1
00:00:02,240 --> 00:00:06,280
तो सभी को जय श्री राम थोड़े से लेट हो

2
00:00:06,280 --> 00:00:11,360
गए हम लोग कुछ टेक्निकल दिक्कत आ रही थी तकनीकी पहले की

3
00:00:11,360 --> 00:00:15,560
तरह जिस कारण से लेट हो गए चालू करने में

4
00:00:15,560 --> 00:00:19,800
ब्राउजर काम नहीं कर रहा था तो अभी जाकर के करा

5
00:00:19,800 --> 00:00:24,000
तो फिर हम आए हैं हमारे साथ जुड़ने वाले हैं जो पहले

6
00:00:24,000 --> 00:00:28,680
इकन की शिक्षाओं का पालन कर चुके हैं फॉलो कर चुके हैं स्कन के द्वारा

7
00:00:28,680 --> 00:00:33,280
जो सिद्धांत उनका अनुगमन कर चुके हैं उसके बाद वहां

8
00:00:33,280 --> 00:00:37,960
से उनका कुछ शुद्धि हुई माइंड में शोधन हुआ

9
00:00:37,960 --> 00:00:42,120
और अभी वह नाम जप करते हैं भगवान का आ गए हैं मैं उन्हें

10
00:00:42,120 --> 00:00:48,040
ले लेता हूं वो अपना परिचय स्वयं ही

11
00:00:48,040 --> 00:00:52,080
देंगे जी जय श्री राम भैया जय

12
00:00:52,080 --> 00:00:56,000
श्री राम जय श्री राम जय श्री

13
00:00:56,000 --> 00:01:00,000
राम मेरा नाम महा सरकार है मेरे बड़े भैया

14
00:01:00,000 --> 00:01:04,280
सरकार पहले हम दोनों इसकन में थे करीबन

15
00:01:04,280 --> 00:01:08,360
डेढ़ साल तक हम थे उसके बाद हम लोगों ने कुछ ऐसे

16
00:01:08,360 --> 00:01:12,680
क्वेश्चन करने स्टार्ट किए कि हम लोग को इसकन

17
00:01:12,680 --> 00:01:16,760
कोलकाता ने भगा दिया अगर डायरेक्ट बोले तो भगा दिया वो अच्छा

18
00:01:16,760 --> 00:01:20,880
रहेगा नहीं थोड़ा सा मैं कहूंगा चर्चा को

19
00:01:20,880 --> 00:01:24,960
चर्चा को शुरू करने से पहले मैं कुछ कहूंगा कि हम लोग यहां

20
00:01:24,960 --> 00:01:29,920
पर सिद्धांति विषयों पर चर्चा करेंगे कमेंट में कोई भी व्यक्ति

21
00:01:29,920 --> 00:01:33,920
हमारे आदित भाषा का उपयोग ना करे किसी के लिए भी भले वो इकन के

22
00:01:33,920 --> 00:01:38,360
फॉलोअर्स के लिए हो या फिर इकन के फाउंडर जो है शील प्रभुपाद

23
00:01:38,360 --> 00:01:42,360
जी उनके लिए हो या शव वैष्णव इस तरह की बातें करते

24
00:01:42,360 --> 00:01:46,880
हुए कोई भी अमर्यादित शब्द अश्लील शब्द ना बोले

25
00:01:46,880 --> 00:01:51,000
हम लोग इसका समर्थन बिल्कुल नहीं करते बस हमारा प्रयास यह है कि किस बात

26
00:01:51,000 --> 00:01:55,120
को लेकर के वैचारिक भिन्नता आ रही जिसके कारण व्यवहारिक

27
00:01:55,120 --> 00:01:59,200
भिन्नता के चलते जो सनातन विरोधी तत्व है वो हम पर हावी हो जाते

28
00:01:59,200 --> 00:02:03,360
हैं वैचारिक भिन्नता के चलते व्यवहारिक

29
00:02:03,360 --> 00:02:08,280
दूरी वैचारिक भिन्नता व्यवहारिक दूरी परिणाम स्वरूप

30
00:02:08,280 --> 00:02:12,280
जो हिंदू है सनातन है उस पर आक्रमण और वो क्षतिग्रस्त

31
00:02:12,280 --> 00:02:16,440
है ना तो इसलिए हमें यहां पर केवल सैद्धांतिक विषय परही बात

32
00:02:16,440 --> 00:02:20,560
करनी है तो शब्दों

33
00:02:20,560 --> 00:02:24,600
की मर्यादा का सभी याद ध्यान रखेंगे पले वो कमेंट्स में हो या मैं

34
00:02:24,600 --> 00:02:28,680
हूं या फिर हमारे जो इस समय जो वक्ता है

35
00:02:28,680 --> 00:02:34,680
इस समय आप दिखाई दे रहे हैं जी बताएं

36
00:02:36,480 --> 00:02:40,720
हा हमने मतलब इकन में बहुत सारे ऐसे क्वेश्चंस किए

37
00:02:40,720 --> 00:02:44,720
जो उनका फिलोसोफी का मेन जो पॉइंट रहता है पहले वो बताते हैं एक पॉइंट

38
00:02:44,720 --> 00:02:49,520
वहां से शुरू करते हैं पूरा फिलोसोफी को तो हमने क्वेश्चन डायरेक्ट वो पॉइंट को किया

39
00:02:49,520 --> 00:02:54,200
जैसे एक होता है ना अगर हमारे इंडिया के मैप को देखे

40
00:02:54,200 --> 00:02:58,400
एक चिकन नेक पीकॉक नेक करके एक जगह है उधर अगर चाइना अटैक

41
00:02:58,400 --> 00:03:02,840
कर दे तो पूरा भारत का जयो ग्राफिकल पोजीशन में बहुत ज्यादा अटैक

42
00:03:02,840 --> 00:03:07,240
उनका बहुत ज्यादा हावी हो जाएगा ऐसे ही अगर

43
00:03:07,240 --> 00:03:11,240
हम इस पॉइंट को पकड़ ले इसकन के कुछ लूप होल्स है जिसको

44
00:03:11,240 --> 00:03:15,960
अगर हम पकड़ ले तो शायद उन लोग के पास आंसर नहीं रहेगा

45
00:03:15,960 --> 00:03:20,280
और हमने काफी बार यह कोशिश करके देखा है मैं

46
00:03:20,280 --> 00:03:24,280
पिछले छ महीने से उनके साथ जाकर चर्चा कर

47
00:03:24,280 --> 00:03:28,760
चुका हूं कि आप लोग क्यों इसका आंसर नहीं दे पा रहे हैं तो वो

48
00:03:28,760 --> 00:03:33,160
लोग उनके कुछ बड़े-बड़े बहुत स्वामी हैं वो बोलते हैं कि

49
00:03:33,160 --> 00:03:38,080
इस क्वेश्चन का जो आंसर है व अगर आप ढूंढने जाओगे तो आप मायावादी बन जाओगे

50
00:03:38,080 --> 00:03:42,280
आप राक्षस प्रवृत्ति के हो जाओगे आप असुर बन जाओगे ऐके

51
00:03:42,280 --> 00:03:46,320
बस आंसर आंसर आपको नहीं मिलेगा इसलिए आप एक काम करो आप जो

52
00:03:46,320 --> 00:03:50,360
प्रभुपाद जी ने कहा है जो हमारे आचार्य गण जो कहा है उसको

53
00:03:50,360 --> 00:03:51,480
फॉलो करो उसको फॉलो

54
00:03:51,480 --> 00:03:55,520
करके आंख बंद करके भक्ति करते रहो हमने सीधा सवाल किया

55
00:03:55,520 --> 00:03:59,800
अरे भक्ति करना है तो कांसेप्ट क्लियर होना चाहिए भक्ति का मतलब है सरेंडर

56
00:03:59,800 --> 00:04:04,320
अगर सरेंडर करने के लिए कांसेप्ट क्लियर नहीं है तो कैसे करेंगे

57
00:04:04,320 --> 00:04:09,440
आख बंद करके अगर फॉलो करना है तो किसी को भी कर सकते

58
00:04:09,440 --> 00:04:14,240
हैं ऐसे करते करते ना करने

59
00:04:14,240 --> 00:04:18,400
बात यहां पर प्रश्न ना करने वाली बात है इस पर मैं थोड़ा सा एक प्रकाश

60
00:04:18,400 --> 00:04:22,480
डालना चाहूंगा कि हमारे जितने भी

61
00:04:22,480 --> 00:04:27,720
सनातन शास्त्र वैदिक वांगम है वो

62
00:04:27,720 --> 00:04:31,760
प्रश्न करने के नाम पर ही शुरू होते हैं जैसे

63
00:04:31,760 --> 00:04:35,800
जितने भी हमारे पुराण आदि शास्त्र है वो जितनी भी हमारी स्मृतियां

64
00:04:35,800 --> 00:04:40,400
है कि वहां पर जैसे भगवत गीता को ले लीजिए अर्जुन ने श्री कृष्ण से

65
00:04:40,400 --> 00:04:44,400
प्रश्न किया ब्रह्म सूत्र के जो दो मुख्य वो है

66
00:04:44,400 --> 00:04:49,160
शारीरिक भाष के सूत्र अथातो धर्म जिज्ञासा अथातो ब्रह्म

67
00:04:49,160 --> 00:04:53,960
जिज्ञासा ये यहां से चालू होता है और ये जिज्ञासा

68
00:04:53,960 --> 00:04:58,000
आना आने से ही आपका मतलब सभी मनुष्यों

69
00:04:58,000 --> 00:05:02,800
के मन के अंदर यह जिज्ञासा आती है था तो धम जिज्ञासा था तो ब्रह्म जिज्ञासा

70
00:05:02,800 --> 00:05:07,080
मगर जो मनुष्य उस जिज्ञासा पर ध्यान दे देता है

71
00:05:07,080 --> 00:05:11,080
उसका अध्यात्मिक पथ शुरू हो जाता है और जो उस जिज्ञासा

72
00:05:11,080 --> 00:05:15,320
पर ध्यान ना देते हुए एसी टीवी फ्रिज कूलर समोसा चाउमीन

73
00:05:15,320 --> 00:05:19,520
बर्गर पिज्जा इन जिज्ञासाओं के लिए ध्यान रखता है कौन सी

74
00:05:19,520 --> 00:05:23,520
कौन सी नई फिल्म आ रही है कौन सा यह हो रहा है वो हो रहा है वो यहां

75
00:05:23,520 --> 00:05:27,720
से दूर रह जाता है आध्यात्मिक पथ उसका चालू हो जाता है अतो तद

76
00:05:27,720 --> 00:05:30,960
गमत सोमा

77
00:05:30,960 --> 00:05:35,120
और जब तक यह संशय समाप्त नहीं होता है तो

78
00:05:35,120 --> 00:05:39,680
संशय के लिए हमारे शास्त्र में क्या कहा गया है कि संशय आत्मा विनती

79
00:05:39,680 --> 00:05:44,720
भगवत गीता में भगवान कह रहे जिसके मन में संशय है

80
00:05:44,720 --> 00:05:48,960
वो इस वो परलोक तो क्या

81
00:05:48,960 --> 00:05:53,000
इस लोक में भी सुखी नहीं हो पाएगा परलोक की तो बात दूर परलोक में

82
00:05:53,000 --> 00:05:57,040
उसको बहुत अच्छा स्थान मिल जाए फिर अब यह जो

83
00:05:57,040 --> 00:06:01,080
संशय है संशय का ही व्याख्यान कर संशय को ही दमन करने

84
00:06:01,080 --> 00:06:05,160
वाले जो है वह गुरु कहे गए अज्ञानता रूपी अंधकार को दूर करने

85
00:06:05,160 --> 00:06:09,400
वाला गुरु तो अगर कोई स्वयं को गुरु के रूप में खपत

86
00:06:09,400 --> 00:06:14,240
करवा रहा है और वो अपने

87
00:06:14,240 --> 00:06:18,440
शिष्य से जिसको वो जिसके सामने वह गुरु बना हुआ है

88
00:06:18,440 --> 00:06:22,200
यदि वह उसके संशय को समाप्त नहीं कर रहा है तो उसकी जो व गुरु की उपाधि

89
00:06:22,200 --> 00:06:26,400
है व चली जाती है उसका संशय क्योंकि वो दूर नहीं कर रहा

90
00:06:26,400 --> 00:06:30,520
तो वो गुरु नहीं तो इसलिए मैं

91
00:06:30,520 --> 00:06:34,560
यह चीज उठाता हूं कि जैसे अचिंत का अगर यह मतलब

92
00:06:34,560 --> 00:06:38,760
निकाला जाए कि आप सवाल ही मत करो प्रश्न ही मत करो अचत

93
00:06:38,760 --> 00:06:42,800
का यह मतलब अगर निकाला जाए तो यह फिलोसोफी मैच खाने लगेगी

94
00:06:42,800 --> 00:06:47,720
5101 जो इस्लाम में कहा गया है कि ज्यादा प्रश्न मत करो

95
00:06:47,720 --> 00:06:52,560
ज्यादा प्रश्न मत कर का दखल नहीं

96
00:06:52,560 --> 00:06:57,520
हा दन में अकल का दखल नहीं देना चाहिए इस्लाम

97
00:06:57,520 --> 00:07:01,680
हा देखिए मैं पूरा कर रहा हूं ज्यादा प्रश्न

98
00:07:01,680 --> 00:07:05,800
मत करो वरना आपके लिए वो आयत खोल दी जाएंगी जिन

99
00:07:05,800 --> 00:07:09,840
आयतों के कारण पहले कुछ लोग बागी हो गए थे यहां इस

100
00:07:09,840 --> 00:07:14,000
बात से बहुत सारे तथ उद् भाषित हो गए पहली बात कि पहले

101
00:07:14,000 --> 00:07:18,440
धर्म कुछ और था अब धर्म कुछ और है शाश्वता

102
00:07:18,440 --> 00:07:22,760
नहीं है धर्म में दूसरी बात क्या हुआ कि

103
00:07:22,760 --> 00:07:27,000
हमने उन नियमों को इसलिए बदला है क्योंकि तुमको दिक्कत

104
00:07:27,000 --> 00:07:31,000
होगी उन नियमों से इसका अर्थ क्या है कि व्यक्ति के हिसाब से नियम बदल

105
00:07:31,000 --> 00:07:35,160
रहे हैं और फिर तीसरी बात क्या है प्रश्न करने से मना किया जा रहा

106
00:07:35,160 --> 00:07:37,280
है तो प्रश्न करने से

107
00:07:37,280 --> 00:07:42,920
मना जहां पर होगा वहां

108
00:07:42,920 --> 00:07:47,120
पर वहां से फिर हमें समझ लेना चाहिए कि यह हमारा आध्यात्मिक मार्ग

109
00:07:47,120 --> 00:07:51,560
नहीं हो सकता है है ना प्रश्न करने से मना नहीं होना चाहिए जी

110
00:07:51,560 --> 00:07:54,640
बता कंटिन्यू

111
00:07:54,640 --> 00:07:58,840
कर फिर हम कुछ दिन पहले कोलकाता में रत यात्रा

112
00:07:58,840 --> 00:08:03,520
निकला था हम वहां पर भी गए थे वहां पर पर एक जगह था

113
00:08:03,520 --> 00:08:07,600
जगह का नाम था परफेक्ट क्वेश्चन परफेक्ट आंसर वो इकन का ही है पूरा

114
00:08:07,600 --> 00:08:12,320
ठीक है हम गए थे वन लोग से हमने पूछ

115
00:08:12,320 --> 00:08:16,640
जी हा तो हम लोगों से उनसे पूछा वहा दो व्यक्ति बैठे थे

116
00:08:16,640 --> 00:08:21,560
एक हस्बैंड वाइफ बैठे थे तो हम उनसे पूछे कि अगर

117
00:08:21,560 --> 00:08:25,800
यह ये चीज आपके फिलोसोफी में है तो यह तो एक लूप होल है यह तो गलत

118
00:08:25,800 --> 00:08:29,800
है आप भगवान को कैसे ठुकरा रहे हो यह तो गलत है मैं

119
00:08:29,800 --> 00:08:33,920
क्वेश्चन बता रहा हूं कुछ देर बाद ही मैं बता रहा हूं इस क्वेश्चन से आज तक मेरे को आंसर

120
00:08:33,920 --> 00:08:37,920
मिला नहीं किसी से इस कन के तो जब उनसे पूछा

121
00:08:37,920 --> 00:08:42,440
तो वह डायरेक्टली अपने ही फिलोसोफी के अपने ही गुरु के आचार्य

122
00:08:42,440 --> 00:08:46,560
अपने प्रभुपाद जी के जो वाक्य है जो

123
00:08:46,560 --> 00:08:50,640
उन्होंने लिखा है उसी को ठुकरा दिए खुद अलग से खुद बताने

124
00:08:50,640 --> 00:08:52,360
लगे क्योंकि उनके पास आंसर

125
00:08:52,360 --> 00:08:56,480
नहीं है उनके आचार्यों के पास से उनको आंसर नहीं मिला इसलिए वो क्या किए खुद

126
00:08:56,480 --> 00:09:00,560
का आंसर खुद बना के देने लगे हम जब पूछने लगे हमको भगा दिया

127
00:09:00,560 --> 00:09:06,040
वहां से भी भगा दिया हम आपके पास नेटवर्क

128
00:09:06,040 --> 00:09:10,440
रहा आपका नेटवर्क ठीक नहीं आ रहा

129
00:09:10,440 --> 00:09:14,640
आप कुछ ऐसा नेटवर्क देख लीजिए जिसमें की मतलब आपका जो

130
00:09:14,640 --> 00:09:20,640
पेस है ना वो रुका हुआ है केवल वॉइस आ रही है

131
00:09:28,360 --> 00:09:33,120
आपकी चलिए बोलिए बोलिए फिर क्या हुआ

132
00:09:33,120 --> 00:09:37,440
अरे अब ठीक है भैया आ रहा है आवाज

133
00:09:37,440 --> 00:09:41,800
आवाज तो आ रही है मगर आपका जो चित्र है ना वो रुक रुक कर चल रहा

134
00:09:41,800 --> 00:09:46,200
है ठीक है कोई बात नहीं जो है वही

135
00:09:46,200 --> 00:09:50,360
बोलिए ठीक है ठीक है तो वहां से आपको मना

136
00:09:50,360 --> 00:09:55,240
कर दिया गया कि इस प्रश्न को मत पूछिए हां

137
00:09:55,240 --> 00:09:59,360
और खुद के कांसेप्ट को यूज करके अपने आचार्यों के बात को

138
00:09:59,360 --> 00:10:03,560
रा दिया गया मतलब एक्चुअली क्वेश्चन जो है उसमें दो पार्ट

139
00:10:03,560 --> 00:10:07,800
आते हैं उसमें से एक एक पार्ट ऐसा आता है कि वैकुंठ से कैसे आए

140
00:10:07,800 --> 00:10:12,040
तो वो खुद बताने लगे कि वैकुंठ जो है वो वहां

141
00:10:12,040 --> 00:10:16,040
से आए हमलोग से नहीं आ वैकुंठ एक मिनट जो वैकुंठ लोक यानी

142
00:10:16,040 --> 00:10:20,320
विष्णु भगवान का जो वैकुंठ लोक है है ना हां जी हा वही

143
00:10:20,320 --> 00:10:24,480
वही वैकुंठ लोक वैकुंठ लोक से जीव जो है संसार में कैसे

144
00:10:24,480 --> 00:10:28,520
आए प्रश्न ये है है ना जी थोड़ा क्लियर क्लियर करते

145
00:10:28,520 --> 00:10:32,520
चलिए हां ठीक है मैं बोल रहा हूं उसके ऊपर ही बोल

146
00:10:32,520 --> 00:10:36,720
रहा हूं कि वैकुंठ से जीव कैसे आए ये प्रभुपाद जी ने कहा

147
00:10:36,720 --> 00:10:40,920
कि वैकुंठ से जीव आए हैं हम पूछते भाई कैसे आए तो उनको उनके पास

148
00:10:40,920 --> 00:10:45,520
मेनली दो आंसर रहते हैं एक आंसर रहता है कि पाप

149
00:10:45,520 --> 00:10:49,600
करके वहां से आ गए कुंठ करके अब वैकुंठ में कैसे कुंठ

150
00:10:49,600 --> 00:10:53,840
किया यह समझ में नहीं आता और दूसरा पॉइंट जो वो बोलते हैं वो बोलते हैं कि

151
00:10:53,840 --> 00:10:58,200
हमने भगवान बनने का कोशिश किया हमने भगवान बनने का कोशिश किया

152
00:10:58,200 --> 00:11:02,200
वहां पर पहले से श्री कृष्ण ही भगवान है हमने जब भगवान से बोला

153
00:11:02,200 --> 00:11:06,200
कि हमें भी भगवान बनना है तो भगवान ने हमारे लिए अलग पृथ्वी

154
00:11:06,200 --> 00:11:10,720
बना दिया जहां पर हम भगवान बनने की कोशिश कर सकते हैं एक और एनालॉजी

155
00:11:10,720 --> 00:11:15,000
जो देते हैं वो बोलते हैं कि वैकुंठ में हम लोग भगवान से ईर्ष करके

156
00:11:15,000 --> 00:11:19,960
आए अच्छा यानी वैकुंठ लोक में भी

157
00:11:19,960 --> 00:11:23,000
ये कुंठ है कुंठा है पाप

158
00:11:23,000 --> 00:11:27,600
है अपराध है वहां पर भी प्रॉपर सच्चिदानंद

159
00:11:27,600 --> 00:11:31,640
नहीं है और ऐसा भी नहीं भैया वहां पर कहा जाता

160
00:11:31,640 --> 00:11:35,840
है कि वैकुंठ लोक में हम भगवान से कुछ डिजायर किए मतलब

161
00:11:35,840 --> 00:11:40,760
डिजायर करना भी पाप है इसलिए हमको इधर आना पड़ा

162
00:11:40,760 --> 00:11:44,760
डिजायर कर दिया तो ये तो वैसी लोको हो गई वो फैंटेसी

163
00:11:44,760 --> 00:11:48,840
जो चलती है जो मतलब वैकुंठ लोक में भी मुक्ति नहीं है वो परमधाम नहीं

164
00:11:48,840 --> 00:11:52,960
है एक तरीके से और इनके बड़े बड़े जो आचार्य हां जी बिल्कुल

165
00:11:52,960 --> 00:11:56,960
भैया इनके बड़े-बड़े जो आचार्य हैं उनमें से एक है राधेश्याम

166
00:11:56,960 --> 00:12:01,480
राधेश्याम प्रभु राधेश्याम प्रभु जी है वो ओपनली

167
00:12:01,480 --> 00:12:05,720
उनका प्रभु जी य में आपको उनका लेक्चर मिल जाएगा

168
00:12:05,720 --> 00:12:09,920
आप वहां पर देखिए वहां पर उन्होने क्लियर बोला है कि वैकुंठ में अगर हम फिर

169
00:12:09,920 --> 00:12:14,000
से गए फिर से आ जाएंगे य खुद श्री कृष्णा का बात को ठुकरा दे

170
00:12:14,000 --> 00:12:18,000
रहे हैं अगर हम इकन का ट्रांसलेशन से भी चले तद

171
00:12:18,000 --> 00:12:22,000
धाम परमम मम जो कहते हैं भगवत गीता में वहां

172
00:12:22,000 --> 00:12:26,080
पर मतलब राधेश्याम प्रभु ने खुद य एक्सेप्ट कर लिया कि अगर हम

173
00:12:26,080 --> 00:12:30,200
वैकुंठ गए फिर अगर हम वहां कुछ उल्टा सीधा काम जो कि

174
00:12:30,200 --> 00:12:34,320
लॉजिकली पॉसिबल नहीं है आना पड़ेगा य पर एक

175
00:12:34,320 --> 00:12:38,120
बार यह कहना चाहूंगा कि बैकुंठ लोक

176
00:12:38,120 --> 00:12:42,360
और गोलोक धाम के बीच में तो डिफरेंस मानता है नान की नहीं मानता

177
00:12:42,360 --> 00:12:46,440
है एक से मानता हैन का कौन सा सेक्शन और एक

178
00:12:46,440 --> 00:12:50,480
सेक्शन नहीं मानता कौन सा सेक्शन मतलब

179
00:12:50,480 --> 00:12:54,560
हमारे जो गुरु थे इसकन के वो गोलोक धाम वैकुंठ में ज्यादा डिफरेंस नहीं करते

180
00:12:54,560 --> 00:12:58,560
थे और स्वामी है ज्यादा और कम नहीं होता

181
00:12:58,560 --> 00:13:02,920
डिफरेंस है था कि नहीं था हां था वो तो 100

182
00:13:02,920 --> 00:13:06,920
पर तो जब वो डिफरेंस था तो फिर यहां ये बात आती है अगर

183
00:13:06,920 --> 00:13:11,040
उनके अनुसार मुक्ति का नाम गोलोक धाम है तो बैकुंठ

184
00:13:11,040 --> 00:13:15,680
लोक को वो लोग कहेंगे कि कहीं ना कहीं वो बैकुंठ लोक में कुछ ना कुछ कुंठा है

185
00:13:15,680 --> 00:13:19,880
मगर बैकुंठ लोक का नाम सार्थक नहीं होता अगर वहां कुंठा है वो बात एक अलग है

186
00:13:19,880 --> 00:13:23,880
मगर स्कोन के अनुसार बैकुंठ लोक परम धाम नहीं

187
00:13:23,880 --> 00:13:28,240
है ना इकन के अनुसार गोलोक

188
00:13:28,240 --> 00:13:32,440
परम है मेरा कहने का मतलब यह है मैं समझा दूं कि

189
00:13:32,440 --> 00:13:36,560
क्या यह बात जो आप कह रहे हैं कि भाई वहां से भी व्यक्ति वापस आ सकता है

190
00:13:36,560 --> 00:13:40,680
ये इस भाव से कह रहे हैं कि उनके अनुसार जो मुक्ति धाम

191
00:13:40,680 --> 00:13:44,760
है परम धाम है उस धाम में भी

192
00:13:44,760 --> 00:13:49,000
जो है मुक्ति नहीं है वहां पर भी कुछ ना कुछ दिक्कत

193
00:13:49,000 --> 00:13:53,240
है आप ये कहना चाह रहे हैं गलो आपको

194
00:13:53,240 --> 00:13:57,720
फिर गोलोक धाम बोलना चाहिए गोलोक धाम के विषय में भी उनकी यही राय

195
00:13:57,720 --> 00:14:01,920
है हा एकदम हा तो वैकुंठ मत बोलिए

196
00:14:01,920 --> 00:14:06,120
उसको इनका आपका कहने का आपको यह कहना चाहिए कि गोलोक धाम

197
00:14:06,120 --> 00:14:10,200
में भी अगर व्यक्ति पाप करता है ऐसा करता है वैसा करता है तो व

198
00:14:10,200 --> 00:14:14,240
य आ जाता है मुक्त मतलब गोलोक धाम में भी वो मुक्त नहीं होता है वहां

199
00:14:14,240 --> 00:14:18,360
भी अपराध है वहां एक चीज इन लोग का मेन

200
00:14:18,360 --> 00:14:22,920
जोय पहले ये पहले क्लियर कर दीजिए जिसको आप वैकुंठ

201
00:14:22,920 --> 00:14:27,280
वैकुंठ लोग कह रहे हैं वही गोलोक धाम है जी बिल्कुल वो

202
00:14:27,280 --> 00:14:31,480
गोलोक और कौन का एक मान्यता है कि एक है कुंठ

203
00:14:31,480 --> 00:14:35,520
जगत एक है वैकुंठ जगत और

204
00:14:35,520 --> 00:14:39,600
कुंठ जगत और वैकुंठ जगत में भेद है कि यही

205
00:14:39,600 --> 00:14:44,120
है राधेश्याम प्रभु जी यही है क्या अच्छा इन्होंने इनका

206
00:14:44,120 --> 00:14:48,600
लेक्चर है जिसमें इन्होंने ये बोला है हा जी क्या कहते हैं कि

207
00:14:48,600 --> 00:14:52,680
अगर आपने वहां जाकर के गलतियां की तो आप वहां से भी फिर से वापस आ जाओ मतलब मुक्त

208
00:14:52,680 --> 00:14:56,720
नहीं हुए वो कहते हैं कि आपके पास फ्रीनेस जो है इंडिपेंडेंस

209
00:14:56,720 --> 00:15:00,840
जो है वो हमेशा रहती है वो भगवान आपसे नहीं छीन मैं बोलता हूं ठीक है भाई कोई बात नहीं लेकिन

210
00:15:00,840 --> 00:15:04,840
जो आत्मा है वो तो सच्चित आनंद है उनके हिसाब से जीवात्मा को

211
00:15:04,840 --> 00:15:08,480
वो आत्मा मानते हैं लेकिन उनके हिसाब से जीवात्मा भी सच्चित आनंद

212
00:15:08,480 --> 00:15:12,760
है मैं बोलता हूं हो सकता है लेकिन कैसे अगर वोह सच्चित आनंद

213
00:15:12,760 --> 00:15:16,760
है सचित आनंद का मतलब में ये भी आता है फुल ऑफ नॉलेज उसके पास

214
00:15:16,760 --> 00:15:20,960
ज्ञान का फुल फुल ऑफ नॉलेज है उस तो अगर उसके पास पूरा

215
00:15:20,960 --> 00:15:25,040
ज्ञान है तो फिर ऐसी इच्छा कैसे आ गई जो

216
00:15:25,040 --> 00:15:29,040
भगवान के विरुद्ध है वो इच्छा कैसे आ गई ये मेन पॉइंट ये फर्स्ट पॉइंट

217
00:15:29,040 --> 00:15:33,360
सेकंड पॉइंट अगर इच्छा आ भी जाती है क्या भगवान इतना निर्दय है कि वो उसका

218
00:15:33,360 --> 00:15:37,880
इच्छा को पूरा नहीं करेंगे यह इससे पाया जाता है कि इसकन

219
00:15:37,880 --> 00:15:42,240
से जो प्रतिपादित ईश्वर है वह गलत है वो ऐसा हो नहीं

220
00:15:42,240 --> 00:15:46,560
सकता देखिए वो गलत है कि सही है यह तो निर्णय

221
00:15:46,560 --> 00:15:50,720
जब कोई चर्चा आगे बढ़ेगी जब स्कोन को भी उसका पक्ष रखने का वो दिया जाएगा

222
00:15:50,720 --> 00:15:54,880
सर तब बात होगी मगर हां यहां प्रश्न जरूर खड़ा हो जाता है कि

223
00:15:54,880 --> 00:15:59,280
इस कन के द्वारा प्रतिपादित होने वाला जो ईश्वर है उसके द्वारा जो प्रतिपादित होने वाला

224
00:15:59,280 --> 00:16:03,680
धाम है परम धाम है उसको गोलोक धाम कहिए बैकुंठ धाम कहिए

225
00:16:03,680 --> 00:16:07,800
वहां पर जाने के बाद भी पाप और पुण्य बच गया है यानी कि

226
00:16:07,800 --> 00:16:11,800
वो ऐसा मान सकते हैं कि इस लेयर के बाद एक और लेयर

227
00:16:11,800 --> 00:16:15,840
मगर वो मुक्ति है नहीं वो भी एक संसार है जहां आपसे गलती होगी तो आप

228
00:16:15,840 --> 00:16:20,080
फिर आ जाओगे है ना सजा के रूप में आओगे एक तरीके से

229
00:16:20,080 --> 00:16:23,800
जो इस्लाम का कांसेप्ट है स्वर्ग वाला स्वर्ग और नरक वाला

230
00:16:23,800 --> 00:16:28,120
कुछ वैसा कांसेप्ट है यहां प हा काफी चीजें मैच

231
00:16:28,120 --> 00:16:32,720
खाती है बिल्कुल अब्राम रिलीजन और इकन में ज्यादा

232
00:16:32,720 --> 00:16:36,920
डिफरेंस है नहीं अगर सनातन धर्म की बात करें तो सनातन धर्म

233
00:16:36,920 --> 00:16:41,360
बिल्कुल ही अलग हैसे फिर आपके साथ क्या हुआ मतलब कैसे आप कैसे

234
00:16:41,360 --> 00:16:45,760
आपका धीरे धीरे वो पथ जो है ठीक हुआ

235
00:16:45,760 --> 00:16:49,760
छ महीने से हम लोग करीबन करीबन छ महीने से हम लोग आंसर ढूंढ रहे थे

236
00:16:49,760 --> 00:16:53,800
तो बहुत सारे हम लोग एक मिनट एक मिनट ये भाई साहब का एक

237
00:16:53,800 --> 00:16:58,040
प्रश्न आया है हमारा लोग सिर्फ आपस में ही लड़ता

238
00:16:58,040 --> 00:17:02,520
रहता है अभी आपको बुरा लग रहा है भाई साहब

239
00:17:02,520 --> 00:17:07,000
अभी आपको बुरा लग रहा है मार्तंड जी अभी जब संत रामपाल

240
00:17:07,000 --> 00:17:11,000
तथाकथित संत रामपाल ब्रह्मा विष्णु महेश का पिता

241
00:17:11,000 --> 00:17:15,680
बताएगा कबीर को और जब हम उसको जाकर के कहेंगे कि मत कहो ऐसा

242
00:17:15,680 --> 00:17:19,720
तब आपको बुरा नहीं लगेगा तब आपको

243
00:17:19,720 --> 00:17:24,000
बुरा नहीं लगेगा इसका अर्थ क्या हुआ अभी ये तथाकथित

244
00:17:24,000 --> 00:17:28,200
आचार्य प्रशांत ने एक बात कही है ज बाला के बारे में हम लोगों का वीडियो

245
00:17:28,200 --> 00:17:32,360
आने वाला है मैंने बता दिया है मगर एक बात कहिए

246
00:17:32,360 --> 00:17:36,480
कि जावाला को यह नहीं पता था कि उसके पुत्र का बाप कौन है पिता कौन

247
00:17:36,480 --> 00:17:38,880
है यह शब्द से बाप बाप कौन है ये

248
00:17:38,880 --> 00:17:42,880
किसने कहा तथाकथित आचार्य प्रशांत ने अब अगर उसको हम

249
00:17:42,880 --> 00:17:47,920
जाकर के काउंटर करेंगे तो आप कुछ नहीं कहेंगे

250
00:17:47,920 --> 00:17:52,080
आपका कहने का अर्थ क्या है मार्तंड जी कि राधा राधा जी को कोई गाली

251
00:17:52,080 --> 00:17:56,600
दे शिव जी को कोई गाली दे उसको हम कुछ ना कहे

252
00:17:56,600 --> 00:18:00,600
तुलसीदास जी को रामचरित मानस रचने वाले को लोग

253
00:18:00,600 --> 00:18:05,000
मायावादी कहते हुए कहे कि वो जो है वैष्णव नहीं है वल्लभाचार्य

254
00:18:05,000 --> 00:18:09,000
को मायावादी कहते उनको हम कुछ ना कहे और हम

255
00:18:09,000 --> 00:18:13,280
लोग शांत रहे चलिए एक बार को मान लेते कि हम शांत रहे मगर इसका परिणाम

256
00:18:13,280 --> 00:18:17,360
पता है क्या होता है इसका परिणाम यह होता है कि

257
00:18:17,360 --> 00:18:21,360
जब कोई व्यक्ति बाहरी व्यक्ति हम पर आक्रमण करता है तो उस समय हम

258
00:18:21,360 --> 00:18:25,520
संगठित नहीं होते हैं इसका परिणाम यह

259
00:18:25,520 --> 00:18:29,720
होता है हम लोग जो है क्वेश्चनिंग करते हैं इसीलिए हमें कोई दिक्कत

260
00:18:29,720 --> 00:18:33,760
नहीं है मत मानो भाई बैकुंठ को मत मानो कुछ मत मानो शिवजी को विष्णु मत मानो ठीक है

261
00:18:33,760 --> 00:18:38,000
आपकी पर्सनल लाइफ है आपने व्यक्तिगत जीवन में अपने अनुसार अपनी जीवन शैली आप

262
00:18:38,000 --> 00:18:42,040
चुन रहे हैं मगर वो जब समष्टि के दृष्टिकोण से जब बाधा

263
00:18:42,040 --> 00:18:46,800
उत्पन्न करती है समाज के लिए तब वहां बोलना पड़ेगा ना और

264
00:18:46,800 --> 00:18:50,840
आपको स्पन के लिए बात हो रही है तो आप बोल रहे आपस में ही लड़ रहे हैं

265
00:18:50,840 --> 00:18:53,880
आपको आर समाज के लिए बात हो रही है आपस में लड़ रहे हैं बोल सकते

266
00:18:53,880 --> 00:18:58,000
हो मगर अभी वही मैंने कहा त दर्शी रामपाल के लिए बोलूंगा खुद को कल

267
00:18:58,000 --> 00:19:02,440
की कहने वाले के लिए मैं बोलूंगा तब आपको बुरा नहीं लगेगा क्यों नहीं लगेगा

268
00:19:02,440 --> 00:19:06,560
इसका अर्थ यह है कि आपने चुन रखा है कि मुझे जो

269
00:19:06,560 --> 00:19:11,200
जो चीजें अच्छी लगती है उन पर कोई उंगली ना उठाए बाकी सब पर उठाए

270
00:19:11,200 --> 00:19:15,320
यह सिद्धांत आपने डिसाइड किया है शायद अपनी लाइफ में हमारा य सिद्धांत

271
00:19:15,320 --> 00:19:19,440
नहीं है गुरु गोविंद और ग्रंथ परंपरा प्राप्त ग्रंथ

272
00:19:19,440 --> 00:19:24,360
के विरुद्ध शास्त्र के विरुद्ध आचार्य परंपरा के

273
00:19:24,360 --> 00:19:28,760
विरुद्ध और गोविंद के विरुद्ध जब कोई जाएगा तो

274
00:19:28,760 --> 00:19:32,800
हम उसकी उस जाने वाली शिक्षा पर विरुद्ध जाने वाली शिक्षा पर क्वेश्चनिंग करेंगे

275
00:19:32,800 --> 00:19:37,000
जिससे कि उनके बहकावे में आकर के हमारा ही भाई हमसे दूर ना हो जाए

276
00:19:37,000 --> 00:19:41,160
हो रहा है ऐसा जैसे वो सीन है

277
00:19:41,160 --> 00:19:45,240
केरला स्टोरी का जिसम जो बिटिया होती है व अपने पिता के मुह पर आके थकती

278
00:19:45,240 --> 00:19:49,560
है किसी के बहकावे में आ जाने से उसी का बदला हुआ रूप

279
00:19:49,560 --> 00:19:53,560
है जब की कोई स्कोन से जुड़ जाता है उसको

280
00:19:53,560 --> 00:19:58,840
यह बताया जाता है कि व जो लोग शिव की पूजा कर रहे हैं वो अक्त है

281
00:19:58,840 --> 00:20:03,040
ये क्या हुआ हमारा ही भाई हमसे छीन लिया गया ना उसके अंदर हीनता

282
00:20:03,040 --> 00:20:07,920
आ गई कि शिवजी पर चढ़ा हुआ प्रसाद मत ग्रहण

283
00:20:07,920 --> 00:20:08,920
करना

284
00:20:08,920 --> 00:20:13,040
यह क्या है इसलिए क्वेश्चनिंग आवश्यक है अगर आप लोग यह सोचते

285
00:20:13,040 --> 00:20:17,240
हो कि आपस में नहीं लड़ना चाहिए सामने वाले से लड़ना चाहिए तो सामने

286
00:20:17,240 --> 00:20:21,720
वाले से सामने वाले से लड़ने के लिए हमको संगठित

287
00:20:21,720 --> 00:20:25,920
होने की आवश्यकता है कैसे लड़ो ग उनकी तैयारी देख

288
00:20:25,920 --> 00:20:30,200
चुके हो हमारे पास क्या है आर्य समाज इसकन ब्रह्मा

289
00:20:30,200 --> 00:20:34,520
कुमारी रामपाल आचार्य प्रशांत ये हमारी तैयारी

290
00:20:34,520 --> 00:20:38,520
है इसी का फायदा उठाया जाता है इसलिए

291
00:20:38,520 --> 00:20:42,600
सोचिए बोलने से पहले जी आप

292
00:20:42,600 --> 00:20:47,000
कुछ बोल रहे थे जी ये

293
00:20:47,000 --> 00:20:51,120
ये जो एक ट्रेंड है ना जो इकन का एक

294
00:20:51,120 --> 00:20:55,280
एक्सपो शियल ट्रेंड है जिसको बोलते हैं मतलब एक साथ बहुत ज्यादा बढ़ रहा है

295
00:20:55,280 --> 00:21:01,280
अभी यह बहुत अच्छा नहीं है क्योंकि

296
00:21:01,480 --> 00:21:05,600
जो सनातन धर्म नहींन धर्मन धर्म

297
00:21:05,600 --> 00:21:09,840
है इसको इसको ठीक से माना नहीं सकते इसमें आप देखिए इतना

298
00:21:09,840 --> 00:21:14,120
जरा लूप होल्स है शिव जी को यह भगवान नहीं मानते

299
00:21:14,120 --> 00:21:18,840
व सब क बार कर चुके अभी टॉपिक मेरे पास और

300
00:21:18,840 --> 00:21:23,160
है एक मुख्य टॉपिक था

301
00:21:23,160 --> 00:21:27,320
कुछ लोग कहते हैं वैवा चार्य पर उंगली उठाते हैं स्न की आड़ में

302
00:21:27,320 --> 00:21:31,360
तो अभी देख लेते चार्य पर उंगली उठा रहे कि नहीं उठा रहे उठा रहा है

303
00:21:31,360 --> 00:21:36,080
तो कौन उठा रहा है तो सबसे पहली बात

304
00:21:36,080 --> 00:21:40,800
है कि एक लेख है कन्वर्सेशन

305
00:21:40,800 --> 00:21:44,960
एंड मॉर्निंग उसमें मॉर्निंग वक हुई

306
00:21:44,960 --> 00:21:49,160
है अगस्त 29 1975 में

307
00:21:49,160 --> 00:21:53,600
यह वाणी स्ट्स नाम की जो वेबसाइट है वहां पर आपको मिलेगा

308
00:21:53,600 --> 00:21:58,760
तुलसीदास जी ही न नॉट प्योर वैष्णव

309
00:21:58,760 --> 00:22:02,840
अब तुलसीदास जी को हम सब जानते हैं राम जी के भक्त के रूप में वैष्णव के रूप

310
00:22:02,840 --> 00:22:08,840
में जानते हैं रामानंद संप्रदाय के हैं और उन्होने क्या लिखा

311
00:22:10,320 --> 00:22:14,520
कि तुलसीदास जी हां थोड़ा

312
00:22:14,520 --> 00:22:18,680
सा ऊपर ऊपर जाइए यह वाला नहीं है यही वाला है इसमें इसमें एक लाइन

313
00:22:18,680 --> 00:22:23,040
थोड़ा सा नीचे करिए इसके जस्ट बाद वाली लाइन है

314
00:22:23,040 --> 00:22:27,240
नाय तो तुलसीदास टीचिंग बोनाफाइड य

315
00:22:27,240 --> 00:22:31,360
जो क्वेश्चन हो रहा है इस क्वेश्चन के नीचे वाला जो लाइन है वो दिखा

316
00:22:31,360 --> 00:22:35,560
दीजिए यह तो पेज बदल गया ना ना

317
00:22:35,560 --> 00:22:39,560
ये पेज बदल गया उसमें लिखा

318
00:22:39,560 --> 00:22:44,520
हुआ है ही इज नॉट प्योर वैष्णव

319
00:22:44,520 --> 00:22:50,520
तो वैष्णव तुलसीदास जी भी नहीं है और कहां लिखा है इन्होंने

320
00:22:52,280 --> 00:22:58,280
एक जगह पर और लिखा है लेटर टू

321
00:22:58,760 --> 00:23:02,800
का ऐसे करके कुछ नाम भाई शोधित कर लेना एक लेटर है य भी

322
00:23:02,800 --> 00:23:07,240
वाणी कोर्ट में मिल जाएगा हैमबर्ग 6 सितंबर को य लेटर

323
00:23:07,240 --> 00:23:11,920
की बात हो रही है यहां पर भी यह बोल रहे हैं कि उनकी जो टीचिंग है

324
00:23:11,920 --> 00:23:16,160
वह इसको थोड़ा बड़ा करिए

325
00:23:16,160 --> 00:23:21,480
थोड़ा सा बड़ा

326
00:23:21,480 --> 00:23:25,480
करिए बड़ा हो सकता है य हां

327
00:23:25,480 --> 00:23:30,640
जी किए ही वा मायावादी टच

328
00:23:30,640 --> 00:23:36,640
हा ही वास नॉट प्योर वैष्णव वा

329
00:23:37,160 --> 00:23:41,560
ए मायावा गट मायावादी टच

330
00:23:41,560 --> 00:23:43,840
ही

331
00:23:43,840 --> 00:23:48,440
माया ठीक है ठीक है दीजिए अब देखिए जो वैष्णव

332
00:23:48,440 --> 00:23:52,720
है तुलसीदास जी को पूरा संसार वैष्णव के रूप में जानता

333
00:23:52,720 --> 00:23:57,000
है और सबसे ज्यादा बिकने वाली धार्मिक ग्रंथ है रामचरित मानस

334
00:23:57,000 --> 00:24:01,120
सबसे ज्यादा लोग घर में जाने वा और यह कह रहे हैं कि वो जो है वैष्णव

335
00:24:01,120 --> 00:24:05,120
नहीं है तो यह कैसे वैष्णव है जो दूसरे वैष्णव की निंदा कर रहे हैं आपके

336
00:24:05,120 --> 00:24:07,280
अनुसार तो मायावादी एक निंदा

337
00:24:07,280 --> 00:24:11,480
पूर्ण शब्द है ना तो आप उनको मायावादी कह

338
00:24:11,480 --> 00:24:15,760
रहे हैं आपके अनुसार आप हीन भावना से देख रहे हैं तुलसीदास

339
00:24:15,760 --> 00:24:19,760
जी के लिखे हुए को सभी संप्रदाय प्रमाण के रूप में

340
00:24:19,760 --> 00:24:22,640
उपयोग करते

341
00:24:22,640 --> 00:24:27,240
हैं जब मैं और मेरा भाई हा

342
00:24:27,240 --> 00:24:31,320
इसकन जाते थे शिक्षा ग्रहण करने तब वही प्रश्न उत्तर में

343
00:24:31,320 --> 00:24:36,160
हमने पूछा था कि तुलसीदास जी ने तो शिव जी को ईश्वर बताया

344
00:24:36,160 --> 00:24:40,320
फिर राम जी शिव जी की उपासना करते हैं रामस रिद शिव

345
00:24:40,320 --> 00:24:44,840
शिवद राम ऐसा श्लोक है फिर हमारे जो गुरु थे

346
00:24:44,840 --> 00:24:49,560
उन्होंने ओपनली कहा कह दिया कि तुलसीदास जी को हम अथॉरिटी नहीं मानते

347
00:24:49,560 --> 00:24:53,560
वह मायावादी टाइप थे मायावादी नहीं बोला मायावादी टाइप

348
00:24:53,560 --> 00:24:57,640
फिर वल्लभाचार्य का वल्लभाचार्य जी को उन्होंने मायावती ओपनली

349
00:24:57,640 --> 00:25:01,760
कह दिया का पूरा हमारे पास वीडियो प्रूफ है व आपके साथ

350
00:25:01,760 --> 00:25:06,440
डिबेट करने आया था मतलब डिस्कशन करने आया था पीयूष

351
00:25:06,440 --> 00:25:10,600
पियूष वडवानी आए थे ना वो हमारे साथ जब बात कर रहे थे

352
00:25:10,600 --> 00:25:16,600
उनका पूरा क्लिप हम लोग का हम लोग का पास है कि वल्लभाचार्य मायावादी

353
00:25:17,360 --> 00:25:21,760
है तो य वैष्णव में भी भेद करते हैं

354
00:25:21,760 --> 00:25:26,000
हा तो अब यह देखिए कि यह किस प्रकार के वैष्णव है जो तुलसीदास

355
00:25:26,000 --> 00:25:30,000
जी को भी घृणा से देख रहे हैं तुलसीदास जी के लिए

356
00:25:30,000 --> 00:25:34,040
भी जो है वैमनस्यता का बीज बो रहे हैं लोगों के मन

357
00:25:34,040 --> 00:25:38,040
में यह वैष्णव नहीं है अगर इस प्रकार से कहा जा रहा है तो यह

358
00:25:38,040 --> 00:25:42,160
वैष्णव नहीं है अभी हम लोग वैष्णव कौन होते हैं इस पर भी बात करेंगे पर

359
00:25:42,160 --> 00:25:46,600
पहले जरा देख ले अब इन्होंने कृष्णा

360
00:25:46,600 --> 00:25:50,680
द सुप्रीम पर्सनालिटी ऑफ गॉड हेड में क्या लिखा है

361
00:25:50,680 --> 00:25:55,240
प्रभु श्री राम के बारे में कृष्णा बुक 47

362
00:25:55,240 --> 00:26:00,040
नंबर का चैप्टर है शायद को ये भी आपको मिल जाए जिसम

363
00:26:00,040 --> 00:26:04,040
की वो कहा गया है शील प्रभुपाद जी के संदर्भ से कहा गया

364
00:26:04,040 --> 00:26:08,160
मगर मुझे यह नहीं लगता है कि श प्रभुपाद जी का यह सब लिखा हुआ

365
00:26:08,160 --> 00:26:12,240
है क्योंकि उसमें भी बहुत सारी डाउट है ना कौन सी उनकी ऑथेंटिक

366
00:26:12,240 --> 00:26:16,440
गीता है बचा है कि नहीं उनके नाम से क्या क्या बदला गया है क्या

367
00:26:16,440 --> 00:26:20,560
क्या नहीं बदला गया हमको क्या पता अभ शल जी ऐसा लिख

368
00:26:20,560 --> 00:26:24,600
सकते मैं कभी नहीं मान सकता मगर उनके नाम से लिखा हुआ है अकॉर्डिंग

369
00:26:24,600 --> 00:26:28,840
टू स्कन क्या लिखा है ज सूपनखा

370
00:26:28,840 --> 00:26:33,000
उनके पास आई थी तो एक क्षत्रिय होते हुए

371
00:26:33,000 --> 00:26:37,760
उनको उसे सेटिस्फाइड करना चाहिए था हा हा

372
00:26:37,760 --> 00:26:42,080
मगर क्या किया उन्होंने उसकी नाक काट करके उसे

373
00:26:42,080 --> 00:26:46,760
एक अगली वुमन बना दिया अगली वुमन

374
00:26:46,760 --> 00:26:50,800
और इसका कारण क्या बताया कि ही वास सो अट्रैक्टेड बाय द

375
00:26:50,800 --> 00:26:54,880
ब्यूटी ऑफ सीता बोलिए मर्यादा पुरुषोत्तम राम

376
00:26:54,880 --> 00:26:59,400
के लिए इस प्रकार से नसता का भी

377
00:26:59,400 --> 00:27:03,880
भरा जा रहा है और यह वैष्णव है

378
00:27:03,880 --> 00:27:08,560
हरि हरि में भेद कर रहे हैं हरि हरि में भेद कर रहे हैं यह तो

379
00:27:08,560 --> 00:27:12,800
मैं पहली बार जब स्पन गया था 2018 में गया था और

380
00:27:12,800 --> 00:27:16,800
वहां पर कोई वो चल रही थी गीता क्लासेस टाइप की तो

381
00:27:16,800 --> 00:27:20,960
उसम मैंने पहली बार राम को ही लेकर के गया था राम को तो वहां

382
00:27:20,960 --> 00:27:25,680
पर जब उन्होंने पूछा कि धर्म क्या है तो मैंने हाथ उठाया

383
00:27:25,680 --> 00:27:29,760
बोले कि क्या है धर्म बताइए मैंने राम को फॉलो

384
00:27:29,760 --> 00:27:33,960
करना धर्म है बोले हां राम को फॉलो करना

385
00:27:33,960 --> 00:27:38,360
धर्म है और भगवान श्री कृष्ण को ओबे

386
00:27:38,360 --> 00:27:42,360
करना धर्म है हां मैंने कहा ये भी सही है राम को फॉलो

387
00:27:42,360 --> 00:27:47,200
कृष्ण को ओबे हां सही है अनुकरण अनुसरण ठीक

388
00:27:47,200 --> 00:27:48,200
है

389
00:27:48,200 --> 00:27:52,520
तो उस समय तक भी मेरे पास मेरे इर्दगिर्द ऐसे लोग थे

390
00:27:52,520 --> 00:27:56,600
जो मुझे पेन लेकर के समझाते थे कि राम जी 12 कला

391
00:27:56,600 --> 00:27:59,000
के क्यों

392
00:27:59,000 --> 00:28:03,120
और कृष्ण जी 16 कला के क्यों राम

393
00:28:03,120 --> 00:28:07,840
पूर्ण नहीं है कृष्ण जी पूर्ण है मगर उसके बाद क्या हुआ

394
00:28:07,840 --> 00:28:12,400
लहर आई प्रभु श्री राम की लहर आई और क्या होता है जो

395
00:28:12,400 --> 00:28:16,880
भाई मुझे नहीं पता कि उन्होंने ऐसा क्यों किया

396
00:28:16,880 --> 00:28:20,880
मगर मुझे नहीं पता कि उन्होंने ऐसा क्यों किया

397
00:28:20,880 --> 00:28:24,880
स्न वालों ने मगर क्या होता है कि जो बिजनेस पॉइंट ऑफ व्यू से अपना काम

398
00:28:24,880 --> 00:28:29,120
कर रहे होते हैं ना तो वो देखते हैं किस चीज की हर है उसके

399
00:28:29,120 --> 00:28:33,640
अनुसार अपने सिद्धांतों में चेंज करने लगते हैं तो जो स्न

400
00:28:33,640 --> 00:28:37,720
ये समझा रहा था एक समय प जो जो राम है वो 12 कलाक

401
00:28:37,720 --> 00:28:42,080
है और कृष्ण है जो 16 कलाक है कृष्ण जी श्रेष्ठ है राम जी

402
00:28:42,080 --> 00:28:46,200
थोड़ा है ठीक है वही वही राम वही राम

403
00:28:46,200 --> 00:28:50,280
का विरोध करने वाले वही राम के प्रति व मनता भरने वाले वही राम और

404
00:28:50,280 --> 00:28:54,280
कृष्ण में वो श्रेष्ठ निमता का भेद करने वाले उसके थोड़े

405
00:28:54,280 --> 00:28:58,400
दिनों बाद जब य राम मंदिर प्राण प्रा हुई तो यात्रा निकाल रहे तरह

406
00:28:58,400 --> 00:29:02,600
तरह से राम जी की बातें हो रही है जगह जगह सब कुछ होने लगा और राम

407
00:29:02,600 --> 00:29:03,240
और कृष्ण की

408
00:29:03,240 --> 00:29:07,240
एकता की बात होने लगी उस समय वरना आप लोगों को वो

409
00:29:07,240 --> 00:29:11,560
वीडियो याद होगा ना जिसम ये जो हमारे तुलसी पीठाधीश्वर

410
00:29:11,560 --> 00:29:15,760
जाने जाते हैं जो राम भद्राचार्य जी राम भद्राचार्य

411
00:29:15,760 --> 00:29:19,840
जी उन्होंने कहा था कि मां का दूध पिया हो तोन माता जी

412
00:29:19,840 --> 00:29:23,920
ने अगर नि से दूध पिलाया हो तो आकर के शास्त्रार्थ कर लो वो भी

413
00:29:23,920 --> 00:29:28,800
इस बात पर नाराज हुए थे कौन से जी है ना तो क्या है

414
00:29:28,800 --> 00:29:33,040
कि यह चीज थी ना करते थे ना ऐसे आज बदल गया क्योंकि

415
00:29:33,040 --> 00:29:37,160
आज राम जी की हवा ऐसी लहर ऐसी हुई तो लहर के साथ साथ थोड़ा सा

416
00:29:37,160 --> 00:29:41,520
अपने अंदर अपडेशन लाए जो भेद फैला रहे थे राम कृष्ण में

417
00:29:41,520 --> 00:29:45,960
वो भेद फैलाना कम कर दिया तो क्या हुआ वैष्णव को भी हीनता

418
00:29:45,960 --> 00:29:50,080
की दृष्टि से देखने वाले राम को हीनता की दृष्टि से देखने

419
00:29:50,080 --> 00:29:56,080
वाले प्रचारित प्रसारित करने वाले और उसके साथ ही साथ

420
00:29:59,280 --> 00:30:05,280
[संगीत]

421
00:30:11,600 --> 00:30:16,520
इसके साथ ही

422
00:30:16,520 --> 00:30:20,880
साथ इसके साथ ही साथ क्या है कि आपने भगवान

423
00:30:20,880 --> 00:30:23,840
विष्णु को भी नहीं

424
00:30:23,840 --> 00:30:28,080
छोड़ा वैष्णवास्त्र

425
00:30:28,080 --> 00:30:32,680
हमने कब कर दी मधवा चार्य जी की निंदा कब कर दी हमने रामानुजाचार्य जी की

426
00:30:32,680 --> 00:30:38,240
निंदा यह जो विष्णु की निंदा हो रही

427
00:30:38,240 --> 00:30:44,240
है भगवत गीता एस इट 2

428
00:30:47,960 --> 00:30:52,400
प2 यह देखिए भगवत गीता

429
00:30:52,400 --> 00:30:58,240
एस इट 2.2 इसमें क्या लिखा है इन्होने

430
00:30:58,240 --> 00:31:02,360
इसमें क्या लिख रहे हैं कि एकमात्र कृष्ण

431
00:31:02,360 --> 00:31:06,480
ही ऐसा दावा कर सकते हैं कि वह भगवान है

432
00:31:06,480 --> 00:31:10,680
कोई दावा करने की बात हो रही है उस पर कहा जा रहा है एक

433
00:31:10,680 --> 00:31:15,160
मात्र कृष्ण ही यह दावा कर सकते हैं कि वह भगवान है ब्रह्मा

434
00:31:15,160 --> 00:31:20,040
शिव या नारायण सहित कोई भी जीव नारायण

435
00:31:20,040 --> 00:31:24,520
विष्णु भगवान विष्णु भगवान भी

436
00:31:24,520 --> 00:31:28,800
पूर्ण ऐश्वर्य वान नहीं है कृष्ण के समान

437
00:31:28,800 --> 00:31:32,880
हरि हरि में भेद हो रहा है विष्णु और कृष्ण में भेद

438
00:31:32,880 --> 00:31:37,680
हो रहा है कृष्ण और राम में भेद हो रहा है

439
00:31:37,680 --> 00:31:42,000
प्रश्न करते हैं य

440
00:31:42,000 --> 00:31:44,880
ये

441
00:31:44,880 --> 00:31:48,880
जो इनको आप ते अब जरा वैष्णव

442
00:31:48,880 --> 00:31:53,080
की बात भी देख ले आप आप कुछ कह रहे थे

443
00:31:53,080 --> 00:31:57,080
बताइए जब हम प्रश्न करते हैं कि ऐसा भेद क्यों है ऐसे कैसे हो सकता

444
00:31:57,080 --> 00:32:02,040
है ईश्वर में नहीं आ सकता तब कहते कि यह अचिंत विषय

445
00:32:02,040 --> 00:32:06,160
है मल हमारी बात तो मानो तु

446
00:32:06,160 --> 00:32:10,280
मतलब क्या है कि हमारी बात तो मानो क्योंकि हम तुम्ह क्योंकि हमारी

447
00:32:10,280 --> 00:32:14,320
बात मानो क्योंकि हम तुम्ह प्रमाण दे रहे हैं और जब आप कोई तर्क

448
00:32:14,320 --> 00:32:18,320
करें प्रमाण अचत हर बात का अंत यही है अभी जब हम

449
00:32:18,320 --> 00:32:22,360
इंदौर में गए थे उनके साथ बात करने जो

450
00:32:22,360 --> 00:32:26,360
थोड़े वृद्ध थे जो पूरी नॉर्थ

451
00:32:26,360 --> 00:32:30,560
जो स्न एसोसिएशन उसके वो है सचिव है

452
00:32:30,560 --> 00:32:34,600
है ना वो बोले कि मेरे अंदर

453
00:32:34,600 --> 00:32:38,920
सवाल आते थे अपने को लेकर के सवाल यह चीज रिकॉर्ड नहीं हुई है मगर उन्होंने

454
00:32:38,920 --> 00:32:43,680
बोला था यह चीज रिकॉर्डेड नहीं है तो उन्होंने हमसे बोला

455
00:32:43,680 --> 00:32:47,760
कि भाई मेरे अंदर बहुत सारे सवाल आते थे अपने अपने को लेकर के ये

456
00:32:47,760 --> 00:32:52,080
को लेकर के वो को लेकर के लास्ट में जब हमारे बीच कन्वर्सेशन हुई

457
00:32:52,080 --> 00:32:56,200
जब हमने यह पूछा कि जिस प्रकार दूध से दही बन सकता है दही से दूध नहीं उसी

458
00:32:56,200 --> 00:33:00,200
प्रकार कृष्ण शिव बन सकते हैं मगर कृष्ण नहीं तो ये ईश्वर

459
00:33:00,200 --> 00:33:05,080
की सर्वशक्ति मत्ता भ भंग हो रही है यहां प तो बोले के ये तो अचिंत विषय

460
00:33:05,080 --> 00:33:09,880
तो क्या हुआ उनकी यात्रा कहां से शुरू हुई थी सवाल से

461
00:33:09,880 --> 00:33:14,520
जी सवाल के कारण वो पहुंचे उनके अनुसार प्रभुपाद जी के पास

462
00:33:14,520 --> 00:33:18,520
प्रभुपाद जी के पास जब वो पहुंचे तो उनको उनके सवालों के हल मिले

463
00:33:18,520 --> 00:33:22,760
और सवालों का हल क्या मिला अचिंत विषय यही

464
00:33:22,760 --> 00:33:26,880
तो हल मिला यही तो हल है जी

465
00:33:26,880 --> 00:33:31,400
कुछ मत पूछो सब गलत है मधवा चार्य का द्वैत गलत शंकराचार्य

466
00:33:31,400 --> 00:33:35,840
का द्वैत गलत और सही क्या है अचिंत

467
00:33:35,840 --> 00:33:40,040
अचिंत कुछ भी सोचना ही सही है कुछ भी ना सोचना सही

468
00:33:40,040 --> 00:33:44,120
है कुछ भी चिंतन मनन ना करना सही है अगर

469
00:33:44,120 --> 00:33:48,160
तुमने शंकराचार्य का वो कर लिया तो तुम गलत हो जाओगे तुमने मधवा चार्य का

470
00:33:48,160 --> 00:33:52,280
वो कर लिया फॉलो तो तुम गलत हो जाओगे तुलसीदास जी का कर लिया तो गलत हो जाओ

471
00:33:52,280 --> 00:33:56,280
वल्लभाचार्य जी का कर लिया तो तुम गलत हो जाओगे तो करें क्या कुछ मत

472
00:33:56,280 --> 00:34:00,760
करो यही सही है क्योंकि हम कह रहे हैं

473
00:34:00,760 --> 00:34:04,960
है ना ये वैष्णव है

474
00:34:04,960 --> 00:34:09,400
अब हम लोग पहले नियम जरा सा मैं बताना चाहूंगा वैष्णव

475
00:34:09,400 --> 00:34:15,400
के नियम क्या है शास्त्र

476
00:34:15,800 --> 00:34:19,800
समत जो भी बातें हमने अभी बोली है उनके लिंक डिस्क्रिप्शन में दिए

477
00:34:19,800 --> 00:34:23,840
गए हैं आप लोग वहां पर चेक कर सकते

478
00:34:23,840 --> 00:34:28,960
हैं जो भगवान विष्णु का भक्त होता है

479
00:34:28,960 --> 00:34:34,880
वो वैष्णव कहलाता है ठीक

480
00:34:34,880 --> 00:34:39,440
है जो भगवान विष्णु का भक्त होता है वह वैष्णव कहलाता है

481
00:34:39,440 --> 00:34:43,680
पद्म पुराण उत उत्तराखंड उत्तरखंड और

482
00:34:43,680 --> 00:34:47,760
8वा अध्याय दूसरा श्लोक ठीक है अब

483
00:34:47,760 --> 00:34:51,800
बात य आती है कि अगर आप विष्णु और

484
00:34:51,800 --> 00:34:55,880
कृष्ण में भेद नहीं मानते हो तब तो आप कृष्ण के रूप में अगर उसकी पूजा कर रहे हो तो

485
00:34:55,880 --> 00:35:00,000
तो ठीक है तो आप वैष्णवी हो मगर जब आप विष्णु को भी

486
00:35:00,000 --> 00:35:05,040
कृष्ण से अलग कर रहे हो तो फिर आप स्वयं को वैष्णव कैसे कह सकते

487
00:35:05,040 --> 00:35:09,360
हो फिर तो आप अपने आप को कृष्णव कहो क्रस्ट

488
00:35:09,360 --> 00:35:13,360
णव कहो क्योंकि कृष्ण और क्राइस्ट में कोई अंतर नहीं है तो आप अपने

489
00:35:13,360 --> 00:35:17,560
आप को वैष्णव कह लो है ना मगर आप वैष्णव कैसे कहोगे जब आपने

490
00:35:17,560 --> 00:35:21,840
विष्णु को वहां से अलग कर लिया और फिर विष्णु को नीचे कर दिया भेद करके

491
00:35:21,840 --> 00:35:26,120
नीचे भी कर दिया फिर भी आप उसको जो है कह रहे हो कि जो है हम वैष्णव

492
00:35:26,120 --> 00:35:30,520
है वैष्णव क्यों कहना क्योंकि पीछे से अपना जो

493
00:35:30,520 --> 00:35:31,020
कड़ी

494
00:35:30,880 --> 00:35:34,880
है वो जोड़ के रखनी है कड़ी को जोड़ने के बारे में भी समझ लीजिए

495
00:35:34,880 --> 00:35:39,680
इस्लाम की उत्पत्ति होती तो इस्लाम ईसा मसीह को छोड़ता नहीं है

496
00:35:39,680 --> 00:35:43,720
इस्लाम कहता है कि वो भी हमारे उन्होंने ही भेजा है उसी खुदा ने भेजा है उनको भी

497
00:35:43,720 --> 00:35:47,960
व छोड़ता नहीं अलग नहीं करता क्यों क्योंकि अगर उस समय जब

498
00:35:47,960 --> 00:35:52,000
वो उसम था जब वो खड़ा हो रहा था अपने पैरों पर उस समय

499
00:35:52,000 --> 00:35:56,440
अगर वो ये बात कहेगा कि मैं ईसा मसीह को नहीं मानता पहले वाले जो महापुरुष है उनको नहीं मानता

500
00:35:56,440 --> 00:36:00,800
या ईश्वर का स्वरूप है उनको नहीं मानता उसकी बात पर विश्वास कैसे हो

501
00:36:00,800 --> 00:36:04,920
इसके बाद क्या हुआ आज एक अपने आप में कल्ट है नया

502
00:36:04,920 --> 00:36:09,120
और सुनो तत्वदर्शी तथाकथित तत्वदर्शी रामपाल

503
00:36:09,120 --> 00:36:13,280
मैं भी पीछे वाले को मानता हूं राम को मानता हूं कृष्ण को मानता हूं

504
00:36:13,280 --> 00:36:17,400
उन सबके अनुसार शिक्षा यह है कि कबीर भगवान यह

505
00:36:17,400 --> 00:36:22,480
नहीं है कि मैंने मना कर दिया राम कृष्ण को मानने से पीछे वाले को पकड़ के रखना आवश्यक

506
00:36:22,480 --> 00:36:26,680
है शिक्षा नहीं देनी है मगर पीछे वाले

507
00:36:26,680 --> 00:36:30,760
के नाम से दे जिससे की हमारी शिक्षा लोग प्रामाणिक मान

508
00:36:30,760 --> 00:36:34,960
सके अरे भाई दो अपने को नया भगवान बनाओ कबीर

509
00:36:34,960 --> 00:36:39,200
को नया भगवान बनाओ या किसी को भी किसी भी तरीके के भगवान बनाओ सनातन शास्त्रों

510
00:36:39,200 --> 00:36:43,280
से तो मत जोड़ो अब जैसे आचार प्रशांत है वो य विचार

511
00:36:43,280 --> 00:36:46,520
फैला रहे होशो वाद फैला रहे हैं उन्होंने कह दिया उसमें

512
00:36:46,520 --> 00:36:50,640
क्या कहते हैं कि भाई जवाला को नहीं पता था कि

513
00:36:50,640 --> 00:36:55,080
उसके पुत्र के पिता का नाम क्या है जबक वहा पर गोत्र जो जवाला

514
00:36:55,080 --> 00:36:59,720
थी उनको गोत्र भूल गई थी वो उनको गोत्र स्मरण नहीं था जैसे हमारे घर की

515
00:36:59,720 --> 00:37:03,880
सामान्य मातृ शक्ति हो उनसे पूछा जाए भाई गोत्र क्या है प्रवर क्या है वेद

516
00:37:03,880 --> 00:37:08,000
कौन सा है तो हो सकता है कुछ कुछ चीजें उनको ना याद तो वो गोत्र उनका

517
00:37:08,000 --> 00:37:12,040
स्मरण नहीं था तो उन्होंने गोत्र के लिए ये बात कही आदि शंकराचार्य जी का उस

518
00:37:12,040 --> 00:37:16,320
पर भाष्य है आदि शंकराचार्य जी ने तो कहीं पर कुल और गोत्र की बात को मना नहीं कर दिया

519
00:37:16,320 --> 00:37:20,520
और वो आदि शंकराचार्य जी को फॉलो करने की बात करते हैं मगर क्या हुआ

520
00:37:20,520 --> 00:37:24,760
कि सामने वाले को संतुष्ट करना है अपने श्रोता को श्रोता को कुछ ऐसी

521
00:37:24,760 --> 00:37:28,920
बात बतानी है जो आज तक किसी ने ना बताई बिल्कुल नई बात

522
00:37:28,920 --> 00:37:33,000
बता दे अब उससे होता क्या है नई बात बतानी है बताओ

523
00:37:33,000 --> 00:37:37,080
अगर उपनिषद से जोड़ के बता रहे हो कह दो मेरे पास कोई फरिश्ता आया

524
00:37:37,080 --> 00:37:41,920
था रात में उसने कहा है कह दो ना

525
00:37:41,920 --> 00:37:46,600
सनातन की आड़ में क्यों बताते हो दिक्कत य है तो अब क्या है

526
00:37:46,600 --> 00:37:50,680
कि विष्णु का भक्त ही वैष्णव है तो अगर आप यह कह रहे

527
00:37:50,680 --> 00:37:54,680
हो कि विष्णु कृष्ण से निम्नतम है और कृष्ण

528
00:37:54,680 --> 00:37:58,800
की हम पूजा करते हैं कृष्ण को हम मानते हैं उस कृष्ण को से विष्णु अलग है

529
00:37:58,800 --> 00:38:01,640
तो फिर आप वैष्णव कैसे हुए

530
00:38:01,640 --> 00:38:05,840
तो इसलिए वैष्णव को पकड़े हुए हैं आप क्योंकि वैष्णव परंपराएं हैं

531
00:38:05,840 --> 00:38:10,440
उस परंपरा से अपने को जोड़ना है परंपरा की बात अगर आती है तो हम

532
00:38:10,440 --> 00:38:14,520
जान लेते हैं मवार जी की जो परंपरा

533
00:38:14,520 --> 00:38:19,240
है वह स्टार्ट होती है हंस भगवान से

534
00:38:19,240 --> 00:38:23,280
मधवा चार जी की परंपरा मेरे पास ऑफिशियल उनकी परंपरा आई है

535
00:38:23,280 --> 00:38:27,720
तो ह हंस भगवान से वो मानते हैं य

536
00:38:27,720 --> 00:38:31,920
कृष्ण से मानते क्या हुआ यह वो परंपरा नहीं है जो मधवा

537
00:38:31,920 --> 00:38:36,360
चार्य जी की परंपरा है और मधवा चार्य जी ने भी भाष्य लिखा भागवत

538
00:38:36,360 --> 00:38:40,840
पर श्रीमद भागवत महापुराण भाष्य लिखा और

539
00:38:40,840 --> 00:38:44,960
श्रीधर स्वामी ने भी लिखा जो अपने समय के शंकराचार्य थे मगर

540
00:38:44,960 --> 00:38:49,160
चैन महाप्रभु ने तो उनको माना श्रीधर स्वामी को क्यों जाना पड़ रहा है भागवत

541
00:38:49,160 --> 00:38:55,160
पढ़ने के लिए आपको अकी परंपरा से बाहर परंपरा से प्राप्त नहीं हुआ क्या

542
00:38:55,160 --> 00:38:59,160
भागवत वो भी नहीं है हा

543
00:38:59,160 --> 00:39:03,440
रियल इंटेंशन का शॉर्ट वीडियो देख लिया है मार्तंड जी और उसका

544
00:39:03,440 --> 00:39:07,440
यथोचित समाधान भी कर दिया है जो उत्तर आपको दिया है ना उसी की

545
00:39:07,440 --> 00:39:13,440
व्याख्या करते हुए उनको अच्छा सा उत्तर दिया है देखिएगा आएगा एक दो

546
00:39:13,520 --> 00:39:16,840
दिन तो अब वैष्णव कौन होता है

547
00:39:16,840 --> 00:39:20,920
जो विष्णु की भक्ति करे पदम पुराण के अनुसार तो जब ये

548
00:39:20,920 --> 00:39:25,200
कृष्ण को विष्णु से अलग करके वो कर रहे हैं तो य वैष्णव कैसे

549
00:39:25,200 --> 00:39:30,960
यह सब सवाल है प्रश्न अब आ जाते हैं इस पर

550
00:39:30,960 --> 00:39:35,040
भैया हेलो जी एक

551
00:39:35,040 --> 00:39:41,040
बस एक ये बात अपनी पूरी कर

552
00:39:49,440 --> 00:39:54,480
ल क्या वैष्णव अव है ये कौन लिख रहे

553
00:39:54,480 --> 00:39:59,360
हैं क्या वैष्णव अव है यह कौन लिख रहे

554
00:39:59,360 --> 00:40:04,080
हैं यह लिख रहे हैं श्री माधवाचार्य शास्त्री

555
00:40:04,080 --> 00:40:09,960
जी रामानुजाचार्य परंपरा से

556
00:40:09,960 --> 00:40:14,400
और इसमें यह पृष्ट संख्या है क्यों

557
00:40:14,400 --> 00:40:20,400
में दो

558
00:40:21,800 --> 00:40:26,480
69 यह देखिए चैप्टर है पूरा

559
00:40:26,480 --> 00:40:29,200
क्या वैष्ण

560
00:40:29,200 --> 00:40:33,480
अव है मतलब क्या जो वैष्णव है वो शैव

561
00:40:33,480 --> 00:40:37,960
नहीं है या फिर जो शैव है वो वैष्णव नहीं है परंपरा प्राप्त

562
00:40:37,960 --> 00:40:42,360
आचार्य परंपरा प्राप्त क्या है

563
00:40:42,360 --> 00:40:46,680
जैसे शंकर मत में नारायण की प्रधानता है इसीलिए

564
00:40:46,680 --> 00:40:51,480
उन्हें कथम प अ वैष्णव नहीं कहा जा सकता

565
00:40:51,480 --> 00:40:55,920
ठीक इसी प्रकार श्री संप्रदाय परंपरा में ना

566
00:40:55,920 --> 00:41:00,320
वैष्णवास्त्र के अनुसार शंकर भगवान को ही प्रधान वैष्णव

567
00:41:00,320 --> 00:41:04,360
के रूप में स्वीकार किया जाता है तो यह भी यहां पर शव और वैष्णव की

568
00:41:04,360 --> 00:41:08,640
एकता की बात कर रहे हैं शव और वैष्णव में कोई अंतर नहीं है

569
00:41:08,640 --> 00:41:12,960
और अब शंकर परंपरा के आचार्य क्या कह रहे हैं इस बारे में वो भी देख

570
00:41:12,960 --> 00:41:17,360
लीजिए जी भक्ति सुदा इसीलिए

571
00:41:17,360 --> 00:41:21,440
मैंने व पांच जो ग्रंथ बताए ना व इसीलिए बताए पांच ग्रंथ पांच

572
00:41:21,440 --> 00:41:24,960
ग्रंथ आप सबको जरूर पढ़ने चाहिए कौन-कौन से

573
00:41:24,960 --> 00:41:29,480
हैं रामचरित मानस भव गीता ज्ञानेश्वरी

574
00:41:29,480 --> 00:41:33,560
और दास बोध समर्थ राम दास जी का भक्ति सुदा और

575
00:41:33,560 --> 00:41:37,640
गर्व से कहो हम हिंदू है ये पांच ग्रंथ आपको पढ़ने

576
00:41:37,640 --> 00:41:41,720
चाहिए इसमें सब कुछ मिल जाएगा आपको लगभग ये

577
00:41:41,720 --> 00:41:45,840
देखिए शिव और विष्णु में अभेद बुद्धि ये सिखाया जाता है हमें शिव

578
00:41:45,840 --> 00:41:50,200
और विष्णु में अभेद बुद्धि शिव और विष्णु में अंतर

579
00:41:50,200 --> 00:41:54,200
करने वाले नहीं है अब जिसका इस

580
00:41:54,200 --> 00:41:58,280
अभेद बुद्धि इसके प्रतिकार स्वरूप अस्तित्व है उसको

581
00:41:58,280 --> 00:42:02,360
तो हमसे दिक्कत होगी ना भाई रियल इंटेंशन वाले ने आज एक बात

582
00:42:02,360 --> 00:42:06,360
कही कि भाई क्या मैं हिंदू तभी कहला

583
00:42:06,360 --> 00:42:11,200
हंगा जब मैं जो है शाक की बुराई करूं वैष्णव की बुराई करूं

584
00:42:11,200 --> 00:42:15,600
या शैव की बुराई करूं या साकार वालों की बुराई करूं

585
00:42:15,600 --> 00:42:19,720
या निराकार वालों की बुराई करूं मैं तभी हिंदू कहला उंग कट्टर तो

586
00:42:19,720 --> 00:42:23,760
भाई अगर तुम इन सबकी बुराई नहीं कर रहे हो तो तुम तो हमारी तरफ खड़े

587
00:42:23,760 --> 00:42:27,800
हो जी हम तो उनको प्रश्न कर रहे हैं

588
00:42:27,800 --> 00:42:32,480
जो ऐसे व्यक्ति की बुराई करता है जो किसी की बुराई नहीं

589
00:42:32,480 --> 00:42:38,480
करता और

590
00:42:40,080 --> 00:42:44,160
पंतवाड़ी सबसे बड़े हैं निराकार की

591
00:42:44,160 --> 00:42:48,200
ही पूजा सही है राम लीला देखना पाप है मूर्ति पूजा करना

592
00:42:48,200 --> 00:42:52,720
अधर्म है अकॉर्डिंग टू आर्य समाज अगर

593
00:42:52,720 --> 00:42:56,720
कोई ऐसे कह रहा है और आप ये कह रहे हो नहीं नहीं मूर्ति पूजा भी गलत नहीं

594
00:42:56,720 --> 00:43:00,720
है शिव भी बड़े हैं विष्णु भी बड़े हैं तो आप भी अपने आप में

595
00:43:00,720 --> 00:43:04,800
एक पंथ वाले बन गए आपने सबको मानने

596
00:43:04,800 --> 00:43:09,160
वाला पंथ तैयार कर दिया अब

597
00:43:09,160 --> 00:43:13,200
क्योंकि जिनका अस्तित्व ही सबको ना मानने में है जिनका

598
00:43:13,200 --> 00:43:17,280
अस्तित्व ही सबको मानने के विरोध में है तो उनके तो ना चाहते हुए भी आप

599
00:43:17,280 --> 00:43:21,400
अपोजिट आ गए ना र हमने

600
00:43:21,400 --> 00:43:26,160
एक अच्छा सा इस बारे में उत्तर दिया है तो इसमें भगवान

601
00:43:26,160 --> 00:43:30,840
शिव और विष्णु में अभेद बुद्धि बता रहे हैं करपात्री जी महाराज भक्ति सुदा में

602
00:43:30,840 --> 00:43:35,240
कि क्यों अभेद बुद्धि होनी चाहिए 601 नंबर प्र

603
00:43:35,240 --> 00:43:41,240
भक्ति

604
00:43:50,160 --> 00:43:56,160
सुदा वैष्णवास्त्र

605
00:43:58,650 --> 00:44:03,920
[संगीत]

606
00:44:03,920 --> 00:44:08,480
ये ये पूरा प्रमाण के साथ में बता रहे हैं कि क्यों अभेद बुद्धि

607
00:44:08,480 --> 00:44:12,800
रखनी चाहिए शिव और विष्णु में ठीक

608
00:44:12,800 --> 00:44:17,200
है और सावधान होकर सुनो

609
00:44:17,200 --> 00:44:21,320
हे ध्रुव तुम महामति हो स्कंद पुराण की बात हैय

610
00:44:21,320 --> 00:44:26,120
और काशी खंड की काशी खंड है स्कंद पुराण का

611
00:44:26,120 --> 00:44:30,400
उसमें क्या हो रहा है तुम महामति हो सावधान होकर सुनो मैं तुम्हारे

612
00:44:30,400 --> 00:44:34,400
हित की बात कहता हूं जिससे तुम्हारा स्थान अत्यंत अचल हो जाएगा

613
00:44:34,400 --> 00:44:38,880
मोक्ष दाता साक्षात भगवान श्री विश्वनाथ जी हैं

614
00:44:38,880 --> 00:44:43,520
यह कौन कह रहे हैं विष्णु भगवान कह रहे हैं

615
00:44:43,520 --> 00:44:47,600
मोक्ष दाता साक्षात भगवान श्री विश्वनाथ जी हैं उस परम

616
00:44:47,600 --> 00:44:52,320
पवित्र काशीपुरी को मैं जाना चाहता हूं इस तरह का यहां पर इन्होंने वर्णन

617
00:44:52,320 --> 00:44:56,360
दिया और फिर आगे बहुत सारी चीजें इन्होंने बताई अभेद

618
00:44:56,360 --> 00:45:00,240
बुद्धि के बारे में तो आप लोगों को ये पढ़ना

619
00:45:00,240 --> 00:45:04,240
चाहिए ब्रह्मा विष्णु और रुद्र में भेद भाव नहीं

620
00:45:04,240 --> 00:45:05,800
रखना

621
00:45:05,800 --> 00:45:10,560
चाहिए क्योंकि सच्चिदानंद स्वरूप एक ही तत्व

622
00:45:10,560 --> 00:45:15,000
है बहुत सारे सैकड़ों शास्त्र वचन है तो

623
00:45:15,000 --> 00:45:19,360
शंकराचार्य के आचार्य भी सिखा रहे हैं अभेद बुद्धि रखना और

624
00:45:19,360 --> 00:45:25,360
वैष्णवास्त्र

625
00:45:27,000 --> 00:45:31,000
जन्म से मानते हैं कि कर्म से मानते हैं जन्म

626
00:45:31,000 --> 00:45:36,320
से तो कैसे परंपरा प्राप्त हो गया इनका ज्ञान

627
00:45:36,320 --> 00:45:40,560
तो यह सारी चीजें हैं कि वैष्णव कौन

628
00:45:40,560 --> 00:45:44,760
है यह पहले पता करिए वैष्णव कौन है केवल अपने

629
00:45:44,760 --> 00:45:48,760
आप को वैष्णव कह लेने से काम नहीं चलेगा अगर हिंदू कोई

630
00:45:48,760 --> 00:45:52,760
है व निठारी कांड में वो बच्चे खा रहा है कुकर में उबाल उबाल करके तो

631
00:45:52,760 --> 00:45:58,120
उसको भी हिंदू कहेंगे क्या कि वो हिंदू है उससे मत भिड़ो

632
00:45:58,120 --> 00:46:02,320
तो पहले वैष्णव कौन है यह हमें जानना पड़ेगा तब

633
00:46:02,320 --> 00:46:06,880
यह सोचना पड़ेगा कि हम वैष्णव का विरोध कर रहे हैं कि नहीं कर

634
00:46:06,880 --> 00:46:11,200
रहे जी आप कुछ कह रहे भैया

635
00:46:11,200 --> 00:46:15,200
आपने बताया ना जो कृष्ण को मानने वाले

636
00:46:15,200 --> 00:46:19,240
कार्स होते हैं यह अमोग लीला प्रभु

637
00:46:19,240 --> 00:46:20,840
ने भी माना है जो कृष्ण के

638
00:46:20,840 --> 00:46:26,840
पूजा करते वह काशव होते वैष्णव अलग लोग होते हैं

639
00:46:30,080 --> 00:46:34,480
ये क्या बोल रहे हैं एक मिनट यह वाला जो

640
00:46:34,480 --> 00:46:40,480
कमेंट है इसको जरा ध्यान रखिएगा इसका मैं आंसर दूंगा और

641
00:46:40,760 --> 00:46:45,000
कुमार कांति रव जी आंसर दूंगा जी बोलिए

642
00:46:45,000 --> 00:46:49,040
आप क्या कह रहे हैं सर आपने बताया

643
00:46:49,040 --> 00:46:53,360
ना जो कृष्ण को मानने वाले कार् णव होते है वैष्णव अलग होते है यह बात

644
00:46:53,360 --> 00:46:57,440
इसकन में माना जाता है अच्छा हां कहीं पर कहा

645
00:46:57,440 --> 00:47:03,120
भी है ऐसा मैंने सुना है प्रभु ने भी कहा है पूरा

646
00:47:03,120 --> 00:47:07,240
वीडियो जी कहा है ऐसा सुना है अभी

647
00:47:07,240 --> 00:47:11,360
वो रजिस्ट नहीं है कुछ सालो में जब फलने फलने देंगे तो हो जाएगा रजिस्टर्ड हम

648
00:47:11,360 --> 00:47:15,360
तो कृष्णव वैष्णव नहीं है अभी वो रजिस्टर नहीं है थोड़े दिनों में

649
00:47:15,360 --> 00:47:20,000
हो जाएगा र जी ठीक है

650
00:47:20,000 --> 00:47:24,040
जाता है हा हो सकता है अंदर से सिखाया भी जाता

651
00:47:24,040 --> 00:47:28,280
हो मेरे तो कई परिचित वाले हैं जोन से जुड़े हुए हैं तो सूचनाएं

652
00:47:28,280 --> 00:47:33,000
मुझे भी प्राप्त होती रहती है क्या हो रहा है क्या नहीं हो रहा है और

653
00:47:33,000 --> 00:47:36,080
कुल मिलाकर के हमारा जो प्रश्न होता है हमारी

654
00:47:36,080 --> 00:47:40,160
जो चर्चाएं होती है वो केवल इस बात के निमित्त होती है कि गलत

655
00:47:40,160 --> 00:47:44,160
बातें क्यों फैलाई जा रही है सनातन शास्त्रों के नाम पर आपका कहना ये

656
00:47:44,160 --> 00:47:48,200
है कि हम विदेशों में जाकर प्रचार करते हैं करो हम मुस्लिमों को हिंदू

657
00:47:48,200 --> 00:47:52,480
बनाते बनाओ अरे भैया तो जब आप किसी परिस्थिति

658
00:47:52,480 --> 00:47:56,600
वस कोई बात बोल रहे हो तो उसको सनातन का चोला क्यों पहना रहे

659
00:47:56,600 --> 00:48:01,400
हो सनातन तो परिस्थिति बस नहीं ना वो तो नित्य है

660
00:48:01,400 --> 00:48:05,560
ना खैर मुझे लगता है हमारी चर्चा काफी

661
00:48:05,560 --> 00:48:10,680
अच्छी रही आप लोगों को कोई और विचार अगर प्रकट करना है तो

662
00:48:10,680 --> 00:48:14,960
बताए देखिए अगर इनको अगर संभालना

663
00:48:14,960 --> 00:48:19,560
है इनको अगर समझाना है तो हम शास्त्र से अगर इनको बोलेंगे तो यह मानेंगे नहीं

664
00:48:19,560 --> 00:48:23,720
क्योंकि शास्त्र हम अलग नजरिया से बोल वो अलग नजरिया से समझ

665
00:48:23,720 --> 00:48:28,000
अल है इंटरप्रिटेशन अलग है इसलिए तो हम

666
00:48:28,000 --> 00:48:32,040
हमें यह कोशिश मेरे ख्याल से कि हमें यह कोशिश करनी

667
00:48:32,040 --> 00:48:36,480
चाहिए कि शास्त्र से उनको ना हराए लॉजिक से उनको हरा दे देख

668
00:48:36,480 --> 00:48:40,720
ह हराने की तो कोई बात ही नहीं है हराने की कोई बात ही नहीं है हराना

669
00:48:40,720 --> 00:48:44,800
नहीं है केवल हमें शोधन करना है हराने और व जीतने

670
00:48:44,800 --> 00:48:49,040
हरने की कोई भावना नहीं है मगर हा जो बात आप कह रहे हो अभी परसों के दिन

671
00:48:49,040 --> 00:48:51,160
जो दो चार दिन पहले वो

672
00:48:51,160 --> 00:48:55,720
जो एक बालक आया था भव्य राधा कृष्ण दास

673
00:48:55,720 --> 00:48:59,960
तो उसके साथ यही हो रहा था जब मैं वह मानता है

674
00:48:59,960 --> 00:49:04,200
प्रमाण जब मैं प्रमाण देता हूं इंटरप्रिटेशन तो प्रमाण की आवश्यकता ही नहीं रह गई

675
00:49:04,200 --> 00:49:08,240
क्योंकि इंटरप्रिटेशन अब वो कहे वो इंटरप्रिटेशन दो जिसको मैं मानता हूं तो

676
00:49:08,240 --> 00:49:12,240
वो तो भैया आप ही के आचार्यों की होगी फिर तो बात ही खत्म हो गई जी तो प्रमाण

677
00:49:12,240 --> 00:49:16,360
की बात ही नहीं हो सकती है जब जब आप जो है इंटरप्रिटेशन अलग अलग है आप लोगों

678
00:49:16,360 --> 00:49:20,360
के ठीक है अच्छा मैं एक इनका

679
00:49:20,360 --> 00:49:26,360
क्वेश्चन ले लू

680
00:49:29,600 --> 00:49:34,000
स्वामी नारायण को भगवान का अवतार नहीं माना गया परंपरा

681
00:49:34,000 --> 00:49:38,280
प्राप्त आचार्यों के द्वारा भगवान

682
00:49:38,280 --> 00:49:44,080
का अवतार नहीं माना गया है परंपरा प्राप्त आचार्यों के

683
00:49:44,080 --> 00:49:50,000
द्वारा अच्छा वह जो प्रश्न था मैं उसका उत्तर दे

684
00:49:50,000 --> 00:49:54,000
दूं हां बिल्कुल कुमार जी तो यह

685
00:49:54,000 --> 00:49:58,040
मैंने नहीं कहा है एक वो जो कमेंट था जो मैंने

686
00:49:58,040 --> 00:50:04,040
कहा था इसको हाईलाइट

687
00:50:06,520 --> 00:50:12,520
करिए वो कमेंट कौन सा था उसको जरा हाईलाइट

688
00:50:16,320 --> 00:50:20,440
करिए हां शो मी वेयर डिड ऋषि आस्क

689
00:50:20,440 --> 00:50:24,600
सत्यकाम फॉर गोत्र यू आर रंग देखिए ऋषि ने

690
00:50:24,600 --> 00:50:28,720
तो सत्यकाम जी से यह कहा था कि आपका

691
00:50:28,720 --> 00:50:34,400
गोत्र क्या है क्योंकि उनका जो सं संवर्थ संस्कार इत्यादि है वो उन्हें करना

692
00:50:34,400 --> 00:50:38,480
था मगर कहा ये गया है आचार्य प्रशांत

693
00:50:38,480 --> 00:50:43,320
के द्वारा तथाकथित आचार्य नहीं तथाकथित

694
00:50:43,320 --> 00:50:47,560
स्वघोषित आचार्य प्रशांत के द्वारा कहा यह गया है

695
00:50:47,560 --> 00:50:51,640
कि भाई जब सत्यकाम ने

696
00:50:51,640 --> 00:50:55,640
पूछा अपनी मां जबाला से कि भाई वो मेरे

697
00:50:55,640 --> 00:50:59,840
पिता कौन है तो उन्होंने कहा मुझे नहीं मालूम तेरे पिता कौन है यह

698
00:50:59,840 --> 00:51:03,920
वर्ड है बल्कि पिता नहीं मेरा बाप कौन है तो उन्होने कहा तेरा बाप कौन है मुझे

699
00:51:03,920 --> 00:51:08,000
नहीं ये वर्ड है आज तथाकथित आचार्य प्रशांत के उसका हमने

700
00:51:08,000 --> 00:51:12,440
रेपन बनाया है बना दिया है व एक दो दिन में आ जाएगा

701
00:51:12,440 --> 00:51:16,600
मगर बात वहां पर क्या पूछी गई थी छंद उपनिषद में चौथे

702
00:51:16,600 --> 00:51:20,680
अध्याय में चौथे खंड में क्या बात पूछी गई है वहां पूछा यह गया है

703
00:51:20,680 --> 00:51:21,600
कि जबाला

704
00:51:21,600 --> 00:51:25,680
से सत्यकाम उनके पुत्र पूछते हैं कि मेरा गोत्र क्या है वो कहती

705
00:51:25,680 --> 00:51:29,800
मुझे गोत्र स्मरण नहीं है मैं इतना ग्रहस्ती के कार्य में थी वो गोत्र को पिता

706
00:51:29,800 --> 00:51:33,880
का नाम बना दिया क्यों क्योंकि सामने बैठी हुई कोई मातृ शक्ति रही होगी जिसने ऐसा

707
00:51:33,880 --> 00:51:37,960
कहा कि भाई मेरे मेरे इतने सारे संबंध हो चुके हैं मैं इतने लोगों को डेट कर

708
00:51:37,960 --> 00:51:42,160
चुकी हूं तो उन्होंने उसको सही करने के लिए यहां जबाला और सत्य काम के ऊपर

709
00:51:42,160 --> 00:51:46,320
ये दोष मर दिया हमारे उपनिषदों के ऊपर दोष मर दिया यह होता

710
00:51:46,320 --> 00:51:50,640
है जब हम परंपरा प्राप्त किस के बाहर परंपरा के बाहर

711
00:51:50,640 --> 00:51:54,800
किसी को भी अनुमति दे देते हैं कि जाओ शास्त्रों की जाकर व्याख्या करो

712
00:51:54,800 --> 00:51:59,720
ठीक है और किसी को क्वेश्चन अगर कोई पूछना है तो

713
00:51:59,720 --> 00:52:05,720
पूछे हां जी बोलिए कुछ बोलना चाहते हैं आप

714
00:52:06,800 --> 00:52:11,080
लोग भैया वह जो क्वेश्चन था ना जीवात्मा कैसे आए

715
00:52:11,080 --> 00:52:15,120
वैकुंठ से इकन के ऊपर इकन के अंदर

716
00:52:15,120 --> 00:52:19,320
दो तरह के बिलीव्स रहते हैं एक मानते हैं कि हम वहां अपराध

717
00:52:19,320 --> 00:52:23,360
करके आए और एकते और एक कहते हैं कि हम कभी

718
00:52:23,360 --> 00:52:27,640
वैकुंठ में थे ही नहीं हम यहां नित्य बद्ध है और और वैकुंठ वाले नित्य

719
00:52:27,640 --> 00:52:31,680
मुक्त है अच्छा इसका

720
00:52:31,680 --> 00:52:35,760
पूरा वीडियो प्रूफ है मतलब इकोन द्वारका का जो प्रशांत मुकुंद प्रभु

721
00:52:35,760 --> 00:52:40,160
है इसको अमोग लीला प्रभु के साथ ही रहते वो

722
00:52:40,160 --> 00:52:44,240
उनका पूरा वीडियो लिंक है मतलब

723
00:52:44,240 --> 00:52:48,240
क्या ये जो बद्ध वाले लोग है कभी मुक्ति नहीं प्राप्त कर पाएंगे

724
00:52:48,240 --> 00:52:52,360
त बद्ध ऐसा नहीं है लेकिन वहां माना जाता है एक

725
00:52:52,360 --> 00:52:56,720
पॉइंट एक बिलीफ कहता है कि हम लोग वहां से ही आए हैं और एक कहते है कि हम

726
00:52:56,720 --> 00:53:00,800
नित्य बद्ध इधर ही है हम कभी वैकुंठ गए नहीं लेकिन अगर हम साधना

727
00:53:00,800 --> 00:53:04,960
करें तो पहुंच जाएंगे ऐसा पॉइंट है लेकिन यहां पर भी तो क्वेश्चन आ जाता है ईश्वर

728
00:53:04,960 --> 00:53:09,200
तो किसी के लिए अनइक्वल नहीं है वो तो सबको एक ही रखेंगे या फिर सबको

729
00:53:09,200 --> 00:53:15,200
इस पार की सबको इस पार रखेंगे ईश्वर तो अनइक्वल नहीं हो

730
00:53:20,360 --> 00:53:24,720
सकते और यहां एक और माना जाता है जो जीवात्मा

731
00:53:24,720 --> 00:53:29,080
भगवान के साथ नित्य है भगवान जैसे सनातन है जीवात्मा भी सनातन

732
00:53:29,080 --> 00:53:33,200
है लेकिन उसी वीडियो में कहा गया है नित्य बध वाले वीडियो में कि

733
00:53:33,200 --> 00:53:38,640
जीवात्मा का उत्पत्ति होता है कारण सागर कारण सागर

734
00:53:38,640 --> 00:53:43,200
से यह भी कांट्रडिक्शन है बहुत सारे कांट्रडिक्शन है इसकन के अगर

735
00:53:43,200 --> 00:53:47,360
च कशन की बात य है वो तो उनके आगे जो प्रामाणिक

736
00:53:47,360 --> 00:53:51,560
गण होंगे जो उनके अनुसार होंगे शायद ज्यादातर उनके पास आंसर हू

737
00:53:51,560 --> 00:53:55,600
मगर जो मुख्य मोटी बात है कि गोलोक धाम में भी कुंठा

738
00:53:55,600 --> 00:54:00,400
है बैकुंठ में भी कुंठा है तो ये एक बड़ी बात जानने को मिली

739
00:54:00,400 --> 00:54:04,720
तुलसीदास जी भी वैष्णव नहीं है यह बड़ी बात जानने को मिली और

740
00:54:04,720 --> 00:54:09,000
राम जी ने भी वो नहीं किया जो उन्हें करना चाहिए था ये भी ध्यान रखिए

741
00:54:09,000 --> 00:54:13,160
मर्यादा पुरुषोत्तम राम ने भी मर्यादा का उल्लंघन कर दिया वो नहीं

742
00:54:13,160 --> 00:54:17,320
किया जो उन्हें करना चाहिए था जो करना चाहिए वो धर्म है मर्यादा

743
00:54:17,320 --> 00:54:21,960
है अगर हम वो नहीं कर रहे तो मर्यादा का उल्लंघन हो गया

744
00:54:21,960 --> 00:54:25,360
तो ये है

745
00:54:25,360 --> 00:54:30,320
और और एक लास्ट पॉइंट मैं बोलूं भैया जी जी बोलिए

746
00:54:30,320 --> 00:54:34,600
बोलिए जो मानते हैं कि हम वहां पर अपराध करके आए हैं गोलोक से

747
00:54:34,600 --> 00:54:38,760
वो लोग मानते हैं कि पहले हम गोलोक में थे वहां पर अपराध करके हम

748
00:54:38,760 --> 00:54:42,760
दूसरे किसी वैकुंठ में गए मतलब कोई लोअर वैकुंठ गोलोक से लोअर

749
00:54:42,760 --> 00:54:46,800
फिर धीरे-धीरे आते-आते हम लोएस्ट जो है नारायण का वैकुंठ ये लोग

750
00:54:46,800 --> 00:54:50,960
मानते हैं वहां है फिर धीरे हम ब्रह्मा जी के लोक में गए फिर देवताओं

751
00:54:50,960 --> 00:54:55,120
के आए फिर आते था मनुष्य में ऐसे ये पूरा सीरीज वो लोग लगा दिए कि

752
00:54:55,120 --> 00:55:01,120
कैसे कैसे हम अपराध करके नीचे आए

753
00:55:01,120 --> 00:55:05,240
जी बहुत सारी चीजें हैं वैष्णव कौन है ठीक

754
00:55:05,240 --> 00:55:09,360
है तो आप लोगों से बात करके अच्छा लगा आप लोग आए और अभी आप क्या कर रहे

755
00:55:09,360 --> 00:55:13,920
हैं मतलब आप कौन से पथ को फॉलो कर रहे हैं किस आचार्य

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00:55:13,920 --> 00:55:18,000
मैं नाम जब करता हूं और शंकराचार्य को ही मानता हूं अच्छा अब

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00:55:18,000 --> 00:55:22,960
आप शंकराचार्य को मानते हैं और आप कब से कब तक रहे थोड़ा डेट वगैरह बताएंगे स्थान

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00:55:22,960 --> 00:55:28,120
वगैरह कहां पे थे आप इस कौन से जब जुड़े थे

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00:55:28,120 --> 00:55:32,280
मैं जन्म सेही कोलकाता में रहता हूं इकन में मैं जॉइन

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00:55:32,280 --> 00:55:36,400
हुआ था मैं और मेरा भाई एक साथ 2000 22 में हा

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00:55:36,400 --> 00:55:41,040
2022 से 23 का अंत तक 24 में हम लोग

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00:55:41,040 --> 00:55:45,040
छोड़ दिए व जो जिस मंदिर में आप जुड़े थे उस मंदिर

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00:55:45,040 --> 00:55:49,240
का क्या नाम था इकन कोलकाता मिंटो पार्क

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00:55:49,240 --> 00:55:53,760
इकन कोलकाता विंडो पर बहुत बढ़िया वहा के वाइस प्रेसिडेंट थे

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00:55:53,760 --> 00:55:57,800
वहां के जो वाइस प्रेसिडेंट थे उनके साथ जो भी रहते थे उनके वाइस प्रेसिडेंट

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00:55:57,800 --> 00:56:01,880
को भी हमने पूछा था वो राधानाथ स्वामी जी के शिष्य हैं उनसे

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00:56:01,880 --> 00:56:05,960
भी हमने ये सवाल पूछा था उन्होंने कहा कि इसकन के पास यह क्वेश्चन का आंसर है नहीं

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00:56:05,960 --> 00:56:10,640
यह उन्होंने खुद के पर्सनल असिस्टेंट को कहा था हमको नहीं कहा था

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00:56:10,640 --> 00:56:14,680
लेकिन हो सकता है सही कह रहे हैं कि ये इसका आंसर

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00:56:14,680 --> 00:56:16,200
नहीं है इसकन के

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00:56:16,200 --> 00:56:20,440
किसी के किसी के पास भी नहीं है इसकन में क्योंकि ये कांट्रडिक्शन बात है तो

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00:56:20,440 --> 00:56:24,440
वो व्यक्ति की यात्रा शुरू होती है ना सवाल पने से उसकी यात्रा खत्म होती है

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00:56:24,440 --> 00:56:28,640
अचिंत प पूरा काप है यात्रा

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00:56:28,640 --> 00:56:32,640
शुरू हुई जिज्ञासा से और खत्म हुई अचिंत ये

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हैरा अचिंत बोल नहीं सकते क्योंकि अगर तुम्हारे प्रभुपाद

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00:56:36,760 --> 00:56:40,880
जी बोल रहे हैं कि आप लोग अपराध करके आए हो तो यह तो गलत

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00:56:40,880 --> 00:56:44,960
ही हो जाता है कैसे अपराध अचिंत कैसे हो जा रहा है ये अगर तुम

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00:56:44,960 --> 00:56:49,640
मान लेते हो कि इनफिनिटी इनफिनिटी तो गलत है

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00:56:49,640 --> 00:56:53,720
ये खैर एक अलग बात हो जाती है कोई नहीं ठीक है तो

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00:56:53,720 --> 00:56:57,720
आप लोगों का आने के लिए आभार आपने अपना समय भी दिया नाम

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00:56:57,720 --> 00:57:01,720
जब बढ़ाइए उपासना सेवा संकीर्तन स्वाध्याय आज

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00:57:01,720 --> 00:57:06,160
दूसरी चर्चा भी है हां रियल इंटेंशन

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वालों से कई बार कहा है पर वो तरह-तरह के बहाने थोड़ा सा बनाते

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हैं कि यहां पे आओ यहीं पर आना होगा ऐसा होगा

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00:57:14,320 --> 00:57:18,480
वैसा होगा और हम उनको अपना नंबर देते हैं कि भाई देखो बात

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00:57:18,480 --> 00:57:22,840
करो हमें आप बताइए कहां-कहां पर आने को बोल रहे हो

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00:57:22,840 --> 00:57:27,000
और या हम आपको बताएंगे कहां-कहां पर आया जा सकता है तो इस

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00:57:27,000 --> 00:57:31,000
संबंध में वो कुछ करते नहीं है ऐसे कोई बीच का रास्ता निकालने के लिए

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बाकी

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आज रात को भी एक हमारी चर्चा है एक मात शक्ति है इस्लाम से

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डॉक्टर जाकिया तो इनके साथ रात को चर्चा

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है 10 बजे आप लोग आए और चर्चा को

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देखें जी ठीक है तो आप लोगों का दोनों

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भाइयों का आने के लिए हमें आपका बहुत बहुत आभार

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एक और निवेदन है हां हां बताइए अगर

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आप फ्यूचर में कभी किसी की किसी भी इकन के

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व्यक्ति से अगर डिस्कशन करें इसके बारे में तो कृपया

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करके यह सवाल जरूर से पूछिए और जितने भी तर्क है वह

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भी मैं आपको लिख के दे दूंगा वो तर्क बहुत सारे देते हैं कि लीलावत

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आ चुके हैं यह करके वो करके आ चुके है लेकिन उनका भी कांट्रडिक्शन है उसका भी

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पिट आंसर है मे पास अच्छा चलिए ठीक है आप

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00:58:22,920 --> 00:58:27,400
लोग अध्ययन भी करिए उपासना सेवा संकीर्तन

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सभी ठीक है बहुत बहुत धन्यवाद आपका आने के लिए और

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जय श्री राम जी जय श्री राम

805
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[संगीत]
