1
00:00:02,960 --> 00:00:07,760
तो सभी को जय श्री राम आज एक विशेष

2
00:00:07,760 --> 00:00:12,760
विषय पर हम लोग चर्चा करने के लिए उपस्थित हुए

3
00:00:12,760 --> 00:00:16,920
हैं अभी क्या हुआ था कुछ मेरे ख्याल से 15 20

4
00:00:16,920 --> 00:00:21,040
दिन पहले की बात हुई रही होगी एक कोई

5
00:00:21,040 --> 00:00:25,680
अग्नि व्रत जी है वह किसी चैनल पर गए और वहां पर

6
00:00:25,680 --> 00:00:30,200
पुराण आदि विषयों पर उन्होंने अत्यंत आप

7
00:00:30,200 --> 00:00:36,200
जनक टिप्पणियां दी जैसे कि मैं तो पढ़ते पढ़ते रुक

8
00:00:36,400 --> 00:00:40,600
गया मैं जो है पुराण को पढ़ नहीं पाता हूं मैं उसको नहीं देख पाता

9
00:00:40,600 --> 00:00:45,080
हूं मैं उसको सहन नहीं कर पाता हूं तो यह सब उन्होंने टिप्पणियां

10
00:00:45,080 --> 00:00:49,280
ी पुराण को लेकर के मतलब अवमानना वहां व्यक्त की

11
00:00:49,280 --> 00:00:53,320
अच्छा वहां पर उनको टोका भी सामने वाले ने जो उनका इंटरव्यू ले रहा था

12
00:00:53,320 --> 00:00:57,360
उसने टोका भी कि इन बातों को लेकर के आपका विरोध हो सकता है उन्होने नहीं

13
00:00:57,360 --> 00:01:00,680
नहीं मैं बोलूंगा मैं तो बोलूंगा

14
00:01:00,680 --> 00:01:05,000
तो जब इस इसमें उन्होंने अत्यंत अच्छा

15
00:01:05,000 --> 00:01:09,840
हम काफी दिनों से देखते ही आ रहे हैं कि भैया इनके कुछ लोग हैं

16
00:01:09,840 --> 00:01:14,200
जो अपने हर प्रवचन में प्रवचन

17
00:01:14,200 --> 00:01:18,760
करने कहीं भी जाते हैं तो सबसे पहले वह उनके

18
00:01:18,760 --> 00:01:23,640
सभी जितने भी वक्तव्य आएंगे तो उसमें एक

19
00:01:23,640 --> 00:01:27,800
बात आपको अवश्य सुनाई देगी भगवान श्री कृष्ण

20
00:01:27,800 --> 00:01:32,600
राधा मा भागवत ब्रह्म वैवर्त पुराण

21
00:01:32,600 --> 00:01:36,880
इनके बारे में उनकी समीक्षा और समीक्षा के परिणाम स्वरूप

22
00:01:36,880 --> 00:01:41,120
निंदा अब मानना अविश्वास

23
00:01:41,120 --> 00:01:45,200
तो जब हमने अब इतने दिन से लगातार देख

24
00:01:45,200 --> 00:01:49,520
ही रहे हैं और फिर एक व्यक्ति जाता है और वह एक चैनल

25
00:01:49,520 --> 00:01:54,360
पर बैठ कर के इंटरव्यू होता है उसको लाखों लोग देखते हैं लाखों लोग

26
00:01:54,360 --> 00:01:58,480
तो ऐसे में जिसकी आस्था होगी

27
00:01:58,480 --> 00:02:02,520
जब वो ऐसे शब्द सुने ब्रह्मवर्त पुराण के लिए

28
00:02:02,520 --> 00:02:07,560
भगवान श्री कृष्ण चंद्र के लिए राधा मां के लिए जब वो

29
00:02:07,560 --> 00:02:11,680
ऐसे सुनेगा तो वह प्रतिक्रिया

30
00:02:11,680 --> 00:02:15,840
देगा या नहीं देगा आज मैं यह प्रश्न लेकर आया

31
00:02:15,840 --> 00:02:20,120
हूं उन हिंदुओं से जो राधा मां की भक्ति करते हैं

32
00:02:20,120 --> 00:02:24,440
कृष्ण भगवान की भक्ति करते हैं क्या आप लोगों को बिल्कुल भी कोई

33
00:02:24,440 --> 00:02:30,040
टस से मस नहीं होता है कोई कुछ भी करता रहे कोई कुछ भी कहता रहे

34
00:02:30,040 --> 00:02:33,920
क्या वास्तविकता में आप लोग इनकी भक्ति करते हैं या वह कुछ

35
00:02:33,920 --> 00:02:37,960
और है क्योंकि मुझे लगता है यदि आपकी माता जी को

36
00:02:37,960 --> 00:02:42,000
स्वयं कोई कुछ कह दे इस तरह से तो आप तो पता नहीं क्या कर दो

37
00:02:42,000 --> 00:02:46,040
आपके पिता को अगर कोई कुछ कह दे इस तरह से तो आप तो पता नहीं क्या कर दो

38
00:02:46,040 --> 00:02:50,080
मगर जब आप माता-पिता जो परमात्मा के रूप में

39
00:02:50,080 --> 00:02:54,080
इनको आप पूज रहे हैं भक्ति कर रहे हैं तो इससे आपको कोई फर्क

40
00:02:54,080 --> 00:02:58,200
नहीं है या फिर या तो आपकी वो भक्ति एक केवल एक क्या है क्या

41
00:02:58,200 --> 00:03:02,240
कहे उसके बारे में तो खैर मैं अपने मैं

42
00:03:02,240 --> 00:03:06,400
मेरा हृदय इन बातों को सहन नहीं कर पाता है तो मैंने

43
00:03:06,400 --> 00:03:10,560
जब इस पर एक प्रतिक्रिया मेंक वीडियो बनाया

44
00:03:10,560 --> 00:03:14,720
मर्यादा में रहते हुए मैंने बातें की यह भी बात वहां

45
00:03:14,720 --> 00:03:18,840
पर उस वीडियो में मैंने मर्यादा में रहते हुए बातें की

46
00:03:18,840 --> 00:03:23,800
और वहां पर मैंने यह सब

47
00:03:23,800 --> 00:03:28,160
हालांकि मैंने अपने ही लोगों को आवान किया कि भाई आप लोग कर क्या रहे हो

48
00:03:28,160 --> 00:03:32,360
कि प्रदीप मिश्रा जी अगर राधा जी के लिए कुछ बोल देते हैं

49
00:03:32,360 --> 00:03:36,440
तो आप उनसे नाक रगड़ वाते हो अब यह लोग इतना अभद्र अभद्र बोल रहे

50
00:03:36,440 --> 00:03:41,560
हैं आज से नहीं चलो आज तो यह हुआ जिसकी वजह से हमने वीडियो

51
00:03:41,560 --> 00:03:45,760
बनाया मगर आप लोग सहन कैसे कर रहे हो क्या है वह

52
00:03:45,760 --> 00:03:49,280
भक्ति भक्ति है हिंदू हिंदू है कि सब सब खोखले हैं

53
00:03:49,280 --> 00:03:53,960
तो हमने जब यह वीडियो बनाया तो इसके पुनः इसके प्रति उत्तर

54
00:03:53,960 --> 00:03:58,000
में कुछ आर्य समाज के युवाओं ने

55
00:03:58,000 --> 00:04:02,160
और मैं कहूंगा थोड़े कुछ भटके हुए भी है कुछ सुलझे हुए भी है

56
00:04:02,160 --> 00:04:06,280
मगर कुछ भटके हुए युवाओं ने भी वीडियो बनाया भटके हुए

57
00:04:06,280 --> 00:04:10,880
किनको कह रहा हूं जिन्होंने वीडियो बनाते समय हमारा

58
00:04:10,880 --> 00:04:14,920
उसको क्या कहते रिट करते समय मर्यादा का कोई ध्यान नहीं

59
00:04:14,920 --> 00:04:19,480
रखा कि यह कर दूंगा वह कर दूंगा खाल उतार दूंगा बहुत सारी

60
00:04:19,480 --> 00:04:23,760
चीज बोली गई और

61
00:04:23,760 --> 00:04:28,080
वीडियो बनाते समय उसमें बीच-बीच में

62
00:04:28,080 --> 00:04:32,600
मीम्स लगाए गए मिर्जापुर इत्यादि जो चलचित्र

63
00:04:32,600 --> 00:04:37,280
आए उनके निकालने कालक तो

64
00:04:37,280 --> 00:04:41,320
अच्छा हमने क्या है आज तक केवल क्या किया है कि जहां पर भी

65
00:04:41,320 --> 00:04:45,720
जो सैद्धांतिक बात हो रही है केवल उस पर प्रश्न उठाया निर्णायक

66
00:04:45,720 --> 00:04:49,920
भी नहीं बने निर्णायक भी नहीं बने केवल

67
00:04:49,920 --> 00:04:55,480
प्रश्न उठाया कि इसका उत्तर क्या है

68
00:04:55,480 --> 00:05:00,880
और आपने क्या किया कि अगर हमने

69
00:05:00,880 --> 00:05:05,000
प्रश्न उठाया तो उस प्रश्न के उत्तर में ही आपने सारी

70
00:05:05,000 --> 00:05:09,680
जो मान मर्यादा है सब एक तरफ और आपने

71
00:05:09,680 --> 00:05:14,800
सब कुछ कर दिया तो इसी बारे में मैं लाइव आया

72
00:05:14,800 --> 00:05:18,840
हूं अब इसमें जब इन्होंने प्रतिक्रिया मेंक वीडियो

73
00:05:18,840 --> 00:05:23,000
बनाया तो इसमें इन्होंने यह भी बात कही है कि हम लोग लड़ना नहीं चाहते

74
00:05:23,000 --> 00:05:27,600
हैं पर तुमने मजबूर किया है हम यह भी एक भाव प्रदर्शित किया गया

75
00:05:27,600 --> 00:05:31,880
इनके चैनल के द्वारा कि हम आपस में नहीं लड़ाई

76
00:05:31,880 --> 00:05:36,480
हम आपस में लड़ाई नहीं दिखाना चाहते हैं बाहर वालों को अरे भाई

77
00:05:36,480 --> 00:05:40,720
अगर आपस में लड़ाई नहीं दिखाना चाहते हैं तो सबसे पहले आपको उनके लिए प्रतिक्रिया

78
00:05:40,720 --> 00:05:44,720
करनी चाहिए थी जो ब्रह्म वैवर्त पुराण को या राधा मां को या

79
00:05:44,720 --> 00:05:48,880
भगवान श्री कृष्ण चंद्र को अभद्र टिप्पणियां कर रहे हैं उनको रोकते

80
00:05:48,880 --> 00:05:53,280
कि ठीक है तुम्हारा सिद्धांत उन्हें नहीं मानने का है ठीक है मत मानो मगर उनकी समीक्षा

81
00:05:53,280 --> 00:05:57,360
मत करो पब्लिकली जाकर के समीक्षा करोगे तो हमारे जो हिंदू भाई

82
00:05:57,360 --> 00:06:01,600
उ उन सिद्धांतों को मानते हैं उनको स्वीकार करते हैं उनको ठेस पहुंचेगी

83
00:06:01,600 --> 00:06:06,120
और जब ठेस पहुंचेगी तो क्योंकि शुरुआत आप कर रहे हो तो प्रति उत्तर में वो कुछ करेंगे

84
00:06:06,120 --> 00:06:10,240
तो यह मामला बाहरी लोगों को दिखाई देगा मगर क्या

85
00:06:10,240 --> 00:06:10,740
आप

86
00:06:10,480 --> 00:06:14,840
लोगों ने ऐसी कोई चर्चा ऐसी

87
00:06:14,840 --> 00:06:18,840
कोई प्रतिक्रिया मेंक वीडियो उनके लिए बनाया जो यह अभद्र टिप्पणियां करके

88
00:06:18,840 --> 00:06:22,960
आए हैं चैनलों पर क्या सदानंद जी के लिए बनाया अग्निवृत जी

89
00:06:22,960 --> 00:06:27,800
के लिए बनाया या वह जो मातृ शक्ति है जो राधा की

90
00:06:27,800 --> 00:06:31,800
तुलना प अभिनेत्री से कर रही है क्या उनके

91
00:06:31,800 --> 00:06:36,200
लिए आप लोगों ने कोई चलचित्र बनाया और अगर नहीं बनाया

92
00:06:36,200 --> 00:06:40,320
तो फिर आपका यह कहना अब अब यहां पर क्या होगा जब

93
00:06:40,320 --> 00:06:44,520
हम यह बात उठाते हैं कि गलत को गलत कहना गलत नहीं होता अरे

94
00:06:44,520 --> 00:06:48,840
भैया तो फिर जब आपको यही बात रखनी है कि हम तो गलत को गलत कहेंगे तो हमारे

95
00:06:48,840 --> 00:06:52,880
हिसाब से हम भी गलत को गलत ही कह रहे हैं तो जब हम गलत को गलत कह रहे हैं तो फिर

96
00:06:52,880 --> 00:06:56,960
यह बारा जो सिद्धांत है क्यों ला रहे हो कि हमें आपस की लड़ाई को सामने नहीं

97
00:06:56,960 --> 00:07:01,280
दिखाना है तो यह जो आपका कहना है

98
00:07:01,280 --> 00:07:05,640
कथनी और करनी में अंतर आ रहा है आप एक तरफ कह रहे हैं कि हमें आपसी मतभेद को

99
00:07:05,640 --> 00:07:10,400
सामने वाले के समक्ष प्रस्तुत नहीं करना है आपकी ओर से

100
00:07:10,400 --> 00:07:14,440
खंड आत्मक कुछ किया जा रहा है खंड आत्मक भी चलो मर्यादा के अंदर रहते

101
00:07:14,440 --> 00:07:18,960
हुए होता है तो भी कोई दिक्कत नहीं है मगर वहां पर जो व्यक्तिगत

102
00:07:18,960 --> 00:07:23,040
टिप्पणियां करना कि ऐसा ईश्वर ऐसा

103
00:07:23,040 --> 00:07:25,520
ऐसा है राधा आप सैद्धांतिक लड़ाई लड़ है ना

104
00:07:25,520 --> 00:07:29,760
अवतारवाद पर बात करिए आप निराकार साकार पर बात करिए नात प्रतिमा

105
00:07:29,760 --> 00:07:33,840
आपका फेमस डायलॉग है उस पर बात करिए मगर वो जो टिप्पणियां करते हैं

106
00:07:33,840 --> 00:07:38,320
कि वो मेरा शर्म आ गई वो पौन अभिनेत्री से मिलती जुलती है

107
00:07:38,320 --> 00:07:42,720
यह जो टिप्पणियां है यह करने की आवश्यकता क्या है अगर सैद्धांतिक

108
00:07:42,720 --> 00:07:46,920
मतभेद है भी तो और अगर आप कर रहे हैं तो फिर आपका और आपने

109
00:07:46,920 --> 00:07:51,720
उनके लिए प्रतिक्रियाएं नहीं की प्रतिक्रिया मेंक वीडियो नहीं बनाया जो

110
00:07:51,720 --> 00:07:55,760
लोग इस तरह से आस्था पर ठेस पहुंचा रहे हैं और आपने वीडियो

111
00:07:55,760 --> 00:07:59,800
उनके लिए नहीं बनाया तो फिर आप यह क्यों ये किस आधार पर कहते कि

112
00:07:59,800 --> 00:08:03,880
भाई मैं कुछ करना नहीं चाहता था और यह आवान ने मुझे मजबूर किया है आपका कहने

113
00:08:03,880 --> 00:08:08,080
का मतलब यह है कि आप इस देश के तानाशाह

114
00:08:08,080 --> 00:08:12,240
है मुगमो मुगमो टाइप के या ड

115
00:08:12,240 --> 00:08:16,560
डोंगरीला का डोन है ना तानाशाह आप

116
00:08:16,560 --> 00:08:20,800
जो कहे वही सही हो आप यदि अपने ही सिद्धांतों

117
00:08:20,800 --> 00:08:25,280
को तोड़े वह भी सही हो आप जब कहे कि भाई

118
00:08:25,280 --> 00:08:29,480
पुराणों को मानने वाले उठो तो हम उठ जाए आप जब कहे पुराणों को

119
00:08:29,480 --> 00:08:33,480
मानने वाले बैठो तो हम बैठ जाए आप जब कहे कि एका तो एका आपका

120
00:08:33,480 --> 00:08:37,520
जब मन हो कि भैया पुराणों के मानने वालों पर जो है आप

121
00:08:37,520 --> 00:08:40,560
जो है टिप्पणी करना चाहो तो भी हम शांत रहे तो हम

122
00:08:40,560 --> 00:08:44,560
लोग आपके आपके अधीनता

123
00:08:44,560 --> 00:08:48,640
में परतंत्रता में रहने वाले लोग हैं जो आप कुछ भी करते रहो

124
00:08:48,640 --> 00:08:52,920
मगर इधर से अगर हम कुछ करेंगे तो हमें ऐसा नहीं करना चाहिए क्योंकि आपसी

125
00:08:52,920 --> 00:08:56,920
मतभेद सामने वाले को दिख जाएगा और अगर हमने कर दिया तो फिर आप प्रतिक्रिया मेंक

126
00:08:56,920 --> 00:09:01,160
रूप से वीडियो बनाकर हमारा हमें जो है दस्त कर देंगे छिन्न भिन्न कर देंगे

127
00:09:01,160 --> 00:09:05,400
सारी मर्यादा को तार तार कर देंगे है ना

128
00:09:05,400 --> 00:09:10,200
पहली बात तो यह है अब अगर एक बात यह भी कह दे

129
00:09:10,200 --> 00:09:14,800
कि गलत को गलत कहना क्या गलत है क्या यह भी बात आती है उसमें

130
00:09:14,800 --> 00:09:20,400
तो पहले इससे आगे बढ़ने से पहले तो मैं यह कहूंगा

131
00:09:20,400 --> 00:09:24,600
कि यहां से आगे बढ़ने से पहले मैं यह कहूंगा कि यहां

132
00:09:24,600 --> 00:09:28,600
पर आपने अपनी ही बात को काट के रख दिया आप

133
00:09:28,600 --> 00:09:32,800
एक तरफ हम अपनी लड़ाई को बाहर नहीं दिखाना है मगर जब आपकी तरफ

134
00:09:32,800 --> 00:09:36,840
के लोग शुरुआत कर रहे हैं तो आप उनको जाकर के नहीं रोक रहे

135
00:09:36,840 --> 00:09:41,320
बल्कि उनके प्रति उत्तर में जब हम कोई कारवाई कर रहे हैं तो आप हमारे

136
00:09:41,320 --> 00:09:45,480
हमें रोकने हमें रोकना चाहते हैं है ना ठीक

137
00:09:45,480 --> 00:09:49,760
है अब आगे चलते हैं अब अगर बात करें पुराणों की जो समीक्षा

138
00:09:49,760 --> 00:09:53,760
आपके द्वारा की जाती है तो पाच

139
00:09:53,760 --> 00:09:57,800
मिनट केवल लगेंगे उस चर्चा को निर्विवाद रूप से खत्म करने में

140
00:09:57,800 --> 00:10:01,880
सिर्फ पाच मिनट आप लोग गुरु तत्व को नहीं मानते परंपरा को

141
00:10:01,880 --> 00:10:06,520
नहीं मानते कोई बात नहीं मत मानिए मगर

142
00:10:06,520 --> 00:10:10,960
जिन पुराणों की आप समीक्षा कर रहे हैं जिन ग्रंथों की आप समीक्षा

143
00:10:10,960 --> 00:10:15,040
कर रहे हैं उनको रचने वाले उनको लिखने वाले

144
00:10:15,040 --> 00:10:19,880
उन पुराणों में भी अनेका अनेक जगह पर लिखा हुआ है

145
00:10:19,880 --> 00:10:23,920
कि जो शास्त्र है उनका जो अध्ययन है वह

146
00:10:23,920 --> 00:10:28,120
परंपरा प्राप्त गुरुओं की शरण में बैठकर करना है यदि नहीं

147
00:10:28,120 --> 00:10:32,720
करेंगे तो मति भ्रष्ट हो जाएगी समझ में नहीं

148
00:10:32,720 --> 00:10:35,480
आएगा तो क्या जब आप किसी

149
00:10:35,480 --> 00:10:39,760
ग्रंथ की समीक्षा कर रहे हैं किसी चैनल पर जाकर के तो

150
00:10:39,760 --> 00:10:44,120
उस ग्रंथ की समीक्षा करते समय उसके पूरे तत्वों के साथ उसका निचोड़

151
00:10:44,120 --> 00:10:48,240
बता रहे हैं या कहीं की ईट कहीं का रोणा और भानुमति

152
00:10:48,240 --> 00:10:52,360
का कुमा जोड़ा कर रहे हैं अच्छा अब प्रमाण को हटा

153
00:10:52,360 --> 00:10:56,560
दे और तर्क को ले ले कि कोई भी व्यक्ति किसी

154
00:10:56,560 --> 00:11:00,600
की भी धार्मिक बुक का अपने मन गणन अनुसार जो

155
00:11:00,600 --> 00:11:05,440
है अर्थ करने के लिए स्वतंत्र है तो फिर क्यों रोकने जाते हैं जाकिर नायक को

156
00:11:05,440 --> 00:11:09,600
क्यों रोकने जाते हैं मै कोले को जब मै कोले कुछ अर्थ

157
00:11:09,600 --> 00:11:13,880
कर रहा होता है तो मान लीजिए उसका भी अर्थ जब जाकिर नायक कुछ अर्थ कर रहा होता है तो मान लीजिए

158
00:11:13,880 --> 00:11:18,080
उसका भी अर्थ मगर नहीं तब उसको समझाने जाते हैं कि तुमको जो है ये समझ

159
00:11:18,080 --> 00:11:22,200
में नहीं आया तुम ये द्वेष वश कर रहे हो तुम गलत कर रहे हो क्यों समझाने

160
00:11:22,200 --> 00:11:26,280
जाते हो अगर आपके ग्रंथों में भी मैंने पहले

161
00:11:26,280 --> 00:11:30,320
भी कहा नियोग इत्यादि ऐसे जटिल विषय जिनको

162
00:11:30,320 --> 00:11:34,680
अगर सामर्थ्य वान गुरुओं की शरण में नहीं पड़ा जाएगा जो आपके

163
00:11:34,680 --> 00:11:38,880
आपके अनुसार जो आचार्य होंगे उनके अनुसार नहीं पड़ा जाएगा उसमें भी मति

164
00:11:38,880 --> 00:11:43,080
भ्रष्ट हो जाएगी कि संतान प्राप्त करने

165
00:11:43,080 --> 00:11:47,120
के लिए देवर के साथ करिए अपनी बहन के पति के साथ करिए यह करिए वो करिए

166
00:11:47,120 --> 00:11:50,680
सब बातें पढ़ी जाएंगी तो वैसे ही नग्न सत्य

167
00:11:50,680 --> 00:11:55,920
है कि कोई अगर इसको पढ़ लेगा तो मेरा तो मन नहीं हो रहा मैं रख दूं

168
00:11:55,920 --> 00:12:00,320
बताइए होगा ना ऐसा तो आप वहा हां पर ये चाहेंगे

169
00:12:00,320 --> 00:12:04,440
कि जो जो आचार्य इन सिद्धांतों को समझते हैं उनके

170
00:12:04,440 --> 00:12:08,960
द्वारा निर्धारित सीमा में रहते हुए उसका अध्ययन करें संचय आने पर

171
00:12:08,960 --> 00:12:13,400
आचार्य के पास जाकर के पूछे उससे पहले कोई टीका टिप्पणी ना दे आप ये एक्सपेक्ट

172
00:12:13,400 --> 00:12:17,600
करेंगे तो जब आप अपनी चीजों के लिए एक्सपेक्ट करते हैं जिनको आपने

173
00:12:17,600 --> 00:12:21,640
स्वीकार रखा है तो आप सामने वाले को वो अवसर

174
00:12:21,640 --> 00:12:25,720
क्यों नहीं देते क्योंकि आप तानाशा है क्योंकि आपको

175
00:12:25,720 --> 00:12:30,080
ऐसा लगता है कि आपने धरती को खरीद लिया है

176
00:12:30,080 --> 00:12:34,280
ऐसा ही है क्योंकि जो महाभारत में लिखा है

177
00:12:34,280 --> 00:12:38,360
कि जो हम अपने लिए एक्सपेक्ट करते हैं औरों से वही

178
00:12:38,360 --> 00:12:42,800
धर्म होता है ठीक है तो आप अपने लिए जो एक्सेप्ट

179
00:12:42,800 --> 00:12:47,080
एक्सपेक्ट कर रहे हैं औरों से आप औरों को वो तो नहीं दे रहे बदल

180
00:12:47,080 --> 00:12:51,960
रहे हैं आप तो फिर आप धार्मिक कैसे हुए यह सवाल आ जाता है

181
00:12:51,960 --> 00:12:56,640
अच्छा एक यहां पर बात और हुई थी एक

182
00:12:56,640 --> 00:13:00,680
मर्यादा में रहते हुए भी हमारे हमारा प्रतिकार किया गया बिना मर्यादा

183
00:13:00,680 --> 00:13:05,040
के भी किया गया मर्यादा में रहते हुए भी किया गया जिन्होंने मर्यादा में रहकर किया उनका मैं सम्मान करता

184
00:13:05,040 --> 00:13:06,480
हूं

185
00:13:06,480 --> 00:13:10,560
तो जिन्होंने मर्यादा में रहकर किया उनकी मैंने एक बात सुनी थी कि यह

186
00:13:10,560 --> 00:13:14,640
जो शिवजी वाली बात है और

187
00:13:14,640 --> 00:13:19,040
यह बात छुपी हुई थी आपने चैनल पर यह बोलकर उजागर

188
00:13:19,040 --> 00:13:23,280
कर दी पहली बात तो छुपी होने से क्या मतलब मेरे भाई आप

189
00:13:23,280 --> 00:13:27,760
उसके प्रति आस्थावान नहीं उस सिद्धांत को मानते नहीं है दूसरी बात

190
00:13:27,760 --> 00:13:32,000
यह जो आपने बातें क अश्लील है चैनल पर जाकर के यह भी तो ऐसी

191
00:13:32,000 --> 00:13:36,040
बातें हैं क्या बच्चों को पढ़ने के लिए दिए जाते हैं क्या पुराण

192
00:13:36,040 --> 00:13:40,040
नहीं दिए जाते रामचरित मानस दी जाती है भगवत गीता दी

193
00:13:40,040 --> 00:13:44,040
जाती है सुनिए कभी पूरी शंकराचार्य जी को क्या कहते हैं जब उनसे

194
00:13:44,040 --> 00:13:48,720
कहा उनसे पूछा जाता है कि व्यक्ति अपना आध्यात्मिक अध्ययन कहां से शुरू करे

195
00:13:48,720 --> 00:13:53,040
तो गुरुदेव उसे य नहीं कहते भागवत पुराण पढ़ो उसे

196
00:13:53,040 --> 00:13:57,480
ये नहीं कहते कि तुम जाकर ब्रह्मवर्त पुराण पढ़ो उसे कहते हैं रामचरित मानस

197
00:13:57,480 --> 00:14:01,480
पढ़ो जिससे आपके अंदर विवेक आए चीजों

198
00:14:01,480 --> 00:14:05,600
को समझने का आपके सिद्धांतों की सीमा तैयार हो जिससे कि जब

199
00:14:05,600 --> 00:14:09,640
दोहरे अर्थ वाले श्लोक आए दोहरे अर्थ वाले घटनाक्रम आए तो आप

200
00:14:09,640 --> 00:14:14,400
वहां पर अपने जो सिद्धांतों की सीमा में उसका अर्थ निकाल

201
00:14:14,400 --> 00:14:19,160
सको है ना तो

202
00:14:19,160 --> 00:14:21,480
यह जो बात है कि हम एक्सपेक्ट

203
00:14:21,480 --> 00:14:25,600
अपने लिए करते हैं कि जब कोई और हमारे ग्रंथों का अर्थ कर रहा हो

204
00:14:25,600 --> 00:14:29,760
तो यदि उसको समझ में ना आए कोई किसी निर्णय पर पहुंचने से पहले

205
00:14:29,760 --> 00:14:34,200
वो प्रामाणिक आचार्य के पास आक के उसको समझे प्रामाणिक सिद्धांतों को समझे

206
00:14:34,200 --> 00:14:38,400
तो आप अपने लिए तो एक्सपेक्ट करते हो मगर सामने

207
00:14:38,400 --> 00:14:42,480
वाले के प्रति वही व्यवहार नहीं करते तो यह क्या है अधर्म

208
00:14:42,480 --> 00:14:46,640
हैय महाभारत के अनुसार यह अधर्म है

209
00:14:46,640 --> 00:14:50,840
और या तो जो आप सामने वाले के लिए कर रहे हो वही आप अपने लिए भी एक्सपेक्ट

210
00:14:50,840 --> 00:14:55,080
करो त तो ठीक भी है तो ऐसे में

211
00:14:55,080 --> 00:14:59,880
आपका मानना यह है कि आप जो है वो है

212
00:14:59,880 --> 00:15:04,040
आपने जो ईश्वर का जो सगुण स्वरूप है उसको तो सगुण साकार स्वरूप है उसको तो हटा

213
00:15:04,040 --> 00:15:08,200
दिया और हटाया इसीलिए क्योंकि आप सगुण साकार ईश्वर के रूप में ख्या

214
00:15:08,200 --> 00:15:13,240
पित हो सको है ना पूरा अधीन कर सको पूरे समाज

215
00:15:13,240 --> 00:15:17,240
को अब क्या है इसमें अगर आगे चले

216
00:15:17,240 --> 00:15:21,400
कि दो तरह के आक्षेप होते हैं दो तरह के आक्षेप

217
00:15:21,400 --> 00:15:25,440
किसी पर हम उठाते हैं हमने आज तक कभी भी जो प्रश्न उठाया

218
00:15:25,440 --> 00:15:29,840
है आर्य समाज पर या स्कन पर जो भी प्र उठाया

219
00:15:29,840 --> 00:15:34,040
उन बातों को लेकर के प्रश्न उठाया है जिन बातों को आप स्वीकार

220
00:15:34,040 --> 00:15:36,960
करते हैं स्वीकार करते हैं

221
00:15:36,960 --> 00:15:42,200
फॉर एग्जांपल जैसे कि आप कहे कि जो

222
00:15:42,200 --> 00:15:46,440
शंकराचार्य मत है रामानुजाचार्य मत है पुराणों को मानने वाला जो मत है उसका

223
00:15:46,440 --> 00:15:51,480
ज्यादातर जो अंश है

224
00:15:51,480 --> 00:15:55,800
वह अजय आर्य जी को जी लगाना

225
00:15:55,800 --> 00:16:00,040
उचित नहीं है उसने बहुत अद भाषा का उपयोग किया अजय को अगर बात

226
00:16:00,040 --> 00:16:06,040
करनी है चर्चा करनी है तो अपने

227
00:16:12,320 --> 00:16:16,400
थोबड़ा है तो हम ऐसे लोगों से चर्चा नहीं करते

228
00:16:16,400 --> 00:16:20,400
ठीक है यह पहले से अच्छा अब मैं विषय पर वापस आ जाता

229
00:16:20,400 --> 00:16:25,160
हूं तो क्या है मैं उस परे आऊंगा वो

230
00:16:25,160 --> 00:16:29,280
जो जिसकी बात हो रही है मैं उस परे आऊंगा हालांकि मैंने सोचा था मैं उसका

231
00:16:29,280 --> 00:16:33,640
नाम नहीं लूंगा मगर ठीक है अब नाम आ गया तो लेंगे नाम तो फिर क्या

232
00:16:33,640 --> 00:16:38,000
है कि अब फॉर एग्जांपल ये कहा जाए कि भाई पुराणों

233
00:16:38,000 --> 00:16:42,440
को मानने वालों का ज्यादातर हिस्सा जो है वो वर्ण को जन्म से मानता है तो हां

234
00:16:42,440 --> 00:16:47,560
इस बात पर आप जब आक्षेप लगाएंगे तो बात समझ में आती है

235
00:16:47,560 --> 00:16:51,560
मगर जो बात हम स्वीकार नहीं करते हैं उसको लेकर के आप

236
00:16:51,560 --> 00:16:52,200
हम पर आक्षेप

237
00:16:52,200 --> 00:16:56,200
कैसे लगा सकते हैं पहले आकर क्लियर तो करिए कि हम जैसे हम कहते हैं

238
00:16:56,200 --> 00:17:00,280
कि आर्य समाज ईश्वर का साकार अवतार नहीं मानता

239
00:17:00,280 --> 00:17:04,320
तो हम जब इस प्रश्न इस पर प्रश्न उठा रहे हैं तो हम पहले चेक तो करें कि आप मानते हो

240
00:17:04,320 --> 00:17:08,400
कि नहीं मानते आप कह रहे हो हम नहीं मानते या आप कह रहे हो

241
00:17:08,400 --> 00:17:12,680
मानते हो और हम आप पर आक्षेप लगाए कि नहीं मानते तुमने किताबों में लिखा है भाई किताब

242
00:17:12,680 --> 00:17:16,800
में लिख देने भर से अर्थ समझ में नहीं आता है नहीं

243
00:17:16,800 --> 00:17:20,960
आता अर्थ समझ में उसको समझाने वाला वाले गुरु की आवश्यकता

244
00:17:20,960 --> 00:17:25,760
सदैव होती है तो इन चीजों पर आपने ध्यान नहीं

245
00:17:25,760 --> 00:17:30,000
दिया तो जब हम किसी से कोई व्यवहार एक्सपेक्ट

246
00:17:30,000 --> 00:17:34,200
कर रहे होते हैं और उसके प्रति वैसा ही व्यवहार नहीं कर रहे होते तो इसको कहते हैं अन्याय

247
00:17:34,200 --> 00:17:38,280
शेषण होता पक्षपात यह पक्षपात

248
00:17:38,280 --> 00:17:42,400
है तो किस प्रकार से आप स्वयं को धर्मावलंबी कहते हैं आचरण

249
00:17:42,400 --> 00:17:46,640
में भी तो होना चाहिए ना धर्म कहां है धर्म भाई

250
00:17:46,640 --> 00:17:51,120
जिससे आपकी अगर खटपट है तो वह बिल्कुल आपके लिए कूड़ा हो गया

251
00:17:51,120 --> 00:17:55,760
कुछ भी बोल दोगे उसे उसने हाउ डेयर

252
00:17:55,760 --> 00:17:59,840
सास कैसे किया मेरे विरुद्ध बोलने का

253
00:17:59,840 --> 00:18:04,440
अच्छा अब एक इसमें एक

254
00:18:04,440 --> 00:18:07,800
पॉइंट आता है कि

255
00:18:07,800 --> 00:18:11,880
यह जो खंडन है शास्त्रार्थ है हालांकि हमने कभी

256
00:18:11,880 --> 00:18:16,480
भी शास्त्रार्थ के रूप में कभी कोई बात की नहीं हमने केवल प्रश्न उठाए

257
00:18:16,480 --> 00:18:21,120
प्रश्न का उत्तर ना मिलने की स्थिति में हमने केवल

258
00:18:21,120 --> 00:18:25,240
जो है वो प्रश्नवाचक निशान के साथ ही हमने अपनी

259
00:18:25,240 --> 00:18:29,240
बात को रखा हमने कभी नहीं कहा हम जीत गए हमने ये कर दिया हमने उसको परास्त

260
00:18:29,240 --> 00:18:33,320
कर दिया यह सब ये सब भाषा जो है यह बचकाने लोगों की

261
00:18:33,320 --> 00:18:37,520
होती है बालक बुद्धि वाले जो लोग होते हैं

262
00:18:37,520 --> 00:18:41,560
ये सब भाषा शैली हमारी नहीं है हमने हरा दिया मरा दिया ये कर दिया वो

263
00:18:41,560 --> 00:18:45,600
कर दिया ठीक है तो ये यह भाषा शैली

264
00:18:45,600 --> 00:18:49,680
को थोड़ा दूर रहने का एक स्थिरता लाइए अपने वक्तव्य में

265
00:18:49,680 --> 00:18:53,800
जो ये सब कर रहे हैं ये सब कह रहे हैं मैंने उसको हरा दिया मैं ये कर दिया मैं घरा

266
00:18:53,800 --> 00:18:57,800
दूंगा मैं तेरे कपड़े उतार दूंगा ये है वो इस तरह की भाषा शैली आप लोग

267
00:18:57,800 --> 00:19:02,280
यूज कर रहे हो स्वयं धर्मावलंबी कहते हैं भाई गिरो

268
00:19:02,280 --> 00:19:06,840
मगर उस झरने की तरह जो गिर के भी अपनी सुंदरता खोने नहीं देता

269
00:19:06,840 --> 00:19:11,280
तब तो आप धर्म को जितवा वाले कहलाएंगे धर्म रक्षक कहलाएंगे वरना

270
00:19:11,280 --> 00:19:15,480
रावण से लड़ते लड़ते अगर स्वयं भी रावण बन जाएंगे तो आप में रावण में कोई भेद

271
00:19:15,480 --> 00:19:19,560
नहीं है रावण सीता माता का हरण करेगा तो

272
00:19:19,560 --> 00:19:23,920
राम सीता माता वो मंदोदरी का हरण करना नहीं सिखाते

273
00:19:23,920 --> 00:19:28,040
हैं आपके आचरण से ऐसा ही है कि आपका धर्म ऐसा ही है एक

274
00:19:28,040 --> 00:19:30,560
बार मैं कभी

275
00:19:30,560 --> 00:19:34,760
लाइव इनका देख रहा था मुस्लिम्स का तो उसमें मुस्लिम से बता रहे थे

276
00:19:34,760 --> 00:19:38,840
मुस्लिम से किसी ने प्रश्न किया कि आपके यहां पर जब कोई कहीं पर विजय

277
00:19:38,840 --> 00:19:42,840
प्राप्त हो जाती है तो वहां से स्त्रियों को ले आने के लिए कहा गया यह

278
00:19:42,840 --> 00:19:47,000
ठीक नहीं है तो मुस्लिम्स ने क्या कहा मुस्लिम्स ने कहा कि

279
00:19:47,000 --> 00:19:51,880
भाई सामने वाला जब ऐसा ही कर रहा है तो हम हम भी तो करेंगे मतलब

280
00:19:51,880 --> 00:19:56,000
कि यहां पर परिस्थिति पर निर्भर है धर्म धर्म

281
00:19:56,000 --> 00:20:00,520
वो नहीं होता जो परिस्थिति में निर्भर हो सामने वाला आपकी स्त्री पर

282
00:20:00,520 --> 00:20:04,600
स्त्री को लेकर आ रहा है अगवा करके तो आप भी उसकी स्त्रियों को मातृ

283
00:20:04,600 --> 00:20:09,160
शक्तियों को ले आओ अगवा करके नहीं यह धर्म नहीं है

284
00:20:09,160 --> 00:20:13,360
और अगर यह भी और अगर यह धर्म है तो फिर क्या है हम

285
00:20:13,360 --> 00:20:17,520
लड़ किसके लिए रहे जब सिद्धांत रखने ही नहीं है अपने

286
00:20:17,520 --> 00:20:21,560
उन्हीं के सिद्धांतों को हिंदू या सनातन के नाम से ओढ लेना है

287
00:20:21,560 --> 00:20:25,640
तो फिर क्यों लड़ रहे हो नाम के लिए लड़ रहे हो केवल

288
00:20:25,640 --> 00:20:29,880
क्योंकि सिद्धांत तो उनके अपना लिए कि अगर सामने वाला

289
00:20:29,880 --> 00:20:34,000
स्त्री को हरण करेगा तो हम भी करेंगे हां ये सोचने

290
00:20:34,000 --> 00:20:38,240
वाली बात है अब अगर हमारी चीजों को देखा

291
00:20:38,240 --> 00:20:39,120
जाए तो हमने

292
00:20:39,120 --> 00:20:43,160
कभी भी अमर्यादित बातें किसी के

293
00:20:43,160 --> 00:20:47,200
लिए भी नहीं की और अगर आप लोग दिखा देंगे कि की है

294
00:20:47,200 --> 00:20:51,640
तो बिल्कुल यहीं पर पब्लिकली मैं क्षमा मांग लू

295
00:20:51,640 --> 00:20:55,680
कहीं पर किसी के लिए अमर्यादित टिप्पणी कर दी हो ऊंच नीच

296
00:20:55,680 --> 00:20:58,840
वाला व्यवहार कर दिया हो

297
00:20:58,840 --> 00:21:02,920
टिप्पणियां कर द हो भले ही वह प्रभुपाद जी

298
00:21:02,920 --> 00:21:07,200
हो भले ही वह दयानंद जी हो

299
00:21:07,200 --> 00:21:11,400
सदैव इनका नाम हमने सम्मान के साथ लिया तू तड़ाक

300
00:21:11,400 --> 00:21:16,960
तक में नहीं लिया इन लोगों का नाम

301
00:21:16,960 --> 00:21:21,240
और अलग से वीडियो बना कर के निवेदन भी किया कि हमारे

302
00:21:21,240 --> 00:21:25,320
जो समर्थक है मैं आज भी कर रहा हूं भाई हमें धर्म

303
00:21:25,320 --> 00:21:29,440
को बचाना यदि आप आपको लगता है कि आप धर्म की रक्षा कर रहे हो

304
00:21:29,440 --> 00:21:33,560
तो धर्म को धारण करने की शुरुआत स्वयं से करो स्वयं

305
00:21:33,560 --> 00:21:37,600
से सिर्फ चिल्लाने से ऊंची आवाज

306
00:21:37,600 --> 00:21:42,160
में लोगों को दबा दबा करके उसको स्वीकार कराने से नहीं होगा

307
00:21:42,160 --> 00:21:46,320
धर्म की रक्षा वहां से नहीं होगी स्वयं से करो शुरुआत आपके

308
00:21:46,320 --> 00:21:50,360
अंदर कितना धर्म है तो इसलिए मैं

309
00:21:50,360 --> 00:21:54,920
मेरे समर्थकों को सबसे पहले कह रहा हूं कि मर्यादा

310
00:21:54,920 --> 00:21:59,120
के अंदर रहते हुए अपने पक्ष को प्र करना

311
00:21:59,120 --> 00:22:03,240
सीखिए अपने सिद्धांतों की रक्षा करना सीखिए धर्म की रक्षा करना

312
00:22:03,240 --> 00:22:07,440
सीखिए वरना अंततोगत्वा आप भौतिक रूप से शारीरिक रूप

313
00:22:07,440 --> 00:22:11,720
से जीत भी जाओगे सामने वाले से पटक दोगे उठा उठा के

314
00:22:11,720 --> 00:22:16,120
मगर जीत लास्ट में भी अधर्म की होगी धर्म नहीं बचेगा

315
00:22:16,120 --> 00:22:20,280
अधर्म बचेगा क्योंकि पर सिर्फ इतना होगा कि उसने वह शरीर

316
00:22:20,280 --> 00:22:24,520
त्यागा और व आपके अंदर है सिर्फ इतना अंतर

317
00:22:24,520 --> 00:22:26,640
आएगा

318
00:22:26,640 --> 00:22:30,840
तो अब एक यह भी कहना आता है कि भाई

319
00:22:30,840 --> 00:22:32,080
यह बहुत पुरानी बातें

320
00:22:32,080 --> 00:22:37,000
हैं जब ऐसा कहा जाता था आपने इसको उजागर कर दिया भाई पुरानी बातें नहीं है

321
00:22:37,000 --> 00:22:41,480
अभी की बात है ना कितना एक दो हफ्ते हुए होंगे अग्निवृत

322
00:22:41,480 --> 00:22:46,000
जी को उस चैनल पर गए हुए तब तक तो हमने वो वीडियो नहीं बनाया था

323
00:22:46,000 --> 00:22:50,160
भाई आप जाकर के क्यों समीक्षा कर रहे हो पुराणों की पहली बात तो आपने

324
00:22:50,160 --> 00:22:54,200
उसका अध्ययन नहीं किया प्रामाणिक आचार्यों से आपने जाकर पूछा वय विचार

325
00:22:54,200 --> 00:22:58,640
है क्या है नहीं किया और जब नहीं किया आपने जो स्टैंडर्ड

326
00:22:58,640 --> 00:23:02,840
प्रोटोकॉल है उनको आपने फॉलो नहीं किया और

327
00:23:02,840 --> 00:23:07,240
चलो वो भी छोड़ दो कि आपको आपको नहीं करना है और आपको उनके प्रति अनास्ता

328
00:23:07,240 --> 00:23:11,600
ही रखनी है जीवन भर वो भी छोड़ दो मगर इसको तो आप कर रहे हो ना कि अभी हम हिंदू

329
00:23:11,600 --> 00:23:15,760
हिंदू आपस में ना लड़े या सनातनी सनातनी आपस में ना टकराए इसको

330
00:23:15,760 --> 00:23:19,960
तो आप भी मानते हो तो फिर जाकर पब्लिक चैनल पर व

331
00:23:19,960 --> 00:23:24,200
समीक्षा क्यों कर रहे हो और यदि कर रहे हो तो फिर मैं उनसे

332
00:23:24,200 --> 00:23:28,560
पूछूंगा जो हमें रोकने आ रहा है कि भाई तुम उनको रोकने क्यों नहीं जा रहे हो ये पक्ष

333
00:23:28,560 --> 00:23:34,560
बात नहीं है तो और क्या है यह अन्याय नहीं है तो और क्या

334
00:23:35,480 --> 00:23:39,480
है और मैं उन हिंदुओं से पूछना चाहता हूं जो स्वयं को राधा भक्त

335
00:23:39,480 --> 00:23:43,560
कहते हैं स् स्वयं को कृष्ण भक्त कहते हैं मैं उनसे

336
00:23:43,560 --> 00:23:48,480
पूछना चाहता हूं कि इस सब से आप लोगों को कोई फर्क नहीं

337
00:23:48,480 --> 00:23:53,320
पड़ता आप लोगों को नहीं पड़ता होगा मुझे पड़ता है

338
00:23:53,320 --> 00:23:59,320
इसलिए मैं अपनी आवाज उठाऊंगा

339
00:23:59,760 --> 00:24:04,200
कुछ ऐसे हमने वीडियो बनाया तो कुछ इकन

340
00:24:04,200 --> 00:24:08,320
के भी लोग जिनका हम विरोध करते हैं वो तक आ कर के हमारा सपोर्ट कर रहे हैं कमेंट्स

341
00:24:08,320 --> 00:24:12,880
में कि नहीं नहीं इस मामले में हम आपके साथ है और कुछ ऐसे

342
00:24:12,880 --> 00:24:16,960
स्वार्थी इसकन के फॉलोअर्स स्वार्थी

343
00:24:16,960 --> 00:24:21,040
जिन्हें ना तो भगवान श्री कृष्ण से कोई मतलब है ना राधा मां से कोई

344
00:24:21,040 --> 00:24:25,120
मतलब है ना अपनी संस्था जिसको फॉलो कर रहे हो उससे मतलब है और ना उसके

345
00:24:25,120 --> 00:24:29,480
द्वारा नियुक्त किए गए आपके जो आचार्य गण है उनसे कोई मतलब है वोह तो

346
00:24:29,480 --> 00:24:33,480
इस बात को लेते हुए कि भाई शिवांश नारायण द्विवेदी का

347
00:24:33,480 --> 00:24:37,960
इस समय किससे वह चल रहा है टकराव या जो भी है

348
00:24:37,960 --> 00:24:41,960
आमना सामना किससे हो रहा है तो हमें उसके विपक्ष में खड़े हुए व्यक्ति के

349
00:24:41,960 --> 00:24:46,120
पास जाकर के उसको सपोर्ट देना वैचारिक समर्थन देना है यह

350
00:24:46,120 --> 00:24:50,120
आधार है हमारे धर्म और अधर्म का भगवत गीता नहीं है हमारे

351
00:24:50,120 --> 00:24:50,620
उसका

352
00:24:50,560 --> 00:24:54,720
आधार हमारा आधार तो यह है कि जो हमारे दुश्मन

353
00:24:54,720 --> 00:24:58,840
का दुश्मन का विपक्ष में खड़ा हुआ है जो हमारे विपक्षी

354
00:24:58,840 --> 00:25:02,960
के विपक्ष में खड़ा हुआ है हम अपने उसके साथ जाकर खड़े हो जाएंगे भले ही वो हमारे

355
00:25:02,960 --> 00:25:07,080
कृष्ण को गाली देता हो भले ही वो हमारे उन्हीं पुराणों का मजाक उड़ाता हो जिसके

356
00:25:07,080 --> 00:25:13,080
ऊपर जिसके आधार पर हम सबको चिल्लाते रहते हैं

357
00:25:27,320 --> 00:25:31,440
वैष्णवास्त्र कह रहे हो ब्रो मैंने भी उसको जब कहा था ना

358
00:25:31,440 --> 00:25:35,600
री डिबेट के लिए तो उसने कह दिया पहले माफी मांगो हां भाई तुमने

359
00:25:35,600 --> 00:25:40,160
जब जब आपसे चर्चा समाप्त हुई उसके बाद जाकर के आपने व्यक्तिगत टिप्पणियां कर दी

360
00:25:40,160 --> 00:25:44,480
चेहरा बिगाड़ के आपने प्रस्तुत कर दिया हमने कहां पर चेहरा बिगाड़ा आपका एक

361
00:25:44,480 --> 00:25:48,480
आप शुरुआत से इस चैनल की शुरुआत से आज तक दिखा दो

362
00:25:48,480 --> 00:25:54,240
हमने कहीं पर प्रभुपाद जी का कहीं पर दयानंद जी का चेहरा बिगाड़ा

363
00:25:54,240 --> 00:25:59,480
हो सदैव मर्यादा के साथ उनका

364
00:25:59,480 --> 00:26:04,000
उनके बारे में बात की है उनका संदर्भ दिया है मर्यादा के साथ

365
00:26:04,000 --> 00:26:08,480
कभी किसी के ऊपर इस तरह का कोई ला क्या है नहीं क्या खूब

366
00:26:08,480 --> 00:26:12,760
बातें उड़ती इधर से उधर हमने क्यों नहीं आज तक एक नियोग पर स्पेशल वीडियो बनाया

367
00:26:12,760 --> 00:26:17,000
क्यों नहीं बनाया हमने क्योंकि हमें उस पर नहीं जाना है

368
00:26:17,000 --> 00:26:21,960
हमें सिर्फ उन बातों पर बात करनी है जिन बातों से हम एक हो सकते हैं

369
00:26:21,960 --> 00:26:27,960
ईश्वर सर्वशक्तिमान परम स्वतंत्र मक्ष शाश्वत धर्म हम क्यों जाए नियोग पर

370
00:26:28,920 --> 00:26:33,080
हमें नहीं तो हमें नहीं वहा खंडन मंडन करना भैया नियोग में आपने अपने हिसाब से जो लिखा

371
00:26:33,080 --> 00:26:37,080
है ठीक है उन्हीं बातों को लेकर के लोग मजाक उड़ाया करते

372
00:26:37,080 --> 00:26:41,760
हैं कई बार कई चैनल से और ना तो हम उनका समर्थन करते हैं

373
00:26:41,760 --> 00:26:45,760
ना हमने अपने अपनी अपनी लाइव में या कहीं पर

374
00:26:45,760 --> 00:26:50,040
भी इस बात को लेकर के खड़े हो गए किसी अलंकार

375
00:26:50,040 --> 00:26:54,560
समाजी के सामने अब अलंकार क्यों कह रहा हूं यह भी सुन लो व अंत में बता दूंगा मैं

376
00:26:54,560 --> 00:26:58,840
कि अलंकार क्यों आता है कहां से आया अलंकार पर

377
00:26:58,840 --> 00:27:03,040
हमने कभी भी ऐसी चीजों को आपकी को नहीं उठाया

378
00:27:03,040 --> 00:27:07,320
है जिसके बारे में आप पर भी फतिया कसी जा सकती है आपकी भी अमानना

379
00:27:07,320 --> 00:27:11,480
हो सकती है हम नहीं उठाते हमें व्यक्तिगत टिप्पणियों से

380
00:27:11,480 --> 00:27:14,800
तो कोई मतलब ही नहीं है केवल वह सिद्धांत

381
00:27:14,800 --> 00:27:18,840
जो अकाट्य हो उनको ढूंढ रहे हैं अकाट्य सिद्धांत जिससे कि हम विधर्मी

382
00:27:18,840 --> 00:27:23,600
के सामने निर्विवाद रूप से अपने धर्म को ख्या पित कर सके

383
00:27:23,600 --> 00:27:28,240
जीत दिला सके अपने धर्म निर्विवाद रूप से

384
00:27:28,240 --> 00:27:32,720
और अभी कुछ दिन पहले देखा था एक मुस्लिम महिला आई थी

385
00:27:32,720 --> 00:27:36,840
बस एक ही बात पूछी क्या वो सब कुछ कर सकता है अवतार ले सकता है

386
00:27:36,840 --> 00:27:40,960
नहीं ले सकता चली गई पाच मिनट लगे कितनी देर लगी

387
00:27:40,960 --> 00:27:45,160
पाच मिनट क्यों हुआ क्योंकि वो सिद्धांत ही ऐसा है ईश्वर सर्व शक्तिमान

388
00:27:45,160 --> 00:27:49,400
है कि नहीं क्यों लड़े हम इधर उधर की क्यों करें तुम्हारे यहां चार विवाह है क्यों करें हम तुम्हारे

389
00:27:49,400 --> 00:27:53,520
यहां बहन से शादी करने को कहा गया है भाई धर्म और अधर्म का निर्णय उस

390
00:27:53,520 --> 00:27:57,800
ग्रंथ के आधार पर होता है जिस ग्रंथ पर उसकी आस्था है कि ये ईश्वर

391
00:27:57,800 --> 00:28:00,000
ने

392
00:28:00,000 --> 00:28:04,040
हमारी भी तो उसी पर आस्था है तो जो चीज हमें बुरी लग

393
00:28:04,040 --> 00:28:08,040
रही है अगर उन ग्रंथों को सामने वाला नहीं मान रहा है उस पर उसकी आस्था नहीं

394
00:28:08,040 --> 00:28:12,120
है तो उसके धर्म और अधर्म का निर्णय नहीं कर सकते इन बातों को लेकर के हम कभी भी

395
00:28:12,120 --> 00:28:16,400
इस इस टॉपिक को खत्म ही नहीं कर सकते मगर

396
00:28:16,400 --> 00:28:20,480
परम स्वतंत्र मोक्ष वो भी ढूंढ रहा है ईश्वर उसको भी चाहिए

397
00:28:20,480 --> 00:28:24,960
सर्वशक्तिमान तो हम वो बातें लेते हैं जिसमें कि

398
00:28:24,960 --> 00:28:29,080
निर्विवाद रूप से ऐसे नहीं कि आज टल गया पोस्टपोन हो गया मैच

399
00:28:29,080 --> 00:28:29,960
ड्र हो गया ऐसे

400
00:28:29,960 --> 00:28:34,000
नहीं निर्विवाद रूप से सनातन ख्या पित होता है और आपके

401
00:28:34,000 --> 00:28:38,120
पास है तो आप दे दो मैं व्यक्तिगत जो भी सिद्धांत मानू मान लूंगा

402
00:28:38,120 --> 00:28:42,160
अपना अलग से जाक छुप के पूजा कर लिया करूंगा भगवान की आपके पास है ना

403
00:28:42,160 --> 00:28:48,160
ऐसे निर्विवाद वाले सिद्धांत दे दो ना कर दो अवाद

404
00:28:48,760 --> 00:28:52,880
सिद्ध नहीं करोगे कहते हो कि जो तर्क लाते

405
00:28:52,880 --> 00:28:56,920
हो वैदिक होने चाहिए भाई वेदों वेद आपके पास भी है

406
00:28:56,920 --> 00:29:01,080
वेद हमारे पास भी है बात है इंटरप्रिटेशन की कि आप

407
00:29:01,080 --> 00:29:05,200
कौन सी लाइन का कौन सा अर्थ अपने हिसाब से निकाल रहे हो और हम कौन सी लाइन

408
00:29:05,200 --> 00:29:09,720
का कौन सा अर्थ अपने हिसाब से निकाल रहे हैं इंटरप्रिटेशन का अंतर है

409
00:29:09,720 --> 00:29:14,040
वेदों का ग्रंथों का अंतर नहीं है जिस लाइन

410
00:29:14,040 --> 00:29:18,120
का एक अर्थ आप निकाल रहे हो उस लाइन का दूसरा अर्थ हम निकाल रहे हैं तो यह

411
00:29:18,120 --> 00:29:22,560
कौन सी बात हुई हम तो बोल देंगे सत्यम नम अनंतम ब्रम लो

412
00:29:22,560 --> 00:29:26,640
जब ब्रह्म अनंत है तो अंत क्यों आ रहा है उसकी सीमित क्यों हो रहा है फिर वो

413
00:29:26,640 --> 00:29:31,000
फिर आप कहोगे नहीं वो वो वो वाला उसके जो कार्य है उसमें रहना चाहिए

414
00:29:31,000 --> 00:29:35,040
यह तो उसमें नहीं लिखा है सर्वशक्तिमान की परिभाषा य तो नहीं है अनंत की परिभाषा य

415
00:29:35,040 --> 00:29:39,440
तो नहीं है अब यहां पर हमारे बीच में मतभेद वेदों को लेकर ग्रंथ को लेकर मतभेद

416
00:29:39,440 --> 00:29:44,240
नहीं है कि वो जो

417
00:29:44,240 --> 00:29:45,080
क्या कहते हैं जो

418
00:29:45,080 --> 00:29:49,080
ईश्वर है वह कभी माया वो अविद्या में नहीं गिरता अरे भाई हमने

419
00:29:49,080 --> 00:29:54,320
कब कहा कि वो अगर अवतार ले रहा है तो अविद्या में फस गया वो कब

420
00:29:54,320 --> 00:29:58,320
काहा और अगर संसार से जुड़

421
00:29:58,320 --> 00:30:02,320
जाना कनेक्ट हो जाना अविद्या से जुड़ना कहलाएगा तो

422
00:30:02,320 --> 00:30:06,800
जब ईश्वर ने सृष्टि की और पृथ्वी बना दी

423
00:30:06,800 --> 00:30:11,040
और पृथ्वी को पृथ्वी के रूप में देखना अविद्या है अगर तो

424
00:30:11,040 --> 00:30:15,240
ईश्वर उसको देख रहा है ना कि मैंने पृथ्वी बनाई है मनुष्य के लिए तो

425
00:30:15,240 --> 00:30:19,280
अविद्या में गिर गया आपके हिसाब से

426
00:30:19,280 --> 00:30:23,440
पता नहीं कैसी बातें कहां से लाते हैं कि वेदों के हिसाब से तर्क

427
00:30:23,440 --> 00:30:27,600
होना चाहिए आपको क्यों लगता है वेदों के हिसाब से नहीं है ब उपनिषद के हिसाब

428
00:30:27,600 --> 00:30:32,960
से ईश्वर किसी भी प्रकार की कमी नहीं होनी चाहिए

429
00:30:32,960 --> 00:30:37,000
तो अब आप जब कमी कर रहे हो कि व यह नहीं कर सकता तो कमी है

430
00:30:37,000 --> 00:30:41,320
ना पूर्ण में दिक्कत आ रही फिर आप उसम अपना इंटरप्रिटेशन दोगे कि नहीं पूर्ण

431
00:30:41,320 --> 00:30:45,360
का मतलब यह वाला तो वही वहां दिक्कत है ग्रंथ में दिक्कत नहीं है

432
00:30:45,360 --> 00:30:50,280
कि हमारे जो तर्क है व वेदों के बाहर के हैं तब आती है परंपरा

433
00:30:50,280 --> 00:30:54,920
कि आपका इंटरप्रिटेशन मान्य क्यों उसका और हमें

434
00:30:54,920 --> 00:30:58,960
कोई किसी को हराकर या

435
00:30:58,960 --> 00:31:00,080
किसी संस्था को या

436
00:31:00,080 --> 00:31:04,560
आर्य समाज इस तरीके के तंत्रों को हराक कुछ सिद्ध नहीं करना है

437
00:31:04,560 --> 00:31:08,600
यह बहुत बड़ी गलतफहमी है कि मैं अपने संप्रदाय को ऊंचा करना चाहता हूं संप्रदाय

438
00:31:08,600 --> 00:31:12,600
के लिए लड़ रहा हू बहुत बड़ी गलतफहमी आप लोगों की मैं सिर्फ उन

439
00:31:12,600 --> 00:31:16,840
सिद्धांतों के लिए लड़ रहा हूं जिसके साथ जिसको रखते ही

440
00:31:16,840 --> 00:31:22,520
जो विधर्मी है उसके सामने निर्विवाद रूप से सनातन जीत

441
00:31:22,520 --> 00:31:26,560
जाए बहुत लंबी वो बहस ना चले ग बस चलती

442
00:31:26,560 --> 00:31:29,480
जा रही है अनंत

443
00:31:29,480 --> 00:31:35,480
और यही हुआ था यही हुआ भी था उसके बारे में बात करूंगा

444
00:31:36,880 --> 00:31:39,000
मैं

445
00:31:39,000 --> 00:31:43,360
अब वही जैसे बात करें अगर जो बंगाली

446
00:31:43,360 --> 00:31:47,400
भाई साहब है जो मर्यादा में रह कर के हमारे लिए उन्होंने लाइव चर्चा

447
00:31:47,400 --> 00:31:51,480
की है और उसमें उन्होंने कहा है तो क्या आपको

448
00:31:51,480 --> 00:31:55,800
नहीं पता है कि ऋषि पिछले कई दिनों से क्या कर रहे

449
00:31:55,800 --> 00:31:59,840
थे अब उन्होंने धर्म सम्राट कपाती जी की अमानना करने के लिए

450
00:31:59,840 --> 00:32:04,240
अपने चैनल का नाम धर्म सम्राट रख लिया है कुछ नहीं करते बना

451
00:32:04,240 --> 00:32:08,360
तो यह सब आपको नहीं मा पता था क्या और पता था तो क्या आपने

452
00:32:08,360 --> 00:32:12,400
कोई प्रतिकार किया हमारे आचार्यों ने

453
00:32:12,400 --> 00:32:16,480
कोई ऐसे वेल नोन व्यक्ति ने यदि कभी भी कुछ कहा है यार समाज

454
00:32:16,480 --> 00:32:20,560
के लिए तो सैद्धांतिक विरोध किया है कभी इस तरह से अमानना नहीं

455
00:32:20,560 --> 00:32:24,640
की कि वोह क्या कहते हैं जो कृष्ण है वो जैसे आप

456
00:32:24,640 --> 00:32:28,640
लोग करते हो कृष्ण और राधा मां के लिए कोई मानना नहीं की इस

457
00:32:28,640 --> 00:32:32,840
तरह से और अगर की होगी तो बताइएगा हम प्रतिक्रिया मेंक वीडियो बना देंगे उनके

458
00:32:32,840 --> 00:32:38,840
लिए य सैद्धांतिक खंडन किया जाए तो उचित

459
00:32:40,240 --> 00:32:44,240
होगा मर्यादा को ना लंगा जाए तो ये अजय आर

460
00:32:44,240 --> 00:32:48,480
ए ऋषि उवाच ये सब जो कर रहे हैं आपको नहीं पता है क्या बंगाली

461
00:32:48,480 --> 00:32:52,760
भाई साहब आपसे पूछ रहा हूं नहीं पता है ये

462
00:32:52,760 --> 00:32:56,760
कैसा पक्षपात है या और फिर जब पक्षपाती हो तो स्वयं को धर्माज

463
00:32:56,760 --> 00:32:59,760
कैसे देख पाते हो आप लोग

464
00:32:59,760 --> 00:33:04,000
भाई धर्म को पहले स्वयं तो धारण करो

465
00:33:04,000 --> 00:33:08,040
सामने वाले को अवसर नहीं दे रहे हो उसको अपने जूते के नीचे कुचले दे रहे हो कि मैं

466
00:33:08,040 --> 00:33:12,920
जो कहूंगा वही मानना होगा तुझे अवसर भी नहीं दिया जाएगा तेरा पक्ष रखने

467
00:33:12,920 --> 00:33:18,800
का और मेरे लोग जो भी करते रहेंगे मैं उन पर कभी भी कुछ नहीं

468
00:33:18,800 --> 00:33:23,040
बोलूंगा यह चाहते हो आप लोग यह धर्म है

469
00:33:23,040 --> 00:33:29,040
यही सनातन धर्म है ना दूसरे को दबा देना

470
00:33:31,720 --> 00:33:35,720
हमने आज तक इनके लिए जो दयानंद जी हैं और

471
00:33:35,720 --> 00:33:39,840
जो प्रभुपाद जी इनके लिए तू तड़ाक भी नहीं बोला है तू

472
00:33:39,840 --> 00:33:44,120
तड़ाक और देखो जाके य अजय अर और यह जो बाकी

473
00:33:44,120 --> 00:33:48,280
के एक दो मित्र मित्र मिलकर के इन्होंने जो अल्पायु वालों ने

474
00:33:48,280 --> 00:33:52,520
वीडियोस बनाए

475
00:33:52,520 --> 00:33:56,520
हैं अजय आर्या अगर आप यहां पर हैं तो अपना चेहरा

476
00:33:56,520 --> 00:34:02,520
दिखाए और सामना

477
00:34:21,960 --> 00:34:26,200
करें और अगर आपको आपकी पहचान खुल जाने से कोई खतरा है

478
00:34:26,200 --> 00:34:29,520
तो किसी दूसरे नाम से आ जाएग

479
00:34:29,520 --> 00:34:33,640
किसी और दिन यदि आपने अब तक किसी को अपना चेहरा नहीं

480
00:34:33,640 --> 00:34:39,640
दिखाया है तो किसी और नाम से आ जाइए किसी दिन चेहरे के

481
00:34:40,160 --> 00:34:44,400
साथ तो और यह बात सर्वविदित

482
00:34:44,400 --> 00:34:48,440
है कि हम लोग बिना चेहरे के किसी से बात नहीं करते हैं विरोधाभासी जहां पर बात

483
00:34:48,440 --> 00:34:52,520
होती है तो यह बात सर्वविदित है पहले से शुरुआत से हम चैनल पर अपने

484
00:34:52,520 --> 00:34:56,520
करते आए हैं ना जाने कितने लोगों को हमने मना किया है तो आज हम

485
00:34:56,520 --> 00:35:00,560
अगर अपनी उसी मर्यादा का अनुपालन कर रहे हैं अनुगमन कर

486
00:35:00,560 --> 00:35:04,560
रहे हैं या तो अजय अर आए तो इसके लिए अपनी मर्यादा को भंग कर

487
00:35:04,560 --> 00:35:08,600
द आज तक जितने लोगों को कहा था कि हम नहीं करते तो उनके साथ अन्याय

488
00:35:08,600 --> 00:35:12,640
कर द और नहीं करेंगे तो हम शायद अब कुछ लोग

489
00:35:12,640 --> 00:35:16,800
यह भी कहेंगे कि वो क्या कहते हैं ये कायर है है ना

490
00:35:16,800 --> 00:35:20,800
कायर कौन है वो भी बताऊंगा मैं कौन है कायर

491
00:35:20,800 --> 00:35:24,880
मुंह को छुपाने वाला कायर नहीं है जो मर्यादा में रहकर

492
00:35:24,880 --> 00:35:28,920
बात करना चाहता है अपने चेहरे को दिखा कर मुसलमानों से भी बात करता

493
00:35:28,920 --> 00:35:34,920
है और आपसे भी बात करता है सबसे बात करता है वो

494
00:35:38,920 --> 00:35:43,000
कायर आपने अपने वीडियो में कहा कि

495
00:35:43,000 --> 00:35:47,320
नमाजी हमने कब कहा आर्य समाज को नमाजी

496
00:35:47,320 --> 00:35:51,440
हमने कब कहा हमने तो अपनी टीम को ये

497
00:35:51,440 --> 00:35:55,480
कह रखा है कि अगर इस तरह के कोई कमेंट हमने वीडियो

498
00:35:55,480 --> 00:36:00,960
बनाया था इस तरह के कोई कमेंट्स भी आए तो तो उनको डिलीट करो

499
00:36:00,960 --> 00:36:05,160
तो आप कहीं और से सुन कर के किसी किसी भी व्यक्ति

500
00:36:05,160 --> 00:36:09,160
के द्वारा सुन कर के आप य आक्षेप लगा दोगे नमाजी कहते हो नहीं

501
00:36:09,160 --> 00:36:13,160
कहते अलंकारी अवश्य कहते हैं

502
00:36:13,160 --> 00:36:17,600
अलंकारी हम अवश्य कहते हैं क्यों कहते हैं उसका कारण है

503
00:36:17,600 --> 00:36:21,800
क्योंकि आप हमें आपके द्वारा पूरा आपके अधिकृत लोग

504
00:36:21,800 --> 00:36:26,080
ऐसा नहीं अनऑफिशियल लोग आप जो है पुराणों को मानने

505
00:36:26,080 --> 00:36:30,200
वालों को पौराणिक कहते हो और इस तरह से कहते हो

506
00:36:30,200 --> 00:36:34,680
कि वहां पर वह अवैध पौराणिक है अगर पौराणिक संज्ञा आपको देनी है उन्हें

507
00:36:34,680 --> 00:36:38,960
तो आप यह कहो वैदिक पौराणिक ये कहो

508
00:36:38,960 --> 00:36:43,160
मगर नहीं आप कहते हो पौराणिक अपने आप को वैदिक कहते हो हमें

509
00:36:43,160 --> 00:36:47,160
पौराणिक कहते हो तो हम आपको बताना चाहते हैं कि जो

510
00:36:47,160 --> 00:36:51,240
संज्ञा हीनता के रूप में आपको आप जो है किसी

511
00:36:51,240 --> 00:36:54,080
और को दे रहे हो उसी तरीके से जब आपको मिलता है तो कैसा

512
00:36:54,080 --> 00:36:58,480
आता है उसका टेस्ट कैसा होता है उसका अनुभव कैसा होता है उसके लिए अलंकारिक

513
00:36:58,480 --> 00:37:02,760
शब्द है अमर्यादित नहीं है और अलंकार आपके भाष्य

514
00:37:02,760 --> 00:37:06,760
में है जहां जहां पर शक्तिमान की बात आई जहां जहां पर चमत्कृत की बात आई

515
00:37:06,760 --> 00:37:10,800
अलंकार है पूरे वेद भाष्य में जहां पर

516
00:37:10,800 --> 00:37:14,880
भी कोई चमत्कारिक घटना हो रही होगी भगवान के अवतार की बात हो रही कुछ भी

517
00:37:14,880 --> 00:37:19,000
हो रहा होगा यहां फलाना अलंकार है यहां फलाना अलंकार है फलाना अलंकार

518
00:37:19,000 --> 00:37:25,000
है अलग से आ कर के आपको बता दिया

519
00:37:25,080 --> 00:37:29,080
गया अब बात अगर ये करें हमने नमाजी कहाया

520
00:37:29,080 --> 00:37:33,120
हमने तो चलो कहा भी नहीं हमारे यहां पर जो हमने अपनी टीम

521
00:37:33,120 --> 00:37:37,760
है बहुत बड़ी टीम नहीं है प्रयास करते हैं कि ऐसे कमेंट्स को

522
00:37:37,760 --> 00:37:42,200
डिलीट कर दिया जाए जिसमें कि अवमानना हो भले ही प्रभुपाद

523
00:37:42,200 --> 00:37:46,440
जी की हो या क्या कहते हैं दयानंद जी की हो किसी

524
00:37:46,440 --> 00:37:50,480
की भी हो डिलीट करने का कहा हुआ है यथा सामर्थ प्रयास करते

525
00:37:50,480 --> 00:37:54,600
हैं कि ऐसे कमेंट्स डिलीट हो जाए आप लोग क्या करते हो चैनल

526
00:37:54,600 --> 00:37:59,160
खोल लिया वहा जा तत बात कर रहे हो आचार्यों के लिए

527
00:37:59,160 --> 00:38:04,120
कहां से सिखाए अरे भाई आर्य हो

528
00:38:04,120 --> 00:38:08,960
राम के वंशज हो राम ने सिखाया

529
00:38:08,960 --> 00:38:09,960
यह

530
00:38:09,960 --> 00:38:15,360
कि रावण से युद्ध करते समय मर्यादा भूल

531
00:38:15,360 --> 00:38:19,560
जाओ और जब हम रावण है आपके अकॉर्डिंग

532
00:38:19,560 --> 00:38:23,600
तो फिर वह बात क्यों कह रहे हो कि हम आपस की लड़ाई नहीं दिखाना चाहते हैं दूसरों

533
00:38:23,600 --> 00:38:27,920
को

534
00:38:27,920 --> 00:38:32,400
आपके ऐसे ऐसे चैनल देखे हैं मैंने जिसमें कि भर भर के गालियां

535
00:38:32,400 --> 00:38:35,880
चल रही चैनल में चल रही है

536
00:38:35,880 --> 00:38:39,960
गालियां और क्या लगता है हमारे पास आपके आप कभी हमारे ट चैनल

537
00:38:39,960 --> 00:38:43,960
में अपना किसी जासूस को भेजना उसको कुछ नहीं मिलेगा क्योंकि

538
00:38:43,960 --> 00:38:47,960
अगर कोई हंसी मजाक भी उड़ा रहा होता है व्यक्तिगत टिप्पणी वहां पर तो हम तुरंत

539
00:38:47,960 --> 00:38:52,400
हम में से जो भी वरिष्ट होते तुरंत उसको रोक देते हैं यह सब नहीं करो यहां

540
00:38:52,400 --> 00:38:56,400
भेज देना मगर आप लोगों के जो ग्रुप बने हुए ना टेलीग्राम इत्यादि

541
00:38:56,400 --> 00:39:00,760
के उसमें क्याक च चलता है और किस तरह की भाषा शैली होती है

542
00:39:00,760 --> 00:39:04,840
क्या लगता है आपको नहीं पता है क्या होते हैं कुछ लोग ऐसे जो

543
00:39:04,840 --> 00:39:08,920
आपके वहां भी हमारे वहां भी है शायद हमारी बातें आप तक पहुंचा रहे हो और

544
00:39:08,920 --> 00:39:13,440
आपकी बातें हम तक पहुंचा रहे हो होते हैं

545
00:39:13,440 --> 00:39:17,760
तो निर्दोष का बनने का वो मत चोला

546
00:39:17,760 --> 00:39:21,960
मत तोड़ो और सबसे बड़ी बात तो मेरे

547
00:39:21,960 --> 00:39:25,120
को यह याद आती है कि मैं उन हिंदुओं से पूछ रहा हूं

548
00:39:25,120 --> 00:39:29,160
मैं फिर पूछ रहा हूं कि ये जो राधा मां के लिए कहा जाता

549
00:39:29,160 --> 00:39:33,360
है भगवान श्री कृष्ण के लिए कहा जाता है मुझे शर्म आती है पढ़ के उनका

550
00:39:33,360 --> 00:39:37,400
वो प्रकरण पढ़ के यह सब कहा जाता है तो आपके आपके क्या आपकी आत्मा

551
00:39:37,400 --> 00:39:41,440
क्या बिल्कुल गायब हो चुकी है सो चुकी है या यह

552
00:39:41,440 --> 00:39:45,640
आपका जो इनको परमात्मा कहना राधा मां के प्रति भक्ति भाव करना

553
00:39:45,640 --> 00:39:50,240
यह सब दिखावा मात्र है प्रेमानंद जी महाराज प्रेमानंद जी महाराज

554
00:39:50,240 --> 00:39:55,640
सब दिखावा है आपको बुरा नहीं

555
00:39:55,640 --> 00:39:59,800
लगता मुझे बुरा लगता है और

556
00:39:59,800 --> 00:40:04,000
जो अंतिम सांस होती है जब तक वह बाकी रहेगी तब

557
00:40:04,000 --> 00:40:08,320
तक मैं अपनी आवाज लोगों को सुनाता

558
00:40:08,320 --> 00:40:12,440
रहूं वो बचपन में एक श्लोक

559
00:40:12,440 --> 00:40:16,480
सुना था भगवत गीता का कर्मन निवादी कारते मा फले सु कदाचना

560
00:40:16,480 --> 00:40:20,480
आप लोग केवल प्रचार करो कि हमने वहां

561
00:40:20,480 --> 00:40:24,480
प्रचार कर दिया हमने यह कर दिया वो कर दिया उसको धारण मत करो हमारे

562
00:40:24,480 --> 00:40:28,920
खून में बहते हैं श्लोक खून में बहते हैं

563
00:40:28,920 --> 00:40:33,320
लोक रामो विग्रह वान धर्म कर्मन

564
00:40:33,320 --> 00:40:37,680
वादी कासते मा फले सु कदाचना नैनम चिंति

565
00:40:37,680 --> 00:40:40,280
शस्त्राणि नैनम दती पावक ना

566
00:40:40,280 --> 00:40:45,320
चैन क्ले देत ना शोष

567
00:40:45,320 --> 00:40:51,320
मारता धर्म के खले प्रचारक नहीं

568
00:40:52,160 --> 00:40:56,680
है आज आप किसी भी आचार को ले लीजिए

569
00:40:56,680 --> 00:41:02,680
किसी भी वैश्णवा चार्य को ले लीजिए कोई भी ऐसा वैष्णवास्त्र

570
00:41:28,800 --> 00:41:32,960
जिनका कोई धर्म ही नहीं है भाई उनका जीवन का जो

571
00:41:32,960 --> 00:41:36,960
सबसे प्राथमिकता है वह इस बात को लेकर है कि शिवांश नारायण द्विवेदी

572
00:41:36,960 --> 00:41:41,040
को अगर मैं ने अगर मेरे सिद्धांत का वहां पर बैंड बजाया कुछ भी व जो

573
00:41:41,040 --> 00:41:45,840
सोचते हो अगर शिवांश नारायण द्विवेदी ने

574
00:41:45,840 --> 00:41:49,840
जो जिस ईश्वर के जो परिभाषा हमारी है जिसको हम स्वीकार करते

575
00:41:49,840 --> 00:41:54,160
हैं उसके अनुसार वो बाधित सिद्ध हो गया तो अब उसके विपक्ष

576
00:41:54,160 --> 00:41:55,320
में जो भी खड़ा होगा मैं उसको

577
00:41:55,320 --> 00:41:59,440
सपोर्ट करूंगा भले ही व वो व्यक्ति हो जो हमारे ही लोगों को गाली

578
00:41:59,440 --> 00:42:03,640
देता आया हमारे गुरुओं को गाली देता आया है जो हमारे क्या कहते

579
00:42:03,640 --> 00:42:07,640
हैं भगवान श्री कृष्ण के बारे में अभद्र चीजें बोलता आया या नहीं

580
00:42:07,640 --> 00:42:13,640
बोलता आया तो उनको सपोर्ट करता आया जो ऐसा करते

581
00:42:21,000 --> 00:42:25,320
हैं अब कुछ वो तार्किक

582
00:42:25,320 --> 00:42:29,720
बात भी कर लू मैं आपसे

583
00:42:29,720 --> 00:42:33,840
एक सब्जी वाला हमने अपने वीडियो में उदाहरण दिया था कि एक घर

584
00:42:33,840 --> 00:42:38,080
में पांच सब्जी एक घर में और पांचों अलग-अलग लोग हैं उसको ग्रहण

585
00:42:38,080 --> 00:42:42,200
करने वाले तो वह व्यक्ति सही है जो यह कह रहा है पांचों

586
00:42:42,200 --> 00:42:46,200
सब्जी सब्जी से पेट भरता है वह व्यक्ति जोड़ने वाला है घर को

587
00:42:46,200 --> 00:42:50,280
या वह व्यक्ति जोड़ने वाला जो कह रहा नहीं मैं जो ले रहा हूं वोह सही है बाकी की चार

588
00:42:50,280 --> 00:42:54,640
सब्जियां खराब है यह मैंने जनरल

589
00:42:54,640 --> 00:42:58,680
रूप से नहीं कहा था यह मैंने रियल इंटेंशन

590
00:42:58,680 --> 00:43:02,840
जैसे लोगों के लिए कहा था जो यह कहते हैं कि हम सबके

591
00:43:02,840 --> 00:43:06,880
द्वारा स्वीकार किए गए सिद्धांतों में कुछ ना कुछ कमियां है

592
00:43:06,880 --> 00:43:10,960
मगर यह समय नहीं है कमियों पर बात करने का इस समय हम सबको

593
00:43:10,960 --> 00:43:15,040
एक होकर के सामने वाले का सामना करना चाहिए एक दूसरे की कमी

594
00:43:15,040 --> 00:43:19,440
नहीं निकालनी चाहिए यह रियल इंटेंशन वाले भाई साहब के वक्तव्य हैं

595
00:43:19,440 --> 00:43:23,440
और उसकी तरीके के कई अन्य लोग भी है तो यह बात मैंने उनके

596
00:43:23,440 --> 00:43:27,600
लिए कही थी कि यदि आपको लगता है कि आप जिस सब्जी को खा रहे हो

597
00:43:27,600 --> 00:43:31,880
उसमें भी कमी है बाकियों में भी कमी है तो वो व्यक्ति

598
00:43:31,880 --> 00:43:36,040
सही है उस समय जो कह रहा है नहीं सारी सब्जियां ठीक है आप लोग

599
00:43:36,040 --> 00:43:40,480
सब्जियां ग्रहण करिए और सामने जो बाहरी मुसीबत है उससे लड़

600
00:43:40,480 --> 00:43:44,800
या फिर वो व्यक्ति ठीक है अभी भी जो सिर्फ अपनी सब्जी को लाद चाहता है पांचों

601
00:43:44,800 --> 00:43:49,000
पर और दूसरे और यही नहीं वो निंदा भी करता है दूसरे

602
00:43:49,000 --> 00:43:53,760
की सब्जियों की भाई क्या

603
00:43:53,760 --> 00:43:57,840
इससे एकता आएगी कि हरि हर एक है शिव जी भी

604
00:43:57,840 --> 00:44:01,920
भगवान है विष्णु जी भी भगवान है कृष्ण जी भी भगवान है ठीक है

605
00:44:01,920 --> 00:44:06,360
आपके ग्रंथों में नहीं है तो उसका प्रचार मत करो आगे

606
00:44:06,360 --> 00:44:11,040
टीवी में जब तुम्हारे अपनी सभाए चल रही है व आपस में बात कर लो

607
00:44:11,040 --> 00:44:15,200
मगर आप जब उसको सार्वजनिक रूप से उसका प्रचार प्रसार करोगे कि शिवजी भगवान

608
00:44:15,200 --> 00:44:19,440
नहीं है तो उससे कहां एकत्व आएगा एकत्व इससे आएगा कि हरि हर

609
00:44:19,440 --> 00:44:23,520
एक है इससे आएगा

610
00:44:23,520 --> 00:44:27,680
एक इसी प्रकार से ईश्वर साकार नहीं

611
00:44:27,680 --> 00:44:32,440
सिर्फ निराकार है इससे एकत्व आएगा

612
00:44:32,440 --> 00:44:36,920
एकत्व आएगा आपके ग्रंथों में है ठीक है आर्य

613
00:44:36,920 --> 00:44:41,360
समाजी ग्रंथों में ईश्वर शिव निराकार है ठीक है मत करो प्रचार आ कर

614
00:44:41,360 --> 00:44:45,560
के मत करो समीक्षा आप पुराणों को नहीं मानते राधा कृष्ण

615
00:44:45,560 --> 00:44:49,680
की रासलीला आपको समझ में नहीं आती उनके अर्थ समझ में नहीं आते आचार्य के पास

616
00:44:49,680 --> 00:44:53,920
नहीं जाना है मत जाओ मगर चैनलों पर आकर के पब्लिकली सार्वजनिक

617
00:44:53,920 --> 00:44:59,920
समीक्षा क्यों कर रहे हो

618
00:45:03,320 --> 00:45:07,440
राघवाचार्य जी का वीडियो है लोग मु कहते हैं कि उसके अनुसार

619
00:45:07,440 --> 00:45:11,600
जो है ईश्वर जो है बलात्कारी भी है हां भैया जो यह कह रहा है उसके उसके रूप

620
00:45:11,600 --> 00:45:16,000
में ही ईश्वर बलात्कारी है जो इस तरह का सवाल कर रहा

621
00:45:16,000 --> 00:45:20,200
है भगवान तो सब में है ना तो तुम्हारे रूप में बलात्कारी

622
00:45:20,200 --> 00:45:24,800
है और जब बलात्कारी के रूप में आओगे तो उसका वैसा

623
00:45:24,800 --> 00:45:27,840
पूजन होगा

624
00:45:27,840 --> 00:45:31,920
प्रेमानंद जी महाराज का कहना है भगवान जब आतंकी के रूप में आते हैं तो फिर

625
00:45:31,920 --> 00:45:36,080
वैसे किया जाता है स्वागत उनका राघवाचार्य जी ने कहा

626
00:45:36,080 --> 00:45:40,360
है भगवान सूअर भी बन जाते हैं जाओ करो खंडन वैश्णवा चार्य

627
00:45:40,360 --> 00:45:44,360
का और फिर कहना कि वैष्णव की निंदा करने पर 10 अपराध

628
00:45:44,360 --> 00:45:50,360
में से एक अपराध आ जाता है है

629
00:45:53,440 --> 00:45:58,440
ना अब क्या है कि

630
00:45:58,440 --> 00:46:02,520
तो ये जो निरुक्त वाले भाई निरुक्त वाले भाई साहब रियल इंटेंशन इन्होंने

631
00:46:02,520 --> 00:46:07,280
भी एक तर्क दिया जब बात य आती है कि गुरु परंपरा

632
00:46:07,280 --> 00:46:11,400
गुरु नहीं है तो तो इन्होंने एक तर्क दिया कि निरुक्त

633
00:46:11,400 --> 00:46:15,440
में आचार्य यासक ने कहा है कि जब तुम्हारा कोई गुरु नहीं होगा

634
00:46:15,440 --> 00:46:19,440
अभाव होगा गुरु का तो तुम्हारा गुरु तुम्हारा तर्क होगा तो यह सिद्धांत

635
00:46:19,440 --> 00:46:23,480
हो गया इससे सारे सिद्धांत कट गए पहली बात तो यह है कि जब आप अपना

636
00:46:23,480 --> 00:46:27,480
यह सिद्धांत रख रहे हैं कि गुरु की आवश्यकता नहीं है उस समय भी आप गुरु का ही

637
00:46:27,480 --> 00:46:31,640
आलंबन ले रहे हैं आप यह चाहते हैं ना कि आचार्य यासक को

638
00:46:31,640 --> 00:46:35,920
प्रमाण के रूप में स्वीकार करते हुए सिद्धांत को मान लिया जाए कि गुरु की आवश्यकता

639
00:46:35,920 --> 00:46:40,040
नहीं होती मगर उसको भी सिद्ध करने के लिए आप गुरु का ही आलंबन ले रहे हैं

640
00:46:40,040 --> 00:46:44,240
तर्क तो यह है कि आचार्य यासक का वह

641
00:46:44,240 --> 00:46:48,520
कथन आप तक कैसे आया यह तर्क है अगर आप प्रमाण

642
00:46:48,520 --> 00:46:52,640
दे रहे हैं तो इसका मतलब किसी ना किसी के कहे हुए वचन को आप आगे प्रोसीड कर रहे

643
00:46:52,640 --> 00:46:57,040
हैं शब्द प्रमाण दे रहे हैं ना आप वो क्या है

644
00:46:57,040 --> 00:47:01,080
लंबन तो है तो इसका

645
00:47:01,080 --> 00:47:05,280
अर्थ है और इसके साथ ही साथ निरुक्त मेंही अनेकानेक जगह उन्होंने परंपरा

646
00:47:05,280 --> 00:47:08,520
की बात की ग परंपरा प्राप्त अर्थ में आपको बता रहा हूं परंपरा प्राप्त अर्थ

647
00:47:08,520 --> 00:47:12,600
में आपको बता रहा हूं तो क्या उनके एक कथन से दूसरे कथन को

648
00:47:12,600 --> 00:47:16,800
काट दिया जाए या ऐसा अर्थ निकाला जाए जिससे दोनों का मान रह जाए

649
00:47:16,800 --> 00:47:22,800
सामंजस्य कहां है अर्ध अर्ध कुकुट न्याय करोगे

650
00:47:23,160 --> 00:47:27,200
क्या कहां है सामंजस भाई अगर वो

651
00:47:27,200 --> 00:47:31,480
यह कह रहे हैं कि परंपरा प्राप्त अर्थ और यह कह रहे हैं कि

652
00:47:31,480 --> 00:47:35,800
जो है तब आपका तर्क आपका गुरु होगा तो इन दोनों में सामंजस्य कहां

653
00:47:35,800 --> 00:47:39,840
है सामंजस्य यही है कि जब हमारे पास

654
00:47:39,840 --> 00:47:43,920
में गुरु नहीं है तो हमें वहां पर तर्क के सारे आगे बढ़ना होता है

655
00:47:43,920 --> 00:47:48,000
यह सामंजस्य है इसका मतलब ये नहीं कि गुरु तत्व का खंडन ही कर दिया गुरु होना ही

656
00:47:48,000 --> 00:47:54,000
नहीं चाहिए

657
00:48:06,000 --> 00:48:10,280
आर्य समाजी के वह युवा बंगाली

658
00:48:10,280 --> 00:48:14,480
भाई साहब की बात नहीं कर रहा हूं जो युवा है उनकी बात कर रहा हूं

659
00:48:14,480 --> 00:48:18,480
वह क्या करते हैं अपने चैनल पर जाएंगे और अपने आप को खुद ही योद्धा में यह कर

660
00:48:18,480 --> 00:48:22,760
दूंगा वो कर दूंगा अरे भाई तुमने सामने वाले को मौका नहीं दिया सामना

661
00:48:22,760 --> 00:48:27,000
हुआ नहीं बस अपने ही आप अपनी वो कर द

662
00:48:27,000 --> 00:48:31,120
मैं यह कर दूंगा मैं व कर दूंगा यह हो जाएगा वो हो जाएगा

663
00:48:31,120 --> 00:48:35,440
तो इससे य प्रतीत होता है कि जो काशी का शास्त्रार्थ इत्यादि जो मिथ्या

664
00:48:35,440 --> 00:48:39,520
फैलाई गई है वो मिथ्या ही है ऐसे ही किया होगा

665
00:48:39,520 --> 00:48:43,560
भाई कहां से सीख रहे हो जब तक वह आमना सामना हुआ नहीं तो

666
00:48:43,560 --> 00:48:47,560
अपने आप को विजेता क्यों कह रहे हो हमने तो नहीं

667
00:48:47,560 --> 00:48:51,600
कहा स्वघोषित विजेता बनना सिखाता है क्यार समाज

668
00:48:51,600 --> 00:48:55,800
आप लोगों को इस मामले में बंगाली भाई साहब बढ़िया है

669
00:48:55,800 --> 00:49:01,680
उन्होने कहीं भी स का बातें नहीं की कि हम जीत गए ये कर दिया वो कर

670
00:49:01,680 --> 00:49:07,680
दिया

671
00:49:10,600 --> 00:49:14,760
हम अब बात कर लेते हैं कि

672
00:49:14,760 --> 00:49:19,000
ये जो युवा है जिन्होंने मर्यादा को लांघा है उन्होंने हमारे एक वीडियो को

673
00:49:19,000 --> 00:49:23,120
भी उसमें यूज किया है हमारा विरोध

674
00:49:23,120 --> 00:49:27,160
प्रकट करने के लिए हमारी असफलता को प्रस्तुत करने के लिए

675
00:49:27,160 --> 00:49:31,560
उसमें क्या है कि कुछ वर्षों पूर्व जब

676
00:49:31,560 --> 00:49:35,600
मुस्लिम से मेरी बात हो रही थी तो मैंने वहां पर यही तर्क कहा था कि

677
00:49:35,600 --> 00:49:39,640
क्या आपका ईश्वर सब कुछ कर सकता है और उसमें बात हो रही वह बोल

678
00:49:39,640 --> 00:49:43,680
रहे हैं कि वहां पर क्या ईश्वर एक्जिस्टेंस से बाहर जा सकता है मर

679
00:49:43,680 --> 00:49:48,360
सकता है तो वहां पर वही व्यवहार और परमार्थ की बात मैं उनको बताना चाह रहा हूं

680
00:49:48,360 --> 00:49:52,440
मगर दो तरीके से चर्चा होती है एक होती है कि हम एक

681
00:49:52,440 --> 00:49:56,800
बात पर अड़ जाए उसको खत्म ही ना होने दे मगर जब हमें अपनी चीजें

682
00:49:56,800 --> 00:50:01,280
मिल जाती

683
00:50:01,280 --> 00:50:05,440
हैं हां भाई साहब अरे इनको मत लो यार इन्होंने इतनी उल्टी

684
00:50:05,440 --> 00:50:09,720
सीधी बातें की मत लो इन्हे मर्यादा

685
00:50:09,720 --> 00:50:13,840
का उल्लंघन करने के वाले के साथ मंच साझा नहीं करते

686
00:50:13,840 --> 00:50:17,920
हम ऋषि उवाच ने किया था हम अड़े रहे हमने आज तक नहीं किया

687
00:50:17,920 --> 00:50:22,560
क्यों करे भाई मंच साझा तुमने तो तू तड़क नंगा बंगा सब बोल दिया

688
00:50:22,560 --> 00:50:27,840
अब हम तुमसे बातचीत करें कभी साहस हो तो सामने आओ

689
00:50:27,840 --> 00:50:32,360
तब पता चले जो अपने आप को स्वघोषित विजेता सिद्ध करते हो सामने

690
00:50:32,360 --> 00:50:36,600
आओ फिर वही शब्द बोलो हम वही बोलेंगे जो अभी बोल रहे हैं

691
00:50:36,600 --> 00:50:40,880
यह है धर्म जो किसी भी देश काल परिस्थिति में नहीं बदलता हमने धारण

692
00:50:40,880 --> 00:50:44,960
किया ना उसे हमारे शब्द ऐसे हैं जब तुम सामने होगे तब भी

693
00:50:44,960 --> 00:50:49,400
ऐसे ही बोलेंगे क्या तुम्हारे हैं नहीं है

694
00:50:49,400 --> 00:50:53,560
जब तक तुम्हारा चेहरा काल कोटरी में है तब तक तुम वैसे बोल

695
00:50:53,560 --> 00:50:57,640
रहे हो और जैसे ही तुम्हारा चेहरा रिवील होगा जैसे ही

696
00:50:57,640 --> 00:51:01,640
तुम्हारी पहचान रिवील होगी तुम्हारे शब्द बदल जाएंगे ये है अधर्म जिसको

697
00:51:01,640 --> 00:51:05,960
त्यागना पड़ जाए इसको कहते हैं

698
00:51:05,960 --> 00:51:10,080
अधर्म धर्म की रक्षा करने की बात करने से पहले धर्म को धारण

699
00:51:10,080 --> 00:51:14,840
करना

700
00:51:14,840 --> 00:51:18,960
सीखो तो वह जो बात हो रही थी जब हम जब

701
00:51:18,960 --> 00:51:23,040
हमें हमारी चीज मिल गई कि भाई सामने वाले का ईश्वर अवतार नहीं ले सकता और ऐसे

702
00:51:23,040 --> 00:51:27,120
हमने कितनी जगह किया है जब आर्य समाज से चर्चा करने जाते कोई विद्रोह

703
00:51:27,120 --> 00:51:31,360
थोड़ी ना कर देते वहा पर नहीं नहीं ईश्वर अवतार वो बिल्कुल अटक ही गए

704
00:51:31,360 --> 00:51:35,440
कुछ हमें प्राप्त हो गई चीज अब अगला प्रश्न अगर हम वहां पर आगे अगर एक ही

705
00:51:35,440 --> 00:51:39,600
बात पर अटक जाएंगे तो अगली चीजों पर कैसे जाएंगे तो इसलिए जब

706
00:51:39,600 --> 00:51:44,320
हमें वहां पर यह प्राप्त हो गया कि इनका ईश्वर वादित है उसको स्वीकार कर रहे हैं

707
00:51:44,320 --> 00:51:48,560
हमने उनसे पूछा कि अगर वह

708
00:51:48,560 --> 00:51:52,560
सब कुछ नहीं कर अगर वह बुरे काम नहीं कर सकता तो क्या बुराई को बनाना बुराई

709
00:51:52,560 --> 00:51:57,240
नहीं है अटक गए उसमें मौलाना जी

710
00:51:57,240 --> 00:52:01,320
वो कह रहे कि नहीं ईश्वर जो है बुरे कार्य नहीं कर सकता मैंने कहा बुराई को बनाना

711
00:52:01,320 --> 00:52:05,440
बुराई नहीं है राक्षस को बनाना बुराई नहीं है तो हमने अपने

712
00:52:05,440 --> 00:52:09,720
जानकारी से यथा सामर्थ और वहां पर हम उनकी उसमें है चर्चा

713
00:52:09,720 --> 00:52:13,960
में तब अंततोगत्वा उने हमें म्यूट करना पड़ा हमारे ना चाहते हुए

714
00:52:13,960 --> 00:52:18,080
हटाना पड़ा मगर हमें काफी वहां से उस दिन पहली अच्छा

715
00:52:18,080 --> 00:52:22,200
यह भी सोचिए आप कायर कह रहे हैं आप

716
00:52:22,200 --> 00:52:26,680
उसके साथ खड़े हैं जो अपना मुंह काला करके मुंह छुपा करके

717
00:52:26,680 --> 00:52:29,920
उल्टी सीधी चीजें कर रहा है स्वयं को धर्म रक्षक खपत कर रहा है

718
00:52:29,920 --> 00:52:34,080
और किसके विपक्ष में खड़े हैं जो व्यक्ति पहली चर्चा करने जाता

719
00:52:34,080 --> 00:52:38,120
है मुस्लिमों से और अपने चेहरे के साथ जाता

720
00:52:38,120 --> 00:52:42,160
है चेहरे के साथ ठीक

721
00:52:42,160 --> 00:52:46,160
है और फिर वहां पर मुस्लिमों के सिद्धांतों का खंडन

722
00:52:46,160 --> 00:52:50,360
भी करता है नास्तिकों का उत्तर नहीं है मुस्लिमों के पास क्योंकि उनका ईश्वर

723
00:52:50,360 --> 00:52:54,440
सर्वशक्तिमान नहीं है जिसका ईश्वर सर्वशक्तिमान होगा

724
00:52:54,440 --> 00:53:00,440
उसी के पास नास्तिकों का उत्तर

725
00:53:00,560 --> 00:53:04,840
होगा और फिर आगे

726
00:53:04,840 --> 00:53:09,480
उसकी सबसे रोचक बात पता है क्या थी वो यह थी उस चर्चा की सबसे रोचक बात

727
00:53:09,480 --> 00:53:14,200
कि वहां पर मुझे जो प्रॉब्लम आई उन लोगों को ध्वस्त करने

728
00:53:14,200 --> 00:53:18,320
करते समय उनकी बातों को वो प्रॉब्लम किसकी वजह से आई थी पता है आरे

729
00:53:18,320 --> 00:53:22,400
समाज इस कौन क्या बात है यह नहीं

730
00:53:22,400 --> 00:53:26,600
दिखाओगे उसी चर्चा में आई जब मैं कह रहा हूं कि ईश्वर सब कुछ

731
00:53:26,600 --> 00:53:31,840
सकता तो वो मुझे कह रहे हैं कि तुम्हारे यहां के आर समाज वाले तो ऐसा नहीं मानते

732
00:53:31,840 --> 00:53:36,520
लो हो गया कौन कर रहा है उनकी मदद

733
00:53:36,520 --> 00:53:40,680
अरे भाई सामने से दिख रहे हो कि हा हम बहुत विरोध कर रहे हैं

734
00:53:40,680 --> 00:53:44,760
प्रत्यक्ष रूप से तो उनका साथ ही दे रहे हो सैद्धांतिक तौर पर तुम्हारा

735
00:53:44,760 --> 00:53:45,260
ही आलंबन

736
00:53:45,240 --> 00:53:49,440
ले रहे हैं तुम्हारे भाई को दबाने के लिए व ईश्वर

737
00:53:49,440 --> 00:53:55,440
कण कण में नहीं है इसकन की गीता का उदाहरण दे दिया उन्होंने

738
00:53:56,680 --> 00:54:00,680
किसने की उनकी मदद इसकन और आर्य समाज

739
00:54:00,680 --> 00:54:05,280
ने देखो वो वीडियो जाकर के पूरा किसने की थी उनकी मदद

740
00:54:05,280 --> 00:54:09,360
परंपरा जब उन्होंने जब आपका आलंबन आर समाज

741
00:54:09,360 --> 00:54:13,440
यों का आलंबन लेकर मुझे कहा था ना कि ऐसा वो तो ऐसा नहीं मानते तो मैंने कहा

742
00:54:13,440 --> 00:54:17,560
था परंपरा कहां है उनकी बताओ मुझे और फिर परंपरा परंपरा

743
00:54:17,560 --> 00:54:23,560
पर चलते चलते कुछ बहुत सारी बातें हो गई फिर हटा दिया

744
00:54:24,240 --> 00:54:28,360
गया तो वहां सिद्ध है

745
00:54:28,360 --> 00:54:32,880
कि कैसे उनकी सहायता हो रही है सनातन सिद्धांतों का विरोध करने में

746
00:54:32,880 --> 00:54:36,440
देखो आप जाकर

747
00:54:36,440 --> 00:54:40,440
के और मुझे सबसे आश्चर्य चकित कर देने

748
00:54:40,440 --> 00:54:44,600
वाली बात यह लगी कि हमारी इतनी सारी इनके लोगों के साथ

749
00:54:44,600 --> 00:54:50,600
चर्चा हो चुकी है वरिष्ठ लोगों के साथ हो चुकी है आर्य समाज की

750
00:54:50,600 --> 00:54:55,400
इंटरनेशनल प्रचारक और जो है प्रतिनिधि मंडल की अध्यक्ष

751
00:54:55,400 --> 00:54:58,360
अध्यक्षा

752
00:54:58,360 --> 00:55:02,560
हां उनके साथ चर्चा हो चुकी है जो वहां के हैं एक अच्छे खासे

753
00:55:02,560 --> 00:55:06,760
व्यक्ति थे उनके साथ चर्चा हो चुकी है आपको किसी चर्चा में ऐसा

754
00:55:06,760 --> 00:55:10,840
कोई दृश्य नहीं मिला जिसमें आवान निरुत्तर हुआ हो जो आपको

755
00:55:10,840 --> 00:55:15,040
जिहादियों की शरणागत होना पड़ रहा है अपने भाई को

756
00:55:15,040 --> 00:55:19,800
नीचा दिखाने के लिए दूसरों की शरण में जाना पड़ रहा है वाह

757
00:55:19,800 --> 00:55:24,360
वाह हिंदू

758
00:55:24,360 --> 00:55:28,760
वाह कितना अच्छा लॉजिक है ना

759
00:55:28,760 --> 00:55:33,000
कि देखो हम तुम्हें गिराने के लिए वहां भी चले जाएंगे वहां से ले आएंगे रे थे वहां

760
00:55:33,000 --> 00:55:37,040
क्योंकि हमारा कोई व्यक्ति तुमको निरुत्तर नहीं कर पाया तो कहीं से तुम्हारी

761
00:55:37,040 --> 00:55:41,360
कटिंग बटिंग निकाल कर के हम तुम्हें वो करता हुआ साबित करेंगे निरुत्तर

762
00:55:41,360 --> 00:55:43,600
होता

763
00:55:43,600 --> 00:55:46,920
हुआ क्या बात

764
00:55:46,920 --> 00:55:51,040
है अरे सनातनी तो कहते हैं अभी मैंने अजय

765
00:55:51,040 --> 00:55:55,040
हरे का एक वो देखा ट्वीट था क्या था पता नहीं उसमें लिखा था कि हमारी

766
00:55:55,040 --> 00:55:59,320
आपस की लड़ाई है अरे भाई आपस की लड़ाई है इसीलिए

767
00:55:59,320 --> 00:56:05,000
तुम जिहादियों के य जा रहे हो अपने भाई की कटिंग

768
00:56:05,000 --> 00:56:09,280
निकालने यह वर्चस्व की लड़ाई है यह धर्म

769
00:56:09,280 --> 00:56:13,280
के लिए युद्ध नहीं है यह ईश्वर के लिए

770
00:56:13,280 --> 00:56:18,240
युद्ध नहीं है यह अपने तंत्र के लिए युद्ध है

771
00:56:18,240 --> 00:56:22,840
संस्था निता के लिए युद्ध है व्यक्ति निता के लिए युद्ध

772
00:56:22,840 --> 00:56:26,880
है ईश्वर और धर्म के लिए नहीं है य युद्ध ना धारण किया

773
00:56:26,880 --> 00:56:31,160
है और ना ही उसका प्रतिपादन है

774
00:56:31,160 --> 00:56:35,360
आपका भाई कहीं जा रहा है सामने वाले को चुप

775
00:56:35,360 --> 00:56:40,240
कराने वो आपका आलंबन ले देखो कैसे एक दूसरे की मदद हो रही है देखिए

776
00:56:40,240 --> 00:56:46,240
यह भी देखिए वो इनका आलंबन ले रहा है मुझे दबाने के लिए और ये उसका आलंबन ले रहे

777
00:56:46,480 --> 00:56:50,640
हैं अब कौन है सनातनी ये ऐसी सिचुएशन

778
00:56:50,640 --> 00:56:54,640
से पता चलता है आपको उसका आलंबन लेना

779
00:56:54,640 --> 00:56:58,840
है अपने भाई को दबाने के लिए उसको आपका आलंबन लेना है आपके भाई

780
00:56:58,840 --> 00:57:04,840
को दबाने के लिए और यह आपका भाई है आप दोनों एक साइड हो वो एक साइड

781
00:57:08,840 --> 00:57:12,880
है और भाई यह सब बातें मत करना कि यह सब आपको पता

782
00:57:12,880 --> 00:57:17,240
नहीं है आपकी बात कर रहा हूं बंगाली भाई साहब आप बड़े मर्यादित

783
00:57:17,240 --> 00:57:21,320
व्यक्ति है अच्छे अच्छा लगा कम से कम मंच पर तो अच्छे

784
00:57:21,320 --> 00:57:25,400
से बात करते हैं बाकी आपकी टेलीग्राम और टेलीफोन चीजें तो

785
00:57:25,400 --> 00:57:29,560
के बारे में मैं नहीं कहूंगा मगर मंच पर पब्लिकली सार्वजनिक रूप

786
00:57:29,560 --> 00:57:35,280
से ठीक से बात करते हैं अच्छा लगा इसके लिए

787
00:57:35,280 --> 00:57:40,200
और अंत में मैं यह कहूंगा कि

788
00:57:40,200 --> 00:57:44,320
सबसे पहले मैं बंगाली भाई साहब से कहूंगा कि आपने जो यह कहा

789
00:57:44,320 --> 00:57:48,360
कि हमने उसको भेजा था आपने उसको निकाल दिया इसकन का हमारा लड़का

790
00:57:48,360 --> 00:57:52,520
था फिर वही बात उसको अपने साथ क्यों खड़ा करते हो भाई जो अपनी

791
00:57:52,520 --> 00:57:56,560
बात पर नहीं खड़ा रह रहा है उस पूरे साढ़े तीन घंटे में वो कितनी बार

792
00:57:56,560 --> 00:58:00,560
अपनी बातों से बदला है जब वो अपनी बात पर नहीं रुक रहा है उसके

793
00:58:00,560 --> 00:58:05,160
साथ उसको अपने साथ क्यों खड़ा करते हो आप आप तो मैच्योर पर्सन दिखते हैं मुझे

794
00:58:05,160 --> 00:58:09,200
और हमने जितने मैच्योर पर्सन के साथ में वार्ता की

795
00:58:09,200 --> 00:58:13,680
है देख लीजिए कहीं पर कि कोई भी व्यक्ति हमसे अभद्रता

796
00:58:13,680 --> 00:58:17,760
अमर्या अनियमितता इस तरह का लांछन हमने लगा सके तो

797
00:58:17,760 --> 00:58:21,960
आप आइए चर्चा के लिए आपने मर्यादा में रहकर

798
00:58:21,960 --> 00:58:23,920
बातें की है आप चर्चा के लिए

799
00:58:23,920 --> 00:58:28,080
आइए आवश्यक नहीं है कि चैनल हमारा हो या आपका ही हो

800
00:58:28,080 --> 00:58:32,120
आप संपर्क करिए और कोई मध्यस्थता वाला चैनल देखेंगे उस पर चर्चा

801
00:58:32,120 --> 00:58:38,120
कर लेंगे कोई तो एक निष्कर्ष पूर्वक समीकरण तो प्राप्त

802
00:58:38,800 --> 00:58:43,280
हो आइए मगर यह जो वह है स्कन

803
00:58:43,280 --> 00:58:47,440
का जो लड़का आया था य पर उसका नाम लेकर के

804
00:58:47,440 --> 00:58:52,040
चर्चा से दूर रहने का जो बहाना है यह मत लगाइए

805
00:58:52,040 --> 00:58:56,840
यह मत लगाइए मॉडरेटर रख लिया जाएगा जैसे आप कहोगे वैसे हो जाएगी

806
00:58:56,840 --> 00:59:01,080
संपर्क करो 7408

807
00:59:01,080 --> 00:59:06,000
30169 और अंत तो गत्वा

808
00:59:06,000 --> 00:59:10,000
जो यह अजय आर्या है उनके शरीके के जो और लोग है जो

809
00:59:10,000 --> 00:59:14,160
अपना काला मुंह करा करके चेहरा छुपा करके धर्म रक्षक

810
00:59:14,160 --> 00:59:19,120
बनने का डंका बजाते हुए और कुछ

811
00:59:19,120 --> 00:59:23,960
निचले स्तर की हरकतें कर रहे हैं ओछी हरकतें कर रहे हैं

812
00:59:23,960 --> 00:59:28,040
इनको मैं कहना चाहूंगा कि थोड़ा सा अपने

813
00:59:28,040 --> 00:59:32,240
भोजन इत्यादि में पौष्टिक आहार ऐड करें

814
00:59:32,240 --> 00:59:36,280
जिससे कि प्रोटीन की कमी हो मांसपेशियों में कैल्शियम की

815
00:59:36,280 --> 00:59:41,240
कमी हो हड्डियों में तो उसकी पूर्ति हो

816
00:59:41,240 --> 00:59:45,320
जिनका अभाव रहा है शायद आपके जन्म से जो आप आगे

817
00:59:45,320 --> 00:59:49,720
चले हो तोन इस तरह का आपको आहार विहार नहीं मिल पाया जिनके

818
00:59:49,720 --> 00:59:53,920
कारण आपको जो है मुंह छुपा कर के घूमना पड़ रहा

819
00:59:53,920 --> 00:59:58,200
है और अपने मत को अपने सिद्धांत

820
00:59:58,200 --> 01:00:02,560
को अपने पक्ष को रखने के लिए मीम्स का सहारा लेना पड़ रहा है

821
01:00:02,560 --> 01:00:06,720
गालियों का सहारा लेना पड़ रहा है अभद्र व्यवहार का सहारा लेना पड़ रहा है ू

822
01:00:06,720 --> 01:00:10,720
तड़ाक का सहारा लेना पड़ रहा है क्योंकि सिद्धांत में दम नहीं है ना सिद्धांत में

823
01:00:10,720 --> 01:00:15,040
दम इसलिए नहीं भोजन इत्यादि में कमी रही निष्ठा पूर्वक व उपलब्ध

824
01:00:15,040 --> 01:00:16,480
नहीं कराया गया बचपन

825
01:00:16,480 --> 01:00:21,040
से तो थोड़ा सा यह सब चीजें ऐड करो प्रोटीन फैट और कार्ब टाइप की चीजें

826
01:00:21,040 --> 01:00:25,520
सस्टेंड एनर्जी देने वाला कार्बोहाइड्रेट ढूंढो है ना होल ग्रेन वाले

827
01:00:25,520 --> 01:00:29,880
ड करो शाकाहारी होंगे आर समाजी है तो

828
01:00:29,880 --> 01:00:34,360
हम भी शाकाहारी है तो ऐसा फूड खाओ जिसमें की प्रोटीन ज्यादा हो थोड़ा सा

829
01:00:34,360 --> 01:00:38,400
जिससे की पहली बात तो सकारात्मकता है जब शरीर में

830
01:00:38,400 --> 01:00:42,720
एनर्जी नहीं होती है ना तो नकारात्मकता आती है बहुत ज्यादा जब एनर्जी

831
01:00:42,720 --> 01:00:47,080
आएगी तो आपके शरीर में थोड़ी सकारात्मकता आएगी सकारात्मक

832
01:00:47,080 --> 01:00:51,280
थोड़ा सजन दृष्टिकोण से देखिए केवल

833
01:00:51,280 --> 01:00:57,280
विध्वंसक दृष्टिकोण से ना देखिए तो थोड़ा आहार विहार में थोड़ा ठीक करो

834
01:00:57,480 --> 01:01:01,680
और अगर ना मिले तो हमसे संपर्क करो इस बारे में

835
01:01:01,680 --> 01:01:05,920
हम आपको गाइड करेंगे जो आपका अभाव रहा है बचपन से निष्ठा पूर्वक आपको

836
01:01:05,920 --> 01:01:10,080
उपलब्ध नहीं कराया गया दुर्भाग्यवश वह हम आपको गाइड करेंगे

837
01:01:10,080 --> 01:01:14,280
अगर आवश्यकता पड़ी तो आपको देंगे भी केवल मार्गदर्शन नहीं करेंगे

838
01:01:14,280 --> 01:01:18,280
वह आपको देंगे और हष्ट पुष्ट बनो जिससे कि आपको

839
01:01:18,280 --> 01:01:22,520
अपना चेहरा ना छिपाना पड़े कायर ना बनना पड़े

840
01:01:22,520 --> 01:01:26,800
मुंह काला करके ना घूमना पड़े सामना कर पा पाओ धर्म की रक्षा

841
01:01:26,800 --> 01:01:31,000
के लिए वास्तविक धर्म रक्षक बन पाओ केवल

842
01:01:31,000 --> 01:01:31,640
ढूं ना

843
01:01:31,640 --> 01:01:35,480
करना पड़े है

844
01:01:35,480 --> 01:01:39,560
ना तो संपर्क करना प्रोटीन फैट और कार्ब के बारे में अच्छे

845
01:01:39,560 --> 01:01:43,760
से आपको बताएंगे वाकई में वचन दे रहे हैं क्योंकि हमें हमारी

846
01:01:43,760 --> 01:01:49,560
माता ने बहुत अच्छे से उपलब्ध कराई ये सब चीजें बचपन

847
01:01:49,560 --> 01:01:53,720
से दुख इत्यादि में अच्छे से ऐड करो और उनका

848
01:01:53,720 --> 01:01:57,800
सेवन करो और फिर आप अष्ट पुष्ट बनकर वैसे अभी आपकी

849
01:01:57,800 --> 01:02:01,840
जो आयु है बहुत अल्प है जिसके कारण आप इस तरह की उ सं कलता कर

850
01:02:01,840 --> 01:02:06,040
रहे हो आशा करूंगा कि जिस धर्म का प्रचार करने का दावा

851
01:02:06,040 --> 01:02:10,280
कर रहे हो आप मत ये जो पुराणों को मानने वाला मत

852
01:02:10,280 --> 01:02:14,400
है वेदों के साथ उनको मत मानो अरे स्वामी दयानंद जी ने जो सिखाया

853
01:02:14,400 --> 01:02:18,480
वही मान लो उसी से हो जाएगा भला

854
01:02:18,480 --> 01:02:23,120
वो भी नहीं मान रहे हो ना अरे राम को आदर्श तो वो भी मानते थे ना

855
01:02:23,120 --> 01:02:27,360
तो कहां है रल रीत चदा चली आ प्राण जाई प्रवचन ना जा

856
01:02:27,360 --> 01:02:31,520
कहां है केवल औरों को मनवाना

857
01:02:31,520 --> 01:02:36,160
चाहते हो अपनी चीजों को खुद नहीं धारण करेंगे

858
01:02:36,160 --> 01:02:40,160
ठीक है तो यह सब ऐड करो अपनी डाइट में मदद चाहिए हो

859
01:02:40,160 --> 01:02:44,240
तो ले लेना और जिससे कि ये जो कायरता वाला जो अंधकार

860
01:02:44,240 --> 01:02:46,680
पूर्ण जीवन है ना अंधेरे वाला केवल

861
01:02:46,680 --> 01:02:50,720
आवाज आती है बोला दिखता है उससे बाहर आओ प्रकाश में आओ

862
01:02:50,720 --> 01:02:54,840
प्रकाश पड़ी है ना सत्यार्थ प्रकाश कहां है आपके

863
01:02:54,840 --> 01:02:59,160
चैनलों में प्रकाश भाई अंधा कुप्प डला है यहां है प्रकाश तो

864
01:02:59,160 --> 01:03:03,200
दिख रहा है ना चेहरा यह क्यों दिख रहा है पता

865
01:03:03,200 --> 01:03:07,720
है गुरु मुख से भगवत गीता का श्लोक सुना था

866
01:03:07,720 --> 01:03:12,040
नैनम छिंदंति शस्त्राणि नैनम दहति पावक न चैन

867
01:03:12,040 --> 01:03:16,160
क्ले दंत शति मारता जिसको आत्मा

868
01:03:16,160 --> 01:03:20,200
का ज्ञान हो जाता है ना वह आपके जैसे लोगों द्वारा दी जाने वाली

869
01:03:20,200 --> 01:03:26,200
जो गीदर भब किया होती है उनसे घबराता नहीं है भ खत्म हो जाता है

870
01:03:27,400 --> 01:03:31,920
हम तो वह लोग हैं जो अपने जीवन का मोक्ष पा चुके हैं केवल

871
01:03:31,920 --> 01:03:37,920
धर्म रक्षा के लिए शरीर है वो लोग हैं

872
01:03:41,120 --> 01:03:47,120
हम जय श्री राम किसी को आना है तो

873
01:03:49,440 --> 01:03:55,440
बताएं चेहरे के साथ यदि कोई आ सकता है

874
01:03:58,680 --> 01:04:03,640
हा रजत जी बताइए शिवांश जी

875
01:04:03,640 --> 01:04:07,760
मेरा यह क्यक मेरा यह मानना है जैसे

876
01:04:07,760 --> 01:04:11,760
मैंने समा इमेट इनफॉर्मेटिव क्वेन

877
01:04:11,760 --> 01:04:16,000
बात नहीं करेंगे आज जो अभी प्रासंगिक विषय चल रहा है उस बात

878
01:04:16,000 --> 01:04:20,000
करेंगे हा हा तो बस यही देख के थोड़ा

879
01:04:20,000 --> 01:04:24,040
बुरा लगता है जैसे बहुत सारे चैनल है एक सनातन धर्म डिकोडेड है

880
01:04:24,040 --> 01:04:28,040
है ना उसने इन के संस्थापक आचार्य उनको बहुत

881
01:04:28,040 --> 01:04:32,280
बहुत बुरा कहा मुझे ऐसा लगता है कि यह लोग इमेच्योर पर्सन

882
01:04:32,280 --> 01:04:36,520
है असल में जो मैच्योर पर्सन है वह कभी किसी आचार्य को

883
01:04:36,520 --> 01:04:40,600
भला बुरा कह ही नहीं सकता क्योंकि चाहे जो

884
01:04:40,600 --> 01:04:42,920
भी हो छोटी छोटी बड़ी गलती

885
01:04:42,920 --> 01:04:47,000
किसी भी आचार्य से हुई हो लेकिन आचार्य हर हर

886
01:04:47,000 --> 01:04:51,000
रूप में रिस्पेक्टेड होते हैं चाहे दयानंद हो चाहे प्रभुपाद

887
01:04:51,000 --> 01:04:55,280
हो चाहे कोई भी हो कोई भी और जैसे मैंने शंकराचार्य

888
01:04:55,280 --> 01:04:59,400
जी का भी एक पुरी के शंकराचार्य जी है उनका मैंने

889
01:04:59,400 --> 01:05:03,440
वीडियो देखा था तो व आर समाज को जब उनसे

890
01:05:03,440 --> 01:05:07,560
किसी ने दयानंद जी के बारे में प्रश्न किया तो उन्होंने कहा था कि वह

891
01:05:07,560 --> 01:05:11,680
रामानुजा चार को ही मानते थे बस उनमें वह दो चीजों को नहीं

892
01:05:11,680 --> 01:05:16,160
मानते थे वर्ण व्यवस्था और क्या कहते

893
01:05:16,160 --> 01:05:20,280
जम से कर हा

894
01:05:20,280 --> 01:05:24,560
हा तो मेरा मेरा इसमें एक पॉइंट है कि ऐसा

895
01:05:24,560 --> 01:05:28,920
क्यों हुआ यह आर समाज अभी 200 साल पहले वो एस्टेब्लिश हुई है

896
01:05:28,920 --> 01:05:33,280
तो यह एक प्रकार से एक वैसी संस्था थी जो धार्मिक और

897
01:05:33,280 --> 01:05:37,960
सामाजिक सुधार आंदोलन थी वैसे लेना चाहिए हमें

898
01:05:37,960 --> 01:05:42,040
तो इसमें कोई मतलब इसमें वेदों को स्वीकार किया गया मतलब एक

899
01:05:42,040 --> 01:05:46,120
प्रकार का वो ऑर्गेनाइजेशन होता है ना उस प्रकार से था बाकी इसमें

900
01:05:46,120 --> 01:05:50,200
ऐसा लड़ना नहीं चाहिए जैसे कि नहीं हां वो ये ये

901
01:05:50,200 --> 01:05:54,440
मैं भी ढूंढ रहा था किच्छा की चीज आ रही है सामने

902
01:05:54,440 --> 01:05:58,280
एक चीज मैं बताना चाहूंगा एक यश नाम का लड़का था यश

903
01:05:58,280 --> 01:06:02,360
यश तिवारी वो वीडियोस

904
01:06:02,360 --> 01:06:06,360
बनाता था इनफॉर्मेटिव वो स्कन पर भी बोलता था और बाद में उसने शायद आर समाज

905
01:06:06,360 --> 01:06:10,480
पर भी बोला था मैं प्रयास करूंगा आपको वो

906
01:06:10,480 --> 01:06:14,640
कमेंट दिखाने का जब मैं अपना चैनल बैनल नहीं चलाता कुछ नहीं मैं वहां

907
01:06:14,640 --> 01:06:18,760
जाके कमेंट करता था भाई मर्यादा को मत लांगो आप मर्यादा को क्यों

908
01:06:18,760 --> 01:06:22,920
लांग रहे हैं आप केवल इंफॉर्मेशन दीजिए ना गाली गलोज क्यों कर रहे हैं ये

909
01:06:22,920 --> 01:06:27,240
मेरा वास्तविक स्वरूप है आज से करीब चा साल पहले का

910
01:06:27,240 --> 01:06:31,280
मैं वहां जाकर के सब सिखाता यह होता है ना धर्म जो

911
01:06:31,280 --> 01:06:35,400
देश काल परिस्थिति बस बदले ना अभी इनका

912
01:06:35,400 --> 01:06:39,400
क्या है यह जो काले घेरे काले गोले के साथ य लोग जो दिख रहे हैं य

913
01:06:39,400 --> 01:06:43,640
अजय आर्य हुआ या इसके जैसा इसके जैसा एक चैनल और है

914
01:06:43,640 --> 01:06:47,800
वो कौन है आरई करके दो दो मित्र है वो बनाते हैं

915
01:06:47,800 --> 01:06:51,920
वो भी ऐसे ही उसम मीम्स लगा रहे बीच में मि बर्गा तो ये

916
01:06:51,920 --> 01:06:56,120
जैसे ही इनके इनका चेहरा सामने आएगा इनका बात का तरीका

917
01:06:56,120 --> 01:07:00,200
बदल जाएगा ये क्या जब सामने मंच पर खड़े होंगे

918
01:07:00,200 --> 01:07:04,520
तब क्या मुझसे ऐसे बात करेंगे जैसे अभी कर रहे अपने चैनलों पर

919
01:07:04,520 --> 01:07:08,800
ये क्यों कर रहे हैं क्योंकि कुख्यात बने हुए

920
01:07:08,800 --> 01:07:12,960
हैं अब जैसे मैं इकन कानपुर कानपुर सेन कानपुर

921
01:07:12,960 --> 01:07:13,680
से कनेक्टेड

922
01:07:13,680 --> 01:07:17,920
काफी अच्छे लोग हैं ऐसा नहीं है कि वो व

923
01:07:17,920 --> 01:07:21,960
वो कहते हैं कि बुराई करते हैं कि वो है बस बस

924
01:07:21,960 --> 01:07:25,960
होता क्या है है ना शिवांश जी जैसे कुछ एक लोग बुरे आ जाते

925
01:07:25,960 --> 01:07:30,560
हैं तो वो बदनाम करने लगते हैं कि अरे यह तो मायावादी है यह तो अद्वैत

926
01:07:30,560 --> 01:07:34,640
वादी है मतलब ये अगर आप डीप डीप में आप जाओगे जैसे

927
01:07:34,640 --> 01:07:39,080
इकन की जो फाउंडेशन है वो गौड़ीय समाज से है तो यह बात शंकराचार्य

928
01:07:39,080 --> 01:07:43,080
जी ने भी कही है कि गौड़ीय समाज से उनको कोई मतलब सब लोग मानते हैं

929
01:07:43,080 --> 01:07:47,480
शंकराचार्य जी को जो इकन की जो स्वागत

930
01:07:47,480 --> 01:07:52,200
कियान जी गए थे वहां परिया समाज में बहुत

931
01:07:52,200 --> 01:07:56,400
अच्छा हा हा बस ये है कि इन

932
01:07:56,400 --> 01:08:00,480
एक थोड़ा अलग लेवल पर चली गई थोड़ा और बात यह भी आती है

933
01:08:00,480 --> 01:08:04,560
कि देखिए उसम कुछ चीज ऐसी है जो प्रभुपाद जी का विरोध मिलता है तो दुख

934
01:08:04,560 --> 01:08:08,960
होता है जैसे एक जगह एक मिला है कि

935
01:08:08,960 --> 01:08:13,280
अब पता नहीं कितना वो प्रमाणिक है बात य प्रभुपाद जी के नाम से वही भरोसा

936
01:08:13,280 --> 01:08:17,320
जा रहा है जो प्रभुपाद जी ने दिया है कि कुछ और है यह दिक्कत अब

937
01:08:17,320 --> 01:08:21,600
एक जगह लिखा है प्रभुपाद जी कृष्ण भगवान को राजल कह रहे

938
01:08:21,600 --> 01:08:25,800
बताइए अब ये बिल्कुल समझ से बाहर की चीज है एक तो भक्त

939
01:08:25,800 --> 01:08:29,040
भगवत भक्त वैष्णव और उसके बाद वो रासकल

940
01:08:29,040 --> 01:08:33,040
और तुलसीदास जी की निंदा कैसे कर सकता है नहीं कर सकते

941
01:08:33,040 --> 01:08:37,280
मगर उसमें कर रहे हैं ही ही वाज नॉट ए प्योर वैष्णव तो

942
01:08:37,280 --> 01:08:41,480
ये मुझे ऐसा दिखाई देता है कि अब स् कन का तंत्र वो तंत्र नहीं है जो प्रभुपाद

943
01:08:41,480 --> 01:08:45,560
जी ने शुरुआत किया था उनके नाम से कुछ ना कुछ चल रहा है

944
01:08:45,560 --> 01:08:49,640
यह बात है हां क्योंकि होता क्या है कि मैंने ये भी नहीं कहा कि क्या चल

945
01:08:49,640 --> 01:08:53,840
रहा है आप देखिए इसको कहते हैं मर्यादा मैंने ये भी नहीं कहा कि क्या चल रहा है

946
01:08:53,840 --> 01:08:58,040
मैंने कभी नहीं कहा कि स्न जो है क्या कहते बिजनेस कर रहा है ऐसे

947
01:08:58,040 --> 01:09:02,120
नहीं कहा मैंने कभी मैंने सदैव क्वेश्चन किया कि इस पर कारवाई

948
01:09:02,120 --> 01:09:07,400
हो इस पर जो है जांच

949
01:09:07,400 --> 01:09:11,200
हो

950
01:09:11,200 --> 01:09:15,200
जी तो मतलब मेरा यही है कि मतलब ऐसा तो है नहीं

951
01:09:15,200 --> 01:09:19,760
किय संस्था इन संस्था य संस्था भी चलती रहेगी

952
01:09:19,760 --> 01:09:24,080
पूरे ऑल ओवर वर्ल्ड में है आर समाज भी ल ओवर वर्ल्ड में है अभी

953
01:09:24,080 --> 01:09:28,400
जैसे मैंने गायत्री को भी मैंने थोड़ा देखा था तो गायत्री परिवार

954
01:09:28,400 --> 01:09:32,480
में थोड़ा यह रहता गायत्री मंत्र बता सबको व पढ़ा रहे

955
01:09:32,480 --> 01:09:36,720
हैं कोई भी कर सकता है और यहां पर जो जैसे प्योर

956
01:09:36,720 --> 01:09:41,000
जो मानते हैं जैसे आपने भी कहा था और फिर व धीरें शास्त्री है भागेश्वर

957
01:09:41,000 --> 01:09:45,360
धाम वाले उन्होने य बोते राघवाचार्य

958
01:09:45,360 --> 01:09:49,600
प्रेमानंद जी महाराज है और य राजेंद्र दास जी सबका सुन

959
01:09:49,600 --> 01:09:55,600
लीने बो के लिए राम भद्राचार्य भी म

960
01:09:56,480 --> 01:10:00,640
लेकिन जो आम आदमी जाता वो कंफ्यूज हो जाता है फिर उसको समझ में नहीं आता किसको माने

961
01:10:00,640 --> 01:10:04,720
किसको ना माने एक मैंने राघवाचार्य जी राम भद्राचार्य पर एक वीडियो

962
01:10:04,720 --> 01:10:08,880
आज तक एक वीडियो बनाया है प्रामाणिक परंपरा प्राप्त आचार्य के ऊपर

963
01:10:08,880 --> 01:10:12,960
एक वीडियो बनाया एक वीडियो और उसम क्या बात कही पता है

964
01:10:12,960 --> 01:10:17,120
मैंने उनसे ये कही कि उन्होंने एक जगह पर कहा था कि चारों शंकराचार्य

965
01:10:17,120 --> 01:10:21,120
में से कोई भी वो नहीं है संस्कृत ज्ञ जो

966
01:10:21,120 --> 01:10:25,400
मेरे से बात करते थे पाच मिनट उन्होंने ये कहा था और उस समय चल भी रहा था शंकराचार्य

967
01:10:25,400 --> 01:10:30,160
का बहुत विरोध तो मैंने देखिए कैसे वीडियो बनाया

968
01:10:30,160 --> 01:10:34,360
कि आचार मतलब बहुत सम्मान प्रकट कहीं पर तू तड़क

969
01:10:34,360 --> 01:10:38,400
नहीं कर दिया उनके लिए हमने कहीं पर और दोबारा कभी बनाया

970
01:10:38,400 --> 01:10:42,600
भी नहीं एक वीडियो ओनली बनाया है एक वीडियो और उसम मैंने

971
01:10:42,600 --> 01:10:46,680
केवल एक प्रश्न किया कि आपकी बात मुझे कहीं पर कुछ और कहीं पर कुछ सुनाई

972
01:10:46,680 --> 01:10:50,800
दे रही है दो तरह की बातें सुनता हूं तो आपकी कौन सी बात को क्यों माने

973
01:10:50,800 --> 01:10:55,560
बस इतना बता दीजिए बस इतना वीडियो बनाया प्रश्न पूछा केवल

974
01:10:55,560 --> 01:10:59,560
हाथ जोड़ कर हमने तो नहीं कर दिया कि वो जो

975
01:10:59,560 --> 01:11:03,640
राम भद्राचार्य जी है वो जो है हमारे सपोर्ट में नहीं है ऐसा कुछ है तो उनके

976
01:11:03,640 --> 01:11:08,160
उनके लिए तड़क बोलने लगे गाली देने लगे कुछ करने

977
01:11:08,160 --> 01:11:11,560
लगे अभी बीच में राम भद्राचार्य जी की

978
01:11:11,560 --> 01:11:15,960
उनसे भी हो गई थी जैसे स्वामी रामदेव के बारे में पता होगा पतंजलि के जो

979
01:11:15,960 --> 01:11:20,120
फाउंडर है वो वो आर समाज से ही आते हैं

980
01:11:20,120 --> 01:11:24,440
तो उनको उनके बीच वो थोड़ी हो गई थी राम भद्राचार्य

981
01:11:24,440 --> 01:11:28,480
की आप उनको महापुरुष मानते हैं ऐसा ऐसा कुछ हो गया

982
01:11:28,480 --> 01:11:33,360
था तो उसमें भी जबक जबक जो

983
01:11:33,360 --> 01:11:37,400
क्या कहते हैं बाबा रामदेव है वोह बागेश्वर धाम जी से जी के

984
01:11:37,400 --> 01:11:41,560
पास भी जाते हैं और राजेंद्र दास जी महाराज है वहां वो अरे

985
01:11:41,560 --> 01:11:45,720
शंकराचार्य जी के पास भी जगतगुरु के पास भी जा

986
01:11:45,720 --> 01:11:49,800
हां हा वहां पर भी तो यही है सब जो तो

987
01:11:49,800 --> 01:11:53,920
य ये मेरी रिक्वेस्ट है कि जो सच में जो मर्यादित

988
01:11:53,920 --> 01:11:58,240
भाषा बात करे और जो कांसेप्ट में बात कांसेप्ट से बात करना चाहे

989
01:11:58,240 --> 01:12:02,400
उसको आप ले जैसे मैंने भव्या के साथ एक आपका वीडियो देखा था

990
01:12:02,400 --> 01:12:06,440
तीन घंटे में कुछ हो ही नहीं पाया था व एक तरह से टाइम वेस्ट हो

991
01:12:06,440 --> 01:12:10,560
गया था एक तरीके से वो अपनी एक बात पर

992
01:12:10,560 --> 01:12:14,720
स्टैंड नहीं कर रहा था जैसे उसने कुछ बोला तो अगले जब उस पर बात करने लग

993
01:12:14,720 --> 01:12:19,200
तो छोड़ देता था बदल देता था स्टेटमेंट

994
01:12:19,200 --> 01:12:25,200
उसके चकर में होते होते साढ़े तीन घंटे लग गए हा

995
01:12:27,000 --> 01:12:31,000
जी रमेश जी बोले जय जगन्नाथ

996
01:12:31,000 --> 01:12:35,120
जय जगन्नाथ जय अभी जो बात हो रही थी वो

997
01:12:35,120 --> 01:12:39,640
जो आपके साथ लाइव कि थे तीन घंटे राधा कृष्ण

998
01:12:39,640 --> 01:12:43,640
जी तो उनका भी चैनल चेक कर रहा

999
01:12:43,640 --> 01:12:47,640
था आपने जो पहले बात बोली थी वो भी वही कर रहे हैं कि उनसे अगर कोई

1000
01:12:47,640 --> 01:12:51,680
भी सवाल पूछा जाए तो व जवाब ए टू लेक जड तक पूरा देते और इस

1001
01:12:51,680 --> 01:12:55,800
में भी ऐसा तो अभी आपके कुछ भी सवाल का जवाब कहीं प कुछ

1002
01:12:55,800 --> 01:13:00,080
दिया है हमने ये कहा था हमने तो ये कहा था वसे ला

1003
01:13:00,080 --> 01:13:04,120
दिखा रहे जो भी आने कहा है हा

1004
01:13:04,120 --> 01:13:08,120
हमने कहा है पहले से ही क है ये करके वो दिखा रहे हैं और इतना हसना आता है उन

1005
01:13:08,120 --> 01:13:12,400
चैनल जाके देखता हूं जैसे ईश्वर अल्ला एक है कि नहीं नहीं

1006
01:13:12,400 --> 01:13:16,440
ईश्वर अल्ला एक नहीं है है है नहीं है है अरे

1007
01:13:16,440 --> 01:13:21,080
भाई बात किस पर करें है प करें

1008
01:13:21,080 --> 01:13:25,200
नहीं फिर माधवाचार्य वो माधवाचार्य शास्त्री जी को मानते हो कि

1009
01:13:25,200 --> 01:13:29,320
नहीं नहीं मानते 2019 में हुए उसके बाद थोड़ी देर बाद

1010
01:13:29,320 --> 01:13:33,360
आगे आगे बढ़ गए तो मैंने अभी उनको अभी पूरी तरीके से नाय

1011
01:13:33,360 --> 01:13:37,360
नहीं किया है ना नहीं किया है बक अब लो भाई तु मानते हो नहीं

1012
01:13:37,360 --> 01:13:41,520
मानता नहीं हूं नाय नहीं किया है मानता नहीं पर नाय नहीं किया

1013
01:13:41,520 --> 01:13:42,240
है अच्छा

1014
01:13:42,240 --> 01:13:46,480
वो प्रमाणिक आचार्य नहीं है मैंने ये नहीं कहा व प्रमाणिक नहीं है मगर

1015
01:13:46,480 --> 01:13:49,360
मैं उनकी बात नहीं मानता

1016
01:13:49,360 --> 01:13:53,360
हूं अभी ईश्वर बिना किसी

1017
01:13:53,360 --> 01:13:57,600
प्रयोजन के सृष्टि का निर्माण करता है ईश्वर का स्वरूप भूत लक्षण है ईश्वर ईश्वर

1018
01:13:57,600 --> 01:14:01,840
है ही इसलिए क्योंकि उसने सृष्टि बनाई है है ना बिल्कुल मगर

1019
01:14:01,840 --> 01:14:05,840
वो वहा पर रील में बोल रहा है कि

1020
01:14:05,840 --> 01:14:10,080
ईश्वर जो है किसी भौतिक कारण से सृष्टि नहीं बनाते ठीक

1021
01:14:10,080 --> 01:14:14,480
है किस कारण से बनाते हैं नहीं पता

1022
01:14:14,480 --> 01:14:18,520
स बात तो वही हो गई तो इसमें आप

1023
01:14:18,520 --> 01:14:22,640
फिर मैं डिबेट जीत गया मैंने उसको हरा दिया अरे भाई जीत गए तो लोगों के पास

1024
01:14:22,640 --> 01:14:26,760
जा जाक क्यों कह रहे हो मुझे डिबेट करनी है जो जीत जाए

1025
01:14:26,760 --> 01:14:30,760
तो वो तो संतुष्ट रहे ना हम तो उसके बाद से नहीं परेशान है कि हमें आपका

1026
01:14:30,760 --> 01:14:35,600
आपको दोबारा लेना है ये सब

1027
01:14:35,600 --> 01:14:39,840
है सर्वशक्तिमान है कि नहीं शरीर अच्छा

1028
01:14:39,840 --> 01:14:43,840
शरीर को नष्ट करने वाली बात छोड़ दीजिए छोड़ दीजिए ईश्वर

1029
01:14:43,840 --> 01:14:47,920
अगर सर्वशक्तिमान है और हमारे सामने खड़ा है उसका

1030
01:14:47,920 --> 01:14:52,200
शरीर आप कह रहे हो शाश्वत है ठीक है

1031
01:14:52,200 --> 01:14:56,240
रूप बदल सकता है क्या हाथ इन सब में आ सकता

1032
01:14:56,240 --> 01:14:57,800
है क्या इन रूपों में

1033
01:14:57,800 --> 01:15:02,240
आ सकता है तो शाश्वत नहीं है शरीर शाश्वत नहीं है फिर

1034
01:15:02,240 --> 01:15:06,440
कोई तत्व है उससे डिफरेंट वो तत्व रूपों

1035
01:15:06,440 --> 01:15:11,080
में आपको दिख रहा है वो हो सकता है साक हो मगर अभी आपके लिए वो

1036
01:15:11,080 --> 01:15:15,200
दिखाई ना देने वाला रूप क्योंकि वो जो दिख रहा है वोह परिवर्तित

1037
01:15:15,200 --> 01:15:19,360
हो सकता है और जो परिवर्तनशील है व सनातन नहीं है शाश्वत नहीं

1038
01:15:19,360 --> 01:15:23,480
है जो अगर यह सवाल लोगों को बुरा लगता है क्या वो अपनी

1039
01:15:23,480 --> 01:15:27,760
देह का नाश कर सकता है मैं तो इसलिए बता रहा हूं कि यहां पर ईश्वर

1040
01:15:27,760 --> 01:15:32,200
नहीं है फिर भी उसकी सत्ता है ना शरीर ईश्वर का नहीं है अभी यहां पर

1041
01:15:32,200 --> 01:15:36,560
साक्षात मगर उसकी सत्ता है तो मैं आपको बता रहा हूं कि शरीर के बिना भी

1042
01:15:36,560 --> 01:15:40,560
सत्ता होती है यानी कि ईश्वर एजिस्ट करता है बिना सत्ता के बिना

1043
01:15:40,560 --> 01:15:44,560
शरीर के एजिस्ट करता है वो कर सकता है कंट्रोल कर सकता है बिना शरीर

1044
01:15:44,560 --> 01:15:48,640
के मगर यदि आप यह कह रहे हो कि नहीं उसका शरीर ही

1045
01:15:48,640 --> 01:15:52,680
है मेन वही उसका वास्तविक स्वरूप है तो यदि अगर

1046
01:15:52,680 --> 01:15:57,040
वो सनातन स्वरूप है तो वो तो नहीं हो पाएगा फिर हम उससे कहे

1047
01:15:57,040 --> 01:16:01,440
क्या आप विराट स्वरूप दिखा सकते हो वो तो दिखा रहे हैं भगवत गीता में

1048
01:16:01,440 --> 01:16:05,680
शरीर बदल रहा है ना जो शरीर बदल रहा है वो शाश्वत कैसे

1049
01:16:05,680 --> 01:16:09,800
रहा बिल्कुल खुदी खुदी

1050
01:16:09,800 --> 01:16:12,840
के विराट स्वरूप किसने दिखाया तो इसका मतलब शाश्वत नहीं था ना वो

1051
01:16:12,840 --> 01:16:16,840
शरीर इंचे बढ़ गए मैंने एक तर्क दिया था एक बार

1052
01:16:16,840 --> 01:16:20,880
मुस्लिम्स को कि शेर यदि चूहे का पीछा कर रहा

1053
01:16:20,880 --> 01:16:26,880
है कि और उसे भूख लगी है उसे खाना है

1054
01:16:27,280 --> 01:16:32,040
अब चूहा जाकर के बिल में घुस गया ठीक है

1055
01:16:32,040 --> 01:16:36,160
बिल में घुसने के बाद अगर शेर के अंदर ताकत नहीं है कि वह छोटा हो

1056
01:16:36,160 --> 01:16:40,320
सके और बिल में जा सके उसको पकड़ने अगर ताकत

1057
01:16:40,320 --> 01:16:44,480
नहीं है तो यहां पर वोह बाधित है क्योंकि वो भूखा रह जाएगा

1058
01:16:44,480 --> 01:16:48,600
अपनी अपनी वह जो करना चाहता है उसको पूरा नहीं कर पा रहा है बाधित

1059
01:16:48,600 --> 01:16:52,760
हो गया तो अगर शेर वो कर पा रहा है तो शेर का शरीर

1060
01:16:52,760 --> 01:16:56,880
शाश्वत हो सकता है क्या शाश्वत नहीं रहा फिर वो कोई और

1061
01:16:56,880 --> 01:17:02,880
तत्व है उस शरीर से अलग जो यह सब कर रहा है यह मानना

1062
01:17:02,920 --> 01:17:07,320
पड़ेगा ये सारी बातें

1063
01:17:07,320 --> 01:17:11,680
हैं चलिए पूरी करते हैं आज की हो गई राम अखिलेश

1064
01:17:11,680 --> 01:17:16,320
जी आ

1065
01:17:16,320 --> 01:17:20,600
जा जय श्री राम हा जय श्री राम

1066
01:17:20,600 --> 01:17:26,600
सर जी बताए राम आपका परिचय

1067
01:17:27,200 --> 01:17:32,080
मेरा परिचय सर मैं बिहार का रहने वाला हूं

1068
01:17:32,080 --> 01:17:37,600
औरंगाबाद डिस्ट्रिक्ट है रफ

1069
01:17:37,600 --> 01:17:43,520
प्रखंड तो मेरा एक सवाल था सर सवाल पूछना

1070
01:17:43,520 --> 01:17:48,960
बोले सर आपके आध्यात्मिक गुरु है

1071
01:17:48,960 --> 01:17:54,960
कोई हमारे आध्यात्मिक गुरु भगवान श्री कृष्ण है

1072
01:17:55,600 --> 01:18:00,000
इसमें एक तर्क आता है कि गुरु शिष्य का जो संबंध होता

1073
01:18:00,000 --> 01:18:04,160
है वह संबंध दोनों तरफ से होता है

1074
01:18:04,160 --> 01:18:08,480
आपने उन्हें गुरु माना है ठीक है उन्होंने आपको अपना शिष्य मान लिया

1075
01:18:08,480 --> 01:18:12,640
है वह तो जगत गुरु उन्हे कहा जाता है ना नहीं

1076
01:18:12,640 --> 01:18:16,680
नहीं वो ठीक है कि हमारी उनके प्रति आस्था है ऑफिली पूछ रहा हूं आप किसी को

1077
01:18:16,680 --> 01:18:20,760
फॉलो करते हैं ऑफिली वो तो मुसलमानों के

1078
01:18:20,760 --> 01:18:26,360
भी गुरु है मगर मुस्लिम सुने अपना गुरु नहीं

1079
01:18:26,360 --> 01:18:30,560
तो मैं पूछ रहा हूं आपसे कि क्या उन्होंने आपको

1080
01:18:30,560 --> 01:18:35,720
स्वीकार कर लिया है कृष्ण भगवान ने शिष्य के रूप में

1081
01:18:35,720 --> 01:18:40,280
इस के रूप में ऐसे भौतिक शरीर के रूप में

1082
01:18:40,280 --> 01:18:44,320
व उन्होंने ऐसा नहीं कहा है कि स्वीकार किया है या

1083
01:18:44,320 --> 01:18:48,840
नहीं किया है तो इसका मतलब आप अपने मन से हैं उनके शिष्य

1084
01:18:48,840 --> 01:18:52,720
उनकी शिक्षाए को एज इट मान रहे हैं कि नहीं मान रहे ये नहीं पता

1085
01:18:52,720 --> 01:18:56,840
मान रहे है ना भगवत गीता में जब वो संपूर्ण प्राणियों के लिए जब बता अरे

1086
01:18:56,840 --> 01:19:01,120
भाई सुनिए तीन बेर खाती थी वो तीन बेर खाती है

1087
01:19:01,120 --> 01:19:05,280
ठीक है इसमें बेर शब्द दो बार आया है

1088
01:19:05,280 --> 01:19:09,440
अब दोनों बार बेर शब्द का अलग अर्थ अलग-अलग है एक

1089
01:19:09,440 --> 01:19:13,760
बार यह कहा जा रहा है कि वह पहले दिन में तीन टाइम खाती थी

1090
01:19:13,760 --> 01:19:17,920
दूसरी बार यह कहा जा रहा है कि आज वह दिन में सिर्फ तीन बेर खाती है तीन

1091
01:19:17,920 --> 01:19:22,520
बेर खाती थी वह तीन बेर खाती है अगर इसमें हम केवल

1092
01:19:22,520 --> 01:19:27,320
पढ़ेंगे लिखा हुआ तो क्या हम सचाई तक

1093
01:19:27,320 --> 01:19:31,640
पहुंचेंगे लिखा हुआ लिखा हुआ को तो ही आचार्य

1094
01:19:31,640 --> 01:19:36,120
गुरु गण ही बताते हैं ना हा तो आचार्य गुरु गण कौन है आपके

1095
01:19:36,120 --> 01:19:40,120
जिन्होंने आपको बताया उसका अर्थ भगवत गीता वो पूछ रहा हूं गुरु दीक्षा

1096
01:19:40,120 --> 01:19:44,360
नहीं ली है ऐसे गुरु प्रवचन सुनता हूं प्रेमानंद

1097
01:19:44,360 --> 01:19:49,040
जी का भी बहुत बढ़िया आप बताइए इतनी देर लगा दी आपने बोलने

1098
01:19:49,040 --> 01:19:53,360
में प्रमान जी की ऐसा बोलना था

1099
01:19:53,360 --> 01:19:57,560
प्रेमानंद जी का गुरु दीक्षा नहीं लिया हूं हा प्रवचन सुनता हूं उनको अच्छा ल

1100
01:19:57,560 --> 01:20:01,560
उनकी न्वित है हां हां

1101
01:20:01,560 --> 01:20:05,760
हां और आपको एक बात बता दूं

1102
01:20:05,760 --> 01:20:07,960
कि जब हम किसी से कहते हैं कि हमारे गुरु

1103
01:20:07,960 --> 01:20:12,200
है साक्षात जो श्री कृष्ण है तो एक्चुअली इसका मीनिंग

1104
01:20:12,200 --> 01:20:16,360
होता है कि हम भगवान को गुरु बनाने की आड़ में वह

1105
01:20:16,360 --> 01:20:20,760
करना चाहते हैं जो हमें अच्छा लग रहा है आप माइंड मत करिएगा आप प्रेमानंद

1106
01:20:20,760 --> 01:20:25,280
जी की ओ आस्थान वित है अब इसको समझिए कैसे गुरु कौन

1107
01:20:25,280 --> 01:20:29,320
है जो ईश्वर को प्राप्त कराने में सहायता करें ठीक

1108
01:20:29,320 --> 01:20:33,760
है बक ईश्वर ईश्वर जो है दुर्लभ है

1109
01:20:33,760 --> 01:20:37,880
अब ईश्वर को प्राप्त करने के लिए गुरु की आवश्यकता होती है

1110
01:20:37,880 --> 01:20:42,200
मगर हमने क्या किया कि गुरु को हटा ही दिया

1111
01:20:42,200 --> 01:20:46,280
और हमने गुरु के रूप में ईश्वर को ही स्वीकार कर लिया तो जो आपके

1112
01:20:46,280 --> 01:20:50,480
लिए दुर्लभ था उसको प्राप्त करने के लिए आपको गुरु चाहिए

1113
01:20:50,480 --> 01:20:55,280
था आपने गुरु की संज्ञा भी उसी को दे दी तो गुरु का फायदा क्या हुआ

1114
01:20:55,280 --> 01:20:59,280
गुरु के आने का जो दुर्लभ है ऑलरेडी पहले ही प्राप्त करना जिनको मुश्किल हो

1115
01:20:59,280 --> 01:21:03,480
रहा है उनको ही आपने गुरु बना लिया तो गुरु का कोई औच

1116
01:21:03,480 --> 01:21:07,560
रहा क्या वो तो किसी रूप में आते

1117
01:21:07,560 --> 01:21:11,920
एक एक और मैं आपको बताऊं फैक्ट जैसे आपने

1118
01:21:11,920 --> 01:21:16,000
जैसे आपने कहा एक मैं फैक्ट बताऊ जैसे आपने कहा यह

1119
01:21:16,000 --> 01:21:20,120
बात मतलब अब मत कहा करिए मेरे डायरेक्ट गुरु श्री कृष्ण भगवान श्री

1120
01:21:20,120 --> 01:21:23,360
कृष्ण तो जगत गुरु है ही मगर भौतिक रूप से

1121
01:21:23,360 --> 01:21:27,760
इस शरीर के जो गुरु है वो प्रेमानंद जी है शंकराचार्य जी हैं

1122
01:21:27,760 --> 01:21:31,760
या राघवाचार्य जी है निमका ऐसे बोलना चाहिए अब देखिए

1123
01:21:31,760 --> 01:21:35,760
मैं बताऊ क्या है जब हम किसी से कह देते मेरे गुरु तो डायरेक्ट शिव है मेरे

1124
01:21:35,760 --> 01:21:39,760
गुरु तो डायरेक्ट श्री कृष्ण है तो पता क्या दिक्कत आती

1125
01:21:39,760 --> 01:21:44,000
है कि क्या आपके जो गुरु हैं उनसे पूछ

1126
01:21:44,000 --> 01:21:48,200
करके आप हमें ऋग्वेद के दसव मंडल के

1127
01:21:48,200 --> 01:21:52,480
125 में सूक्त का 22 वा मंत्र बता सकते हैं दूसरा मंत्र

1128
01:21:52,480 --> 01:21:55,080
बता सकते हैं

1129
01:21:55,080 --> 01:21:59,200
तो क्या होगा आपको सालों लग जाएंगे मगर केवल

1130
01:21:59,200 --> 01:22:03,240
गुरु के आलंबन से आपको वो प्राप्त नहीं होगा आपको कहीं ना कहीं किसी

1131
01:22:03,240 --> 01:22:07,400
और के पास जाना पड़ेगा तब आपको मंत्र पता चल पाएगा इसका मतलब क्या

1132
01:22:07,400 --> 01:22:12,080
है कि जो गुरु के रूप में

1133
01:22:12,080 --> 01:22:16,120
श्री कृष्ण अथवा भगवत स्वरूप और कोई दिखाई दे रहा है गुरु

1134
01:22:16,120 --> 01:22:20,280
के रूप में वह असल में हमारी ही इंद्रियों द्वारा बनाया गया

1135
01:22:20,280 --> 01:22:24,600
भगवान का प्रतिबिंब मात्र है क्यों क्योंकि जब उनसे हमने

1136
01:22:24,600 --> 01:22:29,200
कोई वाकई की जानकारी पूछी तो वो नहीं बता रहे तो इसमें

1137
01:22:29,200 --> 01:22:33,640
एक संजय दत्त की एक फिल्म आई थी बहुत पहले लगे रहो

1138
01:22:33,640 --> 01:22:37,920
मुन्ना भाई उसका कांसेप्ट ये था कि वो इतनी पढ़ाई

1139
01:22:37,920 --> 01:22:38,420
कर लेता

1140
01:22:38,400 --> 01:22:42,400
है उसका जो नायक था वो इतनी

1141
01:22:42,400 --> 01:22:47,560
पढ़ाई कर लेता है गांधी के बारे में कि उसको गांधी दिखने लगते

1142
01:22:47,560 --> 01:22:51,560
हैं गांधी उसे दिखने लगते हैं मगर उसको गांधी के बारे

1143
01:22:51,560 --> 01:22:56,000
में सब कुछ नहीं पता था तो वो क्या करता था जब भी कोई गांधी से रिलेटेड

1144
01:22:56,000 --> 01:23:00,600
प्रश्न आता था तो गांधी जो उसको दिखने लगे थे वह उसको बता देते थे

1145
01:23:00,600 --> 01:23:04,720
कि इस प्रश्न का उत्तर यह है मगर लास्ट मगर वोह जो गांधी था

1146
01:23:04,720 --> 01:23:08,800
व वाकई के गांधी नहीं थे वो जो गांधी थे वो वाकई के गांधी नहीं थे

1147
01:23:08,800 --> 01:23:12,880
वास्तविक गांधी नहीं थे उन उस गांधी को उतना ही पता था जितना

1148
01:23:12,880 --> 01:23:16,920
कि नायक को पता था गांधी के बारे में तो यह जो श्री कृष्ण

1149
01:23:16,920 --> 01:23:21,080
आपको दिख रहे हैं ना गुरु के रूप में जो आते हैं ये इनको भी उतना ही

1150
01:23:21,080 --> 01:23:25,080
पता है जितना आपने प्रेमानंद जी महाराज को सुनक के पता कर लिया

1151
01:23:25,080 --> 01:23:29,120
है ग्रंथ पढ़ के पता कर लिया है या यटू आदि के माध्यम से

1152
01:23:29,120 --> 01:23:33,480
जो आपने पता कर लिया है यह जो श्री कृष्ण आपको दिख रहे हैं वो श्री कृष्ण नहीं है

1153
01:23:33,480 --> 01:23:37,640
इन श्री कृष्ण को उतना ही पता है जितना आपको पहले से पता है उतना

1154
01:23:37,640 --> 01:23:41,840
ही आंसर है इनके पास तो यह वास्तविक गुरु नहीं है आपके वो

1155
01:23:41,840 --> 01:23:46,080
तो जगतगुरु है मगर व्यवहार में व्यवहारिक रूप से

1156
01:23:46,080 --> 01:23:50,600
आपका कोई ना कोई देह धारण किया हुआ गुरु होना

1157
01:23:50,600 --> 01:23:53,400
चाहिए तो सर एक सवाल है

1158
01:23:53,400 --> 01:23:58,000
सवाल आपने लिया हां बताइए

1159
01:23:58,000 --> 01:24:02,440
सवाल हा ईसा से 500 वर्ष पूर्व लगभग यानी

1160
01:24:02,440 --> 01:24:06,520
गौतम बुद्ध के काल में कौन से आचार्य हुआ करते थे

1161
01:24:06,520 --> 01:24:10,680
उनका नाम बता सकते

1162
01:24:10,680 --> 01:24:14,960
हैं गौतम बुद्ध से 500 वर्ष पूर्व

1163
01:24:14,960 --> 01:24:19,000
नहीं नहीं ईसा से 500 वर्ष पूर्व यानी ग वर्ष

1164
01:24:19,000 --> 01:24:25,000
पूर्व तो आदि शंकराचार्य ही थे गचार

1165
01:24:25,520 --> 01:24:29,640
वो तो ईसा के बाद हुए हैं ईसा से पहले थोड़ी है आपकी जानकारी

1166
01:24:29,640 --> 01:24:33,800
गलत है हमारे पास प्रमाण है भाई

1167
01:24:33,800 --> 01:24:37,880
साब आप देखिए आप आप जिज्ञासा के लिए आए हैं या विरोध के लिए आए

1168
01:24:37,880 --> 01:24:41,880
हैं अगर जिज्ञासा के लिए आए हैं तो हमने आपको बता दिया ईसा से

1169
01:24:41,880 --> 01:24:46,000
500 अरे मुझे बोल लेने दीजिए बोल लेने दीजिए ईसा

1170
01:24:46,000 --> 01:24:50,400
से 500 वर्ष पूर्व आदि शंकराचार्य जी का इतिहास प्राप्त है

1171
01:24:50,400 --> 01:24:55,400
और हमारे पास एक ग्रंथ रखा है ना पीछे आद

1172
01:24:55,400 --> 01:24:59,480
अरे भाई पूरी बात बोलने दो पूरी बात बोलने दो फिर बोलना

1173
01:24:59,480 --> 01:25:03,680
तो 500 वर्ष पूर्व आदि शंकराचार्य जी का इतिहास प्राप्त है

1174
01:25:03,680 --> 01:25:07,760
अगर उनका आप नहीं मान पाओ तो तब भी उनके जो गुरुदेव हैं

1175
01:25:07,760 --> 01:25:12,080
गोविंद पाद जी वह तो है ही उनका निर्विवाद रूप से प्राप्त है

1176
01:25:12,080 --> 01:25:16,080
ठीक है सर मैं ईवी काल में पूछ रहा हूं जन्म काल कितना ईवी

1177
01:25:16,080 --> 01:25:20,440
सन में हुआ था यह मैं बता रहा हूं ना ईसा से 500 वर्ष

1178
01:25:20,440 --> 01:25:24,920
पूर्व क्या 563 ईसा पूर्व 63

1179
01:25:24,920 --> 01:25:29,320
ईसा पूर्व में लगभग 500 वर्ष पूर्व है

1180
01:25:29,320 --> 01:25:33,360
कितना लगभग 500 वर्ष पूर्व

1181
01:25:33,360 --> 01:25:37,440
उनका जन्म काल बताइए ईसा के बाद हुए हैं आप बता रहे हैं आप

1182
01:25:37,440 --> 01:25:41,840
मेरी परीक्षा मत लीजिए आपका ये वस्तुनिष्ट

1183
01:25:41,840 --> 01:25:45,920
जानकार क्या बात करते हैं मैं सवाल पूछ रहा हूं ना मैं जो

1184
01:25:45,920 --> 01:25:50,080
बता रहा हूं वो सुन लीजिए आप मेरी परीक्षा मत लीजिए आपका जो सवाल है यह

1185
01:25:50,080 --> 01:25:54,800
ग्रंथ है गोवर्धन मट से छपता है मैं जो

1186
01:25:54,800 --> 01:25:59,880
मैं जो बता रहा हूं सुनिए मैं जो बता रहा हूं सुनिए का

1187
01:25:59,880 --> 01:26:03,920
इसमें आदि शंकराचार्य जी का जन्म काल सिद्ध किया है पुरी

1188
01:26:03,920 --> 01:26:08,800
के शंकराचार्य अरे भाई बोलने दो यार बीच बीच में बोलते हो

1189
01:26:08,800 --> 01:26:13,680
तो बता इसवी सन बताइए कौन सा इसवी

1190
01:26:13,680 --> 01:26:19,160
सन क्यों बताऊ क्यों बताऊ

1191
01:26:19,160 --> 01:26:23,280
बताइए जनरल नॉलेज की बातें करने बैठा हूं य बोलिए

1192
01:26:23,280 --> 01:26:27,400
जवाब नहीं है नहीं है उत्तर है हमारे पास उत्तर है हमारे

1193
01:26:27,400 --> 01:26:33,320
पास आप अथॉरिटेटिव हो रहे है आप अथॉरिटेटिव मत

1194
01:26:33,320 --> 01:26:39,320
होइए हा बता रहा हूं रुकिए

1195
01:27:00,080 --> 01:27:05,080
आदि के परिशीलन से तथा

1196
01:27:05,080 --> 01:27:09,280
चतुष्पथी क्ण से श्री शिव अवतार शंकराचार्य

1197
01:27:09,280 --> 01:27:13,680
का युधिष्ठिर संवत 2631 में आविर्भाव तथा

1198
01:27:13,680 --> 01:27:19,680
ट संवत 2663 में रो भाव सिद्ध

1199
01:27:19,800 --> 01:27:25,800
है ठीक है 2600 26

1200
01:27:26,440 --> 01:27:30,960
2661 संवत एक मिनट रुकिए 2631

1201
01:27:30,960 --> 01:27:35,360
यानी ईसा से पूर्व या ईसा के बाद अरे

1202
01:27:35,360 --> 01:27:39,440
ईसा से पूर्व की बात चल रही है ईसा से पूर्व

1203
01:27:39,440 --> 01:27:44,120
2600 यानी 263 तो मैं 500

1204
01:27:44,120 --> 01:27:48,240
563 ईसा पूर्व की बात पूछ रहा हूं आपसे

1205
01:27:48,240 --> 01:27:52,960
आप वर्ष के अनुसार चल रहे हैं मैं विक्रम संवत की बात कर रहा हूं

1206
01:27:52,960 --> 01:27:57,880
तो विक्रम संवत वही 8 वर्ष थोड़ा सा आगे है ईसा

1207
01:27:57,880 --> 01:28:01,880
से आपका प्रयोजन क्या है यह बता दीजिए आपने जो प्रश्न पूछा था

1208
01:28:01,880 --> 01:28:06,840
उसका उत्तर मैंने दे दिया है प्रयोजन बताइए कनाते

1209
01:28:06,840 --> 01:28:10,880
ई वर्ष ईसा वर्ष पूर्व आप जिस

1210
01:28:10,880 --> 01:28:15,000
प्रश्न के लिए आप आए है व आपको उत्तर मिल गया है प्रमाणित उत्तर मिल गया

1211
01:28:15,000 --> 01:28:19,240
ग को पढ़ लीजिए के लिए चर्चा के लिए

1212
01:28:19,240 --> 01:28:21,000
आपका प्रयोजन

1213
01:28:21,000 --> 01:28:25,080
बताइए ये आए लने कोई मतलब नहीं

1214
01:28:25,080 --> 01:28:27,760
है इस प्रश्न का

1215
01:28:27,760 --> 01:28:32,560
भाई है क्या है मैं इतनी देर

1216
01:28:32,560 --> 01:28:36,840
से पर कोई मतलब नहीं है

1217
01:28:36,840 --> 01:28:41,040
इससे चर्चा का जो विषय है वो भटकाने के लिए

1218
01:28:41,040 --> 01:28:46,040
जिस चर्चा प हम एक घंटे से व चीज कर रहे हैं

1219
01:28:46,040 --> 01:28:50,240
जी का जन्म कब हुआ है यहां पर अभी कौन सा मामला चल रहा है और

1220
01:28:50,240 --> 01:28:56,000
ये प्रेमानंद जी के शिष्य भी नहीं है उन्होने झूठ बोला है

1221
01:28:56,000 --> 01:29:00,360
ये रामपाल जी के बिलकुल बिलकुल बिलकुल

1222
01:29:00,360 --> 01:29:04,400
बकुल दिख रहा था इनका व्यवहार

1223
01:29:04,400 --> 01:29:08,640
जो है ना वही से सब कुछ पता चल जाता है कि आप उनको बताइए क्यों

1224
01:29:08,640 --> 01:29:13,000
हेलो भाई साहब आप आप ये बताइए

1225
01:29:13,000 --> 01:29:17,080
आप कबीर सागर की कबीर सागर की सौगंध गाकर कहिए आप जो

1226
01:29:17,080 --> 01:29:23,080
है रामपाल के शिष्य नहीं है आप सौगंध खा

1227
01:29:24,760 --> 01:29:30,760
इसीलिए नहीं आने देता

1228
01:29:34,160 --> 01:29:38,320
हूं केवल केवल इनको जो है

1229
01:29:38,320 --> 01:29:42,480
परेशान करना हैने गंभीर विषय पर इतने गंभीर विषय पर चर्चा

1230
01:29:42,480 --> 01:29:46,680
हो रही है सारी चीजें हो रही है लेकिन इनको आके

1231
01:29:46,680 --> 01:29:51,280
इसमें बिगन डालना है यह हमारी परीक्षा लेने आए

1232
01:29:51,280 --> 01:29:55,280
हैं ये आपकी परीक्षा ले रहे बताइए और एट

1233
01:29:55,280 --> 01:30:00,400
इनको साल भी चाहिए पढ़ना कुछ नहीं है ना कुछ देखना

1234
01:30:00,400 --> 01:30:04,440
है वो इनका व काम तो वही करना है ना कि बल

1235
01:30:04,440 --> 01:30:10,440
पन लेके काट के उस वो कर

1236
01:30:11,600 --> 01:30:15,800
दो आप एजेक्ट बता दो फिर वो ग्रंथ जो है उसम खरीद

1237
01:30:15,800 --> 01:30:20,160
के और उसम पन से काट के लिख देंगे नहीं ऐसा नहीं ऐसा था

1238
01:30:20,160 --> 01:30:24,240
फिर एक वीडियो बना केने इन्होने कबीर सागर में भी काटा

1239
01:30:24,240 --> 01:30:28,920
पीटी की है पता है आपको जी जी मैंने देखा है

1240
01:30:28,920 --> 01:30:33,120
बहुत कुछ किया हुआ है बहुत सारे चीज जो है इनके खुद के वीडियो जो है देखने

1241
01:30:33,120 --> 01:30:39,120
की इच्छा तो नहीं होती लेकिन कभी कभी जब थोड़ा बहुत समय मिला तो देख लेते

1242
01:30:39,720 --> 01:30:44,160
हैं अब यहां पर चर्चा कर रहे थे

1243
01:30:44,160 --> 01:30:48,840
तो अब यही बात है कि अब हमने तो कभी लोगों के पास क

1244
01:30:48,840 --> 01:30:52,880
को रिप्लाई कर तो दिया भाई और कितना करें वो इतना इंपोर्टेंट पर्सन नहीं है हमारे

1245
01:30:52,880 --> 01:30:57,040
लिए उसी बात करते रहे अरे अजय आर को इतना इंपोर्टेंस

1246
01:30:57,040 --> 01:31:01,040
देना भी नहीं है और ना ही हम कोई उनके लिए

1247
01:31:01,040 --> 01:31:05,080
वो रेसिल मालूम पड़ा ज्यादा इंपोर्टेंस देने लगे कल को वो अंधेरे ही अंधेरे में

1248
01:31:05,080 --> 01:31:09,280
गायब हो जाएगा मैं कहां जाऊं कल

1249
01:31:09,280 --> 01:31:14,600
मेरा क्या है

1250
01:31:14,600 --> 01:31:19,080
पता अभी कल थो गाना

1251
01:31:19,080 --> 01:31:23,080
है मुझको चा वो गाना है ना एक मुझको

1252
01:31:23,080 --> 01:31:27,360
चाहा तब पाओगी क्या मैं कहां जाऊ कल

1253
01:31:27,360 --> 01:31:30,920
मेरा क्या है

1254
01:31:30,920 --> 01:31:35,960
पता वही इतनी

1255
01:31:35,960 --> 01:31:40,280
इनको इतना महत्त्वपूर्ण नहीं बनाना है कि हमारे विषय

1256
01:31:40,280 --> 01:31:44,520
पर आके जो हम उसम बन अपने डाले जो हमें चर्चा करनी थी वो हमने कह दिया है सभी

1257
01:31:44,520 --> 01:31:48,760
से और आज की चर्चा जो है बहुत ही महत्त्वपूर्ण थी

1258
01:31:48,760 --> 01:31:53,400
और बहुत गंभीर चर्चा थी इस पर बात करना बहुत ज्यादा जरूरी था अभद्र

1259
01:31:53,400 --> 01:31:57,760
भाषा की मतलब इन्होने सीमाए लांग द

1260
01:31:57,760 --> 01:32:02,200
अरे बहुत उल्टा सीधा भाई बात करने का तरीका ही नहीं है और कहते हैं धर्म रक्षक धर्म

1261
01:32:02,200 --> 01:32:06,960
का मतलब यही होता है गलत तरीके से बात करने वाला मर्यादा

1262
01:32:06,960 --> 01:32:11,000
बात मैंने क क लाइव आना नहीं चाह रहा था मैंने कई

1263
01:32:11,000 --> 01:32:15,520
कमेंट में भी ये बात लिखी थी आप ये सोचिए भैया कि

1264
01:32:15,520 --> 01:32:19,960
इनको जो है हमारे जो हिंदू भाई है जो सच्चे सनातनी

1265
01:32:19,960 --> 01:32:24,200
है शुद्ध भाषा में बोला जाए तो बरगलाने के लिए आप य

1266
01:32:24,200 --> 01:32:28,280
हमारे आराध्य भगवान स्वरूप जो है धर्म सम्राट स्वामी करपात्री जी महाराज

1267
01:32:28,280 --> 01:32:29,920
का आलंबन लेके

1268
01:32:29,920 --> 01:32:33,920
हिंदुओं को बरगलाने के लिए नाम बदलने की क्या आवश्यकता है आपको क्यों

1269
01:32:33,920 --> 01:32:38,040
आप ऋषि वाज के नाम से आपका जो नाम था जो भी था आपका आप उस नाम से चलाइए ना

1270
01:32:38,040 --> 01:32:42,240
क्या करना चाहते हैं ये ये वैसे एक रूप से देखा जाए तो बहुत बड़ा वो

1271
01:32:42,240 --> 01:32:46,840
भी है उनके सामने निर्णायक दृश्य है कि आपको अपने चैनल का नाम

1272
01:32:46,840 --> 01:32:51,720
बदलने पर विवश हो जाना पड़ा इतनी दिक्कत आ गई

1273
01:32:51,720 --> 01:32:55,760
शास्त्रार्थ की चुनौती देते घूमते हैं वो जो वो

1274
01:32:55,760 --> 01:32:59,960
जो मातृ शक्ति है वो शुरू में वो जो मातृ शक्ति जिनके साथ वो हुआ था हमारी

1275
01:32:59,960 --> 01:33:03,960
चर्चा हुई थी शुरू में आप देखो तो वो कह रही है कि आज

1276
01:33:03,960 --> 01:33:08,520
जो है देखिए हम जो है शंकराचार्य को शास्त्र की चुनौती देते हैं

1277
01:33:08,520 --> 01:33:12,560
और लास्ट तक उनकी जो आवाज थी बदल चुकी थी चर्चा के

1278
01:33:12,560 --> 01:33:16,600
मध्य में वो यह कहने लगी थी कि अपने संगी साथियों को कि आप इधर

1279
01:33:16,600 --> 01:33:21,520
अपनी चेयर खिसका लीजिए इधर आ जाइए पास में इधर बैठ कर के जो है बात

1280
01:33:21,520 --> 01:33:26,160
करिए हा न आर से बात होगी अगर

1281
01:33:26,160 --> 01:33:31,080
वो सुन रहे हैं संपर्क करें तो समान

1282
01:33:31,080 --> 01:33:35,120
हमने एक पत्र भी लिखा है

1283
01:33:35,120 --> 01:33:39,320
कोक्त नहीं हमने एक पत्र भी लिखा है कि उसम

1284
01:33:39,320 --> 01:33:43,920
संदीपन जी के लिए विशेष रूप से कहा है कि आपके जो आपने जिस तरह से

1285
01:33:43,920 --> 01:33:45,080
अपनी बात को रखा उसके

1286
01:33:45,080 --> 01:33:49,080
लिए हम बहुत आभारी है और आपकी प्रशंसा करते हैं आपने जो

1287
01:33:49,080 --> 01:33:53,120
है मर्यादा का बिल्कुल वहां पर पालन किया और एक आदर्श आर

1288
01:33:53,120 --> 01:33:57,760
समाजी के रूप में आप जो है उभरे नब को में

1289
01:33:57,760 --> 01:34:02,320
ब बक तो फिर क्या है वही क जी

1290
01:34:02,320 --> 01:34:06,440
अगर ऐसा है आप आइए कि आपके मान सम्मान

1291
01:34:06,440 --> 01:34:11,000
गरिमा इसकी रक्षा का हम वचन देते हैं सम्मान बात करिए

1292
01:34:11,000 --> 01:34:15,360
और जितने भी वरिष्ठ लोगों से आज तक बात हुई है कभी भी कहीं पर अनियमितता

1293
01:34:15,360 --> 01:34:19,480
नहीं आई य सब जो बालक बुद्धि वाले लोग हैं अब जैसे अभी

1294
01:34:19,480 --> 01:34:23,720
भाई साहब आए थे शंकराचार्य का जन्म कब हुआ इससे

1295
01:34:23,720 --> 01:34:27,960
तुम्हारे धर्म का निर्णय हो रहा है विषय

1296
01:34:27,960 --> 01:34:32,160
से कोई मतलब ही नहीं है मतलब ही नहीं उस विषय से हमारी किस बात पर चर्चा हो रही है उस

1297
01:34:32,160 --> 01:34:36,280
कोई मतलब नहीं आद शंकराचार्य जी का जन्म ईसा से

1298
01:34:36,280 --> 01:34:40,600
500 वर्ष पूर्व सिद्ध किया है इसमें जगतगुरु

1299
01:34:40,600 --> 01:34:46,600
शंकरा जिसको भी जानना हो वो इसको पढ़े अध्ययन

1300
01:34:47,120 --> 01:34:51,360
करे अब इतनी सी बात इनको समझ में आ दिखाया

1301
01:34:51,360 --> 01:34:55,400
जा रहा है ये थोड़ा बड़ा कर दीजिए अगर हो

1302
01:34:55,400 --> 01:34:59,400
सके तो विक्रम सम्मत का और इनको जो

1303
01:34:59,400 --> 01:35:05,400
है अंग्रेजी कैलेंडर का मतलब ही नहीं [संगीत]

1304
01:35:07,120 --> 01:35:11,240
पता और फिर हमें इस विषय पर चर्चा के लिए आपको जो

1305
01:35:11,240 --> 01:35:15,280
प्रश्न करना था वो करना था नहीं वो कोई सैद्धांतिक प्रश्न नहीं

1306
01:35:15,280 --> 01:35:21,280
है य कबीर ईश्वर कबीर वाले है

1307
01:35:22,160 --> 01:35:26,320
ये प्रेमा जी को सुनते हैं अब

1308
01:35:26,320 --> 01:35:31,200
देखो यह होता है कुछ तो बोलना

1309
01:35:31,200 --> 01:35:34,920
पड़ कुछ तो बोलना

1310
01:35:34,920 --> 01:35:39,080
पड़ेगा चलिए ठीक है

1311
01:35:39,080 --> 01:35:43,880
आने के लिए सभी का धन्यवाद सुनने के लिए सभी को जय श्री राम

1312
01:35:43,880 --> 01:35:48,000
और जय श्री राम हर हर महादेव किसी भी प्रकार के वैचारिक मतभेद

1313
01:35:48,000 --> 01:35:53,800
के लिए संपर्क करें 74836 इसको कहते हैं साहस

1314
01:35:53,800 --> 01:35:57,880
कायरता उसे कहते हैं अब भाई कर दिया होगा हो

1315
01:35:57,880 --> 01:36:01,920
सकता है जीवन में ऐसा कुछ किसी को मुह दिखाने लायक नहीं बचे तभी

1316
01:36:01,920 --> 01:36:05,960
तो चेहरा छुपाते घूम रहे हैं क्या हो गया

1317
01:36:05,960 --> 01:36:10,160
क्या हमारे परंपरा प्राप्त आचार्य जो है उनका

1318
01:36:10,160 --> 01:36:14,920
आलंबन आपको उनके नाम का आलंबन लेना पड़ रहा है

1319
01:36:14,920 --> 01:36:18,960
इस वजह से हमारे साथ लोग जुड़ जाए राधा मां

1320
01:36:18,960 --> 01:36:22,960
की माने भगवान श्री कृष्ण की भगवान शिव की इतनी अभद्र टिप्पणियां

1321
01:36:22,960 --> 01:36:26,960
जो करे जा रही है उस पर आज आपने कितना बोला और

1322
01:36:26,960 --> 01:36:31,000
उनको उनके उनके लोग जो है हमारे विरोध में खड़े ना होना शुरू हो जाए

1323
01:36:31,000 --> 01:36:35,040
तो फिर उनका नाम ही बदल दिया कि धर्म सम्राट का नाम सुनके हमारे पास

1324
01:36:35,040 --> 01:36:37,480
लोग आना शुरू कर देंगे आपकी चीजें

1325
01:36:37,480 --> 01:36:42,080
तो एक घंटे में पता चल जाती है

1326
01:36:42,080 --> 01:36:46,080
आपकी बातों से पता चल जाता है हम तो 15 मिनट में चर्चा करने के लिए गए

1327
01:36:46,080 --> 01:36:50,080
थे आपके साथ उस समय हमें तो पता चल गया था कि उनके विचार क्या है फर बाद में ये

1328
01:36:50,080 --> 01:36:54,880
कहने लगे थे कि भाई ऐसा ऐसा है तो बहुत सारी चीजें

1329
01:36:54,880 --> 01:36:59,240
और इनके लिए तो अच्छी बात है जो भी मर्यादा

1330
01:36:59,240 --> 01:37:03,280
में रह के आप सभी का स्वागत है जो भी चर्चा करने वैचारिक मतभेद के लिए हमें क्या

1331
01:37:03,280 --> 01:37:07,400
समस्या है आप वैचारिक मतभेद हो सकते लेकिन हमने कभी बी

1332
01:37:07,400 --> 01:37:11,560
अ बा ख आई कार्ड अपना परिचय देता है बातचीत

1333
01:37:11,560 --> 01:37:15,600
परिवार का परिचय देता है बिल्कुल मैं मतलब अंदर

1334
01:37:15,600 --> 01:37:19,760
से इस बात के लिए मैं य कह रहा था मैं नाम जो भी अ टिप्पणियां कर रहे

1335
01:37:19,760 --> 01:37:23,760
उनके लिए कुछ नहीं कह रहे हैं लेकिन इतनी बात छोटी सी जरूर कहेंगे कि

1336
01:37:23,760 --> 01:37:27,840
उनकी माता जी अगर यय देख रही होंगी य वीडियो जो उनके है

1337
01:37:27,840 --> 01:37:33,840
वो सच में अत आत्मा से रो रही होंगी कि हमने कैसे बालक को जन्म दे

1338
01:37:34,920 --> 01:37:39,640
दिया जो माता पिता के बीज की रक्षा की ना कर पाए उसकी

1339
01:37:39,640 --> 01:37:44,320
जो है अभद्र परिचय दे दे अपने माता पिता का जो है

1340
01:37:44,320 --> 01:37:48,240
यही से तो अपमान हो रहा है कुल का परिवार

1341
01:37:48,240 --> 01:37:52,360
का सही बात यह सब चीजें बड़ी

1342
01:37:52,360 --> 01:37:56,480
ध्यान रखनी पड़ेगी आप किसी एक व्यक्ति को और हमने कभी

1343
01:37:56,480 --> 01:38:00,560
किसी भी चीज को लेकर कोई कुछ गलत नहीं बोला और आप हमको केवल

1344
01:38:00,560 --> 01:38:04,720
नीचा दिखाने के लिए आप कि हद तक जा सकते हैं कि अपने माता पिता के

1345
01:38:04,720 --> 01:38:08,840
आत्म समान को ठ पहुंचा रहे हैं सास तो इसे कहते हैं कि

1346
01:38:08,840 --> 01:38:12,880
जिसको आप भाई कह रहे हो कि हमारा आपस का मामला है उसको दबाने के लिए

1347
01:38:12,880 --> 01:38:16,920
नीचा दिखाने के लिए आप उनके पास जा रहे हो जिनसे युद्ध चल रहा

1348
01:38:16,920 --> 01:38:21,320
है सोचो दोनों लोग दोनों लोग

1349
01:38:21,320 --> 01:38:25,560
आपसे ले रहे जो मुस्लिम है

1350
01:38:25,560 --> 01:38:29,640
वो हमसे हमसे वो नहीं हो पा रहा तो आर समाज की सहायता ले रहे

1351
01:38:29,640 --> 01:38:34,120
आर समाज तो नहीं कहता वोने

1352
01:38:34,120 --> 01:38:40,120
बो आपका आन ले रहे आपका सहारा ले रहे हम गिराने के

1353
01:38:40,400 --> 01:38:44,680
लिए हम तो आपको भाई शुरू से मानते हैं लेकिन आप नहीं मानना चाहते

1354
01:38:44,680 --> 01:38:48,880
तो हम उसम क्या कर सकते हैं हम तो आजीवन मानते रहेंगे हमने तो कभी आपको ना गाली

1355
01:38:48,880 --> 01:38:50,120
दी ना जो भी हमारी

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चर्चा थी हम उस बात को लेकर तो जीवन भर बोलते रहेंगे इसमें तो कोई दोरा नहीं

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जो भी गलत चीज होंगी उनका प्रतिकार तो हम हमेशा करेंगे और जो हमारे भगवान

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आराध्य देव देवी देवताओं के ऊपर अभद्र टिप्पणियां जो भी करेगा उसका

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हम आजीवन विरोध करेंगे प्रतिकार करेंगे मरते दम

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तक करेंगे जब तक हमारे इस शरीर में प्राण रहेंगे तब तक करेंगे

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क्योंकि हमारा खून जो है इतना ठंडा नहीं हो चुका है और ना ही हमने चूड़िया

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पहन रखी है कि हम सामने चेहरा दिखा के ना आ पाए बस बस

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ठीक है ठीक बहुत बढ़िया ठीक है सभी का आभार आने के लिए

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और जय माताज जय श्री राम हर हर महादेव जय श्री राम हर हर महादेव
