1
00:00:02,920 --> 00:00:07,040
तो सभी को जय श्री राम और

2
00:00:07,040 --> 00:00:11,080
जैसा कि आप लोगों को पता है कि हम लोग आज उपस्थित

3
00:00:11,080 --> 00:00:16,040
हुए हैं जो रामपाल

4
00:00:16,040 --> 00:00:20,160
दास जी के द्वारा प्रचारित प्रसारित होने वाला जो

5
00:00:20,160 --> 00:00:24,320
ज्ञान है वह कहां तक वेद सम्मत

6
00:00:24,320 --> 00:00:28,960
है शास्त्र सम्मत है मोक्ष सम्मत है ईश्वर सम्मत है

7
00:00:28,960 --> 00:00:34,240
इस पर चर्चा के लिए और हमारे साथ में यहां पर है

8
00:00:34,240 --> 00:00:37,840
शिवम यादव

9
00:00:37,840 --> 00:00:42,000
जी अच्छा शिवम यादव जी अपने बारे में थोड़ा सा बता दीजिए

10
00:00:42,000 --> 00:00:46,560
आप कहां से हैं और थोड़ा सा ब्रीफ में बता दीजिए

11
00:00:46,560 --> 00:00:51,000
कि किसके शिष्य हैं थोड़ा सा बता दीजिए

12
00:00:51,000 --> 00:00:55,040
जी मैं वैसे तो सांसारिक जाति बात को

13
00:00:55,040 --> 00:00:59,040
संत रामपाल जी महाराज ने खत्म कर दिया है यानी ये जाति तो इसलिए

14
00:00:59,040 --> 00:01:03,080
हमें बतानी पड़गी हम कृष्ण वंस फिर भी परम

15
00:01:03,080 --> 00:01:07,440
पूज्य सतगुरु संत रामपाल जी महाराज की शरण में रहकर और भक्ति कर रहे हैं जो शास्त्र

16
00:01:07,440 --> 00:01:11,640
साधना मैं बताना चाहूंगा मैं शिवम दास जिला टा उत्तर प्रदेश का रहने

17
00:01:11,640 --> 00:01:15,760
वाला हूं मैंने विश्वर भर के लगभग द

18
00:01:15,760 --> 00:01:18,240
से 12 धर्म गुरुओं के पास अपना सर पटक

19
00:01:18,240 --> 00:01:22,320
लिया और जो अद्भुत ज्ञान जो अनमोल ज्ञान

20
00:01:22,320 --> 00:01:26,560
परम पूज्य परव का संत रामपाल जी महाराज ने मुझ दास

21
00:01:26,560 --> 00:01:30,760
को दिया है काफी आपका परिचय

22
00:01:30,760 --> 00:01:34,840
जानना था वोह आपने शिवम दास जी और एटा से रहने वाले हैं और आपकी

23
00:01:34,840 --> 00:01:39,200
नाम दीक्षा कहां से हुई है मैंने अभी

24
00:01:39,200 --> 00:01:45,040
जिला से नाम दीक्षा प्राप्त किया कुछ समय हुआ है ज्यादा समय नहीं

25
00:01:45,040 --> 00:01:48,000
हुआ जी तो सबसे

26
00:01:48,000 --> 00:01:52,520
पहले हम एक ये बात कर ले कि अभी आपने हमारी जो लास्ट लाइव देखी

27
00:01:52,520 --> 00:01:57,160
थी उसमें एक सज्जन आए थे जो यह बोल रहे थे कि

28
00:01:57,160 --> 00:02:01,400
जो कबीर है उनको भी दुख होता है और मुक्त

29
00:02:01,400 --> 00:02:05,440
होने के बाद भी क्या सही बोल रहे

30
00:02:05,440 --> 00:02:09,440
थे जी मैंने लाइव को तो नहीं देखा मैं सिर्फ

31
00:02:09,440 --> 00:02:13,480
य जानना चाहता आपसे जी जी अभी अभी

32
00:02:13,480 --> 00:02:17,720
बात करें मैं एक थोड़ा सा प्रीफिक्स दे रहा हूं जी अगर

33
00:02:17,720 --> 00:02:22,000
कोई व्यक्ति यह बोल रहा है कि कबीर जी को दुख होता है तो क्या यह सही है अकॉर्डिंग

34
00:02:22,000 --> 00:02:26,240
टू रामपाल जी सर एक मिनट आप

35
00:02:26,240 --> 00:02:30,000
भाई साहब ने क्या कहा उसे छोड़िएगा

36
00:02:30,000 --> 00:02:34,320
मैं उसी पे आऊंगा मैं एक एक बात क्लियर करके आगे बढ़ना चाह रहा हूं

37
00:02:34,320 --> 00:02:38,360
एक मिनट रुको मेरा कहने का मतलब ये है आपने किस भाई

38
00:02:38,360 --> 00:02:42,360
साहब से डिबेट किया मैंने तो आपको जान भाई साहब को आप एक तरफ रख

39
00:02:42,360 --> 00:02:46,440
दीजिए मैं आपसे पूछ रहा हूं कबीर जी को दुख होता है क्या मैं आपसे पूछ हूं

40
00:02:46,440 --> 00:02:48,400
भाई साहब को छोड़ दीजिए

41
00:02:48,400 --> 00:02:52,480
वही तो बात है आप किसी की सुनते नहीं है पहले हमारी भी सुन लो हमने आपकी डिबेट में

42
00:02:52,480 --> 00:02:56,520
फॉर्म भरा है इसलिए भराया ताकि मैं नया व्यक्ति कल रामपाल जी से जुड़

43
00:02:56,520 --> 00:03:00,600
गया तो मैं भी तो आपसे कुछ प्रश्न चाहता हूं जो रामपाल जी ने मेरा

44
00:03:00,600 --> 00:03:04,680
शंका समाधान किया है शायद आप कुछ हटके बता दो ये

45
00:03:04,680 --> 00:03:08,760
मैं जानना चाहता हूं कबीर जी का भी टॉपिक नहीं है अभी टॉपिक

46
00:03:08,760 --> 00:03:12,840
ये है जो मैं आपसे जानना चाहता हूं तो जानने

47
00:03:12,840 --> 00:03:17,040
के लिए तो हमारी क्लासेस चलती है उसमें आइए आप आपको वो फॉर्म भरना

48
00:03:17,040 --> 00:03:21,320
चाहिए ऑनलाइन डिबेट प जान यहां पे जो फॉर्म भर रहे हैं एक मिनट

49
00:03:21,320 --> 00:03:25,360
यहां पे जो फॉर्म भर रहे हैं वो इसलिए भर रहे हैं कि हम जो कह रहे हैं उससे

50
00:03:25,360 --> 00:03:30,920
आपको आपत्ति है जी बिल्कुल आपत्ति है आपने

51
00:03:30,920 --> 00:03:35,240
वो आपत्ति बताइए आप ठीक है मैं डिबेट को चालू करते हैं

52
00:03:35,240 --> 00:03:36,000
अब जैसे हमने

53
00:03:36,000 --> 00:03:40,160
कहा कि कबीर दास भगवान नहीं है क्योंकि वह सर्वशक्तिमान

54
00:03:40,160 --> 00:03:44,280
नहीं है अब इससे आपको आपत्ति है क्या बिल्कुल

55
00:03:44,280 --> 00:03:49,240
है हां तो क्या कबीर दास सर्व शक्तिमान है

56
00:03:49,240 --> 00:03:53,480
जी बिल्कुल है सर्वशक्तिमान है सर्वा आधार है सबके आधार हैं वही सबके

57
00:03:53,480 --> 00:03:57,640
रक्षक वही सबके जनक है जो पवित्र यजत अध्याय

58
00:03:57,640 --> 00:04:01,640
पाच मंत्र 32 में स्पष्ट देखिए देखिए जितना पूछा है

59
00:04:01,640 --> 00:04:05,680
प्लीज उतनी ही बात करें एक्स्ट्रा बात ना करें

60
00:04:05,680 --> 00:04:09,680
मैंने आपसे पूछा क्या वो सर्वशक्तिमान है तो आप उसम हा करिए मैं जब आपसे

61
00:04:09,680 --> 00:04:14,160
प्रमाण मांगू तो आप प्रमाण दीजिएगा मैंने अभी आपसे प्रमाण मांगा क्या

62
00:04:14,160 --> 00:04:19,280
देख सर्वप्रथम तो य है रहे

63
00:04:19,280 --> 00:04:23,400
देखिए विषय अंतर करेंगे तो हमारी डिबेट आगे नहीं बढ़ पाएगी यह

64
00:04:23,400 --> 00:04:27,480
सबसे पहला रूल है मैंने आप मैंने आपसे प्रमाण नहीं मांगा

65
00:04:27,480 --> 00:04:31,760
है तो आप प्लीज प्रमाण नहीं देंगे जब कहूंगा कि नहीं मुझे इस चीज का प्रमाण

66
00:04:31,760 --> 00:04:36,040
चाहिए तो आप प्रमाण दीजिए मैंने आपसे सिर्फ इतना पूछा है क्या

67
00:04:36,040 --> 00:04:41,120
आप जिस आइडल जीी को मानते हो जिस संत के

68
00:04:41,120 --> 00:04:45,320
आधार साइजी नहीं साइजी नहीं कह सकते इस

69
00:04:45,320 --> 00:04:49,680
साइजी नहीं कहा है मैंने आईडियोलॉजी कहा है आपको सुनाई

70
00:04:49,680 --> 00:04:52,160
नहीं

71
00:04:52,160 --> 00:04:56,880
दिया तो आईडियोलॉजी के अनुसार आपके अनुसार

72
00:04:56,880 --> 00:05:01,480
क्या कबीर दास जी सर्व शक्तिमान

73
00:05:01,480 --> 00:05:05,560
है मेरे अनुसार नहीं वेदों के अनुसार कबीर

74
00:05:05,560 --> 00:05:09,720
दास जी कबीर साहिब जी काशी वाले सर्वशक्तिमान वही पूण परमात्मा है

75
00:05:09,720 --> 00:05:13,720
ठीक है क्या वह किसी भी नियम के नीचे आते हैं या नहीं

76
00:05:13,720 --> 00:05:17,800
आते हैं

77
00:05:17,800 --> 00:05:21,920
परमात्मा वचन बंद जो उसका विधान है

78
00:05:21,920 --> 00:05:26,600
विधान के अनुसार परमात्मा काम कर करता है जिस तरीके

79
00:05:26,600 --> 00:05:31,040
से यानी सीधे बोलो ना कि हा नियम के नीचे आते क्यों इतना

80
00:05:31,040 --> 00:05:35,200
लंबा बोल रहे हैं आप सीधे बोलिए नियम के नीचे हैमा नियम के नीचे

81
00:05:35,200 --> 00:05:39,920
नहीं आते वो अपने द्वारा स कार्यों को करते हैं

82
00:05:39,920 --> 00:05:44,200
परमात्मा कहते है यह सारे काम हमारे किए हमसे मिले वो निश्चय जी परमात्मा

83
00:05:44,200 --> 00:05:48,200
ही सब कुछ करते हैं वो किसी के बंधक नहीं है यानी

84
00:05:48,200 --> 00:05:52,480
कि वह अपने बनाए हुए नियमों के बंधन में भी नहीं है

85
00:05:52,480 --> 00:05:56,560
परमात्मा ने जो नियम बनाए हैं वो किस लिए बनाए है सर्वप्रथम

86
00:05:56,560 --> 00:06:00,720
हमें उसको जानना ही पड़ेगा सीधी बात नहीं करेंगे

87
00:06:00,720 --> 00:06:05,320
हम करेंगे सब कुछ जानेंगे पहले एक एक टॉपिक सही करते चले ना

88
00:06:05,320 --> 00:06:07,160
अभी मैं आपसे पूछ रहा हूं

89
00:06:07,160 --> 00:06:11,160
कि वोसी नियम के नीचे है या नहीं जो परमात्मा

90
00:06:11,160 --> 00:06:15,760
ने नियम बनाए हैं वो किस लिए बनाए है विधान जो संविधान लिखा

91
00:06:15,760 --> 00:06:19,760
मेरे प्रश्न का उत्तर नहीं है मैं पूछूंगा आपसे मैं उसको भी

92
00:06:19,760 --> 00:06:23,960
पूछूंगा मैं सुनूंगा आपकी बात प्रश्न मेरा यह है क्या वो

93
00:06:23,960 --> 00:06:28,040
किसी भी नियम के नीचे है या नहीं है उत्तर मेरा यह है

94
00:06:28,040 --> 00:06:32,240
कि परमात्मा ने जो नियम ब वो उसे मिटा भी सकता है और बना

95
00:06:32,240 --> 00:06:36,360
भी सकता है सीधा सा उत्तर मेरा यही है वो नियम केर मतलब अपने

96
00:06:36,360 --> 00:06:40,920
इसका मतलब वो किसी भी नियम के नीचे नहीं है जी बिल्कुल परमात्मा

97
00:06:40,920 --> 00:06:45,240
किसी भी नियम में बंधित नहीं होता परमात्मा नियम के नीचे

98
00:06:45,240 --> 00:06:49,400
नहीं जी अब बंधक है परमात्मा बंधक नहीं है परमात्मा

99
00:06:49,400 --> 00:06:53,640
नियम के नीचे है वो नियम कौन सा है जो उसने स्वयं निर्धारित कर रखा

100
00:06:53,640 --> 00:06:57,640
है व गहरी बात क्यों बोल रहे हैं अपने बनाए

101
00:06:57,640 --> 00:07:02,240
हुए नियम के नीचे बोलिए ना ने भाई आप कलवाना

102
00:07:02,240 --> 00:07:06,280
क्या चाहते हैं परमात्मा अपने द्वारा बनाए नियमना कुछ नहीं चाह रहा हूं मैं

103
00:07:06,280 --> 00:07:10,280
आपका जो दृष्टिकोण है साफ सुथरे तरीके से सामने चाहता हूं वह नियम

104
00:07:10,280 --> 00:07:14,360
के नीचे है या नहीं है सर जी गाड़ी मैंने बनाई है

105
00:07:14,360 --> 00:07:18,680
उसके नीचे क्यों रहूंगा उस नहीं रहेंगे तो बोलिए कि नहीं है

106
00:07:18,680 --> 00:07:23,280
नहीं है तो बोलिए परमा चे नहीं

107
00:07:23,280 --> 00:07:27,280
हैने तक दे दिया कि परमात्मा भी क्योंकि गाड़ी जिसने

108
00:07:27,280 --> 00:07:31,280
बनाई है वो उसके नीचे क्यों रहेगा तो अगर नियम परमात्मा ने बनाए तो

109
00:07:31,280 --> 00:07:35,560
उसके नीचे क्यों रहेगा परमात्मा के नियम का परच

110
00:07:35,560 --> 00:07:39,840
अलग है सर परमात्मा ने जो नियम बनाए उस पर उसकी सत्ता है

111
00:07:39,840 --> 00:07:43,960
यह नहीं कह सकते वो उसके नीचे है परमा या उ तोड़ सकता है कि

112
00:07:43,960 --> 00:07:48,200
नहीं मैं पूछ रहा हूं उन्हे तोड़ सकता है कि नहीं बिल्कुल तोड़

113
00:07:48,200 --> 00:07:52,480
सकता है तो अब मुझे बताइए क्या वह अपने शरीर को नष्ट

114
00:07:52,480 --> 00:07:56,640
कर सकते हैं बिल्कुल नहीं कर सकते

115
00:07:56,640 --> 00:08:00,640
क्यों आपने कहा कर स सारे नियम तोड़ स

116
00:08:00,640 --> 00:08:05,160
हा तोड़ सकते हैं लेकिन शरीर को नष्ट क्यों करेंगे परमात्मा सुनिए

117
00:08:05,160 --> 00:08:09,720
क्यों करेंगे एक अलग देखिए ऐसे नहीं हो पाएगा

118
00:08:09,720 --> 00:08:14,000
ऐसे नहीं हो पाएगा क्यों मत बताइए हमको यह बताइए

119
00:08:14,000 --> 00:08:18,280
कि जब आपने कहा कि वो सभी नियमों को तोड़ सकते हैं किसी नियम के नीचे नहीं है

120
00:08:18,280 --> 00:08:22,480
तो इस नियम के नीचे क्यों है यह बताइए मैं बता सकता

121
00:08:22,480 --> 00:08:26,520
हूं आपको यह कोई नियम नहीं यह कोई नियम

122
00:08:26,520 --> 00:08:30,640
नहीं है कि परमात्मा आप कोही नष्ट करने

123
00:08:30,640 --> 00:08:34,760
की बात कर रहे परमा को नष्ट करने की बात नहीं कर रहा हूं

124
00:08:34,760 --> 00:08:39,080
ध्यान से सुनिए मैंने कहा अपना शरीर नष्ट कर सकते हैं कि नहीं

125
00:08:39,080 --> 00:08:43,160
मैंने नहीं परमात्मा नष्ट हो सकता है कि नहीं ध्यान से

126
00:08:43,160 --> 00:08:48,160
सुनिए अपना शरीर नष्ट कर सकते हैं कि नहीं आपने

127
00:08:48,160 --> 00:08:52,160
आपने कहा क्या पूर्ण परमात्मा कबीर साहिब जी अपना शरीर नष्ट कर सकते हैं मैंने

128
00:08:52,160 --> 00:08:56,640
बहुत अच्छे से सुन लिया मैं आपके बा प्रश्न का उत्तर दे रहा हूं

129
00:08:56,640 --> 00:09:00,880
प्रथम तो सुनिए कि परमात्मा को सभी में पवित्र

130
00:09:00,880 --> 00:09:05,040
गीता जी में मैं आपको प्रमाण पूछूंगा अभी

131
00:09:05,040 --> 00:09:09,800
बहुत लंबा सेशन है एक चैप्टर खत्म हो जाए मेरी बात को

132
00:09:09,800 --> 00:09:14,080
सु मुझे आप प्रमाण मत दीजिए मुझे आप प्रमाण मत दीजिए

133
00:09:14,080 --> 00:09:18,120
प्रमाण बोलेंगे मैं आपको काउंटर करूंगा मैंने आपसे प्रमाण नहीं पूछा है

134
00:09:18,120 --> 00:09:22,360
मैं पूछूंगा उस भी आएंगे हम प्रमाण प भी आएंगे पर अभी बात

135
00:09:22,360 --> 00:09:26,640
चल रही है कि जब एक तरफ आप कह रहे हैं वो किसी नियम के नीचे नहीं है

136
00:09:26,640 --> 00:09:31,080
तो फिर यह बताइए कि वो उस नियम के नीचे कैसे है और अगर इस नियम के नीचे है

137
00:09:31,080 --> 00:09:35,760
तो फिर आप यह क्यों कह रहे हैं कि वो किसी नियम के नीचे नहीं है दोनों में से एक बात करिए

138
00:09:35,760 --> 00:09:40,040
परमात्मा की सपर सत्ता रहती है पहले सुन ले बहुत अच्छे से मैं आपको कोई प्रमाण

139
00:09:40,040 --> 00:09:45,480
अभी खोल के नहीं दिखा रहा हूं जब आप प्रमाण मांगेंगे जब दिखाऊंगा ल

140
00:09:45,480 --> 00:09:49,520
कंट्रोल करिए अपने ऊपर जो आपको सिखाया गया ना जिस चीज की ट्रेनिंग की गई

141
00:09:49,520 --> 00:09:53,560
है उसको थोड़ा साथ के रखिए हम पूछेंगे आएंगे उस पर सर सुनिए एक मिनट क्या

142
00:09:53,560 --> 00:09:54,120
सिखाया गया

143
00:09:54,120 --> 00:09:58,680
है सिखाया नहीं पूरा विश्व देख रहा है हमें सिखाया जाएगा मैं सुनो

144
00:09:58,680 --> 00:10:03,480
आपने परमात्मा अपने शरीर को नष्ट कर सकता है या नहीं

145
00:10:03,480 --> 00:10:07,600
इस चीज को इस चीज को मैं बारबार 100 बार कह देता हूं मैंने सुन ली अब उसका उत्तर

146
00:10:07,600 --> 00:10:11,760
सुनिए आप बोलिए को मैं प्रमाण नहीं दूंगा केवल

147
00:10:11,760 --> 00:10:15,760
सुन लेना मेरी बात को जैसे आप सुन रहेता का

148
00:10:15,760 --> 00:10:19,840
नाम मत लेना अभी बोलिए मतलब मैं

149
00:10:19,840 --> 00:10:24,080
कहीं की शर कर रहा हूं तो मैं मैप का नाम नहीं लूगा लूगा भाई

150
00:10:24,080 --> 00:10:28,080
अभी हम सिर्फ तर्क की बात कर रहे प्रमाण पर भी आएंगे अभी

151
00:10:28,080 --> 00:10:32,080
सिर्फ आपकी रा जानना चाह रहा हूं कि आपको कि आपके अनुसार

152
00:10:32,080 --> 00:10:36,400
परमात्मा क्या है मुझे उसके लिए प्रमाण की आवश्यकता नहीं है मैं आपकी

153
00:10:36,400 --> 00:10:40,600
थिंकिंग जानना चा रहा हूं पहले हां मैं वही बता रहा हूं सुनिए

154
00:10:40,600 --> 00:10:45,360
पहले परमात्मा अनासी है गीता वेद की बात नहीं कर रहा हूं सुनिए

155
00:10:45,360 --> 00:10:49,560
परमात्मा अविनाशी है ईश्वर अंश जीव अविनाशी

156
00:10:49,560 --> 00:10:54,120
परमात्मा अविनाशी है और अविनाशी वस्तु का कभी नाश नहीं हो सकता

157
00:10:54,120 --> 00:10:58,160
सर्वप्रथम परमात्मा अपने शरीर को ही नष्ट कर देगा

158
00:10:58,160 --> 00:11:02,320
ये छोटी सी बात है परमात्मा अपने शरीर को ही नष्ट कर देगा भला

159
00:11:02,320 --> 00:11:06,320
बचेगा क्या इसलिए उसे परमा मान लिया मान

160
00:11:06,320 --> 00:11:09,120
लिया क्योंकि परमात्मा अगर नष्ट कर देगा अपने

161
00:11:09,120 --> 00:11:14,080
शरीर को तो कुछ बचेगा नहीं इसलिए वह अपने शरीर को नष्ट नहीं कर सकता

162
00:11:14,080 --> 00:11:18,920
मेरा म मानना पड़ेगा ना मैं मैं परमात्मा के

163
00:11:18,920 --> 00:11:23,880
के नीचे तो मानना पड़ेगा ना भाई साहब किसके नीचे

164
00:11:23,880 --> 00:11:27,960
एक नियम के नीचे मानना पड़ेगा कि वो अपने को नष्ट नहीं कर सकता उसका न

165
00:11:27,960 --> 00:11:32,360
के प्रकार कुछ भी दे दो इस नियम के नीचे तो है

166
00:11:32,360 --> 00:11:36,400
ना ये नियम नहीं है सर कहां पर आप सो रहे आप अपने शरीर को नष्ट

167
00:11:36,400 --> 00:11:40,440
कर सकते हो अपनी आत्मा को नष्ट कर सकते हो क्या मैं आपसे प्रश्न करता हूं बताइए

168
00:11:40,440 --> 00:11:44,560
आगे आऊंगा मेरे भाई कर सकते हो बिल्कुल

169
00:11:44,560 --> 00:11:49,200
मेरा शरीर नष्ट हो सकता है और आपने जो अभी तर्क दिया

170
00:11:49,200 --> 00:11:53,440
अभी मैं आपका तर्क ले लेता हूं आपने कहा जी

171
00:11:53,440 --> 00:11:57,880
सुनि सुनिए सुनिए सुनिए सुनिए आपने कहा

172
00:11:57,880 --> 00:12:02,000
जीव अविनाशी है परमात्मा भी अविनाशी है जीव अविनाशी

173
00:12:02,000 --> 00:12:06,080
है कि नहीं जी बिल्कुल अविनाशी है

174
00:12:06,080 --> 00:12:10,520
नहीं प्लीज देखिए कट टू कट बात करिए मैं पूछ रहा हूं जीव अविनाशी

175
00:12:10,520 --> 00:12:14,600
है कि नहीं बिल्कुल है है उसका शरीर नष्ट

176
00:12:14,600 --> 00:12:18,600
होता है कि नहीं किसका जीव

177
00:12:18,600 --> 00:12:22,920
का भाई आत्मा अविनाशी है यह शरीर तो नाशवान है

178
00:12:22,920 --> 00:12:24,120
जीव कौन

179
00:12:24,120 --> 00:12:28,120
है जो मैं आवाज मेरी सुन रहे हो ना यह जीव की आवाज है आत्मा की

180
00:12:28,120 --> 00:12:32,160
आवाज है य हां तो तो आत्मा आत्मा जब

181
00:12:32,160 --> 00:12:36,480
कोई शरीर धारण कर रही है तो शरीर धार शरीर नष्ट हो रहा है ना आत्मा का

182
00:12:36,480 --> 00:12:40,480
तो भाई बिल्कुल बिल्कुल होगा वो तो तो फिर इसका

183
00:12:40,480 --> 00:12:44,800
मतलब अविनाशी का शरीर भी नष्ट हो सकता है मिनट

184
00:12:44,800 --> 00:12:49,240
सुनिए अब थोड़ा शांति बना के रखिए सर एक मिनट मैं बताता हूं आपको

185
00:12:49,240 --> 00:12:53,360
हम आप यह कहना चाहते हो इधर देखिए सर आप कहना

186
00:12:53,360 --> 00:12:57,360
चाहते हो कि जिस प्रकार आत्मा शरीर धारण कर रही है ऐसे परमात्मा

187
00:12:57,360 --> 00:13:00,640
शरीर धारण नहीं करता

188
00:13:00,640 --> 00:13:05,080
अब आ गया दूसरा नंबर नियम निम नंबर टू

189
00:13:05,080 --> 00:13:09,880
पहले क्लियर होने दो पहले क्लियर होने दो ऐसे काम चलेगा

190
00:13:09,880 --> 00:13:14,000
चल रहे चल रहे बोलिए क्लियर करिए क्लियर करिए बोलिए

191
00:13:14,000 --> 00:13:18,080
जिस प्रकार आत्मा शरीर को धारण करती है जैसे

192
00:13:18,080 --> 00:13:22,080
इस शरीर पर मैंने ये वस्त्र धारण कर लिया

193
00:13:22,080 --> 00:13:26,120
ठीक है शरीर पर वस्तर धारण किया स्तर का नाश हो गया शरीर जो का

194
00:13:26,120 --> 00:13:29,760
त्यों है और वस्तर खरीद लिया

195
00:13:29,760 --> 00:13:33,760
आत्मा और शरीर का परमात्मा तेज पुंज और

196
00:13:33,760 --> 00:13:38,000
नूरी शरीर है परमात्मा का तेज पुंज और नूरी

197
00:13:38,000 --> 00:13:39,280
शरीर है ठीक

198
00:13:39,280 --> 00:13:43,440
है नाम परमात्मा के शरीर में ना जो परमात्मा

199
00:13:43,440 --> 00:13:47,640
का शरीर है वो नूर का बना हुआ है स्नो वाइट बर्फ जैसा

200
00:13:47,640 --> 00:13:51,640
यानी परमात्मा का पासा शरीर नहीं है हमारे तुम्हारे जैसा परमात्मा टट्टी करने

201
00:13:51,640 --> 00:13:55,640
नहीं जाता पेशाब करने नहीं जाता परमात्मा का नूरी शरीर

202
00:13:55,640 --> 00:14:00,480
है वो जन्म मृत्यु में नहीं आता और वो साकार

203
00:14:00,480 --> 00:14:04,640
जी तो बात ये कर रहे हैं

204
00:14:04,640 --> 00:14:08,720
हम बात ये कर रहे हैं कि हम बात ये कर रहे हैं कि

205
00:14:08,720 --> 00:14:12,800
जब आत्मा अविनाशी होते हुए

206
00:14:12,800 --> 00:14:16,920
शरीर धारण कर सकती है तो कबीर शरीर धारण क्यों नहीं कर सकते

207
00:14:16,920 --> 00:14:21,040
हैं आत्मा अविनाशी होते हुए गर्भ

208
00:14:21,040 --> 00:14:25,080
से जन्म ले सकती है तो कबीर क्यों नहीं ले सकते हैं बहुत ही

209
00:14:25,080 --> 00:14:29,880
सुंदर प्रश्न किया बहुत ही सुंदर जिस पर मैं आपको पूछ

210
00:14:29,880 --> 00:14:33,880
सर यह बताइए मैं तो ज नहीं हं ना मैंने

211
00:14:33,880 --> 00:14:38,080
तो रामपाल जी से नाम संत रामपाल जी से मैं आपसे पूछना

212
00:14:38,080 --> 00:14:42,640
यह चाहूंगा कि आत्मा की उत्पत्ति कहां से हुई आप बताइए

213
00:14:42,640 --> 00:14:46,880
मेरा प्रश्न है इसका जवाब विवान

214
00:14:46,880 --> 00:14:50,960
आत्मा अनित्य है कोई उत्पत्ति नहीं है जीव ब्रह्म

215
00:14:50,960 --> 00:14:54,400
आत्मा ये सब अनित्य है एक मिनट बस मजा

216
00:14:54,400 --> 00:14:59,200
आ गया डिबेट का सच में आपकी से हुई

217
00:14:59,200 --> 00:15:03,640
आपकी उत्पत्ति कहा से हुई आपकी माता के गर्भ से हुई

218
00:15:03,640 --> 00:15:07,720
माता के गर्भ से आत्मा हो आत्मा को भी किसी ने उत्पन्न

219
00:15:07,720 --> 00:15:12,720
किया होगा नहीं नहीं किया बिल्कुल सफेद

220
00:15:12,720 --> 00:15:17,600
झूठ तो ठीक है आपका कहने का मतलब है

221
00:15:17,600 --> 00:15:21,760
ट काफ दिन आपकी इस डिबेट को बहुत ही डिबेट रोमांच

222
00:15:21,760 --> 00:15:25,960
हो गई है डट जाइए एक मिनट आपने ऐसा है

223
00:15:25,960 --> 00:15:31,960
आपकी सुनने केवल नहीं आए मैं बोल रहा हूं आप चुप हो जा

224
00:15:32,440 --> 00:15:37,240
आप चुप हो नहीं अभी चुप होंगे नहीं आप

225
00:15:37,240 --> 00:15:40,280
मुझे बोलने देंगे

226
00:15:40,280 --> 00:15:45,320
नहीं इसको लाइव सेशन को बंद

227
00:15:45,320 --> 00:15:49,920
करूंगा बोने देंगे बोने दय

228
00:15:49,920 --> 00:15:55,360
पूछ रहा की उत्पति बताइए

229
00:15:55,360 --> 00:15:59,400
मुझे सुनि सुनि अब सुनिए

230
00:15:59,400 --> 00:16:03,480
जी हमारी बात यह हो रही है क्या कबीर के ऊपर

231
00:16:03,480 --> 00:16:07,880
कोई भी नियम लागू होता है या नहीं बस यह बताओ होता है कि नहीं

232
00:16:07,880 --> 00:16:11,880
कम हो गई वो मैंने क नहीं हुई खत्म अभी दो नियम

233
00:16:11,880 --> 00:16:15,880
आ गए अभी दो नियम आ गए पहला नियम है व अपने शरीर का नाश

234
00:16:15,880 --> 00:16:20,320
नहीं कर सकता दूसरा नियम है वो शरीर धारण नहीं कर सकता

235
00:16:20,320 --> 00:16:24,320
आत्मा की तर गर्भ से नहीं आ सकता वो जैसे आत्मा जन्म ले रही है

236
00:16:24,320 --> 00:16:28,400
मुझे देखिए देखिए अगर आप लड़ाई करने आए जिस तरह से

237
00:16:28,400 --> 00:16:32,560
आप आवेश में आकर के बात कर रहे हैं लड़ाई करने आए हैं तो मैं इसको

238
00:16:32,560 --> 00:16:36,880
चर्चा को तुरंत बंद करूंगा आराम से ठीक है आप मुझे

239
00:16:36,880 --> 00:16:40,960
बताइए कबीर के ऊपर अब दो नियम आ गए हैं पहला नियम है

240
00:16:40,960 --> 00:16:45,160
कि कबीर जो है अपना शरीर नष्ट नहीं कर सकते और दूसरा

241
00:16:45,160 --> 00:16:47,640
नियम है कि कबीर जो है आत्मा की तरह

242
00:16:47,640 --> 00:16:52,000
शरीर धारण नहीं कर सकते तो एक चीज आपने बोली एक मिनट एक

243
00:16:52,000 --> 00:16:56,400
मिनट एक मिनट उसका शरीर जो कबीर है वो अविनाशी

244
00:16:56,400 --> 00:17:00,720
है उसका वो नहीं होता तो मैं आपको बता दूं देह के नाश से

245
00:17:00,720 --> 00:17:05,400
आत्मा का नाश नहीं होता और देह के भेद से आत्मा में भेद नहीं होता

246
00:17:05,400 --> 00:17:09,640
इसका अर्थ यह है कि मैं जब यह पूछ रहा हूं कि क्या कबीर

247
00:17:09,640 --> 00:17:13,960
शरीर धारण कर सकते हैं कि नहीं तो यह बताइए जब जीव आत्मा धारण

248
00:17:13,960 --> 00:17:18,000
कर सकती है शरीर तो कबीर क्यों नहीं कर सकते और क्योंकि

249
00:17:18,000 --> 00:17:22,120
तो बाद की बात है क्योंकि तो बाद की बात है आप तो पहले यह स्वीकार करिए

250
00:17:22,120 --> 00:17:26,200
कि हां इन नियमों के नीचे कबीर भी है वो शरीर धारण

251
00:17:26,200 --> 00:17:30,520
नहीं कर सकता वो अपनी दे का नाश कर सकता

252
00:17:30,520 --> 00:17:34,600
नहीं है परमात्मा अपनी देह का नाश नहीं कर सकता वो मां के

253
00:17:34,600 --> 00:17:38,600
गर्भ से नहीं आता वह स्वयं प्रकट होता है तीन अब

254
00:17:38,600 --> 00:17:42,600
आपने दो बात कही वो मां के गर्भ से नहीं आ सकता और

255
00:17:42,600 --> 00:17:46,800
वो अपनी देह का नाश नहीं कर सकता दो बात आपने कह दी आपने

256
00:17:46,800 --> 00:17:50,840
शुरू में कहा आपने शुरू में ये कहा आपने शुरू

257
00:17:50,840 --> 00:17:54,880
में ये कहा वो सब कुछ कर सकता है जी परमात्मा कबीर साहिब जी

258
00:17:54,880 --> 00:17:59,000
अपनी देह का नाश नहीं करते भाई

259
00:17:59,000 --> 00:18:02,800
आपने अभी अभी कहा कि वो नहीं कर सकते अभी आपने

260
00:18:02,800 --> 00:18:06,920
शुरू में कहा था कर सकते हैं मैंने ये नहीं कहा कि नहीं

261
00:18:06,920 --> 00:18:11,160
कर सकते मैंने यह कहा है वह अपनी देह का नाश नहीं करते कबीर साहिब

262
00:18:11,160 --> 00:18:15,760
जी देखिए करते करते हैं कि नहीं वो बाद की बात है अभी मुझे उनकी कैपेबिलिटी

263
00:18:15,760 --> 00:18:20,160
बताइए देह का नाश कर सकते हैं या नहीं ये बताइए भाई

264
00:18:20,160 --> 00:18:24,160
नहीं करते नहीं करते फिर वही नहीं करते मैं पूछ रहा हूं नहीं कर

265
00:18:24,160 --> 00:18:28,160
सकते क्या सकते ये विधान है भगवान नष्ट ही नहीं

266
00:18:28,160 --> 00:18:32,680
होता भगवान नष्ट होता ही नहीं ठीक है तो इसका मतलब

267
00:18:32,680 --> 00:18:36,800
कबीर पर ये नियम लागू है कि वो अपने देह का नाश नहीं कर सकते वो गर्भ

268
00:18:36,800 --> 00:18:40,880
से नहीं आ सकते जब सच्चाई है तो उससे भाग क्यों रहे हो ठीक है इसको मानो ना

269
00:18:40,880 --> 00:18:45,040
कि य दो नियम लागू है भाग तो आप रहे हो परमात्मा पर नियम

270
00:18:45,040 --> 00:18:50,000
लागू कहां से हुआ यह बताइए आप ही तो कह रहे हो गर्भ से नहीं आ सकता

271
00:18:50,000 --> 00:18:54,080
बिल्कुल नहीं आ सकता ये क्या है अच्छा ये क्या है जो आप मुझे बता रहे हो ये क्या

272
00:18:54,080 --> 00:18:58,160
है व्ट इ एक मिनट जी बता रहा हूं

273
00:18:58,160 --> 00:19:02,200
गीता जी अब मैं प्रमाण दूंगा आपको ठीक है फ फिर

274
00:19:02,200 --> 00:19:06,360
प्रमाण मुझे आप पहले बताइए कि नियम है कि नहीं जो आप बोल रहे

275
00:19:06,360 --> 00:19:11,000
हो क्या है ये खेल है तमाशा है क्या हैय परमात्मा

276
00:19:11,000 --> 00:19:15,000
से नहीं आ सकता इसको मैं क्या समझू तमाशा तो आपने बना रखा

277
00:19:15,000 --> 00:19:18,040
है य ला तो देखिए वर्थ की चर्चा अगर

278
00:19:18,040 --> 00:19:22,120
करेंगे तो मैं इस लाइव को बंद करूंगा आप मुझे

279
00:19:22,120 --> 00:19:26,240
बताइए आप मुझे प्लीज ये बताइए भाई साब मैं हाथ जोड़कर विनती कर रहा

280
00:19:26,240 --> 00:19:30,400
हूं आपसे आप मुझे बताइए मैं हाथ

281
00:19:30,400 --> 00:19:34,680
जोड़ बता जो आपने लाइन कही है आपने जो लाइन

282
00:19:34,680 --> 00:19:38,880
कही है कि परमात्मा गर्भ से नहीं आ सकता परमात्मा जो है अपनी

283
00:19:38,880 --> 00:19:43,280
दे का नाश नहीं कर सकता यह क्या है

284
00:19:43,280 --> 00:19:49,280
शांति से आप सुन नहीं रहे तो फिर कैसे बता पागा मैं क बात

285
00:19:51,960 --> 00:19:56,400
करता कबीर साहिब जी पूर्ण परमात्मा

286
00:19:56,400 --> 00:20:01,120
अपने स्वयं मां के गर्भ से

287
00:20:01,120 --> 00:20:03,960
नहीं आ सकते

288
00:20:03,960 --> 00:20:08,080
सुनो हा बता रहा हूं जो

289
00:20:08,080 --> 00:20:12,280
बता रहे एक मिनट सुनो तो अब आप आ बात कर आवेश

290
00:20:12,280 --> 00:20:16,360
में नहीं बोलिए बोलिए बोलिए कब जी जो मां के

291
00:20:16,360 --> 00:20:20,560
गर्भ जन्म लेता है उसका शरीर 100%

292
00:20:20,560 --> 00:20:24,760
छूटता है यह भगवान का विधान है कि जो मां

293
00:20:24,760 --> 00:20:29,080
के गर्भ से आएगा और जन्म लेगा उसका शरीर नाशवान होगा

294
00:20:29,080 --> 00:20:33,200
आत्मा जीवना होगी समझो कबीर साहिब जी पर यह

295
00:20:33,200 --> 00:20:37,280
नियम लागू आप कैसे कर सकते हैं कैसे आप जबरदस्ती कबीर साहिब जी

296
00:20:37,280 --> 00:20:41,560
को मा के कब से बुला सकते हैं परमात्मा मैं नहीं बुला रहा हूं

297
00:20:41,560 --> 00:20:45,640
मेरे भाई मेरा प्रश्न दूसरा है प्रश्न ये पूछा

298
00:20:45,640 --> 00:20:49,720
है मैंने प्रश्न य पूछा है शिवम जी कि जो आप मुझे

299
00:20:49,720 --> 00:20:53,920
बता रहे हैं कि वोह गर्भ से नहीं आ सकता वो अपनी देह

300
00:20:53,920 --> 00:20:57,920
का नाश नहीं कर सकता ये इसको मैं क्या समझूं यह व्यंग

301
00:20:57,920 --> 00:21:02,320
है यह एक मिनट यह व्यंग है कहानी है

302
00:21:02,320 --> 00:21:06,400
कथा है या कबीर के संबंध में ईश्वर के संबंध में कुछ नियम

303
00:21:06,400 --> 00:21:07,120
है क्या

304
00:21:07,120 --> 00:21:11,160
है ये सर एक मिनट शांतिपूर्वक सुनिए आप बारबार एक

305
00:21:11,160 --> 00:21:16,000
बात कह रहे मैं उस पर उत्तर दे चुका हूं फिर भी आपके समझ नहीं आ रहा य अलग बात

306
00:21:16,000 --> 00:21:20,080
है आपसे मैंने पूछा देखिए आपसे मैंने ये पूछा

307
00:21:20,080 --> 00:21:24,240
है जो बात आपने मुझे कबीर के बारे में बताई है ये क्या

308
00:21:24,240 --> 00:21:28,920
है ये कथा है प्रवचन है कहानी है कविता है या

309
00:21:28,920 --> 00:21:34,920
क्या हैय जो आपने मुझे बता ये सच्चाई है य

310
00:21:36,080 --> 00:21:40,200
स नहीं है य सचाई रूपी नियम नहीं

311
00:21:40,200 --> 00:21:46,200
है स रूप नियम नहीं है आवे में बात

312
00:21:47,920 --> 00:21:48,920
कर

313
00:21:48,920 --> 00:21:53,240
हम लोग बहुत सारी अच्छी चर्चा कर सकते हैं आपको कुछ चीज एक्सेप्ट

314
00:21:53,240 --> 00:21:58,720
करनी होंगी मैं आपसे पूछ रहा य सचाई रूपी नियम नहीं है

315
00:21:58,720 --> 00:22:02,720
क्या चीज जो आप बोल रहे हो भाई साहब इसको नियम आप कैसे कह सकते हो नियम

316
00:22:02,720 --> 00:22:06,720
क्या होता हैय किस प्रकार की सच्चाई है

317
00:22:06,720 --> 00:22:10,440
चलिए बताइ जैसे

318
00:22:10,440 --> 00:22:14,680
मेराम नियम होता है उसके बाहर जाएगा तो य हो जाएगा उसके

319
00:22:14,680 --> 00:22:19,040
बाहर जाएगा य हो जाएगा अंदर रहेगा तो ऐसा खेलने के योग्य है

320
00:22:19,040 --> 00:22:25,040
यह सचाई क्या हो सचाई है अंदर के लिए नियम है

321
00:22:27,520 --> 00:22:31,680
नाने सच्चाई सत्य का कभी नाश नहीं होता यह सच्चाई होती

322
00:22:31,680 --> 00:22:35,760
है मेरे भाई आपने अभी एक बात कही आप

323
00:22:35,760 --> 00:22:39,920
मेरी बात को सुन नहीं रहे हैं आपका प्रश्न य आप विषय

324
00:22:39,920 --> 00:22:44,240
से हटकर बात कर रहे हैं मैंने बोला है ये जो सच्चाई है

325
00:22:44,240 --> 00:22:48,320
सच्चाई में हमें बताया क्या जा रहा है नियम है कथा है क्या है क्या

326
00:22:48,320 --> 00:22:52,400
है डिबेट का डिबेट में यही है कि आपने जितनी भी डिबेट

327
00:22:52,400 --> 00:22:56,400
की है आपने सामने वाले नहीं सुनी है सिर्फ आप अपनी ही

328
00:22:56,400 --> 00:23:00,520
कहते रहते हो सबसे बड़ी कमी आपकी ये है अभी मैं आपसे पूछ रहा

329
00:23:00,520 --> 00:23:04,520
हूं दोबारा आप मुझे यह बताइए कि

330
00:23:04,520 --> 00:23:08,600
यह जो सच्चाई आप मुझे बता रहे हैं इसमें आप मुझे बता क रहे हैं किस प्रकार की

331
00:23:08,600 --> 00:23:12,680
सच्चाई है ये वो बताइए उसम क्या है वो अगर

332
00:23:12,680 --> 00:23:16,800
ये केवल सच्चाई है इससे कोई लेना देना नहीं है तो क्या मैं य प्रचार प्रसार कर सकता हूं व

333
00:23:16,800 --> 00:23:21,240
कबीर भी गर्भ से जन्म लेते हैं कर सकता क्या

334
00:23:21,240 --> 00:23:26,040
गलत है इसका मतलब इसका मतलब मुझे इसका मतलब नियम है ना ये

335
00:23:26,040 --> 00:23:31,920
नियम है ना जो मुझे अगर मैं उसके विरु बात करूंगा तो गलत हो जाएगी

336
00:23:31,920 --> 00:23:36,560
बात सुनो इस आप नियम कह लो लेकिन मैं इसको नियम नहीं मानता

337
00:23:36,560 --> 00:23:40,720
आपके मुताबिक य नियम है ठीक है तो आपके

338
00:23:40,720 --> 00:23:42,680
मुताबिक य क्या है एक

339
00:23:42,680 --> 00:23:46,720
मिनट रुको मेरे मुताबिक क्या है वो मैं बहुत अच्छे से जानता हूं

340
00:23:46,720 --> 00:23:51,160
मेरे मुताबिक यह है कि सच और बिल्कुल वास्त

341
00:23:51,160 --> 00:23:55,280
सुनिए सच तो ये भी है कबीर भगवान है सच तोय भी आपके अनुसार

342
00:23:55,280 --> 00:23:59,320
कबीर भगवान है सच तोय भी है मैं आपसे डिबेट

343
00:23:59,320 --> 00:24:03,440
आगे इसलिए कर पाऊंगा कि मैं पहले आपका ये मान लेता हूं सुनो

344
00:24:03,440 --> 00:24:07,440
कि ये एक नियम है जो आप नियम चिल्ला रहे हैं ना तो नियम मान लेता हूं एक मिनट

345
00:24:07,440 --> 00:24:12,160
सुनना आपका प्रश्न य लाइव चल रहा है सारे लोग देख रहे हैं

346
00:24:12,160 --> 00:24:16,480
क्या कबीर बाद में ये मत कहना आपने प्रश्न नहीं कर पाया क्या कबीर

347
00:24:16,480 --> 00:24:21,080
मां के गर्भ से जन्म ले सकते हैं क्या कबीर अपने श

348
00:24:21,080 --> 00:24:25,240
कर सकते हैं हा ठीक है हा मेरा

349
00:24:25,240 --> 00:24:29,440
प्रति उत्तर यह है कबीर साहिब जी मा के घर से नहीं

350
00:24:29,440 --> 00:24:33,480
आते और ना ही फिर आते

351
00:24:33,480 --> 00:24:37,600
उसम बोलो नहीं आ सकते जिससे लोग ये सुने कि उनके अंदर कुछ है जो

352
00:24:37,600 --> 00:24:41,600
वो नहीं कर सकते नहीं आ सकते क्योंकि मां के गर्भ से जो

353
00:24:41,600 --> 00:24:45,960
भी आता है वो गीता अध्याय 14 के लोक चर

354
00:24:45,960 --> 00:24:50,040
फर मैं बंद करूंगा आपका मुह बंद करूंगा मैं आपको हटा दूंगा प्रमाण अभी दिया

355
00:24:50,040 --> 00:24:54,640
तो मैं हटाऊ अभी प्रमाण मैं नहीं मांग रहा हूं अभी मैं हटाऊ आपको

356
00:24:54,640 --> 00:24:59,240
ह प्रमा प आऊगा

357
00:24:59,240 --> 00:25:03,280
हम अभी प्रमाण देंगे प्रमाण अभी मत दीजिए मैं आऊंगा प्रमाण प प्रमाण प

358
00:25:03,280 --> 00:25:07,360
हम आएंगे देखिए आपको चर्चा करनी है कि नहीं करनी है मैंने पहले ही

359
00:25:07,360 --> 00:25:11,760
क्लियर कर दिया था मैं प्रमाण अभी मांगूंगा आपसे मैं तो तैयार बैठा हूं

360
00:25:11,760 --> 00:25:15,920
के लिए आप मेरी सुनिए तो पहले आप प्रमाण मत बताइए अपनी

361
00:25:15,920 --> 00:25:20,160
बात रखिए प्रमाण मत दीजिए बात में जिस

362
00:25:20,160 --> 00:25:24,520
दूर मैं प्रमाण प आऊंगा भाई साहब अब एक बार और आपने कहा तो मैं हटाऊ

363
00:25:24,520 --> 00:25:28,600
मैं प्रमाण पर बात करूंगा अगला चैप्टर वही है अगला

364
00:25:28,600 --> 00:25:33,480
चैप्टर वही है मैं बात करूंगा प्रमाण ये बताओ भाता कौन है

365
00:25:33,480 --> 00:25:37,520
आप अभी मुझे ये बताइए कि उनके ऊपर

366
00:25:37,520 --> 00:25:41,680
उसके ऊपर ये नियम है कि नहीं है किसके ऊपर

367
00:25:41,680 --> 00:25:45,680
आपने कहा ना अभी मान लेता हूं कि उसके ऊपर नियम है कि वो माता के ग

368
00:25:45,680 --> 00:25:49,800
से नहीं आ सकता एक मिनट रुक जाओ आप ये बताइए शांति

369
00:25:49,800 --> 00:25:53,960
पूर्वक पूछ रहा हूं आवेश में नहीं परमात्मा के

370
00:25:53,960 --> 00:25:58,360
जो परमात्मा होता है ना समरथ जिसे कबीर भगवान हम कहते हैं

371
00:25:58,360 --> 00:26:02,640
कहते नहीं वो वास्तविक वेदों में भी प्रमाण है उसके उस परमात्मा

372
00:26:02,640 --> 00:26:06,920
पर धरती का कोई नियम काम नहीं करता और

373
00:26:06,920 --> 00:26:11,080
इन ब्रह्मांड का परमात्मा निर्बंध है किसी

374
00:26:11,080 --> 00:26:14,520
का बंधक नहीं प्रथम वो

375
00:26:14,520 --> 00:26:18,520
अपने अनुसार सारे कार्य करता है परमात्मा पर किसी

376
00:26:18,520 --> 00:26:22,800
का भी शक्ति नियम बंधन काम नहीं करता

377
00:26:22,800 --> 00:26:26,920
वह परमात्मा जो लीला करता है अपने अकॉर्डिंग स्शन

378
00:26:26,920 --> 00:26:31,400
टू अकॉर्डिंग स्थिति काम करता है भगवान ठीक है

379
00:26:31,400 --> 00:26:35,560
जी यानी कि अब इसका कंक्लूजन मैं ये लूं कि वो गर्भ

380
00:26:35,560 --> 00:26:39,560
से जन्म नहीं ले सकता नहीं लेता

381
00:26:39,560 --> 00:26:44,040
नहीं ले सकता ये आप ले सकते हो लेकिन मेरे मेरा जो वास्तविक

382
00:26:44,040 --> 00:26:48,040
सच्चा नियम है मैं नियम कहता हूं परमात्मा मां के गर्भ से जन्म

383
00:26:48,040 --> 00:26:52,040
नहीं लेता अच्छा ले सकता है

384
00:26:52,040 --> 00:26:56,120
नहीं ले सकता क्यों नहीं ले सकता पूछो क्योंकि

385
00:26:56,120 --> 00:27:00,440
उस भगवान बनाया बताइए अब मुझे आप ये

386
00:27:00,440 --> 00:27:04,560
बताइए गीता जी का जो ज्ञान है वो 5 प्र

387
00:27:04,560 --> 00:27:08,560
काल ने बोला है और 95 प्र पहले तो यह बताइए

388
00:27:08,560 --> 00:27:12,800
गीता जी आपके लिए प्रमाण है कि नहीं है बिल्कुल है मैं गीता जी को प्रमाण

389
00:27:12,800 --> 00:27:17,480
मानता हूं हा तो 5 प्र ज्ञान काल ने बोला है

390
00:27:17,480 --> 00:27:21,480
और 95 प्र किसने बोला है वो कबीर जी का

391
00:27:21,480 --> 00:27:26,960
ज्ञान है किसका कबीर जी का ज्ञान है वो

392
00:27:26,960 --> 00:27:31,040
किसका ज्ञान है एक मिनट रुक जाओ गीता का ज्ञान पहले तो

393
00:27:31,040 --> 00:27:35,240
आप यह कह रहे हैं कि 5 पर इसने बोला है कि 95 पर इसने

394
00:27:35,240 --> 00:27:39,720
बोला है मुझे यह बताइए कि जो गीता का ज्ञान है

395
00:27:39,720 --> 00:27:44,400
वो पूरा गीता का ज्ञान बोला किसने है

396
00:27:44,400 --> 00:27:48,600
भगवान श्री कृष्ण ने अच्छा

397
00:27:48,600 --> 00:27:53,080
अब मैं थोड़ा ज प्रमाण की बात कर लू आपसे ही

398
00:27:53,080 --> 00:27:57,360
पूछ मैं तो छोटा बालक हूं कल से रामपा

399
00:27:57,360 --> 00:28:01,360
भा मैं तो बालक गीता जी अ 11 श्लोक 32

400
00:28:01,360 --> 00:28:05,920
में कहा है हे अर्जुन मैं बड़ा हुआ काल हूं सर्व जीवों को खाने के

401
00:28:05,920 --> 00:28:10,000
उत्पन्न हुआ हूं प्रकट हुआ हूं ठीक अब

402
00:28:10,000 --> 00:28:12,040
ये बताइए जब

403
00:28:12,040 --> 00:28:16,040
श्री कृष्ण जी ने गीता का ज्ञान दिया तो भा सा

404
00:28:16,040 --> 00:28:20,080
विषयात हो रहा है मैं आपके प्रश्न पर आ जाऊंगा अभी हमारा प्रश्न चालू

405
00:28:20,080 --> 00:28:21,200
यहां से हुआ था

406
00:28:21,200 --> 00:28:25,440
क्या गीता जी का 5 प्र ज्ञान क्याल ने दिया है 95 प्र

407
00:28:25,440 --> 00:28:28,760
भगवान आपके अनुसार कबीर ने दिया है इस बात को आप मानते हैं

408
00:28:28,760 --> 00:28:33,080
कि नहीं मानते 100% 100% ज्ञान ब्रह्म

409
00:28:33,080 --> 00:28:37,160
काल ने बोला है श्री कृष्ण जी में प्रवेश हो हा

410
00:28:37,160 --> 00:28:41,520
ठीक है ब्रह्म काल ने बोला है श्री कृष्ण जी के अंदर

411
00:28:41,520 --> 00:28:45,520
अरे मेरे भाई जो मैं जो प्रश्न मैं पूछना चाह रहा हूं उसको आप समझ नहीं रहे

412
00:28:45,520 --> 00:28:46,040
हो

413
00:28:46,040 --> 00:28:50,280
क्या गीता जी का 5 प्र ज्ञान उसके विरोध में है

414
00:28:50,280 --> 00:28:54,480
भगवान के ईश्वर के विरोध में है 5 प्र कौन

415
00:28:54,480 --> 00:28:58,800
सा गीता जी का 5 प्र ज्ञान

416
00:28:58,800 --> 00:29:03,320
आपका जो परब्रह्म है उसके विरोध में है कि नहीं है

417
00:29:03,320 --> 00:29:07,600
मेरा आपका मैंने प्रश्न को समझ लिया है पहला पहले मेरी भी बात सुनो

418
00:29:07,600 --> 00:29:11,800
उतर सुनिए गीता आपका प्रश्न पहले तो आप बदल

419
00:29:11,800 --> 00:29:15,960
जाते हैं बीच में बात को नहीं मैंने चटर जब शुरू किया

420
00:29:15,960 --> 00:29:18,120
तो मैंने पहले कहा

421
00:29:18,120 --> 00:29:22,200
5 प्र वाली बात आपने प्रश्न का उत्तर ना देते हुए उस भी एक क्वेश्चन

422
00:29:22,200 --> 00:29:26,440
किया कि वहा तो ये लिखा है पहले आप अपना जो विचार है उसको

423
00:29:26,440 --> 00:29:30,720
तो क्लियर करो कि ज्ञान मेरा वीडियो

424
00:29:30,720 --> 00:29:34,880
अटक रहा है सर जी एक बात

425
00:29:34,880 --> 00:29:39,560
सुनिए आपने जो कहा अभी जस्ट कि जो

426
00:29:39,560 --> 00:29:43,600
गीता ज्ञान है वो 5 पर तो काल ने

427
00:29:43,600 --> 00:29:47,800
बोला है और काल मैं आपकी बात समझ गया

428
00:29:47,800 --> 00:29:52,040
कि गीता जी का ज्ञान जो है वो बोला पूरा कालने है बस 5 प्र अपने

429
00:29:52,040 --> 00:29:53,640
मन का बोला है

430
00:29:53,640 --> 00:29:59,440
सही बोला है ठीक है इसको इसको ले लू मैं आप

431
00:29:59,440 --> 00:30:04,280
इसको क्यों ले लेंगे आप तो आप बता दीजिए भाई 595

432
00:30:04,280 --> 00:30:08,280
प्र की बात आपका प्रश्न जो है व मैं समझ गया

433
00:30:08,280 --> 00:30:12,360
हूं सबने सुन लिया है अब मेरा उस पर उत्तर सुनिए आप

434
00:30:12,360 --> 00:30:16,560
बोलिए आप कहते हैं कि 5 आप पहले दिख नहीं रहे

435
00:30:16,560 --> 00:30:20,640
आप सामने आइए आप पहले जी

436
00:30:20,640 --> 00:30:22,600
बारिश हो रही है लाइट चली

437
00:30:22,600 --> 00:30:27,200
गई है इस वजह से नहीं दिख रहा हूं मेरा

438
00:30:27,200 --> 00:30:31,360
मैंने आपके प्रश् को सुन लिया है मेरा प्रश्न सुनिए आपका मतलब

439
00:30:31,360 --> 00:30:35,520
है कि 5 पर ज्ञान यह बोला है 95 पर वो अलग बोला है

440
00:30:35,520 --> 00:30:39,800
मेरा मतलब और ये है कि 100% गीता का ज्ञान

441
00:30:39,800 --> 00:30:44,120
काल ने ही बोला है आपने ये कहा था गीता का ज्ञान किसने बोला

442
00:30:44,120 --> 00:30:45,120
है

443
00:30:45,120 --> 00:30:49,360
मैंने मैं आपको ठीक कर दूं आपकी जो ज्ञान गंगा

444
00:30:49,360 --> 00:30:53,400
जो पुस्तक है उसमें ये दावा किया गया है कि गीता जी

445
00:30:53,400 --> 00:30:57,400
में 5 प्र ज्ञान जो है वो काल ने अपने मन से बोल

446
00:30:57,400 --> 00:31:01,600
दिया है और 95 प्र ज्ञान जो है वो वही स

447
00:31:01,600 --> 00:31:05,960
जो परमेश्वर है उसका ज्ञान है उसम बोला काल नहीं है आपकी

448
00:31:05,960 --> 00:31:09,960
बात में मान रहा हूं बोला काल नहीं है मगर 5 प्र अपने मन से बोला

449
00:31:09,960 --> 00:31:13,680
है 5 प्र अपने मन से बोला है

450
00:31:13,680 --> 00:31:17,800
परमेश्वर की जो ज्ञान है वो दिया है क्या यह सही है आप इसको

451
00:31:17,800 --> 00:31:21,800
सही मानते हैं बिल्कुल सही मानता हूं ज्ञान गंगा में लिखा

452
00:31:21,800 --> 00:31:26,240
है 100% सही है ठीक है अब मुझे बताइए

453
00:31:26,240 --> 00:31:30,680
यदि कोई व्यक्ति झूठा है

454
00:31:30,680 --> 00:31:35,040
तो उसकी हमें एक बात पर विश्वास और दूसरी बात पर अविश्वास

455
00:31:35,040 --> 00:31:39,520
कैसे सिद्ध होता है बताइए अगर गीता

456
00:31:39,520 --> 00:31:44,600
में 5 प्र झूठ लिखा है तो फिर वो बाकी के

457
00:31:44,600 --> 00:31:49,440
झूठ नहीं है यह कैसे सिद्ध होता है ब क्या है

458
00:31:49,440 --> 00:31:53,640
जी बिल्कुल होता है देखिए गीता जी में

459
00:31:53,640 --> 00:31:57,640
पा 95 पर जो आपका कहना मतलब है 95 पर वो

460
00:31:57,640 --> 00:32:00,640
तो सही है जो 5 पर उसने अपने मन से बोल दिया

461
00:32:00,640 --> 00:32:05,320
उसमें और 95 पर में सही और गलत कैसे पता चलेगा हा

462
00:32:05,320 --> 00:32:09,760
वो झूठ है या तो पूरा या वो पूरा सत्य है बिल्कुल

463
00:32:09,760 --> 00:32:13,800
हाता जी का ज्ञान प्रथम आपका मैं उसी

464
00:32:13,800 --> 00:32:17,960
पर लेकर चलूंगा ज्यादा टाइम नहीं लूंगा इस चीज में आपने कहा कि

465
00:32:17,960 --> 00:32:22,120
प्रथम जब मैंने पूछा गीता का ज्ञान किसने बोला तो आपके मुताबिक श्री कृष्ण

466
00:32:22,120 --> 00:32:26,200
जी ने बोला राइट हाया

467
00:32:26,200 --> 00:32:30,640
शीने बोला है मैं बता दगा कैसे बोला है मैं उसको प्रमाण सहित बताऊंगा

468
00:32:30,640 --> 00:32:35,080
अभी आप अपनी बात रखिए मैं भी प्रमाण सहित बता दूंगा संत रामपाल

469
00:32:35,080 --> 00:32:39,360
जी महाराज ने जो सच्चाई बिल्कुल प्रमाणित करके भाष करके दिखाया तुम्हारे संस्कृत

470
00:32:39,360 --> 00:32:43,920
के मंत्र नहीं बोले काल ने बोला है 5 पर जो ज्ञान

471
00:32:43,920 --> 00:32:48,040
ब्रह्म ने बोला है अपने मन से वो किस

472
00:32:48,040 --> 00:32:52,040
उद्देश्य से बोला है और क्या उसका बोलने का तरीका है आपको

473
00:32:52,040 --> 00:32:56,040
पता कैसे चला कि यहां पर ब्रह्म सच बोल रहा है यहां प झूठ बोल रहा है इसका आधार

474
00:32:56,040 --> 00:33:00,080
क्या है बिलकुल व्यक्ति एक जगह झूठ बोल सकता है तो वो हर

475
00:33:00,080 --> 00:33:04,560
जगह झूठ बोल सकता है जी बिल्कुल अब अब बिल्कुल आपकी बात

476
00:33:04,560 --> 00:33:09,280
मेरे समझ में आ गई हा यहां पर बहुत अच्छा आपने प्रश्न कर दिया

477
00:33:09,280 --> 00:33:13,920
कि वो पता कैसे चल गया बिल्कुल पारख होता है पार्की

478
00:33:13,920 --> 00:33:15,880
एक तरफ अब सुन लेना ना बाद में चिंगारी

479
00:33:15,880 --> 00:33:20,080
भरने लग जाओ तो बाद में अभी मैं काट देता हूं हटा देता हूं सुन लेना पर्क ही

480
00:33:20,080 --> 00:33:24,200
होता है एग्जांपल नहीं दे रहा हूं कोई लोकतंत्र कथा नहीं सुना रहा हूं

481
00:33:24,200 --> 00:33:28,360
पार्क ही होता है एक में तो लाल लेकर चलता हूं एक में लाल ड़ी

482
00:33:28,360 --> 00:33:32,520
ठीक है और जोरी के पास चलते हैं जो लाल ड़ी होगी उसे

483
00:33:32,520 --> 00:33:36,920
तो जोरी अलग निकाल के फेंक देगा और जो लाल होगा हीरा उसे रख लेगा

484
00:33:36,920 --> 00:33:41,120
तो यह परख है ना पारखी को होगी कि यह सही कहां पर है

485
00:33:41,120 --> 00:33:45,320
और कहां पर गलत है यह तो जरी ही बता सकता है जो उसके जानने वाला

486
00:33:45,320 --> 00:33:49,480
है उसके सारे ब्रह्मांड का पर्दा फास कर देता वही जानता है इस चीज को

487
00:33:49,480 --> 00:33:53,520
मेरा प्रश् का उतर यानी की यानी कि भगवत गीता

488
00:33:53,520 --> 00:33:58,200
आपके लिए अंतिम प्रमाण नहीं है कोई और चीज आपके लिए प्रमाण

489
00:33:58,200 --> 00:34:02,400
जिसके आधार पर आप यह देखते हो कि भगवत गीता में कौन सी बात हमारे लिए है और

490
00:34:02,400 --> 00:34:06,480
कौन सी बात हमारे लिए नहीं है आपके लिए अंतिम प्रमाण के रूप में भगवत

491
00:34:06,480 --> 00:34:10,840
गीता नहीं है बिल्कुल हैरी

492
00:34:10,840 --> 00:34:14,920
है एक मिनट आपसे पूछ रहा हूं मैं

493
00:34:14,920 --> 00:34:19,160
आपसे पूछ रहा हूं आपने जोरी का उदाहरण दिया कि जोरी जो है व

494
00:34:19,160 --> 00:34:23,160
जो खनिज होता है उसम देख लेता है कौन सा पारखी है और कौन सा रखने लायक

495
00:34:23,160 --> 00:34:27,920
है बो बोलने दो अभी आपने पूरा बोला ना

496
00:34:27,920 --> 00:34:31,000
नहीं बोला होता है वो देख लेता है यह हीरा है और यह

497
00:34:31,000 --> 00:34:35,400
हीरा नहीं है वो हटा देता है मगर उसके पास हीरे को पहचानने

498
00:34:35,400 --> 00:34:40,160
के पैरामीटर्स होते हैं अलग से उसके पास

499
00:34:40,160 --> 00:34:44,160
हीरे को पहचानने के अलग से पैरामीटर होते हैं तब वह हीरे में वो

500
00:34:44,160 --> 00:34:48,560
कर पाता है ये रखना है एक मिनट पूरा बोलने दो बोलो

501
00:34:48,560 --> 00:34:52,680
तब वोय फैसला कर पाता है कि कौन सा हीरा कौन सा हीरा नहीं है

502
00:34:52,680 --> 00:34:56,680
अब आपने ये कह दिया कि भैया जो भगवत गीता

503
00:34:56,680 --> 00:35:00,720
है उसम क्या सही है और क्या गलत है इसका आधार

504
00:35:00,720 --> 00:35:04,960
इसका जो है हमारे जो तत्वदर्शी तथाकथित रामपाल जी है वो तय करते हैं

505
00:35:04,960 --> 00:35:09,280
ठीक है नहीं बिल्कुल ऐसे नहीं बोल सकते

506
00:35:09,280 --> 00:35:13,280
पहले तो आप किसी संत के विषय में जिस तरीके

507
00:35:13,280 --> 00:35:17,320
से आप पिछली डिबेट में संत ऐसे रामपाल जी

508
00:35:17,320 --> 00:35:21,400
रामपाल रामपाल ठीक है

509
00:35:21,400 --> 00:35:25,600
जो है समय तथा तथाकथित पर नहीं हूंगा मैं अभी यह पूछ

510
00:35:25,600 --> 00:35:29,640
रहा हूं कि अगर हम गीता को प्रमाण मानते हैं तो

511
00:35:29,640 --> 00:35:34,000
हमें अन्य प्रमाण के आधार पर गीता को जांचने की वो नहीं है

512
00:35:34,000 --> 00:35:38,400
और अगर अन्य कोई प्रमाण है तो गीता हमारे लिए अंतिम प्रमाण नहीं है तो आपको पहले

513
00:35:38,400 --> 00:35:43,240
सीखना होगा कि गीता आपके लिए अंतिम प्रमाण है कि नहीं है

514
00:35:43,240 --> 00:35:46,680
जी अब आपने अपनी बात कह लिए मैं कहूं

515
00:35:46,680 --> 00:35:52,680
बोलिए गीता जी मेरे लिए अंतिम प्रमाण

516
00:35:52,840 --> 00:35:56,880
हैमा इसका मतलब उसम जो लिखा है वो सच है और

517
00:35:56,880 --> 00:36:00,880
अगर उस झूठ का फैसला कर पा रहे हो अगर उसम स झूठ का फैसला

518
00:36:00,880 --> 00:36:05,160
कर यानी की उसको जांचने के लिए भी आपके पास कोई और प्रमाण

519
00:36:05,160 --> 00:36:09,280
है जी रु गीता में ही

520
00:36:09,280 --> 00:36:13,440
प्रमाण है उसे जांचने का अब पूरी बात कने दोगे

521
00:36:13,440 --> 00:36:17,680
जभी तो आप तो अपनी पूरी कह लो हमें रोक दो गीता जी में उसे

522
00:36:17,680 --> 00:36:21,720
जांचने का वास्तविक जो वास्तविक रास्ता दे

523
00:36:21,720 --> 00:36:25,760
रखा है ना कि ये लिखा है वो बताया है गीता अध्याय

524
00:36:25,760 --> 00:36:30,280
15 शलोक एक से चार में त श्री संत बताएंगे अच्छा

525
00:36:30,280 --> 00:36:34,360
क्या बताया है बताओ जरा गीता जी में स्पष्ट कहा

526
00:36:34,360 --> 00:36:38,360
है कि जो मतलब गीता जी ये बता रही गीता

527
00:36:38,360 --> 00:36:42,600
जी ने यह बताया है कि मैंने कहीं कहीं पर जहां पर झूठ बोला है उसको पहचानने

528
00:36:42,600 --> 00:36:46,680
के लिए तत्वदर्शी संत के पास जाओ जहां जहां मैंने झूठ बोला है पूरी

529
00:36:46,680 --> 00:36:51,560
बात सुनो पूरी बात सुन हां सुना सुला

530
00:36:51,560 --> 00:36:55,680
जहां जहां मैंने सच बोला है ये नहीं ये तो बात क्या होती है तो टॉपिक चेंज करने वाली

531
00:36:55,680 --> 00:36:59,840
बातें हैं कि सामने वाले को किसी भी तरीके से तोड़ मरोड़ के और बिल्कुल

532
00:36:59,840 --> 00:37:00,680
गलत साबित कर

533
00:37:00,680 --> 00:37:04,680
देना पहले तो आपने इतने पीछे वेद शास्त्र रख रखे हैं इसमें से

534
00:37:04,680 --> 00:37:09,120
गीता जी उठाइए उठाइए चलिए मैं देखिए आपका

535
00:37:09,120 --> 00:37:13,320
कोई आज्ञाकारी शिष्य नहीं हूं ठीक है जो आप इस तरीके

536
00:37:13,320 --> 00:37:17,360
से अथॉरिटेटिव तरीके से आप मुझसे बात करें

537
00:37:17,360 --> 00:37:22,080
मेरी बात सुनिए आप अपनी बात करिए

538
00:37:22,080 --> 00:37:26,240
हाय दिखाने के लिए मैं इसम खोल के दिखाऊंगा कि यहां

539
00:37:26,240 --> 00:37:31,200
पर ये लिखा है आप पीछे आप अपनी बात बोलो आप अपनी बात बोलो

540
00:37:31,200 --> 00:37:35,360
पवित्र गीता जी में स्पष्ट 15वां अ अ भया

541
00:37:35,360 --> 00:37:36,760
उसमें एक परट भी

542
00:37:36,760 --> 00:37:40,840
गंदगी है तो पवित्र कहां से हो गई भाई साहब

543
00:37:40,840 --> 00:37:44,960
गंदगी पवित्र गंदगी आपने बोला ना 5 पर

544
00:37:44,960 --> 00:37:48,960
ज्ञान व वो नहीं है परमेश्वर का ज्ञान ओनली न मिनट सुन

545
00:37:48,960 --> 00:37:53,240
लीजिएगा इस पर मैं उत्तर देता हूं मैंने ये किताब

546
00:37:53,240 --> 00:37:57,920
ये किताब है ठीक है मैं इसका राइटर हूं

547
00:37:57,920 --> 00:38:01,920
95 पर परमेश्वर का ज्ञान लिखा है 5 पर मैंने इसमें अपने बारे

548
00:38:01,920 --> 00:38:05,960
में लिख दिया तो क्या गलत लिख दिया यह बताइए मुझे झूठ लिखा

549
00:38:05,960 --> 00:38:10,640
ना झूठ झूठ एक मिनट रुक जाइए

550
00:38:10,640 --> 00:38:14,920
इसमें ये पुस्तक है और ये मैंने लिखी है कोई पुस्तक

551
00:38:14,920 --> 00:38:16,480
उसम

552
00:38:16,480 --> 00:38:20,560
सिलेबस की जानकारी दे रहा हूं इसमें क्या हो रहा है विज्ञान क्या कर रहा है

553
00:38:20,560 --> 00:38:24,680
य प जीके में क्या हो रहा है बाहर क्या हो रहा है अंदर क्या हो रहा है

554
00:38:24,680 --> 00:38:28,760
5 पर मैंने उसम अपना मन अंत ज्ञान लिख दिया

555
00:38:28,760 --> 00:38:32,800
अपना म मन माना कुछ लिख दिया कोई नया टॉपिक बना के और वो

556
00:38:32,800 --> 00:38:36,800
बिल्कुल निराधार उतरता है उसका कोई अर्थ नहीं निकलता तो

557
00:38:36,800 --> 00:38:40,800
100% पढ़ने वाला उसे पढ़ाने वाला टीचर बता देगा कि इस

558
00:38:40,800 --> 00:38:45,080
राइटर ने यहां गलती कर रखी है इसमें कोई दो इसका मतलब जो

559
00:38:45,080 --> 00:38:49,160
टीचर है वो आपका अंतिम प्रमाण है गीता आपका अंतिम प्रमाण नहीं

560
00:38:49,160 --> 00:38:53,200
है यह तो आपकी मूर्खता है भाई साहब देखिए

561
00:38:53,200 --> 00:38:59,200
अब आप गलत बात कर रहे हैं अभी मैंने तथाकथित कहा था अब मैं तथाकथित कहूंगा

562
00:38:59,920 --> 00:39:05,600
यास लो मरता मरता वापस लो मरता वास

563
00:39:05,600 --> 00:39:10,320
लोर मरता वापस लो पले मरता वास

564
00:39:10,320 --> 00:39:16,320
लो वास

565
00:39:19,600 --> 00:39:25,600
लो बहा इसको बंद कर रहा मरता वास

566
00:39:26,360 --> 00:39:30,880
लोने मैंने अभी तक कहा मेरे हिसाब से आप मूर्ख है मैंने कहा

567
00:39:30,880 --> 00:39:35,160
एक मिनट रुक जाओ पहले आप वापस लेना चाहते हैं ना

568
00:39:35,160 --> 00:39:39,560
क्या वापस लेना चाहता हूं आपको वापस दिलवाना चाहता हूं आप ये मूर्खता

569
00:39:39,560 --> 00:39:43,760
का शब्द आप कहिए कि मैं अपना शब्द वापस लेता हूं मुझे क्षमा करिए

570
00:39:43,760 --> 00:39:48,080
पहले सुनिए पहले कब कहूंगा उसे देखो कैसे कहता हूं जैसे आप कलवाना

571
00:39:48,080 --> 00:39:52,240
चाह रहे कह रहा हूं एक मिनट रुको मैंने

572
00:39:52,240 --> 00:39:56,360
आपको फिलहाल म्यूट कर दिया है अगर आप मूर्खता शब्द को वापस

573
00:39:56,360 --> 00:40:01,840
लेते हैं तो चर्चा आगे बढ़ेगी अन्यथा आप जा सकते

574
00:40:01,840 --> 00:40:05,840
हैं ले रहे हैं कि नहीं ले रहे हैं

575
00:40:05,840 --> 00:40:10,080
ले रहे हैं ना इशारा करके बताइए हां ले रहे हैं इशारा करिए प

576
00:40:10,080 --> 00:40:14,200
इशारा करके बताइए पहले ले रहे हैं ना इशारे

577
00:40:14,200 --> 00:40:20,200
से बताइए ले रहा हूं हां ठीक

578
00:40:20,440 --> 00:40:25,080
है चलो मेरी बात सुनिए मैंने क्या कहा

579
00:40:25,080 --> 00:40:29,120
जो संत इंटरनेशनल मैं देखिए मैं बार-बार अवसर

580
00:40:29,120 --> 00:40:33,280
नहीं दे सकता मैं यहां मूरख सुनने के लिए नहीं बैठा हूं आप जो है अपना शब्द

581
00:40:33,280 --> 00:40:37,360
वापस लीजिए अन्यथा मैं चर्चा को बंद करू य तथाकथित सुनने के लिए नहीं

582
00:40:37,360 --> 00:40:41,600
बैठा हूं पहले सु तो मैंने उसको वापस लिया मैंने मना किया ठीक है मैं अपना शब्द

583
00:40:41,600 --> 00:40:45,600
वापस अभी मैं अभी आप वापस ले रहे हैं कि नहीं हां ले लिया अगर तुमने

584
00:40:45,600 --> 00:40:49,680
ले लिया मैंने ले लिया मैंने तो उसी समय ले लिया था जब बात

585
00:40:49,680 --> 00:40:53,920
हटक रही थी मैंने ले लिया था मैंने भी उसी समय ले लिया

586
00:40:53,920 --> 00:40:57,920
अभी आपने नहीं लिया था आप खाइए आप खाइए अपने गुरु के चरणों

587
00:40:57,920 --> 00:41:01,920
की सौगंध आपने उसी समय ले लिया था बत खाइए बिल्कुल ले लिया था मैं कसम

588
00:41:01,920 --> 00:41:06,320
नहीं खाता हूं लेकिन मैं ले लिया था देखो तो आप झूठ बोल रहे हैं

589
00:41:06,320 --> 00:41:10,400
एक मिनट रुक जाइए आप झूठ बोल रहे आप झूठ य पर भैया कमेंट करके

590
00:41:10,400 --> 00:41:14,520
बताइए लिया था कि नहीं लिया था तुरंत मैं यहां पर शास्त्रार्थ करने

591
00:41:14,520 --> 00:41:18,800
आया हूं झगड़ा नहीं पहली बात आप झगड़ा कर रहे हैं मूरख बोल कर के आप झगड़ा

592
00:41:18,800 --> 00:41:23,160
कर रहे हैं आप तथा नहीं लिया आपने

593
00:41:23,160 --> 00:41:27,320
त वापस नहीं लिया जिस

594
00:41:27,320 --> 00:41:31,680
तुरंत वापस नहीं लिया भाई साहब आपने तुरंत वापस नहीं

595
00:41:31,680 --> 00:41:36,160
लिया मैं नहीं कर सकता आपके साथ नहीं बढ़ सकता मैं आगे

596
00:41:36,160 --> 00:41:40,600
नहीं

597
00:41:40,600 --> 00:41:46,600
पाओगे मूर्ख शब्द आपने तुरंत वापस लिया था या नहीं

598
00:41:58,320 --> 00:42:04,320
कोई और है तो आए भैया यह जा चुके

599
00:42:07,560 --> 00:42:13,560
हैं रिजट हो चुके हैं रिजट क्या बताऊं

600
00:42:16,400 --> 00:42:22,400
मैं हम आइए

601
00:42:25,680 --> 00:42:30,520
भैया यहां पर उसको शेयर कर दीजिए लिंक

602
00:42:30,520 --> 00:42:36,520
को जिससे अगर कोई आना चाहे तो आ

603
00:42:51,640 --> 00:42:57,640
जाए कोई है आना चाहता है जो

604
00:43:03,480 --> 00:43:09,480
मैं कमेंट कर देता हूं

605
00:43:33,920 --> 00:43:39,920
भाई आप लोग अपना चेहरा दिखाएं तब हम आगे बढ़े

606
00:44:04,280 --> 00:44:08,920
जो चेहरा दिखाएगा भैया उसी को ऊपर

607
00:44:08,920 --> 00:44:14,920
लेंगे जय श्री

608
00:44:15,720 --> 00:44:20,600
राम आवाज आ रही है मेरी हां आपकी आवाज आ रही

609
00:44:20,600 --> 00:44:25,200
है पहले तो इनको तो आप

610
00:44:25,200 --> 00:44:29,400
डिस्कोर्स आते हैं ना उनको अच्छी तरह समझा तरीका

611
00:44:29,400 --> 00:44:33,680
है यार आय आपकी मर्ता है

612
00:44:33,680 --> 00:44:38,000
ये पता है प्रमाण क्यों दिखाना चाहते हैं इनको रटा गया है

613
00:44:38,000 --> 00:44:42,120
रटा गया है और अभी देखो अभी मैंने जब ये सारे प्रमाण खोल

614
00:44:42,120 --> 00:44:46,120
दिए ना अभी प लास्ट बार जो वो हुई थी एक ने भी प्रमाण

615
00:44:46,120 --> 00:44:50,720
की बात नहीं की जी और इनको अपनी बात बोलते टाइम व

616
00:44:50,720 --> 00:44:54,720
जो एकदम उससे आगे को कुछ नहीं पता है यह भी बात है

617
00:44:54,720 --> 00:44:59,000
जो रक्ता है रक्ता मारा है जिसका ही पता है उसके आगे

618
00:44:59,000 --> 00:45:03,160
पीछे का भी नहीं पता है इनके लिए गीता जी प्रमाण है

619
00:45:03,160 --> 00:45:07,160
मैं लि रहा हूं कि प्रमाण मत मांगो मत बोलो मत बोलो अभी रेल लग जाएगी

620
00:45:07,160 --> 00:45:11,480
मत आओ उस पर म हाथ जोड़ रहा था कि मत जाओ प्रमाण

621
00:45:11,480 --> 00:45:15,560
प अभी यहीं पर सब सारी चटनी बन जाएगी लेकिन नहीं मानना है नहीं मानना है

622
00:45:15,560 --> 00:45:19,800
अब उनको यह भाव आता है ना देखि मैं बहुत सारे कमेंट पढ़ रहा था नीचे अब उनको यह लग रहा है

623
00:45:19,800 --> 00:45:23,840
कि ये जो पंडित है जो बैठा हुआ है उसके उसको भी

624
00:45:23,840 --> 00:45:27,920
इसका जवाब नहीं पता जो प्रश्न वो पूछ रहा है और इसके आप 50 बार दे

625
00:45:27,920 --> 00:45:31,920
चुके होंगे अपनी वीडियोस में भी और अलग से प्लेलिस्ट भी है उसके अंदर राइट उसमें

626
00:45:31,920 --> 00:45:36,000
है लेकिन फिर वही देखना क्या कर इनको दोबारा ले क्या

627
00:45:36,000 --> 00:45:40,280
आप आप ले लीजिए उनको और उनको ये जो 15 श्लोक

628
00:45:40,280 --> 00:45:44,680
का 15 अध्याय का चौथा श्लोक दिखा रहे थे उसे पूछिए जरा क्या है वहां पर ठीक है

629
00:45:44,680 --> 00:45:48,800
10 मिनट में मेरी कॉल है तो मैं ड्रॉप हो जाता हूं ठीक है

630
00:45:48,800 --> 00:45:54,040
सुनता हूं इसको मैं है ना जी जी

631
00:45:54,040 --> 00:46:00,040
महादेव आइए शिवम यादव जी

632
00:46:05,200 --> 00:46:09,800
एट टू

633
00:46:09,800 --> 00:46:13,960
स्टेज आपने तुरंत अपनी बात वापस नहीं ली थी उसके बारे

634
00:46:13,960 --> 00:46:18,200
में आपको झूठ बोलने की आवश्यकता नहीं है ठीक है तो अभी

635
00:46:18,200 --> 00:46:22,320
हमारी यह बात चल रही थी गीता जी हमारे लिए प्रमाण है कि

636
00:46:22,320 --> 00:46:26,360
नहीं है तो उसमें आपने बताया मैं आपको विषय पर ले

637
00:46:26,360 --> 00:46:30,400
आऊ गीता जी हमारे लिए प्रमाण है कि नहीं तो उसमें आपने बताया

638
00:46:30,400 --> 00:46:34,960
गीता जी में 5 प्र ज्ञान जो है वो प्रमाण नहीं है

639
00:46:34,960 --> 00:46:39,560
ठीक है तो प्रश्न ये आता है कि इसका मतलब हमारे पास

640
00:46:39,560 --> 00:46:43,560
इसका मतलब गीता में क्या सही है और क्या गलत है

641
00:46:43,560 --> 00:46:47,960
इसको नापने के लिए कोई अलग से नियमावली होगी

642
00:46:47,960 --> 00:46:52,280
अब इस पर आपने बताया कि गीता जी में ही दिया गया है वह नियमावली क्या है

643
00:46:52,280 --> 00:46:57,120
तो इस पर आपने बताया कि पवा अध्याय पहला श्लोक ठीक है

644
00:46:57,120 --> 00:47:01,200
बताया ना तत्वदर्शी संत वो नियमावली है मगर तत्वदर्शी

645
00:47:01,200 --> 00:47:05,200
संत की जो नियमावली है वो भी तो किसी के आधार पर नियमावली होगी

646
00:47:05,200 --> 00:47:09,120
ना तत्वदर्शी संत जो बताएंगे आपको वो भी तो कोई ना

647
00:47:09,120 --> 00:47:13,280
कोई नियमावली होगी पहले सुनिए आपसे जो मैंने

648
00:47:13,280 --> 00:47:17,360
कहा अभी आए थे आपके साथ में उन्होंने कहा कि 15 में अध्याय में

649
00:47:17,360 --> 00:47:21,400
देखो मैं सब देख रहा हूं सुन रहा था बहुत अच्छे से ऐसी बात नहीं है आप कुछ शब्द भी बोले थे

650
00:47:21,400 --> 00:47:23,800
बहुत

651
00:47:23,800 --> 00:47:27,920
जो आपको शोभा नहीं आप ऐसा करिए भाई साहब आप जा सकते हैं हम

652
00:47:27,920 --> 00:47:32,000
आपसे बात नहीं करनी आपका बहुत बहुत आभार म्यूट कर दिया आपको मैंने

653
00:47:32,000 --> 00:47:38,000
म्यूट कर दिया है आप जा सकते हैं हां

654
00:47:39,720 --> 00:47:43,880
जी आपका परिचय नमस्कार जी नमस्कार

655
00:47:43,880 --> 00:47:47,960
आपका परिचय मैं परिचय परिचय देने नहीं आया हूं सिर्फ

656
00:47:47,960 --> 00:47:52,040
आपको चैलेंज करने आया हूं कि आप पर

657
00:47:52,040 --> 00:47:56,160
के बिना सुनिए बिना परिचय के बात नहीं होगी क्योंकि हमारे

658
00:47:56,160 --> 00:48:00,240
स्ट्रीम में आने का आप आप म्यूट है इस समय

659
00:48:00,240 --> 00:48:04,280
आप इस समय म्यूट है आप इस समय म्यूट है मैं आपको बता दूं

660
00:48:04,280 --> 00:48:08,520
यहां पर चर्चा हम तभी करते हैं जब सामने वाला व्यक्ति अपनी

661
00:48:08,520 --> 00:48:13,240
पहचान के साथ आए जिस कारण से जिस कारण से

662
00:48:13,240 --> 00:48:18,040
वो अभद्रता अश्लीलता अमर्यादित

663
00:48:18,040 --> 00:48:22,480
आचरण ना करने के लिए बाध्य रहे ठीक है

664
00:48:22,480 --> 00:48:24,240
तो आपको आना है तो आपको अपनी

665
00:48:24,240 --> 00:48:29,680
परिचय के साथ आना होगा और अब आप फॉर्म मर के

666
00:48:29,680 --> 00:48:34,080
आइएगा शिवम यादव जी अब हम आपके साथ बात नहीं करेंगे हो गया

667
00:48:34,080 --> 00:48:38,120
ठीक है अच्छा लगा आप आए समय दिया आपने आप जा

668
00:48:38,120 --> 00:48:44,120
सकते

669
00:48:44,120 --> 00:48:50,120
हैं अब हमारे पास है

670
00:48:50,960 --> 00:48:55,040
विनय जी विनय जी जय श्री राम नमस्ते

671
00:48:55,040 --> 00:48:59,840
जी जय श्री राम नमस्ते जी आपका परिचय

672
00:48:59,840 --> 00:49:04,760
जी मैं विनय हूं पुणे से आपको मैंने फोन किया था उस

673
00:49:04,760 --> 00:49:08,920
दिन किस बात को लेकर हां एक्चुअली

674
00:49:08,920 --> 00:49:12,960
इसकन के बारे में अगर यह सही समय है तो हम बात कर सकते हैं नहीं तो अगले

675
00:49:12,960 --> 00:49:17,000
लाइव में बात कर हम लोग वो करेंगे आप मुझे एक ट दोबारा कर दीजिए

676
00:49:17,000 --> 00:49:21,520
वो हम लोग शेड्यूल करेंगे एक दो दिन में करेंगे और

677
00:49:21,520 --> 00:49:26,000
उस समय देख रहे हैं ना किस तरह का वातावरण है तो उसके लिए अभी

678
00:49:26,000 --> 00:49:30,080
वो जी थोड़ा अन मैच हो जाएगा ठीक है जी हा सता

679
00:49:30,080 --> 00:49:34,240
ठीक है ठीक है धन्यवाद जय श्री राम धनवाद जय

680
00:49:34,240 --> 00:49:40,240
श्री

681
00:49:42,480 --> 00:49:46,160
राम जी जय श्री

682
00:49:46,160 --> 00:49:50,440
राम जय श्री राम मेरा नाम अरुण

683
00:49:50,440 --> 00:49:54,640
है आप बहुत अच्छा कार कर रहे हैं आप ऐसी

684
00:49:54,640 --> 00:49:58,760
स्ट्रीम ब्रह्म कुमारी प कर जितना सहयोग होगा हमसे हम आपको

685
00:49:58,760 --> 00:50:03,800
करके देंगे हम ऑलरेडी इस काम को कर रहे हैं हम शास्त्र

686
00:50:03,800 --> 00:50:08,080
के हम शास्त्रों के ज्ञाता तो नहीं है लेकिन कोशिश करके दो

687
00:50:08,080 --> 00:50:14,080
स आदमी हमने जोड़े हैं जो ब्रह्म कुमारी से निकले हुए हैं या जो पीड़ित परिवार

688
00:50:14,080 --> 00:50:18,320
है जो ब्रह्म कुमारी से निकले

689
00:50:18,320 --> 00:50:22,400
हुए हैं जो 15 साल में 20 साल बाद निकल

690
00:50:22,400 --> 00:50:26,840
गए हैं उनका अनुभव है या किसी का परिवार का सदस्य ब्रह कुमारी

691
00:50:26,840 --> 00:50:31,160
फसा हुआ है तो वो हम कर रहे हैं

692
00:50:31,160 --> 00:50:35,400
लोगों की सहयोग की आवश्यकता पड़ेगी ताक हम ज्यादा लोग तक पहुंच पाए और

693
00:50:35,400 --> 00:50:39,640
शास्त्रों के अनुसार आप पहुंचा सकते हैं जो नहीं है

694
00:50:39,640 --> 00:50:43,760
जी जी मैं आपका हमसे जो है

695
00:50:43,760 --> 00:50:48,200
संपर्क करिए हमारा नंबर नोट कर लीजिए और संपर्क करिए

696
00:50:48,200 --> 00:50:52,360
हम लोग साथ में क्या कर सकते हैं देखते जी

697
00:50:52,360 --> 00:50:58,360
ठीक है ठीक है धन्यवाद जी धनवाद

698
00:51:14,520 --> 00:51:18,680
तो कोई नहीं है मुझे लगता है सभी ने वह हमारा समझ लिया है कि

699
00:51:18,680 --> 00:51:24,680
मत पढ़ो चक्कर में कोई नहीं है टक्कर में वो वाली बात है

700
00:51:33,360 --> 00:51:37,680
हां जी स् कन की गीता जो है लेकर आए

701
00:51:37,680 --> 00:51:42,160
हैं क्योंकि मुझे लगता है मुझे पता नहीं है कि

702
00:51:42,160 --> 00:51:46,400
रामपाल जी को संस्कृत आती है कि नहीं आती अभी तक कोई गीता

703
00:51:46,400 --> 00:51:50,400
भाष्य किया हो ऐसा कुछ नहीं है जिन लोगों ने भाष्य कर दिया है ऑलरेडी उन्हीं

704
00:51:50,400 --> 00:51:54,560
के उसमें तीन पांच होता रहता है कि यहां पर ये लिखा है 5 प्रतिशत काल

705
00:51:54,560 --> 00:51:58,880
ने बोला है और यह और मैं प्रमाण

706
00:51:58,880 --> 00:52:04,880
की बात हो ही रही थी तो मैं दिखाता चलता

707
00:52:19,000 --> 00:52:23,040
हूं प्रमाण की बात मैं क्यों नहीं करता हूं इस चीज को समझना

708
00:52:23,040 --> 00:52:27,120
चाहिए प्रमाण को मैं मानता हूं प्रॉब्लम प्रमाण में

709
00:52:27,120 --> 00:52:31,600
नहीं है प्रॉब्लम है प्रमाण के इंटरप्रिटेशन में

710
00:52:31,600 --> 00:52:35,760
कि उसका अर्थ कौन क्या निकालेगा तो जब हम

711
00:52:35,760 --> 00:52:39,880
जो कहेंगे इसमें इस अब ये हम अगर इसको

712
00:52:39,880 --> 00:52:43,960
प्रमाण मानते हैं तो इसके अनुवादक ने जो इसमें जहां भी लिखा है उसको हमें लेना

713
00:52:43,960 --> 00:52:48,120
पड़ेगा अगर नहीं मानते तो इसका मतलब हमारे पास कोई और पैरामीटर होगा

714
00:52:48,120 --> 00:52:52,320
कि उसके उस पैरामीटर के अंतर्गत हम इसको मानेंगे अब

715
00:52:52,320 --> 00:52:56,560
मान लीजिए मैं इसमें अगर देख रहा हूं तो क्योंकि मेरे गुरु हैं शंकराचार्य

716
00:52:56,560 --> 00:53:00,840
तो इसमें अगर वैसे इसमें कहीं भी है नहीं जय दयाल गोविंद का जी स्वामी

717
00:53:00,840 --> 00:53:05,080
राम सुख दास जी का सबका साथ रहा है कपाती जी को और पूज्य गुरुदेव

718
00:53:05,080 --> 00:53:09,240
जगतगुरु शंकराचार्य जी को है नहीं मगर मैं कह रहा हूं इसमें अगर कहीं पर

719
00:53:09,240 --> 00:53:13,240
वो विपरीत जाएंगे तो शंकर भाष है मेरे पास है

720
00:53:13,240 --> 00:53:18,160
ना शंकर भाष्य भी है मेरे पास जिससे कि मुझे पता रहे कि भैया

721
00:53:18,160 --> 00:53:22,280
जो हमारे प्रामाणिक आचार्य हैं उन्होंने क्या कहा है यह भी वस्तुत प्रमाणिक आचार्य

722
00:53:22,280 --> 00:53:26,480
इनको आप कह सकते हैं जिन्होंने इनका भाष्य किया है तो बात

723
00:53:26,480 --> 00:53:30,720
प्रण की नहीं है कि कहां क्या लिखा है बात य कि जहां जो लिखा है उसका

724
00:53:30,720 --> 00:53:34,480
कौन क्या अर्थ मान रहा है तो फिर प्रमाण की बात क्या

725
00:53:34,480 --> 00:53:38,640
करें कैसे करें फिर मेरा प्रश्न वही होगा

726
00:53:38,640 --> 00:53:43,120
कि आपके पास गीता के श्लोक आए कैसे

727
00:53:43,120 --> 00:53:47,120
तो इसीलिए प्रमाण भी आते मगर व भाई साहब को

728
00:53:47,120 --> 00:53:51,680
थोड़ा सा अधता थी कुछ अपना बिल्कुल एकदम जो

729
00:53:51,680 --> 00:53:56,440
रट कराए थे वो उन्हें उगलना था वो उगलने का प्रयास कर रहे थे

730
00:53:56,440 --> 00:54:02,440
विषय से हटकर बात कर रहे

731
00:54:03,400 --> 00:54:08,120
थे तो अभी मैं आपको दिखा दूं 15वां अध्याय

732
00:54:08,120 --> 00:54:12,480
मैंने वैसे अपने वीडियोस में दिखाया है

733
00:54:12,480 --> 00:54:16,640
भगवान ने भगवत गीता 434 में कहा विभिन्न

734
00:54:16,640 --> 00:54:20,680
यज्ञों के उस ज्ञान को धर्म के ज्ञान को आपको तत्वदर्शी से जा कर के

735
00:54:20,680 --> 00:54:25,320
लेना है तत्वदर्शी के लिए इन्होंने एक

736
00:54:25,320 --> 00:54:29,560
कड़ी जोड़ी भगवत गीता में ही लिखा हुआ है 15

737
00:54:29,560 --> 00:54:33,920
अध्याय के पहले श्लोक में कि जो उल्टे

738
00:54:33,920 --> 00:54:38,240
वृक्ष की यथावत जानकारी दे दे वह वेदों

739
00:54:38,240 --> 00:54:43,080
को जानने वाला है तत्वदर्शी तो नहीं कहा गया पहली बात

740
00:54:43,080 --> 00:54:47,120
वेदों को जानने वाला भी तत्वदर्शी मगर ये जिस तरीके से शब्दों को पकड़

741
00:54:47,120 --> 00:54:49,600
के अपनी बात को मनवा रहे हैं उस हिसाब से यहां

742
00:54:49,600 --> 00:54:53,680
पर तत्वदर्शी की बात नहीं हो रही है उल्टे वृक्ष को जानने वाले के रूप में

743
00:54:53,680 --> 00:54:58,040
वेद में तो कर्मकांड भी है वेद में कर्मकांड है

744
00:54:58,040 --> 00:55:02,080
यज्ञ है बहुत सी चीजें जो रामपाल नहीं करवा रहे हैं तो फिर कहां से हो गए

745
00:55:02,080 --> 00:55:06,080
वो वेदों को जानने वाला वह कहां से हो गया वेदों को जानने वाला तो वह

746
00:55:06,080 --> 00:55:10,720
कहलाएगा जो वेदों को पूरी तरीके से एक्सेप्ट करता हो तो कहां वेदों को एक्सेप्ट

747
00:55:10,720 --> 00:55:15,280
किया यज्ञ को यज्ञ इत्यादि को एक्सेप्ट कहां किया इन्होंने

748
00:55:15,280 --> 00:55:19,560
अब मैं बता देता हूं 15 अध्याय

749
00:55:19,560 --> 00:55:25,320
में लिखा क्या

750
00:55:25,320 --> 00:55:29,680
है 15 अध्याय के पहले श्लोक में यह कुछ आपको

751
00:55:29,680 --> 00:55:33,960
जितने भी रामपाल जी के फॉलोअर्स मिलेंगे वो

752
00:55:33,960 --> 00:55:38,440
आपको यही कुछ श्लोकों के इर्दगिर्द मैंने जो सीरीज बनाई है छह

753
00:55:38,440 --> 00:55:42,680
वीडियोस की उसमें इन्हीं श्लोकों के इर्दगिर्द बात होती रहेगी एक श्लोक आएगा

754
00:55:42,680 --> 00:55:46,680
बारबार कलयुग में एक मिथ्या फैलाई जाती

755
00:55:46,680 --> 00:55:50,880
है रामपाल के फॉलोअर्स के द्वारा कि श्रीमद्

756
00:55:50,880 --> 00:55:55,080
देवी भागवत में लिखा है कि जो सतयुग के राक्षस है

757
00:55:55,080 --> 00:55:59,080
वो कलयुग में ब्राह्मण होंगे तो हो सकता है कि कुछ

758
00:55:59,080 --> 00:56:03,120
ऐसे राक्षस हो जो ब्राह्मणों के रूप में जन्म ले ले ठीक है मान लिया उस पर भी

759
00:56:03,120 --> 00:56:07,480
हम बाद में जाएंगे व और क्याक लिखा है मगर सारे ब्राह्मण वो राक्षस

760
00:56:07,480 --> 00:56:11,640
होंगे यह तो नहीं लिखा है सारे तो अब मैं बताता हूं

761
00:56:11,640 --> 00:56:15,920
स्कंद पुराण में रामायण का महात्म बताते हुए लिखा

762
00:56:15,920 --> 00:56:20,080
है कि कलयुग में जो स्त्रियां होंगी वाचाल हो जाएंगी व्यभिचार

763
00:56:20,080 --> 00:56:24,320
हो जाएंगे तो यह अपनी घर की स्त्रियों के बारे में क्या सोचते

764
00:56:24,320 --> 00:56:28,400
हैं वो वाचाल है कि नहीं या इन्होंने मान ली

765
00:56:28,400 --> 00:56:32,640
स्कंद पुराण की बात कि हर स्त्री जो है हम तो नहीं मानते कि हर स्त्री के लिए लिखा

766
00:56:32,640 --> 00:56:36,800
है मगर अगर जिस तरह से हर ब्राह्मण को राक्षस सिद्ध करना चाहते

767
00:56:36,800 --> 00:56:40,480
हैं तो फिर उस हिसाब से उसी क्या कहते

768
00:56:40,480 --> 00:56:44,760
हैं प्रोटोकॉल के अनुसार स्कंद पुराण के अनुसार यह अपने घर की स्त्रियों

769
00:56:44,760 --> 00:56:49,560
को वाचाल मानते हैं कि नहीं व्यभिचारिणी मानते हैं कि नहीं जाहिर सी बात है नहीं

770
00:56:49,560 --> 00:56:53,840
मानते तो वहां पर फिर ये सिलेक्टिव हो जाएंगे कि नहीं यहां पर तो

771
00:56:53,840 --> 00:56:58,040
केवल यह बताया जा रहा है कि वहां पर कलयुग में स्त्रियां भी ऐसी

772
00:56:58,040 --> 00:57:02,240
हो जाएंगी ऐसा नहीं है कि हर स्त्री हो गई

773
00:57:02,240 --> 00:57:08,160
यह भविष्यवाणी नहीं

774
00:57:08,160 --> 00:57:12,800
है 15वां अध्याय पहला श्लोक है इसका अर्थ लिखा हुआ

775
00:57:12,800 --> 00:57:14,680
है परमेश्वर

776
00:57:14,680 --> 00:57:18,760
स्वरूप मूल वाले ब्रह्मा रूप मुख्य शाखा

777
00:57:18,760 --> 00:57:23,080
वाले जिस संसार रूप पीपल के वृक्ष को अविनाशी कहते

778
00:57:23,080 --> 00:57:27,280
हैं तथा वेद जिसके पत्ते कहे

779
00:57:27,280 --> 00:57:31,400
गए हैं उस संसार रूप वृक्ष को जो मूल

780
00:57:31,400 --> 00:57:35,440
सहित तत्व से जानता है वह वेद के तात्पर्य को जानने

781
00:57:35,440 --> 00:57:36,480
वाला है वेद के तात्पर्य

782
00:57:36,480 --> 00:57:40,800
को जानने वाला य तत्वदर्शी शब्द नहीं आया अगर वेद के जानने

783
00:57:40,800 --> 00:57:44,960
वाले की बात हो रही है तो वेद के जानने वाले के सब बारे में बहुत सा वैदिक मांग

784
00:57:44,960 --> 00:57:48,960
में है जिसमें बात हो रही है वेद को कौन-कौन जान सकता है मगर अगर

785
00:57:48,960 --> 00:57:53,040
इसको हम थोड़ी देर के लिए मान ले कि वेद को जानने वाला ही तत्वदर्शी है

786
00:57:53,040 --> 00:57:57,440
तो क्या है पवे अध्याय का सरा

787
00:57:57,440 --> 00:58:01,680
लोक उसमें इस व्यक्ति के पास जो व्यक्ति

788
00:58:01,680 --> 00:58:05,960
जान गया है तत्वदर्शी हो गया है है ना उसके

789
00:58:05,960 --> 00:58:10,640
पास वैराग्य होना चाहिए यह लिखा हुआ है

790
00:58:10,640 --> 00:58:15,200
वैराग्य यहां कहीं यह देखिए

791
00:58:15,200 --> 00:58:20,640
यह देखिए वैराग्य लिखा है अब यदि यानी

792
00:58:20,640 --> 00:58:24,800
कि जो इनके अनुसार जो तत्वदर्शी है अगर उल्टे

793
00:58:24,800 --> 00:58:28,840
वृक्ष की व्याख्या करने वाला तो उसी के बारे में लिखा है कि जो

794
00:58:28,840 --> 00:58:33,160
इसको जानता है उसके पास वैराग्य रूपी हथियार होना चाहिए

795
00:58:33,160 --> 00:58:37,880
वैराग्य कहां है रामपाल जी के पास

796
00:58:37,880 --> 00:58:42,360
वैराग्य कहां है नहीं है

797
00:58:42,360 --> 00:58:47,160
तो फिर क्या हुआ इन्हीं के अकॉर्डिंग इनकी जो तत्वदर्शी वाली व्याख्या

798
00:58:47,160 --> 00:58:53,160
है वो खत्म हो

799
00:58:54,400 --> 00:58:58,480
गई कोई आना नहीं चाहता है मुझे लग रहा है

800
00:58:58,480 --> 00:59:02,320
एक बार आप

801
00:59:02,320 --> 00:59:06,760
लोग हम लोग न तारीख से

802
00:59:06,760 --> 00:59:11,160
नाम जप स्टार्ट करने वाले हैं ऑनलाइन

803
00:59:11,160 --> 00:59:16,000
उसमें आप आपके जो ईस्ट है उनका नाम जप कर सकते हैं हम सब मिलकर के करेंगे

804
00:59:16,000 --> 00:59:20,040
सुबह के जो सेशन होगा उसमें मैं स्वयं रहूंगा हम सब मिलकर

805
00:59:20,040 --> 00:59:24,120
के एक बिल्कुल पीछे पड़ जाएंगे भगवान के

806
00:59:24,120 --> 00:59:28,760
भगवान के पैर पकड़ना है तो शिव नाम हो राधा नाम हो

807
00:59:28,760 --> 00:59:32,840
या मां भगवती का और कोई नाम हो गणेश जी का नाम हो गणेश

808
00:59:32,840 --> 00:59:37,840
जी के उपासक हो उन क्लासेस में आप हमें जवाइन कर सकते हैं

809
00:59:37,840 --> 00:59:42,120
सुबह के सेशन में मैं भी रहूंगा बाद में हमारे जो

810
00:59:42,120 --> 00:59:46,160
अन्य सहायता करने वाले अन्य गुरु भाई है वह सब रहेंगे तो

811
00:59:46,160 --> 00:59:50,720
क्या होगा हम लोग एक जब ग्रुप वाइज करेंगे तो थोड़ा मन भी लगेगा

812
00:59:50,720 --> 00:59:56,320
और परस्पर सहयोग की भावना से जो सवा घंटे की

813
00:59:56,320 --> 01:00:00,400
भक्ति का तपोबल हमारे अंदर होना चाहिए कलयुग में वो हम

814
01:00:00,400 --> 01:00:04,400
एकत्र करने में एक दूसरे की सहायता करेंगे तो इस दृष्टिकोण से हम लोग

815
01:00:04,400 --> 01:00:08,600
वो नाम जप करने वाले नाम जप के सेशन शुरू करने वाले हैं इस पर एक विस्तृत वीडियो

816
01:00:08,600 --> 01:00:09,840
भी हम लोग जल्दी लाएंगे

817
01:00:09,840 --> 01:00:15,160
पूरा उसम बताएंगे तो हम लोग जल्दी एक फॉर्म निकाल

818
01:00:15,160 --> 01:00:20,280
देंगे उस फॉर्म को भर के आप उन सेशंस में जवाइन कर सकते हैं 740

819
01:00:20,280 --> 01:00:24,360
8369 यह नंबर नोट कर लीजिए अगर किसी को भी हमारी क्लासेस

820
01:00:24,360 --> 01:00:28,520
जवाइन करनी है किसी को भी हमारे साथ धर्म रक्षा अभियान

821
01:00:28,520 --> 01:00:30,640
में

822
01:00:30,640 --> 01:00:35,800
अ साथ निभाना है किसी को भी

823
01:00:35,800 --> 01:00:40,000
अ वैचारिक मतभेद के निमित्त चर्चा करनी है या फिर इस नाम

824
01:00:40,000 --> 01:00:44,040
जप सेशन में हमारे साथ भगवान के नाम का जप करना है आवान करना

825
01:00:44,040 --> 01:00:48,160
है नाम जप का आवान है ये तो वो इस पर

826
01:00:48,160 --> 01:00:52,200
ट करें कॉल ना करें व कर दे आपके पास हमारी ओर

827
01:00:52,200 --> 01:00:56,480
से कॉल पहुंच जाएगा व करने पर आपको फॉर्म मिल जाएगा फॉर्म

828
01:00:56,480 --> 01:01:00,600
भर के हम जान जाएंगे कि आप किस मंशा से आपने हमें ट किया है तो

829
01:01:00,600 --> 01:01:05,200
वह अवश्य करें और भगवान बुरे कार्य कर सकता है कि नहीं

830
01:01:05,200 --> 01:01:09,920
यह जो प्रश्न आता है क्या भगवान बुराई में भी है कई बार विधर्मी

831
01:01:09,920 --> 01:01:13,920
नास्तिक या फिर सनातन का चोला

832
01:01:13,920 --> 01:01:18,040
ओढ करके सनातन विरुद्ध कार्य करने वाले भी इस तरह की बातें

833
01:01:18,040 --> 01:01:22,320
बोलते हैं जैसे एक भाई साहब जो अभी कुछ दिन पहले साढ़े तीन घंटे का हेडेक प्रोग्राम

834
01:01:22,320 --> 01:01:25,160
लेकर के आए थे उन्होंने अपने

835
01:01:25,160 --> 01:01:29,280
किछ कुछ वीडियो में कहा है कि भैया स्मार्थ परंपरा का शंकराचार्य परंपरा का जो

836
01:01:29,280 --> 01:01:33,680
ईश्वर है वो जो है ये भी कर सकता है वो आपत्ति जनक शब्द है हां भाई

837
01:01:33,680 --> 01:01:37,800
बिल्कुल सही कहा आपने वोह कर सकता है आप जैसों के रूप

838
01:01:37,800 --> 01:01:41,880
में जो काम आप कह रहे हैं वो वो भी कर सकता है मगर प्रेमानंद जी महाराज का वीडियो

839
01:01:41,880 --> 01:01:45,960
भी देखिएगा उस बड़ा अच्छी बात कही उन्होंने प्रमान जी महाराज उन्होंने कहा

840
01:01:45,960 --> 01:01:50,000
कि जब भगवान आतंकवादी के रूप में आएंगे आता ताई के रूप में आएंगे तो उनकी

841
01:01:50,000 --> 01:01:54,040
पूजा फिर दंड के दंड के द्वारा की जाएगी ठीक है

842
01:01:54,040 --> 01:01:58,080
व्यवहारिक भेद है मेरे भाई व्यवहारिक और आपने अपनी एक रील में

843
01:01:58,080 --> 01:02:02,680
यह भी कह दिया कि वो ये

844
01:02:02,680 --> 01:02:06,760
एक रील और बनाई ध्यान आ गया तो मैं बात कर रहा हूं फिर एक रील में उन्होंने

845
01:02:06,760 --> 01:02:11,000
यह भी कह दिया कि क्या कहते हैं मेरी कटिंग दिखाई

846
01:02:11,000 --> 01:02:15,000
उसमें पूछ रहे हैं कि क्या ईश्वर की इच्छा होती है कि नहीं हो सकती

847
01:02:15,000 --> 01:02:19,360
है कि नहीं परमार्थिक धरातल प तो मैंने कहा नहीं हो सकती परमार्थिक

848
01:02:19,360 --> 01:02:23,600
धरातल की बात हो रही है नहीं हो सकती और व्यवहार में वो कुछ भी कर सकता है

849
01:02:23,600 --> 01:02:27,680
तो वहां पर वो उस कटिंग को जोड़ करके और फिर वहां पर कह रहे हैं देखा ये एक तरफ कह रहा

850
01:02:27,680 --> 01:02:31,760
है कि भगवान की इच्छा नहीं हो सकती ये नियम है वादित है अरे भैया तुम खुद ही तो कह

851
01:02:31,760 --> 01:02:35,800
रहे हो परमार्थिक धरातल पर हो सकती है या नहीं नहीं हो सकती वो बिना किसी

852
01:02:35,800 --> 01:02:40,520
इच्छा के यूं ही सृष्टि सर्जन करते हैं मगर वहां पर उसकी निश्चित

853
01:02:40,520 --> 01:02:44,560
उसकी सीमित क्या भगवान वहां परमार्थिक धरातल पर स्वयं को नष्ट कर सकते हैं आपने

854
01:02:44,560 --> 01:02:48,640
शंकराचार्य जी का वहां प्रमाण दिखाया वो व्यवहारिक प्रमाण था या परमार्थिक धरातल

855
01:02:48,640 --> 01:02:52,920
पर प्रमाण था वो आपको नहीं पता होगा व्यवहार परमार्थ नहीं पता है भौतिक

856
01:02:52,920 --> 01:02:57,360
आध्यात्मिक पता है है ना इसको कहते हैं डबल स्टैंडर्ड

857
01:02:57,360 --> 01:03:01,480
प्रिया चरित्र जो हमने एक वीडियो में आपको सं तो क्या है कि ये सवाल

858
01:03:01,480 --> 01:03:05,640
आ जाता है कि भाई आपके संत ने तो ये कहा है आपके आचार्य ने तो ये कहा है पहली

859
01:03:05,640 --> 01:03:09,720
बात शंकराचार्य जी की शिक्षा उनकी परंपरा के किस आचार से आपने

860
01:03:09,720 --> 01:03:13,760
प्राप्त की तो यह सब मैं आपको यहां पर इसलिए बता

861
01:03:13,760 --> 01:03:17,920
रहा हूं जिस आप भी इस कंडीशन से गुजर सकते हैं तो आपको

862
01:03:17,920 --> 01:03:22,160
यह सारी चीजें पता होनी चाहिए जब आपके आचार्य को आधार बनाकर कोई प्रमाण प्रस्तुत

863
01:03:22,160 --> 01:03:26,240
करें तो पहला क्वेश्चन होना चाहिए कि आपने आचार्य जो हमारे

864
01:03:26,240 --> 01:03:30,320
आचार के अनुसार आप जो प्रमाण प्रस्तुत कर रहे हैं वह शिक्षा आपने कहां से

865
01:03:30,320 --> 01:03:34,560
प्राप्त की आप अपने मंतव्य की सिद्धि के लिए अपना प्रमाण लाई ना भाई

866
01:03:34,560 --> 01:03:39,720
आपसे पूछा जा रहा है यदि शंकराचार्य के मत को अद्वैतवाद को

867
01:03:39,720 --> 01:03:43,880
मायावादी मायावादी जिसका जिसको गलत बोला

868
01:03:43,880 --> 01:03:48,560
गया है पद्म पुराण में तो उसके लिए सनातन सिद्धांत लाइए

869
01:03:48,560 --> 01:03:52,800
आप उन आचार्यों का वो दे रहे हो जिनके पास आप कभी पढ़ने गए नहीं जिनको

870
01:03:52,800 --> 01:03:55,600
आप प्रमाण नहीं मानते हैं जैसे वल्लभाचार्य जी

871
01:03:55,600 --> 01:03:59,680
का नाम ले लिया वल्लभाचार्य जी ने अपने में कहा है प्रचन बहुत कहते हुए

872
01:03:59,680 --> 01:04:03,760
यह कहा है वो कहा है अरे भैया वल्लभाचार्य जी को आप मानते हो आप ही की

873
01:04:03,760 --> 01:04:08,040
चेतन चरता मृत में लिखा है कि वल्लभाचार्य जी जब श्रीधर स्वामी के भाष्य के विरुद्ध

874
01:04:08,040 --> 01:04:12,160
बात कर रहे थे तो उनको चैतन्य महाप्रभु ने डांट दिया था तो

875
01:04:12,160 --> 01:04:16,160
जिसको आप मानते नहीं हो उसको प्रमाण रूप में क्यों प्रस्तुत कर रहे

876
01:04:16,160 --> 01:04:20,240
हो है ना आप सनातन सिद्धांत लाइए कि

877
01:04:20,240 --> 01:04:24,720
अद्वैतवाद को वो पद्म पुराण

878
01:04:24,720 --> 01:04:29,800
वाला वैदिक

879
01:04:29,800 --> 01:04:34,080
मायावादी की बात करेंगे रामानुजाचार्य जी के जो परंपरा प्राप्त आचार्य

880
01:04:34,080 --> 01:04:38,880
गण है वो कह रहे हैं भैया कि वो जो श्लोक है जो आप बता रहे हो वो प्रक्षिप्त

881
01:04:38,880 --> 01:04:42,880
है हम कभी भी अपने मंतव्य की सिद्धि के लिए

882
01:04:42,880 --> 01:04:47,320
आपके प्रमाण प्रस्तुत नहीं करते हैं आप अपने मंतव्य उन्होंने

883
01:04:47,320 --> 01:04:51,520
भज गोविंद में लिखा है अरे भैया सौंदर्य लहरी भी तो लिखा है

884
01:04:51,520 --> 01:04:56,000
शिवानंद लहरी भी तो लिखा है वो सब नहीं लिखा क्या उन्होंने

885
01:04:56,000 --> 01:05:00,080
तो भज गोविंदम लिखा है भज गोविंदम और अगर भज गोविंदम

886
01:05:00,080 --> 01:05:04,520
उन्होंने लिखा है तो फिर उनको मायावादी कहते हुए क्रिटिसाइज क्यों करते हो आप लोग

887
01:05:04,520 --> 01:05:09,600
क्या भज गोविंदम गोविंद को भजना भी मायावादी

888
01:05:09,600 --> 01:05:13,640
भी एक सिद्धांत के सगे है ही

889
01:05:13,640 --> 01:05:18,000
नहीं भाई जिस आचार्य को आपके ग्रंथों में क्रिटिसाइज

890
01:05:18,000 --> 01:05:22,920
किया जा रहा उसको प्रमाण के रूप में पब्लिक के सामने पेश कर रहे

891
01:05:22,920 --> 01:05:27,240
हो हम द्वैतवाद को

892
01:05:27,240 --> 01:05:32,080
सिद्ध करने के लिए किसी अन्य परंपरा का सहारा नहीं लेते

893
01:05:32,080 --> 01:05:36,080
हम तो आपको वह प्रमाण इसलिए दिखाते क्योंकि आप आप

894
01:05:36,080 --> 01:05:40,160
उसको प्रमाणिक मानते हो रामानुजाचार्य जी की परंपरा को तो

895
01:05:40,160 --> 01:05:44,320
अगर प्रामाणिक मानते हो तो फिर उनके द्वारा जो परंपरा प्राप्त आचार्य है पुराण दिग दर्शन

896
01:05:44,320 --> 01:05:45,280
में उन्होंने लिखा

897
01:05:45,280 --> 01:05:50,640
कि मायावा

898
01:05:50,640 --> 01:05:54,920
मायावादी सब चीजें है और अंततोगत्वा इन्होंने एक प्रश्न

899
01:05:54,920 --> 01:05:59,200
और किया प्रश्न और आ जाता है मैं लूंगा एक सज्जन आ गए

900
01:05:59,200 --> 01:06:03,240
हैं मगर चेहरा कोई नहीं दिखा रहा है मैं आप लोग चेहरा दिखाइए तो हम

901
01:06:03,240 --> 01:06:09,080
आपको ऊपर ले अच्छा अच्छा आप

902
01:06:09,080 --> 01:06:13,080
है तो एक प्रश्न उन्होंने

903
01:06:13,080 --> 01:06:15,400
और

904
01:06:15,400 --> 01:06:19,760
किया जय श्री राम भैया जय श्री राम

905
01:06:19,760 --> 01:06:24,640
एक प्रश्न उन्होने और किया अपनी रील बना कर के कि भाई वो

906
01:06:24,640 --> 01:06:28,800
यह कैसा ब्रम है जो माया में फस गया है भाई अपनी इच्छा से फसा

907
01:06:28,800 --> 01:06:32,960
है और तो और फसा किसम है वो भी

908
01:06:32,960 --> 01:06:37,000
फसने की इच्छा भी तो उसी की है जिसमें वो फस रहा है वो भी तो ब्रह्म है तो

909
01:06:37,000 --> 01:06:41,120
इस आधार पर एक ऐसा ब्रह्म है जो माया में फस गया है तो इस आधार

910
01:06:41,120 --> 01:06:45,360
पर भी अना स्वान नहीं हो सकते व्यवहार और परमार्थ

911
01:06:45,360 --> 01:06:49,720
इसको समझना बहुत आवश्यक है व्यवहार

912
01:06:49,720 --> 01:06:54,120
और परमार्थ इसके प्रमाण है मांड को उपनिषद पढ़िए

913
01:06:54,120 --> 01:06:58,160
उस दिन भी मैंने बोला था सुनना नहीं है क्योंकि चार लोग थे

914
01:06:58,160 --> 01:07:00,280
ना वहां पर कुसुर पुसर करने के लिए

915
01:07:00,280 --> 01:07:05,000
तो सुनना नहीं है व्यवहार और परमार्थ को समझना बहुत आवश्यक है

916
01:07:05,000 --> 01:07:09,160
परमार्थ में जो ब्रह्म है वह स्वयं को नष्ट नहीं कर

917
01:07:09,160 --> 01:07:13,680
सकता अपने जैसा दूसरा ब्रह्म नहीं बना सकता

918
01:07:13,680 --> 01:07:17,680
और भी बहुत सी चीजें हैं वह वेदों पर चलने वाले व्यक्ति के साथ

919
01:07:17,680 --> 01:07:22,120
अन्याय नहीं कर सकता यह सब परमार्थिक धरातल पर है मगर व्यवहार

920
01:07:22,120 --> 01:07:26,200
में आकर के वही ब्रह्म रावण के रूप में कुछ भी भी कर सकता है

921
01:07:26,200 --> 01:07:30,200
आप जैसों के रूप में लोगों की आस्था जहां पर है आस्था के

922
01:07:30,200 --> 01:07:34,200
केंद्र को उसको अपशब्द बोल सकता है अमर्यादित आचरण कर सकता

923
01:07:34,200 --> 01:07:38,440
है आप जैसों के रूप में तो यह अंतर है अब बात य

924
01:07:38,440 --> 01:07:42,800
क्योंकि व परमार्थ में बाधित है इसलिए हम लोग उसको नहीं मानते परमार्थ

925
01:07:42,800 --> 01:07:47,320
में परमार्थ जो है वह वाणी का अ विषय है विष्णु पुराण

926
01:07:47,320 --> 01:07:51,600
हम यहां पर डाल देंगे बाद में प्रमाण जो परमार्थ है वाणी

927
01:07:51,600 --> 01:07:56,360
का विषय है क्रिया का अ विषय है व्यवहार का अ विषय है

928
01:07:56,360 --> 01:08:00,520
अर्थात कहने का अर्थ यह है अगर मेरी मेरी भाषा में उसको समझे

929
01:08:00,520 --> 01:08:04,560
कि परमार्थ तक आप पहुंचे कैसे हैं जब आपने व्यवहार में किसी

930
01:08:04,560 --> 01:08:09,320
को ईश्वर स्वीकार कर लिया व्यवहार में इसका अर्थ क्या हुआ

931
01:08:09,320 --> 01:08:13,320
कि ईश्वर का कुछ भी कर सकने वाला होना व्यवहार में

932
01:08:13,320 --> 01:08:15,440
आवश्यक है मनुष्य दृष्टि से

933
01:08:15,440 --> 01:08:20,040
सोचा जा सकने वाला कोई भी कार्य ऐसा ना हो जो ईश्वर ना कर

934
01:08:20,040 --> 01:08:24,320
सके तो व्यवहार में उसका आवश्यक है जब वह ईश्वर सिद्ध हो गया

935
01:08:24,320 --> 01:08:28,600
कि हां भाई वो कुछ भी सकता है वो राम बन के

936
01:08:28,600 --> 01:08:32,880
सत्यवादी सत्यवादी हो जाएगा कृष्ण बन के वो रास भी करेगा

937
01:08:32,880 --> 01:08:37,200
छल भी करेगा यह है अनंत सामर्थ वान

938
01:08:37,200 --> 01:08:41,560
ईश्वर जो जिसके ऊपर कोई नियम लागू नहीं हो सकता

939
01:08:41,560 --> 01:08:45,680
और परमार्थ में एक ही तत्व

940
01:08:45,680 --> 01:08:49,680
है तो इसको समझना नहीं है केवल चिल्लाना है

941
01:08:49,680 --> 01:08:53,840
अब एक जनाब है जो भाई साहब वो बात कर रहे हैं उसमें

942
01:08:53,840 --> 01:08:57,920
जो एक बार आ चुके हैं पहले हरे अला हरे अल्लाह जिनसे मैंने पूछा था वो

943
01:08:57,920 --> 01:09:02,080
कहते हैं कि भाई अल्लाह नाम भी कृष्ण का है मैं कह रहा हूं है

944
01:09:02,080 --> 01:09:06,240
दुनिया में दुनिया में जो कुछ भी नाम है वह भगवान का ही तो है

945
01:09:06,240 --> 01:09:10,480
मैं तो कह ही रहा हूं मगर हमारी मोक्ष की प्यास कौन

946
01:09:10,480 --> 01:09:14,520
बुझाएगा जो वेदा दी शास्त्र सम्मत सीमाओं के अंदर वाला

947
01:09:14,520 --> 01:09:18,520
जो भगवान का रूप है वो हमारी प्यास मोक्ष की प्यास बुझाएगा जैसे

948
01:09:18,520 --> 01:09:22,520
पानी सर्वत्र व्याप्त है मगर हमारी प्यास कौन सा पानी बुझाएगा

949
01:09:22,520 --> 01:09:27,120
जो हमारे पात्र के अंदर मुंह के लिए व्यवहार लायक हो

950
01:09:27,120 --> 01:09:30,480
जाएगा परमार्थ के आधार पर आप ईश्वर के प्रति

951
01:09:30,480 --> 01:09:34,520
अनास्ता वान नहीं हो सकते इस पर मैंने लॉजिक भी दिया अभी सुबह वडाली है

952
01:09:34,520 --> 01:09:38,680
कि सोता हुआ व्यक्ति यह नहीं कह सकता मैं सुन के जागा क्योंकि वह सुन रहा है तो

953
01:09:38,680 --> 01:09:42,760
सोना सिद्ध नहीं होता और सुन रहा है तो उसका सोना सिद्ध नहीं

954
01:09:42,760 --> 01:09:46,880
होता उसी प्रकार परमार्थ के आधार पर कोई व्यक्ति ईश्वर को नकार नहीं सकता

955
01:09:46,880 --> 01:09:51,280
क्योंकि अगर वह परमार्थ को नकार रहा है तो उसका भगवान को मानना सिद्ध नहीं होता

956
01:09:51,280 --> 01:09:55,480
और अगर भगवान को मान अगर वो परमार्थ को मान रहा है तो उस

957
01:09:55,480 --> 01:09:59,520
का भगवान को नकारना सिद्ध नहीं होता और अगर भगवान को मान रहा है तो

958
01:09:59,520 --> 01:10:04,280
उसका परमार्थ के आधार पर भगवान को नकारना सिद्ध नहीं होता

959
01:10:04,280 --> 01:10:08,480
ठीक है यह सारी चीजें हैं वो लगातार अपनी छुटपुटिया

960
01:10:08,480 --> 01:10:12,760
रील्स वगैरह उ रील रील खेलने में लगे हुए हैं अब मैंने

961
01:10:12,760 --> 01:10:17,840
उस पर बात करना उसको क्योंकि देखिए मेरा क्या होता है कि मैं जब किसी

962
01:10:17,840 --> 01:10:22,280
को रिप्लाई देता हूं तो वो समष्टि के भाव से रिप्लाई देता हूं

963
01:10:22,280 --> 01:10:26,480
जब तक व्यक्तिगत जवाब नहीं देता अगर अगर कोई

964
01:10:26,480 --> 01:10:30,760
सामाजिक हनन हो रहा है कोई सिद्धांत है जो गलत प्रचारित हो रहा है तो मैं

965
01:10:30,760 --> 01:10:35,080
लोगों को सही बात बताने के लिए जब वह व्यक्ति व्यक्तिगत हो जाता है तुमने

966
01:10:35,080 --> 01:10:39,080
यह किया तुमने वोह किया व्यक्तिगत बातें करने लगता है तो उसको क्या जवाब

967
01:10:39,080 --> 01:10:43,240
देना भाई हम लोग धर्म की रक्षा करने के लिए निकले हैं अपने स्वयं की रक्षा करने

968
01:10:43,240 --> 01:10:45,680
के लिए चैनल नहीं है धर्म की रक्षा

969
01:10:45,680 --> 01:10:49,960
करनी है इसके माध्यम से तो मैं जी शिवम कुमार जी आपसे काफी दिनों

970
01:10:49,960 --> 01:10:55,400
से लंबे समय से चर्चा हो चुकी है बताए आपका स्वागत है

971
01:10:55,400 --> 01:10:59,440
मैं आपकी लाइव देखता रहता हूं और ये जो रामपाल जी के

972
01:10:59,440 --> 01:11:03,560
है उल्टी सीधी बातें कर रहे हैं तो मैं इनके लिए कुछ छोटी

973
01:11:03,560 --> 01:11:07,760
सी बात कहना चाहता हूं मैं आप लोग भाई देख भी रहे होंगे और

974
01:11:07,760 --> 01:11:11,760
आप लोगों को मैं ये कहना चाहता हूं मैंने अनेक प्रकार की

975
01:11:11,760 --> 01:11:15,840
पुस्तकें पढ़ी है और सभी संप्रदायों की मैंने अलग-अलग पुस्तक पढ़ी है ऐसा नहीं है

976
01:11:15,840 --> 01:11:20,040
आपकी पुस्तक मेरे पास नहीं है बहुत सारी है लेकिन फिलहाल के लिए दिखा दूं एक ये भी आपकी पुस्तक

977
01:11:20,040 --> 01:11:24,120
ये भी मैंने पढ़ी है और ज्ञान गंगा य आपकी जितनी भी पुस्तक है एक और

978
01:11:24,120 --> 01:11:28,160
आती है तो आप पांच छह पुस्तक मेरे पास है मैंने सभी पढ़ी है और भी

979
01:11:28,160 --> 01:11:32,320
संप्रदाय की अलग-अलग पढ़ी है स्पन वालों की भी पढ़ी है तो मैं

980
01:11:32,320 --> 01:11:36,560
ये कहना चाहता हूं जैसे इसमें लिखा हुआ है आखिरी में हरियालो

981
01:11:36,560 --> 01:11:40,680
के उस पर जो आप प्रमाण देते हैं कि ये हरियालो है कबीर दास जी ने हरियालो बोला

982
01:11:40,680 --> 01:11:44,720
था और इसीलिए अब वो हरियाणा बन गया है तो हरियाणा तब नहीं था

983
01:11:44,720 --> 01:11:48,760
तो ये अनल बातें है और आप भी जैसी इन बातों पर विश्वास कर

984
01:11:48,760 --> 01:11:52,880
रहे हैं देखिए हमारा आपसे कोई दुश्मनी नहीं है और मैं ये कहना

985
01:11:52,880 --> 01:11:56,920
चाहता हूं एक व्यक्ति को आप कैसे भगवान मान ले रहे हैं वो एक साधारण व्यक्ति और

986
01:11:56,920 --> 01:12:02,520
यहां तक वो जेल में है आप फिर भी मानने को तैयार नहीं

987
01:12:02,520 --> 01:12:06,800
है मैं इस पर ये कहना चाहूंगा कि इन्होंने किसी

988
01:12:06,800 --> 01:12:10,880
को भगवान क्यों माना है क्योंकि वेदों में प्रमाण है और वेदों

989
01:12:10,880 --> 01:12:14,880
में क्या चीज वेदों में क्या चीज प्रमाण है और क्या चीज प्रमाण नहीं है

990
01:12:14,880 --> 01:12:17,440
यह कौन बताएगा

991
01:12:17,440 --> 01:12:21,760
वही जिसने बताया वेदों में प्रमाण है अरे भैया अगर वेद अंतिम प्रमाण

992
01:12:21,760 --> 01:12:25,800
है उसके अनुसार उसको भगवान मान रहे हो तो एक बात हो गई

993
01:12:25,800 --> 01:12:30,040
और उसके कारण आप जो है वेद को प्रमाण मान रहे हो यह दूसरी बात हो

994
01:12:30,040 --> 01:12:34,400
गई यह दूसरी बात हो गई या तो आप वेद को अगर उसके

995
01:12:34,400 --> 01:12:38,600
उसके कारण वेद की यदि उसके कारण वेद की किसी बात को प्रमाण

996
01:12:38,600 --> 01:12:42,840
मान रहे हो तो इसका मतलब आप वैदिक नहीं हो आप राम पाली हो

997
01:12:42,840 --> 01:12:47,120
या आप कबीर पंथी हो जो भी हो आप वैदिक नहीं हो क्योंकि

998
01:12:47,120 --> 01:12:51,680
आपने किसी और चीज के कारण इसमें कुछ अपने जैसी बातें ढूंढ ली

999
01:12:51,680 --> 01:12:55,760
तो आपका वैदिक होना सिद्ध नहीं होता जब आप वैदिक नहीं हुए फिर भी प्रश्न

1000
01:12:55,760 --> 01:12:59,800
रह जाएगा अगर ईश्वर सब कुछ कर सकता है

1001
01:12:59,800 --> 01:13:03,840
तो क्या वह झूठ बोल सकता है कि नहीं अगर वो झूठ बोल

1002
01:13:03,840 --> 01:13:08,320
सकता है तो फिर जब वो बोल रहा है वो झूठ है कि सच है आपको कैसे

1003
01:13:08,320 --> 01:13:13,120
पता क्योंकि हम हमारे जो शास्त्र है व अपर है

1004
01:13:13,120 --> 01:13:18,160
भगवान ने भी नहीं र बहुत हाई लेवल की व इनके समझ में नहीं

1005
01:13:18,160 --> 01:13:22,320
आने बात होती है अभी एक एक

1006
01:13:22,320 --> 01:13:26,720
करके एक एक करके अगर बात होती रहे ना तरीके से नम्रता

1007
01:13:26,720 --> 01:13:31,000
से बात हो किस तरह से आए थे थोड़ा सा अगर बात होती रहे इतने

1008
01:13:31,000 --> 01:13:35,040
नियम लद जाएंगे कबीर जी पर इतने नियम लद जाएंगे कि

1009
01:13:35,040 --> 01:13:38,600
वो परेशान हो

1010
01:13:38,600 --> 01:13:42,680
जाएगा उ क

1011
01:13:42,680 --> 01:13:46,760
और वेदों के प्रमाण मैंने इतने दे दिए मैंने तो ये प्रमाण तक दे दिया

1012
01:13:46,760 --> 01:13:51,040
कि कवियों के कवि है गणपति अब बताओ अगर कवि नाम के कारण आप कबीर

1013
01:13:51,040 --> 01:13:55,680
को भगवान समझ रहे तो उनका भगवान तो गणपति गणेश है गणेश जी की पूजा करो

1014
01:13:55,680 --> 01:13:59,960
कबीर दास कबीर देव क्या मतलब है उसका कबीर देव वहा आया है

1015
01:13:59,960 --> 01:14:04,120
तो इस तरह तो नाम तो अलग आ सकते लेकिन भाइयों मैं आपको ये कहना

1016
01:14:04,120 --> 01:14:08,200
चाहता हूं कि वेद कहां से आए सबसे पहले आप अगर आप इसी बात का पता

1017
01:14:08,200 --> 01:14:12,400
लगा लो तो आप जान जाओगे कौन भगवान है कौन नहीं है और

1018
01:14:12,400 --> 01:14:16,640
शंकराचार्य जी मैंने उनसे दीक्षा नहीं ली मैं सुनता हूं सभी को

1019
01:14:16,640 --> 01:14:20,640
उन्होंने एक पुस्तक बताई थी बहुत पहले तो रामचरित मानस बताई थी और एक और बताई

1020
01:14:20,640 --> 01:14:25,240
थी दास अगर आप इसे भी पढ़ लोगे तो भी आपको पता चल जाएगा

1021
01:14:25,240 --> 01:14:29,280
कौन परमात्मा है और कौन नहीं है ये जो आप इधर उधर एक साधारण व्यक्ति को

1022
01:14:29,280 --> 01:14:33,200
जो जेल में है उसे परमात्मा माने बैठे हैं और काल ब्रम काल ब्रम जो

1023
01:14:33,200 --> 01:14:37,280
आपके य ये बिल्कुल ही गलत है और एक पुस्तक और आती

1024
01:14:37,280 --> 01:14:41,280
है भक्ति शुधा इसके बाद आप इसे पढ़ सकते हैं

1025
01:14:41,280 --> 01:14:45,280
तब आपको पता चलेगा कि कौन परमात्मा है नहीं है क्या परब्रह्म

1026
01:14:45,280 --> 01:14:50,560
है इसे जानना ही बहुत बड़ी बात है ये एक साधारण व्यक्ति

1027
01:14:50,560 --> 01:14:54,680
को कुछ ये भी बात हो गई है ना कि

1028
01:14:54,680 --> 01:14:58,760
जो तो वही वाली बात है कि इतने सारे पुलिस इंस्पेक्टर जब खड़े हो जाते

1029
01:14:58,760 --> 01:15:03,360
हैं मार्केट में तो व्यक्ति सही पुलिस इंस्पेक्टर तक कैसे

1030
01:15:03,360 --> 01:15:07,480
पहुंचेगा हर गेट के बाहर हर गेट के बाहर जो है

1031
01:15:07,480 --> 01:15:11,560
एक नेम प्लेट लगी है पुलिस इंस्पेक्टर अब उसमें से

1032
01:15:11,560 --> 01:15:15,880
सही एक है और गलत 10 लोग है 20 लोग है तो वो हो नहीं पाता

1033
01:15:15,880 --> 01:15:20,200
दूसरी बात य हो जाती है कि जो जिससे बंद

1034
01:15:20,200 --> 01:15:24,320
गए तो अब उसी के सम्मान मान की रक्षा करनी है होता है कई बार जैसे

1035
01:15:24,320 --> 01:15:28,400
कभी कभी का विवाह हो गया किसी महिला का

1036
01:15:28,400 --> 01:15:32,480
मातृ शक्ति का विवाह हो गया क्या कहते एक

1037
01:15:32,480 --> 01:15:36,720
ऐसे पुरुष के साथ जो कि चरित्रहीन है या फिर किसी पुरुष

1038
01:15:36,720 --> 01:15:40,920
का मातृ शक्ति के साथ हुआ जो वहां पर चरित्र नहीं अच्छा तो अब उसके

1039
01:15:40,920 --> 01:15:44,920
बाद उसको मालूम पड़ता है किसी और के द्वारा भैया इसका चरित्र ऐसा

1040
01:15:44,920 --> 01:15:48,400
वैसा है तो कुछ लोग ऐसे होते हैं जो

1041
01:15:48,400 --> 01:15:53,240
कन्नी काटते हैं अलग हटते हैं ठीक है भैया अलग हो रहे हैं जो भी है

1042
01:15:53,240 --> 01:15:57,520
कुछ लोग ऐसे भी होते हैं उस उस त्रिचर ोने पर जो है

1043
01:15:57,520 --> 01:16:01,800
पर्दा डालते हैं कि नहीं नहीं यह बिल्कुल सही है

1044
01:16:01,800 --> 01:16:05,880
वो भी है तो

1045
01:16:05,880 --> 01:16:09,920
ये है अब जैसे आज मैं स्कोन वालों की बात

1046
01:16:09,920 --> 01:16:14,600
कर लेय स्न वाले ये कहते हैं

1047
01:16:14,600 --> 01:16:18,600
स्कन वाले ये कहते हैं कि ये देखो माया आजकल वो ट्रेंड चला रहे हैं

1048
01:16:18,600 --> 01:16:22,800
ये देखो मायावादी का ईश्वर कुछ भी कर सकता है दत वादियों का ईश्वर कुछ भी कर सकता है शंकराचार्य

1049
01:16:22,800 --> 01:16:26,800
का ईश्वर कुछ भी कर सकता है भाई निराकार और साकार

1050
01:16:26,800 --> 01:16:31,280
की एक डिबेट है बहुत फेमस डिबेट है व वो डली हुई है य पर

1051
01:16:31,280 --> 01:16:35,400
उसमें वो निराकार वादी जो है व वो है आर्य समाजी

1052
01:16:35,400 --> 01:16:39,480
जो भगवान को अवतार नहीं मानता वोह पूछ रहा है उनसे

1053
01:16:39,480 --> 01:16:43,600
कि अगर वह भगवान है तो उनको अर्जुन का सारथी बनने की क्या

1054
01:16:43,600 --> 01:16:47,640
आवश्यकता है सही बात तो वहां पर उनको जवाब क्या

1055
01:16:47,640 --> 01:16:51,720
मिल रहा है इस कोन के लीडर्स की तरफ से भगवान वो है जो कुछ भी

1056
01:16:51,720 --> 01:16:55,960
कर सकता है सिंपल अगर भगवान वह

1057
01:16:55,960 --> 01:17:00,000
है जो कुछ भी कर सकता है तो कुछ भी का मतलब होता है कुछ भी मैं फिर

1058
01:17:00,000 --> 01:17:04,000
एक बार याद दिला दू यह जो अभियान है वह कोई

1059
01:17:04,000 --> 01:17:08,240
खेल मौज मजा मनोरंजन के लिए हम लोग नहीं लड़ रहे हैं

1060
01:17:08,240 --> 01:17:12,240
यह मानवता और पशुता के बीच का युद्ध है और हम

1061
01:17:12,240 --> 01:17:16,320
लोग मानवता को धर्म को तभी जिता सकते हैं जब हमारे

1062
01:17:16,320 --> 01:17:20,520
पास अध्य ईश्वर हो यह एक ऐसा प्रश्न

1063
01:17:20,520 --> 01:17:25,280
है जो सनातन विरुद्ध हर तंत्र को मिटा सकता है

1064
01:17:25,280 --> 01:17:29,520
जो भी सनातन को खत्म करना चाहती है शक्तियां उनसे लड़ सकता है एक

1065
01:17:29,520 --> 01:17:34,080
ही सवाल क्या आपका ईश्वर सर्वशक्तिमान है कि नहीं

1066
01:17:34,080 --> 01:17:38,720
यही वह सवाल है जो आपको हर लड़ाई ताएगा हर लड़ाई

1067
01:17:38,720 --> 01:17:42,920
मगर इस पर ध्यान ना देकर के अपना संप्रदायवाद अपना

1068
01:17:42,920 --> 01:17:47,040
तंत्र वाद संस्था वाद ईश्वर निष्ठ नहीं है धर्म निष्ठ

1069
01:17:47,040 --> 01:17:51,200
नहीं है शास्त्र निष्ठ नहीं है व्यक्ति निष्ठ है संस्था निष्ठ है तंत्र

1070
01:17:51,200 --> 01:17:55,240
निष्ठ है उनको इससे मतलब नहीं है कि जब हम बाधित

1071
01:17:55,240 --> 01:17:59,240
करेंगे ईश्वर को तो क्या दिक्कत हो जाएगी बकुल

1072
01:17:59,240 --> 01:18:03,320
ईश्वर के प्रति अनास्ता उत्पन्न होती है जब ईश्वर बाद जब हमने कहा कि

1073
01:18:03,320 --> 01:18:07,560
ईश्वर कुछ भी कर सकता है वहां पर वो जो लड़का है वो जो लड़का है जिससे वहां चर्चा

1074
01:18:07,560 --> 01:18:11,680
चल रही है उसने पूछा कि सारथी भगवान क्यों बने बैठे हां भाई

1075
01:18:11,680 --> 01:18:15,760
भगवान है सब कुछ कर सकते हैं सही बात है तो अभी वहां पर

1076
01:18:15,760 --> 01:18:19,000
वो लड़का है अगर वो भव्य राधा कृष्ण दास

1077
01:18:19,000 --> 01:18:23,040
से मिला होता तो भव्य ही उसको य ट्रेनिंग दे रहे हैं कि पूछ क्या वो

1078
01:18:23,040 --> 01:18:27,080
रेप कर सकते हैं ये पूछ मेरे पास तो उत्तर है हां तेरे

1079
01:18:27,080 --> 01:18:31,080
रूप में कर सकते हैं भाई मेरे पास य उत्तर है आपके

1080
01:18:31,080 --> 01:18:35,480
रूप में कर सकते हैं जो जो कुतर की ऐसा प्रश्न करे ना

1081
01:18:35,480 --> 01:18:39,760
उसके लिए भगवान भगवत पाद शंकराचार्य जी क्या कहते थे जब कोई कहता भगवान

1082
01:18:39,760 --> 01:18:45,080
है कहां है तुम्हारे अंदर है भाग जाते थे

1083
01:18:45,080 --> 01:18:49,160
नास्तिक तुम उसका प्रमाण हो भगवान के होने का तुम ही प्रमाण

1084
01:18:49,160 --> 01:18:53,200
जो व्यक्ति कुतर्क कर रहा है उसी को प्रमाण बना दिया उन्होंने तो भाग

1085
01:18:53,200 --> 01:18:57,240
नास्तिक बौद्धों का वो हुआ और यह लोग क्या कर रहे हैं अपने

1086
01:18:57,240 --> 01:19:01,440
ही लिए गड्डा खोद रहे हैं कि मैं यह मानता हूं कि

1087
01:19:01,440 --> 01:19:05,560
स्कोन के द्वारा पूजित होने वाले कृष्ण जो है बहुत मतलब ऐसा

1088
01:19:05,560 --> 01:19:10,000
नहीं है सामर्थ तो यह तो अब हमारा उस हमारा वह करने के चक्कर

1089
01:19:10,000 --> 01:19:14,400
में और ज्यादा उसको बाधित करते जा रहे हैं

1090
01:19:14,400 --> 01:19:20,120
हां जी दास जी

1091
01:19:20,120 --> 01:19:25,600
आइए दास जी बताए

1092
01:19:25,600 --> 01:19:29,600
दास जी आप हमें सुन पा रहे हैं क्या

1093
01:19:29,600 --> 01:19:34,320
हा जी सुन पा रहे हैं बताइए अपना चेहरा आप दिखा

1094
01:19:34,320 --> 01:19:38,760
दीजिए जी बिल्कुल हा बताइए दास

1095
01:19:38,760 --> 01:19:43,240
जी अच्छा आप अभ थोड़ी बर पहले

1096
01:19:43,240 --> 01:19:47,760
आप थोड़ी बत देर पहले आए तो अपना परिचय क्यों नहीं दे रहे थे

1097
01:19:47,760 --> 01:19:52,600
उस समय में रास्ते में था जरा नहीं थोड़ा

1098
01:19:52,600 --> 01:19:56,640
थोड़ा उस समय अग्रेशन भी था अग्रेशन भी था

1099
01:19:56,640 --> 01:20:00,760
क्योंकि आप सुन नहीं रहे थे भाई साहब मैं परिचय मैं परिचय देने नहीं आया हूं

1100
01:20:00,760 --> 01:20:05,440
यहां पर ऐसा भी था चलिए कोई बात नहीं

1101
01:20:05,440 --> 01:20:10,560
अभी हम हम लोगों की काफी चर्चा अभी आज की आपने देखी होगी आप

1102
01:20:10,560 --> 01:20:14,640
जी रामपाल जी को भगवान मानते हैं

1103
01:20:14,640 --> 01:20:18,720
ना देखिए भगवान कबीर साहिब है और राम कबीर

1104
01:20:18,720 --> 01:20:23,200
साब जी को भगवान मानते हैं कबीर साहब जी को भगवान मानते हैं कबी

1105
01:20:23,200 --> 01:20:27,480
कबीर जी को भगवान मानते तो इनको भगवान मानने का कारण

1106
01:20:27,480 --> 01:20:31,920
क्या है और ब्रह्मा विष्णु महेश जी को भगवान ना मानने का कारण क्या

1107
01:20:31,920 --> 01:20:35,360
है देखिए भगवान हम मानते हैं उसकी क्वालिटीज

1108
01:20:35,360 --> 01:20:38,400
के

1109
01:20:38,400 --> 01:20:42,560
कारण वेदों में प्रमाण है देखिए कि परमात्मा जो आता है व

1110
01:20:42,560 --> 01:20:46,760
सरी ब बो एक बार पूरा बोल वेदों में प्रमाण है कवि सा भगवान है

1111
01:20:46,760 --> 01:20:50,800
व अच्छा लगता है सुनने में एक बार बोल वो

1112
01:20:50,800 --> 01:20:55,240
तो हम हर मरते दम तक बोलेंगे वेदों में प्रमाण है कबीर साहिब भगवान

1113
01:20:55,240 --> 01:20:59,840
और आप भी सम आएगा कि आप भी बोलेंगे बिल्कुल

1114
01:20:59,840 --> 01:21:05,840
शृष्टि में ऐसा कोई जन्म नहीं लिया जो मुझसे

1115
01:21:12,280 --> 01:21:16,280
बुलवाएं अब मैं कह दू कि आप भी अपना नाम बदल लोगे

1116
01:21:16,280 --> 01:21:20,400
अपने पिता का नाम बदल लोगे अपनी माता का नाम बदल लो समय बताएगा तो ये कोई लॉजिक फुल

1117
01:21:20,400 --> 01:21:26,240
बात नहीं हुई मैं अभी आपसे कह दू आपके जैसे पिताजी का नाम क्या है

1118
01:21:26,240 --> 01:21:30,320
एग्जांपल के ताजी का नाम सुधीर है बताइए क्या

1119
01:21:30,320 --> 01:21:34,720
है सुधीर नाम है मेरे फादर का

1120
01:21:34,720 --> 01:21:38,720
सुधीर पूरा पूरा नाम नहीं है पूरा नाम नहीं बताते सुधीर वर्मा

1121
01:21:38,720 --> 01:21:43,160
नाम है मेरे फादर का अच्छा सुधीर वर्मा अब जैसे मैं कह दू

1122
01:21:43,160 --> 01:21:47,160
कि थोड़े दिनों बाद आप जो है सुनील वर्मा बोलोगे तो यह ठीक बात

1123
01:21:47,160 --> 01:21:51,360
नहीं है बिना लॉजिक लॉजिक लेस बात है है ना तो

1124
01:21:51,360 --> 01:21:55,800
अभी हम लोग आते हैं पॉइंट पर विय पर समझाता हूं आपको

1125
01:21:55,800 --> 01:21:59,800
लॉजिक लेस बात नहीं है देखिए अभी बात क्या है अभी आपने

1126
01:21:59,800 --> 01:22:03,960
ज्ञान समझा नहीं है अगर समझा होता भाई समझने खल क्या होता है

1127
01:22:03,960 --> 01:22:08,000
शास्त्र कैसे होता है देखिए ये चर्चा व्यर्थ जा रही है चर्चा

1128
01:22:08,000 --> 01:22:12,280
व्यर्थ जा रही है आप उलझे हुए व्यक्ति लग रहे हैं आपने अपने बारे में बताया

1129
01:22:12,280 --> 01:22:16,400
कि मैं मरते दम तक कबीर कबीर जी भगवान बोलूंगा मैंने बताया भाई

1130
01:22:16,400 --> 01:22:21,800
मैं सत्य के रूप में इस पंक्ति को कभी नहीं बोलूंगा ठीक

1131
01:22:21,800 --> 01:22:25,960
हैने अपने बारे बया बार बताया अब आप मेरा

1132
01:22:25,960 --> 01:22:30,640
भविष्य ना बताए ये बात कहने नहीं

1133
01:22:30,640 --> 01:22:34,760
आप भी बोलोगे आप देखिए व्यर्थ की चर्चा बढ़ेगी आपने बताया मेरा

1134
01:22:34,760 --> 01:22:38,840
भविष्य आपने मेरा भविष्य बताया मैंने आपका नहीं बताया व्यर्थ

1135
01:22:38,840 --> 01:22:41,440
की चर्चा भविष नहीं मैं कोई भविष्यवक्ता

1136
01:22:41,440 --> 01:22:45,560
नहीं हूं ये हमारा वचन नहीं है देखिए इस

1137
01:22:45,560 --> 01:22:49,640
तरह से अगर करेंगे मुझे आपको हटाना पड़ेगा आप मेरा भविष्य ना बताए मैंने आपका

1138
01:22:49,640 --> 01:22:53,680
भविष्य नहीं बताया ठीक है चलिए आगे बढ़ाइए छोड़

1139
01:22:53,680 --> 01:22:56,320
ठीक है हम छोटे

1140
01:22:56,320 --> 01:23:01,160
पढ़े हा अभी मैं आपसे पूछ रहा

1141
01:23:01,160 --> 01:23:07,160
हूं कि पहले एक सवाल में

1142
01:23:09,120 --> 01:23:15,120
कण एक सवाल आपसे पूछना चाता उसके बाद आप बता देना ठीक है

1143
01:23:15,240 --> 01:23:19,320
हा मैं आपसे यह पूछना चाह रहा हूं कि भाई

1144
01:23:19,320 --> 01:23:23,320
शास्त्रार्थ करने क्या आप कभी सतलोक आश्रम धनाना धाम

1145
01:23:23,320 --> 01:23:25,760
में आए हैं

1146
01:23:25,760 --> 01:23:29,800
जो सोनीपत हरियाणा में नहीं नहीं गए

1147
01:23:29,800 --> 01:23:33,880
नहीं गए मेरा उद्देश्य यहा आने का बस यही है कि आपको मैं इनवाइट करना

1148
01:23:33,880 --> 01:23:37,960
चाहता हूं कि एक बार जरूर आइए तो मैं आपको इनवाइट कर रहा हूं

1149
01:23:37,960 --> 01:23:42,080
आप एक बार लखनऊ आ जाइए लखनऊ भी आ जाएंगे आपके

1150
01:23:42,080 --> 01:23:46,200
आप हमारे लखन आए आम भी आे सतलोक

1151
01:23:46,200 --> 01:23:50,400
आश्रम आे आप लखन आ जा

1152
01:23:50,400 --> 01:23:55,440
ता कराना चाहते हैं उनको आप लखनऊ भेज दीजिए ना हम क्यों आए

1153
01:23:55,440 --> 01:24:00,080
आप य अरे फिर वही बात

1154
01:24:00,080 --> 01:24:05,560
अभी को

1155
01:24:05,560 --> 01:24:09,600
बास कारण क्या कर आप

1156
01:24:09,600 --> 01:24:14,320
भी तो वही कर रहे हो कि आप आओ हम नहीं आएंगे आप क्या कर

1157
01:24:14,320 --> 01:24:19,720
तुम

1158
01:24:19,720 --> 01:24:24,680
बता अरे आप क्यों नहीं आए अभी तक बताओ

1159
01:24:24,680 --> 01:24:28,720
तो भैया तुमने तो अभी शुरू किया चैनल हमा तो सालो च

1160
01:24:28,720 --> 01:24:33,960
अरे भैया तुम गए थे क्या शंकराचार्य के पास

1161
01:24:33,960 --> 01:24:38,000
श शंकराचार्य बताते शकर की थरी क्या ी पहले

1162
01:24:38,000 --> 01:24:42,200
य बताइए आप इसीलिए कह रहा ह बात म करो आने

1163
01:24:42,200 --> 01:24:45,760
जाने

1164
01:24:45,760 --> 01:24:51,760
बे बात करोगे हगा हो गया विषय पर

1165
01:24:52,520 --> 01:24:58,240
आए र

1166
01:24:58,240 --> 01:25:00,520
[संगीत]

1167
01:25:00,520 --> 01:25:04,760
क्या फिट बॉय विराज बस एक बार जवाब

1168
01:25:04,760 --> 01:25:08,920
दे दो कौन है भाई राम जी आप चेहरा दिखाए

1169
01:25:08,920 --> 01:25:14,920
अपना

1170
01:25:24,840 --> 01:25:30,120
शंकराचार्य ब्रह्मचारी भी थे सन्यासी भी थे

1171
01:25:30,120 --> 01:25:36,120
आठ वर्ष की उम्र में उन्होंने सन्यास ले लिया

1172
01:25:43,480 --> 01:25:47,520
था दास जी यहां पर हम लोग और बातें नहीं करेंगे विषय

1173
01:25:47,520 --> 01:25:51,920
पर बात करते हैं ठीक है आप कबीर को भगवान

1174
01:25:51,920 --> 01:25:56,160
वेदों में प्रमाण के अनुसार मानते हैं मैं मानता हूं लेकिन

1175
01:25:56,160 --> 01:26:00,280
मैं बता रहा हूं मेरी तरफ से मेरे भाई शिवम भगत

1176
01:26:00,280 --> 01:26:04,320
जी आए थे आपसे चर्चा करने मेरे गुरु भाई है आपने उनकी बात सुनी नहीं

1177
01:26:04,320 --> 01:26:10,320
आपने एक लिया कि उन्होने मोर् कह

1178
01:26:12,800 --> 01:26:18,800
दिया एक राम करके जवाइन करने का प्रयास कर रहे हैं वह

1179
01:26:20,320 --> 01:26:24,360
आए भैया जी राम जी मुझे

1180
01:26:24,360 --> 01:26:28,720
मैं पह कोई संप्रदाय से नहीं हूं ठीक है मैं

1181
01:26:28,720 --> 01:26:32,840
ज आप हिंदू मैं हिंदू हूं मैं सनातन धर्म को मानता हूं

1182
01:26:32,840 --> 01:26:36,840
एक मेरा प्रश्न है समाज व्यवस्था

1183
01:26:36,840 --> 01:26:41,240
केप ठीक है जैसे आप लोग कहते हैं कि

1184
01:26:41,240 --> 01:26:45,240
हम लोग बोलते जाति व्यवस्था होता है ठीक है

1185
01:26:45,240 --> 01:26:49,240
हम जन्म व्यवस्था को मानते हैं आपसे चर्चा हो चुकी है

1186
01:26:49,240 --> 01:26:53,240
भाई साहब की नहीं यह बताइए नहीं हुआ नहीं हु अभी पहली बार

1187
01:26:53,240 --> 01:26:57,360
आया हूं ठीक है तो य वर्ण व्यवस्था के लिए आप फॉर्म भरिए

1188
01:26:57,360 --> 01:27:00,960
हम लोग बात करेंगे उस दिन ठीक है

1189
01:27:00,960 --> 01:27:05,160
74836 इस पर फॉर्म भरिए फम ट

1190
01:27:05,160 --> 01:27:09,600
में लिख ट करने पर फॉर्म मिल जाएगा आपको

1191
01:27:09,600 --> 01:27:12,160
ठीक

1192
01:27:12,160 --> 01:27:16,560
है मैं हटा रहा हूं आपको दास जी आपको हम नहीं लेंगे अब ऊपर

1193
01:27:16,560 --> 01:27:20,800
हम समझ गए आपकी मंशा जो है विषय पर बात करने की नहीं है अन्य

1194
01:27:20,800 --> 01:27:25,240
कोई व्यक्ति अगर जवाइन करना चाहता है

1195
01:27:25,240 --> 01:27:29,520
तो वह आ सकते हैं हां सृजन

1196
01:27:29,520 --> 01:27:34,680
जी इनसे चर्चा हो चुकी है इनको संतुष्ट भी किया था

1197
01:27:34,680 --> 01:27:38,880
संभवत दास जी आपको विषय पर चर्चा नहीं करनी है आप अब अब रहने

1198
01:27:38,880 --> 01:27:42,880
दीजिए आप अटेंप्ट मत करिए अब हम आपको नहीं लेंगे ठीक

1199
01:27:42,880 --> 01:27:48,880
है

1200
01:27:59,880 --> 01:28:05,680
कोई नहीं

1201
01:28:05,680 --> 01:28:10,920
है कोई आओ

1202
01:28:10,920 --> 01:28:16,920
भाई व प्रमाण की बात नहीं

1203
01:28:20,800 --> 01:28:26,800
करेंगे आपको डायरेक्ट चर्चा करनी है और और कुछ करना

1204
01:28:28,680 --> 01:28:34,680
है

1205
01:28:35,920 --> 01:28:41,480
बोलिए चलिए लाइव स्ट्रीम को ऑफ करते हैं

1206
01:28:41,480 --> 01:28:45,720
बहुत ही व्यर्थ की चर्चा रही आज कोई खास बातें

1207
01:28:45,720 --> 01:28:51,720
नहीं हुई नाम जप प्रोग्राम का आप लोग ध्यान रखें

1208
01:28:56,360 --> 01:29:01,080
नाम जप सेशन हम लोग शुरू करने वाले हैं न

1209
01:29:01,080 --> 01:29:03,520
अक्टूबर

1210
01:29:03,520 --> 01:29:09,520
से नवरात्रि भी होंगी नवरात्रि स्थापना

1211
01:29:10,080 --> 01:29:14,120
और आप लोग उसमें हमें जवाइन करें और भगवान के हम

1212
01:29:14,120 --> 01:29:18,120
लोग कहते हैं ना कि पीछे पड़ जाए हम मना

1213
01:29:18,120 --> 01:29:22,200
के रहेंगे आपको हमारा साथ देना होगा इस भाव को लेकर के हम

1214
01:29:22,200 --> 01:29:26,360
सब मिलकर के पूरा भारतवर्ष से जितने यवा उससे जुड़ सकते

1215
01:29:26,360 --> 01:29:30,760
हैं नाम जप से जुड़े उसमें दो प्रकार से होंगे व सेशन

1216
01:29:30,760 --> 01:29:35,000
एक 151 मिनट के पांच सेशन दिन भर में पांच बार उसका

1217
01:29:35,000 --> 01:29:39,120
आपको ग्रुप बना दिया जाएगा उसमें आप जुड़ जाएंगे जब भी सेशन होगा

1218
01:29:39,120 --> 01:29:43,360
उससे पाच मिनट पहले आप वहां पर आपको जो है व लिंक आ जाएगा उस लिंक के माध्यम से

1219
01:29:43,360 --> 01:29:47,360
सेशन में जुड़ कर के आप जो है 15 मिनट अपने ईस्ट के नाम का जप

1220
01:29:47,360 --> 01:29:49,880
करेंगे

1221
01:29:49,880 --> 01:29:54,040
और एक सुबह का होगा सवा घंटे का जिसमें मैं रहूंगा तो

1222
01:29:54,040 --> 01:29:58,360
तो उसमें आप डायरेक्टली पूरे सवा घंटे का जो उद्देश है

1223
01:29:58,360 --> 01:30:02,240
वो प्राप्त कर सकते

1224
01:30:02,240 --> 01:30:06,360
हैं राघवानंद जी मथुरा

1225
01:30:06,360 --> 01:30:12,360
आप चेहरा दिखाएं आचार्य राघवानंद

1226
01:30:17,920 --> 01:30:22,120
जी आवाज नहीं आ रही तो

1227
01:30:22,120 --> 01:30:26,560
आप सबसे निवेदन है बार-बार कह रहा हूं 7483

1228
01:30:26,560 --> 01:30:31,160
189 पर संपर्क करें नाम जब क्लासेस से जुड़ने के लिए

1229
01:30:31,160 --> 01:30:35,720
किसी को हमारी जो अध्ययन वाली क्लासेस है उससे जुड़ना है

1230
01:30:35,720 --> 01:30:40,160
तो आप संपर्क कर सकते हैं

1231
01:30:40,160 --> 01:30:44,400
अ क्या कहते हैं भाई सेम नंबर पर आप ट कर सकते हैं

1232
01:30:44,400 --> 01:30:48,960
और यह ध्यान रखिएगा कि ट करिएगा

1233
01:30:48,960 --> 01:30:52,200
कॉल मत करिएगा

1234
01:30:52,200 --> 01:30:56,040
और इसके साथ ही

1235
01:30:56,040 --> 01:31:00,520
साथ कबीर जो है वह भगवान

1236
01:31:00,520 --> 01:31:04,840
नहीं है अगर कवि शब्द से आप भगवान

1237
01:31:04,840 --> 01:31:08,840
लेते हो कि कवि नाम वहां पर आ गया है उससे

1238
01:31:08,840 --> 01:31:13,080
हम कबीर को भगवान कह रहे हैं तो कवियों का कवि भगवान गणेश

1239
01:31:13,080 --> 01:31:19,080
को कहा गया है आपको उनकी पूजा करनी चाहिए भगवान गणेश

1240
01:31:19,840 --> 01:31:24,040
और इसके अलावा गीता का 5 प्रतित ज्ञान

1241
01:31:24,040 --> 01:31:28,400
की जो बात है वो इनके द्वारा

1242
01:31:28,400 --> 01:31:33,200
बनाई गई कपोल कल्पना है क्योंकि जाहिर सी बात है अगर गीता हमारे लिए प्रमाण है

1243
01:31:33,200 --> 01:31:37,440
तो हम उसमें चुनाव नहीं कर सकते कि इतना सही है इतना गलत इसको अर्ध

1244
01:31:37,440 --> 01:31:41,560
कुट न्याय कहा गया है खंडन किया गया इस बात का और समस्त श्रुति स्मृति

1245
01:31:41,560 --> 01:31:45,600
शास्त्रों में सामंजस अगर हमारे लिए गीता प्रमाण है तो पूरी

1246
01:31:45,600 --> 01:31:49,760
प्रमाण माननी होगी उसकी एक बात को सही दूसरी बात को गलत हम नहीं कर सकते

1247
01:31:49,760 --> 01:31:53,920
अगर करेंगे तो इसका मतलब है कि इसमें सही और गलत के चुनाव का

1248
01:31:53,920 --> 01:31:58,160
हमारे पास कोई और संसाधन है वह संसाधन क्या है

1249
01:31:58,160 --> 01:32:02,320
इसका कुछ नहीं पता बात ये है कि कोई एक बात अगर झूठ बोल सकता

1250
01:32:02,320 --> 01:32:06,560
है गलत बोल सकता है जो कि उस परिपेक्ष में नहीं जैसे उन्होंने कहा कि वहां पर 5

1251
01:32:06,560 --> 01:32:10,600
प्र काल ने अपने बारे में बता दिया काल ने वहां बताया कि अब मैं अपने बारे में बता रहा

1252
01:32:10,600 --> 01:32:14,880
हूं नहीं तो इसलिए हमें वहां गीता के उन श्लोकों का भी खंडन

1253
01:32:14,880 --> 01:32:19,600
ना करते हुए उनसे ऐसी शिक्षा निकालनी होगी

1254
01:32:19,600 --> 01:32:23,880
जो जिसमें कि दो दोनों प्रकार के श्लोकों में कहीं भी खंडन

1255
01:32:23,880 --> 01:32:28,000
ना हो किसी का भी और राधा रानी

1256
01:32:28,000 --> 01:32:32,240
जी के लिए हम लोग वीडियो लाने वाले हैं आप लोग बने रहे

1257
01:32:32,240 --> 01:32:35,000
और ऐसा वीडियो लाएंगे जैसे हरिहर भेद का लाए थे जैसे

1258
01:32:35,000 --> 01:32:39,200
अभी सीरीज लाए हैं रामपाल जी के बारे में और बिल्कुल

1259
01:32:39,200 --> 01:32:43,320
अंतिम बात है ना जो भाई साहब बार-बार कह रहे हैं एक

1260
01:32:43,320 --> 01:32:47,440
परट ज्ञान नहीं है आप में एक परसेंट साहस नहीं है

1261
01:32:47,440 --> 01:32:51,800
जो आप सामना कर सके केवल आप छुपकर कायरता

1262
01:32:51,800 --> 01:32:56,120
पूर्ण ये टिप्पणी ही कर पा रहे हैं ना अगर

1263
01:32:56,120 --> 01:33:00,200
सत्य के पक्षधर हैं तो सामना करिए अन्यथा

1264
01:33:00,200 --> 01:33:04,320
मुगरी लाल के भव्य सपनों की दुनिया में

1265
01:33:04,320 --> 01:33:10,320
डूबे रहने के लिए आप स्वतंत्र

1266
01:33:11,680 --> 01:33:17,680
है य यह कौन सा अभियान है य हमें नहीं पता इस बारे में

1267
01:33:26,000 --> 01:33:31,080
और हां इसके साथ ही साथ मैंने बताया

1268
01:33:31,080 --> 01:33:35,240
कि वह जो भव्य दास है उसने अपनी एक रील बनाई

1269
01:33:35,240 --> 01:33:39,280
उसमें कहा कि यह व्यक्ति जो है खुद कहता है कि भगवान

1270
01:33:39,280 --> 01:33:43,480
की इच्छा नहीं हो सकती मगर फिर कहता है भगवान की इच्छा नहीं हो सकती तो बाद

1271
01:33:43,480 --> 01:33:47,720
तो व्यवहार और परमार्थ का अंतर है फिर बता दूं व्यवहार परमार्थ

1272
01:33:47,720 --> 01:33:51,720
परमार्थ के कारण आप ईश्वर को नकार नहीं सकते

1273
01:33:51,720 --> 01:33:55,720
व्यवहार में कुछ भी कर सकने वाला ई ही ईश्वर सिद्ध होता है

1274
01:33:55,720 --> 01:34:00,320
शंकराचार्य का आपने प्रमाण दिया शंकराचार्य का अध्ययन आपने कहां से किया

1275
01:34:00,320 --> 01:34:04,560
उन्होंने वहां व्यवहारिक बात बताइ है ब्रह्म के बारे में या पार मर्थक यह पता

1276
01:34:04,560 --> 01:34:09,480
कर पता करना होगा आपको वल्लभाचार्य जी का प्रमाण देते हैं

1277
01:34:09,480 --> 01:34:14,120
मायावादी को खुद क्रिटिसाइज करते हैं चेतन चता मृत में चेतन महाप्रभु

1278
01:34:14,120 --> 01:34:18,120
श्रीधर स्वामी का आपने प्रमाण दिया श्रीधर स्वामी का अध्ययन

1279
01:34:18,120 --> 01:34:22,120
आपने कहां से किया कि उनकी परंपरा से कहां से किया उनके शिष्य शिष्य

1280
01:34:22,120 --> 01:34:26,720
के शिष्य कहां से वो किया तो सीधा स्वामी का आपके द्वारा प्रमाण नहीं चलेगा

1281
01:34:26,720 --> 01:34:30,920
और मायावादी उत्तर दिया कि भाई ये कैसा ब्रह्म है जो माया में फस

1282
01:34:30,920 --> 01:34:35,120
जाता है तो भाई वो खुद अपनी इच्छा से फसा

1283
01:34:35,120 --> 01:34:39,240
है आप आप जब वीडियो गेम खेलते हो तो आप खुद अपनी इच्छा से वीडियो गेम खेलते

1284
01:34:39,240 --> 01:34:43,240
हो तो अगर आप इस बात पर उसे अना उसके प्रति अनास्ता वान

1285
01:34:43,240 --> 01:34:47,640
हो रहे हैं कि वो निकल नहीं पा रहा है तो उसको वहां पर

1286
01:34:47,640 --> 01:34:51,640
ना निकलने देने वाला भी वही है तो आपकी जो अनास्ता का कारण है वो सेम

1287
01:34:51,640 --> 01:34:56,280
अपोजिट कारण से कट जाता है तो इस कारण आप आस्थावान नहीं हो सकते और

1288
01:34:56,280 --> 01:35:00,480
एक जवाब और दे दूं क्या था वो अंततोगत्वा

1289
01:35:00,480 --> 01:35:04,480
ठीक है हमारा भी ईश्वर आपने कह दिया गलत

1290
01:35:04,480 --> 01:35:08,760
है ठीक तो आपने आखिर में दिया क्या दुनिया को

1291
01:35:08,760 --> 01:35:12,840
बाधित ईश्वर बाधित दिया और

1292
01:35:12,840 --> 01:35:17,120
उनसे कहिए व वहां पर जो कह रहे हैं सारथी वाली बात में जब उनसे निराकार

1293
01:35:17,120 --> 01:35:21,120
वादी ने पूछा आर्य समाजी ने पूछा कि भगवान सारथी बन के क्यों बैठे

1294
01:35:21,120 --> 01:35:25,240
हैं अगर वो ईश्वर है तो तो वहां उनसे कह कुछ भी कर सते उनसे कहिए भगवान

1295
01:35:25,240 --> 01:35:29,280
सब कुछ नहीं कर सकते हैं कई कार्य हैं आपके अनुसार

1296
01:35:29,280 --> 01:35:33,400
जो है वह सिर्फ जो सात्विक कार्य है उनमें ही है

1297
01:35:33,400 --> 01:35:37,440
जो तामसिक कार्य है उनमें उनका कंट्रोल नहीं है हम जिस भगवान

1298
01:35:37,440 --> 01:35:41,520
को मानते हैं तामसिक कार्य में उनकी गति नहीं है य कहिए उनको जाके सब

1299
01:35:41,520 --> 01:35:42,020
कुछ

1300
01:35:41,720 --> 01:35:45,760
नहीं कर सकते ठीक है तो

1301
01:35:45,760 --> 01:35:50,720
इसी के साथ साथ और हमारी एक प्लेलिस्ट है

1302
01:35:50,720 --> 01:35:54,960
उस प्लेलिस्ट का नाम है सनातन सिद्धांत उसको आप लोग जरूर

1303
01:35:54,960 --> 01:35:59,120
देखा करिए उसमें बहुत इनफॉर्मेटिव चीजें हैं जैसे क्या ईश्वर ऐसा पत्थर बन

1304
01:35:59,120 --> 01:36:03,240
सकता है जो जिसको व स्वयं ना उठा

1305
01:36:03,240 --> 01:36:07,480
सके य सब कुतर्क होते हैं जो

1306
01:36:07,480 --> 01:36:11,480
और उसी में यह वाला भी है क्या ईश्वर बुराई कर सकता है अगर बुराई कर

1307
01:36:11,480 --> 01:36:15,560
सकता है तो हम उस ऐसे ईश्वर की वो क्यों करें भाई सबसे पहली

1308
01:36:15,560 --> 01:36:19,840
बात है ईश्वर बुराई कर सकता है तुम्हारे रूप में दूसरी बात यह है

1309
01:36:19,840 --> 01:36:23,840
कि ईश्वर सर्वत पानी सर्वत्र व्याप्त है मगर प्यास जो आपके

1310
01:36:23,840 --> 01:36:27,960
व्यवहार का विषय होगा वही पानी भुज जाएगा उसी प्रकार से ईश्वर सर्वत्र व्याप्त

1311
01:36:27,960 --> 01:36:32,040
है कुरान भी दुनिया में लिखी गई है तो बिना ईश्वर की मर्जी के नहीं लिखी

1312
01:36:32,040 --> 01:36:36,240
गई है ठीक है हो सकता है आपका ऐसा ईश्वर हो जिसकी मर्जी के बाहर

1313
01:36:36,240 --> 01:36:41,200
हो गया वो ना चाहता हो कुरान का लिखा जाना मगर उसने लिखवा दी

1314
01:36:41,200 --> 01:36:45,240
मगर वो भी अगर लिखी गई दुनिया में जो कुछ भी हो रहा है ईश्वर की मर्जी से ही हो

1315
01:36:45,240 --> 01:36:49,520
रहा है मगर ईश्वर का हमारे लिए ईश्वर

1316
01:36:49,520 --> 01:36:54,280
का मोक्ष दायक स्वरूप कौन सा है जो हमारे सनातन शास्त्रों की सीमा में है

1317
01:36:54,280 --> 01:36:57,520
ठीक है तो

1318
01:36:57,520 --> 01:37:02,480
यह सारी चीजें हैं अलग से रील नहीं बनाऊंगा

1319
01:37:02,480 --> 01:37:06,640
क्योंकि उतना महत्व नहीं है और एक

1320
01:37:06,640 --> 01:37:10,800
वो सरफिरा भी है जो अनर गलल बातें

1321
01:37:10,800 --> 01:37:15,120
किया करता है उसके बारे में एक बार सामने नहीं आता चेहरा नहीं दिखाता है कायर

1322
01:37:15,120 --> 01:37:19,280
है वो सरफिरा भी कुछ इधर का इसकी रीट इसकी ईट

1323
01:37:19,280 --> 01:37:24,960
उसका रोड़ा भानुमती का कुर्मा जोड़ा वो इस तरह से कार्य करते हैं

1324
01:37:24,960 --> 01:37:29,720
उसने शंकरा जो पूज्य जगतगुरु शंकराचार्य पूरी पीठ के

1325
01:37:29,720 --> 01:37:33,720
उनका वीडियो कट करके दिखाया है कि देखो

1326
01:37:33,720 --> 01:37:37,720
देखो वो कह रहे कृष्ण स्तु भगवान स्वयं अरे भैया वो शिव को भी तो कह रहे हैं

1327
01:37:37,720 --> 01:37:41,920
फिर वही अर् कुकुट न्याय और तुम्हारे पास कृष्ण को साबित

1328
01:37:41,920 --> 01:37:46,680
करने के लिए अपनी चीजों को साबित करने के लिए अपनी चीजें नहीं है क्या

1329
01:37:46,680 --> 01:37:50,960
सनातन सिद्धांत दो ना भाई जो सब मान ले

1330
01:37:50,960 --> 01:37:55,120
भगवत पाद आदि शंकराचार्य जी का मायावादी मावाद है जिसको जिसको

1331
01:37:55,120 --> 01:37:59,320
जिसकी आलोचना की गई है पदम पुराण के द्वारा इसको सनातन सिद्धांत से सिद्ध करो

1332
01:37:59,320 --> 01:38:03,400
ना तो सिद्ध नहीं करते तु उन लोगों को लेकर आओगे जिनको

1333
01:38:03,400 --> 01:38:07,480
खुद प्रमाण तुम नहीं मानते हमको कहोगे इसको प्रमाण मान लो और

1334
01:38:07,480 --> 01:38:12,240
प्रेमानंद जी महाराज भी वैष्णव है उनका वीडियो देखिए सृष्टि

1335
01:38:12,240 --> 01:38:12,740
किसने

1336
01:38:12,520 --> 01:38:17,120
बनाई कैस क्यों बनी सृष्टि क्यों बनाई भगवान ने पूरा

1337
01:38:17,120 --> 01:38:21,120
मायावा उनको मायावा क क्रिटिसाइज कर दीजिए विष्णु भगवान को क्रिटिसाइज कर

1338
01:38:21,120 --> 01:38:25,680
दीजिए जो ये कहते हैं कि

1339
01:38:25,680 --> 01:38:29,960
क्या मेरा ये शरीर माया है और कुछ नहीं है अगर आप परमार्थ

1340
01:38:29,960 --> 01:38:34,240
में रहने वाले भगवान को व्यवहारिक कर दोगे जैसे ही भगवान व्यवहार

1341
01:38:34,240 --> 01:38:39,120
में आएंगे जैसे ही भगवान व्यवहार में आएंगे

1342
01:38:39,120 --> 01:38:43,480
तो क्या होगा फिर वो बाधित हो जाएंगे

1343
01:38:43,480 --> 01:38:49,320
व्यवहार का विषय आप बना दोगे

1344
01:38:49,320 --> 01:38:55,320
तो इसलिए परमार्थ और व्यवहार का अंतर रखना आवश्यक है

1345
01:38:56,880 --> 01:39:01,480
जी राम जी शरण स्मार्थ

1346
01:39:01,480 --> 01:39:05,480
जी राम राम जी शरण जी बताए

1347
01:39:05,480 --> 01:39:10,520
जय श्री राम शम जी बहुत बढ़िया चल रहा है

1348
01:39:10,520 --> 01:39:14,720
आपका ब मैं तो यह कने आया जितने भी आते

1349
01:39:14,720 --> 01:39:19,600
हैं इनके साथ एक ही स्लोगन लगता है कि गधों को दीना

1350
01:39:19,600 --> 01:39:25,600
ज्ञान और गधों ने हिलाए कान स्थि

1351
01:39:26,360 --> 01:39:30,360
है नहीं नहीं इस तरह इस तरह का ना करें हो सकता है

1352
01:39:30,360 --> 01:39:34,600
उनमें से कुछ हो जो समझ सकते हो सुधरना चाहते हो तो हमारे द्वारा इस प्रकार

1353
01:39:34,600 --> 01:39:38,840
की टिप्पणियां उनको जो है हतोत्साहित कर देंगी मगर

1354
01:39:38,840 --> 01:39:43,320
हां ये है कि एक पट्टी तो उन्होने बांध ली है

1355
01:39:43,320 --> 01:39:47,480
हा कभी-कभी ऐसा भी लगता है जैसे कोई हिप्नोटिज म किया गया

1356
01:39:47,480 --> 01:39:53,480
है या क्या किया गया है वो भी है

1357
01:39:53,480 --> 01:39:57,520
ये क्या है देखिए बात यह है कि

1358
01:39:57,520 --> 01:40:02,080
किसी भी संप्रदाय के हो यहां तक कि जो अधर्म है

1359
01:40:02,080 --> 01:40:06,200
स्पष्ट तौर पर उनके पास भी तंत्र की विद्या

1360
01:40:06,200 --> 01:40:10,240
तो है ही सब जगह तंत्र

1361
01:40:10,240 --> 01:40:14,760
तो काम करता ही है छोटी

1362
01:40:14,760 --> 01:40:19,680
मोटी हा छोटी छोटी जो शुद्र शक्तियां होती है

1363
01:40:19,680 --> 01:40:24,280
उनकी उनके प्रभाव से लोग कार्य करते हैं

1364
01:40:24,280 --> 01:40:28,960
और दूसरी बात क्या है कि लोगों को समझ में नहीं आता है भेड़ चाल

1365
01:40:28,960 --> 01:40:31,120
है

1366
01:40:31,120 --> 01:40:35,520
एक दसवीं की क्लास में आपने भी पढ़ा होगा शायद

1367
01:40:35,520 --> 01:40:39,640
हमने पढ़ा था हमको तो कल 25 30 साल हो गए हैं

1368
01:40:39,640 --> 01:40:41,640
तो आप एक जगह रुक करके

1369
01:40:41,640 --> 01:40:46,040
बात आप एक जगह रुक कर के बात करते तो ठीक रहता

1370
01:40:46,040 --> 01:40:50,040
अच्छा अच्छा असल में मैं मार्ग में था अभी आ रहा था

1371
01:40:50,040 --> 01:40:54,040
इसलिए तो बात यही है कि

1372
01:40:54,040 --> 01:40:58,680
बहुत कठिन है कार्य क्योंकि यह कलिकाल

1373
01:40:58,680 --> 01:41:02,760
है और जब कली दुर्बल

1374
01:41:02,760 --> 01:41:07,200
होता है ना वह भी भगवान की ही शरण में जाता है और

1375
01:41:07,200 --> 01:41:12,320
य जितने भी तंत्र है ब सब कली के सहायक

1376
01:41:12,320 --> 01:41:16,400
है चलिए एक सज्जन आ गए मैं उनको ले लेता हूं

1377
01:41:16,400 --> 01:41:22,400
आप अच्छा लगा

1378
01:41:24,560 --> 01:41:29,000
महा ऋषि गंगा प्रसाद जी आप अपना मुख दिखाएंगे चेहरा

1379
01:41:29,000 --> 01:41:35,000
तो आपको ऊपर ले

1380
01:41:36,120 --> 01:41:42,120
ले जी महा ऋषि गंगा

1381
01:41:46,840 --> 01:41:51,240
प्रसाद अब इनको क्या है कि भाई यह लोग क्या करते हैं जब

1382
01:41:51,240 --> 01:41:55,920
ज्यादा मतलब जब ज्यादा इनकी वो सच्चाई स्कन वालों की बाहर आने लगती है

1383
01:41:55,920 --> 01:42:00,240
तो फिर कहते हैं कि अ

1384
01:42:00,240 --> 01:42:04,240
वैष्णव की बुराई कर रहे हैं वैष्णव की बुराई कर रहे हैं भैया तुलसीदास

1385
01:42:04,240 --> 01:42:08,280
आपके लिए मायावादी जो है वो गलत है तुलसीदास

1386
01:42:08,280 --> 01:42:12,720
की बुराई आप कर रहे हो है ना कि तुलसीदास जी भी मायावादी थे

1387
01:42:12,720 --> 01:42:18,720
प्रेमानंद जी की बुराई आप कर रहे हो तो ये वैष्णव वैष्णवास्त्र

1388
01:42:23,440 --> 01:42:27,440
सनातन सिद्धांत ले आइए अब आचार्यों की आचार्य के

1389
01:42:27,440 --> 01:42:31,440
नाम के पीछे चुपना बंद करिए हम तो यह नहीं कहते हैं ना कि नहीं शंकराचार्य

1390
01:42:31,440 --> 01:42:35,480
जी ने यह कहा है इसलिए मानो तो आप क्यों कह रहे हो

1391
01:42:35,480 --> 01:42:39,640
सनातन से बात करिए जब भाई आचार्यों को लेकर के ही

1392
01:42:39,640 --> 01:42:44,040
मतभेद है तो आचार्यों को प्रमाण के रूप में क्यों प्रस्तुत कर रहे

1393
01:42:44,040 --> 01:42:48,600
हो तो बहुत सी चीजें हैं आप लोग मेरा मैसेज पहुंचा

1394
01:42:48,600 --> 01:42:52,770
दीजिएगा अगर कोई

1395
01:42:52,770 --> 01:42:57,600
[हंसी]

1396
01:42:57,600 --> 01:43:01,720
आप लोग वो किया करिए नासे कि हम लोग इनको मुह दिखाई

1397
01:43:01,720 --> 01:43:05,800
ना दे

1398
01:43:05,800 --> 01:43:10,200
पाए चलिए सभी को जय श्री राम बहुत अच्छा लगा

1399
01:43:10,200 --> 01:43:14,240
हालांकि आज कोई तथ्य पूर्ण बात नहीं हो पाई व्यक्ति जो

1400
01:43:14,240 --> 01:43:18,320
है आवेश में आए थे पहले वाले और उसके बाद तो कुछ हुआ

1401
01:43:18,320 --> 01:43:22,120
ही नहीं है सभी को जय श्री

1402
01:43:22,120 --> 01:43:26,160
राम मैं फिर से याद दिला दूं क्लासेस जवाइन करनी है तो धर्म

1403
01:43:26,160 --> 01:43:30,240
रक्षा अभियान में साथ देना है तो और नाम जब क्लासेस

1404
01:43:30,240 --> 01:43:34,280
में जवाइन करना है तो और या फिर

1405
01:43:34,280 --> 01:43:38,640
किसी भी प्रकार की वैचारिक मतभेद के निमित्त चर्चा करनी है तो हमारे इस नंबर पर ट

1406
01:43:38,640 --> 01:43:44,200
करें जो इस समय दिख रहा है स्क्रीन पर

1407
01:43:44,200 --> 01:43:48,240
और सनातन सिद्धांत वाली प्लेलिस्ट जरूर चेक करें उसमें

1408
01:43:48,240 --> 01:43:53,160
देखें सनातन सिद्धांत क्याक है द्वैत अद्वैत मायावादी है

1409
01:43:53,160 --> 01:43:57,240
हर चीज को बिल्कुल व्यवस्थित रूप से वहां प्लेलिस्ट में बता दिया गया

1410
01:43:57,240 --> 01:44:01,520
है और हर व्यक्ति एक सनातन योद्धा बन केर घूमिए

1411
01:44:01,520 --> 01:44:05,640
चलते फिरते कहीं पर भी किसी विधर्मी की दाल ना गल

1412
01:44:05,640 --> 01:44:09,920
सके अभी देखा था उस दिन जब वह इस्लाम को मानने वाली

1413
01:44:09,920 --> 01:44:14,280
जो मातृ शक्ति आई थी जब आप अपने इस सिद्धांत

1414
01:44:14,280 --> 01:44:18,360
को पकड़ेंगे ना कि ईश्वर वही है जो कुछ भी कर सकता है कोई

1415
01:44:18,360 --> 01:44:22,480
आपको आपके सामने टिक नहीं पाएगा सनातन सिद्धांत ईश्वर

1416
01:44:22,480 --> 01:44:26,560
कौन है सना सर्वशक्तिमान सच्चिदानंद स्वरूप आपको

1417
01:44:26,560 --> 01:44:30,880
अनर्गल बैसे करने की आवश्यकता ही नहीं है कि तुम्हारे यहां तो ये लिखा है चार शादियां

1418
01:44:30,880 --> 01:44:34,880
लिखी है आठवा लिख य सब बहुत बात की बातें हैं सीधे

1419
01:44:34,880 --> 01:44:38,920
पूछो ईश्वर सर्वशक्तिमान है कि नहीं सनातन में

1420
01:44:38,920 --> 01:44:42,960
और सनातन विरुद्ध ईश्वर में मेन अंतर यही है

1421
01:44:42,960 --> 01:44:47,120
कि सनातन ईश्वर वह है जो कुछ भी कर सकता है और सनातन

1422
01:44:47,120 --> 01:44:51,520
विरुद्ध जितने भी ईश्वर है वो सब बादे थे

1423
01:44:51,520 --> 01:44:55,520
अब प्रॉब्लम क्या है हम सनातन का चोला ओढ

1424
01:44:55,520 --> 01:44:59,360
करके कई सारे ऐसे सेक्ट बन चुके हैं जो सनातन के नाम

1425
01:44:59,360 --> 01:45:03,360
से ही सनातन ईश्वर को बाधित कर रहे हैं तो फिर अब हम इनसे जीतेंगे कैसे

1426
01:45:03,360 --> 01:45:07,480
इनके सामने हम ये प्रश्न कैसे रखे कि नहीं सनातन ईश्वर व

1427
01:45:07,480 --> 01:45:11,920
जो कुछ भी कर सकता है नहीं रख सकते क्यों आर समाज तो नहीं मानता स्कोन

1428
01:45:11,920 --> 01:45:16,080
तो नहीं मानता पहले मुझे नहीं लगता था कि स्कोन य बोलने लगेगा कि ईश्वर

1429
01:45:16,080 --> 01:45:20,280
सर्वत्र नहीं मगर इसकन की तरफ से आने वाले जो सज्जन है वो अभी बोलने

1430
01:45:20,280 --> 01:45:24,600
लगे ईश्वर उसमें नहीं है जहां बुराई हो रही भैया भगवान ने कहा भगवत

1431
01:45:24,600 --> 01:45:28,920
गीता में कि मुझे वह कर्म बांध नहीं सकते

1432
01:45:28,920 --> 01:45:33,000
मैं सभी प्रकार के कर्मों में होते हुए भी उनमें लिप्त नहीं होता

1433
01:45:33,000 --> 01:45:38,160
हूं यह सब चीजें भूल गए क्या यह तो आपके में भी

1434
01:45:38,160 --> 01:45:42,320
है अब उन्होंने कहा कि पशुओं में मैं सिंह हूं सिं

1435
01:45:42,320 --> 01:45:46,440
पशुओं में मैं सिंह हूं तो वह है ना बोल तो रहे हैं कि सिंघ

1436
01:45:46,440 --> 01:45:52,440
में मैं सिंह हूं सिंह तो है ना जो दूसरों का शिकार कर रहा है

1437
01:45:55,080 --> 01:45:59,200
जी पंडित नारायण नारायण जी मैं ये कह रहा था कि मैं मुझे जाना पड़

1438
01:45:59,200 --> 01:46:03,240
गया था बीच में और मैंने मैंने देखा कि वो जो सज्जन आए हुए

1439
01:46:03,240 --> 01:46:07,400
थे यादव जी वो कह रहे थे कि मैंने अशद का प्रयोग किया है देखिए ऐसी बात नहीं है

1440
01:46:07,400 --> 01:46:11,400
मैंने वहां पर जो रेल शब्द का प्रयोग किया था उससे मेरा भाव यह था कि अगर

1441
01:46:11,400 --> 01:46:15,640
आप प्रमाण को लेकर आ रहे हैं तो प्रश्नोत्तरी हो जाएगी

1442
01:46:15,640 --> 01:46:19,880
श प्रश्नों की ऐसी झड़ी लग जाएगी कि विष हो जाएगा यह मेरा भाव था

1443
01:46:19,880 --> 01:46:23,920
पर तो कृपया आप क्या बोलते हैं मेरे शब्दों को नाले ठीक

1444
01:46:23,920 --> 01:46:27,960
है यहां पर रेल लगाने का अर्थ मेरा यह था क्योंकि आप मुझे लग रहा था कि आपको इसी

1445
01:46:27,960 --> 01:46:31,960
से समस्या थी उन भाई साहब को इसी बा से समस्या थी कि मैंने बोल दिया कि रेल

1446
01:46:31,960 --> 01:46:36,440
लग जाएगी ठीक है अबे क्या अथ लेते जी

1447
01:46:36,440 --> 01:46:40,480
रेल मतलब ट्रेन करेक्ट जैसे कि एक डब्बे के पीछे

1448
01:46:40,480 --> 01:46:44,760
दूसरे डब्बे आते हैं वैसे ही प्रश्नों के डब्बे बन जाएंगे खूब सारे प्रॉब्लम य देखि

1449
01:46:44,760 --> 01:46:49,200
प्रमाण प्रमाण के लिए मैं इनको समझा दू प्रमाण पर जब हम बात करते हैं

1450
01:46:49,200 --> 01:46:53,200
वो चैप्टर आ जाता है परंपरा वो चैप्टर आ जाता है

1451
01:46:53,200 --> 01:46:57,480
फिर वहां बात ये जो हो रही है ना कि ईश्वर सर्वशक्तिमान है कि नहीं ईश्वर

1452
01:46:57,480 --> 01:47:01,800
किसी भी नियम के नीचे है कि नहीं मोक्ष क्या है यह सारी चर्चाएं बंद करनी पड़ेगी क्यों

1453
01:47:01,800 --> 01:47:05,880
क्या होगा आप प्रमाण खोलोगे मैं कहूंगा इसका मतलब यह है आप कहोगे

1454
01:47:05,880 --> 01:47:10,120
नहीं है तो फिर मुझे पूछना पड़ेगा आपको वेद शास्त्र गीता

1455
01:47:10,120 --> 01:47:14,160
इत्यादि सनातन धर्म ग्रंथ कहां से प्राप्त हुए तो चर्चा टॉपिक

1456
01:47:14,160 --> 01:47:18,240
बदल जाएगा इसलिए प्रमाण की बात हम बात के लिए रखते हैं कि जिससे

1457
01:47:18,240 --> 01:47:22,280
कि यह सारे पहले सेगमेंट क्लियर हो जाए कि हां भाई आप यह माने कि हमारा

1458
01:47:22,280 --> 01:47:26,680
ईश्वर आप ये माने कि मोक्ष में भी मुक्ति नहीं है आप ये माने

1459
01:47:26,680 --> 01:47:30,880
कि धर्म जो बदलता है शाश्वत नहीं है फिर हम अंत में आएंगे और पूछेंगे

1460
01:47:30,880 --> 01:47:34,880
कि अब आप बताइए कि किन किन प्रमाणों के अनुसार जो है आपने कबीर को

1461
01:47:34,880 --> 01:47:38,920
कवि कवि को कबीर से जोड़ दिया और फिर हम आपको गणेश जी का

1462
01:47:38,920 --> 01:47:43,000
बताएंगे कवियों का कवि तो गणेश है उसके बाद आप तर्क करोगे आप कहोगे

1463
01:47:43,000 --> 01:47:47,400
नहीं इसका मतलब यह नहीं है उसका मतलब य नहीं तब हम ले आएंगे परंपरा

1464
01:47:47,400 --> 01:47:51,400
तो उस चैप्टर मैं कह रहा हं मुझे ये समझ नहीं

1465
01:47:51,400 --> 01:47:55,400
आता कि जब वो कबीर यूज का प्रयोग कर रहे हैं तो कवि जब संधि

1466
01:47:55,400 --> 01:47:59,560
विच्छेद नहीं समझ रहे हैं क्या कि जब आप शब्दों को जोड़ेंगे तो वो आधा र

1467
01:47:59,560 --> 01:48:03,760
लग जाता है उस पर अब उने कवीर समझ रहे हैं ना जैसे कि अब दो अ

1468
01:48:03,760 --> 01:48:07,800
और आ और अ मिलेगा तो आ आ बन जाएगा लेकिन वो

1469
01:48:07,800 --> 01:48:12,120
उसम से कवि वो शब्द कवि है लेकिन उसको उन्होंने कबीर किया है पेन

1470
01:48:12,120 --> 01:48:16,360
से काट के कबीर बिल्कुल कई जगह वो काल को अकाल

1471
01:48:16,360 --> 01:48:20,400
कर देते हैं अच्छा विष्णु पुराण प्रमाण है विष्णु पुराण

1472
01:48:20,400 --> 01:48:24,680
प्रमाण है उसमें बता रहे हैं काल कौन है ठीक है अब उसी काल के लिए परम ब्रह्म

1473
01:48:24,680 --> 01:48:25,680
लिखा है वहां

1474
01:48:25,680 --> 01:48:30,040
ये परम ब्रह्म नहीं है अज्ञानता बस लिख दिया अरे भाई जब जो तुम्हारे लिए अज्ञानी

1475
01:48:30,040 --> 01:48:34,400
है तो वो प्रमाण के रूप में प्रस्तुत क्यों कर रहे हो उसका ग्रंथ सही बात

1476
01:48:34,400 --> 01:48:38,440
है जिससे तुम काल की पहचान कर रहे हो वो

1477
01:48:38,440 --> 01:48:42,440
भी क्या काल ने लिखा है क्या जिससे आप काल को काल

1478
01:48:42,440 --> 01:48:46,840
मान रहे हो वो भी काल ने लिख दिया क्या अपने मन से जहां जो मनए

1479
01:48:46,840 --> 01:48:51,360
वो लिख दो और उसके बाद जो है विदों में प्रमाण है और

1480
01:48:51,360 --> 01:48:55,360
कबीर साहब भगवान है लेकिन सक्ता को है ये

1481
01:48:55,360 --> 01:48:59,400
वो घुमाते रहना है वो सक्ता नहीं बता सकती कि नहीं है वही जैसे

1482
01:48:59,400 --> 01:49:03,640
आपने बो था ताल ठोक के डंके की चोट प बोलो ठीक है कि हां

1483
01:49:03,640 --> 01:49:07,880
है नहीं कर सकता या कर सकता है सर्वशक्तिमान है तो है

1484
01:49:07,880 --> 01:49:11,920
लेकिन नहीं वो नहीं है वो उसको घुमाते हैं उसम उसम ये

1485
01:49:11,920 --> 01:49:16,240
करते हैं वो लेता नहीं है अरे भाई मैं पूछ रहा हूं लेता है कि नहीं वो तो अगला चैप्टर

1486
01:49:16,240 --> 01:49:20,840
है जी जैसे ये लोग कहते हैं कि वो जो सर्वव्यापक

1487
01:49:20,840 --> 01:49:25,160
है वो गर्भ में कैसे आ सकता है मेरे भाई पहला जो मनुष्य बनाया भगवान

1488
01:49:25,160 --> 01:49:29,160
ने वो कैसे बनाया जी ईश्वर को मानना ही इस बात

1489
01:49:29,160 --> 01:49:35,160
का देवत है कि आप ईश्वर को चमत्कारिक मान रहे हो

1490
01:49:35,840 --> 01:49:40,280
जी यह आ गया वही

1491
01:49:40,280 --> 01:49:44,880
जिसमें ये बता रहे हैं रामपाल दास जी बता रहे हैं

1492
01:49:44,880 --> 01:49:48,920
कि जो काल है वो कौन है और इसमें फिर

1493
01:49:48,920 --> 01:49:53,040
य बताते हैं कि यह परब्रह्म अज्ञानता बस लिख दिया है अरे भाई

1494
01:49:53,040 --> 01:49:57,160
जब जो अज्ञानी है तो उसका बाकी का कैसे सही हो जाएगा जो अज्ञानी है वो पूरा

1495
01:49:57,160 --> 01:50:01,200
ज्ञानी है वो आपके लिए प्रमाण नहीं तो आप अपनी बात बोलो कि हम कबीर

1496
01:50:01,200 --> 01:50:05,280
को भगवान क्यों मानते हैं किसी को काल क्यों मानते हैं फिर शास्त्र को बीच में क्यों लाते

1497
01:50:05,280 --> 01:50:09,960
हो इसलिए कि शास्त्रों से जोड़ के जब अपनी बात बोलेंगे तो व्यक्ति

1498
01:50:09,960 --> 01:50:14,000
सुनेगा देखिए वहां पर खुद ही करेक्शन कर रहे हैं येय काल

1499
01:50:14,000 --> 01:50:18,440
नहीं है अकाल है बोलते भी और इतने मतलब

1500
01:50:18,440 --> 01:50:22,840
क्या बोलेंगे इतने प्राउड होक बोलते ना इतने विश्वास के साथ बोलते हैं कि मतलब

1501
01:50:22,840 --> 01:50:27,200
कोई बिल्कुल एकदम ब्रह्म वाक्य बोल बात

1502
01:50:27,200 --> 01:50:31,840
कर है ठीक है चलिए

1503
01:50:31,840 --> 01:50:37,840
चैट को डिलीट करने को बोल रहे हैं अवनीश दीक्षित

1504
01:50:38,520 --> 01:50:44,520
जी श्रीराम कुछ गलत लिख दिया होगा किसी

1505
01:50:46,720 --> 01:50:50,760
ने कौन सा है अब शब्द अरे

1506
01:50:50,760 --> 01:50:54,840
ठीक है बोला होगा अभी देख लेंगे तो ठीक है अब

1507
01:50:54,840 --> 01:50:59,200
पूरी करते हैं चर्चा को बढ़ाते हैं आप फिर किसी दिन आएंगे

1508
01:50:59,200 --> 01:51:03,240
वो जो है कोई आ नहीं रहा है भाई हमने उनको कहा है एकम अ द्वितीय वालों

1509
01:51:03,240 --> 01:51:07,400
को कि भैया निष्ठा पूर्वक माता जी ने

1510
01:51:07,400 --> 01:51:11,560
अपना दूध आपको प्रस्तुत किया हो आपको पिलाया है तो आप

1511
01:51:11,560 --> 01:51:16,400
जो है बंद कमरे में बैठ कर के जवाब ना दें सामना करें

1512
01:51:16,400 --> 01:51:20,560
इस मंच पर नहीं आना चाहते हैं कोई बीच का मंच ढूंढेंगे कोई बीच का चैनल

1513
01:51:20,560 --> 01:51:24,560
ढूंढेंगे वहां पर आ जाएंगे कुछ ऐसी जगह है

1514
01:51:24,560 --> 01:51:28,840
कुछ आप बताइएगा हम आएंगे या फिर कोई बीच की जगह ढूंढ लेंगे सामना

1515
01:51:28,840 --> 01:51:33,200
कर लीजिए आ जाइए है ना और बंद कमरे में बैठ कर के ना बनाए

1516
01:51:33,200 --> 01:51:37,680
चलिए सभी को जय श्री राम बात मुझे याद आ गई है एक बात मुझे याद आ गई है

1517
01:51:37,680 --> 01:51:42,080
के दूर वाली मैं राम भद्राचार्य जी महाबा का वक्तव्य देख रहा था स्कन

1518
01:51:42,080 --> 01:51:46,160
के लिए ही जब वो कह रहे थे कि ये भगवान राम जो

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01:51:46,160 --> 01:51:50,240
है वो कम क्या था वो 16 हा कलाओं

1520
01:51:50,240 --> 01:51:53,640
से है और वो 14 कलाओ से ये बहुत

1521
01:51:53,640 --> 01:51:58,320
बड़ी एक मिथ्या फैला दी इकन वालो नेनी

1522
01:51:58,320 --> 01:52:02,440
सबसे बेस्ट उनका ये था कि जिसकी मा ने निषा

1523
01:52:02,440 --> 01:52:06,440
से दूध पिलाया हो व चर्चा करे मुझसे मैं बताने तैयार

1524
01:52:06,440 --> 01:52:10,800
हूं कि राम कितने कलाओ के 16 कलाओ के कि नहीं है

1525
01:52:10,800 --> 01:52:15,040
करा जाता है भाई मैं मेरे पास एक एक मेरे पास

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01:52:15,040 --> 01:52:19,640
मैं अभी जब स्कन वाला वो मामला हुआ था छत्तीसगढ़ रायपुर

1527
01:52:19,640 --> 01:52:23,680
वहां पर मैंने देखा रामायण इकन की तरफ से छापी मैंने कहा ये रामायण कब

1528
01:52:23,680 --> 01:52:27,880
से छापने लगे जी तो मैंने अपनी जिज्ञासा मुझे

1529
01:52:27,880 --> 01:52:32,000
मालूम था कि क्या लिखा होगा युद्ध कांड में भगवान

1530
01:52:32,000 --> 01:52:36,440
को परमेश्वर कहा गया है राम राम जी कोहा

1531
01:52:36,440 --> 01:52:40,480
युद्ध कांड में तो मैंने सीधे उसको उठा के पहले तो मैंने 00 रुप

1532
01:52:40,480 --> 01:52:44,520
दिए सबसे पहले उसको खरीद लिया कि मैं अच्छे से इसका जो है

1533
01:52:44,520 --> 01:52:48,560
जी कर पाऊ उसको खोला जी बोल के मैं सीधे युद्ध कांड पर

1534
01:52:48,560 --> 01:52:52,760
चला गया और युद्ध कांड में मैंने देखा जहां पर उनको

1535
01:52:52,760 --> 01:52:56,840
कहा गया ना वहा इन्होने तुरंत कि राम जी जो है

1536
01:52:56,840 --> 01:53:01,280
उनका पूर्ण रूप नहीं है कृष्ण जी का वहां पर उसको शब्दों को हेर

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01:53:01,280 --> 01:53:05,360
फेर कर दिया यही जानने के लिए मैंने उसको ग्रंथ

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01:53:05,360 --> 01:53:08,640
को ले लिया कि इसमें भी इन्होने किया है कि नहीं य अपने उस

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01:53:08,640 --> 01:53:12,880
पर ट अडिग है कि नहीं कि हम तो झूठ बोलेंगे

1540
01:53:12,880 --> 01:53:16,880
हम तो मिलावट करेंगे हम तो गलत अर्थ बताएंगे हम तो

1541
01:53:16,880 --> 01:53:21,360
रामायण में भी राम को परमेश्वर नहीं होने देंगे इसी बात

1542
01:53:21,360 --> 01:53:25,520
मुझे समस्या थी बाद से मुझे समस्या थी और फिर क्योंकि चेंज

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01:53:25,520 --> 01:53:29,920
करना बदलना और उसके बाद तो चलिए ठीक है बाद में कभी

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01:53:29,920 --> 01:53:34,000
चर्चा होगी फुर्सत से जी और एक रिक्वेस्ट और

1545
01:53:34,000 --> 01:53:38,440
है मतलब आपके दर्शकों से बताना चाह रहे थे कि आवाहन का जो डिस्कॉर्डेंस

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01:53:38,440 --> 01:53:43,080
बाद हम प्रस्तुत मतलब पब्लिक करेंगे तो

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01:53:43,080 --> 01:53:47,280
आप लोग भी उसपे जब हो तो आप बता आप आई थिंक

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01:53:47,280 --> 01:53:51,440
आप बताइएगा जब जवाइन जब जवाइन करना होगा जब इसको लच हो जाएगा तो

1549
01:53:51,440 --> 01:53:56,160
तो ये बा ड प भी हम जाने वाले हैं बहुत जल्द वहां भी होंगे

1550
01:53:56,160 --> 01:54:00,280
और हम लोग आपसे चाहते हैं कि जो भी हम समर्थक हैं

1551
01:54:00,280 --> 01:54:04,760
वो यह जो सनातन सिद्धांत वाली जो वो है प्लेलिस्ट वो अवश्य

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01:54:04,760 --> 01:54:08,920
देखें संत रामपाल जी को जानना है तो उनके छह वीडियोस है वो डाल

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01:54:08,920 --> 01:54:12,920
दिए हैं उनके बारे में मोटी मोटी जो उनकी बातें हैं क्लेम है उनके बारे

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01:54:12,920 --> 01:54:17,720
में वीडियो डाल दिया है और यह जरूर देखें नाम जब के लिए जरूर

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01:54:17,720 --> 01:54:23,000
जुड़े प्रॉपर विधिवत अध्ययन करना चाहते हैं तो क्लासेस में आए

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01:54:23,000 --> 01:54:24,000
और

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01:54:24,000 --> 01:54:28,000
धर्म रक्षा अभियान के लिए जड़ना चाहते हैं साथ निभाना चाहते हैं कंधे से कंधा

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01:54:28,000 --> 01:54:32,000
मिलाकर तो वहां पर करें और यदि कोई

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01:54:32,000 --> 01:54:37,600
वैचारिक मतभेद है तो सामना करें प्रत्यक्ष सामना

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01:54:37,600 --> 01:54:42,440
करें एक भाई साहब है दिव्यांशु करके

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01:54:42,440 --> 01:54:48,440
मुझे कोई बताएगा कि अभी काफी देर हो चुकी है इसको बढ़ाए या दिव्यांशु जी

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ले अच्छा ठीक है तो ठीक है

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सभी को जय श्री राम आने के लिए आभार श्री राम

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01:54:56,760 --> 01:55:00,760
जय श्री राम
