1
00:00:01,720 --> 00:00:06,520
तो सभी को जय श्री राम हम लोग एक बार आपके

2
00:00:06,520 --> 00:00:12,520
समक्ष फिर से प्रस्तुत हैं अपनी जो वैचारिक गोष्ठी है उसको लेकर

3
00:00:13,160 --> 00:00:17,240
के जो धर्म और ब्रह्म को लेकर तियां और

4
00:00:17,240 --> 00:00:21,440
मत मता हो रहे जिसके कारण हमारा सनातन

5
00:00:21,440 --> 00:00:25,600
समाज बहुसंख्यक होते हुए भी निर्बल दिखाई देता

6
00:00:25,600 --> 00:00:30,280
है और उसके प्रति किसी को भी किसी भी दुरा

7
00:00:30,280 --> 00:00:35,760
को कोई भी दुरा चरण करने में कोई जजक कोई

8
00:00:35,760 --> 00:00:39,960
भी डर नहीं होता भय नहीं होता

9
00:00:39,960 --> 00:00:44,080
सभी को जय श्री राम और जितने भी छोटे भाई हैं उन सबको आज ढेर

10
00:00:44,080 --> 00:00:48,240
सारा आशीर्वाद तो आज हमारे साथ

11
00:00:48,240 --> 00:00:52,520
है रामपाल जी की शिक्षा को मानने वाले एक अनुयाई

12
00:00:52,520 --> 00:00:56,840
है रामपाल जी के और इनका नाम है लोकेश पांचाल जी

13
00:00:56,840 --> 00:00:57,340
लोकेश

14
00:00:57,200 --> 00:01:01,440
पांचाल जी पहले आप अपने बारे में थोड़ा सा यह बता दी जी होता क्या है

15
00:01:01,440 --> 00:01:05,560
कि जब हम किसी के साथ बता दू मैं समझ

16
00:01:05,560 --> 00:01:10,400
गया हमें समझ गया जी जी तो मैं बताता अपने बारे में हां

17
00:01:10,400 --> 00:01:14,440
मैं लोकेश पांचाल हूं ठीक मैं इंदौर लोकेशन से हूं एमपी

18
00:01:14,440 --> 00:01:18,480
इंडिया और मैंने रामपाल जी महाराज जी से अभी अभी

19
00:01:18,480 --> 00:01:22,480
रिसेंटली फरवरी में नाम दीक्षा लिए मुझे छ सात महीने हुए हैं ज्यादा

20
00:01:22,480 --> 00:01:26,800
टाइम हुआ नहीं और उसके बाद में मैंने फिर

21
00:01:26,800 --> 00:01:30,880
ज्ञान गंगा पुस्तक से मुझे भी ज्ञान प्राप्त हुआ था मेरा कोई पहले मतलब ऐसे विशेष

22
00:01:30,880 --> 00:01:35,000
गुरु नहीं थे राधा स्वामी पंथ से जुड़ा हुआ था पहले में आ 10 साल क् था

23
00:01:35,000 --> 00:01:39,040
पहले कबीर पंथ में तो इसलिए क्या हुआ कि जब ये ज्ञान गंगा पुस्तक और

24
00:01:39,040 --> 00:01:43,160
ये थोड़ा बहुत ज्ञान मुझे मेरे पिताजी जुड़ गए थे पहले तो उन्होंने मुझे बताया कि राम

25
00:01:43,160 --> 00:01:47,160
महाराज जी है तो फिर क्या हुआ था कि थोड़ा बता द मैं दो मिनट अपने बारे में मैं

26
00:01:47,160 --> 00:01:51,280
कैसे जुड़ गया नहीं नहीं ये नहीं जानना है असल में मेरा क्वेश्चन दूसरा

27
00:01:51,280 --> 00:01:55,880
था ठीक है होता क्या है कि जब भी हम किसी से बात करते हैं

28
00:01:55,880 --> 00:02:00,320
हम तो बाद में जो जिस

29
00:02:00,320 --> 00:02:04,320
कम्युनिटी के व्यक्ति से हम बात कर रहे हैं उसकी कम्युनिटी वाले ये कहते हैं कि

30
00:02:04,320 --> 00:02:08,640
आप जो है किसी एरे गैरे को पकड़ के उसके साथ चर्चा करते हो

31
00:02:08,640 --> 00:02:12,280
अब हमने किसी को रोका नहीं है आपने वहां पर अप्लाई

32
00:02:12,280 --> 00:02:16,360
किया फॉर्म भरा तो हम आपके समक्ष आ गए अब जो सामर्थ्य वान है वह

33
00:02:16,360 --> 00:02:20,400
क्यों नहीं प्रयास कर रहे संपर्क करने का तो यह इस बारे में हमें नहीं

34
00:02:20,400 --> 00:02:23,000
पता है

35
00:02:23,000 --> 00:02:27,080
मगर इस पर मेरा प्रश्न यह है कि रामपाल जी

36
00:02:27,080 --> 00:02:31,440
की तरफ से किसी को भी एक अधिकृत व्यक्ति समझने

37
00:02:31,440 --> 00:02:35,800
के लिए क्या व्यवस्था है क्या नियमावली है कि हम

38
00:02:35,800 --> 00:02:40,160
किसी को अधिकृत समझे अथवा ना समझे

39
00:02:40,160 --> 00:02:44,440
भाई साहब देखो आप जिस विषय में बात कर रहे

40
00:02:44,440 --> 00:02:48,520
ना मतलब मैं तो यहां इसलिए जवाइन किया है कि आपने एक वीडियो में बोला था कि अगर

41
00:02:48,520 --> 00:02:52,720
रामपाल जी महाराज के किसी शिष्य ने मां का दूध पिया है तो व मुझसे

42
00:02:52,720 --> 00:02:56,760
ज्ञान चर्चा करे ठीक है आपने जो बोला था अभी आप मुकरना चाहो

43
00:02:56,760 --> 00:03:01,040
तो मुक सकते हो देखो मैं तो सत्य को मानने वालां मेरे गुरु जी ने सत्य बोल सिखाया अब

44
00:03:01,040 --> 00:03:05,320
उस उस कांटेक्ट में मैं नहीं आया हूं मेरे गुरु जी का क्या ज्ञान है क्या नहीं है

45
00:03:05,320 --> 00:03:09,440
मैं अपने एक गुरु का शिष्य का फर्ज निभाने के हिसाब से मैं आपसे ज्ञान चर्चा करने

46
00:03:09,440 --> 00:03:13,520
आया हूं बस इतना ही है मैं ज्ञान चर्चा तो करने बैठे हैं वो

47
00:03:13,520 --> 00:03:17,760
आप सही कह रहे हैं और थोड़ा सा वर्डियर चेंज

48
00:03:17,760 --> 00:03:21,840
है माता जी का माता जी ने निष्ठा पूर्वक दूध तो पिलाया ही होगा

49
00:03:21,840 --> 00:03:25,920
ऐसा वर्डिक दूध है मतलब हां ऐसे नहीं

50
00:03:25,920 --> 00:03:27,560
बोला जी वडिंग

51
00:03:27,560 --> 00:03:31,800
थोड़ी चज जी जी ठीक है तो वो दास जो दास

52
00:03:31,800 --> 00:03:35,880
वो गुरुजी का जो अभी मैं देखिए मेरा जो प्रश्न है मैं वो

53
00:03:35,880 --> 00:03:40,760
ज्ञान चर्चा के लिए आप आए हैं मैं ऐसे ही जस्ट फॉर एक जनरल क्वेरी कर रहा हूं

54
00:03:40,760 --> 00:03:45,160
क्या रामपाल जी के द्वारा या रामपाल जी के शास्त्रों

55
00:03:45,160 --> 00:03:49,200
में उनकी ओर जैसे रामपाल जी आज हैं हो सकता है

56
00:03:49,200 --> 00:03:53,400
वो कल को परलोक चले जाए या स्वर्ग में मतलब अपने जो आपके

57
00:03:53,400 --> 00:03:57,760
अनुसार वो भगवान है ना आपके अनुसार

58
00:03:57,760 --> 00:04:01,880
भगवान गुरुजी सतलोक में चले जाए

59
00:04:01,880 --> 00:04:06,240
देखो आप आपके हिसाब से बता दो फिर मेरा क्या काम है मेरा प्रश्न य

60
00:04:06,240 --> 00:04:10,920
हैरा जो प्रश्न है वो कर रहा हूं कि रामपाल जी जब उपलब्ध नहीं है

61
00:04:10,920 --> 00:04:15,440
उस दशा में उनकी तरफ से अधिकृत व्यक्ति कौन है

62
00:04:15,440 --> 00:04:19,440
जो उस ज्ञान को बाकी के लोगों को देगा इस बारे में कोई व्यवस्था है

63
00:04:19,440 --> 00:04:23,560
कि नहीं है बस यह मैं जानना चाह रहा हूं रामपाल जी महाराज के द्वारा ऐसी

64
00:04:23,560 --> 00:04:27,760
व्यवस्था की गई है कि अगले 1000 साल तक सिर्फ रामपाल जी महाराज

65
00:04:27,760 --> 00:04:32,080
के सत्संग सुनाए जाएंगे टीवी पर जो आज व जेल में 10 साल से होते हुए उनके सत्संग

66
00:04:32,080 --> 00:04:36,120
आज भी चल रहे हैं आज भी नाम दीक्षा उन्ही के द्वारा दी जा रही है और अगले 1000 साल

67
00:04:36,120 --> 00:04:40,440
तक की व्यवस्था कर दी गई है नहीं 1000 साल नहीं षष्ठी

68
00:04:40,440 --> 00:04:42,720
तो उसके बाद भी रहेगी व्यवस्था क्या है उसके बाद

69
00:04:42,720 --> 00:04:47,240
की 1000 साल के बाद तो को है कि नहीं है रामपाल

70
00:04:47,240 --> 00:04:51,720
जी के ना होने की स्थिति में कोई व्यवस्था है कि नहीं है अगले 1000

71
00:04:51,720 --> 00:04:55,880
साल तक कीय दास गारंटी लेता है उसके बाद की तो प्रलय आनी है फिर प्रलय

72
00:04:55,880 --> 00:04:59,960
आने पर तो कौन बचेगा आप ही बताओ मतलब अगम

73
00:04:59,960 --> 00:05:04,120
है अगर रामपाल जी नहीं है तो उस दशा में उनकी तरफ से कोई अधिकृत

74
00:05:04,120 --> 00:05:08,560
व्यक्ति नहीं है इस बारे में कोई वो नहीं है

75
00:05:08,560 --> 00:05:12,720
व्यवस्था अच्छा अगर मैं जानना चाहूं कि आप शंकराचार्य के से जैसे

76
00:05:12,720 --> 00:05:16,880
शंकराचार्य हो और आप भी अपने आप को क्या मानते हो म आपको क सर्टिफिकेट दे रखा

77
00:05:16,880 --> 00:05:21,000
है क्या ज्ञान चर्चा करने का आपके दूसरा मैं दूसरा प्रश्न पूछ रहा

78
00:05:21,000 --> 00:05:25,200
हूं सर्टिफिकेट मैं आपको मैं आपको ब्लेम नहीं कर रहा हूं मैं केवल ये जानना

79
00:05:25,200 --> 00:05:29,800
चाह रहा हूं कि क्या ऐसी कोई आपके यहां पर कोई व्यवस्था

80
00:05:29,800 --> 00:05:34,560
है जिसमें रामपाल जी की अनुपस्थिति में उनकी ओर से किसी को

81
00:05:34,560 --> 00:05:39,320
उनका उत्तराधिकारी या उनका जो है अधिकृत

82
00:05:39,320 --> 00:05:43,640
नहीं उत्तराधिकारी तो इसका मतलब जब रामपाल जी नहीं है तो किसकी माने

83
00:05:43,640 --> 00:05:47,680
किसकी ना माने ये कुछ फिक्स नहीं है शायद आपने सुना ही नहीं

84
00:05:47,680 --> 00:05:52,640
मैंने क्या बोला कि आप सुनना नहीं चाहते हो मुझे सुनना चाहते हो आप

85
00:05:52,640 --> 00:05:56,760
हा मैं बोल रहा हूं कि आज रामपाल जी महाराज जी को 10

86
00:05:56,760 --> 00:05:57,800
साल हो गए जेल धाम

87
00:05:57,800 --> 00:06:01,920
गए हुए ये बात आप जानते हो कि नहीं जानते हो 10 साल

88
00:06:01,920 --> 00:06:06,240
से टीवी पर सत्संग चल रहे हैं जानते हो या नहीं जानते हो साधना

89
00:06:06,240 --> 00:06:10,960
चैनल है 7:30 बजे रोज आता है आज उनके 514

90
00:06:10,960 --> 00:06:15,160
नामदान सेंटर है देल धाम जाने के बाद खुले गए ठीक है

91
00:06:15,160 --> 00:06:19,280
तो वो चल रहे देखिए वो चर्चा थोड़ी बदल रही है देखिए मैं आपको प्रैक्टिकली

92
00:06:19,280 --> 00:06:23,440
बताता हूं दिक्कत क्या है जैसे आपने कहा कि उनके 514 नामदान सेंटर

93
00:06:23,440 --> 00:06:27,840
है ठीक है अब उसमें रामपाल जी तो नहीं है 514 जगह रामपाल

94
00:06:27,840 --> 00:06:31,920
जी तो जेल में है रामपाल जी के नाम से जो वहां पर

95
00:06:31,920 --> 00:06:36,040
शिक्षा दी जा रही है वह कुछ और लोग दे रहे हैं तो

96
00:06:36,040 --> 00:06:40,280
जब कुछ और लोग रामपाल जी के नाम से शिक्षा वहां पर दे रहे

97
00:06:40,280 --> 00:06:44,680
हैं रामपाल जीने नियम बनाया ना

98
00:06:44,680 --> 00:06:48,240
व वो नियम सेही

99
00:06:48,240 --> 00:06:52,240
चल देखिए मैंने मैंने आपको एक ज्ञान गंगा पुस्तक

100
00:06:52,240 --> 00:06:56,440
पकड़ाई ठीक है अब ज्ञान गंगा पुस्तक में वही

101
00:06:56,440 --> 00:07:00,440
लिखा है जो रामपाल जी ने लिखा था या बदल दिया गया यह आपको कैसे

102
00:07:00,440 --> 00:07:05,000
पता चलेगा व तो हमारे गुरु जी वो जो पुस्तक छपा

103
00:07:05,000 --> 00:07:09,040
जब तक आप जेल नहीं जाओगे जब तक आप रामपाल जी के पास नहीं जाओगे तब

104
00:07:09,040 --> 00:07:12,960
तक आपको पता नहीं चलेगा ना या तो आपको मान

105
00:07:12,960 --> 00:07:17,040
या तो आपको विश्वास करना पड़ेगा जो रामपाल जी के नाम से आपको पुस्तक

106
00:07:17,040 --> 00:07:21,160
दे रहा है आपको एक मानना पड़ेगा कि चलो इस पर विश्वास कर लेते हैं य वही

107
00:07:21,160 --> 00:07:25,600
ये वही ज्ञान दे रहा है जो रामपाल जी ने दिया मानना पड़ेगा है ना

108
00:07:25,600 --> 00:07:29,680
यानी कि आपने किसी और पर रामपाल जी की तरफ से विश्वास

109
00:07:29,680 --> 00:07:33,840
किया तो मैं यह कह रहा हूं यह जो विश्वास करने वाला नियम है यह

110
00:07:33,840 --> 00:07:37,880
रामपाल जी ने अपनी किसी पुस्तक में दिया है कि नहीं दिया है

111
00:07:37,880 --> 00:07:41,880
दे रखे उन्होने जो भी देखो भाई साहब है ना अपन उस पॉइंट प आते जहा से ज्ञान

112
00:07:41,880 --> 00:07:46,000
चर्चा करनी ठीक है क्या देखिए यय भी ज्ञान चर्चा

113
00:07:46,000 --> 00:07:50,000
है मैं देखिए इसमें कोई हार जीत वाली बात नहीं मैं आपसे बस जानकारी ले रहा

114
00:07:50,000 --> 00:07:54,080
हूं क्या रामपाल जी ने विश्वास किस पर करना है मेरी तरफ से और किस

115
00:07:54,080 --> 00:08:00,080
पर नहीं करना है इस बारे में कोई नियम दिया है क्या

116
00:08:00,080 --> 00:08:04,160
जैसे हमारे पास एक नियम दिया जैसे मैं अपनी बात बताऊ आदि शंकराचार्य

117
00:08:04,160 --> 00:08:08,520
जी ने ममना मानुष आश्रम लिखा उसमें उन्होंने लिख दिया जो

118
00:08:08,520 --> 00:08:12,680
मेरे द्वारा स्थापित पीठ पर आरूढ़ लक्षण संपन्न

119
00:08:12,680 --> 00:08:16,680
सन्यासी होगा वह मुझ शिव का रूप ही मान्य है तो

120
00:08:16,680 --> 00:08:20,880
यह क्या हुआ नियम दे दिया अब भाई उनकी ओर से जो भी आएगा उनका उनके द्वारा

121
00:08:20,880 --> 00:08:24,880
उनका शिष्य फिर उनका शिष्य फिर उनका शिष्य तो वो हमारे लिए उसी रूप में मान्य हो

122
00:08:24,880 --> 00:08:28,920
जाएगा तो यह नियमावली हमें प्राप्त है और यह नियम ये भी जो नियम

123
00:08:28,920 --> 00:08:32,920
है ये आधारित है शास्त्रों के जो आदि शंकराचार्य जी ने जो नियम

124
00:08:32,920 --> 00:08:37,480
लिखा 62 श्वेता शत्र उपनिषद के आधार पर उन्होंने लिखा तो

125
00:08:37,480 --> 00:08:41,680
कहने का अर्थ ये है क्या ऐसा कोई नियम उन्होंने बनाया है मैं मान लीजिए मैं अभी

126
00:08:41,680 --> 00:08:46,040
एक ज्ञान गंगा छपवा लू प्रिंटर से और उसमें कुछ ऐसी बातें लिख दूं

127
00:08:46,040 --> 00:08:50,080
जो रामपाल जी ने नहीं लिखी है तो आपको कैसे पता चलेगा

128
00:08:50,080 --> 00:08:54,160
कि यह जो चीजें हैं वो रामपाल जी ने नहीं लिखी आप तो उसको रामपाल जी

129
00:08:54,160 --> 00:08:58,600
की मानोगे नहीं तो हो सकता है स्के उसमें क्या है मतलब

130
00:08:58,600 --> 00:09:02,800
करने वाले तो इसका मतलब इसका कोई सही ढांचा आपके पास

131
00:09:02,800 --> 00:09:07,000
नहीं है किस पुस्तक को लेना है किसको नहीं लेना है ठीक है हां मान

132
00:09:07,000 --> 00:09:11,440
गए पर सत्संग तो सुन रहे हैं उनके लाइव वो वो तो सुन सकते हैं सत्संग

133
00:09:11,440 --> 00:09:15,200
सुन रहे हैं मगर फिर भी सत्संग में पूरा वृहद ग्रंथावली तो नहीं

134
00:09:15,200 --> 00:09:19,280
आ जाएगी ना सत्संग में उनके 3000 से ज्यादा एपिसोड है

135
00:09:19,280 --> 00:09:23,440
जिसमें 1000 ज्ञान गंगा पुस्तकें और बनाई जा सकती है यानी कि उन्होंने इतना

136
00:09:23,440 --> 00:09:27,440
सत्संग कर दिया है कि उसी से सब कुछ हो जाएगा सत्संग सुनने

137
00:09:27,440 --> 00:09:31,640
से सब अब मुझे भी तो वहीं से ज्ञान प्राप्त हुआ अब मे को ये पैदा होते से रामपाल जी महाराज का शिष्य

138
00:09:31,640 --> 00:09:35,920
तो थाा अच्छा एक बात बताइए सत्संग से सब हो जाएगा अभी आजकल एआई

139
00:09:35,920 --> 00:09:40,000
का जमाना आ गया है एआई से किसी ने रामपाल जी की कॉपी करते

140
00:09:40,000 --> 00:09:44,160
हुए रामपाल जी के नाम से गलत सत्संग बना दिया फिर क्या करेंगे अच्छा

141
00:09:44,160 --> 00:09:48,240
एक काम करते पहले मेरा सवाल का जवाब दे दीजिए नहीं नहीं मैं हम

142
00:09:48,240 --> 00:09:52,680
लोग अपनी मेन टॉपिक प आएंगे मगर अभी अभी जैसे आप पूरी तरीके से

143
00:09:52,680 --> 00:09:56,760
आप पूरी तरीके से डिपेंड हो गए हैं वीडियो पे तो वीडियो

144
00:09:56,760 --> 00:10:01,080
अगर किसी ने यह जो एआई वगैरह का जमाना आ गया इसमें वीडियो वो ऑडियो मिक्सिंग

145
00:10:01,080 --> 00:10:05,120
हो रही है तो रामपाल जी के नाम से रामपाल जी के चित्र आदि का

146
00:10:05,120 --> 00:10:09,400
एडिटिंग डिटिंग करके आपको कुछ गलत उसमें दिखा दिया सत्संग में तो

147
00:10:09,400 --> 00:10:13,920
आप फिर वहां पर आपका वो क्या है सोर्स निर्णायक

148
00:10:13,920 --> 00:10:18,520
आप मुझे बताइए ना कि वो जो वीडियो है वो वीडियो है वो कौन डालेगा

149
00:10:18,520 --> 00:10:22,720
आप बताओ कोई गलत व्यक्ति जो रामपाल जी की शिक्षा आप तक नहीं पहुंचाना चाहता है

150
00:10:22,720 --> 00:10:26,800
हां तो वो व्यक्ति साधना टीवी 7:30 बजे जो जाता है तो उस पर कोई

151
00:10:26,800 --> 00:10:30,720
आधिकारिक व्यक्ति उन्होने बिठा रखा रामपाल जी महाराज जी ने ये आज का स

152
00:10:30,720 --> 00:10:35,040
हा मतलब की मतलब की साधना टीवी उनका आधिकारिक चैनल

153
00:10:35,040 --> 00:10:39,200
है वहां प आधिकारिक चैनल उनका नहीं भाई साहब उसके

154
00:10:39,200 --> 00:10:43,960
मतलब उनकी ओर से सही चीज दिखाता है हां वहां पर कोई बैठा है जो

155
00:10:43,960 --> 00:10:48,280
उनका सत्संग प्रसारित करने वाला कोई बैठा होगा ना हा तो मैं मेरा कहना

156
00:10:48,280 --> 00:10:52,320
यही है कि आज वो अच्छा व्यक्ति है

157
00:10:52,320 --> 00:10:56,600
साधना चैनल वाले का ओनर बदल गया कंपनी एक दूसरे से खरीद लेती है

158
00:10:56,600 --> 00:11:00,760
हा उसका मन बदल गया अब मुझे रामपाल के विरोध में दिखाना है मिक्सिंग करनी

159
00:11:00,760 --> 00:11:05,040
है तो हमारे पास कोई पैरामीटर होना चाहिए ना कि हमें

160
00:11:05,040 --> 00:11:09,200
क्या चीज किस पैरामीटर के हिसाब से सही माननी है किसके हिसाब से नहीं माननी है अब

161
00:11:09,200 --> 00:11:13,240
हमारे पास पैरामीटर सेट है बकुल सही बकुल और आपके पास वो सेट है कि

162
00:11:13,240 --> 00:11:17,440
नहीं मैं ये पूछ रहा था चलिए अब हम मुख्य विषय पर आते हैं समझ गया समझ

163
00:11:17,440 --> 00:11:21,600
बताता नहीं मैं बता देता हूं अब मैं समझ गया तो जवाब भी सुन लीजिए रामपाल जी महाराज

164
00:11:21,600 --> 00:11:25,640
ने अपनी तरफ से कोई ज्ञान दिया नहीं है जो भी ज्ञान दिया है उन्होंने कहां से दिया है एक

165
00:11:25,640 --> 00:11:29,680
है कबीर सागर दूसरा है गरीब दास जी का अमर ग्रंथ ठीक है

166
00:11:29,680 --> 00:11:33,800
तो जहां पर भी गड़बड़ होगी तो कबीर सागर मेरे पास रखा हुआ है देखो दिखा दूं नहीं तो आप बोलोगे

167
00:11:33,800 --> 00:11:37,840
आपके पास कबीर सागर नहीं है देख लीजिए तो जिस दिन मुझे लगे पढ़ रखा है

168
00:11:37,840 --> 00:11:42,080
दास ने तो वो समझ जाएगा कि इसमें मिलावट हो रही है आपके लिए अंतिम

169
00:11:42,080 --> 00:11:45,880
प्रमाण कबीर सागर है या वेद है वेद

170
00:11:45,880 --> 00:11:50,080
नहीं है भाई साहब मैं वही तो पूछना चाह रहा हूं कि वेद का ज्ञान किसने दिया ये मेरा पहला सवाल

171
00:11:50,080 --> 00:11:54,240
ही आपसे है जी जी वेद किसने अभी

172
00:11:54,240 --> 00:11:58,840
इन सब हम लोग एकएक करके चलते हैं पहले एक फिर दूसरा फिर तीसरा

173
00:11:58,840 --> 00:12:03,040
हां बाद तो सवाल नहीं इस पर हम लोग सबसे पहले आते हैं कि

174
00:12:03,040 --> 00:12:08,000
अगर हम ये कहते हैं कि कबीर साहब भगवान है कबीर साहब

175
00:12:08,000 --> 00:12:13,400
भगवान है हम तो क्या वो सर्वशक्तिमान

176
00:12:13,400 --> 00:12:17,440
है सर्वशक्तिमान है हां है क्या

177
00:12:17,440 --> 00:12:21,480
वो सर्व नियामक है नहीं अभी रुको ना भाई साहब अभी रुको

178
00:12:21,480 --> 00:12:25,480
ना अभी एक एक पे चलते हैं ना आपके हिसाब से उसको भी क्लियर करते

179
00:12:25,480 --> 00:12:29,600
चले कि आपने जो ज्ञान आपने जो समझा है क्या वो सही भी है या नहीं है भाई साहब

180
00:12:29,600 --> 00:12:34,040
देखिए पहले मैं बता दूं आपको एक बात बता दूं पहले

181
00:12:34,040 --> 00:12:38,040
क्लेम सुनिए क्लेम आपने पहले शुरू किया है कि भाई वेदों

182
00:12:38,040 --> 00:12:43,720
में प्रमाण है कवि साहब भगवान है यह क्लेम आपने शुरू किया है पहले ठीक

183
00:12:43,720 --> 00:12:48,360
है अभी आप अभी आप उनकी तरफ से आए हो ना हमारे पास

184
00:12:48,360 --> 00:12:52,680
अभी आप उनकी तरफ से ही आए हो ना अब जब हम

185
00:12:52,680 --> 00:12:56,880
हम जब यह मानने को तैयार हो जाए कि कबीर साहब भगवान है तो हमें

186
00:12:56,880 --> 00:13:00,960
य जानना होगा ना कि वो भगवान वाले उनके पास है कि नहीं कि

187
00:13:00,960 --> 00:13:04,960
यूं ही कह रहे हैं भगवान है और मैं मेरे को ये नहीं चाहिए कि आप कुछ करके

188
00:13:04,960 --> 00:13:08,960
दिखा दो कबीर साहब की तरफ से नहीं बस वो नियम तो बताओ कि क्या ये

189
00:13:08,960 --> 00:13:13,680
नियम आपने स्वीकार कर रखे हैं जो जो नियम ईश्वर होने के लिए आवश्यक है

190
00:13:13,680 --> 00:13:17,760
तो अभी मैं पूछ रहा हूं बोल रहा हूं कि आपने किस कौन से आधार पर नियम

191
00:13:17,760 --> 00:13:22,280
बना रखे कि ईश्वर की ये नियम है आप कैसे पहचानोगे कल को अगर ईश्वर अवता

192
00:13:22,280 --> 00:13:26,480
देखिए ये जनता तय कर लेगी अभी हम लोग कन्वर्सेशन करते हैं कि मैंने जो चीजें बोली

193
00:13:26,480 --> 00:13:31,000
है वो गलत है या सही है वो जनता तय करेगी हम यहां किसी जिदो जहद के लिए नहीं आए

194
00:13:31,000 --> 00:13:35,840
ठीक है एक एक करके चलते हैं अभी मैं पूछ रहा हूं आपसे क्या

195
00:13:35,840 --> 00:13:39,840
रामपाल दास जी के द्वारा प्रतिपादित होने वाला जो ईश्वर है कबीर

196
00:13:39,840 --> 00:13:43,960
नाम है जिसका वह सर्वशक्तिमान है या नहीं

197
00:13:43,960 --> 00:13:48,040
सर्वशक्तिमान है व व क्या उसके

198
00:13:48,040 --> 00:13:52,840
ऊपर कोई भी नियम एक मिनट भाई अब हमारे को तो बोलने दो

199
00:13:52,840 --> 00:13:58,040
जन आया आपके द्वारा प्रतिवाद

200
00:13:58,040 --> 00:14:02,200
जब एक बात खत्म आप उसको पॉइंट को लिख लो मैं बताऊंगा मैं

201
00:14:02,200 --> 00:14:06,320
आपको हमारे द्वारा प्रतिपादित होने वाला ईश्वर बताऊंगा ठीक है अभी जब

202
00:14:06,320 --> 00:14:10,320
एक पॉइंट इसको कंप्लीट होने दो पहले इसको

203
00:14:10,320 --> 00:14:14,480
आप कंप्लीट होने दो हा इसको आप कंपलीट होने दो तो यदि

204
00:14:14,480 --> 00:14:16,360
वो सर्वशक्तिमान है

205
00:14:16,360 --> 00:14:20,440
यदि आपका कबीर सर्वशक्तिमान है तो क्या वह किसी भी प्रकार

206
00:14:20,440 --> 00:14:24,480
के नियम के नीचे है कि नहीं है बिल्कुल वो उनके बनाए

207
00:14:24,480 --> 00:14:29,400
हुए नियम के नीचे है मैं मानता हूं अच्छा मतलब

208
00:14:29,400 --> 00:14:33,920
ऐसे बहुत से काम है जो नहीं कर सकता बिल्कुल हा सत्य

209
00:14:33,920 --> 00:14:37,960
सत्य तो फिर वो बाधित है सीमित है उसकी

210
00:14:37,960 --> 00:14:42,120
शक्तिया सीमित है बिल्कुल सर्वशक्तिमान तो है पर

211
00:14:42,120 --> 00:14:46,240
उसकी सीमित है ऐसा नहीं सव शक्तिमान का अर्थ

212
00:14:46,240 --> 00:14:50,560
क्या होता है मैं आपसे जानना चाह रहा हूं भाई क्या सर्वशक्तिमान

213
00:14:50,560 --> 00:14:54,600
का अर्थ आप बताओ मुझे स सर्वशक्ति सर्व शक्ति

214
00:14:54,600 --> 00:14:58,680
सभी कार्य सर्व यानी सभी सभी कार्यों को करने की शक्ति को

215
00:14:58,680 --> 00:15:02,720
रख वाला सर्वशक्तिमान अब सभी कार्यों में आप कह रहे

216
00:15:02,720 --> 00:15:06,720
हो कि नहीं नहीं कुछ कार्य ऐसे जो वो नहीं कर सकता क्या प्रैक्टिकल

217
00:15:06,720 --> 00:15:10,880
हैय आप जो बोल रहे हो क्या प्रैक्टिकली सही है

218
00:15:10,880 --> 00:15:15,080
बिल्कुल प्रैक्टिकल मैं बिल्कुल सिद्ध कर दूंगा पहले अभी आपको पहले एक्सेप्ट करना

219
00:15:15,080 --> 00:15:19,160
होगा कि वो स अरे भाई मैं ये कह रहा हूं कि

220
00:15:19,160 --> 00:15:23,240
मेरे पास ईश्वर है ही नहीं मैं अभी आपको कह रहा हूं है ही नहीं ईश्वर अब आप अपने

221
00:15:23,240 --> 00:15:27,280
ईश्वर को सर्वशक्तिमान तो सिद्ध करोगे कि नहीं करोगे य दुनिया

222
00:15:27,280 --> 00:15:31,320
को नास्तिक बना दोगे कि क्योंकि किसी के पास नहीं है क्योंकि किसी के

223
00:15:31,320 --> 00:15:31,820
पास

224
00:15:31,520 --> 00:15:35,520
नहीं है इसलिए मेरा सही है नहीं नहीं ऐसा क्योंकि किसी के पास क्योंकि

225
00:15:35,520 --> 00:15:40,080
किसी के पास टिकट नहीं है इसलिए मेरे पास भी टिकट ना होना उचित है ऐसा तो नहीं है

226
00:15:40,080 --> 00:15:44,080
दूसरे के पास टिकट है या नहीं है डजन मैटर आपके पास टिकट है कि नहीं यह मैटर

227
00:15:44,080 --> 00:15:48,080
करता है अभी आपसे बात हो रही है शमान ईश्वर है वो

228
00:15:48,080 --> 00:15:52,560
उसके कुछ नियम है उस नियम को फॉलो करता है वो ऐसे नहीं

229
00:15:52,560 --> 00:15:56,720
कि यानी वो अपने बनाए हुए नियम नहीं तोड़ सकता

230
00:15:56,720 --> 00:16:00,880
बिल्कुल सही अपने नियमों को तोड़ने की शक्ति उसमें

231
00:16:00,880 --> 00:16:05,200
नहीं है नहीं है शक्ति वो शक्ति नहीं है उसके अर तो सर्वशक्तिमान कैसे

232
00:16:05,200 --> 00:16:09,600
हुआ तो फिर वो नहीं हु सर्वशक्तिमान आपका श्वर

233
00:16:09,600 --> 00:16:13,920
बोलो पहले आप ये पहले जनता के सामने थोड़ा एक्सेप्ट करो कि हा वो

234
00:16:13,920 --> 00:16:18,040
क्लियर की कबीर सर्वशक्तिमान नहीं है तो

235
00:16:18,040 --> 00:16:22,360
भाई एक बात बताओ मुझे आपने ऐसा बोला ठीक है अरे भाई

236
00:16:22,360 --> 00:16:26,480
आपने बोला ना नहीं है अब बोलो

237
00:16:26,480 --> 00:16:30,760
आपने बोला नहीं है सर्वशक्तिमान पहले बोलो बोलो मेरा ईश्वर सर्वशक्तिमान नहीं

238
00:16:30,760 --> 00:16:35,240
है बोल दिया मेरा नहीं कबीर कबीर सर्वशक्तिमान नहीं है बोलो

239
00:16:35,240 --> 00:16:39,320
कबीर सर्वशक्तिमान नहीं है बोल दिया

240
00:16:39,320 --> 00:16:43,560
बढ़िया अब आप बताइए जब वो सर्वशक्तिमान नहीं

241
00:16:43,560 --> 00:16:46,640
है जब वो सर्वशक्तिमान नहीं

242
00:16:46,640 --> 00:16:51,000
है अब आप श्वर को लेना चाहिए ना य पर

243
00:16:51,000 --> 00:16:55,880
चलो अच्छा अब हमारे ईश्वर के बारे में पूछो हा

244
00:16:55,880 --> 00:16:59,960
सक्तिमान हैते ठीक जी अभी

245
00:16:59,960 --> 00:17:04,040
श्रावण के महीने में 12 बच्चे मना रहे थे उसमें

246
00:17:04,040 --> 00:17:08,800
से नौ बच्चे उनके ऊपर दीवार गिर गए और मर गए उ दबकर

247
00:17:08,800 --> 00:17:12,960
सर्वशक्तिमान ईश्वर जो थे उन्हों क्यों नहीं बचा पाए अच्छा

248
00:17:12,960 --> 00:17:17,600
ठीक है अब मुझे आप एक बात बताओ क्या

249
00:17:17,600 --> 00:17:23,080
यह जो संसार है यह भगवान के लिए क्या

250
00:17:23,080 --> 00:17:27,320
है हमारे हिसाब से तो ये तो आपके ईश्वर के हिसाब से ये सब चीजें

251
00:17:27,320 --> 00:17:31,600
हमारे हिसाब से तो काल का जाल है मैं जिस ईश्वर को जानता हूं आपके ईश्वर

252
00:17:31,600 --> 00:17:36,040
के यहां पर होने वाली घटनाएं क्या आपके ईश्वर को प्रभावित

253
00:17:36,040 --> 00:17:40,200
करती है या नहीं मतलब की

254
00:17:40,200 --> 00:17:44,320
नहीं करती मतलब कि यहां पर किसी का रेप हो रहा है तो उसको दुख होगा

255
00:17:44,320 --> 00:17:48,440
या नहीं होगा मेरे ईश्वर को इस बात से दुख होता जरूर

256
00:17:48,440 --> 00:17:52,480
है ठीक या ईश्वर को भी दुख होता है हा बिल्कुल उनको दुख होता है

257
00:17:52,480 --> 00:17:56,680
उनके बच्चे सब कबीर को दुख होता है बिल्कुल वो बोलते

258
00:17:56,680 --> 00:18:00,760
है मे रोव सृष्टि को यष्टि तो अब आप ईश्वर की व्याख्या

259
00:18:00,760 --> 00:18:01,840
करिए जरा अब

260
00:18:01,840 --> 00:18:05,880
ईश्वर से ईश्वर का अर्थ क्या समझते हैं आप अब मैं तो

261
00:18:05,880 --> 00:18:10,040
बता रहा हूं ना कि जिस ईश्वर ने हमें जन्म दिया या जिसने हमारी उत्पत्ति करी है वो

262
00:18:10,040 --> 00:18:14,560
श्वर हम दुखी होते तो ईश्वर को भी दुख होता है ठीक है

263
00:18:14,560 --> 00:18:18,840
हम हमारे अज्ञान के कारण इस काल के लोक में बैठकर दुखी हो रहे हैं मतलब

264
00:18:18,840 --> 00:18:23,280
कि यहां से जो सभी जो मुक्ति कही गई है

265
00:18:23,280 --> 00:18:27,400
वो मुक्ति भी मुक्त नहीं क्योंकि हमारा ईश्वर भी दुखी होता है

266
00:18:27,400 --> 00:18:31,640
क्यों नहीं दुखी होंगे बताओ उस ब तो फिर मुक्त कहां से तो फिर हम हम

267
00:18:31,640 --> 00:18:35,920
हम मुक्ति जो हमें कह रहे हैं कि हम इन सारे रो दोष कलेश से मुक्त हो जाएंगे

268
00:18:35,920 --> 00:18:40,000
दुखों से मुक्त हो जाएंगे वहां जाकर के जब जिसका जो हमारा भगवान

269
00:18:40,000 --> 00:18:44,080
है वही दुखी हो रहा है तो हमारे को उस भगवान तक जाने की

270
00:18:44,080 --> 00:18:48,960
क्या आवश्यकता है भाई तोब आपका भगवान भी दुखी हो रहा है

271
00:18:48,960 --> 00:18:53,720
भगवान सुख तो है जब य से आत्मा सतलोक को चले जाती तो सुखी भी तो होता है

272
00:18:53,720 --> 00:18:58,240
वो अरे ऐसे तो हम यहां भी खुश होते हैं य हम खुश नहीं होते क्या

273
00:18:58,240 --> 00:19:02,240
य सारे सुख ही नकली है भाई कौन सा सुख मैं कह रहा

274
00:19:02,240 --> 00:19:06,320
हूं सुख नकली है दुख नकली है ठीक है मगर वहां भी जाकर के

275
00:19:06,320 --> 00:19:10,360
दुख तो है ना मुक्ति नहीं है ना दुखों से सवाल का जवाब

276
00:19:10,360 --> 00:19:14,760
नहीं दिया भाई कि वो ईश्वर भाई मैं जब आपका जब ई

277
00:19:14,760 --> 00:19:16,880
बात यहां पर खत्म हो रही है क्योंकि

278
00:19:16,880 --> 00:19:21,200
मैं तो सारे सवालों के जवाब देने बैठा हूं नहीं मेरे ईश्वर के साइड हो गए ना अब तो आपके ईश्वर

279
00:19:21,200 --> 00:19:25,680
की बात चल रही है कि आपका ईश्वर उन बच्चों को क्यों नहीं बचा पाया सर्वशक्ति क्योंकि

280
00:19:25,680 --> 00:19:29,720
सुनिए मैं बता रहा हूं बचा पाने की बात नहीं है बचा पाने की

281
00:19:29,720 --> 00:19:33,840
बात नहीं पहले सुनिए क्योंकि इस संसार को बनाने

282
00:19:33,840 --> 00:19:37,840
वाले ईश्वर हैं इसका अर्थ यह है कि उन बच्चों के साथ जो घटना

283
00:19:37,840 --> 00:19:41,840
हो रही है ना उस घटना को भी भगवान नहीं बनाया है और

284
00:19:41,840 --> 00:19:46,240
बच्चों को भी भगवान नहीं बनाया है भगवान के लिए भगवान

285
00:19:46,240 --> 00:19:50,440
के लिए यह केवल एक खेल है और इससे ज्यादा

286
00:19:50,440 --> 00:19:54,760
कुछ नहीं है इसलिए यहां पर होने वाली अच्छाई अथवा बुराई

287
00:19:54,760 --> 00:19:59,280
भगवान से नहीं चिपकती क्योंकि भगवान ने बुलाया जैसे मान लीजिए फॉर एम

288
00:19:59,280 --> 00:20:03,280
एक पेंटर है जो पेंटिंग कर रहा है ठीक है एक स्त्री की पेंटिंग कर रहा

289
00:20:03,280 --> 00:20:07,320
है वो क्या उस जब वो पेंटिंग करेगा उसकी आंखों में

290
00:20:07,320 --> 00:20:11,440
कलर भरेगा तो उसके जो नीचे के पार्ट्स होंगे जो आपत्ति जनक होते हैं

291
00:20:11,440 --> 00:20:15,480
हमारी दृष्टि से स्त्री के लिए मगर क्या पेंटर जब पेंटिंग करेगा

292
00:20:15,480 --> 00:20:19,720
उसके उन पार्ट्स में जहां पर आपत्ति हो सकती मनुष्य दृष्टि

293
00:20:19,720 --> 00:20:24,400
से तो क्या वह बुरा माना जाएगा पर आपने मेरा जवाब

294
00:20:24,400 --> 00:20:29,240
मतलब है सुनिए इसका मतलब है जो निर्माता है

295
00:20:29,240 --> 00:20:31,960
एक मिनट यार एक मिनट अभी मुझे पूरा करने दो

296
00:20:31,960 --> 00:20:36,320
जो निर्माता है उसके अनुसार जो अच्छाई और बुराई

297
00:20:36,320 --> 00:20:40,560
है उसमें कोई फर्क नहीं है क्योंकि दोनों को उसी ने बनाया है फर्क

298
00:20:40,560 --> 00:20:44,640
हमारे लिए है हमारे लिए अच्छाई और बुराई है क्यों क्योंकि हमें ईश्वर

299
00:20:44,640 --> 00:20:48,760
को प्राप्त करना है ईश्वर को किसी को प्राप्त नहीं करना है

300
00:20:48,760 --> 00:20:52,840
जिससे जिस लिए उसके लिए कुछ भी अच्छा बुरा नहीं है सब कुछ एक समान है

301
00:20:52,840 --> 00:20:56,960
हम लोग घबरा रहे हैं जैसे कि घर में जब छोटे बच्चे होते हैं

302
00:20:56,960 --> 00:21:01,120
वो बेकार की चीजों को लेकर रोने लगते हैं बेकार की चीजों को लेकर

303
00:21:01,120 --> 00:21:05,280
के एक्साइटेड होने लगते हैं अरे मुझे वो दिला दो वो दिला दो हम लोग सच्चाई जानते हैं

304
00:21:05,280 --> 00:21:09,480
ये बेकार में ही टेंशन ले रहा है ऐसे ही ईश्वर सच्चाई जानते हैं कि बेकार

305
00:21:09,480 --> 00:21:13,520
में टेंशन ले रहा है वस्तुतः तो ये मुक्त है इसको मुक्त होना है इसका वास्तविक स्वरूप

306
00:21:13,520 --> 00:21:17,840
तो कुछ और है नैनम छिंदंति शस्त्राणि नैनम दहति पाव का ना चैन

307
00:21:17,840 --> 00:21:22,240
क्लेप न शति मारता जब आत्मा को कोई नुकसान

308
00:21:22,240 --> 00:21:26,400
होता ही नहीं है तो भगवान उससे क्यों दुखी हो मगर आत्मा जो जीव

309
00:21:26,400 --> 00:21:30,440
भाव को प्राप्त मनुष्य शरीर के अंदर आ गई है उसको टेंशन होती है क्योंकि

310
00:21:30,440 --> 00:21:34,600
वह अज्ञानता में है ईश्वर अज्ञानी नहीं है जो वोय

311
00:21:34,600 --> 00:21:38,600
ना समझ पाए बेकार मेंही हो रही है परेशानी तो बच्चे जो मरते हैं यह होते

312
00:21:38,600 --> 00:21:42,720
हैं आत्मा को कुछ नहीं होता यह बात भगवान जानते हैं दुखी हम होते हैं

313
00:21:42,720 --> 00:21:47,040
क्योंकि हम जीव भाव को प्राप्त है भगवान जीव भाव को प्राप्त नहीं है

314
00:21:47,040 --> 00:21:51,200
मगर आपका भगवान हैका भगवान है आपका

315
00:21:51,200 --> 00:21:55,560
जवाब बिल्कुल गलत बता रहा हूं देखो दिल्ली में हत्याकांड

316
00:21:55,560 --> 00:21:59,640
हुआ था हत्याकांड उसम मेरी बात सु एक बस में एक लड़की

317
00:21:59,640 --> 00:22:03,840
के साथ पांच दरिंदे जबरदस्ती सामयिक बलात्कार कर रहे थे उनके गुप्तांगों में रोहे

318
00:22:03,840 --> 00:22:08,560
की ला रा डाल दी थी तो उस लड़की को दर्द नहीं हो रहा था क्या

319
00:22:08,560 --> 00:22:12,720
उस आत्मा को दर्द नहीं हो रहा था अच्छा चलिए ठीक है कबीर

320
00:22:12,720 --> 00:22:17,240
को हो रहा था क्या ठीक कबीर को हो रहा था मैं पूछ रहा हूं कबीर

321
00:22:17,240 --> 00:22:21,520
नहीं हो रहा भाई नहीं सुनिए आत्मा अज्ञानता

322
00:22:21,520 --> 00:22:25,800
वश स्वीकारा कि मेरा परमात्मा सर्वशक्तिमान आपने आपने

323
00:22:25,800 --> 00:22:30,040
आपने कुछ आपने एक प्रश्न पूछा है सक्तिमान नहीं ना भाई सिद्ध

324
00:22:30,040 --> 00:22:34,160
हो गया आप आपके परमात्मा की बात चल रही है कि आपका अरे तो मैंने तो बता दिया ना

325
00:22:34,160 --> 00:22:40,120
दुख नहीं हो रहा नन चि सत्रा नन पाव मैंने गीता से बता

326
00:22:40,120 --> 00:22:44,240
दिया अरे मेरे भाई मैंने मैंने गीता से बता दिया

327
00:22:44,240 --> 00:22:48,400
है आपको सुनना नहीं है आपको सुनना नहीं है मैंने गीता से बता दिया

328
00:22:48,400 --> 00:22:52,560
आत्मा को कुछ नहीं होता है तो यह जो मरना जीना है यह हम अज्ञानता

329
00:22:52,560 --> 00:22:56,560
वश देख रहे हैं वस्तुतः आत्मा को कुछ नहीं होता है मैंने गीता

330
00:22:56,560 --> 00:23:01,080
से प्रमाण दे दिया और भी ेर सारे प्रमाण अ ब्रह्मा लिखा हुआ है

331
00:23:01,080 --> 00:23:02,280
सुनिए ना आपके

332
00:23:02,280 --> 00:23:06,560
हिसाब से ईश्वर इस शरीर की मदद करने कभी नहीं आएंगे आ सकता

333
00:23:06,560 --> 00:23:11,160
उसका मन है उसका मन है उसका मन है अच्छा ये

334
00:23:11,160 --> 00:23:15,280
बताइए उसका मन है वो आए या ना आए मगर वो प्रभावित नहीं हो सकता

335
00:23:15,280 --> 00:23:19,280
कि नहीं नहीं बचाना ही है बाउंड नहीं हो सकता तो अगर मान लो

336
00:23:19,280 --> 00:23:23,320
ईश्वर को रक्षा के समय याद करने पर भी ईश्वर नहीं आता है तो फिर वो

337
00:23:23,320 --> 00:23:27,520
वो कण कण में व्याप्त होते हुए वहां प होते हुए व वहां प ईश्वर है वो देख रहा है

338
00:23:27,520 --> 00:23:31,560
अरे मेरे भाई ये ये पॉइंट तो आपके ईश्वर पर भी लागू हो रहा है ये मैं आपसे

339
00:23:31,560 --> 00:23:35,640
भी पूछ सकता हूं मेरा सर्वशक्तिमान नहीं आपका सर्वशक्तिमान तो सर्वशक्तिमान नहीं है

340
00:23:35,640 --> 00:23:40,280
तो कौन-कौन सी शक्ति पहले ये बता दो कबीर में है कौन-कौन सी शक्तियां

341
00:23:40,280 --> 00:23:44,480
मैं बताऊंगा तो आप सुनोगे भी हां सुनूंगा बताओ जब वो जब वो

342
00:23:44,480 --> 00:23:48,680
जब आप ये कह रहे हो कि वो बचाने नहीं आ सकता है कौन सी शक्तियां है फिर उसके अंदर

343
00:23:48,680 --> 00:23:52,720
मेरे ईश्वर जो कबीर परमेश्वर है उन्होंने तो पहले बोल दिया कि आप लोग काल के लोक

344
00:23:52,720 --> 00:23:56,720
में बैठे हो यानी कि सुनिए एक मिनट एक मिनट मैं

345
00:23:56,720 --> 00:24:00,800
पॉइंट विषयात हो रहा है हो रहा इसलिए बता दू आप जब कबीर

346
00:24:00,800 --> 00:24:05,000
का प्रमाण दे रहे हो तो व हम माने मैंने अपना प्रमाण दे दिया मैंने

347
00:24:05,000 --> 00:24:09,120
अपना प्रमाण दे दिया कि हम वस्तुतः आत्मा है आत्मा को कुछ नहीं

348
00:24:09,120 --> 00:24:13,520
होता मनजी का मन मर्जी हो गए वो कोई

349
00:24:13,520 --> 00:24:17,280
रक्षा के बुलाएगा तो आपका ईश्वर वहां नहीं पहुंच सकता तो सर्वशक्तिमान कैसे हो

350
00:24:17,280 --> 00:24:21,400
गया बताओ फिर क्यों भक्ति कर अरे भाई वो मजबूर नहीं है पहुंचने के लिए

351
00:24:21,400 --> 00:24:25,920
वो पहुंच सकता है वो मजबूर नहीं है मैं मजबूरी की बात आप मजबूर कर रहे हो

352
00:24:25,920 --> 00:24:30,560
वो मजबूर नहीं है पहुंचने के लिए के लिए वस्तुत ये खेल है

353
00:24:30,560 --> 00:24:34,720
जिसके साथ रेप हो रहा है वो याद सुनिए

354
00:24:34,720 --> 00:24:38,880
हां को याद कर रहा है कि भाई भगवान मुझे बचाओ ये लोग मे साथ बड़े गलत

355
00:24:38,880 --> 00:24:42,880
व्यवहार कर रहे हैं तो वो क्यों नहीं प अरे तो भाई ये बताइए जब बच्चे

356
00:24:42,880 --> 00:24:47,080
को खामा खा का दुख हो रहा होता है तो क्या मां-बाप उस समय दुखी होते हैं आपके

357
00:24:47,080 --> 00:24:51,800
घर में मतलब आपके हि ब खाम खा

358
00:24:51,800 --> 00:24:55,840
ब ये दुख अरे तो अच्छा अच्छा

359
00:24:55,840 --> 00:24:59,880
एक बात बताओ जी अच्छा अच्छा एक बात बताओ जीव अविनाशी है

360
00:24:59,880 --> 00:25:03,920
कि नहीं मैं बोल रहा आपके हिसाब से

361
00:25:03,920 --> 00:25:08,360
बताओ मुझे मैंने पूछा वो तो बताओ मैंने जो पूछा है वो तो

362
00:25:08,360 --> 00:25:12,480
अरे भाई आप झक मारने आए हो समझ गया झक लड़ाने आए हो मैं

363
00:25:12,480 --> 00:25:16,680
समझ गया सर्वशक्तिमान जीव को अविनाशी मानते

364
00:25:16,680 --> 00:25:21,200
हो कि नहीं मानते हो जीव तो अविनाशी है तो गीता जी भी बोलती है मैं मानता

365
00:25:21,200 --> 00:25:25,240
गीताज भी गीता अब गीता जी की बात छोड़ो रामपाल भी तो

366
00:25:25,240 --> 00:25:29,400
कहते हैं जीव अविनाशी है ठीक है तो इसका मतलब

367
00:25:29,400 --> 00:25:32,680
वो भीय मानते हैं देह के नाश से आत्मा का नाश नहीं होता

368
00:25:32,680 --> 00:25:37,040
नहीं होता सही बात है नहीं होता तो वो बच्चे मरे तो उनका नाश हो गया

369
00:25:37,040 --> 00:25:41,280
क्या बच्चों के देह का तो नाश हो गया अरे

370
00:25:41,280 --> 00:25:45,440
उनका नाश हुआ क्या अच्छा देह वा देह उनका वास्तविक स्वरूप

371
00:25:45,440 --> 00:25:49,880
है क्या नहीं वास्तविक स्वरूप नहीं था भाई पर व वो भी तो देह के

372
00:25:49,880 --> 00:25:54,160
जो यहां पर देह मिली थी जो वो दुख है

373
00:25:54,160 --> 00:25:58,600
देखिए पहली बात तो य है अभी कंक्लूजन निकाल ले अभी तक की

374
00:25:58,600 --> 00:26:02,880
का पहली बात तोय आपने स्वीकार कर लिया कबीर सर्वशक्तिमान नहीं है दूसरी बात ये स्वीकार

375
00:26:02,880 --> 00:26:07,040
कर लिया कि वो भी दुखी होता है वो मुक्त नहीं है वो भी दुखी होता है ना

376
00:26:07,040 --> 00:26:11,080
दुख होता है उनकी मर्जी से जैसा आपका ईश्वर मर्जी से आता है मर्जी से जाता है उनके मन में आता

377
00:26:11,080 --> 00:26:15,360
है दया करके आ जाते ज्ञान देने नहीं मन में आता खुद कहा है ना वो दुखी

378
00:26:15,360 --> 00:26:19,640
होता है तो उनके मर्जी का है ना हो सकता है वो अपने बच्चों को

379
00:26:19,640 --> 00:26:23,680
मुझे दुखी होना है कि नहीं होना है किस बात प होना है मेरी मर्जी है मेरी मर्जी

380
00:26:23,680 --> 00:26:27,960
बिल्कुल सही ठीक ठीक है तो अभी जो आप मैंने आपसे पूछा

381
00:26:27,960 --> 00:26:32,040
कि यहां के जो लोगों पर जो गड़बड़ होती है उनके साथ यहां के लोगों के साथ कि मैं मर

382
00:26:32,040 --> 00:26:36,480
रहा हूं मैं जी रहा हूं मुझे दर्द हो रहा है मुझे ये हो रहा है इन सबका प्रभाव कबीर

383
00:26:36,480 --> 00:26:40,520
पर होता है कि नहीं कबीर जी पर होता है वो तभी तो यहां आते है

384
00:26:40,520 --> 00:26:44,520
भाई मैं झूठ क्यों बोलूंगा होता है हम कबीर पर होता है हा ये काल के

385
00:26:44,520 --> 00:26:47,920
लोग तो यानी वो भी वो भी वो भी यहां के जो रोग दोष क्लेश

386
00:26:47,920 --> 00:26:52,000
है इनसे प्रभावित होते हैं बिल्कुल हम उनके बच्चे हैं यार हम दुखी है तो दुखी

387
00:26:52,000 --> 00:26:56,840
होते हैं आपका ईश्वर नहीं होता होगा मेरा ईश्वर होता है बिल्कुल

388
00:26:56,840 --> 00:27:01,040
या कबी भी मुक्त नहीं है दुख से मुक्त नहीं है कबीर जी आपकी

389
00:27:01,040 --> 00:27:05,280
ईश्वर को दुख होता है कि नहीं आप ये बताओ अरे मैंने बता तो दिया मेरे

390
00:27:05,280 --> 00:27:09,360
भाई कि मेरे ईश्वर के लिए जो ये वो ये जानता है कि यह जो जीव

391
00:27:09,360 --> 00:27:13,600
है यह अज्ञानता वश अपने आप को दुखी कर रहा है वस्तुतः इसकी स्थिति

392
00:27:13,600 --> 00:27:17,600
अविनाशी है यह खामा खा भय कर रहा है वस्तुतः

393
00:27:17,600 --> 00:27:21,640
इसकी स्थिति जो है अविनाशी है इसलिए वो जब मन आता है उस खेल

394
00:27:21,640 --> 00:27:25,880
सुनिए जब मन आता है तो उस खेल में उसको बचाने आता है जो उसके लिए खेल

395
00:27:25,880 --> 00:27:29,920
है और जब मन आता है तो नहीं भी आता है वो की मर्जी है मगर आपका

396
00:27:29,920 --> 00:27:34,240
ईश्वर तो अ वो है जो दुखी होता है वो मजबूरी में आता है

397
00:27:34,240 --> 00:27:38,320
आपके हाथ में गर्म शरीय पकड़ा दिए जाए तो आप बोलोगे जीव अपने आप ही

398
00:27:38,320 --> 00:27:42,560
दुखी हो रहा है ये जो दुख हो रहा है जिससे बोले आ रहे हैं आपके हाथ में गर्म

399
00:27:42,560 --> 00:27:47,040
शरीय पकड़ा दिए जाए तो आपका ईश्वर ये सोचेगा कि ये तो जबर

400
00:27:47,040 --> 00:27:51,480
रहा है सुनिए ये सुनिए ये व्यवहार और परमार्थ

401
00:27:51,480 --> 00:27:55,680
का अंतर होता है सुनिए जैसे पृथ्वी जो है

402
00:27:55,680 --> 00:28:00,240
जैसे पृथ्वी जो है वो वास्तव में गोल

403
00:28:00,240 --> 00:28:03,080
है ठीक है सेटेलाइट इत्यादि

404
00:28:03,080 --> 00:28:07,320
के द्वारा जब हम देखें तो पृथ्वी क्या है गोल हमें दिख

405
00:28:07,320 --> 00:28:11,360
कैसी रही है फ्लेट है दिख फ्लेट हैट

406
00:28:11,360 --> 00:28:15,520
दिख रही है तो इसी प्रकार से जो हमारा वास्तविक स्वरूप है वह

407
00:28:15,520 --> 00:28:19,560
अविनाशी है मगर हमें दिख कैसा रहा है कि उसका विनाश हो रहा है उसको दर्द

408
00:28:19,560 --> 00:28:23,560
हो रहा है उसको वो हो रहा है यह हमारे दृष्टिकोण पर निर्भर जब हम मुक्त हो जाएंगे

409
00:28:23,560 --> 00:28:28,120
तो हम भी कहेंगे य पृथ्वी गोल है मतलब पृथ्वी से जब व्यक्ति मुक्त हो जाएगा तो

410
00:28:28,120 --> 00:28:32,640
वो भी पृथ्वी को देख के कहेगा हा यार ये तो गोल थी अच्छा मुझे

411
00:28:32,640 --> 00:28:36,760
होने के लिए आपको होता अगर कोई आपको पीछे से चार लट मार

412
00:28:36,760 --> 00:28:40,920
दे जम देखिए अब जो है हमारी जो चर्चा है ना वो बेकार की हो रही

413
00:28:40,920 --> 00:28:45,240
है सुनिए बेकार की हो रही है आपका ईश्वर सर्व शक्तिमान नहीं है

414
00:28:45,240 --> 00:28:49,360
आपका ईश्वर दुखी भी होता है वो मुक्ति नहीं है वहां जाना आप ये बताइए मुक्ति

415
00:28:49,360 --> 00:28:53,440
का क्या मतलब है आपके अनुसार मुक्ति का क्या मतलब मुझे एक बात बताइए

416
00:28:53,440 --> 00:28:58,080
पहले मुक्ति का मतलब क्या है भाई साहब भाई साहब

417
00:28:58,080 --> 00:29:02,960
मतलब भाई साहब क्या है मेरे सवाल का जवाब दे दो गुरु आप एक

418
00:29:02,960 --> 00:29:07,080
मैंने दिया तो है आप रिपी कर रहे हो अलग अलग तरीके से सुनो आपने

419
00:29:07,080 --> 00:29:11,240
देखिए एक ही सवाल को अलग अलग तरीके से रिपीट किया मैं बता देता हूं पहले आपने

420
00:29:11,240 --> 00:29:15,320
कहा पहले आपने कहा 12 बच्चे ठीक उसी तरह का दूसरा

421
00:29:15,320 --> 00:29:18,200
सवाल लड़की के साथ एक जो

422
00:29:18,200 --> 00:29:22,240
हत्याकांड हुआ था ठीक वही सवाल था बस उसम जो

423
00:29:22,240 --> 00:29:26,400
पात्र थे पात्र बदल गए घटना का आपने बताया ये क्यों

424
00:29:26,400 --> 00:29:30,520
नहीं बचा पा रहा है ठीक अब आ गया आपके हाथ में बारबार

425
00:29:30,520 --> 00:29:34,600
मैं वही आपको उत्तर दे रहा हूं आप एक नई घटना लेकर के आ रहे हैं अभी

426
00:29:34,600 --> 00:29:38,840
आप अपना अंतिम प्रश्न पूछ लीजिए घटना नहीं ला रहा मैं घटना नहीं ला रहा हूं आपको

427
00:29:38,840 --> 00:29:42,920
कैसे पता चला कि ईश्वर सर्वशक्तिमान ही है यह कहा

428
00:29:42,920 --> 00:29:48,600
से यह आपका प्रश्न है हा य प्रश्न

429
00:29:48,600 --> 00:29:52,920
है सुनिए असतो मा सद गमाया तमसो

430
00:29:52,920 --> 00:29:57,240
मा ज्योतिर्मया मृत मा मतम गम मुझे

431
00:29:57,240 --> 00:30:01,400
असत से सत की ओर ले चलो ब उपनिषद एकती

432
00:30:01,400 --> 00:30:05,480
28 असतो सद आप जिसका बोल रहे हो उसका क्यों

433
00:30:05,480 --> 00:30:09,480
मान उप अरे मैं मान नहीं रहा हूं मैं नहीं कह रहा हूं उसको आप मान

434
00:30:09,480 --> 00:30:10,600
लो मैं मान नहीं रहा

435
00:30:10,600 --> 00:30:14,640
मैं समय सि बोल रहा हूं समय सि बोल रहा हूं शलोक पर

436
00:30:14,640 --> 00:30:18,920
विश्वास नहीं लोक आप बोल रहे विश्वास मत करना

437
00:30:18,920 --> 00:30:23,040
आप मना कर देना मुझे नहीं मानना है ठीक है मैं अपना अपनी जो बात कहूंगा

438
00:30:23,040 --> 00:30:28,400
तर्क और प्रमाण दोनों से कहूंगा बिना तर्क के नहीं कहूंगा

439
00:30:28,400 --> 00:30:29,000
वो लोक कहां

440
00:30:29,000 --> 00:30:33,360
से आया किसने लिखा वो मैं सब बताता जाऊंगा मैं सब बताते जाऊंगा

441
00:30:33,360 --> 00:30:37,360
ठीक है अभी मैं तर्क और प्रमाण दोनों पर बात कर रहा हूं ठीक ठीक

442
00:30:37,360 --> 00:30:42,280
है असतो मा सगम तमसो मा ज्योतिर्मया ममा मतम

443
00:30:42,280 --> 00:30:46,480
एक नास्तिक व्यक्ति के अंदर भी कभी ना मरने की चाह विद्यमान

444
00:30:46,480 --> 00:30:50,640
है नास्तिक भी है भगवान को नहीं मानता है मगर वह कभी मरना नहीं चाहता

445
00:30:50,640 --> 00:30:54,920
है एक नास्तिक व्यक्ति के अंदर भी समस्त समग्र

446
00:30:54,920 --> 00:30:59,080
ज्ञान अखंड ज्ञानी बन जाने की चाह विद्यमान है सब कुछ जान लेना चाहता

447
00:30:59,080 --> 00:31:03,440
है और एक नास्तिक व्यक्ति के अंदर भी सदा

448
00:31:03,440 --> 00:31:07,480
आनंदित रहने की चाह विद्यमान है सत चित आनंद अब

449
00:31:07,480 --> 00:31:11,600
इसका निचोड़ अगर करें तो एक नास्तिक व्यक्ति के मन में भी कभी-कभी

450
00:31:11,600 --> 00:31:15,920
यह बातें आती हैं कि बारिश ज्यादा हो रही तो कम हो जाए धूप

451
00:31:15,920 --> 00:31:19,920
ज्यादा पड़ रही तो कम हो जाए यानी कि वह मौसम को भी कंट्रोल करने

452
00:31:19,920 --> 00:31:24,760
वाला बनना चाहता है ठीक है और

453
00:31:24,760 --> 00:31:28,880
इसी प्रकार से उसके मन में ये भी चाह कभी-कभी आती है कल भारत पाकिस्तान का अगर

454
00:31:28,880 --> 00:31:33,200
मैच है तो उसमें कौन जीते कौन नहीं जीते क्या हो भविष्य देखना चाहता है भविष्य

455
00:31:33,200 --> 00:31:37,200
देख लेना चाहता है इसका अर्थ क्या है वो प्रकृति के सभी

456
00:31:37,200 --> 00:31:41,200
जितने भी नियम उसे बाधित कर रहे हैं वह सभी पर पजेशन

457
00:31:41,200 --> 00:31:44,320
कब्जा कर लेना चाहता है

458
00:31:44,320 --> 00:31:48,600
तो ये उसके अंदर की ऐसी इनबिल्ट चाह है नास्तिक के अंदर भी

459
00:31:48,600 --> 00:31:52,760
जो वो अपने से अलग नहीं कर सकता उसके मां बाप बूढ़े होंगे तो उसको

460
00:31:52,760 --> 00:31:56,800
दुख होगा जब वो भर्ती होंगे अस्पताल में जब वो मरने की भाव उसके अंदर

461
00:31:56,800 --> 00:32:00,840
आएंगे तो वो डरेगा चाहे उसको कितना भी बता दो कि इस दुनिया में

462
00:32:00,840 --> 00:32:05,040
कोई अमर नहीं है फिर भी वह डरेगा यानी कि वो विज्ञान

463
00:32:05,040 --> 00:32:09,680
के विरुद्ध अपनी जो अमरता की चाह है उससे अलग नहीं हो पा रहा है

464
00:32:09,680 --> 00:32:13,720
ठीक है तो विज्ञान के विरुद्ध जो प्रकृति पर कब्जा

465
00:32:13,720 --> 00:32:17,960
कर लेने की प्रकृति को अपने अधीन कर लेने की चा उसके अंदर जो विद्यमान

466
00:32:17,960 --> 00:32:21,960
है उसी से य सिद्ध होता है कि इस दुनिया में कोई

467
00:32:21,960 --> 00:32:26,200
ऐसी सर्वशक्तिमान सत्ता है जिससे की जिसके

468
00:32:26,200 --> 00:32:30,440
अधीन यह प्रकृति है ठीक

469
00:32:30,440 --> 00:32:34,480
है अरे भाई मेरे को पूरा कर लेने दो फिर तुम क्रॉस करना फिर

470
00:32:34,480 --> 00:32:38,640
तुम क्रॉस करना हमको भी सुनना अच्छे से कभी दास बोले

471
00:32:38,640 --> 00:32:44,160
तो आप तो सु

472
00:32:44,160 --> 00:32:48,840
सुने आपके सारे व दे

473
00:32:48,840 --> 00:32:53,080
सुने सुनि अरे भाई साहब सुनिए तो

474
00:32:53,080 --> 00:32:57,280
इसका अर्थ यह है जैसे हमारी अंदर अगर भूख है तो

475
00:32:57,280 --> 00:33:01,720
उससे सिद्ध हो जाता है कि दुनिया में भोजन है हमारे अंदर प्यास है

476
00:33:01,720 --> 00:33:05,720
तो उससे सिद्ध हो जाता है कि दुनिया में पानी है हमारे अंदर देखने

477
00:33:05,720 --> 00:33:09,720
की क्षमता है तो उससे सिद्ध हो जाता है कि दुनिया में दृश्य

478
00:33:09,720 --> 00:33:14,080
है हमारे अंदर सुनने की क्षमता है तो उससे य सिद्ध हो जाता है कि दुनिया

479
00:33:14,080 --> 00:33:18,720
में क्या है धुनि आवाज स्वर

480
00:33:18,720 --> 00:33:23,280
तो जिस प्रकार एक नास्तिक के अंदर भी व्याप्त भूख से

481
00:33:23,280 --> 00:33:28,000
भोजन का अस्तित्व सिद्ध होता है प्यास से पानी का अस्तित्व सिद्ध होता है

482
00:33:28,000 --> 00:33:32,200
प्रकार एक नास्तिक व्यक्ति के अंदर भी व्याप्त जो सत चितता आनंद की चा है

483
00:33:32,200 --> 00:33:36,320
उस चा से सच्चिदानंद का स्वरूप परमेश्वर का अस्तित्व

484
00:33:36,320 --> 00:33:40,560
सिद्ध हो जाता है ठीक है तो अभी हमने यहां से जाना कि

485
00:33:40,560 --> 00:33:44,560
परमेश्वर का अस्तित्व कैसे आया मनुष्य के अबाध बन

486
00:33:44,560 --> 00:33:48,600
जाने की चाह से मनुष्य अबाध बनना चाहता है उससे सिद्ध होता है

487
00:33:48,600 --> 00:33:52,600
कि इस दुनिया में कोई अबाध है तो अब जब मनुष्य के अंदर

488
00:33:52,600 --> 00:33:56,920
अवाद बन जाने की चाह है तो इस अवाद बन जाने की चाह का जो सब्जेक्ट

489
00:33:56,920 --> 00:34:01,520
होगा वो कौन होगा जो अवाद हो जो सर्वशक्तिमान

490
00:34:01,520 --> 00:34:05,040
हो मनुष्य क्या बनना चाहता है सर्वशक्तिमान

491
00:34:05,040 --> 00:34:09,760
मनुष्य बनना चाहता है तो इस चाह का जो विषय होगा कौन होगा

492
00:34:09,760 --> 00:34:13,800
जो इसकी पूर्ति कर सके तो पूर्ति कर सके मनुष्य सभी दो

493
00:34:13,800 --> 00:34:17,920
सभी दुखों से दूर हो जाना चाहता है तो फिर इस चाह का विषय कौन

494
00:34:17,920 --> 00:34:21,960
होगा वो ईश्वर जो किसी भी दुख से ग्रसित ना होता हो सत चित

495
00:34:21,960 --> 00:34:26,000
आनंद हो मनुष्य सच्चिदानंद बनना चाहता है तो उसका

496
00:34:26,000 --> 00:34:30,360
ईश्वर कौन होगा जो सच्चिदानंद हो मगर आप आप जो ईश्वर

497
00:34:30,360 --> 00:34:34,800
दे रहे हो संसार को व सच्चिदानंद नहीं है यह आपने खुद ही

498
00:34:34,800 --> 00:34:38,840
कहा वो मनुष्य की चाह का विषय ही नहीं है मनुष्य

499
00:34:38,840 --> 00:34:42,920
ढूंढ रहा है पानी उसको दिया जा रहा है तेजाब मनुष्य ढूंढ रहा है

500
00:34:42,920 --> 00:34:47,280
पानी उसको दिया जा रहा है अल्कोहल

501
00:34:47,280 --> 00:34:51,280
प्यास बझाए वो दोना मनुष्य शांति ढूंढ रहा

502
00:34:51,280 --> 00:34:57,280
है और शांति के लिए भगवान को पुकारता है तो सर्वशक्तिमान ईश्वर तो आ ही नहीं पाते उस टाइम

503
00:34:57,920 --> 00:35:02,000
बातें में समझ गया हूं अब अब देखिए जो हमारी जनता देखिए आप

504
00:35:02,000 --> 00:35:06,080
भाही रिपीट कर रहे हैं मैंने आपकी सारी बातों का जवाब दिया है आप रिपीट कर रहे

505
00:35:06,080 --> 00:35:10,120
हैं तो सर्वशक्ति आप सर्वशक्तिमान प्रूफ ही नहीं कर

506
00:35:10,120 --> 00:35:14,240
पाए भाई अच्छा 3 साल अब आपने पूछा कि

507
00:35:14,240 --> 00:35:18,360
आप सुनिए ठीक है मैं प्रूफ कर पाया नहीं कर पाया ये कौन

508
00:35:18,360 --> 00:35:22,400
देखेंगे जनता देखेगी अब हम चले आगे बढ़े ठीक

509
00:35:22,400 --> 00:35:26,880
है चलो आगे बढ़ते हैं अब मुझे बताइए आप वैदिक

510
00:35:26,880 --> 00:35:31,000
है कि नहीं रामपाल जी द्वारा जो ज्ञान दिया जाता है वो वेदा दि

511
00:35:31,000 --> 00:35:35,080
शास्त्र सम्मत है कि नहीं वही बात है अब मेरा सवाल

512
00:35:35,080 --> 00:35:39,920
य कि वेद कहां से वेद का ज्ञान किसने लिखा वेद का ज्ञान

513
00:35:39,920 --> 00:35:44,080
इस बारे में बात करूंगा वेद का ज्ञान वेद सुनिए सुनिए

514
00:35:44,080 --> 00:35:48,080
मैं बताता हूं अरे भाई प्रश्न कर लिया मैं जवाब दे रहा हूं आपको

515
00:35:48,080 --> 00:35:52,440
जवाब दे रहा हूं ब्रदर उपनिषद दो च 10

516
00:35:52,440 --> 00:35:56,840
उपनिषद यह तो बहुत बाद की बात है भैया किसने लिखा उपनिषद

517
00:35:56,840 --> 00:36:01,360
वाला जिसका बात कर रहे ठीक है ठीक है वेद आदि जो शास्त्र है

518
00:36:01,360 --> 00:36:05,480
जो शास्त्र जिनके ऊपर हमारे धर्म अधर्म का निर्णय होता है वो शास्त्र

519
00:36:05,480 --> 00:36:08,640
अपौरुषेय

520
00:36:08,640 --> 00:36:12,680
अरुष का मतलब समझते हैं आप बताइए मैं नहीं समझता

521
00:36:12,680 --> 00:36:16,880
अरुष है जिनकी रचना किसी ने नहीं की ईश्वर ने भी नहीं

522
00:36:16,880 --> 00:36:21,320
की अष शास्त्र है गब हां

523
00:36:21,320 --> 00:36:25,320
तो ठीक आप उनको मत मानो अभी आप ये बताओ अभी

524
00:36:25,320 --> 00:36:29,400
आप ये बताओ मानो तब ना कि पता तो चले किसने लिखे किसका ज्ञान

525
00:36:29,400 --> 00:36:33,560
ज्ञान भाई वो अप है ना उनको किसी ने नहीं रचा तो

526
00:36:33,560 --> 00:36:38,360
हमारे पास कैसे आ गए जब किसी ने नहीं रचा तो आपके

527
00:36:38,360 --> 00:36:42,640
पीछे जो तपो बल से तपोबल से हमारे ऋषि गण मंत्र

528
00:36:42,640 --> 00:36:46,680
के दृष्टा बनते हैं दृष्टा रचते नहीं है मंत्र के दृष्टा बनते हैं और

529
00:36:46,680 --> 00:36:50,720
वह फिर पहले गुरु शिष्य परंपरा के द्वारा श्रुति स्थानांतरित होती है

530
00:36:50,720 --> 00:36:54,960
फिर उसके बाद एक समय पर आकर के जब प्रज्ञा शक्ति और कम होने लगती है तो उनको लिखना

531
00:36:54,960 --> 00:36:59,280
शुरू कर दिया जाता है गुरु शिष्य परंपरा के आप

532
00:36:59,280 --> 00:37:03,440
वही बोल रहे वेदव्यास नहीं वो अपने बुद्धि से लिखे मतलब जो उन्होने दिव दृष्टि

533
00:37:03,440 --> 00:37:07,560
से वेदव्यास जी ने अपने मेरे भाई पहले देखिए आपने एक प्रश्न

534
00:37:07,560 --> 00:37:11,800
किया था मैंने उसका उत्तर आपको दे दिया वो उत्तर सही है कि गलत है

535
00:37:11,800 --> 00:37:16,520
वो उत्तर सही है कि गलत है जनता अभी मैं आपसे पूछ रहा हूं आप वैदिक हो कि नहीं

536
00:37:16,520 --> 00:37:20,560
आप वैदिक हो कि नहीं मैं कैसे मैं वैदिक क्यों मानूंगा पहले

537
00:37:20,560 --> 00:37:23,840
मुझे बताओ ना वेद कहां से आए तो मैं बोलू अरे मैं नहीं मनवा रहा हूं ना

538
00:37:23,840 --> 00:37:27,960
मैं एक एक करके बनवाऊंगा पहले आप कहो तो कि मैं वैदिक नहीं ह तब तो मनवा आप तो कहते

539
00:37:27,960 --> 00:37:32,320
हो वेदों में प्रमाण है वेदों में प्रमाण है क्यों कहते हो कना

540
00:37:32,320 --> 00:37:37,120
कह दो भैया हम तो अपने कबीर सागर से मानते हैं भगवान हम वेदों से नहीं मानते

541
00:37:37,120 --> 00:37:41,520
तो यानी रामपाल झूठ बोलते हैं नहीं वो क झूठ बोलेंगे भैया

542
00:37:41,520 --> 00:37:45,600
भाई रामपाल कहते हैं सद ग्रंथ है हा है

543
00:37:45,600 --> 00:37:49,720
सद ग्रंथ कहते है सद ग्रंथ का अर्थ क्या है

544
00:37:49,720 --> 00:37:53,760
अब देखो कबीर जी ने बोला है जो कबीर को श्वर माता भाई सुनो मैं जो पूछ

545
00:37:53,760 --> 00:37:57,960
रहा हूं वो बताओ सद ग्रंथ क्या है सद ग्रंथ ऋ

546
00:37:57,960 --> 00:38:02,080
ऋषियो ने जो अपने जो सद ग्रंथ सद ग्रंथ सद सद का अर्थ

547
00:38:02,080 --> 00:38:06,080
बताओ पहले सद सद का अर्थ क्या है

548
00:38:06,080 --> 00:38:10,200
सद मतलब सच्चे सदगुरु का अर्थ क्या है सच्चे सच्चे सद ग्रंथ सच्चे

549
00:38:10,200 --> 00:38:14,280
ग्र सच्चे ना तो फिर वेदों को मानते हो ना

550
00:38:14,280 --> 00:38:18,800
नहीं मानता य दास तो नहीं मानता वेद नहीं मानते तो रामपाल को नहीं

551
00:38:18,800 --> 00:38:23,040
मानते रामपाल को नहीं मानते अरे तो अरे

552
00:38:23,040 --> 00:38:27,200
तो भाई तो वो जब कह रहे हैं कि व सद ग्रंथ है वेद कह रहे

553
00:38:27,200 --> 00:38:31,360
हैं ना तो मानते हो कि नहीं मानते कबीर जी ने बोला है भ्रम

554
00:38:31,360 --> 00:38:36,080
गए जब वेद पुराना वो बोल रहे वेद का ज्ञान भम हुआ है तो

555
00:38:36,080 --> 00:38:39,240
ठीक है आपका आने के लिए बहुत बहुत धन्यवाद

556
00:38:39,240 --> 00:38:43,280
भाई साहब हमें आपका कबीर पंथी नहीं सुननी हो गया हो गया ठीक

557
00:38:43,280 --> 00:38:44,440
है आप

558
00:38:44,440 --> 00:38:50,440
जा सकते

559
00:38:59,680 --> 00:39:03,720
बिल्कुल उल्टे कहां से या बिल्कुल चले जाते हैं

560
00:39:03,720 --> 00:39:07,720
ऊपर से तो यह हाल

561
00:39:07,720 --> 00:39:11,880
है कबीर को भगवान मानने वालों का कबीर सर्वशक्तिमान

562
00:39:11,880 --> 00:39:16,000
नहीं है कबीर भी दुखी होता है वहां भी दुख है इनके जो सतलोक आश्रम है वहां

563
00:39:16,000 --> 00:39:20,120
भी दुख है और इसके अलावा यह वेद

564
00:39:20,120 --> 00:39:24,200
को नहीं मानते हैं ठीक है रामपाल को मानते हैं वेद को नहीं

565
00:39:24,200 --> 00:39:28,240
मानते उसी तरीके से जैसे अब

566
00:39:28,240 --> 00:39:32,240
मैं कहूंगा तो किसी को बुरा लग जाएगा मुझे एक ले दे के एक

567
00:39:32,240 --> 00:39:36,560
ही उदाहरण याद आ जाता है वह क्या उदाहरण है

568
00:39:36,560 --> 00:39:41,480
कि हम शिव जी को बहुत मानते हैं बहुत मानते हैं

569
00:39:41,480 --> 00:39:45,480
शिव जीी जो है मगर शिव जीी जो है वह भगवान नहीं है भगवान

570
00:39:45,480 --> 00:39:49,640
के दास है मगर हम शिव जी को बहुत मानते बत मानते फिर उसके

571
00:39:49,640 --> 00:39:53,760
बाद अगला क्या आता है कि शिवजी तो

572
00:39:53,760 --> 00:39:57,800
परम वैष्णव भी नहीं है वो जो दो में

573
00:39:57,800 --> 00:39:59,680
बताया ना शिवजी अपनी इंद्रियों को कंट्रोल

574
00:39:59,680 --> 00:40:04,040
नहीं कर पाए दो में बताया तो था व अपने इंद्रियों

575
00:40:04,040 --> 00:40:08,040
को कंट्रोल नहीं कर पाए बल्कि हरिदास ठाकुर जो थे वह ज्यादा बड़े वैष्णव है क्योंकि

576
00:40:08,040 --> 00:40:12,240
उन्होंने अपनी इंद्रियों को कंट्रोल कर लिया तो शिवजी जो है परम

577
00:40:12,240 --> 00:40:16,280
वैष्णव भी नहीं है व हम यूं ही कहते हैं अच्छा

578
00:40:16,280 --> 00:40:20,360
हम जो है शिव जी पर चढ़ा हुआ प्रसाद भी नहीं खाते हां

579
00:40:20,360 --> 00:40:24,480
क्योंकि शिव और विष्णु में भेद है और कहीं पर पुराण में दिया गया है कि

580
00:40:24,480 --> 00:40:28,720
किसी अन्य देवी देवता पर लगा हुआ प्रसाद ना खाना तो हम क्योंकि भेद मानते

581
00:40:28,720 --> 00:40:32,760
हैं तो इसलिए प्रसाद नहीं खाते हैं मगर हम शिव जी को बहुत मानते हैं आप

582
00:40:32,760 --> 00:40:36,800
समझ रहे हो ना शिव जी आप हमारे लिए क्या

583
00:40:36,800 --> 00:40:41,680
हो तो शिव जी कहते हैं मैं समझ रहा हूं

584
00:40:41,680 --> 00:40:45,840
मैं आपके लिए बेवकूफ हूं तो यह भाई साहब भी रामपाल

585
00:40:45,840 --> 00:40:49,920
को रामपाल जी को इसी तरी से मानने वाले हैं कि मैं बहुत

586
00:40:49,920 --> 00:40:54,160
मानता हूं रामपाल जी को हां जब वेदों को नहीं मानते

587
00:40:54,160 --> 00:40:58,120
तो वेदों से प्रमाण क्यों देते हो

588
00:40:58,120 --> 00:41:02,880
अब आगे यह जो अभी लाइव स्ट्रीम हुई है इसमें से

589
00:41:02,880 --> 00:41:07,040
निकाल करके शॉर्ट बनाना कि ये है रामपाल दास के फॉलोअर

590
00:41:07,040 --> 00:41:11,360
एक तरफ वेदों का प्रमाण रखते हैं विदों में प्रमाण

591
00:41:11,360 --> 00:41:14,680
कबीर साहब भगवान है जब इनको दे दिया वेदों से प्रमाण अब इनको पता

592
00:41:14,680 --> 00:41:18,840
चल गया इसके पास वेदों में कट्टा भर के प्रमाण है जब इनको वेदों से प्रमाण

593
00:41:18,840 --> 00:41:23,120
दे दिया कि कबीर भगवान नहीं कबीर के कबीर कबी कवियों के कवि जो है गणपति

594
00:41:23,120 --> 00:41:27,480
है गणेश जी भगवान है कबीर भगवान नहीं जब इनको प्रमाण दे दिया तो अब वेदों को

595
00:41:27,480 --> 00:41:31,680
मानते यह रामपाल को तो मानते हैं मगर रामपाल दास जिनको

596
00:41:31,680 --> 00:41:35,680
सद ग्रंथ कहते हैं उनको सद ग्रंथ सच्चे ग्रंथ नहीं मानते

597
00:41:35,680 --> 00:41:40,080
और इनकी ईश्वर की डेफिनेशन ही कुछ अलग है वह सर्वशक्तिमान

598
00:41:40,080 --> 00:41:44,360
नहीं है वो दुखी होता है तो ऐसे ईश्वर को प्राप्त

599
00:41:44,360 --> 00:41:49,200
करने के लिए कोई भी व्यक्ति क्यों प्रयासरत हो

600
00:41:49,200 --> 00:41:53,480
हा वह भी दुखी होता है फिर क्या होगा कि

601
00:41:53,480 --> 00:41:57,560
कैसे जब हम परंपरा प्राप्त आचार्यों की शर गत

602
00:41:57,560 --> 00:42:01,760
हो कर के जब हम धर्म का पालन नहीं करते धर्म

603
00:42:01,760 --> 00:42:05,920
के लिए प्रतिवाद नहीं बनते हैं तब क्या स्थिति आएगी जब

604
00:42:05,920 --> 00:42:10,000
वहां पर मुक्ति नहीं है जब वहां पर सर्वशक्तिमान ईश्वर नहीं है तो धर्म का भी

605
00:42:10,000 --> 00:42:14,040
तो लोप होगा भाई धर्म का अर्थ क्या है पहले यह

606
00:42:14,040 --> 00:42:18,680
समझना होगा सच्चिदानंद स्वरूप परमेश्वर को

607
00:42:18,680 --> 00:42:22,840
परिभाषित कर सकने वाले शास्त्रों द्वारा सच्चिदानंद

608
00:42:22,840 --> 00:42:27,160
स्वरूप परमेश्वर को प्राप्त करने के निमित्त बता

609
00:42:27,160 --> 00:42:30,160
ई जाने वाली विधि का नाम धर्म है

610
00:42:30,160 --> 00:42:34,200
तो जब सच्चिदानंद स्वरूप है ही नहीं परमेश्वर तो वह परमेश्वर कहां

611
00:42:34,200 --> 00:42:38,520
हुआ तो जब वो परमेश्वर परमेश्वर नहीं है तो उसको प्राप्त करने की कोई विधि

612
00:42:38,520 --> 00:42:42,560
कहां से हुई इसका अर्थ क्या हुआ कि जिसका ईश्वर सर्वशक्तिमान नहीं

613
00:42:42,560 --> 00:42:46,720
है बाधित है उसके मूल में क्या है सामने खड़ी

614
00:42:46,720 --> 00:42:51,240
हुई तीन स्त्रियों में कौन माता है कौन बहन है कौन पत्नी है इसमें अंतर

615
00:42:51,240 --> 00:42:55,320
करने का जो नियम है वो उसके पास नहीं है अगर वो दिखा रहा

616
00:42:55,320 --> 00:42:59,400
है कि है तो उसने कहीं से किया है और वो उसको मानने के लिए प्रतिवाद

617
00:42:59,400 --> 00:43:03,880
नहीं है वह कभी भी उन नियमों से भटक सकता है छोड़ सकता है इसलिए

618
00:43:03,880 --> 00:43:08,120
क्वेश्चन करते हैं हम इसलिए क्वेश्चन करना आवश्यक

619
00:43:08,120 --> 00:43:12,520
होता है किसी का कोई प्रश्न हो तो वह कर ले

620
00:43:12,520 --> 00:43:18,520
या अगर लाइव स्ट्रीम में आना चाहता हो तो व आ

621
00:43:19,400 --> 00:43:23,680
जाए वेदों में प्रमाण है कबीर साहब भगवान है उसके बाद जब वेदों

622
00:43:23,680 --> 00:43:29,520
की बात आई तो हम वेदों को तो मानते ही नहीं है

623
00:43:29,520 --> 00:43:35,520
हां बस रटी रटाई पूरे विश्व में एक

624
00:43:54,640 --> 00:43:58,640
संत अरे भाई सुनो

625
00:43:58,640 --> 00:44:02,640
अपने उसको कहो अभिषेक को

626
00:44:02,640 --> 00:44:06,720
अभिषेक को कहो भाई सामना करें हमने अपना नंबर दिया

627
00:44:06,720 --> 00:44:10,800
तो है और हमने बताया था इन भाई साहब को भी देखा था इन्होंने भी देखा

628
00:44:10,800 --> 00:44:14,920
था निष्ठा निष्ठा पूर्वक माता जी ने दूध पिलाया हो तो सामना करें अब

629
00:44:14,920 --> 00:44:19,400
पता नहीं कैसे आपने कौन-कौन सा क्या कर दिया सामने आओ भाई विदों

630
00:44:19,400 --> 00:44:25,400
में प्रमाण है

631
00:44:29,840 --> 00:44:34,240
एक एक स्टेप करके चलना पड़ता है ना पहले तो व्यक्ति यह कहे कि मैं वैदिक

632
00:44:34,240 --> 00:44:38,320
नहीं हूं वेदों से बाहर जाए उसके बाद व्यक्ति जो है जब

633
00:44:38,320 --> 00:44:42,400
वैदिक नहीं रह जाएगा तो हम फिर उससे सवाल जब करेंगे तो वह ईश्वर को मानने

634
00:44:42,400 --> 00:44:46,400
वाला भी सिद्ध नहीं होगा तो फिर वह आस्तिक भी नहीं रहा और जब वह

635
00:44:46,400 --> 00:44:50,440
आस्तिक नहीं रहा तो फिर वह धर्म को मानने वाला भी सिद्ध नहीं होगा

636
00:44:50,440 --> 00:44:54,480
तो वहां धार्मिकता से भी बाहर जाएगा और जब धार्मिकता से बाहर चला गया तो

637
00:44:54,480 --> 00:44:58,560
फिर वो मानवता को मानने वाला सिद्ध नहीं होगा तो मनुष्य से

638
00:44:58,560 --> 00:45:04,040
भी गया कहां पहुंचा धर्मेन हीना पशु भी

639
00:45:04,040 --> 00:45:08,040
समान यह लिंक दे दिया गया है डिस्क्रिप्शन

640
00:45:08,040 --> 00:45:14,040
में अगर कोई आना चाहता है अपने चेहरे के साथ तो वह आ सकता

641
00:45:18,600 --> 00:45:23,280
है फैक्ट बाई अभिषेक को बोलिए सामना करे

642
00:45:23,280 --> 00:45:29,280
निष्ठा पूर्वक दुग्ध पान किया है तो वो सा

643
00:45:33,640 --> 00:45:38,160
करें सूर्य और ब्रह्मा हमारे श्रुति शास्त्रों के

644
00:45:38,160 --> 00:45:42,240
अनुसार भैया आप पांच देवों में ब्रह्मा जी का नाम क्यों लेते हो सूर्य

645
00:45:42,240 --> 00:45:47,200
भगवान का क्यों नहीं सूर्य भगवान और ब्रह्मा जी एक ही है

646
00:45:47,200 --> 00:45:53,160
शास्त्रों के

647
00:45:53,160 --> 00:45:58,960
अनुसार चेहरा दिखाइए सुप्रीम इन जो आए

648
00:45:58,960 --> 00:46:02,720
हैं चले

649
00:46:02,720 --> 00:46:07,040
गए जिसके पास गुर्दा है उसी को लड़ने

650
00:46:07,040 --> 00:46:11,360
का हक है अब गुर्दा ही नहीं है सामने आने का

651
00:46:11,360 --> 00:46:15,360
क्या

652
00:46:15,360 --> 00:46:19,480
करें पर्दा फास हो गया

653
00:46:19,480 --> 00:46:23,600
विश्वजीत सिंह हां वेदों में प्रमाण है कबीर

654
00:46:23,600 --> 00:46:27,760
साहब भगवान है उसके बाद हम वेदों को नहीं मानते अरे भाई तो पहले

655
00:46:27,760 --> 00:46:33,760
कहो ना कि हम सनातनी नहीं है वेदों को मानने वाले नहीं

656
00:46:40,800 --> 00:46:44,880
है ठीक है अगर देखो वो वाली बात बाद में आएगी

657
00:46:44,880 --> 00:46:48,920
जब आप ईश्वर को नहीं मानते हो तो फिर बात ये आएगी जब आपका ईश्वर

658
00:46:48,920 --> 00:46:52,920
ईश्वर ही नहीं है तो आपका धर्म धर्म कैसे जब धर्म नहीं रह जाएगा तो क्या होगा कि

659
00:46:52,920 --> 00:46:57,040
आप मानव कैसे जब मानव नहीं रह जाएगा तो आपको कहना पड़ेगा कि मैं यह हूं

660
00:46:57,040 --> 00:47:01,680
मैं वो हूं मैं पशु हूं मैं स्वान हूं मैं यह हूं ये सब बोलना पड़ेगा

661
00:47:01,680 --> 00:47:06,080
इसीलिए माता पच्ची

662
00:47:06,080 --> 00:47:12,080
आर्य अपना चेहरा

663
00:47:17,880 --> 00:47:23,880
दिखाएं नहीं दिखाएंगे चेहरा तो हम आपको ले नहीं सकते ऊपर

664
00:47:39,160 --> 00:47:43,320
यह बात गलत आप लोग मेरे ऊपर मिथ्या लगाते हैं इसीलिए हमारे

665
00:47:43,320 --> 00:47:48,440
समाज में इतना श्वेता जी ऐसा होता

666
00:47:48,440 --> 00:47:52,560
है जो हमारा जो भटकाव है ना समाज में वो

667
00:47:52,560 --> 00:47:56,840
क्यों है पता है क्योंकि हम निष्कर्ष तक नहीं पहुंच रहे निष्कर्ष तक क्यों नहीं पहुंच रहे हैं

668
00:47:56,840 --> 00:48:01,240
क्योंकि हम अनर गर्ल प्रलाप से प्रलाप को होने दे रहे हैं

669
00:48:01,240 --> 00:48:05,800
जब पॉइंट टू पॉइंट बात होती है तब सबको सही होता है व्यक्ति जब

670
00:48:05,800 --> 00:48:10,360
या तो रिपीटेशन कर रहा है चीजों का या फिर वो

671
00:48:10,360 --> 00:48:14,360
विषय से हटकर बातें कर रहा है तो क्या करेंगे हम अब जब

672
00:48:14,360 --> 00:48:18,720
उसने यही कह दिया मैं वेदों को नहीं मानता तो फिर वो उसका सारा जो

673
00:48:18,720 --> 00:48:23,200
रामपाल जी के द्वारा फैलाया गया कि वेदों से हमने सब साबित किया सद ग्रंथों से

674
00:48:23,200 --> 00:48:27,320
वो रामपाल को मानने वाला सिद्ध नहीं हो रहा है अब उससे हम क्या बात

675
00:48:27,320 --> 00:48:33,320
करेंगे यह मेरे ऊपर एक गलत आरोप लगता है कि मैं सुनता नहीं

676
00:48:39,000 --> 00:48:43,000
हूं अगर सेविज्म यह कह रहा है कि नहीं भाई

677
00:48:43,000 --> 00:48:47,160
विष्णु छोटे हैं और शिव बड़े हैं तो यह गलत है अगर

678
00:48:47,160 --> 00:48:51,240
हमारे सामने इस तरह का कुछ आएगा तो हम यथा संभव उसका भी

679
00:48:51,240 --> 00:48:55,320
प्रतिकार करेंगे क्योंकि हरि और हर में कोई भेद नहीं है तो

680
00:48:55,320 --> 00:48:59,920
जैसे हमा हमारे लिए विष्णु भगवान है वैसे ही हमारे लिए शिव जी भी है

681
00:48:59,920 --> 00:49:04,080
और जैसे हमारे लिए शिव जी है वैसे ही हमारे लिए विष्णु जी है अगर कोई

682
00:49:04,080 --> 00:49:08,160
भी इसमें बड़ा छोटा करेगा तो हम वैसे ही खड़े होंगे उतने ही

683
00:49:08,160 --> 00:49:12,840
सशक्त रूप से यह है सेविज्म पर अगर सेविज्म विष्णु

684
00:49:12,840 --> 00:49:17,040
और भगवान शिव की एकता को मानते हुए अपने शिव रूप

685
00:49:17,040 --> 00:49:21,040
में भक्ति रस में और जो है भगवान की व्याख्या कर रहे हैं तो अच्छी बात है

686
00:49:21,040 --> 00:49:25,240
मगर अंत तो गव शाश्वत सत्य के रूप में वो कह रहे हैं नहीं शिव तत्व ही परम

687
00:49:25,240 --> 00:49:29,440
है और जो है विष्णु तत्व जो है अधीन है यह सब बातें अगर कर रहे हैं अगर

688
00:49:29,440 --> 00:49:33,680
है तो प्लीज आप लोग हमें वह सामग्री भेजे जहां पर इस तरह का दुष्प्रचार

689
00:49:33,680 --> 00:49:37,880
किया जा रहा है मगर यह भी बात है व वो जो है दुष्प्रचार

690
00:49:37,880 --> 00:49:42,000
जो है प्रभावशाली भी हो जब उनकी बात ऑलरेडी कोई नहीं सुन रहा है तो हम उनकी

691
00:49:42,000 --> 00:49:46,040
बात करके उनको क्यों प्रचार कर दे उनका तो प्रभावशाली यदि कोई

692
00:49:46,040 --> 00:49:50,240
दुष्प्रचार किया जा रहा है सवेज में का तो आप बिल्कुल हमें भेजिए हम बिल्कुल उनका

693
00:49:50,240 --> 00:49:56,240
प्रतिकार करेंगे

694
00:50:01,600 --> 00:50:07,120
एक दिनेश दास जी वाह आप वापस

695
00:50:07,120 --> 00:50:11,920
आए यह भाई साहब आपका आपको ले लेते हैं

696
00:50:11,920 --> 00:50:15,920
बाकी के तीन लोगों को हटा दीजिए दो लोगों को आर्य और विशाल भाटिया

697
00:50:15,920 --> 00:50:19,760
है

698
00:50:19,760 --> 00:50:24,080
जो दिनेश दास जी को लेते हैं ड टू स्टेज

699
00:50:24,080 --> 00:50:28,240
हां जी दिनेश जी बताइए पता कराए

700
00:50:28,240 --> 00:50:34,080
जो आपको पता करना था पिछली वाली हमारी बातचीत हुई थी

701
00:50:34,080 --> 00:50:38,080
जो आपकी आवाज नहीं आ रही दिनेश दास जी उसको माइक को ऑन कर

702
00:50:38,080 --> 00:50:42,240
लीजिए जी जी जी हां आपने कहा था ना

703
00:50:42,240 --> 00:50:47,520
पता करके आऊंगा अगली बार जी पता करा

704
00:50:47,520 --> 00:50:51,560
है क्या आपने कहा था ना हमारे

705
00:50:51,560 --> 00:50:55,640
कुछ प्रश्न अटक गए थे तो यह बात तो भगवान को ही पता होगी इससे आगे कुछ भगवान ने

706
00:50:55,640 --> 00:50:59,720
बताया ही नहीं है ऐसा कुछ कहा था आपने तो ये जो आपने बात कही

707
00:50:59,720 --> 00:51:05,720
है यह प्रश्न तो बनता ही नहीं है ना यह प्रश्न तो बनता ही

708
00:51:06,120 --> 00:51:10,200
नहीं मुझे लगता है एक चैप्टर तैयार करके आए वो अपना

709
00:51:10,200 --> 00:51:14,920
बोलने के लिए आए एक मिनट एक मिनट सुनि

710
00:51:14,920 --> 00:51:17,440
आप

711
00:51:17,440 --> 00:51:21,600
हटाओ उस चीज का जवाब दूंगा पहले तो ये जवाब दीजिए कि

712
00:51:21,600 --> 00:51:25,680
आपने कहा था इससे आगे भगवान ने नहीं बताया है आप वो पता करके आए

713
00:51:25,680 --> 00:51:30,240
हैं आपने पूरी बात सुनी पूरी बात सुनी

714
00:51:30,240 --> 00:51:34,640
थी आपने वेदों के प्रमाण माने मांगे मैंने 16 16 41

715
00:51:34,640 --> 00:51:38,760
और 16 दो बताया आपने कहा

716
00:51:38,760 --> 00:51:42,880
बस मैंने ये कहा उसम लिखा नहीं आपके पीछे वेद रखे हुए अगर

717
00:51:42,880 --> 00:51:46,960
ऐसा लिखा हुआ है तो दिखाइए जबक ऐसा है ही नहीं वहां पर लिखा

718
00:51:46,960 --> 00:51:51,320
हुआ और दूसरी बात भगवान ने एकवा दिखा रहा

719
00:51:51,320 --> 00:51:55,760
मैं दिखा रहा हूं मैं दिखा रहा हूं हा बताओ दिखाओ दिखाओ

720
00:51:55,760 --> 00:51:59,840
ये बताइए आप पले मुझे कि यदि मैं

721
00:51:59,840 --> 00:52:03,920
उसमें कुछ छपवा दूं नहीं लिखा है और मैं छपवा दूं तो

722
00:52:03,920 --> 00:52:08,360
आप उसे मान लोगे नहीं वेदों में छपा मतलब अपनी तरफ से कैसे

723
00:52:08,360 --> 00:52:12,560
छ क्यों क्यों आदमी गलत बुक नहीं छपा सकता क्या नहीं

724
00:52:12,560 --> 00:52:17,200
अगर जो चीज आप दिखा रहे हो वो हम भी चेक करेंगे ना तो वहां पर है

725
00:52:17,200 --> 00:52:21,320
इसका मतलब कि मेरे यहां पर वेद दिखाने से कुछ नहीं होता है मेरे यहां पर वेद

726
00:52:21,320 --> 00:52:25,400
दिखाने से कुछ नहीं होगा इसलिए नहीं दिखाता मैं इसलिए

727
00:52:25,400 --> 00:52:29,440
प्रमाण की बात नहीं करता किसकी बात क्य मेरे यहां पर प्रमाण दिखाने से कुछ

728
00:52:29,440 --> 00:52:34,280
नहीं होगा अरे भाई प्रमाण ही तो दिखाने पड़ेंगे ना जो अरे

729
00:52:34,280 --> 00:52:38,320
प्रमाण तुम स्वीकार मैं पूछ रहा हूं ना अगर मैंने उसमें कुछ छपवा दिया होगा

730
00:52:38,320 --> 00:52:42,360
तो तुम क्या करोगे अच्छा मैं ऐसे कह दूं कि वेदों

731
00:52:42,360 --> 00:52:46,880
में मेरा नाम लिखा हुआ है मैं भगवान हूं तो पब्लिक मान लेगी क्या

732
00:52:46,880 --> 00:52:51,400
दिखाना पड़ेगा ना दिखाना पड़ेगा दिखाना पड़ेगा मगर संत रामपाल

733
00:52:51,400 --> 00:52:53,920
जी महाराज जी दिखाते हैं वेदों में लिखा

734
00:52:53,920 --> 00:52:58,280
हुआ जी जी बताए केवल बोलने आए बताइए ब

735
00:52:58,280 --> 00:53:02,280
बोलते तो आप भी है ना आप दूसरे को सुनते है बताइए आप

736
00:53:02,280 --> 00:53:06,360
जि आप जिससे प्रमाण ले रहे हैं

737
00:53:06,360 --> 00:53:10,680
वेदों को आपको उस पर भरोसा दिखाना पड़ेगा आपको मानना

738
00:53:10,680 --> 00:53:14,960
पड़ेगा कि जिस जिसका छपा हुआ वेद मैं वेद मान रहा हूं वो

739
00:53:14,960 --> 00:53:19,000
मेरे लिए प्रमाणिक है तब तो उसके वेद पर विश्वास होना सिद्ध

740
00:53:19,000 --> 00:53:23,160
होता है अगर हम वेद जिससे ले रहे हैं उस पर हमें विश्वास

741
00:53:23,160 --> 00:53:27,920
नहीं है तो हमारा वेदों पर विश्वास होना सिद्ध नहीं होता है सही बात है

742
00:53:27,920 --> 00:53:32,040
हां तो आपने वेद किससे लिए वेद गीता

743
00:53:32,040 --> 00:53:36,680
प्रेस गोरखपुर वाले देते हैं तो गीता प्रेस ने कहीं कहा है कि कबीर भगवान

744
00:53:36,680 --> 00:53:40,960
है गीता प्रेस क्यों कहेगा वेद कहेंगे गीता प्रेस तो छपती है

745
00:53:40,960 --> 00:53:45,040
वो वेद कीता है गीता प्रश्न सुनिए गीता प्रश्न

746
00:53:45,040 --> 00:53:49,200
कहता है गीता प्रश्न है राम सुख दास जी ने भाष्य किया है गीता

747
00:53:49,200 --> 00:53:53,360
का आप पूरी बात कर लीजिए फिर पूरी आप पूरी

748
00:53:53,360 --> 00:53:57,560
बात कर लीज के जो प्रभारी प्रभारी लोग है गीता प्रेस के

749
00:53:57,560 --> 00:54:02,040
जो प्रबंधक लोग हैं उन्होंने भाष्य किए गीता के क्या उन भाष्य

750
00:54:02,040 --> 00:54:06,160
पर आपको विश्वास है अब मैं बोलू मैं

751
00:54:06,160 --> 00:54:09,120
पूछ रहा हूं है कि नहीं हां मैं बोलू अब आप थोड़ी

752
00:54:09,120 --> 00:54:13,560
देर चुप जाइएगा गीता जी का जो मेन

753
00:54:13,560 --> 00:54:17,560
जो श्लोक होते हैं जो वेदों के जो मेन मूल संस्कृत श्लोक होते

754
00:54:17,560 --> 00:54:21,720
हैं वास्य करने वाले अनेको है बास्य करने वाले धर्म गुरु बहुत

755
00:54:21,720 --> 00:54:25,840
है है ना हर एक राइटर अपने अपने अनुसार कर देता है लेकिन जो मूल

756
00:54:25,840 --> 00:54:29,840
संस्कृत जो वास्तव में वेद है मूल संस्कृत वही संस्कृत

757
00:54:29,840 --> 00:54:33,960
है जो परमात्मा ने दिए आपको कैसे पता जी मूल

758
00:54:33,960 --> 00:54:38,000
संस्कृत वही संस्कृत है जो परमात्मा ने दी है गीता प्रेस आपको मंत्र

759
00:54:38,000 --> 00:54:42,040
दे रही है आपको गुरु शिष्य परंपरा से मंत्र प्राप्त हो रहे हैं आपको कैसे

760
00:54:42,040 --> 00:54:46,480
पता जो परमात्मा ने जो मंत्र दिए थे वही मत्र के दरा ये वेद व्यास जी ने लिख

761
00:54:46,480 --> 00:54:50,520
उनसे आगे ऋषियों के द्वारा हम यानी की यानी की

762
00:54:50,520 --> 00:54:54,680
जो व्यक्ति आपको मंत्र दे रहा है आपको भरोसा है ना कि यह

763
00:54:54,680 --> 00:54:58,680
झूठ नहीं बोलता यह गलत बात नहीं बताता मिनट

764
00:54:58,680 --> 00:55:02,800
सुनि उसका दिया उसने सिर्फ दिया है उसका नहीं है आप उस

765
00:55:02,800 --> 00:55:08,800
उसकी मोहर लगा रहे कि उसने दिया है ये उसका

766
00:55:10,480 --> 00:55:14,720
नहीं भाईब आपको प्ली आपको यही आता है

767
00:55:14,720 --> 00:55:20,720
फिर क्या अगर यही आता है तो फिर क्यों लाते हो किसी को

768
00:55:29,880 --> 00:55:34,040
दाराम जी प्रणाम प्रणाम करते

769
00:55:34,040 --> 00:55:36,200
आपको

770
00:55:36,200 --> 00:55:40,640
शीराम हमारा हमारा कोई मतभेद तो नहीं है

771
00:55:40,640 --> 00:55:46,320
मैं तो थोड़ा अपना एक रखना चाहता हूं

772
00:55:46,320 --> 00:55:50,520
राय बताइए य क्या होता है जी यह क्या होता है

773
00:55:50,520 --> 00:55:54,560
कि जो हमारी सरचा होती है शास्त्रों की अध्यात्मिक की उसके

774
00:55:54,560 --> 00:55:58,560
लिए भी क्या होता है ना कि एक योग्यता होनी चाहिए इनको तो शुद्ध हिंदी

775
00:55:58,560 --> 00:56:02,800
के शब्द या शास्त्रों के शब्द ही नहीं पता होते हैं उसका अर्थ क्या होता है और

776
00:56:02,800 --> 00:56:07,000
आगे चलकर व्याकरण की तो बात ही छोड़ दीजिए तो यह लोग तो अपने

777
00:56:07,000 --> 00:56:11,000
शब्दों को ही एक तरह से देखा जाए तो पुष्ट नहीं कर पाते हैं कि बोलने

778
00:56:11,000 --> 00:56:15,360
का जो शब्द बोलते हैं उसका अर्थ क्या होता है तो बहुत सारी दिक्कत

779
00:56:15,360 --> 00:56:19,560
हमको यह भी दिखती है सरसा में क्योंकि क्या है ना कि अपने

780
00:56:19,560 --> 00:56:23,920
गुरु का अपमान नहीं झेलना चाहते हैं तो कहीं से भी आ जाते हैं उठ कर के वो अलग बात

781
00:56:23,920 --> 00:56:25,680
है तो हमको

782
00:56:25,680 --> 00:56:30,240
थोड़ा सा आपकी बहुत सारी वीडियो में यह भी हमको लगा है

783
00:56:30,240 --> 00:56:34,560
कि ऐसा होता है दिक्कत चलिए ठीक है प्रणाम जी

784
00:56:34,560 --> 00:56:39,480
चलिए आभार आपका कहां से हैं ताजा राम जी

785
00:56:39,480 --> 00:56:44,160
मैं वर्तमान में बेंगलोर में रहता हूं वैसे मैं राजस्थान बाड़मेर से हूं

786
00:56:44,160 --> 00:56:50,160
अच्छ चलिए ठीक है बहुत बहुत आभ जय श्री राम

787
00:57:10,320 --> 00:57:16,320
वेदों में प्रमाण है

788
00:57:18,280 --> 00:57:22,560
ओए हां बिल्कुल आप सही कह रहे हैं यदि जो शिव

789
00:57:22,560 --> 00:57:26,560
जी है व परम वैष्णव है तो विष्णु जी परम शब

790
00:57:26,560 --> 00:57:30,720
है और इसका शास्त्रों में प्रमाण भी है हरिहर वाला जो भेद वाला हमारा

791
00:57:30,720 --> 00:57:34,920
वीडियो है वो देखें और तीन तारीख

792
00:57:34,920 --> 00:57:39,320
से 3 सितंबर से तीन अक्टूबर से

793
00:57:39,320 --> 00:57:43,400
नाम जप ऑपरेशन नाम जप हम लोग शुरू कर रहे हैं उसका फॉर्म जल्द ही

794
00:57:43,400 --> 00:57:49,400
आपको दे दिया जाएगा

795
00:57:51,120 --> 00:57:55,680
instagram2 तारीख से उसमें दो तरीके की क्ला वो होंगे

796
00:57:55,680 --> 00:57:59,800
सेशन एक होगा सुबह सीधे सवा घंटे का उसमें जो बैठना

797
00:57:59,800 --> 00:58:03,840
चाहता है बैठ सकता है और 1515 मिनट के पांच सेशंस भी होंगे

798
00:58:03,840 --> 00:58:08,040
जिसमें की जो एक सुबह 6 बजे हो गया फिर 10 बजे हो गया उसके

799
00:58:08,040 --> 00:58:12,160
बाद फिर वो जो एक शेड्यूलिंग होगी उसके अनुसार इस तरीके से

800
00:58:12,160 --> 00:58:16,560
दिन में पांच बार 1515 मिनट तो आप दोनों में से किसी भी जो प्रोटोकॉल

801
00:58:16,560 --> 00:58:20,560
है उसको जवाइन कर सकते हैं और जो

802
00:58:20,560 --> 00:58:25,120
पूज्य जगतगुरु शंकराचार्य जी ने बताया है कि उपासना का बल होना चाहिए हम सब में

803
00:58:25,120 --> 00:58:29,280
उपासना का बल साथ में मिलकर के थोड़ा सा अच्छा लगता है एक दूसरे के साथ

804
00:58:29,280 --> 00:58:33,400
में तो हम लोग कर सकते हैं नाम जप उसमें माता का नाम भी ले सकते

805
00:58:33,400 --> 00:58:37,480
हैं उसमें शिव जी का नाम भी ले सकते हैं और उसमें जो है राम

806
00:58:37,480 --> 00:58:41,720
का नाम भी ले सकते हैं नाम आपके ऊपर है मगर उसमें व 1515

807
00:58:41,720 --> 00:58:47,720
मिनट के लिए होगा और सवा घंटे के लिए

808
00:58:48,720 --> 00:58:53,400
होगा एक आपको मैं वीडियो दिखा रहा हूं

809
00:58:53,400 --> 00:58:58,000
यह वीडियो ध्यान से देखिए

810
00:58:58,000 --> 00:59:02,040
वह वीडियो आप दिखा दें जो मैंने एक एक लिंक दिया

811
00:59:02,040 --> 00:59:06,040
है यहां पर जिसमें कि विष्णु पुराण से बताया जा रहा

812
00:59:06,040 --> 00:59:10,120
है कि काल कौन है अपनी बातों को रखने

813
00:59:10,120 --> 00:59:14,640
के लिए क्या चाहिए प्रमाण यह देखिए

814
00:59:14,640 --> 00:59:20,640
इसको देखिए ध्यान से और प्रकाशक वही है मुद्रक

815
00:59:20,720 --> 00:59:26,720
गीता कैसे लोग भ्रमित हो जाते हैं इनकी बातो में देखिए

816
00:59:26,840 --> 00:59:31,120
और पृष्ठ नंबर चार पर इसमें संस्कृत भी साथ

817
00:59:31,120 --> 00:59:35,880
है यह 14 15 शलोक है यह देख

818
00:59:35,880 --> 00:59:39,880
हे दज परब्रह्म का यह काल को परब्रह्म बोल

819
00:59:39,880 --> 00:59:44,080
रहे हैं लेकिन इनको ज्ञान नहीं परब कौन है फिर भी अब य देख

820
00:59:44,080 --> 00:59:49,040
प कर य पर पॉज कर दीजिए

821
00:59:49,040 --> 00:59:53,320
अब देखिए इन्होने क्या किया अपने मत को सिद्ध करने के लिए

822
00:59:53,320 --> 00:59:57,440
यह भाई साहब विष्णु पुराण को खोल रहे हैं और उसके बाद विष्णु

823
00:59:57,440 --> 01:00:01,840
पुराण में ही परम ब्रह्म अगर आया है किसी के लिए तो कह रहे यह गलत लिख दिया उन्होने

824
01:00:01,840 --> 01:00:05,880
अरे भाई गलत लिख दिया है इसका अर्थ है कि जो लिखने वाला है

825
01:00:05,880 --> 01:00:10,120
उस पर आपको भरोसा नहीं है ना तो उसकी कही हुई किसी बात को

826
01:00:10,120 --> 01:00:15,640
आप प्रमाण के रूप में कैसे उपस्थित कर रहे हो कैसे प्रस्तुत कर रहे

827
01:00:15,640 --> 01:00:19,680
हो मतलब इसको कहते हैं कि मैं तो भाई झूठ बोल

828
01:00:19,680 --> 01:00:23,920
रहा हूं तुझे बता रहा हूं कि मैं झूठ बोल रहा हूं मगर फिर भी वेद में प्रमाण

829
01:00:23,920 --> 01:00:29,920
है और कबीर साहब

830
01:00:37,120 --> 01:00:41,120
परब्रह्म प्रथम इसको विष्णु भी कह देते हैं य अज्ञानता में

831
01:00:41,120 --> 01:00:45,240
हे द्विज परब्रह्म का प्रथम रूप पुरुष है पुरुष छो

832
01:00:45,240 --> 01:00:49,320
बस हो गया दिखाना था दिखा दिया है रहने

833
01:00:49,320 --> 01:00:53,360
दीजिए तो मेरे ख्याल से कोई और है नहीं दिनेश दास

834
01:00:53,360 --> 01:00:58,160
जी हैं

835
01:00:58,160 --> 01:01:02,240
दिनेश दास जी अपना चेहरा दिखाएं

836
01:01:02,240 --> 01:01:08,240
थोड़ा

837
01:01:11,680 --> 01:01:15,920
सा अरे भाई चेहरा दिखाएंगे तो हम ऊपर आपको ले

838
01:01:15,920 --> 01:01:19,120
स्टेज

839
01:01:19,120 --> 01:01:23,960
पर हां इस बारे में आपका क्या कहना

840
01:01:23,960 --> 01:01:28,280
है आप बारबार स पहले तो यह बताइए कि रिमूव

841
01:01:28,280 --> 01:01:32,520
कैसे कर देते हैं आपकी रिमूव इसलिए करते हैं क्योंकि जो

842
01:01:32,520 --> 01:01:36,640
एक नैतिकता होती है उसको भंग करते हुए आप ओवरलैपिंग करने लगते

843
01:01:36,640 --> 01:01:40,720
हैं नैतिकता आप भंग नहीं कर रहे हैं मैं भंग

844
01:01:40,720 --> 01:01:44,720
नहीं कर रहा हूं अच्छा जब मैंने आपसे जि जिस विषय पर बात

845
01:01:44,720 --> 01:01:49,160
हो रही है जब मैं बोलने लगता हूं तो मैं आपसे कह रहा हूं कि भाई मेरी बात पूरी होने दीजिए

846
01:01:49,160 --> 01:01:53,280
तो आप उसमें ओवरलैपिंग करते हैं तो उससे क्या होता है कि ये जो चर्चा है

847
01:01:53,280 --> 01:01:57,560
ये बाद में और लोग जब देखेंगे तो उनको दिक्कत आएगी तो

848
01:01:57,560 --> 01:02:02,280
इसलिए मुझे हटाना पड़ता है और मैं जो है सुरी

849
01:02:02,280 --> 01:02:06,960
बात पूरी नहीं हु बोलिए बोलिए बोलिए आप बोलिए हां

850
01:02:06,960 --> 01:02:10,960
तो मैं जो है आपको म्यूट कर कर के नहीं बोल सकता यह मेरे अंदर नहीं

851
01:02:10,960 --> 01:02:15,200
है या तो मैं आपको यहां रखूंगा तो बात करूंगा या फिर नहीं रखूंगा मैं म्यूट

852
01:02:15,200 --> 01:02:19,280
कर कर के आपका जो है वो जो बोलने का वो है कि आप यहां पर हो बोल

853
01:02:19,280 --> 01:02:23,560
रहे हो और लोगों को सुनाई दे रहा है मैं ये भी कर सकता हूं मैं ये नहीं करता

854
01:02:23,560 --> 01:02:28,480
हूं ठीक है तो अभी बात यह है कुल मिलाकर

855
01:02:28,480 --> 01:02:32,720
के अभी जो भाई साहब आए थे आपसे थोड़ी देर पहले

856
01:02:32,720 --> 01:02:34,320
उन्होंने कहा कि वो रामपाल

857
01:02:34,320 --> 01:02:39,440
दास को मानते हैं पर वह वेदों को नहीं मानते यह सही

858
01:02:39,440 --> 01:02:43,480
है नहीं नहीं ऐसा नहीं है उनकी पूरी बात आपने नहीं सुनी

859
01:02:43,480 --> 01:02:47,640
व बाद में उसको मानते ऐसा रामपाल जी का कोई भी अनुयाई ऐसा

860
01:02:47,640 --> 01:02:51,720
नहीं है जो कि वेदों को नहीं मानता अच्छा मतलब वो झूठ

861
01:02:51,720 --> 01:02:56,280
बोल रहे थे झूठ नहीं वो आपने बीच में से ू कर दिया

862
01:02:56,280 --> 01:03:00,840
तो इससे य सिद्ध नहीं होता कि मानते नहीं है वो उस बात परि

863
01:03:00,840 --> 01:03:04,920
सिद्ध भाई साहब उन्होंने यह कहा मैं रामपाल दास को मानता हूं मगर मैं वेदों

864
01:03:04,920 --> 01:03:08,960
को नहीं मानता मैं बारण उपनिषद को नहीं मानता नहीं नहीं

865
01:03:08,960 --> 01:03:13,000
ठीक है चलो अब मैं यहां पर उसको आप नहीं समझ पाओगे अब

866
01:03:13,000 --> 01:03:17,360
आप आप आगे बात इसको क्लियर कर दीजिए ना

867
01:03:17,360 --> 01:03:21,440
उन्होंने जो बोला मैं वेदों को नहीं मानता आप उन्हे रखते वो उस बात

868
01:03:21,440 --> 01:03:26,800
पर भी आ जाते किस बात पर तो इस बात का भी

869
01:03:26,800 --> 01:03:31,640
क् ठीक है मैं समझ गया आप उसको आप उसको क्लियर नहीं करेंगे आज जाते

870
01:03:31,640 --> 01:03:36,520
ये सब हमारी बातें होती है अब अपनी बात रख दीजिए

871
01:03:36,520 --> 01:03:40,800
जी हा मैं ये कह रहा था जैसे आप कह रहे थे कि ये

872
01:03:40,800 --> 01:03:45,280
जो जो वेद है जो शास्त्र है गीता है उसको आप मतलब

873
01:03:45,280 --> 01:03:49,360
सच्चा क्यों मानते हैं क्योंकि जो गीता प्रेस गोरखपुर के पास

874
01:03:49,360 --> 01:03:53,480
जो जो भी गुरु है जो इनको छाप रहे हैं

875
01:03:53,480 --> 01:03:57,640
तो उ उनके पास जो गीता का ज्ञान है आपका

876
01:03:57,640 --> 01:04:01,960
कहना यह है कि यह ज्ञान वो उनका है

877
01:04:01,960 --> 01:04:05,960
हमारा और आपका बीच का जो समझने का जो फेर है ना वो क्या हो

878
01:04:05,960 --> 01:04:10,720
रहा है ठीक है बो लीजिए

879
01:04:10,720 --> 01:04:15,160
बो आपके और हमारे बीच समझने का जो फेर है वो यह है

880
01:04:15,160 --> 01:04:19,600
कि आप कहते हो किय जो ज्ञान वेदव्यास जी से अन्य

881
01:04:19,600 --> 01:04:23,680
और जिनसे भी ये ज्ञान आया है वो उनका ज्ञान

882
01:04:23,680 --> 01:04:27,760
है हमारा कहना है संत रामपाल जी महाराज जी के अनुयायियों का कहना

883
01:04:27,760 --> 01:04:31,960
है कि जो ज्ञान है यह भगवान का है इन ऋषियों

884
01:04:31,960 --> 01:04:36,360
के पास भगवान ने भेजा है दिव दृष्टि दी थी

885
01:04:36,360 --> 01:04:40,400
वेदव्यास जी को उस दिव दृष्टि से वेदव्यास वेस जी

886
01:04:40,400 --> 01:04:44,400
कोष्टि दी थी वेदव्यास जी को दि दृष्टि दी थी वेदव्यास

887
01:04:44,400 --> 01:04:49,000
जी को दिव दृष्टि दी थी वेदव्यास जी ने ही ये सारे 18 पुराण

888
01:04:49,000 --> 01:04:53,560
और 11 उपनिषद और चार वेदों की रचना की थी जैसे

889
01:04:53,560 --> 01:04:58,120
कि काम कर वैसे विषय अलग हो जाएगा मगर फिर भी

890
01:04:58,120 --> 01:05:02,480
आप मुझे ऐसा करिए किसी मंत्र का दृष्टा वेदव्यास जी को

891
01:05:02,480 --> 01:05:04,400
दिखाइए जी वेद है

892
01:05:04,400 --> 01:05:09,120
आपके पास वेदव्यास जी को

893
01:05:09,120 --> 01:05:13,280
वेद व्यास जी को किसी मंत्र का दृष्टा दिखाइए अच्छा

894
01:05:13,280 --> 01:05:17,560
आप बताइए वेदव्यास जी ने कैसे लिखे फिर आप थोड़ा वेदव्यास जी द्वापर

895
01:05:17,560 --> 01:05:22,200
में आकर वेदों के चार भाग करते हैं छ वेदांग

896
01:05:22,200 --> 01:05:26,240
रचना करते हैं और जो जो हमारा एक अरब लो संख्या

897
01:05:26,240 --> 01:05:31,840
वाला महापुराण था उसके 18 भाग करते हैं वेदव्यास जी दृष्टा नहीं

898
01:05:31,840 --> 01:05:35,840
थे हा ठीक है वेदव्यास जी से पहले वो ज्ञान मतलब

899
01:05:35,840 --> 01:05:39,880
उन्होंने जो राइट जो लिखा ज्ञान तो वो ज्ञान कहां

900
01:05:39,880 --> 01:05:43,880
पर था वो उस टाइम था वेदव्यास जी से पहले वो ज्ञान था

901
01:05:43,880 --> 01:05:48,480
क्या भाई साहब हमारी चर्चा जो है

902
01:05:48,480 --> 01:05:52,600
बिना विषय के हो रही है आप विषय

903
01:05:52,600 --> 01:05:56,880
मूल विषय आप समझ लीजिए मूल विषय मैं आपको समझा दूं फिर आप अपना उत्तर

904
01:05:56,880 --> 01:06:00,920
दीजिए आपको मल विय देखिए आपने प्रश्न किया था ना आपने

905
01:06:00,920 --> 01:06:04,920
प्रश्न किया था ना अंत में फिर लोग कहेंगे मैं बोलने नहीं देता हूं आपने

906
01:06:04,920 --> 01:06:09,000
एक प्रश्न किया ना लास्ट में तो इसका अर्थ है कि मुझे बोलना है ठीक है

907
01:06:09,000 --> 01:06:13,560
अब मैं बोल रहा हूं बात यह है कि जिससे

908
01:06:13,560 --> 01:06:17,560
हम वेदों के मंत्र ले रहे हैं वो वेदों के मंत्र उन्होंने नहीं रचे

909
01:06:17,560 --> 01:06:19,400
ईश्वर के ही है अप

910
01:06:19,400 --> 01:06:23,800
ज्ञान आ रहा है ऋषियों के ऋषि दृष्टा हुए फिर उनसे आ रहा है गुरु शिष्य परंपरा

911
01:06:23,800 --> 01:06:28,640
से आ रहा है गुरु परंपरा से अर्थ भी आ रहा है

912
01:06:28,640 --> 01:06:32,640
अर्थ भी आ रहा है शायन भाष्य सबसे प्राचीनतम उठा के

913
01:06:32,640 --> 01:06:37,200
देखिए चारों शायन कौन है अपने समय के जो विद्यान

914
01:06:37,200 --> 01:06:41,400
स्वामी थे उनके छोटे भाई है विद्यान स्वामी कौन है य सब पता ही नहीं होगा पता

915
01:06:41,400 --> 01:06:45,400
किया कभी सबसे प्राचीनतम भाष्य कौन सा है वेदों का

916
01:06:45,400 --> 01:06:49,640
बोलिए कौन सा है बोलिए बोलिए मुझे मालूम है नहीं पता आप पूरा कर लीजिए

917
01:06:49,640 --> 01:06:54,600
फिर बोलूंगा अरे मैं पूरा करूंगा अभी आपसे पूछ रहा हूं पता किया कभी आपने

918
01:06:54,600 --> 01:06:58,680
हाता किया हमने क्या कौन है

919
01:06:58,680 --> 01:07:02,680
आप बताइए क्या पूछ रहे हो आप हां वो यही है कुछ नहीं

920
01:07:02,680 --> 01:07:06,880
पता है केवल वो लाइने रटी है विद में प्रमाण है

921
01:07:06,880 --> 01:07:12,320
चलो फर मैं आगे बढ़ता हूं मैं आगे बढ़ता हूं बताइए

922
01:07:12,320 --> 01:07:16,360
तो जो हमारे ऋषि गण है वह मंत्रों के दृष्टा बनते हैं

923
01:07:16,360 --> 01:07:20,600
फिर गुरु शिष्य परंपरा से मैं दिखाता हूं आपको गुरु शिष्य परंपरा

924
01:07:20,600 --> 01:07:25,840
दिखाइए

925
01:07:25,840 --> 01:07:31,840
अच्छा अच्छा ये बताइए आपके जो रामपाल है वो यह कहते हैं

926
01:07:41,240 --> 01:07:45,280
कि वो यह कहते हैं कि जो गीता है उसमें कुछ 5

927
01:07:45,280 --> 01:07:49,800
पर ज्ञान जो है काल ने दिया है जी सही बात है

928
01:07:49,800 --> 01:07:53,960
हां इस पर रते तो

929
01:07:53,960 --> 01:07:58,520
क्या उसमें चौथा चैप्टर आता है क्या 5 परट

930
01:07:58,520 --> 01:08:02,600
में तीसरा आता है क्या उसम मिक्स है जहां जहां पर

931
01:08:02,600 --> 01:08:06,720
है वो जहां जहां पर है वो आपको दिखा देंगे जहां जहां पर मिक्स है वो

932
01:08:06,720 --> 01:08:10,840
आपको दिखा देंगे जहां पर हमें शंका है जहां पर संत रामपाल जी महाराज जी ने कहा

933
01:08:10,840 --> 01:08:16,840
है वो आपको दिखा

934
01:08:18,920 --> 01:08:24,920
द मुको उपनिषद

935
01:08:40,600 --> 01:08:46,600
दो

936
01:08:48,800 --> 01:08:51,480
48

937
01:08:51,480 --> 01:08:56,080
200 28

938
01:08:56,080 --> 01:09:00,200
यह देखिए यह गीता प्रेस

939
01:09:00,200 --> 01:09:05,760
है गीता प्रेस से प्राप्त मंत्र है मुंडकोपनिषद

940
01:09:05,760 --> 01:09:10,480
प्रथम खंड प्रथम श्लोक में ही बताया जा रहा

941
01:09:10,480 --> 01:09:14,480
है परंपरा परंपरा क्या क्या

942
01:09:14,480 --> 01:09:18,560
लिखा है बताइए पढ़ सर्वशक्तिमान

943
01:09:18,560 --> 01:09:22,880
परब्रह्म परमेश्वर से देवताओं में सर्वप्रथम ब्रह्मा प्रकट हुए

944
01:09:22,880 --> 01:09:26,880
फिर इन्होंने ही समस्त सब देवताओं महा ऋषियों और मरीच

945
01:09:26,880 --> 01:09:31,040
आदि प्रजापति हों को उत्पन्न किया साथ ही अब

946
01:09:31,040 --> 01:09:35,520
इनमें बहुत सारी चीजें उसके बाद लिखा है उनके सबसे बड़े पुत्र महा ऋषि

947
01:09:35,520 --> 01:09:39,600
अथर्वा थे उन्हीं को सबसे पहले ब्रह्मा जी ने ब्रह्म विद्या का

948
01:09:39,600 --> 01:09:43,840
उपदेश किया तो ब्रह्मा जी ने किसको दिया अथर्वा को

949
01:09:43,840 --> 01:09:48,000
उसके बाद आगे क्या है अथर्वा ऋषि जो ब्रह्म विद्या

950
01:09:48,000 --> 01:09:52,160
ब्रह्मा से मिली थी वही ब्रह्म विद्या उन्होंने अंगी ऋषि को बतलाई विद्या

951
01:09:52,160 --> 01:09:56,240
बतलाई केवल मंत्र नहीं विद्या ज्ञान ठीक

952
01:09:56,240 --> 01:10:00,320
है उसके बाद बतलाई और अंगी ने भारद्वाज गोत्र

953
01:10:00,320 --> 01:10:04,440
में उत्पन्न सत व नामक ऋषि को कही फिर आगे परंपरा

954
01:10:04,440 --> 01:10:08,720
आगे बढ़ गई भारद्वाज ऋषि ने परंपरा से चली आती हुई ब्रह्म

955
01:10:08,720 --> 01:10:11,120
के ब्रह्म के पर और अपर दन

956
01:10:11,120 --> 01:10:15,120
और अपर ब्रह्म के पर और अपर दोनों स्वरूपों का

957
01:10:15,120 --> 01:10:19,360
ब्रह्म का पर और अपर परमार्थिक स्वरूप और

958
01:10:19,360 --> 01:10:23,400
व्यवहारिक स्वरूप दोनों स्वरूपों का ज्ञान कराने वाली इस ब्रह्म विद्या

959
01:10:23,400 --> 01:10:27,480
का उपदेश अंगी नामक ऋषि को दिया अंगी के आगे

960
01:10:27,480 --> 01:10:31,680
देखिए वो बता रहे हैं फिर उसके बाद क्या हुआ सोनक

961
01:10:31,680 --> 01:10:35,760
नाम से प्रसिद्ध एक ऋषि थे जो बड़े भारी विश्वविद्यालय के अधिष्ठाता थे पुराणों के अनुसार

962
01:10:35,760 --> 01:10:39,920
उनके ऋषिकुल में 88000 ऋषि रहते थे ब्रह्म विद्या को जानने के लिए

963
01:10:39,920 --> 01:10:44,200
शास्त्र विधि यह पूरी परंपरा चल रही है अब सुनिए गीता प्रस

964
01:10:44,200 --> 01:10:48,400
का आपको पता है कि नहीं 5 पर में कौन आता है कौन नहीं आता है

965
01:10:48,400 --> 01:10:52,440
अब पता है अभी यहां पर दिखाना मतलब संभव नहीं है क्योंकि

966
01:10:52,440 --> 01:10:58,440
मैं खोल के दिखाता हूं सारा दिखाता

967
01:11:00,960 --> 01:11:06,960
क्योंकि एक आप ये बताइए किसके वेद भाष्य आप मानते

968
01:11:08,160 --> 01:11:12,200
हैं आपको संस्कृत आती है क्या गीता गीता

969
01:11:12,200 --> 01:11:16,280
प्रेस गोरखपुर वालो को दिखा दीजिए गीता प्रेस गोरखपुर के वेद छपते

970
01:11:16,280 --> 01:11:20,640
हैं क्या गीता प्रेस गोरखपुर वाले वेद छापते हैं वो

971
01:11:20,640 --> 01:11:26,200
वेद नहीं गीता मैं आपसे वेद

972
01:11:26,200 --> 01:11:30,680
महर्षि दया दयानंद सरस्वती के जो वेद है वो

973
01:11:30,680 --> 01:11:34,800
वही मान तो महर्षि दयानंद सरस्वती के वेद आप मानते

974
01:11:34,800 --> 01:11:39,000
हो वेद है ठीक है अब बात ये आती है कि उन्होंने केवल मंत्र तो दिए

975
01:11:39,000 --> 01:11:43,440
नहीं है सुनिए देखिए तर्क क्या है वेद महर्षि दयानंद के है

976
01:11:43,440 --> 01:11:49,440
क्या अरे भाई मैं जो कह रहा हूं व वो समझो मेरी

977
01:11:49,480 --> 01:11:53,480
बात जो मैं पूछ रहा हूं वो तो बताओ केवल

978
01:11:53,480 --> 01:11:57,520
मंत्र बोले हैं क्या उन्होंने नहीं उन्होंने उसका हिंदी

979
01:11:57,520 --> 01:12:01,720
अनुवाद करा हिंदी अनुवाद करा यानी अर्थ भी बताया है

980
01:12:01,720 --> 01:12:06,120
अर्थ भी बताया है ना तो अगर हम उनके अर्थों पर भरोसा

981
01:12:06,120 --> 01:12:12,120
नहीं कर रहे इसका मतलब है कि हम समझते हैं य व्यक्ति अज्ञानी

982
01:12:12,880 --> 01:12:16,960
है मूल संस्कृत हमारे पास है अगर

983
01:12:16,960 --> 01:12:21,680
हम क पर दयान दयानंद जी से ले रहे हो ना वो मलत

984
01:12:21,680 --> 01:12:25,840
से लो जाके आप तो दयानंद जी से ले रहे हो ना आप एक

985
01:12:25,840 --> 01:12:30,120
गलत बात मत करो आपके पास मूल संस्कृत नहीं है

986
01:12:30,120 --> 01:12:34,960
आप दयानंद जी के ऊपर निर्भर हो आप इस सुन तो लीजिए

987
01:12:34,960 --> 01:12:39,120
मैं मैं आपसे सुनूंगा मुझे आप ये बताओ आपके लिए जो वेदों का मूल

988
01:12:39,120 --> 01:12:43,440
स्त्रोत है संस्कृत स्त्रोत वो क्या है हम तो कहीं से भी ले लेंगे

989
01:12:43,440 --> 01:12:47,480
मतलब कहीं से भी ले लेंगे अगर वो मूल संस्कृत सभी जगह

990
01:12:47,480 --> 01:12:52,320
की मैच करती मैं पूछ रहा हूं मैं जो छाप वेद नाम से वो ले लोगे

991
01:12:52,320 --> 01:12:56,320
मैं अब आप मेरी बात ही नहीं समझ रहे देखा देखा मैं मैं उसी पे आ रहा

992
01:12:56,320 --> 01:13:00,560
हूं मैं मैं बता रहा हूं कि मैं परंपरा की बात क्यों कर रहा हूं आप एकएक करके चलते जाइए

993
01:13:00,560 --> 01:13:04,720
मुझे आप मुझे आप ये बताइए मैं जो वेद छाप दूंगा वेद के नाम

994
01:13:04,720 --> 01:13:08,960
से उसको आप वेद मान लोगे नहीं मानेंगे ना उसका फिर मैच करेंगे मूल

995
01:13:08,960 --> 01:13:13,160
संस्कृत सभी वेदों से मैच करती है या नहीं करती है अच्छा मतलब अगर मैं 10 जगह

996
01:13:13,160 --> 01:13:17,160
10 जगह 10 जगह छाप दूंगा तो मान लोगे नहीं जो

997
01:13:17,160 --> 01:13:21,400
अरे ऑथेंटिक प्रेस भी है नहीं कोई किसी पर तो भरोसा करोगे टिक

998
01:13:21,400 --> 01:13:25,480
कौन स प्रेस है मेरे भाई वो ऑथेंटिक कौन सी है हां आप

999
01:13:25,480 --> 01:13:28,160
वो ऑथेंटिक कौन सी है बोलो ना आप बता दीजिए

1000
01:13:28,160 --> 01:13:32,400
जिस पर आपको अटूट विश्वास हो हमने तो जिस पर आपको अटूट

1001
01:13:32,400 --> 01:13:36,600
विश्वास हो वो ऑथेंटिक प्रेस कौन सी है हां

1002
01:13:36,600 --> 01:13:41,120
प्रेस हमने हम बता तो रहे हैं गीता प्रेस गोरखपुर है वहां से हम गीता जी ले

1003
01:13:41,120 --> 01:13:45,280
तो वेद छप नहीं रही है अरे मैं वे आप मुझे बताइए आपके पास

1004
01:13:45,280 --> 01:13:49,680
वेदों के लिए ऑथेंटिक प्रेस कौन सी है दयानंद सरस्वती

1005
01:13:49,680 --> 01:13:53,720
जी की जो जो भाषा भाष्य किया है उसका प्रेस का नाम नहीं

1006
01:13:53,720 --> 01:13:57,760
पता मेरे को बता द ऑथेंटिक है हां मूल

1007
01:13:57,760 --> 01:14:01,800
संस्कृत ऑथेंटिक है बाकी जो है वो जो उने मूल सं मतलब

1008
01:14:01,800 --> 01:14:06,200
वो जो आपको दे रहे हैं वो उसके अर्थ पर आपको भरोसा नहीं है उसके जो है

1009
01:14:06,200 --> 01:14:10,520
श्लोक वो मंत्र प आपको भरोसा है भरोसे की क्या बात है अगर वो मैच

1010
01:14:10,520 --> 01:14:14,960
कर रहा है आपको कैसे पता वो जो मंत्र आपको दे रहे हैं वो परमात्मा

1011
01:14:14,960 --> 01:14:19,120
के दिए हुए मंत्र है सभी वेदों से मिला लेंगे जो भी जितने भी

1012
01:14:19,120 --> 01:14:23,720
वेद है जो प्रेस और भी है उनसे मिला लेंगे अगर अरे भैया आपके लिए ऑथेंटिक

1013
01:14:23,720 --> 01:14:28,480
तो दयानंद जी है ना फिर दूसरे से क्यों मिलाओ ग

1014
01:14:28,480 --> 01:14:33,200
नहीं नहीं हमारे नहीं है हम तो वेद ले रहे उनसे ऐसा नहीं है कि हम मतलब उनसे

1015
01:14:33,200 --> 01:14:37,320
हम ये नहीं है कि हम आपको दयानंद जी पर अटूट विश्वास है कि नहीं

1016
01:14:37,320 --> 01:14:41,560
है नहीं उन क्यों होता हम वेद प है हम उन क्यों होता अरे भाई तो वेद

1017
01:14:41,560 --> 01:14:43,160
तो आप उन्हीं से ले रहे हो ना

1018
01:14:43,160 --> 01:14:47,280
अरे तो उनका दिया हु थ है भाई वेद उनका ज्ञान है क्या आप ये

1019
01:14:47,280 --> 01:14:51,360
समझ नहीं पा रहे हो वेद उनके ये नहीं क उनका ज्ञान है कि नहीं

1020
01:14:51,360 --> 01:14:55,400
आपको आपको आपके रामपाल जी को वेदा मंत्र याद है

1021
01:14:55,400 --> 01:14:59,720
जो मंत्र है अरे मैं पूछ रहा हूं वेद के मंत्र याद है

1022
01:14:59,720 --> 01:15:03,760
कौन से वेद के मंत्र याद है

1023
01:15:03,760 --> 01:15:07,760
सारे किसी किताब पर तो निर्भर नहीं है वेद के मंत्रों के लिए

1024
01:15:07,760 --> 01:15:11,920
अरे भाई वेदों के या मंत्र याद आप कर लोगे सारे मंत्र नहीं

1025
01:15:11,920 --> 01:15:15,920
मेरे पास गुरु परंपरा है गुरु शिष्य परंपरा पर भरोसा करता हूं वेदों

1026
01:15:15,920 --> 01:15:19,960
के लिए आपके पास क्या है वो बताइए हम वेदों पर करते हैं परंपरा

1027
01:15:19,960 --> 01:15:24,560
पर नहीं करते वो वेद आपके लिए भाई आपके लिए निश्चित पैरामीटर

1028
01:15:24,560 --> 01:15:28,560
क्या है इसके वेद जो है वही वेद है जो परमात्मा ने छापे अभी

1029
01:15:28,560 --> 01:15:32,640
10 लोग 10 किताबें छाप देंगे उसमें मंत्र दूसरे कर देंगे

1030
01:15:32,640 --> 01:15:37,200
तो आप कैसे पता लगाओगे मल संस्कृत नहीं बदलते मूल संस्कृत

1031
01:15:37,200 --> 01:15:41,480
कोई भी राइटर नहीं बदलता है आप इस बात

1032
01:15:41,480 --> 01:15:45,560
को आप एक अंदाजे प हो नहीं आप

1033
01:15:45,560 --> 01:15:50,880
किसी भी किसी भी प्रेस वाले के पास जाइए वो मूल संस्कृत

1034
01:15:50,880 --> 01:15:55,400
किसी चलिए आप दयानंद जी की बात मानते हैं

1035
01:15:55,400 --> 01:15:58,320
मामले में मल संस्कृत बदलते नहीं मानते हम

1036
01:15:58,320 --> 01:16:02,440
जो वेदों का उन्होंने मूल संस्कृत ठीक ठीक है यहां तक

1037
01:16:02,440 --> 01:16:06,760
हमारी ये चर्चा हो गई हो गई अब लोगों ने देख लिया आपका पक्ष सुन लिया

1038
01:16:06,760 --> 01:16:10,760
और हमारा भी सुन लिया कि परंपरा की बात हम क्यों करते हैं देखो आगे

1039
01:16:10,760 --> 01:16:14,920
बढ़ हो सकता है मैं अभी दुर्जन तोष न्याय से बात कर रहा हूं हो सकता है

1040
01:16:14,920 --> 01:16:19,160
कबीर जी ही भगवान है हो सकता है मगर वेदा

1041
01:16:19,160 --> 01:16:23,200
दी मंत्रों के अर्थों के द्वारा भगवान सिद्ध नहीं होते क्योंकि वेदा दि मंत्र

1042
01:16:23,200 --> 01:16:27,480
जिनसे हमने लिए हैं उन्हीं से हमें अर्थ प्राप्त हुआ है उस अर्थ में कहीं भी कबीर

1043
01:16:27,480 --> 01:16:31,600
को भगवान नहीं माना गया आप भगवान मानो मगर वेद

1044
01:16:31,600 --> 01:16:35,680
मंत्रों के आधार पर भगवान आप सिद्ध नहीं कर सकते अगर परंपरा को नहीं मानते तो

1045
01:16:35,680 --> 01:16:40,000
ठीक है दूसरी बात परंपरा देखो

1046
01:16:40,000 --> 01:16:44,120
देखो आपकी और मेरी दोनों की बातें सुन ली है लोगों ने ठीक है परंपरा

1047
01:16:44,120 --> 01:16:48,240
की बात मैंने आपको मुंडकोपनिषद से दिखा दी अभी मैं आपको भगवत

1048
01:16:48,240 --> 01:16:54,240
गीता तीसरे अध्याय से दिखा रहा हूं हम दिखाओ

1049
01:16:55,080 --> 01:16:59,560
आपके तो अपने भाष्य भी नहीं है गीता पर उसके लिए भी आप जो

1050
01:16:59,560 --> 01:17:03,600
है निर्भर करते हो उस अपने भाष्य करेंगे फिर आप

1051
01:17:03,600 --> 01:17:07,600
तो फिर तो बिल्कुल भी नहीं मानोगे अरे हम तो अभी भी

1052
01:17:07,600 --> 01:17:12,160
बिल्कुल नहीं मानते हैं नहीं

1053
01:17:12,160 --> 01:17:16,720
नहीं तो फिर क्यों कह रहे आप बकल नहीं मानोगे

1054
01:17:16,720 --> 01:17:20,760
होगी तब तो भाष करोगे संस्कृत आती होगी तब तो भाष्य करोगे

1055
01:17:20,760 --> 01:17:26,760
ना भाई ये लो ख रामपाल जी ने ये लो देख

1056
01:17:27,680 --> 01:17:32,200
जो जो इस इस लोक में इस प्रकार से परंपरा

1057
01:17:32,200 --> 01:17:36,240
से प्रचलित कैसे प्रचलित परंपरा से प्रचलित

1058
01:17:36,240 --> 01:17:41,160
सृष्टि चक्र के अनुकूल नहीं बरत परंपरा से प्रचलित

1059
01:17:41,160 --> 01:17:45,240
वह अपने कर्तव्य का पालन नहीं करता वह इंद्रियों द्वारा

1060
01:17:45,240 --> 01:17:50,120
भोगों में रमण करने वाला पापायी ही जीता

1061
01:17:50,120 --> 01:17:54,840
है परंपरा को ना मानने वाले का खंडन

1062
01:17:54,840 --> 01:17:59,000
ठीक है ये गीता कह रही है अब अच्छा अब एक बात

1063
01:17:59,000 --> 01:18:03,040
जरा हम लोग दोबारा से रिवाइज कर ले एक बात दोबारा रिवाइज कर ले

1064
01:18:03,040 --> 01:18:07,040
क्या कबीर सर्वशक्तिमान है या नहीं ये

1065
01:18:07,040 --> 01:18:11,040
बताओ अब आपका भगवान सर्वशक्तिमान है या

1066
01:18:11,040 --> 01:18:15,040
नहीं पहले आप इसका मैंने 50 बार सिद्ध कर दिया भाई

1067
01:18:15,040 --> 01:18:19,400
और आपको अगर कोई क्वेश्चन है उसको लेके वो क्वेश्चन करो हां हां क्वेश्चन

1068
01:18:19,400 --> 01:18:23,960
है क्वेश्चन है सब कुछ कर सकता है आपका भगवान

1069
01:18:23,960 --> 01:18:26,960
बिल्कुल

1070
01:18:26,960 --> 01:18:30,960
गलत करवाता है पाप करवाता है वो निठारी के रूप में

1071
01:18:30,960 --> 01:18:35,080
पाप भी होता है उसके द्वारा निठारी हत्याकांड में जो सरदार था

1072
01:18:35,080 --> 01:18:39,160
जो बच्चों का मास खाता था उसके रूप में भगवान पाप भी करते हैं

1073
01:18:39,160 --> 01:18:43,160
आप जैसे लोगों के रूप में वो धर्म का कु प्रचार भी करते हैं और

1074
01:18:43,160 --> 01:18:47,400
बोलो नहीं नहीं और इसम समझो अब इसमें

1075
01:18:47,400 --> 01:18:51,640
समझो भगवान बता रहा हूं अब सुनो भगवान

1076
01:18:51,640 --> 01:18:56,160
भगवान देखा चलो बोलो बोलो हां

1077
01:18:56,160 --> 01:19:00,160
ऐसे ही सुनो तो अब इसमें समझो क्या है मामला

1078
01:19:00,160 --> 01:19:04,480
कि भगवान तो निर्विवाद रूप से सर्वज्ञ

1079
01:19:04,480 --> 01:19:08,520
है सब जगह ईश्वर ही ईश्वर है जैसे

1080
01:19:08,520 --> 01:19:12,840
कि जो पानी है वो सब जगह है मगर हमारी प्यास

1081
01:19:12,840 --> 01:19:17,080
कौन सा पानी बुझाता है जो हमारे गिलास के अंदर आ जाए जो हमारे

1082
01:19:17,080 --> 01:19:21,200
व्यवहार का विषय बन जाए वायु के रूप में नमी के रूप में पानी

1083
01:19:21,200 --> 01:19:25,200
सर्वज्ञ व्याप्त है मगर हमारी प्यास कौन सा पानी भु जाता है जो

1084
01:19:25,200 --> 01:19:29,520
ग्लास के रूप में आ जाए जो रू बीच में मत बोलिए

1085
01:19:29,520 --> 01:19:33,520
मत बोलिए मुझे पूरा करने दीजिए पूरा करो जो हमारे चुल्लू

1086
01:19:33,520 --> 01:19:37,640
में आ जाए जो हमारे मुख में आ जाए जो हमारे व्यवहार का विषय बन जाए

1087
01:19:37,640 --> 01:19:41,640
भगवा पानी का वो रूप हमारी प्यास बुझाता है इसी प्रकार से

1088
01:19:41,640 --> 01:19:42,140
भगवान

1089
01:19:42,080 --> 01:19:46,280
भी सर्वज्ञ व्याप्त है सब कुछ भगवान ही है मगर हमारी प्यास

1090
01:19:46,280 --> 01:19:50,600
भक्ति की प्यास मोक्ष की प्यास बुझाने वाला भगवान का वो रूप है

1091
01:19:50,600 --> 01:19:55,000
जो वेदा शास्त्रों की सीमा में आता है जो वेदा शास्त्र बताएंगे

1092
01:19:55,000 --> 01:19:59,040
जो हमारे सनातन शास्त्र बताएंगे कि भैया इसकी भक्ति करने से मोक्ष मिलेगा

1093
01:19:59,040 --> 01:20:03,080
व सीमा में जो आएगा भगवान का वह रूप हमारे लिए अनुकरणीय

1094
01:20:03,080 --> 01:20:07,080
है अनुसरण पूजनीय है सम्माननीय है बाकी तो सब जगह ईश्वर ही ईश्वर

1095
01:20:07,080 --> 01:20:11,360
है मगर व हमारे लिए मगर वो हमारे मगर वह हमारे

1096
01:20:11,360 --> 01:20:15,760
व्यवहार का विषय नहीं है और उदाहरण ले लीजिए जो सूरज है

1097
01:20:15,760 --> 01:20:20,120
सूरज से आने वाली ऊर्जा को ही हम वो करते हैं ना

1098
01:20:20,120 --> 01:20:24,920
हम लोग हम लोगों की जो जीवन चर्या है वो किस पर चलती है

1099
01:20:24,920 --> 01:20:29,080
कहां से मिलती है हमें सूर्य की सूर्य

1100
01:20:29,080 --> 01:20:33,320
से ना सूर्य प्रकाशित होता है तो पौधे जो है उसका उसका उससे

1101
01:20:33,320 --> 01:20:37,400
ऊर्जा प्राप्त करते हैं वनस्पति और वनस्पति को हम खाते हैं तो हमें वो

1102
01:20:37,400 --> 01:20:41,560
ऊर्जा मिलती है तो सूरज से आने वाली जो ऊर्जा है

1103
01:20:41,560 --> 01:20:45,720
वह सर्वत्र व्याप्त है ऊर्जा मगर हमारे

1104
01:20:45,720 --> 01:20:49,840
लिए हमारी भूख वही ऊर्जा मिटा सकती है जो हमारे व्यवहार का विषय

1105
01:20:49,840 --> 01:20:54,040
बन जाए भोजन इत्यादि के रूप में समझ

1106
01:20:54,040 --> 01:20:57,080
में आ रहा है मैं जो कह रहा हूं इसी तरीके से

1107
01:20:57,080 --> 01:21:01,080
भगवान वो है जो सर्वत्र वो पाप में भी है वो पुण्य में भी है

1108
01:21:01,080 --> 01:21:05,120
वो सब में है वो निठारी में भी है वोन वो जो वो जो

1109
01:21:05,120 --> 01:21:09,240
उन्होंने अभी दो तीन केस बताए थे सब जगह वही वही है क्योंकि उसने सब कुछ बनाया

1110
01:21:09,240 --> 01:21:13,640
है अगर आप यह कहे कि वो यह कर सकता है वो नहीं कर सकता

1111
01:21:13,640 --> 01:21:17,920
मगर फिर भी आप यह नहीं मानते कि कबीर जी ने जो है वो

1112
01:21:17,920 --> 01:21:22,320
जो कांड हुआ था निठारी कांड या जो

1113
01:21:22,320 --> 01:21:26,400
निर्भया केस हुआ था जो कबीर ने वो नहीं किया ठीक

1114
01:21:26,400 --> 01:21:31,040
है मगर कबीर का वहां पर नियंत्रण तो था ना

1115
01:21:31,040 --> 01:21:35,520
था कि नहीं था नहीं नहीं मैं तो अभी अभी आपकी बात का

1116
01:21:35,520 --> 01:21:39,560
मैंने जो पूछा उसका जवाब द तो तो मैं तो

1117
01:21:39,560 --> 01:21:43,640
मैं वही बता रहा हूं कि अगर हम यह भी नहीं मानेंगे कि सब कुछ भगवान है मगर सब

1118
01:21:43,640 --> 01:21:47,720
कुछ भगवान के कंट्रोल में तो मानना पड़ेगा तो भगवान के कंट्रोल में जब

1119
01:21:47,720 --> 01:21:51,920
मानेंगे तब भी उस पर वो दोष लग जाएगा तो इसी हिसाब से

1120
01:21:51,920 --> 01:21:56,000
भगवान के लिए जो पेंटिंग है भगवान के लिए पेंटिंग

1121
01:21:56,000 --> 01:22:00,000
है उसमें कोई छोटा बड़ाई नहीं है यह छोटा बड़ाई हमारे लिए

1122
01:22:00,000 --> 01:22:04,440
है क्योंकि हमें यहां से मुक्ति पानी है भगवान को नहीं मुक्ति पानी है

1123
01:22:04,440 --> 01:22:08,440
भगवान तो मुक्ति का स्वरूप है क्यों ऐसे अनय

1124
01:22:08,440 --> 01:22:12,480
होने देता ऐसे अन्याय होने देता है भगवान

1125
01:22:12,480 --> 01:22:16,520
अरे गीता जी में लिखा है ना कोई मरता है ना कोई मारता है तो अन्याय कहां

1126
01:22:16,520 --> 01:22:20,640
से हो गया भगवान की तरफ से अभी आपसे हमारे एक अनुयाई ने बात विषय वो

1127
01:22:20,640 --> 01:22:24,800
सवाल किया कि भाई आपके हाथ में अगर कोई गर्म सरिया पकड़ा दे आपको दर्द

1128
01:22:24,800 --> 01:22:28,800
होगा या नहीं तो क्योंकि मैं अज्ञानी हूं भगवान अज्ञानी

1129
01:22:28,800 --> 01:22:32,840
नहीं है क्योंकि मैं अज्ञानी हूं एक मिनट इसलिए

1130
01:22:32,840 --> 01:22:37,080
होगा अज्ञानी सुनिए अज्ञानी है इसलिए दर्द होगा आपको

1131
01:22:37,080 --> 01:22:41,320
ज्ञान है आपको तो नहीं होना चाहिए ना मैंने आपको

1132
01:22:41,320 --> 01:22:45,360
बता दिया मैंने आपको क्या बताया पृथ्वी गोल है हमें पता

1133
01:22:45,360 --> 01:22:49,440
चल गया अभी पूछ मैं आपको आप

1134
01:22:49,440 --> 01:22:53,480
फ उत्तर दे रहा हूं हा बताए मैं आपको उत्तर दे रहा हूं मैं आपको

1135
01:22:53,480 --> 01:22:57,520
उत्तर दे रहा हूं कि आप तो ज्ञानी हो ना यहां

1136
01:22:57,520 --> 01:23:01,720
पर जिस ज्ञान की बात हो रही है वो हो रही है मुक्ति मुक्त

1137
01:23:01,720 --> 01:23:05,880
हो क्या अभी अभी हम बता रहा मुझे

1138
01:23:05,880 --> 01:23:10,640
पूरा बोलने मेरा बोलिए बोलिए

1139
01:23:10,640 --> 01:23:14,800
आपको मालूम है ना पृथ्वी गोल है ये सुन लिया

1140
01:23:14,800 --> 01:23:18,920
मैंने वो मैं सारी वीडियो देख रहा था लेकिन सुन लि

1141
01:23:18,920 --> 01:23:22,960
मुझे बताइए पृथ्वी के साथ आप गोल व्यवहार करते हैं या चपटा करते हैं

1142
01:23:22,960 --> 01:23:26,960
मैंने आपसे सवाल किया अरे मैं आपका जवाब दे रहा आपका जवाब दे

1143
01:23:26,960 --> 01:23:27,680
रहा

1144
01:23:27,680 --> 01:23:31,800
के साथ गोल वर करते चप करते हम तो गोल

1145
01:23:31,800 --> 01:23:35,800
व्यवहार करते हैं चपटा कैसे करते है बताइए गोल

1146
01:23:35,800 --> 01:23:39,200
बहुत बहुत धन्यवाद बहुत

1147
01:23:39,200 --> 01:23:43,600
बढ़िया एक मिनट आप किसी को रास्ता दिखाते हैं कि भाई वो जो

1148
01:23:43,600 --> 01:23:47,840
मल है व इधर है तो कैसे दिखाते य जाओ या य जाओ

1149
01:23:47,840 --> 01:23:51,840
अच्छा तो पृथ्वी इतनी छोटी है ऐसे बता द गोल

1150
01:23:51,840 --> 01:23:56,400
है उसके साथ वर करते हैं अब

1151
01:23:56,400 --> 01:24:00,560
सवाल पर आ जाए अच्छा एक बात बताइए आप कहां पर रहते हैं बहुत घुमा

1152
01:24:00,560 --> 01:24:04,560
क प रहते हैं आप कहां पे रहते हैं आप कहां प रहते हैं

1153
01:24:04,560 --> 01:24:09,000
आपको आप कहां प रहते हैं आप कहां प रहते देखिए यहां पर अगर अनर्गल प्रलाप

1154
01:24:09,000 --> 01:24:13,000
करेंगे तो मैं आपको हटाऊ तुरंत आपको लग रहा जाए ये सब मत

1155
01:24:13,000 --> 01:24:17,080
करिए मैं आपसे जो पूछ रहा हूं वो बताइए आपको लग रहा है कि मैं कर रहा हूं भाई

1156
01:24:17,080 --> 01:24:22,520
मैंने आपसे सल आपसे ये पूछ रहा हूं कि आप कहां रहते हैं

1157
01:24:22,520 --> 01:24:25,640
मुरादाबाद मुरादाबाद

1158
01:24:25,640 --> 01:24:29,880
तो जो आपसे जो यह कन्याकुमारी है

1159
01:24:29,880 --> 01:24:32,840
यह किस दिशा में

1160
01:24:32,840 --> 01:24:36,680
है हमसे

1161
01:24:36,680 --> 01:24:41,520
है दक्षिण में दक्षिण में

1162
01:24:41,520 --> 01:24:45,360
उंगली करिए दक्षिण की

1163
01:24:45,360 --> 01:24:49,880
ओर अच्छा अब जब हम गोल पर बैठे हुए हैं

1164
01:24:49,880 --> 01:24:54,000
तो क्या आपकी ये उंगली कन्याकुमारी की तरफ गई गोलाई

1165
01:24:54,000 --> 01:24:58,080
बहुत हां गई नहीं गई गोलाई के

1166
01:24:58,080 --> 01:25:02,360
हिसाब से आपकी उंगली जब आपने य उंगली की है ना तो वो पृथ्वी से बाहर

1167
01:25:02,360 --> 01:25:06,440
गई आकाश की तरफ भाई आपको आपने सुनिए आपने कहा था

1168
01:25:06,440 --> 01:25:10,640
गोल व्यवहार करता हं उसको मैंने सि किया सुनिए मुझे पूरा कर

1169
01:25:10,640 --> 01:25:15,000
इतना बड़ा है आपकी उंगली आपकी उंगली

1170
01:25:15,000 --> 01:25:19,080
जो आपने की है वो गोल के हिसाब से बाहर गई है आपने

1171
01:25:19,080 --> 01:25:23,080
जो व्यवहार किया है चपटा किया है कब भी कोई दिशा

1172
01:25:23,080 --> 01:25:27,160
में उली कर रहे हैं वो वो जो उंगली जब भी होगी वह वोह

1173
01:25:27,160 --> 01:25:31,240
पृथ्वी से आकाश की ओर जाएगी वो क्योंकि पृथ्वी गल अपनी वीडियो

1174
01:25:31,240 --> 01:25:36,720
आप अपनी वीडियो देखते हो उसमें लगता है आपको कि आप बोलने देते हो दूसरे

1175
01:25:36,720 --> 01:25:40,720
को भाई पृथ्वी कोई छोटा

1176
01:25:40,720 --> 01:25:45,000
सा बॉल का टुकड़ा नहीं है बहुत बड़ी है देखिए

1177
01:25:45,000 --> 01:25:49,160
देखिए मैं आपसे संतुष्ट हो चुका हूं मेरी बात सुनिए मेरी

1178
01:25:49,160 --> 01:25:51,840
बात सुनिए मैं जीत और हार के लिए यहां

1179
01:25:51,840 --> 01:25:56,160
पर नहीं आता हूं मेरी बात सुनिए संतुष्ट हो चुका मुझे अनर

1180
01:25:56,160 --> 01:26:02,160
बात नहीं करनी है दिया आपका

1181
01:26:02,360 --> 01:26:06,400
ताछ नहीं कर सकता आपके की बात कर रहा था

1182
01:26:06,400 --> 01:26:10,800
आप बोले जनता साइड कर लेगी

1183
01:26:10,800 --> 01:26:14,320
सुनिए आप एक मिनट सुन

1184
01:26:14,320 --> 01:26:18,360
ली आपने प्रश्न को घुमाया जैसे आपको हम अगर गर्म

1185
01:26:18,360 --> 01:26:22,520
सरिया पकड़ा दे तो आपको ज्ञान हो गया आपको दर्द होगाया नहीं होगा

1186
01:26:22,520 --> 01:26:28,520
पीड़ा

1187
01:26:47,000 --> 01:26:51,600
मत पढ़ो चक्कर में भाई जो इंटेलेक्चुअल

1188
01:26:51,600 --> 01:26:57,200
लोग होंगे वो कहेंगे कहां पर क्यों इनसे मगज मारी कर रहा है इनको हटाना चाहिए

1189
01:26:57,200 --> 01:27:02,520
तुरंत हे

1190
01:27:02,520 --> 01:27:08,520
भगवान हां जी विद्यारण्य स्वामी जी का नाम यही

1191
01:27:12,000 --> 01:27:16,080
था इनकी बात सुनकर मुझे हंसी लग

1192
01:27:16,080 --> 01:27:20,400
रही हाने लग रही है कि वह पहले वाले बच्चा होता है ना

1193
01:27:20,400 --> 01:27:25,160
जो हमें फर्स्ट क्लास में पढ़ाया जाता है समझ में नहीं आता नहीं

1194
01:27:25,160 --> 01:27:30,760
इसकी बातों का इसके लिए बोल रहे हैं इंडियास

1195
01:27:30,760 --> 01:27:34,840
ब भाई इस प्रकार जो तुम जिस प्रकार बोल

1196
01:27:34,840 --> 01:27:39,320
रहे हो ना कि वेद में कबीर जी का नाम है उसे उस प्रकार वेद में ईशा का भी

1197
01:27:39,320 --> 01:27:44,680
नाम है मेरा भी नाम है आर्य का भी नाम

1198
01:27:44,680 --> 01:27:48,920
है सर मैं दर्द कराने के लिए बुलाता हूं क्या

1199
01:27:48,920 --> 01:27:53,360
विशाल भाटिया जी आपको आना है ऊपर तो आप अपना चेहरा दिखाए

1200
01:27:53,360 --> 01:27:57,440
और मुझे लगता है कि मैं आपको जानता हूं चलिए मुझे लगता है काफी

1201
01:27:57,440 --> 01:28:01,560
देर की चर्चा हो गई है और बहुत ही व्यर्थ रही आज की चर्चा

1202
01:28:01,560 --> 01:28:02,240
जो व्यक्ति

1203
01:28:02,240 --> 01:28:06,480
वेदों को नहीं मानता है वही व्यक्ति डिडोरा पीट रहा है वेदों में प्रमाण है कबीर साहब भगवान

1204
01:28:06,480 --> 01:28:10,600
है वेदों को क्यों नहीं मानता है पता है क्यों बोला उसको मालूम है इसके पासस कट्टा

1205
01:28:10,600 --> 01:28:16,600
भर के प्रमाण

1206
01:28:26,880 --> 01:28:32,880
अरे किसी ने अपना नाम ही रख लिया वेदों में प्रमाण होए

1207
01:28:41,680 --> 01:28:47,080
वाह अब कौन है

1208
01:28:47,080 --> 01:28:51,240
पंडित ड टू स्टेज हां जी स्वेतांक जी बताइए

1209
01:28:51,240 --> 01:28:55,240
जय श्री राम हर हर महादेव जय श्री राम अरे मैं तो

1210
01:28:55,240 --> 01:28:59,400
समझाने आया था पथवी गोल चपटी हा मैं लाइव

1211
01:28:59,400 --> 01:29:03,560
देख रहा था मैं समझाने आया था पृथ्वी गोल चपटी अभी समझाता है इनको आपने निकाल दिया

1212
01:29:03,560 --> 01:29:07,680
अभी सारा सम देता मुझे पता है क्या होता है मुझे प्रॉब्लम

1213
01:29:07,680 --> 01:29:11,680
ये होती है कि कहीं ऐसा ना हो रहा हो कि कंटेंट हमारा बहुत निचले स्तर

1214
01:29:11,680 --> 01:29:16,440
का हो रहा हो जिस दिन वो वो आए थे जो भव्य राधा कृष्ण दास

1215
01:29:16,440 --> 01:29:20,440
उसके बाद एक मेरे पास फोन आया बहुत मानते थे भैया

1216
01:29:20,440 --> 01:29:24,600
मैं आपसे छोटा हूं मैं क्षमा मांग रहा हूं मगर भैया

1217
01:29:24,600 --> 01:29:28,800
ऐसे लोगों को मत बुलाया करिए तो अब हम तो अपना

1218
01:29:28,800 --> 01:29:33,440
यहां सर मार रहे हैं हमारी तो परिश्रम हो रहा है वो टाइमिंग भी चल रही है मगर

1219
01:29:33,440 --> 01:29:37,520
अगर बुद्धिजीवियों के नजरिए से देखेंगे तो वो मुझे भी बुद्धू समझेंगे ना

1220
01:29:37,520 --> 01:29:41,720
इतने हमारे मेरे पिताजी देख रहे थे उनका सर दिमाग सर घूम

1221
01:29:41,720 --> 01:29:45,720
गया कि मतलब ये समझ क्यों नहीं रहा एक बार में बात मतलब लिटरली मुझे समझ में नहीं

1222
01:29:45,720 --> 01:29:49,800
आ रहा कि आपका क्या कितना पेशेंस कैसा है इतने ब और उसके

1223
01:29:49,800 --> 01:29:54,280
बाद भी लोग मुझसे ऐसे ऐसे कमेंट कर देते हैं कि शिवान जी आपसे बात नहीं हो सकती

1224
01:29:54,280 --> 01:29:58,400
आप जो है वो बोलने नहीं देते सुनते नहीं मैं क्या सुनू भाई तीन

1225
01:29:58,400 --> 01:30:02,120
बार एक ही प्रकार का सवाल कि वहां यह घटना हुई वहां यह

1226
01:30:02,120 --> 01:30:06,280
घटना हुई वहां ये घटना हुई सवाल तो वही है कि बुराई हो रही है ईश्वर

1227
01:30:06,280 --> 01:30:10,320
को क्यों नहीं रोक रहा है हा और इन्होंने क्या बोला मेरा ईश्वर

1228
01:30:10,320 --> 01:30:14,320
जो है दुखी भी होता है सतलोक आश्रम का सच इसको जो है अलग से

1229
01:30:14,320 --> 01:30:18,320
कटिंग डाल के बनाना पड़ेगा हा आप यह समझिए कि यहां पर आप

1230
01:30:18,320 --> 01:30:22,400
उसका फेशल एक्सप्रेशन देखिए ना वो खुद इंटरेस्टेड नहीं है आपकी बात सुनने में उसके

1231
01:30:22,400 --> 01:30:26,520
दिमाग कुछ और ही चल रहा है आप इतनी मेहनत कर रहे हैं उसको समझाने के लिए

1232
01:30:26,520 --> 01:30:30,520
चलो भाई बाकी लोग तो सुन रहे हैं वो जिसको समझा रहे हैं वो खुद इंटरेस्टेड नहीं है सुनने में

1233
01:30:30,520 --> 01:30:34,800
वो कहां से ये रहेगा चलिए कोई बात नहीं आप कंटिन्यू करिए मैं तो उनको पृथ्वी गोल समझाने

1234
01:30:34,800 --> 01:30:39,160
आया था अभी मैं चपटी गोल सब समझा देता हूं उनको लेकिन कोई बात नहीं कन्य

1235
01:30:39,160 --> 01:30:43,360
नहीं उसने उंगली की ना उंगली जब कर दी तो पृथ्वी के सरफेस से बाहर

1236
01:30:43,360 --> 01:30:47,400
चली गई उंगली तो उसने गोल व्यवहार नहीं किया अरे

1237
01:30:47,400 --> 01:30:51,520
भाई उंगली ऐसे करनी जी अगर पृथ्वी

1238
01:30:51,520 --> 01:30:55,680
जो है वो सूरज से भी बड़ी हो जाए फर अगर व ये दिशा कर देगा तो वो बाहर

1239
01:30:55,680 --> 01:30:59,840
ही जाएगी ठीक हैनी बड़ी हो जाए अब वही

1240
01:30:59,840 --> 01:31:04,000
वही बात है ना ना तो गणित का अध्ययन है ना फिजिक्स का अध्ययन है

1241
01:31:04,000 --> 01:31:08,680
तो उसको तो ये बोलने में भी टाइम लगा था कि मुरादाबाद से कन्याकुमारी

1242
01:31:08,680 --> 01:31:12,720
दक्ष में आपको आपको उसे जापान पूछना चाहिए था

1243
01:31:12,720 --> 01:31:17,800
कि जापान कहां है फिर वो ऐसे करता ये

1244
01:31:17,800 --> 01:31:22,400
जापान तब आती बात समझ में चलिए ठीक है कोई बात नहीं कंटिन्यू करिए

1245
01:31:22,400 --> 01:31:27,200
कोई तो है नहीं रुक जा जाते हैं जी जी रही है थोड़ी देर कोई और है

1246
01:31:27,200 --> 01:31:31,200
क्या ऋषि जी राम अखिलेश जी चक्रपान जी

1247
01:31:31,200 --> 01:31:34,520
कोई है जो आना चाहता

1248
01:31:34,520 --> 01:31:39,040
है जय श्री राम कोई नहीं

1249
01:31:39,040 --> 01:31:45,040
है चेहरा लेकर नहीं आते हैं लोग यह प्रॉब्लम हो जाती

1250
01:31:48,040 --> 01:31:52,040
हैम अच्छा वो इसको भी इसको भी वो लोग अपने लिए यूज कर लेते

1251
01:31:52,040 --> 01:31:56,120
हैं अब जैसे मैंने बेकार की बातों को बंद करने के लिए हटाया

1252
01:31:56,120 --> 01:32:00,240
ना तो फैक्ट फुल डिबेट वाले या वो एकम अद्वितीय मोटा

1253
01:32:00,240 --> 01:32:04,360
चश्मा जो व्यक्ति लगाता है वो इसको भी ऐसे प्रूव करेगा देखो देखो वो

1254
01:32:04,360 --> 01:32:08,400
हो गया आपने वो एक चलचित्र आया था गरम मसाला देखा है

1255
01:32:08,400 --> 01:32:13,080
क्या अक्षय कुमार का देखा जी

1256
01:32:13,080 --> 01:32:17,280
जब मैं देखता था मेरे पाच छ साल से बंद हो गया है मैं छोटा था तो मैंने

1257
01:32:17,280 --> 01:32:22,080
देखा कि जिससे उनको भय था मामा असरानी

1258
01:32:22,080 --> 01:32:26,360
जी तो जब वो असरानी आता है जिससे उनको भय था असरानी के लिए

1259
01:32:26,360 --> 01:32:30,640
पहले से ही चिल्लाने लगते हैं अरे मामा आ गए मामा आ गए हा मामा आ गए मामा

1260
01:32:30,640 --> 01:32:32,800
आ गए तो असरानी कहता है क्या हो

1261
01:32:32,800 --> 01:32:36,880
गया भाई ऐसा क्या मैं ब मैं कोई अजूबा हूं

1262
01:32:36,880 --> 01:32:41,240
क्या जो ऐसे चिल्ला रहे हो वो पहले से ही ओवरलैप इतना कर देना चाहते हैं

1263
01:32:41,240 --> 01:32:45,320
कि जो मूल सच्चाई है उससे व्यक्ति दूर हो जाए पहले से ही इतना

1264
01:32:45,320 --> 01:32:49,480
जैसे जैसे वर्ण व्यवस्था का वर्ण व्यवस्था

1265
01:32:49,480 --> 01:32:53,560
की सबसे बड़ी काट है चातु वण मया सटम ये सबसे बड़ी काट है

1266
01:32:53,560 --> 01:32:57,560
तो इसी कान के द्वारा अरे चातु मया सटम

1267
01:32:57,560 --> 01:33:01,600
काया सटम चातु तो इसी को ही चालू कर दिया इतना

1268
01:33:01,600 --> 01:33:05,600
ज्यादा कि भाई वही आज सबसे बड़ा दिखाई नहीं देगा अरे चातुर्य मया सिस्टम

1269
01:33:05,600 --> 01:33:09,960
तो सबसे बड़ा कर्मणा वर्ण व्यवस्था वाला है अरेया

1270
01:33:09,960 --> 01:33:14,600
सिस्टम भी तो कौन कह रहा है य भी तो समझना चाहिए ना

1271
01:33:14,600 --> 01:33:19,080
मया सिस्टम मेरी सृष्टि है फिर उसम हस्तक्षेप कैसे हो रहा है इंसान का

1272
01:33:19,080 --> 01:33:23,240
अच्छा एक चीज और है अब जैसे मालूम पड़ा कि जैसे वो

1273
01:33:23,240 --> 01:33:27,240
हम लोग प्ले बना रहे हैं थिएटर प्ले उसमें हम लोग सीन दिखा रहे हैं

1274
01:33:27,240 --> 01:33:31,440
कि एक क्या कहते हैं जहां से तैयारी होती है शंकराचार्य

1275
01:33:31,440 --> 01:33:35,440
का विरोध करने की और अधर्म अधर्म फैलाने की

1276
01:33:35,440 --> 01:33:39,480
तो उसमें जो पहला सीन है ना वो यही है कि तुमको वहां जाकर जब तुम अधर्म

1277
01:33:39,480 --> 01:33:43,680
फैलाने निकलोगे तो तुम्हें शंकराचार्य को परास्त करना होगा शंकराचार्य को परास्त

1278
01:33:43,680 --> 01:33:47,840
तो नहीं कर सकते उससे दूर रह सकते हो कैसे कि जाते ही वहां चिल्लाने लगना

1279
01:33:47,840 --> 01:33:53,840
मायावादी

1280
01:33:54,000 --> 01:33:58,320
कि वो लोग उनकी बातें सुनने जाए ही ना कितना भी मूल सत्य उन बातों

1281
01:33:58,320 --> 01:34:04,320
में इनके हिसाब से तो हमारे जो

1282
01:34:22,720 --> 01:34:26,800
वैष्णवास्त्र वादी है और

1283
01:34:26,800 --> 01:34:31,680
एक वो है जो सरफिरा क्या नाम है उसका

1284
01:34:31,680 --> 01:34:35,680
वो द बीइंग स्पिरिट सोल वाला वो लिखता है

1285
01:34:35,680 --> 01:34:39,800
वो बोलता है पुराण दिग दर्शन एक व्यक्ति ने लिखी है उसको मालूम नहीं है

1286
01:34:39,800 --> 01:34:44,240
क्या चीज है पुराण दिग दर्शन सोचिए पुराण दिग्दर्शन

1287
01:34:44,240 --> 01:34:48,240
जो आर्य समाज ने इतने सारे आक्षेप लगाए पुराण को मानने

1288
01:34:48,240 --> 01:34:52,360
वालों पर उसका तोड़ वो ग्रंथ महान ग्रंथ

1289
01:34:52,360 --> 01:34:56,480
मैं कहूंगा और उस ग्रंथ के लिए वो व्यक्ति अपने मत की सिद्धि

1290
01:34:56,480 --> 01:35:00,760
के लिए बिना सोचे समझे बोल रहा है निर्लज के साथ एक व्यक्ति

1291
01:35:00,760 --> 01:35:03,720
ने लिखा है पुराण दि दर्शन सोचिए

1292
01:35:03,720 --> 01:35:07,840
अपने मत के लिए हमें कोई मतलब नहीं है धर्म और अधर्म से हमें सिर्फ

1293
01:35:07,840 --> 01:35:12,000
इससे मतलब है कि हम जो मानते हैं हम उसको जो है उसी

1294
01:35:12,000 --> 01:35:16,160
को जो है ऊपर रखेंगे चाहे उसके लिए कुछ भी करना पड़ जाए कुछ भी का मतलब

1295
01:35:16,160 --> 01:35:22,160
कुछ भी यह देखिए आ गया

1296
01:35:22,640 --> 01:35:26,720
कमेंट भाई ऐसे अज्ञानी लोगों को क्यों बुलाते हो आप जो कहना चाहते हो

1297
01:35:26,720 --> 01:35:30,960
वो समझने लायक नहीं है अब यह मेरे ऊपर ब्लेम आता

1298
01:35:30,960 --> 01:35:35,480
मैं क्या करूं अब या तो यह है कि इनको सुनू बैठ के

1299
01:35:35,480 --> 01:35:39,680
और अपना माता फड़वा भ भ राधा कृष्ण दास जैसे

1300
01:35:39,680 --> 01:35:44,120
लोगों को सुनता रहू तीन तीन साढे तीन तीन घंटे झूठ नहीं है गलत है

1301
01:35:44,120 --> 01:35:48,720
झूठ नहीं है गलत है एक तरीके से है वो तो

1302
01:35:48,720 --> 01:35:53,000
अब आपको बोलने के लिए सब तो ये शब्द के इस्तेमाल तो करने ही पड़ेंगे जब आपको

1303
01:35:53,000 --> 01:35:57,320
उस बात को सत्य करना है तो एक तरीके से ऐसे वैसे प्रक्ष

1304
01:35:57,320 --> 01:36:01,360
लास्ट में भी बोलता है ईश्वर सर्व शक्तिमान जब नहीं है लास्ट में बोलते

1305
01:36:01,360 --> 01:36:05,400
हैं कि मैंने दोनों तरीके बता दिए भाई मतलब

1306
01:36:05,400 --> 01:36:09,880
इनके पास दोनों तरीके हैं मास खाना है नहीं खाना है दोनों

1307
01:36:09,880 --> 01:36:13,880
है ये इनके धर्म ब्रह्म का निर्णय है दो तरीके

1308
01:36:13,880 --> 01:36:17,920
दो तरीके से और फिर भीय कट्टर द्वैतवाद है ये

1309
01:36:17,920 --> 01:36:19,400
कट्टर द्वैतवाद है

1310
01:36:19,400 --> 01:36:23,560
शंकराचार्य का विरोध करने के लिए ये कट्टर द्वैतवाद दिखाते हैं

1311
01:36:23,560 --> 01:36:27,680
स्तु तो कटर दवादी नहीं है क्य अचिंत लग गया वहा हा अचिंत लग

1312
01:36:27,680 --> 01:36:31,800
गया ब भाई अचिंत तो तो प्योर शंकर का विरोध

1313
01:36:31,800 --> 01:36:35,960
करने वाले कैसे हो गए जब अचिंत लग गया तो जैसे आप प्योर

1314
01:36:35,960 --> 01:36:40,200
जैसे आप शंकर का विरोध अगर कर रहे हो प्योरिटी के साथ तो ऐसे ही मधवा चार जी का भी करो

1315
01:36:40,200 --> 01:36:44,680
मगर मधवा चार्य जी के विरोध की उतनी आवश्यकता नहीं है इसलिए

1316
01:36:44,680 --> 01:36:48,680
शंकर का विरोध करने के लिए हम कट्टर दत वाले हैं वस्तुत तो हम

1317
01:36:48,680 --> 01:36:54,680
अचिंत बीच के है हम लोग बीच के वस्तुत

1318
01:36:55,600 --> 01:36:59,600
लेकिन चलिए और और कोई आना चाह रहा है क्या हां

1319
01:36:59,600 --> 01:37:04,320
कोई आया तो है राम राम अखिलेश जी आए

1320
01:37:04,320 --> 01:37:10,320
जी चक्र पानी जी अपने अपना चेहरा नहीं दिखा रहे

1321
01:37:10,640 --> 01:37:15,200
हैं राम कलेश कुमार यादव

1322
01:37:15,200 --> 01:37:19,800
अपना कैमरा ऑन करेंगे तो जुड़ेंगे ड टू स्टेज

1323
01:37:19,800 --> 01:37:22,520
हां

1324
01:37:22,520 --> 01:37:27,240
जी राम अखिलेश कुमार जीम

1325
01:37:27,240 --> 01:37:30,600
जय श्री राम जय श्री

1326
01:37:30,600 --> 01:37:35,240
राम हां सर मैं वर्ण व्यवस्था पर कुछ चर्चा करने आया

1327
01:37:35,240 --> 01:37:39,520
हूं वर्ण व्यवस्था पर हम लोग फिर किसी दिन रख लेंगे अगर आज

1328
01:37:39,520 --> 01:37:43,760
ईश्वर की सर्वशक्ति मत्ता से कोई बात है तो बताइए क्योंकि लाइव

1329
01:37:43,760 --> 01:37:47,880
स्ट्रीम जो है डेढ़ घंटे की हो चुकी है ऑलमोस्ट और मैं थक भी चुका हूं सुबह

1330
01:37:47,880 --> 01:37:52,080
से वो उस दिन मैंने साढ़े तीन घंटे के बाद ऑफ कर दिया था तो लोगों ने कह दिया

1331
01:37:52,080 --> 01:37:56,120
कि भाई वो जब वो गया वो लास्ट के

1332
01:37:56,120 --> 01:38:00,200
10 पा मिनट में व जीत गया है तो यह आप

1333
01:38:00,200 --> 01:38:04,440
किसी और दिन कर लीजिएगा आप एक नंबर नोट कर लिए किसी को भी कोई वैचारिक

1334
01:38:04,440 --> 01:38:09,160
मतभेद के निमित्त अगर चर्चा करनी है तो वह एक नंबर नोट करें

1335
01:38:09,160 --> 01:38:12,720
740

1336
01:38:12,720 --> 01:38:16,760
8369 आप इस पर जब ट करेंगे कॉल मत करना भाई बहुत कॉल

1337
01:38:16,760 --> 01:38:21,080
आते हैं कॉल मत करिएगा कॉल मत करना उस पर ट

1338
01:38:21,080 --> 01:38:25,160
करना आपको एक ऑटो जनरेट मैसेज हो जाएगा उसमें आप फॉर्म

1339
01:38:25,160 --> 01:38:29,480
भरिए हम लोग विधिवत आपको समय देंगे और समय के साथ आएंगे

1340
01:38:29,480 --> 01:38:33,640
ठीक है अभी लाइव स्ट्रीम है अभी कर लीजिए ना अभी भाई

1341
01:38:33,640 --> 01:38:37,680
साहब मैं आप आप देख रहे हैं ना मैं डेढ़ घंटे हो चुके हैं अभी

1342
01:38:37,680 --> 01:38:42,000
मैं वो एक बृहद विषय उस पर चर्चा करना मतलब एक घंटा और

1343
01:38:42,000 --> 01:38:46,680
तो अभी जो ऑलरेडी जो टॉपिक चल रहा है ना ईश्वर सर्वशक्तिमान है कि नहीं परंपरा

1344
01:38:46,680 --> 01:38:51,040
यह इस पर बात करनी हो तो आप कर सकते हैं

1345
01:38:51,040 --> 01:38:55,200
अरे मैं तो पहले से आपको बोला था तो आप बोले कि ऐसे करो मोबाइल से

1346
01:38:55,200 --> 01:38:59,560
उतना होता नहीं है तो मैं आपको अभी लाइव स्ट्रीम कर रहे हैं तो

1347
01:38:59,560 --> 01:39:03,800
इसमें बात रख लीजिए पा 10 मिनट में इसका

1348
01:39:03,800 --> 01:39:08,840
भी तो निर्णय आ जाएगा ना कि आप वर्ण व्यवस्था को जन्म से मानते हैं कि कर्म

1349
01:39:08,840 --> 01:39:12,960
से महाराज जी वो क्या बोलते हैं पा 10 मिनट चलेगा नहीं

1350
01:39:12,960 --> 01:39:16,960
ये ये खींचेगा लंबा बिल्कुल हो

1351
01:39:16,960 --> 01:39:21,120
जाएगा पा 10 मिनट में नहीं होगा अभी बता देता हूं मैं एक सेकंड

1352
01:39:21,120 --> 01:39:25,200
में हम हम क्या बोलते हैं भी मानते हैं

1353
01:39:25,200 --> 01:39:28,680
बताइए आप मानते हैं

1354
01:39:28,680 --> 01:39:33,000
जन्म से मानते यही तो प्रॉब्लम है ना हा तो कौन से

1355
01:39:33,000 --> 01:39:37,320
कर्म से मानते हम पिछले जन्म के कर्म से मानते हैं

1356
01:39:37,320 --> 01:39:41,520
तो सर सुनिए शास्त्र के आधार पर मैं बता रहा हूं

1357
01:39:41,520 --> 01:39:45,560
देखिए भाई साहब देखिए देखिए ठीक

1358
01:39:45,560 --> 01:39:49,680
है ठीक है हम लोग शास्त्र के अंदर क्या लिखा है यह चर्चा हम लोग कर लेंगे फिर

1359
01:39:49,680 --> 01:39:54,600
किसी दिन अभी हम लोग ये बात पूछते हैं शास्त्र आपको मिले कैसे

1360
01:39:54,600 --> 01:39:58,800
ये बताइए शास्त्र वर्ण व्यवस्था को मानने

1361
01:39:58,800 --> 01:40:03,120
या ना मानने का भाई साहब भाई साहब मुझे मुझे अपना प्रश्न

1362
01:40:03,120 --> 01:40:07,200
प्रश्न स्पष्टता से रख लेने दीजिए आपका वर्ण व्यवस्था को

1363
01:40:07,200 --> 01:40:11,240
कर्म से मानने का आधार शास्त्र है ठीक है शास्त्र

1364
01:40:11,240 --> 01:40:15,320
है ना हा अब मैं आपसे प्रश्न ये वाला जो शास्त्र

1365
01:40:15,320 --> 01:40:19,520
के अंदर क्या लिखा है ये वाला विषय हम किसी और दिन रखेंगे आप हमें फॉर्म भरिए

1366
01:40:19,520 --> 01:40:23,560
हम आपसे कांटेक्ट करेंगे रखेंगे अभी मैं आपसे पूछ रहा हूं मैं

1367
01:40:23,560 --> 01:40:27,560
आपसे पूछ रहा हूं मैं आपसे पूछ रहा हूं मेरा वीडियो अटक रहा

1368
01:40:27,560 --> 01:40:32,320
है आप कई बार भाग चुके हैं और अभी भी भागने का प्रयास कर रहे

1369
01:40:32,320 --> 01:40:37,640
यही तो गलती है नानको इनको जो

1370
01:40:37,640 --> 01:40:42,720
है ये इसलिए आते [हंसी]

1371
01:40:42,720 --> 01:40:43,720
हैं

1372
01:40:43,720 --> 01:40:48,360
इनको मैं वीडियो ढूंढ रहा था मैं कनको एक चर्चा लाइव दे दूं आराम से बैठ के देख ले

1373
01:40:48,360 --> 01:40:53,600
वहां प उनको सारा इन उनको उससे मतलब नहीं है उनको तो आके य

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01:40:53,600 --> 01:40:57,600
करना है इतना बोल के जाना है कि आप जो है ऐसा करते हैं रहा ठीक है तो अब

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01:40:57,600 --> 01:41:01,880
हम पूरी कर रहे हैं जी लाइव स्ट्रीम

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01:41:01,880 --> 01:41:07,040
ऑफ कर रहे हैं कोई है नहीं जो अपने चेहरे के साथ आ

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01:41:07,040 --> 01:41:09,840
सके

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01:41:09,840 --> 01:41:13,920
चलिए तो हर हर महादेव जय श्री राम

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01:41:13,920 --> 01:41:19,920
और अगर किसी को ऐसा कोई कंटेंट मिलता है ना जिसमें की

1380
01:41:26,320 --> 01:41:30,520
उस पर जो है कार्य करेंगे और प्रतिकार करेंगे

1381
01:41:30,520 --> 01:41:34,680
अगर हरि निंदा कहीं पर हो रही विष्णु की कृष्ण भगवान की कहीं निंदा हो रही है राम जी की कहीं

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01:41:34,680 --> 01:41:40,680
निंदा हो रही है तो ऐसा हमें कंटेंट कोई मिलता नहीं

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01:41:43,960 --> 01:41:49,000
है अब यह देखिए यह क्या कह रहे पंडित

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01:41:49,000 --> 01:41:53,240
जी कह रहे हैं कि जिनको ये राम

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01:41:53,240 --> 01:41:57,240
ल के पास रामपाल के लोगों के पास शास्त्र का ज्ञान होता नहीं है टाइम पास के लिए

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01:41:57,240 --> 01:42:01,960
आते हैं अब किसको संभाले

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01:42:01,960 --> 01:42:06,160
पंडित जी शास्त्रों का का जिसका ज्ञान है उसके साथ डिबेट करने

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01:42:06,160 --> 01:42:11,680
की करने से अच्छा लगता है य

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01:42:11,680 --> 01:42:15,720
राम शिवसेना वाला भी वो करते हैं ठीक है तो हम

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01:42:15,720 --> 01:42:19,840
लोग लाइव स्ट्रीम को ऑफ कर रहे हैं सभी को जय श्री

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01:42:19,840 --> 01:42:24,120
राम आने के लिए बहुत-बहुत धन्यवाद आपका स्वेतांक जी जय श्री

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01:42:24,120 --> 01:42:28,120
राम शम
