1
00:00:03,080 --> 00:00:07,280
सभी को जय श्री राम और हम लोगों

2
00:00:07,280 --> 00:00:11,520
का जो ऑपरेशन नाम जप है नामा स्त्र

3
00:00:11,520 --> 00:00:15,800
वह चालू हो चुका है उसमें लोग जुड़ रहे हैं और हम सब मिलकर

4
00:00:15,800 --> 00:00:20,480
के साथ में भगवान का ध्यान करते हैं

5
00:00:20,480 --> 00:00:25,040
भगवान का नाम जपते हैं और आज

6
00:00:25,040 --> 00:00:30,000
भी उसमें मतलब ज्यादा से ज्यादा संख्या में लोग जुड़ते जा रहे हैं तो मैं

7
00:00:30,000 --> 00:00:34,080
जितने भी भाई बहन है उन सबको आहवान करना चाहूंगा कि आप

8
00:00:34,080 --> 00:00:38,680
लोग भी इस अभियान से जुड़े यह दोनों ही

9
00:00:38,680 --> 00:00:43,120
चीजें हमारे लिए आवश्यक हैं नीचे संघ का बल

10
00:00:43,120 --> 00:00:47,440
और ऊपर आध्यात्म का बल नामा स्त्र से अवश्य ही

11
00:00:47,440 --> 00:00:51,640
जुड़े जुड़ने के लिए हम कई बार अपना नंबर दे चुके उस पर आपको केवल ट

12
00:00:51,640 --> 00:00:54,640
करना है

13
00:00:54,640 --> 00:00:58,840
74836 एक सुबह का सेशन होता है जिसमें हम सीधे

14
00:00:58,840 --> 00:01:02,760
सवा घंटे का नाम जब करते हैं

15
00:01:02,760 --> 00:01:06,920
अ वो उसमें मैं स्वयं भी होता हूं और फिर जिनके

16
00:01:06,920 --> 00:01:10,920
पास ऐसा अवसर नहीं है कि वह सुबह सवा घंटे दे सके

17
00:01:10,920 --> 00:01:15,000
तो फिर उनके लिए पूरे दिन का 15-15 मिनट भी है पूरे दिन

18
00:01:15,000 --> 00:01:19,120
में 1515 मिनट पांच बार आप लोग नाम जप

19
00:01:19,120 --> 00:01:23,640
करें नाम जप करने के लिए जो

20
00:01:23,640 --> 00:01:27,760
सुबह जो हमारे इष्ट राम है तो हम उनका नाम

21
00:01:27,760 --> 00:01:32,000
जप करते हैं मगर यदि आपके इष्ट

22
00:01:32,000 --> 00:01:36,120
बजरंग बली है शिव जी हैं मां है मां भगवती

23
00:01:36,120 --> 00:01:40,200
हैं या राधा जी हैं तो आप

24
00:01:40,200 --> 00:01:44,440
उनके नाम का जप कर सकते हैं उस समय मगर क्या होता है परस्पर जो

25
00:01:44,440 --> 00:01:48,720
एक दूसरे की सहभागिता होती है उपस्थिति होती है उससे बल मिलता है

26
00:01:48,720 --> 00:01:52,800
और हम लोग हमारे अंदर वह बल निर्माण कर पाते हैं संग

27
00:01:52,800 --> 00:01:57,000
की सहायता से सत्संग से है ना हमें आपका मिल जाता है आपको हमारा

28
00:01:57,000 --> 00:02:01,480
मिल जाएगा इस तरह से तो

29
00:02:01,480 --> 00:02:05,560
आप लोग जुड़े उससे और आगे के जो पांच सेशन

30
00:02:05,560 --> 00:02:09,920
होते हैं उसमें भी ब्रह्मा विष्णु महेश भगवती और

31
00:02:09,920 --> 00:02:14,040
गणेश यह पंच परमेश्वर है तो इनके नाम का पांच बार में जप

32
00:02:14,040 --> 00:02:18,640
होता है वहां पर भी वही है कि अगर आपको आपके ईस्ट है

33
00:02:18,640 --> 00:02:22,680
तो आप उनके नाम का जप करें प्राथमिकता उनको दे और यदि संभव

34
00:02:22,680 --> 00:02:26,680
नहीं हो पा रहा है तो श्रवण कर ले 15 मिनट श्रवण कर ले तो

35
00:02:26,680 --> 00:02:30,880
उससे भी आपके मन में मानसिक जब तो हो ही गया वो एक सवा

36
00:02:30,880 --> 00:02:35,080
घंटे की जो भक्ति का तपोबल जो एकत्र करना है हमें

37
00:02:35,080 --> 00:02:39,520
वो वहां से हम उसके लिए थोड़ा सा

38
00:02:39,520 --> 00:02:44,880
प्रयास हैय बस और कुछ नहीं अच्छा कल एक किसी

39
00:02:44,880 --> 00:02:47,840
ने कमेंट किया था

40
00:02:47,840 --> 00:02:53,840
कि भाई अगर नाम जब से ही सारे युद्ध लड़े जाने

41
00:02:54,520 --> 00:02:58,680
हैं जिसमें जिसमें मैं रहता

42
00:02:58,680 --> 00:03:02,720
हूं यह गल मीट पर होता है जूम पर वो वाले

43
00:03:02,720 --> 00:03:06,960
होते हैं जो 1515 मिनट के हैं यह गल मीट

44
00:03:06,960 --> 00:03:12,960
पर होता है जिसमें मैं रहता हूं सवा घंटे

45
00:03:13,480 --> 00:03:17,960
वाला तो कल एक कमेंट पढ़ने में आया था जब हमने

46
00:03:17,960 --> 00:03:22,880
पहले थोड़ा पीछे से शुरू करता हूं कि हमने अभी कुछ दिन पूर्व

47
00:03:22,880 --> 00:03:27,360
आर्य समाज की विवादास्पद टिप्पणियों को लेकर के एक

48
00:03:27,360 --> 00:03:31,440
वीडियो बनाया था जिसमें हमने कुछ जग जोड़ देने वाले जो दृश्य

49
00:03:31,440 --> 00:03:35,560
है वह भी दिखाए थे जैसे जो हमारे भक्ति का

50
00:03:35,560 --> 00:03:39,600
आस्था का केंद्र है उनकी तुलना पर्न

51
00:03:39,600 --> 00:03:43,800
अभिनेत्रियों से की गई ऐसे वीडियोस है जिसमें

52
00:03:43,800 --> 00:03:46,720
कि आर्य समाज

53
00:03:46,720 --> 00:03:51,120
के वक्ता है उसमें अब हमने

54
00:03:51,120 --> 00:03:55,200
वहां पर एक वक्तव्य दिया कि भाई आप लोग कैसे वीर सेब

55
00:03:55,200 --> 00:03:59,200
हो और इत्यादि इत्यादि तो इस पर कुछ आर्य समाज के लोगों की तरफ से

56
00:03:59,200 --> 00:04:03,520
टिप्पण आई कुछ अपना प्रस्तुतीकरण आया निराकरण आया

57
00:04:03,520 --> 00:04:07,760
कि हमने तो वह चीज छुपा कर रखी थी जो वो पंक्ति है

58
00:04:07,760 --> 00:04:11,920
आर्य समाज के ग्रंथों में हमने तो वह चीज छिपा कर रखी थी

59
00:04:11,920 --> 00:04:15,920
आपने वह चीज उजागर कर दी हम तो उजागर नहीं करना चाहते थे तो यह

60
00:04:15,920 --> 00:04:20,720
आपकी गलत फहमी है आपके लोग उसे उजागर कर रहे हैं

61
00:04:20,720 --> 00:04:24,800
दूसरी बात यह है कि इस दृष्टिकोण को आप राधा

62
00:04:24,800 --> 00:04:29,120
जी पर नहीं सोच सकते हो जब आप राधा जी के बारे में आपके वक्ता लोग यहां वहां अपनी प्रसिद्धि

63
00:04:29,120 --> 00:04:33,280
के लिए बात कर रहे होते हैं तो आपको वहां यह सोचना चाहिए

64
00:04:33,280 --> 00:04:37,560
कि आप उनका उनका प्रतिकार करें जाकर के कि ये छुपी हुई चीजें रहने

65
00:04:37,560 --> 00:04:43,560
दो केवल जो विवादास्पद बातें ना हो केवल उनको

66
00:04:45,720 --> 00:04:50,680
उठाओ वीडियो की क्वालिटी खराब आ रही है

67
00:04:50,680 --> 00:04:56,680
हां दीदी एक

68
00:04:57,960 --> 00:05:02,000
मिनट ता वीडियो की क्वालिटी खराब आ रही

69
00:05:02,000 --> 00:05:08,000
है

70
00:05:11,720 --> 00:05:17,720
क्या

71
00:05:19,240 --> 00:05:24,600
यह अभी भी थोड़ा सा धुला ही आ रहा

72
00:05:24,600 --> 00:05:30,600
है ला ही आ रहा है

73
00:05:36,000 --> 00:05:40,280
धरा होगा

74
00:05:40,280 --> 00:05:45,200
हा तो भाई यह बेस्ट हो सकता है वीडियो जो देख चल रहा है

75
00:05:45,200 --> 00:05:49,240
तो कुछ जो मुझे स्मरण है जब तक हमारे जो आज के अतिथि

76
00:05:49,240 --> 00:05:53,320
हैं रामानंद संप्रदाय से वह जब तक

77
00:05:53,320 --> 00:05:58,640
नहीं आ रहे

78
00:05:58,640 --> 00:06:03,920
हैं को वो जब तक नहीं आ रहे

79
00:06:03,920 --> 00:06:08,040
हैं तब तक हम जो कुछ पॉइंट्स मुझे याद है

80
00:06:08,040 --> 00:06:12,400
उन पर बात कर लेते हैं जैसे कि उन्होंने एक पॉइंट यह कहा

81
00:06:12,400 --> 00:06:16,520
कि भाई वह जो शिव जी के लिए जो नपुंसक

82
00:06:16,520 --> 00:06:20,640
इत्यादि शब्दों का नपुंसक नहीं हुआ और भी गिरा हुआ श है पर बारबार बोल

83
00:06:20,640 --> 00:06:24,840
नहीं सकते तो नपुंसक

84
00:06:24,840 --> 00:06:30,840
इत्यादि जो शब्दों का उपयोग हुआ है उनके ग्रंथों में

85
00:06:31,440 --> 00:06:35,480
तो उनका एक उनका यह कहना था कि भाई

86
00:06:35,480 --> 00:06:39,720
हमने इन चीजों को उजागर नहीं किया है आप कर रहे हो हम तो छुपा रहे थे तो पहली

87
00:06:39,720 --> 00:06:43,720
बात तो यह है कि छुपाना उन चीजों को

88
00:06:43,720 --> 00:06:48,320
पड़ता है जिन्हें आप सत्य ना मानते हो

89
00:06:48,320 --> 00:06:52,320
पहली बात तो यह ठीक है फिर आप सत्य मानते हैं मगर एक व्यवहारिकता के लिए आप

90
00:06:52,320 --> 00:06:56,360
उसको छुपा रहे हैं शांत रह रहे मगर आपकी तरफ के जो लोग है वो

91
00:06:56,360 --> 00:07:02,360
नहीं छिपा रहे ना राधा जी के बारे में पटांग टिप्पणियां

92
00:07:03,880 --> 00:07:09,720
और यह मतलब एन केन प्रकार बहुत सी चीज

93
00:07:09,720 --> 00:07:13,960
वो शॉर्ट वीडियो बनाते हैं हम

94
00:07:13,960 --> 00:07:18,120
आप लोगों का सहयोग है आप में से जो लोग हमारा साथ देना चाहे शॉर्ट वीडियो इत्यादि

95
00:07:18,120 --> 00:07:22,120
बनाने में वह हमसे जुड़ सकते हैं धर्म रक्षा के निमित्त

96
00:07:22,120 --> 00:07:26,080
कार्य कर सकते हैं

97
00:07:26,080 --> 00:07:32,080
74036 तो शॉर्ट वीडियो बनाने में हमारी सहायता करें

98
00:07:32,320 --> 00:07:36,360
तो पहली बात तो यह है कि आपके लोग जो हैं

99
00:07:36,360 --> 00:07:40,600
आप नहीं बोल रहे मगर आपके लोग बोल रहे हैं दूसरी बात यह है कि राधा

100
00:07:40,600 --> 00:07:44,600
जी के बारे में आपने कहा कि यह है वह है वहां पर कुब्जा के साथ य

101
00:07:44,600 --> 00:07:48,920
हुआ कृष्ण के कृष्ण ने ऐसा किया वैसा किया तो इन

102
00:07:48,920 --> 00:07:52,960
सारी चीजों का मिनट से पहले निरुत्तर कर देने

103
00:07:52,960 --> 00:07:56,960
वाला उत्तर है मेरे पास जितनी भी आप कथाएं कर लीजिए जितने भी

104
00:07:56,960 --> 00:08:01,160
पन्ने खोल खोल के दिखा दीजिए मिनट से पहले एक

105
00:08:01,160 --> 00:08:05,640
मिनट लगेगा और आप निरुत्तर हो जाएंगे

106
00:08:05,640 --> 00:08:09,760
और वह क्या है पंक्ति जिन शास्त्रों का अर्थ

107
00:08:09,760 --> 00:08:14,040
आप हम मैं बता उन्हीं शास्त्रों

108
00:08:14,040 --> 00:08:18,160
में दिया गया है कि स्व अध्ययन ना करें

109
00:08:18,160 --> 00:08:22,400
उन्हीं शास्त्रों में दिया गया है स्कंद पुराण में दिया गया जिसका गुरु

110
00:08:22,400 --> 00:08:26,400
नहीं वो पशु है चाहे आप चारों वेद पढ़ ले सारे पुराण पढ़ ले सारे उपनिषद

111
00:08:26,400 --> 00:08:30,400
पढ़ ले जब तब व्रत दान पुण्य कर्म तीर्थ दान यज्ञ सब कुछ वर्थ

112
00:08:30,400 --> 00:08:34,760
है किसके बिना गुरु के बिना वो भी परंपरा प्राप्त प्रामाणिक

113
00:08:34,760 --> 00:08:38,840
इसके भी प्रमाण है तो आप गुरु परंपरा प्र प्रणाली को

114
00:08:38,840 --> 00:08:41,680
नहीं मानते हो आप गुरु की महत्ता

115
00:08:41,680 --> 00:08:45,320
को नहीं मानते

116
00:08:45,320 --> 00:08:49,520
हो हां शायद इंटरनेट की वजह से खराब हो रही है अभी थोड़ी

117
00:08:49,520 --> 00:08:53,600
देर में ठीक हो जाएगी तो आप गुरु गुरु की महत्ता को नहीं मानते

118
00:08:53,600 --> 00:08:57,760
मगर जिन ग्रंथों को आप बताने का दावा कर रहे हो कि हम इसका

119
00:08:57,760 --> 00:09:01,840
यह अर्थ आपको बता रहे देखिए कितना गलत अर्थ वो ग्रंथ जो है

120
00:09:01,840 --> 00:09:05,880
गुरु की महत्ता को मानते हैं वो ग्रंथ यह

121
00:09:05,880 --> 00:09:10,320
नहीं कहते कि हमारा अध्ययन आप स्वयं से कर ले जो

122
00:09:10,320 --> 00:09:14,320
आचार्य गण उन ग्रंथों को मानने वाले हैं स्वीकार करने वाले हैं

123
00:09:14,320 --> 00:09:19,120
वह कभी भी स्वतंत्र रूप से उन ग्रंथों का अध्ययन करने की शिक्षा नहीं

124
00:09:19,120 --> 00:09:23,520
देते भागवत पुराण की कथा होती है पूरी के शंकराचार्य

125
00:09:23,520 --> 00:09:27,560
जी ये नहीं कहते जाओ भागवत पुराण का अध्ययन करो जाकर के अपने आप

126
00:09:27,560 --> 00:09:31,840
अध्ययन करो मगर फिर जो गुरुओं की गुरुओं के द्वारा

127
00:09:31,840 --> 00:09:35,840
जो बताए जा रहे सिद्धांत उसकी सीमा में रह के कर वही शास्त्र

128
00:09:35,840 --> 00:09:40,000
कह रहे हैं जिसका आप अर्थ बता रहे हो ब्रह्मवर्त पुराण स्कंद पुराण भागवत पुराण सब

129
00:09:40,000 --> 00:09:44,000
में गुरु की महिमा है तो तो जब आप उसकी किसी चीज

130
00:09:44,000 --> 00:09:48,400
का अर्थ बता रहे हो कि देखो कितना गंदा लिखा है तो दूसरी चीज का भी अर्थ बताओ ना

131
00:09:48,400 --> 00:09:52,480
कि इन शास्त्रों को गुरु के बिना नहीं पढ़ना है खत्म हो

132
00:09:52,480 --> 00:09:56,480
गया गुरु के पास जाओगे वो आपको आदि दैविक आदि भौतिक आध्यात्मिक अर्थ के साथ

133
00:09:56,480 --> 00:09:57,480
बताएगा

134
00:09:57,480 --> 00:10:01,960
कि क्यों है यह लीला जैसे गोपियों के वस्त्र

135
00:10:01,960 --> 00:10:06,560
उठाना आपका एक क्लेम आता है गोपियों के वस्त्र उठाए भगवान श्री कृष्ण ने

136
00:10:06,560 --> 00:10:10,680
क्या निराकार ईश्वर जो है आर्य समाज का वह उन गोपियों

137
00:10:10,680 --> 00:10:14,760
को नगन अवस्था में नहीं देख रहा होता है वहां नहीं होता है वह देखने

138
00:10:14,760 --> 00:10:18,880
के लिए यह सारी बातें हैं हमारे अतिथि गण

139
00:10:18,880 --> 00:10:22,920
आ गए सबसे पहले जय श्री राम

140
00:10:22,920 --> 00:10:27,280
आपको पुनीत जी और रामानंद

141
00:10:27,280 --> 00:10:31,880
जय श्री राम इनका थोड़ा सा परिचय मैं बता

142
00:10:31,880 --> 00:10:34,080
दूं

143
00:10:34,080 --> 00:10:38,440
कि यह रामानंद संप्रदाय से हैं और फिर मेरे पास उतने

144
00:10:38,440 --> 00:10:42,600
शब्द नहीं है कि मैं सारी इनकी चीजें बता सकूं तो यह खुद ही बताएंगे तो बत

145
00:10:42,600 --> 00:10:46,720
ज्यादा अच्छा लगेगा बस मैं जो एक बात बोल रहा था उसको अंत कर दूं

146
00:10:46,720 --> 00:10:50,800
कि हमने उस वीडियो में वीर सेवों

147
00:10:50,800 --> 00:10:55,040
को बताया था कि तुम कैसे शिव भक्त हो जो अपने शिव के बारे में ऐसी बातें

148
00:10:55,040 --> 00:10:59,040
सुन लेते हो प्रदीप मिश्रा से नाक र नाक रगवाने

149
00:10:59,040 --> 00:11:03,080
वा वह राधा भक्त अब कहां है जो राधा जी के

150
00:11:03,080 --> 00:11:07,240
बारे में इतनी गंदी बातें होने पर भी चुप रह जाते हैं तो जब मैंने वहां

151
00:11:07,240 --> 00:11:11,480
पर य कहा था कि तुमसे कुछ नहीं होगा यह होगा तो इस पर जब प्रतिक्रिया

152
00:11:11,480 --> 00:11:13,280
स्वरूप जो वीडियो बनाया

153
00:11:13,280 --> 00:11:17,320
गया समाज यों की तरफ से अलंकार वालों की तरफ से तो

154
00:11:17,320 --> 00:11:20,640
उसमें यह कहा गया

155
00:11:20,640 --> 00:11:24,880
कि भाई आप इसमें कहना क्या चाह रहे हैं वीर सेब लोगों

156
00:11:24,880 --> 00:11:30,880
से उनको क्या करना चाहिए क्या कहना चाह रहे हैं

157
00:11:32,840 --> 00:11:38,840
तो यह

158
00:11:45,600 --> 00:11:49,680
उनकी जो हमारा उसके बाद जो नेक्स्ट वीडियो आया उसमें

159
00:11:49,680 --> 00:11:53,760
हमने अपनी मंशा आपको प्रकट कर दी कि हम चाह रहे हैं कि जो भी

160
00:11:53,760 --> 00:11:58,160
व्यक्ति भगवान में आस्थान वित है भगवान के भगवत विग्रह में आस्थान

161
00:11:58,160 --> 00:12:02,520
वित है ब विष्णु महेश भगवती और गणेश में आस्थान वित है राम कृष्ण

162
00:12:02,520 --> 00:12:06,960
उनके जो अवतार उम आस्थान वित है वह नाम जप करना स्टार्ट

163
00:12:06,960 --> 00:12:11,160
करें तो हमने जो उसमें आवान किया था सबका वह

164
00:12:11,160 --> 00:12:15,280
सबसे पहले उ उनसे हमने अनुरोध किया कि

165
00:12:15,280 --> 00:12:19,400
आप नाम जप करना स्टार्ट करें प एक तो यह

166
00:12:19,400 --> 00:12:23,480
बात हो गई अ दूसरी बात इसी में लगा लगा एक व्यक्ति का

167
00:12:23,480 --> 00:12:27,560
एक क्वेश्चन आया कि महाराणा प्रताप

168
00:12:27,560 --> 00:12:28,560
क्या

169
00:12:28,560 --> 00:12:32,640
महाराणा प्रताप क्या यूं ही युद्ध लड़े नाम जप करना चाहिए

170
00:12:32,640 --> 00:12:36,800
था मेरे भाई महाराणा प्रताप जब युद्ध करने जाते होंगे तो जाने

171
00:12:36,800 --> 00:12:40,800
से पहले जल का पान जल पान या फिर भोजन इत्यादि करते हैं कि

172
00:12:40,800 --> 00:12:44,960
नहीं करते हैं तो अगर हम यह कहे कि सबसे पहले आप भोजन कर लो युद्ध

173
00:12:44,960 --> 00:12:48,960
पर जाने से पहले सबसे पहले आप अस्त्र शस्त्र

174
00:12:48,960 --> 00:12:53,040
एकत्रित कर लो युद्ध पर जाने से पहले तो इसका अर्थ आप यह निकालेंगे

175
00:12:53,040 --> 00:12:57,440
कि वहां पर जब आप यह कह रहे होंगे कि महाराणा प्रताप को

176
00:12:57,440 --> 00:13:01,880
महाराणा प्रताप जी को या छत्रपति शिवाजी को अस्त्र शस्त्र उठा लेने चाहिए

177
00:13:01,880 --> 00:13:05,880
युद्ध पर जाने से पहले तो क्या आपसे काउंटर क्वेश्चन किया जाना उचित

178
00:13:05,880 --> 00:13:10,560
होगा कि अगर हथियार उठा लेने से ही काम चल जाता तो

179
00:13:10,560 --> 00:13:14,800
युद्ध लड़ने की क्या आवश्यकता थी छत्रपति शिवाजी ने अनावश्यक ही

180
00:13:14,800 --> 00:13:19,040
युद्ध लड़ा यह सब घटक है मेरे भाई क्रमिक क्रमिक

181
00:13:19,040 --> 00:13:23,040
अभिव्यक्ति है यह सब हमारे प्रयोजन की जब आपके अंदर नामा

182
00:13:23,040 --> 00:13:27,120
जब आप नाम जप का तप अपने अंदर निर्माण करेंगे भगवान की

183
00:13:27,120 --> 00:13:31,840
भगवत भक्ति का बल एकत्रित करेंगे तब आपको वो

184
00:13:31,840 --> 00:13:35,960
बल आएगा जब आप विप्लव की स्थितियों में अपने धर्म की रक्षा के लिए खड़े

185
00:13:35,960 --> 00:13:40,480
हो पाएंगे बस इतना ही बताऊंगा अब आगे हमारे जो

186
00:13:40,480 --> 00:13:43,640
अतिथि आए हैं आदरणीय

187
00:13:43,640 --> 00:13:47,640
पुनीत जी तो आप सबसे पहले थोड़ा सा अपने बारे में और

188
00:13:47,640 --> 00:13:52,240
आपका जो एक बहुत ही दिव्य एक पुराना आपका वंशावली

189
00:13:52,240 --> 00:13:56,440
और आपका एक बैकग्राउंड है बहुत प्रभावशाली वह बताते हुए हमारे दर्शकों

190
00:13:56,440 --> 00:14:00,640
को अपना परिचय अवश्य दे जिससे कि वो जान पाए व जहां जो चीजें मैंने आपके

191
00:14:00,640 --> 00:14:05,040
बारे में जानी थी तो मैं तो मंत्रमुग्ध हो गया था उन सब चीजों को सुन कर के थोड़ा सा

192
00:14:05,040 --> 00:14:09,080
वह सब बताएं अपने बारे में दर्श श्रीराम सर्वप्रथम

193
00:14:09,080 --> 00:14:13,320
तो मैं क्षमा चाहूंगा मैं थोड़ा विलंब से आया

194
00:14:13,320 --> 00:14:17,520
आपके इस कार्यक्रम में उसके लिए सर्वप्रथम मैं क्षमा मांगता हूं

195
00:14:17,520 --> 00:14:21,600
और चंद्रमौलेश्वर भगवान को प्रणाम करते हुए मैं

196
00:14:21,600 --> 00:14:25,800
पुनीत पाठक और हमारे कोय

197
00:14:25,800 --> 00:14:30,160
सौभाग्य प्राप्त हुआ यह शरीर जो है ऐसे परिवार में

198
00:14:30,160 --> 00:14:34,280
जन्म लिया जहां पर पीढ़ियों से श्री राम

199
00:14:34,280 --> 00:14:38,360
कथा श्री राम के गुणगान से ही जीवन चला

200
00:14:38,360 --> 00:14:42,360
है हमारे प्र पितामह पंडित श्री राम गुलाम जी

201
00:14:42,360 --> 00:14:46,600
महाराज काशी के परम विद्वान थे श्रीमद भागवत के प्रकांड विद्वान

202
00:14:46,600 --> 00:14:50,800
थे उसके बाद उनके उसके बाद जो हमारे परदादा

203
00:14:50,800 --> 00:14:55,320
थे श्री राधेश्याम रामायणी जी उसके बाद जो हमारे पिता महा थे

204
00:14:55,320 --> 00:14:59,280
श्री गोस्वामी इंदु भूषण रामायणी जी मैं उनका उनके

205
00:14:59,280 --> 00:15:03,440
सु पौत्र उनका कृपा पात्र हूं और उसी परंपरा में

206
00:15:03,440 --> 00:15:07,560
जो हमारी गुरु परंपरा है वह भी पुरी से ही संबंध

207
00:15:07,560 --> 00:15:11,920
है उसका भी हमारे जो दादा गुरुदेव थे

208
00:15:11,920 --> 00:15:16,000
परम पूज्य श्री महंत श्री गंगादास

209
00:15:16,000 --> 00:15:20,600
जी महाराज छोटा छता पुरी तो वह हमारी रामानंदी परंपरा है

210
00:15:20,600 --> 00:15:24,840
इस प्रकार से इस दास को सौभाग्य मिला कि भगवत सेवा और अपने

211
00:15:24,840 --> 00:15:29,480
श्री मुख से ये श्री राम के गुणगान को

212
00:15:29,480 --> 00:15:33,520
कर सके अपना जीवन चला सके क्या बात है बहुत

213
00:15:33,520 --> 00:15:37,680
अच्छी आपने और आपने हमें एक जगह और दिखाई थी कि आपके

214
00:15:37,680 --> 00:15:41,680
य कुछ प्राचीन गद्दी है गुरु गद्दी

215
00:15:41,680 --> 00:15:45,840
है शायद वहा जहा हम पहुंचे थे जहा आपका

216
00:15:45,840 --> 00:15:49,960
निवास है भगत कपा जिस समय भारत में

217
00:15:49,960 --> 00:15:53,960
अंग्रेजी शासन था शिवांग जी उस समय हमारे

218
00:15:53,960 --> 00:15:58,200
जो पितामह थे वह आंदोलन

219
00:15:58,200 --> 00:16:02,360
में थे ता संग्राम सेनानी थे तो वह अपनी जगह छोड़ कर के जहा उनका जन्म

220
00:16:02,360 --> 00:16:06,640
स्थान था वहां से वृंदावन आए वृंदावन में उन्होंने मानस

221
00:16:06,640 --> 00:16:10,840
मंदिर का निर्माण किया मानस मंदिर से अभिप्राय श्री रामचरित्र मानस

222
00:16:10,840 --> 00:16:14,640
का व 40 वर्ष अखंड पारायण हुआ

223
00:16:14,640 --> 00:16:18,800
40 वर्ष अखंड पारायण अनवरत चला तो

224
00:16:18,800 --> 00:16:22,840
वहां पर व्यासपीठ है और उसी और व सौभाग्य से हमें जगह ऐसी प्राप्त

225
00:16:22,840 --> 00:16:27,040
हुई थी वो श्री ब्रह्मकुंड वृंदावन में एक जगह ब्रह्मकुंड जहां

226
00:16:27,040 --> 00:16:31,280
से भगवान श्री कृष्ण ने अपने गो वालो को वैकुंठ के दर्शन कराए थे स्नान

227
00:16:31,280 --> 00:16:35,320
करवा के ब्रह्मकुंड में तो वहीं पर श्री कर्माबाई की गुफा

228
00:16:35,320 --> 00:16:39,320
है जिसकी आप चर्चा कर रहे हैं वह गुफा वो उस घर

229
00:16:39,320 --> 00:16:43,360
की नीव में मतलब हमारा जो घर है उसकी नीव में वो गुफा अभी भी है

230
00:16:43,360 --> 00:16:47,680
और अभी भी व पूजा सेवा होती है विधिवत मैं तो इस समय

231
00:16:47,680 --> 00:16:51,720
भगवत कथा के लिए श्री राम कथा के लिए जलंधर में आया हुआ हूं अभी मैं

232
00:16:51,720 --> 00:16:56,120
आपसे जहां से जुड़ा हुआ हूं जलंधर शहर से जुड़ा हुआ हूं नहीं तो मैं अगर वृंदावन

233
00:16:56,120 --> 00:17:00,280
होता तो निश्चित आपको अभी समय और जितने भी लोग आपके संग आपका परिकर जुड़ा

234
00:17:00,280 --> 00:17:04,360
है उनको दर्शन करवाता जी जी जी नहीं नहीं मैं तो वहां पर

235
00:17:04,360 --> 00:17:08,440
जाकर के बड़ा मतलब थोड़ा धन्य मुझे अनुभव हुआ

236
00:17:08,440 --> 00:17:12,440
कि भगवत कृपा से उस जगह वहां वो ब्रह्म कुंड के दर्शन आपने कराए वहां

237
00:17:12,440 --> 00:17:16,600
से पूरे वृंदावन के आपने दर्शन कराए तो बहुत ही सौभाग्यशाली मुझे

238
00:17:16,600 --> 00:17:20,920
आप अगर भौतिक दृष्टि से देखा जाए तो मुझे आपसे थोड़ी जलस

239
00:17:20,920 --> 00:17:25,480
भी हुआ उस समय ईर्ष्या भी हुई कि आप कि आप इतने

240
00:17:25,480 --> 00:17:29,680
पावन जगह पर स्थित है स्थाई स्थाई रूप से हैं और

241
00:17:29,680 --> 00:17:33,680
हम लोग यहां वहां पर फिर लगा के जहां पर भक्ति हो

242
00:17:33,680 --> 00:17:38,080
जाए भगवान की तो वहीं पर भगवान मिल जाते हैं फिर इस तरह से अपने हदय

243
00:17:38,080 --> 00:17:42,640
को संतोष दिया हृदय को के आप ऐसे करके

244
00:17:42,640 --> 00:17:46,680
मगर बहुत जितनी उपयोगिता

245
00:17:46,680 --> 00:17:50,840
शरीर में मुझे लगता है कि अचल अंगों के जैसे

246
00:17:50,840 --> 00:17:54,960
दिल है और हमारी बुद्धि है वो तो एक स्थिर है उनका

247
00:17:54,960 --> 00:17:58,960
तो काम लेकिन जैसे हमारे पैर है हाथ है उनकी

248
00:17:58,960 --> 00:18:02,960
आवश्यकता भी क्योंकि आप कितना भी बढ़िया सोच ले कितने भी अच्छे विचार रख ले जब तक

249
00:18:02,960 --> 00:18:07,480
वो विचार जो है प्रसारित नहीं होंगे आप

250
00:18:07,480 --> 00:18:11,520
के माध्यम से जिस तरह का आप मैं वास्तव में आपके कार्य की सराहना करता

251
00:18:11,520 --> 00:18:15,520
हूं कि मतलब एक योद्धा जो होता है सनातन धर्म को इस

252
00:18:15,520 --> 00:18:19,880
समय योद्धाओं की बहुत आवश्यकता है नितांत आवश्यकता है क्

253
00:18:19,880 --> 00:18:23,960
जिस दिशा में हमारा अभी आप मैं तो थोड़ा लेट जुड़ा

254
00:18:23,960 --> 00:18:28,240
आपसे आप जो चर्चा कर रहे थे मैं श्रवण कर रहा था कि

255
00:18:28,240 --> 00:18:32,520
यह गल उनकी नहीं है जो प्रश्न कर रहे हैं उनका ब्रेन पूरी तरह से वश

256
00:18:32,520 --> 00:18:36,680
कर दिया गया है वो सवाल ही ऐसा कर रहे अरे

257
00:18:36,680 --> 00:18:40,800
भाई महाराणा प्रताप अभी आप चर्चा कर रहे थे श्री महाराणा

258
00:18:40,800 --> 00:18:44,880
प्रताप के इष्टदेव हैं भगवान शंकर चित्तौड़ के किले में

259
00:18:44,880 --> 00:18:49,120
उनका उनकी जो स्थापना है एकलिंग महादेव के नाम से है

260
00:18:49,120 --> 00:18:53,240
और एकलिंग के परम भक्त थे श्री महाराणा प्रताप बिना उनकी सेवा

261
00:18:53,240 --> 00:18:57,960
की है वो अपना दिनचर्या शुरू ही नहीं करते थे आप आज भी जाकर के चितौड़

262
00:18:57,960 --> 00:19:02,040
दुर्ग में दर्शन कर सकते हैं एकलिंग महादेव वहां विराजमान है जी

263
00:19:02,040 --> 00:19:06,400
जी जी जी तो कहने का अभिप्राय यह है

264
00:19:06,400 --> 00:19:10,560
कि यह प्रश्न क्यों उठ रहे हैं क्योंकि

265
00:19:10,560 --> 00:19:14,560
और हमसे क्यों उठ रहे हैं देखिए जब तक घाव दबा हुआ

266
00:19:14,560 --> 00:19:18,800
है दबा हुआ है बीमारी दबी हुई है दबी हुई है लेकिन जब उस पर कोई कुरेता

267
00:19:18,800 --> 00:19:23,000
है ना तो वो बीमारी उठती है उफनती है बाहर आती है वो जखम बाहर आता

268
00:19:23,000 --> 00:19:27,200
है तो ये गलती उनकी नहीं है ये गलती तो किसी ने बड़ा

269
00:19:27,200 --> 00:19:31,480
घनघोर षड्यंत्र करके के और जैसे हमारे परम पूज्य

270
00:19:31,480 --> 00:19:35,560
आचार्य परम पूज्य गुरुदेव श्रीमद जगतगुरु शंकराचार्य

271
00:19:35,560 --> 00:19:39,960
भगवान श्री पूरी पीठाधीश्वर जो है आपको शायद विधित

272
00:19:39,960 --> 00:19:44,880
हो एक बार उनके खिलाफ षड्यंत्र किया गया था महाराज श्री को विष देने की

273
00:19:44,880 --> 00:19:48,920
कोशिश की गई थी जी जी जी और तब से आप

274
00:19:48,920 --> 00:19:53,360
देखते होंगे महाराज श्री अपने संग एक तामे का पात्र में जल हमेशा और बारबार उसको

275
00:19:53,360 --> 00:19:57,400
क्योंकि उनकी षडयंत्र किया गया था क्यों भाई क्यों ऐसा

276
00:19:57,400 --> 00:20:00,960
द्वेष है क्या क्या पीड़ा

277
00:20:00,960 --> 00:20:05,040
है तो आप जैसे जो क्रांतिकारी मैं

278
00:20:05,040 --> 00:20:09,120
तो आपको संत मानूंगा क्रांतिकारी जहां पर वशिष्ट की उपयोगिता

279
00:20:09,120 --> 00:20:13,280
है हमारे शास्त्रों में हमारे पुराणों में जहा वशिष्ठ गुरुदेव

280
00:20:13,280 --> 00:20:17,280
की उपयोगिता है वही विश्वामित्र की भी उपयोगिता है कि एक एक ऐसा अस्त्र

281
00:20:17,280 --> 00:20:21,640
है परमाणु अस्त्र जो विध्वंस कर सकता है वही अगस्त ऋषि की भी उपयोगिता

282
00:20:21,640 --> 00:20:25,760
है जो तीन अंजलि में केशवा नमो नारायण नमो माधवा नमो करके समुद्र सुखा

283
00:20:25,760 --> 00:20:29,760
दे तो दोनों की ज्ञान से भी भक्ति योग

284
00:20:29,760 --> 00:20:33,880
भी है ज्ञान योग भी और कर्म योग भी है तो तीनों चाहिए तब

285
00:20:33,880 --> 00:20:38,240
जाकर के जो है जो जो संस्कृति है हमारी सभ्यता

286
00:20:38,240 --> 00:20:42,280
है व पुष्ट होती है जी जी जी

287
00:20:42,280 --> 00:20:46,360
आपने जैसे अभी आभार आपका अने जो

288
00:20:46,360 --> 00:20:50,400
कहा आपने जैसे जो अभी गुरुदेव का जो जीवन के बारे में

289
00:20:50,400 --> 00:20:54,400
बताया हमें गुरुदेव का जीवन जो जीवन के

290
00:20:54,400 --> 00:20:58,680
बारे में उतना डेप्थ में नहीं पता है जितना आपको पता है

291
00:20:58,680 --> 00:21:04,120
उसका कारण मैं चाहूंगा कि एक बार थोड़ा सा बताएं दर्शकों

292
00:21:04,120 --> 00:21:08,320
को वैसे तो पूज्य महाराज श्री के दर्शन

293
00:21:08,320 --> 00:21:12,800
का सौभाग्य मुझे एक बार उनका चतुर्मास वृंदावन में चल रहा था तब हुआ था

294
00:21:12,800 --> 00:21:16,040
उसके बाद उनके अति निकट एक उनके परम शिष्य

295
00:21:16,040 --> 00:21:20,160
हैं श्री भारत भूषण पांडे जी वो आरा के हैं तो

296
00:21:20,160 --> 00:21:24,200
उनसे मेरी एक बार उनके संग मैंने बिहार के बेगूसराय जिले

297
00:21:24,200 --> 00:21:28,200
में कथा करी थी तो तब से उनसे अत्यंत प्रेम हो गया तब उन्होंने मुझे ये चर्चाएं

298
00:21:28,200 --> 00:21:32,360
बताई थी कि इस इस प्रकार की घटना है और हमारा ऐसे

299
00:21:32,360 --> 00:21:36,600
भी जुड़ाव है कि वर्तमान जो पीठाधीश्वर है पुरी

300
00:21:36,600 --> 00:21:40,760
के उनके जो परमाचार्य थे पूर्वा चार्य थे श्रीमद जगतगुरु

301
00:21:40,760 --> 00:21:45,160
शंकराचार्य पाद भगवान श्री निरंजन देव तीर्थ जी महाराज

302
00:21:45,160 --> 00:21:49,560
जी उनके संग हमारे पितामह जो है एक बार

303
00:21:49,560 --> 00:21:53,960
उनकी दोनों की कथा आरा में एक जगह बड़ी मठिया तो बड़ी मठिया

304
00:21:53,960 --> 00:21:57,960
में पूज्य महाराज श्री शंकराचार्य भगवान भी आते थे और हमारे दादाजी भी

305
00:21:57,960 --> 00:22:02,320
जाते थे वहां दोनों की कथाएं होती थी तो इस प्रकार से अत्यंत सन्निकट

306
00:22:02,320 --> 00:22:06,720
प्रेम है उनसे अच्छा अच्छा और कुछ करपात्री

307
00:22:06,720 --> 00:22:10,920
जी महाराज के साथ भी आपका कुछ वो रहा है जुड़ाव ऐसा

308
00:22:10,920 --> 00:22:15,000
कुछ मेरा तो खैर जन्म भी नहीं था उस समय का मेरी आयु मात्र 26

309
00:22:15,000 --> 00:22:19,120
वर्ष है लेकिन हमारे जो पितामह थे परम पूज्य

310
00:22:19,120 --> 00:22:23,880
श्री गोस्वामी इंदु भूषण रामायणी जी महाराज उनकी

311
00:22:23,880 --> 00:22:28,200
गीता प्रेस गोरखपुर में हनुमान प्रसाद पोदार जी ने वो कराई थी कथा

312
00:22:28,200 --> 00:22:31,120
तब पूज्य महाराज श्री धर्म सम्राट स्वामी कृपा प्री स्वामी जी

313
00:22:31,120 --> 00:22:35,440
महाराज वहां उपस्थित थे उस समय हमारे पिता मा ने एक हनुमान

314
00:22:35,440 --> 00:22:39,760
चालीसा पर भाष्य लिखा था तो उस पर पूज्य महाराज श्री ने वक्तव्य दिया

315
00:22:39,760 --> 00:22:44,120
था कि जिसके घर में पुराण आदि शास्त्र ना भी हो लेकिन यह

316
00:22:44,120 --> 00:22:48,360
हनुमान चालीसा भाष्य हो तो भी उसके घर में मंगलमय

317
00:22:48,360 --> 00:22:52,640
मंगल होगा उसका घर स्वर्ग होगा क्योंकि ये बहुत अलौकिक ग्रंथ उन्होंने लिखा

318
00:22:52,640 --> 00:22:56,640
था हनुमान चालीसा प उससे पहले कोई भाष्य था ही नहीं

319
00:22:56,640 --> 00:23:00,760
अच्छा अच्छा अच्छा भाष्य अभी भी उपलब्ध है हनुमान

320
00:23:00,760 --> 00:23:05,000
चालीसा पर हा भाष पतिया उपलब्ध है और हमारा जो हमारा

321
00:23:05,000 --> 00:23:09,080
जो हमारी जो टीम है मानस मंदिर के द्वारा राम कथा सत्संग मंडल के

322
00:23:09,080 --> 00:23:13,560
द्वारा उसके द्वारा हम उसको पुनः रिप्रिंट करवा रहे हैं

323
00:23:13,560 --> 00:23:17,720
ताकि सबको जनमानस को व सुलभ हो जाए जी जी बिल्कुल

324
00:23:17,720 --> 00:23:21,840
आप हमें बताइएगा तो हम भी यहां से प्रचारित प्रसारित उसको करना

325
00:23:21,840 --> 00:23:26,000
चाहेंगे जो हनुमान जरूर जरूर

326
00:23:26,000 --> 00:23:30,840
जरूर बारबार आपकी इसलिए प्रशंसा करना चाहूंगा कि देखिए

327
00:23:30,840 --> 00:23:35,000
बात पता है क्या है यह है कि

328
00:23:35,000 --> 00:23:39,760
जिस चीज को हमने जाना नहीं है जिस चीज को हमने जाना नहीं है

329
00:23:39,760 --> 00:23:43,760
उस चीज के प्रति हमारा खिंचाव नहीं होगा और

330
00:23:43,760 --> 00:23:46,160
जिस चीज के प्रति हमारा खिंचाव नहीं हो रहा है ना

331
00:23:46,160 --> 00:23:50,600
उससे सहज प्रेम नहीं होगा और जिससे प्रेम नहीं होगा ना

332
00:23:50,600 --> 00:23:54,600
उसके मर्म को हम कभी नहीं जान पाएंगे और जिसका मर्म हम कभी नहीं

333
00:23:54,600 --> 00:23:59,200
जान पाएंगे ना उसके प्रति ऐसी उल्टी पुल्टी बातें करेंगे

334
00:23:59,200 --> 00:24:03,280
ये है जैसे धर्म तत्वम नीतम

335
00:24:03,280 --> 00:24:07,480
गुया महा जनो यन गत स पं ये जो वेदा

336
00:24:07,480 --> 00:24:11,480
शास्त्रों के तत्व है ना ये कूट है

337
00:24:11,480 --> 00:24:15,800
ये सं भ्रमित करने वाले हैं जी जी और

338
00:24:15,800 --> 00:24:19,800
मैं तो कहता हूं ये उल्टे पल्टे जो अर्थ होते हैं और

339
00:24:19,800 --> 00:24:24,040
जो ये जो होता है ना इसको देख कर के मेरे को ऐसा प्रतीत होता है कभी कभी व्यास

340
00:24:24,040 --> 00:24:28,760
जी महाराज जो खुश होते होंगे बोले अच्छा है भाग गया

341
00:24:28,760 --> 00:24:32,920
स नहीं आया रामचरित मानस में एक चौपाई लिखी आवत यही सर

342
00:24:32,920 --> 00:24:37,080
अति कठिनाई जो राम चरित है

343
00:24:37,080 --> 00:24:41,160
राम का चरित्र है पुराण आदि है वेदा शास्त्रों का

344
00:24:41,160 --> 00:24:45,360
जो परम सरोवर है आवत यही सर अति कठिनाई

345
00:24:45,360 --> 00:24:49,520
वहां पहुंचने में बहुत कठिनाई है आ ही नहीं सकता कैसे आ सकता है

346
00:24:49,520 --> 00:24:53,640
राम कृपा बिनु आव ना जाई बिना राम की कृपा के कोई आ

347
00:24:53,640 --> 00:24:57,760
ही नहीं सकता तो राम की कृपा कैसे होती है राम जिस

348
00:24:57,760 --> 00:25:01,280
पर कृपा करेंगे उसको सबसे पहले किसी सद गुरु

349
00:25:01,280 --> 00:25:05,440
से मिलवा जाएंगे ध्रुव जी ने संकल्प किया हमारे

350
00:25:05,440 --> 00:25:09,440
शास्त्रों में कथा है पुराणों में कता है ध्रुव जी ने संकल्प किया ध्रुव जी ने

351
00:25:09,440 --> 00:25:13,480
क्या नारद जी को इन्विटेशन भेजा था भाई तुम आओ मुझे दीक्षा दो नहीं उन्होंने बस

352
00:25:13,480 --> 00:25:18,320
संकल्प किया कि मुझे भगवत प्राप्ति करनी है सदगुरु खुद मिल गए

353
00:25:18,320 --> 00:25:22,360
जी खुद मिल गए तो कहने का अभिप्राय आप जो अभी

354
00:25:22,360 --> 00:25:26,360
बात कर रहे थे पुराणों की जो भाषा है ना वो जन

355
00:25:26,360 --> 00:25:31,840
साधारण नहीं समझ सकते हैं जी जी कैसे

356
00:25:31,840 --> 00:25:36,400
कैसे आप आप कुछ क रहे हा इसमें क्या है कि

357
00:25:36,400 --> 00:25:40,480
मतलब मैं यह सोचता हूं कि व्यक्ति इतना पक्षपाती और अन्याय

358
00:25:40,480 --> 00:25:44,560
शष्ण कैसे हो जाता है भाई जो उन्होंने वेद के

359
00:25:44,560 --> 00:25:49,440
अर्थ लिखे हैं उसके नीचे से उनका भाष्य उनकी कमेंट्री हटा दो

360
00:25:49,440 --> 00:25:53,680
उनके वेद के भाष्य वेदों के भाष्य में आपको मिल जाएगा वेदों

361
00:25:53,680 --> 00:25:57,720
के भाष में आपको वैसे ही तत्व मिल जाएंगे वेदों के अर्थ में वैसे

362
00:25:57,720 --> 00:26:01,760
ही तत्व मिल जाएंगे जैसे जिन तत्वों का विरोध कर रहे हैं निंदा कर रहे हैं पुराण

363
00:26:01,760 --> 00:26:05,880
की है ना अब क्या किया इन्होंने वहां

364
00:26:05,880 --> 00:26:10,800
पर जी जी हां जी हा बोलिए

365
00:26:10,800 --> 00:26:15,120
यहां पर वेदों में इस तरह की बात आई तो इन्होंने अब क्योंकि

366
00:26:15,120 --> 00:26:16,280
वेद के अलावा फिर

367
00:26:16,280 --> 00:26:20,880
कहां जाएंगे वेद के बाद कौन सा विकल्प रह जाएगा स्वयं को सनातनी कहने के लिए

368
00:26:20,880 --> 00:26:25,000
तो कोई भी उनका मंतव्य र हो मगर वेद की रक्षा के लिए उन्होंने

369
00:26:25,000 --> 00:26:29,000
क्या किया कि जहां पर इस तरह की बातें आई है वहां पर भाव अपने हिसाब से वो कुछ भी

370
00:26:29,000 --> 00:26:33,240
अलंकार के नाम पर कुछ भी करके वहां पर तो इन्होंने कोशिश की कि हम इसके

371
00:26:33,240 --> 00:26:37,280
इस अर्थ को बदल दे और सही अर्थ लोगों को बता द अपने मन मुताबिक बता

372
00:26:37,280 --> 00:26:41,600
दे मगर जब पुराणों में वैसी बातें आ रही है तो अगर आप

373
00:26:41,600 --> 00:26:45,600
उसका भाष्य करने में इंटरेस्टेड नहीं है तो कम से कम दुष्प्रचार

374
00:26:45,600 --> 00:26:49,640
तो नहीं करना चाहिए अपमान तो नहीं करना चाहिए दुष्प्रचार

375
00:26:49,640 --> 00:26:53,800
क्यों कर रहे हो उसका भी भाष्य कर दो जैसे आपने वेदों का अपने मन मुताबिक भाष्य कर दिया

376
00:26:53,800 --> 00:26:58,040
और फिर प्रचार करो उसका मगर वहां पर केवल अर्थ लेकर के प्रचार

377
00:26:58,040 --> 00:27:02,080
कर कर दिया ये जो ग्रंथ है

378
00:27:02,080 --> 00:27:06,360
ये पुराण दिग दर्शन पंडित माधवाचार्य शास्त्री जी का

379
00:27:06,360 --> 00:27:10,480
इसमें इन्होंने प्रमाण के साथ सारी कहानी बताई है कि वेद में भी

380
00:27:10,480 --> 00:27:14,600
कहां कहा दयानंद श ऋषि जो दयानंद है उनके भाष्य में

381
00:27:14,600 --> 00:27:18,600
भी उनके अर्थों में भी कहां-कहां पर ऐसी ही अगर

382
00:27:18,600 --> 00:27:22,680
यह उसको अश्लीलता कहते हैं पुराण आदि के कुछ जो अंश है

383
00:27:22,680 --> 00:27:26,880
उनको अश्लीलता कहते हैं तो यही तत्व इनके वेद भाष्य में भी उपलब्ध

384
00:27:26,880 --> 00:27:30,920
है मगर उस पर ये बात नहीं करेंगे अब

385
00:27:30,920 --> 00:27:31,420
वहां पर

386
00:27:31,320 --> 00:27:35,400
क्या है कि बात नहीं करेंगे हां वहां पर

387
00:27:35,400 --> 00:27:39,400
क्या है जब हम इनके इ इन तत्वों प उठाएंगे हम

388
00:27:39,400 --> 00:27:44,240
जब इनके इन त एक बस पूरी कर लो अपनी बात जब हम इनके इन

389
00:27:44,240 --> 00:27:48,280
प्रकरणों पर बात करेंगे तो ये कहेंगे तुम समझे नहीं अरे तो भैया वही तो हम

390
00:27:48,280 --> 00:27:52,400
कह रहे हैं कि आप समझे नहीं आप समझो ना आप चाहते हो

391
00:27:52,400 --> 00:27:56,640
कि आपकी चीजों को हम आपके पास आकर समझे तो आप यह क्यों नहीं चाहते

392
00:27:56,640 --> 00:28:01,280
हो कि जो हमारी चीजें हैं जिन पर आप उंगली उठा रहे हो आप हमारे पास आके समझो

393
00:28:01,280 --> 00:28:05,960
वो अपने आप वही की वही अच्छा वो चीजें कह रही है कि

394
00:28:05,960 --> 00:28:10,040
अगर मनुष्य बिना गुरु के इनका अध्ययन करेगा तो उसकी मति

395
00:28:10,040 --> 00:28:14,320
भ्रष्ट हो जाएगी क्यों कर रहे हो बिना गुरु के अध्ययन मत करो

396
00:28:14,320 --> 00:28:18,400
जाओ आप भगवत भागवत इत्यादि का पाठ कराने वाले जो सामर्थ वान गुरु

397
00:28:18,400 --> 00:28:22,520
हैं उनके पास जाओ देखो अभी दूध का दूध और पानी का पानी हो

398
00:28:22,520 --> 00:28:28,520
जाएगा तो ये उनकी तरफ से आता है जी

399
00:28:29,560 --> 00:28:34,240
मैं बताता हमारे दादा एक बात बोलते थे यह

400
00:28:34,240 --> 00:28:38,320
कहते थे जैसे कभी व्यक्ति गरिष्ठ भोजन कर लेता है

401
00:28:38,320 --> 00:28:42,920
ना जी पिस्ते की खीर खा लेता है

402
00:28:42,920 --> 00:28:47,080
मेवे मेवे की खीर खा लेता है तो क्या होता है

403
00:28:47,080 --> 00:28:51,600
उसके पेट में अपच हो जाता है

404
00:28:51,600 --> 00:28:55,680
जा डाइजेशन हो जाता है उसी

405
00:28:55,680 --> 00:28:59,920
तरह से वेद शास्त्र का जो ज्ञान है वो गाढ़ा

406
00:28:59,920 --> 00:29:04,640
है गुण है गाढ़ है जी हैवी

407
00:29:04,640 --> 00:29:08,920
है बिना गुरु के उसको अध्ययन किए हुए

408
00:29:08,920 --> 00:29:13,680
उसके अर्थों को अर्थ से काम नहीं चलता अर्थ तो यह भी हो जाएगा

409
00:29:13,680 --> 00:29:18,200
मैं बहुत सरल उदाहरण किसी शास्त्र किसी पुराण का उदाहरण नहीं दे रहा एक रामचरित

410
00:29:18,200 --> 00:29:22,600
मानस की एक चौपाई का उदाहरण दे रहा हूं प्रात काल उठ के

411
00:29:22,600 --> 00:29:28,240
रघुनाथा मात पिता गुरु ना वही माथा

412
00:29:28,240 --> 00:29:32,920
तो सरल अर्थ क्या है गीता प्रेस गोरखपुर ने जो अर्थ लिखा उसके हिसाब से क्या अर्थ होगा

413
00:29:32,920 --> 00:29:37,040
प्रात काल उट के रघुनाथा मात पिता गुरु ना महि

414
00:29:37,040 --> 00:29:41,520
माथा मतलब माता पिता और गुरु को भगवान राम प्रणाम करते थे

415
00:29:41,520 --> 00:29:45,040
यही अर्थ की आज वर्तमान में आवश्यकता है कि हर नौजवान

416
00:29:45,040 --> 00:29:49,360
हर लड़का अपने माता पिता और गुरु के आगे झुके अब

417
00:29:49,360 --> 00:29:53,520
एक जैसा कोई खुरा आती हो तो वो क्या करेगा बोले नहीं नहीं

418
00:29:53,520 --> 00:29:57,640
नहीं प्रातकाल उठ के रघुनाथा मात पिता गुरु

419
00:29:57,640 --> 00:30:02,080
नाव माथा माता पिता और गुरु तीनों जाकर के रघुनाथ

420
00:30:02,080 --> 00:30:06,120
को प्रणाम करते थे क्योंकि तीनों जानते थे ये भगवान है अर्थ यह भी है लेकिन

421
00:30:06,120 --> 00:30:10,120
इस अर्थ की उपयोगिता नहीं है आज इस

422
00:30:10,120 --> 00:30:14,400
पर मुझे एक बात याद आई ये चाल शोभराज

423
00:30:14,400 --> 00:30:18,640
था पता नहीं नेटवर लाल था उसके बारे में एक बात याद आई उसने

424
00:30:18,640 --> 00:30:22,680
कभी ऐसा को किस्सा सुनाया गया वो मन गणन है काल्पनिक है

425
00:30:22,680 --> 00:30:27,440
क्या है बचपन में किसी अपने अग्रज से सुनी थी ये कहानी

426
00:30:27,440 --> 00:30:31,440
कि उसने कहा कि मैं जी जी मैं जो है इतनी

427
00:30:31,440 --> 00:30:35,560
फलानी फलानी तारीख को यहां से भाग जाऊंगा जेल से उसने

428
00:30:35,560 --> 00:30:39,720
य चैलेंज कर दिया जेल प्रशासन को तो जेल प्रशासन ने क्या

429
00:30:39,720 --> 00:30:43,800
किया कि सतर्कता को बढ़ाने के लिए उसने एक पर्ची लिखवा

430
00:30:43,800 --> 00:30:48,000
दी रोको मत जाने दो रोको

431
00:30:48,000 --> 00:30:52,000
मत जाने दो मगर उन्होंने अपनी शैली में लिखवा दी उसमें कौमा

432
00:30:52,000 --> 00:30:56,360
वगैरह उन्होंने नहीं लगवाया और सीधे उन्होंने लिखवा दिया हालांकि

433
00:30:56,360 --> 00:31:00,240
हमारे जो धर्म ग्रंथ रचे जाते हैं वो तो बिल्कुल

434
00:31:00,240 --> 00:31:04,640
जो शास्त्रोक्त भाषा होती है उसमें रचे जाते हैं वो हमारी अल्पज्ञ

435
00:31:04,640 --> 00:31:08,760
होती है कि जैसे जैसे युग बदलता जाता है हमारी प्रज्ञा शक्ति घटती जाती

436
00:31:08,760 --> 00:31:13,240
है तो हमें सामर्थ मान गुरु चाहिए होते हैं यथावत उनको जानने के लिए

437
00:31:13,240 --> 00:31:17,680
मगर उसने वहां पर ये गलती की कि उसने कोई कोमा नहीं

438
00:31:17,680 --> 00:31:21,680
लगाया तो सबके हाथ में जो पर्ची गई तो लोगों ने यह समझ लिया

439
00:31:21,680 --> 00:31:25,840
वहां के जो प्रशासन में थे पुलिस पुलिस वाले सुरक्षा

440
00:31:25,840 --> 00:31:29,880
कर्मचारी उन्होंने यह समझ लिया रोको मत जाने की ज

441
00:31:29,880 --> 00:31:34,200
मत जाने दो की जगह रोको मत जाने दो

442
00:31:34,200 --> 00:31:38,240
वो नटवरलाल जो जाना चाहता था वहां उस पर्ची का मतलब उन्होंने

443
00:31:38,240 --> 00:31:42,400
यह समझ लिया कि रोको मत जाने दो अर्थ था रोको

444
00:31:42,400 --> 00:31:46,880
मत जाने दो और उन्होंने समझ लिया रोको मत जाने दो ठीक उल्टा

445
00:31:46,880 --> 00:31:50,880
तो जब वो उसको भागना था हां तो

446
00:31:50,880 --> 00:31:54,920
जब उसको भागना था तो उसको कोई रोक ही नहीं रहा जा रहा है क्योंकि ऊपर

447
00:31:54,920 --> 00:31:59,440
से आदेश आया है तो इसी प्रकार से हां

448
00:31:59,440 --> 00:32:03,440
इसी प्रकार से यह लोग अर्थ करते हैं अपने हिसाब से जहां पर

449
00:32:03,440 --> 00:32:07,600
इनको विद्रोह करना है परंपरा प्राप्त सिद्धांतों का तो वहां अपने हिसाब से

450
00:32:07,600 --> 00:32:11,600
अर्थ कर देते हैं और फिर कहते हैं देखो देखो यहां तो यह लिखा है यहां राधा जी

451
00:32:11,600 --> 00:32:15,560
के बारे में यह लिखा है यहां कृष्ण को इतना बुरा दिखाया जा रहा है

452
00:32:15,560 --> 00:32:19,640
ऐसे शास्त्रों को पढ़ेंगे हम ऐसे शिव को पढ़ेंगे हम हम तो शिव को

453
00:32:19,640 --> 00:32:25,080
देवता मानते हैं यह है वो है तो यह सारी चीजें हैं

454
00:32:25,080 --> 00:32:29,880
यदि किसी शास्त्र का आलंबन ले भी रहे तो पूरा लो

455
00:32:29,880 --> 00:32:33,880
उसी शास्त्र में लिखा है गुरु के बारे में उन्हीं शास्त्रों में उन्ही

456
00:32:33,880 --> 00:32:38,080
18 महा पुराणों में जगह जगह गुरु तत्व की बात है गुरु तत्व के ही बारे में

457
00:32:38,080 --> 00:32:42,160
हर लगभग हर पुराण में बात चल रही है गुरु के बारे और

458
00:32:42,160 --> 00:32:46,280
जो गुरु गीता मैं आपको एक लोक से बता

459
00:32:46,280 --> 00:32:50,640
देता हूं आपको हर पुराण में दर्शन होंगे उ लोक के नारायणम नमस्कृत्य

460
00:32:50,640 --> 00:32:54,760
नरम चव नरोत्तम देवी सरस्वती व्यास तो जय

461
00:32:54,760 --> 00:32:59,840
मुर अब इसमें करता कौन है

462
00:32:59,840 --> 00:33:03,960
क्योंकि नारायण नारायण नमस्कृत्य नरम चैव नरोत्तम

463
00:33:03,960 --> 00:33:08,200
देवी सरस्वति व्यास य ग्रंथ ही ततो

464
00:33:08,200 --> 00:33:12,600
जय अहम मुरे ग्रंथ कह रहा है यह ध्यान दीजिएगा

465
00:33:12,600 --> 00:33:17,120
लोक में ततो जय अ मु ग्रंथ स्वयं कह रहा है

466
00:33:17,120 --> 00:33:21,240
मैं वंदना कर रहा हूं किसकी बोले नारायण की नारायण का ही चरित्र सारे

467
00:33:21,240 --> 00:33:25,880
ग्रंथों का है नारायण नमस्कृत्य नरम चव नरोत्तम

468
00:33:25,880 --> 00:33:30,160
नर नारायण भक्त और भगवान चरित्र हर ग्रंथ में है देवी

469
00:33:30,160 --> 00:33:34,520
सरस्वती देवी यानी शक्ति आदि शक्ति के बगैर भगवान अवतार ले नहीं सकते

470
00:33:34,520 --> 00:33:38,560
और लीला के लिए सहायक चाहिए यथा श्रीमद् भागवत का य

471
00:33:38,560 --> 00:33:42,640
श्लोक है भगवान प्रता रात्री शरद उत्पन्न मल्लिका वि

472
00:33:42,640 --> 00:33:46,680
मन चक्र योग मायाम उपा योग माया को आश्रय

473
00:33:46,680 --> 00:33:50,680
लेकर के ही भगवान अवतार लेते हैं तो शक्ति की उपासना देवी फिर

474
00:33:50,680 --> 00:33:54,800
सरस्वति सरस्वती वाणी देती है देवी सरस्वती

475
00:33:54,800 --> 00:33:59,120
व्यास व्यास विस्तार करते हैं त जय हम मुद रहे

476
00:33:59,120 --> 00:34:03,640
तो बिना इनके साधन तो हो जाएगा सिद्ध नहीं

477
00:34:03,640 --> 00:34:07,640
होगा जी ये

478
00:34:07,640 --> 00:34:11,800
एक बार मैं कहूंगा थोड़ा सा आप ना लीव करके एक बार दोबारा आ जाइए

479
00:34:11,800 --> 00:34:15,680
क्योंकि आपका वीडियो रुक रुक कर चल रहा है

480
00:34:15,680 --> 00:34:21,680
ओके एक बार लीव करके आ जाइए

481
00:34:22,720 --> 00:34:27,080
दोबारा तो बड़ी ही मधुर चर्चा चल रही है

482
00:34:27,080 --> 00:34:32,560
और

483
00:34:32,560 --> 00:34:36,560
विभिन्न विषयों पर प्रकाश डाल रहे हैं पुनीत जी बहुत ही अच्छे

484
00:34:36,560 --> 00:34:40,920
वक्ता भी है और साथ ही साथ अपने

485
00:34:40,920 --> 00:34:45,200
जो वंश है जो घर परिवार है उससे बहुत ही जो

486
00:34:45,200 --> 00:34:49,360
वैदिक वांगम है और शास्त्र सम्मत संविधान है उससे बहुत

487
00:34:49,360 --> 00:34:53,520
ही पुष्ट परिवार से बिलोंग करते हैं जो कि उनकी वाणी से दिख

488
00:34:53,520 --> 00:34:58,760
भी रहा है

489
00:34:58,760 --> 00:35:03,040
आ गए हैं पुनीत जी जीटू जी महाराज

490
00:35:03,040 --> 00:35:07,640
आ गया हा जी अब अच्छा आ रहा है तो

491
00:35:07,640 --> 00:35:11,640
अब मैं थोड़ा सा चर्चा को थोड़ा आगे दिशा में

492
00:35:11,640 --> 00:35:15,680
बढ़ाना चाहूंगा एक चीज आती है कि जैसे आपने जो है

493
00:35:15,680 --> 00:35:19,720
एक समर्थन प्रकट किया एक एकता प्रकट की

494
00:35:19,720 --> 00:35:24,240
जो शंकराचार्य हैं पुरी के शंकराचार्य जी कपाती जी के प्रति आस्था

495
00:35:24,240 --> 00:35:28,400
और प्रकट की और ये अ

496
00:35:28,400 --> 00:35:32,480
सबसे पहले मैं एक चीज क्लियर करना चाहूंगा कि मतलब आपको भी वैष्णव ही कहा जाता है

497
00:35:32,480 --> 00:35:36,520
ना रामानंद संप्रदाय को वैष्णव में ही आता है रामानंद

498
00:35:36,520 --> 00:35:40,560
संप्रदाय है ना तो तो जब वैष्णव में

499
00:35:40,560 --> 00:35:45,400
आता है तो एक प्रचार किया जाता है कि शंकराचार्य तो मायावादी हैं

500
00:35:45,400 --> 00:35:49,560
या वह माया से ग्रसित है यह इस तरह का दुष्प्रचार

501
00:35:49,560 --> 00:35:53,760
किया जाता है हालांकि हमने कई अच्छे संतों से इसका निराकरण सुना है थोड़ा

502
00:35:53,760 --> 00:35:57,840
सा इस विषय में आपसे मैं सुनना चाहूंगा कि शंकराचार्य जो मायावादी है सब आक्षेप

503
00:35:57,840 --> 00:36:01,880
लगाया जाता है उनसे थोड़ा सा लोगों के मन में वैमनस्यता डालने के लिए

504
00:36:01,880 --> 00:36:05,960
तो इस विषय पर आप क्या कहना चाहेंगे कि क्या जो तुलसीदास

505
00:36:05,960 --> 00:36:10,160
जी महाराज है उन्होंने जो कहा कि देह दृष्टि से मैं आपका

506
00:36:10,160 --> 00:36:13,840
सेवक हूं और पद की दृष्टि से आप

507
00:36:13,840 --> 00:36:17,920
मेरे स्वामी मैं आपका सेवक हूं और यह थोड़ी सी इस

508
00:36:17,920 --> 00:36:22,000
व्याख्या इससे जोड़ते हुए थोड़ा सा हमें प्रकाश डाले माया ये

509
00:36:22,000 --> 00:36:26,080
जो माया का एक वो चलता है एक नैरेटिव हालांकि कुछ पिछले कुछ

510
00:36:26,080 --> 00:36:30,280
दशकों में ज्यादा चलाया गया वो आप बताए हम

511
00:36:30,280 --> 00:36:32,760
एक बात

512
00:36:32,760 --> 00:36:36,840
कते सबसे बड़े यह तो प्रचलित बात है सबसे

513
00:36:36,840 --> 00:36:42,840
बड़े जो वैष्णव है वैष्णवास्त्र

514
00:36:53,860 --> 00:36:58,200
[संगीत]

515
00:36:58,200 --> 00:37:02,380
वैष्णवास्त्र

516
00:37:02,380 --> 00:37:08,380
[संगीत]

517
00:37:28,440 --> 00:37:32,920
कामदेवाय नम ठाय नम करते ना पाठ

518
00:37:32,920 --> 00:37:37,360
कौन है भगवान राम के आचार्य जी शंकराचार्य

519
00:37:37,360 --> 00:37:41,560
भगवान कौन है स्वयं भगवान शंकर जी

520
00:37:41,560 --> 00:37:45,880
प्रथक नहीं किया आचार्य गुरु और गोविंद को पथक नहीं किया

521
00:37:45,880 --> 00:37:50,200
हैक है त एक है तो जी

522
00:37:50,200 --> 00:37:54,400
भगवत शंकराचार्य भगवान जो है वह स्वयं साक्षात

523
00:37:54,400 --> 00:37:58,640
शिवा अवतार है और ब से लेकर नारायण

524
00:37:58,640 --> 00:38:02,640
समारंभा शंकराचार्य मध्यमाम से लेकर आज पर्यंत जितने

525
00:38:02,640 --> 00:38:06,800
शंकराचार्य आसीन हुए हैं पद पर वो सब भगवान शंकर के ही

526
00:38:06,800 --> 00:38:11,160
अवतार है भेद नहीं है उ वो एक ही है जी

527
00:38:11,160 --> 00:38:13,640
ठीक ये तो बात हो गई अब

528
00:38:13,640 --> 00:38:17,920
जो यह कहा जाता है कि शंकराचार्य तो मायावादी कैसे हुए मैं पहले

529
00:38:17,920 --> 00:38:22,000
ये पूछना चाहूंगा फिर मायावादी कैसे हुए

530
00:38:22,000 --> 00:38:26,200
यदि भगवान शंकर भगवान शंकर मायावादी नहीं है

531
00:38:26,200 --> 00:38:30,760
भगवान शंकर माया से परे है त्रिगुणा तीत है सदा

532
00:38:30,760 --> 00:38:35,160
सच्चिदानंद माया प विजय दिलाने वाले माया प विजय दिलाने वाले हैं

533
00:38:35,160 --> 00:38:39,200
माया पर विजय दिलाने वाले माया पर विजय दिलाने वाले

534
00:38:39,200 --> 00:38:43,520
क्योंकि भगवान ने ये कहा भगवान ने ये कहा गीता

535
00:38:43,520 --> 00:38:46,800
में दैवी हेशा

536
00:38:46,800 --> 00:38:51,960
गुणमककुम

537
00:38:51,960 --> 00:38:56,080
नहीं है पुरुष की माया कम नहीं है पुरुष के ऊपर एक माया होती

538
00:38:56,080 --> 00:39:00,360
है वो स्त्रीय माया त्रिया चरित्र जी

539
00:39:00,360 --> 00:39:04,360
स्त्री की माया स्त्री के ऊपर माया होती है आसुरी माया

540
00:39:04,360 --> 00:39:08,400
यंत्र मंत्र तंत्र की माया आसुरी माया के ऊपर होती

541
00:39:08,400 --> 00:39:12,720
है दव माया और दव माया के ऊपर तब भगवान ने कहा देवी हेशा

542
00:39:12,720 --> 00:39:17,120
गुमई मम माया दुर य सब मेरी माया के अंडर आती है

543
00:39:17,120 --> 00:39:21,920
यह किसी को भी मोहित कर सकती सबको मोहित किया नारद को मोहित किया

544
00:39:21,920 --> 00:39:26,160
सबको मोहित किया पर भगवान शंकर एकमात्र ऐसे भक्त है

545
00:39:26,160 --> 00:39:31,040
कि भगवान की माया से अच्छी तरह से परिचित है

546
00:39:31,040 --> 00:39:35,560
जी अच्छी तरह से परिचित तभी तो उन्होंने यह कहा

547
00:39:35,560 --> 00:39:40,280
कि होई है सोई जो राम रच राखा को करि तर्क बढ़ाव शाखा

548
00:39:40,280 --> 00:39:44,320
राम कीन चाहि सोई होई राम जो कहेंगे वही होगा

549
00:39:44,320 --> 00:39:48,320
इसका मतलब माया से परिचित है तो माया से भगवान शंकर मायावादी नहीं है

550
00:39:48,320 --> 00:39:52,320
माया से परे हैं माया तीत है त्रिगुणा तीत है इनको

551
00:39:52,320 --> 00:39:56,320
माया के चक्कर में नहीं फसा सकता कोई उसी प्रकार से मैंने अभी

552
00:39:56,320 --> 00:40:00,520
बोला भगवान शंकर में और

553
00:40:00,520 --> 00:40:01,960
भगवान शंकराचार्य

554
00:40:01,960 --> 00:40:06,080
में जो भेद करता है वो फिर व

555
00:40:06,080 --> 00:40:12,080
फिर मू मती है नहीं नहीं भेद नहीं

556
00:40:12,520 --> 00:40:16,520
करते आरोप एक आरोप लगाया जाता है कि

557
00:40:16,520 --> 00:40:22,520
पद्म पुराण में कहीं पर जिसको कुछ

558
00:40:26,320 --> 00:40:30,640
वैष्णवास्त्र दे रहे हैं कि आप जाकर के ऐसे शास्त्रों का निर्माण

559
00:40:30,640 --> 00:40:34,960
करो जिससे कि जिसे पढ़ के लोग वेदों से थोड़ा मतलब

560
00:40:34,960 --> 00:40:39,280
जो बौद्ध बौद्ध और बौद्ध से मिलता जुलता जो है

561
00:40:39,280 --> 00:40:43,480
माया वाला दर्शन आप उसका वो करो माया वाला अ शास्त्रम

562
00:40:43,480 --> 00:40:47,520
आपने सुना हो तो इसका स्कोन नामक संस्था की ओर से बहुत प्रचार किया जाता

563
00:40:47,520 --> 00:40:51,520
है उनके प्रति द्वेष भरने के लिए शंकराचार्य के मत को ना

564
00:40:51,520 --> 00:40:55,600
मानने के लिए तो मैं ये जानना चाहता हूं क्या तुलसीदास जी यहां

565
00:40:55,600 --> 00:40:59,760
गुरुदेव क्या है कि लोगों को ने को कहते हैं रामचरित मानस और एक तरफ

566
00:40:59,760 --> 00:41:03,880
दिखाया जाता है कि आदि शंकराचार्य और वैष्णव बहुत दूर आपस में

567
00:41:03,880 --> 00:41:07,920
और यहां गुरुदेव तुलसीदास जी का ग्रंथ पढ़ने को कहते हैं तो यह

568
00:41:07,920 --> 00:41:12,040
कैसे मायावादी है जो एक वैष्णव के ग्रंथ को पढ़ने को कह रहे हैं पहली बात

569
00:41:12,040 --> 00:41:16,200
दूसरी बात जी

570
00:41:16,200 --> 00:41:18,200
मैं एक

571
00:41:18,200 --> 00:41:22,360
बलक शप तो कहीं भी घुस सकती क्या

572
00:41:22,360 --> 00:41:26,360
चीज क्या कहा आपने काली भेड़ जो होती है ना वो तो ब्लक शीप जो

573
00:41:26,360 --> 00:41:32,360
होती है ना काली भेड़ वो कहीं भी घुस सकती है

574
00:41:36,840 --> 00:41:42,840
वैष्णवास्त्र

575
00:41:44,400 --> 00:41:48,440
ही नहीं है हरि हर ऐक्य है दोनों में ऐक्य

576
00:41:48,440 --> 00:41:52,520
है स्थापित किया गोस्वामी श्री तुलसीदास जी महाराज ने सेवक

577
00:41:52,520 --> 00:41:56,720
स्वामी सखा पीए सी के हित निरपद सब विधि तुलसी के

578
00:41:56,720 --> 00:42:00,800
गुरु मा महेश भवानी प्रण दन बंधु दिन दानी

579
00:42:00,800 --> 00:42:03,920
य तुलसीदास जी का वचन

580
00:42:03,920 --> 00:42:08,320
है जी और अगर राम मानस की

581
00:42:08,320 --> 00:42:12,520
क्रेडिबिलिटी पर प्रश्न चिन्ह लगेगा तो मैं पहले ही बोल दू गोस्वामी जी कहते

582
00:42:12,520 --> 00:42:16,600
नाना पुराण निगम समत यद रामायण नितम

583
00:42:16,600 --> 00:42:20,600
पचित जितनी अब तक रामायण कही गई उनका रेफरेंस है

584
00:42:20,600 --> 00:42:24,680
18 पुराणों का रेफरेंस है शास्त्रों का रेफरेंस वेद का रेफरेंस हैल

585
00:42:24,680 --> 00:42:28,760
करोगे बताओ वो ल कह रहे हैं भक्त

586
00:42:28,760 --> 00:42:32,840
माल के सुमेरू भक्त माला के सुमेरू मणि माल के

587
00:42:32,840 --> 00:42:33,340
सुमेरू

588
00:42:33,320 --> 00:42:37,680
श्री गोस्वामी तुलसीदास जी महाराज कह रहे हैं कि शंकर विमुख भगत

589
00:42:37,680 --> 00:42:41,960
चह मोरी सो नार की मूढ़ मति थोरी जो

590
00:42:41,960 --> 00:42:46,000
शंकर के बगैर मेरी भक्ति प्राप्त करना चाह रहा है गोस्वामी

591
00:42:46,000 --> 00:42:50,800
जी के शब्दों में वो मूड मती है

592
00:42:50,800 --> 00:42:55,120
जी तो मतलब एक तरीके से दे देखा जाए तो कहीं पर भी

593
00:42:55,120 --> 00:42:59,400
तुलसीदास जी ने या इन्होंने खंडन नहीं किया है आदि शंकराचार्य

594
00:42:59,400 --> 00:43:04,640
जी के सिद्धांतों का बल्कि और परस्पर सहभागिता

595
00:43:04,640 --> 00:43:08,760
है तुलसीदास जी करही तुलसीदास जी ने तो पहले ही कह दिया तस

596
00:43:08,760 --> 00:43:14,760
क हो जस हर के प्रेरेटिनल

597
00:43:27,200 --> 00:43:31,320
करके कहा है अंत में जब मैंने काशी में समर्पण किया है तब भगवान

598
00:43:31,320 --> 00:43:35,760
ने अपने दसत किए सत्यम शिवम सुंदरम और क्या बचता है

599
00:43:35,760 --> 00:43:39,840
जी जी तो इसका मतलब यह प्रचार

600
00:43:39,840 --> 00:43:44,200
करना गलत है जो एक वैष्णव एक वैमनस्यता

601
00:43:44,200 --> 00:43:48,960
फैलाने के लिए प्रचार किया जाता है कि वैष्णव में और शंकराचार्य जो

602
00:43:48,960 --> 00:43:53,600
आचार्य परंपरा है उसमें अंतर है यह गलत किया जाता है प्रचार

603
00:43:53,600 --> 00:43:59,560
मैं मैं तो एक बात कहूंगा आयम तुही युग धर्म

604
00:43:59,560 --> 00:44:03,960
दूषण श्रीम भागवत का वचन है जी

605
00:44:03,960 --> 00:44:08,000
इस काल में तो यह हो नहीं नहीं था होना तभी तो

606
00:44:08,000 --> 00:44:12,240
तभी तो तभी तो वह तभी तो भविष्य को देखते

607
00:44:12,240 --> 00:44:16,560
हुए दूर्गा में दृष्टि को देखते हुए भगवत पाद आदि शंकराचार्य भगवान ने

608
00:44:16,560 --> 00:44:20,760
पहले ही सेना तैयार कर दी चवा आश्रम चवा

609
00:44:20,760 --> 00:44:24,840
आचार्य चार पीठ चार उस पर चार आचार्यों को नियुक्त किया

610
00:44:24,840 --> 00:44:29,480
गया क्यों किया है इसी दिन के लिए किया गया ये दिन

611
00:44:29,480 --> 00:44:33,720
आएगा य होगा

612
00:44:33,720 --> 00:44:37,720
हरित भूम त्रण संकुल समझ पई नहीं पंथ जिमी

613
00:44:37,720 --> 00:44:41,920
पाखंड के बाद ते गुप्त हो ही सद ग्रंथ जिस तरह बरसात

614
00:44:41,920 --> 00:44:46,080
में कुकुर मुत्ते हो जाते हैं मशरूम हो जाता है कुकुर मुत्ता उस प्रकार

615
00:44:46,080 --> 00:44:50,160
से कलयुग की बरसात में पाखंड की बरसात

616
00:44:50,160 --> 00:44:54,200
में पाखंडवाद इतना बढ़ जाएगा कि जैसे जो आपने क अध्ययन करते ही

617
00:44:54,200 --> 00:44:58,200
नहीं है तो गुप्त हो ही सद ग्रंथ सद ग्रंथों का हो जाएगा वो

618
00:44:58,200 --> 00:45:02,320
छुप जाएंगे उनका उनका जो तेज है वो हर किसी को नहीं दिखेगा क्योंकि

619
00:45:02,320 --> 00:45:06,440
अ अरे भैया मैं आपसे कहता लाइट का प्रकाश किसको दिखेगा

620
00:45:06,440 --> 00:45:10,480
जिसकी आंख में रोशनी होगी चम जो अंधा है उससे आप काहे

621
00:45:10,480 --> 00:45:14,480
उम्मीद कर रहे कि वो प्रकाश देख लेगा व अंधा है जी

622
00:45:14,480 --> 00:45:14,980
जी

623
00:45:14,720 --> 00:45:18,960
जी इसमें इस विषय में गुरुदेव

624
00:45:18,960 --> 00:45:23,080
ल तुलसीदास जी का एक वचन उधत करते थे कहीं पर हनुमान जी

625
00:45:23,080 --> 00:45:27,240
से पूछा राम जी ने कि बताओ तुम्हारा हमारा क्या संबंध

626
00:45:27,240 --> 00:45:31,600
वो और जो हनुमान जी उन्होंने तीन तरीके से परिभाषित

627
00:45:31,600 --> 00:45:35,600
किया था अपना उनका संबंध कि देह दृष्टि से आप मेरे

628
00:45:35,600 --> 00:45:40,000
स्वामी है मैं आपका सेवक हूं यह वाला थोड़ा सा मैं आपसे सुनना चाह रहा था

629
00:45:40,000 --> 00:45:44,240
वो मैंने आपको बोली वो सेवक स्वामी

630
00:45:44,240 --> 00:45:48,400
सखा सीय पय के सीय पय माने श्री सीता

631
00:45:48,400 --> 00:45:53,320
के प्रिय यानी श्री राम के शंकर सेवक भी है दास भी

632
00:45:53,320 --> 00:45:59,320
है और तत्व की दृष्टि से देखें तो एक कही है आप

633
00:45:59,360 --> 00:46:03,360
जी दास्ता की कहा की जिस समय शिव विवाह

634
00:46:03,360 --> 00:46:07,480
का प्रसंग आता है भगवान ने कहा बोले विवाह करो भगवान शंकर ने कहा हम विवाह विवाह नहीं

635
00:46:07,480 --> 00:46:11,560
करेंगे जब ते सती जाही तन त्यागा तब ते शिव मन अब तो केवल

636
00:46:11,560 --> 00:46:15,720
राम कथा योगी श्री राम जय राम जय जय राम विवाह विवाह कुछ नहीं

637
00:46:15,720 --> 00:46:19,840
तब भगवान शंकर को आदेश दिया भगवान ने नारायण ने

638
00:46:19,840 --> 00:46:24,320
जाही विवाह शैल जीी रामचरित का प्रसंग है कि जाके आप विवाह कीजिए

639
00:46:24,320 --> 00:46:28,440
तब भगवान यही कहते हैं सिर धरी आए करि तुम्हारा आपके

640
00:46:28,440 --> 00:46:32,440
वचन को मैं शिरोधार्य करता हूं दास्ता वहां प्रमाणित होती

641
00:46:32,440 --> 00:46:37,000
है फिर सेवक के बाद आते हैं स्वामी

642
00:46:37,000 --> 00:46:41,280
भगवान शंकर श्री राम के स्वामी भी है कैसे

643
00:46:41,280 --> 00:46:45,720
लिंग थाप विधिवत करी पूजा शिव समान प्रिय मोहि न दूजा

644
00:46:45,720 --> 00:46:49,720
भगवान श्री राम कहते हैं रामेश्वरम के तट पर वहां पर शिव की

645
00:46:49,720 --> 00:46:54,160
स्थापना करके भगवान ने श्री रामनाथ को

646
00:46:54,160 --> 00:46:58,320
शंकर को अपना नाथ माना अपना स्वामी माना जे

647
00:46:58,320 --> 00:47:03,040
रामेश्वर दर्शन करें जो इस रामेश्वर के दर्शन करेगा वो

648
00:47:03,040 --> 00:47:07,080
मेरे लोग को मेरी मेरे लोक को प्राप्त करेगा ते

649
00:47:07,080 --> 00:47:11,160
तनज मम लोक से राम जी का वचन राम जी कह रहे

650
00:47:11,160 --> 00:47:15,080
वहा पर अपना स्वामी माना और अपना सखा भी माना

651
00:47:15,080 --> 00:47:19,480
मित्र भी माना कहने का अभिप्राय है श्री राम

652
00:47:19,480 --> 00:47:23,560
के सखा भी है श्री राम के स्वामी भी और श्री राम के सेवक भी

653
00:47:23,560 --> 00:47:28,080
तीनों है तीनों रिश्ते प्रमाण होते और तत्व

654
00:47:28,080 --> 00:47:32,160
कहीं पर यह भी कहा कि आप और मैं एक ही है तत्व कि

655
00:47:32,160 --> 00:47:36,360
आप और मैं भेद नहीं जी एक ही है

656
00:47:36,360 --> 00:47:41,480
जी यही कहा यही श्वर लंका कांड के प्रसंग मेंही कहा

657
00:47:41,480 --> 00:47:45,640
की लिंग थाप विधिवत कर पूजा शिव समान मोहिन

658
00:47:45,640 --> 00:47:50,040
जो दूजा शिव द्रोही मम भगत कहावा सोनर सपने

659
00:47:50,040 --> 00:47:54,520
मोहिन भावा जो शिव का द्रोही होकर के मेरी उपासना

660
00:47:54,520 --> 00:47:58,960
करेगा उसको सपने में भी स्वीकार नहीं कर सक

661
00:47:58,960 --> 00:48:03,640
जी क्यों क्यों बहुत अच्छा बड़ा प्रामाणिक

662
00:48:03,640 --> 00:48:07,760
ग्रंथ राम का भक्त वैष्णव होने की सबसे बड़ी पहचान

663
00:48:07,760 --> 00:48:12,240
ये है कि वो सबसे पहले शिव भक्त होगा भगवान शंकर ही

664
00:48:12,240 --> 00:48:16,360
भगवान श्री राम के भक्ति का अविष्का आशीर्वाद की

665
00:48:16,360 --> 00:48:20,640
देने की सामर्थ्य रखते हैं विद्या का आशीर्वाद गणपति देते हैं वाणी का आशीर्वाद

666
00:48:20,640 --> 00:48:25,080
सरस्वती देती है लेकिन भगवत भक्ति का जो आशीर्वाद है

667
00:48:25,080 --> 00:48:29,320
वो केवल भगवान शंकर ही दे सकते और कोई नहीं दे सकता

668
00:48:29,320 --> 00:48:30,520
जी राम रसायन

669
00:48:30,520 --> 00:48:34,800
तुम्हरे पासा इसलिए तो हनुमान चालीसा में कहा ना राम रसायन

670
00:48:34,800 --> 00:48:38,880
तुम्हरे पास हनुमान जी कौन है शिवा उतार

671
00:48:38,880 --> 00:48:43,240
है जी राम रूपी भक्ति का जो रसायन

672
00:48:43,240 --> 00:48:47,760
है वो शिव के पास ही है भैया और किसी के पास नहीं है दे ही नहीं सकता कोई

673
00:48:47,760 --> 00:48:51,840
अमर कथा किसने सुनाई शिव जी ने सुनाई जी

674
00:48:51,840 --> 00:48:56,120
जी पार्वती को जो कथा सुनाई चाहे श्री भागवत की बोल लीजिए चाहे श्री राम कथा बोल लीजिए

675
00:48:56,120 --> 00:49:00,320
किसने सुनाई वहा श्रोता कौन है पार्वती जी है वक्ता कौन है आचार्य कौन

676
00:49:00,320 --> 00:49:04,400
है राम कथा के आदि आचार्य कौन भगवान

677
00:49:04,400 --> 00:49:08,800
शंकर जी तो मतलब रामानंद संप्रदाय

678
00:49:08,800 --> 00:49:13,200
जो कि वैष्णव है और तुलसीदास जी को बहुत बड़ा कलयुग में बहुत

679
00:49:13,200 --> 00:49:18,280
मान्य वैष्णव है प्रामाणिक आचार्य तो इनके अनुसार अगर देखें तो

680
00:49:18,280 --> 00:49:22,360
तत्व हरि और हर में भेद नहीं है दोनों ही पूर्ण परम

681
00:49:22,360 --> 00:49:27,200
ब्रम परमात्मा के रूप है बिल्कुल

682
00:49:27,200 --> 00:49:31,240
जी अब इसमें एक इसी क्रम में आगे और चलते

683
00:49:31,240 --> 00:49:36,160
हैं तो इसमें मैं कहूंगा जैसे आज य प्रचारित किया जा रहा है

684
00:49:36,160 --> 00:49:42,160
हालांकि जो प्रामाणिक

685
00:49:45,120 --> 00:49:49,160
वैष्णवास्त्र जी जो ग्रंथ लिख कर के गए क्यों इत्यादि जिसमें

686
00:49:49,160 --> 00:49:53,240
की आर समाज से उन्होंने मुख्यतः लोहा लिया आर्य समाज के

687
00:49:53,240 --> 00:49:57,280
जो प्रासंगिक कथन उठते थे उसमें कुब्जा समागम धा

688
00:49:57,280 --> 00:50:01,520
जी के ऊपर जो आक्षेप और यह सब हालांकि भक्ति सुदा

689
00:50:01,520 --> 00:50:06,400
में भगवान के भक्ति सुदा में करपात्री जी ने लिखा राधा सुदा में लिखा उन्होंने

690
00:50:06,400 --> 00:50:12,400
तो माधवा जो प्रमाणिक वैष्णवास्त्र

691
00:50:15,560 --> 00:50:21,560
[प्रशंसा]

692
00:50:24,980 --> 00:50:29,000
[संगीत] स्वयं को वैष्णव होने का दावा कर रही है

693
00:50:29,000 --> 00:50:33,040
उनको प्रामाणिक संप्रदाय कोई नहीं स्वीकार कर रहा वो कह रहे है कि हम वैष्णव है

694
00:50:33,040 --> 00:50:37,520
हालांकि अभी एक बात ये भी देखने में आ कि जो गड़िया वैष्णव संप्रदाय है

695
00:50:37,520 --> 00:50:41,600
उसके यहां पर अभी बंगाल में शंकराचार्य ये

696
00:50:41,600 --> 00:50:45,600
जो इस समय गौ ध्वज लेकर के निकले

697
00:50:45,600 --> 00:50:49,760
हैं जो अभ मुक्तेश्वर जी है जो शंकर परंपरा के ही सन्यासी

698
00:50:49,760 --> 00:50:53,840
आचार्य है जी जी तो वो जब अभी बंगाल में गए तो उनका स्वागत

699
00:50:53,840 --> 00:50:58,560
हुआ उनका चरण वंदना की चरण पूजन किया और

700
00:50:58,560 --> 00:51:02,800
उनका दिशा निर्देश भी लिया मुक्तेश्वर जी का वहां

701
00:51:02,800 --> 00:51:07,160
गौड़ी संप्रदाय वालों ने तो पहली बात तो यह अपने आप गड़िया भी कहते हैं

702
00:51:07,160 --> 00:51:11,520
इकोन वाले अब बात यह आती है कि जितने भी वैष्णव संप्रदाय

703
00:51:11,520 --> 00:51:15,800
है प्रामाणिक और इनकी बताई जाने वाली जो परंपरा भी है गुरु परंपरा

704
00:51:15,800 --> 00:51:19,800
इकोन की उसमें देखा जाए तो चैतन्य महाप्रभु जो है महाप्रभु

705
00:51:19,800 --> 00:51:24,480
चैतन्य महाप्रभु वहां तक सारे आचार्य जो है

706
00:51:24,480 --> 00:51:28,840
ब्राह्मण थे जन्म से चैतन्य महाप्रभु के बाद शायद कुछ

707
00:51:28,840 --> 00:51:32,960
वहां कहां से बदल गया कि अब कोई भी आचार्य वहां पर लिख रहा है तो

708
00:51:32,960 --> 00:51:37,080
मैं ये जानना चाहता हूं कि रामानंद संप्रदाय का वर्ण व्यवस्था के बारे में क्या

709
00:51:37,080 --> 00:51:40,120
दृष्टिकोण है जन्म से कर्म से कैसे कैसे उसमें

710
00:51:40,120 --> 00:51:44,280
क्या है नहीं रामानंद संप्रदाय में तो कबीर

711
00:51:44,280 --> 00:51:48,320
भी आते हैं कबीर ने भी रामानंद को गुरु माना था जी जी ठीक

712
00:51:48,320 --> 00:51:52,520
है ना जी जी ये भी बात है लेकिन इसका

713
00:51:52,520 --> 00:51:57,640
मतलब यह नहीं है ना कि गधा घोड़ा तुम एक कर दोगे

714
00:51:57,640 --> 00:52:02,440
जी गधा घोड़ा एक कर दोगे ये थोड़ी मतलब हो जाएगा

715
00:52:02,440 --> 00:52:06,560
इसका जी ये मतलब मतलब कहने

716
00:52:06,560 --> 00:52:10,600
का ये है कि जिसकी जो व्यास गद्दी है उस पर

717
00:52:10,600 --> 00:52:15,280
क्या कर्म कोई किसी भी कुल में जन्म लिया हो वो क्या व्यास गद्दी पर

718
00:52:15,280 --> 00:52:19,640
जाके उस या वोह ब्राह्मण ही हो जब ब्राह्मण कुल से ही हो तभी

719
00:52:19,640 --> 00:52:23,920
व्यास गद्दी इत्यादि पर बैठे इस बारे में थोड़ाहे रामानंदाचार्य हो

720
00:52:23,920 --> 00:52:28,440
चाहे रामानुजाचार्य हो चाहे माधव गणेश्वरा आचार्य हो

721
00:52:28,440 --> 00:52:32,600
चाहे निंबार्काचार्य हो चाहे वो वल्लभाचार्य

722
00:52:32,600 --> 00:52:36,720
हो है ना जी कोई भी हो चाहे

723
00:52:36,720 --> 00:52:42,520
शंकर परंपरा से कोई हो विरक्त वैष्णव

724
00:52:42,520 --> 00:52:47,480
विप्र इसका क्या अर्थ लगाएगा विरक्त

725
00:52:47,480 --> 00:52:51,880
वैष्णव और विप्र वेद शास्त्र प्रभेद कुशल

726
00:52:51,880 --> 00:52:55,200
स विप्र यह संज्ञा है सॉरी विशेषण

727
00:52:55,200 --> 00:52:59,640
है एडजेक्टिव है विप्र वेद शास्त्र प्रभेद वेदा

728
00:52:59,640 --> 00:53:04,080
शास्त्रों के प्रभेद को कुशलता से जानता हो स विप्र

729
00:53:04,080 --> 00:53:09,200
वो वेद शास्त्र का अध्ययन ही तब कर पाएगा जब उसके कंधे पर यज्ञ पवित

730
00:53:09,200 --> 00:53:11,960
होगा

731
00:53:11,960 --> 00:53:16,720
बिना नहीं कर सकता जी जी जी

732
00:53:16,720 --> 00:53:20,760
ब नहीं कर सकता अब अब इससे

733
00:53:20,760 --> 00:53:26,760
ज्यादा और क्या प्रमाण मांगेंगे होते समय

734
00:53:26,920 --> 00:53:32,680
विद्या वेधन शुरू होता है और यज पवित के समय ही डिसाइड हो जाता

735
00:53:32,680 --> 00:53:36,840
है उसने तो किसी को भी वही तो बोल रहा गधा घोड़ा सबको एक

736
00:53:36,840 --> 00:53:39,800
कर दिया

737
00:53:39,800 --> 00:53:43,800
उन्होने जी सबको एक कर दिया चातु

738
00:53:43,800 --> 00:53:49,800
वण फिर भगवान क्यों चातु वण मया सटम

739
00:53:51,440 --> 00:53:55,720
ब्राह्मणन इसका क्या अर्थ करेंगे फिर एसन वाले उल्टा

740
00:53:55,720 --> 00:53:58,800
करते हैं

741
00:53:58,800 --> 00:54:02,920
उल्टा करते हैं कि इसमें जन्म की बात कहां की भगवान नहीं

742
00:54:02,920 --> 00:54:07,160
नहीं मैं तो वही कह रहा हूं ना जब व्यक्ति ज्यादा मेवे पिस्ते खीर खा लेता

743
00:54:07,160 --> 00:54:11,400
है तो उसकी पेट में अपच हो जाता है उसी तरह से जब व्यक्ति मीठा

744
00:54:11,400 --> 00:54:15,680
ठाला बैठा रहता है और बिना सदगुरु के अध्ययन करता है तो उसकी बुद्धि

745
00:54:15,680 --> 00:54:19,760
में अपच हो जाता है उसकी बुद्धि में अपच हो जाता

746
00:54:19,760 --> 00:54:24,120
है जी जी कैसे कर दोगे तुम

747
00:54:24,120 --> 00:54:28,320
हु टोल्ड यू किसने लाइसेंस दिया तु किस परंपरा के लाइसेंस

748
00:54:28,320 --> 00:54:32,560
दिया क्या तुम्हारे आदि आचार्य श्री चैतन्य महाप्रभु ने अर्थ किया

749
00:54:32,560 --> 00:54:36,560
ये उन्होंने महामंत्र को इसलिए आनो पूर्वी हमारे यहां

750
00:54:36,560 --> 00:54:40,720
भी परंपरा है श्रीमद शंकराचार्य पाद भगवान भी करते हैं पूर्वी आनो

751
00:54:40,720 --> 00:54:44,840
करके मंत्र क्यों मंत्र का दुरुपयोग नहीं हो इसलिए उन्होंने

752
00:54:44,840 --> 00:54:48,920
उपनिषद के महामंत्र को आनो पूर्वी करके हरे कृष्ण हरे कृष्ण

753
00:54:48,920 --> 00:54:53,200
कृष्ण कृष्ण हरे हरे हरे राम हरे राम करके प्रचार प्रसारित

754
00:54:53,200 --> 00:54:55,320
किया तो अगर उनके

755
00:54:55,320 --> 00:54:59,400
मन में ये अगर उनके मन में शास्त्र की मर्यादा का ख्याल नहीं होता तो वो पूर्वी

756
00:54:59,400 --> 00:55:03,640
आनो क्यों करते मंत्र को वो सीधे सधे प्र प्रसारित करते

757
00:55:03,640 --> 00:55:07,720
उसको पढ़ने से सब उसको पढ़ने से जब ब्राह्मण हो जाते हैं तो फिर उसको बदलने की क्या

758
00:55:07,720 --> 00:55:11,800
आवश्यकता थी ये ये एक वो है पॉइंट उन्होंने जो बदला

759
00:55:11,800 --> 00:55:16,120
उसको व इसीलिए बदला कि सब उसको पढ़ सके अगर उसको पढ़ने से

760
00:55:16,120 --> 00:55:20,560
ब्राह्मण अगर उसको पढ़ने से ब्राह्मण सिद्ध होता किसी का

761
00:55:20,560 --> 00:55:25,440
तो फिर उसको बदलने की आवश्यकता थोड़ी ना थी जो भी उसको पढ़ लेता ब्राह्मण हो जाता

762
00:55:25,440 --> 00:55:30,280
नहीं तो उन्होंने क मैं तो यह कह रहा हूं ना ले आओ कोई वाणी

763
00:55:30,280 --> 00:55:35,000
ले आओ कोई उनके ग्रंथ का चैतन्य का कोई प्रमाण

764
00:55:35,000 --> 00:55:39,040
उनके संग छ गोस्वामी आए थे उनका कोई प्रमाण क्या

765
00:55:39,040 --> 00:55:43,240
गोपाल भट्ट गोस्वामी जी की यज्ञ पवित्र था क्या गोपाल भट्ट गोस्वामी जी ब्राह्मण

766
00:55:43,240 --> 00:55:47,240
नहीं थे क्या रूप सनातन जी ब्राह्मण नहीं

767
00:55:47,240 --> 00:55:51,240
थे और ब्राह्मण नहीं थे

768
00:55:51,240 --> 00:55:55,320
जी जी जी जिस ग्रंथ को प्रमाण मानते

769
00:55:55,320 --> 00:55:59,440
थे श्री स्वामी का ग्रंथ था शंकराचार्य वो भी थे

770
00:55:59,440 --> 00:56:03,640
अपने समय के जिसको चैतन्य महाप्रभु प्रमाण मानते थे वो भी

771
00:56:03,640 --> 00:56:08,120
वर्ण को जन्म से ही मानते आए उनकी परंपरा में सब वर्ण को जन्म से

772
00:56:08,120 --> 00:56:10,480
माना तो ये तो सनम बेवफा

773
00:56:10,480 --> 00:56:14,480
वाली बात हो गई ना जब ये अपनी अपनी आचार्य को

774
00:56:14,480 --> 00:56:18,760
अपनी आचार्य के रेफरेंस को नहीं माने तो इनसे क्या बहस की जाए क्या बात की

775
00:56:18,760 --> 00:56:22,800
जाए ये तो मन मुखी साधन है जिसके जो

776
00:56:22,800 --> 00:56:26,800
मन में आ रहा है अरे महाराज

777
00:56:26,800 --> 00:56:31,040
हमारे गुरुदेव एक बात कहते थे हमारे हमारे

778
00:56:31,040 --> 00:56:35,200
गुरुदेव दो बात है एक है आचार्य और एक है

779
00:56:35,200 --> 00:56:39,240
प्रचार हमारे यहां आचार्य हमारे

780
00:56:39,240 --> 00:56:43,320
यहां आचार्य है वल्लभाचार्य शंकराचार्य निबार

781
00:56:43,320 --> 00:56:48,120
काचार्य रामानुजाचार्य रामानंदाचार्य इनके क्या है प्रचार

782
00:56:48,120 --> 00:56:52,200
गीता पकड़ा देंगे हाथ में भाई बाटो प्रचार

783
00:56:52,200 --> 00:56:56,240
प्रचार है प्रचार हमेशा हमेशा प्रचार नकली

784
00:56:56,240 --> 00:57:00,360
स्तु का होता है आपने सूर्य का कभी

785
00:57:00,360 --> 00:57:04,520
प्रचार सुना है अखबार में टाइम होता है सूर्य का इतने

786
00:57:04,520 --> 00:57:09,080
बजे सूर्योदय हो होगा टाइम एंड टाइट वेट फर नून

787
00:57:09,080 --> 00:57:14,000
इसी के लिए नहीं रुकता आपने

788
00:57:14,000 --> 00:57:18,360
ये आपने बड़ा ये आपने बहुत गुढ अर्थ प्रकट कर दिया क्योंकि

789
00:57:18,360 --> 00:57:22,440
एक बार मैंने एक छोटा सा वीडियो बनाया था यह गुण अर्थ है बहुत

790
00:57:22,440 --> 00:57:25,760
इसमें क्या है मैंने बोला था कि मुझे इनकी तरफ से एक बात सुनाई

791
00:57:25,760 --> 00:57:29,920
देती जी कि भाई हमने जो है 900

792
00:57:29,920 --> 00:57:34,680
मंदिर बनाए हैं 900 मंदिर बनाए पूरे वर्ल्ड में अब बात होती

793
00:57:34,680 --> 00:57:38,960
मैंने फिर एक दिन सोचा कि 900 मंदिर बनाए ये बात

794
00:57:38,960 --> 00:57:43,400
क्या है ये फिर मैंने यह तत्व निकाला कि

795
00:57:43,400 --> 00:57:47,840
जो इकोन के टेंपल्स है वह हरि हर भेद करते हैं कि नहीं

796
00:57:47,840 --> 00:57:52,200
थर जो है वह छोटा है और कृष्ण को अल्लाह

797
00:57:52,200 --> 00:57:56,400
से जोड़ देते हैं उनकी उनका एक ग्रंथ है

798
00:57:56,400 --> 00:58:00,400
इसमें पहले ही पेज पर लिखा हुआ है आप शुरू करोगे

799
00:58:00,400 --> 00:58:05,480
सबसे पहले कृष्ण के बारे में बात हो रही है और यहां पर लिखा हुआ

800
00:58:05,480 --> 00:58:09,840
है अल्लाह

801
00:58:09,840 --> 00:58:13,920
बुद्ध बुद्ध यहोवा

802
00:58:13,920 --> 00:58:18,080
यानी बाइबल का ईश्वर राम दिख

803
00:58:18,080 --> 00:58:22,320
रहा है आपको यह सब एक है

804
00:58:22,320 --> 00:58:26,520
जी ये देखिए जी अल्लाह जी जी

805
00:58:26,520 --> 00:58:31,000
है ना बुद्ध हा बुद्ध यहोवा राम

806
00:58:31,000 --> 00:58:35,120
कृष्ण यह सब कृष्ण है ये सब एक है तो यह सब इनके मंदिरों

807
00:58:35,120 --> 00:58:39,320
में तो मैंने कहा कि अगर यह कृष्ण को अल्लाह के समान बताने वाले

808
00:58:39,320 --> 00:58:40,920
अगर पूरी दुनिया में 900

809
00:58:40,920 --> 00:58:45,040
मंदिर हैं तो भगवत पद आरी शंकराचार्य आज हम देखते हैं कि हम

810
00:58:45,040 --> 00:58:49,320
जब कहीं पर भी सामान्य से शहरों में सड़क पर निकल जाए

811
00:58:49,320 --> 00:58:53,440
तो हमारे जो सामान्य मंदिर होते हैं उसमें हरि हर में भेद नहीं है वहां

812
00:58:53,440 --> 00:58:57,480
पर हरि भी है हर भी है मां भगवती भी है और

813
00:58:57,480 --> 00:59:01,520
बजरंग बली भी है सबकी पूजा बराबरी से होती है तो मैंने

814
00:59:01,520 --> 00:59:05,960
देखा कि कि अगर ऐसे मंदिरों को गिना जाए जहां पर

815
00:59:05,960 --> 00:59:09,960
भगवान को अल्लाह से नहीं जोड़ा जाता जहां पर हरि हर भेद नहीं होता

816
00:59:09,960 --> 00:59:14,080
है पांचों परमेश्वर को समान समझा जाता है तो ऐसे

817
00:59:14,080 --> 00:59:18,120
तो मेरे ख्याल से अनगिनत मंदिर निकल आएंगे अगर पूरी दुनिया में हम खोजें

818
00:59:18,120 --> 00:59:22,120
तो अनगिनत तो अब यहां पर दिक्कत क्या हुई

819
00:59:22,120 --> 00:59:26,640
है कि जो आदि शंकराचार्य जी के सिद्धांतों के आधार

820
00:59:26,640 --> 00:59:30,760
या जो हमारे प्रामाणिक आचार्य गण है अन्य जैसे आपने अभी नाम लिया

821
00:59:30,760 --> 00:59:34,880
इनके सिद्धांतों के आधार पर जब मंदिर बनता है तो वहां

822
00:59:34,880 --> 00:59:39,480
पर यह लोग प्रचार नहीं करते यह वल्लभाचार्य का मंदिर है

823
00:59:39,480 --> 00:59:43,560
यह शंकराचार्य का मंदिर है यह रामानंदाचार्य का

824
00:59:43,560 --> 00:59:48,080
मंदिर है यह प्रचार नहीं किया जाता वहा आचार्य होते हैं य आपने जोभी गुण अर्थ कहा

825
00:59:48,080 --> 00:59:52,080
और यह लोग जब मंदिर बनाते हैं तो वहां अपना तमगा लगा देते हैं किय स्कोन मंदिर

826
00:59:52,080 --> 00:59:56,160
है यह स्कोन मंदिर है तो क्या हुआ एक जगह प्रचार है

827
00:59:56,160 --> 01:00:00,520
जी जी मैं वही कह रहा था बहुत गुण अर्थ आपने बताया जो स्वर्ण

828
01:00:00,520 --> 01:00:04,600
होता है असली जो सोना होता है उसका कहीं आपने प्रचार सुना है भा

829
01:00:04,600 --> 01:00:08,720
आवाज आपकी आवाज बहुत कम आ रही है ग्राम आज सोना

830
01:00:08,720 --> 01:00:12,720
इतने हज 10 ग्राम प्रचार तो ये मन होता

831
01:00:12,720 --> 01:00:17,600
है इमिटेशन माने आपकी आवाज कम आ रही है

832
01:00:17,600 --> 01:00:21,760
मैं कह रहा हूं प्रचार होता है हमेशा अली वस्तु का होता है

833
01:00:21,760 --> 01:00:25,760
आपने कभी असली स्वर्ण का सुना होगा अखबार में भाव होता है असली सोने

834
01:00:25,760 --> 01:00:30,280
का आज सोना इतने हजार रुप सोना इतने हजार रुप 10

835
01:00:30,280 --> 01:00:34,520
ग्राम प्र नहीं होता प्रचार मद्रास के गोल्ड का होता है इमिटेशन

836
01:00:34,520 --> 01:00:38,840
है चमक नहीं उतरेगी इ तो कहने का अभिप्राय

837
01:00:38,840 --> 01:00:43,400
यह है कि समन्वय पूर्वक चिंतन करना पड़ेगा

838
01:00:43,400 --> 01:00:49,400
चाहे वैष्णवास्त्र

839
01:00:56,280 --> 01:01:00,440
खंडन किया हो श मत का कहीं नहीं

840
01:01:00,440 --> 01:01:04,680
किया तो वाण मैं कह रहा हूं ब्रह्म तत्व

841
01:01:04,680 --> 01:01:08,760
को लेकर के जो थोड़ा बहुत डिफरेंस है भी मगर जो धर्म धर्म तत्व है उसको

842
01:01:08,760 --> 01:01:13,120
लेकर के तो सब लोग मतक है बिल्कुल कि वर्ण व्यवस्था जन्म से हो आचार्य

843
01:01:13,120 --> 01:01:17,120
व्यास ग पर वही बैठे सब स्वा स्वा कर्मणा का पालन

844
01:01:17,120 --> 01:01:21,240
करें ब्रह्म तत्व को लेकर के डिफरेंस मत अलग

845
01:01:21,240 --> 01:01:25,920
हो सकता है ना जिसने जैसा देखा वैसा अनुभूति करी वैसा लिखा

846
01:01:25,920 --> 01:01:30,160
ब तो निराकार है ब्रह्म तो निराकार है जल जो है निराकार

847
01:01:30,160 --> 01:01:34,280
है उसम नीला डालोगे तो नीला हो जाएगा पीला डालोगे तो पीला हो

848
01:01:34,280 --> 01:01:38,320
जाएगा जी तो निराकार हैकी तो बात ल लेकिन जो

849
01:01:38,320 --> 01:01:42,360
सिद्धांत है एकम सद बहुदा वदंती

850
01:01:42,360 --> 01:01:46,640
जो सिद्धांत है सिद्धांत जब तुम हमारी जो परंपरा

851
01:01:46,640 --> 01:01:50,640
है वो मंडन करने की है मंडन मिश्र को

852
01:01:50,640 --> 01:01:54,840
जीता था खंडन करने की नहीं है

853
01:01:54,840 --> 01:01:58,960
जैसे तुम जी किया किसी वस्तु का आज हमारे

854
01:01:58,960 --> 01:02:03,040
पूरी पीठ के शंकराचार्य महा भाग है क्यों नहीं बोलते वो क्यों नहीं बोलेंगे नहीं

855
01:02:03,040 --> 01:02:08,200
अगर उन्होंने बोल दिया तो इसको तो वेटेज मिल जाएगी ना

856
01:02:08,200 --> 01:02:11,320
जी मिल जाएगी ना फिर ये कोई फोकस में आ जाएगा

857
01:02:11,320 --> 01:02:15,400
लाइम लाइट में आ जाएगा भैया ये कुछ है क्यों

858
01:02:15,400 --> 01:02:19,440
है ये भी बात है पर हा जरूरी है अपने लेवल पर इसका

859
01:02:19,440 --> 01:02:23,560
खंडन भी जरूरी है लेकिन हमारी जो परंपरा है वो खंडन की नहीं

860
01:02:23,560 --> 01:02:27,600
है मंडन की है जोड़ने की है इसलिए हमारे आचार्य ने किसी वैष्णव

861
01:02:27,600 --> 01:02:32,040
आचार्य ने शैव्य मत का कभी विरोध नहीं

862
01:02:32,040 --> 01:02:36,560
किया

863
01:02:36,560 --> 01:02:40,880
जी कहीं कहीं पर यह रखा है कि जो ईस्ट

864
01:02:40,880 --> 01:02:45,480
के प्रति जो अनन्य का होता है भाव उसको सुरक्षित रखने के लिए

865
01:02:45,480 --> 01:02:49,560
जो ईस्ट की महिमा तो गाई है ईस्ट की महिमा खूब गाई

866
01:02:49,560 --> 01:02:53,680
है मगर यह नहीं है कि वहां पर जो हरि की निंदा के रूप में

867
01:02:53,680 --> 01:02:58,160
जो हरि निंदा की व पाखंड है या उनको

868
01:02:58,160 --> 01:03:02,440
जो शिव शिव जी के जो भक्त है वह पाखंडी है शिव को भगवान

869
01:03:02,440 --> 01:03:06,600
मानने वाले पाखंडी है यह सब निंदा क्मक रवैया थोड़ा सा

870
01:03:06,600 --> 01:03:11,240
और अगर कहीं पर ग्रंथों के माध्यम से हो भी गया तो उसको प्रचार नहीं किया

871
01:03:11,240 --> 01:03:15,360
यह भी है कई ग्रंथों के रूप में अगर स्वीकार कर लिया तो

872
01:03:15,360 --> 01:03:20,280
उसका बहुत ज्यादा मैं आपको एक बात बताता हूं एक

873
01:03:20,280 --> 01:03:24,480
बात आपसे क्षमा चाहूंगा फिर मेरे को थोड़ा

874
01:03:24,480 --> 01:03:26,920
सा वि ना पड़ेगा

875
01:03:26,920 --> 01:03:31,080
मैं आपको एक बात बताता हूं बात क्या है

876
01:03:31,080 --> 01:03:35,200
कि तीन तरह के लोग होते हैं तीन तरह के संसार

877
01:03:35,200 --> 01:03:39,200
में एक होते हैं विद्वान

878
01:03:39,200 --> 01:03:43,360
एक होते हैं विद्वान एक होते हैं विद्वान

879
01:03:43,360 --> 01:03:47,920
एक होते है साधक और एक होते हैं गृहस्थ

880
01:03:47,920 --> 01:03:52,240
गृहस्थ को व्यवहार चाहिए होता है विद्वानों को विचार

881
01:03:52,240 --> 01:03:56,440
चाहिए होता है और संतों को भाव चाहिए होता है ठीक संत भाव

882
01:03:56,440 --> 01:04:00,600
के भूखे हैं विद्वान विचार के भूखे हैं गृहस्थ व्यवहार के भूखे

883
01:04:00,600 --> 01:04:04,640
आपने देखा होगा दिवाली होली किसी तीज त्यौहार पर तुम्हारे घर पर नहीं आया तो हम भी तुम्हारे

884
01:04:04,640 --> 01:04:09,600
घर नहीं जाएंगे तो व्यवहार त है ये एकय

885
01:04:09,600 --> 01:04:15,600
ये

886
01:04:24,720 --> 01:04:28,760
वैष्णवास्त्र तो मतलब तुम छोटे हम बड़े छोटे बड़े की बात

887
01:04:28,760 --> 01:04:32,920
ही कहां आती है जी ये

888
01:04:32,920 --> 01:04:37,440
है तो कहने का अभिप्राय यह है कि मैंने जैसा अभी कहा

889
01:04:37,440 --> 01:04:41,520
कि ये इसे युग प्रभाव मान सकते हैं या इसे

890
01:04:41,520 --> 01:04:45,800
काल का चक्र मान सकते हैं कि अब जैसे भगवान गिन रहे थे ना 99

891
01:04:45,800 --> 01:04:49,800
की गिनती पूरी हो तो मैं सुदर्शन फेंकू शिशुपाल प तो

892
01:04:49,800 --> 01:04:54,160
शायद उसी का इंतजार है इसलिए शायद इन लोगों की चीजें

893
01:04:54,160 --> 01:04:59,080
क्योंकि जो चीज बड़ी तीव्रता से चढ़ती है व तीव्रता से उतरती हुई है

894
01:04:59,080 --> 01:05:03,120
यह मैंने अनुभव किया है इसलिए

895
01:05:03,120 --> 01:05:07,160
मैं एक सकारात्मक विचार के संग आपके इस कार्यक्रम

896
01:05:07,160 --> 01:05:12,160
से विदा लूंगा कि आपने जो यह अथक प्रयास किया है यह बहुत सरानी

897
01:05:12,160 --> 01:05:16,400
है हमारा किसी से विरोध नहीं है लेकिन कार्य करने की

898
01:05:16,400 --> 01:05:20,640
का कार्य करने की जो शैली है यह गलत है इसमें सुधार की आवश्यकता

899
01:05:20,640 --> 01:05:24,640
है तुम सुधर जाओ हमें क्या दिक्कत हमारा भी यही कहना है कि

900
01:05:24,640 --> 01:05:29,600
आप जो शोधन कर दीजिए तो हमें हम और आप साथ में मिलकर धर्म का प्रचार

901
01:05:29,600 --> 01:05:33,960
करें बहुत बहुत अच्छा लगा आपका ज्यादा समय हम

902
01:05:33,960 --> 01:05:38,000
नहीं लेंगे क्योंकि आप जो है आप व्यस्त है वहां पर और मैं

903
01:05:38,000 --> 01:05:39,880
अपेक्षा करूंगा ऐसी आशा करते

904
01:05:39,880 --> 01:05:44,120
हुए कि एक बार जो है पुनः यहां पर आते रहे और ऐसे

905
01:05:44,120 --> 01:05:48,640
कुछ एक विद्वत चर्चा जो है आपसे हमें प्राप्त होती रहे

906
01:05:48,640 --> 01:05:53,080
और आने के लिए बहुत बहुत आभार आपका क्योंकि आपके रू

907
01:05:53,080 --> 01:05:57,400
में मुझे आपने आमंत्रित किया और इतना सम्मान

908
01:05:57,400 --> 01:06:01,480
प्राप्त हुआ स्नेह प्राप्त हुआ आप लोगों से और भगवत पाद शंकराचार्य

909
01:06:01,480 --> 01:06:05,640
कुछ चर्चाएं हुई तो मैं अपने को अपना आभारी मानता

910
01:06:05,640 --> 01:06:09,640
हूं आपका और ी के संग अपने शब्दों को और

911
01:06:09,640 --> 01:06:14,400
जरूर निश्चित ही शीघ्र अति शीघ्र पुनः मुलाकात होगी और फिर चर्चा भगवत

912
01:06:14,400 --> 01:06:18,600
चर्चा और हम आपकी वो जो हनुमान चालीसा का जो भाष्य

913
01:06:18,600 --> 01:06:22,880
जो पुनर प्रकाशित हो रहा है उसको भी आप ध्यान में रखिएगा

914
01:06:22,880 --> 01:06:26,920
कि जब जैसे ही प्रकाशित हो तो आप हमें बताइएगा तो जो हमारे दर्शक होंगे

915
01:06:26,920 --> 01:06:31,000
वो भी उनको भी हम बताएंगे है ना ठीक है फिर निश्चित रूप से

916
01:06:31,000 --> 01:06:35,080
जरूर समित करूंगा जी जी जी जय श्री राम जय

917
01:06:35,080 --> 01:06:40,640
श्री राम ज जय श्री

918
01:06:40,640 --> 01:06:45,080
राम तो आशा करते हैं आप लोगों को

919
01:06:45,080 --> 01:06:49,320
चर्चा अच्छी लगी हो विद्वान थे और मैंने

920
01:06:49,320 --> 01:06:53,520
जैसा कि बताया कि इनका जो कुटुंब है वंश है वो पूरा

921
01:06:53,520 --> 01:06:57,800
पुष्ट है सनातन सिद्धांत से और त

922
01:06:57,800 --> 01:07:01,880
प्र धर्म से बहुत त मैं इनके यहां पर गया था तो वहां पर छोटी सी गौशाला भी थी

923
01:07:01,880 --> 01:07:06,000
वहां पीछे इनके निवास में ही इतना तो इनका मतलब जो निवास स्थान

924
01:07:06,000 --> 01:07:10,000
है पूरा दिव्य था एक तो वहीं पर एक व्यास गद्दी जो इनकी परंपरा की जो इनकी दादा की

925
01:07:10,000 --> 01:07:14,280
गद्दी थी और वहीं पर वो जो एक गुफा

926
01:07:14,280 --> 01:07:18,640
की बात बताई इन्होंने वहीं पर जो इनका घर है वो सटा हुआ है उस ब्रह्म

927
01:07:18,640 --> 01:07:22,840
कुंड से सटा हुआ इनका घर है तो सोचिए एक दिव्य दर्शन

928
01:07:22,840 --> 01:07:26,920
आपको इनके घर पर जाएंगे तो होते रहेंगे और ऐसी कृपा में फिर

929
01:07:26,920 --> 01:07:30,960
मैं जब वहां पहुंचा तो इन्होंने कहा कि भाई आप लोग क्या पीते

930
01:07:30,960 --> 01:07:35,600
हैं तो हमने कहा कि हम तो चायवा तो नहीं पीते हैं तो

931
01:07:35,600 --> 01:07:40,120
लोकाचार की दृष्टि से इन्होंने पूछा था जो प्रासंगिक होता है तो

932
01:07:40,120 --> 01:07:44,200
फिर इन्होंने कहा कि गौ माता का जो शुद्ध दूध है वो आप ले आइए

933
01:07:44,200 --> 01:07:49,560
तो हम जो ये आधुनिक नगरों में रहने वाले लोग हमको

934
01:07:49,560 --> 01:07:53,720
कहां ऐसा जो बहुमूल्य है तत्व वो कहां प्राप्त होता है तो हमने

935
01:07:53,720 --> 01:07:55,800
जट से हां कर दी फिर बढ़िया

936
01:07:55,800 --> 01:07:59,840
गौ माता का जो बिल्कुल देसी गाय होती है उनका दूध आया तो

937
01:07:59,840 --> 01:08:04,120
व हमने प्राप्त किया फिर इनसे वहां पर थोड़ी बहुत चर्चा भी हुई और हमने इनकी

938
01:08:04,120 --> 01:08:08,120
जो अच्छा इनका कुछ और भी चीजें थी जैसे कपाती जी के साथ और

939
01:08:08,120 --> 01:08:12,160
भी इनके जो दादा है उनका कुछ संबंध है उसका विवरण है

940
01:08:12,160 --> 01:08:18,160
रहा है तो मैंने आपको कई बार बताया कि जो वैष्णवास्त्र

941
01:08:25,640 --> 01:08:30,080
पटक कर लेते हैं इस से पच गया था दूध

942
01:08:30,080 --> 01:08:36,080
तो

943
01:08:37,000 --> 01:08:43,000
वैष्णवास्त्र

944
01:08:46,040 --> 01:08:50,440
जी का बहुत महिमा मंडन हुआ है भाई अगर

945
01:08:50,440 --> 01:08:54,720
मायावादी का भाष्य सुनते ही सर्वनाश होता है एक जगह आप इसका प्रचार

946
01:08:54,720 --> 01:08:59,600
कर रहे हो और आपके अनुसार शंकर संप्रदाय मायावादी है कपाती जी मायावादी तो

947
01:08:59,600 --> 01:09:03,840
वही आचार्य जिनके द्वारा आप ऐसा प्रचार कर रहे हो जिनके नाम पर वही

948
01:09:03,840 --> 01:09:07,880
आचार उस उनका जो है उनकी इतना महिमा मंडर कर रहे हैं कि

949
01:09:07,880 --> 01:09:12,120
व पूरे विश्व में एक उनके जैसा कोई विद्वान नहीं है दूसरा उनकी वाणी है

950
01:09:12,120 --> 01:09:14,680
सुनिए

951
01:09:14,680 --> 01:09:19,080
इवन प्रभुपाद जी ने स्कोन मंदिर के उद्घाटन में

952
01:09:19,080 --> 01:09:23,400
करपाती जी को आमंत्रित किया था और हमारे पास वो छाया

953
01:09:23,400 --> 01:09:27,920
प्रतियां है जिसमें कि खंडा सरस्वती जी वहां पहुंचे

954
01:09:27,920 --> 01:09:32,360
थे वृंदावन में हमारे पास वो फोटोज है

955
01:09:32,360 --> 01:09:36,480
तो जब प्रभुपाद जी अब जैसे वही वाली बात है कि प्रभुपाद जी इतने बड़े

956
01:09:36,480 --> 01:09:40,640
वैष्णव इतना बड़ा वैष्णव नाम प्रचार प्रसार करने वाले फिर उनके

957
01:09:40,640 --> 01:09:44,720
नाम से ही तुलसीदास जी के बारे में लिखा हुआ है कि वोह जो है

958
01:09:44,720 --> 01:09:48,800
प्योर वैष्णव नहीं थे वो मायावादी थे तो यह कुछ बातें फिर एक

959
01:09:48,800 --> 01:09:52,160
दूसरे को करती है कि यह प्रभुपाद जी के नाम

960
01:09:52,160 --> 01:09:56,360
पर गलत प्रचार किया जा रहा है राज कल तक लिखा हुआ है कृष्ण

961
01:09:56,360 --> 01:10:00,400
भगवान के लिए वशिष्ठ जी के लिए रासकल लिखा हुआ है

962
01:10:00,400 --> 01:10:04,680
कि प्रभुपाद जी ने उनको रासकल कहा तो यह सब बातें मेरी हजम मेरे

963
01:10:04,680 --> 01:10:08,920
हजम नहीं होती कि प्रभुपाद जी ने जो है

964
01:10:08,920 --> 01:10:13,080
तुलसीदास जी को मायावादी कहते हुए निंदा की कपाती जी को रासकल का एक तरफ

965
01:10:13,080 --> 01:10:17,280
बढ़ाई कर रहे दूसरी तरफ रासकल का एक तरफ कृष्ण भगवान की भक्ति कर रहे हैं दूसरी

966
01:10:17,280 --> 01:10:21,480
तरफ रासकल का यह सब मुझे मतलब मैं इन बातों को नहीं स्वीकार करता

967
01:10:21,480 --> 01:10:25,520
कि प्रभुपाद जी ने सब कहा है यह ऐसा दिखाई पड़ता है कि उनके ना नाम

968
01:10:25,520 --> 01:10:29,520
से एक दुष्प्रचार किया जा रहा है अपने मंतव्य की सिद्धि के लिए तो ऐसा

969
01:10:29,520 --> 01:10:35,520
दिखाई देता है और बाकी

970
01:10:36,200 --> 01:10:41,440
वैष्णवास्त्र

971
01:10:41,440 --> 01:10:46,080
में भूमिका लिख रहे हैं

972
01:10:46,080 --> 01:10:48,560
वैष्णवास्त्र

973
01:10:48,560 --> 01:10:54,240
की भूमिका लिख रहे हैं और

974
01:10:54,240 --> 01:10:58,320
वैष्णवास्त्र शंकराचार्य या

975
01:10:58,320 --> 01:11:02,640
करपात्री जी और करपात्री जी के बारे में बताते

976
01:11:02,640 --> 01:11:08,640
हुए

977
01:11:24,240 --> 01:11:28,240
वैष्णवास्त्र एक आपको अच्छा सा वक्तव्य प्राप्त होगा

978
01:11:28,240 --> 01:11:32,480
और उनके द्वारा भी देखिए कपाती जी का वर्णन आएगा तो कितनी मिठास

979
01:11:32,480 --> 01:11:36,640
और कितना महिमा गान होगा उनका और

980
01:11:36,640 --> 01:11:40,760
इसी प्रकार से जैसे अभी आपने इनको सुना

981
01:11:40,760 --> 01:11:46,760
रामानंदी तो वैष्णवास्त्र

982
01:11:55,360 --> 01:11:59,400
करपात्री जी का बात आई तो उन्होंने कहा कुछ चीजें संप्रदाय से

983
01:11:59,400 --> 01:12:03,400
बिल्कुल अलग हट के होती है करपात्री जी की कुछ कुछ बात ही नहीं कही जा सकती इस

984
01:12:03,400 --> 01:12:07,200
तरह का

985
01:12:07,200 --> 01:12:13,080
उन्होंने यह सारी सामंजस्य हम लोग दिखाते रहेंगे

986
01:12:13,080 --> 01:12:17,360
आपको जो तात्विक कहीं कहीं पर भेद है सिद्धांतों में

987
01:12:17,360 --> 01:12:21,400
अंत में बिल्कुल जाकर के आखिर में वो ब्रह्म क्या है

988
01:12:21,400 --> 01:12:25,400
वो तात्विक भेद है ठीक है व तत्वों के नाम

989
01:12:25,400 --> 01:12:29,760
पर वो सिद्धांति मगर जो ब्रह्म में ये जो भेद आया मगर जो आचरण

990
01:12:29,760 --> 01:12:34,000
यानी कि धर्म है उसमें कोई बहुत बड़ा भेद नहीं आया वर्ण

991
01:12:34,000 --> 01:12:38,040
व्यवस्था या गायत्री मंत्र का जाप कौन करेगा कौन नहीं

992
01:12:38,040 --> 01:12:42,200
करेगा यह विधि विधान को लेकर के कोई भेद प्रामाणिक

993
01:12:42,200 --> 01:12:46,200
आचार्यों के रूप में नहीं आता इसलिए हम कहते हैं कि आप शंकर संप्रदाय से दीक्षा

994
01:12:46,200 --> 01:12:50,400
ल राम संप्रदाय से दीक्षा ले वल्लभाचार्य संप्रदाय से दीक्षा

995
01:12:50,400 --> 01:12:54,400
ल किसी भी प्रामाणिक संप्रदाय से दीक्षा ल जो सनातन का

996
01:12:54,400 --> 01:12:59,000
चोला ओ सनातन को अब्राम दिखाने की कोशिश कर रहे हैं अब्राम

997
01:12:59,000 --> 01:13:03,520
से वो जो अब्राम विचारधारा

998
01:13:03,520 --> 01:13:07,560
है वह सिद्ध करने की कोशिश कर रहे हैं उनसे अपने आप को बचाए

999
01:13:07,560 --> 01:13:10,440
और हो सके तो कम से

1000
01:13:10,440 --> 01:13:14,560
कम उन बातों को ना माने जो बातें विवादास्पद है जो बातें

1001
01:13:14,560 --> 01:13:18,760
प्रामाणिक आचार्य द्वारा स्वीकार नहीं की जा रही है उनको ना स्वीकार करें

1002
01:13:18,760 --> 01:13:23,240
तो इन सब चीजों के साथ हम इसको जो

1003
01:13:23,240 --> 01:13:27,760
है लाइव को पूरा करते

1004
01:13:27,760 --> 01:13:32,240
हैं और जो है अच्छा

1005
01:13:32,240 --> 01:13:36,400
रहा गौशाला में यज्ञ होना है नवंबर

1006
01:13:36,400 --> 01:13:40,920
में चलिए शुद्ध दूध पिलाते हैं देसी गाय का जी बिल्कुल श्रेयस जी

1007
01:13:40,920 --> 01:13:45,000
अवश्य शेश जी भी आपके साथ

1008
01:13:45,000 --> 01:13:49,200
भी हम जाएंगे और दूध पिएंगे गौ माता का और

1009
01:13:49,200 --> 01:13:53,680
भविष्य निकट भविष्य में ऐसा भी है जी अवनीश जी बहुत-बहुत आभार

1010
01:13:53,680 --> 01:13:57,880
आपका समर्थन प्रकट करने के लिए पुनीत जी बहुत अच्छे वक्ता हैं

1011
01:13:57,880 --> 01:14:02,200
थोड़ा सा नेट की प्रॉब्लम रही जो जिस कारण से आज

1012
01:14:02,200 --> 01:14:06,280
कहीं कहीं पर वो आपको असुविधा दिख रही होगी मगर ऐसी

1013
01:14:06,280 --> 01:14:10,800
प्रार्थना करते हैं कि अगली बार जब उनका वक्तव्य प्राप्त हो तो वह ऐसी जगह पर हो

1014
01:14:10,800 --> 01:14:16,800
जहां पर धारा में उनकी बिल्कुल धारा प्रवाह उनका वक्तव्य सुनाई

1015
01:14:18,040 --> 01:14:22,360
दे राघवाचार्य जी जो रामन संप्रदाय के जो प्रामाणिक

1016
01:14:22,360 --> 01:14:26,600
आचार्य हैं उनमें और जो पुरी के

1017
01:14:26,600 --> 01:14:30,640
पुरी पीठ के जो गुरुदेव हैं उनके गुरु भाई हैं आचार्य

1018
01:14:30,640 --> 01:14:34,880
राम शंकर शुक्ल जिनका अभी अभी रिसेंटली चालू हुआ है यू

1019
01:14:34,880 --> 01:14:39,000
चैनल तो उनसे बहुत अच्छे संबंध है

1020
01:14:39,000 --> 01:14:43,120
राघवाचार्य जी के और जो आचार्य राम शंकर शुक्ल है

1021
01:14:43,120 --> 01:14:47,360
उनसे बहुत अच्छे संबंध है तो अभी वो कब होना है यह अभी निश्चित

1022
01:14:47,360 --> 01:14:51,440
नहीं हुआ है पर बहुत जल्दी होगा हां भाई दूध

1023
01:14:51,440 --> 01:14:55,720
आरडी से दूध का सेवन करेंगे अबकी बार बिल्कुल ठीक

1024
01:14:55,720 --> 01:15:00,360
सभी को जय श्री राम अपना समय देने के लिए आभार नाम जप से जुड़िए

1025
01:15:00,360 --> 01:15:04,600
धर्म के लिए कुछ भी करना है तो सबसे पहले नामा आस्त्र उठाइए उसके बाद

1026
01:15:04,600 --> 01:15:09,000
फिर भगवान आपको दिशा निर्देश स्वयं देने लगेंगे कि

1027
01:15:09,000 --> 01:15:13,160
आपको करना क्या है व स्वयं आपको दिशा निर्देश देंगे गुरु

1028
01:15:13,160 --> 01:15:17,560
की शरणागति प्राप्त हो जाएगी और सार्वभौम सिद्धांत प्राप्त

1029
01:15:17,560 --> 01:15:21,720
होंगे सभी का सभी का आभार

1030
01:15:21,720 --> 01:15:27,200
सभी को जय श्री राम

1031
01:15:27,200 --> 01:15:31,440
यह ना मास्त्र का देख लीजिए ना मास्त्र अभियान

1032
01:15:31,440 --> 01:15:36,040
चल रहा है जो लोग भी इस नाम जब ऑपरेशन से जुड़ना चाहते हैं

1033
01:15:36,040 --> 01:15:40,200
वह हमें ट कर सकते हैं 74836

1034
01:15:40,200 --> 01:15:44,560
पर और इस पर ट करने पर आपको

1035
01:15:44,560 --> 01:15:49,960
एक ऑटो जनरेट फॉर्म प्राप्त होगा उसको भर करके आप इस अभियान से जुड़

1036
01:15:49,960 --> 01:15:53,960
सकते जय श्री राम सर
