1
00:00:02,120 --> 00:00:06,840
शम तो सभी को जय श्री राम और

2
00:00:06,840 --> 00:00:11,000
हम लोगों का जैसा कि आज हमने अपने

3
00:00:11,000 --> 00:00:15,160
दर्शकों को समर्थकों को जो भी फॉलो कर रहे हैं हमारे चैनल्स को

4
00:00:15,160 --> 00:00:19,400
को बताया था कि आज कुछ इकन से जुड़े हुए लोग जो

5
00:00:19,400 --> 00:00:23,680
इकन से किसी ना किसी प्रकार से वैचारिक

6
00:00:23,680 --> 00:00:28,000
रूप से व्यवहारिक रूप से दूर हो चुके हैं तो वह आज हमारे चैनल

7
00:00:28,000 --> 00:00:32,320
पर आने वाले हैं और क्या क्या की जीवनी रही कैसे उनको क्या

8
00:00:32,320 --> 00:00:36,360
परेशानियां हुई या किन बातों को लेकर के उनका जो

9
00:00:36,360 --> 00:00:40,840
मत है वो एक नहीं है इस बारे में हम लोग डिस्कशन करेंगे

10
00:00:40,840 --> 00:00:45,080
मगर इससे पहले मैं अपने सभी जितने भी दर्शक

11
00:00:45,080 --> 00:00:49,560
है उनको मैं यह कहना चाहूंगा कि जैसे एक अभियान

12
00:00:49,560 --> 00:00:54,080
है कि जब कोई ब हो गया मुस्लिम हो गया या कोई क्रिश्चियन

13
00:00:54,080 --> 00:00:58,160
हो गया तो वहां से जब हम किसी को वापस लाते हैं तो उस अभियान को नाम दिया

14
00:00:58,160 --> 00:01:02,320
जाता है घर वापसी तो ये जो हमारे

15
00:01:02,320 --> 00:01:06,960
जो भटके हिंदू भाई हैं जो ब्रह्मा कुमारी रामपाल

16
00:01:06,960 --> 00:01:11,160
इस्कोन आ समाज इस प्रकार के जो अभी पिछले

17
00:01:11,160 --> 00:01:15,480
100 डेढ स सालों में जो तंत्र भर कर के आए हैं सामने इस प्रकार के तंत्रों

18
00:01:15,480 --> 00:01:17,240
में जो फस गए हैं स्वामी

19
00:01:17,240 --> 00:01:21,480
नारायण और भी कई है नाम जो मुझे अभी रबली याद नहीं हो रहे हैं

20
00:01:21,480 --> 00:01:25,960
तो इस प्रकार के तंत्रों में जो फस गए हैं वहां से अगर हम लोग

21
00:01:25,960 --> 00:01:30,080
किसी को शुद्ध परंपरा निष्ठ

22
00:01:30,080 --> 00:01:34,560
उसम लाते हैं विचार में तो उस अभियान को क्या नाम दिया जाए

23
00:01:34,560 --> 00:01:38,560
ये आप लोग सजेस्ट करिए आने वाले टाइम में आप लोग जिसके मन में जो जो नाम

24
00:01:38,560 --> 00:01:42,880
आता जाए वो हमें कमेंट के द्वारा बताते रहे तो हम इस अभियान

25
00:01:42,880 --> 00:01:47,040
को एक नाम देना चाहते हैं कि इस अभियान को क्या नाम दिया जाए

26
00:01:47,040 --> 00:01:51,320
वो हो सकता है जैसे समथिंग लाइक हम कह सकते हैं भटका हिंदू

27
00:01:51,320 --> 00:01:55,480
वापसी अभियान या इस तरह से पैटर्न

28
00:01:55,480 --> 00:01:59,480
हो सकता है इस अभियान को एक नाम देना है हमें तो सभी से आग्रह है कि व

29
00:01:59,480 --> 00:02:04,320
अपने हिंदु हिंदुत्व जागृत अभियान भी बोल सकते हैं हां

30
00:02:04,320 --> 00:02:08,480
कैसे वो उस चीज को हम लोग लाइमलाइट कर सकते हैं कि कोई

31
00:02:08,480 --> 00:02:12,480
विकृत धर्म के स्वरूप को छोड़ कर के शुद्ध धर्म के स्वरूप में वापस आ रहा

32
00:02:12,480 --> 00:02:16,680
है वो भले ही निंबार्क परंपरा में आ रहा है वो भले ही शुद्ध रामानुजाचार्य

33
00:02:16,680 --> 00:02:20,840
परंपरा में आ रहा है वो भले ही शुद्ध शंकराचार्य परंपरा में आ रहा है मगर वो शुद्धता

34
00:02:20,840 --> 00:02:24,920
में आ रहा है ये जो विकृत स्थितियां है जो तंत्रों के रूप में ख्या पित हुई

35
00:02:24,920 --> 00:02:29,240
है तो इनसे वो वापस आ रहा है है ना

36
00:02:29,240 --> 00:02:32,400
इस बारे में सभी अपने सुझाव दीजिएगा तो अभी

37
00:02:32,400 --> 00:02:36,600
हमारे साथ सब कई लोग हैं विनय

38
00:02:36,600 --> 00:02:41,080
जी है पुणे से हैं विनय जी और दीपक

39
00:02:41,080 --> 00:02:45,800
जी और मिहिर जी भी है हमारे साथ

40
00:02:45,800 --> 00:02:49,920
तो सबसे पहले मैं चाहूंगा दीपक जी

41
00:02:49,920 --> 00:02:54,720
आप अपने बारे में थोड़ा सा बता दीजिए कि कैसे क्या है और आपका

42
00:02:54,720 --> 00:02:59,000
इस समय का क्या है अपने बारे में बताए

43
00:02:59,000 --> 00:03:03,680
जैसे कि मैं दीपक नाम तो है लिखा हुआ टाइटल में

44
00:03:03,680 --> 00:03:07,880
मैं 2016 में मतलब बहुत मतलब

45
00:03:07,880 --> 00:03:12,160
क्यूरियोसिटी रहता है जिज्ञासा रहता है जब भी मतलब बचपन से

46
00:03:12,160 --> 00:03:16,160
मेरे जो माता पिता है वो पहले से मतलब ये सत्संग वगैरह में जाते थे

47
00:03:16,160 --> 00:03:20,160
बट वो सत्संग में जाते थे किसी मतलब एक गुरु जीी है उनका

48
00:03:20,160 --> 00:03:24,200
नाम सतपाल जी महाराज आपने शायद सुना रहेगा तो उसम

49
00:03:24,200 --> 00:03:28,320
जाते थे तो वहां से जो मेरा भक्ति धीरे धीरे वहा से मेरा स्टार्ट हुआ था

50
00:03:28,320 --> 00:03:32,680
भक्ति जब मैंने 2016 में जब मेरा पवी

51
00:03:32,680 --> 00:03:36,760
जब खत्म हुआ पवी का एग्जाम तो मुझे लगा कि मतलब य परफेक्ट

52
00:03:36,760 --> 00:03:40,920
टाइम है मतलब और धर्म को जानना मतलब शास्त्र वगैरह का बात करते

53
00:03:40,920 --> 00:03:45,000
हैं तो मतलब क्या है हिंदू मतलब क्योंकि उसके पहले इतना इतना पूरा

54
00:03:45,000 --> 00:03:47,760
अवे नहीं था उसके बारे में इतना जागृत नहीं था मैं बस

55
00:03:47,760 --> 00:03:52,000
सुनता था हिंदू हिंदू ू ना कुछ शास्त्र के बारे में पता था हा लेकिन भगवत

56
00:03:52,000 --> 00:03:56,040
गीता सुनने का मतलब ऐसा होता था कि और सुन और सुन मतलब लेकिन कहां से

57
00:03:56,040 --> 00:04:00,120
सुनू क्योंकि अभी जैसे हम लोग जो शहर में रहते मुंबई में तो

58
00:04:00,120 --> 00:04:04,240
वहां पर ऐसा जैसे कि आप देखेंगे धाम धाम वगर साइड में देखेंगे

59
00:04:04,240 --> 00:04:08,560
तो वहां पर आपको हर एक मठ मिल जाते हैं हर एक अलग संप्रदाय

60
00:04:08,560 --> 00:04:12,800
का ये मिल जाता है जहा पर आपको इ मतलब इजी हो जाता है आपको जो भी भक्ति

61
00:04:12,800 --> 00:04:17,040
वगर का पा मिल जाता है ब मुंबई जैसे य पर क्या होता है कि थोड़ा स्ट्रगल करना पड़ता

62
00:04:17,040 --> 00:04:21,160
है जल्दी मिलता नहीं है यहां पर तो उस टाइम पर उस

63
00:04:21,160 --> 00:04:25,880
टाइम पर य हुआ था मेरे साथ में जब 2015 में जब मे एगजाम मतलब

64
00:04:25,880 --> 00:04:29,960
एम अंतिम अंतिम एग्जाम का मेरा सेमेस्टर चल रहा था तो

65
00:04:29,960 --> 00:04:34,000
मेरा एक मित्र थे तो वो मित्र ने मतलब

66
00:04:34,000 --> 00:04:38,200
जो इकन का है हर सेंटर ता हर एक एरिया में

67
00:04:38,200 --> 00:04:42,400
तो फिर उनके जरिए मैं वहां पर गया था फर्स्ट सेमिनार मैंने अटेंड किया था वहां प

68
00:04:42,400 --> 00:04:46,600
तो एक्चुअली सेमिनार तो नहीं बोलते वो लोग प्रोग्राम बोलते उसको कि हर

69
00:04:46,600 --> 00:04:50,600
वीक में प्रोग्राम होता है तो फर्स्ट टाइम में जब वहां पर

70
00:04:50,600 --> 00:04:54,800
गया फिर एक ये अपने टेंपल के ब्रह्मचारी

71
00:04:54,800 --> 00:04:58,840
आए हुए थे वहां प तो जो भगवत गीता के जो भी भगवत

72
00:04:58,840 --> 00:05:03,000
गीता ता उसका को टाइटल ले लेते लोग उसके उसके इस पर डिस्कस

73
00:05:03,000 --> 00:05:07,120
करते हैं वो मतलब भगवत गीता तो नहीं बोल सकते बस एक मोटिवेशन आप बोल सकते हो कि कैसा

74
00:05:07,120 --> 00:05:11,160
क्या मतलब डिवोशनल डिवोशनल ये क्या होता है

75
00:05:11,160 --> 00:05:15,880
तभी मेरा उससे मतलब फर्स्ट टाइम जब मैं गया तो मुझे अच्छा लगा अच्छा इसलिए लगा क्योंकि

76
00:05:15,880 --> 00:05:20,000
पहले तो मैं अवेयर था नहीं बट जब उनकी वाणी मैंने सुना तो मुझे अच्छा लगा कि हा

77
00:05:20,000 --> 00:05:24,080
नहीं बराबर हैय तो उस टाइम से थोड़ा मेरा वहां से स्टार्ट चालू

78
00:05:24,080 --> 00:05:28,120
हुआ वहां पर फिर जाना चालू हुआ हर वीक में फिर लेक्चर सुनता था

79
00:05:28,120 --> 00:05:32,200
हर एक हर एक वीक में अलग अलग ब्रह्मचारी आते थे मंदिर से

80
00:05:32,200 --> 00:05:36,240
और वो जो भी एक टाइटल प्रोग्राम का एक टाइटल

81
00:05:36,240 --> 00:05:40,400
होता था वो उसके ऊपर दो घंटा चलते थे प्रोग्राम फिर

82
00:05:40,400 --> 00:05:44,400
भजन होता था कीर्तन होता था फिर अच्छा लगने लगा फिर और

83
00:05:44,400 --> 00:05:48,520
थोड़ा डीप में गया मैं तो ये मेरा तो इंट्रोडक्शन पार्ट हो गया फिर उसके

84
00:05:48,520 --> 00:05:52,880
आगे तो और भी जानकारी है तो वो भी मैं आगे बताता आपको

85
00:05:52,880 --> 00:05:56,920
तो उसके पहला तो मैं एक बोलता जो महिर करके है ये मेरे से

86
00:05:56,920 --> 00:06:01,080
पहले आए हुए हैं इनको कम से कम लगभग सात से आ साल हो गया

87
00:06:01,080 --> 00:06:05,760
इनको हा मैं आपका परिचय ले लिया है हमने

88
00:06:05,760 --> 00:06:11,160
महर जी आप भी थोड़ा सा परिचय दे द अपने बारे में

89
00:06:11,160 --> 00:06:15,600
हा हा जय श्री राम जय श्री

90
00:06:15,600 --> 00:06:18,000
राम मैं मेरा नाम मिहिर पाठक

91
00:06:18,000 --> 00:06:22,280
है और मैं भी मुंबई में ही रहता हूं और

92
00:06:22,280 --> 00:06:26,560
इसकन 2011 में मैंने जवाइन किया था पहले

93
00:06:26,560 --> 00:06:30,680
तो मेरे घर पर परंपरा जो थी वो अभी भी वही परंपरा है

94
00:06:30,680 --> 00:06:34,880
पंच देव की उपासना और मेरा ज्यादा करके लगाव जो ी

95
00:06:34,880 --> 00:06:39,680
गणेश जी और भगवान महादेव में तो मैं उनकी ही उनके जो

96
00:06:39,680 --> 00:06:44,480
जो भी है उनके व्रत है वही करता रहता था संकष्ट है ये सब तो

97
00:06:44,480 --> 00:06:48,680
और मुझे इच्छा थी की कुछ श्रीमद भगवत गीता के बारे में कुछ जान मुझे कुना

98
00:06:48,680 --> 00:06:52,840
शास्त्र का ज्ञान नहीं था बस सिर्फ ये है हम महादेव

99
00:06:52,840 --> 00:06:57,160
हमारे आराध्य है और श्री गणेश जी है उनको हम पूछते थे

100
00:06:57,160 --> 00:07:01,320
और रामायण महाभारत का बेसिक जो नॉलेज रहता

101
00:07:01,320 --> 00:07:05,560
है हर हिंदुओ को हम हमें भी था इच्छा थी हमें भी हमें जानने

102
00:07:05,560 --> 00:07:09,760
की इच्छा थी श्रीमद भगवत गीता के बारे में जाने तो हमारे हमारे एक मित्र

103
00:07:09,760 --> 00:07:14,080
थे तो उन्होंने मुझे बोला वो हमारे मतलब इतने हाय हेलो वाले दोस्त

104
00:07:14,080 --> 00:07:18,440
मतलब एकदम क्लोज नहीं तो उन्होने बोला मैं यहा पर जाता हूं स्न

105
00:07:18,440 --> 00:07:22,520
में कोई स्कूल था हमारा य प बो स्कूल है वहा प

106
00:07:22,520 --> 00:07:26,600
वो प्रोग्राम लेते यथ यूथ पिंग बोलते है ना य यूथ को

107
00:07:26,600 --> 00:07:30,840
मतलब प्रोत्साहित करते है इसके इसके

108
00:07:30,840 --> 00:07:33,080
लिएन के लिए उनकी

109
00:07:33,080 --> 00:07:37,080
जो टीचिंग के लिए हमें पता नहीं था कि क्या हो रहा है तो हम गए वहां पर

110
00:07:37,080 --> 00:07:41,280
तो कीर्तन व सब हो रहा था और थोड़ जो श्रीमद भगवत गीता

111
00:07:41,280 --> 00:07:45,320
के कोई भी रैंडम कोई भी अध्याय है सातवा

112
00:07:45,320 --> 00:07:49,320
अध्याय हो या 18 अध्याय हो उसके ऊपर वो प्रवचन देते

113
00:07:49,320 --> 00:07:53,880
थे और हर बार मैंने एक चीज देखा है उन्होने 18 अध्याय

114
00:07:53,880 --> 00:07:59,880
का 66 नंबर का लोक है सर्वधर्म 6

115
00:08:00,840 --> 00:08:04,960
तो वो जो उस लोग को हर बार बताते थे कि यही है इसका

116
00:08:04,960 --> 00:08:09,200
यही परम वही है इसम कुछ जाने योग्य दूसरा कुछ नहीं है

117
00:08:09,200 --> 00:08:13,200
तो हमें तो स्टार्टिंग में तो अच्छा लगा कि सब प्रसाद प्रसाद मिल

118
00:08:13,200 --> 00:08:17,320
रहा है डांस भी करते सब लोग हमें तो अच्छा लगा हम तो थोड़े

119
00:08:17,320 --> 00:08:21,360
सस गए बाद में धीरे धीरे हमें पता चला एक महीना हो गया

120
00:08:21,360 --> 00:08:25,720
उन्होने हमें बोला चलो उ जा रहे उ श्री कृष्ण म है वहा माधवाचार्य

121
00:08:25,720 --> 00:08:30,000
जी का है वहा पर हम जा रहे हैं तो आप भी चाए

122
00:08:30,000 --> 00:08:34,160
बहुत अच्छा है बड़ी बड़ी बोलते है ना लालच बोलते

123
00:08:34,160 --> 00:08:38,200
है ना गोलोक का वो सबका अरे बहुत पवित्र है आप

124
00:08:38,200 --> 00:08:43,040
आपका मतलब आगे का आपका मार्ग सरल हो जाएगा भक्ति में तो

125
00:08:43,040 --> 00:08:47,080
हम ठीक है हम चले जाएंगे जाते चलो जाते घर प भी परमिशन

126
00:08:47,080 --> 00:08:48,160
ली वो समय प हम

127
00:08:48,160 --> 00:08:52,440
20 साल के थे तो गए कभी गए तभी हमारा वो समय प संकष्ट

128
00:08:52,440 --> 00:08:56,520
आया हमने कहा संकष्ट है हम संकष्ट करते है

129
00:08:56,520 --> 00:09:00,720
तो अरे तुम संकष्ट क्यों करते हो संकष्टी एक बार क्लियर

130
00:09:00,720 --> 00:09:04,920
कर दूं जो गणेश चतुर्थी का एक व्रत आता है बीच में अभी

131
00:09:04,920 --> 00:09:09,320
आके गया है कुछ दिनों पूर्व ही है ना जी

132
00:09:09,320 --> 00:09:14,080
हा हा जी तो संकष्ट करते थे तो हमने हम बोला लो

133
00:09:14,080 --> 00:09:18,200
थोड़ा नाश्ता कर लो हमें संकष्ट है तो

134
00:09:18,200 --> 00:09:22,240
संकष्ट के ऊपर हमारे बीच में आधे घंटे की बहस हो गई

135
00:09:22,240 --> 00:09:26,280
बोले की जो गणेश जी है वो डेमी गड है

136
00:09:26,280 --> 00:09:30,400
और तुम सुप्रीम पर्सनालिटी ऑफ गड हैड जो कृष्णा हो उनको तुम मानते

137
00:09:30,400 --> 00:09:34,480
हो उन उनके पास जा रहे हैं हम और उनको ही भजना है हमें

138
00:09:34,480 --> 00:09:38,520
ये तो मतलब ये स्टार्टिंग का ये सब है जो भक्ति जो स्टार्टिंग की

139
00:09:38,520 --> 00:09:42,680
है आप गणेश जी प्रसन्न हुए इसलिए आपको भगवान श्री कृष्ण के पास आपको भेजा है तो

140
00:09:42,680 --> 00:09:46,880
ये सब उन्होंने हमें बोला और हमें हम थोड़ी उनके बाद में भी आ गए कि हां

141
00:09:46,880 --> 00:09:51,640
हा सही है उन्होने बहुत बड़ा पूरा उनका वो मैप रहता है ना जो

142
00:09:51,640 --> 00:09:55,960
ये लोग के बाद ये लोग वसा वो रहता है पहले भूलोक है उसके बाद

143
00:09:55,960 --> 00:10:00,640
वैकुंठ लो उस ब्रह्म लो उसके बाद वैकुंठ उसके बाद साकेत लोग

144
00:10:00,640 --> 00:10:03,320
उसके बाद सबसे ऊपर गोता है उन्होने

145
00:10:03,320 --> 00:10:07,320
सब ऐसा सब वो करा करा के बो सुप्रीम जो है वो भगवान श्री

146
00:10:07,320 --> 00:10:11,480
कृष् नहीं है तो हमें बाद में ला दिया

147
00:10:11,480 --> 00:10:15,920
हमने सम सं तो पहली बार ऐसा हुआ हम ऐसा ऐसा

148
00:10:15,920 --> 00:10:19,960
करना पड़ा हमें हमें पता नहीं था क्या हो रहा है पर हम थोड़ा उस

149
00:10:19,960 --> 00:10:24,880
समय इतना पता नहीं चला बाद में धीरे धीरे धीरे आगे हम आपको बताएंगे वैसा

150
00:10:24,880 --> 00:10:28,920
हमारा स्टार्ट हुआ और उनका जो रेगुलर प्रोग्राम था

151
00:10:28,920 --> 00:10:32,960
जाते उसम और आगे हम बाद में बताएंगे

152
00:10:32,960 --> 00:10:37,400
हमें क्या ऐसा लगा कि हम हमने ये छोड़

153
00:10:37,400 --> 00:10:41,920
दिया जी जी मैं समझ रहा हूं

154
00:10:41,920 --> 00:10:46,400
जी विनय जी आप भी अपने बारे में थोड़ा बताते

155
00:10:46,400 --> 00:10:50,480
हम आपको साधुवाद देते हैं आप बहुत ही अच्छा कार्य कर रहे हो यह कार्य हम भी

156
00:10:50,480 --> 00:10:54,560
नहीं कर सकते य मुंबई में र आप इतना वहा सेना कर रहे हो सची

157
00:10:54,560 --> 00:10:58,640
में आपको बहुत बड़ा साधुवाद है जी जी आभार आपका

158
00:10:58,640 --> 00:11:02,680
और ये सब कृपा है गुरु गोविंद ग्रंथ की हम लोग निमित्त

159
00:11:02,680 --> 00:11:06,880
मात्र है विनय जी आप अपने बारे में बताएं कैसे क्या थोड़ा

160
00:11:06,880 --> 00:11:10,160
सा आपकी शुरुआत रही

161
00:11:10,160 --> 00:11:14,840
है आप सुन पा रहे हैं विन जी हा जी जय श्री राम सबको

162
00:11:14,840 --> 00:11:18,960
जय श्री हा जी मैं सुन पा रहा हूं मेरा मेरी आवाज आ रही है

163
00:11:18,960 --> 00:11:22,520
जी आ रही

164
00:11:22,520 --> 00:11:26,720
है हा अटक रहा है शायद लाइव थोड़ा थोड़ा बी

165
00:11:26,720 --> 00:11:30,720
आपके य शायद नेटवर्क का प्रॉब्लम है क्योंकि हमारे पास क्लियर आ रहा

166
00:11:30,720 --> 00:11:34,880
है

167
00:11:34,880 --> 00:11:38,880
सब अच्छा आपकी जी आपकी आवाज आ रही है हमको

168
00:11:38,880 --> 00:11:43,000
क्लियर आप

169
00:11:43,000 --> 00:11:47,400
बोलिए मेरी आवाज भी अटक रही है आवाज

170
00:11:47,400 --> 00:11:50,520
थोड़ी सी अटक रही है जी

171
00:11:50,520 --> 00:11:55,400
हेलो अभी आप बोल अभी आप कुछ बोलिए तो हम

172
00:11:55,400 --> 00:12:01,400
आवाज आ रही है आप बोलिए

173
00:12:01,920 --> 00:12:06,120
हां जी मेरा नाम विनय है पुणे से और मेरे

174
00:12:06,120 --> 00:12:10,520
को एक्चुअली 12 साल हो गए इकन 2008 से मैं इकन

175
00:12:10,520 --> 00:12:14,560
में हूं और मैं जब कॉलेज में था तभी मेरे एक

176
00:12:14,560 --> 00:12:19,200
दोस्त ने करवाया इस कन से और लेके गया

177
00:12:19,200 --> 00:12:23,240
टेंपल में तो बीच में रास्ते में मुझे बताया कि सबका बाप बैठा

178
00:12:23,240 --> 00:12:27,760
है व उधर जाना है तो मैं सोचा कौन कौन बाप बैठा है

179
00:12:27,760 --> 00:12:32,160
तो तभी मेरे को कुछ पता नहीं था तो इस इसकन में जो कृष्ण

180
00:12:32,160 --> 00:12:36,320
का मूर्ति है उधर उसने दिखाया कि ये हमारा बाप है

181
00:12:36,320 --> 00:12:40,560
तो ऐसे इंट्रोडक्शन हुआ फिर बाद में डायरेक्टली मेरे को माला पकड़ा दिया

182
00:12:40,560 --> 00:12:44,880
और बिठा दिया 16 माला करने के लिए और

183
00:12:44,880 --> 00:12:49,120
16 माला पूरा होने तक वो मेरा दोस्त मेरे बाजू में बैठा रहा फर

184
00:12:49,120 --> 00:12:53,560
उसके बाद स माला खत्म होने के बाद वो मेरे को एक उधर एक

185
00:12:53,560 --> 00:12:57,640
ब्रह्मचारी रहते तो उनसे इंट्रोड्यूस करवाया फिर उन्होंने

186
00:12:57,640 --> 00:13:01,760
मुझे बताया कि आप हमारे होते एवरी संडे तो आते जाइए

187
00:13:01,760 --> 00:13:05,840
फिर प्रसाद होता है फीस्ट होता है बहुत बड़ा फिर फिर मैं बोला ठीक

188
00:13:05,840 --> 00:13:10,240
है आता हूं फिर ऐसे करते करते मुझे एक बात बहुत अच्छी लगी इसकन

189
00:13:10,240 --> 00:13:14,280
की वह है उनका कीर्तन उनका कीर्तन से मैं इतना अट्रैक्ट हो गया

190
00:13:14,280 --> 00:13:17,800
कि मैं उधर हमेशा जाता रहा कंटीन्यूअसली

191
00:13:17,800 --> 00:13:22,400
तो कीर्तन ने मुझे खींच लिया इसन ने तो

192
00:13:22,400 --> 00:13:27,360
इस हिसाब से मैं कीर्तन करता गया फिर बाद में ऐसे ही बहुत सारे

193
00:13:27,360 --> 00:13:31,360
साल बीत गए फिर उसके बाद में जरा स्पिच मतलब भगवत गीता में

194
00:13:31,360 --> 00:13:35,680
घुसने लग गया फिर उसके बाद मुझे बहुत कुछ ऐसी

195
00:13:35,680 --> 00:13:39,920
ऐसी बातें पता पता चली कि इसकन में बोलते

196
00:13:39,920 --> 00:13:43,960
कुछ अलग है लेकिन गीता में कुछ अलग लिखा है तो यह मुझे

197
00:13:43,960 --> 00:13:48,080
खटक नहीं लगा तो ऐसे मैं उनको सवाल करने लग गया फिर

198
00:13:48,080 --> 00:13:52,400
फिर उसके बाद मुझे हमेशा हमेशा ये बोलते थी ज्यादा शास्त्र में घुसो मत

199
00:13:52,400 --> 00:13:57,040
तुम तुम्हारा दिमाग खराब हो जाएगा जितना प्रभुपाद ने बोला है उतना ही करो

200
00:13:57,040 --> 00:14:01,520
तो उनका सिर्फ एक ही स्टेटमेंट है फॉलो प्रभुपाद ओनली

201
00:14:01,520 --> 00:14:05,800
उनके जो सन्यासी है वह लोग भी यही बोलते कि रीड ओनली प्रभुपाद

202
00:14:05,800 --> 00:14:10,080
बुक्स डोंट रीड एनी अदर बुक्स तो जी

203
00:14:10,080 --> 00:14:14,320
ऐसे करके करके फिर मैं थोड़ी दिन के बाद फिर मैंने छोड़ ही दिया फिर इसन

204
00:14:14,320 --> 00:14:18,440
पूरा फ अभी मैं जैसे महाराष्ट्र पुना से हूं यहां

205
00:14:18,440 --> 00:14:23,080
पर वारकरी संप्रदाय है जैसे आपको पता है संत तुकाराम स संत

206
00:14:23,080 --> 00:14:27,080
ज्ञानेश्वर इन्होने इनके संप्रदाय में मैं

207
00:14:27,080 --> 00:14:31,120
ज्ञान प्राप्त करने लग गया और अचानक मे को एक गुरु मिल गए जो शंकर

208
00:14:31,120 --> 00:14:32,920
संप्रदाय से तो उनके

209
00:14:32,920 --> 00:14:37,080
साथ मैंने बैठ के पूरी ज्ञानेश्वरी पढ़ली अच्छा और

210
00:14:37,080 --> 00:14:41,240
दास बध भी पूरा पढ़ लिया है तो और दो किताब पढ़ना

211
00:14:41,240 --> 00:14:45,280
बा बाकी था लेकिन मेरे गुने दे का अंत कर

212
00:14:45,280 --> 00:14:49,400
दिया अच्छा अच्छ चलिए ठीक

213
00:14:49,400 --> 00:14:53,760
है तो अभी

214
00:14:53,760 --> 00:14:59,760
ोड अच्छा इंट्रोडक्शन पार्ट हो गया है सभी का

215
00:15:00,280 --> 00:15:04,560
तो अभी एक बात यहां पर हम याद आई जैसे एक

216
00:15:04,560 --> 00:15:08,680
इन्होंने बात कही महीर जी ने और मेहर जी ने कहा कि आधे

217
00:15:08,680 --> 00:15:13,160
घंटे तक इस बात को लेकर डिबेट हो गई क्योंकि वह इस चीज के पीछे पड़े हुए थे

218
00:15:13,160 --> 00:15:17,840
कि आपको जो है य गणेश जी के व्रत में इंटरेस्टेड नहीं होना चाहिए संकष्ट का जो व्रत

219
00:15:17,840 --> 00:15:21,880
है ना तो और इधर आपने बात कही कि भाई

220
00:15:21,880 --> 00:15:26,320
आपको जो है और किसी की बुक्स नहीं पढ़नी

221
00:15:26,320 --> 00:15:30,720
चाहिए अब मैं यहां पर कोई पक्षपात

222
00:15:30,720 --> 00:15:34,760
नहीं रख रहा हूं मगर एक बात बता रहा हूं अगर आप प्रेमानंद जी

223
00:15:34,760 --> 00:15:38,760
से पूछे भगवत गीता किसकी पढ़ेंगे तो प्रेमानंद जी निर्विवाद रूप से

224
00:15:38,760 --> 00:15:42,880
कह देंगे साधक संजीवनी पढ़ लो

225
00:15:42,880 --> 00:15:47,240
जो गीता प्र छपती है जो

226
00:15:47,240 --> 00:15:48,240
जो

227
00:15:48,240 --> 00:15:52,320
उसको उसके उसको लिखने वाले हैं जो स्वामी राम सुख दास

228
00:15:52,320 --> 00:15:56,320
जी वो उनके कोई परंपरा के नहीं है कि उनकी

229
00:15:56,320 --> 00:16:00,440
जो श्री हित हरिवंश की जो परंपरा है परंपरा उस

230
00:16:00,440 --> 00:16:04,480
परंपरा की नहीं है राम सुखदास जी मगर निष्पक्षता से न्याय

231
00:16:04,480 --> 00:16:08,760
पूर्वक बात वो करते हैं उन्होंने बोला कि आप जो

232
00:16:08,760 --> 00:16:13,360
है इनकी पढ़ लो अच्छा देखा जाए तो

233
00:16:13,360 --> 00:16:17,960
ज्ञानेश्वरी मा ज्ञानेश्वरी जो गीता है ज्ञानेश्वर महाराज की पुरी

234
00:16:17,960 --> 00:16:22,000
के शंकराचार्य जी पूछा जाता है कि प्रारंभिक अध्ययन कहां

235
00:16:22,000 --> 00:16:26,160
से शुरू करें तो गुरुदेव जगतगुरु शंकराचार्य व क्या कहते

236
00:16:26,160 --> 00:16:30,320
हैं कि ज्ञानेश्वरी गीता पढ़िए ज्ञानेश्वर ऑफिशियल

237
00:16:30,320 --> 00:16:34,520
ज्ञानेश्वर महाराज ऑफिशियल हालांकि उनका दिया हुआ ज्ञान शंकर

238
00:16:34,520 --> 00:16:38,720
संप्रदाय का ही है मगर ऑफिशियल वो लाइनेज में कहीं

239
00:16:38,720 --> 00:16:42,880
नहीं दिखते हैं उनका कहीं ऐसा कोई स्त्रोत नहीं मिलता है प्रामाणिक

240
00:16:42,880 --> 00:16:45,320
रूप से

241
00:16:45,320 --> 00:16:49,360
और दूर से उनको यह माना जा सकता है कि हां उनके द्वारा दिया जाने

242
00:16:49,360 --> 00:16:54,240
वाला ज्ञान भी क्योंकि अद्वैत वाला ही है तो वह मिलता जुलता है अच्छा

243
00:16:54,240 --> 00:16:58,360
जो तुलसीदास जी है वो गुरुदेव तीन

244
00:16:58,360 --> 00:17:03,160
जो है ग्रंथ प्रमुखता से बताते हैं ज्ञानेश्वरी गीता

245
00:17:03,160 --> 00:17:04,160
और

246
00:17:04,160 --> 00:17:08,600
क्या कहते हैं रामचरित मानस और दासबोध इनमें

247
00:17:08,600 --> 00:17:12,640
से एक भी ग्रंथ ऐसा नहीं है जो प्रामाणिक रूप से शंकर

248
00:17:12,640 --> 00:17:16,880
संप्रदाय का ही हो के किसी शंकराचार्य ने लिखा हो

249
00:17:16,880 --> 00:17:21,040
एक भी ग्रंथ ऐसा नहीं है तुलसीदास जी रामानंद संप्रदाय

250
00:17:21,040 --> 00:17:25,120
के ज्ञानेश्वर महाराज उनका एक अपना

251
00:17:25,120 --> 00:17:29,240
अलग इतिहास और दासबोध समर्थ रामदास

252
00:17:29,240 --> 00:17:33,360
तो इनका जो ज्ञान है वह तो मैच खाता है जब यदि

253
00:17:33,360 --> 00:17:37,360
सत्यता का ज्ञान होगा गुरु गुरु का यह कर्तव्य होता है

254
00:17:37,360 --> 00:17:41,520
कि वह सत्य बताए अपने शिष्य को तो जब वह सत्य बता रहे हैं तो उनको

255
00:17:41,520 --> 00:17:46,000
इससे मतलब नहीं है कि यह जो समर्थ रामदास जी है शंकराचार्य थे कि नहीं थे

256
00:17:46,000 --> 00:17:50,560
तुलसीदास जी शंकराचार्य थे कि नहीं थे या ज्ञानेश्वर

257
00:17:50,560 --> 00:17:54,680
महाराज है शंकराचार्य थे कि नहीं थे क्या इन्होंने सत्य का स्वरूप

258
00:17:54,680 --> 00:17:58,920
बताया अपने गीता में तो इससे पता चलता है एक तरफ

259
00:17:58,920 --> 00:18:03,840
कहा जा रहा है सिर्फ इनके द्वारा लिखी हुई किताबें पढ़िए आप

260
00:18:03,840 --> 00:18:08,160
एक तरफ निष्पक्षता से यह बताया जा रहा है कि कहां-कहां से आपको सत्य

261
00:18:08,160 --> 00:18:12,240
प्राप्त होगा यह यह ध्यान र इस पर कोई ध्यान

262
00:18:12,240 --> 00:18:16,400
ना देते हुए कि जिनका हम नाम ले रहे हैं क्या ऑफिशियल वो लोग हमारे से जुड़े

263
00:18:16,400 --> 00:18:19,320
हुए हैं क्या उनका नाम लेने से हमारा जो

264
00:18:19,320 --> 00:18:23,360
संप्रदाय है हमारी जो परंपरा है वही प्रचलित होगी वही प्रसारित होगी उसी

265
00:18:23,360 --> 00:18:27,640
का प्रचार होगा यह सब ध्यान नहीं दिया जाता है अच्छा एक चीज और आती है

266
00:18:27,640 --> 00:18:31,680
कि प्रभुपाद जी का भी नाम आया हमने आज

267
00:18:31,680 --> 00:18:36,160
तक अपने द्वारा कभी भी

268
00:18:36,160 --> 00:18:40,200
प्रभुपाद जी ही नहीं प्रभुपाद जी तो हमारे लिए सम्माननीय है किसी के

269
00:18:40,200 --> 00:18:44,280
लिए भी कोई भी अभद्र अमर्यादित अश्लीलता

270
00:18:44,280 --> 00:18:48,560
भरे शब्दों द्वारा कोई भी किसी के लिए संबोधन हमने आज तक नहीं किया

271
00:18:48,560 --> 00:18:52,760
बहुत सारे हमने वैचारिक ऐसे वीडियोस बनाए जिसमें कि हमने प्रश्न किया कि

272
00:18:52,760 --> 00:18:56,920
भाई ऐसा है तो ऐसा क्यों या यह है तो यह क्यों मगर हमने आज तक

273
00:18:56,920 --> 00:19:01,080
कभी भी ऐसा नहीं कि प्रभुपाद जी के विशेष रूप से आज क्योंकि स्न की बात हो रही

274
00:19:01,080 --> 00:19:05,720
है तो प्रभुपाद जी के लिए हमने आज तक ऐसा कोई शब्द उपयोग में नहीं लाया

275
00:19:05,720 --> 00:19:09,720
जिसको कि णा मूलक कहा जा सके

276
00:19:09,720 --> 00:19:14,320
मगर जब से जब इकन की तरफ से कोई प्रतिक्रिया

277
00:19:14,320 --> 00:19:18,760
मेंक कोई वीडियो बनाया जाता है हमारी तरफ तो उसमें इतने सारे अभद्र

278
00:19:18,760 --> 00:19:23,800
टिप्पणियां हमारे व्यक्तिगत लिए की घटिया निर्लज

279
00:19:23,800 --> 00:19:27,880
और तरह तरह से नाम बिगाड़ना शक्ल बिगाड़ना

280
00:19:27,880 --> 00:19:32,480
यह सब कुछ करने का प्रयास किया जाता है तो इसमें मुझे इतना आश्चर्य

281
00:19:32,480 --> 00:19:34,520
होता है कि भाई एक तरफ

282
00:19:34,520 --> 00:19:38,600
तो यह परंपरा से अपने आप को बताते हैं वह सारी बातें अलग है कि

283
00:19:38,600 --> 00:19:42,960
परंपरा उनकी है कि नहीं है मगर क्या इस कोन में तैयारी

284
00:19:42,960 --> 00:19:47,240
कराई जाती है कि यदि आपकी शिक्षाओं पर आपके सिद्धांतों पर यदि कोई व्यक्ति

285
00:19:47,240 --> 00:19:51,360
प्रश्न कर दे तो उसको आप घटिया बोलो उसको आप निर्लज बोलो

286
00:19:51,360 --> 00:19:55,560
उसके उसके द्वारा जो मान्यता है ईश्वर के विषय में उसको आप घटिया

287
00:19:55,560 --> 00:19:59,560
बोलो उसके संप्रदाय को आप गट छाप बोलो यह

288
00:19:59,560 --> 00:20:03,760
सारी चीजें बोली जा रही यह सारी चीज तो मुझे आश्चर्य

289
00:20:03,760 --> 00:20:07,760
होता है कि इस इतनी निम्न लेवल की बातें करने वाले लोग अपने

290
00:20:07,760 --> 00:20:11,800
आप को परंपरावादी कैसे कहते हैं कैसे अपने आप को परंपरावादी कहते हैं

291
00:20:11,800 --> 00:20:16,160
जी दीपक

292
00:20:16,160 --> 00:20:20,320
जी देखिए शिवान जी शीला प्रभुपाद ने जो भी किया

293
00:20:20,320 --> 00:20:24,400
है सरा नहीं है मतलब एकदम बेस्ट है मतलब जो बाहर गए उन्होने प्रचार किया

294
00:20:24,400 --> 00:20:28,800
ठीक है बहुत अप्रिशिएट है वो क्योंकि ऐसा करना मतलब एक दुर्लभ होता है कि

295
00:20:28,800 --> 00:20:33,360
बाहर जाक पा देश में जाके भगवान के नाम का हरि नाम का प्रचार करना

296
00:20:33,360 --> 00:20:38,080
ठीक है उसम कुछ मब उसम कुछ भी मुझे मतलब

297
00:20:38,080 --> 00:20:42,080
उस विषय में कुछ अगेंस्ट में बहुत अच्छा लगता है

298
00:20:42,080 --> 00:20:46,360
दूसरा चीज प्रेमानंद महाराज राजेंद्र दास महाराज

299
00:20:46,360 --> 00:20:50,560
का ज जब भी सुनेंगे तो वो क्या करते हैं वो

300
00:20:50,560 --> 00:20:54,760
बेस्ट बताते है प्रभुपाद को हमेशा उन्होने कभी उन्होने पता प्रभुपाद ने कितना बे

301
00:20:54,760 --> 00:20:58,920
काम किया सब किया अब ब वाले पता है क्या करते जहा पर प्र

302
00:20:58,920 --> 00:21:03,200
प्रभुपाद का नाम आ गया उसका शॉर्ट क्लिप बना देंगे देखो प्रेमानंद महाराज ने शीला

303
00:21:03,200 --> 00:21:07,280
प्रभुपाद का तारीफ किया देखो राजेंद्र दास राजेंद्र दास जी महाराज ने

304
00:21:07,280 --> 00:21:11,480
उनका तारीफ किया बट उसी जगह प आप अगर

305
00:21:11,480 --> 00:21:15,480
जो हमारे जो भी संत है उनका नाम लेंगे नहीं दे आर नॉट जेन वो

306
00:21:15,480 --> 00:21:19,640
वो जेनन नहीं है प्रभुपाद के साथ डिवटी कोई मिलेगा नहीं अरे मानते हैं

307
00:21:19,640 --> 00:21:24,040
उन्होंने स्ट्रगल किया संघर्ष किया भक्ति के लिए उन्होंने बाहर गए

308
00:21:24,040 --> 00:21:28,080
बट ऐसा नहीं है कि अगर जो जो हमारे धाम के जो हमारे धाम के जितने भी

309
00:21:28,080 --> 00:21:31,160
संत उन्होंने स्ट्रगल नहीं कि ऐसा नहीं है आज आज अगर वो

310
00:21:31,160 --> 00:21:35,400
जिस पद पर बैठे हैं जिस यहां पर बैठे हैं वो

311
00:21:35,400 --> 00:21:39,760
तो उनका जो भी तजुर्बा है जो भक्ति में गए हैं उससे पूरा पता चलता है वो अभी

312
00:21:39,760 --> 00:21:43,760
प्रेमानंद राजेंद्र दास जी महाराज अभी जो अपने शंकराचार्य

313
00:21:43,760 --> 00:21:48,120
जी है वो खुद बोलते हैं कि जो वो जो लिमिटेशन

314
00:21:48,120 --> 00:21:52,320
में जो शास्त्रों का अध्ययन उन्होने जो किया है प्रॉपर उसके जैसा अभी

315
00:21:52,320 --> 00:21:56,440
संत जो मिलना दुर्लभ है वो प्रेमानंद महाराज के विषय में बोलते हैं राजें जी महाराज

316
00:21:56,440 --> 00:22:01,280
के विषय में बोलते हैं बट प्रभुपाद प्र प्रभुपाद के विषय में उन्होने

317
00:22:01,280 --> 00:22:05,440
शंकराचार्य है कुछ गलत नहीं बोलते वो भी सही बोलते व बाहर गए अच्छा मतलब

318
00:22:05,440 --> 00:22:09,640
जो भी कार्य किया अच्छे कार्य उने ब य पर क्या होता जो भी जो इनके

319
00:22:09,640 --> 00:22:13,880
शिष्य है जो भी डिपल है बारे में मेरी जानकारी

320
00:22:13,880 --> 00:22:18,160
है प्रभुपाद जी के बारे में वो ये है की

321
00:22:18,160 --> 00:22:22,680
उन्होंने क्रिश्चन को प्रभावित करने के लिए

322
00:22:22,680 --> 00:22:27,360
एक ताना बाना जो है बनाया है और

323
00:22:27,360 --> 00:22:31,360
मगर क्या है कि उसी सामग्री को यदि आप

324
00:22:31,360 --> 00:22:35,640
हिंदू को देने लगोगे तो जिस प्रकार को क्रश्न जिस प्रकार

325
00:22:35,640 --> 00:22:40,360
कोई क्रिश्चन उस सामग्री के द्वारा अपने

326
00:22:40,360 --> 00:22:44,480
मूल उसको अस्तित्व को त्याग कर हिंदू जम की तरफ प्रभावित

327
00:22:44,480 --> 00:22:46,200
हो सकता है उसी प्रकार

328
00:22:46,200 --> 00:22:50,600
उसी सामग्री से कोई हिंदू अपने मूल अस्तित्व को त्यागकर क्रिश्चियनिटी

329
00:22:50,600 --> 00:22:54,600
की तरफ भी प्रभावित हो सकता है एक अगर ब्रिज अगर बनाया गया

330
00:22:54,600 --> 00:22:58,800
है क्रिटी से और हिंदू जम के बीच में तो जिस ब्रिज से

331
00:22:58,800 --> 00:23:02,880
कोई क्रिश्चन हिंदुत्व की तरफ आएगा उसी बृज से कोई हिंदू

332
00:23:02,880 --> 00:23:06,920
भी क क जा सकता है तो प्रभुपाद जी का

333
00:23:06,920 --> 00:23:11,200
उद्देश्य था इधर से इधर वाला है ना और

334
00:23:11,200 --> 00:23:15,200
अब क्या हो रहा है कि वह है नहीं तो दिखाई ऐसा दे रहा है कि हमारे

335
00:23:15,200 --> 00:23:19,280
हिंदू ही आडलज क्रिश्चियनिटी की

336
00:23:19,280 --> 00:23:23,600
ओ प्रभावित हो रहे हैं क्योंकि व व

337
00:23:23,600 --> 00:23:27,680
सारी सामग्री कई बार ऐसा इनके जो लीडर्स भी है वो भीय कहते

338
00:23:27,680 --> 00:23:31,880
बाहर के देशों में प्रचार करना था इसलिए ऐसा कहा गया ठीक है अच्छी बात है आप

339
00:23:31,880 --> 00:23:35,960
वही करो ना आप वही करो आप फिर उसको यहां क्यों ला

340
00:23:35,960 --> 00:23:40,080
रहे हो आप सेम सामग्री यहां पर क्यों दे रहे हो यहां

341
00:23:40,080 --> 00:23:44,080
की जो सामग्री जो पहले से हिंदू है उसको वो सामग्री क्यों दे

342
00:23:44,080 --> 00:23:48,360
रहे हो जो हिंदू बनने के लिए दी जा रही है ये कुछ क्वेश्चन

343
00:23:48,360 --> 00:23:52,920
आ जाते हैं खैर मैं अब इस

344
00:23:52,920 --> 00:23:57,840
प्रकाश डालने चाहूंगा कि आपको कैसे क्या हुआ जो आपके

345
00:23:57,840 --> 00:24:01,280
सामने जो है स् कन को लेकर के कौन सी ऐसी सच्चाई यां है

346
00:24:01,280 --> 00:24:06,680
जिनके कारण आप आपके मन में वैचारिक मतभेद उत्पन्न हो वो आप कुछ

347
00:24:06,680 --> 00:24:11,040
प्रकार पहले पहली से जो चीज है वो एक है कि जलेबी

348
00:24:11,040 --> 00:24:15,640
बनाना बातों को मतलब एक एक ब्रह्मचारी कुछ अलग बात कर रहे है

349
00:24:15,640 --> 00:24:19,720
फिर वही हम दूसरे अगर ब्रह्मचारी से बात करते हैं तो वो बात

350
00:24:19,720 --> 00:24:23,920
अलग हो जाता है अभी जैसे कि मैंने फॉर एग्जांपल अभी मैंने हा

351
00:24:23,920 --> 00:24:27,920
हाल में मतलब पूछा था एक दो महीना हो गया रहेगा तो एक ब्रह्माचारी को मैंने पूछा कि

352
00:24:27,920 --> 00:24:32,280
जो बोलते हैं कोटी आपके पीछे से आवाज आ रही है दीपक

353
00:24:32,280 --> 00:24:36,360
जी मेरे पीछे से आवाज आ रही है

354
00:24:36,360 --> 00:24:40,720
एक्चुअली खाली है यहां प तो नहीं

355
00:24:40,720 --> 00:24:45,280
कुछ लोग बातें कर रहे हैं ना किसी के पीछे वो आवाज आ रही है

356
00:24:45,280 --> 00:24:51,280
अच्छा घर का शोर आ रहा है एक

357
00:24:56,360 --> 00:25:00,520
मिनट हां शिवा जी जी हा

358
00:25:00,520 --> 00:25:04,520
तो अभी शिवन जीी मेरे साथ में मैं आपको बताता हूं

359
00:25:04,520 --> 00:25:08,720
फॉर एग्जांपल अभी मैंने जैसे एक हाल में पूछा था कोटी मतलब क्या होता है जब हमारा

360
00:25:08,720 --> 00:25:13,280
मतलब ऐसा मंथली में प्रोग्राम होता है ठीक है और

361
00:25:13,280 --> 00:25:17,520
कैंप वगैरह भी लेकर जाया जाता है तो मैंने कैंप में उनको पूछा था कि जो कोटी

362
00:25:17,520 --> 00:25:20,880
है

363
00:25:20,880 --> 00:25:24,880
कोटी शोर आ रहा है आपके पीछे से आपके पीछे से ही

364
00:25:24,880 --> 00:25:29,000
आ रहा है क्या घर पीछे तो नहीं है वो तो काफी

365
00:25:29,000 --> 00:25:33,120
दूर है किसी के पीछे से आ रहा है क्या शोर मेहर जी

366
00:25:33,120 --> 00:25:38,840
आपके पीछे शोर हो रहा है क्या बातें करने का कुछ

367
00:25:38,840 --> 00:25:43,280
नट अब शोर बंद हो गया

368
00:25:43,280 --> 00:25:47,520
दीपक जी शायद आपके पीछे सेही क्योंकि आपने बंद किया ना माइक तो

369
00:25:47,520 --> 00:25:51,560
अभी आ रहा है अब नहीं आ रहा

370
00:25:51,560 --> 00:25:55,920
आवाज जोर से आ हा तो अभी अभी मेरा यह हुआ कि मैंने एक को पूछा

371
00:25:55,920 --> 00:25:59,920
कि कोटी मतलब क्या होता है ठीक है तो उन्होंने बताया कोटि मतलब होता

372
00:25:59,920 --> 00:26:04,160
है करोड़ बोला ठीक है करोड़ होता है एस पर मतलब

373
00:26:04,160 --> 00:26:08,320
जैसे उन्होंने बताया कि शीला प्रभुपाद ने बोला है कोट मतलब होता है करोड़ मतलब जो देवी

374
00:26:08,320 --> 00:26:12,800
देवता करोड़ देवी देवता ठीक है अभी सेम टेंपल के ब्रह्मचारी

375
00:26:12,800 --> 00:26:16,960
से मैंने फिर से पूछा कोट क्या होता है अभी वो क्या बोलते कोट

376
00:26:16,960 --> 00:26:21,160
मतलब होता है जैसे कि जो 12 12 देवी देवता

377
00:26:21,160 --> 00:26:25,360
बताते ना इतने रुद्र है इतने वासु

378
00:26:25,360 --> 00:26:29,600
है तो ये बताया उन्होने मैं बोला कि एक ही संस्था में है

379
00:26:29,600 --> 00:26:33,600
तो ये अलग-अलग क्यों मतलब बोलना है अगर आप जब एक ही चीज का पालन कर रहे

380
00:26:33,600 --> 00:26:37,840
हो अी मैं कोई चीज का पालन कर तो मुझे पता होना चाहिए वो चीज का क्या है बराबर

381
00:26:37,840 --> 00:26:41,840
अभी वो क्या करते हैं ये अलग बताएंगे आपको वो अलग बताएंगे तो यहां प बात

382
00:26:41,840 --> 00:26:45,840
पूरा जलेबी जले घूमता है मतलब यहां प मैं खुद कंफ्यूजन में कौन सही है ठीक

383
00:26:45,840 --> 00:26:50,280
है अभी जभी फिर मैंने य में सर्च मारा ठीक है सेम ब्रह्माचारी

384
00:26:50,280 --> 00:26:54,000
अलग-अलग बात कर रहे दो अलग-अलग ब्रह्मचारी मैं बोला इनका खुद कांसेप्ट क्लियर

385
00:26:54,000 --> 00:26:58,000
है नहीं तो मेरे को पहली बात तो दिक्कत यहां पई अब दूसरी दिक्कत

386
00:26:58,000 --> 00:27:02,360
य ये हुई कि एक बार मैं गया प्रोग्राम में लेके इस मैं एक

387
00:27:02,360 --> 00:27:06,360
इस मैं एक चीज याद दिलाना चाहूंगा इसमें ऐसा होता है कि

388
00:27:06,360 --> 00:27:10,800
जब इनसे कोई भी क्वेश्चन बोलो यस और नो कुछ भी क्वेश्चन करो

389
00:27:10,800 --> 00:27:15,360
तो ये सारी बातें बोल देंगे यस भी बोलेंगे नो भी बोलेंगे सब कुछ बोल देंगे

390
00:27:15,360 --> 00:27:19,720
जिससे कि बाद में जब आए नहीं इसका ये राइट आंसर था तो हमने कहा तो था

391
00:27:19,720 --> 00:27:24,040
मान लीजिए हमने कहा जैसे एक से लेकर 10 तक के बीच में से कोई एक आंसर है

392
00:27:24,040 --> 00:27:28,560
तो ये क्या करेंगे सारी बातें बोल देंगे टू 3 4 5 6 7 8 9 10

393
00:27:28,560 --> 00:27:33,080
अब उसके बाद हमने कहा कि भाई इसका आंसर था नाइन तो हमने बोला तो था नाइन

394
00:27:33,080 --> 00:27:37,120
हमने तो नाइन बोला था इन्होंने जो बाकी के बाकी की संख्या

395
00:27:37,120 --> 00:27:41,120
बोली वह गलत नहीं है इन्होंने जो नाइन बोला वो सही था जैसे अभी लास्ट

396
00:27:41,120 --> 00:27:45,400
में एक सज्जन आए थे ना एक तरीके से है भी और एक तरीके

397
00:27:45,400 --> 00:27:49,440
से नहीं भी है तो क्या हुआ सब कुछ बोल दिया और कुछ भी

398
00:27:49,440 --> 00:27:53,520
नहीं बोला जिससे कि बाद में जब हम यह कहे कि आपने मान ली थी अपनी नहीं मैंने

399
00:27:53,520 --> 00:27:57,520
कहा तो था एक तरीके से नहीं कर सकता और हम नहीं कर सकता पर जाएंगे

400
00:27:57,520 --> 00:28:01,800
तो बाद में बोलेगा नहीं मैंने कहा था ना कर सकता है जी

401
00:28:01,800 --> 00:28:06,280
आगे बताइए अपना कांसेप्ट क्लियर नहीं है आपने बोला था

402
00:28:06,280 --> 00:28:09,000
हां तो कांसेप्ट एक तो क्लियर नहीं होता है मुझे अभी

403
00:28:09,000 --> 00:28:13,320
अभी सीन ये हुआ था कि मैं गया था गीता प्रेस गोरखपुर

404
00:28:13,320 --> 00:28:17,400
का भगवत गीता लेके उनके पास में तो मैंने पूछा प्रभु जी

405
00:28:17,400 --> 00:28:21,440
मतलब ये तो मैं पाट कर रहा हूं तो इसमें से मुझे सब आंसर मिल जाएगा ना मतलब अगर ये

406
00:28:21,440 --> 00:28:25,520
इसका पाट कर तो मेरा जो कांसेप्ट है क्लियर हो जाएगा तो मुझे बोला नहीं नहीं नहीं

407
00:28:25,520 --> 00:28:29,760
नहीं ये बुक बोनाफाइड नहीं है तुम कुछ भी मत पढ़ो या क्या पढ़ गीता प्र

408
00:28:29,760 --> 00:28:33,760
का आपको सिर्फ शीला प्रभुपाद का ही बुक पढ़ना है और

409
00:28:33,760 --> 00:28:38,120
उसम जब आप पढ़ोगे तो आपको परा कांसेप्ट क्लियर हो जाएगा क्योंकि एक तो आपको ट्रांसलेशन

410
00:28:38,120 --> 00:28:42,360
मिल जाएगा प्रॉपर्ली फिर हर एक ट्रांसलेशन का जो अनुवाद है जो

411
00:28:42,360 --> 00:28:46,360
जो भी मतलब श्लोक है व श्लोक के आपको अनुवाद पूरे मिल जाएंगे दूसरा आपको

412
00:28:46,360 --> 00:28:50,480
तात्पर्य है एकदम प्रभु किसने नहीं लिखा है तो आपको

413
00:28:50,480 --> 00:28:54,600
पढ़ना है बोला ठीक है अबन ये होता है कि

414
00:28:54,600 --> 00:28:59,320
मतलब मैं भी जाता था बुक डिस्ट्रीब्यूशन के लिए दिसंबर में लगता है बुक का मैराथन

415
00:28:59,320 --> 00:29:03,440
तो मैं भी उसम पार्टिसिपेट करता था अब मेरे एक बार मेरे मित्र ने मुझे

416
00:29:03,440 --> 00:29:07,480
पूछा तो तुम बोलते हो कि बुक जो शीला प्रपात का

417
00:29:07,480 --> 00:29:11,640
बुक है वो एज इट इज है तो मुझे ये प्रूफ करो एज इट इज मतलब होता क्या है मैं

418
00:29:11,640 --> 00:29:15,680
बोला जैसा का तैसा मतलब जैसा लिखा जैसा परंपरा में लिखा गया वैसे का

419
00:29:15,680 --> 00:29:19,760
वैसा ही मिलेगा आपको कुछ अलग नहीं है तो उसने उसने मुझे बोला चलो ठीक

420
00:29:19,760 --> 00:29:23,960
है दूसरे चैप्टर का नाम क्या है तो मैंने बोला दिव्य ज्ञान बोला दिव्य

421
00:29:23,960 --> 00:29:24,460
ज्ञान

422
00:29:24,200 --> 00:29:28,480
कैसा हो गया दूसरे चैप्टर का नाम दूसरे चैप्टर का नाम तो सांख्य योग है

423
00:29:28,480 --> 00:29:32,480
तो एस इट कैसा हो गया यह परंपरा में कैसा तो को वहा पर थ

424
00:29:32,480 --> 00:29:36,800
डाउट लगा मुझे कि नहीं व तो बराबर है ए इट मतलब तोसे होना चाहिए अभी

425
00:29:36,800 --> 00:29:40,800
य पर सायोग का मतलब दिव्य ज्ञान हो गयाने

426
00:29:40,800 --> 00:29:44,800
थ टाइटल चेक किया मतलब जो हेडलाइन जो भी चैप्टर है

427
00:29:44,800 --> 00:29:49,120
उसका ज मैंने चेक करना चालू किया तो पता चला य लोग ने तो

428
00:29:49,120 --> 00:29:53,320
व वहा पर इसकी टोपी उसके स वहा पर पता चल पूरा अलग लिखा

429
00:29:53,320 --> 00:29:58,280
है अब जब आप अंदर जाते हो कमेंट्री पढ़ने अब उसम सबसे पहले तो

430
00:29:58,280 --> 00:30:02,560
डर है डर मतलब बोलते डर किसी में भी एक डर बिठाने का

431
00:30:02,560 --> 00:30:06,720
डर क्या बिठाने का अगर तुम्हारे पास ये जन्म है

432
00:30:06,720 --> 00:30:10,720
यह जन्म है तो अगर तुम जैसे शीला प्रभुपाद ने अपने बुक में लिखा है जो भी मुझे

433
00:30:10,720 --> 00:30:15,000
फॉलो करेगा मैं उसको बैक टू गड हेड लेकर जाऊंगा ये मेरा प्रॉमिस

434
00:30:15,000 --> 00:30:19,360
है जो भी 16 माला करना चाहिए चार नियमों का पालन करना चाहिए

435
00:30:19,360 --> 00:30:23,480
जो यह करता है जो भी मैं डिपल में मैं मैं खुद आके उसको गोलो धाम

436
00:30:23,480 --> 00:30:27,480
लेकर जाऊंगा एक तो पहला दिमाग में आ जाता कि भाई इतना तो हम लोग

437
00:30:27,480 --> 00:30:32,360
डेली कर तो अभी सबको तो एक रहता है ना कि बा कौन सा

438
00:30:32,360 --> 00:30:36,400
किसको जन्म लेना है य प एक जन्म में इतना टेंशन है तो किसको लेना

439
00:30:36,400 --> 00:30:39,560
है तो डर बै जाता है दूसरा कैसा

440
00:30:39,560 --> 00:30:43,640
अगर तुम इसकन डिवटी से हट के रहोगे अगर तुम किसकी बात सुनोगे

441
00:30:43,640 --> 00:30:48,080
तो तुम पूरे मायावादी हो तुम पूरा माया के जाल में फस गए हो इसलिए

442
00:30:48,080 --> 00:30:52,120
तुमको इकन डिवटी के साथ हर दम असोसिएशन में रहना है

443
00:30:52,120 --> 00:30:56,120
अभी उनका ए बी सीडी है ए बी सीडी का कांसेप्ट है ए मतलब एसोसिएशन

444
00:30:56,120 --> 00:31:00,360
बी मतलब बुक रीडिंग बुक डि कौन साला ओनली शीला प्रभुपाद का बुक डिंग

445
00:31:00,360 --> 00:31:04,480
सी मतलब चैटिंग और डी मतलब प्रभु डांसिंग ये

446
00:31:04,480 --> 00:31:08,480
चार हो गया ठीक है अभी इसमें क्या रहता है अभी एक तो दिक्कत क्या

447
00:31:08,480 --> 00:31:12,520
होता मुंबई में आपको बताता हूं कि बाकी तो मतलब यहां पर इतना कोई मट है

448
00:31:12,520 --> 00:31:16,520
नहीं कोई भी मतलब कोई संप्रदाय रहेंगे ऐसा नहीं है बट जहां पर

449
00:31:16,520 --> 00:31:20,720
हम लोग जिस जगह पर रहते है उस जगह पर ऐसा कोई मतलब है नहीं तो हम लोग

450
00:31:20,720 --> 00:31:24,880
क्या लगता है नहीं टेंपल बराबर है यहां पर डिवटी का असोसिएशन मिल रहा है दूसरी

451
00:31:24,880 --> 00:31:29,400
बात डिवटी हर दम कांटेक्ट में रहते कुछ भी डाउट हो गया तो उनको पूछ सकते है

452
00:31:29,400 --> 00:31:33,680
तीसरी बात उनके साथ उनके साथ जितना क्लोज में रहेंगे तो और भी मतलब

453
00:31:33,680 --> 00:31:38,040
और भी भक्ति में प्रोत्साहन मिलेगा और भी आगे बढ़ने का

454
00:31:38,040 --> 00:31:42,200
मतलब म भटक नहीं एक तो यहां प ये चीज होता है अब तीसरा

455
00:31:42,200 --> 00:31:46,440
चीज य होता है ये सारे चीज में चौथ चीज में आके फसा देते फसा

456
00:31:46,440 --> 00:31:50,640
देते पूरा जलेबी एक जगह बोलते ऐसा करना चाहिए और दूसरी जगह

457
00:31:50,640 --> 00:31:54,680
पर बात घूम जाता है इनका ऐसा नहीं करना चाहिए ठीक है अ ये क्या बोलते है एक

458
00:31:54,680 --> 00:31:58,960
जगह प तुमको ना वेदों का का अध्ययन करना चाहिए

459
00:31:58,960 --> 00:32:03,200
और तुमको शास्त्र पढ़ने चाहिए ठीक है ये इनका पहला पॉइंट अब दूसरे

460
00:32:03,200 --> 00:32:07,280
पॉइंट में क्या बोलते है अरे प्रभु शास्त्र मत

461
00:32:07,280 --> 00:32:11,440
शास्त्र पढ़ोगे तो आपका मतलब जो जन्म है वो 60 70 साल

462
00:32:11,440 --> 00:32:15,720
का है आप इतना शास्त्र अगर पढ़ोगे तो आपसे तो होगा नहीं आपको सिर्फ प्रभुपाद

463
00:32:15,720 --> 00:32:19,760
ने जो बोला है सोला माला करना है एक तो वो आपको करना है सोला माला

464
00:32:19,760 --> 00:32:23,760
और दूसरा एसोसिएशन में ही आपको रहना है और जो बताया जा रहा

465
00:32:23,760 --> 00:32:28,040
है मतलब जो सीनियर डिवटी हमारे जो सीनियर डिवटी है जो हमको बता रहे

466
00:32:28,040 --> 00:32:32,160
उनके आज्ञा में रहके करना है मतलब अपना बुद्धि मत लगाओ आप अगर आपको

467
00:32:32,160 --> 00:32:36,680
आपका बुद्धि भी लगाना है तो आप यूज मत करो मतलब आप रंग हो आपको उसके पहले

468
00:32:36,680 --> 00:32:40,800
ये लेना पड़ेगा आपके सीनियर से परमिशन लेना पड़ेगा बुद्धि लगाने का भी अभी

469
00:32:40,800 --> 00:32:44,920
मेरे साथ में क्या होता है जो मेरे अभी जो मेरे अभी जो मेरे

470
00:32:44,920 --> 00:32:48,920
सीनियर थे मेरे सीनियर थे वो क्या मुझे क्या बोलते थे अरे तुम यहां पर जा

471
00:32:48,920 --> 00:32:53,040
रहे हो तो यहां पर ऐसा मत जाया करो तुम बिना तुम बिना सला के कैसे

472
00:32:53,040 --> 00:32:57,080
जाते हो तुम डायरेक्टली भक्ति ऐसा करोगे तो भक्ति कभी भक्ति जो होता

473
00:32:57,080 --> 00:32:59,800
है वो

474
00:32:59,800 --> 00:33:03,800
वो सीनियर डिवटी के शेल्टर में जाके होता है तुम अपना मन मानी करोगे तो तुमरा

475
00:33:03,800 --> 00:33:08,240
भक्ति कैसा होगा तुम तो माया में फस जाओगे और माया इतनी प्रबल है

476
00:33:08,240 --> 00:33:09,840
कि तुम थोड़ा भी बाहर गए तो

477
00:33:09,840 --> 00:33:13,880
तुमको खींच लेगी तो इसलिए जो भी तुम करो अगर तुमको समझो फॉर एमल हमारे

478
00:33:13,880 --> 00:33:18,200
यहां पर ऐसा बोलते हैं अगर तुम वृंदावन धाम जा रहे हो तो तुम अकेले

479
00:33:18,200 --> 00:33:22,360
नहीं जा सकते उसके पहले तुम्हें सीनियर डिवटी का परमिशन लेना

480
00:33:22,360 --> 00:33:26,360
पड़ेगा वृंदावन धाम जाने का कोई भी धाम जाने का आप ऐसे नहीं जा सकते अगर वो

481
00:33:26,360 --> 00:33:30,600
बोलेंगे कि हा जाओ तो आपको जाना है नहीं तो आपको पाप लगेगा पाप क्या लगेगा

482
00:33:30,600 --> 00:33:34,800
क्यक जो जैसे मैंने पूछा था प्रभु वृंदावन में जा सकते है नहीं नहीं नहीं वृंदावन

483
00:33:34,800 --> 00:33:38,880
में ऐसे कैसे जा सकते है जब त तुमको राधा रानी बुलाएंगे नहीं जब तक तुम सीनियर

484
00:33:38,880 --> 00:33:42,920
डिवटी से पूछोगे नहीं तो ऐसे कैसे जाओगे और ऐसे जाना मतलब सबसे बड़ा सबसे

485
00:33:42,920 --> 00:33:47,560
बड़ा तुम गलत कर रहे हो मतलब तुम माया भटक जाओगे

486
00:33:47,560 --> 00:33:51,760
और भक्ति ना इतने भक्ति इतने जल्दी करना नहीं मतलब इतना

487
00:33:51,760 --> 00:33:55,800
इंक्रीज नहीं करना चाहिए उसका लेवल अगर तुम जितने ज्यादा लेवल इंक्रीज करोगे तो माया

488
00:33:55,800 --> 00:33:59,960
देवी तुमको नजर में रखेगी और तुमको नजर में रखेगी तो तुमको खींच लेगी

489
00:33:59,960 --> 00:34:04,000
तो तुम्हारा भक्ति जैसा बढ़ रहा है ना वैसा खींच के नीचे आ जाएगा तो ये डाउट रता

490
00:34:04,000 --> 00:34:08,120
था मैं बोला नहीं बराबर क कसा कहीं कहीं ऐसा से होता था कि नहीं मैं भक्ति

491
00:34:08,120 --> 00:34:12,160
कर तो आज ये प्रॉब्लम आ ये समस्या आया तो शायद मैं ज्यादा भक्ति कर रहागा

492
00:34:12,160 --> 00:34:16,200
इसलिए आ गया एक तो ये कंफ्यूजन होता था फिर दूसरे पॉइंट

493
00:34:16,200 --> 00:34:20,240
में क्या बोलते थे कि थोड़ा मंदिर आया करो थोड़ा डिवटी डिवटी से

494
00:34:20,240 --> 00:34:24,720
एसोसिएशन किया करो थोड़ा भक्ति बढ़ाओ मतलब कन्फ्यूज

495
00:34:24,720 --> 00:34:25,220
तो मैं

496
00:34:24,960 --> 00:34:28,960
ये हो रहा हूं कि भक्ति ज्यादा करू कि कम करू कि नहीं करू मतलब

497
00:34:28,960 --> 00:34:33,080
करना क्या है अगर मैं ज्यादा करता हूं तो दिक्कत है अगर मैं कम करता हूं तो दिक्कत

498
00:34:33,080 --> 00:34:37,200
है अगर मैं इनसे संपर्क में ता तो दिक्कत है मुझे करना क्या है एक तो पूरा ये

499
00:34:37,200 --> 00:34:41,240
भा ठीक है फिर धीरे धीरे जानना चालू किया मतलब

500
00:34:41,240 --> 00:34:45,440
और भी जब थोड़ा वीडियो देखना चालू किया और भी लोग से जब मिला जैसे मेरे एक फ्रेंड ने बोला देख

501
00:34:45,440 --> 00:34:49,680
यहां प एक तो कैसा है ना अगर तुम अपने सीनियर डिवटी से पूछोगे नहीं तो वहां पर वैष्णव

502
00:34:49,680 --> 00:34:53,720
अपराध मतलब यहां पर य प डर बट गया ना पूरा अभी वैष्णव अपराध कौन

503
00:34:53,720 --> 00:34:57,760
करना चाहेगा वैष्णव अपराध कोई नहीं करेगा अगर आप उनसे थोड़ा भी अनबन होता है

504
00:34:57,760 --> 00:35:01,760
सीनियर से तुमने वैष्णव अपराध जाओ अब तुम्हारे आगे सा देखो क्या होगा तुम

505
00:35:01,760 --> 00:35:05,760
तुम तुमने जो शीला प्रभुपाद ने जो वैष्णव बनाए थे तुम

506
00:35:05,760 --> 00:35:09,760
उनका अपमान कर रहे हो वैष्ण मतलब क्या होता है तो एक डर

507
00:35:09,760 --> 00:35:14,320
रता था कि नहीं बराबर है इनका भी बराबर है अगर ये मतलब इतना अपराध हो रहा है और

508
00:35:14,320 --> 00:35:18,320
मतलब मेरे साथ तो हुआ है मैंने मतलब मैं तो प्रैक्टिकली प सेवा में रहता था तो

509
00:35:18,320 --> 00:35:22,600
मैं जब जवाइन किया तो जो भी सेवा का कार्य होता था यहां प जाना कांटेक्ट

510
00:35:22,600 --> 00:35:26,680
करना डेटा बेस लेना बुक प्रीचिंग करना तो मेरा वो सब

511
00:35:26,680 --> 00:35:30,720
कार्य होता था अब उसम क्या होता था कभी उनको समझो नंबर दिया नहीं डेटा बेस जो मेरे

512
00:35:30,720 --> 00:35:34,880
पास कलेक्ट हो थे नंबर दिया नहीं तो उसम क्या होता था वैष्णव अपराध ये वैष्णव अपराध

513
00:35:34,880 --> 00:35:38,960
तुम कर रहे हो ऐसा नहीं होना चाहिए तुम्हा तो ये पूरा डर बट गया था मेरे अंदर

514
00:35:38,960 --> 00:35:40,040
मतलब अगर इनका संगत

515
00:35:40,040 --> 00:35:44,040
में छोडूंगा तो मतलब मैं इनका अगर संगत छोड़ता हूं

516
00:35:44,040 --> 00:35:48,320
तो फिर भक्ति मेरा मिलेगा नहीं फिर मैं वापस से भटक जाऊंगा वापस से माया में आ जाऊंगा तो

517
00:35:48,320 --> 00:35:52,520
एक डर रहता था मेरे साथ तो मैंने पूरा इसके साथ कंटिन्यू मतलब कंटिन्यू उसके साथ मैंने

518
00:35:52,520 --> 00:35:56,960
जारी रखा था बट काफी सारी चीज मतलब काफी सारी चीज होने लगी

519
00:35:56,960 --> 00:36:01,000
जिसकी वजह से से फिर थोड़ा और डीप में मैं गया कि मतलब

520
00:36:01,000 --> 00:36:05,200
फिर पता मतलब बहुत सारी चीज पता चले जैसे कि ये पता चला कि जो

521
00:36:05,200 --> 00:36:09,240
एक मिनट एक मिनट थोड़ा मीर जी मीर प्रभु आप थोड़ा

522
00:36:09,240 --> 00:36:13,400
कंटिन्यू कर करो एक मिनट बस देना मुझे जी जी

523
00:36:13,400 --> 00:36:17,560
मिहीर जी आप आप बताएं कैसे आपको क्या ऐसी चीजें हैं जो

524
00:36:17,560 --> 00:36:21,640
जिनके कारण आप एक निर्णय कर पाए कि भाई यह जो जहां मैं

525
00:36:21,640 --> 00:36:25,760
जुड़ा हुआ हूं यह ठीक जगह नहीं है और कहीं ना कहीं ये हमें जो

526
00:36:25,760 --> 00:36:31,760
है जो शुद्ध सनातन वैदिक कार्य हिंदू धर्म है उससे दूर ले जा रही

527
00:36:33,200 --> 00:36:37,560
है आपकी आवाज नहीं आ रही एक मिनट माइक चालू करो

528
00:36:37,560 --> 00:36:43,560
माइक मैं करता मैं करता हूं एक

529
00:36:44,560 --> 00:36:50,560
मिनट जी मर जी

530
00:36:53,640 --> 00:36:59,640
बोलेर जी आपने अपना माइक ऑफ किया है क्या

531
00:37:00,280 --> 00:37:06,280
आपकी आवाज नहीं आ रही चालू नहीं

532
00:37:07,520 --> 00:37:11,720
चालू आ कंटिन्यू मेरा करता अभी

533
00:37:11,720 --> 00:37:15,920
आप पूरा कर लो

534
00:37:15,920 --> 00:37:20,160
हा अभी दूसरा दिक्कत य होता था मुझे

535
00:37:20,160 --> 00:37:25,040
मेरा एक कांसेप्ट क्लियर नहीं हुआ है पर श्रीमद भागवत के हिसाब से

536
00:37:25,040 --> 00:37:29,680
मतलब मतलब मैंने बचपन से तो जो विष्णु जी थे

537
00:37:29,680 --> 00:37:33,840
विष्णु जी से विष्णु जी से काफी सारे मेनिफेस्टेशन मतलब उन्होंने अलग

538
00:37:33,840 --> 00:37:38,320
अलग फॉर्म लिए जैसे की परशुराम का फम परशुराम

539
00:37:38,320 --> 00:37:42,560
भगवान का फॉर्म लिया है राम जी का फॉर्म लिया है रा फर्म लिया है तो मैंने मतलब बचपन

540
00:37:42,560 --> 00:37:46,720
सुनता कि विष्णु जी ने फर्म लि अब य पर ठीक है भगवान वो भगवान

541
00:37:46,720 --> 00:37:50,920
है वो कुछ भी कर सकते है उसम कुछ ये नहीं पुराण भी तो झूठ नहीं बोलते ये भी ठीक है

542
00:37:50,920 --> 00:37:55,080
यहां तक मेरा कांसेप्ट है कि भगवान कुछ भी कर सकते है जो

543
00:37:55,080 --> 00:37:59,160
उनका मर्जी है मतलब वो संकल्प मात्र से जो भी चाहे वो कर सकते है

544
00:37:59,160 --> 00:38:03,840
अभी यहां पर इशू क्या होता है मुझे जो विष्णु है

545
00:38:03,840 --> 00:38:08,000
जो विष्णु है वो पूर्ण नहीं है पूर्ण नहीं है क्यों

546
00:38:08,000 --> 00:38:12,120
क्योंकि वो कृष्ण जो कृष्ण है उनसे उनका मेनिफेस्टेशन

547
00:38:12,120 --> 00:38:16,880
उ उनसे उनका फॉर्म आया ठीक है येय

548
00:38:16,880 --> 00:38:20,920
ये 2.2 के अनुसार बोल रहे हैं भगवत गीता में भगवत

549
00:38:20,920 --> 00:38:22,760
गता के अ

550
00:38:22,760 --> 00:38:26,800
भगवता 2 में कहा गया है कि जो विष्णु है वो पूर्ण ऐश्वर्य

551
00:38:26,800 --> 00:38:30,880
वान नहीं है नहीं है नहीं है क्योंकि क्योंकि जो कृष्ण है

552
00:38:30,880 --> 00:38:35,080
कृष्ण कृष्ण से भी तीन नारायण निकले हुए एक एक तो बोलते

553
00:38:35,080 --> 00:38:39,640
है शिरो दक्षा विष्णु गर्भ दक्षा विष्णु और महाविष्णु ठीक है

554
00:38:39,640 --> 00:38:43,720
तो अभी यहां पे मुझे पहली बात तो कांसेप्ट क्लियर हो कि ठीक है नारायण है वो तो अलग-अलग

555
00:38:43,720 --> 00:38:47,760
फॉर्म मतलब सेम मतलब जो नारायण है तो सेम है ना उसमें अभी

556
00:38:47,760 --> 00:38:51,800
क्या भेद अभी वही अभी वो अपना शिव रूप ले ब्रह्मा रूप ले तो उनका फॉर्म

557
00:38:51,800 --> 00:38:55,960
है अभी उसमें मैं अपना बुद्धि क्यों लगाऊ मुझे इतना पता है कि नारायण का मुझे सेवा करना है

558
00:38:55,960 --> 00:39:00,040
अभी बट यहां पे क्या होता है नहीं जो राम है ना वो भी इनके

559
00:39:00,040 --> 00:39:04,080
फॉम है कृष्ण के तो कृष्ण कौन है सुप्रीम पर्सनालिटी ऑफ ग ठीक

560
00:39:04,080 --> 00:39:08,760
है सुप्रीम कोई कोई दिक्कत नहीं अब दिक्कत क जो विष्णु है

561
00:39:08,760 --> 00:39:12,880
वो पूर्ण नहीं है उनके पास जो कृष्ण के पास जो भी

562
00:39:12,880 --> 00:39:16,960
64 कलाए है व विष्णु जी के पास नहीं है पूरी कला ठीक

563
00:39:16,960 --> 00:39:22,960
है अब पूरी कला नहीं तो इससे अभी पहली बात तो इससे दिमाग में

564
00:39:23,400 --> 00:39:27,680
मतलब पहली बात तो दिमाग में य होता है कि मतलब जो हमने बचपन

565
00:39:27,680 --> 00:39:31,720
से सुना होआ है कि जो विष्णु है अलग-अलग अवतार के माध्यम से अलग-अलग अपना लीला

566
00:39:31,720 --> 00:39:36,040
करते हैं ठीक है अब यहां प पता चला है ठीक है कृष्ण में से विष्णु

567
00:39:36,040 --> 00:39:37,800
विष्णु जी का जो फॉर्म है कृष्ण

568
00:39:37,800 --> 00:39:41,880
में से आया ब दिक्कत यहां पे है कि इसमें भी जो भगवान का फॉर्म

569
00:39:41,880 --> 00:39:46,080
है वो एक लिमिटेड है मतलब अनलिमिटेड नहीं है लिमिटेड

570
00:39:46,080 --> 00:39:50,240
है लिमिटेड मतलब जैसे महाविष्णु है तो महाविष्णु जो उनका

571
00:39:50,240 --> 00:39:54,320
सिर्फ काम क्या है जो सृष्टि मतलब जो सृष्टि का उत्पत्ति वगैरह होता है अलग अलग जो ब्रह्मांड

572
00:39:54,320 --> 00:39:58,320
है सि उसका कार्य कर स मैं इसको थोड़ा समझ क्लेरिफाई कर दूं

573
00:39:58,320 --> 00:40:02,440
आपका कहने का मतलब यह है कि वो विष्णु

574
00:40:02,440 --> 00:40:06,480
कृष्ण से निकले हैं यह तो चलो एक बार को मान भी सकते हैं मगर एट

575
00:40:06,480 --> 00:40:10,560
द सेम टाइम विष्णु लिमिटेड भी है वो कृष्ण के समान

576
00:40:10,560 --> 00:40:14,800
सर्वशक्तिमान नहीं है नहीं है नहीं है नहीं तो

577
00:40:14,800 --> 00:40:19,040
एक तो यहां पे मैं बोला कि ठीक है वही मतलब सेम नारायण है उनका

578
00:40:19,040 --> 00:40:23,120
सेम फॉर्म है सेम जो भी परब्रह्म उनको मतलब

579
00:40:23,120 --> 00:40:27,320
कहा जाता है तो फिर लिमिटेड कैसे हो गए तो यहां पर तो एकय आ गया तो मैंने एक

580
00:40:27,320 --> 00:40:31,320
जो सीनियर मतलब सीनियर वैष्णव थे उनको मैंने पूछा कि प्रभु ये कैसा तो उन्होने बोला हां

581
00:40:31,320 --> 00:40:35,520
बराबर है तुमने जो सुना ना तुम पहला सुनते थे कि जो विष्णु में सबया

582
00:40:35,520 --> 00:40:39,880
तो ऐसा नहीं है श्रीमद् भागवत क्या बोलता है कि जो कृष्ण में से

583
00:40:39,880 --> 00:40:43,960
बाकी सारे फॉर्म कृष्ण में से तो ये सही है और फिर जो शिवजी है

584
00:40:43,960 --> 00:40:48,200
जो बलराम जी है बलराम जी तो बलराम जी में से शिव जीी आए शिवजी का जो उत्पत्ति

585
00:40:48,200 --> 00:40:52,400
बलराम जी में से हुआ तो मैं बोला कि ठीक है मतलब हो सकता है क्योंकि

586
00:40:52,400 --> 00:40:53,240
इतना तो

587
00:40:53,240 --> 00:40:57,520
शास्त्र मैंने पढ़ा नहीं था मैंने मान लिया अब धीरे धीरे ये पता चलने लगा

588
00:40:57,520 --> 00:41:01,640
एक बार तो बोलते कि जो विष्णु है मतलब प्रभुपाद लिख रहे प्रभुपाद

589
00:41:01,640 --> 00:41:05,800
के जब श्रीमद् भगवत गीता पढ़ेंगे तो बहुत जगह पर उन्होंने

590
00:41:05,800 --> 00:41:10,200
ऐसा वर्णन किया जो विष्णु है ना ही द सुप्रीम ठीक है सुप्रीम

591
00:41:10,200 --> 00:41:14,320
बट थोड़ा जब आगे जाके पढ़ेंगे ना तो उसम क्या आता है उसम ये आता है

592
00:41:14,320 --> 00:41:18,400
कि जो कृष्णा है ही सुप्रीम पर्सनालिटी ऑफ गड विष्णु है वो लिमिटेड

593
00:41:18,400 --> 00:41:22,400
फॉर्म में है उनको जितना कार्य दिया गया वो उतना ही करेंगे उसे आगे नहीं करेंगे

594
00:41:22,400 --> 00:41:26,560
ठीक है मतलब यहां पर क्या होता है कला की कला की बात करते वो

595
00:41:26,560 --> 00:41:30,600
64 जो गुण है वो कृष्ण में है बाकी किसम भी

596
00:41:30,600 --> 00:41:35,000
नहीं बाकी जो विष्णु वगैरह है उनमें कम है फ राम जी उम 60 है

597
00:41:35,000 --> 00:41:39,080
मतलब जो भी है अभी जितना क्लियर उना बता रहा

598
00:41:39,080 --> 00:41:43,280
आपको तो ये तरीके से फिर मतलब बात होता है तो य पर आता मतलब

599
00:41:43,280 --> 00:41:47,320
अभी भी मैं प्रॉपर जगह पर हूं की नहीं हूं क्योंकि मैं य पर भटक रहा हूं य

600
00:41:47,320 --> 00:41:51,400
इसलिए भटक रहा हूं कि भगवान में भी भेद कर रहे अ जब

601
00:41:51,400 --> 00:41:56,240
मेरे प्रीवियस क्लास में गया था तो वहा उन्होने बताया जो विष्णु है ना

602
00:41:56,240 --> 00:42:00,440
तो लिमिटेड ही है तो विष्णु में इतने गुण है कृष्णा सुप्रीम पर्सनालिटी

603
00:42:00,440 --> 00:42:04,600
ऑफ तो मतलब यहां पर मेरा दिमाग जलेबी जै आपरा

604
00:42:04,600 --> 00:42:08,320
अभी शब्द सुन रहे तो आपको ल जलेबी जलेबी क्या घूम रहा हू तो मैं खुद घूम रहा हूं

605
00:42:08,320 --> 00:42:13,800
जलेबी में जलेबी में घूम रहा हूं क्योंकि अभी तक मुझे ये क्लियर नहीं

606
00:42:13,800 --> 00:42:19,000
कना यहां पर एक दो चीज सामने आती है

607
00:42:19,000 --> 00:42:23,360
जब कृष्ण अंतिम रूप से

608
00:42:23,360 --> 00:42:28,360
जो कृष्ण भगवान है वह अंतिम स्वरूप है भगवान

609
00:42:28,360 --> 00:42:32,520
का तो फिर जब हम यह कहते हैं कि द

610
00:42:32,520 --> 00:42:36,560
सुप्रीम पर्सनालिटी ऑफ गॉड हैड

611
00:42:36,560 --> 00:42:40,720
यानी कि जो श्री कृष्ण है इसका मतलब क्या बताया जाता

612
00:42:40,720 --> 00:42:44,920
है आप थोड़ा सा बताएंगे इसका एजेक्ट मीनिंग क्या बताया जाता है

613
00:42:44,920 --> 00:42:50,160
हिंदी में हिंदी में तो कृष्ण मतलब तो सर्वा आकर्षित ल

614
00:42:50,160 --> 00:42:54,480
अट्रैक्टिव सुप्रीम पर्सनालिटी ऑफ गड हैड इसका हिंदी अर्थ क्या बताया जाता

615
00:42:54,480 --> 00:42:58,600
है हिंदी अर्थ तो य है कि जो मतलब ऐसे

616
00:42:58,600 --> 00:43:03,800
मैं आपको बोल सकता हूं जो भवान

617
00:43:03,800 --> 00:43:07,800
स्वरूप सर्वच स्वरूप यानी कि अभी भी

618
00:43:07,800 --> 00:43:12,000
भगवान का जो मूल स्वरूप है वो खुद

619
00:43:12,000 --> 00:43:16,280
ही इस लाइन से बाहर निकल रहा है सुप्रीम पर्सनालिटी ऑफ गॉड

620
00:43:16,280 --> 00:43:20,440
हैड यानी अभी भी यह कहा जा रहा है कि एक जो प्राप्त

621
00:43:20,440 --> 00:43:25,160
वाला स्वरूप है भगवान का जो व्यवहार में नहीं आ सकता है

622
00:43:25,160 --> 00:43:29,160
वो स्वरूप जो है अभी भी इस लाइन से ही क्लियर

623
00:43:29,160 --> 00:43:33,280
हो रहा है कि जो भगवान श्री कृष्ण है डायरेक्ट वो गॉड

624
00:43:33,280 --> 00:43:37,440
उनके लिए नहीं कहा जा रहा है उनके लिए कहा जा रहा है कि सुप्रीम पर्सनालिटी

625
00:43:37,440 --> 00:43:41,440
ऑफ गॉड हैड तो इसमें भी एक वो आ रहा

626
00:43:41,440 --> 00:43:45,480
है जो आपको ध्यान आप अगर ले जाए तो उनका एक मूल स्वरूप और

627
00:43:45,480 --> 00:43:49,640
भी है जो अंतिम स्वरूप अगर हम कृष्ण को मानेंगे तो हम केवल

628
00:43:49,640 --> 00:43:53,720
यह कहेंगे कृष्ण इज गॉड है

629
00:43:53,720 --> 00:43:57,720
ना मगर हम यहां क्या कह रहे हैं सुप्रीम पर्सनालिटी

630
00:43:57,720 --> 00:44:01,800
ऑफ गॉड हैड मतलब अगर जो गॉड हैड है जो गॉड

631
00:44:01,800 --> 00:44:06,600
है उसकी जो सबसे सुप्रीम पर्सनालिटी हो सकती है वो कृष्ण

632
00:44:06,600 --> 00:44:10,840
है ना यानी कि अभी भी हमने भगवत तव का एक ऐसा स्वरूप मान रखा

633
00:44:10,840 --> 00:44:15,040
है जो भगवान का जो सगुण साकार स्वरूप है उससे थोड़ा

634
00:44:15,040 --> 00:44:18,800
भिन्न है जो व्यवहार में आ सकने लायक नहीं है व्यवहार में

635
00:44:18,800 --> 00:44:22,800
आ सकने लायक स्वरूप को हमने कृष्ण के रूप में स्वीकार किया है इस कन

636
00:44:22,800 --> 00:44:27,280
के अनुसार तो ये चीज है दूसरी चीज आप

637
00:44:27,280 --> 00:44:31,600
बात कही कि जो

638
00:44:31,600 --> 00:44:35,680
वहां यह कहा जाता है कि विष्णु जी भी वो नहीं

639
00:44:35,680 --> 00:44:39,720
है पूर्ण नहीं है तो इसके बारे में उनके पास एक कुछ सामग्री है वो

640
00:44:39,720 --> 00:44:43,760
मैं आपको ध्यान दिला दूं वो यह कहते हैं जब वह विष्णु और राम में भेद

641
00:44:43,760 --> 00:44:47,880
करते हैं विष्णु राम और कृष्ण में भेद करते हैं तो वोह यह कह देते हैं कि

642
00:44:47,880 --> 00:44:51,960
यह तो हम लीला की दृष्टि से कह रहे हैं रस की दृष्टि से कह रहे हैं

643
00:44:51,960 --> 00:44:56,280
क्यों क्योंकि अगर यह लीला और रस की दृष्टि से नहीं होगा

644
00:44:56,280 --> 00:45:00,960
तो फिर उन्होंने तो एक जगह यह भी कहा है ना कि यह तीनों एक

645
00:45:00,960 --> 00:45:05,640
है है ना यह तीनों एक है

646
00:45:05,640 --> 00:45:09,640
उन्होंने कहीं कहीं पर लिखा है कि इनमें कोई अंतर नहीं है जो अंतर है लीला

647
00:45:09,640 --> 00:45:13,720
की उससे अंतर है विष्णु राम और कृष्ण में ठीक है यही चीज

648
00:45:13,720 --> 00:45:17,840
तो व्यास जी ने भी लिखी है उन्होंने कहीं पर विष्णु को

649
00:45:17,840 --> 00:45:22,720
कहीं पर शिव को बड़ा छोटा किया रस की दृष्टि से लीला की दृष्टि से

650
00:45:22,720 --> 00:45:26,760
मगर एट द सेम टाइम उन्होंने भी तो लिखा एक जगह कि ब्रह्मा विष्णु महेश

651
00:45:26,760 --> 00:45:31,000
में अंतर नहीं है ब्रह्मा विष्णु महेश में अंतर करने करना

652
00:45:31,000 --> 00:45:34,120
पाप है तो अपनी चीजों को

653
00:45:34,120 --> 00:45:38,160
सही करने के लिए कि हमने भेद नहीं किया हम भेदवाद नहीं है

654
00:45:38,160 --> 00:45:42,360
हरि हरि में उसके लिए तो इनका प्रमाण ले लेंगे कि देखिए शीला उपाद

655
00:45:42,360 --> 00:45:46,680
जी एक भी कह रहे हैं मगर व्यास जी जब एक कह रहे हैं तो कह रहे हैं

656
00:45:46,680 --> 00:45:50,920
यहां व्यास जी ने झूठ बोला है व्यास जी झूठे हैं व्यास

657
00:45:50,920 --> 00:45:54,920
जी झूठे हो सकते हैं मगर प्रभुपाद जी झूठे नहीं हो सकते है ना

658
00:45:54,920 --> 00:45:57,840
बकुल

659
00:45:57,840 --> 00:46:01,960
सोचने सोचने वाली बात तो मेन ये है कि जो व्यास जीने जो बाकी पुराण

660
00:46:01,960 --> 00:46:06,280
लिखा है बाकी पुराण में भी भेद है इनके बाकी पुराण में भी भेद जो जैसे 18

661
00:46:06,280 --> 00:46:10,600
पुराण जो है उसमें से ये क्या कहते हैं अगर आप कैटेगरी

662
00:46:10,600 --> 00:46:14,640
इज करोगे 18 पुराण को तीन में मतलब छह छ का पुराण लोगे

663
00:46:14,640 --> 00:46:18,640
आप तो इसमें भी इनका कैसा है एक सतोगुण में आता है एक

664
00:46:18,640 --> 00:46:23,320
रजोगुण में आता है एक तमोगुण में आता है ठीक है जो सतोगुण में है

665
00:46:23,320 --> 00:46:27,480
जो सतोगुण में है तो उसको श्रीमद् भागवत बोलते हैं ठीक है

666
00:46:27,480 --> 00:46:31,600
जो तमोगुण में है उसको बोलते शिव पुराण मैं बोला

667
00:46:31,600 --> 00:46:35,720
मतलब अभी इन अगर इस विषय परर आप चर्चा करेंगे उनसे

668
00:46:35,720 --> 00:46:40,000
तो क्या बोलते है कि एक बावड़ी का बच्चा रहता है

669
00:46:40,000 --> 00:46:44,120
अगर उसको दवी का बुक दे देंगे पढ़ेगा क्या वो तो बसली बात नहीं पड़ेगा वो

670
00:46:44,120 --> 00:46:48,600
कक उसका बुद्धि का पहली बात तो विकसित हुआ ही नहीं तो कैसा पड़ेगा वो ठीक है

671
00:46:48,600 --> 00:46:49,240
तो ये उसका

672
00:46:49,240 --> 00:46:53,640
एग्जांपल देख क्या बोलते बराबर तो वैसा ही जो एक बालक है

673
00:46:53,640 --> 00:46:57,760
वो अपना धीरे धीरे मतलब भक्ति में धीरे धीरे गु तो कैसे गु

674
00:46:57,760 --> 00:47:02,120
करेगा पहला गणेश भक्ति करेगा पहला शिवजी भक्ति करेगा पहला

675
00:47:02,120 --> 00:47:06,120
जो भी अन्य देवी देवता है उनकी भक्ति करेगा जब उनकी भक्ति करेगा तो

676
00:47:06,120 --> 00:47:10,360
क्या होगा कि वो उसको प्रेरणा देंगे आगे का आगे बढ़ने

677
00:47:10,360 --> 00:47:14,720
का आगे जो आगे का पा कौन सा है हरि ठीक है तो

678
00:47:14,720 --> 00:47:19,920
इसम क्या होता है य पर क्वेश्चन य उठ जाता

679
00:47:19,920 --> 00:47:24,080
है यदि ऐसा है तो जबन की शिक्षा किसी को दी

680
00:47:24,080 --> 00:47:28,320
जा रही है भागवत की शिक्षा तो क्या यह चेक

681
00:47:28,320 --> 00:47:32,360
किया जा रहा है कि यह तमोगुण है या रजोगुण

682
00:47:32,360 --> 00:47:36,360
है चेक तो नहीं किया जा रहा सबको इक्वल से बांटी जा रही

683
00:47:36,360 --> 00:47:41,040
है है ना जबकि वो तो हायर लेवल की शिक्षा है तो आप

684
00:47:41,040 --> 00:47:45,280
कोई वो डिटेक्टर मशीन होती है ना जिससे लाइट डिटेक्टर होता है उस टाइप

685
00:47:45,280 --> 00:47:49,480
का कुछ चलते हो क्या साथ में इसका पहले वो डिटेक्ट किया

686
00:47:49,480 --> 00:47:53,520
किय सतोगुण है कि रजोगुण है तब हम इसको भागवत देंगे तब तो आप तो बिना

687
00:47:53,520 --> 00:47:57,720
देखे दे रहे हो दूसरी बात ये है यदि भागवत

688
00:47:57,720 --> 00:48:01,840
सतो रजो गुणी लोगों के लिए नहीं है तमो गुणी लोगों

689
00:48:01,840 --> 00:48:04,480
के लिए नहीं है तो आपको यह मानना पड़ेगा

690
00:48:04,480 --> 00:48:08,640
कि भागवत जो है वह सनातन शास्त्र नहीं है क्योंकि

691
00:48:08,640 --> 00:48:12,800
वह देश काल परिस्थिति से प्रभावित हो रहा है है ना

692
00:48:12,800 --> 00:48:16,800
अच्छा मैं अब थोड़ा सा आपसे वो लेना चाहूंगा क्योंकि हमारे

693
00:48:16,800 --> 00:48:21,280
दो और मेहमा बैठे हुए अतिथि गण तो

694
00:48:21,280 --> 00:48:25,720
विनय जी आप अब बताएं आपकी जो क्या है

695
00:48:25,720 --> 00:48:31,120
यात्रा विनय जी का शायद नेटवर्क का कुछ इशू चल रहा है

696
00:48:31,120 --> 00:48:36,320
मे जी आप

697
00:48:36,320 --> 00:48:42,320
बताए आवाज आपका ब्लूटूथ शायद

698
00:48:42,480 --> 00:48:46,480
आरही क्षमा चाहूंगा नेटवर्क बलट सबका

699
00:48:46,480 --> 00:48:50,760
प्रॉब्लम है पहली बार तो मेरा सबसे

700
00:48:50,760 --> 00:48:54,760
पहला जो था की यहां पर कुछ गड़बड़ है

701
00:48:54,760 --> 00:48:58,840
वो था हरि हर भेद जैसे कि इकन हमारे यहां पर

702
00:48:58,840 --> 00:49:03,360
जो इकन है वहां पर नाइट स्टे भी होता है तो हम एक बार

703
00:49:03,360 --> 00:49:07,640
दो कहां पे हम मुंबई

704
00:49:07,640 --> 00:49:11,920
मुंबई में हम मुंबई से है मुंबई में हमारे दो स्कन एक है

705
00:49:11,920 --> 00:49:16,120
राधा गोपीनाथ टेंपल और एक है राधा राज बिहारी झूम है आपको

706
00:49:16,120 --> 00:49:19,680
हमने नाम सुना झू तो हम राधा गोपीनाथ से जुड़े हुए हैं

707
00:49:19,680 --> 00:49:23,680
वहां प तो वहां पर नाइट डे भी होता है हम एक बार नाइट डे के लिए गए

708
00:49:23,680 --> 00:49:27,760
मॉर्निंग में मंगलारती रहती है प्रात काल चार बजे की मंगला

709
00:49:27,760 --> 00:49:31,960
आरती रहती है तो वहा पर स्टे करना रहता है तो स्टे करते हैं बाद में वहा पर सबको सो

710
00:49:31,960 --> 00:49:36,240
माला जप करवाते है स्टे करते आरती होती है उसके बाद सो माला जप करवाते हैं तो

711
00:49:36,240 --> 00:49:40,320
सोला माला जप करने के पहले आरती हो जाती

712
00:49:40,320 --> 00:49:44,520
है उसके पहले 10 नाम अपराध की श्रेणी आती है 10 नाम अपराध इसम

713
00:49:44,520 --> 00:49:48,560
जो उसम 10 नाम अपराध में हरि हर भेद करवाते हैं ऐसा बोलते

714
00:49:48,560 --> 00:49:51,800
हैं कि श्री कृष्ण

715
00:49:51,800 --> 00:49:55,880
को महादेव और ब्रह्मा आदि देवताओ के समान

716
00:49:55,880 --> 00:50:00,080
मानना वो भी अपराध है तो दूसरा नाम अपराध हमें बहुत ही

717
00:50:00,080 --> 00:50:04,320
पहले तो हमें पता ऐसा ही लगा कि हां शास्त्र में लिखा है तो सही रहेगा

718
00:50:04,320 --> 00:50:08,320
तो हम थोड़े तो भी हमें थोड़ा शंका तो थी वहां पर भी कि ऐसा कैसे

719
00:50:08,320 --> 00:50:12,480
हो सकता है हम हमें तो बचपन से वही पंच देव की पूजा का विधान

720
00:50:12,480 --> 00:50:16,880
सिखाया गया है हमारे हमारे जो माता पिता है उन्होंने वही कहा हैय पंच

721
00:50:16,880 --> 00:50:20,880
देवता की पूजा करनी है पूज्य श्री आदि गुरु शंकराचार्य जी के वहां से

722
00:50:20,880 --> 00:50:24,960
चलते आ रहे हैं तो हम वही सब करते थे हम सब

723
00:50:24,960 --> 00:50:29,200
भगवान को एक ही मानते थे सभी देवताओ तत्व तो एक ही है भगवान ईश्वर

724
00:50:29,200 --> 00:50:33,320
तत्व तो हमें यहां यहां प तो कुछ अलग ही देखने को मिला और

725
00:50:33,320 --> 00:50:34,720
यहां प जैसे कि दीपक

726
00:50:34,720 --> 00:50:38,760
जी ने कहा और जो विनय जी ने कहा था यहां पर हम इसलिए जा रहे थे जैसे कि ये

727
00:50:38,760 --> 00:50:42,920
जो भगवान का विग्रह है और कीर्तन है भगवान तो हमें इतने पसंद

728
00:50:42,920 --> 00:50:47,200
वहां का जो विग्रह इतना पसंद आता है तो उसको दर्शन करने के

729
00:50:47,200 --> 00:50:51,280
जाते है और कीर्तन और प्रसाद जो भी है तो बहुत आनंद होता है

730
00:50:51,280 --> 00:50:55,400
इसलिए हम जाते थे और जभी इसकी बात आती थी नॉलेज की बात आथ

731
00:50:55,400 --> 00:50:59,480
हमें कुछ इतना ज्यादा उसमें शंका करते थे शंका बहुत आती थी हमें पर ठीक

732
00:50:59,480 --> 00:51:03,760
है चलो कुछ नहीं जैसे कि हम मुंबई में है ना तो वहां पर ऐसा कोई भक्ति

733
00:51:03,760 --> 00:51:08,000
भाव माला माहौल नहीं रहता है चलो कुछ ना कुछ कुछ नहीं

734
00:51:08,000 --> 00:51:12,000
तो भले हम उस वो सब नहीं सुनना है भगवान श्री कृष्ण के

735
00:51:12,000 --> 00:51:16,000
लिए जाते है तो पहले तो ये पहले तो हमें विरोध हुआ ये

736
00:51:16,000 --> 00:51:20,760
हरि हर भेद का और दूसरा और एक बार क्या हुआ हमने ये रुद्राक्ष

737
00:51:20,760 --> 00:51:24,880
रुद्राक्ष से भी उन्होने आपत्ति की अरे तुम कंठी माला नहीं पहनते हो ये करते

738
00:51:24,880 --> 00:51:28,960
हो ये ऐसा कि ऐसा तो ऐसा कुछ विधान है ही नहीं कि

739
00:51:28,960 --> 00:51:33,280
जो मतलब ये रुद्राक्ष धारण करके हम कृष्ण भक्ति नहीं कर सकते

740
00:51:33,280 --> 00:51:37,480
ऐसा कुछ तो हमें तो कुछ ऐसा कुछ पता नहीं कु शास्त्रों में ऐसा कुछ लिखा है

741
00:51:37,480 --> 00:51:41,560
तो वहां पर हमें कुछ खटका और दूसरी एक बात कि

742
00:51:41,560 --> 00:51:46,080
हमें अभी थोड़ी समय पहले की बात है हमने उन्होंने लिटरली

743
00:51:46,080 --> 00:51:50,080
अपने मुख सेको प्रभु जी का हम नाम नहीं बोलना चाहते उन्होंने

744
00:51:50,080 --> 00:51:54,440
ऐसा बोला कि प्रभुपाद जी जैसे कि ये देखिए

745
00:51:54,440 --> 00:51:58,520
जो एक इस समय लिख कर के आ रहा है य महानुभाव कई दिनों

746
00:51:58,520 --> 00:52:03,360
से इसी तरीके की अनर गल अमर्यादित भाषा बोलते हैं

747
00:52:03,360 --> 00:52:09,360
कर करेंगे क्योंकि उसको उसके जैसे नालायक मिल

748
00:52:11,800 --> 00:52:16,120
गएता यह सोचने वाली बात है एक तरफ राम है

749
00:52:16,120 --> 00:52:21,080
एक तरफ राम है जो सिखा रहे हैं कि हर हाल में आप जो है मर्यादा का आचरण

750
00:52:21,080 --> 00:52:25,280
करो और एक तरफ य कौन सा धर्म सिखाया जा रहा है

751
00:52:25,280 --> 00:52:29,480
इसकन के नाम पर ये सोचने वाली बात है जी आप कंटिन्यू कर बस यही दिक्कत

752
00:52:29,480 --> 00:52:33,760
है यही दिक्कत है यही दिक्कत है यहां प आपको बताता हूं अगर आप कुछ

753
00:52:33,760 --> 00:52:37,880
दूसरा फॉलो करेंगे तो यहां पर प्रॉब्लम ये आता है कि आप कैसा फॉलो

754
00:52:37,880 --> 00:52:43,000
कर रहे हो यहां से भटक कैसे गए हो प्रभु पा भटक कैसे ग

755
00:52:43,000 --> 00:52:47,000
हो मेरी एक अभी रिसेंटली थोड़ी समय पहले की बात

756
00:52:47,000 --> 00:52:51,080
है भगवत गीता के बारे में चर्चा कह रहे थे जो कह रहे थे अगर वो अधूरा

757
00:52:51,080 --> 00:52:55,120
हो तो उसको पूरा करके फिर आप नेक्स्ट चालू करें कहीं रह ना जाए वो

758
00:52:55,120 --> 00:52:59,160
आप भूल जाएंगे फिर हम हां हा हम वही कह रहे

759
00:52:59,160 --> 00:53:03,280
हैं कि हमारे अभी थोड़े समय पहले की बात है श्रीमद् भगवत गीता के ऊपर

760
00:53:03,280 --> 00:53:05,360
थोड़ी चर्चा थ हम ना हम शॉर्ट

761
00:53:05,360 --> 00:53:09,520
में बता देते हैं हम स्पन तो मतलब वो प्रोग्राम में जाते थे हमने बोला

762
00:53:09,520 --> 00:53:13,640
ना कि हमरा ऐसा कुछ सोर्स नहीं है और हमें बुलाया जाता है कि आप आओ आओ हम

763
00:53:13,640 --> 00:53:17,720
जाते भी थे और हम साइड बाय साइड गीता परिवार करके है हम वहां से

764
00:53:17,720 --> 00:53:21,840
हम जुड़े थे मतलब वहां प पूजेश की गोविंद देव गिरी जी महाराज जी ने

765
00:53:21,840 --> 00:53:26,760
वो शुरू करवाया था वो भी शंकर मत से ही आते हैं तो उन्होंने

766
00:53:26,760 --> 00:53:31,000
भगवत गीता के श्लोक का कैसे लोक सिखाना है कैसे लोक बोला जाता है उसके

767
00:53:31,000 --> 00:53:35,240
ऊपर कहते है और उसका विवेचन जो होता है ना तो वो ज्ञानेश्वरी

768
00:53:35,240 --> 00:53:40,120
से होता है ये ये वाली उन्ही की बुक है आपको

769
00:53:40,120 --> 00:53:44,680
शायद सही सही वही वही हम उसम व सीख रहे थे

770
00:53:44,680 --> 00:53:48,760
तो क्या हुआ कि उनको पता चला कि ये भगवत गीता य अलग

771
00:53:48,760 --> 00:53:52,880
जगह सेय भगवत गीता कर रहा है सीख रहा है तो उन्होंने ऐसा

772
00:53:52,880 --> 00:53:57,160
ही बोल दिया जो मतलब मब टोटिंग बोलते जो ताना

773
00:53:57,160 --> 00:54:01,640
मारना तो प्रभु जी ने ऐसा बोल दिया कि जो जो भी कोई इन

774
00:54:01,640 --> 00:54:05,760
के बाहर से व भगवत गीता पढ़ता है ना उसको कुछ होने नहीं वाला है ये वो ऑथेंटिक

775
00:54:05,760 --> 00:54:09,920
जो है जो ओरिजनल है वो इकन की भगवत गीता है अगर इकन

776
00:54:09,920 --> 00:54:14,360
के बाग में मतलब जो दूसरे कोई संप्रदाय क्यों नहीं लिखता एज इट इज

777
00:54:14,360 --> 00:54:18,720
यथारूप ताकत नहीं किसी में ऐसे लिखने की और मैंने जभी

778
00:54:18,720 --> 00:54:20,440
उसके ऊपर प्रश्न किया तो

779
00:54:20,440 --> 00:54:24,640
ज्ञानेश्वरी जो है वो तो संत ने लिखी है संत है ज्ञानेश्वरी महाराज

780
00:54:24,640 --> 00:54:28,760
तो संत है उन्होंने लिखी है तो बो उनकी तो बात ही मत करो उनकी

781
00:54:28,760 --> 00:54:32,880
तो बात ही मत करो मायावादी मतलब कुछ भी होता है मायावादी वो

782
00:54:32,880 --> 00:54:36,920
मायावादी भाष हम पढ़ते भी नहीं है मलब मतलब इतना भगवत

783
00:54:36,920 --> 00:54:40,960
गीता में भी भेदभाव इतना अपमान मतलब कभी भी मेरा

784
00:54:40,960 --> 00:54:45,040
वही होगा कि यहां पर मतलब रहना जैसा है ही नहीं और कुछ भी

785
00:54:45,040 --> 00:54:49,240
कुछ भी करते हैं ना हम लोग हमलोग कुछ भी मतलब जैसे की शिवरात्रि करते हैं

786
00:54:49,240 --> 00:54:54,200
ये करते उनको पसंद नहीं आता है इनडायरेक्टली वो ऐसा ही करते है कि तुम जिसको

787
00:54:54,200 --> 00:54:58,280
भगवान श्री कृष्ण को मानना है तो उनको मतलब

788
00:54:58,280 --> 00:55:02,920
य से तुम वहा पर पोगे श्री कृष्ण तक पोगे तो यह सब करने से कुछ

789
00:55:02,920 --> 00:55:07,120
लाभ नहीं होगा जहां तक तुम कृष्ण को नहीं पूछोगे शिवजी को पूछोगे शिवजी

790
00:55:07,120 --> 00:55:12,000
प्रसन्न नहीं होगे और अगर उनका कोई भी काम हमने अगर कुछ

791
00:55:12,000 --> 00:55:16,440
कुछ प्रश्न चिन्ह उठाए तो वैष्णव अपराध हो जाता

792
00:55:16,440 --> 00:55:20,720
है वव हमने बीच में कुछ कहा था तो बो तुम आर्ग

793
00:55:20,720 --> 00:55:24,880
बहुत करते हो ये व अपरा है और तुलसीदास जी की

794
00:55:24,880 --> 00:55:28,920
बा बात की थी हमने कुछ काम के ऊपर कुछ बात चल रही थी लस्ट बोलते है ना

795
00:55:28,920 --> 00:55:33,120
उनको लस्ट लस्ट बोलते रहते ये चीज आपने सुनी रहेगी स्न वाले से लस्ट

796
00:55:33,120 --> 00:55:35,640
तो जो लस्ट के ऊपर बात लस्ट है ना काम मतलब

797
00:55:35,640 --> 00:55:39,720
नाम जब से लस्ट खत्म हो जाता है जैसे कि प्रेमानंद महाराज जी बोलते कि वो जो है

798
00:55:39,720 --> 00:55:43,840
काम तो रहता ही है हमें उसको नियंत्रण में लाना है श्रीमद भगवत गीता में वही

799
00:55:43,840 --> 00:55:48,000
कहा है भगवान श्री कृष्ण ने नाम जप तो करते है पर उसको नियंत्रण में हमें खुद

800
00:55:48,000 --> 00:55:52,120
को लाना पड़ता है तो मैंने उसका उदाहरण दिया श्री तुलसीदास

801
00:55:52,120 --> 00:55:56,280
जी के ऊपर उनका जो जीवन चरित्र है उनके श्री तुलसीदास जी को भी ऐसा हो

802
00:55:56,280 --> 00:56:00,800
हुआ था सबसे बड़े राम भक्त माने जाते हैं अ कलयुग में

803
00:56:00,800 --> 00:56:05,320
उन्होंने रामचरित मानस उन्होंने रचना की है तो

804
00:56:05,320 --> 00:56:09,320
बोला की उनके पास कोई आंसर नहीं था तो बो तुम तुलसीदास

805
00:56:09,320 --> 00:56:13,320
हो क्या तुम तुलसीदास हो क्या उनके पास कोई आंसर

806
00:56:13,320 --> 00:56:17,400
नहीं था कोई आंसर नहीं था तो

807
00:56:17,400 --> 00:56:21,800
इससे मुझे एक किस्सा याद आया अभी हम लोग जब इंदौर

808
00:56:21,800 --> 00:56:27,320
गए थे तो वहां पर हम लोग वहा ये जो नॉर्थ इंडिया के जो

809
00:56:27,320 --> 00:56:31,440
सेक्रेटरी कहे जाते जनल सेक्रेटरी उनके साथ हमारी

810
00:56:31,440 --> 00:56:35,880
चर्चा है वो वीडियो पड़ा हुआ है पर ही है तो

811
00:56:35,880 --> 00:56:39,880
उन्होंने हमारी जो मतलब ऑफ ऑफ कैमरा जो बात हुई

812
00:56:39,880 --> 00:56:43,880
थी तो उन्होंने उसमें यह बताया था कि भाई मैं पहले बहुत

813
00:56:43,880 --> 00:56:47,920
वो रहता था जिज्ञासु सीकर टाइप का था और

814
00:56:47,920 --> 00:56:50,760
मैं मेरे अंदर सवाल आते थे अपने को लेकर के

815
00:56:50,760 --> 00:56:54,800
और एक दिन मुझे प्रभुपाद जी से हुआ उनका कहना

816
00:56:54,800 --> 00:56:58,840
था अब हुआ कि नहीं हुआ वो बहुत सारी प्रामाणिक बातें नहीं है कहानियां

817
00:56:58,840 --> 00:57:02,880
है कई सारी ऐसा प्रतीत होता है तो अब उन्होंने कहा कि मैं स्कन

818
00:57:02,880 --> 00:57:07,080
से जुड़ा और स्कोन से जुड़ने के बाद मुझे मेरे सवालों के जवाब

819
00:57:07,080 --> 00:57:11,600
मिल गए और सवालों के जवाब यहां तक का स्टेटमेंट उनका

820
00:57:11,600 --> 00:57:15,640
फिर हमारी उसके बाद पूरी कन्वर्सेशन उस कन्वर्सेशन में लास्ट में

821
00:57:15,640 --> 00:57:19,640
उन्होंने जब मैंने पूछा कि भाई भगवान श्री कृष्ण यदि

822
00:57:19,640 --> 00:57:24,560
पूर्ण है तो उनसे जो भी एक्सपेंशन निकलेगा वो पूर्ण निकलेगा

823
00:57:24,560 --> 00:57:28,600
यदि उनसे शंकर निकल रहे तो पूर्ण निकलेंगे वो दही की तरह नहीं हो सकते कि दही

824
00:57:28,600 --> 00:57:32,640
वापस वो नहीं बन सकता वो अपूर्ण नहीं हो सकता पूर्ण से तो पूर्ण ही

825
00:57:32,640 --> 00:57:36,640
निकलेगा तो जब मैंने यह वाला क्वेश्चन लास्ट में उनसे किया तो उन्होंने कहा

826
00:57:36,640 --> 00:57:40,760
यह तो अचिंत विषय है तो जब हमारा क्योंकि बड़े भी थे

827
00:57:40,760 --> 00:57:45,320
तो मैं बहुत ज्यादा उनको काउंटर नहीं कर रहा था तो जब

828
00:57:45,320 --> 00:57:49,560
कैमरा ऑफ हो गया और मैं जाने लगा मेरा थोड़ा दुखी हुआ मैंने

829
00:57:49,560 --> 00:57:53,800
कहा कि आपने शुरू में कहा था कि आपकी जर्नी जो शुरू हुई थी वो जर्नी

830
00:57:53,800 --> 00:57:58,560
शुरू हुई थी क्वेश्चनिंग से कि आप आपके मन में वो थे क्वेश्चन

831
00:57:58,560 --> 00:58:03,560
उनके जवाब आपको चाहिए थे और आपको जवाब लास्ट में क्या मिल रहा है

832
00:58:03,560 --> 00:58:05,880
अचिंत आपको जवाब लास्ट में मिल रहा

833
00:58:05,880 --> 00:58:10,040
है कि इस बारे में प्रश्न मत पूछो

834
00:58:10,040 --> 00:58:14,080
यही तो हुआ मेरे मन में बहुत सारे प्रश्न है और लास्ट में एट द एंड

835
00:58:14,080 --> 00:58:18,400
उसका जवाब क्या है प्रश्न मत पूछो क्वेश्चन

836
00:58:18,400 --> 00:58:22,920
मत पूछो इस पर चिंता मत करो यही तो जवाब है फाइनली

837
00:58:22,920 --> 00:58:27,320
तो ये कहते हुए मैं बाहर निकला उससे और और इस अचिंत

838
00:58:27,320 --> 00:58:31,480
नाम से ही एक चीज और आ जाती है प्रश्न मत पूछन उ से

839
00:58:31,480 --> 00:58:35,520
कि जब ये अचिंत विषय है जीव और परमात्मा में भेद है

840
00:58:35,520 --> 00:58:39,880
भी और नहीं भी या जो भी ये कहे तो फिर यह

841
00:58:39,880 --> 00:58:43,880
जब यह अचिंत कहते हुए मधुवा चार्य जी के कट्टर विरोधी नहीं

842
00:58:43,880 --> 00:58:47,920
है तो शंकराचार्य के कट्टर विरोधी कैसे हैं

843
00:58:47,920 --> 00:58:52,040
जब ये बीच के हैं जब ये बीच में तो इनको जितना इनके

844
00:58:52,040 --> 00:58:56,120
लिए जितना सम्माननीय या जितने प्रामाणिक मधवा चार जी

845
00:58:56,120 --> 00:59:00,200
होने चाहिए उतने ही प्रमाणिक इनके लिए शंकराचार्य जी भी होने चाहिए

846
00:59:00,200 --> 00:59:04,240
या फिर जितने जितने अपमा शंकराचार्य जी है उतने ही अप्र

847
00:59:04,240 --> 00:59:08,400
माणिक इनके लिए मधवा चारज भी होने चाहिए मगर य

848
00:59:08,400 --> 00:59:12,480
करते क्या है इनको मधवा चार जी से प्रॉब्लम नहीं है इनकी

849
00:59:12,480 --> 00:59:16,480
जो मार्ग में बाधा है वह क्या है शंकराचार्य तो इसलिए

850
00:59:16,480 --> 00:59:20,800
बीच का होते हुए भी मधुवा चार्य के तो इनको काउंटर

851
00:59:20,800 --> 00:59:21,300
नहीं

852
00:59:20,920 --> 00:59:25,200
करना है इनको शंकराचार्य को काउंटर करते रहना है क्योंकि अगर

853
00:59:25,200 --> 00:59:29,400
उनसे अपने लोग को दूर नहीं रखा तो वहां तो पर्दा जोड़

854
00:59:29,400 --> 00:59:33,560
गया तो भेद खुल जाएगा जी आप कंटिन्यू

855
00:59:33,560 --> 00:59:37,720
करें हां और उनको जैसे कि अने शंकराचार्य जी

856
00:59:37,720 --> 00:59:41,720
की बात की तो उनको शंकराचार्य जी से बहुत प्रॉब्लम बहुत ये क्या करते

857
00:59:41,720 --> 00:59:45,800
हैं कि भज गोविंदम जो भजन है जो शंकराचार्य जी ने लिखा

858
00:59:45,800 --> 00:59:50,120
है वो लेते हैं और बताते कि शंकराचार्य ने अंत में यही

859
00:59:50,120 --> 00:59:54,440
कहा था भज गोविंदम कहा था देखो हमें भी यही कहा था स्टार्टिंग में

860
00:59:54,440 --> 00:59:58,880
ये जो आप शिव जी को मानते हैं ना ये जो कौन है वो शंकराचार्य खुद शिवजी थे

861
00:59:58,880 --> 01:00:03,000
उन्होंने ये भज गोविंदम भज गोविंदम कहा और और एक सबसे

862
01:00:03,000 --> 01:00:07,720
बड़ा उनका उत्तम श्लोक है उनका वैष्णव नाम यथा शंभू

863
01:00:07,720 --> 01:00:11,720
ये बोलते हर बार ये हर बार बोलते हम वैष्ण यथा शंभू

864
01:00:11,720 --> 01:00:15,720
पर उनका बोलना कुछ हमें इतना फर्क नहीं पड़ा हम अभी भी शिवजी को

865
01:00:15,720 --> 01:00:20,400
उतना ही मानते है तो मतलब वो हर बार ऐसा ही करते हैं कि

866
01:00:20,400 --> 01:00:24,600
तुमय शिवजी का जो शिवरात्रि करते हैं उसके ऊपर बहुत बड़े बड़ी वीडियो

867
01:00:24,600 --> 01:00:28,720
आते है शिवरात्रि क्यों नहीं करनी चाहिए शिवरात्रि क्यों नहीं करनी

868
01:00:28,720 --> 01:00:32,800
चाहिए उसके ऊपर एक ये सब आपत्ति हमें बहुत है अभी भी मतलब अभी तो

869
01:00:32,800 --> 01:00:36,120
है ही पहले भी थी थोड़ी थोड़ी पर हमें क्या कि चलो

870
01:00:36,120 --> 01:00:40,200
ये सब अच्छे अच्छे सब मित्र मिले दीपक जी भी वहां ही थे तो हमें उससे

871
01:00:40,200 --> 01:00:44,280
अच्छी दोस्ती हो गई थी मित्रता हो गई थी तो उन्होंने बोला कि तुम आ जाओ हमें

872
01:00:44,280 --> 01:00:48,880
भी हमें भी पता है तुम आ तो जाओ हम धीरे धीरे करके निकल जाएंगे

873
01:00:48,880 --> 01:00:53,800
और चलो आज निकल भी गए पर

874
01:00:53,800 --> 01:00:57,800
वैसे तो बहुत सारा चीज है जैसे कि बीच में क्या था हा और और एक

875
01:00:57,800 --> 01:01:02,360
चीज बोला था उन्होंने की श्री श्रीमद भगवत गीता के बारे में

876
01:01:02,360 --> 01:01:06,400
जो प्रभुपाद की जो लिखी हुई भगवत गीता है उसके अलावा जितने भी भगवत गीता वो सब

877
01:01:06,400 --> 01:01:10,520
बोगस है ऐसा बोला था ये शब्द उन्होने यूज किया था बोगस द

878
01:01:10,520 --> 01:01:14,600
सब भगवत गीता बोगस तो ये सब है और दूसरा हमें ऐसा लगता है

879
01:01:14,600 --> 01:01:18,720
कि ये जो निंदा हम सुनते है ना तो उससे भी हमें पाप लगता है ऐसा कभी

880
01:01:18,720 --> 01:01:22,840
कभी अंदर मन में बहुत ऐसा आता भी है कि ये जो हम शिव हरि और हरि हर

881
01:01:22,840 --> 01:01:27,000
भेद की जो निंदा सुनते है उससे हमें ऐसा लगता है हमें भी उससे अपराध

882
01:01:27,000 --> 01:01:31,280
लगेगा ये ऐसा बोलते ही रहते हर बार और वो तो छोड़ो राम और कृष्ण

883
01:01:31,280 --> 01:01:35,800
में भी भेद करते है राम कृष्ण और विष्णु में भी व तो व भी तो हरि

884
01:01:35,800 --> 01:01:40,120
दूर की बात है विष्णु विष्णु करते उतार

885
01:01:40,120 --> 01:01:44,720
आज इस मामले प वीडियो आज ही डाला है हमने

886
01:01:44,720 --> 01:01:49,320
देखी थोड़ी तो देखी हमने बाकी है पूरी देखने की बाकी है

887
01:01:49,320 --> 01:01:51,160
चलिए अब हम लोग विनय

888
01:01:51,160 --> 01:01:56,040
जी को सुन ले अगर विनय जी उपलब्ध हो तो विन जी

889
01:01:56,040 --> 01:01:58,640
सुन पा रहे हैं विनय

890
01:01:58,640 --> 01:02:04,640
जी जी विनय जी

891
01:02:05,120 --> 01:02:10,000
बताइए नेट का आवाज आपकी नहीं आ रही मेरी आवाज आ रही है आपको

892
01:02:10,000 --> 01:02:16,000
जी आवाज आ रही है बहुत स्लो आ रही

893
01:02:16,240 --> 01:02:20,400
है हां थोड़ा नेट का इशू चल रहा है य प एक

894
01:02:20,400 --> 01:02:24,400
मिनट मैं एक बार आप ना लीव करके दोबारा आइए मुझे लगता

895
01:02:24,400 --> 01:02:30,400
है कोई टेक्निकल होगी तो एक बार आप लीव कर दीजिए दोबारा आप आ

896
01:02:30,960 --> 01:02:35,560
जाइए तो शिव जी थोड़ा और ड़ चर्चा में जसे

897
01:02:35,560 --> 01:02:41,040
जी ठीक है आ आप

898
01:02:41,040 --> 01:02:44,480
बोलिए जी

899
01:02:44,480 --> 01:02:48,120
बोलिए नहीं

900
01:02:48,120 --> 01:02:52,520
बोल हा तो अभी इनका आपको बता

901
01:02:52,520 --> 01:02:56,560
कांसेप्ट क्या है ज हम मत हमारा होता हर चार महीने में कहीं

902
01:02:56,560 --> 01:03:00,600
ना कहीं कैंप में जाते रहते मतलब जो भी यूथ लोग है यूथ मतलब जो

903
01:03:00,600 --> 01:03:04,640
भी 18 साल से कितने 16 साल 16

904
01:03:04,640 --> 01:03:08,960
साल से लेकर जो भी 30 साल तक है

905
01:03:08,960 --> 01:03:13,440
उ एक बात मन में आ रही है मैं कह दू छोटी सी है

906
01:03:13,440 --> 01:03:17,640
जैसे अभी आपने मर जी ने बताया कि वो

907
01:03:17,640 --> 01:03:21,760
जब भी कभी बात आती शंकराचार्य की तो वो कहते हैं उन्होंने अंत में क्या

908
01:03:21,760 --> 01:03:26,000
कहा भज गोविंदम तो क्या वो मायावा फैला

909
01:03:26,000 --> 01:03:30,080
नहीं आए थे जो सच बोल रहे हैं अगर यह सच है

910
01:03:30,080 --> 01:03:34,240
गोविंद गोविंद को भजना सच है तो वो तो माया बात फैलाने आए थे आपके

911
01:03:34,240 --> 01:03:38,280
अकॉर्डिंग झूठ फैलाने आए थे गलत फैलाने आए थे तो वो

912
01:03:38,280 --> 01:03:42,760
भज गोविंदम जो सच्चाई है वो क्यों कह रहे हैं और

913
01:03:42,760 --> 01:03:45,960
यदि वो मायावा फैलाने ही आए थे तो

914
01:03:45,960 --> 01:03:50,280
क्या भज गोविंदम भी माया है भज गोविंदम भी झूठी शिक्षा है

915
01:03:50,280 --> 01:03:54,360
तो ये ये कभी नहीं सोचते हैं सब कुछ बोलते हैं शंकराचार्य जी ने भज गोविंदम

916
01:03:54,360 --> 01:03:58,600
कहा अरे भैया शंकराचार्य तो झूठ बोलने आए थे ना आपके अकॉर्डिंग तो इसका मतलब

917
01:03:58,600 --> 01:04:02,800
भज गोविंदम झूठ है क्या और यदि भज गोविंदम सच है तो भज

918
01:04:02,800 --> 01:04:06,920
गोविंदम सच है तो शंकराचार्य मायावादी नहीं है नहीं जहा

919
01:04:06,920 --> 01:04:11,280
प जहां पर भगवान का हरि का नाम आएगा वो सत्य है बाकी

920
01:04:11,280 --> 01:04:15,320
जो भी बाकी जो भी विषय है वो सब मायावादी है और वो सब चीज को

921
01:04:15,320 --> 01:04:19,360
नहीं सुनना चाहिए सि जहा पर कृष्ण का नाम आए ये आ बस आपको वही सुनना

922
01:04:19,360 --> 01:04:23,480
है यानी शंकराचार्य अंत में सच बोल

923
01:04:23,480 --> 01:04:27,640
के गए और एक बात बता चाहता हूं बीच में थो थोड़े समय पहले

924
01:04:27,640 --> 01:04:31,760
की बात है ये दीपक जी गए थे तो वहां पर गणेश जी की कुछ बात

925
01:04:31,760 --> 01:04:35,920
हुई कि उनको कुछ यात्रा प जाना था यहां प गोवर्धन निकोले करके

926
01:04:35,920 --> 01:04:40,200
य प वो पूरा उन्होने मिनी वृंदावन बनाया तो वहा प किसी ने कहा कि गणेश मतलब

927
01:04:40,200 --> 01:04:44,320
सा तारीख को कुछ गणेश चतुर्थी यहां पर महाराष्ट्र में हमारे गणेश जी को बहुत ही पूजा जाता

928
01:04:44,320 --> 01:04:48,720
है उस समय पर बहुत बड़ा त्यौहार होता है गणपति है अरे क्या गणपति गणपति

929
01:04:48,720 --> 01:04:53,120
करने का वहां पर सबके स्वामी बैठे हैं

930
01:04:53,120 --> 01:04:57,680
सुप्रीम पस ऑ गड हैड तुम गणपति गणपति करते हो

931
01:04:57,680 --> 01:05:01,000
तो ऐसा तुरंत ऐसा

932
01:05:01,000 --> 01:05:05,440
अपमानित भी कर देते म इजत से बेती करना नसे

933
01:05:05,440 --> 01:05:10,200
सीखे बड़ी इजत सेसा बोल तो नहीं सकते तुरत खराब चीज

934
01:05:10,200 --> 01:05:14,960
श बो नहीं सकते बड़ी इ करते भगवान गणेश जी की

935
01:05:14,960 --> 01:05:19,040
महादेव की महादेव की भी बती करते बहुत दुख होता

936
01:05:19,040 --> 01:05:21,920
है

937
01:05:21,920 --> 01:05:27,080
इसलिए जी न जी बोले

938
01:05:27,080 --> 01:05:31,080
विनय जी हा मेरी आवाज आ रही है अभी जी जी आ

939
01:05:31,080 --> 01:05:34,960
रही है बोलिए हां

940
01:05:34,960 --> 01:05:39,120
जी हां तो मैंने कुछ पॉइंट्स निकाले थे

941
01:05:39,120 --> 01:05:44,760
जैसे मैंने आपको उस दिन फोन पर कहा था कि 11 अध्याय

942
01:05:44,760 --> 01:05:48,960
में मेरी आवाज आ रही है जी जी बिल्कुल आ

943
01:05:48,960 --> 01:05:53,040
रही है अच्छा मैं थोड़ा ऐसे

944
01:05:53,040 --> 01:05:59,040
बैठता हूं शायद आ जाए आप

945
01:05:59,280 --> 01:06:03,480
आवाज हां जी तो 11 अध्याय में अर्जुन ने बोला

946
01:06:03,480 --> 01:06:09,480
था कि मुझे आपका विराट स्वरूप नहीं देखना है

947
01:06:13,010 --> 01:06:15,840
[संगीत]

948
01:06:15,840 --> 01:06:19,840
मुझे आपका नहीं आ रहा है क्लियर नहीं आ रहा

949
01:06:19,840 --> 01:06:22,760
है

950
01:06:22,760 --> 01:06:26,840
आपका क्लियर नहीं आ रही आपकी वॉइस कट रही है और

951
01:06:26,840 --> 01:06:32,840
दिक्कत है आपके में नेटवर्क कंपलीटली आ रहे हैं

952
01:06:35,040 --> 01:06:41,040
ना चलिए विनय जी अभी नहीं

953
01:06:41,200 --> 01:06:47,200
है हा शिवन जी तो मैं थोड़ा जब तक विन जी आते

954
01:06:48,200 --> 01:06:52,320
है अभी यहां प ना एक पूरा आपको मैं बताता हूं य

955
01:06:52,320 --> 01:06:56,360
पूरा बोते पूरा सीक्वेंस बना म

956
01:06:56,360 --> 01:07:00,600
मूवी होता है कब क्लाइम आनाए कब स्टार्टिंग क ए

957
01:07:00,600 --> 01:07:04,760
य आपको बताता सन क्या है जब

958
01:07:04,760 --> 01:07:09,440
मैं मतलब पिछले साल ज मैं गया था एक

959
01:07:09,440 --> 01:07:13,520
हम आपको बता होते रहता है अलग अलग जग तो हमारा

960
01:07:13,520 --> 01:07:17,680
नासिक में कैम था तो हमें कैंप में मतलब बताया गया

961
01:07:17,680 --> 01:07:21,960
था भागवत से के

962
01:07:21,960 --> 01:07:26,160
कैसा होता है ना कैटरपिलर नाम का पता इंसेक्ट

963
01:07:26,160 --> 01:07:30,400
होता कैटर जिसे तितली बनती है बराबर

964
01:07:30,400 --> 01:07:34,800
तो बता कि एक कैटरपिलर होता है व कैसा मतलब जब वो निकल

965
01:07:34,800 --> 01:07:38,960
जब वो अपना पूरा तितली बनने से पहले उसको

966
01:07:38,960 --> 01:07:43,280
जो कष्ट होता है तो अभी इकन भी जो मतलब

967
01:07:43,280 --> 01:07:47,320
का परंपरा है वो कैसे चला है तो उसके उसके उदाहरण

968
01:07:47,320 --> 01:07:51,440
से बताया गया उसके उदाहरण से यह बताया गया कि जो

969
01:07:51,440 --> 01:07:55,560
सबसे पहला बुद्ध ज बुद्ध आए थे य बुद्ध जी आए थे तो

970
01:07:55,560 --> 01:07:59,840
उन्होने उनका जो कांसेप्ट नि मतलब निर्वाना ऐसा करके

971
01:07:59,840 --> 01:08:03,480
कांसेप्ट था ठीक है उसम क्या हो गया उन्होने बताया जो सब शास्त्र

972
01:08:03,480 --> 01:08:07,600
जो भी य सब पूरा गलत है और मतलब निर्वाणा का

973
01:08:07,600 --> 01:08:11,760
बताय प्रॉपर है तो उस टाइम पर क्या हुआ धर्म का जो

974
01:08:11,760 --> 01:08:15,920
सनातन धर्म था तो बहुत जगह मतलब समा बो एक लु

975
01:08:15,920 --> 01:08:19,960
लुप्त होने के कागार पर था ठीक है अ बुद्ध जी

976
01:08:19,960 --> 01:08:24,440
के बाद व बुद्ध जी के बा बुद्ध जी के बाद आदि शंकराचार्य

977
01:08:24,440 --> 01:08:28,480
तो शंकराचार्य ने क्या किया उन्होंने ये खुद ही बोलते

978
01:08:28,480 --> 01:08:32,680
हैं उनका वाक्य उनका इसन का वाक्य है अब ये क्या बोलते

979
01:08:32,680 --> 01:08:36,680
हैं कि आदि शंकराचार्य आए तो उन्होंने क्या किया उन्होंने फिर से धर्म

980
01:08:36,680 --> 01:08:40,760
का जो धर्म का जो बुद्ध जी का जो वाणी

981
01:08:40,760 --> 01:08:45,200
था जो उन्होंने बता कि निर्वाणा सही है उसके बाद जब

982
01:08:45,200 --> 01:08:49,280
अपने आदि शंकराचार्य आ तो उन्होंने फिर से धर्म का स्थापित किया अलग

983
01:08:49,280 --> 01:08:53,360
मतलब पूरा मतलब भ्रमण किया पूरे भारतवर्ष

984
01:08:53,360 --> 01:08:57,480
का और फिर से हिंदू धर्म का जो था स्थापना किया स्थापना

985
01:08:57,480 --> 01:09:01,920
कैसे किया जैसे की फॉर एग्जांपल अभी साउथ में है

986
01:09:01,920 --> 01:09:06,240
तो उन्होंने बताया बता मतलब जगह के और प्लेस के हिसाब से लोगों

987
01:09:06,240 --> 01:09:11,120
के कहानी है कि वो जीरो हो गया

988
01:09:11,120 --> 01:09:15,120
जीरो से पहले उसको थोड़ा प्रिपेयर किया और

989
01:09:15,120 --> 01:09:19,120
उसके बाद फिर फाइनल य दे दिया गया यय

990
01:09:19,120 --> 01:09:23,160
होती है क्या नास्तिकता से लड़ने के लिए क्या

991
01:09:23,160 --> 01:09:28,000
जो फिलॉसफी स्कन जो दे रहा है क्या वह पर्याप्त नहीं है

992
01:09:28,000 --> 01:09:32,040
जो शंकराचार्य को बीच में आना पड़ रहा है हा

993
01:09:32,040 --> 01:09:36,040
तो शायद हो सकता है रगा इसलिए उनको लेके आ रहे ना नहीं गा क्लियर इसलिए वो

994
01:09:36,040 --> 01:09:40,360
उनको लेके आ रहे बीच में इसलिए लेके आ रहे ताकि उनका काम तो चल जाए ना

995
01:09:40,360 --> 01:09:44,760
जब नाक से लड़ना है जब धर्मिल है तो शंकराचार्य से लो

996
01:09:44,760 --> 01:09:49,160
और उसके बाद गलत है सही हम है जो कि नास्ति

997
01:09:49,160 --> 01:09:53,360
से नहीं लड़ सकते अभी य कांसेप्ट क्या वो भी आपको बताता

998
01:09:53,360 --> 01:09:57,440
हूं अभी वो क्या बोले कि अभी यहां पर जी को भेजा भगवान ने किसको भेजा पहला

999
01:09:57,440 --> 01:10:01,720
भगवान भगवान आए ठीक है बुद्ध बुद्ध रूप में आ जब बुद्ध रूप में उन्होने

1000
01:10:01,720 --> 01:10:05,800
निर्वाणा का स्थापना किया मतलब पूरा जो भी शास्त्र वगैरह को उनको प्रमाण नहीं मानते थे

1001
01:10:05,800 --> 01:10:10,000
वो तो उसके बाद उनको शंकर जी को भेजना पड़ा शंकर जी को क्या भेजना पड़ा ताकि

1002
01:10:10,000 --> 01:10:14,800
फिर से तुम धर्म का स्थापना करो फिर से जहां जहां प जो लुप्त हुआ है फिर से तुम

1003
01:10:14,800 --> 01:10:19,080
सनातन सनातन का प्रचार प्रसार करो ठीक है अब क्या होता है तीसरे

1004
01:10:19,080 --> 01:10:23,240
टम में कौन आता है माधवाचार्य जी आते हैं ठीक है अब यहां प बोलते माधवाचार्य

1005
01:10:23,240 --> 01:10:27,680
ना हा माधवाचार्य जी अ अभी क्या बोलते अभी माधवाचार्य जी आए अब माधवाचार्य

1006
01:10:27,680 --> 01:10:32,560
जी ने प्रॉपर प्रॉपर उन्होंने हिंदू की स्थापना की प्रॉपर उन्होंने

1007
01:10:32,560 --> 01:10:34,320
जो ग्रंथ था इसका

1008
01:10:34,320 --> 01:10:38,440
पूरा उन्होंने प्रॉपर्ली स्थापना कर दिया अभी अब किसका आना बाकी रह गया

1009
01:10:38,440 --> 01:10:42,480
अब यहां पे साक्षात चैतन्य महाप्रभु का आना बाकी रह गया ठीक है

1010
01:10:42,480 --> 01:10:46,520
अब ये विषय में वो क्या बोलते हैं सबसे पहला बुद्ध बुद्ध आए ठीक है

1011
01:10:46,520 --> 01:10:51,480
उन्होंने क्या किया थोड़ा रास्ता बनाया रास्ता क्या बना कि लोग को पहले तो ये बता दिया कि

1012
01:10:51,480 --> 01:10:55,720
जो सनातन है ये पूरा झूठ है जो शास्त्र वगैरह

1013
01:10:55,720 --> 01:10:59,720
झूठ है जो निर्वाणा है वही एकदम मतलब सच है

1014
01:10:59,720 --> 01:11:03,880
ठीक है अभी जब यहां पर य पर शंकर जी को भेजा तो शंकर जी ने किसका

1015
01:11:03,880 --> 01:11:07,880
स्थापना किया मतलब थोड़ा थोड़ा धर्म का प्रचार किया कि अद्वैत मतलब जो भगवान

1016
01:11:07,880 --> 01:11:11,960
है हर जगह प ठीक है अभी उन्होने य स्थापना किया अब यहां पर भी कमी रह गई

1017
01:11:11,960 --> 01:11:15,960
थी य पर भी कमी रह गई ी जिस माधवाचार्य जी को आना पड़ा ठीक है भगवान ने

1018
01:11:15,960 --> 01:11:19,960
साक्षात माधवाचार्य जी का रूप लेके आए य प माधव चार्य

1019
01:11:19,960 --> 01:11:23,960
के रूप में उन्होंने मतलब जो एक मंदिर होता है मंदिर अभी

1020
01:11:23,960 --> 01:11:28,040
ये सब कौन थे कि मंदिर बन रहा है पूरा बना नहीं है अभी ठीक है अब

1021
01:11:28,040 --> 01:11:32,280
पूरा कब बनेगा जब चैतन्य महाप्रभु आए तो चैतन्य महाप्रभु के लिए इन्होने

1022
01:11:32,280 --> 01:11:36,960
पूरा मंदिर बनाना चालू कि किन्ने बनाना चालू किया बुद्ध हो गए

1023
01:11:36,960 --> 01:11:41,040
फिर आदि शंकराचार्य जी हो गए माधवाचार्य जी माधवाचार्य

1024
01:11:41,040 --> 01:11:45,160
जी ने क्या किया पूरा टेंपल मतलब एग्जांपल दे रहा आप य मत समझ

1025
01:11:45,160 --> 01:11:49,280
मंदिर बना रहे मंदिर नहीं बना रहे मतलब निर्माण कैसा हो रहा है

1026
01:11:49,280 --> 01:11:49,780
पिलर

1027
01:11:49,560 --> 01:11:53,880
खड़ा हुआ जिसमें नीचे बेस में शंकराचार्य जी ने

1028
01:11:53,880 --> 01:11:58,600
यहां तक पहुंचाया म जी ने यहां तक पहुंचाया उस य तक पहुंचाया

1029
01:11:58,600 --> 01:12:02,640
चैतन्य य एक टस्ट है ये कहते हैं कि हमारी जो

1030
01:12:02,640 --> 01:12:07,160
गुरु परंपरा है वोह सृष्टि के प्रारंभ

1031
01:12:07,160 --> 01:12:11,200
से है भगवान श्री कृष्ण से लेकर हम तक ठीक है तो

1032
01:12:11,200 --> 01:12:15,240
फिर ये मधवा चार्य जी का ज्ञान क्या कहीं और था जो यह कहा जा

1033
01:12:15,240 --> 01:12:19,320
रहा है कि मधवा चार्य जी आए और उन्होंने एक स्टेप और ऊपर किया

1034
01:12:19,320 --> 01:12:23,360
या क्या क्या मधवा चार या जो चैतन्य महाप्रभु जी ने जो

1035
01:12:23,360 --> 01:12:27,800
ज्ञान दिया है क्या वो कहीं और था वो था नहीं क्या सृष्टि के अंदर

1036
01:12:27,800 --> 01:12:31,800
जो यह बताया जा रहा है कि उन्होंने और एक स्टेप ऊपर बढ़ा दिया

1037
01:12:31,800 --> 01:12:36,280
और य जब य जब यह देश काल परिस्थिति

1038
01:12:36,280 --> 01:12:41,080
वश दिया जा रहा है तो सनातन सिद्धांत कहां रहा

1039
01:12:41,080 --> 01:12:45,160
सना को नहीं दिया गया आज के लोगों को दिया गया तो सनातन

1040
01:12:45,160 --> 01:12:49,320
नहीं है मवी बन रहा हैय बता मवी बन रहा है

1041
01:12:49,320 --> 01:12:53,240
मूवी में क्या होता

1042
01:12:53,240 --> 01:12:57,320
है इनका कहने आ भगवान भगवान के आने से पहले उनके

1043
01:12:57,320 --> 01:13:01,360
भक्त आते हैं ठीक है मैं य पर बोला ओके चलेगा

1044
01:13:01,360 --> 01:13:05,560
भगवान के पहले भक्त आते हैं वो पूरा वो पूरा मूवी कैसे बननी

1045
01:13:05,560 --> 01:13:09,760
चाहिए मतलब जो जब हीरो आने वाला है तो उसके पहले पूरा सेटअप ऑलरेडी सब रेडी है

1046
01:13:09,760 --> 01:13:14,320
अब यहां पर बस भगवान को क्या करना है अपना जो भी हीरो जैसा

1047
01:13:14,320 --> 01:13:18,320
हीरो अपना कार्य करता है अभी भगवान को लीला करना है तो लीला करने से पहले उनके

1048
01:13:18,320 --> 01:13:22,320
भक्त आए ठीक है उनके भक्त ने धीरे धीरे पिलर खड़ा किया अब भगवान

1049
01:13:22,320 --> 01:13:26,400
की यहां प लीला एक्चुअली चालू हुई यहां पर चैतन्य महाप्रभु ने

1050
01:13:26,400 --> 01:13:31,200
हरि नाम का प्रचार किया यह सब किया बोला ठीक है हरि नाम का प्रचार किया इसमें

1051
01:13:31,200 --> 01:13:35,240
मतलब जो चैतन्य महाप्रभु का जो ये था उन्होने अपनी पूरा लीला की यहां

1052
01:13:35,240 --> 01:13:39,280
पे उन्होंने हरिनाम का प्रचार किया उन्होने मतलब सारे

1053
01:13:39,280 --> 01:13:43,280
बहुत सारे कार्य जो भक्ति का जो उन्होने बोलते ना बीच सभी

1054
01:13:43,280 --> 01:13:47,440
के ह बोते गली मोहल्ले हर शहर में होना चाहिए हरि नाम का प्रचार तो यहां से पूरा

1055
01:13:47,440 --> 01:13:51,840
चैतन्य महाप्रभु ने स्टार्ट किया तो य पर दिक्कत य आता है

1056
01:13:51,840 --> 01:13:56,080
कि ठीक है मतलब भगवान अभी यहां प आ रहे है ठीक है यहां पय एक चीज

1057
01:13:56,080 --> 01:14:00,200
और बताते हैं एक चीज और ऐड करते हैं जब चैतन्य महाप्रभु को ही पूरा

1058
01:14:00,200 --> 01:14:04,440
प्रचार करना था जब चैतन्य महाप्रभु को ही पूरी मतलब भक्ति का प्रचार करना

1059
01:14:04,440 --> 01:14:08,320
था तोय फर चैतन्य महाप्रभु ने ऐसा क्यों बोला कि एक सेनापति आएगा

1060
01:14:08,320 --> 01:14:12,480
जो पूरे मतलब अलग गली गली मोहल्ले मोहले में हरि नाम का प्रचार

1061
01:14:12,480 --> 01:14:16,640
करेगा तो मतलब यहां पर य मतलब मेरा ये चीज क्लियर नहीं हुआ

1062
01:14:16,640 --> 01:14:21,600
कि हीरो तो आ गया अभी कार्य क्या होता है हीरो का कार्य होता है जो मतलब

1063
01:14:21,600 --> 01:14:25,880
हीरो का कार्य होता है कि वो विलन से युद्ध करे जो भी लड़ाई करे समाप्त

1064
01:14:25,880 --> 01:14:30,520
करे ठीक है किसका कार्य है हीरो का अब यहां प हीरो आने के बाद भी

1065
01:14:30,520 --> 01:14:34,800
एक सेनापति आने का बाक्य था ऐसा लिखा म ऐसा बताते हैं इसकन वाले

1066
01:14:34,800 --> 01:14:39,200
कि सेनापति एक आने वाला है जो पूरा हरि नाम का हर गली मोहल्ले में प्रचार करेगा

1067
01:14:39,200 --> 01:14:43,200
वो सेनापति कौन है शीला प्रभुपाद मतलब अभी यहां पर ये भी क्लियर नहीं है

1068
01:14:43,200 --> 01:14:47,400
कि असली हीरो कौन था अभी यहां पर तो मतलब मैं पूरा घूम

1069
01:14:47,400 --> 01:14:51,600
रहा हूं कि चलो इतने लोग आ गए ठीक है चैतन्य महाप्रभु भी आ गए ठीक है वहां से हरि नाम

1070
01:14:51,600 --> 01:14:55,920
का प्रचार भी स्टार्ट हो ठीक है फिर एक सेनापति की फिर आने की आवश्यकता क्यों प पढी

1071
01:14:55,920 --> 01:15:00,000
नहीं प से तक आपकी जो कन्वर्सेशन रही है उसम मुझे ऐसा लग

1072
01:15:00,000 --> 01:15:04,000
रहा है कि आपका ये मन करने लगता होगा बीच-बीच में

1073
01:15:04,000 --> 01:15:08,240
कि मैं एक अधा लू और अपने सर अपने सर पर मार लू बिल्कुल बिल्कुल

1074
01:15:08,240 --> 01:15:12,400
बिल्कुल बिल्कुल क्योंकि क्योंकि जब आपने चैतन्य महाप्रभु को जब आपने

1075
01:15:12,400 --> 01:15:16,680
बताया कि वो साक्षात हरि अभी आ गए हरि ने प्रचार वगैरह करना जो लोगों का भक्ति

1076
01:15:16,680 --> 01:15:20,840
वगैरह जो नहीं हुआ था मतलब भक्ति का बीज तो आपने यहां से हरि नाम

1077
01:15:20,840 --> 01:15:23,480
का बीज बो दिया ठीक है जब हरि

1078
01:15:23,480 --> 01:15:27,840
नाम का आपने बीज बो दिया तो फिर ऐसा आप इसको क्यों बोलते है कि सेनापति

1079
01:15:27,840 --> 01:15:31,880
के आने की जरूरत पड़ेगी जो पाश्चात्य देश में जाएगा वहां

1080
01:15:31,880 --> 01:15:35,880
पर प्रचार करेगा हरि नाम का गली महल में प्रचार होगा तो चैतन्य म

1081
01:15:35,880 --> 01:15:39,880
प्रभु के टाइम पर नहीं होता था उसके बाद नहीं हुआ प्रचार तो हरि

1082
01:15:39,880 --> 01:15:44,040
नाम का हुआ ही ना ऐसा तो नहीं नहीं हु बहुत लोग गए बाहर प्रचार करने के लिए ठीक है

1083
01:15:44,040 --> 01:15:48,120
जो सक्सेसफुल उनको श प्रभुपाद ने जो स्ट्रगल किया ठीक है उस टाइम

1084
01:15:48,120 --> 01:15:52,160
पर आप ये भी बोल सकते हैं जब वर्ल्ड वर युद्ध का ज बोलते ना सेकंड

1085
01:15:52,160 --> 01:15:56,240
वर्ल्ड वर युद्ध था तो उसम बहुत सारे ऐसे हिस हिप्पस जो

1086
01:15:56,240 --> 01:16:00,360
अपना मतलब सब त्याग के मतलब क्या कर कुछ नहीं पता था कुछ बिल्कुल नहीं

1087
01:16:00,360 --> 01:16:04,440
पता था नश नशे में मतलब बो उनके कंट्री के ही

1088
01:16:04,440 --> 01:16:08,560
उनके कंट्री के लोगों ने ही उनको बाहर भगा दिया बाहर भगा दिया मतलब बाहर कंट्री

1089
01:16:08,560 --> 01:16:12,680
में नहीं भगाया वही देश में उनको मतलब बोलते है ना अभी अपने यहां प कैसा है

1090
01:16:12,680 --> 01:16:16,680
अरे तू तू शुद्र है चल तू यहां प मत ते को अंडर एंट्री नहीं

1091
01:16:16,680 --> 01:16:20,880
है तो फॉर एग्जांपल वहां प जो हिप्पस थे उनको भी वैसा बोलते है ना निकाला

1092
01:16:20,880 --> 01:16:25,000
गया उनको उनके घर से मतलब तो उस टाइम प अभी क्या

1093
01:16:25,000 --> 01:16:29,000
र तिरक हा तिरस्कृत लोग थे अब सिंपल सी बात है

1094
01:16:29,000 --> 01:16:33,000
कोई एक भटका आदमी रहेगा अगर आप उसके पास जाओगे

1095
01:16:33,000 --> 01:16:37,120
मैं ऐसा नहीं बोल रहा हूं जो शीला प्रभुपाद ने किया बहुत सरय कार्य है इसके

1096
01:16:37,120 --> 01:16:39,120
लिए मैं मतलब बो उनको दंडवत

1097
01:16:39,120 --> 01:16:43,440
जितना भी दंडवत करू कम है तो मेरा बत यहां पर क्या आता हिस

1098
01:16:43,440 --> 01:16:47,520
के पास जब गए तो वहा से जो प्रचार इनका स्टार्ट हुआ ठीक है वहां से ज

1099
01:16:47,520 --> 01:16:51,680
प्रचार स्टार्ट हुआ अभी इनका य पर मानना क्या है मैं आपको बताता

1100
01:16:51,680 --> 01:16:56,320
हूं य पर इनका मानना ये है कि जो अंग्रेज को ज्ञान दिया जो

1101
01:16:56,320 --> 01:17:00,480
इंडिया की मानसिकता क्या है कि जो बाहर देश वाले करेंगे तो वो

1102
01:17:00,480 --> 01:17:04,520
उससे प्रेरित होकर हम ये कार्य करेंगे ठीक है जो बाहर बाहर वाले

1103
01:17:04,520 --> 01:17:08,560
जैसा उनका आचरण करेंगे तो वैसा आचरण हम करेंगे फॉर एग्जांपल जैसे वो इंग्लिश बोल

1104
01:17:08,560 --> 01:17:12,800
रहे तो मतलब उनका तो मतलब लैंग्वेज ही है इंग्लिश बोलना तो यहां पे हमको भी इंग्लिश

1105
01:17:12,800 --> 01:17:16,920
सीखना चाहिए वो शर्ट पैट पहन रहे तो यहां प हमको भी शर्ट पैट पहनना चाहिए मतलब ये

1106
01:17:16,920 --> 01:17:21,240
एक प्रोफेशनल टाइप लगता है बहुत अच्छा टाइप लगता है तो अभी इनका मानना क्या है कि जो बाहर

1107
01:17:21,240 --> 01:17:25,320
देश वाले को प्रभुपाद ने इसलिए बताया इंडिया में ज्ञान इसलिए इन्होने प्रचार नहीं किया क्योंकि

1108
01:17:25,320 --> 01:17:29,320
यहां पर लडी कोई सुनने वाला था नहीं तो प्रभुपाद को उसके लिए बाहर जाना पड़ा अब जब

1109
01:17:29,320 --> 01:17:33,360
बाहर गए वो जब बाहर उन्होने प्रचार किया जो वो अंग्रेज आए तो

1110
01:17:33,360 --> 01:17:38,200
लोग क्या बोलते हैं जोन की इंडिया में इंडिया के लोग आकर्षित हु मतलब इंडिया के लोग

1111
01:17:38,200 --> 01:17:42,200
य इस मतलब य विचार में पड़ गए जब बाहर वाले भक्ति कर तो हम लोग

1112
01:17:42,200 --> 01:17:46,280
क्यों भक्ति ना करे फिर से मतलब जो इंडिया का ही चीज है तो

1113
01:17:46,280 --> 01:17:50,520
इंडिया की चीज कोय ऐसा बोल रहे हैं कि वो बाहर

1114
01:17:50,520 --> 01:17:53,840
वो बाहर से सीख रहे हैं इंडिया

1115
01:17:53,840 --> 01:17:54,880
वाले

1116
01:17:54,880 --> 01:17:59,160
एक एक मिनट जी जी मेहर

1117
01:17:59,160 --> 01:18:04,120
जी आप हां हां आप बताए जी

1118
01:18:04,120 --> 01:18:08,960
हां सुनाई दे र आवाज जी जी सुनाई देर

1119
01:18:08,960 --> 01:18:13,200
विनय जी आ गए विनय जी आ गए विनय जी आपको कई बार हो गया कि हम आपको

1120
01:18:13,200 --> 01:18:17,360
कोशिश करते हैं सुनने की बट आपका नेटवर्क थोड़ा सा इशू है अभी नेटवर्क

1121
01:18:17,360 --> 01:18:22,320
में है आप हां जी

1122
01:18:22,320 --> 01:18:26,480
हां जी नेट का इशू है मेरा मेरी आवाज आ रही है आवाज

1123
01:18:26,480 --> 01:18:32,120
आ रही है आप ऐसा करिए अपना कैमरा ऑफ कर

1124
01:18:32,120 --> 01:18:36,560
दीजिए हां ओके अभी आ रही है

1125
01:18:36,560 --> 01:18:41,160
अब

1126
01:18:41,160 --> 01:18:45,280
बोलिए हां जी तो मैंने कुछ पॉइंट्स इकट्ठा

1127
01:18:45,280 --> 01:18:49,920
किए थे जैसे मैंने उस दिन आपको फोन पर बताया

1128
01:18:49,920 --> 01:18:54,040
कि एक पॉइंट तो मैंने बता दिया था कि अर्जुन रिक्वेस्ट

1129
01:18:54,040 --> 01:18:58,160
करता है क से कि मुझे आपका चतुर्भुज रूप देखना है

1130
01:18:58,160 --> 01:19:02,240
जी तो इसकन के सभी पिक्चर्स में जितने

1131
01:19:02,240 --> 01:19:06,320
भी उन्होंने पिक्चर्स बनाए है उसमें किधर भी कृष्णा का चतुर्भुज रूप

1132
01:19:06,320 --> 01:19:12,320
नहीं दिखा उन्होने सब

1133
01:19:23,720 --> 01:19:28,000
द्विभ्ग्योर तो बोलिए वो लोग

1134
01:19:28,000 --> 01:19:32,040
चतुर्भुज कृष्ण को मानते नहीं है तो यह पहला पॉइंट हो गया और

1135
01:19:32,040 --> 01:19:36,200
दूसरा पॉइंट वह लोग सिर्फ और सिर्फ प्रचार के ऊपर बहुत ध्यान देते

1136
01:19:36,200 --> 01:19:40,240
हैं जितना भी हो प्रचार करो प्रचार करो प्रचार करो बुक डिस्ट्रीब्यूटर करो

1137
01:19:40,240 --> 01:19:44,320
बुक डिस्ट्री ब्यूट करो प्रोग्राम करो बाहर संकीर्तन

1138
01:19:44,320 --> 01:19:48,360
को जाओ रास्ते पर तो उनका बोलना यह

1139
01:19:48,360 --> 01:19:52,640
कि सिर्फ प्रचार करो बस क्यों और वह भगवत गीता का 18

1140
01:19:52,640 --> 01:19:57,400
अध्याय का एक शलोक कि

1141
01:19:57,400 --> 01:20:01,880
जो भी मेरे नाम का प्रचार करेगा मेरे बारे में प्रचार करेगा

1142
01:20:01,880 --> 01:20:06,880
वो वो मेरे से व वो मुझे बहुत प्रिय

1143
01:20:06,880 --> 01:20:11,040
है मेरी आवाज आ रही है जी जी सुन रहे हैं आप

1144
01:20:11,040 --> 01:20:17,040
जब नहीं आएगी तो हम आपको टॉक देंगे अभी आप

1145
01:20:18,040 --> 01:20:24,040
बोलिए बोलिए विनय जी

1146
01:20:31,840 --> 01:20:37,840
विन जी आवाज आ रही है आपको हेलो

1147
01:20:39,040 --> 01:20:44,400
जी जी विनय जी

1148
01:20:44,400 --> 01:20:48,440
बोलिए ठीक है विनय जी आप फिर किसी और दिन आइए क्योंकि आपका थोड़ा

1149
01:20:48,440 --> 01:20:52,600
नेटवर्क का इशू है या तो आप पहले से थोड़ा सा किसी ऐसी जगह

1150
01:20:52,600 --> 01:20:57,000
पर होते कि जहां वाईफाई हो मेहर जी

1151
01:20:57,000 --> 01:21:02,320
आप और

1152
01:21:02,320 --> 01:21:06,480
कंटिन्यू अभी बराबर आ रहा है हां बराबर आ रही है

1153
01:21:06,480 --> 01:21:10,680
हा हा तो मैं और एक पॉइंट बोलने को भूल गया

1154
01:21:10,680 --> 01:21:14,880
जैसे की अभी बात हुई थी कंपटीशन यहां पर कंपटीशन बहुत होती है

1155
01:21:14,880 --> 01:21:18,880
जैसे की जो 16 रांग जो है 16 माला करना तो

1156
01:21:18,880 --> 01:21:23,080
उसमें कैसा है कि जैसे कि हम कुछ भी कोई भी जाप करते

1157
01:21:23,080 --> 01:21:27,280
हैं तो हम एक एकाग्रता से करते हैं कि एक एक मंत्र है जो भी है नाम

1158
01:21:27,280 --> 01:21:31,560
जप करते हैं या फिर पंचाक्षर मंत्र करते हैं जो भी हरे राम हरे कृष्ण

1159
01:21:31,560 --> 01:21:35,840
जो भी करते हैं कोई भी हो तो हम आराम से आराम से करते हैं तो वहां

1160
01:21:35,840 --> 01:21:39,840
पर हमने देखा कि बस ये 16 माला हमें

1161
01:21:39,840 --> 01:21:43,840
दो घंटे में हमें करना है तो एकदम फास्ट करते हरे ह

1162
01:21:43,840 --> 01:21:47,840
क राम राम राम एकदम हमने ये चीज देखा है और बाद में

1163
01:21:47,840 --> 01:21:51,880
उसके बाद सब पूछते हैं तुमने कितना किया कभी कभी कहीं प भी हम प्रोग्राम में जाते

1164
01:21:51,880 --> 01:21:56,360
है तुम कितना मला करते हो ब दोही करते हो अरे

1165
01:21:56,360 --> 01:22:00,440
तुम तुम सिंसियर नहीं हो तुम तुम ठीक नहीं हो ये तुम

1166
01:22:00,440 --> 01:22:04,680
ठीक नहीं करते सला माला तो मिनिमम होनी चाहिए ये तो ये गलत

1167
01:22:04,680 --> 01:22:08,760
बात है इतना तो होना ही नहीं चाहिए मतलब मतलब जो

1168
01:22:08,760 --> 01:22:13,440
16 माला करता है वही भक्त है और जो सोला मला नहीं करता जो समझो

1169
01:22:13,440 --> 01:22:17,440
कुछ भी करता है जो भी है हमारा हमारे जो भी सनातन धर्म में जो भी आता

1170
01:22:17,440 --> 01:22:21,680
है शास्त्र के हिसाब से जो भी करता है वो करता रहेगा वो तो

1171
01:22:21,680 --> 01:22:25,760
भी वो ठीक नहीं है वो अगर गायत्री मंत्र भी करता रहेगा तो व भक्त है ही

1172
01:22:25,760 --> 01:22:29,800
नहीं क्यक वो सो माला जाप नहीं कर हमने देखा है हमने अनुभव भी किया

1173
01:22:29,800 --> 01:22:33,840
है य पर और कंपटीशन बहुत होती रहती है इससे अच्छा

1174
01:22:33,840 --> 01:22:38,400
यह है देखो उससे सीखो वो देखो मंदिर आता है तो मंदिर नहीं आते हो

1175
01:22:38,400 --> 01:22:42,520
तुमय तुमय सोला माला करते हो तुम सो माला नहीं करते हो तुम ली

1176
01:22:42,520 --> 01:22:46,600
दो ही माला करते हो मतलब ऊच नीच बहुत होती है

1177
01:22:46,600 --> 01:22:51,280
बहुत होती है य पर और हमय चचनी से

1178
01:22:51,280 --> 01:22:55,280
चचनी भी हम पसंद नहीं आई वहा बत बहुत बार हम भी हो गए हो

1179
01:22:55,280 --> 01:22:59,360
रहे थे अगर एक

1180
01:22:59,360 --> 01:23:03,600
पंक्ति में मैं अगर मैं

1181
01:23:03,600 --> 01:23:08,400
मुझसे पूछा जाए कि स्कोन के बारे में क्या है मामला

1182
01:23:08,400 --> 01:23:13,040
क्या विचार तो अगर एक पंक्ति में कहा जाए

1183
01:23:13,040 --> 01:23:18,000
तो सबसे पहले मैं कहूंगा कि भाई इसकन

1184
01:23:18,000 --> 01:23:22,160
का यह कहना है कि हम जो भगवत

1185
01:23:22,160 --> 01:23:26,800
गीता देते हैं वो एज इट इज है भगवत गीता का ज्ञान

1186
01:23:26,800 --> 01:23:31,880
तो एज इट नहीं है जैसे

1187
01:23:31,880 --> 01:23:37,520
कि चौथे अध्याय का 24 वा श्लोक मान लीजिए

1188
01:23:37,520 --> 01:23:41,720
उसम हा वो पूरा उसमें

1189
01:23:41,720 --> 01:23:46,360
जो एज इट इज है तो शील प्रभुपाद जी ने भी लिखा है इसकी भूमिका

1190
01:23:46,360 --> 01:23:50,520
इत्यादि कि वो एज इट इज दे उस पर जब व्यक्ति कोई भाष्य

1191
01:23:50,520 --> 01:23:54,600
करने लगता है या कुछ अपनी चीजें डालने लगता है तो वो फिर उसका

1192
01:23:54,600 --> 01:23:58,640
रूप बदल जाता है हो सकता है कि श्री प्रभुपाद जी का भाष्य वो यह मानते हो

1193
01:23:58,640 --> 01:24:02,640
कि वह वही भाव है जो भगवान बोलना चाह रहे थे क्योंकि हमें गुरु परंपरा

1194
01:24:02,640 --> 01:24:06,720
से वो प्राप्त हुआ ठीक है मगर अगर अनुवाद की बात

1195
01:24:06,720 --> 01:24:10,960
आती है हास्य में आप अपने मन का लिखिए व एक बात आती है

1196
01:24:10,960 --> 01:24:14,960
मगर जब जब अनुवाद हो रहा है तो अनुवाद

1197
01:24:14,960 --> 01:24:19,320
में हम कैसे छेड़छाड़ कर सकते हैं जैसे कि चौथे अध्याय

1198
01:24:19,320 --> 01:24:23,560
का 24 वा श्लोक है जो

1199
01:24:23,560 --> 01:24:27,720
ब्रह्मा ब्र ब्रत ब

1200
01:24:27,720 --> 01:24:31,920
गंतव्य ब्रह्म कर्म समाधि तो इसमें ब्रह्म शब्द

1201
01:24:31,920 --> 01:24:36,000
इतनी बार आया है कि कोई साधारण व्यक्ति भी सुन कर के समझ जाएगा भा

1202
01:24:36,000 --> 01:24:40,120
ब्रह्म की बात हो रही है मगर जब अच्छा इसमें एक जगह

1203
01:24:40,120 --> 01:24:45,160
ब्रह्म का अर्थ ब्रह्म स्वीकार भी किया गया शब्दार्थ में है ना

1204
01:24:45,160 --> 01:24:47,080
ये फिर इसमें क्या कहा

1205
01:24:47,080 --> 01:24:51,320
जा रहा है आगे एक भी बार ब्रह्म की बात नहीं हुई ट्रांसलेशन में ट्रांसलेशन

1206
01:24:51,320 --> 01:24:55,320
में आप भाष्य में लिखो अपने मन की बात मगर ट्रांसलेट तो एज इट

1207
01:24:55,320 --> 01:24:59,400
इज करो जब आप एज इट इज कह रहे हो तो उसको एज इट इज दो तो एज इट

1208
01:24:59,400 --> 01:25:03,440
इज के नाम पर आप तो बदला हुआ दे रहे हो ब्रह्म का अर्थ कहीं भी ब्रह्म नहीं लिखा

1209
01:25:03,440 --> 01:25:07,440
है क्या लिखा है जो व्यक्ति कृष्ण भावना मृत अच्छा इसका जो सही

1210
01:25:07,440 --> 01:25:10,920
ट्रांसलेशन है वो भी मैं बताऊंगा मगर अभी ट्रांसलेशन क्या है जो

1211
01:25:10,920 --> 01:25:14,960
व्यक्ति कृष्ण भावना मृत में पूर्णतया लीन रहता है उसे अपने

1212
01:25:14,960 --> 01:25:19,000
आध्यात्मिक कर्मों के योगदान के कारण अवश्य ही भगवत धाम की प्राप्ति

1213
01:25:19,000 --> 01:25:23,000
होती है क्योंकि उसमें हवन आध्यात्मिक होता

1214
01:25:23,000 --> 01:25:27,320
है उसमें भी आध्यात्मिक होती है

1215
01:25:27,320 --> 01:25:31,480
और इसका जो सही ट्रांसलेशन है वह

1216
01:25:31,480 --> 01:25:36,240
क्या है यहां पर एक तरीके से अवत

1217
01:25:36,240 --> 01:25:42,240
की स्थापना हो रही है क्योंकि उसम कहा जा रहा है

1218
01:25:43,080 --> 01:25:47,440
की जिस ब्रह्म में जो सामग्री

1219
01:25:47,440 --> 01:25:51,520
भी ब्रह्म है क्रिया भी ब्रह्म है फल स्वरूप प्राप्त होने वाला भी

1220
01:25:51,520 --> 01:25:56,040
ब्रह्म है तो ब्रह्म शब्द जब आ रहा है तो उसका

1221
01:25:56,040 --> 01:26:00,080
कम से कम एक बार तो कहीं पर उपयोग होता

1222
01:26:00,080 --> 01:26:05,160
ब्रह्म के अर्थ का मगर कहीं भी नहीं हुआ और

1223
01:26:05,160 --> 01:26:09,200
चौथा अध्याय और इसका है 24

1224
01:26:09,200 --> 01:26:10,400
वा श्लोक

1225
01:26:10,400 --> 01:26:14,840
जिस यज्ञ में अर्पण अर्थात स्वा आदि भी ब्रह्म है

1226
01:26:14,840 --> 01:26:18,960
हवन किए जाने योग्य द्रव्य भी ब्रह्म है तथा ब्रह्म रूप

1227
01:26:18,960 --> 01:26:23,880
कर्ता के द्वारा ब्रह्म रूप अग्नि में आहुति देना क्रिया भी ब्रह्म है

1228
01:26:23,880 --> 01:26:28,000
उस ब्रह्म कर्म में स्थित रहने वाले योग योगी द्वारा प्राप्त किए

1229
01:26:28,000 --> 01:26:29,400
जाने योग्य फल भी ब्रह्म

1230
01:26:29,400 --> 01:26:34,360
है अब इन्होंने न्याय किया ये एज इट इज नहीं है

1231
01:26:34,360 --> 01:26:38,520
इन्होंने शब्दार्थ में वही लिखा जो संस्कृत से हिंदी हुई

1232
01:26:38,520 --> 01:26:42,640
मगर इन्होंने शब्दार्थ में बदल दिया मगर एज इट इज ही है वो एज

1233
01:26:42,640 --> 01:26:46,680
इट इज नहीं अच्छा एक मैंने अभी निर्गुण की बात

1234
01:26:46,680 --> 01:26:50,800
चली थी कि भगवान निर्गुण नहीं तो मैंने अब अपना तो अध्ययन ठीक है मैंने देखा

1235
01:26:50,800 --> 01:26:54,800
ये क्या कह रहे हैं जहां पर भगवान ने निर्गुण की बात की भगवत गीता

1236
01:26:54,800 --> 01:26:58,920
में वहा यह क्या कह रहे हैं तो निर्गुण पर 13 अध्याय

1237
01:26:58,920 --> 01:27:04,080
के 31 में मुझे क्या मिलता है जहा भगवान ने निर्गुण शब्द का उपयोग किया अपने

1238
01:27:04,080 --> 01:27:08,200
लिए तो 13 अध्याय के

1239
01:27:08,200 --> 01:27:14,200
निर्ग अना परमा

1240
01:27:14,240 --> 01:27:18,520
शरीर मैं बस ल इसको 1

1241
01:27:18,520 --> 01:27:24,520
अध्याय का 31 वा श्लोक

1242
01:27:34,080 --> 01:27:39,720
नहीं 13 का नहीं है और कोई है देखना

1243
01:27:39,720 --> 01:27:43,920
पड़ेगा उसम उन्होंने निर्गुण शब्द का

1244
01:27:43,920 --> 01:27:48,200
उपयोग चय यह रहेगा आठवे अध्याय का

1245
01:27:48,200 --> 01:27:53,120
आठवे अध्याय का मेरे खल से 25 वा लोक

1246
01:27:53,120 --> 01:27:57,160
है निर्गुण शब्द आया है वहा प अव्यक्त अव्यक्त ऐसा

1247
01:27:57,160 --> 01:28:01,320
कुछ आ रहा है अव्यक्त आ रहा है आया

1248
01:28:01,320 --> 01:28:06,000
निर्गुण निर्गुण भी आया है मैं एक मिनट देख लेता

1249
01:28:06,000 --> 01:28:12,000
हूं एक मिनट मैं देख के बताता हूं

1250
01:28:35,160 --> 01:28:40,160
अध्याय 13 का 30 वा है

1251
01:28:40,160 --> 01:28:44,240
य अध्याय 13 का 30 वा यह

1252
01:28:44,240 --> 01:28:50,240
भी नहीं है क्या

1253
01:29:08,960 --> 01:29:14,240
32 वा श्लोक है अध्याय 13 का इसमें

1254
01:29:14,240 --> 01:29:19,280
अनादि निर्गुण शब्द स्पष्ट दिखाई दे रहा

1255
01:29:19,280 --> 01:29:23,600
है है ना इसमें इन्होने क्या किया

1256
01:29:23,600 --> 01:29:27,640
क्योंकि ने निर्गुण सत्ता नहीं माननी है

1257
01:29:27,640 --> 01:29:32,520
तो इनको क्या किया निर्गुण का अर्थ लिख दिया दिव्य

1258
01:29:32,520 --> 01:29:36,640
जी जब निर्गुण का अर्थ भी निर्गुण नहीं है

1259
01:29:36,640 --> 01:29:40,840
तो फिर ये प्रश्न ही नहीं बनता कि वह निर्गुण है कि नहीं दिव्य

1260
01:29:40,840 --> 01:29:44,920
है कि नहीं और यह कैसी भगवत गीता है जिसमें उसके शब्दार्थ

1261
01:29:44,920 --> 01:29:49,040
में ट्रांसलेशन में भी लिखने वाले ने अपने मन का डाल दिया

1262
01:29:49,040 --> 01:29:50,720
है अब

1263
01:29:50,720 --> 01:29:55,000
इसमें इसमें अच्छा एक चीज और आपको बहुत काम की दिखाता

1264
01:29:55,000 --> 01:29:59,600
हूं पांचवे अध्याय का 25वां श्लोक है वो देखिए

1265
01:29:59,600 --> 01:30:03,680
कि जगतगुरु शंकराचार्य कहते हैं किस आचार्य को कहां

1266
01:30:03,680 --> 01:30:07,680
पर जाकर के भगवत आदि शंकराचार्य को मानना पड़ जाएगा यह कोई

1267
01:30:07,680 --> 01:30:11,800
कह नहीं सकता है क्योंकि कहीं ना कहीं सभी को मानना पड़ जाता है

1268
01:30:11,800 --> 01:30:16,000
तो पांचवे अध्याय का 25वां श्लोक है इसमें देखिए क्या कहा जा रहा है

1269
01:30:16,000 --> 01:30:20,520
इसमें ट्रांसलेशन में क्या कहा जा रहा है जो लोग संशय

1270
01:30:20,520 --> 01:30:25,080
से उत्पन्न होने वाले द्वैत से परे हैं

1271
01:30:25,080 --> 01:30:29,160
द्वैत का खंडन हो गया भगवत गीता में और इसकन

1272
01:30:29,160 --> 01:30:33,400
की भगवत गीता आई क्योंकि भाई

1273
01:30:33,400 --> 01:30:37,480
वो होता है ना कि हमको कितना भी हम कर ले हमको याद रखना पड़ता

1274
01:30:37,480 --> 01:30:41,600
है झूठ की एक कमी होती है झूठ को याद रखना पड़ेगा तो कहीं ना

1275
01:30:41,600 --> 01:30:45,800
कहीं तो हमसे गलती होगी ही होता है ना कि कहीं पर हम जाते हैं तो हम सबूत

1276
01:30:45,800 --> 01:30:49,920
छोड़ आते हैं कोई हमने ऑफेंस कार किया तो अब ये क्या

1277
01:30:49,920 --> 01:30:54,080
है जो लोग संशय से उत्पन्न होने वाले द्वैत से परे हैं

1278
01:30:54,080 --> 01:30:58,160
तो द्वैत का खंडन तो ये खुद ही कर रही है इस कोन की भगवत गीता हालांकि इसके आगे भाष्य

1279
01:30:58,160 --> 01:31:02,680
में कुछ और किया गया होगा उसका निराकरण मगर क्या

1280
01:31:02,680 --> 01:31:05,880
हुआ कि एक कैसी गीता है जो कहीं

1281
01:31:05,880 --> 01:31:10,000
कहीं पर तो अपने ही सिद्धांत का खंडन कर रही है कहीं पर ब्रह्म का

1282
01:31:10,000 --> 01:31:14,000
अर्थ ब्रह्म नहीं है वहां पर जो है ब्रह्म कर्म समाधि नाम

1283
01:31:14,000 --> 01:31:18,280
उसका अर्थ हो रहा है कृष्ण भावना मृत अंतरराष्ट्रीय

1284
01:31:18,280 --> 01:31:22,560
सोसाइटी है ना और निर्गुण का अर्थ निर्गुण नहीं है

1285
01:31:22,560 --> 01:31:26,680
निर्गुण का अर्थ दिव्य है तो भाई फिर जब निर्गुण का अर्थ दिव्य

1286
01:31:26,680 --> 01:31:31,040
है तो फिर दिव्य किसको कहेंगे दिव्य को क्या कहा जाएगा

1287
01:31:31,040 --> 01:31:35,120
और फिर निर्गुण का अर्थ जब दिव्य है ही तो फिर निर्गुण को लेकर के

1288
01:31:35,120 --> 01:31:39,200
विवाद कैसा शंकराचार्य से जब निर्गुण का अर्थ

1289
01:31:39,200 --> 01:31:43,240
आप दिव्य मानते हो तो विवाद क्यों शंकराचार्य से या तो निर्गुण का अर्थ निर्गुण

1290
01:31:43,240 --> 01:31:47,280
मानो मगर नहीं जहां पर हमें प्रॉब्लम आएगी वहां हम क्या

1291
01:31:47,280 --> 01:31:51,360
करेंगे अब ये बात ये है कि ये शील प्रभुपाद जी ने

1292
01:31:51,360 --> 01:31:55,400
लिखा है कि नहीं लिखा है यह भी एक डाउट का मामला है क्यों डाउट का मामला

1293
01:31:55,400 --> 01:31:59,640
है डाउट का मामला इसलिए है क्योंकि ये

1294
01:31:59,640 --> 01:32:03,920
1972 में पहला वर्जन इन्होंने लिखा इसमें

1295
01:32:03,920 --> 01:32:07,960
मोटे मोटे करीब 108 के करीब है मगर कुछ थोड़े बहुत की

1296
01:32:07,960 --> 01:32:12,160
भी अगर बात की जाए तो दूसरे अध्याय का 30 वा श्लोक है जिसमें इन्होंने प्रभुपाद

1297
01:32:12,160 --> 01:32:16,440
जी ने 1972 में लिख दिया कि भाई

1298
01:32:16,440 --> 01:32:20,720
ही हु ड्वे इन द बॉडी इज टर्नल इटरनल

1299
01:32:20,720 --> 01:32:21,720
यानी

1300
01:32:21,720 --> 01:32:26,000
जो आत्मा है उसको सनातन मान लिया शाश्वत ठीक और हमारा

1301
01:32:26,000 --> 01:32:30,080
जो सनातन धर्म है वो इसी पर टिका हुआ है कि आत्मा कभी मरती नहीं है पूरा इस पर ही

1302
01:32:30,080 --> 01:32:34,120
है सनातन तभी है उसका नाम ही सनातन इसलिए आत्मा

1303
01:32:34,120 --> 01:32:38,240
और जो ब्रह्म है दोनों इटरनल है अगर उसको द्वैत

1304
01:32:38,240 --> 01:32:42,520
से देखे तो भी और अद्वैत से देखे तो भी तो इन्होंने भी टर्नल मान लिया मगर

1305
01:32:42,520 --> 01:32:46,800
ये जो श्लोक है ये टर्नल जो लिखा हुआ है इसमें

1306
01:32:46,800 --> 01:32:51,240
यहां पर देखिए श्रील प्रभुपाद जी ने

1307
01:32:51,240 --> 01:32:56,000
टर्नल शब्द का उपयोग कर लिया है ठीक

1308
01:32:56,000 --> 01:33:01,400
अब जो ये 1972 का वर्जन है अब आज का वर्जन

1309
01:33:01,400 --> 01:33:05,080
देखिए आज के वर्जन

1310
01:33:05,080 --> 01:33:10,240
में इसका अर्थ बदल दिया गया टर्नल शब्द को हटा ही दिया

1311
01:33:10,240 --> 01:33:14,720
गया है ना हां ये देखिए इसमें क्या

1312
01:33:14,720 --> 01:33:19,960
है इसमें कहीं भी आपको टर्नल नहीं दिखेगा

1313
01:33:19,960 --> 01:33:23,960
नहीं दिख रहा है इसमें इन्होंने सीधे लिख दिया ही

1314
01:33:23,960 --> 01:33:28,080
हु डल्स इन द बॉडी कैन नेवर बी स्लेन उसको मारा नहीं जा सकता म

1315
01:33:28,080 --> 01:33:32,160
ही हु डल्स इन द बॉडी इ टर्नल ये नहीं लिखा अब टर्नल

1316
01:33:32,160 --> 01:33:37,000
शब्द हटा दिया तो यहां से दोनों की प्रामाणिकता पर प्रश्न चिन्ह लग गया

1317
01:33:37,000 --> 01:33:41,120
भाई आज जो हमें प्रभुपाद जी के नाम से परोसा जा रहा है वो प्रभुपाद जी

1318
01:33:41,120 --> 01:33:45,960
का है कि नहीं है यह बहुत बड़ा एक विचारणीय प्रश्न हो गया

1319
01:33:45,960 --> 01:33:50,160
ये बोलते है कि इसम जो ग्रामर एक मिनट बोलता हूं

1320
01:33:50,160 --> 01:33:54,400
ये बोलते बात ई है इन्होने

1321
01:33:54,400 --> 01:33:58,560
लास्ट में उसका दिया है कि क्या कहते

1322
01:33:58,560 --> 01:34:02,560
हैं इसमें जो ग्रामेटिकल फॉल्ट्स है उनको सही करने की अनुमति दी है मैं कह रहा हूं द है

1323
01:34:02,560 --> 01:34:06,600
ठीक है मगर जब आप किसी का लिखा हुआ चेंज कर रहे

1324
01:34:06,600 --> 01:34:10,960
हो उसमें नाम लिखो ना कि ये प्रभुपाद जी की नहीं

1325
01:34:10,960 --> 01:34:14,960
यह फलाने व्यक्ति के द्वारा संशोधित की गई भगवत गीता है यह

1326
01:34:14,960 --> 01:34:19,080
लिख लिखना पड़ेगा ना आप उसको वही उसी नाम

1327
01:34:19,080 --> 01:34:23,960
से नहीं जैसे आदि शंकराचार्य जी ने भगवत गीता पर भाष्य किया

1328
01:34:23,960 --> 01:34:28,160
भगवत गीता पर उनके बाद भी भाष्य किया गया उन्होंने भग शंकराचार्य

1329
01:34:28,160 --> 01:34:32,480
के विरुद्ध नहीं किया मगर जब उन्होंने किया तो उनको शंकराचार्य का नाम नहीं दिया

1330
01:34:32,480 --> 01:34:36,520
उसी परंपरा के अनाचार ने जब उस पर भाष्य किया उसमें कुछ तोड़ा

1331
01:34:36,520 --> 01:34:40,600
मरोड़ा कुछ चीजें और उनको समझ में आई कि लिखनी चाहिए तो लिखी उन्होंने

1332
01:34:40,600 --> 01:34:45,080
मगर उन्होंने यह नहीं लिखा शंकराचार्य जी का ही भाष्य उन्होंने अपना नाम दिया

1333
01:34:45,080 --> 01:34:49,280
तो यदि आपको प्रभुपाद जी के ट्रांसलेशन में कोई दिक्कत लग रही है

1334
01:34:49,280 --> 01:34:52,240
आप बदल रहे हो तो बदलो मगर उसको अपना

1335
01:34:52,240 --> 01:34:56,280
नाम दो प्रभु जी का नाम मत दो फिर है

1336
01:34:56,280 --> 01:35:00,560
ना प्रभुपाद जी के ही नाम से आप कैसे लिख सकते हो

1337
01:35:00,560 --> 01:35:05,240
अब जब ये हमें क्लियर हो गया कि उनकी प्रमाणिकता सिद्ध नहीं होती

1338
01:35:05,240 --> 01:35:09,360
इसके बाद फिर हम लोग जब यह देखते हैं कि भगवत गीता में कई जगह ऐसी जगह बहुत

1339
01:35:09,360 --> 01:35:13,360
सारी जगह जहां पर वर्ड का मीनिंग जो है वो छुपा

1340
01:35:13,360 --> 01:35:17,560
लिया गया अब इसमें एक एक कोई है बंगाल के

1341
01:35:17,560 --> 01:35:21,600
हैं जो जिनका बहुत वायरल हुआ था वो बोगस फिलोसोफी ही केम

1342
01:35:21,600 --> 01:35:25,640
फॉर हिज न ब्लोगन बोगस

1343
01:35:25,640 --> 01:35:30,720
फिलोसोफी वो एक वायरल हुआ था आदि शंकराचार्य जी के लिए

1344
01:35:30,720 --> 01:35:35,520
कि बंगाल के कोई हैं कोई प्रभु जी है

1345
01:35:35,520 --> 01:35:39,720
पतले पतले से हैं सावले कलर के तो उनका बड़ा

1346
01:35:39,720 --> 01:35:44,320
फेमस हुआ था तो उनका एक वीडियो मिलता है कि भाई उसमें

1347
01:35:44,320 --> 01:35:48,320
लि वो एक क्वेश्चन का आंसर करते हैं कि भाई कई बार लोग कहते हैं कि

1348
01:35:48,320 --> 01:35:52,480
जो भगवत गीता एज इट इज है उसमें सब जगह

1349
01:35:52,480 --> 01:35:56,600
कृष्ण कृष्ण कृष्ण कर दिया तो ऐसा क्यों है

1350
01:35:56,600 --> 01:36:00,720
तो वोह आंसर देते हैं हमने सब जगह कृष्ण कृष्ण इसलिए दिया

1351
01:36:00,720 --> 01:36:05,560
है लिख दिया है कि जो भक्त होता है ना उसको सिर्फ कृष्ण ही दिखाई देते

1352
01:36:05,560 --> 01:36:07,600
हैं ये आंसर

1353
01:36:07,600 --> 01:36:11,640
अब इस आंसर को का ये दो लोग ने बोला है

1354
01:36:11,640 --> 01:36:16,960
दो लोग ने बोला एक तो एक तो अमरेंद्र अमरेंद्र

1355
01:36:16,960 --> 01:36:21,240
दास की बात कर रहा उने बताया शीला प्रभुपाद

1356
01:36:21,240 --> 01:36:25,880
ने जो लिखा है भक्तिमय लिखा है ब व

1357
01:36:25,880 --> 01:36:29,960
अगर भक्ति इसको कहना चाह रहा हूं मैं अपनी बात पूरी कर लू अब इसमें

1358
01:36:29,960 --> 01:36:34,280
बात ये आती है कि एक भक्त जो होता है उसको केवल

1359
01:36:34,280 --> 01:36:38,360
वो भक्ति दिखती है तो ये सनातन नहीं रहा इट्स नॉट

1360
01:36:38,360 --> 01:36:42,760
द इटरनल ट्रुथ फिर य भगवत गीता प्रभावित है किससे

1361
01:36:42,760 --> 01:36:46,760
किसी के दृष्टिकोण से यह न्यूट्रल होकर

1362
01:36:46,760 --> 01:36:51,120
के लिखा गया भाष्य नहीं रहा यह फिर एक व्यक्ति

1363
01:36:51,120 --> 01:36:55,520
की अपनी वो भक्ति भावना है वो उसमें ई गई सनातन सत्य

1364
01:36:55,520 --> 01:36:59,720
नहीं रहा पहली बात दूसरी बात यह है कि अगर उनको

1365
01:36:59,720 --> 01:37:03,800
सिर्फ कृष्ण ही दिखते हैं तो इस पूरी भगवत गीता में कहीं पर भी

1366
01:37:03,800 --> 01:37:08,080
कोई दूसरा शब्द आना ही नहीं चाहिए था सिर्फ कृष्ण

1367
01:37:08,080 --> 01:37:12,200
लिखा होना चाहिए था पूरे सारे श्लोकों का अर्थ क्या है कृष्ण

1368
01:37:12,200 --> 01:37:16,400
कृष्ण कृष्ण कृष्ण कृष्ण कृष्ण हर श्लोक का अर्थ यही होना चाहिए था क्योंकि भक्त

1369
01:37:16,400 --> 01:37:20,440
को तो भगवान ही दिखते हैं ना मगर जहां पर उनका मंतव्य सिद्ध हो रहा वहां भगवान

1370
01:37:20,440 --> 01:37:22,720
नहीं दिख रहे वहां प तो दिव दिव्य

1371
01:37:22,720 --> 01:37:26,760
दिख रहा है द्वैत दिख रहा है द्वैत दिख रहा है सब माया वाद भी दिख रहा है है ना

1372
01:37:26,760 --> 01:37:30,840
सब दिख रहा है मगर जहां पे दिक्कत आ रही दिक्कत आ रही

1373
01:37:30,840 --> 01:37:35,400
है भगवान वो किसी चीज को छुपाना है भगवान के नाम से वहां पर उनको

1374
01:37:35,400 --> 01:37:39,680
जो है भगवान दिख रहे हैं एक ये बात हो गई तीसरी बात ये हो गई

1375
01:37:39,680 --> 01:37:43,760
क्या ऐसा करना सही है कि आप सत्यता को छोड़ कर के

1376
01:37:43,760 --> 01:37:47,760
अपनी बात लिख दो जो हमें दिखाई दे रही है अगर

1377
01:37:47,760 --> 01:37:51,840
ऐसा माने तो जो वाल्मीकि जी थे वो बहुत बड़े

1378
01:37:51,840 --> 01:37:55,960
भक्त थे भगवान के राम के तो हमको उसमें राम ही राम दिखाई देता

1379
01:37:55,960 --> 01:38:00,160
फिर तो राम राम राम राम क्या हमें वाल्मीकि रामायण प्राप्त हो पाती कभी

1380
01:38:00,160 --> 01:38:04,400
नहीं राम राम राम राम ये है भाई वाल्मीकि रामायण

1381
01:38:04,400 --> 01:38:08,440
ये कौन सा तर्क हुआ भाई कि हमको जो है भक्त हम भक्त है तो हमें तो ईश्वर

1382
01:38:08,440 --> 01:38:12,640
दिखते हैं बस भाई तो फिर आप उसको लिख उसको बेचते समय कहो ना

1383
01:38:12,640 --> 01:38:16,880
ये यथारूप गीता नहीं है यह भक्ति भाव से प्रभावित गीता

1384
01:38:16,880 --> 01:38:20,920
है उसको क्यों कह रहे हो एज इट इज वो न्यूट्रल होकर के लिखा

1385
01:38:20,920 --> 01:38:26,560
गया भाष्य नहीं है ये मेरा कहना का ब जी आप बोले दीपक

1386
01:38:26,560 --> 01:38:30,720
वमा हा श जी तो एक्चुअली

1387
01:38:30,720 --> 01:38:34,800
प्रॉब्लम यहां पर आ जाता है कि इनको जैसे बताते

1388
01:38:34,800 --> 01:38:38,240
हैं कि जो प्रभु पादने बुक लिखा तो परा भक्ति में मतलब

1389
01:38:38,240 --> 01:38:42,520
कृष्ण को पूरा सेंटर में रख के भक्तिमय लिखा तो

1390
01:38:42,520 --> 01:38:46,640
दूसरा क्वेश्चन य आ जाता ठी उने भक्तिमय लिखा जब उन्होने

1391
01:38:46,640 --> 01:38:50,760
भक्तिमय लिखा तो उनको क्या बोलते है बराबर

1392
01:38:50,760 --> 01:38:54,800
है कि उनको सि मतलब भगवान के विषय में पूरा

1393
01:38:54,800 --> 01:38:59,000
लिखना चा फको गीता पह गीता नहीं बोल सकता जहारा भक्ति

1394
01:38:59,000 --> 01:39:03,040
का लिख रहा भगवान का विषय निकल रहा तो भगवत गीता हो मतलब नहीं होगा

1395
01:39:03,040 --> 01:39:07,880
वो क्यों नहीं मतलब भगवत गीता व इसलिए नहीं होगा भगवान

1396
01:39:07,880 --> 01:39:12,120
भगवान अर्जुन को उद्देश्य दे रहे तो वो उद्देश तो रहा नहीं गया ना

1397
01:39:12,120 --> 01:39:16,320
उद्देश तो रहा नहीं गया वहा प वहा खंडित हो गया वहा प क भगवान अर्जुन

1398
01:39:16,320 --> 01:39:20,320
को क्या बताना चाह रहे और ये हमको क्या बरा अलग हो गया मैं मानता हूं

1399
01:39:20,320 --> 01:39:24,560
कि भक्ति करनी चाहिए लेकिन भक्ति का उसका

1400
01:39:24,560 --> 01:39:29,520
निचोड़ हो सकता है उन वाक्यं का अर्थ नहीं हो सकता

1401
01:39:29,520 --> 01:39:33,680
नहीं चेंज हो सकता नहीं चेंज हो सकता तो वहां पे आप चेंज कर रहे हो और उसको फिर

1402
01:39:33,680 --> 01:39:37,680
भी आप बोल रहे एज इट इज एज इट इज तो कैसा मतलब एज इट इज पहली बात तो

1403
01:39:37,680 --> 01:39:41,800
जो मतलब जो भगवत गीता जो अर्जुन को भगवान ने बता और आप जो बता रहे हो उसम

1404
01:39:41,800 --> 01:39:45,800
बहुत ही अंतर है मतलब एक अगर एक दृष्टि से देखा जाएगा तो

1405
01:39:45,800 --> 01:39:50,040
आप भले भगवत गीता हमको दे रहे हो जो हमको मतलब

1406
01:39:50,040 --> 01:39:53,640
जो मतलब कृष्ण ने अर्जुन को बताया था तो वो ज्ञान हमको प्राप्त

1407
01:39:53,640 --> 01:39:57,680
हो रहा है मतलब अगर देखन हमको प्राप्त नहीं हो रहा है अगर हम दूसरे की

1408
01:39:57,680 --> 01:40:01,920
भगवत गीता पढ़ते हैं तो वो गलत है मतलब बोगस है

1409
01:40:01,920 --> 01:40:06,160
तो मतलब अगर पढ़े भी तो हम कहां से भगवत गीता लेके भाई हम किसकी

1410
01:40:06,160 --> 01:40:10,160
पढ़े अगर आपकी पढ़ते हो तो आप तो डायरेक्ट बो हमारा प्रमाणिक है

1411
01:40:10,160 --> 01:40:14,160
और प्रमाण में भी आप इतने अमल आपको बता प्रमाण में

1412
01:40:14,160 --> 01:40:18,680
हमारे पास य है कृष्ण कृष्ण कृष्ण कृष्ण जो जाप करना है नाम का

1413
01:40:18,680 --> 01:40:22,680
वही जन वही हमारा आपको किसी का और आपको

1414
01:40:22,680 --> 01:40:26,720
किसी का सु अगर आप दूसरे का सुनोगे तो आप फिर मतलब माया की जाल में फस आप

1415
01:40:26,720 --> 01:40:30,760
मायावादी मतलब बोते माया अभी बोलते एक शब्द कोलोग पकड़ के बैठ

1416
01:40:30,760 --> 01:40:35,080
गए मायावादी भाष्य सुने हो होए विनाश कुछ मतलब आता है

1417
01:40:35,080 --> 01:40:39,200
चैतन्य चरिता में तो मायावा जैसे माया जाता है अ

1418
01:40:39,200 --> 01:40:43,320
फर एपल मतलब य प्रभु मुझे बताते प्रभु कि एक बार क्या हुआ

1419
01:40:43,320 --> 01:40:47,880
कि इन्होने एक विषय मतलब कुछ विषय निकाला किसी के

1420
01:40:47,880 --> 01:40:52,040
मतलब माया शकर का जिसम

1421
01:40:52,040 --> 01:40:56,160
उन्होने क्या बोला उनको नहीं नहीं प्रभु मायावा का मत सुनो मत ये

1422
01:40:56,160 --> 01:41:02,160
क्या आप शंकराचार्य कब से बनने लगे हो मतलब

1423
01:41:17,120 --> 01:41:21,480
मायावादी गया वैदिक मायावा एक मायावा य है कि भगवान

1424
01:41:21,480 --> 01:41:25,760
के बारे में जब सिद्धांत निकाल तो उसम माया की बात हो जाती तो मायावा

1425
01:41:25,760 --> 01:41:30,000
उसको कहा जा सकता है तो माया की बातें माया के नाम से तो इनकी

1426
01:41:30,000 --> 01:41:34,400
किताबें छप रही है अभी आपने बताई कहानी के तुमको माया जो है घसीट लेगी

1427
01:41:34,400 --> 01:41:38,400
आपको ऐसे डराया जाता था यानी माया के अस्तित्व को तो स्वीकार किया जा रहा

1428
01:41:38,400 --> 01:41:42,520
है और माया का मैंने एक शील प्रभुपाद जी का एक वीडियो देखा जिम

1429
01:41:42,520 --> 01:41:46,560
वो कह रहे हैं कि माया वोह है जिसका माया का अर्थ है जो नहीं

1430
01:41:46,560 --> 01:41:50,600
है जो एसिस्ट और जो भव साढ़े तीन घंटे उसने

1431
01:41:50,600 --> 01:41:55,200
जो सर पटका था य प वो एस्ट ऐसा नहीं है इसका मतलब

1432
01:41:55,200 --> 01:41:59,840
मतलब प्रभुपाद जी कह रहे हैं कि व माया का अर्थ ही है जो एजिस्ट नहीं करती

1433
01:41:59,840 --> 01:42:04,120
और वो माया के अस्तित्व को स्वीकार रहे हैं उनकी आवाज की रिकॉर्डिंग है वीडियो

1434
01:42:04,120 --> 01:42:08,280
में और उसने व्यक्ति ने कम से कम एक घंटे बर्बाद किए थे

1435
01:42:08,280 --> 01:42:13,040
वो झूठ झूठ नहीं गलत है

1436
01:42:13,040 --> 01:42:17,440
वो मेरे पास वो चीज इंफॉर्मेशन आनी नहीं चाहिए मगर वो इंफॉर्मेशन है

1437
01:42:17,440 --> 01:42:21,520
रियल एक नजर अगर एक नजर से देखा जाए तो जो गौड़े

1438
01:42:21,520 --> 01:42:25,520
संप्रदाय है गड़े संप्रदाय वो भी इनको वो भी इनको एग्री नहीं

1439
01:42:25,520 --> 01:42:29,560
करते मतलब जहा मैंने सुना है मतलब पूछा है मैंने जो मतलब

1440
01:42:29,560 --> 01:42:32,120
अ इतना डिटेल नहीं पता ब इतना पता है मुझे कि

1441
01:42:32,120 --> 01:42:36,120
जो गौड़ संप्रदाय इनको अपना नहीं मानते दूसरी बात जो माधव

1442
01:42:36,120 --> 01:42:40,480
माधव चार्य के संप्रदाय है माधव माधव संप्रदाय

1443
01:42:40,480 --> 01:42:45,280
वो भी उनको नहीं मानते और यह क्या लिखते हैं ब्रह्म गड़ माधव संप्रदाय

1444
01:42:45,280 --> 01:42:49,760
ये क्या बोलते हमारा जो आता है ब्रह्म गौड़े माधव जहा से हम ब्रम

1445
01:42:49,760 --> 01:42:53,880
जो ब्रह्म संप्रदाय गौड़े संप्रदाय माध से हमने

1446
01:42:53,880 --> 01:42:58,320
कुछ कुछ चीजें ली हुई है मतलब कुछ कुछ चीजें इनको लेनी पड़ी मतलब इनका

1447
01:42:58,320 --> 01:43:02,680
इनका कुछ है नहीं बट इनको लेनी पड़ी फिर भी वो पूर्ण तरह से

1448
01:43:02,680 --> 01:43:07,280
मतलब पूर्ण तरीके से वो भी फिर भी कंप्लीट नहीं है

1449
01:43:07,280 --> 01:43:11,360
इस इसमें एक और बात आता है जी इसम

1450
01:43:11,360 --> 01:43:15,560
एक बात एक मैं संक्षिप्त में बताऊं कि

1451
01:43:15,560 --> 01:43:19,800
अगर यह लोग यह कहते हैं कि हम जो

1452
01:43:19,800 --> 01:43:23,800
है भगवान का ज्ञान एज इट इज कहते हैं तो क्योंकि भगवत गीता में

1453
01:43:23,800 --> 01:43:27,840
मीनिंग बदल दिए गए हैं तो इनकी गीता एज इट इज नहीं रही

1454
01:43:27,840 --> 01:43:31,960
फिर ये कहते हैं हम श्री प्रभुपाद जी के शिष्य हैं तो क्योंकि वो भी

1455
01:43:31,960 --> 01:43:36,120
अंतर आ रहा है कई जगह कंट्रक्शन भी है 262 में कहा जा रहा

1456
01:43:36,120 --> 01:43:40,120
है कि भगवान जो शिव थे वो अपनी इंद्रियों पर कंट्रोल नहीं कर

1457
01:43:40,120 --> 01:43:44,240
पाए थे और भागवत में श्री प्रभुपाद जी के रेफरेंस से कहा जा रहा

1458
01:43:44,240 --> 01:43:47,360
है कि जो पार्वती

1459
01:43:47,360 --> 01:43:51,360
के साथ शिव को देखकर उन्हें कामी समझते हैं काम इंद्रियों के अधीन समझते हैं

1460
01:43:51,360 --> 01:43:55,720
मूर्ख होते हैं तो एक प्रभुपाद जी के स्टेटमेंट में कंट्रक्शन है

1461
01:43:55,720 --> 01:43:59,760
है ना एक तरफ कह रहे हैं कि वोह काम वो नहीं कर पाए नियंत्रण और एक तरफ कह रहे

1462
01:43:59,760 --> 01:44:03,840
हैं कि जो उनको नियंत्रण नियंत्रण में ना रहने वाला समझता है

1463
01:44:03,840 --> 01:44:08,280
जो वो मूर्ख होता है तो यह भी वो सिद्ध कर रहा है कि प्रभुपाद जी का कौन सा प्रमाणिक

1464
01:44:08,280 --> 01:44:12,320
है कौन सा नहीं है वो नहीं समझ में आ रहा तो अगर यह कहा जाए कि प्रभुपाद

1465
01:44:12,320 --> 01:44:16,440
जी को मानते हैं फॉलो करते हैं तो यह भी सिद्ध नहीं होता

1466
01:44:16,440 --> 01:44:20,520
फिर फिर इनको कहा जाए फिर अगर यह कहते हैं

1467
01:44:20,520 --> 01:44:24,520
कि हम वैष्णव है तो वैष्णव के अनुसार विष्णु को क्योंकि

1468
01:44:24,520 --> 01:44:28,720
सुपर मानना चाहिए वैष्णव का अर्थ ही हो गया कि हम विष्णु को सुपर मानते

1469
01:44:28,720 --> 01:44:32,720
हैं मगर ये 2.2 में कह देते हैं कई जगह कहते थे विष्णु भी थोड़ा सा

1470
01:44:32,720 --> 01:44:36,760
निम्न है तो इनको अगर ये कृष्ण विष्णु के कृष्ण रूप को सुपर

1471
01:44:36,760 --> 01:44:41,000
मानते हैं तो कृष्णव हो सकते हैं इनका वैष्णव होना भी सिद्ध नहीं होता

1472
01:44:41,000 --> 01:44:45,040
अच्छा यह कहते हैं कि हम चैतन्य महाप्रभु को मानते हैं तो हमारे पास

1473
01:44:45,040 --> 01:44:49,280
जो है अगर हम लोग अध्ययन करें तो चैतन्य महाप्रभु

1474
01:44:49,280 --> 01:44:53,520
ने श्रीधर स्वामी जी को प्रामाणिक माना श चैतन्य प्रभ

1475
01:44:53,520 --> 01:44:58,080
इनके अनुसार ही यह कहा कि जो भी चैतन्या के अगेंस्ट

1476
01:44:58,080 --> 01:45:02,280
जाकर के कुछ लिखेगा वोह मेरे लिए प्रोस्टिट्यूशन के समान

1477
01:45:02,280 --> 01:45:02,780
होगा

1478
01:45:02,600 --> 01:45:06,920
या वो मेरे वो जो है मैं पहले ही कह रहा हूं कि वो गलत होगा

1479
01:45:06,920 --> 01:45:10,920
और श्रीधर स्वामी जी का जो टीका है उसमें और इनके

1480
01:45:10,920 --> 01:45:15,440
टीके में जमीन आसमान का फर्क मिलता है हरि हर भेद उन्होंने नहीं माना

1481
01:45:15,440 --> 01:45:19,720
जो है श्रीधर स्वामी जी ने और इन्होंने मान लिया तो अगेंस्ट हो गया तो फिर क्या हुआ

1482
01:45:19,720 --> 01:45:24,080
ये इस तरह से चैतन्य अच्छा जब चैत

1483
01:45:24,080 --> 01:45:28,640
जी एक मिनट पूरा कर ल हा चले जब चैतन्य

1484
01:45:28,640 --> 01:45:32,920
महाप्रभु भागवत पढ़ के समझ रहे हैं कृष्ण को तो

1485
01:45:32,920 --> 01:45:37,080
चैतन्य महाप्रभु श्रीधर स्वामी के शिष्य हो गए वो कृष्ण को कैसे

1486
01:45:37,080 --> 01:45:41,120
जाने गुरु कौन होता है भागवत के अनुसार गुरु कौन है

1487
01:45:41,120 --> 01:45:45,240
परम गुरु जो आपको ब्रह्म के बारे में बताए और ब्रह्म कौन

1488
01:45:45,240 --> 01:45:49,280
है कृष्ण कृष्ण को जान पा रहे हैं कहां से श्रीधर

1489
01:45:49,280 --> 01:45:53,440
स्वामी के द्वारा तो चैतन्य महाप्रभु जो शिष्य सिद्ध होते हैं सीधा

1490
01:45:53,440 --> 01:45:57,640
स्वामी के होते हैं तो चैतन्य महाप्रभु की कही हुई बातों

1491
01:45:57,640 --> 01:46:01,840
को फॉलो ना करने के कारण चैतन्य महाप्रभु के भी वंशावली

1492
01:46:01,840 --> 01:46:05,840
में फिट नहीं बैठते तो चैतन्य महाप्रभु के फॉलोअर भी सिद्ध नहीं होते

1493
01:46:05,840 --> 01:46:09,960
फिर अगर कहा जाए कि ये मधवा चार जी की परंपरा के

1494
01:46:09,960 --> 01:46:14,240
तोय वो भी सिद्ध नहीं होते क्योंकि चैतन्य महाप्रभु ने श्रीधर स्वामी को माना है

1495
01:46:14,240 --> 01:46:17,840
तो आप जो पढ़ा रहे हो व आप अगर

1496
01:46:17,840 --> 01:46:21,920
मतलब आपने चेंज कर दिया मगर आप नाम तो आपका सीध स्वामी का ही चलेगा क्योंकि

1497
01:46:21,920 --> 01:46:25,920
आप ये तो नहीं कह रहे हम चेंज किया है आपने किया है वो बात सही है मगर आप कह तो

1498
01:46:25,920 --> 01:46:29,920
नहीं रहे क्योंकि कहोगे तो पकड़े जाओगे तो ये मधवा चार्य जी के

1499
01:46:29,920 --> 01:46:34,400
भी सिद्ध नहीं हो रहे क्योंकि मधवा चार्य जी का अपना भाष्य है अपनी उनकी पढ़ाई है सीध स्वामी

1500
01:46:34,400 --> 01:46:38,600
और अगर आपका परंपरा प्राप्त ज्ञान है भगवान श्री कृष्ण

1501
01:46:38,600 --> 01:46:42,960
से तो आपको क्यों जाना पड़ रहा है श्रीधर स्वामी के पास पढ़ने के लिए

1502
01:46:42,960 --> 01:46:47,040
भाई अब वो शंकराचार्य वो शंकर परंपरा के थे

1503
01:46:47,040 --> 01:46:51,120
ठीक है अब इनका कहना है कि वो शुद्ध द्वैत वाले थे मान लिया शुद्ध द्वैत

1504
01:46:51,120 --> 01:46:55,240
वाले थे द्वैत वाले तो नहीं थे मधवा चार वाले तो नहीं

1505
01:46:55,240 --> 01:46:59,280
थे तो फिर भी आप मधवा चार की लाइनेज के तो नहीं हुए

1506
01:46:59,280 --> 01:47:03,400
आप जिसके कह रहे हो उसके हो गए आप शुद्ध द्वैत के हो गए आप मान

1507
01:47:03,400 --> 01:47:07,400
लो थोड़ी देर दुर्जन तोष नय कि आपके अनुसार वो शुद्ध द्वैत थे तो

1508
01:47:07,400 --> 01:47:11,560
आप सुद्धा द्वैत वाले हो गए फिर क्योंकि आप जिनको फॉलो कर रहे हैं

1509
01:47:11,560 --> 01:47:17,080
वोह यह कह रहे हैं कि मैं कृष्ण को जान पाया हूं श्रीधर स्वामी के कारण

1510
01:47:17,080 --> 01:47:21,360
और अब यह ना तो ये ना तो इनकी गीता यथारूप

1511
01:47:21,360 --> 01:47:25,800
सिद्ध हुई ना ही वैष्णव सिद्ध हुए ना ही ये प्रभुपाद

1512
01:47:25,800 --> 01:47:30,000
जी के फॉलोअर सिद्ध हुए ना ही ये चेतन महाप्रभु के फॉलोअर सिद्ध हुए

1513
01:47:30,000 --> 01:47:33,400
ना ही ये मधवा चार्य जी के फॉलोअर सिद्ध हुए अब

1514
01:47:33,400 --> 01:47:37,520
अगर हम यह कहे कि यह धर्म

1515
01:47:37,520 --> 01:47:41,560
की शिक्षा देते हैं तो क्योंकि यह खुद कहते हैं कि हमको बाहर शिक्षा

1516
01:47:41,560 --> 01:47:45,640
देनी होती है इसलिए हम थोड़ा सा ट्विस्ट करते हैं बातों को तो यानी कि इनका

1517
01:47:45,640 --> 01:47:49,760
इनके द्वारा दिया जाने वाला जो ज्ञान है वो सनातन ज्ञान सिद्ध

1518
01:47:49,760 --> 01:47:53,920
नहीं होता क्योंकि वो परिस्थिति से प्रभावित ज्ञान है परिस्थिति से प्रभावित ज्ञान है

1519
01:47:53,920 --> 01:47:58,120
तो इस धर्म की शिक्षा देने वाले भी सिद्ध नहीं हुए उसके बाद यदि

1520
01:47:58,120 --> 01:48:03,120
ये क हम कृष्ण के भक्त है तो क्योंकि कृष्ण कौन है सनातन सर्वशक्तिमान

1521
01:48:03,120 --> 01:48:07,200
ईश्वर जिसके ऊपर कोई भी नियम लागू नहीं होता मगर य खुद ही उस पर

1522
01:48:07,200 --> 01:48:11,280
नियम लागू कर देते हैं तो ये कृष्ण के भक्त भी सिद्ध नहीं होते तो भैया सिद्ध

1523
01:48:11,280 --> 01:48:16,560
क्या होते हो आप जलेबी जलेबी

1524
01:48:16,560 --> 01:48:21,760
जलेबी बस घूमते

1525
01:48:21,760 --> 01:48:25,920
रहो तो हा अभी तो अभी मैं जैसे कि

1526
01:48:25,920 --> 01:48:30,400
जैसे मुझे कुछ चीज पता चला अ

1527
01:48:30,400 --> 01:48:34,400
मुझे ऐसा मतलब पता चला है कि जो शीला प्रभुपाद के जो गुरु

1528
01:48:34,400 --> 01:48:38,440
थे भक्ति सिद्धांत स ठाकुर महाराज तो उन्होंने जो

1529
01:48:38,440 --> 01:48:42,480
दीक्षा ली थी दीक्षा ली थी वो जो गौर किशोर दास बाबा जी का

1530
01:48:42,480 --> 01:48:47,920
जो फोटोग्राफ था उसके सामने लिया था ठीक है उनके

1531
01:48:47,920 --> 01:48:51,920
सामने ये बातें तो काउंटेबल होती है हम लोग तो केवल उसी बात प जो

1532
01:48:51,920 --> 01:48:56,680
आउटपुट आ रहा है उसी परर बात कर तो बतर

1533
01:48:56,680 --> 01:49:02,280
होगा बता रहा

1534
01:49:02,280 --> 01:49:08,120
बताहा उसम फोटो में देख स्वयं को दीक्षित किया था

1535
01:49:08,120 --> 01:49:12,280
सुना हा मैं इसका पॉइंट बता रहा आगे जाके अभी सन

1536
01:49:12,280 --> 01:49:17,680
य होता ठीक य तो जो भी बात है अभी आगे य होता

1537
01:49:17,680 --> 01:49:21,840
हैन इनका आपस में आपस में एक त्

1538
01:49:21,840 --> 01:49:26,040
आपको पता ठीक है अभी हमारे अभी जो हमारे सीनियर

1539
01:49:26,040 --> 01:49:30,120
डिवटी है सीनियर डिटी एक जगह पर क्या करेंगे एक

1540
01:49:30,120 --> 01:49:34,360
जगह बुराई करते किसका रितिक वाले लोग का ति वाले क्या बुराई करते

1541
01:49:34,360 --> 01:49:38,600
बराबर नहीं है मतलब ये शीला प्रभुपाद के फूट प्रिंट पर नहीं चल

1542
01:49:38,600 --> 01:49:43,000
मार्गदर्शन में नहीं चल र भटक गए इन्होंने अपना खुद का रि बना लिया

1543
01:49:43,000 --> 01:49:47,040
और एक जगह पर य पर क्या आता है जो इकन है वो मतलब बराबर

1544
01:49:47,040 --> 01:49:52,280
है क्योंकि जीबीसी है गनिंग बॉडी

1545
01:49:52,280 --> 01:49:56,320
क येय है गनिंग बॉडी कमीशन तो ये बराबर है क्योंकि ये लोग जीबीसी

1546
01:49:56,320 --> 01:50:02,320
फॉलो करते हैं तो जो इनका इनिशिएटिव

1547
01:50:05,120 --> 01:50:09,240
में क्या होता है कि आप आप मतलब जो ऋत में क्या होता है

1548
01:50:09,240 --> 01:50:13,440
कि जो शीला प्रपात का जो फोटो रहता है

1549
01:50:13,440 --> 01:50:17,600
उसके सामने आपको इशन देते है तो वो गलत है मतलब

1550
01:50:17,600 --> 01:50:23,600
मैं इसलिए इसमें कंफ्यूज ये हुआ अच्छा अच्छा मतलब ये खुद ही उसको क्लेम कर रहे हैं

1551
01:50:25,680 --> 01:50:29,840
गलत करते य अगर फोटो से दीक्षा लेना गलत

1552
01:50:29,840 --> 01:50:33,880
है तो फिर इनके इनकी जो परंपरा खंडित हो जाएगी

1553
01:50:33,880 --> 01:50:38,720
जाए उसको स्वीकार कर रहे त्विक वही काम कर रहा है तो उसको गलत कह रहे के विरुद्ध

1554
01:50:38,720 --> 01:50:42,960
पॉट पॉइंट है य हा तो मैं यहां प आ रहा हूं

1555
01:50:42,960 --> 01:50:47,920
ये बोल रहा था मैं कि मेरे को यहां से थोड़ा लगा कि अच्छा भक्ति वो क्या बोलते भक्ति

1556
01:50:47,920 --> 01:50:51,920
सि सरस्वती महाराज जो थे वो उच्च लेवल के भक्त थे मतलब

1557
01:50:51,920 --> 01:50:55,960
ऐसे भक्त थे ना जो कर सकते हैं जो मतलब जो उनके गुरु के फोटो के सामने

1558
01:50:55,960 --> 01:50:59,960
दीक्षा ले सकते हैं तो ठीक है जो रितिक वाले जो कर रहे हैं फिर वो गलत कैसा

1559
01:50:59,960 --> 01:51:03,960
हो गया वो भी तो प्रभुपाद का मतलब जो प्रभुपाद के फॉलो मतलब उनके हिसाब

1560
01:51:03,960 --> 01:51:08,000
से दीक्षा ले रहे हैं अभी इनका क्या होता है कांसेप्ट जो ये कर रहे हैं

1561
01:51:08,000 --> 01:51:12,160
ना ये बराबर है दैट इज 100% करेक्ट ये जो है

1562
01:51:12,160 --> 01:51:16,160
सास समत के हिसाब से कर रहे बाकी जो लोग कर रहे गलत कर रहे हैं तो यहां प मुझे

1563
01:51:16,160 --> 01:51:20,280
प्रॉब्लम यह होता है कि जब आपको आप हर चीज में आपको बता रहे

1564
01:51:20,280 --> 01:51:24,280
हो कि आप अच्छे हो अच्छे हो अच्छे हो तो आप दूसरे का बुरा क्यों कर रहे

1565
01:51:24,280 --> 01:51:28,400
हो ठीक है ना भाई उसका जो भी है जो भी गुरु परंपरा फॉलो कर रहा है व

1566
01:51:28,400 --> 01:51:32,800
अगर अग भक्ति कर रहा है तो आप उसको भक्ति बेकार बोल रहे मत बोलिए वो

1567
01:51:32,800 --> 01:51:36,800
आपको भक्ति जिसका अव ही दूसरे की

1568
01:51:36,800 --> 01:51:42,600
बुराई से बना है क्या करेगा अगर बुराई नहीं करेगा

1569
01:51:42,600 --> 01:51:47,080
तो जैसे इलाम की बात करें तो उसम इस्लाम में क्या है

1570
01:51:47,080 --> 01:51:51,920
कि अगर वहां पर दिन में पूजा हो रही है तो हम रात को करेंगे

1571
01:51:51,920 --> 01:51:56,760
अगर व रोटी सीधे तवे पर बनती है तो हम उल्टे तवे बनाएंगे

1572
01:51:56,760 --> 01:52:00,760
तो हर चीज हम विरुद्ध चलेंगे है ना अगर वह सूर्य को

1573
01:52:00,760 --> 01:52:04,800
देख के करते तो हम चांद को देख के करेंगे चांद को देखेंगे विरु चलेंगे उल्टा

1574
01:52:04,800 --> 01:52:08,840
चलेंगे हर चीज उल् जिसका अगर जिसका अस्तित्व

1575
01:52:08,840 --> 01:52:12,880
ही किसी के खंडन पर बना हुआ है भाई शंकराचार्य जी

1576
01:52:12,880 --> 01:52:17,080
ने तो अपने में नहीं लिख दिया स्कोन का खंडन कि वो फिसपी ऐसी है वैसी

1577
01:52:17,080 --> 01:52:21,080
है मगर क्या हुआ कि शंकराचार्य जी का नाम लेके

1578
01:52:21,080 --> 01:52:25,120
वो मायावादी है और जिस जिस ने सत्य का सिद्धांत दिया तुलसीदास जी की

1579
01:52:25,120 --> 01:52:29,520
जो उसको भी मायावा कह दिया ही गट मायावा टच

1580
01:52:29,520 --> 01:52:33,560
ही इ नॉट प्योर वेश्णव अब वैष्णव की जब इनसे इनसे कुछ कहो तो हम

1581
01:52:33,560 --> 01:52:35,280
वैष्णव हमें ऐसे क्यों कह रहे हो

1582
01:52:35,280 --> 01:52:39,440
और आप तुलसीदास जी को कहने के अधिकारी हो गए वो कैसे हो गए

1583
01:52:39,440 --> 01:52:43,640
व भी तो वैष्णव है और आप कौन कौन होते हुए तय करने वाले

1584
01:52:43,640 --> 01:52:47,680
कौन वैष्णव है कौन नहीं है यह भी दिक्कत है और यदि आप तय

1585
01:52:47,680 --> 01:52:51,680
कर सकते हो फिर हम क्यों नहीं कर सकते यदि आप तय

1586
01:52:51,680 --> 01:52:55,840
कर सकते हो कौन वैष्णव नहीं है तो हम भी तो कर सकते हैं

1587
01:52:55,840 --> 01:53:00,000
तो यह कैसी तानाशाही है कैसा व परतंत्रता है यह सारी

1588
01:53:00,000 --> 01:53:04,520
चीज है आपको अगर

1589
01:53:04,520 --> 01:53:08,800
जी बहुत सारी चीज

1590
01:53:08,800 --> 01:53:13,720
हैने बात जन पूछी थी केतन

1591
01:53:13,720 --> 01:53:17,840
महाप्रभु जी ने उनसे दीक्षा ली थी

1592
01:53:17,840 --> 01:53:20,160
सने

1593
01:53:20,160 --> 01:53:24,200
प्रश्न के मत से आते थे तो हमने कहा ऐसा

1594
01:53:24,200 --> 01:53:28,640
कैसा मतलब आप तो वैसे तो ऐसे ही पूछ लिया प्रश्न

1595
01:53:28,640 --> 01:53:32,800
कि उन्होंने तो शंकर मत से तो लिया आया दीक्षा तो हम ऐसा क्य शंकराचार्य

1596
01:53:32,800 --> 01:53:37,320
को नहीं मानते वो तो कैसा वो समय प कैसा था कि जो

1597
01:53:37,320 --> 01:53:41,400
मेन जो दीक्षा थी वो नाम जपता वो नाम जप तो उन्होंने

1598
01:53:41,400 --> 01:53:45,480
जो उनके जो गौड़ीय से लिया है और ये तो उन्होंने इससे लिया

1599
01:53:45,480 --> 01:53:49,640
है सन्यास दिखता तो ठीक है व लेना पड़ा वो समय

1600
01:53:49,640 --> 01:53:53,840
प शंकराचार्य जी का वर्चस्व ये था कि जो शंकराचार्य से

1601
01:53:53,840 --> 01:53:57,920
दीक्षा ले तो उनका महत्व गिना जाता है मतलब ऐसी सब बात

1602
01:53:57,920 --> 01:54:01,920
कर लेते अभी क्या बोलू आपका हल है

1603
01:54:01,920 --> 01:54:06,880
ना दीपक जी ऐसा ही लगता है भैया मैं अपने सर पर एक अधा मार

1604
01:54:06,880 --> 01:54:10,880
लू आप पढ़ने पढ़ने जा रहे हो श्रीधर स्वामी

1605
01:54:10,880 --> 01:54:15,040
के पास मगर आप श्रीधर स्वामी के शिष्य नहीं हो आप पढ़ नहीं रही

1606
01:54:15,040 --> 01:54:19,320
हो पढ़ नहीं रहे हो मधुवा चार्य जी का ज्ञान मगर आप मधवा चार्य जी के शिष्य हो

1607
01:54:19,320 --> 01:54:23,480
आप दीक्षा ले रहे हो ऑफिली शंकर संप्रदाय मगर आप फिर भी शंकर

1608
01:54:23,480 --> 01:54:23,980
संप्रदाय

1609
01:54:23,920 --> 01:54:28,040
के नहीं हो और आप जो है नाम ले रहे हो एक किसी

1610
01:54:28,040 --> 01:54:32,040
से तो आप जो है उसके शिष्य हो जाते हो सो जाते

1611
01:54:32,040 --> 01:54:36,080
और उसके बाद भी आप जिनको आप ही प्रमाण मान रहे हैं वोह जो कह रहे

1612
01:54:36,080 --> 01:54:40,080
हैं उसके विरुद्ध आप कार्य कर रहे हो फिर भी आप उसके फॉलोवर हो जाते हो भाई अभी जो मैंने

1613
01:54:40,080 --> 01:54:44,280
पांच छ स्टेप बताए ना कि अंत गत्वा आप सिद्ध क्या होते हो व

1614
01:54:44,280 --> 01:54:48,560
वो समझ पाना और जन्मना कर्मणा में भी है यही बात जन्मना

1615
01:54:48,560 --> 01:54:52,640
कर्मणा में पता है क्या सामने आ रहा है भैया से

1616
01:54:52,640 --> 01:54:57,080
भी है और कर्म से भी है जिसका जैसा मनो वैसा मान ले अरे मेरे भाई

1617
01:54:57,080 --> 01:55:01,080
यह तो ऐसा हो गया जैसे कि बहन से विवाह नहीं भी करना है और करना

1618
01:55:01,080 --> 01:55:06,000
भी है जिसको जैसा मानना हो मान ले यह कौन सा नियम हुआ भाई

1619
01:55:06,000 --> 01:55:10,200
अगर मैं किसी के पास जाऊ भैया क्षत्रिय किसी को क्षत्रिय

1620
01:55:10,200 --> 01:55:14,360
स्वीकार करने का पैरामीटर क्या है तो वह कहेगा कि

1621
01:55:14,360 --> 01:55:18,360
यदि क्षत्रिय ने तलवार हाथ में घुमा दी तो उसको माना जाएगा तलवार

1622
01:55:18,360 --> 01:55:22,440
घुमा दी ऐसे ऐसे करके तो मान लिया जाएगा हालांकि य शास्त्र में वर्णित नहीं है मर

1623
01:55:22,440 --> 01:55:26,560
थोड़ी देर के लिए मान लेते हैं तो फिर जन्म नाव खत्म हो जाती है जैसे ही आपने

1624
01:55:26,560 --> 01:55:30,720
कर्मण से मान लिया कि कर्म के अनुसार किसी को क्षत्रिय घोषित किया जाएगा

1625
01:55:30,720 --> 01:55:34,720
तो तो जन्मना का स्पेस ही नहीं रह जाता है ऐसा नहीं हो सकता है कि

1626
01:55:34,720 --> 01:55:38,720
जन्मना और कर्मणा साथ में चल पाए तो ये कौन सा वो है जन्मना

1627
01:55:38,720 --> 01:55:39,220
और कर्म

1628
01:55:39,160 --> 01:55:43,840
अच्छा जितने भी आचार्य गण है मधवा चार हुए रामन जाचार्य हुए

1629
01:55:43,840 --> 01:55:48,240
जितने भी जो प्रामाणिक हमारे संप्रदाय है वो सब जन्म से मानते हैं सब

1630
01:55:48,240 --> 01:55:52,280
टोटली तो फिर आप वर्ण व्यवस्था कहां से ले आ रहे हो दोहरी

1631
01:55:52,280 --> 01:55:56,360
दो मुही और इसका इसका विनियोग किसम है इसका परवन

1632
01:55:56,360 --> 01:56:00,440
किसम है ये सब कुछ बिल्कुल आउट ऑफ द सिलेबस हो जाता है कुछ कुल मिला

1633
01:56:00,440 --> 01:56:05,000
कर के हमारा जो एक सेशन हुआ था लखनऊ के जो प्रेसिडेंट

1634
01:56:05,000 --> 01:56:09,200
थे उनके साथ उसमें भी ऐसा देख था ये जो साढ़े तीन

1635
01:56:09,200 --> 01:56:13,640
घंटे का सरदर्द था वो भी ऐसा ही था क्योंकि व्यक्ति अपनी बातो

1636
01:56:13,640 --> 01:56:18,040
से जो वो कह रहा है उससे मुक रहा है तो उसको पकड़े कहां पे

1637
01:56:18,040 --> 01:56:22,560
उसको कहां प पकड़े जैसे मैं जिस चीज प जैसे मैं मैंने बोला

1638
01:56:22,560 --> 01:56:26,760
कि अच्छा 19वीं सदी के है तो आप उसे प्रमाणिक नहीं मानेंगे यह सिद्धांत है आपका

1639
01:56:26,760 --> 01:56:31,120
तो बोलते मैंने अभी तक उसको प्रॉपर वो नहीं कहा है प्रॉपर मैंने उसको अन ऑथराइज

1640
01:56:31,120 --> 01:56:35,160
नहीं करा कि क्या हुआ पहले बोल दिया खुल के कि मैं उसको अप्र माणिक मानता हूं

1641
01:56:35,160 --> 01:56:39,320
फिर थोड़ी देर बाद बोलता है मैंने प्रॉपर नहीं कहा भाई तुम एक स्टेटमेंट दोना क्लियर

1642
01:56:39,320 --> 01:56:43,640
क्लियर कि मानते हो कि नहीं झूठ नहीं है गलत है और अंत में ईश्वर

1643
01:56:43,640 --> 01:56:47,720
सर्व शक्तिमान है कि नहीं तो भैया वो है भी और नहीं भी वो

1644
01:56:47,720 --> 01:56:52,360
कर भी सकता है नहीं भी कर सकता है यह क्या है तो ये कन्फ्यूजिंग

1645
01:56:52,360 --> 01:56:54,200
का समुद्र है

1646
01:56:54,200 --> 01:56:58,480
उनके पास कुछ प्रश्न नहीं रता तो ऐसा बोलते प्रभुपाद जी ने कहा है खतम

1647
01:56:58,480 --> 01:57:02,480
प्रभुपाद जी ने कहा बात खतम हो जाती है अपनी बात को रखने के

1648
01:57:02,480 --> 01:57:06,560
लिए शास्त्र ले आएंगे जब शास्त्र पर बात करोगे तो आचार को ले आएंगे आचार पर बात करोगे

1649
01:57:06,560 --> 01:57:11,680
तो फिर शास्त्र को ले आएंगे जिस चीज

1650
01:57:11,680 --> 01:57:15,800
हा शकरा े शंकराचार्य जी को भी ले आे

1651
01:57:15,800 --> 01:57:19,880
देखो गोविंद को लेे जगनाथ गाते उन

1652
01:57:19,880 --> 01:57:24,080
लोग जगन्नाथ अष्टकम गाते साड़ी बीज रहती है ना कभी जगनाथ

1653
01:57:24,080 --> 01:57:28,160
जगन्नाथ अष्टकम गाते है क्यों वो क्यों वो क्यों गाते हो वो तो शंकराचार्य जी ने लिखा है वो

1654
01:57:28,160 --> 01:57:32,480
तो मायावादी है उनका क्यों गाते हो अरे जैसे

1655
01:57:32,480 --> 01:57:36,520
मान लीजिए मैंने कहा कि भाई इसमें ऐसे से ऐसा क्यों कि क्योंकि भाई

1656
01:57:36,520 --> 01:57:40,600
देखो प्रेमानंद जी भी कह रहे हैं देखो भाई वो

1657
01:57:40,600 --> 01:57:45,680
जो है ना एक और नाम है जिनका वो प्रेम मंदिर

1658
01:57:45,680 --> 01:57:49,760
है उनका नाम याद नहीं आ रहा है उनका नाम

1659
01:57:49,760 --> 01:57:52,960
कृपालु जी महाराज कृपालु

1660
01:57:52,960 --> 01:57:57,240
तो कृपालु जी महाराज का नाम जब जब हमारी किसी बात को काटना होगा तो कृपालु

1661
01:57:57,240 --> 01:58:01,480
जी महाराज प्रेमानंद जी महाराज अच्छा जब आप किसी आचार्य

1662
01:58:01,480 --> 01:58:05,640
को प्रमाण के रूप में स्वीकार करवाना चाहते हो तो हम भी तो किसी आचार्य का नाम

1663
01:58:05,640 --> 01:58:09,280
ले सकते हैं जैसे ही हम आचार्य का नाम लेंगे तो शास्त्र ले आओगे फिर हम

1664
01:58:09,280 --> 01:58:13,280
शास्त्र का नाम लेंगे तो आचार्य ले आओगे आप एक चीज पर स्टेबल ही नहीं

1665
01:58:13,280 --> 01:58:17,360
हो आप अगर आचार्य से सिद्ध करना चाह रहे हो तो हम भी तो आपको आचार्य का ही नाम

1666
01:58:17,360 --> 01:58:21,440
दे रहे हैं जब हम दे रहे हैं तो आचार्य वो ऑथराइज नहीं है हम उन्हें अथॉरिटी नहीं

1667
01:58:21,440 --> 01:58:25,640
मानते और जब हम शास्त्र दे तो आप आचार

1668
01:58:25,640 --> 01:58:29,920
ला रहे हो देखो देखो प्रेमानंद जी कह रहे हैं कुल मिला के ये अपने उसम

1669
01:58:29,920 --> 01:58:33,920
ही जैसे नहीं वो फस जाता है व्यक्ति और फिर कहते है कि

1670
01:58:33,920 --> 01:58:37,920
शंकराचार्य जी का भाष्य जो सुन लेगा वो उसका सर्वनाश होगा खुद आदमी इतना

1671
01:58:37,920 --> 01:58:42,000
बड़ा कन्फ्यूज है खुद कन्फ्यूज है व्यक्ति व्यक्ति जो प्रेसिडेंट

1672
01:58:42,000 --> 01:58:46,640
उस पर बैठा है वह कह रहा है ज्यादा शास्त्र की गहराई में मत जाओ

1673
01:58:46,640 --> 01:58:52,400
शा की गहराई में जाना हमारा उद्देश्य नहीं है हम तो बस वो

1674
01:58:52,400 --> 01:58:56,480
16 माला करते रहो और य मंदिर आते रहो य की संख्या बढ़ाते रहो और जो

1675
01:58:56,480 --> 01:59:00,480
भी यहां पर जो आगे की चीज है वो करते रहो इसमें तो

1676
01:59:00,480 --> 01:59:04,640
व बात हो गई इसम तो वही वाली बात हो गई है कि बस आप आप

1677
01:59:04,640 --> 01:59:08,680
बस भक्ति जो है वो मेन करना है आपको बाकी दुनिया में बम फूट

1678
01:59:08,680 --> 01:59:12,800
रहा है क्या क्या हो रहा है उस पर आपको ध्यान नहीं देना है आपको सिर्फ एक ध्यान

1679
01:59:12,800 --> 01:59:18,240
देना गोलोक धाम जाना है आपको बस य आप दिमाग भरो और

1680
01:59:18,240 --> 01:59:22,360
आपको हा और आपको वहा प क्या गोलोक

1681
01:59:22,360 --> 01:59:24,640
धाम में क्या होता है जब जब इंसान

1682
01:59:24,640 --> 01:59:28,800
जो होता है जब भगवान की सेवा करता है म हम जो आत्मा होती है जब भगवान की सेवा

1683
01:59:28,800 --> 01:59:33,160
करती है उनके धाम में तो उनको उनको वहां प ना ऐसा थॉट्स

1684
01:59:33,160 --> 01:59:37,160
आता है कि काश मतलब मेरा भी ऐसा सेवा होना चाहिए मेरा भी ऐसा मतलब सेवा

1685
01:59:37,160 --> 01:59:41,160
होना चाहिए तो उसके लिए भगवान वो तो भगवान है तो क्या बोलते है ठीक है मेरा भक्त है इसकी

1686
01:59:41,160 --> 01:59:45,200
भी इच्छा पूरा कर मतलब मैं पूरी करता हूं तो उसके लिए भगवान क्या करते हैं ठीक

1687
01:59:45,200 --> 01:59:49,400
है भाई उसके लिए ये भूलो मतलब ये मृत्यु लोक मेंको भेज

1688
01:59:49,400 --> 01:59:53,480
देते हैं मटेरियल उसम उसको भेज देते हैं अब जा तू भोग कर जो ते

1689
01:59:53,480 --> 01:59:57,520
को भोग करना है मतलब व से रिटन आ रहा है इंसान वहा से वहा पर जाने

1690
01:59:57,520 --> 02:00:01,560
के बाद भी विचार चल रहे है

1691
02:00:01,560 --> 02:00:05,560
मतलब हा वो धाम में तो भगवान का सेवा

1692
02:00:05,560 --> 02:00:09,640
उसम आनंद है तो वहा बुद्धि अपनी कैसे चलेगी पहली बात तो इंसान

1693
02:00:09,640 --> 02:00:13,680
ज जब कोई भक्त होता है श्रेष्ठ भक्त होता है जब भगवान के पास जाता हैसे तुलसीदास

1694
02:00:13,680 --> 02:00:17,680
जी तो उनका मेनन डेस्टिनेशन क्या था कि मुझे भगवान के पास जाना

1695
02:00:17,680 --> 02:00:22,000
है और उनकी सेवा में लीन होना है मुझे ठीक है जब उनकी सेवा में मैंने खुद

1696
02:00:22,000 --> 02:00:26,080
मैंने खुद ये निर्णय बनाया है कि मुझे सेवा करना है उनकी उनका

1697
02:00:26,080 --> 02:00:30,200
मुझे सेवा करना है वहां पर जाके उनकी लीला देखना है मुझे तो वहां पर जाने के विचार

1698
02:00:30,200 --> 02:00:35,000
कैसा करू कि मैं भाई नहीं भाई को मेरा भी ऐसा मतलब

1699
02:00:35,000 --> 02:00:39,160
जैसा भगवान का श आराम सेय हो रहा है वैसा मेरा भी होना चाहिए वहा मेरी बुद्धि

1700
02:00:39,160 --> 02:00:43,440
कैसे चल रही है तो यह विषय आ जाता है

1701
02:00:43,440 --> 02:00:47,440
तो जहा मतलब स्पष्टता कुछ नहीं है मतलब जो क्लेरिफिकेशन है वो कुछ भी नहीं

1702
02:00:47,440 --> 02:00:52,080
है बस यहां पर क्या है ना आप अंदर आ जाओगे ना बस गोल गोल घूमते रहोगे आप

1703
02:00:52,080 --> 02:00:56,360
आप प्रसाद खाओ च ठीक है बहुत अच्छ आप कार्य कर रहे ठीक

1704
02:00:56,360 --> 02:01:02,360
हैसे प्रसाद डि तो अंत में एक आंसर मिलेगा

1705
02:01:02,480 --> 02:01:06,520
अचत आप मायावादी हो आप मायावादी हो आप जब ज्यादा प्रश्न कर

1706
02:01:06,520 --> 02:01:10,720
आप मायावादी हो जब ये में जब

1707
02:01:10,720 --> 02:01:14,720
ये मैंने इनसे रोड पर बात की थी स्कन वाले जो

1708
02:01:14,720 --> 02:01:16,600
दो नवयुवक थे

1709
02:01:16,600 --> 02:01:20,600
जब मैं उससे कन्वर्सेशन करने लगा तो जो सीनियर था वो जूनियर

1710
02:01:20,600 --> 02:01:24,640
के कान में बोलता है अरे ये लोग अ भक्त है इनसे बात मत करो

1711
02:01:24,640 --> 02:01:27,960
ऐसे कान में बोलता

1712
02:01:27,960 --> 02:01:32,480
है काफिर काफिरो से दोस्ती मत करो अक्त

1713
02:01:32,480 --> 02:01:37,120
से दोस्ती मत करो य सब है आपको

1714
02:01:37,120 --> 02:01:41,800
में र भक्ति करना है बाकी अगर आप बाहर होते हो आप

1715
02:01:41,800 --> 02:01:46,000
मतलब आपको माया ने पकड़ लि और आप मायावादी हो तो मतलब इनका

1716
02:01:46,000 --> 02:01:50,000
एक सिंपल सी बात है भक्त के साथ रगे ना तो बार मतलब भगवान के विषय

1717
02:01:50,000 --> 02:01:54,120
में सुनने य सब मिलेगा बट बट वही भगवान के विषय में कोई दूसरा

1718
02:01:54,120 --> 02:01:58,240
आपको संप्रदाय वाला बताएगा तो वो वो बराबर नहीं है क्यों बराबर नहीं है

1719
02:01:58,240 --> 02:02:02,560
क्योंकि जो उनका फिलोस हैट डिफरेंट फम आवर फिलोस उनका फिलोस

1720
02:02:02,560 --> 02:02:06,840
हमारे फिस ऐसा नहीं है तो इनका य पूरा मतलब आ जाता है बहुत

1721
02:02:06,840 --> 02:02:12,840
कुछ है मतलब बोलने के लिए बट ठीक है

1722
02:02:13,440 --> 02:02:17,440
अभी और सबसे बड़ी बात की यहां पर

1723
02:02:17,440 --> 02:02:21,600
ये सनातन धर्म को तोड़ना चाहते है जैसे कि शिव और कृष्ण

1724
02:02:21,600 --> 02:02:25,840
में करते हैं पर वही पर जीसस और कृष्ण

1725
02:02:25,840 --> 02:02:30,240
एक है बाद में जीसस और अल्लाह एक है तो मतलब

1726
02:02:30,240 --> 02:02:34,560
य इस पता च जा स्टेटमेंट है इनका ऑफिशियल स्टेटमेंट कृष्णा

1727
02:02:34,560 --> 02:02:39,120
नाम की इनकी बुक है उसमें इन्होंने लिखा है

1728
02:02:39,120 --> 02:02:43,200
कृष्ण अल्लाह और यहोवा एक है यवा य

1729
02:02:43,200 --> 02:02:47,400
यवा जो बाइबल का ईश्वर कुरान का ईश्वर और जो हमारा ईश्वर

1730
02:02:47,400 --> 02:02:51,600
है कृष्ण वो एक है तो जो हमारा ईश्वर है अगर अगर

1731
02:02:51,600 --> 02:02:55,600
वो हमारा ईश्वर है तो वो बाइबल और कुरान का ईश्वर सेम नहीं हो सकता

1732
02:02:55,600 --> 02:03:00,080
और अगर वो सेम है बाइबल और कुरान का ईश्वर के साथ तो फिर वो हमारा

1733
02:03:00,080 --> 02:03:04,360
ईश्वर नहीं हो सकता क्योंकि वो सच्चितानंद स्वरूप

1734
02:03:04,360 --> 02:03:08,560
है आबाद है सर्वशक्तिमान है अगर हम उसको बाइबल

1735
02:03:08,560 --> 02:03:12,560
और कुरान की सीमा के ईश्वर के सिमिलर कह रहे हैं तो बाइबल और

1736
02:03:12,560 --> 02:03:16,680
कुरान की सीमा का जो ईश्वर है वो बाधित है वो जन्म नहीं ले सकता बहुत

1737
02:03:16,680 --> 02:03:20,760
से काम है जो नहीं कर सकता अब यहां पर कुछ लोग कहते हैं कि वो वहां की

1738
02:03:20,760 --> 02:03:25,040
सुप्रीमेसी ली गई क्योंकि उस किताब के अनुसार व सुप्रीम है

1739
02:03:25,040 --> 02:03:28,480
तो पहली बात तो यह है कि कुरान की

1740
02:03:28,480 --> 02:03:32,840
सीमा का ईश्वर बात हो रही कुरान की सीमा कुरान क्या है

1741
02:03:32,840 --> 02:03:37,240
व यह कहती है कि मैं सबसे ज्यादा प्रामाणिक किताब हूं

1742
02:03:37,240 --> 02:03:41,800
ईश्वर के विषय में तो यदि आप यह बात कहोगे कि उसकी हम सिर्फ सुप्रीमेसी

1743
02:03:41,800 --> 02:03:46,040
ले रहे हैं तो व इसकी बात कट जाएगी इसका मतलब जो

1744
02:03:46,040 --> 02:03:50,080
जिस अल्लाह को आप कृष्ण के समान खड़ा कर रहे हो अगर आप यह

1745
02:03:50,080 --> 02:03:54,120
कहते हुए कर रहे हो कि हम सुप्रीम के कारण ले रहे वहां से अल्लाह को तो

1746
02:03:54,120 --> 02:03:58,120
इसका मतलब व आप कुरान का खंडन करते हुए ले रहे हो यानी कि वो अल्लाह

1747
02:03:58,120 --> 02:04:02,400
कुरान की सीमा का ईश्वर नहीं है वो कुरान और बाइबल

1748
02:04:02,400 --> 02:04:07,240
की सीमा का ईश्वर नहीं है तो फिर आपका एक क्लेम गलत हो गया कि

1749
02:04:07,240 --> 02:04:11,520
कुरान का ईश्वर और बाइबल का ईश्वर और कृष्ण एक है आपका क्लेम गलत हो गया क्योंकि

1750
02:04:11,520 --> 02:04:15,600
कुरान यह नहीं मानती कि गीता जो है ज्यादा प्रमाणिक है कुरान खुद कहती है

1751
02:04:15,600 --> 02:04:19,640
सबसे ज्यादा प्रमाणिक मैं हूं और आपने अगर यह कह दिया कि

1752
02:04:19,640 --> 02:04:23,720
हमने वहां से सिर्फ सुप्रीम एसी लिए तो य ने कुरान का खंडन कर दिया तो अब जो

1753
02:04:23,720 --> 02:04:28,480
अल्लाह आप ले रहे हो वो कुरान की सीमा का ईश्वर नहीं है फिर

1754
02:04:28,480 --> 02:04:32,480
तो फिर आप ये नहीं कह सकते कि कुरान का अल्लाह और भगवत गीता

1755
02:04:32,480 --> 02:04:36,600
का जो कृष्ण है वो एक है दूसरी बात ये आ जाती है

1756
02:04:36,600 --> 02:04:40,640
दूसरी बात ये आ जाती है कि क्या आप

1757
02:04:40,640 --> 02:04:43,800
यह लिखते हो वहां पर जहां यह कहते हो कि कुरान का अल्लाह

1758
02:04:43,800 --> 02:04:48,400
और हम लोग जो है यूं ही कह रहे हैं जिससे कि वो लोग

1759
02:04:48,400 --> 02:04:52,840
अच्छा जब व्यक्ति हमसे यह कह सकता है कि

1760
02:04:52,840 --> 02:04:57,680
जो गुरु होता है वो कौन होता है सत्य बोलने वालात

1761
02:04:57,680 --> 02:05:01,720
गुरु कौन होना चाहिए सत्य बोल जब आप हमसे कह रहे हो कि वो तो उनको

1762
02:05:01,720 --> 02:05:05,880
धर्म परिवर्तन कराने के लिए हम बोल देते हैं मगर वास्तविकता य हम ऐसा नहीं मानते

1763
02:05:05,880 --> 02:05:10,000
जब मुस्लिम यह पूछता होगा नहीं कुरान का ईश्वर तो यह कहता है वो जन्म नहीं ले

1764
02:05:10,000 --> 02:05:14,040
सकता और क्योंकि इंटेलेक्चुअल वहां भी होंगे ना ऐसा थोड़ी ना बिल्कुल वहा बिल्कुल

1765
02:05:14,040 --> 02:05:18,200
दही बेच के है वहां भी होंगे ना वहां भी पूछेंगे कि आप

1766
02:05:18,200 --> 02:05:22,240
तो कहते हो कि वो जो है कुरान य कृष्ण जन्म लेते हैं ईश्वर

1767
02:05:22,240 --> 02:05:26,320
तो जन्म नहीं लेता तो वहा क्या कहते होंगे सोच के देखो यही लाइन

1768
02:05:26,320 --> 02:05:30,440
कि हम लोग अंदर से ऐसा नहीं सोचते हैं हम लोग सिफ कहते हैं व कृष्ण

1769
02:05:30,440 --> 02:05:34,760
है वाला क नहीं है व सनातन का वो वाला जो पुराणों में जो कृष्ण

1770
02:05:34,760 --> 02:05:39,040
व वाला नहीं है अल्ला ही है मगर हम हम कहना पड़ता है क्योंकि

1771
02:05:39,040 --> 02:05:44,360
हमें इंडिया में प्रचार करना है तो ऐसा कोई सगा

1772
02:05:44,360 --> 02:05:48,480
नहीं की बात इधर हमारे मन की बात कह दी उधर

1773
02:05:48,480 --> 02:05:52,520
उनके मन की जब हमसे ू बोल सकता है हम से झूठ बोल

1774
02:05:52,520 --> 02:05:56,520
जो हमसे किसी और के लिए झूठ बता सकता है कि मैं वहा झूठ बोलता हूं तो

1775
02:05:56,520 --> 02:06:00,720
वहा से उसका जो विश्वास का धागा टूट गया वो खुद अपनी क्रेडिबिलिटी पर

1776
02:06:00,720 --> 02:06:04,720
उंगली उठवा रहा है मैं झूठ बोल सकता हूं तो वो हमसे झूठ नहीं

1777
02:06:04,720 --> 02:06:10,360
बोल रहा इसका क्या अर्थ इसका क्या प्रमाण

1778
02:06:10,360 --> 02:06:14,480
अकी बात है व

1779
02:06:14,480 --> 02:06:18,520
जहा जैसे जिसको फिट करना है बस वो बोलते अच्छा एक चीज और आ जाती

1780
02:06:18,520 --> 02:06:22,640
है यदि आप सुप्रीम मेसी के कारण आप जो है यह कह देते हो

1781
02:06:22,640 --> 02:06:26,880
कि अल्लाह और कृष्ण एक है तो सुप्रीम मेसी के कारण भैया आप शिव

1782
02:06:26,880 --> 02:06:31,680
पुराण का ईश्वर और भागवत का कृष्ण एक क्यों नहीं कह देते ही

1783
02:06:31,680 --> 02:06:35,840
कता क्योंकि भैया वहां से डर लगता है और सिर्फ भगवान के भक्त है

1784
02:06:35,840 --> 02:06:40,080
भोले भोले बाबा के भक्त बोले उनसे डर नहीं लगता सीधी सिंपल

1785
02:06:40,080 --> 02:06:44,160
बात है ये लोग आपकी सुन लेंगे हा हरे कृष्णा भैया

1786
02:06:44,160 --> 02:06:48,480
हरे कृष्णा और जो है शिवजी भगवान नहीं है शिवजी तो भगवान के बहुत बड़े भक्त है शिवजी

1787
02:06:48,480 --> 02:06:52,840
भगवान के बहुत बड़े भक्त भी नहीं है वो तो हरिदास ठाकुर है क्योंकि शिवजी अपनी इंद्रियों

1788
02:06:52,840 --> 02:06:56,840
में कंट्रोल का कर पाए व सबसे बड़े भक्त नहीं है और शिवजी शिवजी का

1789
02:06:56,840 --> 02:06:59,360
प्रसाद भी नहीं खाना है क्योंकि वो देवता है जब वो

1790
02:06:59,360 --> 02:07:03,520
कृष्ण प लगा होगा तभी प्रसाद खाना है हा आप समझ रहे हो ना शिवजी हम आपकी कितनी

1791
02:07:03,520 --> 02:07:09,520
रेस्पेक्ट करते हैं तो शिवजी कहेंगे समझ रहा

1792
02:07:11,720 --> 02:07:16,040
हूं अ ला आखरी है एक आखरी

1793
02:07:16,040 --> 02:07:20,240
है अभी जैसे गीता परिवार ने मतलब आपके माध्यम से बता रहा

1794
02:07:20,240 --> 02:07:24,520
गीता परिवार ने जो वो 24 आवर्स जो

1795
02:07:24,520 --> 02:07:28,560
गीता का प्रचार कर रहे तो अधिक से अधिक लोग उसम जवाइन करे ताकि उनको जो

1796
02:07:28,560 --> 02:07:32,880
गीता का परा श्लोक का भी सीखने का मतलब सीखने मिले उनको अभी

1797
02:07:32,880 --> 02:07:36,960
य पर क्या होता है इसम इसम ये होता है कि अगर आपको पढ़ना

1798
02:07:36,960 --> 02:07:41,120
है भगवत गीता इस में अगर आपको भगवत गीता पढ़ना है तो आपको पैसे

1799
02:07:41,120 --> 02:07:45,720
देने पड़ेंगे ठीक है वो भी कंप्लीट नहीं होता है इनका इनका कंप्लीट नहीं होता है

1800
02:07:45,720 --> 02:07:49,880
तो मैंने इसम य चीज देखा जब से मैं जब से मैं स्न में हूं चार पा साल

1801
02:07:49,880 --> 02:07:53,880
से तभी से देखा गता इन्होने कंप्लीट किया हुआ है नहीं

1802
02:07:53,880 --> 02:07:58,320
करते बस आओ आप सुबह सुबह श्रीमद भागवत लेक्चर में बैठो

1803
02:07:58,320 --> 02:08:02,840
अब वो भी सीक्वेंस में नहीं चलता है जो जो मतलब वो चाहे मतलब

1804
02:08:02,840 --> 02:08:07,040
जो भी लोक वो चाहे वो रखेंगे बाकी सीक्वेंस

1805
02:08:07,040 --> 02:08:11,040
में कुछ नहीं देता ये सिंपल सी बात मैं आपको बता र तो ठीक

1806
02:08:11,040 --> 02:08:14,360
है बहुत अच्छा लगा आप लोगों ने इतना समय दिया लगभग दो घंटे हम

1807
02:08:14,360 --> 02:08:18,760
लोगों ने बहुत ही मतलब फैक्ट फुल बातें की तथ्य पूर्ण

1808
02:08:18,760 --> 02:08:22,760
और निष्कर्ष पूर्ण बातें की और मैं दो चीजें बताने

1809
02:08:22,760 --> 02:08:27,440
वाला हूं कि पहली बात है कि हमारा डिस्कॉर्डेंस

1810
02:08:27,440 --> 02:08:31,520
का लिंक है यहां पर आपको भी शेयर किया गया था उसको हम पिंड कमेंट में भी

1811
02:08:31,520 --> 02:08:35,720
कर देंगे तो

1812
02:08:35,720 --> 02:08:39,920
डिस्कॉर्डेंट हम लोग शुरू कर रहे हैं 3 तारीख से नामा स्त्र

1813
02:08:39,920 --> 02:08:44,120
ऑपरेशन नाम जप में पांच सेशन में हम लोग 15-15 मिनट के नाम जप करेंगे जो सवा

1814
02:08:44,120 --> 02:08:48,240
घंटे की भक्ति का अभियान है उसको पूरा करने के लिए एक दूसरे के परस्पर

1815
02:08:48,240 --> 02:08:52,360
सहयोग के भावना से शुरू हो रहा है यह निशुल्क है पूरी तरीके से आप लोग

1816
02:08:52,360 --> 02:08:58,360
इसके लिए हमारा व नंबर है 740 830

1817
02:09:21,600 --> 02:09:25,960
अपना वो सर्वर उसको क्या कहते हैं मैं टेक्निकल भाषा मुझे नहीं मालूम है

1818
02:09:25,960 --> 02:09:30,040
मगर जो जो लोग जानते हो डिस्कॉर्डेंस का हमारा चालू

1819
02:09:30,040 --> 02:09:33,920
चालू हो गया है तो उस पर आप लोग आए

1820
02:09:33,920 --> 02:09:38,080
और एक सूत्र में जैसे कि अभी मैंने बीच में कहा था

1821
02:09:38,080 --> 02:09:42,200
कि क्योंकि इकोन विष्णु को सुप्रीम ना मान

1822
02:09:42,200 --> 02:09:47,000
कर के उनके कृष्ण रूप को सुप्रीम मानता है तो वह वैष्णव सिद्ध नहीं होता

1823
02:09:47,000 --> 02:09:51,120
और क्योंकि वह देश काल परिस्थिति वस धर्म की शिक्षा देता है

1824
02:09:51,120 --> 02:09:55,120
तो सनातन सिद्ध नहीं होता प्रभुपाद के वर्ड्स को बदलता है तो प्रभुपाद का

1825
02:09:55,120 --> 02:09:59,400
फॉलोअर सिद्ध नहीं होता चेतन महाप्रभु के विरुद्ध हो जाता है तो चेतन महाप्रभु

1826
02:09:59,400 --> 02:10:03,520
का फॉलोअर सिद्ध नहीं होता श्रीधर स्वामी का टीका पड़ता है तो मधवा चार्य

1827
02:10:03,520 --> 02:10:07,640
जी का फॉलोअर सिद्ध नहीं होता कृष्ण को सर्वशक्तिमान नहीं

1828
02:10:07,640 --> 02:10:12,320
कहता है तो कृष्ण का भक्त सिद्ध नहीं होता

1829
02:10:12,320 --> 02:10:16,600
और जब एज इट इज अर्थ नहीं किया गया है तो जो उनकी भगवत

1830
02:10:16,600 --> 02:10:21,360
गीता है वो एज इट इज सिद्ध नहीं होती है ना और

1831
02:10:21,360 --> 02:10:25,480
ये कुछ मोटे मोटे से हैं जिसमें कि चक्कर आ

1832
02:10:25,480 --> 02:10:29,600
जाता है ज्यादा सोचते हैं तो तो इसके साथ ही साथ सभी का जुड़ने

1833
02:10:29,600 --> 02:10:33,800
के लिए आभार आप सभी का और

1834
02:10:33,800 --> 02:10:37,520
हम लोग अब आपसे आज्ञा लेना चाहेंगे ये

1835
02:10:37,520 --> 02:10:41,080
आपको दिखाई दे रहा है

1836
02:10:41,080 --> 02:10:45,080
डिस्कर्सेस हैं वहां पर हम लोग एक्टिव हो रहे

1837
02:10:45,080 --> 02:10:49,600
हैं अब और सभी को जय श्री राम सभी लोग

1838
02:10:49,600 --> 02:10:53,800
उपासना सेवा संकीर्तन स्वाध्याय चार चीजें हैं अपने

1839
02:10:53,800 --> 02:10:58,000
जीवन में जरूर करें उपासना सवा घंटे की भक्ति दिन भर में सेवा

1840
02:10:58,000 --> 02:11:02,560
संकीर्तन सेवा संकीर्तन के लिए आप मठ मंदिरों को अपने

1841
02:11:02,560 --> 02:11:06,560
दुर्ग बनाए शिक्षा रक्षा सेवा के प्रकल्प चलाए और स्वाध्य स्वा

1842
02:11:06,560 --> 02:11:10,600
अध्ययन करने के लिए जो मुख्य तीन और प्लस उसमें मेरा जो

1843
02:11:10,600 --> 02:11:14,640
वो है जगतगुरु शंकराचार्य द्वारा बताए गए जो ग्रंथ है वो

1844
02:11:14,640 --> 02:11:19,000
है रामचरित मानस ज्ञानेश्वरी गीता

1845
02:11:19,000 --> 02:11:23,200
और क्या कहते हैं हिंदी दास बोध

1846
02:11:23,200 --> 02:11:27,480
समर्थ रामदास जी ये तीन और इसमें जो और तात्विक

1847
02:11:27,480 --> 02:11:31,840
रूप से समझने के लिए गर्व से कहो हम हिंदू है पुरी शंकराचार्य

1848
02:11:31,840 --> 02:11:36,280
जी द्वारा रचित है बहुत उसमें आपको जो है ना एक बेसिक पूरे सारे कांसेप्ट

1849
02:11:36,280 --> 02:11:40,280
के पांच देव उपासना कैसे कहां गणेश को सुप्रीम कहा है कैसे

1850
02:11:40,280 --> 02:11:44,800
एक ही परम तत्व अपने आप को पांच रूप प्रकट करता है बहुत विवत उसम बताया गया हिंदू

1851
02:11:44,800 --> 02:11:48,800
हिंदू हमारा नाम क्यों है और हमारे ऊपर एक आरोप लगता

1852
02:11:48,800 --> 02:11:52,560
है अने केश्वर वाद का तो कैसे एक वा सिद्ध होते हैं

1853
02:11:52,560 --> 02:11:56,840
वो सब उसमें है हर चीज का जवाब प्रमाण और तर्क के साथ प्रमाण और यति

1854
02:11:56,840 --> 02:12:00,920
के साथ और जो पांचवा पांचवा जो वो है वो

1855
02:12:00,920 --> 02:12:05,520
है भक्ति सुदा वो करपात्री जी महाराज का ग्रंथ है वो आप लोग अवश्य पढ़े

1856
02:12:05,520 --> 02:12:09,840
इसके साथ ही साथ सभी को जय श्री राम आने के लिए

1857
02:12:09,840 --> 02:12:14,440
नवाद न

1858
02:12:14,440 --> 02:12:18,440
धनवाद जय श्री राम
