधर भी रहते हैं इधर भी रहते हैं एक

682
00:48:44,360 --> 00:48:48,400
ही साथ में गोलोक का जो स्वरूप है भगवान का वो

683
00:48:48,400 --> 00:48:52,640
आप ला रहे हो हम तो मांग ही नहीं रहे हम नहीं ला रहे उनको य

684
00:48:52,640 --> 00:48:56,880
आप ला रहे हो कि नहीं जैसा गोलोक में था वैसा ही यहां आया था

685
00:48:56,880 --> 00:49:00,920
तो ये मानना पड़ेगा कि वो जो स्वरूप है उसको हम नहीं जानते वो

686
00:49:00,920 --> 00:49:04,920
हमारे व्यवहार का नहीं जानते हम लोग जानते अगर जानते हो तो

687
00:49:04,920 --> 00:49:09,160
वो सर्वशक्तिमान सिद्ध नहीं होगा क्यों नहीं अगर आप उसको जान

688
00:49:09,160 --> 00:49:13,560
बताओ ना वो हाथी बन रहा है तो उसका शरीर बढ़ रहा है जो वो पर

689
00:49:13,560 --> 00:49:17,800
सुनो सुनो सुनो ऐसा ऐसा नहीं कता सुनो थोड़ा सुनो हम

690
00:49:17,800 --> 00:49:22,120
स्पिरिचुअल फॉर्म हो जो कुछ भी स्पिरिचुअल होता है वन माइव इव

691
00:49:22,120 --> 00:49:28,120
ही होता है आप हां या ना बोलिए अरे मेरे भाई तो स्पिरिचुअल

692
00:49:30,600 --> 00:49:34,680
अगर वो स्पिरिचुअल है तो उसको मटेरियल स्टिक क्यों बना रहे हो आप बना रहे हो ना

693
00:49:34,680 --> 00:49:38,680
मैटेरियलिस्टिक हमारे बीच आप बोलते हम क नहीं

694
00:49:38,680 --> 00:49:42,720
बोला हम मेटल बने अरे यहां जब हमारे बीच में आ गए तो हम पूछ

695
00:49:42,720 --> 00:49:46,840
रहे हैं कि भैया श्री कृष्ण क्या हाथी बन सकते हैं अगर श्री कृष्ण का वो

696
00:49:46,840 --> 00:49:50,880
जो शरीर है ना घट सकता है ना बढ़ सकता है नैनम चिंति शस्त्राणि नैनम

697
00:49:50,880 --> 00:49:54,960
दती पाव का अगर वो शाश्वत है ना घट सकता है ना बढ़ सकता

698
00:49:54,960 --> 00:49:59,080
है कुछ नहीं हो सकता तो फिर वो क्या हाथी बन सकते हैं

699
00:49:59,080 --> 00:50:03,080
अगर आप कहोगे हाथी बन सकते हैं तो वो घट बढ़ रहा है और वो

700
00:50:03,080 --> 00:50:07,200
घटे बे है वो लाला के रूप में आए थे वो लाला

701
00:50:07,200 --> 00:50:11,440
के रूप में आए थे तो नहीं आप कहते रहो ठीक है वो

702
00:50:11,440 --> 00:50:15,720
नहीं आप नहीं समझते बिल्कुल नहीं समझते समझने की कोशिश भी नहीं करते आप

703
00:50:15,720 --> 00:50:19,920
ठीक है मुझे नहीं करनी है कोशिश अब ये बताइए सुनो

704
00:50:19,920 --> 00:50:24,000
क्वेन का आंसर दो पहले न माइनस वन कितना होता है स्पिरिचुअल व में स्पिरिचुअल चीज

705
00:50:24,000 --> 00:50:28,240
को मैं वन माइनस वन नहीं बोलता हूं मैं बोलता हूं पूर्ण का मतलब

706
00:50:28,240 --> 00:50:32,240
होता है पूर्ण स्पिरिचुअल मीनिंग य आसर

707
00:50:32,240 --> 00:50:36,320
नहीं देने के लिए कोशिश कर रहे सीर नहीं मैं बोल

708
00:50:36,320 --> 00:50:40,320
रहा हूं पूर्ण का मतलब पूर्ण होता पूर्ण सेना

709
00:50:40,320 --> 00:50:44,400
पूर्ण से ना कुछ कम होता है पूर्ण में ना कुछ जुड़ता है तो यदि वो

710
00:50:44,400 --> 00:50:45,600
अपने सेम

711
00:50:45,600 --> 00:50:50,160
चीज है भैया से अरे तो इसका मतलब वो नहीं बन सकते हा

712
00:50:50,160 --> 00:50:54,240
पूर्ण से ना कुछ निकलेगा ना कुछ घटेगा ना बढ़ेगा तो वो हाथी नहीं

713
00:50:54,240 --> 00:50:57,880
बन सकते

714
00:50:57,880 --> 00:51:02,040
सर्व शक्तिमान नहीं है फिर वो तो

715
00:51:02,040 --> 00:51:06,120
जब ठीक है मैं क्वेश्चन कर आपका ठीक है अभी पहले आप ये बताइए

716
00:51:06,120 --> 00:51:10,160
वो सर्वशक्तिमान है कि नहीं मैं तो बोल दिया यार हा हो

717
00:51:10,160 --> 00:51:14,280
सकता डेफिनेटली बन पा रहे वो हाथी क्यों

718
00:51:14,280 --> 00:51:18,480
नहीं बन पा रहे मैं तो नहीं बोला नहीं बन पा रहे तो बोला बोन रहे

719
00:51:18,480 --> 00:51:22,560
बन पा रहे तो फिर उनका शरीर तो चेंजलेस नहीं रहा चेंज हो रहा शरीर ठीक

720
00:51:22,560 --> 00:51:27,840
है अभ सुनि अी सुनि अरे पहले बोलो तो चेंज हो रहा है

721
00:51:27,840 --> 00:51:31,960
पहले आप सुनो शरीर चेंज हो रहा है ना पहले सुनो यार प्लीज

722
00:51:31,960 --> 00:51:36,120
सुनो पहले हम मैं हम लोग

723
00:51:36,120 --> 00:51:40,720
का पॉइंट ये है गल वृंदावन जो कृष्णा है

724
00:51:40,720 --> 00:51:46,360
हां वो उधर ही रहेगा फिर भी र आ सकता

725
00:51:46,360 --> 00:51:50,440
है फिर भी एक हाथी बोलने के बाद भी वो फिर वही ऐसे ही रूप

726
00:51:50,440 --> 00:51:54,480
में रह सकता है गलो ववन वृंदावन में इसका मतलब वो

727
00:51:54,480 --> 00:52:00,480
अपनी रियल फॉम में नहीं हाथ बनेगा

728
00:52:01,160 --> 00:52:06,200
क्या कर हाथ बन सकते हैं फिर भी जैस कृष्णा ऐसा ही रहेगा चेंजलेस

729
00:52:06,200 --> 00:52:10,720
है तो इसका मतलब कृष्ण हाथी नहीं बना ना

730
00:52:10,720 --> 00:52:15,640
क्यों नहीं बना आप

731
00:52:15,640 --> 00:52:19,960
ही आप ही तो कह रहे हो व कृष्ण हाथी बन सकता है मगर वो चेंजलेस

732
00:52:19,960 --> 00:52:24,640
है करोड़ों आथ बन गए मगर व वैसा का वैसा ही रहेगा आप ही ने बोला

733
00:52:24,640 --> 00:52:28,640
हम पूछ रहे कृष्ण भगवान बन सकते हैं कि नहीं शेर बन सकते

734
00:52:28,640 --> 00:52:32,720
हैं कि नहीं हम यह पूछ रहे हैं मैं बोला हा तो जब

735
00:52:32,720 --> 00:52:36,760
वो बन सकते हैं तो फिर क्यों कह रहे हो वैसा का वैसा ही रहेगा अगर वैसा का वैसा

736
00:52:36,760 --> 00:52:40,760
ही रहेगा तो शेर नहीं बन सकते शेर बन सकते वैसा का वैसा ही नहीं रहेगा दोनों

737
00:52:40,760 --> 00:52:44,760
बातें क्यों कर रहे हो क्योंकि भगवान एक

738
00:52:44,760 --> 00:52:49,200
ही साथ में दोनों किया हजारों काम एक ही टाइम में कर सकता है ठीक है

739
00:52:49,200 --> 00:52:53,760
कर दिया हमने यह पूछा है क्या भगवान

740
00:52:53,760 --> 00:52:57,840
श्री कृष्ण अपने शरीर को सि के रूप में बदल

741
00:52:57,840 --> 00:53:02,480
सकते हैं या नहीं उनके अंदर इस बात की क्षमता है कि

742
00:53:02,480 --> 00:53:06,680
नहीं अपने रियल शरी अपने जैसे दूसरे

743
00:53:06,680 --> 00:53:10,680
नहीं अपने रियल शरीर को बदल सकते हैं कि वो

744
00:53:10,680 --> 00:53:14,960
भी कर सकता है वो भी कर सकता कर सकते हैं वो भी कर सकता है

745
00:53:14,960 --> 00:53:16,320
कर सकते हैं तो फिर उनका

746
00:53:16,320 --> 00:53:20,560
शरीर वो शाश्वत कहां रहा वो तो बदल गया बदल रहा है नहीं

747
00:53:20,560 --> 00:53:24,680
बदला है क्यों बदला आप क्यों ऐसा करते आप ही तो कह रहे हो वो बदल जाएगा शेर

748
00:53:24,680 --> 00:53:28,920
बन जाएंगे आप ही तो कह रहे हो स्पिरिचुअल चीज का कुछ भी नहीं मालूम है आपको सिर्फ मटेरियल

749
00:53:28,920 --> 00:53:33,040
लॉजिक के मटेरियल हिसाब से कुछ कैलकुलेशन करते हो एक चला गया तो माइनस

750
00:53:33,040 --> 00:53:37,440
हो गया ख हो चेंज हो गया चेंज होना मटेरियल चीज का

751
00:53:37,440 --> 00:53:41,440
क्या हो क्वालिटी होता है चेंज होना अजीब बात कर रहे हो आप चेंज

752
00:53:41,440 --> 00:53:45,560
होना मटेरियल चीज है स्पिरिचुअल चेंज चीज कोई चेंज नहीं होता है

753
00:53:45,560 --> 00:53:49,600
क्यों नहीं समझते आप इसको जो स्पिरिचुअल है जो

754
00:53:49,600 --> 00:53:53,640
भी हो आत्मा भी चेंज नहीं होता आत्मा भी चेंज नहीं होता तो कृष्णा क्यों चेंज

755
00:53:53,640 --> 00:53:57,840
होंगे आत्मा को तो अनबल बता गया है सुनिए आत्मा

756
00:53:57,840 --> 00:54:02,360
जो है वो व्यवहार का विषय नहीं है आत्मा का ज्ञान प्राप्त

757
00:54:02,360 --> 00:54:06,400
व्य है और आप अ व्यवहारिक ईश्वर को यहां व्यवहार

758
00:54:06,400 --> 00:54:10,680
में ले आ रहे हो जब व्यवहार में आएगा तो बाधित हो जाएगा आप बताओ

759
00:54:10,680 --> 00:54:14,840
या तो बाधित ही तो हो रहा है नहीं भगवान

760
00:54:14,840 --> 00:54:19,080
एक ही टाइम में साइनस सब काम कर सकते मतलब कि यदि

761
00:54:19,080 --> 00:54:23,560
भगवान श्री कृष्ण सिंह के रूप में अपने शरीर को परिवर्तित कर रहे हैं

762
00:54:23,560 --> 00:54:28,000
तो इसका मतलब जो मूल शरीर है वो ऐसा नहीं है

763
00:54:28,000 --> 00:54:31,560
वो बदल रहा है और वो

764
00:54:31,560 --> 00:54:35,960
छोड़ दो के परिवर्तित हाथी के रूप में करेंगे कि नहीं करेंगे सिंह के रूप में वो आए थे लल्ला

765
00:54:35,960 --> 00:54:40,040
के रूप में अच्छा य बताइए आप ये बोल रहे हो कि वो वहां से सीधे उठके आते

766
00:54:40,040 --> 00:54:46,040
हैं तो वोह तो छोटे बालक के रूप में आथे शिशु के रूप

767
00:54:46,960 --> 00:54:51,200
में क्या बात करें आपसे हम वो रियल नहीं था क्या

768
00:54:51,200 --> 00:54:57,200
माया थी भगवान की

769
00:54:57,760 --> 00:55:01,800
कैसे आपको समझाया जाए चलिए और कुछ बात करते हैं अचत

770
00:55:01,800 --> 00:55:06,000
बोल दो समझ जाऊंगा आप क्या सोचते

771
00:55:06,000 --> 00:55:10,160
भगवान चिंत है निराकार मानते निराकार

772
00:55:10,160 --> 00:55:14,200
मानते चिं है चिता करत भेद कौन

773
00:55:14,200 --> 00:55:18,360
बोलता है बताइए हम बोलते हैं

774
00:55:18,360 --> 00:55:22,560
तो अचिंत भदा भद जब बोलते तो फिर क्यों ठोस ठोस भगवान श्री कृष्ण को सीधे

775
00:55:22,560 --> 00:55:26,720
ले आ रहे हो ये लोय खड़े हैं इस उसको मैं लास्ट

776
00:55:26,720 --> 00:55:30,800
में पकडा ठीक है अ दूसरा क्वेश्चन जाते है इसको हम आपको फिर कान पकड़ेगा बाद में

777
00:55:30,800 --> 00:55:34,800
अब आप मुझे बताइए कि ये शिव

778
00:55:34,800 --> 00:55:38,840
जीी जो है उनके लिए आपके न 15 25 में

779
00:55:38,840 --> 00:55:44,120
क्यों लिखा है कि वो उनको भगवान समझने वाले पापी हैं

780
00:55:44,120 --> 00:55:46,560
बताइए हम नहीं जाएंगे अब तो

781
00:55:46,560 --> 00:55:50,680
इतना आसान चीज हम नहीं समझा पाया तो व सब जाने के क्या फायदा है कुछ फायदा नहीं है

782
00:55:50,680 --> 00:55:56,440
तो फिर आए क्यों है रहन दो बंद करते हैं वैसे ही आजकल

783
00:55:56,440 --> 00:56:00,640
पर है लेकिन मैं आपको बोला था मैं मेरा कुछ ऑब्जेक्शन भी है आप सब आपका

784
00:56:00,640 --> 00:56:04,680
बातचीत में जो है इसकन का किताब लेकर और कुछ क्लेरिफिकेशन लेना

785
00:56:04,680 --> 00:56:09,000
चाहिए था हमको ठीक है तो क्लेरिफिकेशन हो तो गया

786
00:56:09,000 --> 00:56:13,600
आपका ना तो मोक्ष सिद्ध है परम स्वतंत्र मोक्ष नहीं है ईश्वर सर्वशक्तिमान

787
00:56:13,600 --> 00:56:17,880
नहीं है और अभी यह जो चैप्टर खुल रहा है इसमें आपका जो धर्म है वो शाश्वत

788
00:56:17,880 --> 00:56:21,880
नहीं रहेगा हां वो भी होने दीजिए आप सर्टिफिकेट दीजिए

789
00:56:21,880 --> 00:56:25,920
आप ऐसा ही करिए ऐसा ही करिए आप ये आपका काम आप ही तो कह रहे हो कि वो सिंह बन सकते हैं

790
00:56:25,920 --> 00:56:30,320
तो सिं नहीं बन सकते व शाश्वत है उनका शरीर हम ऐसा नहीं बोला

791
00:56:30,320 --> 00:56:34,640
हम बोला एक ही समय में भगवान हर कुछ काम कर सकते है एक ही टाइम

792
00:56:34,640 --> 00:56:38,640
मेरे भाई ये भगवान श्री कृष्ण आप समझते नहीं

793
00:56:38,640 --> 00:56:42,720
आप समझते नहीं आपका माइंड इतना चेंज हो गया है ना वैदिक कल्चर कु समझते नहीं बिल्कुल

794
00:56:42,720 --> 00:56:46,880
नहीं और यही मैं कह द आप समझते नहीं आपका माइंड इतना चेंज हो गया

795
00:56:46,880 --> 00:56:52,640
तो हा बोला मैं तो मान लिया हा बोला माना नहीं समझता आपका बात

796
00:56:52,640 --> 00:56:56,680
हो नहीं मैं बोला आपका बात मैं आपको नहीं समझा पा रहा हार

797
00:56:56,680 --> 00:57:00,720
गया ना मैं नहीं नहीं आप हार गए य बोल रहे हो लेकिन आप ऐसा

798
00:57:00,720 --> 00:57:01,720
नहीं बोलते आप थोड़ा ऐसा

799
00:57:01,720 --> 00:57:06,480
बोल के देखिए कितना आप दम है नहीं सम सतार

800
00:57:06,480 --> 00:57:11,920
बोल दिखा क्यों बोलू भाई जो उदारता

801
00:57:11,920 --> 00:57:16,520
अपने आप तो सब कुछ जानते हो इसलिए सबते उदारता

802
00:57:16,520 --> 00:57:20,600
आपके अस्तित्व और आदर्श पर हावी हो जाए वो उदारता नहीं कायरता

803
00:57:20,600 --> 00:57:25,160
होती है मैं क्यों बोलू हा ठीक है हम ड

804
00:57:25,160 --> 00:57:29,160
भी बोलू जो बातें राम ने नहीं सिखाई

805
00:57:29,160 --> 00:57:33,160
मैं उनके विरुद्ध क्यों जाऊ इंडोनेशिया की पढ़ा है

806
00:57:33,160 --> 00:57:37,160
आप लोग इकन का किता पिता खोल के एक्सपोज करते ऐसे बैठे रहो ऐसे आपका

807
00:57:37,160 --> 00:57:41,400
काम है अभी आपसे मैंने पूछा कि भगवान शिव

808
00:57:41,400 --> 00:57:45,480
के लिए क्यों लिखा है उनके भक्तों के लिए पापी आपके 3 1525

809
00:57:45,480 --> 00:57:49,520
में बताइए भागवत हर को चीज का क्वेश्चन लेने

810
00:57:49,520 --> 00:57:53,520
के लिए कोई ऐसा कोई तो ऐसा नहीं होता ना जो हम बोल सकता हूं ज

811
00:57:53,520 --> 00:57:58,240
बोलना चाहू मैं वही बोलूंगा नहीं पता इस बारे में पता

812
00:57:58,240 --> 00:58:02,240
भी है नहीं भी है लेकिन आप जैसा मेंटालिटी में रहते बात कर

813
00:58:02,240 --> 00:58:07,240
फायदा नहीं अजीब बात हैब

814
00:58:07,240 --> 00:58:11,240
बात है या हर एक आदमी का अपना सिचुएशन होता है अपना लिमिटेशन

815
00:58:11,240 --> 00:58:15,760
होता है अपना मजबूरी होता है अपना बारे

816
00:58:15,760 --> 00:58:17,800
आपको इस बारे में नहीं पता है

817
00:58:17,800 --> 00:58:21,880
चलिए नहीं हम बात ही करना नहीं चाहते जितना इतना छोटा ची

818
00:58:21,880 --> 00:58:27,840
आपको समझा नहीं था क्या आपने अभी बोला वो झूठ था क्या

819
00:58:27,840 --> 00:58:31,880
कौन सा आपने बोला हमें नहीं पता है

820
00:58:31,880 --> 00:58:35,920
रीड मुंडकोपनिषद तीन दो

821
00:58:35,920 --> 00:58:40,240
तीन लॉर्ड कैन नॉट बी रिच्ड बाय आर्गुमेंट और

822
00:58:40,240 --> 00:58:44,360
बाय अपलाइन इंडिपेंडेंट ब्रीन पावर और बाय स्टडिंग मेनी

823
00:58:44,360 --> 00:58:48,560
स्क्रिप्चर हां ये तो मैं आपको बोल बो हम यही

824
00:58:48,560 --> 00:58:52,960
कह रहे हैं भाई साहब कि भगवान का जो अव्यावहारिक रूप

825
00:58:52,960 --> 00:58:57,080
है व्यवहार में ना आ सकने वाला उसकी यहां पर बात हो रही है बिल्कुल सातव

826
00:58:57,080 --> 00:59:01,360
में भी यही लिखा है वो वाणी का विषय है व तर्क का विषय है

827
00:59:01,360 --> 00:59:05,400
और अगर आप उसको य ले है हम लोग के लिए जो रेटेड

828
00:59:05,400 --> 00:59:09,720
होते हैं उलो के लिए नहीं हैन क्या कर रहा है वो जो भगवान का अव्यावहारिक

829
00:59:09,720 --> 00:59:13,840
स्वरूप है व्यवहार में ना आ सकने वाला वाणी का अ विषय है उसको

830
00:59:13,840 --> 00:59:18,080
यहां लाकर खड़ा कर दे रहा है लो यह तो नेत्रों

831
00:59:18,080 --> 00:59:22,400
का विषय हो ग कानों का विषय हो ग सबका विषय हो गए फिर कह रहे कि यह जो है मूल स्वरूप

832
00:59:22,400 --> 00:59:26,440
है अगर मूल स्वरूप यही है आप कहां

833
00:59:26,440 --> 00:59:31,200
गए मेरे बात में आइए हां हमसे बात

834
00:59:31,200 --> 00:59:34,040
करिए

835
00:59:34,040 --> 00:59:38,640
हम देखो आप जैसे पता नहीं मैं जो समझता हूं आपको

836
00:59:38,640 --> 00:59:42,640
ना अगर ऐसा ही हम लोग बात करें कि हम लोग कु उनको उसके बारे

837
00:59:42,640 --> 00:59:47,320
में मालूम नहीं कर सकते हैं जान नहीं सकते हैं तो क्या प्रचार करते हैं हम लोग

838
00:59:47,320 --> 00:59:51,640
अच्छा आप ये बताइए इसीलिए इसीलिए

839
00:59:51,640 --> 00:59:55,760
हम लोग प्रचार नहीं कर सकते दुनिया में हम फेल नहीं सकते सिर्फ इंडिया में सीमित हो गया लिमिटेड हो गया

840
00:59:55,760 --> 00:59:59,760
हम लोग क्योंकि आपको बा पता नहीं है भगवान पता नहीं है उसके बारे में बोल नहीं

841
00:59:59,760 --> 01:00:04,480
सकते उ सोच नहीं सकते क्या देख वर्थ की बात है मत करिए

842
01:00:04,480 --> 01:00:09,320
अभी मुझे आप बताइए शिवजी के बारे में आपको पता है कि नहीं पता है

843
01:00:09,320 --> 01:00:13,400
पता है बहुत कुछ पता है लेकिन उसके बा टॉपिक छोड़ ना क्योंकि आपको

844
01:00:13,400 --> 01:00:17,760
बात करना बहुत मुश्किल होता है ना आपसे करूगा आप

845
01:00:17,760 --> 01:00:21,840
क् मत कर पले क् करूंगा बाद में आप एक मिनट एक

846
01:00:21,840 --> 01:00:24,280
मिनट

847
01:00:24,280 --> 01:00:29,040
आपको आपको ब नहीं पता

848
01:00:29,040 --> 01:00:33,160
है मालूम है क्यों नहीं मालूम इतना दिन से मैं 25 साल हो गए स्कूल में पढ़ता

849
01:00:33,160 --> 01:00:37,160
हूं सुनता हूं क्यों नहीं मा शिव जी के बारे में जो यह बात लिखी हुई है कि उनको

850
01:00:37,160 --> 01:00:41,360
भगवान समझने वाले पापी हैं

851
01:00:41,360 --> 01:00:46,000
आपसे बोला ये क्वेश्चन मैं नहीं लूंगा लूगा तो दूसरा दिन लूंगा ठीक है अभी के लिए छोड़

852
01:00:46,000 --> 01:00:49,600
दीजिए मैं आपको क्वेश्चन करने जा रहा हूं

853
01:00:49,600 --> 01:00:53,600
पहले आपने यह कहा था कि मुझे नहीं पता इस बारे में जरूरी नहीं है सबको सब कुछ सब चीजों के

854
01:00:53,600 --> 01:00:57,040
बारे में पता हो

855
01:00:57,040 --> 01:01:01,240
कुछ भी सोचिए ना कोई भी ऑप्शन लीजिए हमको छोड़ दीजिए ना बाद में बात करेंगे

856
01:01:01,240 --> 01:01:05,400
दूसरा दिन बात करेंगे बोलिए आपको किस किस

857
01:01:05,400 --> 01:01:09,720
बारे में बात करनी है मैं आपसे मु बता दीजिए

858
01:01:09,720 --> 01:01:13,800
एक बात मुझे बता दीजिए आप जो बात करने जा रहे हैं इसके बाद मैं भी एक बात करूं या ना

859
01:01:13,800 --> 01:01:18,680
करूं या ये आपकी बात कर लेकिन

860
01:01:18,680 --> 01:01:22,720
क् मैं जब करूंगा तो आप यह कह सकते हो कि मैं नहीं करूंगा इस बारे में

861
01:01:22,720 --> 01:01:27,120
बात फिर आप यह चाहते हो कि मैं तो आपकी बात को मानू

862
01:01:27,120 --> 01:01:31,120
मगर मैं जब अपनी बात कहूंगा तो आप निर्णायक हो जाएंगे तो मैं क्या आपके

863
01:01:31,120 --> 01:01:35,120
परतंत्र हूं आपके प्रति बिल्कुल

864
01:01:35,120 --> 01:01:39,320
ऐसा नहीं सोचता हूं मैं आप तो बोलना सुनो सुनो मैं कोशिश किया

865
01:01:39,320 --> 01:01:43,400
समझाने कोशिश किया समझाने के लिए कोशिश किया जितना था लेकिन

866
01:01:43,400 --> 01:01:47,800
आपको समझा नहीं पाया ठीक है ना मैं छोड़ दिया उसको नहीं

867
01:01:47,800 --> 01:01:52,040
अभी आप मेरे प्रति व्यवहार ऐसा कर रहे हैं मैं पूछूंगा वह

868
01:01:52,040 --> 01:01:56,240
तुम्हें बताना है और तुम पूछोगे मैं उसके बारे में बात नहीं करूंगा जाओ

869
01:01:56,240 --> 01:02:00,480
नहीं ऐसा नहीं है मैं पूछा पूछूंगा आप नहीं बोलना तो नहीं बोलना मना कर दीजिए

870
01:02:00,480 --> 01:02:04,600
ना कि इस मैं बात नहीं करूंगा बोलिए ना भाई नहीं नहीं मैं य नहीं बोलूंगा

871
01:02:04,600 --> 01:02:08,680
अभी मैंने बोला कि आप आप शिव जी के बारे में बात करो तो आप मना कर रहे हो कि

872
01:02:08,680 --> 01:02:12,920
मैं नहीं करूंगा क्योंकि

873
01:02:12,920 --> 01:02:16,920
मेरा कुछ है और कोई बात कर सकता कुछ भी कर सकता हूं ना क्यों आप हमको

874
01:02:16,920 --> 01:02:21,760
फर्स करेंगे क्या क्वेश्चन आंसर देने के लिए तो आप

875
01:02:21,760 --> 01:02:25,880
फिर आप कैसे फोर्स कर सकते हैं मुझे मैं कभी कब आपको

876
01:02:25,880 --> 01:02:30,320
फोर्स किया मैंने आप क्वेश्चन ठीक है बंद कर बंद कर बंद करिए

877
01:02:30,320 --> 01:02:35,000
बंद करें चलिए पूछिए पूछिए

878
01:02:35,000 --> 01:02:39,120
बोलिए बोलिए अरे या सुने थोड़ा ठीक है आ से बात करते

879
01:02:39,120 --> 01:02:43,280
दूसरा टॉपिक लेते ठीक है ना बोलिए आप जितना पढ़े हैं सुने

880
01:02:43,280 --> 01:02:47,720
समझे हैं उसका हिसाब

881
01:02:47,720 --> 01:02:52,920
से गुरु का पोजीशन क्या होता है

882
01:02:52,920 --> 01:02:57,400
देखिए मुझसे जो है आप सैद्धांतिक काटर करिए वस्तुनिष्ठता

883
01:02:57,400 --> 01:03:02,960
से मेरी परीक्षा मत लीजिए

884
01:03:02,960 --> 01:03:07,320
आप जो मेरी कही हुई कोई बात हो उसको आप काउंटर करिए मेरी परीक्षा

885
01:03:07,320 --> 01:03:12,160
मत लीजिए मेरी परीक्षा मत लीजिए गु की परिभाषा क्या है

886
01:03:12,160 --> 01:03:16,160
कछ बोता सुनो मैं क्यों पूछ रहा

887
01:03:16,160 --> 01:03:20,240
हूं क्योंकि मेरा प बात करता मैं

888
01:03:20,240 --> 01:03:24,840
आपका कनेस का पकड़ना पड़ता है पहले बाद में क्वेन करू प

889
01:03:24,840 --> 01:03:29,560
पहले से बैकग्राउंड क्लियर नहीं करूंगा ना तो आपको कुछ समझ में नहीं आ जाएगा लोगों को

890
01:03:29,560 --> 01:03:33,760
आपका बैकग्राउंड क्या है कैसा बैकग्राउंड आप नॉलेज लिया है

891
01:03:33,760 --> 01:03:37,960
सुनिए परंपरा में आप भी एक परंपरा से लिए शा लिए है ना

892
01:03:37,960 --> 01:03:42,040
में आपको देखा है आप मेरी नरी कहां से दीक्षा हुई है

893
01:03:42,040 --> 01:03:46,280
कहां से शिक्षा हुई है मैं जानता हूं पूरी का शंकराचार्य महाराज से दिखा

894
01:03:46,280 --> 01:03:50,560
लिए मैं जानता हूं में जा देख ठीक है

895
01:03:50,560 --> 01:03:54,600
मेरी कही हुई बात कौन सी ऐसी है जो गलत है वो

896
01:03:54,600 --> 01:03:56,840
आप बताइए

897
01:03:56,840 --> 01:04:01,120
जो मैंने गलत किया उस पर काउंटर करिए आपकी गलत बातों को मैं

898
01:04:01,120 --> 01:04:02,960
बताऊं नहीं

899
01:04:02,960 --> 01:04:07,240
उससे बाद में बता मैं आपको बारे में बता ऐसे बताइए आप सुनि

900
01:04:07,240 --> 01:04:11,840
आप इसन का बहुत सार किताब में लेकर ना इधर गलत है इधर इलॉजिकल

901
01:04:11,840 --> 01:04:15,880
है ऐसा करके बहुत सारे वीडियो बनाया है है कि नहीं ठीक है

902
01:04:15,880 --> 01:04:20,200
ठीक है लेकिन सुनिए तो ये हम लोग का गड़ परंपरा

903
01:04:20,200 --> 01:04:24,680
का आचार्य लिखा हुआ है ठीक है ठीक है

904
01:04:24,680 --> 01:04:28,880
तो इसका अंदर आपका सिर घुसा कर उसको एक्सपोज करने ट्राई करने

905
01:04:28,880 --> 01:04:32,880
का आपको अधिकार कहां से मिला अच्छा ठीक सु पले

906
01:04:32,880 --> 01:04:36,880
सु पहले सुनि एक परंपरा में

907
01:04:36,880 --> 01:04:40,960
परंपरा में गुरु बताया है ठीक है और हम लोग मानते हैं

908
01:04:40,960 --> 01:04:45,120
फॉलो करते हैं पूछते हैं प्रभुपाद को ठीक है आप य क्वेश्चन

909
01:04:45,120 --> 01:04:49,160
कर य सब क्यों लिखा हुआ है अब यह क्वेश्चन

910
01:04:49,160 --> 01:04:53,160
य एक्सपोज करने केलिए कोशिश क्यों करते अच्छा अब ऐसा

911
01:04:53,160 --> 01:04:59,160
ही क्वेश्चन मैं आपको जवाब दे देता हूं

912
01:04:59,280 --> 01:05:03,680
आपके प्रश्न जैसा ही आपका जवाब है मेरा

913
01:05:03,680 --> 01:05:09,680
मेंटालिटी यही है अगर मैं आपका गलत देखा तो मैं आपके पास में आऊ आप फोन

914
01:05:11,200 --> 01:05:15,240
करू गीता पढ़ते हैं वो स्कन की पढ़ते हैं

915
01:05:15,240 --> 01:05:19,440
हां जरूर और भागत ले जा रहे

916
01:05:19,440 --> 01:05:23,560
मेरा क्वेश्चन कहां रह गया अभी आपका क्वेश्चन मुझे लेना पड़ेगा आपके क्वेश्चन प आ जाऊंगा नहीं

917
01:05:23,560 --> 01:05:27,720
आया तो मैं तुरंत जो है अपने आप को कह दूंगा आज से स्कोन का नाम लेना

918
01:05:27,720 --> 01:05:32,880
ही बंद ठीक है आजन का नाम लेना बंद कर दूंगा ठीक

919
01:05:32,880 --> 01:05:36,960
ऐ भागवत किसकी पढ़ते हैं

920
01:05:36,960 --> 01:05:41,360
गीता या भागवत भागवत श्रीमद् भागवत

921
01:05:41,360 --> 01:05:45,520
इस कौन काही पढ़ प्रभुपाद काही प प्रभुपाद जी का तो प्रभुपाद

922
01:05:45,520 --> 01:05:49,680
जी किस परंपरा से आते हैं मैं जो समझा

923
01:05:49,680 --> 01:05:53,800
गड़ी बण परंपरा से आते है ब्रह्म मा परंपरा

924
01:05:53,800 --> 01:05:58,280
बोलते परंपरा से तो नहीं आते ना

925
01:05:58,280 --> 01:06:02,360
नहीं नहीं तो श्रील प्रभुपाद जी को

926
01:06:02,360 --> 01:06:06,480
किसने अधिकार दिया इस कौन को किसने अधिकार दिया कि श्री प्रभुपाद जी के नाम

927
01:06:06,480 --> 01:06:10,560
से उसने लिखा श्रीमद् भागवत के तात्पर्य में

928
01:06:10,560 --> 01:06:15,320
4 24 17 में कि

929
01:06:15,320 --> 01:06:19,680
जो शंकराचार्य है वो मायावादी है उनकी फिलॉसफी नीरस है बेकार

930
01:06:19,680 --> 01:06:23,760
है किसने अधिकार दिया उनको अगर मैं सीधा सीधा

931
01:06:23,760 --> 01:06:28,240
आंसर द जब वो शंकर परंपरा के नहीं है

932
01:06:28,240 --> 01:06:32,480
तो उनको किसने अधिकार दिया आपके अनुसार

933
01:06:32,480 --> 01:06:36,720
आपके अनुसार अगर मैं परंपरा का हूं तो ही मैं उसकी बात करूं अन्यथा ना

934
01:06:36,720 --> 01:06:41,040
करूं तो अब मुझे बताइए कि श्रील प्रभुपाद जी को किसने श्रील प्रभुपाद

935
01:06:41,040 --> 01:06:45,280
जी ने नहीं किया य इस कन ने छापा है इसकन को किसने अधिकार दिया कि श्रील

936
01:06:45,280 --> 01:06:49,320
प्रभुपाद जी के नाम से वह शंकराचार्य पर उंगली उठाए

937
01:06:49,320 --> 01:06:53,440
बताइए आप शर है इसको ने क्या प्र नहीं किया बल आप शर

938
01:06:53,440 --> 01:06:57,800
है मुझे नहीं पता मगर य

939
01:06:57,800 --> 01:07:02,640
अरे बिल्कुल बोलूंगा क्योंकि और बहुत सी बातें है और बहुत से क्वे

940
01:07:02,640 --> 01:07:08,640
उसका आसर इसको देगा भया अगर इसको इस

941
01:07:10,000 --> 01:07:14,000
देगा आप किसकी साइड है

942
01:07:14,000 --> 01:07:18,680
हम प्रभुपाद के साइड में तो य प्रभुपाद जी के नाम से झूठ लिखा

943
01:07:18,680 --> 01:07:23,000
है अगर प्रभुपाद लिखा है तो झूठ नहीं लिखा है नहीं

944
01:07:23,000 --> 01:07:27,200
आप ये बताओ आपको क्या लगता है य प्रभ ने लिखा है कि नहीं लिखा

945
01:07:27,200 --> 01:07:31,320
है मेरा मेरा अंडरस्टैंडिंग में प्रभुपाद ही लिखा है प्रभुपाद

946
01:07:31,320 --> 01:07:35,320
ने लिखा है तो फिर आप इनके साथ है ना य जी जो लिखा है कि शंकराचार्य जो है मायावादी

947
01:07:35,320 --> 01:07:40,240
उनका वो है नीरस है ये है वो है हां हा

948
01:07:40,240 --> 01:07:44,320
तो आप इनके साथ है ना तो फिर आप तो फिर आप क्यों

949
01:07:44,320 --> 01:07:48,600
ऐसे व्यक्ति के साथ है जो आपका ही सिद्धांत तोड़ रहा है नहीं तोड़ा

950
01:07:48,600 --> 01:07:52,800
है प्रभुपाद नहीं तोड़ र है अरे आप ही ने तो कहा जब आपने उस परंपरा

951
01:07:52,800 --> 01:07:57,400
का अध्ययन नहीं किया है तो आपको कोई अधिकार नहीं है उस परंपरा सवाल करा करने

952
01:07:57,400 --> 01:08:01,440
का लेकिन वो अलग बात है अ जिसने

953
01:08:01,440 --> 01:08:05,480
बोला दुनिया स अलग बात है क्यों अलग

954
01:08:05,480 --> 01:08:10,360
बात तो अगर ये अगर गलत है तो गलत है तो

955
01:08:10,360 --> 01:08:14,680
महाभारत में लिखा है दूसरों के साथ वही व्यवहार करो

956
01:08:14,680 --> 01:08:18,880
जो अपने लिए पसंद हो धर्म है ये

957
01:08:18,880 --> 01:08:23,040
तो शुरुआत किसने की शुरुआत

958
01:08:23,040 --> 01:08:25,760
किसने कीय करने की

959
01:08:25,760 --> 01:08:29,760
ने किया मुझे नहीं पता प्र आप बताइए मैं आपसे पूछ रहा हूं किसने

960
01:08:29,760 --> 01:08:34,000
किया हा मैं बोल रहा हूं ना मैं बोल रहा प्रभुपाद ने किया तो आप ऐसे व्यक्ति

961
01:08:34,000 --> 01:08:38,080
के साथ क्यों जिस व्यक्ति का व व्यक्ति

962
01:08:38,080 --> 01:08:42,920
सिद्धांत आंसर देता ठीक है मैं आपका आंसर देता हूं ठीक है

963
01:08:42,920 --> 01:08:48,400
बोलिए तो इसके लिए आपको जानना पड़ेगा प्रभुपाद कौन

964
01:08:48,400 --> 01:08:53,840
है है कि नहीं क्या

965
01:08:53,840 --> 01:08:58,000
जो लिखा है वो व्यक्ति कौन मालूम तो करना पड़ेगा ना आप मुझे

966
01:08:58,000 --> 01:09:02,280
वो सिद्धांत बताइए कि कब किसी दूसरे पर हम लोग क्वेश्चन कर सकते

967
01:09:02,280 --> 01:09:07,560
हैं और कब नहीं कर सकते हैं बस ये बताइए

968
01:09:07,560 --> 01:09:12,880
सिद्धांत क्या प्रभुपाद जी ने जान लिया था शंकराचार्य कौन है

969
01:09:12,880 --> 01:09:17,440
शर क्या श्यर मैंने भी जान

970
01:09:17,440 --> 01:09:22,360
मैंने भी जान लिया शर बिल्कुल नहीं ऐसा नहीं होता

971
01:09:22,360 --> 01:09:27,320
देखो फालतू की बातें मत करो व्यर्थ हो रहा है

972
01:09:27,320 --> 01:09:31,600
व्यर्थ की बातें कर रहे हो जो व्यवहार अपने लिए पसंद

973
01:09:31,600 --> 01:09:35,920
नहीं है वो दूसरों के साथ भी ना करो ठीक

974
01:09:35,920 --> 01:09:40,120
है लेकिन एक आदमी होता और दूसरी बात

975
01:09:40,120 --> 01:09:44,120
यह है कि धर्म की रक्षा करने के लिए

976
01:09:44,120 --> 01:09:48,160
कोई अपॉइंटमेंट लेटर की आवश्यकता नहीं है अगर हमारे आसपास कहीं अधर्म

977
01:09:48,160 --> 01:09:52,320
हो रहा है तो हम उसे रोकेंगे भले ही परंपरा से हो रहा हो या ना हो रहा हो अगर वहां

978
01:09:52,320 --> 01:09:56,360
पटना ठीक कर ठीक है सुनि सुनिए पटना में

979
01:09:56,360 --> 01:10:00,400
किसी लड़की को यह सब करते हुए आज जो है ये सब वीडियो वायरल हो रहे हैं मैं वो

980
01:10:00,400 --> 01:10:04,520
बात कहना नहीं चाहता हूं अब मेरे सामने वो सब हो रहा है इसकन मंदिर

981
01:10:04,520 --> 01:10:08,560
का अध्यक्ष है वहां पर वो वहां पर वो पकड़ा गया है निर्वस्त्र था

982
01:10:08,560 --> 01:10:12,640
वो ऐसे पकड़ा गया व्यक्ति अब मेरे सामने हो रहा है तो मैं इसलिए ना करूं क्योंकि मैं उस

983
01:10:12,640 --> 01:10:17,120
परंपरा का नहीं हूं मैं उसको रोकूं नहीं किसी मातृ शक्ति के

984
01:10:17,120 --> 01:10:21,400
साथ वो जो है दुराचार करते हुए उसके वीडियोस वायरल हो रहा है मैं उसको रोकू नहीं क्योंकि वो परंपरा

985
01:10:21,400 --> 01:10:25,480
का है ऐसा नहीं होता है रोकना चाहिए क्यों नहीं रोकना

986
01:10:25,480 --> 01:10:29,480
चाहिए तो फिर आप ही तो कह रहे हो आपको किसने अधिकार दिया क्वेश्चन उठाने का वो भी

987
01:10:29,480 --> 01:10:33,560
गड़िया परंपरा का है जो आज सि क्वेश्चन क्या डिस्कशन करने

988
01:10:33,560 --> 01:10:37,600
डिस्कशन ओपन करने क्वेश्चन किया था आपको आर्गुमेंट नहीं किया था हमने हम आर्गुमेंट करने के

989
01:10:37,600 --> 01:10:41,760
लिए नहीं आए बिल्कुल नहीं फ आर्गुमेंट आर्गुमेंट नहीं

990
01:10:41,760 --> 01:10:42,360
है ये तो

991
01:10:42,360 --> 01:10:46,520
मैं भी तो आपको क्वेश्चन ही कर रहा हूं आपने मुझे कहा कि गड़िया परंपरा

992
01:10:46,520 --> 01:10:50,760
प क्वेश्चन करने का आपको किसने अधिकार दिया अब मेरे सामने कोई मातृ

993
01:10:50,760 --> 01:10:55,080
शक्ति का चीर हरण हो रहा है तो वहां पर मैं जो है यह सोचूं कि भैया वो गड़िया परंपरा

994
01:10:55,080 --> 01:10:59,440
के द्वारा बनाए गए अध्यक्ष है स्कोन मंदिर के और जो है इसलिए मैं और

995
01:10:59,440 --> 01:11:04,280
उनको उसकी रक्षा ना करूं वहां पर यह कहां का सिद्धांत

996
01:11:04,280 --> 01:11:08,320
है अगर आपके आसपास अधर्म हो रहा है और आप शांत है तो

997
01:11:08,320 --> 01:11:13,600
आप भी अधर्मी है यह सिद्धांत

998
01:11:13,600 --> 01:11:17,800
है चलिए अब मैं अपना क्वेश्चन पूछ लू

999
01:11:17,800 --> 01:11:23,800
आपने कहा था बाद में अपना पूछ लीजिएगा

1000
01:11:25,560 --> 01:11:29,080
मैं बोलना चाहता

1001
01:11:29,080 --> 01:11:34,480
था तो क्या आपका बात आपसे बात

1002
01:11:34,480 --> 01:11:39,000
करना मैं तो आपको पूछा था कि गुरु का पोजीशन क्या होता है

1003
01:11:39,000 --> 01:11:43,160
ठीक है उसी से मैं धीरे धीरे ओपन करना चाहता था कि एक्चुअली हम लोग

1004
01:11:43,160 --> 01:11:47,240
इकन में देखो कभी इकन का ब्रह्मचारी

1005
01:11:47,240 --> 01:11:51,240
भी है डिवटी है हम भी है जो भी हो क ऐसा ऐसा बात

1006
01:11:51,240 --> 01:11:55,280
करते हैं जो समाज के लिए अच्छा नहीं होता

1007
01:11:55,280 --> 01:11:59,320
समाज उसको हमारा हिसाब से समझ नहीं सकते क्योंकि हम लोग गलत भी करते

1008
01:11:59,320 --> 01:12:05,320
हैं ठीक है कोई प्रॉब्लम नहीं है होता है लेकिन हम हमारा पॉइंट

1009
01:12:05,600 --> 01:12:09,720
था जितना आपके साथ इसको डिटी साथ जितना बातचीत आर्गुमेंट

1010
01:12:09,720 --> 01:12:14,680
जै चलता रहता है इसका तो इसकन का डिवटी इतना

1011
01:12:14,680 --> 01:12:19,000
बात क्यों करते हैं मी समथिंग लाइक टेंपर लाइक टेंपर जैसा है अभिमान

1012
01:12:19,000 --> 01:12:23,240
जैसा है हम लोग क्यों बात करते हैं उसका बैकग्राउंड भी आपको समझना पड़ेगा कि ये लोग

1013
01:12:23,240 --> 01:12:27,320
इतने सारे राम के बारे में जैसे आप बोल रहे राम को कृष्ण छोटा मानते हैं लोग या

1014
01:12:27,320 --> 01:12:31,520
शिव जी को छोटा मानते हैं उसको मानते हैं नहीं मानते ये इसको हम लोग

1015
01:12:31,520 --> 01:12:35,560
मानते और बोलते भी है उसमें कोई हम लोग दोरे नहीं पता नहीं किसने क्या बोल रहे

1016
01:12:35,560 --> 01:12:39,800
हैं ठीक है हम मानते हैं हम कृष्णा से

1017
01:12:39,800 --> 01:12:43,880
जो बोलते हैं ना राम छोटा है कृष्णा बड़ा जैसा य य ो

1018
01:12:43,880 --> 01:12:48,360
कुछ तो है हम लोग हम बोलते हैं लेकिन क्यों बोलते हैं उसका रीजन आप ढूंढिए

1019
01:12:48,360 --> 01:12:52,560
ये मैं आपको आपको रिक्वेस्ट कर ढूंढिए इसकन लोग इतना सार गब

1020
01:12:52,560 --> 01:12:56,600
किताब में जो दिख रहा है क्यों है इस सब आपको जो मुझे अभी तक समझ में

1021
01:12:56,600 --> 01:13:00,600
आया जो मुझे अभी तक समझ में आया है वो ये है

1022
01:13:00,600 --> 01:13:04,920
कि इकन की फाउंडेशन हो सकता है एक अच्छे मंतव्य

1023
01:13:04,920 --> 01:13:08,960
से डाली गई हो मगर आज स्कोन का स्वरूप जो दिखाई देता

1024
01:13:08,960 --> 01:13:13,040
है वह यह है कि सनातन संस्कृति के नाम पर

1025
01:13:13,040 --> 01:13:17,200
सनातन जो सामग्री है उसकी जो कुछ मूलभूत

1026
01:13:17,200 --> 01:13:20,720
चीजें हैं उसको सनातन से दूर करते हुए और जो

1027
01:13:20,720 --> 01:13:25,200
यह विचारधाराएं हैं अब्राम उनसे जोड़ दो

1028
01:13:25,200 --> 01:13:30,160
क्योंकि शिव और कृष्ण एक नहीं

1029
01:13:30,160 --> 01:13:34,280
है क्योंकि शिव और कृष्ण एक बोलने में दिक्कत है मगर अल्लाह और

1030
01:13:34,280 --> 01:13:38,440
कृष्ण एक बोलने में दिक्कत नहीं है बोलने

1031
01:13:38,440 --> 01:13:43,240
में दिक्कत है राम और कृष्ण एक बोलने में दिक्कत है मगर

1032
01:13:43,240 --> 01:13:47,320
कृष्ण और यहोवा बोलने में दिक्कत नहीं है यह

1033
01:13:47,320 --> 01:13:51,320
जो कंट्रोवर्सी है ना इसको जानने के लिए डीप स्टडी करिए ऐसा ही

1034
01:13:51,320 --> 01:13:55,680
हमसे पूछ लीजिए और किसी पूछ ली एक्चुअली आप आंसर नहीं मिलेगा य आपको

1035
01:13:55,680 --> 01:13:59,880
अगर कुछ हम मंदिर तक गए वहां जाकर के डीप

1036
01:13:59,880 --> 01:14:04,040
डिस्कशन हुआ उनसे पूछा उन्होंने बोला नहीं नहीं शिवजी तो वो नहीं है

1037
01:14:04,040 --> 01:14:08,400
अलग है अल्लाह यहोवा और कृष्ण एक है और

1038
01:14:08,400 --> 01:14:13,760
अल्लाह वही कुरान का अल्लाह यहोवा वही बाइबल का जो

1039
01:14:13,760 --> 01:14:17,880
होगा तो ये है कुछ तो है इसलिए बोलते हैं बिल्कुल नहीं है ऐसा भी नहीं बोल

1040
01:14:17,880 --> 01:14:22,280
सकते कुछ तो है अंदर में इसलिए बोलते हैं नहीं तो कितना डेरिंग किसका है बोलने के लिए

1041
01:14:22,280 --> 01:14:26,560
क्या तो क्यों बोले सोर्स का सुनिए ना सुनिए अरे भाई आप मुसे

1042
01:14:26,560 --> 01:14:30,800
ये कहने आए हैं क्या कि क्यों बोलते हैं आप डिस्कस करो तो फोन प बोल देते

1043
01:14:30,800 --> 01:14:35,160
यहां क्यों आए फिर कितना बार फन कियां मालूम है

1044
01:14:35,160 --> 01:14:35,720
सुनो सुनो

1045
01:14:35,720 --> 01:14:39,840
सुनो मैं आपको फोन किया हूं आप हर बार काट लिया मेरा मुझे टाइम नहीं लाइव में लाइव में आपके

1046
01:14:39,840 --> 01:14:43,960
पास बहुत एक लाइन बोलनी थी आप स्कोन का और डीप स्टडी

1047
01:14:43,960 --> 01:14:49,200
करिए बस बात खत्म करते

1048
01:14:49,200 --> 01:14:53,360
आप हमको फोन बाद में बात करहा है जितनी बार आपकी बात गलत

1049
01:14:53,360 --> 01:14:57,520
गलत हो रही है या कट रही है उतनी बार आप जो है उस जो कन्वर्सेशन

1050
01:14:57,520 --> 01:15:01,560
है उसको रोक देना चाह रहे हो बंद कर देना चाह रहे हो और सोच रहे

1051
01:15:01,560 --> 01:15:05,600
हो हालाकि एक भी बार मेरी बात कटी नहीं हो सकता है कटी हो मगर सोच रहे हो

1052
01:15:05,600 --> 01:15:09,680
कि मैं ऐसा कुछ बोलू जिसम इसकी बात कटती जाए आप यह सोच रहे हो

1053
01:15:09,680 --> 01:15:13,680
ऐसा नहीं है मैं आपको ससा नहीं है मैं आपको समझाना चाहता हूं हा कि हम लोग

1054
01:15:13,680 --> 01:15:18,320
ऐसा जो आप कंट्रोवर्सी जैसे आप बोला की शिव राम आला जि

1055
01:15:18,320 --> 01:15:22,440
बात कर ना इसम इसको उनका किताब में है प्रभुपाद ने बोला

1056
01:15:22,440 --> 01:15:26,600
है लेकिन क्यों बोला है कहां है आपको थोड़ा रिसर्च करना चाहिए क्योंकि

1057
01:15:26,600 --> 01:15:30,600
हम लोग देखो प थ सुनो पले थो आपने की

1058
01:15:30,600 --> 01:15:34,800
कि नहीं थोड़ा सुनो तो पहले पहले

1059
01:15:34,800 --> 01:15:39,040
थ सुनो यार देखो हम लोग

1060
01:15:39,040 --> 01:15:43,120
हम बोलते हैं इसकन वाले बोलते हैं इतना आसानी से नहीं बोलते कुछ पढ़ा

1061
01:15:43,120 --> 01:15:47,960
है कुछ सुना है कुछ जानते हैं इसलिए तो बोलते हैं क्यों बोलेंगे ऐसा

1062
01:15:47,960 --> 01:15:50,760
तो वो क्या जाना है आपने वो बता दो ना

1063
01:15:50,760 --> 01:15:54,960
आज भेद खुल जाए आज दुनिया के सामने मैं तो वही बोलने के लिए आपको कोशिश कर रहा हूं

1064
01:15:54,960 --> 01:15:59,000
लेकिन आप तो इतना होते है ना अभी खिला देने जैसा हो जाते तो

1065
01:15:59,000 --> 01:16:03,040
अभी बोलेंगे कि नहीं बोलेंगे अब हां बोलेंगे अब वेट करो आपको

1066
01:16:03,040 --> 01:16:07,160
बैकग्राउंड आपको थोड़ा क्लियर करना चाहिए देखो कोई चीज डिफिकल्ट होता है फिलोसोफी होता

1067
01:16:07,160 --> 01:16:11,160
है समझने के लिए मेरा क्लियर आप जो है अपनी बात

1068
01:16:11,160 --> 01:16:15,160
बताइए आप तहकीकात मत करिए आप सीआईडी इंस्पेक्टर मत बनिए आप अपनी

1069
01:16:15,160 --> 01:16:18,960
बात बताइए प्लीज

1070
01:16:18,960 --> 01:16:22,960
कंटिन्यू कैसे आपके समझाए अगर अगर सुने

1071
01:16:22,960 --> 01:16:26,960
सुन बात सुनो पहले अगर किसी को को हम लोग पीएचडी का पाट पढ़ना चाहते हैं

1072
01:16:26,960 --> 01:16:31,120
तो उसका बैकग्राउंड भी क्लियर करके लेके आना पड़ेगा या इतना

1073
01:16:31,120 --> 01:16:35,120
जिसको सामने जा सुनो एक मंदिर में चले जाओ कुछ क्वेश्चन

1074
01:16:35,120 --> 01:16:39,280
कर लो इधर थोड़ा फोन कर लो इधर वीडियो में में बुला लो इसी से

1075
01:16:39,280 --> 01:16:43,680
ऐसा करके आपका परंपरा समझ क्या आप तो बहुत प है बं

1076
01:16:43,680 --> 01:16:48,120
कौन ने पीएचडी की है कौन ने नहीं की है इसका पैरामीटर क्या है

1077
01:16:48,120 --> 01:16:52,320
मैं आपको बोलना तो चाहता बोलना ही चाहता हू यही बोलना चाहता हूं

1078
01:16:52,320 --> 01:16:58,320
हा बोलो य आपको किसने

1079
01:17:00,960 --> 01:17:05,160
पने हम लोग का परम गीता में जो पहला जो चैप्टर स्टार्ट होता

1080
01:17:05,160 --> 01:17:09,200
है उसका पहला पेज में चैप्टर का

1081
01:17:09,200 --> 01:17:13,280
स्टार्टिंग जो नाम उसका पहले पेज में लिखा हुआ है गुरु परम लिस्ट दिया गया है

1082
01:17:13,280 --> 01:17:17,280
ठीक है कृष्णा उसके बाद ब्रह्मा नारद ब्यास

1083
01:17:17,280 --> 01:17:21,080
माध लिस्ट दिया गया है

1084
01:17:21,080 --> 01:17:25,560
देख तो उसके बाद प्रभुपाद

1085
01:17:25,560 --> 01:17:29,640
के नाम आता है ठीक है बीच में बहुत सारे

1086
01:17:29,640 --> 01:17:34,280
नाम है उसम 3 न प्रभुपाद के नाम आता है ली

1087
01:17:34,280 --> 01:17:38,320
प्रभुपाद कौन थे उनका स्पीच में ऐ गुरु

1088
01:17:38,320 --> 01:17:42,640
था एजुकेटेड था दीक्षा लिया था य सब य सब सेकेंडरी है मेरा मेरा अंडरस्टैंडिंग

1089
01:17:42,640 --> 01:17:46,800
आपको न का हिसाब से बोल रहा प्रभुपाद एजुकेटर थे

1090
01:17:46,800 --> 01:17:51,600
बिजनेसमैन थे गस्त थे सन्यास थे यह सब आउट वर्ड है

1091
01:17:51,600 --> 01:17:55,680
य सब आउट वर्ड है क्यों हसते हो नहीं नहीं

1092
01:17:55,680 --> 01:17:59,760
वो किसी ने कुछ कमेंट किया कोई कमेंट किया था उस पर

1093
01:17:59,760 --> 01:18:03,960
हंसी आ गई आपकी बात प नहीं ठीक

1094
01:18:03,960 --> 01:18:07,960
है अगर आपको एक्चुअली एक्चुअली कुछ करना इसकन का एक्सपो भी करना हो

1095
01:18:07,960 --> 01:18:12,000
या इसन सपोर्ट भी करना कुछ भी करना मेरा रिक्वेस्ट आपसे एक्चुअली

1096
01:18:12,000 --> 01:18:16,120
आप थोड़ा इक्वारी कर प्रका स्पिरिचुअल आइडेंटिटी

1097
01:18:16,120 --> 01:18:20,240
बताने जा रहे थे भाई साहब वो बताइए मुझे सुनना ही नहीं चाहते आप

1098
01:18:20,240 --> 01:18:24,360
तो यह आ रहे है ना कि आप स्टडी करिए

1099
01:18:24,360 --> 01:18:28,360
चलिए ठीक है बहुत आप

1100
01:18:28,360 --> 01:18:34,280
क्या मानते हो ईश्वर कृष्ण अल्ला एक

1101
01:18:34,280 --> 01:18:38,400
है हम बात करने के नहीं देते क्वेश्चन कर लेते कहीं

1102
01:18:38,400 --> 01:18:44,400
से अरे तो आप कुछ कर क रहे हैं आप तो वही वही रिपीट कर रहे

1103
01:18:44,400 --> 01:18:48,480
हैं कुछ नहीं है आप दूसरा को एक्सपोज करना है लाइव में बला

1104
01:18:48,480 --> 01:18:51,960
के एक्सपोज करना है

1105
01:18:51,960 --> 01:18:55,960
आपको ऐसा नहीं होता है चलिए ठीक है आने के लिए

1106
01:18:55,960 --> 01:19:01,960
आभार आपका जय श्री राम ठीक है थैंक

1107
01:19:06,120 --> 01:19:07,560
यू सुबह

1108
01:19:07,560 --> 01:19:12,120
नाम जप के लिए उठना है भाई टाइम नहीं

1109
01:19:12,120 --> 01:19:16,160
है क्यों भैया लड़कियों

1110
01:19:16,160 --> 01:19:20,640
की तरह क्या हो रहा

1111
01:19:20,640 --> 01:19:26,640
है क्या हुआ मैंने क्या किया भाई

1112
01:19:27,360 --> 01:19:33,360
इनको रखना था

1113
01:19:35,360 --> 01:19:38,560
क्या

1114
01:19:38,560 --> 01:19:43,280
बताएं इफ द सुप्रीम लॉर्ड अपीयर इन डिफरेंट फॉम्स

1115
01:19:43,280 --> 01:19:47,480
इट इज ओनली बिकॉज ऑफ हि डिजायर ट वी सी हिम इन दैट

1116
01:19:47,480 --> 01:19:51,800
वे और सिंपली बिकॉज ऑफ हर लैक ऑफ

1117
01:19:51,800 --> 01:19:54,840
डिस्क्रिमिनेशन

1118
01:19:54,840 --> 01:19:59,000
म भागवत आप ऊपर आना चाहेंगे क्या

1119
01:19:59,000 --> 01:20:03,400
स्पिरिचुअल साइंस आपका ये किसके पक्ष में है मैं समझ नहीं पा रहा

1120
01:20:03,400 --> 01:20:07,400
हूं निकाल ले क्या दसवा स्कंद 48

1121
01:20:07,400 --> 01:20:11,440
वा अध्याय और अच्छा मेंबर है

1122
01:20:11,440 --> 01:20:17,440
आप अब तो अपनी तरफ से होगा

1123
01:20:26,720 --> 01:20:31,520
अचिंत है सब कुछ जहां यह फसें वहां पर अचिंत है

1124
01:20:31,520 --> 01:20:34,720
और जहां

1125
01:20:34,720 --> 01:20:38,760
पर दीपक कुमार पूछ रहे हैं कि शिव

1126
01:20:38,760 --> 01:20:43,040
जीी भगवान है तो भस्मासुर के डर से

1127
01:20:43,040 --> 01:20:47,920
पहले तो आपका वही ठीक नहीं है लहजा नहीं तो आपका उत्तर दे देते

1128
01:20:47,920 --> 01:20:52,040
ईश्वर वही है जो कुछ भी कर सकता है तो वह डर के भी दिखा सकता

1129
01:20:52,040 --> 01:20:58,040
है

1130
01:21:00,880 --> 01:21:05,600
अच्छा अच्छा ठीक है

1131
01:21:05,600 --> 01:21:09,680
प्र सारे भेद तो खुले हुए हैं अब तो कुछ बचा ही नहीं

1132
01:21:09,680 --> 01:21:14,360
है ना खुलने को क्या है सर्वशक्तिमान ईश्वर परम स्वतंत्र मोक्ष और शाश्वत धर्म

1133
01:21:14,360 --> 01:21:18,360
शाश्वत धर्म उसमें आता हरि और हर के वेद में तो उस पर बात नहीं करनी है

1134
01:21:18,360 --> 01:21:22,360
हम लोग और इधर उधर की बात नहीं करते हैं ना कि कौन के मंदिरों

1135
01:21:22,360 --> 01:21:26,920
में क्या हो रहा है क्या नहीं हो रहा ये सब कुछ तित वो जाते हैं टारगेट

1136
01:21:26,920 --> 01:21:31,360
हम लोग ये नहीं करते जैसे कोई कहीं पर आया तो मैं उसको

1137
01:21:31,360 --> 01:21:35,800
चर्चा में यह कहूं कि क्यों वो तुम्हारे यहां व अध्यक्ष जो है वो पकड़े गए

1138
01:21:35,800 --> 01:21:40,160
इस तरह से बहुत गंदा वीडियो उनका वायरल हो रहा है और यह लोग क्या करते

1139
01:21:40,160 --> 01:21:44,880
इनके पास कुछ नहीं रह जाता है शंकराचार्य प्राण प्रतिष्ठा में क्यों नहीं गए

1140
01:21:44,880 --> 01:21:49,160
हालांकि वोह जो भाई साहब आए थे पिछली बार वो तो उनका तो अलग था मामला मगर बाकी

1141
01:21:49,160 --> 01:21:50,680
सब भी

1142
01:21:50,680 --> 01:21:54,800
उन्होंने सबने इस बात को लाने का प्रयास किया है जो स

1143
01:21:54,800 --> 01:21:59,040
कहीं भी आए हैं तो शंकराचार्य क्यों नहीं गए ये है वो है और

1144
01:21:59,040 --> 01:22:03,240
ये जबक लोगों से कह दें कि व पारंपरिक मंदिर

1145
01:22:03,240 --> 01:22:08,120
में मत जाना तो कोई दिक्कत नहीं

1146
01:22:08,120 --> 01:22:11,720
है

1147
01:22:11,720 --> 01:22:16,080
हम वो आएंगे नहीं वो कभी समय नहीं

1148
01:22:16,080 --> 01:22:20,200
देंगे बहुत संभव नहीं है ये कि वो हमें समय

1149
01:22:20,200 --> 01:22:25,840
दे द गुरुदेव ने एक बार कहा

1150
01:22:25,840 --> 01:22:28,320
था

1151
01:22:28,320 --> 01:22:32,840
अपने प्रवचन में उनको बरगला दो जिन्होंने ग्रंथों

1152
01:22:32,840 --> 01:22:37,800
का ना देखा हो यहां दाल नहीं

1153
01:22:37,800 --> 01:22:43,800
गलेगी वो वाली बात

1154
01:22:49,800 --> 01:22:54,000
है हम लोग इस तरह के काउंटर्स नहीं करते हैं कि

1155
01:22:54,000 --> 01:22:58,080
आज इतने सारे हमारे पास वीडियोस आए पर हमने अपने कोई पब्लिकली कहीं शेयर

1156
01:22:58,080 --> 01:23:02,600
नहीं किया कुछ नहीं किया क्योंकि हमारी जो

1157
01:23:02,600 --> 01:23:06,080
भाषा है वह सैद्धांतिक

1158
01:23:06,080 --> 01:23:10,120
है इतनी बार रामपाल वालों से चर्चा हुई है हमने कभी

1159
01:23:10,120 --> 01:23:14,560
वो जेल वाली चर्चा को वो नहीं बनाया

1160
01:23:14,560 --> 01:23:20,560
दे दीजिए भाई किसी को आना हो तो आ जाए लिंक दे दीजिए

1161
01:23:28,120 --> 01:23:32,960
लिंक दे दिया गया

1162
01:23:32,960 --> 01:23:37,320
है कोई लग नहीं रहा है वैसे जो आएगा

1163
01:23:37,320 --> 01:23:43,320
फेस कैम के साथ

1164
01:23:56,080 --> 01:24:02,080
सिद्धांत ही काफी

1165
01:24:03,920 --> 01:24:08,080
है किया था एजुकेशन उनका

1166
01:24:08,080 --> 01:24:12,160
बड़ा चल रहा है मामला तो वह क्यों आएंगे उनको कोई मतलब नहीं है ना उनकी

1167
01:24:12,160 --> 01:24:16,640
चीजें सेट

1168
01:24:16,640 --> 01:24:20,640
है एजुकेशन वालों को भी अप्रोच किया था एक

1169
01:24:20,640 --> 01:24:26,640
बार ई बात करिए आके उनकी चीज

1170
01:24:27,280 --> 01:24:32,240
ब्रह्मा कुमारी वाले समय नहीं देते हैं

1171
01:24:32,240 --> 01:24:37,040
वोह समय नहीं देते हैं जानते हैं कि

1172
01:24:37,040 --> 01:24:41,600
एक बार चर्चा हुई थी तो कैमरा बंद करवा के चर्चा की थी

1173
01:24:41,600 --> 01:24:47,600
आइए दीपक कुमार

1174
01:24:49,160 --> 01:24:53,240
जी निष्ठा पूर्वक

1175
01:24:53,240 --> 01:24:57,960
माता जी द्वारा प्राप्त हुआ हो पोषण युक्त आहार

1176
01:24:57,960 --> 01:25:03,960
तो आए और कबीर भगवान है सिद्ध

1177
01:25:04,080 --> 01:25:08,360
करें आइए दीपक जी

1178
01:25:08,360 --> 01:25:14,360
कोई आया

1179
01:25:14,960 --> 01:25:20,960
है आप तो आ चुके हैं नरेंद्र

1180
01:25:22,120 --> 01:25:27,440
जी क्या परिचय है आपका

1181
01:25:27,440 --> 01:25:32,040
परिचय दोबारा पूछ रहे हो हां मुझे याद नहीं है

1182
01:25:32,040 --> 01:25:36,160
सर मैं नरेंद्र हूं जी जयपुर से हूं और नास्तिक

1183
01:25:36,160 --> 01:25:40,280
नहीं हूं एनोट हूं जिसको हिंदी में कहते

1184
01:25:40,280 --> 01:25:44,640
हैं

1185
01:25:44,640 --> 01:25:49,080
अवादी सर मैं यह पूछ र हां जी

1186
01:25:49,080 --> 01:25:53,280
बोलिए मैं यह पूछ रहा हूं उस दिन मैंने आपसे पूछा

1187
01:25:53,280 --> 01:25:57,320
था नहीं मैंने नहीं कोई और कोई आदमी चर्चा कर

1188
01:25:57,320 --> 01:26:01,360
रहा था आपके साथ उसने ईश्वर के बारे में कुछ गलत

1189
01:26:01,360 --> 01:26:05,600
शब्द बोले थे हालांकि उसको कहने का उसका तरीका सही

1190
01:26:05,600 --> 01:26:09,840
नहीं था लेकिन उसका सवाल यह था कि क्या

1191
01:26:09,840 --> 01:26:14,080
ईश्वर अपराध करते हैं यह सवाल था उसका लेकिन उसने ठीक है वो गलत

1192
01:26:14,080 --> 01:26:18,920
तरीके से पेश किया आपने फिर बीच में हटाना पड़ उसको हा जी गल

1193
01:26:18,920 --> 01:26:23,320
जब कण कण में ईश्वर है तो जो अपराध कर रहा है उसके अंदर भी तो ईश्वर है

1194
01:26:23,320 --> 01:26:27,480
हा जीय उसका हा जी तो गलत व्यक्ति के रूप में ईश्वर

1195
01:26:27,480 --> 01:26:29,960
ही तो कर रहा

1196
01:26:29,960 --> 01:26:30,960
है

1197
01:26:30,960 --> 01:26:35,120
नहीं आप इसको थोड़ा एक्सप्लेन करेंगे कि अगर कोई गलत हो रहा है तो क्या वो भी ईश्वर ही कर रहे

1198
01:26:35,120 --> 01:26:39,720
हैं ईश्वर की मर्जी के बिना तो कुछ नहीं होता ना दुनिया में

1199
01:26:39,720 --> 01:26:43,800
बात इतनी है कि ईश्वर सर्वत्र समान रूप से

1200
01:26:43,800 --> 01:26:48,040
सर्वव्यापी है सब कुछ दुनिया में जो भी हो रहा है वो ईश्वर

1201
01:26:48,040 --> 01:26:52,240
ही कर रहा है मगर हम ईश्वर के उस रूप का अनुगमन करते

1202
01:26:52,240 --> 01:26:56,680
हैं पूजन करते हैं उनके पीछे पीछे चलते हैं

1203
01:26:56,680 --> 01:27:01,160
जो मोक्ष दायक कहा गया है वेदा दि शास्त्रों के द्वारा

1204
01:27:01,160 --> 01:27:05,600
जो वेदा दि शास्त्र सम्मत सीमाओं के अंदर रहकर के मोक्ष की बात करें

1205
01:27:05,600 --> 01:27:09,880
हम उसका अनुगमन करते हैं जैसे कि पानी सर्वत्र व्याप्त

1206
01:27:09,880 --> 01:27:13,960
है नमी के रूप में जी मगर हमारी प्यास

1207
01:27:13,960 --> 01:27:18,160
वो पानी बुझाता है जो हमारे व्यवहार की सीमा में हो

1208
01:27:18,160 --> 01:27:22,440
गिलास की सीमा में हो जो जिसके लिए हम व्यवहार कर सके

1209
01:27:22,440 --> 01:27:26,560
तो दुनिया में सर्वत्र सर्व ईश्व है मगर ईश्वर का वो रूप जो वेदों

1210
01:27:26,560 --> 01:27:30,640
के द्वारा मोक्ष दायक बनाया बताया गया है उसको हम अनुगमन

1211
01:27:30,640 --> 01:27:34,680
करते ठीक है तो सर आपका कहने का मीनिंग

1212
01:27:34,680 --> 01:27:38,760
यह हुआ कि जैसे अगर कोई आदमी मान लो कुछ गलत कर रहा है कोई आदमी की बात कर

1213
01:27:38,760 --> 01:27:43,040
रहा हूं कोई अपराध कर रहा है तो वो भी तो उस इंसान

1214
01:27:43,040 --> 01:27:46,200
के रूप में ईश्वर ही कर रहे हैं तो फिर उसको सजा क्यों मिलती

1215
01:27:46,200 --> 01:27:50,400
है तो उसको जो सजा देगा वो भी तो ईश्वर ही

1216
01:27:50,400 --> 01:27:54,480
देगा नहीं मेरा सवाल रूप

1217
01:27:54,480 --> 01:27:58,560
में जब हम उसे रोक रहे हैं तो वो भी तो ईश्वरी है

1218
01:27:58,560 --> 01:28:02,680
यह पार मर्थक सत्य है कि सब कुछ ईश्व है मगर व्यावहारिक सत्य क्या है

1219
01:28:02,680 --> 01:28:06,800
वह अलग है हम अलग है तो हम जो व्यवहार करते हैं व्यवहारिक

1220
01:28:06,800 --> 01:28:10,960
सत्य के अनुसार करते हैं जैसे कि पार मार्थी सत्य के पृथ्वी गोल

1221
01:28:10,960 --> 01:28:15,120
है मगर हम जो व्यवहार करते हैं व व्यावहारिक सत्य के अनुसार करते हैं

1222
01:28:15,120 --> 01:28:19,680
पायलट से आप पूछो पायलट का इंटरव्यू पड़ा है य पर क्या आप जब एरोप्लेन

1223
01:28:19,680 --> 01:28:24,360
उड़ा रहे होते आकाश में इसपे जा रहे होते तो आपको पृथ्वी गोल लगती है

1224
01:28:24,360 --> 01:28:28,680
करके उड़ाते हो या सीधे समझ के उड़ाते हो वो तो कहते सीधे

1225
01:28:28,680 --> 01:28:33,400
पायलट की जान पायलट की जानकारी जो धरती से ऊपर उड़ रहा

1226
01:28:33,400 --> 01:28:37,760
है हा सर जाते तो सीधी नजर आती है

1227
01:28:37,760 --> 01:28:42,480
सीध नजर आती हैलाइट य व्यवहारिक सत्य हो गया मान

1228
01:28:42,480 --> 01:28:46,720
जानते हैं कि वो पृथ्वी गोल है फिर भी उसके अनुसार व्यवहार नहीं करते

1229
01:28:46,720 --> 01:28:51,680
व्यवहार जो व्यवहारिक सत्ता प्राप्त है उसके अनुसार करते

1230
01:28:51,680 --> 01:28:55,760
अब यह बताइए मेरा आपसे एक प्रश्न है जी आप कहते हो कि आप

1231
01:28:55,760 --> 01:29:00,280
भगवान को नहीं मानते अवाद

1232
01:29:00,280 --> 01:29:01,280
सर

1233
01:29:01,280 --> 01:29:05,280
नहीं मानते ना हां 100 पर यकीन नहीं है कि

1234
01:29:05,280 --> 01:29:09,280
सच में है या नहीं अभी सब सबसे पहली बात

1235
01:29:09,280 --> 01:29:13,320
तो ये आ गई कि आपके

1236
01:29:13,320 --> 01:29:17,680
पास सामने खड़ी हुई तीन स्त्रियों में माता बहन और पत्नी में अंतर

1237
01:29:17,680 --> 01:29:20,880
करने का आधार क्या है

1238
01:29:20,880 --> 01:29:26,880
ईश्वर इसका मतलब मानते हो

1239
01:29:29,000 --> 01:29:33,440
हां आपका यह सवाल है ना इसम क्या है आदमी

1240
01:29:33,440 --> 01:29:38,120
कुछ भी बोले चा दोनों तरफ फसता है प्रॉब्लम य है

1241
01:29:38,120 --> 01:29:42,680
य कुछ ऐसे

1242
01:29:42,680 --> 01:29:47,560
होते आप अच्छे लगे आप जो क्लासेस में आया करिए

1243
01:29:47,560 --> 01:29:50,360
मेरा एक सवाल

1244
01:29:50,360 --> 01:29:54,600
है सवाल है जैसे नॉनवेज

1245
01:29:54,600 --> 01:29:58,920
नहीं खाना चाहिए मैं खाता भी नहीं हूं हमारे घर में कोई भी आदमी नॉनवेज नहीं खाता

1246
01:29:58,920 --> 01:30:02,960
है मैं खाता नहीं हूं ये बात मैं पहले बता रहा हूं अब मेरा

1247
01:30:02,960 --> 01:30:07,040
सवाल स्टार्ट करता हूं सवाल ये है कि जैसे हम दही भी खाते हैं

1248
01:30:07,040 --> 01:30:11,120
दही में भी बैक्टीरिया पानी पीते हैं पानी में बैक्टीरिया परमार्थ और

1249
01:30:11,120 --> 01:30:16,040
व्यवहार का अंतर है वहां आपको दिख रहा है ना क्योंकि वो मर रहा है कोई

1250
01:30:16,040 --> 01:30:20,440
और यहां पारिक दृष्टि से हो गई सूक्ष्म है वो दिख नहीं रहा

1251
01:30:20,440 --> 01:30:24,760
है इट्स ऑल अबाउट योर कॉन्शसनेस आपका

1252
01:30:24,760 --> 01:30:29,200
चित्त अशुद्ध होता है जितनी बार आप कोई कर्म करते हैं छिपाने

1253
01:30:29,200 --> 01:30:33,400
वाला तो आपके चित्त में दोष आता है आप व्यवहारिक संसार

1254
01:30:33,400 --> 01:30:37,640
में बंद जाते हैं आपकी जो प्रज्ञा शक्ति घटती है निर्णायक

1255
01:30:37,640 --> 01:30:41,960
क्षमता घटती है जितनी बार आप छुपाओ ग उतनी बार आपकी जो प्रज्ञा

1256
01:30:41,960 --> 01:30:45,960
शक्ति घटेगी तो इसलिए अगर हम देखे कि पेड़ भी तो

1257
01:30:45,960 --> 01:30:50,720
जीव है पेड़ भी जीव है बिल्कुल और

1258
01:30:50,720 --> 01:30:55,200
यह हमारे उसम भी आया है शास्त्रों में जी

1259
01:30:55,200 --> 01:30:57,880
मेरा मतलब जीव हत्या तो फिर भी हो रही है ना अगर हम

1260
01:30:57,880 --> 01:31:02,200
नॉनवेज तो मैं बता रहा हूं ना आपको कि व्यवहारिक

1261
01:31:02,200 --> 01:31:06,760
रूप से वहां पर नहीं दिख रहा है कि हम किसी को मार रहे हैं जब पेड़ काट रहे हैं व्यवहारिक

1262
01:31:06,760 --> 01:31:10,920
रूप से वहां पर दिख रहा है कि हम बकरे की जान ले रहे हैं तो वो जो बकरे

1263
01:31:10,920 --> 01:31:15,000
को जो कष्ट है जो कष्ट हो रहा है वोह एक अलग मैटर है

1264
01:31:15,000 --> 01:31:19,400
मगर हमने क्या किया कोई ऐसा काम किया जिसमें हमारे मन में छिपाने

1265
01:31:19,400 --> 01:31:25,280
का भाव आया आप बकरे को अपनी रसोई में काटोगे क्या

1266
01:31:25,280 --> 01:31:29,320
कहीं भी मैं रसोई क्य मैं तो खाता ही नहीं मैं तो कहीं भी नहीं कटू नॉर्मल

1267
01:31:29,320 --> 01:31:33,360
जो लोग नॉर्मली खाते भी हैं अगर एक कानून लागू कर दिया जाए कि

1268
01:31:33,360 --> 01:31:37,680
जानवर कसाई की दुकान से नहीं मिलेगा सबकी रसोइयों में

1269
01:31:37,680 --> 01:31:41,680
कटेगा तो जो मीट ईटिंग है नॉनवेज

1270
01:31:41,680 --> 01:31:45,880
का जो व हो रहा है कंजप्शन उसम बहुत गिरावट आ जाएगी क्योंकि

1271
01:31:45,880 --> 01:31:50,880
घर में काटना जानवरों को उतना आसान नहीं है मगर टमाटर

1272
01:31:50,880 --> 01:31:55,840
काटना गोभी काटना हिंडी काटना आसान

1273
01:31:55,840 --> 01:32:00,320
है सर आपका कहने का बाव अर्थ क्या है काटना आसान नहीं है

1274
01:32:00,320 --> 01:32:04,720
आसानी और ना आसानी से आप कहना क्या चाहते हो मैं बता रहा हूं

1275
01:32:04,720 --> 01:32:09,000
जी जो जब हम कोई भी कार्य करते हैं ना छिपाने वाला

1276
01:32:09,000 --> 01:32:13,240
तो उस उसके चि में दोष उत्पन्न होते हैं तो इस दृष्टि

1277
01:32:13,240 --> 01:32:17,360
से छिपाने वाले कार्यों पर या तो लगाम लगाई गई है

1278
01:32:17,360 --> 01:32:21,840
और या फिर कहीं कहीं पर निषेध ही कर दिया गया निषिद्ध कर दिया गया है

1279
01:32:21,840 --> 01:32:25,920
तो जो मासा हार इत्यादि है के बारे में यह है कि अमुक अमुक

1280
01:32:25,920 --> 01:32:30,120
स्थितियों से उभरने के लिए प्राण रक्षा के निमित्त

1281
01:32:30,120 --> 01:32:34,360
या विषम परिस्थितियों में जब अंतिम विकल्प ही वो हो तो उसका

1282
01:32:34,360 --> 01:32:40,360
उपयोग अमुक अमुक विधि से ही कर सकते हैं वहां भी

1283
01:32:45,520 --> 01:32:49,760
अविधिकता गए ना कि ऐसा कर वैसा कर पूरा सुबह से शाम

1284
01:32:49,760 --> 01:32:54,080
कर यह चित्त में दोष को कम से कम करने की प्रक्रिया है

1285
01:32:54,080 --> 01:32:58,320
कि आपके मन में छिपाने वाला भाव कम से कम उत्पन्न हो

1286
01:32:58,320 --> 01:33:02,360
जितना ज्यादा व्यक्ति छिपाए उतना ज्यादा उसके जीवन से ईश्वर

1287
01:33:02,360 --> 01:33:06,640
दूर होता जाएगा जैसे कि फॉर एग्जांपल

1288
01:33:06,640 --> 01:33:10,760
इसका एक उत्कृष्ट उदाहरण ले ले कि जैसे कोई

1289
01:33:10,760 --> 01:33:15,720
भगवान को मानने वाला व्यक्ति है बहुत श्रद्धा है ठीक है

1290
01:33:15,720 --> 01:33:19,960
और वो राम भगवान का बड़ा भक्त है और वो जा रहा

1291
01:33:19,960 --> 01:33:25,000
डकती डालने रास्ते में उसको भगवान की मूरत दिख

1292
01:33:25,000 --> 01:33:29,280
गई उससे वो अपनी नजरें

1293
01:33:29,280 --> 01:33:30,360
चुराए

1294
01:33:30,360 --> 01:33:34,840
छुपाए तो क्या हुआ भगवान का भक्त था मगर फिर भी

1295
01:33:34,840 --> 01:33:38,960
उस समय के लिए उसकी भगवान से दूरी बनी

1296
01:33:38,960 --> 01:33:43,320
क्योंकि वह ऐसा काम करने जा रहा है जितने भी ऐसे काम हैं जिनको

1297
01:33:43,320 --> 01:33:47,440
करते समय आपके मन में छिपाने का भाव आता है उस उसी पर काम किया गया

1298
01:33:47,440 --> 01:33:51,480
है पूरी दुनिया में जितने भी जो ये चीजें बनी है

1299
01:33:51,480 --> 01:33:55,720
ना अच्छाई और बुराई इसके डीप में आप जाओगे अच्छाई और बुराई तो छिपाना

1300
01:33:55,720 --> 01:34:00,080
और ना छिपाना है शाकाहार को बिना छिपाए एक्सेप्ट

1301
01:34:00,080 --> 01:34:04,120
कर लिया गया साकार को एक्सेप्ट कर लिया गया कोई वो

1302
01:34:04,120 --> 01:34:08,120
नहीं है दिक्कत आराम से ले सकते हैं क्यों क्योंकि हमें जब हम पेड़ को काटते

1303
01:34:08,120 --> 01:34:12,200
हैं या इसको काटते तो व्यावहारिक रूप से हमें नहीं दिखता कि हम किसी की जान ले रहे हैं

1304
01:34:12,200 --> 01:34:16,320
मगर जब हम बकरे को काटते हैं तो पूरी दुनिया से छिपाए या ना छिपाए कम

1305
01:34:16,320 --> 01:34:20,440
से कम बकरे से तो छुपा के ही उसको काटा जाता है सर

1306
01:34:20,440 --> 01:34:25,160
आपकी छिपाने ना छिपाने वाली तो ठीक है बात समझ आती है

1307
01:34:25,160 --> 01:34:29,240
लेकिन जब किसी दही को खाते हैं भले ही वो आंखों

1308
01:34:29,240 --> 01:34:33,320
से उस टाइम दिखाई नहीं देते तड़पते हुए मरते हुए मैं आपको वही तो

1309
01:34:33,320 --> 01:34:37,360
कह रहा हूं आपको मैंने कहा क्या व्यावहारिक सत्य ये है

1310
01:34:37,360 --> 01:34:41,360
कि वहां पर हमें नहीं पता हमें नहीं मालूम है हमारी जानकारी में हम

1311
01:34:41,360 --> 01:34:45,480
किसी को मार नहीं रहे यह व्यवहारिक सत्य है और उसमें सूक्ष्म

1312
01:34:45,480 --> 01:34:49,560
सत्य है कि उसमें भी कुछ है सूक्ष्म सत्य वैसा

1313
01:34:49,560 --> 01:34:54,120
ही हो गया जैसे पृथ्वी गोल है मगर व्यवहार में चपटी

1314
01:34:54,120 --> 01:34:58,760
तो हम जो व्यवहारिक सत्य है उसके अनुसार अपना कर्म कर रहे हैं

1315
01:34:58,760 --> 01:35:03,120
तो कहने का मतलब जो चीज नजर आ जाए गलत होता हुआ दिख जाए

1316
01:35:03,120 --> 01:35:07,320
वह गलत ना करो और जिसमें नजर ना आए वह कर सकते हैं क्या आपका यह मतलब

1317
01:35:07,320 --> 01:35:12,000
है जिसमें नजर नहीं आ रहा वो गलत कहां से रहा

1318
01:35:12,000 --> 01:35:16,040
नहीं लेकिन ज्ञान तो है ना अपने को कि कुछ ना कुछ गलत हो रहा है अपने को

1319
01:35:16,040 --> 01:35:20,280
नजर नहीं आ रहा लेकिन रियल में गलत हो रहा है तेरे लिए

1320
01:35:20,280 --> 01:35:23,920
कर्तव्य और अकर्वेंट

1321
01:35:23,920 --> 01:35:28,080
प्रमाण है हमारी जो नजर होती है वो फ्लकचुएट होती है सनातन

1322
01:35:28,080 --> 01:35:32,080
दृष्टिकोण नहीं होता हमारा हम अपने हिसाब से चीजों को देखते

1323
01:35:32,080 --> 01:35:36,280
हैं हम कहीं खड़े हैं वही जो लाल दिख रहा है दूसरी ओर से पीला

1324
01:35:36,280 --> 01:35:40,560
दिखेगा तो इसलिए जो थर्ड पॉइंट ऑफ व्यू है ईश्वर के द्वारा प्रदत

1325
01:35:40,560 --> 01:35:44,560
है जो थर्ड पॉइंट ऑफ व्यू उसके अनुसार पूरी

1326
01:35:44,560 --> 01:35:48,600
जो चीज है वह दिखाई जा रही है तो आपको बता दिया गया है कि दही को खाना

1327
01:35:48,600 --> 01:35:52,800
गलत नहीं है उससे आपके चित्त में दोष नहीं आएगा आपको आता

1328
01:35:52,800 --> 01:35:57,160
है क्या आपको दिक्कत होती है क्या दही खाते

1329
01:35:57,160 --> 01:36:01,320
टाइम नहीं यह बात तो बकरे वाले भी बोलते हैं कि बकरे खाते टाइम

1330
01:36:01,320 --> 01:36:05,320
दिक्कत नहीं होती होती है दिक्कत मैं बता तो रहा हूं आप उनको जो

1331
01:36:05,320 --> 01:36:09,320
है बकरा जो कटवा रहे हो कसाई में पर्दा लगा के पर्दा लगा के

1332
01:36:09,320 --> 01:36:13,440
काट रहा है ना कसाई कसाई कैसे काट रहा है हम लोग कभी स्पेंसर

1333
01:36:13,440 --> 01:36:17,960
में आप जाओ क्या ऐसे होता है क्या मल होते है जहां पर मीट मिलता है

1334
01:36:17,960 --> 01:36:22,040
क्या वहां पर ऐसा होता है खड़े हैं बकरे कचा कच कचा कच वही भीड़ के बीच में कट रहे

1335
01:36:22,040 --> 01:36:26,360
हैं नहीं कहीं से कट कुटा

1336
01:36:26,360 --> 01:36:31,040
के पैकिंग करके वह आता है तब जो है उसको काटा जाता है

1337
01:36:31,040 --> 01:36:35,160
तब जो है उसको बेचा जाता है मतलब जो मीट ईटिंग हो रही

1338
01:36:35,160 --> 01:36:38,920
है ना बहुत ज्यादा नॉनवेज को ग्रहण कर रहा है व्यक्ति उसका कारण यह है

1339
01:36:38,920 --> 01:36:42,920
कि उसको बहुत सुलभ तरीके से उपलब्ध कराया जा रहा है सुलभता

1340
01:36:42,920 --> 01:36:46,960
ले आए अगर वह सुलभता कम कर दे और यह सब हो जाए मुर्गा घर

1341
01:36:46,960 --> 01:36:51,040
में ही काटो बकरा घर में ही काटो बहुत गिरावट आ जाएगी बहुत ही

1342
01:36:51,040 --> 01:36:55,360
बड़े हत्यारे टाइप के होंगे जो बिल्कुल दया या नहीं होगी वही बचेंगे फिर

1343
01:36:55,360 --> 01:36:59,680
बहुत गिरावट आ जाएगी नहीं घर पर ही काटना है कसाई नहीं काटेगा दूसरा

1344
01:36:59,680 --> 01:37:03,920
नहीं काटेगा छिपकर नहीं काटेगा अच्छा आप देखो मुस्लिम्स की बात देख लो

1345
01:37:03,920 --> 01:37:08,080
मुस्लिम्स के यहां पर आप कहते हो कि नहीं नहीं वो तो कह देते कि हमारे हम तो वो नहीं आता

1346
01:37:08,080 --> 01:37:12,280
उनके यहां पर शाकाहार और मासा आर में अंतर क्यों किया गया

1347
01:37:12,280 --> 01:37:16,560
बिस्मिल्लाह करके क्यों काटना है भाई वैसे ही जैसे तरकारी

1348
01:37:16,560 --> 01:37:21,240
काट रहे हो वैसे ही काटो ना उसको क्यों अंतर है वहां

1349
01:37:21,240 --> 01:37:25,520
इसका मतलब वहां पर कोई दिक्कत है ना टमाटर काटते

1350
01:37:25,520 --> 01:37:29,680
हुए तो आपको नहीं कहा गया आयत पढ़ केही काटना ऐसे ऐसे काटना मगर वहां

1351
01:37:29,680 --> 01:37:33,760
पर कहा गया कि ऐसे ऐसे करना विधि क्यों दी गई जब वोह दोनों चीजें समान

1352
01:37:33,760 --> 01:37:37,880
है साकार और मासा हार में अंतर नहीं है तो मासा हार के लिए विधि क्यों

1353
01:37:37,880 --> 01:37:43,120
है

1354
01:37:43,120 --> 01:37:47,560
एक्स्ट्रा सर आपने सवाल का जवाब तो दे दिया लेकिन मजा नहीं आया

1355
01:37:47,560 --> 01:37:52,040
मेरा मतलब वो आप ये कह रहे हो कि कोई चीज दिख रही है

1356
01:37:52,040 --> 01:37:56,400
चलो ठीक है मैं आपकी क्लास मैंने आपको ये बताया कि जब भी हमारे

1357
01:37:56,400 --> 01:38:00,600
मन में छिपाने वाला भाव उत्पन्न होता है तो उससे हमारे चित्त

1358
01:38:00,600 --> 01:38:04,640
में दोष उत्पन्न होता है हम तो इसलिए

1359
01:38:04,640 --> 01:38:08,640
हमें उन कामों को करने से रोका जाता है जिससे छिपाने का भाव उत्पन्न

1360
01:38:08,640 --> 01:38:12,800
हो जैसे कि झूठ बोलना झूठ बोल रहे हैं तो इसका मतलब हम छुपा रहे हैं

1361
01:38:12,800 --> 01:38:17,040
चोरी करना छिपा रहे हैं अब आप इसको

1362
01:38:17,040 --> 01:38:21,120
भी देख लीजिए व्यभिचार जब हम इलीगल संभोग

1363
01:38:21,120 --> 01:38:25,240
करते हैं अ अवैध संभोग के लिए मनुष्य प्रवृत होता है

1364
01:38:25,240 --> 01:38:30,200
तो वहां क्या है चार जनों से छिपा रहा है मगर वहीं पर विवाह कर रहा है

1365
01:38:30,200 --> 01:38:34,600
तो क्या हो रहा है बैंड बज रहा है सबको बता रहा

1366
01:38:34,600 --> 01:38:38,800
है हुआ ना तो यह छिपाने और ना छिपाने

1367
01:38:38,800 --> 01:38:43,280
पर सब कुछ है अच्छा एक आखरी

1368
01:38:43,280 --> 01:38:48,360
सवाल क्या जो लोग ईश्वर की पूजा करते

1369
01:38:48,360 --> 01:38:52,520
हैं उनके साथ में क्या कभी कोई

1370
01:38:52,520 --> 01:38:56,560
चमत्कार जैसी चीज होती है जैसे कोई बीमार था मंदिर गया या पूजा की और वो

1371
01:38:56,560 --> 01:38:58,520
ठीक हो गया ऐसी घटना जरूरी

1372
01:38:58,520 --> 01:39:02,840
नहीं कि मरीज ही ठीक हो मेरा मतलब जैसे किसी के घर में किसी

1373
01:39:02,840 --> 01:39:07,760
हा जी चमत्कार होता है बिल्कुल होता है सर

1374
01:39:07,760 --> 01:39:12,280
तो क्या इसका कहीं पर प्रूफ मिल सकता है मतलब सुनी सुनाई बात ना हो

1375
01:39:12,280 --> 01:39:17,560
प्रूफ हो ठोस हो मान य है बात ये

1376
01:39:17,560 --> 01:39:22,400
है आपकी अभी बात मतलब आपकी क्या है कि अभी जो

1377
01:39:22,400 --> 01:39:27,400
आप मतलब सही लाइन पर जा रहे हो मगर कुछ चीजें है जो बेसिस आपको क्लियर करने

1378
01:39:27,400 --> 01:39:31,480
चाहिए की नजर में जो प्रूफ है पडि

1379
01:39:31,480 --> 01:39:35,880
मैटर ये करता है वो क्या मानते हो आप क्या प्रूफ है जैसे आपने मुझसे पूछा

1380
01:39:35,880 --> 01:39:39,880
कि मेरा नाम शिवांश नारायण द्विवेदी है अब इसको मुझे सिद्ध करना

1381
01:39:39,880 --> 01:39:44,120
है तो मैं कैसे सिद्ध करूंगा

1382
01:39:44,120 --> 01:39:48,400
कैसे सिद्ध करूंगा कैसे सर सर दवारा बताओगे

1383
01:39:48,400 --> 01:39:52,600
मैंने कहा मेरा नाम शिवांश नारायण द्विवेदी है जी

1384
01:39:52,600 --> 01:39:56,680
अब इसको आप कहोगे प्रूफ करो प्रूफ के साथ बताओ तो कैसे आपसे

1385
01:39:56,680 --> 01:40:00,840
आपसे मैं पूछ रहा हूं आपने क्या नाम बताया अपना नरेंद्र कुमार

1386
01:40:00,840 --> 01:40:05,000
हा अब मुझे आप सिद्ध करो सर एक्चुअल में सिद्ध

1387
01:40:05,000 --> 01:40:09,640
करने के लिए कोई भी टूल्स नहीं है कोई भी चीज नहीं है

1388
01:40:09,640 --> 01:40:13,640
बता विश्वास ना करने पर आ जाऊ अगर मैं

1389
01:40:13,640 --> 01:40:17,680
आपकी बताई हुई चीजों पर विश्वास ना करने पर आ जाऊ तो मुझे

1390
01:40:17,680 --> 01:40:21,720
आप अपना नाम अपने पिता का नाम अपनी माता जी का नाम अपने

1391
01:40:21,720 --> 01:40:26,200
घर का एड्रेस ये सब भी सिद्ध कर सकते नहीं नहीं हो सकता

1392
01:40:26,200 --> 01:40:30,280
क्यों आप मान लो ज्यादा से ज्यादा क्या करोगे सरकारी पेपर ही तो दिखा

1393
01:40:30,280 --> 01:40:34,320
दोगे ये देखो वोटर आईडी फिर मैं आपसे

1394
01:40:34,320 --> 01:40:38,400
पूछूंगा हा मैं आपसे पूछूंगा क्या नकली बनते हैं कि नहीं बनते हैं एक

1395
01:40:38,400 --> 01:40:42,560
आतंकवादी कैसे देश में घुसता है फिर बनते हैं नकली बन

1396
01:40:42,560 --> 01:40:46,640
जाते इट कैन बी पॉसिबल दूसरी बात यही वोटर आईडी

1397
01:40:46,640 --> 01:40:50,720
लेकर के आप एज इट इज इंग्लैंड चले जाइए वहां आप कहिए मेरा

1398
01:40:50,720 --> 01:40:55,200
नाम दिनेश कुमार है तोव टर आईडी जो है

1399
01:40:55,200 --> 01:40:59,600
मान्य नहीं होगी उनको तो उन्हीं के हिसाब का पहचान पत्र चाहिए

1400
01:40:59,600 --> 01:41:03,960
तो क्या हुआ यह सब जो यह सब जो आपके पैरामीटर्स है ना विश्वास करने

1401
01:41:03,960 --> 01:41:08,280
और ना करने के यह पैरामीटर शाश्वत नहीं है

1402
01:41:08,280 --> 01:41:12,720
एक स्टार्टिंग पॉइंट हमें लेना ही पड़ेगा जिसको शब्द प्रमाण कहते हैं

1403
01:41:12,720 --> 01:41:16,720
वह हमारा लेना ही पड़ेगा तभी यह दुनिया एक सेकंड चल रही है य दुनिया

1404
01:41:16,720 --> 01:41:20,920
एक सेकंड नहीं खिसके आपने दुकान पर आप गए कि कोलगेट

1405
01:41:20,920 --> 01:41:25,000
दे दो उसने कोलगेट लिखा हुआ आपको दिया मगर यह जरूरी

1406
01:41:25,000 --> 01:41:29,920
नहीं है कि उसके अंदर कोलगेट हो आपको विश्वास है उसम कोलगेट

1407
01:41:29,920 --> 01:41:33,960
विश्वास तो इसी तरीके से यह विश्वास पर है

1408
01:41:33,960 --> 01:41:38,600
बहुत सारे अच्छे अच्छे लोग कहते हुए मिल जाएंगे मेरे साथ चमत्कार मगर आप नकार दोगे और

1409
01:41:38,600 --> 01:41:42,680
बिना अच्छे लोगों के कोई कोई बात आप स्वीकार कर लोगे बहुत

1410
01:41:42,680 --> 01:41:46,800
सी चीज दुनिया में आपने ऐसे ही स्वीकार कर ली होंगी किसी ने कहा होगा अच्छा

1411
01:41:46,800 --> 01:41:50,880
पैकेट है बिस्किट का ले जाओ खा लो आपने विश्वास कर लिया सर

1412
01:41:50,880 --> 01:41:54,880
देखो अच्छा पैकेट वाला वो इसलिए स्वीकार करते क्योंकि दुनिया में मैंने बहुत

1413
01:41:54,880 --> 01:41:59,160
सारे अच्छे पैकेट देख रखे हैं अब जैसे मान लीजिए

1414
01:41:59,160 --> 01:42:04,000
मिट यानी कि आपका कहने का मतलब है आप तर्क परही विश्वास करते हैं

1415
01:42:04,000 --> 01:42:08,040
जी बिल्कुल ठीक है आपके एक मिनट

1416
01:42:08,040 --> 01:42:12,320
मैं आपको तक खत्म कर देता हूं आपके माता पिता ने आपको मान लीजिए

1417
01:42:12,320 --> 01:42:17,200
सिखाया कि बहन के साथ कुदृष्टि मत डालना सर वही

1418
01:42:17,200 --> 01:42:21,240
अब इसमें तर्क क्या है बताइए य तो वही एग्जांपल आ

1419
01:42:21,240 --> 01:42:25,280
गया इस प्र प्रैक्टिकल करके देखोगे इसमें

1420
01:42:25,280 --> 01:42:29,520
पहले कि नहीं मैं पहले जान लू गलत होता है कि नहीं या विश्वास कर लोगे

1421
01:42:29,520 --> 01:42:33,560
देखो वो तो वही बात आ जाती है ना कि जिस माहौल में पले बड़े

1422
01:42:33,560 --> 01:42:37,560
हैं जहा के जिस चीज को संस्कार के रूप में सभी आपको

1423
01:42:37,560 --> 01:42:41,720
ये नहीं लगता है कि ये सही चीज है सर

1424
01:42:41,720 --> 01:42:44,960
सही तो लगता ही है ये क्या है उस टॉपिक प

1425
01:42:44,960 --> 01:42:49,000
जाने के बाद आदमी कुछ भी बोले वो दोनों तरफ एक तरफ तो ये हो जाता है लोग

1426
01:42:49,000 --> 01:42:53,200
क्या कहेंगे आप मैं आपको ये बताना चाह रहा हूं

1427
01:42:53,200 --> 01:42:57,240
ने भी अपने जीवन में बिना तर्क के चीजें बानी है विश्वास

1428
01:42:57,240 --> 01:43:01,360
किया है तो विश्वास पर य दुनिया चलती है अगर हमसे कहा गया

1429
01:43:01,360 --> 01:43:05,600
नाया सुनिए हमसे कहा गया ना कि दुनिया में बरमूडा ट्रायंगल है

1430
01:43:05,600 --> 01:43:09,800
हमने उसके बारे में कोई तहकीकात नहीं की हमने जिन लोगों से जाना उन पर विश्वास कर

1431
01:43:09,800 --> 01:43:14,720
लिया बहुत सी ऐसी चीज जो हमने विश्वास की

1432
01:43:14,720 --> 01:43:19,000
नहीं बहुत सारी विश्वास तो की मैं

1433
01:43:19,000 --> 01:43:23,120
एपल से अगर आप किसी के कहने पर किताब में

1434
01:43:23,120 --> 01:43:27,160
छाप देने पर यह मान लेते हो कि भाई बर्मुडा ट्रायंगल है दुनिया में बहुत सी

1435
01:43:27,160 --> 01:43:31,200
ऐसी चीज है जो हम ऐसे ही मान लेते लिखी हुई तो फिर हम यह

1436
01:43:31,200 --> 01:43:35,240
क्यों नहीं मान सकते जब हमारे गुरुजन जो हमारे परंपरा प्राप्त आचार आचार्य

1437
01:43:35,240 --> 01:43:39,320
गण हमारे मां बाप हमारी वंश परंपरा जो शब्द प्रमाण हमें मिल रहा है वहां पर हम

1438
01:43:39,320 --> 01:43:43,320
तर्क क्यों कर रहे हैं शब्द प्रमाण प

1439
01:43:43,320 --> 01:43:48,080
दुनिया एक सेकंड बा होती है तर्क करना तो अच्छी बात होती है

1440
01:43:48,080 --> 01:43:52,080
नहीं अच्छी बात है मगर आप सिर्फ तर्क पर चलते हैं

1441
01:43:52,080 --> 01:43:56,200
ऐसा नहीं है मैं आपको बता रहा हूं वो देखो आप मैं अने

1442
01:43:56,200 --> 01:44:00,040
उस दिन मैं आपको ये क्यों बता रहा हूं क्योंकि आपने मुझसे ये कहा

1443
01:44:00,040 --> 01:44:04,440
कि चमत्कार किसी के साथ हुआ इसका मुझे प्रमाण दो अब

1444
01:44:04,440 --> 01:44:09,240
किसी के साथ हुआ मैंने आपको कह दिया भाई मेरे साथ प्रमाण हुआ आप नहीं मानोगे इसको

1445
01:44:09,240 --> 01:44:13,240
क्योंकि मेरी जो वाणी है आपके लिए प्रमाण नहीं है मगर आपके मां-बाप की वाणी आपके लिए

1446
01:44:13,240 --> 01:44:17,480
प्रमाण थी जिसने कहा कि बहन के ऊपर को दृष्टि मत डालना वो प्रमाण

1447
01:44:17,480 --> 01:44:21,520
थी वो अच्छी बात नहीं होती तो ये जो आपका प्रमाण मांगना

1448
01:44:21,520 --> 01:44:25,520
है ये तरीका ही गलत है क्योंकि जब आप

1449
01:44:25,520 --> 01:44:30,000
प्रमाण मांग रहे हो तो प्रमाण डिपेंड इस पर करता है कि

1450
01:44:30,000 --> 01:44:34,040
आप किसको प्रमाण मानते हो मैं आपको प्रमाण के रूप में क्या दूंगा

1451
01:44:34,040 --> 01:44:38,280
नहीं जैसे सर वो तो मैं आपकी बात समझ गया मेरा सवाल समझिए किसी

1452
01:44:38,280 --> 01:44:42,480
आदमी ने यह कहा कि मैं मंदिर गया और मेरी यह बीमारी ठीक हो गई

1453
01:44:42,480 --> 01:44:46,720
अब उसका प्रमाण तो मिलना चाहिए ना उसकी कोई डॉक्टर की पहले वाली रिपोर्ट और अब वाली रिपोर्ट

1454
01:44:46,720 --> 01:44:50,720
अब तो मैंने आपको डॉक्टर की रिपोर्ट दे दी ठीक है डॉक्टर की

1455
01:44:50,720 --> 01:44:55,400
रिपोर्ट डॉक्टर सची रिपोर्ट लिखते झूठी नहीं बनवा सकता उस पर शक नहीं हो

1456
01:44:55,400 --> 01:44:59,720
सकता ऐसा है मैं आपको दिलवा दूंगा मगर मैं

1457
01:44:59,720 --> 01:45:03,920
मैं इस चीज पर लड़ रहा हूं कि ये कुतर्क है आपको ये समझाना चाह रहा हूं

1458
01:45:03,920 --> 01:45:08,600
ऐसे भी प्रमाण है जो आपको मान लिया सर इस

1459
01:45:08,600 --> 01:45:12,760
बता रहा हूं मैं आपको बता रहा हूं यह कुतर्क इसलिए है कि एक ना एक जगह

1460
01:45:12,760 --> 01:45:15,280
आपको विश्वास ही करना पड़ेगा

1461
01:45:15,280 --> 01:45:19,400
भाई जब मैं आपको रिपोर्ट दूंगा कि पहले ऐसी रिपोर्ट थी अब ऐसी रिपोर्ट है उस रिपोर्ट

1462
01:45:19,400 --> 01:45:23,440
पर आप विश्वास ही तो कर रहे हो आप जब तक वहां खड़े नहीं हो पहले

1463
01:45:23,440 --> 01:45:27,560
इसकी यह हालत थी अब यह हालत है अपनी आंखों से प्रत्यक्ष होकर नहीं देखा

1464
01:45:27,560 --> 01:45:31,840
किसी की वाणी पर तो भरोसा कर रहे हो आप रिपोर्ट

1465
01:45:31,840 --> 01:45:36,240
वाली बात छोड़ दीजिए हा आप जो आदमी

1466
01:45:36,240 --> 01:45:40,400
आज से 10 साल पहले मंदिर जाने लगा आज भी मंदिर ही जा रहा है और वहीं

1467
01:45:40,400 --> 01:45:44,400
का वही खड़ा है तो वो भी तो हमारे लिए प्रमाण है कि उसने कोई प्रोग्रेस नहीं

1468
01:45:44,400 --> 01:45:48,480
की आपको इसके लिए बता देता हूं साइंस के तरीके से बता देता हूं एक

1469
01:45:48,480 --> 01:45:52,600
आदमी ने जिम जवाइन की ठीक है और उसका वेट

1470
01:45:52,600 --> 01:45:56,800
था 12 केजी फैट लॉस के लिए उसने जिम जवाइन की वो

1471
01:45:56,800 --> 01:46:00,960
जिम में आया बोला सर मुझे जो है फिट कर दो मुझे बॉडी बना दो मेरी यह कर दो वो

1472
01:46:00,960 --> 01:46:05,080
कर दो ठीक है भाई कर देंगे वह वर्कआउट करता है डेली आता है 10 साल

1473
01:46:05,080 --> 01:46:09,240
हो गए डेली आता है एक किलो वजन कम नहीं हुआ

1474
01:46:09,240 --> 01:46:13,440
तो इसका मतलब यह है कि जो पूरी थ्योरी है वेट लॉस की वो गलत

1475
01:46:13,440 --> 01:46:17,960
है साइंस की या यह है कि केवल जिमाने से काम नहीं चलेगा

1476
01:46:17,960 --> 01:46:22,040
यह भी देखना पड़ेगा कि उसके जेनेटिक्स क्या कहते हैं यह भी देखना पड़ेगा

1477
01:46:22,040 --> 01:46:26,760
कि वो बाहर जाक के क्या खा पी रहा है उसकी लाइफ स्टाइल कैसी है जब ओवरऑल

1478
01:46:26,760 --> 01:46:31,440
सारी चीजें होंगी तब जाकर के रिजल्ट

1479
01:46:31,440 --> 01:46:35,520
मिलेगा अब आप मान लोगे साइंस की थ्योरी है इसली

1480
01:46:35,520 --> 01:46:39,840
मान लोगे सर आप है ना

1481
01:46:39,840 --> 01:46:44,040
तो कोई तो ऐसा हो इस पूरी दुनिया में मैं भक्त नहीं हूं मैं तो नास्तिक

1482
01:46:44,040 --> 01:46:48,200
हूं पूरी दुनिया में कर नहीं आपने अभी थोड़ी देर पहले माना है कि मैं अपनी

1483
01:46:48,200 --> 01:46:52,360
बहन को माता को पत्नी को अंतर इसलिए करता हूं क्योंकि मैं ईश्वर को मानता हूं

1484
01:46:52,360 --> 01:46:56,800
नास्तिक मेरा मेरा मतलब समझिए मेरा पूरी बात

1485
01:46:56,800 --> 01:47:01,000
सुनिए मैं पापी हूं अब पापी कह फिर आप क आप पाप करते हो

1486
01:47:01,000 --> 01:47:05,360
अपने बात को रिप्रेजेंट करने के लिए किसी ना किसी शब्द का तो इस्तेमाल करना ही पड़ेगा

1487
01:47:05,360 --> 01:47:09,360
नास्तिक बोलूंगा तो आप कहोगे नास्तिक तो मैं आपको दे दूंगा मुझे व

1488
01:47:09,360 --> 01:47:13,480
करिएगा मैं बहुत सारी थ्योरी दे दूंगा जहा चमत्कार हुआ है एक

1489
01:47:13,480 --> 01:47:17,640
सेकंड सर मेरी बात पूरी कर लेने दीजिए मैं पापी हूं मैं भक्ति

1490
01:47:17,640 --> 01:47:22,000
नहीं करता ठीक है लेकिन जो व्यक्ति मेरे इर्दगिर्द रहते

1491
01:47:22,000 --> 01:47:26,040
हैं जिनको मैं अच्छे से जानता हूं बचपन से जानता आया हूं मेरे जो साथ

1492
01:47:26,040 --> 01:47:30,240
पड़े हुए है मैंने आपको बताया ना कोई व्यक्ति जिम जा रहा है पूरी

1493
01:47:30,240 --> 01:47:34,320
डाइट अच्छी ले रहा है मगर उसके जेनेटिक्स खराब है उसको जो शरीर मिला

1494
01:47:34,320 --> 01:47:38,320
है उसके अनुवांशिकता में ही उसको जो है थायराइड मिल गया बीपी मिल

1495
01:47:38,320 --> 01:47:42,360
गया शुगर मिल गया वो प्रोटीन फैट और कार् प खूब काम कर रहा है कि पूरे

1496
01:47:42,360 --> 01:47:46,360
दिन की मेरी कैलोरी कितनी है मेरे प्रोटीन कितना है प्रोटीन

1497
01:47:46,360 --> 01:47:46,860
से

1498
01:47:46,520 --> 01:47:50,520
एक कैलोरी एक ग्राम प्रोटीन में चार कैलोरी आती है

1499
01:47:50,520 --> 01:47:54,760
तो पूरे दिन में मुझे कितना प्रोटीन से कैलोरी कितनी फैट से कैलोरी लेनी

1500
01:47:54,760 --> 01:47:58,840
है म आपका मतलब य केवल पूजा

1501
01:47:58,840 --> 01:48:03,120
से कुछ नहीं मिलेगा पूजा के साथ साथ बहुत सार सब कुछ केवल

1502
01:48:03,120 --> 01:48:07,360
भक्ति नहीं केवल ज्ञान नहीं केवल कर्म नहीं ज्ञान भक्ति और कर्म

1503
01:48:07,360 --> 01:48:11,440
तीनों का मिलाकर के फायदा होगा ना तीनों का मिला

1504
01:48:11,440 --> 01:48:15,520
कर के फायदा होगा ना ज्ञान भक्ति और कर्म भक्ति क्या

1505
01:48:15,520 --> 01:48:19,920
है ज्ञान के भी उसमें चलती है और कर्म के भी कर्म में भी चलती है

1506
01:48:19,920 --> 01:48:24,600
तो केवल ज्ञान नहीं केवल कर्म नहीं ज्ञान कर्म दोनों मिलाकर के इंटरडिपेंडेंट

1507
01:48:24,600 --> 01:48:28,760
है ये चीज जैसे केवल गुरु नहीं केवल गोविंद नहीं केवल ग्रंथ नहीं

1508
01:48:28,760 --> 01:48:32,920
गुरु गोविंद और ग्रंथ जब इन तीनों का सामंजस्य होगा तब धर्म

1509
01:48:32,920 --> 01:48:37,120
की स्थापना होगी इंटरडिपेंडेंट है अब मालूम पड़ा हमें गुरु तो परंपरा प्राप्त

1510
01:48:37,120 --> 01:48:41,280
मिल गया परंपरा से है मगर उसके अनुसार बताया

1511
01:48:41,280 --> 01:48:45,400
जाने वाला जो ईश्वर है व सच्चिदानंद है ही नहीं सर्वशक्तिमान है ही नहीं तो

1512
01:48:45,400 --> 01:48:49,440
वो गोविंद कहां से सिद्ध हुआ व गोविंद सिद्ध नहीं हुआ तो क्या

1513
01:48:49,440 --> 01:48:53,760
हुआ गुरु है गुरु के द्वारा दिए गए ग्रंथ है गोविंद

1514
01:48:53,760 --> 01:48:58,000
नहीं है एक पांव खाली है तो हम यह नहीं कह सकते अरे वो तो परंपरा

1515
01:48:58,000 --> 01:49:01,800
प्राप्त गुरुओं के पास गया था फिर भी उसको जो है यह चीज दिक्कत

1516
01:49:01,800 --> 01:49:05,920
है क्योंकि उसके में गोविंद की कमी है फिर हमें गोविंद मिल गया

1517
01:49:05,920 --> 01:49:09,960
भगवान सच्चिदानंद स्वरूप परमेश्वर मिल गए भैया उनके बारे में पता चल गया इनकी भक्ति

1518
01:49:09,960 --> 01:49:14,160
करनी है मगर भक्ति कैसे करनी है उसके लिए जो गुरु मिले वो परंपरा प्राप्त नहीं

1519
01:49:14,160 --> 01:49:18,960
है तो क्या हुआ अब यहां गुरु वाला पाया तो ये तीनों इंटरडिपेंडेंट

1520
01:49:18,960 --> 01:49:23,000
चीजें है ज्ञान भक्ति कर्म ये सब इंटरडिपेंडेंट एक भी

1521
01:49:23,000 --> 01:49:27,040
पाया हटेगा तो दिक्कत हो जाएगी इसी प्रकार से जैसे एक वेट

1522
01:49:27,040 --> 01:49:31,320
लॉस करने वाले को या मसल बिल्डिंग करने वाले को जिम जिम गोवर को क्या होता है

1523
01:49:31,320 --> 01:49:35,320
दिक्कत कि उसकी जो सारी चीजें मैटर करती है उसकी

1524
01:49:35,320 --> 01:49:39,720
जेनेटिक्स भी मैटर करते हैं उसकी लाइफ स्टाइल भी मैटर करती है उसका खानपान

1525
01:49:39,720 --> 01:49:43,720
भी मैटर करता है फिर वो जो वर्कआउट कर रहा है वहां पर जिम में वो भी मैटर करता

1526
01:49:43,720 --> 01:49:48,080
है सब कुछ मैटर करता है तो सर मान लिया सब कुछ मैटर करता है

1527
01:49:48,080 --> 01:49:52,160
आम आदमी जो मेरी कैटेगरी में आता हो हम लोगों को नहीं पता

1528
01:49:52,160 --> 01:49:56,320
कि क्या है क्या नहीं हम तो ये मानते हैं कि ठीक है वो पूजा कर रहा है तो भी हमारी जैसा ही है

1529
01:49:56,320 --> 01:50:00,720
पूजा नहीं कर रहा तो भी हमें तो एक बार उपर उपर से देखने में एक जैसे नजर आते हैं सभी

1530
01:50:00,720 --> 01:50:05,320
ठीक पूजा करने वाला ऊपर ऊपर से देखने में तो एक नास्तिक

1531
01:50:05,320 --> 01:50:09,320
जो अपनी माता बहन और पत्नी में अंतर नहीं करता होगा और एक आस्तिक

1532
01:50:09,320 --> 01:50:14,000
जो अंतर करता होगा वो भी एक नजर आएंगे इसका क्या करें

1533
01:50:14,000 --> 01:50:17,440
मेरा सवाल तो सुन लीजिए हां

1534
01:50:17,440 --> 01:50:21,520
मेरा सवाल यह था कि जैसे एक बड़े-बड़े संत है मुझे नहीं

1535
01:50:21,520 --> 01:50:25,760
पता आप जिन संत की बात करें शंकराचार्य जी की कि वो कौन है और मुझे

1536
01:50:25,760 --> 01:50:29,880
उनके बारे में ज्यादा ज्यादा क्या बिल्कुल भी नहीं पता लेकिन उनके अलावा अगर

1537
01:50:29,880 --> 01:50:34,680
बातें करें जो बड़े बड़े संत हुए हैं जिनका काफी नाम है अपने इंडिया में मोस्टली

1538
01:50:34,680 --> 01:50:39,000
या तो किसी गंभीर बीमारी से असाध्य बीमारी से पीड़ित चल रहे हैं

1539
01:50:39,000 --> 01:50:43,040
या फिर अकाल मौत के शिकार हो रहे हैं मैं किसी का अपमान नहीं करना चाह रहा बड़ी इज्जत

1540
01:50:43,040 --> 01:50:47,120
के साथ अपनी बात रख रहा हूं किसी के पर्टिकुलर मैं कोई टारगेट

1541
01:50:47,120 --> 01:50:51,400
नहीं कर रहा हूं वैसे एक नॉर्मली जनरली बात कर रहा हूं पहली बात तो ये है पहली

1542
01:50:51,400 --> 01:50:55,440
बात तो ये है कि आपका आखरी प्रश्न जो था वो अब फिर टक गया आगे एक और

1543
01:50:55,440 --> 01:50:59,600
प्रश्न आ गया अच्छा अब इस प्रश्न का उत्तर ये है अभी

1544
01:50:59,600 --> 01:51:03,640
आखरी है इसके बाद अब अगला प्रश्न नहीं आएगा ठीक है आप क्लासेस में आया

1545
01:51:03,640 --> 01:51:08,760
करिए क्योंकि आप अच्छे व्यक्ति है जिज्ञासु है और मानते हैं चीजों को इसलिए

1546
01:51:08,760 --> 01:51:13,200
तो इसका जवाब ये है कि ईश्वर का

1547
01:51:13,200 --> 01:51:18,600
होना का यह अर्थ है कि दुनिया में कोई मरेगा

1548
01:51:18,600 --> 01:51:23,200
नहीं ईश्वर के होने का क्या ये अर्थ है कि दुनिया में कोई मरेगा नहीं

1549
01:51:23,200 --> 01:51:27,200
देखो अकाल मौत तो बुरी चीज होती है अकाल मौत तो ये भी हो सकता है

1550
01:51:27,200 --> 01:51:33,200
ना कि जितना कर्म आप उसका देख रहे हो उसके अलावा उसने कुछ ऐसा किया हो जो काल मौत का कारण

1551
01:51:33,320 --> 01:51:37,480
बनाओ आप डिसाइड नहीं कर सकते कि उसने पूरे दिन क्या कहा आप डिसाइड

1552
01:51:37,480 --> 01:51:41,760
तब कर सकते हो जब आप उसी के साथ रह रहे हो तब भी दिक्कत है

1553
01:51:41,760 --> 01:51:45,840
दिक्कत क्या है उसने एक साल पहले क्या किया हो

1554
01:51:45,840 --> 01:51:50,000
तो यह पैरामीटर्स नहीं है जांचने के तो

1555
01:51:50,000 --> 01:51:54,200
सर किसी ना किसी पर तो विश्वास करें जिसको विश्वास करने लगते हैं उसकी

1556
01:51:54,200 --> 01:51:58,320
या तो काल मौत या बीमारी से पीड़ित अब संत है संतो को ही हम भक्ति

1557
01:51:58,320 --> 01:52:02,640
के लिए अपने नहीं सेलेक्ट कर सकते ऐ है मैं आपको बताऊ देखिए

1558
01:52:02,640 --> 01:52:07,120
जो आध्यात्म है उसका अर्थ ये नहीं है कि आपका शरीर सड़ेगा नहीं गलेगा नहीं

1559
01:52:07,120 --> 01:52:11,240
आध्यात्म का अर्थ य है कि जब शरीर ड़ेगा कुछ भी होगा आपको

1560
01:52:11,240 --> 01:52:15,400
दिक्कत नहीं होगी आप सुखी रहोगे यह है अध्यात्म

1561
01:52:15,400 --> 01:52:19,400
का फायदा कुछ भी होता रहे आपको क्योंकि मालूम होगा नैनम छिंदंति

1562
01:52:19,400 --> 01:52:23,880
शस्त्राणि नैनम दती पावक न चन किले पुति

1563
01:52:23,880 --> 01:52:28,840
मारता गुरुदेव के पास एक व्यक्ति आया था जिसको कैंसर था

1564
01:52:28,840 --> 01:52:33,000
तो गुरुदेव ने कहा कि

1565
01:52:33,000 --> 01:52:33,800
गुरुदेव से उसने

1566
01:52:33,800 --> 01:52:37,800
बोला कि मुझे कैंसर है बताइए मैं क्या करू गुरुदेव ने उसको य नहीं कहा कि हम तुमहे एक मंत्र दे रहे

1567
01:52:37,800 --> 01:52:42,640
हैं तुम ठीक हो जाओगे गुरुदेव ने उसको यह कहा कि हम तुम्हारे

1568
01:52:42,640 --> 01:52:46,640
उसको नहीं कम कर सकते हैं हम आपके

1569
01:52:46,640 --> 01:52:50,760
व जो भय है ना जो दुख है उसको कम कर सकते हैं

1570
01:52:50,760 --> 01:52:54,760
जैसे आत्मा का ज्ञान हो जाता है उसको भय नहीं होता है

1571
01:52:54,760 --> 01:52:59,000
कम होता चला जाता है उसकी लाइफ से तो ये जितने भी संत जिनको आप अकाल

1572
01:52:59,000 --> 01:53:03,040
मृत्यु होता हुआ देख रहे हो यह देख रहे हो वो देख रहे हो अकाल वाली तो

1573
01:53:03,040 --> 01:53:07,240
नहीं जानता मगर जैसे आप इनको देख लो प्रेमानंद जी को डायलिसिस

1574
01:53:07,240 --> 01:53:11,520
प ठीक हैर मजे में

1575
01:53:11,520 --> 01:53:16,840
मगर हमसे मगर हमसे मगर हमसे और आपसे ज्यादा मजे में

1576
01:53:16,840 --> 01:53:21,080
है यह फर्क है अध्यात्म का डेरा सच्चा सौदा

1577
01:53:21,080 --> 01:53:23,920
वाले जेल में

1578
01:53:23,920 --> 01:53:27,960
स सदा वालो की बात मत करो यार प्रेमानंद महाराज जी

1579
01:53:27,960 --> 01:53:31,960
हमारे हमेशा एक बात कहते हैं कि ब्रह्मास्त्र का प्रयोग कभी मच्छर मारने

1580
01:53:31,960 --> 01:53:36,000
के लिए नहीं किया जाता है यह जो हमारे प्रारब्ध है व तो श्री कृष्णा

1581
01:53:36,000 --> 01:53:40,680
जी भी बोले है अवश्य भत कम शुभना

1582
01:53:40,680 --> 01:53:44,480
किसको बोल र ब का

1583
01:53:44,480 --> 01:53:48,520
मनि मैं बता रहा हूं आपको इनका कहने का अर्थ है

1584
01:53:48,520 --> 01:53:49,240
कि तलवार

1585
01:53:49,240 --> 01:53:53,400
की धार से नाखून नहीं काटा जाता

1586
01:53:53,400 --> 01:53:57,680
अब आया समझ में पास अगर भक्ति की पावर है नाम की पावर है अगर

1587
01:53:57,680 --> 01:54:02,320
आप चाहे तो अपने कष्ट खत्म करने के लिए उस यू कर सकते हैं

1588
01:54:02,320 --> 01:54:06,400
कर सकते हैं लेकिन बात यह है कि एक जन्म में एक प्रारब्ध को काटने

1589
01:54:06,400 --> 01:54:10,480
के लिए आप कर लेंगे नाम का यूज कर लेंगे अपनी पावर्स का य क्या दोबारा प्रारब्ध

1590
01:54:10,480 --> 01:54:15,080
नहीं आएगा क्या दोबारा जन्म नहीं आएंगे फिर तो फिर आप उसको

1591
01:54:15,080 --> 01:54:20,280
क्यों यूज कर रहे हो मुक्त होने के लिए यूज करो

1592
01:54:20,280 --> 01:54:24,360
ना जी जी महाराज जी जैसे है आप बोल रहे हैं कि दोनों

1593
01:54:24,360 --> 01:54:28,640
किडनी फेल आप मुझे आपने बोला ना दुनिया से एक एग्जांपल आप मुझे

1594
01:54:28,640 --> 01:54:32,760
पूरी दुनिया से एक एग्जांपल बता दीजिए जिनकी दोनों किडनीज 18 20 साल

1595
01:54:32,760 --> 01:54:36,880
से खराब हो और वो इतने आराम से रह रहे हो ऐसी दिनचर्या का पालन

1596
01:54:36,880 --> 01:54:41,000
कर रहे हो जो हमारे आप जैसे हेल्दी लोग भी नहीं कर पाते

1597
01:54:41,000 --> 01:54:45,040
एक एग्जांपल आप ढूंढ करके ले आइए और आपके लिए एक जीता

1598
01:54:45,040 --> 01:54:49,240
जाता एग्जांपल मैं खुद हूं मैंने खुद अपनी मेडिसिन फेंक

1599
01:54:49,240 --> 01:54:53,400
दी थी थक करके हर जगह से ट्रीटमेंट करवा करके अपने एंकल के लिए और

1600
01:54:53,400 --> 01:54:57,520
आपने बोला ना मंदिर जाने से ठीक हो जाता है मैं कहती हूं मैं एग्जांपल मैं ठीक हुई

1601
01:54:57,520 --> 01:55:01,720
मंदिर जाने से हालाकि ये चीजों में जैसे प्रभु जी ने बताया कि मतलब आसान

1602
01:55:01,720 --> 01:55:04,360
नहीं है वो आप प्रमाण मानेंगे नहीं मानेंगे वो आप प डिपेंड करता

1603
01:55:04,360 --> 01:55:08,400
है और मेरे जैसे लाखों करोड़ों लोग है लेकिन

1604
01:55:08,400 --> 01:55:12,560
इसीलिए मैं जो है जो आपने अभी जो बात कही मैं इसीलिए

1605
01:55:12,560 --> 01:55:16,560
वो बातें खोदता ही नहीं हूं जो बातें अंतिम ना

1606
01:55:16,560 --> 01:55:20,880
हो ऐसी बात बोलो जो अंतिम हो वो बेकार का व्यर्थ जैसे

1607
01:55:20,880 --> 01:55:24,960
रामपाल वाले कई बार ऐसा आरोप लगाते गया अरे वो प्रमाणों से डर गया भाई

1608
01:55:24,960 --> 01:55:29,040
मैं प्रमाण से क्या करूंगा निकालू वो तो वो काल बोल रहा है तो

1609
01:55:29,040 --> 01:55:33,160
वो बात करो ना जो बिल्कुल उसम खत्म बात ू स्टॉप

1610
01:55:33,160 --> 01:55:37,560
द न स् होगा तभी आप उनकी चीजों को बिलीव करेंगे

1611
01:55:37,560 --> 01:55:41,560
अब जब हम ग्रंथ दिखाएंगे तो तुम कहोगे नहीं रामपाल जी ने जो कहा है

1612
01:55:41,560 --> 01:55:46,320
वो मानेंगे तो ग्रंथ दिखाने का कोई फायदा ही नहीं है

1613
01:55:46,320 --> 01:55:50,360
बात ही नहीं की मैंने ग्रंथों की बात आप गलत

1614
01:55:50,360 --> 01:55:55,360
आप गलत जा रहे ठीक है अब आप क्लास में आया करिए

1615
01:55:55,360 --> 01:55:57,960
और

1616
01:55:57,960 --> 01:56:02,320
7 ठीक है सर बारबार मैसेज आ लाइव खत्म करो इसलिए मैं

1617
01:56:02,320 --> 01:56:06,360
बात को आ नहीं बढ़ रहा नहीं बात आगे कैसे बढ़ेगी आपने तो

1618
01:56:06,360 --> 01:56:10,840
दो बार कह दिया मेरा अंतिम प्रश्न दो प्रश्न हो गए आपके वो क्या बात चलती

1619
01:56:10,840 --> 01:56:15,080
आगे से आगे बात निकल जाती है किसी भी प्रकार की विचारी मलिए आप फम

1620
01:56:15,080 --> 01:56:19,240
भर के आइएम और अपनी बात पर अक

1621
01:56:19,240 --> 01:56:19,740
रही

1622
01:56:19,440 --> 01:56:22,960
है कि मैं नास्तिक हूं

1623
01:56:22,960 --> 01:56:26,960
देखो नास्तिक सुनो अब बात में बात चल जाती है बात

1624
01:56:26,960 --> 01:56:31,240
ऐसी बोल देते कि आगे कोई ना कोई सवाल फिर आ जाता है अब आपने कहा ना नास्तिक प

1625
01:56:31,240 --> 01:56:35,520
रही है अपने आप को रिप्रेजेंट करने के लिए कोई ना कोई वर्ड इस्तेमाल

1626
01:56:35,520 --> 01:56:40,320
करना पड़ेगा अगर कोई बोले कि मैं जनी को मानते हैं कि नहीं

1627
01:56:40,320 --> 01:56:44,400
मानते नहीं मानते फिर आप वो पति

1628
01:56:44,400 --> 01:56:48,440
माता पत्नी वो वाला एग्जांपल ओगे आप अच्छे व्यक्ति

1629
01:56:48,440 --> 01:56:52,520
है कुछ ऐसे भी आते हैं जो कह देते कि नहीं करता मैं अंतर वो होते

1630
01:56:52,520 --> 01:56:56,920
हैं ओरिजिनल नास्तिक सैद्धांतिक नास्तिक बोल

1631
01:56:56,920 --> 01:57:01,800
में आप अगर दो मिनट टाइम दे सकते हो तो आप मेरी बात को समझने का प्रयास करो जो मैं कहना चाह रहा हूं

1632
01:57:01,800 --> 01:57:05,800
अगर आप टाइम हो तो मैं दो ही मिनट ज्यादा टाइम लूंगा नहीं मैं चाहता हूं कि जितनी देर मैं बोलू बीच में

1633
01:57:05,800 --> 01:57:10,560
ना टोका जाए ताकि मैं मेरी बात को कह सकूं

1634
01:57:10,560 --> 01:57:14,680
बोलिए सर एक्चुअल में होता यह है आप भी इस बात को मानते हैं

1635
01:57:14,680 --> 01:57:18,680
पूरी बात सुनना आप भी इस बात को मानते हो कि कोई भी

1636
01:57:18,680 --> 01:57:22,800
इंसान जिस सोसाइटी में जिस परिवार में जहां जन्म लेता है वहां की

1637
01:57:22,800 --> 01:57:26,800
जो रीति रिवाज होती है उसको वो एक अनुशासन का हिस्सा मानने लग

1638
01:57:26,800 --> 01:57:30,800
जाता है उस रीति रिवाज के अकॉर्डिंग चलने आपकी चीजें गलत है

1639
01:57:30,800 --> 01:57:34,520
आप गलत जा रहे हो अभी आप मुझे आपसे कुछ ऐसे टफ क्वेश्चंस

1640
01:57:34,520 --> 01:57:38,760
बोलने पड़ेंगे आपको दिक्कत होगी ठीक है सर

1641
01:57:38,760 --> 01:57:43,440
सुनिए ये आपका जो मानना है कि मैं ये इसलिए मानता हूं

1642
01:57:43,440 --> 01:57:47,640
क्योंकि मैं यहां जन्म लिया हूं ये आपका मानना गलत है नहीं तो

1643
01:57:47,640 --> 01:57:51,640
आप यह बोलिए कि अगर मैं वहां चला जाऊंगा वहां की सोसाइटी में यह

1644
01:57:51,640 --> 01:57:55,920
अंतिम सत्य नहीं है माता बहन और पत्नी वाला जो चीज है अंतिम नहीं दूसरी

1645
01:57:55,920 --> 01:58:00,160
बात अगर अगर इस संसार में कोई

1646
01:58:00,160 --> 01:58:04,320
सत चित आनंद नहीं है तो आप सचित आनंद को हर पल

1647
01:58:04,320 --> 01:58:08,400
हर क्षण क्यों मांग रहे हैं अभी साइंस ने तो डिक्लेयर

1648
01:58:08,400 --> 01:58:12,520
किया नहीं है आप उसके उसके ना होने की स्थिति में आप दुखी

1649
01:58:12,520 --> 01:58:16,680
हो रहे हैं अगर आपको अभी मृत्यु के बारे में बात होने लग जाए तो आप वहां

1650
01:58:16,680 --> 01:58:21,160
से अपना मन हटाओ क्यों भाग रहे हैं साइंस ने तो नहीं कहा है

1651
01:58:21,160 --> 01:58:25,520
सर आप आपके अंदर आप अपनी बात

1652
01:58:25,520 --> 01:58:29,520
बोल देते हो सर आप अपनी बात तो रख देते हो मैं मेरी बात बोलने

1653
01:58:29,520 --> 01:58:33,560
लगता हूं तब उस टाइम बीच में मेरी बात को काट देते हो एक्चुअल में

1654
01:58:33,560 --> 01:58:37,600
जब आपने सवाल पूछ ही लिया ठीक है

1655
01:58:37,600 --> 01:58:41,760
बोलिए देखो आप मेरी पूरी बात सुनिए जो मैं बात बोल रहा था

1656
01:58:41,760 --> 01:58:45,760
कि कोई भी आदमी है वह जन्म लेता है इस दुनिया में आता है वह सीखता है

1657
01:58:45,760 --> 01:58:50,120
तो इसी दुनिया से सीखता है ना कि किसको क्या समझना है किसके प्रति

1658
01:58:50,120 --> 01:58:54,200
क्या बिहेव करना है किसके पांव छने किसि मगर ये

1659
01:58:54,200 --> 01:58:58,200
मगर ये जो चीज है ना आपका मानना यह है कि यह हमारे

1660
01:58:58,200 --> 01:59:02,280
वातावरण पर निर्भर होता है हमारा मानना यह है कि हमारे शास्त्र पर निर्भर

1661
01:59:02,280 --> 01:59:06,360
होता है आपका मानना यह है कि किसी ऐसी चीज पर निर्भर होता है जो

1662
01:59:06,360 --> 01:59:10,640
बदल सकती है हमारा मानना यह है किसी ऐसी चीज पर निर्भर होता है जो बदलती

1663
01:59:10,640 --> 01:59:14,640
नहीं है आपका मानना यह है कि माता बहन और पत्नी वाला जो सिद्धांत है

1664
01:59:14,640 --> 01:59:18,800
वह बदल सकता है और हमारा मानना यह है कि नहीं

1665
01:59:18,800 --> 01:59:24,160
नहीं बदल सकता है यह अंतर है

1666
01:59:24,160 --> 01:59:28,440
ठीक है सर आप सही हो मतलब मतलब किसी भी स्थिति में

1667
01:59:28,440 --> 01:59:33,000
आप यह नहीं कह सकते कि य नियम जो है गलत है

1668
01:59:33,000 --> 01:59:37,320
ठीक है सर लाइव प्रोग्राम बंद कर देना चाहिए ठीक है

1669
01:59:37,320 --> 01:59:42,800
चलिए जय श्री

1670
01:59:42,800 --> 01:59:46,800
राम चलिए म आपको अच्छा लगा

1671
01:59:46,800 --> 01:59:51,000
जी बताइए आप कुछ कह रहे हैं आपकी आवाज नहीं आ रही आवाज

1672
01:59:51,000 --> 01:59:55,400
नहीं आ रही अभी आ रही है जी बोलिए

1673
01:59:55,400 --> 01:59:59,680
मुझे एक्चुअली यह बताना था आपको याद होगा परसों एक रोहित मिश्रा करके आए थे

1674
01:59:59,680 --> 02:00:03,840
दो दिन पहले रोहित करके वो बोल

1675
02:00:03,840 --> 02:00:08,520
रहे थे कि मैं पहले आस्तिक था फिर नास्तिक हो गया फिर कबीर को स्टडी कर रहा

1676
02:00:08,520 --> 02:00:12,800
हूं अच्छा वो आपके भाई थे क्या जी वही थे

1677
02:00:12,800 --> 02:00:16,880
एक्चुअली उनको मैंने काफी देर पहले ही मैंने भेजा था कि आप आ जाइए आ जाइए डिबेट

1678
02:00:16,880 --> 02:00:21,160
में बट आई फील ए आई फील जब तक मैं ऑन स्टेज थी वो नहीं आए

1679
02:00:21,160 --> 02:00:25,680
और जैसे ही उतरी वैसे ही क्योंकि मेरा फोन ऑफ हो गया जैसे ही उसे

1680
02:00:25,680 --> 02:00:29,920
क्या हुआ था उनके साथ हमारी कोई बातचीत हुई थी क्या थोड़ी बहुत ही बात हुई थी

1681
02:00:29,920 --> 02:00:33,920
उन्होंने जैसे नास्तिकता के लिए बोला था तो आपने वो एक्सप्लेन किया था फिर आपने बोला था

1682
02:00:33,920 --> 02:00:38,040
क्लासेस में आने के लिए और वो के प्रणाम बोलके चले गए वहां से

1683
02:00:38,040 --> 02:00:39,240
तो बाद में फिर वो मुझे

1684
02:00:39,240 --> 02:00:43,280
बोले कि हा मैंने उनको क्वेश्चन किया था लेकिन उन्होंने मुझे क्लासेस में आने के लिए कहा तो

1685
02:00:43,280 --> 02:00:47,560
मैंने कहा आप वहां पर स्टूडेंट बन के जाएंगे तो आपको क्लास में ही आने बोलेंगे ना

1686
02:00:47,560 --> 02:00:52,440
आप जैसे हमारे आगे ज्ञानी बन के रहते वहां पर ज्ञानी बन के जाते तो व आपसे डिबेट करते

1687
02:00:52,440 --> 02:00:56,960
आप स्टूड कार कर काउंटर करने

1688
02:00:56,960 --> 02:01:01,560
आइए तो बोलिए कर तो आपका

1689
02:01:01,560 --> 02:01:05,720
थोड़ सनातन सिधांत नहीं है आप मुझे कोई

1690
02:01:05,720 --> 02:01:09,800
ऐसी ऐसा व दो नियमावली जो मैं आपकी बात मान सक बात तो वही है ना

1691
02:01:09,800 --> 02:01:13,960
तस्मा प्रमा हम आपकी बात क्यों मान मुझे

1692
02:01:13,960 --> 02:01:18,200
आपको थैंक य बोलना है आपकी से मुझे परेशान नहीं कर रहे क्योंकि मुझे कुछ

1693
02:01:18,200 --> 02:01:22,200
बोल व जा बात कर वहा जा अपना पॉट प्रू कर दीजिए

1694
02:01:22,200 --> 02:01:26,400
तो मैं मान लूंगी तो मेरी प्रॉब्लम मतलब ये सॉल्व हो गई है उसके लिए मुझे

1695
02:01:26,400 --> 02:01:30,400
आपको थैंक यू बोलना था मैं उसी के लिए आई थी चलिए चलिए बहुत अा

1696
02:01:30,400 --> 02:01:34,560
एक्चुअली वो आपके आगे निरुत्तर हो गए उनके पास बचा नहीं कुछ बोलने के लिए

1697
02:01:34,560 --> 02:01:39,120
तो इसलिए थैंक यू सो मच ठीक है

1698
02:01:39,120 --> 02:01:45,120
जय श्री राधा बो श्री हरिवंश राधे राधे श्री हरि राधे

1699
02:01:46,440 --> 02:01:50,560
राधे सभी को जय श्री राम सबने इतना समय दिया भैया

1700
02:01:50,560 --> 02:01:54,560
बहुत लेट नाइट हो गया है जय श्री राम सभी
