1
00:00:00,680 --> 00:00:04,840
कि वो बाधित नहीं हो सकता अच्छा अभी हम लाइव हुए

2
00:00:04,840 --> 00:00:09,640
हैं ओ हो ओके पीछे जाना पड़ेगा थोड़ा सा

3
00:00:09,640 --> 00:00:14,160
ठीक है सभी को जय श्री राम तो आज हमारे

4
00:00:14,160 --> 00:00:18,560
साथ में है एक मातृ शक्ति है इस्लाम को फॉलो करती हैं

5
00:00:18,560 --> 00:00:22,560
और ये हमारे चैनल पर आई है हमारा सौभाग्य है

6
00:00:22,560 --> 00:00:26,560
और आप सबसे पहले हमारे दर्शकों को थोड़ा सा अपना एक परिचय दे दें

7
00:00:26,560 --> 00:00:31,080
और आपका एक धार्मिक बिलीफ जो है विश्वास वो आप बता दें

8
00:00:31,080 --> 00:00:35,640
यस मेरा नाम डॉक्टर जकिया है बन एंड ब्रॉट अप सूरत गुजरात से

9
00:00:35,640 --> 00:00:39,760
फिलहाल कनाडा हूं प्रोफेशनली जनरल फिजियन

10
00:00:39,760 --> 00:00:43,880
और एक एनएलपी कोच थॉट कोच हूं मेरी कंपनी

11
00:00:43,880 --> 00:00:47,920
है डॉक्टर जक एनपी एंड बिजनेस और अल्लाह

12
00:00:47,920 --> 00:00:52,200
तो मैं एक ही बिलीव बताऊंगी कि मुझे बस यही यकीन है कि जो भी करने वाली

13
00:00:52,200 --> 00:00:56,560
जात आपकी जिंदगी में जो भी हो रहा है

14
00:00:56,560 --> 00:01:01,840
और सिर्फ उसी की वजह से

15
00:01:01,840 --> 00:01:06,360
सुंदर परिचय आपका जाकिया जी अ

16
00:01:06,360 --> 00:01:10,480
हम अपने मूल विषय पर अगर आते हैं कि मनुष्य होते

17
00:01:10,480 --> 00:01:14,840
हुए हमारे बीच में जो वैचारिक वो आता है अंतर आता है वैचारिक

18
00:01:14,840 --> 00:01:19,000
मतभेद आता है तो उसको लेकर के अगर हम यह बात करें कि

19
00:01:19,000 --> 00:01:23,040
सबसे पहला प्रश्न मेरा आपसे ये होगा कि क्या इस्लाम

20
00:01:23,040 --> 00:01:27,200
के अनुसार प्रतिपादित परिभाषित होने वाला जो ईश्वर है

21
00:01:27,200 --> 00:01:32,280
वो सर्वशक्तिमान है बिल्कुल

22
00:01:32,280 --> 00:01:36,280
अगर वह सर्वशक्तिमान है तो जाहिर सी बात है वह किसी भी प्रकार की बाधा

23
00:01:36,280 --> 00:01:40,400
से बाधित नहीं है उसके ऊपर कोई भी नियम लागू नहीं होता है

24
00:01:40,400 --> 00:01:45,160
वो सभी नियमों को बनाने वाला सर्व नियामक है बक

25
00:01:45,160 --> 00:01:49,200
ऐसा मानना पड़ेगा अगर सर्वशक्तिमान है कोई तो तो

26
00:01:49,200 --> 00:01:53,320
अगर वह किसी भी प्रकार के नियम के नीचे नहीं है तो क्या वह

27
00:01:53,320 --> 00:01:58,280
अवतार ले सकता है आप एक बात समझे

28
00:01:58,280 --> 00:02:02,560
मैं य एग्जांपल के साथ आपको समझाना चाहूंगी

29
00:02:02,560 --> 00:02:07,040
जैसे हमारे घर में हमारे बड़े हैं फर एग्जांपल हमारे

30
00:02:07,040 --> 00:02:11,160
फादर जी ठीक है तो जब

31
00:02:11,160 --> 00:02:15,400
फादर कोई नियम हमारे घर के कर देते हैं आपने

32
00:02:15,400 --> 00:02:17,000
बहुत सारे घरों में मेरे घर

33
00:02:17,000 --> 00:02:21,240
में भी मैंने ऐसा देखा है कि पीढ़ियों से बहुत सारी चीजें चली आई

34
00:02:21,240 --> 00:02:25,360
है और कोई भी इफ बट के फॉलो

35
00:02:25,360 --> 00:02:29,560
करते हैं अच्छा ठीक है

36
00:02:29,560 --> 00:02:33,560
तो जब इस्लाम की बात आती है और जो नियम अल्लाह

37
00:02:33,560 --> 00:02:37,760
ने बनाए हैं मैं ऐसा मानती हूं कि वहां पर कोई इफ बट नहीं

38
00:02:37,760 --> 00:02:42,040
आता और रही अवतार की बात तो अल्लाह अपने

39
00:02:42,040 --> 00:02:47,640
आप में ही काफी है उनको दुनिया में अवतार लेने की जरूरत नहीं

40
00:02:47,640 --> 00:02:51,840
है यहां पर हमें दो चीजें समझ में आई जाके एक

41
00:02:51,840 --> 00:02:56,000
पहली की क्योंकि उन्होंने नियम बनाया है कि वो नहीं आएंगे इसलिए

42
00:02:56,000 --> 00:03:00,080
वो नहीं आते हैं और दूसरी की क्योंकि उन्हें आवश्यकता

43
00:03:00,080 --> 00:03:04,600
नहीं आने की इसलिए वो नहीं आएंगे उन्हे आवश्यकता नहीं है आने की

44
00:03:04,600 --> 00:03:09,120
और पहला वाला ये क्योंकि उन्होंने नियम बनाया इसलिए वो नहीं आएंगे नहीं

45
00:03:09,120 --> 00:03:13,600
वो जरूरी नहीं है कि उन्होंने नियम बनाया है इसलिए नहीं है उन्हें आवश्यकता

46
00:03:13,600 --> 00:03:17,640
ही नहीं है आने की यहां पर सारी बातें खत्म हो जाती है फिर

47
00:03:17,640 --> 00:03:21,720
कोई कोमा नहीं लगता है ठीक है ये मान लिया कि उन्हें

48
00:03:21,720 --> 00:03:25,760
आवश्यकता नहीं आने की मगर पूछा यह जा रहा है कि वो आ सकते

49
00:03:25,760 --> 00:03:30,160
हैं कि नहीं देखिए बहुत सारे पैगंबर आए हैं

50
00:03:30,160 --> 00:03:32,080
अल्हम्दुलिल्लाह और हमारे

51
00:03:32,080 --> 00:03:37,080
लास्ट पैगंबर आप स सलम वो उनके मैसेंजर बनके ही आए

52
00:03:37,080 --> 00:03:41,320
हैं आने वाले भी हा वो तो ठीक कह रही है

53
00:03:41,320 --> 00:03:45,480
मैं अभी कैपेबिलिटी की बात कर रहा हूं जी कि वो आ

54
00:03:45,480 --> 00:03:49,960
सकते हैं या नहीं वो आते हैं कि नहीं वो एक अलग चैप्टर है

55
00:03:49,960 --> 00:03:54,120
उन्हे क्यों आना है आ सकते हैं तो वो करने वाली जाती पूरी

56
00:03:54,120 --> 00:03:58,360
है पूरी दुनिया पर वही कर रहे हैं तो जिस दिन

57
00:03:58,360 --> 00:04:02,720
अगर उनको ऐसा लगा उनके लिए ऐसा मैं बोल ही नहीं सकती हूं

58
00:04:02,720 --> 00:04:07,920
कि वह आ सकते हैं या नहीं आ सकते हैं यह सारी चीजें

59
00:04:07,920 --> 00:04:11,960
मैं नहीं बोल सकती मतलब यह क्लियर

60
00:04:11,960 --> 00:04:16,160
नहीं है कि व आ सकते हैं कि नहीं आ सकते लेकिन क्यों करना है इसको क्लियर क्योंकि

61
00:04:16,160 --> 00:04:20,320
वो कायनात के मालिक है ठीक

62
00:04:20,320 --> 00:04:25,280
है उनको कायनात बनाने की आवश्यकता क्या

63
00:04:25,280 --> 00:04:30,000
है उनको कायनात बनाने की आवश्यकता मी वो तो दुनिया है

64
00:04:30,000 --> 00:04:34,560
और आखरत अलग चीज है उन्होने बना

65
00:04:34,560 --> 00:04:38,680
जैसे हम ये कहते हैं कि उनकी कोई आने की मजबूरी नहीं है इसलिए वह नहीं

66
00:04:38,680 --> 00:04:42,920
आते वो ठीक है मगर उनकी

67
00:04:42,920 --> 00:04:46,920
संसार को बनाने की भी कोई मजबूरी तो नहीं है मेरे ख्याल से क्योंकि अगर जो मजबूर है

68
00:04:46,920 --> 00:04:47,420
तो व

69
00:04:47,200 --> 00:04:51,320
सक्तिमान एक चीज समझिए शायद आपने आदम

70
00:04:51,320 --> 00:04:55,920
अ सलाम का सुना है नहीं सुना है मैं यहा पर व नहीं करूंगी

71
00:04:55,920 --> 00:04:59,920
जब आदम अ सलाम ये शैतान आदम

72
00:04:59,920 --> 00:05:03,920
अल सलाम जब तरह से कुरान को जानेंगे मैं यहां पर वो चीज इसलिए नहीं

73
00:05:03,920 --> 00:05:08,040
करूंगी कि मैं स्कॉलर नहीं मैं डीप सारी बातों को नहीं सम

74
00:05:08,040 --> 00:05:12,040
समझती हूं यस ब सारी चीजों को जानती हूं मानती हूं इस्लाम

75
00:05:12,040 --> 00:05:16,480
को मानती हूं बट मैं लाइफ कोई बात नहीं करूंगी

76
00:05:16,480 --> 00:05:20,680
राइट पहली चीज चीज जब आप शैतान को समझ जाओगे

77
00:05:20,680 --> 00:05:25,120
जब आप आदम अ सलाम को समझ तब आपको पूरी क्लियर

78
00:05:25,120 --> 00:05:29,200
पिक्चर होगा कि दुनिया क्यों बनाई गई है

79
00:05:29,200 --> 00:05:33,400
और दुनिया में जब हम लोग आए हैं तो हमें अल्लाह की इबादत क्यों

80
00:05:33,400 --> 00:05:37,560
करनी है उसके लिए आपको कुरान पढ़ना पड़ेगा आपको कुरान समझना

81
00:05:37,560 --> 00:05:41,680
पड़ेगा जब आप कुरान को डीप समझ जाएंगे तो

82
00:05:41,680 --> 00:05:45,760
यह दुनिया क्यों बनाई गई है वो सवालों के जवाब

83
00:05:45,760 --> 00:05:49,880
आपको कुरान में नहीं नहीं क्यों बनाई गई है तो फिर वो

84
00:05:49,880 --> 00:05:54,480
एक पर्सपेक्टिव अलग हो जाएगा जाक अभी पूछ रहे हैं उसको कोई आवश्यकता

85
00:05:54,480 --> 00:05:58,480
है क्या बनाने की एक बात

86
00:05:58,480 --> 00:06:02,280
आपसे क्लियर करना चाहू लाइव बात कर रही हूं इसलिए कि

87
00:06:02,280 --> 00:06:06,320
जब मुझे यहां पर इनवाइट किया गया तब बात यह थी कि हिंदू

88
00:06:06,320 --> 00:06:10,360
और मुस्लिम्स दोनों में एकता कैसे लेकर आए व सवाल होंगे

89
00:06:10,360 --> 00:06:14,560
यहां पे अच्छा अगर मुझे यह पता होता कि मुझे यहां पर इस्लाम

90
00:06:14,560 --> 00:06:18,600
को रिप्रेजेंट तो करना ही है अल्हम्दुलिल्लाह लेकिन साबित करना

91
00:06:18,600 --> 00:06:22,640
है तो मैं कभी इस लाइव प नहीं आती क्योंकि मैं हिंदू मुस्लिम जोड़ को

92
00:06:22,640 --> 00:06:27,000
मानती हूं मुझे ना ही हिंदू को गलत साबित करना है

93
00:06:27,000 --> 00:06:31,240
इस्लाम को सही साबित करना है मेरी बात हम आपसे क्षमा प्रार्थी

94
00:06:31,240 --> 00:06:35,440
क्योंकि हमें ये बताया गया है कि यहां पर जो है साबित करने वाली

95
00:06:35,440 --> 00:06:39,960
बात है और एक्चुअली जो हमारे एक्चुअली जो हमारा जो चैनल है

96
00:06:39,960 --> 00:06:44,360
उसकी जो बुनियाद मतलब जो फाउंडेशन है

97
00:06:44,360 --> 00:06:48,680
वो यही है कि जो मनुष्य के स्तर पर जो वैचारिक मतभेद आ रहे हैं ईश्वर

98
00:06:48,680 --> 00:06:52,800
को लेकर के वो कौन सी चीज है जो कि हमें और आपको अलग

99
00:06:52,800 --> 00:06:57,120
कर रही है उस चीज पर बात उसके लिए शायद मैं सही इंसान नहीं हूं आपको

100
00:06:57,120 --> 00:07:01,280
सही में कोई स्कलर की हा य

101
00:07:01,280 --> 00:07:04,560
नलेज रखता

102
00:07:04,560 --> 00:07:08,680
है हमारा मतभेद इसलिए हो रहा है शयद आपको और मुझे गलत

103
00:07:08,680 --> 00:07:12,680
इंफॉर्मेशन दी गई हैम य दी गई

104
00:07:12,680 --> 00:07:16,680
थी कि हम हिंदू और मुस्लिम में एकता के लिए क्या कर

105
00:07:16,680 --> 00:07:21,400
सकते एकता के लिए नहीं देख

106
00:07:21,400 --> 00:07:25,560
सवा तर से हो रहे मुझे नहीं लगता मुझे य पर कोई

107
00:07:25,560 --> 00:07:29,760
बात करनी चाहिए क्योंकि सा पूरी

108
00:07:29,760 --> 00:07:34,040
दुनिया कर चुकी है साबित कि अल्लाह है इस्लाम है सही

109
00:07:34,040 --> 00:07:38,040
है मैं तो ब क मैं क्या साबित करूंगी

110
00:07:38,040 --> 00:07:42,720
अल्ला की सा मैं उन सब बातों पर नहीं जाऊंगा कि है कि नहीं है वो एक अलग है मगर

111
00:07:42,720 --> 00:07:46,880
ये हो सकता है कि जिन्होंने ये आपको कहा

112
00:07:46,880 --> 00:07:51,600
कि आपका भी यट चैनल है है ना यस जी

113
00:07:51,600 --> 00:07:56,000
जिन्होंने आपको इफॉर्म किया तो वो हो सकता है कि हमारी भावना ये रहती है

114
00:07:56,000 --> 00:08:00,200
कि ईश्वर को लेकर के अगर हमारे बीच में मतभेद है और अगर हम उस पर बात करें

115
00:08:00,200 --> 00:08:04,440
कि ईश्वर ऐसा है ऐसा है ब्रह्म का स्वरूप ऐसा है या आप जिसको

116
00:08:04,440 --> 00:08:08,480
खुदा कहती है अल्लाह कहती उसका स्वरूप ऐसा है तो अगर हम उस पर

117
00:08:08,480 --> 00:08:12,680
बात करें तो शायद एक कंक्लूजन पर हम लोग निकल पाए क्योंकि हमें

118
00:08:12,680 --> 00:08:16,880
जो है एक शत्र करने वाला भी वही है ईश्व है

119
00:08:16,880 --> 00:08:19,680
बिल्कुल एक सत्र करने वाली जात अल्लाह की

120
00:08:19,680 --> 00:08:23,840
ही है मतभेद है तो हम हमारे मतभेद प बात

121
00:08:23,840 --> 00:08:27,920
कर सकते हैं उसकी सा प मैं बात नहीं कर सकती

122
00:08:27,920 --> 00:08:31,320
मुझे तो उस

123
00:08:31,320 --> 00:08:35,600
कोई बात नहीं आई मैं अच्छा लगा अच्छा मैं आपसे

124
00:08:35,600 --> 00:08:40,160
एक विनती करना चाहूंगा कि अगर आपके पास कोई ऐसे पक्षकार

125
00:08:40,160 --> 00:08:44,200
हो आपकी नॉलेज में जो इस्लाम के पक्ष को अच्छे से रख

126
00:08:44,200 --> 00:08:48,480
सके वार्ता कर सके आपने अभी देख लिया हमारी जो चर्चा करने का तरीका है

127
00:08:48,480 --> 00:08:52,680
एक एक्सपीरियंस हो गया तो हम हमारा जो प्रयास

128
00:08:52,680 --> 00:08:56,920
होता है वो होता है दर्शन विज्ञान और व्यवहार की मर्यादा में

129
00:08:56,920 --> 00:09:00,960
सीमित रहते हुए अपनी अपनी बात को रखना सामने वाले की बात को सुन तो

130
00:09:00,960 --> 00:09:05,680
मेरा आपसे निवेदन है है तो मैं जरूर आपको बात

131
00:09:05,680 --> 00:09:10,080
और आने के लिए फिर से एक बार में बहुत बहुत आपको आभार प्रकट करूंगा

132
00:09:10,080 --> 00:09:16,080
औरथ

133
00:09:23,560 --> 00:09:27,600
धन्यवाद तो किसी को अगर कोई छोटे मोटे कुछ

134
00:09:27,600 --> 00:09:30,800
प्रश्न

135
00:09:30,800 --> 00:09:35,000
पूछने हैं तो बोल दीजिए नहीं तो मैं भी जाऊं तीज

136
00:09:35,000 --> 00:09:38,240
का व्रत

137
00:09:38,240 --> 00:09:44,240
है घर में किसी

138
00:09:51,680 --> 00:09:57,680
का चलिए सभी को जय श्री

139
00:09:58,320 --> 00:10:02,320
राम म
