1
00:00:01,360 --> 00:00:04,320
सभी को जय श्री

2
00:00:04,320 --> 00:00:08,560
राम तो हमारे साथ में मदन दास जी हैं

3
00:00:08,560 --> 00:00:14,040
रामपाल जी की ओर से

4
00:00:14,040 --> 00:00:18,160
और आज हम लोग एक लाइव कर

5
00:00:18,160 --> 00:00:22,200
चुके हैं पहले ही और यह दूसरी लाइव है एक ही

6
00:00:22,200 --> 00:00:26,200
दिन में आज तो अपने बारे में थोड़ा सा बता दें आप किस

7
00:00:26,200 --> 00:00:32,200
प्रकार से जुड़े हुए हैं रामपाल जीरा नाम मदन दास है

8
00:00:32,200 --> 00:00:36,360
मैं महाराष्ट्र से हूं मैं दो साल से जुड़ा

9
00:00:36,360 --> 00:00:40,360
हूं संत रामपाल जी महाराज जी के नाम दो साल

10
00:00:40,360 --> 00:00:45,200
पहले आपकी नामदान मिला था आपको दो साल पहले दो साल पहले 202

11
00:00:45,200 --> 00:00:47,560
में अच्छा

12
00:00:47,560 --> 00:00:52,360
तो यह संत रामपाल जी जो हैं

13
00:00:52,360 --> 00:00:56,640
उनकी जो गुरु उनकी जो गद्दी है किस प्रकार से ऑपरेट

14
00:00:56,640 --> 00:01:02,520
होती है मतलब उनकी प्रामाणिक चीजें आप तक कैसे पहुंचती

15
00:01:02,520 --> 00:01:06,600
हां पहले तो मैं

16
00:01:06,600 --> 00:01:10,760
टीवी प जब पहली बार उनका सत्संग देखा हम

17
00:01:10,760 --> 00:01:15,160
तो बाद में धीरे-धीरे मैंने उनका ज्ञान

18
00:01:15,160 --> 00:01:19,200
ज्ञान सीखा बाद में पुस्तकों का अध्ययन

19
00:01:19,200 --> 00:01:23,320
किया शास्त्रों का अध्ययन किया तो वो जो बता रहे और शास्त्र में

20
00:01:23,320 --> 00:01:27,400
जो लिखा है ये मुझे

21
00:01:27,400 --> 00:01:31,960
थोड़ा सा लगा कि ये सही है

22
00:01:31,960 --> 00:01:37,040
और उनकी गुरु गुरु परंपरा ऐसी है कि

23
00:01:37,040 --> 00:01:41,040
संत गरीबदास जी महाराज स्वामी राम देवानंद

24
00:01:41,040 --> 00:01:45,040
जी महाराज उनके गुरु थे नहीं वो परंपरा

25
00:01:45,040 --> 00:01:49,400
नहीं पूछ रहा मैं यह पूछ रहा हूं कि

26
00:01:49,400 --> 00:01:55,000
उनकी चीजें आप तक कैसे पहुंच रही है

27
00:01:55,000 --> 00:01:59,200
हा य से और चैनल

28
00:01:59,200 --> 00:02:03,560
से टीवी से क्या हमारे शास्त्र में कहीं वर्णित

29
00:02:03,560 --> 00:02:08,520
है कि आपको जो गुरु की शिक्षा है वह ट से मिलेगी या

30
00:02:08,520 --> 00:02:12,840
चैनल से मिलेगी शास्त्र में तो वर्णित

31
00:02:12,840 --> 00:02:17,280
नहीं है तो फिर जो अभ प्रामाणिक

32
00:02:17,280 --> 00:02:22,160
चीज क्या है प्रामाणिक गुरु का सानिध आपको कैसे प्राप्त हुआ

33
00:02:22,160 --> 00:02:26,600
गुरु का ज्ञान आपको कैसे मिल रहा है उसमें य आदि को प्रमाण

34
00:02:26,600 --> 00:02:31,120
नहीं माना जा सकता य चैनल इत्यादि को वो माध्यम हो सक

35
00:02:31,120 --> 00:02:35,120
उनका सहारा लिया जा सकता है मगर उस स्थिति में जब हमारे

36
00:02:35,120 --> 00:02:39,480
पास उसे वेरीफाई करने के लिए प्रामाणिक पद्धति भी

37
00:02:39,480 --> 00:02:43,680
हो समझ रहे हैं जैसे आजकल एआई आ गया है

38
00:02:43,680 --> 00:02:47,880
रामपाल जी की आवाज बदल करके कोई एआई का वीडियो बना दिया जाएगा यट

39
00:02:47,880 --> 00:02:52,080
पर अपलोड कर दिया जाएगा तो आप क्या करेंगे आपको कैसे पता लगेगा

40
00:02:52,080 --> 00:02:56,160
कि नहीं यह जो है उनका प्रामाणिक वीडियो नहीं है तो वो

41
00:02:56,160 --> 00:03:00,360
कौन सी प्रणाली है जिससे कि आपको पता लगता है कि यह यह

42
00:03:00,360 --> 00:03:04,440
जो है रामपाल दास जी का प्रामाणिक हम तक पहुंच रहा है

43
00:03:04,440 --> 00:03:08,640
हा तो उन्होंने हम जो आते

44
00:03:08,640 --> 00:03:10,000
हैं कबीर पन से आते

45
00:03:10,000 --> 00:03:14,200
हैं उनका जो ज्ञान है वह जो ज्ञान दे रहे हैं व

46
00:03:14,200 --> 00:03:18,240
जिनको परमात्मा बता रहे हैं पूर्ण परमात्मा जिनको बता रहे

47
00:03:18,240 --> 00:03:22,400
वह कबीर जी है मतलब 600 साल पहले जो संत कबीर

48
00:03:22,400 --> 00:03:26,560
ई साब मेरा प्रश्न य है जो ज्ञान दिया

49
00:03:26,560 --> 00:03:30,600
है उन्होंने जो कबीर

50
00:03:30,600 --> 00:03:34,800
कबीर सागर कबीर मैं कह रहा हूं आज रामपाल

51
00:03:34,800 --> 00:03:39,120
जी आज रामपाल जी आपको कुछ ज्ञान देते हैं

52
00:03:39,120 --> 00:03:43,120
आपको कैसे पता वह ज्ञान रामपाल जी ने ही दिया है

53
00:03:43,120 --> 00:03:47,280
हा वही तो बोल रहा हूं ना जब मैंने

54
00:03:47,280 --> 00:03:51,640
मतलब रामपाल जी कौन से रामपाल जी कौन सी प्रामाणिक प्रणाली

55
00:03:51,640 --> 00:03:55,840
का उपयोग करते हैं जिससे कि उनकी चीजें फिक्स हो पाती है कि हां

56
00:03:55,840 --> 00:04:00,800
यह जो मेरे को ज्ञान मिला यह रामपाल जी का ही है अभी सोट

57
00:04:00,800 --> 00:04:04,840
जैसे कि आपकी कई किताबें छप रही है ठीक

58
00:04:04,840 --> 00:04:08,920
है ज्ञान गंगा अब मैं चाहूं तो उसमें ज्ञान गंगा

59
00:04:08,920 --> 00:04:12,920
में थोड़ा सा रद्द बदल कर दूं एक नई ज्ञान गंगा छपवा दूं बिल्कुल

60
00:04:12,920 --> 00:04:17,040
उसके जैसी डुप्लीकेट और उसमें थोड़ा सा रद्द बदल उनके शब्दों में

61
00:04:17,040 --> 00:04:21,800
कर दूं कबीर की जगह वहां पर शिव लिख दूं

62
00:04:21,800 --> 00:04:25,080
पूर्ण परमात्मा की जगह ठीक है या

63
00:04:25,080 --> 00:04:29,120
फिर और कुछ ऐसा छोटा मोटा रद्द बदल जिसको आप जो आपकी नजर में

64
00:04:29,120 --> 00:04:33,120
ही ना आ पाए मगर वो हो तो फिर आप उसको

65
00:04:33,120 --> 00:04:37,120
जब पढ़ेंगे ज्ञान गंगा को समझ के किय भाही उन्हीं की है

66
00:04:37,120 --> 00:04:41,240
ज्ञान गंगा किसकी रामपाल दास जी की तो फिर आपको

67
00:04:41,240 --> 00:04:45,400
पता कैसे लगेगा कि यह जो ज्ञान गंगा में पढ़ रहा हूं यह नकली

68
00:04:45,400 --> 00:04:49,400
नहीं है असली ही है उसके लिए कबीर सागर है

69
00:04:49,400 --> 00:04:53,640
ना जो संत कबीर थे आप जिनको संत कबीर मान रहे

70
00:04:53,640 --> 00:04:58,200
हैं उन्होने उन्होंने जो कबीर सागर लिखा है

71
00:04:58,200 --> 00:05:02,280
उनमें सब बातें सब ज्ञान एज इट इज है

72
00:05:02,280 --> 00:05:06,400
जो शास्त्रों से मेल खाता है और सभी शास्त्रों से मेता है

73
00:05:06,400 --> 00:05:10,640
श्रीम कबीर साहब ने जो लिखना था लिख दिया आज के प्रासंगिक

74
00:05:10,640 --> 00:05:14,720
विषय के अनुसार रामपाल जी कोई बात बताते हैं

75
00:05:14,720 --> 00:05:18,760
जो कबीर साहब के टाइम पर थी ही नहीं वह बात मान लो कंप्यूटर के

76
00:05:18,760 --> 00:05:22,880
बारे में कुछ बोल रहे हैं मोबाइल के बारे में कुछ बोल रहे हैं यह सब चीजें

77
00:05:22,880 --> 00:05:27,080
तो थी नहीं कबीर साहब के टाइम प अब इसके बारे में वो इसके बारे

78
00:05:27,080 --> 00:05:31,720
में इसके बारे में रामपाल दास जी आज कुछ धर्म और अधर्म बताते हैं

79
00:05:31,720 --> 00:05:36,400
कि ये टीवी नहीं देखना मान लीजिए कह रहे हैं टीवी नहीं देखना चाहिए

80
00:05:36,400 --> 00:05:40,200
तो अब वह चाहते हैं कि टीवी नहीं देखना चाहिए

81
00:05:40,200 --> 00:05:44,240
यह संदेश लोगों तक पहुंचे मगर आपके पास जो किताब आ रही

82
00:05:44,240 --> 00:05:48,240
है उसमें किसी ने द्वेश बस यह मिला दिया कि नहीं

83
00:05:48,240 --> 00:05:54,240
टीवी जो है देखना चाहिए आपको कैसे पता

84
00:05:54,600 --> 00:05:59,040
लगेगा हां उसके लिए हमने ज्ञान उनका जो था उन्होंने

85
00:05:59,040 --> 00:06:03,360
जो बताया व सब कुछ ग्रहण कर लिया है अपने अंदर समा लिया है

86
00:06:03,360 --> 00:06:07,960
इसलिए हमको तुरंत पता चल जाता है कि कहां पर गड़बड़

87
00:06:07,960 --> 00:06:11,960
हुई यानी कि कोई नया व्यक्ति अगर कोई रामपाल जी को चुन

88
00:06:11,960 --> 00:06:15,960
रहा है उसके लिए क्या प्रणाली होगी आपने तो उनका सारा ज्ञान पी

89
00:06:15,960 --> 00:06:20,120
लिया आपको पता लग जाएगा जो नया व्यक्ति रामपाल

90
00:06:20,120 --> 00:06:24,320
दास जी के बताए हुए मार्ग पर चलना चाहता है वह

91
00:06:24,320 --> 00:06:28,320
किस प्रणाली को फॉलो करे जिससे कि उसके पास रामपाल दास

92
00:06:28,320 --> 00:06:32,320
जी का ही ज्ञान आए किसी और का ना आए

93
00:06:32,320 --> 00:06:36,640
कबीर सागर अ फिर वही बात घूम

94
00:06:36,640 --> 00:06:40,640
फिर के आप वहीं आ जाते हैं मेरा कहने का मतलब

95
00:06:40,640 --> 00:06:44,840
है कि वह कौन सी व्यवस्था है जिसको फॉलो करके

96
00:06:44,840 --> 00:06:49,200
रामपाल दास जी के ही सही ज्ञान तक कोई व्यक्ति पहुंच

97
00:06:49,200 --> 00:06:53,760
सकता है वह कौन सी प्रणाली

98
00:06:53,760 --> 00:06:55,240
है इस बारे

99
00:06:55,240 --> 00:06:59,360
में कोई समाधान नहीं है क्या अभी

100
00:06:59,360 --> 00:07:04,280
तो हमा

101
00:07:04,280 --> 00:07:08,320
पास होगा आपको इस बारे में नहीं

102
00:07:08,320 --> 00:07:12,600
पता तो हमारे पास

103
00:07:12,600 --> 00:07:16,640
पता हा वो बताइए क्या है पता

104
00:07:16,640 --> 00:07:20,720
है अगर ऐसा कुछ होगा तो हमारे पास शास्त्र अवेलेबल

105
00:07:20,720 --> 00:07:24,800
है श्रीमद श्रीमद भगवदगीता है आप

106
00:07:24,800 --> 00:07:29,600
समझे नहीं मेरी बात जैसे मैंने अभी उदाहरण दिया आपको मैंने

107
00:07:29,600 --> 00:07:33,960
कि यदि रामपाल दास जी यह संदेश देना चाहते हैं अपनी किताबों

108
00:07:33,960 --> 00:07:38,000
के माध्यम से कि भाई इसमें जो है ऐसे से

109
00:07:38,000 --> 00:07:42,040
ऐसा हो कंप्यूटर को लेकर के टीवी को लेकर के कोई

110
00:07:42,040 --> 00:07:46,160
संदेश व देना चाहता तो आपको कैसे पता लगेगा

111
00:07:46,160 --> 00:07:50,280
अब कोई नया व्यक्ति है चलिए आपने सारे शास्त्र पढ़ रखे उनके

112
00:07:50,280 --> 00:07:54,400
कोई नया व्यक्ति है वह नया व्यक्ति जोड़ अभी अभी जाना ही है

113
00:07:54,400 --> 00:07:58,400
बस और अब वो रामपाल दास जी को फॉलो कर रहा है उसको मैंने जाकर

114
00:07:58,400 --> 00:08:02,560
के मैंने करके उसको एक नई किताब छाप के दे दी

115
00:08:02,560 --> 00:08:06,760
और उसमें लिख दिया कि रामपाल दास जी ने उल्टी

116
00:08:06,760 --> 00:08:10,560
कुछ उल्टी बातें लिख दी उनके नाम से तो उस व्यक्ति

117
00:08:10,560 --> 00:08:15,000
के पास किसी किताब को वेरीफाई करने का और ना करने का

118
00:08:15,000 --> 00:08:19,040
क्या ठोस आधार है वह बताइए उसके लिए हमारे जो

119
00:08:19,040 --> 00:08:25,040
सेवक है जो सेवादार है हा

120
00:08:25,080 --> 00:08:29,480
सेवादार जाता यानी कि उन्होंने जिसको अपना उत

121
00:08:29,480 --> 00:08:33,920
ि घोषित किया है वो उत्तराधिकारी किया

122
00:08:33,920 --> 00:08:38,080
सब उनके शिष्य तो अगर

123
00:08:38,080 --> 00:08:42,080
मैं कल को तो अगर मैं कल को यह कहने लगू मैं रामपाल दास जी

124
00:08:42,080 --> 00:08:46,200
का सेवादार हूं और मैं उनके नाम से गलत किताबें देने लगू लोगों को

125
00:08:46,200 --> 00:08:50,320
तो उससे कोई दिक्कत नहीं है ऐसा हो ही

126
00:08:50,320 --> 00:08:54,320
नहीं सकता जो उनके शिष्य बन गया ऐसा गलत काम कर ही नहीं सकते अरे

127
00:08:54,320 --> 00:08:58,720
भाई मैं कह रहा हूं कि मैं द्वेष वस उनके विरुद्ध

128
00:08:58,720 --> 00:09:02,840
षडयंत्र पूर्वक उनके नाम से गलत बात फैलाने लगूं और मैं

129
00:09:02,840 --> 00:09:07,200
कहूं कि मैं उनका शिष्य हूं तो

130
00:09:07,200 --> 00:09:11,440
इसको कैसे रोकेंगे आप आप तो कह रहे हैं कि सेवादार ऐसे हैं वैसे

131
00:09:11,440 --> 00:09:15,480
हैं मैं अपने आप को झूठा ही सेवादार घोषित कर लू कि मैं रामपाल दास जी

132
00:09:15,480 --> 00:09:19,480
का सेवादार हूं और मैं वह किताब छपवा और छपवा करके लोगों

133
00:09:19,480 --> 00:09:23,520
को बांटने लगू तो वह ठोस प्रणाली

134
00:09:23,520 --> 00:09:25,800
क्या है अगर आप उत्तराधिकारी को नहीं मानते

135
00:09:25,800 --> 00:09:29,920
हैं तो ठोस प्रणाली क्या है जिससे कि हम रामपाल दास जी

136
00:09:29,920 --> 00:09:34,080
की यथावत चीजों तक पहुंच सके बताइए उनकी

137
00:09:34,080 --> 00:09:38,080
पुस्तकें अभी तक सुरक्षित है उनका जो सत्य ज्ञान है

138
00:09:38,080 --> 00:09:42,480
जो उन्होने पुस्तक बने है अभी सुरक्षित है सेवादारों के हाथ में

139
00:09:42,480 --> 00:09:46,720
भाई साहब मैं आपसे यह कह रहा हूं कि

140
00:09:46,720 --> 00:09:50,840
उनकी पुस्तकें सुरक्षित है अभी कोई नया व्यक्ति उनसे जुड़ा हुआ है और अब

141
00:09:50,840 --> 00:09:54,920
वह जो नया व्यक्ति है वह जाता है वह सोचता है कि मुझे कहीं से उनकी ज्ञान

142
00:09:54,920 --> 00:09:58,920
गंगा नाम की पुस्तक मिले अब उनको मेरे जैसा कोई एक व्यक्ति मिलता है जो कहता है

143
00:09:58,920 --> 00:10:03,080
मैं उनका सेवादार हूं यह लो नई पुस्तक ज्ञान गंगा छाप के उनको दे दी और

144
00:10:03,080 --> 00:10:07,120
उसमें सब गलत सरा लिख दिया उसमें लिख दिया फुटबॉल खेलो क्रिकेट खेलो यह करो वो

145
00:10:07,120 --> 00:10:11,440
करो ठीक है सब उल्टा लिख दिया अब वह तो व्यक्ति

146
00:10:11,440 --> 00:10:15,520
यही सोचेगा ना अगर अगर उसके पास कोई प्रॉपर प्रोटोकॉल नहीं होगा तो

147
00:10:15,520 --> 00:10:19,760
वो व्यक्ति तो यह सोचेगा रामपाल दास जी ने कहा है कि फुटबॉल

148
00:10:19,760 --> 00:10:24,000
खेलो हां नए व्यक्ति ऐ सोचेगा इस समस्या

149
00:10:24,000 --> 00:10:28,040
का निराकरण क्या है अब आप आप अभी एक निराकरण तक पहुंचे

150
00:10:28,040 --> 00:10:32,120
थे उत्तराधिकारी राम दास जी ने अपना किसी को उत्तराधिकारी बनाया कि

151
00:10:32,120 --> 00:10:36,880
भाई यह जो है यह जो किताब देगा वह यह सत्यापित करेगा वह मान्य होगी

152
00:10:36,880 --> 00:10:41,080
और जब व व नहीं होंगे तो उनका भी कोई उत्तराधिकारी होगा

153
00:10:41,080 --> 00:10:45,320
वह नहीं होंगे तो उनका भी कोई उत्तराधिकारी होगा तो अगर

154
00:10:45,320 --> 00:10:49,320
उत्तराधिकारी वाली बात को स्वीकार किया जाता रामपाल दास जी के द्वारा

155
00:10:49,320 --> 00:10:53,480
तो तो यह बात ठीक है कि हां इससे हम रक्षा कर सकते हैं

156
00:10:53,480 --> 00:10:57,720
शुद्ध ज्ञान की अन्यथा तो कोई तरीका मुझे नहीं दिखाई देता

157
00:10:57,720 --> 00:11:01,160
है तो आप मुझे बताओ

158
00:11:01,160 --> 00:11:05,200
यह जो उनका जो आश्रम है उनके जो संस्था उनके

159
00:11:05,200 --> 00:11:08,280
संस्था में सेवादार

160
00:11:08,280 --> 00:11:12,280
का मेरे को तो मेरे पास तो अ इसका जवाब नहीं है कि

161
00:11:12,280 --> 00:11:16,400
इसको कैसे रोका जा सके य उनका इंटरनल रोका नहीं

162
00:11:16,400 --> 00:11:20,600
देख रोक सकते नहीं रोक सकते व एक अलग बात है मगर प्रामाणिक

163
00:11:20,600 --> 00:11:24,720
प्रणाली है कि नहीं वह एक अलग बात है प्रामाणिक प्रणाली है

164
00:11:24,720 --> 00:11:28,760
कि नहीं वो एक अलग बात है कि रामपाल दास जी ने किसी को

165
00:11:28,760 --> 00:11:33,040
यह कहा यह मेरा उत्तराधिकारी है मेरे ना होने की स्थिति में यह सारी चीजों

166
00:11:33,040 --> 00:11:37,560
को देखेगा और अगर वह नहीं होगा तो वह भी अपना एक उत्तराधिकारी घोषित

167
00:11:37,560 --> 00:11:41,640
करेगा कि यह मेरा उत्तराधिकारी है मैं नहीं होंगा तो यह उन सारी

168
00:11:41,640 --> 00:11:46,000
चीजों को देखेगा अगर ऐसे उत्तराधिकारी है आपके यहां पर तो

169
00:11:46,000 --> 00:11:50,120
तो रामपाल दास जी का ही ज्ञान आपके पास आ रहा हैय माना जा सकता

170
00:11:50,120 --> 00:11:54,280
है वरना इस बात को सत्यापित करने के लिए ही बड़ी टेढ़ी खड़

171
00:11:54,280 --> 00:11:56,160
हो जाएगी कि जो आप बता

172
00:11:56,160 --> 00:12:00,400
रहे हैं वो रामपाल दास जी का है कि नहीं है

173
00:12:00,400 --> 00:12:04,600
आप देखो अभी तक अभी तक तो उत्तराधिकारी कोई

174
00:12:04,600 --> 00:12:09,000
नियुक्त किया नहीं तो यह तोय

175
00:12:09,000 --> 00:12:13,560
तो फिर नहीं वही उतरा वो नहीं किया वो ठीक है मगर

176
00:12:13,560 --> 00:12:17,600
कहीं पर उन्होंने इस व्यवस्था के संबंध में बताया है कि ऐसा

177
00:12:17,600 --> 00:12:23,600
ऐसा होता है ऐसा होना चाहिए

178
00:12:24,040 --> 00:12:28,040
नि अरे भाई साहब दिक्कत आती तब धर्म का ज्ञान दिया जाता

179
00:12:28,040 --> 00:12:32,360
है क्या सतयुग में वेद क्यों दिए गए सतयुग

180
00:12:32,360 --> 00:12:36,400
में तो कोई दिक्कत थी ही नहीं धर्म का ज्ञान

181
00:12:36,400 --> 00:12:40,480
तो दिया जाता है उसमें दिक्कत से क्या मतलब है

182
00:12:40,480 --> 00:12:44,520
चलिए खैर सही प्रश्न है आपका हां तो

183
00:12:44,520 --> 00:12:48,800
इस बारे में आपको जानकारी जुटा चाहिए कि आपके पास जो ज्ञान

184
00:12:48,800 --> 00:12:53,160
आ रहा है वह रामपाल जी का ही ज्ञान है

185
00:12:53,160 --> 00:12:57,240
ऐसा हुआ है कुछ सेवादार रामपाल जी से अलग ज्ञान दे रहे हैं और आपस में

186
00:12:57,240 --> 00:13:01,880
झगड़ा है रामपाल जी ने जेल से फोन पर यह बातें बताई हैं

187
00:13:01,880 --> 00:13:05,080
लो

188
00:13:05,080 --> 00:13:09,120
बताइए मैं जिस समस्या की और आपका ध्यान लाना चाहता हूं

189
00:13:09,120 --> 00:13:13,200
वह बहुत गंभीर समस्या है अगर हमने

190
00:13:13,200 --> 00:13:17,240
किसी प्रॉपर उत्तराधिकारी की व्यवस्था को स्वीकार नहीं किया

191
00:13:17,240 --> 00:13:21,280
तो कोई भी कुछ भी बोले उनके नाम से वह तो जेल में

192
00:13:21,280 --> 00:13:25,440
वह तो बता नहीं पाएंगे मैंने बोला कि नहीं बोला समझ

193
00:13:25,440 --> 00:13:29,520
रहे हैं आप और ऊपर ऊपर के लोग आराम से खेल खेलते रहेंगे

194
00:13:29,520 --> 00:13:34,200
भोली भाली जनता के साथ अगर चाहे तो खेल रहे हैं ऐसा नहीं है

195
00:13:34,200 --> 00:13:38,680
मगर वह चाहे तो जो नादान जो निर्दोष जनता है

196
00:13:38,680 --> 00:13:42,720
उसके साथ आराम से खेल खेल सकते हैं क्योंकि वह लोग जो बैठे हैं उनके द्वारा

197
00:13:42,720 --> 00:13:46,760
प्रामाणिक उत्तराधिकारी तो घोषित किया नहीं है उन्होंने रामपाल

198
00:13:46,760 --> 00:13:51,000
दास जी इसका मतलब है आपने पुस्तक पढ़ा है और आपको वो

199
00:13:51,000 --> 00:13:55,160
बातें सही लगी ऐसा है क्या नहीं नहीं नहीं वो एक अलग

200
00:13:55,160 --> 00:13:59,160
विषय है कि उनकी बातें मुझे सही लग रही है कि नहीं मगर अभी बात यह है कि मैं

201
00:13:59,160 --> 00:14:03,200
जो पुस्तक पढ़ रहा हूं इतनी चिंता में पड़ गए आपने इतना

202
00:14:03,200 --> 00:14:07,560
चिंताजनक आप मतलब इन जब कोई व्यक्ति

203
00:14:07,560 --> 00:14:11,840
धर्म और अधर्म जब कोई व्यक्ति धर्म और अधर्म का निर्णायक बन रहा है

204
00:14:11,840 --> 00:14:16,080
तो उसके जो महत्त्वपूर्ण घटक है उन पर हम पूछेंगे ना बात करेंगे

205
00:14:16,080 --> 00:14:20,240
ना उन परे तो अभी बात यह है कि अभी हम जो ज्ञान

206
00:14:20,240 --> 00:14:24,480
गंगा पढ़ रहे हैं या गीता तेरा ज्ञान अमृत पढ़ रहे हैं यह

207
00:14:24,480 --> 00:14:28,480
वही गीता तेरा ज्ञान अमृत है जो उन्होंने लिखी है यह कैसे

208
00:14:28,480 --> 00:14:32,520
पता चल कैसे फिक्स होगा आदेश देते

209
00:14:32,520 --> 00:14:36,520
रहते ना आश्रम में क्या आदेश देते

210
00:14:36,520 --> 00:14:40,960
क्या उपाय योजना करनी चाहिए क्या नहीं कौन

211
00:14:40,960 --> 00:14:45,280
देता गुरुजी देते गुरुजी आश्रम में मिलते है क्या

212
00:14:45,280 --> 00:14:49,520
आपको आश्रम में नहीं जेल से व आदेश देते

213
00:14:49,520 --> 00:14:53,680
है जेल से किसको आदेश देते एक मिनट जेल से किसको आदेश देते

214
00:14:53,680 --> 00:14:58,080
हैं जो आश्रम के सेवादार है मुख्य सेवादार से

215
00:14:58,080 --> 00:15:02,520
आश्रम के सेवा को वो देते हैं जो जो आश्रम के सेवादार

216
00:15:02,520 --> 00:15:08,040
है वह आपको यह बता देते हैं कि उन्होंने जेल से हमें यह आदेश दिया

217
00:15:08,040 --> 00:15:12,160
है है ना उन सेवादार पर आपको विश्वास

218
00:15:12,160 --> 00:15:16,360
क्यों है क्या उनको उन्होंने अपना प्रामाणिक

219
00:15:16,360 --> 00:15:20,480
उत्तराधिकारी माना है उनको उन्होंने अपना प्रामाणिक घोषित

220
00:15:20,480 --> 00:15:24,480
किया है कि ये जो आश्रम के सेवादार है यह मेरी तरफ

221
00:15:24,480 --> 00:15:28,640
से बोलेंगे आप लोगों से ऐसा कुछ कहा है उन्होंने

222
00:15:28,640 --> 00:15:32,840
नहीं हो तो बातें मेरे को मालूम नहीं तो फिर तो फिर उन परे विश्वास कैसे

223
00:15:32,840 --> 00:15:35,440
हो मैं अभी आपको कह दूं कि भाई जेल से मेरे पास फोन आया

224
00:15:35,440 --> 00:15:38,800
उन्होंने ये कहा है मान

225
00:15:38,800 --> 00:15:42,880
लोगे एक महीने तक मैं बोर्ड बोर्ड और लगा दूं बढ़िया जगतगुरु तत्वदर्शी

226
00:15:42,880 --> 00:15:47,360
संत रामपाल और बढ़िया नाम दान केंद्र तथाकथित खोल दूं

227
00:15:47,360 --> 00:15:52,680
एक महीने तक और फिर मैं बोल दूं जेल से मेरे पास फोन आया है मान लोगे मेरी

228
00:15:52,680 --> 00:15:57,520
बात अगर उनका पुस्तक किसी ने गलत छपवा या

229
00:15:57,520 --> 00:16:01,640
लाइट चली ग आप मैं जिस जिस र आपका ध्यान आकृष्ट करना

230
00:16:01,640 --> 00:16:05,720
चाह रहा हूं उस और आप जा नहीं पा रहे हैं मेरा

231
00:16:05,720 --> 00:16:11,320
कहने का अर्थ ये है आप आप दिख नहीं रहे इस

232
00:16:11,320 --> 00:16:16,080
समय मेरा कहने का अर्थ यह है

233
00:16:16,080 --> 00:16:20,400
कि रामपाल दास जी के द्वारा जो शिक्षा

234
00:16:20,400 --> 00:16:24,400
आपको दी जा रही है हां वो कैसे आपको पता लग रहा

235
00:16:24,400 --> 00:16:28,480
है कि वो रामपाल दास जी की ही शिक्षा है या तो आप यह मानो कि

236
00:16:28,480 --> 00:16:32,640
हां सेवादार उनकी तरफ से बोलने वाले प्रामाणिक हैं तब तो आगे बढ़

237
00:16:32,640 --> 00:16:38,600
सकती है गाड़ी वरना तो यहां अटक रही है

238
00:16:38,600 --> 00:16:42,800
गाड़ी सेवादार प्रामाणिक है मैंने उनके ऊपर विश्वास

239
00:16:42,800 --> 00:16:47,320
किया और पुस्तक यानी कि आपको सेवादार पर विश्वास है

240
00:16:47,320 --> 00:16:53,320
कि भाई यह जो है वही बात बोलते हैं जो रामपाल जी इनको कहते

241
00:16:53,560 --> 00:16:57,640
हैं है ना नहीं इस बार अभी तक तो इस बारे में मैंने सोचा

242
00:16:57,640 --> 00:17:01,760
नहीं था मैं फर्स्ट टाइम दो साल हो गए ना तो मैंने आपको

243
00:17:01,760 --> 00:17:05,800
सोचना चाहिए कि रामपाल दास जी के नाम से जो

244
00:17:05,800 --> 00:17:09,880
किताबें हमें मिल रही हैं उन किताबों में वही लिखा है जो

245
00:17:09,880 --> 00:17:14,040
वह लिखना चाहते थे या कहीं कुछ बदल तो नहीं किया क्योंकि हमसे

246
00:17:14,040 --> 00:17:18,160
ऐसे लोगों ने संपर्क किया है जो यह कह रहे हैं कि रामपाल दास जी

247
00:17:18,160 --> 00:17:22,880
की किताबों में भी बदलाव हो गया है बहुत सारा ऐसे लोग हैं

248
00:17:22,880 --> 00:17:26,880
जिनका हमें फोन आया है हां हो सकता है ऐसा हो सकता है

249
00:17:26,880 --> 00:17:31,080
तो इसलिए यदि उतरा अधिकारी उन्होंने घोषित नहीं किया तो उन्हें

250
00:17:31,080 --> 00:17:35,680
करना चाहिए जिससे कि उनके भक्तों को उनके फॉलोअर्स

251
00:17:35,680 --> 00:17:39,680
को यह पता रहे कि हमें शुद्ध ज्ञान कहां से मिलेगा

252
00:17:39,680 --> 00:17:44,000
क्योंकि वह तो है नहीं व तो जेल में है है ना

253
00:17:44,000 --> 00:17:48,320
तो उनके द्वारा दी जाने वाली शुद्ध शिक्षा कौन देगा उनको यह बताना

254
00:17:48,320 --> 00:17:52,320
चाहिए कि तब तक आप इनसे जब तक मैं नहीं हूं तब तक आप इनके

255
00:17:52,320 --> 00:17:56,360
पास जाओ यह कहे कि फलानी दुकान है वहां से

256
00:17:56,360 --> 00:18:00,360
किताबें ले लेना तो ले लो ये कहे वहां से मत लेना तो मत

257
00:18:00,360 --> 00:18:04,520
लो वरना तो कोई भी आपको रामपाल दास जी के नाम पर

258
00:18:04,520 --> 00:18:09,720
चिपका सकता है कुछ भी हां ऐसा हो सकता

259
00:18:09,720 --> 00:18:13,720
है तो अभी जो आप पढ़ रहे हैं मैं फिर से पॉइंट

260
00:18:13,720 --> 00:18:17,760
पर आता हूं अभी जो आप पढ़ रहे हैं वो रामपाल दास जी की किताबें हैं

261
00:18:17,760 --> 00:18:22,640
यह कैसे सिद्ध होता है एक मिनट

262
00:18:22,640 --> 00:18:28,640
एक मिनट सर

263
00:19:09,600 --> 00:19:15,600
हेलो आप दिख नहीं रहे

264
00:19:26,760 --> 00:19:31,320
हैं अब प्रॉब्लम यह है कि अगर

265
00:19:31,320 --> 00:19:36,640
यह जो व्यक्ति गुरु परंपरा के सिद्धांत को नहीं मानता

266
00:19:36,640 --> 00:19:40,840
है तो क्या

267
00:19:40,840 --> 00:19:44,840
होगा जो व्यक्ति गुरु परंपरा के सिद्धांत को नहीं मानता है उत्तराधिकारी

268
00:19:44,840 --> 00:19:49,400
के सिद्धांत को नहीं मानता है तो उसके सामने य अड़चन आएगी कि

269
00:19:49,400 --> 00:19:53,440
भा मैं जो बोल रहा हूं वह कैसे प्रमाणित हो कि वही है

270
00:19:53,440 --> 00:19:57,480
उनके द्वारा कहा गया और यदि वह गुरु परंपरा के सिद्धांत को

271
00:19:57,480 --> 00:20:01,640
मान लेता है उत्तराधिकारी वाले सिद्धांत को मान लेता है तो फिर प्रश्न

272
00:20:01,640 --> 00:20:06,000
यह बनेगा कि रामपाल दास जी को किसने किसके सामने

273
00:20:06,000 --> 00:20:10,080
अपना उत्तराधिकारी ठहराया था फिर प्रश्न ये बनेगा कि उसको

274
00:20:10,080 --> 00:20:14,840
किसने किसके सामने अपना उत्तराधिकारी ठहराया था फिर वह उसने

275
00:20:14,840 --> 00:20:19,280
तो इसमें यह जो है मामला सब गड़प झिम हो जाएगा

276
00:20:19,280 --> 00:20:23,560
यह चीज आर्य समाज पर भी लागू होती है आर्य समाज ने

277
00:20:23,560 --> 00:20:27,800
परंपरा वाले सिद्धांत को अपनाया नहीं है

278
00:20:27,800 --> 00:20:33,800
ठीक है कि गुरु जो है परंपरा प्राप्त होना

279
00:20:34,360 --> 00:20:38,440
चाहिए के आधार पर ही यह बात कह

280
00:20:38,440 --> 00:20:42,520
दी जाए कि भाई आज के टाइम में सत्यार्थ प्रकाश जो है

281
00:20:42,520 --> 00:20:46,800
वह वही सत्यार्थ प्रकाश है जो दयान ऋषि दयानंद जी ने लिखी है तो कैसे

282
00:20:46,800 --> 00:20:51,000
उसका निर्णय करेंगे यह लोग इनका इनके पास इसका उत्तर नहीं होगा

283
00:20:51,000 --> 00:20:55,160
और अगर इन्होंने परंपरा का आलंबन लेने की बात की तो फिर इनका बन जाएगा बताइए

284
00:20:55,160 --> 00:20:59,200
पूर्णानंद के गुरु का नाम क्या है अपनी बातों को मनवाने

285
00:20:59,200 --> 00:21:03,600
के लिए आप परंपरा को लाना ही होगा और दूसरों

286
00:21:03,600 --> 00:21:08,680
की बातों का कुतर्कों द्वारा विरोध कर

287
00:21:08,680 --> 00:21:12,080
दो ये गलत

288
00:21:12,080 --> 00:21:16,880
है लिंक दे दीजिए भाई क्योंकि वो भाई साहब चले गए हैं

289
00:21:16,880 --> 00:21:21,080
फिलहाल आ नहीं रहे

290
00:21:21,080 --> 00:21:25,200
हैं एक ऐसे ही कुतर्क कायों

291
00:21:25,200 --> 00:21:29,200
ने एक दो कुछ वीडियो बनाए हैं पहले से जी भैया

292
00:21:29,200 --> 00:21:33,840
आ गए तो

293
00:21:33,840 --> 00:21:37,200
मैं वही पूछ रहा

294
00:21:37,200 --> 00:21:41,240
था कि इस बारे में आपके

295
00:21:41,240 --> 00:21:44,360
यहां क्या व्यवस्था

296
00:21:44,360 --> 00:21:48,840
है कि कोई व्यक्ति गलत प्रचार प्रसार ना कर पाए

297
00:21:48,840 --> 00:21:49,800
रामपाल

298
00:21:49,800 --> 00:21:54,640
दास जी के नाम पर कोई व्यवस्था नहीं है आपकी जानकारी में नहीं है

299
00:21:54,640 --> 00:21:58,640
मेरी जानकारी में नहीं है व्यवस्था होगी लेकिन मेरी जानकारी में नहीं है तो

300
00:21:58,640 --> 00:22:02,720
आप तो अभी कह रहे थे कि आपने उनके सारे ग्रंथों को घोट रखा

301
00:22:02,720 --> 00:22:07,400
है वो अलग चीज है ना ज्ञान की और

302
00:22:07,400 --> 00:22:12,160
मतलब आपने सारे सारे नियमावली हों को नहीं घोटा है

303
00:22:12,160 --> 00:22:17,040
सब कुछ नहीं आपने कुछ रह गया

304
00:22:17,040 --> 00:22:21,160
है नहीं नहीं नहीं वो ज्ञान की बात नहीं ना

305
00:22:21,160 --> 00:22:25,160
आप जो बोल रहे हैं वो वो ज्ञान की बात नहीं ना अच्छा

306
00:22:25,160 --> 00:22:29,200
वो ज्ञान की बात नहीं है तो वो जो नियम है वो वो

307
00:22:29,200 --> 00:22:33,520
उस नियम के लिए कौन सी किताब होगी उनकी जिसमें वो नियम लिखा हो सकता है

308
00:22:33,520 --> 00:22:39,520
जो आपने पढ़ी नहीं है उसका कोई

309
00:22:40,560 --> 00:22:45,320
नाम अभी तक तो नियम तो मैंने पढ़ा

310
00:22:45,320 --> 00:22:49,440
नहीं नहीं पढ़ा नाम भी नहीं मालूम ऐसी कोई किताब उनकी

311
00:22:49,440 --> 00:22:55,440
छपी हो हम नियमावली

312
00:22:56,720 --> 00:23:02,520
की हां

313
00:23:02,520 --> 00:23:06,920
ऐसी नियमावली की कोई किताब हो वह भी आपको नहीं पता है ना

314
00:23:06,920 --> 00:23:11,120
मेरे ज्ञान में नहीं है पता करिएगा बताइएगा

315
00:23:11,120 --> 00:23:16,000
अगर इस तरह की नियमावली कोई हो तो हा अच्छी बात है ये तो

316
00:23:16,000 --> 00:23:20,200
अब मुझे बताइए कि

317
00:23:20,200 --> 00:23:24,600
आपका ऐसा मानना क्यों है रामपाल दास जी यह कहते

318
00:23:24,600 --> 00:23:29,320
हैं कि जो

319
00:23:29,320 --> 00:23:33,800
ब्रह्मा विष्णु महेश है वह अविनाशी

320
00:23:33,800 --> 00:23:36,360
नहीं

321
00:23:36,360 --> 00:23:40,640
है हमारे ग्रंथ में ही लिखा है ना व व अविनाशी

322
00:23:40,640 --> 00:23:46,320
नहीं है अच्छा आप अविनाशी हो कि नहीं

323
00:23:46,320 --> 00:23:50,400
हो मैं तो अविनाशी हूं आप

324
00:23:50,400 --> 00:23:55,040
अविनाशी हो मगर ब्रह्मा विष्णु महेश अविनाशी नहीं है

325
00:23:55,040 --> 00:23:55,920
मैं नाशवान

326
00:23:55,920 --> 00:24:01,280
हूं मैं एक पंच महाभूत का मेरा शरीर है

327
00:24:01,280 --> 00:24:05,400
और हो और मैंने आपको अगर रामपाल दास जी

328
00:24:05,400 --> 00:24:10,920
के वीडियो में दिखा दिया कि आप नाशवान नहीं हो अविनाशी हो

329
00:24:10,920 --> 00:24:15,080
तो आत्मा अविनाशी है शरीर नाशवान है

330
00:24:15,080 --> 00:24:19,120
मेरा तो यानी कि शरीर का जो नाश हो रहा है या बन

331
00:24:19,120 --> 00:24:23,880
रहा है या बिगड़ रहा है उससे आपका नाश सिद्ध नहीं होता

332
00:24:23,880 --> 00:24:28,120
जबकि यह कहा जा सकता है कि आपका भी जीवन और मरण है तब

333
00:24:28,120 --> 00:24:32,480
भी आप अविनाशी हो आत्मा के रूप में हा आत्मा

334
00:24:32,480 --> 00:24:38,480
मेरी अविनाशी है आत्मा के रूप में आप अविनाशी

335
00:24:38,880 --> 00:24:42,880
हो हा आत्मा के रूप में अविनाशी हूं इसी

336
00:24:42,880 --> 00:24:47,800
प्रकार से परमात्मा के रूप में ईश्वर भी अविनाशी है ब्रह्मा विष्णु महेश भी अविनाशी

337
00:24:47,800 --> 00:24:52,000
वो जो जीवन मरण वाली बात आप कह रहे हैं वो इसी प्रकार से

338
00:24:52,000 --> 00:24:56,000
शरीर धारण किए हुए के लिए कह रहे हैं जो शास्त्रों में कहा

339
00:24:56,000 --> 00:25:00,120
गया है कि हमारा भी जीवन म होता है वह कहा

340
00:25:00,120 --> 00:25:04,280
गया है जब उन्होंने कोई पर्टिकुलर देह धारण की हुई है और इसके

341
00:25:04,280 --> 00:25:08,280
लिए भगवत गीता में भगवान ने कहा कि वह लोग जो मुझे मानव

342
00:25:08,280 --> 00:25:12,360
देह में र देखकर मेरे ब्रह्म रूप को समझ नहीं पाते हैं

343
00:25:12,360 --> 00:25:16,360
वह मूर्ख होते हैं अब यह जो अविनाशी वाली

344
00:25:16,360 --> 00:25:21,120
बात है या दुर्गा मात से उत्पन्न होने वाली बात है

345
00:25:21,120 --> 00:25:26,360
इसके लिए आप कौन से शास्त्र का रेफरेंस देते

346
00:25:26,360 --> 00:25:31,560
हैं श्रीमद देवी भागवत पेज नंबर

347
00:25:31,560 --> 00:25:35,880
123 पेज नंबर नहीं अध्याय अध्याय कौन सा है वो बताइए

348
00:25:35,880 --> 00:25:41,880
देवी भागवत केवल गीता प्रश्न ही छपता

349
00:25:42,120 --> 00:25:46,120
है देवी भागवत केवल गीता प्रश्न ही छपता

350
00:25:46,120 --> 00:25:52,120
है

351
00:26:06,960 --> 00:26:12,960
कहां गए भाई साहब हां यही

352
00:26:17,600 --> 00:26:21,880
हूं मतलब आपको व प्रमाण चाहिए कि कहां

353
00:26:21,880 --> 00:26:27,880
पर लिखा है कि अविनाशी नहीं है [संगीत]

354
00:26:28,440 --> 00:26:32,480
श्रीमद् देवी भागवत निकालिए अपना नहीं मैं

355
00:26:32,480 --> 00:26:35,440
निकाल लूंगा आप बोल

356
00:26:35,440 --> 00:26:41,440
दीजिए उसका 123 पेज निकालिए

357
00:26:41,440 --> 00:26:46,520
130 12 अध्याय लोक क्रमांक बताइए अध्याय और श्लोक

358
00:26:46,520 --> 00:26:52,520
क्रमांक ठीक है

359
00:27:12,840 --> 00:27:17,000
आप एक बार निकालिए वही पर मैं बता देता हूं अध्याय कौन सा है

360
00:27:17,000 --> 00:27:21,040
अध्याय बताइए अध्याय मेरा देवी नहीं है

361
00:27:21,040 --> 00:27:27,040
ना गीता प्रस वाला अध्याय बताइए

362
00:27:29,320 --> 00:27:33,400
अध्याय नहीं बताया क्या रामपाल दास जी ने

363
00:27:33,400 --> 00:27:39,400
पूर्ण ज्ञानी तत्वदर्शी ने नहीं बताया क्या

364
00:27:50,840 --> 00:27:56,840
अध्याय नहीं पता क्या

365
00:28:00,160 --> 00:28:04,440
भाई पेज नंबर तो बदल जाता है नाया कि वो

366
00:28:04,440 --> 00:28:08,520
गीता प्रश्ने छाप दिया तो फलाने पेज पर है बनारस

367
00:28:08,520 --> 00:28:12,880
वालों ने छाप दिया तो फलाने पेज पर है यह कौन सी बात है क्या इसीलिए

368
00:28:12,880 --> 00:28:18,880
मैंने अपने वीडियो में कहा था भाई अध्याय दो ना पूर्व पक्ष को रखने के लिए कम से

369
00:28:22,240 --> 00:28:26,320
कम चले

370
00:28:26,320 --> 00:28:32,320
गए जीत

371
00:28:34,200 --> 00:28:38,680
जितेश जी आपने फॉर्म भरा

372
00:28:38,680 --> 00:28:42,720
था फॉर्म भरा था आपने हां जी भरा

373
00:28:42,720 --> 00:28:47,320
था शिवा जी हमें तो नहीं मिला किस नाम से भरा था

374
00:28:47,320 --> 00:28:51,480
जितेश के नाम से ही भरा था दोनों भरे हैं मैंने वो चर्चा वाला

375
00:28:51,480 --> 00:28:55,920
ही भरा है और कक्षा वाला ही भरा है

376
00:28:55,920 --> 00:29:00,240
आप तो कक्षा में आई है यहां पर तो आप आप तो जिज्ञासु है ना कक्षा में आइए

377
00:29:00,240 --> 00:29:06,240
आप यहां क जुड़ रहे हैं ठीक ठीक

378
00:29:06,520 --> 00:29:09,720
है मयंक

379
00:29:09,720 --> 00:29:15,720
जी जय श्री राम जय श्री

380
00:29:16,000 --> 00:29:20,680
राम बिटिया प्यारी है आपकी बिटिया

381
00:29:20,680 --> 00:29:25,200
बाबू है बाबू है

382
00:29:25,200 --> 00:29:29,600
बाबू जी बताइए परिचय क्या है

383
00:29:29,600 --> 00:29:33,720
आपका जी राजस्थान के जयपुर जिले

384
00:29:33,720 --> 00:29:37,800
से हूं अच्छा मदन दास जी आप

385
00:29:37,800 --> 00:29:42,160
आ गए हैं आप मयंक जी आप थोड़ी देर म्यूट हो जाइए

386
00:29:42,160 --> 00:29:46,160
आप रामपाल जी की तरफ रामपाल जी की बात ही करेंगे ना

387
00:29:46,160 --> 00:29:50,960
नहीं नहीं अच्छा नहीं ठीक है तो मुझ इनकी

388
00:29:50,960 --> 00:29:56,040
रामपाल जी महाराज की कुछ

389
00:29:56,040 --> 00:30:01,200
बातें एक मिनट आपको ले जी मैं मदन दास जी

390
00:30:01,200 --> 00:30:07,100
बताइए श्रीमद् देवी भागवत स्कंध

391
00:30:07,100 --> 00:30:13,100
[संगीत]

392
00:30:23,880 --> 00:30:29,880
तीसरा स्कंद तीन अध्याय

393
00:30:32,480 --> 00:30:36,760
पेज नंबर 123 निकालिए ना फर पेज नंबर अरे भैया

394
00:30:36,760 --> 00:30:42,160
पेज नंबर नहीं अध्याय

395
00:30:42,160 --> 00:30:46,160
बताओ स्कंद तीसरा निकालिए उसी में है

396
00:30:46,160 --> 00:30:52,160
स्कं तीसरा है मेरे पास उसमें आप अध्याय नंबर तो

397
00:30:55,080 --> 00:30:59,480
बताइए याद नहीं है लेकिन आप खोलिए उसम में लिखा है

398
00:30:59,480 --> 00:31:04,000
संदीपन रॉय आपका खंडन कर रहा है

399
00:31:04,000 --> 00:31:08,000
मेरे ख्याल से खंडन केवल एक कमरे में बैठ कर के कुछ कह देने से नहीं होता है

400
00:31:08,000 --> 00:31:12,040
सामना करने से होता है अगर मन में

401
00:31:12,040 --> 00:31:16,160
मैं सोचूं कि मैं खंडन कर रहा हूं तो ऐसे सोच करके भी मैं खंडन कर सकता हूं ऐसे

402
00:31:16,160 --> 00:31:20,200
सोचा मैंने और हो गया सबका खंडन यह तरीका

403
00:31:20,200 --> 00:31:24,240
नहीं है ना सामने आकर के बात करते हैं तब पता लगता है दूध का दूध और पानी का पानी होता

404
00:31:24,240 --> 00:31:28,640
है वो आ नहीं रहे हैं उनको मैंने बड़े संभ्रांत तरीके से कहा भी था एक बार

405
00:31:28,640 --> 00:31:32,960
कि आप सामने आइए भाई ऐसा ना करिए बंद कमरे में बैठकर कार्बो

406
00:31:32,960 --> 00:31:37,000
टारगेट गेम खेलना बहुत आसान होता है अब सामने आइए चर्चा

407
00:31:37,000 --> 00:31:40,320
करते हैं क्या है क्या नहीं है पता

408
00:31:40,320 --> 00:31:43,000
लगेगा

409
00:31:43,000 --> 00:31:49,000
हम जी बोलिए अध्याय क्या है

410
00:31:51,040 --> 00:31:55,240
आपका बोलिए वो जो बा वो जो बात कही है ना आयु

411
00:31:55,240 --> 00:32:00,040
भाव होता है तिरो भाव होता है

412
00:32:00,040 --> 00:32:04,040
अरे भाव तो आपका भी होता है भैया फिर भी आप अविनाशी हो कि

413
00:32:04,040 --> 00:32:08,520
नहीं हो मेरा आत्मा

414
00:32:08,520 --> 00:32:12,960
अविनाशी है और मैं ऐसे ही ब्रह्मा विष्णु महेश का आविर्भव

415
00:32:12,960 --> 00:32:16,960
होता है रूप में दे धारण करते हैं देह से जाते भी है मगर वह

416
00:32:16,960 --> 00:32:21,040
अविनाशी रूप में भी वो अविनाशी रूप में भी विद्यमान है यानी

417
00:32:21,040 --> 00:32:25,600
की यह सिद्ध हुआ कि वो अविनाशी नहीं है कहां से

418
00:32:25,600 --> 00:32:29,720
अना हो क्या आपकी देह हो रही है सुनो

419
00:32:29,720 --> 00:32:33,840
देह के नाश से आत्मा का नाश नहीं होता और देह

420
00:32:33,840 --> 00:32:37,960
के भेद से आत्मा का भेद नहीं होता आत्मा कहां से प्रकट

421
00:32:37,960 --> 00:32:42,520
हुई इसका जवाब दीज आत्मा कहीं से प्रकट नहीं हुई

422
00:32:42,520 --> 00:32:46,640
आत्मा सदैव नित्य है कैसे

423
00:32:46,640 --> 00:32:50,800
नित्य हुई किसी ने तो प्रकट किया होगा उसको आप मुझे अध्याय नंबर बताइए

424
00:32:50,800 --> 00:32:55,040
भाई साहब अध्याय नंबर है आपके पास आप संत

425
00:32:55,040 --> 00:32:59,320
कबीर को मानते हैं यह बताइए 6 साल

426
00:32:59,320 --> 00:33:03,400
प संत कबीर को एक मैं संत कबीर

427
00:33:03,400 --> 00:33:06,560
को एक भगवत भक्त के रूप में जानता हूं

428
00:33:06,560 --> 00:33:11,160
मगर यदि उनकी मगर यदि उनकी कही हुई कोई बात

429
00:33:11,160 --> 00:33:15,400
परंपरा प्राप्त प्रामाणिक आचार्यों से प्राप्त होने वाले ग्रंथ अथवा उनकी वाणी

430
00:33:15,400 --> 00:33:19,720
के विरुद्ध जाएगी तो उतने अंश में मैं उनको नहीं मानूंगा वह प्रमाण

431
00:33:19,720 --> 00:33:23,760
नहीं होंगे परंपरा के विरुद्ध में

432
00:33:23,760 --> 00:33:28,000
व पाचवा वे कहते उनके वाणी को कबीर सागर को आपने कबीर

433
00:33:28,000 --> 00:33:32,160
तो पढ़ होगा आप तोन लग रहे आप ये बताइए क्या

434
00:33:32,160 --> 00:33:36,280
आपने कबीर सागर प है मैंने आपको समझ लिया

435
00:33:36,280 --> 00:33:40,480
है आप जो कह रहे समझ तो हो गया आपने बता

436
00:33:40,480 --> 00:33:44,960
ही दिया कि उनका आपने सिद्ध कर दिया कि वो अविनाशी नहीं है ठीक है

437
00:33:44,960 --> 00:33:50,960
ये आप कह रहे होय हम नहीं कह रहे ये आप क

438
00:33:51,000 --> 00:33:55,240
रहे भगवत गीता सुना नहीं है

439
00:33:55,240 --> 00:33:58,240
केवल बोलना है

440
00:33:58,240 --> 00:34:02,920
भन श्री कृष्ण क्या कहते मैं अजन्मा अविनाशी

441
00:34:02,920 --> 00:34:07,280
होते हुए भी अपनी योग माया को अपने अधीन

442
00:34:07,280 --> 00:34:11,600
करके प्रकट होता हूं सजाम में हम व काल सजन

443
00:34:11,600 --> 00:34:15,880
करता सुनो है कि जब आपकी देह

444
00:34:15,880 --> 00:34:20,640
के नाश से आपका नाश सिद्ध नहीं हो रहा

445
00:34:20,640 --> 00:34:24,720
तो ब्रह्मा विष्णु महेश की देह का नाश वो भी

446
00:34:24,720 --> 00:34:28,760
उनके कंट्रोल में है जो उनके कंट्रोल उनका देह का

447
00:34:28,760 --> 00:34:33,640
नाश होगा कि नहीं होगा उनके कंट्रोल में नहीं

448
00:34:33,640 --> 00:34:38,960
सिद्ध करूंगा वो मैं अभी सिद्ध करूंगा वो भी उनके कंट्रोल में कि होगा कि नहीं

449
00:34:38,960 --> 00:34:43,160
होगा ऐसा है इस तरह से बात नहीं होगी जब मैंने आपको सुनने के लिए रुका

450
00:34:43,160 --> 00:34:47,440
रहा अब आप मुझे सुनने के लिए रुके रहिए एक नाश

451
00:34:47,440 --> 00:34:53,440
से आप अपना नाश मानते हैं क्या मैं यह पूछ रहा हूं

452
00:34:57,760 --> 00:35:01,840
आपकी दे मैं आपसे पूछ रहा हूं आपकी देह का नाश हो जाएगा तो

453
00:35:01,840 --> 00:35:06,320
आप खत्म हो जाएगा आपका अस्तित्व वो तो बोल रहा ह ना

454
00:35:06,320 --> 00:35:07,480
सुनिए आप मेरी बात

455
00:35:07,480 --> 00:35:11,600
सु बोलिए मेरी बात सु

456
00:35:11,600 --> 00:35:16,800
हमारी आत्मा इस काल लोक में फसी हुई है और

457
00:35:16,800 --> 00:35:22,800
हमें

458
00:35:25,960 --> 00:35:29,920
रहा महाराज

459
00:35:29,920 --> 00:35:30,420
आप

460
00:35:30,240 --> 00:35:34,840
आप आप मैं पूछ रहा हूं आपका वास्तविक रूप क्या

461
00:35:34,840 --> 00:35:39,000
है आपका वास्तविक रूप क्या है मदन जी आपका वास्तविक रूप

462
00:35:39,000 --> 00:35:43,000
क्या है मैं पंच मैं पंच महाभूत तत्व से

463
00:35:43,000 --> 00:35:47,160
बना हूं मेरा वास्तविक रूप मनुष्य है मुझे मनुष्य योनि प्राप्त हुए

464
00:35:47,160 --> 00:35:51,320
है 84 लक्ष योनि योनियों के बाद प्राप्त

465
00:35:51,320 --> 00:35:55,320
हुक रूप है ये मैं पूछ रहा हूं ये

466
00:35:55,320 --> 00:35:59,400
आपका वास्तविक रूप है जो आपका भूतो से बना हुआ जो शरीर है यह

467
00:35:59,400 --> 00:36:04,600
वास्तविक रूप है य नाशवान है यह वास्तविक रूप नहीं

468
00:36:04,600 --> 00:36:08,880
है नहीं बादाम काजू सतलोक में जाकर

469
00:36:08,880 --> 00:36:13,840
कौन खाएगा यह रूप खाएगा या आपका कुछ कोई और रूप खाएगा

470
00:36:13,840 --> 00:36:18,320
बादाम का सेब केला य सब है ना सतलोक में

471
00:36:18,320 --> 00:36:23,160
सतलोक में हैय सबन गा य वाला शरीर

472
00:36:23,160 --> 00:36:28,000
य रूप खाएगा या दूसरा रूप कौन सा रूप खाएगा आत्मा

473
00:36:28,000 --> 00:36:31,720
तो

474
00:36:31,720 --> 00:36:35,920
आप भाई साहब आप बात करने नहीं आए क्या मैं पूछ

475
00:36:35,920 --> 00:36:40,000
रहा हूं इसका मतलब आपकी देह का नाश हो जाएगा तो भी आप

476
00:36:40,000 --> 00:36:45,000
अपना नाश नहीं मानते मानते हैं क्या

477
00:36:45,000 --> 00:36:49,080
देखिए आत्मा ने आप 8 लक्ष

478
00:36:49,080 --> 00:36:54,840
योनियों को मानते है क्या मानता हूं बताइए

479
00:36:54,840 --> 00:36:58,920
हा तो मनुष्य जन्म किस लिए मिला है

480
00:36:58,920 --> 00:37:02,960
यही जानने के लिए कि आत्मा में भाई साब भाई साहब आप

481
00:37:02,960 --> 00:37:07,520
विषय को बदलिए नहीं बात ये हो रही है आप अपनी देह के नाश से

482
00:37:07,520 --> 00:37:13,400
अपना नाश मानते हैं या नहीं मानते हैं यह

483
00:37:13,400 --> 00:37:17,440
बताइए मैं नष्ट हो जाऊंगा मेरी आत्मा अविनाशी है य तो बोल रहा

484
00:37:17,440 --> 00:37:22,320
हूं ना आत्मा आपसे अलग है क्या

485
00:37:22,320 --> 00:37:25,680
हम कहां रहते मृत्यु लोक में रहते हैं ना आत्मा आपसे अलग

486
00:37:25,680 --> 00:37:29,720
है क्या हा आलग आपना

487
00:37:29,720 --> 00:37:33,760
आत्मा आपसे अलग हैलिए आमा अलग आत्मा

488
00:37:33,760 --> 00:37:38,720
आपसे अलग है क्या आत्मा अलग है मेरे

489
00:37:38,720 --> 00:37:41,160
ार अलग है यानी की

490
00:37:41,160 --> 00:37:45,240
यहां पर कर्म आप करोगे और कोई और वहा पर जाकर फल भोगे

491
00:37:45,240 --> 00:37:49,520
ऐसा है आप फल नहीं भो

492
00:37:49,520 --> 00:37:53,560
गोगे

493
00:37:53,560 --> 00:37:57,800
हेलो आमा को आपने अलग माना यानी की कम माफ

494
00:37:57,800 --> 00:38:02,240
करोगे और फल कोई और भोगे

495
00:38:02,240 --> 00:38:06,480
बोलो कि आप ही भोगो आत्मा

496
00:38:06,480 --> 00:38:10,600
ही भो गगी ना सतलोक जाके मैं अभी पूछ रहा हूं आपने कहा आत्मा

497
00:38:10,600 --> 00:38:14,600
आपसे अलग है तो आपकी आत्मा अलग है और वह

498
00:38:14,600 --> 00:38:19,400
फल भोगे गी आप तो भोगो ग नहीं आप नहीं भोगो ग

499
00:38:19,400 --> 00:38:24,000
ना मेरे से अलग है या नहीं इससे मतलब नहीं है हम आत्मा

500
00:38:24,000 --> 00:38:28,200
कोतल नहीं रे से कैसे छुड़ा सकते हैं वो इंपोर्टेंट नहीं है

501
00:38:28,200 --> 00:38:32,280
मतलब इसलिए नहीं है क्योंकि आपको अपना पॉइंट सिद्ध करना है

502
00:38:32,280 --> 00:38:36,360
और मतलब इसलिए है क्योंकि आपकी देह के नाश

503
00:38:36,360 --> 00:38:40,400
से आप अपना नाश नहीं मान रहे हो और अगर मान रहे हो तो फिर

504
00:38:40,400 --> 00:38:44,480
आपकी भक्ति करने का कारण वोह क्या रहा क्योंकि वहां पर फल तो कोई और भोग

505
00:38:44,480 --> 00:38:48,600
रहा है बादाम काजू तो किसी और को खाने को मिलेगा सतलोक

506
00:38:48,600 --> 00:38:52,920
आश्रम में देखिए मैं क्या कह रहा हूं

507
00:38:52,920 --> 00:38:56,440
अब मैं आपको प्रमाण दे देता हूं आप प्रमाण ले

508
00:38:56,440 --> 00:39:00,760
लीजिए विष्णु महेश के अविनाशी होने के बहुत देर तक मगज

509
00:39:00,760 --> 00:39:05,000
मारी नहीं कर सकते हां बताइए प्रम

510
00:39:05,000 --> 00:39:09,240
सबसे पहली सबसे पहले क्या है कि देवी ही ब्रह्म है

511
00:39:09,240 --> 00:39:14,040
इस बात का प्रमाण लीजिए नौवा नौवा स्कंद पहला अध्याय

512
00:39:14,040 --> 00:39:18,320
आठ से 10 लोक खोलिए खोलिए पुस्तक पुस्तक

513
00:39:18,320 --> 00:39:22,320
नहीं मेरे पास क्यों नहीं है क्यों नहीं

514
00:39:22,320 --> 00:39:26,720
है जो रामपाल जी ने कहा उसको वेरीफाई किया कि नहीं किया

515
00:39:26,720 --> 00:39:31,040
हा वेरीफाई किया तो बताओ क्या लिखा है न स्कंद

516
00:39:31,040 --> 00:39:31,960
में पहले अध्याय में

517
00:39:31,960 --> 00:39:36,120
आ से शलोक में वेरीफाई किया तो क्या लिखा है आप

518
00:39:36,120 --> 00:39:41,320
बोल रहे ना आप बताइ आप तो बोलने दे

519
00:39:41,320 --> 00:39:45,000
आप

520
00:39:45,000 --> 00:39:49,360
बताइए जितनी चाबी

521
00:39:49,360 --> 00:39:54,440
ब आपको बता रहा आप शांत रहिए आपको बता

522
00:39:54,440 --> 00:39:55,440
रहा

523
00:39:55,440 --> 00:39:59,680
भाई साहब शांत रहिए बिल्कुल भी अननेसेसरी टॉक नहीं चाहिए

524
00:39:59,680 --> 00:40:04,520
ठीक है शांत रहिए मैं आपको बता रहा हूं आपका जो अर्थ है और

525
00:40:04,520 --> 00:40:08,880
डायरेक्ट भाई साहब आप अगर आप बोलेंगे व्यर्थ व्यर्थ बोलेंगे

526
00:40:08,880 --> 00:40:12,960
मुझे आपको हटाना पड़ेगा मैं आपको प्रमाण दे रहा हूं तब तक आप धैर रखिए

527
00:40:12,960 --> 00:40:18,960
शांत रहिए ठीक

528
00:40:23,520 --> 00:40:28,160
है ये पहले देख लीजिए देवी भागवत दर्शन कर लीजिए

529
00:40:28,160 --> 00:40:32,840
इसी से शायद मुक्ति मिल जाएगी आपको क्योंकि वहां तो

530
00:40:32,840 --> 00:40:37,080
सिद्धांत है नहीं

531
00:40:37,080 --> 00:40:43,080
कुछ देवी भागवत नौवा

532
00:40:48,360 --> 00:40:53,320
स्कंद देवी भागवत नौवा स्कंद और उसके बाद

533
00:40:53,320 --> 00:40:58,880
प्रथम अध्याय 12000 1216 पेज नंबर

534
00:40:58,880 --> 00:41:03,680
आपका कहीं ना ऐसा तो नहीं ना जीव ही ब्रह्म है

535
00:41:03,680 --> 00:41:08,200
मैं जो ग्रंथ में लिखा है प्रमाण सहित आपको बता रहा हूं ठीक है

536
00:41:08,200 --> 00:41:11,920
वो आपको मैं बता रहा

537
00:41:11,920 --> 00:41:17,920
हूं आपको केवल प्रमाण चाहिए तर्क की कोई आवश्यकता नहीं

538
00:41:20,680 --> 00:41:26,680
आपको तर्क अगर बताएंगे तो आपके वो सर से ऊपर चला जाएगा सब

539
00:41:28,360 --> 00:41:34,360
9 एक आ से 10

540
00:41:43,840 --> 00:41:46,160
1216

541
00:41:46,160 --> 00:41:52,160
1216 देवी भागवत का नवा स्कंद

542
00:41:52,440 --> 00:41:56,840
और इसमें पहला अध्याय श्लोक क्रमांक

543
00:41:56,840 --> 00:42:02,840
आठ से 10 क्या कहा जा रहा

544
00:42:05,400 --> 00:42:09,520
है सृष्टि के आदि में जो देवी विराज है उसे

545
00:42:09,520 --> 00:42:13,520
प्रकृति कहा गया है सृष्टि करने के लिए योग माया का

546
00:42:13,520 --> 00:42:17,680
आश्रय लेकर परमात्मा दो रूपों में विभक्त हो गए उनका आधा

547
00:42:17,680 --> 00:42:22,040
दाहिना भाग पुरुष और बाया आधा भाग प्रकृति कहा गया देवी प्रकृति

548
00:42:22,040 --> 00:42:26,120
ब्रह्म स्वरूपा नित्या एवं सनातनी है कौन है जो

549
00:42:26,120 --> 00:42:30,760
प्रकृति है जो देवी है मां भगवती है नित्य है

550
00:42:30,760 --> 00:42:34,760
सनातनी है परमात्मा के सभी गुण परमात्मा

551
00:42:34,760 --> 00:42:38,800
के सभी गुण उसमें उसी

552
00:42:38,800 --> 00:42:43,120
प्रकार निहित है जिस प्रकार अग्नि में दाह कत्व शक्ति विद्यमान

553
00:42:43,120 --> 00:42:47,920
रहती है ठीक है इसके

554
00:42:47,920 --> 00:42:51,920
बाद जो भी सत असत जो कुछ भी दृश्य मान जगत

555
00:42:51,920 --> 00:42:56,080
है वह सब ब्रह्म मय है ब्रह्म मय और सुनो

556
00:42:56,080 --> 00:43:00,440
आगे क्या है तत्पश्चात आनंद कंद भगवान

557
00:43:00,440 --> 00:43:04,800
श्री कृष्ण चंद्र के मन में सृष्टि करने की इच्छा होती है किसके मन में होती

558
00:43:04,800 --> 00:43:07,720
है भगवान श्री कृष्ण चंद्र

559
00:43:07,720 --> 00:43:12,280
के उनकी मूल प्रकृति त तत्पश्चात

560
00:43:12,280 --> 00:43:16,800
परमात्मा की आज्ञा के अनुसार वह पांच प्रकार की बन जाती है इस तरीके से

561
00:43:16,800 --> 00:43:20,880
यहां पर भगवान श्री कृष्ण से सृष्टि का बनना

562
00:43:20,880 --> 00:43:25,040
बताया जा रहा है और जो भगवान की वो है

563
00:43:25,040 --> 00:43:29,240
शक्ति वो अनादि है अविनाशी

564
00:43:29,240 --> 00:43:35,240
हैं अनंत है और

565
00:43:35,680 --> 00:43:40,200
सुनो देवी भागवत नौवा स्कंद पहला

566
00:43:40,200 --> 00:43:45,560
अध्याय

567
00:43:45,560 --> 00:43:51,040
और 12 से 13

568
00:43:51,040 --> 00:43:55,240
श्लोक 12 से 13वां श्लोक कृष्ण चंद्र

569
00:43:55,240 --> 00:43:59,680
की आज्ञा से ही वे सृष्टि करती हैं

570
00:43:59,680 --> 00:44:03,720
और उनकी जो सबसे परम प्रिय जो पांच रूप

571
00:44:03,720 --> 00:44:08,080
धारण करती हैं उनमें से जो कृष्ण को प्रिय है वह है

572
00:44:08,080 --> 00:44:12,200
मां भगवती का जो राधा स्वरूप है वह भगवान श्री कृष्ण को सबसे

573
00:44:12,200 --> 00:44:16,640
ज्यादा प्रिय

574
00:44:16,640 --> 00:44:20,680
है इसके अलावा भगवत गीता

575
00:44:20,680 --> 00:44:25,320
चार छ भगवान स्वयं कह रहे हैं

576
00:44:25,320 --> 00:44:29,320
मैं अजन्मा हूं मैं अविनाशी हूं

577
00:44:29,320 --> 00:44:35,320
ठीक

578
00:44:37,320 --> 00:44:43,320
है और

579
00:45:08,920 --> 00:45:13,040
इसके अलावा अनेकानेक जगह ऐसे प्रमाण

580
00:45:13,040 --> 00:45:17,280
है जिसमें कि भगवान को ब्रह्मा विष्णु

581
00:45:17,280 --> 00:45:21,520
महेश को अविनाशी परमात्मा कहा गया है जैसे कि

582
00:45:21,520 --> 00:45:25,600
विष्णु पुराण दूसरा अध्याय पहले से

583
00:45:25,600 --> 00:45:29,600
तीसरा श्लोक उसमें क्या लिखा हुआ है ब्रह्मा

584
00:45:29,600 --> 00:45:33,920
विष्णु और शंकर रूप से जगत की उत्पत्ति स्थिति एवं संहार के कारण

585
00:45:33,920 --> 00:45:37,960
विकार रहित शुद्ध अविनाशी परमात्मा कौन सा

586
00:45:37,960 --> 00:45:42,360
परमात्मा अविनाशी परमात्मा सर्वदा एक रस

587
00:45:42,360 --> 00:45:48,360
सर्व विजय भगवान वासुदेव विष्णु है ठीक

588
00:45:53,240 --> 00:45:58,120
है और सुनो देवी

589
00:45:58,120 --> 00:46:03,080
ऋग्वेद दसवा मंडल 125 वा सूक्त

590
00:46:03,080 --> 00:46:07,080
उसमें क्या कहा जा रहा है देवी परम ब्रह्म से भिन्न

591
00:46:07,080 --> 00:46:11,520
नहीं है अपितु परमेश्वर परमात्मा नित्य सनातन

592
00:46:11,520 --> 00:46:15,720
सच्चिदानंद स्वरूप परम तत्व ही है देवी परम ब्रह्म से अभिन्न है

593
00:46:15,720 --> 00:46:19,960
यह ऋग्वेद में लिखा है और सुनो जो देवी शक्ति

594
00:46:19,960 --> 00:46:24,360
है वही परमात्मा है और जो परमात्मा है वही शक्ति है देवी भागवत

595
00:46:24,360 --> 00:46:28,360
तीसरा स्कंद सातवा अध्याय और 14

596
00:46:28,360 --> 00:46:33,160
से 15 श्लोक देवी भगवती ही ब्रह्म और ब्रह्म शक्ति

597
00:46:33,160 --> 00:46:37,840
है देवी भागवत तीसरा अध्याय छठवां तीसरा

598
00:46:37,840 --> 00:46:41,880
स्कंद छठवां अध्याय दूसरा श्लोक

599
00:46:41,880 --> 00:46:44,960
और इसी तरीके

600
00:46:44,960 --> 00:46:49,920
से अनेकानेक प्रमाण है अब बताइए

601
00:46:49,920 --> 00:46:54,120
क्या किया जाए भगवत गीता में जो बताया है

602
00:46:54,120 --> 00:46:58,240
तीन पुरुष मैंने आपको देवी भागवत से भी बताया उसको नहीं मानोगे

603
00:46:58,240 --> 00:47:02,320
क्या नहीं आपने बताया लेकिन मैं क्या

604
00:47:02,320 --> 00:47:08,320
बता रहा हूं आपकी बात ठीक है

605
00:47:08,520 --> 00:47:12,680
प्रमाण पुरुष परम अक्षर पुरुष य तीन पुरुष पुरुष

606
00:47:12,680 --> 00:47:16,680
माने तो परम अक्षर आ गए पहले एक बात खत्म करो अक्षर

607
00:47:16,680 --> 00:47:20,880
की बात पर भी आएंगे पहले एक बात खत्म करो पहले एक बात

608
00:47:20,880 --> 00:47:25,200
खत्म करो अविनाशी है

609
00:47:25,200 --> 00:47:29,560
या नहीं है माने आपको शास्त्र से बता दिया विष्णु पुराण से देवी भागवत इत्यादि

610
00:47:29,560 --> 00:47:33,560
से कि ब्रह्मा विष्णु महेश भगवती गणेश पांचों के लिए अविनाशी शब्द आया

611
00:47:33,560 --> 00:47:36,680
है अविनाशी नित्य

612
00:47:36,680 --> 00:47:41,640
सनातन अब इसको मानोगे कि नहीं श्रीमद

613
00:47:41,640 --> 00:47:45,640
श्रीमद् देवी भागवत कंद तीसरा उसमें लिखा भाई

614
00:47:45,640 --> 00:47:49,960
साहब भाई साहब लीला पूर्वक भगवान लीला पूर्वक

615
00:47:49,960 --> 00:47:54,160
ये बात कह रहे हैं कि हमारा भी जीवन मरण होता है वस्तुत नहीं होता

616
00:47:54,160 --> 00:47:58,280
है होता भाव होता है आप आप ये बताइए

617
00:47:58,280 --> 00:48:02,800
कबीर साहब के कोई गुरु थे या नहीं थे

618
00:48:02,800 --> 00:48:06,920
थे थे उनके गुरु हा उन्होने लीला की थी वो क्या जनी वो

619
00:48:06,920 --> 00:48:10,920
क्या ज्ञानी थे जो उनको गुरु करना पड़ा समाज

620
00:48:10,920 --> 00:48:15,080
को एक मार्गदर्शन मिले की गुरु पर ब ऐसे ही समाज को

621
00:48:15,080 --> 00:48:19,120
मार्ग दिखाने के लिए वो लीला पूर्वक अपनी देह का नाश करते हैं

622
00:48:19,120 --> 00:48:23,240
ऐसे ही जैसे आपने आपके कबीर दास जी ने समाज को दिखाने

623
00:48:23,240 --> 00:48:23,740
के लिए

624
00:48:23,640 --> 00:48:27,880
लीला की ना गुरु बनाने की ऐसे ही वो समाज को दिखाने

625
00:48:27,880 --> 00:48:32,000
के लिए लीला करते हैं अपनी देह का नाश करके अब मैं आपसे अब मैं आपसे

626
00:48:32,000 --> 00:48:36,280
पूछ रहा हूं सीधी बात मैं आपसे ज्यादा मगज नहीं मार सकता मैं आपसे सीधी

627
00:48:36,280 --> 00:48:40,480
बात पूछ रहा हूं क्या आप जिसको ईश्वर मानते हैं

628
00:48:40,480 --> 00:48:45,240
वह सर्वशक्तिमान है या नहीं यह बताइए बस

629
00:48:45,240 --> 00:48:49,320
इसीलिए ज्यादा उसको खोलने का कोई मतलब नहीं रहता है सब लोग कहते

630
00:48:49,320 --> 00:48:53,720
हैं ना प्रमाण दिखाओ खोल के दिखाओ खोल के दिखाओ उससे कोई फर्क नहीं पड़ना है

631
00:48:53,720 --> 00:48:57,760
उससे कोई मतलब नहीं है आप तो मुझे ये

632
00:48:57,760 --> 00:49:02,080
बताओ रामपाल दास जी के अनुसार प्रतिपादित

633
00:49:02,080 --> 00:49:06,760
होने वाला जो ईश्वर है वो सर्वशक्तिमान है या नहीं

634
00:49:06,760 --> 00:49:10,960
यह बताओ इसका भी आंसर देता हूं और इससे पहले

635
00:49:10,960 --> 00:49:14,960
का भी आंसर देता हूं इसके पहले का मत दो भाई साहब मत दो भाई साहब

636
00:49:14,960 --> 00:49:19,800
आप मुझे ये बताओ आप मुझे बताओ वो सर्वशक्तिमान है या नहीं

637
00:49:19,800 --> 00:49:23,840
होगा आपको एक अच्छा आदमी मिलेगा आपको एक बढ़िया

638
00:49:23,840 --> 00:49:28,080
जो आपको ग्रंथ दिखाएगा सद ग्रंथ दिखाएगा ठीक है भाई

639
00:49:28,080 --> 00:49:32,160
साहब मुझसे ज्यादा व्यर्थ की बातें ना करिए मुझे सीधे-सीधे

640
00:49:32,160 --> 00:49:36,400
जवाब दीजिए क्या ईश्वर सर्वशक्तिमान है जिसको आप मानते हो

641
00:49:36,400 --> 00:49:38,680
बताओ सर्वशक्तिमान है अविनाशी है

642
00:49:38,680 --> 00:49:42,880
परम पुरुष सर्वशक्तिमान क्या वो सब कुछ कर सकता है सब कुछ

643
00:49:42,880 --> 00:49:47,520
कर सकता है अपनी देह का नाश कर सकता है

644
00:49:47,520 --> 00:49:51,640
अपनी देह का भी नाश कर सकता है यानी कि उसकी देह अविनाशी

645
00:49:51,640 --> 00:49:56,240
नहीं है लीला वश कर सकता है

646
00:49:56,240 --> 00:50:00,640
उस नहीं मैं पूछ रहा उसकी दे अविनाशी है कि नहीं

647
00:50:00,640 --> 00:50:05,240
अविनाशी है उसकी दे अविनाशी है

648
00:50:05,240 --> 00:50:09,280
किसी नियमों से उनकी दे नष्ट नहीं हो जा उसकी

649
00:50:09,280 --> 00:50:13,600
दे उसकी देह अविनाशी है कि नहीं वो खुद

650
00:50:13,600 --> 00:50:18,040
करेंगे देह का नाश तो ऐसा नहीं है कि वह अविनाशी

651
00:50:18,040 --> 00:50:22,240
नहीं है हा अगर किसी नियमों से बात है किसी नियम

652
00:50:22,240 --> 00:50:26,720
के अंदर व है जैसे ब्रह्मा विष्णु

653
00:50:26,720 --> 00:50:30,960
की आयु लिखी है हमारे सत ग्रंथों में भाई साहब मुझे आपको हटाना पड़ जाएगा

654
00:50:30,960 --> 00:50:35,040
भाई साहब आप जो है सर में दर्द वाली बात कर रहे हैं मेरी बात

655
00:50:35,040 --> 00:50:39,360
आप समझिए मैंने आपको म्यूट किया है प्लीज मेरी बात समझिए मैं हाथ जोड़ रहा हूं

656
00:50:39,360 --> 00:50:44,160
मैं आपके बोलने के अधिकार का हनन नहीं करना चाहता आप मुझे यह बता दीजिए

657
00:50:44,160 --> 00:50:48,520
आप मुझे यह बता दीजिए कि आपके जो कबीर

658
00:50:48,520 --> 00:50:52,840
है आपके अनुसार जो कबीर भगवान है वह सब कुछ कर सकता है या नहीं

659
00:50:52,840 --> 00:50:54,640
यह बताइए

660
00:50:54,640 --> 00:50:58,880
सब कुछ कर सकते प्रारब्ध नष्ट कर अपनी देह का नाश कर सकते हैं अप

661
00:50:58,880 --> 00:51:02,960
दे देह का लीलाव अपनी देह का नाश कर सकते हैं

662
00:51:02,960 --> 00:51:07,320
अपनी देह का नाश कर सकते हैं कर सकते हैं ना कुछ भी कर सकते हैं

663
00:51:07,320 --> 00:51:12,200
तो कर सकते हैं तो यानी कि उनकी देह अविनाशी नहीं है

664
00:51:12,200 --> 00:51:16,320
ना अविनाशी कब कब नहीं होगी जब वो निय

665
00:51:16,320 --> 00:51:20,640
में होंगे जब हा ब्रह्मा सते

666
00:51:20,640 --> 00:51:26,640
भाई साहब

667
00:51:32,240 --> 00:51:35,040
आपने देख

668
00:51:35,040 --> 00:51:39,120
लिया आप लोगों ने देख लिया इनके जवाब क्या आ रहे हैं ठीक है आपने अपनी बात

669
00:51:39,120 --> 00:51:43,280
कह दी हमने अपनी बात कह दी अब लोग यहां पर डिसाइड कर लेंगे वह अपनी दे का नाश

670
00:51:43,280 --> 00:51:47,840
कर सकते हैं फिर भी उनकी दे अविनाशी है आपके अनुसार ये है ना

671
00:51:47,840 --> 00:51:53,760
एक मिनट सुनिए ना बोलज मेरे को एक मिनट दीजिए एक

672
00:51:53,760 --> 00:51:57,760
मिनट मैं एक मनुष्य हूं मुझे मोक्ष

673
00:51:57,760 --> 00:52:01,760
चाहिए यदि आपका ज्ञान सही लगा मैं ज्ञान चर्चा

674
00:52:01,760 --> 00:52:05,840
में इसके लिए आया हूं यदि आपका ज्ञान मेरे को सही लगा तो मैं आपके मार्ग पर

675
00:52:05,840 --> 00:52:09,680
चलूंगा यदि मेरे आप जो

676
00:52:09,680 --> 00:52:14,200
है आपकी बात समझ सम

677
00:52:14,200 --> 00:52:18,840
में समझ लेता हूं मेरे भाई मैं समझ गया आपकी बात मेरी बात सुनिए

678
00:52:18,840 --> 00:52:22,840
हम दोनों शास्त्र निकाल रहे हैं देखो देखो देखो

679
00:52:22,840 --> 00:52:26,840
बोलने नहीं दोगे भाई मेरी बात सुनिए आप ध्यान से मेरी बात

680
00:52:26,840 --> 00:52:31,320
सुनिए ध्यान से आपने कहा कि उनकी देह अविनाशी

681
00:52:31,320 --> 00:52:35,600
है अगर उनकी देह अविनाशी है तो कबीर अपनी देह का नाश

682
00:52:35,600 --> 00:52:39,600
नहीं कर सकते अगर उनकी देह अविनाशी अगर वह कर

683
00:52:39,600 --> 00:52:43,680
सकते हैं तो उनकी देह अविनाशी नहीं है तो अगर आप ये कह रहे हैं

684
00:52:43,680 --> 00:52:47,720
कि उनकी देह अविनाशी भी है और वो वो भी कर सकते हैं तो जनता डिसाइड करेगी आप

685
00:52:47,720 --> 00:52:52,160
क्या कह रहे हैं ठीक है हमने सव शक्तिमान

686
00:52:52,160 --> 00:52:56,800
हमने देवी भागवत से अनेकानेक प्रमाण दे दिए हैं कि

687
00:52:56,800 --> 00:53:00,880
विष्णु महेश जो है अविनाशी है वो लीला पूर्वक अपनी देह का नाश करके

688
00:53:00,880 --> 00:53:05,720
दिखाते हैं वो लीला पूर्वक च दिखाते हैं हा

689
00:53:05,720 --> 00:53:09,840
क्या आप अभी बोल रहे है अविनाश अभी बोल रहे वो लीला

690
00:53:09,840 --> 00:53:13,960
नाश कर सकते हैं अरे मेरे भाई लीला में अपनी देह का नाश

691
00:53:13,960 --> 00:53:18,600
करते हैं मैं वही तो कह रहा हूं देह का नाश ठीक है

692
00:53:18,600 --> 00:53:23,080
आप ठीक है भाई साहब जनता देख लेगी जनता देख

693
00:53:23,080 --> 00:53:24,680
लेगी ठीक है आप

694
00:53:24,680 --> 00:53:28,800
आए अच्छा लगा सता से बातें की आप आए अच्छा लगा आपने

695
00:53:28,800 --> 00:53:29,320
सहता

696
00:53:29,320 --> 00:53:35,320
से बातें की हम और लोग ले

697
00:53:39,080 --> 00:53:44,200
ले जी वंदना जी जय श्री राम

698
00:53:44,200 --> 00:53:48,200
मेरा उ कैसे मरी करनी पड़ती है सर

699
00:53:48,200 --> 00:53:52,440
में दर्द होता है बहुत सना पड़ता है मेरा एक क्वेश्चन

700
00:53:52,440 --> 00:53:56,720
था उनसे कि अगर उनके कबीर जी सर्वशक्तिमान है

701
00:53:56,720 --> 00:54:00,720
परमात्मा है भगवान है तो फिर जो व ये स्टोरी बनाते हैं

702
00:54:00,720 --> 00:54:04,720
कि काल ने ऐसा कर दिया वैसा कर दिया तो अगर वह सर्वशक्तिमान है तो उन्होंने काल

703
00:54:04,720 --> 00:54:08,760
को रोक क्यों नहीं लिया हा वो सर्वशक्तिमान

704
00:54:08,760 --> 00:54:12,840
कहने को है मगर वो भविष्य नहीं देख सकते काल क्या करने वाला है

705
00:54:12,840 --> 00:54:17,080
नहीं देख सकते कहां क्या हो रहा है उनको नहीं पता बुराइयों को उन्होंने

706
00:54:17,080 --> 00:54:21,080
बनाया नहीं क्योंकि बुराई में वह है नहीं बुराई उनसे बनी नहीं है बहुत सारी

707
00:54:21,080 --> 00:54:25,080
बाधाएं लग जाती है ईश्वर पर तो कहां से फिर कहां से प्रकट

708
00:54:25,080 --> 00:54:29,320
हुआ है अपने आप कैसे से हो गया है जब उनको कोई बेस ही नहीं है उनकी बातों का

709
00:54:29,320 --> 00:54:33,520
मैं आप लोगों को एक चीज और बता देता हूं परम अक्षर ब्रह्म के बारे में वैसे मैंने वीडियो

710
00:54:33,520 --> 00:54:37,520
बनाया हुआ है य लोग ये जो परम अक्षर की बात करते हैं उस पर

711
00:54:37,520 --> 00:54:43,520
भी हमने ताबड़ तोड़ प्रमाण प्रस्तुत किए

712
00:54:43,840 --> 00:54:48,080
थे य जो परम अक्षर की बात करते हैं ना

713
00:54:48,080 --> 00:54:54,080
एक बहुत बढ़िया चीज दिखाऊंगा

714
00:54:57,240 --> 00:55:02,800
परम ब्रह्म

715
00:55:02,800 --> 00:55:07,440
के जो परम अक्षर की बात करते हैं ऋग्वेद में

716
00:55:07,440 --> 00:55:11,800
परमेश्वर को अक्षर कहा गया है परम ब्रह्म को

717
00:55:11,800 --> 00:55:16,000
ऋग्वेद में परम ब्रह्म को अक्षर कहा गया है दसव मंडल

718
00:55:16,000 --> 00:55:20,040
के 164 म सूक्त के 39 में मंत्र

719
00:55:20,040 --> 00:55:24,080
में परम ब्रह्म को जो है अक्षर कहा गया परम अक्षर

720
00:55:24,080 --> 00:55:28,200
नहीं कहा गया है दूसरी बात नि जो

721
00:55:28,200 --> 00:55:32,200
वैदिक डिक्शनरी मान लीजिए आचार्य यास के द्वारा जिसका भाष

722
00:55:32,200 --> 00:55:36,240
हुआ है निरुक्त का वहां क्या है 13

723
00:55:36,240 --> 00:55:40,920
अध्याय के दव प्रकरण में वह बात कर रहे हैं उसमें भी उन्होंने

724
00:55:40,920 --> 00:55:45,320
परम ब्रह्म का जो अर्थ अक्षर का जो अर्थ बताया वह परम ब्रह्म

725
00:55:45,320 --> 00:55:50,080
परमात्मा बताया है इसके

726
00:55:50,080 --> 00:55:56,080
अलावा आपको एक अच्छी चीज दिखा दूं

727
00:56:03,240 --> 00:56:07,280
वाल्मीकि रामायण और

728
00:56:07,280 --> 00:56:13,280
युद्ध

729
00:56:16,520 --> 00:56:22,520
कांड वाल्मीकि रामायण युद्ध

730
00:56:23,880 --> 00:56:29,880
कांड और इसमें

731
00:56:38,360 --> 00:56:42,480
624 युद्ध कांड का

732
00:56:42,480 --> 00:56:48,480
117 वा

733
00:56:50,080 --> 00:56:54,560
सर्ग जब हम इनको प्रमाण दिखाएंगे तो उनकी बात ही नहीं करेंगे

734
00:56:54,560 --> 00:56:58,760
देवी भागवत सही प्रमाण दिखाए कि कृष्ण परमेश्वर है कृष्ण परम ब्रह्म

735
00:56:58,760 --> 00:57:03,040
है तो उनकी बात नहीं करेंगे उसी

736
00:57:03,040 --> 00:57:07,080
देवी भागवत से अपनी बात को स्वीकार करवाएंगे कि ब्रह्मा विष्णु महेश जो

737
00:57:07,080 --> 00:57:11,080
है अविनाशी नहीं है क्योंकि उन्होंने कहीं पर भक्ति भाव में

738
00:57:11,080 --> 00:57:15,160
कह दिया कि हमारे रूप का तो आविर्भव तिरो भाव होता है अगर वह यह नहीं

739
00:57:15,160 --> 00:57:19,400
कहेंगे तो ईश्वर में बाधा लग जाएगी ना ईश्वर की देह का नाश

740
00:57:19,400 --> 00:57:22,320
नहीं कर सकते

741
00:57:22,320 --> 00:57:27,920
ईश्वर इसीलिए भगवान भक्त

742
00:57:27,920 --> 00:57:33,920
भक्त और भगवान दोनों रूपों में अपनी लीलाएं करते

743
00:57:42,960 --> 00:57:47,040
हैं यह देखिए श्री राम के लिए लिखा है

744
00:57:47,040 --> 00:57:51,400
जो भी देख रहे हो रामपाल दास के फॉलोअर्स देखे वाल्मीकि रामायण

745
00:57:51,400 --> 00:57:55,680
उसी गीता प्र से प्रकाशित है जिस गीता

746
00:57:55,680 --> 00:57:59,720
प्र के पेज नंबर के आधार पर अपनी बातों को सिद्ध

747
00:57:59,720 --> 00:58:03,760
करते हो ना आप लोग ये देखो रघुनंदन

748
00:58:03,760 --> 00:58:07,560
आप अविनाशी परम ब्रह्म

749
00:58:07,560 --> 00:58:12,160
है देखो दिख रहा है

750
00:58:12,160 --> 00:58:17,040
रघुनंदन आप अविनाशी परम ब्रह्म है और इसी में

751
00:58:17,040 --> 00:58:21,000
इनको अक्षर भी कहा गया

752
00:58:21,000 --> 00:58:25,400
है इसका अर्थ है अक्षर परम अक्षर ब्रह्म

753
00:58:25,400 --> 00:58:29,400
परम ब्रह्म यह सब कोई अलग-अलग नहीं है बात करते टाइम कहीं

754
00:58:29,400 --> 00:58:35,400
शास्त्रों में ब्रह्म कह दिया गया कहीं शास्त्रों में परम ब्रह्म कह दिया गया

755
00:59:00,120 --> 00:59:06,120
यह देखिए

756
00:59:17,800 --> 00:59:23,800
अक्षरमनामलाई करते हैं

757
00:59:27,440 --> 00:59:32,320
प्रॉब्लम फॉलो करने वालोने शास्त्र एकचल में पढ़े नहीं है

758
00:59:32,320 --> 00:59:36,320
बस उस उसी के आधार पर रते उसी को

759
00:59:36,320 --> 00:59:41,080
य कोई भगत जी है इनको हम ले लेते हैं

760
00:59:41,080 --> 00:59:45,640
ऊपर भगत जी आप चेहरा दिखाए

761
00:59:45,640 --> 00:59:49,720
अपना शिवांश द्विवेदी ज्यादा बोला बोली मत

762
00:59:49,720 --> 00:59:53,360
बोला

763
00:59:53,360 --> 00:59:57,440
करो शिवाज भाई आपके पास जो सारे ग्रंथ है वो सारे गीता

764
00:59:57,440 --> 01:00:03,440
प्रस के हैं क्या नहीं जहां से जो मिलता है वोह ले लेते

765
01:00:03,960 --> 01:00:08,240
हैं चेहरा दिखाएं अपना भगत जी

766
01:00:08,240 --> 01:00:14,240
अगर आपको ऊपर आना है

767
01:00:17,200 --> 01:00:23,200
तो मयंक कुमार जी आप पहले आ चुके हैं

768
01:00:24,280 --> 01:00:30,280
क्या पहले आए क्या कल आप ही आए थे

769
01:00:31,760 --> 01:00:36,560
क्या जी जय श्री राम जय श्री

770
01:00:36,560 --> 01:00:40,680
राम आप पहले आए नहीं मुझे लग रहा कल आप ही थे शायद लाइव

771
01:00:40,680 --> 01:00:44,720
में नहीं मैं भी थोड़ी देर पहले आया था फिर मैं डिस्कनेक्ट

772
01:00:44,720 --> 01:00:49,680
हो गया था नहीं आप पहले आ चुके हैं या नहीं आ चुके हैं कल

773
01:00:49,680 --> 01:00:55,680
नहीं नहीं

774
01:00:56,560 --> 01:01:02,560
मैं आज ही आया हूं हां

775
01:01:04,000 --> 01:01:08,120
बताइए मैं सर बताइए क्या कहना आपसे कुछ चीज जानना

776
01:01:08,120 --> 01:01:12,440
चाह रहा था मैं नहीं जानने के लिए आप वहां पर आए

777
01:01:12,440 --> 01:01:16,480
क्लासेस में यहां जानने के लिए बिल्कुल नहीं है समय व्यर्थ होता है आप तो

778
01:01:16,480 --> 01:01:20,560
ये बताइए क्या आप कबीर पाल जो ये संत रामपाल है इनका जो ज्ञान गंगा है

779
01:01:20,560 --> 01:01:24,880
इत्यादि है ये सब आप सही मानते हैं नहीं

780
01:01:24,880 --> 01:01:28,920
नहीं अच्छा अभी आप थोड़ी देर आप थोड़ी देर पहले स्टेज प थे

781
01:01:28,920 --> 01:01:32,920
आप जी है ना तो आपको कोई जिज्ञासा है तो

782
01:01:32,920 --> 01:01:37,120
आप क्लासेस में आइएगा यह हमारा जो एक धारा है बिगड़ जाती है यहां

783
01:01:37,120 --> 01:01:41,440
पर वैचारिक मतभेद के निमित्त हम लोग चर्चा करने वाला यह वीडियो है

784
01:01:41,440 --> 01:01:45,800
जिस दिन हम प्रश्नोत्तरी वाला रखेंगे उस दिन आप आइए ठीक है वो धारा बिगड़ती

785
01:01:45,800 --> 01:01:50,040
चली जाती है जी ठीक है सर जय श्री राम नंबर है आपके पास

786
01:01:50,040 --> 01:01:54,040
हमारा नहीं सर नंबर

787
01:01:54,040 --> 01:01:57,440
नहीं है नंबर नोट कर लीजिए 740

788
01:01:57,440 --> 01:02:02,560
869 न मिनट सर वापस बोलिए एक

789
01:02:02,560 --> 01:02:07,520
मिनट

790
01:02:07,520 --> 01:02:10,640
7483

791
01:02:10,640 --> 01:02:15,040
830

792
01:02:15,040 --> 01:02:19,920
74836 ठीक है सर जी जय श्री राम

793
01:02:19,920 --> 01:02:25,920
जय श्रीराम

794
01:02:27,720 --> 01:02:32,360
अभी अवधेश जी

795
01:02:32,360 --> 01:02:36,560
हैं जी अवधेश जी बताइए

796
01:02:36,560 --> 01:02:42,560
अ जय श्री राम जय श्री

797
01:02:44,480 --> 01:02:48,840
राम रामपाल जी की जो य इनकी कथा जो भी

798
01:02:48,840 --> 01:02:53,040
बुक्स है सब इनका ही अपना खुद

799
01:02:53,040 --> 01:02:58,560
का आडलज है

800
01:02:58,560 --> 01:03:02,840
और कलजी कह रहे लजी

801
01:03:02,840 --> 01:03:07,080
बोलो हमारी खुद की हमने ु बनाया तो हमारी फजी

802
01:03:07,080 --> 01:03:11,640
बो आइजी बोलो जो शास्त्र समत है उनकी उस हिसाब से आडलज

803
01:03:11,640 --> 01:03:16,840
नहीं है उनकी पर्सनल आडलज है जो उनके भक्त जो उनके शिष्य है

804
01:03:16,840 --> 01:03:21,120
व जानते हैं और

805
01:03:21,120 --> 01:03:25,320
जबतक कोई जब तक तपस्या नहीं करेगा शास्त्र

806
01:03:25,320 --> 01:03:31,080
का नहीं करेगा उसको सत का ज्ञान कहां से

807
01:03:31,080 --> 01:03:35,400
होगा एक चीज की समस्या एक व्यक्ति इतनी बार

808
01:03:35,400 --> 01:03:39,400
मैंने कहा कि भाई आओ दिखाओ मुझे वेदों में कहां प्रमाण है कि कबीर

809
01:03:39,400 --> 01:03:43,520
भगवान है आप गणेश को नहीं मानोगे आप शिव को नहीं मानोगे विष्णु

810
01:03:43,520 --> 01:03:47,920
को नहीं मानोगे मां भगवती को नहीं मानोगे जिनका स्पष्ट वेदों में प्रमाण दिया है

811
01:03:47,920 --> 01:03:53,920
मगर जिससे मिलता जुलता नाम दिया है आप उसको कह रहे हो वो भगवान है

812
01:03:56,640 --> 01:04:00,760
कहां गए अक्षर परम अक्षर और तीन अक्षर वाले क्यों

813
01:04:00,760 --> 01:04:04,000
नहीं आ रहे

814
01:04:04,000 --> 01:04:08,040
भाई वाल्मीकि रामायण में इनका सबसे

815
01:04:08,040 --> 01:04:12,440
जवाब लिखा हुआ है छवा अध्याय टवे

816
01:04:12,440 --> 01:04:16,440
कांड में देख लीजिएगा श्री राम को परम ब्रम भी कहा गया और

817
01:04:16,440 --> 01:04:21,040
अक्षर पुरुष भी कहा गया

818
01:04:21,040 --> 01:04:27,040
है बिल्कुल है ही वो

819
01:04:33,960 --> 01:04:38,040
और यह सूरज जी आप अपना चेहरा दिखाए तो अवदेश

820
01:04:38,040 --> 01:04:40,800
जी आप कहां से

821
01:04:40,800 --> 01:04:45,240
हैं कहां से अ जी आप हम यूपी के हैं

822
01:04:45,240 --> 01:04:51,240
अच्छा अंबेडकर नगर से

823
01:04:52,720 --> 01:04:57,480
अच्छा इसीलिए कहता हूं मत पढ़ो चक में कोई नहीं है टक्कर

824
01:04:57,480 --> 01:05:01,520
में सनातन धर्म से उलझना

825
01:05:01,520 --> 01:05:05,560
परंपरा प्राप्त सनातन धर्मा परंपरा प्राप्त

826
01:05:05,560 --> 01:05:09,640
सनातन धर्मावलंबियों से उलझना इतना आसान नहीं है व

827
01:05:09,640 --> 01:05:14,440
तभी तक है जब तक वह शता दिखा

828
01:05:14,440 --> 01:05:18,760
रहे अजीब बात यह लगती है एक चीज को कितनी बार बताया

829
01:05:18,760 --> 01:05:22,840
जा चुका है व कबीर देव जो लोग बारबार बोलते हैं उसको कितनी बार आप

830
01:05:22,840 --> 01:05:26,880
क्लियर कर चुके हैं सेम क्वेश्चन हर कोई लेकर आता है कुछ नया

831
01:05:26,880 --> 01:05:32,880
लेकर के आइए अगर आपके पास है

832
01:05:36,320 --> 01:05:40,320
तो अरे भैया वेदों में रुद्र तो दिया है शिव तो

833
01:05:40,320 --> 01:05:44,360
दिया है चलो ठीक है वेदों

834
01:05:44,360 --> 01:05:48,520
में रुद्र शिव तो दिया है बोलना चालू करो वेदों में प्रमाण है

835
01:05:48,520 --> 01:05:52,600
शिव जी भगवान है बोलो जो नहीं दिया है जिससे

836
01:05:52,600 --> 01:05:56,720
मिलता जुलता दिया है उसको क्यों बोलते हो कबीर दिया नहीं

837
01:05:56,720 --> 01:06:00,920
है कवि दिया है कवि की संधि होती तो कबीर होने लगता है वोह अरे

838
01:06:00,920 --> 01:06:04,920
भाई ठीक है चलो कबीर भी मान ले वो कबीर कहीं पर तो अलग से लिखा

839
01:06:04,920 --> 01:06:09,280
हो वहां संधि हो रही है वहां का मंत्र का भाव कुछ और है व

840
01:06:09,280 --> 01:06:13,360
प्रकरण कुछ और है वो संधि होने के कारण रा आ गया तो उसको आपने

841
01:06:13,360 --> 01:06:17,400
कर लिया कबीर तब भी वो कबीर हुआ कबीर तब भी नहीं हुआ

842
01:06:17,400 --> 01:06:21,400
और कहीं पर तो लिखा हो कबीर चलो मान लो कबीर का अर्थ है

843
01:06:21,400 --> 01:06:25,800
कबीर तो कहीं अलग से कबीर लिखा हो ना फिर

844
01:06:25,800 --> 01:06:30,240
नहीं है हर जगह वहां ट्रांसलेशन में आया है

845
01:06:30,240 --> 01:06:34,360
कवि कवि से इन्होंने कबीर बना लिया फिर कहते हैं कि

846
01:06:34,360 --> 01:06:38,480
गुण देखो तो फिर यह कहो कि गुणों का प्रमाण है कबीर भगवान यह मत कहो वेदों

847
01:06:38,480 --> 01:06:42,560
में प्रमाण है वेदों में प्रमाण है तो वेदों में दिखाना

848
01:06:42,560 --> 01:06:46,760
पड़ेगा गुण भी तो बहुत सारे भक्त ऐसे हुए हैं जो कविताएं

849
01:06:46,760 --> 01:06:51,160
लिखे हैं रसखान जी है मीरा भाई है कितने पद लिखे हैं तो

850
01:06:51,160 --> 01:06:51,660
ये सब

851
01:06:51,360 --> 01:06:57,360
भगवान है सब भगवान है कवि है ये सब सब भगवान है

852
01:07:14,840 --> 01:07:19,320
कोई आ नहीं रहा है विशाल भाटिया जी

853
01:07:19,320 --> 01:07:25,320
हैं विशाल भाटिया जी आप अपना चेहरा दिखाए

854
01:07:26,800 --> 01:07:32,800
विशाल

855
01:07:47,480 --> 01:07:52,360
जी वेद शस्त्र गीता के आधार पर

856
01:07:52,360 --> 01:07:56,400
रामपाल वाले क्यों बोलते हैं डायरेक्ट बोल देते कबीर शिक्षा के आधार पर

857
01:07:56,400 --> 01:08:00,400
भक्ति करते हैं बढ़िया है डायरेक्ट बोलो कि कबीर

858
01:08:00,400 --> 01:08:04,440
प्रमाण है और कबीर भगवान है बोलो डायरेक्ट वेद का आलंबन

859
01:08:04,440 --> 01:08:10,440
क्यों लेते हो

860
01:08:17,360 --> 01:08:21,440
भाई यह देखो एक और आए शिवांश जी जैसे

861
01:08:21,440 --> 01:08:26,440
भ्रमित करने वाले सतलोक में भी थे इसका मतलब वहां भी

862
01:08:26,440 --> 01:08:31,240
वही बैकुंठ सतलोक में भी प्रॉब्लम्स है

863
01:08:31,240 --> 01:08:35,920
टेंशन फ्री नहीं है आपका सतलोक है ना क्या बात

864
01:08:35,920 --> 01:08:40,840
है यहां से सारी यह मेहनत करके

865
01:08:40,840 --> 01:08:45,360
सब प्रकार की मेहनत करके आप जहां पहुंचो पहुंचेंगे

866
01:08:45,360 --> 01:08:49,640
वहां पर क्या है भ्रमित करने वाले लोग दिक्कतें

867
01:08:49,640 --> 01:08:55,640
समस्याएं यह सब वहां भी है

868
01:08:56,040 --> 01:09:00,120
एक बार लिंक दे

869
01:09:00,120 --> 01:09:06,120
दीजिए लिंक दे दीजिए एक

870
01:09:07,360 --> 01:09:11,520
बार सतलोक में भी असत है वही मैं कह रहा हूं

871
01:09:11,520 --> 01:09:15,560
सतलोक में भी असत है भ्रमित करने वाले लोग हैं सतलोक

872
01:09:15,560 --> 01:09:20,120
में भी देखिए जो भी आए

873
01:09:20,120 --> 01:09:26,120
लिंक के द्वारा वह अपने चेहरे को लेकर आए

874
01:09:37,160 --> 01:09:41,240
मैंने भाई को शेयर किया है देखिए आते हैं कि नहीं पहले भी शेयर किया

875
01:09:41,240 --> 01:09:45,360
था आ प्रूफ कर दीजिए आप बो उनको ऐसे बोला

876
01:09:45,360 --> 01:09:49,400
करिए वो तो बहुत चैलेंजिंग रूप में बोल रहे हैं कि अगर अपना ये

877
01:09:49,400 --> 01:09:53,400
किया हो वो किया हो तो आ जाना अभी किया मैंने

878
01:09:53,400 --> 01:09:59,400
क आपको बहुत ज्ञान है ना तो भी आप आ करिए विशाल भाटिया

879
01:10:00,720 --> 01:10:05,920
जी जय श्री राम जय श्री राम शिवांश

880
01:10:05,920 --> 01:10:10,680
हम जी

881
01:10:10,680 --> 01:10:15,760
बोलिए कहां गए चले ही

882
01:10:15,760 --> 01:10:21,760
गए जोगेंदर जी आप अपना

883
01:10:22,320 --> 01:10:26,400
कैमरा आपका चेहरा नहीं दिख रहा है ठीक से थोड़ा उजाले

884
01:10:26,400 --> 01:10:30,400
में रहिए जी बताइए जय श्री राम

885
01:10:30,400 --> 01:10:34,520
जय श्री राम भाई जी

886
01:10:34,520 --> 01:10:38,560
मैं ना थोड़ा बोलने वाला था ड़

887
01:10:38,560 --> 01:10:43,400
ये जो रामपाल जो है रामपाल जी

888
01:10:43,400 --> 01:10:47,720
इनसे थोड़ा मेरा भी एक बार थोड़ा ऐसा हो गया था कनेक्शन मतलब मैं भी थोड़ा इनसे

889
01:10:47,720 --> 01:10:52,000
बात इनकी सुनी थी ना मैंने बोलते ब्राह्मण सारे जो

890
01:10:52,000 --> 01:10:56,080
मतलब य कलयुग के आ

891
01:10:56,080 --> 01:11:00,120
क्या बोलते क्या बोलते ब्राह्मणों को

892
01:11:00,120 --> 01:11:04,280
य जो राक्षस बोलते हैं मतलब ये जो रामपाल

893
01:11:04,280 --> 01:11:08,360
जी इस बात से थोड़ा मैं भी इससे थोड़ा मतलब मेरा

894
01:11:08,360 --> 01:11:12,360
मन विचलित हो गया तो मैं भी किसी और मतलब दृष्टि मतलब

895
01:11:12,360 --> 01:11:17,160
किसी नहीं देता बाद में यह बात सुनके

896
01:11:17,160 --> 01:11:21,280
इकी मैं भी जो है श्री वृंदावन धाम में

897
01:11:21,280 --> 01:11:25,600
वृंदावन श्री अचार जी महाराज

898
01:11:25,600 --> 01:11:29,600
इनकी कथा सु जी तो

899
01:11:29,600 --> 01:11:33,800
मैंने इनकी वीडियो सुनी थी ना ब्राह्मण जितने ब्राह्मण है राक्षस मतलब उनकी फोटो

900
01:11:33,800 --> 01:11:38,640
ला लाकर भेजते हैं हर बार वीडियो अपनी अपलोड करते हैं

901
01:11:38,640 --> 01:11:42,800
डाल देते हैं कभी बागेश्वर धाम उनको डाल देते कभी प्रेमानंद जी महाराज

902
01:11:42,800 --> 01:11:47,440
को डाल देते हैं ऐसे डाल के उसके लिख ब्रा

903
01:11:47,440 --> 01:11:51,600
े नहीं डालेंगे क्योंकि हा इसको

904
01:11:51,600 --> 01:11:56,600
लिखते थे वो कलयुग सतयुग के जो राक्षस है वही कलयुग के ब्रा

905
01:11:56,600 --> 01:12:01,240
लेे य पर आएंगे तो यहां पर आएंगे तो चोट लग जाएगी उनको

906
01:12:01,240 --> 01:12:05,480
इसी वा से थोड़ा मेरा ही मन भटकने लगा था उस बा सुनके तो फिर मैंने देखा

907
01:12:05,480 --> 01:12:09,680
जब मेरे को पता लगा राक्षस देख सकते अपनी आखों से जैसे क्या

908
01:12:09,680 --> 01:12:13,680
कोई ब्राह्मण है ब्राहमण के रूप में कोई क्या बो दारू पी रहा है या फिर मानसून खा रहाय सब खा

909
01:12:13,680 --> 01:12:17,680
रहा है तो मतलब हम उसको दे सकते गलत आचरण कर रहा है मतलब

910
01:12:17,680 --> 01:12:21,760
उसको हम राक्षस कह सकते हैं मतलब सबके लिए बात नहीं है जो गलत काम कर

911
01:12:21,760 --> 01:12:25,760
रहा है उसके लिए हम कह सकते अरे भैया में लिखा

912
01:12:25,760 --> 01:12:29,880
हुआ है रामायण महात्म में

913
01:12:29,880 --> 01:12:32,720
रामायण महात्म में क्या लिखा

914
01:12:32,720 --> 01:12:37,120
है कलयुग के लोग काम वेदना

915
01:12:37,120 --> 01:12:41,640
से पीड़ित और लालची होंगे

916
01:12:41,640 --> 01:12:45,720
तो क्या यह रामपाल दास जी को काम वेदना से पीड़ित वाला

917
01:12:45,720 --> 01:12:49,720
समझते हैं क्या लालची समझते हैं क्या या

918
01:12:49,720 --> 01:12:53,800
जो उनके सेवादार है जो उनके सेवादार है

919
01:12:53,800 --> 01:12:58,280
जो इनके वीडियो रिकॉर्डिंग दिखाते हैं

920
01:12:58,280 --> 01:13:02,280
या नाम दान केंद्र में बैठते हैं वह सब क्या काम

921
01:13:02,280 --> 01:13:06,680
वेदना से पीड़ित रहते हैं क्या वह लालची होते हैं

922
01:13:06,680 --> 01:13:12,680
इसका कोई उत्तर नहीं है आगे आगे देखिए इसी में लिखा

923
01:13:13,160 --> 01:13:18,120
है कि कलयुग की स्त्रियां और

924
01:13:18,120 --> 01:13:22,640
यह देखिए व्यभिचार हम

925
01:13:22,640 --> 01:13:26,680
यहां पर सब लिखा है तो हमारे घर की माताएं

926
01:13:26,680 --> 01:13:30,760
बहने हैं वो तो नहीं है भई ऐसी हम तो नहीं मानते आप

927
01:13:30,760 --> 01:13:34,960
क्योंकि वहा के ब्राह्मणों की बात हो रही है तो आप कलयुग के सभी ब्राह्मणों को ब्र

928
01:13:34,960 --> 01:13:38,960
राक्षस सोच रहे हो तो आप यहां पर जब कलयुग की स्त्रियों की

929
01:13:38,960 --> 01:13:43,240
बात हो रही तो अपनी स्त्रियों को आप क्या समझते हैं सवाल य आ

930
01:13:43,240 --> 01:13:47,280
जाए तब उनका लेगा नहीं नहीं ग्रंथों में जो लिखा

931
01:13:47,280 --> 01:13:47,920
है वो सभी

932
01:13:47,920 --> 01:13:52,120
स्त्रियों के लिए नहीं लिखा है उसी प्रकार से ग्रंथों में जो लिखा

933
01:13:52,120 --> 01:13:56,240
है वो सभी ब्राह्मणों के नहीं लिखा है यह बात ठीक

934
01:13:56,240 --> 01:14:00,440
हैसे ये सब ब्राह्मण को मतलब ये लोग देखते हैं तो इसी हिसाब से जब इसको सिद्ध

935
01:14:00,440 --> 01:14:05,360
करना चाहते य भी सब सही है तो मतलब अपनी घर में जो इनकी घरवाली जो

936
01:14:05,360 --> 01:14:09,600
मानना इन लोग के लिए मतलब उसको नहीं मानते म इसको सिद्ध करते हैं य

937
01:14:09,600 --> 01:14:13,720
लोग वो अपनी बात को सिद्ध करने के लिए जी विशाल जी जय

938
01:14:13,720 --> 01:14:16,680
श्री

939
01:14:16,680 --> 01:14:21,680
राम जी मेरा नाम मशाल भाटिया विशाल भाटिया मेरे पिताजी का नाम

940
01:14:21,680 --> 01:14:26,040
है अच्छा आपका नाम क्या बताया

941
01:14:26,040 --> 01:14:30,080
आपने मन भाटिया एम ए डबल एन

942
01:14:30,080 --> 01:14:34,840
मन भाटिया अच्छा आपका अध्यात्मिक

943
01:14:34,840 --> 01:14:38,880
बैकग्राउंड जी मैं भी अब ग्रंथों को पढ़ ही रहा हूं मैं मेरा अभी मैं किसी से

944
01:14:38,880 --> 01:14:44,040
जुड़ा नहीं संप्रदाय से अच्छा बताइए

945
01:14:44,040 --> 01:14:48,080
प्रयोजन आपका आने का मैं बस आपको ही

946
01:14:48,080 --> 01:14:52,280
शुभकामनाए देते आ रहा हूं कि आप ऐसे ही आप कार्यरत ऐसे ही रहते रहिए सनातन

947
01:14:52,280 --> 01:14:56,440
धर्म के लिए बहुत-बहुत आभार आपका बहुत बहुत आ

948
01:14:56,440 --> 01:15:00,520
आप ऐसे ही आगे बढ़ते रहिए आपको श्री हनुमान जी आपको

949
01:15:00,520 --> 01:15:03,240
पूरा सामर्थ्य दे शक्ति दे इस चीज के

950
01:15:03,240 --> 01:15:07,320
लिए आप जय श्री राम जय श्री राम

951
01:15:07,320 --> 01:15:11,520
मैं एक सेकंड देखता हूं कि मुझको भी एक प्रमाण देना है शिव पुराण से इनके खंडन में अगर

952
01:15:11,520 --> 01:15:16,600
मेरे को समय मिलता है तो मैं आपको दिखाता हूं अभी ठीक है

953
01:15:16,600 --> 01:15:20,600
ठीक है तो अभी आपको स्टेज से हटा देना जी मैं

954
01:15:20,600 --> 01:15:26,480
बस देखता हूं अभी आप हटा दीजिए तबतक जी

955
01:15:26,480 --> 01:15:32,040
मैं आपको भैया बोल हा क्यों नहीं बोल

956
01:15:32,040 --> 01:15:36,080
बो एक बात बो ये लोग क्या

957
01:15:36,080 --> 01:15:41,000
बो प्रमाण देते मतलब हर बार मतलब गीता मतलब इस पुराण से मतलब प्रमाण देते

958
01:15:41,000 --> 01:15:45,200
तो मतलब पूरी नहीं पढ़ते लोग आधी आ क्य मतलब बीच

959
01:15:45,200 --> 01:15:49,800
के पने क्यों पढ़ के दिखाते सबके लिए उसका आगे पीछे थोड़ पढ़ता

960
01:15:49,800 --> 01:15:53,840
लिए इसके अंदर ये भी लिखा हुआ है मगर उसको काट देंगे बीच में दिखा उसको बताएंगे

961
01:15:53,840 --> 01:15:58,080
सब लिखा हु ये तो पूरा दिखाना चाहिए उनके लिए

962
01:15:58,080 --> 01:16:02,080
खा मैं इसीलिए ज्यादा ग्रंथों की बात नहीं

963
01:16:02,080 --> 01:16:06,160
करता हूं क्योंकि वह जो ग्रंथ में खोल के दिखा दूंगा यह कर दूंगा वह कर दूंगा

964
01:16:06,160 --> 01:16:10,360
उसके बाद व उसकी बात ही नहीं करेंगे जो मैंने दिखाया वह उसी की बात करेंगे

965
01:16:10,360 --> 01:16:14,880
जो उन्होंने रटा है बस उसके अलावा तो सब बाउंसर जाएगा ना

966
01:16:14,880 --> 01:16:18,400
शायद वो ब्रेटली की बॉल होगी ग्लेन मैगरा की बॉल होगी जो बिल्कुल

967
01:16:18,400 --> 01:16:22,800
सर के ऊपर से चली

968
01:16:22,800 --> 01:16:26,840
जाएगी गन की बड़ी लाइन और लेंथ की तारीफ होती थी ना

969
01:16:26,840 --> 01:16:31,880
जहां चाहे वहां पर उसका वो बल का हो जाता

970
01:16:31,880 --> 01:16:35,960
है तो थोड़ी देर थोड़ी देर पहले कोई महानुभाव आए थे उनको देख

971
01:16:35,960 --> 01:16:40,360
के मैं आया हूं हम और वो भव्या

972
01:16:40,360 --> 01:16:44,440
जी के साथ भी मैंने उनको लाइव स्ट्रीम पर देखा है तो किसके साथ

973
01:16:44,440 --> 01:16:49,040
देखा है जो आपके मित्र है वो भव्य

974
01:16:49,040 --> 01:16:53,240
क्या नाम है उनका भव्य क्या नाम है राधा कृष्ण दास जी भव्य जी अच्छा जो ये

975
01:16:53,240 --> 01:16:57,360
ये आए थे जो विशाल भाटिया जी जी जी जी तो मैं पूछ रहा हूं

976
01:16:57,360 --> 01:17:01,840
कि अगर आपके मन में ये भावना आ गई है क्योंकि उस दिन तो ऐसी भावना नहीं थी

977
01:17:01,840 --> 01:17:06,320
तो आ गई है तो बहुत अच्छी बात है कि जो अभी शुभकामनाए दे रहे थे जो

978
01:17:06,320 --> 01:17:10,360
हां जो अभी शुभकामनाए दे रहे थे अच्छा भावना आपके अंदर आ गई है तो बहुत

979
01:17:10,360 --> 01:17:14,920
अच्छी बात है ठीक है और बाकी तो राम जानते ही है

980
01:17:14,920 --> 01:17:19,160
तो अच्छा है देख के थोड़ा आश्चर्य लगा था एकदम से उनको देखकर

981
01:17:19,160 --> 01:17:23,520
ये तो जाना लग रहा है तो देखा अभी वो गए नहीं है अभी वो है

982
01:17:23,520 --> 01:17:28,840
अभी वो गए नहीं है वो कुछ निकाल के दिखाना चाहते हैं वो है अभी

983
01:17:28,840 --> 01:17:33,200
विशाल हां जी विशाल जी मैं कुछ प्रमाण

984
01:17:33,200 --> 01:17:33,700
दिखाना

985
01:17:33,640 --> 01:17:38,600
चाहता हूं आपको शिवरा जी जी बताइए जी जील

986
01:17:38,600 --> 01:17:43,080
जी उस दिन जिस दिन आप भवेश जी के साथ आए थे तो उस

987
01:17:43,080 --> 01:17:47,240
समय आपको थोड़ा कुछ समस्याएं थी आपकी तो अब आशा

988
01:17:47,240 --> 01:17:51,560
करता हूं दूर हो गई होंगी सुनकर बहुत ही ज्यादा परिवर्तन आया

989
01:17:51,560 --> 01:17:57,560
आपके विचारों में

990
01:17:57,800 --> 01:18:01,880
जी के नाम से कमेंट लिखता हूं फोन पर आपको तो मैं आपको

991
01:18:01,880 --> 01:18:06,760
कुछ प्रमा चाहता से चलिए आप

992
01:18:06,760 --> 01:18:10,760
आप आप भ के भव्य के साथ में लाइव स्ट्रीम में थे

993
01:18:10,760 --> 01:18:14,960
क्या ऐसा कुछ बता रहे भाई साहब भ राधा कृष्ण

994
01:18:14,960 --> 01:18:17,960
दास जी

995
01:18:17,960 --> 01:18:22,080
हा जी था मैं कुछ और था मेरा कोई

996
01:18:22,080 --> 01:18:26,120
मतलब कुछ वो नहीं मे को जो जैसा काम होता था भन से संबंधित श से तो

997
01:18:26,120 --> 01:18:30,120
उस चीज में मेरे को होता था अच्छा ठीक

998
01:18:30,120 --> 01:18:34,520
है ठीक है बताइए प्रमाण मैं प्रमाण आपको दिखाना चाहूंगा शिवपुराण

999
01:18:34,520 --> 01:18:38,760
से मेरा कैमरा उल्टा हो सकता है थोड़ा सा मैं प्रमाण

1000
01:18:38,760 --> 01:18:43,480
ऐसे आप बैक बैक कैमरा चालू कर दीजिए

1001
01:18:43,480 --> 01:18:47,640
एक सेकंड बक प्रमाण दे दीजिए ना देख लेते

1002
01:18:47,640 --> 01:18:48,640
हैं कहां पर है प्रमाण बोल

1003
01:18:48,640 --> 01:18:52,760
दीजिए हमारे पास है शिव पुराण जी

1004
01:18:52,760 --> 01:18:56,960
मेरे पास संक्षिप्त शिव पुराण है संपत आप अध्याय

1005
01:18:56,960 --> 01:19:02,960
बताइए अध्याय अध

1006
01:19:03,640 --> 01:19:07,880
बताइए सेक खोल के दिखा रहा रुद्र संहिता के सृष्टि खंड

1007
01:19:07,880 --> 01:19:11,960
में जाइएगा ठीक है किस बारे में है प्रमाण प्रमाण किस

1008
01:19:11,960 --> 01:19:16,080
बारे में य जो ब्रह्मा विष्णु महेश में जो शिव जी है

1009
01:19:16,080 --> 01:19:20,320
और जो सदाशिव जी है जिनको य काल ब्रम बोलते हैं वो उनकी

1010
01:19:20,320 --> 01:19:26,320
एकता का प्रतिपादन है व मैं उसम दिखाना चाहता हूं

1011
01:19:27,640 --> 01:19:32,480
अच्छा एक

1012
01:19:32,480 --> 01:19:36,920
सेकंड हा सट अब वो संक्षिप्त

1013
01:19:36,920 --> 01:19:42,920
में है तो अध्याय मुझको पता नहीं वो एक

1014
01:19:44,480 --> 01:19:47,760
सेकंड ट

1015
01:19:47,760 --> 01:19:52,400
खंड आप देखिए वो जो है ना षष्ठी खंड में

1016
01:19:52,400 --> 01:19:56,400
जो आपने पेज नंबर खोला होगा पर वो खत्म हो रहा होगा चेंज

1017
01:19:56,400 --> 01:20:00,520
हो रहा होगा वहा लिखा होगा अध्याय इतने से इतने तक है ये जहां पर खत्म

1018
01:20:00,520 --> 01:20:04,640
हो रहा हो उसमें देखिए अध्याय कहां से कहां तक बोला है

1019
01:20:04,640 --> 01:20:08,920
शव पुराण सृष्टि खंड रुद्र संहिता सृष्टि खंड अध्याय

1020
01:20:08,920 --> 01:20:12,600
नंबर अध्याय नंबर

1021
01:20:12,600 --> 01:20:17,560
न अध्याय नंबर न जी

1022
01:20:17,560 --> 01:20:21,720
इसमें है उमा सहित भगवान शिव का प्राकट्य उनके द्वारा अपने स्वरूप

1023
01:20:21,720 --> 01:20:26,000
का विवेचन तथा ब्रह्मा आदि तीनों देवताओ की एकता प्र

1024
01:20:26,000 --> 01:20:30,960
प्रतिपादन जी जी अब मैं इस

1025
01:20:30,960 --> 01:20:35,000
235 एक सेकंड मे पास व संस्कृत वाला है नहीं

1026
01:20:35,000 --> 01:20:39,040
अभी वो मैं पढा कोई बात नहीं पढ़ बता दूंगा बस मुझे बोल दीजिए क्या

1027
01:20:39,040 --> 01:20:41,280
पढ़ना

1028
01:20:41,280 --> 01:20:45,440
है जो सुन पहले उनको उनको जो देख रहे उनको पहले

1029
01:20:45,440 --> 01:20:49,640
उसम दिखा देता हूं कि जो ब्रह्मा जी और विष्णु जी जब बोलते हैं कि आप

1030
01:20:49,640 --> 01:20:53,760
कोई अपने रूप में आइए उतार लीजिए तो उसम पहले

1031
01:20:53,760 --> 01:20:57,760
श्री महेश्वर बोलते हैं मैं सृष्टि पालन और संहार करता हूं और सगुण और

1032
01:20:57,760 --> 01:21:02,000
निर्गुण तथा सच्चिदानंद स्वरूप निर्विकार परब्रह्म परमात्मा हूं उस परे जाइएगा

1033
01:21:02,000 --> 01:21:06,320
ठीक है अब ये देखि जो ब्रह्मा विष्णु मश

1034
01:21:06,320 --> 01:21:10,600
जो तीसरे रुद्र है वो पिता नहीं है वो सब एक ही है इसमें देखिए

1035
01:21:10,600 --> 01:21:14,840
ब्रह्मा जी को बोल रहे भगवान महेश्वर सदाशिव ब्रह्मण

1036
01:21:14,840 --> 01:21:20,200
आपको

1037
01:21:20,200 --> 01:21:24,760
दिखा मेरा ऐसा ही परम उत्कृष्ट रूप

1038
01:21:24,760 --> 01:21:29,000
और संहार करता सगुण निर्गुण निर्विकार सच्चिदानंद लक्षण वाला

1039
01:21:29,000 --> 01:21:32,400
तथा परम ब्रह्म परमात्मा

1040
01:21:32,400 --> 01:21:35,760
हूं अब इसम

1041
01:21:35,760 --> 01:21:40,080
आगे गुण अथवा कार्यों के भेद से मैं ही ब्रह्मा विष्णु

1042
01:21:40,080 --> 01:21:44,160
और रुद्र नाम धारण करके तीन स्वरूपों में विभक्त होता हूं अब य सदाशिव कह

1043
01:21:44,160 --> 01:21:48,160
आप विष्णु पुराण पढ़ोगे तो विष्णु जी कहते हैं कि मैं विष्णु जी का उसम बताया गया कि वो तीन

1044
01:21:48,160 --> 01:21:52,240
रूप धारण करते हैं ठीक है अब इसमें देखिए वो ब्रह्मा जी से कह रहे

1045
01:21:52,240 --> 01:21:56,480
भगवान सदाशिव पहले कि विष्णु तुमने और ब्रह्मा ने मेरे अवतार

1046
01:21:56,480 --> 01:22:00,720
के निमित्त जो स्तुति की है तुम्हारी उस प्रार्थना को मैं अवश्य सच्ची करूंगा

1047
01:22:00,720 --> 01:22:04,960
क्योंकि मैं भक्त वत्सल हूं वो उसमें शिवजी बने तो इसलिए ऐसा वो

1048
01:22:04,960 --> 01:22:09,120
है ये देखिए ब्रह्मण मेरा ऐसा ही परम उत्कृष्ट रूप तुम्हारे

1049
01:22:09,120 --> 01:22:13,240
शरीर से ब्रह्मा जी की विट से प्रकट हुए थे ना तुम्हारे

1050
01:22:13,240 --> 01:22:17,320
शरीर से इस लोक में प्रकट होगा जो नाम से रुद्र कहलाएगा

1051
01:22:17,320 --> 01:22:21,520
मेरे अंश से प्रकट हुए रुद्र की सामर्थ्य मुझसे कम नहीं होगी जो मैं हूं

1052
01:22:21,520 --> 01:22:25,600
वही यह रुद्र है पूजा की विधि विधान की दृष्टि से भी मुझ में और उसमें

1053
01:22:25,600 --> 01:22:29,640
कोई अंतर नहीं है जैसे ज्योति का जल आदि के साथ संपर्क होने पर भी

1054
01:22:29,640 --> 01:22:33,920
उसमें स्पर्श दोष नहीं लगता उसी प्रकार मुझ निर्गुण निर्गुण परमात्मा

1055
01:22:33,920 --> 01:22:35,320
को भी किसी से

1056
01:22:35,320 --> 01:22:39,320
संयोग से बंधन नहीं प्राप्त होता यह मेरा शिव रूप ही है तो यहां पर

1057
01:22:39,320 --> 01:22:43,920
कह रहे हैं कि मैं और वो एक ही है पूजा की दृष्टि में भी कोई नहीं है अब

1058
01:22:43,920 --> 01:22:48,160
इस 38 में श्लोक में ये भी लिखा

1059
01:22:48,160 --> 01:22:52,520
है कि मैं आप ब्रह्मा तथा जो ये रुद्र

1060
01:22:52,520 --> 01:22:56,640
प्रकट होंगे ये सब के सब एक रूप है इनमें कोई

1061
01:22:56,640 --> 01:23:00,720
भेद नहीं है भेद मानने पर अवश्य बधन हो अवश्य ही बंदन होगा तथापि मेरा

1062
01:23:00,720 --> 01:23:04,920
शिव रूप ही सनातन है हां अब इसमें जो उनकी

1063
01:23:04,920 --> 01:23:09,280
शक्ति है उमा ठीक है इसमें जो उनकी

1064
01:23:09,280 --> 01:23:13,280
शक्ति है अब उन्हीं के तीन भाग हुए हैं ठीक है एक तो सरस्वती जी

1065
01:23:13,280 --> 01:23:17,280
हो गई जो ब्रह्मा जी को प्रदान लक्ष्मी जी हो गई जो विष्णु जी को और

1066
01:23:17,280 --> 01:23:21,360
काली हो गई जो रुद्र को अगर यह लोग इनको पिता पुत्र मानते हैं

1067
01:23:21,360 --> 01:23:25,480
तो फिर ये जो तीन शक्तियां उमा जी से प्रकट हुई है ये तो आपस में भाई बहन

1068
01:23:25,480 --> 01:23:29,560
हो गए ना फिर पत्नी पति प अरे वो सब लफड़ा है वो हमने

1069
01:23:29,560 --> 01:23:34,040
पीडीएफ दे दी है वो वो पूरा वो सब झोल है वो सब

1070
01:23:34,040 --> 01:23:38,680
ऐसा इसके सवाल का जवाब दे ये लोग ये लोग आपस में भाई बहन हो गए ना फिर

1071
01:23:38,680 --> 01:23:42,880
जो तीन वो प्रकट हुए सदाशिव से उनसे उमा से जो तीन शक्तिया

1072
01:23:42,880 --> 01:23:47,280
प्रकट हुई लक्ष्मी सरस्वती काली ये विष्णु

1073
01:23:47,280 --> 01:23:50,760
पुराण के ये लोग कहते हैं कि

1074
01:23:50,760 --> 01:23:55,440
जो भगवत गीता है वो काल ने बोली है अब काल कौन

1075
01:23:55,440 --> 01:23:59,440
देख मैं उसका खंडन महाभारत से दिखाऊंगा दिखाऊं आपको

1076
01:23:59,440 --> 01:24:03,680
नहीं मैं मैं जिस जिसका काल के उसको समझाने के लिए जो

1077
01:24:03,680 --> 01:24:08,200
खोलते हैं मैं उसी से दिखाऊंगा विष्णु पुराण बताते हैं

1078
01:24:08,200 --> 01:24:14,200
दूसरा अध्याय दूसरा अंश

1079
01:24:15,480 --> 01:24:19,640
और दूसरा अध्याय प्रथम अंश नहीं नहीं

1080
01:24:19,640 --> 01:24:23,680
भगवत गीता में ही खंडन है काल का मिट विष्णु

1081
01:24:23,680 --> 01:24:28,200
पुराण का ने लिया है ना प्रथम अंश और दूसरा अध्याय

1082
01:24:28,200 --> 01:24:32,200
उसमें विष्णु जी की पहले स्तुति की गई उनको परमात्मा उसम दूसरे अध्याय में बताया

1083
01:24:32,200 --> 01:24:35,760
गया कि वही

1084
01:24:35,760 --> 01:24:41,760
ब्र विष्णु

1085
01:24:45,480 --> 01:24:51,480
पुराण मेरा एक क्या लिखा है 14 से 15

1086
01:24:51,720 --> 01:24:56,000
में यह कुछ दिख रहा हो इसमें खा है जगत

1087
01:24:56,000 --> 01:25:00,160
के रूप से तथा इसके साक्षी पुरुष और महा

1088
01:25:00,160 --> 01:25:03,320
काण काल

1089
01:25:03,320 --> 01:25:07,840
बता हां हां हा इसमें पेज नंबर है 10 नंबर

1090
01:25:07,840 --> 01:25:12,240
10 मेरे पास है हा

1091
01:25:12,240 --> 01:25:16,280
इसमें लिखा है कि नंबर पेज

1092
01:25:16,280 --> 01:25:18,600
नंबर

1093
01:25:18,600 --> 01:25:22,960
10 आपका संस्कृत हिंदी वाला है ना जी

1094
01:25:22,960 --> 01:25:27,480
हां तो इसमें ता वही

1095
01:25:27,480 --> 01:25:31,840
वही इन सब व्यक्त और अव्यक्त जगत रूप से तथा इसके साक्षी

1096
01:25:31,840 --> 01:25:33,760
पुरुष और महा काण काल के

1097
01:25:33,760 --> 01:25:37,840
रूप से स्थित है हे द्विज परम ब्रह्म

1098
01:25:37,840 --> 01:25:42,520
का प्रथम रूप पुरुष है लो यहां पर काल कौन है

1099
01:25:42,520 --> 01:25:44,880
परम

1100
01:25:44,880 --> 01:25:49,440
ब्रह्म यहां पर काल हो गए परम ब्रह्म और देखिए

1101
01:25:49,440 --> 01:25:53,680
ये लोग आधा कॉन्टेक्स्ट ही दिखाते हैं उसके उसका वहा

1102
01:25:53,680 --> 01:25:58,000
से को बता रहे हैं वहीं पर परम ब्रह्म लिखा है और अभी मैं बताता

1103
01:25:58,000 --> 01:26:02,320
हूं आपको नहीं नहीं अब देखिए मैंने शिव

1104
01:26:02,320 --> 01:26:06,560
पुराण से जो दिखाया आपको कि भगवान सदाशिव तीन रूप धारण करते हैं अब ये विष्णु पुराण के दूसरे

1105
01:26:06,560 --> 01:26:11,440
अध्याय में लिखा है जो ब्रह्मा विष्णु महेश्वर शंकर रूप से जगत की उत्पत्ति स्थिति और संहार

1106
01:26:11,440 --> 01:26:15,680
के कारण है तथा अपने भक्तों को संसार सागर से तारने वाले उन विकार रहित

1107
01:26:15,680 --> 01:26:19,880
शुद्ध अविनाशी परमात्मा सर्वदा एकरस विजय भगवान वासुदेव विष्णु

1108
01:26:19,880 --> 01:26:23,960
को नमस्कार है वही दूसरा दूसरा अध्याय पहले अंश का दूसरा

1109
01:26:23,960 --> 01:26:28,200
अध्याय पहला और दूसरा श्लोक हां

1110
01:26:28,200 --> 01:26:33,800
अब श्री राम गीता में हम देखते हैं

1111
01:26:33,800 --> 01:26:38,200
कि दूसरा अध्याय

1112
01:26:38,200 --> 01:26:44,200
और

1113
01:26:53,240 --> 01:26:57,600
पहला मुझको बस एक महाभारत से भी दिखाना है काल का मैं दिखा दूं

1114
01:26:57,600 --> 01:27:01,600
आप आप लोग आप तब तक दिखा दीजिए ये

1115
01:27:01,600 --> 01:27:06,560
देखिए मेरे पास महाभारत है छह खंड की है ना जो गीता प्रस वाली महाभारत

1116
01:27:06,560 --> 01:27:10,600
हम उसका छठा खंड आप लीजिए आपके पीछे छह खंड वाली

1117
01:27:10,600 --> 01:27:14,720
रखी हुई है महाभारत जी जी एक सेकंड

1118
01:27:14,720 --> 01:27:20,120
आप काफी पूरा सब देखे हुए हैं कौन कन सी कहां कहा रखी

1119
01:27:20,120 --> 01:27:24,240
है हमको गीता प्रस का अच्छा लगता है क्योंकि उन्होंने भी काम ही किया है

1120
01:27:24,240 --> 01:27:28,800
हमारी सनातन संस्कृति को बचाने का मगर

1121
01:27:28,800 --> 01:27:33,280
मगर जो भव्य राधा कृष्ण दास है वो तो कहते हैं इसने बड़ा ही फेक ट्रांसलेशन कुछ

1122
01:27:33,280 --> 01:27:37,400
दिखा दिया वो तो ऐसा कुछ कहते हैं रील बना के अब

1123
01:27:37,400 --> 01:27:41,560
वो कन है तो वो अपना सबका अपना अपना वो है कोई बात

1124
01:27:41,560 --> 01:27:46,360
नहीं आप उस परे हम ध्यान नहीं देंगे ये देखिए

1125
01:27:46,360 --> 01:27:48,840
महाभारत है छठा खंड महाभारत का छटा

1126
01:27:48,840 --> 01:27:53,120
खंड अनुशासन पर्व उसका उसका है

1127
01:27:53,120 --> 01:27:55,760
अध्याय नंबर

1128
01:27:55,760 --> 01:28:01,560
147 148

1129
01:28:01,560 --> 01:28:05,760
148 मैं मुझे निकालने की आवश्यकता है आप बता दीजिए क्या लिखा

1130
01:28:05,760 --> 01:28:10,280
है बता 148

1131
01:28:10,280 --> 01:28:14,360
य चैप्टर है इसका इसमें महाभारत के के बाद जब पांडव भीष्म

1132
01:28:14,360 --> 01:28:19,000
पितामह से उपदेश लेते हैं ना बा लेट होते पिता

1133
01:28:19,000 --> 01:28:23,040
तो उस समय जो उदेश देते हैं शांति पर हो गया फिर अभी य अनुशासन

1134
01:28:23,040 --> 01:28:27,200
पर आया है अब इसमें जो पितामह भीष्म है वह भगवान श्री कृष्ण

1135
01:28:27,200 --> 01:28:31,200
की महिमा बता रहे हैं तो मैं कुछ श्लोक बताऊंगा जिससे सिद्ध हो जाएगा कि काल और

1136
01:28:31,200 --> 01:28:36,360
कृष्ण में कोई अंतर ही नहीं है

1137
01:28:36,360 --> 01:28:41,520
देखिए य अनुशासन परव पेज नंबर

1138
01:28:41,520 --> 01:28:45,800
687 ये देखिए संसार में श्लोक नंबर

1139
01:28:45,800 --> 01:28:49,880
35 संसार में कौन सा ऐसा जो ऐसा है जो मेरे

1140
01:28:49,880 --> 01:28:54,400
इस कथन को अन्यथा सिद्ध कर सके पितामह कह रहे हैं श्री कृष्ण का जैसा

1141
01:28:54,400 --> 01:28:58,840
है उसे सुनो जहा भगवान श्री कृष्ण है वहां सर्वोत्तम पुष्टि विद्यमान है

1142
01:28:58,840 --> 01:29:03,000
ठीक है अब ये लोग कहते हैं कि श्री कृष्ण की जन्म होता है

1143
01:29:03,000 --> 01:29:07,200
महाभारत का सबसे पहला अध्याय पढ़ेंगे ना तो उसमें भगवान श्री कृष्ण को सबसे पहले

1144
01:29:07,200 --> 01:29:11,480
अध्याय में परमात्मा बताया गया यह भी बताया गया कि भगवान श्री कृष्ण से ही जन्म मृत्यु वगैरे

1145
01:29:11,480 --> 01:29:15,800
उत्पन्न होते है वो तो आप सही कह रहे हैं वो तो अनेकानेक

1146
01:29:15,800 --> 01:29:19,880
ऐसे शास्त्र है जहा भगवान श्री कृष्ण की परब्रह्म राम की परब्रह्म

1147
01:29:19,880 --> 01:29:24,240
सिद्ध है मगर मैं तो

1148
01:29:24,240 --> 01:29:28,360
तो जिस शास्त्र को यह हाथ में लेकर बात कर रहे हैं मैं उस शास्त्र

1149
01:29:28,360 --> 01:29:32,440
को बिना बदले ही इनको बता रहा हूं ना कि वहीं पर भगवान श्री कृष्ण

1150
01:29:32,440 --> 01:29:36,520
को परम ब्रह्म कहा जा रहा है नौवे स्कंध में अब

1151
01:29:36,520 --> 01:29:40,560
मैं यहां पर आया हूं उसी अध्याय के 39 श्लोक में ठीक है 39

1152
01:29:40,560 --> 01:29:44,560
से 40 श्लोक में ये दो श्लोक पढ़ूंगा जब श्री कृष्ण विषव रूप दिखाते

1153
01:29:44,560 --> 01:29:48,560
हैं तो कहते हैं ना कि मैं काल हूं और अर्जुन ये सब जो क्षत्रिय लोग है पहले

1154
01:29:48,560 --> 01:29:51,400
ही मेरे हाथों आए गए हैं तुम बस निमित मात्र हो इनको मारने के लिए

1155
01:29:51,400 --> 01:29:56,280
तुम निमित बन जाओ अब इसके आगे आप

1156
01:29:56,280 --> 01:29:56,780
ये

1157
01:29:56,440 --> 01:30:00,520
सब राजा लोग युद्ध के मुहाने पर काल के द्वारा मारे गए हैं हम भी काल

1158
01:30:00,520 --> 01:30:03,880
से ही मारे जाएंगे क्योंकि काल ही परमेश्वर है

1159
01:30:03,880 --> 01:30:08,400
एक सेकंड ठीक है

1160
01:30:08,400 --> 01:30:13,400
एक सेकंड रुकिए मैं म्यूट करके आया हूं ठीक है दो मिनट मैं बताता

1161
01:30:13,400 --> 01:30:17,440
हूं मैं भी एक दिखा दूं आप आप जा सकते हैं

1162
01:30:17,440 --> 01:30:21,520
ये अद्भुत रामायण का 11 से

1163
01:30:21,520 --> 01:30:26,160
14 अध्याय है जिसमें कि श्री राम गीता दी गई है

1164
01:30:26,160 --> 01:30:30,280
श्री राम गीता में भगवान कह रहे हैं मुझ

1165
01:30:30,280 --> 01:30:34,520
अव्यक्त से मुझ अव्यक्त से

1166
01:30:34,520 --> 01:30:39,520
काल की उत्पत्ति होती है किससे होती है मुझ अव्यक्त

1167
01:30:39,520 --> 01:30:43,640
से और उससे प्रधान नामक तत्व और परम

1168
01:30:43,640 --> 01:30:48,000
पुरुष की तो परम पुरुष की उत्पत्ति यहां पर राम से हो रही श्री

1169
01:30:48,000 --> 01:30:52,040
राम और आगे क्या लिखा है इसके 22 में

1170
01:30:52,040 --> 01:30:58,040
श्लोक में

1171
01:31:01,320 --> 01:31:06,000
की मुझ एक मैं सर्वव्यापी

1172
01:31:06,000 --> 01:31:11,680
परमेश्वर शांत और ज्ञान स्वरूप हूं मुझसे परे कुछ नहीं है मुझे

1173
01:31:11,680 --> 01:31:17,200
जान य हनुमान जी को उपदेश दे रहे गीता संग्रह में

1174
01:31:17,200 --> 01:31:21,520
हा और मेरे सानिध्य से

1175
01:31:21,520 --> 01:31:25,960
यह काल सारे जगत की सृष्टि का करता है तो यहां पर क्योंकि सृष्टि

1176
01:31:25,960 --> 01:31:30,200
से उत्पन्न है तो यहां पर जो काल है माया पति में लीला

1177
01:31:30,200 --> 01:31:34,320
पूर्वक काल के सहयोग से इस संपूर्ण जगत की सदा सृष्टि

1178
01:31:34,320 --> 01:31:40,040
और इसका संघार करता रहता

1179
01:31:40,040 --> 01:31:44,720
हूं तो यह सारे हैं कोई और आना चाहे तो बताए भाई कौन-कौन

1180
01:31:44,720 --> 01:31:49,600
है मैं आपको इनकी एक चीज और

1181
01:31:49,600 --> 01:31:54,040
बताऊ बताऊ एक जी हा बोलिए का

1182
01:31:54,040 --> 01:31:59,960
छवा श्लोक है सर्व धर्मा पर माम शरण 18 अध्याय

1183
01:31:59,960 --> 01:32:04,440
का उसमें जो ब्रज शब्द आया है ब्रज शब्द

1184
01:32:04,440 --> 01:32:08,720
उसम इनका मानना है कि ब्रज शब्द का मतलब जाना होता है आना नहीं होता

1185
01:32:08,720 --> 01:32:12,720
तो इन लोगों ने उसका अर्थ पता है क्या किया जैसे उसमें हम पढ़ते हैं कि समस्त पूजा को

1186
01:32:12,720 --> 01:32:16,920
त्याग कर समस्त समस्त धर्मों को त्याग कर त एक मात्र मेरी शरण में आ मैं तुझे

1187
01:32:16,920 --> 01:32:21,480
संपूर्ण पापों से मुक्त कर दूंगा तो करते मेरी श से

1188
01:32:21,480 --> 01:32:25,680
य कह रहे कि इसमें उन्होने अर्थ किया है समस्त पूजा को मुझ में त्याग

1189
01:32:25,680 --> 01:32:29,920
कर मेरी समस्त पूजा को मुझ में त्याग कर त उस एक परमात्मा की शरण में चला जा मैं तुझे

1190
01:32:29,920 --> 01:32:34,000
संपूर्ण पाप से छुड़वा दूंगा और य धर्म का भी अन्ने

1191
01:32:34,000 --> 01:32:39,200
बदल दिया पूजा वही शलोक में नहीं लिखा

1192
01:32:39,200 --> 01:32:43,360
सजान समझ में नहीं आता मुझे भी बतानी थी

1193
01:32:43,360 --> 01:32:47,400
जैसे मैंने बताया शरीर के भाया जो व मतलब अपनी एक अलग

1194
01:32:47,400 --> 01:32:51,800
स्टोरी बना के बैठे निराकार है

1195
01:32:51,800 --> 01:32:55,960
उनसे जो पुरुष प्रकट पुरुष है और उन्होंने सबको काल बंधन

1196
01:32:55,960 --> 01:32:59,960
में फसा दिया मतलब सारा ब्लेम जो है सारा टेंशन जो है कर्म बंधन का

1197
01:32:59,960 --> 01:33:04,280
जो भी है वो सब काल के सिर पर डाल दिया और जो परमात्मा है निराकार

1198
01:33:04,280 --> 01:33:08,400
वो इनके कबीर है और वो एकदम निर्दोष है मतलब उनका कोई दोष

1199
01:33:08,400 --> 01:33:12,440
नहीं है जो जीवात्मा जो सह रही है और वगैरह जो भी चीजें हो रही है उसमें उनका

1200
01:33:12,440 --> 01:33:16,640
कोई दोष नहीं है तो ये स्टोरी बना के भी लोगों को समझाई जा रही है तो अगर

1201
01:33:16,640 --> 01:33:20,720
कोई ये भी कह देता है मतलब ये भी ये चीज प्रूव करते है कि देखो कृष्णा ही काल है या महादेव

1202
01:33:20,720 --> 01:33:24,960
ही काल है तो फिर उससे ये मतलब कृष्णा कृष्णा

1203
01:33:24,960 --> 01:33:29,000
ही काल है मगर कृष्णा ही परम ब्रह्म भी है ये भी तो

1204
01:33:29,000 --> 01:33:33,040
कह रहे हैं हां दूसरी बात दूसरी बात

1205
01:33:33,040 --> 01:33:37,040
ये है क्या कबीर भविष्य नहीं जानते थे कि जिसको मैं बना रहा हूं काल को

1206
01:33:37,040 --> 01:33:41,480
ये लोगों को फसाए हा उसमें बताते जाते

1207
01:33:41,480 --> 01:33:45,960
उनको पता नहीं था वो अनजान थे तो भा थे

1208
01:33:45,960 --> 01:33:50,760
जय श्री राम जय श्री अच्छा अच्छा विशाल जी आने के लिए आपका बहुत-बहुत आभार

1209
01:33:50,760 --> 01:33:54,360
जी बहुत आनंद आ गया जय श्री राम ब आभार

1210
01:33:54,360 --> 01:33:58,720
आपका आप आए और आपने अपना समय यहां पर दिया अच्छा लगा आपसे बात करके

1211
01:33:58,720 --> 01:34:04,720
जय श्री राम जय श्रीम जय

1212
01:34:08,840 --> 01:34:09,840
श्रीम

1213
01:34:09,840 --> 01:34:12,840
धर्मेंद्र

1214
01:34:12,840 --> 01:34:16,160
जी

1215
01:34:16,160 --> 01:34:21,880
बताएं आपका

1216
01:34:21,880 --> 01:34:26,680
परिचय हेलो आपका परिचय

1217
01:34:26,680 --> 01:34:32,280
अन म्यूट कर लीजिए जवाब

1218
01:34:32,280 --> 01:34:36,520
दीजिए सुन पा रहे हैं सर

1219
01:34:36,520 --> 01:34:42,520
मैं आपको पहले तो क्या करना

1220
01:34:43,600 --> 01:34:47,960
चाहेंगे नमस्कार कहना चाहूंगा मैं आपको पहले तो

1221
01:34:47,960 --> 01:34:52,200
अच्छा जय श्री राम

1222
01:34:52,200 --> 01:34:56,280
जी ज राम सर मैं काफी दिनों से आपका

1223
01:34:56,280 --> 01:35:01,160
वीडियो देख रहा हूं और डिबेट भी देख रहा हूं बहुत सारा

1224
01:35:01,160 --> 01:35:07,160
जी तो मुझे एक चीज समझ में नहीं आ रही

1225
01:35:08,280 --> 01:35:13,000
है आप जो आध्यात्मिक ज्ञान

1226
01:35:13,000 --> 01:35:17,320
है उस पहलू को छोड़ के आप पहले तो

1227
01:35:17,320 --> 01:35:23,320
ऐसे क्वेश्चन करते हो जो समझ में नहीं आता किसी के

1228
01:35:24,520 --> 01:35:28,560
क्योंकि आप दोहरे क्वेश्चन करते हो आपके उसम मुझे मालूम

1229
01:35:28,560 --> 01:35:32,640
है भाई साहब सुनि मेरी बात सुनिए भाई

1230
01:35:32,640 --> 01:35:36,880
साहब मेरी बात एक मैं आपको टोकू यहां पर आप हमारी

1231
01:35:36,880 --> 01:35:41,560
समीक्षा मत करिए हमारी समीक्षा करने के लिए जिनको

1232
01:35:41,560 --> 01:35:45,880
अधिकार है वह हमारी समीक्षा करते हैं गलती पाए जाने पर डंडे

1233
01:35:45,880 --> 01:35:50,080
भी पड़ते हैं मार भी पड़ती है आप हमारी समीक्षा

1234
01:35:50,080 --> 01:35:54,120
ना करें आप हमें यह बताए कि आपको क पर

1235
01:35:54,120 --> 01:35:58,400
कौन सी बात है जो हमने गलत कही है वो प्रतिकार करिए आप

1236
01:35:58,400 --> 01:36:02,440
आपकी समीक्षा नहीं करूंगा क्योंकि हम तो उस मार्ग के लोग

1237
01:36:02,440 --> 01:36:04,920
हैं के ना काऊ से दोस्ती ना काऊ

1238
01:36:04,920 --> 01:36:09,880
सेर आप तो

1239
01:36:09,880 --> 01:36:13,880
डंडे प्रॉब्लम यह है कि हम अननेसेसरी जो कंटेंट है

1240
01:36:13,880 --> 01:36:18,760
वो नहीं लाना चाहते हैं कि यहां से इनके प्रवचन निष्कासित हो

1241
01:36:18,760 --> 01:36:22,880
फिर वहां वो कटिंग करके दिखाए कि देखो इसने यह बोला था वहां जाकर के यह

1242
01:36:22,880 --> 01:36:26,920
सब हम नहीं कर ना चाहते हैं भाई आपको मैं बता रहा हूं आप कट टू

1243
01:36:26,920 --> 01:36:31,000
कट बात करिए पॉइंट टू पॉइंट क्या कबीर भगवान है वेदों में

1244
01:36:31,000 --> 01:36:35,000
प्रमाण है अगर आप मानते हैं तो क्या आप प्रूफ दे सकते हैं इस तरह की

1245
01:36:35,000 --> 01:36:39,560
बातें आप करिए आध्यात्म की आपको अगर चर्चा चाहिए आध्यात्म

1246
01:36:39,560 --> 01:36:43,640
सुनने के लिए आप गुरुदेव के प्रवचन सुने गुरुदेव के वहां जाए

1247
01:36:43,640 --> 01:36:47,640
पुरी शंकराचार्य जी के वहां पर जाएं उनका य चैनल है वहां

1248
01:36:47,640 --> 01:36:51,800
पर जाकर के उनको देखें वहां आपको अध्यात्म की बहुत अच्छी अच्छी चीजें

1249
01:36:51,800 --> 01:36:55,840
सुनाई देंगी हम तो क्या कौन होते अध्यात्म का वो प्रवचन

1250
01:36:55,840 --> 01:37:00,240
करने वाले तो आप जो है कृपा करके यह बताइए

1251
01:37:00,240 --> 01:37:04,360
क्या वेदों में प्रमाण है कबीर भगवान है अगर है तो हमें वो

1252
01:37:04,360 --> 01:37:09,080
प्रमाण दिखाए ठीक है मैं दोबारा ले रहा हूं

1253
01:37:09,080 --> 01:37:09,580
व्यर्थ

1254
01:37:09,360 --> 01:37:13,480
की कोई चर्चा नहीं चाहिए भाई साहब मैं फिर कह रहा हूं व्यर्थ की

1255
01:37:13,480 --> 01:37:18,160
चर्चा नहीं चाहिए विषय विषय प रहिए

1256
01:37:18,160 --> 01:37:24,160
विषय प ही बात करूंगा विषयों प ही बात करूंगा

1257
01:37:24,240 --> 01:37:28,320
पहले तो हम यह जानेंगे कि कबीर साहेब को संत रामपाल जी महाराज

1258
01:37:28,320 --> 01:37:32,520
ने पूर्ण परमात्मा क्यों कहा गया है भाई इस

1259
01:37:32,520 --> 01:37:36,760
भी तो आप जाओ बा बता आप एक बात बताइए पूर्ण

1260
01:37:36,760 --> 01:37:41,360
का अर्थ क्या होता है चलिए इसी पर आज करते हैं बात पूर्ण का अर्थ क्या

1261
01:37:41,360 --> 01:37:45,760
है पूर्ण का मतलब य

1262
01:37:45,760 --> 01:37:49,920
है अगर ये कबीर जी है तो आधा परमात्मा कौन है

1263
01:37:49,920 --> 01:37:54,360
सवा परमात्मा कौन है य बता दीजिए

1264
01:37:54,360 --> 01:37:58,480
पूर्ण का य देखिए सर सभी धर्म

1265
01:37:58,480 --> 01:38:02,960
अपनी अपनी ढपली पीट रहे हैं सभी धर्म

1266
01:38:02,960 --> 01:38:06,960
मैंने आपको कहा ना मुझे मालूम हैसी भर के आए आपके चेहरे से

1267
01:38:06,960 --> 01:38:12,440
प्रकट हो रहा है आप उसको थोड़ा तसल्ली में धैर

1268
01:38:12,440 --> 01:38:15,760
रखिए

1269
01:38:15,760 --> 01:38:20,200
आप एक तो बिना फॉर्म भरे जो लोग आते उनसे य प्रॉब्लम होती है

1270
01:38:20,200 --> 01:38:24,280
वो न्यू सेंस फैला देते हैं और जो फॉर्म भर के उनसे हम पहले

1271
01:38:24,280 --> 01:38:28,720
ही बात करके संतुष्ट हो जाते हैं कि इनको स्क्रीन पर लाना है कि नहीं लाना है

1272
01:38:28,720 --> 01:38:32,880
यह प्रॉब्लम हो जाती है अब कोई व्यक्ति बिना बनियान के आ गया भाई कैमरा ऑन

1273
01:38:32,880 --> 01:38:37,600
कर दिया यह भी सोचना पड़ेगा जीब

1274
01:38:37,600 --> 01:38:41,840
है घर में बैठे हैं वहा टीशर्ट कंधे

1275
01:38:41,840 --> 01:38:46,120
पर डली और अब अरे यार यह कैसी लाइव स्ट्रीम होती है लोग य भी

1276
01:38:46,120 --> 01:38:50,240
देखेंगे य कैसा चैनल है किस प्रकार के लोग

1277
01:38:50,240 --> 01:38:54,240
यहां चर्चा कर रहे हैं यह भी अब क्या करें उनसे बात करनी पड़ेगी नहीं

1278
01:38:54,240 --> 01:38:58,680
करोगे तो कहोगे कि भाई वो देखो देखो कायर है

1279
01:38:58,680 --> 01:39:02,720
हा जवाब नहीं है इसके पास लिए हटा दिया अब वो व्यक्ति जो आया था

1280
01:39:02,720 --> 01:39:06,840
अभी कुछ दिन पहले रतन रजत करके उसका कुछ

1281
01:39:06,840 --> 01:39:10,920
नाम था वो आ कर के ऐसे मैंने बोला कबीर क्या वेदों में प्रमाण

1282
01:39:10,920 --> 01:39:14,960
है कबीर भगवान है अरे आपको यही नहीं पता

1283
01:39:14,960 --> 01:39:19,560
तो मैंने कहा अरे भाई इसको हटाओ अब उसने वहा फेसबुक पर डाला है

1284
01:39:19,560 --> 01:39:25,000
भगोड़ा मेरे लिए आवान भगोड़ा

1285
01:39:25,000 --> 01:39:27,800
तो या तो इनकी यह सब कारस्तानी झेले

1286
01:39:27,800 --> 01:39:31,920
हम लोग यहां बैठ कर के तीन घंटे चार घंटे नहीं नहीं नहीं नहीं भाई और अगर हमने

1287
01:39:31,920 --> 01:39:37,120
इनको हटाया इनकी कारस्तानी हों को नहीं झेला तो जैसे वह तथाकथित

1288
01:39:37,120 --> 01:39:41,920
कृष्ण भक्त मैंने आवान रा दिया

1289
01:39:41,920 --> 01:39:45,840
वो मेरे से डर

1290
01:39:45,840 --> 01:39:49,920
गया उस दिन तो मतलब सबका सर दर्द हो गया था लेकिन

1291
01:39:49,920 --> 01:39:53,920
छ हा अरे उस दिन आपकी माता जी ने क्या

1292
01:39:53,920 --> 01:39:57,920
कहा था उस दिन की चर्चा के बारे में

1293
01:39:57,920 --> 01:40:02,120
अरे छोड़िए मेरी माता जी तो मेरी माता जी वो

1294
01:40:02,120 --> 01:40:06,320
हो जाती है ना भाव हा तो कहते है अरे इस पापी को समझ

1295
01:40:06,320 --> 01:40:10,440
में नहीं आ रहा है क्या एक बार में कितनी बार समको वो थोड़ा

1296
01:40:10,440 --> 01:40:14,760
ऐसे हो जाती है तो मैंने कहा मम्मी लास्ट में वो जो साढ़े तीन घंटे

1297
01:40:14,760 --> 01:40:18,760
के बाद जब हुए थे और वो बात जब हो रही थी ना कि

1298
01:40:18,760 --> 01:40:22,840
वो ईश्वर अगर वो है सृष्टि की रचना और वो इच्छा नहीं

1299
01:40:22,840 --> 01:40:27,400
है तो फिर अगर वो सच्चिदानंद है तो वो

1300
01:40:27,400 --> 01:40:31,520
वो निर्गुण कैसे है उस समय मैं इतना मतलब थ

1301
01:40:31,520 --> 01:40:35,680
एक तो पूरा शायद व संडे का दिन था क्या पता नहीं

1302
01:40:35,680 --> 01:40:39,760
संडे का नहीं था कोई और दिन था पर मैंने अपना जो भोजन

1303
01:40:39,760 --> 01:40:42,840
प्राप्त किया था उसको भी कि काफी समय हो गया था और मेरे

1304
01:40:42,840 --> 01:40:46,960
हा दिन स्प कर दिया था दोपहर का स्किप किया था सुबह लिया

1305
01:40:46,960 --> 01:40:51,000
था और बहुत लेट हो गया था रात भर उससे जदा एनर्जी बर्बाद

1306
01:40:51,000 --> 01:40:55,240
हुई थी चिल्लाने में सा लगातार वोकल य

1307
01:40:55,240 --> 01:40:59,360
वॉइस का यूज हो रहा है तो मैंने उसको हटाने का निर्णय पता है कब लिया

1308
01:40:59,360 --> 01:41:03,440
जब मैंने गिलास उठाया पानी पीने के लिए और मैं अपने हाथ को देख रहा हूं

1309
01:41:03,440 --> 01:41:07,640
कि मेरा हाथ काप रहा है तो मैंने कहा कि अब एक चर्चा

1310
01:41:07,640 --> 01:41:11,800
किसी और दिन रख लेंगे और मैंने उससे कहा भी कि हट

1311
01:41:11,800 --> 01:41:16,640
जाओ हट जाओ मगर जाएगी य

1312
01:41:16,640 --> 01:41:21,480
बात करते हुए य भीय भी कटिंग लग जाएगी तो

1313
01:41:21,480 --> 01:41:25,520
मैंने उससे कहा भी काफी देर हो चुकी है चर्चा किसी और दिन ल उसके अंदर

1314
01:41:25,520 --> 01:41:29,520
एक बवासी भर चुकी थी कि इसने जो है मेरे ईश्वर को बाधित सिद्ध

1315
01:41:29,520 --> 01:41:33,560
कर दिया है उसने थोड़ी देर पहले ही मान लिया था ना

1316
01:41:33,560 --> 01:41:37,960
कि एक नियम है लगा हुआ है ईश्वर अपनी देह का नाश नहीं कर सकता

1317
01:41:37,960 --> 01:41:42,000
ईश्वर की इच्छा नहीं हो सकती अपनी देह का नाश करने की उसने मान

1318
01:41:42,000 --> 01:41:46,280
लिया था वादित हो गया ईश्वर अब उसके अंदर य बवासी थी

1319
01:41:46,280 --> 01:41:51,000
नहीं मैं नहीं जाऊंगा तो तब मुझे ऐसा निर्णय लेना पड़ा कि भाई

1320
01:41:51,000 --> 01:41:55,240
हटाओ और किसी और दिन स विवेक से विवेक पूर्ण

1321
01:41:55,240 --> 01:41:57,960
आदर सम्मान के साथ दोबारा रख लिया जाएगा मगर उसने उतनी

1322
01:41:57,960 --> 01:42:01,960
देर में क्या किया वहां जाके अपने ा इत्यादि इत्यादि

1323
01:42:01,960 --> 01:42:06,080
पर चालू कर दिया कॉमेडी बनाना चेहरा बिगाड़ना

1324
01:42:06,080 --> 01:42:10,320
सब कुछ उसने चालू कर दिया और फिर हमने इधर से कुछ सच्चा भरे

1325
01:42:10,320 --> 01:42:14,440
बनाए तो फिर उसके प्रतिकार में तो उसने फिर अर्थ का अनर्थ ही

1326
01:42:14,440 --> 01:42:19,120
कर दिया वो सब लंबी कहानी जी कौन आए

1327
01:42:19,120 --> 01:42:23,320
हैं धर्मेंद्र जी आप आप रहने दीजिए आप

1328
01:42:23,320 --> 01:42:27,960
आपसे हम चर्चा नहीं करेंगे क्योंकि आपको चर्चा नहीं करनी आपको जो है

1329
01:42:27,960 --> 01:42:33,960
कुछ और नैरेटिव के साथ आप आए ठीक

1330
01:42:35,400 --> 01:42:39,480
है जी हर हर महादेव शिवांश भैया हर

1331
01:42:39,480 --> 01:42:43,680
हर महादेव आप दिख नहीं रहे आपका केवल वो भैया

1332
01:42:43,680 --> 01:42:48,040
मैं एक्चुअली अभी ऑन ड्यूटी में हूं मलेशिया से कनेक्ट हूं मैं अच्छा

1333
01:42:48,040 --> 01:42:52,360
अच्छा मलेशिया में कहां से मलेशिया में मैं शिलांग

1334
01:42:52,360 --> 01:42:58,360
गढ़ में हूं कोलपुर से थोड़ी दूरी में

1335
01:42:59,680 --> 01:43:03,680
अच्छा आप बहुत अच्छा कार्य कर रहे हैं क्योंकि देखो

1336
01:43:03,680 --> 01:43:07,720
अंधविश्वास इतना फैला हुआ है कुछ चर्चा मेरी भी होती

1337
01:43:07,720 --> 01:43:12,240
रहती है एक चीज आपको बताना चाहूंगा शं भैया

1338
01:43:12,240 --> 01:43:16,440
जैसे ये लोग बोलते हैं कि किसने कहा जैसे परमात्मा है तो

1339
01:43:16,440 --> 01:43:20,800
वेदों में क्यों नहीं है परमाण उसका पर वेदों में उनकी क्वालिटी

1340
01:43:20,800 --> 01:43:25,720
बताई गई है ज जैसे चारों वेदों में है

1341
01:43:25,720 --> 01:43:30,280
जो कति शास्त्रों में भगवान श्री कृष्ण का प्रमाण है

1342
01:43:30,280 --> 01:43:34,400
पहली बात तो यह है मैं रेखा बता देता हूं आपको शति

1343
01:43:34,400 --> 01:43:39,000
शास्त्रों में भगवान श्री कृष्ण का प्रमाण है और रामचंद्र

1344
01:43:39,000 --> 01:43:45,000
जी के बारे में भी प्रमाण है चुटियों में

1345
01:43:47,520 --> 01:43:51,760
जी जी जैसे ये अध्याय 11 का 32 वा श्लोक

1346
01:43:51,760 --> 01:43:56,040
खोल के दिखा एक एक 75

1347
01:43:56,040 --> 01:44:00,160
और चार में हे तेजस्वी कृष्ण आप हम भक्त

1348
01:44:00,160 --> 01:44:04,360
जनों के बंधु मित्र और प्यारे हो अतः हम सभी जनों

1349
01:44:04,360 --> 01:44:09,560
के सखा होने के कारण सर्वथा स्तुत्य हो

1350
01:44:09,560 --> 01:44:13,680
जी अभी मैं मूर्ति पूजा वाला चैप्टर है उससे निकाल के आपको बहुत

1351
01:44:13,680 --> 01:44:17,920
सारे प्रमाण बता देता हूं जी जी नहीं

1352
01:44:17,920 --> 01:44:22,080
जो वो सहस्त्र शीर्ष जो विराट रूप दिखाया था श्री कृष्ण

1353
01:44:22,080 --> 01:44:26,280
जी ने गीता में देखिए श्री राम के वैदिक प्रमाणों का

1354
01:44:26,280 --> 01:44:30,520
यहां पूरा संक्षिप्त में जी जी विवरण है

1355
01:44:30,520 --> 01:44:34,760
श्री राम के वैदिक प्रमाण और जी

1356
01:44:34,760 --> 01:44:40,760
श्री कृष्ण के वैदिक प्रमाण भी हैं

1357
01:44:57,520 --> 01:45:01,720
जैसे अर्थ वेद के अवेद का अध्याय 21 और

1358
01:45:01,720 --> 01:45:05,760
32 जो विराट परम पुरुष का रूप दिखाया

1359
01:45:05,760 --> 01:45:10,640
गीता जी में उन्ही परमात्मा कहा गया दोनों उसम

1360
01:45:10,640 --> 01:45:15,120
अजन्मा अभिनाशी मोक्षी दाता व

1361
01:45:15,120 --> 01:45:19,320
लक्ष्मीपति है यह देखिए वैदिक प्रमाण

1362
01:45:19,320 --> 01:45:23,360
श्री कृष्ण का वासुदेव के पुत्र श्री कृष्ण भगवान

1363
01:45:23,360 --> 01:45:27,680
साक्षात नारायण विष्णु है जीय

1364
01:45:27,680 --> 01:45:31,680
मिलाय तत्र आरण्यक में है

1365
01:45:31,680 --> 01:45:35,880
यह पढ़ते ही नहीं है देखो चारों वेदों में जो सहस्त्र शीर्ष जो

1366
01:45:35,880 --> 01:45:40,960
विराट स्वरूप दिखाया था चारों वेदों में उनका वर्णन है उन्ही को परमात्मा कहा गया है

1367
01:45:40,960 --> 01:45:45,200
जैसे सामवेद आक पर्व अध्याय छ खंड चार

1368
01:45:45,200 --> 01:45:49,360
मंत्र तीन से आ अर्थ वेद में कांड 10 सूक्त सात

1369
01:45:49,360 --> 01:45:53,440
और कांड 19 सूक्त छ

1370
01:45:53,440 --> 01:45:57,640
है यजुर्वेद में अध्याय 31 और 32 और ऋगवेद

1371
01:45:57,640 --> 01:46:01,640
में मंडल 10 सक्त 90 वही सहस्त्र शीष वाले जो श्लोक है

1372
01:46:01,640 --> 01:46:07,200
जो उसमें जो गीता में जो विराट स्वरूप दिखाया उसे ही परमात्मा कहा गया है

1373
01:46:07,200 --> 01:46:11,480
जी तो यह नहीं पढ़ते धर्मेंद्र

1374
01:46:11,480 --> 01:46:12,600
जी आए इनको हम ऊपर

1375
01:46:12,600 --> 01:46:16,680
लेते हैं देखें कुछ अगर यह कुछ बताए वेदों में प्रमाण है

1376
01:46:16,680 --> 01:46:20,240
कबीर कैसे भगवान

1377
01:46:20,240 --> 01:46:21,240
है

1378
01:46:21,240 --> 01:46:25,480
हां भाई धर्मेंद्र जी विषय पर रहकर अगर बात करना चाहे तो कर सकते

1379
01:46:25,480 --> 01:46:29,680
हैं अंतिम बार आपको एक अवसर प्रदान कर रहे हैं बताइए वेदों

1380
01:46:29,680 --> 01:46:34,040
में प्रमाण है कबीर भगवान है मतलब

1381
01:46:34,040 --> 01:46:38,120
आप ज्ञान चर्चा का अर्थ यह होता है कि सामने वाले

1382
01:46:38,120 --> 01:46:42,440
की भी सुनी जाए आप एक क्वेश्चन ले लेते

1383
01:46:42,440 --> 01:46:46,480
हो भाई साहब यह बताइए रामपाल दास

1384
01:46:46,480 --> 01:46:50,720
जी ने कितने वीडियोस में या उनके भक्तों ने कितने ज्यादा

1385
01:46:50,720 --> 01:46:54,720
कमेंट्स में अपने यह कहे हैं कि वेदों में प्रमाण

1386
01:46:54,720 --> 01:47:00,000
है कबीर भगवान है कहा है कि नहीं कहा है जी

1387
01:47:00,000 --> 01:47:04,640
बकल पहले पहले एक बात को खत्म

1388
01:47:04,640 --> 01:47:09,400
करिए वेदों में प्रमाण है कबीर साहब भगवान है आप इस बात को मानते

1389
01:47:09,400 --> 01:47:13,600
हैं जी बिल्कुल मानते हैं तो अब मैं

1390
01:47:13,600 --> 01:47:17,600
यही तो आपसे कह रहा हूं कि आप वेदों में प्रमाण दिखाइए कि कबीर कहां

1391
01:47:17,600 --> 01:47:21,600
भगवान है बताइए मैं यह कह रहा

1392
01:47:21,600 --> 01:47:25,600
हूं कि संत राम जी महाराज भाई साब क्या वेदों में प्रमाण नहीं

1393
01:47:25,600 --> 01:47:29,440
है क्या कबीर भगवान

1394
01:47:29,440 --> 01:47:33,560
है क्या वेदों में प्रमाण नहीं है क्या कबीर भगवान है

1395
01:47:33,560 --> 01:47:37,680
आप उनसे आप उनसे चर्चा कीजिए ये उनका वाक्य है वो कह रहे हैं

1396
01:47:37,680 --> 01:47:41,720
मगर हमय कह रहे आप नहीं मानते आप

1397
01:47:41,720 --> 01:47:45,800
नहीं मानते नहीं मानते हैं ना

1398
01:47:45,800 --> 01:47:49,800
तो फिर आप बताइए वेदों में कहां प्रमाण है कबीर भगवान है 2

1399
01:47:49,800 --> 01:47:54,000
प्स टूट 2 प्लसटू फो होता है और टीचर बता

1400
01:47:54,000 --> 01:47:58,000
रहा है तो बच्चा थोड़ी पूरा पूरा उसका सिलेबस रट

1401
01:47:58,000 --> 01:48:02,080
के आएगा हां ठीक है सिलेबस रट के नहीं आएगा फिर वह

1402
01:48:02,080 --> 01:48:06,840
अपनी वो रामपाल दास जी की तरफ से उनका पक्ष रखने भी नहीं आएगा

1403
01:48:06,840 --> 01:48:11,000
देखिए सर रामपाल दास जी की तरफ से पक्ष रखने

1404
01:48:11,000 --> 01:48:15,880
नहीं आएगा वो बच्चा वो टीचर की तरफ से कहीं शास्त्रार्थ में नहीं पहुंचेगा

1405
01:48:15,880 --> 01:48:21,000
क्यों नहीं पहुंचेगा भाई साब आप जा सकते हैं

1406
01:48:21,000 --> 01:48:25,320
भाईब है जी के ज्ञान के बारे में आपको नहीं पता है

1407
01:48:25,320 --> 01:48:29,360
मत आइए कोई और आएगा आप घबरा रहे

1408
01:48:29,360 --> 01:48:33,440
हैं आपको मालूम

1409
01:48:33,440 --> 01:48:37,520
है इसलिए इसलिए प्रॉब्लम होती है देखिए अपनी

1410
01:48:37,520 --> 01:48:41,600
बात सिद्ध नहीं करनी है कि हम ू प्लसटू वाले बच्चे हैं और

1411
01:48:41,600 --> 01:48:45,720
रामपाल टीचर है अभी तक

1412
01:48:45,720 --> 01:48:49,880
ताना झंडा लेकर चलते थे वेदों में प्रमाण है ये झंडा इनका नीचे

1413
01:48:49,880 --> 01:48:53,920
हो गया अब देखिए उस बात को सपोर्ट नहीं कर पा रहे

1414
01:48:53,920 --> 01:48:58,000
यह बहुत बड़ा अचीवमेंट है बहुत बड़ा अचीवमेंट है क्योंकि यह लोग

1415
01:48:58,000 --> 01:49:02,800
रट लगाए रहते थे भाई रट मैं तो अपने कमेंट देख देख के परेशान था

1416
01:49:02,800 --> 01:49:07,000
उसमें जो दो लाख व्यूज आए ढाई लाख उस मेले वाले उसमें वीडियो

1417
01:49:07,000 --> 01:49:11,240
में उसमें हर दो तीन मिनट के बाद एक कमेंट आता था वेदों में प्रमाण

1418
01:49:11,240 --> 01:49:15,360
पूरी लिस्ट ऋग्वेद मंडल इतना सक्त इतना मंत्र इतना ऋग्वेद

1419
01:49:15,360 --> 01:49:19,440
मंडल इतना अथर वेद सामवेद य उसम लिस्ट आती थी

1420
01:49:19,440 --> 01:49:23,520
पूरी मैं तो उसको देख अब अब जब हम उनसे खोल रहे हैं कि भाई

1421
01:49:23,520 --> 01:49:27,560
खोल ऋगवेद में क लिखा है तो अब ये हट रहे हैं कि मैं तो ू प्लस टू

1422
01:49:27,560 --> 01:49:31,760
वाला बच्चा हूं हमारे उन्होंने जो कहा वो जो

1423
01:49:31,760 --> 01:49:36,650
है क्या कहते हैं उन्होंने जो कहा मान लि हमारे टीचर

1424
01:49:36,650 --> 01:49:41,120
[संगीत] ने कहेंगे अब जब इनसे

1425
01:49:41,120 --> 01:49:45,480
कहेंगे कि टीचर ने अगर कहा है तो तुमने टीचर को टीचर

1426
01:49:45,480 --> 01:49:48,520
माना क्यों किसी आधार

1427
01:49:48,520 --> 01:49:53,600
पर मानोगे ना टीचर ना तो वो परंपरा से है टीचर

1428
01:49:53,600 --> 01:49:57,600
वो टीचर परंपरा से तो नहीं है तो कैसे तुमने मान

1429
01:49:57,600 --> 01:50:01,840
लिया उसको टीचर अपने माता-पिता का

1430
01:50:01,840 --> 01:50:06,440
खंडन करके ही तो तुमने उसको टीचर माना है

1431
01:50:06,440 --> 01:50:10,480
बताइए माता-पिता का खंडन किया ना क्योंकि यही कहते हैं कि कबीर

1432
01:50:10,480 --> 01:50:14,720
साहब से पहले वह ज्ञान नहीं था अपने पूर्वजों का खंडन करके ही टीचर

1433
01:50:14,720 --> 01:50:20,720
माना आपने उनको बिल्कुल परंपरा नहीं है

1434
01:50:25,600 --> 01:50:29,880
हां मैं तो इस बात से हैरान हूं शिवान से भैया जिस

1435
01:50:29,880 --> 01:50:33,920
जिसका वो अनुवाद लेते हैं जिससे व मंत्र लेते हैं उसी का खंडन करते हैं कि ये मूर्ख

1436
01:50:33,920 --> 01:50:38,320
था इसको इसको ज्ञान नहीं था अज्ञान था हां

1437
01:50:38,320 --> 01:50:42,360
इस बात को हम कैसे फसा ले बताइए आप ये देखिए अब से थोड़ी

1438
01:50:42,360 --> 01:50:46,440
देर पहले तक ये लोग एक ध्वज बना के चलते थे दौड़ लगाते थे मैराथन

1439
01:50:46,440 --> 01:50:50,440
वाली कि विदों में प्रमाण है कबीर भगवान अब इनको शर्म आ रही

1440
01:50:50,440 --> 01:50:54,480
है अब लज्जा आ रही है इनको यहां इस चैनल पर आक के अब हम नहीं

1441
01:50:54,480 --> 01:50:58,760
बोलेंगे कि वेदों में प्रमाण है वो तो आप कभी वो रामपाल से ही पूछना व आप रामपाल

1442
01:50:58,760 --> 01:51:02,760
दास जी के पास जेल में जाओ वहां पर मुलाकात क्या कहते मिलाई कहते

1443
01:51:02,760 --> 01:51:06,880
वो संडे संडे को होती कब होती है उसम जाओ उसम पूछना

1444
01:51:06,880 --> 01:51:10,920
हा व तो जेल धाम है इनके लिए हा जेल

1445
01:51:10,920 --> 01:51:15,480
जाना पड़ेगा वहां जाकर के जो है वहां पूछना भाई और हम

1446
01:51:15,480 --> 01:51:19,720
य बोलते ही बोलते े रामपाल

1447
01:51:19,720 --> 01:51:23,720
जी के शि से चर्चा हुई मैंने कहा वेद को बोले हा मानते मैंने

1448
01:51:23,720 --> 01:51:27,800
100% मानते बोले 100% मानते हैं अच्छा जो गीता में जो

1449
01:51:27,800 --> 01:51:32,080
काल है जिसको आप काल कहते हो अगर गीता अगर चारों वेदों में उनका उनको

1450
01:51:32,080 --> 01:51:36,160
परमात्मा सिद्ध कर दूंगा तो मानोगे बोलेगा वो बोलने लगा नहीं हा ठीक है

1451
01:51:36,160 --> 01:51:40,200
मान लेंगे जब चारों वेदों में मैंने सिद्ध किया तो बाद उसको वेदों से नाय

1452
01:51:40,200 --> 01:51:41,200
करने

1453
01:51:41,200 --> 01:51:46,160
लगे कुछ कुछ ज्ञान इसम काल ने दे रखा है

1454
01:51:46,160 --> 01:51:50,160
आपको कैसे पता है कि कौन सा ज्ञान काल ने दिया कौन सा ज्ञान परमात्मा ने दिया

1455
01:51:50,160 --> 01:51:54,400
है वो तत्वदर्शी संत बताते हैं संत कौन है

1456
01:51:54,400 --> 01:51:58,640
वो संत राम बती है जो गीता बताती है तत्वदर्शी संत

1457
01:51:58,640 --> 01:52:03,120
वो है जी तो द संत रामपाल जी मतलब

1458
01:52:03,120 --> 01:52:07,480
की अभी तक मोक्ष किसी को प्राप्त नहीं हुआ मतलब जो अभी अब जो मोक्ष

1459
01:52:07,480 --> 01:52:11,560
प्राप्त होने लगा वो रामपाल जी के उससे होने लगा बोले हा

1460
01:52:11,560 --> 01:52:15,760
मैंने कहा गीता में तो शर जी कह रहे हैं कि कर्म योग से तो राजा जनक

1461
01:52:15,760 --> 01:52:20,040
जैसे बहुत से राजाओ को मोक्ष की प्राप्ति हुई है

1462
01:52:20,040 --> 01:52:24,200
और जनक राजा तो त्रेता युग में थे ये तो कलयुग में हुए

1463
01:52:24,200 --> 01:52:28,360
रामपाल जी तो बकुल अरे तत्वदर्शी संत

1464
01:52:28,360 --> 01:52:32,680
गुरु बिल्कुल गीता बताती है मनुस्मृति दो 12 अध्याय

1465
01:52:32,680 --> 01:52:36,960
12 112 14 बताती है अथर्ववेद 117 16 बताती है

1466
01:52:36,960 --> 01:52:41,120
ष 6 14 दो बताती है 4 नती बताती है मको

1467
01:52:41,120 --> 01:52:46,320
उपनिषद एक दो 12 बताती है भर भर के प्रमाण

1468
01:52:46,320 --> 01:52:50,560
बोरे भर भर के इतने प्रमाण है कि इनके बातो का खंडन गीता से ही होता है

1469
01:52:50,560 --> 01:52:55,040
अध्याय तीन के 20 श्लोक में श जी कहते हैं कि कर्म ही

1470
01:52:55,040 --> 01:52:56,280
कर्म के कर्म योग

1471
01:52:56,280 --> 01:53:00,280
ही राजा जनक जैसे बहुत से राजा थे उन्हें मोक्ष की प्राप्ति हुई त भी

1472
01:53:00,280 --> 01:53:04,360
उनको देखते हुएय नित प्रामाणिकता का खंडन भाई

1473
01:53:04,360 --> 01:53:08,400
देखिए जो भी ज्ञान इनके विरुद्ध सुनिए इसका एक ही

1474
01:53:08,400 --> 01:53:12,400
खंडन है मैं रामपाल दास जी की तरफ से उस समय सुन लीजिए इन

1475
01:53:12,400 --> 01:53:16,440
सब बातों का एक ही खंडन है जो भी हमारे मंतव्य के विरुद्ध होगा

1476
01:53:16,440 --> 01:53:20,480
लिखा हुआ वो हम नहीं मानेंगे वो काल ने मिला दिया जो

1477
01:53:20,480 --> 01:53:24,480
भी है कुछ अज्ञानता वश कुछ है वो हम नहीं मानेंगे जो भी हमारे

1478
01:53:24,480 --> 01:53:28,640
विरुद्ध होगा इसका अर्थ क्या है कि वेद हमारे लिए प्रमाण

1479
01:53:28,640 --> 01:53:32,680
नहीं है या तो वो बोलने वाला या उसके द्वारा जो कहा गया है

1480
01:53:32,680 --> 01:53:37,000
सूक्ष्म वेद वो प्रमाण है वेद हमारे लिए

1481
01:53:37,000 --> 01:53:41,000
प्रमाण नहीं है हां वो सकाल ने

1482
01:53:41,000 --> 01:53:45,000
बोला सेम इसी तरह की बातें कुछ अन्य पंथ भी करता है जैसे

1483
01:53:45,000 --> 01:53:49,280
ये इतना हिस्सा तामसिक है तो ये ये तामसिक है तो ये सात्विक

1484
01:53:49,280 --> 01:53:53,880
है तो इसको नहीं करना इसको ही पढ़ना है

1485
01:53:53,880 --> 01:53:57,920
दिलीप दास जी जय श्री राम एक क्वेन और था मेरा

1486
01:53:57,920 --> 01:54:01,960
ये लोग अपने नाम के आगे दास क्यों लगाते हैं ये लोग तो डायलॉग मारते

1487
01:54:01,960 --> 01:54:06,200
है बंदी छोड़ मतलब किसी की दास्ता नहीं करनी है तो नाम क्या

1488
01:54:06,200 --> 01:54:10,480
खत्म हो चुकी है ये बंदी छोड़ का अर्थ क्या होता है दिलीप

1489
01:54:10,480 --> 01:54:11,560
दास

1490
01:54:11,560 --> 01:54:15,920
जी बंदी छोड़ का मतलब होता है कि बंधनों से मुक्त कराने वाला

1491
01:54:15,920 --> 01:54:20,200
परमात्मा का नाम है अच्छा कहीं

1492
01:54:20,200 --> 01:54:24,240
कहीं पर वो बिना आ की मात्रा के लिख देते तो व बंदी छेड़ हो जाता

1493
01:54:24,240 --> 01:54:28,400
है कहीं कहीं पर वो लिखने में गलती हो जाए थोड़ा सा

1494
01:54:28,400 --> 01:54:32,400
तो बंदी छोड़ की बजाय व कुछ और ही हो जाता है खैर मुक्ति

1495
01:54:32,400 --> 01:54:36,520
के लिए लिखा जाता है सम छो होता है हा नहीं वो कभी

1496
01:54:36,520 --> 01:54:40,560
कभी नहीं जैसे किसी पेंटर ने लिखा अब उसमें जो आ का डंडा

1497
01:54:40,560 --> 01:54:44,560
है वो मिट गया किसी तरीके से मिस प्रिंट हो गया तो वो पढ़ने में आ रहा

1498
01:54:44,560 --> 01:54:48,840
है बंदी छेड़ तोव अजीब हो जाता है खैर वो बंदी छोड़ है मुक्ति

1499
01:54:48,840 --> 01:54:53,800
का है तो बात अलग है जी बताइए दा जी

1500
01:54:53,800 --> 01:54:58,000
तो क्या आज कोई नया क्वेश्चन ले लेते हैं क्योंकि वही

1501
01:54:58,000 --> 01:55:02,480
वाले क्वेश्चन से वो थोड़ा सा बोर हो गई होगी जो दर्शक होंगे

1502
01:55:02,480 --> 01:55:06,640
यह बताइए आपके हिसाब से

1503
01:55:06,640 --> 01:55:10,800
क्या रामपाल जी तत्वदर्शी संत है या नहीं इस आखरी क्वेश्चन के साथ

1504
01:55:10,800 --> 01:55:13,240
ही हम

1505
01:55:13,240 --> 01:55:17,480
लोग तत्वदर्शी है कि नहीं है बताइए है

1506
01:55:17,480 --> 01:55:21,560
स त शांति है अच्छा वो किस

1507
01:55:21,560 --> 01:55:25,920
कैसे सिद्ध हो होता व तत्वदर्शी संत

1508
01:55:25,920 --> 01:55:30,000
है कैसे सीत होता है बस तत्व संत मतलब

1509
01:55:30,000 --> 01:55:34,320
होता है कि जो ने तीन प्रकार के मंत्र होते हैं तीनों प्रकार के मंत्र बताए जाते

1510
01:55:34,320 --> 01:55:38,520
हैं प्रमाण के साथ बात करिए

1511
01:55:38,520 --> 01:55:44,520
हा ठीक है

1512
01:55:45,400 --> 01:55:49,400
बोलिए चलो इस टॉपिक के ऊपर मैं बात नहीं करना चाहता आपको प्रमाण चाहिए था

1513
01:55:49,400 --> 01:55:53,440
ना कबीर साब जी के बारे में कबीर साहब जी के

1514
01:55:53,440 --> 01:55:57,600
बारे में प्रमाण चलिए वही बता दीजिए

1515
01:55:57,600 --> 01:55:58,100
ठीक

1516
01:55:57,840 --> 01:56:00,040
है

1517
01:56:00,040 --> 01:56:04,080
अवेद कांड नंबर च अनुवाद नंबर एक मंत्र सात में

1518
01:56:04,080 --> 01:56:08,320
प्रमाण क्या लिखा है व अथर्ववेद

1519
01:56:08,320 --> 01:56:12,400
व लिखा यो हा अर्थ

1520
01:56:12,400 --> 01:56:14,240
वेद कांड नंबर चार अनुवादक नंबर

1521
01:56:14,240 --> 01:56:18,720
एक मंत्र सात में प्रमाण है कबी सा

1522
01:56:18,720 --> 01:56:22,960
क्या क्या लिखा है

1523
01:56:22,960 --> 01:56:27,360
बताए क्या लिखा है बताइए क्या

1524
01:56:27,360 --> 01:56:31,400
लिखा यथम पितम अरे भैया

1525
01:56:31,400 --> 01:56:35,440
केवल व शब्द बता दीजिए जो आप प्रमाण के रूप में बोल रहे मंत्र मत पढ़ हमारे चैनल

1526
01:56:35,440 --> 01:56:39,920
पर आप केवल वो बता कबीर देवो क्या लिखा

1527
01:56:39,920 --> 01:56:43,240
है कबीर

1528
01:56:43,240 --> 01:56:47,280
देवो कबीर कबीर लिखा है या कबीर लिखा

1529
01:56:47,280 --> 01:56:52,480
है कबीर कबीर क्या लिखा है

1530
01:56:52,480 --> 01:56:56,720
कभी मैं आपको लिख के बता रहा हूं यह बता दीजिए जरा खामा खाम मुझे

1531
01:56:56,720 --> 01:57:00,760
वेद शाम रात के टाइम में निकालना नहीं चाहिए यह

1532
01:57:00,760 --> 01:57:06,000
तो नहीं लिखा

1533
01:57:06,000 --> 01:57:10,320
है यह लिखा है क्या हा कभ देव

1534
01:57:10,320 --> 01:57:16,320
अरे भाई य है क्या जो पूछ रहा व तो बताओ आगे क्यों बढ़ जाते हो

1535
01:57:16,600 --> 01:57:22,600
हां तो हम तो यह पूछ रहे हैं ना कि यह कहां पर लिखा है

1536
01:57:22,720 --> 01:57:25,240
तो

1537
01:57:25,240 --> 01:57:29,560
बताया यह कहां लिखा है यह

1538
01:57:29,560 --> 01:57:34,520
बताओ इससे क्या मतलब होता है कबीर बोलो या कबीर बोलो

1539
01:57:34,520 --> 01:57:38,680
क्यों नहीं मतलब किया गया

1540
01:57:38,680 --> 01:57:42,760
कबीर कबीर कैसे बना कौन

1541
01:57:42,760 --> 01:57:46,960
सा गटल नियम है व्याकरण का कौन सा नियम

1542
01:57:46,960 --> 01:57:52,600
है जिसके अनुसार कबीर कबीर बनता है और

1543
01:57:52,600 --> 01:57:56,600
जो कबीर है वो कोई नाम है तो वो कबीर अलग से क्यों नहीं लिखा उसके

1544
01:57:56,600 --> 01:58:00,920
आगे कोई ना कोई दूसरा शब्द क्यों है क्योंकि

1545
01:58:00,920 --> 01:58:05,040
वो कबीर साहेब जी जैसे आपका कोई नाम है तो घर प कुछ और बोलते थोड़ा सा तो

1546
01:58:05,040 --> 01:58:09,040
फिर उसम थोड़ा नाम में डिफरेंट हो सकता है लेकिन नहीं वोटर आईडी

1547
01:58:09,040 --> 01:58:13,240
में मेरा नाम लिखा है शिवांश नारायण द्विवेदी जी नहीं लिखा है शिवांश नारायण

1548
01:58:13,240 --> 01:58:17,360
द्विवेदी लिखा है जब मेरा नाम ऑफिशियल

1549
01:58:17,360 --> 01:58:21,240
कहीं पर लिखा जाएगा नाम तो उसके साथ जी नहीं जुड़ा रहेगा तो ऐसा

1550
01:58:21,240 --> 01:58:25,240
कहीं प है क्या केवल कब लिखा हो उसके आगे

1551
01:58:25,240 --> 01:58:31,240
दूसरा शब्द जुड़ा ना हो उससे क्या घर

1552
01:58:32,640 --> 01:58:36,640
अपना घर के जो भी सदस्य अपना नाम शुद्ध रूप

1553
01:58:36,640 --> 01:58:40,840
से लेते हैं मगर मगर जब आवश्यकता पड़ती

1554
01:58:40,840 --> 01:58:44,960
है तो शुद्ध रूप से भी लेते हैं मगर जब आवश्यकता

1555
01:58:44,960 --> 01:58:50,960
पड़ती है तो शुद्ध रूप से भी लेते है

1556
01:58:51,040 --> 01:58:55,240
जैसे मेरी बात सुनो मैं उदाहरण देता हूं मैं उदाहरण देता हूं जैसे रामपाल दास

1557
01:58:55,240 --> 01:58:59,320
जी है वो जब पेशी पर अदालत जाते हैं तो

1558
01:58:59,320 --> 01:59:03,480
भले ही आप लोग उनको कहते हो बंदी छोड़ या आप लोग उनको कहते हो तत्वदर्शी

1559
01:59:03,480 --> 01:59:07,480
संत रामपाल मगर वहां पर जब उनका नाम बोला जाता है तो पता

1560
01:59:07,480 --> 01:59:11,760
है उसकी पेशी है रामपाल हाजिर हो या इस तरह से वहां

1561
01:59:11,760 --> 01:59:16,120
बिल्कुल शुद्ध नाम बोला जाएगा रामपाल दास बनाम ये वहां

1562
01:59:16,120 --> 01:59:20,360
कुछ नहीं बोला जाएगा आगे पीछे कुछ भी कोर्ट

1563
01:59:20,360 --> 01:59:23,960
के कागजों में नाम लिखा

1564
01:59:23,960 --> 01:59:28,160
अनुवाद करता ने त्रुटी कर द है अनुवाद करता ने ु कर

1565
01:59:28,160 --> 01:59:32,200
अरे मंत्र की अनुवाद की बात नहीं हो रही है

1566
01:59:32,200 --> 01:59:36,200
य पर मंत्र की बात हो रही है अनुवाद बाद में पहले आप बताओ क

1567
01:59:36,200 --> 01:59:36,700
कबीर

1568
01:59:36,560 --> 01:59:40,720
कैसे बना मंत्र में कबीर है कबीर क

1569
01:59:40,720 --> 01:59:44,760
तो मतलब होता है वो आप लगा म करो

1570
01:59:44,760 --> 01:59:48,960
कैसे मतलब होता कबीर कबीर

1571
01:59:48,960 --> 01:59:53,000
कैसे बना वो बताओ भाई साहब वो बताओ मैं क्या बोल रहा

1572
01:59:53,000 --> 01:59:57,160
हूं और अगर मान लो अगर मान अगर मान

1573
01:59:57,160 --> 02:00:01,760
लिया कि कबीर का अर्थ कबीर है यह मान लिया तो फिर

1574
02:00:01,760 --> 02:00:05,760
आप यह बोलो के वेदों में प्रमाण है कबीर भगवान है कबीर भगवान

1575
02:00:05,760 --> 02:00:09,760
नहीं बोलो और वहां पर जितनी

1576
02:00:09,760 --> 02:00:13,840
जग बोल रहे क सुनो जितनी भी जगह आप बोल

1577
02:00:13,840 --> 02:00:17,920
रहे हो ना कबीर का अर्थ कबीर है वहां पर वो

1578
02:00:17,920 --> 02:00:22,120
शब्द पूरा कवि है ही नहीं वो शब्द है कवि और

1579
02:00:22,120 --> 02:00:26,600
जो रा आया है वो रा संधि संधि होने के कारण व

1580
02:00:26,600 --> 02:00:31,440
ता है जब उस परमात्मा की महिमा लिखी तभी तो उसको देव बोला जाएगा

1581
02:00:31,440 --> 02:00:37,120
जब परमात्मा के बारे में जानकारी द बोला

1582
02:00:37,120 --> 02:00:41,280
जाएगा हु साफ साफ मैं यह नहीं कह रहा हूं

1583
02:00:41,280 --> 02:00:45,400
उसको देव क्यों बोला गया मैं यह कह रहा हूं जब दो शब्द आपस में जुड़ रहे हैं वहा

1584
02:00:45,400 --> 02:00:49,440
पर रा उत्पन्न हो रहा है संधि के कारण व्याकरण संबंधी नियम है

1585
02:00:49,440 --> 02:00:53,440
वो और वहा पर जो शब्द है मूल शब्द है व क

1586
02:00:53,440 --> 02:00:57,480
कवि का अर्थ है सर्वज्ञ यह सब वहा पर

1587
02:00:57,480 --> 02:01:02,400
कबीर शब्द नहीं है वहा पर कवि शब्द

1588
02:01:02,400 --> 02:01:06,400
है यजुर्वेद ठीक है यजुर्वेद का मतलब हिंदी संस्कृत में

1589
02:01:06,400 --> 02:01:10,600
बोलते यज ठीक है उसके पीछे दो मात्र लग जाता ठीक है हलंत लग जाता

1590
02:01:10,600 --> 02:01:14,640
इसका मतलब बहुत अच्छी बात आपने क

1591
02:01:14,640 --> 02:01:16,800
देखिए बहुत अच्छी बात आपने कह दी

1592
02:01:16,800 --> 02:01:22,040
जैसे यसे

1593
02:01:22,040 --> 02:01:26,200
यु में पीछे विसर्ग होता है और जब साथ में वेद लग जाता

1594
02:01:26,200 --> 02:01:30,280
है तो यजुर्वेद रा उत्पन्न हो जाता है तो इसका मतलब व

1595
02:01:30,280 --> 02:01:31,840
यजर नहीं लिखा है वहा पर

1596
02:01:31,840 --> 02:01:36,080
यजुर नहीं लिखा है व यज लिखा है संधि होने के कारण व रा उत्पन्न

1597
02:01:36,080 --> 02:01:40,080
हो रहा है यानी कि वहा मूल शब्द क्या है यजू इसी प्रकार से जो

1598
02:01:40,080 --> 02:01:44,400
कबीर देव में रा आ रहा है वो उत्पन्न हो रहा है संधि के कारण

1599
02:01:44,400 --> 02:01:47,360
वहा पर जो

1600
02:01:47,360 --> 02:01:51,440
मूल साहब पूरे ग्रंथों में कहीं प कबीर क्यों नहीं

1601
02:01:51,440 --> 02:01:55,680
लिखा कहीं पर तो लिखा हो कबीर

1602
02:01:55,680 --> 02:02:00,200
और अगर नहीं लिखा है तो आप य कना वे में प्रमाण है कवि भगवान है कवि

1603
02:02:00,200 --> 02:02:04,640
कबीर मत कहो कभी नहीं कबीर कबीर लिखा है

1604
02:02:04,640 --> 02:02:05,480
आप कबीर कह रहे

1605
02:02:05,480 --> 02:02:08,480
हो

1606
02:02:08,480 --> 02:02:14,480
क कवि है वो कबीर कैसे

1607
02:02:14,840 --> 02:02:19,280
बना कबीर देवो लिखा है कबीर देव नहीं

1608
02:02:19,280 --> 02:02:23,400
लि है कबीर बोला जाएगा

1609
02:02:23,400 --> 02:02:23,900
तो उन्होने

1610
02:02:23,880 --> 02:02:27,880
कबीर क्यों लिखवाया वेद में क्या उन्हें नहीं पता था कि भविष्य में लोग उन्ह कबीर

1611
02:02:27,880 --> 02:02:32,200
कहेंगे तो उन्होंने कबीर ही क्यों नहीं लिखा वेद

1612
02:02:32,200 --> 02:02:36,320
में परमा को संत लिख ग उन्होने त्रुटी कर द अब

1613
02:02:36,320 --> 02:02:40,320
आप अब आप भाईब परमात्मा की महिमा लिखी

1614
02:02:40,320 --> 02:02:44,360
सुनो अब आपकी अब सुनो कवि का अर्थ क्या था

1615
02:02:44,360 --> 02:02:48,680
आप परमात्मा मानते हो कवि का अर्थ परमात्मा

1616
02:02:48,680 --> 02:02:52,680
मानते हो आप परमात्मा को मानते हैं नहीं नहीं कवि का अर्थ

1617
02:02:52,680 --> 02:02:58,480
परमात्मा मानते हो कि नहीं हेलो

1618
02:02:58,480 --> 02:03:02,880
हेलो क मानते उसमें कबीर देवो लिखा गया मैं

1619
02:03:02,880 --> 02:03:06,960
मैं अभी पूछ रहा हूं कवि का अर्थ परमात्मा मानते हो कि नहीं कवि

1620
02:03:06,960 --> 02:03:12,120
कवि का

1621
02:03:12,120 --> 02:03:16,240
अर्थ कवि नहीं कवि लिखा गया कवि मैं आपसे पूछ

1622
02:03:16,240 --> 02:03:22,240
रहा हूं कभ का परमात्मा मानते हो कि नहीं

1623
02:03:22,320 --> 02:03:26,400
उसम परमात्मा का अगर आगे महिमा लिखी होगी तो कवि का मतलब भगवान ही

1624
02:03:26,400 --> 02:03:32,400
होगा मतलब केवल केवल

1625
02:03:37,720 --> 02:03:41,920
ना मतलब केवल नाम आने से य सिद्ध नहीं होता कि व

1626
02:03:41,920 --> 02:03:45,920
कभी कवि जो है वही कबीर है जिसको आप कह रहे हो केवल नाम आ जाने

1627
02:03:45,920 --> 02:03:51,920
से परक उसम

1628
02:03:51,920 --> 02:03:56,000
पूछ रहा हूं आपसे केवल नाम आ जाने से ये माना जाएगा या नहीं माना

1629
02:03:56,000 --> 02:04:00,040
जाएगा यह बताओ पहले केवल नाम से नहीं माना जाएगा ना

1630
02:04:00,040 --> 02:04:04,480
हेलो हेलो हेलो हा सुन रहे

1631
02:04:04,480 --> 02:04:08,520
केवल नाम आ जाने से मानोगे या नहीं मानोगे कि वह जो बात हो

1632
02:04:08,520 --> 02:04:12,880
रही है वह कबीर केही बारे में बात हो रही

1633
02:04:12,880 --> 02:04:17,200
है कबीर के बारे में ही बात हो रही है

1634
02:04:17,200 --> 02:04:21,760
क्योंकि उसम आप बहुत अच्छा लगा आप बात कर

1635
02:04:21,760 --> 02:04:25,760
परमात्मा कारा मेरा प्रश्न जो मैं पूछ रहा हूं आप उसका उत्तर नहीं दे रहे मेरे पास

1636
02:04:25,760 --> 02:04:30,480
इतनी एनर्जी नहीं है कि मैं आपको बारबार अपना प्रश्न समझा सकू

1637
02:04:30,480 --> 02:04:36,200
आपकी हमारी चर्चा लोगों ने देख ली है आप जा सकते

1638
02:04:36,200 --> 02:04:40,320
हैं अगर देव लगने से कोई परमात्मा सिद्ध हो जाता है तो तो नरसिंह

1639
02:04:40,320 --> 02:04:44,720
देव वामन देव सबके आगे देव लगा हुआ है सब परमात्मा

1640
02:04:44,720 --> 02:04:48,720
है दिनेश जी तीसरी चौथी

1641
02:04:48,720 --> 02:04:53,320
बार आपका स्वागत है लाइव में

1642
02:04:53,320 --> 02:04:59,320
नारायण जी आप कुछ नया लाए हैं या पुराना ही है

1643
02:04:59,920 --> 02:05:05,280
आपका बताइए नया सुनोगे या पुराना सुनोगे

1644
02:05:05,280 --> 02:05:11,280
पुराना सुन चुके हैं वो तो नहीं सुनना बताइए वेदों में कहां प्रमाण है कबीर भगवान

1645
02:05:12,160 --> 02:05:16,520
है अभी जो आप कह रहे थे

1646
02:05:16,520 --> 02:05:21,760
कहीं पर भी कबीर नहीं लिखा हुआ है और वो

1647
02:05:21,760 --> 02:05:25,840
कबीर की बात कबीर कबीर कबीर नहीं कबीर

1648
02:05:25,840 --> 02:05:30,040
क लिखा है कबीर कबीर तो हम उसको बोलते

1649
02:05:30,040 --> 02:05:31,480
हैं ना कबीर क

1650
02:05:31,480 --> 02:05:35,800
बोते क्यों बोलते हो कौन सा नियम है जो ऐसा बोलते हो

1651
02:05:35,800 --> 02:05:39,840
क्यों बोलते हो भाई को शकर जी बता

1652
02:05:39,840 --> 02:05:45,840
रहा सुन लीजिएगा शिवजी को शकर जी क्यों बोलते हो बोले क्यों

1653
02:05:46,120 --> 02:05:48,960
बोलते बो बोलते दुनिया

1654
02:05:48,960 --> 02:05:53,000
वाले क्यों बोलते हैं अब चुप गए अरे भैया शिव और शंकर

1655
02:05:53,000 --> 02:05:57,360
दोनों का अर्थ है अभी उस नहीं आते कबीर की बाकर शंकर

1656
02:05:57,360 --> 02:06:02,320
नाम भी शंकर नाम भी शास्त्रों में दिया गया है

1657
02:06:02,320 --> 02:06:06,600
शंकर नाम भी शास्त्रों में दिया गया है और अगर

1658
02:06:06,600 --> 02:06:10,640
कोई उनका ऐसा नाम बोलेगा जो शास्त्र सम्मत नहीं होगा तो

1659
02:06:10,640 --> 02:06:15,240
हम उसको गलत कहेंगे यह गलत है बल अब बोलो

1660
02:06:15,240 --> 02:06:17,400
बोलो

1661
02:06:17,400 --> 02:06:21,720
अब और काना बोलते हैं वो उनको अलग अलग ना

1662
02:06:21,720 --> 02:06:25,920
वो गलत है वो गलत है मत बोलो कोई जरूरी नहीं है काना बोलना काना

1663
02:06:25,920 --> 02:06:30,120
बोलना कोई जरूरी नहीं है काना बोलना

1664
02:06:30,120 --> 02:06:34,160
कोई आवश्यक नहीं है काना बोलना कोई आवश्यक

1665
02:06:34,160 --> 02:06:38,160
नहीं है मेन उनका नाम है कृष्ण

1666
02:06:38,160 --> 02:06:42,360
अगर कोई काना बोल रहा है तो बोले मगर हम यह कहेंगे वेदों में प्रमाण है

1667
02:06:42,360 --> 02:06:46,360
ब्रह्मा विष्णु महेश भगवती गणेश भगवान है

1668
02:06:46,360 --> 02:06:50,360
उनका बाद में नाम जो भी पड़ जाए मगर जो उनका मूल नाम है व

1669
02:06:50,360 --> 02:06:56,360
वेद में है आपका मूल नाम वेद में कहां

1670
02:06:57,400 --> 02:07:03,400
है म्यूट कर दीजिए इनको

1671
02:07:03,800 --> 02:07:07,920
बोलिए म्यूट है म्यूट है बोलिए बोलिए

1672
02:07:07,920 --> 02:07:13,920
अरे भाई मैं अन म्यूट कर रहा हूं आप अपने आप को म्यूट कर ले रहे

1673
02:07:14,360 --> 02:07:18,840
हो फिर हो गया म्यूट आप टच कर रहे हैं क्या कुछ

1674
02:07:18,840 --> 02:07:22,880
बोलिए बताइए ठीक है ना मुझे आप मुझे

1675
02:07:22,880 --> 02:07:27,040
आप मुझे आप सुनिए अब सीधी बात इस पर आ जाइए मुझे प्रमाण

1676
02:07:27,040 --> 02:07:31,080
से बताइए कि कबीर कबीर कैसे बना बस प्रमाण

1677
02:07:31,080 --> 02:07:35,360
से मनमुक बातें कुछ नहीं प्रमाण प्रमाण

1678
02:07:35,360 --> 02:07:39,480
दसे जैसे प्रमाण दीजिए प्रमाण मैं पूछ रहा

1679
02:07:39,480 --> 02:07:43,640
हूं प्रमाण दीजिए अपनी बात के लिए प्रमाण दीजिए इस अध्याय में लिखा

1680
02:07:43,640 --> 02:07:48,080
है ऐसा ऐसा होता है करो प्रमाण

1681
02:07:48,080 --> 02:07:52,360
दो प्रमाण अरे तो ये प्रमाण कबीर

1682
02:07:52,360 --> 02:07:56,560
कबीर कैसे बना कन्हैया कृष्ण जी हो गए या काना

1683
02:07:56,560 --> 02:08:00,840
हो अरे भाई मैं नहीं मानता कन्हैया कृष् हो गए मैं तो कृष्ण कृष्ण

1684
02:08:00,840 --> 02:08:05,120
बोलो मैं तो कृष्ण मानता हूं वेदों में प्रमाण है कृष्ण भगवान

1685
02:08:05,120 --> 02:08:09,360
है अरे भाई उसका वास्तविक नाम कबीर है हम उसको

1686
02:08:09,360 --> 02:08:12,440
कबीर बोलते हैं बस इतना अंतर है इसमें कौन सी ब

1687
02:08:12,440 --> 02:08:16,640
बात हो कौन से नियम के आधार पर बोलते हो भाई

1688
02:08:16,640 --> 02:08:21,120
और अगर बोलते हो अगर बोलते हो अगर बोलते हो

1689
02:08:21,120 --> 02:08:25,120
तो उसम यह बोलो वेदों में प्रमाण है कबीर भगवान

1690
02:08:25,120 --> 02:08:29,320
है कबीर भगवान नहीं बोलो कबीर भगवान अ आप

1691
02:08:29,320 --> 02:08:34,960
लगालो हम तो कभी जो भगवान की महिमा

1692
02:08:34,960 --> 02:08:39,440
है क्या बोलोगे आजसे बोलो जरा रिपीट करो

1693
02:08:39,440 --> 02:08:43,520
क्या बोलोगे आपसे हम तो जो बोलेंगे जो परमात्मा ने

1694
02:08:43,520 --> 02:08:45,600
कहा है वही बोलेंगे ठीक कबीर

1695
02:08:45,600 --> 02:08:51,600
जी ने ुद कहा है

1696
02:08:52,080 --> 02:08:56,200
मुजरी करने आते हैं लोग मुजरी कृष्ण

1697
02:08:56,200 --> 02:09:00,200
जी को तो ऐसे भी यशो मैया बाकी वात्सल्य भाव से उनको मानती

1698
02:09:00,200 --> 02:09:04,600
है तो उन्ह प्यार से कान्हा कन्हैया प्यार से वात्सल भा में उनका कोई प्रमाणिक

1699
02:09:04,600 --> 02:09:08,640
नाम नहीं हो जाता है अगर कोई अगर प्रेम भाव में कुछ बोल रहा

1700
02:09:08,640 --> 02:09:12,880
है कोई प्रामाणिक नहीं होता है इस बारे में गुरुदेव ने बताया है

1701
02:09:12,880 --> 02:09:17,000
कि नाम जप इत्यादि अगर करें तो उनका वही जो बिल्कुल शुद्ध नाम है उसी

1702
02:09:17,000 --> 02:09:21,640
का करें और बाकी प्रेम भाव में जो अपभ्रंश हो जाता है

1703
02:09:21,640 --> 02:09:26,520
भाषा में चेंज हो जाता है वो बात अलग है मगर प्रमाणिकता नहीं बदल जाएगी

1704
02:09:26,520 --> 02:09:31,000
उनके जो म य नहीं होता नल

1705
02:09:31,000 --> 02:09:34,720
ने

1706
02:09:34,720 --> 02:09:39,320
होता कृष्ण और कृष्णा कृष्णा तो द्रौपदी

1707
02:09:39,320 --> 02:09:43,440
मा विशाल जी आपको दोबारा आना है क्या शी जी कानाम

1708
02:09:43,440 --> 02:09:47,600
क जी जी चक्रपान

1709
02:09:47,600 --> 02:09:52,120
जी एक स्टेज पर आए हुए हैं काफी देर से

1710
02:09:52,120 --> 02:09:56,840
कबीर जी जो थे वो खुद भगवान राम के भक्त थे भाई संत रामानंद आचार्य जी के शिष्य

1711
02:09:56,840 --> 02:10:00,880
थे यह पता है चक्र पाण मिश्रा जी जय श्री राम

1712
02:10:00,880 --> 02:10:05,000
बताइए जय श्री राम जय श्री राम काफी

1713
02:10:05,000 --> 02:10:09,160
देर से आपका वीडियो देख रहा था और आपसे

1714
02:10:09,160 --> 02:10:13,360
चर्चा हुई है कॉल से शिवा

1715
02:10:13,360 --> 02:10:18,320
जी आपसे बात हुई हैद फन से अच्छा

1716
02:10:18,320 --> 02:10:22,760
हा हा भविष्य पुराण को विषय

1717
02:10:22,760 --> 02:10:27,040
था किस विषय में आपसे फोन

1718
02:10:27,040 --> 02:10:31,400
से बात किया था छत्तीसगढ़ से बोल रहा हूं विषय

1719
02:10:31,400 --> 02:10:35,440
क्या था थोड़ा सा स्मरण करा दे वो भविष्य

1720
02:10:35,440 --> 02:10:40,480
पुराण को मंगवाना था उसको पढ़ लीजिए

1721
02:10:40,480 --> 02:10:44,920
आपको हा तो अच्छा आप भी रामपाल

1722
02:10:44,920 --> 02:10:48,560
दास जी के द्वारा प्रताड़ित

1723
02:10:48,560 --> 02:10:52,560
है अरे मैं कुछ बोलू सुनिए सुनि मैं कुछ बोलू बोलिए

1724
02:10:52,560 --> 02:10:56,560
विशाल जी भाटिया जी पहले सुन ले नहीं नहीं अभी इससे

1725
02:10:56,560 --> 02:11:00,840
पहले जो दिनेश दास जी आए थे या जो भी कोई आए जितने भी आए हैं या आएंगे

1726
02:11:00,840 --> 02:11:05,440
जो इनके फॉलोवर्स है ये मेरे सवाल का जवाब दे दे ठीक है

1727
02:11:05,440 --> 02:11:09,520
ये लोग अगर चिल्लाते हैं कि बोलते हैं कि वेदों में प्रमाण है कबीर जी

1728
02:11:09,520 --> 02:11:13,520
भगवान है तो महाभारत में महाभारत में वेदव्यास जी ने

1729
02:11:13,520 --> 02:11:18,000
दो श्लोक लिखे हैं एक श्लोक में सुना देता हूं आलो सर्व शस्त्राणि विचार

1730
02:11:18,000 --> 02:11:22,280
च पुनः पुन इदम एकम सुनिप यो नारायण सदा अनुशासन

1731
02:11:22,280 --> 02:11:26,320
प्र का श्लोक है इसका अर्थ है समस्त शास्त्रों का अवलोकन करके बारंबार

1732
02:11:26,320 --> 02:11:30,640
विचार करने पर एकमात्र यही सिद्धांत स्थिर हुआ समस्त शास्त्रों का अवलोकन

1733
02:11:30,640 --> 02:11:35,320
करके कि भगवान नारायण का ही ध्यान करना चाहिए अब एक दूसरा श्लोक मैं बता रहा हूं

1734
02:11:35,320 --> 02:11:39,320
वो हरिवंश पुराण का है महाभारत की भाग है वो उसमें लिखा है वेद

1735
02:11:39,320 --> 02:11:43,480
रामायण चैव पुराणे भारते तथा आदि मध्य तथा चाते हरि ही

1736
02:11:43,480 --> 02:11:47,480
सर्वत्र गीय वेद रामायण पुराण महाभारत इन सबके आदि मदत में

1737
02:11:47,480 --> 02:11:51,520
सर्वत्र भगवान श्री हरि का ही कीर्तन किया गया है तो आप अब व्यास

1738
02:11:51,520 --> 02:11:55,680
जी ऐसा लिख रहे महाभारत में जो पंचम वेद है तो बताइए इसको आप मानोगे

1739
02:11:55,680 --> 02:11:59,920
कि नहीं और वो लिख रहे तो हम क्यों सुने

1740
02:11:59,920 --> 02:12:03,680
आप लोगों की अगर व्यास जी ने ये लिख दिया कि उन्हीं का ध्यान करने

1741
02:12:03,680 --> 02:12:09,120
को कहा गया उन्ही का यश गाया

1742
02:12:09,120 --> 02:12:13,680
गया बोलिए शि ये सब तो काल ने बुलवा दिया भाई

1743
02:12:13,680 --> 02:12:18,400
समझते क्यों नहीं कबीर जी खु श्री हरि के भक्त

1744
02:12:18,400 --> 02:12:22,400
थे मालूम है श्री हरि के भक्त दे रामानंदाचार्य जी के

1745
02:12:22,400 --> 02:12:25,880
शिष्य

1746
02:12:25,880 --> 02:12:30,080
थे चलिए एक एक ये एक ग्रंथ पर आएंगे

1747
02:12:30,080 --> 02:12:34,080
कबीर सागर नाम है उसका अगर कोई ग्रंथ नहीं मिलेगा लेकिन वो ग्रंथ जो है वो

1748
02:12:34,080 --> 02:12:38,240
फर्जी है पूरा वो कबीर जी का उससे लेना देना नहीं है वो कबीर सागर जिस पर उ चलते

1749
02:12:38,240 --> 02:12:42,440
हैं कि उसमें कबीर जी को भगवान बताया गया है वो कबीर जी के निधन के बाद लिखा

1750
02:12:42,440 --> 02:12:47,480
गया था वो कबीर सागर

1751
02:12:47,480 --> 02:12:51,760
हम हा कबीर बीजक है उसको पढ़ सकते हैं उसमें वो ऑथेंटिक

1752
02:12:51,760 --> 02:12:55,760
है वो कबीर बीजक उसमें भी भगवान राम भगवान हरि की भक्ति का उसमें

1753
02:12:55,760 --> 02:12:59,880
वो उल्लेख है एक रोहित रोहित करके आए हैं रोहित जी

1754
02:12:59,880 --> 02:13:02,160
आए

1755
02:13:02,160 --> 02:13:06,240
हैं जी रोहित जी अपना चेहरा रिवील

1756
02:13:06,240 --> 02:13:12,240
करें कुछ बोलने से पहले

1757
02:13:22,760 --> 02:13:26,760
पियूष वादवानी बोल रहे हैं रामपा रामपा के

1758
02:13:26,760 --> 02:13:32,720
खिलाफ बोल सकता हूं आऊ [हंसी]

1759
02:13:32,720 --> 02:13:36,920
क्या और लगता है बिना पेंदी के लौटे हैं जिंदर

1760
02:13:36,920 --> 02:13:42,000
पाए वही धनक जाते हैं पीयूष जी

1761
02:13:42,000 --> 02:13:47,040
श्रीराम क्यों पीयूष जी है

1762
02:13:47,040 --> 02:13:51,440
कौन पियूष वादवानी वही जो अभी दो दिन पहले आए

1763
02:13:51,440 --> 02:13:55,480
बोले कि मैं श्री कृष्ण के चरणों की सौगंध खाकर

1764
02:13:55,480 --> 02:13:59,600
कह रहा हूं कि अब आपको हैवान नहीं बोलूंगा अच्छा अच्छा अच्छा

1765
02:13:59,600 --> 02:14:04,400
अच्छा ये रामपाल विषय के बारे में थोड़ा सा बताना था इनका

1766
02:14:04,400 --> 02:14:08,400
वीडियो अगर जैसे टीवी में जो इनका चलता है तो जैसे

1767
02:14:08,400 --> 02:14:12,760
पूरा एपिसोड जाने के बाद जो है लास्ट में कोई एक जो है उनके अनुयाई

1768
02:14:12,760 --> 02:14:16,920
आते हैं और अपना अनुभव यह बताते हैं कि उनके जीवन

1769
02:14:16,920 --> 02:14:21,200
में चमत्कार हुआ तो बहुत लोग उस चमत्कार को

1770
02:14:21,200 --> 02:14:25,200
सुने वो सही था गलत था कैसा था यह अब

1771
02:14:25,200 --> 02:14:30,040
तो सामने जो सुनाई दे रहा है तो लोग तो यही मानते हैं कि हां उनके जीवन में ऐसा

1772
02:14:30,040 --> 02:14:34,480
यह वाला चमत्कार वो जो क्रिश्चन द्वारा धर्म परिवर्तन होता है

1773
02:14:34,480 --> 02:14:38,760
पंजाब हरियाणा की साइड में मैंने देखा है उसमें भी वो एकदम उछलने

1774
02:14:38,760 --> 02:14:42,840
लगेंगे और व्हील चेयर का व्यक्ति जो है वो डांस करने लग जाएगा

1775
02:14:42,840 --> 02:14:47,000
खड़ा हो जाएगा हला ऐ से और

1776
02:14:47,000 --> 02:14:47,960
किसी ने एक मीम

1777
02:14:47,960 --> 02:14:51,960
बनाया था उसने दिखाया था कि पहले व्हील चेयर पर बैठा जो व्यक्ति है वो

1778
02:14:51,960 --> 02:14:56,120
चलने लगा और वहां पर जो क्रिश्चन के सबसे बड़े पद पर बैठे हुए

1779
02:14:56,120 --> 02:15:00,280
पोप है वो व्हील चेयर पर चल रहे हैं वो खड़े नहीं

1780
02:15:00,280 --> 02:15:03,080
हो पा

1781
02:15:03,080 --> 02:15:07,120
रहे अब उनको आशीर्वाद कौन दे हा

1782
02:15:07,120 --> 02:15:11,240
तो उन तक आशीर्वाद नहीं पहुंच रहा है अच्छा एक बात

1783
02:15:11,240 --> 02:15:15,440
जब कहे आप कि सतलोक में जो है काजू किशमिश जो है तो मुझे

1784
02:15:15,440 --> 02:15:19,680
एक बात याद आई कि जैसे मुस्लिमों में वो बताया जाता है कि 72

1785
02:15:19,680 --> 02:15:23,800
हूरे मिलेंगी वही जो इनको भी जो है गाजर पकड़ाया जा रहा है

1786
02:15:23,800 --> 02:15:28,480
कि जो है आप जाइए सतलोक में और वहां जो है आपको काजू किशमिश आपको मिलेंगे

1787
02:15:28,480 --> 02:15:33,120
हा बोलते तो है कि वहां पर बढ़िया काजू है किसमिस

1788
02:15:33,120 --> 02:15:37,960
है जी भाई साहब रोहित जी स्वागत है जय श्री राम

1789
02:15:37,960 --> 02:15:41,960
सभी को नमस्कार जय श्री राम मेरी कुछ क्वेरी है वो

1790
02:15:41,960 --> 02:15:46,000
मैं जानना चाहता हूं क्वेरी के लिए आप क्लासेस में

1791
02:15:46,000 --> 02:15:50,240
आए क्वेरी के लिए आप क्लासेस में आए अभी वैचारिक

1792
02:15:50,240 --> 02:15:54,320
मतभेद के चर्चा है तो आप अगर उसमें कुछ आप कहां से

1793
02:15:54,320 --> 02:15:58,920
हैं रामपाल जी से जुड़े हुए हैं या किसको फॉलो करते

1794
02:15:58,920 --> 02:16:03,080
हैं मैं बहुत टाइम से कबीर को स्टडी कर रहा हूं

1795
02:16:03,080 --> 02:16:07,080
और अच्छा मतलब मेनली है

1796
02:16:07,080 --> 02:16:11,120
कि पहले आस्तिक फिर नास्तिकता फिर इस तरफ और

1797
02:16:11,120 --> 02:16:15,320
नास्तिकता ऐसे चालू हुई थी कि क्वेरी जो पैदा हुई

1798
02:16:15,320 --> 02:16:19,520
उसके आंसर नहीं मिलते थे इस नास्तिकता चालू हुई थी तो वो क्वेरी

1799
02:16:19,520 --> 02:16:23,920
अभी भी है कि अगर मैं मान लीजिए मैं एक नास्तिक

1800
02:16:23,920 --> 02:16:28,240
कभी स्टडी कर कभी हटा देते हैं अग अगर मैं एक नास्तिक हूं तो मेरे अंदर जो क्वेश्चन

1801
02:16:28,240 --> 02:16:33,000
है उसके आंसर मतलब सही से नहीं मिल

1802
02:16:33,000 --> 02:16:37,800
पाते वो एक है मैं जो देख

1803
02:16:37,800 --> 02:16:42,080
आप क्लासेस में आइए हमारे जो सनातन धर्म

1804
02:16:42,080 --> 02:16:46,280
वाले हैं वो जो बात बताते हैं उसम ऐसा लगता है कि कहीं ना कहीं गॉड

1805
02:16:46,280 --> 02:16:50,440
को हमेशा पॉजिटिव लाइट में दिखाया जाता है उन्हे दयावान दिखाया जाता है बहुत

1806
02:16:50,440 --> 02:16:54,440
लेकिन मुझे लगता नहीं कि ऐसा कुछ है क्योंकि रोज

1807
02:16:54,440 --> 02:16:58,720
हजारों गाय कटती है हजारों मतलब लोगों को बहुत कष्ट होता है तो वो लकता

1808
02:16:58,720 --> 02:17:02,840
नहीं कि गड दयालु है आपने अभी तक किसी मत को स्वीकार किया है या नहीं

1809
02:17:02,840 --> 02:17:08,280
किया है या केवल स्टडी कर रहे हैं मैं स्टडी कर रहा

1810
02:17:08,280 --> 02:17:12,280
हूं देखिए भगवत गीता में भगवान श्री

1811
02:17:12,280 --> 02:17:16,480
कृष्ण ने 17वें दूसरे अध्याय के 17वें श्लोक

1812
02:17:16,480 --> 02:17:18,280
से लेकर 31 में श्लोक

1813
02:17:18,280 --> 02:17:23,080
तक अर्जुन जी को केवल ये बताया है

1814
02:17:23,080 --> 02:17:27,400
कि वास्तविकता में कोई मरता नहीं है

1815
02:17:27,400 --> 02:17:31,520
वास्तविकता में ना कोई किसी को मारता है ना कोई मरता है

1816
02:17:31,520 --> 02:17:35,560
जो अगर किसी को मारने वाला अथवा मरा हुआ समझ रहे हैं तो वह

1817
02:17:35,560 --> 02:17:39,840
अज्ञानता अविद्या के कारण है ठीक है इतना

1818
02:17:39,840 --> 02:17:44,040
समझ में आ रहा है आपको अब हम जब बात करते

1819
02:17:44,040 --> 02:17:48,360
हैं मुक्ति की तो मुक्ति का मतलब क्या है मुक्ति

1820
02:17:48,360 --> 02:17:52,480
का मतलब है यहां जो हमें जरा

1821
02:17:52,480 --> 02:17:56,560
जन्म और व्याधि इत्यादि जैसे दुख क्लेश दिखाई दे

1822
02:17:56,560 --> 02:18:00,640
रहे हैं उनसे हम प्रताड़ित हो रहे हैं इन सभी से इन

1823
02:18:00,640 --> 02:18:04,680
सभी विकारों से हम मुक्त हो जाएंगे यह मुक्ति है ठीक

1824
02:18:04,680 --> 02:18:09,080
है अब सपोज करिए कि कोई

1825
02:18:09,080 --> 02:18:13,640
व्यक्ति यहां से मुक्त हो गया उसने खूब अपना

1826
02:18:13,640 --> 02:18:17,720
भक्ति की और वह मुक्त हो गया मगर उसकी फैमिली तो अभी

1827
02:18:17,720 --> 02:18:21,760
भी यहीं पर है वो मुक्त हो गया उसकी फैमिली यहीं

1828
02:18:21,760 --> 02:18:26,400
पर है तो आप मुझे बताइए जो व्यक्ति मुक्त हो गया

1829
02:18:26,400 --> 02:18:30,840
क्या उसकी फैमिली के साथ जो यहां पर क्लेश हो रहा होगा

1830
02:18:30,840 --> 02:18:33,440
उसके जाने के बाद भी

1831
02:18:33,440 --> 02:18:37,720
क्या उससे वह प्रभावित होगा जो मुक्त हो गया

1832
02:18:37,720 --> 02:18:43,320
है तो उसके लिए सब चीजें क्या होंगी जो यहां पर हो रही

1833
02:18:43,320 --> 02:18:47,960
है कुछ खेल तमाशा

1834
02:18:47,960 --> 02:18:52,120
नथिंग कुछ नहीं उसके लिए मुक्त के लिए क्या होंगी

1835
02:18:52,120 --> 02:18:56,280
यहां की चीजें खेल तमाशा यह सब जो अच्छाई और बुराई

1836
02:18:56,280 --> 02:19:00,480
है यह हमारे लिए है हमारे पर्सपेक्टिव

1837
02:19:00,480 --> 02:19:04,760
से दुनिया में कुछ अच्छा हो रहा है कुछ बुरा हो रहा है क्योंकि हम अविद्या से ग्रसित

1838
02:19:04,760 --> 02:19:08,840
है और जब हम मुक्त हो जाते हैं तो हमें पता लग जाता है कि वो सब चीजें थी

1839
02:19:08,840 --> 02:19:12,960
जिनको हम रियल मान रहे थे हम अपने से जोड़ रहे थे उसको कि मैं मर रहा हूं

1840
02:19:12,960 --> 02:19:17,080
मेरे ये हो रहा है मेरे वो हो रहा है वो सब वास्तविकता में अविद्या के

1841
02:19:17,080 --> 02:19:21,200
कारण था वस्तुत तो मैं मुक्त हूं यह मेरा सच्चा स्वरूप

1842
02:19:21,200 --> 02:19:25,560
है तो जब उसको मुक्त होने के बाद उसकी फैमिली दिखाई देगी कि सुनामी

1843
02:19:25,560 --> 02:19:29,640
आ रहा है प्रलय आ रही है भूकंप आ रहा है रोड एक्सीडेंट हो रहे हैं कुछ भी

1844
02:19:29,640 --> 02:19:33,800
हो रहे है वो उसकी फैमिली वहां पर तड़पेगी चिल्लाएगी अरे मैं मरा

1845
02:19:33,800 --> 02:19:37,800
अरे मैं यह हुआ वो हुआ मगर वह जो मुक्त अगर होगा उसको देख रहा होगा तो

1846
02:19:37,800 --> 02:19:42,040
उसको कोई फर्क नहीं पड़ेगा वो बल्कि हसेगा अरे इनको पता ही नहीं है अल्प

1847
02:19:42,040 --> 02:19:46,080
बुद्धि है समझ रहे हैं नहीं तोय

1848
02:19:46,080 --> 02:19:48,600
अविद्या विकार ये सब कहां से आए य सब तो गौर

1849
02:19:48,600 --> 02:19:53,080
नहीं देय जो दुनिया में जो क्राइसिस हो रहे हैं

1850
02:19:53,080 --> 02:19:57,080
यह मुक्त आत्मा की दृष्टि से इन क्राइसिस की कोई वैल्यू

1851
02:19:57,080 --> 02:20:01,400
नहीं है पहली बात समझ में आया तो अब जब दूसरी बात

1852
02:20:01,400 --> 02:20:06,520
आती है जब मुक्त आत्मा को कोई फर्क नहीं पड़ रहा है यहां होने

1853
02:20:06,520 --> 02:20:10,760
वाली इस अविद्या रूपी संसार में होने वाले चीजों

1854
02:20:10,760 --> 02:20:14,760
से जब उसको मुक्त आत्मा को कोई फर्क नहीं पड़ रहा है तो हम यह एक्सपेक्ट

1855
02:20:14,760 --> 02:20:18,800
क्यों करते हैं कि ईश्वर को भी फर्क पड़ना चाहिए

1856
02:20:18,800 --> 02:20:22,800
जब मुक्त आत्मा उन प्रभाव से रहित है तो वो तो परम मुक्त

1857
02:20:22,800 --> 02:20:27,240
है वो तो पहले से ही मुक्त है वोह तो अभी मुक्त हुई है

1858
02:20:27,240 --> 02:20:31,400
अब दूसरी बात आती है ये आती कहां से है

1859
02:20:31,400 --> 02:20:35,640
ठीक है यह अविद्या रूपी संसार आता कहां से है

1860
02:20:35,640 --> 02:20:39,800
यह अविद्या रूपी संसार उसी प्रकार से आ जाता है जिस प्रकार से आप कभी

1861
02:20:39,800 --> 02:20:43,960
वीडियो गेम खेलने लगते हैं या अपने मन में कुछ अपना संसार

1862
02:20:43,960 --> 02:20:48,240
कल्पित करने लगते हैं या आप कहीं पर फिल्म देखने चले जाते हैं

1863
02:20:48,240 --> 02:20:52,520
यह अविद्या रूपी संसार वहीं से आता है उसी प्रकार से आता

1864
02:20:52,520 --> 02:20:56,560
है फिल्म देखने जाने में आप कोई उस फिल्म के अधीन

1865
02:20:56,560 --> 02:21:00,640
नहीं होते हैं आप स्वेच्छा से जाते हैं यूं ही जाते

1866
02:21:00,640 --> 02:21:04,080
हैं आपको उसकी आवश्यकता नहीं होती यूं ही ऐसे ही

1867
02:21:04,080 --> 02:21:08,680
भगवान अपनी माया शक्ति से संसार का निर्माण कर देते हैं यूं ही

1868
02:21:08,680 --> 02:21:12,800
बिना किसी प्रयोजन के और अगर हम माने कि नहीं

1869
02:21:12,800 --> 02:21:17,680
हर चीज का प्रयोजन होना चाहिए भगवान बिना प्रयोजन के कुछ नहीं करते

1870
02:21:17,680 --> 02:21:22,080
है ना अगर हम यह कहेंगे तो इसका अर्थ यह माना जाएगा

1871
02:21:22,080 --> 02:21:26,240
कि संसार में कोई ऐसा है ही नहीं जो पूर्ण हो तो

1872
02:21:26,240 --> 02:21:30,400
फिर इसका अर्थ यह माना जाएगा कि जब संसार में ऐसा कोई है ही नहीं जो पूर्ण

1873
02:21:30,400 --> 02:21:34,600
है तो हमारे अंदर पूर्णत्व की चाह विद्यमान क्यों

1874
02:21:34,600 --> 02:21:39,160
है फिर हमें यह मानना होगा कि जब पूर्णत्व की चा विद्यमान

1875
02:21:39,160 --> 02:21:43,280
है और पूर्णत्व है ही नहीं दुनिया में तो इसका मतलब पूर्णत्व

1876
02:21:43,280 --> 02:21:47,520
की चाह रखने वाला मंद बुद्धि है मूल बुद्धि है तो जो ईश्वर

1877
02:21:47,520 --> 02:21:51,720
को नकार रहा है ईश्वर के द्वारा संसार की रचना को नकार रहा

1878
02:21:51,720 --> 02:21:57,000
है वस्तुत व स्वयं को मूर्ख कह रहा है

1879
02:21:57,000 --> 02:22:03,000
क्योंकि उसके अंदर भी ईश्वर की चाह विद्यमान

1880
02:22:04,960 --> 02:22:08,560
है ठीक

1881
02:22:08,560 --> 02:22:12,800
है हा ठीक

1882
02:22:12,800 --> 02:22:16,880
है तो आप बाकी हमारी क्लासेस होती

1883
02:22:16,880 --> 02:22:21,200
है वीकली क्लासेस होती है उसमें आप आए आइए

1884
02:22:21,200 --> 02:22:25,800
उसमें आप अध्ययन करिए हर शनिवार रात 9:00 बजे होती

1885
02:22:25,800 --> 02:22:31,240
है ठीक है ठीक

1886
02:22:31,240 --> 02:22:37,240
हम प्रणाम श्री राम जय श्री राम जय श्री

1887
02:22:40,120 --> 02:22:44,280
राम हरा शंकर जी बोल रहे हैं मुंह

1888
02:22:44,280 --> 02:22:49,160
में कृष्ण दिल में कंस कौन

1889
02:22:49,160 --> 02:22:53,620
हर हर शंकर मुह में कृष्ण दिल में

1890
02:22:53,620 --> 02:22:56,040
[हंसी]

1891
02:22:56,040 --> 02:23:02,040
कंस अरे यार एक से एक कॉमेडी है यहां

1892
02:23:09,680 --> 02:23:15,680
प किरमाड़ा क्या किरमाड़ा भी आए हैं

1893
02:23:21,040 --> 02:23:25,160
श्री राम जय राम राम अखिलेश जी है राम अखिलेश जी आप अपना

1894
02:23:25,160 --> 02:23:28,880
चेहरा

1895
02:23:28,880 --> 02:23:32,920
दिखाए श्री राम जय राम जय जय

1896
02:23:32,920 --> 02:23:37,840
राम सर जय श्री राम जय श्री

1897
02:23:37,840 --> 02:23:41,920
राम महादेव जय श्री कृष्ण पहले भी आया

1898
02:23:41,920 --> 02:23:45,000
था आपको याद है

1899
02:23:45,000 --> 02:23:49,000
ना स्मरण नहीं है बताइए मैं

1900
02:23:49,000 --> 02:23:53,680
वर्णाश्रम पर बात करने

1901
02:23:53,680 --> 02:23:58,640
आ आपने फॉर्म नहीं भरा वर्ण आश्रम के लिए

1902
02:23:58,640 --> 02:24:03,960
देखिए यही आपका एक बहाना हो जाता है ना

1903
02:24:03,960 --> 02:24:08,160
सवाल बस फम भर के आइए सारे बहाने आपके

1904
02:24:08,160 --> 02:24:10,440
हो

1905
02:24:10,440 --> 02:24:14,440
जाएंगे चलिए अब काफी हो गया दो घंटे 24 मिनट

1906
02:24:14,440 --> 02:24:19,040
कल से नामा स्त्र भी प्रारंभ है सभी लोगों को एक बार बता द

1907
02:24:19,040 --> 02:24:23,520
बहाने बहाने नंबर दे दीजिएगा जाने से पहले हां

1908
02:24:23,520 --> 02:24:27,840
ये शाश्वत जी अब फिर किसी दिन आइएगा हो गए हम लोग 8:30

1909
02:24:27,840 --> 02:24:31,920
बजे से बैठे हुए हैं

1910
02:24:31,920 --> 02:24:36,000
और कल से हम लोग नामा स्त्र उठा रहे हैं अपना

1911
02:24:36,000 --> 02:24:40,120
आप लोग भी उठाएं साथ में ना मास्त्र और

1912
02:24:40,120 --> 02:24:44,360
सुबह 5 बजे से 5:30 बजे से सवा

1913
02:24:44,360 --> 02:24:49,240
घंटे वाला सेशन होगा नाम जप का जो सवा घंटे एक साथ करना चाहते हैं उसमें जुड़े

1914
02:24:49,240 --> 02:24:53,320
और जो 15 15 मिनट दिन में पांच बार वाले जुड़ना चाहते हैं वह आप फॉर्म भर

1915
02:24:53,320 --> 02:24:57,400
दीजिए आपको जिसमें सुविधा जनक हो व आपके व आपके पास ऑप्शन रहेगा उसम

1916
02:24:57,400 --> 02:25:01,520
जुड़ सकते हैं जिसमें आप जुड़ना चाह तो

1917
02:25:01,520 --> 02:25:05,840
कल सुबह 5:30 बजे नाम जप प्रारंभ हो जाएगा नामा स्त्र ऑपरेशन

1918
02:25:05,840 --> 02:25:10,120
नाम जप जो भी लोग हमारे साथ मिलकर के भगवान के नाम का

1919
02:25:10,120 --> 02:25:14,200
जप करते हुए आवान करना चाहते हैं वह इसमें जुड़ सकते हैं

1920
02:25:14,200 --> 02:25:18,960
जुड़ने के लिए फॉर्म है फॉर्म के लिए नंबर है

1921
02:25:18,960 --> 02:25:24,480
74836 यहां आप मैसेज करें और वह फॉर्म भर

1922
02:25:24,480 --> 02:25:28,560
दे इसके अलावा यह

1923
02:25:28,560 --> 02:25:32,720
जो भगवान के नाम का जप होगा यह पांच राउंड में होगा

1924
02:25:32,720 --> 02:25:36,720
6 10 दो 6 10 15 15 मिनट तो जो

1925
02:25:36,720 --> 02:25:41,320
सवा घंटे की भक्ति का बल होना चाहिए हर हिंदू में

1926
02:25:41,320 --> 02:25:45,840
उसको हम पुष्ट करेंगे अर्जित

1927
02:25:45,840 --> 02:25:47,320
करेंगे पुष्ट

1928
02:25:47,320 --> 02:25:51,360
करेंगे और इस नाम जप अभियान में कोई भी जुड़

1929
02:25:51,360 --> 02:25:55,600
सकता है व हमारे विचारों से सहमत हो या ना हो

1930
02:25:55,600 --> 02:25:59,600
कोई भी जुड़ सकता है जो भी भगवान का नाम लेना चाहता है वो सब

1931
02:25:59,600 --> 02:26:03,720
जुड़ सकते हैं पियूष धवानी जी फिर जबाती हो गए

1932
02:26:03,720 --> 02:26:07,800
हैं मुझे लिख और मोटे मोटा तो मैं हूं यार उसमें

1933
02:26:07,800 --> 02:26:13,800
क्या दिक्कत है विशाल जी आप बताए कुछ कहना चाहते

1934
02:26:14,560 --> 02:26:18,800
हैं बोलिए विशाल जी अभी

1935
02:26:18,800 --> 02:26:23,440
कल परसों जो आपने आर के ऊपर वीडियो बनाया

1936
02:26:23,440 --> 02:26:27,600
था तो उसका खंडन हो रहा है चारों तरफ

1937
02:26:27,600 --> 02:26:31,640
वो तो होना ही चाहिए जो पुराणों को लेकर राधारा जी

1938
02:26:31,640 --> 02:26:35,960
को लेकर जो उनकी बातें होती हैं अब वह क्या करें अभी आपने

1939
02:26:35,960 --> 02:26:39,960
एक पुस्तक बताया था जो कपाती जी महाराज का है राधा सुधा निधि

1940
02:26:39,960 --> 02:26:44,280
करके कुछ वही है ना एक पुस्तक

1941
02:26:44,280 --> 02:26:48,640
मेरे पास एक मेरे पास है आप उसको भी एक बार चाहो तो पढ़ सकते हैं ये

1942
02:26:48,640 --> 02:26:52,920
राधा माधव चिंतन गीता प्रेस से है ये हनुमान प्रसाद पदास जी जो पूज्य

1943
02:26:52,920 --> 02:26:57,600
भाई जी थे उन्होंने ये लिखी है आप एक बार इस पुस्तक को आप एक बार जरूर पढ़िए

1944
02:26:57,600 --> 02:27:01,640
इस पुस्तक को आप पढ़ेंगे ना तो उसमें राधा तत्व का तो वर्णन किया गया है

1945
02:27:01,640 --> 02:27:02,680
और जो आय

1946
02:27:02,680 --> 02:27:06,760
समाज की जितने चीज है कि जैसे वो कहते हैं कि श्री कृष्ण को हम महापुरुष मानते हैं

1947
02:27:06,760 --> 02:27:11,160
वो ईश्वर नहीं है और जो राधा

1948
02:27:11,160 --> 02:27:15,280
जी को भी लेकर जो इनके मंतव्य होते हैं उनका आधा खंडन तो आपको उस पुस्तक में

1949
02:27:15,280 --> 02:27:19,320
मिल जाएगा और जो ब्रह्म पुराण है उस

1950
02:27:19,320 --> 02:27:23,520
पर भी ये लोग बहुत जो ये लोग उछलते हैं उसपे भी बातें इसमें कही गई है भाई

1951
02:27:23,520 --> 02:27:28,280
जी ने कही है इसमें तो आप एक बार इस पुस्तक को जरूर पढ़िए

1952
02:27:28,280 --> 02:27:32,680
बिल्कुल बिल्कुल तो ऐसा है जो आर्य

1953
02:27:32,680 --> 02:27:37,760
समाज के जो लोग हैं अगर हमें सुन रहे हैं

1954
02:27:37,760 --> 02:27:41,840
अ मैं उनसे कहूंगा पहली बात तो एक चैनल है कार्ते

1955
02:27:41,840 --> 02:27:45,920
कार्य के नाम से है शायद तो वह भी कुछ

1956
02:27:45,920 --> 02:27:50,920
प्रयास करते हैं सबसे पहले उनको साहस जुटाना चाहिए अपने चेहरे को दिखाएं

1957
02:27:50,920 --> 02:27:55,160
और सामने से आकर के धर्म रक्षा के लिए उतरे

1958
02:27:55,160 --> 02:27:59,360
कायरों की तरह व्यवहार करना बेकार है क्योंकि आपने

1959
02:27:59,360 --> 02:28:03,480
एक दो महीने पहले उनको पत्र लिखा था उनको रा गौतम खट्ट को वो लोग देखिए आए नहीं

1960
02:28:03,480 --> 02:28:07,520
है हां मैंने लिखा था मैंने कहा था जिसको भी कोई प्रॉब्लम है

1961
02:28:07,520 --> 02:28:11,560
वह आए और यहां आमने सामने बैठ के करें ऑनलाइन करें जैसे

1962
02:28:11,560 --> 02:28:15,560
भी करना हो करें संपर्क करें तो वह तो किया नहीं और जाकर और हमने

1963
02:28:15,560 --> 02:28:17,760
अपना नंबर भी पब्लिक कर रखा है फिर

1964
02:28:17,760 --> 02:28:22,040
भी वो अपने चैनल पर कह रहे हैं कि देखो हम लाइव कर ले कर लेंगे

1965
02:28:22,040 --> 02:28:26,160
पता नहीं पुरा क्या प्रॉब्लम हैट के साथ खिलवाड़

1966
02:28:26,160 --> 02:28:32,160
हमने नहीं किया है जिसने किया है आपको उससे कहना

1967
02:28:34,080 --> 02:28:38,120
चाहिए मुझे नहीं समझ में आता उनको प्रॉब्लम य है कि देखिए जिसका

1968
02:28:38,120 --> 02:28:42,560
अस्तित्व ही किसी के विरोध में तैयार होता है तो उसको तो आजीवन

1969
02:28:42,560 --> 02:28:46,680
करना पड़ेगा ना विरोध अब जैसे इस्लाम का अस्तित्व ही है कि

1970
02:28:46,680 --> 02:28:51,040
वो सनातन के विरोध में ही अपने से पहले जो है

1971
02:28:51,040 --> 02:28:55,560
उनके विरोध में ही वह बना है तो वह तो आखिरी दम तक वह करेगा ही ना

1972
02:28:55,560 --> 02:28:59,880
सनातन नहीं तो फ सनातन से अलग कैसे होगा वह तो आर्य

1973
02:28:59,880 --> 02:29:03,920
समाज का अस्तित्व ही तभी है जब वह परंपरा प्राप्त सिद्धांतों का विरोध

1974
02:29:03,920 --> 02:29:08,000
करे तो फिर वह अगर वह समर्थन कर देगा

1975
02:29:08,000 --> 02:29:12,280
तो फिर उसमें अलग क्या रह जाएगा फिर कैसे व

1976
02:29:12,280 --> 02:29:16,440
कैसे वह मां-बाप की इच्छा के विरुद्ध जो जोड़े विवाह करने पहुंच

1977
02:29:16,440 --> 02:29:20,480
जाते हैं उनका विवाह कैसे होगा सेसे

1978
02:29:20,480 --> 02:29:24,480
अगर कोई मुस्लिम हिंदू बिटिया से विवाह करना चाहता है

1979
02:29:24,480 --> 02:29:29,120
तो उसका वही की वही सर्टिफिकेट बना करके भैया इसने इस्लाम को अपना लिया इसकी

1980
02:29:29,120 --> 02:29:32,800
हम विवाह को विवाह करा दे रहे हैं 00 रप की वहां पर वो

1981
02:29:32,800 --> 02:29:36,960
हो जाती है फीस शुल्क जो भी है

1982
02:29:36,960 --> 02:29:41,280
तो यह सब कैसे होगा ये आ समाज वाले बोलते कि ईश्वर

1983
02:29:41,280 --> 02:29:46,640
कभी साकार नहीं हो सकता य सतलोक वाले बोलते कि ईश्वर कभी निराकार नहीं हो

1984
02:29:46,640 --> 02:29:52,440
सकता और ईश्वर वही है जो कुछ भी कर सकता है

1985
02:29:52,440 --> 02:29:57,400
अगर ईश्वर के सामने

1986
02:29:57,400 --> 02:30:02,160
कोई इनको इनको आ रही है तो जिसके बारे

1987
02:30:02,160 --> 02:30:06,400
में ब्र हमने स्टोरी में रखा था हमने

1988
02:30:06,400 --> 02:30:10,440
कौन सी स्टोरी में रखा था हमने स्टोरी में नहीं रखा

1989
02:30:10,440 --> 02:30:14,600
हैय गलत बात है झूठ हैय आप स्क्रीनशॉट लाइए हमने कब

1990
02:30:14,600 --> 02:30:18,760
उसको स्टोरी में लगाया था जी हा पियूष जी दो अक्टूबर था

1991
02:30:18,760 --> 02:30:24,200
आज है ड्राई डे है य सम मत करिए आज

1992
02:30:24,200 --> 02:30:28,280
इनको ब्रह्म पुराण इससे पहले के जो पुराण है पद्म पुराण शिव

1993
02:30:28,280 --> 02:30:32,800
पुराण यह भी तो एक पढ़े ना उसमें राधा कृष्ण का क्या संबंध है

1994
02:30:32,800 --> 02:30:36,960
उसमें खाली ब्रम पुराण ही उनको दिखता है

1995
02:30:36,960 --> 02:30:41,280
लि भी होगा तो मिलावट व ग्रंथों में हमारे हुई है तो उल्टा सीधा उत

1996
02:30:41,280 --> 02:30:45,280
मिने उस कर दिया होगा नहीं नहीं होगा पर

1997
02:30:45,280 --> 02:30:48,160
बात नहीं करते हैं अगर ग्रंथ में कहीं पर मिलावट

1998
02:30:48,160 --> 02:30:52,280
होगी तो इसका निर्णय करने वाले परंपरा प्राप्त आचार्य हैं बस

1999
02:30:52,280 --> 02:30:58,280
और कोई नहीं करेगा ऐसी बातें नहीं कहते

2000
02:30:59,680 --> 02:31:04,520
हम अंग्रेजों ने मुगलों ने कुछ नहीं किया था तब

2001
02:31:04,520 --> 02:31:08,520
जो किया है वह हमारे जो आचार्य गण है उन्होंने उसको बताया

2002
02:31:08,520 --> 02:31:12,680
है कि यहां पर किया यहां नहीं किया है मगर जो रास

2003
02:31:12,680 --> 02:31:16,680
लीला है या राधा माधव जो संघ है वो

2004
02:31:16,680 --> 02:31:20,680
जो परमेश्वर है उनकी जो आराधी शक्ति है वो लीला पूर्वक

2005
02:31:20,680 --> 02:31:25,080
अपनी कार्य करने की प्रणाली को दर्शाने के लिए इस प्रकार की लीलाएं

2006
02:31:25,080 --> 02:31:29,080
करती हैं इसके साथ ही साथ और भी बहुत सी चीजें

2007
02:31:29,080 --> 02:31:33,080
हैं जो उसमें आ जाती है अब जैसे

2008
02:31:33,080 --> 02:31:37,840
म श्रीमद भागवत के गवे स्कं के अध्याय 15 के अनुसार

2009
02:31:37,840 --> 02:31:41,840
सिद्धियां होती हैं जो बागेश्वर जी के लिए प्रश्न किया जा रहा था क्या

2010
02:31:41,840 --> 02:31:45,840
उनके पास सिद्धियां है आप ऐसा मानते हो कि नहीं बिल्कुल

2011
02:31:45,840 --> 02:31:49,920
गुरुदेव ने खुद कहा था कि भाई विद्या है जब तक व

2012
02:31:49,920 --> 02:31:54,040
समझ में नहीं आती है तब तक ऐसा हो सकता है कि

2013
02:31:54,040 --> 02:31:58,160
वह आपको चमत्कार लगे मगर जब आ जाती तो विद्या कहलाती है

2014
02:31:58,160 --> 02:32:02,160
वो तो हनुमान जी ने कुछ उनको सिद्धि कुछ कृपा करके दिया कि लाखों में किसी एक

2015
02:32:02,160 --> 02:32:03,440
को ही सिद्धि

2016
02:32:03,440 --> 02:32:08,560
हनुमान जी से मिलती है एक वो भी है हनुमान जी के भक्त है वो

2017
02:32:08,560 --> 02:32:12,760
तो जी चलिए आप आए विशाल भाटिया

2018
02:32:12,760 --> 02:32:15,840
जी अच्छा लगा

2019
02:32:15,840 --> 02:32:21,840
और अब हम किसी और दिन रखते हैं

2020
02:32:23,240 --> 02:32:27,240
सनातन शंकरा आए हैं अब हम किसी और दिन

2021
02:32:27,240 --> 02:32:31,360
रखते हैं अपना और कल से एक

2022
02:32:31,360 --> 02:32:36,320
नया आरंभ करने वाले हैं बड़े अ

2023
02:32:36,320 --> 02:32:40,960
अभियान का सभी को जय श्री राम जय श्री राम

2024
02:32:40,960 --> 02:32:45,000
आप भी जुड़िए हो सके तो नामा आस्क में आप भी जुड़िए

2025
02:32:45,000 --> 02:32:49,120
नाम जप तो जुड़ अ हां प

2026
02:32:49,120 --> 02:32:54,840
आप स्वागत है यह मोटा आपके साथ नाम जप करेगा चिंता मत

2027
02:32:54,840 --> 02:32:59,640
करिए जय श्री राम जय श्री राम हर हर

2028
02:32:59,640 --> 02:33:03,640
महादेव जय बजरंग
