1
00:00:02,080 --> 00:00:06,520
तो सभी को जय श्री

2
00:00:06,520 --> 00:00:11,800
राम आज भी पहले की तरह ही विलंब हो गया

3
00:00:11,800 --> 00:00:16,720
है ऐसा लगने लगा है कि हर बार हमारी स्ट्रीम विलंबी

4
00:00:16,720 --> 00:00:20,760
दिए गए समय से विलंब हो जाता है पर मुझे अपेक्षा है

5
00:00:20,760 --> 00:00:24,920
आप लोगों से और मैं जानता भी हूं कि जो भी समर्थक है वो ये समझ रहे

6
00:00:24,920 --> 00:00:29,000
होंगे कि बहुत सारे दायित्व है जिनका

7
00:00:29,000 --> 00:00:33,560
वहन कर रहे हैं भगवत कृपा से भगवान की शक्ति से ही

8
00:00:33,560 --> 00:00:37,600
उस कारण से थोड़ा सा ऊपर नीचे हो जाता है इससे अन्यथा ना

9
00:00:37,600 --> 00:00:41,880
ले ऐसी प्रार्थना है आप सभी

10
00:00:41,880 --> 00:00:45,880
से तो जो जिनके साथ अभी हमारी चर्चा होने वाली है

11
00:00:45,880 --> 00:00:50,840
वो अभी आए नहीं है तो

12
00:00:50,840 --> 00:00:56,840
आप तब तक अपने कुछ प्रश्न हो तो आप कर सकते

13
00:00:58,280 --> 00:01:02,600
हैं नाम जप अभियान जो है ऑपरेशन नाम जप

14
00:01:02,600 --> 00:01:07,160
वो अ न तारीख से प्रारंभ हो रहा है

15
00:01:07,160 --> 00:01:11,520
और अभी हमने लास्ट वीडियो जो डाला है आर्य समाज के लिए जिसमें कि

16
00:01:11,520 --> 00:01:16,080
हमने उन चीजों को प्रकाश में लाए हैं कि किस तरीके से अवमानना

17
00:01:16,080 --> 00:01:20,800
की जाती है जहां पर हमारी श्रद्धा है उन विषयों की

18
00:01:20,800 --> 00:01:25,080
जैसे राधा मां और

19
00:01:25,080 --> 00:01:29,160
भगवान श्री कृष्ण का जो प्रेम संबंध है उनके

20
00:01:29,160 --> 00:01:33,560
बीच का जो अलाद नहीं शक्ति है भगवान की राधा

21
00:01:33,560 --> 00:01:37,320
तो उनका किस प्रकार से

22
00:01:37,320 --> 00:01:41,400
उपास उपास नहीं बल्कि

23
00:01:41,400 --> 00:01:46,320
अपमान जनक उनके लिए वक्तव्य दिए जाते हैं तो

24
00:01:46,320 --> 00:01:50,640
इस सब पर हमने जो वीडियो बनाया था अभी

25
00:01:50,640 --> 00:01:55,360
उसमें हमें कई सारे लोगों ने कहा कि भैया क्या करना है बताइए आपका मार्गदर्शन

26
00:01:55,360 --> 00:02:00,120
दीजिए या फिर कैसे करना है बताइए बस शुरू करिए

27
00:02:00,120 --> 00:02:04,440
तो अगर आप हमें बड़े भाई के रूप में देखते हैं तो आज आपका बड़ा भाई आपको

28
00:02:04,440 --> 00:02:09,560
निर्देश दे रहा है कि आप इस ऑपरेशन नाम जप से

29
00:02:09,560 --> 00:02:13,800
जुड़िए क्योंकि जैसा कि भगवान ने

30
00:02:13,800 --> 00:02:18,200
कहा कि तू मेरी शरण में आ जा

31
00:02:18,200 --> 00:02:22,320
तेरी प्राप्ति की रक्षा और अप्राप्य की चिंता

32
00:02:22,320 --> 00:02:26,320
मैं करूंगा भगवत गीता 92 में

33
00:02:26,320 --> 00:02:30,520
उन्होंने कहा तो हम लोग सदैव जीवन

34
00:02:30,520 --> 00:02:36,520
में यह सोचते रहते हैं कि अपनी समस्याओं को हम खुद ही

35
00:02:36,520 --> 00:02:41,280
सुलझाए और इस कारण से हम

36
00:02:41,280 --> 00:02:45,440
भगवान की शरण में जाने के कार्य को बाद के लिए रखते

37
00:02:45,440 --> 00:02:49,440
हैं मगर यदि हमें धर्म के लिए कुछ भी करना है अपने व्यक्तिगत

38
00:02:49,440 --> 00:02:53,560
स्वार्थ के लिए आध्यात्म के स्वार्थ के लिए भौतिक स्वार्थ

39
00:02:53,560 --> 00:02:58,200
के लिए समाज के लिए परिवार के लिए कुटुंब के लिए

40
00:02:58,200 --> 00:03:02,320
हमें कुछ भी करना है धर्म के लिए आपको आप में आप

41
00:03:02,320 --> 00:03:07,160
मेरी सहायता करना चाहते हैं ना इस अभियान में भाग लेना चाहते हैं ना तो सबसे

42
00:03:07,160 --> 00:03:11,240
पहले भगवान के नाम के जप में भाग लीजिए ऑपरेशन नाम

43
00:03:11,240 --> 00:03:15,280
जप में आप भाग लीजिए उससे जुड़िए सवा घंटे

44
00:03:15,280 --> 00:03:19,360
की भक्ति का बल एकत्र करिए और स्वतः

45
00:03:19,360 --> 00:03:23,920
देखिएगा कि आप एक बहुत ही महत्त्वपूर्ण योद्धा के नजर में

46
00:03:23,920 --> 00:03:28,480
महत्वपूर्ण योद्धा के रूप में आप समाज के सामने प्रस्तुत होंगे

47
00:03:28,480 --> 00:03:30,120
हमारे

48
00:03:30,120 --> 00:03:34,120
जो आज के वक्ता है रामपाल जी की ओर से वह

49
00:03:34,120 --> 00:03:39,920
आ चुके हैं हम उनको स्टेज पर

50
00:03:39,920 --> 00:03:44,440
ले जय श्री राम ज्ञानी दास जी

51
00:03:44,440 --> 00:03:48,600
रामम जी जी

52
00:03:48,600 --> 00:03:53,000
तो ज्ञानी दस जी आप सर्वप्रथम अपना परिचय देते हुए

53
00:03:53,000 --> 00:03:57,440
हमें बता दें दर्शकों को यह बता दें कि आप

54
00:03:57,440 --> 00:04:01,640
रामपाल जी से कहां से जुड़े हुए हैं और

55
00:04:01,640 --> 00:04:06,440
रामपाल जी की जो शिक्षा है वह आप तक किस तरह से पहुंचती

56
00:04:06,440 --> 00:04:11,080
है जी मेरा नाम ज्ञानी दास

57
00:04:11,080 --> 00:04:15,400
है मैं तहसील साडोरा जिला अशोकनगर एमपी का रहने वाला

58
00:04:15,400 --> 00:04:19,520
हूं और मुझे जस्ट दो साल जुड़े हुए संत

59
00:04:19,520 --> 00:04:24,200
रामपाल जी

60
00:04:24,200 --> 00:04:28,720
महाराज किस प्रकार से आप तक उनकी शिक्षा पहुंचती

61
00:04:28,720 --> 00:04:33,000
है सत्संग के द्वारा टीवी चैनलों के

62
00:04:33,000 --> 00:04:37,920
द्वारा डायरेक्ट आप कभी मिले हैं क्या उनसे

63
00:04:37,920 --> 00:04:42,000
किन से रामपाल जी से

64
00:04:42,000 --> 00:04:46,080
संत रामपाल जी महाराज से टीवी के द्वारा जो लाइव

65
00:04:46,080 --> 00:04:50,440
चलता है उनके द्वारा हमको सत्संग सुनने को मिलता है लेकिन

66
00:04:50,440 --> 00:04:55,280
मिले नहीं है आपकी नाम दीक्षा कैसे हुई

67
00:04:55,280 --> 00:05:00,080
हमारी नाम दीक्षा संत रामपाल जी महाराज से ऑनलाइन हुई है

68
00:05:00,080 --> 00:05:04,320
ऑनलाइन मतलब मैं समझा नहीं कैसे समझाए थोड़ा ला गुरु

69
00:05:04,320 --> 00:05:08,480
गुरुजी द्वारा मंत्र दिया जाता है तो व ऑनलाइन दिया जाता है

70
00:05:08,480 --> 00:05:12,480
सिर्फ मतलब जो गुरुजी दे सकते हैं और और

71
00:05:12,480 --> 00:05:16,520
कोई नहीं दे सकता उसके द ऑनलाइन मतलब जो टीवी के द्वारा

72
00:05:16,520 --> 00:05:20,680
है ना जैसे अपन लोग बात कर रहे हैं ना

73
00:05:20,680 --> 00:05:25,400
उसी प्र मल मतलब उन्होंने टीवी पर आपको मंत्र

74
00:05:25,400 --> 00:05:30,960
दिया उनको यह मालूम था व मंत्र किसको दे रहे हैं

75
00:05:30,960 --> 00:05:35,400
उन तो सर वहां पर तो बहुत सारे भक्त होते

76
00:05:35,400 --> 00:05:39,200
हैं नहीं नहीं जैसे मान लीजिए अभी जैसे जो

77
00:05:39,200 --> 00:05:43,440
गुरु मंत्र देते हैं तो शिष्य के लिए देते हैं भले

78
00:05:43,440 --> 00:05:47,560
वो कान में ना भी दे पाए मगर शिष्य के लिए देते हैं तो यह मालूम होता

79
00:05:47,560 --> 00:05:51,760
है शय है इसको दे रहे हैं तो

80
00:05:51,760 --> 00:05:55,880
जैसे आपने कहा कि आपने उनसे टीवी पर उनको देखा मंत्र देते

81
00:05:55,880 --> 00:06:00,560
हुए तो क्या इस प्रकार से अभी उनका वो वीडियो मैं अगर ल लू

82
00:06:00,560 --> 00:06:04,640
और मैं उनका वो वीडियो देख लू मंत्र दे रहे हैं तो मेरे भी मेरा भी नाम दान

83
00:06:04,640 --> 00:06:10,120
हो जाएगा नहीं होगा सर कैसे

84
00:06:10,120 --> 00:06:14,200
होगा आपके लिए वो

85
00:06:14,200 --> 00:06:18,200
नंबर जो सत्संग आता है ना उस पर एक नंबर चलता

86
00:06:18,200 --> 00:06:22,240
है तो उसमें अपन फोन लगा

87
00:06:22,240 --> 00:06:27,000
कर के जो आप जिस जिले के हो ना तो उसी जिले में आपका

88
00:06:27,000 --> 00:06:31,640
नामदान वहीं पर हो जाता है नामदान के होता है छोटे छोटे

89
00:06:31,640 --> 00:06:36,520
जैसा कि एसबीआई बैंक के छोटे छोटे क्स होते ना उ उसी प्रकार

90
00:06:36,520 --> 00:06:40,600
यह क्स मतलब सेंटर होते हैं नाम दीक्षा सेंटर तो तो

91
00:06:40,600 --> 00:06:45,000
वहां से पता लग जाता है कि हम य जिले में यह सेंटर

92
00:06:45,000 --> 00:06:49,800
नहीं सेंटर का पता लग गया मगर आपका

93
00:06:49,800 --> 00:06:54,240
जो आपकी दीक्षा जो हुई है व तो उसी पर हुई ना ऑनलाइन

94
00:06:54,240 --> 00:07:00,240
सेंटर का क्या रोल है सेंटर के द्वारा ही होगी ना

95
00:07:00,360 --> 00:07:04,560
आप थोड़ा समझाइए जैसे आप एक सेंटर पर गए सेंटर

96
00:07:04,560 --> 00:07:08,600
पर जाकर आपने कहा मुझे नाम दान चाहिए फिर उन्होंने आपको क्या

97
00:07:08,600 --> 00:07:12,720
कहा क्या दिया उन्होंने देखो सर वो भी

98
00:07:12,720 --> 00:07:16,720
सेवादार है हमारे जैसे सेवादार वो भी है लेकिन गुरु जी ने

99
00:07:16,720 --> 00:07:20,760
उनको सेवा दे रखी है तो उनका काब

100
00:07:20,760 --> 00:07:25,000
भाई साहब इसीलिए मुझे बीच में इंटरप्ट करना पड़ता है कितना सरल मैंने पूछा है

101
00:07:25,000 --> 00:07:29,520
मैं तो यह कह रहा हूं कि आप जब नामदान सेंटर पर गए आपने

102
00:07:29,520 --> 00:07:33,640
बताया मुझे जो है नाम दान चाहिए तो उन्होंने को

103
00:07:33,640 --> 00:07:37,720
क्या दिया क्या कहा कैसे

104
00:07:37,720 --> 00:07:41,960
ये प्रोसेस क्या हुई आगे जी अरे सर सीधी

105
00:07:41,960 --> 00:07:46,000
सी बात है हमको गुरु मंत्र दिया उन्होंने सर ने है ना हमारे संत रामपाल जी

106
00:07:46,000 --> 00:07:50,000
महाराज ने सीधे सीधी स बात रामपाल

107
00:07:50,000 --> 00:07:56,000
जी महाराज तो थे ही नहीं ना वहा नामदान सेंटर पर थे क्या

108
00:07:56,080 --> 00:08:00,680
सुनो जी जीकी और

109
00:08:00,680 --> 00:08:04,760
देखो सर आप वहां पर हो जहां पर हो वहां पर और हम यहां

110
00:08:04,760 --> 00:08:09,600
पर हैं तो हमारी बात कैसे हो रही है इंटरनेट के द्वारा है ना जी

111
00:08:09,600 --> 00:08:14,040
तो उसी प्रकार नाम मतलब

112
00:08:14,040 --> 00:08:18,160
कि आप जब नाम नाम नामदान सेंटर पर पहुंचे आपने

113
00:08:18,160 --> 00:08:22,200
कहा मुझे नामदान चाहिए तो उन्होंने कोई वीडियो कॉल या कोई

114
00:08:22,200 --> 00:08:26,640
गल मीट वगैरह चालू कर दी जिसमें कि वो बैठे थे

115
00:08:26,640 --> 00:08:30,800
कौन रामपाल जी वो बैठे थे

116
00:08:30,800 --> 00:08:35,000
और उन्होंने आपको दीक्षा दे दी

117
00:08:35,000 --> 00:08:39,160
ऐसा है जी उन्होंने आपसे बात भी की जैसे

118
00:08:39,160 --> 00:08:43,320
अभी हम लोगों की बात हो रही है ऐसे आपकी बात हुई

119
00:08:43,320 --> 00:08:47,640
जी हां उन्होंने आपका नाम

120
00:08:47,640 --> 00:08:51,880
पूछा क्या बात हुई आप इतने सारे

121
00:08:51,880 --> 00:08:56,000
लोग हैं इतना टाइम नहीं होता है नाम पूछने के

122
00:08:56,000 --> 00:09:00,120
लिए मतलब वो जब वो जब ग मीट प आते हैं

123
00:09:00,120 --> 00:09:04,840
तो एक साथ बहुत सारे लोगों को एक ही साथ देते हैं दीक्षा अलग-अलग नहीं

124
00:09:04,840 --> 00:09:08,880
देते अच्छा तो इसका मतलब जब वो गगल मीट पर आते हैं तो उनको यह

125
00:09:08,880 --> 00:09:12,120
भी नहीं पता होता है कि वह किसको नामदान दे रहे

126
00:09:12,120 --> 00:09:16,360
हैं सर मेरी बात सुनो उनके द्वारा एक फॉर्म भरा

127
00:09:16,360 --> 00:09:20,760
जाता है हा है ना तो सब

128
00:09:20,760 --> 00:09:24,800
वहां पर पहुंच जाती है एंट्री के द्वारा सब उनको पता होता है

129
00:09:24,800 --> 00:09:28,960
कि हमारे शस इतने जिले में इतने जिले में इतने

130
00:09:28,960 --> 00:09:33,160
जिले में सब पता होता है उनको वो जेल सेही

131
00:09:33,160 --> 00:09:38,440
होता है उनका गल मीट वगैरह उनका स

132
00:09:38,440 --> 00:09:44,440
उनको पता है उनकी संगत का कि हमारी इस जिले में इतनी संगत

133
00:09:44,760 --> 00:09:48,880
है ठीक है उसके बाद

134
00:09:48,880 --> 00:09:53,640
जो उनके नाम से आने वाली जो सामग्री है

135
00:09:53,640 --> 00:09:57,960
शिक्षा वो जिसम वो खुद बोल रहे हैं वो तो चलो वीडियो

136
00:09:57,960 --> 00:10:02,720
है बाकी उनके ग्रंथ वर कैसे प्रामाणिक होते हैं आपके

137
00:10:02,720 --> 00:10:06,760
लिए ग्रंथ वगैरह ऐसे मिलते हैं

138
00:10:06,760 --> 00:10:10,960
कि हम जो बड़े-बड़े आश्रम होते हैं ना उन

139
00:10:10,960 --> 00:10:15,520
पर आपको सारे ग्रंथ मिल जाएंगे हा

140
00:10:15,520 --> 00:10:19,600
तो दीक्षा आपकी कब हुई है दीक्षा

141
00:10:19,600 --> 00:10:23,840
हुई है हमारी 24 2 22 में हुई

142
00:10:23,840 --> 00:10:28,760
है 2 जी ठीक है

143
00:10:28,760 --> 00:10:33,880
अभी हम लोग विषय पर आते

144
00:10:33,880 --> 00:10:37,960
हैं रामपाल जी द्वारा ईश्वर के अस्तित्व को

145
00:10:37,960 --> 00:10:42,240
किस प्रकार सिद्ध किया जाता है वह थोड़ा सा

146
00:10:42,240 --> 00:10:46,520
बताए संत रामपाल जी महाराज के द्वारा ईश्वर

147
00:10:46,520 --> 00:10:50,600
को मनुष्य दृश्य स शरीर

148
00:10:50,600 --> 00:10:54,160
राजा के

149
00:10:54,160 --> 00:10:58,240
समान जो है राजा के समान दिखाई देने

150
00:10:58,240 --> 00:11:02,320
वाला जिसको हम देख सकते हैं नहीं

151
00:11:02,320 --> 00:11:06,800
नहीं आप समझे नहीं मेरा प्रश्न ये है कि अगर

152
00:11:06,800 --> 00:11:10,920
हमारे सामने एक नास्तिक है वो ये कह रहा है ईश्वर

153
00:11:10,920 --> 00:11:14,960
है ही नहीं मुझे विश्वास नहीं है इस दुनिया में कोई ईश्वर है मैं नहीं

154
00:11:14,960 --> 00:11:19,160
मानता धर्म को तो उसके लिए हमारे पास रामपाल जी के अनुसार

155
00:11:19,160 --> 00:11:23,400
क्या जवाब है सर उनके लिए

156
00:11:23,400 --> 00:11:27,800
तो देखो वो बात अलग है कि नास्तिक है है ना

157
00:11:27,800 --> 00:11:32,160
तो उनके लिए तो कोई समझाना

158
00:11:32,160 --> 00:11:36,680
बड़ी बात नहीं हैते सुनो बशर्ते वो व्यक्ति

159
00:11:36,680 --> 00:11:41,120
नशा करता है है ना नशा करता है तो उसके लिए संत रामपाल

160
00:11:41,120 --> 00:11:45,280
जी महाराज की शिक्षाओं से प्रेरित होकर नाम दीक्षा लेकर उसका

161
00:11:45,280 --> 00:11:49,920
नशा छूट सकता है तोल ले सकता है संत रामपाल जी महाराज से

162
00:11:49,920 --> 00:11:54,000
दीक्षा आप समझ नहीं रहे हैं सबसे पहली

163
00:11:54,000 --> 00:11:58,040
लड़ाई जो होती है धर्म और धर्म की आपके अनुसार रामपाल जी महाराज

164
00:11:58,040 --> 00:12:02,080
धर्म धार्मिक है ना धर्म का ज्ञान देने वाले हैं ना

165
00:12:02,080 --> 00:12:06,720
बिल्कुल धार्मिक है हिंदू धर्म के और हम भी ू हिंदू धर्म के ही है

166
00:12:06,720 --> 00:12:10,760
तो अगर वह धार्मिक है तो धर्म और अधर्म की जो धर्म और अधर्म के

167
00:12:10,760 --> 00:12:15,400
बीच जो सबसे पहली लड़ाई है वह होती है आस्तिक और नास्तिक के

168
00:12:15,400 --> 00:12:19,440
बीच जी और नास्तिक के बीच तो क्या

169
00:12:19,440 --> 00:12:23,680
संत रामपाल जी के पास ऐसे सिद्धांत है जिससे हम नास्तिकों का मुंह

170
00:12:23,680 --> 00:12:27,960
बंद कर सकते हो मतलब नास्तिक अगर ये कह रहा है

171
00:12:27,960 --> 00:12:32,000
कि मुझे भरोसा नहीं कि इस दुनिया में कोई ईश्वर है मुझे

172
00:12:32,000 --> 00:12:36,360
नहीं मैं नहीं मानता तो हम उसको कैसे विश्वास दिलाएं रामपाल

173
00:12:36,360 --> 00:12:40,720
जी के अनुसार कि इस दुनिया में ईश्वर है

174
00:12:40,720 --> 00:12:44,760
देखो उसको पता चलेगा सर मान लो कि

175
00:12:44,760 --> 00:12:48,880
उनके संत रामपाल जी महाराज के शिष्य हैं और उनके

176
00:12:48,880 --> 00:12:52,920
आंखों के सामने उसको दिखा रहा है कि यह व्यक्ति

177
00:12:52,920 --> 00:12:56,920
जब इस मार्ग में नहीं था अध्यात्म मार्ग में उससे पहले इसकी

178
00:12:56,920 --> 00:13:01,160
क्या स्थिति थी और उसके बाद उसकी क्या स्थिति थी लाने

179
00:13:01,160 --> 00:13:05,160
का सिर्फ एक ही वो है उसका कि उसको मतलब

180
00:13:05,160 --> 00:13:09,440
देख कर के आ सकता है वो व्यक्ति बरना उसके लिए

181
00:13:09,440 --> 00:13:14,000
कोई नहीं ला सकता नहीं नहीं ये तो

182
00:13:14,000 --> 00:13:18,160
ये तो डॉक्टर भी करता है ना डॉक्टर के पास जाने से पहले व्यक्ति बीमार

183
00:13:18,160 --> 00:13:22,800
था डॉक्टर से इलाज किराया ठीक हो गई

184
00:13:22,800 --> 00:13:26,880
बीमारी सर अपन जिस टॉपिक को लेकर आए हैं उसको बात करो

185
00:13:26,880 --> 00:13:30,880
ना नहीं नहीं टॉपिक वही है टॉपिक वही है क्या

186
00:13:30,880 --> 00:13:35,640
रामपाल जी के अनुसार ईश्वर का अस्तित्व सिद्ध हो सकता है

187
00:13:35,640 --> 00:13:39,680
हम हमारे पास वो सिद्धांत है जिससे हम नास्तिक का मुह

188
00:13:39,680 --> 00:13:43,880
बंद कर सकते हैं ईश्वर के अस्तित्व को सिद्ध कर सकते हैं मैं आपसे

189
00:13:43,880 --> 00:13:48,160
पूछ रहा हूं क्या रामपाल जी के अनुसार आपको ईश्वर

190
00:13:48,160 --> 00:13:52,240
की सिद्धि प्राप्त हुई है क्या ईश्वर है सबसे पहले यह

191
00:13:52,240 --> 00:13:56,240
बात किसी भी धार्मिक उसम जाएंगे आप किसी भी

192
00:13:56,240 --> 00:14:00,880
धार्मिक उस में जाएंगे जो प्रामाणिक आचार्य गण होंगे प्रामाणिक परंपरा होंगी

193
00:14:00,880 --> 00:14:05,160
वास्तविक संत होंगे वो सबसे पहले उनके य की जो शिक्षा

194
00:14:05,160 --> 00:14:09,400
स्टार्ट होती है वो होती है इससे ईश्वर है कि नहीं वो यह समझाएंगे

195
00:14:09,400 --> 00:14:13,440
अपने भक्तों को अपने शिष्यों को ईश्वर है यह

196
00:14:13,440 --> 00:14:17,800
किस किस प्रकार से हम सिद्ध कर सकते हैं तो हमारे पास ढेर

197
00:14:17,800 --> 00:14:20,320
सारे वो तरीके हैं जिससे यदि कोई

198
00:14:20,320 --> 00:14:24,520
नास्तिक हो जो भगवान में विश्वास नहीं करता है तो उसका हम मुंह

199
00:14:24,520 --> 00:14:29,080
बंद कर सकते हैं उसको निरुत्तर उसको निराधार सिद्ध कर सकते हैं तो क्या

200
00:14:29,080 --> 00:14:33,400
ल जी के क्या रामपाल जी के पास वो क्योंकि रामपाल

201
00:14:33,400 --> 00:14:37,520
जी आपके अनुसार सच्चे संत है तो उनके पास तो सबसे

202
00:14:37,520 --> 00:14:41,640
आवश्यक हो जाता है कि उनके पास वो सिद्धांत हो जिससे कि

203
00:14:41,640 --> 00:14:45,920
ईश्वर का अस्तित्व सिद्ध किया जा सके अगर हम कहे

204
00:14:45,920 --> 00:14:50,400
कि चमत्कार होता है सुनिए अगर हम कहे कि चमत्कार होता है

205
00:14:50,400 --> 00:14:54,400
तो रदरफोर्ड या राइट बंधु जो

206
00:14:54,400 --> 00:14:59,600
थे जिन्होंने एरोप्लेन इत्यादि का आविष्कार किया है ना

207
00:14:59,600 --> 00:15:03,720
हम किसी सामान्य व्यक्ति को अगर लोहा पकड़ा दे लो भैया हवाई जहाज बना दो

208
00:15:03,720 --> 00:15:07,960
बना पाएगा क्या नहीं तो सामान्य

209
00:15:07,960 --> 00:15:12,720
व्यक्ति के लिए वो जो राइट बंधु है जिन्होंने हवाई जहाज बनाया

210
00:15:12,720 --> 00:15:16,760
या जो थॉमस अल्वा एडिसन है जिसने बल बनाया वो चमत्कार है

211
00:15:16,760 --> 00:15:20,960
वो नहीं बना सकता मैं किसी को कांच पकड़ा दूं आपको कांच पकड़ा दूं आप

212
00:15:20,960 --> 00:15:25,240
बल्ब जला सकते हो नहीं जला सकते थॉमस अल्वा एडिसन

213
00:15:25,240 --> 00:15:29,520
ने बल्ब का आविष्कार किया तो वो उसके लिए क्या है चमत्कार

214
00:15:29,520 --> 00:15:33,960
तो चमत्कार के ऊपर भी ईश्वर की सिद्धि नहीं है चमत्कार के आधार पर

215
00:15:33,960 --> 00:15:35,520
तो हमें आप वह

216
00:15:35,520 --> 00:15:39,720
सिद्धांत बताइए जिसके रामपाल जी के अनुसार नास्तिकों

217
00:15:39,720 --> 00:15:43,960
का खंडन किस प्रकार से होता है वो बताइए सर पहली

218
00:15:43,960 --> 00:15:48,680
बार मैं भी नास्तिक भगवान को ना मानने वाला मैं नास्तिक था ठीक

219
00:15:48,680 --> 00:15:53,480
है मैं भी जो था नास्तिक था सबसे बड़ा नास्तिक

220
00:15:53,480 --> 00:15:57,600
लेकिन अब मुझे भी प्रेरणा कैसे मिली कहां से मिली अब

221
00:15:57,600 --> 00:16:01,800
वो तो उनके सत्संग की राही मिली ना मुझे अरे मुझे वो

222
00:16:01,800 --> 00:16:07,120
जो जो जानकारी मिली वो बताओ ना भाई

223
00:16:07,120 --> 00:16:11,280
पन आप मुझे वो जानकारी बताओ आप

224
00:16:11,280 --> 00:16:15,720
मुझे वो जानकारी बताओ जिसके कारण आप नास्तिक से आस्तिक बने वो क्या

225
00:16:15,720 --> 00:16:19,880
है नास्तिक आप ये समझो आप ये समझो

226
00:16:19,880 --> 00:16:24,000
आपके सामने एक नास्तिक बैठा हुआ है भगवान को ना मानने वाला देख अभी थोड़ी

227
00:16:24,000 --> 00:16:28,040
देर पहले आप क्या समझ रहे थे कि मैं कौन हूं रामपाल जी महाराज

228
00:16:28,040 --> 00:16:32,160
को ना मानने वाला ठीक है तो आप मुझे समझाने आए हैं ना

229
00:16:32,160 --> 00:16:36,280
कि रामपाल जी महाराज क्यों क्यों सही है यही यही

230
00:16:36,280 --> 00:16:40,400
बताने आए ना अभी मैं थोड़ा सा और बा थोड़ा

231
00:16:40,400 --> 00:16:44,400
और दूर हो गया अभी मैं रामपाल जी महाराज को ही नहीं सपोज करो

232
00:16:44,400 --> 00:16:48,520
कि मैं भगवान को ही नहीं मानता तो अब मुझे आप विश्वास दिलाए

233
00:16:48,520 --> 00:16:50,920
कि भगवान है रामपाल

234
00:16:50,920 --> 00:16:55,080
जी के अनुसार देखो सर वो तो यह

235
00:16:55,080 --> 00:16:59,280
प्रमाणित करेंगे अपने वेद शस्त्र ना

236
00:16:59,280 --> 00:17:03,800
वो प्रमा वेत्र को तो मैं तब मानूंगा ना जब मेरी ईश्वर में आस्था

237
00:17:03,800 --> 00:17:08,520
होगी उसको कौन समझाएगा सर ऐसे मुझे

238
00:17:08,520 --> 00:17:12,800
समझाया आप नास्तिक बन जाओ मैं आपको समझा दूंगा आप

239
00:17:12,800 --> 00:17:17,280
आप बन जाओ नास्तिक मैं अभी आपको मनवा दूंगा ईश्वर है

240
00:17:17,280 --> 00:17:21,480
और अपने मन से नहीं अपने मन से नहीं शास्त्रों के आधार

241
00:17:21,480 --> 00:17:25,800
पर जो हमारे परंपरा प्राप्त आचार्य हैं उनसे प्राप्त ज्ञान

242
00:17:25,800 --> 00:17:29,840
विज्ञान के आधार पर मैं अभी आपको नास्तिक से आशिक बना दूंगा

243
00:17:29,840 --> 00:17:34,200
हमारे चैनल पर बने भी हैं बहुत अच्छे व्यक्ति थे उन्होंने स्वीकार किया

244
00:17:34,200 --> 00:17:38,440
आप हम लोग अलग से उसको काट के डाल देंगे लाइव में ही हुआ थाय

245
00:17:38,440 --> 00:17:42,640
एक नास्तिक प्रवृत्ति के थे आए थे हमने उनसे चर्चा की और ऐसे

246
00:17:42,640 --> 00:17:46,760
ऐसे उनको सिद्धांत बताए कि उन्होंने हां सकारात्मक व्यवहार किया उन्होंने

247
00:17:46,760 --> 00:17:50,960
बता हा यह पॉइंट है इसका अर्थ है कि भगवान है यह सिद्ध

248
00:17:50,960 --> 00:17:56,960
होता है तो आप हमें ईश्वर को सिद्ध करके दिखाइए रामपाल जी महाराज के

249
00:17:57,360 --> 00:18:01,360
अनुसार सर ऐसे तो सद कैसे करेंगे हम

250
00:18:01,360 --> 00:18:05,800
हम कर देंगे हम कर देंगे आप पहले आप

251
00:18:05,800 --> 00:18:06,300
आप

252
00:18:06,040 --> 00:18:10,080
थोड़ी देर के लिए कहिए भैया यह ज्ञान विज्ञान रामपाल जी महाराज से नहीं

253
00:18:10,080 --> 00:18:14,200
मिला क्या नहीं मिला ये कि ईश्वर है यह

254
00:18:14,200 --> 00:18:19,040
कैसे सिद्ध होता है हमें कोर्स कराते हैं आप हम

255
00:18:19,040 --> 00:18:23,240
हमारे परंपरा प्राप्त जो आचार्य गण है उनको छोड़ दीजिए उनके

256
00:18:23,240 --> 00:18:27,640
थोड़े बहुत जो सानिध्य से हमको जो प्राप्त हुआ है ना वो कोर्स

257
00:18:27,640 --> 00:18:31,800
जब चालू होता है कोर्स में सबसे पहले यह नहीं बताते कि कहां लिखा है राम भगवान

258
00:18:31,800 --> 00:18:35,800
है कहां लिखा है हनुमान जी भगवान है कहां लिखा है विष्णु भगवान है

259
00:18:35,800 --> 00:18:39,800
सबसे पहले य बताते कहां लिखा है कि ईश्वर

260
00:18:39,800 --> 00:18:43,920
किस प्रकार से सिद्ध होगा ईश्वर है

261
00:18:43,920 --> 00:18:48,320
यह तो सिद्ध हो तब तो व्यक्ति य सोचेगा कि ईश्वर कबीर है कि राम है

262
00:18:48,320 --> 00:18:52,720
ईश्वर है पहले यह तो सिद्ध हो तब तो व्यक्ति य पूछेगा कि ईश्वर रामपाल

263
00:18:52,720 --> 00:18:56,840
जी है या ईश्वर जो है बजरंग बली है तब तो ये सोचेगा पहले

264
00:18:56,840 --> 00:19:01,200
तो ये तो ये तो ईश्वर है

265
00:19:01,200 --> 00:19:05,480
ईश्वर है नास्तिक व्यक्ति तो अपन नहीं समझा सकते लेकिन आस्तिक

266
00:19:05,480 --> 00:19:09,880
को तो समझा सकते हैं ये ज्ञान तत्वदर्शी संत के द्वारा आपको नहीं

267
00:19:09,880 --> 00:19:14,480
मिला मिला है ना वो वेद बताओ सर आप

268
00:19:14,480 --> 00:19:19,000
मेरी बात सुनो देखो आस्तिक को या नास्तिक को जब वो थोड़े बहुत

269
00:19:19,000 --> 00:19:21,040
पढ़ेगा या वेद पढ़ेगा

270
00:19:21,040 --> 00:19:25,080
या कुछ को मानते नहीं है तो आपने पढ़े ना आपने प्राप्त

271
00:19:25,080 --> 00:19:29,160
किया ना ज्ञान

272
00:19:29,160 --> 00:19:33,480
तभी तो आपको भरोसा है उनके ऊपर तो वो हमको आज दो ना य लाइव में

273
00:19:33,480 --> 00:19:37,760
दो क्या पड़ेगा नास्तिक जिससे वो आस्तिक बनेगा

274
00:19:37,760 --> 00:19:42,000
तो उसको क्यों जब बनना ही नहीं चाहता आतक तो हम क्यों समझाए

275
00:19:42,000 --> 00:19:46,120
उसको ऐसा नहीं है कोई व्यक्ति जानना चाहता

276
00:19:46,120 --> 00:19:50,320
है कि अगर मैं भगवान को मानू तो क्यों मानू

277
00:19:50,320 --> 00:19:54,480
वो आप मुझे आधार बताइए आधार

278
00:19:54,480 --> 00:19:59,000
बताते हैं आधार तो सर वही बताते हैं हम संतराम

279
00:19:59,000 --> 00:20:05,000
जी महाराज मतलब आपके पास नहीं है क्या नहीं है

280
00:20:05,160 --> 00:20:09,360
आधार आधार क्या है इनके मुख उद्देश है सर सुनो मुख उद्देश

281
00:20:09,360 --> 00:20:13,640
इनके क्या है सबसे पहला मुख उद्देश संत रामपाल

282
00:20:13,640 --> 00:20:17,760
जी महाराज से नशे की बुराई से दूर रना भा साहब नशे को

283
00:20:17,760 --> 00:20:22,400
छुड़वाने की बात वो कंपनी भी करती है जिन्होंने निकोटीन की आदत को छुड़वाने

284
00:20:22,400 --> 00:20:26,720
एक मिनट एक मिनट एक एक मिनट भाई साब नशे को छुड़वाने

285
00:20:26,720 --> 00:20:30,960
की बात बहुत सी मेडिकल साइंस भी कर रही है वो भगवान नहीं है वो अवतार

286
00:20:30,960 --> 00:20:35,000
नहीं है मगर कर रही है बहुत से केंद्र खुले हैं सरकार की तरफ से वो भी भगवान है

287
00:20:35,000 --> 00:20:36,240
क्या तो नशे

288
00:20:36,240 --> 00:20:40,720
को छुड़वाने के आधार पर भगवान है ये सिद्ध नहीं होता है आप भगवान के अस्तित्व

289
00:20:40,720 --> 00:20:45,800
को सिद्ध

290
00:20:45,800 --> 00:20:50,560
करिए भगवान के अस्तित्व को सिद्ध करें

291
00:20:50,560 --> 00:20:54,760
जी तो वो तो वेदों की आधार पर होगा ना सिद्ध तो बोलो

292
00:20:54,760 --> 00:20:59,560
बोलो वेदों में ऐसा क्या लिखा है जिसके आधार पर भगवान का अस्तित्व सिद्ध होता है

293
00:20:59,560 --> 00:21:04,080
मेरी बात सुनो हम हम पर जो है हम उससे बात करेंगे ठीक

294
00:21:04,080 --> 00:21:08,160
है बताओ इसी से बता दो आपको कहीं से

295
00:21:08,160 --> 00:21:14,160
ईश्वर का अस्तित्व सिद्ध हुआ है क्या कहीं से भी ईश्वर

296
00:21:14,720 --> 00:21:19,480
का ईश्वर साकार है यजुर्वेद अध्याय नंबर न के

297
00:21:19,480 --> 00:21:23,760
का अस्व तो सिद्ध करो पहले ईश्वर है यह तो बताओ मुझे कैसे है किस आधार

298
00:21:23,760 --> 00:21:27,760
पर यह ज्ञान कहां है तो सर वेदों में य

299
00:21:27,760 --> 00:21:31,840
ज्ञान आपको बता तो रहे और भाई मेरे

300
00:21:31,840 --> 00:21:35,880
भाई वेदों में वो कौन सा तर्क लिखा है जैसे अभी आप वेदों का

301
00:21:35,880 --> 00:21:39,960
एक तर्क बता रहे हो कि ईश्वर साकार है यह वेदों में तर्क लिखा है ठीक

302
00:21:39,960 --> 00:21:44,080
है ऐसे ही वेदों में वो कौन सा तर्क है जिससे की यह प्रमाणित

303
00:21:44,080 --> 00:21:48,320
हो कि ईश्वर है ईश्वर होने के संबंध में वेद

304
00:21:48,320 --> 00:21:52,560
ने कहां बात की है वो बताओ आपकी जानकारी

305
00:21:52,560 --> 00:21:56,760
अरे सर कैसे बताऊं कि वेदों में है ईश्वर साकार

306
00:21:56,760 --> 00:22:00,960
मैं अपने मुह अब मैं अपने मुंह से बात कर साकार

307
00:22:00,960 --> 00:22:05,120
नहीं मैं आपसे ईश्वर साकार नहीं पूछ रहा हूं कि ईश्वर साकार है कि निराकार

308
00:22:05,120 --> 00:22:09,720
है मुझे आप ये बताइए ईश्वर है यह कैसे सिद्ध होता है

309
00:22:09,720 --> 00:22:13,840
रामपाल जी के द्वारा रामपाल

310
00:22:13,840 --> 00:22:18,080
जी के द्वारा यह वेदों में सिद्ध होता है बताओ कैसे सिद्ध

311
00:22:18,080 --> 00:22:22,560
होता है जैसे अभी आप खोल के बता रहे हो कि ईश्वर साकार है

312
00:22:22,560 --> 00:22:26,760
ऐसे ही बताओ कि किस प्रकार से कहां से कौन से उस

313
00:22:26,760 --> 00:22:32,760
मंत्र से ईश्वर की सिद्धि होती

314
00:22:32,800 --> 00:22:38,800
वो जो संत रामपाल जी महाराज देते हैं

315
00:22:42,160 --> 00:22:46,160
ना अरे बोलिए जो

316
00:22:46,160 --> 00:22:50,920
संत रामपाल जी महाराज संत रामपाल जी महाराज के द्वारा

317
00:22:50,920 --> 00:22:55,400
हमको दिया जाता है जो चार वेद छ सात 18

318
00:22:55,400 --> 00:22:59,800
पुराणों का ज्ञान वो वेदों में ही वेदों

319
00:22:59,800 --> 00:23:03,840
के मतलब वेदों के द्वारा बताया जाता है भाई साहब

320
00:23:03,840 --> 00:23:08,160
मैंने आपसे पूछा क्या मैंने आपसे य पूछा है क्या रामपाल जी महाराज

321
00:23:08,160 --> 00:23:12,400
का ज्ञान कहां से आया है मैंने पूछा क्या मैं पूछ रहा हूं

322
00:23:12,400 --> 00:23:16,760
रामपाल जी के अनुसार ईश्वर है यह किस प्रकार सिद्ध होता

323
00:23:16,760 --> 00:23:20,880
है सिद्ध करिए आपके सामने मान लीजिए

324
00:23:20,880 --> 00:23:25,000
एक नास्तिक बैठा है उसको क्या क्या कहोगे कौन से लोक कौन

325
00:23:25,000 --> 00:23:29,800
से मंत्र आप च

326
00:23:29,800 --> 00:23:33,800
अब आप यह स्वीकार करो कि रामपाल जी महाराज

327
00:23:33,800 --> 00:23:37,960
से आपको ईश्वर है यह ज्ञान प्राप्त नहीं हुआ

328
00:23:37,960 --> 00:23:42,040
नहीं ये ज्ञान प्राप्त हुआ है वेदों के द्वारा मैं बता रहा हूं

329
00:23:42,040 --> 00:23:47,040
आप बताओ क्या कैसे सिद्धा ईश्वर

330
00:23:47,040 --> 00:23:48,040
मैं

331
00:23:48,040 --> 00:23:52,920
इसमें बता इसमें बता क्या

332
00:23:52,920 --> 00:23:57,000
मैं पूछ रहा हूं इसमें ये लिखा है कि ईश्वर है ये किस प्रकार सिद्ध होता है इस बारे

333
00:23:57,000 --> 00:24:01,320
में है आप इनके इसके आधार पर बोलो आप ईश्वर को सिद्ध

334
00:24:01,320 --> 00:24:06,040
करो इसके द्वारा करेंगे ठीक है करो करो

335
00:24:06,040 --> 00:24:10,800
करो 18 इसकी द्वारा करेंगे ठीक है

336
00:24:10,800 --> 00:24:15,400
हा करो करो बोलो अरे आगे बढ़ो करो ना

337
00:24:15,400 --> 00:24:19,440
आप भी उठाओ ना इसको है ना अरे भैया

338
00:24:19,440 --> 00:24:23,520
आप बोलो तो आप बोलो देखो जबी तो

339
00:24:23,520 --> 00:24:27,520
बोलेंगे मैं आपकी बात सुन रहा हूं मुझे लगेगा तो मैं उठा लूंगा आप ऑर्डर

340
00:24:27,520 --> 00:24:32,400
मत दो मुझे ब तो आप बताओ मुझे किस प्रकार श होता है

341
00:24:32,400 --> 00:24:36,440
देखो हम क्यों देंगे आपको डर भाई आपने

342
00:24:36,440 --> 00:24:40,520
ऑर्डर नहीं दिया है मैं कह रहा हूं आप गीता के अनुसार सिद्ध करो कि

343
00:24:40,520 --> 00:24:45,160
भगवान है भगवान है गीता के

344
00:24:45,160 --> 00:24:51,160
अनुसार

345
00:24:55,360 --> 00:24:59,840
बताओ 15 के श्लोक 17 में

346
00:24:59,840 --> 00:25:04,480
अध्याय 15 के शलोक नंबर 17 में

347
00:25:04,480 --> 00:25:08,720
कृष्ण भगवान बोल रहे हैं उत्तम

348
00:25:08,720 --> 00:25:12,920
पुरुष तो अन है उत्तम पुरुष तो

349
00:25:12,920 --> 00:25:17,520
अन है जिसका 1 के में ओम तत सत भाई साहब

350
00:25:17,520 --> 00:25:21,680
मैं ये पूछ रहा हूं कि इस दुनिया में कोई उत्तम पुरुष है

351
00:25:21,680 --> 00:25:26,000
उत्तम पुरुष अन्य है यह भावना मेरे अंदर तब आए उत्तम

352
00:25:26,000 --> 00:25:30,160
पुरुष अन्य है यह ढ उत्तम पुरुष कौन है यह ढूंढने में तब

353
00:25:30,160 --> 00:25:34,920
निकलूंगा जब मेरे मन को यह लगेगा कि कोई दुनिया में उत्तम पुरुष

354
00:25:34,920 --> 00:25:39,080
है मैं उत्तम पुरुष कौन है यह जानने

355
00:25:39,080 --> 00:25:43,520
तब निकलूंगा जब मैं ये मान लूंगा कि दुनिया में कोई उत्तम पुरुष है

356
00:25:43,520 --> 00:25:47,720
मैंने आपको क्या कहा कि ईश्वर कबीर है कि राम है

357
00:25:47,720 --> 00:25:51,920
कि शिव है यह जानने में तब जाऊंगा जब मैं ये मान लूंगा कि दुनिया

358
00:25:51,920 --> 00:25:56,080
में कोई ईश्वर है तो मैं किस प्रकार मानू

359
00:25:56,080 --> 00:26:00,480
रामपाल जी के अनुसार कि ईश्वर है क्या यह ज्ञान तत्वदर्शी आपके

360
00:26:00,480 --> 00:26:04,720
अनुसार जो तत्वदर्शी संत है उन्होंने आपको दिया है कि इस

361
00:26:04,720 --> 00:26:08,800
दुनिया में ईश्वर है य इस प्रकार सिद्ध होता है यह दिया है उन्होंने

362
00:26:08,800 --> 00:26:11,600
आपको ज्ञान

363
00:26:11,600 --> 00:26:15,800
ई ई एक ही क्वेश्चन कर रहे हैं आप वो मानने

364
00:26:15,800 --> 00:26:20,200
के लिए तैयार आपने ही तो कहा कि वो तत्वदर्शी है स

365
00:26:20,200 --> 00:26:24,960
पूर्ण ज्ञानी है ओकाम

366
00:26:24,960 --> 00:26:29,880
ब्रमर मानम समरण या पर त परमा गतम

367
00:26:29,880 --> 00:26:33,960
गीता जी में ओम मंत्र का बिल्कुल स्पष्ट जवाप दिया है

368
00:26:33,960 --> 00:26:38,080
भाई साहब फिर आप आगे बढ़ रहे हैं देखो अगर आपको नहीं पता

369
00:26:38,080 --> 00:26:42,240
है कि उन्होंने ज्ञान दिया है कि नहीं दिया है तो आप यहां स्पष्ट कह दो भाई

370
00:26:42,240 --> 00:26:46,240
मेरी जानकारी में उन्होंने ये ज्ञान नहीं दिया तो हम अगला चैप्टर प चले

371
00:26:46,240 --> 00:26:50,320
अगले प्रश्न प च जान ठीक ठीक ठीक है ठीक है अगले चैप्टर

372
00:26:50,320 --> 00:26:54,440
प चल तो अब मैं अपना प्रश्न आपसे क्लियर कर दूं क्या

373
00:26:54,440 --> 00:26:58,600
तव आपके अनुसार जो तत्वदर्शी संत रामपाल हैं

374
00:26:58,600 --> 00:27:04,000
उन्होंने ईश्वर है यह किस प्रकार सिद्ध होता है यह बताया

375
00:27:04,000 --> 00:27:08,040
है बताया है ना लेकिन आप समझ नहीं पा रहे वेदों

376
00:27:08,040 --> 00:27:12,200
के अनुसार बताया है ना अभी तो कह रहे थे अब फिर

377
00:27:12,200 --> 00:27:16,200
देखो आपने चेंज कर दी ऐसे अटके रहेंगे हम लोग यहीं प या

378
00:27:16,200 --> 00:27:20,240
तो आप स्वीकार करिए कि आपकी जानकारी में उन्होंने बताया है कि नहीं बताया

379
00:27:20,240 --> 00:27:24,240
यह जानकारी आपको नहीं है तो हम आगे चले चलो

380
00:27:24,240 --> 00:27:26,640
ठीक है मेरी जानकारी में नहीं है फिर

381
00:27:26,640 --> 00:27:30,720
से मैं फिर से अपना प्रश्न कर रहा हूं फिर बोलना ठीक है मैं फिर से अपना प्रश्न बो

382
00:27:30,720 --> 00:27:34,760
रहा हूं क्या आपके अनुसार जो तत्वदर्शी

383
00:27:34,760 --> 00:27:39,520
रामपाल जी हैं उन्होंने किस प्रकार

384
00:27:39,520 --> 00:27:43,680
ईश्वर है यह सिद्ध होता है यह ज्ञान दिया है

385
00:27:43,680 --> 00:27:46,280
या नहीं दिया

386
00:27:46,280 --> 00:27:50,600
है मेरी नॉलेज में नहीं है लेकिन दिया है

387
00:27:50,600 --> 00:27:54,720
उन्होंने देखिए आप दोनों बातें नहीं कर सकते अगर दिया

388
00:27:54,720 --> 00:27:59,040
है तो फिर आपको कम से कम यह बताना होगा फलाने चैनल पर फलाना वीडियो है

389
00:27:59,040 --> 00:28:03,560
उसको देख लो तो आपको बता रहे हैं ना

390
00:28:03,560 --> 00:28:07,720
नहीं आप य कह रहे हो मेरी नॉलेज में नहीं जब नॉलेज में नहीं है तो फिर यह भी नहीं होगा कि उन्होंने

391
00:28:07,720 --> 00:28:12,400
दिया है कि नहीं दिया है आपको सच बोलना है फिर हम आगे बढ़ेंगे

392
00:28:12,400 --> 00:28:16,400
अगर आपकी जानकारी में नहीं है तो आप इतना बोलो मेरी जानकारी में नहीं

393
00:28:16,400 --> 00:28:20,720
है कि उन्होंने दिया है कि नहीं दिया है मेरी जानकारी में नहीं है

394
00:28:20,720 --> 00:28:24,920
अब दोबारा प्रश्न करूंगा फिर आप बोलना दोबारा मैं प्रश्न करूंगा फिर

395
00:28:24,920 --> 00:28:28,920
बोलना तो क्या आपके अनुसार जो तत्व दर्श श्री रामपाल जी

396
00:28:28,920 --> 00:28:33,000
हैं उन्होंने यह ज्ञान दिया है कि ईश्वर है

397
00:28:33,000 --> 00:28:37,320
यह किस प्रकार सिद्ध होता है इस बारे में उन्होंने ज्ञान दिया

398
00:28:37,320 --> 00:28:41,360
है देखो दिया है लेकिन मेरी बात सुनना

399
00:28:41,360 --> 00:28:41,860
एक

400
00:28:41,840 --> 00:28:45,840
मिनट जब हमने जब हमने आपके चैनल का फॉर्म

401
00:28:45,840 --> 00:28:50,320
भरा ना तो हमने इसलिए भरा था

402
00:28:50,320 --> 00:28:54,360
कि प्रमाण के साथ बात होंगी है ना भाई साहब हम

403
00:28:54,360 --> 00:28:58,960
अभी हम आपको नास्तिकों का खंडन प्रमाण के साथ करके दिखाएंगे

404
00:28:58,960 --> 00:29:03,080
नास्तिक नहीं हम तो आस्तिक है ठीक है हम भगवान पर विश्वास करने वाले हैं

405
00:29:03,080 --> 00:29:07,440
ना अरे भाई जिनकी शरण में आप गए हो व पूर्ण ज्ञानी संत है

406
00:29:07,440 --> 00:29:10,040
ना

407
00:29:10,040 --> 00:29:14,080
प्रमाण अरे भाई

408
00:29:14,080 --> 00:29:18,400
प्रमाण को प्रमाण तब माना जाएगा ना जब उसकी प्रमाण में आस्था

409
00:29:18,400 --> 00:29:22,640
हो तो उसको कौन समझा सकता है आप समझाओ कैसे समझाओ

410
00:29:22,640 --> 00:29:26,880
मैं बोल तो रहा हूं कि हम समझा सकते हैं जी समझाओ कैसे समझाओ

411
00:29:26,880 --> 00:29:31,000
आप तो पहले हम लोग आपसे सुन ले कि इस बारे में

412
00:29:31,000 --> 00:29:35,800
आपको जानकारी नहीं है कि उन्होंने ज्ञान दिया है कि नहीं दिया है पूर्ण ज्ञानी तत्वदर्शी

413
00:29:35,800 --> 00:29:39,920
ठीक है अभी मैं फिर से पूछ रहा हूं आपके अनुसार जो पूर्ण

414
00:29:39,920 --> 00:29:44,120
ज्ञानी तत्वदर्शी है रामपाल जी उन्होंने

415
00:29:44,120 --> 00:29:48,120
यह ज्ञान दिया है क्या कि ईश्वर है यह किस प्रकार सिद्ध

416
00:29:48,120 --> 00:29:52,160
होता है बताइए मेरी नॉलेज में नहीं है

417
00:29:52,160 --> 00:29:56,160
हमारी नॉलेज नहीं है आपकी जानकारी में

418
00:29:56,160 --> 00:29:57,360
नहीं है

419
00:29:57,360 --> 00:30:01,680
तो आप बता रहा हूं आप मानने के लिए तैयार नहीं हूं देख आप दोनों दोन

420
00:30:01,680 --> 00:30:06,000
दोरी बात करते रहोगे बात अच्छी रहेगी चलो ठीक है बात नहीं

421
00:30:06,000 --> 00:30:10,400
अटकने चाहिए आगे को बढ़ नहीं तो आप क्लियर बोलो

422
00:30:10,400 --> 00:30:14,640
ना आप क्लियर नहीं बोलते जितनी बार प्रश्न करता हूं उतनी बार उलझा

423
00:30:14,640 --> 00:30:18,760
हुआ जवाब देते हो क्लियर बोलो आपके अनुसार जो पूर्ण

424
00:30:18,760 --> 00:30:23,000
ज्ञानी तत्वदर्शी रामपाल जी है क्या उन्होंने यह ज्ञान

425
00:30:23,000 --> 00:30:29,000
दिया है कि ईश्वर है यह किस प्रकार सिद्ध होता है

426
00:30:29,440 --> 00:30:33,600
अब आप मानने के लिए तैयार नहीं हो ईश्वर है तो व वेदों से

427
00:30:33,600 --> 00:30:37,760
सिद्ध होगा ना अरे भाई

428
00:30:37,760 --> 00:30:41,840
मेरे भाई जो वेद जो वेदों को ही

429
00:30:41,840 --> 00:30:46,160
नहीं मानता है या जो वेदों के बारे में जानता ही नहीं है उसको वेदों

430
00:30:46,160 --> 00:30:50,320
तक कैसे लाओगे आप तो फिर उसकी तो उसकी कैसे

431
00:30:50,320 --> 00:30:54,400
समझा सकते हैं बताओ हम समझा सकते हैं ना आप अपनी चीज को क्लियर

432
00:30:54,400 --> 00:30:58,440
करो हम समझा देंगे तो आप सवाल ही को ऐसा कर

433
00:30:58,440 --> 00:31:02,520
रहे हो अरे भाई सवाल तो धर्म से ही तो कर रहा हूं ईश्वर

434
00:31:02,520 --> 00:31:08,520
विषयक सवाल है ये और कौन सा सवाल

435
00:31:11,280 --> 00:31:15,360
है भैया आप में से कितनों को लग रहा है कि मैं विषय से

436
00:31:15,360 --> 00:31:21,360
हट के सवाल किया है मैंने

437
00:31:31,360 --> 00:31:35,360
सभी लोगों का कहना है कि नहीं विषय से हटके सवाल का जवाब नहीं

438
00:31:35,360 --> 00:31:39,640
है और मैं आपको सिद्ध करके दिखाऊंगा कि ईश्वर है

439
00:31:39,640 --> 00:31:43,880
पहले आप अपनी जानकारी को स्पष्ट करिए क्या आपने इस बात की

440
00:31:43,880 --> 00:31:48,120
शिक्षा ली है क्या आपको यह पता है रामपाल जी के अनुसार

441
00:31:48,120 --> 00:31:52,200
ईश्वर है यह किस प्रकार सिद्ध होता है क्या इस बारे में आपको जानकारी है कि उन्होंने ज्ञान

442
00:31:52,200 --> 00:31:56,200
दिया है कि नहीं दिया है बताइए हमा

443
00:31:56,200 --> 00:32:02,200
हमारे नलेज नहीं हमारी सुनिए हम बताए आपको

444
00:32:35,160 --> 00:32:38,000
ये

445
00:32:38,000 --> 00:32:42,600
देखिए यह देखिए ये देखिए

446
00:32:42,600 --> 00:32:46,680
हमारी शुरुआत ही यहां से होती है सबसे

447
00:32:46,680 --> 00:32:51,560
पहले हमको यह बताया जाता है कि इस दुनिया में ईश्वर

448
00:32:51,560 --> 00:32:55,800
है उसके बाद हम बताया जाता है उसके बाद हमें य बताया

449
00:32:55,800 --> 00:33:00,080
जाता है कि वो ईश्वर कौन है मगर ईश्वर है यह किस प्रकार

450
00:33:00,080 --> 00:33:04,200
सिद्ध होता है सबसे पहले हमें यह सिखाया जाता है ईश्वर है

451
00:33:04,200 --> 00:33:08,880
ये किस प्रकार सिद्ध होता है धर्म धर्म की

452
00:33:08,880 --> 00:33:13,160
धर्म जो है वो है धर्म की आवश्यकता ये किस प्रकार सिद्ध

453
00:33:13,160 --> 00:33:17,200
होता है ये हमें सबसे पहले सिखाया जाता है तो इसलिए हम

454
00:33:17,200 --> 00:33:21,360
आपसे कह रहे हैं क्या आपके अनुसार जो पूर्ण ज्ञानी है

455
00:33:21,360 --> 00:33:25,360
तत्व दर्शी है रामपाल जी उनके द्वारा ये बताया गया है

456
00:33:25,360 --> 00:33:30,960
कि ईश्वर है यह किस प्रकार सिद्ध होता है

457
00:33:30,960 --> 00:33:35,200
अब मैं आपको कैसे बताऊं अब ये सिद्ध कैसे करूं ये बताओ

458
00:33:35,200 --> 00:33:39,400
देखो मैं नास्तिक व्यक्ति था अगर आपको नहीं पता है तो आपको

459
00:33:39,400 --> 00:33:43,400
यह कहना है कि मेरी जानकारी में नहीं है कि उन्होंने य ज्ञान दिया है

460
00:33:43,400 --> 00:33:47,760
कि नहीं दिया है मेरी जानकारी में नहीं है यह बोल दिया ना मैंने

461
00:33:47,760 --> 00:33:51,840
मेरी जानकारी प्रश्न करता हूं आप बारबार जब मैं प्रश्न करता

462
00:33:51,840 --> 00:33:55,840
हूं उसके बाद यह नहीं बोलते आप सीधे-सीधे बोलो मेरी जानकारी

463
00:33:55,840 --> 00:34:00,040
में नहीं है कि उन्होंने ज्ञान दिया है कि नहीं दिया बस मेरी जानकारी

464
00:34:00,040 --> 00:34:04,280
में नहीं है है ना मेरी जानकारी में नहीं अभी मैं दोबारा प्रश्न कर रहा

465
00:34:04,280 --> 00:34:08,640
हूं क्या आपके अनुसार जो पूर्ण ज्ञानी तत्वदर्शी है

466
00:34:08,640 --> 00:34:12,640
रामपाल जी उन्होंने इस बात का ज्ञान दिया है कि

467
00:34:12,640 --> 00:34:17,160
ईश्वर है यह किस प्रकार सिद्ध होता

468
00:34:17,160 --> 00:34:21,400
है अब आप मानोगे कैसे दे पहला शब्द

469
00:34:21,400 --> 00:34:25,480
क्या निकला अब और अभी आप क्या बोल रहे थे मेरी जानकारी में नहीं

470
00:34:25,480 --> 00:34:29,600
है ये है नहीं सुनो ब अपने बदल रहे

471
00:34:29,600 --> 00:34:33,720
बार आपके दो क्वेश्चन हो रहे हैं है ना दो हो रहे है एक

472
00:34:33,720 --> 00:34:37,800
तो नास्तिक आस्तिक बने का एक तो नास्तिक

473
00:34:37,800 --> 00:34:41,880
आस्तिक बना मैंने अभी मैंने प्रश्न ये किया है कि इस सब्जेक्ट में

474
00:34:41,880 --> 00:34:45,880
नास्तिक से आस्तिक बनाने के सब्जेक्ट में उन्होंने ज्ञान दिया

475
00:34:45,880 --> 00:34:46,380
है

476
00:34:46,080 --> 00:34:50,840
कि नहीं दिया मेरा प्रश्न ये है मैंने जब वो प्रश्न हो गया

477
00:34:50,840 --> 00:34:54,840
देखो हमारी नले नहीं है ना हमारी नॉलेज तो ये बोल दो ना ये

478
00:34:54,840 --> 00:34:58,840
बोल दो जब मैं प्रश्न करूं तो ये क्लियर क्लियर बोल दो अब मैं प्रश्न

479
00:34:58,840 --> 00:35:03,160
कर रहा हूं क्या आपके अनुसार क्या आपकी जानकारी

480
00:35:03,160 --> 00:35:07,360
में जो पूर्ण संत है रामपाल है तत्वदर्शी है

481
00:35:07,360 --> 00:35:11,880
उन्होंने यह ज्ञान दिया है कि ईश्वर है यह किस प्रकार सिद्ध होता है

482
00:35:11,880 --> 00:35:16,040
उनने दिया है लेकिन हमारी नॉलेज में नहीं है अब अब देखो अब आपने

483
00:35:16,040 --> 00:35:20,040
फिर थोड़ा सा वर्ड बदल दिया ये दो तरह की बात करोगे फिर मुझे फिर

484
00:35:20,040 --> 00:35:24,160
मुझे जो है यही पर इसको समाप्त करना होगा चर्चा को दो तरह की बात मत करो अभी आपने

485
00:35:24,160 --> 00:35:28,240
सीधे बोला मेरी जानकारी में नहीं है अब आप कह रहे हो उन्होने दिया पर हम जानकारी में

486
00:35:28,240 --> 00:35:32,320
नहीं है अगर दिया है तो फिर रेफरेंस बताओ दिया है

487
00:35:32,320 --> 00:35:36,480
दिया है तो कौन से ग्रंथ में लिखा है बताओ उनके कौन से ग्रंथ में लिखा है अभी

488
00:35:36,480 --> 00:35:40,600
हम देख लेंगे पीडीएफ डाउनलोड करके बताओ कौन से ग्रंथ में लिखा

489
00:35:40,600 --> 00:35:44,880
है क्या लि जो उनके द्वारा दिया गया नास्तिक के संबंध

490
00:35:44,880 --> 00:35:48,880
में जो उनके द्वारा दिया गया ज्ञान है वह कौन से उनकी कौन से ग्रंथ में लिखा

491
00:35:48,880 --> 00:35:53,360
है ज्यादातर ग्रंथ तो यहीं पर है उठा लेंगे ज्ञान गंगा में

492
00:35:53,360 --> 00:35:58,000
है सारे ग्रंथ सारे ग्रंथ आपके जो रखे है ना

493
00:35:58,000 --> 00:36:01,400
उसी में ज्ञान देते हैं ना भाई साहब उन्होने

494
00:36:01,400 --> 00:36:05,760
अपनी भी तो अलग से अरे भाई उससे निचोड़ करके वो अपने ज्ञान

495
00:36:05,760 --> 00:36:10,720
वो किताबें छापते हैं ना उससे निचोड़ करके उसम जो वेद और

496
00:36:10,720 --> 00:36:15,000
हा तो उससे निकालते हैं ना ज्ञान गंगा इत्यादि में तो नास्तिकों के

497
00:36:15,000 --> 00:36:19,120
बारे में अपनी किस पुस्तक में उन्होंने बात की है बताइए

498
00:36:19,120 --> 00:36:23,120
अगर आपने कहा कि दिया है तो किस पुस्तक में दिया है किस ग्रंथ में दिया

499
00:36:23,120 --> 00:36:28,200
है बताओ बात सुनो सर नास्तिक लोगों को

500
00:36:28,200 --> 00:36:32,320
अगर वो नहीं समझना चाहता कि ईश्वर है बाद की बात है

501
00:36:32,320 --> 00:36:36,440
वो बाद की बात है वो बाद हमारे पास क्या है अगर कोई

502
00:36:36,440 --> 00:36:40,440
चोर चोरी कर रहा है वह बाद की बात है हमारे पास ताला है कि

503
00:36:40,440 --> 00:36:46,000
नहीं हमने अपना प्रयास किया है कि नहीं वह बताइए क्या

504
00:36:46,000 --> 00:36:50,840
प्रयास जैसे हम देखो सीधी सी बात बता रहे हैं सर आपको

505
00:36:50,840 --> 00:36:54,880
जैसे हम नास्तिक थे ठीक है है ना

506
00:36:54,880 --> 00:36:59,240
तो हम भी कुछ भा आप अप स्ट्री मत बताइए अब

507
00:36:59,240 --> 00:37:03,320
आप नास्तिक से आस्तिक किस तर्क के आधार पर बने किस

508
00:37:03,320 --> 00:37:07,360
ज्ञान के आधार पर बो वो ज्ञान मुझे दीजिए आप

509
00:37:07,360 --> 00:37:11,400
समझ लीजिए कि आपके पास आप समझ लीजिए कि आपके सामने

510
00:37:11,400 --> 00:37:15,520
इस समय नास्तिक बैठा है उसको आपको आस्तिक बनाना है मैं कह रहा हूं मुझे नहीं

511
00:37:15,520 --> 00:37:16,520
विश्वास इस दुनिया में

512
00:37:16,520 --> 00:37:20,720
कोई परमेश्वर है फिर भले ही वो कबीर हो या शिव हो कोई भी हो मुझे विश्वास

513
00:37:20,720 --> 00:37:24,880
ही नहीं है अब मुझे विश्वास दिलाओ कि इस दुनिया में कोई भगवान है दिलाओ

514
00:37:24,880 --> 00:37:28,920
भगवान दिलाओ रामपाल जी पूर्ण ज्ञानी है तत्वदर्शी है

515
00:37:28,920 --> 00:37:33,680
उनके शिष्य को भगवान का अस्तित्व तो सिद्ध करना आता होगा

516
00:37:33,680 --> 00:37:37,840
देखो यदि वो व्यक्ति वेदों को नहीं मानता तो उसको कैसे बता सकते

517
00:37:37,840 --> 00:37:41,920
हैं हम है मेरे भाई सुनो सुनो

518
00:37:41,920 --> 00:37:45,960
मेरी बात सुनो मेरी बात सुनो जो जो

519
00:37:45,960 --> 00:37:50,160
बौद्ध है वो वेदों को नहीं मानते जो जैन है

520
00:37:50,160 --> 00:37:54,280
वो वेदों को नहीं मानते जी और यह तो चलो

521
00:37:54,280 --> 00:37:58,480
ये तो चलो तब भी ईश्वर के नित्य ईश्वर को नहीं मानते मगर

522
00:37:58,480 --> 00:38:02,960
दुनिया में और भी कई ऐसे धर्म है अगर सिख ईसाई को छोड़ दो मुसलमान

523
00:38:02,960 --> 00:38:06,960
को भी छोड़ दो और भी कई तरह के धर्म है कई नामों से धर्म क्या

524
00:38:06,960 --> 00:38:11,040
पंथ है धर्मा भात है मगर उसमें ईश्वर की क वो है

525
00:38:11,040 --> 00:38:15,360
कल्पना वो वेदों को नहीं मानते हैं तो इसलिए मुझे

526
00:38:15,360 --> 00:38:19,720
आप आपके अनुसार नास्तिक को आस्तिक बनाने

527
00:38:19,720 --> 00:38:24,040
के लिए आपके पास क्या जानकारी है क्या तर्क है यदि उसके संबंध

528
00:38:24,040 --> 00:38:28,040
में प्रमाण भी है तो अच्छी बात है नहीं है तो भी अच्छी बात है आप मुझे

529
00:38:28,040 --> 00:38:32,000
बताइए कौन से तक कौन से तर्क है रामपाल जी के

530
00:38:32,000 --> 00:38:36,080
जिनके आधार पर व एक नास्तिक को आस्तिक बना देते हैं

531
00:38:36,080 --> 00:38:40,160
ऐसा नहीं है संत रामपाल जी महाराज के समाज विशेष

532
00:38:40,160 --> 00:38:44,160
शि हिंदू मुस्लिम सिख ईसाई कोई भी हो और

533
00:38:44,160 --> 00:38:48,320
कोई भी समाज हो जीव हमारी जाति है मानव धर्म हमारा

534
00:38:48,320 --> 00:38:52,560
हिंदू मुस्लिम मैं आपसे कुछ और पूछ रहा हूं आप अलग प्रवचन

535
00:38:52,560 --> 00:38:57,600
चालू कर रहे हो मैंने पूछा क्या क्या रामपाल

536
00:38:57,600 --> 00:39:01,680
के अनुसार जो पूर्ण ज्ञानी तत्वदर्शी है उनके द्वारा यह

537
00:39:01,680 --> 00:39:05,880
ज्ञान दिया गया है कि ईश्वर है यह किस प्रकार

538
00:39:05,880 --> 00:39:09,960
सिद्ध होता है बताइए अब सीधा सी

539
00:39:09,960 --> 00:39:14,080
सीधी सी बात है नास्तिक के लिए तो कोई सिद्ध नहीं कर सकता आप बता दो सिद्ध

540
00:39:14,080 --> 00:39:18,080
करके ठीक है मैं बता देता हूं आप थोड़ी देर के लिए भगवान को ना

541
00:39:18,080 --> 00:39:22,200
मानने वाले बन जाइए मैं आपको निरुत्तर कर दूंगा ठीक है

542
00:39:22,200 --> 00:39:27,560
जी अब आप भगवान को ना मानने वाले बन जाइए ठीक है

543
00:39:27,560 --> 00:39:32,880
आप बता हा देखो बात

544
00:39:32,880 --> 00:39:37,240
अपनी इस के आधार पर होनी थी है ना

545
00:39:37,240 --> 00:39:41,520
मैं ग्रंथों के आधार पर ही बोलने वाला हूं मैं आपको नास्तिकों का जो नास्तिकों

546
00:39:41,520 --> 00:39:45,560
का खंडन ग्रंथों के आधार पर ही करूंगा ठीक है नीचे कर लो नीचे कर लो

547
00:39:45,560 --> 00:39:47,160
मैं करूंगा

548
00:39:47,160 --> 00:39:51,560
तो नास्तिकों के खंडन में जो पहला सिद्धांत है वो है असतो

549
00:39:51,560 --> 00:39:56,080
मा सद गमाया तमसो मा ज्योतिर्मया मृत मा मतम गमाया बृहदारण्यक

550
00:39:56,080 --> 00:40:00,360
उपनिषद तीन 28 ठीक है अब इसके अनुसार

551
00:40:00,360 --> 00:40:04,720
क्या है इसमें शास्त्रों में य बताया गया है कि दुनिया के प्रत्येक

552
00:40:04,720 --> 00:40:09,080
जीव के अंदर तीन प्रकार की चाह विद्यमान है सत

553
00:40:09,080 --> 00:40:13,160
चित आनंद की चाह एक नास्तिक व्यक्ति भी कभी मरना चाहता

554
00:40:13,160 --> 00:40:17,400
है क्या आपसे पूछ रहा हूं एक नास्तिक व्यक्ति भी कभी मरना

555
00:40:17,400 --> 00:40:21,480
चाहता है क्या नहीं एक नास्तिक एक नास्तिक व्यक्ति

556
00:40:21,480 --> 00:40:25,720
भी इस पूरी दुनिया का ज्ञान प्राप्त कर लेना चाहता है फॉर

557
00:40:25,720 --> 00:40:29,800
एग्जांपल कल इंडिया या पाकिस्तान का मैच है वो अभी

558
00:40:29,800 --> 00:40:33,920
से ही ये आंकड़े लगाने लगेगा इंडिया जीत जाए या पाकिस्तान वाला आंकड़ा

559
00:40:33,920 --> 00:40:37,920
लगाएगा पाकिस्तान जीत जाए और इसके

560
00:40:37,920 --> 00:40:42,080
साथ ही साथ मान लीजिए कि मैं किसी के सामने आया उसने

561
00:40:42,080 --> 00:40:46,160
मुझे कभी नहीं देखा है और उसकी नजर मुझ पर पड़ गई फिर भी वो

562
00:40:46,160 --> 00:40:50,520
अपना अंदाजा लगाएगा कि यह व्यक्ति कौन-कौन हो सकता है प्रयास

563
00:40:50,520 --> 00:40:54,640
करेगा मनी मन मुझे जानने का इससे सिद्ध हो रहा है

564
00:40:54,640 --> 00:40:59,120
कि उसके अंदर दुनिया का पूरा ज्ञान प्राप्त कर लेने की

565
00:40:59,120 --> 00:41:02,280
चा विद्यमान है और तीसरी चाह कौन सी

566
00:41:02,280 --> 00:41:06,440
है एक नास्तिक व्यक्ति भी कभी दुखी नहीं होना चाहता है

567
00:41:06,440 --> 00:41:11,280
होना चाहता है क्या कभी दुखी नहीं होना चाहता इसको कहते हैं

568
00:41:11,280 --> 00:41:15,480
आनंद ऐसा आनंद जो कभी खत्म ना हो इसको और एग्जांपल

569
00:41:15,480 --> 00:41:20,280
देख लेते हैं अगर मैं मोबाइल लेकर आया नया तो पहली बात तो मेरे पास

570
00:41:20,280 --> 00:41:24,400
दुनिया का सबसे अच्छा मोबाइल होना चाहिए ऐसी भावना होती है ना

571
00:41:24,400 --> 00:41:28,480
ला पाए बात अलग है मगर सबसे अच्छा मोबाइल होना चाहिए

572
00:41:28,480 --> 00:41:32,520
उसमें कभी स्क्रैच नहीं आना चाहिए वो कभी टूटना नहीं

573
00:41:32,520 --> 00:41:36,720
चाहिए कार के पहिए कभी घिसने नहीं चाहिए मेरे बाल कभी सफेद नहीं होने

574
00:41:36,720 --> 00:41:41,480
चाहिए मेरे कभी झुर्रियां नहीं पड़नी चाहिए मैं कभी बीमार नहीं पड़ना चाहिए

575
00:41:41,480 --> 00:41:45,680
हूं ये होता है आनंद और अगर इन सारी चाह

576
00:41:45,680 --> 00:41:49,960
को हम निचोड़ दे एक साथ कर दे तो एक नास्तिक व्यक्ति

577
00:41:49,960 --> 00:41:54,040
के अंदर भी यह ख्याल आता है कि बारिश ज्यादा हो रही

578
00:41:54,040 --> 00:41:58,440
है तो कम हो जाए धूप ज्यादा पड़ रही है तो

579
00:41:58,440 --> 00:42:02,960
कम हो जाए नास्तिक व्यक्ति भी सोचता है नास्तिक व्यक्ति के भी माता-पिता

580
00:42:02,960 --> 00:42:07,720
यदि 200 साल के भी हो जाएंगे और वह उनसे प्रेम करता होगा

581
00:42:07,720 --> 00:42:12,080
तो वह यह सोचेगा कि यह बच जाए यह कभी मरे नहीं

582
00:42:12,080 --> 00:42:16,120
सोचेगा कि नहीं जबकि विज्ञान नहीं कह रहा

583
00:42:16,120 --> 00:42:17,600
है कि आप मौसम को कंट्रोल

584
00:42:17,600 --> 00:42:21,720
कर सकते हो विज्ञान नहीं कहता है कि आप भविष्य देख सकते हो

585
00:42:21,720 --> 00:42:25,760
विज्ञान नहीं कहता है कि आप अमर हो जाओगे विज्ञान नहीं कहता है

586
00:42:25,760 --> 00:42:29,840
कि आपके कभी झुरिया नहीं फिर भी आप विज्ञान के विरुद्ध

587
00:42:29,840 --> 00:42:34,080
ऐसी चाह को लेकर के चल रहे हो इसी चाह को ब्रार उपनिषद

588
00:42:34,080 --> 00:42:38,440
के एकती 28 में कहा गया है असतो मा सद गमाया तमसो

589
00:42:38,440 --> 00:42:42,920
मा ज्योतिर गमाया मृतु मा मतम गमाया अब एक सिद्धांत है सिद्धांत

590
00:42:42,920 --> 00:42:47,400
क्या है कि हमारे अंदर जिस जिस प्रकार की डिजायर्स

591
00:42:47,400 --> 00:42:51,600
है डिजायर का अर्थ है चाह हमारे अंदर जिस जिस प्रकार की चाह

592
00:42:51,600 --> 00:42:55,800
विद्यमान है उस उस चाह का विषय इस दुनिया में

593
00:42:55,800 --> 00:43:00,040
उसका अस्तित्व जैसे हमारे अंदर भूख है तो भूख होने

594
00:43:00,040 --> 00:43:04,040
से ही ये सिद्ध हो जाता है कि इस दुनिया में भोजन है बताओ हमारे

595
00:43:04,040 --> 00:43:08,280
अंदर भूख है इसका मतलब इस दुनिया में खाना है हमारे अंदर प्यास

596
00:43:08,280 --> 00:43:13,240
है तो इसका मतलब इस दुनिया में क्या है पानी

597
00:43:13,240 --> 00:43:17,520
हमारे अंदर सुनने की क्षमता है तो इसका मतलब इस दुनिया में क्या है

598
00:43:17,520 --> 00:43:21,520
ध्वनि हमारे अंदर देखने की क्षमता है तो इसका मतलब

599
00:43:21,520 --> 00:43:25,640
इस दुनिया में क्या है दृश्य तो जिस प्रकार एक नास्तिक

600
00:43:25,640 --> 00:43:28,800
व्यक्ति के अंदर भी व्या

601
00:43:28,800 --> 00:43:32,880
प्यास का विषय पानी सिद्ध होता है भूख का विषय भोजन सिद्ध

602
00:43:32,880 --> 00:43:37,440
होता है उसी प्रकार एक नास्तिक व्यक्ति के अंदर भी

603
00:43:37,440 --> 00:43:41,520
सत चित आनंद कभी ना मरने की अखंड ज्ञानी बनने की

604
00:43:41,520 --> 00:43:45,520
और सदा आनंदित रहने की चा सत चित आनंद की चा

605
00:43:45,520 --> 00:43:49,680
के विद्यमान होने से ही यह सिद्ध हो जाता है कि इस दुनिया में

606
00:43:49,680 --> 00:43:54,320
इस संसार में कोई सच्चिदानंद स्वरूप परमेश्वर का

607
00:43:54,320 --> 00:43:58,480
अस्तित्व है अगर नहीं मानते अगर नहीं

608
00:43:58,480 --> 00:44:02,520
मानते तो जो ना मानने पर भी उस चाह को

609
00:44:02,520 --> 00:44:07,080
कर रहा है अगर वो नहीं मानता कि इस दुनिया में कोई सत है चित आनंद है

610
00:44:07,080 --> 00:44:11,200
तो फिर भी वह सत चित आनंद को ढूंढ रहा है तो व पागल

611
00:44:11,200 --> 00:44:15,320
कहलाएगा मैं मैं कहीं जा रहा हूं मुझसे किसी ने

612
00:44:15,320 --> 00:44:19,760
पूछा कहां जा रहे हो मैं कहता हूं कि ताजमहल जा रहा हूं ठीक है

613
00:44:19,760 --> 00:44:24,280
ताजमहल जा रहा हूं फिर पूछा जाए ताजमहल है कि नहीं बोलता हूं ताजमहल

614
00:44:24,280 --> 00:44:28,560
नहीं है तो मुझको पागल कहा जाएगा कि नहीं जहां मैं जा रहा हूं

615
00:44:28,560 --> 00:44:32,760
जिसको मैं ढूंढ रहा हूं मैं उसी के लिए मना कर रहा हूं ठीक

616
00:44:32,760 --> 00:44:36,920
है तो इस प्रकार भगवान का अस्तित्व सिद्ध होता है

617
00:44:36,920 --> 00:44:41,400
हमारे शास्त्रों के आधार पर इसके बाद एक चीज और है

618
00:44:41,400 --> 00:44:45,480
धर्मे ना पशु भी समाना आहार निद्रा भय

619
00:44:45,480 --> 00:44:48,160
मैथुन ये चार चीजें

620
00:44:48,160 --> 00:44:52,760
हम में और जानवरों में समान है एक ही चीज है

621
00:44:52,760 --> 00:44:57,080
जो हमें पशुओं से अलग करती है उसका नाम है धर्म

622
00:44:57,080 --> 00:45:01,360
तो अगर हम ईश्वर को नहीं मानते तो हमारा धर्म को मानना

623
00:45:01,360 --> 00:45:06,160
भी सिद्ध नहीं होता क्योंकि धर्म है क्या सच्चिदानंद

624
00:45:06,160 --> 00:45:10,640
स्वरूप परमेश्वर को परिभाषित कर सकने वाले

625
00:45:10,640 --> 00:45:14,960
शास्त्रों द्वारा सच्चिदानंद स्वरूप परमेश्वर को

626
00:45:14,960 --> 00:45:20,200
प्राप्त करने के निमित्त बताई जाने वाली विधा का नाम धर्म

627
00:45:20,200 --> 00:45:24,240
है ठीक है अब आगे चलते

628
00:45:24,240 --> 00:45:28,320
हैं जी अब आज के बाद आप नास्तिक को सिद्ध कर पाओगे ना

629
00:45:28,320 --> 00:45:33,920
कि ईश्वर है अगर नहीं समझ आया हो तो बताओ मैं फिर से बताऊ

630
00:45:33,920 --> 00:45:38,040
आपको नास्तिक को तो सर अगर वह नहीं

631
00:45:38,040 --> 00:45:42,160
समझना चाहता ना भाई साहब मैं निरुत्तर करने की बात

632
00:45:42,160 --> 00:45:46,600
कर रहा हूं अगर कोई स्वयं को नास्तिक कहेगा तो वो निरुत्तर

633
00:45:46,600 --> 00:45:50,680
हो जाएगा हमारे सामने जैसे जैसे मान लो जैसे मान लो

634
00:45:50,680 --> 00:45:54,800
सुनो मैं बताऊ आप यहां पर आए हो रामपाल जी का पक्ष बताने आए

635
00:45:54,800 --> 00:45:59,080
हो ना अब मेरे पास आप के तर्को का जवाब नहीं है प्रमाणों

636
00:45:59,080 --> 00:46:03,120
का जवाब नहीं है मान लो ठीक है जी और मैंने ठान रखी है

637
00:46:03,120 --> 00:46:03,620
कि

638
00:46:03,280 --> 00:46:07,800
मैं मानूंगा नहीं तुम्हारी बात तो क्या मनवा सकते हो तुमन

639
00:46:07,800 --> 00:46:12,120
सकते हो क्या नहीं मनवा सकते मगर मगर जब मेरे पास तुम्हारे तर्कों

640
00:46:12,120 --> 00:46:16,920
का जवाब नहीं होगा तुम्हारे प्रमाणों का जवाब नहीं होगा तो दुनिया देखेगी यह बेकार है

641
00:46:16,920 --> 00:46:21,000
देखेगी ना इसके पास जवाब नहीं था किसका रामपाल

642
00:46:21,000 --> 00:46:25,120
दास जी के शिष्य का जवाब इसके पास नहीं था

643
00:46:25,120 --> 00:46:29,120
तो हम नास्तिक को निरुत्तर कर सकते हैं मौन कर सकते हैं

644
00:46:29,120 --> 00:46:33,160
उसके पास उत्तर नहीं है हमारा ठीक है वो अपने मुंह से

645
00:46:33,160 --> 00:46:37,160
मानेगा कि नहीं मानेगा ये बात की बात है मेरी बात एक तो नास्तिक

646
00:46:37,160 --> 00:46:41,320
कैसे सिद्ध होगा मतलब कैसे वो होगा

647
00:46:41,320 --> 00:46:45,440
भगवान में आस्था रखेगा एक तो देखकर

648
00:46:45,440 --> 00:46:49,640
दूसरे को देखकर भी भगवान में आस्था रखेगा ना

649
00:46:49,640 --> 00:46:53,840
देखिए दूसरे को देख करके तो लोग शराब पीना भी सिद्ध शराब

650
00:46:53,840 --> 00:46:57,840
भी पी लेते हैं तो फिर क्या करें इस नियम को मान ले मैं एक

651
00:46:57,840 --> 00:47:02,200
बात बता रहा हूं दूसरे को दूसरे को देखने के आधार पर हम ये सिद्ध

652
00:47:02,200 --> 00:47:06,480
नहीं कर सकते कि ईश्वर है क्योंकि दूसरे को देखने के आधार पर अभी दुनिया

653
00:47:06,480 --> 00:47:10,480
भर में व्यभिचार बढ़ रहा है व्यभिचार व्यभिचार समझते क्या

654
00:47:10,480 --> 00:47:14,520
होता है विचार मतलब संगत संगत संगत वि

655
00:47:14,520 --> 00:47:18,600
विचार मतलब कु संगत व

656
00:47:18,600 --> 00:47:22,600
विचार का चलिए कुसंगति मान लीजिए ठीक है

657
00:47:22,600 --> 00:47:27,120
तो दुनिया में व्यभिचार बढ़ रहा है विदेशों में क्या हो रहा है कि इसकी

658
00:47:27,120 --> 00:47:31,320
मतलब कोई उसमें मर्यादा नहीं रह गई है विवाह इत्यादि के निमित है ना हमारे यहां

659
00:47:31,320 --> 00:47:35,320
भी अब बढ़ता जा रहा है तो दूसरों को देख कर के अगर सीखने की बात है तो यह भी

660
00:47:35,320 --> 00:47:39,520
तो सीख सकते हैं क्यों नास्तिक से आस्तिक ही होंगे

661
00:47:39,520 --> 00:47:43,640
तो दूसरों को देख के नहीं अका नियम क्या है ईश्वर के अस्तित्व

662
00:47:43,640 --> 00:47:47,720
को सिद्ध करने के वो आपको जानने की आवश्यकता है ठीक

663
00:47:47,720 --> 00:47:52,600
है जी हा तो अब हम चलते हैं आगे

664
00:47:52,600 --> 00:47:57,080
कि वेदों में कहां लिखा है कि कभी

665
00:47:57,080 --> 00:48:01,400
भगवान है

666
00:48:01,400 --> 00:48:05,760
बताइए आपके पास

667
00:48:05,760 --> 00:48:10,080
यजुर्वेद है ना यजुर्वेद

668
00:48:10,080 --> 00:48:14,400
में अध्याय नंबर ऋग्वेद

669
00:48:14,400 --> 00:48:18,600
मंडल नंबर न के सुप्त नंबर 96 के मंत्र नंबर 16

670
00:48:18,600 --> 00:48:22,920
से लेकर 17 में एक मिनट मंडल

671
00:48:22,920 --> 00:48:27,040
नावेद मंडल हा ऋगवेद

672
00:48:27,040 --> 00:48:31,520
नंबर सुत नंबर 96 के 16 से लेकर 21

673
00:48:31,520 --> 00:48:35,600
में अरे भाई मंडल न पर ना है तो रुक जाओ बाद में

674
00:48:35,600 --> 00:48:39,680
बोल देना बाकी की बात रटा हुआ लाइन पूरी बोल के समते हो

675
00:48:39,680 --> 00:48:43,760
अरे रटा हुआ नहीं है लेकिन सुनो व पर लिखा है

676
00:48:43,760 --> 00:48:48,240
वो परमात्मा विद्युत के समान गति करके आता है

677
00:48:48,240 --> 00:48:52,520
मैंने पूछा है कबीर भगवान है यह कहा लिखा है वेदों में

678
00:48:52,520 --> 00:48:56,840
बस यह बताओ में आपको बता दिया ना आप देखो खोलकर

679
00:48:56,840 --> 00:49:01,040
तो फिर बिजली के समान वाली बात प क्यों आ रहे हो देखो

680
00:49:01,040 --> 00:49:05,120
मेरी बात सुनो इसमें भी है उसका प्रमाण तो इसमें भी

681
00:49:05,120 --> 00:49:11,120
है जो हम बता रहे हैं इसमें भी है उसका

682
00:49:12,960 --> 00:49:17,240
परमाण वेदों में ऋग्वेद में नवा

683
00:49:17,240 --> 00:49:23,240
मंडल खोल रहा हूं मैं पहले आप उसमें बताइए कहां लिखा है

684
00:49:38,040 --> 00:49:44,040
एक मिनट एक पुस्तक ला रहा

685
00:49:55,280 --> 00:50:01,280
हूं जी जी अभी देखते

686
00:50:04,240 --> 00:50:08,320
हैं तो वेडों में मंडल न सुक्त कौन

687
00:50:08,320 --> 00:50:12,680
सा बताया आपने

688
00:50:12,680 --> 00:50:18,680
96 सुत नंबर

689
00:50:22,400 --> 00:50:26,800
96 आपके पास है ऋग्वेद

690
00:50:26,800 --> 00:50:30,960
नहीं हमारे पास नहीं है तो आपने कभी

691
00:50:30,960 --> 00:50:36,960
चेक कर किया कि ऋग्वेद में लिखा है कि नहीं लिखा

692
00:50:37,280 --> 00:50:41,360
है जब आपसे बोला गया कि ऋग्वेद में लिखा है

693
00:50:41,360 --> 00:50:45,360
तो आपने चेक किया संत रामपाल जी महाराज

694
00:50:45,360 --> 00:50:49,640
की जो पुस्तक है वेद शस्त्र से प्रमाण है यह पुस्तक साहब

695
00:50:49,640 --> 00:50:53,640
अगर कोई अगर मैं आपसे यहां पर अभी एक बात छाप दूं कि उसमें

696
00:50:53,640 --> 00:50:57,640
लिखा हुआ है संत रामपाल जी महाराज मुजरिम है और उसमें लिखा

697
00:50:57,640 --> 00:51:01,680
हुआ है कि वो जो है बलात्कारी है और यह मैं आपको छपा हुआ दिखा दूं मान

698
00:51:01,680 --> 00:51:06,400
लोगे क्या आप पहले जाके देखोगे वेद में आप पहले

699
00:51:06,400 --> 00:51:10,480
एक मिनट एक मिनट आप पहले चेक करोगे ना कि वाकई में वेद में य

700
00:51:10,480 --> 00:51:14,760
बात लिखी हुई है कि नहीं

701
00:51:14,760 --> 00:51:19,080
सरया आपने चेक किया था क्या

702
00:51:19,080 --> 00:51:23,240
क्या आपने ये चेक किया था क्या कि अगर

703
00:51:23,240 --> 00:51:27,360
संत रामपाल जी संत रामपाल जी ने अगर अपनी

704
00:51:27,360 --> 00:51:31,360
देखो बोलने नहीं दे रहे हो संत रामपाल जी ने यदि

705
00:51:31,360 --> 00:51:35,400
यदि अपनी पुस्तक में य लिखा कि फलाने मंडल में

706
00:51:35,400 --> 00:51:39,600
फलाने सूक्त में फलाने मंत्र में कबीर को भगवान कहा गया है

707
00:51:39,600 --> 00:51:44,000
तो क्या यह बात आपने जाकर के चेक की वेदों

708
00:51:44,000 --> 00:51:48,200
में वेद आपके पास है ना हम बता रहे हैं आप देखो आप

709
00:51:48,200 --> 00:51:54,200
मैं आप मैं एक एक कदम चल रहा हूं मैं आपसे पूछ रहा हूं आपने चेक किया

710
00:51:55,040 --> 00:51:59,320
कभी चक तभी तो बोल रहे हैं सर आपसे तो आपने

711
00:51:59,320 --> 00:52:04,000
वेद खोल के स्वयं देखे सर हमको

712
00:52:04,000 --> 00:52:08,000
इसमें सारी जानकारी है तो

713
00:52:08,000 --> 00:52:12,400
मान लो सुनो आपने पहले रामपाल पर विश्वास किया था रामपाल

714
00:52:12,400 --> 00:52:16,440
जी पर विश्वास पहले किया था या फिर पहले उनकी किताबों को विश्वास

715
00:52:16,440 --> 00:52:20,680
कर लिया था पहले पुस्तक पहले पुस्तक मान

716
00:52:20,680 --> 00:52:24,720
ली ये शक्ति पुस्तक है ज्ञान गंगा पहले ही

717
00:52:24,720 --> 00:52:29,000
मतलब आपके पास कोई सुनो मेरी बात सुनो वो बताते

718
00:52:29,000 --> 00:52:33,600
हैं प्रश्न और उत्तर इसमें है सर गलत क्या है

719
00:52:33,600 --> 00:52:37,640
अरे भैया उनकी आपने किताब पर विश्वास पहले किया या पहले उन

720
00:52:37,640 --> 00:52:41,640
पर विश्वास किया हमने पहले उनकी बातों सेसे

721
00:52:41,640 --> 00:52:45,800
प्रमाणित किया ये इसका मतलब उसका मतलब

722
00:52:45,800 --> 00:52:50,520
आपने चेक की उनकी बातें सही है कि नहीं है बक बकुल हा

723
00:52:50,520 --> 00:52:54,560
उसी प्रकार से मैं पूछ रहा हूं आपसे इसको नीचे करो भाई अब इसको

724
00:52:54,560 --> 00:52:59,120
जब मैं कहूं तब उठाना जी ठीक है

725
00:52:59,120 --> 00:53:03,400
जिस प्रकार से आपने उनकी कही हुई बात को इस भगवत गीता से चेक

726
00:53:03,400 --> 00:53:07,440
किया ऐसे ही जब उन्होंने वेदों की बात की तो क्या आपने वेदों

727
00:53:07,440 --> 00:53:10,720
से चेक किया उनकी बात को कि नहीं किया

728
00:53:10,720 --> 00:53:14,720
वेदों हमारे पास मान लो किसी के पास पैसा नहीं हैद खरीदने भाई तो बोल दो

729
00:53:14,720 --> 00:53:18,800
ना नहीं किया बोल दो ना सीधे सधे नहीं किया मैं पूछ रहा हूं क्यों नहीं किया

730
00:53:18,800 --> 00:53:22,840
मैंने पूछा आपसे क्यों नहीं किया मैं पूछ रहा हूं किया क्या तो आप बोल दो नहीं

731
00:53:22,840 --> 00:53:27,880
मैंने नहीं किया बोलो सीधे पता नहीं क्या सचाई बोलने में

732
00:53:27,880 --> 00:53:32,080
हो भागवत गीता सवाल किया क्या आपने

733
00:53:32,080 --> 00:53:36,160
मेंक किया है कि नहीं मैंने आपसे सवाल किया क्या आपने वेदों में

734
00:53:36,160 --> 00:53:40,400
चेक किया कि नहीं जैसे आपने अभी मुझे पूरी लाइन बताई कि मंडल

735
00:53:40,400 --> 00:53:44,520
नंबर न सुक्त नंबर इतना 96 और उसका मंत्र यहां

736
00:53:44,520 --> 00:53:49,040
से यहां तक य आपने मुझे बताया तो मैंने आपसे सवाल किया क्या आपने यह

737
00:53:49,040 --> 00:53:53,920
स्वयं चेक किया है वेद खोल के की नहीं सिंपल जवाब है नहीं

738
00:53:53,920 --> 00:53:56,720
सिंपल जवाब

739
00:53:56,720 --> 00:54:01,560
उसको बोलने में पूछो नहीं बिल्कुल सिपल ज है

740
00:54:01,560 --> 00:54:06,120
हमारे पास श्रीमद् भगवत गीता गीता जी से प्रमाण

741
00:54:06,120 --> 00:54:10,760
आप मुझे प्रमाण किसका बता रहे हो मैं आपसे पूछ रहा हूं प्रमाण किसका बता रहे हो आप

742
00:54:10,760 --> 00:54:14,960
अभी आपने क्या बताया प्रमाण और वेद हमारे पास नहीं प्रमाण

743
00:54:14,960 --> 00:54:19,600
क्या बताया मेरे भाई आपने अभी प्रमाण किसका बताया

744
00:54:19,600 --> 00:54:23,960
था ये यजुर्वेद का यजुर्वेद ऋग्वेद

745
00:54:23,960 --> 00:54:28,040
का बताया है ऋगवेद

746
00:54:28,040 --> 00:54:32,360
सवे ऋग्वेद का आपने मुझे प्रमाण बताया है तो मैंने प्रश्न आपसे

747
00:54:32,360 --> 00:54:36,640
किया क्या आपने ऋग्वेद खोल के देखा तो आपका जवाब यह होना चाहिए नहीं नहीं मैंने

748
00:54:36,640 --> 00:54:40,680
उसको चेक नहीं किया है खुद से क्योंकि आपने नहीं

749
00:54:40,680 --> 00:54:46,680
किया है सच्चाई है

750
00:54:54,440 --> 00:55:00,280
जी हां 9 में मंत्र नंबर कौन

751
00:55:00,280 --> 00:55:04,560
सा केवल मत्र नंबर बोलो हा

752
00:55:04,560 --> 00:55:09,120
म नंबर 16 से लेकर 21

753
00:55:09,120 --> 00:55:13,320
ये प्रमाण है वो परमात्मा विद्युत के समान धरा पर आता है और वो कबीर दे

754
00:55:13,320 --> 00:55:17,800
नहीं नहीं कबीर भगवान है कि नहीं यह बताना है विद्युत

755
00:55:17,800 --> 00:55:22,320
के समान तो शिवजी भी आ सकते हैं मेरी बात सुनो आपके पास

756
00:55:22,320 --> 00:55:27,400
वो होगी ना मंत्र नंबर कौन सा 17

757
00:55:27,400 --> 00:55:33,400
हा 17 से लेकर 21 इसमें लिखा

758
00:55:33,720 --> 00:55:37,960
है कवि इसमें लिखा है कि

759
00:55:37,960 --> 00:55:42,360
पाप मोचक नवजात सभी को प्रमुदित करने वाले सोम

760
00:55:42,360 --> 00:55:46,520
को शुद्ध करते हैं वहन करने वाले सोम को

761
00:55:46,520 --> 00:55:51,280
सात गण अलंकृत करते हैं कवि अर्थात ज्ञानी

762
00:55:51,280 --> 00:55:56,600
कावन अर्थात स्त्रोत पाठ के साथ कवि

763
00:55:56,600 --> 00:56:00,920
के समान शब्द करता हुआ गिर भी

764
00:56:00,920 --> 00:56:05,320
स्तुति हों द्वारा पवित्रम छलनी में से छाना

765
00:56:05,320 --> 00:56:09,400
जाता है इसमें कबीर भगवान ने कहां लिखा है इसमें कबीर

766
00:56:09,400 --> 00:56:14,040
कहां लिखा है कबीर भगवान है छोड़ दो मेरी बात सुनो

767
00:56:14,040 --> 00:56:15,280
जिस प्रकार आप

768
00:56:15,280 --> 00:56:19,480
कबीर भगवान नहीं मान रहे व कभी बाइबल में उसका प्रमाण है है

769
00:56:19,480 --> 00:56:23,720
ना और जो कवि है वो

770
00:56:23,720 --> 00:56:27,960
कबीर कैसे बना की बात हो रही है वेद की

771
00:56:27,960 --> 00:56:32,000
आप हमें बाइबल और कुरान वहां से मत दो कवि को कबीर कैसे

772
00:56:32,000 --> 00:56:36,120
माना जाए हम हिंदू मुस्लिम

773
00:56:36,120 --> 00:56:39,200
देखो बाइबल

774
00:56:39,200 --> 00:56:43,360
कुरान अगल की बात करेंगे फिजूल की बात मत

775
00:56:43,360 --> 00:56:47,680
करिए आप मुझे बताइए कि कवि कबीर

776
00:56:47,680 --> 00:56:53,680
कैसे बना यह बताइए आप कभी

777
00:56:53,760 --> 00:56:57,760
कबीर वो आपको बता तो दिया कहां

778
00:56:57,760 --> 00:57:02,800
बता खा क कहा लिखा है जो कवि है वो कबीर होता

779
00:57:02,800 --> 00:57:07,080
है अभी आपने नहीं देखा 17

780
00:57:07,080 --> 00:57:11,160
के 21 में मंत्र नंबर 21 वो कबीर दे आपने वेदों में प्रमाण

781
00:57:11,160 --> 00:57:15,680
बोला है ना या तो बोलो के गीता में प्रमाण है कबीर भगवान ऐसे बोलो पहले

782
00:57:15,680 --> 00:57:19,680
वेदों में प्रमाण नहीं है कबीर भगवान नहीं है ऐसे बोलो वेदों

783
00:57:19,680 --> 00:57:23,760
में प्रमाण नहीं है कबीर भगवान है का दिखा

784
00:57:23,760 --> 00:57:28,200
तो वेदों का दिखाओ या तो जमला बदल दो

785
00:57:28,200 --> 00:57:30,440
हम बता रहे हैं ना आपको वेदों

786
00:57:30,440 --> 00:57:35,000
में दि बता रहे दिखाओ आप तो सुनो सुनो

787
00:57:35,000 --> 00:57:39,040
आप एक ही वेद से मानोगे जो अपने हिंदू धर्म के वेद

788
00:57:39,040 --> 00:57:43,280
है ना उनसे ही मानोगे ना आपने आपका जो जुमला है

789
00:57:43,280 --> 00:57:47,280
क्या वो ये है कि कुरान में कुरान में प्रमाण है हम बात कर रहे

790
00:57:47,280 --> 00:57:51,920
वेदों में प्रमाण अरे तो हम उस हम उस परे काउंटर ही नहीं कर रहे ना

791
00:57:51,920 --> 00:57:55,960
आप हमें वेदों में प्रमाण दिखाइए वेदों में कहां लिखा है कि कबीर भगवान

792
00:57:55,960 --> 00:58:01,400
है देखो सब में प्रमाण करना पड़

793
00:58:01,400 --> 00:58:05,400
देख सब आप अगर कुरान को कहोगे मुझे कोई दिक्कत

794
00:58:05,400 --> 00:58:09,520
नहीं कहते रहोम आप अगर वेदों में

795
00:58:09,520 --> 00:58:14,360
प्रमाण कह रहे तो वेदों में मुझे दिखाइए कबीर कहां लिखा

796
00:58:14,360 --> 00:58:18,440
है तो आप कहोगे अभी कि आपके पास वो अवेद है

797
00:58:18,440 --> 00:58:22,600
क्या तो हमारे पास नहीं है

798
00:58:22,600 --> 00:58:27,400
इसलिए आप मुझे मंत्र नंबर तो बताओ

799
00:58:27,400 --> 00:58:31,560
तो मंत्र नंबर आपको बता रहा है ना अभी तो बताया आपको और आपने

800
00:58:31,560 --> 00:58:35,800
पढ़ भी लिया तो क है उसम कबीर उसम

801
00:58:35,800 --> 00:58:39,960
तो कवि लिखा है कबीर क्यों

802
00:58:39,960 --> 00:58:44,000
नहीं कभी वो कबीर देव है

803
00:58:44,000 --> 00:58:48,160
क वो कवि कबीर कबीर कैसे बना

804
00:58:48,160 --> 00:58:52,400
पूछ रहा सुनो सुनो

805
00:58:52,400 --> 00:58:57,040
ये हमारे सद ग्रंथ है वेद इसमें एक कवि लिखा

806
00:58:57,040 --> 00:59:01,120
इसमें कवि का अर्थ लिखा है ज्ञानी कबीर नहीं लिखा है

807
00:59:01,120 --> 00:59:05,120
आप मुझे वेद वेद वो वाले वेद बताइए जहा कवि का अर्थ कबीर

808
00:59:05,120 --> 00:59:09,560
लिखा हो और मुझे वह नियम बताइए

809
00:59:09,560 --> 00:59:14,160
संस्कृत के कि कवि कबीर माना जाए वो नियम

810
00:59:14,160 --> 00:59:20,160
बताइए जी वो भी बता रहे

811
00:59:32,360 --> 00:59:36,480
अब आप ऋगवेद भाई

812
00:59:36,480 --> 00:59:40,600
आप मुझे पुस्तक मत दिखाइए आप केवल मंत्र नंबर बोलिए वेदों

813
00:59:40,600 --> 00:59:44,240
में कहां प्रमाण है कि कबीर भगवान

814
00:59:44,240 --> 00:59:48,360
है तो आपको बता तो दिया एक बार के एक

815
00:59:48,360 --> 00:59:52,680
बार बता दिया ना आपको क्या बता है भाई कवि कवि

816
00:59:52,680 --> 00:59:56,680
कवि कबीर आप कह रहे हो कि वेदों में प्रमाण है कबीर भगवान है आप ये कहो

817
00:59:56,680 --> 01:00:00,920
वेदों में प्रमाण है कवि भगवान कवि आप ये कहो कबीर दिखाओ

818
01:00:00,920 --> 01:00:04,920
अगर कबीर कह रहे हो तो कबीर दिखाओ मुझे यहां अगर

819
01:00:04,920 --> 01:00:09,000
कबीर कह रहे हो तो कबीर दिखाओ मुझे और अगर आपको ये कहना

820
01:00:09,000 --> 01:00:13,080
है कि कवि कबीर ही है तो वो कवि कबीर कैसे बना ये बताओ मुझे

821
01:00:13,080 --> 01:00:17,440
इसका प्रमाण वेदों में दो बिल्कुल बिल्कुल अब आप कहोगे

822
01:00:17,440 --> 01:00:21,560
फिर पुस्तक मत बताओ तो फिर मैं कैसे दूंगा आपको अरे मुझको

823
01:00:21,560 --> 01:00:25,560
मंत्र नंबर बोलो ना आपकी पुस्तक में मंत्र नंबर लिखा होगा ना वेदों

824
01:00:25,560 --> 01:00:30,120
का

825
01:00:30,120 --> 01:00:34,240
भाई मैं विनम्र निवेदन करना चाहता हूं कबीर पंथिया से जो

826
01:00:34,240 --> 01:00:38,280
भी रामपाल जी को फॉलो करते हैं कबीर को भगवान मानते

827
01:00:38,280 --> 01:00:42,720
हैं कि जो सक्षम हो जो सामर्थ्य

828
01:00:42,720 --> 01:00:46,840
वान हो उन्हें आगे आना चाहिए और यहां पर आकर के

829
01:00:46,840 --> 01:00:51,080
जो रामपाल जी के द्वारा फैलाया जा रहा मिथ्या प्रचार है उसका

830
01:00:51,080 --> 01:00:55,960
पक्ष लेना चाहिए आपको आप आप समाज में गलत मैसेज मत दीजिएगा

831
01:00:55,960 --> 01:01:00,280
मेरी बात सुनो आपने क्या कहा था कि

832
01:01:00,280 --> 01:01:04,320
जो भी डिबेट होगी तो वो मतलब जिन

833
01:01:04,320 --> 01:01:08,440
आधार पर होग शास्त्र गीता जी के आधार पर लेकिन आपने एक

834
01:01:08,440 --> 01:01:12,520
भी क्वेश्चन नहीं किया कि गीता में वेदों के आधार पर अपन को ये

835
01:01:12,520 --> 01:01:17,120
करना है बताओ आपने किया अभी तक भाई क्या आपका

836
01:01:17,120 --> 01:01:21,240
क्या मेमोरी श एक मिनट आपने अब कुछ पूछा

837
01:01:21,240 --> 01:01:25,320
है जवाब सुनिए आप क्या शॉर्ट ट मेमोरी लॉस है क्या मैंने

838
01:01:25,320 --> 01:01:29,320
क्या पूछ र वेदों में कहा लिखा है कि कबीर भगवान है आपने

839
01:01:29,320 --> 01:01:33,400
बताया वेदों का मंत्र नंबर इतना वहां कवि लिखा है कबीर नहीं

840
01:01:33,400 --> 01:01:37,960
लिखा है कबीर कहां लिखा है वो बताइए कबी

841
01:01:37,960 --> 01:01:42,080
वो उसे कबीर देवी कहते हैं कबीर वो कहा लिखा है

842
01:01:42,080 --> 01:01:46,320
कि उसको कबीर कहते हैं वह कहां लिखा

843
01:01:46,320 --> 01:01:50,760
है तो वह बता तो दिया कबीर कबी मतलब कबीर देव

844
01:01:50,760 --> 01:01:55,200
अरे वो कैसे मैं सुनो मैंने कहा कि मैं मेरे

845
01:01:55,200 --> 01:01:59,640
इसमें में लिखा है कि जो है शिवांश भगवान है ठीक है

846
01:01:59,640 --> 01:02:04,600
अब मैं कह दूं कि भैया यहां पे जो ये लिखा है ना ये

847
01:02:04,600 --> 01:02:08,960
शिशु ये शिवांश की बात हो रही है तो आप मुझसे पूछोगे

848
01:02:08,960 --> 01:02:13,160
ना कि शिशु शिवांश कैसे हो

849
01:02:13,160 --> 01:02:17,520
गया पूछोगे ना कि मान लोगे हां भैया शिवांश वही

850
01:02:17,520 --> 01:02:23,520
है तो मैं पूछ रहा हूं आपसे कवि कबीर कैसे

851
01:02:24,160 --> 01:02:28,520
बना क्या क्या मैं आपसे पूछ रहा हूं

852
01:02:28,520 --> 01:02:32,640
कवि कबीर कैसे बना ग्रंथ का जो ग्रंथ का लिखने वाला

853
01:02:32,640 --> 01:02:37,480
है जो अनुवाद करता है उसने कवि का अर्थ कबीर

854
01:02:37,480 --> 01:02:41,560
नरहा ग्रंथ का जिसने ग्रंथ का जिसने अनुवाद किया है उसने

855
01:02:41,560 --> 01:02:45,840
वहां पर कवि का अर्थ ज्ञानी लिखा है जी ठीक है उसने कवि

856
01:02:45,840 --> 01:02:49,920
का अर्थ कबीर नहीं लिखा आप मुझे बताइए

857
01:02:49,920 --> 01:02:53,960
क्या वेदों में आपके पास कोई ठोस प्रमाण है जहां पर सिद्ध हो रहा हो के

858
01:02:53,960 --> 01:02:58,200
कबीर भगवान है वो बताइए वेद उने दिए है

859
01:02:58,200 --> 01:03:03,160
वेद उने दिए है तो लिखा बताओ ना

860
01:03:03,160 --> 01:03:07,680
लिखा बताओ वेदों में कहां लिखा है कि कबीर भगवान

861
01:03:07,680 --> 01:03:11,920
है ज्ञान गंगा पुस्तक पूरी पढ़ लीजिएगा आपको पता चल जाएगा

862
01:03:11,920 --> 01:03:16,160
तो फिर तुम क्यों आए हो यही कह ते ज्ञान गंगा पढ़ लेना तो

863
01:03:16,160 --> 01:03:20,360
हम बता रहे हैं ना आपको आप मानने के लिए तैयार नहीं होते सुनो ठीक

864
01:03:20,360 --> 01:03:24,400
है आप आप आए आपने समय दिया और अच्छी चर्चा हुई

865
01:03:24,400 --> 01:03:28,520
व्यवहार कुशल चर्चा आप तर आपकी तरफ से दूसरे

866
01:03:28,520 --> 01:03:33,400
लोग आए हैं हम लोग उनको ले लेते हैं जितेश दास जी व कह रहे

867
01:03:33,400 --> 01:03:37,400
एक और सवाल बोलिए आपसे पूछ रहा हूं

868
01:03:37,400 --> 01:03:39,960
आप जवाब दीजिएगा आखरी सवाल

869
01:03:39,960 --> 01:03:44,040
हा ठीक है कि कौन ब्रह्मा का पिता है और कौन विष्णु की मां

870
01:03:44,040 --> 01:03:48,120
शंकर का दादा कौन है हमको दे बता बस ठीक है अब ये

871
01:03:48,120 --> 01:03:52,760
बताओ कबीर जी का गुरु कौन है नहीं नहीं नहीं कबीर

872
01:03:52,760 --> 01:03:57,120
जी सवाल के मैं आपको इस सवाल

873
01:03:57,120 --> 01:04:01,960
के उत्तर आपको इस सवाल के उत्तर में ही आपका उत्तर दे दूंगा

874
01:04:01,960 --> 01:04:06,160
कबीर जी ने लीला पूर्वक रामानंदाचार्य को गुरु बनाया था

875
01:04:06,160 --> 01:04:10,240
कि नहीं बनाया था बनाया था कि नहीं

876
01:04:10,240 --> 01:04:14,520
हा वास्तविकता में कोई उनका गुरु था क्या

877
01:04:14,520 --> 01:04:17,440
बनाया

878
01:04:17,440 --> 01:04:21,920
था वास्तविकता में उनका कोई गुरु था क्या बिल्कुल

879
01:04:21,920 --> 01:04:26,680
रामानंद कोई गुरु रामानंद

880
01:04:26,680 --> 01:04:30,680
जी वास्तविकता में जो उनको कबीर को ज्ञान दे

881
01:04:30,680 --> 01:04:34,800
पाए ऐसा कोई था क्या आपके अनुसार नहीं मैंने

882
01:04:34,800 --> 01:04:38,840
मैंने दिया उसका जवाब दो ना आप अरे भाई मैं उसी से आपका जवाब

883
01:04:38,840 --> 01:04:43,320
दे रहा हूं जैसे कबीर जी ने गुरु बनाकर लीला की

884
01:04:43,320 --> 01:04:47,880
वैसे ही ब्रह्मा विष्णु महेश का कोई पिता नहीं है भगवान ही

885
01:04:47,880 --> 01:04:52,200
अपने भगवान ही अपनी लीला में प्रकट होते हैं कभी वो संतान

886
01:04:52,200 --> 01:04:56,520
बन जाते हैं कभी वो पिता बन जाते हैं समझ गए सुनो

887
01:04:56,520 --> 01:05:00,560
मेरी बात सुनो देवी दुर्गा जी है देवी दुर्गा जी उनका

888
01:05:00,560 --> 01:05:04,560
पति कौन है ऐसा है यहां फिजूल की बात ना करना

889
01:05:04,560 --> 01:05:08,800
फालतू की ठीक है मेरी बात सुनो आप सवालों

890
01:05:08,800 --> 01:05:12,840
से मु कर रहे हो आप सवालों का जवाब नहीं दे रहे है

891
01:05:12,840 --> 01:05:17,000
बताइए बताओ बताओ हमको बताओ यदि आपको

892
01:05:17,000 --> 01:05:21,680
है तो ब्रह्मा वि क्या पूछो

893
01:05:21,680 --> 01:05:25,920
पूछो क्या बताना है ब्रह्मा विष्णु महे

894
01:05:25,920 --> 01:05:30,160
पिता कौन है और देवी दुर्गा जी का पति कौन है आप य बता

895
01:05:30,160 --> 01:05:33,360
ये मुझे बता दो कबीर का पिता कौन है

896
01:05:33,360 --> 01:05:39,360
नहीं ये बात आप नहीं क्या है क्या

897
01:05:39,520 --> 01:05:44,120
है आपने एक भी परमाण बात नहीं की तो आप बताइए ना

898
01:05:44,120 --> 01:05:48,280
कौन बया मैंने पूछ मैंने जब पूछा कि वेदों में प्रमाण

899
01:05:48,280 --> 01:05:52,600
कहा है कबीर भगवान है आपने प्रमाण दिया क्या हमने चलो

900
01:05:52,600 --> 01:05:57,360
हमने बता दिया आप ज्ञान गंग पुस्तक पढ़ लेना ठीक है अच्छा

901
01:05:57,360 --> 01:06:01,400
अच्छा जन पुस्तक आपका जवाब है ज्ञान गंगा पुस्तक आपने नहीं

902
01:06:01,400 --> 01:06:06,080
पढ़ी क्यारी बांगा पुस्तक आपने नहीं पढ़ी क्या

903
01:06:06,080 --> 01:06:10,080
वो तो पढ़ ली हमने तो लेकिन हमारी बा नहीं पता है

904
01:06:10,080 --> 01:06:14,080
पढ़ ली है तो आप मुझे बताओ ना हमारी बात का जवाब तो दो

905
01:06:14,080 --> 01:06:18,120
जो हमने पूछा है उसका तो मैं दे तो रहा हूं भगवान का

906
01:06:18,120 --> 01:06:23,920
कोई पिता नहीं होता कोई पिता नहीं है

907
01:06:23,920 --> 01:06:29,480
उनका ठीक है ठीक है आप जाइए बाय सुनो सुन

908
01:06:29,480 --> 01:06:33,800
ये हां भाई जितेश जी आप

909
01:06:33,800 --> 01:06:37,880
आएंगे जय श्री राम जय श्री राम कहां

910
01:06:37,880 --> 01:06:42,680
से है जितेश जी मैं हरियाणा से

911
01:06:42,680 --> 01:06:46,880
हरियाणा से आप रामपाल जी को मानते हैं

912
01:06:46,880 --> 01:06:50,960
हां मैंने उनसे नाम दि ली अच्छा तो मुझे

913
01:06:50,960 --> 01:06:54,960
आप यह बताइए कि रामपाल जी के अनुसार ईश्वर है

914
01:06:54,960 --> 01:06:59,040
यह किस प्रकार सिद्ध होता है अब मैं जो जवाब दूंगा वो

915
01:06:59,040 --> 01:07:03,080
आपने जवाब दे चुके हैं फिर आप कहेंगे कि जो मैंने बोला वही आप बोल रहे हो नहीं

916
01:07:03,080 --> 01:07:07,200
नहीं नहीं नहीं आप वो आप जवाब अगर दे रहे हो तो आप हमें यह बताएंगे

917
01:07:07,200 --> 01:07:11,240
ये उन्होंने कहां पर कहा है आप

918
01:07:11,240 --> 01:07:15,280
जो जवाब मैं बता रहे हां उन्होंने अपने सत्संग में यह

919
01:07:15,280 --> 01:07:19,680
कहा है कौन सा सत्संग है अभी मेरे को

920
01:07:19,680 --> 01:07:23,920
एपिसोड काम करो सत्संग का कुछ डिटेल हमें बता दो हम चेक करेंगे

921
01:07:23,920 --> 01:07:28,560
उन्होंने ज्ञान दिया है कि नहीं उसके बाद आप ज्ञान दे देना कौन सा सत्संग है

922
01:07:28,560 --> 01:07:33,360
वो मैं आपको एपिसोड नंबर ढूंढ के बता दूंगा अभी मेरे को नहीं

923
01:07:33,360 --> 01:07:37,400
कर आप ऐसा करिए अभी थोड़ी देर के लिए जाइए आप ढूंढिए और उसको कमेंट

924
01:07:37,400 --> 01:07:39,400
कर दीजिए फिर आइए

925
01:07:39,400 --> 01:07:43,480
कोई बात नहीं वो मेरे को आपसे कुछ सवाल करने हैं आप उनके जवाब दे

926
01:07:43,480 --> 01:07:47,560
दे तो मैं दूंगा आपको जवाब अभी आप पहले जो मैंने आपसे पूछा है

927
01:07:47,560 --> 01:07:51,880
उसका हमें लिंक दीजिए और आप यहां पर प्रमाण देने आए हैं

928
01:07:51,880 --> 01:07:55,920
मैं प्रमाण देने नहीं नहीं नहीं प्रमाण देने में नहीं आ तो

929
01:07:55,920 --> 01:08:00,040
आप ऐसा करिए आपके पास वो वीडियो है जिसमें उन्होंने भगवान है

930
01:08:00,040 --> 01:08:04,280
ये सिद्ध किया हो मैं आपका नंबर भाई साहब

931
01:08:04,280 --> 01:08:08,400
भाई साहब भाई साहब देखिए टॉपिक से हटके बात मत करिए मैं

932
01:08:08,400 --> 01:08:12,520
नहीं करूंगा आपके पास देखिए आपके पास वह वीडियो है आपकी

933
01:08:12,520 --> 01:08:17,680
जानकारी में जिसमें उन्होंने ईश्वर को सिद्ध किया हो है

934
01:08:17,680 --> 01:08:21,920
एक ही लाइन बोलने का मौका दे दीजिए बस बोलिए आपका आपका

935
01:08:21,920 --> 01:08:26,120
नंबर मेरे पास है मैं आपको नंबर नहीं य जनता को दिखाइए

936
01:08:26,120 --> 01:08:30,280
आप जाइए अभी हम आधे घंटे रुकेंगे आपके लिए आधे घंटे में हमें उस वीडियो

937
01:08:30,280 --> 01:08:34,600
का लिंक यहां दीजिए हम यहां जनता के सामने उसको सीधे प्रस्तुत करेंगे

938
01:08:34,600 --> 01:08:38,760
कबीर जी ने कहां पर ये सिद्ध किया है कि इस दुनिया में ईश्वर

939
01:08:38,760 --> 01:08:43,080
है वो वीडियो में दीजिए आप पूर्ण ज्ञानी है ना वो चलो सुनिए

940
01:08:43,080 --> 01:08:49,080
मेरी बात सुनिए यहां पे बात तो

941
01:08:49,480 --> 01:08:53,520
सु बोलिए बोलिए हम चर्चा करने की तो बैठे

942
01:08:53,520 --> 01:08:57,600
हैं बात तो सुनिए आप मैं बिल्कुल आराम से या तो आप ये कहो कि आपको

943
01:08:57,600 --> 01:09:01,720
जानकारी नहीं है तो हम आगे चर्चा करें आपने ठोक के कह दिया

944
01:09:01,720 --> 01:09:05,920
कि हां दिया है और मैं वही जवाब दूंगा जो आपने दिया है तो अगर आपने

945
01:09:05,920 --> 01:09:10,240
ठोक के कहा है तो अब उसे सिद्ध करो पहले आप जाओ और

946
01:09:10,240 --> 01:09:14,440
ढूंढो हम लोग अभी हैं औरों से चर्चा कर रहे हैं हम आपका वेट कर रहे हैं

947
01:09:14,440 --> 01:09:18,480
आप 15 मिनट आधा घंटा ले लो हमें वो वीडियो दो जिसमें

948
01:09:18,480 --> 01:09:23,040
उन्होंने ईश्वर को सिद्ध किया है

949
01:09:23,040 --> 01:09:27,120
और कि आप जो है फोन उस फोन पर व

950
01:09:27,120 --> 01:09:31,160
कर देना और अगर आज की चर्चा में ना भी आ पाए तो आप व

951
01:09:31,160 --> 01:09:35,480
करना हमको के पर आपको फॉर्म मिलेगा फॉर्म भरना हम आपसे कांटेक्ट

952
01:09:35,480 --> 01:09:39,680
करेंगे फिर से आइएगा मगर अभी आपको आप यदि

953
01:09:39,680 --> 01:09:43,920
आप यदि यह दावा कर रहे हैं कि उन्होंने ज्ञान दिया है सत्संग में दिया है

954
01:09:43,920 --> 01:09:48,560
तो आप वो वीडियो हमको दीजिए जहां पर आपने वो ज्ञान देखा ठीक

955
01:09:48,560 --> 01:09:53,160
है अभी अभी के लिए जाइए और उसको ढूंढिए

956
01:09:53,160 --> 01:09:57,160
इससे आगे चर्चा कर सकते हैं इससे आगे तब करेंगे या तो आप

957
01:09:57,160 --> 01:10:01,200
अपनी इस बात को वापस लीजिए आपने जो बात बोली है उसको

958
01:10:01,200 --> 01:10:05,360
या तो सिद्ध करिए तब तो हम आगे बढ़े समझ

959
01:10:05,360 --> 01:10:11,360
मैं ढूंढता हूं मैं आपको भेजता

960
01:10:13,000 --> 01:10:16,560
ठीक हां

961
01:10:16,560 --> 01:10:21,320
भाई अब है हमारे साथ सत्यम सक्सेना सात्विक

962
01:10:21,320 --> 01:10:25,480
इनमें से फोटो दिख रही है अमित दास की अमित दास

963
01:10:25,480 --> 01:10:29,480
जी जय श्री राम जी

964
01:10:29,480 --> 01:10:33,520
बोलिए कहां से मैं नोएडा से हूं

965
01:10:33,520 --> 01:10:37,600
अमित अमित नोएडा से अच्छा आप प्रमाण

966
01:10:37,600 --> 01:10:41,720
मांग रहे थे कबीर साब जी के भगवान होने का आपको

967
01:10:41,720 --> 01:10:46,390
प्रमा आप निकालिए सामवेद

968
01:10:46,390 --> 01:10:52,390
[संगीत]

969
01:10:56,800 --> 01:11:01,200
कौन अलोक 30 अध्याय नंबर

970
01:11:01,200 --> 01:11:04,180
एक श्लोक

971
01:11:04,180 --> 01:11:10,180
[संगीत]

972
01:11:10,840 --> 01:11:14,920
30 वेदों में मंत्र होते हैं श्लोक नहीं

973
01:11:14,920 --> 01:11:18,280
होते या तो

974
01:11:18,280 --> 01:11:23,120
मंत्र मंत्र अध्याय नंबर कौन सा बताया एक

975
01:11:23,120 --> 01:11:29,120
एक में शलोक मंत्र 30

976
01:11:39,840 --> 01:11:45,840
इसकी बात कर रहे हैं

977
01:11:49,320 --> 01:11:53,800
क्या नहीं यह वाला नहीं है उसमें लिखा है कबीर अभी तोजा

978
01:11:53,800 --> 01:11:57,080
कभी र

979
01:11:57,080 --> 01:12:01,160
कबीर लिखा है कबीर या कबीर लिखा है

980
01:12:01,160 --> 01:12:05,360
हा कबीर अग्ने कवीर नहीं मुझे कबीर बताइए कहां

981
01:12:05,360 --> 01:12:09,720
लिखा है कबीर अगर कवि को कबीर कहा जाता है तो वह नियम बताइए

982
01:12:09,720 --> 01:12:13,920
किस आधार पर कवि कबीर बनता है

983
01:12:13,920 --> 01:12:18,000
ये तो ऐसे तो इन्होने भी दिया ऋगवेद भाई

984
01:12:18,000 --> 01:12:22,320
यहां पर लिखा है ना कबीर ये कबीर लिखा तो है ये

985
01:12:22,320 --> 01:12:26,480
मगर य कबीर में जो रा आया है जोय आया है वो

986
01:12:26,480 --> 01:12:30,520
विसर्ग संधि होने के कारण आया है और वास्तविक शब्द नीचे

987
01:12:30,520 --> 01:12:34,800
लिखा है कवि यह देखिए कवि लिखा

988
01:12:34,800 --> 01:12:39,200
है हा दिख रहा है कबीर नहीं है कवि है अब ये कवि कबीर

989
01:12:39,200 --> 01:12:45,200
कैसे बना इसके बारे में सिद्धांत दीजिए संस्कृत का

990
01:12:47,760 --> 01:12:52,000
अष्टाध्यायी हो अमर कोष हो उसका जो प्रमाणिक हो ऐसे

991
01:12:52,000 --> 01:12:56,040
दीजिए आपने कवि का अर्थ कबीर

992
01:12:56,040 --> 01:13:00,040
वेदों में कहां लिखा है वो बताइए मुझे देखिए मैं आपसे

993
01:13:00,040 --> 01:13:04,560
एक बात कहना चाहता हूं इस तर

994
01:13:04,560 --> 01:13:09,080
आप कोई भी बात कहिए आप कोई बात कगा पहले एक बात को खत्म होने दीजिए

995
01:13:09,080 --> 01:13:13,080
क्या वेदों में इस प्रकार का कोई प्रमाण है जहां से

996
01:13:13,080 --> 01:13:17,960
सिद्ध होता है हो कि कवि का अर्थ कबीर है

997
01:13:17,960 --> 01:13:22,000
उसके लिए मैं आपको अभी मतलब मेरे पास इस चीज का प्रमाण नहीं

998
01:13:22,000 --> 01:13:26,160
है मतलब मेरे को पता नहीं है मैं आपको बस एक छोटी सी बात कहना चाता

999
01:13:26,160 --> 01:13:30,320
या आपको एक मिनट यानी कि आपको यह नहीं पता है

1000
01:13:30,320 --> 01:13:34,800
कि वेदों में प्रमाण है कि नहीं कबीर भगवान है कि नहीं प्रमाण तो है

1001
01:13:34,800 --> 01:13:39,040
बट उसको जो मतलब सेटिस्फाई करने के लिए मेरे पास मतलब थोड़ा सा

1002
01:13:39,040 --> 01:13:43,120
मेरे को रे भाई आप कह रहे हो प्रमाण है सेटिस्फाइड करने

1003
01:13:43,120 --> 01:13:47,240
के लिए नहीं है मेरे पास ये कौन सी या तो नहीं है आपकी जानकारी में प्रमाण

1004
01:13:47,240 --> 01:13:51,800
नहीं है ना आपकी जानकारी में क्या

1005
01:13:51,800 --> 01:13:55,840
है तो मैं अब आपसे कहना चाहता हूं अगर आपको डिबेट करनी है तो आप फेस

1006
01:13:55,840 --> 01:14:01,840
टू मतलब एक तरीके से बैठ के

1007
01:14:05,840 --> 01:14:10,800
कहीं और कोई है

1008
01:14:10,800 --> 01:14:14,840
क्या भाई साहब हम लोग बैठे हैं वेट कर रहे

1009
01:14:14,840 --> 01:14:19,280
हैं आपके कमेंट का आप कमेंट करिए जितेश जी

1010
01:14:19,280 --> 01:14:23,360
जहां पर पूर्ण ज्ञानी तत्वदर्शी संत रामपाल जी

1011
01:14:23,360 --> 01:14:27,640
ने यह सत्संग में बताया हो कि ईश्वर

1012
01:14:27,640 --> 01:14:32,480
हैय किस प्रकार सिद्ध होता है अथवा

1013
01:14:32,480 --> 01:14:38,480
वेद में कबीर है कबीर कहां लिखा

1014
01:14:50,320 --> 01:14:54,360
है 464 लोग लाइव देख

1015
01:14:54,360 --> 01:14:56,800
रहे हैं

1016
01:14:56,800 --> 01:15:01,200
बताइए कहां लिखा

1017
01:15:01,200 --> 01:15:07,200
है कबीर भगवान

1018
01:15:13,360 --> 01:15:17,400
है कोई आया क्या सत्यम सखना जी

1019
01:15:17,400 --> 01:15:21,480
आप अपना चेहरा दिखाए तो हम आपको ऊपर ले और ये

1020
01:15:21,480 --> 01:15:25,600
दीपक जी अपना पेस रिवील करें तो हम आपको

1021
01:15:25,600 --> 01:15:29,760
ऊपर लेंगे अन्यता आपको हटा दिया जाएगा हटा

1022
01:15:29,760 --> 01:15:35,760
दीजिए भैया इनको यह फेस नहीं दिखा रहे दीपक

1023
01:15:36,960 --> 01:15:42,960
जी किक फ्रॉम स्टूडियो आकाश तिवारी

1024
01:15:43,440 --> 01:15:47,120
जी जय श्री

1025
01:15:47,120 --> 01:15:51,360
राम ठीक राम राम

1026
01:15:51,360 --> 01:15:55,520
आप कहां से हैं अपना परिचय दीजिए

1027
01:15:55,520 --> 01:15:59,240
मैं यूपी औरैया से

1028
01:15:59,240 --> 01:16:03,600
हू आ अभी आपकी डिबेट चल रही

1029
01:16:03,600 --> 01:16:08,040
थी आप यह कह रहे थे कि वेदों में

1030
01:16:08,040 --> 01:16:12,160
कबीर का क्या प्रमाण [संगीत]

1031
01:16:12,160 --> 01:16:16,480
है हम भी संत रामपाल जी महाराज के शिष्य है

1032
01:16:16,480 --> 01:16:20,920
कब लि आपने नाम दीक्षा

1033
01:16:20,920 --> 01:16:26,920
हमने नाम दीक्षा ली थी 2013 में

1034
01:16:27,640 --> 01:16:33,040
ठीक है आप तो काफी मतलब सीनियर है इसका

1035
01:16:33,040 --> 01:16:37,040
अर्थ तो अब मुझे आप बताइए कि वेदों में कहां प्रमाण है

1036
01:16:37,040 --> 01:16:39,920
कबीर

1037
01:16:39,920 --> 01:16:44,520
भगवान और आप अपना टीवी बंद कर दीजिए आपकी आवाज आ रही पीछे टीवी

1038
01:16:44,520 --> 01:16:48,880
की टीवी नहीं ब मोबाइल

1039
01:16:48,880 --> 01:16:53,040
मोबाइल चल रहा हैब ऐसा कर आप

1040
01:16:53,040 --> 01:16:57,280
सुनिए आप कपड़े भी पहन ली थोड़ा सा

1041
01:16:57,280 --> 01:17:01,320
एक अच्छा कंटेंट नहीं जाता है आप टीशर्ट पहन लीजिए कैमरे के

1042
01:17:01,320 --> 01:17:05,320
सामने आएंगे ना तो टीशर्ट आप डाल लीजिए कम से कम ठीक

1043
01:17:05,320 --> 01:17:11,320
है

1044
01:17:29,320 --> 01:17:33,480
बताओ इतना हल्ला मचा रखा है जब पूछने पर आते हैं कहां लिखा है कबीर भगवान

1045
01:17:33,480 --> 01:17:39,480
है तो यह वो यह वो इस तरह से बात होती

1046
01:17:41,050 --> 01:17:47,050
[संगीत]

1047
01:17:48,600 --> 01:17:53,120
है कांत कुमारी आप

1048
01:17:53,120 --> 01:17:57,120
इनको भाई ऐड करो आप लिंक दे दो इनको ये ऐड हो चेहरा दिखाना

1049
01:17:57,120 --> 01:18:03,120
होगा ये ध्यान

1050
01:18:13,320 --> 01:18:17,920
रखिएगा लिंक दे दिया गया

1051
01:18:17,920 --> 01:18:22,840
है जी वंदना जी जय श्री राम

1052
01:18:22,840 --> 01:18:27,000
श्री हरिवंश एक्चुअली मेरा विरोध नहीं है आपसे

1053
01:18:27,000 --> 01:18:31,160
को मैं तो आप लोग के चरणों की धूल हू नहीं ऐसा

1054
01:18:31,160 --> 01:18:35,320
मत कहिए हम निमित मात्र है गुरुदेव के अल्पज्ञ शिष्य है और

1055
01:18:35,320 --> 01:18:39,920
आपका नाम पढ़ने से हमने जान लिया कि आप हमारी साइड के लोग

1056
01:18:39,920 --> 01:18:43,920
आपने जो नाम लिखा है उससे ही हमें समझ में आ गया कि आप हमारी तरफ विरोध

1057
01:18:43,920 --> 01:18:48,080
नहीं है जी बताइए नाचुली मैं कुछ

1058
01:18:48,080 --> 01:18:52,120
दिन से आपके लाइव स्ट्रीम देख रही हूं सीरियसली बहुत अच्छा लग रहा है

1059
01:18:52,120 --> 01:18:56,440
मुझे देख करके कुछ टाइम से एक मैंने आपको मैसेज भी किया था

1060
01:18:56,440 --> 01:19:00,520
मेरे शरीर के भैया के बारे में कि उन्होंने मुझे बहुत ज्यादा

1061
01:19:00,520 --> 01:19:04,520
मतलब सालों से टॉर्चर किया एक तरह से मान लीजिए टॉर्चर किया मतलब एक एक

1062
01:19:04,520 --> 01:19:08,640
दिन में उनके 50 100 प्लस ऐसे मैसेजेस मुझे आते हैं

1063
01:19:08,640 --> 01:19:12,840
कि मतलब तुम काल की पूजा करते हो तुम काल को पूछते हो तुम भगवान

1064
01:19:12,840 --> 01:19:17,000
को नहीं मानते हो परमात्मा को नहीं मानते हो एंड मुझे ऐसा लगता था कि मतलब

1065
01:19:17,000 --> 01:19:21,320
मैं किसको बोलू जाकर के मेरे साथ जो क्योंकि मैंने सारे शास्त्र नहीं पढ़े हैं

1066
01:19:21,320 --> 01:19:25,320
सारी नॉलेज मुझे नहीं है मैं भी नई नई भक्ति में आए हू जस्ट शुरू कि महाराज

1067
01:19:25,320 --> 01:19:29,480
प्रेमानंद महाराज जी को सुनना तो बहुत सारे क्वेश्चन के आंसर मैं नहीं दे पाती थी

1068
01:19:29,480 --> 01:19:33,120
तो मुझे लगता था कोई हो जिससे मैं जान सकू एंड सीरियसली

1069
01:19:33,120 --> 01:19:37,160
आपके लाइव स्ट्रीम्स देखने के बाद मुझे बहुत सपोर्ट मिला है बहुत नॉलेज मिल

1070
01:19:37,160 --> 01:19:41,160
रही है आपकी वीडियोस से सब कृपा है गुरु गोविंद

1071
01:19:41,160 --> 01:19:45,360
ग्रंथ की कृपा मात्र बस और कुछ बिल्कुल पर कुछ पॉइंट्स

1072
01:19:45,360 --> 01:19:49,800
मैं ऐड करना चाहती हूं प्रभु जी अगर आपको सही लगे तो आप वो

1073
01:19:49,800 --> 01:19:53,880
क्वेश्चन उन लोगों से पूछ सकते हैं कि जैसे मब

1074
01:19:53,880 --> 01:19:58,120
ये जो थंबनेल भी है ना कि क्या वो नास्तिकों का खंडन कर सकते

1075
01:19:58,120 --> 01:20:02,680
हैं बट जितना मैंने देखा है ना वो लोग आस्तिक का खंडन करते हैं

1076
01:20:02,680 --> 01:20:07,040
मतलब हम किसी को भी पूछे अगर हम कृष्णा जी को पूछ रहे हैं तो वो उनके अगेंस्ट

1077
01:20:07,040 --> 01:20:11,040
बोलेंगे अगर हम शिव जी को पूछ रहे हैं तो वो उनके अगेंस्ट बोलेंगे माता रानी के

1078
01:20:11,040 --> 01:20:15,120
अगेंस्ट तो अगर कोई आस्तिक है तो उनको ये नहीं है कि ये किसी भी स्वरूप के

1079
01:20:15,120 --> 01:20:19,200
थ्रू एटलीस्ट भगवान से जुड़े हैं उनको ये है कि आप किसी को

1080
01:20:19,200 --> 01:20:23,200
मत पूछो आप सबको छोड़ दो आप सिर्फ हमारे ही मतलब जिसे

1081
01:20:23,200 --> 01:20:27,400
हम परमात्मा कह रहे हैं जिसे हम भवान क रहे बस उनको पूजिए एंड सेकंड

1082
01:20:27,400 --> 01:20:31,640
थिंग की कबीर पंथ में ही दो तरह के लोग हैं एक

1083
01:20:31,640 --> 01:20:35,880
है जो कबीर को परमात्मा मान रहे हैं दूसरे हैं जो कबीर को परमात्मा

1084
01:20:35,880 --> 01:20:40,120
नहीं मान रहे हैं एक जो उनके आदर्श एक जो उनको आदर्श बना

1085
01:20:40,120 --> 01:20:44,280
के चलते हैं कि उन्होंने जो शिक्षाएं दी उनके अनुसार चलते हैं

1086
01:20:44,280 --> 01:20:48,120
उनको नमन है उनको नमन है जी इस तरह का भी है कबीर

1087
01:20:48,120 --> 01:20:52,240
पं जो कबीर जी ने जो ज्ञान दिया है भक्ति के निमित्त और भगवान की

1088
01:20:52,240 --> 01:20:56,280
वो उनको आदर्श बनाकर चलने वाला एक पंथ है वो कबीर पंथ है मगर

1089
01:20:56,280 --> 01:21:00,280
इनके कारण वो बदनाम हो जाता है अगर कोई बताता है कि हम

1090
01:21:00,280 --> 01:21:04,280
कबीर पंथी है तो वो पहले रामपाल दास जी

1091
01:21:04,280 --> 01:21:08,640
से जोड़ कर के उन्हें देखा जाता है जी एक्चुअली

1092
01:21:08,640 --> 01:21:12,680
भैया के साथ भी था उनका भी जैसे मुझे जहां ल टोटल ब्रेन वश हुआ है क्योंकि

1093
01:21:12,680 --> 01:21:16,840
पहले वो भगवत गीता पढ़ते थे मेरी शादी के पहले और कृष्णा जी को ही परम भगवान मानते

1094
01:21:16,840 --> 01:21:20,920
थे फिर उन्होंने धीरे धीरे रामपाल को सुनना स्टार्ट किया मैं

1095
01:21:20,920 --> 01:21:24,960
उस टाइम मुझे ज्यादा नॉलेज तो नहीं थी मैं इसन समय उतना जानती भी नहीं थी बट

1096
01:21:24,960 --> 01:21:28,960
मैं ये देखती थी कि वो रामपाल जी के कुछ वीडियोस देखते थे र जी भी मैंने गलती

1097
01:21:28,960 --> 01:21:33,040
से लगा दिया हैट है बट ऐसे लोगों के एक्चुअली मैं जी लगा नहीं सकते जो

1098
01:21:33,040 --> 01:21:37,120
मेरे भगवान के अगेंस्ट बोलते हैं तो रामपाल के वीडियोस देखते थे और फिर देखते

1099
01:21:37,120 --> 01:21:41,120
देखते आई डोंट नो उन्होने कभी कबीर को भगवान माना या नहीं माना बट अभी

1100
01:21:41,120 --> 01:21:45,320
एक तीसरा निकल के सिस्टम उनसे मैंने देखा है कि वो मतलब कबीर

1101
01:21:45,320 --> 01:21:49,360
को तो भगवान नहीं मानते बट जो हमारे जो ऑलरेडी भगवान के अलग अलग स्वरूप

1102
01:21:49,360 --> 01:21:53,440
है महादेव जी है कृष्णा जी है इन लोगों को भी भगवान नहीं मानते इन लोगों को

1103
01:21:53,440 --> 01:21:57,480
सीरियसली वो बारबार एक ही चीज स्ट करते हैं कि तुम लोग काल

1104
01:21:57,480 --> 01:22:01,480
की पूजा करते हो कृष्णा जी ने कहा है कि वो काल है वो सबको खत्म करते सृष्टि

1105
01:22:01,480 --> 01:22:03,160
को खत्म कर देते हैं वगैरह एक्

1106
01:22:03,160 --> 01:22:07,200
चीज बोलते हैं और तुम लोग उनकी पूजा करते हो और कबीर ने मतलब

1107
01:22:07,200 --> 01:22:11,240
इन लोगों की कभी भक्ति नहीं की थी ये सब झूठ फैलाया गया है इस तरह की बातें हमेशा मुझे बोलते

1108
01:22:11,240 --> 01:22:15,320
हैं और कहते हैं कि कबीर को मानते थे

1109
01:22:15,320 --> 01:22:19,520
आप कभी उनको यहां ले आइएगा किसी प्रकार

1110
01:22:19,520 --> 01:22:23,720
किया था मैंने कहा कि मैंने कहा आपको अगर आप मुझे इतने सालों से परेशान कर रहे हैं

1111
01:22:23,720 --> 01:22:27,840
आप ये जानते मेरे पास हर चीज का जवाब नहीं है आप उनके पास जाइए उनके पास तो हर चीज

1112
01:22:27,840 --> 01:22:32,040
का जवाब है उन्होंने सारे शास्त्र पढ़े हु मैं जब छोटा था मैं

1113
01:22:32,040 --> 01:22:36,160
मैं रहा हगा 14 साल का था मैं तब

1114
01:22:36,160 --> 01:22:40,680
पहली बार मैं इनसे टकराया था रामपाल के लोगों से जी और

1115
01:22:40,680 --> 01:22:44,960
इन्होंने मुझे बैठ के सुनाना शुरू किया गीता अध्याय शायद थोड़ा 15

1116
01:22:44,960 --> 01:22:49,400
16 कराऊंगा तो इन्होंने मुझे सुनाना शुरू किया कि गीता अध्याय

1117
01:22:49,400 --> 01:22:53,400
उसमें इनके बिल्कुल रटी हुई लाइन होती है आप कभी देखना जो रटा हुआ व्यक्ति होता है वो क्या

1118
01:22:53,400 --> 01:22:57,480
करता है जब भी उससे प्रमाण पूछोगे जैसे मैंने अभी बोला कि भाई

1119
01:22:57,480 --> 01:23:01,520
मंत्र नंबर बताओ तो वह शुरू से बताएगा पीछे

1120
01:23:01,520 --> 01:23:06,000
से मंडल नंबर इतना सक्त नंबर इतना

1121
01:23:06,000 --> 01:23:10,520
और मंत्र नंबर इतना वह ऐसे बताएगा वह क्रम नहीं तोड़ सकता

1122
01:23:10,520 --> 01:23:15,400
बीच में से नहीं जैसे कई बार हम फोन नंबर याद करते हैं ना

1123
01:23:15,400 --> 01:23:18,560
998346 ऐसे हमने याद किया तो

1124
01:23:18,560 --> 01:23:22,680
अगर हमसे पूछा जाए लास्ट में क्या था तो हम लोग उस तक आने के लिए

1125
01:23:22,680 --> 01:23:27,640
पीछे सेही क्योंकि हमने रटा है नहीं है व हम पीछे से ही स्टार्ट कर 918

1126
01:23:27,640 --> 01:23:31,920
314 सि से लास्ट तो सिक्स को जानने के लिए हमें दोबारा पीछे

1127
01:23:31,920 --> 01:23:36,080
रट्टा मारना पड़ा तो यह इनका हाल है कि इनसे जब भी आप प्रमाण

1128
01:23:36,080 --> 01:23:40,240
पूछोगे तो पीछे से आएंगे तोय अपने रटे रटा वो लाइने हमको बोल रहे

1129
01:23:40,240 --> 01:23:44,240
थे तो मैंने इनसे एक प्रश्न कर दिया वही मैं

1130
01:23:44,240 --> 01:23:48,280
छोटा था मुझे तब गुरु गुरुदेव का सानिध्य नहीं था बस राम जी के

1131
01:23:48,280 --> 01:23:52,360
प्रति जो अपार श्रद्धा थी वो थी पूर्व

1132
01:23:52,360 --> 01:23:56,560
जन्म के कुछ संस्कार रहे होंगे कि ऐसे माता पिता यहां पर जन्म मिल गया कि बचपन

1133
01:23:56,560 --> 01:24:00,720
से राम और भगवान श्री कृष्ण इन सबके बारे में इनके दर्शन

1134
01:24:00,720 --> 01:24:04,720
हो गए इनकी प्रतिमाएं देख ली वो एक वो था पूर्व जन्म का वो

1135
01:24:04,720 --> 01:24:08,880
प्रारब्ध तो मैं मतलब बचपन में भी कट्टर

1136
01:24:08,880 --> 01:24:13,200
टाइप का रहा कोई मेरे सामने कैसे इनका खंडन करेगा

1137
01:24:13,200 --> 01:24:17,400
तो मेरे पास कुछ नहीं था तो मैंने उनसे कहा जब वो मुझे

1138
01:24:17,400 --> 01:24:21,640
सब समझाने लगे मैंने कहा आप तो बहुत ज्ञानी है बोले हां तो मैंने उनको हिंदी

1139
01:24:21,640 --> 01:24:25,920
मेरी अच्छी थी हिंदी अच्छी थी तो मैंने उनको कहा अपान वायु

1140
01:24:25,920 --> 01:24:30,000
का अर्थ क्या है उस उनकी उस वो जो मुझे बता रहे थे उसमें कहीं पर

1141
01:24:30,000 --> 01:24:33,760
अपान वायु लिखा था अब अपान वायु का अर्थ

1142
01:24:33,760 --> 01:24:37,960
जल्दी जल्दा कोई सामान व्यक्ति बता ही नहीं सकता

1143
01:24:37,960 --> 01:24:42,000
मैंने कहा यदि तुम ज्ञानी हो तो अपान वायु का अर्थ मुझे बताओ क्या

1144
01:24:42,000 --> 01:24:46,800
है तभी तो तुम मानोगे तुम जो इसमें बता रहे हो वही है जो तुम बता रहे हो

1145
01:24:46,800 --> 01:24:50,840
नहीं बता पाए अपान वायु का अर्थ होता है इंग्लिश में फार्ट कहते हैं जो

1146
01:24:50,840 --> 01:24:55,000
गैस वैस पास होती है गैस बन जाती है शरीर उसको वायु कहते

1147
01:24:55,000 --> 01:24:59,160
हैं शुद्ध हिंदी आप सोचिए कितनी अलग टाइप की मैंने उनसे चीज

1148
01:24:59,160 --> 01:25:03,440
पूछी क्योंकि सामान्य चीज तो है नहीं हम लोग सामान्यत उसको कुछ और ही कहते हैं

1149
01:25:03,440 --> 01:25:07,480
तो अपान वायु का अर्थ नहीं था इस और एक बार की बात है मैं

1150
01:25:07,480 --> 01:25:11,920
गया था अपने फिटनेस प्रोग्राम के लिए वहां पर तो वहां पर यह लोग

1151
01:25:11,920 --> 01:25:15,960
अपनी वो लगाए थे दुकाने य वो तो मैं अकेला

1152
01:25:15,960 --> 01:25:20,040
था वहां पर और वहां पर कई लोग आए हुए थे हिंदू हिंदू जो अंदर

1153
01:25:20,040 --> 01:25:24,080
जॉगिंग वगैरह कर रहे थे और जैसे ही मैंने इनको देखा तो मेरा दिमाग थोड़ा अल्टर

1154
01:25:24,080 --> 01:25:28,120
हो जा जाता था तो मैंने तुरंत इनको देखा और मैंने कहा मैं अकेला कैसे

1155
01:25:28,120 --> 01:25:32,360
करूं क्या करूं ये तो आज अगर इन्होंने अपनी 10 किताबें भी सेल कर दी

1156
01:25:32,360 --> 01:25:36,600
तो उनमें से दो को तो आज ये ब्रेन वॉश कर ही देंगे तो मैं क्या करूं

1157
01:25:36,600 --> 01:25:41,480
तो मैंने उनकी बातों को ऐसे पढ़ के चालू ऐसे पढ़ना चालू किया कि लोग भी

1158
01:25:41,480 --> 01:25:45,720
सुने तो मैंने ऐसे चालू किया अरे ये तुमने क्या लिखा

1159
01:25:45,720 --> 01:25:49,040
है इसमें दुर्गा का पति ये है

1160
01:25:49,040 --> 01:25:53,160
मतलब लोग सुने जो पीछे हो और ऐसे ऐसे करके मैंने बोलना चालू किया

1161
01:25:53,160 --> 01:25:57,160
वो बहुत खराब लाइंस है जो इनकी वो बहुत हृदय को दुख दुख

1162
01:25:57,160 --> 01:26:01,160
देने वाली पंक्ति जैसे अभी जो व्यक्ति आया था उसने भी जब उसके पास कोई बात

1163
01:26:01,160 --> 01:26:06,160
नहीं बनी तो वो चुभने वाली बातें बोलने लगा

1164
01:26:06,160 --> 01:26:10,280
तो मैंने यह बातें करना शुरू की तो वहां पर एक दो मातृ शक्तियों को हिट हो गई वो

1165
01:26:10,280 --> 01:26:14,400
लाइन और फिर उन मातृ शक्तियों को हिट हो गई तो पीछे से दो

1166
01:26:14,400 --> 01:26:18,520
तीन लोगों को और हिट हो गई फिर पीछे से दो तीन लोगों को और हिट हो गई ऐसे करके वहां

1167
01:26:18,520 --> 01:26:22,640
पर पूरा जमघट लग गया और 15 मिनट के अंदर उनके वो

1168
01:26:22,640 --> 01:26:26,720
जो ग्रंथ इत्यादि थे उनको धक्का का मार के उन लोगों ने पटक

1169
01:26:26,720 --> 01:26:31,320
दिया यह कर दिया और वहां से उनका जो तंबू कनाथ था वो खड़ गया

1170
01:26:31,320 --> 01:26:35,360
यह हुआ उस समय यह जब मैं छोटा था तो मैं

1171
01:26:35,360 --> 01:26:39,360
अपने सामने यह चीजें बिल्कुल भी वो नहीं ले

1172
01:26:39,360 --> 01:26:43,480
पाता हूं कि कोई हमारे धर्म का हमारे ईश्वर का खंडन कर सके जी

1173
01:26:43,480 --> 01:26:47,520
बक राम कृष्ण का खंडन कर सके बिल्कुल नहीं पीछे

1174
01:26:47,520 --> 01:26:51,520
पड़ जाऊंगा झूटे की हद तक और चोर के घर तक जाएंगे मैं

1175
01:26:51,520 --> 01:26:55,520
तो ख बक ब फैमिली म पेरेंट्स की वजह

1176
01:26:55,520 --> 01:26:59,600
से करना पड़ता है फिर बट जैसे मेरे कजन भी है वो कहते हैं जैसे कोई माता जी

1177
01:26:59,600 --> 01:27:03,600
के उपासक है कोई महादेव जी के वो कहते हमें भी मैसेज करते रहते हैं और

1178
01:27:03,600 --> 01:27:04,100
उनकी

1179
01:27:04,080 --> 01:27:08,680
एक ना मतलब मनमानी कहानी है एक कि परमात्मा

1180
01:27:08,680 --> 01:27:12,720
से सभी जीवात्मा प्रकट हुई फिर उनसे काल प्रकट हुआ उस काल ने सभी

1181
01:27:12,720 --> 01:27:16,720
जीवात्मा को परमात्मा से अलग कर दिया अरे उसम दुर्गा माता को बहुत ही गलत

1182
01:27:16,720 --> 01:27:20,920
तरह से प्रस्तुत किया है उन्होने वो तो चीज आवाज उठाने लायक है

1183
01:27:20,920 --> 01:27:25,040
जैसे कुछ संगठन की शक्ति होगी तो वो भी करेंगे मगर बहुत गलत तरीके

1184
01:27:25,040 --> 01:27:29,720
से प्रस्तुत किया है ही सब चीज खराब लगती है

1185
01:27:29,720 --> 01:27:33,840
आप काकार को मानिए या निराकार को मानिए बट एटलीस्ट जो मान रहे हैं आप

1186
01:27:33,840 --> 01:27:37,960
उन्हें मतलब इस तरह से और शास्त्रीय प्रमाण हमारे पास है आपके पास

1187
01:27:37,960 --> 01:27:42,080
तो प्रमाण भी नहीं है किस बेस पर मतलब वही चीज खराब लगती है कि ये लोग

1188
01:27:42,080 --> 01:27:46,240
अपनी मनमानी स्टोरी के बेस पर लोगों के सेंटीमेंट्स को उनकी भक्ति भावना को हर्ट

1189
01:27:46,240 --> 01:27:50,360
करते हैं एक मिनट ज जितेश जी वापस आए जरा आप

1190
01:27:50,360 --> 01:27:56,360
यहीं पर रहिए जाइए नहीं मैं उनको एक मिनट ले लू उनसे पूछ लू वो क्या लेके आए हैं

1191
01:27:59,200 --> 01:28:03,200
हां जितेश जी वो वीडियो मिल गया आपको मैंने

1192
01:28:03,200 --> 01:28:07,280
आपको वीडियो भेज दिया है और वो वीडियो का लिंक

1193
01:28:07,280 --> 01:28:12,080
आपने यहां पर कमेंट किया है क्या हां हां कर दिया मैं

1194
01:28:12,080 --> 01:28:17,280
एक बार और कर दीजिए जरा मैं एक बार और कर देता

1195
01:28:17,280 --> 01:28:21,520
हूं मैं यह कह रहा था शीमा जी कि

1196
01:28:21,520 --> 01:28:25,760
आप मेरे बस कुछ प्रश्न है ना मैं कोई प्रमाण

1197
01:28:25,760 --> 01:28:29,920
की बात कर रहा ना मैं मैं आपको पहले यह बता देता हूं कि

1198
01:28:29,920 --> 01:28:34,120
मैं अभी किसी भी पद्धति पर अंधविश्वास टाइप से भरोसा

1199
01:28:34,120 --> 01:28:38,280
नहीं कर रहा हूं बस मेरे कुछ प्रश्न है जो मैं जानना देखिए अगर

1200
01:28:38,280 --> 01:28:42,360
आपने आपने हमें वो वीडियो दिया है तो आप पहले मुझे

1201
01:28:42,360 --> 01:28:46,560
बरा भेज दिया मैं मैंने दोबारा ही भेज दिया

1202
01:28:46,560 --> 01:28:50,760
अच्छा भेजा है उसमें क्या

1203
01:28:50,760 --> 01:28:54,840
हेडिंग है उसमें क्या लिखा है हेडिंग क्या है उस वीडियो

1204
01:28:54,840 --> 01:28:58,960
की अब मुझे दोबारा जाके देखना पड़े मैंने लिंक भेज दिया

1205
01:28:58,960 --> 01:29:02,960
आपके अच्छा ठीक है ठीक है अगर हम बाद में बता देंगे कि

1206
01:29:02,960 --> 01:29:07,000
आपने हा आप बताइए आपका एक प्रश्न ले लेते हैं क्योंकि बहुत

1207
01:29:07,000 --> 01:29:11,960
सारे लोग हैं हा बस एक ही

1208
01:29:11,960 --> 01:29:14,440
प्रश्न क्या है

1209
01:29:14,440 --> 01:29:19,120
इसमें इसमें जैसे हां मैं आपको बताता हूं

1210
01:29:19,120 --> 01:29:23,480
इसमें जैसे आप कहते हैं कि भूख होने से

1211
01:29:23,480 --> 01:29:27,560
खाना सिद्ध होता है आप यह बात बोलते हैं ना

1212
01:29:27,560 --> 01:29:31,640
और जैसे आपने बोला कि सत चित आनंद की हमारे अंदर

1213
01:29:31,640 --> 01:29:35,800
तृष्णा है उससे भगवान

1214
01:29:35,800 --> 01:29:40,160
की उससे भगवान स्थापित होते हैं तो उस वीडियो में यही बताया

1215
01:29:40,160 --> 01:29:44,320
गया है कि जो आदमी है वो ना कभी मरना चाहता है ना बूढ़ा होना

1216
01:29:44,320 --> 01:29:48,520
चाहता है ना वो यह चाहता है कि उसको कोई ठीक है मगर क्या उन्होने

1217
01:29:48,520 --> 01:29:52,680
इस शास्त्रों का उन्होने इसम उन्होंने इसमें शास्त्रों का सहारा

1218
01:29:52,680 --> 01:29:57,040
लिया है नहीं शास्त्रों का सहारा नहीं लिया मतलब

1219
01:29:57,040 --> 01:30:01,280
उन्होंने अपने आप बताया उन्होंने शास्त्र का आधार लेकर नहीं बताया है इसमें

1220
01:30:01,280 --> 01:30:05,360
उन्होंने शास्त्र का आधार लेक नहीं बताया ठीक है बस

1221
01:30:05,360 --> 01:30:09,680
हां यही मुझे जानना था हां आपका प्रश्न क्या है एक प्रश्न कर लीजिए

1222
01:30:09,680 --> 01:30:13,880
हां एक ही प्रश्न है जैसे आप कहते

1223
01:30:13,880 --> 01:30:18,080
हैं कि भगवान ने जो

1224
01:30:18,080 --> 01:30:22,120
सृष्टि का निर्माण किया हां वो बस ऐसे ही

1225
01:30:22,120 --> 01:30:26,160
किया हां कि उनका मन हुआ उन्होंने कर

1226
01:30:26,160 --> 01:30:29,680
दिया उनका बिना किसी

1227
01:30:29,680 --> 01:30:34,280
इच्छा के बिना किसी प्रयोजन के इच्छा भी

1228
01:30:34,280 --> 01:30:38,280
नहींन आप प्रयोजन मान लोगे तो वो बाध्य हो जाएंगे मैंने आपके

1229
01:30:38,280 --> 01:30:42,400
वो वीडियो देखे मैं आपके वीडियो काफी दिनों से देता आपको एक उदाहरण

1230
01:30:42,400 --> 01:30:46,400
दे दू जैसे आप जब बात कर रहे हो ना मुझसे तो आप बात

1231
01:30:46,400 --> 01:30:50,480
करते टाम मैंने बकुल मैंने आपके सारे वीडियो

1232
01:30:50,480 --> 01:30:54,720
देखे हैं जी और मैं ये बात कह रहे हैं

1233
01:30:54,720 --> 01:30:58,800
वो बात वहां तक सही है कि हा उनका मन हुआ वो भगवान है हम कहां

1234
01:30:58,800 --> 01:31:02,800
सवाल उठाएंगे भगवान उनका मन हुआ उन्होने कर दिया और

1235
01:31:02,800 --> 01:31:06,800
वो सर्वशक्तिमान है तो उन पर यह कह देना उन्होंने यह क्यों किया वहां तो बात

1236
01:31:06,800 --> 01:31:11,240
ही खत्म हो जाती है फिर तुम भगवान को ही नहीं मान रहे भगवान सर्वशक्तिमान उनका

1237
01:31:11,240 --> 01:31:16,160
जो मन हुआ उन्होंने कर दिया वो जो चाहे वो कर सकते

1238
01:31:16,160 --> 01:31:20,240
बताए हा मेरा प्रश्न ये है मेरा प्रश्न यह है कि जैसे जब

1239
01:31:20,240 --> 01:31:24,600
मोक्ष की बात आती है तो मोक्ष क्या है कि हम जाके

1240
01:31:24,600 --> 01:31:27,880
भगवान को प्राप्त कर

1241
01:31:27,880 --> 01:31:31,960
लेंगे तो वहां पर मेरा प्रश्न यह आता है कि अगर

1242
01:31:31,960 --> 01:31:36,360
भगवान का दोबारा मन हुआ कि मैं फिर से सृष्टि

1243
01:31:36,360 --> 01:31:41,240
बनाऊ तो मैं फिर यही आ गया

1244
01:31:41,240 --> 01:31:45,600
आप थोड़ी ना आए भगवान आया

1245
01:31:45,600 --> 01:31:49,640
ईश्वर आए जैसे अब मैं हू इसको ऐसे

1246
01:31:49,640 --> 01:31:54,040
समझिए कि जब आप कभी फिल्म देखते हैं हा

1247
01:31:54,040 --> 01:31:59,200
तो आप सुखी होते हैं कि दुखी होते हैं अंततोगत्वा

1248
01:31:59,200 --> 01:32:03,520
वो तो कई बार फिल्म पे निर्भर करता है अगर

1249
01:32:03,520 --> 01:32:07,880
दुख करने वा ठीक है फिल्म से आप अटैच हो गए आप रो भी लिए अंत तो गत्वा

1250
01:32:07,880 --> 01:32:12,240
क्या होता है आनंद हां मतलब फिल्म है तो मनोरंजन

1251
01:32:12,240 --> 01:32:16,400
के लिए बिल्कुल सही हां तो इसका मतलब वो जो ब्रह्म है

1252
01:32:16,400 --> 01:32:20,440
वो कभी भी अधीन नहीं होता है वो अगर अपनी माया में

1253
01:32:20,440 --> 01:32:26,000
कल्पित हो रहा है तो वो अधीन हो रहा है क्यों नहीं होता है

1254
01:32:26,000 --> 01:32:30,160
इसका एक बहुत अच्छा वो है उदाहरण कि फिल्म जो होती है

1255
01:32:30,160 --> 01:32:34,520
उससे कभी भी आप बाहर आ सकते हो ये आपको पता होता है

1256
01:32:34,520 --> 01:32:39,000
बिल्कुल सही बिल्कुल आपको पता होता है कि ये नकली है

1257
01:32:39,000 --> 01:32:43,120
ठीक है ठीक है ठीक बकुल इसका मतलब क्या है

1258
01:32:43,120 --> 01:32:47,280
कि आप जब ईश्वर में ईश्वर तोव को प्राप्त कर लिया तो आप थोड़ी

1259
01:32:47,280 --> 01:32:51,760
ना आ रहे हो ईश्वर आ रहा है आपको तो ईश्वर मिल गया सुकून मिल गया आपको

1260
01:32:51,760 --> 01:32:55,920
हम है ना हम पर जैसे

1261
01:32:55,920 --> 01:33:00,120
मैं अब हूं इस दुनिया में अभी भी तो मेरे अर ईश्वर

1262
01:33:00,120 --> 01:33:00,640
का ही अंश

1263
01:33:00,640 --> 01:33:04,840
है ना ईश्वर ही कल्पित हुए हैं वही जीव

1264
01:33:04,840 --> 01:33:08,880
भाव को प्राप्त हो जाते हैं यह जो सच्चाई है यह मनुष्य की

1265
01:33:08,880 --> 01:33:13,000
दृष्टि से नहीं है ये मुक्त की दृष्टि से ब्रह्म की दृष्टि

1266
01:33:13,000 --> 01:33:17,080
से सच्चाई है मनुष्य की दृष्टि से मनुष्य की दृष्टि

1267
01:33:17,080 --> 01:33:21,200
से आप अलग हो ईश्वर अलग है हमारी जानकारी

1268
01:33:21,200 --> 01:33:25,440
बक बिल्कुल सही वो बात बिल्कुल सही है तो वहीं पर मेरा

1269
01:33:25,440 --> 01:33:29,560
वहीं जाके मैं थोड़ा मतलब अब खुद को क्लियर

1270
01:33:29,560 --> 01:33:33,840
नहीं कर पा रहा वहां प वो बताइए क्वेश्चन बताइए जैसे जब

1271
01:33:33,840 --> 01:33:37,920
मैं अब भगवान का जब मन होगा तब भगवान मेरे को बुला लेंगे ठीक है

1272
01:33:37,920 --> 01:33:42,160
कि भाई आ जाओ और हम फिर से भगवान में मिल जाएंगे

1273
01:33:42,160 --> 01:33:46,320
जब उनका मन होगा जब मेरे वैसे कर्म होंगे जब मैं उतनी

1274
01:33:46,320 --> 01:33:50,360
भक्ति करूंगा जब मेरे वैसे कर्म होंगे और जब भगवान की इच्छा होगी तब मैं भगवान

1275
01:33:50,360 --> 01:33:54,440
में जाकर मिल जाऊं ठीक है कह सकते हो भी कह सकते हो

1276
01:33:54,440 --> 01:33:58,600
व्यवहारिक व्यवहारिक रूप से कह सकते हो हम तो सब

1277
01:33:58,600 --> 01:34:02,640
व्यवहारिक ही बातें कर रहे हैं तो व्यवहार के रूप में ही है और जब भी

1278
01:34:02,640 --> 01:34:06,920
हम भगवान श्री कृष्ण या राम जी की बात करते हैं

1279
01:34:06,920 --> 01:34:11,280
तो वह व्यवहारिक बातें ही क्योंकि एक्चुअल में जो सर्वशक्तिमान

1280
01:34:11,280 --> 01:34:15,320
भगवान है वह तो ना कभी दुखी होंगे ना वह किसी से लड़ाई उनको लड़ाई करने की जरूरत

1281
01:34:15,320 --> 01:34:15,820
ही नहीं

1282
01:34:15,640 --> 01:34:19,840
है उनको तो जो चाहे वह कर ही सकते हैं तो सारी बातें व्यवहारिक

1283
01:34:19,840 --> 01:34:24,000
ही हो रही है ना तो मान लो लो

1284
01:34:24,000 --> 01:34:28,320
की मैंने अच्छे कर्म किए मैंने भक्ति भी की भगवान

1285
01:34:28,320 --> 01:34:32,480
की और भगवान की कृपा दृष्टि हुई और उन्होंने मेरे

1286
01:34:32,480 --> 01:34:37,960
को मोक्ष दिया कि मैं दोबारा से भगवान में जाकर विलय हो गया

1287
01:34:37,960 --> 01:34:42,080
ठीक फिर उनका उनकी दोबारा इच्छा हुई और

1288
01:34:42,080 --> 01:34:46,680
दोबारा सृजन किया उ उन्होंने सृष्टि का

1289
01:34:46,680 --> 01:34:50,840
मैं फिर से व्यवहारिक जीवन में यहां आ आप नहीं आए यही दिक्कत

1290
01:34:50,840 --> 01:34:55,040
है यही पर दिक्कत है यहीं पर दिक्कत है

1291
01:34:55,040 --> 01:34:59,200
जो आपका अस्तित्व था वो ब्रह्मवर्त हो गया

1292
01:34:59,200 --> 01:35:03,200
अब आप नहीं आ रहे हो अब वो अब वो उनकी मर्जी है कि

1293
01:35:03,200 --> 01:35:07,520
अपने किस अंश को वो जीव भाव प्राप्त कराए आप थोड़ी ना आ रहे हो

1294
01:35:07,520 --> 01:35:12,000
दोबारा से जो आपका नाम क्या जितेश दोबारा

1295
01:35:12,000 --> 01:35:16,160
से जितेश वाला जो वो है अविद्या से युक्त

1296
01:35:16,160 --> 01:35:20,280
जो चेतना है वही की वही थोड़ी ना आ रही है फिर तो ब्रह्म है दोबारा

1297
01:35:20,280 --> 01:35:24,480
से अपना बना वो जो जितेश का जो वो था वो तो ब्रह्म युक्त गया ना तो ब्रह्म

1298
01:35:24,480 --> 01:35:28,840
में लीन हो गया पर वो तो ब्रह्म की इच्छा ना उन्होंने दोबारा उसी

1299
01:35:28,840 --> 01:35:30,680
अंश को वापस

1300
01:35:30,680 --> 01:35:34,800
निर्माण में दे वापस व्यावहारिक जीवन में डाल दिया भगवान है ना वो कुछ भी कर पहली

1301
01:35:34,800 --> 01:35:38,800
बात वो अंश वो अंश कोई फिक्स थोड़ी ना है हम

1302
01:35:38,800 --> 01:35:42,880
आप जब उस जब समुद्र के पानी में पानी की जो बूंद है

1303
01:35:42,880 --> 01:35:46,960
वो वापस जाकर समुद्र में मिल गई तो आप क्या उससे निकाल सकते हो कि उसी

1304
01:35:46,960 --> 01:35:51,040
बूंद को बाहर भेज दोबारा मैं तो नहीं निकाल सकता पर भगवान तो निकाल

1305
01:35:51,040 --> 01:35:55,080
सकते हैं ना नहीं यही तो बात है परमार्थिक

1306
01:35:55,080 --> 01:35:59,160
धरातल हां मैं बताता हूं इसको बता रहा हूं आपको सुन लिए

1307
01:35:59,160 --> 01:36:03,760
परमार्थिक धरातल पर भगवान का सुनिश्चित होना सीमित होना

1308
01:36:03,760 --> 01:36:07,960
निश्चित होना केवल एक होना जैसे भगवान क्या अपने जैसा दूसरा

1309
01:36:07,960 --> 01:36:12,520
ईश्वर बना सकता है नहीं परमार्थ में परमार्थ

1310
01:36:12,520 --> 01:36:17,640
में दो धरातल है दो पर्सपेक्टिव आपने कहा आप मेरे वीडियो देख के आए हैं नहीं आए

1311
01:36:17,640 --> 01:36:22,120
नहीं आपने दो पर्सपेक्टिव बताए हैं परमार्थ बताया व बता

1312
01:36:22,120 --> 01:36:26,160
देखिए आप मुझे पूरा बोलने दीजिए हां बोलिए परमार्थ में ईश्वर

1313
01:36:26,160 --> 01:36:30,200
के निश्चित होने के कारण हम उसके प्रति अनास्ता वान नहीं हो सकते

1314
01:36:30,200 --> 01:36:34,720
हैं क्यों नहीं हो सकते हैं क्योंकि हमें परमार्थ की जानकारी

1315
01:36:34,720 --> 01:36:38,840
ईश्वर को ईश्वर मानने के बाद मिलती है जब हम

1316
01:36:38,840 --> 01:36:43,120
व्यवहार में किसी को ईश्वर मान लेते हैं तब हमें पता चलता है कि

1317
01:36:43,120 --> 01:36:46,160
एक दुनिया और है परमार्थिक दुनिया

1318
01:36:46,160 --> 01:36:50,240
तो अगर हमने परमार्थिक दुनिया की किसी गतिविधि के कारण ईश्वर को

1319
01:36:50,240 --> 01:36:54,400
नकार दिया फॉर एग्जांपल कि हम ईश्वर को नहीं मानते फिर आपसे पूछा

1320
01:36:54,400 --> 01:36:58,480
जाएगा आपने ईश्वर को क्यों नकारा तो आप कहोगे क्योंकि व परमार्थिक धरातल

1321
01:36:58,480 --> 01:37:02,600
पर बाध्य है व्यवहारिक में नहीं है परमार्थ में बाध्य है तो फिर प्रश्न ये

1322
01:37:02,600 --> 01:37:06,640
बनेगा कि परमार्थ है यह सिद्ध कहां से हो रहा है जब ईश्वर ईश्वर

1323
01:37:06,640 --> 01:37:11,560
ही नहीं है तो उसके द्वारा बताई जाने वाली दुनिया कहां से सिद्ध हुई

1324
01:37:11,560 --> 01:37:16,320
बिल्कुल सही है समझ रहे हैं ना तो यह ठीक इस प्रकार से है

1325
01:37:16,320 --> 01:37:19,360
जैसे कोई व्यक्ति यह नहीं कह सकता कि

1326
01:37:19,360 --> 01:37:23,520
मैं किसी की आवाज देने से जाग गया क्यों क्योंकि

1327
01:37:23,520 --> 01:37:27,640
यदि वो सो रहा है तो उसका सुनना सिद्ध नहीं होता और अगर वह

1328
01:37:27,640 --> 01:37:28,480
सुन रहा है

1329
01:37:28,480 --> 01:37:32,520
तो उसका सोना सिद्ध नहीं होता तो यदि कोई व्यक्ति य

1330
01:37:32,520 --> 01:37:36,920
यही पे मेरा एक सवाल है य एक मिनट यदि कोई

1331
01:37:36,920 --> 01:37:41,040
यदि कोई परमार्थ को मानता है कि परमार्थ है तो

1332
01:37:41,040 --> 01:37:45,160
उसका ईश्वर को ना मानना सिद्ध नहीं होता और यदि कोई ईश्वर को

1333
01:37:45,160 --> 01:37:49,480
नहीं मानता है तो उसका परमार्थ परमार्थ को मानना सिद्ध नहीं होता

1334
01:37:49,480 --> 01:37:53,600
तो परमार्थ में ईश्वर ईश्वर की जो ईश्वर है

1335
01:37:53,600 --> 01:37:58,080
व्यवहार का विषय है ही नहीं परमार्थिक वो केवल प्राप्ति का विषय है तो परमार्थ

1336
01:37:58,080 --> 01:38:02,160
में वो ये नहीं कर सकता वो माया से ग्रसित होता है वो ऐसा करता है वैसा करता है

1337
01:38:02,160 --> 01:38:06,240
कुछ भी करता हो उसके आधार पर हम उसे नकार नहीं सकते यहां

1338
01:38:06,240 --> 01:38:10,600
के आधार पर किसी को ईश्वर ईश्वर को ईश्वर माना जा सकता है तो

1339
01:38:10,600 --> 01:38:15,240
मनुष्य ईश्वर उसी को मानेगा जो व्यवहार में कुछ भी कर सकता हो

1340
01:38:15,240 --> 01:38:19,280
कबीर पंथ के द्वारा प्रतिपादित होने वाला जो ईश्वर है वो व्यवहार में बाधित

1341
01:38:19,280 --> 01:38:23,600
है वो अपनी देह का नाश नहीं कर सकता वो अपने जैसा

1342
01:38:23,600 --> 01:38:27,680
दूसरा अपने जैसा दूसरा ईश्वर नहीं बना सकता

1343
01:38:27,680 --> 01:38:31,680
तोर बा है वहां पे लोगों की समझ

1344
01:38:31,680 --> 01:38:36,120
कम है या तो भगवान मान ही नहीं रहे जब किसी एक्स

1345
01:38:36,120 --> 01:38:40,440
वाई जड किसी को भी आपने भगवान मान लिया तो वहां पर सर्वशक्तिमान

1346
01:38:40,440 --> 01:38:43,520
तो आपको तो पहले क्लियर करना चाहिए था कि आप जो

1347
01:38:43,520 --> 01:38:47,600
है संत रामपाल जी के फॉलोअर नहीं है हम आपको भेजते ही नहीं वापस प्रमाण लाने

1348
01:38:47,600 --> 01:38:51,840
के लिए कोई मैं मैं वो बात

1349
01:38:51,840 --> 01:38:55,960
देखिए एक एक आपने जो भी तर्क दिया कि सोना सिद्ध नहीं होता

1350
01:38:55,960 --> 01:39:00,160
कोई भी आदमी सो रहा है जो आप तर्क दे रहे उस हिसाब

1351
01:39:00,160 --> 01:39:04,680
से कोई आदमी सोता ही नहीं है कभी क्योंकि

1352
01:39:04,680 --> 01:39:08,800
सोते हुए आदमी को कोई कितना ही गहरा सो रहा है उसको आवाज देक

1353
01:39:08,800 --> 01:39:12,960
तो जगा ही जा सकता है पर इससे आप य क आपको बताता

1354
01:39:12,960 --> 01:39:16,960
हूं मैं आपको बताता हूं शब्द में एक अचिंत

1355
01:39:16,960 --> 01:39:21,360
शक्ति होती है जिसको डिफाइन नहीं किया जा सकता है अनिर्वचनीय शक्ति

1356
01:39:21,360 --> 01:39:25,560
तो यहां पर तो हमें तब भी मालूम है कि भैया हम जगे तो इसी की वजह

1357
01:39:25,560 --> 01:39:29,720
से हैं शब्द की वजह से ही जगे हैं मगर हम सिद्ध नहीं कर सकते

1358
01:39:29,720 --> 01:39:33,760
मगर वहां पर तो परमार्थ का बिल्कुल भी अस्तित्व नहीं है बिना भगवान

1359
01:39:33,760 --> 01:39:37,880
को स्वीकार स्वीकार अगर एक भौतिकवादी

1360
01:39:37,880 --> 01:39:42,320
है नास्तिक है सोचो जो भगवान को नहीं मानता क्या वो स्वर्ग को मानता है

1361
01:39:42,320 --> 01:39:46,640
क्या वो बैकुंठ को मानता मानता वो तो कि नहीं मानता जब उसकी यही

1362
01:39:46,640 --> 01:39:50,640
यात्रा खत्म हो गई ईश्वर को मानने की तो परलोक मोक्ष

1363
01:39:50,640 --> 01:39:54,720
ये सब खत्म बिल्कुल वो अपने वो अपने कुल मिला

1364
01:39:54,720 --> 01:39:58,600
कर के ईश्वर वही है जो मनुष्य दृष्टि से सोचा जा

1365
01:39:58,600 --> 01:40:02,960
सकने वाला कोई भी कार्य कर सकता है इसीलिए भगवान

1366
01:40:02,960 --> 01:40:07,000
राम के रूप में जन्म भी लेते हैं कृष्ण के रूप में अपनी देह का नाश भी

1367
01:40:07,000 --> 01:40:11,200
करके दिखाते हैं और इसके बाद वो विभिन्न ऐसी लीलाएं करके

1368
01:40:11,200 --> 01:40:15,240
बता देते हैं कॉलर पकड़ पकड़ के हिला हिला के बताते हैं व्यक्ति को

1369
01:40:15,240 --> 01:40:19,480
कि मैं ईश्वर हूं और मैं कुछ भी कर सकता हूं बिल्कुल

1370
01:40:19,480 --> 01:40:23,640
भगवान है वो कुछ भी कर सकते वो सर्वशक्तिमान

1371
01:40:23,640 --> 01:40:27,800
तो हो ही नहीं सकता कि वो यह क्यों कर रहे हैं या ये नहीं कर सते वहा वो बात

1372
01:40:27,800 --> 01:40:32,080
बिल्कुल सत्य है उसमें कोई दोराय है ही नहीं जो वहां

1373
01:40:32,080 --> 01:40:36,680
पर जो किसी भी कारण भगवान को बाधित कर रहा है

1374
01:40:36,680 --> 01:40:40,680
अगर कोई ये कहे कि हमारा जो कबीर है वो भी परमार्थिक धरातल पर बाद नहीं यह

1375
01:40:40,680 --> 01:40:44,840
लोग खुद कहते परमात्मा सीधे वहां से उठके य आया

1376
01:40:44,840 --> 01:40:48,840
है ना तो जैसे ही आपने पार मर्थ ईश्वर के रूप को व्यवहारिक

1377
01:40:48,840 --> 01:40:53,360
कर दिया जैसे कन कहता है कि कृष्ण जी सीधे वहा से यहा आ गए

1378
01:40:53,360 --> 01:40:57,440
अवतार नहीं लिया सीधे आ गए तो जैसे ही आपने परमार्थ को व्यवहार

1379
01:40:57,440 --> 01:41:01,480
में आ सकने वाले रूप में बना दिया वैसे ही आप वादित कर देंगे वो अपनी दे

1380
01:41:01,480 --> 01:41:05,840
का नाश नहीं कर पाएगा कर देगा तो वो ईश्वर का अंतिम रूप नहीं कहलाएगा

1381
01:41:05,840 --> 01:41:09,920
बिल्कुल ये बात ये बात इसलिए ये

1382
01:41:09,920 --> 01:41:13,800
सभी जो ईश्वर है दूसरे जो अलग-अलग विचारधाराओं से प्रतिपादित

1383
01:41:13,800 --> 01:41:18,400
हो रहे हैं ये बाधित हो जाते हैं और जो भी शंकराचार्य जी का ज्ञान है

1384
01:41:18,400 --> 01:41:22,840
वो इसलिए नहीं है कि हम ईश्वर के जो है इस रूप को नहीं मानते

1385
01:41:22,840 --> 01:41:27,160
उनको ईश्वर की सर्वशक्ति मत्ता की रक्षा करनी थी इसलिए

1386
01:41:27,160 --> 01:41:31,320
उन्होंने वह सारा ज्ञान विज्ञान जो लुप्त हो रहा था होने

1387
01:41:31,320 --> 01:41:37,320
के कगार प था उसको पुनर

1388
01:41:39,560 --> 01:41:43,560
उद्भाव से भी हमें वार्ता करनी है तो आप फिर किसी दिन

1389
01:41:43,560 --> 01:41:47,960
आ आइए आप फम भगा आपसे बात करके अच्छा लगा आप मुझे

1390
01:41:47,960 --> 01:41:52,040
बता दीजिए कि इस दिन आप हमसे बात कर सकते हैं मैं आपसे थोड़ी

1391
01:41:52,040 --> 01:41:56,160
सी बातचीत करना चाहता हूं बस मेरे ख्याल से आप जो है

1392
01:41:56,160 --> 01:42:00,280
मेरे ख्याल से आप जिज्ञासु है आप हमारे वो

1393
01:42:00,280 --> 01:42:04,520
नहीं है प्रतिद्वंदी आप जिज्ञास किसी के नहीं है बक हा

1394
01:42:04,520 --> 01:42:08,520
तो आप हमारी क्लासेस लगती है हर शनिवार रात 9 बजे

1395
01:42:08,520 --> 01:42:12,560
उसमें आइए आप जब इस तरह से वार्ता होनी है तो वहां के लिए पर्याप्त

1396
01:42:12,560 --> 01:42:16,680
है वो आपको सारी चीजें समझ में आ जाएंगी आपके जितने भी क्वेश्चन होंगे अगर हमें

1397
01:42:16,680 --> 01:42:20,680
भी नहीं आता होगा आचार्य श्री से गुरुदेव से ला ला के आपको

1398
01:42:20,680 --> 01:42:24,680
बताएंगे बिल्कुल जो अकाट्य सार्व सिद्धांत होंगे वो आपके सामने

1399
01:42:24,680 --> 01:42:30,680
रख दिए जाए उस क्लास में आने का तरीका

1400
01:42:31,240 --> 01:42:35,440
74836 इस आप कर इस इस आपको

1401
01:42:35,440 --> 01:42:39,440
फॉर्म मिल जाएगा ट करने पर ठीक है तो मेरा एक सवाल

1402
01:42:39,440 --> 01:42:43,600
है उस कक्षा में भी ऐसे मतलब सवाल जवाब होंगे या वो बस शिक्षा

1403
01:42:43,600 --> 01:42:47,960
देंगे और हमको सुनना है नहीं नहीं नहीं सवाल जवाब भी होंगे सवाल जवाब भी होंगे

1404
01:42:47,960 --> 01:42:51,960
आपकी शंका वो उनका निदान किया जाएगा ठीक है ठीक

1405
01:42:51,960 --> 01:42:56,160
जय श्री राम जय श्री जी

1406
01:42:56,160 --> 01:43:00,520
वंदना जी जी रोचक लग रहा है

1407
01:43:00,520 --> 01:43:04,720
आपको जी बिल्कुल बहुत कुछ जानने को मिलता है सीखने को मिलता है अच्छा

1408
01:43:04,720 --> 01:43:08,840
लगता है यही चाहिए था कि कोई हो जो मतलब ये चीजें क्लियर

1409
01:43:08,840 --> 01:43:12,880
करें तो बहुत लोगों को भ्रमित किया जा रहा है जी जी की कृपा

1410
01:43:12,880 --> 01:43:16,920
है कि जैसे आप जैसे लोगों से ज्ञान मिलता है महाराज जी से ज्ञान

1411
01:43:16,920 --> 01:43:21,000
मि गुरुदेव की कृपा है आपके जो गुरुदेव हैं वो बहुत परम पूज्य

1412
01:43:21,000 --> 01:43:25,240
हैं और बहुत अच्छे हैं और और उनका उनका एक वो है

1413
01:43:25,240 --> 01:43:30,040
कि आज हम और आप पीछे हमारे गुरुदेव का चित्र लगा है और

1414
01:43:30,040 --> 01:43:35,000
आज उन्हीं की कृपा है कि हम और आप यहां एक जगह पर

1415
01:43:35,000 --> 01:43:39,080
है तो ये क्वेश्चन एक मेरा रहेगा अगर आप मेरे साइड से पूछ

1416
01:43:39,080 --> 01:43:43,120
सके उन कबीर पंथ से कि आपका जो ज्ञान जैसे आप बोल रहे

1417
01:43:43,120 --> 01:43:46,320
हो कबीर जी से आया है तो इन्होने इन्होने

1418
01:43:46,320 --> 01:43:50,320
एक बात कही है कि उन्होंने खंडन किया है मगर वो

1419
01:43:50,320 --> 01:43:54,320
शास्त्रोक्त खंडन नहीं है बाद का

1420
01:43:54,320 --> 01:43:58,560
शास्त्रोक्त खंडन नहीं है अगर मैं ही नास्तिक बनकर उनके आसपास पहुंच

1421
01:43:58,560 --> 01:44:02,600
जाऊंगा उसी बात में दोबारा अय उस वीडियो को देखकर कोई आ जाएगा

1422
01:44:02,600 --> 01:44:07,560
और मैं नास्तिक बन जाऊंगा य मुझे चुप नहीं करा पाएंगे निरुत्तर नहीं कर पाएंगे

1423
01:44:07,560 --> 01:44:11,640
क्योंकि शास्त्रोक्त खंडन नहीं है उसमें भी कभी कोई

1424
01:44:11,640 --> 01:44:16,120
आएगा तो हम बात करेंगे खैर अभी हम लेते हैं जिनको भाई साहब को हमने भेजा

1425
01:44:16,120 --> 01:44:20,640
था एड टू स्टेज

1426
01:44:20,640 --> 01:44:24,400
जी आकाश जी

1427
01:44:24,400 --> 01:44:30,400
जी वेदों में प्रमाण कहां है कबीर साहब

1428
01:44:30,640 --> 01:44:34,760
भगवान देखिए भाई जी पहले आपको एक बात

1429
01:44:34,760 --> 01:44:39,480
सु आपकी बात हमने सुनी बहन जी की बात सुनी

1430
01:44:39,480 --> 01:44:45,480
परमात्मा का जो विषय है

1431
01:44:45,640 --> 01:44:49,880
आज आज बहुत विषय गंभीर हो गया है क्यों साब

1432
01:44:49,880 --> 01:44:54,080
देखिए हमारे हम किसी और दिन आपसे चर्चा रख लेंगे एक घंटा 44 मिनट अभी

1433
01:44:54,080 --> 01:44:58,160
हो चुका है हमें भी घर जाना है भोजन भोजन प्राप्त करना है भगवान

1434
01:44:58,160 --> 01:45:02,520
के प्रसाद के रूप में भोजन करते हैं तो वो सब हमें करना है आप मुझे

1435
01:45:02,520 --> 01:45:07,600
बता दीजिए अभी आपके पास कबीर भगवान है संबंध में प्रमाण है वेदों

1436
01:45:07,600 --> 01:45:11,760
का देखिए कबीर साहब के कई एक प्रमाण है

1437
01:45:11,760 --> 01:45:16,520
एक नहीं है कई एक प्रमाण है और हम आपको बता रहे हैं

1438
01:45:16,520 --> 01:45:20,760
आपको देखिए पहला प्रमाण अब चकि आप यह

1439
01:45:20,760 --> 01:45:25,240
कह रहे हो कि वो कभी ही कबीर को

1440
01:45:25,240 --> 01:45:29,400
संस्कृत में कबीर देव के नाम से कहा गया है कुरान

1441
01:45:29,400 --> 01:45:33,560
कबीर देव नहीं कहा गया कवि कहा गया है संधि होने के कारण रा

1442
01:45:33,560 --> 01:45:37,640
आ रहा है क्या उस उस ग्रंथ का भाष्य आप मुझे

1443
01:45:37,640 --> 01:45:39,400
दिखा दो जहां कवि का अर्थ कबीर

1444
01:45:39,400 --> 01:45:43,840
लिखा हो आप मुझे वो ग्रंथ दिखा दो आपके पास है

1445
01:45:43,840 --> 01:45:47,880
मेरी एक बात समझिए देखो किसी चीज की महिमा

1446
01:45:47,880 --> 01:45:52,040
उसके गुणों द्वारा उसकी पहचान यही तो हम लोग जानते साब

1447
01:45:52,040 --> 01:45:56,040
आप कहते के गुणों की महिमा है कबीर भगवान है आप कहते हैं वेदों

1448
01:45:56,040 --> 01:46:00,280
में प्रमाण है कबीर साहब भगवान है आप यह कहते हैं आप मुझे वेदों में प्रमाण

1449
01:46:00,280 --> 01:46:04,600
दिखाइए हां तो वही तो बता रहा हूं आप ये आप आज

1450
01:46:04,600 --> 01:46:09,080
से नारे को चेंज कर लीजिए कि भैया गुण और जो महिमा है वो प्रमाण

1451
01:46:09,080 --> 01:46:13,160
है कबीर साहब भगवान है हमें कोई दिक्कत नहीं खूब कहिए आप वेदों में प्रमाण

1452
01:46:13,160 --> 01:46:17,560
दिखाइए कहां है कबीर साहब भगवान अच्छा आप वो निकालिए

1453
01:46:17,560 --> 01:46:22,040
कांड अनुवाद नंबर एक मंत्र नंबर सात हालांकि हम वेदों के विशेषज्ञ

1454
01:46:22,040 --> 01:46:26,360
नहीं है लेकिन जो परमात्मा जितनी समझ दी है

1455
01:46:26,360 --> 01:46:31,280
मालिक की दया से कौन सा कौन सा वेद है

1456
01:46:31,280 --> 01:46:37,200
आप ये निकालिए अथर

1457
01:46:37,200 --> 01:46:42,000
वेद अवेद कौन सा अनवा

1458
01:46:42,000 --> 01:46:47,680
नंबर एक मंत्र नंबर सात कांड नंबर कौन

1459
01:46:47,680 --> 01:46:52,200
सा मंत्र नंबर सात अनुवा नंबर एक

1460
01:46:52,200 --> 01:46:58,080
अनुवाद नंबर

1461
01:46:58,080 --> 01:47:02,480
एक निकालिए आज देखिए आपको

1462
01:47:02,480 --> 01:47:06,680
यही तो जब चर्चा होगी तभी तो सबको

1463
01:47:06,680 --> 01:47:10,920
समझ में आएगा जो लोग नहीं समझ रहे हैं अनुवाद नंबर

1464
01:47:10,920 --> 01:47:15,280
एक और मंत्र नंबर कौन सा बताया सात हां

1465
01:47:15,280 --> 01:47:19,680
मंत्र नंबर सात है कांड नंबर चार

1466
01:47:19,680 --> 01:47:23,840
इसमें पढ़िए इसमें कांड चार है रुक

1467
01:47:23,840 --> 01:47:29,160
जाइए कांड चार है ना हां जी हां

1468
01:47:29,160 --> 01:47:33,560
जी कांड चार और

1469
01:47:33,560 --> 01:47:37,640
सूक्त नंबर नहीं पता सूक्त नंबर

1470
01:47:37,640 --> 01:47:42,040
सूक्त सूक्त सूक्त पता

1471
01:47:42,040 --> 01:47:46,200
है

1472
01:47:46,200 --> 01:47:52,200
हम एक मिनट

1473
01:48:12,240 --> 01:48:16,800
इसमें कहां लिखा है अनुवाद नंबर एक कांड नंबर चार

1474
01:48:16,800 --> 01:48:20,960
मंत्र नंबर सात हा इसमें क्या लिखा है क्या

1475
01:48:20,960 --> 01:48:25,240
लिखा है आप ही बताइए पहले इसमें लिखा है हे निद्रा

1476
01:48:25,240 --> 01:48:29,280
नींद के उपाय से सब जनों को सुला दे अन्य जनों को सूर्य उदय होने

1477
01:48:29,280 --> 01:48:33,360
तक सुला दे मैं शूर पुरुष के समान नाश रहित और क्षय रहित

1478
01:48:33,360 --> 01:48:37,400
होता हुआ जागता रहू हा तो बताइए

1479
01:48:37,400 --> 01:48:41,760
फिर क्या लिखा है संस्कृत यो अथर वाणम पितम

1480
01:48:41,760 --> 01:48:45,840
देव बंधु बृहस्पति नम साचा

1481
01:48:45,840 --> 01:48:50,080
गच्छा आप मुझे सक्त नंबर बताइए लगता है मैं आपकी बताई

1482
01:48:50,080 --> 01:48:55,040
हुई जगह पर नहीं हूं

1483
01:48:55,040 --> 01:48:59,720
एक चलो हम दूसरा सूक्त वाला ही हम निकाल ले

1484
01:48:59,720 --> 01:49:03,800
अब इसमें मोबाइल में तो हमारे काफी पड़े हुए है

1485
01:49:03,800 --> 01:49:09,800
अब हम ऐसे बता रहे दूसरा

1486
01:49:11,480 --> 01:49:15,200
मत्र यह निकाल

1487
01:49:15,200 --> 01:49:21,200
लीज इसम स नंबर

1488
01:49:31,480 --> 01:49:35,560
फिर आपको ऋग्वेद मंडल नंबर न

1489
01:49:35,560 --> 01:49:41,560
सूत्र नंबर 96 निकालिए आप और मंत्र नंबर 18

1490
01:49:41,720 --> 01:49:47,720
ऋग्वेद मंडल न सूक्त नंबर 96 मंत्र 18

1491
01:49:56,360 --> 01:50:01,200
देखिए परमात्मा कितनी सुंदर महिमा बताई गई है

1492
01:50:01,200 --> 01:50:06,200
वह परमात्मा कबीर नहीं है व परमात्मा शिव है दुर्गा

1493
01:50:06,200 --> 01:50:10,920
है व आप देखिए

1494
01:50:10,920 --> 01:50:15,880
तो और उस क्या और भी हम प्रमाण देंगे मंडल नंबर

1495
01:50:15,880 --> 01:50:19,960
मंडल नंबर न देखिए भाई साहब ऐसा है मैं

1496
01:50:19,960 --> 01:50:24,160
बिल्कुल नहीं चाहता हूं कि यहां पर कोई ऐसा कं एक्स्ट्रा जाए

1497
01:50:24,160 --> 01:50:28,640
जिससे कि लोगों में कोई भ्रांति फैले इसलिए विषय पर रहिए एक्स्ट्रा

1498
01:50:28,640 --> 01:50:32,920
बात ना बोलिए ठीक है हम यहां आपका प्रचार करने

1499
01:50:32,920 --> 01:50:37,160
नहीं बैठे हैं जो आप जितनी देर फ्री होंगे तो यहां देखिए कितनी अच्छी महिमा है य वो है

1500
01:50:37,160 --> 01:50:42,120
हमें नहीं जानना है आपने प्रमाण बताया हम प्रमाण देख रहे हैं

1501
01:50:42,120 --> 01:50:46,560
जी मंडल नंबर

1502
01:50:46,560 --> 01:50:52,560
न और सक्त नंबर सक्त नंबर

1503
01:51:10,320 --> 01:51:13,680
अभी उन्होंने भी तो यही खुलवाया

1504
01:51:13,680 --> 01:51:17,960
था अब तो मुझे धीरे धीरे र जाएगा वेदों में कहां क प्रमाण है

1505
01:51:17,960 --> 01:51:22,720
कबीर भगवान नहीं है

1506
01:51:22,720 --> 01:51:27,120
वो तो होही जाएगा वो तो जो सच है वो तो

1507
01:51:27,120 --> 01:51:32,680
प्रकाश होना ही होना है मंत्र नंबर

1508
01:51:32,680 --> 01:51:36,840
18 चाहे विरोध से हो चाहे साथ से हो बिल्कुल सही

1509
01:51:36,840 --> 01:51:41,000
कह रहे हैं इसी प्रकार से प्रकाश हुआ है आपने ज जहां जहां क ब्रह्मा विष्णु महेश बमा

1510
01:51:41,000 --> 01:51:45,400
विष्णु महेश इसी प्रकार उनका प्रकाश हुआ है

1511
01:51:45,400 --> 01:51:49,920
है ना जैसे आपने विरोध से किया

1512
01:51:49,920 --> 01:51:54,120
विरोध तो सत्य का हमेशा में विरोध होता है लेन

1513
01:51:54,120 --> 01:51:59,280
वही तो किया वही रामपाल जी ने किया है ना सत्य का विरोध

1514
01:51:59,280 --> 01:52:03,960
हा तो 18 नंबर पर आ गए

1515
01:52:03,960 --> 01:52:08,440
हम इसमें क्या लिखा

1516
01:52:08,440 --> 01:52:12,760
है इसमें लिखा है ऋषि

1517
01:52:12,760 --> 01:52:18,320
मनहा ऋषियों के समान मननशील ऋषि

1518
01:52:18,320 --> 01:52:22,640
कृत ठीक है ऋषियों

1519
01:52:22,640 --> 01:52:27,880
के समान कर्म करने वाला स्वरसा स्वयं प्रकाशी

1520
01:52:27,880 --> 01:52:32,400
सहस्त्र नीत सहस्त्र स्तुति हों वाला कवि नाम पदवी

1521
01:52:32,400 --> 01:52:36,920
कवियों का पद धारण करने वाला कवियों का पद धारण

1522
01:52:36,920 --> 01:52:41,080
करनें की आचरण करने

1523
01:52:41,080 --> 01:52:45,360
वाला कवियों की तरह आचरण करने वाला तो इसका मतलब

1524
01:52:45,360 --> 01:52:50,160
वेदों में यह नहीं लिखा है कि कबीर भगवान है कवियों की तरह आचरण करने वाला भगवान

1525
01:52:50,160 --> 01:52:54,280
है और अपना मल एक मिनट एक मिनट एक

1526
01:52:54,280 --> 01:52:58,400
मिनट जो सोम है वह महिष

1527
01:52:58,400 --> 01:53:02,920
बड़ा महान है सोम यह सोम तृतीय

1528
01:53:02,920 --> 01:53:07,200
धाम शासन तीसरे धाम स्वर्ग लोक में रहने वाले

1529
01:53:07,200 --> 01:53:11,200
विराजम तेजस्वी इंद्र को स्तुति हों से प्रसन्न

1530
01:53:11,200 --> 01:53:15,440
होकर अनु राजति और भी अधिक प्रकाशित करता है

1531
01:53:15,440 --> 01:53:19,480
इसमें कहां है कबीर भगवान देखो

1532
01:53:19,480 --> 01:53:23,560
आप थोड़ा समझिए कि भाई साहब

1533
01:53:23,560 --> 01:53:28,040
आप ये कहना बंद करिए वेदों में प्रमाण है आप यह कहना चालू करिए

1534
01:53:28,040 --> 01:53:32,320
समझिए कबीर भगवान है आप यह कहिए वेदों में प्रमाण

1535
01:53:32,320 --> 01:53:36,320
मत कहिए वेदों में प्रमाण दिखाइए कबीर भगवान है

1536
01:53:36,320 --> 01:53:40,400
कबीर दिखाइए तरीके से कौन आचरण करता है वो कौन

1537
01:53:40,400 --> 01:53:44,720
है परमात्मा कवियों की तरह जो आचरण करता है और जो तृतीय

1538
01:53:44,720 --> 01:53:48,880
धाम यानी की वेदों में यह नहीं लिखा है कि कबीर भगवान

1539
01:53:48,880 --> 01:53:53,360
है कवियों की तरह आचरण करने वाला भगवान है

1540
01:53:53,360 --> 01:53:57,520
यही यही तो मैं आपसे पूछ रहा हूं कवियों की तरह आचरण

1541
01:53:57,520 --> 01:54:01,840
करने वाला भगवान है कबीर भगवान नहीं है कवियों की तरह आचरण करने वाला भगवान

1542
01:54:01,840 --> 01:54:05,920
है अब वो बात और है कि आपके अनुसार कवियों की तरह आचरण करने

1543
01:54:05,920 --> 01:54:09,960
वाले केवल कबीर है कवियों की तरह वो आचरण करता है अब नाम के

1544
01:54:09,960 --> 01:54:15,960
लिए हम आपको बता रहे हैं नाम बताइए हा

1545
01:54:26,240 --> 01:54:32,240
करी वाला आपको

1546
01:55:08,640 --> 01:55:11,520
पंडित जी जय श्री

1547
01:55:11,520 --> 01:55:15,800
राम जय श्री राम हर हर महादेव ये

1548
01:55:15,800 --> 01:55:21,800
लिए मैं संस्कृत शब्द कोष लेकर खोल के बैठा हूं कवि का मीनिंग बताने

1549
01:55:27,400 --> 01:55:31,640
भाही भाही जो जो दे रहे हैं सामवेद और ये अपना

1550
01:55:31,640 --> 01:55:35,680
ऋग्वेद मुझे ऐसा लग रहा है पहले में क्या होता था पहले मैं

1551
01:55:35,680 --> 01:55:39,920
कबीर मतलब एक जो वो मेले में वीडियो बनाया था केवल केवल

1552
01:55:39,920 --> 01:55:43,920
वही बना के रह गया था मेरा उसके बाद फिर मैंने कभी य ध्यान नहीं

1553
01:55:43,920 --> 01:55:48,040
दिया कि मेरे को इनको शास्त्रों से निकाल निकाल के देना है मगर होता क्या था

1554
01:55:48,040 --> 01:55:52,360
कि उस वीडियो के कारण मेरे में वो मैंने बताया था ना रट के

1555
01:55:52,360 --> 01:55:56,400
वह पैराग्राफ डले रहते थे तो जब मैंने इनका जो अभी यह कुछ दिनों

1556
01:55:56,400 --> 01:56:00,640
पहले मैंने जो छह एपिसोड में जो पीडीएफ शेयर की है ना कि वेदों

1557
01:56:00,640 --> 01:56:04,640
में प्रमाण नहीं जब मैं ये लिखने बैठा तो मैंने कहा पूर्व पक्ष के रूप में

1558
01:56:04,640 --> 01:56:08,640
इनका मुझे प्राप्त तो हो कि ये कहां-कहां से कहते हैं पूर्व पक्ष के

1559
01:56:08,640 --> 01:56:12,840
रूप में तो मैंने कहा कि उसी वीडियो के जाकर के देखना पड़ेगा मतलब

1560
01:56:12,840 --> 01:56:16,960
मुझे रटा हुआ नहीं था कि यह लोग कौन-कौन से वहां से निकालते हैं कि कभी कबीर

1561
01:56:16,960 --> 01:56:20,960
भगवान है मगर अभी क्या हो रहा है इतनी मेहनत कर दी आपने

1562
01:56:20,960 --> 01:56:25,200
इतनी मेहनत कर दी एक ही मैं तो बस मेरा एक ही प्रश्न है कौन सा ऐसा व्याकरण

1563
01:56:25,200 --> 01:56:29,280
का सूत्र है जो बताता है बिना संध विच्छेद किए कि कवि

1564
01:56:29,280 --> 01:56:33,440
इक्वल टू कबीर क बीर मुझे बस य बता

1565
01:56:33,440 --> 01:56:37,480
दे ये व्याकरण पढ़ना चाहता हूं मैं भी कौन सा अध्याय का सूत्र है पाणिनी

1566
01:56:37,480 --> 01:56:42,280
का सूत्र है कौन सा सूत्र है बस मैं य जानना चाहता हूं

1567
01:56:42,280 --> 01:56:42,780
बताइए

1568
01:56:42,720 --> 01:56:47,040
भैया कबीर क है आप अभी अभी आप अभी

1569
01:56:47,040 --> 01:56:52,280
हमें प्रमाण देने वाले थे ना कबीर का हा

1570
01:56:52,280 --> 01:56:56,600
वे अध्याय 29 मंत्र नंबर 25 अब वो यही है ना

1571
01:56:56,600 --> 01:57:01,120
कि ऐसा है कि जो देखिए भाई साहब कोई

1572
01:57:01,120 --> 01:57:05,560
आप मेरे से खामा का मेहनत करवा रहे हो अगर जैसे पिछली एक मिनट

1573
01:57:05,560 --> 01:57:09,640
पिछली कुछ डिबेट में ऐसा हुआ कि मैंने कहा कि खामा का अभी प्रमाण पर नहीं जाते

1574
01:57:09,640 --> 01:57:13,720
हैं आप अगर वही कबीर वो कबीर शब्द दिखा रहे हैं कवि शब्द

1575
01:57:13,720 --> 01:57:17,840
दिखा रहे हैं तो मैं मेहनत ना करू ऊपर चढ़ के ग्रंथ ना उतारूं वरना

1576
01:57:17,840 --> 01:57:21,920
आप कहे तो फिर उतारूं अगर कबीर लिखा है तो उतारूं अगर कवि लिखा

1577
01:57:21,920 --> 01:57:26,040
है तो उसको उतारे बिना बात कर सकते हैं बताइए कबीर

1578
01:57:26,040 --> 01:57:30,360
क्या लिखा क कबीर लिखा है ना

1579
01:57:30,360 --> 01:57:34,480
कबीर कबीर लिखा है कबीर तो नहीं लिखा है अब आप मुझे

1580
01:57:34,480 --> 01:57:38,600
बताइए कि कबीर जो है कबीर है यह कैसे सिद्ध

1581
01:57:38,600 --> 01:57:43,360
होता है अब जैसे कुरान में खबरा लिखा

1582
01:57:43,360 --> 01:57:47,480
भाई साब भाई साहब वेदों की बात करें वेदों की वेदों की

1583
01:57:47,480 --> 01:57:51,680
बात करें वेदों के कौन से नियम के अनुसार कबीर

1584
01:57:51,680 --> 01:57:56,000
शब्द का अर्थ कबीर है और जो कवि लिखा जो कब

1585
01:57:56,000 --> 01:57:58,120
जिसको आप कबीर कह रहे हैं एक मिनट

1586
01:57:58,120 --> 01:58:02,920
एक मिनट एक मिनट एक मिनट एक मिनट एक मिनट भाई साहब एक मिनट

1587
01:58:02,920 --> 01:58:06,960
भाई साहब एक मिनट भाई साहब भाई साहब मैं

1588
01:58:06,960 --> 01:58:11,160
यह कह रहा हूं कि क्या कहीं पर ऐसा लिखा है

1589
01:58:11,160 --> 01:58:15,280
कि केवल कबीर लिखा हो उसके आगे उसी शब्द में दूसरा

1590
01:58:15,280 --> 01:58:19,440
शब्द जुड़ा ना हो क्योंकि जो रा आता है अभी

1591
01:58:19,440 --> 01:58:24,080
नहीं अभी नहीं अभी म्यूट रखिए इनको म्यूट रखिए म्यूट रखिए एक मिनट मैं अपनी बात पूरी कर

1592
01:58:24,080 --> 01:58:28,400
दूं उसमें जो रा आता है वो संधि होने के कारण रा

1593
01:58:28,400 --> 01:58:32,600
आता है तो अगर आपका कहना है कि वो कबीर वही कबीर

1594
01:58:32,600 --> 01:58:37,160
है तो कहीं पर ऐसा कबीर आया है कबीर शब्द ऐसा आया है

1595
01:58:37,160 --> 01:58:41,480
जहां पर उसके बाद कबीर के बाद अगला तुरंत जुड़ा

1596
01:58:41,480 --> 01:58:46,080
हुआ अक्षर ना हो क्या आया ऐसा कहीं

1597
01:58:46,080 --> 01:58:50,520
जैसे कि मैं आपको बताऊं जैसे कि

1598
01:58:50,520 --> 01:58:56,360
यह जो आपने बताया ना मंत्र नंबर

1599
01:58:56,360 --> 01:59:00,520
18 इसमें जो अभी उस व्यक्ति ने बताया था 17 नंबर

1600
01:59:00,520 --> 01:59:04,640
हां जैसे इसमें यह जो शिशु

1601
01:59:04,640 --> 01:59:08,800
शब्द है ना शिशु यह शिशु

1602
01:59:08,800 --> 01:59:13,640
शब्द निर्विवाद रूप से लिखा हुआ है लिखा है

1603
01:59:13,640 --> 01:59:18,280
इसमें कोई भी अगला अक्षर नहीं जुड़ा है तो क्या कवि

1604
01:59:18,280 --> 01:59:22,480
केवल कबीर कहीं पर लिखा है वेदों में लिखा कबीर

1605
01:59:22,480 --> 01:59:27,840
उससे जुड़ा हुआ अगला अक्षर ना

1606
01:59:27,840 --> 01:59:32,000
हो तो कहने का अर्थ मेरा ये है कि जो रा

1607
01:59:32,000 --> 01:59:36,040
वहां पर उत्पन्न हो रहा है वो हो रहा है संधि के

1608
01:59:36,040 --> 01:59:40,320
कारण तो उसको पहली बात दूसरी बात ये है कि अगर मान

1609
01:59:40,320 --> 01:59:44,320
भी लिया जाए कि वो कवीर ही लिखा है वहां पर रा जो है वो कवीर के

1610
01:59:44,320 --> 01:59:48,920
लिए रा है तो फिर आप मुझे बताएं कि कबीर कबीर कैसे बना

1611
01:59:48,920 --> 01:59:54,920
इसका क्या संस्कृत का वो है नियम

1612
01:59:55,720 --> 02:00:00,440
कोई शब्द कोश हो जिसमें लिखा हो कि कवि का अर्थ कबीर होता

1613
02:00:00,440 --> 02:00:04,680
है देखो जो हमारे लिए प्रामाणिक मुझे तो नहीं

1614
02:00:04,680 --> 02:00:08,960
मिला मैं तो शब्द भया य य प

1615
02:00:08,960 --> 02:00:13,560
जिनका आप वेद पढ़ रहे हैं वोह तो कवि का अर्थ ज्ञानी कह रहे हैं

1616
02:00:13,560 --> 02:00:19,080
अरे बात तो सुनो जैसे क्या होता है जैसे मेरा

1617
02:00:19,080 --> 02:00:23,320
नाम रमेश है गाव में लोग वही नाम कह दे

1618
02:00:23,320 --> 02:00:27,560
रमेश रमेशु या नाना रमेशु

1619
02:00:27,560 --> 02:00:31,880
कोई प्यार से राम इसी प्रकार

1620
02:00:31,880 --> 02:00:36,080
तो व्याकरण के व्याकरण से गलत है व्याकरण से गलत है तो इसका मतलब

1621
02:00:36,080 --> 02:00:40,160
वेदों में प्रमाण नहीं है कि कबीर भगवान है वेदों में प्रमाण है कवि भगवान है वो

1622
02:00:40,160 --> 02:00:44,920
आपकी गलती है आप कवि को कबीर कहते हो क्यों कहते हो हमने तो नहीं कहा

1623
02:00:44,920 --> 02:00:49,240
गुण भी तो मिलाइए वेदों में जो गुण बताए गए उन केवल इसका मतलब

1624
02:00:49,240 --> 02:00:53,360
पहले आपको य कहना पड़ेगा में प्रमाण नहीं है कबीर भगवान

1625
02:00:53,360 --> 02:00:57,360
है तब हम गुण पर जाएंगे आप ये कहिए आप आप सुनिए आप

1626
02:00:57,360 --> 02:01:01,440
अपना जुमला बदल आप आप अपना जुमला बदलिए आप

1627
02:01:01,440 --> 02:01:05,760
कहिए गुणों का प्रमाण है कबीर भगवान है हमें कोई दिक्कत नहीं

1628
02:01:05,760 --> 02:01:09,520
नहीं तो

1629
02:01:09,520 --> 02:01:13,840
है अच्छा यह बताइए चलिए अब आ जाते हैं हमारे मेन प्रश्न

1630
02:01:13,840 --> 02:01:17,880
पर यह बताइए जो आपके अनुसार कबीर है क्या

1631
02:01:17,880 --> 02:01:23,440
वह सब कुछ कर सकता है

1632
02:01:23,440 --> 02:01:27,520
बताइए भैया उनकी डायरी में कोई भी असंभव

1633
02:01:27,520 --> 02:01:31,520
शब्द नहीं है सीधी बात नहीं है ठीक है क्या

1634
02:01:31,520 --> 02:01:35,520
वो झूठ बोल सकता

1635
02:01:35,520 --> 02:01:40,040
है क्यों नहीं बो बो

1636
02:01:40,040 --> 02:01:44,160
सते हम प्रमाण दे रहे परमात्मा

1637
02:01:44,160 --> 02:01:48,880
कते स जन कर अपने जन के का

1638
02:01:48,880 --> 02:01:53,000
मैं पूछ रहा केव उना ब एक तो आवाज बहुत कम

1639
02:01:53,000 --> 02:01:57,160
आ रही है दर्शकों को सुनने में दिक्कत आएगी मैं पूछ रहा हूं क्या

1640
02:01:57,160 --> 02:02:01,360
वह झूठ बोल सकता है या नहीं

1641
02:02:01,360 --> 02:02:05,560
बिल्कुल अगर वो भक्तों के कल्याण के लिए जहां झूठ की आवश्यकता

1642
02:02:05,560 --> 02:02:09,600
होगी वो ठ बो अगर अगर वह झूठ बोल

1643
02:02:09,600 --> 02:02:13,880
सकता है तो फिर उसने जो उसकी कबीर वाणी है उसमें

1644
02:02:13,880 --> 02:02:17,080
सत्य बोला य कैसे सिद्ध

1645
02:02:17,080 --> 02:02:22,080
होगा परमात्मा देखिए हर चीज के पीछ

1646
02:02:22,080 --> 02:02:24,520
सूक्ष्म वेद कहते हो ना

1647
02:02:24,520 --> 02:02:28,760
उसे उसको सूक्ष्म वेद कहते हो ना हेलो हेलो एक

1648
02:02:28,760 --> 02:02:33,080
एक एक एक बात आप उसको सूक्ष्म वेद कहते हैं ना

1649
02:02:33,080 --> 02:02:37,520
सूक्ष्म वेद कहते हो ना हां तो अब मुझे बताओ

1650
02:02:37,520 --> 02:02:41,760
कि अगर वोह झूठ बोल सकता है तो उसने सूक्ष्म वेद

1651
02:02:41,760 --> 02:02:45,840
में झूठ नहीं बोला आपके अनुसार वो वेद है जो उसमें झूठ नहीं बोला यह

1652
02:02:45,840 --> 02:02:49,960
कैसे पता लगा ये कैसे सिद्ध होगा ये देखो ऐसे

1653
02:02:49,960 --> 02:02:54,600
सिद्ध होगा हम जो उन्होंने बात

1654
02:02:54,600 --> 02:02:58,840
कही वही बात वही बात दूसरे

1655
02:02:58,840 --> 02:03:03,360
ने भी कही वही बात तीसरे ने भी कही

1656
02:03:03,360 --> 02:03:07,400
यानी कि ज्यादा लोगों के बोलने के कारण सिद्ध होगा यानी कि ज्यादा लोगों

1657
02:03:07,400 --> 02:03:11,400
के बा बोलने के कारण सिद्ध होगा नहीं ऐसा नहीं

1658
02:03:11,400 --> 02:03:15,520
है जिन्ने तो आप ही तो कह रहे वही बात तीसरे ने कही चौथे ने

1659
02:03:15,520 --> 02:03:20,000
कही ज्यादा लोगों की बात प्रमाण नहीं होती महाभारत

1660
02:03:20,000 --> 02:03:24,120
के काल में यदि वोट पड़ते तो पांडवों के वोट कितने होते कौरवों

1661
02:03:24,120 --> 02:03:28,240
के कितने होते प्रहलाद के का प्रहलाद के

1662
02:03:28,240 --> 02:03:32,840
काल में अगर वोटिंग होती तो प्रहलाद को कितने वोट मिलते

1663
02:03:32,840 --> 02:03:36,880
वो बात सही है लेकिन एक बात लॉजिक समझिए उसका लॉजिक दूसरा ये

1664
02:03:36,880 --> 02:03:39,600
लॉजिक दूसरा भाई साहब जो शब्द

1665
02:03:39,600 --> 02:03:44,120
प्रमाण होता है शब्द जो शब्द प्रमाण होता है वो वही

1666
02:03:44,120 --> 02:03:48,240
हां बताइए बताइए बताइए जैसे हम कहे ये

1667
02:03:48,240 --> 02:03:52,800
आम का पेड़ है समझ हो

1668
02:03:52,800 --> 02:03:57,040
और उसके हमने गुण भी बताए आपको आम के वृक्ष में क्या गुण

1669
02:03:57,040 --> 02:04:00,800
होते हैं

1670
02:04:00,800 --> 02:04:05,040
समझना तो यही बात और भी कोई बताए

1671
02:04:05,040 --> 02:04:09,160
की हा य आम का ब होता उसका कई लोगों के

1672
02:04:09,160 --> 02:04:13,240
कहने से प्रमाण नहीं बनता है और अगर आप कहेंगे कि

1673
02:04:13,240 --> 02:04:17,360
अनुभव कि हमने खा के देखा तो हमें पता चल गया कि हा जो बताया गया था

1674
02:04:17,360 --> 02:04:22,120
सत्य था ऐसा है क्या देखिए

1675
02:04:22,120 --> 02:04:26,320
परमात्मा की महिमा बहुत बड़ी ये हम लोग उलझे हुए

1676
02:04:26,320 --> 02:04:30,560
हैं क्यों उ हुए भाई साहब भाई साहब हमको प्रवचन नहीं चाहिए

1677
02:04:30,560 --> 02:04:35,320
भाई साहब प्रवचन के लिए हमारे पास है सामर्थ वान गुरु गोविंद और ग्रंथ

1678
02:04:35,320 --> 02:04:39,360
आप हमको यह बताइए कि अगर कबीर झूठ

1679
02:04:39,360 --> 02:04:43,520
बोल सकते हैं तो उन्होंने अपनी वाणी में कबीर वाणी में झूठ नहीं बोला यह कैसे

1680
02:04:43,520 --> 02:04:48,720
सिद्ध होगा आप बताइए

1681
02:04:48,720 --> 02:04:53,000
जो उनको संत जैसे राम तुलसीदास

1682
02:04:53,000 --> 02:04:55,280
ने लिखी है रामायण और उसके कई

1683
02:04:55,280 --> 02:04:59,320
लाखों वर्ष पहले लिखी थी वाल्मीक जी ने लिखी

1684
02:04:59,320 --> 02:05:03,400
थी क्या तुलसीदास की रा झूठ है

1685
02:05:03,400 --> 02:05:07,440
वह झूठ इसलिए नहीं है क्योंकि वह अपर वेद आधारित

1686
02:05:07,440 --> 02:05:12,160
ग्रंथ है अप वेद आधारित हम

1687
02:05:12,160 --> 02:05:16,520
सुनिए सनातनी वो है जो उन ग्रंथों पर विश्वास

1688
02:05:16,520 --> 02:05:20,640
करता है जिसको ईश्वर ने भी नहीं

1689
02:05:20,640 --> 02:05:24,640
रचा समझ में आ रहा है आपको आप उस ग्रंथ को प्रमाण

1690
02:05:24,640 --> 02:05:28,640
बना रहे हैं जिसको ईश्वर ने रचा आपके अनुसार तो जैसे ही

1691
02:05:28,640 --> 02:05:33,080
ईश्वर कुछ रच देगा वैसे ही उस रची हुई चीज की

1692
02:05:33,080 --> 02:05:37,160
क्रेडिबिलिटी पर सवाल ठ जाएगा जैसे कि आपके

1693
02:05:37,160 --> 02:05:41,360
अनुसार हमको यहां पर किसने फसाया

1694
02:05:41,360 --> 02:05:46,040
आपके अनुसार हमको यहां पर किसने फसाया वो बाद की बात है पले

1695
02:05:46,040 --> 02:05:50,320
मैं पूछ रहा हूं आपके अनुसार हमको यहां पर किसने फसाया काल

1696
02:05:50,320 --> 02:05:54,360
ने एक एक ट भाई साब काल

1697
02:05:54,360 --> 02:05:59,800
ने फसाया आप यह बताइए आप

1698
02:05:59,800 --> 02:06:04,160
काल जो है कालने फसाया

1699
02:06:04,160 --> 02:06:08,440
तो आपको व जानकारी कालने फसाया ठीक है काल

1700
02:06:08,440 --> 02:06:13,520
ने फसाया

1701
02:06:13,520 --> 02:06:17,440
नाना पड़ता

1702
02:06:17,440 --> 02:06:22,640
हैका नेटवर्क खराब हो रहा है आपकी आवाज अटक रही है

1703
02:06:22,640 --> 02:06:26,800
एक मिनट और कोई भी है क्या

1704
02:06:26,800 --> 02:06:30,040
लाइन

1705
02:06:30,040 --> 02:06:34,080
में ति जी तिक [संगीत]

1706
02:06:34,080 --> 02:06:39,880
जी ऋतिक जी तो कैमरा ऑफ किए हुए

1707
02:06:39,880 --> 02:06:43,080
हैं

1708
02:06:43,080 --> 02:06:47,800
जी अबे भैया साइंस जर्नी वाले को कहो

1709
02:06:47,800 --> 02:06:51,880
वो कायरता छोड़े और सामने आए रेशनल वर्ड और जिस

1710
02:06:51,880 --> 02:06:56,040
दिन चेहरा दिखाने का साहस हो जाए उस दिन वो सामने आकर

1711
02:06:56,040 --> 02:07:00,120
के चर्चा करें ठीक है और यदि कायर

1712
02:07:00,120 --> 02:07:04,200
ही है बने रहे तो जो उनके तरीके के हो उनको अपना ज्ञान देते

1713
02:07:04,200 --> 02:07:08,640
रहे नहीं तो फिर लाइन याद कर ले

1714
02:07:08,640 --> 02:07:12,680
हा अगर थोड़ा बहुत मुह रह गया हो दिखाने का काला ना हुआ

1715
02:07:12,680 --> 02:07:16,800
इतना ज्यादा तो आए सामना

1716
02:07:16,800 --> 02:07:22,080
करें भाई साहब आपका वो नहीं आ रहा फिर किसी दिन आइएगा

1717
02:07:22,080 --> 02:07:26,400
भैया पांचवा वेद तो वो इसका प्रमाण भी दे दीजिए मैं आपको ंद उपनिषद

1718
02:07:26,400 --> 02:07:29,440
से प्रमाण दे देता हूं पांचवा वेद पुराण

1719
02:07:29,440 --> 02:07:33,520
है भाई साहब आकाश जी आप ना तिवारी एक तो लिखना बंद

1720
02:07:33,520 --> 02:07:37,640
कर दीजिए वह आपके लिए ठीक नहीं आप दास लिखा करिए आकाश दास अच्छा लगेगा आपके

1721
02:07:37,640 --> 02:07:41,160
ऊपर और

1722
02:07:41,160 --> 02:07:45,320
वो मेरी र से भी था की ये लोग

1723
02:07:45,320 --> 02:07:49,360
य लोगों को बारबार इतनी मेहनत करनी पड़ रही है कि कबीर देव को कबीर साबित करने

1724
02:07:49,360 --> 02:07:53,560
के लिए अगर कबीर जी के बारे में लिखना ही था वेद में तो कबीर

1725
02:07:53,560 --> 02:07:57,600
क्यों नहीं लिखा गया क्यों नहीं लिखा स्पष्ट क्यों नहीं लिखा क्यों

1726
02:07:57,600 --> 02:08:02,040
नहीं लिखा गया अगर वो सच में परमात्मा है और अगर उनके ही है

1727
02:08:02,040 --> 02:08:06,160
एक जगह तो लिख देते कबीर कबीर कबीर भगवान है कबीर भगवान है एक

1728
02:08:06,160 --> 02:08:10,720
जगह जैसे रुद्र लिख है रु लिखा

1729
02:08:10,720 --> 02:08:14,840
कहीं नहीं नाम तक कहीं है ही नहीं जबरदस्ती

1730
02:08:14,840 --> 02:08:19,200
विष्णु स्पष्ट लिखा है माता का स्पष्ट वहां पर प्रमाण है गणेश

1731
02:08:19,200 --> 02:08:23,320
जी का स्पष्ट प्रमाण है भाई जो तुम्हारा असली ईश्वर है उसका

1732
02:08:23,320 --> 02:08:27,600
तो प्रमाण हो बिल्कुल और अगर वो

1733
02:08:27,600 --> 02:08:31,800
तो लिख दिया गया है तु प्रत्यक्ष बमा तो फिर को क्यों नहींन

1734
02:08:31,800 --> 02:08:35,840
रहे अगर वो बोल रहे हैं कि वेद में प्रमाण है तो वेद में तोय भी प्रमाण है गणपति

1735
02:08:35,840 --> 02:08:40,280
जी भगवान है में तोय भी प्रमाण है तो कुछ ना कुछ

1736
02:08:40,280 --> 02:08:44,360
करते ही रहेंगे अब हम किसी को ले लेते हैं पहले कौन आया था

1737
02:08:44,360 --> 02:08:44,860
ऋतिक

1738
02:08:44,760 --> 02:08:48,760
जी पहले आए थे कौन आए थे मैंने पंडित सूरज जी को काफी देर से देखा है

1739
02:08:48,760 --> 02:08:53,320
इनको ले ले पहले

1740
02:08:53,320 --> 02:08:57,360
जी पंडित जी जय श्री राम जय श्री

1741
02:08:57,360 --> 02:09:01,440
राम जय श्री राम हर हर महादेव हर हर महादेव भाई

1742
02:09:01,440 --> 02:09:05,440
जी मैं कहना चाहता इनका रामपाल जी के च इतना भ्रम फैला

1743
02:09:05,440 --> 02:09:09,480
रखा है इतना भ्रम फैला रखा है हम भी समझाते समझाते थक

1744
02:09:09,480 --> 02:09:13,480
गए पर हम समझा नहीं पाए हर

1745
02:09:13,480 --> 02:09:17,480
बस स्टेशन पर हमें मिल जाते हैं हम दिल्ली में रहते हैं वही हमें बुक

1746
02:09:17,480 --> 02:09:21,760
पकड़ा देंगे एक बार तो मेरी तो कहीं से मल कई बार हो ही जाता है

1747
02:09:21,760 --> 02:09:25,960
कैसे इनको समझाए इनका भ्रम तोड़ना बहुत ही आवश्यक है इन लोगों

1748
02:09:25,960 --> 02:09:30,240
ने इतना भ्रम र मैं इस बारे में एक चीज कहूंगा

1749
02:09:30,240 --> 02:09:34,480
हम किसी को निराधार या निरुत्तर कर सकते हैं हम उससे

1750
02:09:34,480 --> 02:09:39,200
अपने मन की बात कलवा नहीं सकते जी

1751
02:09:39,200 --> 02:09:43,240
भाई जी आपने इतना प्रमाण देता इतना नितर कर दिया फर मानने को

1752
02:09:43,240 --> 02:09:47,320
तैयार है इतने महामूर्ख इतने महा मैं आपको

1753
02:09:47,320 --> 02:09:51,520
एक बात बताऊ वो कभी नहीं मानेंगे जिनको मैं प्रमाण दे रहा हूं वो कभी

1754
02:09:51,520 --> 02:09:55,640
माने जो इसको देखेगा वो मानेगा जैसे अभी

1755
02:09:55,640 --> 02:09:59,640
एक भाई साहब आए थे आकाश तिवारी जी वो जिज्ञासु थे तो

1756
02:09:59,640 --> 02:10:00,140
थोड़ा

1757
02:09:59,960 --> 02:10:04,080
सकारात्मक उनका व्यवहार था वो उसमें जाएंगे डेप्थ

1758
02:10:04,080 --> 02:10:08,080
में तो इससे यह होगा कि जैसे हम किसी को निरुत्तर करते

1759
02:10:08,080 --> 02:10:12,200
हैं हम किसी को निराधार प्रस्तुत सिद्ध कर देते हैं

1760
02:10:12,200 --> 02:10:16,400
तो उसके बाद जो आने वाले जो लोग है जो उनकी चपेट में आ सकते होंगे

1761
02:10:16,400 --> 02:10:20,840
या जो अभी अधर में होंगे पूरी तरीके से चपेट में नहीं आए होंगे वो बच जाएंगे

1762
02:10:20,840 --> 02:10:23,200
तो ये

1763
02:10:23,200 --> 02:10:27,240
हां ये होता है इट्स बेटर टू केयर देन क्यर ये

1764
02:10:27,240 --> 02:10:31,280
ब्रेन वश करने में बड़े माहिर है इनका यहां मुंडका में एक आश्रम

1765
02:10:31,280 --> 02:10:35,600
है वरा तो नहीं कर पाए हमारा ब्रेन वश नहीं कर पाए 55

1766
02:10:35,600 --> 02:10:39,680
से से भाई जी इतना थोड़ा ब्राह्मणों

1767
02:10:39,680 --> 02:10:43,800
में अभी भी इतना वो है नहीं तो उधर आप सारी जनता देखे होगे मैं गया था वहां

1768
02:10:43,800 --> 02:10:47,840
पर एक कोई ऐसे ही किसी के फैक्ट्री को अजमा तो वहां पर मुझे सब

1769
02:10:47,840 --> 02:10:51,920
साहिब कह रहे मैंने कहा ऐसा जय श्री राम बोलिएगा ये क्या हो

1770
02:10:51,920 --> 02:10:56,360
तो मुझे ही ज्ञान देने लग गए तो सबसे पहले भाई जी इनको लाइव

1771
02:10:56,360 --> 02:11:00,440
इनको कबीर जी के रामपाल जी को लाइव बुलाना चाहिए इनका ये

1772
02:11:00,440 --> 02:11:04,520
भ्रम तोड़ना चाहिए मैं तो इसको पकड़ के इसी को लाइव डिबेट में मीडिया

1773
02:11:04,520 --> 02:11:08,840
के सामने जी लाइव आना बहुत असंभव सा

1774
02:11:08,840 --> 02:11:12,880
कार है रामपाल जी के सा जीरो है व्याकरण

1775
02:11:12,880 --> 02:11:14,960
उनके समझ में कुछ है ही नहीं कुछ है ही नहीं

1776
02:11:14,960 --> 02:11:19,320
कबीर कबी वेदों में व कवि लिखा है अब हमने बता दिया

1777
02:11:19,320 --> 02:11:23,400
कहां तुम कैसे पढ़ रहे कुछ है ही नहीं सिर्फ उन्होंने इतना

1778
02:11:23,400 --> 02:11:27,720
रट रखा है कि सूत नंबर एक मंडल नंबर वही कहते बाइबल

1779
02:11:27,720 --> 02:11:31,800
में य है तो मैं एक जगह गया था बात य हमारे जो प्रश्न होते हैं

1780
02:11:31,800 --> 02:11:36,000
ऐसे आते हैं एकदम से सामने

1781
02:11:36,000 --> 02:11:40,040
अलगम करता आपको बहुत प्रणाम करता हूं इनको

1782
02:11:40,040 --> 02:11:44,320
सबसे पहले बंद करना बहुत ही जरूरी है कही लोगों को तो मैंने किताब

1783
02:11:44,320 --> 02:11:48,560
हमा बंद करें ना करें मगर यह

1784
02:11:48,560 --> 02:11:53,280
गलत बात है कि वेदों में प्रमाण है यह क हमारे हमारे

1785
02:11:53,280 --> 02:11:57,360
जो हमारे जो कबीर की वाणी है उसम प्रमाण है कि कबीर भगवान है वो कहे उसम

1786
02:11:57,360 --> 02:12:01,680
भी ये पेन चलाए बैठे हैं हालाकि उसम भी पेन चलाया है

1787
02:12:01,680 --> 02:12:05,800
तो इन्होने ज्ञान गंगा में कितना बकवास लिखा हुआ है भाई जी क्या बताए हम कितना

1788
02:12:05,800 --> 02:12:09,840
बकवास लिखा मद बवास बकवास

1789
02:12:09,840 --> 02:12:14,160
इत्यादि मत बोलिए वो ऐसे शब्द का वो रखिए

1790
02:12:14,160 --> 02:12:17,200
कि मर्यादा

1791
02:12:17,200 --> 02:12:21,440
रहे देखो गीता में कहते हो 5 पर जो है जो है काल

1792
02:12:21,440 --> 02:12:25,480
का ज्ञान है 95 पर ईश्वर का है अब क्या बताए हम क्या समझाए

1793
02:12:25,480 --> 02:12:29,760
आप तो बहुत अ हमने अपने चैनल पर पूरी एक पीडीएफ

1794
02:12:29,760 --> 02:12:34,440
उपलब्ध करा दिए छ एपिसोड के साथ उसम पूरा इनका

1795
02:12:34,440 --> 02:12:38,440
दूध का दूध और पानी पानी और एक जो इनकी दो मिथ्या रह गई थी एक तो वो

1796
02:12:38,440 --> 02:12:42,560
श्राद्ध वाली मिथ्या जो है व हम ले आएंगे एक दो दिन में टाइम नहीं मिल रहा है जो

1797
02:12:42,560 --> 02:12:46,720
श्राद्ध का खंडन करते हैं और एक का हमने दिया वो जो ब्राह्मणों को कहते

1798
02:12:46,720 --> 02:12:51,560
है ना कलयुग के ब्राह्मण सतयुग के राक्षस है उसका भी हमने कर दिया

1799
02:12:51,560 --> 02:12:55,640
में कहीं पर से उठा के ले आए हो मैंने दे हमने पूछा ना कि भैया

1800
02:12:55,640 --> 02:12:59,760
स्कंद पुराण के रामायण महात्मा में लिखा है कि कलयुग की जो स्त्रिया

1801
02:12:59,760 --> 02:13:05,360
होंगी वो व्यभिचारी हो जाएंगी क्या आप अपने घर की स्त्रियों को मानते हो

1802
02:13:05,360 --> 02:13:09,440
व्यभिचारी तो इसका अर्थ यह है कि कलयुग के सभी ब्राह्मण राक्षस

1803
02:13:09,440 --> 02:13:13,440
नहीं है कुछ ब्राह्मण राक्षस है सभी ब्राह्मण राक्षस नहीं

1804
02:13:13,440 --> 02:13:18,040
है हमें मानना पड़ेगा नहीं तो अपनी घर की स्त्रियों को मानो व विचारी

1805
02:13:18,040 --> 02:13:22,880
हम नहीं मानेंगे इनकाम भा

1806
02:13:22,880 --> 02:13:27,840
आने के लिए आपका धन्यवाद जी जी आने के लिए आपका धन्यवाद श्रीराम

1807
02:13:27,840 --> 02:13:31,840
हमारा नंबर नंबर हमारा है ना आपके पास नहीं है भाई जी

1808
02:13:31,840 --> 02:13:32,340
बिल्कुल है

1809
02:13:32,280 --> 02:13:37,520
ही नहीं हम तो देते रहते हैं य पर यह नंबर है नोट कर लीजिएगा

1810
02:13:37,520 --> 02:13:42,440
74836 और नाम जप अभियान चालू कर दिया है न

1811
02:13:42,440 --> 02:13:46,720
बिल्कुल भाई जीी जय श्री राम भाई जी आपको जय श्री रामनारायण

1812
02:13:46,720 --> 02:13:51,440
हर हर महादेव जय श्री मन नारायण

1813
02:13:51,440 --> 02:13:55,880
अरे डॉप हो गए न तारीख से

1814
02:13:55,880 --> 02:13:59,920
24 अल्ट्रा हो गया आपका न तारीख से नाम जप

1815
02:13:59,920 --> 02:14:04,080
अभियान जो है वह चालू हो जाएगा उसमें जो भी जुड़ना चाहे जुड़ सकता

1816
02:14:04,080 --> 02:14:08,280
है अच्छा वह मातृ शक्ति चली गई क्या जो आई थी हा

1817
02:14:08,280 --> 02:14:12,680
वो ड्रॉप हो गए थे बीच में भी अच्छा मैं डप अब

1818
02:14:12,680 --> 02:14:17,400
मैं ले लेता हूं ऋतिक जी पहले आए हुए थे तो रितिक जी को ले लेते

1819
02:14:17,400 --> 02:14:21,400
हैं तिक जी जय श्री राम जय

1820
02:14:21,400 --> 02:14:25,720
श्री राम भैया जय श्री राम कैसे हो आप बस बस कृपा है राम की आप

1821
02:14:25,720 --> 02:14:29,960
बताए जी जी भैया मेरा एक प्रश्न था क्योंकि मुझे थोड़ा सा जानना

1822
02:14:29,960 --> 02:14:34,480
था और और दो चीज थी क्योंकि जैसे एक तो जो आप

1823
02:14:34,480 --> 02:14:38,600
बताते हो हमें नॉर्मली मतलब पढ़ने को नहीं मिलता है एक

1824
02:14:38,600 --> 02:14:42,800
तो जो ये जो सोर्सेस है ताकि हमें बताइए ताकि हम खुद से भी पढ़ के स्वाध्याय

1825
02:14:42,800 --> 02:14:47,000
कर सके और थोड़ा मतलब बातचीत कर सके एक तो ये बताइएगा दूसरा मेरा

1826
02:14:47,000 --> 02:14:47,500
एक प्रश्न

1827
02:14:47,360 --> 02:14:51,520
था कि जैसे आपने ईश्वर के विषय में दो बातें बताई थी व्यवहारिक

1828
02:14:51,520 --> 02:14:55,720
और परमार्थिक ठीक है तो मुझे यह बता कि जो परमार्थिक ईश्वर उसकी सिद्धि

1829
02:14:55,720 --> 02:15:00,200
कैसे होती है परमार्थिक ईश्वर व्यवहारिक

1830
02:15:00,200 --> 02:15:04,240
ईश्वर को भक्ति करके प्राप्त करने के लिए प्रयास करके परमार्थिक

1831
02:15:04,240 --> 02:15:08,360
ईश्वर स्वतः प्राप्त हो जाते हैं जैसे मैं बता

1832
02:15:08,360 --> 02:15:12,440
रहा हूं मैं बता रहा जैसे की जो

1833
02:15:12,440 --> 02:15:16,480
भोजन है आप उसके लिए भोजन के लिए प्रयास

1834
02:15:16,480 --> 02:15:20,480
नहीं करते हो आपका प्रयास होता है आपकी आतो की अंतरियो

1835
02:15:20,480 --> 02:15:24,640
की मिटाने के लिए जो भूख मिटेगी आपकी कैलोरी से किससे

1836
02:15:24,640 --> 02:15:29,480
मिटेगी कैलोरी से सुन रहे आप

1837
02:15:29,480 --> 02:15:33,840
बता मगर आप क्या कैलोरी खरीदने के लिए बाजार में निकलते हो

1838
02:15:33,840 --> 02:15:37,880
क्या नहीं आप हाथ पैर हवा में मार सकते

1839
02:15:37,880 --> 02:15:42,040
हो कैलोरी लाओ इधर से लाओ उधर से लाओ नहीं मार सकते क्योंकि

1840
02:15:42,040 --> 02:15:46,200
वह आपके व्यवहार का विषय नहीं है नहीं है है

1841
02:15:46,200 --> 02:15:50,440
वो केवल प्राप्त किया जा सकता है तो वो कैसे प्राप्त होगा आप

1842
02:15:50,440 --> 02:15:54,640
देखो कैलोरी किस किस चीज से प्राप्त हो सकती है तो कैलोरी

1843
02:15:54,640 --> 02:15:58,840
का सगुण साकार स्वरूप होता है भोजन जो हमें प्राप्त करना

1844
02:15:58,840 --> 02:16:02,440
है जब ये बंद हो जाएगी आज की लाइव स्ट्रीम भूख लग

1845
02:16:02,440 --> 02:16:06,560
रही है तो जो

1846
02:16:06,560 --> 02:16:10,640
उसका सगुण साकार स्वरूप है कैलोरी का जी वो रूप

1847
02:16:10,640 --> 02:16:14,840
हम लोग ढूंढने निकलते हैं भैया बर्गर दे दो मैगडी का पिज्जा दे दो उसका ड

1848
02:16:14,840 --> 02:16:19,520
डोमिनोस का या छोले भटूरे दे दो चेतराम वाले पिंडी छोले वाले

1849
02:16:19,520 --> 02:16:23,520
या हम उसके लिए प्रयास करते हैं जब हम उसके लिए प्रयास

1850
02:16:23,520 --> 02:16:27,840
करते हैं उसको प्राप्त करते हैं तो वो जो उसका पार मर्थक रूप होता है

1851
02:16:27,840 --> 02:16:31,880
व्यवहार में ना आ सकने वाला रूप वो स्वतः हमको प्राप्त हो जाता है

1852
02:16:31,880 --> 02:16:36,240
इसी प्रकार से भगवान के सगुण साकार रूप के लिए जब हम प्रयास करते हैं

1853
02:16:36,240 --> 02:16:40,320
उनके पीछे पड़ जाते हैं उनसे प्रेम करते हैं उनसे आलिंगन करते हैं उनके

1854
02:16:40,320 --> 02:16:44,400
साथ एकत्व स्थापित करते हैं तो उनका जो पारिक

1855
02:16:44,400 --> 02:16:49,280
स्वरूप है प्राप्त है जो वो हमको स्वतः प्राप्त हो जाता है

1856
02:16:49,280 --> 02:16:53,480
शवास जी एक थोड़ा सा मिस्ट हो गया आपसे मैं बताता हूं मैंने प्राप्त

1857
02:16:53,480 --> 02:16:57,520
प्राप्त करने का तरीका नहीं पूछा था कि जैसे अगर मैं ये बोल दू कि ईश्वर को कैसे जाने

1858
02:16:57,520 --> 02:17:01,560
तो आप कहते कि नहीं यम नियम आसन प्राणायाम प्रत्याहार ध्यान धारणा समाधि

1859
02:17:01,560 --> 02:17:05,600
से प्राप्त कर लो वो तो दूसरी चीज हो गई मैंने पूछा कि ईश्वर की सिद्धि करो पहले तो

1860
02:17:05,600 --> 02:17:09,600
व एक दूसरा टॉपिक हो गया तो वही मैं कह रहा था कि पहले जो परमार्थिक ईश्वर है उसकी सिद्धि किस प्रकार से

1861
02:17:09,600 --> 02:17:14,280
होती है मुझे वो जाना था मतलब वो अस्तित्व उसका आपको सिद्ध करना है

1862
02:17:14,280 --> 02:17:17,800
हां अब जैसे ये जो व्यवहारिक ईश्वर है इस कर देते

1863
02:17:17,800 --> 02:17:21,880
हमने आपको ये बताया कि एक नास्तिक व्यक्ति

1864
02:17:21,880 --> 02:17:25,920
के अंदर भी सच्चिदानंद होने की चाह विद्यमान है जिसको

1865
02:17:25,920 --> 02:17:30,440
वो आनंद प्राप्त करने की सच्चिदानंद सत चित आनंद

1866
02:17:30,440 --> 02:17:34,480
यह प्राप्त करने की चा विद्यमान है ठीक है तो

1867
02:17:34,480 --> 02:17:39,120
इसका अर्थ है कि इस दुनिया में कोई सत चित आनंद है

1868
02:17:39,120 --> 02:17:43,320
नहीं य होता है भाई

1869
02:17:43,320 --> 02:17:47,400
अगर आप उसके अस्तित्व को नहीं मानोगे तो उस चाह को रखने वाला पागल

1870
02:17:47,400 --> 02:17:51,800
सिद्ध हुआ नहीं जैसे मान ले मुसलमान ठीक है

1871
02:17:51,800 --> 02:17:56,200
उसको 7 रो की चाह है तोसे क्या 72 रे होने की सिद्धि हो जाती है

1872
02:17:56,200 --> 02:18:00,400
72 रो की चाह वो है जो इनबिल्ट नहीं है वो उनको छोड़ सकता

1873
02:18:00,400 --> 02:18:05,240
है समझिए जैसे एक बच्चे से हमने कहा

1874
02:18:05,240 --> 02:18:09,400
कि भाई हाथी जो है उड़ते हैं वो मैं तुम्ह लाकर

1875
02:18:09,400 --> 02:18:13,480
दूंगा उसको हमने अगले दिन बताया कि नहीं उड़ने वाली हाथी

1876
02:18:13,480 --> 02:18:17,480
होते ही नहीं है तो उस हाती के ना होने की स्थिति में

1877
02:18:17,480 --> 02:18:21,680
भी उस व्यक्ति वो उस चा को जो उड़ने वाले हाथी

1878
02:18:21,680 --> 02:18:25,840
की जो उसके अंदर डिजायर थी वो उसको छोड़ कर के जी सकता

1879
02:18:25,840 --> 02:18:29,840
है जीता है छोड़ देता है अगर किसी बच्चे ने

1880
02:18:29,840 --> 02:18:32,880
कहा मां मेरा मन करता है कि मैं ट्रेन को जो है

1881
02:18:32,880 --> 02:18:36,880
हवा में उठा दूं तो मां कहती है कि नहीं ये

1882
02:18:36,880 --> 02:18:41,360
यह जो है ऐसा पॉसिबल नहीं है चा को तुम छोड़ दो बच्चा मान जाता है और

1883
02:18:41,360 --> 02:18:45,640
उस मानने की स्थिति में वह दुखी नहीं होता है

1884
02:18:45,640 --> 02:18:49,880
मगर विज्ञान यह कहता है कि आप मरोगे ही आज की तारीख

1885
02:18:49,880 --> 02:18:53,880
में अमरता की खोज नहीं हुई है मगर जैसे ही आपको मृत्यु का ख्याल

1886
02:18:53,880 --> 02:18:57,880
आएगा आप दुखी हो जाओगे इस चाह को आप छोड़ नहीं सकते

1887
02:18:57,880 --> 02:19:02,240
हो तो बात हो रही है उस चाह की जिसको छोड़ के आप ना रह सको

1888
02:19:02,240 --> 02:19:06,480
इसको कहते हैं इनबिल्ट चाप हो हां इसको

1889
02:19:06,480 --> 02:19:10,880
कहते हैं इनबिल्ट

1890
02:19:10,880 --> 02:19:15,040
चा अब आप खाना खा लीजिए दो लोग

1891
02:19:15,040 --> 02:19:19,120
हैं अब कोई ना आए अब जो है वो जो लिंक है ना उसको आप रोक दीजिए

1892
02:19:19,120 --> 02:19:23,120
अब काफी देर हो गई ढाई घंटे हो गए हम लोग फिर कभी देख लेंगे नरेंद्र

1893
02:19:23,120 --> 02:19:27,360
जी आपको ले लेंगे मधुसूदन जी से बात कर ले हम लोग फिर आपको लेते हैं जी मधुसूदन

1894
02:19:27,360 --> 02:19:31,360
जी जय श्री राम हर हर महादेव हर

1895
02:19:31,360 --> 02:19:36,160
हर महादेवर महादेव बताइए मसन जी

1896
02:19:36,160 --> 02:19:40,960
भैया आपसे मिलने का बहुत

1897
02:19:40,960 --> 02:19:45,480
मतलब हमसे मत मिलिए भगवान से मिलने का प्रयास करिए

1898
02:19:45,480 --> 02:19:49,600
तो सब मिल जाएंगे आपको हम तो कुछ नहीं है शिव

1899
02:19:49,600 --> 02:19:53,880
शभ अविनाश हम बहुत बड़े भक्त है भैया अच्छा

1900
02:19:53,880 --> 02:19:58,680
शिव शिव नाम का जब चालू करिए न तारीख से आइए साथ नि भाइए

1901
02:19:58,680 --> 02:20:02,920
उसमें जुड़िए नाम जप अभियान में नामा स्त्र

1902
02:20:02,920 --> 02:20:07,480
हा भैया हम यह पूछ रहे थे कि भैया

1903
02:20:07,480 --> 02:20:11,480
एकन संस्था है हम उसको जवाइन किए

1904
02:20:11,480 --> 02:20:14,040
थे

1905
02:20:14,040 --> 02:20:19,160
और मतलब व भगवान

1906
02:20:19,160 --> 02:20:23,160
भगवान शिव को नहीं मानता है देखिए

1907
02:20:23,160 --> 02:20:26,040
वो नहीं मानते यह एक अलग बात है कि वो उनकी

1908
02:20:26,040 --> 02:20:30,120
श्रद्धा भगवान के कृष्ण रूप में है मगर यदि व शिव रूप का

1909
02:20:30,120 --> 02:20:34,240
खंडन करते हैं तो यह गलत बात होती है कि शिव जी भगवान नहीं है

1910
02:20:34,240 --> 02:20:38,560
शिव को भगवान समझने वाले पाखंडी है हमारे मधुसूदन भाई पाखंडी

1911
02:20:38,560 --> 02:20:42,920
हैं यह बात गलत है मधुसूदन जी और श्वेतांक

1912
02:20:42,920 --> 02:20:46,960
जी हमारे दोनों भाई पाखंडी नहीं है हम

1913
02:20:46,960 --> 02:20:51,800
मरते दम तक लड़ेंगे इनके लिए भैया

1914
02:20:51,800 --> 02:20:56,320
है और भगवान कृष्ण भी एक जीव थे इस धरती पर जन्म लिए

1915
02:20:56,320 --> 02:21:00,800
थे उनका भी मरण हुआ उनका भी जन्म हुआ तो मान लीजिए

1916
02:21:00,800 --> 02:21:04,840
परमा ऐसी बात ऐसी बातें नहीं कही है कृष्ण जी के बारे में

1917
02:21:04,840 --> 02:21:09,200
वो भी उतने ही परमेश्वर है जितने शिवजी परमेश्वर है कोई अंतर नहीं

1918
02:21:09,200 --> 02:21:13,240
क परब्रह्म परमेश्वर है उसमें कोई दो राय नहीं है केवल

1919
02:21:13,240 --> 02:21:17,320
लीला भेद है एक ही परम तत्व शिव बन रहा है

1920
02:21:17,320 --> 02:21:21,440
एक ही परम तत्व कभी भगवान बन जाता है कभी भक्त बन जाता है अगर हम

1921
02:21:21,440 --> 02:21:26,160
यह कह देंगे कि वो भक्त नहीं बन सकता तो यह भी एक बाधा होगी भगवान पर

1922
02:21:26,160 --> 02:21:29,920
भगवान इस बाधा को भी तोड़ देते

1923
02:21:29,920 --> 02:21:34,280
हैं आप उनके शिव रूप के भक्त बनिए मगर अनास्ता

1924
02:21:34,280 --> 02:21:38,400
ना लाइए कृष्ण के प्रति भगवान कृष्ण बहुत बड़ा

1925
02:21:38,400 --> 02:21:41,120
काम किया उन्होंने व श्लोक बोल दिया जो

1926
02:21:41,120 --> 02:21:45,800
यदा यदा धर्मला भवती भारता अनम धर्म

1927
02:21:45,800 --> 02:21:49,800
सजा मैं जब इस लोक की महिमा को समझा था कम से कम एक

1928
02:21:49,800 --> 02:21:54,360
महीने तक रो रहा एक महीने तक रोता रहा

1929
02:21:54,360 --> 02:21:58,400
मैंने ईश्वर की य जो बाधित वाली स्टोरी है ना इसमें बहुत मेहनत

1930
02:21:58,400 --> 02:22:02,560
की बहुत रिसर्च की बहुत मंथन करता रहता था चिंतन करता रहता था

1931
02:22:02,560 --> 02:22:06,720
तो मैंने जब यह जाना कि

1932
02:22:06,720 --> 02:22:11,360
ईश्वर वही है जो कुछ भी कर सकता है तो ईश्वर ने जितने भी अन्य रूप लिए

1933
02:22:11,360 --> 02:22:15,520
उसमें उन्होंने कुछ ना कुछ किसी ना किसी सीमा का पालन कर लिया मगर

1934
02:22:15,520 --> 02:22:20,080
उन्होंने कृष्ण का रूप लेकर के बता दिया कि मैं वही हूं जो

1935
02:22:20,080 --> 02:22:24,320
कुछ भी कर सकता है तो कृष्ण का रूप उन्होंने इसीलिए लिया था जो ऐसे लोगों

1936
02:22:24,320 --> 02:22:28,560
का मुंह बंद कर सके तो मैं रोया

1937
02:22:28,560 --> 02:22:32,600
कि भगवान ने इस बात को क्यों देर से समझा और और फिर राम

1938
02:22:32,600 --> 02:22:36,760
जी के बारे में जब मैं इस नतीजे पर पहुंचा कि ईश्वर वही है जो कुछ

1939
02:22:36,760 --> 02:22:40,920
भी कर सकता है तो मैं फिर कई दिनों तक परेशान रहा कि एक नियम तो लागू

1940
02:22:40,920 --> 02:22:44,960
हो गया कुछ भी कर सकता है यह भी तो नियम है इसको कैसे

1941
02:22:44,960 --> 02:22:49,400
तोड़ोगे प्रभु तो उन्होंने राम रूप दिखा दिया ये देखो

1942
02:22:49,400 --> 02:22:53,080
नियम नियम नियम ही

1943
02:22:53,080 --> 02:22:56,280
नियम हम आपसे एक बात चाहते है जिस

1944
02:22:56,280 --> 02:23:00,960
प्रकार ओम नमः शिवाय जो मंत्र है यह पंचाक्षरी

1945
02:23:00,960 --> 02:23:05,200
मंत्र है भगवान शिव पच तत्व को दर्शाते हैं इसमें और

1946
02:23:05,200 --> 02:23:09,200
भगवान कृष्ण जो है वो एक मनुष्य

1947
02:23:09,200 --> 02:23:13,640
थे तो मतलब

1948
02:23:13,640 --> 02:23:17,960
देखिए के रूप में थे उन्होंने कहा ना कि मेरे

1949
02:23:17,960 --> 02:23:22,560
को मानव देह में देखकर जो लोग मुझे साधारण समझते हैं वह मूर्ख

1950
02:23:22,560 --> 02:23:27,280
है 92 में कहा उन्होंने

1951
02:23:27,280 --> 02:23:31,320
अच्छा और मेरे को लगता है कि आपके जो वैसे विधि विषयक

1952
02:23:31,320 --> 02:23:37,320
प्रश्न है तो आप ऐसा करिए नंबर नोट करिए हमारा नंबर है

1953
02:23:37,880 --> 02:23:41,120
7408

1954
02:23:41,120 --> 02:23:45,200
74836 हा लिए है इसको

1955
02:23:45,200 --> 02:23:49,280
हा यहां पर डाल दीजिए टेलीग्राम प प्रश्न उत्तरी

1956
02:23:49,280 --> 02:23:54,080
होती है वहां डाल दीजिए डिस्ड प डाल दीजिए आपको उत्तर मिल जाएंगे हर

1957
02:23:54,080 --> 02:24:00,080
है अब हम किसी और को ले ले

1958
02:24:01,280 --> 02:24:05,280
नारायण आपकी आवाज नहीं आ रही है मधुसूदन जी

1959
02:24:05,280 --> 02:24:09,600
हम सरी का रात हो ग वसे

1960
02:24:09,600 --> 02:24:13,600
बट जैसे स्कन के लिए इन्होने बोला कि वो महादेव जी को नहीं मानते हैं

1961
02:24:13,600 --> 02:24:17,720
उसके लिए मैं कुछ पॉइंट्स बताना चाहूंगी मैं काफी टाइम स्कन से जुड़ी रही हूं एक डेढ़ साल

1962
02:24:17,720 --> 02:24:22,200
तक तो मैं यह बताना चाहूंगी कि वो लोग बाकी बिहारी जी को भी नहीं मानते

1963
02:24:22,200 --> 02:24:26,760
व लोग न लोग लड्डू गोपाल जी को भी नहीं मानते

1964
02:24:26,760 --> 02:24:30,920
महादेव जी तो बहुत अलग बात हो जाती है कृष्णा जी के ही अलल स्वरूपों

1965
02:24:30,920 --> 02:24:34,960
को नहीं मानते हैं बहुत सारे पॉइंट मेरे पास है कभी जैसे

1966
02:24:34,960 --> 02:24:39,000
डिबेट होगी बताऊंगी सारे एक्सपीरियंस अपने आइ आगा प्रेमानंद

1967
02:24:39,000 --> 02:24:44,360
जी के महाराज जी के शिष्य गण भी आएंगे तो मतलब सौभाग्य

1968
02:24:44,360 --> 02:24:48,440
होगा जाएगा उसम क्या है उसम एक बात

1969
02:24:48,440 --> 02:24:52,960
है आपको बता अपने संध नाम नहीं बता सकता मगर मेरे एक संबंधी

1970
02:24:52,960 --> 02:24:56,360
है जी भार्या

1971
02:24:56,360 --> 02:25:00,920
वोह जो है शिव भक्त है और जो मेरे संबंधी है

1972
02:25:00,920 --> 02:25:05,040
वो इसकन में वो हो चुके

1973
02:25:05,040 --> 02:25:09,400
हैं तो उनकी भार्या वो एक ट्रिप हुई कि भाई वृंदावन

1974
02:25:09,400 --> 02:25:13,440
ले चलते हैं आप लोगों को तो उन्होंने मुझे आप बीति सुनाई

1975
02:25:13,440 --> 02:25:17,560
कि जब उसमें वो ट्रिप जा रही थी बस में तो वो लोग

1976
02:25:17,560 --> 02:25:21,560
वैष्णव गीत गा रहे थे वैष्णव गीत वैष्णव गीत में कौन से गीत

1977
02:25:21,560 --> 02:25:25,640
वैष्णव गीत का मतलब तो विष्णु भगवान की भक्ति वाले गीत मगर वैष्णव गीत में

1978
02:25:25,640 --> 02:25:29,840
वो गा रहे थे केवल वो जो बंगाल की भाषा में जो इन लोगों ने लिख

1979
02:25:29,840 --> 02:25:34,400
रखे हैं कृष्ण जी के लिए जी वो वाले गीत को गा रहे थे

1980
02:25:34,400 --> 02:25:39,120
उसके बाद हम सुन भी नहीं सकते मतलब कोई और ब

1981
02:25:39,120 --> 02:25:43,200
वो उनकी जो भार है मतलब उनका उनकी बारी आई

1982
02:25:43,200 --> 02:25:47,320
कि आप भी कोई वैष्णव गीत सुनाइए तो उनको वो बड़ा अच्छा लगता था

1983
02:25:47,320 --> 02:25:51,360
जगत जाल पालम कचत कंत मालम वो बड़ा अच्छा

1984
02:25:51,360 --> 02:25:56,120
लगता था उन्होंने गाना शुरू किया बंद करवा दिया

1985
02:25:56,120 --> 02:26:00,880
विष्णु गीत मत गाइए कृष्ण गीत गाइए बंद करवा दिया

1986
02:26:00,880 --> 02:26:04,920
और वहां पर वो जो ट्रिप में ले गए थे वहां पर भी दूसरे मंदिर जाने पर

1987
02:26:04,920 --> 02:26:09,080
मतलब संकुचन आता है कि उन मंदिरों में ना जाइए पारंपरिक मंदिरों

1988
02:26:09,080 --> 02:26:11,440
में इनके ही मंदिरों में रह कर के आप जो है

1989
02:26:11,440 --> 02:26:15,880
सिमट के रह जाइए खैर

1990
02:26:15,880 --> 02:26:19,960
हमें भी मना कि जाता था वृंदावन जाना है आपको या जगन्नाथपुरी तो

1991
02:26:19,960 --> 02:26:24,200
जब वहां से ट्रिप जाएगा आप तभी उन्हीं भक्तों के साथ जा सकते हैं

1992
02:26:24,200 --> 02:26:28,400
आप खुद से नहीं जा सकते और आप बाके बिहारी जीर

1993
02:26:28,400 --> 02:26:32,520
शंकराचार्य कहीं आप शंकराचार्य के शिष्य अथवा

1994
02:26:32,520 --> 02:26:36,800
उनको मानने वालों के उसम ना आ जाए नहीं आपका वो जो

1995
02:26:36,800 --> 02:26:41,400
ट्रेनिंग प्रोग्राम चल रहा होता ना मायावा मायावादी

1996
02:26:41,400 --> 02:26:45,400
प्रोग्राम फेल हो जाएगा फर मैंने भगवत गीता को

1997
02:26:45,400 --> 02:26:49,520
वहा से स्टार्ट किया था द्वारका से वो मैंने बीच में ही छोड़ दिया उस वजह से

1998
02:26:49,520 --> 02:26:53,800
मुझे लगा नहीं कुछ तो गलत हो रहा है मतलब यह सही नहीं है बोले बाके बरी

1999
02:26:53,800 --> 02:26:57,840
जी को बाहर से भी प्रणाम नहीं करेंगे क्यों दूसरे संप्रदाय के है अरे

2000
02:26:57,840 --> 02:27:02,080
कृष्णा तो भैया सबके है मतलब कल को बिहारी

2001
02:27:02,080 --> 02:27:06,840
जीसी चीजों में ख खोलता है

2002
02:27:06,840 --> 02:27:11,680
बस आ रही है इसी बात प यार कैसे यान

2003
02:27:11,680 --> 02:27:16,480
प्रकट हो जाए तो क्या बोलेंगे हम नहीं जाे भगवान जी मिलने के लिए क्योंकि वो दूसरे संप्रदाय

2004
02:27:16,480 --> 02:27:20,600
के हमारे संप्रदाय में जब आएंगे कृष्णा जी दर्शन देने तभी हम जाए दर्शन करने

2005
02:27:20,600 --> 02:27:24,680
के लिए ऐसा बोल पाएंगे क्या तो बहुत मतलब मेरे पास जैसे लड्डू गोपाल

2006
02:27:24,680 --> 02:27:28,760
जी है सेवा होती है उनको मैं एक बार लेके गई मंदिर में तो जो

2007
02:27:28,760 --> 02:27:32,880
मतलब जो कहते हैं मैं बहुत रिस्पेक्ट करती थी कि हा इन्होने अपना सारा जीवन

2008
02:27:32,880 --> 02:27:37,240
दिया है कृष्णा जी के लिए बट लड्डू गोपाल जी को देख कर उनका एक्सप्रेशन था

2009
02:27:37,240 --> 02:27:41,360
उससे लगा कि मतलब माय गॉड मतलब अगर आप लोग घर में ये सब करने लगोगे

2010
02:27:41,360 --> 02:27:45,360
तो फिर आप मंदिर में टाइम नहीं दोगे अरे मोटो तो ये होना चाहिए ना इंसान भगवान

2011
02:27:45,360 --> 02:27:49,520
से जुड़े वो जैसे भी जुड़े वो मंदिर जाकर जुड़ रहा है चाहे वो घर से जुड़ रहा

2012
02:27:49,520 --> 02:27:53,520
है बट ये नहीं है वहां प मतलब टाम

2013
02:27:53,520 --> 02:27:57,640
इसमें मैं एक फैक्ट देना चाहूंगा वो मास खाए हुए हाथों में

2014
02:27:57,640 --> 02:28:01,800
गीता देते टाइम तो यह कहेंगे कि भाई किसी भी प्रकार से भक्ति से जुड़े जुड़े

2015
02:28:01,800 --> 02:28:06,240
तो सही क्योंकि हमें अपनी 50 रुप की गीता बेचनी है वहां पर

2016
02:28:06,240 --> 02:28:10,400
जी है ना वैल्यू डज मैटर मनी डज मैटर

2017
02:28:10,400 --> 02:28:14,560
तो हमें क्योंकि अपनी गीता बेचनी है तो वहां पर तो हम यह कहेंगे कि हम प्रचार

2018
02:28:14,560 --> 02:28:18,680
कर रहे हैं और जो है मास चिकन के हाथों में भी गीता दे देंगे

2019
02:28:18,680 --> 02:28:22,000
है ना और जब कोई व्यक्ति घर पर लड्डू गोपाल की पूजा करेगा

2020
02:28:22,000 --> 02:28:26,080
तो उससे कहेंगे ऐसा है किसी भी प्रकार से भक्ति नहीं होगी भक्ति वैसे ही

2021
02:28:26,080 --> 02:28:30,120
होगी जैसे हम कहेंगे शास्त्र जैसे कहेंगे

2022
02:28:30,120 --> 02:28:34,120
वैसे भक्ति नहीं होगी क्योंकि शास्त्र भगवत गीता को किसी के भी

2023
02:28:34,120 --> 02:28:38,160
हाथों में प्रदान करने से मना करते हैं एक पाठ का भेद होता है कि कब

2024
02:28:38,160 --> 02:28:42,560
आप भगवत गीता को उठाएं कब कैसे करें बिल्कुल इवन

2025
02:28:42,560 --> 02:28:46,560
सभी शास्त्रों में ग्रहण आदि के दिन ये कहा जाता है इस समय मंदिर

2026
02:28:46,560 --> 02:28:50,680
में ना जाए शास्त्रों को ना छुए तो ग्रहण तो बहुत बड़ी चीज है

2027
02:28:50,680 --> 02:28:54,800
मतलब बहुत तब भी पास की चीज है मास खाने वाले के हाथ में डायरेक्ट

2028
02:28:54,800 --> 02:28:58,880
आप कम से कम उससे कह दो भैया नहा आओ नहा कर के हमसे भगवत गीता

2029
02:28:58,880 --> 02:29:03,240
खरीद लेना हम जो है बाहर खड़े हैं तो खैर

2030
02:29:03,240 --> 02:29:08,000
खर कोई बात नहीं एक और सज्जन है उनको ले ले मयंक जी

2031
02:29:08,000 --> 02:29:12,000
आज विलंब हो गया है आप किसी और दिन आ जाइएगा नरेंद्र जी

2032
02:29:12,000 --> 02:29:16,200
को हम ले लेते हैं आपने बहुत प्रतीक्षा

2033
02:29:16,200 --> 02:29:21,320
की है नरेंद्र जी जय श्री राम नमस्कार सर

2034
02:29:21,320 --> 02:29:25,520
बोलिए सर एक छोटी सी शिकायत है आपसे

2035
02:29:25,520 --> 02:29:29,640
बोलिए शय आपका परिचय बता दीजिए पहले सर मैं

2036
02:29:29,640 --> 02:29:34,160
जयपुर से नरेंद्र कुमार हूं नास्तिक हूं आपके विचार सुने मैंने

2037
02:29:34,160 --> 02:29:37,040
ध्यानपूर्वक डिबेट पिछले तीन चार डिबेट मैंने

2038
02:29:37,040 --> 02:29:41,120
सुनी है तो एक चीज मैं

2039
02:29:41,120 --> 02:29:45,880
वैसे बहस करने के लिए नहीं आया वैसे एक छोटी सी बात करनी थी आपसे

2040
02:29:45,880 --> 02:29:50,880
कि देखो आप इस लेवल पर पहुंच गए हो कि हर बात का तर्क से

2041
02:29:50,880 --> 02:29:55,040
शास्त्रोक्त आप जवाब लेते हो तो मैं आपको यह कहना

2042
02:29:55,040 --> 02:29:59,040
चाहूंगा कि जैसे राम मैं एग्जांपल देक अपनी बात क्लियर करना चाहता हूं एक रामपाल का

2043
02:29:59,040 --> 02:30:03,160
शिष्य आया था आज की डिबेट में आपने उससे पूछा कि जिस मंत्र की

2044
02:30:03,160 --> 02:30:07,240
बात कर रहे हो क्या उस मंत्र को आपने खुद ने पढ़ा

2045
02:30:07,240 --> 02:30:11,240
आपका यह सवाल था सीधा सा सवाल था सिर्फ सीधे से सवाल के

2046
02:30:11,240 --> 02:30:15,320
जवाब देने में उसने 15 मिनट या 20 मिनट उसने आपके वेस्ट कि और खुद के वेस्ट

2047
02:30:15,320 --> 02:30:19,480
कि और हम लोगों को जो देखने वाले थे उनके भी वेस्ट किए हां या ना में जवाब देना

2048
02:30:19,480 --> 02:30:23,520
था सल सा सिंपल सा आंसर था और एक सेकंड से भी कम

2049
02:30:23,520 --> 02:30:27,600
टाइम में जवाब दिया जा सकता लेकिन उसका लेवल इतना कमजोर था कि इस हां

2050
02:30:27,600 --> 02:30:31,680
ना के जवाब के लिए उसने 15 20 मिनट खराब किए अपने सबके उस

2051
02:30:31,680 --> 02:30:35,800
व्यक्ति के बाद पहले तो उस व्यक्ति के काफी देर तक आपने बात की जब उसका लेवल

2052
02:30:35,800 --> 02:30:39,920
ही नहीं कि इस चैनल प आके वो बात कर सके इतना उसमें वो इस पानी

2053
02:30:39,920 --> 02:30:44,440
में इतना अभी उतरा ही नहीं उससे पहले मतलब आप हल्के लेवल के लोगों को ले लेते हो

2054
02:30:44,440 --> 02:30:48,480
दूसरा काफी देर तक उसने म शिकायत है आपकी ये शिकायत

2055
02:30:48,480 --> 02:30:52,320
है आपकी हां जी पहली नंबर बात कि भैया

2056
02:30:52,320 --> 02:30:57,120
किसी के टेलीफोन नंबर पर उसकी फोटो में उसके माथे पर

2057
02:30:57,120 --> 02:31:01,360
या फिर उसके नाम के साथ नहीं लिखा होता है कि उसका लेवल क्या है जी

2058
02:31:01,360 --> 02:31:05,560
वो तभी पता चलता है जब हम उसे ले लेते हैं और

2059
02:31:05,560 --> 02:31:09,560
कुछ देर उसके साथ बिताते हैं अब उसमें होता यह है

2060
02:31:09,560 --> 02:31:13,600
कि अगर हमने उसकी बात को रखे बिना उसको हटा दिया और वो सही

2061
02:31:13,600 --> 02:31:17,640
से बात कर रहा है मतलब वो अपनी मर्यादा को नहीं लांग

2062
02:31:17,640 --> 02:31:21,760
रहा है वो मतलब अज्ञानता अज्ञानी तो है

2063
02:31:21,760 --> 02:31:25,840
पर वो अमर्यादित आचरण नहीं कर रहा अ भद्र आचरण नहीं कर रहा है उसकी बात

2064
02:31:25,840 --> 02:31:30,040
को सुने बिना अगर हमने हटा दिया तो फिर लोग ये कहेंगे

2065
02:31:30,040 --> 02:31:34,200
देखो देखो देखो प्रश्न का टाइम आया तो उनको हटा दिया जी ये भी बात

2066
02:31:34,200 --> 02:31:38,400
आप हमारे पास एक ठोस कारण होना चाहिए किसी को हटाने का

2067
02:31:38,400 --> 02:31:42,480
और किसी का अज्ञानी सिद्ध हो जाना यह ठोस

2068
02:31:42,480 --> 02:31:46,680
कारण नहीं है क्योंकि हमारे पास जो सिद्धांत है सार्वभौम सिद्धांत

2069
02:31:46,680 --> 02:31:50,840
उनके अकॉर्डिंग उनको ना मानने वाला हर व्यक्ति ज्ञानी ही सिद्ध

2070
02:31:50,840 --> 02:31:54,880
है जी जो हमारे जो दर्शन विज्ञान व्यवहार तीनों ही

2071
02:31:54,880 --> 02:31:59,080
धरातल पर सिद्ध होने वाले जो सिद्धांत हैं उनको ना

2072
02:31:59,080 --> 02:32:03,280
मानने वाला उनका विरोध रखने वाला वह अंततोगत्वा अज्ञानी

2073
02:32:03,280 --> 02:32:07,400
ही सिद्ध होगा तो इस अज्ञानता के आधार पर हम किसी को भी तुरंत जज करके नहीं हटा

2074
02:32:07,400 --> 02:32:11,480
सकते क्योंकि कोई ना कोई यह सवाल उठा सकता है कि भाई उसने क्या किया

2075
02:32:11,480 --> 02:32:15,680
था जैसे अभी दो दिन पहले एक व्यक्ति आया था उसने

2076
02:32:15,680 --> 02:32:20,000
क्या किया कि जब मैंने कुछ पूछा तो उसने अरे तुमको यही नहीं पता है

2077
02:32:20,000 --> 02:32:24,640
तरह की वो एक्टिंग एक्टिंग करने लगा मैंने उसको बिना पूछे हटाया क्योंकि

2078
02:32:24,640 --> 02:32:28,840
हम लोग एक न्यू सेंस नहीं लेना चाहते भा जो कट टकट बात हो रही है आप बात करो यहां

2079
02:32:28,840 --> 02:32:33,600
पर वो फतिया कसने किसी को जेर करने किसी की बुराई करने

2080
02:32:33,600 --> 02:32:37,760
किसी को नीचा दिखाने किसी का मजाक उड़ाने इस सबके लिए हम लोग यहां

2081
02:32:37,760 --> 02:32:41,840
नहीं बैठे हैं है ना तो हमने उसको निर् रू

2082
02:32:41,840 --> 02:32:45,920
हमने उसको बिना हमने उसको बिना पूछे हटा दिया तो कहने का अर्थ य

2083
02:32:45,920 --> 02:32:50,200
कि जब तक किसी से सामना नहीं होता है तब तक हम यह नहीं कह सकते

2084
02:32:50,200 --> 02:32:54,280
कि कौन क्या है वो जब तक उससे बात होती है तभी पता चलता है कि

2085
02:32:54,280 --> 02:32:58,280
कौन क्या है हम लोग हम लोग अपने फॉर्म में नहीं लिखते हैं कि जो

2086
02:32:58,280 --> 02:33:02,320
अज्ञानी हो वही इस फॉर्म को भरे हम उसमें ये नहीं लिखते हैं

2087
02:33:02,320 --> 02:33:06,400
हम लोग तो लिखते हैं भैया आओ सिद्ध करो अपना पक्ष मगर अब कोई भी भर देता

2088
02:33:06,400 --> 02:33:10,520
है तो इसमें हम क्या कर सकते हैं जी जी और उनके मदीश है

2089
02:33:10,520 --> 02:33:14,600
और जो उनके मठाधीश है हम पर वीडियो बना लेंगे हमको एक

2090
02:33:14,600 --> 02:33:18,600
फोन नहीं कर पाएंगे हमने यहां तक कह दिया कि माता जी ने निष्ठा

2091
02:33:18,600 --> 02:33:23,200
पूर्वक दूध पिलाया तो हम पर वीडियो बना रहे हैं वीडियो बन रहे है लगातार

2092
02:33:23,200 --> 02:33:27,360
मगर हमको फोन नहीं कर पा रहे हैं कि इस चैनल पर हम लोग इस बीच के चैनल पर आकर

2093
02:33:27,360 --> 02:33:31,560
के हमसे चर्चा कर या कोई बीच का चैनल ढूंढा जाए

2094
02:33:31,560 --> 02:33:36,160
जब फोन फोन करेंगे उनको वो बुलाएंगे हम जाएंगे

2095
02:33:36,160 --> 02:33:40,320
और उसके बाद सुबह बोलेंगे आप 11 बजे आ जाइएगा उसके बाद फोन ही बंद

2096
02:33:40,320 --> 02:33:44,320
कर देंगे हा भाई मैं वृंदावन में

2097
02:33:44,320 --> 02:33:48,480
था उंगे बोलेंगे आप वो नहीं है यहां पर चले गए

2098
02:33:48,480 --> 02:33:52,720
जगह गया पहले दिन कॉल किया मैंने कहा हम ज्ञान चर्चा करना चाहते

2099
02:33:52,720 --> 02:33:56,720
हैं हम आए हुए हैं आपके शहर में आप बोलो कब आ

2100
02:33:56,720 --> 02:34:01,280
जाए उन्होंने कहा कल 11 बजे आप आ जाइएगा बहुत विद्वान मिल जाएंगे आपको

2101
02:34:01,280 --> 02:34:05,520
जी तो मैंने ठीक है भाई मैं एक दिन स्पेशली कल जाने के लिए रुका

2102
02:34:05,520 --> 02:34:09,920
रहा वहां पर होटल में रूम लेकर के रूम लेना पड़ा मुझे वहां पर

2103
02:34:09,920 --> 02:34:14,120
और पैसे खर्च करके मैं रुका दूसरे दिन उन्होंने कहा

2104
02:34:14,120 --> 02:34:18,240
आप जो अपने चैनल का वो भेज दो लिंक चैनल का लिंक जैसे ही भेजा

2105
02:34:18,240 --> 02:34:22,320
वो पूरी कहानी बदल गई उन्होंने कहा भैया हमारे पास

2106
02:34:22,320 --> 02:34:26,400
अभी कोई विद्वान नहीं है आप बाद में आना आप ये आना वो आना

2107
02:34:26,400 --> 02:34:30,520
तो यह हो रहा है क्यों नहीं आ रहे सामने भाई क्या दिक्कत है

2108
02:34:30,520 --> 02:34:34,600
हम खा जाते हैं क्या सामने क्यों नहीं आ रहे कबीर भगवान है

2109
02:34:34,600 --> 02:34:38,440
कबीर भगवान है जी बताइए दूसरा आपका चलिए एक और किसी

2110
02:34:38,440 --> 02:34:43,880
को ले लेंगे है नहीं सवाल उस

2111
02:34:43,880 --> 02:34:46,720
टेड

2112
02:34:46,720 --> 02:34:50,800
सवा काफी देर तक उल रहा हा नाब देने में उसने काफी देर लगा

2113
02:34:50,800 --> 02:34:54,840
दी उसके बाद जस्ट बाद जो दूसरा चेला है रामपाल

2114
02:34:54,840 --> 02:34:59,320
का वो उसका भी बाप निकला वो क्या बोल रहा था कि मैं सा

2115
02:34:59,320 --> 02:35:03,640
वेदों में प्रमाण तो है कबीर भगवान है लेकिन मैं आपको बता नहीं सकता

2116
02:35:03,640 --> 02:35:07,760
अब ये ऐसी उटपटांग बात करने वाले और डिबेट करने आ जाते हैं तो सर यही रिक्वेस्ट

2117
02:35:07,760 --> 02:35:12,480
है कि ऐसे उटपटांग बात करने हैंड टू हैंड निकाल दिया करो एक बात बताओ

2118
02:35:12,480 --> 02:35:16,560
चलो वो सब छोड़ो आप नास्तिक क्यों हो ये बताओ वो सब

2119
02:35:16,560 --> 02:35:21,360
छोड़ो मैं नास्तिक क्यों हूं हम बा

2120
02:35:21,360 --> 02:35:25,520
अच्छे से आपका सामना नहीं कर पाऊंगा ठीक है लेकिन फिर

2121
02:35:25,520 --> 02:35:30,360
भी बताता आप ऐसा करो

2122
02:35:30,360 --> 02:35:34,440
जी आप ऐसा करो जी एक सवाल ढूंढो

2123
02:35:34,440 --> 02:35:39,320
कि आप सामने खड़ी हुई तीन स्त्रियों में माता बहन और पत्नी

2124
02:35:39,320 --> 02:35:43,440
इनमें भेद करते हो कि नहीं करते हो यदि करते हो

2125
02:35:43,440 --> 02:35:47,440
तो इसका आधार क्या है आधार यही है कि मैं जिस

2126
02:35:47,440 --> 02:35:51,520
समाज से बिलोंग करता हूं हम हमारे जैसे मम्मी पापा हिंदू

2127
02:35:51,520 --> 02:35:53,480
फैमिली में हमारा पूरा समाज हिंदू फैमिली

2128
02:35:53,480 --> 02:35:57,600
से यानी कि आपका जो आधार है माता बहन और

2129
02:35:57,600 --> 02:36:01,760
पत्नी में अंतर करने का वो धर्म है जी हां जी बिल्कुल

2130
02:36:01,760 --> 02:36:06,000
वो धर्म है क और सुनिए और एक एक मिनट

2131
02:36:06,000 --> 02:36:10,080
और धर्म का आधार है ईश्वर तो माता बहन और

2132
02:36:10,080 --> 02:36:14,080
पत्नी में अंतर करने वाला व्यक्ति यह नहीं कहना चाहिए मैं ईश्वर को नहीं मानता आपको

2133
02:36:14,080 --> 02:36:18,280
यह कहना चाहिए मैं जिज्ञासु हूं मैं ढूंढ रहा हूं यह कह दोगे

2134
02:36:18,280 --> 02:36:22,280
तो चलेगा मगर खंडन कर दोगे तो फिर आपके पास सामने

2135
02:36:22,280 --> 02:36:26,520
खड़ी हुई तीन स्त्रियों में कौन माता है कौन बहन है कौन

2136
02:36:26,520 --> 02:36:30,520
पत्नी है इसका आधार नहीं रहेगा आप जो है पशु

2137
02:36:30,520 --> 02:36:34,960
हो जाओगे जो पशु होता है ना जो पशु होता है

2138
02:36:34,960 --> 02:36:39,040
मैं जो पशु होता है उसके लिए कोई माता बहन पत्नी नहीं

2139
02:36:39,040 --> 02:36:43,160
होती है तो जब हम ईश्वर का खंडन कर देते हैं मैं मानता

2140
02:36:43,160 --> 02:36:47,360
ही नहीं हूं तो हमारे पास ये नियम नहीं रह जाते हैं अगर हमें

2141
02:36:47,360 --> 02:36:51,800
सिद्ध करना है कि हम इंसान है तो मानना होगा कि हम जो है

2142
02:36:51,800 --> 02:36:55,800
वो हम जो है भगवान को ढूंढ रहे हैं उसे नकार

2143
02:36:55,800 --> 02:36:59,840
नहीं रहे कम से कम आप बताइए आप देखो आपने कहा कि तीन

2144
02:36:59,840 --> 02:37:04,680
स्त्रियों में से माता बहन पत्नी का आप अलग-अलग कैसे डिसाइड कर पाते हो

2145
02:37:04,680 --> 02:37:08,520
देखो बहुत सारी चीजें ऐसी होती है कि अंदर से हम दिल से नहीं मानते

2146
02:37:08,520 --> 02:37:12,520
उन चीजों को बावजूद उसके सिर्फ इसलिए समाज के रूल को फॉलो

2147
02:37:12,520 --> 02:37:16,560
करना होता है क्योंकि ऐसे लोगों हम इर्दगिर्द हमारे चारों और वही लोग रहते हैं

2148
02:37:16,560 --> 02:37:20,640
जो ऐसे रूल्स को मानते हैं फॉर एग्जांपल मैं मेरे मतलब आपका

2149
02:37:20,640 --> 02:37:24,800
बस चले तो आप इस नियम को तोड़ सकते हो ये ई ये हुआ

2150
02:37:24,800 --> 02:37:29,480
प्योर नास्तिक ये प्योर नास्तिक वाली बात है

2151
02:37:29,480 --> 02:37:33,720
देखिए आप आपका बस मैं पूछ रहा हूं आपका बस अगर चले

2152
02:37:33,720 --> 02:37:38,120
देखिए मैं आपका दुश्मनी दुश्मन हो के बात नहीं कर रहा एक भाई की तरह बात कर रहा हूं बड़ा भाई

2153
02:37:38,120 --> 02:37:42,360
बड़ा भाई समझ के ठीक है क्या आपका बस चलेगा तो आप बहन के साथ पत्नी

2154
02:37:42,360 --> 02:37:46,400
जैसा व्यवहार प आ जाओगे क्या नहीं जैसे अभी आप

2155
02:37:46,400 --> 02:37:51,000
नहीं नहीं नहीं आओगे इसका मतलब आप आत्मा से मानते हो ना

2156
02:37:51,000 --> 02:37:55,360
देखो मैं इस बात को मानता हूं कि जहां हम जिस सोसाइटी में रह रहे हैं

2157
02:37:55,360 --> 02:37:59,960
कुछ ना कुछ रूल्स होने चाहिए ताकि वहां की शांति व्यवस्था और बड़ मेरे भाई

2158
02:37:59,960 --> 02:38:04,200
आप अगर विदेश चले जाओगे जहां पर पॉन मूवीज का संसार है पूरा

2159
02:38:04,200 --> 02:38:08,360
संसार व्यभिचार का संसार है वहां पर बहन के साथ

2160
02:38:08,360 --> 02:38:12,440
इस नियम को तोड़ दोगे बिल्कुल नहीं

2161
02:38:12,440 --> 02:38:16,440
नहीं ना इसका मतलब ये नियम आपने आत्मा से माना है

2162
02:38:16,440 --> 02:38:20,720
बिल्कुल माना है ना ठीक है बिल्कुल खोज

2163
02:38:20,720 --> 02:38:23,680
करो धर्म ना पशु भी समाना शास्त्रों

2164
02:38:23,680 --> 02:38:27,680
में इसीलिए कहा गया इसकी आप खोज करोगे धीरे धीरे देखना आप एक दिन दोबारा

2165
02:38:27,680 --> 02:38:32,440
आओ फिर आओ हमारी क्लासेस में आओ ईश्वर कैसे सिद्ध होता है और

2166
02:38:32,440 --> 02:38:36,720
श्वर आज तक जो लोग जैसे बागेश्वर के बारे में आप क्या

2167
02:38:36,720 --> 02:38:40,720
विचार रखते व सच में चमत्कार करते हैं या फिर वो एक झूठ है आपका क्या मत है इसके बारे

2168
02:38:40,720 --> 02:38:45,520
में देखिए

2169
02:38:45,520 --> 02:38:49,680
य कोई भी विद्या जब तक हमें प्राप्त नहीं होती

2170
02:38:49,680 --> 02:38:53,680
हमारे लिए वो चमत्कार है जब तक हम हवाई जहाज नहीं बना सकते हैं

2171
02:38:53,680 --> 02:38:57,800
ना लोहा लेके तब तक हमारे लिए राइट बंधु जो है चमत्कारी

2172
02:38:57,800 --> 02:39:02,200
पुरुष है मगर चमत्कार के आधार पर हम भगवान को सिद्ध नहीं

2173
02:39:02,200 --> 02:39:06,520
करते हम भगवान के लिए तर्क नहीं देते कि देखो उसने ये करके दिखा दिया

2174
02:39:06,520 --> 02:39:10,760
हमने आज तक दिया क्या हमारे चैनल प जैसे ये लोग कहते हैं

2175
02:39:10,760 --> 02:39:14,880
जैसे ये लोग कहते हैं कबीर पं का

2176
02:39:14,880 --> 02:39:19,000
एकन या आप बोल लीजिए ऐसी विद्या हो सकती

2177
02:39:19,000 --> 02:39:23,200
है हमने नहीं जाना हमने समीक्षा नहीं की कि बागेश्वर वालों

2178
02:39:23,200 --> 02:39:27,360
के पास ऐसी विद्या है कि नहीं ऐसी विद्या अस्तित्व में है

2179
02:39:27,360 --> 02:39:31,720
हो सकती हैं अगर कोई सिद्धि प्राप्त करना चाहे इस लेवल तक की

2180
02:39:31,720 --> 02:39:35,840
हो सकती है आप ही देखो उसी न्यूज चैनल पर जिस पर बागेश्वर वाले

2181
02:39:35,840 --> 02:39:39,600
गए थे उस पर माइंड रीडिंग वाले दूसरे लोग आए थे ना

2182
02:39:39,600 --> 02:39:43,760
जी है ना उन्होंने काफी हद तक उस विद्या को टच किया

2183
02:39:43,760 --> 02:39:48,480
हुआ था माइंड रीडर्स ने किया हुआ था ना

2184
02:39:48,480 --> 02:39:52,520
तो अब उससे और आगे की स्थिति हो सकती है हमने समीक्षा नहीं

2185
02:39:52,520 --> 02:39:56,840
की कि बागेश्वर वालों के पास और ना ही हमें समीक्षा करनी है

2186
02:39:56,840 --> 02:40:00,920
हमें समीक्षा करने का तब वो आता है जब

2187
02:40:00,920 --> 02:40:05,000
धर्म की संस्था में बहन के साथ पत्नी जैसा

2188
02:40:05,000 --> 02:40:09,160
व्यवहार ना करने की मर्यादा को तोड़ने लग जाए जब

2189
02:40:09,160 --> 02:40:13,440
कोई तो हम लोग बीच में आ जाते हैं जो ये

2190
02:40:13,440 --> 02:40:17,480
आज दुनिया में संसार में जब तक कोई माता को

2191
02:40:17,480 --> 02:40:21,520
माता की नजरों से और बहन को बहन की नजरों से देख रहा

2192
02:40:21,520 --> 02:40:25,680
है इसका अर्थ है कि दुनिया में धर्म है

2193
02:40:25,680 --> 02:40:29,920
जी ठीक है तो अब नींद आ रही है सभी को आप आए अच्छा लगा काफी

2194
02:40:29,920 --> 02:40:33,920
देर हो गई ओके जी नमस्कार करते अच्छा

2195
02:40:33,920 --> 02:40:38,040
लगा आपसे बात करके और आप क्लासेस जवाइन करिए हो हो सके तो आपके

2196
02:40:38,040 --> 02:40:42,440
और सारे प्रश्नों का समाधान ये नोट कर लीजिए इसमें क्लासेस में आप आ सकते हैं

2197
02:40:42,440 --> 02:40:44,640
740

2198
02:40:44,640 --> 02:40:48,640
8306 एक सेकंड सर आप दोबारा बोलोगे आराम से ये आ रहा

2199
02:40:48,640 --> 02:40:52,640
है स्क्रीन प लास्ट का दोबारा देख लीजिएगा लास्ट का

2200
02:40:52,640 --> 02:40:54,600
लाइव रहेगा ना ये तो दोबारा देख लीजिएगा

2201
02:40:54,600 --> 02:40:58,760
लास्ट में आपका सीन है बाकी सर मेरी वजह से काफी लोग नास्तिक बन चुके हैं मेरे इर्दगिर्द

2202
02:40:58,760 --> 02:41:02,880
के लोग काफी काफी लोग अब आप आस्तिक बन जाओगे

2203
02:41:02,880 --> 02:41:07,080
तो वो भी आस्तिक बन जाएंगे नहीं सर मैंने उनको लॉजिक करना इतना ज्यादा

2204
02:41:07,080 --> 02:41:11,240
सिखा दिया है कि वो मजबूत ठोस प्रमाण के बिना कभी आस्तिक नहीं बनेंगे वो कम

2205
02:41:11,240 --> 02:41:15,480
से कम 50 50 से प्रमाण देते हैं बात ये है देखिए कभी-कभी

2206
02:41:15,480 --> 02:41:19,680
ऐसा भी होता है कि जैसे किसी ने अगर त्रिया चरित्र

2207
02:41:19,680 --> 02:41:23,840
मातृ शक्ति के साथ विवाह कर लिया उसको बाद में पता लग

2208
02:41:23,840 --> 02:41:27,840
भी गया कि त्रिया चरित्र शक हो रहा है उसको पता चल रहा है प्रमाण मिल रहे है

2209
02:41:27,840 --> 02:41:31,880
फिर भी वह अपने निर्णय की रक्षा कर रहा है

2210
02:41:31,880 --> 02:41:36,000
वो तो उसकी ही रहा है जैसे जैसे रा जैसे

2211
02:41:36,000 --> 02:41:40,000
कई बार ऐसा होगा कि रामपाल जी या इकोन के कई लोग ऐसे होंगे जो हमारे तर्क और

2212
02:41:40,000 --> 02:41:44,000
प्रमाण की बात पर कहीं कहीं उनके अंदर अलग जगग कि कहीं तो कुछ

2213
02:41:44,000 --> 02:41:48,240
गलत हो रहा है मगर मगर फिर क्या होगा कि

2214
02:41:48,240 --> 02:41:52,880
हमने इतने लोग से ऐसा कहा अब मैं ही इस सिद्धांत को कैसे छोड़ दूं

2215
02:41:52,880 --> 02:41:56,960
इस दिक्कत के कारण व सारा जीवन उसमें बिताएंगे इसीलिए कहा जाता

2216
02:41:56,960 --> 02:42:01,280
है इट्स बेटर टू केयर देन क्यर आप

2217
02:42:01,280 --> 02:42:05,320
जो है मामला बिगड़ने से पहले जितना बचा सकते हैं बचाइए क्योंकि बिगड़ने

2218
02:42:05,320 --> 02:42:09,320
के बाद अगर उसको हमने तर्क और प्रमाण से सिद्ध भी कर दिया

2219
02:42:09,320 --> 02:42:09,880
तो आखिर

2220
02:42:09,880 --> 02:42:14,200
में उसके पास यह रह जाएगा कि लोग मुझसे क्या कहेंगे मैं तो आज तक इसकन के लिए प्रचार

2221
02:42:14,200 --> 02:42:18,320
करता था और अब मैं जाकर के इसकन की बुराई कर रहा हूं नहीं नहीं मैं

2222
02:42:18,320 --> 02:42:22,440
तो अब इसी जीवन जिगा ऐसा हो जाता

2223
02:42:22,440 --> 02:42:26,440
जो नास्तिक बने है उम से तीन चार तो पुजारी थे और उन्होने

2224
02:42:26,440 --> 02:42:30,760
मा वगर किसी दिन आप फम भर दीजिएगा सामना करिएगा

2225
02:42:30,760 --> 02:42:35,080
हम लोग किसी दिन आपके नास्तिक पन से भिड़ेंगे है ना जी जरूर मोस्ट

2226
02:42:35,080 --> 02:42:39,120
वेलकम जय श्री राम नहीं अभी आप यह कह रहे थे ना कि मैं आपसे

2227
02:42:39,120 --> 02:42:43,160
नहीं भिड़ सकता ऐसा आपने कहा था अभी शुरुआत में अभी बिड़ने के

2228
02:42:43,160 --> 02:42:48,120
मूड में नहीं फिर कभी जरूर बूंगा जी ठीक है

2229
02:42:48,120 --> 02:42:54,000
श

2230
02:42:54,000 --> 02:42:58,520
चलिए सभी को जय श्री राम आज की लाइव स्ट्रीम में आप लोग जुड़े अच्छा लगा

2231
02:42:58,520 --> 02:43:02,520
जय श्री राम
