1
00:00:02,640 --> 00:00:07,880
जी सभी को जय श्री

2
00:00:07,880 --> 00:00:11,920
राम आप लोगों ने प्रतीक्षा की है काफी और हम लोग

3
00:00:11,920 --> 00:00:15,920
अक्सर ऐसा होता है अधिकांश हम लोग लेट हो जाते हैं अपनी लाइव को चालू करने

4
00:00:15,920 --> 00:00:19,920
में अभी का कारण तो यही था कि कुछ नेटवर्क इशू

5
00:00:19,920 --> 00:00:24,120
टेक्निकल इशू आ रहे थे जिसके कारण थोड़ा सा टाइम लगा

6
00:00:24,120 --> 00:00:28,480
सामान्य स्थिति तक पहुंचने में तो हमारे साथ में रोहित जी

7
00:00:28,480 --> 00:00:32,720
है ब्रह्मा कुमारी प्रजापति ब्रह्मा

8
00:00:32,720 --> 00:00:36,720
कुमारी द्वारा प्रतिपादित जो आध्यात्मिक सिद्धांत है

9
00:00:36,720 --> 00:00:41,120
उनको स्वीकार करते हुए उसके फॉलोअर है

10
00:00:41,120 --> 00:00:45,320
उन सिद्धांतों को ये मानते हैं तो जी अपना थोड़ा सा आप हमारे

11
00:00:45,320 --> 00:00:49,960
ये बता दीजिए आपका परिचय देते हुए कि आप ब्रह्मा कुमारी में कहां से जुड़े हुए हैं

12
00:00:49,960 --> 00:00:54,120
जी हित जी ब्रह्मा

13
00:00:54,120 --> 00:00:58,320
कुमारी में है आपके

14
00:00:58,320 --> 00:01:02,520
रोशनी बहुत कम आ रही है अगर हो सके तो ऐसे बैठे कि रोशनी आपके

15
00:01:02,520 --> 00:01:07,400
चेहरे पर आए अभी अंधेरा है आपके चेहरे पर अब ठीक

16
00:01:07,400 --> 00:01:12,240
है ठीक है चल जाएगा काम बताइए

17
00:01:12,240 --> 00:01:16,600
दे दिया आपने परिचय तो दे ही दिया है ब्रह्मा कुमारी

18
00:01:16,600 --> 00:01:20,640
में कहां से जुड़े हुए हैं आप माउंट आबू

19
00:01:20,640 --> 00:01:23,320
से ही नहीं नहीं

20
00:01:23,320 --> 00:01:27,800
माउंट आबू से तो जुड़े हैं अभी आप रहते कहां है

21
00:01:27,800 --> 00:01:31,920
हरियाणा में तो जो रूटीन प्रैक्टिस करते हैं माउंट आबू जा जा

22
00:01:31,920 --> 00:01:36,360
कर के करते हैं कि आपके हरियाणा में ही कुछ होगा

23
00:01:36,360 --> 00:01:40,640
नहीं ऑनलाइन भी है हरियाणा में भी है तो हरियाणा

24
00:01:40,640 --> 00:01:44,640
में कोई पर्टिकुलर सेंटर है आप डायरेक्ट मतलब जब आपने ब्रह्मा कुमारी

25
00:01:44,640 --> 00:01:49,520
से जुड़े तो डायरेक्ट माउंट आबू से जुड़े या उनके किसी जो रिप्रेजेंटेटिव

26
00:01:49,520 --> 00:01:53,840
सेंटर होता है या कोई व्यक्ति होता है उसने आपको ब्रह्मा कुमारी से

27
00:01:53,840 --> 00:01:57,960
जुड़वा नहीं खुद खुद जांच की वो

28
00:01:57,960 --> 00:02:02,440
जांच कहां से की आपने ऑनलाइन ही उनके अथोरा

29
00:02:02,440 --> 00:02:06,560
कंटेंट है ना जो कहां पर नाम बता दीजिए

30
00:02:06,560 --> 00:02:10,720
उस चैनल का वेबसाइट पर उनकी मेन वेबसाइट है

31
00:02:10,720 --> 00:02:14,720
जो उस पर नहीं आपने ब्रह्मा कुमारी

32
00:02:14,720 --> 00:02:19,520
वेबसाइट को चेक किया खुद हा हा

33
00:02:19,520 --> 00:02:24,240
मतलब आपके मन में ब्रह्मा कुमारी शब्द जो है वो अपने आप आ गया था

34
00:02:24,240 --> 00:02:28,960
कि मुझे ब्रह्मा कुमारी को सुनना है ब्रह्मा कुमारी को जानना है ऐसा कुछ था

35
00:02:28,960 --> 00:02:32,960
कुछ तो ऐसा हुआ होगा जिसकी वजह से आपका रुझान हुआ वो क्या था कौन

36
00:02:32,960 --> 00:02:37,080
मेडिएटर था मा भगवत

37
00:02:37,080 --> 00:02:38,720
गीता प्रते टाइम

38
00:02:38,720 --> 00:02:43,200
आ गया था ब्रह्मा कुमारी का नाम प्रजापति ब्रह्मा कुमारी

39
00:02:43,200 --> 00:02:48,160
विश्वविद्यालय की वेबसाइट खोले हां

40
00:02:48,160 --> 00:02:53,200
हा आपको नहीं लगता आपकी बातें यहां पर थोड़ी सी अव्यावहारिक लग रही

41
00:02:53,200 --> 00:02:57,280
है क्यों किस वजह से आप यह कह रहे

42
00:02:57,280 --> 00:03:01,680
हैं कि जो ब्रह्मा कुमारी नाम की जो संस्था है भ गीता पढ़ते समय इसकी जानकारी

43
00:03:01,680 --> 00:03:05,880
आपके दिमाग में आई और आपने उसकी वेबसाइट को सर्च करना चालू

44
00:03:05,880 --> 00:03:10,040
किया य आप सच बोल रहे य पर हुआ

45
00:03:10,040 --> 00:03:14,160
था यह सब य पर देख के किया था मैंने य पर क्या

46
00:03:14,160 --> 00:03:18,720
देखा था आपने यही जो भी य कंटेंट

47
00:03:18,720 --> 00:03:23,200
बता रहे हैं जो भी चीज है तो कुछ अरे तो

48
00:03:23,200 --> 00:03:27,400
अरे कुछ तो चैनल का नाम होगा उसमें कोई तो वक्ता होगा जिससे आप प्रभावित हुए होंगे

49
00:03:27,400 --> 00:03:32,920
जिसको आपने सुना होगा

50
00:03:32,920 --> 00:03:36,920
सभी है अरे तो एक का नाम बताइए ना सभी

51
00:03:36,920 --> 00:03:42,920
है उसमें तो बहुत सारे लोग हैं तो आप सबको सुनते हैं सबको सुनते थे क्याय

52
00:03:43,800 --> 00:03:47,920
पर नहीं खुद भी तो अवेलेबल है ना

53
00:03:47,920 --> 00:03:52,320
चीज मेरे भाई मैं आपसे पूछ रहा हूं कि आप ब्रह्मा कुमारी

54
00:03:52,320 --> 00:03:56,640
के बारे में आपका रुझान हुआ किसको सुनकर हुआ कौन से कंटेंट

55
00:03:56,640 --> 00:04:00,640
को देखकर हुआ हां उनका जो मेन कंटेंट है

56
00:04:00,640 --> 00:04:04,760
जो सेवन डेज का कोर्स है वो कहां से मिला आपको सेवन

57
00:04:04,760 --> 00:04:09,040
डेज का कोर्स वो ऑनलाइन नहीं मिला

58
00:04:09,040 --> 00:04:13,720
आप ऑनलाइन आपने कोई चैनल देखा वो थोड़ा प्रैक्टिकली बताइए

59
00:04:13,720 --> 00:04:17,880
कि क्या देखा आपने ऐसे हमको थोड़ा समझाई है कि आपने

60
00:04:17,880 --> 00:04:22,320
कोई चैनल देखा उसमें वो ये बात कह रहे थे तो मुझे ये बात क्लिक कर गई फिर मैं

61
00:04:22,320 --> 00:04:26,360
उनके ही उनके द्वारा मैंने संपर्क किया तो वहां से मुझे से सेन डेज का ऑनलाइन

62
00:04:26,360 --> 00:04:30,840
कोर्स मिला आप इस तरह से खोल के थोड़ा सा खुल करके बताइए

63
00:04:30,840 --> 00:04:34,880
भाई हां यही जो उनका

64
00:04:34,880 --> 00:04:39,200
ये चैनल है नाम उस नाम याद नहीं आपको

65
00:04:39,200 --> 00:04:43,280
पीसफुल माइंड जो चैनल है अच्छा पीसफुल माइंड

66
00:04:43,280 --> 00:04:47,880
वो चैनल आपने फॉलो किया फिर उनसे ही आपने संपर्क किया

67
00:04:47,880 --> 00:04:48,380
और

68
00:04:48,160 --> 00:04:53,080
फिर उनसे ही आपको सेवन डेज का कोर्स

69
00:04:53,080 --> 00:04:57,680
मिला हां जी हां हां

70
00:04:57,680 --> 00:05:01,840
तो यह जो हां हां ठीक है तो

71
00:05:01,840 --> 00:05:07,240
यह जो आपको सेवन डेज का ऑनलाइन कोर्स मिला था वो

72
00:05:07,240 --> 00:05:11,400
वो डायरेक्ट माउंट आबू से संचालित हो रहा था ऑनलाइन कोर्स या आपके

73
00:05:11,400 --> 00:05:14,920
हरियाणा का कोई सेंटर

74
00:05:14,920 --> 00:05:19,000
था वो डायरेक्ट माउंट आबू से अच्छा डायरेक्ट

75
00:05:19,000 --> 00:05:23,160
माउंट आबू से और उसमें लीड कौन कर रहे

76
00:05:23,160 --> 00:05:27,200
थे लीड तो उसमें कुछ वो नहीं है हम अपने

77
00:05:27,200 --> 00:05:31,360
आप भी जांच कर सकते हैं ऐसा नहीं है सेन डेज सेवन डेज

78
00:05:31,360 --> 00:05:36,120
ऑनलाइन में प्रोग्राम में कौन वक्ता था जो आपको ज्ञान देता

79
00:05:36,120 --> 00:05:40,480
था कोई नहीं मैंने खुद ही जासा है उनकी चीजों को

80
00:05:40,480 --> 00:05:44,680
सेवन डेज ऑनलाइन कोर्स में कोई वक्ता होता है ना जो बोलता है आपको

81
00:05:44,680 --> 00:05:49,480
पढ़ाता है मेडिटेशन कोर्स जो होता है सेवन डेज का

82
00:05:49,480 --> 00:05:53,600
कोई बताता है ना आपको आपने का कोर्स लिया

83
00:05:53,600 --> 00:05:57,800
है ना हम बताते हैं बहुत बताते हैं मैं ये नहीं कह रहा

84
00:05:57,800 --> 00:06:01,440
100 लोग बताते हैं एक साथ

85
00:06:01,440 --> 00:06:03,360
कैसी बातें कर रहे हो आप

86
00:06:03,360 --> 00:06:07,360
पीडीएफ भी तो अवेलेबल है ना भैया जी य भी आपने से डेज का कोर्स

87
00:06:07,360 --> 00:06:11,520
किया था कि नहीं किया था हां किया है उसमें

88
00:06:11,520 --> 00:06:14,040
वक्ता कौन

89
00:06:14,040 --> 00:06:18,240
था वक्ता ऑनलाइन वैसे नहीं किया जैसे आप सोच

90
00:06:18,240 --> 00:06:22,400
रहे हो कि किसी ने सिखाया पढ़ाया या देखिए

91
00:06:22,400 --> 00:06:26,960
सेन डेज ऑनलाइन कोर्स जो हमें मालूम है वो यह है कि एक मीटिंग ऑर्गेनाइज

92
00:06:26,960 --> 00:06:31,160
होती है गल इत्यादि पर ग मीट पर या इस तरह के अन्य

93
00:06:31,160 --> 00:06:35,240
पोर्टल्स पर वहां पर कोई व्यक्ति टीचर की तरह बैठा होता है और

94
00:06:35,240 --> 00:06:39,280
वहां पर जवाइन करने वाले उसको सुनते हैं यह कोर्स नहीं था

95
00:06:39,280 --> 00:06:43,360
आपका नहीं ऐसा नहीं था तो आपका कैसा कोर्स

96
00:06:43,360 --> 00:06:47,560
था वो हमें समझाए वही पीडीएफ वाला

97
00:06:47,560 --> 00:06:51,640
था पीडीएफ कंटेंट होता उनकी वेबसाइट पर जो कंटेंट अवेलेबल

98
00:06:51,640 --> 00:06:55,640
है जो जो दे रखा उन्होंने जो भी नॉलेज है

99
00:06:55,640 --> 00:07:00,080
उस पीडीएफ में लिखा था सेन डेज कोर्स है हा लिखा

100
00:07:00,080 --> 00:07:05,400
था वो पीडीएफ है अभी भी आपके पास

101
00:07:05,400 --> 00:07:09,600
हां है वो जो पीडीएफ को लिखने

102
00:07:09,600 --> 00:07:14,840
वाले हैं जिसने वो पीडीएफ बनाई थी उसके लेखक कौन

103
00:07:14,840 --> 00:07:18,360
है ये ब्रह्मा कुमारी विश्वविद्यालय के ही

104
00:07:18,360 --> 00:07:22,600
है लेख ब्रह्मा कुमारीज के ही है मगर उसमें लेखक का नाम होता है ना

105
00:07:22,600 --> 00:07:27,040
हम हम वो क्या है नाम

106
00:07:27,040 --> 00:07:31,320
कोई भी बुक या पीडीएफ जब लिखी जाती है तो उसमें व

107
00:07:31,320 --> 00:07:35,880
किसी भी संस्था से हो मगर उसमें जिसने उसको लिखा है पार्टिकुलरली उसका नाम होता है

108
00:07:35,880 --> 00:07:40,760
तो आपने किसकी पीडीएफ पढ़ी

109
00:07:40,760 --> 00:07:45,120
थी यही जो नॉलेज अवेलेबल है जो दी है इन्होंने जो भी नॉलेज

110
00:07:45,120 --> 00:07:51,120
है पीडीएफ किसने लिखी थी वो रचयिता कौन था उस पीडीएफ

111
00:07:51,320 --> 00:07:55,760
का यह तो नॉलेज है यह तो

112
00:07:55,760 --> 00:07:59,800
ईश्वरीय नॉलेज है नहीं नहीं उसको

113
00:07:59,800 --> 00:08:04,440
नॉलेज को उस पीडीएफ फॉर्म में किसने टाइप किया वो कौन था

114
00:08:04,440 --> 00:08:08,480
अच्छा वो वो जो जि

115
00:08:08,480 --> 00:08:12,760
टाइप किया माउंट आबू से ही माउंट ताबू से कौन व्यक्ति

116
00:08:12,760 --> 00:08:16,880
था आपको नाम नहीं पता है नहीं

117
00:08:16,880 --> 00:08:20,960
मतलब आपका यह कहने का मतलब है कि मैं ब्रह्मा कुमारी को सुनता हूं पर उसके

118
00:08:20,960 --> 00:08:26,960
कुस किस व्यक्ति को सुनता हूं यह मुझे नहीं पता

119
00:08:27,640 --> 00:08:31,600
है बताइए भाई

120
00:08:31,600 --> 00:08:35,760
साहब किस व्यक्ति के ऊपर डिपेंड थोड़ी हो सकता है अगर

121
00:08:35,760 --> 00:08:39,840
हम डिपेंड की बात नहीं कर रहा हूं मैं एक एक स्टेप आगे बढ़ रहा हूं अभी

122
00:08:39,840 --> 00:08:43,840
मैं क्लियर कर लूं आपको यह नहीं पता है कि आप किसको सुनते हैं

123
00:08:43,840 --> 00:08:47,920
ब्रह्मा कुमारी के कई सारे वक्ता है आप उनमें से किसको सुनते

124
00:08:47,920 --> 00:08:51,600
हैं यह आपको नहीं पता

125
00:08:51,600 --> 00:08:56,400
है वैसे पर्टिकुलर में किसी को नहीं सुनता हूं

126
00:08:56,400 --> 00:09:00,520
आपने सारों को सुना है आज तक हां सभी को सुनता

127
00:09:00,520 --> 00:09:05,680
हूं सभी को सुनते हैं उनमें से कुछ के नाम पता

128
00:09:05,680 --> 00:09:10,600
है हां

129
00:09:10,600 --> 00:09:14,920
बताइए जैसे बी के सूरज भाई जी है हां

130
00:09:14,920 --> 00:09:19,440
उनको क्या नाम आया पहला सूरज ब

131
00:09:19,440 --> 00:09:23,680
के सूरज सूरज बस इतना ही

132
00:09:23,680 --> 00:09:28,160
है अभी आपने कुछ आगे बोला बी के सूरज भाई जी ऐसा कुछ

133
00:09:28,160 --> 00:09:33,560
हां बी के सूरज जी बोला है भाई अच्छा

134
00:09:33,560 --> 00:09:37,800
और बस इन्हीं का ही है और ज्यादा इतना नहीं सु बहु

135
00:09:37,800 --> 00:09:41,960
को सुना है ना एक केवल उम से एक का ही नाम मालूम है

136
00:09:41,960 --> 00:09:47,800
हा एक नाम इतना न

137
00:09:47,800 --> 00:09:53,120
नहीं यह है क्या बी के सूरज भाई जी

138
00:09:53,120 --> 00:09:57,880
हा इनको सुनते ठीक है

139
00:09:57,880 --> 00:10:01,920
ठीक है तो मैं सबसे पहले

140
00:10:01,920 --> 00:10:04,480
पूछूंगा

141
00:10:04,480 --> 00:10:09,440
कि ब्रह्मा कुमारी के अनुसार

142
00:10:09,440 --> 00:10:13,720
जो ईश्वर है मनुष्य का अंतिम विकल्प है मतलब ईश्वर ही

143
00:10:13,720 --> 00:10:19,720
उसकी अंतिम डेस्टिनेशन है यह किस प्रकार प्रूव होता

144
00:10:20,760 --> 00:10:26,760
है ईश्वर ही अंतिम डेस्टिनेशन है जीवन

145
00:10:27,960 --> 00:10:32,120
में पूरा पूरा क्वे में इस क्वेश्चन

146
00:10:32,120 --> 00:10:36,320
में दो क्वेश्चन छुपे हैं एक कि क्या ब्रह्मा कुमारी के द्वारा

147
00:10:36,320 --> 00:10:40,320
प्रतिपादित होने वाला जो सिद्धांत है उसके द्वारा

148
00:10:40,320 --> 00:10:45,200
ईश्वर का अस्तित्व सिद्ध होता है और यदि सिद्ध होता है

149
00:10:45,200 --> 00:10:49,840
तो क्या वह इस तरह से इस रूप में सिद्ध हो पाता है

150
00:10:49,840 --> 00:10:54,200
जो जिसको मनुष्य को प्राप्त करना ही मनुष्य का अंतिम विकल्प

151
00:10:54,200 --> 00:11:00,200
हो मतलब उसको स्वीकार किए बिना मनुष्य का काम ना चले

152
00:11:01,160 --> 00:11:07,160
नहीं ऐसा तो नहीं है ऐसा नहीं

153
00:11:07,960 --> 00:11:12,280
है हां मतलब ब्रह्मा कुमारी

154
00:11:12,280 --> 00:11:16,480
इसके द्वारा ईश्वर सिद्धि नहीं हो सकती ईश्वर है यह सिद्ध

155
00:11:16,480 --> 00:11:22,480
नहीं हो सकता हो सकता है वो

156
00:11:22,920 --> 00:11:27,160
बताइए वो तो डिपेंड करता है ना हम किस रूप में देखते हैं उस

157
00:11:27,160 --> 00:11:31,600
चीजों को अरे मेरे भाई एक नास्तिक आपके सामने बैठा है

158
00:11:31,600 --> 00:11:36,640
उसके सामने ईश्वर को सिद्ध करिए ईश्वर

159
00:11:36,640 --> 00:11:40,480
है

160
00:11:40,480 --> 00:11:44,720
बताइए यह तो हम नॉलेज के साथ ही देख सकेंगे ना फिर पहले

161
00:11:44,720 --> 00:11:48,920
उनकी नॉलेज को समझना होगा तभी समझ में आ सकेगा यह चीज

162
00:11:48,920 --> 00:11:52,920
मतलब आपसे जब कोई यह कहेगा जब देखिए धर्म क्या

163
00:11:52,920 --> 00:11:57,240
है पहले इसको समझ लीजिए धर्म है सच्चिदानंद स्वरूप

164
00:11:57,240 --> 00:12:01,320
परमेश्वर ईश्वर को प्राप्त कराने वाली विधा विधि का नाम

165
00:12:01,320 --> 00:12:05,720
धर्म है और व विधि है क्या झूठ मत बोलो सच

166
00:12:05,720 --> 00:12:10,120
बोलो यह मत करो यह करो यह धर्म है ठीक है

167
00:12:10,120 --> 00:12:14,280
अच्छाई और बुराई में अंतर करने वाले नियमों का नाम धर्म

168
00:12:14,280 --> 00:12:18,520
है तो जब कोई व्यक्ति अब यह धर्म है क्यों इसका अस्तित्व

169
00:12:18,520 --> 00:12:22,680
क्यों है क्योंकि यह ईश्वर की प्राप्ति करवाता है ठीक है अब

170
00:12:22,680 --> 00:12:26,800
जब कोई व्यक्ति को हम वादित करते हैं कि अपनी बहन से माता से विवाह मत

171
00:12:26,800 --> 00:12:31,200
करो उ उन पर कुदृष्टि म डालो झूठ मत बोलो

172
00:12:31,200 --> 00:12:35,640
हम जब ये किसी को सिखाते हैं तो एक नास्तिक कहेगा

173
00:12:35,640 --> 00:12:40,200
क्यों क्यों ना करें तो हम कहेंगे कि भाई ईश्वर

174
00:12:40,200 --> 00:12:44,640
ईश्वर ने ये कहा है कि ये मत करो ठीक है अगर ईश्वर तक पहुंचना है

175
00:12:44,640 --> 00:12:49,880
तो आपको ऐसा करना है अब वो ये कहेगा ईश्वर है ही

176
00:12:49,880 --> 00:12:54,120
नहीं ईश्वर है मुझे सिद्ध तो करो तो इस बारे

177
00:12:54,120 --> 00:12:55,640
में अगर कोई

178
00:12:55,640 --> 00:13:00,040
संस्था ऐसी है जो यह कह रही है कि हम धर्म का प्रचार कर रहे हैं

179
00:13:00,040 --> 00:13:04,120
धार्मिक है तो उस संस्था के द्वारा सबसे पहले ईश्वर

180
00:13:04,120 --> 00:13:08,840
की सिद्धि होना आवश्यक है तभी तो धर्म

181
00:13:08,840 --> 00:13:13,120
तभी तो व धर्म के प्रचारक कहलाएंगे जब ईश्वर की सिद्धि ही नहीं है तो कोई

182
00:13:13,120 --> 00:13:17,240
प्राप्त क्यों करेगा उसको तो क्या क्या

183
00:13:17,240 --> 00:13:21,520
ब्रह्मा कुमारी के द्वारा प्रतिपादित होने वाले जो सिद्धांत है जो आपको मिले

184
00:13:21,520 --> 00:13:25,800
हैं सूरज जी के द्वारा उनके अनुसार ईश्वर सिद्ध

185
00:13:25,800 --> 00:13:30,800
होता है कि नहीं कि ईश्वर है

186
00:13:30,800 --> 00:13:36,680
हां यह सिद्ध होता है वो बताइए कैसे होता

187
00:13:36,680 --> 00:13:41,400
है आप ईश्वर के कौन से स्वरूप को मानते हैं

188
00:13:41,400 --> 00:13:45,520
नास्तिक जो आपके सामने मान के चलिए अभी नास्तिक बैठा है

189
00:13:45,520 --> 00:13:49,680
किसी भी स्वरूप को आप छोड़ दीजिए अभी तो उसको मजबूर करिए कि वह

190
00:13:49,680 --> 00:13:54,040
ईश्वर को स्वीकार कर ले जिससे कि वह धर्म की सीमा में आ जाए मर्यादित

191
00:13:54,040 --> 00:13:59,320
हो जाए

192
00:13:59,320 --> 00:14:03,680
इसका मतलब हम वह मान सकते हैं कि वह

193
00:14:03,680 --> 00:14:09,160
दोनों रूप में से निकारी रूप को मानता है इसका मतलब

194
00:14:09,160 --> 00:14:15,160
नास्ति अरे मेरे भाई पहले ईश्वर का अस्तित्व तो सिद्ध

195
00:14:17,760 --> 00:14:22,200
करिए अब यह प्रत्यक्ष थोड़ी है मैं आपसे कह

196
00:14:22,200 --> 00:14:26,200
जी क्या बोल रहे हैं जी

197
00:14:26,200 --> 00:14:30,440
बोलिए प्रत्यक्ष थोड़ी है बक में आपके सामने प्रत्यक्ष

198
00:14:30,440 --> 00:14:35,040
कर दूं यह हो जाएगा ये लो मेरे भाई

199
00:14:35,040 --> 00:14:39,160
अगर हम धर्म के प्रचारक हैं तो हमें धर्म की स्थापना

200
00:14:39,160 --> 00:14:43,720
के लिए ईश्वर की स्थापना को सिद्ध करना पड़ेगा

201
00:14:43,720 --> 00:14:49,600
ना तो ईश्वर की स्थापना

202
00:14:49,600 --> 00:14:53,720
करिए यह जरूर है कि व ईश्वरीय द्वारा वह चीजें होती

203
00:14:53,720 --> 00:14:57,920
है वो स्थापित हुई है अरे तो करिए ना

204
00:14:57,920 --> 00:15:02,000
मैं पूछ रहा हूं ना मुझे समझाइए एक नास्तिक को सामने रख कर के

205
00:15:02,000 --> 00:15:08,000
बताइए कि ब्रह्मा कुमारी के द्वारा किस प्रकार से ईश्वर की सिद्धि होती

206
00:15:10,920 --> 00:15:15,000
है आपको उस नॉलेज द्वारा ही समझाया जा सकता है

207
00:15:15,000 --> 00:15:21,000
और दूसरा तो तरीका है तो समझाइए ना मेरे भाई

208
00:15:23,760 --> 00:15:27,760
समझाइए आप यहां पर आने से पहले मुझसे फोन पर बोले थे ना कि हमारे

209
00:15:27,760 --> 00:15:33,760
पास वास्तविक सिद्धांत कहां है वास्तविक सिद्धांत लाइए

210
00:15:36,320 --> 00:15:40,840
सामने यहां पर सो हो सकते हैं वैसे नहीं है दिखा

211
00:15:40,840 --> 00:15:45,680
अरे जैसे है वैसे बोलिए ना

212
00:15:45,680 --> 00:15:51,680
जैसे हैं जो है आपके पास वोह तो

213
00:15:52,960 --> 00:15:57,080
बोलो ईश्वर है यह कैसे सिद्ध होता है

214
00:15:57,080 --> 00:16:01,120
यह बोलो

215
00:16:01,120 --> 00:16:06,280
पहले आप बताइए नास्तिक है आप

216
00:16:06,280 --> 00:16:12,280
नास्तिक तो कोई भी स्वरूप को मानता है

217
00:16:17,240 --> 00:16:23,240
नहीं आप बहुत मुझे लग रहा है अल्पज्ञ फॉलोअर

218
00:16:23,280 --> 00:16:28,240
है सच में यहां पर नॉलेज कैसे दी जा सक

219
00:16:28,240 --> 00:16:32,280
को नहीं आना चाहिए ए जब आपको पता है इससे क्या

220
00:16:32,280 --> 00:16:36,360
होता है जो उनकी थोड़ी बहुत चीजें होती भी है उनके पास तो आप जैसे

221
00:16:36,360 --> 00:16:40,400
लोग आकर के उनकी मट्टी कुटवा हैं जब

222
00:16:40,400 --> 00:16:44,600
आपको बिल्कुल बेसिक चीजें नहीं पता है ईश्वर कैसे सिद्ध होता है अरे

223
00:16:44,600 --> 00:16:48,760
भाई दुनिया में कोई ईश्वर है यह तो सीख लो पहले तब तो कहो हम अध्यात्म

224
00:16:48,760 --> 00:16:53,000
को जानने वाले वास्तविक सिद्धांत को जानने वाले हैं ये आपकी फाउंडेशन

225
00:16:53,000 --> 00:16:57,600
ही नहीं बनी है ईश्वर है यही नहीं मालूम है आपको

226
00:16:57,600 --> 00:17:01,600
आप ये तो देखो बिल्कुल नास्तिक रूप में कह रहे हैं ना तो

227
00:17:01,600 --> 00:17:05,640
आप निराकार को मानते हैं धर्म तो धर्म की स्थापना

228
00:17:05,640 --> 00:17:08,480
तो वहीं से चालू होती है ना मेरे भाई

229
00:17:08,480 --> 00:17:12,480
क्या ऊपर ऊपर का हलवा हलवा खाने आते हैं क्या ये ब्रह्मा कुमारी

230
00:17:12,480 --> 00:17:16,880
वाले कि पहले जो परंपरा प्राप्त आचार्य गण है उन्होंने

231
00:17:16,880 --> 00:17:21,600
ईश्वर की सिद्धि कर दी धर्म दे दिया उसके बाद ऊपर ऊपर का हलवा खा लो फिर

232
00:17:21,600 --> 00:17:25,880
भाई पहली लड़ाई तो धर्म की स्थापना के लिए नास्तिकों से होगी

233
00:17:25,880 --> 00:17:30,080
ना उसके बाद धर्म स्थापित होगा उसके बाद अध्यात्म आएगा

234
00:17:30,080 --> 00:17:34,680
व्यक्ति के जीवन में उसके बाद उसकी वो होगा स्वा धारक

235
00:17:34,680 --> 00:17:38,760
तब वो जाकर के स्वाद धारक हो पाएगा जब धर्म की सिद्धि होगी तब आध्यात्म

236
00:17:38,760 --> 00:17:42,880
की सिद्धि होगी तब स् स्वधार हो पाएगा व्यक्ति

237
00:17:42,880 --> 00:17:47,000
तो आप वो जो स्व उधार जो ऊपर की क्रीम

238
00:17:47,000 --> 00:17:51,080
है बस उसके नाम का प्रचार कर रहे हैं आप तो आपने ईश्वर को सिद्धि

239
00:17:51,080 --> 00:17:56,200
नहीं किया धर्म की स्थापना ही नहीं

240
00:17:56,200 --> 00:18:00,800
की और अगर है तो बताइए ईश्वर को सिद्ध

241
00:18:00,800 --> 00:18:05,080
करिए हां हो सकता है सुनिए जैसे ब्रह्मा

242
00:18:05,080 --> 00:18:09,400
कुमारी के द्वारा य बताया जाता है कि परमात्मा है परमात्मा आके नॉलेज

243
00:18:09,400 --> 00:18:13,640
देता है और वो नॉलेज ऐसे ऐसे मिलती है इतना इतना मोटा

244
00:18:13,640 --> 00:18:17,640
मोटा उसकी आकाशवाणी होती थी पहले अभी तक अभी क्या हो रही कि नहीं नहीं

245
00:18:17,640 --> 00:18:23,640
पता मगर परमात्मा है यह सिद्ध तो

246
00:18:25,760 --> 00:18:31,760
करो तभी तो कोई आपकी बात मानेगा

247
00:18:33,080 --> 00:18:37,240
हां फिर आपने यह चीज जो कही है कि परमात्मा आते थे

248
00:18:37,240 --> 00:18:41,360
उनकी जो वाणी करते थे यह बात तो है ही

249
00:18:41,360 --> 00:18:45,360
सत्य यह आपके अनुसार है अभी मैं

250
00:18:45,360 --> 00:18:49,600
आपकी बात को लेकर बोल रहा हूं कि जब आप यह कहते परमात्मा अपनी वाणी देते

251
00:18:49,600 --> 00:18:54,080
हैं ठीक है परमात्मा है कोई सुपर नेचुरल कोई एंटिटी

252
00:18:54,080 --> 00:18:59,800
है सिद्ध तो करो

253
00:18:59,800 --> 00:19:04,000
अब यह प्रत्यक्ष थोड़ी है आपकी आंखों के सामने प

254
00:19:04,000 --> 00:19:08,640
ये प्रत्यक्ष नहीं है मैंने कहा मेरी आंखों के सामने करो

255
00:19:08,640 --> 00:19:13,800
कैसे भी करो समझाओ मुझे कि इस दुनिया में ईश्वर है

256
00:19:13,800 --> 00:19:16,600
आपको नहीं समझाया

257
00:19:16,600 --> 00:19:20,720
गया दो ही स्वरूप है इस चीज में तो हम जो भी देखते

258
00:19:20,720 --> 00:19:25,000
हैं आप देखते आए हैं संसार में एक निराकार स्वरूप है साकार स्वरूप

259
00:19:25,000 --> 00:19:29,000
है फर बात वो निराकार साकार तो उसके

260
00:19:29,000 --> 00:19:33,600
वो बाद की चीज आप मुझे अभी यह बताइए कि वह है

261
00:19:33,600 --> 00:19:38,480
जैसे कि आपने जापान देखा है क्या

262
00:19:38,480 --> 00:19:44,000
हा देखा है देख वैटिकन

263
00:19:44,000 --> 00:19:48,080
सिटी वेटिकन सिटी भी देखा है वैसे

264
00:19:48,080 --> 00:19:52,720
ऑनलाइन देखा वैसे गया नहीं वेटिकन सिटी देखा है

265
00:19:52,720 --> 00:19:56,720
स्विटजरलैंड स्विटजरलैंड नीदरलैंड सारे दुनिया के जितने भी

266
00:19:56,720 --> 00:20:00,800
कंट्री है सब देखे हैं

267
00:20:00,800 --> 00:20:06,800
गया नहीं हूं वहां पर वैसे देखि सारे कंट्री देखे

268
00:20:07,800 --> 00:20:12,360
आपने नहीं घूमा नहीं हूं वैसे नहीं गया हूं अरे

269
00:20:12,360 --> 00:20:16,960
देखा है नहीं देखा नहीं है देखा नहीं

270
00:20:16,960 --> 00:20:21,000
तो आपने प्रत्यक्ष उसको नहीं देखा है फिर भी आपके

271
00:20:21,000 --> 00:20:24,920
अंदर यह सिद्ध है ना कि वह

272
00:20:24,920 --> 00:20:29,440
है आपकी जानकारी में सिद्ध है ना कि वो है

273
00:20:29,440 --> 00:20:33,520
हा ऐसे ही आप मुझे भले ही प्रत्यक्ष मत

274
00:20:33,520 --> 00:20:37,800
दिखाओ आप मुझे ईश्वर को सिद्ध

275
00:20:37,800 --> 00:20:43,800
करो जैसे आपके मन में जापान इत्यादि सिद्ध है बिना

276
00:20:43,880 --> 00:20:48,240
देखे नहीं बिना देखे कैसे सिद्ध हो सकता कोई चीज

277
00:20:48,240 --> 00:20:52,320
तो आप नहीं मानते जापान है दुनिया में वो तो है वो

278
00:20:52,320 --> 00:20:56,360
तो वो तो एजिस्ट करता हैलिए तो

279
00:20:56,360 --> 00:21:00,480
इसका मतलब परमात्मा एजिस्ट नहीं करता है

280
00:21:00,480 --> 00:21:04,480
परमात्मा आपने परमात्मा को बिना देखे सिद्ध हुआ कि नहीं आपके मन

281
00:21:04,480 --> 00:21:08,680
में या देखा है हां

282
00:21:08,680 --> 00:21:12,160
जो देखा है मैंने

283
00:21:12,160 --> 00:21:16,240
तो चलिए दोबारा से आ जाते हैं आपने दुनिया के सारे कंट्रीज देखे

284
00:21:16,240 --> 00:21:21,040
हैं जितन के नाम बताए जाते

285
00:21:21,040 --> 00:21:25,080
हैं देखे हैं सारे कंट्रीज

286
00:21:25,080 --> 00:21:29,080
देखे

287
00:21:29,080 --> 00:21:33,760
नहीं वैसे नहीं देखे वैसे पता किय कंट्री एस्ट करता

288
00:21:33,760 --> 00:21:37,800
यानी कि आपको नॉलेज दी गई ना उसकी जिससे आपको य फिक्स

289
00:21:37,800 --> 00:21:41,840
हो गया बिना देखे ही कि हां वह है

290
00:21:41,840 --> 00:21:45,840
हा तो वैसे ही बोल रहा हूं मुझे ऐसी नॉलेज दीजिए जिससे मुझे

291
00:21:45,840 --> 00:21:51,840
फिक्स हो पाए कि हा ईश्वर

292
00:21:52,240 --> 00:21:56,400
है जसे आपने कहा कि

293
00:21:56,400 --> 00:22:00,520
वो जो देखे हमने कंट्रीज वो तो खोज हुई ना जभी तो

294
00:22:00,520 --> 00:22:04,520
तभी तो पता चला कि ये है एजिस्ट करते हैं वैसे पहले

295
00:22:04,520 --> 00:22:08,560
कब कहां पता था इन चीजों का क्या नॉलेज तो

296
00:22:08,560 --> 00:22:12,720
दी गई ना किसी गुरु ने आकर समझाया कि हा भाई इस दुनिया में स्कॉटलैंड

297
00:22:12,720 --> 00:22:16,720
है नीदरलैंड है और हमें उसकी वाणी पर वो हुआ

298
00:22:16,720 --> 00:22:20,840
उसने ऐसे हमें समझाया आश्वस्त किया तो आज हम उसकी चीजों से

299
00:22:20,840 --> 00:22:25,520
मानते हैं तो अभी आप मुझे समझाइए तो सही कि हा ईश्वर है

300
00:22:25,520 --> 00:22:29,400
कैसे सिद्ध होता है

301
00:22:29,400 --> 00:22:33,640
चलिए खैर आप दोबारा आइएगा कभी तैयारी करके आपको

302
00:22:33,640 --> 00:22:36,400
हटा रहे

303
00:22:36,400 --> 00:22:41,520
हैं भाई और कोई आना चाहता है तो बताए

304
00:22:41,520 --> 00:22:47,040
यह है ब्रह्मा कुमारीज का

305
00:22:47,040 --> 00:22:48,040
हाल

306
00:22:48,040 --> 00:22:52,640
कोई रामपाल वाला है क्या जो आ सके

307
00:22:52,640 --> 00:22:55,880
माता जी का निष्ठा

308
00:22:55,880 --> 00:22:59,920
पूर्वक पियूष वादवानी इस कौन की

309
00:22:59,920 --> 00:23:04,520
तरफ से पीयूष वादवानी हम एक

310
00:23:04,520 --> 00:23:08,720
एक कंडीशन पर आपको ले सकते हैं आपने कमेंट्स में बहुत

311
00:23:08,720 --> 00:23:12,840
अबे तुबे हैवान यह सब कहा है तो आके हाथ जोड़ के क्षमा

312
00:23:12,840 --> 00:23:16,280
मांगो तो तो बात

313
00:23:16,280 --> 00:23:22,280
करें

314
00:23:22,880 --> 00:23:27,000
बताइए अन्यथा नहीं किसी

315
00:23:27,000 --> 00:23:31,840
दिन मिलोगे तब बताए तुम उल्टी सीधी बातें जो किया करते हो

316
00:23:31,840 --> 00:23:37,840
छोटे हो समझ के छोड़ा करते हैं

317
00:23:44,080 --> 00:23:49,000
समझे यूष कह रहे हैं कि हां यह आकर के

318
00:23:49,000 --> 00:23:55,000
क्षमा मांगेंगे ठीक है इनको ले लिया जाए

319
00:24:02,480 --> 00:24:08,480
कोई बताएगा लिया जाए कि

320
00:24:08,480 --> 00:24:14,480
नहीं ले ले और ले

321
00:24:14,600 --> 00:24:20,600
लो चलो ले लेते हैं दे दो भाई पिन कमेंट दे दो

322
00:24:37,600 --> 00:24:43,600
पिन कमेंट दे दिया दे

323
00:24:52,560 --> 00:24:56,640
दीजिए यह कमेंट दे दिया है

324
00:24:56,640 --> 00:25:02,640
आ जाइए

325
00:25:06,480 --> 00:25:10,720
हा मांगिए क्षमा हां जी

326
00:25:10,720 --> 00:25:14,880
सॉरी बस मैं मैंने आपको हैवान बोला उसके लिए

327
00:25:14,880 --> 00:25:19,240
सॉरी आज तक मैंने जो जो आचरण किया है वह आपने जो अभद्र

328
00:25:19,240 --> 00:25:23,240
आचरण बहुत सारी टिप्पणियां की है आपने तू तड़ाक में बात की है अब आप में कर र देखो ये

329
00:25:23,240 --> 00:25:27,840
मैं कहता हूं ना आप सबसे मैंने आपको

330
00:25:27,840 --> 00:25:31,840
और तू तड़क बोला वो तू त क्या अभी आप क्यों कह रहे हो

331
00:25:31,840 --> 00:25:34,880
तू

332
00:25:34,880 --> 00:25:38,920
कहो क्या तू क्या बोला ऐसे बोलो कि मैंने तेरे को

333
00:25:38,920 --> 00:25:42,960
हैवान बोला जो ऐसे बोलो हां मैंने आपको हैवान बोला उसके लिए सॉरी

334
00:25:42,960 --> 00:25:47,080
नहीं नहीं तेरे को आपने तू तड़ाक में बात की ना मुझसे

335
00:25:47,080 --> 00:25:51,120
आपको मैंने आपको हैवान बोला उसके लिए सॉरी आपको नहीं

336
00:25:51,120 --> 00:25:55,280
तू तड़ाक बोला ना तुमने कमेंट्स में हां मैंने

337
00:25:55,280 --> 00:25:59,840
जो त तू तलक बोला उसके लिए सॉरी बस हा ये

338
00:25:59,840 --> 00:26:04,000
ये मैं दिखाना चाह रहा था आपको ये होता है

339
00:26:04,000 --> 00:26:08,160
त्रिया चरित्र सामने आकर के अभी यह व्यक्ति

340
00:26:08,160 --> 00:26:13,120
जब पर्दे पर आया है तो इसकी भाषा शैली बदल गई

341
00:26:13,120 --> 00:26:16,520
है ना

342
00:26:16,520 --> 00:26:20,520
और अभी ये दोबारा कमेंट में जाएगा ना तो फिर उसी पर

343
00:26:20,520 --> 00:26:24,520
आएगा हा भा नहीं कर ऐसा करोगे क्या नहीं करूंगा

344
00:26:24,520 --> 00:26:30,480
बिल्कुल नहीं नहीं करोगे भगवत गीता पर हाथ रख के सौगं खाओ नहीं करो

345
00:26:30,480 --> 00:26:34,640
अभी है नहीं मेरे पास ले आओ उठा

346
00:26:34,640 --> 00:26:38,640
के ले आओ घर में है नहीं किसी और

347
00:26:38,640 --> 00:26:42,680
के घर में में अच्छा तो भगवान

348
00:26:42,680 --> 00:26:46,680
श्री कृष्ण के चरणों की सौगं खाके बोलो चलो अब मैं

349
00:26:46,680 --> 00:26:51,040
तूतक में बात नहीं करूंगा और अचरण नहीं करूंगा हा

350
00:26:51,040 --> 00:26:55,280
मैं भगवान श्री कृष्ण की सन लखा के बोलता हूं मैं अच नहीं

351
00:26:55,280 --> 00:26:59,400
करूंगा त तक नहीं बोलूंगा हा तू

352
00:26:59,400 --> 00:27:03,880
तलाक नहीं बो थोड़ा तेज बोलो स्पष्ट जिसे सुनाई

353
00:27:03,880 --> 00:27:07,880
दे ऐसे एक बार में बोलो भगवान श्री कृष्ण के चरणों

354
00:27:07,880 --> 00:27:11,920
की सौगंद मैं अब टू तड़क नहीं बोलूंगा और ये जो हैवान इत्यादि

355
00:27:11,920 --> 00:27:16,560
शब्दों का उपयोग करता हूं आपके लिए वो नहीं करूंगा ये पूरी लाइन एक बार में बोलो

356
00:27:16,560 --> 00:27:21,040
मैं भगवान श्री कृष्ण की सौग के बोलता हूं चरण की मैं ल नहीं

357
00:27:21,040 --> 00:27:25,120
बोलगा और क्या नहीं बोलोगे पूरा पूरी लाइन नहीं बोल रहे हो आपको

358
00:27:25,120 --> 00:27:29,160
हैवान इत्यादि नहीं बोलूंगा बोला तो सही मैं वो

359
00:27:29,160 --> 00:27:31,520
मैंने पहले बोल दिया अभी च अभी चरणों की

360
00:27:31,520 --> 00:27:35,560
सौगं खाके बोलना है अ भाई मैं आपको कभी नहीं बोलूंगा यार आप

361
00:27:35,560 --> 00:27:39,680
आगे बढ़ नहीं नहीं भगवान श्री कृष्ण के चरणों

362
00:27:39,680 --> 00:27:43,720
की सौगंध खाके पूरी लाइन बोलिए है कि मैं आपको तू तड़ाक नहीं बोलूंगा भद्र आचरण नहीं

363
00:27:43,720 --> 00:27:48,520
करूंगा और हैवान इत्यादि जैसे शब्दों का उपयोग नहीं करूंगा आपके लिए बोलिए

364
00:27:48,520 --> 00:27:52,600
मैं भगवान श्री कृष्ण की चरणों की के बोलता हूं

365
00:27:52,600 --> 00:27:56,760
कि मैं आपको तलग नहीं बोलूंगा एवान नहीं बोलूंगा

366
00:27:56,760 --> 00:28:00,840
और और क्या बोला आपने अभद्र आचरण किसी भी प्रकार का अद आचरण

367
00:28:00,840 --> 00:28:06,840
नहीं करूंगा आपके वि और मैं कोई भी

368
00:28:07,640 --> 00:28:11,800
अद नहीं करूंगा ठीक है चलिए

369
00:28:11,800 --> 00:28:15,960
ठीक है छोटे हो तो जब माफी मांग रहे हो तो तुम्हें

370
00:28:15,960 --> 00:28:20,000
एक अवसर दिया है तो अभी हम लोगों की

371
00:28:20,000 --> 00:28:24,000
कल एक बात हो रही थी

372
00:28:24,000 --> 00:28:28,520
कि जो कौन है वो य दावा कर

373
00:28:28,520 --> 00:28:32,200
व चैतन्य महाप्रभु का फॉलोअर

374
00:28:32,200 --> 00:28:36,840
है चैतन्य महाप्रभु यह कहते कि श्रीधरी टीका जो है उनके लिए

375
00:28:36,840 --> 00:28:41,360
प्रमाण है उनके विरुद्ध कुछ भी लिखा जाएगा

376
00:28:41,360 --> 00:28:46,080
तो वो जो है लिखने वाला वैश्या कहलाएगा तो

377
00:28:46,080 --> 00:28:50,600
अभी उन्होंने कहा वहां पर आ सा 2 में

378
00:28:50,600 --> 00:28:54,880
कि वहां पर शिव जी की स्तुति हो रही है और शिवजी जो ब्रह्मा विष्णु महेश के रूप में अवतरित

379
00:28:54,880 --> 00:28:58,880
होते हैं इस बात को मानते हैं आपके वेवे

380
00:28:58,880 --> 00:29:02,120
में नहीं लिखा

381
00:29:02,120 --> 00:29:06,320
है हो रही है श्रीधर स्वामी हैल में

382
00:29:06,320 --> 00:29:10,920
श स्वामी असल में वैष्णव सबसे पहली बात कौन

383
00:29:10,920 --> 00:29:16,000
पास उनके पास किस परंपरा

384
00:29:16,000 --> 00:29:20,160
से हमारे टाइप नहीं उनकी वंशावली बताइए जैसे आपकी

385
00:29:20,160 --> 00:29:24,440
वंशावली है प्रभुपाद जी तक की ऐसे वंशावली बताइए कि वैष्णव

386
00:29:24,440 --> 00:29:28,560
उनके पास कैसे आया

387
00:29:28,560 --> 00:29:32,680
उस टाइम प शब लोग होते थे और भाई साहब मैंने पूछा उनके गुरु

388
00:29:32,680 --> 00:29:38,680
के गुरु के गुरु का नाम बताएं जो आपके अनुसार वैष्णव तक

389
00:29:38,680 --> 00:29:44,680
पहुंचे किसके गुरु का नाम बताओ श्रीधर स्वामी के वैष्णवास्त्र

390
00:29:58,240 --> 00:30:02,240
ब वो अपना बेस बदल बेस बदल के रखते थे ब उस लोग

391
00:30:02,240 --> 00:30:06,320
वैष्णव लोग का मैं आपसे पूछ

392
00:30:06,320 --> 00:30:10,680
रहा हं उनके गुरु कौन थे जिनके पास यह

393
00:30:10,680 --> 00:30:14,800
जो वैष्णव ज्ञान आया था देखो

394
00:30:14,800 --> 00:30:19,480
वो को नहीं खबर पर जीव गोस्वामी

395
00:30:19,480 --> 00:30:23,760
हैता

396
00:30:23,760 --> 00:30:29,760
गु गोस्वामी जी ने उसम य बात लिखी है क्या

397
00:30:33,400 --> 00:30:37,800
हा केशव दस जी ने आपके केशव दास जी ने कहा है कि व सुद्धा

398
00:30:37,800 --> 00:30:41,920
दत वाले वैष्णव वल्लभाचार्य वाले केशव

399
00:30:41,920 --> 00:30:47,400
दास जी गलत बोल रहे क्या व सही बोलते

400
00:30:47,400 --> 00:30:51,960
अभी आप झूठ बोल रहे क्या आपने गड़िया वैष्णव

401
00:30:51,960 --> 00:30:57,960
केशव दास जी ने कहा कि व सुद्ध दत वाले वैष्णव ती हो

402
00:31:01,800 --> 00:31:05,960
तो भाई फिर आप अपनी चीज पक्का करके आइए ना आए क्यों गलती करनी है

403
00:31:05,960 --> 00:31:10,040
तो मेरी मेरी आप से य ी आप रामा

404
00:31:10,040 --> 00:31:14,200
संप्रदाय ऐसे किसी को भी बुला लेते सुनिए सुनिए

405
00:31:14,200 --> 00:31:18,240
विषयात मत करिए विषयात मत करिए मुझे हटाना पड़ेगा विषयात मत करिए

406
00:31:18,240 --> 00:31:22,600
मैं कह रहा हूं आप आए क्यों है मैं क्लियर

407
00:31:22,600 --> 00:31:26,680
करने रामानुज संप्रदाय के रामानु संप्रदाय की बात कल

408
00:31:26,680 --> 00:31:30,760
हुई है रामानुज संप्रदाय की बात कल हुई है उससे पहले भी आप

409
00:31:30,760 --> 00:31:36,760
आने के लिए मुझसे कई बार कह चुके

410
00:31:37,080 --> 00:31:41,440
हैं वह बात सही है

411
00:31:41,440 --> 00:31:45,480
पर जो जो रामानु संप्रदाय जो जो ऑथेंटिक संप्रदाय

412
00:31:45,480 --> 00:31:49,680
है देखिए मैं विषयात मत करिए मुझे आपसे बात नहीं करनी है ठीक है जाइए

413
00:31:49,680 --> 00:31:55,680
आप

414
00:32:08,960 --> 00:32:13,280
यह जो भर के आए इनको उसमें बोलना है और इनका त्रिया चरित्र

415
00:32:13,280 --> 00:32:17,320
देख लिया ना यह यह शिक्षा

416
00:32:17,320 --> 00:32:21,640
दी जाती है कि कमेंट्स में आप तू तड़ाक करो वहां जाकर आप

417
00:32:21,640 --> 00:32:27,640
बोलो यह है सच्चाई की शक्ति

418
00:32:28,320 --> 00:32:32,480
भाई मैंने जो भी शब्द बोले हैं मैं वही

419
00:32:32,480 --> 00:32:36,600
शब्द जब य सामने होंगे बोलूंगा तो मैं उन शब्दों को बोलने वाला व्यक्ति हूं क्योंकि

420
00:32:36,600 --> 00:32:40,720
मैंने प्रभु श्री राम से सीखा है कि रामो दुर नावी

421
00:32:40,720 --> 00:32:44,960
भाषित दो प्रकार की बातें मत करो अपनी

422
00:32:44,960 --> 00:32:49,000
बोली हुई बातें मत बदलो रघुकुल री

423
00:32:49,000 --> 00:32:53,800
सदा चली आई प्राण जाई परवचन ना जाई कहां है य

424
00:32:53,800 --> 00:32:58,200
सारे अनुशासन सिद्धांत कहां है इनमें

425
00:32:58,200 --> 00:33:02,320
यह नई जनरेशन तैयार हो रही है वह

426
00:33:02,320 --> 00:33:08,320
भव्य भी और यह पियूष देख

427
00:33:08,360 --> 00:33:12,400
लो रामानुज संप्रदाय की चिंता आप मत करिए हम जा रहे राघवाचार्य

428
00:33:12,400 --> 00:33:16,400
जी के पास उनके जो प्रतिनिधि है

429
00:33:16,400 --> 00:33:20,640
उनसे बात हो गई है बहुत सहर्ष उन्होंने बुलाया है और जा रहे हैं एक बढ़िया

430
00:33:20,640 --> 00:33:24,840
चर्चा आपको देखने को मिलेगी उनके साथ वर्णाश्रम धर्म के पक्ष

431
00:33:24,840 --> 00:33:28,680
में बहुत बढ़िया चर्चा

432
00:33:28,680 --> 00:33:34,680
राणु संप्रदाय की चिंता ना करें आप अपनी चिंता करें अपने एथिक्स मजबूत

433
00:33:37,080 --> 00:33:40,760
करें ठीक

434
00:33:40,760 --> 00:33:46,760
है तो अब तो कोई मुझे लग रहा है है

435
00:33:56,040 --> 00:34:00,200
नहीं कोई है जो आ सकता है स्ट्रीम में

436
00:34:00,200 --> 00:34:04,200
क्योंकि हमें नहीं लगता पियूष से कोई बातचीत होनी है कि वो अपना एक कुछ

437
00:34:04,200 --> 00:34:08,320
सिलेबस तैयार करके आए उनको व यहां बोलना है स्क्रीन पर आके और जो

438
00:34:08,320 --> 00:34:13,920
आप लोग कहते हो ना कि मैं प्रमाण की बात नहीं करता इस तरह के कई लोग

439
00:34:13,920 --> 00:34:18,360
हैं रामपाल इत्यादि के संजय

440
00:34:18,360 --> 00:34:24,360
कुमार संजय जी आप अपना चेहरा दिखा दें

441
00:34:29,280 --> 00:34:35,280
चेहरा दिखाएं हम आपको स्टेज पर

442
00:34:36,640 --> 00:34:40,960
ले संजय जी अगर आपको चर्चा करनी है तो आपको अपनी

443
00:34:40,960 --> 00:34:45,240
पहचान को रिवील करते हुए करनी होगी

444
00:34:45,240 --> 00:34:49,520
क्योंकि हम निकले हैं धर्म की रक्षा में यह चिंता

445
00:34:49,520 --> 00:34:53,600
छोड़ कर के कि हमारा क्या होगा तो हम किसी ऐसे

446
00:34:53,600 --> 00:34:57,720
व्यक्ति से ही सामना करेंगे जो कम से कम अपनी पहचान को ना

447
00:34:57,720 --> 00:35:03,720
छिपाए अपने चेहरे को ना

448
00:35:05,040 --> 00:35:09,920
छिपाए ऑनलाइन होगा आप वहां पर फॉर्म भर दीजिए

449
00:35:09,920 --> 00:35:15,880
जब तक कोई नहीं आ रहा तब तक मैं आप लोगों को बता दूं

450
00:35:15,880 --> 00:35:21,360
कि यह नंबर आप लोग नोट कर लीजिए 7408 30169

451
00:35:21,360 --> 00:35:25,360
हमारा नाम जप ऑपरेशन नाम जप अभियान नामा स्त्र शुरू होने जा

452
00:35:25,360 --> 00:35:28,880
रहा है

453
00:35:28,880 --> 00:35:33,040
न तारीख से और यह पांच बार में होगा

454
00:35:33,040 --> 00:35:37,240
यह नाम जब 6 10 दो 6 10 मतलब

455
00:35:37,240 --> 00:35:41,280
सुबह के 6 बजे फिर सुबह के 10 बजे फिर दो बजे फिर शाम के 6 बजे

456
00:35:41,280 --> 00:35:45,400
फिर रात के 10 बजे पांच बार में पांचों देवों का नाम जाप किया

457
00:35:45,400 --> 00:35:49,720
जाएगा उसमें जुड़ कर के आप अपनी ईस्ट का नाम जाप कर सकते

458
00:35:49,720 --> 00:35:53,800
हैं या फिर जो नाम उच्चारित किया किया जा रहा है वो जाप कर

459
00:35:53,800 --> 00:35:58,000
सकते हैं या फिर केवल उसका श्रवण भी कर सकते हैं इससे आपका जो सवा घंटे का भक्ति

460
00:35:58,000 --> 00:36:02,440
का लक्ष्य है वह प्राप्त होने में आसानी होगी

461
00:36:02,440 --> 00:36:06,440
अपने भाइयों का आपको क्या कहते कंपनी मिलेगी जाप

462
00:36:06,440 --> 00:36:10,520
करते समय तो सत्संग हो जाएगा संकीर्तन हो जाएगा इसके

463
00:36:10,520 --> 00:36:14,520
साथ ही साथ इसमें कोई ऐसी बात नहीं है कि कोई

464
00:36:14,520 --> 00:36:19,240
अगर आर्य समाजी तो वो नहीं आ सकता है स्कन वाला है तो नहीं आ सकता है

465
00:36:19,240 --> 00:36:23,400
कोई भी है जो अपने प्रभु का नाम स्मरण करना चाहता है वोह आ सकता है

466
00:36:23,400 --> 00:36:27,560
नाम जप कर सकता है हम सब हिंदू सनातनी होते हुए

467
00:36:27,560 --> 00:36:33,560
एकजुट हो सकते हैं इसके

468
00:36:34,560 --> 00:36:40,560
द्वारा

469
00:36:41,240 --> 00:36:47,240
अ कोई आया है क्या रतन

470
00:36:50,680 --> 00:36:55,240
दास हा जी रतन दास जी जय श्री राम

471
00:36:55,240 --> 00:36:59,360
हा आपका परिचय आप हमारा

472
00:36:59,360 --> 00:37:03,840
परिचय तो जानते ही होंगे जामा

473
00:37:03,840 --> 00:37:07,840
जो आप शायद कल या परसों टैक किए थे हमें फ में आप थोड़ा सीधा

474
00:37:07,840 --> 00:37:12,040
कर दीजिए अपने को स्वयं

475
00:37:12,040 --> 00:37:15,840
को जी

476
00:37:15,840 --> 00:37:20,160
बताइए तो नहीं आपका वीडियो देखा

477
00:37:20,160 --> 00:37:24,320
था नहीं नहीं आप अपना परिचय बताइए

478
00:37:24,320 --> 00:37:28,320
मेरा परिचय मैं रतन दास हूं मैं जगतगुरु तर्शी संत रामपाल जी महाराज

479
00:37:28,320 --> 00:37:32,440
जी का शिष्य हूं ठीक

480
00:37:32,440 --> 00:37:36,600
है अभी आपकी ओर से एक मिथ्या बहुत फैलाई

481
00:37:36,600 --> 00:37:40,920
जाती है कि जो कलयुग के ब्राह्मण है सतयुग के राक्षस ही कलयुग में ब्राह्मण

482
00:37:40,920 --> 00:37:45,000
बनके जन्म लिए हैं जी जी जी जी तो क्या ये सभी ब्राह्मणों के लिए

483
00:37:45,000 --> 00:37:49,280
है या कुछ कुछ नहीं क्या है कि

484
00:37:49,280 --> 00:37:54,200
जो राक्षसों के स्वभाव मतलब कि आचरण करता रा

485
00:37:54,200 --> 00:37:58,440
रण की तर हीन आचरण करने वाला जी जी

486
00:37:58,440 --> 00:38:02,600
उसके लिए जैसे मान लीजिए अभी देखिए त्रिपति बालाजी

487
00:38:02,600 --> 00:38:05,960
मंदिर में क्या क्या

488
00:38:05,960 --> 00:38:10,040
हुआ तो हीन आचरण करने वाले यानी

489
00:38:10,040 --> 00:38:14,320
सभी समझ रहे मेरी बातो को हा मैं समझ गया ही

490
00:38:14,320 --> 00:38:18,520
आचरण बता दे रहा हूं ना ब्राह्मण जो ब्रह्म

491
00:38:18,520 --> 00:38:22,880
की जानकारी रखता है उसी को ब कते आपसे प्रवचन सुनने

492
00:38:22,880 --> 00:38:26,920
नहीं बैठा हूं जो हमारे टॉपिक की बात केवल वही कर अब

493
00:38:26,920 --> 00:38:27,800
पूछे

494
00:38:27,800 --> 00:38:32,640
कि ब्राह्मण मतलब सभी ब्राह्मण तो मैं बता रहा हूं ना ब्राह्मण कौन से ब्राह्मण

495
00:38:32,640 --> 00:38:36,920
आपसे मैंने पूछा क्या ब्राह्मण कुल में जन्म लेने वाला हर व्यक्ति राक्षस

496
00:38:36,920 --> 00:38:41,560
है आपने कहा नहीं हर व्यक्ति नहीं जो आचरण से हीन है वो राक्षस है

497
00:38:41,560 --> 00:38:45,600
हा ठीक है ना हमारा टॉपिक हो गया अब मुझे आपसे नहीं

498
00:38:45,600 --> 00:38:50,280
जानना है कि ब्राह्मण किसे कहते मुझे नहीं जानना आपसे

499
00:38:50,280 --> 00:38:54,400
जाने नहीं सुनि बात अब हमारी हमारा विषय नहीं है मैं

500
00:38:54,400 --> 00:38:58,680
आपसे य ज्ञान लेने नहीं आया हूं कि ब्राह्मण किसे कह

501
00:38:58,680 --> 00:39:02,880
अरे बताइए मैं अपनी परिभाषा बता रहा हूं तब ना आप बताएंगे कि आप किस प्रकार

502
00:39:02,880 --> 00:39:07,520
के ब बता रहे परिभाषा जब मैं संतुष्ट हो गया आपके जवाब से मैं पूछ रहा हूं क्या आपसे

503
00:39:07,520 --> 00:39:11,560
परिभाषा मैं ब्राह्मण का परिभाषा बताने वाला हूं नहीं

504
00:39:11,560 --> 00:39:15,680
आपके जवाब से मैं संतुष्ट हो चुका हूं अब आप मुझे ज्ञान मत दीजिए

505
00:39:15,680 --> 00:39:19,840
ठीक है अरे ज्ञान कोई काला धन थोड़ी है जो छुपाए गे परमात्मा का

506
00:39:19,840 --> 00:39:24,080
दिया है पूरे विश्व को बताएंगे अब आप मुझे बताइए वेदों में प्रमाण

507
00:39:24,080 --> 00:39:28,080
है कबीर साहब भगवान ने कहां लिखा है अरे अभी

508
00:39:28,080 --> 00:39:32,120
आप तो ये नहीं पता है कि वेदों में प्रमाण है कबीर साहब कहां है

509
00:39:32,120 --> 00:39:38,120
मैं आपको हटा रहा

510
00:39:53,560 --> 00:39:57,720
हूं इस तरह के कॉल्स इस तरह के लोगों को मुझे

511
00:39:57,720 --> 00:40:03,680
जो है व जो नंबर अपना पब्लिक कर रखा है उसके कारण सुनना पड़ता है देखना पड़ता

512
00:40:03,680 --> 00:40:08,800
है आइए पंडित जी आप ही आ

513
00:40:08,800 --> 00:40:11,280
जाइए

514
00:40:11,280 --> 00:40:15,920
क्या पता लगा में प्रमाण है कैसी बातें कर रहे

515
00:40:15,920 --> 00:40:19,560
आप जय श्री

516
00:40:19,560 --> 00:40:23,640
राम इन जैसों को रोज मेरे फोन आते हैं मेरे

517
00:40:23,640 --> 00:40:27,840
पास और शुरुआत हमेशा जीरो

518
00:40:27,840 --> 00:40:31,840
से करते हैं या तो अच्छे से स्टडी कर लो कि इस आदमी ने क्या क्या कहा

519
00:40:31,840 --> 00:40:35,840
है क्या क्या नहीं कहा है उसके बाद आओ मगर कोई एक छोटी मोटी

520
00:40:35,840 --> 00:40:40,560
चीज देख ली उसके बाद वो जवाइन कर लेते हैं लेकिन आपके प्रति जो उसका प्यार था

521
00:40:40,560 --> 00:40:44,720
व आज हम सबने देख लिया कितना मुस्कुरा मुस्कुरा

522
00:40:44,720 --> 00:40:50,360
के ऐसे बोल रहा था वो आपको कितना शांत था

523
00:40:50,360 --> 00:40:54,600
बेचारा नारायण नाराय

524
00:40:54,600 --> 00:41:00,600
कोई है भाई जो और आना चाहेगा

525
00:41:01,360 --> 00:41:05,880
अभी कल जो व रामानु संप्रदाय के आए हैं हमारे यहां

526
00:41:05,880 --> 00:41:10,000
उसको लेकर के इनको कुछ ऐसे इकन

527
00:41:10,000 --> 00:41:14,600
के फॉलोअर्स हैं जो अपने आप को श्री संप्रदाय के रूप में वहां पर

528
00:41:14,600 --> 00:41:18,920
रखते हैं तो हमारी अभी बात हो गई है उनके गुरुदेव से उनके गुरुदेव अभी घर पर आएंगे

529
00:41:18,920 --> 00:41:23,680
जब हम जाएंगे वो भी जाने माने मतलब आचार्य है उसके

530
00:41:23,680 --> 00:41:27,840
जिनसे वो दीक्षित है जो कल आए थे ना सुम अच्छा अच्छा

531
00:41:27,840 --> 00:41:32,120
अच्छा जी जी जीके गुरुदेव कोई मतलब ऐसे

532
00:41:32,120 --> 00:41:37,240
साधारण नहीं है और उनके पास जाने वाले हैं

533
00:41:37,240 --> 00:41:41,600
और जो राघवाचार्य जी के पास भी चल रही है चीजें

534
00:41:41,600 --> 00:41:46,080
ये तो बहुत अच्छा लगा मु सुनक के आपको उनके दर्शन भी हो रहे हैं

535
00:41:46,080 --> 00:41:50,720
हमारा ही दुर्भाग्य बड़ा अच्छा लगता है उनको सुनना बड़ा अच्छा लगता है बहुत

536
00:41:50,720 --> 00:41:54,960
रस के साथ वो सिद्धांत को रखते हैं रस के साथ सिद्धांत को रखने

537
00:41:54,960 --> 00:41:59,000
वाले और वो भी बहुत गर्व के साथ उसमें वो

538
00:41:59,000 --> 00:42:03,120
नहीं होता कि थोड़ा ऐसे मृद भाषी बन के कहे जो थोड़ा सामने वाले को बुरा

539
00:42:03,120 --> 00:42:05,520
कम लगे एक बार बोल रहे थे ढोल गवार

540
00:42:05,520 --> 00:42:11,520
शुद्र पशु नारी तो जो लोग ये वित फैलाते हैं ना उन्हीं के लिए लिखा [हंसी]

541
00:42:11,760 --> 00:42:15,760
गया नहीं अच्छे वक्ता है बहुत उनके प्रवचन सुनता

542
00:42:15,760 --> 00:42:19,920
रहता हूं मैं एक उनसे मुझे मिलना है एक राजेंद्र दास

543
00:42:19,920 --> 00:42:24,000
जी महा भाग से मिलना है हां

544
00:42:24,000 --> 00:42:28,320
बहुत बढ़िया और

545
00:42:28,320 --> 00:42:33,480
कल एक बात हुई थी क्या कहते हैं वोह मैंने जब यह कहा था

546
00:42:33,480 --> 00:42:37,560
कि हां य आचार्य श्री का चैनल है आप सभी लोग फॉलो

547
00:42:37,560 --> 00:42:43,560
कर ले यहां से आपको बहुत सारे प्रश्नों के हल मिल जाएंगे

548
00:42:47,120 --> 00:42:51,320
और जो वह विषय चल रहा है ना आजकल जिसने तिरुपति बालाजी का

549
00:42:51,320 --> 00:42:54,680
वो

550
00:42:54,680 --> 00:42:59,320
कि एस मूवी जी अगर आपको कोई प्रश्न है तो आप आ जाएगी ना लाइव

551
00:42:59,320 --> 00:43:03,320
नहीं वो लाइव नहीं आते उन्होने बचपन में माता जी ने निष्ठा पूर्वक दूध नहीं पिलाया

552
00:43:03,320 --> 00:43:07,400
उन्हें नहीं पिलाया होगा हा वो लाइव नहीं आ सकते हैं वो बस यही

553
00:43:07,400 --> 00:43:11,360
कमेंट्स के ही द्वारा अपना पराक्रम

554
00:43:11,360 --> 00:43:15,400
दिखाएंगे जो आपका पर परब्रह्म जो मेरा परब्रह्म

555
00:43:15,400 --> 00:43:19,400
है वही आपका ही है अंदर नहीं है उसमें कोई बस ये है कि आप अपने

556
00:43:19,400 --> 00:43:23,680
परब्रह्म को बाधित के रूप में सीमित कर बैठे हो जी

557
00:43:23,680 --> 00:43:27,720
और जिसकी वजह से जो आपका धर्म है धर्म नहीं है अधर्म है ये देखिए

558
00:43:27,720 --> 00:43:32,280
शुभम जी को देखिए चलिए यही होता है कि

559
00:43:32,280 --> 00:43:36,280
यही समस्या है ना ये बहुत अच्छी बात है कि फेस टू फेस जब बात होती है ना तो ये बहुत

560
00:43:36,280 --> 00:43:40,520
सारे लोग ना ऐसे लोग छड़ जाते हैं हा अब जैसे पियूष पियूष

561
00:43:40,520 --> 00:43:44,560
की देखिए पियूष आया था और वो देखो कमेंट में कुछ

562
00:43:44,560 --> 00:43:48,760
और था मगर स्क्रीन पर आते ही वो व्यवहारिक हो गया आदर्श बन

563
00:43:48,760 --> 00:43:53,320
गया जी जी ये सच्चाई है प्रिया

564
00:43:53,320 --> 00:43:57,840
चरित्र यह धर्म सीख रहे हैं ये हरे कृष्ण का जाप कर रहे हैं

565
00:43:57,840 --> 00:44:01,920
तो जब तक वही बात है ना मनम कीी भक्ति आपके किसी काम की नहीं नारद पुराण

566
00:44:01,920 --> 00:44:02,420
में दिया

567
00:44:02,200 --> 00:44:06,520
गया है जब आपके आचरण में वो नहीं आ रहा है तो कैसा आपने वो किया

568
00:44:06,520 --> 00:44:10,640
आप भव्य की जो वो है उसकी कई रिकॉर्डिंग मिल रही है वह

569
00:44:10,640 --> 00:44:14,960
गाली दे रहा है उल्टी सीधी मतलब गालिया अश्लील शब्द व

570
00:44:14,960 --> 00:44:19,480
तो जबक ऐसा नहीं दिखता था मुझे कि वह गाली वाली देता होगा मगर वो गालियां दे रहा

571
00:44:19,480 --> 00:44:23,480
है वो भी उसका भी हाल यही होगा अभी अगर स्क्रीन पर य ले लूंगा तुरंत

572
00:44:23,480 --> 00:44:27,600
आप आप करने लगेगा आप बड़े हो ये है वो है ये तो त्रिया

573
00:44:27,600 --> 00:44:33,600
चरित्र है भाई जी ये तो

574
00:44:34,280 --> 00:44:38,600
है सारा ज्ञान एस मूवी जी क्या बोलते हैं कमेंट प दे देंगे

575
00:44:38,600 --> 00:44:43,080
लाइव आ जाइए आपका स्वागत है हम कुछ नहीं बोलेंगे आप जिस तरह से आप बात कर रहे हैं वैसे आप

576
00:44:43,080 --> 00:44:47,120
स शिवांश जी नहीं करेंगे कंट्रोल करके रखते हैं वो अपने आप

577
00:44:47,120 --> 00:44:51,520
को अपने दांत पीसते हैं करके

578
00:44:51,520 --> 00:44:57,280
संतोष नोनिया जी स्वागत है आपका जी

579
00:44:57,280 --> 00:45:01,120
बताएं अपना परिचय संतोष जी कहां से

580
00:45:01,120 --> 00:45:06,240
हैं झारखंड का धनबाद जिला

581
00:45:06,240 --> 00:45:10,880
से कहां किसके फॉलोअर है

582
00:45:10,880 --> 00:45:15,080
फॉलोवर तो किसका है नहीं लेकिन कुछ सवाल है मेरा

583
00:45:15,080 --> 00:45:19,320
मन में पूछ सकते हैं क्या सवाल के लिए हमारी क्लासेस

584
00:45:19,320 --> 00:45:23,440
चलती है वहां आ सकते हैं और हमने बहुत सारे वीडियोस बना रखे हैं आप वो देख

585
00:45:23,440 --> 00:45:27,560
सकते जब उनसे हल ना निकले तब आपको आना चाहिए अब आ गए

586
00:45:27,560 --> 00:45:32,240
हैं तो सवाल बता दीजिए हमने ये जो चर्चा रखते हैं ये वाली

587
00:45:32,240 --> 00:45:36,280
इसका क्या है कंटेंट बहुत सारे हो जाते हैं तो हम लोगों को क्या

588
00:45:36,280 --> 00:45:40,400
बताए कि इसमें क्या बताया गया सवाल का जवाब दिया गया है इकन वाले से बात

589
00:45:40,400 --> 00:45:44,560
की गई है रामपाल वाले से बात की गई है या ब्रह्मा कुमारी से बात की गई आप समझने

590
00:45:44,560 --> 00:45:48,720
का प्रयास करिए एक जो कंटेंट होता है वो एक जैसा रहना चाहिए अब

591
00:45:48,720 --> 00:45:53,000
उसी चर्चा में आकर के दूसरी दूसरे तरीके कंटेंट होगा तो हम उसको

592
00:45:53,000 --> 00:45:59,000
क्या कहे लोगों के सामने दिक्कत आती है अभी आप बताइए सवाल

593
00:45:59,000 --> 00:46:03,000
जैसे कि लोग है कोई शिव की पूजा कर रहे हैं

594
00:46:03,000 --> 00:46:07,040
शंकर भगवान का कोई काली का पूजा कर रहा है कोई दुर्गा का पूजा कर

595
00:46:07,040 --> 00:46:11,280
रहा है कोई विष्णु का पूजा कर रहा है तो इतनी

596
00:46:11,280 --> 00:46:16,760
सारी देवी देवता भगवान की जो पूजा लोग कर रहे हैं

597
00:46:16,760 --> 00:46:22,560
तो आप रामपाल के फॉलोवर आप रामपाल के

598
00:46:22,560 --> 00:46:26,760
फॉलो रामपाल से क्या मतलब है हमको रामपाल को मानते

599
00:46:26,760 --> 00:46:31,160
हैं नहीं भाई उसको पाखंडी को कौन

600
00:46:31,160 --> 00:46:35,360
बोलेगा चलिए अच्छ पाखंडी इत्यादि शब्दों का उपयोग ना

601
00:46:35,360 --> 00:46:40,840
करें कि उनको नहीं वो करते बस ठीक है

602
00:46:40,840 --> 00:46:44,960
बताइए वेद में क्या ऐसा लिखा हुआ है कि

603
00:46:44,960 --> 00:46:49,160
इतने सारी देवी देवताओं को पूजा करना चाहिए बिल्कुल

604
00:46:49,160 --> 00:46:54,080
लिखा हुआ है रात्रि सूक्त में देवी मां की पूजा बताई गई

605
00:46:54,080 --> 00:46:58,080
बोल रहा हूं सुनिए किसम रात्रि सूक्त में देवी मां की

606
00:46:58,080 --> 00:47:01,120
पूजा बताई गई

607
00:47:01,120 --> 00:47:05,640
है नहीं ऋग्वेद का ऋग्वेद में कहीं लिखा हुआ है क्या

608
00:47:05,640 --> 00:47:09,800
अरे भैया वेद का ही बता रहा हूं आपको ऋग्वेद और यजुर्वेद अथर्ववेद

609
00:47:09,800 --> 00:47:15,800
सामवेद इनमें से एक का

610
00:47:18,120 --> 00:47:22,520
बताऊंगा आपके पास वेद खुला है तो आप मीन टाइम जरा

611
00:47:22,520 --> 00:47:27,520
शुक्ल र्वेद कावा

612
00:47:27,520 --> 00:47:32,640
और उसका अंतिम श्लोक पढ़िए जरा क्या लिखा है व

613
00:47:32,640 --> 00:47:36,760
पर आपके पास वेद है वेद है

614
00:47:36,760 --> 00:47:39,480
हा ऋगवेद

615
00:47:39,480 --> 00:47:43,640
है शुक्ल यजुर्वेद ऋगवेद है बाकी

616
00:47:43,640 --> 00:47:47,800
नहीं जवेद पढ़िए कृष्ण र्वेद की हिता पढ़िए भर

617
00:47:47,800 --> 00:47:51,960
भर के हम आपको य पर प्रमाण बता दे रहे हैं वो आप जाकर

618
00:47:51,960 --> 00:47:56,360
चेक करिएगा अपने अनुसंधान करिएगा क्या हमने गलत बोला

619
00:47:56,360 --> 00:47:58,640
नहीं

620
00:47:58,640 --> 00:48:02,960
आपके पास क्योंकि सभी वेद नहीं है यह

621
00:48:02,960 --> 00:48:08,360
ऋग्वेद यह ऋग्वेद उत्तम देवी सूक्त है

622
00:48:08,360 --> 00:48:14,360
बताता हूं आपको ऋग्वेद का देवी सूक्त

623
00:48:14,360 --> 00:48:18,840
237 वैसे इस बारे में भी आप यह जो बोल रहे हैं ना क्या ऋग्वेद

624
00:48:18,840 --> 00:48:23,040
में है ज मैंने कहा ना आपने वीडियोस देखे हमने छह वीडियोस

625
00:48:23,040 --> 00:48:27,160
बनाए रामपाल के ऊपर और उस छ

626
00:48:27,160 --> 00:48:31,600
वीडियो में लास्ट वाले वीडियो में एक पीडीएफ दी है उसमें सारे भगवान

627
00:48:31,600 --> 00:48:35,920
के जितने पांच रूप है उन सबकी कहां कहा पर बात हुई है यह

628
00:48:35,920 --> 00:48:39,960
मोटे मोटे तौर पर हमने वहा बता दिया उस पीडीएफ में और

629
00:48:39,960 --> 00:48:44,400
इसके अलावा भी बात हुई है ऐसा नहीं है कि वो अंतिम प्रमाण केवल वही है

630
00:48:44,400 --> 00:48:48,960
उनके अलावा बात हुई मगर यथा सामर्थ्य जो हम उसमें संकलित कर पाए हैं

631
00:48:48,960 --> 00:48:53,000
वह पर्याप्त है इसके लिए मंडल कौन

632
00:48:53,000 --> 00:48:58,400
होगा बता दीजिए हां बता रहा हूं आपको 27

633
00:48:58,400 --> 00:49:02,440
यह मुझे दुर्गा सस्ती बहुत अच्छी लगती है गीता प्रस से प्रकाशित

634
00:49:02,440 --> 00:49:06,520
होती है य और और यह अंदर ऐसे जैसे कोई

635
00:49:06,520 --> 00:49:10,560
बच्चे कॉमिक्स नहीं पढ़ते थे फलकी जी आपसे बात कर

636
00:49:10,560 --> 00:49:14,560
रहा हूं बच्चे कॉम पढ़ते तो उस तरह से माता का इसमें

637
00:49:14,560 --> 00:49:18,640
बताया गया है जी जी जी छोटे

638
00:49:18,640 --> 00:49:22,840
थे तो राज कॉमिक्स पढ़ते

639
00:49:22,840 --> 00:49:28,840
थे 237

640
00:49:31,040 --> 00:49:35,080
यह ऋग्वेद उतम देवी सूक्त है और यह है ऋग्वेद

641
00:49:35,080 --> 00:49:40,280
का मंडल 10 अध्याय सूक्त

642
00:49:40,280 --> 00:49:45,480
125 सूक्त 125

643
00:49:45,480 --> 00:49:49,800
श्लोक अरे पूरा सूक्ति वही है भाई श्लोक नहीं होता मंत्र

644
00:49:49,800 --> 00:49:53,920
होते हैं मैंने एक बार गलती से श्लोक कह दिया था तो आर समाज पीछे पड़

645
00:49:53,920 --> 00:49:58,520
गए लोक बोलता है

646
00:49:58,520 --> 00:50:02,520
अच्छा इसमें क्या ब्रह्मा विष्णु म हेलो इसमें क्या

647
00:50:02,520 --> 00:50:07,200
ब्रह्मा विष्णु देवी इसमें परम तत्व की देवी के रूप में

648
00:50:07,200 --> 00:50:11,520
स्तुति की जा रही है ना क्या ऋगवेद

649
00:50:11,520 --> 00:50:17,120
में कहीं जिक्र है कि ब्रह्मा विष्णु महेश की उत्पत्ति किस तरह हुई

650
00:50:17,120 --> 00:50:21,400
स अरे वेद तो एक ही है लिए आपना आप हमारे वीडियो

651
00:50:21,400 --> 00:50:25,440
देखिए यजुर्वेद सामवेद या कोई वेद कोई भी चारों में

652
00:50:25,440 --> 00:50:31,440
से कोई भी एक वेद बताइए

653
00:50:33,080 --> 00:50:37,360
3 चैप्टर बताहा खिवा चैप्टर

654
00:50:37,360 --> 00:50:41,400
में उसका अंतिम लोक पढ़िए क्या है उसमें भगवान विष्णु के बारे में बात

655
00:50:41,400 --> 00:50:45,760
हो रही है जिनके श्री और लक्ष्मी जी जिनके पति है उनके बारे में बात हो रही है

656
00:50:45,760 --> 00:50:51,760
प कौन सा कौन

657
00:50:53,720 --> 00:50:58,160
सा इनको आपने दिखाओ अभी मैंने ऋग्वेद

658
00:50:58,160 --> 00:51:02,160
बोल दिया तोब आप दूसरा दूसरी बात क्यों कर रहे हैं नहीं नहीं आप ऋग्वेद में ही

659
00:51:02,160 --> 00:51:06,360
दिखा दिए क्या ब्रह्मा विष्णु महेश का जिक्र है या उसकी उत्पत्ति किस प्रकार

660
00:51:06,360 --> 00:51:10,400
सेवेद आवा केवल ऋग्वेद में क्यों बताए पहले तो ये बताओ केवल

661
00:51:10,400 --> 00:51:14,400
ऋग्वेद में क्यों बताए आपके पास क्या करें

662
00:51:14,400 --> 00:51:18,680
नहीं नहीं सबसे पहले तो ऋग्वेद ही ना आया लो

663
00:51:18,680 --> 00:51:22,720
नहीं नहीं आया कहां लिखा है सबसे पहले रिद आया

664
00:51:22,720 --> 00:51:27,080
लो हम लोग तो किताबों में यही पढ़ते आ रहे सबसे पुराना कहां

665
00:51:27,080 --> 00:51:31,840
पढ़ा आपने और ये मैंने आपको मैंने

666
00:51:31,840 --> 00:51:37,840
ब हम सुनते सबसे पुराना

667
00:51:39,160 --> 00:51:43,440
वे तैत्र आरण पढ़ लीजिए आयात वरदा देवी अक्षर

668
00:51:43,440 --> 00:51:48,240
ब्रह्म समित करके पूरा है उसमें वो पढ़िए सावित्री की बात

669
00:51:48,240 --> 00:51:53,160
है आपको वेदों में प्रमाण जो है आपको जो है कहां मिलेगा

670
00:51:53,160 --> 00:51:57,200
वो जो कबीर पंथ का जो छवा वीडियो है उसमें हमने

671
00:51:57,200 --> 00:52:01,320
पीडीएफ दी है उसमें भगवान के रूपों का जहां जहां पर भी प्रमाण दिया गया

672
00:52:01,320 --> 00:52:05,640
है वह सारे हैं और एक अच्छा ग्रंथ

673
00:52:05,640 --> 00:52:07,880
और

674
00:52:07,880 --> 00:52:13,880
है सहस्त्र नाम

675
00:52:14,160 --> 00:52:18,160
वाला व गीता प्रस से छपता है उसमें वेदोक्त स्तुति

676
00:52:18,160 --> 00:52:22,160
जितनी भी है वह संग्रहित की गई है तो आप वहां

677
00:52:22,160 --> 00:52:26,720
से गीता प से वो ले लीजिएगा संतोष जी आप जो है अनर्गल

678
00:52:26,720 --> 00:52:30,840
करने आए थे हमें पता लग गया एक

679
00:52:30,840 --> 00:52:35,280
ही वेद के चार विभाग करते हैं व्यास जी द्वापर में आकर

680
00:52:35,280 --> 00:52:39,400
के ठीक है तो अब तो यार समाज

681
00:52:39,400 --> 00:52:44,120
से भी आगे हो [हंसी]

682
00:52:44,120 --> 00:52:47,240
गए

683
00:52:47,240 --> 00:52:51,360
श्रीराम पहले आए फिर इसके बाद ऋगवेद को बोले कि नहीं

684
00:52:51,360 --> 00:52:55,360
मुझे सारद में कहीं से भी दिखा दो उसमें जब बताने लग गए तो कह

685
00:52:55,360 --> 00:53:00,160
रहे हैं कि नहीं दिया मुझे वैसे ही दिखाओ हां विषयात

686
00:53:00,160 --> 00:53:04,440
इसी को कहते हैं विषयात अरे कोई और है

687
00:53:04,440 --> 00:53:08,520
क्या रामपाल दास जी की ओर से कोई है क्या कोई तो

688
00:53:08,520 --> 00:53:12,720
होगा माई का लाल जो आए और दिखाए कहां प्रमाण

689
00:53:12,720 --> 00:53:16,560
है वेदों

690
00:53:16,560 --> 00:53:22,200
में हम आया कोई आया माइका लाल कोई

691
00:53:22,200 --> 00:53:27,560
आया जी जय सियाराम जय श्री राम आपका नाम

692
00:53:27,560 --> 00:53:32,040
मेरा नाम कृष्णा है कृष्ण हा

693
00:53:32,040 --> 00:53:36,040
कृष्णा कृष्णा हा कृष्णा नाम

694
00:53:36,040 --> 00:53:41,920
तो द्रौपदी का था नहीं तो मेरा नाम कृष्णा है

695
00:53:41,920 --> 00:53:46,880
भगवान आपके गु हमारे गुरुजी प्रेमानंद

696
00:53:46,880 --> 00:53:51,480
महाराज क्या बात है बहुत बढ़िया स्वागत है आपका हमारा

697
00:53:51,480 --> 00:53:56,840
भाई हम भी उसी के पाखंडी रामपाल के विरोधी है

698
00:53:56,840 --> 00:54:00,920
देखिए आपत्ति जनक शब्दों का उपयोग वर्जित है आप मर्यादा

699
00:54:00,920 --> 00:54:02,640
में रहकर किसी के भी बारे में बात

700
00:54:02,640 --> 00:54:06,640
करें जी ठीक है जी एक

701
00:54:06,640 --> 00:54:10,840
सवाल था आपसे बोलिए जो हमारे मतलब

702
00:54:10,840 --> 00:54:15,440
जो भगवान विष्णु है वही परब्रह्म है

703
00:54:15,440 --> 00:54:19,560
सर्वश्रेष्ठ हां वही वही परब्रह्म वही ब्रह्मा विष्णु महेश

704
00:54:19,560 --> 00:54:24,520
के रूप में दिखाई देते हैं और

705
00:54:24,520 --> 00:54:28,560
एक एक और है जैसे कारण दक्षा विष्णु शरो

706
00:54:28,560 --> 00:54:32,840
दक्षा विष्णु गर्भ दक्षा विष्णु ये सब लीला लीला की बात है देखिए

707
00:54:32,840 --> 00:54:35,840
ऐसा है

708
00:54:35,840 --> 00:54:40,000
कि लीला में क्या होता है जैसे मान लीजिए शिव जी ब्रह्मा विष्णु

709
00:54:40,000 --> 00:54:44,320
महेश भगवती और गणेश के रूप में प्रकट हुए या विष्णु जी हुए ठीक है

710
00:54:44,320 --> 00:54:48,840
अगर वो कहीं पर लीला पूर्वक भक्ति नहीं करेंगे

711
00:54:48,840 --> 00:54:53,760
केवल स्वामी रह जाएंगे सेवक नहीं दिखाई देंगे ना

712
00:54:53,760 --> 00:54:59,760
तो ईश्वर पर एक बाधा आएगी क्या ईश्वर सेवक हो सकता

713
00:55:00,360 --> 00:55:04,480
है यह बाधा आ जाएगी इसलिए वो सेवक भी बनते

714
00:55:04,480 --> 00:55:08,680
हैं इसलिए वो सेवक भी बन जाते हैं कि मैं भक्त

715
00:55:08,680 --> 00:55:12,920
ही मैं भगवान ही नहीं मैं भक्त भी हूं यत्र तत्र सर्वत्र

716
00:55:12,920 --> 00:55:17,000
मैं ही मैं हूं तो अबाध अपने

717
00:55:17,000 --> 00:55:21,080
वो जो है व अबाध है कोई भी बाधा उन पर नहीं लग सकती वही

718
00:55:21,080 --> 00:55:25,200
भक्त वही भक्त वही भगवान वही भगवान वही भक्त तो वो बाधा

719
00:55:25,200 --> 00:55:29,400
नहीं लगती इसलिए ज भले ही परमेश्वर के रूप में स्थापित है मगर

720
00:55:29,400 --> 00:55:35,400
वहीं पर जाकर के वैष्णवास्त्र

721
00:55:56,920 --> 00:56:01,160
और यह समझाने के लिए कि मैं ईश्वर हूं मैं कुछ भी

722
00:56:01,160 --> 00:56:05,200
कर सकता हूं मेरे ऊपर किसी भी प्रकार के नियम लागू नहीं

723
00:56:05,200 --> 00:56:09,880
होते मैं सभी नियमों को बनाने वाला सर्व नियामक हूं मैं सर्वशक्तिमान

724
00:56:09,880 --> 00:56:14,000
हूं यह ईश्वर आपको बता रहे हैं अपनी लीलाओं के माध्यम से मगर

725
00:56:14,000 --> 00:56:18,040
जब वो लीला करते हैं तो कुछ जो कुतर की होते हैं वो कहने लगते हैं अरे यह

726
00:56:18,040 --> 00:56:22,200
कैसा ईश्वर है जो रो रहा है यह कैसा ईश्वर है जो माया में फस गया

727
00:56:22,200 --> 00:56:26,520
ये कैसा ईश्वर है जो यह नहीं कर पा रहा यह कैसा ईश्वर है जो वो नहीं कर पा रहा

728
00:56:26,520 --> 00:56:30,840
फिर इसका अर्थ क्या हुआ कि वह जिस ईश्वर को मानते हैं वह फलाने

729
00:56:30,840 --> 00:56:34,920
फलाने काम नहीं कर सकता मगर इस बात का भगवान ने जवाब दिया

730
00:56:34,920 --> 00:56:39,400
भगवान ने 92 में मेरे ख्याल से कहा 92 है

731
00:56:39,400 --> 00:56:43,600
शायद वो लोग जो मुझे मानव देह में देख

732
00:56:43,600 --> 00:56:47,600
करके और मेरे ब्रह्म तत्व को भूल जाते हैं नजर

733
00:56:47,600 --> 00:56:51,640
अंदाज कर देते इग्नोर कर देते हैं वोह लोग मूर्ख है वो कभी मुझे

734
00:56:51,640 --> 00:56:55,760
प्राप्त नहीं कर पाएंगे और इसका एक उदाहरण

735
00:56:55,760 --> 00:57:00,440
भी ले ली उदाहरण क्या है इसका कि

736
00:57:00,440 --> 00:57:04,480
जैसे वायु है वायु आपको यह बताना चाहती

737
00:57:04,480 --> 00:57:08,640
है कि वह क्या क्या कर सकती है कहां कहा जा सकती है अब

738
00:57:08,640 --> 00:57:12,240
वायु आपसे कैसे कम्युनिकेट करे

739
00:57:12,240 --> 00:57:16,880
वायु की अपनी एक वो है आपकी अलग है ज्ञानेंद्रियां

740
00:57:16,880 --> 00:57:20,960
कर्मेंद्रिय तो वायु ने अगर वायु के पास क्षमता होगी आपकी

741
00:57:20,960 --> 00:57:24,960
ज्ञानेंद्रियों का विषय बनने की तो वायु एक

742
00:57:24,960 --> 00:57:29,040
अवतार लेगी रूप लेगी ऐसा रूप जो

743
00:57:29,040 --> 00:57:33,200
आपको समझ में आ सके समझे और

744
00:57:33,200 --> 00:57:37,880
वो ऐसी भाषा बोलने वाला रूप जो आप जिसको आप सुन सके

745
00:57:37,880 --> 00:57:42,080
ऐसा रूप लेगी वाय अब उसने ले लिया मगर वो

746
00:57:42,080 --> 00:57:46,080
आप आई क्यों है आपको यह बताने कि मैं सभी जगह जा सकती

747
00:57:46,080 --> 00:57:50,160
हूं तो क्या हुआ वायु वाई एक अवतार लिया उसने वायु

748
00:57:50,160 --> 00:57:54,320
देव के रूप में वायु देव ने कहा देखो भाई मैं सब जगह जा सकता

749
00:57:54,320 --> 00:57:58,520
हूं मैं वायु हूं तो हां तो उन्होंने जा जा के बताना

750
00:57:58,520 --> 00:58:02,600
शुरू हुआ देखो मैं कान के अंदर जा सकती हूं मैं जो है ध्वज

751
00:58:02,600 --> 00:58:06,760
के ऊपर जा सकती हूं शीर्ष पर जा सकती हूं मैं नाली में भी जा सकती हूं मैं

752
00:58:06,760 --> 00:58:10,760
वायु हूं अब जब वो शीर्ष पर गई तो तो कोई बात नहीं है

753
00:58:10,760 --> 00:58:14,760
मगर जब उसने दिखाया मैं नाली में जा सकती हो अरे देखो वायु देव नाली में जा रहे

754
00:58:14,760 --> 00:58:18,760
हैं अरे भैया जो आपकी सीमाए है जो आपकी मर्यादा

755
00:58:18,760 --> 00:58:23,000
है वो वायु के लिए नहीं है वायु सब जगह

756
00:58:23,000 --> 00:58:27,040
वैसे ही व्याप्त है वो केवल आपको प्रकट टक करके दिखा

757
00:58:27,040 --> 00:58:27,540
रहा

758
00:58:27,240 --> 00:58:32,160
है वो तो पहले से ही व्याप्त थी सब जगह ठीक है ऐसा है

759
00:58:32,160 --> 00:58:36,360
ठीक है भया अा लगा

760
00:58:36,360 --> 00:58:40,760
बहुत बढ़िया ब दीक्षा लेली प्रमान जी

761
00:58:40,760 --> 00:58:45,000
महाराज अभी नहीं अभी हम गए नहीं भैया

762
00:58:45,000 --> 00:58:49,080
अभी हम जाएंगे तो ले लेंगे

763
00:58:49,080 --> 00:58:53,240
ठीक है भया जय सियाराम सीताराम

764
00:58:53,240 --> 00:58:59,240
जय श्री राम

765
00:58:59,880 --> 00:59:04,160
धन्यवाद सन ऑफ उड़ीसा जी आप लोग

766
00:59:04,160 --> 00:59:09,120
भी हमारी सहायता कर सकते हैं इस अभियान में नाम

767
00:59:09,120 --> 00:59:13,480
अभन नाम जप अभियान से जुड़े जो भी हमारी सहायता

768
00:59:13,480 --> 00:59:17,600
करना चाहता है किसी भी प्रकार से वह नाम जप अभियान से जुड़े क्योंकि

769
00:59:17,600 --> 00:59:21,640
हमारा वह नाम जप अभियान एक संगठन की शक्ति प्रकट करेगा

770
00:59:21,640 --> 00:59:26,400
हिंदुओं को एक करके दिखाएगा इसलिए नामा स्त्र से जुड़े

771
00:59:26,400 --> 00:59:30,880
और साथ ही साथ आपकी सवा घंटे की सवा घंटे की जो भक्ति है वह टारगेट

772
00:59:30,880 --> 00:59:36,880
भी कंप्लीट हो

773
00:59:36,920 --> 00:59:40,280
जाएगा सचिन

774
00:59:40,280 --> 00:59:44,360
मिश्रा मतभेद ठीक है इस जन्मना वर्ण

775
00:59:44,360 --> 00:59:49,240
व्यवस्था के कारण हमारे कितने हिंदू भाई देखिए

776
00:59:49,240 --> 00:59:53,360
यह जो सवाल आता है ना हमारे कितने हिंदू भाई जो

777
00:59:53,360 --> 00:59:57,400
मनुष्य है ना उसके अंदर नियमों नियमों में में ना बंधने का

778
00:59:57,400 --> 01:00:01,640
ना बंधने की प्रवृत्ति है आज अगर आप उसके लिए

779
01:00:01,640 --> 01:00:05,880
शास्त्रों की चीज को बदल दो ठीक है शास्त्र धर्म को चेंज कर दिया हमने जन्मना नहीं करमना

780
01:00:05,880 --> 01:00:10,040
क्योंकि इसकी वजह से वो ईसाई हो रहे है कल को वो बहन से विवाह ना होने की वजह

781
01:00:10,040 --> 01:00:14,280
से जाने लगेंगे तो इसको भी बदल दे

782
01:00:14,280 --> 01:00:19,120
भाई धर्म का अर्थ है मर्यादा जिसके जिसमें रह कर के उसको अनुशासित

783
01:00:19,120 --> 01:00:23,360
होकर के प्रवृत्ति से निवृत्ति और निवृत्ति से निर्वत तक जाना

784
01:00:23,360 --> 01:00:24,360
है

785
01:00:24,360 --> 01:00:28,640
मगर उसके अनुसार हम उस मर्यादा कोही बदलते रहे तो हमारे सनातन

786
01:00:28,640 --> 01:00:34,640
धर्म में और दूसरे सनातन विरुद्ध तंत्रों में क्या अंतर रह

787
01:00:35,200 --> 01:00:39,760
जाएगा ब्रह्मा कुमारी वाले आए थे और

788
01:00:39,760 --> 01:00:45,760
मुस्कुरा मुस्कुरा के बस चले

789
01:00:46,800 --> 01:00:52,440
गए क्लास में जवाइन करने के लिए वही नंबर है हमारा

790
01:00:52,440 --> 01:00:56,680
74836 और उसमें आप जवाइन कर सकते जो

791
01:00:56,680 --> 01:01:00,840
यथा सामर्थ उसमें बताने का प्रयास किया जा सकता है जाता है और

792
01:01:00,840 --> 01:01:05,400
हिंदू योद्धा के रूप में बनाने का कोर्स है वो जो हम लोग

793
01:01:05,400 --> 01:01:09,440
करते व्यक्ति हिंदू योद्धा बने ये

794
01:01:09,440 --> 01:01:13,640
तो है बहुत सारे प्रश्नों के उत्तर

795
01:01:13,640 --> 01:01:19,640
मिल जाएंगे आपको उस क्लासेस में अपने आप अपने आप

796
01:01:20,720 --> 01:01:24,760
ही भया अब पियूष अब पियूष यहां पर दिख

797
01:01:24,760 --> 01:01:29,120
क्यों नहीं रहे हैं पता है य कमेंट्स में क्यों नहीं दिख रहे हा

798
01:01:29,120 --> 01:01:33,160
इसलिए नहीं दिख रहे कि वो जो करने आए थे व कर नहीं सकते चरणों की सौगंध खाली

799
01:01:33,160 --> 01:01:37,160
है क्या करें तो अब यहां

800
01:01:37,160 --> 01:01:43,160
रह के फायदा क्या

801
01:01:45,680 --> 01:01:50,880
है ठीक है अ भद्र भाषा के लिए कारवाई करते हैं कुछ ना

802
01:01:50,880 --> 01:01:54,880
कुछ चित्र बिगाड़ रहे हैं हमारा और इनका युगल जी का

803
01:01:54,880 --> 01:01:59,120
जोकर ड यह सब कह रहे हैं तो करते

804
01:01:59,120 --> 01:02:01,600
हैं कारवाई

805
01:02:01,600 --> 01:02:04,120
[संगीत]

806
01:02:04,120 --> 01:02:08,240
करेंगे शक्तिमान के शत्रु द्वारा तारीफ प्राप्त

807
01:02:08,240 --> 01:02:10,880
हो रही है

808
01:02:10,880 --> 01:02:15,120
प्रशंसा अच्छा आभार आपका समर्थन

809
01:02:15,120 --> 01:02:20,080
प्रकट करने के लिए किलविश

810
01:02:20,080 --> 01:02:26,080
एक पुराना कैरेक्टर है अंधेरा कायम रहे

811
01:02:26,880 --> 01:02:32,880
बिल्कुल था

812
01:02:32,880 --> 01:02:37,200
तो सब्सक्राइबर मीट चलिए समय

813
01:02:37,200 --> 01:02:41,560
समय मिला तो किसी दिन रखते हैं सब्सक्राइबर

814
01:02:41,560 --> 01:02:45,640
मीट आद राय जी पूछ रहे कि मनुवाद आएगा कौन पूछ र है

815
01:02:45,640 --> 01:02:50,480
आदिर जी मनुवाद आएगा नहीं आएगा व आप पर निर्भर करता है ना

816
01:02:50,480 --> 01:02:54,520
जब तक आप और हम है तब तक मनुवाद है आना कहां से है यहां तो

817
01:02:54,520 --> 01:02:58,560
आर समां का लज जाता है ना कि भाई जब जब वह

818
01:02:58,560 --> 01:03:02,800
पहले से है तो उसको जन्म लेने की क्या आवश्यकता

819
01:03:02,800 --> 01:03:07,040
बिल्कुल तो मनुवाद तो है ही मनुवाद

820
01:03:07,040 --> 01:03:11,040
को संरक्षित करना है हमें केवल यथा सामर्थ फिर

821
01:03:11,040 --> 01:03:15,160
आगे तो भगवान भी है वो भी बैठे हैं कोई बात नहीं अब मैं आता

822
01:03:15,160 --> 01:03:19,160
हूं बस बहुत हो चुका एक बार गुरुदेव बता रहे

823
01:03:19,160 --> 01:03:23,360
थे कि मान लीजिए अगर वर्ण व्यवस्था नहीं रहेगी तो अब

824
01:03:23,360 --> 01:03:27,680
कल्की अवतार जी का कल्की अवतार भगवान का तो जो प्राकट्य होगा वह तो

825
01:03:27,680 --> 01:03:32,000
ब्राह्मण कुल में ही होगा तो जब वर्ण व्यवस्था नहीं रहेगी कोई ब्राह्मण

826
01:03:32,000 --> 01:03:36,840
बचेगा ही नहीं तो अवतार कैसे होगा तो इसलिए भगवान स्वयं इसको

827
01:03:36,840 --> 01:03:41,320
हमेशा प्रतिष्ठित करके रखेंगे क्योंकि सनातन अकॉर्डिंग टू आ समाज न

828
01:03:41,320 --> 01:03:42,040
मुझे ऐसा लगता

829
01:03:42,040 --> 01:03:46,320
है कि भगवान जब गेट पर आएंगे कि भाई मुझे जन्म लेना है तो

830
01:03:46,320 --> 01:03:50,400
जो क्षत्रिय होगा वो कहेगा हां तुरंत वण बदल लेता हूं

831
01:03:50,400 --> 01:03:54,560
वर्ण बदल लिया मैंने वर्ण कैसे बदला बेटा ए फ एप्पल होता

832
01:03:54,560 --> 01:03:58,560
है हां पढ़ा दिया मैंने पढ़ा दिया आ जाओ ब्राह्मण हो गया आ

833
01:03:58,560 --> 01:04:02,600
जाओ जन्म हो गया यही यही तो है ब

834
01:04:02,600 --> 01:04:07,440
क कर्मणा मैंने पढ़ा दिया बच्चे को

835
01:04:07,440 --> 01:04:11,680
अरे छोटू इधर से नहीं उधर से जाना ये लो मैंने मार्गदर्शन कर दिया ब्राह्मण

836
01:04:11,680 --> 01:04:15,920
हो गया आ जाइ भगवान ब्राह्मण हो गए भगवान

837
01:04:15,920 --> 01:04:20,120
कहेंगे इधर मैं बताता नकली

838
01:04:20,120 --> 01:04:26,120
ब्राह्मण

839
01:04:27,040 --> 01:04:31,160
जी जी धर्म के पक्ष में किलविश जी धर्म के पक्ष में व उन्होंने

840
01:04:31,160 --> 01:04:35,480
अपने किसी कारणवश वो नाम रखा होगा मगर व अच्छा

841
01:04:35,480 --> 01:04:41,480
है याद आ गई छोटे बचपन

842
01:04:42,520 --> 01:04:46,800
की नाम अभ कक्टर

843
01:04:46,800 --> 01:04:52,040
मिलेंगे आपको शक्तिमान के यहां पर एक से एक नाम बदल के आएंगे शक्तिमान

844
01:04:52,040 --> 01:04:56,040
काने दे सुपर हीरो का नाम रखते हैं वो लोग अद

845
01:04:56,040 --> 01:05:01,000
करते हैं और जो लोग विलन का नाम रखते हैं वह अच्छा आचरण करने वाले होते हैं

846
01:05:01,000 --> 01:05:05,320
जी पीयूष ठाकरे जी हमारा नंबर नोट कर लीजिए

847
01:05:05,320 --> 01:05:07,520
7408

848
01:05:07,520 --> 01:05:11,640
30169 इस पर ट करने पर आपको फॉर्म मिल जाएगा व फॉर्म भर

849
01:05:11,640 --> 01:05:17,640
दीजिएगा नाम जप के

850
01:05:20,360 --> 01:05:24,800
लिए क्या समस्या है इनकी लॉर्ड दज्जाल जी

851
01:05:24,800 --> 01:05:30,800
व्ट द फ हिस्टोरियन एंड एविडेंसेस से आई एम सेइंग एक्जेक्टली

852
01:05:31,200 --> 01:05:37,200
दैट ठीक है तो मुझे लगता है

853
01:05:38,280 --> 01:05:42,840
कि आते हैं ब्रह्मा जी

854
01:05:42,840 --> 01:05:46,920
पंचदेव में आते हैं जहां पर ब्रह्मा जी प्र ब्रह्मा जी को

855
01:05:46,920 --> 01:05:51,200
प्रजापति कहा गया है शास्त्रों में और प्रजापति

856
01:05:51,200 --> 01:05:55,720
सूर्य को भी कहा गया है ब्रह्मा जी ही सूर्य है और सूर्य ही ब्रह्मा जी है और प्रजापति

857
01:05:55,720 --> 01:06:00,400
भी सपद ब्राह्मण बहुत सारे ग्रंथ है जहां पर ये विवेचन है

858
01:06:00,400 --> 01:06:04,120
ठीक

859
01:06:04,120 --> 01:06:10,120
है अधिरा 2030 तक लागू

860
01:06:11,080 --> 01:06:15,400
ओहो जयगर वेटिकन सि हरि रत्नम आचार्य

861
01:06:15,400 --> 01:06:19,640
जी कौन है उस दिन हर

862
01:06:19,640 --> 01:06:23,640
हरि रत्नम आचार्य जी वो तो नहीं है जो वेदांत पाठशाला

863
01:06:23,640 --> 01:06:28,360
नाम से वो लाइव किया था वही है शायद

864
01:06:28,360 --> 01:06:32,520
वो वो लिखते हैं अपने नहीं है नहीं वो लिखते हैं आचार्य

865
01:06:32,520 --> 01:06:36,680
तो प्रशांत वो भी नहीं है नहीं वो मैंने पूछा था

866
01:06:36,680 --> 01:06:40,880
वो मैंने पूछा था हरि रत्नम से वो आचार्य नहीं है अच्छा आचार्य

867
01:06:40,880 --> 01:06:44,920
नहीं हा क मतलब अपने आपको आचार नहीं कहता इतना तो है

868
01:06:44,920 --> 01:06:48,960
क्या इसकन के सिद्धांत में नहीं

869
01:06:48,960 --> 01:06:53,600
वो कहता कहता होगा क्योंकि मैंने बहुत लोगों से सुना है कि वो अपने आप को कहते हैं कि वो आचार्य है

870
01:06:53,600 --> 01:06:58,280
शास्त्री लेकि हां ये लगता नहीं है

871
01:06:58,280 --> 01:07:00,920
वो नहीं

872
01:07:00,920 --> 01:07:05,000
है बच्चे हैं वो अभी

873
01:07:05,000 --> 01:07:09,080
नहीं नहीं एक से अधिक वर्ण नहीं हो होता है बस यह

874
01:07:09,080 --> 01:07:13,120
है कि जब आप वर्ण उचित कर्म करने वाले होते

875
01:07:13,120 --> 01:07:17,320
हैं तो आप प्रॉपर उस वर्ण को धारण करने वाले बन जाते हैं

876
01:07:17,320 --> 01:07:19,920
और जब आप

877
01:07:19,920 --> 01:07:24,080
जैसे ब्राह्मण कुल में जन्म लेकर आप क्षत्रिय वाला कार्य कर रहे हैं तो आप क्षत्रियो उचित ब्राह्मण

878
01:07:24,080 --> 01:07:28,680
कहलाएंगे और अगर शुद्धता की दृष्टि से देखेंगे तो आप कर्म संकर हो गए

879
01:07:28,680 --> 01:07:32,760
तो जब आप क्षत्रियो चित ब्राह्मण हो गए तो आपको अमुक अमुक कई सारी जो

880
01:07:32,760 --> 01:07:37,360
विधि विधान होंगे उससे आपको अलग रखा जाएगा

881
01:07:37,360 --> 01:07:41,600
अब जैसे कि शंकराचार्य कौन बनता है जिसने कुल में जन्म

882
01:07:41,600 --> 01:07:45,840
भी लिया हो जिसने बचपन से ऐसा ऐसा किया हो इतनी इतनी पढ़ाई की हो फिर

883
01:07:45,840 --> 01:07:50,280
जाकर के उसको गुरुओं का सानिध्य प्राप्त हुआ हो फिर वो

884
01:07:50,280 --> 01:07:54,280
वेद वेदांग में निपुण हो इन सबके बाद वो बनता है ऐसा नहीं

885
01:07:54,280 --> 01:07:58,760
है कि जन्म ले लिया शंक हो गए तो वो वाली बात है कि

886
01:07:58,760 --> 01:08:02,920
क्षत्रियो चित ब्राह्मण वैश्य उचित ब्राह्मण हो सकता है ब्राह्मण उचित

887
01:08:02,920 --> 01:08:07,200
क्षत्रिय भी आजकल होने लगे हैं तो उसका

888
01:08:07,200 --> 01:08:11,320
परिणाम है जब हम लोग अपने अपने जो जिस कुल में जन्म लिया वो कर्म ना करके जब दूसरे कर्म करने

889
01:08:11,320 --> 01:08:15,520
पड़ रहे हैं हालांकि वो वो है समाज

890
01:08:15,520 --> 01:08:19,720
की समाज का स्ट्रक्चर ही ऐसा बना हुआ है तो किया क्या जाए अभी

891
01:08:19,720 --> 01:08:23,960
मैंने देखा था मुझे एक फोटो शेयर की गई थी उसमें क्या था एक

892
01:08:23,960 --> 01:08:28,600
एक युवक ने वो

893
01:08:28,600 --> 01:08:32,600
युवक ने आत्महत्या कर ली

894
01:08:32,600 --> 01:08:34,920
और क्योंकि क्योंकि वह कुछ पास नहीं हो

895
01:08:34,920 --> 01:08:39,400
पाया किसी परीक्षा में किसी भी सेलेक्ट नहीं हो पाया इसलिए आत्महत्या की

896
01:08:39,400 --> 01:08:43,480
यह परिणाम है कर्म आधारित वर्ण व्यवस्था

897
01:08:43,480 --> 01:08:47,560
को मानने का यह परिणाम है उसका और जब आप जन्म

898
01:08:47,560 --> 01:08:51,680
से जन्म जन्म आधारित वर्ण व्यवस्था को मानते हैं तो क्या होता है जन्म से सबकी

899
01:08:51,680 --> 01:08:56,080
जीविका सुनिश्चित है जीविका के लिए दिमाग और और

900
01:08:56,080 --> 01:09:00,280
अलग से प्रेशर नहीं लगाना है जो आपके कुल में हो रहा है नहीं करना पड़गा हा

901
01:09:00,280 --> 01:09:04,400
जो आपके कुल में हो रहा है बचपन से आप वही सीखो ग वही सीखो गया

902
01:09:04,400 --> 01:09:09,120
आप और उसी को ही और ज्यादा निपुण होते हुए वही करने लोगो के आगे

903
01:09:09,120 --> 01:09:13,320
बिल्कुल उनको एक्स्ट्रा एफर्ट्स नहीं डालने है कि नहीं मैं बना मैं जन्म तो लिया लेब्राडोर

904
01:09:13,320 --> 01:09:18,000
का पर मुझे अब जो है रट वेलर बनना है बिल्कुल ये

905
01:09:18,000 --> 01:09:22,000
तो है वो भी बचपन सेही नहीं बड़े हो करर के जब वो 20 2

906
01:09:22,000 --> 01:09:26,120
साल बिता लिए जब वो भाई जब व्यक्ति जन्म लेता है तो उसकी

907
01:09:26,120 --> 01:09:30,200
जो कॉपी होती है नोटबुक वो खाली होती है तो उसमें हम कुछ भी लिख भी

908
01:09:30,200 --> 01:09:34,280
सकते हैं पाच वर्ष की आयु में लिखना शुरू कर दिया मगर

909
01:09:34,280 --> 01:09:38,280
जब वो 25 वर्ष का हो गया तब वो कह रहा है कि अब मुझे जो है सब पछ पिछला मिटा कर

910
01:09:38,280 --> 01:09:42,400
के ये करना है और फिर आपको प्राप्त होने वाला जो खून है वो कहां चला

911
01:09:42,400 --> 01:09:46,400
जाएगा रक्त तो डीएनए तो प्राप्त हुआ ही है आपको पीछे का

912
01:09:46,400 --> 01:09:50,040
बिल्कुल अभी मैं जो आजकल वो डोनेट

913
01:09:50,040 --> 01:09:54,160
करते हैं जो परक नली शिशु इत्यादि होते हैं जो तेरो गैसी मदर होती

914
01:09:54,160 --> 01:09:58,200
है या फिर सेरोगेसी फादर भी होता है तो उसमें देखते हैं

915
01:09:58,200 --> 01:10:02,320
कि हम जिसका जिसका डोनेट डोनेट करवाए

916
01:10:02,320 --> 01:10:06,320
है ना संतान प्राप्ति के लिए तो वीर जो होता है या

917
01:10:06,320 --> 01:10:10,640
फिर गर्भ धारण करने वाली जो मां होती है उसका कुल वंश अच्छे से जाच

918
01:10:10,640 --> 01:10:15,160
जांच हैं क्यों जांच रहे हो बिल्कुल जांच

919
01:10:15,160 --> 01:10:19,200
क्यों जांच रहे हो जब वो जन्म से गु गुण कर्म नहीं आने वाले हैं तो कोई

920
01:10:19,200 --> 01:10:23,320
भी हो अभी आपको 50 डोनर मिल जाएंगे सरकारी ठेके

921
01:10:23,320 --> 01:10:28,320
के पास चले जाइए 50 डोनर मिल जाएंगे आपको क्यों नहीं जाते वहा सरकारी ठेके के

922
01:10:28,320 --> 01:10:33,080
पास हा फाइल बनती है मोटी

923
01:10:33,080 --> 01:10:37,160
मोटी ब्राउंड मैंने कभी अखबार में पढ़ा था जॉन

924
01:10:37,160 --> 01:10:41,320
अब्राहम का लेने के लिए डोनेट डोनेट में जॉन अब्राहम

925
01:10:41,320 --> 01:10:46,120
का लेने के लिए जा रहे क्यों जा रहे हो भाई करोड़ों रुपए खर्च करके

926
01:10:46,120 --> 01:10:50,800
सही बहुत सस्ते मिल जाएगा किसी को भी पकड़ो रास्ते में

927
01:10:50,800 --> 01:10:54,920
बहुत आसानी से मिल जाएगा बहुत लोगों को अर्थ की आवश्यकता है किसी

928
01:10:54,920 --> 01:10:59,760
का भी ले लो और उसको बना लो लेब्राडोर या रट वेलर

929
01:10:59,760 --> 01:11:03,920
ऐसे नहीं होता है जन्म से हमें प्राप्त होते हैं सत्यम जी आए हैं

930
01:11:03,920 --> 01:11:05,440
जय श्री राम सत्यम

931
01:11:05,440 --> 01:11:11,440
सक्सेना जी जय श्री राम बताए अपना परिचय

932
01:11:17,840 --> 01:11:22,240
दे जी बोलिए सना

933
01:11:22,240 --> 01:11:26,360
जी चले गए

934
01:11:26,360 --> 01:11:30,440
एक और है यह ज्ञानी पिशाच करके हैं

935
01:11:30,440 --> 01:11:34,600
यह कौन है य तो मुझे कुछ ज्ञानी जी आप

936
01:11:34,600 --> 01:11:40,600
अपना चेहरा दिखाएं

937
01:11:42,040 --> 01:11:46,280
अमृत अमृत पाठक पाठक ही

938
01:11:46,280 --> 01:11:50,320
है जी पाठक जी आप अन म्यूट कर लीजिए अपना अन

939
01:11:50,320 --> 01:11:56,320
म्यूट कर दीजिए पाठक जी को

940
01:11:58,440 --> 01:12:02,440
जी

941
01:12:02,440 --> 01:12:06,680
बोलिए हेलो भैया मैं अभी शास्त्री द्वितीय

942
01:12:06,680 --> 01:12:11,880
वर्ष का विद्यार्थी हूं बीएचयू में जय श्री राम अच्छा

943
01:12:11,880 --> 01:12:16,040
जय मैं एक साल से इसकन संस्था से जुड़ा हुआ

944
01:12:16,040 --> 01:12:20,640
हूं और जुड़े हुए हैं अभी भी है

945
01:12:20,640 --> 01:12:25,480
अभी भी हू मतलब पहले रहता था रूम लेकर रहता हूं अलग से अच्छ

946
01:12:25,480 --> 01:12:29,480
भैया मतलब आपकी वीडियोस को सुनता हूं और पूरी

947
01:12:29,480 --> 01:12:33,480
शंकराचार्य जी को भी सुनता हूं तो बहुत स बहुत सारी चीज मेरे को क्लियर

948
01:12:33,480 --> 01:12:37,600
हुआ और वहां बहुत जो गलत गलत सिद्धांत पढ़ाया जाता है लेकिन

949
01:12:37,600 --> 01:12:41,640
भैया अब मेरे को एक समस्या में अभी हूं कि जैसे मैं इसकन से

950
01:12:41,640 --> 01:12:45,680
बहुत अच्छे चीजों को भी सीखा तो अब मेरे को लगता

951
01:12:45,680 --> 01:12:49,680
है कि क्या मुझे वह संस्था छोड़ देना चाहिए क्योंकि जैसे मेरे

952
01:12:49,680 --> 01:12:54,080
जो दोस्त है जो मित्र है जैसे वो भी ब्राह्मण है

953
01:12:54,080 --> 01:12:57,160
लेकिन जो वहां के लोग वो ब्राह्मण नहीं होकर भी बहुत अच्छा

954
01:12:57,160 --> 01:13:01,200
अच्छा आचरण कर रहे हैं अपने जीवन में और वो ब्राह्मण होकर भी गलत आचरण कर रहे

955
01:13:01,200 --> 01:13:05,280
हैं तो फिर कभी कभी ऐसा मतभेद आता है कि

956
01:13:05,280 --> 01:13:09,600
मैं ऐसा सिच देखिए पहली बात तो यह है कि दो भाव

957
01:13:09,600 --> 01:13:13,680
है एक तो हमने वहां से बहुत कुछ सीखा है ठीक है

958
01:13:13,680 --> 01:13:17,760
जी उसके कारण पहली बात य संस्था छोड़ने का अर्थ

959
01:13:17,760 --> 01:13:22,320
क्या है क्या अर्थ है संस्था छोड़ने का

960
01:13:22,320 --> 01:13:26,760
लोग मुझसे पूछते हैं कि सनातन में वापसी कै हो सनातन

961
01:13:26,760 --> 01:13:30,920
में घर वापसी के लिए कोई स्पेशल प्रोटोकॉल नहीं बनाया गया है जिन्होंने

962
01:13:30,920 --> 01:13:35,080
बनाए हैं स्पेशल प्रोटोकॉल उन लोगों ने अपने मन गंत बनाए

963
01:13:35,080 --> 01:13:39,160
हैं दिखावा स्पेशल प्रोटोकॉल नहीं बनाया गया

964
01:13:39,160 --> 01:13:43,280
जिस दिन आप सनातन के सिद्धांतों पर आस्थान

965
01:13:43,280 --> 01:13:47,480
वित हो गए उस दिन आप सनातनी हो गए जी उनके प्रति

966
01:13:47,480 --> 01:13:52,000
आप में निष्ठा आ गई आप सनातनी हो गए है ना

967
01:13:52,000 --> 01:13:56,360
मगर अब आप कह रहे संस्था छोड़ने की क्या आवश्यकता है अगर आपके

968
01:13:56,360 --> 01:14:00,720
मन के अंदर सच्चाई है वास्तविकता है तो वहां की उन चीजों को ग्रहण करिए

969
01:14:00,720 --> 01:14:04,960
केवल जो ग्रहण करने योग्य है और अपना जीवन

970
01:14:04,960 --> 01:14:09,320
उस तरह से लीजिए मगर एक दिक्कत य आती है कि जो जगह

971
01:14:09,320 --> 01:14:12,200
गलत है उसके चेहरे पर तो कुछ और

972
01:14:12,200 --> 01:14:16,200
लिखा है जैसे मान लीजिए कि जो नल

973
01:14:16,200 --> 01:14:20,920
की पत्नी थी दमयंती है ना उनको जो

974
01:14:20,920 --> 01:14:25,040
अजगर है वो खाने वाला था ठीक है अब

975
01:14:25,040 --> 01:14:29,080
अर खाने वाला था और वहां पर एक व्याध आता

976
01:14:29,080 --> 01:14:33,240
है और वो उनकी रक्षा कर लेता है ठीक है उसके

977
01:14:33,240 --> 01:14:38,040
बाद व्याध की कुदृष्टि हो जाती है दंती के ऊपर

978
01:14:38,040 --> 01:14:42,360
तो उस सिचुएशन में क्योंकि व्याध ने उनके उनको मरने से बचाया

979
01:14:42,360 --> 01:14:47,000
क्या दमयंती द्वारा अपने आप को उन्हें सौंप देना चाहिए

980
01:14:47,000 --> 01:14:51,120
हम आपसे पूछ रहा हूं नहीं नहीं भैया तो

981
01:14:51,120 --> 01:14:55,480
यही बात है कि जो आपको उनसे अच्छा मिला वो अच्छी बात है

982
01:14:55,480 --> 01:14:59,640
मगर क्या है कि सिद्धांत का त्याग नहीं करना है भले

983
01:14:59,640 --> 01:15:03,960
ही संबंधों का त्याग करना पड़ जाए हिरण्य

984
01:15:03,960 --> 01:15:08,040
कश्यप पिता थे प्रहलाद के पिता क्या उन्होंने कुछ अच्छी बात नहीं

985
01:15:08,040 --> 01:15:12,120
सिखाई होगी उन्हें गुरुओं को प्रणाम कैसे करना है खाना

986
01:15:12,120 --> 01:15:16,400
कैसे है पीना कैसे आचरण सिखाए ना अच्छे मनुष्य के आचरण

987
01:15:16,400 --> 01:15:20,520
मिले ना उनको प्रहलाद जी को आचरण मिले

988
01:15:20,520 --> 01:15:24,600
ना मगर यह आचरण प्राप्त होने के बाद भी जब उन्होंने

989
01:15:24,600 --> 01:15:27,280
ना को मानने से मना कर दिया नहीं नारायण जाप

990
01:15:27,280 --> 01:15:31,600
मत करो मेरे नाम का जाप करो तो उन्होंने क्या किया सिद्धांत का त्याग

991
01:15:31,600 --> 01:15:34,840
नहीं किया संबंधों का

992
01:15:34,840 --> 01:15:38,920
त्याग और जो लोग संबंधों का पक्ष रखते हैं

993
01:15:38,920 --> 01:15:43,160
संबंधों का त्याग नहीं करते सिद्धांत का त्याग कर देते हैं उनकी दुर्गति

994
01:15:43,160 --> 01:15:47,320
भी देख लीजिए भीष्म पितामह भीष्म

995
01:15:47,320 --> 01:15:51,560
पितामह को मालूम था धर्म और अधर्म क्या है सिद्धांत क्या है उन्हें मालूम था

996
01:15:51,560 --> 01:15:56,480
जी मगर उन्होंने संबंधों को वरीयता दी हम

997
01:15:56,480 --> 01:16:01,000
है ना कई बार हमारे सामने आते हैं जीवन में ऐसे दो रास्ते

998
01:16:01,000 --> 01:16:05,160
जिसमें से एक कम गलत होता है एक ज्यादा गलत होता है हम

999
01:16:05,160 --> 01:16:10,040
और कई बार आते हैं जिसमें से एक ज्यादा सही होता है और एक कम सही होता है

1000
01:16:10,040 --> 01:16:14,200
तो सही में से ज्यादा सही चुनना और गलत में से

1001
01:16:14,200 --> 01:16:18,560
कम गलत चुनना ये हमारा वहां कर्तव्य हो जाता है हम

1002
01:16:18,560 --> 01:16:22,720
ठीक है तो सिद्धांत की रक्षा करिए भले

1003
01:16:22,720 --> 01:16:26,920
ही उसके लिए संबंधों का त्याग करना पड़े अब यदि

1004
01:16:26,920 --> 01:16:31,160
आप ऐसा सोचे कि कोई संस्था है जो ऊपर से तो आचरण

1005
01:16:31,160 --> 01:16:35,360
दे रही है सब कुछ पूरा उसका व्यापारी करण है धर्म

1006
01:16:35,360 --> 01:16:39,600
को कैसे धर्म का एक कॉर्पोरेट वर्ल्ड बना हुआ है उस संस्था

1007
01:16:39,600 --> 01:16:42,280
में कॉर्पोरेट वर्ल्ड धर्म का

1008
01:16:42,280 --> 01:16:48,280
एक धर्म का

1009
01:16:50,520 --> 01:16:54,880
कॉम्प्लेक्शन गुरुओं के चरण में अपने जो

1010
01:16:54,880 --> 01:16:58,920
परंपरा प्राप्त आचार्य गण है रामानुजाचार्य निंबार्काचार्य

1011
01:16:58,920 --> 01:17:03,200
शंकराचार्य इनको छोड़कर और वहां से प्राप्त होने वाला धर्म

1012
01:17:03,200 --> 01:17:07,400
जो है वह क्या है व शाश्वत नहीं है वो लोग खुद

1013
01:17:07,400 --> 01:17:12,080
कहते हैं कि हमने मुसलमानों को कन्वर्ट करने के लिए ऐसा कहा

1014
01:17:12,080 --> 01:17:16,200
हमने ईसाइयों को कन्वर्ट करने के लिए ऐसा कहा इसलिए गीता में ऐसा ऐसा लिखा

1015
01:17:16,200 --> 01:17:20,360
है तो शाश्वत धर्म नहीं है तो उसको

1016
01:17:20,360 --> 01:17:24,400
जब वो शाश्वत ही नहीं है तो इस सच्चाई को मानना आत्मसात

1017
01:17:24,400 --> 01:17:28,640
करना ना कहना ही उस संस्था को छोड़ देना है बाकी आप व्यक्तिगत संबंध

1018
01:17:28,640 --> 01:17:33,320
उनसे रख सकते हैं मगर यदि आप वहां पर फिजिकली

1019
01:17:33,320 --> 01:17:37,320
अपीयर हो रहे हैं तो आप वहां का संख्या बल बढ़ा रहे हैं

1020
01:17:37,320 --> 01:17:41,560
कई बार लोग कहते हैं ना कि भाई वहां तो मैं जाता हूं भगवान कृष्ण की मूर्ति

1021
01:17:41,560 --> 01:17:45,680
के लिए मुझे वहां की मूर्ति बहुत अच्छी लगती है पहली बात वो भगवान

1022
01:17:45,680 --> 01:17:50,200
कृष्ण की मूर्ति है ये शास्त्रों से सिद्ध होगा जब वहां पर शास्त्रोक्त

1023
01:17:50,200 --> 01:17:54,440
विधि का वर्णन ही नहीं है तो वो केवल एक मूर्ति है वो विग्रह नहीं है प्राण प्रतिष्ठा

1024
01:17:54,440 --> 01:17:57,560
हुआ अगर शास्त्रों को ताक

1025
01:17:57,560 --> 01:18:01,840
में रख दिया गया है है ना जैसे मान लीजिए जाकिर नायक

1026
01:18:01,840 --> 01:18:05,880
कल को एक मंदिर खोल दे राम नाम का और उसम बकरे को चढ़ाए

1027
01:18:05,880 --> 01:18:10,040
उनको रोज श्री राम जी को और उनके हाथ में धनुष पकड़ा

1028
01:18:10,040 --> 01:18:14,040
दे और वहां पर चचेरी ममेरी बहनों से ब्याह करवाए उन्हीं के

1029
01:18:14,040 --> 01:18:19,000
सामने तो क्या वह राम आपके राम है नहीं

1030
01:18:19,000 --> 01:18:23,000
वो राम जैसे दिख रहे हैं वो राम नहीं है राम

1031
01:18:23,000 --> 01:18:27,120
कौन है मर्यादा पुरुषोत्तम रामो विग्रहवां धर्मा तो

1032
01:18:27,120 --> 01:18:31,160
इसी तरीके से हमें लेना चाहिए कि वो सब चीज

1033
01:18:31,160 --> 01:18:35,200
तो है जो बहुत ज्यादा मैच खा रही है दिखाई दे रही है मगर

1034
01:18:35,200 --> 01:18:39,320
अंदर जब आप जा रहे हो तो उसके अर्थ में आपको वह सनातन प्राप्त नहीं

1035
01:18:39,320 --> 01:18:43,400
हो रहा है जो वास्तविक स्वरूप है सनातन का तो आप अपने परंपरा

1036
01:18:43,400 --> 01:18:48,120
प्राप्त आचार्य गणों की शरण में जाइए वहां का संख्या बल बढ़ाइए

1037
01:18:48,120 --> 01:18:52,200
जिससे कि हमारा जो परंपरा प्राप्त हमारे जो सार्वभौम

1038
01:18:52,200 --> 01:18:56,200
सिद्धांत है वो उस तरीके के सशक्त रूप में दिखाई दे कि इस तरीके

1039
01:18:56,200 --> 01:19:00,400
के जो तंत्र है वो खड़े ही ना हो भविष्य में अगर हमने

1040
01:19:00,400 --> 01:19:04,440
ऐसा नहीं किया और हमने अपनी ओर से कोई प्रयास नहीं किया और

1041
01:19:04,440 --> 01:19:08,560
यह लोग अपने उसम आते जा आते गए अस्तित्व में तो मैंने अभी

1042
01:19:08,560 --> 01:19:12,600
कल परसों के अपने उसम बताया था आज इनके

1043
01:19:12,600 --> 01:19:16,680
ऑनलाइन जो पोर्टल्स है वहां पर कृष्ण के साथ

1044
01:19:16,680 --> 01:19:20,680
क्राइस्ट को ख्या पित किया जा चुका है बाइबल

1045
01:19:20,680 --> 01:19:25,160
इत्यादि के नाम की शिक्षाएं दी जा रही है इनके ग्रंथों में

1046
01:19:25,160 --> 01:19:29,520
हमारे इस कन जाने वाले जो बालक गण है संतान है

1047
01:19:29,520 --> 01:19:33,640
वह जो है आस्थान वित हो रही है जीसस क्राइस्ट

1048
01:19:33,640 --> 01:19:37,760
के प्रति आज जी आने वाले समय में

1049
01:19:37,760 --> 01:19:41,960
बहुत बड़ी बात नहीं है जब आपको अभी हमारे शिव दुर्गा काली गणेश

1050
01:19:41,960 --> 01:19:46,280
य सब गायब हो गए मंदिरों से इसकन के मंदिरों से

1051
01:19:46,280 --> 01:19:50,280
अधिकांशत आने वाले समय में क्या होगा जो हमारी वास्तविक संस्कृति उसका

1052
01:19:50,280 --> 01:19:54,280
मूल स्वरूप है वो तो दिखेगा ही नहीं अगर इनके हाथों

1053
01:19:54,280 --> 01:19:58,520
में चली गई तो धीरे धीरे ऐसे ही मंदिर केवल दिखेंगे ना

1054
01:19:58,520 --> 01:20:02,520
जिसमें सि दुर्गा काली की पूजा को पाखंड माना जाता होगा भगवान

1055
01:20:02,520 --> 01:20:06,640
समझने वालो को पाखंड माना जाता हो तो क्या होगा केवल कृष्ण रह

1056
01:20:06,640 --> 01:20:11,400
जाएंगे और क्योंकि अभी से कृष्ण के समानांतर

1057
01:20:11,400 --> 01:20:15,400
क्राइस्ट को खड़ा करना शुरू किया जा चुका है तो बहुत बड़ी बात नहीं

1058
01:20:15,400 --> 01:20:20,080
है धीरे से कि नहीं क्राइस्ट जो है सबसे अच्छा रूप है भगवान

1059
01:20:20,080 --> 01:20:24,800
यह भी हो सकता है है ना तो कृष्ण

1060
01:20:24,800 --> 01:20:27,640
क की एक जर्नी मुझे तो दिखाई देती जब मैं ओवरल बाहर

1061
01:20:27,640 --> 01:20:31,960
निकल के देखता हूं कैसे हम कृष्णा से क्रा तक

1062
01:20:31,960 --> 01:20:36,000
पहुंचे जी तो इसलिए हमें जागरूकता की आवश्यकता

1063
01:20:36,000 --> 01:20:40,080
है बाकी निर्णय आपका है हम इसमें ये नहीं कहेंगे नहीं नहीं आप ऐसा

1064
01:20:40,080 --> 01:20:44,080
करो ही करो हमने आपको शास्त्रों के और जो वृतांत स्मृतियां उनके

1065
01:20:44,080 --> 01:20:48,440
आधार पर भी आपको बताया है ना बहुत कठिन

1066
01:20:48,440 --> 01:20:52,560
समय था कुंभकरण जब उठे

1067
01:20:52,560 --> 01:20:56,600
उनसे कहा राम से लड़ो तो वह चाहते तो

1068
01:20:56,600 --> 01:21:00,720
ना लड़ते मगर उन्होंने भाई के मोह के कारण

1069
01:21:00,720 --> 01:21:04,800
लड़ाई लड़ी तो आज उनको राक्षस में ही गिना गया और जो है उनका वध

1070
01:21:04,800 --> 01:21:09,520
हुआ अधोगति को प्राप्त हुए इसी प्रकार से द्रोणाचार्य आचार्य

1071
01:21:09,520 --> 01:21:13,720
थे फिर भी वो कौरवों की तरफ से लड़े और अधर्म

1072
01:21:13,720 --> 01:21:17,760
की तरफ से लड़ने के कारण अधोगति को प्राप्त हुए ये सब शिक्षाए

1073
01:21:17,760 --> 01:21:21,920
है कि जिन्होंने अपने सिद्धांत को नीचे किया संबंध को ऊपर

1074
01:21:21,920 --> 01:21:26,200
किया वो लोग कभी भी उसको प्राप्त नहीं

1075
01:21:26,200 --> 01:21:30,240
हुए और जिन्होंने संबंध को पीछे कर दिया

1076
01:21:30,240 --> 01:21:34,640
सिद्धांत को ऊपर कर दिया वह हमारे आदर्श राम

1077
01:21:34,640 --> 01:21:38,960
श्री राम के सामने एक विडंबना आई क्या थी वह

1078
01:21:38,960 --> 01:21:42,680
विडंबना कि माता सीता के को आधार बना

1079
01:21:42,680 --> 01:21:46,760
कर के वहां की कई स्त्रियां कुछ दुराचार करने लगी

1080
01:21:46,760 --> 01:21:50,920
माता सीता को आधार बना कर के और उससे प्रजा में विप्लव

1081
01:21:50,920 --> 01:21:55,000
होने लगा अब प्रजा जो है वह उसका

1082
01:21:55,000 --> 01:21:59,120
कहना य है कि माता सीता के कारण हमारे साथ उसका मतलब उसका

1083
01:21:59,120 --> 01:22:03,160
जो दृष्टिकोण है और वह प्रजा कैसी प्रजा थी हीन

1084
01:22:03,160 --> 01:22:07,720
हीन आचरण वाली प्रजा नहीं थी स्वधर्म का पालन करने वाली

1085
01:22:07,720 --> 01:22:12,000
वर्णो चित धर्म का पालन करने वाली ऐसी प्रजा वह परेशान

1086
01:22:12,000 --> 01:22:16,000
होने लगी तो एक तरफ थे शासक के मेरी प्रजा जो है परेशान हो

1087
01:22:16,000 --> 01:22:20,640
रही है और एक तरफ कि मेरी पत्नी निर्दोष है उसको मैं कैसे

1088
01:22:20,640 --> 01:22:24,640
तो दो गलत परिस्थिति आ गई या तो अपनी जो स्वधर्म

1089
01:22:24,640 --> 01:22:29,200
का पालन करने वाली प्रजा है उसको कष्ट में रहने दे और या फिर जो

1090
01:22:29,200 --> 01:22:33,960
हमारी धर्म पत्नी है जो निर्दोष है उसको कष्ट में रहने दे

1091
01:22:33,960 --> 01:22:38,480
तो वहां पर उन्होंने क्या सिद्धांत दिया कि नहीं दो

1092
01:22:38,480 --> 01:22:42,480
गलत रास्तों में से कम गलत करेंगे एक तरफ पूरी प्रजा

1093
01:22:42,480 --> 01:22:46,640
को परेशान करना और एक तरफ निर्दोष पत्नी को परेशान करना तो उन्होंने

1094
01:22:46,640 --> 01:22:50,720
वहां पर क्या किया निर्दोष पत्नी को वनवास भेज दीजिए

1095
01:22:50,720 --> 01:22:55,040
उसके पीछे भी बहुत सारी और अलौकिक है चीजें है मगर उन्होंने एक आदर्श दिया

1096
01:22:55,040 --> 01:22:57,760
कि जब आपके सामने दो गलत रास्ते हो तो उनमें

1097
01:22:57,760 --> 01:23:02,080
से कम गलत को चुनो दोनों गलत है प्रजा भी परेशान

1098
01:23:02,080 --> 01:23:06,400
है और इधर इनको कष्ट होगा तो उन्होंने आदर्श

1099
01:23:06,400 --> 01:23:10,840
स्थापित किया हमारे लिए कि मैं अपनी पत्नी का त्याग

1100
01:23:10,840 --> 01:23:14,840
कर देता हूं जिससे कि यह जो प्रजा है वो सुखी

1101
01:23:14,840 --> 01:23:18,880
हो इसी तरीके की इसी तरीके का कुछ कथानक वृंदा

1102
01:23:18,880 --> 01:23:23,240
जो वृंदा वाला वो है कथा है व

1103
01:23:23,240 --> 01:23:27,240
वृंदा वाली तुलसी जी का जो पिछला जन था उससे भी हमें यही सीखने

1104
01:23:27,240 --> 01:23:32,040
को मिलता है वो फिर किसी दिन बताएंगे अलग तरीके की है वो कथा

1105
01:23:32,040 --> 01:23:36,080
जी हां तो भैया बता भैया जी

1106
01:23:36,080 --> 01:23:40,280
एक प्रश्न था जैसे आपने बताया एक नाम जब ग्रुप से जुड़ने

1107
01:23:40,280 --> 01:23:44,320
के लिए उससे कैसे जुड़ सकते हैं और आपसे जुड़ना

1108
01:23:44,320 --> 01:23:48,520
आप जो है 7408 30169 ये नंबर नोट कर

1109
01:23:48,520 --> 01:23:53,480
लीजिए जी इस पर व करिए हम एक फॉर्म मिलेगा आपको

1110
01:23:53,480 --> 01:23:57,560
जी और और बीएचयू में हमारी टीम के एक

1111
01:23:57,560 --> 01:24:02,240
एक टीम लीडर है वहां पर जो पूरा संभालते हैं उनसे भी संपर्क कर लीजिएगा

1112
01:24:02,240 --> 01:24:06,360
आप जब व करेंगे हम उनका संपर्क सूत्र दे देंगे आपको जी भैया

1113
01:24:06,360 --> 01:24:10,360
ठीक वो भी वहां अन रहते हैं सेवन

1114
01:24:10,360 --> 01:24:13,120
ये नंबर नोट कर लीजिए इस परे आप जो

1115
01:24:13,120 --> 01:24:17,160
है ट करेंगे आपको जो है फॉर्म मिल जाएगा नामा स्त्र से

1116
01:24:17,160 --> 01:24:21,240
जुड़ने के लिए और हम और आप बैठ कर के सब लोग बैठ कर के आहवान

1117
01:24:21,240 --> 01:24:25,560
करेंगे भगवान का ना मास्त्र के द्वारा जी जितना आवान होगा उतनी

1118
01:24:25,560 --> 01:24:29,680
जो देवीय शक्तियां उतनी वो उसमें आएंगी अस्तित्व में और धीरे धीरे

1119
01:24:29,680 --> 01:24:33,760
स्वतः नाश होने लग भगवान ने क्या कहा मेरी शरण में आ जा चिंता

1120
01:24:33,760 --> 01:24:37,960
मत कर मैं देखूंगा तेरी प्राप्ति और प्राप्ति मैं देखूंगा हम पूरे

1121
01:24:37,960 --> 01:24:42,440
जीवन ये करते रहते कि हम जो है स्वयं करेंगे

1122
01:24:42,440 --> 01:24:46,680
भगवान के पास बाद में जाएंगे यह दिक्कत में रहते हैं हम लोग अगर

1123
01:24:46,680 --> 01:24:51,000
सवाल भी आ रहे मन में तो उन सवालों का खोज खुद करेंगे पहले भगवान

1124
01:24:51,000 --> 01:24:55,120
की शरण पकड़ लो फिर सवाल अपने आपके हल होते जाए मेरे पास मेरे जीवन में तो हुआ

1125
01:24:55,120 --> 01:24:59,480
भी है मैं डेडलिफ्ट का एक मतलब मैंने थीसिस

1126
01:24:59,480 --> 01:25:03,840
लिख डाली है डेडलिफ्ट के ऊपर डेडलिफ्ट स्कट के ऊपर बेंच प्रेस के ऊपर

1127
01:25:03,840 --> 01:25:08,280
कि जब आप डेडलिफ्ट कर रहे होते हैं नीचे से पड़े हुए

1128
01:25:08,280 --> 01:25:12,840
वजन को उठा रहे होते हैं जो डेड वेट होता है उसको जब उठा रहे होते हैं तो किस किस क्षण

1129
01:25:12,840 --> 01:25:16,880
आपकी कौन-कौन सी मसल्स पर जोर आएगा लोड आएगा बिल्कुल एगजैक्टली

1130
01:25:16,880 --> 01:25:21,000
ये मैंने पता किया मगर ये कब किया

1131
01:25:21,000 --> 01:25:25,000
मैं दो दो तीन-तीन साल तक लगा रहा लगा रहा नहीं हो रहा था मगर इधर

1132
01:25:25,000 --> 01:25:28,360
भगवान का नाम लेना शुरू किया जाप शुरू किया और

1133
01:25:28,360 --> 01:25:32,720
अपने आप जैसे हलवा हो गया वो सब जानना डेडली डिस्कोट

1134
01:25:32,720 --> 01:25:36,920
ये जो भौतिक वो है लक्ष्य वो तो ऐसे प्राप्त होने लगते हैं जिसकी

1135
01:25:36,920 --> 01:25:41,880
कोई सीमा ही नहीं आपको लगेय क्या चमत्कार हो रहा है क्या मेरे साथ बैठे बिठाए

1136
01:25:41,880 --> 01:25:46,000
विष्णु भगवान का नाम लीजिए बैठे बिठाए आपको खबरें आने लगेंगी हा

1137
01:25:46,000 --> 01:25:50,120
वहां से यह काम हो गया वो काम हो गया इतना ज्यादा उसमें बल होता है केवल

1138
01:25:50,120 --> 01:25:54,840
नाम जप में तो यह बिल्कुल यह सिद्ध बातें है इसमें

1139
01:25:54,840 --> 01:25:59,480
जैसे ही करना शुरू करते हैं नाम जप अपने आप

1140
01:25:59,480 --> 01:26:03,640
आपके जीवन में वह आने लगता है जो आना चाहिए मगर बस प्रॉब्लम

1141
01:26:03,640 --> 01:26:07,720
यही है वो डायलॉग है ना कि

1142
01:26:07,720 --> 01:26:11,720
सक्सेस के पीछे मत भागो तो व्यक्ति सक्सेस के पीछे भागता है इंटेलिजेंस के

1143
01:26:11,720 --> 01:26:16,080
पीछे नहीं भागता है वही बात यहां पर है कि

1144
01:26:16,080 --> 01:26:20,760
आप जो है भौतिक दुनिया के पीछे मत भागो भगवान के पीछे भागो

1145
01:26:20,760 --> 01:26:25,080
भगवान के पीछे भागोगे भौतिक दुनिया आपके पीछे

1146
01:26:25,080 --> 01:26:29,120
अपने आप आएगी ठीक है जी अच्छा लगा आपसे

1147
01:26:29,120 --> 01:26:33,160
बात इसमें एक और उदाहरण दे देता हूं मैं जी महाग बता

1148
01:26:33,160 --> 01:26:37,240
रहे थे इसके बारे में करपात्री जी के बारे में कि वो भी बचपन में

1149
01:26:37,240 --> 01:26:41,560
गुरु के पास जब पढ़ते थे तो अपने पास कोई पोता पोथी नहीं रखते थे

1150
01:26:41,560 --> 01:26:43,840
वो याद करते थे तो वो

1151
01:26:43,840 --> 01:26:48,280
भगवान का नाम का जब इतना करते थे कि उनकी मेधा इतनी लक्षण हो गई थी

1152
01:26:48,280 --> 01:26:53,240
कि उनको वेदों हम वेद उनको याद ग्रंथ उनको याद रहने लग गए

1153
01:26:53,240 --> 01:26:57,280
उनकी स्तुति जो मेदा थी इतनी बढ़ गई थी उनकी

1154
01:26:57,280 --> 01:27:01,360
और उनके बाद स्वत ही उनके पास ऐसे विचार आते थे उनके मन में इस तरह से

1155
01:27:01,360 --> 01:27:05,440
जो वेदों से मिलते थे तो कहने का अर्थ यह है कि भगवान के नाम में इतनी

1156
01:27:05,440 --> 01:27:09,480
शक्ति है कि आपको वैदिक ज्ञान भी प्राप्त हो सकता है

1157
01:27:09,480 --> 01:27:13,960
उस शक्ति ये मैं नहीं कह रहा हूं ऐसा राज दास जी बता रहे थे जी स्वयं

1158
01:27:13,960 --> 01:27:18,120
तो ये चीज है क्योंकि करपात्री जी महाराज भी हरनेस

1159
01:27:18,120 --> 01:27:22,240
राम नाम का जप करते रहते थे ह ऐसा शब्द कहते हैं

1160
01:27:22,240 --> 01:27:26,520
तो नाम जप में तो है ही शक्ति

1161
01:27:26,520 --> 01:27:30,520
नाम जब भी एक शरणागति का मार्ग ही है

1162
01:27:30,520 --> 01:27:34,640
भगवान के ऐसा होता है कि भगवान के हमने पैर पकड़ लिया

1163
01:27:34,640 --> 01:27:39,600
मैं छोडूंगा नहीं जब तक सुनोगे नहीं मेरी बात

1164
01:27:39,600 --> 01:27:44,000
हम लोग तो कई प्रकार की वो भाव में डूब जाते तो कई प्रकार के आते

1165
01:27:44,000 --> 01:27:48,040
के भगवान कह र छोड़ छोड़ नहीं छोडूंगा मैं

1166
01:27:48,040 --> 01:27:52,320
टंगा तुम्हारा नाम बड़े अच्छे अच्छे भैया

1167
01:27:52,320 --> 01:27:56,360
एक अंतिम प्रश्न है मेरा क्या आध्यात्मिक ज्ञान जो है

1168
01:27:56,360 --> 01:28:00,440
वह कहीं से भी लिया जा सकता है जैसे य इत्यादि प अभी बहुत

1169
01:28:00,440 --> 01:28:04,520
सारे आचार्य गुरु हैं जो आध्यात्मिक ज्ञान दे रहे हैं तो

1170
01:28:04,520 --> 01:28:10,520
जैसे कहा जाता है कि हमें जहां से भी अच्छा ज्ञान मिले हमें वहां से ले लेना चाहिए

1171
01:28:12,800 --> 01:28:16,840
जैसे वो भी समाज के ऊपर हा

1172
01:28:16,840 --> 01:28:20,840
बात ये है कि क्या अच्छा है और क्या बुरा है यह

1173
01:28:20,840 --> 01:28:24,240
आपको पता कैसे है

1174
01:28:24,240 --> 01:28:28,960
जो मतलब जो मुझे अच्छा लग रहा है भैया जो सही लग रहा है इसका अर्थ है कि आपके

1175
01:28:28,960 --> 01:28:33,000
आपका जो आध्यात्मिक ज्ञान जो सही है या गलत है वो इस पर आधारित

1176
01:28:33,000 --> 01:28:37,000
है कि आपको क्या अच्छा लग रहा है आपके संस्कार क्या है अब किसी

1177
01:28:37,000 --> 01:28:41,160
के संस्कार बचपन से हैं कि उसको मां से ही खाना है तो उसके लिए तो आचार्य

1178
01:28:41,160 --> 01:28:45,160
प्रसन नहीं है फिर हम नहीं

1179
01:28:45,160 --> 01:28:49,200
है ना इसलिए यह सिद्धांत नहीं है कि जो मुझे अच्छा लग

1180
01:28:49,200 --> 01:28:53,440
रहा है जो मीमांसा दर्शन उसमें जो कुमारिल भट्ट जी उन्होंने एक बहुत

1181
01:28:53,440 --> 01:28:57,640
वैसा कठोर शब्द में लिखा है कि माता के साथ

1182
01:28:57,640 --> 01:29:01,800
रमण करना भी अच्छा लगता है सुख प्राप्त सुखदायक होता है मगर वह धर्म नहीं

1183
01:29:01,800 --> 01:29:05,880
कहा जाएगा यह उनके शब्द है कुमार भट्ट जी

1184
01:29:05,880 --> 01:29:10,120
अच्छा लगना धर्म और अधर्म का निर्णायक नहीं है तो क्या है

1185
01:29:10,120 --> 01:29:14,160
धर्म और अधर्म का निर्णायक तस्मा शास्त्रम प्रमाणम

1186
01:29:14,160 --> 01:29:18,200
भगवत गीता 1624 और जब तक हम लोग अपने अपने

1187
01:29:18,200 --> 01:29:22,600
मुताबिक हमें क्या अच्छा लग रहा है उसको क्या अच्छा लग रहा है इसके अनुसार

1188
01:29:22,600 --> 01:29:27,160
जब तक हम लोग धर्म और अधर्म की व्याख्या करते रहेंगे तभी तक तो संसार में विप्लव

1189
01:29:27,160 --> 01:29:28,160
रहेगा

1190
01:29:28,160 --> 01:29:32,200
जी विप्लव क्यों है क्योंकि जो आपको गलत लग रहा है वो किसी और

1191
01:29:32,200 --> 01:29:36,440
को सही लग रहा है जब हम एक शास्त्र के नीचे आते

1192
01:29:36,440 --> 01:29:40,680
हैं थर्ड व्यक्ति थर्ड पार्टी जिसके नीचे

1193
01:29:40,680 --> 01:29:44,920
आते हैं तब हम लोग अब जैसे आज वैकल्पिक शास्त्र तो है ही ना

1194
01:29:44,920 --> 01:29:49,040
संविधान के रूप में जी वैकल्पिक शास्त्र के नीचे आ गए

1195
01:29:49,040 --> 01:29:53,400
ना संविधान के रूप में मगर वो भी क्योंकि वो बदल रहा है

1196
01:29:53,400 --> 01:29:57,440
तो हम ये डिपेंड नहीं हो सकते कि नहीं यह जो चीज आज हम गलत मान रहे कल

1197
01:29:57,440 --> 01:30:01,600
भी गलत हो जैसे पहले लिवन रिलेशनशिप नहीं था आज मेरे ख्याल

1198
01:30:01,600 --> 01:30:05,800
से हो गया है है ना तो हम उसके ऊपर

1199
01:30:05,800 --> 01:30:10,040
निर्भर नहीं हो सकते कि य अच्छाई बुराई का ही निर्णायक है वह केवल व्यवस्था

1200
01:30:10,040 --> 01:30:14,200
लाने के निमित्त है और व्यवस्था लाने के निमित्त क्यों है क्योंकि

1201
01:30:14,200 --> 01:30:18,840
ईश्वर वाणी के नाम पर अनश्वर वाणिया भी प्रचारित हो गई

1202
01:30:18,840 --> 01:30:23,120
है ईश्वर के नाम पर एक है और

1203
01:30:23,120 --> 01:30:27,240
ईश्वर के नाम पर बहुत सारी है अब उसमें

1204
01:30:27,240 --> 01:30:31,400
एक वो कैसे लाए तो एक वैकल्पिक शास्त्र बनाया गया जिसको संविधान कहते हैं

1205
01:30:31,400 --> 01:30:34,320
अच्छाई और बुराई

1206
01:30:34,320 --> 01:30:38,560
तो तस्मा शास्त्रम प्रमाणम अच्छाई और बुराई का निर्णय

1207
01:30:38,560 --> 01:30:42,600
शास्त्र करेंगे आप करोगे तो आप तो जन्म से जन्म से आप

1208
01:30:42,600 --> 01:30:43,600
एक पशु

1209
01:30:43,600 --> 01:30:47,800
हो जन्म से हम क्या है पशु अगर हमको हमारे माता

1210
01:30:47,800 --> 01:30:50,960
पिता ये ना सिखाए

1211
01:30:50,960 --> 01:30:55,400
कि बाहर कपड़े कपड़े के बिना नहीं जा

1212
01:30:55,400 --> 01:30:59,480
तो चला चले जाएंगे हम लोग कपड़े के बिना

1213
01:30:59,480 --> 01:31:03,520
बाहर जाएंगे तो वस्त्र धारण करना हमें हमारे माता पिता ने सिखाया उनको

1214
01:31:03,520 --> 01:31:07,560
उनके माता पिता ने सिखाया और यह जो धर्म की स्थापना है यह होती है

1215
01:31:07,560 --> 01:31:11,640
शास्त्रों से अपने आप से नहीं होती है फिर हमारे जो बंड्स

1216
01:31:11,640 --> 01:31:15,640
बन गए बचपन से लेकर के बड़े होने तक विचार इत्यादि आ गए हमने तरह तरह के विचार

1217
01:31:15,640 --> 01:31:19,760
पाल लिए फिर हमने जब किसी को सुना उनमें से किसका विचार हमसे मैच खा रहा

1218
01:31:19,760 --> 01:31:25,760
है हमको हिट कर गया हमको वही सही लगने लगता है यह है

1219
01:31:26,320 --> 01:31:30,320
अब इसमें है क्या कि भगवत गीता में एक बात कही गई है अज्ञानता

1220
01:31:30,320 --> 01:31:35,000
वस हमने एक चार्ट बनाया है किसी दिन उस पर वीडियो बनाएंगे

1221
01:31:35,000 --> 01:31:39,360
उसमें प्रथम स्तर के जो हिंदू हैं या धार्मिक है आस्तिक है

1222
01:31:39,360 --> 01:31:43,600
उसमें क्या है कि उसमें सबके बाद जैसे परंपरा

1223
01:31:43,600 --> 01:31:47,800
प्राप्त आचार्य हो गए उनके परिकर हो गए उनसे दीक्षित हो गए यह सब ठीक है

1224
01:31:47,800 --> 01:31:52,640
उसके बाद भी एक प्रकार और है उनका कि जो लोग अज्ञानता

1225
01:31:52,640 --> 01:31:56,640
वश अथवा व्यवस्था वश धर्म का पालन नहीं

1226
01:31:56,640 --> 01:32:00,640
कर पा रहे हैं मगर उनके मन में आस्था है कि सही तो वही है मैं जो

1227
01:32:00,640 --> 01:32:04,960
कर रहा हूं गलत है अगर इतनी निष्ठा भी है तो भी आप प्रथम श्रेणी

1228
01:32:04,960 --> 01:32:08,960
के सनातनी है प्रथम श्रेणी के आस्तिक है प्रथम श्रेणी के धार्मिक

1229
01:32:08,960 --> 01:32:13,160
है होता क्या है द्वितीय श्रेणी में कौन आता है जो यही

1230
01:32:13,160 --> 01:32:17,240
वाली बात बदल जाती है वहां वह क्या होता है कि जब

1231
01:32:17,240 --> 01:32:21,440
उसे यह पता चलता है कि मैं शास्त्र विरोध कर रहा हूं तो व शास्त्र को गलत

1232
01:32:21,440 --> 01:32:26,120
कहने लगता है मैं नहीं मानता गलत है

1233
01:32:26,120 --> 01:32:30,280
जैसे कि रामपाल दास जी के लोग क्या करते हैं विदों में प्रमाण है कबीर साहब

1234
01:32:30,280 --> 01:32:34,320
भगवान है अब उसी में भगवान विष्णु को कहा जा रहा है जिसको

1235
01:32:34,320 --> 01:32:38,920
वह प्रमाण मान रहे हैं उसी में भगवान विष्णु को कहा जा रहा है परम ब्रह्म यह अज्ञानता बश

1236
01:32:38,920 --> 01:32:41,320
यह क्या हुआ यहां पर उन्होंने शास्त्र

1237
01:32:41,320 --> 01:32:45,400
को दोष देना शुरू कर दिया तो जो जब शास्त्रों को दोष देने

1238
01:32:45,400 --> 01:32:49,640
लग जाए तो इसका मतलब शास्त्रों से बाहर से उनका धर्म और अधर्म

1239
01:32:49,640 --> 01:32:54,040
का निर्णय हो रहा है और जब शास्त्रों के बाहर

1240
01:32:54,040 --> 01:32:58,040
धर्म धर्म का निर्णय होगा तो मन मुताबिक होगा अपने मन से कुछ

1241
01:32:58,040 --> 01:33:02,080
भी अच्छा कुछ भी बुरा जो जिसका जो समझ में आए तो कुल मिलाकर आपके

1242
01:33:02,080 --> 01:33:06,520
प्रश्न का उत्तर क्या हुआ कि शास्त्रोक्त जो आचार्य

1243
01:33:06,520 --> 01:33:10,520
हैं उनके द्वारा ही धर्म और अध्यात्म की का

1244
01:33:10,520 --> 01:33:14,520
ज्ञान लेना चाहिए अब जैसे आचार्य प्रशांत है वो

1245
01:33:14,520 --> 01:33:18,720
कई जगह पर जो हमारा वास्तविक धर्म है उसका खंडन करते हैं

1246
01:33:18,720 --> 01:33:24,040
गलत शिक्षा फैलाते हैं जैसे कि वर्णाश्रम धर्म को ना मानना

1247
01:33:24,040 --> 01:33:28,040
जैसे कि यह कहना कि मैं तो कहता हूं कि अभी थोड़े बहुत दिनों में यूटरस

1248
01:33:28,040 --> 01:33:32,760
निकाल दिया जाए मातृ शक्तियों का यह सब बातें भी करते हैं वो

1249
01:33:32,760 --> 01:33:37,000
है ना मैं मनुस्मृति को सिद्धांत नहीं मानता पता नहीं किसने उसको प्रमाणिक

1250
01:33:37,000 --> 01:33:41,040
माना है राम ने माना है श्री राम जो जिसको

1251
01:33:41,040 --> 01:33:45,320
प्रामाणिक मान रहे हैं उसके लिए आप इतनी आपत्ति जनक बातें कर रहे हो अच्छा

1252
01:33:45,320 --> 01:33:49,360
वो यह क्यों लिखते हैं कि मैं मैं आईआईटी से पढ़ा ह बताओ क्यों

1253
01:33:49,360 --> 01:33:53,760
लिखते हैं अपना पवा दिखाने के लिए ना

1254
01:33:53,760 --> 01:33:56,880
हम कि मैं इंजीनियर भी हूं पवा जी

1255
01:33:56,880 --> 01:34:01,680
तो फिर वो ये क्यों नहीं बताते मैंने धर्म की शिक्षा कहां से

1256
01:34:01,680 --> 01:34:05,760
ली किसी से नहीं लियाने पुस्तक मतलब अपनी

1257
01:34:05,760 --> 01:34:10,200
भौतिक उपलब्धि को बताने के लिए अपनी परंपरा बता रहे हैं परंपरा

1258
01:34:10,200 --> 01:34:14,440
भाई मैं आईआईटी एन हूं तो आईआईटी एन क्या है मेरी परंपरा

1259
01:34:14,440 --> 01:34:18,680
मेरे गुरु का नाम पता चल जाएगा आईआईटीए से और वहां जाएंगे तो उसके गुरु

1260
01:34:18,680 --> 01:34:22,960
का नाम वहां जाएंगे तो उसके गुरु का नाम तो आईआईटी यानी इंजीनियरिंग

1261
01:34:22,960 --> 01:34:27,240
की शिक्षा का से ली इसकी गुरु परंपरा व दिखा रहे हैं अपनी गुरु परंपरा

1262
01:34:27,240 --> 01:34:32,400
जो धर्म की जिसके बारे में वह आचार्य लिख रहे हैं वह परंपरा कहां

1263
01:34:32,400 --> 01:34:36,400
है जिनको व आदर्श मान रहे हैं शंकराचार्य के रूप में

1264
01:34:36,400 --> 01:34:40,680
उनके ही ग्रंथों में ज बाल वाला वृतांत है जिसमें उन्होंने जब वो

1265
01:34:40,680 --> 01:34:44,920
वहां जो है यह नहीं माना कि वो जो है उनको उनके पति

1266
01:34:44,920 --> 01:34:48,920
का नाम नहीं पता था उनको उनका गोत्र नहीं पता था गोत्र तो

1267
01:34:48,920 --> 01:34:53,120
उसको कन्वर्ट कर दिया कि उनको अपने पति का नाम नहीं पता था परिचर्या शब्द इतनी जगह

1268
01:34:53,120 --> 01:34:57,600
आया में कहीं भी पर परिचर्या का अर्थ ये नहीं लिया गया

1269
01:34:57,600 --> 01:35:01,880
कि परिचर्या का अर्थ होता है कि अतिथि गणों के साथ जो है देह संबंध

1270
01:35:01,880 --> 01:35:06,600
बनाना और वहां पर परिचर्या शब्द आया है उनकी जो मां है जबाला

1271
01:35:06,600 --> 01:35:10,600
उनके लिए सत्यकाम जी की जो माता जी है उनके लिए परिचर्या

1272
01:35:10,600 --> 01:35:11,920
का शब्द आया है तो उसका

1273
01:35:11,920 --> 01:35:16,080
अर्थ उन्होंने ये निकाल लिया कि वो जो अतिथि गण आते थे घर में उनके साथ वो दहिक

1274
01:35:16,080 --> 01:35:20,920
संबंध बनाती थी बताइए और क्यों निकाला

1275
01:35:20,920 --> 01:35:25,080
जिससे कि वो अपनी किसी फॉलोअर को जिसने कई लोगों

1276
01:35:25,080 --> 01:35:29,080
के साथ संबंध बनाए उसको वह संतुष्ट कर सके यह बता

1277
01:35:29,080 --> 01:35:33,280
सके कि तुमने जो किया है वह सही किया है तो क्या हुआ व्यक्ति के अकॉर्डिंग

1278
01:35:33,280 --> 01:35:37,440
धर्म की स्था धर्म बन रहा है जो उसको क्या अच्छा लगना

1279
01:35:37,440 --> 01:35:41,800
चाहिए उसके अकॉर्डिंग धर्म तो यह शाश्वत धर्म नहीं है

1280
01:35:41,800 --> 01:35:46,280
जी यह ब्रिक आडलज है उसमें पा

1281
01:35:46,280 --> 01:35:50,680
101 में यह कहा गया कि ज्यादा सवाल

1282
01:35:50,680 --> 01:35:55,080
मत करो ज्यादा सवाल करोगे तो आपके लिए वो आयतें

1283
01:35:55,080 --> 01:35:59,240
खोल दी जाएंगी जिनके कारण पहले के लोग बागी हो गए

1284
01:35:59,240 --> 01:36:03,480
थे समझिए यानी कि वहां पर धर्म

1285
01:36:03,480 --> 01:36:08,000
का निर्धारण किस चीज पर हो रहा है कि इसको लोग मानेंगे कि नहीं मानेंगे

1286
01:36:08,000 --> 01:36:13,360
भाई मनुष्य का अंत तो गत्वा तो ये है ना कि उसको धर्म को नहीं मानना

1287
01:36:13,360 --> 01:36:17,360
है उसके अंदर प्रवृत्ति है मुझे मैं

1288
01:36:17,360 --> 01:36:21,680
मैं जो है मैं ये भी नहीं मानूंगा वो भी नहीं मगर जो उसको अपनी इंद्रियों

1289
01:36:21,680 --> 01:36:25,720
को कंट्रोल कर ले जाता है वो आगे निकल जाता है मुक्ति के मार्ग

1290
01:36:25,720 --> 01:36:27,000
पर और जो रह जाता

1291
01:36:27,000 --> 01:36:31,040
है व उसी में माया में फस के रह जाता है ठीक है

1292
01:36:31,040 --> 01:36:34,640
जी धन्यवाद भैया

1293
01:36:34,640 --> 01:36:39,600
बहुत आचार जो है प्रमाणिक हो और

1294
01:36:39,600 --> 01:36:44,120
परंपरा से हो वंश परंपरा से ब्राह्मण

1295
01:36:44,120 --> 01:36:49,280
और आचार्य परंपरा से आचार्य और

1296
01:36:49,280 --> 01:36:53,800
सन्यासी अंतिम निर्णायक हो सभी सुति स्मति शास्त्र

1297
01:36:53,800 --> 01:36:58,280
में सामंजस्य की शिक्षा दे और अंततोगत्वा आपका संशय दूर करे

1298
01:36:58,280 --> 01:37:02,480
ईश्वर सर्वशक्तिमान है कि नहीं यह वाला ब मोक्ष मोक्ष

1299
01:37:02,480 --> 01:37:06,640
परम स्वतंत्र है कि नहीं संध्या नहीं कि आप

1300
01:37:06,640 --> 01:37:10,720
क्या किया जाए तो इस बारे में आप

1301
01:37:10,720 --> 01:37:15,000
जो आचार्य श्री का चैनल है वहां संपर्क करें और संपर्क

1302
01:37:15,000 --> 01:37:19,640
करके उनसे नाम जप का वो ले ले

1303
01:37:19,640 --> 01:37:23,840
संकल्प और साढ़े लाख बार

1304
01:37:23,840 --> 01:37:28,640
नाम जाप करें भगवान का उसके बाद

1305
01:37:28,640 --> 01:37:32,920
आपका जेनेव दोबारा से आपको कराना होगा

1306
01:37:32,920 --> 01:37:38,040
यज्ञ

1307
01:37:38,040 --> 01:37:44,040
पवित्र डिस्कॉर्डेंस रहे

1308
01:37:45,600 --> 01:37:51,600
हैं उसका इनवाइट लिंक में भ

1309
01:37:51,920 --> 01:37:57,920
देता ये लीजिए

1310
01:37:58,800 --> 01:38:03,120
हां कोई वो आने वाले थे यूष वादवानी जी

1311
01:38:03,120 --> 01:38:07,280
ष वादवानी जी को लेंगे क्या दोबारा वो तो अपनी और जो वो वही बात

1312
01:38:07,280 --> 01:38:11,400
करनी है उनको कुछ और वो नहीं करना है राम संप्रदाय

1313
01:38:11,400 --> 01:38:15,640
के बारे में बात क्यों वो कर रहे हैं राम संप्रदाय से उनका मतलब ही नहीं है अच्छा

1314
01:38:15,640 --> 01:38:20,080
अच्छा प अच्छा ये अपने ये वाले पि जी जोभी आए थे

1315
01:38:20,080 --> 01:38:24,160
हां अच्छा सत्यम सक्सेना जी

1316
01:38:24,160 --> 01:38:28,560
अभी आ तो चुके सत्यम जी आप तो आ चुके

1317
01:38:28,560 --> 01:38:34,560
हैं यह कौन है पदम

1318
01:38:37,680 --> 01:38:41,720
लोच कैमरा ऑन किया क्या उन्होने पद

1319
01:38:41,720 --> 01:38:45,720
मलो जी आपका कैमरा ऑफ है आप ऑन करें तो आपको ले राहुल

1320
01:38:45,720 --> 01:38:49,720
जी आपका कैमरा भी ऑफ है आप ऑन करें तो आपको ले तब तक रजत जी से

1321
01:38:49,720 --> 01:38:54,040
बातें कर लेते हैं

1322
01:38:54,040 --> 01:38:59,320
जी जी नम नमस्ते जय श्री राम जय श्री राम

1323
01:38:59,320 --> 01:39:03,640
बताइए शिवांश जी मेरा मेरे काफी प्रश्न है क्योंकि मैं

1324
01:39:03,640 --> 01:39:07,800
जैसे आप आज ब्रह्मा कुमारी का बता रहे हैं क्योंकि मेरा जो सर्च है

1325
01:39:07,800 --> 01:39:11,800
स्पिरिचुअलिटी को लेकर वह शुरू से ही बचपन से ही चल रहा है जैसे आपने

1326
01:39:11,800 --> 01:39:15,960
अभी ब्रह्मा कुमार इस का अभी जैसे आप चला रहे हैं तो मैं आया फिर

1327
01:39:15,960 --> 01:39:20,320
मैंने सोचा तो मेरा जो सर्च स्टार्ट हुआ था वो ब्रह्मा कुमारी

1328
01:39:20,320 --> 01:39:25,880
से स्टार्ट हुआ था और इकन में जाकर एंड हुआ था तब मैंने

1329
01:39:25,880 --> 01:39:30,920
यन में एंड हो गया नहीं

1330
01:39:30,920 --> 01:39:35,680
एंड तो अचत है

1331
01:39:35,680 --> 01:39:40,360
नहीं मैं कुछ और बताना चाह रहा हूं की

1332
01:39:40,360 --> 01:39:44,400
लोगों को यह बताना बहुत जरूरी है कि धर्म और अध्यात्म दोनों

1333
01:39:44,400 --> 01:39:48,480
अलग अलग चीज हैं स्लिटी इ डिफरेंट थिंग ए

1334
01:39:48,480 --> 01:39:54,080
रिजन डिफरेंट थिंग आध्यात्म की आवश्यकता धर्म है

1335
01:39:54,080 --> 01:39:58,120
हां धर्म धर्म एक बड़ी चीज है धर्म अध्यात्म से बड़ी चीज है

1336
01:39:58,120 --> 01:40:02,160
तो धर्म का जो क्या कहते हैं नहीं कर सकते

1337
01:40:02,160 --> 01:40:06,280
एक दूसरे के पूरक है पूरक हा हा पूरक तो

1338
01:40:06,280 --> 01:40:10,320
धर्म जो है बेसिकली या फिर मोटी मोटी तौर पर हम समझे तो भारत में

1339
01:40:10,320 --> 01:40:16,320
एजिस्ट करता है विदेशों में एजिस्ट नहीं करता है

1340
01:40:16,600 --> 01:40:20,840
धर्म करता है आंशिक रू से करता है

1341
01:40:20,840 --> 01:40:24,920
हा वहां पर स्पिरिचुअलिटी का ज्यादा दुनिया में जहां भी थोड़ी

1342
01:40:24,920 --> 01:40:29,200
बहुत चमत्कृत है वो है तो वेदों के ही आधार पे प्रॉब्लम वहां

1343
01:40:29,200 --> 01:40:33,360
है जब वेदों की कुछ चीजें तो ले ली बाकी को डिनायर दिया

1344
01:40:33,360 --> 01:40:39,360
और उसको अपना नाम दे दिया [संगीत]

1345
01:40:39,600 --> 01:40:43,800
ये तो जैसे कि

1346
01:40:43,800 --> 01:40:48,000
जैसे हम देखते हैं कि जितने भी देवी मंदिर हैं

1347
01:40:48,000 --> 01:40:52,040
51 शक्ति पीठ है या फिर 12 ज्योतिर्लिंग है वो सिर्फ भारत में

1348
01:40:52,040 --> 01:40:56,040
ही क्यों है क्योंकि जो ऐसा

1349
01:40:56,040 --> 01:41:00,040
भी ऐसा भी मैंने सुना है कि जो शंकराचार्य जी है व विदेशों में नहीं जाते हैं

1350
01:41:00,040 --> 01:41:04,520
खाली भारत में ही रहते हैं

1351
01:41:04,520 --> 01:41:09,160
उसका सारे प्रश्नों के उत्तर गुरुदेव दे चुके हैं अपनी वीडियो

1352
01:41:09,160 --> 01:41:13,360
में करना मैंने आपको बताया केवल भारत

1353
01:41:13,360 --> 01:41:17,600
में ही क्यों वैसे तो मैंने आपको एक ग्रंथ भी बताया

1354
01:41:17,600 --> 01:41:22,000
है और इस तरह कपा जी का भक्ति सुदा है इसको आप पढ़े

1355
01:41:22,000 --> 01:41:26,600
इस तरह के प्रश्नों के उत्तर केवल भारत में ही क्यों

1356
01:41:26,600 --> 01:41:30,680
भारत भूमि को भगवान ने चुना एक सेंटर बनाने के लिए

1357
01:41:30,680 --> 01:41:34,800
कि हम इसको सेंटर बनाएंगे पूरे विश्व का

1358
01:41:34,800 --> 01:41:40,080
केंद्र बनाएंगे तो इसलिए उन्होंने सारी चीजें की यहां

1359
01:41:40,080 --> 01:41:44,080
पे तो ऐसा नहीं है भारत में ही जन्मे भारत वो

1360
01:41:44,080 --> 01:41:48,160
है जहां वो जन्मे इसको समझिए वो भारत में ही जन्मे ऐसा नहीं

1361
01:41:48,160 --> 01:41:52,800
है भारत वो है जहां वो जन्मे जहां वो मंदिर बने

1362
01:41:52,800 --> 01:41:56,800
ठीक है थोड़ा साही और जसे और जैसे यह कहा जाता है कि

1363
01:41:56,800 --> 01:42:00,800
ब्रह्मा जी की पूजा नहीं होती तो मैंने मेरा भी था आज से

1364
01:42:00,800 --> 01:42:04,920
करीब 12 1 साल पहले यह सवाल मेरा भी था मैं अपने पिताजी से पूछता

1365
01:42:04,920 --> 01:42:09,040
था और मेरे घर में मैं कोई जन्म से वैसा

1366
01:42:09,040 --> 01:42:13,440
नहीं है कि मेरा यज्ञ पवित्र समय पर हो गया और रात

1367
01:42:13,440 --> 01:42:17,720
संध्या का दोष लगा था उसके बाद ज जन् वो हुआ और

1368
01:42:17,720 --> 01:42:19,520
क्या कहते हैं मेरे घर में मैं पूछता

1369
01:42:19,520 --> 01:42:23,560
था पिताजी ये मेरे पिता जी का

1370
01:42:23,560 --> 01:42:27,640
समय पर हुआ मेरे पिताजी तक समय पर हुआ उनका तो आठ वर्ष की उम्र में

1371
01:42:27,640 --> 01:42:31,800
आयु में ही हो गया तो मैं उनसे पूछता था पिताजी सारे जो वो

1372
01:42:31,800 --> 01:42:36,960
है वो सारे जन्म भगवान ने यहीं पर क्यों लिए हैं

1373
01:42:36,960 --> 01:42:41,160
और ऐसा पूछते मतलब मुझे कभी संतुष्ट जनक

1374
01:42:41,160 --> 01:42:45,360
उत्तर नहीं मिलता था मगर पिताजी जो है वो मुझे घर में कभी कभी

1375
01:42:45,360 --> 01:42:49,840
चर्चाएं होती थी शंकराचार्य के बारे

1376
01:42:49,840 --> 01:42:53,960
में सनातन के जो सार्व मतलब सबसे बड़े गु के रूप में उनका

1377
01:42:53,960 --> 01:42:58,040
नाम लिया जाता था शंकराचार्य का कौन थे नहीं पता था पिताजी ने

1378
01:42:58,040 --> 01:43:02,240
बचपन में स्वरूपानंद सरस्वती जी जो हमारे ब्रह्मलीन है पूज

1379
01:43:02,240 --> 01:43:06,640
उनकी सेवा करने का उन्ह सौभाग्य प्राप्त हुआ है हमारा जो ददल था उसके

1380
01:43:06,640 --> 01:43:10,760
बिल्कुल सटे हुए घर में करपा जी आ कर रुकते थे उनकी

1381
01:43:10,760 --> 01:43:15,520
सेवा का सौभाग्य प्राप्त हुआ एक बार का तांत पिताजी बताते हैं कि

1382
01:43:15,520 --> 01:43:19,520
स्वरूपानंद सरस्वती जी आए थे वहां पर

1383
01:43:19,520 --> 01:43:23,560
पूज पाद तो पिताजी को काजू बादाम खाने को देते थे ये

1384
01:43:23,560 --> 01:43:27,560
लोग वहां जाकर के सेवा करते थे काम धाम कराते थे वहा शिविर में

1385
01:43:27,560 --> 01:43:32,440
तो उनको काजू और बादाम खाने को ड्राई फ्रूट्स देते थे छोटे छोटे थे हमारे पिताजी और

1386
01:43:32,440 --> 01:43:34,560
फिर उन्होंने एक बताया कि एक

1387
01:43:34,560 --> 01:43:38,720
कोई कार्यक्रम था तो उसमें

1388
01:43:38,720 --> 01:43:43,040
किसी बालिका को मंच पर

1389
01:43:43,040 --> 01:43:47,040
किसी भौतिक जो ये फिल्मों का गाना होता है उस पर

1390
01:43:47,040 --> 01:43:51,640
डांस कराया जा रहा था नृत्य कराया जा रहा था तो वो बहुत

1391
01:43:51,640 --> 01:43:56,000
गुस्से में रहते थे मतलब बल तुरंत उनका पारा हाई होता

1392
01:43:56,000 --> 01:44:00,160
तो उन्होने तुरंत किसने कराया य व्यवस्था हमारे य देवी बना

1393
01:44:00,160 --> 01:44:04,440
के पूजा होती है कन्याओ की सब बंद करो तुरंत

1394
01:44:04,440 --> 01:44:09,120
बंद करा दिया ऐसे सिद्धांतों के पक्के

1395
01:44:09,120 --> 01:44:13,240
आ जाता हं अपने प्रश्न पर वापस विषय पर वापस आ जाता हूं कि

1396
01:44:13,240 --> 01:44:17,240
यह प्रश्न मेरा भी था जिसका समाधान मुझे गुरुदेव

1397
01:44:17,240 --> 01:44:21,240
से प्राप्त हुआ आने वाले समय में जब मैंने शंकराचार्य जी को सुनना शुरू किया

1398
01:44:21,240 --> 01:44:25,280
तो उसका समाधान मुझे प्राप्त शिवांश जी एक मैं

1399
01:44:25,280 --> 01:44:29,360
मतलब एक क्लेरिफिकेशन चाहता हूं क्योंकि मैं मेरा जो नेचर रहा है हमेशा

1400
01:44:29,360 --> 01:44:33,720
काफी जैसे नहीं सीक्रेट पता करने गुण तत्व जैसे

1401
01:44:33,720 --> 01:44:37,840
कर्म धर्म को कर्म से भी गुण कहा जाता है धर्म जो है वो बहुत गुण

1402
01:44:37,840 --> 01:44:42,720
गुण विषय है कर्म से भी गुण है तो

1403
01:44:42,720 --> 01:44:47,360
क्या कहते हैं एक जैसे राम कृष्ण मिशन भी आप ही के

1404
01:44:47,360 --> 01:44:49,880
मतलब इंक्लूड माना जाता है शंकराचार्य जी से

1405
01:44:49,880 --> 01:44:54,200
वण व्यवस्था को लेके वर्ण व्यवस्था को लेकर के अंतर है

1406
01:44:54,200 --> 01:44:58,800
और दार्शनिक धरातल पर शंकराचार्य को ही मानने वाले हैं

1407
01:44:58,800 --> 01:45:03,000
और अभी प्रासंगिक वही ब्रह्म की व्याख्या लगभग समान

1408
01:45:03,000 --> 01:45:07,040
है धर्म की व्याख्या में अंतर है तो एक

1409
01:45:07,040 --> 01:45:11,040
मेरा बहुत मतलब इंटरेस्टिंग प्रश्न है मतलब

1410
01:45:11,040 --> 01:45:15,160
आपको लगेगा क्योंकि एक डिवाइन डिवाइन स्पार्क करके एक

1411
01:45:15,160 --> 01:45:19,560
संस्था है उडपी कर्नाटक में साउथ में

1412
01:45:19,560 --> 01:45:24,120
तो वो यह क्लेम करते हैं कि जो स्वामी विवेकानंद थे वो

1413
01:45:24,120 --> 01:45:28,120
अपने पूर्व जन्म में पूर्व जन्मों में शंकराचार्य रहे हैं

1414
01:45:28,120 --> 01:45:32,480
और उनकी एक पर्टिकुलर एक वेबसाइट भी है तो उन्होंने ऐसा

1415
01:45:32,480 --> 01:45:36,480
मतलब बताया है कि कि मतलब ये उनके

1416
01:45:36,480 --> 01:45:40,720
पिछले कितने जन्म हुए हैं आठ आठ जन्म हुए उन्होंने वो वो

1417
01:45:40,720 --> 01:45:44,880
वो आप मुझे क्लेरिफिकेशन करके आप कृपया बताएंगे कि और उसकी जो

1418
01:45:44,880 --> 01:45:48,960
उस मंदिर की जो स्थापना है वो रामकृष्ण मिशन के जो स्वामी जी होते

1419
01:45:48,960 --> 01:45:53,040
हैं मक होते हैं उन्होंने ही स्थापना करी है उनकी देखिए

1420
01:45:53,040 --> 01:45:57,560
इसमें तो सीधे-सीधे वाली बात है

1421
01:45:57,560 --> 01:46:02,000
इसमें तो सीधे-सीधे वाली बात है कि मैं अगर ये कह दूं

1422
01:46:02,000 --> 01:46:05,600
कि मैं जो है विवेकानंद जी का अवतार हूं

1423
01:46:05,600 --> 01:46:09,600
मैं विवेकानंद जी का अवतार हूं और यहां पर जो पंडित फलकी जी बैठे हैं य भी कह

1424
01:46:09,600 --> 01:46:13,760
देंगे हाय अवतार है इसको क्यों ना माना जाए क्यों माना जाए व्यर्थ की

1425
01:46:13,760 --> 01:46:18,520
चर्चा है शास्त्र तस्मा शास्त्रम प्रमाणम

1426
01:46:18,520 --> 01:46:22,920
शास्त्र में क्या ऐसा वर्णन है कि वो ऐसा ऐसा शंकराचार्य होंगे

1427
01:46:22,920 --> 01:46:27,160
अगर नहीं है तो शास्त्रों के द्वारा निर्धारित जो अंतिम निर्णायक

1428
01:46:27,160 --> 01:46:31,360
है क्या वो ये कह रहा है या तो शास्त्र

1429
01:46:31,360 --> 01:46:35,480
कहे या शास्त्रों के द्वारा जो अंतिम निर्णायक गद्दिया है वो ये कहे

1430
01:46:35,480 --> 01:46:39,480
तब तो ये माना जाएगा और बात है कि वो अवतार है या नहीं

1431
01:46:39,480 --> 01:46:43,600
ये हमारा विषय है ही नहीं हमारा विषय ये है कि उनसे द्वारा प्राप्त

1432
01:46:43,600 --> 01:46:47,920
होने वाला जो धर्म है वो सार्वभौम है जो ब्रह्म है

1433
01:46:47,920 --> 01:46:52,240
जो धर्म है वो शाश्वत हो जो ब्रह्म हो ईश्वर हो वो सर्वशक्तिमान हो

1434
01:46:52,240 --> 01:46:56,640
और जो इन दोनों के साधन से प्राप्त होने वाला मोक्ष हो वो परम स्वतंत्र

1435
01:46:56,640 --> 01:47:00,720
हो तो धर्म में लेकर के अंतर है तो वो अवतार

1436
01:47:00,720 --> 01:47:04,760
अपने आपको को कह सकते उनको उनके जो श्रद्धावन है उनको मान सकते हैं उससे हमें

1437
01:47:04,760 --> 01:47:08,760
कोई आपत्ति नहीं है मगर जब वो शास्त्रों की आड़ में उसका प्रचार करेंगे

1438
01:47:08,760 --> 01:47:12,920
तो हम काउंटर करेंगे जैसे रामपाल जी रामपाल जी

1439
01:47:12,920 --> 01:47:17,000
कबीर को भगवान माने कोई दिक्कत नहीं मगर वो जब वेदों की आड़ में

1440
01:47:17,000 --> 01:47:20,360
प्रचार करेंगे तो हम

1441
01:47:20,360 --> 01:47:21,360
का

1442
01:47:21,360 --> 01:47:25,520
किसी को भी किसी को भी नए सेक्ट को चालू करने के लिए अपनी

1443
01:47:25,520 --> 01:47:29,760
बात को मनवाने के लिए दो ही चीजें होती है अपने व्यक्ति

1444
01:47:29,760 --> 01:47:32,400
को अवतार घोषित

1445
01:47:32,400 --> 01:47:37,560
करो जिसके द्वारा हमारा सेक्ट जाना जा रहा है उसको अवतार घोषित करो

1446
01:47:37,560 --> 01:47:41,680
और क्या कहते हैं जो अपने जो शास्त्र लिखो

1447
01:47:41,680 --> 01:47:47,480
व ऐसे लिखो कि हम पुराने वाले को नकार नहीं रहे हम उससे जोड़ के ही आगे चल रहे

1448
01:47:47,480 --> 01:47:51,560
हैं तभी आपकी बात को वैल्यू दी जाएगी आपने बिल्कुल

1449
01:47:51,560 --> 01:47:55,840
नया शटर अगर खोला तो दुकान का तो आपको कोई सुनेगा ही

1450
01:47:55,840 --> 01:48:00,320
नहीं इसलिए वो पुराने से जोड़ के

1451
01:48:00,320 --> 01:48:04,400
देखिए जो इस्लाम की जो व्याख्या है उसमें देखिए

1452
01:48:04,400 --> 01:48:08,560
जो जीसस है उसको उनको छोड़ा नहीं गया जीसस

1453
01:48:08,560 --> 01:48:13,080
को लेकर के इस्लाम की स्थापना हुई है जीस को नकारा नहीं गया

1454
01:48:13,080 --> 01:48:17,960
है स्कोन में क्या हो रहा है स्कोन में क्या हो रहा है कि

1455
01:48:17,960 --> 01:48:21,960
चैतन्य महाप्रभु को जोड़ लिया श्रीधर स्वामी के जो

1456
01:48:21,960 --> 01:48:26,040
थे अब हम नकार नहीं रहे श्रीधर स्वामी को हम देखो उन्हीं को मानने वाले का

1457
01:48:26,040 --> 01:48:30,440
तो फॉलो कर रहे हैं मगर जब उसको खोलते हैं पन्नों को इधर उधर पलटते

1458
01:48:30,440 --> 01:48:34,520
तो वो तो कुछ का कुछ ही मिलता है तो पहले के

1459
01:48:34,520 --> 01:48:36,480
किसी व्यक्ति से जोड़ के ही अपने

1460
01:48:36,480 --> 01:48:41,240
अस्तित्व को सिद्ध करने करना पड़ता है जब हम

1461
01:48:41,240 --> 01:48:46,160
धार्मिक आध्यात्मिक संस्था के रूप में उ भाषित होना चाहते हैं

1462
01:48:46,160 --> 01:48:50,200
तो जी जैसे उन्होंने कबीर जी

1463
01:48:50,200 --> 01:48:54,400
को जोड़ा उन्होंने तो परमात्मा ही बना दिया उनको नहीं कबीर

1464
01:48:54,400 --> 01:48:58,840
जी को जोड़ा तो जोड़ा कबीर जी को जोड़ते हुए अपने आप को वेदों से

1465
01:48:58,840 --> 01:49:02,840
जोड़ा अपने स्वयं को वेदों से जोड़ा वेदों में प्रमाण

1466
01:49:02,840 --> 01:49:07,200
है केवल ये कहो कि आपके वो जो आपने सक्षम

1467
01:49:07,200 --> 01:49:11,320
कुछ लिख रखा है वेद भी मत क आपका कोई सक्षम ग्रंथ

1468
01:49:11,320 --> 01:49:16,040
है कबीर वाणी उसके अनुसार कबीर भगवान है कौन सुनेगा फ

1469
01:49:16,040 --> 01:49:20,040
जब ये गीता नहीं लेंगे साथ में वेद नहीं लेंगे साथ में

1470
01:49:20,040 --> 01:49:25,880
कौन सुनेगा बाइबल वाले सुनेंगे नहीं

1471
01:49:25,880 --> 01:49:29,000
यह बात

1472
01:49:29,000 --> 01:49:33,000
है चलिए अब आज का समाप्त करते हैं काफी लंबी हो गई चर्चा

1473
01:49:33,000 --> 01:49:37,920
और चर्चा एक दिशा में नहीं है

1474
01:49:37,920 --> 01:49:41,920
एक चीज मैं जानना चाह रहा हूं एक प्रश्न है कि जैसे अद्वैत के बारे

1475
01:49:41,920 --> 01:49:45,960
में मतलब जो फिर कभी आ जाइएगा कुछ अन्य

1476
01:49:45,960 --> 01:49:51,960
लोग है हमको उनको लेना है मैं आप फिर कभी आइएगा

1477
01:49:54,520 --> 01:49:59,320
आकाश जी आप अपना कैमरा ऑन करें या

1478
01:49:59,320 --> 01:50:05,320
पद्म लोच जी आप अपना कैमरा ऑन

1479
01:50:21,120 --> 01:50:25,480
करें कर रहे कोई आया क्या

1480
01:50:25,480 --> 01:50:29,760
आ नहीं रहा है कोई भी ठीक है तो आज की चर्चा को बढ़ाते

1481
01:50:29,760 --> 01:50:34,200
हैं आपका आभार आपका हमने कई बार देखा यह कमेंट

1482
01:50:34,200 --> 01:50:38,640
आप बहुत बढ़िया कार्य कर रहे हैं शिवांश भैया जिनके नाम में ही शिव

1483
01:50:38,640 --> 01:50:44,640
कांश तो वो तो धर्म की रक्षा हेतु अभियान चलाएंगे

1484
01:50:45,720 --> 01:50:49,800
चलिए आपका आभार बहुत-बहुत समर्थन प्रकट करने

1485
01:50:49,800 --> 01:50:54,320
के लिए

1486
01:50:54,320 --> 01:50:59,000
मेरे ख्याल से कोई है नहीं जो चेहरे के साथ आ सकता

1487
01:50:59,000 --> 01:51:03,960
है पद्म लोच

1488
01:51:03,960 --> 01:51:09,960
जी अच्छा

1489
01:51:15,640 --> 01:51:19,840
अच्छा आकाश जी आप आए हैं क्या आकाश जी आप

1490
01:51:19,840 --> 01:51:25,800
अपना कैमरा ऑन करिए ना फेस रिवील कर

1491
01:51:25,800 --> 01:51:30,120
अपना फेस रिवील होते ही व्यक्ति पहले तो थोड़ा बहुत मर्यादित हो जाता है

1492
01:51:30,120 --> 01:51:34,320
जितनी उसम थोड़ा सा मर्यादा होती प थोड़

1493
01:51:34,320 --> 01:51:37,680
मुझे लोग देख

1494
01:51:37,680 --> 01:51:42,160
रहे बहुत बढ़ ल कर आकाश जी ल करिए वरना

1495
01:51:42,160 --> 01:51:45,160
रिमूव हो

1496
01:51:45,160 --> 01:51:49,160
जाइए चेहरा दिखाइए आकाश जी सब लोग

1497
01:51:49,160 --> 01:51:55,160
कमेंट में लिख दीजिए फेस रिवील

1498
01:51:55,760 --> 01:52:00,040
ईश्वर सर्वशक्तिमान है कि नहीं मैं एक बार फिर से

1499
01:52:00,040 --> 01:52:04,840
आप लोगों को स्मरण करा दूं यह जो अभियान है

1500
01:52:04,840 --> 01:52:07,000
वह

1501
01:52:07,000 --> 01:52:11,280
किसी मनोरंजन के लिए नहीं है आनंद के लिए नहीं है

1502
01:52:11,280 --> 01:52:15,800
यह एक युद्ध है जो हमें जीतना है कैसे जीतेंगे सिद्धांत

1503
01:52:15,800 --> 01:52:20,400
से ईश्वर सर्वशक्तिमान है कि नहीं बस इसके पीछे आप पड़

1504
01:52:20,400 --> 01:52:24,440
जाइए जिसको जहां से बचा बचा लेंगे जिसको जहां लाना है

1505
01:52:24,440 --> 01:52:28,880
ले आएंगे ईश्वर को सर्वशक्तिमान कहिए केवल एक बात प्रचारित

1506
01:52:28,880 --> 01:52:33,080
करना शुरू करिए केवल एक बात क्या आपके द्वारा परिभाषित

1507
01:52:33,080 --> 01:52:37,200
होने वाला ईश्वर जो है वह सर्वशक्तिमान है कि नहीं बस इसके ही

1508
01:52:37,200 --> 01:52:42,080
पीछे पड़ जाएंगे सब आपकी बातें सुनने समझने लग जाए

1509
01:52:42,080 --> 01:52:47,480
आवान का आधार ही यही है ईश्वर सर्वशक्तिमान

1510
01:52:47,480 --> 01:52:52,720
यह मैंने कृपा जी की जो ग्रंथ है ना उसमें पढ़ लिया था

1511
01:52:52,720 --> 01:52:56,760
अब अवाद शब्द मैंने कहा ये

1512
01:52:56,760 --> 01:53:01,040
अवाद पकड़ने वाला है ये तो है ला

1513
01:53:01,040 --> 01:53:05,120
सभी सभी बातें गुरुदेव के प्रवचन या उनके ग्रंथों से ही पकड़ में आई

1514
01:53:05,120 --> 01:53:09,400
है जी जैसे गुरुदेव का मैंने इधर सुना जिनका ईश्वर जगत बनाता

1515
01:53:09,400 --> 01:53:14,280
ही नहीं बनता भी है उन्हीं का ईश्वर श्री राम कृष्ण आदि रूपों में अवतार ले

1516
01:53:14,280 --> 01:53:18,520
सकता सकता वा बात बोला था उन्होंने ये हां

1517
01:53:18,520 --> 01:53:22,560
और और इधर करपात्री जी के ग्रंथ में मैंने पढ़ा

1518
01:53:22,560 --> 01:53:26,560
के आबाद किसी भी नियम के नीचे नहीं मैंने कहा फिर

1519
01:53:26,560 --> 01:53:30,640
मैं अच्छा मेरा मैं इनके बारे में ज्यादा नहीं जानता था ये स्

1520
01:53:30,640 --> 01:53:34,640
कन की क्या धारणा है आर्य समाज की क्या धारणा है आपने देखा होगा चैनल

1521
01:53:34,640 --> 01:53:38,800
स्टार्ट करने के बहुत समय तक आर्य समाज पर कुछ नहीं बोला था जी जी तो मैं बहुत

1522
01:53:38,800 --> 01:53:43,120
ज्यादा इनको ध्यान नहीं देता था मैं जो है मुस्लिम्स

1523
01:53:43,120 --> 01:53:47,360
को जानता था उनकी क्या विचार है कैसे वह विरोध में है कहां कहां पर

1524
01:53:47,360 --> 01:53:51,600
तो मैंने वो जो सक्ता सुना गुरुदेव से और फिर मैंने 611 देखा

1525
01:53:51,600 --> 01:53:55,600
ये बहुत बड़ा ट पॉइंट था फिर मैंने उनके उसकी कोई संतान

1526
01:53:55,600 --> 01:54:00,440
कैसे हो सकती है सक्ति है नियम आ रहा है

1527
01:54:00,440 --> 01:54:03,200
और यहां पर नियम नहीं है अवाद है

1528
01:54:03,200 --> 01:54:07,520
यह था वो टर्निंग पॉइंट यह है अंतर

1529
01:54:07,520 --> 01:54:11,720
आप लड़ते रहो कि अरे तुम्हारे य बहनों से विवाह होता है आप लड़ते रहो इन बातों को लेकर

1530
01:54:11,720 --> 01:54:15,800
के कभी कोई निस्तारण नहीं निकलेगा आपका जो धर्म है वो

1531
01:54:15,800 --> 01:54:20,200
आपका जो अधर्म है वो उनका धर्म है उनका जो अधर्म है वो आपका धर्म है

1532
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इन बातों को लेकर कभी आप जीत ही नहीं सकते वह अनिश्चित

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कालीन वार्ताएं होती जाएंगी एक बात आपको जिता

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देगी ईश्वर सर्वशक्तिमान है कि नहीं इसको पकड़ लो बस

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अबाध बनाओ ईश्वर और जिस दिन सारा हिंदू ईश्वर

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को अबाध बनाने के पीछे पड़ जाएगा सब एक हो जाएंगे इसको आर समाज ब्रह्मा

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कुमारी सब एक हो जाएंगे सारा हिंदू ईश्वर को अवाद मानने के

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पीछे पड़ जाए अब देश्वर शंकराचार्य को मत मानो

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प्रेमानंद जी को मत मानो रामानुजाचार्य को मत मानो ईश्वर

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को अवाद मानो और जो सनातन विरोधी

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तंत्र है उनकी दाल गलना बंद हो

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जाएगी आकाश जी की तो अपनी

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समस्याए है उसकी सेद नहीं आ पाए आकाश जी देखिए हमारी

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बात आकाश जी ये कह रहे कि भा मैं दूसरी आईडी से मुस्लिमों के पास जाता

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हूं तो आप अपना चेहरा छिपा के जाते हैं ना उनको कैसे पता कि आकाश है

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और यहां पर आकर के वो कोई फंक्शन होता है ना इसमें आप अपनी आवाज भी चेंज कर

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सकते हैं तो आपकी आवाज से भी वो पहचान में नहीं आएंगे है

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ना और इसके साथ ही साथ बात यह है कि आपकी

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अगर अपनी कोई व्यक्तिगत वो है व्यवस्था तो वो ठीक है मगर हमारी व्यक्तिगत

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व्यवस्था यही है कि हम चर्चा उसी के साथ करते हैं जो अपना चेहरा लेकर

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आए ठीक है अ

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देखिए मुझे कोई बहुत बड़ा ज्ञानी ना समझे आप लोग

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एक भाई साहब पूछ रहे हैं कि आपने उन ग्रंथों का व किया है

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अध्ययन मुझे बहुत बड़ा ज्ञानी ना समझे अल्पज्ञ शिष्य हूं

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कोशिश कर रहा हूं कि गुरुदेव के द्वारा प्राप्त जो सिद्धांत है उन्हीं को समझ लू पूरा

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बहुत बड़ा ज्ञानी ना समझे मगर जितना है उतना य जो तथाकथित धर्मा

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भाषी तंत्र है सनातना भाषी उनके लिए पर्याप्त है

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ऐसा जितना है सनातन विरुद्ध तंत्रों के लिए पर्याप्त है

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सनातन भासी तंत्रों के लिए पर्याप्त है समाज को

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संगठित करने के लिए

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पर्याप्त ठीक है बढ़ाते हैं आप काफी देर

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बातें हो गई सभी को जय श्री राम आने के लिए धन्यवाद और नाम

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जब से जुड़े किसी भी प्रकार के वैचारिक मतभेद के लिए ट करें सबसे बड़ी

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बात है देखिए कुछ तथाकथित ये

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रामपाल जी के फॉलोअर्स भी हैं वह लोग वो ट

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करते हैं वह फॉर्म भरने के लिए नहीं करते अपना मटेरियल भेजने के लिए करते

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हैं प्रचार करने के लिए मुझे आप प्रचार मत करिए आप ट अगर

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व्यर्थ में करेंगे आप ब्लॉक हो जाएंगे आपको ट करना है वहां

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01:57:23,960 --> 01:57:28,080
पर फॉर्म लेना है फॉर्म भरिए हम आपसे संपर्क करेंगे आप

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01:57:28,080 --> 01:57:32,400
अपने वीडियोस फोटोस पोस्ट यह सब वहां पर मत भेजिए

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तो किसी प्रकार के वैचारिक मतभेद के निमित्त

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धार्मिक कक्षाओं से जुड़ने के लिए या

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फिर नाम नास्त्र के लिए नाम जप अभियान से जुड़ने के

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लिए और धर्म रक्षा के अभियान से जुड़ने के लिए इन

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चारों में से किसी से भी जुड़ने के लिए आप जो है हमें

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01:57:54,040 --> 01:57:58,120
इस नंबर पर ट करिए फोन मत करिए केवल ट करिए किसी

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01:57:58,120 --> 01:58:02,360
भी प्रकार का अन्य मैसेज मत करिए इनमें से एक फॉर्म भरिए

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01:58:02,360 --> 01:58:05,880
हम आपसे संपर्क करेंगे ठीक है सभी को

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01:58:05,880 --> 01:58:10,160
जय श्री राम जय श्री राम आपका पंडित जी स्तांक जी जय श्री

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राम ह
