1
00:00:03,000 --> 00:00:07,320
सभी को जय श्री राम हर हर महादेव

2
00:00:07,320 --> 00:00:10,080
दज्जाल

3
00:00:10,080 --> 00:00:15,720
जी जय

4
00:00:15,720 --> 00:00:19,840
जगदंबा जगत जननी माता आदि पराशक्ति

5
00:00:19,840 --> 00:00:24,520
पार्वती की जय बिल्कुल जय जय

6
00:00:24,520 --> 00:00:28,960
तो अभी जिनसे हमारा आज चर्चा होने वाली है आज का है यह

7
00:00:28,960 --> 00:00:31,080
डिस्कशन

8
00:00:31,080 --> 00:00:35,120
वो कुछ समय लगेगा उनको आने में पाच मिनट तब

9
00:00:35,120 --> 00:00:39,360
तक मैं कुछ अपनी बातें कर लेता हूं

10
00:00:39,360 --> 00:00:43,520
अ कल हमने एक लाइव किया था

11
00:00:43,520 --> 00:00:47,680
जिसमें कि भाव में बातें करते करते करते

12
00:00:47,680 --> 00:00:52,200
अंततोगत्वा मैंने यह भी बोला कि

13
00:00:52,200 --> 00:00:56,440
हम हमें जो है मोक्ष मिल चुका है मोक्ष और

14
00:00:56,440 --> 00:01:02,440
अब जो यह देह है वह धर्म रक्षा के निमित्त मात्र है

15
00:01:02,680 --> 00:01:06,680
तो इसका भाव किसी ने इसका उपहास भी उड़ाने

16
00:01:06,680 --> 00:01:11,000
का प्रयास किया कमेंट के माध्यम

17
00:01:11,000 --> 00:01:15,400
से तो मोक्ष इस पर मैं बताऊंगा कि उसका मतलब

18
00:01:15,400 --> 00:01:20,280
उसका अर्थ क्या था एक समय था जब मैं भौतिकवाद

19
00:01:20,280 --> 00:01:24,560
से लिप्त जीवन जीता था जिसमें कि

20
00:01:24,560 --> 00:01:28,640
यही सब चीजें होती थी कि मुझे मकान लेना है मुझे कार लेनी

21
00:01:28,640 --> 00:01:32,960
है मुझे एसी लेना है फीज लेना है टीवी लेना है

22
00:01:32,960 --> 00:01:37,840
जो भौतिक भौतिकी का आकर्षण होता

23
00:01:37,840 --> 00:01:41,880
है हां नहीं वह थोड़ा व्यस्तता रहती है तो थोड़ा सा समय

24
00:01:41,880 --> 00:01:44,680
लग जाता है रोकली

25
00:01:44,680 --> 00:01:48,800
जी इसके लिए क्षमा प्रार्थी है समय लिखते हैं जो

26
00:01:48,800 --> 00:01:52,800
भी व काम करते करते बिल्कुल एंड टाइम तक थोड़ा लेट हो

27
00:01:52,800 --> 00:01:57,440
जाता है तो

28
00:01:57,440 --> 00:02:02,080
मैं भौतिकी को आकर्षित रहने वाला जीन जब जी रहा था अपने जीवन

29
00:02:02,080 --> 00:02:06,400
में उस समय की बात है मेरे मन में एक प्रश्न

30
00:02:06,400 --> 00:02:11,080
सदैव चलता रहता था ये मैं आज

31
00:02:11,080 --> 00:02:15,200
बहुत अच्छी फिजिक बना रहा हूं बहुत अच्छी बॉडी बना रहा हूं बहुत

32
00:02:15,200 --> 00:02:19,560
अच्छे कपड़े पहन रहा हूं सब कुछ कर रहा

33
00:02:19,560 --> 00:02:24,160
हूं 50 के बाद क्या होगा 60 के बाद क्या होगा

34
00:02:24,160 --> 00:02:28,560
70 के बाद क्या होगा यह विचार मेरे मन में सदैव चला

35
00:02:28,560 --> 00:02:32,880
चला करता था मतलब सब कुछ जो

36
00:02:32,880 --> 00:02:37,880
भौतिकवाद के संसार से जो हमें प्राप्त होने वाली खुशियां होती हैं

37
00:02:37,880 --> 00:02:41,880
ददम वह सब कुछ प्राप्त हो रहा था मगर यह प्रश्न

38
00:02:41,880 --> 00:02:46,440
उन सारे

39
00:02:46,440 --> 00:02:50,840
जो वोह जो खुशियां थी ना छद्म छोटी छोटी मतलब

40
00:02:50,840 --> 00:02:54,920
जो शाश्वत नहीं होती है उन सारी खुशियों के अंदर

41
00:02:54,920 --> 00:02:59,160
एक खोखला पन था इस प्रश्न की वजह से

42
00:02:59,160 --> 00:03:03,160
कि एक समय आएगा जब मैं यह सारे भोग जो आज

43
00:03:03,160 --> 00:03:07,560
मैं कर रहा हूं वो सारे भोग नहीं कर पाऊंगा

44
00:03:07,560 --> 00:03:11,880
ऐसा नहीं था कि मैं दुराचारी था या

45
00:03:11,880 --> 00:03:16,040
कोई मतलब धर्म विरुद्ध जीवन जी रहा था ऐसा नहीं था मगर

46
00:03:16,040 --> 00:03:20,040
जीवन का लक्ष्य नहीं जानता था जिस कारण से य प्रश्न सदैव मुझे अंदर ही अंदर

47
00:03:20,040 --> 00:03:23,280
कचोट था

48
00:03:23,280 --> 00:03:27,280
और भगवान का स्वरूप जब भी मैंने ध्यान करने का प्रयास किया

49
00:03:27,280 --> 00:03:32,400
तो मुझे ऐसा लगता था जैसे जो

50
00:03:32,400 --> 00:03:36,480
अर्जुन भगवान श्री कृष्ण के पंजे के पास खड़े होते हैं विराट दर्शन

51
00:03:36,480 --> 00:03:41,120
के समय तो उसमें मुझे ऐसे ही दिखते थे भगवान

52
00:03:41,120 --> 00:03:45,160
सदैव जी डिस्कशन अभी है डिस्कशन अभी है

53
00:03:45,160 --> 00:03:49,200
भगवान सदैव ऐसे दिखते थे कि मैं उनके पैर

54
00:03:49,200 --> 00:03:53,200
के पंजे के पास बिल्कुल नाखून के पास खड़ा हूं बहुत छोटा सा और

55
00:03:53,200 --> 00:03:57,360
मैं उनका चेहरा देखना चाहता हूं मैं टेढ़ा होता जा रहा हूं मगर वह विशाल

56
00:03:57,360 --> 00:04:01,800
काय शरीर उसका अंत ही नहीं हो रहा है ऐसे दिखते थे

57
00:04:01,800 --> 00:04:05,920
और राम जी का ध्यान राम जी के प्रति श्रद्धा थी ही सदैव

58
00:04:05,920 --> 00:04:10,000
बचपन से ईश्वर का भगवत कृपा है जो ऐसे माता पिता

59
00:04:10,000 --> 00:04:14,080
के यहां पर हम हमें जन्म मिल गया जो श्री राम को बचपन

60
00:04:14,080 --> 00:04:18,240
से ही जान लिया थोड़ा बहुत जान क्या लिया

61
00:04:18,240 --> 00:04:22,400
मतलब थोड़ा बहुत जो माता पिता के द्वारा जो हमें प्राप्त हो

62
00:04:22,400 --> 00:04:26,440
पाया उसके बाद वही वह जीवन चल रहा था वही

63
00:04:26,440 --> 00:04:30,600
कंजप्शन कंजप्शन कंजप्शन तो क्योंकि हमारी

64
00:04:30,600 --> 00:04:34,800
बचपन से प्रोग्रामिंग ही ऐसी होती है ना आजकल कि लाइफ

65
00:04:34,800 --> 00:04:38,080
का एक ही गोल है

66
00:04:38,080 --> 00:04:42,200
कंजप्शन तो वह कंजप्शन वाली लाइफ चल रही थी उसमें बार-बार एक विचार

67
00:04:42,200 --> 00:04:47,120
आता रहता था

68
00:04:47,120 --> 00:04:51,240
कि क्या होगा जब 60 की आयु हो जाएगी तब

69
00:04:51,240 --> 00:04:55,560
क्या होगा 70 की आयु हो जाएगी तब क्या होगा तब क्या मैं ऐसे ही भोग करूंगा

70
00:04:55,560 --> 00:04:59,680
तब क्या मैं ऐसे ही कंजप्शन करूंगा प्रकृति का या

71
00:04:59,680 --> 00:05:03,960
सार का जैसे आज कर रहा हूं तो

72
00:05:03,960 --> 00:05:08,560
यह प्रश्न मुझे सदैव अंदर से मैं

73
00:05:08,560 --> 00:05:12,680
मतलब वोह जो खुशियां थी वो सब एक तरफ थी वो जो आनंद था वह

74
00:05:12,680 --> 00:05:18,560
सब एक तरफ था उसके अंदर एक ही खोकला पन था जय श्री राम अवनीश

75
00:05:18,560 --> 00:05:22,640
जी उसके बाद धर्म रक्षा के निमित्त ही

76
00:05:22,640 --> 00:05:26,880
जब मैंने अध्ययन करना प्रारंभ किया गुरुदेव

77
00:05:26,880 --> 00:05:32,880
को सुना गुरुदेव का आगमन हुआ जीवन में

78
00:05:33,400 --> 00:05:37,760
और गुरुदेव धर्म रक्षा के निमित्त अध्यात्म

79
00:05:37,760 --> 00:05:42,000
आया है मेरे जीवन में यह मैं आपको बताऊं बहुत ये वैसी रोचक

80
00:05:42,000 --> 00:05:46,120
बात है अध्यात्म मेरे जीवन में अध्यात्म की दृष्टि से नहीं आया धर्म रक्षा

81
00:05:46,120 --> 00:05:50,200
की दृष्टि से आए धर्म रक्षा के लिए पढ़ना शुरू

82
00:05:50,200 --> 00:05:54,200
किया अध्ययन प्रारंभ किया गुरुदेव की शरणागत हुए गुरुदेव के

83
00:05:54,200 --> 00:05:58,640
बारे में जाना परंपरा प्राप्त प्रामाणिक आचार्य का महत्व

84
00:05:58,640 --> 00:06:02,920
जाना और सबके पीछे उद्देश्य यही था धर्म

85
00:06:02,920 --> 00:06:06,920
रक्षा फिर एक दिन

86
00:06:06,920 --> 00:06:11,520
बहुत मन में अपार वो थी कि

87
00:06:11,520 --> 00:06:15,800
गुरुदेव के दर्शन कर लूं बस तो गुरुदेव

88
00:06:15,800 --> 00:06:19,880
के जीवन में जब दर्शन किए

89
00:06:19,880 --> 00:06:23,880
मैंने और गुरुदेव का वो वाग्य मुझे प्राप्त

90
00:06:23,880 --> 00:06:28,000
हुआ असतो मा सद गम या तमसो मा जोति गमाया

91
00:06:28,000 --> 00:06:32,760
ार उपनिषद का वा मृत मा मतम

92
00:06:32,760 --> 00:06:37,720
गमाया जीव की चा का जो वास्तविक विषय है

93
00:06:37,720 --> 00:06:42,080
वही ईश्वर है जिस दिन मुझे

94
00:06:42,080 --> 00:06:46,400
गुरुदेव का दर्शन और गुरुदेव के द्वारा वो जो मनुष्य

95
00:06:46,400 --> 00:06:48,400
की चाह का वास्तविक विषय ईश्वर

96
00:06:48,400 --> 00:06:52,640
है सच्चिदानंद स्वरूप परमेश्वर ये दोनों चीजें जिस दिन

97
00:06:52,640 --> 00:06:57,000
मेरे जीवन में आ गई उस दिन

98
00:06:57,000 --> 00:07:01,800
जितनी भी शंकाएं थी जितना भी मतलब जैसे

99
00:07:01,800 --> 00:07:05,840
सभी प्रकार के बंधनों से मुक्त हो जाने वाली फील कुछ बचा ही

100
00:07:05,840 --> 00:07:10,120
नहीं जीवन में और जिस दिन हम लोग य

101
00:07:10,120 --> 00:07:14,160
यह वाली चीज कोई भी व्यक्ति जानता है ना जिस दिन उसको वाकई में बैठ के समझाया

102
00:07:14,160 --> 00:07:18,400
जाता है उस दिन वाकई में उसे ऐसी संतुष्टि मिलती है जो मुझे

103
00:07:18,400 --> 00:07:22,760
उस दिन मिली थी गुरु का आगमन गुरु के दर्शन

104
00:07:22,760 --> 00:07:26,520
और यह जीव की चाह का वास्तविक

105
00:07:26,520 --> 00:07:30,600
विषय ये मिल गया तो उस दिन के बाद से मैं देख

106
00:07:30,600 --> 00:07:34,760
रहा हूं जो भौतिकी थी मेरी मेरे जीवन से वो कम होती चली गई

107
00:07:34,760 --> 00:07:39,480
जो भी चीजें थी उनके प्रति जो आकर्षण रहता था वो नहीं रहा

108
00:07:39,480 --> 00:07:43,480
गुरुदेव इस बारे में कहते हैं ना कि जिसको आत्मा का ज्ञान हो जाता है उसके अंदर भय

109
00:07:43,480 --> 00:07:47,760
नहीं रहता है उसका कारण यही है कि उसका आकर्षण कम हो जाता है

110
00:07:47,760 --> 00:07:51,840
जब वो आत्मा का ज्ञान पा लेता है तो

111
00:07:51,840 --> 00:07:55,840
इस बारे में भगवत गीता एक बात कहती है कि

112
00:07:55,840 --> 00:08:00,320
जिस व्यक्ति के मन में संशय होता है ना

113
00:08:00,320 --> 00:08:03,480
वो परलोक तो क्या यहां पर भी सुखी नहीं रह पाएगा यहां तो

114
00:08:03,480 --> 00:08:07,840
क्या परलोक में भी सुखी नहीं रह पाएगा भगवत गीता चौथा अध्याय 40 वा

115
00:08:07,840 --> 00:08:12,280
तो जितने भी लोग प्रामाणिक आचार्यों से दूर

116
00:08:12,280 --> 00:08:17,080
हैं जिन जितने भी लोगों का आध्यात्मिक

117
00:08:17,080 --> 00:08:21,760
मार्ग जो है वो प्रशस्त नहीं है क्लियर नहीं है वह अपने जीवन में

118
00:08:21,760 --> 00:08:25,880
संतुष्ट नहीं है और जिसको यह

119
00:08:25,880 --> 00:08:30,360
संतुष्टि यह जो ज्ञान है जीव की चाह का

120
00:08:30,360 --> 00:08:34,560
वास्तविक विषय असतो मा सदम तमस मा यह जो ज्ञान है जिसको

121
00:08:34,560 --> 00:08:39,360
प्राप्त हो जाता है वह उसी समय सुखी हो जाता है उसको

122
00:08:39,360 --> 00:08:43,600
वह इंतजार नहीं करना है कि मोक्ष प्राप्त होगा तभी वह सुखी

123
00:08:43,600 --> 00:08:48,320
होगा वह यह ज्ञान प्राप्त कर लेने के बाद ही सुखी हो जाता है

124
00:08:48,320 --> 00:08:53,600
क्योंकि जीवन

125
00:08:53,600 --> 00:08:57,600
में समस्या यह नहीं है

126
00:08:57,600 --> 00:09:01,840
कि हम हम कैसे करेंगे क्या करेंगे

127
00:09:01,840 --> 00:09:05,840
यह समस्याएं नहीं है जीवन की जीवन की सबसे बड़ी

128
00:09:05,840 --> 00:09:10,000
समस्या यह है कि हमें करना क्या है आप किसी से भी पूछ लेना

129
00:09:10,000 --> 00:09:14,200
जो भी व्यक्ति परेशान होता है ना एगजैक्टली उसको यह नहीं पता होता है कि उसे

130
00:09:14,200 --> 00:09:18,400
करना क्या है और जैसे ही उसको पता लग जाएगा कि उसको करना क्या है

131
00:09:18,400 --> 00:09:22,920
फिर डजन मैटर कि करने के बाद मिलने वाला जो परिणाम है व उसको कम मिलेगा

132
00:09:22,920 --> 00:09:27,440
व बाद की बात है मगर जब उसको फिक्स हो गया ना कि उसको यह करना है गड्ढा खोदना

133
00:09:27,440 --> 00:09:31,640
है तो बस इतना वो पता लग जाता है कि मुझे गड्ढा खोदना

134
00:09:31,640 --> 00:09:35,920
है तो वहीं से वह संतुष्ट हो जाता है सुखी हो जाता

135
00:09:35,920 --> 00:09:40,000
है इसी भाव को मैंने वहां पर कहा था मोक्ष का भाव

136
00:09:40,000 --> 00:09:44,600
जब मैंने गुरुदेव का दर्शन प्राप्त किए और यह असतो मा सद गमाया तमसो मा जति गमाया

137
00:09:44,600 --> 00:09:49,200
और इसका जवाब क्या है गायत्री मंत्र कनेक्शन देखिए

138
00:09:49,200 --> 00:09:53,440
जीव की चाह क्या है सत चिता आनंद और गायत्री मंत्र क्या है भूर

139
00:09:53,440 --> 00:09:57,520
भुवा स्वाहा गायत्री मंत्र का निचोड़ क्या है रामायण

140
00:09:57,520 --> 00:10:01,560
रामायण का निचोड़ क्या है तो कैसे कनेक्शन

141
00:10:01,560 --> 00:10:06,160
हुआ गुरु के आगमन से जीवन

142
00:10:06,160 --> 00:10:08,960
में तो

143
00:10:08,960 --> 00:10:13,160
यह जो भाव था यह जो मुझे करना क्या है जीवन में वह मुझे

144
00:10:13,160 --> 00:10:17,400
पता लग गया उस दिन से मोक्ष जैसी फीलिंग आने लगी इस बारे में कपात

145
00:10:17,400 --> 00:10:21,640
जी महाराज ने मैं आपको भक्ति सुदा पढ़ने को कहता हूं कई बार

146
00:10:21,640 --> 00:10:25,760
भक्ति सुदा पढ़ी है कृपा जी की कपाती जी ने बहुत अच्छे अच्छे

147
00:10:25,760 --> 00:10:30,040
वहां पर तर्कों के साथ युक्तियों के साथ प्रमाणों के साथ बहुत अच्छे अच्छे स

148
00:10:30,040 --> 00:10:35,200
दिए तो एक सिद्धांत यही दिया उन्होंने

149
00:10:35,200 --> 00:10:39,440
कि जब हमें पता लग जाता है ना कि भक्ति करनी है उससे भगवान

150
00:10:39,440 --> 00:10:43,520
प्राप्त होंगे तो हम भक्ति करके ही सुख प्राप्त कर लेते संतुष्ट हो जाते हैं

151
00:10:43,520 --> 00:10:47,760
भक्ति करने वाला व्यक्ति क्यों सुखी होता है क्यों संतुष्ट होता है इसीलिए

152
00:10:47,760 --> 00:10:52,200
होता है कि उसको यह मालूम पड़ गया कि भक्ति करने से जो मिलना होगा सब मिल जाएगा

153
00:10:52,200 --> 00:10:56,480
उसको व मिलर मिल रहा है कि नहीं मिल रहा वो बाद की बात है इसका उन्होंने फिर एग्जांपल

154
00:10:56,480 --> 00:11:00,920
दिया जैसे सपोज करिए आपको कार लेनी है

155
00:11:00,920 --> 00:11:05,160
बहुत मन है कार लेने का और कार है मान लीजिए आपकी

156
00:11:05,160 --> 00:11:09,320
जो सीमा है आपका जो धन है आपके पास है 10 लाख रुप और

157
00:11:09,320 --> 00:11:13,360
आपको जो कार पसंद आई है लेने के लिए वह है 30 लाख रुप 50 लाख

158
00:11:13,360 --> 00:11:17,720
रुप ज्यादा की है तो

159
00:11:17,720 --> 00:11:22,400
जिस दिन आप वोह 50 लाख रुप एकत्रित कर लेंगे ना अपने पास

160
00:11:22,400 --> 00:11:24,000
उस दिन आप संतुष्ट हो

161
00:11:24,000 --> 00:11:28,040
जाएंगे कार भले ही चार दिन बाद ले आए आपके पास आपके

162
00:11:28,040 --> 00:11:32,200
लॉकर में वोह जो कार का जो मूल्य है वह अगर रखा

163
00:11:32,200 --> 00:11:36,320
होगा आपके पास तो आप उस मूल्य के प्राप्त हो जाने से ही

164
00:11:36,320 --> 00:11:41,160
संतुष्ट हो जाएंगे भले ही

165
00:11:41,160 --> 00:11:45,320
आप कार 10 दिन बाद ले कोई दिक्कत नहीं है आप चैन की नींद

166
00:11:45,320 --> 00:11:49,320
सोएंगे जब तक वो मूल्य जो उसका है वह जब तक आपको

167
00:11:49,320 --> 00:11:53,400
प्राप्त नहीं हो रहा है तब तक आपके अंदर बेचैनी रहेगी कार के लिए

168
00:11:53,400 --> 00:11:57,760
कार अभी भी नहीं आई है मगर उसका मूल्य आपके पास आ गया है इसलिए आप संतुष्ट

169
00:11:57,760 --> 00:12:02,360
हो जाएंगे यह करपात्री जी महाराज ने वहा समझाया भक्ति सुदा

170
00:12:02,360 --> 00:12:06,560
हां इसीलिए वो कठिन है हिंदी मगर फिर भी पढ़िए प्रयास करिए आ जाएगा

171
00:12:06,560 --> 00:12:10,600
प्रवचन सुनते रहिए गुरुदेव के भक्ति सुदा पढ़िए और एक डिक्शनरी मंगा लीजिए

172
00:12:10,600 --> 00:12:15,680
चौखंबा से आती है संस्कृत हिंदी वाली वह आपके काम

173
00:12:15,680 --> 00:12:19,920
आए तो क्या हुआ कि जिस दिन

174
00:12:19,920 --> 00:12:24,720
हमें यह पता लग गया ना कि हमारे जीवन का उद्देश्य क्या है और हमें करना क्या है

175
00:12:24,720 --> 00:12:29,960
उस दिन वो मोक्ष वाला भाव आया जीवन बस अब कुछ बाकी नहीं रह गया

176
00:12:29,960 --> 00:12:34,120
तो उसको मैंने कल कहा था कि अपने जीवन के लिए

177
00:12:34,120 --> 00:12:38,480
व्यक्तिगत कोई लालसा ऐसी कुछ बची नहीं है

178
00:12:38,480 --> 00:12:39,080
केवल एक ही

179
00:12:39,080 --> 00:12:43,080
लालसा है धर्म रक्षा उसमें भी यह नहीं है कि

180
00:12:43,080 --> 00:12:47,120
नहीं हम जीत के ही वो जीतने के प्रति जो आसक्ति होती है वो भी नहीं भगवत

181
00:12:47,120 --> 00:12:51,280
गीता का वो जो डायलॉग है कर्मन निवादी कारते मा फले सुचना वो

182
00:12:51,280 --> 00:12:55,760
भी नहीं है अपना कर्म करते रहेंगे अंतिम सांस समत्व

183
00:12:55,760 --> 00:12:59,760
भाव से जीत का लालच हार का भय ना

184
00:12:59,760 --> 00:13:03,880
हो शत्रु प्रतिकार करो तो उसी में एक

185
00:13:03,880 --> 00:13:07,960
संतुष्टि मिलती है बहुत चैन की नींद आती है

186
00:13:07,960 --> 00:13:12,000
बहुत जीवन में चैन रहता है कोई ऐसा बैंक बैलेंस नहीं

187
00:13:12,000 --> 00:13:16,080
है कोई बहुत बड़ी बड़ी गाड़ियां नहीं है सब कुछ अलग है

188
00:13:16,080 --> 00:13:20,240
सामान्य सा जीवन मगर उस जीवन में बड़ा संतोष

189
00:13:20,240 --> 00:13:24,320
क्यों क्योंकि हमें पता है कि हमें करना क्या है वो धन है ना जो

190
00:13:24,320 --> 00:13:28,480
मूल्य भगवत प्राप्ति का जो मूल्य है वो हमारे पास आ गया

191
00:13:28,480 --> 00:13:32,640
गुरु गोविंद ग्रंथ अब वह

192
00:13:32,640 --> 00:13:38,640
मोक्ष की जो स्थिति है वह आएगी जब आएगी

193
00:13:42,240 --> 00:13:45,520
गुरुओं से सुना

194
00:13:45,520 --> 00:13:49,920
है गुरुओं से सुना है और मैं ज्ञान नहीं दे रहा हूं

195
00:13:49,920 --> 00:13:53,960
अपनी लाइफ का जो एक्सपीरियंस है वह शेयर कर रहा हूं अगर आपको अच्छा नहीं लग रहा है

196
00:13:53,960 --> 00:13:59,400
तो आप मत सुनिए बंद कर दीजिए चैनल बदल दीजिए

197
00:13:59,400 --> 00:14:03,560
है ना तो यह इसका मजाक उड़ाया था वो मोक्ष

198
00:14:03,560 --> 00:14:08,400
जैसी फीलिंग आई थी गुरुदेव के दर्शन कर लिए तो उ आके ऐसा लग रहा था बस क्या बचा

199
00:14:08,400 --> 00:14:12,440
शंकर परंपरा के शंकराचार्य जिसके लिए स्वयं शंकराचार्य कह

200
00:14:12,440 --> 00:14:17,000
के गए इस गद्दी पर बैठने वाला जो

201
00:14:17,000 --> 00:14:21,240
सन्यासी होगा वह मुझ शिव का रूप ही मान्य होगा उनके दर्शन कर लिए

202
00:14:21,240 --> 00:14:25,480
उनसे दीक्षा प्राप्त कर ली ऐसा लगा क्या बाकी रह गया है

203
00:14:25,480 --> 00:14:29,560
उनका वो जो वास्तविक जीव की चाह का वास्तविक

204
00:14:29,560 --> 00:14:33,800
विषय था वह पता लग गया कि मेरी चा जो है वास्तविकता में वो ईश्वर

205
00:14:33,800 --> 00:14:38,200
प्राप्ति की है इसलिए मैं परेशान रहता हूं यह कार से टीवी से फ्रिज

206
00:14:38,200 --> 00:14:42,360
से काम नहीं चलेगा तो यह सब बातें हैं अभी आए नहीं

207
00:14:42,360 --> 00:14:46,560
हमारे जो गेस्ट हैं 15 मिनट हो चुके हैं तब तक आप लोग

208
00:14:46,560 --> 00:14:50,560
अगर कुछ पूछना चाहे शिवांश भाई कुछ अपना बताने लगो तो

209
00:14:50,560 --> 00:14:56,560
लोगों को व ज्ञान ही लगता है बस फिर क्या

210
00:15:01,920 --> 00:15:06,040
हां लाएंगे सीरीज लाएंगे काम बहुत सारे

211
00:15:06,040 --> 00:15:12,040
हैं करने को वह पूरे नहीं हो पाते नहीं तो करने को बहुत सारे

212
00:15:14,760 --> 00:15:19,080
हैं शिवांश जी आपको देखकर रामपाल

213
00:15:19,080 --> 00:15:25,080
के

214
00:15:25,600 --> 00:15:29,600
चेले तो यह है कि वो मोक्ष का जो भाव था

215
00:15:29,600 --> 00:15:35,040
जो हमने क्या कहा क्यों कहा था इसीलिए कहा था

216
00:15:35,040 --> 00:15:39,240
कि हां फ्लोकी जी अब व्यस्त है शायद कहीं ट्रेवलिंग

217
00:15:39,240 --> 00:15:45,240
में है

218
00:15:46,920 --> 00:15:51,480
अ आप आ जाइए ऊपर आ जाइए आपको

219
00:15:51,480 --> 00:15:55,720
कोई आपत्ति है तो रावल दास जी अगर

220
00:15:55,720 --> 00:16:00,000
आप रामपाल से हैं रामपाल एंड जो

221
00:16:00,000 --> 00:16:04,440
क्या कहेंगे रामपाल एंड पंत से हैं तो

222
00:16:04,440 --> 00:16:08,480
आप आ जाइए ऊपर आकर बातें करिए हमारे पास काफी कुछ है

223
00:16:08,480 --> 00:16:14,480
आपके साथ बोलने बात करने के लिए जय श्री राम सनातनी

224
00:16:20,600 --> 00:16:24,920
जी कोई लिख रहा है रामपाल की शरण ग्रहण करो

225
00:16:24,920 --> 00:16:28,920
उसे नहीं पता ब्राह्मण रामपाल की शरण ले तो रामपाल की

226
00:16:28,920 --> 00:16:33,120
नरक की सीट पक्की हो जाएगी यह बात सत्य है यह हमारे शास्त्र में लिखा

227
00:16:33,120 --> 00:16:37,160
हुआ है जो पैर छूने के लिए मना किया जाता है ना वो इसलिए नहीं कि

228
00:16:37,160 --> 00:16:43,160
निम्न हीन भावना है वो इसलिए कि जिसके जो

229
00:16:43,320 --> 00:16:47,400
जैसे पिता अपने पुत्र के पैर छुए तो उससे पिता को कुछ

230
00:16:47,400 --> 00:16:51,440
नहीं होगा दोष पुत्र को जाएगा तो पुत्र की रक्षा

231
00:16:51,440 --> 00:16:55,520
की दृष्टि से कहा जाता है कि इस इससे इसके इनके

232
00:16:55,520 --> 00:16:59,720
पैर छूने चाहिए आपको इनके छूने चाहिए वो जिसके पैर छुए

233
00:16:59,720 --> 00:17:03,840
जा रहे हैं उनके लिए कुछ नहीं है वह

234
00:17:03,840 --> 00:17:08,560
अगर गलत व्यक्ति से छिला लेंगे जिससे नहीं छिला नहीं चाहिए पैर जैसे मान लीजिए

235
00:17:08,560 --> 00:17:12,560
कि पुत्र अपने पिता से पैर चिलवा ले

236
00:17:12,560 --> 00:17:16,920
तो पिता को दोष नहीं आएगा इसमें इसमें इसका दोष

237
00:17:16,920 --> 00:17:22,920
पुत्र को

238
00:17:24,120 --> 00:17:28,280
लगेगा बहुत अच्छे गीत है उनके गोपी गीत

239
00:17:28,280 --> 00:17:33,400
हमारे पास भी कुछ ग्रंथ है पर बहुत सारे

240
00:17:33,400 --> 00:17:37,600
कार्य रहते हैं तो थोड़ा समय कम मिल पाता है मगर

241
00:17:37,600 --> 00:17:42,160
ठीक है असतो मा सद माया तमस मा जमाया

242
00:17:42,160 --> 00:17:46,360
राम हमारे साथ श्री

243
00:17:46,360 --> 00:17:50,800
रघुनाथ फिर किस बात की चिंता

244
00:17:50,800 --> 00:17:54,800
भाई आप अपना एड्रेस बता दीजिए हम आ जाएंगे वहां जब

245
00:17:54,800 --> 00:17:58,960
कभी आपके आसपास से निकलेंगे तो आ जाएंगे आपको आप नंबर दे

246
00:17:58,960 --> 00:18:03,720
दीजिए संपर्क कर लेंगे हमारा नंबर नोट कर लीजिए

247
00:18:03,720 --> 00:18:09,600
कभी लखनऊ आए तो फोन करिएगा 740

248
00:18:09,600 --> 00:18:13,640
8369 ठीक है और अगर अभी चर्चा की इच्छा हो तो अभी

249
00:18:13,640 --> 00:18:19,640
भी ऊपर आ सकते

250
00:18:21,800 --> 00:18:25,920
हैं प्यारी बहना ढेर सारा दुलार

251
00:18:25,920 --> 00:18:29,320
आपको और

252
00:18:29,320 --> 00:18:33,480
शिवांश भैया पता है मेरे पापा रामपाल को मानते हैं आपकी

253
00:18:33,480 --> 00:18:37,800
उन छह वीडियोस के थ्रू मैं उनको समझा

254
00:18:37,800 --> 00:18:42,320
पाऊंगी बहुत अच्छा बेटा और थैंक यू मुझे मत बोलो

255
00:18:42,320 --> 00:18:48,320
गुरुदेव को बोलो गुरु गोविंद और ग्रंथ को

256
00:18:52,280 --> 00:18:56,640
बोलो जी उस पर सोच रहे हैं कि उसको अच्छे से रिकॉर्ड रिकॉर्ड

257
00:18:56,640 --> 00:19:00,600
करके और एक

258
00:19:00,600 --> 00:19:06,600
गीत के रूप में प्रस्तुत

259
00:19:08,760 --> 00:19:12,920
करें आपत्ति जनक शब्दों का उपयोग ना किया करिए वोह

260
00:19:12,920 --> 00:19:16,960
कर रहे हैं करने दीजिए हम लोग अपनी मर्यादा के अंदर रह कर के

261
00:19:16,960 --> 00:19:21,280
भी तोड़ सकते हैं अच्छे से मर्यादा को लांग

262
00:19:21,280 --> 00:19:25,400
कर ही तोड़ने में वह मजा नहीं है जो मर्यादा के अंदर रहते हुए तोड़ने

263
00:19:25,400 --> 00:19:29,480
में आनंद है आपने हमारी शैली देखी

264
00:19:29,480 --> 00:19:33,560
हो रावल दास जी आपको अगर कोई चर्चा करनी है तो आप ऊपर आ सकते हैं

265
00:19:33,560 --> 00:19:37,640
अन्यथा टेलीफोन फोन के माध्यम से हमसे संपर्क कर

266
00:19:37,640 --> 00:19:41,480
सकते अच्छा

267
00:19:41,480 --> 00:19:45,920
आपको लोकी जी ने संपर्क दिया था

268
00:19:45,920 --> 00:19:51,920
अच्छा बहुत

269
00:19:54,760 --> 00:20:00,760
बढ़िया ब्रह्मा जी और सरस्वती जी का विवाह

270
00:20:03,800 --> 00:20:08,280
छोटे भाइयों को ढेर सारा आशीर्वाद और

271
00:20:08,280 --> 00:20:14,280
बाकी सभी को यथोचित

272
00:20:16,000 --> 00:20:20,200
अभिवादन भैया तो चलिए ब्रह्मा

273
00:20:20,200 --> 00:20:24,640
सरस्वती विवाह पर ही बात कर लेते हैं अभी

274
00:20:24,640 --> 00:20:29,960
जो ब्रह्मा सरस्वती विवाह है

275
00:20:29,960 --> 00:20:34,200
उसके तीन प्रकार के अर्थ हैं

276
00:20:34,200 --> 00:20:38,280
जो उसका आदि दैविक अर्थ है वह यह है

277
00:20:38,280 --> 00:20:42,480
कि उसमें बताया गया है कि संसार की रचना

278
00:20:42,480 --> 00:20:47,040
भगवान कैसे करते हैं पहले एक से दो होते हैं

279
00:20:47,040 --> 00:20:51,400
तो क्योंकि सरस्वती जी उन्हीं से उत्पन्न थी ब्रह्मा जी से

280
00:20:51,400 --> 00:20:55,680
अब हमारे अतिथि आ चुके हैं यह फिर चर्चा

281
00:20:55,680 --> 00:20:59,240
किसी और दिन करते हैं

282
00:20:59,240 --> 00:21:04,000
जय श्री राम जय श्री राम जी

283
00:21:04,000 --> 00:21:08,200
आवा आपका स्वागत है आपका स्वागत है हमारे

284
00:21:08,200 --> 00:21:12,040
चैनल पर

285
00:21:12,040 --> 00:21:16,120
और आप मैं कहूंगा कि हमारे दर्शकों को आप ही अपना परिचय

286
00:21:16,120 --> 00:21:20,680
बता

287
00:21:20,680 --> 00:21:24,800
दे हम हरे कृष्णा सेंटर से

288
00:21:24,800 --> 00:21:28,880
हैं और प्रभुपाद जी को अपने गुरु

289
00:21:28,880 --> 00:21:34,120
के तौर पर मानते हुए हम कृष्ण भक्ति का अनुसरण करते हैं

290
00:21:34,120 --> 00:21:38,040
और बहुत अच्छे

291
00:21:38,040 --> 00:21:42,320
से नाम आप एक बार अपना बताएंगे मैं नाम बोल रहा हूं

292
00:21:42,320 --> 00:21:46,680
शिवांश नारायण द्विवेदी शिवांश जी के कुछ मैंने वीडियोस

293
00:21:46,680 --> 00:21:51,600
देखे थे तो काफी अच्छा प्रचार ये कर रहे हैं अच्छा लगता है यंग एज में

294
00:21:51,600 --> 00:21:56,120
लोग प्रचार के लिए लगे हुए हैं तो मैंने बहुत सारे वीडियो जिनके देखे

295
00:21:56,120 --> 00:22:00,360
और उसमें काफी सारे डिस्कशन के स्कन के

296
00:22:00,360 --> 00:22:04,560
और और भक्तों के साथ भी है तो काफी अच्छी

297
00:22:04,560 --> 00:22:08,560
चर्चाएं होती है तो मुझे देख के अच्छा लगा सुन के भी

298
00:22:08,560 --> 00:22:12,760
अच्छा लगा होना भी चाहिए तो कुछ चीजें थी जिनको लेकर

299
00:22:12,760 --> 00:22:16,920
मेरा इनसे प्रश्न था उसको लेकर हम आज इनसे वार्तालाप करने के लिए

300
00:22:16,920 --> 00:22:20,960
यहां आए थे तो उम्मीद करते हैं कि आपने शायद मोबाइल को

301
00:22:20,960 --> 00:22:25,160
बहुत दूर तो नहीं रख रखा है ऐसा लग रहा है बहुत दूर है मोबाइल से आवाज कम आ रही है

302
00:22:25,160 --> 00:22:27,080
मे पास मोबाइल नहीं है मेरे पास लैपटॉप

303
00:22:27,080 --> 00:22:31,200
है लैपटॉप से कर र बहुत दूर है क्या लैपटॉप नहीं पास मेंही

304
00:22:31,200 --> 00:22:35,960
है बकल पास में अच्छा चलिए कोई बात नहीं काम चला लेंगे

305
00:22:35,960 --> 00:22:40,000
यूज कर हा ईयरफोन यूज कर लेता

306
00:22:40,000 --> 00:22:46,000
हूं तो शद एक बार ट्राई करके देख लीजिए शायद अच्छी आवाज आ

307
00:22:50,480 --> 00:22:56,480
जाए हरे

308
00:22:57,440 --> 00:23:01,960
कृष्णा अी आवाज आ रहा है साफ इंप्रूवमेंट हुआ कुछ

309
00:23:01,960 --> 00:23:05,120
वैसा ही आ रहा

310
00:23:05,120 --> 00:23:09,120
है ठीक है हो सकता है आपके हां ठीक है ये आवाज ठीक है

311
00:23:09,120 --> 00:23:13,200
जो आ रही है अभी मैं आपसे मैं ये कहूंगा आपने अपना शुभ

312
00:23:13,200 --> 00:23:17,240
नाम नहीं बताया दर्शकों को अच्छा नाम नहीं बताया मेरा

313
00:23:17,240 --> 00:23:21,640
नाम है विवेक शर्मा

314
00:23:21,640 --> 00:23:25,800
विवेक शर्मा और विवेक शर्मा जी हरे कृष्णा सेंटर

315
00:23:25,800 --> 00:23:29,920
से हैं और भी बहुत सारे नाम है मैंने अपना आईडी नेम बता

316
00:23:29,920 --> 00:23:34,080
दिया अच्छा विवेक शर्मा जी के बारे में जो हमें

317
00:23:34,080 --> 00:23:38,080
बताया गया वो यह है कि विवेक शर्मा जी हरे कृष्ण सेंटर

318
00:23:38,080 --> 00:23:42,240
से हैं हरे कृष्ण सेंटर इज नॉट फ्रॉम

319
00:23:42,240 --> 00:23:46,360
एक्जेक्टली स्कन स्कन नहीं है वो इसकन से थोड़ा

320
00:23:46,360 --> 00:23:50,920
अलग है क्योंकि यहां पर प्रभुपाद जी के पद चिन्हों पर तो चलते हैं

321
00:23:50,920 --> 00:23:55,000
पर कुछ बात में कुछ बातों में कुछ बातों को लेकर डिफरेंसेस ऑफ

322
00:23:55,000 --> 00:23:59,280
ओपिनियन है स्कोन के साथ इसलिए इनका एक अलग इनका

323
00:23:59,280 --> 00:24:03,320
हरे कृष्ण नाम से सेंटर है यह भी तो एक वर्ल्ड वाइड चैन

324
00:24:03,320 --> 00:24:07,320
तरीके से ही होगा जैसे स्कन की ब्रांचेस है

325
00:24:07,320 --> 00:24:11,560
हा स्कन ही है एक तरीके से पूरा वो नहीं बोलेंगे ब

326
00:24:11,560 --> 00:24:15,720
प्रभुपाद जी को मानते हैं बस यही बाकी सबन का

327
00:24:15,720 --> 00:24:19,800
पार्ट है कुछ ऐसा मतभेद वाला

328
00:24:19,800 --> 00:24:23,920
व नहीं है सोच नहीं है नहीं तो कोई मुख कोई कारण तो

329
00:24:23,920 --> 00:24:29,040
है ना जिससे अल मुख्य कारण यही है कि

330
00:24:29,040 --> 00:24:33,280
हम लोग प्रभुपाद जी को ही गुरु परंपरा में प्रभुपाद जी को अंतिम

331
00:24:33,280 --> 00:24:37,440
गुरु मानते हैं और उनको ही गुरु मान के और भक्ति में आगे बढ़ते

332
00:24:37,440 --> 00:24:41,520
हैं और इसन में कुछ नए जो भक्त लोग है

333
00:24:41,520 --> 00:24:45,680
उनको गुरु मानते हैं बस यही अ मतलब उसमें गुरु आगे

334
00:24:45,680 --> 00:24:49,720
बढ़ रहे हैं गुरु बढ़ते जा रहे हैं और आपके में गुरु अंतिम गुरु प्रभुपाद

335
00:24:49,720 --> 00:24:53,800
जी ही है अच्छा यहां पर मैं यह थोड़ा सा जानना

336
00:24:53,800 --> 00:24:56,280
चाहूंगा

337
00:24:56,280 --> 00:24:57,280
कि

338
00:24:57,280 --> 00:25:01,360
क्या ऐसी कोई बात मतलब कोई कारण है कि प्रभुपाद जी के बाद कोई और दीक्षा

339
00:25:01,360 --> 00:25:05,680
नहीं देगा ये इस तरह का जो क्योंकि ये लॉजिकल नहीं है

340
00:25:05,680 --> 00:25:09,960
लॉजिकल तो वही ठीक लग रहा है कि आगे गुरु बढ़ते जाए बढ़ते जाए

341
00:25:09,960 --> 00:25:14,000
कन वाला ठीक लग रहा है ऐसे हा इसलिए मैं पूछ रहा हूं कि ऐसा कोई

342
00:25:14,000 --> 00:25:18,000
निर्णायक कोई वक्तव्य क्या कारण है जो गुरु नहीं बढ़ने का मतलब

343
00:25:18,000 --> 00:25:22,240
आप वहीं पर रुक गया है इन सब चीजों को तो मैं बाद

344
00:25:22,240 --> 00:25:26,600
में बोलना वो करूंगा पहले जो मैं आपसे नहीं ये जो

345
00:25:26,600 --> 00:25:31,240
ये जो लाइट वाली चीजें हैय हो जाए फिर हम लोग उस पर आए

346
00:25:31,240 --> 00:25:35,360
मुख्य विषयों पर नहीं मैं प्रशंसा करता हूं आपके र तरीको

347
00:25:35,360 --> 00:25:39,800
की आप बहुत अच्छे से चालाकी से लोगों से प्रश्न पूछते हैं

348
00:25:39,800 --> 00:25:44,000
लेकिन लाइट नहीं है लाइट नहीं है बड़ा प्रश्न है तो

349
00:25:44,000 --> 00:25:48,000
पहले बहुत अच्छी ब

350
00:25:48,000 --> 00:25:52,440
यह विषय असल में चल रहा है ना क्योंकि आपने बताया थोड़ा सा अलग है

351
00:25:52,440 --> 00:25:56,480
इसलिए मैं जानना चाह रहा था कि क्या वो कारण है हा

352
00:25:56,480 --> 00:26:01,960
अलग ऐसा कुछ नहीं है बहुत ज्यादा कुछ अलग अलग वाली बात नहीं

353
00:26:01,960 --> 00:26:05,960
है में इस चर्चा करेंगे जैसे हम कॉल पर बात किए थे तो

354
00:26:05,960 --> 00:26:10,400
मैंने क पहले आपसे चर्चा कभी समाप्त नहीं होती है ज्यादातर

355
00:26:10,400 --> 00:26:12,360
वो पोप होती है

356
00:26:12,360 --> 00:26:16,480
अधूरी रह जाती है बात कर लेंगे नहीं होगी पोस्ट

357
00:26:16,480 --> 00:26:20,640
अपन बात

358
00:26:20,640 --> 00:26:24,680
करेंगे बहुत अच्छा है आप बहुत तरीके से पूछते हो

359
00:26:24,680 --> 00:26:28,840
चीजों को तो इसलिए मैं तो पहले से सोच के आया था मैंने कहा मैं आपको कम पूछने

360
00:26:28,840 --> 00:26:33,000
दूंगा आप सबसे पूछते रहते हैं मैं आपसे पूछूंगा तो अच्छा है तेरी

361
00:26:33,000 --> 00:26:37,480
बारी है कमर कसले तेरे बस में है सारे मसले

362
00:26:37,480 --> 00:26:41,600
नहीं नहीं नहीं ऐसा भी ऐसा ऐसा कोई वो नहीं है मत तेरे टूटे हुए

363
00:26:41,600 --> 00:26:46,000
दिल की उम्मीदों प हिम्मत की उड़ाने बढ़ ले

364
00:26:46,000 --> 00:26:50,240
वो सोच के भी नहीं आए हम बस वही है कि देखो एक

365
00:26:50,240 --> 00:26:54,600
ही एक ही देखिए मैं आपसे वाकई में कह तो मैं आपसे सुखद

366
00:26:54,600 --> 00:26:58,960
चर्चा करने ही आया हूं मैं आपको काउंटर करने नहीं आया हूं

367
00:26:58,960 --> 00:27:03,360
यह मैंने अपने मन में सोचा था इस चर्चा से पहले कि अगर डिफरेंस

368
00:27:03,360 --> 00:27:07,480
ऑफ ओपिनियन की जगह आएगी भी तो मैं

369
00:27:07,480 --> 00:27:12,160
वो नहीं होगा जो एक होता है ना कि आक्रामकता आती है

370
00:27:12,160 --> 00:27:16,360
वैचारिक मतभेद में वो नहीं आएगी यह मैं सोच के आया था

371
00:27:16,360 --> 00:27:20,560
नहीं उसी तरीके से बात तो अच्छा लगता है और अत

372
00:27:20,560 --> 00:27:25,400
में एक ही ही देखिए आप जो कह रहे हैं ना

373
00:27:25,400 --> 00:27:27,600
कि आप डायरेक्ट प्रभुपाद

374
00:27:27,600 --> 00:27:31,640
जी को मानते गुरु प्रणाली आगे नहीं बढ़ रही है तो इसमें मेरे पास

375
00:27:31,640 --> 00:27:35,720
कुछ लोगों ने संपर्क किया है बीच में मैं आपको बताऊ अंदर की बात

376
00:27:35,720 --> 00:27:39,800
क्या है उन्होंने मुझे कहा कि जो स्पन जो चीजें

377
00:27:39,800 --> 00:27:44,440
बता रहा है प्रभुपाद जी थोड़ा अलग बताते उन्होंने डाउट डाला

378
00:27:44,440 --> 00:27:48,680
उन्होंने कहा कि प्रभुपाद जी ने यह नहीं कहा कि सिर्फ कृष्ण ही सुप्रीम

379
00:27:48,680 --> 00:27:52,840
है प्रभुपाद जी ने ये कहा कि जो तुम्हारा य जो वैदिक ईश्वर

380
00:27:52,840 --> 00:27:57,080
स्वरूप है उनमें से जिसकी तुम जो तुम्हारे ईट है उनकी भक्ति करो ऐसा

381
00:27:57,080 --> 00:28:01,280
उन्होंने मुझसे कहा मैं अपने आप नहीं बोल रहा मेरे पास चैट है उनकी और यह वाली चीज

382
00:28:01,280 --> 00:28:05,760
कि वो जो स्पन कह रहा है वो काफी चीजें अलग है अ

383
00:28:05,760 --> 00:28:10,320
जो बाहर के देशों में स्पन का स्वरूप है वो अलग है यहां पर अलग से चल रहा है कुछ मामला

384
00:28:10,320 --> 00:28:14,640
और किताबों में अच्छा हरे कृष्ण नाम से वेबसाइट है

385
00:28:14,640 --> 00:28:18,800
उसमें बहुत सारे एलिगेशंस उन्होंने बुक में चेंजेज किए

386
00:28:18,800 --> 00:28:22,800
हैं वो जो जय द्वेत नाम के कोई व्यक्ति है

387
00:28:22,800 --> 00:28:26,800
आपके यहां जो बीबीटी को देखते हैं तो

388
00:28:26,800 --> 00:28:30,800
उन्होंने उस परे भी कहा है कि जय द्वेत य क्यों कर रहा है क्यों बदलाव कर रहा है

389
00:28:30,800 --> 00:28:35,000
प्रभुपाद जी के लिखे हुए को क्यों बदल रहा है इसलिए मैंने आपसे पहली

390
00:28:35,000 --> 00:28:39,000
बात तो एक मैंने वही एक लाइट सा आपके साथ अनुभव रखा य नहीं

391
00:28:39,000 --> 00:28:42,800
रखा कि मैं आपको जो है काउंटर ही करूं

392
00:28:42,800 --> 00:28:46,800
काउंटर ना करने की स्थिति होती कि जब वैचारिक मतभेद आ रहे होते हैं बीच में तो

393
00:28:46,800 --> 00:28:50,840
ठीक है उस बात को छोड़ के आगे चल देते हैं मैं तो ये कहूंगा कि आप काफी

394
00:28:50,840 --> 00:28:55,200
समझदार है और चीजों को समझते हैं तो बोलने वालों के तो 10

395
00:28:55,200 --> 00:28:59,600
मुह होते हैं बोलने वाले को लोग कुछ भी बोल सकते हैं लेकिन मुझे वो वो वेबसाइट

396
00:28:59,600 --> 00:29:03,600
आपकी नहीं है क्योंकि उसमें हरे कृष्णा नाम ही है उस वेबसाइट का हां तो वही

397
00:29:03,600 --> 00:29:07,760
मैं बोल रहा हूं जब एक बुद्धिजीवी होने के नाते एक समझदार व्यक्ति होने

398
00:29:07,760 --> 00:29:11,800
के नाते हमें तो अथॉरिटीज को फॉलो करना चाहिए जो सच में योग्य

399
00:29:11,800 --> 00:29:16,040
है सच में गंभीर व्यक्ति है उनके मत को मानना चाहिए अब य प आप जाओगे

400
00:29:16,040 --> 00:29:20,400
ग पय नहीं मैं बस क्लियर कर रहा हूं हरे कृष्ण

401
00:29:20,400 --> 00:29:24,480
वेबसाइट आपकी नहीं है वो वो हरे कृष्णा

402
00:29:24,480 --> 00:29:28,920
सेंटर हरे कृष्णा सेंटर शायद नहीं होगा वल्व

403
00:29:28,920 --> 00:29:33,120
और ऐसा कुछ मत नहीं रखते ना हमारे

404
00:29:33,120 --> 00:29:37,200
और जैसे जैसे जैसे जैसे चीज बड़ी होती चली जाती है आप जैसे

405
00:29:37,200 --> 00:29:41,200
आगे बढ़ेंगे आप अभी जो आवान चला रहे हैं तो जैसे जैसे आप आगे बढ़ेंगे तो

406
00:29:41,200 --> 00:29:45,320
आपके ऊपर बहुत सारे एलिगेशन लगना आपके बारे में बोलना लोग शुरू करेंगे तोय

407
00:29:45,320 --> 00:29:49,320
तो तो चालू हो गया चालू हो

408
00:29:49,320 --> 00:29:53,680
गया तो बातो को तोड़ मरोड़ करके दूसरा भाव करके

409
00:29:53,680 --> 00:29:58,480
देखो ईश्वर को कह रहा है बलात्कारी है रेपिस्ट है तो ये सब चीज

410
00:29:58,480 --> 00:30:02,520
हम लोग अच्छा हमने अपने चैनल पर इस तरह के प्रयास कभी नहीं किए कि हम

411
00:30:02,520 --> 00:30:06,920
जब समझ रहे हैं जैसे रासकल वाली जो बात है प्रभुपाद जी की हमने कभी उसको नहीं उठ

412
00:30:06,920 --> 00:30:11,200
ा क्योंकि वहां पर जब हम उसकी कमेंट्री पढ़ेंगे तो भाव

413
00:30:11,200 --> 00:30:15,320
पढ़ेंगे उनके जो शिष्य उनके द्वारा समझेंगे उसे तो तत्व निकल

414
00:30:15,320 --> 00:30:19,400
आएगा तो हम ऐसी बातों को नहीं छेड़ते जिसमें की जो जैसे

415
00:30:19,400 --> 00:30:23,520
जो आप ही को नहीं स्वीकार है उसका हम आप आक्षेप लगाए आप ही

416
00:30:23,520 --> 00:30:27,560
को स्वीकार नहीं है तो हम उसके बारे में कभी नहीं उठाते भाव को बदल के

417
00:30:27,560 --> 00:30:31,760
कभी नहीं करते बस मैं तो वही उम्मीद कर रहा था कि आप

418
00:30:31,760 --> 00:30:35,840
बहुत अच्छे से चीज करते हो शंकराचार्य की टीचिंग तो बहुत प्रोमट बताई गई है

419
00:30:35,840 --> 00:30:40,200
सब जगह प्रभुपाद जी ने भी खूब सारा बखान किया है करपात्री

420
00:30:40,200 --> 00:30:44,560
महाराज प्रभुपाद जी के समय जो रहे उनके बारे में काफी कुछ बोला है प्रभुपाद जी

421
00:30:44,560 --> 00:30:48,560
ने एक छोटा सा प्रश्न और करूंगा फिर हम लोग अपना मुख्य विषय पर

422
00:30:48,560 --> 00:30:52,560
आ जाते हैं जनरल प्रश्न है जनरल

423
00:30:52,560 --> 00:30:56,720
प्रश्न मुझे प करना है मुझे आपसे पूछने है प्रश्न आप

424
00:30:56,720 --> 00:31:01,520
लास्ट में पूछिए बार ये तो

425
00:31:01,520 --> 00:31:05,680
लग रहा है मुझे बारबार घूम फिर के उधर ही आ रहे हो पहले इनको

426
00:31:05,680 --> 00:31:09,760
पकड़ लिया जाए नहीं नहीं एक जनरल क्वेश्चन है रित्विक जो है

427
00:31:09,760 --> 00:31:13,520
आपका आपसे अलग है या ही रित्विक का मतलब

428
00:31:13,520 --> 00:31:18,160
य होता है जो प्रभुपाद को फॉलो करते हैं र वो कहलाते हैं जो गुरु

429
00:31:18,160 --> 00:31:23,400
नए गुरु है उनको फॉलो नहीं करे तो हम ही कहलाते तो आप

430
00:31:23,400 --> 00:31:27,480
रित्विक रित्विक हो ना वो जो सेंटर जो चल रहा है जो एक आपकी

431
00:31:27,480 --> 00:31:31,720
तरफ से आते बीच बीच में धर्मा लाइव पर भी आए

432
00:31:31,720 --> 00:31:36,200
वो एकद बार पता नहीं मुश्किल होगा कोई आया

433
00:31:36,200 --> 00:31:41,280
होगा ऐसे उनको नहीं जानते आप क्या नाम

434
00:31:41,280 --> 00:31:45,520
है आपका आपको नहीं नहीं

435
00:31:45,520 --> 00:31:49,640
ऋत्विक की तरफ से जो एक रिप्रेजेंटेटिव है जो य इत्यादि पर सोशल मीडिया

436
00:31:49,640 --> 00:31:54,360
पर दिखते हैं बहुत है और सोशल मीडिया

437
00:31:54,360 --> 00:31:58,600
पर एक थोड़े वृद्ध से है उनका क्या नाम है नाम वो धर्मा

438
00:31:58,600 --> 00:32:02,680
लाइव चैनल पर आए हैं कई बार उसका पक्ष रखने पुराणों का अवतारवाद

439
00:32:02,680 --> 00:32:06,680
का पुराण का ये काफी काफी बढे हैं क्या सीनियर है क्या

440
00:32:06,680 --> 00:32:11,320
हां हां वृंदावन चंद्र

441
00:32:11,320 --> 00:32:15,600
दस वृंदावन चंद्र दस अच्छा बेंगलोर

442
00:32:15,600 --> 00:32:20,480
से है शायद गिव गीतावली

443
00:32:20,480 --> 00:32:24,480
दिल्ली तो वो वो ऋत्विक है ना वो गिव गीता वाले वो

444
00:32:24,480 --> 00:32:28,480
ऋत्विक है प्रभुपाद जी को फॉलो करने वाले प्रभुपाद जी को

445
00:32:28,480 --> 00:32:32,560
फॉलो करने वाले बहुत लोग हैं आप उनसे जुड़े हैं कि नहीं जुड़े हैं

446
00:32:32,560 --> 00:32:36,640
नहीं नहीं नहीं नहीं उनसे नहीं है हरे कृष्णा सेंटर थोड़ा अलग है आपका

447
00:32:36,640 --> 00:32:40,720
अलग हैई एक एक साथ एक साथ सब लोग ये प्रभुपाद

448
00:32:40,720 --> 00:32:44,840
जी को फॉलो करने वाले बहुत है घर घर पर लोग फॉलो कर रहे हैं और अपने हिसाब से प्रचार

449
00:32:44,840 --> 00:32:48,840
कर रहे हैं बाकी वो इकन के सहयोग गीता वही

450
00:32:48,840 --> 00:32:52,960
पढ़ते हैं जो इकन पढ़ाता है वही वही एज इट इज

451
00:32:52,960 --> 00:32:57,120
वो नहीं चेंज वाली को अवॉइड करते हैं जहां प्रभुपाद जी के शब्दों में बदलाव

452
00:32:57,120 --> 00:33:01,320
किया उसको नकारते थोड़ा जिसने बदलाव कर दिया प्र

453
00:33:01,320 --> 00:33:05,440
इस बात को लेके है ना आपका भी जो प्रभुपाद के शब्दों को बदला इस बात

454
00:33:05,440 --> 00:33:09,640
को लेके आप तो पर उसम

455
00:33:09,640 --> 00:33:13,960
बहुत ज्यादा ऐसे कोई वो नहीं है कि लड़ना है हमें और ऐसा करना है ऐसा कोई भावना

456
00:33:13,960 --> 00:33:18,000
नहीं है भाई सर तो सदैव पेट की ओर ही झुकेगा

457
00:33:18,000 --> 00:33:22,200
आपको देख के ऐसा लग रहा है चलिए

458
00:33:22,200 --> 00:33:27,080
बोलिए आपका प्रश्न कितने है पहले बता दीजिए

459
00:33:27,080 --> 00:33:31,520
प्रश् तीन चार पाच कुछ ऐसे ऐसे

460
00:33:31,520 --> 00:33:35,560
मेरी बातो को थोड़ा सा मेरे प्रश्नों को आप थोड़ा सा दिमाग से सुनिए

461
00:33:35,560 --> 00:33:39,640
दिल से मत सुनिए क्योंकि दिल तो थोड़ा पागल टाइप

462
00:33:39,640 --> 00:33:43,920
होता है तो दिमाग से थोड़ा इंटेलेक्चुअली सुनेंगे तो थोड़ा

463
00:33:43,920 --> 00:33:48,080
आपको अच्छा लगेगा कुछ प्रश् तो

464
00:33:48,080 --> 00:33:52,080
पहला तो प्रश्न यही था कि एक वीडियो में मैंने आपके देखा था जिसम आप

465
00:33:52,080 --> 00:33:56,120
बोल रहे थे कि न और हरे कृष्णा के जो ईश्वर है वो बाद

466
00:33:56,120 --> 00:34:00,720
है सीमित है फिर आपने उसम बताया था कि अगर आध्यात्मिक

467
00:34:00,720 --> 00:34:04,760
जगत में जीव चला जाता है तो फिर क्योंकि भगवान

468
00:34:04,760 --> 00:34:08,920
सीमित है इसलिए उसको बचा नहीं पा रहे तो वो लौट के वापस आ जाता है

469
00:34:08,920 --> 00:34:13,080
नहीं ये मैंने नहीं कहा ये स्टेटमेंट नहीं है मेरा बचा नहीं पा

470
00:34:13,080 --> 00:34:17,400
सीमित वादित बाधित है कहीं ना क ईश्वर सीमित है ईश्वर का

471
00:34:17,400 --> 00:34:21,470
ईश्वर का असीमित होना वहां के लिए है ही नहीं मुक्ति वाली जगह के

472
00:34:21,470 --> 00:34:25,640
[संगीत] लिए भाव य था संसार के लिए

473
00:34:25,640 --> 00:34:29,680
हा वहां कैसे कं आ गया उपर आध्यात्मिक जगत

474
00:34:29,680 --> 00:34:33,680
में य भाव था आपका वहा कैसे आध्यात्मिक जगत के

475
00:34:33,680 --> 00:34:37,760
लिए मैंने कभी भी य सवाल नहीं रखा है कि वहां पर भगवान असीमित है

476
00:34:37,760 --> 00:34:42,600
कि नहीं यह भौतिक जगत में भगवान असीमित है कि नहीं सवाल य है

477
00:34:42,600 --> 00:34:46,720
अच्छा अच्छा तो अब इसका आपको उदाहरण दे दू आपको

478
00:34:46,720 --> 00:34:51,080
इसका उ आप ही बता दीजिएगा इसमें यह है

479
00:34:51,080 --> 00:34:55,120
बाधित ऐसे है कि हमने कहा कि भगवान श्री कृष्ण जैसे बैकुंठ में

480
00:34:55,120 --> 00:34:59,400
बैठते हैं वैसे ही व य आते हैं

481
00:34:59,400 --> 00:35:03,440
कहा ना उनका शरीर शाश्वत

482
00:35:03,440 --> 00:35:07,520
है शाश्वत है करेक्ट ठीक है तो शाश्वत

483
00:35:07,520 --> 00:35:11,760
का अर्थ तो यह है कि वह ना तो गलेगा ना सड़ेगा नैनम

484
00:35:11,760 --> 00:35:15,800
छिंदंति शस्त्राणि नन धती पाव का आत्मा के गु

485
00:35:15,800 --> 00:35:20,120
आत्मा हा तो उनका शरीर शाश्वत है

486
00:35:20,120 --> 00:35:24,880
अब शाश्वत का अर्थ हम ये भी ले सकते हैं जो परिवर्तित परिवर्तनशील

487
00:35:24,880 --> 00:35:29,200
नहीं होता है व जो परिवर्तनशील है वो शाश्वत

488
00:35:29,200 --> 00:35:33,520
नहीं है जैसे हमारा धर्म सनातन है

489
00:35:33,520 --> 00:35:37,520
तो सनातन का अर्थ है वो बदलेगा नहीं वही रहेगा वो सनातन हो

490
00:35:37,520 --> 00:35:41,720
गया और जो बदलते हैं वो सनातन नहीं है जैसे

491
00:35:41,720 --> 00:35:45,840
इस्लाम इत्यादि की जो शिक्षाएं है बदलती है समय समय प

492
00:35:45,840 --> 00:35:49,880
वो सनातन नहीं

493
00:35:49,880 --> 00:35:54,040
तो क्या आप ये मानते हैं कि जो श्री कृष्ण है उनका

494
00:35:54,040 --> 00:35:58,520
शरीर शाश्वत है और वो एज इट इज वहां से आते हैं

495
00:35:58,520 --> 00:36:03,920
बिल्कुल दिव्य भी जोड़ दो उसम ट्रांसल बॉडी है

496
00:36:03,920 --> 00:36:08,280
क्या ट्रेंटल बॉडी है ये एक और चीज जोड़ दीजिए

497
00:36:08,280 --> 00:36:12,440
कि आप जो शाश्वत है वो तो है ही और दिव्य शरीर भी है ट्रांसल

498
00:36:12,440 --> 00:36:16,680
बॉडी है उनका दिव्य जनम क

499
00:36:16,680 --> 00:36:21,200
दिव्य को थोड़ा प्रैक्टिकली प्रैक्टिकली समझाइए व्यवहार में जब आ गए वो

500
00:36:21,200 --> 00:36:25,680
जब वो आ गए व्यवहारिक रूप से समझाइए दिव्य को व्यवहारिक

501
00:36:25,680 --> 00:36:30,080
रूप से अचिंत शब्द भी उपयोग किया गया है इस भावना

502
00:36:30,080 --> 00:36:34,280
तो फिर अचिंत है तो फिर सब बात ही अचिंत है बात ही खत्म हो

503
00:36:34,280 --> 00:36:38,320
गई पास का उत्तर यही है चिंत क्या बताऊ नहीं

504
00:36:38,320 --> 00:36:42,480
नहीं नहीं नहीं वो नहीं है अपने सेसेस परबल है बट अभी जो हमारी

505
00:36:42,480 --> 00:36:46,600
इंद्रिया है उनसे परसी नहीं किया जा सकता अचिंत का मतलब य नहीं है कि

506
00:36:46,600 --> 00:36:50,760
उसको नहीं जाना जा सकता अचिंत का मतलब है भौतिक इंद्रियो से नहीं समझा

507
00:36:50,760 --> 00:36:55,520
जा सकता के दो प्रकार के स्वरूप हम भी मानते हैं

508
00:36:55,520 --> 00:37:00,040
एक जिसको समझा नहीं जा सकता वो अचिंत है

509
00:37:00,040 --> 00:37:04,320
व्यवहार में ना आ सकने लायक वो से परव

510
00:37:04,320 --> 00:37:04,960
नहीं किया जा

511
00:37:04,960 --> 00:37:09,320
सकता वो जो स्वरूप है वो परमार्थिक है उसको केवल प्राप्त

512
00:37:09,320 --> 00:37:13,400
कर सकते हैं अगर हम यहां से देखें तो मगर आप क्या कर

513
00:37:13,400 --> 00:37:17,400
रहे हैं कि श्री कृष्ण का जो पार मर्थक स्वरूप है उसको यहां लेकर आ रहे हैं व्यवहारिक

514
00:37:17,400 --> 00:37:22,120
बना रहे हैं उसको आप व्यवहार में ला रहे हैं श्री कृष्ण बना

515
00:37:22,120 --> 00:37:26,160
चाह रहा था आप कैसे समझते हैं उस चीज को आप कैसे पढ़े हैं आपने

516
00:37:26,160 --> 00:37:30,200
वहा कह दिया बात ही खत्म हो गई आपको पता ही नहीं है वो वो तो

517
00:37:30,200 --> 00:37:34,720
हमारा मत है वो तो हम पढ़ रहे जान रहे और उसम मैंने बताया

518
00:37:34,720 --> 00:37:40,720
मल है अगर अंत है

519
00:37:41,480 --> 00:37:45,800
अगर बता रहा अगर वह अचिंत है विषय

520
00:37:45,800 --> 00:37:50,960
तो फिर उसको आप शाश्वत भी मत बोलिए केवल दिव्य

521
00:37:50,960 --> 00:37:55,040
बोलिए क्योंकि अगर शाश्वत बोलेंगे तो यह डेफिनेशन

522
00:37:55,040 --> 00:37:59,480
लागू हो जाएगी कि वो बदलाव नहीं आएगा और जब बदलाव नहीं आएगा

523
00:37:59,480 --> 00:38:03,680
तो वह सीमित हो जाएंगे सीमित कैसे हो जाएंगे मैं अगर यह कह दूं क्या श्री

524
00:38:03,680 --> 00:38:08,360
कृष्ण शेर बन सकते हैं वास्तविकता ये है कि वो बन सकते हैं

525
00:38:08,360 --> 00:38:12,480
मगर आप कह रहे हो कि उनका जो शरीर वो शाश्वत है वो कहीं से ना कम होगा ना

526
00:38:12,480 --> 00:38:16,520
बढ़ेगा तो शेर की फॉर्म कैसे दोन चीज एक साथ दोनों चीज एक साथ कैसे

527
00:38:16,520 --> 00:38:20,520
होंगी ये जी से भी एक बार प्रश्न पूछा गया कि

528
00:38:20,520 --> 00:38:25,280
भगवान कृष्ण ऐसे प ऐसा पत्थर बना सकते हैं क्या जिसको खुद उठा

529
00:38:25,280 --> 00:38:29,920
सके यह नहीं है मेरा प्रश्न यह प्रश्न है ही नहीं मेरा

530
00:38:29,920 --> 00:38:34,480
अगर भगवान का जो अंतिम स्वरूप है जिसको प्राप्त किया जाता है

531
00:38:34,480 --> 00:38:38,640
वो स्वरूप हम देख रहे हैं वो हमारे वो हम जान रहे हैं इतने इतनी चौड़ाई

532
00:38:38,640 --> 00:38:42,720
है इतनी लंबाई है इतना ये है वो हम देख रहे हैं हमारे जानने में आने वाला होना चाहिए समझ

533
00:38:42,720 --> 00:38:48,720
गया आपकी बात को हां तो फिर ईश्वर फिर बाधित हो रहा

534
00:38:48,800 --> 00:38:53,000
है अगर वो या तो वो उनके अंदर शेर सीता

535
00:38:53,000 --> 00:38:57,600
सब कुछ बन जाने की आप इस बात को ये तो ये आपका मत है एक आपकी

536
00:38:57,600 --> 00:39:01,720
समझ हैय इस बात को मैं समझ गया बट आप इसमें आगे

537
00:39:01,720 --> 00:39:06,240
की समझ क्या है आपके अनुसार की समझ ये है कि अगर इकन

538
00:39:06,240 --> 00:39:10,560
की इस बात को मानते हैं कि शाश्वत स्वरूप यहां आता है हमारे

539
00:39:10,560 --> 00:39:14,720
बीच व्यवहार में जो अंतिम स्वरूप है वो यहां आता है तो

540
00:39:14,720 --> 00:39:19,520
फिर वह बाधित हैन के अनुसार

541
00:39:19,520 --> 00:39:24,240
हां सीमित है बहुत से ऐसे काम है वो नहीं कर

542
00:39:24,240 --> 00:39:28,240
पाएगा तो भगवान के मेरा प्रश्न वापस लौट यही है कि भगवान

543
00:39:28,240 --> 00:39:32,240
की फर वास्तविक स्थिति आप लोग क्या समझते हैं आप लोगों के अनुसार

544
00:39:32,240 --> 00:39:36,240
शास्त्रों के आधार के अनुसार आप जो आधार देखते हैं वो आधार क्या है

545
00:39:36,240 --> 00:39:40,600
और उनके अनुसार एक सही समझ क्या है एब्सलूट अंडरस्टैंडिंग क्या

546
00:39:40,600 --> 00:39:45,400
है यही कि भगवान का जो व्यवहार में

547
00:39:45,400 --> 00:39:49,440
यही कि भगवान का जो प्राप्त वाला स्वरूप है जो व्यवहार में

548
00:39:49,440 --> 00:39:53,640
नहीं आ सकता वही अपना एक स्वरूप बनाता है व्यवहार में आ

549
00:39:53,640 --> 00:39:57,640
सकने लायक और फिर उस स्वरूप में वो यहां आता है और वो स्वरूप ऐसा होता है

550
00:39:57,640 --> 00:40:01,680
जो कुछ भी कर सकता है आप कुछ भी कहो वो कर देगा अपनी देह का नाश

551
00:40:01,680 --> 00:40:04,160
करने को कर देगा

552
00:40:04,160 --> 00:40:08,200
अपनी देह का नाश करने को कहो कर देगा कुछ भी कर

553
00:40:08,200 --> 00:40:12,480
सकता है कोई लिमिट नहीं है तो भगवान का जो व्यवहार

554
00:40:12,480 --> 00:40:16,560
में ना आ सकने वाला स्वरूप है भगवान फिर भक्तों के उद्धार के

555
00:40:16,560 --> 00:40:20,680
लिए व्यवहार में एक आ सकने वाला स्वरूप बनाते हैं

556
00:40:20,680 --> 00:40:24,840
भक्तों की भक्ति का विषय बन जाते हैं भक्तों की प्रेम का विषय बन जाते हैं

557
00:40:24,840 --> 00:40:29,000
जिससे कि भक्त उनकी भक्ति करके अपने सद्गति को प्राप्त

558
00:40:29,000 --> 00:40:33,280
हो सके तो इसका कुछ आधार

559
00:40:33,280 --> 00:40:37,360
कहां से आप लोग देते हैं कि यहां यह चीज लिखी हुई है कि देखो भगवान यहां

560
00:40:37,360 --> 00:40:41,760
आते हैं तो वो शरीर देते हैं

561
00:40:41,760 --> 00:40:45,880
प्रमाण प्रमाण ये ले लीजिए मैं अजन्मा अविनाशी

562
00:40:45,880 --> 00:40:50,000
होते हुए भी ये ले लीजिए चार छ

563
00:40:50,000 --> 00:40:54,520
भगवत भगवत गीता दिक्कत प्रमाण की नहीं है दिक्कत है इंटरप्रिटेशन

564
00:40:54,520 --> 00:40:59,200
की प्रमाण तो बहुत ढेर ढेर सारे में मगर आपकी इंटरप्रिटेशन

565
00:40:59,200 --> 00:41:03,360
दूसरी होगी हमारी इंटरप्रिटेशन दूसरी होगी आपको क्या लगता है प्रमाण नहीं होंगे हमारे

566
00:41:03,360 --> 00:41:07,440
पास बिना प्रमाणों के चल रहे हैं नहीं वो ऐसा नहीं है

567
00:41:07,440 --> 00:41:11,680
वो वही तो पूछ रहा हूं कि देखो दोनों तरफ

568
00:41:11,680 --> 00:41:15,880
एक समझ है एक व्यवस्थित समझ है इतने आचार्य हुए हैं इतना लोगों ने पढ़ा जाना

569
00:41:15,880 --> 00:41:19,160
समझा है ज्ञान को मैंने आपको प्रमाण दे दिया

570
00:41:19,160 --> 00:41:23,200
भगवत गीता चार से भगवान कह रहे हैं कि मैं अजन्मा अविनाशी होते

571
00:41:23,200 --> 00:41:27,440
हुए भी अपनी योग माया से

572
00:41:27,440 --> 00:41:31,920
अपना सृजन करता हूं प्रकट होता हूं क्यों करता हूं

573
00:41:31,920 --> 00:41:37,840
साधु भक्तों के उद्धार के लिए सा

574
00:41:37,840 --> 00:41:42,160
हा तो आपका कहने का मतलब हुआ कि उनका जो शरीर

575
00:41:42,160 --> 00:41:46,160
है व यहां आके रूप यहां दिखाई देने वाला जो स्वरूप

576
00:41:46,160 --> 00:41:51,040
है वो उनकी अंतिम उनका अंतिम स्वरूप नहीं है

577
00:41:51,040 --> 00:41:55,160
वो हमारा हां वो हमारा वो भक्ति का

578
00:41:55,160 --> 00:41:59,400
विषय है भगवान ने स्वरूप एक लिया है से हम वहां तक उसको प्राप्त कर सके

579
00:41:59,400 --> 00:42:03,960
जैसे कि कैलोरी कैलोरी हमें वास्तविकता में चाहिए

580
00:42:03,960 --> 00:42:08,200
मगर कैलोरी के लिए हम व्यवहार नहीं कर सकते कैलोरी को प्राप्त

581
00:42:08,200 --> 00:42:12,360
करने के लिए फिर कैलोरी का जो सोर्स है वो क्या है खाना सगुण

582
00:42:12,360 --> 00:42:16,400
साकार भोजन उसके लिए हम व्यवहार कर सकते हैं कि रोटी

583
00:42:16,400 --> 00:42:20,480
कितने की आएगी पिज्जा कितने का आएगा इसके लिए हम व्यवहार कर सकते हैं तो

584
00:42:20,480 --> 00:42:24,880
इसके लिए हम व्यवहार करते हैं दांतों से उसको चबाते हैं और फिर अंततोगत्वा इंटेस्टाइन

585
00:42:24,880 --> 00:42:29,040
में जाकर के हमें प्राप्त होती है कैलोरी

586
00:42:29,040 --> 00:42:33,960
जो हमारे व्यवहार का विषय नहीं तो भगवान का व्यवहार में ना आ सकने वाला

587
00:42:33,960 --> 00:42:34,960
स्वरूप

588
00:42:34,960 --> 00:42:39,680
ने एक ऐसा स्वरूप लिया जो हमारे व्यवहार में आ सके उसकी भक्ति उसकी आराधना

589
00:42:39,680 --> 00:42:43,840
उसको उसके लिए व्यवहार करके हमने उसको प्राप्त किया अगर

590
00:42:43,840 --> 00:42:47,840
हम कह देंगे कि व्यवहार में वही स्वरूप पार मर्थक स्वरूप अंत

591
00:42:47,840 --> 00:42:53,400
वाला स्वरूप यहां आ गया वो तो बहुत सी चीजों में बाधित हो जाएगा क्योंकि वो शाश्वत

592
00:42:53,400 --> 00:42:57,600
है शाश्वत को य उसकी वही नहीं है श स्वरूप

593
00:42:57,600 --> 00:43:01,920
में य प्रकट होने की पहली बात तो वो वाणी का अ विषय है

594
00:43:01,920 --> 00:43:06,080
वाणी का ही अ विषय व बस वाणी के द्वारा समझाए नहीं जा सकता मगर

595
00:43:06,080 --> 00:43:10,160
हम उसी को यहां ला रहे हैं वाणी के द्वारा समझा रहे देखो दो आंखें उसकी दो

596
00:43:10,160 --> 00:43:14,160
कान है और ऐसा नहीं है कि भगवान श्री

597
00:43:14,160 --> 00:43:18,200
कृष्ण ने रूप बदला नहीं अगर उनका शरीर शाश्वत था तो फिर

598
00:43:18,200 --> 00:43:22,200
वह बदल के विराट स्वरूप कैसे हो गया उनका स्वरूप तो

599
00:43:22,200 --> 00:43:26,480
तस से मस नहीं हो सकता बदल नहीं सकता शाश्वत का मतलब

600
00:43:26,480 --> 00:43:32,240
जो किसी भी देश काल परिस्थिति से प्रभावित ना हो नित्य स्थाई जैसा है

601
00:43:32,240 --> 00:43:36,480
वैसा ठीक है बस आपका एक इसम मत जानना था दूसरा प्रश्न

602
00:43:36,480 --> 00:43:40,840
था मेरा वर्ण और आश्रम को लेकर बहुत आपने डिस्कशन किया है

603
00:43:40,840 --> 00:43:44,840
भक्तो से जो भी आए वर्ण और आश्रम को लेकर चातु वर्ण

604
00:43:44,840 --> 00:43:49,000
सिस्टम जो चर्चा रहती है उसम तो जन्म के आधार पर

605
00:43:49,000 --> 00:43:50,400
और कर्म के आधार

606
00:43:50,400 --> 00:43:54,920
पर थोड़ा सा चीजों को आप बताते हैं कि

607
00:43:54,920 --> 00:43:59,080
उसम इस तरीके से जी ने किया है ऐसा होता है तो

608
00:43:59,080 --> 00:44:03,080
वहा वहां के आधार कहां से आप बताते हैं उसमें मैं मैं

609
00:44:03,080 --> 00:44:07,160
ऐसे शुरू करूंगा इसमें आपका मानना क्या है मुझे ये बता द

610
00:44:07,160 --> 00:44:11,240
जन्म से होता है कि नहीं हरा हमारा मानना तो आपको पता ही है जितने लोग

611
00:44:11,240 --> 00:44:15,240
चर्चा करके गए हैं वही मानना होगा वही चर्चा होगी

612
00:44:15,240 --> 00:44:19,600
तो एक तो उस चर्चा में मैंने ये बताया है कि मेरा मानना क्या

613
00:44:19,600 --> 00:44:23,600
है आपको आपको काउंटर क्वेन करना चाहिए

614
00:44:23,600 --> 00:44:27,800
आपको काउंटर क्वेन करना चाहिए वही चीज जैसे मुझे कुछ वीडियो ऐसा मिला

615
00:44:27,800 --> 00:44:31,960
कि आप वो बता के चले गए जैसे तीन भगवत गीता तीन तीन कंपेयर

616
00:44:31,960 --> 00:44:36,080
किए थे क आप एक वीडियो में वहां भी आपको वो चीज बता के

617
00:44:36,080 --> 00:44:40,480
चले गए बट अपना मत देक नहीं गए तो मुझे जहां मैंने सुना वहां मुझे

618
00:44:40,480 --> 00:44:44,800
आपका उत्तर नहीं मिला था इसलिए मैं प्रश्न कर रहा हूं

619
00:44:44,800 --> 00:44:49,240
ठीक है मैं बता देता हूं जो इसका निचोड़ है वर्ण व्यवस्था का

620
00:44:49,240 --> 00:44:53,600
वो निचोड़ है जन्म से नॉमिनेशन

621
00:44:53,600 --> 00:44:58,280
और कर्म से सिलेक्शन

622
00:44:58,280 --> 00:45:02,280
जैसे कि हमें ब्राह्मण चाहिए तो ब्राह्मण को ढूंढने की शुरुआत

623
00:45:02,280 --> 00:45:05,880
पहली बात तो यह है कि ब्राह्मण क्षत्रीय वैश्य

624
00:45:05,880 --> 00:45:09,960
शूद्र की उपयोगिता क्या है अगर वर्ण व्यवस्था की उपयोगिता पहले सोचे ये

625
00:45:09,960 --> 00:45:14,000
क्यों दिया गया जिससे की आवश्यकता पड़ने पर उस व्यक्ति को ढूंढा

626
00:45:14,000 --> 00:45:18,080
जा सके यही तो है यह टैग देने का कारण क्या

627
00:45:18,080 --> 00:45:22,200
है कि हम जोय क्लासिफिकेशन कर रहे हैं कि ये ब्राह्मण है वैश

628
00:45:22,200 --> 00:45:26,200
शूद्र है क्षत्रिय है तो इसका टैग देने का कारण

629
00:45:26,200 --> 00:45:30,480
यह है जिससे कि हम पर्टिकुलर उस व्यक्ति को ढूंढ सके हमें ब्राह्मण

630
00:45:30,480 --> 00:45:34,960
की जब आवश्यकता है तो हम ब्राह्मण को ढूंढ सके

631
00:45:34,960 --> 00:45:39,240
मगर जब हम इसको जन्म से नहीं कर्म से मान लेंगे डायरेक्ट

632
00:45:39,240 --> 00:45:44,200
कि हम कर्म से ही ब्राह्मण को ढूंढेंगे तो कर्म किसके चेक किए जाए

633
00:45:44,200 --> 00:45:48,280
शुरुआत कहां से की जाए किसी को भी पकड़ लो जो

634
00:45:48,280 --> 00:45:52,520
भी रास्ते में जा रहा हो उसको पकड़ लो कर्म चेक करने हमें तो अगर

635
00:45:52,520 --> 00:45:56,520
हम ऐसा नहीं करते हैं और हम सोचते हैं कि कोई ब्राह्मण घर होगा

636
00:45:56,520 --> 00:46:00,520
वहां से शुरू करते हैं तो यही है जन्म से वर्ण व्यवस्था

637
00:46:00,520 --> 00:46:04,520
वहां जाएंगे चेक करेंगे ब्राह्मण घर वहां पर आवश्यक नहीं है कि वहां

638
00:46:04,520 --> 00:46:08,560
यथोचित ब्राह्मण कर्म करने वाला ब्राह्मण उचित कर्म करने वाला ब्राह्मण

639
00:46:08,560 --> 00:46:12,760
मिल जाएगा आप दिख नहीं रहे हैं हा

640
00:46:12,760 --> 00:46:18,760
वही मैं देख रहा हूं कैसे गायब

641
00:46:20,560 --> 00:46:26,560
हो मैं वो कर रहा हूं ये समझ में नहीं आ रहा कैसे गया

642
00:46:34,000 --> 00:46:38,000
तो इसकी वर्ण व्यवस्था की जो उपयोगिता है वह इसी

643
00:46:38,000 --> 00:46:42,080
से सिद्ध है कि जब हमें आवश्यकता पड़े तो हमें मालूम हो कि ब्राह्मण

644
00:46:42,080 --> 00:46:46,160
कहां मिलेगा उस कहां मिला कहां मिलेगा के लिए

645
00:46:46,160 --> 00:46:50,560
स्टार्टिंग पॉइंट के लिए जन्म से है उसके बाद उसके कर्म चेक किए जाएंगे

646
00:46:50,560 --> 00:46:54,640
अगर वो ब्राह्मण उचित कर्म भी कर रहा होगा तो हम उसे अपने कार्य

647
00:46:54,640 --> 00:46:58,640
के लिए लेकर आएंगे अन्यथा तिरस्कृत कि नहीं भाई तुम्हारे कर्म

648
00:46:58,640 --> 00:47:02,680
जो है ब्राह्मणों वाले नहीं है तो हम तुमसे अपना यज्ञ नहीं कराएंगे तुमसे अपने आप

649
00:47:02,680 --> 00:47:06,720
पूजा पाठ नहीं कराएंगे या तुम अगर छत्रिय हो और तुम क्षत्रिय वाले कार्य नहीं कर

650
00:47:06,720 --> 00:47:10,920
रहे हो तुम दूसरे कार्य कर रहे हो स्वा कर्मण का फॉलो नहीं कर रहे हो

651
00:47:10,920 --> 00:47:14,920
तो हम तुमसे दूसरे का ब्राह्मण जन्म से कैसे देखेंगे आज के समय में

652
00:47:14,920 --> 00:47:19,480
कैसे देखेंगे जन्म से ब्राह्मण किस किस घर

653
00:47:19,480 --> 00:47:23,880
[संगीत]

654
00:47:23,880 --> 00:47:28,040
में इसके बारे में भागवत में दिया है

655
00:47:28,040 --> 00:47:32,080
पहली बात तो यह है कि जो कुल होते हैं परंपराएं होती हैं

656
00:47:32,080 --> 00:47:37,360
जैसे हम कैसे डिसाइड करेंगे कि कोई परंपरा प्राप्त आचार्य

657
00:47:37,360 --> 00:47:41,640
है कैसे डिसाइड करेंगे आप बताइए परंपरा

658
00:47:41,640 --> 00:47:45,640
के आचार्यों को उनके जो पहले के जो गुरुजन होते हैं उन्हें वो

659
00:47:45,640 --> 00:47:49,680
ऑथराइज करते हैं बताते हैं कि उनके गुणों के आधार पर उ इसी

660
00:47:49,680 --> 00:47:53,760
तर इसी तरीके से जिस जो वंश चला आ रहा होगा ब्राह्मण वंश जिसको

661
00:47:53,760 --> 00:47:57,800
हम जानते होंगे कि ब्राह्मण वंश चला आ रहा है उसको हम चेक करेंगे जाके कि अब इसके आज

662
00:47:57,800 --> 00:48:01,840
के जो वंशज है व उसी कर्म में है कि

663
00:48:01,840 --> 00:48:06,360
नहीं प्रमाण आपका य क्वेश्चन है ना

664
00:48:06,360 --> 00:48:10,600
कि ब्राह्मण को कैसे हम चेक करेंगे तो यह ठीक ऐसे है जैसे प्रामाणिक

665
00:48:10,600 --> 00:48:14,920
आचार्य को हम कैसे चेक करेंगे प्रामाणिक आचार के लिए

666
00:48:14,920 --> 00:48:19,160
प्रामाणिक आचार के लिए हम उसका गुरु वंश देखेंगे और यहां पर ब्राह्मण

667
00:48:19,160 --> 00:48:23,560
को चेक करने के लिए हम उसका कुल वंश देखेंगे उसके बाद यदि प्रामाणिक

668
00:48:23,560 --> 00:48:27,680
आचार यदि प्रामाणिक आचार्य सही से पढ़ा रहा शिक्षा दे रहा

669
00:48:27,680 --> 00:48:32,000
होगा सही बातें कर रहा होगा तो हम उसके पास ज्ञान लेने

670
00:48:32,000 --> 00:48:36,280
जाएंगे मान लिया वो परंपरा से है मर हीन आचरण हीन

671
00:48:36,280 --> 00:48:38,920
आचरण युक्त है तो हम उससे ज्ञान नहीं लेंगे इसी प्रकार से

672
00:48:38,920 --> 00:48:43,360
मान लिया कि ब्राह्मण कुल से है मगर वो हीन आचरण से युक्त है तो हम उसको ब्राह्मण

673
00:48:43,360 --> 00:48:47,480
की जगह उपयोग में नहीं लेंगे तो पहले उसका कुल देखेंगे और फिर उसके कर्म

674
00:48:47,480 --> 00:48:51,720
भी देखेंगे हा य कर्म भी देख ब

675
00:48:51,720 --> 00:48:56,360
ठीक है और फिर कोई व्यक्ति मान लो कुल से ब्राह्मण नहीं रहा

676
00:48:56,360 --> 00:49:00,600
लेकिन उसके जो कर्म है वो सच में उसकी जो मानसिकता है उसकी कार्य

677
00:49:00,600 --> 00:49:04,880
विधि है भगवान की सेवाओ में रुचि है ठीक है ठीक

678
00:49:04,880 --> 00:49:09,200
है इसको हम पता कैसे लगाए कि उसके उसके जो भाव

679
00:49:09,200 --> 00:49:13,800
है कैसे हैं भाई कुल तो ऐसी चीज

680
00:49:13,800 --> 00:49:17,800
भगवान के नाम के भगवान के नाम के जप के लिए आप हर किसी को नहीं बैठा

681
00:49:17,800 --> 00:49:21,800
सकते कि बोले कि आप भगवान के नाम का जप कीजिए और

682
00:49:21,800 --> 00:49:26,120
वो बैठ के कर सकता है संभव नहीं है उसकी मानसिकता उसको सपोर्ट

683
00:49:26,120 --> 00:49:30,360
करेगी नहीं नहीं ऐसा नहीं है जाकिर नायक को जाकिर नायक

684
00:49:30,360 --> 00:49:34,680
को अगर यह कह दिया जाए कि आपको हिंदुस्तान पर मुस्लिमों का कब्जा

685
00:49:34,680 --> 00:49:38,880
करवाना है आपको एक बार हरे कृष्ण महामंत्र पढ़ना पड़ेगा और आप जो है उनकी सर्म

686
00:49:38,880 --> 00:49:42,880
गुरु गद्दी में बैठ जाओगे तो हरे कृष्ण पढ़ देगा वो बोल देगा

687
00:49:42,880 --> 00:49:47,000
पढ़ देगा बट वो पढ़ देगा बट वही मैं बोल रहा हूं कि जैसे

688
00:49:47,000 --> 00:49:51,160
कि कोई कर्म से अच्छा है और फिर वोतो

689
00:49:51,160 --> 00:49:53,960
ये कर्मों की कोई सीमा नहीं है ना कोई वो नहीं है

690
00:49:53,960 --> 00:49:58,280
कर्मों से अच्छा है इसको हमको स्टैंडर्ड प्रोटोकॉल नहीं बना सकते

691
00:49:58,280 --> 00:50:02,760
इसको हम एक मिनट इसको हम आपत्ति कालीन

692
00:50:02,760 --> 00:50:06,760
सुविधा तो ले सकते हैं कि जब कोई ब्राह्मण नहीं मिल रहा है तो हमने देखना शुरू

693
00:50:06,760 --> 00:50:10,920
किया कि भैया चलो कर्म चेक कर लो मगर जनरल

694
00:50:10,920 --> 00:50:15,160
जनरल नियम नहीं बना सकते कि ब्राह्मण उपलब्ध है कुल वंश उपलब्ध

695
00:50:15,160 --> 00:50:19,360
है तब भी हम जो है किसी हर व्यक्ति के कर्म ही चेक करें और कर्म को चेक

696
00:50:19,360 --> 00:50:23,800
करने की कोई व सीमा नहीं है कैसे चेक करें सपोज ट मेरे घर में

697
00:50:23,800 --> 00:50:28,320
विवाह है मान लीजिए और मुझे कहा गया को ढूंढ के लाओ जो यहां

698
00:50:28,320 --> 00:50:32,480
पर वो पढ़ेगा मंत्र पढ़ेगा विवाह के तो

699
00:50:32,480 --> 00:50:36,480
मैं उसके पास विवाह की वेदी से कितने दिन पूर्व जाऊ जो मैं

700
00:50:36,480 --> 00:50:41,400
उसके कर्मों को लेकर के सेटिस्फाइड हो पाऊ 10 दिन पहले

701
00:50:41,400 --> 00:50:45,480
एक महीने पहले छ महीने पहले कितने दिन में गुण कर्म

702
00:50:45,480 --> 00:50:49,640
मेन डिसाइड कर पाऊंगा और इसका कोई प्रमाणिक चलो हम अगर अपने अंदाज से मान

703
00:50:49,640 --> 00:50:53,680
भी ले छ महीने पहले तो यह पहली बात तो व्यवहारिक नहीं है कि मैं उसके

704
00:50:53,680 --> 00:50:57,760
घर जाकर रहूं वो सौचा चार में मिट्टी का उपयोग कर रहा है कि नहीं कर रहा

705
00:50:57,760 --> 00:51:01,880
है सच से वापस आकर के 16 वो आठ कुल्ले कर रहा है कि नहीं कर रहा है

706
00:51:01,880 --> 00:51:05,960
मूत्र विसर्जन करते समय वो आठ कुल्ले वापस आकर यह सब जांचने के लिए मुझे उसके

707
00:51:05,960 --> 00:51:09,000
साथ रहना पड़ेगा जा जाकर के

708
00:51:09,000 --> 00:51:13,040
और उसका भी कोई पैरामीटर नहीं है कितने दिन रहो पता नहीं हो सकता है वो मुझे

709
00:51:13,040 --> 00:51:17,880
बेवकूफ बनाने के लिए अभी चार दिन करने लग जाए मैंने चार दिन में डिसाइड किया

710
00:51:17,880 --> 00:51:22,000
तो अब बात यह आती है कि

711
00:51:22,000 --> 00:51:26,120
अगर हम अपने अंदाजे से एक पैरामीटर बना भी ले तो इसका भी कोई पहली

712
00:51:26,120 --> 00:51:30,520
बात तो प्रमाण नहीं है और फिर इतनी मेहनत करने की आवश्यकता

713
00:51:30,520 --> 00:51:34,760
क्यों है क्यों करें मैंने कहा ना आपत्ति कालीन में तो किया जा सकता

714
00:51:34,760 --> 00:51:39,600
है शास्त्रों ने अनुमति दी है कि जब आप

715
00:51:39,600 --> 00:51:43,640
काल काल ही चल रहा है अभी अब

716
00:51:43,640 --> 00:51:47,720
यही बात है ना कि ये डिसाइड कौन करेगा फिर य आ जाएगा आपको

717
00:51:47,720 --> 00:51:52,160
नहीं लगता आपत्ति काल चल रहा है समय काल परिस्थितियों के हिसाब सेय

718
00:51:52,160 --> 00:51:56,240
को इसके बारे में प्रामाणिक बातें होनी चाहिए अभी 5000 वर्ष कलयुग के बीते

719
00:51:56,240 --> 00:52:00,720
हैं कलयुग कितने सा वर्ष का है शास्त्रों के अनुसार हां

720
00:52:00,720 --> 00:52:04,800
432000 तो आपको यह कलयुग का य 5000 वर्ष जो पूरे हो गए

721
00:52:04,800 --> 00:52:08,800
हैं इसी से आपत्ति कालीन हो गया नहीं आप मैं आपसे ही

722
00:52:08,800 --> 00:52:12,800
पूछ रहा हूं बड़ा आप मन से जवाब दीजिए दिल से इसका जवाब दीजिए आपको

723
00:52:12,800 --> 00:52:17,080
नहीं लगता क्या परिस्थितियों को समय काल परिस्थितियों को देखते हुए कि ब्राह्मणों

724
00:52:17,080 --> 00:52:21,160
की स्थिति क्या है किस तरीके से काम कर रहे हैं और दूसरी चीज जैसे

725
00:52:21,160 --> 00:52:24,040
आप आपने जो बात बोली वो तो सही थी

726
00:52:24,040 --> 00:52:28,720
लेकिन जो एग्जांपल लिया जाकर मैं थोड़ा बोलू फिर उसके बाद

727
00:52:28,720 --> 00:52:33,400
एक बात पूरी कर दू आपत्ति काल वाला आपत्ति कालीन जो बात है

728
00:52:33,400 --> 00:52:37,840
आपत्ति कालीन वो सिर्फ इस बात प है कि हमें ब्राह्मण उपलब्ध ना हो

729
00:52:37,840 --> 00:52:42,160
कुल वंश से ब्राह्मण हमें उपलब्ध ना हो यथोचित कर्म

730
00:52:42,160 --> 00:52:46,280
करने वाला ब्राह्मण हमें मिले ना तब आपत्ति काल मान लिया जाएगा तो ऐसा

731
00:52:46,280 --> 00:52:50,320
नहीं है अभी अच्छे अच्छे संत है अच्छे अच्छे ब्राह्मण कुल वंश है मिल रहे

732
00:52:50,320 --> 00:52:56,320
हैं तो उसको आपत्ति काल नहीं माना जा सकता

733
00:52:58,280 --> 00:53:02,280
मैं आपकी मानसिकता और भावनाओं को समझ चुका हूं अब थोड़ा सा मैं

734
00:53:02,280 --> 00:53:05,760
बोलू थोड़ा सा आप उस पर विचार

735
00:53:05,760 --> 00:53:09,800
कीजिएगा उस बात से आपके बोलने के तरीके से जो एक्सप्लेनेशन

736
00:53:09,800 --> 00:53:14,000
दिया उसमें सच्चाई है बट आपने जो उदाहरण दिया जाकिर नायक अगर

737
00:53:14,000 --> 00:53:18,040
बोल देगा तो बात उस तरीके से नहीं परख जाती है कर्म वाली

738
00:53:18,040 --> 00:53:22,080
चीजें अब जैसे किसी व्यक्ति को चाहे जाकिर नायक

739
00:53:22,080 --> 00:53:26,080
को कोई भी अच्छा साधक नहीं है वो मैं आपको बहुत सरल सी चीज बता रहा हूं एक

740
00:53:26,080 --> 00:53:30,120
बहुत सरल सी विधि अब किसी भी व्यक्ति से छ महीने का मैं बोल

741
00:53:30,120 --> 00:53:34,800
रहा हूं हरे कृष्णा मम छ महीने छोड़िए आप एक महीने

742
00:53:34,800 --> 00:53:38,800
लगातार किसी से दो माला या चार माला किसी व्यक्ति से करवा नहीं

743
00:53:38,800 --> 00:53:39,300
सकते

744
00:53:39,120 --> 00:53:43,240
अगर वह कर्म से व्यवस्थित नहीं है तो अगर वह करने बैठेगा

745
00:53:43,240 --> 00:53:47,880
तो उसका मन बुद्धि दोनों में से ना उसकी इंद्रिया ना उसका मन ना उसका शरीर

746
00:53:47,880 --> 00:53:52,200
किसी भी प्रकार से उस चीज को सपोर्ट नहीं कर पाएगा क्योंकि वो जो क्रिया विधि है जो

747
00:53:52,200 --> 00:53:56,640
जो चीज है जो हम करने निकल निकले हैं उसके लिए एक व्यक्ति का

748
00:53:56,640 --> 00:54:00,920
होना चाहिए और जब कर्मों के आधार पर जन्म से वो ऐसा नहीं आया व्यक्ति

749
00:54:00,920 --> 00:54:05,000
जन्म पता नहीं कहां लिया लेकिन जब उसे ये चीजें मिली और उसके बाद उसने

750
00:54:05,000 --> 00:54:09,240
चीजें करना शुरू कर दिया चेतन्य महाप्रभु ने भी बोला

751
00:54:09,240 --> 00:54:13,400
कृष्ण तत्व भता सेही गुरु होए जिसको कृष्ण का विज्ञान पता चल जाता

752
00:54:13,400 --> 00:54:17,680
है जो उसका आचरण कर सकता है वो उन सब चीजों में आ सकता है

753
00:54:17,680 --> 00:54:22,080
और अब बात वही ट्रांसलेशन वाली आ जाती है नहीं तो भगवत गीता में भी दसव

754
00:54:22,080 --> 00:54:26,600
अध्याय में ये साफ साफ लिखा है आप प्रमाण ना दे कि शूद्र हो

755
00:54:26,600 --> 00:54:30,640
मेरे पास भी प्रमाण भर भर के हैं हां वही वाली बात बो इसम

756
00:54:30,640 --> 00:54:34,640
इंटरप्रिटेशन की बात है हां इंटरप्रिटेशन की बात बट व्यवहारिक बातें आप कर रहे

757
00:54:34,640 --> 00:54:38,720
हो तो व्यवहारिक तौर पर भी देखें तो प्रैक्टिकली आप करके देखिए हम

758
00:54:38,720 --> 00:54:42,880
तो कर रहे हैं उस आधार पर पूरा कर लिया तो मैं अपनी बात कह आपने जवाब

759
00:54:42,880 --> 00:54:46,920
सुना मैंने क्या बोला क्या समझे बताओ अरे तभी तो मैं

760
00:54:46,920 --> 00:54:51,760
आपको बोल रहा हूं कि आपने कहा कि अगर हम सामान्यता किसी को दे दे

761
00:54:51,760 --> 00:54:54,160
कि भाई तुम दो माला करो तो वास्तविकता यही है

762
00:54:54,160 --> 00:54:58,200
कि वो नहीं कर पाएगा नहीं कर पाएगा मगर चेक हम करेंगे कैसे

763
00:54:58,200 --> 00:55:03,880
उसके साथ जाना पड़ेगा उसके घर में रहना पड़ेगा उसने की कि नहीं

764
00:55:03,880 --> 00:55:08,360
की िकल चीज नहीं है कि हम उसके साथ रह सके

765
00:55:08,360 --> 00:55:12,400
नहीं भक्ति य पर दूसरी बात दूसरी बात दूसरी बात जैसे आपने

766
00:55:12,400 --> 00:55:16,560
एक नियम बताया कि वो दो माला एक महीने तक कर पाए य चेक करना है ठीक मान लीजिए

767
00:55:16,560 --> 00:55:20,800
इस नियम को दूसरा क्यों माने इसीलिए तो लड़ाई होती है

768
00:55:20,800 --> 00:55:24,840
लड़ाई क्यों है दुनिया में कि तेरे लिए कर्तव्य और अ कर्तव्य

769
00:55:24,840 --> 00:55:28,960
के विषय में एक मात्र शास्त्र प्र है अब जब व्यक्ति अपने मन

770
00:55:28,960 --> 00:55:33,080
से नियम बनाएगा तो उसको दूसरा स्वीकार नहीं करेगा शास्त्र से हम दे

771
00:55:33,080 --> 00:55:37,200
द माला शास्त्र से हम दे दे दो माला एक

772
00:55:37,200 --> 00:55:41,480
महीने कर लेंगे चेक आप दे दो शास्त्र से मुझे दो माला एक महीने

773
00:55:41,480 --> 00:55:45,720
छ महीने दे दो हम कर लेंगे चेक मेहनत कर लेंगे मगर यह कहीं नियम

774
00:55:45,720 --> 00:55:49,840
है ही नहीं तो फिर जब हम इस नियम को लेकर चलेंगे तो दूसरा कोई कहेगा छ

775
00:55:49,840 --> 00:55:54,560
महीने में नहीं पता चलेगा साल भर में पता चलेगा तो लो अब यहां विप्लव

776
00:55:54,560 --> 00:55:58,600
कोई कहेगा नहीं छ महीने नहीं एक म तो वहा विपलव फिर बन जाएंगे न त्

777
00:55:58,600 --> 00:56:02,720
और ह कृष्णा सेंटर वर व्यवहारिकता में जब बात होती है तो

778
00:56:02,720 --> 00:56:07,160
एक एक पैरामीटर नहीं देखा जाता है उसके रि जाते

779
00:56:07,160 --> 00:56:09,280
आप मुझे एक बार में बता दीजिए कौन

780
00:56:09,280 --> 00:56:13,600
कन से पैरामीटर है येय चेक किया जाएगा फिर हम उन बात करेंगे

781
00:56:13,600 --> 00:56:17,600
तो फिर लेके आऊंगा सिस्टमिकली त फिर आपसे चर्चा करूंगा व्यवहारिक चर्चा

782
00:56:17,600 --> 00:56:21,880
जब हो रही है तो प्र प्रमाण नहीं बोल

783
00:56:21,880 --> 00:56:26,760
आपसे आपसे ये बोल रहा हूं आप पैरामीटर सिर्फ बताइए ये चेक करना उस

784
00:56:26,760 --> 00:56:30,760
अगर आपने मुझे निश्चिता दे दी मैं अभी से कर्मणा वण व्यवस्था की प्रचार में

785
00:56:30,760 --> 00:56:35,680
लग जाऊंगा आप मुझे निश्चिता दे दीजिए क्योंकि धर्म का अर्थ होता है मर्यादा

786
00:56:35,680 --> 00:56:39,680
ल इसके बाहर सुनिए सुनि जो धर्म होता है

787
00:56:39,680 --> 00:56:43,680
उसका अर्थ होता है मर्यादा जो आपके जीवन को निश्चित करता है

788
00:56:43,680 --> 00:56:47,800
अनिश्चित नहीं और यह कर्मणा वर्ण व्यवस्था तो अनिश्चितता वाली

789
00:56:47,800 --> 00:56:52,080
है इसमें अनिश्चितता कहां

790
00:56:52,080 --> 00:56:56,520
है देखो शज का फलना परिच वो तो फल परिचय देता

791
00:56:56,520 --> 00:57:01,200
किसी करमना और जो आपने बोला के जन्म सेल

792
00:57:01,200 --> 00:57:05,400
परच दे रहा है आज आप देख लीजिए चलिए फल परिचय को देख लेते हैं

793
00:57:05,400 --> 00:57:10,080
उसी चीज पर आइ फल परिचय नहीं दे रहा क्या आप खुद मन से बता

794
00:57:10,080 --> 00:57:14,120
परच भी ले लीजिए प्रचार सम जन्म से होता था या

795
00:57:14,120 --> 00:57:18,280
कर्म से होता था किस चीज से जोड़ रहे फल

796
00:57:18,280 --> 00:57:22,400
परच बोल रहा प्र आज की जो स्थिति है आज

797
00:57:22,400 --> 00:57:24,520
कर्मणा वर्ण व्यवस्था लागू है

798
00:57:24,520 --> 00:57:28,720
सब लोग अपने वर्ण के बाद दूसरे कर्म कर रहे हैं तो आज का समय

799
00:57:28,720 --> 00:57:33,240
ज्यादा सही है या राम राज्य ज्यादा सही है कौन सा राज्य ज्यादा सही बताइए

800
00:57:33,240 --> 00:57:37,440
देखो कलयुग और रामराज्य को कंपेयर तो नहीं कर सकते

801
00:57:37,440 --> 00:57:41,760
नहीं नहीं हमारी हमारी वो तो यही है ना कि हमें धर्म संस्थापन

802
00:57:41,760 --> 00:57:47,760
करनी है लेकिन स कर

803
00:57:53,360 --> 00:57:57,160
सतेल बात

804
00:57:57,160 --> 00:58:01,160
हमें अगर आदर्श वो चाहिए पल तो हमें जो

805
00:58:01,160 --> 00:58:05,400
है राम राज्य में लोग जन्म से मानते थे राम

806
00:58:05,400 --> 00:58:09,640
जी का राज तिलक करने से पहले कोई कंपटीशन नहीं रखा

807
00:58:09,640 --> 00:58:13,880
गया था कि भैया चुनाव करवाओ कोई और चन मभु

808
00:58:13,880 --> 00:58:17,880
ने हरिदास ठाकुर जो मुसलमान परिवार में जन्म उनको भक्त मान लिया ब्राह्मण मान लिया

809
00:58:17,880 --> 00:58:22,480
तो गलत भक्त माना भक्त माना जने कराया था क्या

810
00:58:22,480 --> 00:58:26,640
जने कराया था क्या वही ठीक है अब मेरे को और चीज क्लियर हो गई

811
00:58:26,640 --> 00:58:31,240
आपसे सुन के आप ब्राह्मण पर अटके हुए हैं तो मैं बोल रहा हूं फिर

812
00:58:31,240 --> 00:58:35,240
उसे फाइन कर दो क्वेश्चन को क्या भक्त बन सकता है क्या अगर ब्राह्मण कुल में क्यों नहीं

813
00:58:35,240 --> 00:58:39,400
बन सकता भक्त कोई भी बन सकता है भगवत गीता में 9 32

814
00:58:39,400 --> 00:58:43,520
में कहा तो कि वो भी मेरी शरण में आकर के वो हो जाते हैं वो भक्ति

815
00:58:43,520 --> 00:58:48,040
तो कहलाएंगे तो आपने ये

816
00:58:48,040 --> 00:58:52,600
धारण नहीं कर सकते अनुनीत है उ उन्हीं के लिए भागवत में वचन आया ना

817
00:58:52,600 --> 00:58:56,680
कि जो वेदो कर् कोई डाउट नहीं लग रहा आपने जो

818
00:58:56,680 --> 00:59:00,880
चीजें बताई अब मुझे डाउट नहीं लग रहा है जैसे ही आपने ये बोला ना अब मेरा डाउट दूर

819
00:59:00,880 --> 00:59:05,160
हो गया अब समझ में आ गई चीजें जैसे

820
00:59:05,160 --> 00:59:09,240
हा भक्त बन सकते हैं बिल्कुल है ही हमारे कई

821
00:59:09,240 --> 00:59:12,200
साथी है कई गुरु भाई है भक्त है अपना

822
00:59:12,200 --> 00:59:16,280
आचरण कर रहे हैं वर्णानु सार तो यह मुझे थोड़ा क्लियर

823
00:59:16,280 --> 00:59:20,400
हो गया जहां पहले चर्चा कर रहे थे वहां वो व्यक्ति भी थोड़ा पूछ नहीं पा रहे थे

824
00:59:20,400 --> 00:59:24,520
आपसे मेरा और उसे फाइन कर दें तो प्रश्न वास्तव में यही है कि क्या

825
00:59:24,520 --> 00:59:28,600
हर व्यक्ति भक्त बन सकता है क्या बिल्कुल भक्त बन सकते भक्त

826
00:59:28,600 --> 00:59:33,080
और ब्राह्मण में अंतर क्या है कि भक्ति करो अपने स्वांता सुखाए

827
00:59:33,080 --> 00:59:37,120
स्वांता सुखाए केलिए भक्ति करो मोक्ष पाओ और ब्राह्मण का मामला

828
00:59:37,120 --> 00:59:41,280
ये जब किसी अधिकृत जगह पर वक्ता बनना होगा होता बनना

829
00:59:41,280 --> 00:59:45,520
होगा तो वहां कौन जाएगा तो बकुल सही है आप बिल्कुल अपनी

830
00:59:45,520 --> 00:59:49,520
जगह सही है और जहां जो डाउट था जहां हमें लग रहा था कि एक तरीके से

831
00:59:49,520 --> 00:59:53,640
बुराई की जा रही है प्रभुपाद जी ने जो किया संभव नहीं है गलत कर रहे हैं

832
00:59:53,640 --> 00:59:58,120
उस आधार पर तो वहां वो व्यक्ति व फसे रहे वो समझ नहीं पाए आपकी मानसिकता

833
00:59:58,120 --> 01:00:02,160
को आप जो बोल रहे वो सही है ब्राह्मण के रेस्पेक्ट में उसे कैसे बढ़ना चाहिए लेकिन भक्ति

834
01:00:02,160 --> 01:00:06,400
के संदर्भ में बात हो रही है उनकी मानसिकता भक्त वाली थी लेकिन वो

835
01:00:06,400 --> 01:00:10,600
रिलेट ब्राह्मण से कर रहे थे तो वो थोड़ा गलत हो गया था वहा पर यह चीज मेरे समझ

836
01:00:10,600 --> 01:00:14,720
में आ गई और भक्त ही हम पूछ रहे थे कि भक्त संभव है क्या तो

837
01:00:14,720 --> 01:00:17,400
आपने

838
01:00:17,400 --> 01:00:21,840
ब बहुत सही एक और

839
01:00:21,840 --> 01:00:26,000
ववन चैतन्य महाप्रभु जी की लिख लीजिए एक बहुत बड़ी बात है

840
01:00:26,000 --> 01:00:27,440
जो उन्होंने उसका अनुक्रमण

841
01:00:27,440 --> 01:00:31,720
बदला हरे राम वो बदला

842
01:00:31,720 --> 01:00:36,320
ही इसीलिए कि वो सर्व चारों वर्णों को सुलभ हो जाए अब अगर इसको उल्टा कर ले

843
01:00:36,320 --> 01:00:40,440
कि उसको पढ़ के कोई भी ब्राह्मण हो सकता था तो उसको बदलने की आवश्यकता ही

844
01:00:40,440 --> 01:00:44,680
नहीं थी फ तो जो उसको पढ़ेगा वो ब्राह्मण हो जाएगा वो

845
01:00:44,680 --> 01:00:49,000
कोई भी उसको जाप कर सके इसीलिए तो उसका अनुक्रमाणिका जो उसकी बदल दी उसका सीक्वेंस

846
01:00:49,000 --> 01:00:53,360
बदल दिया उन्होने कोई भी कर पाए जी समझ ग समझ गया बिल्कुल आपकी

847
01:00:53,360 --> 01:00:59,120
बात को इसी से जुड़ा दूसरा प्रश्न भक्त ब में किसे आप श्रेष

848
01:00:59,120 --> 01:01:03,360
देखेंगे यदि ब्राह्मण भक्त भी है तो क्या करें बॉलर

849
01:01:03,360 --> 01:01:08,160
और बैट्समैन का कोई कंपैरिजन नहीं है बलर और बैटमैन का

850
01:01:08,160 --> 01:01:12,160
वोही है नहीं हम श्रेष्ठ निम्न पर बात ही

851
01:01:12,160 --> 01:01:18,160
नहीं करते यह कोई समीक्षा करवाने का भाई

852
01:01:18,440 --> 01:01:22,680
अप दोनों दोनों महत्त्वपूर्ण है दोनों अच्छे हैं मगर

853
01:01:22,680 --> 01:01:27,000
ब्राह्मण की उपयोगिता है कि वो उसकी कारण ही कोई भक्त बनेगा

854
01:01:27,000 --> 01:01:31,240
अंततोगत्वा किसी को भक्त बनाने वाला कोई ब्राह्मण होगा चैतन्य महाप्रभु

855
01:01:31,240 --> 01:01:35,600
जी ने बता बनाया हरिदास को भक्त तो दोनों की उपयोगिता है

856
01:01:35,600 --> 01:01:39,800
अब अब भक्त जो है वो भक्ति कर रहा है मगर ब्राह्मण हीन आचरण कर रहा है

857
01:01:39,800 --> 01:01:44,000
बस मत सुनना आप कैसे सोचते हैं मतलब अगर आपके सामने प्रश्न आया

858
01:01:44,000 --> 01:01:48,040
तो आप कैसे सोचते वो आपने बता दिया मुझे इन दोनों में कोई कंपैरिजन नहीं

859
01:01:48,040 --> 01:01:51,640
है दोनों

860
01:01:51,640 --> 01:01:56,000
अच्छा फिर तीसरा जो आता है कि सिमिलर

861
01:01:56,000 --> 01:02:00,480
है लेकिन थोड़ा समझ उसकी अलग है कि भगवान कृष्ण और भगवान शिव में

862
01:02:00,480 --> 01:02:04,720
बहुत सारी जगह आप लोगों का चर्चा जब हुआ है तो बहुत कहीं ना कहीं

863
01:02:04,720 --> 01:02:08,880
चीजें ये तो ही छेड़े तो अच्छा है क्योंकि ना

864
01:02:08,880 --> 01:02:12,960
छेड़िए इसको रहने आज मेरे ही चैनल पर मेरा ही इंटरव्यू हो रहा है मैंने

865
01:02:12,960 --> 01:02:17,120
बहुत इंटरव्यू लिए लोगों के पास जा जा के नहीं नहीं अच्छा लगेगा लोगों को लोग

866
01:02:17,120 --> 01:02:21,560
सुनेंगे तो उन्हें अच्छा लगेगा आप और इस तरीके से चीजें आती रहती है तो

867
01:02:21,560 --> 01:02:26,200
अब देखो ये वही वाली बात आ गई एक ही जड़ की ब्रांच है द्वैत अद्वैत

868
01:02:26,200 --> 01:02:30,240
इसमें कोई बहुत अच्छे से क्लियर करके मुझे लगता है यह भक्ति में आगे जब

869
01:02:30,240 --> 01:02:33,440
व्यक्ति बढ़ता है तो भगवान ने एक हिसा छोड़ रखा है कि भैया आगे बढ़ो

870
01:02:33,440 --> 01:02:37,960
तब हम चीज दिखाएंगे दोनों ही तो उतना डिस्टेंस तो कवर करें

871
01:02:37,960 --> 01:02:42,000
दोनों ही लोग उतना डिस्टेंस तो कवर करें ताकि बाद में व भगवान उस चीज को

872
01:02:42,000 --> 01:02:46,040
जो रियलिटी क्या है वो उस स्तर तक व्यक्ति पहुंचे अधु श्रद्धा साधु

873
01:02:46,040 --> 01:02:50,120
संग भजन क्रिया अनर्थ निवृति निष्ठा सक्ति रुचि भाव उस

874
01:02:50,120 --> 01:02:54,120
स्तर तक जाए तो प्रेम क्या है प्रेम की स्थिति में क्या परिस्थिति है

875
01:02:54,120 --> 01:02:58,120
वो भगवान का काम है व रिवील करेंगे बट ये दोनों एक ही

876
01:02:58,120 --> 01:03:02,320
उसकी है और शंकराचार्य को शंकराचार्य ने कहीं

877
01:03:02,320 --> 01:03:06,880
ना कहीं ये एक ही घर की चीजें हैं तो उस स्तर से हमें बढ़ना

878
01:03:06,880 --> 01:03:10,920
चाहिए लेकिन इसमें फिर भी मेरा प्रश्न थोड़ा सा ये रुकता है और

879
01:03:10,920 --> 01:03:15,520
जो आप बोल रहे हैं कि मेरा इंटरव्यू हो रहा है तो अच्छा लगेगा लोगों को खराब नहीं लगे आपको तो करना चाहिए

880
01:03:15,520 --> 01:03:19,800
आपका चैनल है उसम इस तरीके की चीज आती है नहीं करते हैं मतलब उसमें क्या है कि हमारे

881
01:03:19,800 --> 01:03:23,840
बीच में बहुत माधुर्य है ना तो शिवजी का ऐसा ना हो कि खंडन हो तो फिर

882
01:03:23,840 --> 01:03:28,000
माधुर्य कम होने लग जाए उसका स्तर इसलिए मैं कह रहा हूं अच्छा मैं एक चीज पूछ

883
01:03:28,000 --> 01:03:32,600
रहा था आप करिए प्रश्न लास्ट उस उसी फिर वो टूट जाएगा

884
01:03:32,600 --> 01:03:37,000
ठीक है आपने बोला इसको छोटी सी बात है

885
01:03:37,000 --> 01:03:41,240
कि मैंने जो बाधित के बारे में बात कही उसमें आपने कोई आगे कोई तर्क

886
01:03:41,240 --> 01:03:45,320
या काउंटर कुछ क्वेश्चन नहीं किया मतलब अगला प्रश्न ले लिया तो उसमें आप सहमत है

887
01:03:45,320 --> 01:03:48,640
आपको समझ में नहीं आया उसमें आपकी क्या रही विचार वो

888
01:03:48,640 --> 01:03:52,640
आपने बताया नहीं आगे बढ़ गए आप आप ही बताइए कि

889
01:03:52,640 --> 01:03:56,800
द्वैत अद्वैत के लोग जब बैठ रहे हैं तो वो क्या एक दूसरे का समत होने

890
01:03:56,800 --> 01:04:00,960
आते हैं या चर्चा करने आते हैं नहीं जैसे अभी आपने वर्ण

891
01:04:00,960 --> 01:04:05,120
व्यवस्था में बताया ना कि हां ये मुझे बात आपकी पता चल गई और ये

892
01:04:05,120 --> 01:04:09,320
सही बात है आपकी आपने ये सब बोला हां उसमें सहमति वाली नहीं जो

893
01:04:09,320 --> 01:04:13,520
वीडियोस पर लोग कमेंट कुछ भी करते हैं आप अपनी जगह सही हो आप

894
01:04:13,520 --> 01:04:17,560
कुछ चीजों को पढ़ के आए हो उनको यथा रूप में लोग नहीं ले रहे हैं तो वो गलत है

895
01:04:17,560 --> 01:04:21,600
लोगों का विचार वहां पर ऐसे सोचेंगे और य पर इतना गंदा कल्चर

896
01:04:21,600 --> 01:04:25,720
है कि लोग थोड़ा सुनते हैं अकट नहीं आय थोड़ा सुनेंगे और उसे

897
01:04:25,720 --> 01:04:29,760
प्रेजेंट करने लग जाते हैं कि देखो ऐसा बोला है ऐसा किया है तो बस वो है बाकी

898
01:04:29,760 --> 01:04:33,920
जो सहमति वाली बात है वो तो अलग चीजें हो जाती है जैसे आपने बोला कि इस चर्चा

899
01:04:33,920 --> 01:04:38,080
ना करें तो ही अच्छा है तो सहमति वाली बात नहीं है बट हां मैं यह समझ गया कि

900
01:04:38,080 --> 01:04:42,120
वहां आप कैसे सही थे और वो व्यक्ति कैसे सही थे और

901
01:04:42,120 --> 01:04:46,480
आप दोनों एक ही धरातल पर नहीं थे इसलिए कांट्रडिक्शन क्रिएट हो रहा था और लोग उसको

902
01:04:46,480 --> 01:04:50,520
बहुत गलत तरीके से देख रहे हैं और ले रहे हैं वो मेरा विचार था कि वो थोड़ा

903
01:04:50,520 --> 01:04:54,520
दूर रहे दूर हो जाए चीजें तो उस चीज को लेकर था

904
01:04:54,520 --> 01:04:58,640
तो उसमें सहमति वाली बात तो मैं नहीं बोलूंगा बट एक समझ वाली बात बोलूंगा कि मेरे

905
01:04:58,640 --> 01:05:02,640
समझ में आ गया कि आप कैसे बोल रहे थे और व्यक्ति सामने वाला कैसे समझ रहा था

906
01:05:02,640 --> 01:05:04,840
तो मैं तो सब

907
01:05:04,840 --> 01:05:08,840
ते इसी में ही प्रश्न था कि थोड़ा सा आपने बोला इसको छेड़े

908
01:05:08,840 --> 01:05:13,480
ना बट छेड़ लीजिए वो मैंने थोड़ा हंसी ग थी वो

909
01:05:13,480 --> 01:05:17,480
एक जोग े तो इसमें जो आधार आते हैं भागवत के भगवत गीता

910
01:05:17,480 --> 01:05:21,480
के कृष्णा की सुप्रीम एसी जैसे की बहुत सारे हम आपको

911
01:05:21,480 --> 01:05:25,720
बताए एक एक करके अगर वो करें बत

912
01:05:25,720 --> 01:05:29,800
हमारे भी पास है आप अगला तर्क तक प्रमाण हमारे भी पास है बहुत सार तो

913
01:05:29,800 --> 01:05:33,840
भागवत में तेम कलाप कृष्ण भगवान स्वयं ब्रह्म समता में

914
01:05:33,840 --> 01:05:37,840
ईश्वर परम कृष्णा परम ईश्वर कृष्ण ही है या भगवत गीता में कृष्णा

915
01:05:37,840 --> 01:05:41,960
खुद बोल रहे है सर्वस्य प्रभव मता

916
01:05:41,960 --> 01:05:46,760
परम ना नोन सुपीरियर देन मी और आई एम द सोर्स ऑफ एवरीथिंग

917
01:05:46,760 --> 01:05:50,800
तो ये इतने सारे गणेश गीता में गणेश जी बोल

918
01:05:50,800 --> 01:05:55,040
रहे हैं ईश्वर गीता में शिव गीता में शिव बोल रहे हैं

919
01:05:55,040 --> 01:05:59,600
मैं हूं सब कुछ आई एम द एवरीथिंग और

920
01:05:59,600 --> 01:06:04,120
माता वाली जो गीता है भगवती वाली उसम वो बोल रही है आम एवरीथिंग

921
01:06:04,120 --> 01:06:08,280
तो इनको हम अमान नहीं कर सकते एक मत पुराण में यह

922
01:06:08,280 --> 01:06:13,040
कहां से ये आप गता स ली 50 गीता

923
01:06:13,040 --> 01:06:17,280
50 तो उसमें भगवान के जो पांच रूप है उन पांच

924
01:06:17,280 --> 01:06:20,040
रूपों का आ जाएगा कि उन्होंने एकना एक जगह

925
01:06:20,040 --> 01:06:26,040
गणेश गीता तो दिखा द

926
01:06:33,080 --> 01:06:37,680
गणेश ताप गणेश तापन निषद है शायद

927
01:06:37,680 --> 01:06:41,840
उसमें भी वर्णन है उपनिषद में और गणेश जी के तो प्रमाण

928
01:06:41,840 --> 01:06:46,160
है उसमें वेदों में ऋग्वेद

929
01:06:46,160 --> 01:06:49,960
में

930
01:06:49,960 --> 01:06:54,000
है ये लीजिए मैं अजन्मा अविनाशी तथा सभी जीवों का

931
01:06:54,000 --> 01:06:58,080
आत्मा अनादि ईश्वर हूं वही का वही लोक

932
01:06:58,080 --> 01:07:02,320
जो भगवत गीता का है श्री कृष्ण का वही का वही शलोक गणेश जी के लिए

933
01:07:02,320 --> 01:07:06,480
तो कृ बोल रहे नाम कौन बो गणेश बोल रहे

934
01:07:06,480 --> 01:07:11,040
गणेश गणेश भगवान बोल रहे खुद के बारे में बता रहे

935
01:07:11,040 --> 01:07:15,200
हा तो ये जो मैं वाली बात है यह भी गलत बात है कि केवल कृष्ण

936
01:07:15,200 --> 01:07:19,600
जी नेही बोली है शिव पुराण में शिव जी ने बोली है भगवती पुराण में

937
01:07:19,600 --> 01:07:23,800
भगवती ने बोली है गणेश जी ने बोली है

938
01:07:23,800 --> 01:07:28,280
सबने बोली है राम जी ने बोली है राम जी की भी गीता है उसम उन्होंने बोला

939
01:07:28,280 --> 01:07:32,280
है और यह जो गीता जो बता रहे हैं य ये

940
01:07:32,280 --> 01:07:35,360
किस परंपरा से कौन आचार्य इनको शंकराचार्य ने

941
01:07:35,360 --> 01:07:39,440
को थरा किया है शंकराचार्य हा हा शंकराचार्य द्वारा स्वीकार

942
01:07:39,440 --> 01:07:43,520
है हम आपको इस कहां से है मैं आपको बता

943
01:07:43,520 --> 01:07:47,600
दूं गणेश पुराण है गणेश पुराण

944
01:07:47,600 --> 01:07:51,920
है वह है वहां से वो है और राम

945
01:07:51,920 --> 01:07:56,120
गीता अध्यात्म रामायण से है अद्भुत रामायण से है और

946
01:07:56,120 --> 01:08:00,720
पुराण पुराण जो 18 पुराण है उम आता हैय

947
01:08:00,720 --> 01:08:04,840
18 पुराणों से जो ऑ पुराण निकले हैं उसमें

948
01:08:04,840 --> 01:08:09,040
आता है अच्छा परंपरा प्राप्त आचार्य द्वारा

949
01:08:09,040 --> 01:08:12,080
स्वीकार है

950
01:08:12,080 --> 01:08:17,000
हा अच्छा परंपरागत आचार्य मीस हम बोले रामानुजाचार्य मधुवा

951
01:08:17,000 --> 01:08:21,240
चार्य रामानुजाचार्य द स्वीकार अच्छा

952
01:08:21,240 --> 01:08:26,600
गणेश पुराण है ना जी अच्छा अच्छा

953
01:08:26,600 --> 01:08:30,760
और दूसरा क्या बता रहे थे आप एक और देवी भागवत

954
01:08:30,760 --> 01:08:34,760
में कहा है देवी भागवत में मां भगवती कह रही है कि मैं हूं

955
01:08:34,760 --> 01:08:38,760
सब कुछ आईम एवरीथिंग उसका मैं आपको बता

956
01:08:38,760 --> 01:08:42,880
दूं क्या प्रमाण हा मुझे श्लोक

957
01:08:42,880 --> 01:08:48,880
नंबर एक बार बताएंगे तो थोड़ा

958
01:08:50,720 --> 01:08:54,880
सही देवी भागवत का विगत कुछ दिनों में मैंने बहुत अध्ययन किया

959
01:08:54,880 --> 01:08:58,880
है कारण था कि रामपाल वाले जितनी भी वो

960
01:08:58,880 --> 01:09:03,600
अपनी फैलाते हैं मिथ्या वो देवी भागवत के आधार पर फैलाते हैं

961
01:09:03,600 --> 01:09:07,640
वो वहां बहुत अच्छा वो करते हो आप वहा तो रामपाल तो खैर क्या

962
01:09:07,640 --> 01:09:12,720
ही बोले मतलब पूरा ही स्पेकल है

963
01:09:12,720 --> 01:09:17,120
कहानी बहुत उल्टा सीधा कर रखा उन्होने आपको ये

964
01:09:17,120 --> 01:09:21,160
वेदों के प्रमाण है ब्रह्मा विष्णु महेश भगवती गणेश पांचों के वेदों में इनको

965
01:09:21,160 --> 01:09:26,600
तो छोड़ ही दिए रेफरेंस रेफरेंस वेदों में

966
01:09:26,600 --> 01:09:32,600
ऋगवेद में ऋग्वेद में आता है 1.5 सॉरी ट

967
01:09:32,920 --> 01:09:37,160
1546 ये ऋग्वेद में भगवान का आता है कि गलोक धाम कैसे सर्वश्रेष्ठ

968
01:09:37,160 --> 01:09:41,520
है मैं आपको बताऊ एक बात कि जैसे भगवान

969
01:09:41,520 --> 01:09:45,560
श्री कृष्ण के लिए वाली बात आती है कि वह शिव जी की

970
01:09:45,560 --> 01:09:51,560
भक्ति करते हैं तो इसके बारे में आप क्या

971
01:09:51,720 --> 01:09:56,400
कहेंगे कृष्ण जी ने शिव जी की भक्ति की है पता है आपको कि नहीं पता बता

972
01:09:56,400 --> 01:10:00,840
हां देखो भगवान राम ने भी उनको वशिप किया था वो सब चीज है

973
01:10:00,840 --> 01:10:04,960
बट जैसा हम सुनते हैं अपनी अथॉरिटी और उन लोगों

974
01:10:04,960 --> 01:10:09,480
से तो वहां ये हमें सुनने में आता है कि

975
01:10:09,480 --> 01:10:13,920
भगवान को बहुत बड़ा भक्त भी बोला गया है भगवान शिव को

976
01:10:13,920 --> 01:10:18,000
मतलब लीला पूर्वक भक्ति करते हैं वो वैसे भक्ति नहीं करते हैं कि मेरे इष्ट

977
01:10:18,000 --> 01:10:22,040
है है ना लीला पूर्वक भक्ति होती है तो भक्त और भगवान का रिश्ता होता है

978
01:10:22,040 --> 01:10:26,160
जिसमें भगवान भक्त को पूज रहे होते हैं ठीक है तो

979
01:10:26,160 --> 01:10:30,160
वही वही भक्त और भगवान का रिश्ता तब भी तो माना जा सकता है जब शिव जी भक्ति

980
01:10:30,160 --> 01:10:34,840
में कुछ कह रहे हैं फिर शिव जी की बात को प्रमाण के रूप में ले लिया जाता है

981
01:10:34,840 --> 01:10:38,960
भाई जब भक्त और भगवान का ऐसा रिश्ता है कि भगवान अपने भक्त की भक्ति करेगा उसको

982
01:10:38,960 --> 01:10:41,920
खूब बड़ा कहेगा तो

983
01:10:41,920 --> 01:10:45,920
जब विष्णु ने किया कृष्ण ने किया तो उसको तो प्रमाण नहीं माना

984
01:10:45,920 --> 01:10:50,040
किय तो लीला में कह दिया भगवान ने ठीक है मगर शिवजी ने जब कहा तो

985
01:10:50,040 --> 01:10:54,040
उसको प्रमाण में ले लिया देखो शिव जी कह रहे हैं कि विष्णु के अलावा सबकी भक्ति

986
01:10:54,040 --> 01:10:58,240
बेकार है उसको भी बहुत चालाक हैन वाले बहुत

987
01:10:58,240 --> 01:11:03,560
चालाक हैन स्कोन वाले आप भी

988
01:11:03,560 --> 01:11:07,680
है ये देखिए मैं आपको एक बात बताऊ रेफरेंस मुझे बताइएगा आप जो बता

989
01:11:07,680 --> 01:11:11,720
रहे हैं ना उ मैं एक रेफरेंस बता रहा

990
01:11:11,720 --> 01:11:15,800
ये देवी भागवत में कह रही है देवी

991
01:11:15,800 --> 01:11:19,840
तीसरा स्कंद छवा अध्याय चौथे से छठवां

992
01:11:19,840 --> 01:11:24,120
श्लोक मैं और ब्रह्म एक ही है

993
01:11:24,120 --> 01:11:27,960
ये देवी भागवत में

994
01:11:27,960 --> 01:11:31,960
ऋग्वेद में लिखा है 10 125

995
01:11:31,960 --> 01:11:36,320
में देवी परब्रह्म से भिन्न नहीं

996
01:11:36,320 --> 01:11:40,520
हैय तो भगवत गीता में भगवान कृष्णना

997
01:11:40,520 --> 01:11:44,640
सु बता रहे और य भी बोल देवी सा गुण म माया

998
01:11:44,640 --> 01:11:48,800
मेरी तो माया देवी बोल रही हैम

999
01:11:48,800 --> 01:11:53,080
परमेश्वर बोल रहे अपितु परमेश्वर परमात्मा नित्य सनातन सच्चिदानंद

1000
01:11:53,080 --> 01:11:57,520
स्वरूप परम तत्व ही है देवी और यह ऋग्वेद

1001
01:11:57,520 --> 01:12:01,680
का वचन है 10 125 पूरा

1002
01:12:01,680 --> 01:12:05,840
सूक्त उनका तो आपका इसमें मत है कि वो भी

1003
01:12:05,840 --> 01:12:10,000
श्रेष्ठ है और यह भी है एक ही धरातल पर है वो यह आपका मत

1004
01:12:10,000 --> 01:12:14,040
है बस ये है कि पूर्व जन्म के प्रारब्ध के कारण और इस

1005
01:12:14,040 --> 01:12:18,120
जन्म के अथवा संस्कारों के कारण ये जो ईश्वर के पांच रूप है

1006
01:12:18,120 --> 01:12:22,480
अथवा इनके जो अवतार है इनमें से किसी एक के प्रति आपकी श्रद्धा आस्था

1007
01:12:22,480 --> 01:12:26,760
हो सकती है ज्यादा तो वहां पर अपने की भक्ति करने के लिए

1008
01:12:26,760 --> 01:12:30,920
आप यह कर सकते हैं हे ब्रह्मा विष्णु महेश भगवती और गणेश

1009
01:12:30,920 --> 01:12:34,920
मैं आप सबकी भक्ति कृष्ण के रूप में करने जा रहा हूं आपका जो कृष्ण रूप है मुझे बहुत

1010
01:12:34,920 --> 01:12:40,080
प्यारा है मैं उसमें आप सबकी भक्ति करूंगा

1011
01:12:40,080 --> 01:12:43,720
इस तरीके से सभी शास्त्रों का मान भी हो गया

1012
01:12:43,720 --> 01:12:48,360
सभी शास्त्रों का मान रह गया और आपने अपने कृष्ण को भी भक्ति कर लिया दूसरी बात

1013
01:12:48,360 --> 01:12:52,400
जहां जहां पर शिव और विष्णु में ऊपर नीचे है कहीं

1014
01:12:52,400 --> 01:12:56,520
पर शिव बड़े कहीं पर विष्णु बड़े इसको हमें लेना चाहिए अनन्य

1015
01:12:56,520 --> 01:13:00,720
होता के भाव की रक्षा के लिए जैसे कि हमारा अपने ट के प्रति

1016
01:13:00,720 --> 01:13:04,800
वो होना चाहिए अनन्य होता उसके सिवाय कुछ दिखाई नहीं देना चाहिए तो हम क्या

1017
01:13:04,800 --> 01:13:09,320
करेंगे कि उसके लिए फिर वो वाले पुराण पढ़ेंगे जिसमें उसी को सुप्रीम कहा गया

1018
01:13:09,320 --> 01:13:13,400
है अच्छा जैसे अपनी भक्ति उनके प्रति बढ़ानी है तो

1019
01:13:13,400 --> 01:13:17,400
स्वाभाविक तो उनका ही चरित्र पढ़े अब उनको अगर भक्त कहा जा

1020
01:13:17,400 --> 01:13:21,560
रहा होगा तो हमारा कहीं ना कहीं वहां से अनंतता का भाव कम होगा तो हम वही शास्त्र

1021
01:13:21,560 --> 01:13:25,680
पढ़े जिसमें उनको ही सुप्रीम कहा गया है इस दृष्टिकोण से

1022
01:13:25,680 --> 01:13:29,880
ये अलग अलग भाव को प्रकट करने वाले वेदव्यास जी द्वारा वो रचित है मगर

1023
01:13:29,880 --> 01:13:34,480
उनको हम यह कह दे कि जहां वेदव्यास जी ने विष्णु को सुप्रीम कहा वो तो सही कहा

1024
01:13:34,480 --> 01:13:38,480
मगर दूसरा जो कहा वो भ्रम फैलाने के लिए कहा तो फिर ये आईडियोलॉजी

1025
01:13:38,480 --> 01:13:42,760
थोड़ा मैच करने लगेगी इस्लाम से इस्लाम को रचने

1026
01:13:42,760 --> 01:13:46,920
वाला कई जगह पर ऐसी बातें कह देता है जो वह अपनी

1027
01:13:46,920 --> 01:13:51,720
क्रेडिबिलिटी पर उंगली उठा देता है जैसे उसने सातव

1028
01:13:51,720 --> 01:13:56,000
उसम क्या कहते सुर में आ नंबर सु कुरान

1029
01:13:56,000 --> 01:13:58,920
को रचने वाले को रचने वाले ने ये कहा मैं भटका

1030
01:13:58,920 --> 01:14:03,200
हूं उसने स्वयं य कहा प्रमाण उसने स्वयं दिया मैं भटका आता हूं

1031
01:14:03,200 --> 01:14:07,320
बुरे लोगों को भटका हूं किसको भटका अगर वह भटका सकता है

1032
01:14:07,320 --> 01:14:12,280
तो जब वह आपको भटका रहा होगा तो आपको बताएगा क्या मैं आपको भटका नहीं रहा हूं

1033
01:14:12,280 --> 01:14:16,280
तो यदि वेदव्यास जी भ्रम फैला सकते हैं तो जब वह आपको

1034
01:14:16,280 --> 01:14:20,320
कुछ कह रहे होंगे भ्रम फैलाने के लिए तो

1035
01:14:20,320 --> 01:14:26,160
क्या वह आपको बताएंगे

1036
01:14:26,160 --> 01:14:30,600
ये ह क्यों जाता है और

1037
01:14:30,600 --> 01:14:34,760
सारी बातें खत्म हो जाती है जब

1038
01:14:34,760 --> 01:14:39,000
आ जाते हैं हमारे राम जब राम आ जाते हैं क्योंकि

1039
01:14:39,000 --> 01:14:43,000
भगवान के जो अन्य चरित्र है वो लीला पूर्वक कई चीजें ऊपर नीचे

1040
01:14:43,000 --> 01:14:47,080
कर देते हैं बिल्कुल सही बात है वो उनका अपना स्वरूप है मगर

1041
01:14:47,080 --> 01:14:51,400
जो राम का स्वरूप है वह सत्य प्रतिज्ञ है जो राम स्वरूप है भगवान

1042
01:14:51,400 --> 01:14:56,120
का वो सत्य प्रतिज्ञ है तो उसमें उन्होंने

1043
01:14:56,120 --> 01:15:00,160
पहली बात आती है कि पद्म पुराण में जैसे वो वाली बात कही जाती है

1044
01:15:00,160 --> 01:15:04,160
पदम पुराण में वो ठव उसमें वो कह रहे हैं

1045
01:15:04,160 --> 01:15:08,440
कि वो अपनी अनंतता को प्रकट कर रहे हैं शिव जी कि नहीं विष्णु

1046
01:15:08,440 --> 01:15:12,440
तुमसे तुमसे तुम्हारे बराबर कोई कुछ नहीं है और जो लोग मुझे और

1047
01:15:12,440 --> 01:15:14,680
तुम्हें एक मानते हो बेकार है

1048
01:15:14,680 --> 01:15:18,720
पागल है जैसे कोई प्रेमी अपनी प्रेमिका से कह रहा हो कि तुम्हारे

1049
01:15:18,720 --> 01:15:23,000
जैसी इस संसार में कोई नहीं है तुम बहुत ऊंची हो अन्यता

1050
01:15:23,000 --> 01:15:27,040
जैसे मैं अपनी मां को कहूं आप संसार की सबसे अच्छी मां हो ऐसा नहीं और भी

1051
01:15:27,040 --> 01:15:31,280
मां होंगी अच्छी मगर मैं अपने अन्यता के भाव को कैसे प्रकट करूं

1052
01:15:31,280 --> 01:15:35,600
तो वो इन शब्दों में प्रकट कर रहे हैं तो इसको प्रमाण मान

1053
01:15:35,600 --> 01:15:39,600
लिया भेद करने वालों ने इसको प्रमाण मान लिया कि

1054
01:15:39,600 --> 01:15:44,080
यहां देखिए भगवान ने कह दिया कि उनके अलावा जितनी भी

1055
01:15:44,080 --> 01:15:48,280
शिक्षाएं दी गई है जहां पर भी विष्णु के अलावा किसी और को सुप्रीम कहा गया है

1056
01:15:48,280 --> 01:15:52,280
वो सब भ्रम फैलाने के लिए तो पहली बात तो ये है जब हम भ्रम फैलाने वाला

1057
01:15:52,280 --> 01:15:56,560
मान लेंगे इतने से भी अंश में तो हम तो हम पूरे सनातन

1058
01:15:56,560 --> 01:16:00,600
शास्त्रों पर ही की क्रेडिबिलिटी पर उंगली उठा देंगे व झूठ

1059
01:16:00,600 --> 01:16:05,360
फिर कहीं भी बोल सकते हो सकता यह वाली बात भी झूठी हो क्योंकि वो झूठ बोल सकते हैं

1060
01:16:05,360 --> 01:16:09,360
तो आपका आपका आक्रोश को लेकर रता है मैं अपनी

1061
01:16:09,360 --> 01:16:13,400
बात पूरी कर लू तो अभ एक तो य हो गया कि हमने जब यह कह दिया

1062
01:16:13,400 --> 01:16:17,720
भ्रम फला के लिए तो हमने पूरे अपने सनातन वांग की क्रेडिबिलिटी

1063
01:16:17,720 --> 01:16:22,560
पर उंगली उठा दिया दूसरी फिर बात ये हो गई कि

1064
01:16:22,560 --> 01:16:26,680
यही तरीके से भगवान शिव ने इसी प्रकार से

1065
01:16:26,680 --> 01:16:32,680
अनन्य होता का भाव प्रकट किया पद्म पुराण

1066
01:16:32,680 --> 01:16:36,880
में श्री राम के सामने श्री राम

1067
01:16:36,880 --> 01:16:40,920
के सामने ऐसे ही उन्होंने अनन्य का

1068
01:16:40,920 --> 01:16:45,640
भाव प्रकट कर दिया तो क्या हुआ

1069
01:16:45,640 --> 01:16:49,840
पद्म पुराण पाताल खंड 46 वा अध्याय

1070
01:16:49,840 --> 01:16:54,360
और पांच से नौ श्लोक इसमें शिवजी

1071
01:16:54,360 --> 01:16:58,960
वही बोल रहे कि नहीं तुम यहां हो हम यहां है वही वैसे ही

1072
01:16:58,960 --> 01:17:02,960
अन्यता और जब सामने राम थे तो

1073
01:17:02,960 --> 01:17:07,040
वोह तो लीला पुरुषोत्तम नहीं है वह मर्यादा पुरुषोत्तम है

1074
01:17:07,040 --> 01:17:12,000
वह सत्य प्रतिज्ञ है तो उन्होंने वहां पर कहा नहीं शिव

1075
01:17:12,000 --> 01:17:16,400
यह गलत तुम में और मुझ में कोई भेद नहीं है भेद मानने

1076
01:17:16,400 --> 01:17:21,160
वाला हजारों कल्पों तक कुंभी पाक नामक नरक में

1077
01:17:21,160 --> 01:17:25,200
पकाया जाएगा मेरे हृदय में तुम हो तुम्हारे हृदय में मैं हूं कोई

1078
01:17:25,200 --> 01:17:29,320
भेद नहीं तो यह राम का जब वचन आ जाता है तो जितनी भी वो

1079
01:17:29,320 --> 01:17:33,520
है उनका निचोड़ आ जाता है अब या तो हम वेदव्यास जी को अन्यता

1080
01:17:33,520 --> 01:17:37,520
के भाव की रक्षा करने वाला मान ले और या फिर उन्हें झूठा मान ले

1081
01:17:37,520 --> 01:17:41,560
मगर राम के वचन को तो नहीं ठुकरा सकते हैं यह राम का वचन है

1082
01:17:41,560 --> 01:17:45,560
और रामो दना भी भाते राम दो प्रकार की बातें नहीं करता राम

1083
01:17:45,560 --> 01:17:47,960
झूठ नहीं बोल सकता वह अपनी पत्नी को त्याग

1084
01:17:47,960 --> 01:17:52,160
सकता है अपने भाई को त्याग सकता है अपने प्राणों को त्याग

1085
01:17:52,160 --> 01:17:56,160
सकता है मगर वो झूठ नहीं बोल सकता वो

1086
01:17:56,160 --> 01:18:00,160
राम रामो विग्रह वान धर्म श्री राम

1087
01:18:00,160 --> 01:18:04,280
धर्म का साक्षात स्वरूप है अब यदि कोई राम के

1088
01:18:04,280 --> 01:18:08,280
विरोध में कोई चीज खपत हो रही है राम कह रहे हैं भेद मत करो और

1089
01:18:08,280 --> 01:18:12,320
कोई यह सिखा रहा है भेद करो भेद है तो फिर हम राम का

1090
01:18:12,320 --> 01:18:17,120
राम का अनुसरण अनुगमन करें कि राम के विरोधी

1091
01:18:17,120 --> 01:18:19,520
का

1092
01:18:19,520 --> 01:18:23,760
और इसमें एक चीज और आती जैसे अभी हमने कहा कि भगवान अपने भक्त

1093
01:18:23,760 --> 01:18:27,840
की भक्ति करते हैं तो कुछ ऐसा ही भाव प्रकट करने वाला एक दृश्य और

1094
01:18:27,840 --> 01:18:32,320
है नारद पुराण में भगवान विष्णु कह रहे हैं हे महेश्वर

1095
01:18:32,320 --> 01:18:36,440
आप किसको नमस्कार करते हैं किसका ध्यान करते हैं वहां पर भगवान

1096
01:18:36,440 --> 01:18:40,920
शिव भी वही बात बोल रहे जो श्री कृष्ण के लिए प्रचारित की जाती है

1097
01:18:40,920 --> 01:18:44,960
कि वो अपने ला लीला पूर्वक करते हैं तो यहां पर

1098
01:18:44,960 --> 01:18:49,000
शिव जी ने कहा नारद पुराण में 69 में अध्याय में

1099
01:18:49,000 --> 01:18:53,080
200 नंबर श्लोक में हे गोविंद ना तो मैं किसी

1100
01:18:53,080 --> 01:18:57,480
का ध्यान करता हूं ना ही किसी पूजा भक्ति करता हूं यह सच्चाई है

1101
01:18:57,480 --> 01:19:01,480
मैं तो नास्तिकों को प्रवत करने के लिए धर्म के मार्ग में ऐसा

1102
01:19:01,480 --> 01:19:03,800
करता हूं

1103
01:19:03,800 --> 01:19:09,800
लीला सारी चीजें सामने आपके सामने

1104
01:19:11,240 --> 01:19:15,360
बताइए इस प्रश्न का मैं समझ गया इसमें जो आप बोल रहे

1105
01:19:15,360 --> 01:19:19,480
हैं कि आपका बस मानसिकता यह है कि एक ही चीज

1106
01:19:19,480 --> 01:19:23,480
को लेके पूरा समझो और पूरा प्रेजेंट करो लोगों के सामने यह

1107
01:19:23,480 --> 01:19:28,000
थोड़ा सा वो है जसा मैं अनुभव कर पा रहा हूं बाकी लोग

1108
01:19:28,000 --> 01:19:32,720
जिस तरीके से बता रहे हैं कि हा जैसे मैंने भी पढ़ा मैंने भी जाना ऋगवेद

1109
01:19:32,720 --> 01:19:36,880
में भगवान के बारे में बताया गया है ये ऋग्वेद

1110
01:19:36,880 --> 01:19:39,240
का न

1111
01:19:39,240 --> 01:19:43,720
प आपको जितने आप दोगे उससे दुगने में आपको दे दूंगा मेरे

1112
01:19:43,720 --> 01:19:47,880
पास समझ गया समझ गया समझ गया ब

1113
01:19:47,880 --> 01:19:52,000
मैं बस यह बोलना चाह रहा हूं कि य जिस तरीके से हम देख

1114
01:19:52,000 --> 01:19:56,600
रहे हैं चीजों को उसम उसकी स्थिति को समझना वास्तविक

1115
01:19:56,600 --> 01:20:00,840
उसकी मानसिकता को समझना है और उस भाव से भक्ति में आगे बढ़ना है

1116
01:20:00,840 --> 01:20:04,840
कई बार अब जैसे य य बताया गया साफ साफ लिखा हुआ ू अट

1117
01:20:04,840 --> 01:20:09,000
प्लेस र य एजय टल पास्ट कृष्ण बलम के बारे

1118
01:20:09,000 --> 01:20:13,560
में मुझे मुझे आपकी चालाकी लग रही है मैंने आपके सामने

1119
01:20:13,560 --> 01:20:18,840
प्रमा लिए पढ

1120
01:20:18,840 --> 01:20:23,200
रहे एकन है आपने

1121
01:20:23,200 --> 01:20:27,280
पनेर पले कहा था अर्ध कुक्कुट न्याय कहा

1122
01:20:27,280 --> 01:20:31,280
था ना तो अगर हम केवल केवल इस प्रमाण को मानेंगे

1123
01:20:31,280 --> 01:20:35,320
जो ये कह रहे हैं जो आप अभी पढ़ रहे हो मैं तो नहीं कह रहा कि उसको ना मानो मैं

1124
01:20:35,320 --> 01:20:39,520
तो कह रहा हूं कृष्ण भी सुप्रीम है मैं तो कह रहा हूं कृष्ण भी सुप्रीम है

1125
01:20:39,520 --> 01:20:43,600
मगर आप यदि अपना प्रमाण पढ़ रहे हैं तो इस पक्ष में रख रहे नहीं कृष्ण

1126
01:20:43,600 --> 01:20:47,760
सुप्रीम है बाकी सब थोड़ा डाउन है बोल रहा हूं कि जैसे

1127
01:20:47,760 --> 01:20:51,760
लोग उसको लेके आए उन्होंने ये पढ़ा यहां सुप्रीमेसी बताई है

1128
01:20:51,760 --> 01:20:55,760
उनके अवार्ड के ऋगवेद ऋग्वेद का रेफरेंस बता मैंने आपको बता दिया

1129
01:20:55,760 --> 01:20:59,840
ना कि ऋग्वेद में श भी बताई है माता भी बताई है

1130
01:20:59,840 --> 01:21:04,120
गणेश जी मैं कहूं कि कृष्ण भगवान की सुप्रीमेसी वेद में बहुत कम है

1131
01:21:04,120 --> 01:21:08,120
विष्णु भगवान की है मैं यह कह रहा हूं मैं अभी आप भूल

1132
01:21:08,120 --> 01:21:12,600
गए मैं आपके आपसे क्वेश्चन पूछ रहा हूं तो मैं कह रहा हूं कि

1133
01:21:12,600 --> 01:21:16,640
आप यह बोलना चाहते हो आप इसीलिए उन लोगों का विरोध कर रहे

1134
01:21:16,640 --> 01:21:20,680
हो या उन्हें समझाने का प्रयास कर रहे हो कि भैया दोनों चीजों को देखो अर्ध कुकुट न्याय

1135
01:21:20,680 --> 01:21:25,000
मत करो तरीके की हा इस तरीके की आप सोच

1136
01:21:25,000 --> 01:21:29,120
जैसे मैं एक रेफरेंस पढ़ रहा हूं श्री कृष्ण के विरोधी नहीं है श्री

1137
01:21:29,120 --> 01:21:33,800
कृष्ण के हम विरोधी नहीं है भगवान श्री कृष्ण का मंत्र ले रखा है मेरी

1138
01:21:33,800 --> 01:21:34,300
घर

1139
01:21:34,000 --> 01:21:38,160
में फैमिली में कई लोग हैं भगवान श्री कृष्ण का मंत्र ले रखा है राम का मैंने

1140
01:21:38,160 --> 01:21:42,200
ले रखा है शिव का मेरी माता जी ने ले रखा है अच्छा

1141
01:21:42,200 --> 01:21:46,560
आपने कभी डिटेल में कभी कुछ अपना एक वीडियो कुछ डिटेल में नहीं बताया कि आप

1142
01:21:46,560 --> 01:21:50,640
आप खुद के बारे में कहां से क्या पढ़ाई किए आप थोड़ा सा यह भी बताएंगे तो

1143
01:21:50,640 --> 01:21:56,280
थोड़ा अच्छा लगेगा मैं किसी दिन इस पर वीडियो बनाऊंगा

1144
01:21:56,280 --> 01:22:00,480
आप आने से पहले अभी वही चर्चा चल रही थी अच्छा तो

1145
01:22:00,480 --> 01:22:04,600
ये नहीं होना चाहिए आप प्रचार कार्य कर रहे हैं तो इन चीजों

1146
01:22:04,600 --> 01:22:09,000
से भी बड़ा यूथ इंस्पायर होता है मेटली क्या क्या कैसे चीज किए आप

1147
01:22:09,000 --> 01:22:13,160
तो कहां के वैसे कहां के रहने वाले हैं आप नेटिव प्लेस एट

1148
01:22:13,160 --> 01:22:17,560
कहा का है आपका लखनऊ लखनऊ लखनऊ से आप यूपी

1149
01:22:17,560 --> 01:22:21,760
से अच्छा और क्या पढ़ाई वगैरह की बचपन

1150
01:22:21,760 --> 01:22:26,560
से ही ऐसी मार्ग पर रहे आप

1151
01:22:26,560 --> 01:22:30,800
वो मैं हम लोग किसी और उसम ले लेंगे किसी इसमें ले लेंगे

1152
01:22:30,800 --> 01:22:35,520
अभी आप उसम धारा में चले

1153
01:22:35,520 --> 01:22:39,720
तो वैसे एक दो ही प्रश्न पूछ रहा था मैं ऐसे आपसे तो थोड़ा

1154
01:22:39,720 --> 01:22:44,440
बताते तो अच्छा लगता चलो

1155
01:22:44,440 --> 01:22:48,480
जी पढ़ाई है और पिछले पाच छ साल से गुरुदेव

1156
01:22:48,480 --> 01:22:49,040
के सानिध्य

1157
01:22:49,040 --> 01:22:53,080
में अपने ग्रंथों का अध्ययन कर रहे हैं अल्पा के शिष्य माने हमें कोई प्रामाणिक

1158
01:22:53,080 --> 01:22:57,360
और उच्च स्तरीय अध्ययन करता ना माने और ना ही गुरुकुल में पढ़ाई

1159
01:22:57,360 --> 01:23:01,400
हुई है नहीं पर अच्छी एनर्जी के साथ आप चीजों

1160
01:23:01,400 --> 01:23:05,520
को लेकर आते हैं और वो दिखता है आपका एक रिनेस कि नहीं भाई चीजों

1161
01:23:05,520 --> 01:23:09,560
को बढ़ाना है कुछ कुछ करना है एक वीडियो मैंने देखा था जिसम आप कुछ लोगों के साथ

1162
01:23:09,560 --> 01:23:13,560
रोड पर कुछ मार्च निकाल रहे थे तो एक बहुत अच्छा

1163
01:23:13,560 --> 01:23:17,680
एक भाव है अब थोड़ा सा प्रश्न जिस तरीके से बात कर रहे थे कि राम का

1164
01:23:17,680 --> 01:23:22,280
आपने ले रखा है तो थोड़ा अलग उस सेंस में पूछूंगा

1165
01:23:22,280 --> 01:23:26,280
आप अगर मेरा प्रश्न इधर उधर जाए तो आप बोल दीजिएगा मैं उसको नहीं पूछूंगा

1166
01:23:26,280 --> 01:23:30,320
कि जैसे राम के बारे में आपने बोला तो शंकराचार्य में

1167
01:23:30,320 --> 01:23:34,840
जो फॉलोअर्स है जो अथॉरिटीज है जो गुरुजन लोग हैं उन्होंने बड़ा

1168
01:23:34,840 --> 01:23:38,960
राम टेंपल को लेकर उसमें बहुत सपोर्ट नहीं किया उसके पीछे

1169
01:23:38,960 --> 01:23:43,280
क्या शास्त्र वो है रीजन कि जिसमें उन्होंने वो सहमति नहीं जताई

1170
01:23:43,280 --> 01:23:47,480
कि नहीं इस चीज को लेकर देखो शास्त्रों के वो प्रमाण देते हुए पाए गए कि

1171
01:23:47,480 --> 01:23:51,680
ये सही नहीं है इस तरीके से सब चीजें कर रहे हैं और इवन उसमें सम्मिलित भी नहीं हुए

1172
01:23:51,680 --> 01:23:55,720
जबकि कई जगह आप जैसे बोल रहे हैं या फर कई जगह उनके ऐसे वीडियो है

1173
01:23:55,720 --> 01:23:59,840
जहां वो राम के बड़े मजबूत भक्त दिखाई देते हैं

1174
01:23:59,840 --> 01:24:04,360
और एक तरफ जब य का बताइए मैं फिर जाकिर नायक को ही लाऊंगा

1175
01:24:04,360 --> 01:24:08,440
उसका बड़ा वो रहता है आसानी से समझ में आ जाता है

1176
01:24:08,440 --> 01:24:12,640
अगर जाकिर नायक कल को द्वेष वश कोई ऐसा मंदिर बनाए जिसमें

1177
01:24:12,640 --> 01:24:15,320
बहुत

1178
01:24:15,320 --> 01:24:19,920
अविधवा चढ़ने लगे तो हम लोग उस मंदिर के प्रति

1179
01:24:19,920 --> 01:24:24,680
उसको छोड़ दीजिए उसको छोड़ दीजिए अभी थोड़े दिन पहले फिल्म आई थी

1180
01:24:24,680 --> 01:24:29,360
उसका नाम था आदि पुरुष जानते हैं आप प्रभास की

1181
01:24:29,360 --> 01:24:33,880
थी जिसमें भगवान श्री राम को मूछों के साथ दिखा दिया था

1182
01:24:33,880 --> 01:24:38,280
हनुमान जी को वो तेल तेल में

1183
01:24:38,280 --> 01:24:42,720
तेल तेरे बाप का कपड़ा तेरे बाप का जलेबी तेरे बाप इस तरह के डायलॉग थे

1184
01:24:42,720 --> 01:24:46,720
विवाद हो गया पूरे हिंदू समाज ने उसके कठोर वो किया

1185
01:24:46,720 --> 01:24:50,800
विरोध और उनको वो डायलॉग हटाना पड़ा उनको वो

1186
01:24:50,800 --> 01:24:55,520
डायलॉग फिर मनोज मुंतशिर जी के लिखे हुए डायलॉग उसम

1187
01:24:55,520 --> 01:24:59,800
उन्होंने कई जगह जाकर के क्षमा याचना भी किया चैनलों पर तो

1188
01:24:59,800 --> 01:25:04,040
यदि भगवान का मंदिर बन रहा है बहुत अच्छी बात है आखिरकार

1189
01:25:04,040 --> 01:25:08,280
जो लड़ाई लड़ी है उसमें बहुत बड़ा भाग रहा है शंकराचार्य का आपको शायद

1190
01:25:08,280 --> 01:25:12,440
नहीं पता सुप्रीम कोर्ट के जो आदेश आए हैं और जो हाई कोर्ट

1191
01:25:12,440 --> 01:25:16,440
के जो आदेश आए हैं उसमें नाम मेंशन है कि किसकी ओर के

1192
01:25:16,440 --> 01:25:19,360
वकील ने कितनी देर तक वो किया जिरह और

1193
01:25:19,360 --> 01:25:23,440
किसकी गवाही से सिद्ध हुआ स्कंद पुराण के दिए गए प्रमाणों

1194
01:25:23,440 --> 01:25:27,520
के आधार पर कि व ला का जन्म हुआ है ये सब मेंशन

1195
01:25:27,520 --> 01:25:31,600
है राम भद्राचार्य का भी उसमें आता है कुछ ऐसा

1196
01:25:31,600 --> 01:25:35,600
उन्होंने भी राम भद्राचार्य जी से मैं वो नहीं कर रहा हूं कि उनका नहीं आता है मैं

1197
01:25:35,600 --> 01:25:39,720
फिलहाल बात ये कर रहा हूं कि शंकराचार्य ने तो लड़ाई भी लड़ी है राम

1198
01:25:39,720 --> 01:25:43,760
सेतु की लड़ाई लड़ी है राम मंदिर तो राम विरोधी कैसे समझ ले हम कि

1199
01:25:43,760 --> 01:25:48,040
अगर वो अब बात ये आती है उनका ये कहना नहीं था कि मत करो उनका भाव

1200
01:25:48,040 --> 01:25:52,360
ये था कि अगर वहां पर यथोचित पालन नहीं हो रहा है शास्त्र की मर्यादा का

1201
01:25:52,360 --> 01:25:56,560
तो वहां शंकराचार्य को खड़ा मत करो शंकराचार्य का

1202
01:25:56,560 --> 01:26:00,800
खड़ा होने का अर्थ होता है कि वो प्रमाण

1203
01:26:00,800 --> 01:26:04,960
मान लिया जाएगा आने वाले समय के लिए कि वहां देखो ऐसे

1204
01:26:04,960 --> 01:26:09,000
से ऐसे हुआ था और वहां पर जो है शंकराचार्य भी

1205
01:26:09,000 --> 01:26:13,640
खड़े थे नहीं था फिर भी शंकराचार्य खड़े थे

1206
01:26:13,640 --> 01:26:17,800
बोले हां अगर कल को कोई कुछ कहने लगेगा कि थोड़ा सा मास्क

1207
01:26:17,800 --> 01:26:21,920
चढ़ देते हैं भगवान को भोग में आजकल हो रहा है रील्स बन रही है ना कुछ

1208
01:26:21,920 --> 01:26:26,000
भी कर रहे हैं लोग प्रेमानंद जी महाराज भी नाराज हो रहे हैं और स्पन के कई वीडियो

1209
01:26:26,000 --> 01:26:30,160
आ रहे हैं जो नाराज हो रहे हैं जिसमें वो कह रहे हैं या ये क्या है आप मास का भोग

1210
01:26:30,160 --> 01:26:34,400
लगा रहे हो तो मास का जब कोई भोग लगाने लगेगा तो उसको कोई दूसरा

1211
01:26:34,400 --> 01:26:38,640
व्यक्ति रोकेगा रुक मास का भोग मत लगाए कृष्ण इनको नहीं चढ़ता

1212
01:26:38,640 --> 01:26:42,640
ये वाला भोग कहां लिखा है शास्त्र में लिखा है शास्त्र में तो ये भी लिखा है कि

1213
01:26:42,640 --> 01:26:47,640
ऐसे पूजन नहीं होना चाहिए था उस दिन शंकराचार्य ने तो करवा दिया

1214
01:26:47,640 --> 01:26:51,920
तो धर्म का स्वरूप जो है वो बदलता जाएगा इसलिए

1215
01:26:51,920 --> 01:26:55,920
शंकराचार्य जी ने पूरी शंकरा जगतगुरु ने ने वहां से अपनी दूरी बनाई

1216
01:26:55,920 --> 01:26:59,960
कि उस पूजन में जहां शास्त्रो मर्यादा का पूर्णत पालन नहीं हो पा रहा है

1217
01:26:59,960 --> 01:27:04,000
उसके उसके कारण है कई सारे व्यवस्था हो सकती है कुछ हो सकता है तो

1218
01:27:04,000 --> 01:27:08,200
उससे हमको दूर रखा जाए और उन्होंने संदर्भ आपने

1219
01:27:08,200 --> 01:27:12,480
भी बोला उन्होने शास्त्र प्रमाण दिए स्कंद पुराण में किसी भगवत

1220
01:27:12,480 --> 01:27:16,520
विग्रह की प्रतिष्ठा कैसी अच्छा ये छोड़ दीजिए आपके य

1221
01:27:16,520 --> 01:27:20,680
भी तो मंदिरों में प्राण प्रतिष्ठा होती है प्रा प्रतिष्ठा

1222
01:27:20,680 --> 01:27:24,680
होती है ना विधिवत अब वो विधिवत नहीं हुई सिर्फ

1223
01:27:24,680 --> 01:27:28,680
एक मूर्ति बनाई और लाक रख दी उसमें विधि का इस्तेमाल नहीं

1224
01:27:28,680 --> 01:27:32,720
हुआ तो विधि का इस्तेमाल नहीं हुआ तो क्या आपके लिए वो वैसा ही

1225
01:27:32,720 --> 01:27:37,040
प्रामाणिक मंदिर कहलाएगा प्रतिष्ठित

1226
01:27:37,040 --> 01:27:41,120
भगवान नहीं के प्रतिष्ठित भगवान नहीं कहलाएंगे

1227
01:27:41,120 --> 01:27:45,200
भगवान का सत्यावे सित रूप नहीं कहलाएगा फिर वो हां तो बस उतनी सी

1228
01:27:45,200 --> 01:27:49,320
बात है आप अभी जैसे बोले जाकिर

1229
01:27:49,320 --> 01:27:49,820
नायक

1230
01:27:49,680 --> 01:27:53,800
से कंपेयर करने के जाकिर नायक कुछ समय के लिए बोल देया कुछ ऐसा कर दे तो ये कहीं ऐसा था

1231
01:27:53,800 --> 01:27:58,400
क्या इतना इतना अथरा है

1232
01:27:58,400 --> 01:28:02,520
नहीं नहीं नहीं ऐसा कुछ नहीं जाकर नायक

1233
01:28:02,520 --> 01:28:06,960
को तो बारबार लेके आने की जरूरत ऐसा है मैं उदाहरण की पराकाष्ठा

1234
01:28:06,960 --> 01:28:11,440
पर जाता हूं सीधे बात य जिससे की वो जल्दी समझ में आए

1235
01:28:11,440 --> 01:28:17,440
जैसे सम बाद में आपने बोला क

1236
01:28:18,360 --> 01:28:22,560
कि करते हा नहीं स्तर

1237
01:28:22,560 --> 01:28:26,680
की बात नहीं विधि की बात है वहां पर जाकिर नायक के होने से मतलब नहीं है

1238
01:28:26,680 --> 01:28:30,680
मैं तो जाकिर नायक को इसलिए ले रहा हूं कि कोई व्यक्ति विधि के विरुद्ध क्यों

1239
01:28:30,680 --> 01:28:34,960
जाएगा उसके मन में दोष होगा तो द्वेष के रूप में मैंने जाकिर नायक को ले लिया

1240
01:28:34,960 --> 01:28:39,240
मगर मैं वहां पर भी उसके द्वारा उपयोग विधि का विरोध कर रहा हूं कि वह अपने मस्जिद

1241
01:28:39,240 --> 01:28:43,560
के अनुसार वहां पर विधि चला दे उस मूर्ति के लिए

1242
01:28:43,560 --> 01:28:47,600
तो क्या वह हमारे लिए आस्था का केंद्र होगा क्योंकि विधि मेरा फोकस विधि

1243
01:28:47,600 --> 01:28:52,560
प था जाकिर नायक का नाम तो मैंने हा वो

1244
01:28:52,560 --> 01:28:57,160
जो उ की पराकाष्ठा पर जाने का यही होता है

1245
01:28:57,160 --> 01:29:01,320
और जितने भी आचार्य देख लीजिए जो प्रभुपाद जी है उनकी

1246
01:29:01,320 --> 01:29:04,800
भी अगर आप लेखनी पड़ेंगे तो उदाहरण जब देते हैं आचार्य गण तो

1247
01:29:04,800 --> 01:29:08,960
उदाहरण की पराकाष्ठा पर जाते हैं हल्के फुल्के वो नहीं देते

1248
01:29:08,960 --> 01:29:13,280
क्योंकि सामने वाला उनके साथ कंप्रोमाइज कर लेगा अगर मैं आपको छोटा मोटा उदाहरण

1249
01:29:13,280 --> 01:29:17,520
दूं जैसे कि किसी ने कहा कि भाई मैंने

1250
01:29:17,520 --> 01:29:21,520
जो है धर्म जो है गुरुओं से नहीं सीखा माता पिता से नहीं

1251
01:29:21,520 --> 01:29:25,640
सीखा वो तो मेरे अंदर आया है ठीक है तो मैंने उसको सीधे

1252
01:29:25,640 --> 01:29:30,120
बोल दिया कि बहन के साथ कु बहन पर कुदृष्टि ना

1253
01:29:30,120 --> 01:29:34,280
डालना बहन के बहन पर कुदृष्टि ना डालना आपने कहां से सीखा

1254
01:29:34,280 --> 01:29:38,440
अंदर से आया है या मां बाप से सीखा आपके संस्कार से सीखा जो आपको

1255
01:29:38,440 --> 01:29:43,040
बाहर से मिले तो धर्मे ना पशु भी समाना धर्मे

1256
01:29:43,040 --> 01:29:47,080
पशु समाना यस हा तो आप जो आज मनुष्य कहला रहे

1257
01:29:47,080 --> 01:29:51,320
हो मनुष्य मनुष्य उचित आचरण कर पा रहे हो उसका कारण आपको बाहर

1258
01:29:51,320 --> 01:29:55,320
से मिले संस्कार है अंत तो अंदर से आप

1259
01:29:55,320 --> 01:29:59,360
पशु रूप में उत्पन्न होते हैं पशु होते हैं आप केवल

1260
01:29:59,360 --> 01:30:03,440
योनि मनुष्य की होती है आप पशु होते हैं आपका अगर संस्कार आपको नहीं मिलेंगे आप

1261
01:30:03,440 --> 01:30:07,440
पशु बते चले जाओगे वो संस्कार आपको घर से मिलते हैं माता पिता

1262
01:30:07,440 --> 01:30:11,880
से मिलते हैं गुरुओ से मिलते हैं तब आप एक मन मानव कहलाते

1263
01:30:11,880 --> 01:30:15,920
ब्राह्मण परिवार में जन्मा व्यक्ति भी इस तरीके से

1264
01:30:15,920 --> 01:30:20,360
हम सोचेंगे उसको सूत्र वत मैंने कहा पशु वत

1265
01:30:20,360 --> 01:30:24,600
पशुओ जैसे होते हैं मगर योनि तो कहलाए गी ना मानव की

1266
01:30:24,600 --> 01:30:28,680
जैसे धर्मे ना पशु भी समाना य उसम समाना

1267
01:30:28,680 --> 01:30:33,200
स्कंद पुराण में एक वचन आया कि जिसका गुरु नहीं वो पशु है

1268
01:30:33,200 --> 01:30:37,640
इसका मतलब पूरा पशु नहीं है उसकी योनि तो मानव की है

1269
01:30:37,640 --> 01:30:41,800
मानव योनि में जन्मा है यह तो स्वीकार करना पड़ेगा मगर उसके आचरण

1270
01:30:41,800 --> 01:30:45,920
से वह आगे चल कर के वो नहीं है तो ब्राह्मण के घर में जन्मा

1271
01:30:45,920 --> 01:30:50,760
भी जो जन्म से वो शूद्र वत है शूद्र नहीं है शूद्र वत है

1272
01:30:50,760 --> 01:30:55,000
और जब उसके वो कर्म संस्कार हो जाएंगे तो व और वो ब्राह्मण

1273
01:30:55,000 --> 01:30:59,440
उचित कार्य भी करेगा तब वो ब्राह्मण ब्राह्मण ब्राह्मण

1274
01:30:59,440 --> 01:31:03,600
कहलाएगा अभी वो हीन आचरण वाला हीन है अपने आचरण

1275
01:31:03,600 --> 01:31:08,040
से दूर है वो जो उसको करने चाहिए नहीं मुझे

1276
01:31:08,040 --> 01:31:12,040
बस यही वो थे हालाकि प्रश्न पूछना नहीं चाह रहा था आपसे बड़े वैसे हो जाते

1277
01:31:12,040 --> 01:31:16,120
हैं एक और शंकराचार्य पॉलिटिकल चीजों में शंकराचार्य आजकल के अरिटी बहुत

1278
01:31:16,120 --> 01:31:20,960
जाते हैं ब ठीक है कारण य होता है कि शंकराचार्य

1279
01:31:20,960 --> 01:31:25,000
का केवल यह नहीं है कि वो चाहे तो कथा कर सकते हैं यह

1280
01:31:25,000 --> 01:31:29,040
बात है वो केवल कथा कर सकते हैं बहुत अच्छे से अपना जीवन निकाल सकते

1281
01:31:29,040 --> 01:31:33,560
हैं मगर उन्हें राष्ट्र की चिंता होती है

1282
01:31:33,560 --> 01:31:35,400
तो राष्ट्र में क्या हो रहा है क्या नहीं

1283
01:31:35,400 --> 01:31:39,400
हो रहा है कैसे प्रगति होगी कैसे रक्षा होगी हिंदुओं की इन बातों पर

1284
01:31:39,400 --> 01:31:43,440
वो बात करते हैं तो जाहिर सी बात मानसिकता उनकी प्रचार की है

1285
01:31:43,440 --> 01:31:47,480
मानसिकता धर्म से जुड़ के ही करने की है बट पानी में जाना पड़ता

1286
01:31:47,480 --> 01:31:51,720
है भीगना पड़ता है कई बार उनके जैसा बनना पड़ता है उस चीज में सुधार

1287
01:31:51,720 --> 01:31:55,800
करने के लिए ऐसा बोला जा सकता है उस क्त्र उके जैसा नहीं

1288
01:31:55,800 --> 01:32:00,720
वो गद्दी ही इसीलिए है धर्म के नियंता धर्म और अधर्म के नियंता

1289
01:32:00,720 --> 01:32:05,040
देखिए पहले क्या बता रहा एक बात सुन लीजिए

1290
01:32:05,040 --> 01:32:09,120
जैसे राम जी है राम जी को कोई परेशानी आ रही क्या करना

1291
01:32:09,120 --> 01:32:13,520
है क्या नहीं करना है तो वह अपने गुरु के पास जाते हैं वशिष्ठ जी के पास

1292
01:32:13,520 --> 01:32:17,920
क्या करना है और क्या नहीं करना है कि विषय में जाते हैं ना

1293
01:32:17,920 --> 01:32:21,960
निर्णय लेने के लिए क्या करना चाहिए क्या नहीं करना चाहिए उसी प्रकार से आज है

1294
01:32:21,960 --> 01:32:25,960
आज गुरु गद्दी आपकी सुरक्षित है तो देश की व्यवस्था कैसी

1295
01:32:25,960 --> 01:32:30,160
होनी चाहिए गुरुओं को निर्धारित करना होता है अब दुर्भाग्यवश

1296
01:32:30,160 --> 01:32:34,400
ऐसी स्थिति हो गई है कि गुरु और शासन व्यवस्था

1297
01:32:34,400 --> 01:32:38,720
में तालमेल नहीं रहा शासन जो भी कुछ कर रहा है हा

1298
01:32:38,720 --> 01:32:43,680
वो तालमेल नहीं रहा जो होना चाहिए उसी से सुव्यवस्थित शासन आ सकता है

1299
01:32:43,680 --> 01:32:49,400
व्यास गद्दी और शासन तंत्र यह दोनों चीज ब्राह्मण और

1300
01:32:49,400 --> 01:32:50,400
क्षत्रिय

1301
01:32:50,400 --> 01:32:54,760
आंसर सही है अच्छा लगा सुनके एक और इतना

1302
01:32:54,760 --> 01:32:58,840
वो करते रहते हैं पूरा स्कन का या स्कन के लोगों

1303
01:32:58,840 --> 01:33:03,560
को पकड़ पकड़ के कुछ कुछ ऐसे मतवे उनको करेक्ट करना कभी

1304
01:33:03,560 --> 01:33:07,760
मैंने नहीं सुना प्रभुपाद ने इतना प्रचार किया है इतना अच्छे से चीज बताई है बहुत

1305
01:33:07,760 --> 01:33:11,880
बड़े स्तर पर तो कभी आपको उनका एक अच्छा वो भी

1306
01:33:11,880 --> 01:33:16,200
बताए कि प्रभुपाद जी ने कैसे चीजें की है किस स्तर पर की है 70

1307
01:33:16,200 --> 01:33:21,000
साल की उम्र में गए ये सब चीज कभी नहीं बात बताए

1308
01:33:21,000 --> 01:33:25,200
बा मैंने सुना है आपसे तब तक केवल

1309
01:33:25,200 --> 01:33:29,320
जबक जो प्रचारक होता है वो अब जैसे आप जिस तरीके से आज बताए मुझे इतना

1310
01:33:29,320 --> 01:33:33,320
अच्छा लगा सुनके मुझे बिल्कुल भी एक थोड़ा परसेप्शन बना हुआ था मैंने

1311
01:33:33,320 --> 01:33:37,320
कहा ये यंग एज में इतना अच्छा काम कर रहे हैं कौन करता है और एक एक

1312
01:33:37,320 --> 01:33:41,320
पैशन है इस चीज को करने के लिए कि ये चीज करनी है बहुत बड़ी चीज होती हैय मैं सही

1313
01:33:41,320 --> 01:33:45,400
बता रहा हूं कि आप जिस मानसिकता से लड़ते हो या विरोध कर रहे हो किसी

1314
01:33:45,400 --> 01:33:49,640
चीज का चाहे वो रामपाल वाले हो चाहे वो और कोई हो तो

1315
01:33:49,640 --> 01:33:53,760
एक अच्छा एटीट्यूड है कि हम बहुत सीरियस है इस चीज को लेकर के समाज के लिए

1316
01:33:53,760 --> 01:33:57,880
जरूरी है ये चीज इन चीजों के लिए लड़ना वो भाव देख के अच्छा लगता है लेकिन

1317
01:33:57,880 --> 01:34:01,960
जो ऐसे लोग हुए हैं बड़े और बहुत इंपोर्टेंट लोग हुए हैं प्रभुपाद जी का जो

1318
01:34:01,960 --> 01:34:05,480
काम है वो बहुत अलग है अद्भुत है

1319
01:34:05,480 --> 01:34:09,760
तो ऐसे व्यक्तित्व को जो इस तरीके की चीजें कर रहा है और बार-बार वही चीज

1320
01:34:09,760 --> 01:34:13,760
दिखाने की वजह कभी कभी बीच बीच में प्रभुपाद के देखो आप ऐसा ऐसा कर रहे हो लेकिन प्रभुपाद

1321
01:34:13,760 --> 01:34:17,880
की स्थिति ऐसी है प्रभुपाद ने ऐसा किया इतने कार्य किए इस

1322
01:34:17,880 --> 01:34:22,120
तरीके से चीजें चल रही है उनका ये सहयोग है अभी के समाज में वो कभी सुनने

1323
01:34:22,120 --> 01:34:28,120
को नहीं मिला तो क्या मानसिकता है आप सच में आप एक ही चीज लेक चलते हो

1324
01:34:28,960 --> 01:34:32,960
मानता सुन लीजिए सुन लीजिए पहली बात तो ऐसा है कि मैंने अपने

1325
01:34:32,960 --> 01:34:36,960
वीडियो में कभी भी प्रभुपाद जी का अनादर नहीं किया दूसरी बात

1326
01:34:36,960 --> 01:34:41,360
कहीं पर भी कोई विरोधाभासी बात आई तो मैंने उसमें यही माना यह प्रभुपाद

1327
01:34:41,360 --> 01:34:45,680
जी नहीं लिख सकते जैसे तुलसीदास जी की निंदा प्रभुपाद

1328
01:34:45,680 --> 01:34:50,520
जी के नाम से वर्णित है ही वाज नॉट ए प्योर

1329
01:34:50,520 --> 01:34:54,760
वैष्णव एक जगह लिखा है मैं नहीं जानता कि मुझे

1330
01:34:54,760 --> 01:34:59,240
एक सिंगल पर्सन नहीं मिला जो तुलसीदास जी के कारण

1331
01:34:59,240 --> 01:35:03,240
स्पिरिचुअल हुआ हो यह शब्द लिखे हैं मैंने पढ़ाया

1332
01:35:03,240 --> 01:35:07,640
उन्होने बत जी की प्रशंसा भी की है मैं कर

1333
01:35:07,640 --> 01:35:11,680
नहीं प्रशंसा वो मैं जानता हूं की है मगर प्रशंसा तब कट जाती है जब निंदा

1334
01:35:11,680 --> 01:35:15,840
कर दी जब वो उन्ह प्योर वैष्णव नहीं मानते कबक वो राम के भक्त

1335
01:35:15,840 --> 01:35:20,560
थे उसके बाद एक चीज आती है कि

1336
01:35:20,560 --> 01:35:24,640
अखंडानंद सरस्वती जी महाराज उनके साथ में

1337
01:35:24,640 --> 01:35:29,360
बैठक फोटो है प्रभुपाद जी की और

1338
01:35:29,360 --> 01:35:33,480
वो लिखा है रासकल उनके लिए करपात्री जी के लिए रासकल लिखा है

1339
01:35:33,480 --> 01:35:37,800
गुरु वशिष्ठ जी के लिए रासकल लिखा है है ना

1340
01:35:37,800 --> 01:35:42,000
तो आप मानते प्रभुपाद जी ऐसा नहीं क सकते लेकिन कुछ लोग उसको गलत तरीके

1341
01:35:42,000 --> 01:35:48,000
सेे मुझे कहने दीजिए मुझे आपने मौका दिया तो बोल लेने दीजिए

1342
01:35:48,000 --> 01:35:52,000
तो यह देखिए अखंडानंद सरस्वती जी महाराज बैठे हैं प्रभुपाद जी के

1343
01:35:52,000 --> 01:35:56,160
बगल में और इन्हीं के लिए इकोन के द्वारा प्रचारित

1344
01:35:56,160 --> 01:36:00,160
जो सामग्री है उसमें लिखा हुआ है रास्कल

1345
01:36:00,160 --> 01:36:04,160
ठीक है और इसी प्रकार से करपात्री जी महाराज की

1346
01:36:04,160 --> 01:36:08,560
तो आपने भी जाना है कि प्रशंसा की थी उद्घाटन में उनको भी बुलाया था वृंदावन में

1347
01:36:08,560 --> 01:36:13,240
मगर फिर भी उनके लिए रासकल लिखा है इसके साथ ही

1348
01:36:13,240 --> 01:36:17,320
साथ वशिष्ठ जी गुरु वशिष्ठ जी उनके लिए रासकल लिखा है बहुत

1349
01:36:17,320 --> 01:36:21,360
बड़ी बात है गुरु वशिष्ठ जी के आगे तो हम आप कोई राम जी के

1350
01:36:21,360 --> 01:36:24,200
गुरु जो

1351
01:36:24,200 --> 01:36:28,280
इसमें यह देखिए अखंडानंद जी के लिए लिखा है अखंडानंद और कपाती जी महाराज के लिए लिखा

1352
01:36:28,280 --> 01:36:32,720
है रा यह प्रभुपाद बुक्स नाम की जो

1353
01:36:32,720 --> 01:36:35,680
वो है वेबसाइट उस पर आपको मिल जाएगा तो आप

1354
01:36:35,680 --> 01:36:39,720
देखिएगा कितना सत्य है तो जो भी चीजें उनके नाम से

1355
01:36:39,720 --> 01:36:44,040
आती है और मुझे विरोधाभासी लग रही होती है तो मैं यह कहता हूं कि य प्रभुपाद

1356
01:36:44,040 --> 01:36:48,040
जी की शिक्षा नहीं है भैया यह मुझे ऐसा लगता है कि बदला गया मैं कभी

1357
01:36:48,040 --> 01:36:52,200
भी उनकी अवमानना नहीं होने देता इवन ये जो पांच रूपों की भक्ति भरी

1358
01:36:52,200 --> 01:36:56,400
और भेद वाली बात भी है इसमें भी मैं यही मान जैसे मैंने आपको शुरू में ही बताया कि

1359
01:36:56,400 --> 01:37:00,560
मैं मेरे को ऐसा लगता है प्रभुपाद जी ने सबकी भक्ति बताई होगी ऐसा

1360
01:37:00,560 --> 01:37:05,120
लगता है मैं कभी भी ये नहीं बोलता प्रभुपाद जी ने गलत किया ये किया वो किया

1361
01:37:05,120 --> 01:37:09,120
अब प्रभुपाद जी की जो बातें हैं ग्लोरिफिकेशन की

1362
01:37:09,120 --> 01:37:13,240
वो अपने कई वीडियोस में मैंने की भी है मगर उस टाइटल से

1363
01:37:13,240 --> 01:37:17,640
नहीं की है उस वीडियो का टाइटल ही है कि प्रभुपाद जी ने क्या किया क्योंकि

1364
01:37:17,640 --> 01:37:22,000
इतना सारा सामग्री है कार्य करने को हर दिन करेक्ट

1365
01:37:22,000 --> 01:37:26,000
हर दिन एक नया विवाद खड़ा होता है तो उसम

1366
01:37:26,000 --> 01:37:30,480
बहुत सी चीज रहती अच्छा प्रभुपाद जी की क्या हमने अभी तक स्वामी विवेकानंद

1367
01:37:30,480 --> 01:37:34,560
जी की अच्छे कार्यों की प्रशंसा नहीं की कबीर जी के अच्छे कार्यों की प्रशंसा

1368
01:37:34,560 --> 01:37:38,720
नहीं की बहुत से ऐसे लोग हैं जिनके बारे में हमने बात की है अपने

1369
01:37:38,720 --> 01:37:43,040
चैनल पर मगर उनका जो अच्छा पार्ट है उसके बारे में बात नहीं नहीं बट उनसे संबंधित

1370
01:37:43,040 --> 01:37:47,800
लोग आपसे नहीं जुड़े ना य तो प्रभुपाद से संबंधित बहुत लोग आपसे जुड़े हैं

1371
01:37:47,800 --> 01:37:51,160
ऐसी परिस्थितियों में समाज से संबंधित बहुत लोग जुड़े हैं

1372
01:37:51,160 --> 01:37:55,200
आर समाज से संबंधित बहुत लोग जुड़े हैं हमने नहीं कर पाए दयानंद

1373
01:37:55,200 --> 01:37:59,240
जी के अच्छे पार्ट की प्रशंसा नहीं की इतना रखा कि हमने कभी

1374
01:37:59,240 --> 01:38:03,400
भी उनके प्रति अवमानना नहीं की अब मैं एक चीज पूछना चाहूंगा जैसे आपने

1375
01:38:03,400 --> 01:38:07,720
मुझसे प्रश्न किया कि हमने रासकल तो देख लिया प्रभुपाद

1376
01:38:07,720 --> 01:38:12,240
जी ने कहा है चलो नहीं कहा है वो उनके नाम से छपा है वो सब अलग है

1377
01:38:12,240 --> 01:38:16,440
मुझे आप बताइए जितने भी यूथ है उनमें से आज तक किसने

1378
01:38:16,440 --> 01:38:20,720
जो आज के वर्तमान शंकराचार्य हैं या एक पीढ़ी पहले वाले शंकराचार्य

1379
01:38:20,720 --> 01:38:26,720
हैं उनमें से किसी की तारीफ वाला वीडियो बनाए प्रशंसा

1380
01:38:27,400 --> 01:38:31,520
वाला आप जैसे अभी बोले खुद के बारे में कि मैं अभी इतना परिपक्व नहीं

1381
01:38:31,520 --> 01:38:36,840
हूं अभी इतना वो नहीं हूं तो उसी तरीके के लोग परप मैंने नहीं बोला ऐसा नहीं

1382
01:38:36,840 --> 01:38:40,880
बोला बो अभी आपने के कार्य बहुत अधिक

1383
01:38:40,880 --> 01:38:45,000
है नहीं इससे थोड़ा देर पहले आपने बोला कि मैं

1384
01:38:45,000 --> 01:38:49,160
इतना बड़ा वो नहीं हूं बहुत बड़ा कोई अथॉरिटी नहीं हूं ऐसे कुछ समय पहले

1385
01:38:49,160 --> 01:38:53,800
आपने थोड़ी देर पहले बोला था उसी संदर्भ मेंब आपने शैक्षिक योग

1386
01:38:53,800 --> 01:38:57,920
वीडियो बना रहे हैं आप उन्हे अथॉरिटी मत मानिए समझ नहीं नहीं जैसे अमोग

1387
01:38:57,920 --> 01:39:02,080
लीला है अमोग लीला है ये तो अथरा अटी

1388
01:39:02,080 --> 01:39:06,080
नहीं उन्हे उन्हे उन्हें आप वो नहीं मान सकते देखो कन के

1389
01:39:06,080 --> 01:39:10,080
वही मैं इसलिए मुझे कई बार मैंने देखा बहुत छोटे-छोटे लोग अपने

1390
01:39:10,080 --> 01:39:14,200
चैनल की अथॉरिटी तो मैं हूं इस चैनल की अथॉरिटी तो मैं हूं तभी तो आपने मुझसे प्रश्न

1391
01:39:14,200 --> 01:39:19,080
किया करेक्ट करेक्ट तभी तोके चैनल की अथ

1392
01:39:19,080 --> 01:39:23,720
आप हां तो वो सब चीज है लेकिन आप बोले कि आप हर चीज परफेक्ट

1393
01:39:23,720 --> 01:39:27,720
कर रहे हो हर चीज आपकी सही है आप इस चीज को मानते हैं ना कि हम उस स्तर के

1394
01:39:27,720 --> 01:39:32,320
वो नहीं है अथॉरिटी की हां कुछ गलतिया हमसे इधर उधर हो सकती है उस तरीके

1395
01:39:32,320 --> 01:39:36,600
की वो चीज हमें समझनी चाहिए य शंकराचार्य

1396
01:39:36,600 --> 01:39:40,680
जी की आज शंकराचार्य शंकर परंपरा की तरफ से बोलने वाले कुछ दो चार लोग

1397
01:39:40,680 --> 01:39:42,440
दिखने लगे हैं दिखने वाले तो

1398
01:39:42,440 --> 01:39:46,640
बहुत ही कम है शायद मैं हूं एक दो लोग और कुछ लोग और होंगे जो

1399
01:39:46,640 --> 01:39:50,960
ऐसे करके सीधे-सीधे पक्ष रखते हो मगर हम देख रहे हैं कि इकन

1400
01:39:50,960 --> 01:39:55,760
या प्रभुपाद जी की विचारधारा की तरफ से जी एक मिनट

1401
01:39:55,760 --> 01:39:59,800
उनकी तरफ से बोलने वाले छाए हुए हैं सोशल मीडिया प मगर कहीं

1402
01:39:59,800 --> 01:40:03,920
पर भी आपने वर्तमान के शंकराचा हो की अच्छे कामों की बात सुनी हो आज

1403
01:40:03,920 --> 01:40:08,560
भी आप देख लीजिए आज भी आपको नहीं पता होगा कि उनकी वैदिक मैथमेटिक्स

1404
01:40:08,560 --> 01:40:12,680
को पढ़ाया जा रहा है जो पूर्व के शंकराचार्य उनकी आपको नहीं पता

1405
01:40:12,680 --> 01:40:16,760
होगा आपको यह पता है कि राम मंदिर प्र प्रतिष्ठा से उन्होंने दूरी बनाई थी आपको

1406
01:40:16,760 --> 01:40:20,840
यह नहीं पता होगा कि उनकी उनका गवाही में नाम था आपको यह

1407
01:40:20,840 --> 01:40:24,840
नहीं पता होगा को ये नहीं पता होगा कि राम सेतु

1408
01:40:24,840 --> 01:40:29,200
की लड़ाई उन्होंने लड़ी थी पूरी शंकराचार्य जीने वो तो ऐसा है जनसामान्य लोगों

1409
01:40:29,200 --> 01:40:33,440
तक वो चीज पहुंचती है जो मीडिया के थ हाला

1410
01:40:33,440 --> 01:40:38,320
ये प्रश्न करने जा रहे हैं जब हम ये पता कर रहे इसकी बुराइयां क्या क्या

1411
01:40:38,320 --> 01:40:42,360
है प्रमोट अब आपने बताया तो पढ़ूंगा आप लोगों की जिम्मेदारी

1412
01:40:42,360 --> 01:40:46,480
मनती प्रचार करें जहां तक यूथ की बात है तो निश्चित रूप से अगर आप

1413
01:40:46,480 --> 01:40:50,480
सच में बुद्धिजीवी हो तो आपको उनको इग्नोर मारना चाहिए जो यूथ है जिस तरीके

1414
01:40:50,480 --> 01:40:54,920
से चीज कर रहे उम उतनी मैच्योरिटी नहीं होती और वो छाए हुए हैं

1415
01:40:54,920 --> 01:40:57,600
और कहीं ना कहीं ये सब चीजें करना या शंकराचार्य

1416
01:40:57,600 --> 01:41:02,000
के बारे में कुछ बोलना निश्चित रूप से गलत निश्चित रूप ग

1417
01:41:02,000 --> 01:41:06,040
आपका कोई सोशल मीडिया अकाउंट है नहीं हमारे यहां अलाउड नहीं है

1418
01:41:06,040 --> 01:41:10,200
10 15 साल तक हम यूज नहीं करते मैं बहुत क्लासेस में लेता

1419
01:41:10,200 --> 01:41:14,640
हूं मैं देखो मेडिकल क्लासेस में जाता हूं कल भी मेरा जो राजस्थान

1420
01:41:14,640 --> 01:41:18,680
के सेकंड नंबर की मेडिकल कॉलेज है उसमें मेरा सेशन है और हर साल

1421
01:41:18,680 --> 01:41:22,800
बुलाते हैं कोचिंग कोटा की वहां जाते हैं पर्सनल मेरे पास वीडियोस कुछ

1422
01:41:22,800 --> 01:41:26,880
पड़े हुए बट हमारे य ये अलाउड नहीं है हमारे य पहले स्वाध्याय अलाउड है

1423
01:41:26,880 --> 01:41:31,000
पहले अपना भक्ति कीजिए अच्छे से चीजों को समझिए

1424
01:41:31,000 --> 01:41:35,200
नेता नेता बनने लगते थोड़ी थोड़ी जानकारी प्राप्त करते

1425
01:41:35,200 --> 01:41:39,320
तो उस पर आपको ध्यान नहीं देना चाहिए वही मैं सोचता हूं आप भी उनको पकड़ के लेके आते

1426
01:41:39,320 --> 01:41:43,440
हो ना छोटे छोटे लोगों को तो तब भी मुझे भी कई बार लगता है कि आप तो अब

1427
01:41:43,440 --> 01:41:47,600
इतना आपने अध्ययन कर रखा है हमें कोई मिलता नहीं है तो फ होता है जो मिल जाए फ

1428
01:41:47,600 --> 01:41:51,720
उसी के साथ बात करे भैया क्या करें अब आप आज मिले

1429
01:41:51,720 --> 01:41:56,120
हो ठीक से बात कर रहे हैं और ऐसा नहीं है इंदौर

1430
01:41:56,120 --> 01:42:00,560
वाले जो प्रभु जी मिले थे वो भी उनके साथ हमारी कोई वो नहीं

1431
01:42:00,560 --> 01:42:04,640
नियमित एक व्यवहारिक चर्चा हुई जो लखनऊ के जो

1432
01:42:04,640 --> 01:42:09,040
वो है उनके साथ व्यवहारिक चर्चा हुई है कहीं कोई उठा पटक

1433
01:42:09,040 --> 01:42:12,640
आपको आमंत्रित भी करेंगे आइएगा कभी जयपुर आप

1434
01:42:12,640 --> 01:42:16,800
नंबर है आपके पास बहुत अच्छा अनुभव रहेगा आपका

1435
01:42:16,800 --> 01:42:22,800
बहुत अच्छा अरे आपके बंद क्यों हो जाता है बारबार

1436
01:42:36,080 --> 01:42:40,200
चले ग क्या नहीं नहीं चला नहीं क्या आ रहा हूं क्या अभी

1437
01:42:40,200 --> 01:42:44,480
मैं आ रहा हूं मैं कह रहा हूं आपके सामने आपके सामने

1438
01:42:44,480 --> 01:42:50,480
बंद हो जाता है मेरा कैमरा बाली हूं क्या

1439
01:42:50,640 --> 01:42:56,640
मैं तीन चार बार हो गया पता नहीं अभी तो ऑन भी नहीं हो रहा

1440
01:42:58,840 --> 01:43:04,840
है कोई पूछ रहा है आप कल क्या महात्मा गांधी कॉलेज में आ रहे हो

1441
01:43:07,520 --> 01:43:11,640
क्या कले जयपुर का है व सेकंड नंबर का कॉलेज नहीं है वो शद प्राइवेट

1442
01:43:11,640 --> 01:43:15,880
कॉलेज भी है एसपी मेडिकल कॉलेज है जिसमें नीट क्वालिफाइड स्टूडेंट्स

1443
01:43:15,880 --> 01:43:20,000
का अच्छे स्टूडेंट साथ हैं और यह बीकानेर में है और

1444
01:43:20,000 --> 01:43:25,320
मैं वीडियो पर आ नहीं [संगीत]

1445
01:43:25,320 --> 01:43:29,320
मेरे समझ में नहीं आ रहा कि क्यों ऐसा हो रहा है वीडियो

1446
01:43:29,320 --> 01:43:34,600
ऑन नहीं हो पा रहा

1447
01:43:34,600 --> 01:43:38,720
मेरा तो मैं बस यही बोल रहा था मैंने कहा आप उन पर

1448
01:43:38,720 --> 01:43:42,720
ध्यान ना देके और केवल प्रचार पर कभी

1449
01:43:42,720 --> 01:43:46,760
प्रभुपाद की वो चीज जिस तरीके से लोग बोलते हैं शंकराचार्य के बारे

1450
01:43:46,760 --> 01:43:50,920
में कुछ भी तो मैं उसे बिल्कुल इ मैच्योरिटी बोलूंगा और ना वो प्रभुपाद

1451
01:43:50,920 --> 01:43:54,960
ने सिखाया है और देखिए कभी बीइंग स्पिरिट सोल

1452
01:43:54,960 --> 01:43:59,000
वाला चैनल है वो कहता है कि भाई हम

1453
01:43:59,000 --> 01:44:03,320
जो है बहुत बड़े भक्त हैं मैं आपकी चीजों से पूर्ण सहमत

1454
01:44:03,320 --> 01:44:07,360
हूं जो भी बच्चा लोग अपरिपक्व अवस्था में या इच के

1455
01:44:07,360 --> 01:44:11,520
साथ इन सब चीजों पर जोश में भावास में आक जो भी चीजें कर रहे हैं वो

1456
01:44:11,520 --> 01:44:15,520
अच्छी नहीं है क्योंकि य और मीडिया पर सब लोग देखते हैं

1457
01:44:15,520 --> 01:44:19,680
कम मानसिकता वाले भी देखते हैं भू भी देखते हैं और वो अपने

1458
01:44:19,680 --> 01:44:23,960
तरीके से मानसिकता बना चेहरा बिगाड़ है तोता है गया है

1459
01:44:23,960 --> 01:44:28,080
इतनी गंदी भाषा का उपयोग करता है लगता ही नहीं है कहीं से कि

1460
01:44:28,080 --> 01:44:32,560
वो यह देखिए य यह एक ऑथराइज पर्सन का वीडियो है

1461
01:44:32,560 --> 01:44:38,560
इनका चैनल का नाम दिखा दीजिए

1462
01:44:40,040 --> 01:44:44,240
जरा स्वागत है ये

1463
01:44:44,240 --> 01:44:49,240
चैनल नेम थोड़ा सा दिखा दीजिए क्या नाम है चैनल

1464
01:44:49,240 --> 01:44:53,320
का चैनल नेम लिख दीजिए यहां पर ये थरा

1465
01:44:53,320 --> 01:44:57,440
पर्सन है मैं मतलब शायद ब्रह्मचारी है य और यह

1466
01:44:57,440 --> 01:45:01,560
कथा सुनाते हैं कि वहां पर एक आया मायावादी मायावादी से बात हुई

1467
01:45:01,560 --> 01:45:05,840
फिर वह मायावादी बिच्छू बना दिया उन्होंने इस तरह की कथा सुनाते हैं

1468
01:45:05,840 --> 01:45:10,280
और कथा सुनाते समय बिच्छू बनने वाला जो मायावादी है उसके रूप में

1469
01:45:10,280 --> 01:45:14,440
जो पूज्य परम पूज्य ब्रह्मलीन शंकराचार्य द्वारका

1470
01:45:14,440 --> 01:45:18,560
पीठ के उनका फोटो दिखाते हैं

1471
01:45:18,560 --> 01:45:22,640
आवाज आ रही है मेरी हा तो जो

1472
01:45:22,640 --> 01:45:26,680
भी ये बहुत सरल सी बात है आपको इनसे मुझे नहीं लगता आपको इनसे विचलित

1473
01:45:26,680 --> 01:45:31,440
और प्रभावित होना चाहि नहीं नहीं विचलित नहीं होते विचलित नहीं होते मगर

1474
01:45:31,440 --> 01:45:35,640
यह देखिए श्री चैतन्य चंद्र दास

1475
01:45:35,640 --> 01:45:39,880
तो यह बिल्कुल मतलब कोई भी समझदार व्यक्ति इस चीज सेम जताए

1476
01:45:39,880 --> 01:45:43,960
कि ये तरीका बिल्कुल गलत है बिल्कुल गलत है 100% ग सर आप बींग स्प सोल

1477
01:45:43,960 --> 01:45:48,120
वाला चैनल देख लेंगे तो अपना सरही पकड़ लेंगे तो नहीं तो

1478
01:45:48,120 --> 01:45:52,240
आप आप ही सोचिए और कोई भी ग्रेव पर्सन कोई भी

1479
01:45:52,240 --> 01:45:55,040
एक अ मैचोर व्यक्ति इन सब चीजों

1480
01:45:55,040 --> 01:45:59,240
को कोई भी हो प्रभुपाद का अच्छा सपोर्टर कभी इन चीजों को व नहीं करेगा भैया प्रचार

1481
01:45:59,240 --> 01:46:03,760
कीजिए अपना उन चीजों पर ध्यान दीजिए यह तौर तरीके बिल्कुल सही

1482
01:46:03,760 --> 01:46:07,800
नहीं है बिल्कुल सही नहीं है प्रभुपाद ने हर व्यक्ति हर संत के रेस्पेक्ट

1483
01:46:07,800 --> 01:46:12,120
में साफसाफ बोला है कि हमें हर एक

1484
01:46:12,120 --> 01:46:16,240
संत को चेतन प्रभु बोलते हैं हरे कृष्णा बोलने वाले व्यक्ति को भक्त समझना चाहिए

1485
01:46:16,240 --> 01:46:21,200
नहीं मुझे ऐसा लग रहा है उन्होंने हर वैष्णव के लिए बोला है और आप थोड़ा सा चेंज हो रहे हैं

1486
01:46:21,200 --> 01:46:25,280
वाह कहा आपने फिर आप रुक गए फिर संत बोला नहीं नहीं

1487
01:46:25,280 --> 01:46:29,360
नहीं ऐसा नहीं है प्रभुपाद ने और आप आप खुद ही

1488
01:46:29,360 --> 01:46:33,360
सोचिए इन सब चीजों को कि अगर इस तरीके के व्यक्तित्व और इस तरीके

1489
01:46:33,360 --> 01:46:37,800
के लोग इस तरीके की बातें करेंगे जैसा यह बोल रहे हैं

1490
01:46:37,800 --> 01:46:41,800
क्या ऐसा सच में मन से और बुद्धि से और ज्ञान के आधार पर आप सोचिए क्या

1491
01:46:41,800 --> 01:46:45,840
जैसे ये लोग बोल रहे हैं ऐसा उन्होंने

1492
01:46:45,840 --> 01:46:49,840
गाइड किया होगा कि नहीं बिल्कुल नहीं मैं बिल्कुल सहमत नहीं हूं और आप जो बोल रहे

1493
01:46:49,840 --> 01:46:54,040
हैं नहीं नहीं गाइड तो नहीं किया है खैर मगर ये तो उकता

1494
01:46:54,040 --> 01:46:58,800
मुझे ऐसा लगता है आयु भी कम होग जो फेस नहीं दिखा रहा उसकी बीइंग स्पल

1495
01:46:58,800 --> 01:47:02,880
और जो एक अभी आया था बालक एक अभी बालक बुद्धि आया था जो उसका नाम

1496
01:47:02,880 --> 01:47:06,960
था क्या था भव्य यह तो खैर है ही किशोर अवस्था है

1497
01:47:06,960 --> 01:47:10,160
तो किशोर अवस्था में वो होता है उच्छवास स्तर

1498
01:47:10,160 --> 01:47:14,440
जो है वो बढ़ा हुआ होता है बहुत जोश होता है बहुत ज्यादा बस

1499
01:47:14,440 --> 01:47:18,560
उसका आपने बोला तोता बोला और ये सब चीज ये ये

1500
01:47:18,560 --> 01:47:22,600
तरीका नहीं है बिल्कुल भी नहीं है नहीं बोले बहुत अपशब्द यूज

1501
01:47:22,600 --> 01:47:26,640
हो करें तो य पर इस तरीके से आना कई बार थोड़ा

1502
01:47:26,640 --> 01:47:30,880
मानसिकता होती है माया का प्र तो सदैव हमने कई बार अपने फॉलोअर्स

1503
01:47:30,880 --> 01:47:35,400
से अलग से वीडियो बना कर के कहा कि आप स्वामी दयानंद जी के लिए या फिर

1504
01:47:35,400 --> 01:47:39,440
प्रभुपाद जी के लिए अभद्र भाषा का उपयोग ना करें इस चैनल पर हालांकि अब

1505
01:47:39,440 --> 01:47:43,480
बहुत ज्यादा आते हैं पर शुरू में जब मैं प्रयास करता था कि ऐसा

1506
01:47:43,480 --> 01:47:47,880
कोई गंदा कमेंट आए किसी के लिए भी तो उसको मैं हटा देता था

1507
01:47:47,880 --> 01:47:51,960
तो हमने कभी भी किसी के लिए भी समाज सुधारक तो थे

1508
01:47:51,960 --> 01:47:56,160
ही सभी के सभी इसमें नए बच्चों में थोड़ी

1509
01:47:56,160 --> 01:48:00,920
मानसिकता होती है व्यूअरशिप की सब्सक्राइबर बढ़ाने कुछ इस तरीके का

1510
01:48:00,920 --> 01:48:05,120
वो भी होता है क्या कहते हैं अपने वर्चस्व को स्थापित करना हा

1511
01:48:05,120 --> 01:48:09,200
वो भी होता है वो हम कभी नहीं कर पाएंगे वो भगवान के बल से होता है प्रभुपाद जी

1512
01:48:09,200 --> 01:48:13,760
प्रचार के लिए गए और कर पाए इतने बड़े स्तर पर वह कृष्ण की शक्ति

1513
01:48:13,760 --> 01:48:17,920
के कारण ऐसा व्यक्ति कर पाता है नहीं तो नहीं लेकिन आपके कुछ वीडियो है आपका उसके

1514
01:48:17,920 --> 01:48:22,000
बारे में क्या कहना है जैसे आपने अपने वीडियोस पर कुछ ऐसे लोगों

1515
01:48:22,000 --> 01:48:25,200
को भी बुलाया है जो एक्स स्कन

1516
01:48:25,200 --> 01:48:29,240
करके जो वीडियो है वो तो मुझे थोड़ा वो नहीं

1517
01:48:29,240 --> 01:48:33,400
लगे कि आप ऐसे लोग और आप उनके साथ खूब कुछ बोल

1518
01:48:33,400 --> 01:48:37,600
रहे हैं कुछ वो मजाक बना रहे तो आप भी उनके साथ हस रहे हैं और इस तरीके का

1519
01:48:37,600 --> 01:48:41,680
आज के द्वारा जो फैलाई जा रही शिक्षाएं हैं जो

1520
01:48:41,680 --> 01:48:45,880
लॉजिकल नहीं है या जो तार्किक प्रामाणिक सिद्ध नहीं हो रही है उन

1521
01:48:45,880 --> 01:48:51,720
पर बात हो रही है बात वहां कहीं नहीं हो रही कि प्रभुपाद जी के लिए बात हो रही हो

1522
01:48:51,720 --> 01:48:56,040
या बचपन के साथ एक मजाक बनाए जा रहे हैं कल्चर का सिस्टम

1523
01:48:56,040 --> 01:49:01,440
का ऐसा होता है व ऐसे बोल देते हैं फिर ऐसा बोल देते हैं फिर ऐसा है पहले बुलाते

1524
01:49:01,440 --> 01:49:05,520
हैं आता जो होता है आता ताई जो होता

1525
01:49:05,520 --> 01:49:09,640
है उसका विनोद करने की आज्ञा तो प्रभु श्री राम ने भी दी

1526
01:49:09,640 --> 01:49:13,760
है सूपनखा जब उनके पास पहुंची थी तो प्रभु

1527
01:49:13,760 --> 01:49:18,400
श्री राम ने विनोद किया था उनका सूपनखा

1528
01:49:18,400 --> 01:49:22,840
वो समझ गए थे कि अपने कामा वेश में आकर के जो है बिल्कुल

1529
01:49:22,840 --> 01:49:27,120
आतुर हुई जा रही है काम वासना से वो है तो उन्होंने

1530
01:49:27,120 --> 01:49:31,680
क्या किया कि विनोद किया था तो ऐसा नहीं है कि

1531
01:49:31,680 --> 01:49:35,840
हम लोग जो कोई व्यक्ति गलत कर रहा है या कोई व्यक्ति

1532
01:49:35,840 --> 01:49:39,960
अगर गलत प्रचार कर रहा है तो हम उसके प्रति कोई

1533
01:49:39,960 --> 01:49:40,460
ना तो

1534
01:49:40,280 --> 01:49:44,280
दंडात्मक कारवाही कर रहे हैं ना कुछ कर रहे हैं मगर उसको हम इस तरीके से अपना

1535
01:49:44,280 --> 01:49:48,360
विरोध तो प्रस्तुत कर ही सकते

1536
01:49:48,360 --> 01:49:52,880
हैं ठीक है मुझे तो थोड़ा वो लगा आपसे

1537
01:49:52,880 --> 01:49:56,960
कह रहे तो मैं इस पर थोड़ा ध्यान दूंगा कि अब आप कह रहे हैं तो इस

1538
01:49:56,960 --> 01:50:01,000
पर ध्यान दिया जाएगा वो विरोध वाला भाव तो ठीक है मस्ती मजाक वाले सेंस

1539
01:50:01,000 --> 01:50:05,360
में चीजें हो गई बट वहां एक्सप्रेशन और चीजें ऐसी लगे जैसे आप उनकी मानसिकता

1540
01:50:05,360 --> 01:50:09,480
के साथ बह रहे हो वो तो मजे लेने वाले सेंस में आए हैं अब

1541
01:50:09,480 --> 01:50:13,720
ये ये एकय ये एक ये भी नहीं नहीं नहीं नहीं मैंने उनको जो लोग आते

1542
01:50:13,720 --> 01:50:18,120
हैं इस तरह से वो सबसे

1543
01:50:18,120 --> 01:50:22,240
पहले पीछे आपके पीछे कुछ चल रहा है हां

1544
01:50:22,240 --> 01:50:26,240
ये पास मेंही मस्जिद है प्रचार के लिए

1545
01:50:26,240 --> 01:50:30,520
जब हम आते हैं तो य सबसे पहले जब वो मुझसे कांटेक्ट

1546
01:50:30,520 --> 01:50:35,000
करते हैं इस तरह के मैं आपके चैनल पर आना चाहता हूं अपना एक्सपीरियंस बताना चाहता हूं

1547
01:50:35,000 --> 01:50:39,360
तो मेरा उनको पहला वो होता है कि भाई वहां आकर के कोई भी अभद्र टिप्पणी

1548
01:50:39,360 --> 01:50:43,680
अमर्यादित टिप्पणी ना तो किसी संत के लिए

1549
01:50:43,680 --> 01:50:47,760
मतलब उनके जो फाउंडर है अगर आप स्कन के लिए आ रहे तोन

1550
01:50:47,760 --> 01:50:52,000
के जो फाउंडर आचार्य जो कहे जाते हैं श्रील प्रभुपाद उनके लिए किसी

1551
01:50:52,000 --> 01:50:55,560
भी व्यक्ति के के लिए आप अमर्यादित टिप्पणी तो नहीं

1552
01:50:55,560 --> 01:51:00,000
करिएगा यह हमारी पहली कंडीशन होती है किसी के भी साथ चर्चा करने की

1553
01:51:00,000 --> 01:51:04,080
यह तो दिखाया मैंने और इसीलिए मैं आपसे बात करने आया देखो आपके उसमें

1554
01:51:04,080 --> 01:51:08,120
कोई संशय नहीं है आप एक अभ्यास किए हो कहीं एक स्तर पर हो इसम कोई संशय

1555
01:51:08,120 --> 01:51:12,320
नहीं एक पर डाउट नहीं है बट कुछ कुछ जगह मुझे थोड़ा ऐसा लगा लजा

1556
01:51:12,320 --> 01:51:16,400
आपका आपके एक्सप्रेशन तो बस वो इसलिए ना कि नहीं पहली

1557
01:51:16,400 --> 01:51:20,520
बात तो मैं इस पर ध्यान दूंगा अगर आपको ऐसा लग रहा है कि मैं कोशिश करूं आपको संतुष्ट करने

1558
01:51:20,520 --> 01:51:24,840
की मगर इसलिए भी है कि कहीं ना कहीं जो बातें

1559
01:51:24,840 --> 01:51:28,960
मैं बोल रहा हूं वो आपकी चीजों के विपरीत तो है ही तो

1560
01:51:28,960 --> 01:51:33,360
जब हम किसी एक पर्सपेक्टिव से चीजों को देखने लगते हैं और जरा भी वो फ्लकचुएट

1561
01:51:33,360 --> 01:51:38,240
होती है चीज तोव फिर तुरंत हमारी रर में आ जाती है

1562
01:51:38,240 --> 01:51:42,320
अब मैं कहूंगा कि आप जो है या

1563
01:51:42,320 --> 01:51:46,320
तो बंद कर दीजिए या थोड़ी देर विराम के बाद आ जाइए क्योंकि इस वीडियो में

1564
01:51:46,320 --> 01:51:52,320
यह जो सुनाई दे रहा है

1565
01:52:01,400 --> 01:52:05,840
उस चक करने वो थोड़ा आवाज आ रहा है

1566
01:52:05,840 --> 01:52:10,160
तो यह बाकी तो बहुत सही है मुझे तो बहुत अच्छा भगवान

1567
01:52:10,160 --> 01:52:14,400
से प्रार्थना करेंगे आप ऐसे करते रहो बट छोटी छोटी चीजों को लेकर आप जैसे गंभीर

1568
01:52:14,400 --> 01:52:18,720
व्यक्ति को बुद्धिजीवी व्यक्ति को प्रभावित नहीं होना चाहिए और हरे कृष्णा

1569
01:52:18,720 --> 01:52:22,800
कम्युनिटी में स्कोन कम्युनिटी में बहुत युवा है और वो इतना पर

1570
01:52:22,800 --> 01:52:26,960
नहीं होता और य चैनल के लिए कोई रिस्ट्रिक्शन नहीं होते या कोई ऐसा नहीं है कि तुम

1571
01:52:26,960 --> 01:52:31,040
इतने बड़े हो जाओगे तब तुम उसका यूज करोगे तो इस तरीके से बहुत लोग

1572
01:52:31,040 --> 01:52:35,120
आ रहे हैं बट ये निश्चित रूप से कोई भी मैचोर व्यक्ति चाहे कहीं से भी हो हरे

1573
01:52:35,120 --> 01:52:39,640
कृष्णा स्कोन से इस तरीके की चीजों को वो प्रमाणित नहीं करेगा और अच्छा नहीं बोलेगा

1574
01:52:39,640 --> 01:52:43,680
जो आपने बताया कि कोई तोता बोलता है और ये सब चीजें बिल्कुल उचित नहीं है और ये आपको

1575
01:52:43,680 --> 01:52:47,680
भी समझना चाहिए कोई फेक कोई फेक बुक है उसके आधार

1576
01:52:47,680 --> 01:52:51,680
पर सिद्ध करते आदि शंकराचार्य जो थे भगवत पाल आदि शंकराचार्य शंकर

1577
01:52:51,680 --> 01:52:55,680
भगवान के अवतार वो उनके लिए बोलता है अपने चैनल

1578
01:52:55,680 --> 01:52:59,840
पर वो तोता बन के वहां गए थे हालाकि उसको एक दो बार हमने सुना

1579
01:52:59,840 --> 01:53:03,920
दिया अपने चैनल से मगर अब वो बारबार करता ही रहता तो आप जो कह रहे

1580
01:53:03,920 --> 01:53:08,680
वही हम कर रहे हैं हम ध्यान नहीं दे रहे उसके ऊपर

1581
01:53:08,680 --> 01:53:12,680
अब शास्त्र चीजों के मत अलग-अलग हो सकते हैं आचार्य बोलते हैं कई बार हम उनकी यथा

1582
01:53:12,680 --> 01:53:16,960
स्थिति को नहीं समझ पाते हैं हो सकता है अच्छे साधक बनेंगे आगे भविष्य में तो समझ पाएंगे

1583
01:53:16,960 --> 01:53:21,040
बट मुझे नहीं लगता कि इस तरीके का विरोधाभास और ये सब चीज होनी चाहिए और आप तो

1584
01:53:21,040 --> 01:53:25,240
इतना अच्छा अभी आपका बहुत अच्छे से कर भी रहे हो इतने कम समय में आपके एक

1585
01:53:25,240 --> 01:53:29,360
वो भी बढ़िया चीज है तो आप तो अच्छे से प्रचार करके आपने कुछ जबका भी कुछ किया

1586
01:53:29,360 --> 01:53:33,520
था अभी कुछ दिनों पहले तो मुझे तो बड़ा अच्छा लगा देख के कि आप ये सब चीजें कर रहे हो

1587
01:53:33,520 --> 01:53:37,560
बट केवल और केवल वही चीज आ जाती है तो थोड़ा सा वो लगता है मैंने कहा ये कभी

1588
01:53:37,560 --> 01:53:41,560
कभी वही लोगों को बुला बुला के और बच्चों को और उस

1589
01:53:41,560 --> 01:53:45,560
तरीके से तो ऐसा हो मैं ध्यान दूंगा इस बात प कि अब मानना किसी

1590
01:53:45,560 --> 01:53:49,920
की ना हो इस बारे में मैं ध्यान दूंगा

1591
01:53:49,920 --> 01:53:54,720
बाकी हमारा क हा

1592
01:53:54,720 --> 01:53:58,720
वयो भी ऑन नहीं हो पा रहा है बाकी बहुत अच्छा लगा लिए

1593
01:53:58,720 --> 01:54:03,160
जी बहुत अच्छा लगा आपसे बात करके और आपको

1594
01:54:03,160 --> 01:54:07,560
हम निमंत्रित करते हैं जब भी आप जयपुर आए आइएगा बिल्कुल एक दो दिन रुकिए

1595
01:54:07,560 --> 01:54:11,720
आराम से बहुत बढ़िया बहुत एक अच्छा अनुभव रहेगा अच्छे से आइए प्रसाद

1596
01:54:11,720 --> 01:54:15,760
लीजिए रुकिए उधर इवन परिवार सहित भी आ सकते हैं य पूरा

1597
01:54:15,760 --> 01:54:19,760
रुकने का एक अच्छा वो रहता है और जयपुर आप कितनी बार आए हैं पहले

1598
01:54:19,760 --> 01:54:24,960
कभी भविष्य में पास्ट में मैं क आया जयपुर बहुत

1599
01:54:24,960 --> 01:54:29,160
बार ठीक है ठीक है आप भी थोड़ा थके थके लग रहे हैं और खाना वाना

1600
01:54:29,160 --> 01:54:31,960
भी खाना होगा मिलेंगे कभी आगे कुछ ऐसा

1601
01:54:31,960 --> 01:54:36,480
कुछ आया प्रश्न और शंका तो बहुत अच्छा लगा बहुत बहुत धन्यवाद बहुत बहुत धन्यवाद

1602
01:54:36,480 --> 01:54:42,480
जय श्री राम जय श्री

1603
01:54:50,120 --> 01:54:54,200
राम हां इस प्रकार की च हो सकती है

1604
01:54:54,200 --> 01:54:58,680
हमारे बीच में और आर समाज के अनुगामी हों के बीच में

1605
01:54:58,680 --> 01:55:02,680
आर्य समाज के बीच में बोलना तो कठिन है जिससे भी कर लेंगे

1606
01:55:02,680 --> 01:55:05,560
व आ समाज का रहेगा

1607
01:55:05,560 --> 01:55:09,800
नहीं शिवा भैया क्या प्रकृति त से नहीं भगवान

1608
01:55:09,800 --> 01:55:14,640
का जो प्रकृति क्या है प्रकृति माया की चादर है

1609
01:55:14,640 --> 01:55:18,680
उसको चीर के भगवान दिखते हैं ना तो वो दिव्य है

1610
01:55:18,680 --> 01:55:24,680
उनका शरीर दिव्य है

1611
01:55:27,520 --> 01:55:31,600
आत्मा जब मनुष्य शरीर धारण करता चुनाव शरीर का हुआ

1612
01:55:31,600 --> 01:55:34,800
या आत्मा

1613
01:55:34,800 --> 01:55:39,560
का लिंक दे दीजिए वह एक राम कलेश क्या नाम था

1614
01:55:39,560 --> 01:55:45,040
राम कलेश नाम है या कुछ और नाम

1615
01:55:45,040 --> 01:55:51,040
है नाम से ही क्लेश निकल रहा है

1616
01:55:53,360 --> 01:55:59,360
चलिए ठीक है समाप्त करते हैं फिर किसी दिन रते

1617
01:56:08,320 --> 01:56:14,320
हैं दे रहे हैं क्या लिंक

1618
01:56:22,680 --> 01:56:26,840
हां यह आपने कहा ना यह आर्य समाज ही तो नहीं मैं कहूंगा

1619
01:56:26,840 --> 01:56:30,920
पूरा आर्य समाज को तो दोष देना ठीक नहीं है मगर एक तरफ

1620
01:56:30,920 --> 01:56:35,400
नोटिस बिजवा हैं कि इससे चर्चा मत करना और जब चर्चा करने आते हैं

1621
01:56:35,400 --> 01:56:40,680
कोई आता है तो वह इस तरह से आता है चोरों की

1622
01:56:40,680 --> 01:56:44,760
तरह जैसे कुछ हो गया हो बचपन में उनके साथ लिंक दे दिया गया

1623
01:56:44,760 --> 01:56:50,760
किसी को आना है तो आइए समापन की हो रहा है चर्चा हमारी

1624
01:57:10,800 --> 01:57:16,800
श्री राम ही शिव

1625
01:57:16,840 --> 01:57:21,400
है ऐसा नहीं है अगर ऐसा है तो आप आए

1626
01:57:21,400 --> 01:57:25,440
और अपनी बात को यह भैया

1627
01:57:25,440 --> 01:57:29,600
वोल्ड रिमोट आए हैं हैरी पॉटर

1628
01:57:29,600 --> 01:57:34,160
के मुख्य विलन नाम लिखा है कबीर साहेब

1629
01:57:34,160 --> 01:57:38,160
भाई साहब अपना असली चेहरा दिखा दे वोल्डर मट के चेहरे से डर लगता है हम

1630
01:57:38,160 --> 01:57:42,400
आज भी हैरी पॉटर वाली जज के हैं

1631
01:57:42,400 --> 01:57:47,000
चेहरा दिखा दे लोगों को यह देख लीजिए बोल्डर

1632
01:57:47,000 --> 01:57:53,000
मोड भाई साहब अपना चेहरा दिखाए

1633
01:57:56,680 --> 01:58:00,160
सही

1634
01:58:00,160 --> 01:58:04,200
होगा चेहरा नहीं दिखाएंगे तो हम आपसे बात

1635
01:58:04,200 --> 01:58:08,400
नहीं कर पाएंगे हटा दिया गोल्डर मोड को हैरी

1636
01:58:08,400 --> 01:58:14,400
पॉटर ने हरा

1637
01:58:19,840 --> 01:58:24,440
दिया हां सही कह रहे हैं आप

1638
01:58:24,440 --> 01:58:30,440
आप तो फिर ठीक है आने के लिए सभी का आभार

1639
01:58:31,520 --> 01:58:36,160
और ऐसी चर्चाएं होंगी तो वास्तविकता बाहर आएगी

1640
01:58:36,160 --> 01:58:41,120
जो मिथ्या फैली हुई है मिथ्या प्रचार जो हो रहा है

1641
01:58:41,120 --> 01:58:45,920
उस पर जो है प्रकाश डाला जाए सभी को जय श्री राम आने के लिए आभार

1642
01:58:45,920 --> 01:58:51,040
जय श्री

1643
01:58:51,040 --> 01:58:55,040
राम m
