1
00:00:02,480 --> 00:00:08,320
जय श्री राम सभी को जय श्री राम मयंक

2
00:00:08,320 --> 00:00:12,880
जी जी हरे कृष्णा जी

3
00:00:12,880 --> 00:00:17,000
हरे कृष्णा तो जैसा कि आप लोगों को पता

4
00:00:17,000 --> 00:00:21,040
है आज हम स्कन विषयक चर्चा के लिए

5
00:00:21,040 --> 00:00:25,160
उपलब्ध है यहां पर और हमारे साथ

6
00:00:25,160 --> 00:00:30,840
में मयंक जी हैं मयंक जी थोड़ा सा अपना परिचय दे दीजिए कि आप

7
00:00:30,840 --> 00:00:34,880
आप अपने बारे में बता दीजिए इस कन में कहां से जुड़े हुए हैं यह बता दीजिए

8
00:00:34,880 --> 00:00:39,720
आपके गुरुदेव कौन है जिनसे आप इस कन की शिक्षाए प्राप्त करते हैं

9
00:00:39,720 --> 00:00:43,880
जी तो मेरा नाम ऑफिशियल ने आपकी आवाज बहुत

10
00:00:43,880 --> 00:00:48,920
स्लो आ रही मुझे लगता है ब्लूटूथ बंद कर

11
00:00:48,920 --> 00:00:53,880
लीजिए अभी ब्लूटूथ अभी ठीक आ रही है

12
00:00:53,880 --> 00:00:57,880
हेलो ठीक नहीं आ रही थोड़ ब थोड़ी लो आ

13
00:00:57,880 --> 00:01:01,880
रही है आवाज कम आ रही है ब्लूटूथ बंद करके देखिए आप एक

14
00:01:01,880 --> 00:01:07,880
बार मैं

15
00:01:12,680 --> 00:01:16,680
थ जी जी अब अच्छे से हरे कृष्णा

16
00:01:16,680 --> 00:01:20,720
जी आप अपना परिचय दे दीजिए दर्शकों को और थोड़ा सा बता दीजिए

17
00:01:20,720 --> 00:01:25,680
आप कहां से जुड़े इस कन से

18
00:01:25,680 --> 00:01:29,680
जी तो मेरा नाम वैसे तो अभिषेक है लेकिन

19
00:01:29,680 --> 00:01:33,840
मैं मैं अपना जो निकनेम है व यूज करता हूं ट म और

20
00:01:33,840 --> 00:01:38,800
मैं पिछ एक साल

21
00:01:38,800 --> 00:01:42,800
से अच्छा तो इटावा में जो स्कन

22
00:01:42,800 --> 00:01:46,960
मंदिर है वहां पर कौन शिक्षा देते हैं स्कन की जो आप जिनम

23
00:01:46,960 --> 00:01:51,040
आप गुरु भाव रखते

24
00:01:51,040 --> 00:01:57,040
हैं र य एक [संगीत]

25
00:01:58,200 --> 00:02:02,200
सेकंड प्र अगर य यूज नहीं कर रहा हूं तो मुझे आवाज नहीं

26
00:02:02,200 --> 00:02:07,040
आ रही मेरी आवाज स्लो आ रही है क्या

27
00:02:07,040 --> 00:02:11,720
आपको हा बिल्कुल बहुत ज्यादा

28
00:02:11,720 --> 00:02:15,760
कोई बताएगा आपको आप एक काम करिए पहले लीव करके एक बार दोबारा आ जाइए

29
00:02:15,760 --> 00:02:19,880
आप लीव हो

30
00:02:19,880 --> 00:02:23,400
जाइए

31
00:02:23,400 --> 00:02:29,400
तो तब तक हम लोग कुछ बातें कर लेते हैं

32
00:02:41,400 --> 00:02:45,960
हम तो एक तो बात यह कि हम लोग जब यहां पर जो होने

33
00:02:45,960 --> 00:02:50,200
वाली चर्चाएं हैं या जो हम पॉडकास्ट करते हैं अन्य महानुभावों के साथ वहां

34
00:02:50,200 --> 00:02:54,360
पर उनके यहां पर जा जा कर के उसकी जब रील्स बनाकर डालते तो कुछ लोग ऐसा भी बोलते

35
00:02:54,360 --> 00:02:58,400
हैं कि आपने जो है काट पीट के आप डाल रहे हो पहली

36
00:02:58,400 --> 00:03:02,880
बात यह है कि हम लोग लोग भाव को चेंज नहीं होने देते हैं

37
00:03:02,880 --> 00:03:07,000
जो व्यक्ति जो संदेश देना चाह रहा है आप उससे पुनः पूछ लीजिए आप यहां पर अगर

38
00:03:07,000 --> 00:03:11,280
और कुछ कहना चाह रहे थे हमने आपके भाव को बदला है तो हम क्षमा मांगते हुए

39
00:03:11,280 --> 00:03:15,800
अपनी उस रील को डिलीट करेंगे कि हमने आपके भाव को बदल दिया

40
00:03:15,800 --> 00:03:20,040
दूसरी बात कि रील काट

41
00:03:20,040 --> 00:03:24,080
के निकालना तो सभी निकालते हैं जिससे कि उसके छोटे छोटे एक तरीके

42
00:03:24,080 --> 00:03:28,360
से प्रचार के रूप में ही उसको देख कर के और लोग यहां पर आकर के पूरा वीडियो देखें

43
00:03:28,360 --> 00:03:32,880
हां अगर हम रील काट दे और यहां से हम

44
00:03:32,880 --> 00:03:34,960
उस जो मुख्य वीडियो है उसको डिलीट

45
00:03:34,960 --> 00:03:39,000
ही कर दें सच्चाई अगर आपके अनुसार वो झूठ है और यह सच्चाई तो हम व्यक्ति

46
00:03:39,000 --> 00:03:43,080
को सच्चाई तक पहुंचने का अवसर ही ना दे तब तो ये कहा जा सकता है कि हम रील कार्ड

47
00:03:43,080 --> 00:03:47,200
जो भाव यहां पर दिए जाते हैं उन्हीं का संक्षिप्तीकरण करके हम लोग

48
00:03:47,200 --> 00:03:51,960
रील बनाते हैं तो ये वाली जो बात है गलत है आप लोगों

49
00:03:51,960 --> 00:03:55,960
कहना जी हरे कृष्णा अभिषेक जी अभी आ रही

50
00:03:55,960 --> 00:04:00,600
है म आपको मेरी आवाज हां जी आ रही है आ रही है

51
00:04:00,600 --> 00:04:05,120
जी आप अपना परिचय देते हुए और इटावा में

52
00:04:05,120 --> 00:04:09,200
आप किसके सानिध में अध्यनरत है

53
00:04:09,200 --> 00:04:13,320
उनका थोड़ा सा तो

54
00:04:13,320 --> 00:04:17,040
मेंटर गोविंदी

55
00:04:17,040 --> 00:04:21,200
प्र थो थोड़ा मुझे लग और लाउड हो थो बोलिए अभी

56
00:04:21,200 --> 00:04:25,760
बीच में आवाज बहुत अच्छी आ रही थी अभी थोड़ी कम आ रही है

57
00:04:25,760 --> 00:04:30,720
कोशिश करता थ ते

58
00:04:30,720 --> 00:04:34,760
तो गोविंद गिरिधारी प्रभु जी के सानिध में रह के मैं अभी आगे कर रहा

59
00:04:34,760 --> 00:04:38,760
और जो गुरुदेव है वो श गोपाल कृष्ण स्वामी महाराज

60
00:04:38,760 --> 00:04:43,280
को मानता हूं अभी दीक्षा नहीं हुई परर कर

61
00:04:43,280 --> 00:04:47,360
अच्छा तो आज जैसे की हम लोगों ने टॉपिक रखा

62
00:04:47,360 --> 00:04:51,400
है कि क्या कन जो

63
00:04:51,400 --> 00:04:55,440
गुरु परंपरा को क्लेम करता है कि हम इस गुरु परंपरा से

64
00:04:55,440 --> 00:05:00,480
तो क्या आप मानते हैं तलन की गुरु परंपरा है जो प्रामाणिक है

65
00:05:00,480 --> 00:05:05,240
प्रभु जी एक बात मैं पहले क्लियर कर दूं कि मैं इसकन को यहां पे

66
00:05:05,240 --> 00:05:09,360
रिप्रेजेंट नहीं कर रहा हूं पूरी तरीके से हां वो तो हमें पता लग गया आप

67
00:05:09,360 --> 00:05:13,520
फॉलोअर है आप वहां के वो रिप्रेजेंटेटिव नहीं है आप एक फॉलोअर

68
00:05:13,520 --> 00:05:18,160
मात्र है हां वो तो पता लग गया

69
00:05:18,160 --> 00:05:22,360
जी जी तो अभी मैं आपको पूछ रहा हूं क्या आपके अकॉर्डिंग आपकी

70
00:05:22,360 --> 00:05:27,240
जानकारी में जो स्कन की गुरु परंपरा है वो प्रामाणिक है

71
00:05:27,240 --> 00:05:30,880
जी बिल्कुल अच्छा

72
00:05:30,880 --> 00:05:35,040
तो श्रीमद् भागवत के अनुसार यह कहा गया

73
00:05:35,040 --> 00:05:39,040
है कि जो ब्रह्म का ज्ञान दे वो हमारा परम गुरु

74
00:05:39,040 --> 00:05:43,760
होता है जी है ना

75
00:05:43,760 --> 00:05:47,960
ठीक है तो चैतन्य महाप्रभु को ब्रह्म का ज्ञान किसने

76
00:05:47,960 --> 00:05:52,160
दिया चैतन्य महाप्रभु आपके अनुसार मधुवा चार्य जी की परंपरा

77
00:05:52,160 --> 00:05:56,240
में आते हैं ना चैतन्य महाप्रभु को जो

78
00:05:56,240 --> 00:06:00,720
उनके गुरुदेव थे उनका नाम था ईश्वर पुरी

79
00:06:00,720 --> 00:06:04,840
ईश्वर पुरी जीने ब्रह्म का ज्ञान दिया

80
00:06:04,840 --> 00:06:10,840
ईश्वर

81
00:06:10,960 --> 00:06:15,000
का अ गुरु भी इसकी व

82
00:06:15,000 --> 00:06:17,760
उनकी शिखा भी

83
00:06:17,760 --> 00:06:23,120
नहीं नहीं नहीं मैं पूछ रहा हूं कि ब्रह्म का ज्ञान उन्होंने किससे

84
00:06:23,120 --> 00:06:27,120
लिया ब्रह्म यानी ईश्वर श्वर जन परमेश्वर

85
00:06:27,120 --> 00:06:31,760
का ज्ञान किससे लिया ईश्वर पुरी हा उनसे ही

86
00:06:31,760 --> 00:06:36,080
लिया तो इस बारे में आप कोई रेफरेंस दे सकते हैं कि उन्होंने ईश्वर

87
00:06:36,080 --> 00:06:41,040
पुरी से भगवान श्री कृष्ण का ज्ञान लिया परमेश्वर का ज्ञान

88
00:06:41,040 --> 00:06:45,160
लिया देखिए मैंने बहुत ज्यादा शास्त्र नहीं पढ़े हैं तो

89
00:06:45,160 --> 00:06:49,360
मैंने आपको जो मैंने जो फॉर्म भरा था उसम एटली मैंने क्वेश्चन

90
00:06:49,360 --> 00:06:53,640
पूछे थे मुझे येय क्वेश्चन के आंसर चाहिए आपसे जो मुझे डाउट है मैंने

91
00:06:53,640 --> 00:06:56,200
बस इसके लिए

92
00:06:56,200 --> 00:07:00,280
मुझे नहीं मैं ठीक है मैं उस आऊंगा मगर मैं आप आज यहां कुछ

93
00:07:00,280 --> 00:07:04,320
क्वेश्चन दे कर के जा रहा हूं मतलब आपको कुछ चीज बता रहा हूं आप इनको

94
00:07:04,320 --> 00:07:09,080
जाके सर्च करिएगा है ना कोई बात नहीं आपके पास नहीं र्च

95
00:07:09,080 --> 00:07:13,440
आप अध्ययन करिएगा और इसको पूछिए वहा जाके मठ में तो मुझे आप

96
00:07:13,440 --> 00:07:18,520
जरा स्क्रीन प वो दिखा

97
00:07:18,520 --> 00:07:22,960
दीजिए जिसमें चैतन्य महाप्रभु यह कह रहे हैं कि मैं

98
00:07:22,960 --> 00:07:26,000
जानता हूं भगवान श्री कृष्ण को श्रीधर

99
00:07:26,000 --> 00:07:30,320
स्वामी के द्वारा हा श्रीधर स्वामी

100
00:07:30,320 --> 00:07:34,480
से हां ऑफस मैं दिखा देता

101
00:07:34,480 --> 00:07:38,560
हूं एक बार यहां स्क्रीन पर ठीक स्क्रीन पर

102
00:07:38,560 --> 00:07:43,720
जरा शेयर कर दीजिए मैंने आपको शेयर किया हुआ है

103
00:07:43,720 --> 00:07:47,800
ये कैसे करना हैको थोड़ा बड़ा करके दिखा दीजिए जहां पर वो

104
00:07:47,800 --> 00:07:51,800
लिखा है चैतन्य चरता मृत का रेफरेंस और मैं जानता हूं

105
00:07:51,800 --> 00:07:57,800
भगवान श्री कृष्ण को श्रीधर स्वामी के द्वारा

106
00:07:57,840 --> 00:08:03,840
हम जी

107
00:08:11,640 --> 00:08:15,640
प्रभु जी एक बार यह मुझे बताइए कि य जो चैतन्य चता मृत है

108
00:08:15,640 --> 00:08:19,920
यह मतलब किस मतलब यन का है या फिर ग

109
00:08:19,920 --> 00:08:24,640
परपरा कान कान

110
00:08:24,640 --> 00:08:28,720
का अब इसमें लिख कर के आ रहा है कि मैं

111
00:08:28,720 --> 00:08:32,760
श्रीधर की कृपा से भागवत को समझता हूं जो भागवत

112
00:08:32,760 --> 00:08:37,240
आपके अनुसार सबसे मेन शास्त्र है और मैं मानता हूं कि व

113
00:08:37,240 --> 00:08:41,280
ब्रह्मांड के आध्यात्मिक गुरु जगतगुरु है

114
00:08:41,280 --> 00:08:45,560
आप शीर स्वामी के आगे मतलब ये किसी और को कह रहे हैं कि आप श्रीधर

115
00:08:45,560 --> 00:08:49,560
स्वामी के आगे जो भी कुछ लिखते हैं वह मैं पहले से ही

116
00:08:49,560 --> 00:08:53,720
बता रहा हूं कि वह गलत होगा व यहां पर लिखा है उन्होंने इस भाव को

117
00:08:53,720 --> 00:08:58,120
कि वह गर्भ से वास्तविक अर्थ की विपरीत होगा

118
00:08:58,120 --> 00:09:02,280
तो प्रभ जी

119
00:09:02,280 --> 00:09:06,520
जी आप कंटिन्यू कर कंटिन्यू करिए अच्छा इसमें श्री

120
00:09:06,520 --> 00:09:10,520
कृष्ण वाला भी आया है भागवत को समझ पाया हूं श्री कृष्ण को जान पाया

121
00:09:10,520 --> 00:09:14,720
हूं तो ये दोनों चीजें यहां पर दी गई है अब बात

122
00:09:14,720 --> 00:09:18,720
ये आती है कि श्रीमद् भागवत के

123
00:09:18,720 --> 00:09:23,840
अनुसार इसको हटा लीजिए प्रमाण को हटा लीजिए इसमें है आगे

124
00:09:23,840 --> 00:09:27,960
हां अब इसमें ये आया है कि श्रीमद् भागवत के अनुसार

125
00:09:27,960 --> 00:09:32,080
जो परम गुरु होता है मेन जो मेन गुरु होता है ऐसे तो गुरु

126
00:09:32,080 --> 00:09:36,120
हमें कोई रास्ता भी दिखा रहा है वो भी मार्गदर्शक है मगर मेन जो गुरु होता

127
00:09:36,120 --> 00:09:40,120
है जिसको हम गुरु की संज्ञा देते हैं वो वो होता है जो हमें ईश्वर के बारे में बता देता है

128
00:09:40,120 --> 00:09:44,280
भगवत प्राप्ति का मार्ग बता देता है भगवान के बारे में बता देता है ठीक है

129
00:09:44,280 --> 00:09:48,760
अब यहां पर यह कह रहे हैं कि मैं भगवान को समझ पाया हूं

130
00:09:48,760 --> 00:09:52,880
श्रीधर स्वामी के द्वारा तो इनका जो परम गुरु

131
00:09:52,880 --> 00:09:56,960
है वह श्रीधर स्वामी है अगर ये अन्य किसी से भी छोटी मोटी शिक्षाए

132
00:09:56,960 --> 00:10:01,600
लेते रहेंगे तो वो एक बात मगर श्रीधर स्वामी जो है

133
00:10:01,600 --> 00:10:06,680
वो इनके मेन गुरु है श्रीधर

134
00:10:06,680 --> 00:10:10,760
स्वामी श्रीधर स्वामी जो है अपने समय के शंकराचार्य है मैं

135
00:10:10,760 --> 00:10:14,760
पूरी कर लू बहुत सी बात शीर स्वामी अपनी समय के

136
00:10:14,760 --> 00:10:17,280
शंकराचार्य वो शंकराचार्य थे

137
00:10:17,280 --> 00:10:21,680
तो अगर चैतन्य महाप्रभु उनसे जान रहे हैं

138
00:10:21,680 --> 00:10:25,840
भगवान को तो उनके नीचे चैतन्य

139
00:10:25,840 --> 00:10:30,000
महाप्रभु के बाद आने वाले जो फॉलोअर्स है जो चैतन्य महाप्रभु को जो फॉलो

140
00:10:30,000 --> 00:10:34,000
करते हैं वह अपने आप को मधवा चार्य जी का वो कैसे कह रहे

141
00:10:34,000 --> 00:10:40,000
हैं जबकि उनके जो गुरु है सीध स्वामी के व शंकराचार्य

142
00:10:40,640 --> 00:10:45,080
ठीक पास दीक्षा हु

143
00:10:45,080 --> 00:10:49,240
दीक्षा वाली बात तो मैंने की नहीं कि उन्होंने दीक्षा ली थी केशव

144
00:10:49,240 --> 00:10:53,240
भारती जी से सन्यास की दीक्षा उन्होंने केशव भारती

145
00:10:53,240 --> 00:10:57,440
जी से ली थी वो शंकराचार्य परंपरा के आचार्य

146
00:10:57,440 --> 00:11:01,560
थे वो ठीक है मैं वो बात नहीं कर यहां मैं बात कर रहा हूं श्रीमद्

147
00:11:01,560 --> 00:11:06,800
भागवत के अनुसार मैं वोह श्लोक भी बता देता हूं कहां लिखा

148
00:11:06,800 --> 00:11:11,120
है भागवत के अनुसार जो व्यक्ति

149
00:11:11,120 --> 00:11:16,120
का परम गुरु होता है वह होता

150
00:11:16,120 --> 00:11:21,000
है जो आपको ब्रह्म की

151
00:11:21,000 --> 00:11:23,760
प्राप्ति

152
00:11:23,760 --> 00:11:27,760
कराए ठीक है ये देखिए भागवत दसवा

153
00:11:27,760 --> 00:11:31,760
स्कंध 8 अध्याय 32 वा श्लोक है मनुष्य

154
00:11:31,760 --> 00:11:35,760
के तीन गुरु होते हैं पहले जन्मदाता प्रथम गुरु होता

155
00:11:35,760 --> 00:11:39,800
है उपनयन संस्कार आदि सत कर्मों की शिक्षा देने वाला दूसरा

156
00:11:39,800 --> 00:11:43,800
गुरु होता है वो भी पूज्य है मगर ज्ञानो

157
00:11:43,800 --> 00:11:47,920
उपदेश करके परमात्मा को प्राप्त कराने का मार्ग प्रशस्त करने वाला

158
00:11:47,920 --> 00:11:52,200
गुरु परम गुरु होता है यह भागवत के अनुसार है तो उनके गुरु

159
00:11:52,200 --> 00:11:56,440
हो सकता है वो ईश्वर पुरी हो या कोई भी हो या जिनसे

160
00:11:56,440 --> 00:12:00,600
उन्होंने सन्यासी दीक्षा ले ली मगर वो को सम

161
00:12:00,600 --> 00:12:04,800
रहे परमात्मा को समझ रहे जान पा रहे भागवत को जान पा रहे श

162
00:12:04,800 --> 00:12:09,320
स्वामी केडिंग तो उनके अंतिम निर्णायक गुरु सिद्ध होते हैं श्रीधर

163
00:12:09,320 --> 00:12:13,720
स्वामी ठीक है ठीक श्रीधर स्वामी मचार

164
00:12:13,720 --> 00:12:18,240
परंपरा के नहीं थे श्रीधर स्वामी मचार परंपरा के नहीं थे श्रीधर

165
00:12:18,240 --> 00:12:23,600
स्वामी शंकराचार्य परंपरा के अधिकृत शंकराचार्य थे

166
00:12:23,600 --> 00:12:28,160
र इसम कुछ ऐसे कुतर्क भी किए जाते हैं

167
00:12:28,160 --> 00:12:32,360
कि स्वामी जो है छुपे हुए सुद्धा

168
00:12:32,360 --> 00:12:37,240
द्वैत को मानने वाले थे सुद्धा द्वैत को तो

169
00:12:37,240 --> 00:12:38,880
अगर वह सुद्धा द्वैत को भी मानने

170
00:12:38,880 --> 00:12:43,200
वाले थे तब भी उस हिसाब से इस्कोन का यह क्लेम गलत है

171
00:12:43,200 --> 00:12:47,400
पहली बात तो ऐसा व बहुत सारी चीजें हो जाएंगी सीध स्वामी झूठे सिद्ध हो जाएंगे झूठ

172
00:12:47,400 --> 00:12:51,520
बोलने वाले सिद्ध हो जाएंगे फिर वह प्रामाणिक आचार नहीं रह जाएंगे फिर प्रामाणिक

173
00:12:51,520 --> 00:12:55,520
आचार्य को आचार मानने वाले चेतन महाप्रभु प्रामाणिक नहीं रह जाएंगे बहुत सी चीजें

174
00:12:55,520 --> 00:12:59,560
मगर अभी थोड़ी देर के लिए अगर ये मान ले सीध स्वामी जो है हुए

175
00:12:59,560 --> 00:13:03,720
सुद्धा दैत को मानने वाले थे हालांकि चेतन चरता मृत के अनुसार

176
00:13:03,720 --> 00:13:07,800
वो शुद्ध द्वैत जो वल्लभाचार्य जी ने प्रतिपादित किया है उन्हीं को मना कर रहे हैं कि

177
00:13:07,800 --> 00:13:11,880
नहीं श्रीधर स्वामी के विरोध में जाकर आप कुछ मत लिखो यही कहा उन्होंने

178
00:13:11,880 --> 00:13:16,000
तो वो उनके हिसाब से जैसे जो आपके केशव

179
00:13:16,000 --> 00:13:20,200
दास प्रभु जी इत्यादि इन्होंने वीडियो बनाए तो उसमें कहा है कि वो छुपे हुए जो है

180
00:13:20,200 --> 00:13:26,200
सुद्धा दत इत्यादि को

181
00:13:28,120 --> 00:13:32,160
वैष्णवास्त्र मचार से नहीं आ रही है वो सीदर स्वामी

182
00:13:32,160 --> 00:13:36,240
से आ रही है और सीदर स्वामी अगर सुद्धा दैत के है तो आप लोग मधवा चार वाले

183
00:13:36,240 --> 00:13:40,400
नहीं वल्लभाचार्य वाले हो गए बट इस तरीके से तो चेंज होता

184
00:13:40,400 --> 00:13:44,440
है जैसे की अगर इसी तरीके से अगर कहने की बात है तो आईस वल्लभाचार्य

185
00:13:44,440 --> 00:13:48,920
के संप्रदाय में भी चेंज हुआ पहले विष्णु की पूजा होती थी फिर उसके बाद कृष्ण की

186
00:13:48,920 --> 00:13:53,200
उपासना देखिए महाभारत का एक श्लोक है जिसमें स्पष्ट

187
00:13:53,200 --> 00:13:53,840
लिखा है

188
00:13:53,840 --> 00:13:57,880
किसी के कर देने से प्रमाण नहीं बनता है शास्त्रों के द्वारा

189
00:13:57,880 --> 00:13:59,680
स्वीकार किए जाने पर प्रमाण बनता

190
00:13:59,680 --> 00:14:03,760
है तो इस हिसाब से अगर देखा जाए किसी ने अगर कुछ कर

191
00:14:03,760 --> 00:14:07,880
दिया तो उसके लिए हम लोग थोड़ी ना यहां बात करने बैठे हैं शास्त्र में वो नियम

192
00:14:07,880 --> 00:14:11,920
दिया गया है क्या शास्त्र तो कहता है कि गुरु विरोध स्त्री

193
00:14:11,920 --> 00:14:16,000
गमन के समान है भगवान और गुरु में कुछ नहीं होना चाहिए अंतर

194
00:14:16,000 --> 00:14:20,480
स्वेता सत्र उपनिषद 6 इसके बाद तन सता

195
00:14:20,480 --> 00:14:24,640
का आप दे रहे हैं बारे में जानकारी नहीं है तो हम इसको छोड़ सकते हैं

196
00:14:24,640 --> 00:14:28,640
मैं एक बात और यहां पर कहना चाहूंगा मैं

197
00:14:28,640 --> 00:14:32,960
जी [संगीत] बोलिए तो चैतन्य चता

198
00:14:32,960 --> 00:14:37,160
मृत में मैं कह रहा हूं कि उसम एक और मतलब आता है सार्वभौम

199
00:14:37,160 --> 00:14:41,880
भट्टाचार्य के बारे में आता है स सार्वभौम भट्टाचार्य वो भी एक अद्वैतवाद

200
00:14:41,880 --> 00:14:46,040
थे आप ये मानते हैं नहीं मैंने मैंने

201
00:14:46,040 --> 00:14:50,160
नहीं पढ़ी आप बोलिए अपनी बात तो सार्वभौम भट्टाचार्य

202
00:14:50,160 --> 00:14:54,160
को महाप्रभु मतलब सार्वभौम भट्टाचार्य जब महाप्रभु जगन्नाथ पुरी में

203
00:14:54,160 --> 00:14:58,400
थे तो सार्वभौम भट्टाचार्य उनको शास्त्र अध्ययन कराया

204
00:14:58,400 --> 00:15:03,360
करते थे द्वैतवाद के तरीके से जिस पर चैतन्य महाप्रभु उनकी बातें सुनते थे

205
00:15:03,360 --> 00:15:07,400
लेकिन वो कभी कुछ पूछते नहीं थे तो एक बार सार्वभौम भट्टाचार्य उनसे पूछते

206
00:15:07,400 --> 00:15:11,520
हैं कि आप मतलब कुछ भी क्वेश्चन नहीं करते काउंटर क्वेश्चन नहीं करते यानी कि आपको सब

207
00:15:11,520 --> 00:15:14,760
समझ आ गया तो इस पर महाप्रभु उनको पूरा का पूरा ज्ञान

208
00:15:14,760 --> 00:15:18,800
देते हैं कि किस तरीके से जो वो ज्ञान बता रहे हैं वो गलत है और जो चेतन्य महाप्रभु उनको

209
00:15:18,800 --> 00:15:23,280
षड भुजा रूप में यानी छह हाथों के रूप में जिनके छह हाथ है ऐसे महाप्रभु

210
00:15:23,280 --> 00:15:27,400
का दर्शन कराते हैं जिसके बाद सार्वभौम भट्टाचार्य खुद अद्वैतवाद को छोड़

211
00:15:27,400 --> 00:15:31,960
के महाप्रभु के मतलब फलोर बन जा

212
00:15:31,960 --> 00:15:36,080
तो महाप्रभु ने श्रीधर स्वामी का ज्ञान दिया वहा उनको या किसी

213
00:15:36,080 --> 00:15:40,240
और का दिया उन्होने कृष्ण के

214
00:15:40,240 --> 00:15:44,240
उपासना का ज्ञान दिया बस नहीं नहीं श्रीधर स्वामी से वो भागवत को

215
00:15:44,240 --> 00:15:48,360
समझ पाए ये हमने आपको दिखा दिया तो हो सकता है

216
00:15:48,360 --> 00:15:52,400
कि जो हो सकता है जो आप कहानी बता रहे हैं वो कितनी प्रमाणिक मैं नहीं

217
00:15:52,400 --> 00:15:56,440
जानता मगर हो सकता है कि जो उनको पढ़ा रहे थे वो

218
00:15:56,440 --> 00:16:00,560
सही चीज जो श्रीधर स्वामी के द्वारा प्रतिपादित नहीं पढ़ा रहे थे उन्होंने वो पढ़ा दिया

219
00:16:00,560 --> 00:16:04,680
उन्हे बता दिया इसका तो ये अर्थ भी है भाई जब वो ये कह रहे

220
00:16:04,680 --> 00:16:08,720
हैं कि मैं बात ये है कि ये विषत हो गया मैं पूछ रहा हूं कि

221
00:16:08,720 --> 00:16:13,080
जब वो ये कह रहे हैं मेरे गुरु है श्रीधर स्वामी

222
00:16:13,080 --> 00:16:17,600
श्रीधर स्वामी को मैं जगत का गुरु मानता हूं और मैं भागवत

223
00:16:17,600 --> 00:16:22,160
को उनसे समझ पाया हूं श्री कृष्ण को उनसे जान पाया हूं

224
00:16:22,160 --> 00:16:26,200
तो फिर या तो ये दोनों बातें कंटक्ट हो गई फिर फिर

225
00:16:26,200 --> 00:16:29,840
इसका निदान होना चाहिए दो अलग अलग बातें हो रही है इसम मैं ये भी

226
00:16:29,840 --> 00:16:34,280
तो इसम ये भी तो कहा जा सकता है ना जैसे अगर मैं कहूं आप जैसे बोल रहे हो कि जो सार्वभौम

227
00:16:34,280 --> 00:16:38,400
भट्टाचार्य है उनकी स्टोरी कुछ अलग हो सकती है तो मैं आपके इस पर ये तर्क दे सकता हूं

228
00:16:38,400 --> 00:16:42,400
ना कि ऐसे तो श्रीला प्रभुपाद जो थे वो भी पहले एक मतलब

229
00:16:42,400 --> 00:16:46,400
अद्वैतवाद गीता रखते थे उससे पढ़ाया करते थे लोग को लेकिन वो ज्ञान जो देते थे

230
00:16:46,400 --> 00:16:50,400
वो ऑफकोर्स कृष्ण की उपासना का और मतलब मतलब आपका

231
00:16:50,400 --> 00:16:54,560
कहने का मतलब है श्रीधर स्वामी को वो गुरु मानते थे मगर उन्होंने ज्ञान उनके विरुद्ध

232
00:16:54,560 --> 00:16:59,120
दिया है नहीं गुरु के विरोध दिया जो

233
00:16:59,120 --> 00:17:03,200
भी लिखा है उसका विरोध तो कोई कर नहीं सकता ना नहीं नहीं चैतन्य

234
00:17:03,200 --> 00:17:07,200
महाप्रभु श्रीधर स्वामी को गुरु मानते थे अब जो

235
00:17:07,200 --> 00:17:12,160
वो ज्ञान दे रहे हैं वो श्रीधर स्वामी का आगे दे रहे हैं या नहीं दे रहे हैं

236
00:17:12,160 --> 00:17:16,360
नहीं वही तो मैं कह रहा हूं ना कि वो उसम क्या है ना कि अद्वैतवाद ऐसा

237
00:17:16,360 --> 00:17:20,360
तो है नहीं कि अद्वैतवाद गलत है और द्वैतवाद ही सही है या अचिंत भेद अभेद भी सही

238
00:17:20,360 --> 00:17:24,800
है डल रियलिटी भी कुछ होती है मैं

239
00:17:24,800 --> 00:17:28,920
मैं अभ देखिए ये बदल रहा है मैं बोल रहा हूं जो श्रीधर स्वामी ने ज्ञान

240
00:17:28,920 --> 00:17:34,080
दिया क्या चैतन्य महाप्रभु ने आगे वही ज्ञान दिया आपके अनुसार या नहीं

241
00:17:34,080 --> 00:17:38,480
दिया आगे अगर ऐसी बात है तो फिर तो नहीं दिया क्यक चैतन्य तामृत

242
00:17:38,480 --> 00:17:42,720
में ही आगे आता है क्योंकि मतलब उन्होने गुरु इसका मतलब

243
00:17:42,720 --> 00:17:44,880
उन्होंने गुरु विरोध किया जबक

244
00:17:44,880 --> 00:17:49,160
भगवान को वह समझ पाए हैं भागवत को समझ पाए हैं श्रीधर स्वामी के द्वारा

245
00:17:49,160 --> 00:17:53,920
मगर उन्होंने जो समझा था जो समझ पाए हैं वो ना देक के झूठा ज्ञान दिया

246
00:17:53,920 --> 00:17:58,040
वहां पर विरोध कैसे हो गया बातो में फसा रहे हो

247
00:17:58,040 --> 00:18:02,200
विरोध क्यों नहीं जब वो अपने गुरु से लिया हुआ जिसके कारण वह

248
00:18:02,200 --> 00:18:06,200
श्री कृष्ण को समझ पा रहे हैं वह ज्ञान आगे नहीं दे रहे हैं उस ज्ञान को

249
00:18:06,200 --> 00:18:10,760
काट रहे हैं आपके अनुसार जो आपके अनुसार जो आचार्य थे उनसे

250
00:18:10,760 --> 00:18:14,800
उने वो बस उसम अपना ज्ञान ड कर र

251
00:18:14,800 --> 00:18:18,840
है वो ऐड कर रहे हैं यानी कि अद्वैत भी पूरी

252
00:18:18,840 --> 00:18:22,840
तरीके से गलत नहीं है पूरी तरीके से गलत नहीं है

253
00:18:22,840 --> 00:18:27,760
शास्त्र में आता है ना क्या नाम है

254
00:18:27,760 --> 00:18:31,800
सॉरी मतलब भगवान निराकार भी है और साकार भी है

255
00:18:31,800 --> 00:18:36,000
दोनों ही रूपों में प्रेजेंट है और हमारे अंदर जो है ईश्वर

256
00:18:36,000 --> 00:18:40,480
का एक अंश ही है तो हम भी ईश्वर के एक अंश है

257
00:18:40,480 --> 00:18:44,640
मतलब स्न का श्रीधर स्वामी या शंकराचार्य

258
00:18:44,640 --> 00:18:48,800
परंपरा से कोई शैक्षिक विरोध नहीं है इसकन

259
00:18:48,800 --> 00:18:53,040
का एस सच हा मायावादी संप्रदाय

260
00:18:53,040 --> 00:18:57,240
में यानी कि कुछ ऐसा है जिसका खंडन किया जाता है

261
00:18:57,240 --> 00:19:00,040
जी हां यानी कुछ

262
00:19:00,040 --> 00:19:04,200
ऐसा है जिसका श्रीधर स्वामी का खंडन किया जाता है गुरु का खंडन किया जाता

263
00:19:04,200 --> 00:19:08,200
है पॉइंट ये है ये चीज समझने की जरूरत है कि यहां प मायावा

264
00:19:08,200 --> 00:19:12,280
का खंडन किया जाता है लोग जाएंगे आगे जाएंगे अभी हमको ये

265
00:19:12,280 --> 00:19:17,200
क्लियर करना है गुरु का विरोध हुआ कि नहीं हुआ

266
00:19:17,200 --> 00:19:21,760
मैं उस पर कुछ नहीं कह सकता अभी क्योंकि मैंने मुझे उस बारे में नॉलेज ज्यादा है

267
00:19:21,760 --> 00:19:25,760
अच्छा अब मैं एक दूसरी चीज आपको बताता हूं

268
00:19:25,760 --> 00:19:30,840
मुझे वो स्क्रीन दिखा दीजिए जरा जिसमें की

269
00:19:30,840 --> 00:19:35,200
श्रीधर स्वामी के विरुद्ध लिखने वाले को वैश्या की

270
00:19:35,200 --> 00:19:41,200
उपमा दी गई है श्री चैतन्य महाप्रभु के

271
00:19:45,440 --> 00:19:49,640
द्वारा मैं कैसे दिखा सकता हूं आपसे नहीं बोल रहा

272
00:19:49,640 --> 00:19:52,400
आपसे नहीं बोल

273
00:19:52,400 --> 00:19:56,560
रहा नहीं नहीं ये नहीं नहीं यह वाला नहीं जो अभी आपने

274
00:19:56,560 --> 00:20:02,560
खोला था ना पहले उसी को दोबारा बोल

275
00:20:15,920 --> 00:20:20,000
दीजिए जो अभी इससे पहले खोला था ना श्री चैतन्य महाप्रभु का

276
00:20:20,000 --> 00:20:24,040
हा वही दोबारा खोल दीजिए हा इसमें

277
00:20:24,040 --> 00:20:28,280
थोड़ा बड़ा करिए तो एक जगह उन्होंने कहा है कि मेरे अनुसार वो वैश्या

278
00:20:28,280 --> 00:20:32,320
के देखिए पहली बात तो व यह कह रहे हैं कि जो भी श्रीधर

279
00:20:32,320 --> 00:20:36,640
स्वामी की अवेल करता है वो मेरे लिए उसे

280
00:20:36,640 --> 00:20:41,040
वैश्या में गिना जाना चाहिए और जो भी श्रीधर स्वामी के अगेंस्ट

281
00:20:41,040 --> 00:20:45,520
जाकर के लिख रहा है वो जो है गलत होगा यह दो चीज

282
00:20:45,520 --> 00:20:49,640
मतलब कुल मिलाकर के अगर इन दोनों को हम यहां पर देखे तो वो

283
00:20:49,640 --> 00:20:53,840
सीधे सधे कह रहे चैतन्य महाप्रभु कि जो भी श्रीधर स्वामी के

284
00:20:53,840 --> 00:20:58,040
अगेंस्ट जाकर के लिखता है वो वैश्या के समान होगा ठीक

285
00:20:58,040 --> 00:21:02,960
है यहां पर क्लियर

286
00:21:02,960 --> 00:21:07,280
है वा हमा आचार्य भी मतलब

287
00:21:07,280 --> 00:21:11,320
नहीं नहीं अभी मैं वही दिखा रहा आपको कितना एक्सेप्ट किया है उन्होंने कहा

288
00:21:11,320 --> 00:21:15,360
जो भी स्वामी के एक मिनट उन्होंने कहा जो भी सीधा स्वामी

289
00:21:15,360 --> 00:21:19,400
के अगेंस्ट लिखा है वह गलत होगा और उसे वव में गिना

290
00:21:19,400 --> 00:21:23,800
जाना चाहिए अब आप जरा वेदा बेस का वो खोल लीजिए स्क्रीन

291
00:21:23,800 --> 00:21:27,840
मैंने आपको जो शेयर की थी नहीं बोल रहा जो हमारे ऑपरेटर है उनको

292
00:21:27,840 --> 00:21:33,840
बोल रहा ठीक है

293
00:21:36,160 --> 00:21:40,440
ठीक हम श्रीमद्

294
00:21:40,440 --> 00:21:46,440
भागवत इसको बड़ा करिए अनुवाद को

295
00:22:01,440 --> 00:22:07,440
इसमें लिखा हुआ है और बड़ा नहीं हो

296
00:22:08,560 --> 00:22:12,560
पाएगा इसमें देखिए शिव जी की स्तुति

297
00:22:12,560 --> 00:22:17,440
जो हो रही है उसमें यह लिखा हुआ है कि हे प्रभु

298
00:22:17,440 --> 00:22:22,560
आप संपूर्ण ब्रह्मांड के बंधन और

299
00:22:22,560 --> 00:22:26,800
मोक्ष के कारण है क्योंकि आप इसके शासक

300
00:22:26,800 --> 00:22:31,480
हैं जो लोग आध्यात्मिक चेतना में उन्नत है

301
00:22:31,480 --> 00:22:35,560
आपकी शरण में आते हैं इसलिए आप उनके कष्टों को कम करने के

302
00:22:35,560 --> 00:22:39,640
कारण आप उनकी मुक्ति का कारण भी है यह यहां पर कहा जा रहा

303
00:22:39,640 --> 00:22:43,840
है 22 में इसके आगे का देखिए जहां पर

304
00:22:43,840 --> 00:22:48,560
शिव जी के लिए कहा जा रहा है माया के बारे में

305
00:22:48,560 --> 00:22:53,120
अगला अगला अगला श्लोक 23 देखिए 23 में क्या

306
00:22:53,120 --> 00:22:57,200
है यहां पर इन्होंने लिख दिया कि वास्तव में य जो स्तुति हो रही

307
00:22:57,200 --> 00:23:01,440
है यह रही है विष्णु भगवान

308
00:23:01,440 --> 00:23:05,560
की अब 23 नंबर का खोलिए जरा उसी वेबसाइट में आगे

309
00:23:05,560 --> 00:23:11,560
होगा 23 नंबर

310
00:23:12,120 --> 00:23:18,120
का अगला अगर आप टच कर देंगे तो आ जाएगा

311
00:23:18,120 --> 00:23:22,160
वो हां 23 इसमें

312
00:23:22,160 --> 00:23:25,960
जाइए जरा हां इसको बड़ा

313
00:23:25,960 --> 00:23:30,240
करिए हां ये देखिए अब इसमें अनुवाद

314
00:23:30,240 --> 00:23:34,480
में लिखा हुआ है हे प्रभु आप स्वयं प्रकाशमान और

315
00:23:34,480 --> 00:23:38,960
सर्वोच्च है आप अपनी व्यक्तिगत शक्ति से यहां देखिए

316
00:23:38,960 --> 00:23:42,960
कैसे व्यक्तिगत शक्ति ऊपर जरा संस्कृत दिखा दीजिए

317
00:23:42,960 --> 00:23:46,320
क्या लिखा है संस्कृत

318
00:23:46,320 --> 00:23:50,360
में गुण मया यहां माया की बात हो

319
00:23:50,360 --> 00:23:56,360
रही है नीचे अनुवाद दिखा

320
00:23:56,840 --> 00:24:00,840
दीजिए आप अपनी व्यक्तिगत शक्ति से इस भौतिक जगत का

321
00:24:00,840 --> 00:24:05,040
निर्माण करते हैं यहां इन्होने य लिखा पीछे इन्होने यह नहीं माना कि यह जो है भगवान शिव

322
00:24:05,040 --> 00:24:11,040
की स्तुति है ठीक है अब आगे आगे

323
00:24:16,360 --> 00:24:20,680
चलिए इसमें क्या है आप सभी कारणों के कारण है स्वयं

324
00:24:20,680 --> 00:24:24,800
प्रकाशमान अचिंत निराकार ब्रह्म है जो मूलता परब्रह्म है

325
00:24:24,800 --> 00:24:30,800
आप इस और आगे एक और आगे कर दीजिए

326
00:24:34,680 --> 00:24:38,720
इसमें क्या है भौतिक सृष्टि करते हैं

327
00:24:38,720 --> 00:24:44,720
धार्मिक प्रणालियां है एक और आगे

328
00:24:56,440 --> 00:25:00,760
करिए जिसमें लिखा है ना कि आप ही ब्रह्मा विष्णु महेश का रूप धारण

329
00:25:00,760 --> 00:25:04,880
करते हैं वो कहां गया ये हा ये

330
00:25:04,880 --> 00:25:10,880
23 23 वाला ही है 23 प आ जाइए 23 प पीछे

331
00:25:15,680 --> 00:25:20,840
जाइए और पीछे आ

332
00:25:20,840 --> 00:25:25,120
जाइए हां यह 23 है इसका अनुवाद

333
00:25:25,120 --> 00:25:29,120
देखिए आप स्वयं प्रकाशमान और सर्वोच्च है

334
00:25:29,120 --> 00:25:33,160
और आप अपनी व्यक्तिगत शक्ति से जगत का निर्माण करते हैं जब

335
00:25:33,160 --> 00:25:37,280
आप सजन पालन और संहार करते हैं तो आप ब्रह्मा

336
00:25:37,280 --> 00:25:41,520
विष्णु और महेश्वर का नाम धारण करते हैं ठीक है

337
00:25:41,520 --> 00:25:45,560
अब पहली बात यह है कि यह जो स्तुति हो रही है यह यहां पर पीछे हमने बा

338
00:25:45,560 --> 00:25:49,840
बताया कि यह स्तुति यहां पर दिखाई जा रही है कि यह भगवान विष्णु की स्तुति

339
00:25:49,840 --> 00:25:53,840
हो रही है जबकि श्रीधर

340
00:25:53,840 --> 00:25:57,880
स्वामी का ये टीका हमारे पास

341
00:25:57,880 --> 00:26:02,120
जी जी बोलिए बोलिए

342
00:26:02,120 --> 00:26:06,360
पहली बात य कि मैं डिबेट करने के लिए नहीं आया था तो आप यह सब दिखा

343
00:26:06,360 --> 00:26:10,480
के टाइम वेस्ट मत करिए अच्छा अ बात हो रही

344
00:26:10,480 --> 00:26:13,560
तो इसको पूरी

345
00:26:13,560 --> 00:26:17,680
करले जी वैसे हमारा जो फॉर्म है जो आपने भरा है

346
00:26:17,680 --> 00:26:21,840
व है आईडियोलॉजिकल डिस्कशन ऑन डिस्कशन

347
00:26:21,840 --> 00:26:27,840
ऑन आडलज डिसएग्रीमेंट

348
00:26:28,640 --> 00:26:33,200
मब आपको मे ट भी लेने चाहिए ना कि जिन टॉपिक्स प मुझे चर्चा करनी है

349
00:26:33,200 --> 00:26:37,400
ठीक है अब ले लेते हैं अब जब ये हो गया है शुरू कर किया था आप तभी टोक

350
00:26:37,400 --> 00:26:41,920
देते तो ना भी लेते बगर ये हो गया तो ले लेते हैं तो

351
00:26:41,920 --> 00:26:45,960
मैं ये कह रहा था कि यहां पर

352
00:26:45,960 --> 00:26:49,960
पीछे स्कन ने ये माना है वेदा बेस में स्कन के भाष्य में ये माना

353
00:26:49,960 --> 00:26:54,760
गया है कि ये विष्णु की स्तुति हो रही है और

354
00:26:54,760 --> 00:26:58,880
जो आपको 23 नंबर का श्लोक दिखाया उसमें स्कन ने ये माना है

355
00:26:58,880 --> 00:27:03,040
कि वहां पर भगवान अपनी व्यक्तिगत शक्ति के

356
00:27:03,040 --> 00:27:07,400
द्वारा जगत का निर्माण करते हैं और निर्माण करते समय

357
00:27:07,400 --> 00:27:11,440
जगत का निर्माण करते समय ब्रह्मा विष्णु ब्रह्मा विष्णु महेश का नाम

358
00:27:11,440 --> 00:27:15,520
धारण करते हैं कौन विष्णु भगवान ठीक है अब ये मेरे पास

359
00:27:15,520 --> 00:27:19,840
श्रीधरी टीका आ चुका है श्रीधर स्वामी जिनका

360
00:27:19,840 --> 00:27:23,880
टीका चैतन्य महाप्रभु ने पढ़ के भागवत को समझा अब

361
00:27:23,880 --> 00:27:28,520
इसमें आप वो वाला श्लोक लगा दीजिए 22 नंबर का जिसमें

362
00:27:28,520 --> 00:27:29,020
शिव

363
00:27:28,800 --> 00:27:32,200
की स्तुति माना जा रहा

364
00:27:32,200 --> 00:27:38,200
है भगवान शिव की स्तुति दिखाई गई है

365
00:28:01,600 --> 00:28:07,600
आ

366
00:28:10,680 --> 00:28:15,200
गया हां इसमें वह 21 नंबर 21 नंबर का

367
00:28:15,200 --> 00:28:17,680
लगाइए

368
00:28:17,680 --> 00:28:21,680
जरा बड़ा करिए

369
00:28:21,680 --> 00:28:26,240
21 इसका प इसका अगले पेज पर वो दिया है

370
00:28:26,240 --> 00:28:32,240
अनुवाद अगले पेज प अनुवाद दिया

371
00:28:40,000 --> 00:28:44,280
है अरे हमारे साथ वाले कहां चले

372
00:28:44,280 --> 00:28:48,720
गए कहां के चले गए भाई

373
00:28:48,720 --> 00:28:54,040
आ गए आ गए आ कट गया था कि प्रकार

374
00:28:54,040 --> 00:28:56,600
से

375
00:28:56,600 --> 00:29:00,600
हां जी यह जो अगले पेज पर इसका

376
00:29:00,600 --> 00:29:06,600
भाव प्रकाशिका दिया गया है वह देखिए

377
00:29:07,880 --> 00:29:13,880
जरा 21 नंबर

378
00:29:16,360 --> 00:29:21,040
का हां इसको बड़ा करिए

379
00:29:21,040 --> 00:29:25,200
इसमें देखिए यहां पर इसकी जो स्तुति बताई गई है श्रीधर स्वामी के द्वारा

380
00:29:25,200 --> 00:29:28,880
और बड़ा कर सकते हैं क्या

381
00:29:28,880 --> 00:29:30,440
इसमें लिखा हुआ है कि

382
00:29:30,440 --> 00:29:34,440
दोनों प्रकार के शिव की स्तुति करने वाले प्रजापति हों

383
00:29:34,440 --> 00:29:38,080
ने उन दोनों में नाम मात्र का ही अंतर माना नाम का अंतर माना

384
00:29:38,080 --> 00:29:42,120
और स्तुति किसकी हो रही है शिव जी की इसकन के द्वारा किसका

385
00:29:42,120 --> 00:29:46,400
कहा गया है विष्णु जी की तो जहां पर भागवत

386
00:29:46,400 --> 00:29:50,640
में शिवजी की परब्रह्म को स्वीकारा गया

387
00:29:50,640 --> 00:29:54,680
और विष्णु भगवान और शिव जी की एकता को स्वीकारा

388
00:29:54,680 --> 00:29:58,960
गया वहां पर शब्दों को बदल दिया श्रीधर ध टीका के विरोध

389
00:29:58,960 --> 00:30:02,960
में और इसके आगे मैं आपको बता दूं यहां पर श्रीधर स्वामी ने

390
00:30:02,960 --> 00:30:07,600
जो 23 नंबर का अर्थ निकाला है 23 2 वाला नीचे करिए

391
00:30:07,600 --> 00:30:13,600
थोड़ा ज्यादा नीचे नहीं हा बड़ा

392
00:30:14,200 --> 00:30:20,200
करिए भगवान अपनी गुणमककुम

393
00:30:28,240 --> 00:30:32,360
व्यक्तिगत शक्ति के द्वारा यह श्रीधर स्वामी है

394
00:30:32,360 --> 00:30:36,800
जिनको चैतन्य महाप्रभु पढ़ रहे हैं और वह वोह है जो अब स्कोन

395
00:30:36,800 --> 00:30:41,480
के द्वारा पढ़ाई जा रही है तो अब बात य आती है

396
00:30:41,480 --> 00:30:47,480
अगर अगर चैतन्य महाप्रभु ने यह कहा

397
00:30:48,200 --> 00:30:52,440
है है कि जो भी

398
00:30:52,440 --> 00:30:56,560
श्रीधर स्वामी के अगेंस्ट में लिखेगा जाएगा वो

399
00:30:56,560 --> 00:31:00,560
गलत होगा वो मेरे लिए के समान होगा तो मुझे नहीं पता

400
00:31:00,560 --> 00:31:04,680
है कि यह किसने लिखा है मैं ज्यादा इसकी तह में नहीं गया तो आप

401
00:31:04,680 --> 00:31:08,840
मुझे बताइए तन महाप्रभु की बात माने कि वो

402
00:31:08,840 --> 00:31:13,080
जो लिखने वाला है वैश्या है या क्या माने जी आप उस

403
00:31:13,080 --> 00:31:17,200
जो क रहे है उसम बहुत ज्यादा भेद नहीं है आप शब्दों को घुमा रहे इसके

404
00:31:17,200 --> 00:31:21,240
लिए उसम भेद आ रहा है एक्चुअली तो वहा लिखा हुआ है कि

405
00:31:21,240 --> 00:31:25,240
जब विष्णु ही महेश्वर का रूप धारण करते गुणा अवतार

406
00:31:25,240 --> 00:31:29,240
है महेश्वर शिवजी है व अर है विष्णु के तो

407
00:31:29,240 --> 00:31:33,360
आप वहाई साब य शिव जी की स्तुति माना गया है शिव जी

408
00:31:33,360 --> 00:31:37,720
की स्तुति वहां पर विष्णु की स्तुति

409
00:31:37,720 --> 00:31:41,760
जब विष्णु की जब विष्णु की स्तुति हो रही है तो शिव की भी स्तुति

410
00:31:41,760 --> 00:31:45,960
वैसे ही होगी ना अगर वो अवतार ही उनका है तो जब भेद ही नहीं है तो

411
00:31:45,960 --> 00:31:50,040
आप यह भी तो मानिए इसका मतलब हरि हर में भेद नहीं

412
00:31:50,040 --> 00:31:54,080
है नहीं भेद है लेकिन आप कह रहे हो ना कि जब भेद नहीं है

413
00:31:54,080 --> 00:31:58,320
तो

414
00:31:58,320 --> 00:32:02,520
जब हरि और हर में भेद है तो यहां पर इन्होंने हर की स्तुति माना

415
00:32:02,520 --> 00:32:06,640
है तो फिर उसको आप विष्णु की स्तुति क्यों कर रहे हो भेद नहीं है

416
00:32:06,640 --> 00:32:10,640
यानी कि यानी कि जब भगवान शिव की परब्रह्म की बात

417
00:32:10,640 --> 00:32:14,880
होगी तो दोनों एक है इसलिए ऐसा कहा गया विष्णु की स्तुति व

418
00:32:14,880 --> 00:32:18,960
कह दिया गया और जब हमें बताना हो कि अलग अलग है तो दोनों अलग अलग

419
00:32:18,960 --> 00:32:24,040
है यहां पर तो विष्णु की स्तुति हो रही है ज सुनि दोनों एक

420
00:32:24,040 --> 00:32:28,200
मिनट दोनों एक है

421
00:32:28,200 --> 00:32:32,400
एक है तो जब यह कहा जाता है कि विष्णु के अलावा किसी की भी भक्ति भ्रम

422
00:32:32,400 --> 00:32:36,600
फैलाने के लिए है तो वहां यह क्यों नहीं सोचा जाता है कि विष्णु

423
00:32:36,600 --> 00:32:42,600
का मतलब शिव भी

424
00:32:42,840 --> 00:32:47,040
है आपकी आवाज चली मैं कह रहा हूं

425
00:32:47,040 --> 00:32:51,120
जब यह कहा जाता है कि जो विष्णु के विष्णु से भिन्न किसी

426
00:32:51,120 --> 00:32:55,520
की भी भक्ति जो बताई गई ब्रम फैलाने के लिए है वहां यह अभेद

427
00:32:55,520 --> 00:32:59,600
क्यों नहीं स्वीकार किया जाता जहा विष्णु की बात हो रही है वहां शिव की भी बात हो रही है जैसे

428
00:32:59,600 --> 00:33:03,720
कि यहां पर शिव की बात को आपने विष्णु की बात मान लिया

429
00:33:03,720 --> 00:33:07,720
और दूसरी बात य बो जब गु जब गुरु कह

430
00:33:07,720 --> 00:33:11,760
रहे हैं जब गुरु लिख रहे हैं कि शिव जी की स्तुति तो य शिव जी

431
00:33:11,760 --> 00:33:16,040
की स्तुति लिखने में दिक्कत क्या हो रही

432
00:33:16,040 --> 00:33:20,160
है देखिए पहली बात यह मैं कहूंगा कि आप

433
00:33:20,160 --> 00:33:24,320
जो कह रहे हो कि शिव जी जो है वो उनकी यहां पे ये कहा जा रहा

434
00:33:24,320 --> 00:33:28,440
है कि शिव जी की भक्ति या फिर किसी और देवी देवता की भक्ति भ्रम फैलाने के लिए तो पहली बात

435
00:33:28,440 --> 00:33:32,560
तो ऐसा है नहीं यहां पर ये कहा गया है भगवत गीता

436
00:33:32,560 --> 00:33:36,720
में भगवान क्या कह रहे हैं भगवत गीता में भगवान कह रहे ही भगवत

437
00:33:36,720 --> 00:33:40,760
गीता की बात अभी नहीं हो रही मैं पूछ रहा हूं श्रीधर स्वामी ने य लिखा है

438
00:33:40,760 --> 00:33:44,960
या तो आप इस टॉपिक को बंद कर सकते हैं अगर चलाएंगे तो फिर बहुत

439
00:33:44,960 --> 00:33:49,000
अच्छे से लंबा चलेगा और लंबा इसलिए चलेगा क्योंकि भगवत गीता की

440
00:33:49,000 --> 00:33:53,080
बात अभी हम नहीं कर रहे श्रीधर स्वामी जी ने ये लिखा कि यहां शिव जी

441
00:33:53,080 --> 00:33:57,080
की स्तुति है और आप हरि और हर में भेद मानते हैं तो

442
00:33:57,080 --> 00:33:57,880
फिर यहां पर

443
00:33:57,880 --> 00:34:01,920
आपने विष्णु की स्तुति क्यों करा और अगर कर सकते हो तो पदम पुराण में

444
00:34:01,920 --> 00:34:06,280
जब ये कहा जाता है कि विष्णु से भिन्न किसी की भी स्तुति जो है वो भ्रम फैलाने

445
00:34:06,280 --> 00:34:12,280
के लिए तो वहां क्यों नहीं करते कि शिव की भी बात हो रही है वहां

446
00:34:12,480 --> 00:34:16,560
पर ठीक है इसको मैं उसी को समझाने के लिए भगवत गीता का श्लोक

447
00:34:16,560 --> 00:34:20,800
बता रहा था लेकिन अब आप मान नहीं रहे हो तो फिर अभी कुछ नहीं देखिए भगवत गीता का

448
00:34:20,800 --> 00:34:25,080
जो आपका ट्रांसलेशन है वो बहुत ज्यादा कॉम्प्रोमाइजिंग है उसका

449
00:34:25,080 --> 00:34:29,160
हिंदी के शब्दों में उसम भाव केवल नहीं चेंज किया गया

450
00:34:29,160 --> 00:34:33,560
उसके शब्द भी बदले गए हैं शब्द मतलब जब आप ट्रांसलेशन

451
00:34:33,560 --> 00:34:38,160
कर रहे हो संस्कृत से हिंदी में तब भी आप कृष्ण भावना भावित कर दे रहे हो

452
00:34:38,160 --> 00:34:42,480
ब्रह्म का अर्थ कृष्ण भावना भावित हो गया

453
00:34:42,480 --> 00:34:47,120
तो इसलिए आप जब भगवत गीता का प्रमाण देंगे तो वो एक दूसरा चैप्टर खुल जाएगा

454
00:34:47,120 --> 00:34:51,920
अभी मैं सिंपल बात कर रहा हूं जब श्रीधर स्वामी ने यहां पर शिव की स्तुति लिखी

455
00:34:51,920 --> 00:34:56,040
तो इसकन ने क्यों नहीं लिखी अगर नहीं लिखी तो फिर

456
00:34:56,040 --> 00:35:00,320
वो लिखने वाले को क्या माना दूसरी बात दूसरी

457
00:35:00,320 --> 00:35:04,400
बात दूसरी बात श्रीधर स्वामी की जो शिक्षा

458
00:35:04,400 --> 00:35:08,600
है वो आप कैसे प्राप्त कर रहे हैं सीदर स्वामी

459
00:35:08,600 --> 00:35:12,600
की जो प्रामाणिक अध्ययन है वह आप कैसे चैलेंज कर रहे हैं कि वहां पर उन्होंने

460
00:35:12,600 --> 00:35:13,100
यह नहीं

461
00:35:12,920 --> 00:35:18,920
लिखा है जब वह स्पष्ट लिख रहे हैं कि शिव की स्तुति यहां हो रही

462
00:35:19,160 --> 00:35:23,520
है ठीक है तो यह टॉपिक आपका हो गया मैं कुछ

463
00:35:23,520 --> 00:35:29,520
बोलू तो आपको इस टॉपिक पर आगे नहीं बढ़ना है

464
00:35:30,400 --> 00:35:35,200
हम लोग आपका टॉपिक ले ले आपका क्वेश्चन ले ले

465
00:35:35,200 --> 00:35:39,440
अब कुछ हेलो मैं बोल रहा हूं

466
00:35:39,440 --> 00:35:43,560
हम लोग आपका क्वेश्चन लेले मेरी आवाज आ

467
00:35:43,560 --> 00:35:49,000
रही है जी पहले मैं य हां अभी आ रही

468
00:35:49,000 --> 00:35:53,000
है आ रही है हेलो तो मैं पूछ रहा हूं आपको इस टॉपिक

469
00:35:53,000 --> 00:35:57,960
प आगे नहीं बढ़ना है मैं आपका क्वेश्चन ले लू अब जी

470
00:35:57,960 --> 00:36:01,960
तो पहले मैं एक चीज क्लियर कर जो गीता है भगवत गीता आप क रहे

471
00:36:01,960 --> 00:36:06,560
बत कंप्रोमाइज है तो एक्चुअली वो भक्ति योग के लिए है वो

472
00:36:06,560 --> 00:36:11,160
उन लोगों के लिए भक्तियोग फलो कर वो इसलिए इधर उधर नहीं

473
00:36:11,160 --> 00:36:15,240
उसम सनातन सत्य नहीं है सनातन

474
00:36:15,240 --> 00:36:19,520
का समते क सना नहीं है आप

475
00:36:19,520 --> 00:36:23,640
क्या जितना चैप्टर खोलेंगे मैं वहा काउंटर करता जाऊंगा

476
00:36:23,640 --> 00:36:29,200
या तो खोलिए मत अब मैं पूछ रहा हूं सनातन सत्य है गीता में या नहीं

477
00:36:29,200 --> 00:36:33,240
हां बिल्कुल है अच्छा आपने अभी एक परिस्थिति बताई कि

478
00:36:33,240 --> 00:36:37,920
वो उन लोगों के लिए जो भक्ति में होते हैं

479
00:36:37,920 --> 00:36:41,960
जी तो फिर सनातन सत्य कहां रह गया जो किसी भी

480
00:36:41,960 --> 00:36:46,440
देश काल परिस्थिति से प्रभावित ना हो उसका नाम सनातन है

481
00:36:46,440 --> 00:36:50,440
ठीक है तो आप ये मानते क नित्य स्थाई ना

482
00:36:50,440 --> 00:36:54,520
वो वो अकार सत्य होता है ना वो भक्ति के रेफरेंस से होता है ना

483
00:36:54,520 --> 00:36:58,920
वो ज्ञान के रेफरेंस से होता है वो सत्य होता है तो मानते

484
00:36:58,920 --> 00:37:02,920
सतयुग और कलयुग दोनों ही सेम है अलग-अलग

485
00:37:02,920 --> 00:37:07,160
है मगर जो अलग-अलग है उसकी व्यवस्था पहले ही कर दी गई है जी अलग

486
00:37:07,160 --> 00:37:11,560
अलग पह कर दी गई है ना कलयुग में क्या रिकमेंड किया गया कलयुग में क्या रिकमेंड

487
00:37:11,560 --> 00:37:15,840
किया गया है सब कुछ रिकमेंड किया गया है आप

488
00:37:15,840 --> 00:37:19,880
य बताइए अच्छा इसको इसको थोड़ा वो कर लेते खोल लेते

489
00:37:19,880 --> 00:37:25,040
हैं इस बात को क्या भक्ति के कारण उसमें ट्रांसलेशन को बदला गया

490
00:37:25,040 --> 00:37:29,120
है कुछ जगहो प कहीं पर ये नियम कहीं पर

491
00:37:29,120 --> 00:37:33,240
ये सिद्धांत है कि भक्ति करा भक्ति के लिए आप जो है संस्कृत

492
00:37:33,240 --> 00:37:37,920
का जो अर्थ हो जो हिंदी में लिखा जाता हो उसको बदल दीजिए

493
00:37:37,920 --> 00:37:42,800
संस्कृत अर्थ चेंज नहीं किया गया है

494
00:37:42,800 --> 00:37:44,320
लेे मैं दिखाऊ

495
00:37:44,320 --> 00:37:48,680
आपको अगर आप किसी और की अगर आप किसी और की टीका लेंगे

496
00:37:48,680 --> 00:37:52,960
आप पहले अगर आप किसी और की टीका लेंगे तो उसम जो शब्द मैं आपसे

497
00:37:52,960 --> 00:37:57,560
ही मैं आपसे ही यहां पर मनवा लूंगा कि अर्थ चेंज किया है

498
00:37:57,560 --> 00:38:02,400
मैं आपसे ही मनवा लूंगा अभी मैं उस टॉपिक प ट करने आया नहीं

499
00:38:02,400 --> 00:38:06,640
क्लेरिफिकेशन दे रहा था देखिए तरीका ये होता है तरीका ये होता है जैसे भक्ति

500
00:38:06,640 --> 00:38:10,760
के उसम लिखना है भाव में ठीक है तो कमेंट्री में लिखना चाहिए ना

501
00:38:10,760 --> 00:38:14,760
जब हम अनुवाद कर रहे तो अनुवाद ना उसमें अनुवाद में

502
00:38:14,760 --> 00:38:19,280
भी चेंज है ना दिक्कत ये है प्रॉब्लम ये है

503
00:38:19,280 --> 00:38:23,280
ठी उसमें ट्रांसलेशन भी चेंज है श्लोक सेम

504
00:38:23,280 --> 00:38:27,560
है श्लोक सेम है श्लोक का ट्रांसलेशन बदल

505
00:38:27,560 --> 00:38:31,640
चर अगर व की जगह भावना का शब्द किया गया है तो

506
00:38:31,640 --> 00:38:35,760
उसम मुझे नहीं लगता कि कोई दिक्कत है आप देखिए बात ये हो रही है

507
00:38:35,760 --> 00:38:39,880
कि ट्रांसलेशन क्या कोई यह कहता है कोई सनातन सिद्धांत

508
00:38:39,880 --> 00:38:44,800
के भक्ति योग में लाने के लिए आप अनुवाद को बदल दो जबकि

509
00:38:44,800 --> 00:38:48,840
भगवत गीता की भूमिका में जो प्रभुपाद जी है वह यह लिख रहे

510
00:38:48,840 --> 00:38:52,840
हैं कि एक गुरु का काम होता है भगवान की बात

511
00:38:52,840 --> 00:38:56,960
को यहां से उठाए और बिल्कुल उसमें कोई भावना मिलाए हुए

512
00:38:56,960 --> 00:38:59,400
और आगे के पास कर दे क्योंकि जब

513
00:38:59,400 --> 00:39:03,640
भी कोई भक्ति की भावना के नाम पर एक मिनट मुझे पूरा कर ले

514
00:39:03,640 --> 00:39:07,680
दीजिए जब भी कोई भक्ति की भावना के नाम पर या अन्य किसी

515
00:39:07,680 --> 00:39:11,720
कारण को बताते हुए उसमें बदलाव करेगा तो सबको

516
00:39:11,720 --> 00:39:16,280
मौका मिल जाएगा बदलाव करने का रामपाल भी खड़े हो जाएंगे और वो कहेंगे

517
00:39:16,280 --> 00:39:20,640
हमने अपनी भावना भर दी कलयुग के अनुसार हमने अपनी भक्ति भर दी

518
00:39:20,640 --> 00:39:24,640
तो ट्रांसलेशन को बदलने का अधिकार प्रभुपाद जी ने कहा नहीं माना

519
00:39:24,640 --> 00:39:29,320
उन्होंने अब मैं आपको खोल के दिखाऊ ट्रांसलेशन कितना उसम

520
00:39:29,320 --> 00:39:33,320
नहीं अभी उसकी जरूरत नहीं है आप मेरे क्वेश्चन ले लीजिए यहां तक कि यहां तक

521
00:39:33,320 --> 00:39:37,440
कि प्रभुपाद जी ने जो लिख दिया उ उनके लिखे हुए को

522
00:39:37,440 --> 00:39:41,560
भी बदला जा रहा है उसको भी चेंज कर दिया

523
00:39:41,560 --> 00:39:46,760
कितना चेंज है फिर उसका नाम एज इट इज है

524
00:39:46,760 --> 00:39:50,960
तो पहली बात तो यह भगवत गीता जो प्रभुपाद ने लिखी वो आ रही है परंपरा

525
00:39:50,960 --> 00:39:54,960
से तो बलदेव विद्याभूषण ने जो गीता लिख नहीं होई आपने वो

526
00:39:54,960 --> 00:39:59,200
मैटर छोड़ दिया है बलाल आपको याद दिला दूं आपने वो मैटर क्लोज करवा दिया

527
00:39:59,200 --> 00:40:03,680
परंपरा आपकी सिद्ध नहीं हो रही जब चैतन्य महाप्रभु

528
00:40:03,680 --> 00:40:07,800
को भागवत पढ़ने के लिए जाना पड़ रहा है शंकराचार्य परंपरा वालो के

529
00:40:07,800 --> 00:40:11,800
एक मिनट जब जब चैतन्य महाप्रभु को भागवत पढ़ने के

530
00:40:11,800 --> 00:40:14,720
लिए जाना पड़ रहा है श्रीधर स्वामी के पास

531
00:40:14,720 --> 00:40:19,120
तो मधवा चार्य जी मधुवा चार्य जी उनके परमाचार्य कैसे हो गए

532
00:40:19,120 --> 00:40:23,160
उनकी परंपरा मधवा चार्य के पास कैसे चली गई जब आपका परंपरा प्राप्त ज्ञान है तो

533
00:40:23,160 --> 00:40:27,480
श्रीधर स्वामी के पास क्यों जा रहे हो मधवा चार्य के पास जाओ उनसे

534
00:40:27,480 --> 00:40:31,480
वाले आचार्य के पास जो भागवत समझने पहली बात यह

535
00:40:31,480 --> 00:40:35,480
चैतन्य महाप्रभु स्वयं परमेश्वर है तो उनको जरूरत नहीं है कि वो

536
00:40:35,480 --> 00:40:40,000
किसी और से ज्ञान ले लीला करने के लिए किसी

537
00:40:40,000 --> 00:40:44,280
यानी कि उन्होंने जो यह कहा है चैतन्य महाप्रभु ने व झूठ कहा

538
00:40:44,280 --> 00:40:49,880
है कि मैं उन्हें जगतगुरु मानता हूं

539
00:40:49,880 --> 00:40:54,120
किसको उन्होंने झूठ बोला है ना लीला की है ना लीला में झूठ बोला

540
00:40:54,120 --> 00:40:58,200
उन्होंने वास्तविकता में जगतगुरु नहीं मानते उन्हे कृष्ण ने

541
00:40:58,200 --> 00:41:02,880
भी तो किया हैय लीला में लीला पु भगवान कृष्ण तो लीला पुरुषोत्तम है

542
00:41:02,880 --> 00:41:07,840
ठीक है जी हा वो भी लीला पुरुषोत्तम थे

543
00:41:07,840 --> 00:41:11,840
कर देते कृष्ण ही कृष्ण ही है जो कष्ण ही

544
00:41:11,840 --> 00:41:16,000
जब राम बनते है तो धर्म कहलाते हैं कृष्ण ही जब राम बनते हैं तो धर्म

545
00:41:16,000 --> 00:41:20,320
कहलाते हैं सत्य प्रतिज्ञ कहलाते हैं रामो दना भाष कहलाते

546
00:41:20,320 --> 00:41:24,440
हैं तो ज कृ महा के रूप में कुछ कर रहे हैं अगर

547
00:41:24,440 --> 00:41:28,560
वो अपना अगर अपनी परंपरा जन वो वाक्य झूटा

548
00:41:28,560 --> 00:41:29,800
है क्या ये बताइए

549
00:41:29,800 --> 00:41:33,920
मुझे गलत है क्या बकुल नहीं बिल्कुल भी तो क्या है वो

550
00:41:33,920 --> 00:41:37,920
क्या है वो देखिए या तो आप उस टॉपिक को छोड़ दीजिए अगर आपको

551
00:41:37,920 --> 00:41:42,120
जानकारी नहीं है मैं फिर आपको याद दिला रहा हूं या फिर अगर जाएंगे तो उसम

552
00:41:42,120 --> 00:41:46,280
हमें खोलना पड़ेगा एक एक तार निकालेंगे उसका वही कह रहा हूं मैं उस टॉपिक

553
00:41:46,280 --> 00:41:50,400
को छोड़िए मेरे क्वेश्चन लीजिए वो कह रहा तो फिर आप ये क्लेम मत करिए अपनी

554
00:41:50,400 --> 00:41:54,920
बात को सिद्ध करने के लिए परंपरा से आ रही है क्योंकि वो टॉपिक आपका छूटा हुआ

555
00:41:54,920 --> 00:41:58,920
है ठीक है फिर आप भी उसको आगे मत निकालिए ना आप भी निकाल रहे हो मैं

556
00:41:58,920 --> 00:42:02,920
क निकाल रहा हू मैं तो आपसे कहने लगा क्वे कर आप जब मैंने आपको आपका

557
00:42:02,920 --> 00:42:06,920
क्वेश्चन करने को कहा तो आपने उसको डिफेंड किया जो अभी भगवत गीता इत्यादि की

558
00:42:06,920 --> 00:42:11,400
बात हुई आपने उसको डिफेंड करने के लिए परंपरा लाई कि वो परंपरा से आ रही है जब मैं परंपरा

559
00:42:11,400 --> 00:42:15,640
जा रहा आपकी जो भागवत है आपके अकॉर्डिंग व परंपरा

560
00:42:15,640 --> 00:42:19,720
से नहीं आई है जिस परंपरा को आप प्रामाणिक बताते हो उसी से नहीं आई है

561
00:42:19,720 --> 00:42:24,120
आपकी भागवत शंकराचार्य से आ रही है तो आप कैसे

562
00:42:24,120 --> 00:42:28,520
कह नहीं है लॉजिक अच्छा है खैर आप आगे बढ़

563
00:42:28,520 --> 00:42:32,560
अभी हां नहीं नहीं आपने क्या बोला अभी उसको जरा रिसाइट करिए

564
00:42:32,560 --> 00:42:36,880
क्या बोला नहीं कुछ नहीं अभी रहने दीजिए अब नहीं तो वो और आगे जाएगा

565
00:42:36,880 --> 00:42:41,240
फिर वो बात आगे लंबी चली जाएगी चलिए

566
00:42:41,240 --> 00:42:45,200
आप बोलिए आपका क्या प्रश्न है तो देखिए

567
00:42:45,200 --> 00:42:49,280
सबसे पहले तो मेरा पहला क्वेश्चन यह है कि अवतारवाद के बारे में आपकी

568
00:42:49,280 --> 00:42:53,520
धारणा क्या है किस परिपेक्ष

569
00:42:53,520 --> 00:42:57,960
से पूछ रहे हैं होता है अवतार कि नहीं होता है हां

570
00:42:57,960 --> 00:43:03,960
नहीं अवतार होता है और अगर होता है तो क्या होता

571
00:43:04,320 --> 00:43:08,360
है यह धारणा यह मतलब हमारी

572
00:43:08,360 --> 00:43:12,360
कही हुई किसी बात को आप सीधे काउंटर करिए य आप जो इस तरह

573
00:43:12,360 --> 00:43:16,560
का होता है ना वहां क्या लिखा है इसके बारे में आप क्या जानते हैं यह नहीं हमने

574
00:43:16,560 --> 00:43:21,240
कुछ बात य पर कही है आप उसको क्लेम करिए ये गलत है

575
00:43:21,240 --> 00:43:25,400
जी वही तो मैं वही कोशिश कर रहा हूं पहले आप एक बार अपना उस

576
00:43:25,400 --> 00:43:29,440
मत रखिए कि आप क्या कहना चा उस उस टॉपिक आप क्या विचार भवान

577
00:43:29,440 --> 00:43:33,440
भगवान जो है भगवान जो है व्यवहार में ना आ सकने वाला रूप है जो

578
00:43:33,440 --> 00:43:38,080
भगवान का भगवान सा भक्तो के उद्धार के लिए

579
00:43:38,080 --> 00:43:44,080
भाई मेरी आवाज आ रही है या नहीं आ रही है सभी

580
00:43:44,960 --> 00:43:50,960
को आप एक बार रिपीट

581
00:43:51,880 --> 00:43:56,000
करेंगे आ रही है अभी आ रही है आपको आवाज

582
00:43:56,000 --> 00:44:02,000
आपका नेटवर्क थोड़ा

583
00:44:03,680 --> 00:44:07,800
आपने क्या लास्ट लाइन य बोली थी क्या वह अद्वैत वादी नहीं है ऐसा कुछ

584
00:44:07,800 --> 00:44:11,360
बोला था क्या

585
00:44:11,360 --> 00:44:15,360
आपने हेलो आपकी आवाज नहीं आ रही भाई

586
00:44:15,360 --> 00:44:19,120
साहब अभिषेक

587
00:44:19,120 --> 00:44:23,400
जी हां मेरी आवाज क्लियर आ रही है ठीक है ठीक

588
00:44:23,400 --> 00:44:27,520
है तो स्कोन को लेकर के मैंने एक अपनी

589
00:44:27,520 --> 00:44:31,680
एक उसमें संक्षिप्त दिया है आप लोग इसको बना सकते हैं रील

590
00:44:31,680 --> 00:44:35,840
के रूप में इसकन यह कहता है कि हम प्रभुपाद जी के फॉलोअर है

591
00:44:35,840 --> 00:44:39,880
मगर उनकी लिखी हुई गीता में बदलाव हो रहा है इसलिए व प्रभुपाद जी के फॉलोअर सिद्ध नहीं

592
00:44:39,880 --> 00:44:43,960
होते इसकन यह क्लेम करता है कि वह चैतन्य महाप्रभु का फॉलोअर

593
00:44:43,960 --> 00:44:47,960
है मगर क्योंकि चैतन्य महाप्रभु ने श्रीधरी टीका पढ़ा और वह जो आज टीका पढ़

594
00:44:47,960 --> 00:44:51,960
रहे हैं वो श्रीधरी टीका के बहुत सारे अगेंस्ट है तो वो चेतन

595
00:44:51,960 --> 00:44:56,000
महाप्रभु के फॉलोअर सिद्ध नहीं होते फिर स्कोन का एक क्लेम है

596
00:44:56,000 --> 00:45:00,120
कि मधवा चार्य जी के के परंपरा में आते हैं मगर क्योंकि वो खुद कह

597
00:45:00,120 --> 00:45:04,200
रहा है कि हम भागवत पढ़ने जाते हैं श्रीधर स्वामी के पास जो कि उनके अनुसार

598
00:45:04,200 --> 00:45:08,320
शुद्ध द्वैत वाले थे अद्वैत नहीं थे मगर फिर भी वो मधवा चार्य जी की परंपरा वाले सिद्ध

599
00:45:08,320 --> 00:45:12,400
नहीं होते फिर स्कोन ये कहता है कि हम जो है

600
00:45:12,400 --> 00:45:16,440
भगवान कृष्ण के भक्त है ये क्लेम करता है मगर भगवान कृष्ण को

601
00:45:16,440 --> 00:45:20,520
अल्लाह से जोड़ कर के बाधित ईश्वर से जोड़ कर के वो कृष्ण के भक्त सिद्ध

602
00:45:20,520 --> 00:45:24,760
नहीं होते और सब कुछ कर सकने वाला ईश्वर ना मानते हुए वो ईश्वर

603
00:45:24,760 --> 00:45:28,800
को मानने वाले सिद्ध नहीं होते तो ऐसे बहुत सारी एक पंक्ति में

604
00:45:28,800 --> 00:45:32,840
अगर कहेंगे तो बहुत सारी चीजें आ जाएंगी वह अपनी भगवत गीता को एस इट इज कहता

605
00:45:32,840 --> 00:45:34,120
है मगर जब वो ट्रांसलेशन

606
00:45:34,120 --> 00:45:38,200
में आता है तो भक्ति भाव के नाम पर वो कुछ भी लिख देता है क्योंकि व भक्ति

607
00:45:38,200 --> 00:45:42,400
भाव से आ रही है पहले कहता है प्रामाणिक है परंपरा से आ रही है मगर यहां पर हमने भक्ति

608
00:45:42,400 --> 00:45:46,760
भाव से लिख दिया तो भाई वो वो नहीं है ना जो परंपरा से आया भक्ति

609
00:45:46,760 --> 00:45:50,920
भाव से लिख दिया तो ट्रांसलेशन को भी बदल देता है इसलिए उसकी जो भगवत गीता

610
00:45:50,920 --> 00:45:55,040
है व ए इट सिद्ध नहीं होती तो सिद्ध क्या होता है प्रश्न

611
00:45:55,040 --> 00:45:59,040
य र जाता मेरी बात सुनिए हरे कृष्णा स अभी

612
00:45:59,040 --> 00:46:03,080
नेट लास्ट लास्ट एक लास्ट वर्ड और है वो क्या है कि

613
00:46:03,080 --> 00:46:07,360
वो कहता है कि हम वैष्णव है मगर 2.2 में ये भी लिख देता है कि भगवान नारायण

614
00:46:07,360 --> 00:46:11,840
भी कृष्ण के सामने कुछ नहीं है तो जब वो विष्णु को मानने वाले नहीं हुए सर्वोच्च

615
00:46:11,840 --> 00:46:16,320
मानने वाले नहीं हुए तो वह वैष्णव भी सिद्ध नहीं होता है

616
00:46:16,320 --> 00:46:21,080
यह चीज है अब आप ना क्वेश्चन करिए आप चले गए थे तो मैंने कहा कि यहां पर बोल

617
00:46:21,080 --> 00:46:27,080
लू तो पहला था कि अवतारवाद की घना पहले आप उस पर आइए

618
00:46:27,760 --> 00:46:31,760
मैंने कहा ना आप हमारी किसी कही हुई बात को काउंटर कर दीजिए तो थोड़ा छोटा

619
00:46:31,760 --> 00:46:37,760
हो जाएगा ना अवतारवाद को मैं बताने लगूंगा हमारी धारणा क्या बहुत लंबा

620
00:46:37,960 --> 00:46:42,160
है मानते हो अवतार होता है कि नहीं होता बिल्कुल होता है

621
00:46:42,160 --> 00:46:46,360
बिल्कुल होता है मानते हैं और अवतार अगर है

622
00:46:46,360 --> 00:46:51,280
तो व किस तरीके से है ला परम ब्रम स्वयं आते हैं अवतार

623
00:46:51,280 --> 00:46:55,480
लेके अवतार जो है वो है कि

624
00:46:55,480 --> 00:46:59,520
यह संसार जो दिख रहा है वस्तुतः तो

625
00:46:59,520 --> 00:47:03,560
ये भी भगवान ही दिख रहे हैं संसार के रूप में मगर

626
00:47:03,560 --> 00:47:08,200
ये जो भगवान दिख रहे हैं यह सावरण ब्रह्म है इस

627
00:47:08,200 --> 00:47:12,240
ब्रह्म के ब्रह्म जो हमें ये दिख रहा है कुर्सी टीवी फ्रीज कूलर इत्यादि के

628
00:47:12,240 --> 00:47:16,400
रूप में ये कपड़े पहने हुए हैं सावरण ब्रह्म है कपड़े

629
00:47:16,400 --> 00:47:20,880
कौन से हैं माया के कपड़े माया से ढका हुआ ब्रह्म है ये

630
00:47:20,880 --> 00:47:25,080
जो टीवी फ्रीज कुर्सी ये सब हमें दिख रहा है यह माया से ढका

631
00:47:25,080 --> 00:47:29,440
हुआ ब्रह्म है मगर माया रूप चादर में ही एक

632
00:47:29,440 --> 00:47:33,920
चीरा लगता है उस आकृति का चीरा

633
00:47:33,920 --> 00:47:38,160
जिन आकृतियों को हम भगवान राम कृष्ण आदि के रूप में जानते हैं उस

634
00:47:38,160 --> 00:47:42,360
चीरे से दिखाई देने वाला जो ईश्वर होता है वह निरा वण ब्रह्म हो जाता है

635
00:47:42,360 --> 00:47:43,000
निरा वण

636
00:47:43,000 --> 00:47:47,000
ब्रह्म उसी को भगवान का अवतार कहते हैं जी तो इससे क्वेश्चन

637
00:47:47,000 --> 00:47:51,080
निकला कि अगर आप कह रहे हो कि ब्रह्म को माया ने

638
00:47:51,080 --> 00:47:55,840
ढका है तो क्या ब्रह्म इतना शक्तिशाली नहीं है कि ब्रह्म को माया ने ढक

639
00:47:55,840 --> 00:48:00,000
लिया पहली बात य है कि ब्रह्म की सहमति से हो रहा

640
00:48:00,000 --> 00:48:04,360
है उसकी उससे तो ब्रह्म की शक्ति का कोई ही नहीं है अगर कोई

641
00:48:04,360 --> 00:48:08,400
अगर कोई चाहता है जानबूझकर ऐसा करना दूसरी बात

642
00:48:08,400 --> 00:48:12,600
अगर मान भी लेते कि ऐसा हो रहा है और वो शक्ति के बाहर है दुर्जन तोष नय

643
00:48:12,600 --> 00:48:16,720
तो यह पार मार्क धरातल की बात है रिक धरातल की बात है ही नहीं

644
00:48:16,720 --> 00:48:21,600
तो उसके आधार पर हम उस तो

645
00:48:21,600 --> 00:48:25,600
आपके जिस रूप में आप ईश्वर को ित कर रहे मगर जिस रूप में

646
00:48:25,600 --> 00:48:29,960
आप ईश्वर को उसम वो व्यवहार में ही हो जाता है बाधित

647
00:48:29,960 --> 00:48:34,080
जैसे कि आपने कहा कि भगवान कृष्ण ही शिव बनते हैं मगर

648
00:48:34,080 --> 00:48:38,720
व शिव से कृष्ण नहीं बन पा रहे व्यवहारिक स्वरूप हो गया उनका व्यवहार में बाधित हो रहे

649
00:48:38,720 --> 00:48:42,920
हैं व शिव बनने के बाद वास व शिव के रूप में आते

650
00:48:42,920 --> 00:48:47,120
ही वह जो है बा देते यह आप कह रहे हो सब

651
00:48:47,120 --> 00:48:51,440
कुछ कर सकने वाले नहीं है मैं यह कह रहा हूं

652
00:48:51,440 --> 00:48:57,040
कि जब ब्रह्म है और माया अलग नहीं

653
00:48:57,040 --> 00:48:58,040
और ब्र अलग नहीं है

654
00:48:58,040 --> 00:49:02,200
आप तो क सभी कुछ ब्रम ही है तो माया और ब्र अलग नहीं

655
00:49:02,200 --> 00:49:06,560
ठीक अगर माया ही ब्र है ब्रहम ही माया है तो फिर दोनों

656
00:49:06,560 --> 00:49:11,800
अगर एक दूसरे को एक दूसरे को कवर किए हुए यह मतलब कुछ समझ नहीं

657
00:49:11,800 --> 00:49:15,920
आया तो इसके लिए आप हमारी क्लासे में आ सकते हैं समझने के लिए हमने

658
00:49:15,920 --> 00:49:19,960
आपको सिद्धांत बता दिया उसको काटिए समझ ना आने से कुछ नहीं

659
00:49:19,960 --> 00:49:24,440
होगा आप उसको काटिए हमने आपको वो भी बताया

660
00:49:24,440 --> 00:49:28,520
कि क्या जब आप वीडियो गेम खे तो क्या वीडियो गेम के

661
00:49:28,520 --> 00:49:32,520
अधीन होते हैं आप जब चाहे तब उसके

662
00:49:32,520 --> 00:49:36,680
स्वामी नहीं होते उसका प्लग निकाल सकने वाले ठीक

663
00:49:36,680 --> 00:49:40,680
है लेकिन जब हम मूवी देखते हैं मान लेते हैं अगर हम मूवी देख रहे हैं

664
00:49:40,680 --> 00:49:44,840
तो अगर हम मवी देख रहे तो क्या हम व इमोशन आते हैं मूवी को देख

665
00:49:44,840 --> 00:49:48,840
के व जो मोशन आने का र वही तो है वही तो

666
00:49:48,840 --> 00:49:52,880
ब्रह्म का व रूप है जो इसम फसा जो हमारी ब्रह्म की चेतना जो हमारे आपके रूप में

667
00:49:52,880 --> 00:49:57,960
फसी हुई है मगर एट द सेम टाइम

668
00:49:57,960 --> 00:50:01,960
उ बाहर भी आ सकता है एट द सेम टाइम उसका इतना

669
00:50:01,960 --> 00:50:06,120
अधिकार है कि ब्रह्म वहां से उठ कर के बाहर भी आ सकता है वो उसकी इच्छा

670
00:50:06,120 --> 00:50:10,280
है कि उसने ऐसा किया हुआ है ठीक है तो अगर

671
00:50:10,280 --> 00:50:13,200
अधीन होता तो उसके हाथ में अगर वो अधीन

672
00:50:13,200 --> 00:50:17,840
होता तो उसके हाथ में यह सब कुछ नष्ट करने का वो नहीं होता

673
00:50:17,840 --> 00:50:22,160
अधिकार अब मैं इसको दूसरे तरीके से आपको समझाता हूं आप एक बात

674
00:50:22,160 --> 00:50:26,240
बताइए कि इसकन के अनुसार जो है मोक्ष

675
00:50:26,240 --> 00:50:29,600
क्या है

676
00:50:29,600 --> 00:50:33,800
मोक्ष भगवान के धाम में जाना इस संसार

677
00:50:33,800 --> 00:50:38,960
के जो जन्म मृत्यु का चक्कर है इससे मुक्त होना ही मोक्ष है

678
00:50:38,960 --> 00:50:43,080
बेसिकली जन्म और मरण के उससे मुक्त होना ही मोक्ष है भक्ति

679
00:50:43,080 --> 00:50:47,400
करने से आपको क्या मिलता है भक्ति करने से बेसिकली

680
00:50:47,400 --> 00:50:51,600
भक्ति करने के कई रीजन हो सकते हैं कुछ भी भौतिक रीजन भी हो सकते हैं आध्यात्मिक

681
00:50:51,600 --> 00:50:55,640
मेन जो पर परम चीज मानी गई है वो क्या मिलता है भगवान

682
00:50:55,640 --> 00:50:59,760
की सेवा भगवान की सेवा तो मुझे थोड़ा

683
00:50:59,760 --> 00:51:04,000
मतलब आपको यह मिलता है कि जब आप वहा बैकुंठ में जाएंगे तो भगवान की सेवा करेंगे वही

684
00:51:04,000 --> 00:51:08,000
आपका मोक्ष है वैकुंठ जाना ही नहीं है पॉइंट

685
00:51:08,000 --> 00:51:12,080
यही है कि अगर हम यहां पर भी हम मोक्ष के अगर हम इसन में देखे तो हमारे य

686
00:51:12,080 --> 00:51:16,080
तो मोक्ष को ही नहीं माना जातारे ठीक है भाण बात है मगर

687
00:51:16,080 --> 00:51:20,120
गोलोक गोलोक जाना है ना गोलोक की बात होती है कि नहीं परम मोक्ष परम

688
00:51:20,120 --> 00:51:24,160
शांति कहां पर है गोलोक में है ना जी

689
00:51:24,160 --> 00:51:28,280
परम शांति गोलोक में है तो गोलोक में आपको क्या मिलेगा जो आपको परम शांति

690
00:51:28,280 --> 00:51:32,400
प्रदान करेगा परम शांति एक्चुअली वो लोग में नहीं है अगर

691
00:51:32,400 --> 00:51:36,560
भगवान की सेवा में अगर कोई इंसान है तो उसको वही परम शांति मिल रही है

692
00:51:36,560 --> 00:51:40,800
वह चाहे यहां हो या कहीं और अरे भाई

693
00:51:40,800 --> 00:51:44,800
गोलोक गोलोक जो है नित्य धाम है कि नहीं ये जो जहां पर वो है

694
00:51:44,800 --> 00:51:49,960
वो नित्य नहीं है ना यहां की शांति नित नहीं है

695
00:51:49,960 --> 00:51:53,960
ना यहां की शांति नित्य नहीं है ना तो गोलोक

696
00:51:53,960 --> 00:51:58,160
नित्य है ना वहा की शांति तो नि चा

697
00:51:58,160 --> 00:52:02,920
ठीक है तो भगवान की हा

698
00:52:02,920 --> 00:52:07,200
तो भगवान की भक्ति करने से अंतत गत्वा आपको मिलता है

699
00:52:07,200 --> 00:52:11,640
भगवान की सेवा करने का अवसर नित्य सुख है

700
00:52:11,640 --> 00:52:15,800
ना ठीक है अब मुझे बताइए कि सेवा को थोड़ा

701
00:52:15,800 --> 00:52:19,880
सा प्रैक्टिकल करिए कि वहां पर वो सेवा क्या कर रहे होते हैं जो उसको नित्य सुख

702
00:52:19,880 --> 00:52:23,960
मिलता है जैसे भगवान के पैर दबाना या भगवान के लिए नाचना या क्या

703
00:52:23,960 --> 00:52:28,120
कर रहे होते हैं वहां पर जो नित्य सुख तो यहां

704
00:52:28,120 --> 00:52:32,240
पे कहा जाएगा कि भगवान को वैसे तो किसी भी सेवा की जरूरत नहीं है

705
00:52:32,240 --> 00:52:36,280
ईश्वर को नहीं नहीं नहीं वो नहीं कह रहा उनको आवश्यकता नहीं है आपकी वो है

706
00:52:36,280 --> 00:52:40,280
कि आप सेवा करो तो अभी मुझे आप बताओ वो सेवा क्या जैसे क्या होती

707
00:52:40,280 --> 00:52:43,440
है पैर दबाना या गुदगुदी करना

708
00:52:43,440 --> 00:52:47,720
भगवान को आनंद देना किसी प्रकार से वो क्या होती है बहुत अलग-अलग

709
00:52:47,720 --> 00:52:51,920
तरीके की सेवाएं होती है और मतलब उसम तो शास्त्रों में बहुत ही

710
00:52:51,920 --> 00:52:56,560
अलग तरीके से कोई भी एक दो बता दीजिए कोई भी एक दो बता दीजिए

711
00:52:56,560 --> 00:53:00,800
सेवा है भगवान को जिस भी चीज से खुशी होती है हर चीज से ला

712
00:53:00,800 --> 00:53:05,000
जो भी चीज भगवान को अच्छी लग रही है जिस भी चीज से भगवान को प्रसन्नता हो रही है

713
00:53:05,000 --> 00:53:09,040
उस चीज से जैसे कोई एक उदाहरण के लिए बोल दीजिए कोई एक उदाहरण के लिए

714
00:53:09,040 --> 00:53:13,040
बोल दीजिए जैसे कि जो गोलोक धाम की मंजिया होती

715
00:53:13,040 --> 00:53:17,200
है वो भगवान के लिए भगवान का श्रृंगार करती है और एट द

716
00:53:17,200 --> 00:53:21,320
सेम टाइम जब या एक मिनट एक मिनट अब बस इतना काफी है श्रृंगार बोल

717
00:53:21,320 --> 00:53:26,000
श्रृंगार कर रही है यानी कि भगवान बैठे हैं और फिर हमने श्रृंगार किया

718
00:53:26,000 --> 00:53:30,840
है ना ठीक है हम श्रृंगार किया तो श्रृंगार

719
00:53:30,840 --> 00:53:34,880
लगातार चलता रहता है या जैसे हमने ये किया

720
00:53:34,880 --> 00:53:39,120
उसके बाद एक आज सजा दिया भगवान को फिर कल सजाएंगे ऐसे होता है

721
00:53:39,120 --> 00:53:43,440
या जन्म जन्मांतर त अलग-अलग टाइम

722
00:53:43,440 --> 00:53:47,560
पे अलग-अलग भाई साहब मैं ये पूछ रहा हूं जैसे आप श्रृंगार है तो करते ही चले

723
00:53:47,560 --> 00:53:51,880
जा रहे हैं श्रृंगार को या रुक जाते हैं

724
00:53:51,880 --> 00:53:55,880
दोबारा से अगले दिन करते हैं रुक जाते रुक जाते हैं

725
00:53:55,880 --> 00:53:58,840
तो जब तो हमने यह कहा कि हमको श्रृंगार

726
00:53:58,840 --> 00:54:02,840
करने से यानी सेवा करने से सुख की प्राप्ति होती है ठीक

727
00:54:02,840 --> 00:54:08,280
है अब हमने जब वहां पर आज श्रृंगार भगवान का कर दिया तो हम रुक

728
00:54:08,280 --> 00:54:12,520
गए तो ये तो सुख नित्य नहीं रहा नहीं

729
00:54:12,520 --> 00:54:16,800
वो नित्य कैसे नहीं है उसके बाद कोई दूसरी सेवा होगी

730
00:54:16,800 --> 00:54:20,920
या यानी जैसे मैंने य जैसे मैंने आईलाइनर लगाया मान

731
00:54:20,920 --> 00:54:25,520
के चलिए मैंने आईलाइनर लगाया भगवान के या टीका लगा दिया भगवान के मान लीजिए

732
00:54:25,520 --> 00:54:29,520
तो टीका लगा ने के बा य से मैं दूसरी जगह जब तक जाऊंगा तब तक व नित्य

733
00:54:29,520 --> 00:54:32,880
नहीं रहा बीच में रुकावट आ

734
00:54:32,880 --> 00:54:37,000
गई नहीं आई ना ये कैसे आ गई आपने कैसे मान लिया कैसे आ ग

735
00:54:37,000 --> 00:54:41,640
अगले दिन फिर श्रंगार करना है ना और ये तो भगवान का ही स्वरूप

736
00:54:41,640 --> 00:54:45,760
है नहीं सबसे बड़ा सुख सेवा है ना तो जितनी देर

737
00:54:45,760 --> 00:54:50,040
आप सेवा नहीं कर रहे उतनी देर नित्य नहीं रहा ना फिर वो जितनी

738
00:54:50,040 --> 00:54:54,200
देर आप इंतजार कर रहे सेवा करने का उतनी देर वो नित्यता कैसे

739
00:54:54,200 --> 00:54:58,200
रही तो आप यह चीज ना कि जितनी देर अगर हम सेवा नहीं

740
00:54:58,200 --> 00:55:02,280
कर रहे हैं तो उस टाइम में जो सुख मिल रहा है वो भी एक वो भी नित्य

741
00:55:02,280 --> 00:55:06,360
सुख है जितनी देर में उसका सुख सेवा अंतिम सुख नहीं है

742
00:55:06,360 --> 00:55:10,440
सिर्फ पहुंच जाना ही सुख है क्योंकि हम वहा पर

743
00:55:10,440 --> 00:55:14,840
सेवा का इंतजार करते हुए भी सुखी रह सकते हैं

744
00:55:14,840 --> 00:55:19,080
हां तो मतलब सेवा सेवा अंतिम चरम सुख नहीं

745
00:55:19,080 --> 00:55:23,080
है सेवा सुख है सेवा ही अंतिम सुख

746
00:55:23,080 --> 00:55:27,080
है है तो इसका मतलब वो जो अंतिम सुख है व बाधित हो रहा है ना

747
00:55:27,080 --> 00:55:30,760
जब हम रुक रहे हैं अगले दिन के

748
00:55:30,760 --> 00:55:34,760
लिए नहीं वो बाधित कैसे हो गया ना जब आप सेवा के लिए इंतजार

749
00:55:34,760 --> 00:55:38,920
कर रहे हो तब भी आपको उतना ही आनंद उससे ज्यादा आनंद मिल रहा है उ अगर

750
00:55:38,920 --> 00:55:43,120
देखिए इंतजार करना भी सेवा के समतुल्य है तो सेवा फिर सेवा

751
00:55:43,120 --> 00:55:47,240
और इंतजार करना अलग अलग नहीं है फिर यानी कि वहां पर पहुंच गए

752
00:55:47,240 --> 00:55:51,400
वही सुख है फि सेवा करो या ना करो वहां पर पहुंचने

753
00:55:51,400 --> 00:55:56,600
के पहले जो प्रोसेस है ना वो सबसे ज्यादा सुखमय मानी गई है

754
00:55:56,600 --> 00:56:00,680
मतलब वो जो गोलोक धाम है वो नित्य नहीं है ये नित्य यही का मान लिया

755
00:56:00,680 --> 00:56:04,840
गया नित्य है नित्य है

756
00:56:04,840 --> 00:56:08,920
तो यहां का फिर कम हो गया ना ये वाला जो मैटेरियल वर्ल्ड में रहते हुए जो

757
00:56:08,920 --> 00:56:13,000
हम कर रहे हैं वो उतना वैसा नहीं है आपने

758
00:56:13,000 --> 00:56:17,120
कैसे कह दिया कि हम मटेरियल वर्ल्ड में है जब हम भगवान की सेवा में है जब हमने

759
00:56:17,120 --> 00:56:21,120
अपना सब कुछ लाइक हम आत्म समर्पण कर चुके हैं तो फिर हम मटेरियल वर्ड

760
00:56:21,120 --> 00:56:25,360
में हमारा शरीर है मैं बता देता हूं कैसे हैं मैं बता देता हूं कैसे है

761
00:56:25,360 --> 00:56:29,720
प्यास लगती है प्यास लगती है

762
00:56:29,720 --> 00:56:30,220
जी

763
00:56:30,120 --> 00:56:34,480
ये मटेरियल वर्ल्ड है भूख लगती

764
00:56:34,480 --> 00:56:38,640
है ये मटेरियल वर्ड है सच जाते

765
00:56:38,640 --> 00:56:42,800
हैं हम ये मटेरियल वर्ड है और

766
00:56:42,800 --> 00:56:47,200
मूत्र मूत्र त्याग के लिए जाते हैं

767
00:56:47,200 --> 00:56:51,720
ये मटेरियल वर्ड है अच्छा आपकी ओर कोई जब घूंसा मारेगा

768
00:56:51,720 --> 00:56:55,720
चेहरे की ओर चाटा घुमा देगा आपको डर लगेगा कि नहीं

769
00:56:55,720 --> 00:56:59,960
लगेगा पलक झपके गी कि नहीं झपके गी

770
00:56:59,960 --> 00:57:04,360
अगर आपने खुद को आत्म समर्पण करके रखा है अगर

771
00:57:04,360 --> 00:57:08,360
करके रखा है मैं कह रहा हूं अगर आपको उतना ज्ञान है जितना शास्त्रों में

772
00:57:08,360 --> 00:57:12,520
है तो हमारे आचार्य उस लेवल तक पहुंचे हुए हैं जो कुछ

773
00:57:12,520 --> 00:57:16,520
आचार्य हुए हैं जो कि उस लेवल तक पहुंचे हुए थे कि उनको इन सभी में से

774
00:57:16,520 --> 00:57:20,560
किसी भी चीज का उनको खाना खाने का भी नहीं इसका

775
00:57:20,560 --> 00:57:24,600
मतलब जो परम मुक्ति धाम है वो जो गोलोक आप जो क्लेम करते हो

776
00:57:24,600 --> 00:57:30,600
वो नहीं है यहीं पर है

777
00:57:32,880 --> 00:57:37,040
गोलोक है तो फिर उसको परम

778
00:57:37,040 --> 00:57:41,520
की संज्ञा क्यों दी जा रही है जब यहां और वहां में कोई अंतर नहीं

779
00:57:41,520 --> 00:57:47,440
है वहां पर परम की संज्ञा क्या दी जा रही है वहां पर सेवा करने

780
00:57:47,440 --> 00:57:51,560
को वो मेरा परमधाम भगवान का परमधाम है

781
00:57:51,560 --> 00:57:55,760
वहां पर भगवान एज एंजॉयर रहते हैं अरे

782
00:57:55,760 --> 00:58:00,000
भाई मुक्ति जो परम मुक्ति आपको जो नित्य सुख मिलेगा वो गोलोक

783
00:58:00,000 --> 00:58:04,000
जाकर के मिलेगा यहां नहीं मिलेगा ऐसा अभी तक मुझे मालूम

784
00:58:04,000 --> 00:58:08,880
था मगर आप कह रहे हो कि यहां पर भी नित्य सुख मिल जाएगा मिल सकता है

785
00:58:08,880 --> 00:58:12,880
बिल्कुल य मिल तो फिर फिर यहां में और वहां में अंतर

786
00:58:12,880 --> 00:58:17,000
नहीं रहा ना फिर वो कुछ रहा क्या अगर हम

787
00:58:17,000 --> 00:58:21,720
ये कहा जाता कि अगर हम उस लेवल पर पहुंच गए हैं तो फिर

788
00:58:21,720 --> 00:58:25,800
आप पता है क्या है आप उसको तह तक पहुंचने नहीं दे

789
00:58:25,800 --> 00:58:29,800
रहे हो खामा खा के टॉपिक पर आप अटक रहे हो यह सच्चाई है कि

790
00:58:29,800 --> 00:58:33,840
स्कन जो है गोलोक को वो मानता है परमधाम मगर आप यहां पर भी उसको जो

791
00:58:33,840 --> 00:58:37,920
है मिक्स अप करके आगे नहीं बढ़ने दे रहे हो बात को आपने कैसे

792
00:58:37,920 --> 00:58:42,200
कह दिया हमने तो इसम मुझे नहीं लगता कांट्रडिक्शन होना चाहिए था मगर ठीक

793
00:58:42,200 --> 00:58:46,680
है आप करो इसी करो तो आप बताओ कि फिर अंतर क्या है दोनों

794
00:58:46,680 --> 00:58:48,000
में आप

795
00:58:48,000 --> 00:58:52,000
वही तो बात है ना आप सुनना नहीं चाह रहे हो कुछ भी आप बीच में ही सब कुछ कर रहे

796
00:58:52,000 --> 00:58:56,080
हो बोलिए बोलिए बोलिए तो

797
00:58:56,080 --> 00:59:00,200
गोलोक धाम एक्चुअली में नित्य ही है गोलोक धाम में भगवान एंजॉय करते हैं वहा

798
00:59:00,200 --> 00:59:04,320
पर उनको जरूरत नहीं है कि हम वहां पर जाए और उनको करें लेकिन हां भगवान उनको

799
00:59:04,320 --> 00:59:08,360
अपनी सेवा में बुलाते हैं सब कुछ करते हैं अप ए लीला पुरुषोत्तम लीला करने

800
00:59:08,360 --> 00:59:12,600
के लिएब मेरा प्रश्न देखिए मैं इसलिए इसलिए इंटरप्ट करना पड़ता है मेरा प्रश्न

801
00:59:12,600 --> 00:59:16,880
यह है कि यहां जो हम लोग आप कह रहे हो यहां पर भी आपको नित्य सुख मिल जाएगा

802
00:59:16,880 --> 00:59:20,920
तो फिर परमधाम और यहां पर अंतर नहीं होना चाहिए अंतर बताइए क्या है

803
00:59:20,920 --> 00:59:24,400
जो यहां नहीं

804
00:59:24,400 --> 00:59:28,480
है जब हम यहा पर जो सेवा करते हैं तो हम यहां पर ये कह ही

805
00:59:28,480 --> 00:59:33,240
नहीं रहे ना कि हम मैटेरियलिस्टिक वर्ल्ड में है हम मैटेरियलिस्टिक वर्ड में

806
00:59:33,240 --> 00:59:37,440
त अंतर बताइए दोनों में अंतर क्या है आप कुछ भी कहते रहे

807
00:59:37,440 --> 00:59:41,520
मुझे अंतर बताइए दोनों जगह में अंतर क्या है

808
00:59:41,520 --> 00:59:47,520
परमधाम में और यहां पर जो है इस वर्ल्ड में क्या अंतर है

809
01:00:06,520 --> 01:00:10,800
झूठे की हद तक और चोर के घर तक

810
01:00:10,800 --> 01:00:14,680
जाना चाहिए जाना अच्छा होता

811
01:00:14,680 --> 01:00:18,960
है आइए भैया वापस आइए दिख

812
01:00:18,960 --> 01:00:24,960
नहीं रहे कहां चले

813
01:00:24,960 --> 01:00:29,080
गए एक पियूष नाम का बच्चा जो है पहले आया था काफी दिन पहले

814
01:00:29,080 --> 01:00:33,160
हमारी लाइव स्ट्रीम प एक बार आया फर दोबारा आया

815
01:00:33,160 --> 01:00:37,280
शिवा भैया मुझे एक बार और करना है फिर रट के आया था कुछ उसको सिखाया गया था तो

816
01:00:37,280 --> 01:00:43,280
बच्चा आया वो अभी वह मुझसे संपर्क करके कह रहा

817
01:00:44,640 --> 01:00:49,280
है हां भाई ये जो है

818
01:00:49,280 --> 01:00:54,240
अनाधिकृत इकन के जो अनाधिकृत व्यक्ति है भव्य

819
01:00:54,240 --> 01:00:58,320
श ऑफिशियल यह देखिए इनकी भाषा शैली आपको दिख रही

820
01:00:58,320 --> 01:01:02,360
है भोकना बंद करो और सामने वाले को जवाब दो

821
01:01:02,360 --> 01:01:06,880
यह इनकी भाषा शैली हटा दीजिए

822
01:01:06,880 --> 01:01:11,680
भैया आप भी हमारे दर्शक हैं भव्य जी अच्छा लगा देख

823
01:01:11,680 --> 01:01:16,720
कर तो वो बच्चा आया था पीयूष

824
01:01:16,720 --> 01:01:20,880
वादवानी वह अभी कल मुझसे कह रहा है ट में

825
01:01:20,880 --> 01:01:25,000
जरा वो दिखाइए पियूष वादवानी जी का वो पड़ा होगा कल मैंने अपने

826
01:01:25,000 --> 01:01:29,280
ग्रुप में शेयर किया कि अब मैं रामानुजाचार्य परंपरा

827
01:01:29,280 --> 01:01:33,480
से हो गया हूं मुझसे आप लाइव कर लीजिए और बच्चों से बात करने

828
01:01:33,480 --> 01:01:37,880
में य दिक्कत एक आती जैसे भवे से बात की थी वो भी यही कर रहा

829
01:01:37,880 --> 01:01:40,080
था व

830
01:01:40,080 --> 01:01:44,200
अपना जो मेन टॉपिक है उस पर बात ना करके इधर उधर की खूब सारी बातें

831
01:01:44,200 --> 01:01:48,400
करना और मेन टॉपिक से बचने का प्रयास करना वहां तक आना ही नहीं है

832
01:01:48,400 --> 01:01:52,520
तह तक जाने ही नहीं देना बात को अब वोह

833
01:01:52,520 --> 01:01:56,440
चले गए हैं आ नहीं रहे हैं

834
01:01:56,440 --> 01:02:00,760
तो ठीक है एक घंटे का हमारा हुआ है आज का

835
01:02:00,760 --> 01:02:03,440
तो अभी हमने

836
01:02:03,440 --> 01:02:07,760
जाना क्योंकि स्कोन कृष्ण और विष्णु में भेद

837
01:02:07,760 --> 01:02:12,520
करते हुए स्वयं को

838
01:02:12,520 --> 01:02:16,560
कृष्ण को सर्वोच्च मानने वाला प्रकट करता है तो वह वैष्णव नहीं सिद्ध

839
01:02:16,560 --> 01:02:20,760
होता कृष्णव और कृष्णव क्योंकि कृष्ण एंड क्राइस्ट आर सेम तो उनको

840
01:02:20,760 --> 01:02:24,840
क्राइस्ट भी कहा जाए तो कोई गलत नहीं है वैष्णव सिद्ध नहीं होते

841
01:02:24,840 --> 01:02:28,840
प्रभुपाद जी को फॉलो करने वाले सिद्ध नहीं होते चेतन महाप्रभु को फॉलो करने वाले

842
01:02:28,840 --> 01:02:32,840
सिद्ध नहीं होते मधवा चार जी को फॉलो करने वाले सिद्ध

843
01:02:32,840 --> 01:02:37,080
नहीं होते सनातन को हिंदू धर्म के द्वारा प्रतिपादित ईश्वर को मानने वाले सिद्ध

844
01:02:37,080 --> 01:02:39,480
नहीं

845
01:02:39,480 --> 01:02:43,840
होते कृष्ण की भक्ति करने वाले सिद्ध नहीं होते मेरे भाई तो

846
01:02:43,840 --> 01:02:47,880
क्या ही सिद्ध होते हैं वह कोई समझाए सब उलझा हुआ

847
01:02:47,880 --> 01:02:52,000
है वही जब भी कोई प्रश्न पूछो तो उसका

848
01:02:52,000 --> 01:02:55,360
उसका आंसर आएगा कोई भी प्रश्न कि ए फॉर एपल

849
01:02:55,360 --> 01:02:59,360
होता है क्या वो बोलेगे नहीं ए बी सी डी एफ जी एच आई जे के एल एम एन ओ पी क आर एस

850
01:02:59,360 --> 01:03:03,440
टी डब् एक्स वाई जड इसका अर्थ क्या हुआ हम बाद में बो

851
01:03:03,440 --> 01:03:07,520
नहीं नहीं ए फॉर होता है तो हमने बोला तो ए

852
01:03:07,520 --> 01:03:11,800
से लेकर जड तक हमने सब बोल दिया उसमें सब कुछ है जैसे कि वर्ण

853
01:03:11,800 --> 01:03:16,160
व्यवस्था जन्म से है कि कर्म से दोनों से है दोनों से है

854
01:03:16,160 --> 01:03:20,440
अच्छा हरि हर एक है कि नहीं नहीं नहीं जब जहां पर शिव की बात हो रही होगी वहां एक

855
01:03:20,440 --> 01:03:24,640
जहां विष्णु की बात हो रही होगी वहा एक नहीं है अच्छा विष्णु और कृष्ण एक है कि नहीं नहीं नहीं जहां

856
01:03:24,640 --> 01:03:28,720
पर कृष्ण की बात हो रही जहां विष्णु की बात हो रही होगी परब्रह्म की वहां एक है

857
01:03:28,720 --> 01:03:33,320
जहां पर कृष्ण को सर्वोच्च कहा जा रहा होगा वहां अलग है वहां कृष्ण

858
01:03:33,320 --> 01:03:38,200
सर्वोच्च है ना तो वो सारी चीजें बोल दो

859
01:03:38,200 --> 01:03:42,200
झूठ नहीं है गलत है इसका मतलब यह नहीं है कि वो एजिस्ट ही

860
01:03:42,200 --> 01:03:47,160
नहीं करता मैंने श्रीधर स्वामी वो जो

861
01:03:47,160 --> 01:03:53,160
वैष्णवास्त्र

862
01:03:56,040 --> 01:04:00,160
गलत थोड़ी ना कह दिया है ये भी ये भी हो गया अच्छा फिर

863
01:04:00,160 --> 01:04:04,360
बाद में आगे कि मैंने उनको अपमा नहीं कहा है मैंने उनके द्वारा द जाने ली

864
01:04:04,360 --> 01:04:08,520
शिक्षा को अप्र माणिक कहा है भाई अपमा शिक्षा से ही सिद्ध होता है ना कि कौन

865
01:04:08,520 --> 01:04:12,360
आचार प्रामाणिक है कौन नहीं है

866
01:04:12,360 --> 01:04:18,080
हा यदि गलत शिक्षा देने वाला उसको आप प्रामाणिक आचार

867
01:04:18,080 --> 01:04:22,920
कहेंगे तो दोनों बातें हैं श्रीधर

868
01:04:22,920 --> 01:04:27,320
स्वामी को इन्होंने पूरा ये श्रीधर स्वामी का टीका है हमारे पास

869
01:04:27,320 --> 01:04:31,840
श्रीधर स्वामी का कितना विरोध हुआ है वह आप

870
01:04:31,840 --> 01:04:36,240
देखिए श्रीधर स्वामी जी ने आठवे स्कंद

871
01:04:36,240 --> 01:04:40,360
के सातवे अध्याय के 21

872
01:04:40,360 --> 01:04:44,400
से लेकर 23 के बीच कहा है शिव जी की स्तुति मानी है और

873
01:04:44,400 --> 01:04:48,800
शिव जीी ब्रह्मा विष्णु महेश का रूप धारण करते माना है एकत्व

874
01:04:48,800 --> 01:04:52,840
माना है और अपनी माया के द्वारा करते हैं ऐसा माया शक्ति

875
01:04:52,840 --> 01:04:57,540
ईश्वर की जो माया शक्ति उसके द्वारा उसको कैसे मलेट किया जाता है

876
01:04:57,540 --> 01:05:02,000
[प्रशंसा]

877
01:05:02,000 --> 01:05:05,680
मायावादी

878
01:05:05,680 --> 01:05:09,960
मायावादी काने वाले अगर इनके हिसाब से प्रभुपाद जी नहीं हालांकि

879
01:05:09,960 --> 01:05:14,320
उन्होंने भी अपने भाष्य में माया की बात की है जो ईश उपनिषद

880
01:05:14,320 --> 01:05:18,600
इत्यादि में तो अब इनके हिसाब से वह मायावादी

881
01:05:18,600 --> 01:05:23,040
नहीं है यह मायावादी है फिर भी इनका खंडन करने के

882
01:05:23,040 --> 01:05:27,320
लिए इनके द्वारा प्रतिपादित सिद्धांतों का खंडन करने के लिए इन्हीं के शास्त्रों

883
01:05:27,320 --> 01:05:33,320
का सहारा वाह भाई बहुत अच्छी

884
01:05:33,360 --> 01:05:37,720
बात तो अभी वह चले गए हैं आ नहीं रहे हैं मुझे

885
01:05:37,720 --> 01:05:41,760
वो आशा है कि वह कि

886
01:05:41,760 --> 01:05:45,920
वह जो है हां हम लोग बहुत जल्द राघवाचार्य जी

887
01:05:45,920 --> 01:05:50,160
इत्यादि के साथ भी पास भी जा रहे हैं और जो रामानुज

888
01:05:50,160 --> 01:05:54,640
परंपरा के अन्य वो हैं मानने वाले उन सबको इस प्लेटफॉर्म पर लाएंगे

889
01:05:54,640 --> 01:05:58,960
निंबार्क चार वाले को लाएंगे मधवा चार वालों को

890
01:05:58,960 --> 01:06:03,120
लाएंगे रामानुजा चार वालों को लाएंगे सबको लाएंगे दिखाएंगे यहां पे

891
01:06:03,120 --> 01:06:09,120
सनातन की एकता की शक्ति अखंडता की शक्ति वर्णाश्रम

892
01:06:22,520 --> 01:06:27,160
धर्मयोद्दा का वो जरा शेयर करिए यहां पे

893
01:06:27,160 --> 01:06:33,160
वो यह कह रहा है कि

894
01:06:41,520 --> 01:06:45,520
वो पिन कमेंट शेयर करिए कल

895
01:06:45,520 --> 01:06:51,520
एक स्क्रीनशॉट मैंने शेयर किया था

896
01:07:25,520 --> 01:07:29,680
कैसे अपने सिद्धांतों को त्याग करना पड़ता है कोई अपनी बातों को रखने

897
01:07:29,680 --> 01:07:33,760
के लिए अ विपुल

898
01:07:33,760 --> 01:07:37,920
सिंह जी हैं अपना चेहरा

899
01:07:37,920 --> 01:07:43,920
दिखाइए तब तक आप स्क्रीन शेयर कर दीजिए मैंने आपको भेज दिया

900
01:07:44,680 --> 01:07:50,680
है ट पर भेजा है मैंने आपको

901
01:07:57,280 --> 01:08:03,280
पीयूष वादवानी का

902
01:08:04,600 --> 01:08:10,600
स्क्रीनशॉट ये बड़ा करिए क्या कह रहे हैं वादवानी

903
01:08:13,520 --> 01:08:18,960
जी मैं रामानुज संप्रदाय से

904
01:08:18,960 --> 01:08:23,440
हूं तो ये है अब इनको इस कौन को क्यों छोड़ना पड़ा

905
01:08:23,440 --> 01:08:29,360
यह भी अपनी स्टोरी किसी दिन शेयर करेंगे

906
01:08:29,360 --> 01:08:33,400
भव्य आपको तो पहले माफी मांगनी होगी आपने बहुत अभद्र आचरण

907
01:08:33,400 --> 01:08:37,800
कर दिया अब तक तो आप क्षमा मांगे वीडियो यब

908
01:08:37,800 --> 01:08:42,040
पर व रील बना कर के मैंने गलती की है मैंने भद्रा चरण किया यसा

909
01:08:42,040 --> 01:08:46,120
ऐसा अच्छे से मन से माफी मांगिए फिर किसी दिन आपके साथ चर्चा

910
01:08:46,120 --> 01:08:50,560
होगी विपुल सिंह जी महाराज

911
01:08:50,560 --> 01:08:56,560
जी प्रणाम आवाज आ रही है मेरी आपको जी आ रही है जय श्री राम

912
01:08:56,560 --> 01:09:00,760
जी गुल जी बताए महाराज एक शंका निवारण है आपसे

913
01:09:00,760 --> 01:09:05,080
पूछना था मुझे जैसा कि आपकी मैंने

914
01:09:05,080 --> 01:09:09,120
आप अपना परिचय दे दीजिए मेरा नाम

915
01:09:09,120 --> 01:09:13,960
विपुल सिंह है जाति से हम राजपूत क्षत्रिय और

916
01:09:13,960 --> 01:09:17,960
मैं अभी किसी परंपरा से नहीं जुड़ा हूं और ज्ञान आर्जन में लगाऊं य के माध्यम

917
01:09:17,960 --> 01:09:22,000
से या कई जो ग्रंथ है अपने उनको पढ़ने की कोशिश स्वयं करता

918
01:09:22,000 --> 01:09:26,040
हूं अभी ऐसा सौभाग्य प्राप्त नहीं हुआ किसी आचार्य

919
01:09:26,040 --> 01:09:28,840
के माध्यम से ज्ञान प्राप्त कर सकूं और आपकी

920
01:09:28,840 --> 01:09:32,840
आपकी वीडियो देखिए उसके माध्यम से मैं आपको जान पाया हूं एक शंका है अगर आप

921
01:09:32,840 --> 01:09:37,000
निवारण कर पाए तो बहुत कृपा होगी आप वैसे

922
01:09:37,000 --> 01:09:41,000
देखिए यह जो स्ट्रीम हमने रखी है ये है वैचारिक मतभेद के निमित्त

923
01:09:41,000 --> 01:09:45,840
जो है चर्चा यहां पर होती है तो यदि कोई

924
01:09:45,840 --> 01:09:50,080
व्यक्ति सहमत नहीं है ना उससे हम यहां पर करते हैं क्योंकि वो कंटेंट

925
01:09:50,080 --> 01:09:54,520
थोड़ा गड़बड़ हो जाता है दूसरी तरह का कंटेंट हो जाता है

926
01:09:54,520 --> 01:09:58,640
तो आप जो है एक टेलीग्राम ग्रुप बनाया

927
01:09:58,640 --> 01:10:02,920
हुआ है वहां पर एक प्रश्नोत्तरी वाला ग्रुप है टेलीग्राम चैनल पर

928
01:10:02,920 --> 01:10:07,160
वहां आप अपनी शंका लिख कर के भेज देंगे तो ऑफिशियल हम आपको जवाब भेज देंगे

929
01:10:07,160 --> 01:10:11,240
है ना पाच मिनट का टाइम लगेगा अगर आपके

930
01:10:11,240 --> 01:10:16,280
पास हो समय तो कर सके तो अब चलिए बोलिए

931
01:10:16,280 --> 01:10:20,720
बोलिए सर जैसे आप परंपरावादी है तो आप ये चाहते हैं कि जो व्यक्ति

932
01:10:20,720 --> 01:10:25,560
ज्ञान प्राप्त करे वो किसी परंपरा से हो तो ज्यादा सही रास्ता है क्योंकि आपने नग

933
01:10:25,560 --> 01:10:29,560
के भी वहा पर प्रमाण दिए थे वीडियो में ज आप किसी आर सवाजी व्यक्ति से चर्चा कर रहे थे

934
01:10:29,560 --> 01:10:33,560
त तो मुझे ये पूछना था तो जो परंपरावादी व्यवस्था

935
01:10:33,560 --> 01:10:39,560
है उसमें जो वर्ण व्यवस्था है व कर्मनाशा

936
01:10:56,000 --> 01:11:00,160
लाने के लिए यज्ञ के लिए होता लाने के लिए हम किसी ब्राह्मण

937
01:11:00,160 --> 01:11:04,440
के कुल को देखेंगे ब्राह्मण कुल हो ठीक है

938
01:11:04,440 --> 01:11:08,520
उसके बाद उसको जो है वेद मंत्रों का उच्चारण आता हो समग्र रूप से व वेद पाठी

939
01:11:08,520 --> 01:11:12,960
ब्राह्मण हो व यज्ञ में निपुण यह कर्म हो गया तो जन्म से क्या हुआ

940
01:11:12,960 --> 01:11:17,080
नॉमिनेशन वह व्यक्ति हमारी रडार पर कैसे आया हमने उसी को

941
01:11:17,080 --> 01:11:21,160
क्यों चेक किया और किसी को चेक क्यों नहीं किया क्योंकि उसका कुल ब्राह्मण

942
01:11:21,160 --> 01:11:25,520
का है ठीक है और फिर हमने उसके कर्मों को

943
01:11:25,520 --> 01:11:30,080
किया उसके बाद उसको तो जन्म से नॉमिनेशन कर्म से

944
01:11:30,080 --> 01:11:34,680
सिलेक्शन अगर कर्म नहीं होंगे तो भी वो तिरस्कृत हो जाएगा मगर

945
01:11:34,680 --> 01:11:38,760
कर्म किसके चेक करें क्या रास्ते पर उतर जाए चेक करने हर

946
01:11:38,760 --> 01:11:42,760
रिक्शे वाले के हर ऑटो वाले के किसी के भी चेक करने लगे साइकिल वाले के चेक करने लगे

947
01:11:42,760 --> 01:11:47,160
पान की दुकान वाले का चेक करने के ल तू बता भाई तेरे गुण कर्म क्या है

948
01:11:47,160 --> 01:11:51,360
चेक करने के लिए जो प्रारंभिक बिंदु है वो है कुल तो

949
01:11:51,360 --> 01:11:55,440
कुल के कुल के नाम से हम किसी परिवार में गए जहां पर वंशा

950
01:11:55,440 --> 01:11:59,600
परंपरा के अनुसार वो चीजें आ रही है वहां गए फिर अब देखा कि वो

951
01:11:59,600 --> 01:12:03,640
लड़का विलायत पढ़ने चला गया एमबीबीएस करने तो नहीं भाई वो हमारा होता नहीं

952
01:12:03,640 --> 01:12:07,720
है व हम फिर और किसी ब्राह्मण कुल में जाएंगे और

953
01:12:07,720 --> 01:12:12,520
किसी में जाएंगे तो ये

954
01:12:12,520 --> 01:12:16,720
है जी बोलिए तो सर जैसे आपने

955
01:12:16,720 --> 01:12:21,000
सत्यकाम जवाली जोका नाम सुना होगा

956
01:12:21,000 --> 01:12:25,240
जो कि मुझे आईडिया नहीं किस उपनिषद में उनकी चर्चा उपनिषद में है सत्यकाम

957
01:12:25,240 --> 01:12:29,520
वाली जो कि जिनकी माता हमने वीडियो बनाया है ना सकाल

958
01:12:29,520 --> 01:12:33,600
वाला का उपनिषद में है अभी वीडियो बनाया तो है ी बात

959
01:12:33,600 --> 01:12:37,920
पे हा जो जावाल है

960
01:12:37,920 --> 01:12:42,200
माना नहीं माना जाएगा क्योंकि वो उनको ब्राह्मण

961
01:12:42,200 --> 01:12:46,280
सुनिए वहां पर क्या लिखा है हिंदी पढ़िए उनको ब्राह्मण मानकर ही उनका

962
01:12:46,280 --> 01:12:50,480
संस्कार कराया गया मतलब इस बात को माना गया कि जन्म

963
01:12:50,480 --> 01:12:54,760
से ब्राह्मण है तब उनका संस्कार कराया गया

964
01:12:54,760 --> 01:12:58,760
जैसे हम सब वो किसी का वो चाहिए होता ना प्रमाण तो उन्होंने

965
01:12:58,760 --> 01:13:02,800
अपनी आस्था को प्रमाण माना कि मैं जो है इसको ये ऐसा नहीं हो सकता ये ब्राह्मण

966
01:13:02,800 --> 01:13:06,960
ही है तो जन्म से उसके ब्राह्मण को स्वीकार किया गया फिर

967
01:13:06,960 --> 01:13:11,200
उसका संस्कार कराया

968
01:13:11,200 --> 01:13:15,200
गया और मर्ष विश्वामित्र का क्या करेंगे वो तो जन्म से क्षत्रिय

969
01:13:15,200 --> 01:13:19,280
थे फिर वो ब्राह्मण माने जाएंगे यानी कि यहां पर जो है ये क्रॉस कन्वर्सेशन

970
01:13:19,280 --> 01:13:23,400
है यह जिज्ञासा नहीं है जिज्ञासा के नाम पर क्रॉस कर

971
01:13:23,400 --> 01:13:27,640
चलिए जो विश्वामित्र जी है पहली बात यह थी कि अगर

972
01:13:27,640 --> 01:13:32,120
आप विश्वामित्र जी के जन्म की कथा देखेंगे तो उन्होंने

973
01:13:32,120 --> 01:13:36,720
ब्राह्मणों चित खीर खा ली थी उनकी मां ने जैसे परशुराम

974
01:13:36,720 --> 01:13:41,400
जी की माता जी ने क्षत्रियो चित खीर खा ली थी ठीक है

975
01:13:41,400 --> 01:13:45,400
अच्छा परशुराम जी ने क्त्र क्षत्रियो चित आचरण किए कहीं पर उनके लिए

976
01:13:45,400 --> 01:13:49,520
क्षत्रिय आया क्या प्रभु श्री राम

977
01:13:49,520 --> 01:13:52,920
से जब वो ल

978
01:13:52,920 --> 01:13:58,720
जाते क्षत्रियो शार नहीं कि वो लड़ाई नहीं की

979
01:13:58,720 --> 01:14:02,800
उन्होंने लड़ाई देखो क्षत्रिय के कर्म क्या होते हैं शासन

980
01:14:02,800 --> 01:14:07,080
करना राज्य में व्यवस्था बनाना अपनी आत्मरक्षा के लिए युद्ध करना ये क्षत्रिय

981
01:14:07,080 --> 01:14:11,520
वर्ण में थोड़ी आ जाएगा वो तो हर व्यक्ति का मा उसका धर्म ही है

982
01:14:11,520 --> 01:14:17,200
तो अच्छा चलिए ठीक है द्रोणाचार्य ने क्या किया

983
01:14:17,200 --> 01:14:22,280
था आत्मरक्षा बिल्कुल सही बात है द्रोणाचार्य

984
01:14:22,280 --> 01:14:26,480
द्रोणाचार्य मैं बताता हूं आपको द्रोणाचार्य पहली बात तो अधर्म कर रहे थे सजा

985
01:14:26,480 --> 01:14:30,720
उसे उही बात मिली शि शिक्षक को

986
01:14:30,720 --> 01:14:36,720
स वो बात की बात है क्या उनके लिए क्षत्रिय शब्द का उपयोग

987
01:14:38,160 --> 01:14:42,560
हुआ रावण क्या रावण के लिए क्या कहेंगे रावण

988
01:14:42,560 --> 01:14:46,760
के लिए क्या

989
01:14:46,760 --> 01:14:50,920
कहेंगे रावण तो ब्राह्मण था लेकिन उसने गद्दी खुद ही प्राप्त

990
01:14:50,920 --> 01:14:55,000
करी ना ऐसा नहीं था परंपरा से आ रही है उसने अप ग बना

991
01:14:55,000 --> 01:14:59,000
क्या उस मैं पूछ रहा हूं क्या उसके लिए

992
01:14:59,000 --> 01:15:04,400
क्षत्रिय शब्द का उपयोग किया

993
01:15:04,400 --> 01:15:08,560
गया अब आ जाते अब आ जाते विश्वामित्र पर

994
01:15:08,560 --> 01:15:12,680
विश्वामित्र जी की माता जी ने ब्राह्मण उचित खीर

995
01:15:12,680 --> 01:15:17,600
खाई उसके बाद विश्वामित्र जी जो परंपरा

996
01:15:17,600 --> 01:15:21,640
प्राप्त आचार्य थे वशिष्ठ जी उनके पास

997
01:15:21,640 --> 01:15:25,720
बार-बार गए कि भाई मुझे जो है ब्राह्मण घोषित कर दो

998
01:15:25,720 --> 01:15:30,000
मगर वशिष्ठ जी ने ब्राह्मण घोषित नहीं किया कि आप

999
01:15:30,000 --> 01:15:34,200
राज ऋषि तो हैं मगर ब्रह्म ऋषि नहीं है इनकी

1000
01:15:34,200 --> 01:15:38,320
फोटो रुक गई है ब्रह्म ऋषि

1001
01:15:38,320 --> 01:15:42,440
नहीं है इस कारण से वशिष्ठ जी के साथ उनकी शत्रुता भी

1002
01:15:42,440 --> 01:15:46,480
हुई युद्ध हुए ठीक है तो यहां से

1003
01:15:46,480 --> 01:15:50,600
पहला फैक्ट निकल कर के आ रहा है यदि वो वशिष्ठ जी के पास जा रहे हैं कि मुझे

1004
01:15:50,600 --> 01:15:53,320
क्षत्रिय घोषित कर दो इसका मतलब वह

1005
01:15:53,320 --> 01:15:58,120
स्वयं को जन्म से क्या मान रहे हैं

1006
01:15:58,120 --> 01:16:02,360
ब्राह्मण मान रहे है जन्मना वर्ण व्यवस्था को मानने वाला

1007
01:16:02,360 --> 01:16:06,840
मानने वाले यहां से वो सिद्ध होते हैं ठीक है दूसरी बात

1008
01:16:06,840 --> 01:16:11,560
जब उन्होंने जब उन्होंने अनेका अनेक

1009
01:16:11,560 --> 01:16:15,600
वर्षों तक जाने कितनी तपस्या कर ली तब भगवान ने प्रकट होकर

1010
01:16:15,600 --> 01:16:19,840
के उनके क्षत्रिय तोव को स्वीकार किया यही हम भी कहते हैं भगवान प्रकट

1011
01:16:19,840 --> 01:16:23,960
होकर के आपको आपका बदला हुआ वर्ण घोषित कर दे ठीक है

1012
01:16:23,960 --> 01:16:28,120
भगवान ने व ब्रह्मा जी ने वहां प्रकट हो कर के कहा कि हां तुम्हारे जो क्षत्रिय वाले

1013
01:16:28,120 --> 01:16:32,560
वो है वो लुप्त हो गए तो तीन चीजें हो गई पहली बात तो वो जन्मना

1014
01:16:32,560 --> 01:16:36,920
को मानने वाले सिद्ध हुए दूसरी बात उनकी माता जी ने खीर खाई थी तीसरी बात

1015
01:16:36,920 --> 01:16:41,000
यहां पर भी मनुष्य की मर्जी से ये नहीं हुआ कि उनका जो है वर्ण बदल

1016
01:16:41,000 --> 01:16:46,800
गया भगवान ने ही घोषित किया अंततोगत्वा

1017
01:16:46,800 --> 01:16:51,200
जी नहीं तो फिर वो उनके पिता क्षत्रिय थे उनकी माता छत्रिय

1018
01:16:51,200 --> 01:16:55,240
है तो खीर खाने का ये तो फिर हम आउटर चीज जोड़ रहे हैं ना उसमें अगर

1019
01:16:55,240 --> 01:16:59,520
एक पिता के औरत का पुत्र है तो वो तो क्षत्रिय हो जाएगा अपने आप ही उसके सिद्ध करवाने की जरूरत

1020
01:16:59,520 --> 01:17:03,680
क्या है उसे किसका पुत्र

1021
01:17:03,680 --> 01:17:07,760
जैसे अगर मान लो पिता क्षत्रिय है माता क्षत्रिय है विश्वामित्र की

1022
01:17:07,760 --> 01:17:11,840
तो वो तो अपने आप ही औरस पुत्र क्षत्रिय हो गए ना तो उसके लिए सिद्ध करने की जरूरत क्यों

1023
01:17:11,840 --> 01:17:16,120
थी वो उनके अंदर की कामना थी कि मैं ब्राह्मण को प्राप्त

1024
01:17:16,120 --> 01:17:20,640
करूं उनके अंदर की कामना थी मैं प्राप्त करूं ब्राह्मण

1025
01:17:20,640 --> 01:17:24,920
तो हो र वण व्यवस्था जो है जन्मना नहीं है बल्कि कर्म

1026
01:17:24,920 --> 01:17:29,000
उन्होंने चाहा जो ये मैंने बताया तो

1027
01:17:29,000 --> 01:17:33,000
जो ये प्रक्रिया सिद्ध उन्होंने कहा उन्होंने करा मगर ये सिद्ध कब

1028
01:17:33,000 --> 01:17:37,000
हुआ जब भगवान ने उतर के उनको गारंटी दे दी हां अब

1029
01:17:37,000 --> 01:17:41,120
तुम हो गए भगवान उतर के जिसको हम मान रहे आप ऐसे कर्म करो भगवान आके

1030
01:17:41,120 --> 01:17:45,960
गवाही दे दे कि आप ब्राह्मण हो गए मान लेंगे सिंपल

1031
01:17:45,960 --> 01:17:50,000
भगवान का परंपरा प्राप्त जो आचार्य थे मनुष्य के रूप

1032
01:17:50,000 --> 01:17:54,200
में उन्होंने नहीं माना मना कर दिया प्रामाणिक आचार्य और

1033
01:17:54,200 --> 01:17:58,480
प्रामाणिक आचार्य के पास पूछने जाना यह भी प्रामाणिक आचार्य

1034
01:17:58,480 --> 01:18:01,800
की प्रामाणिकता को सिद्ध करता है विश्वामित्र जी उनके पास

1035
01:18:01,800 --> 01:18:06,640
पूछने जा रहे हैं य तो यह पता लगता है कि ब्राह्मणों की उच

1036
01:18:06,640 --> 01:18:11,400
वो नहीं जब तक स्वीकारें तब तक समाज में उस को स्वीकृति नहीं दी जाएगी ना जब तक

1037
01:18:11,400 --> 01:18:15,960
व बात य नहीं है बात है सनातन सिद्धांत क्या है

1038
01:18:15,960 --> 01:18:20,400
सनातन सिद्धांत व तो गीता का लोक है भगवान सा

1039
01:18:20,400 --> 01:18:24,800
कहते कि मैंने गुण कर्म स्वभाव से विवाह किए चार इसम जन्म

1040
01:18:24,800 --> 01:18:28,880
आप डाल सकते थे जन्म से मैंने डाल दिया जन्म की बात छंद उपनिषद

1041
01:18:28,880 --> 01:18:29,480
में की जा रही है

1042
01:18:29,480 --> 01:18:33,720
पूर्व जन्मों के कर्मों के आधार पर इस जन्म का शरीर प्राप्त होता है शरीर की सीमा में इस जन्म

1043
01:18:33,720 --> 01:18:36,480
का वर्ण प्राप्त होता है और वर्ण की सीमा में इस जन्म

1044
01:18:36,480 --> 01:18:40,480
के तुरंत दोबारा से कर्म प्राप्त होते हैं और उन्होंने क्या कहा गुण कर्म

1045
01:18:40,480 --> 01:18:45,400
विभाव सा उसमें उन्होंने कहा मया सिस्टम

1046
01:18:45,400 --> 01:18:49,600
मैं करता हूं ना तो जो जो मनुष्य की इच्छा के अनुसार

1047
01:18:49,600 --> 01:18:53,600
बदल रहा है उसमें भगवान की मर्जी कहां रह गई उसमें तो आपकी मर्जी आ रही है

1048
01:18:53,600 --> 01:18:57,760
अभी आपने किसी रक्षा कर दी अभी आपने किसी की रक्षा कर दी

1049
01:18:57,760 --> 01:19:01,800
जाकर के तो आप क्षत्रिय हो गए आगे जाकर के दो कदम आगे आपने

1050
01:19:01,800 --> 01:19:05,920
किसी को ज्ञान दे दिया ब्राह्मण हो गए कहा

1051
01:19:05,920 --> 01:19:10,240
रह गया जो जो कार्य व्यक्ति अपने जो मुख

1052
01:19:10,240 --> 01:19:14,240
एक होता है मुख्य कार्य जो जीवन उपार्जन के लिए करता है जसे ब्राह्मण होता है अब

1053
01:19:14,240 --> 01:19:18,360
चाहे वो किसी भागते हुए हिरण को बचा ले सि से इसका मतलब ये तो नहीं है कि वो क्षत्रिय हो

1054
01:19:18,360 --> 01:19:22,400
जाएगा लिखा है ये कहां लिखा है ये

1055
01:19:22,400 --> 01:19:26,400
कहां लिखा है ये वाला जो कार्य वो के लिए कहेगा

1056
01:19:26,400 --> 01:19:30,520
ये कहा लिखा है वर्ण कार्थ होता है चुनाव करना अपने लिए

1057
01:19:30,520 --> 01:19:34,560
अरे भाई साहब देखिए बहुत सी चीज है इस पर हमने कई बार

1058
01:19:34,560 --> 01:19:39,200
बातें कर ली है और हमने कई वीडियो भी बनाए इस बारे में

1059
01:19:39,200 --> 01:19:44,920
यह जो ण चलिए ठीक है इसका उपयोग क्या माना जाएगा

1060
01:19:44,920 --> 01:19:49,600
बताइए इसको इसको जो वर्ण को डिसाइड कौन करेगा अंततोगत्वा

1061
01:19:49,600 --> 01:19:51,640
व्यक्ति का जब दीक्षा

1062
01:19:51,640 --> 01:19:57,120
समारोह हो जाएगा जब स्नातक हो जाएगी उसकी पूरी स्नान दिया जाएगा शिक्षा के

1063
01:19:57,120 --> 01:20:01,200
प ये कहां लिखा है संस्कारों में है ना

1064
01:20:01,200 --> 01:20:05,440
व्यक्ति की शिक्षा हो जाती है ऐसे थोड़ी होता है जब आप आपने अपनी बातों को रखने

1065
01:20:05,440 --> 01:20:10,880
के लिए प्रमाण लाया विश्वामित्र जी के पास ऐसा हु प्रमाण प्रमाण देरहा

1066
01:20:10,880 --> 01:20:15,040
प्रमाण पुराण का जो लोक है आपने सुना ही होगा

1067
01:20:15,040 --> 01:20:19,040
की ज जन्मना शूद्र और शिक्षा

1068
01:20:19,040 --> 01:20:23,200
पश्चा दज बन जाता है तो फ जन् से तो सी

1069
01:20:23,200 --> 01:20:27,400
शिक्षा प्रा जन्म से राम के लिए कहीं पर शूद्र आया है

1070
01:20:27,400 --> 01:20:32,080
क्या ज नहीं राम के लिए आ वो राम की जीवनी है राम के

1071
01:20:32,080 --> 01:20:36,480
दूसरे तरीके से लेते हैं स्कंद पुराण में ही उमा महेश्वर

1072
01:20:36,480 --> 01:20:40,920
संवाद में लिखा हुआ है जिसका गुरु नहीं है वह जानवर

1073
01:20:40,920 --> 01:20:45,160
है आपके अभी आपने बताया कोई गुरु नहीं है

1074
01:20:45,160 --> 01:20:49,200
तो आप जानवर हो नहीं गुरु मत

1075
01:20:49,200 --> 01:20:54,120
किस सेंस में कह रहे आप शास्त्रों के बिना बिना शास्त्र पढ़ने के लिए इसका गुरु नहीं है वो

1076
01:20:54,120 --> 01:20:58,880
जो गुरु के बिना स्वा अध्ययन करता है शास्त्रों का वह जानवर है

1077
01:20:58,880 --> 01:21:02,840
यह स्कंद पुराण में

1078
01:21:02,840 --> 01:21:06,880
मेंशन आप जानवर शस्त्र में ऐसा लिखा

1079
01:21:06,880 --> 01:21:11,000
है कि गुरु के बिना जानवर तो हो सकता जानवर जानवर

1080
01:21:11,000 --> 01:21:15,040
हो सता नहीं आप क्लियर बताइए आप क्लियर बताइए आप जानवर

1081
01:21:15,040 --> 01:21:17,960
है या नहीं

1082
01:21:17,960 --> 01:21:23,120
है सांस के र सभी जानवर है भी जानवर

1083
01:21:23,120 --> 01:21:27,360
नहीं सभी मत कहो हमारा गुरु हम जानवर नहीं है आपका गुरु

1084
01:21:27,360 --> 01:21:31,360
नहीं है आप जानवर हो कि नहीं जिसके संस्कार नहीं हुए गुरु

1085
01:21:31,360 --> 01:21:35,520
के अभाव में वो जानवर ये क्यों बोलना पड़ रहा है दिक्कत आ रही है ना सत्य को बोलने

1086
01:21:35,520 --> 01:21:40,440
में स्पष्ट बोलो ना भाई कि मैं जानवर हूं

1087
01:21:40,440 --> 01:21:44,720
अच्छा ठीक है मैं जानवर ह इससे क्या सिद्ध हो गया अब बात ये आती है

1088
01:21:44,720 --> 01:21:49,560
कि आप जानवर नहीं है आप जानवर वत है पशु वत है

1089
01:21:49,560 --> 01:21:53,800
पशु यानी की अगर वहां ये कहा गया अगर वहां

1090
01:21:53,800 --> 01:21:57,840
ये कहा गया कि जिसका गुरु नहीं है

1091
01:21:57,840 --> 01:22:02,000
वह जानवर है तो वहां वोह पशु है तो वह पशु वत है आपकी

1092
01:22:02,000 --> 01:22:06,000
योनि नहीं बदल गई आप अभी भी मनुष्य योनि में ही माने जाएंगे मगर

1093
01:22:06,000 --> 01:22:10,080
क्योंकि आपके कर्म जो है वैसे है तो आप पशु वत है मगर पशु

1094
01:22:10,080 --> 01:22:14,160
नहीं है इसी प्रकार से जो जन्मना जाते शूद्र वाली बात है वहां पर

1095
01:22:14,160 --> 01:22:18,160
भी शूद्र वत है जैसे यहां पर पशु वत है वैसे

1096
01:22:18,160 --> 01:22:22,000
ही वहां पर शूद्र वत है अब मैं आपसे पूछूंगा कि

1097
01:22:22,000 --> 01:22:26,920
आपके पास भगवत गीता आई कहां से मेरे

1098
01:22:26,920 --> 01:22:31,000
पास गीता प्रेस गोरखपुर गीता प्रेस गोरखपुर

1099
01:22:31,000 --> 01:22:35,080
के पास कहां से आई सर यह तो

1100
01:22:35,080 --> 01:22:39,640
उनके एडिटर को पता होगा यह तो मुझे नहीं पता से पता करिए

1101
01:22:39,640 --> 01:22:43,840
पता करिए गुरु शिष्य परंपरा से हमारे पास शास्त्र आते

1102
01:22:43,840 --> 01:22:47,920
हैं गुरु शिष्य परंपरा से

1103
01:22:47,920 --> 01:22:51,960
तो जो शंकराचार्य परंपरा है रामानुजाचार्य परंपरा है

1104
01:22:51,960 --> 01:22:56,000
इनके पास जाइए आप पढ़ने के लिए और पूछिए जन्म से है

1105
01:22:56,000 --> 01:23:00,440
हमारे शास्त्रों में के कर्म से है सिंपल

1106
01:23:00,440 --> 01:23:04,440
हा आप जो है आप जो है इस कर्म का तमका लगा दीजिए ना तो

1107
01:23:04,440 --> 01:23:08,560
उसकी कोई व्यवहारिक उपयोगिता है ना ही वह शास्त्रों से सिद्ध हो रही है आप

1108
01:23:08,560 --> 01:23:12,800
उस पर कर्म का तमका लगा दीजिए मगर मगर फिर यह नहीं कह सकते शास्त्र सम्मत

1109
01:23:12,800 --> 01:23:16,800
है जो हम कह रहे हैं क्योंकि शास्त्र सम्मत की बात तब आएगी जब आप गुरुओं

1110
01:23:16,800 --> 01:23:20,960
के पास जाकर के उसको अपने कहे हुए वचन को ठप्पा लगवा

1111
01:23:20,960 --> 01:23:26,360
लेंगे किसके पास से ठप्पा लगवाया आपने

1112
01:23:26,360 --> 01:23:31,040
गीता प्रेस में ही गीता प्रेस में ही जन्म से मानने वाले में आपको प्रमाण दे देता

1113
01:23:31,040 --> 01:23:35,240
हूं चलो ठीक है आप मान ले रहा हूं आप शास्त्र की ज्यादा ज्ञाता है उतना

1114
01:23:35,240 --> 01:23:39,240
नहीं ठीक बात है सर आपसे सवाल क्यों कर रहा हूं

1115
01:23:39,240 --> 01:23:43,560
अगर हम जनम व्यवस्था को चले

1116
01:23:43,560 --> 01:23:47,720
क्योंकि विरोधियों के द्वारा यह जो वर्ण व्यवस्था

1117
01:23:47,720 --> 01:23:52,440
है इसके नाम पर जहर घोला गया है और

1118
01:23:52,440 --> 01:23:56,640
जो व्यवस्था व्यवस्था मूलक जो शब्द है कि ब्राह्मण क्षत्रिय वैश

1119
01:23:56,640 --> 01:24:00,640
शूद्र इसमें ये ये करेगा इसमें ये ये करेगा उसको घणा मूलक रूप में

1120
01:24:00,640 --> 01:24:04,920
पेश करा गया है प्रस्तुत किया गया लोगों के साथ जैसे

1121
01:24:04,920 --> 01:24:09,320
कि केवल गायत्री मंत्र पढ़ के ही मोक्ष मिलेगा ऐसा नहीं है

1122
01:24:09,320 --> 01:24:13,840
राम जप करके भी मिलेगा कृष्ण का नाम का जप करके भी मिलेगा

1123
01:24:13,840 --> 01:24:17,840
हरे कृष्ण महामंत्र का जप करके भी मिलेगा ऐसा है

1124
01:24:17,840 --> 01:24:21,960
और भी कई रास्ते हो सकते हैं मगर क्या किया गया कि पहले जो है गायत्री मंत्र

1125
01:24:21,960 --> 01:24:26,280
को ही सबसे ऊपर बना दिया कि नहीं गायत्री मंत्र

1126
01:24:26,280 --> 01:24:30,640
से ही केवल मुक्ति मिल सकती है वही सबके लिए वो है उपयोगी

1127
01:24:30,640 --> 01:24:34,800
और जब लोगों की मेंटालिटी ऐसी हो गई कि भाई नहीं गायत्री मंत्र

1128
01:24:34,800 --> 01:24:39,000
को जपना ही सबसे ज्यादा वो है जरूरी और वो मोक्ष

1129
01:24:39,000 --> 01:24:41,360
दायक तब क्या किया गया अरे देख वो तुझसे

1130
01:24:41,360 --> 01:24:45,720
घणा करते हैं गायत्री मंत्र को नहीं पढ़ने देते तुझे मना करते हैं

1131
01:24:45,720 --> 01:24:50,000
उसके अपने अपने बहुत सारे रीजन है कि ब्राह्मण क्षत्रिय वै शूद्र का

1132
01:24:50,000 --> 01:24:54,360
जो क्लेरि और सब करते हैं सबके यहां होता है

1133
01:24:54,360 --> 01:24:58,400
कल्प रूप में सबके य होता है खैर मैं इस बारे में बात कर चुका हूं आप

1134
01:24:58,400 --> 01:25:02,560
किसी दिन फॉर्म भर के आए तो हम लोग इसमें और चर्चा ये बहुत लंबा टॉपिक है हम लोग

1135
01:25:02,560 --> 01:25:07,400
कई बार बात कर चुके हो आप जो है फॉर्म भरिए 74836

1136
01:25:07,400 --> 01:25:12,120
और फिर दोबारा से हम लोग वर्ण व्यवस्था पर किसी दिन बात करते हैं ठीक है

1137
01:25:12,120 --> 01:25:17,920
इस पर मैं कई बार हमारी बातें हो चुकी है आप आइए दोबारा आपका स्वागत

1138
01:25:17,920 --> 01:25:23,920
है ठीक धन्यवाद जी

1139
01:25:25,320 --> 01:25:27,960
रजत

1140
01:25:27,960 --> 01:25:33,960
जी डेढ़ घंटा हो चुका है अभी बढ़ाए क्या इसको

1141
01:25:49,520 --> 01:25:53,760
आगे भाई आज के टॉपिक पर अगर किसी को बात करनी है तो वह

1142
01:25:53,760 --> 01:25:59,760
हमें ब बताए

1143
01:26:28,520 --> 01:26:32,880
आयुष मिश्रा जी हैं रजत जी भी

1144
01:26:32,880 --> 01:26:38,880
है बताइए रजत जी जी आवाज आ

1145
01:26:39,760 --> 01:26:43,920
रहीम आवाज आ रही मेरी जी आ रही है

1146
01:26:43,920 --> 01:26:48,680
शिवांश जी मुझे मतलब आपका परिचय

1147
01:26:48,680 --> 01:26:53,200
परिचय मेरा नाम रजत गुप्ता है मैं कानपुर उत्तर प्रदेश से हूं

1148
01:26:53,200 --> 01:26:57,320
और मैं से बात हो चुकी है ना हमारी फोन प हो

1149
01:26:57,320 --> 01:27:01,760
चुकी है और आपका आज के विषय को लेकर के कोई वो है

1150
01:27:01,760 --> 01:27:06,640
क्या जो आज जो हमने विषय रखा है स्कन से रिलेटेड

1151
01:27:06,640 --> 01:27:10,680
बोलिए मैं ये जानना चाहता हूं जैसे कि

1152
01:27:10,680 --> 01:27:14,760
फिलोसोफी सारी एजिस्ट करती है ऐसा नहीं है कि अद्वैत एजिस्ट नहीं करता है या द्वैत

1153
01:27:14,760 --> 01:27:18,960
एजिस्ट नहीं करता है मतभेद अद्वैत और द्वैत का शुरू से देखिए

1154
01:27:18,960 --> 01:27:23,040
प्रॉब्लम क्या है मैं आपको क्लियर कर दूं द्वैत अद्वैत को मानने वाले

1155
01:27:23,040 --> 01:27:27,640
हम है अद्वैत को ना मानने वाला दूसरा व्यक्ति

1156
01:27:27,640 --> 01:27:31,920
है जैसे कि ब्रह्मा विष्णु महेश भगवती और गणेश पांचों ब्रह्म

1157
01:27:31,920 --> 01:27:36,080
है ये हम है मगर विष्णु के अतिरिक्त या विष्णु

1158
01:27:36,080 --> 01:27:40,200
भी नहीं कृष्ण के अतिरिक्त ब्रह्मा विष्णु महेश भगवती और गणेश को ना मानने वाला

1159
01:27:40,200 --> 01:27:43,600
दूसरा व्यक्ति है प्रॉब्लम वहां है तो बांधने

1160
01:27:43,600 --> 01:27:47,840
वाला संगठित करने वाला कोई और है हम उस तरफ से खड़े

1161
01:27:47,840 --> 01:27:51,960
हैं कि संगठित कैसे हो जब ब्रह्मा विष्णु महेश भगवती और गणेश पांचों की

1162
01:27:51,960 --> 01:27:56,120
उसको परब्रह्म को स्वीकार किया जाए मगर को काउंटर कर रहा है किसी की आस्थाओं को ठेस

1163
01:27:56,120 --> 01:28:00,680
पहुंचा रहा है शिव और विष्णु में भेद कर रहा है विष्णु और कृष्ण में भेद कर रहा है

1164
01:28:00,680 --> 01:28:04,680
सिव दुर्गा काली गणेश का तो कहना ही क्या है

1165
01:28:04,680 --> 01:28:09,360
तो उसको तो हमें काउंटर करना पड़ेगा

1166
01:28:09,360 --> 01:28:13,600
ना जी जैसे मैंने काफी स्टडी किया पूरा मतलब सनातन धर्म

1167
01:28:13,600 --> 01:28:17,720
में जैसे स्मार्थ होते हैं आपका जो देखिए मैं आपके आपसे बातें

1168
01:28:17,720 --> 01:28:21,720
कर चुका हूं इसलिए आप मुझे विषय बताइए आपने स्टडी किया है वो आपने कहां

1169
01:28:21,720 --> 01:28:25,800
से किया ये भी आपने बताया मुझे तो उसम बहुत स वो तो इसलिए

1170
01:28:25,800 --> 01:28:29,880
आप मुझे ये बताइए हा आपने कन से

1171
01:28:29,880 --> 01:28:33,920
किया है ना सारा स्टडी नहीं नहीं इसकन को इकन

1172
01:28:33,920 --> 01:28:37,960
को मैंने मतलब एस अ रिफरेंस मैंने पढ़ा था ऐसा नहीं कि मैं केवल इकन

1173
01:28:37,960 --> 01:28:42,360
से मैंने गीता प्रस से भी स्टडी किया है तो आपका सनातन सनातन

1174
01:28:42,360 --> 01:28:46,880
सिद्धांत के रूप में आपने कौन सी परंपरा से प्राप्त ज्ञान को स्वीकार किया

1175
01:28:46,880 --> 01:28:51,160
है यही जो हमारे शंकराचार्य जी बताते हैं हमारा

1176
01:28:51,160 --> 01:28:55,160
जो धर्म है वो प्योर अगर हम कहेंगे कोई जैसे आजकल सनातन धर्म

1177
01:28:55,160 --> 01:28:58,680
बहुत ज्यादा फेमस हो रहा है लेकिन जो टोटल हम

1178
01:28:58,680 --> 01:29:03,040
अपने अपना धर्म को अगर पहचाने तो हमारा जो जो सनातन

1179
01:29:03,040 --> 01:29:07,120
वद कार हिंदू हा हा जी जी जी

1180
01:29:07,120 --> 01:29:11,200
जी जी और बस मेरा य यह प्रश्न है

1181
01:29:11,200 --> 01:29:15,720
जैसे कि इकन वाले जो आप पर या फिर शंकराचार्य जी पर

1182
01:29:15,720 --> 01:29:19,760
ये जो आक्षेप लगाते हैं कि वो लोग निराकार को मानते

1183
01:29:19,760 --> 01:29:24,080
हैं ऐसा कुछ जैसे मैं मैं बस आपसे यह जानना चाह रहा हूं कि

1184
01:29:24,080 --> 01:29:28,160
जैसे की जो परम सत्य के तीन रूप बताए गए

1185
01:29:28,160 --> 01:29:32,160
हैं एक ब्रह्म परमात्मा और भगवान परम सत्य

1186
01:29:32,160 --> 01:29:36,320
के तीन रूप है ब्रह्म परमात्मा भगवान तो

1187
01:29:36,320 --> 01:29:40,440
यह इन लोगों का यह मानना है कि आप ब्रह्म से ही सारे अवतार

1188
01:29:40,440 --> 01:29:44,600
मानते हैं उनका यह मानना है जैसे की

1189
01:29:44,600 --> 01:29:48,800
एक वृंदावन के बहुत बड़े

1190
01:29:48,800 --> 01:29:53,120
ये थोड़ा समझिए आपको हमको यह ध्यान रखना पड़ता है कि कंटेंट

1191
01:29:53,120 --> 01:29:57,280
किस उसम में जाए तो आप मुझे यह मत बताइए कौन क्या मानता

1192
01:29:57,280 --> 01:30:01,280
है आप मुझे सीधे बताइए कि आपकी य चीज से मुझे दिक्कत

1193
01:30:01,280 --> 01:30:05,480
है और मेरा ये सवाल उसके लिए बहुत ज्यादा प्रीफिक्स

1194
01:30:05,480 --> 01:30:09,520
देने की आवश्यकता नहीं है तो मेरा सवाल

1195
01:30:09,520 --> 01:30:13,600
ये है कि कि जैसे कि आप जो

1196
01:30:13,600 --> 01:30:14,160
अवतार

1197
01:30:14,160 --> 01:30:18,560
मानते हैं कि जैसे ब्रह्म को सगुण और साकार दोनों माना शंकराचार्य

1198
01:30:18,560 --> 01:30:22,600
जी तो आप क्या अवतार जो मानते हैं कि वो निराकार से

1199
01:30:22,600 --> 01:30:26,640
आता है ऐसा कुछ है कि ब्रह्म ब्रह्म को ही मैं यहां पर सीधे ये

1200
01:30:26,640 --> 01:30:30,920
बात कहूंगा कि वह अंततोगत्वा साकार

1201
01:30:30,920 --> 01:30:35,440
हो निराकार हो अगर हम लोग संगठित करने की बात कर रहे हैं सनातन समाज को

1202
01:30:35,440 --> 01:30:39,960
वो जो भी हो वह व्यवहार में आ सकने लायक नहीं है

1203
01:30:39,960 --> 01:30:44,080
तो उस दृष्टि से देखेंगे व्यवहार में ना आ सकने लायक मतलब

1204
01:30:44,080 --> 01:30:48,200
हम उसके बारे में वो हम जो है उसको डिस्क्राइब नहीं कर सकते व्यवहार

1205
01:30:48,200 --> 01:30:52,240
में आ सकने ना आ सकने लायक अब वो आप जो है साकार

1206
01:30:52,240 --> 01:30:56,680
भी कह दो मान लो साकारी मगर वह ऐसा साकार है जिसको हम

1207
01:30:56,680 --> 01:31:00,720
व्यवहार में नहीं ला सकते वो एज इट इज यहां पर कृष्ण जो

1208
01:31:00,720 --> 01:31:04,920
आते हैं वो गलत फिलॉसफी है क्योंकि एज इट इज आ रहे हैं अगर व्यवहार

1209
01:31:04,920 --> 01:31:09,280
में अगर आ रहे हैं तो बाधित हो जाएंगे नियमों के अधीन हो जाएंगे उनका वो स्वरूप

1210
01:31:09,280 --> 01:31:13,360
जो है वो व्यवहार में नहीं आ सकता उसी को अगर हम निर्गुण कह दे निर्गुण निराकार

1211
01:31:13,360 --> 01:31:17,520
कह दे तो ठीक उसको हम आध्यात्मिक रूप से साकार कह दे तो

1212
01:31:17,520 --> 01:31:21,680
भी ठीक अगर हम इस बात को ही लेकर चले कि एकत्व कैसे

1213
01:31:21,680 --> 01:31:25,920
आए तो उसको निर्गुण निराकार कह दीजिए इंद्रियों का विषय नहीं है आंख का विषय नहीं है कान

1214
01:31:25,920 --> 01:31:29,280
का विषय नहीं है व्यवहार में नहीं आ सकता निर्गुण निराकार किसी ने

1215
01:31:29,280 --> 01:31:33,440
कह दिया आध्यात्मिक साकार उनकी बॉडी तो है पर वो

1216
01:31:33,440 --> 01:31:37,480
मटेरियल मैटेरियलिस्टिक बॉडी नहीं है वैसी है वो मटेरियल

1217
01:31:37,480 --> 01:31:41,880
जो हमें जो इंद्रिया प्राप्त है इनका विषय नहीं है बात तो वही हो गई

1218
01:31:41,880 --> 01:31:46,040
अगर आज की जो हमें इंद्रिया प्राप्त है कर्मेंद्रियां ज्ञान इंद्रिया इनके द्वारा

1219
01:31:46,040 --> 01:31:50,200
वो व्यवहार में नहीं आ सकता उस रूप को कोई आध्यात्मिक साकार कह

1220
01:31:50,200 --> 01:31:54,320
दे या उस रूप को कोई निर्गुण निराकार कह दे उससे फर्क क्या पड़ता है यहां भगवान

1221
01:31:54,320 --> 01:31:58,360
साकार होके आ रहे हैं हमारे व्यवहार का विषय बन रहे है तो आप

1222
01:31:58,360 --> 01:32:02,680
मतलब यह मानते हैं कि वो ब्रह्म ही सगुण ही है वो वही ब्रह्म

1223
01:32:02,680 --> 01:32:06,800
ही सगुण भी है और साकार भी है ऐसा व्यवहारिक

1224
01:32:06,800 --> 01:32:11,200
धरातल पर व सगुण हो जाता है जी जी

1225
01:32:11,200 --> 01:32:15,200
मतलब कहने का मतलब मेरा यह है कि जैसे कि जो

1226
01:32:15,200 --> 01:32:19,280
इकन मानता है वो कहता है कि ब्रह्म जो है वो अल्टीमेट रियलिटी नहीं

1227
01:32:19,280 --> 01:32:23,280
है वो ये कहता है कि जो भगवान अभी मैंने इनसे भाई साहब से एक

1228
01:32:23,280 --> 01:32:27,360
बात पूछी वो अल्टीमेट रियलिटी नहीं है वो

1229
01:32:27,360 --> 01:32:31,520
कृष्ण से स्टार्ट हो रही है जब कृष्ण से स्टार्ट होगी चीजें भगवान श्री कृष्ण

1230
01:32:31,520 --> 01:32:35,880
जो यहां पर आए हो सकता है उनका वहां का रूप भी हो वैसा ही मगर वह अभी हमारी

1231
01:32:35,880 --> 01:32:39,880
इंद्रियों का विषय नहीं है तो जो यहां पर भगवान श्री कृष्ण आ रहे जिनके बारे में बात

1232
01:32:39,880 --> 01:32:44,240
कर रहे हैं अगर इनको अल्टीमेट बताएंगे अल्टीमेट रियलिटी तो दिक्कत आएंगी क्या दिक्कत

1233
01:32:44,240 --> 01:32:44,740
आएगी

1234
01:32:44,440 --> 01:32:48,440
भगवान जहां बैठे हैं वो दुनिया किसने बनाई भगवान अपनी देह

1235
01:32:48,440 --> 01:32:52,840
का नाश नहीं कर सकते यह दिक्कत आ जाएंगी भगवान बाधित हो जाएंगे

1236
01:32:52,840 --> 01:32:56,880
अगर उसको रिलिटी बना लेंगे तो हो

1237
01:32:56,880 --> 01:33:00,880
सकता है वो ऐसे ही दिखते हो हो सकता है मगर हम अभी

1238
01:33:00,880 --> 01:33:05,160
उसको डिस्क्राइब नहीं कर सकते व्यवहार में आ सकने वाला नहीं है अगर व्यवहार

1239
01:33:05,160 --> 01:33:09,240
में ना आ सकने वाले रूप कोही आप व्यवहारिक बना दोगे तो क्या होगी

1240
01:33:09,240 --> 01:33:13,320
दिक्कत दिक्कत यही होगी भगवान जो होंगे बाधित हो जाएंगे

1241
01:33:13,320 --> 01:33:17,360
सर्वशक्तिमान सिद्ध नहीं होंगे अब जैसे कि

1242
01:33:17,360 --> 01:33:21,400
वो कहते हैं कि वो अपनी देह का नाश क्यों करेंगे ठीक है यहां

1243
01:33:21,400 --> 01:33:25,920
से शुरू हुई यहां नाश हो गया यहां से शुरू हुई

1244
01:33:25,920 --> 01:33:30,480
य नाश हो गया इसके बाद इसके बाद नहीं है ना बॉडी उनकी

1245
01:33:30,480 --> 01:33:34,760
तो नाश हो गया और उन्होंने कई उसमें कहा है कि तेरे

1246
01:33:34,760 --> 01:33:39,400
और मेरे कई जन्म हो चुके हैं किस रूप में

1247
01:33:39,400 --> 01:33:43,520
कहा तेरे और मेरे अब तक कई जन्म हो चुके हैं इस रूप में कहा

1248
01:33:43,520 --> 01:33:47,560
जब वो जाएंगे तभी तो जन्म लेंगे तो व्यावहारिक धरातल पर वो

1249
01:33:47,560 --> 01:33:51,600
जो है जन्म और मरण की लीला भी करके दिखाते हैं देह का नाश करके भी

1250
01:33:51,600 --> 01:33:56,000
दिखाते हैं सब कुछ कर सकने वाले हैं कुछ भी कर सकते और अगर

1251
01:33:56,000 --> 01:34:00,080
हम इसको ही अल्टीमेट रियलिटी मान लेंगे तो और क्या क्या होगा

1252
01:34:00,080 --> 01:34:04,520
जो ईश्वर है व ब्रा जैसा क्यों होगा अब्राह्मिक ईश्वर क्या है

1253
01:34:04,520 --> 01:34:08,520
एक जगह बैठा है और सृष्टि की रचना कर देता है जहां

1254
01:34:08,520 --> 01:34:12,680
मनया सूर्य को टांग दिया जामन आया पृथ्वी को टांग दिया ठीक है तो

1255
01:34:12,680 --> 01:34:16,920
पहला क्वेश्चन तो यही है कि जहा वो बैठा है वो स्पेस उसने नहीं बनाया

1256
01:34:16,920 --> 01:34:21,120
अंतिम रचता नहीं है वो संसार का पहला इसको भी हटा

1257
01:34:21,120 --> 01:34:25,200
दो फिर दूसरा क्या आया कि उसने कुछ भी बनाया नहीं

1258
01:34:25,200 --> 01:34:29,320
है उसने केवल शेप दिया है कुमार की तरह एक कुमार होता

1259
01:34:29,320 --> 01:34:33,400
है जो मिट्टी लेकर घड़ा बनाता है मिट्टी को

1260
01:34:33,400 --> 01:34:37,720
उसने नहीं बनाया ये भी बात आ जाती है

1261
01:34:37,720 --> 01:34:41,840
ये बहुत सी बातें हैं और फिर अभी हमने बोला कि अगर भगवान

1262
01:34:41,840 --> 01:34:46,680
अंत तो गत्वा आपको भगवान के साथ एकत्व प्राप्त नहीं हो रहा है

1263
01:34:46,680 --> 01:34:51,320
तो यहां पर दावा किया जाता है कि हम भगवान से बहुत प्रेम करते हैं

1264
01:34:51,320 --> 01:34:55,440
तो यदि गोलोक धाम पहुंच कर के इनको सुख मिल गया तो इसका

1265
01:34:55,440 --> 01:34:59,840
मतलब प्रेम भगवान से नहीं था भगवान केवल माध्यम

1266
01:34:59,840 --> 01:35:03,840
थे गलोक धाम पहुंचने का ठीक

1267
01:35:03,840 --> 01:35:08,480
है ठीक है और दूसरी बात क्या आ जाएगी

1268
01:35:08,480 --> 01:35:12,520
कि वहां जाकर के भी अभी क्या कह रहे थे भाई साहब कि सेवा करते हैं फिर

1269
01:35:12,520 --> 01:35:15,120
अगली अगले दिन फिर सेवा करने का प्रयास मौका मिलता

1270
01:35:15,120 --> 01:35:19,560
है है ना अब वहा पर जो सुख म

1271
01:35:19,560 --> 01:35:23,920
वहां पर जो सुख मिल रहा है वो बाधित सुख है नित्य सुख नहीं मिल रहा है क्योंकि

1272
01:35:23,920 --> 01:35:28,120
जो सेवा कर रहे हैं फिर जब अभी जब एक तिलक पूरा लग जाएगा फिर अगले

1273
01:35:28,120 --> 01:35:32,320
दिन सेवा करेंगे उन्होंने कहा तो जब तक वो दोबारा सेवा

1274
01:35:32,320 --> 01:35:36,360
नहीं करेंगे तब तक व परेशान रहेंगे ना अगली बार सेवा करने के लिए

1275
01:35:36,360 --> 01:35:40,640
नित्य सुख नहीं है ना तो अल्टीमेट रिटी य

1276
01:35:40,640 --> 01:35:45,840
पर मैं प्रश्न य पर मैं य पर क्लेरिफाई करना चाहता हूं जैसे

1277
01:35:45,840 --> 01:35:50,000
की वहां पर यह बताया गया है जो नित्य धाम है वहा पर माया और

1278
01:35:50,000 --> 01:35:54,520
काल का प्रभाव नहीं पड़ता है धाम

1279
01:35:54,520 --> 01:35:58,520
मतलब जैसे समय है ना व पर माया ना माया है ना काल है

1280
01:35:58,520 --> 01:36:02,640
मतलब वहा पर माया नहीं अब बात आती है कि वहां

1281
01:36:02,640 --> 01:36:07,800
से जो सृष्टि की रचना होती है वह कृष्ण अपराध से ही होती

1282
01:36:07,800 --> 01:36:11,800
है यह क्या है जहां पर माया का आवरण

1283
01:36:11,800 --> 01:36:15,840
ही नहीं है जरा भी काल का आवरण ही नहीं है वहां पर कृष्ण अपराध कैसे हो

1284
01:36:15,840 --> 01:36:21,840
रहा है बैकुंठ में कुंठा कैसे आ रही

1285
01:36:22,200 --> 01:36:26,360
है जो जिसका नाम ही है जहां पर कुंठा ना हो वहां

1286
01:36:26,360 --> 01:36:30,520
कुंठा कैसे आ रही तो अपनी बात

1287
01:36:30,520 --> 01:36:34,760
को जहां रखना है वहां कुंठा आ गई जहां नहीं रखना व माया का प्रभाव

1288
01:36:34,760 --> 01:36:38,920
नहीं है य है

1289
01:36:38,920 --> 01:36:43,400
ना तो प्रभु जी एक मेरा एक प्रश्न है जैसे कि राजेंद्र

1290
01:36:43,400 --> 01:36:47,880
दास जी को महाराज जी को आप जानते होंगे विशिष्टा के वृंदावन

1291
01:36:47,880 --> 01:36:51,880
के तो उन्होंने भी उनका भी थोड़ा मतभेद

1292
01:36:51,880 --> 01:36:56,320
बार सुना था कि जी जो जब भगवान

1293
01:36:56,320 --> 01:37:00,920
अवतार लेते हैं तो माया युक्त ब्रह्म मानते हैं

1294
01:37:00,920 --> 01:37:05,640
आप उसको पूरा करिए पूरा सुनिए उसको कटिंग टिंग करके दिखाया गया था

1295
01:37:05,640 --> 01:37:09,840
और देखिए मैं यह नहीं कह रहा हूं कि एक स्तर पर जाकर

1296
01:37:09,840 --> 01:37:14,400
के बहुत 0.5 समथिंग समथिंग जो हमारे बड़े आचार्य

1297
01:37:14,400 --> 01:37:18,440
उनके बीच में मतभेद है मगर हमारा जो धर्म है ब्रह्म को

1298
01:37:18,440 --> 01:37:22,520
लेकर मतभेद है धर्म को लेकर मतभेद नहीं है

1299
01:37:22,520 --> 01:37:26,520
और धर्म की के लिए धार्मिक रूप से हमारे आचरण एक जैसे हो

1300
01:37:26,520 --> 01:37:30,920
ना कम से कम तो जो

1301
01:37:30,920 --> 01:37:35,480
गुरुदेव बताते हैं अच्छा वो गुरुदेव को बहुत सम्मान करते हैं उनके वैसे वीडियोस भी है पॉजिटिवली

1302
01:37:35,480 --> 01:37:37,320
वाले तो गुरुदेव यह

1303
01:37:37,320 --> 01:37:41,480
बताते हैं किई 97 इनसे मैच खाता है 98 इनसे

1304
01:37:41,480 --> 01:37:45,600
मैच खाता है 99 से खाता है ठीक है इसको गुरुदेव ने कहा

1305
01:37:45,600 --> 01:37:49,840
कि यह सत सता की क्रमिक अभिव्यक्ति है

1306
01:37:49,840 --> 01:37:54,080
व्यक्ति के जीवन में आध्यात्म आता कहां से

1307
01:37:54,080 --> 01:37:58,400
द्वैत से द्वैत से आता है पहली बार व

1308
01:37:58,400 --> 01:38:02,680
ईश्वर के बारे में जानना शुरू करता है पहली बार वह अपनी मां को देखता है भगवान

1309
01:38:02,680 --> 01:38:06,800
की पूजा करते हुए यह द्वैत है और

1310
01:38:06,800 --> 01:38:10,840
खत्म कब होगा अद्वैत प जाता द्वैत

1311
01:38:10,840 --> 01:38:14,920
से शुरू अद्वैत प पूरा बीच में विशिष्टा द्वैत

1312
01:38:14,920 --> 01:38:19,480
तो यह क्रमिक अभिव्यक्ति है जैसे कि

1313
01:38:19,480 --> 01:38:23,520
हम हमारा जो मार्ग है वो क्या है द्वैत पर चलना

1314
01:38:23,520 --> 01:38:27,600
और दत पर चलकर प्राप्त क्या होगा अद्वैत इस बात को हम लोग कई

1315
01:38:27,600 --> 01:38:31,760
बार बता चुके हैं ठीक है अब अन्य लोग

1316
01:38:31,760 --> 01:38:35,800
भी है हम लोग किसी को ले ले और और

1317
01:38:35,800 --> 01:38:39,920
शिवा जी मेरा एक प्रश्न यह भी है कि जैसे की अद्वैत

1318
01:38:39,920 --> 01:38:45,560
में जैसे आपकी फिलॉसफी में जो अल्टीमेट रियलिटी है किसे मानी जाती

1319
01:38:45,560 --> 01:38:49,720
है अच्छा क्याम अल्टीमेट

1320
01:38:49,720 --> 01:38:53,880
रियलिटी किसे मानते हैं

1321
01:38:53,880 --> 01:38:58,160
मतलब सचिदानंद स्वरूप परमेश्वर

1322
01:38:58,160 --> 01:39:02,240
को तो वो कौन है ब्रह्म है या फिर कोई

1323
01:39:02,240 --> 01:39:05,720
मतलब नारायण है या

1324
01:39:05,720 --> 01:39:10,000
फिर नारायण का व्यवहार में ना आ सकने वाला स्वरूप है देखिए

1325
01:39:10,000 --> 01:39:14,200
इसमें क्या हुआ है भगवान ने एक जगह यह कहा है कि वो जो निराकार

1326
01:39:14,200 --> 01:39:18,200
ब्रह्म है वो भी मेरे ही अधीन मेरे ही वो है मुझ पर

1327
01:39:18,200 --> 01:39:22,280
निर्भर है डिपेंड है उसका यह मतलब निकालते हैं कि

1328
01:39:22,280 --> 01:39:26,560
नहीं नहीं वो निराकार ब्रह्म पर वो है वो भगवान के सब वो है

1329
01:39:26,560 --> 01:39:31,520
तो अब बात ये है कि भगवान कौन है भगवान श्री कृष्ण जो है

1330
01:39:31,520 --> 01:39:35,520
वो हमारे जीवन में ब्रह्म का अस्तित्व सिद्ध करने

1331
01:39:35,520 --> 01:39:39,560
के लिए कौन कौन है भगवान श्री कृष्ण जैसे काठ

1332
01:39:39,560 --> 01:39:43,920
की लकड़ी है उसमें दाह क्षमता है मगर वह दाह

1333
01:39:43,920 --> 01:39:48,080
क्षमता को अपना अस्तित्व प्रकट करने के लिए जब वह कहीं से भम भम भम भम जलने

1334
01:39:48,080 --> 01:39:52,280
लगती है दिखाई देने वाला सगुण साकार स्वरूप होता है तब

1335
01:39:52,280 --> 01:39:56,720
जाकर के व्यक्ति को पता चलता है इसमें दाह क्षमता है

1336
01:39:56,720 --> 01:40:02,280
तो अपने अस्तित्व को मनुष्य के समक्ष सिद्ध करने के लिए

1337
01:40:02,280 --> 01:40:06,360
अभिव्यंजना अभिव्यंजना संस्थान पर निर्भर है

1338
01:40:06,360 --> 01:40:09,120
तो इस रूप से देखा जाए तो हमारे हम

1339
01:40:09,120 --> 01:40:13,240
जिधर खड़े हैं उस तरफ वो जो निराकार जो निर्गुण निराकार

1340
01:40:13,240 --> 01:40:17,480
ब्रह्म का जो भी स्वरूप है व किस पर निर्भर कर रहा है भगवान श्री कृष्ण

1341
01:40:17,480 --> 01:40:21,800
पर तो इसका मतलब ही बदल दिया गया उनकी गीता में जैसे कि कान

1342
01:40:21,800 --> 01:40:24,880
है जो हमारी श्रवण

1343
01:40:24,880 --> 01:40:28,880
शेंद्री हमारी कहां है कहीं शरीर के अंदर मगर ये

1344
01:40:28,880 --> 01:40:32,920
चमड़े का कान है हम इसको फोकस करते

1345
01:40:32,920 --> 01:40:37,040
हुए किसी के कान की ओर कोई बात कहते हैं है ना

1346
01:40:37,040 --> 01:40:41,080
तो वो जो मूल है जो श्रवण इंद्री है वह अपने

1347
01:40:41,080 --> 01:40:45,160
अस्तित्व के लिए किस पर निर्भर है चमड़े वाले प निर्भर

1348
01:40:45,160 --> 01:40:49,200
है ना अपने अस्तित्व के लिए तो अभ व्यंजन किस पर निर्भर हुआ अ

1349
01:40:49,200 --> 01:40:53,720
व्यंजक पर जो थोड़ा बहुत गुरुदेव की कृपा से जो उनका टूटा

1350
01:40:53,720 --> 01:40:57,840
सुना है मैंने वो मैं बताने का प्रयास करता हूं ठीक है अब हम किसी

1351
01:40:57,840 --> 01:41:01,920
और को ले ले प्रभु जी एक एक लास्ट सवाल

1352
01:41:01,920 --> 01:41:06,200
मैं पूछना चाहूंगा पहले वाला अच्छा

1353
01:41:06,200 --> 01:41:10,480
बस एक ये चीज की जो मैंने सुना है कि परम सत्य के जो है तीन स्वरूप

1354
01:41:10,480 --> 01:41:14,960
बताए गए ब्रह्म परमात्मा और भगवान तो यह तीनों

1355
01:41:14,960 --> 01:41:19,000
एक ही एक ही रूप के मतलब एकही

1356
01:41:19,000 --> 01:41:23,640
एक ही चीज के तीन रूब हमारे वहार मेंब

1357
01:41:23,640 --> 01:41:24,200
में आ सकने

1358
01:41:24,200 --> 01:41:28,560
वाला है तो सगुण साकार हो गया वही ब्रह्म वही ब्रह्म

1359
01:41:28,560 --> 01:41:33,080
एक स्तर पर प्रति भाषिक सत हो गया तो व हो गया सगुण निराकार ब्रह्म

1360
01:41:33,080 --> 01:41:37,600
और वही ब्रह्म जो प्राप्ति का विषय केवल व्यवहार में ना आ सकने का विषय

1361
01:41:37,600 --> 01:41:42,200
वाणी का अ विषय वो हो गया जो है निर्गुण निराकार

1362
01:41:42,200 --> 01:41:46,240
अब जैसे इसको बिजली के माध्यम से समझ लीजिए भागवत में दिया गया य वाला उदाहरण

1363
01:41:46,240 --> 01:41:50,280
श्रीमद् भागवत में अंतिम 11 या बवे स्कं में दिया गया है

1364
01:41:50,280 --> 01:41:54,520
क्या है और गुरुदेव भी देते हैं जो ऊर्जा है

1365
01:41:54,520 --> 01:41:59,400
ऊर्जा के रूप में जो विद्युत है वो सब जगह व्याप्त है

1366
01:41:59,400 --> 01:42:03,440
ऊर्जा मगर अभी जहां मैं बैठा हूं वहां पर ना तो

1367
01:42:03,440 --> 01:42:07,600
वो मुझे झटका मार रही है विद्युतीय ऊर्जा ना ही मुझे

1368
01:42:07,600 --> 01:42:11,600
दिख रही है ठीक है तो यह

1369
01:42:11,600 --> 01:42:15,600
हो गया विद्युत का निर्गुण निराकार स्वरूप उसके बाद यही

1370
01:42:15,600 --> 01:42:20,200
ऊर्जा उद्योग आदि करने पर तारों में प्रवाहित हो

1371
01:42:20,200 --> 01:42:24,360
गई जो हमारे घर में वायरिंग होती है उसमें हित हो गई

1372
01:42:24,360 --> 01:42:28,560
तो क्या हो गया अब वो उसको छुए तो झका मार देगी

1373
01:42:28,560 --> 01:42:32,560
अब विद्युतीय शौक लग जाएगा ना तो

1374
01:42:32,560 --> 01:42:36,560
झटका मार देगी मगर अभी भी वो दिख नहीं रही है तो यह क्या हो

1375
01:42:36,560 --> 01:42:39,480
गया सगुण निराकार स्वरूप

1376
01:42:39,480 --> 01:42:44,320
और इसके बाद वही बिजली बल्ब के माध्यम से प्रकाशित हो जाएगी

1377
01:42:44,320 --> 01:42:48,320
तो क्या हुआ सगुण साकार स्वरूप इसी तरह

1378
01:42:48,320 --> 01:42:52,480
से भगवान के भी तीन रूप है एक है सगुण निर्गुण निराकार

1379
01:42:52,480 --> 01:42:56,840
एक है सगुण निराकार और एक है सगुण साकार जी बताइए

1380
01:42:56,840 --> 01:43:00,920
अल्टीमेट रियलिटी आप बता दीजिए कि क्या है आपके मतलब आप मानी जाती

1381
01:43:00,920 --> 01:43:05,800
है अल्टीमेट रियलिटी ब्रह्म को मानते हैं परमात्मा को या भगवान को

1382
01:43:05,800 --> 01:43:09,880
इनमें अंतर कहां है जब हम व्यवहार कर रहे हैं उनके लिए

1383
01:43:09,880 --> 01:43:14,800
जैसे अल्टीमेट भूख कौन मिटाएगा कैलोरी या बर्गर

1384
01:43:14,800 --> 01:43:19,720
बर्गर बर्गर मिटाएगा और मिल क्या रहा है बर्गर से

1385
01:43:19,720 --> 01:43:24,280
आपको बर्गर से आपको मिल क्या रहा है कैलोरी

1386
01:43:24,280 --> 01:43:28,400
कलोरी तो इनमें अंतर अंतर नहीं कर सकते तो अल्टीमेट रियलिटी

1387
01:43:28,400 --> 01:43:33,120
जो बरगरी है वही आपकी भूख मिटा रहा है कैलोरी के रूप में ऐसे ही

1388
01:43:33,120 --> 01:43:37,600
जो भगवान सगुण साकार है वही निर्गुण निराकार के रूप में आपको प्राप्त हो रहे हैं

1389
01:43:37,600 --> 01:43:41,880
क्योंकि वह सगुण साकार होंगे तो आप प्राप्त कैसे

1390
01:43:41,880 --> 01:43:44,080
करोगे

1391
01:43:44,080 --> 01:43:48,120
बताइए अलग रह जाओगे ना अंदर घुसने का प्रयास करोगे तो सर

1392
01:43:48,120 --> 01:43:53,120
मारोगे उनकी छाती है अंदर नहीं जा पाओगे

1393
01:43:53,120 --> 01:43:54,640
विष्णु भगवान के है

1394
01:43:54,640 --> 01:44:00,640
ना ठीक है ठीक थय चलिए जय श्री राम

1395
01:44:03,400 --> 01:44:07,400
जय तो आज की हम समाप्त करते हैं दो घंटे हो गए हैं

1396
01:44:07,400 --> 01:44:12,000
फिर किसी दिन होते हैं

1397
01:44:12,000 --> 01:44:16,760
लाइव जिनका ईश्वर जगत बनाता ही नहीं बनता भी है

1398
01:44:16,760 --> 01:44:20,800
उनका ही ईश्वर श्री राम कृष्ण आदि रूपों में अवतार ले

1399
01:44:20,800 --> 01:44:25,520
सकता है और यदि

1400
01:44:25,520 --> 01:44:29,720
इस संसार के कण कण में ईश्वर नहीं है

1401
01:44:29,720 --> 01:44:34,000
तो इसका अर्थ है कि उसकी सत्ता वहां

1402
01:44:34,000 --> 01:44:38,040
पर उतनी नहीं है जहां पर वह स्वयं है और यदि

1403
01:44:38,040 --> 01:44:42,360
उसकी सत्ता बराबर है हर जगह समान है तो फिर आपको मानना पड़ेगा

1404
01:44:42,360 --> 01:44:46,440
कि वही हर हर जगह व्याप्त है और यदि वह हर जगह

1405
01:44:46,440 --> 01:44:52,440
व्याप्त है तो जो उसका एक रूप दिख रहा है वो

1406
01:44:56,480 --> 01:45:02,200
क्या हो रहा है

1407
01:45:02,200 --> 01:45:08,200
भाई आजा बेटा मेरे साथ

1408
01:45:08,480 --> 01:45:12,640
लाइव बालक है बालक है बालक है पियूष पियूष

1409
01:45:12,640 --> 01:45:16,760
और ये भव्य आदि अभी किशोर अवस्था में है किशोर

1410
01:45:16,760 --> 01:45:20,840
अवस्था में होता है एक बार एक मेरे पिताजी ने मुझे

1411
01:45:20,840 --> 01:45:25,160
एक वो सुनाया था उनका किस्सा कि एक पांडे

1412
01:45:25,160 --> 01:45:29,520
जी थे पांडे जी तो उनको जो

1413
01:45:29,520 --> 01:45:33,840
है शाम को फलदान में दहेज मिलने वाला था दो लाख रुपए

1414
01:45:33,840 --> 01:45:38,160
नगद पुराने जमाने में तो जब नगद

1415
01:45:38,160 --> 01:45:42,960
मिलने वाला था तो उसकी खुशी में सुबह पांडे जी

1416
01:45:42,960 --> 01:45:47,120
जो मोटरसाइकिल पर बैठ के एक्सलेटर को मार घुमाए पड़े मार घुमाए पड़े

1417
01:45:47,120 --> 01:45:51,120
उसको बिल्कुल एक्सलरेटर का कान मरोड़े दे रहे हैं बाइक का

1418
01:45:51,120 --> 01:45:55,120
अच्छा उस समय मैं भी युवा था तो पिताजी ने जब ये किस्सा मुझे सुनाया था तो मैं उस समय

1419
01:45:55,120 --> 01:45:59,160
यही कर रहा था पल्सर 220 थी तो उसको मार तेजी से भगा

1420
01:45:59,160 --> 01:46:03,480
रहा था तो मेरे पिताजी ने कहा बेटा ज्यादा तरंग

1421
01:46:03,480 --> 01:46:07,520
में ना हो तो किशोर अवस्था में जो होता है बालक बुद्धि होती

1422
01:46:07,520 --> 01:46:11,480
है तो तरंग में रहता है बिल्कुल हर एक को पीछे छोड़ दूं सबसे आगे

1423
01:46:11,480 --> 01:46:15,640
निकल जाऊं ये इस बुद्धि से गाड़ी चलाते हैं कई बार तो ऐसा होता

1424
01:46:15,640 --> 01:46:19,640
है कि बस जब भी बाहर निकली गाड़ी तो 100 पे कब पहुंचे 150 प कब

1425
01:46:19,640 --> 01:46:23,760
पहुंचे तो कुछ ऐसे ही चल रही थी तो पांडे

1426
01:46:23,760 --> 01:46:27,800
जी जो थे जिनको शाम को पिताजी ने किस्सा सुनाया कि पांडे जी

1427
01:46:27,800 --> 01:46:31,840
को पांडे जी इसी तरीके से तरंग में थे और वह तरंग में

1428
01:46:31,840 --> 01:46:35,840
क्या हुआ कि वह अपनी मोटरसाइकिल का एक्सलरेटर खूब उमेट रहे

1429
01:46:35,840 --> 01:46:40,120
थे कान मरोड़े दे रहे थे उसका और उनके तरंग किस बात की थी क्योंकि

1430
01:46:40,120 --> 01:46:44,400
साय काल को उनको फलदान में उनके बेटे का विवाह था तो फलदान

1431
01:46:44,400 --> 01:46:48,480
में उनको दो लाख रुपए नगद मिलने वाला था हालांकि दहेज इत्यादि

1432
01:46:48,480 --> 01:46:52,480
को इस तरह से लेनदेन के रूप में प्रस्तुत करना सही नहीं होता दहेज

1433
01:46:52,480 --> 01:46:56,520
का रूप होता है कि वो अपनी बिटिया को कोई उपहार स्वरूप कुछ दे

1434
01:46:56,520 --> 01:47:00,600
वो होता है मगर वो पांडे जी का किस्सा है उसमें ऐसा हो रहा था तो अब

1435
01:47:00,600 --> 01:47:04,760
क्या होता है कि पांडे

1436
01:47:04,760 --> 01:47:09,040
जी जब मार एक्सलेटर जो है वह कर रहे हैं

1437
01:47:09,040 --> 01:47:13,040
तो साय काल को वह जो है फलदान में उपलब्ध नहीं हो पाए वह पड़े

1438
01:47:13,040 --> 01:47:17,200
थे उर्सला अस्पताल में कानपुर में एक उर्सला नाम का अस्पताल है

1439
01:47:17,200 --> 01:47:21,400
सरकारी वहां पर उनकी दोनों टांगे ऊपर थी पांडे जी की और उसम

1440
01:47:21,400 --> 01:47:25,480
प्लास्टर था उनको जो कोरी से नहीं लटकाया जाता टांग को तो ये

1441
01:47:25,480 --> 01:47:26,480
तो पिताजी ने मुझे एक

1442
01:47:26,480 --> 01:47:30,520
सबक दिया कि तरंग में आकर के वही गुरुदेव कहते हैं कोरी भावुकता के वशीभूत

1443
01:47:30,520 --> 01:47:34,680
होकर के कुछ भी नहीं करना है तो बालक है अभ यह सब उनकी उनका वो

1444
01:47:34,680 --> 01:47:38,760
किशोरावस्था का उास है जो उनके द्वारा उन्हीं

1445
01:47:38,760 --> 01:47:43,240
की द्वारा जो सिद्धांत है उन्हीं का खंडन उनसे करवाता है

1446
01:47:43,240 --> 01:47:47,400
उन्हीं के द्वारा स्वीकार जो सिद्धांत जिनका वो सम्मान करते हैं उन्हीं का अपमान करवाता है

1447
01:47:47,400 --> 01:47:51,400
और इस तरीके से अपनी बातों को प्रस्तुत करते हैं बालक बुद्धि से

1448
01:47:51,400 --> 01:47:55,440
कि वो अपमान हो उन्हीं का ही भाई मुझे तो

1449
01:47:55,440 --> 01:47:59,480
नहीं लगता कि शील प्रभुपाद ने आजा बेटा इस तरह से ये सब भाषा

1450
01:47:59,480 --> 01:48:04,040
सिखाई होगी तो खैर ठीक है यथोचित कारवाही

1451
01:48:04,040 --> 01:48:08,280
की जाएगी समय संसाधन होने पर इतना ही कहूंगा

1452
01:48:08,280 --> 01:48:12,600
इनके लिए ज्यादा कड़ी कारवाई कर देंगे तो अभी किशोरावस्था है

1453
01:48:12,600 --> 01:48:16,480
जीवन भी दुर्गति में चला

1454
01:48:16,480 --> 01:48:20,960
जाएगा अन्य भाई हैं पर अभी लाइव नहीं करेंगे अब गोपेश्वर

1455
01:48:20,960 --> 01:48:25,160
जी भी हैं आयुष जी भी हैं आयुष मिश्र जी आयुष मिश्र जी काफी

1456
01:48:25,160 --> 01:48:29,520
देर से जुड़े थे तो इनको थोड़ा सा देख लेते इनका विषय अगर व हुआ आयुष मिश्र जी

1457
01:48:29,520 --> 01:48:33,520
अपना कैमरा ऑन कर लीजिए गोपेश्वर जी आप फॉर्म भर दीजिए आपके साथ किसी

1458
01:48:33,520 --> 01:48:37,520
और दिन हम लाइव में जुड़ेंगे है ना आभार आपका मगर अभी क्या है

1459
01:48:37,520 --> 01:48:41,680
ना दो घंटे हो चुके हैं बात करते करते तो एक हमारी

1460
01:48:41,680 --> 01:48:44,800
भी सीमा होती है शरीर

1461
01:48:44,800 --> 01:48:49,600
की आयुष मिश्र जी आप जो है अपना वो कर दीजिए

1462
01:48:49,600 --> 01:48:55,600
कैमरा ऑन

1463
01:48:57,960 --> 01:49:02,480
आयुष मश जी कैमरा ऑन नहीं कर रहे हैं

1464
01:49:02,480 --> 01:49:06,560
गोपेश्वर जी आपसे हम किसी और दिन आप हमें लगता है कि स्कन से ही

1465
01:49:06,560 --> 01:49:10,960
है है ना इस कन से है ना

1466
01:49:10,960 --> 01:49:15,760
तो हम आपके साथ किसी और दिन रखते हैं नहीं है आप इसकन से

1467
01:49:15,760 --> 01:49:20,400
आपके साथ हम किसी और दिन कर लेते हैं आप एक फम एक नंबर नोट कर लीजिए

1468
01:49:20,400 --> 01:49:24,440
नाम जब होने वाला है चालू न तारीख से

1469
01:49:24,440 --> 01:49:28,440
तो दिनांक तीन से नामजप अभियान नामा स्त्र शुरू कर रहे हैं उससे

1470
01:49:28,440 --> 01:49:32,520
जुड़ने के लिए वैचारिक मतभेद के निमि चर्चा के लिए साप्ताहिक कक्षाओं से

1471
01:49:32,520 --> 01:49:36,760
जुड़ने के लिए धर्म रक्षा अभियान से जुड़ने के लिए किसी

1472
01:49:36,760 --> 01:49:42,760
भी प्रकार से वो करने के लिए आप ये 7483

1473
01:49:52,720 --> 01:49:56,840
उसम आप किसी भी मत को मानते हो भगवान की अगर पूजा करते हैं

1474
01:49:56,840 --> 01:50:00,880
नाम जब हमारे साथ में करना चाह रहे हैं तो आप कर सकते हैं आप इस कौन

1475
01:50:00,880 --> 01:50:05,040
से हो आप आर्य समाज से हो किसी से भी हो नाम जप यदि आप करना

1476
01:50:05,040 --> 01:50:11,040
चाहते हैं हमारे साथ तो आप कर सकते हैं उसके लिए आप फॉर्म भर सकते

1477
01:50:11,040 --> 01:50:15,040
हैं सारे जो पर परंपरा प्राप्त संप्रदाय वो तो है ही

1478
01:50:15,040 --> 01:50:19,040
इसमें और आप नाम जप के लिए इससे जुड़ सकते हैं तो

1479
01:50:19,040 --> 01:50:23,120
धर्म रक्षा के लिए वैचारिक

1480
01:50:23,120 --> 01:50:28,040
मतभेद के निमित्त चर्चा के लिए नाम जप के लिए

1481
01:50:28,040 --> 01:50:32,760
और एक और

1482
01:50:32,760 --> 01:50:36,800
है हां धार्मिक कक्षाओं के लिए इन चार चीजों

1483
01:50:36,800 --> 01:50:41,200
के लिए यदि आप हमसे जुड़ना चाहते हैं तो व करें इस नंबर पर

1484
01:50:41,200 --> 01:50:47,200
7483 18 69

1485
01:50:48,320 --> 01:50:52,400
और अब हम लोग अगली बार मिलते हैं आयुष

1486
01:50:52,400 --> 01:50:57,640
जी आप अपना चेहरा नहीं दिखा रहे हैं

1487
01:50:57,640 --> 01:51:01,640
और गोपेश्वर जी आप फॉर्म भर दीजिए हम

1488
01:51:01,640 --> 01:51:05,720
लोग आपके साथ हो सकता है कल ही रख ले या आने वाले एक दो दिन में ही रख

1489
01:51:05,720 --> 01:51:10,640
ले कोई बहुत लंबी टाइमिंग नहीं है अभी के लिए थोड़ा क्षमा चाहता हूं मैं आपसे

1490
01:51:10,640 --> 01:51:16,640
जय श्री राम सभी को जय श्री राम आने के लिए धन्यवाद

1491
01:51:21,560 --> 01:51:25,560
और m
