1
00:00:02,720 --> 00:00:07,360
तो सभी को जय श्री

2
00:00:07,360 --> 00:00:11,960
राम आशा करते हैं आप सभी कुशल मंगल से होंगे

3
00:00:11,960 --> 00:00:16,480
अभी हमारी दो दिन पहले लाइव चर्चा हुई थी

4
00:00:16,480 --> 00:00:21,160
इसकन के फॉलोअर थे भव्य राधा कृष्ण

5
00:00:21,160 --> 00:00:25,560
दास यह इग्राम पर जो हम जन जागरूकता

6
00:00:25,560 --> 00:00:30,160
के लिए और जो वैचारिक मतभेद आते हैं

7
00:00:30,160 --> 00:00:34,240
शिक्षाओं के कारण हमारे समाज में सनातन समाज में

8
00:00:34,240 --> 00:00:38,480
उन शिक्षाओं को हम काउंटर करते हैं कि जिससे

9
00:00:38,480 --> 00:00:42,920
कि वह शोधित हो सके और हमारे समाज में एकत्व

10
00:00:42,920 --> 00:00:47,360
आ सके हम लोग संगठित हो सके संगठित होकर

11
00:00:47,360 --> 00:00:51,880
हम सामना कर सके सनातन को मिटाने के लिए जो आता

12
00:00:51,880 --> 00:00:56,040
ताई जो शक्तियां है उनका सामना कर सके

13
00:00:56,040 --> 00:01:00,160
पर ये भावना संभवतः हर व्यक्ति अपने अपने

14
00:01:00,160 --> 00:01:04,240
तरीके से देखता है इस भावना को और वो ऐसा सोचने लगता

15
00:01:04,240 --> 00:01:08,880
है कि हमारे तंत्र को मिटाना चाहता है या हमारी जो

16
00:01:08,880 --> 00:01:12,960
आस्था है उसको मिटा देना चाहता है हमारे मंदिरों को तबाह कर

17
00:01:12,960 --> 00:01:17,880
देना चाहता है और ऐसे कुछ वक्तव्य दिए

18
00:01:17,880 --> 00:01:22,040
भी गए हैं अभी रिसेंटली जो हमारी लाइव चर्चा हुई थी वही लाइव चर्चा दिखाई गई

19
00:01:22,040 --> 00:01:26,760
एक दूसरे चैनल पर तो वहां पर इस तरह के वक्तव्य दिए भी

20
00:01:26,760 --> 00:01:30,800
गए तो सबसे पहली बा वही बात कि हम

21
00:01:30,800 --> 00:01:35,280
अपनी बात बता दे कि हमने कभी नहीं कहा कि हमको आर्य समाज

22
00:01:35,280 --> 00:01:39,640
स्कोन इस प्रकार की जो सनातन के नाम से जो तंत्र प्रचलित

23
00:01:39,640 --> 00:01:42,720
है प्रचारित हो रहे

24
00:01:42,720 --> 00:01:47,400
हैं हम उनको नष्ट करना चाहते हैं नहीं जो

25
00:01:47,400 --> 00:01:52,080
वह शिक्षा है जिसके कारण समाज बट रहा है

26
00:01:52,080 --> 00:01:56,120
उसमें कौन सी ऐसी स्थिति हो सकती है उसका कौन सा ऐसा अर्थ हो सकता

27
00:01:56,120 --> 00:02:00,320
है जो अकाट्य हो काट

28
00:02:00,320 --> 00:02:05,200
होने के कारण वो सार्वभौम हो जाए और

29
00:02:05,200 --> 00:02:09,280
सार्वभौम होने के कारण उस सार्वभौम सिद्धांत की छत्र

30
00:02:09,280 --> 00:02:13,360
के तले हम और आप सभी लोग उसके नीचे

31
00:02:13,360 --> 00:02:17,720
खड़े हो कंधे से कंधा मिलाकर हाथी बन

32
00:02:17,720 --> 00:02:21,840
सके इस कारण से हमारे प्रयास होते हैं कि उन शिक्षाओं पर

33
00:02:21,840 --> 00:02:26,400
हम चोट कर सके जो शिक्षाए अधूरी है अकाट्य नहीं है अकाट्य

34
00:02:26,400 --> 00:02:31,080
होने के कारण लोगों को मौका मिलता है उसमें प्रवेश करने काे

35
00:02:31,080 --> 00:02:33,080
हम बना देते हैं सनातन के नाम

36
00:02:33,080 --> 00:02:37,120
से अकाट्य शिक्षाए नहीं देते तो हम एक

37
00:02:37,120 --> 00:02:41,640
वो क्या कहते हैं एक छिद्र बना देते जिससे की

38
00:02:41,640 --> 00:02:46,240
जो विरोधी है वह हमारे सुरक्षात्मक घरे के अंदर प्रवेश कर सकता है

39
00:02:46,240 --> 00:02:50,400
अब जैसे कि मान लीजिए कि हम यह कहने ल

40
00:02:50,400 --> 00:02:54,760
मान लीजिए जैसे आर्य समाज है वोह इतना ज्यादा परंपरा

41
00:02:54,760 --> 00:02:58,960
प्राप्त सिद्धांतों को नहीं मानता है

42
00:02:58,960 --> 00:03:03,840
तो परंपरा सिद्धांतों को जब वो नहीं मानता है तभी तो किसी

43
00:03:03,840 --> 00:03:07,880
रामपाल दास जैसे व्यक्ति को यह मौका मिलता है कि हम भी अपनी

44
00:03:07,880 --> 00:03:11,960
मनमानी व्याख्या करेंगे अब परम परंपरा कुछ नहीं हम भी

45
00:03:11,960 --> 00:03:16,120
मनमानी व्याख्या करेंगे वो भी करेगा फिर किसी जाकिर नायक जैसे व्यक्ति को भी मौका

46
00:03:16,120 --> 00:03:20,120
मिलेगा वो भी करेगा भाई कोई एक उसमें लिमिट होनी चाहिए ना

47
00:03:20,120 --> 00:03:24,200
कि यही कर सकता है भले ही उसने सारे वेद शास्त्र पढ़े सारी संस्कृत पढ़ी

48
00:03:24,200 --> 00:03:28,240
हो फिर भी यही करने के लिए अलाउ है तो

49
00:03:28,240 --> 00:03:32,280
वो मर्यादा जब हम स्वयं ही लाने लगेंगे वेदों के नाम पर दूसरा

50
00:03:32,280 --> 00:03:36,480
भी लांगेगा और फिर जब वो लांगेगा तो हो सकता है कुछ लोगों

51
00:03:36,480 --> 00:03:40,680
को समझ में ना आए उसकी बात मगर कुछ लोगों को समझ में आएगी तो आपको

52
00:03:40,680 --> 00:03:44,880
आप आपको आपके भाई को आपसे दूर करने वाला कौन है

53
00:03:44,880 --> 00:03:48,880
वह स्वयं जो उनको छेद बना कर के दे रहा है

54
00:03:48,880 --> 00:03:53,400
कि परंपरा रंपरा कुछ नहीं डॉक्टर के पास जाएंगे तो परंपरा होनी

55
00:03:53,400 --> 00:03:57,560
चाहिए स्कूल में पढ़ने जाएंगे तो परंपरा होनी चाहिए

56
00:03:57,560 --> 00:04:01,600
जगह कहीं पर भी पढ़ने करने जाएंगे भी तो परंपरा होनी चाहिए मगर धर्मशास्त्रों

57
00:04:01,600 --> 00:04:05,680
को जब पढ़ने जाएंगे तो वहां परंपरा की कोई आवश्यकता नहीं

58
00:04:05,680 --> 00:04:09,720
तो इसी कारण से ऐसे खड़े होते हैं तंत राम रहीम भी आ

59
00:04:09,720 --> 00:04:14,160
जाते हैं रामपाल भी आ जाते हैं सब आ जाते

60
00:04:14,160 --> 00:04:19,120
हैं अच्छा अब हम लोग

61
00:04:19,120 --> 00:04:23,160
दो खंड में आज बात करने वाले हैं एक

62
00:04:23,160 --> 00:04:27,480
खंड है कि जो व्यवहारिकता में जो दिक्कतें

63
00:04:27,480 --> 00:04:31,560
आई उन्होंने क्या कहा मैंने क्या का व्यवहार स्वरूप और

64
00:04:31,560 --> 00:04:35,880
दूसरा है जो हमारी जो दार्शनिक चर्चा हुई सैद्धांतिक चर्चा

65
00:04:35,880 --> 00:04:40,800
हुई उसमें लेकर के क्या पॉइंट्स रहे जो नोटिफाई होने चाहिए

66
00:04:40,800 --> 00:04:44,840
तो सबसे पहले जो बात है एक

67
00:04:44,840 --> 00:04:49,280
प्रश्न उठाया गया कि हमने एक ऐसे

68
00:04:49,280 --> 00:04:53,320
कमेंट को विजिबल कर दिया था स्क्रीन पर जिस कमेंट

69
00:04:53,320 --> 00:04:57,960
में कुछ व्यक्तिगत टिप्पणी की जा रही थी भव्य राधा कृष्ण दास के बारे में कि

70
00:04:57,960 --> 00:05:02,240
उनका कुछ प्रेम संबंध है या फिर होने वाली उनकी भार्या

71
00:05:02,240 --> 00:05:04,120
है उनके संबंध में कोई

72
00:05:04,120 --> 00:05:08,600
टिप्पणी थी अश्लील शब्द नहीं था उसमें भी कोई टिप्पणी थी

73
00:05:08,600 --> 00:05:12,640
तो सबसे पहले इस बारे में मैं अपनी स्थिति बता दूं कि

74
00:05:12,640 --> 00:05:16,680
आपने अभी देखा होगा पिछले कई दिनों से बीच में जो लाइव

75
00:05:16,680 --> 00:05:20,920
स्ट्रीम थी पहले बंद हो गई थी और इससे पहले जब लाइव स्ट्रीम होती थी

76
00:05:20,920 --> 00:05:25,800
तो हम सीधे मोबाइल से करते थे जो यट एप्लीकेशन होती है उससे

77
00:05:25,800 --> 00:05:30,080
उसके कारण जो आप हमारी पुरानी लाइव स्ट्रीम देखेंगे तो हमारी लाइव

78
00:05:30,080 --> 00:05:34,160
स्टोरी वाले साइज में आपको दिखाई देंगी वो ऐसे आपको हॉरिजॉन्टल

79
00:05:34,160 --> 00:05:38,600
दिखाई नहीं देगी वर्टिकल दिखाई देगी व लाइव स्ट्रीम और उसमें

80
00:05:38,600 --> 00:05:43,000
जैसे इस तरह से अभी जो हम ये लाइव स्ट्रीम कर रहे हैं स्ट्रीम यार्ड से इसमें

81
00:05:43,000 --> 00:05:47,040
आप थंबनेल लगा सकते तो हमारी पुरानी लाइव स्ट्रीम जो है उसमें आप देखेंगे तो थंबनेल

82
00:05:47,040 --> 00:05:51,600
वगैरह भी आपको शो नहीं होंगे क्योंकि वो उसका साइज नहीं है थंबनेल के लिए

83
00:05:51,600 --> 00:05:55,640
इससे क्या पता चलता है कि हम जब अपने फोन से

84
00:05:55,640 --> 00:06:00,000
करते थे तब तक हमने लाइव स्ट्रीम की उसके बाद हमने जब ये डिसाइड किया

85
00:06:00,000 --> 00:06:04,400
जब हमने स्ट्रीम यार्ड पर आने का सोचा तो उसमें भी हमें तकनीकी जानकारियों

86
00:06:04,400 --> 00:06:08,560
के एकत्रित करते करते संसाधनों को एकत्रित करते करते काफी समय लग गया

87
00:06:08,560 --> 00:06:12,880
तो पहले की लाइव स्ट्रीम्स स्टोरी वाली साइज में होना

88
00:06:12,880 --> 00:06:17,240
रील्स वाली साइज में होना और अब की लाइव स्ट्रीम हॉरिजॉन्टल

89
00:06:17,240 --> 00:06:19,240
साइज में होना पहले वाली लाइव

90
00:06:19,240 --> 00:06:23,280
स्ट्रीम्स और अब जो लाइव स्ट्रीम हो रही है पिछले कुछ दिनों से

91
00:06:23,280 --> 00:06:27,560
इनके बीच में एक अच्छा खासा समय अंतराल रहा लगभग मुझे लगता है दो महीने

92
00:06:27,560 --> 00:06:31,600
तीन महीने के आसपास अच्छा खासा अंतराल रहा तो इन

93
00:06:31,600 --> 00:06:35,680
सब से यही सिद्ध हो जाता है कि जो हम आज ये उपयोग कर रहे हैं पिछले

94
00:06:35,680 --> 00:06:39,960
कुछ एक दो हफ्तो से वो पिछले कुछ एक दो हफ्तो से ही कर रहे हैं और जो लास्ट

95
00:06:39,960 --> 00:06:44,400
लाइव स्ट्रीम हमने की थी शायद

96
00:06:44,400 --> 00:06:48,480
आराध राधा कृष्ण दास जी के साथ वो हमने इसी पर की थी स्ट्रीम

97
00:06:48,480 --> 00:06:52,560
यार्ड पर मगर उसमें हमारा फोन इतना गर्म हो गया था कि हमें उसके बाद लाइव स्ट्रीम से जाना

98
00:06:52,560 --> 00:06:56,720
पड़ा फोन हमारा इतना गर्म हो गया था तो कुल मिलाकर के

99
00:06:56,720 --> 00:07:00,720
ये है कि हम स्ट्रीम यार्ड को उपयोग करने में बिल्कुल

100
00:07:00,720 --> 00:07:04,760
नवीन है हमें बहुत ज्यादा उसका कोई अंदाजा नहीं है कि कैसे

101
00:07:04,760 --> 00:07:08,880
क्या करना है इसीलिए कुछ हमारे गुरु भाई हैं जो सहायता करते कोई ऐसी टेक्नोलॉजी

102
00:07:08,880 --> 00:07:13,080
वाली टेक्निकल टीम नहीं है कोई ऐसा बहुत बड़ा सा स्टूडियो

103
00:07:13,080 --> 00:07:17,200
नहीं है जिसमें बैठ कर के हम चर्चा कर रहे हैं और नीचे हमारे मोबाइल पर हमारे पास

104
00:07:17,200 --> 00:07:21,360
क्या-क्या लिख कर के आ रहा है उनके संदेश देख रहे हैं बार-बार और सामने वो चेयर

105
00:07:21,360 --> 00:07:25,600
पर बैठे हुए हैं वो हमें इशारा भी कर रहे हैं जिसके कारण हम कुछ बोल रहे हैं उसके बाद इशारा प्राप्त

106
00:07:25,600 --> 00:07:29,720
हो जाने के बाद फिर हम अपने वक्तव्य को बदल भी रहे हैं तो ये सारी स्थितियां नहीं है यहां

107
00:07:29,720 --> 00:07:34,320
पर कुछ गुरु भाई हैं जो सहायता स्वरूप

108
00:07:34,320 --> 00:07:38,480
सहयोग स्वरूप इस टेक्निकल चीजों में हमारी मदद कर देते

109
00:07:38,480 --> 00:07:42,640
हैं तो अब वह जो वक्तव्य वहां पर दिखाई दिया काफी

110
00:07:42,640 --> 00:07:46,720
देर से उस प्रकार के वक्तव्य आ रहे थे भव्य राधा कृष्ण दास जी

111
00:07:46,720 --> 00:07:50,760
अपनी बात बोल रहे थे हालांकि वो कई

112
00:07:50,760 --> 00:07:55,000
लोगों ने मुझको यह कहा कि भाई इस स्तर के जो व्यक्ति है जो अभी आए थे

113
00:07:55,000 --> 00:07:59,080
इस स्तर के व्यक्तियों से आप बात ना किया करें इससे आपका स्तर गिरेगा लोग

114
00:07:59,080 --> 00:08:03,280
आपको जानेंगे किन किन से मतलब किस तरह किस स्तर की बातें हो रही है

115
00:08:03,280 --> 00:08:07,280
यह तक लोगों ने कहा तो जो ये राधा कृष्ण दास

116
00:08:07,280 --> 00:08:11,280
जी आए थे वह अपनी बात बोल रहे थे मेरी

117
00:08:11,280 --> 00:08:15,600
नजर गई कि भाई यह क्या कमेंट आ रहा है बारबार अजीब सा तो मैंने

118
00:08:15,600 --> 00:08:19,600
उसको नवीन होने के कारण मैंने उसको टच कर दिया और जैसे ही

119
00:08:19,600 --> 00:08:23,800
टच किया वह स्क्रीन पर आया और जब तक मुझे यह ध्यान आया कि नहीं मुझे स्क्रीन पर नहीं लाना

120
00:08:23,800 --> 00:08:28,080
है अभी अभी थोड़ी देर पहले बात होके चुकी है तो मैंने उसको हटा भी लिया इससे

121
00:08:28,080 --> 00:08:32,080
पहले कि भव्य राधा कृष्ण दास जी उसको पढ़कर

122
00:08:32,080 --> 00:08:37,240
उससे विचलित हो जाए इससे पहले बहुत जल्दी उसको हटा

123
00:08:37,240 --> 00:08:41,520
तो यह कारण था उस कमेंट

124
00:08:41,520 --> 00:08:45,800
का जो कमेंट को लेकर के विवाद बनाया जा रहा है उसको आ जाने वो स्क्रीन

125
00:08:45,800 --> 00:08:50,160
पर कैसे आया अब बात आती है कि

126
00:08:50,160 --> 00:08:54,280
यह फिर इग्राम में आकर के हमने लाइव को इस तरह से बंद

127
00:08:54,280 --> 00:08:58,360
किया था कि भाई हमने पहले इनसे कहा कि भाई आज बहुत देर चर्चा हो गई

128
00:08:58,360 --> 00:09:02,400
साढ़े तीन घंटे तक हमने इनसे चर्चा की थी लगभग तो हमने इनसे

129
00:09:02,400 --> 00:09:06,760
कहा कि भाई बहुत समय हो गया है अब हम कभी और कर लेंगे

130
00:09:06,760 --> 00:09:10,760
तो नहीं इनका बीच में एक दृश्य ये भी था कि जैसे मैंने जब यह कहना

131
00:09:10,760 --> 00:09:14,760
चाहा कि आपने श्री भाष्य का नाम लिया है आपने श्लोक क्रमांक

132
00:09:14,760 --> 00:09:19,160
बताया है अब उसे हम जो है तसल्ली करेंगे पढ़ेंगे क्योंकि उनके ही परंपरा

133
00:09:19,160 --> 00:09:23,560
प्राप्त आचार्य द्वारा हमें कुछ बताया जा रहा है यह संदर्भ आगे आएगा मगर फिलहाल

134
00:09:23,560 --> 00:09:27,680
मैं आपको बता दूं कि जब हमने यह कहा कि हम तसल्ली कर लेंगे

135
00:09:27,680 --> 00:09:32,040
तो वो क्या बोल रहे थे कि नहीं अभी करो अभी करो ये करो वो करो अच्छा अभी

136
00:09:32,040 --> 00:09:36,560
करो की बात पर हमने जब इनसे कहा था कि

137
00:09:36,560 --> 00:09:42,560
आप जो है प्रमाण दिखाइए जैसे हम प्रमाण दिखा रहे हैं कि वैष्णवास्त्र

138
00:09:59,920 --> 00:10:03,960
गलत है और रामन चार ने क्योंकि उसी श्लोक का उपयोग

139
00:10:03,960 --> 00:10:08,680
किया है तो हमने कहा कि

140
00:10:08,680 --> 00:10:12,880
इस बारे में आप प्रमाण दिखाइए कि किसने उस श्लोक को

141
00:10:12,880 --> 00:10:17,200
या उस श्लोक को सही माना हो या फिर शंकराचार्य को अवैध

142
00:10:17,200 --> 00:10:21,240
मायावादी माना हो अवैध क्योंकि वहां प्रच्छन्न बौद्ध वाला जो श्लोक

143
00:10:21,240 --> 00:10:27,240
है पद्म पुराण का उसमें अवैध

144
00:10:28,320 --> 00:10:32,360
मायावादी कौन से नहीं आने हमने इनसे कहा था कि कौन-कौन है जो

145
00:10:32,360 --> 00:10:36,720
शंकराचार्य को अवैध मायावादी कहता है तो इन्होंने कहा था बहुत लोग कहते

146
00:10:36,720 --> 00:10:42,720
तो हमने कहा बहुत लोगों को कोई प्रूफ दिखाओ हमने आपको प्रूफ दिखा दिया

147
00:10:51,080 --> 00:10:55,240
वैष्णवास्त्र के लिए जब इनसे कहा

148
00:10:55,240 --> 00:10:59,360
कि भाई आपने नंबर हमें बता दिया है श्लोक क्रमांक हमें बता दिया है और

149
00:10:59,360 --> 00:11:03,480
हम यथा सामर्थ उसकी संतुष्टि कर लेंगे और यदि

150
00:11:03,480 --> 00:11:07,640
वह सही पाएंगे आपको तो हम उस बारे में बाकायदा घोषणा करते हुए

151
00:11:07,640 --> 00:11:11,840
रील बनाएंगे तो इन्होंने

152
00:11:11,840 --> 00:11:15,880
वहां पर ट धारण कर लिया कि नहीं नहीं अभी अभी अभी अभी अभी अभी यानी

153
00:11:15,880 --> 00:11:20,160
कि यहां पर ये किसी चर्चा के लिए नहीं आए थे इनका आने का जो

154
00:11:20,160 --> 00:11:24,280
वो था उद्देश्य वो इनकी इन चीजों से प्रतीत

155
00:11:24,280 --> 00:11:28,440
हो जाता है तो इस कारण से जब हमने उस दिन

156
00:11:28,440 --> 00:11:32,480
वो चर्चा ऑफ की थी तो हमने इनको सूचित नहीं किया हमने पहले कहा भी

157
00:11:32,480 --> 00:11:36,720
था काफी देर हो गई पर ये मान नहीं रहे थे जैसे छोटे बच्चे होते हैं उस तरह से वो जिद्द

158
00:11:36,720 --> 00:11:40,720
कर रहे थे तो इसलिए हमें यह कदम उठाना पड़ा साढ़े तीन घंटे बाद

159
00:11:40,720 --> 00:11:46,520
हमें इनको जो है बिना बताए उस चर्चा को समाप्त करना पड़ा

160
00:11:46,520 --> 00:11:50,640
अब बात यह आती है कि यह फिर हमसे इग्राम

161
00:11:50,640 --> 00:11:54,880
पर आकर के वार्तालाप करते हैं और उसमें हमें बताते हैं

162
00:11:54,880 --> 00:11:58,240
कि क्या कहते

163
00:11:58,240 --> 00:12:02,320
हैं जो व्यक्ति वो कमेंट कर रहे हैं जो

164
00:12:02,320 --> 00:12:06,200
सुपर चैट इत्यादि दे रहे थे और इनके बारे में व्यक्तिगत टिप्पणी लिख रहे थे इनकी

165
00:12:06,200 --> 00:12:10,320
जो व्यक्तिगत जीवन शैली है उसके बारे में उसमें

166
00:12:10,320 --> 00:12:14,560
वो इंगित कर रहे थे कि इनकी भार्या ये है होने वाली में मैं वो शब्द

167
00:12:14,560 --> 00:12:18,640
उपयोग नहीं कर रहा हूं अ कि वो शब्द

168
00:12:18,640 --> 00:12:22,880
ठीक नहीं लगता है मुझे इनकी होने वाली भार्या है ये है वो है

169
00:12:22,880 --> 00:12:26,960
तो उसके बारे में उसने टिप्पणी की थी जो जिसको मैंने अ

170
00:12:26,960 --> 00:12:31,080
तकनीकी जानकारी के अभाव स्वरूप उसको मैंने टच किया देखने के लिए

171
00:12:31,080 --> 00:12:35,960
कि क्या गलत बात हो रही है और वह स्क्रीन पर आ गया ऊपर आ गया

172
00:12:35,960 --> 00:12:40,120
तो इनका यह कहना था ा में हमसे इा में जब इनसे बातें

173
00:12:40,120 --> 00:12:44,240
हुई तो इनका यह कहना था हमसे कि वह व्यक्ति हमारा

174
00:12:44,240 --> 00:12:48,440
था अब हमने कहा कि भई हमारा उनसे

175
00:12:48,440 --> 00:12:52,680
कोई संबंध नहीं है जब हमने यह कहा

176
00:12:52,680 --> 00:12:56,360
और साथ ही साथ

177
00:12:56,360 --> 00:13:00,720
अ जब हमने अनेक मतलब इनको प्रयास किया समझाने

178
00:13:00,720 --> 00:13:04,960
का तो इन्होंने फिर कहा नहीं नहीं मैं जानता हूं आप आप इसको

179
00:13:04,960 --> 00:13:09,000
नहीं जानते पर ये आपका बहुत लंबे समय से सपोर्टर है मेरे पास इसका फोन नंबर भी

180
00:13:09,000 --> 00:13:13,120
है यह भी कहा तो इसका मतलब क्या है पहली बात तो यह

181
00:13:13,120 --> 00:13:17,240
मेरा सपोर्टर है यह जानते हैं और इनके पास वो जो नंबर है

182
00:13:17,240 --> 00:13:21,240
उससे प्रतीत हो जाता है कि इनकी जो है उससे कोई पर्सनल जान

183
00:13:21,240 --> 00:13:25,320
पहचान चल रही है हो सकता है कि वो मुझे वैचारिक तौर पर समर्थन देते हो वो

184
00:13:25,320 --> 00:13:29,360
मुझे समर्थन देते हो पर मेरा समर्थन उन्हें प्राप्त है ये

185
00:13:29,360 --> 00:13:33,520
तो सिद्ध नहीं होता है अब भाई वो मुझे समर्थन देते

186
00:13:33,520 --> 00:13:37,520
हैं वो इनकी जानकारी में है इनके साथ उनका फोन नंबर का आदान प्रदान

187
00:13:37,520 --> 00:13:41,520
है इससे पता चलता है कि इनकी उनसे व्यक्तिगत कोई

188
00:13:41,520 --> 00:13:45,800
चीजें हैं जिसके कारण वो भी यहां पर ऐसा व्यक्तिगत कार्य कर रहे हैं हालांकि

189
00:13:45,800 --> 00:13:49,960
वो कार्य बिल्कुल उचित नहीं है जो वो कर रहे थे यहां पे वो जो

190
00:13:49,960 --> 00:13:53,960
अगर टेक्निकली देखा जाए वो जो कमेंट था जो ऊपर दिखाई

191
00:13:53,960 --> 00:13:58,120
दिया था उसमें कोई अश्लील शब्द नहीं था जिसको

192
00:13:58,120 --> 00:14:02,160
दिखाने पर जिसको वहां पर शो कर देने पर या फिर कोई व्यक्तिगत

193
00:14:02,160 --> 00:14:06,280
जानकारी भी नहीं थी उसमें कि फोन नंबर हीे तो उसमें कहा जा रहा है जो कमेंट

194
00:14:06,280 --> 00:14:10,560
शो हुआ था उसमें कहा जा रहा था उसके द्वारा कि मेरे पास है

195
00:14:10,560 --> 00:14:15,120
मगर उसमें उसका वह नंबर नहीं था कोई व्यक्तिगत जानकारी भी नहीं थी

196
00:14:15,120 --> 00:14:19,160
और अगर थी भी तो भाई यहां पर कमेंट आ रहे हैं पब्लिक कमेंट कर

197
00:14:19,160 --> 00:14:23,160
रही है उसका कौन सा कमेंट शो हो रहा है कौन सा नहीं हो रहा इस लिए

198
00:14:23,160 --> 00:14:27,440
कोई कानूनी बाध्यता नहीं है हां ये नैतिकता

199
00:14:27,440 --> 00:14:31,440
है कि मुझे वह जो कमेंट था वह

200
00:14:31,440 --> 00:14:35,640
अगर उसमें आपकी कोई पर्सनल जानकारी है तो वह शो नहीं होना चाहिए था मगर उसमें

201
00:14:35,640 --> 00:14:36,360
आपकी कोई पर्सनल

202
00:14:36,360 --> 00:14:40,720
जानकारी भी नहीं थी मगर फिर भी वह आपके विरुद्ध

203
00:14:40,720 --> 00:14:44,720
था यह मान लिया जाए आपके विरुद्ध था तो भी वह अगर वहां दिख गया तो ऐसी कोई

204
00:14:44,720 --> 00:14:49,360
आपको हानि नहीं हो गई इस बारे में हमने इनसे

205
00:14:49,360 --> 00:14:55,360
पूछा कि क्या कहते

206
00:14:55,360 --> 00:14:59,480
हैं इनसे हमने पूछा था वो चैट हमने नोट कर ली है के साथ जो

207
00:14:59,480 --> 00:15:03,520
जो चैट हुई है तो उस चैट में जो मोटी मोटी बातें हैं वो मैं आपको

208
00:15:03,520 --> 00:15:07,360
बता रहा

209
00:15:07,360 --> 00:15:11,360
हूं जो नंबर इन्होंने चैट के माध्यम से हमें प्रोवाइड कराया

210
00:15:11,360 --> 00:15:15,360
है वह हमने अपने जो सहयोगी गुरु भाई इत्यादि हैं जो समर्थक हैं टीम है

211
00:15:15,360 --> 00:15:19,600
जो हमारी हमने उसको दे दिया कि भाई इनको इनका जो है प्रतिकार करिए आप

212
00:15:19,600 --> 00:15:23,600
कि वह इस तरह की चीजें ना करें अगर हमारे समर्थक है तो ना

213
00:15:23,600 --> 00:15:28,320
करें और यदि अ

214
00:15:28,320 --> 00:15:32,400
उनका कोई धर्म नहीं है तो वो कुछ भी करने के लिए स्वतंत्र है हम

215
00:15:32,400 --> 00:15:36,560
तो यही कहते हैं भाई या तो सामने आइए या

216
00:15:36,560 --> 00:15:40,720
फिर आप स्वतंत्र है अपने निर्णय लेने के लिए तो अब

217
00:15:40,720 --> 00:15:45,240
बात आती है इसके बाद

218
00:15:45,240 --> 00:15:49,520
हमने यथोचित रूप से इनसे बात की और

219
00:15:49,520 --> 00:15:51,640
यह कहा कि भाई उसमें

220
00:15:51,640 --> 00:15:56,520
आपके लिए अगर आपको लगता है कि बहुत ही आपत्ति जनक है जानकारी वो

221
00:15:56,520 --> 00:16:00,680
और वो जानकारी आप के लिए ठीक नहीं आपके हितार्थ नहीं

222
00:16:00,680 --> 00:16:04,800
है आपको कोई हानि हो सकती है उससे आपके मान को सम्मान को किसी

223
00:16:04,800 --> 00:16:08,840
भी प्रकार से तो हम उस टिप्पणी

224
00:16:08,840 --> 00:16:12,960
को वहां से हटा देते हैं वहां पर ब्लर कर देते हैं तो जब हमने यह बात

225
00:16:12,960 --> 00:16:17,160
कही कि उस टिप्पणी को जो वीडियो में आ गया है जब हमने उस टिप्पणी

226
00:16:17,160 --> 00:16:21,560
को ब्लर करने की इनसे बात कही तो इन्होंने पहले तो काफी देर तक कोई प्रतिक्रिया

227
00:16:21,560 --> 00:16:25,600
ही नहीं दी उसके बाद यह कहते हैं जब

228
00:16:25,600 --> 00:16:29,800
हमने उसको इनका जब कोई जवाब नहीं आया तो हमने यथोचित रूप से किसी मातृ

229
00:16:29,800 --> 00:16:33,800
शक्ति के बारे में बात हो रही है हालांकि उसमें शील भंग करने वाला कोई शब्द

230
00:16:33,800 --> 00:16:38,040
नहीं था ठीक है मगर फिर भी हमने ये सोचते हुए कि बिल्कुल

231
00:16:38,040 --> 00:16:42,280
कोई एक परसेंट भी ऐसा कुछ ना हो तो हमने ये सोचते हुए उसको जब ब्लर

232
00:16:42,280 --> 00:16:46,520
करने के लिए प्रक्रिया अपनी कर दी कुछ उसमें ऐसी सुविधा

233
00:16:46,520 --> 00:16:50,760
होती है कि आप किसी किसी दृश्य को ब्लर कर सकते तो हमने वो पढ़ने

234
00:16:50,760 --> 00:16:55,000
में ना आए किसी के तो हमने उस चित्र को ब्लर करने की जब प्रक्रिया शुरू कर दी

235
00:16:55,000 --> 00:16:59,120
तो बाद में वापस आ कर के कह रहे कि नहीं नहीं उसको रहने दो ना उसको क्यों उठ

236
00:16:59,120 --> 00:17:03,160
रहे हो देखने दो लोगों को कितने निम्न लोग है मतलब अब यहां

237
00:17:03,160 --> 00:17:06,680
पर फिर वही हो गया क्या हो गया कि आपके

238
00:17:06,680 --> 00:17:10,880
लिए उस मातृ शक्ति का जो मातृ शक्ति की जो गरमा

239
00:17:10,880 --> 00:17:14,920
है वो नहीं है ऊपर आपको यह दिखाना

240
00:17:14,920 --> 00:17:19,200
वो आपके लिए प्राथमिकता नहीं है आपके लिए प्राथमिकता क्या है लोगों

241
00:17:19,200 --> 00:17:23,760
को यह दिखाना कि भाई लोगों के सामने जो है जो आहवान

242
00:17:23,760 --> 00:17:27,760
को आवान को समर्थन देने वाले लोग हैं वो जो है निम्न है या जो भी आपका

243
00:17:27,760 --> 00:17:31,800
मंतव्य की प्राथमिकता उस मातृ शक्ति की गरिमा नहीं है जिसके बारे

244
00:17:31,800 --> 00:17:37,760
में आप विचलित हो रहे हैं

245
00:17:37,760 --> 00:17:43,760
अच्छा अब क्या

246
00:17:44,600 --> 00:17:48,920
है मगर फिर भी हमने इनसे यह कह दिया कि हम जो है

247
00:17:48,920 --> 00:17:52,960
इस प्रकार की सामग्री नहीं रखते हैं और हम ऐसे कमेंट्स को भी डिलीट करेंगे

248
00:17:52,960 --> 00:17:58,960
और हम जो है उसको अगर स्क्रीन पर शो हो गया है तो उसको भी हटाएंगे

249
00:18:03,440 --> 00:18:08,400
जो भी है ठीक है तो अब बात य आती

250
00:18:08,400 --> 00:18:12,440
है कि मेरा जो कमेंट गलत था

251
00:18:12,440 --> 00:18:16,760
जो ऊपर आया था व आया य बातें हो गई

252
00:18:16,760 --> 00:18:20,960
अब बात य आती कि हमारी टीम के द्वारा जो कमेंट दिखाए जा रहे थे

253
00:18:20,960 --> 00:18:25,080
उनसे इन्ह क्या पत्ति थी इस बारे में भी आगे

254
00:18:25,080 --> 00:18:31,080
कुछ जानकारिया एकत्रित की गई है जिसमें की

255
00:18:33,040 --> 00:18:37,120
देखिए ऐसा होता है कि हम किस बारे में बात कर रहे हैं

256
00:18:37,120 --> 00:18:41,280
उससे रिलेटेड अगर कमेंट्स आ रहे हैं और अगर हम उसको दिखा रहे हैं कोई जानकारी

257
00:18:41,280 --> 00:18:45,520
मिल रही है या फिर कोई ऐसी बात है जो हमें आपके सामने

258
00:18:45,520 --> 00:18:50,160
जिसके साथ चर्चा हो रही है वह सामने रखनी है और या फिर कोई

259
00:18:50,160 --> 00:18:54,280
ऐसी जानकारी है कि सामने वाले के बारे में वह ऐसा बोल रहा है वह नहीं है या

260
00:18:54,280 --> 00:18:58,400
कोई बहुत उससे बिल्कुल रिलेटिवली

261
00:18:58,400 --> 00:19:02,560
कोई बात है जो वहां पर बताना आवश्यक है तो ऐसी जानकारियों को वहां पर प्रदर्शित

262
00:19:02,560 --> 00:19:06,800
किया जा रहा था हमारी टीम के द्वारा क्योंकि वो उपयोग में ली जा सकती

263
00:19:06,800 --> 00:19:11,880
है वो जो सर्विसेस है वहा दी गई है अब

264
00:19:11,880 --> 00:19:16,320
इनका आरोप क्या था इनकी तरफ से आरोप लगाया गया

265
00:19:16,320 --> 00:19:20,360
कि गाली वाले कमेंट बार-बार शो हो रहे थे अब

266
00:19:20,360 --> 00:19:24,640
यह पूरी जो साढ़े तीन घंटे की वीडियो है वो लाइव स्ट्रीम

267
00:19:24,640 --> 00:19:28,720
उसमें आप लोग भी जाकर देखिएगा कि पूरी लाइव स्ट्रीम में कोई भी

268
00:19:28,720 --> 00:19:32,840
गाली वाला कमेंट स्क्रीन पर आया है क्या

269
00:19:32,840 --> 00:19:36,880
पूरी स्ट्रीम में एक भी कमेंट गाली का नहीं था मगर इनकी

270
00:19:36,880 --> 00:19:40,960
ओर से यही आरोप लगाया जा रहा है कि भाई गाली वाले कमेंट

271
00:19:40,960 --> 00:19:45,080
जो हैं वो आपको बार-बार स्क्रीन पर शो हो रहे थे अब एक बात सोचने

272
00:19:45,080 --> 00:19:48,400
की है कि कमेंट्स

273
00:19:48,400 --> 00:19:52,400
चर्चा जब शुरू हुई है उस तभी से लेके वहां तक जब तक

274
00:19:52,400 --> 00:19:57,080
इन्होंने आपत्ति जिताई है तब तक करीब लगभग काफी समय गुजर चुका था

275
00:19:57,080 --> 00:20:01,360
15-20 मिनट एक घंटा हो गया था तो वह कमेंट

276
00:20:01,360 --> 00:20:05,360
जो शो हो रहे थे चैनल पर वह काफी देर से हो

277
00:20:05,360 --> 00:20:10,000
रहे थे मगर आप जब इन्होंने आपत्ति जताई है

278
00:20:10,000 --> 00:20:14,080
तो उस समय पर जाकर ध्यान से देखिएगा कि इनके चेहरे के उस

279
00:20:14,080 --> 00:20:18,360
समय के हाव भाव क्या है तो वहां पर सबसे ज्यादा जो कमेंट

280
00:20:18,360 --> 00:20:23,240
शो हो रहा था वह नवीन शर्मा जी की तरफ से हो रहा था जो यह कह रहे थे कि इनके

281
00:20:23,240 --> 00:20:27,480
जो जिस रूम में बैठकर ये बात कर रहे जिस क कक्ष में है उस कक्ष

282
00:20:27,480 --> 00:20:31,480
में केवल यही नहीं है और लोग भी हैं जो इनको इशारे कर रहे हैं जो

283
00:20:31,480 --> 00:20:36,080
इनको मोबाइल इत्यादि पर मैसेजेस भेज रहे हैं जिनकी आवाजें बीच-बीच में आती हैं

284
00:20:36,080 --> 00:20:40,280
जिनके लिए बोलते हैं कि कमरे में कोई नहीं है अपना कैमरा घुमा करके दिखा देते

285
00:20:40,280 --> 00:20:44,480
हैं मगर उसके बाद भी पेन मांगते हैं पेन क्या इन्होंने हवा से मांगा

286
00:20:44,480 --> 00:20:48,560
था एक दृश्य है जिसमें हमने कहा कि भाई आप दिखाइए आपके कमरे में कोई

287
00:20:48,560 --> 00:20:52,760
नहीं है क्या जहां आप बैठे हो जो य विघ्न आ रहा है भाई आप

288
00:20:52,760 --> 00:20:56,880
आप 10 नहीं आप हजारों लोगों को लेकर के आओ अपने सिद्धांत

289
00:20:56,880 --> 00:21:00,920
के पक्के हैं वो कोई बात नहीं है बस बस वो चर्चा के बीच में डिस्टरबेंस ना आए उनके

290
00:21:00,920 --> 00:21:03,480
कारण है ना तो हमने

291
00:21:03,480 --> 00:21:07,960
इस भावना से इनसे कहा कि भाई डिस्टरबेंस आ रहा है आप एक बार दिखाओ अपने कमरे में

292
00:21:07,960 --> 00:21:12,000
तो फिर इन्होंने दिखा दिया उसके पांच पाच 10 मिनट बाद ये पेन मांग रहे हैं

293
00:21:12,000 --> 00:21:16,200
तो वो क्या थे कि नहीं थे तो इन्हीं से पूछना चाहिए हालांकि

294
00:21:16,200 --> 00:21:20,520
हम यह भी कर सकते थे कि जिस भगवत गीता को मानते हैं उसी भगवत गीता पर हाथ रख कर के कहिए

295
00:21:20,520 --> 00:21:24,520
कि आपकी कोई इस समय वहां पर सहायता करने के लिए वहां पर

296
00:21:24,520 --> 00:21:28,720
बीच में नहीं बोल रहा है आपसे कुछ भी तो

297
00:21:28,720 --> 00:21:33,120
यह हमने किया नहीं नेक्स्ट टाइम अगर यह ध्यान रखेंगे

298
00:21:33,120 --> 00:21:37,560
कि इनकी इस हद तक इनकी सच्चाई बाहर सामने आए कि क्या करेंगे भगवत गीता

299
00:21:37,560 --> 00:21:42,080
एज इट इज कि सौगंध खाएंगे कि नहीं खाएंगे

300
00:21:42,080 --> 00:21:46,280
खैर तो य जो चीज

301
00:21:46,280 --> 00:21:50,400
हुई कि इनका जो है विचलित होना नवीन शर्मा

302
00:21:50,400 --> 00:21:54,800
जी के उस कमेंट से कि वो ये कह रहे थे कि इनके कमरे में और लोग हैं जिनकी आवाजें

303
00:21:54,800 --> 00:21:59,000
आ रही है जिसकी वजह से डिस्टर्ब हो रहे हैं पहले कुछ बोल देते हैं उसके बाद वक्तव्य

304
00:21:59,000 --> 00:22:03,040
को बदलते हैं और यह भी बोलते हैं वो भी बोलते हैं और चारों

305
00:22:03,040 --> 00:22:07,320
तरफ निगाह तो आप इनके एक्सप्रेशन देखिएगा उस समय के कि

306
00:22:07,320 --> 00:22:11,480
यह उसी कमेंट के कारण इनके इनका यह जो प्रभावित हुए

307
00:22:11,480 --> 00:22:15,640
थे क्यों हुए थे क्योंकि इनको य भय हो गया था कि मेरी सच्चाई

308
00:22:15,640 --> 00:22:18,800
बाहर ना आ जाए तो इस कमेंट को मत सामने लाओ बारबार

309
00:22:18,800 --> 00:22:23,400
मेरी सच्चाई बाहर आ जाएगी तो ठीक है यह भी प्रतीत होता

310
00:22:23,400 --> 00:22:29,400
है तो

311
00:22:29,760 --> 00:22:33,760
मैंने आपको बता ही दिया उसमें कई ऐसे दृश्य जिसमें किय पता चल रहा है

312
00:22:33,760 --> 00:22:37,840
कि पहले कुछ कहा फिर ऐसा लगता है किसी ने कुछ बता दिया तो उसके बाद अपनी

313
00:22:37,840 --> 00:22:42,040
बात को बदला तो इस इस वजह से वह जो लाइव

314
00:22:42,040 --> 00:22:46,080
स्ट्रीम है व इतनी कन्फ्यूजिंग इसीलिए है कि व्यक्ति एक बात प टिक नहीं रहा उस

315
00:22:46,080 --> 00:22:50,240
बात प आएंगे अभी अभी आएंगे आगे सैद्धांतिक बातें भी है जो

316
00:22:50,240 --> 00:22:55,680
हमारा मुख्य डिपार्टमेंट है वोह आगे आएगा

317
00:22:55,680 --> 00:23:01,680
खर आंखों से सारे य सारी चीज उसमें थी चैट में

318
00:23:02,120 --> 00:23:06,120
और पहले इन्होंने प्रमाण मांगा एक जगह की बात है इन्होंने

319
00:23:06,120 --> 00:23:10,560
कहा प्रमाण दिखाओ जब हम सब वीडियो

320
00:23:10,560 --> 00:23:14,720
थे आपको कई जगह दास जी के चेहरे को देखना और आवाज भी आ रही

321
00:23:14,720 --> 00:23:18,760
थी जी बिल्कुल बिल्कुल आवाजें आ रही थी और नीचे मोबाइल

322
00:23:18,760 --> 00:23:23,000
में भी कुछ चल रहा था हो सकता है कुछ अंशों में हम गलत हो मगर

323
00:23:23,000 --> 00:23:27,400
उसमें यह निचोड़ तो है कि वहां पर ये जो है पूरा षड्यंत्र पूर्वक बैठे थे

324
00:23:27,400 --> 00:23:31,600
और कार्य कर रहे थे बारे में हमें सूचनाएं कई सारी मिली है इनके कुछ ग्रुप्स

325
00:23:31,600 --> 00:23:35,760
है उनके वीडियोस भी है जो हमें आ गए पता नहीं कैसे किसी प्रकार

326
00:23:35,760 --> 00:23:41,360
से मैं पहुंचाए गए हैं कि कैसी कैसी बातें हो रही है क्याक तैयारियां चल रही

327
00:23:41,360 --> 00:23:46,440
है अब इन्होंने एक बात और कही

328
00:23:46,440 --> 00:23:52,440
उसमें

329
00:24:09,560 --> 00:24:14,760
अब इन्होंने कहा

330
00:24:14,760 --> 00:24:18,960
कि अच्छा यह भी यह भी एक बात थी पॉइंट नोट करने लायक

331
00:24:18,960 --> 00:24:23,080
था कि यह जो इतना क्लोज आकर के इस तरह से इस तरह से

332
00:24:23,080 --> 00:24:27,240
जो बैठे हुए थे कैमरे के पास मोबाइल के तो इससे भी ये

333
00:24:27,240 --> 00:24:31,920
जाहिर मतलब होता है कि यह कुछ और बातें सुनने के लिए

334
00:24:31,920 --> 00:24:36,000
सुन पाए इस कारण से इतना ज्यादा कुछ कुछ उसमें ऐसा था जो वहां से

335
00:24:36,000 --> 00:24:39,720
कई सारी चीजें सवाल खड़ा करती

336
00:24:39,720 --> 00:24:44,480
हैं यह सारी चीजों से पता चलता है कि भाई आवान

337
00:24:44,480 --> 00:24:48,560
से लड़ने के लिए क्योंकि यह तो लड़ने लड़ने नहीं आए थे हम लड़ने नहीं

338
00:24:48,560 --> 00:24:52,840
आए थे आहवान से टकराने के लिए बहुत लंबा चौड़ा

339
00:24:52,840 --> 00:24:58,680
एक षड्यंत्र जैसे गीदड़ नहीं

340
00:24:58,680 --> 00:25:02,720
हमला करते हैं शेर पर ऐसे हमला करने का प्रयास किया

341
00:25:02,720 --> 00:25:07,040
जा रहा था कई सारे गीदड़ गीदड़ मिलकर के अलग-अलग तरह से

342
00:25:07,040 --> 00:25:11,160
कि हम शेर को घेर लेंगे मगर खर हमारे

343
00:25:11,160 --> 00:25:15,760
साथ श्री रघुनाथ तो किस बात की चिंता और

344
00:25:15,760 --> 00:25:21,760
भाई एक जगह का यह भी था कि

345
00:25:28,600 --> 00:25:32,680
एक जगह पर आप लोगों ने ध्यान दिया हो कि ना दिया हो मुझे बड़ा अच्छा लगा कुछ

346
00:25:32,680 --> 00:25:36,840
मेरे गुरु भाई उन्होंने मुझे याद दिलाया कि एक जगह की बात

347
00:25:36,840 --> 00:25:40,840
है उस लाइव वीडियो में अच्छा दृश्य था वो जब मुझसे यह कहा गया

348
00:25:40,840 --> 00:25:45,760
भव्य राधा कृष्ण दास जी की तरफ से कि [संगीत]

349
00:25:45,760 --> 00:25:50,200
वोय यह कोई प्रोफेशनल तरीका नहीं है प्रोफेशनल तरीका नहीं है

350
00:25:50,200 --> 00:25:54,640
तो मैंने उनको कहा कि भाई हम जो है प्रोफेशनलिस्ट नहीं है प्रोफेशनल

351
00:25:54,640 --> 00:25:58,800
नहीं है हम मनुवादी हमसे प्रोफेशनल बिहेवियर की आप उम्मीद

352
00:25:58,800 --> 00:26:03,000
ना करें तो ये मतलब एक उसका मुझे अच्छा जो वहां

353
00:26:03,000 --> 00:26:07,080
की जो एक स्मृति है जो अच्छी लगी मुझे आप लोगों ने नोटिस किया

354
00:26:07,080 --> 00:26:13,080
कि नहीं किया बताइएगा

355
00:26:16,800 --> 00:26:22,800
खैर इसके

356
00:26:23,000 --> 00:26:29,000
बाद जब चर्चा हो रही है वहां पर कि

357
00:26:29,920 --> 00:26:34,240
वहां इनका जो दूसरा लाइव स्ट्रीम चल रहा था उसमें इन्होंने चर्चा की

358
00:26:34,240 --> 00:26:38,680
कि भाई जब उन्होंने बहुत सारे अपने सवाल पूछ लिए सारे सवाल इन्होंने पूछ

359
00:26:38,680 --> 00:26:42,760
लिए और जो है उसकी पूछने की बारी आई तो हटा ही दिया तो

360
00:26:42,760 --> 00:26:46,960
पहले तो आप इसको समझिए हमने सबसे

361
00:26:46,960 --> 00:26:51,000
पहले प्रश्न किए आपके अधिकृत मंदिरों में जा जाकर

362
00:26:51,000 --> 00:26:55,560
आगे भी जाएंगे आप भी आर समाज की तरह पर्चा निकलवा दीजिएगा

363
00:26:55,560 --> 00:26:59,760
इस आदमी से बच के रहिएगा है ना तो आगे भी जाएंगे

364
00:26:59,760 --> 00:27:03,760
हमने पहले प्रश्न किए थे आपके मंदिरों में जा जाकर भाई ये

365
00:27:03,760 --> 00:27:08,000
ये चीजें ऐसे ऐसे क्यों है जब उसका संतुष्टि जनक उत्तर नहीं मिला तो हमने

366
00:27:08,000 --> 00:27:12,200
वही प्रश्न सोशल मीडिया के माध्यम से यहां डालना शुरू

367
00:27:12,200 --> 00:27:16,640
किए जो हम पूछ चुके हैं वहां पर जा जाकर आगे भी पूछेंगे

368
00:27:16,640 --> 00:27:20,960
तो आप यहां पर आए हो हमारे प्रश्न का उत्तर

369
00:27:20,960 --> 00:27:25,080
देने प्रश्न करने नहीं आए हो प्रश्न करना है तो

370
00:27:25,080 --> 00:27:29,120
जो तरीका है जिस तरीके से हम और आप मिल रहे हैं प्रश्न करना है तो

371
00:27:29,120 --> 00:27:31,840
उसके लिए आपको गुरुदेव के पास जाना चाहिए या

372
00:27:31,840 --> 00:27:36,000
प्रश्न करने के लिए आपको आपके हिसाब से जो आपको पता चले किय शंकराचार्य का मठ

373
00:27:36,000 --> 00:27:40,280
है आश्रम है यहां जाना चाहिए है ना मगर ऐसा नहीं है कि हम प्रश्न

374
00:27:40,280 --> 00:27:44,480
का उत्तर देने से मना कर रहे मैं एक बात बता रहा हूं कि यह चीजें शुरू

375
00:27:44,480 --> 00:27:49,080
कहां से होती है हमने प्रश्न उठाए जो शिक्षाएं विवादास्पद है वो

376
00:27:49,080 --> 00:27:53,200
प्रश्नों का जवाब देने के लिए आप आए हो उन प्रश्नों का जवाब देने के नाम से आप आए हो

377
00:27:53,200 --> 00:27:57,200
आप प्रश्न करने के नाम से नहीं आए हो हमने ये नहीं कहा कि भैया आप

378
00:27:57,200 --> 00:28:01,880
प्रश्न करिए ठीक है मगर फिर भी हम लोग प्रश्न

379
00:28:01,880 --> 00:28:06,160
का उत्तर देने के लिए दायित्व वान स्वयं को समझते हैं यथा सामर्थ

380
00:28:06,160 --> 00:28:10,680
कोई हम ज्ञानी नहीं है अल्प ज्ञानी है शंकराचार्य के अल्पज्ञ शिष्य

381
00:28:10,680 --> 00:28:14,720
और प्रभु श्री राम के साधारण भक्त मगर फिर भी

382
00:28:14,720 --> 00:28:19,240
आपके प्रश्नों का उत्तर हम अवश्य दे पाएंगे भगवान से ऐसी प्रार्थना है

383
00:28:19,240 --> 00:28:24,000
ठीक है तो अब बात आती है कि हमने उन्हें हटाया क्यों

384
00:28:24,000 --> 00:28:28,200
साढ़े तीन घंटे से उनके साथ हम मगज मरी कर रहे हैं जो व्यक्ति

385
00:28:28,200 --> 00:28:32,200
प्रमाण मांगता है उसके बाद प्रमाण जो है कहता है मैंने कब मांगा जो

386
00:28:32,200 --> 00:28:36,440
व्यक्ति यह कहता है कि स्पिरिचुअल मां है व आपकी यहां की मां है भौतिक

387
00:28:36,440 --> 00:28:40,720
मां है वो स्पिरिचुअल मां है फिर वो व्यक्ति कहता है शरीर

388
00:28:40,720 --> 00:28:45,280
जो है भगवान का वो वो शाश्वत है फिर कहता है कि भगवान उसको

389
00:28:45,280 --> 00:28:47,440
नष्ट कर सकते हैं नहीं कर

390
00:28:47,440 --> 00:28:51,520
सकते ये क्या है जैसे वो नहीं

391
00:28:51,520 --> 00:28:55,600
था वो राजपाल यादव किसी

392
00:28:55,600 --> 00:28:59,760
नेने छुप-छुप के देखी हो तो उस तोब वो दृश्य याद आता है जब मार पड़ने

393
00:28:59,760 --> 00:29:04,040
के बाद वो ऐसे करता है वो जब गूंगा बोलने लगता है उसका जो नायक

394
00:29:04,040 --> 00:29:08,160
था वो जब बोलने लगता है तो पहली बार जब उसको बोलता हुआ सुनता है तो राजपाल यादव ऐसे

395
00:29:08,160 --> 00:29:10,600
करने लगता

396
00:29:10,600 --> 00:29:14,880
है हसता भी है रोता भी है तो कुछ वैसी स्थितियां

397
00:29:14,880 --> 00:29:19,000
सी हो रही है ऐसे व्यक्ति के साथ हम साढ़े तीन साढ़े तीन घंटे

398
00:29:19,000 --> 00:29:23,320
बैठे हुए हैं उसके बाद हम कह भी रहे हैं कि चलो किसी और दिन रख लेंगे आपके

399
00:29:23,320 --> 00:29:27,360
प्रश्न जो है किसी और दिन ले लेंगे और उसके बाद क्या हो

400
00:29:27,360 --> 00:29:31,600
रहा है कि वो नहीं नहीं आज ही होंगी सारी बातें आज ही होंगी सारी बात

401
00:29:31,600 --> 00:29:36,080
तो फिर हमारी व्यवस्था है वो

402
00:29:36,080 --> 00:29:40,360
कि हमें हटाना पड़ा और सच्चाई

403
00:29:40,360 --> 00:29:45,080
तो यह है कि अगर हमारी जगह और कोई होता तो आपको बहुत पहले हटा दिया जाता

404
00:29:45,080 --> 00:29:49,200
ये सच्चाई है जब आप ये कहते ना स्पिरिचुअल मा तब हटा दिया जाता जब आप

405
00:29:49,200 --> 00:29:53,240
ये कहते कि जो है ये ईश्वर का शरीर शाश्वत

406
00:29:53,240 --> 00:29:57,240
भी है और ईश्वर उसे मार भी सकता है तो आपको हटा दिया जाता जब आप

407
00:29:57,240 --> 00:30:01,640
ये कहते कि वो जो इंफॉर्मेशन हमें मिल रही है वह गलत है

408
00:30:01,640 --> 00:30:02,440
झूठ नहीं है उस

409
00:30:02,440 --> 00:30:08,440
पर बात करेंगे अभी उस पर बात करेंगे अभी है ना

410
00:30:11,560 --> 00:30:17,560
खैर तो

411
00:30:17,560 --> 00:30:22,480
हम हमने फिर वो बढ़ा दिया उसको बंद कर दिया अब

412
00:30:22,480 --> 00:30:26,720
दोबारा जब हमारे से ा पर आ करर के चर्चा कर रहे हैं ा में कमेंट भी कर रहे हैं दोबारा

413
00:30:26,720 --> 00:30:31,800
कब करोगे चर्चा तो हमने कहा भाई फॉर्म भर दो करेंगे

414
00:30:31,800 --> 00:30:36,240
चर्चा भाई मैं स्कन से नहीं हूं किसी दिन उसको परंपरा

415
00:30:36,240 --> 00:30:41,200
वादियों से शास्त्रार्थ करने

416
00:30:41,200 --> 00:30:45,280
बोलो हम ठीक है हम चार

417
00:30:45,280 --> 00:30:49,800
शास्त्रार्थ नहीं करते हैं शास्त्रार्थ करने का अधिकार जिसको प्राप्त है

418
00:30:49,800 --> 00:30:55,240
वही करते हैं हम डिस्कशन कर सकते हैं

419
00:30:55,240 --> 00:30:58,400
और तो

420
00:30:58,400 --> 00:31:02,720
हमने उनको जब फॉर्म भरने को बोला तो अब वह कहते हैं कि भाई

421
00:31:02,720 --> 00:31:06,840
हमने पहले आ चुके हैं मतलब कई सारी बातें दोबारा से

422
00:31:06,840 --> 00:31:12,840
फिर हमने बोला

423
00:31:16,400 --> 00:31:22,400
कि संडे को

424
00:31:23,880 --> 00:31:28,200
बता तो फिर दोबारा से दोबारा चर्चा की उनसे बातें शुरू

425
00:31:28,200 --> 00:31:33,200
हुई उसमें

426
00:31:33,200 --> 00:31:37,640
instagram2 बजे आ जाइए आज ही आ जाइए तो जब

427
00:31:37,640 --> 00:31:41,760
आज ही आने की बात हुई तो उन्होंने कहा कि आपको एक दिन पहले

428
00:31:41,760 --> 00:31:46,560
बताना चाहिए था संडे को रखिए सैटरडे को रखिए हमने उनको यह भी बताया कि

429
00:31:46,560 --> 00:31:50,600
क्या कहते हैं भाई हम आप अभी 10:30 बज रहा है और दो 2 बजे का हम रख सकते हैं

430
00:31:50,600 --> 00:31:54,760
आप आज आ सकते हैं तो फिर वो बोले कि नहीं मैं 7:00 बजे

431
00:31:54,760 --> 00:31:59,480
आ सकता हूं आप आ सकते हो क्या हमको कहीं बाहर जाना था 7:00 बजे के बारे में

432
00:31:59,480 --> 00:32:03,480
तो फिर हमने कहा कि या तो कल रख लीजिए हां उन्होंने

433
00:32:03,480 --> 00:32:07,680
कहा कि आप अगर 7:00 बजे नहीं आ सकते तो हम तो कल रख लीजिए

434
00:32:07,680 --> 00:32:11,800
तो हमने कहा कल हमको कहीं बाहर जाना है तो इसी बारे में

435
00:32:11,800 --> 00:32:15,920
बात हो ही रही थी कि अब वो अपनी और डिमांड्स लाने लगे मॉडरेटर

436
00:32:15,920 --> 00:32:19,920
लाओ मॉडरेटर रिपन से ही होना चाहिए क्योंकि आप चर्चा में

437
00:32:19,920 --> 00:32:24,320
चिल्लाते हैं यह हैं बहुत सारी दरदर की बात तो भाई देखिए

438
00:32:24,320 --> 00:32:28,400
मॉडरेटर का कोई यहां पर वो नहीं वैसे हम प्रयास

439
00:32:28,400 --> 00:32:32,400
करते हैं करेंगे ऐसा नहीं है कि कोई मॉडरेटर मगर वास्तविकता यह है

440
00:32:32,400 --> 00:32:36,880
कि मॉडरेटर जब आप चाहते हैं तो आप यह चाहते हैं

441
00:32:36,880 --> 00:32:38,880
कि या तो आपके बताए हुए व्यक्ति पर

442
00:32:38,880 --> 00:32:43,040
हम भरोसा करें या फिर हमारे बताए हुए व्यक्ति पर आप भरोसा करें

443
00:32:43,040 --> 00:32:47,040
तो जब हमारे बताए हुए व्यक्ति पर आप भरोसा नहीं करेंगे तो आप यह अपेक्षा

444
00:32:47,040 --> 00:32:51,280
क्यों कर रहे हैं कि आपके बताए हुए व्यक्ति पर हम भरोसा करेंगे तो यह तो

445
00:32:51,280 --> 00:32:55,880
एक निष्पक्षता रहित बात हुई ना पक्षपात हीनता कहां रही इसमें

446
00:32:55,880 --> 00:32:59,880
तो मॉडरेटर इत्यादि के नाम से नहीं ये तो हमें डिसाइड करना पड़ेगा अपनी

447
00:32:59,880 --> 00:33:04,360
बुद्धि और विवेक से कि एक म्यूचुअल अंडरस्टैंडिंग बनानी होगी उसमें मॉडरेटर

448
00:33:04,360 --> 00:33:08,360
है इसकन का कि नहीं है तो इस तरह की भावना हम रखते हैं

449
00:33:08,360 --> 00:33:12,400
कि हम भैया एक सड़क पर निकल रहे हैं और सड़क पर निकलने के बाद ही

450
00:33:12,400 --> 00:33:16,400
वहां पर कहां पर क्लच लगाना है कहां पर ब्रेक का उपयोग करना है यह

451
00:33:16,400 --> 00:33:20,480
सारी बातें हम पहले से डिसाइड नहीं कर सकते और हमारी भावना यह रहती है

452
00:33:20,480 --> 00:33:24,520
कि हमारे हा तो कोई भी किसी भी प्रकार का अन्याय ना

453
00:33:24,520 --> 00:33:28,840
हो किसी के भी साथ किसी के भी अधिकार का हनन ना

454
00:33:28,840 --> 00:33:30,960
हो

455
00:33:30,960 --> 00:33:35,560
हां पहले इन्होंने 2 बजे के लिए हां कर दिया

456
00:33:35,560 --> 00:33:39,680
उसके बाद अब आगे

457
00:33:39,680 --> 00:33:43,840
क्या होता है कि जब इन्होंने इधर उधर की बात की मतलब ऐसा लग रहा था

458
00:33:43,840 --> 00:33:47,960
कि जैसे इनका चर्चा करने में इंटरेस्ट नहीं है बस एक फ एक मतलब य

459
00:33:47,960 --> 00:33:52,040
रखना चाहते कि हमने चर्चा के लिए कहा था और जब वो तय होने लगी

460
00:33:52,040 --> 00:33:53,960
तो फिर उससे इधर-उधर की बात है कि आप

461
00:33:53,960 --> 00:33:58,120
चिल्लाते हो चिल्लाओ ग ऐसी डिमांड करना जो इनको मालूम है कि हमने मानेंगे

462
00:33:58,120 --> 00:34:03,280
यह चाहते हैं मॉडरेटर स् कन का हो तो वो तो पॉसिबल नहीं है

463
00:34:03,280 --> 00:34:07,320
अच्छा फिर उसके बाद इनका आरोप लगाना बिना बोले निकाल दिया उसके बारे में हम

464
00:34:07,320 --> 00:34:13,320
बता ही चुके हैं कि हमने क्यों निकाला था बिना बोले

465
00:34:16,240 --> 00:34:20,520
और गालियों वाले कमेंट करते हैं आप लोग और

466
00:34:20,520 --> 00:34:24,640
यह सारी चीजें करने लगे हमने जब इनको कहा कि आपके लोग

467
00:34:24,640 --> 00:34:28,920
भी हमें गालियां देते हैं मैसेज में इतने गंदी गंदी गालियां

468
00:34:28,920 --> 00:34:32,920
आई है जिसको हमको क्या कहते हैं

469
00:34:32,920 --> 00:34:37,320
उसमें डालना पड़ता रिस्ट्रिक्शन में या ब्लॉक करना पड़ता है

470
00:34:37,320 --> 00:34:41,440
मैसेज में गंदी गंदी गालियां आ रही है वो सब कुछ है हमने जब

471
00:34:41,440 --> 00:34:45,680
इनको यह कहा कि व आपके लोगों वो जो है हमें गालियां दी गई कमेंट्स

472
00:34:45,680 --> 00:34:49,840
में तो जैसे इनका ये कहना है कि हमारे लोग आपको कमेंट्स में गालियां देते हैं हमने कहा

473
00:34:49,840 --> 00:34:54,000
ऐसे तो आपके भी देते हैं क्या उसके कारण आप हम पर दोष लगा सकते हैं अगर तो फिर इन

474
00:34:54,000 --> 00:34:58,120
इन ये जो कमेंट्स हमें गालियां दी जा रही है इनके कारण हम आपको दोष लगा सकते हैं तो एक बोल रहे

475
00:34:58,120 --> 00:35:02,640
हैं कि वो हम नहीं दे रहे हैं वो आर्य समाजी दे रहे हैं

476
00:35:02,640 --> 00:35:06,680
मतलब भैया ऐसा करो 250 ग्राम मिर्ची का पाउडर लाओ एवरेस्ट का आंखों

477
00:35:06,680 --> 00:35:09,280
में झोक दो मतलब

478
00:35:09,280 --> 00:35:13,720
हम मतलब आपको जब कुछ गलत कहा जाएगा तो उसके दोषी हम है निर्विवाद

479
00:35:13,720 --> 00:35:18,040
रूप से और जब हमको कोई अगर आपके संदर्भ से

480
00:35:18,040 --> 00:35:22,240
आपका हिमायती होते हुए जब हमको गाली दे देगा तो निर्विवाद रूप से वो आर्य

481
00:35:22,240 --> 00:35:27,800
समाजी है क्योंकि आप जो है दुनिया के वो है भगवान

482
00:35:27,800 --> 00:35:31,960
ईश्वर आप है ना आप लोग हमें कहते रहते हो भगवान है भगवान भगवान जैसी बातें

483
00:35:31,960 --> 00:35:35,920
तो अथॉरिटी तो आप दिखाते

484
00:35:35,920 --> 00:35:39,960
हो हां आप ऐसा करते हो कि मैं जो बोल

485
00:35:39,960 --> 00:35:45,960
दूं वो मान लिया जाए बहुत से लोग कहते हैं मैं जो बोलू वो मान लिया जाए

486
00:36:07,680 --> 00:36:13,680
तो अब आगे चलते हैं ये सारी बातें हो

487
00:36:16,160 --> 00:36:19,680
गई कुल मिलाकर

488
00:36:19,680 --> 00:36:23,760
के विषय पर बातें तो कर नहीं रहे थे वो और इधर

489
00:36:23,760 --> 00:36:28,560
उधर की बातें करना अभद्र आचरण करना चेतावनी

490
00:36:28,560 --> 00:36:33,120
देना तो यह सारी चीजें उनकी चल रही

491
00:36:33,120 --> 00:36:37,280
थी तो यह तो रहा कि वह कमेंट के बारे

492
00:36:37,280 --> 00:36:41,360
में जो जितनी चीजें हो सकती थी यथा सामर्थ हमने आप लोगों को बताने का प्रयास किया

493
00:36:41,360 --> 00:36:45,560
अब बात आती है कि

494
00:36:45,560 --> 00:36:49,680
एक चैनल पर इन्होंने हमारी जो

495
00:36:49,680 --> 00:36:53,760
लाइव चर्चा थी उसको लाइव किया था अपने चैनल पर अब इन्होंने वहां क्या किया है वह

496
00:36:53,760 --> 00:36:57,760
भी समझिए उसके लिए मुझे वो मोबाइल

497
00:36:57,760 --> 00:37:01,920
दे दीजिए जरा दिखाना है उस चैनल

498
00:37:01,920 --> 00:37:06,040
पर इन्होंने हमें नीच पता नहीं और कौन कन से और कौन-कौन

499
00:37:06,040 --> 00:37:10,560
से कई शब्द है जो सारे नहीं बोल सकता हा नीच का उपयोग में कर सकता हूं नीच बोलना

500
00:37:10,560 --> 00:37:14,760
ऐसे ब्रह्म को मैं मारता हूं ठुकरा हूं मतलब उसमें वो गलत

501
00:37:14,760 --> 00:37:19,160
शब्द है जो लात मारने वाला वो भी है यह सारी चीजें इन्होंने

502
00:37:19,160 --> 00:37:22,800
वो की तो पहले मैं आपको इनकी वो रिकॉर्डिंग

503
00:37:22,800 --> 00:37:26,840
सुना देता हूं जो इन्होंने उस चैनल पर हमारे बारे में मुख्य

504
00:37:26,840 --> 00:37:30,880
मुख्य जो हमने हमें समझ में आई ये

505
00:37:30,880 --> 00:37:35,080
सामने से आके ना बात करने आए ना इनको टैग करो इनको टैग

506
00:37:35,080 --> 00:37:39,160
करो इनके चैनल में जा जा के ऐसे ऐसे टैक करो इनको समझ में

507
00:37:39,160 --> 00:37:43,400
आ जाए बस छोड़ो इनको ये तो खुद ही लगे हैं यार

508
00:37:43,400 --> 00:37:46,320
ये वैष्णव

509
00:37:46,320 --> 00:37:50,440
और से हटो अभी हमारा दुश्मन को

510
00:37:50,440 --> 00:37:54,560
कोई और है ये ची अवान अरे अवान को समझा

511
00:37:54,560 --> 00:37:58,680
नहीं है ना अवान नहीं समझ रहा ना ये चीज मैंने भी उसे कहा

512
00:37:58,680 --> 00:38:02,680
सामने से पहले कोई अटैक करेगा हमें डिफेंड तो करना ही पड़ेगा ना फिर उ

513
00:38:02,680 --> 00:38:06,760
इतनी बात समझा पर आवान तो खुद कह रहा है कि पहले हम

514
00:38:06,760 --> 00:38:11,000
जो ये सब है वैष्णव अलग है जो अवेद से अलग है जो संप्रदाय

515
00:38:11,000 --> 00:38:15,240
इनको खत्म करो क्योंकि वो तो अवेद को ही मानता है वो कह रहा अवे सत्य

516
00:38:15,240 --> 00:38:19,800
और सब ये फालतू की चीज है अवेद के अलावा सनातन धर्म हा तो

517
00:38:19,800 --> 00:38:24,240
पहला वीडियो इसमें आपने क्या सुना आहवान

518
00:38:24,240 --> 00:38:28,400
यह कहता है कि बाकी सबको खत्म करो दैत को खत्म करो मेरी

519
00:38:28,400 --> 00:38:33,480
कौन सी वीडियो में हमने ऐसा कहा है इतना मिथ्या

520
00:38:33,480 --> 00:38:37,600
विचार मतलब साफसाफ कोरा झूठ हमने

521
00:38:37,600 --> 00:38:38,100
अपने

522
00:38:37,880 --> 00:38:42,080
कौन से वीडियो में कहा है कि हमें जो है अरे हमें तो आर समाज को नहीं नष्ट

523
00:38:42,080 --> 00:38:46,080
करना हमें तो रामपाल वाला जो तंत्र है उसको नहीं नष्ट करना

524
00:38:46,080 --> 00:38:50,320
शोधित हो जाए वही के वही मंदिर रहेंगे जो शिक्षा जो गलत प्रतिपादित

525
00:38:50,320 --> 00:38:55,040
हो रही है वैसा का वैसा ही मंदिर सबको चा वैसा ही रहे शोधित हो

526
00:38:55,040 --> 00:38:59,240
जाए भाई द्वैत को मानते हुए आप

527
00:38:59,240 --> 00:39:03,280
द्वैत को द्वैत का आलंबन आराम से ले सकते हैं हम भी लेते हैं हम

528
00:39:03,280 --> 00:39:07,960
भी द्वैत वादी हैं व्यवहार में हम द्वैत को ही मानते हैं

529
00:39:07,960 --> 00:39:12,000
वो आप लोग अपना द्वेष निकालने के लिए

530
00:39:12,000 --> 00:39:16,040
कहते हैं कि हम लोग यह कहते हैं कि हम ब्रह्म है नहीं हम ब्रह्म नहीं है

531
00:39:16,040 --> 00:39:20,320
हम ब्रह्म है इस स्थिति तक पहुंचना हमारा लक्ष्य है

532
00:39:20,320 --> 00:39:25,160
कैसे पहुंचेंगे राम की भक्ति करके कृष्ण की भक्ति करके

533
00:39:25,160 --> 00:39:30,120
वो प्राप्त है खैर मगर

534
00:39:30,120 --> 00:39:34,400
अगर पॉइंट की बात की जाए तो हमने अपने किसी भी वीडियो में यह नहीं कहा है कि हमें तंत्रों

535
00:39:34,400 --> 00:39:38,720
को नष्ट करना है हमें तो जो हमारी

536
00:39:38,720 --> 00:39:42,720
जो समरसता जो एकता है वो लानी है समाज में

537
00:39:42,720 --> 00:39:47,480
संगठित करना है समाज को जो बट गया है उसके कारण से जो ऐसी

538
00:39:47,480 --> 00:39:51,680
शिक्षाएं हैं जो बांट रही है हमें उस पर हम प्रश्न करते हैं

539
00:39:51,680 --> 00:39:53,000
केवल कहीं

540
00:39:53,000 --> 00:39:57,440
पर भी निर्णायक नहीं बनते इतनी बातें बोली जाती हैं

541
00:39:57,440 --> 00:40:01,680
आर समाज के द्वारा व ऋषि वाच चैनल पर इतनी बातें बोली गई सीधे-सीधे बोला

542
00:40:01,680 --> 00:40:06,320
गया कि तुम ऐसे हो तुम पाखंडी हो तुम ये हो तुम वो अब हमारा वीडियो उठाकर देख लीजिएगा

543
00:40:06,320 --> 00:40:10,400
सवाल किया प्रश्न किया अनंत सामर्थ वान है कि

544
00:40:10,400 --> 00:40:14,800
नहीं ईश्वर प्रश्न किया हमने हमने नहीं कहा दयानंद

545
00:40:14,800 --> 00:40:19,480
जी गलत लिखे ये किया वो किया परंपरा क्या है विरजानंद

546
00:40:19,480 --> 00:40:23,520
के पहले कौन पूर्णानंद के पहले कौन हमने प्रश्न

547
00:40:23,520 --> 00:40:27,720
किया जिससे कि वो प्रश्न बारबार उद् भाषित हो लाइम टेड

548
00:40:27,720 --> 00:40:31,760
हो उस पर बात हो उस पर चर्चा हो और कोई ऐसी बात निकल के आ

549
00:40:31,760 --> 00:40:35,800
सके हो सकता है कोई ऐसी बात हो उनके पास जो नहीं पता है लोगों को वो

550
00:40:35,800 --> 00:40:41,240
निकल के आ सके जिससे कि उनकी बात अकाट्य हो

551
00:40:41,240 --> 00:40:45,400
सके तो हमने कहीं भी

552
00:40:45,400 --> 00:40:49,760
हमने कहीं भी ऐसा नहीं कहा है कि भाई

553
00:40:49,760 --> 00:40:54,600
क्या कहते हैं हम किसी को नष्ट करना चाहते हैं तो वो क्या कह रहे हैं ये सब खत्म अद्वैत

554
00:40:54,600 --> 00:40:58,880
कुछ नहीं है हमने अपने सभी वीडियो में कहा है द्वैत रास्ता है

555
00:40:58,880 --> 00:41:03,080
अद्वैत प्राप्ति है द्वैत जो है

556
00:41:03,080 --> 00:41:07,160
मार्ग है और उसका लक्ष्य है अद्वैत

557
00:41:07,160 --> 00:41:08,160
कितनी

558
00:41:08,160 --> 00:41:12,400
आपको नहीं लगता य सुंदरता भरी बात है जिसमें द्वैत भी आ गया द्वैत

559
00:41:12,400 --> 00:41:16,560
भी आ गया अरे आर समाज भी आ जाएगा निराकार

560
00:41:16,560 --> 00:41:20,720
भगवान की बात है यहां पर करो निराकार की पूजा यह कहते हुए मत

561
00:41:20,720 --> 00:41:25,120
करो यह कहते हुए मत करो कि साकार नहीं है निराकार

562
00:41:25,120 --> 00:41:29,240
की पूजा करो यह कहते हुए मत करो साकार नहीं है क्योंकि जब आप

563
00:41:29,240 --> 00:41:33,600
ऐसा कहते हो तो निराकार और साकार में समाज समाज बट जाता

564
00:41:33,600 --> 00:41:38,280
है निराकार की पूजा भी है सनातन में अद्वैत

565
00:41:38,280 --> 00:41:42,360
में है तो अब अगर किसी का

566
00:41:42,360 --> 00:41:46,480
अस्तित्व ही इस कारण से है कि हम जो है इसके विरोधी के रूप में

567
00:41:46,480 --> 00:41:51,080
ही जाने गए हैं तो अब वो तो अपनी वो अस्तित्व को या तो बचाएगा या तो अपने

568
00:41:51,080 --> 00:41:55,440
क्या कहते हैं या तो अस्तित्व को नहीं बचा पाएगा उसका अस्तित्व

569
00:41:55,440 --> 00:41:59,720
भी नष्ट हो जाएगा तो वो बात अलग है किसी ने अपना अस्तित्व इस बात पर तैयार

570
00:41:59,720 --> 00:42:04,240
किया हो कि मैं कौन हूं मैं हूं अद्वैत का विरोधी

571
00:42:04,240 --> 00:42:08,600
अद्वैत वाले निराकार के विरोधी नहीं है हां

572
00:42:08,600 --> 00:42:12,880
अगर कोई ऐसा निराकार को मानने वाला जो अद्वैत का विरोधी तो वहां प्रॉब्लम

573
00:42:12,880 --> 00:42:17,080
है अद्वैत वाले द्वैत के विरोधी नहीं है हां यदि

574
00:42:17,080 --> 00:42:21,200
कोई द्वैत को मानने वाला ऐसा है जो अद्वैत का विरोधी है तो प्रॉब्लम

575
00:42:21,200 --> 00:42:27,200
है

576
00:42:28,680 --> 00:42:32,720
हां तो अगर कोई

577
00:42:32,720 --> 00:42:37,240
हो वहां पर निष्ठावान कृष्ण भक्त

578
00:42:37,240 --> 00:42:42,040
प्रभुपाद जी को मानने वाला तो वह आए हमारी लाइव में और

579
00:42:42,040 --> 00:42:46,240
यहां आकर बताए कि हमने यह बात कब बोली है कि हम जो

580
00:42:46,240 --> 00:42:50,640
है सबको बाकियों को नष्ट करना चाहते खत्म करना चाहते हैं

581
00:42:50,640 --> 00:42:54,920
वह आपके मन का भय है शायद कि कहीं वो सिद्धांति

582
00:42:54,920 --> 00:42:59,320
चर्चा ज्यादा होने लगी तो हमारा नष्ट होने वाला तो

583
00:42:59,320 --> 00:43:03,440
भय है अगर और आपके मन में द्वंदवा है कि हम विरोधी हैं अद्वैत

584
00:43:03,440 --> 00:43:07,600
के तो य भय अच्छा है जैसे दाग अच्छे हैं ना वैसे

585
00:43:07,600 --> 00:43:11,720
हीय भय भी अच्छा है जो बात हमने बोली नहीं वह आपको सुनाई दे रही

586
00:43:11,720 --> 00:43:16,200
है तोय भय का देवत है यह भय अच्छा है होना

587
00:43:16,200 --> 00:43:20,440
चाहिए फिर उन्होंने क्या बोला

588
00:43:20,440 --> 00:43:24,680
आगे देखिए क्या बात हो रही हैय तरीका था

589
00:43:24,680 --> 00:43:27,760
य तरीका था

590
00:43:27,760 --> 00:43:32,840
उनको कैसे भी करके वापस लेकर मतलब कैसे भी इन लोगों

591
00:43:32,840 --> 00:43:37,520
को होता क्या है थो नक आए

592
00:43:37,520 --> 00:43:41,640
विस्तार के लिए उन्होने दो चार बात बोली जिस कारण से थोड़ा इनका

593
00:43:41,640 --> 00:43:43,800
विरोध किया गया मतलब आपने

594
00:43:43,800 --> 00:43:47,960
क्यों कह दिया कृष्ण और इसको बराबर बो भाई भारत में कभी बोला

595
00:43:47,960 --> 00:43:53,960
नहीं गया के बा

596
00:44:15,960 --> 00:44:21,960
क् वरा बरा

597
00:44:23,080 --> 00:44:28,440
चैनल बसे बो

598
00:44:28,440 --> 00:44:32,800
जिस इंटूट को फलो करता है व सारा ही

599
00:44:32,800 --> 00:44:37,280
अग डि स ने

600
00:44:37,280 --> 00:44:39,600
शंकराचार्य

601
00:44:39,600 --> 00:44:45,600
हो घर वाप कर सकते तो बोले घर वापसी करना सना

602
00:44:46,560 --> 00:44:52,560
में डि म कोई भी तरफ

603
00:44:53,080 --> 00:44:57,080
स इनके अंग जो घर वाप करते

604
00:44:57,080 --> 00:45:01,520
समाज को इही कारणों से आर्य समाज कोलोग विरोध करते हैं आर्य समाज घर वापसी करवाता हैन

605
00:45:01,520 --> 00:45:05,520
घर वापसी करवाता है तो इस कारण से ये लोग समाज का

606
00:45:05,520 --> 00:45:10,680
विरोध करते है मेन कारण ये है

607
00:45:10,680 --> 00:45:14,800
और तो भाई इन्होंने कहा कि सारे ट्रेशन

608
00:45:14,800 --> 00:45:19,680
जो होते हैं यानी परंपरावादी परंपरा निष्ठ वो जो है घर वापसी नहीं कराते

609
00:45:19,680 --> 00:45:24,080
कहां से पता चल गया कहां से पता चल गया आपको

610
00:45:24,080 --> 00:45:28,120
आप आइए कितने लोगों को लाना है आपको चलिए शंकर

611
00:45:28,120 --> 00:45:32,360
शंकर परंपरा के आचार्यों के ले चलते हैं करिए घर वापसी मतलब अपने

612
00:45:32,360 --> 00:45:36,440
मन से कुछ भी बोलना है वो बोल कर के और सामने वाले को जो है

613
00:45:36,440 --> 00:45:40,600
यह बता दो कि हम बहुत अच्छे हैं दुनिया बहुत बुरी है और सबसे

614
00:45:40,600 --> 00:45:44,680
बड़ी बात क्या है कि चलो आर्य समाज तो स्वयं को परंपरावादी नहीं

615
00:45:44,680 --> 00:45:48,760
कहता है तुम तो कहते हो तुम तो कहते

616
00:45:48,760 --> 00:45:53,000
हो ना कि हम परंपरावादी है तो क्या कह रहे हो कि जितने

617
00:45:53,000 --> 00:45:57,400
भी ट्रेडिशनल है वो घर वापसी नहीं करते आप ट्रेडिशनल

618
00:45:57,400 --> 00:46:02,280
नहीं हो क्या भगवत गीता में क्यों लिखा है बार-बार हमरा ज्ञान परंपरा से प्राप्त

619
00:46:02,280 --> 00:46:06,280
हुआ तो यहां से इनका परंपरा विरोध

620
00:46:06,280 --> 00:46:10,480
का पता चलता है और परंपरावादी होने के पाखंड का पता चलता

621
00:46:10,480 --> 00:46:14,720
है कि परंपरावादी होने का पाखंड है वस्तुतः ये परंपरा विरोधी

622
00:46:14,720 --> 00:46:19,200
है और वह बात अलग है कि इनको नहीं पता कि परंपरा प्राप्त आचार्य

623
00:46:19,200 --> 00:46:23,360
भी जो विधर्मी हो चुके हैं किसी कारण वश उनका

624
00:46:23,360 --> 00:46:25,920
वो हो चुका है उनकी घर वापसी होती है

625
00:46:25,920 --> 00:46:29,920
बंगाल के जो ब्राह्मण थे उनको जबरदस्ती मास

626
00:46:29,920 --> 00:46:34,080
इत्यादि खिला खिला करके व्यवस्था पूर्ण उनका धर्मांतरण वहा कराया गया था

627
00:46:34,080 --> 00:46:38,560
करपात्री जी महाराज ने वहां पर जाकर के उनकी घर वापसी कराई थी जाइए

628
00:46:38,560 --> 00:46:42,920
हिस्ट्री पढ़िए जाकर के मतलब जितना

629
00:46:42,920 --> 00:46:47,000
आपको पहुंचा दिया गया सुना दिया गया केवल उतनी ही सच्चाई है दुनिया में और

630
00:46:47,000 --> 00:46:51,160
कुछ नहीं हमने जापान नहीं देखा तो जापान नहीं है बन जाओ शिरोही हमने

631
00:46:51,160 --> 00:46:54,960
भगवान नहीं देखा तो भगवान नहीं

632
00:46:54,960 --> 00:46:58,960
है बन जाओ सिरो जिसके पास सामने

633
00:46:58,960 --> 00:47:03,520
खड़ी हुई तीन स्त्रियों में कौन माता है कौन बहन है कौन पत्नी है

634
00:47:03,520 --> 00:47:07,840
यह विभाजन करने का कोई आधार नहीं है उसका नाम है सिरोही बन जाओ

635
00:47:07,840 --> 00:47:13,800
उसका यही सिद्धांत है मैंने नहीं देखा जापान तो मैं नहीं मानता जापान

636
00:47:13,800 --> 00:47:18,040
है सारे ट्रेडिशनल स्वयं को फिर ट्रेडिशनल

637
00:47:18,040 --> 00:47:21,920
भी

638
00:47:21,920 --> 00:47:27,920
कहेंगे फिर सुनो आगे और क्या कह रहे हैं

639
00:47:28,040 --> 00:47:32,240
माया नहीं कगा तो क्या तुम लोग मायावती

640
00:47:32,240 --> 00:47:36,560
कहलाने के अपने ईश्वर क हम ईश्वर है और दूसरे

641
00:47:36,560 --> 00:47:40,760
की पत्नी पर दूसरे की होने वाली वाइ प करोगे य

642
00:47:40,760 --> 00:47:44,760
तुम ईश्वर हो सुपर चट दे रहे और लिख रहे

643
00:47:44,760 --> 00:47:48,960
हो य यह रहा भव्य दास का नंबर

644
00:47:48,960 --> 00:47:52,960
पहले इसने नंबर वा किया इस मायावादी ने मेरे पर किसी

645
00:47:52,960 --> 00:47:57,040
को चाहिए तो बताना इसकी गर्लफ्रेंड की प है न मिनट में

646
00:47:57,040 --> 00:48:01,160
में हारा था मुझसे हा भाई खुद को ईश्वर कहते

647
00:48:01,160 --> 00:48:05,640
कहते क्या खुद को ईश्वर समझने लगे हो क्या किसी की जो चाहे गर्लफ्रेंड

648
00:48:05,640 --> 00:48:09,760
हो किसी की होने वाली वाफ उसका फोटो वायरल करोगे साले इतने नीच हो गए तुम

649
00:48:09,760 --> 00:48:14,160
हा तुम इतने नीच हो ग तुम किसी का नंबर वायरल करो डिबेट के कारण

650
00:48:14,160 --> 00:48:18,160
यही संस्कार है तुमको अच्छा मैं

651
00:48:18,160 --> 00:48:22,680
डिबेट गया नहीं और मुझे जाना भी नहीं है ठीक है

652
00:48:22,680 --> 00:48:26,880
क्योंकि अभी से नहीं हं मेरे कोई प्रश्न नहीं है लेकिन

653
00:48:26,880 --> 00:48:29,280
जब इंसान जब ये बार बार वैश्णवा

654
00:48:29,280 --> 00:48:33,640
चार्य की निला करेगा हम जाएंगे

655
00:48:33,640 --> 00:48:37,640
ठीक है लिटरली क्या इस जनता

656
00:48:37,640 --> 00:48:41,800
क्या अनपढ जनता है क्या कोई लिख रहा है कि मैंने इसके फोटो वायरल

657
00:48:41,800 --> 00:48:45,800
किया है कोई कह रहा है कि मैंने इसका नंबर वायरल किया है सुपर चैट कर रहा है इसको ये बंदा

658
00:48:45,800 --> 00:48:50,240
इतना मधूर है कि सुपर चैट को सामने लगा दे रहा है कोई इंसान भ

659
00:48:50,240 --> 00:48:54,280
को गाली दे रहा है तो ये उसको हाईलाइट कर दे रहा है कभी उसको बोले

660
00:48:54,280 --> 00:48:59,040
भाई आप सामने बारबार कर रहे हो ठी बायनेस ठीक है

661
00:48:59,040 --> 00:49:04,200
इसको समझ नहीं आता है डिबेट कभी डिबेट तो किया है नहीं प्रोफेशनली

662
00:49:04,200 --> 00:49:08,520
अब इसमें तो भैया इन्होंने भरमार लगा दी पहले

663
00:49:08,520 --> 00:49:12,960
तो मैं आपको कहूंगा कि आप हिंदू

664
00:49:12,960 --> 00:49:17,000
तो है नहीं जब आप किसी मातृ शक्ति को किसी की गर्लफ्रेंड

665
00:49:17,000 --> 00:49:21,200
बता रहे हैं तो आप हिंदू है कौन है

666
00:49:21,200 --> 00:49:25,200
क्योंकि जिसकी आप गर्लफ्रेंड बता रहे हैं अगर वो होने वाली भार है उसकी

667
00:49:25,200 --> 00:49:29,480
तो यह आपके लिए उसके लिए आप के शब्द हैं गर्लफ्रेंड

668
00:49:29,480 --> 00:49:33,920
य कहां से सीखा है आपने कौन से परंपरा प्राप्त अध्ययन किया है

669
00:49:33,920 --> 00:49:38,040
भाई गर्लफ्रेंड यही सिखाओ ग यही शिक्षा दोगे

670
00:49:38,040 --> 00:49:42,120
अपने चैनल से जनता को कि आवान गलत है हमसे आकर सीखो गर्लफ्रेंड बॉयफ्रेंड

671
00:49:42,120 --> 00:49:44,520
यह सीखो यह तो अमोक

672
00:49:44,520 --> 00:49:49,080
लीला जी भी नहीं सिखाते हैं अरे गर्लफ्रेंड

673
00:49:49,080 --> 00:49:54,560
शब्द का उपयोग क्यों कर रहे हो जब कोई स्कोन की तरफ से आकर के बात कर रहा

674
00:49:54,560 --> 00:50:00,560
है हम फिर क्या कह रहे हो हमने

675
00:50:03,840 --> 00:50:06,280
वैष्णवास्त्र

676
00:50:06,280 --> 00:50:12,280
आता है लास्ट की जो स्क्रीन आती है उसमें वैष्णवास्त्र

677
00:50:26,760 --> 00:50:30,920
प्रभुपाद जी या स्कन तंत्र य कहता है कि हम जो है वही वाले

678
00:50:30,920 --> 00:50:35,040
वैष्णव है जो मधवा चार से स्टार्ट हो रहे हैं तो उस पर किसी दिन चर्चा कर लीजिएगा

679
00:50:35,040 --> 00:50:39,040
आ कर के उनकी परंपरा हंस

680
00:50:39,040 --> 00:50:43,840
भगवान से शुरू हो रही है आपकी परंपरा भगवान श्री कृष्ण से शुरू हो रही

681
00:50:43,840 --> 00:50:48,040
है ढेर सारे ढेर सारे

682
00:50:48,040 --> 00:50:53,520
अंतर है आप में और उनमें तो क्या गुरु विरोधी है

683
00:50:53,520 --> 00:50:57,600
क्या तो यह तो एक अलग चैप्टर है हालांकि ने श्रील प्रभुपाद जी

684
00:50:57,600 --> 00:50:59,600
को भी यह सब होते हुए भी

685
00:50:59,600 --> 00:51:03,680
हमने कभी भी उनके प्रति कोई अपमानजनक टिप्पणी नहीं की हमने प्रश्न पूछे

686
00:51:03,680 --> 00:51:08,440
हैं वो आपको गाली लगते हैं क्यों लगते हैं यह भय है

687
00:51:08,440 --> 00:51:13,120
सैद्धांतिक प्रश्नों पर आपको जो भय हो रहा है यह भय का तक है

688
00:51:13,120 --> 00:51:17,720
कि प्रश्न आपको गाली लगने

689
00:51:17,720 --> 00:51:22,080
लगे आपने खुद को घोषित कर लिया तो आप वैष्णव हो गए हैं अभी

690
00:51:22,080 --> 00:51:26,160
सैद्धांतिक रूप से पूछ लिया जाएगा वैष्णव कौन होता है दिखा दिया जाएगा

691
00:51:26,160 --> 00:51:30,360
कि और वैष्णव में कोई अंतर नहीं है तो आवाज नहीं निकलेगी इसलिए

692
00:51:30,360 --> 00:51:34,760
इन सिद्धांतों को साम इन सिद्धांतों से बचने के लिए वो वैश्णवा

693
00:51:34,760 --> 00:51:38,920
चार्य को गाली देगा तो मैं आऊंगा हा और क्या कहा इन्होंने

694
00:51:38,920 --> 00:51:42,920
धूर्त है जो उस चैट को ऊपर

695
00:51:42,920 --> 00:51:47,000
दिखा रहा है इसमें गालियां दी जा रही है गालिया दी गई उसमें पूरे साढ़े

696
00:51:47,000 --> 00:51:51,360
तीन घंटे की लाइव में किसी भी गाली वाले कमेंट को ऊपर नहीं दिखाया गया

697
00:51:51,360 --> 00:51:55,400
है और आप क्या कह रहे हो धूर है गाली वाले वो चैट को ऊपर दिखा रहा

698
00:51:55,400 --> 00:51:59,320
है और क्या कह

699
00:51:59,320 --> 00:52:03,480
कि वो उसकी जो होने वाली भार्या

700
00:52:03,480 --> 00:52:07,520
है उसके लिए ऐसी बात कर रहे भाई हमने जो अगर वह

701
00:52:07,520 --> 00:52:11,720
चीज ऊपर आई भी है जिसमें की आपत्ति जनक कोई बात नहीं है मैं फिर कह रहा हूं

702
00:52:11,720 --> 00:52:16,320
वो चीज ऊपर आई भी है उसको भी हमने ब्लर कर दिया आपने क्या किया

703
00:52:16,320 --> 00:52:20,400
उसी बात को वहां पर खुल्लम खुल्ला दिखाया और अभी भी दिखा रहे हो कोई

704
00:52:20,400 --> 00:52:24,640
ब्लर नहीं हुआ है इसका अर्थ क्या हुआ आपके लिए

705
00:52:24,640 --> 00:52:29,240
अगर वो उसमें कोई आपत्ति जनक बात है मातृ शक्ति के लिए

706
00:52:29,240 --> 00:52:33,920
भव्य राधा कृष्ण दास जी की जो होने वाली भार्या है

707
00:52:33,920 --> 00:52:38,000
या फिर उनसे उनका विवाह वो निश्चित हुआ है

708
00:52:38,000 --> 00:52:42,040
मैं इसी रूप में जानता हूं आपकी गर्लफ्रेंड वाली चीजों को मैं नहीं

709
00:52:42,040 --> 00:52:46,880
जानता व आप जानो वो सिखाओ अपने चैनल से

710
00:52:46,880 --> 00:52:51,240
है ना और क्या है कि आपने क्या किया

711
00:52:51,240 --> 00:52:55,360
कि हमने जो जो हमसे जो अनजाने में हुआ

712
00:52:55,360 --> 00:52:59,360
और वो भी इसके निमित्त हुआ कि हम उस चीज को सही कर सके उसको भी

713
00:52:59,360 --> 00:53:03,440
हमने बदलने के लिए प्रक्रिया चालू कर दी आपने क्या किया उसको अपने आ से और

714
00:53:03,440 --> 00:53:07,520
हाईलाइट करके रिपीटेड दिखाया और अभी भी दिखा रहे हो इसका

715
00:53:07,520 --> 00:53:11,760
अर्थ यह है कि आपके लिए उस मातृ शक्ति की जो गरिमा है

716
00:53:11,760 --> 00:53:14,840
वह प्राथमिकता पर नहीं है आवान

717
00:53:14,840 --> 00:53:19,520
को नीचा दिखाना आपके लिए प्राथमिकता

718
00:53:19,520 --> 00:53:23,640
है और और सुनो सैद्धांतिक रूप से बात करते

719
00:53:23,640 --> 00:53:29,640
हैं हम लोग तो भाई मन गणन बातें नहीं करते और सुनो

720
00:53:30,720 --> 00:53:35,080
कि आपने क्या-क्या कहा नीच

721
00:53:35,080 --> 00:53:39,320
धूर्त और और भी कुछ कहा गाली वाली देते

722
00:53:39,320 --> 00:53:43,760
हुए तो रामो विग्रहवां धर्मा वाल्मीकि

723
00:53:43,760 --> 00:53:47,920
रामायण 337 1 जो राम ने किया वह धर्म है

724
00:53:47,920 --> 00:53:52,800
जो राम की सीमा के बाहर है वह अधर्म है निम्न नीचता है

725
00:53:52,800 --> 00:53:57,080
राम ने जब रावण ने प्रभु श्री राम की

726
00:53:57,080 --> 00:54:01,120
जो अर्धांगिनी है माता सीता उनका जब हरण कर लिया था कौन सी

727
00:54:01,120 --> 00:54:06,560
जगह पर उन्होंने गाली दी थी रावण

728
00:54:06,560 --> 00:54:10,680
को कौन सी जगह पर दी थी यह राम से नहीं सीखा

729
00:54:10,680 --> 00:54:15,200
ना किससे सीखा मलेच्छ से इसीलिए काउंटर करते हैं

730
00:54:15,200 --> 00:54:19,600
मलेच्छ गुरु ना बनाओ मलेच्छ गुरु बनाओगे यह होगा

731
00:54:19,600 --> 00:54:23,960
मलेच्छ से सीखा ना कि गाली दो नीचता

732
00:54:23,960 --> 00:54:28,880
पर उतर आओ राम जी ने तो नहीं सिखाया

733
00:54:28,880 --> 00:54:32,920
ये और क्या कह रहे हो अच्छा हुआ मैं लाइव में नहीं गया अच्छा हुआ जो

734
00:54:32,920 --> 00:54:38,920
नहीं है वो लाइव छोड़ो सामने नहीं

735
00:54:40,520 --> 00:54:44,240
हो अगला वीडियो

736
00:54:44,240 --> 00:54:49,000
सुनो ऐसा तो नहीं है डिबेट हुआ है मुसलमानों डिबेट नहीं जाएगा

737
00:54:49,000 --> 00:54:53,040
या जो ऐसा है कि क्रश्न या फिर अन्य धर्म वालो के पास ट नहीं जाएगा सबके पास ट

738
00:54:53,040 --> 00:54:57,160
जाएगा और जब ये हरकत देख कमेंट को उन्होने जो पिन कर रहे

739
00:54:57,160 --> 00:55:01,200
थे कमेंट ठीक है ऐसे सुपर चैट भा समझ नहीं आता क्या

740
00:55:01,200 --> 00:55:05,240
चीज हमें बोलना है किसी महिला के बारे तुम बात कर रहे

741
00:55:05,240 --> 00:55:09,680
हो फिर तुम कहोगे कि हम हम स्मार्थ है अ ब्रम

742
00:55:09,680 --> 00:55:13,720
में ईश्वर काहे का ईश्वर जब किसी स्त्री का सम्मान नहीं कर सकते

743
00:55:13,720 --> 00:55:17,920
हो कहे का ईश्वर हो तुम कहे का ब्रह्म हो

744
00:55:17,920 --> 00:55:22,120
तुम लात मारते हैं ऐसे ब्रह्म को हम जब तुम किसी स्त्री

745
00:55:22,120 --> 00:55:26,120
का सम्मान नहीं कर पा रहे हो तुम सुपर चैट डाल रहे हो का उसको महान दिखा रहे

746
00:55:26,120 --> 00:55:32,120
हो अरे मैंने तो इसकी होने वाली वाइफ के फोटो वायरल किया

747
00:55:36,720 --> 00:55:40,960
है सुन लिया लात मारता हूं

748
00:55:40,960 --> 00:55:43,240
ऐसे

749
00:55:43,240 --> 00:55:47,280
इसको है ना तो यह

750
00:55:47,280 --> 00:55:51,800
सारी इनकी गतिविधियां है और यह अपने आप को धार्मिक उत्थान करता

751
00:55:51,800 --> 00:55:57,440
मानते हैं चार पांच झापड़ में ठीक हो जाओगे

752
00:55:57,440 --> 00:56:00,720
पूरा नशा उतर जाएगा

753
00:56:00,720 --> 00:56:05,080
पूरा बस वही है कि जब तक भैया मोबाइल

754
00:56:05,080 --> 00:56:09,280
प्राप्त है इंटरनेट प्राप्त है वो अब तो थोड़ा महंगा हो गया 00

755
00:56:09,280 --> 00:56:14,480
का कर दिया रिचार्ज जीओ य का तो कुछ भी करते

756
00:56:14,480 --> 00:56:18,480
रहो लात मारता

757
00:56:18,480 --> 00:56:23,360
हूं अब आ जाते हैं थोड़े सैद्धांतिक विषय प है ना

758
00:56:23,360 --> 00:56:28,640
कि लोगों को समरा हो जाए कि

759
00:56:28,640 --> 00:56:31,480
उसमें क्या हुआ

760
00:56:31,480 --> 00:56:35,640
है सबसे पहले हमारी बात हुई मायावादी पर कि वह

761
00:56:35,640 --> 00:56:39,840
हमें अवैध मायावादी वह मायावादी जिसको जिसकी बात पद्म

762
00:56:39,840 --> 00:56:44,040
पुराण में हो रही है वह हमें किस प्रकार से कहते हैं तो

763
00:56:44,040 --> 00:56:48,120
क्या हो रहा है कि हमने जब उनसे

764
00:56:48,120 --> 00:56:52,200
यह पूछा उनमें से एक उन्होंने चार पॉइंट बताए

765
00:56:52,200 --> 00:56:58,200
थे जिसमें से एक पॉइंट यह था

766
00:56:58,600 --> 00:57:02,720
कि आपके विद्वानों ने अपने आप को मायावादी माना है तो

767
00:57:02,720 --> 00:57:07,080
इसम प्रश्न क्या बनता है हमारे विद्वानों की जो बात है वह आप तक कैसे

768
00:57:07,080 --> 00:57:11,320
पहुंची परंपरा से पहुंची परंपरा से अध्ययन किया अपने मन से अध्ययन किया

769
00:57:11,320 --> 00:57:15,680
हमारे विद्वानों ने क्या स्वयं को अवद मायावादी कहा है क्योंकि पदम

770
00:57:15,680 --> 00:57:19,840
पुराण की जो बात हो रही है उसम वैदिक मायावादी अवद तो अ वैदिक मायावादी

771
00:57:19,840 --> 00:57:23,920
तो कहा नहीं है या तो उसमें यह कहा जा रहा हो कि वो

772
00:57:23,920 --> 00:57:28,040
फलाने व्यक्ति जो कहेंगे वो वाले मायावादी क्योंकि मायावादी का अर्थ तो

773
00:57:28,040 --> 00:57:32,080
इस बात से है कि जिसने माया की व्याख्या की माया की बात की तो वह

774
00:57:32,080 --> 00:57:35,360
जो बात है वह

775
00:57:35,360 --> 00:57:39,560
मायावादी जिस कांटेक्ट में अपने आप को मायावादी कहा है

776
00:57:39,560 --> 00:57:44,000
वो वही कॉन्टेक्स्ट है भाई शास्त्रों में माया नाम से बात हुई है भगवान

777
00:57:44,000 --> 00:57:48,000
माया नाम से बात कर रहे हैं पद्म पुराण में गीता महात्मा में बता

778
00:57:48,000 --> 00:57:52,360
रहे हैं कि मेरा जो शरीर है माया है अब उसकी व्याख्या

779
00:57:52,360 --> 00:57:56,680
आपकी कुछ भी हो मगर माया शब्द तो है ना क ज

780
00:57:56,680 --> 00:58:00,760
कौन के शास्त्रों में है इसी संदर्भ में उन विद्वानों ने

781
00:58:00,760 --> 00:58:05,240
अपने आप को माया बात कहा तो इससे ये सिद्ध नहीं होता कि ये जो इन्होंने मायावादी

782
00:58:05,240 --> 00:58:08,800
तो ये वही मायावादी

783
00:58:08,800 --> 00:58:12,840
मायावादी जवाब नहीं था और दूसरी बात कि वो तो अपने आप को

784
00:58:12,840 --> 00:58:16,960
वैदिक भी कहते हैं वो तो अपने आप को ब्रह्म को प्राप्त करवाने वाला जो ज्ञान

785
00:58:16,960 --> 00:58:21,000
देने वाला यह भी बताते हैं प्रामाणिक आचार्य भी बताते हैं तो यदि उनकी

786
00:58:21,000 --> 00:58:25,520
बात को आप प्रमाण मान रहे हो तो इसको नहीं मान कर के इसको कैसे मान रहे हो

787
00:58:25,520 --> 00:58:29,520
इसका अ कि उनकी बात के आधार पर यह नहीं आप मान सकते कि वह

788
00:58:29,520 --> 00:58:34,040
वही मायावादी जिसके बारे में बात हो रही है कहां

789
00:58:34,040 --> 00:58:38,080
उसमें पद्म पुराण फिर

790
00:58:38,080 --> 00:58:42,640
दूसरा आपका था पॉइंट बहुत लोग कहते हैं कि आप मायावादी हो बहुत लोग

791
00:58:42,640 --> 00:58:46,920
तो हमने क्या कहा था उसमें ईसाई कहते हैं कि सनातन गलत

792
00:58:46,920 --> 00:58:51,040
है बौद्ध कहते हैं कि सनातन गलत

793
00:58:51,040 --> 00:58:55,080
है मुस्लिम कहते हैं कि सनातन गलत है इसका अर्थ

794
00:58:55,080 --> 00:59:00,080
क्या हुआ हम गलत है बहुत लोग कहते हैं और इस बारे

795
00:59:00,080 --> 00:59:04,120
में हमने फिर बताया कि आप जो है आप जो है जो

796
00:59:04,120 --> 00:59:08,840
बहुत लोग कहते हैं इससे यह सनातन सिद्धांत नहीं है

797
00:59:08,840 --> 00:59:12,840
अगर प्रहलाद के समय में य पूछा जाता वोट डलवाए

798
00:59:12,840 --> 00:59:16,880
जाते कि कौन प्रहलाद के पक्ष में है कौन हिरण्य कश्यप के पक्ष में है तो कितने वोट

799
00:59:16,880 --> 00:59:21,400
आते प्रहलाद जी को तो प्रहलाद जी गलत थे

800
00:59:21,400 --> 00:59:25,680
महाभारत के समय में अगर पांडवों के लिए वोट डलवाए जाते कि डालो पांडव

801
00:59:25,680 --> 00:59:29,680
पांडव सही है कि नहीं तो कितने वोट आते पांडवों को तो इस आधार पर तय किया जाएगा

802
00:59:29,680 --> 00:59:33,680
कि कितने लोग कह रहे हैं संख्या बल क्या कह रहा है यह

803
00:59:33,680 --> 00:59:38,080
सिद्धांत है सनातन और सनातन से याद

804
00:59:38,080 --> 00:59:42,160
आया जो इन्होंने पिछले अभी हमने जो रिकॉर्डिंग सुनी है उसमें क्या कह

805
00:59:42,160 --> 00:59:46,360
रहे थे ये लोग कि भाई वो जो है घर वापसी

806
00:59:46,360 --> 00:59:50,560
कराने के लिए थोड़ा बहुत ऐसे बोल देते हैं ये थोड़ा बहुत जो ऐसे बोल रहे हैं उसको

807
00:59:50,560 --> 00:59:55,200
लिखो नाय सनातन शिक्षा नहीं है और आपने कहा इंडिया में नहीं बोला जाता

808
00:59:55,200 --> 00:59:59,280
क्या वो वीडियो इंडिया में प्रचारित प्र सादित नहीं हो रहे हैं जिसमें वो ये बोल रहे हैं

809
00:59:59,280 --> 01:00:04,720
और इंडिया में भी बोला जाता है भारत में बोला गया

810
01:00:04,720 --> 01:00:06,200
है कृष्ण

811
01:00:06,200 --> 01:00:10,240
अल्लाह और यहोवा में कोई अंतर नहीं है यह हमसे इकोन मंदिर के अध्यक्ष ने बोला

812
01:00:10,240 --> 01:00:14,760
है क्यों बोला विदेशों में बोलते ना

813
01:00:14,760 --> 01:00:18,880
हम तो टीका भी लगाए थे उनको मालूम था कि हम हिंदू हैं क्यों बोला बोल

814
01:00:18,880 --> 01:00:23,320
देते कि नहीं नहीं अलग अलग है व ऐसे ही बोलते हैं हम लोग नहीं

815
01:00:23,320 --> 01:00:27,320
बोला बोला इस कन य अल्लाह में कोई अंतर नहीं है

816
01:00:27,320 --> 01:00:30,080
यह तीनों एक ही

817
01:00:30,080 --> 01:00:35,040
है अच्छा हुआ सामने नहीं आए

818
01:00:35,040 --> 01:00:39,160
हा और अगर वह सनातन सिद्धांत नहीं है तो यह भी यही तो हम कह

819
01:00:39,160 --> 01:00:43,160
रहे हैं कि भाई कहो ना कि सनातन नहीं इस पर लिख दो यह जो शिक्षा है यह

820
01:00:43,160 --> 01:00:48,000
सनातनी हों के लिए नहीं है यह जो शिक्षा है यह सनातन शिक्षा नहीं है लिख दो ना

821
01:00:48,000 --> 01:00:52,200
नहीं ग्रंथ तो य सनातन ही है मगर ये कह इसलिए

822
01:00:52,200 --> 01:00:56,360
रहे जो किसी भी देश काल परिस्थिति से प्रभावित ना हो उसका नाम

823
01:00:56,360 --> 01:01:00,400
नित्य शाश्वत है आपका ज्ञान जो है य वाला

824
01:01:00,400 --> 01:01:05,080
प्रभावित है इस स्थिति से कि वहां पर धर्म का प्रचार कैसे हो

825
01:01:05,080 --> 01:01:11,080
करो मगर फिर उसको सनातन मत

826
01:01:20,280 --> 01:01:24,520
कहो वाचस्पति के लिए भी है ना कि वाचस्पति

827
01:01:24,520 --> 01:01:28,680
ने अरे भाई तुम जो अपनी लाइव में वाचस्पति का सूत्र दिखा रहे हो उसकी

828
01:01:28,680 --> 01:01:32,920
बात तो हमने कर ली ना वाचस्पति खुद आए थे क्या आपको बताने मैं अवैध मायावादी

829
01:01:32,920 --> 01:01:37,880
हूं वही मायावादी हूं जो जिसकी बात पद्म पुराण में हो रही है

830
01:01:37,880 --> 01:01:42,040
बैठ के वहां कार्बो टारगेट खेल रहे हो लखनऊ

831
01:01:42,040 --> 01:01:46,440
में रहता हूं उत्तर प्रदेश 7408 30169 चले

832
01:01:46,440 --> 01:01:50,440
आना और फिर बोलना वही सब रिपीटेड बोलना आंखों के

833
01:01:50,440 --> 01:01:54,920
सामने जो तुमने बोला मैं वही बोलूंगा जो मैं आज यहां बोल रहा हूं

834
01:01:54,920 --> 01:01:59,000
इसको कहते हैं जो प्रभावित नहीं होता देशकाल

835
01:01:59,000 --> 01:02:03,000
परिस्थिति से तुमने जो किया व अधर्म था क्योंकि जिस दिन मैं सामने खड़ा हंगा

836
01:02:03,000 --> 01:02:08,400
तुम्हारी बोली नहीं निकलेगी वो वाली मर्यादित हो

837
01:02:08,400 --> 01:02:12,680
जाओगे यथा सम्मत जितनी मर्यादा मालूम होगी

838
01:02:12,680 --> 01:02:18,120
यह अंतर होता है धर्म और धर्म

839
01:02:18,120 --> 01:02:22,200
का वाचस्पति का वहां दे रहे हो भाई वही तो हमारा वही

840
01:02:22,200 --> 01:02:26,200
तो हम पूछ रहे हैं कि आपने वाचस्पति की शंकर संप्रदाय वाले

841
01:02:26,200 --> 01:02:30,480
लोगों की जो शिक्षा है जिसका आप आलंबन ले रहे हो यह मानने में कि ये मायावादी

842
01:02:30,480 --> 01:02:34,600
है वो शिक्षा आपने कहां से प्राप्त

843
01:02:34,600 --> 01:02:38,800
की घर बैठे प्राप्त कर ली फिर खुद ही कहते हो परंपरा के बिना ज्ञान प्राप्त

844
01:02:38,800 --> 01:02:42,800
नहीं होता चैनल को बंद करवाने

845
01:02:42,800 --> 01:02:46,880
के लिए प्रयास कर रहे हो कोई बात नहीं हमने इतने बीज

846
01:02:46,880 --> 01:02:51,560
बो दिए हैं एक जाएगा लाखों आएंगे

847
01:02:51,560 --> 01:02:55,960
ठीक है मनुवादी प्रोफेशनल नहीं मनुवादी

848
01:02:55,960 --> 01:03:00,400
आएंगे

849
01:03:00,400 --> 01:03:04,440
मनुवादी अब बात आ जाती है कि हमने उस दिन एक प्रमाण

850
01:03:04,440 --> 01:03:08,680
दिखाया था पुराण

851
01:03:08,680 --> 01:03:13,640
दिग्दर्शन यह प्रामाणिक आचार्य है रामानुजाचार्य परंपरा के

852
01:03:13,640 --> 01:03:18,080
और इनका बोल बाला है हिम्मत तो है नहीं ना

853
01:03:18,080 --> 01:03:22,400
साहस नहीं है आरस माजियो ने जो मूर्ति पूजा का खंडन किया

854
01:03:22,400 --> 01:03:27,040
निराकार पुराणों का खंडन किया मजाक उड़ाया राधा रानी का मजाक उड़ाया

855
01:03:27,040 --> 01:03:31,520
हैं जिस आचार्य ने इतना अच्छा ग्रंथ लिखा उसके ही

856
01:03:31,520 --> 01:03:35,960
अस्तित्व पर सवाल उठा दो क्योंकि आप उसकी रडार के अंदर आ गए

857
01:03:35,960 --> 01:03:40,000
आप तो ट्रेडिशनल हो नहीं है ना तो उसके ऊपर

858
01:03:40,000 --> 01:03:44,360
सवाल उठा दो यह पुराण दिग्दर्शन पता है क्यों लिखा गया है

859
01:03:44,360 --> 01:03:48,400
क्योंकि पुराणों पर आक्षेप लगे थे तब लिखा उन्होंने

860
01:03:48,400 --> 01:03:52,520
पुराण दिग्दर्शन आपने उनकी जो प्रामाणिकता उस पर ही प्रश्न उठा दिया

861
01:03:52,520 --> 01:03:58,360
हम नहीं मानते रावण चार श्री भाष्य दो 27 ये है श्री भाष्य

862
01:03:58,360 --> 01:04:02,760
बिंगो श्री भाष्य आ

863
01:04:02,760 --> 01:04:04,040
गया ना

864
01:04:04,040 --> 01:04:08,160
मान तू विजय बिना मृत्यु को भी टाल दे मास की तू दे बली

865
01:04:08,160 --> 01:04:12,560
आहुति में डाल दे पाताल तक प्रहार कर जल को तू निकाल दे

866
01:04:12,560 --> 01:04:17,440
नित्य कर बिगुल बजा कर ध्वनि तू ताल दे

867
01:04:17,440 --> 01:04:21,640
ऐसे नहीं मानेंगे घायल खड़ा पराक्रमी तू

868
01:04:21,640 --> 01:04:24,120
आस चाहिए मुझे

869
01:04:24,120 --> 01:04:28,720
तेरा अंतिम वही प्रयास चाहिए

870
01:04:28,720 --> 01:04:34,720
तो आ जाते हैं दो 27

871
01:04:38,920 --> 01:04:42,600
पर श्री

872
01:04:42,600 --> 01:04:46,560
भाष्य

873
01:04:46,560 --> 01:04:51,240
दूसरा अध्याय और दूसरा पाद

874
01:04:51,240 --> 01:04:57,240
ठीक है इसमें यह है

875
01:05:01,640 --> 01:05:06,080
उपलब्ध सूत्र का अर्थ है योगाचार्य मता वलब

876
01:05:06,080 --> 01:05:10,200
बौद्ध ज्ञान से भिन्न ज्ञाता एवं ग

877
01:05:10,200 --> 01:05:14,280
पदार्थों के अभाव की सिद्धि नहीं कर सकते तो यहां पर

878
01:05:14,280 --> 01:05:18,760
खंडन किया है रामानुजाचार्य जी ने बौद्धों का

879
01:05:18,760 --> 01:05:22,880
कहीं पर भी ना तो आदि शंकराचार्य जी का नाम पिछले कई चैप्टर से ऐसा है

880
01:05:22,880 --> 01:05:27,440
पिछले कई चैप्टर से वो बौद्धों का खंडन कर रहे हैं

881
01:05:27,440 --> 01:05:31,520
और यहां कहीं भी प्रच्छन्न बौद्ध नहीं आया आदि शंकराचार्य जी का नाम

882
01:05:31,520 --> 01:05:35,720
भी नहीं आया प्रच्छन्न बौद्ध नहीं आया बौद्ध की बात हो रही है दिखाओ

883
01:05:35,720 --> 01:05:40,120
कहां है वैष्णव वैष्णव वैष्णव वैष्णव

884
01:05:40,120 --> 01:05:46,120
का अर्थ है वेदों को मानने वाला शास्त्रों को मानने

885
01:05:46,440 --> 01:05:50,480
वाला समस्त सुति स्मृति शास्त्रों में सामंजस्य की शिक्षा

886
01:05:50,480 --> 01:05:54,720
को मानने वाला वो है वैष्णव विष्णु को मानने

887
01:05:54,720 --> 01:05:58,800
वाला विष्णु के द दवारा दिए गए शास्त्रों को मानने वाला वो है

888
01:05:58,800 --> 01:06:03,000
वैष्णव वैष्णव का ढोल पीट करके पाखंड की दुकान चलाने

889
01:06:03,000 --> 01:06:09,000
वाला वैष्णव नहीं

890
01:06:10,880 --> 01:06:15,120
है मैं घट को जानता हूं इत्यादि प्रतियों से मैं करता

891
01:06:15,120 --> 01:06:19,280
एवं कर्म के रूप में ज्ञाता नहीं हूं यह इनका संस्कृत सब लिखा हुआ

892
01:06:19,280 --> 01:06:23,320
है इसमें से कहीं भी इन्होंने आदि शंकराचार्य को प्रचन

893
01:06:23,320 --> 01:06:26,880
बौद्ध नहीं कहा है हो गया

894
01:06:26,880 --> 01:06:30,960
केवल बौद्ध की बात हो जाने से यह सिद्ध नहीं होता कि वहां

895
01:06:30,960 --> 01:06:35,240
पर आदि शंकराचार्य जी के सिद्धांत को उन्होंने प्रच्छन्न बौद्ध कहा

896
01:06:35,240 --> 01:06:39,240
और अगर मान लेते हैं वैसे तो नहीं कहा हमने प्रमाण ले लिया अगर

897
01:06:39,240 --> 01:06:43,480
प्रच्छन्न बध कहा होता तो बात वहां हो रही थी कि उस श्लोक को

898
01:06:43,480 --> 01:06:49,480
प्रक्षिप्त क्यों ना माना जाए जब

899
01:06:54,520 --> 01:06:58,600
वैष्णवास्त्र जो आचार्य माधवाचार्य शास्त्री जी यह जो

900
01:06:58,600 --> 01:07:02,600
है इन्होंने गलत ज्ञान दे दिया तो डंडे से मार मार के भगा

901
01:07:02,600 --> 01:07:08,600
दिया जाएगा पंडाल से चले भी ना

902
01:07:09,080 --> 01:07:13,480
जाना वाचस्पति मिश्र वाचस्पति मिश्र वाचस्पति

903
01:07:13,480 --> 01:07:18,120
मिश्र एक ही चीज रट ली है

904
01:07:18,120 --> 01:07:24,120
और क्या है और क्या कहा था भाई

905
01:07:29,080 --> 01:07:33,520
कुल मिलाकर के उस दिन आपने हमें मायावादी

906
01:07:33,520 --> 01:07:37,520
सिद्ध करने के लिए कोई भी ऐसी बात नहीं की जिसको सनातन सिद्धांत के रूप

907
01:07:37,520 --> 01:07:41,680
में स्वीकारा जा सके ठीक है और अगर बात माया की

908
01:07:41,680 --> 01:07:45,720
है माया की बात करने वालों की है तो माया की बात तो इस कोन

909
01:07:45,720 --> 01:07:50,640
के शास्त्रों में भी की गई है वह भी मायावादी हो गए

910
01:07:50,640 --> 01:07:56,640
मायावादी हो गए तो क्यों ना माना जाए कि पदम पुराण में उन्हीं के लिए कहा गया

911
01:08:06,760 --> 01:08:11,320
अब आ जाते हैं दूसरा जो उस दिन सवाल डिस्कस किया गया था

912
01:08:11,320 --> 01:08:15,960
कि

913
01:08:15,960 --> 01:08:20,000
माया इन्होंने एक बात कही कि जो इंफॉर्मेशन हमें प्राप्त हो रही

914
01:08:20,000 --> 01:08:24,320
है कि वो मेरे संबंधी है वो मेरा भाई है वो इंफॉर्मेशन जो

915
01:08:24,320 --> 01:08:28,360
है झूठी नहीं है वो गलत है तो पहली

916
01:08:28,360 --> 01:08:33,320
बात तो यह गलत और सही की फिर परिभाषा जाननी पड़ेगी गलत क्या है और झूठ क्या है

917
01:08:33,320 --> 01:08:37,360
गलत और सही इस दृष्टि से कि वह चीज होनी चाहिए और

918
01:08:37,360 --> 01:08:41,560
नहीं होनी चाहिए पाप और पुण्य उचित और अनुचित तो उसकी तो बात वहां

919
01:08:41,560 --> 01:08:45,560
हो ही नहीं रही है अगर वो इस कांटेक्ट में कह रहे हैं कि ऐसा होना

920
01:08:45,560 --> 01:08:49,600
नहीं चाहिए मगर हो रहा है तो इसलिए उसे गलत माना जाएगा वो तो सही बात है

921
01:08:49,600 --> 01:08:53,720
कि वो नहीं होना चाहिए मगर उसकी स्थिति क्या है उसका

922
01:08:53,720 --> 01:08:57,840
अस्तित्व क्या है वो सच है झूठ है उस भावना का अस्तित्व

923
01:08:57,840 --> 01:09:02,160
क्या है तो अगर आप इसमें यह कह रहे हैं कि जिस चीज

924
01:09:02,160 --> 01:09:06,280
से वह भावना आ रही है उसका अस्तित्व है कि नहीं तो हम उसके बारे में प्रश्न

925
01:09:06,280 --> 01:09:10,400
नहीं कर रहे हैं जैसे कि हमें भावना किसी महिला को

926
01:09:10,400 --> 01:09:15,240
देख कर के आ रही है कि मेरी मां है तो हम यह नहीं पूछ रहे कि वह मां

927
01:09:15,240 --> 01:09:19,400
अस्तित्व है कि नहीं उस मां का वह है जो आपको य

928
01:09:19,400 --> 01:09:21,840
सूचना प्राप्त हो रही है कि

929
01:09:21,840 --> 01:09:26,000
वो मेरी मां है उससे मुझे प्रभावित होना मेरा ये कर्तव्य

930
01:09:26,000 --> 01:09:30,040
उसके प्रति ये जो सूचना आ रही है यह सच है कि नहीं तो

931
01:09:30,040 --> 01:09:34,160
इस परे इनका कहना वो गलत है तो जो वस्तु है

932
01:09:34,160 --> 01:09:38,360
जिसको लेकर के भाव आ रहा है उस वस्तु के अस्तित्व पर

933
01:09:38,360 --> 01:09:42,400
क्या कहते प्रश्न नहीं है प्रश्न है उसके निमित्त जो भाव आ रहा है उसके

934
01:09:42,400 --> 01:09:46,640
ऊपर वो भाव सच है या कि झूठ है ठीक है तो माया से बचने

935
01:09:46,640 --> 01:09:50,960
के लिए कितना खेले कि भाई झूठ नहीं है वो गलत है अच्छा

936
01:09:50,960 --> 01:09:55,840
अब इस पर आ जाते हैं कि आपका कहने का मतलब है कि वो

937
01:09:55,840 --> 01:09:59,880
जो है जो था वोव टेंपरेरी सत्य था झूठ नहीं था तो

938
01:09:59,880 --> 01:10:04,000
इस हिसाब से दुनिया में कुछ भी झूठ है ही नहीं फिर झूठ की परिभाषा बताओ

939
01:10:04,000 --> 01:10:08,120
क्यों मान लीजिए कि आपको सपना आ रहा है उस सपने में दिखाया जा रहा

940
01:10:08,120 --> 01:10:12,280
है कि शिवजी को जो प्रसन्न बौद्ध जो मत फैलाने का काम दिया

941
01:10:12,280 --> 01:10:16,280
गया था तो शिवजी जो है वह प्रभुपाद जी के रूप में प्रकट हुए यह

942
01:10:16,280 --> 01:10:20,520
आपको सपना आ रहा है मगर अब जब आप उठेंगे तो यह सपना झूठा नहीं है

943
01:10:20,520 --> 01:10:24,640
ये सपना बस गलत है तो झूठ का अस्तित्व नहीं है आपके हिसाब से

944
01:10:24,640 --> 01:10:28,680
वो वो जो है झूठ नहीं कहलाएगा क्योंकि एक्सपीरियंस तो

945
01:10:28,680 --> 01:10:32,760
किया ना सपना देखते समय आपने कि प्रभुपाद जी ही वो शिव जी का

946
01:10:32,760 --> 01:10:37,040
वो अवतार है जो मायावादी माया वादत वो वाद जिसमें

947
01:10:37,040 --> 01:10:41,800
जो भ्रम फैलाया जाएगा जो सच्चा नहीं है झूठा है ऐसा वाद

948
01:10:41,800 --> 01:10:45,800
वो फैलाने आएंगे प्रभुपाद जी तो उनके लिए आपने वह सपना

949
01:10:45,800 --> 01:10:50,200
देखा और उस सपने के बाद जब आप उठे तो आप उसको झूठ

950
01:10:50,200 --> 01:10:54,280
झू झूठी इंफॉर्मेशन नहीं मानेंगे उसको जो है गलत मानेंगे कि ऐसा

951
01:10:54,280 --> 01:10:58,720
नहीं होना चाहिए था या फिर उसको आप टेंपरेरी सत्य कहेंगे आप संज्ञा बदल देंगे

952
01:10:58,720 --> 01:11:02,720
तो इसका अर्थ यह है पहली बात तो ये आ जाती है कि जिसको आप टेंपरेरी सत्य कह

953
01:11:02,720 --> 01:11:06,960
रहे हैं जिसको आप जो है गलत कह रहे हैं उसी को हम

954
01:11:06,960 --> 01:11:11,000
माया कहते हैं यानी कि शाब्दिक भेद है सैद्धांतिक

955
01:11:11,000 --> 01:11:15,080
भेद नहीं है ठीक है उसी को हम माया कहते हैं

956
01:11:15,080 --> 01:11:19,280
और अब हम आपसे पूछते हैं कि जब वो चीज भी

957
01:11:19,280 --> 01:11:23,280
माया नहीं है तो माया फिर है क्या जिसका आपके भी शास्त्र में वर्णन है

958
01:11:23,280 --> 01:11:27,920
कि माया देवी ने उनके साथ ये किया को ये हो गया वो माया के उसमें बस में नहीं आए

959
01:11:27,920 --> 01:11:32,080
262 पढ़ लीजिए वही माया का नाम लिया गया है 262 भगवत गीता

960
01:11:32,080 --> 01:11:36,160
जहां भगवान शिव को कर्मेंद्रियों के

961
01:11:36,160 --> 01:11:40,600
अधीन माना गया है काम इंद्रियों के अधीन माना गया है तो वहां पूछ लीजिए

962
01:11:40,600 --> 01:11:44,920
तो माया शब्द जो है वो आया

963
01:11:44,920 --> 01:11:49,280
आया कैसे जब माया का कोई अस्तित्व ही नहीं है आपको मानना पड़ेगा

964
01:11:49,280 --> 01:11:52,040
या तो कि जिसको आप टेंपरेरी सत्य कह रहे हो जिसको

965
01:11:52,040 --> 01:11:56,160
आप गलत कह रहे हो वही माया है माया को को मान लोगे

966
01:11:56,160 --> 01:12:01,040
फस जाओगे है ना आपका सिद्धांत जो है वो ग उसमें आ

967
01:12:01,040 --> 01:12:05,400
जाएगा तो यह हो

968
01:12:05,400 --> 01:12:09,560
गया तो अगर आपकी परिभाषा को मान भी लिया जाए

969
01:12:09,560 --> 01:12:13,680
तो क्या हुआ अंतर कि जिसको आप गलत कह रहे हो जिसको आप

970
01:12:13,680 --> 01:12:17,680
जो है टेंपरेरी सत्य कह रहे हो उसी को हम माया कह रहे हैं तो बात

971
01:12:17,680 --> 01:12:21,720
तो वही हो गई हम भी तो यही कहते हैं कि जो महान हमारे जितने भी आचार्य गण है

972
01:12:21,720 --> 01:12:27,720
उनमें केवल शाब्दिक भेद है उनकी व्याख्या

973
01:12:34,560 --> 01:12:38,720
अब तीसरा प्रश्न था जिसमें कि आप बिल्कुल साफ साफ

974
01:12:38,720 --> 01:12:42,840
बिल्कुल पकड़े गए जब हमने पूछा कि भगवान श्री कृष्ण एज इट इज वहां

975
01:12:42,840 --> 01:12:46,880
से आते हैं यहां पर पहली बात ये समझ लीजिएगा कि यह वाले जो कृष्ण है जो एज इट इज

976
01:12:46,880 --> 01:12:51,080
वहां से आते हैं यहां पर यह बिल्कुल रामपाल के कबीर वाले हैं

977
01:12:51,080 --> 01:12:55,400
वो भी ऐसे ही आता है उनका जो कबीर है वो भी ऐसे ही

978
01:12:55,400 --> 01:12:59,400
जैसे आप बता रहे हो कृष्ण आते हैं उनका ईश्वर भी ऐसे ही आता है और हमने

979
01:12:59,400 --> 01:13:03,440
उनको इसी चीज पर पकड़ा था कि क्या वो अपने देह का नाश कर सकता है कि

980
01:13:03,440 --> 01:13:07,680
नहीं आपने कहा नहीं उनकी देह तो शाश्वत है जब शाश्वत है

981
01:13:07,680 --> 01:13:11,840
तो फिर वो या तो वोह शाश्वत है तो नष्ट नहीं हो सकती और अगर वह उसको

982
01:13:11,840 --> 01:13:15,960
नष्ट नहीं कर सकते तो सर्व शक्तिमान नहीं तो आपने वहां पर माना कि हां भाई अगर यह

983
01:13:15,960 --> 01:13:21,400
है तो यह है तो आपका ईश्वर वादित भी सिद्ध हो

984
01:13:21,400 --> 01:13:26,560
गया अब इसके बाद एक पॉइंट और था

985
01:13:26,560 --> 01:13:30,920
कि कुल मिलाकर के मायावादी आप हमें सिद्ध नहीं कर पाए

986
01:13:30,920 --> 01:13:35,480
दूसरी बात आपने माया को ही टेंपरेरी सत्य और झूठ के रूप में स्वीकार कर लिया

987
01:13:35,480 --> 01:13:39,520
और हां एक उस बारे में एक टेंपरेरी सत्य के बारे

988
01:13:39,520 --> 01:13:43,560
में और मैं उदाहरण देना भूल गया आप क्या कह रहे थे कि भाई वो

989
01:13:43,560 --> 01:13:47,640
जो व्यक्ति है जो जीवात्मा है जो यहां पर किसी को अपनी मां समझ रही है वो

990
01:13:47,640 --> 01:13:49,800
जो है परलोक में मुक्ति में भी जाकर

991
01:13:49,800 --> 01:13:54,200
के उसको मा ही रहेगी स्पिच मा हो जाएगी स्पिरिचुअल मां

992
01:13:54,200 --> 01:13:58,480
बहुत अच्छी बात है एक बात बताइए जो जीव अभी

993
01:13:58,480 --> 01:14:02,520
अभी शरीर छोड़ा उससे थोड़ी देर पहले उसने अपनी पत्नी के गर्भ में बीज

994
01:14:02,520 --> 01:14:06,560
डाला हो और उसके बाद उसने अपना शरीर छोड़ दिया वही गर्भ

995
01:14:06,560 --> 01:14:10,640
में आ गया जीव के रूप में और वह संतान के रूप में प्रकट हो गया तो वह

996
01:14:10,640 --> 01:14:14,520
उसको अपनी मां समझेगा या फिर पत्नी

997
01:14:14,520 --> 01:14:18,640
समझेगा आप जब यहीं से अभी मुक्ति नहीं मिली है उसकी

998
01:14:18,640 --> 01:14:24,640
वो मां सिद्ध नहीं हो रही है आप जो है कह रहे कि मुक्ति में भी उसकी स्पिरिचुअल मां है

999
01:14:25,840 --> 01:14:30,440
मतलब कुछ भी अपने ही सिद्धांतों को नहीं पकड़ पा रहे हो आप

1000
01:14:30,440 --> 01:14:34,680
तो और फिर ईश्वर बुराई नहीं कर सकता भगवान

1001
01:14:34,680 --> 01:14:39,240
कहते हैं मैं सभी कर्मों को करते हुए भी उनमें लिप्त नहीं होता हूं क्यों

1002
01:14:39,240 --> 01:14:43,320
क्योंकि उन्होंने य अच्छाई बुराई को बनाया है इसलिए वह अच्छाई बुराई से

1003
01:14:43,320 --> 01:14:47,600
प्रभावित नहीं है अच्छाई बुराई में फसे हुए हम लोग हैं हमें इससे मुक्ति

1004
01:14:47,600 --> 01:14:51,960
पानी है अच्छाई और बुराई में क्या है अच्छाई वो जो आपको मुक्ति दिलाएगी बुराई

1005
01:14:51,960 --> 01:14:56,240
वो जो मुक्ति से दूर ले जाएगी भगवान को भी मुक्ति पानी है क्या

1006
01:14:56,240 --> 01:15:00,400
जो उनके लिए अच्छाई बुराई की डेफिनेशन हो

1007
01:15:00,400 --> 01:15:04,640
इस कारण से भगवान जो है वो लिप्त नहीं है उन पर वो अच्छाई बुराई

1008
01:15:04,640 --> 01:15:08,760
का क्राइटेरिया फिक्स नहीं होता है और अगर करोगे क्राइटेरिया फिक्स

1009
01:15:08,760 --> 01:15:12,880
तो फिर क्या होगा दुनिया का कोई ऐसा ईश्वर नहीं होगा जिसके ऊपर

1010
01:15:12,880 --> 01:15:16,920
वो बुराई का दोष नहीं लगेगा एनीहाउ लग जाएगा खैर यह प्रश्न आपका तो है

1011
01:15:16,920 --> 01:15:20,920
ही नहीं आर समाजी का प्रश्न है आप पता नहीं क्यों खामा खा अपने ऊपर ले ली जब

1012
01:15:20,920 --> 01:15:25,280
आप अवतारवाद को मानते हो तो और

1013
01:15:25,280 --> 01:15:29,960
वाला क्या था लास्ट वाला आपने जो पूछा था निर्गुण निराकार

1014
01:15:29,960 --> 01:15:34,120
तो भाई भगवत गीता में

1015
01:15:34,120 --> 01:15:38,120
भागवत में कई जगह पर भगवान ने कहा है कि मैं गुणों से रहित हूं

1016
01:15:38,120 --> 01:15:40,960
णा तीत हू निर्गुण का एक यही

1017
01:15:40,960 --> 01:15:45,000
अर्थ नहीं है कि जिसके अंदर गुण नहीं है निर्गुण का अर्थ यह भी है कि जिससे सारे गुण निकल रहे

1018
01:15:45,000 --> 01:15:48,640
हैं

1019
01:15:48,640 --> 01:15:52,840
निर्गत और वो निकल भी किस स्तर पर रहे हैं तो आप

1020
01:15:52,840 --> 01:15:56,920
कुल मिलाकर के एक तो यह वाला मत समझ में आता है कि आप निर्गुण निराकार नहीं है इसका

1021
01:15:56,920 --> 01:16:01,080
मतलब आदि शंकराचार्य गलत है आपको यह सिद्ध करना है इससे मतलब नहीं

1022
01:16:01,080 --> 01:16:05,880
समाज को एक कैसे करना है निर्गुण निराकार नहीं है

1023
01:16:05,880 --> 01:16:10,120
तो भाई वोह गलत कर सिद्ध कर नहीं पाओगे कान को कैसे भी पकड़ लेना

1024
01:16:10,120 --> 01:16:14,720
मगर अभी की बात ये हो रही है कि

1025
01:16:14,720 --> 01:16:18,720
गुण जहां से निकल रहे हैं इस रूप में उनको निर्गुण माना

1026
01:16:18,720 --> 01:16:22,800
गया है और दूसरे रूप में मनुष्य के सापेक्ष मनुष्य जिसको गुण मानता

1027
01:16:22,800 --> 01:16:26,800
है सत रज और तम वो गुणों से व प्रभावित नहीं है इसलिए वह

1028
01:16:26,800 --> 01:16:31,120
त्रिगुणा तीत कहे जाते हैं इसलिए उन्हें निर्ग निर्गुण

1029
01:16:31,120 --> 01:16:35,400
कहा गया है हो गया चारों प्रश्न

1030
01:16:35,400 --> 01:16:39,640
तो कुल मिलाकर के क्या हुआ कि आप

1031
01:16:39,640 --> 01:16:43,680
यह नहीं कह सकते कि जो मायावा मायावादी का जो आपका वो है

1032
01:16:43,680 --> 01:16:48,040
कि मायावादी अत शास्त्रम या माया वो मायावादी भाष

1033
01:16:48,040 --> 01:16:52,040
सुन ले होत सर्वनाश व बंगाली भाषा में क्या कहा गया है वो

1034
01:16:52,040 --> 01:16:56,160
मायावादी हम नहीं है मायावादी है झूठ फैला ने वाला कोई

1035
01:16:56,160 --> 01:17:00,680
जिसका शायद आपने कोई सपना देखा हो

1036
01:17:00,680 --> 01:17:04,800
और क्या आप सिद्ध नहीं कर पाए कि मायावादी हम ही है जिसके

1037
01:17:04,800 --> 01:17:09,240
बारे में वहा बात हो रही है पदम पुराण में ईश्वर सर्वशक्तिमान है नहीं

1038
01:17:09,240 --> 01:17:13,240
माया को आपने स्वीकार कर लिया टेंपरेरी सत्य और झूठ के नाम

1039
01:17:13,240 --> 01:17:17,320
पर और अगर माया का अस्तित्व नहीं है तो आपके शास्त्रों में माया

1040
01:17:17,320 --> 01:17:21,680
किसे कहा गया है वोह बताने का कष्ट करें और सैद्धांतिक

1041
01:17:21,680 --> 01:17:25,760
रूप से अगर किसी को मर्यादित होते हुए चर्चा करनी है तो वह

1042
01:17:25,760 --> 01:17:29,920
फॉर्म भर सकता है सभी आमंत्रित है एक

1043
01:17:29,920 --> 01:17:34,320
मंच पर आने के लिए 740

1044
01:17:34,320 --> 01:17:38,720
8369 मुझे कोई बता दे कि अब हमारी लाइव स्ट्रीम काफी हो गई है

1045
01:17:38,720 --> 01:17:42,720
तो क्या हमारा मतलब ऑफ कर दे इसे

1046
01:17:42,720 --> 01:17:46,840
या कुछ प्रश्न उत्तर कर ले दे ओनली वांट देम टू

1047
01:17:46,840 --> 01:17:52,120
बी ऑथेंटिक ल अदर्स आर नॉट ऑथेंटिक एस पर देन

1048
01:17:52,120 --> 01:17:56,160
ईश्वर फस गया ना हम में भाई ईश्वर फसता है

1049
01:17:56,160 --> 01:18:00,160
अपनी इच्छा से ठीक है जैसे आप फसते हो अपनी इच्छा

1050
01:18:00,160 --> 01:18:06,160
से वीडियो गेम में क्या नाम है आपका हरि दसो

1051
01:18:09,400 --> 01:18:11,640
हम

1052
01:18:11,640 --> 01:18:16,600
तो इसको इसमें आना इसलिए भी आवश्यक हो गया था

1053
01:18:16,600 --> 01:18:21,000
कि उसका सार नहीं किसी किसी को समझ में आ रहा था

1054
01:18:21,000 --> 01:18:25,280
तो हमने कहा कि एक बार बात कर ले और यह सारी चीजें बता द

1055
01:18:25,280 --> 01:18:29,560
तो हमें कोई बता दे कि हो गया है या

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01:18:29,560 --> 01:18:33,840
जाना चाहिए वेदांत पाठशाला तुम क्यों

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01:18:33,840 --> 01:18:39,840
डिबेट करते

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01:18:42,160 --> 01:18:46,280
हो विधान पाठशाला लाइव करेगा चैलेंज कर रहा है उसको

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01:18:46,280 --> 01:18:52,280
पहले फॉर्म भरे

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01:18:52,840 --> 01:18:56,920
ना ऐसे नहीं जाता कहीं भी पहले बात होती

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01:18:56,920 --> 01:19:01,120
है कि कौन है क्या है चेहरा है क्या है कैसे है

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01:19:01,120 --> 01:19:05,280
उसके बाद हो सकता है कि हम उसके चैनल पर चले भी जाए पर देखे तो पहले वह

1063
01:19:05,280 --> 01:19:09,360
कौन है क्या है हमने तो भाई उस व्यक्ति को देख लिया जो

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01:19:09,360 --> 01:19:13,520
एक व्यक्ति था अभी जिसकी हमने रिकॉर्डिंग सुनाई उसको

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01:19:13,520 --> 01:19:19,520
हमने देख लिया वो क्या क्या बोलता है कैसे कैसे बोलता है तो उनके चैनल पर हम क्यों जाए हमने किसी को कभी गाली दिया

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01:19:27,840 --> 01:19:33,840
चलिए फिर सभी को जय श्री

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01:19:34,600 --> 01:19:38,720
राम अच्छा य वही है जो गालिया दे रहे थे जने चैनल वाह

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01:19:38,720 --> 01:19:42,800
मल बंद कमरे में बैठते हो तो कुछ भी कर लो आओ जरा सामने कहो

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01:19:42,800 --> 01:19:48,560
धूर्त इत्यादि लात मारता हूं कहो आके सामने पता

1070
01:19:48,560 --> 01:19:53,440
चले सारी एकड़ी निकल जाएगी

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01:19:53,440 --> 01:19:56,240
सारी एकड़ी

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01:19:56,240 --> 01:20:00,240
यही तो होता है धर्म और धर्म क्या बताया धर्म वो है जो साधे रह

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01:20:00,240 --> 01:20:04,280
सकते हो आप अधर्म वो है जिसको आपको त्यागना पड़ जाएगा इसी

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01:20:04,280 --> 01:20:08,640
को कहते हैं धर्म और धर्म का अंतर ऋषि उवाच ने क्या किया

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01:20:08,640 --> 01:20:12,920
खूब गंदी गंदी बातें बोली अश्लील शब्द बोले सब कुछ कहा अमर्यादित

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01:20:12,920 --> 01:20:17,800
आचरण किया फिर उसको क्या करना पड़ा भ्य अच्छे से बात करना पड़ा

1077
01:20:17,800 --> 01:20:22,800
करना पड़ा ना हम आज भी वैसे ही बात कर रहे हैं जैसे कर रहे थे

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01:20:22,800 --> 01:20:27,280
क्यों क्योंकि हमारे पास धर्म था मर्यादा थी राम

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01:20:27,280 --> 01:20:31,920
थे जिसके पास नहीं है उसको त्यागना पड़ेगा

1080
01:20:31,920 --> 01:20:36,400
ठीक है चलिए सभी को जय श्री राम

1081
01:20:36,400 --> 01:20:40,920
और हां उपासना सेवा संकीर्तन स्वाध्याय यह सभी लोग चालू

1082
01:20:40,920 --> 01:20:45,040
करे उपासना सबसे पहले भगवन

1083
01:20:45,040 --> 01:20:49,840
नाम का जप करिए सवा घंटे अगर कोई भी ऐसा है

1084
01:20:49,840 --> 01:20:52,760
जो

1085
01:20:52,760 --> 01:20:57,000
अ हमारा समर्थन करता है मन से तो अगर

1086
01:20:57,000 --> 01:21:01,120
आप कुछ भी ना करें बस केवल सवा घंटे की आप भक्ति कर लेंगे तो आपके

1087
01:21:01,120 --> 01:21:05,240
द्वारा दिया जाने वाला जो समर्थन है वह हम तक पहुंच जाएगा या

1088
01:21:05,240 --> 01:21:09,280
किसी भी ऐसे व्यक्ति तक जो धर्म की रक्षा के लिए खड़ा होता है

1089
01:21:09,280 --> 01:21:13,520
और भगवन नाम का जप करने के लिए क्या है हे ब्रह्मा विष्णु

1090
01:21:13,520 --> 01:21:17,600
महेश भगवती और गणेश मैं आप सबकी भक्ति

1091
01:21:17,600 --> 01:21:21,760
आप अपने ईस्ट का नाम ले मैं अपने ईट का नाम ले रहा हूं श्री राम के रूप में करना

1092
01:21:21,760 --> 01:21:26,000
चाहता हूं आप इस रूप में आप सबकी प्रदान करने की कृपा

1093
01:21:26,000 --> 01:21:30,360
करें फिर अपने ईस्ट का जप

1094
01:21:30,360 --> 01:21:34,720
कितना सरल है ना मगर नहीं जिनको दिक्कत

1095
01:21:34,720 --> 01:21:39,960
है ना धर्म से वोह लड़ेंगे और हम भी

1096
01:21:39,960 --> 01:21:43,960
लड़ेंगे जय श्री राम
