1
00:00:03,080 --> 00:00:09,080
तो सभी को जय श्री राम और आज हमारे पास हैं

2
00:00:10,080 --> 00:00:14,800
दो विशेष अतिथि हमारे चैनल पर

3
00:00:14,800 --> 00:00:19,280
युगल किशोर शर्मा जी हैं रामानुजाचार्य परंपरा

4
00:00:19,280 --> 00:00:23,280
से श्री संप्रदाय से दीक्षित हैं और उसी मार्ग पर

5
00:00:23,280 --> 00:00:27,320
आगे बढ़ रहे हैं और भव्य शर्मा जी हैं यह भी ू

6
00:00:27,320 --> 00:00:31,640
चैनल के माध्यम से अपने ा इत्यादि के माध्यम

7
00:00:31,640 --> 00:00:35,920
से जो धर्म के प्रति जागरूकता है वो

8
00:00:35,920 --> 00:00:40,040
फैलाने का प्रयास करते हैं तो आप लोगों

9
00:00:40,040 --> 00:00:44,120
का बहुत-बहुत स्वागत है युगल किशोर जी आप बताएं

10
00:00:44,120 --> 00:00:48,240
अपने बारे में मेरा नाम ल किशोर शर्मा

11
00:00:48,240 --> 00:00:52,720
है देखिए आज जो है कल स्कोन

12
00:00:52,720 --> 00:00:57,080
की एक वीडियो आई थी जहां पर हमने लिखा था

13
00:00:57,080 --> 00:01:01,080
कि जो भगवत गीता वो जिस तरीके से अन्य

14
00:01:01,080 --> 00:01:05,440
व्यक्ति को जो जिसने मांस खाया हुआ और व कह रहा है कि मैंने मांसाहार

15
00:01:05,440 --> 00:01:09,680
किया हुआ है तो जो है मैं भगवत गीता को स्पर्श नहीं कर सकता

16
00:01:09,680 --> 00:01:13,680
व अपनी श्रद्धा को वहां पर व्यक्त कर रहा है किंतु वहां पर यह लोग क्या करते

17
00:01:13,680 --> 00:01:17,800
हैं कि हम जो है आप भगवत गीता ले लीजिए किंतु

18
00:01:17,800 --> 00:01:18,300
भगवत

19
00:01:18,240 --> 00:01:22,480
गीता के अंदर एक विधि और निषेध का पालन करते हु हमारे वेदा दि शास्त्रों के

20
00:01:22,480 --> 00:01:26,640
अंदर कि हमको इस नियम का पालन करना है संध्या बंदन भी करना

21
00:01:26,640 --> 00:01:30,640
है तो उसके अंदर भी नियम आते हैं हर एक जब हम करते

22
00:01:30,640 --> 00:01:35,000
तो उसके अंदर नियम है जहां पर हम विधि की बात करते हैं वहां पर निषेध

23
00:01:35,000 --> 00:01:39,000
अपने आप लागू हो जाता है किंतु जहां पर हम विधि की बात नहीं करेंगे

24
00:01:39,000 --> 00:01:43,160
वहां पर निषेध भी लागू नहीं होता अब जैसे हम कहते हैं कि हरि

25
00:01:43,160 --> 00:01:47,200
नाम जपने में राम नाम जपने में कृष्ण नाम जपने में कोई विधि नहीं

26
00:01:47,200 --> 00:01:51,360
है तो जहां विधि नहीं है वहा निषेध भी नहीं है तो नहाते हुए भी हम हरि

27
00:01:51,360 --> 00:01:55,360
नाम को ज जप सकते हैं कोई भी का हम अशुद्ध अवस्था के

28
00:01:55,360 --> 00:01:59,360
अंदर भी हरि नाम को जप सकते हैं किंतु यदि हम विधि की

29
00:01:59,360 --> 00:02:03,440
बात करें संध्या वंदन आदि की बात करेंगे ग्रंथों के अवलोकन की

30
00:02:03,440 --> 00:02:07,880
बात करेंगे तो वहां पर पवित्रता चाहिए हमको गीता के अंदर स्पष्ट

31
00:02:07,880 --> 00:02:12,240
लिखा हुआ है दमते ना तपस ना भक्ता कदाचना ना

32
00:02:12,240 --> 00:02:16,280
चास श सवे वाचम इस प्रकार से भगवत गीता के अंदर लिखा

33
00:02:16,280 --> 00:02:20,640
है कि तप रहित व्यक्ति जो हो श्रद्धा से रहित जो व्यक्ति हो

34
00:02:20,640 --> 00:02:24,680
भक्ति से रहित जो व्यक्ति हो उसके समक्ष मेरे ज्ञान

35
00:02:24,680 --> 00:02:28,720
को प्रकट मत करो और भगवत गीता के अंदर एक और शब्द का प्रयोग

36
00:02:28,720 --> 00:02:32,880
हुआ है गुय त ममा माने कि मेरा जो भगवत

37
00:02:32,880 --> 00:02:33,380
गीता का

38
00:02:33,280 --> 00:02:37,480
ज्ञान है वो अत्यंत गोपनीय है गुय है उसको

39
00:02:37,480 --> 00:02:41,520
छुपाओ किससे छुपाओ जो सत पात्र नहीं है 17

40
00:02:41,520 --> 00:02:45,680
वा अध्याय भगवत गीता का पढ़ेंगे तो 17वी अध्याय के अंदर क्या बताया

41
00:02:45,680 --> 00:02:49,800
है कि हम यदि दान करते हैं तो दान के तीन

42
00:02:49,800 --> 00:02:53,920
भेद बताए हैं सात्विक दान राजसिक दान और तामसिक दान उसके

43
00:02:53,920 --> 00:02:58,360
अंदर बताया आदेश काले यद दनम दिय नपा अकारी

44
00:02:58,360 --> 00:03:02,640
यानी कि देश को देखो काल को देखो पात्र को देखो उसको

45
00:03:02,640 --> 00:03:06,880
देखते हुए ही हमको दान करना है यदि किसी व्यक्ति के अंदर

46
00:03:06,880 --> 00:03:11,280
प्रति उपकार की भावना करते हुए कोई व्यक्ति दान करता है तो वो राजसी दान

47
00:03:11,280 --> 00:03:15,280
है इसी प्रकार से जब हम दान के भेद तो य क्या कर रहे भगवत

48
00:03:15,280 --> 00:03:19,320
गीता का दान कर रहे हैं ना कहते हम दान कर रहे हैं तो दान क्या

49
00:03:19,320 --> 00:03:23,480
कर रहे भगवत गीता और भगवत गीता क्या कर रहे हैं की भगवान कृष्ण

50
00:03:23,480 --> 00:03:27,760
की वाणी है तो भगवान कृष्ण की वाणी का जितना हम प्रचार करेंगे अच्छा

51
00:03:27,760 --> 00:03:31,920
एक सबसे विचित्र बात ये है कि यदि

52
00:03:31,920 --> 00:03:35,920
हम इनसे प्रश्न करते हैं हमने इनसे कोई प्रश्न करा

53
00:03:35,920 --> 00:03:40,320
तो यदि इनके पास उसका उत्तर नहीं है तो यह कुछ अभद्र टिप्पणियां

54
00:03:40,320 --> 00:03:44,480
करने लग जाते हैं मेरी कल बात हुई थी एक व्यक्ति से जहां पर मैंने

55
00:03:44,480 --> 00:03:48,280
उससे कुछ प्रश्न रखे तो एक समय तक तो उसने अच्छी तरीके से बात

56
00:03:48,280 --> 00:03:52,320
की ठीक है बाद में तुम मायावादी हो तुम अपने आप को नारायण समझते

57
00:03:52,320 --> 00:03:58,320
हो यह है वो है फिर क्या करने लगते हैं अच्छा

58
00:03:58,720 --> 00:04:03,120
अगर इनके सिद्धांतों के विरुद्ध चले गए तो आप मास खाते हो

59
00:04:03,120 --> 00:04:07,320
आप जो है वो चाय पीते हो आपसे चाय नहीं छोड़ी जाती आप मांस खाते हो आप प्याज

60
00:04:07,320 --> 00:04:11,480
लहसुन खाते हो आप संप्रदाय हीन हो आपको मेरे बारे में कोई जानकारी

61
00:04:11,480 --> 00:04:15,600
नहीं है क्योंकि मैंने आपके केवल इनसे प्रश्न कर

62
00:04:15,600 --> 00:04:20,080
देने पर ही ये सिद्ध हो जाता है कि आप आपके सारे

63
00:04:20,080 --> 00:04:24,280
क्योंकि मैं आपके विरुद्ध जा रहा हूं तो क्योंकि मेरे अंदर जलना

64
00:04:24,280 --> 00:04:28,640
मेंक वृत्ति पैदा हुई क्योंकि यह व्यक्ति मेरे विरुद्ध गया है इसीलिए

65
00:04:28,640 --> 00:04:32,680
अब मैं इसके ऊपर आरोप लगाऊंगा कैसे कैसे आरोप ये व्यक्ति

66
00:04:32,680 --> 00:04:36,680
संप्रदाय हीन है तो संप्रदाय हीन जानता नहीं

67
00:04:36,680 --> 00:04:40,760
है वो व्यक्ति मेरी अच्छा मैं यह टीका लगा कर के वीडियोस बनाता

68
00:04:40,760 --> 00:04:44,760
हूं यह टीका मेरी हर वीडियो में होता है तो आप

69
00:04:44,760 --> 00:04:48,760
यह जो टीका देख रहे हो यह जो टीका है इससे चिन्हित होता

70
00:04:48,760 --> 00:04:52,800
है कि मैं श्री संप्रदाय से हूं यह किसी अन्य संप्रदाय

71
00:04:52,800 --> 00:04:56,920
का टीका तो नहीं है ये श्री संप्रदाय का टीका है श्री संप्रदाय के अंदर भी

72
00:04:56,920 --> 00:05:01,640
दो संप्रदाय हैं एक रामानंदी संप्रदाय रामानु जीी संप्रदाय

73
00:05:01,640 --> 00:05:03,440
तो मैं रामानु जीी संप्रदाय से

74
00:05:03,440 --> 00:05:08,040
हूं रामानंदी संप्रदाय है उसके अंदर

75
00:05:08,040 --> 00:05:12,920
रामानंदी संप्रदाय रामानुज संप्रदाय दोनों विशिष्टा दत को मानती है

76
00:05:12,920 --> 00:05:17,680
अब जो रामानंदी संप्रदाय है उसके अंदर जो आचार्य

77
00:05:17,680 --> 00:05:21,880
है व भिन्न है रामानु जी का जो आचार्य है वह परंपरा अलग

78
00:05:21,880 --> 00:05:25,960
है किंतु जो सिद्धांत है विशिष्टा दवे वो एक ही है इस

79
00:05:25,960 --> 00:05:30,040
प्रकार से हमारी गुरु परंपरा चलती है लक्ष्मी नारायण से लक्ष्मी

80
00:05:30,040 --> 00:05:34,160
नारायण से होते होते नुर याम चार्य तक आते

81
00:05:34,160 --> 00:05:38,680
आते फिर वो जो आज वर्तमान में

82
00:05:38,680 --> 00:05:42,680
जो रामानुजाचार्य जी है

83
00:05:42,680 --> 00:05:46,800
तो वहां तक य गुरु परंपरा हमारी है अब श्री

84
00:05:46,800 --> 00:05:51,280
संप्रदाय जगतगुरु राघवाचार्य इत्यादि है जो हा हा

85
00:05:51,280 --> 00:05:55,280
तो राघवाचार्य जी है वो श्री संप्रदाय से अब राघवाचार्य जी

86
00:05:55,280 --> 00:05:59,920
का वक्तव्य आप सुनिए तो राघवाचार्य जी ने क्या कहा है

87
00:05:59,920 --> 00:06:04,240
कि जो व्यक्ति ज्ञान का दुरुपयोग कर रहा

88
00:06:04,240 --> 00:06:08,480
है जो व्यक्ति ज्ञान का दुरुपयोग कर रहा है भाई ज्ञान

89
00:06:08,480 --> 00:06:12,560
हमको जितने भी संप्रदाय सभी के अंदर श्रीधरी टीका का सम्मान

90
00:06:12,560 --> 00:06:16,600
है और सभी लोग वहां से पढ़ते हैं सीखते हैं

91
00:06:16,600 --> 00:06:18,600
अपक्ष के कारण उस ज्ञान को ना

92
00:06:18,600 --> 00:06:22,880
पचाने की स्थिति में वह व्यक्ति क्या है वमन कर देता है और जो वमन

93
00:06:22,880 --> 00:06:27,200
करता है वह कुत्ते के खाने के लायक भी नहीं है यह शब्द मेरे नहीं य शब्द है हमारे

94
00:06:27,200 --> 00:06:31,280
श्री संप्रदाय के आचार्य के तो यह आप देखिए

95
00:06:31,280 --> 00:06:35,520
कि जो व्यक्ति ज्ञान को पचा नहीं पा रहा वह क्या कर रहा है वहां

96
00:06:35,520 --> 00:06:39,600
पर अपच की उल्टी कर रहा है वमन कर रहा है जोक कुत्ते के खाने के लायक नहीं

97
00:06:39,600 --> 00:06:43,680
है तो ज्ञान को किस प्रकार से प्रचारित किया जा रहा

98
00:06:43,680 --> 00:06:48,240
है वमन के रूप में वो ज्ञान नहीं है वो वमन है जो वो कर रहे हैं

99
00:06:48,240 --> 00:06:52,280
जी क्योंकि हमसे बस हम एक चीज है कि हम इनसे प्रश्न ना करें

100
00:06:52,280 --> 00:06:56,280
भाई देखो अगर तुम मेरे सिद्धांत के अंदर हो अगर तुमने मेरी

101
00:06:56,280 --> 00:07:00,360
साइड ले दी तो इसका अर्थ है कि तुम प्रकांड विद्वान हो तुम

102
00:07:00,360 --> 00:07:04,520
नहीं भी हो तब भी हम तुमको प्रकांड विद्वान घोषित कर देंगे बना देंगे इनका

103
00:07:04,520 --> 00:07:08,560
ये है मैंने देखा है कि

104
00:07:08,560 --> 00:07:12,600
इन लोगों के जो वो है कुछ कुतर्क होते हैं बहुत

105
00:07:12,600 --> 00:07:16,720
निराधार टाइप की चीजें होती है जो सामना होने पर तुरंत दूध का दूध और पानी पानी

106
00:07:16,720 --> 00:07:20,840
हो जाए मगर उसमें भी कुछ लोग कहते वाह वाह वाह वाह वो वाली

107
00:07:20,840 --> 00:07:25,040
बात याद आती है वो फिल्मों का वो डायलॉग है ना कि अर्ज किया

108
00:07:25,040 --> 00:07:29,160
है तो पहले ही लोग चालू हो जाते हैं वा वाह वा वा तो वो कहता है अमिताभ बच्चन

109
00:07:29,160 --> 00:07:33,840
जो है वो कहता है कि अमा शुरू तो करने दो

110
00:07:33,840 --> 00:07:38,240
इनका वो वाला रहता है पहले से ही वावा वावा हो जाता है

111
00:07:38,240 --> 00:07:42,600
भगवत गीता का जोवा अध्याय है उसके अंदर क्या है ओम तत्सत

112
00:07:42,600 --> 00:07:46,680
ति इति निर्देश ब्राह्मणा स्त्री विधा स्मता ब्राह्मणा तेन

113
00:07:46,680 --> 00:07:50,760
वेद यज्ञ ता पुरा ता का अर्थ है वहां

114
00:07:50,760 --> 00:07:54,800
पर की निर्माण किया ठीक है तो वहां पर बताया जा रहा है कि

115
00:07:54,800 --> 00:07:58,840
ब्राह्मण का वेद का और यज्ञ का भगवान ने सृष्टि के

116
00:07:58,840 --> 00:08:03,200
आरंभ में निर्माण किया माने कि ब्राह्मण ने अभी कर्म नहीं किया

117
00:08:03,200 --> 00:08:07,240
किंतु भगवान ने ब्राह्मण का निर्माण कर दिया तो जन्म से सिद्ध हो ही गया भगवत

118
00:08:07,240 --> 00:08:11,240
गीता के अंदर क्योंकि कर्म नहीं किया नाभी उसने किंतु ब्राह्मण

119
00:08:11,240 --> 00:08:15,280
का निर्माण किया भगवान ने नहीं तो इस मामले में तो मैंने

120
00:08:15,280 --> 00:08:19,600
बताया ना इनसे जब भी कोई सिद्धांत पूछते हैं तो यह

121
00:08:19,600 --> 00:08:24,320
क्लियर कट सिद्धांत नहीं देते हैं जैसे अभी सुबह ही मैंने किसी से पूछा

122
00:08:24,320 --> 00:08:28,800
कि जो मुक्ति है वो क्या है तो पहले बोला जीवन मरण से मुक्त हो जाना

123
00:08:28,800 --> 00:08:32,920
और गोलोक धाम को प्राप्त कर लेना यह मुक्ति है उसके बाद जब मैंने

124
00:08:32,920 --> 00:08:37,200
वहां के प्रश्न पूछे कि नहीं मुक्ति यहां भी है अगर आप यहां पर ये

125
00:08:37,200 --> 00:08:41,440
करते हैं तो यहां भी मुक्ति है फिर जब मैंने ये पूछा कि जब यहां पर भी मुक्ति

126
00:08:41,440 --> 00:08:45,560
है तो गोलोक धाम में यहां पर अंतर क्या है तो पहले तो बोला कि वहां

127
00:08:45,560 --> 00:08:48,960
पर श्री कृष्ण स्वयं है तो इसका मतलब जहां पर प्रभु है वहां ज्यादा

128
00:08:48,960 --> 00:08:52,960
अच्छा है इसका मतलब य थोड़ा वीक है तो जब मैंने इतना डेप्थ में

129
00:08:52,960 --> 00:08:56,960
जाकर के पूछने लगा तो भाई साहब जो है वो आउट

130
00:08:56,960 --> 00:09:00,440
हो गए वो लीव कर गए र

131
00:09:00,440 --> 00:09:04,520
तो ये क्लियर कट जवाब नहीं देते हैं जब भी इनसे कुछ भी

132
00:09:04,520 --> 00:09:08,960
पूछा जाता है कि वर्ण व्यवस्था जन्म से या कर्म से तो इनका

133
00:09:08,960 --> 00:09:13,080
जो लखनऊ के वह है और भी मैंने कई देखे उसमें वह जन्म से भी मानते हैं

134
00:09:13,080 --> 00:09:17,200
कर्म से भी मानते हैं भाई या तो जन्म से हो सकता है कर्म से हो सकता है जन्म

135
00:09:17,200 --> 00:09:21,200
और कर्म दोनों से नहीं हो सकता है शुरुआत की बात कर रहा हूं बाकी तो किसी

136
00:09:21,200 --> 00:09:25,560
की भी पहचान उसके कर्म से ही होती है मगर शुरुआत

137
00:09:25,560 --> 00:09:30,080
की हम किसी को नामांकन कैसे करेंगे वो जन्म से ही करना पड़ता है तो

138
00:09:30,080 --> 00:09:34,280
इनके जो परम श्यामदास जी है उनसे किसी ने पूछा था

139
00:09:34,280 --> 00:09:38,320
लाइव चर्चा में कि

140
00:09:38,320 --> 00:09:42,560
कि अगर हम लव मैरिज जो होती है वो करनी चाहिए कि नहीं करनी चाहिए

141
00:09:42,560 --> 00:09:46,600
तो उन्होंने बोला नहीं लव मैरिज तो नहीं करनी चाहिए अब लव मैरिज का मतलब क्या है वो

142
00:09:46,600 --> 00:09:50,720
बोले कि अपनी ही कास्ट में करनी चाहिए फिर बोलते हैं कि अगर कोई

143
00:09:50,720 --> 00:09:54,800
व्यक्ति भक्ति कर रहा है तो फिर व उसम ब्राह्मण क्षत्रिय वैश शूद्र नहीं देखा

144
00:09:54,800 --> 00:09:59,360
जाएगा अब बात आती कितनी भक्ति कर रहा है यह भी तो देखना पड़ेगा

145
00:09:59,360 --> 00:10:04,000
अगर कोई अगर भक्ति करने की वजह से वो ब्राह्मण क्षत्रिय वैश शूद्र हो रहा है तो

146
00:10:04,000 --> 00:10:08,400
उसका सर्टेन अमाउंट क्या है वो कोई अमाउंट नहीं है अभी मैंने

147
00:10:08,400 --> 00:10:12,720
अभी कल एक रील डाली थी उसम दिखाया था वो कोई अमाउंट नहीं है तो

148
00:10:12,720 --> 00:10:16,920
ये क्या करते हैं किसी भी कोई भी सवाल आप पूछो कोई भी सवाल उसमें

149
00:10:16,920 --> 00:10:19,560
एक निश्चित सिद्धांत नहीं है ए

150
00:10:19,560 --> 00:10:22,560
बी सी डी ई एफ जी एच आई जे के एल एम एन ओ पी क्यू

151
00:10:22,560 --> 00:10:26,600
आर एस टी यूवी डब् एक्स वाई जड ये पूरा बोल दिया

152
00:10:26,600 --> 00:10:30,760
तो हमने पूछा एप्पल की स्पेलिंग कहां से शुरू होती है ए

153
00:10:30,760 --> 00:10:34,800
से होती है बी से होती है नहीं ए बी सी डी जी एच के प आर एस

154
00:10:34,800 --> 00:10:38,840
टीड एक्स वा उसम क्या होता है अगर हमने इनको

155
00:10:38,840 --> 00:10:43,120
काउंटर किया कि नहीं बी से नहीं होती भाई ए से होती हमने बोला तो

156
00:10:43,120 --> 00:10:48,000
हमने तो ए टू जेड बोला है उसम से जो आपको सही लगे ले लो

157
00:10:48,000 --> 00:10:52,000
ये सिद्धांत है राम चर

158
00:10:52,000 --> 00:10:56,000
आपके बारे में य जानना चाह रहा था कि थोड़ा सा अपने बारे में बता

159
00:10:56,000 --> 00:11:02,000
दे कि आपके गुरु कहां से हैं आप दीक्षित कहां से हैं

160
00:11:02,040 --> 00:11:06,200
और मतलब उनके पीछे का परंपरा थोड़ी सी कुछ उस पर प्रकाश

161
00:11:06,200 --> 00:11:10,200
डाल दीजिए जी तो जो हमारे गुरु जी है उनका नाम

162
00:11:10,200 --> 00:11:14,280
है कृष्ण चंद्र शास्त्री जी जो इंद्रेश उपाध्याय जी है

163
00:11:14,280 --> 00:11:18,280
उनके पिताजी और उनका जो निवासी स्थान है वो है

164
00:11:18,280 --> 00:11:22,560
वृंदावन तो वृंदावन के अंदर वो तो वृंदावन

165
00:11:22,560 --> 00:11:26,680
के अंदर ही हमारी जो है गुरु दीक्षा हुई थी गुरु पूर्णिमा के शुभ अवसर

166
00:11:26,680 --> 00:11:30,880
पर गुरु पूर्णिमा के शुभ अवसर पर गुरु दीक्षा का इनका

167
00:11:30,880 --> 00:11:35,680
वो गुरुदेव के साथ का एक चित्र है वो जरा प्रदर्शित कर दीजिए

168
00:11:35,680 --> 00:11:39,320
ऑपरेटर

169
00:11:39,320 --> 00:11:43,440
महोदय जी आप बोले तो हमारी

170
00:11:43,440 --> 00:11:47,520
संप्रदाय जो है उसके अंदर जो गुरु

171
00:11:47,520 --> 00:11:51,760
दीक्षा उसका विधान क्या शंख और चक्र लगा कर के गुरु दीक्षा दी जाती है

172
00:11:51,760 --> 00:11:55,880
तो यहां पर शंख लगाते हैं उसको तपा

173
00:11:55,880 --> 00:11:59,880
करके शंख चक्र यहां पर लगा करके और गुरु दीक्षा

174
00:11:59,880 --> 00:12:04,120
दी जाती है और फिर उसमें गुरु दीक्षा के अंदर तीन मंत्र दिए जाते हैं

175
00:12:04,120 --> 00:12:08,320
पहला मंत्र तो अष्टा को सार्वजनिक रूप से बोलना अपराध

176
00:12:08,320 --> 00:12:12,760
है उसको नहीं बोलना चाहिए दूसरा मंत्र में बोल सकता हूं दूसरा

177
00:12:12,760 --> 00:12:17,320
मंत्र सभी के सामने बोल सकते हैं श्रीमन नारायण चरणो शरणम प्रपद्ये

178
00:12:17,320 --> 00:12:21,880
श्रीमते नारायणाय नमः ये दूसरा मंत्र है तीसरा

179
00:12:21,880 --> 00:12:26,400
जो है वो गीता जी का श्लोक है वो हम शरणागति

180
00:12:26,400 --> 00:12:30,480
के लिए बोलते हैं सर्व धर्मा परमा शरणं ब्रजा अहम तोम

181
00:12:30,480 --> 00:12:34,640
सर्व पाप मोक्ष श्याम माचा तो ये तीन मंत्र हमको दिए

182
00:12:34,640 --> 00:12:38,880
जाते हैं पहला मंत्र है उसकी गुरुदेव ने बताया कि इसका विधि

183
00:12:38,880 --> 00:12:42,880
विधान है मूलता आप समय ज्यादा नहीं है तो

184
00:12:42,880 --> 00:12:46,920
आप पांच माला कर लीजिए इसकी ऐसा गुरुदेव का आदेश है अगर है तो

185
00:12:46,920 --> 00:12:51,000
आप अधिक भी कर सकते हैं किंतु पांच से कम नहीं करनी तो अष्टा

186
00:12:51,000 --> 00:12:54,480
मंत्र की विधि है की स्नान करके शुद्ध अवस्था के अंदर

187
00:12:54,480 --> 00:12:58,480
आसन बिछा कर के और तुलसी की माला लेकर के आपको जप

188
00:12:58,480 --> 00:13:02,640
करना है दूसरे मंत्र का विधान कि आप कैसी भी अवस्था

189
00:13:02,640 --> 00:13:06,960
के अंदर है शुद्ध है अशुद्ध है तो आप उस मंत्र को जो श्रीमन नारायण चरणों

190
00:13:06,960 --> 00:13:11,240
शरणम है उसको किसी भी प्रकार से आप जाप कर सकते हैं सर्व धर्मा

191
00:13:11,240 --> 00:13:15,240
परिज जो गीता जी का श्लोक है वह आप एक बार बोलिए

192
00:13:15,240 --> 00:13:19,360
बस इतना कि भगवान को ध्यान दिलाने के लिए बस हम इसको बोलते हैं कि हे

193
00:13:19,360 --> 00:13:23,840
भगवान हम आपकी शरण में है आप ही ने कहा है गीता जी के अंदर

194
00:13:23,840 --> 00:13:28,000
कि सर्व धर्मा परत माम शरण बजा मेरी शरण में आओ मैं तुम्ह मुक्त

195
00:13:28,000 --> 00:13:32,680
कर दूंगा तो हम केवल आपको ध्यान दिला रहे प्रभु हम आपकी शरण में ही है

196
00:13:32,680 --> 00:13:36,760
तो इस प्रकार से गुरुदेव ने कहा अब गुरुदेव ने जब दीक्षा दी तो

197
00:13:36,760 --> 00:13:40,760
स्पष्ट रूप से इस बात का उन्होने ध्यान देते हुए यह बात कही कि

198
00:13:40,760 --> 00:13:44,800
आजकल जो लोग हैं वह जिस संप्रदाय के अंदर दीक्षित

199
00:13:44,800 --> 00:13:49,000
हो जाते हैं तो संप्रदायवाद फैल जाता है वहां पर किसी को हीन दृष्टि

200
00:13:49,000 --> 00:13:53,400
से देखना किसी अन्य संप्रदाय के व्यक्ति को तो इस प्रकार से

201
00:13:53,400 --> 00:13:57,600
फिर गुरुदेव ने कहा कि आप आज से श्री वैष्णव

202
00:13:57,600 --> 00:14:01,800
हो चुके हैं पहले के जो आपके पाप थे वो सब अब नष्ट हो गए

203
00:14:01,800 --> 00:14:05,960
अब से आपका नया जन्म है क्योंकि गुरु दीक्षा के बाद जो है प्राणी का एक नया

204
00:14:05,960 --> 00:14:09,600
जन्म हो जाता है पहरा तो माता पिता के गर्भ से होता है दूसरा

205
00:14:09,600 --> 00:14:14,080
जन्म जो है वो दीक्षा के बाद होता है तो इस प्रकार से

206
00:14:14,080 --> 00:14:18,240
फिर गुरुदेव ने वहां पर कहा कि कोई भी

207
00:14:18,240 --> 00:14:22,280
भगवान शिव का अपराध ना करे कोई भी भगवान शिव

208
00:14:22,280 --> 00:14:26,800
जी का अपमान ना करे उनको हीन या निंद दृष्टि से ना देखे

209
00:14:26,800 --> 00:14:31,440
गणेश भगवान का शक्ति का सब मतलब कंपैरेटिव

210
00:14:31,440 --> 00:14:35,480
बात ना करें कि विष्णु से छोटे हैं जी जी

211
00:14:35,480 --> 00:14:39,480
कोई अच्छा एक एक बात मैं आपको बताऊं कि स्कन की मैं एक

212
00:14:39,480 --> 00:14:43,760
बार क्लास ले रहा था बहुत पहले मैं देखो मैं सिखाते क्या है मैं

213
00:14:43,760 --> 00:14:47,880
उनके मैंने कई सारे कंपटीशन के अंदर भी हिस्सा लिया हुआ है और उन्हीं की तरफ

214
00:14:47,880 --> 00:14:51,960
से मेरे को गीता मिली हुई थी जब मैं जीता था इंग्लिश की और हिंदी की दोनों की

215
00:14:51,960 --> 00:14:56,000
उ की तरफ से मैंने कोई खरीदी वरीदी नहीं उनकी गीता उन्हीं की तरफ से

216
00:14:56,000 --> 00:15:01,480
आई कंपटीशन जीता था आपने क्या अच्छा

217
00:15:01,480 --> 00:15:05,600
मैं उनके उसम गीता कंपटीशन में पाट लिया था तो उसम विनर रहा था तो

218
00:15:05,600 --> 00:15:09,840
उसके अंदर आप विनर है हमारी गीता कंपटीशन के

219
00:15:09,840 --> 00:15:14,080
तो हम आपको गीता भिजवा चाहते हैं तो आप बता दीजिए आपकी इच्छा

220
00:15:14,080 --> 00:15:18,080
आपको हिंदी में चाहिए की इंग्लिश में चाहिए मैंने कहा हिंदी की तो मेरे पास है आप इंग्लिश

221
00:15:18,080 --> 00:15:22,080
में भिजवा दीजिए इंग्लिश की गीता उन्होने मेरे पास भिजवाई और जो हिंदी

222
00:15:22,080 --> 00:15:26,320
की गीता है वो तो कौन सी आई थी आपके पास वो

223
00:15:26,320 --> 00:15:30,440
प्रभुपाद जी की जो ओरिजिनल है या बाद में जो इन लोगों ने चेंज कर द है वो कौन सी आई

224
00:15:30,440 --> 00:15:34,600
थी जो चेंज वाली है ना एज इट इज जो चेंज की हुई

225
00:15:34,600 --> 00:15:38,640
है में आज चेंज करके चल रही है प्रभुपाद जी वाली ओरिजनल नहीं

226
00:15:38,640 --> 00:15:42,680
आई थी ओरिजनल नहीं वो चेंज की हुई है तो वो गीता इन लोगों

227
00:15:42,680 --> 00:15:46,720
ने भेजी उसके साथ भगवान कृष्ण का जो चित पत्र है वो

228
00:15:46,720 --> 00:15:50,800
भी भेजा था भगवान कृष्ण का विग्रह जो था पार्थ सारथी कहते

229
00:15:50,800 --> 00:15:55,360
हैं वृंदावन के अंदर वो इस कोन के अंदर वो उन्होने भेजा था

230
00:15:55,360 --> 00:15:59,440
अच्छा मैं जब इनकी क्लास ले रहा था तो मैंने इनसे प्रश्न

231
00:15:59,440 --> 00:16:03,480
किया क्या भगवान शिव जो है वो डेमी गड है बहुत साल पहले

232
00:16:03,480 --> 00:16:07,520
मेरे मन के मेरे अंदर जिज्ञासा रही है कि मैं जानू और जान

233
00:16:07,520 --> 00:16:11,960
आज भी इच्छाओं के चक्कर में नाया कितने ग्रंथ डेली पढ़ता रहता हूं

234
00:16:11,960 --> 00:16:16,160
तो मैंने क्या भगवान शिव डेमी गड है तो

235
00:16:16,160 --> 00:16:16,660
इनके

236
00:16:16,600 --> 00:16:20,840
जो स्कोन के अध्यापक जो पढ़ा रहे थे उन्होंने कहा कि जो

237
00:16:20,840 --> 00:16:25,200
भगवान शिव है वो भी जन्म मृत्यु के चक्र में फसे हुए हैं भगवान

238
00:16:25,200 --> 00:16:29,320
शिव जो है वो जन्म लेते रहते हैं तो बाद में मेरी

239
00:16:29,320 --> 00:16:33,520
गुरु दीक्षा हुई थी फिर मैं गुरुदेव के पास गया मेरे को इसमें थोड़ा संशय था तब

240
00:16:33,520 --> 00:16:37,720
भी मैंने कहा ये कैसे हो सकता है भगवान शिव जन्म लेते हू मेरे

241
00:16:37,720 --> 00:16:41,800
को इसमें तब भी संशय मैं गुरुदेव के पास गया मैंने गुरुदेव से पूछा कि

242
00:16:41,800 --> 00:16:45,880
गुरुदेव ऐसा ऐसा है कि भगवान शिव को किसी ने मेरे को बताया

243
00:16:45,880 --> 00:16:49,960
है कि वो जो भगवान शिव है वो जन्म मृत्यु के चक्र में फसे हुए हैं और वो

244
00:16:49,960 --> 00:16:54,160
हमारी तरह ही चीटी भी बनते हैं छेटा भी बनते है मच्छर भी बनते है और इस प्रकार

245
00:16:54,160 --> 00:16:58,160
से जन्म भी लेते 84 लाख योनियों में भटकते रहते हैं तो गुरुदेव

246
00:16:58,160 --> 00:17:02,320
ने कहा कि जो महादेव है भगवान शंकर है वो वास्तविकता

247
00:17:02,320 --> 00:17:06,360
में उनका जो स्वरूप है उनकी कोई ऐसी पदवी नहीं है कि कोई व्यक्ति अपने कर्म के

248
00:17:06,360 --> 00:17:10,640
द्वारा उसको ले ले भगवान शिव शिव है वो भगवान

249
00:17:10,640 --> 00:17:14,960
ही है उ कोई जन्म मृत्यु के चक्र में 84 लाख के चक्र में नहीं फसे

250
00:17:14,960 --> 00:17:19,440
हैं यदि किसी ने बताया है तो गुमरा किया है गलत बताया है

251
00:17:19,440 --> 00:17:23,640
तो वहा पर इसका खंडन मतलब यके गुरुदेव ने सीधे सीधे स्कोन

252
00:17:23,640 --> 00:17:29,040
के द्वारा दी जाने वाली जो गलत शिक्षा है इसका जो है प्रतिकार किया एक

253
00:17:29,040 --> 00:17:31,880
एक और चीज अब मैंने इनसे ये

254
00:17:31,880 --> 00:17:36,560
एक और बात पूछी थी क्या हम हनुमान जी का प्रसाद ग्रहण कर सकते हैं

255
00:17:36,560 --> 00:17:40,560
तब इन्होंने कहा कि नहीं हनुमान जी का जो प्रसाद है वो ग्रहण

256
00:17:40,560 --> 00:17:44,560
नहीं कर सकते ये कोई मनगण कहानियां नहीं है ये स्कोन के

257
00:17:44,560 --> 00:17:48,600
द्वारा जब मैंने क्लास ली थी तो इसका सबसे बड़ा प्रमाण मालूम है

258
00:17:48,600 --> 00:17:53,080
क्या है इन्होंने मेरे से कहा था कि आप हमारे लिए वीडियो बनाइए

259
00:17:53,080 --> 00:17:57,080
तो मैंने इनके लिए वीडियो शूट की और इन्हीं के चैनल पे सोनिक नाम का

260
00:17:57,080 --> 00:18:01,560
चैनल आप जाइएगा उसपे मेरी वीडियो है अभी भी है

261
00:18:01,560 --> 00:18:05,960
तो मैं जो है हा तो मैं कोई अलग

262
00:18:05,960 --> 00:18:10,440
तिलक लगा कर के जब दीक्षित नहीं था तब अलग तिलक लगा कर के मैं वीडियो इनकी

263
00:18:10,440 --> 00:18:14,640
बना रहा था मैंने इनके पास वीडियो भेजी इनके पास जब मैंने अपनी वीडियो

264
00:18:14,640 --> 00:18:18,760
भेजी इन्होने मेरे से कहा कि आप तिलक यह वाला नहीं जो हम लगाते हैं गड़

265
00:18:18,760 --> 00:18:23,320
संप्रदाय का वो तिलक लगाइए मैंने कहा ठीक है फिर

266
00:18:23,320 --> 00:18:27,760
मैंने गीता प्रेस की जो गीता है मैं वही पढ़ता था तो मैंने कहा

267
00:18:27,760 --> 00:18:31,840
कि उन्होंने मेरे को एक श्लोक भेज दिया कि इस श्लोक का अर्थ आपको वहां पर बताना

268
00:18:31,840 --> 00:18:35,880
है वीडियो के अंदर मैंने कहा ठीक है मैंने कहा गीता प्रेस

269
00:18:35,880 --> 00:18:39,960
की मेरे पास गीता उसे नहीं नहीं नहीं नहीं गीता प्रेस की नहीं हम आपको भेज रहे

270
00:18:39,960 --> 00:18:44,280
हैं अपनी श्रीला प्रभुपाद जी की जो गीता है केवल उसी को आप पढ़िए

271
00:18:44,280 --> 00:18:47,000
और उसी के बेस पर आप बता सकते हैं माने

272
00:18:47,000 --> 00:18:51,120
कि तिलक भी चाहिए हमारी ही संप्रदाय का और यदि आप जो ग्रंथ पढ़ रहे

273
00:18:51,120 --> 00:18:55,400
हैं आप हमारी वीडियो तभी बनाइए जवाब प्रभुपाद जी का जो ग्रंथ

274
00:18:55,400 --> 00:18:59,560
है वही होगा मेरे पास प्रभुपाद जी कई सारे ग्रंथ रखे हुए हैं इ तरफ से मेरे को भेजे

275
00:18:59,560 --> 00:19:03,360
थे जब कंपटीशन में मैं जीता

276
00:19:03,360 --> 00:19:07,440
था जी तो इस प्रकार से

277
00:19:07,440 --> 00:19:11,440
जो इस कोन के अंदर है और जब हनुमान जी की जो बात थी कि प्रसाद

278
00:19:11,440 --> 00:19:15,760
नहीं खाना है यह बात मेरे को बड़ी अजीब लगी मैंने इनसे पूछा कि हनुमान जी तो वैष्णव

279
00:19:15,760 --> 00:19:19,920
है ना भाई भगवान श्री राम के भक्त है तो

280
00:19:19,920 --> 00:19:24,120
फिर हम उनका प्रसाद क्यों नहीं ग्रहण कर सकते बोले अन्य देवी देवता का प्रसाद

281
00:19:24,120 --> 00:19:28,240
ग्रहण करना अपराध है अपराध की कोट में आता आपको

282
00:19:28,240 --> 00:19:32,400
प्रसाद ग्रहण करना है केवल भगवान कृष्ण का वो आप कर सकते हैं

283
00:19:32,400 --> 00:19:36,880
मैंने पूछा काली माता का कर सकते बोले नहीं काली माता का भी नहीं कर सकते

284
00:19:36,880 --> 00:19:41,480
तो हनुमान जी का प्रसाद ग्रहण नहीं करना शक्ति का ग्रहण नहीं करना और

285
00:19:41,480 --> 00:19:45,480
शिव का तो करना ही नहीं है शिव से तो परमय

286
00:19:45,480 --> 00:19:49,960
आपको कुछ अब्रिक नहीं लगता है जो यहां पर कहा गया है कि वो

287
00:19:49,960 --> 00:19:54,040
जो ऊपर वाले की तरफ जो चढ़ाया गया प्रसाद उसी को ग्रहण

288
00:19:54,040 --> 00:19:58,040
करो सवाल मत पूछो वो तो होही गया कि हरे कृष्ण का जाप करो ज्यादा

289
00:19:58,040 --> 00:20:02,000
ग्रंथों की गराई में मत जाओ यहां पर यहां पर

290
00:20:02,000 --> 00:20:06,040
आप देखिए कि अब देखिए हनुमान जी कौन है हनुमान जी भक्त है

291
00:20:06,040 --> 00:20:10,040
किसके भगवान श्री राम के अब जब इन्होंने यह कह दिया कि आप हनुमान

292
00:20:10,040 --> 00:20:14,040
जी का प्रसाद ग्रहण नहीं कर सकते तो वैष्णव निंदा हो गई अब दूसरी बात

293
00:20:14,040 --> 00:20:18,080
ये इनके जो गुरु है प्रभुपाद जी उनका चरणामृत

294
00:20:18,080 --> 00:20:22,160
हम धो धो कर पिए कुछ नहीं क्यों भाई प्रभुपाद जी

295
00:20:22,160 --> 00:20:26,240
का चरणामृत क्यों पी रहे हो आप क्यों क्योंकि वो वैष्णव है उन्होंने गीता जी का प्रचार

296
00:20:26,240 --> 00:20:30,760
किया तो भाई वो भी तो भक्त कोटि के अंदर आ र भगवान तो नहीं है फिर हम प्रभुपाद

297
00:20:30,760 --> 00:20:35,360
जी का उचि क्यों पाए हनुमान जी का उचि क्यों ना पाए

298
00:20:35,360 --> 00:20:39,560
बात आ गई ना मतलब हनुमान जी क्या प्रभुपाद जी से जी तो वैष्णव

299
00:20:39,560 --> 00:20:43,840
है हनुमान जी भी तो वैष्णव है हनुमान जी का भोग

300
00:20:43,840 --> 00:20:47,840
नहीं खा सकते मगर शी प्रभुपाद जी का उ चिट खा सकते हैं

301
00:20:47,840 --> 00:20:52,080
यही पॉइंट यही पॉइंट मेरे दिमाग में आया मैं इनका हनुमान जी का नहीं खा सकते

302
00:20:52,080 --> 00:20:56,720
उ प्रभुपाद जी का खा सकते हैं क्या हनुमान जी से अधिक श्रेष्ठ है प्रभुपाद

303
00:20:56,720 --> 00:21:01,560
जी क्या तुलसीदास जी से भी अधिक श्रेष्ठ है प्रभुपाद जी

304
00:21:01,560 --> 00:21:05,960
निंदा किसी की नहीं है सभी हमारे आचार्य कोटि सभी को प्रणाम है किंतु

305
00:21:05,960 --> 00:21:10,560
इस प्रकार की बातें करना कि आप इसका प्रसाद

306
00:21:10,560 --> 00:21:14,560
ये जो बातें जो आज इसकन के सामने इसकन की आ रही है ये मेरे से कई

307
00:21:14,560 --> 00:21:17,680
लोगों ने स्कन के लोगों ने संपर्क किया है

308
00:21:17,680 --> 00:21:21,680
कि जो बाहर के देशों में जो इकन तंत्र चल रहा है उसकी कई चीजें

309
00:21:21,680 --> 00:21:25,840
जो आज हमारे इंडिया में चल रहा है इससे बहुत डिफरेंट है दूसरी बात

310
00:21:25,840 --> 00:21:30,040
यह भी है कि हम अभी भी उसमें नहीं है जो प्रभुपाद जी की शिक्षा

311
00:21:30,040 --> 00:21:34,200
है कई लोगों ने मुझसे कहा स्कोन के जुड़े हुए वो मैसेजिंग

312
00:21:34,200 --> 00:21:38,760
में आते हैं कभी-कभी बहुत कम मगर उन्होंने ये कहा है कि प्रभुपाद

313
00:21:38,760 --> 00:21:42,760
जी ने यह कहा था कि जिसका जो ईस्ट है उसको सर्वोपरि मानते

314
00:21:42,760 --> 00:21:47,120
हुए वो शिक्षा दी है वो केवल कृष्ण तक सीमित नहीं रहे

315
00:21:47,120 --> 00:21:51,240
अब जो यहां पर बात आ रही है यहां पर कृष्ण तक सीमित हो जाने की कृष्ण के विरुद्ध

316
00:21:51,240 --> 00:21:55,360
किसी को भी छोटा करने की तो यह सारी बातें जो है वो

317
00:21:55,360 --> 00:21:57,520
एक

318
00:21:57,520 --> 00:22:01,520
सस्पिशंस उनका नाम लेकर के कही जा रही है जैसे चैतन्य महाप्रभु

319
00:22:01,520 --> 00:22:06,040
जी ने कही है या उनका नाम लेकर के कही जा रही है क्योंकि अपनी बात को प्रमाणिक

320
00:22:06,040 --> 00:22:10,120
सिद्ध करना है तो किसी को अवतार बना लो या किसी महान

321
00:22:10,120 --> 00:22:14,400
इंसान का जो महान व्यक्ति रहा हो उसका आप साथ अपने अपने

322
00:22:14,400 --> 00:22:18,520
से उसको जोड़ लो कि ये उन्होंने कहा था इसलिए हम कह रहे हैं ठीक है तो

323
00:22:18,520 --> 00:22:22,680
एक तो ये बात मैं थोड़ा जानना चाह रहा था कि तुलसीदास के बारे अच्छा पहले तो आप

324
00:22:22,680 --> 00:22:26,840
ये बताइए थोड़ा कि ये जो मीट जो आपका जो मीट

325
00:22:26,840 --> 00:22:31,160
वाले जो मामले प जो वो चिकन खाया था और दूसरे हाथ से गीता दे रहे थे

326
00:22:31,160 --> 00:22:32,880
इस मामले पर कैसे क्या थोड़ा इसको

327
00:22:32,880 --> 00:22:37,440
ठीक से बताइए क्योंकि लव भारत जी के साथ भी इसी मामले पर कुछ हुआ है

328
00:22:37,440 --> 00:22:41,720
हां तो देखिए ऐसा क्या हुआ कि मेरे को बाद में पता

329
00:22:41,720 --> 00:22:45,800
पहली वीडियो आई थी मैंने आपकी वीडियो देखी अब भाई कोई व्यक्ति शेयर करता

330
00:22:45,800 --> 00:22:49,960
है सोशल मीडिया पर कोई चीज हमको नहीं पता रहती हम किसी और काम में व्यस्त है ऐसा तो नहीं

331
00:22:49,960 --> 00:22:54,080
पूरे दिन सोशल मीडिया पर ही रहते हो एक मिनट की मुश्किल से

332
00:22:54,080 --> 00:22:58,200
वीडियो बनाते हैं ा के लिए तो ज्यादा से ज्यादा उसमें 10 पा मिनट चले जाते

333
00:22:58,200 --> 00:23:02,440
हो हमारे उसके अलावा का जो हमारा पूरा दिन उसम हम क्या करते

334
00:23:02,440 --> 00:23:06,480
हैं यह भी पूरान डिसाइड कर लेता है क्योंकि हमने इनसे प्रश्न कर लिया कि भाई

335
00:23:06,480 --> 00:23:10,760
पूरे दिन तुम सोशल मीडिया चलाते हो अच्छा तो मैंने आपकी वीडियो देखी

336
00:23:10,760 --> 00:23:14,760
उस पर की आपने जो वीडियो डाली थी कि एक व्यक्ति

337
00:23:14,760 --> 00:23:18,960
जो है स्न का वह भगवत गीता एक ऐसे व्यक्ति को दे रहा है

338
00:23:18,960 --> 00:23:23,360
जो व्यक्ति सामने से कह रहा है कि मैंने चिकन खाया है

339
00:23:23,360 --> 00:23:27,480
तो वक्ति ने कहा कि मैंने भाई चिकन खाया मैं इस गीता को स्पर्श नहीं कर

340
00:23:27,480 --> 00:23:31,520
सकता तो मैंने सोचा इन्होंने वीडियो बनाई है मेरे को भी

341
00:23:31,520 --> 00:23:36,200
बनानी चाहिए हम तो साथ काम कर ही रहे हैं जी

342
00:23:36,200 --> 00:23:40,760
तो अब वीडियो बनाने में समस्या क्या है क्योंकि

343
00:23:40,760 --> 00:23:44,960
हमको तो भाई अधिक से अधिक इस बात का प्रचार करना है कि आप गलत शिक्षा

344
00:23:44,960 --> 00:23:48,400
कहीं से यदि आपको प्राप्त हो रही है तो मत लीजिए

345
00:23:48,400 --> 00:23:52,920
जब मैं आगरा के अंदर जब गुरुदेव आए थे शंकराचार्य जी

346
00:23:52,920 --> 00:23:56,960
तब मैं उनसे मिलने के लिए गया था तो वहां पर कोई अंग्रेज था

347
00:23:56,960 --> 00:24:01,280
वो भी भगवत गीता बेच रहा था तो मैंने वीडियो बना दिया

348
00:24:01,280 --> 00:24:05,400
इसके ऊपर तो जो आपसे जो डिस्कशन हुआ था

349
00:24:05,400 --> 00:24:09,480
जिस व्यक्ति का नाम मैं नहीं लेना चाहता उसका

350
00:24:09,480 --> 00:24:13,520
ले ले भी दू तो कोई समस्या नहीं है किंतु अपने आप समझ जाएगा

351
00:24:13,520 --> 00:24:17,960
जो भी देख रहा के साथ हुआ था ना अरे क्या बात है नाम लीजिए

352
00:24:17,960 --> 00:24:22,160
ठीक है भव्य के साथ ना जतिन नाम का व्यक्ति

353
00:24:22,160 --> 00:24:26,200
था तो उसके साथ जतिन जो हरे अल्लाह हरे अल्ला करने

354
00:24:26,200 --> 00:24:30,320
करने को वही व्यक्ति अच्छा अब वो क्या कमेंट बॉक्स

355
00:24:30,320 --> 00:24:34,520
में बारबार कमेंट करने लग रहा मैन का बारबार कमेंट भाई

356
00:24:34,520 --> 00:24:38,600
तुम बारबार एक व्यक्ति यदि कमेंट करता रहेगा उस वीडियो प

357
00:24:38,600 --> 00:24:42,640
तो एक गलत इंप्रेशन जाता है व्यक्ति के पास अभी कोई दूसरा

358
00:24:42,640 --> 00:24:46,720
व्यक्ति आक के पढ़े उसको तो हो सकता है वो भी अपनी धारणा उसके अनुसार बना

359
00:24:46,720 --> 00:24:50,720
ले तो वहां पर हमको सब कुछ ध्यान रखना होता है मैंने इनके कमेंट डिलीट

360
00:24:50,720 --> 00:24:55,280
कर दिए आपसे डिस्कशन के बाद वहां पर उत्तर तो उसको नहीं

361
00:24:55,280 --> 00:24:59,640
निकलते आपके पास उत्तर नहीं मिले उसको आपके

362
00:24:59,640 --> 00:25:04,120
सामने जवाब नहीं दे पाया जवाब नहीं बना तो कमेंट बॉक्स में आकर के

363
00:25:04,120 --> 00:25:08,800
टक टक टक टक टक टक करने लगा कमेंट बॉक्स से मैंने कमेंट डिलीट कर दिए

364
00:25:08,800 --> 00:25:13,120
अब यह तो भाई आहवान की फैन करले जैसी आहवान की वीडियो आती है ऐ

365
00:25:13,120 --> 00:25:17,160
इसकी वीडियो आ जाती है अब इसके ऊपर तो हमारे भव्य

366
00:25:17,160 --> 00:25:21,200
जी भी उन्होंने भी वीडियो बनाई थी जी तो अब

367
00:25:21,200 --> 00:25:25,240
इनका खंडन देखिए कि भाई मैंने आपका सपोर्ट करा तो मैं आपकी

368
00:25:25,240 --> 00:25:29,360
फैन गरल हो गया अब भाई मैंने मैंने आपका जो वीडियो

369
00:25:29,360 --> 00:25:33,360
देखा जो इनका डिस्कशन चला तो मैं देख रहा हूं कि ये जो कुछ बंदा बोल रहा है

370
00:25:33,360 --> 00:25:37,640
वो वही वो वही वाक्य बोल रहा है जो अमोग लीला चिपका

371
00:25:37,640 --> 00:25:41,680
है सबको सेम अमोग लीला के वाक्य ही ये व्यक्ति

372
00:25:41,680 --> 00:25:46,080
आपके समक्ष आ कर के बोलता है तो भाई तुम अमोग

373
00:25:46,080 --> 00:25:50,440
लीला की फैन कर लो क्या तो मतलब जो तुम मेरे से बोल रहे हो वो तुम्हारे

374
00:25:50,440 --> 00:25:54,480
ऊपर ही तुम्हारा ही खंडन होता जा रहा है सीधा तुम मेरा खंडन क्या करोगे भाई मैं

375
00:25:54,480 --> 00:25:58,640
जो कुछ अच्छा मैंने जितने वीडियो अब तक बनाए हैं स्कोन के लिए

376
00:25:58,640 --> 00:26:02,720
वो सारे प्रमाण सहित बनाए उसम प्रमाण रहित कोई वीडियो नहीं है

377
00:26:02,720 --> 00:26:07,240
उसमें एक एक ग्रंथ का प्रमाण मिलेगा चाहे वो गीता का हो चाहे वो भागवत

378
00:26:07,240 --> 00:26:11,440
का हो या फिर वो अन्य रामचरित मानस का हो या अन्य किसी ग्रंथ का हो 18

379
00:26:11,440 --> 00:26:15,960
पुराणों में से लिया हो लेकिन प्रमाण अवश्य है अब इनको विषय से विषयात

380
00:26:15,960 --> 00:26:19,680
करते हुए बात को अपनी को रखना है तो

381
00:26:19,680 --> 00:26:23,720
अभी इसने वीडियो बनाया मेरे ऊपर कि भाई हम सुबह सुबह उठते हैं साधना आदि करते

382
00:26:23,720 --> 00:26:27,800
हैं सोचते हैं थोड़ा रील स्क्रोल कर ले अब

383
00:26:27,800 --> 00:26:31,840
वक्ति मैं मैं जतिन जतिन के बारे में बता दूं अभी कुछ दिन पहले एक दो

384
00:26:31,840 --> 00:26:36,440
स्टोरी जतिन ने लगाई थी अपने मेरे ऊपर आजकल वो कुछ

385
00:26:36,440 --> 00:26:40,680
चलते फिरते ऐसा लग रहा है जैसे कहीं से कोई स्वास्थ्य ठीक नहीं है

386
00:26:40,680 --> 00:26:44,680
एक तो दुबले पतले तो है ही बहुत ज्यादा तो कुछ स्वास्थ्य ठीक नहीं है

387
00:26:44,680 --> 00:26:49,080
तो जबरदस्ती उनको मार मार के उनसे जो है कहा जा रहा है कि रील बनाओ रील बनाओ ऐसा कुछ

388
00:26:49,080 --> 00:26:53,080
जब रील बनाते हैं तो आवाज भी नहीं सुनाई देती तो मेरे कुछ बनाई थी तो

389
00:26:53,080 --> 00:26:57,640
मैंने कहा कि जतिन जी माता जी ने निष्ठा पूर्वक दूध पिलाया है तो आप

390
00:26:57,640 --> 00:27:01,760
प्रत्यक्ष वार्ता कर रही है आप सभ्य व्यक्ति है भव्य की तरह तो है नहीं जिसके

391
00:27:01,760 --> 00:27:06,000
पास सभ्यता संस्कार नहीं है आचरण हीन तो है नहीं वो ठीक है आचरण

392
00:27:06,000 --> 00:27:10,320
में है तो मैंने कहा कि आप जो है लाइव आ

393
00:27:10,320 --> 00:27:15,040
जाइए लाइव आकर के जो है आमने सामने हम लोग प्रत्यक्ष चर्चा करेंगे

394
00:27:15,040 --> 00:27:19,080
तो उसने बोला कि मैं आता हूं आता हूं अच्छा भव्य से भी जब लाइव की बात हुई थी

395
00:27:19,080 --> 00:27:23,240
भव ने कहा था मुझे 15 दिन का समय चाहिए अब 15 दिन के समय में क्या तैयारी

396
00:27:23,240 --> 00:27:27,240
करते हैं कोई क्या पहाड़ से टकराने जा रहे हैं ये समझ में नहीं आता है

397
00:27:27,240 --> 00:27:31,520
तो भवे ने आज जतिन ने भी यही कहा कि मैं आता हूं मैं करूंगा आऊंगा

398
00:27:31,520 --> 00:27:35,000
लाइव आज तक उसका अता पता नहीं है वो कब आएगा तो भाई

399
00:27:35,000 --> 00:27:39,040
क्या आपके सिद्धांत क्लियर है तो आ क्यों नहीं रहे हो और आप जो

400
00:27:39,040 --> 00:27:43,400
एनर्जी कमेंट करके कर लेते हो जो एनर्जी आप स्टेटस लगा के कर लेते हो

401
00:27:43,400 --> 00:27:47,600
स्टोरी लगा के कर लेते हो सामना करके क्यों नहीं करते डर

402
00:27:47,600 --> 00:27:51,720
है क्या कोई तो यह वाली बात है आप कंटिन्यू करिए

403
00:27:51,720 --> 00:27:56,280
थोड़ा सा फिर हम लोग थोड़ा सा लव भारत जी को सुनेंगे भवे शर्मा

404
00:27:56,280 --> 00:28:00,440
हां तो ये जो जतिन है फिर इसने क्या बोला कि हम भाई सुबह साधना करके थोड़ा

405
00:28:00,440 --> 00:28:04,880
उठते हैं तो हमको लगता है कि थोड़ा रील स्क्रोल कर ले अब ये साधना करके

406
00:28:04,880 --> 00:28:08,960
रील स्क्रोल करने में अपने समय को बर्बाद करता है ये नहीं कि मैं कुछ अध्ययन कर लू थोड़ा

407
00:28:08,960 --> 00:28:12,960
पढ़ लू नहीं मेरे को तो सब ज्ञान है भाई जो होता है

408
00:28:12,960 --> 00:28:17,000
बस उसके लिए वही संसार है जो कुए के अंदर है बाहर का कोई संसार है ही नहीं

409
00:28:17,000 --> 00:28:21,360
उसके लिए ा ा

410
00:28:21,360 --> 00:28:25,400
वही उसका संसार है तो वहां पर देखता है कि मेरी वीडियो चल रही

411
00:28:25,400 --> 00:28:30,120
है ओ उसका तो पूरा मूड खराब हो जाता है तो भाई मैंने कहा कि तुमरी

412
00:28:30,120 --> 00:28:34,200
देखो मुझे ब्लॉक कर दो ग करके करे जा रहे हो

413
00:28:34,200 --> 00:28:38,320
मैं तुम्हारे कमेंट को डिलीट कर रहा हूं फिर भी बे श्रमा से तुम कमेंट कर रहे हो एक बार

414
00:28:38,320 --> 00:28:42,320
तु हार के जा भी आवान के द्वारा लेकिन फिर भी कमेंट

415
00:28:42,320 --> 00:28:46,320
करे जा रहे हो इस प्रकार सेरा दोस्त

416
00:28:46,320 --> 00:28:50,160
फिर वो चर्चा प आया मेरे साथ मैंने कहा देखो भाई मेरे पास साधन

417
00:28:50,160 --> 00:28:54,480
नहीं है मैं तुमसे लाइव चर्चा नहीं कर सकता आप इच्छुक हो आवान

418
00:28:54,480 --> 00:28:58,640
जी भी इच्छुक है आवान से जाकर के आप करिए उनको कोई

419
00:28:58,640 --> 00:29:02,760
संतुष्ट नहीं कर सकता वो बिल्कुल भ्रमित व्यक्ति है तो

420
00:29:02,760 --> 00:29:08,000
भाई तो भाई तुम जा कोई नहीं है टक्कर

421
00:29:08,000 --> 00:29:12,080
में तो फिर उस व्यक्ति से मेरी थोड़ी बहुत वार्ता होने लगी

422
00:29:12,080 --> 00:29:16,160
अब मैंने उसके ऊपर थोड़े प्रश्न डाल दिए उसके ऊपर तो फिर अब

423
00:29:16,160 --> 00:29:20,200
वो बला गया बला हट के मारे मेरे पास उसका मैसेज पड़ा हुआ बलाह के

424
00:29:20,200 --> 00:29:24,480
मारे उसने क्या मैसेज करा अरे तुम मायावादी हो तुम प्रसन्न बध हो तुमको

425
00:29:24,480 --> 00:29:28,760
सुनने से हमारा सत्यानाश हो जाएगा हमारी भक्ति खत्म हो जाएगी अब

426
00:29:28,760 --> 00:29:32,960
ना जाने कैसी कैसी मैंने कहा अब तुमसे चर्चा नहीं करनी फिर कहने

427
00:29:32,960 --> 00:29:37,080
लगा अच्छा ये बताओ क्या तुम अपने आप को नारायण समझते हो मैंने कहा तुमको उत्तर मिल जाता

428
00:29:37,080 --> 00:29:41,400
अगर मर्यादित भाषा में बात करते तो मैं अपने आपको को नारायण समझता हूं या नहीं समझता

429
00:29:41,400 --> 00:29:45,880
हूं उसका उत्तर मैं दे देता किंतु अब नहीं दूंगा क्यों नहीं दूंगा अमर्यादित जो

430
00:29:45,880 --> 00:29:50,040
भाषा का तुमने प्रयोग किया है तुम्हें पहले मर्यादित हो करर के बात करना चाहिए

431
00:29:50,040 --> 00:29:54,040
ना यदि आप किसी को बुला भी बुला भी रहे हो अपने पास बात

432
00:29:54,040 --> 00:29:58,120
करने के लिए चर्चा करने के लिए तो मर्यादित हो कर के बुलाओ आप कहोगे

433
00:29:58,120 --> 00:30:02,360
सुन इधर मेरे से बात कर कोई आएगा क्या आपके पास तो एक

434
00:30:02,360 --> 00:30:05,400
मर्यादा आपके अंदर आचरण नहीं है आप आचरण

435
00:30:05,400 --> 00:30:09,400
हीन है स्कोन के अंदर यही सिखाया जाता है कि भाई देखो यदि तुम्हारे

436
00:30:09,400 --> 00:30:13,400
ऊपर बने तुमको लगे कि मेरी पोल पट्टी खुलने वाली है बस तुरंत अभद्र भाषा

437
00:30:13,400 --> 00:30:17,440
का प्रयोग करना आरंभ कर देना वो व्यक्ति अपने आप चले जाएगा वो फिर भिड़ेगा

438
00:30:17,440 --> 00:30:21,480
ही नहीं तुमसे तो ये इनका सिद्धांत है

439
00:30:21,480 --> 00:30:26,120
तो दो बातें मैं यहां पर कहूंगा पहली बात तो यह है कि इनका

440
00:30:26,120 --> 00:30:30,400
ा पर चैनल है युगल किशोर जी का ा

441
00:30:30,400 --> 00:30:34,720
पेज है इनका भगवत वचन नाम से और य

442
00:30:34,720 --> 00:30:38,880
पर भी आपका चैनल है ना य पर भी इनका चैनल है

443
00:30:38,880 --> 00:30:43,080
आप लोग वहां पर भी फॉलो कर सकते हैं इ दूसरी बात मैं

444
00:30:43,080 --> 00:30:47,280
कहूंगा एक सवाल आ रहा है कि इनके गुरु कौन है तो रामानुजाचार्य परंपरा

445
00:30:47,280 --> 00:30:51,280
के प्रामाणिक आचार्य जिनका इन्होंने अभी पीछे कुछ देर पहले नाम बताया है बारबार

446
00:30:51,280 --> 00:30:56,080
गुरु का नाम लेना उचित नहीं है ही हम इनसे कहेंगे कि गुरु का नाम ले

447
00:30:56,080 --> 00:31:00,320
और साथ ही साथ इन्होंने यह भी प्रकाश डाला

448
00:31:00,320 --> 00:31:04,600
कि जो इनके जो परंपरा प्राप्त प्रामाणिक आचार्य हैं जिनसे

449
00:31:04,600 --> 00:31:09,000
दीक्षित है उन्होंने यह बताया कि सनातन धर्म में पंच

450
00:31:09,000 --> 00:31:13,240
देव उपासना है भेद नहीं है बस यह है कि श्री संप्रदाय

451
00:31:13,240 --> 00:31:17,320
कौन सा है जो विष्णु के प्रति समर्पित है जैसे मैं

452
00:31:17,320 --> 00:31:20,800
भी पंचदेव उपासक हूं मगर मैं कौन हूं जो राम के प्रति समर्पित

453
00:31:20,800 --> 00:31:25,040
है है ना तो भेद दृष्टि नहीं है अपने ईष्ट

454
00:31:25,040 --> 00:31:29,120
का अपने ईट के प्रति अन्यता तो है है मगर दूसरे के

455
00:31:29,120 --> 00:31:33,560
ईट के प्रति हीनता की भावना नहीं है कि नहीं नहीं वो

456
00:31:33,560 --> 00:31:37,600
जो है दास है वो परम वैष्णव है फिर वो परम वैष्णव भी नहीं

457
00:31:37,600 --> 00:31:42,360
है फिर वो काम इंद्रियों के वशीभूत है यह सब नहीं है ठीक है

458
00:31:42,360 --> 00:31:46,920
तो एक तो बात ये आ जाती है दूसरी तुलसी

459
00:31:46,920 --> 00:31:51,000
दास जी के लिए इन्होंने क्या कहा है वो

460
00:31:51,000 --> 00:31:55,080
थोड़ा सा प्रकाश डाले वो जो बनारस वाली बात है जो भगवान का कहा हुआ

461
00:31:55,080 --> 00:31:59,200
है और वैष्णव निंदा हो रही है जब भन का कहा हुआ नहीं मान रहे

462
00:31:59,200 --> 00:32:03,360
महादेव जी व थो सिद्धांत है इनकी

463
00:32:03,360 --> 00:32:08,280
जो बातें है वो श्री वैष्णव से भी टकराती

464
00:32:08,280 --> 00:32:12,400
हैन चाहे वो रामानुज जी हो दोनों से ही टकराती है श्री तो एक ही

465
00:32:12,400 --> 00:32:16,400
है ठीक है तो रामचरित मानस के अंदर स्पष्ट रूप से लिखा हुआ

466
00:32:16,400 --> 00:32:20,560
है अच्छा रामचरित मानस की एक चौपाई के बल पर इनकेन की पूरी नीव

467
00:32:20,560 --> 00:32:24,640
हिल जाएगी एक चौपाई में बोलता हूं शूद्र कर जब

468
00:32:24,640 --> 00:32:29,000
तपत नाना बैठी बसन कर ना

469
00:32:29,000 --> 00:32:33,280
सब नर कल्पित करही अचारा बाद में क्या कहा जान बरनी

470
00:32:33,280 --> 00:32:35,920
अनीति अरा इस अनीति का मैं वर्णन नहीं

471
00:32:35,920 --> 00:32:40,080
कर सकता तुलसीदास जी क्या कह रहे हैं शूद्र कर जब कलयुग क्या लक्षण बता रहे

472
00:32:40,080 --> 00:32:44,520
हैं कि शूद्र जो है वो तप करेंगे व्रत करेंगे नाना प्रकार के होम करेंगे

473
00:32:44,520 --> 00:32:49,120
इस प्रकार से और व्यास गद्दी पर बैठ कर के उसको विकृत करेंगे

474
00:32:49,120 --> 00:32:53,760
और सनर कल्पित अपने मनो कल्पित विचार के द्वारा

475
00:32:53,760 --> 00:32:58,160
जो वेद की विधा है जो पुराण की विधा उसको अपने मनोक विचार के द्वारा

476
00:32:58,160 --> 00:33:02,360
फॉलो करेंगे उसका आरंभ करेंगे जान बनी

477
00:33:02,360 --> 00:33:06,360
अनीति ऐसी अनीति का मैं वर्णन नहीं तुलसीदास जी की वेदना है कि मैं

478
00:33:06,360 --> 00:33:11,000
ऐसी अनीति का वर्णन कैसे करू भाई तो

479
00:33:11,000 --> 00:33:15,080
तुलसीदास जी को तो य प्रामाणिक नहीं मानते प्रमाण नहीं मानते तुलसीदास

480
00:33:15,080 --> 00:33:19,160
जी को मायावादी कहते हैं श्री संप्रदाय को तो प्रमाणिक मानते हैं

481
00:33:19,160 --> 00:33:23,400
ना श्री संप्रदाय को मानते हैं शय के अंदर दो हो रामानुज

482
00:33:23,400 --> 00:33:27,840
रामानंदी अच्छा अमोग लीला जो है वो आप देखिए वहां पर

483
00:33:27,840 --> 00:33:31,960
डाला हुआ उनका कि वो यदि प्रमाणिक नहीं मानते तो

484
00:33:31,960 --> 00:33:36,760
जो राम भद्राचार्य जी हैं उनके पास क्यों गए थे ये लोग

485
00:33:36,760 --> 00:33:41,000
उन्होंने स् कन से कहा था कि निष्ठा पूर्वक यदि आपने अपनी माता का दूध

486
00:33:41,000 --> 00:33:45,280
पिया हो तो मुझसे आके शास्त्रार्थ करें भगवान श्री राम को उन्होंने 12 कलाओं

487
00:33:45,280 --> 00:33:49,280
का और भगवान कृष्ण को 16 कलाओं का इत्यादि इन्होंने वक्तव्य दिया था उस पर

488
00:33:49,280 --> 00:33:51,560
नहीं ग

489
00:33:51,560 --> 00:33:55,680
तो ये राम भद्राचार्य जी के पास क्यों गए वो तो रामानंदी संप्रदाय के है यदि प्रमाणिक

490
00:33:55,680 --> 00:33:59,760
नहीं मानते तो अवॉइड कर देना चाहिए था कि भाई हम तुमको अवॉइड करते

491
00:33:59,760 --> 00:34:03,920
हैं तुमको मानते ही नहीं है किंतु ये लोग मानते हैं अब तुलसीदास जी की जहां

492
00:34:03,920 --> 00:34:08,160
तक बात है तुलसी रामचरित मानस के अंदर स्पष्ट रूप से लिखा हुआ है

493
00:34:08,160 --> 00:34:12,280
रामचरित मानस का निर्माण जो है तुलसीदास जी ने किया दो साल

494
00:34:12,280 --> 00:34:16,320
के अंदर किया दो साल के अंदर कुछ महीने और कुछ दिन उसके

495
00:34:16,320 --> 00:34:20,680
अंदर वर्णित है उसके अंदर तुलसीदास जी ने रामचरित मानस लिखी

496
00:34:20,680 --> 00:34:25,000
रामचरित मानस को परम प्रमाण त करने के लिए उन्होंने विश्व

497
00:34:25,000 --> 00:34:29,240
काशी में वो गए काशी के अंदर विश्वनाथ जी का जो मंदिर है उसके

498
00:34:29,240 --> 00:34:33,280
अंदर रामचरित मानस को भगवान शिव को और माता पार्वती को उन्होंने सुनाया

499
00:34:33,280 --> 00:34:37,960
ऐसा लिखा है बाद में मंदिर के कपाट बंद कर दिए गए

500
00:34:37,960 --> 00:34:41,960
कपाट जब बंद कर दिए गए तो भगवान शिव की वाणी भी सुनाई

501
00:34:41,960 --> 00:34:46,000
दी और भगवान शिव ने अपने हस्त कमल से उस ग्रंथ पर

502
00:34:46,000 --> 00:34:50,000
लिखा था सत्यम शिवम सुंदरम ग्रंथ प्रमाणित करते

503
00:34:50,000 --> 00:34:54,160
हुए उन्होंने सत्यम शिवम सुंदरम लिख दिया अब बात ये आती है अगर इस

504
00:34:54,160 --> 00:34:58,160
कन यहां पर तुलसीदास जी का विरोध करता है रामचरित

505
00:34:58,160 --> 00:35:02,160
मानस का विरोध करता है तो यह विरोध जाते जाते कहां

506
00:35:02,160 --> 00:35:06,240
तक जाएगा अब देखिए तो अगर रामचरित मानस का विरोध

507
00:35:06,240 --> 00:35:07,080
हुआ ना

508
00:35:07,080 --> 00:35:11,120
तो तुलसीदास जी का विरोध हुआ परम भक्त का विरोध हो गया तो वैष्णव निंदा हो गई अब

509
00:35:11,120 --> 00:35:15,280
तुलसीदास जी के बाद चलो हम ये कहेंगे तुलसीदास जी ने जो लिखा स लिख दिया

510
00:35:15,280 --> 00:35:19,320
लेकिन शिवजी को प्रमाणित करने की क्या आवश्यकता थी जब गलत लिखा था तो भाई

511
00:35:19,320 --> 00:35:23,560
भाई भगवान ने प्रमाणित किया अब शिवजी तक बात पहुंच गई है कि भाई शिवजी

512
00:35:23,560 --> 00:35:27,760
ने प्रमाणित क्यों किया यानी कि अब शिवजी को आरोपित इस कौन की नजर में कौन दोषी हो गया

513
00:35:27,760 --> 00:35:31,800
शिवजी अच्छा ये भी वैष्णव जिंदा हो गई अब

514
00:35:31,800 --> 00:35:35,920
शिवजी से बात जाएगी नारायण तक वैवा नाम यथा शंभु

515
00:35:35,920 --> 00:35:40,160
इनका हां तो शिवजी से अब बात जाएगी नारायण तक

516
00:35:40,160 --> 00:35:44,320
कि भाई शिवजी ने प्रमाणित कर दिया कर दिया नारायण को तो रोकना चाहिए

517
00:35:44,320 --> 00:35:48,560
था ना क्योंकि नारायण के पुजारी शिवजी है तो भाई नारायण ने भी नहीं रोका

518
00:35:48,560 --> 00:35:52,600
इसका मतलब नारायण की भी स्वीकृति है शिवजी की भी स्वीकृति है वैष्णव नाम यथा

519
00:35:52,600 --> 00:35:56,880
शंभू की स्वीकृति है वैष्णव इनके हिसाब से वैष्णव की स्वीकृति है परम वैष्णव

520
00:35:56,880 --> 00:36:01,160
की स्वीकृति है तो यहां पर खंडन किसका कर रहे हो नारायण का

521
00:36:01,160 --> 00:36:05,480
तो यह तो फिर यहां पर वैष्णव निंदा सिद्ध हो रही है तुलसीदास जी का खंडन

522
00:36:05,480 --> 00:36:09,680
करने में पूरी वैष्णव निंदा हो गई वो इनको नहीं दिखती

523
00:36:09,680 --> 00:36:13,800
है वैष्णव निंदा इनका अर्थ है जो इस कन के ऊपर प्रश्न कर दे वो

524
00:36:13,800 --> 00:36:17,880
वैष्णव बाकी राण प्रश्न होता रहे इनके द्वारा

525
00:36:17,880 --> 00:36:22,080
उ उन पर होता रहे उनको प्रमाणिक अप प्रामाणिक करते रहे अच्छा मैं बस

526
00:36:22,080 --> 00:36:26,800
भवे शर्मा जी के पास जाऊंगा बस जाने से पहले एक बात क्लियर कर दूं

527
00:36:26,800 --> 00:36:31,040
जो ये सारी बात उठी है वो जो वीडियो है उससे उठी है तो

528
00:36:31,040 --> 00:36:35,120
उस वीडियो में एक व्यक्ति है जो

529
00:36:35,120 --> 00:36:39,120
इकोन को फॉलो करने वाला दिखाई दे रहा है और वह इकोन की गीता को

530
00:36:39,120 --> 00:36:43,160
प्रदान इकोन के ग्रंथों को प्रदान करने का प्रयास कर रहा है एक ऐसे

531
00:36:43,160 --> 00:36:49,040
व्यक्ति के में जो जिसने अभी अभी चिकन खाया और वह कह रहा है

532
00:36:49,040 --> 00:36:53,080
कि यह जो है मैंने अभी अभी चिकन खाया मैं हाथ

533
00:36:53,080 --> 00:36:57,560
में भगवत गीता नहीं ले सकता हूं तो ऐसे में इनका कहना है कि अगर इस

534
00:36:57,560 --> 00:37:01,720
भगत गीता को देखने के बाद तुरंत उसकी मृत्यु हो जाएगी तो इस कारण से उनका वहां पर उनको

535
00:37:01,720 --> 00:37:05,840
भगवत गीता देने का प्रयास करना उचित था तो पहली बात यहां

536
00:37:05,840 --> 00:37:09,920
पर आती है कि अगर गीता देखने

537
00:37:09,920 --> 00:37:13,920
से भगवान श्री कृष्ण का चित्र देख लेने से मुक्ति हो जाती है फिर

538
00:37:13,920 --> 00:37:17,960
भी ये नहीं बनता है कि हम उसको भगवत गीता प्रदान करें हाथ में

539
00:37:17,960 --> 00:37:22,000
दे दिखा दो य भाई देख ले देख ले अभी इसके बाद तुरंत तेरी मिट्टी हो

540
00:37:22,000 --> 00:37:26,080
गई तो फिर क्या होगा तो इसलिए देखता रहे और थोड़ी देर रुको वहां पर दिखाते रहो थोड़ी

541
00:37:26,080 --> 00:37:30,200
देर दूसरी बात कि जब आती है बात

542
00:37:30,200 --> 00:37:34,280
विधि विधान की विधि विधान का पालन तो करना ही चाहिए तो

543
00:37:34,280 --> 00:37:37,240
क्या विधि विधान का पालन स्कोन वाले नहीं करते

544
00:37:37,240 --> 00:37:41,760
वो नहीं कहते चार नियमों का पालन मास छोड़ दो जुआ छोड़ दो व्यभिचार

545
00:37:41,760 --> 00:37:46,000
छोड़ दो और एक कोई और है चौथा वो

546
00:37:46,000 --> 00:37:52,000
छोड़ दो ये क्या नहीं करते जैसे आपने

547
00:37:52,840 --> 00:37:58,520
वि हा ये टिंगटिंग और ये सब

548
00:37:58,520 --> 00:38:03,080
हां हा मैं अब इनको कहूंगा कि इन्होंने 10

549
00:38:03,080 --> 00:38:07,240
अपराध बताए हैं जी जी जी 10 अपराध

550
00:38:07,240 --> 00:38:11,440
इन्होने बताए हैं वो अपराध इस बारे में बताए

551
00:38:11,440 --> 00:38:16,240
यदि आप नाम जप कर रहे हो और यह 10 अपराध में से एक अपराध कर रहे हो

552
00:38:16,240 --> 00:38:20,520
तो शिव और विष्णु को यदि आप एक समझ रहे हो तो आप जो है अपराध

553
00:38:20,520 --> 00:38:24,640
कर रहे हो आपको नाम जप का फल नहीं मिलेगा यानी कि नाम जप पर भी

554
00:38:24,640 --> 00:38:28,640
आपने विधि को स्वीकार किया हुआ है नाम जप

555
00:38:28,640 --> 00:38:32,720
है विधि को आपने भी स्वीकार किया है कि अगर ऐसा करोगे तो ही वो होगा

556
00:38:32,720 --> 00:38:36,960
तो जब विधि का सब जगह अपने अनुसार तो विधि है मगर

557
00:38:36,960 --> 00:38:41,080
शास्त्र में लिखी हुई विधि विधि नहीं है जबकि इनके बहुत सारे

558
00:38:41,080 --> 00:38:45,320
वीडियोस है एक एक वही वीडियो नहीं है उस वीडियो से तो हमारे जो है दृष्टि

559
00:38:45,320 --> 00:38:49,400
में आया मामला कि हमें इस पर वीडियो बनाना चाहिए मगर इनके बहुत से वीडियो

560
00:38:49,400 --> 00:38:52,480
है जिसमें ये इस तरह का प्रोत्साहन कर रहे हैं कि जो व्यक्ति

561
00:38:52,480 --> 00:38:56,960
एक तरफ मास खा रहा है तो दूसरे हाथ में मैंने उसको गीता पकड़ा दी

562
00:38:56,960 --> 00:39:01,240
जबकि अगर हमने थाली से एक बाइक उठाकर

563
00:39:01,240 --> 00:39:05,600
खा लिया वो थाली झूठी हो जाती है दोबारा उसको छुए या ना छुए वो थाली झूठी

564
00:39:05,600 --> 00:39:10,920
हो गई तो हमारा शरीर हमारा ही दूसरा हाथ झूठा नहीं हुआ क्या

565
00:39:10,920 --> 00:39:15,040
हा झूठा हो गया जब वो खाली जो हमारा अंग नहीं है वो

566
00:39:15,040 --> 00:39:19,160
झूठी मानी जा रही तो हमारा हाथ नहीं झूठ हुआ क्या उसी दशा में हम जाकर

567
00:39:19,160 --> 00:39:23,200
राइट हैंड से भगवान के मंदिर में जाकर के इनके य मंदिर में ऐसे ही पूजा होती है

568
00:39:23,200 --> 00:39:27,400
गर्भ ग्रह में एक तरफ आदमी ने खाना खाया दूसरे हाथ से भगवान को

569
00:39:27,400 --> 00:39:31,400
सेवा कर दी तो विधि का विधि का इन्होंने एक्सेप्ट किया

570
00:39:31,400 --> 00:39:35,480
हुआ है मगर य विधि वो विधि है जो हमने मानी है ना

571
00:39:35,480 --> 00:39:39,480
तो शास्त्र में हो भले ही और ना तो गुरु इनके ही गुरुओ ने ना कही हो

572
00:39:39,480 --> 00:39:43,960
भले ही मगर व कोई वो नहीं है

573
00:39:43,960 --> 00:39:48,200
जी तो लव भारत जी थोड़ा सा मैं आपसे

574
00:39:48,200 --> 00:39:52,200
कहूंगा कि आप अपने बारे में बताए और एक

575
00:39:52,200 --> 00:39:56,440
सबसे एक चीज और मैं कहना चाहूंगा कि जो लोग भी

576
00:39:56,440 --> 00:40:00,720
इस तरह से धर्म को आगे लाना चाहते हैं आप आप देखिएगा लव

577
00:40:00,720 --> 00:40:04,880
भारत जी एक न्यूट्रल रहते हुए अपने वीडियोस बनाते हैं

578
00:40:04,880 --> 00:40:07,560
धार्मिक जागरण के निमित मगर क्या

579
00:40:07,560 --> 00:40:11,640
होता है कि इनका ऐसा चल रहा है कि जो व्यक्ति

580
00:40:11,640 --> 00:40:15,920
भले ही वो वैष्णव हो यह भी वैष्णव है भले ही कोई व्यक्ति

581
00:40:15,920 --> 00:40:20,200
वैष्णव हो मगर यदि वो स्कोन का नहीं है तो उसको रोका

582
00:40:20,200 --> 00:40:24,720
जाता है तो यह जो चीज कही जाती है ना वैष्णव निंदा वैष्णव अपराध

583
00:40:24,720 --> 00:40:28,720
तो आपके सामने आज एक यह जो कितनी सामंजस्य

584
00:40:28,720 --> 00:40:32,840
है जो शुद्ध सनातन आर्वैदिक हिंदू धर्म के लोग है

585
00:40:32,840 --> 00:40:36,920
उनमें कितनी सामंजस्य है वो वो आप देखिए और

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00:40:36,920 --> 00:40:41,120
यह जो तथाकथित तंत्र है जो धर्म रक्षा का

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00:40:41,120 --> 00:40:45,240
वो देते हैं दावा करते हैं कि हम धर्म रक्षा के हम धर्म प्रचारक है उनका ये

588
00:40:45,240 --> 00:40:49,880
देखिए जो उनकी संस्था के द्वारा स्वीकार सिद्धांतों के

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00:40:49,880 --> 00:40:54,000
साथ खड़ा नहीं होगा वो भले ही वैष्णव हो कोई भी हो उसको रोकेंगे आगे

590
00:40:54,000 --> 00:40:58,400
बढ़ने से आज इनका चैनल आप देखिए भव्य शर्मा जी का ल भारत नाम से युगल

591
00:40:58,400 --> 00:41:02,720
किशोर जी का देखिए वहां पर उसको आगे बढ़ने ही नहीं दिया जाता और मैं एक

592
00:41:02,720 --> 00:41:08,720
आवान करना चाहूंगा हमारे जितने भी वैष्णवास्त्र

593
00:41:27,360 --> 00:41:31,440
सामने आएगा इसकन ना तो श्री संप्रदाय

594
00:41:31,440 --> 00:41:35,720
रह जाएगा श्री संप्रदाय का कोई वो रह जाएगा सामग्री रह जाएगी

595
00:41:35,720 --> 00:41:39,800
ना वो रह जाएगा क्योंकि जिस तरीके से इनकी कार्य प्रणाली है और अगर वो

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00:41:39,800 --> 00:41:43,920
सही है अगर उसका समर्थन किया जा रहा है तो अगर इस

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00:41:43,920 --> 00:41:48,120
तरह से हम चलेंगे तो आने वाले समय में वैष्णव का अर्थ केवल एक होगा जो वैष्णव

598
00:41:48,120 --> 00:41:52,160
नहीं है आने वाले समय में वैष्णव का अर्थ एक होगा जो वैष्णव नहीं

599
00:41:52,160 --> 00:41:56,280
है क्योंकि वो वैष्णव की निंदा कर रहा है अपराध कर रहा है शिव जी का बात नहीं मान

600
00:41:56,280 --> 00:42:00,480
रहा है तुलसीदास जी को मायावादी कह रहा है और वो हरि और वो हरि

601
00:42:00,480 --> 00:42:04,640
हरि में भी भेद कर रहा है हरि हरि में भी भेद कर रहा है तो वैष्णव का अर्थ

602
00:42:04,640 --> 00:42:09,040
क्या होगा आने वाले समय में जो वैष्णव नहीं है तो इसलिए मैं ये आवान

603
00:42:09,040 --> 00:42:13,160
करना चाहूंगा जी लव भारत जी आप अपने बारे में बताए थोड़ा सा जी

604
00:42:13,160 --> 00:42:17,360
तो मेरी एक ये आदत है कि मैं न्यूट्रल तो हूं ही

605
00:42:17,360 --> 00:42:21,480
और साथ ही साथ जब भी मुझे लगता है कि शास्त्र विरुद्ध यदि कोई काम कर र

606
00:42:21,480 --> 00:42:25,600
है तो मैं उसका विरोध करता हूं अब पहली बार जब मैंने स्कोन

607
00:42:25,600 --> 00:42:29,640
का यहां पर विरोध करा क भी मैंने फोन का यहां पर विरोध नहीं करा परंतु पहली बार जब

608
00:42:29,640 --> 00:42:33,880
मैंने करा इस चीज को लेकर तो आप देखेंगे कि कैसे

609
00:42:33,880 --> 00:42:37,960
जो भाषा की मर्यादा है उसका बिल्कुल वो हो जाती है टूट जाती है

610
00:42:37,960 --> 00:42:42,680
पूरी अलग हो जाती है अच्छा आपने आपने इसी बारे में विरोध किया था कि मछली

611
00:42:42,680 --> 00:42:46,680
जो वो उसने चिकन खाया था वो उसी पे मैंने विरोध

612
00:42:46,680 --> 00:42:50,680
करा था तो जैसे फ मैंने वीडियो बनाई

613
00:42:50,680 --> 00:42:54,760
तो ा पर भी और य प भी तो जो भव्य

614
00:42:54,760 --> 00:42:59,440
राधा कृष्ण दास जी है मैं नाम मैंने ले लिया तो इनका क्या है

615
00:42:59,440 --> 00:43:03,640
ये पहले मेरे से काफी अच्छे से बात करते थे जब मैं उनका हमेशा

616
00:43:03,640 --> 00:43:07,760
मतलब उनकी चीजों के लिए बहुत अच्छा बोलता था वो करता था उनको

617
00:43:07,760 --> 00:43:11,920
प्रोत्साहन करता था तो तब ये इनकी जो बा बात करने

618
00:43:11,920 --> 00:43:16,160
की शैली है बहुत अच्छी होती थी कैसे जैसे कि आप भव्य राधा कृष्ण दास

619
00:43:16,160 --> 00:43:20,160
है उन्होंने उस टाइम पर मुझे लिखते थे बहुत-बहुत धन्यवाद

620
00:43:20,160 --> 00:43:24,600
आपका और आपके काम के बारे में कौन नहीं जानता प्रभु जी

621
00:43:24,600 --> 00:43:28,720
आप सनातन धर्म का बहुत प्रचार ार करते हैं और विधर्मी

622
00:43:28,720 --> 00:43:32,720
हों से लड़ते हैं आपके चरणों में मेरा प्रणाम आप कितने

623
00:43:32,720 --> 00:43:36,800
अच्छा कितना अच्छा लगा ये जान के कि आपका नाम भी

624
00:43:36,800 --> 00:43:41,320
भव्य है ऐसे करके मतलब कितने प्रेम के साथ मेरे से बातें कर रहे हैं और

625
00:43:41,320 --> 00:43:45,400
फिर उसके बाद अब जब मैंने वीडियो बना दी फिर देखिए आप ये

626
00:43:45,400 --> 00:43:49,520
जो कमेंट है यहां पर ये क्या लिखते हैं क्या आप

627
00:43:49,520 --> 00:43:53,760
लाइव में आके बात करेंगे मेरे साथ आपकी विचारधारा

628
00:43:53,760 --> 00:43:57,320
मायावादी

629
00:43:57,320 --> 00:44:01,440
प्रभावित है यानी प्रभावित है ये नहीं कि जरा सा भी थोड़ा

630
00:44:01,440 --> 00:44:05,560
सा भी वो बोल दिया कि नहीं मतलब थोड़ा सा वो हो सकता है मुझे ऐसा लग रहा है या

631
00:44:05,560 --> 00:44:09,880
ये है प्रभावित है डिसीजन दे दिया कि निर्णय सुना दिया फ

632
00:44:09,880 --> 00:44:14,000
तो यही करके कि आप आके एक बार मुझसे फिर चर्चा कर अब

633
00:44:14,000 --> 00:44:18,240
मैं मेरा ये चीज है कि मैं इनसे फिर चर्चा करूं क्यों

634
00:44:18,240 --> 00:44:22,320
जब इन्होने ये आपकी ये आपकी रील प कमेंट आया है

635
00:44:22,320 --> 00:44:26,440
क्या ये वाला जी क्या आप लाइव आके बात करेंगे मेरे साथ जी

636
00:44:26,440 --> 00:44:30,560
जी जी भैया कि अब मैं इनसे जाकर

637
00:44:30,560 --> 00:44:34,600
क्यों चर्चा तो ये तो कुछ प्रिया चरित्र जैसा दिख रहा है कि ये

638
00:44:34,600 --> 00:44:39,200
तो कुछ िया चरित्र जैसा दिख रहा है जैसे ही विचार मेल नहीं खाए तुरंत आउट

639
00:44:39,200 --> 00:44:43,400
और जो अपमान जनक स्थिति आ गई फिर आगे क्या कहा उन्होने

640
00:44:43,400 --> 00:44:47,560
भैया तो इस पर इन्होने बोला कि लाइव आकर मेरे से चर्चा करो मुझे

641
00:44:47,560 --> 00:44:51,560
कोई डर नहीं है मैं जाकर लाइव भी चर्चा करूंगा जहां बुलाएंगे वहां करूंगा

642
00:44:51,560 --> 00:44:56,040
परंतु आप यहां पर निर्णय दे रहे हैं जब की

643
00:44:56,040 --> 00:45:00,120
आपकी विचारधारा मा के द्वारा प्रभावित है तो ये तब निर्णय

644
00:45:00,120 --> 00:45:04,280
क्यों नहीं देंगे कि हम जीत गए ऐसा निर्णय क्यों नहीं देंगे जब ये अभी

645
00:45:04,280 --> 00:45:08,360
ही निर्णय दे रहे हैं बात ये है निर्णायक बन रहे निर्णायक निर्णायक बन रहे

646
00:45:08,360 --> 00:45:12,880
है जी फिर इनका ही इससे आपका

647
00:45:12,880 --> 00:45:17,040
इससे आपका हृदय थोड़ा आहत हुआ होगा जब उन्होंने एकदम से एक

648
00:45:17,040 --> 00:45:21,040
होता है ना कि पहले राजेश खन्ना स्वर्ग के हैं तो उनको बहुत सम्मान

649
00:45:21,040 --> 00:45:25,080
हो रहा है स्वर्ग में और फिर जब उनका हां कुछ हो जाता है फैक्ट्री वैक्ट्री

650
00:45:25,080 --> 00:45:29,320
में आग लग जाती है तो उसके बाद जो उन के भाई उन्हें पूछना बंद कर देते

651
00:45:29,320 --> 00:45:33,400
हैं ठीक बिलकुल कुछ ऐसा ही है अब

652
00:45:33,400 --> 00:45:37,720
यहां प तो फिर आप ये है कि एक तो इन्होंने करा

653
00:45:37,720 --> 00:45:41,960
भव्य राधा कृष्ण दास फिर बाकी भी जितने भी इस फोन किए हैं

654
00:45:41,960 --> 00:45:46,040
अब यहां पर एक है नितिन करके इनकी भी प्रोफाइल मैंने

655
00:45:46,040 --> 00:45:50,440
यहां पर अगर आप शो कर सकते हैं तो यहां पे ये

656
00:45:50,440 --> 00:45:54,640
लिखते हैं भाई लेट मी आंसर योर क्वेश्चन आई अप्रिशिएट दैट

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00:45:54,640 --> 00:45:58,720
यू रिस्पेक्ट कोन पहले इन्होंने लिखा कि आप स्पन का सम्मान करते हैं हमें

658
00:45:58,720 --> 00:46:02,720
बहुत अच्छा लगा फिर क्या लिखते हैं यू आर नथिंग

659
00:46:02,720 --> 00:46:06,840
टू टेल स्पन व्हाट दे शुड इंप्रूव यानी यहां पर फिरने निर्णय

660
00:46:06,840 --> 00:46:10,840
दे दिया कि आप कोई नहीं होते इस कोन के बारे में कि स्कोन को क्या करना

661
00:46:10,840 --> 00:46:14,880
चाहिए ये बताने वाले आप कोई भी नहीं होते फिर मैंने इनको बोला मर्यादा में

662
00:46:14,880 --> 00:46:18,880
बात करी मैंने ना आपके लिए ना इस कोन के लिए मर्यादा भंग नहीं करी कोई

663
00:46:18,880 --> 00:46:23,000
भी ऐसा शब्द नहीं बोला जिससे कि भावना आहत हो या कुछ थोड़ा लगे

664
00:46:23,000 --> 00:46:27,040
गलत लगे ऐसा मैंने कुछ कहा ही नहीं फिर ये सॉरी भी कहते हैं

665
00:46:27,040 --> 00:46:27,920
अगले कमेंट में

666
00:46:27,920 --> 00:46:32,040
लेकिन उसके बाद पहली बात तो इनके जितने भीय प्रश्न थे उन

667
00:46:32,040 --> 00:46:36,080
सबका मैंने उत्तर दिया फिर इनके पास कोई भी उत्तर नहीं था आप

668
00:46:36,080 --> 00:46:40,120
देखेंगे अभी भी जाकर मेरे चैनल में तो वहां पे इनके आगे का

669
00:46:40,120 --> 00:46:44,120
मैंने दो इन्होंने प्रश्न पूछे मतलब वो करके दो कमेंट तो

670
00:46:44,120 --> 00:46:48,280
फिर मैंने दो उत्तर दिए उसके बाद इनका कोई उत्तर नहीं है कोई इनके

671
00:46:48,280 --> 00:46:52,280
इनके पास कोई आंसर नहीं है उसके बाद ऐसा भी नहीं है कि इन्होंने फोन रख दिया

672
00:46:52,280 --> 00:46:56,320
हो ऑफलाइन हो गए हो इनको पता ना हो कि अब मैंने कोई रिप्लाई दिया

673
00:46:56,320 --> 00:47:00,480
इनको रि में तो फिर ये उस टाइम प ऑनलाइन थे और

674
00:47:00,480 --> 00:47:04,640
फिर ये क्या करते हैं उसकी थोड़ी देर बाद जब मैंने इनको उत्तर दे दिया और ये निरुत्तर

675
00:47:04,640 --> 00:47:08,760
हो गए फिर ये दूसरे मेरे मतलब मेरी कमेंट वीडियो के कमेंट बॉक्स

676
00:47:08,760 --> 00:47:12,880
में दूसरी कमेंट में जाकर क्या लिखते हैं हर जगह कॉपी पेस्ट

677
00:47:12,880 --> 00:47:16,960
करता फिरे क्या भाई यही जवाब तेरी खुद

678
00:47:16,960 --> 00:47:21,200
की औकात नहीं है एक भी बंदे को भक्त बनाने

679
00:47:21,200 --> 00:47:25,280
की यानी आप अभी फिर से पर्सनल हो रहे हैं फिर से निर्णय दे रहे हैं

680
00:47:25,280 --> 00:47:29,640
और औकात पे आ रहे हैं यानी य भाषा की शैली है ऐसी बात की जाती है

681
00:47:29,640 --> 00:47:33,880
आप एक जगह अपने ही कमेंट में बो इनका इनका ये जो आचरण

682
00:47:33,880 --> 00:47:37,880
ऐसा क्यों बदलता है इस पर मैं कुछ कहना चाहूंगा क्योंकि मुझे

683
00:47:37,880 --> 00:47:42,040
नहीं लगता प्रभुपाद जी ने ऐसा कहा होगा मगर उनके नाम से ये सब चीजें लिखी

684
00:47:42,040 --> 00:47:43,240
हुई है ना कि रास्कल

685
00:47:43,240 --> 00:47:47,520
का उन्होंने करपात्री जी के लिए उन्होंने रासकल शब्द का उपयोग

686
00:47:47,520 --> 00:47:51,600
उसमें लिखा हुआ है अखंडानंद सरस्वती जी अखंडानंद

687
00:47:51,600 --> 00:47:55,720
सरस्वती जी को तो उन्होंने कृपा जी को भी बुलाया था उन्होंने उद्घाटन

688
00:47:55,720 --> 00:47:59,760
में जब यहां मथुरा वृंदावन वाले मंदिर का उद्घाटन हुआ था तो

689
00:47:59,760 --> 00:48:03,760
करपात्री जी को भी बुलाया था करपात्री जी वर्णाश्रम धर्म की मर्यादा के उसमें नहीं

690
00:48:03,760 --> 00:48:07,800
गए थे अखंडानंद जी गए थे तो वो साथ में बैठे हुए

691
00:48:07,800 --> 00:48:12,000
फोटो है और उनके लिए लिखा हुआ है इनके नाम से प्रभुपाद

692
00:48:12,000 --> 00:48:16,240
जी के नाम से कि उन्होंने उनको रासकल कहा जिसको व्यक्ति रासकल कहेगा उसको

693
00:48:16,240 --> 00:48:20,360
क्यों बुलाने जाएगा कृष्ण भगवान के बारे में भी रासकल

694
00:48:20,360 --> 00:48:24,800
लिखा हुआ है प्रभुपाद जी की तरफ से अब वो कितना रियल है वो नहीं

695
00:48:24,800 --> 00:48:29,000
पता मगर अगर जब ये यह पढ़ेंगे अपने ग्रंथों

696
00:48:29,000 --> 00:48:33,040
में कि हमारे जो पूज्य आचार्य गण है वो रासकल इत्यादि शब्द का उपयोग कर

697
00:48:33,040 --> 00:48:37,080
रहे हैं तो उनका आचरण रामो विग्रहवां धर्मा रामो दुर्वी

698
00:48:37,080 --> 00:48:41,360
भाषित ये सब कब सीखेंगे वो वो तो ऐसा ही करेंगे आगे प्रिया चरित्र वाला

699
00:48:41,360 --> 00:48:45,560
जी भ जी तो यही है कि इनकी भाषा

700
00:48:45,560 --> 00:48:49,720
की शैली जो ऐसे बदली है इससे तो मैं बहुत आहत हुआ हूं और

701
00:48:49,720 --> 00:48:54,120
फिर मुझे अब लगता है कि अब एक और वीडियो बनाऊंगा और वीडियो इनके ऊपर बनानी पड़ जाएगी

702
00:48:54,120 --> 00:48:58,400
क्योंकि ये नहीं है कि जरा भी हा मतलब

703
00:48:58,400 --> 00:49:02,480
बहुत आराम आपको ये कहना चाहूंगा आप मुझ मतलब इस

704
00:49:02,480 --> 00:49:06,680
तरह से बनाए अगर बनाएंगे तो केवल वो अगर किसी एकाद व्यक्ति

705
00:49:06,680 --> 00:49:10,720
ने कुछ कर दिया तो उसको समष्टि के रूप में ना देखें पूरा स्कोन ही ऐसा है

706
00:49:10,720 --> 00:49:14,800
अगर आपको पूरे स्न से किस प्रकार का व्यवहार दिखता है उसके

707
00:49:14,800 --> 00:49:19,320
उसके निमित्त आप अपनी प्रतिक्रिया दे क्योंकि कोई भव्य

708
00:49:19,320 --> 00:49:23,640
और य यह लोग कोई उनके वो नहीं है प्रतिनिधि

709
00:49:23,640 --> 00:49:27,960
यह लोग तो अपने मन में य कई बातो में उनका भी विरोध कर रहे हैं इन्होंने

710
00:49:27,960 --> 00:49:32,640
अपने लाइव में कई बातें की जी अ जितने भी

711
00:49:32,640 --> 00:49:36,760
ओवरऑल एक्सपीरियंस जो है ना स्कन के प्रति यदि वो आपको लग रहा है ना ओवरऑल

712
00:49:36,760 --> 00:49:41,720
वाला तो उस परे फिर आप प्रतिक्रिया दें वो आप बताए वो क्या है

713
00:49:41,720 --> 00:49:45,960
वही चीज है कि पहले बहुत ही ज्यादा प्रेम

714
00:49:45,960 --> 00:49:50,160
बहुत ही ज्यादा अच्छे से व्यवहार करना मतलब जब तक आप इनकी उसके

715
00:49:50,160 --> 00:49:54,440
हिसाब से रहोगे कि जरा सा भी कहीं भी कुछ विरोध नहीं करना कि भैया

716
00:49:54,440 --> 00:49:58,560
चाहे शास्त्र विरोध आचरण हो जो भी चीज कर रहे हैं वो शास्त्र विरोध भी हो

717
00:49:58,560 --> 00:50:02,760
गलत हो तो भी अगर आपने कुछ नहीं बोला तो आपको गले लगाएंगे आपको

718
00:50:02,760 --> 00:50:06,800
करेंगे कि नहीं बहुत अच्छा बहुत बढ़िया लेकिन जब भी अगर आपने थोड़ा सा

719
00:50:06,800 --> 00:50:11,080
भी बोल दिया कि नहीं यार यहां पे ना कुछ गलत है यहां पे थोड़ा शास्त्र के अनुसार

720
00:50:11,080 --> 00:50:13,640
सही नहीं है मैंने इनको 18 अध्याय के अनुसार मतलब

721
00:50:13,640 --> 00:50:17,720
पूरा कोट करके पूरा एक एक रेफरेंस देके वीडियो बना के समझाया है मतलब जो वीडियो

722
00:50:17,720 --> 00:50:22,000
बनाई है मैंने उसको भी इतना ये पूरा समझा कर रहा हूं मैं कि ज 18

723
00:50:22,000 --> 00:50:26,160
अध्याय में भगवान ने कहा है कि जो गीता है वो भक्तों को

724
00:50:26,160 --> 00:50:30,800
जो भक्त नहीं है जो भगवान के प्रति जिनकी श्रद्धा नहीं है भगवान के प्रति

725
00:50:30,800 --> 00:50:35,160
जो तप तप नहीं करते हैं जो जिनकी इच्छा नहीं है

726
00:50:35,160 --> 00:50:39,320
उनके उनके साथ यह जो भगवत गीता का रहस्य है वह साझा नहीं करना

727
00:50:39,320 --> 00:50:43,440
उनको नहीं बताना तो आप फिर भी बता रहे हो तो मैं इसके इसी चीज को लेकर

728
00:50:43,440 --> 00:50:47,720
को ये नहीं है कि मैं अपने हिसाब से मन में मेरा कोई द्वेष हो इसन के लिए या वो हो

729
00:50:47,720 --> 00:50:52,080
परंतु मैं केवल शास्त्र के अनुसार ही बता रहा हूं उस पर ही इनको

730
00:50:52,080 --> 00:50:56,720
इतना वो आ गया कि नहीं आप शास्त्र के अनुसार भी बोल नहीं सकते

731
00:50:56,720 --> 00:51:00,880
यह बात सही बात है मुझे

732
00:51:00,880 --> 00:51:05,320
मैं समझ सकता हूं आपको किस प्रकार का लग रहा होगा हालांकि मैं मेरे को तो

733
00:51:05,320 --> 00:51:09,400
कोई ऐसी अपेक्षा नहीं रहती है इन लोगों से मगर हां उसने लाइव

734
00:51:09,400 --> 00:51:13,440
में आकर के इस तरह की बातें की थी कि आप मुझसे बड़े हैं ये हैं वो है तो

735
00:51:13,440 --> 00:51:17,800
फिर बाद में वहां जाकर के वो गटर छाप तेरी

736
00:51:17,800 --> 00:51:21,840
बेटा ये वो अच्छा एक बात सत्य है यदि किसी दिन

737
00:51:21,840 --> 00:51:26,240
सामना हुआ तो सामने क्या ये अपने वही शब्द दोहराएंगे

738
00:51:26,240 --> 00:51:28,760
जो अब कह रहे हैं रहा है यह

739
00:51:28,760 --> 00:51:32,840
कर रहा है नहीं दोहराएंगे क्योंकि सामना हुआ तो यह जो है

740
00:51:32,840 --> 00:51:36,840
धरती फाड़ के गाड़ दिए जाएंगे सामना

741
00:51:36,840 --> 00:51:40,840
होगा तो ये यह शब्द नहीं दोहराएंगे जो आज यह किसी मंच

742
00:51:40,840 --> 00:51:45,280
पर शब्द दोहराएंगे क्या नहीं दोहरा सकते तो ये क्या है मनुस्मृति

743
00:51:45,280 --> 00:51:49,600
में एक बात कही गई है वही कार्य करिए जो आपको

744
00:51:49,600 --> 00:51:53,640
छुपाना ना पड़े छिपाने वाले कार्य तामसिक होते हैं अब इनके य क्या

745
00:51:53,640 --> 00:51:57,640
कहा जा रहा है कि आप सात्विकता की ओर जाओ तो यदि ये दोहरी

746
00:51:57,640 --> 00:52:01,760
प्रकार की भाषा कर रहे हैं कि मैं जब लाइव में आऊंगा तो अलग बोलूंगा

747
00:52:01,760 --> 00:52:06,640
मंच पर आऊंगा तो अलग बोलूंगा पब्लिकली बोलूंगा तो अलग बोलूंगा और

748
00:52:06,640 --> 00:52:10,880
पीठ पीछे या छुप करके कुछ अलग बात बोलूंगा तो यह क्या है यह छिपाने

749
00:52:10,880 --> 00:52:14,920
वाला भाव है तो यह तामसिक का है ठीक है शास्त्र विरुद्ध हो

750
00:52:14,920 --> 00:52:18,960
गया दूसरी बात यदि आपको ऐसा लग रहा है कि सामने वाले ने आपके

751
00:52:18,960 --> 00:52:23,320
प्रति कोई अभद्र आचरण किया है तब भी आपको अनुमति यह नहीं है कि आप भी अभद्र

752
00:52:23,320 --> 00:52:27,680
आचरण करो आपको लड़ने की है मगर गिरो

753
00:52:27,680 --> 00:52:32,160
उस झरने की तरह जो गिर के भी अपनी सुंदरता खोने नहीं देता आप

754
00:52:32,160 --> 00:52:36,800
जैसे रावण ने सीता माता का हरण किया तो राम भी कर सकते थे

755
00:52:36,800 --> 00:52:41,040
श्री राम ने नहीं सिखाया ना कि आप जाकर वहा मंदोदरी का हरण कर लो लड़ो

756
00:52:41,040 --> 00:52:43,800
लड़ के सामने से जीत के लाओ अपनी गरिमा आत्म

757
00:52:43,800 --> 00:52:47,880
सम्मान उसके लिए लड़ो तो यह नहीं है कि अधर्म

758
00:52:47,880 --> 00:52:51,960
से लड़ने के लिए खुद अधर्मी बन जाओ यह नहीं सिखाया उन्होंने अच्छा इसके

759
00:52:51,960 --> 00:52:56,680
बाद क्या है कि उनकी बातें गटर छाप है उसका ईश्वर

760
00:52:56,680 --> 00:53:00,800
निर्लज है और घटिया है बहुत बहुत गंदी गंदी चीजें कही है तो उस

761
00:53:00,800 --> 00:53:04,880
पर अगर बंद नहीं किया तो हम लोग कारवाई भी करेंगे ऐसा नहीं है कारवाई नहीं समय का थोड़ा

762
00:53:04,880 --> 00:53:08,920
अभाव है धर्म रक्षा में रहते हैं मगर यह जो त्रिया चरित्र है

763
00:53:08,920 --> 00:53:13,120
जो दोहरा रूप है यह सात्विकता तो नहीं है और मैं

764
00:53:13,120 --> 00:53:17,320
इनसे मैं इनसे यह कहूं कि तुम सामने आओ मान लो तुम दोबारा अगर

765
00:53:17,320 --> 00:53:21,400
यह लाइव भी आ जाएंगे तो क्या यह बोलेंगे यही भाषा गटर

766
00:53:21,400 --> 00:53:25,400
छाप शब्द का उपयोग करेंगे यह जो घटिया है इस

767
00:53:25,400 --> 00:53:29,600
शब्द का उपयोग करेंगे करेंगे तोय क्या है त्रिया चरित्र कि पब्लिकली

768
00:53:29,600 --> 00:53:33,640
कुछ और और पीठ पीछे कुछ और है ना जब मेरे

769
00:53:33,640 --> 00:53:37,880
सामने होंगे तो य क्या कह पाएंगे मुझे घटिया नहीं कह पाएंगे

770
00:53:37,880 --> 00:53:42,320
मालूम है यह हाथ जब किसी के ऊपर पड़ता है तो आदमी उठता नहीं उठ जाता

771
00:53:42,320 --> 00:53:46,360
है तो तब नहीं कर पाएंगे तो ये

772
00:53:46,360 --> 00:53:50,800
है यह कुछ है त्रिया चरित्र टाइप का

773
00:53:50,800 --> 00:53:55,200
खैर आशु जी आपके पास में वापस आऊंगा यह पूछूंगा

774
00:53:55,200 --> 00:53:59,920
कि

775
00:53:59,920 --> 00:54:05,000
अ ये मायावादी क्या

776
00:54:05,000 --> 00:54:09,600
क्योंकि ये क्लेम किया जाता है कि उन्होंने खंडन किया और

777
00:54:09,600 --> 00:54:13,600
तो जो मायावादी

778
00:54:13,600 --> 00:54:18,520
ने शंकराचार्य जी का खंडन किया या उसमें सामंजस्य है

779
00:54:18,520 --> 00:54:22,520
कुछ एकत्व है सिद्धांतों में वो आप उस पर थोड़ा सा प्रकाश डाल

780
00:54:22,520 --> 00:54:26,840
दीजिए क्योंकि आप रामानु परंपरा से दीक्षित है देखिए

781
00:54:26,840 --> 00:54:31,240
ऐसा है कि अब जैसे कि अब आपका जैसे सिद्धांत है शंकराचार्य

782
00:54:31,240 --> 00:54:35,600
जी का अद्वैत हमारा सिद्धांत है विशिष्टा

783
00:54:35,600 --> 00:54:39,600
दवे हम गृहस्थ के अंदर है ठीक

784
00:54:39,600 --> 00:54:44,480
है हम गृहस्ती के अंदर है और हम किस संप्रदाय से हैं श्री संप्रदाय से

785
00:54:44,480 --> 00:54:48,520
हमारे सामने कोई श्री संप्रदाय का आचार्य आएगा तो

786
00:54:48,520 --> 00:54:52,640
हम क्या करेंगे उसको दंडवत प्रणाम करेंगे अब हमारे

787
00:54:52,640 --> 00:54:57,280
सामने यदि शंकराचार्य जी आ गए संत है वो

788
00:54:57,280 --> 00:55:01,320
तो हम क्या करेंगे अरे यह तो मायावादी है उनके

789
00:55:01,320 --> 00:55:05,520
सामने हम तू तड़ाक शब्दों का प्रयोग करेंगे क्या रामानुजाचार्य

790
00:55:05,520 --> 00:55:09,680
जी ने यह नहीं सिखाया कि भाई शंकराचार्य जी को तुम हीन

791
00:55:09,680 --> 00:55:14,240
दृष्टि से देखो शंकराचार्य जी की तुम लोग निंदा करो रामानुजाचार्य

792
00:55:14,240 --> 00:55:14,920
जी ने यह नहीं

793
00:55:14,920 --> 00:55:19,200
सिखाया किसी के सिद्धांत में भेद होने से यह सिद्ध नहीं हो जाता

794
00:55:19,200 --> 00:55:23,200
कि वह व्यक्ति उसकी निंदा कर रहा है आपने कभी श्री संप्रदाय के आचार्यों के

795
00:55:23,200 --> 00:55:27,320
मुखारविंद से जब वो कथा कहते हैं आदि की रामायण

796
00:55:27,320 --> 00:55:31,640
आदि की तो कभी आपने यह नहीं सुना होगा श्री संप्रदाय के आचार्यों से कि जितने

797
00:55:31,640 --> 00:55:36,240
भी शैव लोग है वो सब श्री में आकर के वैष्णव हो जाओ लेकिन

798
00:55:36,240 --> 00:55:40,360
आपको कोन के अंदर य सुनने को मिल जाएगा कि जितने भी शव लोग है वो आकर

799
00:55:40,360 --> 00:55:44,600
के वैष्णव हो जाओ क्यों क्योंकि भगवान शिव जो है वो भगवान कृष्ण का ध्यान

800
00:55:44,600 --> 00:55:48,680
करते हैं अब कितनी बार ऐसा आया है शास्त्रों के अंदर की जो भगवान

801
00:55:48,680 --> 00:55:52,720
शिव है वो राम जी का ध्यान करते हैं एक मैं ग्रंथ पढ़ रहा था उत्पत्ति

802
00:55:52,720 --> 00:55:56,960
तंत्र नामक ग्रंथ उत्पत्ति तंत्र नामक ग्रंथ के अर

803
00:55:56,960 --> 00:56:01,360
स्पष्ट रूप से लिखा हुआ है कि जो वैष्णव है जो शास्त्र

804
00:56:01,360 --> 00:56:05,640
है जो गाण पत्य है तो जितने संप्रदाय है अगर यह भगवान

805
00:56:05,640 --> 00:56:09,720
शिव की पूजा नहीं करेंगे तो जो अन्य देवी देवता हैं वो इनको

806
00:56:09,720 --> 00:56:13,720
छोड़ कर के चले जाते हैं उत्पत्ति तंत्र के अंदर य

807
00:56:13,720 --> 00:56:18,240
स्पष्ट रूप से लिखा हुआ है कि वैष्णव को शकतो को और गणपति

808
00:56:18,240 --> 00:56:22,520
को इन सभी संप्रदाय के लोगों को भगवान शिव की पूजा करनी चाहिए

809
00:56:22,520 --> 00:56:26,960
अब रही जहां तक रामानुज चार के सिद्धांत की बात शंकराचार्य

810
00:56:26,960 --> 00:56:30,040
जी के तो रामानुजाचार्य जी का जो विशिष्टा दत

811
00:56:30,040 --> 00:56:34,640
सिद्धांत है विशिष्ट का अर्थ क्या हैम चेतन और अचेतन

812
00:56:34,640 --> 00:56:39,240
इन दोनों से युक्त ब्रम और अद्वैत का अर्थ है एकता

813
00:56:39,240 --> 00:56:43,320
अभेद तो ये विशिष्टा द्वत है तो विशिष्ट के अंदर भी अद्वैत

814
00:56:43,320 --> 00:56:47,440
आ ही रहा है कहीं ना कहीं मैं एक ग्रंथ पढ़ रहा था योगा

815
00:56:47,440 --> 00:56:51,680
वशिष्ठ नामक ग्रंथ तो योगा वशिष्ठ के अंदर आप देखेंगे

816
00:56:51,680 --> 00:56:55,680
उसके अंदर मेरे को अद्वैत अद्वैत दिखाई दिया जहां पर वशिष्ठ जी श्री राम

817
00:56:55,680 --> 00:56:59,960
से कह रहे हैं य जो पूरा जगत है ब्र स्वरूप है योगा

818
00:56:59,960 --> 00:57:04,600
गुरु परंपरा उसको आप बिना के पढ़ नहीं सकते गीता

819
00:57:04,600 --> 00:57:08,760
प्रयोगा नहीं लिखा दे दिया जाएगा उसको बदल

820
00:57:08,760 --> 00:57:13,160
देंगे इनको दे दिया जाएगा उसको बदल देंगे

821
00:57:13,160 --> 00:57:17,640
योग की कमेंट्री में अनुवाद में सब बदल देंगे हमने तो भक्ति में लिखा है

822
00:57:17,640 --> 00:57:22,080
हम तो बदल सकते है नाम बदल सकते सब कुछ बदल सकते हैं

823
00:57:22,080 --> 00:57:26,160
टोटल तो इसका अर्थ रामानुजाचार्य जी ने अपना

824
00:57:26,160 --> 00:57:30,200
त लिखा शंकराचार्य जी ने शंकराचार्य जी तो उनका अपना

825
00:57:30,200 --> 00:57:34,360
अलग सि मुझे विशिष्ट दत ऐसा लगता है जैसे जो हम लोग जो बात बताने

826
00:57:34,360 --> 00:57:38,560
ना व्यवहार में द्वैत और परमार्थ में अद्वैत तो यह

827
00:57:38,560 --> 00:57:42,600
जो चीज है इसी को नाम दिया गया विशिष्टा द्वैत जैसे मान

828
00:57:42,600 --> 00:57:45,160
लीजिए शंकराचार्य जी का वो क्लियर नहीं समझ पाया

829
00:57:45,160 --> 00:57:49,800
कि व्यवहार में उन्होंने द्वैत को अपनाया और परमार्थिक रूप से अद्वैत की स्थापना कर दी

830
00:57:49,800 --> 00:57:53,880
तो इसको जब व्यक्ति समझ नहीं पाया तो इसी को एक नाम और दिया गया इस चीज को बीच

831
00:57:53,880 --> 00:57:57,880
की जो दोनों तरफ से कड़ियों को जोड़ते हैं तो विशिष्टा द्वैत बन गया कुछ ऐसा समझ

832
00:57:57,880 --> 00:58:02,160
में आता है जीन तो केवल मोक्ष को भी नहीं मानेगा

833
00:58:02,160 --> 00:58:06,160
किंतु शास्त्रों के अंदर केवल मोक्ष का वर्णन है या नहीं है केवल मोक्ष

834
00:58:06,160 --> 00:58:10,160
का वर्णन है इकोन को कौन सा वाला मोक्ष चाहिए इसन को चाहिए कि

835
00:58:10,160 --> 00:58:14,160
हम गलोक में जाए उनको भाई गलोक चाहिए वो यदि किसी

836
00:58:14,160 --> 00:58:18,160
से भक्ति करवाएंगे तो क्या लेकर के आते हैं कि हम तुमको गलोक

837
00:58:18,160 --> 00:58:22,160
ले जाएंगे गलोक के अंदर क्या है अखंड आनंद गलोक के

838
00:58:22,160 --> 00:58:26,240
बाद आपको जन्म मृत्यु के चक्र से आप बिल्कुल मुक्त हो जाते हैं

839
00:58:26,240 --> 00:58:30,360
गलोक के अंदर कोई आधि व्याधि नहीं है गलोक के अंदर भगवान कृष्ण की

840
00:58:30,360 --> 00:58:34,600
नित्य सेवा आप करिए तो यह मैं पूछना कमेंट आ रहे हैं

841
00:58:34,600 --> 00:58:38,640
कुछ ऐसे कमेंट आ रहे हैं कि रावण उजा चार परंपरा ने अद्वैत का खंडन

842
00:58:38,640 --> 00:58:43,400
किया है खंडन नहीं किया है शाब्दिक भेद से मध्यस्थता सामंजस्य

843
00:58:43,400 --> 00:58:47,680
स्थापित की है दूसरी बात यह है कि

844
00:58:47,680 --> 00:58:51,720
रामानुजाचार्य परंपरा ने क्या कहा है क्या नहीं कहा है यह कौन

845
00:58:51,720 --> 00:58:56,080
बताएगा भाई रामानुज यह तो कम से कम उन्हें बता लेने दो

846
00:58:56,080 --> 00:59:00,600
जो रामानुज वाले हैं श्रीधर ने क्या कहा यह आप बताओगे रामानुज

847
00:59:00,600 --> 00:59:04,880
जी ने क्या कहा वो आप बताओगे मतलब श्रीधर स्वामी की परंपरा से जहां से वो बुक

848
00:59:04,880 --> 00:59:08,880
आ रही है वो नहीं बताएंगे वो दूसरे लोग बताएंगे और स्न ने

849
00:59:08,880 --> 00:59:13,000
जो कहा वो तो स्कन बताएगा ही जी एक बात और देखिए आप जैसे की

850
00:59:13,000 --> 00:59:17,160
एक माता होती है ना वो कहती है बच्चा अगर छोटा हो तो इस कमरे के अंदर म यहां

851
00:59:17,160 --> 00:59:21,360
मत जाना यहां पर भूत रहता है यहां पर बंदर रहता है तो ऐसे इ लोगों ने शंकराचार्य

852
00:59:21,360 --> 00:59:25,400
जी के लिए कर रखा है देखो भाई वो मायावादी है वहां तुम जाओगे भक्ति खराब

853
00:59:25,400 --> 00:59:29,720
हो जाएगी हमारी शंकराचार्य जी को ना सुनना है ना उनके ग्रंथों

854
00:59:29,720 --> 00:59:34,000
को तुमको पढ़ना है वो बिल्कुल इन्होने शंकराचार्य जी को ऐसे उन्होंने

855
00:59:34,000 --> 00:59:38,040
शंकराचार्य जी के ग्रंथ नहीं पढ़े शंकराचार्य जी के सिद्धांत को नहीं जाना उन्होंने

856
00:59:38,040 --> 00:59:42,320
केवल एक चीज बताई है कि शंकराचार्य जी ने क्या बोला है जीव और ब्रह्म

857
00:59:42,320 --> 00:59:46,600
एक है माने कि वो स्वयं को कृष्ण समझते हैं स्वयं को नारायण समझते

858
00:59:46,600 --> 00:59:50,800
हैं तो जो है आप इस सिद्धांत को मत मानिए वो निर्गुण

859
00:59:50,800 --> 00:59:55,040
निराकार को मानते हैं एक विकृत रूप अद्वेता इस कोन के अंदर

860
00:59:55,040 --> 00:59:59,200
प्रतिपादित मेरे को जब मैंने स्कोन को सुना था तो मेरे को भी यही लगा

861
00:59:59,200 --> 01:00:04,080
मैंने कहा अत अच्छा ऐसा है कि मतलब इतना विकृत रूप है उसका

862
01:00:04,080 --> 01:00:08,760
एक बार मैंने पूरी शंकराचार्य जी की वीडियो देखी मैं कोई वीडियो देख रहा था क्योंकि

863
01:00:08,760 --> 01:00:13,080
सुनता रहता हूं जिज्ञास तो मैंने कोई वीडियो देखी शंकराचार्य की

864
01:00:13,080 --> 01:00:15,720
मेरे को उनका वक्तव्य बड़ा अच्छा मैंने उनकी

865
01:00:15,720 --> 01:00:20,000
वीडियो कब से देखना स्टार्ट करी जब मुझे पता चला कि धर्म सम्राट

866
01:00:20,000 --> 01:00:24,240
कृपा जीहा हैं मैंने तकी व देखना आकि धर्म

867
01:00:24,240 --> 01:00:28,320
सम कृपा जी बहुत बचपन से जानता हूं उनको उनके बारे

868
01:00:28,320 --> 01:00:32,480
में मैंने पढ़ाया सुना है कि प्रकार अच्छे विद्वान रहे हैं वो अपने गुरुदेव से भी सुना

869
01:00:32,480 --> 01:00:36,680
है अच्छा मैंने ये देखा है कि रावण संप्रदाय के भी लोग

870
01:00:36,680 --> 01:00:40,960
जो अपने कथा करते हैं तो उसमें कितने अच्छे से वो शंकराचार्य जी

871
01:00:40,960 --> 01:00:45,200
का मतलब वो करते हैं कि उन्होंने हमको जैसे प्रेमानंद जी आप तो वहां

872
01:00:45,200 --> 01:00:49,360
पास में ही रहते हैं वृंदावन के तो प्रेमानंद जी के विचार जो है शंकराचार्य

873
01:00:49,360 --> 01:00:53,720
जी के लिए करपात्री जी के लिए कि मायावादी नहीं है माया का नाश

874
01:00:53,720 --> 01:00:57,840
करने वाले हैं शंकराचार्य जी माया से छूटते कैसे हैं

875
01:00:57,840 --> 01:01:02,120
उन्होंने सिखाया तो प्रेमानंद महाराज जी ने

876
01:01:02,120 --> 01:01:06,280
में देखिए सत्य भदा गमना नमन तो

877
01:01:06,280 --> 01:01:10,400
इस लोक का उच्चारण किसका है ये शंकराचार्य जी का ही तो दिया हुआ है तो

878
01:01:10,400 --> 01:01:14,800
शंकराचार्य जी के को भी प्रेमानंद महाराज जी बताते हैं और

879
01:01:14,800 --> 01:01:19,080
प्रेमानंद महाराज जीने क्या कहा था की गीता प्रेस की भगवत गीता जो साधक

880
01:01:19,080 --> 01:01:23,320
संजीवनी है राम सुख दास जी के द्वारा लिखित वो आप पढ़िए

881
01:01:23,320 --> 01:01:27,600
शंकरा पुरी श जब राम सुख दास जी ने जो साधक संजीवनी ग्रंथ

882
01:01:27,600 --> 01:01:30,800
लिखा था तो पुरी शंकराचार्य जी को उन्होंने अपने पास बुलाया

883
01:01:30,800 --> 01:01:35,120
था कुछ प्रवचन करने के लिए उस ग्रंथ के लेखन के लिए क्योंकि

884
01:01:35,120 --> 01:01:39,280
उन्होंने बताया था तो इस प्रकार से उन्होंने शंकराचार्य जी को बुलाया तो

885
01:01:39,280 --> 01:01:43,720
वहां पर जो उनके कुछ बात उनकी साधक संजीवनी के अंदर शंकराचार्य

886
01:01:43,720 --> 01:01:47,920
जी के द्वारा भी लिखित है सिद्धांत उसम मतलब

887
01:01:47,920 --> 01:01:52,680
उसम जो है एक दूसरे की वो विचार विमर्श से वो लिखा गया

888
01:01:52,680 --> 01:01:56,760
जो वर्ण व्यवस्था है वो जन्म को लेकर है इसका मतलब प्रेमानंद महाराज जी जो है वो

889
01:01:56,760 --> 01:02:00,880
जन्मना वर्ण व्यवस्था को स्वीकार करते हैं क्योंकि स्पन की गीता तो वो नहीं पढ़ते वो कौन

890
01:02:00,880 --> 01:02:04,880
सी पढ़ते हैं साधक संजीवनी तो जितने भी हमारे बड़े-बड़े आचार्य

891
01:02:04,880 --> 01:02:08,920
आप देखिए वो भागवत भी पढ़ते हैं तो ये थोड़ा क्लियर कर दीजिए

892
01:02:08,920 --> 01:02:13,000
थोड़ा ठोस तरीके से कि रामानुज संप्रदाय में वर्ण व्यवस्था को दोहरा

893
01:02:13,000 --> 01:02:13,720
माना जाता है ए

894
01:02:13,720 --> 01:02:17,200
बी सी डी ई एफ जी एच आई जे के एल एम एन ओ पी क्यू आर एस टी डब्लू एक्स वाई जड

895
01:02:17,200 --> 01:02:21,760
ऐसा या जन्म से या कर्म से ऐसा कुछ

896
01:02:21,760 --> 01:02:26,080
रामानुजाचार्य संप्रदाय के अंदर जो वर्ण व्यवस्था है वो

897
01:02:26,080 --> 01:02:30,120
जन्म से मानी जाती है से ण श्री

898
01:02:30,120 --> 01:02:34,400
संप्रदाय के अंदर मानी जाती है य क्यों नामक ग्रंथ में माधवाचार्य शास्त्री

899
01:02:34,400 --> 01:02:38,680
हुए वो भी श्री संप्रदाय से हैं तो श्री संप्रदाय के आचार्य ने स्वयं

900
01:02:38,680 --> 01:02:43,400
प्रमाणित किया है कि हम जन्म से वर्ण व्यवस्था को स्वीकार करते

901
01:02:43,400 --> 01:02:47,560
हैं उन्होंने वहा पर प्रमाण भी दिए हैं उन्होंने

902
01:02:47,560 --> 01:02:51,640
वहा प्रमाण भी दिए जी अच्छा मैं ये कह रहा हूं

903
01:02:51,640 --> 01:02:55,880
ये जो श्री संप्रदाय के जो वैष्णवास्त्र

904
01:02:55,880 --> 01:03:00,160
ये आपके यहां पर इनकी पुराण दिग दर्शन इत्यादि को प्रामाणिक माना जाता है इनको

905
01:03:00,160 --> 01:03:04,360
या मतलब इसमें कुछ थोड़ा सा बताइए जो माधवाचार्य जी जिन्होने

906
01:03:04,360 --> 01:03:08,360
क्योंकि वो बहुत अच्छा ग्रंथ है क्यों और पुराण दिग्दर्शन और इन्होंने

907
01:03:08,360 --> 01:03:12,480
जब यह ग्रंथ लिखा है तो ग्रंथ मेरे पास

908
01:03:12,480 --> 01:03:17,240
है ये इसमें इन्होंने वर्ण

909
01:03:17,240 --> 01:03:20,320
व्यवस्था

910
01:03:20,320 --> 01:03:26,320
को जन्म से इन्होंने सिद्ध किया है

911
01:03:26,440 --> 01:03:30,840
यह यह जो ग्रंथ है इसमें जन्म से सिद्ध किया है इसमें सबसे बड़ी बात क्या है

912
01:03:30,840 --> 01:03:34,960
ना इसमें जब यह इन्होंने ग्रंथ लिखा है उसके

913
01:03:34,960 --> 01:03:39,080
बाद इन्होंने कई आचार्यों से इस पर जो है भूमिका

914
01:03:39,080 --> 01:03:43,560
में साइन करवाए कई आचार्यों से इसकी प्रामाणिकता के लिए

915
01:03:43,560 --> 01:03:47,760
ऐसे नहीं

916
01:03:47,760 --> 01:03:51,920
है तो यह एक सामंजस्य होती है हमारे जो

917
01:03:51,920 --> 01:03:55,920
शुद्ध सनातन वैदिक कपा जी भूमिका ख

918
01:03:55,920 --> 01:04:01,920
रहे हैं

919
01:04:02,320 --> 01:04:04,880
वैष्णवास्त्र

920
01:04:04,880 --> 01:04:08,880
जी के ग्रंथों में कपाती जी के जो भक्ति सुदा

921
01:04:08,880 --> 01:04:13,440
है उसमें निंबार्काचार्य जी ने भूमिका में कि हस्ताक्षर

922
01:04:13,440 --> 01:04:17,800
तो ऐसा है अब देखिए यदि आप इनके

923
01:04:17,800 --> 01:04:21,880
पास जाएंगे और यह कहेंगे कि हम जो है अद्वैत का ग्रंथ पढ़ रहे हैं शंकराचार्य जी

924
01:04:21,880 --> 01:04:25,960
के द्वारा लिखा हुआ ग्रंथ पढ़ रहे हैं तो ये तुरंत मना कर देंगे कि उसको मत पढ़िए अब मैं

925
01:04:25,960 --> 01:04:30,000
आपको अपनी बताता हूं मैं अपने गुरुदेव के पास गया मैंने अपने

926
01:04:30,000 --> 01:04:34,080
गुरुदेव को बताया कि मैं जो है धर्म सम्राट करपात्री

927
01:04:34,080 --> 01:04:38,120
जी महाराज के द्वारा लिखित जो ग्रंथ है भक्ति सुदा आदि उनको उनका अध्ययन करता हूं

928
01:04:38,120 --> 01:04:42,240
उन्होंने नाम पूछे थे मेरे से ग्रंथों के कि किन ग्रंथों का अध्ययन

929
01:04:42,240 --> 01:04:46,800
करते हो तब मैंने उनको बताया था कि करपात्री जी के ये अमुक अमुक ग्रंथ है

930
01:04:46,800 --> 01:04:51,040
तो उन्होंने कहा कि करपात्री जी तो बहुत प्रकांड विद्वान रहे

931
01:04:51,040 --> 01:04:55,320
हैं और बहुत अच्छे संत रहे हैं और गुरुदेव ने ये भी बताया कि वो जब छोटे

932
01:04:55,320 --> 01:04:59,360
थे जब उनका विद्या अध्ययन का समय था तो उनके जो गुरुदेव

933
01:04:59,360 --> 01:05:03,400
है हमारे गुरुदेव के जो गुरुदेव है उनका नाम है रामानुज प्रपन्नाचार्य जी

934
01:05:03,400 --> 01:05:08,240
जो भागवत जी का सचल विग्रह उनको कहते हैं तो

935
01:05:08,240 --> 01:05:12,920
तो उनके मित्र थे करपात्री जी महाराज हमारे गुरुदेव

936
01:05:12,920 --> 01:05:17,080
के जो मित्र थे करपात्री जी महाराज उनके आश्रम पर भी आया करते थे तो एक बार करपात्री

937
01:05:17,080 --> 01:05:17,640
जी गुरुदेव

938
01:05:17,640 --> 01:05:21,800
ने बताया छोटा सा उनका संस्मरण सुनाया कि करपात्री जी

939
01:05:21,800 --> 01:05:26,360
महाराज रामानुज प्रपन्नाचार्य जी के आश्रम पर आए

940
01:05:26,360 --> 01:05:30,400
तब वहां पर गुरुदेव छोटे से बालक थे तब विद्या अध्ययन के लिए

941
01:05:30,400 --> 01:05:34,560
आए ही थे तब करपात्री जी का उनको वहां पर दर्शन सुलभ हुआ तो करपात्री जी

942
01:05:34,560 --> 01:05:39,120
ने उनको अपनी गोद में बिठाला था और उनसे पूछा

943
01:05:39,120 --> 01:05:43,120
कि क्या करता है य बालक तो उनके गुरुदेव

944
01:05:43,120 --> 01:05:47,720
ने बताया कि ये अभी ब्रजवासी बालक है अभी ये देखिए

945
01:05:47,720 --> 01:05:51,800
ये कमेंट आ रहा है य माकन वाले जो है व माधवाचार्य शास्त्री

946
01:05:51,800 --> 01:05:55,920
जी को प्रमाणिक नहीं मानते तो माधवाचार्य जी का जो ग्र

947
01:05:55,920 --> 01:06:00,040
है ना उसको लिखने के बाद उसको जब आप पढ़ेंगे

948
01:06:00,040 --> 01:06:04,240
तो उसी ग्रंथ में ही अनेकानेक जो वैष्णव चार्य

949
01:06:04,240 --> 01:06:08,840
शंकराचार्य है और सभी से उसमें सम्मति में हस्ताक्षर

950
01:06:08,840 --> 01:06:13,480
करवाए गए हैं तो यह आपको पढ़ना चाहिए

951
01:06:13,480 --> 01:06:17,920
है ना इसमें कई सारे आचार्यों का इसमें दिया गया है और

952
01:06:17,920 --> 01:06:23,920
सबसे बड़ी बात है कि

953
01:06:24,560 --> 01:06:29,000
वैष्णवास्त्र अगर आपको अपने धर्म की रक्षा करनी है

954
01:06:29,000 --> 01:06:33,040
तो आपको इनके ग्रंथों की आवश्यकता पड़ ही जाएगी कभी ना कभी यह

955
01:06:33,040 --> 01:06:37,160
देख लीजिएगा आर्य समाजी जब आर्य समाजी जब

956
01:06:37,160 --> 01:06:41,160
क्यों उठाएंगे ना आपकी आपके सिद्धांतों पर क्यों

957
01:06:41,160 --> 01:06:45,720
तो उन क्यों का जवाब आपको इनके ग्रंथों में मिलेगा तो पहली बात तो यह है कि

958
01:06:45,720 --> 01:06:50,040
यह भूल जाइए कि इनके बिना आपका निर्वाह हो पाएगा दूसरी बात

959
01:06:50,040 --> 01:06:54,120
कि आपके जो जो ये परंपरा प्राप्त है कि

960
01:06:54,120 --> 01:07:00,120
नहीं आचार्य ये कौन बताएगा यह

961
01:07:24,520 --> 01:07:28,600
वैष्णवास्त्र प्रमाण इनको प्रमाण के रूप में प्रस्तुत किया जाता है इनके द्वारा लिखित इन

962
01:07:28,600 --> 01:07:33,560
ग्रंथों को अब अगर वही वाली बात है कि इकोन के बारे

963
01:07:33,560 --> 01:07:37,880
में क्या है और क्या नहीं यह कौन बताएगा सबसे

964
01:07:37,880 --> 01:07:42,320
जो अंततोगत्वा जो इस कन का होगा वही प्रमाण माना जाएगा

965
01:07:42,320 --> 01:07:46,560
तो इसी प्रकार से श्री संप्रदाय के कौन है और कौन नहीं है

966
01:07:46,560 --> 01:07:50,560
यह कौन बताएगा जो श्री संप्रदाय का होगा वो बताएगा और अगर

967
01:07:50,560 --> 01:07:54,600
नहीं मानते तो फिर डॉक्टर जाकिर नायक भी आकर के तुम्हारे ग्रंथों को खोल करके उल्टी

968
01:07:54,600 --> 01:07:58,760
सीधी व्याख्या कर दे मान लो उसकी बात उससे भी तो आप यही तर्क करते

969
01:07:58,760 --> 01:08:02,920
हो कि अपनी मां की बात मानते हो कि आपके पिता

970
01:08:02,920 --> 01:08:07,040
कौन है इस प्रश्न के संबंध में या फिर किसी और से पूछते हो

971
01:08:07,040 --> 01:08:13,040
मां जो कहेगी ये तुम्हारे पिता है वही मानना पड़ता है उसी प्रकार से जब वैष्णवास्त्र

972
01:08:42,320 --> 01:08:46,360
वैष्णवास्त्र जी के बारे में पूछा था तो गुरुदेव ने कहा था ये

973
01:08:46,360 --> 01:08:50,440
तो शास्त्रार्थ महारथी है उनको ज्ञात है उनके बारे में माधवाचार्य शास्त्री जी के

974
01:08:50,440 --> 01:08:54,840
बारे में श महार हा शास्त महारथ

975
01:08:54,840 --> 01:08:59,000
गुरुदेव ने ने कहा था ये शा महारथी श्री संप्रदाय

976
01:08:59,000 --> 01:09:03,280
के और आप देखिए जब मेरे गुरुदेव के जो गुरुदेव है रामानुज प्रपन्नाचार्य

977
01:09:03,280 --> 01:09:08,440
जी जब उनकी मित्रता धर्म सम्राट से है वो कौन है अद्वैत

978
01:09:08,440 --> 01:09:12,480
अद्वैत और वो कौन है विशिष्टा तो उनकी मित्रता वो एक दूसरे को हीन

979
01:09:12,480 --> 01:09:16,600
दृष्टि से नहीं देख रहे मेरी आपसे मित्रता है मैं आपका किसी उसम

980
01:09:16,600 --> 01:09:20,600
साथ दे रहा हूं तो ये लोग क्या कह रहे हैं कि भाई ये तो मायावादी है ये तो

981
01:09:20,600 --> 01:09:24,720
माया इसमें मायावादी कहां से आया मेरी समझ में नहीं आया

982
01:09:24,720 --> 01:09:29,360
जी तो बड़ी विचित्र बात है इनकी

983
01:09:29,360 --> 01:09:33,480
और गीता को य प्रमाण मानते हैं किसके रूप में कि भगवान कृष्ण की

984
01:09:33,480 --> 01:09:37,920
ही वो वाणी है इसलिए हम उसको प्रमाण मानते हैं तो भाई भगवान की वाणी

985
01:09:37,920 --> 01:09:41,960
मान कर के यदि आप उसको प्रमाण मानोगे तो भगवद उक्ति होने

986
01:09:41,960 --> 01:09:46,320
के कारण जो बौद्ध दर्शन है उसको भी आपको प्रमाण मानना पड़ेगा क्योंकि

987
01:09:46,320 --> 01:09:50,320
भगवत गता को हम प्रमाण क्यों मानते हैं भगवत गीता को हम प्रमाण इसलिए

988
01:09:50,320 --> 01:09:55,840
मानते हैं कि वो वेद का अनुसरण करती है यदि वेकल है नुकूल

989
01:09:55,840 --> 01:09:57,360
हा यदि वो वेदानु कूल

990
01:09:57,360 --> 01:10:01,480
नहीं होती भगवत गीता तो उसको भी हम प्रमाण के रूप में स्वीकार नहीं करते यदि आप

991
01:10:01,480 --> 01:10:05,640
यह कहते हो कि भाई भगवान श्री कृष्ण के मुखारविंद से

992
01:10:05,640 --> 01:10:09,760
निशित श्रीमद् भगवत गीता है इसलिए हम उसको प्रमाण के रूप में मानते

993
01:10:09,760 --> 01:10:13,800
हैं फिर आपको जो भगवान बध वो भी भगवान विष्णु का अवतार

994
01:10:13,800 --> 01:10:18,240
माने जाते हैं बुद्ध नाम जन की कटे भविष्यति तो फिर बुद्ध

995
01:10:18,240 --> 01:10:22,280
भगवान के द्वारा जो निश्चित बौद्ध दर्शन है उसको भी आपको प्रमाण मानना

996
01:10:22,280 --> 01:10:26,480
होगा उसका भी आप खंडन नहीं कर सकते

997
01:10:26,480 --> 01:10:31,640
जी तो वा रूप सकते

998
01:10:31,640 --> 01:10:35,640
जी जी जीमें है जो वेद की निंदा

999
01:10:35,640 --> 01:10:39,760
करेगा वो नास्तिक

1000
01:10:39,760 --> 01:10:45,560
है

1001
01:10:45,560 --> 01:10:50,760
तो अ एक चीज और लेंगे

1002
01:10:50,760 --> 01:10:55,680
हमसे हो गया है लगभग लगभग मेरे तो कई सारे

1003
01:10:55,680 --> 01:10:59,840
रामानुजाचार्य परंपरा और जो शंकराचार्य परंपरा या

1004
01:10:59,840 --> 01:11:04,400
अन्य जितनी भी जो प्रामाणिक परंपराएं हैं उनके बीच जो सामंजस्य

1005
01:11:04,400 --> 01:11:08,760
है और एकत्व है और जिस एकत्व को प्रदर्शित

1006
01:11:08,760 --> 01:11:12,800
करते हुए हम सनातन समाज को संगठित कर सकते हैं मुख्य उद्देश्य य

1007
01:11:12,800 --> 01:11:17,240
नहीं है कि हमारा सिद्धांत ऊपर है हमारा सिद्धांत ऊपर है जिस सिद्धांत

1008
01:11:17,240 --> 01:11:21,240
से हम लोग एक हो जाए वो सिद्धांत ऊपर है

1009
01:11:21,240 --> 01:11:25,640
जिससे कि हिंदू एक हो जाए संगठित हो जाए व सि

1010
01:11:25,640 --> 01:11:29,760
सीधे है कि ईश्वर सर्वशक्तिमान है

1011
01:11:29,760 --> 01:11:34,040
या नहीं और जिस सिद्धांत से ईश्वर अबाध

1012
01:11:34,040 --> 01:11:38,640
सिद्ध हो रहा है वह सिद्धांत हमारा है फिर वह रामानुजाचार्य

1013
01:11:38,640 --> 01:11:43,120
जी का हो शंकराचार्य जी का हो या मधवा

1014
01:11:43,120 --> 01:11:47,120
चार जी का हो मगर इसमें क्या है कि अलग अलग तरीके से इसकी

1015
01:11:47,120 --> 01:11:51,480
ईट उसका रोड़ा भानुमति का कुंडमा जोड़ा

1016
01:11:51,480 --> 01:11:54,840
भागवत पढ़ी सीदर स्वामी से और हम है मधुवा

1017
01:11:54,840 --> 01:11:58,880
चार्य जी के फॉलोअर मधुवा चार्य जी की परंपरा शुरू हो रही है हंस

1018
01:11:58,880 --> 01:12:03,000
भगवान से और इनकी परंपरा इनकी भगवत गीता में परंपरा शुरू हो रही

1019
01:12:03,000 --> 01:12:07,240
है श्री कृष्ण से मगर हम है मधवा चार्य जी के फॉलोअर मधुवा

1020
01:12:07,240 --> 01:12:11,240
चार्य जी बताते हैं कि उसमें इनके द्वारा बताया जाता है कि जो बलराम जी

1021
01:12:11,240 --> 01:12:14,840
है वो बलराम

1022
01:12:14,840 --> 01:12:18,840
जी बलराम जी के बारे में बताया जाता है इनके द्वारा कि बलराम श्री

1023
01:12:18,840 --> 01:12:22,960
कृष्ण के बाद जो सबसे पहला एक्सपेंशन है श्री कृष्ण का बलराम जी है उसके

1024
01:12:22,960 --> 01:12:26,960
बाद जो शि है वो तो और तीसरे

1025
01:12:26,960 --> 01:12:31,080
चौथे नंबर पर कहीं आते हैं मगर मधवा चार्य जी के द्वारा

1026
01:12:31,080 --> 01:12:35,840
बताया गया जो सिद्धांत है उसमें तो शिव जी बहुत पहले आ जाते हैं बलराम जी बाद में आते हैं

1027
01:12:35,840 --> 01:12:39,880
वो है वो हम तारतम में लाएंगे किसी दिन हमारी बात चल रही है मधवा

1028
01:12:39,880 --> 01:12:43,920
चार जी वालों से तो हम वो तारतम में वहां पर जो मधुवा चार्य जी के

1029
01:12:43,920 --> 01:12:48,360
कहां कहां पर स्कोन की चीजें अगेंस्ट जाती है वो सब हम सामने

1030
01:12:48,360 --> 01:12:52,400
लाएंगे और ये जो जिसको इसकी प्रमाणिकता जाननी

1031
01:12:52,400 --> 01:12:56,520
हो बहुत ज्यादा महंगी नहीं है ये ग्रंथ और बहुत काम के

1032
01:12:56,520 --> 01:13:00,680
हैं क्योंकि आर समाज यों के जितने भी आरोप होते हैं उनका संक्षिप्त में इसमें

1033
01:13:00,680 --> 01:13:04,920
उत्तर है अवतारवाद बहुत सारे उत्तर हैं इसमें तिलक क्यों लगाया

1034
01:13:04,920 --> 01:13:08,960
जाए शिखा क्यों लगाई जाए छोटे छोटे से बहुत सारे उत्तर हैं गणेश जी के सर क्यों

1035
01:13:08,960 --> 01:13:09,880
थे हाथी के बहुत

1036
01:13:09,880 --> 01:13:13,880
अच्छा अच्छे ग्रंथ है आप सबके पास जो भी हिंदू धर्म के सिद्धांतों की

1037
01:13:13,880 --> 01:13:18,040
रक्षा करना चाहते हैं सनातन वैद कार्य हिंदू धर्म पहले

1038
01:13:18,040 --> 01:13:22,120
सिर्फ धर्म लिखने से काम चल जाता था रामायण

1039
01:13:22,120 --> 01:13:26,200
इत्यादि काल में मगर आज धर्म धर्म के नाम पर धर्मा भास बहुत सारे हैं तो

1040
01:13:26,200 --> 01:13:30,360
इसलिए एडजेक्टिव लगा लगाना पड़ता है अब एक लगा दिया सनातन तो फिर

1041
01:13:30,360 --> 01:13:34,600
कहेगा सनातन वेद वाला ना हां भाई सनातन वैदिक फिर हिंदू भी लगाना

1042
01:13:34,600 --> 01:13:38,920
पड़ता है हार भी लगाना पता सनातन वैदिक आर हिंदू धर्म इतने सारे एडजेक्टिव है

1043
01:13:38,920 --> 01:13:42,920
धर्म का अर्थ ही है सनातन धर्म और कल हमारा एक वीडियो

1044
01:13:42,920 --> 01:13:46,960
आएगा आर समाज ने एक वीडियो है कोई बना है जिसमें

1045
01:13:46,960 --> 01:13:51,160
वो बता रहे हैं कि वो ब्रह्म वैवर्त पुराण में इतना ज्यादा वो गंदगी

1046
01:13:51,160 --> 01:13:55,480
देखी मैंने मतलब हीन दिखा रहे हैं पुराण को हीनता को लेकर के बोल रहे हैं

1047
01:13:55,480 --> 01:13:59,640
तो उसमें हमारा एक कल वीडियो हम लाने वाले हैं बना दिया है व कुछ

1048
01:13:59,640 --> 01:14:03,760
व्यस्तता के चलते ऐसा हो रहा है तो हम लोग आने वाले हैं आप लोगों का बहुत-बहुत

1049
01:14:03,760 --> 01:14:08,000
धन्यवाद मैं फिर से एक बार सबसे कहूंगा कि लव भारत जी का जो चैनल

1050
01:14:08,000 --> 01:14:12,000
है वह आप लोग सब्सक्राइब करें फॉलो करें और इनके

1051
01:14:12,000 --> 01:14:16,200
पेज इनको सपोर्ट करें क्योंकि जो शुद्ध धर्म को

1052
01:14:16,200 --> 01:14:20,240
बचा बता बचाने का प्रयास कर रहे हैं हमें उनका सपोर्ट करना चाहिए

1053
01:14:20,240 --> 01:14:24,400
फिर वो युगल किशोर जी हो रामानुज परंपरा से या भव्य जी हो वैष्णव परंपरा

1054
01:14:24,400 --> 01:14:25,640
से

1055
01:14:25,640 --> 01:14:30,000
या कोई भी ऐसा व्यक्ति जो निर्विवाद रूप

1056
01:14:30,000 --> 01:14:34,040
से उस सिद्धांत का प्रचार प्रसार कर रहा है जिससे कि हमारे धर्म की रक्षा की

1057
01:14:34,040 --> 01:14:38,560
जा सकती है देखिए व्यक्तिगत रूप से हम किसके प्रति आस्त है ड मैटर

1058
01:14:38,560 --> 01:14:43,240
किसी प्रति आस्त हो सकते मगर हमें सिद्धांत कौन सा बचा पाएगा जो सार्वभौम

1059
01:14:43,240 --> 01:14:47,520
हो जिसको दुनिया में काटा ना जा सके और शंकराचार्य

1060
01:14:47,520 --> 01:14:51,600
का विरोध करते हुए आप ईश्वर को सर्वशक्तिमान सिद्ध

1061
01:14:51,600 --> 01:14:55,680
नहीं कर पाएंगे शंकराचार्य जी द्वारा नि सीमा

1062
01:14:55,680 --> 01:15:00,080
में रहते हुए आप अंदर रहते हुए भक्ति कर सकते हैं द्वैत की दैत

1063
01:15:00,080 --> 01:15:04,120
का पालन कर सकते हैं सभी का पालन कर मगर आप यह कहते हुए आगे बढ़ेंगे कि हम उसका

1064
01:15:04,120 --> 01:15:08,160
खंडन कर रहे हैं उसको मानते ही नहीं है यह कहते हुए जब आप आगे

1065
01:15:08,160 --> 01:15:12,400
बढ़ेंगे तो ईश्वर आपका बाधित हो जाएगा जैसे ही आपने किया तो

1066
01:15:12,400 --> 01:15:16,440
आप जो सकारात्मक दृष्टि से देखने का प्रयास करने वाले लोग हैं मैं

1067
01:15:16,440 --> 01:15:20,560
उनको कहना चाहूंगा आप इस बात पर ध्यान दे कि जो माया अद्वैत

1068
01:15:20,560 --> 01:15:25,240
इत्यादि की आवश्यकता इसीलिए है जिससे कि ईश्वर की सर्व शक्तिमता

1069
01:15:25,240 --> 01:15:29,800
हो सके ईश्वर सर्वशक्तिमान सिद्ध नहीं हो पाएगा अद्वैत को बिना

1070
01:15:29,800 --> 01:15:33,800
माने ग्रंथ का नाम पूछ रहे हैं आकाश जोशी जी तो उनके लिए

1071
01:15:33,800 --> 01:15:38,320
बता दूं ग्रंथ का नाम है क्यों इसके दो भाग हैं पूर्वार्ध

1072
01:15:38,320 --> 01:15:40,680
और उत्तरार्ध और एक ग्रंथ

1073
01:15:40,680 --> 01:15:44,760
है पुराण दिग्दर्शन इसमें आपको सनातन धर्म से

1074
01:15:44,760 --> 01:15:49,080
रिलेटेड बहुत सारे सवालों के उत्तर मिल जाएंगे प्रश्नों के उत्तर मिल जाएंगे

1075
01:15:49,080 --> 01:15:53,280
सभी हिंदुओं के पास य ग्रंथ होना चाहिए है ना बहुत अच्छा ग्रंथ

1076
01:15:53,280 --> 01:15:57,360
है और इसकी शुरू में ही इसकी प्रमाणिकता भी आपको यथा सामर्थ मिल जाएगी

1077
01:15:57,360 --> 01:16:01,400
और प्रमाणिकता जाननी है तो हमसे संपर्क कर लीजिएगा हम पूरा इनके गुरु कौन

1078
01:16:01,400 --> 01:16:05,800
थे उनके गुरु कौन थे कैसे वो रामानुज तक पहुंचते हैं वो सारी वंशावली दे देंगे

1079
01:16:05,800 --> 01:16:09,800
मायने रखता है कि आपको हमारी बात पर विश्वास है कि नहीं अगर

1080
01:16:09,800 --> 01:16:13,840
विश्वास नहीं है तो नहीं है आप कह रहे हो कि आप प्रभुपाद जी के शिष्य

1081
01:16:13,840 --> 01:16:18,000
हो अभी हम कह दे सबूत दो अब सबूत तो कोई सनातन ग्रंथ

1082
01:16:18,000 --> 01:16:22,480
से तो दे नहीं पाओगे कि हम प्रभुपाद जी के शिष्य है तो हम क्यों माने तो

1083
01:16:22,480 --> 01:16:26,520
भाई रामानुज परंपरा से कौन है कौन नहीं है राम अनुज परंपरा

1084
01:16:26,520 --> 01:16:30,560
के जो अधिकृत आचार्य गण है वो बताएंगे वो बता रहे हैं राम अनुज परंपरा

1085
01:16:30,560 --> 01:16:34,360
के हैं इतना काफी है ठीक

1086
01:16:34,360 --> 01:16:39,760
है तो

1087
01:16:39,760 --> 01:16:43,840
आपका आने का बहुत-बहुत धन्यवाद आप दोनों का और इस तरह की चर्चाएं हम

1088
01:16:43,840 --> 01:16:48,120
चाहेंगे कि आगे भी हमारे चैनल पर होती रहे जिसमें कि हम

1089
01:16:48,120 --> 01:16:52,200
जो निंबार्क परंपरा राम अनुज परंपरा मधवा चार परंपरा ये लोग बैठ

1090
01:16:52,200 --> 01:16:56,760
कर के जो वर्णाश्रम धर्मी है जो वर्णाश्रम धर्मी

1091
01:16:56,760 --> 01:17:00,840
वो लोग बैठ कर के आपस में जो है एक सामंजस प्रकट करें जिससे कि

1092
01:17:00,840 --> 01:17:05,680
ये जो तथाकथित उद् भाषित तंत्र इनकी दाल जो है

1093
01:17:05,680 --> 01:17:10,080
ना गल पाए और अशुद्ध धर्म का प्रचार ना हो पाए

1094
01:17:10,080 --> 01:17:14,200
शुद्ध धर्म का प्रचार करें हम सबके साथ है ईश्वर को सर्वशक्तिमान कहिए

1095
01:17:14,200 --> 01:17:18,240
अल्लाह से मत जोड़िए एक वो पूरी शंकराचार्य जी का वक्तव्य

1096
01:17:18,240 --> 01:17:22,400
है इनके इन्होंने कमेंट करा मेरी वीडियो पर कि जो पुरी

1097
01:17:22,400 --> 01:17:26,400
शंकराचार्य है वो भी तो कह रहे हैं कि भाई जो अला है जो

1098
01:17:26,400 --> 01:17:30,760
वो भी तो कह रहे हैं कि अल्लाह जो है हमारे भगवान का ही नाम है

1099
01:17:30,760 --> 01:17:34,760
इसका मैं द इसका मैं दू उत्तर इसका उत्तर मैं दूं

1100
01:17:34,760 --> 01:17:39,080
पहली बात पूरी शंकराचार्य जी ने अल्लाह नहीं कहा है

1101
01:17:39,080 --> 01:17:43,600
अल्लाह कहा है और अल्लाह शब्द संस्कृत का है आप देख लीजिए

1102
01:17:43,600 --> 01:17:47,600
गलत तो नहीं है दूसरी बात ये है कि ठोक के उन्होंने आप कितने भी

1103
01:17:47,600 --> 01:17:51,720
वो दे दीजिए अंततोगत्वा व्यक्ति की वाणी तो ये सिद्ध कर रही है ना कि वो

1104
01:17:51,720 --> 01:17:55,120
क्या बोल रहे हैं ठोक के कहा है कि कुरान

1105
01:17:55,120 --> 01:17:59,120
की सीमा का ईश्वर बाइबल की सीमा का ईश्वर जगत बना

1106
01:17:59,120 --> 01:18:03,440
सकता है जगत बन नहीं सकता साक्षात अवतार ले नहीं सकता बाधित है ठोक

1107
01:18:03,440 --> 01:18:07,920
के कह दिया तो अब आप उनके नाम से छपे हुए अनाधिकृत अधिकृत

1108
01:18:07,920 --> 01:18:12,280
कोई भी ग्रंथ ले आओ और उन्होंने वहां पर यह कहा था वो कहा था भाई आपने

1109
01:18:12,280 --> 01:18:16,440
किस परंपरा से उनका ज्ञान प्राप्त किया आप आइए हमसे

1110
01:18:16,440 --> 01:18:20,520
बताइए कहां पर उन्होंने अल्लाह के साथ सामंजस्य बिठाई है अल्लाह

1111
01:18:20,520 --> 01:18:24,920
और अल्लाह में अंतर है दूसरी बात ये है कि

1112
01:18:24,920 --> 01:18:29,120
आपके ग्रंथों में स्पष्ट लिखा है कि

1113
01:18:29,120 --> 01:18:33,120
अल्लाह अल्लाह अल्लाह नहीं अल्लाह कुरान की

1114
01:18:33,120 --> 01:18:37,240
सीमा का जो ईश्वर है बाइबल की सीमा का जो ईश्वर है वो और कृष्ण एक

1115
01:18:37,240 --> 01:18:41,320
है और फिर हमने ऐसे नहीं कहा कि दूरी दूर से बैठ कर के वीडियो सुन कर

1116
01:18:41,320 --> 01:18:45,400
के बैठ गए हो ऐसे नहीं या दूर ही दूर से ग्रंथ पढ़ लिया और उसके

1117
01:18:45,400 --> 01:18:50,360
अनुसार हमने वो दे दिया हम गए मंदिर में गए पूछा

1118
01:18:50,360 --> 01:18:54,800
ये जो अल्लाह है यह जो यहोवा है यह कौन है इन्होंने

1119
01:18:54,800 --> 01:18:59,000
कहा शिवजी भगवान नहीं है शिवजी और कृष्ण को एक

1120
01:18:59,000 --> 01:19:03,480
समझने वाले पाखंडी हैं मगर अल्लाह

1121
01:19:03,480 --> 01:19:07,560
कृष्ण और यहोवा ये तीनों एक है इनमें कोई भेद नहीं है जाके देख लीजिए

1122
01:19:07,560 --> 01:19:10,320
वीडियो खुद पूछा हमने कोई भी

1123
01:19:10,320 --> 01:19:14,320
अपने मन से आपकी किताब पढ़ के हमने अपने मन से अर्थ किसी भी बात

1124
01:19:14,320 --> 01:19:18,480
का किया हो जो आप ना मानते हो बता दीजिए हमको

1125
01:19:18,480 --> 01:19:22,680
जो आप ना मानते हो और हमने उस बात को चैलेंज किया हो मगर आप उन बातों

1126
01:19:22,680 --> 01:19:26,680
को लेकर चैलेंज कर रहे हैं जो हम नहीं मानते हम उन बातों को लेकर के प्रश्न कर

1127
01:19:26,680 --> 01:19:30,800
रहे हैं जो आप मानते हैं आप कहते हैं कि कृष्ण अल्लाह यहोवा एक

1128
01:19:30,800 --> 01:19:34,920
है आप कहते हैं कि शिव और विष्णु में भेद है आप कहते

1129
01:19:34,920 --> 01:19:39,080
हैं कि विष्णु और कृष्ण में भेद है तो आप ये क्लेम नहीं कर सकते कि हम

1130
01:19:39,080 --> 01:19:43,160
जो नहीं मानते आप हमारी बातों का गलत मतलब निकाल करके उस पर उसका

1131
01:19:43,160 --> 01:19:47,280
प्रचार कर रहे हैं नहीं हम उसी बात को उठा रहे हैं जो आपने ठोक

1132
01:19:47,280 --> 01:19:51,480
के स्वीकार की है हमने जब आज सुबह पूछा आपसे कि आपका

1133
01:19:51,480 --> 01:19:55,680
जो धाम है वो नित्य है कि नहीं तो आप बोल वहां पर नित्य

1134
01:19:55,680 --> 01:19:59,920
सुख है तो मैंने कहा कि सेवा का सुख अंतिम सुख बताया है भगवान की

1135
01:19:59,920 --> 01:20:04,200
तो मैंने पूछा कि अगर आप वहां पर तिलक लगा रहे हो भगवान को तो लगाते

1136
01:20:04,200 --> 01:20:08,400
ही रहोगे लगाते ही रहोगे हालांकि इसमें भी नित्यता में बाधा आ रही है नीचे

1137
01:20:08,400 --> 01:20:12,480
से ऊपर गया तिलक उसके बाद वापस जब हाथ आया तो उतनी देर जितनी

1138
01:20:12,480 --> 01:20:16,560
देर वापस हाथ आया उतनी देर नित्य नहीं रहा रुक गया ना मामला

1139
01:20:16,560 --> 01:20:20,760
तिलक लगाया लगाते टाइम तो ठीक है लगा दिया फिर वापस आएगा हाथ तो इतनी

1140
01:20:20,760 --> 01:20:24,920
देर वो नित्य नहीं रहा बाधा आ गई रुक गया तिलक लगा

1141
01:20:24,920 --> 01:20:25,420
ही चले

1142
01:20:25,320 --> 01:20:29,400
जाओ तिलक अनंत हो तोय श्रृंगार नहीं रहा श्रंगार

1143
01:20:29,400 --> 01:20:33,440
तो नहीं रहा सेवा तो नहीं रही फय लगाते ही चले जाओ और कोई मत अच्छा

1144
01:20:33,440 --> 01:20:37,680
दूसरी बात ये है कि तो हम उन

1145
01:20:37,680 --> 01:20:41,680
बातों पर प्रश्न करते हैं जो आप जो केवल हमने आपने आपके ग्रंथों

1146
01:20:41,680 --> 01:20:46,120
से पढ़ कर के और गलत अर्थ निकाल करके हमने कोई प्रश्न नहीं किया है

1147
01:20:46,120 --> 01:20:50,240
ग्रंथों से जो हमें दिखा उस पर हमने प्रश्न किया और आपने उसको स्वीकार किया

1148
01:20:50,240 --> 01:20:54,840
जैसे हमने पूछा कि कृष्ण और अल्लाह क्या एक मानते हो हा मानते हैं

1149
01:20:54,840 --> 01:20:59,000
क्यों मानते हो क्योंकि वहां पर भी वो सुप्रीम है वहां पर भी वो सुप्रीम भाई शिव पुराण

1150
01:20:59,000 --> 01:21:03,400
के ईश्वर को तुम क्यों नहीं कह देते कि शिव और कृष्ण एक है

1151
01:21:03,400 --> 01:21:07,560
जब तुम बाइबल के ईश्वर को सुप्रीम एसी कुरान के ईश्वर को

1152
01:21:07,560 --> 01:21:11,760
सुप्रीम एसी होने के कारण एक बता दोगे कृष्ण के समान तो शिव पुराण

1153
01:21:11,760 --> 01:21:15,920
के ईश्वर को एक बताने में कोई दिक्कत है क्या है दिक्कत दिक्कत

1154
01:21:15,920 --> 01:21:19,920
ये है कि फिर विष्णु की सर्वोच्चता कैसे हो कृष्ण की कृष्ण में सीमित कैसे होंगे

1155
01:21:19,920 --> 01:21:24,080
लोग तो ये सब बातें हैं आने के लिए आप दोनों का धन्यवाद

1156
01:21:24,080 --> 01:21:28,280
और बहुत अच्छा लगा आपके साथ चर्चा करके

1157
01:21:28,280 --> 01:21:32,440
सभी को जय श्री राम भव्य जी आपको भी जय

1158
01:21:32,440 --> 01:21:36,530
श्री राम युगल किशोर जी आपको भी जय श्री राम

1159
01:21:36,530 --> 01:21:40,530
[संगीत]
