1
00:00:01,720 --> 00:00:06,120
तो सभी को जय श्री राम और

2
00:00:06,120 --> 00:00:10,200
कल से लोग वेट कर रहे थे क्योंकि हमारी चैनल पर इसको पब्लिक कर

3
00:00:10,200 --> 00:00:14,360
दिया गया था कि ओके हमारा और

4
00:00:14,360 --> 00:00:18,480
भव्य राधा कृष्ण दास इनका

5
00:00:18,480 --> 00:00:22,640
एक लाइव सेशन है यहां आज के दिन तो काफी

6
00:00:22,640 --> 00:00:27,120
लोगों में उत्सुकता भी है तो

7
00:00:27,120 --> 00:00:33,120
आप सबसे पहले स्वयं अपना परिचय दे दे दर्शकों

8
00:00:34,520 --> 00:00:36,640
को

9
00:00:36,640 --> 00:00:41,000
जीकी हरे कृष्णा शिवा जीम

10
00:00:41,000 --> 00:00:45,760
सभी को मेरा नाम

11
00:00:45,760 --> 00:00:51,760
भव्य आपका जो नेटवर्क है ना कुछ नेटवर्क कवरेज का प्रॉब्लम

12
00:00:54,480 --> 00:00:58,640
हैरर नहीं क्लियर ब वाईफाई से कनेक्ट कर लेता हूं

13
00:00:58,640 --> 00:01:02,920
हा वाई आप एक काम करिए लीव

14
00:01:02,920 --> 00:01:08,920
कर दीजिए दोबारा से आ

15
00:01:14,280 --> 00:01:18,320
जाइए जो वेद में शिव का नाम लिया है वह ईश्वर

16
00:01:18,320 --> 00:01:22,000
के नामों में से एक नाम

17
00:01:22,000 --> 00:01:26,160
है लाइव वीडियो कॉल पर ही बात करना इनसे फेस

18
00:01:26,160 --> 00:01:32,160
टू फेस

19
00:01:43,080 --> 00:01:47,360
तो जब तक वह आ रहे हैं तब तक मैं अपनी कुछ शुरुआती चीजें

20
00:01:47,360 --> 00:01:51,800
बता दूं कि हम लोग जो यह चर्चाएं करते हैं इसके

21
00:01:51,800 --> 00:01:56,040
पीछे लक्ष्य यह नहीं है कि हमें किसी तंत्र

22
00:01:56,040 --> 00:02:00,080
को संस्था को या किसी

23
00:02:00,080 --> 00:02:05,000
विचार को मानने वालों को नष्ट करना है या उनके प्रति द्वेष है

24
00:02:05,000 --> 00:02:09,440
हमारा लक्ष्य यह है कि जिस बात को लेकर के मत मता

25
00:02:09,440 --> 00:02:13,480
बन रहे हैं उस बात को पॉइंट आउट करके उस पर चर्चा करके उस पर

26
00:02:13,480 --> 00:02:17,720
प्रश्न उत्तरी करके उस बात को लेकर के किसी एक जगह

27
00:02:17,720 --> 00:02:21,760
आया जा सके जिससे कि वैचारिक मतभेद

28
00:02:21,760 --> 00:02:26,280
हमारे समाज से दूर हो हम संगठित

29
00:02:26,280 --> 00:02:31,160
हो ओके हरे कृष्णा इसको एक बार

30
00:02:31,160 --> 00:02:35,760
और सभी को मेरा कहना है कि देखिए यह जानकारी लेना ज्ञान

31
00:02:35,760 --> 00:02:39,760
प्राप्त करना या किसी को फॉलो करना और रील्स बनाना

32
00:02:39,760 --> 00:02:43,880
और इग्राम ट यह सब ठीक है मगर

33
00:02:43,880 --> 00:02:47,920
उपासना सेवा संकीर्तन स्वाध्याय यह चार

34
00:02:47,920 --> 00:02:52,120
चीजें आपके जीवन में अवश्य डाले हो सकता है कि हम किसी गलत

35
00:02:52,120 --> 00:02:56,200
मार्ग पर जा भी रहे होंगे तो फिर अनन्यास चिंत तो भगवान

36
00:02:56,200 --> 00:03:00,200
के क्या कहा न 22 में कि तुम जब मेरी

37
00:03:00,200 --> 00:03:04,440
शरण में आते हो तो मैं तुम्हारी चीजें देख लेता हूं

38
00:03:04,440 --> 00:03:08,720
तो इसलिए आप उपासना सेवा संकीर्तन

39
00:03:08,720 --> 00:03:12,880
स्वाध्याय सभी अवश्य अपने जीवन में ऐड करें जिससे कि

40
00:03:12,880 --> 00:03:17,120
आप अगर कुछ अप्राप्य हो तो भगवान उसको

41
00:03:17,120 --> 00:03:21,360
आपको प्राप्त करवाने में सहायक जी भव्य राधा कृष्ण दास

42
00:03:21,360 --> 00:03:25,360
जी यह काफी दिनों से कमेंट्स के जरिए से

43
00:03:25,360 --> 00:03:29,440
हमारी भेंट होती थी ा में और मैं पहले

44
00:03:29,440 --> 00:03:34,640
भी क बार बोल चुका था तो

45
00:03:34,640 --> 00:03:38,800
कि भाई लाइव आकर के चर्चा हो जाए होता क्या है कि लिखकर बात करने में समस्या यह

46
00:03:38,800 --> 00:03:41,360
होती है कि कई बार

47
00:03:41,360 --> 00:03:45,640
जब सामने वाला निरुत्तर है या फिर सामने वाले के पास अपना पक्ष प्रस्तुत

48
00:03:45,640 --> 00:03:49,640
करने के लिए कुछ नहीं है तो ऐसे में वह जब शांत होता है तो हम यह

49
00:03:49,640 --> 00:03:53,720
निर्णय वहां नहीं कर सकते हैं कि भाई वोह शांत क्यों हुआ हो सकता है कि उसके पास समय ना

50
00:03:53,720 --> 00:03:57,720
हो हो सकता है कि उसके पास संसाधन ना हो इंटरनेट ना हो जिसकी

51
00:03:57,720 --> 00:04:01,960
वजह से उसका उत्तर नहीं आ रहा है तो उत्तर ना की स्थिति में दिखाई नहीं पड़ता

52
00:04:01,960 --> 00:04:06,120
कि क्या हो रहा है दूसरी बात विषयात होना भी बहुत आसान हो जाता है लिख लिखकर

53
00:04:06,120 --> 00:04:10,120
जब बात हो रही होती है हम कुछ पूछ रहे हैं और वहां

54
00:04:10,120 --> 00:04:14,240
से जवाब कुछ और आ रहा है सीधे-सीधे जवाब नहीं आ रहा तो उसमें विषयात होता

55
00:04:14,240 --> 00:04:18,520
है और वह चर्चाएं आज जो इतने सारी लड़ाइयां चल रही है धर्म ईश्वर को लेकर

56
00:04:18,520 --> 00:04:22,760
के इसलिए चल रही है क्योंकि ईश्वर को लेकर के गोष्ठी हुई ही

57
00:04:22,760 --> 00:04:27,320
नहीं गुरुदेव ने अपने एक वीडियो में कहा सारा विश्व

58
00:04:27,320 --> 00:04:32,000
सारा विश्व घंटे दो घंटे की गो कर ले हमसे

59
00:04:32,000 --> 00:04:36,280
तो गोली बंदूक ले की नोक

60
00:04:36,280 --> 00:04:40,400
पर नहीं सारे विश्व में शांति आ जाए केवल गोष्ठी

61
00:04:40,400 --> 00:04:45,160
केवल वाद संवाद परस्पर मगर व वाद संवाद होता नहीं है

62
00:04:45,160 --> 00:04:49,200
इस वजह से राधा कृष्ण

63
00:04:49,200 --> 00:04:51,000
जी जी बहुत बहुत धन्यवाद

64
00:04:51,000 --> 00:04:55,360
आपने मुझे स्टेज पर मौका दिया कि मैं आपके जो प्रश्न होते हैं

65
00:04:55,360 --> 00:04:59,960
उनका आंसर दे सकू और मैं पूरा पूरा का पूरा मैं प्रयास करूंगा भगवान

66
00:04:59,960 --> 00:05:05,120
शक्ति से जितना मेरे पास ज्ञान है थोड़ा बहुत जितना आंसर दे सकता हूं मैं प्रयास

67
00:05:05,120 --> 00:05:07,360
करूंगा जी तो

68
00:05:07,360 --> 00:05:11,720
आप अपना परिचय दे जी मैं मेरा नाम

69
00:05:11,720 --> 00:05:16,240
व तो मैंने ा की आईडी भव्य राधा कृष्ण दास नाम अच्छा लगता

70
00:05:16,240 --> 00:05:20,560
और मैं 24 यर्स का हू और मैं गुजरात से हूं

71
00:05:20,560 --> 00:05:24,880
बस इना काफी है और मैंकन से साढ़े साल

72
00:05:24,880 --> 00:05:28,880
साल से जुड़ा हुली न साल से तो आपके

73
00:05:28,880 --> 00:05:32,960
जो गुरु है वो कौन है मेरे गुरु का नाम जीव

74
00:05:32,960 --> 00:05:37,920
पवन प्रभु है किस मंदिर से है ये

75
00:05:37,920 --> 00:05:42,360
ये इस कन सही है वो भक्ति विका स्वामी महाराज के डिपल

76
00:05:42,360 --> 00:05:46,440
है नहीं नहीं जो किसी सेंटर में होंगे ना इसकन के कई

77
00:05:46,440 --> 00:05:50,480
सारे सेंटर्स है तो उसमें से किसी एक मंदिर में होंगे ना हा हा यहां पर एक

78
00:05:50,480 --> 00:05:54,480
सेंटर है गुजरात में भुज नाम की एक जगह है तो

79
00:05:54,480 --> 00:05:58,600
वहां से वहां प एक सेंटर है वहां प दो सेंटर्स है इसन के एक मेन मंदिर

80
00:05:58,600 --> 00:06:02,880
और एक अलग एक ये है सेंटर है तो मैं वही पर जाता हूं उनसे शास्त्र

81
00:06:02,880 --> 00:06:06,960
अध्ययन करने जी अच्छा मैं ये कह रहा था क्या ऐसा हो सकता है कि

82
00:06:06,960 --> 00:06:11,000
आप थोड़े से ज्यादा दिखाई दो आपका बस फेस ही फेस दिखाई दे रहा हैली मैंने काफी

83
00:06:11,000 --> 00:06:15,160
दूर रखा है मैंने दूर रखा है पता नहीं इतना बड़ा कैसे दिख रहा है मुझे सच में काफी दूर रखा है मैंने तो

84
00:06:15,160 --> 00:06:19,280
थोड़ा मुझे भी फिर देखने में प्रॉब्लम हो जाएगी तो आई थंक सुनने में भी

85
00:06:19,280 --> 00:06:22,360
कनेक्ट नहीं कर पाएंगे ठीक है हा ठीक है कोई

86
00:06:22,360 --> 00:06:28,000
बात नहीं जैसे हो थक ओके

87
00:06:28,000 --> 00:06:31,280
ओओ जी

88
00:06:31,280 --> 00:06:35,480
तो अब सीधे-सीधे आ जाते हैं सबसे पहले तो हमें एक चीज ठीक नहीं लगी

89
00:06:35,480 --> 00:06:39,640
वो आपको मैं याद दिला दूं आपने एक पोस्टर लगाया है

90
00:06:39,640 --> 00:06:43,840
जिसमें कि आपने लिखा है मतलब आपने इधर पुरी

91
00:06:43,840 --> 00:06:48,360
के शंकराचार्य जगतगुरु शंकराचार्य जी को दिखाया और इधर

92
00:06:48,360 --> 00:06:53,040
आपने प्रभुपाद जी को दिखाया बीच में वर्जस करके कुछ लिखा है

93
00:06:53,040 --> 00:06:57,120
तो आपसे हमने कहा था कि ये कोई मैच है या ये कोई शास्त्रार्थ है ऐसा

94
00:06:57,120 --> 00:07:01,160
कुछ हमने आपको कहा था क्या नहीं तो फिर

95
00:07:01,160 --> 00:07:05,280
आप उसको जनता को शास्त्रार्थ के रूप में आपको नहीं दिखाना चाहिए

96
00:07:05,280 --> 00:07:09,400
इससे जो हा क्योंकि इससे क्या वर्जस लिख रहे हो

97
00:07:09,400 --> 00:07:13,600
आपको पता होना चाहिए कि प्रभुपाद जी ने स्वयं करपात्री

98
00:07:13,600 --> 00:07:17,760
जी महाराज को की कितनी प्रशंसा की है हा ये तो मुझे

99
00:07:17,760 --> 00:07:21,880
पता है वर्स वर्सेस हम नहीं कह सकते इसको ये केवल एक

100
00:07:21,880 --> 00:07:26,240
चर्चा है गो है दो अल्पज्ञ के बीच है ना जी जी

101
00:07:26,240 --> 00:07:30,440
दो आचार केता कारण बता देता हूं क्योंकि

102
00:07:30,440 --> 00:07:34,520
मैंने आपके जितने भी कन्वर्सेशन देखे हैं कभी मुझे ऐसा लगता है

103
00:07:34,520 --> 00:07:37,480
कि आप चर्चा कर रहे हो बुरा मत मानना मेरी बात का मैं बस अपना

104
00:07:37,480 --> 00:07:41,560
एक ओपिनियन दे रहा हूं मुझे कभी ऐसा लगता नहीं कि आप चर्चा कर रहे हो आई लवेज थिंक ट

105
00:07:41,560 --> 00:07:45,600
कि आप हमेशा डिबेटिंग के मूड में रहते हो और कहीं ना कहीं मेरा मूड भी ऐसा

106
00:07:45,600 --> 00:07:51,600
ही है तो आई थिंक इसलिए मैंने डाल दिया थाने

107
00:07:53,240 --> 00:07:57,240
पहली डिबेट के लिए बोला था स्टार्टिंग में मैंने डिबेट के लिए बोला था लेकिन

108
00:07:57,240 --> 00:08:01,240
फिर बाद में मुझे पता चला कि आप बस चर्चा वग करते हो मतलब ठीक है कोई बात नहीं फिर चर्चा ही कर लेंगे कोई

109
00:08:01,240 --> 00:08:05,280
दिक्कत वाली बात नहीं है ठीक है मगर इसमें जैसे

110
00:08:05,280 --> 00:08:09,400
आपने कहा कि मुझे ऐसा लगता नहीं है कि हम चर्चा नहीं शास्त्रार्थ

111
00:08:09,400 --> 00:08:13,480
नहीं चर्चा करते हैं और एक बात आपने बोली कि मैं भी इस

112
00:08:13,480 --> 00:08:17,560
समय डिबेट के ही मूड में हूं ये भी आपने बोला मगर

113
00:08:17,560 --> 00:08:22,120
ये दोनों ही चीजें आपका व्यक्तिगत था जबकि उस पोस्टर में हम भी है

114
00:08:22,120 --> 00:08:26,160
आप अगर अपना व्यक्तिगत पोस्टर बनाते हैं गुरुदेव नहीं है उसमें

115
00:08:26,160 --> 00:08:30,160
और आप कुछ भी उसम वहां पर अपने व्यक्तिगत धारणा अगर आप हमको भी वहां पर

116
00:08:30,160 --> 00:08:34,520
जैसे हम आपका नाम लिख दे आर्य समाजी

117
00:08:34,520 --> 00:08:38,800
मुझे लगता है कि आप आर्य समाजी है मुझे लगता है आपसे

118
00:08:38,800 --> 00:08:42,960
मैंने पूछा नहीं और मैंने आपकी फोटो के साथ आर समाज तो ये न्यायोचित

119
00:08:42,960 --> 00:08:47,640
नहीं होगा होगा क्या तो आपको मुझ

120
00:08:47,640 --> 00:08:51,640
ऐसा नहीं लगता को इतनी बड़ी मुझे नहीं लगता बड़ी नहीं है

121
00:08:51,640 --> 00:08:52,600
इसलिए लेट गो करके

122
00:08:52,600 --> 00:08:56,760
आगे चल रहे बड़ी नहीं है इसलिए मगर समाज में गलत संदेश

123
00:08:56,760 --> 00:08:59,960
ना जाए इसीलिए

124
00:08:59,960 --> 00:09:04,320
मेरा भी इशन मेरा मेरा भी य इंटेंशन है शिवांश जी मेरा भीय इंटेंशन

125
00:09:04,320 --> 00:09:08,480
है कि समाज में कुछ भी गलत चीज ना जाए इसलिए

126
00:09:08,480 --> 00:09:12,640
मैं भी इस लाइव में जो भी बोलूंगा के कपा जी कपाती

127
00:09:12,640 --> 00:09:16,760
जी को जो प्रेज कर रहे हैं प्रभुपाद जी मंदिर में उद्घाटन के लिए

128
00:09:16,760 --> 00:09:21,120
बुलाया था प्रभुपाद जी ने कपाती जी को वो बात है वैचारिक

129
00:09:21,120 --> 00:09:25,120
वो जो अलगाव था जिसके कारण कपाती जी ने मना कर दिया था वरना

130
00:09:25,120 --> 00:09:29,800
जो वृंदावन में जो मुख्य मंदिर है इसकन का

131
00:09:29,800 --> 00:09:34,840
उसका जब फीता काटना था तो करपात्री जी को बुलाया गया था

132
00:09:34,840 --> 00:09:39,320
और पर्सनली प्रभुपाद जी के द्वारा बुलाया गया था तो इसलिए

133
00:09:39,320 --> 00:09:44,240
इन इन चीजों से बचना चाहिए तो अब हम आगे चलते हैं

134
00:09:44,240 --> 00:09:48,640
एक बात बता न क्योंकि जो प्रभुपाद जी थे

135
00:09:48,640 --> 00:09:53,080
वो करपात्री महाराज को एक एस अद्वैत

136
00:09:53,080 --> 00:09:57,120
सन्यासी नहीं दिखते थे वो उनको वैष्णव सन्यासी दिखते थे उनकी दृष्टि में इसलिए

137
00:09:57,120 --> 00:10:01,200
उन्होने तना सम्मान दिया नहीं तो इतना देद

138
00:10:01,200 --> 00:10:05,400
तो बस क्लियर करने के लिए बोल रहा हूं आपने बात उठाई है तो मैं क्लियर करने केलिए

139
00:10:05,400 --> 00:10:08,080
स्यासी ही थेम

140
00:10:08,080 --> 00:10:12,720
के भक्त है राम के भक्त थे तो वैव सन्यासी थे

141
00:10:12,720 --> 00:10:16,760
जो शिव का भक्त होगा वो सन्यासी होगा वव

142
00:10:16,760 --> 00:10:21,120
होने का अर्थ य नहीं है कि हम जो है गणपति को ईश्वर

143
00:10:21,120 --> 00:10:25,720
नहीं मानते सात नहीं मां भगवती को ईश्वर नहीं मानते

144
00:10:25,720 --> 00:10:29,720
हम ईश्वर के पांच रूपों में से विष्णु रूप की पूजा करते इसलिए

145
00:10:29,720 --> 00:10:34,600
हम वैष्णव है अच्छा तो आप भी वैष्णव हो हम भी वैष्णव है

146
00:10:34,600 --> 00:10:38,840
अच्छा मतलब नहीं हो ना आप हा

147
00:10:38,840 --> 00:10:43,200
आप शाक्त और शैव नहीं हो ना मतलब उनकी उपासना नहीं करते ना आप ऐसा वैष्णव

148
00:10:43,200 --> 00:10:47,240
वैष्णव होने का अर्थ ये नहीं है कि मैं शक्त और शैव नहीं

149
00:10:47,240 --> 00:10:51,480
हूं बस प्रकट रूप से वैष्णव हूं क्योंकि विष्णु भगवान की पूजा करता हूं मगर

150
00:10:51,480 --> 00:10:56,160
क्योंकि मैं उनको अलग नहीं कर रहा हूं भगवती और गणेश को तो इसलिए

151
00:10:56,160 --> 00:11:00,360
मैं शक्त भी हूं मैं गान पत भी हूं र भी हूं शेफ

152
00:11:00,360 --> 00:11:06,360
भी हूं मगर प्राक स्ट

153
00:11:06,480 --> 00:11:10,600
मैं इस प्रमाण दे द मैं इस प्रमाण दे दूंगा

154
00:11:10,600 --> 00:11:14,680
आपको ओके ओके और फिर वही वाली बात

155
00:11:14,680 --> 00:11:18,880
हो गई की चलिए खैर इसको छोड़ते हैं आगे बढ़ते हैं हा वही

156
00:11:18,880 --> 00:11:23,040
आगे बढ़ते है मेन पॉइंट अब आपने उसम ये लिखा है अपने उसम कि अब मैं

157
00:11:23,040 --> 00:11:27,080
वो कुछ इंग्लिश में लिखा था आपने मायावादी की वाट लगा दूंगा

158
00:11:27,080 --> 00:11:31,280
ऐसा भाव आ रहा था ऐसा वाट लगा दूंगा ऐसा नहीं कहा था वाट लगा दूंगा

159
00:11:31,280 --> 00:11:35,840
ऐसा नहीं कहा था मुझे भा था पो

160
00:11:35,840 --> 00:11:39,880
में हां मैं बता दे मैं तो मैं तो डरता भी नहीं शिवं जी

161
00:11:39,880 --> 00:11:44,600
मैं तो जो बोला है मैं मानता हूं कि मैंने बोला है आप मुझे स्टोरी दिखा दीजिए एक बार

162
00:11:44,600 --> 00:11:48,920
ये हटा दो निकाल इसको एक

163
00:11:48,920 --> 00:11:53,120
सेकंड ो जरा देख के बताता हूं कि मैंने एटली

164
00:11:53,120 --> 00:11:57,320
बोला गया क्योंकि मुझे ऐसा लग रहा है कि जो मेन टॉपिक है उस पर बात नहीं हो रही है मैंने क्या स्टोरी डाला

165
00:11:57,320 --> 00:12:01,520
है क्योंकि आपने पहले बोला चलो ठीक है लेट गो करते फिर आप वही सेम चीज ले मुझे

166
00:12:01,520 --> 00:12:05,640
सम दो ची दो चीज है एक वर्जस वाली है और एक है कि

167
00:12:05,640 --> 00:12:10,160
मैं मायावादी के पास जा रहा हूं और आई प्रॉमिस स्कन डिवटी

168
00:12:10,160 --> 00:12:14,200
में कुछ ऐसा करूंगा मायावा फिलोसोफी बिल्कुल

169
00:12:14,200 --> 00:12:18,480
बिल्कुल आई वट बिल्कुल सही बात इसको जरा हमारे दर्शकों को हिंदी

170
00:12:18,480 --> 00:12:21,760
में बता दीजिए पूरा भाव क्या है आपका हा मतलब आई वट

171
00:12:21,760 --> 00:12:26,320
स्पेयर दिस गाय एंड द मायावा फिलोसोफी इसमें क्या है कि

172
00:12:26,320 --> 00:12:30,320
मैं बिल्कुल भी ये टॉपिक को जाने नहीं दूंगा जो मावाद फिलॉसफी है और

173
00:12:30,320 --> 00:12:34,320
जो आपने जो आक्षेप लगाए अननेसेसरी आक्षेप झूठे आक्षेप जो

174
00:12:34,320 --> 00:12:38,560
आपने लगाए हैं इसकन के ऊपर उसका मैं उत्तर दूंगा बिल्कुल तो

175
00:12:38,560 --> 00:12:42,600
इसका मतलब यह तो मानते हैं कि अभी तक उसका उत्तर दिया नहीं गया

176
00:12:42,600 --> 00:12:46,640
है दिया गया है लेकिन कभी-कभी क्या होता है कि आप ऐसे व्यक्ति से

177
00:12:46,640 --> 00:12:50,640
बात करते हो कभी कभी कि जिनको शास्त्र का ज्ञान ना हो ठीक है जिनके पास

178
00:12:50,640 --> 00:12:54,760
प्रप कभी कभी बात करते हैं मगर कभी कभी तो कभी

179
00:12:54,760 --> 00:12:58,760
कभी तो नहीं बोलूंगा मैंने शायद गलत बोल दिया कभी कभी नहीं हमेशा आप उन्ही लोगों से बात

180
00:12:58,760 --> 00:13:03,320
करते हो जिनके पास या अभी त अभी तक हमको उत्तर नहीं मिला है ना

181
00:13:03,320 --> 00:13:07,360
इसका ठीक है आज आपको प्रयास करूंगा जितना हो सकेगा

182
00:13:07,360 --> 00:13:11,440
दे आगे बढ़ आगे बढ़ेंगे आगे बढ़ेंगे मैं कह रहा अभी तक

183
00:13:11,440 --> 00:13:15,640
उत्तर नहीं दिया गया ना मेरे प्रश्नों का ठीक है

184
00:13:15,640 --> 00:13:19,840
मैं प्रयास करूंगा नाने एक चीज क्लियर

185
00:13:19,840 --> 00:13:23,920
कर रहा हूं कि उत्तर हमको अभी तक दिया गया या नहीं दिया गया ये पूछ रहा ह

186
00:13:23,920 --> 00:13:27,920
आपसे हमने अंग ऐसे लोगों से बात की जिनको नॉलेज

187
00:13:27,920 --> 00:13:31,920
नहीं थी तो इसलिए हम हमारे प्रश्नों का उत्तर

188
00:13:31,920 --> 00:13:35,920
दिया गया कि नहीं दिया गया अ देखिए कैसा

189
00:13:35,920 --> 00:13:36,800
है कि अब

190
00:13:36,800 --> 00:13:40,840
मुझे भी नहीं पता कि आप ऑफलाइन कितने लोगों से बात करते हो क्या करते हो

191
00:13:40,840 --> 00:13:45,200
जो जो ऑनलाइन है जो ऑनलाइन है ऑनलाइन है आप सिर्फ उसकी बात

192
00:13:45,200 --> 00:13:49,280
कर देखिए ऑनलाइन ऑफलाइन दोनों आप चर्चा करते हैं आप दोनों के साथ चर्चा करते

193
00:13:49,280 --> 00:13:53,480
हैं जैसे आप ऑनलाइन मुझसे कर रहे हैं वैसे आप ऑफलाइन बाकी लोगों से भी करते हैं जैसे आप

194
00:13:53,480 --> 00:13:59,480
अभी अपने चैनल प

195
00:14:00,240 --> 00:14:04,440
मि हां ठीक है आपने दिखा दिया मुझे ठीक

196
00:14:04,440 --> 00:14:08,720
है कोई बात नहीं अगर आपको नहीं मिला तो वो प्रश्न अभी रख लीजिए ठीक

197
00:14:08,720 --> 00:14:12,720
प्लीज मेरा यह सवाल क्लियर करिए आपके अकॉर्डिंग हमारे प्रश्नों का

198
00:14:12,720 --> 00:14:16,760
जवाब दिया गया है अभी तक या नहीं दिया गया है देख कैसा है

199
00:14:16,760 --> 00:14:20,760
कि दिया तो गया है हो सकता है कि आप संतुष्ट ना हुए हो

200
00:14:20,760 --> 00:14:24,400
सता जनक नहीं

201
00:14:24,400 --> 00:14:29,080
मिला वो आपकी रिलेटिविटी है शिवा जी देखो क्या होता है

202
00:14:29,080 --> 00:14:33,080
ज कि अगर मैंने आपको 100 प्रमाण दे दिए आपके अद्वैत के अगेंस्ट में ठीक

203
00:14:33,080 --> 00:14:37,240
है तो हो सकता है कि आप उसको एक्सेप्ट आप प्लीज थोड़ा सा मुझे बोलने

204
00:14:37,240 --> 00:14:41,320
दीजिए ट ना करिए प्लीज रिक्वेस्ट है श जी आप बढे हैं तो बोलिए

205
00:14:41,320 --> 00:14:45,400
बोलिए बोलिए जी तो मैं येही कह रहा हूं कि जैसे अगर मैंने आपको 100

206
00:14:45,400 --> 00:14:49,960
रेफरेंसेस दे दिए मायावादी अगेंस्ट मत अद्वैतवाद के अगेंस्ट मैंने 100 रेफरेंस दे दिए फॉर एग्जांपल

207
00:14:49,960 --> 00:14:51,960
ठीक है तो हो सकता है कि आप उससे भी संतुष्ट

208
00:14:51,960 --> 00:14:56,040
ना हो ठीक है तो आंसर तो मैंने दिया अपना पूरा प्रयास किया लेकिन हो सकता है

209
00:14:56,040 --> 00:15:00,280
कि आपके अंदर वो एक्सेप्टेंस ना हो या आपके विचारधारा थोड़ी अलग आपको स्क्रीन पर

210
00:15:00,280 --> 00:15:06,280
मैसेज दिख रहा है क्या आप लाइव चल रहा है

211
00:15:06,520 --> 00:15:11,200
क्या इस वजह से आपके यहां कोई लाइव देख रहा है क्या ऐसे

212
00:15:11,200 --> 00:15:15,480
मोबाइल में मेरे यहां से क्या आपके आसपास कोई और भी मोबाइल

213
00:15:15,480 --> 00:15:19,480
में चल रहा है क्या लाइव स्ट्रीम नहीं नहीं नहीं मेरे यहां प तो मतलब एक

214
00:15:19,480 --> 00:15:23,480
बैठे हैं बट वो देख नहीं रहे वो तो बैठे हुए हैं और लाइव नहीं देख र हो तो क्योंकि

215
00:15:23,480 --> 00:15:27,600
मैं लाइव हूं यहां प तो वो क्यों देखेंगे इस वजह से आवाज

216
00:15:27,600 --> 00:15:31,720
नहीं ऐसा हो सकता है ऐसा ऐसा हो सकता है

217
00:15:31,720 --> 00:15:35,960
आ इनके चैनल पर लाइव है अच्छा आपने भी अपने चैनल पर भी लाइव

218
00:15:35,960 --> 00:15:40,400
किया हुआ है क्या यम स्ट्रीम हो रहा व

219
00:15:40,400 --> 00:15:44,640
आप हम आपको दे देंगे हम आपको पूरी रिकॉर्डिंग दे देंगे आप चिंता

220
00:15:44,640 --> 00:15:48,640
ना करें में भी बोल पूरी रिकॉर्डिंग

221
00:15:48,640 --> 00:15:52,880
दे दूंगा आप स्ट्रीम मत करिए ल

222
00:15:52,880 --> 00:15:55,440
कह

223
00:15:55,440 --> 00:15:59,560
रहे लेकिन फिर भी टेक्निकल ड थ क वो अपने

224
00:15:59,560 --> 00:16:03,560
य से अलग से अभी अभी पता चल रहा है तो आप मत करिए

225
00:16:03,560 --> 00:16:07,000
मैं आपको बता रहा हूं यहां पर सबके सामने बोल रहा हूं मैं आपको य रिकॉर्डिंग पूरी

226
00:16:07,000 --> 00:16:11,400
दे दूंगा एक किसी ड्राइव पर डाल दूंगा ड्राइव पर डालर

227
00:16:11,400 --> 00:16:15,440
गा मैं आपको एक चीज बोल देता शिवा जी देख टेक्निकल प्रॉब्लम हो

228
00:16:15,440 --> 00:16:19,600
ही नहीं सकता पॉसिबल नहीं है क्योंकि वो अपने इस पर स्ट्रीम कर रहे म

229
00:16:19,600 --> 00:16:23,880
य से कॉपी करके व स्ट्रीम कर र तो आपके इसम कुछ भी दिक्कत नहीं जाएगी

230
00:16:23,880 --> 00:16:27,920
व स्क्रीन श करम आपकी आवाज नी क्लेरिटी के

231
00:16:27,920 --> 00:16:32,040
साथ तो मुझे भी नहीं मैं ये कह रहा हूं शिवांश जी शिवांश जी एक सेकंड मैं

232
00:16:32,040 --> 00:16:38,040
ना एक बार वाईफाई बंद करके एक बार बात करता हूं

233
00:16:44,120 --> 00:16:49,760
रुको अ ये क्या हो

234
00:16:49,760 --> 00:16:53,800
गया हेलो हेलो हेलो हेलो अब

235
00:16:53,800 --> 00:16:58,160
मैं क् हां मैं ये कह रहा हूं कि टेक्निकल प्रॉब्लम हा

236
00:16:58,160 --> 00:17:02,280
हो सकता है कि इसम कुछ टेक्निकल प्रॉब्लम हो लेकिन क्योंकि स्ट्रीम तो दुनिया में बैठा

237
00:17:02,280 --> 00:17:06,440
कोई भी व्यक्ति कर सकता है हमको देख के उससे आपके स्ट्रीम में कोई दिक्कत

238
00:17:06,440 --> 00:17:10,480
नहीं आएगी कोई टेक्निकल प्रॉब्लम नहीं आएगी तो आप टेंशन मत लीजिए एंड रही बात

239
00:17:10,480 --> 00:17:13,240
रिकॉर्डिंग देने की ठीक है मैं आपके ऊपर

240
00:17:13,240 --> 00:17:19,240
कर ले मामले में कोई पक्ष रखना है तो वो कमेंट यहां पर शो कर

241
00:17:20,000 --> 00:17:26,000
दीजिए अरे लेकिन टेक्निकल प्रॉब्लम आप भी हो सकती है प्रभु जी

242
00:17:29,320 --> 00:17:34,600
हरे

243
00:17:34,600 --> 00:17:38,760
कृष्णा जरा मैं भी कमेंट्स पढ़ लेता हूं क्या क्या आ र है ब्रेक

244
00:17:38,760 --> 00:17:42,920
ब्रेक होके आ रही है आवाज यही बोल रहे हैं तो क्या करें ऐसे

245
00:17:42,920 --> 00:17:48,080
ही आगे बढ़े कुछ सुझाव दे

246
00:17:48,080 --> 00:17:52,400
दीजिए आवाज कट रही है

247
00:17:52,400 --> 00:17:56,520
शिवांस जी का सही है आपकी आवाज कट आप कैसे

248
00:17:56,520 --> 00:18:02,520
उसको स्ट्रीम कर रहे हैं दूसरी जगह मैं समझ नहीं पा रहा स्क्रीन रिकॉर्डिंग

249
00:18:11,440 --> 00:18:15,520
से ठीक है तो वापस आ जाए तो हम लोग

250
00:18:15,520 --> 00:18:19,640
आगे बढ़ाते हैं कन ब्रो वॉइस ब्लर

251
00:18:19,640 --> 00:18:24,400
भी है स्कन वाला स्म वापस से चालू करके देखो भग जी

252
00:18:24,400 --> 00:18:27,760
नहीं आपका स्ट्रीम

253
00:18:27,760 --> 00:18:31,840
कॉपी इनका आवाज ठीक से नहीं आ रहा मतलब ब्रेक होकर

254
00:18:31,840 --> 00:18:36,280
आ रहा है शिवांश जी और इनका फेस कैम भी अटक रहा है

255
00:18:36,280 --> 00:18:42,120
जी बिल्कुल यही बात बोल रहा हूं तो ये किस तरह से

256
00:18:42,120 --> 00:18:47,280
इसको वो कर रहे हैं ये समझ में नहीं आ रहा

257
00:18:47,280 --> 00:18:51,320
है ये देखिए ये अब मैं ऑडिबल हूं शिवांश

258
00:18:51,320 --> 00:18:55,360
जी ऑडिबल तो है मगर आपका मतलब ठीक से

259
00:18:55,360 --> 00:18:59,440
हो नहीं रहा है ये लाइव जो है प्रॉब्लम आ रही है

260
00:18:59,440 --> 00:19:03,520
एक्चुअली मैं अभी जिस सिटी में हूं यहां पे हैवी रेंज के वज से दूसरे दो ने

261
00:19:03,520 --> 00:19:07,520
लाइव शेयर किया है तो कोई दिक्कत नहीं होगी शिवांश भाई अच्छा

262
00:19:07,520 --> 00:19:11,960
ठीक है अब छोड़ो जैसा भी है आगे बढ़ते हैं य

263
00:19:11,960 --> 00:19:16,360
य आवाज आ रही है मेरी हम जी बोलिए एक्चुअली

264
00:19:16,360 --> 00:19:20,720
य पे बारिश बहुत है जिस सिटी में मैं हूं अभी फिलहाल हो सकता है ठीक है

265
00:19:20,720 --> 00:19:24,920
नहीं कोई नहीं आगे बढ़ते हैं लेट गो छोड़ उसको आगे बढ़ते ओके मेन

266
00:19:24,920 --> 00:19:27,640
टॉपिक हां

267
00:19:27,640 --> 00:19:31,800
तो अब अब सबसे पहले हमें आप यह बताइए

268
00:19:31,800 --> 00:19:35,880
कि आप यह कहते हैं कि मैं मायावादी की फिलॉसफी को आज जो है

269
00:19:35,880 --> 00:19:40,360
कुछ करके आऊंगा नष्ट करके जो भी तो आप

270
00:19:40,360 --> 00:19:46,360
ये मानते हैं कि शंकराचार्य की फिलोसोफी मायावादी

271
00:20:01,600 --> 00:20:05,840
एक सेकंड कट नहीं प्रभु शिवांश जी प्लीज एक रिक्वेस्ट

272
00:20:05,840 --> 00:20:09,920
बोलिए बोलिए जी और

273
00:20:09,920 --> 00:20:13,080
ये जो मायावा जो फिलोसोफी है आपकी यह ऐसा

274
00:20:13,080 --> 00:20:17,640
नहीं है कि बस इकन वाले बोल रहे हैं या कोई एक

275
00:20:17,640 --> 00:20:21,640
पर्टिकुलर संप्रदाय बोल रहा है ठीक है जितने भी संप्रदाय ले लो

276
00:20:21,640 --> 00:20:27,200
जितना भी इंफॉर्मेशन अवेलेबल है ग पे हर जगह पर

277
00:20:27,200 --> 00:20:31,320
मायावादी को नहीं आ गया ठीक है और सेकंड चीज आपकी

278
00:20:31,320 --> 00:20:35,240
फिलोसोफी बुद्धिज्म से काफी मिलती जुलती है देखिए ये एक

279
00:20:35,240 --> 00:20:39,440
एक सेक्टे डिस्कशन है तो इसको प्लीज पर्सनल मत लीजिएगा ओके

280
00:20:39,440 --> 00:20:43,680
मतलब मैं आपको ऐसे किसी भी तरीके से हर्ट नहीं करना चाहता तो मैं पहले ही आपको बता देता

281
00:20:43,680 --> 00:20:48,040
हूं एंड जो मैंने कहा वहां पर स्टोरी में उसको आप इतना सीरियसली मत लीजिए

282
00:20:48,040 --> 00:20:52,080
मैं थोड़ा सा रजस में आके मैंने कह दिया था वो

283
00:20:52,080 --> 00:20:56,680
वैसे करूंगा वही जो मैंने कहा है बट फिर भी मुझे उस चीज के लिए थोड़ा सा

284
00:20:56,680 --> 00:21:00,880
क्षमा कर दीजिए कि मैंने आपको बुरा लग रहा है आपको दुख पहुचा उसके लिए मुझे क्षमा

285
00:21:00,880 --> 00:21:05,080
कर दीजिए आप बड़े हैं मुझसे और मुझे अच्छा नहीं लग रहा है कि आप मुझसे

286
00:21:05,080 --> 00:21:09,120
12 1 साल बड़े हैं तो मुझे भी थोड़ा अच्छा नहीं लग रहा है कि मैंने किसी बड़े भैया को ऐसे

287
00:21:09,120 --> 00:21:13,320
मैंने बोल दिया है ना तो उसके लिए मैं क्षमा चाहता हूं बट हा मायाव

288
00:21:13,320 --> 00:21:17,360
फिलोसोफी है उसको तो मैं कभी भी सपोर्ट नहीं कर सकता और उसका डिब

289
00:21:17,360 --> 00:21:21,520
मेरे लिए काफी इजी है जो मैं बात ऐ

290
00:21:21,520 --> 00:21:25,600
करना पब आप कट मत कर प्लीज मैंने सवाल ये

291
00:21:25,600 --> 00:21:29,720
पूछा शंकरा की फ मा है आप

292
00:21:29,720 --> 00:21:34,000
मुझे यह प्लीज बता शिवान

293
00:21:34,000 --> 00:21:38,160
जीही आपको बताया कई लोग बोलते हैं

294
00:21:38,160 --> 00:21:42,480
कई आचार्य बोलते हैं एक बोला कई आचार्य बोलते हैं

295
00:21:42,480 --> 00:21:46,600
एक बोला बुद्ध से मैच खाती है और एक बोला शास्त्र

296
00:21:46,600 --> 00:21:49,560
में लिखा है हा

297
00:21:49,560 --> 00:21:53,720
शास्त्र में भी लिखा है और आप ही के आप ही के जो सन्यासी हुए जैसे

298
00:21:53,720 --> 00:21:56,320
की वाचस्पति मिश्र हुए तो उन्होंने भी

299
00:21:56,320 --> 00:22:00,320
अपने कहा जी बिल्कुल बिल्कुल आप नोट कर लीजिए

300
00:22:00,320 --> 00:22:04,680
इसको और मैं आई वि आईड मैं अगर लैपटॉप से जुड़ा

301
00:22:04,680 --> 00:22:09,000
तो स्क्रीन शेयर करके जो मान रहा हं

302
00:22:09,000 --> 00:22:13,960
आपको प्रमाण देने की आवश्यकता तब पड़ेगी जब मैं मना करू कि मैं नहीं मान

303
00:22:13,960 --> 00:22:18,640
रहा मैं मान

304
00:22:18,640 --> 00:22:24,640
रहा हा

305
00:22:25,440 --> 00:22:29,440
प हो गया हा नहीं हुआ नहीं है

306
00:22:29,440 --> 00:22:33,560
आपने कट किया तो मैं कंप्लीट कर लेता हूं ठीक है तो जितनी इंफॉर्मेशन अवेलेबल

307
00:22:33,560 --> 00:22:36,720
है

308
00:22:36,720 --> 00:22:40,840
मायावादी रिलेटेड है और वाचस्पति मिश्र जो नाइ सेंचुरी के थे

309
00:22:40,840 --> 00:22:45,040
इवन उन्होंने भी कहा है ठीक है फिर एक और है श्री गोविंदा आनंद

310
00:22:45,040 --> 00:22:49,280
जी ऐसे मुझे नाम ठीक से याद नहीं आ रहा है वो भी आप ही के मान लिया हमारे आचार्यों

311
00:22:49,280 --> 00:22:53,280
ने कहा है अब आप और कोई वो है आपका अभी

312
00:22:53,280 --> 00:22:57,480
जब आप मान चुके हैं कि आप मायावादी है तो फिर अभी आगे क्या मतलब अभी आगे क्या आगे

313
00:22:57,480 --> 00:23:01,600
क्या क्वे है यहां पे डिबेट बंद कर द बंद कर दूं एंड स्ट्रीम कर दूं लाइव लाइव

314
00:23:01,600 --> 00:23:05,640
को एंड कर दूं नहीं मैं कह रहा हूं आगे क्या आप मान गए ना तो बस मैंने सुन ली

315
00:23:05,640 --> 00:23:09,720
मैं बोलू मुझे बोलने का अधिकार है कि नहीं अरे प्रभु आप ही का

316
00:23:09,720 --> 00:23:13,760
तो चैनल है तो आपके पास तो अधिकार होना चाहि ये क्यों कह रहे हैं कि जब आपने मान लिया तो अब

317
00:23:13,760 --> 00:23:17,800
कुछ मत बोलना इस पे ये क्यों कह रहे मैंने कब बोला मैं बो मैंने बोला अब जब आपने मान लिया तो

318
00:23:17,800 --> 00:23:21,880
अभी आगे क्या क्वेश्चन है आपका मैं ये पूछ रहा हूं तो मैं वो बता रहा हूं ना आपको आगे क्या क्वेश्चन है मैं

319
00:23:21,880 --> 00:23:26,160
बता रहा हूं वो सु सुन रहा मैं सुन तो रहा हूं

320
00:23:26,160 --> 00:23:30,520
हां आपने पहला कहा कि शास्त्र में लिखा है

321
00:23:30,520 --> 00:23:36,520
तो मेरा क्वेश्चन पहला है क्या शास्त्र में लिखा है शंकराचार्य की फिलोसोफी

322
00:23:39,840 --> 00:23:43,920
मायावादी क्या शास्त्र में लिखा है शंकराचार्य

323
00:23:43,920 --> 00:23:49,920
की फिलोसोफी

324
00:23:54,600 --> 00:23:58,800
मायावादी नहीं सब बोलते आपने बो बोला

325
00:23:58,800 --> 00:24:03,000
कि बहुत सारे लोग बोलते मैंने बोला सब लोग बोलते हैं हा सब लोग

326
00:24:03,000 --> 00:24:09,000
बो सब लोग तो मैं तो नहीं बोल रहा

327
00:24:09,640 --> 00:24:13,680
अभी मेरा भाई तो नहीं बोल र 30 सेकंड पहले आपने बोला

328
00:24:13,680 --> 00:24:18,160
कि मैं मान लेता हूं आपने अभी 30 सेकंड बात करूंगा उस

329
00:24:18,160 --> 00:24:22,200
मैं आपके अभी मैंने यह माना कि हमारे आचार्यों ने कहीं कहीं पर

330
00:24:22,200 --> 00:24:26,400
ये कहा कि हम मायावादी है मगर मैंने आपसे यह पूछा

331
00:24:26,400 --> 00:24:30,760
है कि आपका आधार क्या है हमें मायावादी कहने का

332
00:24:30,760 --> 00:24:34,880
ठीक है तो आपने उसके जवाब में जो जवाब दिए हैं उन जवाबों पर

333
00:24:34,880 --> 00:24:38,920
एक एक करके हम बात कर रहे हैं ठीक है

334
00:24:38,920 --> 00:24:43,200
पहला है क्या शास्त्र में लिखा है नाम लेकर

335
00:24:43,200 --> 00:24:49,200
कि शंकराचार्य का अद्वैतवाद ही

336
00:24:53,320 --> 00:24:54,600
मायावादी

337
00:24:54,600 --> 00:24:58,680
पहली बात आपने कही क्या शास्त्र में लिखा है तो मैंने मेरा

338
00:24:58,680 --> 00:25:02,840
प्रश्न है क्या शास्त्र में लिखा है कि शंकराचार्य का जो अद्वैतवाद है

339
00:25:02,840 --> 00:25:06,840
वही मावाद है ठीक है दूसरा पॉइंट यह है

340
00:25:06,840 --> 00:25:10,960
कि कई लोगों के बोल देने से वह प्रमाण नहीं बनता है महाभारत

341
00:25:10,960 --> 00:25:15,200
में भीष्म जी ने य बात कही है युधिष्ठिर जी से कि कई लोगों के कह

342
00:25:15,200 --> 00:25:19,480
देने से पूर्व में किसी के कर देने से वह प्रमाण नहीं माना जाता है शास्त्रों

343
00:25:19,480 --> 00:25:24,200
द्वारा उसे स्वीकार किए जाने पर प्रमाण माना जाता है तर्क भी ले लीजिए

344
00:25:24,200 --> 00:25:28,480
दुनिया में बहुत से लोग हैं जो कहते हैं सनातन धर्म बुरा है

345
00:25:28,480 --> 00:25:32,600
ईसाई हैं बाइबल वाले हैं तो उसके आधार

346
00:25:32,600 --> 00:25:36,840
पर हम यह नहीं कह सकते कि नहीं सनातन धर्म बुरा है ठीक है

347
00:25:36,840 --> 00:25:41,160
तीसरा पॉइंट था आपकी बुद्ध से मैच खाती थी अच्छा

348
00:25:41,160 --> 00:25:45,640
बुद्धों का खंडन किसने किया

349
00:25:45,640 --> 00:25:49,880
था बुद्धों बों से इसलिए लड़े बुद्धों से इसलिए लड़े क्योंकि

350
00:25:49,880 --> 00:25:53,920
उनकी उनकी फिलोस फी उनको फैला थी बौद्धों का खंडन इसलिए

351
00:25:53,920 --> 00:25:54,840
किया

352
00:25:54,840 --> 00:25:59,120
हा बिल्कुल तीसरी चौथी बात जो है

353
00:25:59,120 --> 00:26:03,160
कि हमारे सन्यासियों ने भी यह बात कही है ठीक

354
00:26:03,160 --> 00:26:07,400
है अब जो यह बात आती है कि हमारे सन्यासियों ने भी अपने आप को मायावादी

355
00:26:07,400 --> 00:26:13,200
माना है तो हमारे सन्यासी स्वयं को वैदिक भी तो कहते

356
00:26:13,200 --> 00:26:19,200
हैं जो शस्त्र में आप बात कर रहे हैं कि अवैध

357
00:26:20,520 --> 00:26:22,120
मायावादी मायावादी

358
00:26:22,120 --> 00:26:26,120
कहा है क्या हमारे सन्यासी स्वयं को वैदिक

359
00:26:26,120 --> 00:26:30,440
भी तो कहते हैं वैष्णव भी तो धार्मिक

360
00:26:30,440 --> 00:26:34,560
भी तो कहते हैं सच्चिदानंद स्वरूप का बोध कराने वाला भी

361
00:26:34,560 --> 00:26:38,640
तो कहते हैं यह बात आपने क्यों नहीं मानी

362
00:26:38,640 --> 00:26:39,140
हां

363
00:26:39,080 --> 00:26:43,080
मैं बता दूं अभी हो गया क्वेश्चन तो ये चार पॉइंट हो गए

364
00:26:43,080 --> 00:26:47,080
अब अब इसमें बात ऐसी है कि

365
00:26:47,080 --> 00:26:51,400
कुल मिलाकर के अगर हमारे कुछ आचार्यों ने किसी किसी

366
00:26:51,400 --> 00:26:55,600
कांटेक्ट में यह अपने लिए कह दिया कि मायावादी कहा था

367
00:26:55,600 --> 00:26:58,560
ये वही मायावादी

368
00:26:58,560 --> 00:27:02,640
जो आपके चैतन्य महाप्रभु जी हमारे और या फिर जिसके लिए पद्म

369
00:27:02,640 --> 00:27:06,640
पुराण में जिसको आक्षेप रूप में कहा गया है अवैध कहा गया है हम

370
00:27:06,640 --> 00:27:10,800
वही वाले मायावादी है क्या ये कहा है हां तो आप मायावादी

371
00:27:10,800 --> 00:27:16,480
होने का सनातन सिद्धांत बताइए कि शंकराचार्य का सिद्धांत

372
00:27:16,480 --> 00:27:20,480
मायावादी है वैसे आपने चार पॉइंट बोल दिए आई थिंक ये थोड़ा

373
00:27:20,480 --> 00:27:24,520
सा ये ठीक तरीका मुझे नहीं लगता कि आप चार पॉइंट बो मुझे सारे पॉइंट्स याद नहीं रहेंगे

374
00:27:24,520 --> 00:27:30,480
बट फिर भी आपने भी तो चार बोले थे आपने भी चार

375
00:27:30,480 --> 00:27:35,200
फिर दूसरा बोलते फिर जवाब लेते जब आपने चार बोले तो हमने चार जवाब दे दिने

376
00:27:35,200 --> 00:27:39,600
एक क्वेश्चन पूछा था आपने एक क्वेश्चन पूछा था उसका मैंने प्रॉपर आंसर

377
00:27:39,600 --> 00:27:43,720
दिया चार थे लेकिन

378
00:27:43,720 --> 00:27:48,010
सुनि आपने जवाब चार दिए एक साथ जी

379
00:27:48,010 --> 00:27:52,360
[प्रशंसा] सुनिए इसको क्लियर करिए प्लीज

380
00:27:52,360 --> 00:27:56,360
आपने जवाब चार दिए थे एक साथ प्रभ जरा पेन मुझे देना पेन और बुक

381
00:27:56,360 --> 00:28:00,760
देनार एक मिनट पॉइंट एक बार लिख लेता हूं ठीक है ठीक है आपका

382
00:28:00,760 --> 00:28:03,760
ये मत

383
00:28:03,760 --> 00:28:08,520
दीजिए किसी में भी लिख दो चलेगा ना

384
00:28:08,520 --> 00:28:12,680
मैंने क्या एक्चुअली गलती मेरी है मुझे एक पहले ही लिख लेना

385
00:28:12,680 --> 00:28:17,040
चाहिए था कोई बात नहीं वैसे आपके क्वेश्चन

386
00:28:17,040 --> 00:28:21,240
बहुत ही मतलब ऐसा दम नहीं आपके क्वेश्चन में कुछ मतलब

387
00:28:21,240 --> 00:28:25,360
एकदम ऐसा लग रहा है कि वो निर्णय जनता को लेने दीजिए वो निर्णय

388
00:28:25,360 --> 00:28:29,840
जनता को लेने दीजिए आप अपनी बात कए निर्णायक ना ब फ पॉइंट

389
00:28:29,840 --> 00:28:34,040
फर्स्ट पॉइंट फर्स्ट पॉइंट

390
00:28:34,040 --> 00:28:38,120
हां बोलिए फर्स्ट पॉइंट आप बोलिए मैं एक बार फिर से रिवाइज

391
00:28:38,120 --> 00:28:44,120
कर रहा हूं मैं लिख लेता हूं फिर एक एक करके चार चत्र में लिखा है कि

392
00:28:45,920 --> 00:28:50,040
मायावादी कहां लिखा है कि शंकराचार्य का अद्वैत है वही मायावादी

393
00:28:50,040 --> 00:28:54,160
बात हो रही है वहां पर भाई शंकराचार्य जी ने तो जिस कांटेक्ट

394
00:28:54,160 --> 00:28:58,240
में मायावादी

395
00:28:58,240 --> 00:29:03,280
में स्वयं को मायावादी कहा है वो

396
00:29:03,280 --> 00:29:07,320
मायावादी है ज पदम पुराण में गीता महात्मा में बता रहे भगवान

397
00:29:07,320 --> 00:29:11,600
विष्णु कि मेरा य शरीर भी माया है और कुछ नहीं है तो जो मायावा

398
00:29:11,600 --> 00:29:15,600
भगवान विष्णु बता रहे हैं उसकी बात की है ऋग्वेद में इंद्रो माया भी आया है

399
00:29:15,600 --> 00:29:19,600
उस मावाद के कांटेस्ट में हमारे आचार्यों ने स्वयं को मायावादी

400
00:29:19,600 --> 00:29:25,000
कहा है उन्होंने ये थोड़ी ना कहा कि पदम पुराण में जिस अवैध

401
00:29:25,000 --> 00:29:28,560
मायावादी मायावादी

402
00:29:28,560 --> 00:29:33,760
और ना ही शास्त्रों में य कहा है कि जो वैदिक

403
00:29:33,760 --> 00:29:38,000
मायावादी ब्राह्मण के द्वारा वही मायावा

404
00:29:38,000 --> 00:29:44,000
है व

405
00:29:44,000 --> 00:29:48,240
मायावादी मायावादी बोला अब आप जवाब दि

406
00:29:48,240 --> 00:29:52,320
और और दो पॉइंट रह गए कि एक वो बौद्धों से मैच खाता

407
00:29:52,320 --> 00:29:56,360
है ठीक है और का जवाब हमने

408
00:29:56,360 --> 00:30:00,440
दिया कि पहली बात हम वैदिक है तो बौद्ध कैसे हो गए

409
00:30:00,440 --> 00:30:02,040
अगर कहीं कहीं पर हमारा

410
00:30:02,040 --> 00:30:06,240
हमारा कोई चीजें मिल रही है तो ऐसे तो मैं आपके अंदर की कई चीजें मिला

411
00:30:06,240 --> 00:30:10,480
दिखा दूंगा जो कुत्तों से भी मिलेगी जानवरों से भी मिलेगी जैसे कि

412
00:30:10,480 --> 00:30:14,600
जो एक स्वान है वो दांतों से चबाकर

413
00:30:14,600 --> 00:30:18,600
खाना खाता है आप भी दांतों से चबाकर खाना खाते हैं तो इस कारण

414
00:30:18,600 --> 00:30:21,680
से क्या आपको स्वान माना

415
00:30:21,680 --> 00:30:23,760
जाए तो

416
00:30:23,760 --> 00:30:28,200
कुल मिलाकर अगर आप प्रसन्न बध कहेंगे तो बौद्धों को प्रच्छन्न वैदिक क्यों ना

417
00:30:28,200 --> 00:30:32,480
जाए और अंततोगत्वा तो शंकराचार्य जी ने बौद्धों का खंडन

418
00:30:32,480 --> 00:30:36,840
किया हराया उनके साम्राज्य को मिटाया आज हम और आप जो

419
00:30:36,840 --> 00:30:41,440
हिंदुत्व के अपने स्वयं को हिंदुत्व से जोड़ते हुए सनातन से जोड़ते हुए

420
00:30:41,440 --> 00:30:45,480
जो सांस ले पा रहे हैं वह तो आदि शंकराचार्य उनके साथ जो कुमार

421
00:30:45,480 --> 00:30:49,560
भट्ट आदि थे महान आचार्य गण उनके कारण ले पा रहे हैं उनके शिष्य

422
00:30:49,560 --> 00:30:53,680
थे जो मंडन मिश्र आदि जो बाद में सुरेश आचार्य हुए

423
00:30:53,680 --> 00:30:58,040
तो उनके कारण हम आज ले रहे हैं हिंदुत्व है हमारे पास आज हमें वेद के मंत्र

424
00:30:58,040 --> 00:31:02,200
प्र सायनाचार्य का सबसे प्राचीन भस्य हमय सुलभता से प्राप्त

425
00:31:02,200 --> 00:31:06,280
है तो हम कैसे कह सकते हैं कि वो बौद्धों के लिए उन्होंने ब

426
00:31:06,280 --> 00:31:10,880
जो है बौद्धों के लिए वो वो थे समर्पित

427
00:31:10,880 --> 00:31:15,360
और सभी बातें बोल दी कुल मिलाकर सूत्रा क्मक अगर बोले तो शास्त्रों

428
00:31:15,360 --> 00:31:21,360
में

429
00:31:23,440 --> 00:31:27,680
अवैदिस कि उन्होंने जो फिलोस

430
00:31:27,680 --> 00:31:31,720
फी वो बौद्धों से मैच खाती है तो बहुत सारे कांटेक्ट में आपकी फिलॉसफी यहां तक

431
00:31:31,720 --> 00:31:36,440
कि कुछ भी दुनिया में कुछ भी बोला जाएगा बौद्धों से मैच खा जाएगी और

432
00:31:36,440 --> 00:31:41,160
उन्होंने बौद्धों का खंडन किया था ना कि उनका बौद्धों का प्रचार प्रसार और चौथी चीज

433
00:31:41,160 --> 00:31:45,560
हमारे सन्यासियों ने स्वयं को वैदिक मायावादी बोला है अगर बोला भी है तो

434
00:31:45,560 --> 00:31:49,600
और शास्त्रों में अवैध मायावादी बात हुई है चार चार पॉइंट हो गए

435
00:31:49,600 --> 00:31:53,680
अब बताइए चार नहीं सात पॉइंट मैं सारे लिख रहा था आपके

436
00:31:53,680 --> 00:31:58,400
पॉइंट्स ठीक है एक एक करके मैं डिंग करता हूं शंकरा

437
00:31:58,400 --> 00:32:01,920
शास्त्र में लिखा है

438
00:32:01,920 --> 00:32:07,920
मायावादी है ठीक है तो पहली बात तो जो

439
00:32:19,320 --> 00:32:23,400
मायावादी आपके लिए ही है ठीक है क्योंकि आपकी जो फिस दो बार

440
00:32:23,400 --> 00:32:28,920
कह दिया आपके लिए आपके लिए आपने ये बताया क्यों है हमारे लिए

441
00:32:28,920 --> 00:32:32,960
अरे जब आप बोल रहे थे मैं कुछ बोल नहीं रहा था आपने एक ही पॉइंट दो तीन बार बोल दिया तो उस पर मैंने आपको

442
00:32:32,960 --> 00:32:36,960
कुछ नहीं बोला और मैं अगर एक चीज को रिपीट कर रहा कुछ नहीं बोलूंगा आपके बीच में

443
00:32:36,960 --> 00:32:40,960
मगर आप निर्णायक ना बने आप आपके

444
00:32:40,960 --> 00:32:45,080
लिए आपके लिए तो ये निर्णय है आप अपना तर्क बताइए कि हमारे

445
00:32:45,080 --> 00:32:49,120
लिए क्यों है तोय निर्णय नहीं है आप ये बताइए कि हमारे लिए क्यों है यह मत

446
00:32:49,120 --> 00:32:53,240
बताइए आपके लिए आपके लिए आपके लिए नहीं बता रहा

447
00:32:53,240 --> 00:32:57,360
लॉजिकली बात करूंगा ठीक है लॉजिक बताइए आप ये निर्णय मत दीजिए लॉजिक बताने

448
00:32:57,360 --> 00:33:01,480
से पहले आपके लिए ठीक है ठीक है आप अगर कट नहीं करेंगे तो मैं लॉजिक

449
00:33:01,480 --> 00:33:05,840
देता हूं लॉजिक बताइए ओके तो

450
00:33:05,840 --> 00:33:10,160
अभी प्लीज कुछ बोलिएगा मत ठीक हैने निया

451
00:33:10,160 --> 00:33:14,560
तो बोलूंगा अगर विषय से हट के बात की तो बोलूंगा आप लॉजिक बता

452
00:33:14,560 --> 00:33:18,600
अपने काउटर कर देखो मैं निर्णय नहीं दे रहा आपने

453
00:33:18,600 --> 00:33:22,640
मुझे आधे में कट किया कैसा होता है निर्णय निर्णय आपके लिए

454
00:33:22,640 --> 00:33:26,640
है य ये मैंने आपसे नहीं पूछा था किसके लिए मैंने आपसे कारण पूछा

455
00:33:26,640 --> 00:33:31,160
था वो तो आपने शुरू में बोल दिया कि हां आप मायावादी हो ठीक है पोस्टर

456
00:33:31,160 --> 00:33:34,600
बनाया हा प्लीज ठीक आप पोस्टर

457
00:33:34,600 --> 00:33:38,640
अरे पहले बोलते लेट गो करो अब बोलते आपने पोस्टर बनाया ऐसे मत अरे तो मैं

458
00:33:38,640 --> 00:33:42,720
आपको ये बता रहा हूं कि ये आप मुझे बता चुके हैं कि आप मुझे मायावादी मानते

459
00:33:42,720 --> 00:33:46,800
हैं अब मैंने पूछा है क्यों मानते हैं तो आपको कारण बताना है आपको ये

460
00:33:46,800 --> 00:33:50,960
नहीं बताना है कि मैं आपको मायावादी मानता हूं शिवा जीी टाइम

461
00:33:50,960 --> 00:33:55,240
देखो आपको सब मानते हैं ब मुझे मैं जो

462
00:33:55,240 --> 00:33:59,560
मैं जो सिद्धांत है उससे नहीं हटूंगा अगर आप विषय को बदलेंगे निर्णय

463
00:33:59,560 --> 00:34:03,960
देंगे तो मैं टोकू आप लॉजिक बोलिए लॉजिक क्या उसके पीछे

464
00:34:03,960 --> 00:34:08,480
बताइ आप अभी म्यूट कर दीजिए ठीक है अब मेरे

465
00:34:08,480 --> 00:34:12,560
मे चार पाच पॉइंट प्लीज अभी आप सुन लीजिए ठीक है ठीक है

466
00:34:12,560 --> 00:34:16,600
तो कारण क्या है कि आप जो आपका जो ये जो सिद्धांत है

467
00:34:16,600 --> 00:34:20,720
ठीक है प्रसन्नम बौम वो क्यों है उसका मैं आपको कारण बताता ठीक है

468
00:34:20,720 --> 00:34:24,800
पहली बात तो ये भगवान विष्णु ने शंकर जी को कहा है ठीक है

469
00:34:24,800 --> 00:34:29,040
कि आप जाकर ऐसे शास्त्र का प्रचार करो जो बु बु बुद्धिस्ट बोलते इसको बुद्धिस्ट

470
00:34:29,040 --> 00:34:33,280
नहीं है ये बुद्धिस्म का प्रचार नहीं किया आदि शंकराचार्य ने आदि शंकराचार्य

471
00:34:33,280 --> 00:34:37,560
जी ने बुद्धिस्म का खंडन किया ठीक है और जब उन्होंने

472
00:34:37,560 --> 00:34:41,880
खंडन किया बुद्धिज्म का तो उन्होंने एक ऐसी फिलोसोफी दी जो एंड

473
00:34:41,880 --> 00:34:46,800
गोल ऑलमोस्ट सेम है जो एक बुद्धिस्ट का जो एंड गोल है और एक जो अद्वैत

474
00:34:46,800 --> 00:34:49,720
वादी का जो एंड गोल है वो एंड गोल सेम है ठीक

475
00:34:49,720 --> 00:34:54,080
है क्योंकि आपको भी निर्गुण निर्गुण मींस जिसमें कोई क्वालिटी ना हो क्वालिटी लेस

476
00:34:54,080 --> 00:34:58,320
ब्रम ठीक है तो मब एक तरीके से वो भी शून्य है और

477
00:34:58,320 --> 00:35:02,600
जो बुद्ध है वो भी विष्णु के अवतार उन्होने भी ये जो बुद्धिस्ट

478
00:35:02,600 --> 00:35:06,680
स्क्रिप्चर दिए वो भी विष्णु ने ही दिए हम ऐसा नहीं बोल रहे कि देखो देखो भगवान

479
00:35:06,680 --> 00:35:10,680
विष्णु हमारे अच्छे हैं ऐसा हम नहीं कह रहे कि देखो बस हमारे विष्णु ने ही ये

480
00:35:10,680 --> 00:35:14,720
किया है अच्छा काम किया है और शंकर जी ने गलत किया हम ऐसा नहीं कह रहे वो

481
00:35:14,720 --> 00:35:19,440
टाइम पे बुद्धिज्म की जरूरत थी तो भगवान विष्णु ने बुद्धिज्म को प्रकट किया

482
00:35:19,440 --> 00:35:23,600
ठीक है और जब अहिंसा वो हां जी वो टाइम प अहिंसा का आना

483
00:35:23,600 --> 00:35:27,720
बहुत इंपोर्टेंट था तो जो बुद्धिस्ट फिलोसोफी है अहिंसा की

484
00:35:27,720 --> 00:35:31,880
तो उसको मैं भी एक्सेप्ट करता हूं कि हां अहिंसा होना चाहिए उनको भी मैं गलत नहीं कहता और ना

485
00:35:31,880 --> 00:35:35,960
मैं आप लोगों को गलत कह रहा हूं ठीक है मेरी आवाज

486
00:35:35,960 --> 00:35:40,080
आ रही है आ रही है बोलते रहिए हां जी तो

487
00:35:40,080 --> 00:35:44,200
मैं ये कह रहा हूं लेकिन जब आदि शंकराचार्य जी ने जब फिल तो यहां प प्रचन न ब

488
00:35:44,200 --> 00:35:48,320
मतलब एक ऐसी फिलोसोफी जो न्यू बुद्धिस्ट है न्यू बुद्धिस्ट मींस कंपलीटली बुद्धिस्ट

489
00:35:48,320 --> 00:35:52,480
नहीं है वो वेदास के अकॉर्डेंस में है ठीक है वो वेदास को यूज

490
00:35:52,480 --> 00:35:57,320
करके दिया भले ही वो अवेद है वो अलग बात है को यूज करके

491
00:35:57,320 --> 00:36:01,360
क्या वहां वेदों के वेदों के आधार पर वैदिक फिलॉसफी

492
00:36:01,360 --> 00:36:05,400
होगी वो ये लिखा है वहां

493
00:36:05,400 --> 00:36:09,640
अरे लिखा है मायावादी लिखा है या वैदिक

494
00:36:09,640 --> 00:36:13,880
लिखा है हां क्योंकि आपका जो सिद्धांत है सुनिए आपका जो सिद्धांत

495
00:36:13,880 --> 00:36:17,880
है अद्वैतवाद सिद्धांत है वो जो आदि

496
00:36:17,880 --> 00:36:22,040
शंकराचार्य जी का जो सिद्धांत है ठीक है तो वो अपने आप में ही

497
00:36:22,040 --> 00:36:26,080
एक अवैध सिद्धांत है ठीक है क्योंकि वो केवल और केवल

498
00:36:26,080 --> 00:36:28,360
अभेद वाद को बताता है अभेद वाद पूछ रहा हूं

499
00:36:28,360 --> 00:36:32,920
वहां पर वेदों के आधार पर बताया गया बौद्ध लिखा है या वेदों के

500
00:36:32,920 --> 00:36:33,420
अगेंस्ट

501
00:36:33,400 --> 00:36:37,520
बताया गया बध लिखा है वेदों देखो सुनो अगर एगजैक्टली अगर

502
00:36:37,520 --> 00:36:42,360
अवैध होना चाहिए था अगर एटली अवैध रखना था ठीक है तो फिर

503
00:36:42,360 --> 00:36:46,680
आदि शंकराचार्य को आने की जरूरत क्या पड़ी फिर बुद्धिस्म का खंडन करने

504
00:36:46,680 --> 00:36:50,720
की वो पहले ही बोल देते ना और प्रम बहु मतलब ऐसी

505
00:36:50,720 --> 00:36:54,760
फिलोसोफी जो नियो बुद्धिस्ट हो और आप जाकर उसका प्रचार करना ठीक है ऐसे

506
00:36:54,760 --> 00:36:59,000
कह रहे है तो अगर वो सेम ही फिलोसोफी देनी थी भगवान

507
00:36:59,000 --> 00:37:03,360
नारायण चाहते हैं सेम की सेम फिलोसोफी दे शिवजी जा के

508
00:37:03,360 --> 00:37:07,480
ठीक है तो फिर वो वेदों को एक्सेप्ट नहीं करते फिर

509
00:37:07,480 --> 00:37:12,560
सिंपल सी बात है ये कॉमन सेंस है कोई कोई कोई भी व्यक्ति इसको समझ सकता

510
00:37:12,560 --> 00:37:16,600
है हो गया आगे आगे आपके आपके बहुत सारे पॉइंट है

511
00:37:16,600 --> 00:37:20,800
मैं उसम भी आना चाहूंगा ठीक है क्या आपके आचार्य

512
00:37:20,800 --> 00:37:25,280
ने बोला कि हम लेकिन हम वैदिक मायावादी आपने कहा कि हम वैदिक मायावादी है

513
00:37:25,280 --> 00:37:29,760
ठीक है ऐसा आपने कहा है तो पहली बात तो तो हमारे जितने आचार्य हुए हैं वैष्णव आचार्य

514
00:37:29,760 --> 00:37:33,880
रामन आचार्य मधवा चार्य जितने बड़े-बड़े आचार्य हुए हैं

515
00:37:33,880 --> 00:37:38,240
चैतन्य महाप्रभु भी जिनको आप अवतार मानते हो सभी ने

516
00:37:38,240 --> 00:37:42,800
सभी के सभी ने आपका जो अद्वित वेदांत है सॉरी

517
00:37:42,800 --> 00:37:47,000
शिवजी शंकराचार्य जी का जो अद्वैत सिद्धांत है उसका खंडन

518
00:37:47,000 --> 00:37:48,400
किया है और उनको अवद

519
00:37:48,400 --> 00:37:52,400
भी बोला है और इनको और मधवा चार्य ने अपने एक से प्लीज बता

520
00:37:52,400 --> 00:37:56,600
रहे तर्क से खंडन किया है तर्क से ही किया है बिना तर्क

521
00:37:56,600 --> 00:38:00,800
अगर तर्क से नहीं होता आप जब

522
00:38:00,800 --> 00:38:05,560
आप जब ये बोलते हैं कि चैतन्य महाप्रभु ने मायावादी

523
00:38:05,560 --> 00:38:10,960
भाष सवना

524
00:38:10,960 --> 00:38:15,080
कुछ जब आप कह रहे थे तब मैं कुछ नहीं जी आप बड़े है और आप ऐसे

525
00:38:15,080 --> 00:38:19,600
टोक रहे लोग भी देख रहे तो आप अच्छे नहीं दिखो तो प्लीज मुझे

526
00:38:19,600 --> 00:38:23,120
प पूरा कर

527
00:38:23,120 --> 00:38:27,560
कर कर पूरा करिए पूरा करिए आ

528
00:38:27,560 --> 00:38:33,440
भी म्यूट करिए प्लीज ठीक है फिर अवैध

529
00:38:33,440 --> 00:38:37,640
मायावादी आपके आचार्यों ने अवैध मायावादी

530
00:38:37,640 --> 00:38:38,140
देखी

531
00:38:37,880 --> 00:38:42,240
सी बात है कोई भी व्यक्ति अपने आप को अवैध नहीं बोलेगा जो वेदों का सहारा लेकर

532
00:38:42,240 --> 00:38:46,280
जब वो जो बुद्धिज्म के सिमिलर कोई कांसेप्ट दे रहा है वेदों

533
00:38:46,280 --> 00:38:50,560
का सहारा लेकर तो फिर व वो लोग क्यों बोलेंगे कि भाई मैं

534
00:38:50,560 --> 00:38:51,060
मैं

535
00:38:50,760 --> 00:38:54,760
अवदी वाला मायावादी हू वो तो अपने को वैदिक ही बोलेंगे अब बुद्धिस्ट है

536
00:38:54,760 --> 00:38:58,880
क्या बुद्धिस्ट आपको आके बोलेगा नहीं नहीं आपका जो अद्वैत सिद्धांत है ना वो बहुत अच्छा

537
00:38:58,880 --> 00:39:02,960
है है ना हमारा बुद्धिस्ट गलत है हम बुद्धिस्ट है हम लोग गलत है क्या ऐसा

538
00:39:02,960 --> 00:39:07,040
आ के वो बोलेगा ये पॉसिबल नहीं है जैसे

539
00:39:07,040 --> 00:39:11,280
कि आप लोग पंच रात्र को मैंने देखा है कि आपके संप्रदाय के बहुत लोग पंच रात्र

540
00:39:11,280 --> 00:39:15,360
को उल्टा सीधा बोलते हैं ठीक है तो क्या तो तो आप ये एक्सपेक्ट

541
00:39:15,360 --> 00:39:19,360
करोगे वैष्णव से कि वैष्णव भी उसको ये बोले नहीं नहीं आपके पंच रात्र गलत

542
00:39:19,360 --> 00:39:23,360
है तो वैष्णव भी बोलेगा हां हां पंच रात्र गलत है भाई मैं मान मान लेता हूं आपकी

543
00:39:23,360 --> 00:39:27,800
बात अरे वो तो अपना डिफेंस करेगा ना सीधी सी बात है कॉमन सेंस है वो अपना डिफेंस में लाएगा

544
00:39:27,800 --> 00:39:31,440
नहीं हम

545
00:39:31,440 --> 00:39:36,400
तो होका हैसे क प्रमाण है ऐसे कमा

546
00:39:36,400 --> 00:39:40,400
ऐसे कई प्रमाण है कि आपका जो अद्वैत आदि शंकराचार्य जी का

547
00:39:40,400 --> 00:39:44,480
जो अद्वैत वेदांत है वोचली बा में

548
00:39:44,480 --> 00:39:48,560
गई है प्रच ब उसी की बात वेद में

549
00:39:48,560 --> 00:39:49,060
उसी की

550
00:39:48,880 --> 00:39:52,960
बात जो है पदम पुराण में कही गई है प्रच ब वही है क्योंकि

551
00:39:52,960 --> 00:39:57,720
शंकराचार्य को आप शिव का अवतार मानते और शिवजी ना के दिया बस और मुझे दिखा दीजिए

552
00:39:57,720 --> 00:40:01,120
शिव का ऐसा कौन सा अवतार है जिसने अवैध मायावा दिया है मुझे प्रमाण दीजिए

553
00:40:01,120 --> 00:40:05,880
फर हम ठीक है हो गया आपका हो

554
00:40:05,880 --> 00:40:09,880
गया आई थिंक आपके और कौन से

555
00:40:09,880 --> 00:40:14,080
पॉइंट है हां आप कह रहे थे कि आदि शंकराचार्य ने हमको यह जीवन दिया

556
00:40:14,080 --> 00:40:18,200
है ऐसा दिया है वैसा दिया है तो यह थोड़ा हिस्टोरिकल चीजें हो जाती है और मैंने

557
00:40:18,200 --> 00:40:22,240
इसके ऊपर देखा है कि हिस्टोरिकल एविडेंसेस में इसके ऊपर बहुत

558
00:40:22,240 --> 00:40:26,600
बहुत मतभेद है इसके ऊपर ठीक है मैं आपकी बात को रिजेक्ट नहीं कर रहा

559
00:40:26,600 --> 00:40:30,640
बट क्योंकि ये नहीं आप इस बात को नहीं मानते कि बौद्धों को हराने वाले

560
00:40:30,640 --> 00:40:34,880
शंकराचार्य थे इस बात को आप नहीं मानते ब को ऐसे कई सारे श शैव

561
00:40:34,880 --> 00:40:39,040
राजा भी थे ऐसे शैव राजा प्रॉपर शैव ना कि अद्वैथ ऐसे कई शैव राजा

562
00:40:39,040 --> 00:40:43,040
थे जिन्होंने बुद्धिस्ट के के गले उड़ा दिए थे ठीक है और उनको भगा दिया

563
00:40:43,040 --> 00:40:47,080
था हराने वाले शास्त्रार्थ में उनकी फिलोसोफी को खत्म करने वाले

564
00:40:47,080 --> 00:40:51,240
पूछ रहा हूं फिलोसोफी से लड़ने वाले फिलोसोफी

565
00:40:51,240 --> 00:40:55,400
से मैं उसके लिए मना ही नहीं कर रहा शिवांश जी मैंने मैंने आपको क्या कहा

566
00:40:55,400 --> 00:40:59,520
आदि शंकराचार्य ने जैनों का भी खंडन किया है उन्होंने बौद्धों का भी खंडन किया उन्होंने

567
00:40:59,520 --> 00:41:03,680
शैव का भी खंडन किया काफी सारी चीजों का उन्होने खंडन करके उन्होंने

568
00:41:03,680 --> 00:41:08,000
अद्वैतवाद को स्थापित किया है मैं उसको मना नहीं कर रहा

569
00:41:08,000 --> 00:41:12,040
मैं आपकी किसी बात को रिजेक्ट नहीं कर रहा लेकिन जब आप एक ऐसे हिस्टोरिकल इवेंट की

570
00:41:12,040 --> 00:41:16,120
बात कर रहे हो कि देखो कि सबको ये कर दिया जीवन दान दिया तो

571
00:41:16,120 --> 00:41:20,520
इस चीज को मैं एक्सेप्ट नहीं करता क्योंकि ऐसे कई बुद्धिस्ट कंट्रीज है ऐसे कई बुद्धिस्ट

572
00:41:20,520 --> 00:41:24,920
कंट्रीज है जहां प जैसे कि भूटान ले लो आप फॉर एग्जांपल वहां पर तो बुद्धिस्म फ्लश

573
00:41:24,920 --> 00:41:29,120
कर रहा है और उल्टा बुद्धिस्म कांसेप्ट वही जितना हो सके उतना

574
00:41:29,120 --> 00:41:33,480
ठीक है तो उसमें आप ये नहीं बोल सकते कि भाई को हमको मारने वाले थे बुद्धिस्ट लोग ये आप व

575
00:41:33,480 --> 00:41:37,560
पॉइंट नहीं बोल सकते क्योंकि हिस्टोरिकल चीज हो जाएगी बहुत ज्यादा

576
00:41:37,560 --> 00:41:41,800
आपकी बात हो गई पूरी नहीं हुई मैं कह रहा शिवांश

577
00:41:41,800 --> 00:41:46,160
जी मैं कह रहा हूं इसलिए नहीं हुई है हम बोलिए बोलिए प्

578
00:41:46,160 --> 00:41:50,320
आप पता है क्या करते हो आप ऐसे शिवांश भैया आप ऐसे बीच में टोक देते हो ना तो मेरा फ्लो टूट

579
00:41:50,320 --> 00:41:54,360
जाता है मैं बोल लेता हूं फिर आप बोलो ना आप पाच 10 मिनट बोलो मैं कुछ नहीं बोल बात ये है कि

580
00:41:54,360 --> 00:41:58,400
आप कितनी देर बोलेंगे आपके वो पॉइंट तो पूरे हो गए मैं पूछ रहा हूं आपका और कोई पॉइंट बाकी

581
00:41:58,400 --> 00:42:02,960
है क्या मेरे मेरे अरे लेकिन आप जब मैं बोल रहा हूं बीच में पूछ

582
00:42:02,960 --> 00:42:07,040
हम यहां पे लेक्चर या प्रवचन के लिए थोड़ी ना आए आपने कट टू कट अपनी बात बोल दी

583
00:42:07,040 --> 00:42:11,400
अब आगे बढ़े ये लेक्चर ये लेक्चर नहीं है ये डिस्कशन डिशन कि हिस्टोरिकल

584
00:42:11,400 --> 00:42:15,400
एविडेंसेस के कारण मुझे डाउट है कि वो हम लोग जो बचे हैं

585
00:42:15,400 --> 00:42:19,560
वो शंकराचार्य के कारण ही बचे हैं कि नहीं डाउट की यहां पर बात

586
00:42:19,560 --> 00:42:23,720
नहीं है मैं आपको एक देखिए सुनिए शिवांश जी डिस्कस आप कह रहे हो कि यहां पे

587
00:42:23,720 --> 00:42:29,720
कोई प्रवचन है लेक्चर है मैं लेक्चर नहीं दे रहा मैं आपसे डिस्कशन कर रहा हूं ठीक

588
00:42:30,160 --> 00:42:31,160
डिक

589
00:42:31,160 --> 00:42:35,360
चार पाच पॉइंट पर आपको जवाब देना था व आपने दे दिया अब मुझे आगे

590
00:42:35,360 --> 00:42:39,880
बोलने दीजिए आप कब तक बोलते रहेंगे कब तक बोलते रहेंगे बताइए

591
00:42:39,880 --> 00:42:43,960
आपने प जवाब देना दिया ठीक है मुझे

592
00:42:43,960 --> 00:42:48,000
नहीं लगता आपको सुनना बोलिए मैं खत्म करता अपना पॉट

593
00:42:48,000 --> 00:42:52,240
आपको लग रहा प्रवचन दे रहा कंटिन्यू करिए चलिए अब आपने पहली

594
00:42:52,240 --> 00:42:57,160
बात य कही है पहले से ले लेता हूं कि

595
00:42:57,160 --> 00:43:01,440
वि जी ने शंकर जी को कहा था कि तुम ऐसा ऐसा करो

596
00:43:01,440 --> 00:43:05,600
और शंकर जी का कोई और ऐसा अवतार मुझे प्रमाण दिखा दो

597
00:43:05,600 --> 00:43:09,480
जिसने अवैध

598
00:43:09,480 --> 00:43:13,560
मायावादी है शंकर भगवान के एक करुण अवतार बताए गए हैं

599
00:43:13,560 --> 00:43:17,560
शास्त्र में एक करोड़ एक करोड़ से भी ज्यादा कौन

600
00:43:17,560 --> 00:43:21,800
से शास्त्र में मैं यहां पर दे दूंगा एक मिनट

601
00:43:21,800 --> 00:43:26,480
नाम बता रेफरेंस छोड़ दो आप मुझे शास्त्र का नाम बताओ

602
00:43:26,480 --> 00:43:30,560
संभवत शिव पुराण में कहा गया है शिव पुराण में कहा

603
00:43:30,560 --> 00:43:34,480
गया है शंकराचार्य जी के लिए जी शंकराचार्य नहीं

604
00:43:34,480 --> 00:43:38,480
भगवान शंकर के लिए कहा गया है एक करोड़ से ज्यादा अवतार है उनके तो अब

605
00:43:38,480 --> 00:43:42,520
मैं आपसे अगर ये पूछू कि आप मुझे वो बाकी के एक करोड़ अवतार है जो उनके

606
00:43:42,520 --> 00:43:46,680
प्रमाण दे दीजिए और अगर नहीं है तो मैं अगर

607
00:43:46,680 --> 00:43:50,720
नहीं है अगर नहीं है तो मैं ये कह दूं कि वो सब आप ही हो इसकन में ही

608
00:43:50,720 --> 00:43:55,440
है वो सारे एक करुण अवतार तो ये क्या ठीक है इसको

609
00:43:55,440 --> 00:43:59,480
स अगर वहां पर सुनिए अगर वहां पर मुझे बोलने दीजिए मेरा तर्क

610
00:43:59,480 --> 00:44:03,600
ये है मेरा तर्क ये है मेरा तर्क ये है कि अगर वहां

611
00:44:03,600 --> 00:44:07,640
पर शंकर के भगवान शंकर के अवतार की बात हो रही है और

612
00:44:07,640 --> 00:44:11,960
उनका कोई अन्य प्रमाण नहीं मिल रहा है इसलिए जो उपलब्ध

613
00:44:11,960 --> 00:44:15,960
दिखाई दे रहे हैं अवतार उसमें से ही किसी एक को पकड़ के वैदिक बना दो यह कहां का

614
00:44:15,960 --> 00:44:16,460
सनातन

615
00:44:16,360 --> 00:44:20,600
सिद्धांत है और दूसरी बात आपने कहा एक मिनट

616
00:44:20,600 --> 00:44:25,360
मुझे भी चारों पॉइंट पर बोलने दीजिए दूसरी बात आपने कहा कि

617
00:44:25,360 --> 00:44:29,840
जो अंतिम रूप से है वो निर्गुण है व बौद्ध जैसा है यह कहा लिखा

618
00:44:29,840 --> 00:44:34,040
है यह कहां लिखा है सनातन शास्त्र में कि अंतिम रूप से जो निर्गुण

619
00:44:34,040 --> 00:44:38,160
है वो बौद्ध जैसा है ये कहा लिखा

620
00:44:38,160 --> 00:44:39,960
है एक मिनट

621
00:44:39,960 --> 00:44:44,280
अब आगे जो बात आती है वो यह है कि शंकराचार्य को आने की आवश्यकता

622
00:44:44,280 --> 00:44:48,640
ही क्या थी अगर उन्हें एज इट इज बौद्धों का ही वो देना था

623
00:44:48,640 --> 00:44:53,040
तो मैं एक बात आपसे पूछ रहा हूं कि जब बौद्धों का अतिक्रमण

624
00:44:53,040 --> 00:44:57,040
हुआ था इस दुनिया में तो आप गुरु शिष्य परंपरा मधवा चार की

625
00:44:57,040 --> 00:45:01,160
फॉलो करते हैं वो जो ज्ञान है भगवान कृष्ण से आया है वो ज्ञान

626
00:45:01,160 --> 00:45:05,800
उस समय धरती पर था कि नहीं था बिल्कुल था

627
00:45:05,800 --> 00:45:10,000
तो शंकराचार्य को क्यों आना पड़ रहा है हिंदुओ को बचाने के लिए हा

628
00:45:10,000 --> 00:45:14,000
आपको बताता हूं आपको स बताता हूं अभी प्लीज अभी इस बार मत

629
00:45:14,000 --> 00:45:18,800
टकना ठीक है काम कर मिन मिनट एक मिनट

630
00:45:18,800 --> 00:45:22,800
अब जो है इस एक एक चीज और है आपने कहा कोई भी

631
00:45:22,800 --> 00:45:27,320
खुद को अवैध क्यों कहेगा तो अगर कोई भी खुद को अवद नहीं

632
00:45:27,320 --> 00:45:31,320
तो कोई भी खुद को मायावादी क्यों कहेगा हां मैं आपको

633
00:45:31,320 --> 00:45:35,760
बताता हूं इसका मतलब यह है कि जब कोई खुद को वैदिक

634
00:45:35,760 --> 00:45:39,800
कह रहा है तो उसकी बात पर आपको विश्वास नहीं है मगर जब कोई खुद को

635
00:45:39,800 --> 00:45:44,000
मायावादी कह रहा है तो क्योंकि वहां से आपका मंतव्य सिद्ध हो रहा है व पदम पुराण से आप उसको

636
00:45:44,000 --> 00:45:49,120
जोड़ पा रहे हैं इसलिए वो बात आपके लिए प्रमाणिक हो जाएगी

637
00:45:49,120 --> 00:45:53,160
हम इसका अर् हु जिस व्यक्ति के बोले

638
00:45:53,160 --> 00:45:54,960
हुए एक वचन पर हमको भरोसा

639
00:45:54,960 --> 00:45:59,760
नहीं है उसके ही दूसरे वचन पर हमको भरोसा है

640
00:45:59,760 --> 00:46:00,440
आपने

641
00:46:00,440 --> 00:46:06,280
कोई भी सनातन सिद्धांत नहीं दिया कि

642
00:46:06,280 --> 00:46:11,560
मायावादी जा रही है वह मायावादी

643
00:46:11,560 --> 00:46:16,320
मायावादी का मायावादी है

644
00:46:16,320 --> 00:46:20,600
कि इस ये जो टॉपिक है ना यह बढ़ता चला जाएगा मैं इसको ऐसे खत्म कर देता हूं

645
00:46:20,600 --> 00:46:24,800
अगर मैं कहूं कि आपका एक नहीं मत करिएगा

646
00:46:24,800 --> 00:46:30,800
मत करिएगा अब बात ये आ जाती है कि जो

647
00:46:31,800 --> 00:46:36,000
मायावादी बात प पुराण में हो रही है और आपने यह भी कहा

648
00:46:36,000 --> 00:46:42,000
कि सब उसको यही बोलते हैं और मैं आपको ऐसे वैष्णवास्त्र

649
00:46:57,520 --> 00:47:01,760
देखिए आपके द्वारा आपके अनुसार

650
00:47:01,760 --> 00:47:06,360
प्रामाणिक परंपरा हां रामानुजा चार परंपरा

651
00:47:06,360 --> 00:47:11,240
राण पर परपरा के प बाद में पता कर

652
00:47:11,240 --> 00:47:15,360
लीजिए एक मिनट मानते नहीं नहीं ये पॉइंट इंपोर्टेंट है शिवान

653
00:47:15,360 --> 00:47:19,960
जी ये पॉइंट इंपोर्टेंट है क्या आप रामानुजाचार्य को मानते हो नहीं

654
00:47:19,960 --> 00:47:24,240
नहीं हमा लिए उनको बता रहा हूं मैं आपको बता रहा

655
00:47:24,240 --> 00:47:27,120
बता रहा

656
00:47:27,120 --> 00:47:31,320
सुनोगे भाई सुनोगे कि नहीं सुनोगे जितने अंश में जितने

657
00:47:31,320 --> 00:47:35,520
अंश में वो शंकराचार्य का खंडन नहीं करते हैं मैं उनको मानता हूं मेरे लिए आदरणीय

658
00:47:35,520 --> 00:47:39,800
है क्यों नहीं मानता बहुत सी चीजें है ये पूरा ग्रंथ प्रामाणिक है

659
00:47:39,800 --> 00:47:44,280
दूसरी बात हमें शंकराचार्य को मायावादी पद्म

660
00:47:44,280 --> 00:47:48,400
पुराण वाला ना मानने के लिए हमारे पास पर्याप्त सामग्री है

661
00:47:48,400 --> 00:47:52,600
अच्छा मगर यदि हां भाई हमारे पास विष्णु भगवान का वो श्लोक

662
00:47:52,600 --> 00:47:56,600
है कि मेरी ये देह तो माया मात्र है हमारे पास ऋग्वेद का मंत्र

663
00:47:56,600 --> 00:48:00,720
है उनको अवैध मायावादी ना मानने के लिए

664
00:48:00,720 --> 00:48:04,800
हमारे पास पर्याप्त सामग्री है यह मैं इसलिए दे रहा हूं

665
00:48:04,800 --> 00:48:08,800
क्योंकि इनको आप प्रमाण मानते हैं हमारी बातों को आप प्रमाण नहीं मानते

666
00:48:08,800 --> 00:48:12,680
तो जिसको आप प्रमाण मानते हैं उसी से मैं आपको दे रहा हूं कि इन्होंने

667
00:48:12,680 --> 00:48:16,880
शंकराचार्य को अवैध मायावादी नहीं माना और जिस श्लोक

668
00:48:16,880 --> 00:48:20,920
की आप बात कर रहे हैं उसको इन्होंने माना है

669
00:48:20,920 --> 00:48:25,320
क्या प्रक्ष क्या माना है अरे लेकिन

670
00:48:25,320 --> 00:48:29,440
लेकिन वो प्रक्षिप्त मान रहे तो किस बस प मान रहे वो भी तो जाना पड़ेगा ना क्वेश्चन आंसर का करने का

671
00:48:29,440 --> 00:48:33,440
अधिकार नहीं है हमको हां हां तो मैं आपको खोल के बता तो रहा

672
00:48:33,440 --> 00:48:37,520
हूं पहले देख तो लो कहां प्रक्षिप्त माना है अरेरे अरे भाई मैं

673
00:48:37,520 --> 00:48:41,520
देख चुका हूं मैं देख चुका हां और

674
00:48:41,520 --> 00:48:47,520
इन्होंने शंकराचार्य के

675
00:48:48,520 --> 00:48:52,840
मायावादी वैदिक है शंकराचार्य की फिलॉसफी वैदिक है

676
00:48:52,840 --> 00:48:56,840
मधवा चार्य की फिलॉसफी भी वैदिक है इन्होंने

677
00:48:56,840 --> 00:49:01,200
कहीं नहीं माना कि वो प्रचन बौद्ध थे इन्होंने टा

678
00:49:01,200 --> 00:49:05,320
टा गाड़ के बोला वो प्रचन बौद्ध नहीं थे तो अब यह बातें हो गई

679
00:49:05,320 --> 00:49:09,480
इसको आप मेरे ख्याल से नहीं मानेंगे इस बात को मैंने मैंने

680
00:49:09,480 --> 00:49:13,520
आप मैंने अभी तक रिजेक्ट नहीं किया मैंने आपको क्या बोला कि किस बेसिस पर उसको प्रक्षिप्त

681
00:49:13,520 --> 00:49:18,200
बोला वो बताइए मैंने बोला तो आपको प्रक्षिप्त इसलिए

682
00:49:18,200 --> 00:49:22,320
बोला मैं खोल के दिखा देता हूं आपको आप तो कह रहे थे आपने पढ़ा है

683
00:49:22,320 --> 00:49:26,360
अब रीजनिंग दो प अरे मैंने वो श्लोक मैंने पढ़ा है कि उन्होंने कहा है कि

684
00:49:26,360 --> 00:49:30,520
प्रक्ष नहीं है ऐसा है वैसा है ये मैंने सुना है

685
00:49:30,520 --> 00:49:34,920
लेकिन मैं ये बोल रहा दे है सुना है कि देखा है

686
00:49:34,920 --> 00:49:38,960
सुना भी है देखा भी है 217 मैं आपको बता देता हूं इन्होंने

687
00:49:38,960 --> 00:49:44,000
क्या कहा है उसके संबंध में इन्होंने मायावादी

688
00:49:44,000 --> 00:49:47,200
मायावादी का

689
00:49:47,200 --> 00:49:53,200
मायावादी का मंत्र दिया

690
00:49:54,760 --> 00:49:58,800
है जब आप एक एक तरफ कह रहे मुझे मालूम है कि इन्होने कहा

691
00:49:58,800 --> 00:50:03,880
है फिर पूछ भी रहे क्या बेसिस हैलिए कर

692
00:50:03,880 --> 00:50:08,040
दिया मैंने य नहीं कहा नहीं लिखा है मैंने य पूछा किस बेसस पर लिखा है क्वे

693
00:50:08,040 --> 00:50:12,040
समझ नहीं रहेब आपने देखा था तो आपको य पूछना बनता ही नहीं है किस

694
00:50:12,040 --> 00:50:14,960
बेसस

695
00:50:14,960 --> 00:50:20,960
पय क्या

696
00:50:21,600 --> 00:50:27,600
बा आपके िक से

697
00:50:28,120 --> 00:50:32,440
य तो जी किया आपने य कि पढ़ा है तो फिर आपको क्वेश्चन

698
00:50:32,440 --> 00:50:36,440
पूछना नहीं चाहिए अरे क्यों नहीं पूछना चाहिए अरे मुझे

699
00:50:36,440 --> 00:50:40,440
मुझे लगा ना जब आपने कहा मैंने वो पढ़ा है पढ़ है पढ़ है मत खोलो मत दिखाओ

700
00:50:40,440 --> 00:50:44,520
पने मैंने बोला पढ़ा है लेकिन आप आपने मुझ दिखाने से रोका

701
00:50:44,520 --> 00:50:48,640
कि नहीं रोका आपने मुझे दिखाने से रोका था कि नहीं रोका था

702
00:50:48,640 --> 00:50:52,760
क्यक मुझे चीज पता है लेकिन मैं आपको पूछ रहा हूं दिखाने से रोक क्यों

703
00:50:52,760 --> 00:50:56,800
रहे हो अरे जब फुल कंप्लीट पता है तो दिखाने से रोक क्यों रहे हो और मैं उसके लिए

704
00:50:56,800 --> 00:51:00,880
दनीय नहीं क रहा आप दिखा आप उसको दिखा दो

705
00:51:00,880 --> 00:51:04,920
लेकिन आप कभी भी तर्क उस आपने रोका था कि मुझे पता है मुझे

706
00:51:04,920 --> 00:51:09,720
पता है मैंने पढ़ा है

707
00:51:09,720 --> 00:51:13,800
वो आप देखिए मैं एक्सेप्ट करने की नहीं बोल रहा हूं मैं कह रहा हूं आपने कहा

708
00:51:13,800 --> 00:51:18,160
मैंने पढ़ा है और ग्रंथ खोलने से मना किया तो फिर वहां से यह प्रतीत

709
00:51:18,160 --> 00:51:22,160
हुआ कि आपको आपने पढ़ा होगा कंपलीटली इसमें इन्होंने क्या कहा है आप

710
00:51:22,160 --> 00:51:27,400
सुनिए क्या कहा है इन्होने कहा है

711
00:51:27,400 --> 00:51:31,400
पहले उन्होने श्लोक दिखाया वो पद्म पुराण का देख लीजिए श्लोक दिखाया

712
00:51:31,400 --> 00:51:35,640
देख लीजिए हेलो हेलो देख लीजिए लोक दिखाया उन्होने

713
00:51:35,640 --> 00:51:39,320
पहले

714
00:51:39,320 --> 00:51:43,880
वो श्लोक दिख रहा है ऐसे

715
00:51:43,880 --> 00:51:48,080
जूम तो नहीं हो रहा इसम नहीं उतना क्लियर नहीं दिख रहा चलिए

716
00:51:48,080 --> 00:51:52,400
बाद में देख लीजिएगा इन्होने व शलोक पहले उत किया पद्म पुराण अध्याय

717
00:51:52,400 --> 00:51:56,880
दो समथिंग इसलिए पदम

718
00:51:56,880 --> 00:52:01,080
व्यास बल्कि शंकराचार्य के बाद है अब इन्होंने

719
00:52:01,080 --> 00:52:02,640
आगे लिखा है

720
00:52:02,640 --> 00:52:06,720
प्रतिवादी को मानो आक्षेप करने के लिए

721
00:52:06,720 --> 00:52:11,040
किसी पुराण का कोई मूल श्लोक मिलता ही नहीं है इसलिए

722
00:52:11,040 --> 00:52:15,240
वह प्रक्षिप्त श्लोकों के आधार पर आक्षेप की इमारत

723
00:52:15,240 --> 00:52:19,000
खड़ी करता करना चाहता है अभय यहां आपको कह रहे हैं फिलहाल

724
00:52:19,000 --> 00:52:24,400
व आप बाद में काउंटर कर लीजिएगा इनको पदम पुराण के जिस

725
00:52:24,400 --> 00:52:28,560
मायावादी में प्रमाण रूप से उपस्थित किया गया है

726
00:52:28,560 --> 00:52:32,920
यह वस्तुतः प्रक्षिप्त है श्री पंडित कालूराम शास्त्री

727
00:52:32,920 --> 00:52:37,160
आदि ने भी प्रक्षिप्त ही सिद्ध किया है कदाचित महाशय

728
00:52:37,160 --> 00:52:41,560
जी इसे मूल मानने का आग्रह करें तब भी

729
00:52:41,560 --> 00:52:45,800
पूर्व लिखित व्यवस्था के अनुसार त्रिकालदर्शी वेदव्यास

730
00:52:45,800 --> 00:52:50,720
जी के लिए अपने से परिवर्तित श्री शंकराचार्य का

731
00:52:50,720 --> 00:52:54,960
मायावादी बात नहीं है इसके अतिरिक्त हम पूर्व

732
00:52:54,960 --> 00:52:59,040
कह चुके हैं कि उक्त आचार्यों ने ये

733
00:52:59,040 --> 00:53:03,120
क्या मानते हैं उक्त आचार्यों ने किसी नए मत का

734
00:53:03,120 --> 00:53:07,360
प्रचार नहीं किया बल्कि वेदोक्त किंतु काल क्रम

735
00:53:07,360 --> 00:53:11,600
से विलुप्त सिद्धांतों का ही पुनरुद्धार मात्र किया है

736
00:53:11,600 --> 00:53:16,040
यदि मायावादी वैदिक जाननी हो तो नीचे लिखे प्रमाणों

737
00:53:16,040 --> 00:53:20,680
का मनन करिए अब इन्होंने क्या कहा आगे ये इन्होंने ऋगवेद

738
00:53:20,680 --> 00:53:26,680
के प्रमाण दिए हैं ये वैष्णवास्त्र

739
00:53:26,880 --> 00:53:32,160
वणवा चार्य नहीं मानते वो मानते मायावादी

740
00:53:32,160 --> 00:53:36,160
हैय के लोग सब ऐसा एक आपको रामानुज

741
00:53:36,160 --> 00:53:40,800
जी नहीं दिखेगा आपको कोई े प्रमाण

742
00:53:40,800 --> 00:53:45,400
दि अभी आपको प्रमाण रहा प्रमाण दिखाओ

743
00:53:45,400 --> 00:53:49,560
किस चीज का सब कहते हैं मैं तो आपको प्रमाण दिखा

744
00:53:49,560 --> 00:53:55,560
रहा

745
00:53:57,160 --> 00:54:01,560
अभी क्वेश्चन पूछा तो आंसर भी सुनो ठीक है अभी आप क रहे मेरे को दिखाओ

746
00:54:01,560 --> 00:54:05,600
कौन कह रहा है ठीक है आप य मुझे पूछ रहे हो अ क्या डिस्कशन के लिए बुला रहे हो ठीक

747
00:54:05,600 --> 00:54:09,760
है आपको पहले बोलना चा मुझे ये प्रमाण चाहिए निकाल के देता अभी आप बोल

748
00:54:09,760 --> 00:54:15,280
क्या पता मुझे क्या पता था आपुरा देंगे

749
00:54:15,280 --> 00:54:19,440
तना मैं तो समझता हं आप इनको प्रमाण मानते हो आप मुझे

750
00:54:19,440 --> 00:54:25,440
मैंने आपसे एक क्वेश्चन पूछा कि आचार्य कब के है आपने उसका उत्तर दिया

751
00:54:26,480 --> 00:54:30,480
पूरी भूमिका लिखी है इस ग्रंथ में इनका पूरा कालखंड समझ लीजिएगा पूरा

752
00:54:30,480 --> 00:54:34,960
बताओ आपने पढ़ है ना आपने भूमिका पढ़ी है ना तो बताओ कि कौन है वो भाई ये तो विषयात

753
00:54:34,960 --> 00:54:38,960
हो रहा है ये किस कालखंड से क्या मतलब आप केवल

754
00:54:38,960 --> 00:54:43,160
ये पता कर लीजिएगा आप केवल यह पता कर लीजिएगा ये रामानुज

755
00:54:43,160 --> 00:54:47,480
है कि नहीं रामानुज परंपरा के है कि नहीं इसको अगर

756
00:54:47,480 --> 00:54:51,520
को इनको कोई रामानुज कोई रामानुज जी इनको अप

757
00:54:51,520 --> 00:54:55,840
प्रामाणिक नहीं बोलेगा ठीक है मैं आपको क्या कह रहा हूं

758
00:54:55,840 --> 00:55:00,120
कोई लोग आगे बढ़ते लोग सु

759
00:55:00,120 --> 00:55:04,320
अब हम लोग आगे बढ़ते हैं अब हम लोग आगे बढ़ते हैं अब हम तर्क

760
00:55:04,320 --> 00:55:08,560
से जो है माया बात को देखेंगे कि वह सही है कि नहीं ठीक है

761
00:55:08,560 --> 00:55:12,560
प्रमाणों पर हमने बात कर ली है जनता को जो फैसला लेना होगा व ले

762
00:55:12,560 --> 00:55:13,960
ले आपके पास आपके

763
00:55:13,960 --> 00:55:19,600
पास आपके पास रामानुजाचार्य का विधान सूत्र भाष्य

764
00:55:19,600 --> 00:55:23,960
नहीं आपके पास नहीं लगी मेरे पास एक प्रमाण है कि श्रीपद

765
00:55:23,960 --> 00:55:27,960
रामानुजा चरने श्री भाष्य में ये कहा है इस चीज को

766
00:55:27,960 --> 00:55:28,460
कहा है कि

767
00:55:28,400 --> 00:55:32,560
मायावा अस शास्त्रम प्रन बौम उच ये उन्होने

768
00:55:32,560 --> 00:55:38,000
उसम कोट किया विधान सूत्र में ठीक है अगर ऐसा है तो

769
00:55:38,000 --> 00:55:42,520
फ देखो आप हैना मुझे समझ में

770
00:55:42,520 --> 00:55:47,560
सॉरी मुझे कॉल आ गया एक सेकंड मैं आपको क्या कह

771
00:55:47,560 --> 00:55:51,720
रहा है हम ये मान लेंगे कि इन्होने

772
00:55:51,720 --> 00:55:55,840
नहीं कहा हम ये मान लेंगे कि इन्होंने नहीं कहा भाई इन्होने गलत कहा अपने गुरु

773
00:55:55,840 --> 00:56:00,920
परंपरा के विरोध में बोला हम ये मान लेंगे हम ये मान लेंगे आप

774
00:56:00,920 --> 00:56:04,920
प्रमाण जी इमोशनल मत होइए सुनिए इमोशनल मत हो

775
00:56:04,920 --> 00:56:08,920
डिस्कशन इमोशन प नहीं चलती कोई भी डिस्कशन इमोशन प नहीं चलती

776
00:56:08,920 --> 00:56:13,640
हमय मान लेंगे हमय हम ये मान लेंगे कि रामानुजाचार्य

777
00:56:13,640 --> 00:56:19,480
जी ने

778
00:56:19,480 --> 00:56:23,520
मायावादी अब हम आगे को

779
00:56:23,520 --> 00:56:27,560
प्र ब कहा है प्र नहीं वो श्लोक

780
00:56:27,560 --> 00:56:31,680
बात हो रही है श्लोक प्रक्षिप्त है या नहीं उस श्लोक का उपयोग किया है अगर

781
00:56:31,680 --> 00:56:37,000
रामानुजाचार्य जी ने तो हम ये मान

782
00:56:37,000 --> 00:56:41,680
ध नहीं अब मुझे बोलने दीजिए वो शलोक प्रक्ष कैसे हो सकता ब्रामर

783
00:56:41,680 --> 00:56:46,480
कोट कर र है बताइए मैं वही तो कह रहा हूं कि अगर आपके पास प्रमाण है तो हम मान लेंगे

784
00:56:46,480 --> 00:56:50,560
और क्या क दिया प्रमाण आपको प्रमाण तो दिया

785
00:56:50,560 --> 00:56:54,680
आगे बढ़े हो गई ये बात हम मान लेंगे भा रामर जी ने इसका

786
00:56:54,680 --> 00:56:58,680
खंडन किया है शिवांश जी आप बड़े हैं थोड़ा प्लीज लिमिट में रहकर

787
00:56:58,680 --> 00:57:02,920
बात करिए एक तो आपरी बात करू क्या मैं अगर आपसे बोल

788
00:57:02,920 --> 00:57:07,560
मैं बोल रहा हूं कि अगर आपने प्रमाण दे दिया हम ये मान लेंगे उसको हम चेक करेंगे

789
00:57:07,560 --> 00:57:11,720
उसको हम चेक करेंगे हम रील बनाएंगे हम रील बना के बोलेंगे भैया इस आदमी

790
00:57:11,720 --> 00:57:15,760
ने यहां पर ये प्रमाण दिया था जो सही है और जो है ये

791
00:57:15,760 --> 00:57:19,800
और जो सुनिए आप जो प्रमाण दे रहे हैं उसको हम चेक करेंगे ना अपने स्तर प कि ना करें

792
00:57:19,800 --> 00:57:23,920
ऐसे ही मा करेंगे और हम उस ल बनाएंगे और ये

793
00:57:23,920 --> 00:57:27,920
बोलेंगे अभी करो ना जो अभी प्रमाण अभी हमारे पास अवेलेबल नहीं

794
00:57:27,920 --> 00:57:33,920
है बात अभी हमारे पास वो अवेलेबल नहीं है सामग्री चेक करने के

795
00:57:39,520 --> 00:57:45,520
लिए आपकी आवाज नहीं आ रही

796
00:57:46,280 --> 00:57:50,800
है आवाज नहीं आ रही

797
00:57:50,800 --> 00:57:55,120
आपकी हेलो आवाज आ रही है हा आ रही

798
00:57:55,120 --> 00:57:59,560
है यहां पे आया तो होस्ट हैज मूटेड यू ऐसा आया यहां पे ठीक है कोई बात

799
00:57:59,560 --> 00:58:03,560
नहीं मैं बोलता हूं भाई म्यूट ना करे कोई भी

800
00:58:03,560 --> 00:58:07,640
मैंने नहीं किया था टीम में से किसी ने कर दिया हो मॉडरेटर को बोलिए

801
00:58:07,640 --> 00:58:11,760
हद में र शिवांश जी आपके मॉडरेटर को बोलिए सब हरकत ना करने बोल दिया है अब

802
00:58:11,760 --> 00:58:16,120
आप आगे अपनी बात बोलिए प् आपने बोल दिया लेकिन ये डिस रिस्पेक्ट है

803
00:58:16,120 --> 00:58:20,160
सुनिए शिवा जी आप ब मैंने उसके लिए क्षमा भी चाहता हूं ये भी बोल

804
00:58:20,160 --> 00:58:24,200
दिया है अब बताइए क्या करें ठीक है ठीक है मैं आपको ये कह रहा हूं

805
00:58:24,200 --> 00:58:28,560
श शिवांश जी मैं आपको ये कह रहा हूं जब आप खुद प्रमाण आप खुद

806
00:58:28,560 --> 00:58:32,560
आपके पास कोई प्रमाण नहीं होता किसी चीज का तो आप भी सामने वाले से एक्सपेक्ट नहीं कर

807
00:58:32,560 --> 00:58:36,880
सकते कि मैं कोई तुरंत लाकर प्रमाण द मैंने क कहा तुरंत

808
00:58:36,880 --> 00:58:40,880
लाके दीजिए आप इस चीज को लेके आइएगा

809
00:58:40,880 --> 00:58:44,960
आप इस चीज को लेके आइएगा रील बनाएगा कि भाई उसने मुझसे ऐसे कहा था

810
00:58:44,960 --> 00:58:49,000
मेरे पास समय प्रमाण नहीं था मगर यह देखो य ये है मैंने आपको यहां पर

811
00:58:49,000 --> 00:58:53,320
प्रमाण के साथ बैठा हूं यह दिखाया मैंने आपको बस लेकि अरे लेकिन जो प्रमाण

812
00:58:53,320 --> 00:58:54,600
आप दे रहे हो सुनो सुनो अब

813
00:58:54,600 --> 00:58:58,720
मेरी बात सुनो प्रमाण भी ना डिस्कस करना होता है प्रमाण देके देखो देखो तुम्हारा हमने

814
00:58:58,720 --> 00:59:02,840
खंडन कर दिया देखो देखो ऐसा नहीं होता प्रमाण को एक्सप्लेन मैंने अभी तक एक भी बार कहा

815
00:59:02,840 --> 00:59:06,920
कि हमने आपका खंडन कर दिया मैं आपको उदाहरण दे रहा हूं महाराज महाराज

816
00:59:06,920 --> 00:59:11,240
उदाहरण दे रहा ह उ वो दीजिए ना जो यहां अप्लाई हो सके वो दीजिए

817
00:59:11,240 --> 00:59:15,960
जो यहां अप्लाई हो सके अरे अरे तो उदाहरण वो दीजिए ना जो अप्लाई हो

818
00:59:15,960 --> 00:59:20,080
वैसे तो उदाहरण आपके भी आचार्यों ने बहुत दिए कि जो अप्लाई नहीं होता रियल लाइफ में बट ठीक है चलो कोई

819
00:59:20,080 --> 00:59:24,160
बात नहीं अभी मैं मेन टॉपिक पे आता हूं ठीक है हां

820
00:59:24,160 --> 00:59:28,480
आप मुझे एक बात बताइए अ कि जब कि आपने जो भी मुझको ब्रहमांड

821
00:59:28,480 --> 00:59:32,680
दिया म्यूट तो नहीं अभी अभी वॉइस ज्यादा हो गई थी

822
00:59:32,680 --> 00:59:37,440
वो शायद कुछ समझ में ना आया हो मैं फिर से एक बात क्लियर कर दूं अगर आप रामानुजर

823
00:59:37,440 --> 00:59:41,480
जी के मुझे प्लीज अपनी बात बोलने दीजिए रामानुजा

824
00:59:41,480 --> 00:59:43,480
चार जी के भाष्य में यदि

825
00:59:43,480 --> 00:59:47,560
रामानुजाचार्य जी ने इस श्लोक को उ दृत किया है तो हम

826
00:59:47,560 --> 00:59:51,560
यह मान लेंगे कि यह जो आचार्य हैं जिसके आधार पर हम यह

827
00:59:51,560 --> 00:59:56,520
मानते थे कि वैष्णवास्त्र

828
00:59:56,520 --> 01:00:00,680
हम इन आचार्य को गुरु विरोधी मानते हुए प्रामाणिक नहीं मानेंगे अगर

829
01:00:00,680 --> 01:00:03,000
हम अपनी तसली कर लेंगे और इस पर हम

830
01:00:03,000 --> 01:00:07,600
ल बना

831
01:00:07,600 --> 01:00:11,760
देंगे अभी मगर अभी भी यि नहीं हुआ

832
01:00:11,760 --> 01:00:15,960
है मगर अभी भी यह सिद्ध नहीं हुआ है कि जो हमारे

833
01:00:15,960 --> 01:00:20,040
आचार्य हैं वह मायावादी वही वाले हैं

834
01:00:20,040 --> 01:00:24,360
जो कि पदम पुराण में थे ठीक है देखि प्रन

835
01:00:24,360 --> 01:00:28,360
बध रानु के श्री भाष के दूसरे

836
01:00:28,360 --> 01:00:33,320
अध्याय के दूसरे पद के 27 सूत्र

837
01:00:33,320 --> 01:00:37,040
में प्रसन्नम

838
01:00:37,040 --> 01:00:41,960
बध आ रही है कि व लोक प्रक्षिप्त है कि नहीं

839
01:00:41,960 --> 01:00:46,120
लोक है नहीं शलोक का उपयोग

840
01:00:46,120 --> 01:00:51,280
ने किया है कि नहीं किया है प्र बध कहा

841
01:00:51,280 --> 01:00:57,280
है पुराण का रेफरेंस देते हुए बात की है कि नहीं

842
01:01:08,320 --> 01:01:12,400
पदमपुर एक सेकंड आवाज आ रही है मेरी मे वाईफाई मेरा डिस्कनेक्ट हो गया

843
01:01:12,400 --> 01:01:16,880
था हेलो जी बोलिए आ रही

844
01:01:16,880 --> 01:01:21,080
ठीक है ओके ओके सॉरी यहां पर लाइट चली गई है हैवी रेंस के कारण

845
01:01:21,080 --> 01:01:25,200
सॉरी उसके लिए क्षमा चाहता हूं मैं ये कह रहा हूं कि

846
01:01:25,200 --> 01:01:29,320
वो जो वो पद्म पुराण का श्लोक है जब आपने एक आपने

847
01:01:29,320 --> 01:01:33,320
एक रामानुज संप्रदाय के एक किसी आचार्य का अने कोटेशन दिया कि उनकी

848
01:01:33,320 --> 01:01:37,440
बुक है शिवांश जी ध्यान से सुनना मेरा प्रश्न ठीक है मैंने आपके

849
01:01:37,440 --> 01:01:40,640
उसके परर मैंने दो से तीन सवाल उठाए थे ठीक है सबसे

850
01:01:40,640 --> 01:01:44,720
पहला क्वेश्चन कि ये जो आचार्य जिनका बुक इतना मोटा

851
01:01:44,720 --> 01:01:49,280
सा बुक आप दिखा रहे हैं ठीक है सबसे पहले तो वो कौन से ईयर के थे

852
01:01:49,280 --> 01:01:52,000
क्वेश्चन नंबर वन ठीक है और किस

853
01:01:52,000 --> 01:01:56,160
आधार पर दूसरा क्वेश्चन कि उन्होने किस आधार पर उसको प्रक्षिप्त

854
01:01:56,160 --> 01:02:00,200
है ठीक और थोड़ा अच्छे से एक्सप्लेन करके बताइएगा ऐसा नहीं कि ऊपर

855
01:02:00,200 --> 01:02:05,000
ऊपर से पूरा अच्छे से एक्सप्लेन करना किस आधार पर उनको

856
01:02:05,000 --> 01:02:09,160
प्रक्षित बोला बस खतम बस इतना मुझे जानना है दो आंसर दे दीजिए

857
01:02:09,160 --> 01:02:13,600
कब के आचार्य आपने उसका पूरा भूमि पढ़ य आचार 19वी

858
01:02:13,600 --> 01:02:17,760
सदी के ही है कब के है 19वी

859
01:02:17,760 --> 01:02:18,260
सदी

860
01:02:18,000 --> 01:02:22,720
के ही है अरे तो 19 शद तो उसको प्रमाण कैसे मान लेंगे हम

861
01:02:22,720 --> 01:02:24,880
लोग मतलब नहीं मानते ना

862
01:02:24,880 --> 01:02:29,040
किय जो प्रामाणिक आचार्य हैं मैंने

863
01:02:29,040 --> 01:02:33,280
सुनो सुनो ये तो वैसे तो मैं वैसे

864
01:02:33,280 --> 01:02:37,360
बुद्धिस्ट फिलोसोफी को भी नहीं मानता शिवांश लेकिन इसका ये अर्थ नहीं है कि वो विष्णु के

865
01:02:37,360 --> 01:02:41,480
अवतार नहीं है ठीक है तो जस्ट बिकॉज किसी आचार्य ने कोई बात बोली है इसका

866
01:02:41,480 --> 01:02:45,760
ये अर्थ मैं ये नहीं बोलूंगा कि वो प्रामाणिक नहीं है सुनिए प्रमाणिक

867
01:02:45,760 --> 01:02:46,260
की

868
01:02:45,880 --> 01:02:49,880
परिभाषा क्या है प्रामाणिक आचार्य की परिभाषा क्या है

869
01:02:49,880 --> 01:02:54,240
जो ऑथेंटिक प्रॉपर गुरु परंपरा से हो

870
01:02:54,240 --> 01:02:58,360
तो ये परंपरा और यह सिद्ध हो रहा है तो आप ये इसलिए नहीं मानेंगे क्योंकि

871
01:02:58,360 --> 01:03:02,360
ये 19वीं सदी के हैं 19वी सदी की

872
01:03:02,360 --> 01:03:06,400
बात ही नहीं है यहां पे मतलब की अगर कोई आचार 19वीं सदी में अगर ऑथेंटिक

873
01:03:06,400 --> 01:03:10,720
गुरु परंपरा से होगा तो प्रामाणिक नहीं माना जाएगा प्रामाणिक की परिभाषा

874
01:03:10,720 --> 01:03:14,720
ये है नहीं नहीं ये बात तो मैंने बोली

875
01:03:14,720 --> 01:03:18,760
नहीं है ये बात बोली नहीं है ये आपने एकदम गलत पूरा ऐसे बो घुमा दिया यहां

876
01:03:18,760 --> 01:03:19,640
पे ऐसा बिल्कुल भी नहीं

877
01:03:19,640 --> 01:03:23,800
है ये सुनो सुनो सुनो मैं आपको बताता हूं मैंने आपसे

878
01:03:23,800 --> 01:03:28,160
जो प्रश्न पूछा उसका उत्तर आपके पास था नहीं मेरे दो ही क्वेश्चन थे कि आचार्य कौन है

879
01:03:28,160 --> 01:03:32,280
वो प्रश्न का उत्तर देना कोई आवश्यक नहीं था इसलिए नहीं दिया वरना इसकी भूमिका

880
01:03:32,280 --> 01:03:36,960
में लिखा है ये कब के है सब कुछ लिखा है

881
01:03:36,960 --> 01:03:41,520
ये क्यों क्यों आवश्यक क्यों नहीं है उत्तर देना आवश्यक क्यों नहीं है बताओ

882
01:03:41,520 --> 01:03:45,800
बताओ आवश्यक क्यों है कि वो कब के आचार्य है यह जानना

883
01:03:45,800 --> 01:03:50,880
आवश्यक क्यों

884
01:03:50,880 --> 01:03:56,880
है आपका फिर कट गया

885
01:03:56,880 --> 01:04:01,280
हेलो पता नहीं बोलिए जी बोलिए हा

886
01:04:01,280 --> 01:04:03,640
मैं ये मैं आपको क्या कह रहा हूं मैं ये नहीं

887
01:04:03,640 --> 01:04:07,920
कह रहा कि वो आचार्य है वो प्रामाणिक परंपरा के नहीं है मैंने ये नहीं कहा प्रामाणिक

888
01:04:07,920 --> 01:04:11,920
आचार्य का अर्थ क्या बताया आपने मैंने

889
01:04:11,920 --> 01:04:16,080
आपको क्या कहा है देखो सुनो अभी तक मैंने उस चीज को कंपलीटली रिजेक्ट

890
01:04:16,080 --> 01:04:20,200
भी नहीं किया मैंने आपसे बस क्वेश्चन पूछा किस आधार पर कहा है आप उस आधार अ

891
01:04:20,200 --> 01:04:24,720
आप इस पर अध्ययन करिएगा कि उन्होंने क्या कहा किस आधार प कहा गलत कहा सही

892
01:04:24,720 --> 01:04:28,920
कहा दे रहे मैं क्यों अध्यन करू जाके आप प्रमाण दोरे क

893
01:04:28,920 --> 01:04:33,200
कंपलीटली रिजेक्ट नहीं कर रहा हूं तो आप अभी बीच मजार में हो ना अरे

894
01:04:33,200 --> 01:04:37,440
तो इसलिए तो क्वेश्चन पूछ रहा आपको उसका उत्तर दो मुझको अच्छे से तो मैंने

895
01:04:37,440 --> 01:04:41,480
तो दिया आपको बता तो दिया 19 सदी के कहा दिया आपने क्या

896
01:04:41,480 --> 01:04:45,640
नहीं नहीं 19वी सदी का नहीं दूसरा क्वेश्चन दो किस आधार पर उसको रिजेक्ट किया उसका आंसर

897
01:04:45,640 --> 01:04:50,120
दो ब बोला तो पढ़ के बताया आपको पूरा पढ़ के

898
01:04:50,120 --> 01:04:53,200
क्या पढ़ के सुनाना नहीं होता एक्सप्लेनेशन देना होता है

899
01:04:53,200 --> 01:04:57,360
ऑडियंस देख रही है डि डियस को भी तो पता चल एक्सप्लेनेशन दिया कि

900
01:04:57,360 --> 01:05:01,480
उन्होंने ये कहा है अगर कि ये जो श्लोक प्रक्षिप्त

901
01:05:01,480 --> 01:05:05,760
है तो इसका मतलब कि वो उन्होंने ऐसा पद्म पुराण देखा जिसमें

902
01:05:05,760 --> 01:05:10,040
वो श्लोक नहीं है क्योंकि वो परंपरा प्राप्त आचार्य है उन्होंने अपने

903
01:05:10,040 --> 01:05:14,080
गुरु से उन्होंने सुनिए सुनिए बोलने

904
01:05:14,080 --> 01:05:17,640
दीजिए पूरी बात बोलने दीजिए पूरी बात बोलने दीजिए

905
01:05:17,640 --> 01:05:21,800
उन्होंने अपने गुरु से जिस पद्म पुराण का अध्ययन किया उसमें वह श्लोक

906
01:05:21,800 --> 01:05:25,880
नहीं था दूसरी बात उन्होंने इसका आधार यह भी बताया

907
01:05:25,880 --> 01:05:30,160
कि भैया यह जो माया है इस माया के बारे में वेदों

908
01:05:30,160 --> 01:05:34,200
में भी बात की गई है तो अगर इस माया वेदों में दी गई माया

909
01:05:34,200 --> 01:05:38,200
के आधार पर पदम पुराण में दी गई माया के आधार पर अगर कोई आचार्य अपने आप

910
01:05:38,200 --> 01:05:44,160
को मायावादी बोलेगा और

911
01:05:44,160 --> 01:05:48,160
मायावादी बताई प्रक्षिप्त भी बताया अच्छा कोई

912
01:05:48,160 --> 01:05:53,080
कोई श्लोक प्रक्षिप्त है कि नहीं इसका निर्णय किस आधार पर होगा ये बताइए

913
01:05:53,080 --> 01:05:57,160
अरे मैं वही तो पूछ क्वेन मे आप से किस आधार पर

914
01:05:57,160 --> 01:06:01,200
होगा बोल दिया हमारे गुरु ने हमको नहीं पढ़ाया और अब

915
01:06:01,200 --> 01:06:05,720
वो आ रहा है सामने तो प्रक्षिप्त

916
01:06:05,720 --> 01:06:06,720
है

917
01:06:06,720 --> 01:06:12,720
परंपरा की आवता क्या है बताइए प्रभु मुझे

918
01:06:14,000 --> 01:06:19,080
शिवांश दूसरे लेसे होता

919
01:06:19,080 --> 01:06:23,120
अपने देते जिसके कारण से आप चुप हो जाते उनकी बात

920
01:06:23,120 --> 01:06:27,640
सुनते उनकी अगर उन्ह आना है तो जाइए वो आ जाए सामने

921
01:06:27,640 --> 01:06:31,880
कौन कौन कौन जो आपको इंस्ट्रक्शन दे रहे हैं अरे

922
01:06:31,880 --> 01:06:36,320
इंस्ट्रक्शन नहीं वो बात कर रहे कॉल प किसी से बीच बीच में वो आपको जो इंस्ट्रक्शन

923
01:06:36,320 --> 01:06:40,360
आप उनकी ओर देखते हो ना वो कुछ बोलते हैं जब जनता पूरी देख रही है तो दिक्कत

924
01:06:40,360 --> 01:06:44,360
होती है आप हट जाइए हा तो बात कर तो देखूंगा ना उसम क्या गलत

925
01:06:44,360 --> 01:06:48,400
हो गया उनसे कह दीजिए अपना जो कॉल है वो कहीं और जाके करें

926
01:06:48,400 --> 01:06:52,400
हां ठीक है थोड़ा बाहर चले जाइए और मुझे थोड़ा बीच में बोलना मत

927
01:06:52,400 --> 01:06:56,520
ठीक है हां परेशान ना करें डिस्टक्ट ना करें हां तो

928
01:06:56,520 --> 01:07:00,960
अब ये बताइए परंपरा प्रात आचार की आवश्यकता क्या है

929
01:07:00,960 --> 01:07:05,040
हां अब मेरा क्वेश्चन आपसे फिर से वही रहेगा कि एक सेकंड आपने क्या

930
01:07:05,040 --> 01:07:09,080
बोला एक सेट अभी सुनना एक सेकंड आपका आंसर एक बार मुझे फिर से सुनना एक बार रिकॉल कर रहा हूं

931
01:07:09,080 --> 01:07:11,160
कि मैंने सही सुना कि नहीं आपने

932
01:07:11,160 --> 01:07:15,480
ये कहा आपने यह कहा कि जो जो भी आचार्य

933
01:07:15,480 --> 01:07:19,680
जिनका 19 सेंचुरी का आपने रेफरेंस दिया है उन्होंने इस आधार पर उसको

934
01:07:19,680 --> 01:07:23,960
प्रक्षिप्त बोला है क्योंकि उन्होंने वो चीज नहीं पढ़ी बराबर

935
01:07:23,960 --> 01:07:28,040
ये इतना ही है बसने उन्होंने जिस पदम पुराण का अध्ययन

936
01:07:28,040 --> 01:07:32,640
किया अपनी गुरु परंपरा से उस पदम पुराण में वो श्लोक नहीं

937
01:07:32,640 --> 01:07:35,400
है उस पद्म पुराण में नहीं है ना तो हो सकता

938
01:07:35,400 --> 01:07:39,760
है कि लस्ट हो ऐसे अरे ऐसे क सा

939
01:07:39,760 --> 01:07:44,040
तो ठीक है ये गलत बोल रहे हैं बस सिंपल ये गलत है आप सही

940
01:07:44,040 --> 01:07:48,200
हो बसने नहीं माना आप

941
01:07:48,200 --> 01:07:53,160
मानते हो कि वो गलत है आप मानते हो गलत है मैं नहीं मानता मैं नहीं मानता

942
01:07:53,160 --> 01:07:56,960
मान रहे हो ये आप मान रहे हो

943
01:07:56,960 --> 01:08:01,000
पर से राण जी परंपरा से जो उनको ग्रंथ दिया गया था वो पूर्ण

944
01:08:01,000 --> 01:08:05,400
नहीं था अधूरा था शिवांश जी आप है ना अपने

945
01:08:05,400 --> 01:08:09,440
जो आपका जो आप जो भी बता रहे हो मुझको रेफरेंस दे रहे हो

946
01:08:09,440 --> 01:08:13,440
ठीक हैको सिद्ध नहीं कर पा रहे अब उसको तक

947
01:08:13,440 --> 01:08:17,720
नहीं कर जनता त करगी ये जनता त करेगी किसने सिद्ध किया किसने

948
01:08:17,720 --> 01:08:20,800
नहीं किया आप उनको जो पदम

949
01:08:20,800 --> 01:08:24,920
पुराण दिया गया था व अधूरा था पूरा नहीं था और पूरे के नाम पर उन्हे

950
01:08:24,920 --> 01:08:30,920
दे दिया गया परंपरा से आने वाला ज्ञान भी भंग हुआ

951
01:08:54,440 --> 01:08:59,240
वैष्णवास्त्र ठीक है हम अब अब बात ऐसी

952
01:08:59,240 --> 01:09:02,720
है

953
01:09:02,720 --> 01:09:07,520
कि जब एक व्यक्ति यहां से मुक्त होता

954
01:09:07,520 --> 01:09:11,600
है कहां से यहां से

955
01:09:11,600 --> 01:09:15,640
इस संसार से भौतिक संसार से हा हा और वो बैकुंठ आदि में

956
01:09:15,640 --> 01:09:20,080
जाता है ठीक है तो क्या आपके

957
01:09:20,080 --> 01:09:24,200
अनुसार यहां पर जो उसका परिवार रह गया होता है

958
01:09:24,200 --> 01:09:28,520
जो भी चीजें होती है उससे उसको जो सुख मिल रहा है दुख मिल रहा

959
01:09:28,520 --> 01:09:33,080
है या फिर उसके ना रिश्तेदारों को कष्ट हो रहा है

960
01:09:33,080 --> 01:09:37,160
उसको वहां पर पहुंच कर कष्ट होता है कि नहीं

961
01:09:37,160 --> 01:09:41,360
मुक्त होने के बाद मुक्त होने के बाद

962
01:09:41,360 --> 01:09:45,520
प्रॉपर वैकुंठ जाने के बाद आपके हिसाब से जो भी

963
01:09:45,520 --> 01:09:51,320
मुक्ति है वहां मुक्ति मिल जाने के

964
01:09:51,320 --> 01:09:55,360
बाद हा ले लिया इंस्ट्रक्शन

965
01:09:55,360 --> 01:09:59,480
नहीं नहीं मैंने उनको बोला कि बाहर जाओ सुनाई दे रहा है उनसे क

966
01:09:59,480 --> 01:10:05,080
ऐसी आवाज में बोले कम से कम जनता तो ना देखे इनको इंस्ट्रक्शन ने पड़

967
01:10:05,080 --> 01:10:09,600
रहे प्लीज फ ले जाइ प्लीज हा

968
01:10:09,600 --> 01:10:14,680
बहुत बढ़िया प्लीज डिस्टर्ब मत कर

969
01:10:14,680 --> 01:10:19,120
प्लीज अरेली मैं उनसे कुछ इंस्ट्रक्शन लेता

970
01:10:19,120 --> 01:10:24,000
ही कोई हमें कुछ समझने की आवश्यकता नहीं जनता देख डिसाइड कर

971
01:10:24,000 --> 01:10:28,200
जनता ने तोय भी दे मेरे क्वेश्चन का आंसर नहीं दे पाए य भी दिखाया जनता ने वो भी जनता

972
01:10:28,200 --> 01:10:32,320
देख रही है ठीक है बिल्कुल बढ़िया बासर दे नहीं पा आप तो पूरा इमोशनल आप तो पूरा

973
01:10:32,320 --> 01:10:36,320
इमोशन चने क्या आंसर दिया है शास्त्र में क नहीं लिखा

974
01:10:36,320 --> 01:10:40,520
ये बोलता है वो बोलता है सब बोलते हैं शास्त्र में कहीं नहीं लिखा कि वो शंकराचार्य

975
01:10:40,520 --> 01:10:44,520
की बात हो रही है पम पुराण में अरे अरे वल्लभाचार्य ने कोट किया है

976
01:10:44,520 --> 01:10:49,040
आनंद मयो भाषा वाले इस रेफरेंस पट किया

977
01:10:49,040 --> 01:10:53,920
उन्होने परंपरा के जो आचार इनको आप गलत मानते

978
01:10:53,920 --> 01:10:57,920
हैं या देखो आप है ना ऐसे इमोशनल तरीके से

979
01:10:57,920 --> 01:11:00,920
मत

980
01:11:00,920 --> 01:11:05,080
जाने विषय को आगे बढ़ाते मैंने जो पूछा उसका आंसर दीजिए

981
01:11:05,080 --> 01:11:09,920
आपके हिसाब से मुक्ति हैब सेक् है

982
01:11:09,920 --> 01:11:14,320
आपके हिसाब सेक् आगे बढ प्लीज मैं उस पर डिस्कस अब नहीं करूंगा

983
01:11:14,320 --> 01:11:18,400
आप अगर बोलेंगे फिर वो डिस्कशन वही पहुंचेगा जो डिस्कशन हो

984
01:11:18,400 --> 01:11:24,400
चका उसके बारे में जनता देगी क्या निर्णय है दर्शक है देखेंगे

985
01:11:25,560 --> 01:11:26,060
मुक्ति

986
01:11:25,960 --> 01:11:30,040
है मुक्त होने के बाद व्यक्ति को यहां के जो दुख

987
01:11:30,040 --> 01:11:34,680
दर्द क्लेश है उसके परिवार के साथ जो आज हो रहा है

988
01:11:34,680 --> 01:11:38,920
वह उसको महसूस होता है मगर क्या मुक्त होने के बाद भी यदि यहां

989
01:11:38,920 --> 01:11:43,360
प्रलय आएगी क्लेश होगा वह दुखी होंगे उसके परिवार वाले

990
01:11:43,360 --> 01:11:47,360
तो उसको दुख होगा कि नहीं वैकुंठ में दुख होगा कि नहीं ऐसा

991
01:11:47,360 --> 01:11:51,720
पूछ रहे हो आपके हिसाब से जो मुक्ति है वो गोलोक

992
01:11:51,720 --> 01:11:56,000
धाम मुक्ति आपकी क्या मुक्ति है

993
01:11:56,000 --> 01:12:00,080
है तो वहां पर पहुंच कर जब आप मुक्त हो गए तो यहां पर

994
01:12:00,080 --> 01:12:04,320
जो हमारा परिवार है भाई बहन है बंधु है नाते रिश्तेदार है इनको

995
01:12:04,320 --> 01:12:08,520
आज अगर कुछ होता है तो हमें दुख होता है तो क्या मुक्ति के बाद दुख होगा

996
01:12:08,520 --> 01:12:13,280
कि नहीं नहीं क् उसका उसका अथ

997
01:12:13,280 --> 01:12:17,280
ज एंजाइटी नहीं कुछ नहीं कोई दुख नहीं तो ये सब जो आज जो हो

998
01:12:17,280 --> 01:12:21,400
रहा है ये क्या झूठ है मतलब

999
01:12:21,400 --> 01:12:25,480
अरे जो आज जो हमें य दुख हो रहा है दुख की भावना हो रही है हमें कि हम दुखी हो रहे ये सब

1000
01:12:25,480 --> 01:12:29,480
क्या झूठ है झूठ कैसे होगा अगर आप एक्सपीरियंस कर

1001
01:12:29,480 --> 01:12:33,680
रहे हो ठीक है आप बोल रहे हो कि यार मेरे इसकी डेथ हो गई तो

1002
01:12:33,680 --> 01:12:37,280
ये मुझे दुख हुआ है ठीक है तो दुख तो रियल है

1003
01:12:37,280 --> 01:12:43,280
तो रियल है ना तो ये वहां जाकर के आपको इंफॉर्मेशन नहीं

1004
01:12:43,480 --> 01:12:47,760
मिलेगी क्या वहां जाकर आपको इंफॉर्मेशन नहीं

1005
01:12:47,760 --> 01:12:51,920
नहीं मिलेगी किस चीज की इंफॉर्मेशन यहां

1006
01:12:51,920 --> 01:12:56,120
क्या हो रहा है मिल सकती है क

1007
01:12:56,120 --> 01:13:01,040
मिल सक है जब आपके किसी ना रिश्तेदार को

1008
01:13:01,040 --> 01:13:06,160
मिनट मिरे या पूछने

1009
01:13:06,160 --> 01:13:10,240
केने आ बोल रहा मिल सकती आगे बोल रहा हूं मिल सकती आपने

1010
01:13:10,240 --> 01:13:12,720
बोला

1011
01:13:12,720 --> 01:13:16,920
ना बो मिल सकती बात अगर उसको मिल सकती है

1012
01:13:16,920 --> 01:13:21,000
तो यहां पर जो उसके रिश्तेदार है उनको जो दुख दर् तकलीफ हो रही है उसका

1013
01:13:21,000 --> 01:13:25,240
दुख उसको तब क्यों नहीं होगा यह बताइए क्योंकि

1014
01:13:25,240 --> 01:13:29,480
वो सारे आसक्ति से मुक्त है यानी

1015
01:13:29,480 --> 01:13:33,600
आज जो आसक्ति हो रही है ये झूठ है

1016
01:13:33,600 --> 01:13:37,840
झूठ कैसे है रियल है तो आसक्ति मर जाएगी

1017
01:13:37,840 --> 01:13:42,160
इनके प्रति अरे अरे भाई आसक्ति

1018
01:13:42,160 --> 01:13:46,400
और प्रेम में अंतर होता है ठीक है ठीक है बोलिए आगे

1019
01:13:46,400 --> 01:13:50,760
बोलिए सुनो सुनो जो मुक्त आत्मा है ठीक है जो मुक्त आत्मा है जो वैष्णव

1020
01:13:50,760 --> 01:13:52,480
है जो मुक्त आत्मा है वो सभी

1021
01:13:52,480 --> 01:13:56,560
के प्रति दया का भाव रखता है ठीक है और वो ये भी चाहता है

1022
01:13:56,560 --> 01:14:00,840
कि बाकी के वैष्णव भी कृपा करके ये बताए कि वहां पर जाकर

1023
01:14:00,840 --> 01:14:04,840
के जो भावना है आपकी क्यों बदल जाएगी यह

1024
01:14:04,840 --> 01:14:09,360
बताइए जो आपकी प्रेम है आसक्ति है दया है वो कहां चली

1025
01:14:09,360 --> 01:14:13,720
जाएगी दया सुनो सुनो सुनो यहां पर दया की बात नहीं है

1026
01:14:13,720 --> 01:14:17,800
दया और आसक्ति को आप एक मत करिए अटैचमेंट भाई मेरे जो

1027
01:14:17,800 --> 01:14:22,040
भी भावना है वो वहां क्यों खत्म हो जाएगी ये बताइए मुझे

1028
01:14:22,040 --> 01:14:26,080
सुन तो लो यार बोलने तो दो यार सामने वाले को यार ों का विश्लेषण कर

1029
01:14:26,080 --> 01:14:30,200
रहे हैं जो हमारे विषय में है नहीं आप उसको दया मानिए आसक्ति मानिए प्रेम मानिए कोई

1030
01:14:30,200 --> 01:14:34,480
भी जो भावना है कुछ भी नाम दीजिए वो भावना बदल क्यों जाएगी यह

1031
01:14:34,480 --> 01:14:38,640
बताइए अरे अरे वो भावना बदल नहीं जाएगी सुनो जो प्रेम

1032
01:14:38,640 --> 01:14:42,720
है वो रहेगा ठीक है लेकिन जो अटैचमेंट है ना मटेरियल जो क्या

1033
01:14:42,720 --> 01:14:47,080
कहते है उसको मटेरियल रिलेशनशिप है उसको लेकर भौतिक आसक्ति

1034
01:14:47,080 --> 01:14:51,080
जिसको हम कहते हैं ठीक है कि ये चीज मेरी है ये चीज ऐसा

1035
01:14:51,080 --> 01:14:55,200
है ये चीज वैसा है ठीक है भोग भोग की भावना ठीक ठीक

1036
01:14:55,200 --> 01:14:59,320
है वो चीज खत्म हो जाती है यानी कि वहां पर पहुंचने

1037
01:14:59,320 --> 01:15:03,600
के बाद पत्नी के प्रति प्रेम नहीं रहेगा माता के प्रति प्रेम नहीं रहेगा

1038
01:15:03,600 --> 01:15:07,680
बोला अरे प्रेम रहेगा आसक्ति नहीं रहेगी मेरे भाई आपको पहले ही बोला आसक्ति प्रेम में अंतर है

1039
01:15:07,680 --> 01:15:12,520
क्यों नहीं रहेगा वक्ति नहीं रहेगी आसक्ति नहीं रहेगी

1040
01:15:12,520 --> 01:15:16,800
मैं क्लियर कर रहा हूं मैंने सही सुना आसक्ति नहीं रहेगी

1041
01:15:16,800 --> 01:15:21,360
पहले तो आसक्ति का और प्रेम का डेफिनेशन क्लियर

1042
01:15:21,360 --> 01:15:26,200
कर ये आप बोल रहे हो ना प्रेम आसक्ति तो आप क्लियर करो

1043
01:15:26,200 --> 01:15:30,600
तो मैंने बोल दिया है मैंने सिर्फ इतना कहा है जो भी भावना

1044
01:15:30,600 --> 01:15:35,640
है आसक्ति प्रेम आपके

1045
01:15:35,640 --> 01:15:40,280
अंग उसकी भी आवश्यकता नहीं है मत दो उसकी आवता नहीं बोल

1046
01:15:40,280 --> 01:15:44,680
रहा भावना आ सक है आप प्लीज ऐसे विषयात

1047
01:15:44,680 --> 01:15:48,880
होता रहेगा हम किसी निष्कर्ष पर नहीं पहुंचेंगे हर

1048
01:15:48,880 --> 01:15:53,040
बा आ सक मैं जब आपकी मान मान रहा हूं कि वो प्रेम

1049
01:15:53,040 --> 01:15:57,240
नहीं आ सकती है तो फिर क्यों उस रहे हो वो प्रेम और आसक्ति की डेफिनेशन कुछ और अरे

1050
01:15:57,240 --> 01:16:01,280
मैं कुछ कहना चाह रहा हूं इसी टॉपिक के विषय में लेकिन बोलने नहीं दे रहे ना कितना अभी मैं अभी

1051
01:16:01,280 --> 01:16:05,360
मैं अपना प्रश्न एक बार फिर से क्लियर कर दूं अगर हमें हमारी पत्नी के प्रति

1052
01:16:05,360 --> 01:16:09,400
जो आसक्ति है माता के प्रति जो आसक्ति है पिता के प्रति

1053
01:16:09,400 --> 01:16:13,560
जो आसक्ति है यह झूठ है या सच है अगर सच

1054
01:16:13,560 --> 01:16:17,720
है तो यह वहां जाकर के खत्म क्यों हो जाएगा अगर झूठ है

1055
01:16:17,720 --> 01:16:21,840
तो फिर वोह मुक्ति कैसी वहां पर जाकर के आपको दुख क्यों नहीं होगा बताइए

1056
01:16:21,840 --> 01:16:22,840
हां

1057
01:16:22,840 --> 01:16:27,080
हां मैं अभी आपको पूरा एक्सप्लेन करता हूं दोनों लेवल जो है कपट डिफरेंट

1058
01:16:27,080 --> 01:16:31,120
है ठीक है यहां पर ऐसा नहीं य पर प्रेम नहीं सुनि अभी ध्यान से सुनना ऐसा नहीं

1059
01:16:31,120 --> 01:16:35,320
य पर प्रेम नहीं है ठीक इवन भी जब कोई भक्ति में आता है ठीक है तो ऐसा

1060
01:16:35,320 --> 01:16:39,520
नहीं कि एक दिन में भाई सब पूरा एकदम डिटैचमेंट हो जाए

1061
01:16:39,520 --> 01:16:43,640
बो यार मैंने कहा की जो भावना है व वहा जाके बदल क्यों

1062
01:16:43,640 --> 01:16:48,120
रही है बोलिए

1063
01:16:48,120 --> 01:16:52,160
प् भावना बदल नहीं रही है भावना बदल नहीं रही है कुछ

1064
01:16:52,160 --> 01:16:56,920
ऐसी छ रही है कुछ छ र

1065
01:16:56,920 --> 01:17:01,040
खत्म हो रही है आसक्ति की बात कर रहा प्रेम

1066
01:17:01,040 --> 01:17:05,240
आसक्ति की बात करहा प्रेम बढ़ता रहता है आसक्ति वो कम हो जाती

1067
01:17:05,240 --> 01:17:09,280
है प्रेम बढ़ता रहता है मेरे भाई मैं अब और

1068
01:17:09,280 --> 01:17:13,480
क्लियर कर देता हूं अगर उनको चोट पहुंचेगी तो आपको दुख होता है आज की डेट

1069
01:17:13,480 --> 01:17:17,480
में कि नहीं होता है हा होता है क्योंकि आ सकती है तो

1070
01:17:17,480 --> 01:17:21,720
जब आप मुक्त हो जाएंगे तब क्यों नहीं होगा तब आपको कोई मतलब नहीं रहेगा

1071
01:17:21,720 --> 01:17:25,760
वो मरे कटे कु भी हो उ देता उदाहरण दे मैं आपको उदाहरण देता

1072
01:17:25,760 --> 01:17:29,760
हूं ठीक है जैसे कि फॉर एग्जांपल मेरा कोई मेरा बच्चा है फॉर

1073
01:17:29,760 --> 01:17:33,920
एग्जांपल ठीक है जैसे आपके भी कोई शद बच्चे होंगे शायद तो अगर उनको चोट

1074
01:17:33,920 --> 01:17:37,880
लगी तो आपको बुरा लगेगा कि अरे उसको बेचारे को दर्द हुआ लेकिन

1075
01:17:37,880 --> 01:17:41,880
दर्द किसको हुआ शरीर को हुआ ठीक है तो इसलिए आपको बुरा लग रहा

1076
01:17:41,880 --> 01:17:46,000
है लेकिन जब आप मोक्ष प्राप्त कर लोगे जब आप भगवत भगवत धाम चले जाओगे

1077
01:17:46,000 --> 01:17:50,240
ठीक है तो आपके अंदर जो इच्छा क्योंकि इच्छा ऑलरेडी इधर है ऑलरेडी प्रेजेंट

1078
01:17:50,240 --> 01:17:54,280
है कि सब मुक्त हो जाए जैसे शिला प्रभुपाद जी है वो चाहते थे कि सब अपने दुखों से

1079
01:17:54,280 --> 01:17:58,400
ऊपर उठ के भगवान के प्रेम में खो जाए ठीक है क आत्मा जो दुख

1080
01:17:58,400 --> 01:18:02,640
एक्सपीरियंस कर रही है अपने सेंसेस की वजह से अपने इंद्रिय भोग इंद्रिय भोग कहते

1081
01:18:02,640 --> 01:18:06,680
इसको ठीक है उसकी डिजायर्स की वजह से जो वो दर्द सहन

1082
01:18:06,680 --> 01:18:10,960
कर रहा है कभी डिजायर्स पूरे नहीं होते आता है थर्ड अध्याय में डिजायर्स पूरे नहीं होते तो

1083
01:18:10,960 --> 01:18:15,240
दुख होता है गुस्सा आता है है ना इस तरीके से तो

1084
01:18:15,240 --> 01:18:19,440
प्रेम अ आपको पूरा अच्छे से एक्सप्लेन करता आपको समझ में नहीं आ रहा तो अच्छे से एक्सप्लेन

1085
01:18:19,440 --> 01:18:23,840
कर देता हूं शर्ट में बस एक मिनट लूगा बस एक मिनट लूगा ठीक है आप मुझे बस बोलने देना

1086
01:18:23,840 --> 01:18:28,120
ठीक है तो तो होता ऐसा है शिवांश जी कि

1087
01:18:28,120 --> 01:18:32,200
जब आप भक्ति कर रहे हो कोलोक तो ऐसे तो कोई चला नहीं जाएगा एक ही दिन में

1088
01:18:32,200 --> 01:18:36,480
है ना उसके लिए आपको डिवोशनल कंप्लीट सरेंडर करना पड़ेगा भगवान को

1089
01:18:36,480 --> 01:18:40,800
ठीक है तो जब आप कंप्लीट सरेंडर करते हो भगवान तो आपकी अपने आप

1090
01:18:40,800 --> 01:18:44,880
जो क्या कहते हैं जी जीव है जितने भी जीव है इस पूरे

1091
01:18:44,880 --> 01:18:49,120
ब्रह्मांड में ठीक है तो आपको सबके लिए एक दया का भाव आ जाता है और ये आध्यात्मिक

1092
01:18:49,120 --> 01:18:53,080
लेवल की दया ये कोई भौतिक लेवल की दया नहीं है ठीक है तो दया रह

1093
01:18:53,080 --> 01:18:57,080
जाती है इवन मान लो अगर मैं मान लो चला गया ठीक

1094
01:18:57,080 --> 01:19:01,240
है मान लो कि मैं क्या कहते है

1095
01:19:01,240 --> 01:19:05,360
गोलक चला गया या साकेत धाम चला गया या वैकुंठ चला गया किधर भी भगवान के किसी धाम में मैं चला गया

1096
01:19:05,360 --> 01:19:09,520
फॉर एग्जांपल ठीक है तो अब वहां पर जा भौतिक

1097
01:19:09,520 --> 01:19:14,480
आसक्ति है भौतिक अटैचमेंट है वो तो चले जाएंगे लेकिन जो सेवा भाव है वो तो नहीं जाएगी

1098
01:19:14,480 --> 01:19:18,680
और उस सेवा भाव के कारण मुझे सामने

1099
01:19:18,680 --> 01:19:22,720
हो आपका हो गया जब सामने वाला जब बोलता

1100
01:19:22,720 --> 01:19:26,920
है ना तो बीच में आकर ये नहीं बोलना होता कि आपका हो गया क्या कब तक ना बोलू रात

1101
01:19:26,920 --> 01:19:31,120
तक शाम तक ना बोलू मैंने आपको कहा कि मुझे एक मिनट दो आपने 30

1102
01:19:31,120 --> 01:19:35,240
सेकंड भी नहीं सुना एक मिनट से ज्यादा आप बोल चुके हैं नहीं नहीं नहीं

1103
01:19:35,240 --> 01:19:39,280
पता है आप क्या करते हो पता है सामने वाले का कंप्लीट भी नहीं होता कभी-कभी आप

1104
01:19:39,280 --> 01:19:43,360
चाहते हो कि सामने वाला बोले आप अपनी जब आपकी बारी आती है आप पांच पाच छछ मिनट बोलते हो और मैं

1105
01:19:43,360 --> 01:19:47,440
एक मिनट भी नहीं बोल सकता ये दिक्कत है शिवान जी ये प्रोफेशनलिज्म नहीं

1106
01:19:47,440 --> 01:19:51,560
है बिल्कुल भी मैं कोई प्रोफेशनल हूं नहीं मैं प्रोफेशनल

1107
01:19:51,560 --> 01:19:55,880
बंदा नहीं हू अ आप प्रोफेशन आप अनप्रोफेशनल मैं

1108
01:19:55,880 --> 01:19:59,920
नहीं प्रोफेशनल तरीके से काम कर आप अनप्रोफेशनल तरीके से काम करते

1109
01:19:59,920 --> 01:20:04,160
क रहे सुनिए सुनिए सुनिए मेरा प्रश्न ये है मुद्दे पर रहे विषय

1110
01:20:04,160 --> 01:20:08,360
से ना भटके आपको और बोलना है आपको और बोलना

1111
01:20:08,360 --> 01:20:12,560
है उस बारे में मुक्ति के बारे में हां मुझे बोलना

1112
01:20:12,560 --> 01:20:16,600
है मुझे थोड़ा सा दो से तीन मिनट चाहिए बोलने के लिए आप बो सकते हैं

1113
01:20:16,600 --> 01:20:20,760
बोलिए ठीक है तो जब भौतिक जगत से आपको मुक्ति मिलती

1114
01:20:20,760 --> 01:20:25,280
है ये जन्म मृत्यु फिर आपके डिजीज ल्ड

1115
01:20:25,280 --> 01:20:29,600
ठीक है यह सब चीज गो थ्रू कर रहे हो ठीक है तो ये एक तरीके से आसक्ति

1116
01:20:29,600 --> 01:20:33,680
है क्योंकि आप किसी किसी चीज से अटच हो इसलिए अभी वो चीज गो थ्रू कर रहे हो ठीक

1117
01:20:33,680 --> 01:20:37,920
है जो जीवात्मा है वो मटेरियल डिजायर से अटच है

1118
01:20:37,920 --> 01:20:42,080
फिलहाल ठीक इसलिए सब चीज एक्सपीरिंस कर रहा है लेकि इसका यह मतलब नहीं कि वो

1119
01:20:42,080 --> 01:20:46,480
बाकी की आध्यात्मिक चीज एक्सपीरियंस नहीं कर सकता ठीक है

1120
01:20:46,480 --> 01:20:50,520
एक प हो गया और बोलना है

1121
01:20:50,520 --> 01:20:54,640
नहीं हुआ नहीं पॉट है

1122
01:20:54,640 --> 01:20:58,800
ठीक है बोलते हो ना जब आपका नहीं हुआ तो ठीक है मत बोलो लास्ट में

1123
01:20:58,800 --> 01:21:02,840
बोलना फलो लेट मी कंप्लीट फ्लो अभी फ्लो में हूं मैं ठीक है

1124
01:21:02,840 --> 01:21:06,840
तो उसके बाद उसके बाद जब वो हा उसके बाद जब वो भगवान के किसी भी धाम जाता

1125
01:21:06,840 --> 01:21:10,960
है व व्यक्ति तो उसकी भौतिक आसक्ति तो खत्म हो जाती कंपलीटली ठीक है

1126
01:21:10,960 --> 01:21:15,160
क्योंकि भगवत धाम मोक्ष का अर्थ ही वही है कि भौतिक चीजों से आपका छूट जाना जन्म मृत्यु

1127
01:21:15,160 --> 01:21:19,320
जरा व्याधि ठीक है दुख सुख ये सब जो भौतिक सुख दुख है उसकी बात कर रहा हूं

1128
01:21:19,320 --> 01:21:23,560
ठीक है उससे आप ऊपर उठ जाते हो ठीक है जब आप इससे ऊपर उठ

1129
01:21:23,560 --> 01:21:27,600
गए तो आपको किसी और को देख दुख होगा आपको दया आएगी हा चलो ठीक है भाई

1130
01:21:27,600 --> 01:21:31,640
इसको भी भगवत प्राप्ति हो जाए तो दया आएगी ठीक है क्यों दया क्यों

1131
01:21:31,640 --> 01:21:32,140
आएगी

1132
01:21:31,840 --> 01:21:35,960
क्योंकि आपको पता है कि जो जीवात्मा हैय कुछ ना कुछ सफर कर रहा

1133
01:21:35,960 --> 01:21:39,400
है ठीक है आपको उसे दुख नहीं होगा आपको बस दया हाय

1134
01:21:39,400 --> 01:21:44,040
ठीक हो जाए ठीक है इस तरीके

1135
01:21:44,040 --> 01:21:49,320
से आपके अंदर जब आप मुक्त हो जाएंगे तो आपको दया आएगी

1136
01:21:49,320 --> 01:21:53,440
दया तो लरे आध्यात्म का पार्ट है

1137
01:21:53,440 --> 01:21:57,720
मैं आपसे बस क्लियर कर रहा हूं आप मैं सही सुना कि नहीं सुना

1138
01:21:57,720 --> 01:22:02,080
जब आप मुक्त हो जाएंगे तो आपको दया आएगी हां

1139
01:22:02,080 --> 01:22:06,840
वो दया ऐसी दया है जो क्या कहते हैं भाव

1140
01:22:06,840 --> 01:22:11,840
भा चलिए मैं अपनी लाइन पूरी कर लू अगर आप वया

1141
01:22:11,840 --> 01:22:15,960
आगी ला एक लाइन बस एक लाइन एक लाइन बस आपने कट किया था

1142
01:22:15,960 --> 01:22:20,000
इसलिए बस एक लाइन जो बोलिए बोलिए जो भाव रोग की दया है वह

1143
01:22:20,000 --> 01:22:24,160
खत्म हो जाती है लेकिन आध्यात्मिक दया जैसे कि मैंने आसक्ति का तो भौतिक लेवल का जो प्रेम होता है भौतिक लेवल

1144
01:22:24,160 --> 01:22:28,400
का प्रेम उसको आ सक्ति अरे बाप रे तो जो भौतिक लेवल

1145
01:22:28,400 --> 01:22:32,400
का जो प्रेम होता क्या हु बाप रे क्या हुआ बॉक्स

1146
01:22:32,400 --> 01:22:36,520
कर गया पूरा अच्छा अच्छा मेरा पैर लग

1147
01:22:36,520 --> 01:22:40,640
गया तो ब आप वो सब छोड़ो यार वो सब ये सब ये सब मटेरियल

1148
01:22:40,640 --> 01:22:44,680
चीज है इसके ऊपर ध्यान नहीं देना चाहिए तो मैं आपको ये कह रहा हूं कि ज हा

1149
01:22:44,680 --> 01:22:48,880
जो भाव रोग की जो दया है की अरे बेचारा इतना भूका है

1150
01:22:48,880 --> 01:22:52,880
है ना इस तरीके से ठीक है तो इसम भी आप किस ना किसी प्रकार का इंद्रिय सुख कर

1151
01:22:52,880 --> 01:22:54,520
तोय ये एक मटेरियल लेवल

1152
01:22:54,520 --> 01:22:58,560
का एक अटैचमेंट है ठीक है क्यों क्योंकि उसके भौतिक शरीर के बारे में

1153
01:22:58,560 --> 01:23:02,640
सोच रहा है ठीक मैं गरीब की मदद कर देता हूं मैं इसका ये करता हं तो ये मटेरियल

1154
01:23:02,640 --> 01:23:06,720
लेवल का उद्धार है मटेरियल लेवल का उधार ठीक है लेकिन जब

1155
01:23:06,720 --> 01:23:10,880
आप किसी को भक्ति का ज्ञान देते हो ठीक है कि भक्ति

1156
01:23:10,880 --> 01:23:15,120
कैसे करनी है जैसे कि चैतन्य चरिता मृत में आता है नाम

1157
01:23:15,120 --> 01:23:19,120
रुचि जीव दया नाम रुचि जीव दया ठीक है मतलब भगवान के

1158
01:23:19,120 --> 01:23:23,880
नाम में रुचि रखनी चाहिए और सभी जीवात्मा के प्रति दया रखनी चाहिए क्योंकि कोई ना

1159
01:23:23,880 --> 01:23:28,040
जो इस संसार में है ठीक है

1160
01:23:28,040 --> 01:23:32,120
तो वो सब कुछ ना कुछ सफर कर र है ठीक है तो हा

1161
01:23:32,120 --> 01:23:36,280
दया रहेगी आध्यात्मिक जगत में भी दया रहेगी प्रेम रहेगा सब कुछ रहेगा

1162
01:23:36,280 --> 01:23:40,520
वहा प ठीक है वहा पर सब कुछ रहेगा लेकिन वोह

1163
01:23:40,520 --> 01:23:44,880
जन्म मृत्यु से ज बाहर चला जाएगा उसके बाद वो कंपलीटली डिफरेंट इमोशन

1164
01:23:44,880 --> 01:23:48,640
होते हैं

1165
01:23:48,640 --> 01:23:53,440
उसम मैंने कंप्लीट नहीं किया जो मुक्त आत्मा होती

1166
01:23:53,440 --> 01:23:57,680
है सुनिए सुनिए भाई आपने मुझसे दो-तीन मिनट कहे थे अब पाच

1167
01:23:57,680 --> 01:24:01,840
मिनट होने जा रहा है अरे एक ही लाइन बोल रहा हूं मेरा लास्ट लाइन

1168
01:24:01,840 --> 01:24:06,440
था उसपे आपने कट कर दिया बस लास्ट लाइन कह रहा था मैं आवाज आ रही है

1169
01:24:06,440 --> 01:24:10,480
आप चले गए स्क्रीन से बोलिए बोलिए हम

1170
01:24:10,480 --> 01:24:14,560
स्क्रीन बंद हो गया था पूरा अ यार हां जो

1171
01:24:14,560 --> 01:24:18,800
भौतिक लेवल का जो दया है वो खत्म हो जाता है और आध्यात्मिक लेवल का दया आ जाता है क्योंकि जितने

1172
01:24:18,800 --> 01:24:22,840
इमोशंस हम यहां पर एक्सपीरियंस करते हैं मटेरियल वर्ल्ड में वो सब उस आध्यात्मिक जगत

1173
01:24:22,840 --> 01:24:28,840
की एक रिफ्लेक्शन है एक तरीके से एक

1174
01:24:30,200 --> 01:24:34,440
परवर्ती रह जाती है इसमें अटैचमेंट जाते वहां प अटैचमेंट इस प्रकार के अटैचमेंट्स

1175
01:24:34,440 --> 01:24:39,160
नहीं होते वहां प नाम रूचि जीविया हो

1176
01:24:39,160 --> 01:24:43,360
गया चलो अब बोलिए पहली

1177
01:24:43,360 --> 01:24:47,520
बात आध्यात्मिक आध्यात्मिक दया रह जाएगी प्रेम रह

1178
01:24:47,520 --> 01:24:51,640
जाएगा हा और सब कुछ होगा मगर वो आध्यात्मिक होगा

1179
01:24:51,640 --> 01:24:56,280
है ना बिल्कुल अभी मैं आपसे अभी मेरा प्रश्न ये है

1180
01:24:56,280 --> 01:25:00,320
कि यह सब होगा कैसे जो आप वहां जाकर के अभी जब

1181
01:25:00,320 --> 01:25:04,720
हमारे किसी बेटे को भाई को चोट लग रही है तो हम दुख हो रहे हैं दुखी हो रहे हैं

1182
01:25:04,720 --> 01:25:09,840
वहां पर दुखी नहीं हो रहे हैं य कैसे होगा कैसे पॉसिबल है इसको प्रैक्टिकली

1183
01:25:09,840 --> 01:25:13,880
बताइए अरे लेकिन वो तो वहां की बात है ना तो उसको हम

1184
01:25:13,880 --> 01:25:18,080
यहां पर अभी अभी एक्सपीरियंस कैसे कर सकते हैं उस चीज को जो

1185
01:25:18,080 --> 01:25:22,680
टेक्निटी तो बताइए आपको ऐसी कौन सी इंफॉर्मेशन मिलेगी

1186
01:25:22,680 --> 01:25:26,800
लेन वो जगत जो जो अव्यक्त जगत है सुनिए सुनिए आपका आंसर

1187
01:25:26,800 --> 01:25:30,840
दे रहा हूं अभी जो अव्यक्त जगत है ठीक है जो अव्यक्त जगत है ठीक

1188
01:25:30,840 --> 01:25:34,840
है अब देखो जैसे कि अभी हमारे शरीर है बहुत इस क्वेश्चन का आंसर नहीं

1189
01:25:34,840 --> 01:25:35,440
दिया जा सकता

1190
01:25:35,440 --> 01:25:39,480
कि ये होगा कैसे सुनो सुनो सुनो मैं आंसर दे रहा हूं या

1191
01:25:39,480 --> 01:25:43,680
प्लीज ऐसे कट मत किया करो आपने कितनी बार टोक दिया यार आपने जब मैं दो-तीन

1192
01:25:43,680 --> 01:25:47,680
मिनट बाद बोलना शुरू किया तो आप फिर आ गए मेरी बात आप बोलने नहीं देंगे फिर

1193
01:25:47,680 --> 01:25:51,880
अपनी छोटी सी बात जब मैं बोलना चाहता हूं तो आप अपनी बात लेके आ गए क्वेन पूछा

1194
01:25:51,880 --> 01:25:55,960
है अरे आपने क्वेश्चन पूछा अभी अ तो मैं आगे

1195
01:25:55,960 --> 01:26:00,880
बढ़ रहा हूं ना जब आपने कोई छोटी सी बात बोली तो उसमें लीजिए आप काउंटर

1196
01:26:00,880 --> 01:26:05,360
आपने बोला अब व्यक्त जगत की बात हम यहां नहीं बता

1197
01:26:05,360 --> 01:26:09,400
सकते अरे सुन तो लो कम से

1198
01:26:09,400 --> 01:26:13,480
अरे बो पहले क्लियर करिए बो मैं बोलू पूरा

1199
01:26:13,480 --> 01:26:17,640
पूरा बोलू मैं पहले इसको ये क्लियर करिए फिर बोलिए अब व्यक्त जगत के उत्तर

1200
01:26:17,640 --> 01:26:22,120
यहां नहीं दे सकते नहीं ऐसा नहीं है ऐसा नहीं है आपने अभी

1201
01:26:22,120 --> 01:26:26,440
बोला होगा होगा बोला कि नहीं बोला देखिए राधा

1202
01:26:26,440 --> 01:26:30,840
कृष्ण दास जी सच पे रही है आपने बोला कि नहीं बोला

1203
01:26:30,840 --> 01:26:35,640
अरे मैं कह रहा हूं कि हम ऐसे डायरेक्ट सुनिए सुनिए सुनिए मैंने ये कहा

1204
01:26:35,640 --> 01:26:39,720
कि मैं इसे डायरेक्टली नहीं बता सकता मैंने क्या कहा कि मैं इसे डायरेक्टली अपने हिसाब से नहीं बता

1205
01:26:39,720 --> 01:26:43,880
सकता क्या ये नहीं होता उत्तर नहीं दिया जा सकता अरे भाई सुनो अरे

1206
01:26:43,880 --> 01:26:48,520
सुन तो लो मैं बोल के रहा ये बात क्लियर नहीं करेंगे हम आगे नहीं बढ़ेंगे आपने बोला

1207
01:26:48,520 --> 01:26:50,600
अव्यक्त जगत के चीजें यहां नहीं बताई

1208
01:26:50,600 --> 01:26:55,240
जा सकती है बोला कि नहीं बोला आपने मेरा आंसर पूरा सुना कि नहीं सुना

1209
01:26:55,240 --> 01:26:59,600
सुना वो वाला आंसर सुना था नहीं सुना था

1210
01:26:59,600 --> 01:27:03,600
नहीं सुना था मैं बोल रहा थाने पहले बोला पूरा

1211
01:27:03,600 --> 01:27:07,760
बाद में कर लीजिएगा आप अभी ये बता दीजिए आपने बोला नहीं बोला अरे

1212
01:27:07,760 --> 01:27:11,800
बाद में क्यों करू मैं जब आपने मुझे टोका है तो बाद ठीक मैं अपनी बात

1213
01:27:11,800 --> 01:27:15,800
वापस ले रहा हूं आप बोलिए अपना आंसर पूरा बोलिए ठीक है मैं

1214
01:27:15,800 --> 01:27:20,320
आपको ये कह रहा हूं मैं डायरेक्टली नहीं बता सकता ऐसे की देखो य पर एटली

1215
01:27:20,320 --> 01:27:24,560
ऐसा ऐसा हो रहा है ठीक है क्यों क्योंकि वो चीज शास्त्र में लिखी तो

1216
01:27:24,560 --> 01:27:28,840
अनुसार ठीक है शास्त्र के अनुसार चलकर व क्या एक्सपीरियंस होता है

1217
01:27:28,840 --> 01:27:34,840
ठीक है व सब चीज हमको शास्त्र से समझ में आएगी

1218
01:27:36,400 --> 01:27:39,360
फर

1219
01:27:39,360 --> 01:27:44,000
कही अबकी बार आप ठीक है मत बोलिएगा तब तक कट नहीं करूंगा

1220
01:27:44,000 --> 01:27:49,440
ठीक है म बोला कर

1221
01:27:49,440 --> 01:27:53,680
बो मतलब आपकी बातो को ओके करता जा रहा क्या ठीक

1222
01:27:53,680 --> 01:27:56,240
है म

1223
01:27:56,240 --> 01:28:00,240
ठीक क्या एक व्यक्ति की एक हैबिट होती है बात करने की ठीक है तो

1224
01:28:00,240 --> 01:28:04,400
वो हैबिट गलत है एक व्यक्ति की आदत है शराब पीने की उसको छोड़

1225
01:28:04,400 --> 01:28:08,520
एक व्यक्ति की हैबिट होती है चाकू मारने की उसको छोड़ आदत है

1226
01:28:08,520 --> 01:28:12,760
आपकी भी आदत है बीच बीच में बोलने की दूष प्रचार करने की आप अगर ठीक है पूछेंगे

1227
01:28:12,760 --> 01:28:17,560
तो मैं उसम काउंटर करूंगा ठीक है नहीं है नो इट्स नॉट ओके अच्छ अ

1228
01:28:17,560 --> 01:28:21,840
बो ओके ओके तो मैं बोलूंगा नॉट ओके नॉट ओके न ओके

1229
01:28:21,840 --> 01:28:26,080
एक सेकंड एक सेकंड आप अभी मेरी गलतिया बता रहे हो आपने कितनी बार टोका खुद की गलती क्यों नहीं देखते आप

1230
01:28:26,080 --> 01:28:30,240
हम तो मैं गल जहां पे मैं गलत हूं वहां पे मैंने कहा ना कि यहां मुझसे गलती हो गई जहां

1231
01:28:30,240 --> 01:28:34,360
आपको वो किया गया था म्यूट वहां मैंने कहा था ना कि क्षमा मांगता हूं मैं की बात

1232
01:28:34,360 --> 01:28:38,600
अरे मैं म्यूट की बात नहीं कर रहा मैं तो अभी बोल रहा हूं आप जो बीच में बार-बार ते हो उसकी बात कर इसलिए

1233
01:28:38,600 --> 01:28:42,800
करता हूं क्योंकि आप ठीक है पूछते हो मुझसे यार आगे बढ़ो अपनी बात बोलो ठीक

1234
01:28:42,800 --> 01:28:47,400
है बोलोगे मैं टोकू अरे मैं क्लियर करने केलिए ठीक है बोलेंगे मैं

1235
01:28:47,400 --> 01:28:51,600
टोकू मैंने क्या बोला ठीक है मैंने इसलिए बोला कि आपको क्या समझ में आया है क्या

1236
01:28:51,600 --> 01:28:55,640
कि इतना जो बोला है मैंने मैं बोलू ना तो मैं बोलू ना समझ में आया कि

1237
01:28:55,640 --> 01:28:59,720
नहीं आया मैं बोलूंगा ना फिर व हां तो बोलो फिर आप तो कह रहे हो आपने

1238
01:28:59,720 --> 01:29:03,920
टोक दिया अरे टोक दि की बात नहीं कर रहा मैं आप बोलो

1239
01:29:03,920 --> 01:29:08,000
कि हा इतना समझ में आया मैं आगे बढ़ता हूं ऐसा होता है अरे नहीं समझ में आया ना आपकी वो

1240
01:29:08,000 --> 01:29:12,120
बात गलत लग रही है इसलिए मैं वो बात बोलूंगा जो गलत लग रही है ठीक है ठीक है ठीक

1241
01:29:12,120 --> 01:29:16,320
है अभी ना एकदम ध्यान से सुनना मेरी बात ठीक है बोलोगे तो बीच में फिर टोकू

1242
01:29:16,320 --> 01:29:20,680
ठीक है मत बोलना चलो अच्छा ठीक है मैं अभी वापस से नहीं बोलूंगा

1243
01:29:20,680 --> 01:29:24,720
बस खुश हा बोलो क्वेश्चन फिर सेट क्वेश्चन फिर से

1244
01:29:24,720 --> 01:29:28,880
पुट करिए अभी यहां पर भौतिक जगत

1245
01:29:28,880 --> 01:29:33,120
में जो आपके नाते रिश्तेदार हैं माताएं हैं बहने है भाई है बेटा

1246
01:29:33,120 --> 01:29:37,320
है बेटी है इनको जो दुख दर्द और कष्ट हो रहा

1247
01:29:37,320 --> 01:29:41,560
है उसके कारण आप प्रभावित होते हैं मुक्ति मिलने के बाद आप

1248
01:29:41,560 --> 01:29:45,640
प्रभावित क्यों नहीं होंगे उसका आंसर मैंने दिया था

1249
01:29:45,640 --> 01:29:49,840
वो समझ में आया अभी तक आपको कि नहीं समझ में आया जो पहले मैंने आंसर दिया था आपने

1250
01:29:49,840 --> 01:29:54,080
अपनी तरफ से संतुष्टि जनक आंसर दे दिया है ना आपको

1251
01:29:54,080 --> 01:29:58,080
संतुष्ट देखो मेरे तरफ से हुआ या नहीं हुआ वो बाद में की बात है अगर

1252
01:29:58,080 --> 01:29:59,760
आपको संतुष्ट मैंने

1253
01:29:59,760 --> 01:30:03,920
बोला कि ऐसा क्या परिवर्तन होता है जिसके कारण वहां जाने

1254
01:30:03,920 --> 01:30:08,080
पर दुख नहीं होता तो आपने ये कहा मुझको आपने यह

1255
01:30:08,080 --> 01:30:12,120
कहा इसके बारे में क्योंकि शास्त्र ने ऐसा कहा है वहा दुख नहीं होगा इसका कोई जवाब नहीं

1256
01:30:12,120 --> 01:30:12,920
है

1257
01:30:12,920 --> 01:30:17,040
परिवर्तन का मैंने आंसर दिया रिवा करेंगे सुनो अगर आप रिवाइंड

1258
01:30:17,040 --> 01:30:23,040
करोगे तो क्या परिवर्तन होता है उसका आंसर मैंने दिया था परिवर्तन यह होता है

1259
01:30:24,240 --> 01:30:29,920
वही जो आंसर दिया है वही बोल दीजिए क्या परिवर्तन हो जाता है

1260
01:30:29,920 --> 01:30:33,920
ऐसा आपका सेकंड क्वेन ये था एक

1261
01:30:33,920 --> 01:30:38,040
सेकंड एक सेकंड अभी पूरा सुन लीजिए ठीक है आपने पूरा का पूरा उसको घुमा दिया लेकिन

1262
01:30:38,040 --> 01:30:41,080
मेरा है कंसंट्रेशन

1263
01:30:41,080 --> 01:30:45,120
देखो अरे नहीं रुको रुको आपने क्या पूछा कि वहां ऐसा

1264
01:30:45,120 --> 01:30:49,120
और कुछ बोलोगे इसको आपको म्यूट करूंगा आप मुझे आप दोबारा आंसर दे

1265
01:30:49,120 --> 01:30:54,160
दीजिए वो टेक्निकल क्या है जो यहां से मिलने वाली जो इंफॉर्मेशन है

1266
01:30:54,160 --> 01:30:58,200
जो आपको दुख पहुंचा रही है वही इंफॉर्मेशन जब आप वहां मुक्त हो जाएंगे

1267
01:30:58,200 --> 01:31:02,280
तो आपको दुख नहीं पहुंचाएगी वो टेक्निकल क्या है दोबारा आंसर दे दीजिए

1268
01:31:02,280 --> 01:31:06,400
मैंने आपको मैंने आपको तीन बार उसको एक्सप्लेन किया था फिर से एक्सप्लेन कर देता हूं

1269
01:31:06,400 --> 01:31:10,480
सरल भाषा में जब आप वहां पर चले जाते हो तो आपकी जो चेंज

1270
01:31:10,480 --> 01:31:14,560
आ रहा है जिसको परिवर्तन कह रहे हैं परिवर्तन ये आ रहा है कि

1271
01:31:14,560 --> 01:31:18,560
आपकी भौतिक जो आसक्ति है ठीक है अटैचमेंट्स है

1272
01:31:18,560 --> 01:31:22,840
वो छूट जाते हैं यहां पे खत्म हो जाते हैं वो अटैचमेंट मैं उसी प तो काउंटर

1273
01:31:22,840 --> 01:31:26,840
किया मेरे भाई कि वो क्यों छूट रहे हैं वही मैं उस पर पूछ रहा हूं क्यों

1274
01:31:26,840 --> 01:31:28,280
छूट रहे हैं

1275
01:31:28,280 --> 01:31:32,520
क्योंकि वो मोक्ष को प्राप्त कर रहा है इसलिए छूट रहे है क्या मोक्ष के बाद क्या बहु आ स र

1276
01:31:32,520 --> 01:31:36,760
क्या वो वो जो मोक्ष है उसमें वो प्रैक्टिकली

1277
01:31:36,760 --> 01:31:40,840
बताइए टेक्निकली आंसर है कि नहीं कि वो मोक्ष को जो प्राप्त कर रहे हैं

1278
01:31:40,840 --> 01:31:44,840
तो क्या यहां पर जो चेंजेज है जो इंफॉर्मेशन पहले आ रही थी अभी भी

1279
01:31:44,840 --> 01:31:49,880
आ रही है अब हमारी आसक्ति क्यों खत्म हो गई पहले आसक्ति

1280
01:31:49,880 --> 01:31:54,600
थी पहले आसक्ति थी पहले आ

1281
01:31:54,600 --> 01:32:00,200
पहले आसक्ति थी उसी इंफॉर्मेशन के कारण हम प्रभावित हो रहे

1282
01:32:00,200 --> 01:32:04,280
थे मिल रही है अभी वो आ क्यों नहीं

1283
01:32:04,280 --> 01:32:08,320
है आप बीच में से स्क्रीन से चले गए थे एक बार रिपीट कर स्क्रीन से चले गए थे

1284
01:32:08,320 --> 01:32:12,560
आप पहले आसक्ति थी जिसके कारण मिलने

1285
01:32:12,560 --> 01:32:16,880
वाली इंफॉर्मेशन के आधार पर हम प्रभावित होते थे और अभी हमको

1286
01:32:16,880 --> 01:32:20,960
जो कि मोक्ष मिल गया है तो अब क्या परिवर्तन ऐसा आया जिसकी वजह से

1287
01:32:20,960 --> 01:32:25,000
अभी भी वो इंफॉर्मेशन अगर मिल रही है मगर हम प्रभावित नहीं हो

1288
01:32:25,000 --> 01:32:29,080
रहे हां हो गया आपका क्वेश्चन बोलिए ठीक

1289
01:32:29,080 --> 01:32:33,240
है सबसे पहली बात तो ऐसा जरूरी नहीं है ऐसा जरूरी नहीं है कि

1290
01:32:33,240 --> 01:32:37,560
अब प्लीज कट मत करिए ऐसा जरूरी बिल्कुल भी नहीं है कि मोक्ष के बाद ही आपकी सारी

1291
01:32:37,560 --> 01:32:41,680
आसक्ति छूट जाएगी ये आवश्यक नहीं है आप इस जन्म में जीवित रहकर भी इस

1292
01:32:41,680 --> 01:32:43,520
शरीर में रहकर भी आप सभी भौतिक आसक्ति

1293
01:32:43,520 --> 01:32:48,000
हों से दूर रह सकते हो ठीक है क्योंकि आपका य जीवन मिला है तो ओबवियसली

1294
01:32:48,000 --> 01:32:52,240
भौतिक आसक्ति छूट चुकी है इसलिए मोक्ष मिल रहा है ठीक है तो इसी जन्म में आसक्ति

1295
01:32:52,240 --> 01:32:56,800
छूटी है इसलिए तो मोक्ष मिल रहा है ठीक है अब इसी जन्म में जब आसक्ति छूट रही है

1296
01:32:56,800 --> 01:33:01,240
अरे यार फिर से यार अभी मैंने 30 सेकंड भी नहीं बोला यार ये क्या

1297
01:33:01,240 --> 01:33:05,640
फिर से क्योंकि आप उस बात पर बात कर रहे जो मैंने पूछी नहीं है मैं अभी मोक्ष

1298
01:33:05,640 --> 01:33:10,000
के बारे में पूछ रहा हूं आप ये मत बताइए ये जो ज्ञान गंगा है

1299
01:33:10,000 --> 01:33:14,160
प्लीज मत दीजिए कि नहीं यहां पर भी आप छूट सकते हैं ये मैंने आपसे नहीं पूछा है

1300
01:33:14,160 --> 01:33:18,200
मैंने आपसे क्वेश्चन किया है इमेशन अभी हमको दुख

1301
01:33:18,200 --> 01:33:22,440
पहुंचा रही है वो मुक्त होने के बाद ऐसा क्या चेंज आएगा कि वो इंफॉर्मेशन हमें

1302
01:33:22,440 --> 01:33:26,440
दुख नहीं पहुंचाएगी वो क्या है चेंज चेंज इसी जन्म में

1303
01:33:26,440 --> 01:33:30,440
आ जाता है ठीक है फिर मोक्ष के बाद आ

1304
01:33:30,440 --> 01:33:33,800
वो क्या है वो क्या कारण

1305
01:33:33,800 --> 01:33:37,960
है वो चेंज ये है कि जीवात्मा है जो अभी भौतिक

1306
01:33:37,960 --> 01:33:41,960
आसक्ति में लगी हुई है वो आसक्त नहीं है यही चेंज है सिंपल और क्या

1307
01:33:41,960 --> 01:33:46,600
चेंज आएगा अरे आसक्त है क्यों यह बताओ क्यों आसक्त

1308
01:33:46,600 --> 01:33:50,680
है क्यों आ सकते अभी तो क्रिएशन प आ जाएगा पूरा हा

1309
01:33:50,680 --> 01:33:54,720
बताओ बरारा अच्छा अभी पूरा का पूरा

1310
01:33:54,720 --> 01:33:58,880
जो देखो अभी है ना विष तरण तो हो गया ठीक है कि क्यों आ

1311
01:33:58,880 --> 01:34:03,040
नहीं मैं अपने विषय प ही हूं मैं बोल रहा हूं आपको एक आप सिंपल सी एक बात

1312
01:34:03,040 --> 01:34:07,200
नहीं बता पाए कि क्योंकि जो जीवात्मा है उसको शरीर

1313
01:34:07,200 --> 01:34:11,520
की इंद्रियों के कारण जो दुख दर्द तकलीफ लग रहे है जो कि है नहीं

1314
01:34:11,520 --> 01:34:15,760
झूठे हैं वो और आत्मा को जब वो मुक्त होती है तो ये पता लगता

1315
01:34:15,760 --> 01:34:19,800
है कि ये सब बकवास था ऐसा झूठ तो नहीं है झूठ तो

1316
01:34:19,800 --> 01:34:24,000
आप नहीं कह सकते इसको हां तो फिर बताइए फिर वो क्या अंतर आ रहा हैप

1317
01:34:24,000 --> 01:34:28,080
टेंपररी चीज होने में सुनो टपरी चीज बस वो हो जाता है उसको बताया नहीं

1318
01:34:28,080 --> 01:34:32,080
जा सकता टेंपररी चीजों सुनो जो चीजें टेंपररी होती है

1319
01:34:32,080 --> 01:34:36,080
वो झूठ नहीं होती जरूरी नहीं कि टेंपररी वो झूठ जब मेरा

1320
01:34:36,080 --> 01:34:40,200
बेटा आज रो रहा है मेरी बिटिया आज रो रही है मुझे

1321
01:34:40,200 --> 01:34:44,400
दुख हो रहा है क्योंकि मैं भी अपने शरीर के द्वारा इस भौतिक जगत से जुड़ा

1322
01:34:44,400 --> 01:34:48,600
हुआ हूं और वो भी जुड़ी हुई है मगर जब मैं मुक्त हो जाऊंगा और

1323
01:34:48,600 --> 01:34:52,800
मैं उसको रोता हुए देखूंगा तो मैं ये जानू कि बकवास है इसको कोई दुख

1324
01:34:52,800 --> 01:34:56,880
नहीं हो रहा है वस्तुत तो सब कुछ सही है इसका यह जीवात्मा इसको कोई काट

1325
01:34:56,880 --> 01:35:02,880
नहीं सकता कोई मार नहीं सकता गलत

1326
01:35:03,520 --> 01:35:07,800
बोनेरा मेरे पास तो उत्तर य है कि उसको यह पता लग जाएगा

1327
01:35:07,800 --> 01:35:11,920
कि ये भौतिक जगत से मिलने वाली जो इंफॉर्मेशन है यह झूठ है

1328
01:35:11,920 --> 01:35:15,960
यह सच नहीं है इसलिए मेरी बेटी जब रो रही होगी मेरा भाई जब रो रहा

1329
01:35:15,960 --> 01:35:20,200
होगा तो मुझे कष्ट नहीं होगा अब आप बताइए उसको क्या पता लगेगा जिसके

1330
01:35:20,200 --> 01:35:24,560
कारण उसकी आसक्ति नहीं होगी हा हो गया आपका क्वेश्चन

1331
01:35:24,560 --> 01:35:28,680
अब सुनोगे हां हो गया हां सुनो पहली बात तो ये कह

1332
01:35:28,680 --> 01:35:32,680
देना कि मुक्ति के बाद वो ऐसा सोचेगा मुक्ति के बाद वो ऐसा सोचेगा

1333
01:35:32,680 --> 01:35:36,840
कि अरे ये तो क्या झूठ है अरे मैंने ये नहीं बोला कि दया दया नहीं रहेगी मैंने

1334
01:35:36,840 --> 01:35:40,920
ये तो बोला ही नहीं आसक्ति नहीं रहेगी मतलब आसक्ति मतलब क्या मैंने अपना ये

1335
01:35:40,920 --> 01:35:45,080
मैंने अपना उत्तर बताया है आप मुझे बताइए कौन सा परिवर्तन

1336
01:35:45,080 --> 01:35:49,440
आएगा जिसके कारण मुक्ति के बाद वो अपने नाते रिश्तेदारों को

1337
01:35:49,440 --> 01:35:53,880
कष्ट में देखकर दुखी नहीं होगा आप अपना उत्तर बताइए प्लीज

1338
01:35:53,880 --> 01:35:58,640
अरे तो बता अरे तीन बार बता चुका हूं जब आपको दर्द हो रहा हैता

1339
01:35:58,640 --> 01:36:02,680
क्या बताया जब आपको किसी हा मैंने आपको बताया एक बार रिवाइंड भी कर लेना आपने सुना नहीं कि पता

1340
01:36:02,680 --> 01:36:06,800
नहीं जब आप मैंने आपको पहले एग्जांपल भी दिया था कि जब मैं किसी गरीब को

1341
01:36:06,800 --> 01:36:10,840
देखता हूं तो मुझे उससे जो दया आ रही है मुझको उस उसको देखकर मुझे दया

1342
01:36:10,840 --> 01:36:14,880
आ रही है वो भौतिक लेवल की दया है ठीक है खाना खा लेगा

1343
01:36:14,880 --> 01:36:19,800
इसको मैं पैसे दे देता हूं तो यह भौतिक लेवल की दया है इससे आत्मा का उद्धार

1344
01:36:19,800 --> 01:36:24,000
सुनो अभी बिल्कुल नहीं वो उसको जो उसको जो आसक्ति

1345
01:36:24,000 --> 01:36:28,080
हो रही है उसको जो आसक्ति वाली दया हो रही है उसको भौतिक लेवल की भौतिक मटेरियल

1346
01:36:28,080 --> 01:36:32,240
अटैचमेंट की बात करते हैं मटेरियल लेवल का जो दया है उसकी बात करते हैं ठीक है मटेरियल

1347
01:36:32,240 --> 01:36:36,320
लेवल की मर्सी जो है ठीक है तो उसको जो फील हो रही है कि ये इसको

1348
01:36:36,320 --> 01:36:40,640
मैं ये दे दूंगा तो ये थोड़ा खा लेगा तो थोड़ा इसका पेट भर जाएगा ठीक है तो ये भौतिक

1349
01:36:40,640 --> 01:36:44,640
उद्धार की बात हो रही है भौतिक उद्धार के लेवल की दया है ये ठीक है लेकिन

1350
01:36:44,640 --> 01:36:48,840
आध्यात्मिक लेवल की जो दया होती है कि जितने भी जीवात्मा है

1351
01:36:48,840 --> 01:36:52,960
वो क्या कहते हैं जितने भी जीवात्मा है वो इस संसार में

1352
01:36:52,960 --> 01:36:57,320
दुख भोग ठीक है इस संसार में दुख भोग रहे हैं तो

1353
01:36:57,320 --> 01:37:02,000
दया य आती है कि काश व भक्ति कर ले तो इन सारे दुखों से वह छूट जाएगा

1354
01:37:02,000 --> 01:37:06,080
तो य पर दया उसको पेन नहीं हो रहा उसको बस यह है कि यह भी जीवात्मा है

1355
01:37:06,080 --> 01:37:10,120
मैं भी जीवात्मा हूं हम सब उस हरि के ही एक शक्ति है उस हरी की

1356
01:37:10,120 --> 01:37:14,560
हम लोग ठीक उही के दास है प्रभावित नहीं हो रहा है

1357
01:37:14,560 --> 01:37:18,720
वो प्रभावित नहीं हो रहा है ना मुक्ति के बाद प्रभावित किस तरीके

1358
01:37:18,720 --> 01:37:22,880
से नहीं हो रहा वो बताओ अरे जैसे भगवान नहीं होते प्रभावित जैसे

1359
01:37:22,880 --> 01:37:27,120
भगवान नहीं होते प्रभावित के वो जानते हैं कि सब कुछ क्या है क्या नहीं है तो वो जानते

1360
01:37:27,120 --> 01:37:31,200
हैं उनको दया तो आती है कि ये लोग भक्ति कर ले मेरी तो ये मुक्त हो जाएंगे उनको दया तो

1361
01:37:31,200 --> 01:37:35,000
है करुणा है मगर भगवान प्रभावित विचलित नहीं होते ऐसे

1362
01:37:35,000 --> 01:37:39,080
ही वो जो मुक्त हो जाएगा वो भी विचलित नहीं होगा विचलित नहीं

1363
01:37:39,080 --> 01:37:43,160
होगा ठीक है विचलित नहीं होगा लेकिन किस तरीके देखो विचलित अगर कोई हो

1364
01:37:43,160 --> 01:37:47,280
भी रहा है तो उसम हम मटेरियल स्पिरिचुअल एंगल ला सकते उसम क्यों

1365
01:37:47,280 --> 01:37:51,280
नहीं ला सकते तो मैं आपकी बात को मान तो लिया कि वो जो मटेरियल

1366
01:37:51,280 --> 01:37:55,320
स्टिक जो चीज है वो खत्म हो जाएगी उसकी जो कनेक्शन है

1367
01:37:55,320 --> 01:37:59,360
मैटेरियलिस्टिक मटेरियल कनेक्शन खत्म हो जाएगा लेकिन जो ऑलरेडी स्पिरिचुअल

1368
01:37:59,360 --> 01:38:03,440
कनेक्शन एस्टेब्लिश है वो तो रहेगा ना कम से कम कि वो भी छूट जाएगा मैं कहा कह रहा हूं

1369
01:38:03,440 --> 01:38:07,440
नहीं रहेगा भाई आगे बात करें आपको समझ में आ गया आपको समझ में

1370
01:38:07,440 --> 01:38:11,800
आ गया कहां आया बात बोल मोल हो ग अब ये जो मेरिस्टिक कनेक्शन

1371
01:38:11,800 --> 01:38:16,280
आज है ऐसा क्या होगा कि ये कट जाएगा

1372
01:38:16,280 --> 01:38:20,360
जब आपकी जब अनर्थ निवृत्ति होगी तो धीरे धीरे कट जाएगा

1373
01:38:20,360 --> 01:38:24,360
वो क्या चीज होगी इंफॉर्मेशन में क्या चेंज आ जाएगा जो बदल

1374
01:38:24,360 --> 01:38:28,360
जाएगा इंफॉर्मेशन में एक इंफॉर्मेशन घट जाएगी कि ये मेरा है

1375
01:38:28,360 --> 01:38:32,440
ऐसे ये इंफॉर्मेशन घट जाएगी मतलब आज जो हमें महसूस हो रहा है कि मेरा

1376
01:38:32,440 --> 01:38:36,800
है ये गलत इंफॉर्मेशन है हां ये इंफॉर्मेशन गलत है लेकिन आप एक्सपीरियंस

1377
01:38:36,800 --> 01:38:41,120
जो कर रहे हो वो रियल है मतलब झूठी है ये झूठ

1378
01:38:41,120 --> 01:38:45,160
अरे यार देखो पता है मैं आपको बता मुझे पता है कि आप वर्ड्स को कैसे ये करने

1379
01:38:45,160 --> 01:38:49,480
वाले हो झूठ नहीं है सत्य है एसिस्टिंग है

1380
01:38:49,480 --> 01:38:54,160
अभी आपने बोला गलत है अभी आपने बोला गलत है

1381
01:38:54,160 --> 01:38:58,160
गलत होने में गलत होने में और एसिस्टिंग जैसे कि कोई चोर है तो चोर है वो

1382
01:38:58,160 --> 01:39:00,880
चोरी कर रहा है तो गलत है चोरी कर रहा है गलत है ठीक

1383
01:39:00,880 --> 01:39:05,080
है भावना की बात कर रहा हूं भाई साहब भावना आपको एक

1384
01:39:05,080 --> 01:39:09,160
इंफॉर्मेशन आ रही है कि मेरे बेटे को कष्ट हो रहा है मेरी भाई

1385
01:39:09,160 --> 01:39:13,200
को कष्ट हो रहा है तो आपको आपने कहा कि

1386
01:39:13,200 --> 01:39:17,520
उसको यह पता लग जाएगा कि ये मेरा नहीं है

1387
01:39:17,520 --> 01:39:18,020
तो

1388
01:39:17,680 --> 01:39:21,680
ये जो मेरा होने की भावना अभी आपको आ रही है वो गलत आ रही

1389
01:39:21,680 --> 01:39:26,040
है ना वो नहीं है ना वो सही नहीं है ना ये झूठ है ना कि वो मेरा है झूठ

1390
01:39:26,040 --> 01:39:30,720
नहीं है एक सेकंड एक सेकंड अभी मैं बोलू अब मैं बोल लू बोलो

1391
01:39:30,720 --> 01:39:34,760
ठीक है अब जैसे कि फॉर एग्जांपल मुझको ये भावना आ रही है किय

1392
01:39:34,760 --> 01:39:38,800
जो माता है यह मेरी है ठीक है यह भावना है मेरे अंदर किय मेरी मां

1393
01:39:38,800 --> 01:39:43,040
है मुझे जन्म दिया ठीक है तो मैंर चाहूं अगर

1394
01:39:43,040 --> 01:39:49,040
मैं चाहूं तो उस प्रेम को मैं स्पिरिचुलाइज्ड

1395
01:39:53,680 --> 01:39:57,720
लेवल का है वो प्रेम ठीक है तो उसी प्रकार से जो

1396
01:39:57,720 --> 01:40:02,080
जब व्यक्ति की भौतिक लेवल की आसक्ति छूटती है तो आध्यात्मिक लेवल पर तो उसको मैं मा मानूंगा

1397
01:40:02,080 --> 01:40:07,200
ना हमारे इसम तो य सभी स्त्रिया माता है भो

1398
01:40:07,200 --> 01:40:07,760
मैं ये कह रहा

1399
01:40:07,760 --> 01:40:11,760
हूं आप मानिए आध्यात्मिक ये जो मैटेरियलिस्टिक मां मान रहे हैं यह झूठ है

1400
01:40:11,760 --> 01:40:16,480
कि नहीं है यह सत्य है कि झूठ है यह भावना जो आ रही है मेरी मां है मैटेरियलिस्टिक

1401
01:40:16,480 --> 01:40:20,560
स्पिरिचुअल मा नहीं मैटेरियलिस्टिक मा जो आप मान रहे हैं जो उससे

1402
01:40:20,560 --> 01:40:24,560
जुड़े हुए हैं यह झूठ है कि सत्य है यह बताइए झूठ झूठ

1403
01:40:24,560 --> 01:40:28,560
नहीं कह सकते य झूठ मतलब वो एस्टिंग झूठ मतलब

1404
01:40:28,560 --> 01:40:33,640
क्या एस्टिंग नहीं आप उसकी बात कर भावना

1405
01:40:33,640 --> 01:40:38,120
भावना वो भावना रियल है की फील हो रही है लेकिन व भावना एक्चुअली अटैचमेंट

1406
01:40:38,120 --> 01:40:42,160
के कारण फील हो रही है तो मैं वही तो कह रहा हूं कि आपको ऐसा

1407
01:40:42,160 --> 01:40:46,240
क्या पता लगेगा कि व अटैचमेंट नहीं है व आपको क्या पता लगेगा य मेरी

1408
01:40:46,240 --> 01:40:50,360
मां नहीं है ऐसा क्या होगा जिसके

1409
01:40:50,360 --> 01:40:55,600
कारण जो आपको आज अपनी मां महसूस हो रही है बा

1410
01:40:55,600 --> 01:40:59,800
बार बोला ऐसा क्या होगा कि आपको फील होगा कि वो आपकी रियल बायोलॉजिकल मा

1411
01:40:59,800 --> 01:41:03,880
नहीं है आपको मैंने कहा अनर्थ निवृति जो आपकी जो अनर्थ है आपके अंदर जो आपकी

1412
01:41:03,880 --> 01:41:07,920
भोग आसक्ति है ठीक है जो वो कम होते जाएगी कम होते जाएगी धीरे धीरे तो

1413
01:41:07,920 --> 01:41:11,960
अपने रि ये भावना एजिस्ट करेगी बस आप इस भावना से

1414
01:41:11,960 --> 01:41:16,040
डिस्कनेक्ट हो जाएंगे एटली तो झूठ थोड़ी ना हो जाएगा आप क

1415
01:41:16,040 --> 01:41:20,160
झूठ है ठीक है अब मैं प्रश्न को और बढ़ाता हूं आगे इस भावना

1416
01:41:20,160 --> 01:41:25,240
से मैं जुड़ा हुआ हूं यह झूठ है कि सत्य है

1417
01:41:25,240 --> 01:41:29,280
मतलब यह जो भावना है कि यह भावना सही मान रहा

1418
01:41:29,280 --> 01:41:33,560
हूं मैं आज कल को यही भावना एजिस्ट करेगी मगर मैं अपने आपको को यह बताऊंगा

1419
01:41:33,560 --> 01:41:37,920
कि वो भावना झूठी थी यही तो है इसका आपने कहा सुनो

1420
01:41:37,920 --> 01:41:42,200
भावना झूठी नहीं हो सकती भावना गलत हो सकती है

1421
01:41:42,200 --> 01:41:46,880
भावना झूठी नहीं हो सकती भावना गलत हो सकती है बिल्कुल झूठ

1422
01:41:46,880 --> 01:41:51,080
और गलत में बहुत अंतर है यानी कि मेरा एक मिनट

1423
01:41:51,080 --> 01:41:55,760
रुक जा मिनट एक मिनट एक मिनट एक मिनट एक

1424
01:41:55,760 --> 01:42:00,320
मिनट दो मिनट यार लेट मी फिनिश लेट मी फिनिश

1425
01:42:00,320 --> 01:42:03,320
ओके फाइन गो फ हा तो क्या है

1426
01:42:03,320 --> 01:42:07,720
आपने कहा भावना झूठी नहीं हो सकती गलत हो सकती है गलत की परिभाषा

1427
01:42:07,720 --> 01:42:12,200
क्या है गलत की परिभाषा यह है

1428
01:42:12,200 --> 01:42:16,280
ठीक है जो आप कोई सही कार्य नहीं करते ठीक है

1429
01:42:16,280 --> 01:42:20,680
कार्य करना नहीं चाहिए ऐसा कार्य आपको करना नहीं चाहिए

1430
01:42:20,680 --> 01:42:24,880
वो सत कर्म नहीं है वो अच्छे कार्य नहीं है ठीक है तो वो

1431
01:42:24,880 --> 01:42:28,960
वो हो जाता है गलत यानी मैं जोय भावना

1432
01:42:28,960 --> 01:42:33,120
मेरे अंदर आ रही है कि मैं उसको ऐसा समझू ऐसा समझ

1433
01:42:33,120 --> 01:42:37,320
रहा हूं वो मेरी मां है तो यह नहीं आनी चाहिए

1434
01:42:37,320 --> 01:42:43,320
ऐसा नहीं कि नहीं आनी चाहिए उसको स्पिच कर देना चाहिए खत्म हां

1435
01:42:52,120 --> 01:42:57,040
स्पिरिचुलाइज्ड वास्तविक वस्तु तो यही सच्चाई है ना कि नहीं जुड़ा हुआ हूं

1436
01:42:57,040 --> 01:43:01,760
जुड़ा हुआ हूं य तो स ये तो सच्चाई है ये तो

1437
01:43:01,760 --> 01:43:05,760
छोड़ कैसे सकते सत्य को क्या इस सत्य को

1438
01:43:05,760 --> 01:43:11,440
हम छोड़ कैसे सकते हैं जब ये सच्चाई है देखो सत्य के अलग

1439
01:43:11,440 --> 01:43:15,640
मीनिंग नहीं है ना कि वो मेरी मां है शाश्वत

1440
01:43:15,640 --> 01:43:19,840
सत्य का अर्थ क्या समझते हो आप मैं अपना

1441
01:43:19,840 --> 01:43:24,040
प्रश्न क्लियर कर दूं नहीं तो हमारा जो है दूसरी ओर चला जाएगा दोबारा मैं दोबारा से क्लियर

1442
01:43:24,040 --> 01:43:28,280
कर देता हूं क्वे आपका क्वेश्चन तो ठीक से पूछो हां

1443
01:43:28,280 --> 01:43:32,440
तो मैं इसीलिए पूछ रहा हूं क्लियर इसीलिए पूछ रहा हूं दोबारा आपने कहा

1444
01:43:32,440 --> 01:43:36,600
कि जो मेरे को यह लग रहा है कि वो मेरी मां है वो लगना

1445
01:43:36,600 --> 01:43:40,720
मुझे बंद हो जाएगा क्योंकि मुझे यह पता चल जाएगा कि यह जो मुझे लग

1446
01:43:40,720 --> 01:43:45,760
रहा था यह लग रहा था यह गलत था य नहीं लगना चाहिए था

1447
01:43:45,760 --> 01:43:49,760
हां तो जब मुझे जो चीज लग रही है और

1448
01:43:49,760 --> 01:43:53,800
वो जब मैं यह कह रहा हूं कि नहीं लगना चाहिए यानी कि उसकी प्र उसको नहीं मान रहा

1449
01:43:53,800 --> 01:43:58,360
हूं ना वहां पे जब मुझे ये

1450
01:43:58,360 --> 01:44:02,480
फीलिंग नहीं रहेगी जब मेरे अंदर कि ये मेरी भौतिक लेवल की मां

1451
01:44:02,480 --> 01:44:06,720
है जब ये फीलिंग मेरे अंदर से चली जाएगी तो मुझे तो अपने आप बोध हो जाएगा ना कि वो फीलिंग

1452
01:44:06,720 --> 01:44:07,480
अभी एजिस्ट

1453
01:44:07,480 --> 01:44:11,480
नहीं करती यानी कि बोध हो जाएगा यानी कि आपको कुछ ऐसा पता लगा

1454
01:44:11,480 --> 01:44:16,120
जो पहले आपको नहीं पता था हां बिल्कुल हो

1455
01:44:16,120 --> 01:44:20,240
सकता है या हो सकता है इसका मतलब अभी जो आपको इसका मतलब

1456
01:44:20,240 --> 01:44:24,240
अभी जो आपको पता है वो गलत है ना अभ मुझे आपने मुझे कट किया है

1457
01:44:24,240 --> 01:44:28,320
पूरा मुझे प्लीज पूरा सामने वाले को बोलने का मौका दिया करि यार

1458
01:44:28,320 --> 01:44:33,040
मैं बोलने देता हूं भाई बोलने बो भाई सीरियसली

1459
01:44:33,040 --> 01:44:37,200
सीरियसली तो हा ठीक है तो ऐसा भी हो सकता है कि

1460
01:44:37,200 --> 01:44:41,520
आपको क्योंकि साधना करता है व्यक्ति तो ऐसा नहीं कि एक दिन में वो उसका

1461
01:44:41,520 --> 01:44:45,560
हो जाए हो सकता है कि वो एक कंट्रोल लेवल पर आके फिर से भी गिर सकता है फिर

1462
01:44:45,560 --> 01:44:49,560
से अटैचमेंट में भी आ सकता है ये चांसेस है ठीक है तो ऐसा भी हो सकता

1463
01:44:49,560 --> 01:44:53,600
है उसने कुछ एक्सपीरियंस कर कि हा भाई आसक्ति तो जा रही है ठीक है फिर वापस

1464
01:44:53,600 --> 01:44:57,640
से आसक्ति आ भी जाती है ठीक है और मैं एक और बात बोलूंगा य ये यहां

1465
01:44:57,640 --> 01:45:01,680
प ना शो करना बंद करिए डिस्टर्ब हो रहा है इससे बारबार ये जो आपने कमेंट्स बारबार

1466
01:45:01,680 --> 01:45:05,880
पिन कर रहे हैं नेगेटिव कमेंट्स उसको हटा दीजिए भाई कमेंट

1467
01:45:05,880 --> 01:45:09,880
क्या बोला है इन्होंने जो भी है ना भाई भाई बहुत कुछ बोला है

1468
01:45:09,880 --> 01:45:13,960
भाई ये ना बहुत बकवास काम कर रहे हो आप बहुत गलत काम आप गंदे

1469
01:45:13,960 --> 01:45:18,280
गंदे कमेंट्स कर रहे हो भाई ये बहुत फ भाई

1470
01:45:18,280 --> 01:45:22,320
ये बहुत गलत बात आपकी बात मान ली है मैंने आपकी बात मान ली है मैं

1471
01:45:22,320 --> 01:45:22,820
बोल

1472
01:45:22,520 --> 01:45:26,760
रहा हूं अगर आप मेरे चैनल पर आते ना मैं ऐसी फालतू गिरी नहीं करता आपके

1473
01:45:26,760 --> 01:45:31,040
साथ ये बहुत गलत काम है आप किसी को बुला रहे देखिए वो कमेंट

1474
01:45:31,040 --> 01:45:35,400
ह आप अपनी नहीं है ये प्रोफेशनल एटीट्यूड नहीं प्रोफेशनल

1475
01:45:35,400 --> 01:45:39,400
छोड़ो एक इंसानियत के नाते तो मत करो य हरकत कम

1476
01:45:39,400 --> 01:45:43,400
से कम आप अपनी बात बोले फिर

1477
01:45:43,400 --> 01:45:47,480
से मत करिए और ये सब भाई बहुत गलत चीज है भाई य

1478
01:45:47,480 --> 01:45:51,920
सच में यार क्या प्रभु क्या बोलू इसको

1479
01:45:51,920 --> 01:45:55,960
प्रभु बो तो ठीक है ठीक है जो

1480
01:45:55,960 --> 01:46:00,000
भी डिस्टरबेंस हुआ है छोड़

1481
01:46:00,000 --> 01:46:04,160
दो आपका क्वेश्चन क्या है मैं एक बार फिर से रिकॉल कर लेता हूं कि आपका क्वेश्चन

1482
01:46:04,160 --> 01:46:08,360
यह है कि जो भावना जो उसको फील हो रही है वो झूठ है वो झूठ वो

1483
01:46:08,360 --> 01:46:12,840
जो भावना है वो झूठ नहीं है वो भावना जो है वो एक्सपीरियंस कर रहा है तो ये

1484
01:46:12,840 --> 01:46:17,080
सत्य है कि हां ये एक्सपीरियंस कर रहा है ठीक इट्स रियल रियल मीन सत्य

1485
01:46:17,080 --> 01:46:21,520
ठीक है सत्य के भी दो डेफिनेशन हो सकता है कि जो कभी चेंज ना हो वो सत्य होता है

1486
01:46:21,520 --> 01:46:25,760
ऐसा भी हो सकता है लेकिन कुछ टेंपररी चीजें होती है वो भी सत्य है ठीक है

1487
01:46:25,760 --> 01:46:29,880
जैसे कि कोई व्यक्ति है वो अनमैरिड है ठीक है कोई व्यक्ति है वो अनमैरिड है

1488
01:46:29,880 --> 01:46:33,880
तो ये सत्य है कि हां वो अनमैरिड है ठीक है लेकिन जब वो शादी कर लेगा तो

1489
01:46:33,880 --> 01:46:37,640
शादीशुदा हो जाएगा तो वहां प सत्य चेंज हो गया यहां पे ठीक है इस

1490
01:46:37,640 --> 01:46:41,680
तरीके से क्योंकि मटेरियल वर्ल्ड में सत्य बारबार चेंज हो रहता है ठीक

1491
01:46:41,680 --> 01:46:45,720
है लेकिन जो लेकिन जो प्रेम होता है ठीक

1492
01:46:45,720 --> 01:46:49,720
है जो प्रेम होता है वो कभी भी चेंज नहीं होता आसक्ति छूट सकती है हो सकता

1493
01:46:49,720 --> 01:46:53,880
है कि मैं मेरी मां के प्रति इतना प्रेम में आ जाऊं जब मैं उनको एज अ सोल

1494
01:46:53,880 --> 01:46:58,080
रिलाइज करू कि हां व वो जो माता है वो इतना मुझको प्रेम करती है तो मैं उनको

1495
01:46:58,080 --> 01:47:02,600
एस सोल केस में इमेजिन करता कि हा यह जो संबंध है मां और पुत्र का वो आध्यात्मिक

1496
01:47:02,600 --> 01:47:06,640
हो जाएगा ठीक है और ऐसे कई उदाहरण है हमारे स्कन टेंपल में कि जो माता पिता

1497
01:47:06,640 --> 01:47:10,840
है वो जो पुत्र प्राप्ति करते वो यही इंटेंशन रखते हैं कि ये जो बच्चा

1498
01:47:10,840 --> 01:47:15,080
मुझे भगवान ने दिया है इसको मैं भगवत धाम पहुंचाओ यह मेरी जिम्मेदारी है

1499
01:47:15,080 --> 01:47:19,200
ठीक है अगर मैं ये नहीं करता तो ये पाप हो ब बा मैं सच बता रहा हूं आप जो है ना

1500
01:47:19,200 --> 01:47:23,320
विषय से हटके बहुत बहुत व्याख्या कर रहे हैं बहुत व्याख्या

1501
01:47:23,320 --> 01:47:27,320
कर रहे हैं आप वो पॉइंट बता ही नहीं पा रहे मैं अपना और सिंपल कर

1502
01:47:27,320 --> 01:47:31,520
देता हूं क्वेश्चन मेरे शरीर को आज चोट लग रही है मुझे

1503
01:47:31,520 --> 01:47:35,680
अपने शरीर को सत्य मान रहा हूं मैं आज तो बाद में क्या मुझे

1504
01:47:35,680 --> 01:47:40,160
क्या वास्तविकता में मेरा शरीर सत्य है यह मेरा शरीर

1505
01:47:40,160 --> 01:47:46,160
है यह अभी के लिए तो आपका शरीर है क्योंकि आप जो एक्सपीरियंस कर

1506
01:47:46,840 --> 01:47:51,080
रहे वहा के लिए भीय मेरा शरीर है इसे अपना शरीर मानना

1507
01:47:51,080 --> 01:47:55,080
सही होगा मोक्ष जाएगा तो वो शरीर नहीं रहेगा आपका वो

1508
01:47:55,080 --> 01:47:59,080
तो यानी कि ये जो मैं मान रहा हूं कि ये मेरा शरीर है ये गलत मान रहा हूं ना

1509
01:47:59,080 --> 01:48:04,280
हां गलत ही तो मान रहे हो लेकिन आप मान रहे हो ये भी लेकिन आप मान रहे

1510
01:48:04,280 --> 01:48:08,400
हो अरे आप उस चीज को मान रहे हो ये तो रियलिटी है ना मेरे भाई

1511
01:48:08,400 --> 01:48:12,800
अगर आप नहीं मान रहे अगर आप अपने आप को शिवांश द्विवेदी नहीं मानते तो आप अपना नाम क्यों रखते

1512
01:48:12,800 --> 01:48:16,920
शिवांश द्विवेदी अरे तो इसका मतलब जो शरीर के द्वारा प्राप्त होने

1513
01:48:16,920 --> 01:48:21,160
वाले मैसेजेस हैं जिनके कारण मैं दुखी होता हूं प्रभावित होता हूं इसका

1514
01:48:21,160 --> 01:48:25,240
मतलब कि ये सारे मैसेजेस झूठ है ना और इस झूठ को खत्म

1515
01:48:25,240 --> 01:48:29,920
करना ही अपनी लाइफ से यही मोक्ष है

1516
01:48:29,920 --> 01:48:34,000
अरे भाई झूठ कैसे बोल सकते हैं हम उसको गलत बोल सकते हैं ना झूठ कैसे

1517
01:48:34,000 --> 01:48:38,400
बोल झूठ मतलब जो एसिस्ट ही नहीं करता फल्स फल्स स्टेटमेंट

1518
01:48:38,400 --> 01:48:42,440
अरे मैं किसी शरीर िक

1519
01:48:42,440 --> 01:48:46,880
देना सुनो ऐसा लज देना आसमान से ते सुनो एक सेकंड नहीं

1520
01:48:46,880 --> 01:48:50,960
आसमान से भाई मैंने ना आसमान में देखा फूल उग रहे हैं ठीक है ऐसा किसीने जाके झूठ बोल दिया

1521
01:48:50,960 --> 01:48:55,120
तो चीज एजिस्ट नहीं कर रही है ठीक है वो चीज एजिस्ट

1522
01:48:55,120 --> 01:48:59,400
नहीं कर रही है व पर उस समय पर ऐसी कोई चीज रियलिटी में

1523
01:48:59,400 --> 01:49:01,840
हो सता हम कोई दूसरी रिलिटी देखे तो कपलीट

1524
01:49:01,840 --> 01:49:06,000
डिफरेंट हो सकता है दूसरा यूनिवर्स उसके ऊपर मैं नहीं आऊंगा जनरल

1525
01:49:06,000 --> 01:49:10,880
जनरली बोल रहा बात कनागा

1526
01:49:10,880 --> 01:49:14,880
उ के लिए अरे मत कट

1527
01:49:14,880 --> 01:49:17,480
करते जाओ

1528
01:49:17,480 --> 01:49:22,320
याना मिनट से बोल रहे थे अभी अगर कुछ बोलना चा रहा तो कट मत करो

1529
01:49:22,320 --> 01:49:26,360
मिनट तो कैसे भी नहीं हुआ है 10 मिनट तो कैसे भी नहीं अभी अभी मेरी बात सुनिए

1530
01:49:26,360 --> 01:49:30,400
आप जो चेतना की बात मैं कर रहा हूं कि चेतना ऐसी हो रही है तो आप

1531
01:49:30,400 --> 01:49:34,400
उसके लिए उदाहरण दे रहे हैं मटेरियल चीजों का मैंने

1532
01:49:34,400 --> 01:49:38,760
आपको ये पूछा कि ये जो भावना जो मुझे अपनी लग रही है वो मेरी

1533
01:49:38,760 --> 01:49:43,040
मां है वो जो भावना है वो सत्य भावना है

1534
01:49:43,040 --> 01:49:47,160
असत्य भावना है वो मेरी मां है कि नहीं है वास्तविकता

1535
01:49:47,160 --> 01:49:51,200
में वो आपकी सुनो सुनो वास्तविकता में और क्या हम फील

1536
01:49:51,200 --> 01:49:55,560
करते उस दोनों में डिफरेंस होता है पहली तो मैं कहां कह रहा हूं कि आप मुझे फील बताओ

1537
01:49:55,560 --> 01:49:59,680
मैं कह रहा हूं आप मुझे वास्तविकता बताओ हां तो बता तो रहा हूं कि वो

1538
01:49:59,680 --> 01:50:03,720
जो उसकी अगर बायोलॉजिकली अगर हम बात करें तो बायोलॉजिकली उसकी वो मां है

1539
01:50:03,720 --> 01:50:07,800
बायोलॉजिकली नहीं वो जो मैं समझ रहा हूं कि वो मेरी मां है मैं उसके दुख दर्द

1540
01:50:07,800 --> 01:50:11,920
तकलीफ से कनेक्ट हो रहा हूं क्या ये सही इंफॉर्मेशन है सही समझ रहा

1541
01:50:11,920 --> 01:50:16,680
हूं या वास्तविकता कुछ और है आप समझ तो जो इंफॉर्मेशन आपको

1542
01:50:16,680 --> 01:50:17,180
आपका

1543
01:50:16,840 --> 01:50:20,840
ब्रेन दे रहा है आपका माइंड सॉरी माइंड आपका माइंड जो आपको इंफॉर्मेशन दे रहा है कि

1544
01:50:20,840 --> 01:50:25,400
यह मेरी मां है जो थॉट थॉट माइंड में आते हैं पहली बात मैं आपको मैटेरियलिस्टिक

1545
01:50:25,400 --> 01:50:29,400
वास्तविकता नहीं पूछ रहा हूं अंततोगत्वा वाली वास्तविकता पूछ

1546
01:50:29,400 --> 01:50:33,400
रहा हूं सही है कि गलत है गलत है अगर अगर

1547
01:50:33,400 --> 01:50:35,920
आध्यात्म की बात करेंगे तो हां ये बात गलत है कि ये मेरी

1548
01:50:35,920 --> 01:50:40,000
मां है वो चीज ये नहीं है कि मां समझना है ये

1549
01:50:40,000 --> 01:50:44,120
झूठ हुआ ना क्या हु झूठ नहीं गलत हुआ यार झूठ

1550
01:50:44,120 --> 01:50:45,400
नहीं होता गलत होता है

1551
01:50:45,400 --> 01:50:49,440
मैं मा मैं मां के एक्जिस्टेंस प नहीं बात कर रहा हूं उसको मां समझने प बात कर

1552
01:50:49,440 --> 01:50:54,480
रहा हूं मा के प्रकृति के मैं मां के

1553
01:50:54,480 --> 01:50:59,720
एसिस्टेंसिया

1554
01:50:59,720 --> 01:51:04,120
हूं मां दुनिया में है कि नहीं है वो मैटर नहीं है

1555
01:51:04,120 --> 01:51:08,280
वो मेरी मां है वो मेरी मां है ये जो भावना अभी

1556
01:51:08,280 --> 01:51:12,480
मेरे है ये झूठी है ना वो मेरी मां नहीं है ना जो भावना

1557
01:51:12,480 --> 01:51:16,640
आपको आ रही है आप उदाहरण में ये कहते हैं कि इसका मतलब ये नहीं कि मां है ही नहीं मां

1558
01:51:16,640 --> 01:51:20,840
है वो जो वो जो चित्र है वो जो वो जो चित्र

1559
01:51:20,840 --> 01:51:24,960
है शरीर है वो दुनिया में है मगर वो मेरे से कनेक्टेड है

1560
01:51:24,960 --> 01:51:29,000
मगर वो मेरे से कनेक्टेड है ये भावना जो है ये झूठी भावना है

1561
01:51:29,000 --> 01:51:33,040
कि नहीं ये बताइए अच्छा भावना आप भावना की बात कर रहे हैं भावना

1562
01:51:33,040 --> 01:51:37,240
मींस क्या जो एक्सपीरियंस कर रहा है उसकी बात कर रहे हो आप आपके पास जो चेतना पहुंच

1563
01:51:37,240 --> 01:51:41,320
रही है इंफॉर्मेशन पहुंच रही है ये झूठी इंफॉर्मेशन है

1564
01:51:41,320 --> 01:51:43,760
कि नहीं

1565
01:51:43,760 --> 01:51:48,200
झूठी इंफॉर्मेशन कैसे हो गई ये तो आप रियल रियलिटी में उसको एक्सपीरिंस कर

1566
01:51:48,200 --> 01:51:52,360
वो आपकी मां है भावना जो आप फल कर बताइए वो मेरी मां

1567
01:51:52,360 --> 01:51:56,680
है मां आत्मा की मां नहीं है

1568
01:51:56,680 --> 01:52:00,400
लेकिन आप जो फील कर रहे हो वो रियल है

1569
01:52:00,400 --> 01:52:04,560
मगर अंत तो अच्छा मेरी मेरी सच्चाई क्या है वास्तविकता मैं कौन

1570
01:52:04,560 --> 01:52:08,600
हूं आत्मा हूं कि नहीं जीव स्वरूप हो कृष्ण

1571
01:52:08,600 --> 01:52:12,800
और नित्य दास आत्मा हू कि नहीं जीवात्मा हो

1572
01:52:12,800 --> 01:52:18,600
आप कहा तो सही जीव स्वरूप कृष्ण नित्य दस आपने क्वेश्चन पूछा मैं

1573
01:52:18,600 --> 01:52:22,760
कौन आत्मा तो वास्तविकता मेरी आत्मा है आज

1574
01:52:22,760 --> 01:52:27,680
मैं यह समझ रहा हूं कि वो मेरी मां है तो य झूठी इंफॉर्मेशन

1575
01:52:27,680 --> 01:52:31,800
हुई झूठी मी कैसे ूठी मस्ट होसे मेरी

1576
01:52:31,800 --> 01:52:36,280
मा नहीं है मैं गलत समझ रहा हूं सिंपल गलत समझ रहेने

1577
01:52:36,280 --> 01:52:40,360
मना किया गलत सम होमा आत्मा की

1578
01:52:40,360 --> 01:52:46,360
दृष्टि से मैं गलत समझ रहा हूं जैसे

1579
01:52:49,080 --> 01:52:53,520
की मिनट एक मिनट नैनम चिंद

1580
01:52:53,520 --> 01:52:57,880
सण नैनम दहति पाव ना चन क्लेंप ना शति

1581
01:52:57,880 --> 01:53:01,920
मारता मेरी वास्तविकता य है मेरी वास्तविकता ये है कि

1582
01:53:01,920 --> 01:53:06,000
देही नित्यम देह में रहने वाला जो वो है

1583
01:53:06,000 --> 01:53:10,240
वो शाश्वत है उसको ना काटा जा सकता है ना मारा जा सकता है कुछ नहीं है

1584
01:53:10,240 --> 01:53:14,360
अभी कोई मुझे मारने आ रहा है तो मारने के कारण वो जो मारने

1585
01:53:14,360 --> 01:53:18,640
आ रहा है मैं उसके एक्जिस्टेंस को मना नहीं कर रहा हूं कि वो है ही नहीं मगर उसके

1586
01:53:18,640 --> 01:53:22,800
कारण एक मिनट लेट मी फिनिश उससे जो ने

1587
01:53:22,800 --> 01:53:27,720
वाली इमेशन मुझे मिल रही है मैं डर रहा हूं प्रभावित हो रहा हूं ये इंफॉर्मेशन गलत

1588
01:53:27,720 --> 01:53:32,680
है झूठ है वास्त में मुझे कोई नहीं मार

1589
01:53:32,680 --> 01:53:36,800
सकता नहीं नहीं नहीं आप जो एक्सपीरियंस एक्सपीरियंस कर रहे

1590
01:53:36,800 --> 01:53:40,840
एक्सपीरियंस कौन कर रहा है वो बताओ वो गलत एक्सपीरियंस

1591
01:53:40,840 --> 01:53:44,920
है ना झूठा है माया है वो मैंने क्या क्वेश्चन पूछा एक्सपीरियंस कौन कर

1592
01:53:44,920 --> 01:53:49,200
रहा है वो बताओ आत्मा आत्मा एक्सपीरियंस

1593
01:53:49,200 --> 01:53:53,560
कर रही है मतलब आत्मा एक्सपीरियंस करती है ये बात सत्य हा

1594
01:53:53,560 --> 01:53:57,920
तो इसका मतलब सत्य है अब ये बताओ अब ये बताओ आप वीडियो गेम खेलते

1595
01:53:57,920 --> 01:53:58,920
हो

1596
01:53:58,920 --> 01:54:03,080
क्या आप वीडियो गेम खेला है कभी आपने हां बचपन में खेला

1597
01:54:03,080 --> 01:54:07,200
है फिल्में देखी है आपने कभी हां

1598
01:54:07,200 --> 01:54:11,640
तो उसमें जब अच्छा होता है तो हमको अच्छा फील होता है कि

1599
01:54:11,640 --> 01:54:15,720
नहीं हां अगर कुछ बुरा होता है

1600
01:54:15,720 --> 01:54:19,760
इमोशन आते हैं तो हम इमोशन होते हैं कि नहीं हां

1601
01:54:19,760 --> 01:54:23,880
आत्मा एक्सपीरियंस करती है उन सारे इमोशंस को तो वास्तविकता में व जो वीडियो गेम

1602
01:54:23,880 --> 01:54:28,800
में हो रहा होता है व सब कुछ सच होता है नहीं

1603
01:54:28,800 --> 01:54:32,600
झूठ होता है वीडियो गेम में

1604
01:54:32,600 --> 01:54:36,760
और इस रियलिटी में बत अभी हम आगे चलेंगे

1605
01:54:36,760 --> 01:54:41,280
इसको आ चकोर कर अगर हम एक्सपीरियंस

1606
01:54:41,280 --> 01:54:45,360
कर रहे हैं तो वो सच है कि झूठ है अभी इसको बाद में आगे करेंगे अभी मैं पूछ रहा

1607
01:54:45,360 --> 01:54:50,280
हूं वीडियो गेम के अंदर की जो दुनिया है वो एजिस्ट करती है कि नहीं करती है

1608
01:54:50,280 --> 01:54:54,560
वीडियो गेम की दुनिया एजिस्ट नहीं करती नहीं करती मगर आपको तो एक्सपीरियंस

1609
01:54:54,560 --> 01:54:58,800
हो रहा है किसको एक्सपीरियंस हो रहा है वो एक्सपीरियंस

1610
01:54:58,800 --> 01:55:03,160
अलग है और मैं सं हम लोग आगे चलेंगे अभी हम लोग आगे चलेंगे

1611
01:55:03,160 --> 01:55:07,560
आगे चलेंगे अभी पहले वीडियो गेम के ऊपर बात कर ले आपको एक्सपीरियंस हो रहा

1612
01:55:07,560 --> 01:55:11,760
है हा हो रहा है तो इसका मतलब अगर एक्सपीरियंस हो रहा है तो वो सही

1613
01:55:11,760 --> 01:55:15,840
है वो रियल है आपको बताता आपने सिद्धांत ये दिया था

1614
01:55:15,840 --> 01:55:19,920
मैं क्लियर कर दूं कि अगर आत्मा को एक्सपीरियंस हो रहा है तो वो चीज

1615
01:55:19,920 --> 01:55:24,120
झूठी नहीं है और जब वो चीज झूठी नहीं है तो इसका मतलब

1616
01:55:24,120 --> 01:55:28,120
जिसके द्वारा वो एक्सपीरियंस हो रहा है वो रियल है अब आप कह रहे हो वीडियो गेम की दुनिया

1617
01:55:28,120 --> 01:55:32,320
जो है अनय है और जो हमको एक्सपीरियंस हो रहा है वहां पर

1618
01:55:32,320 --> 01:55:36,360
वो भी गलत है झूठा है अब बताइए मैं य बोला नहीं नहीं ऐसा नहीं

1619
01:55:36,360 --> 01:55:40,440
है अब जब मैं आपको बताता हूं जैसे जो जब मैं वीडियो गेम खेल रहा हूं

1620
01:55:40,440 --> 01:55:44,520
फॉर एग्जांपल तो उसम या कोई मूवी देख रहा हूं लेट्स टेक एन एग्जांपल मूवी मूवी

1621
01:55:44,520 --> 01:55:47,960
का एग्जांपल ज्यादा बेटर रहेगा ठीक है तो उसम एक्टर है

1622
01:55:47,960 --> 01:55:52,440
एक रोमांटिक सीन चल रहा है दोनों गले लगा रहे एक दूसरे को तो

1623
01:55:52,440 --> 01:55:56,720
जो गले लगा रहे तो ऐसे हां कितने अच्छे कपल है तो आपको देख के अच्छा लगेगा वो एक्चुअली

1624
01:55:56,720 --> 01:56:00,920
में कपल नहीं है वो वहा प नाटक कर रहे है वहा प ठीक है

1625
01:56:00,920 --> 01:56:05,040
कह रहा हूं वो माया है वही तो मैं कह रहा हूं वो माया

1626
01:56:05,040 --> 01:56:09,560
है अभी आपने ठीक है बोला है अभी आपने ठीक है बोला है तब बोल रहा

1627
01:56:09,560 --> 01:56:13,600
ह बोलेंगे तो मैं बोलूंगा आगे सुनो आगे सुनो आगे सुनो अभी कट मत

1628
01:56:13,600 --> 01:56:17,640
कर एक्सपीरियंस कर रहा है ठीक है वो जो एक्सपीरियंस कर रहा

1629
01:56:17,640 --> 01:56:21,680
है उस चीज को देख के उस चीज को देख के जो एक्सपीरियंस कर रहा है कि मुझे खुशी मिल

1630
01:56:21,680 --> 01:56:25,680
रही है उस चीज को देखकर कुछ अच्छी चीज हो रही है ठीक है तो व

1631
01:56:25,680 --> 01:56:30,480
एक्सपी रियल है सिंपल सी बात

1632
01:56:30,480 --> 01:56:36,000
वो चल जो रहा है जो चल रहा है वो सुनो जो चल रहा है

1633
01:56:36,000 --> 01:56:40,080
एक एक्सपीरियंस है रियल है बकल एक्सपी

1634
01:56:40,080 --> 01:56:45,040
जो रियल हैब एक्सपीरियंस रियल है

1635
01:56:45,040 --> 01:56:49,640
जब एक्सपीरियंस रियल है तो य बाद में कहां चले जाते हैं

1636
01:56:49,640 --> 01:56:54,680
जो चीज अस्तित्व में है मेरे अंदर

1637
01:56:54,680 --> 01:56:58,760
तोय चली जाएगी फिर जो मैं मुक्त हो जाऊंगा इनसे हा

1638
01:56:58,760 --> 01:57:04,000
तो चली जाएगी जैसे कीमा

1639
01:57:04,000 --> 01:57:08,280
हैर ये भावना कहां है अरे आपको बता रहा हूं

1640
01:57:08,280 --> 01:57:12,520
सुन लो सामने बात तो सुनलो बोलिए बोलिए उस एक्सस

1641
01:57:12,520 --> 01:57:16,960
किया है उस एक्सपीरियंस किया है फिर भाई फालतू कर दिया आपने

1642
01:57:16,960 --> 01:57:21,040
फर फ कर अरे भाई आपने पढ़ लिया क्या लिखा था

1643
01:57:21,040 --> 01:57:25,120
पढ़ लिया आपने क्या लिखा मना जब आप

1644
01:57:25,120 --> 01:57:29,440
उससे प्रभावित हो जाए इससे पहले की कुछ होता मैंने उसको हटाया ना

1645
01:57:29,440 --> 01:57:33,520
तो तो लाया क्यों फिर पहले कोई टेक्निकल गलती अगर हो भी

1646
01:57:33,520 --> 01:57:37,840
गई उसको तुरंत हटा दिया गया ना इसको टेक्निकल गलती नहीं बोलते एक चीज

1647
01:57:37,840 --> 01:57:41,920
बारबार इसको टेक्निकल गलती नहीं बोलते कितनी बार हो गई अभी तक

1648
01:57:41,920 --> 01:57:46,200
बताइए बहुत बार आ आही च कितनी बार कितनी

1649
01:57:46,200 --> 01:57:50,280
ब आधे से ज्यादा लाइव अरे भाई मैं कह रहा

1650
01:57:50,280 --> 01:57:54,280
हूं बहुत बार हुई यानी आपने अंदाजा होगा 100 बार हुई 200 बार

1651
01:57:54,280 --> 01:57:58,640
हुई 50 बार हुई कितनी बार हुई काउंट कर दे रहा हूं क्या हर एक चीज

1652
01:57:58,640 --> 01:58:02,720
नहीं काउंट मत करिए अंदाजे से बताइए 20 बार हो गई 25 बार हो गई

1653
01:58:02,720 --> 01:58:06,880
मैंने आपको क्या बोला जब से लाइव चल रही है तब से हो मैंने अपनी ओर से

1654
01:58:06,880 --> 01:58:09,800
प्रयास कर लिया है कि ये चीज आपको परेशान नहीं

1655
01:58:09,800 --> 01:58:13,840
करेगी उसके लिए मैंने बोला भी अगर वो आ गई स्क्रीन प

1656
01:58:13,840 --> 01:58:18,000
अगर वो स्क्रीन प आ गई तो जिससे पहले आपको कोई कष्ट होता उसको हटा दिया

1657
01:58:18,000 --> 01:58:24,000
गया मगर फिर भी अब आप उसको तूल बना रहे हैं तो मुझे

1658
01:58:24,480 --> 01:58:29,240
आप अपने जो भी आपके मॉडरेटर है उनको बोलो की गलती से भी ना होय

1659
01:58:29,240 --> 01:58:33,400
चीज मैंने बोल दिया है अगर गलती से होगा तो उसको

1660
01:58:33,400 --> 01:58:37,520
हटाया जाएगा यथा संभव ठीक है गलती इसको गलती

1661
01:58:37,520 --> 01:58:41,960
नहीं बोलते इसको ऑन परपस करना बोलते हैं ये सनातन सिद्धांत है

1662
01:58:41,960 --> 01:58:46,120
अगर आपकी बात मुझे माननी होगी तो आप मुझे शास्त्रम तस्मा शास्त्रम प्रमाणम का

1663
01:58:46,120 --> 01:58:50,240
वो देंगे किस चीज का यही इसको

1664
01:58:50,240 --> 01:58:54,360
गलती नहीं बोलते य जो टेक्निक गली बारबार हो रहा है शास्त्र प्रमाण क्यों दू

1665
01:58:54,360 --> 01:58:58,360
शास्त्र प्रमाण क्यों द अभी आपसे बात कर रहा हू इसीलिए कह रहा हूं मेरे भाई मैंने

1666
01:58:58,360 --> 01:59:02,360
वो हटा लिया अब आगे विषय पे आओ इसीलिए कह रहा हूं मैं आपको बोल रहा हूं अपने मैंने बस

1667
01:59:02,360 --> 01:59:06,600
इना बोला मैं यही नहीं मान लूंगा मेरे नजरिए से वो गलती

1668
01:59:06,600 --> 01:59:10,760
से हुआ उसको हमने हटा लिया आपने ठीक है क्यों बोला था एक मिनट आपने

1669
01:59:10,760 --> 01:59:14,840
अभी ठीक है क्यों बोला था आपने ठीक है क्यों बोला था मेरी मर्जी

1670
01:59:14,840 --> 01:59:19,000
है आपने ठीक है क्यों बोला था बताइए क्योंकि क्योंकि मेरी हैबिट है वो

1671
01:59:19,000 --> 01:59:23,280
आपको पहले बोला वो हैबिट है जैसे आपकी ब ने की हैबिट है शराब

1672
01:59:23,280 --> 01:59:24,960
होगी तो क्या उसको शराब पीने दिया

1673
01:59:24,960 --> 01:59:30,960
जाए किसी की चाकू मारने कीट है तो चाकू मने दिया

1674
01:59:31,240 --> 01:59:35,360
जाए मैंने य नहीं बोला किरी आपके मुह से जो ठीक

1675
01:59:35,360 --> 01:59:39,520
है निकला था भाई देखो आपको बात बताता हूं अगर

1676
01:59:39,520 --> 01:59:43,520
मैं ठीक ठीक करके बात करे बात मत बताए प्लीज आप पर आ जा प्लीज

1677
01:59:43,520 --> 01:59:47,600
मुझे कोई बात नहीं सुननी दस जी आप

1678
01:59:47,600 --> 01:59:51,040
विषय पर आ जाइए कृपा

1679
01:59:51,040 --> 01:59:57,040
करके आप बार-बार बीच में टोकना बंद करिए

1680
01:59:57,040 --> 02:00:01,280
बस आप बीच में टोकना बंद कर आपने हां

1681
02:00:01,280 --> 02:00:06,240
लोगों को परेशानी हो रही है परेशानी तो होगी

1682
02:00:06,240 --> 02:00:07,520
आपके कमरे

1683
02:00:07,520 --> 02:00:11,800
में और भी कई लोग हैं क्या कहां पर है आपको

1684
02:00:11,800 --> 02:00:16,760
देखना है देख दिखा द एक बार

1685
02:00:16,760 --> 02:00:21,080
ब लोग एक बार लोगों को दिखा दीजिए यहां पे कैमरा

1686
02:00:21,080 --> 02:00:25,800
कसे कैमरा फ्लिप कैसे होता हैम

1687
02:00:25,800 --> 02:00:29,800
अच्छा चलिए हटाइए छोड़ नेरा स्टूडियो

1688
02:00:29,800 --> 02:00:34,040
य कोई नहीं य

1689
02:00:34,040 --> 02:00:37,760
ठीक

1690
02:00:37,760 --> 02:00:41,840
है य बुक है आपके पॉइंट लिखने के लिए ठीक है ठीक है

1691
02:00:41,840 --> 02:00:45,920
ठीक बहुत अच्छी बात अब आप य बताइए

1692
02:00:45,920 --> 02:00:50,040
बताइ एक सेकंड

1693
02:00:50,040 --> 02:00:56,040
ला प्रभु पेन लाना

1694
02:00:56,960 --> 02:01:01,040
पेन ठीक है कोई बात नहीं अब

1695
02:01:01,040 --> 02:01:05,240
आप य बताइए कि वीडियो आपने कहा कि अगर वह मुझे फील

1696
02:01:05,240 --> 02:01:09,280
हो रहा है तो वो रियल है अगर वीडियो गेम की दुनिया

1697
02:01:09,280 --> 02:01:13,400
से मुझे ऐसा लग रहा है कि हाय मैं मरा हाय मैं गिरा इमोशन हो रहा हूं तो इसका

1698
02:01:13,400 --> 02:01:17,400
मतलब वीडियो गेम की दुनिया रियल है वीडियो गेम की दुनिया रियल

1699
02:01:17,400 --> 02:01:19,160
नहीं है तो

1700
02:01:19,160 --> 02:01:23,200
इसका मतलब यह नहीं माना जा सकता कि फील होने के आधार एक्सपीरियंस होने के

1701
02:01:23,200 --> 02:01:27,280
आधार पर मान लिया जाए कि वो जो एक्सपीरियंस है वो रियल

1702
02:01:27,280 --> 02:01:32,440
लेकिन वीडियो गेम सामने चल रहा है वीडियो गेम तो सामने चल रहा है ना वो तो फैक्ट है

1703
02:01:32,440 --> 02:01:36,520
ना जो मेरे अंदर यह भावना आ रही थी कि रियल है वो भावना

1704
02:01:36,520 --> 02:01:40,600
गलत थी मेरे अंदर जो भावना अर भावना आ रही

1705
02:01:40,600 --> 02:01:44,120
थी मैं मरा गिर रहा

1706
02:01:44,120 --> 02:01:48,160
मुझे सुनो मैं आपको बताता हूं देखो वीडियो गेम का एग्जांपल यहां

1707
02:01:48,160 --> 02:01:52,520
पर लेना ठीक नहीं रहेगा ये थोड़ा मुझे एपल उत्तर

1708
02:01:52,520 --> 02:01:56,560
नहीं देंगे आप नहीं नहीं उत्तर दूंगा मैं बोल रहा आपका एग्जांपल थोड़ा सा गलत है मैं

1709
02:01:56,560 --> 02:02:01,040
आपके अरे उत्तर तो दे रहा हूं ना यार आप सुनते कम हो आप बोलते ज्यादा हो ऐसा है

1710
02:02:01,040 --> 02:02:05,160
आपका उत्तर दे कि जो वीडियो गेम का एग्जांपल है थोड़ा आपने मूवी का एग्जांपल दिया उसको

1711
02:02:05,160 --> 02:02:08,240
सुनो मूवी का जो एग्जांपल दिया आपने वो एक तरीके से हम बो

1712
02:02:08,240 --> 02:02:12,280
कि मूवी में जो एक्टर्स है वो सच में वो चीज कर रहे हैं ठीक है वो सच में वो चीज कर

1713
02:02:12,280 --> 02:02:16,560
रहे हैं जिसको देखकर मुझे अच्छा लग रहा है हो सकता है कि एक्टिंग कर रहे हो हो सकता है झूठ हो

1714
02:02:16,560 --> 02:02:18,680
झूठ मींस उनका जो उनका जो फीलिंग है

1715
02:02:18,680 --> 02:02:22,680
उनकी एक दूसरे के प्र उनको रियल समझना ये भावना रियल है

1716
02:02:22,680 --> 02:02:26,840
मेरे माइंड के अंदर या झूठ है उनको रियल समझना यह भावना

1717
02:02:26,840 --> 02:02:31,160
मेरे माइंड के अंदर झूठ है या सच है अगर

1718
02:02:31,160 --> 02:02:35,320
सच है अगर सच है अगर सच है अगर सच है तो

1719
02:02:35,320 --> 02:02:40,360
वो मेरे माइंड से कहां चली जाएगी जब मैं वीडियो गेम बंद कर दूंगा तब

1720
02:02:40,360 --> 02:02:44,440
हा हो गया आपका क्वेश्चन क्वेश्चन हो

1721
02:02:44,440 --> 02:02:49,720
गया आपका आपके पॉइंट भी लिख लेता

1722
02:02:49,720 --> 02:02:54,320
हूं हो गया आपका पॉइंट जी जी जी आप कंटिन्यू करिए

1723
02:02:54,320 --> 02:02:58,360
हां तो मैं ये कह रहा हूं कि जो इमोशन मुझे फील

1724
02:02:58,360 --> 02:03:02,480
हो रहे है वो रियल है डेफिनेटली रियल रियल मींस एक्जिस्टिंग रियल मींस

1725
02:03:02,480 --> 02:03:07,040
वो जो चीज एजिस्ट कर रही है वो जो एक्सपीरियंस मैं कर रहा हूं वीडियो गेम हो

1726
02:03:07,040 --> 02:03:11,040
कोई मूवी मैं देख रहा हूं कोई भी कैसे भी मूवी देख रहा हूं तो जो मुझे इमोशन है वो

1727
02:03:11,040 --> 02:03:15,120
रियल है क्यों क्योंकि मैं क्योंकि मैं ऐसी चीज को देख रहा हूं ऐसे ऑब्जेक्ट

1728
02:03:15,120 --> 02:03:19,120
को देख रहा हूं जो बिल्कुल मेरी तरह है वो हिल रहे हैं डुल रहे है मेरी तरह फील कर रहे हैं ऐसा

1729
02:03:19,120 --> 02:03:19,920
मुझे लग रहा है कि हो

1730
02:03:19,920 --> 02:03:24,200
सकता है कि अंदर वो फील ना कर रहे हो रियल लाइफ में भी हो सकता है कि

1731
02:03:24,200 --> 02:03:28,400
किसी की पत्नी उसको प्यार ना करती हो पति को वो हो सकता है दिखा रही है

1732
02:03:28,400 --> 02:03:32,440
ठीक है तो उसको उसको उस उसका जो रिलाइजेशन है ठीक

1733
02:03:32,440 --> 02:03:36,440
है कि उसको ऐसा लग रहा है उसको ऐसा लग रहा है कि हा यह पत्नी प्रेम करती

1734
02:03:36,440 --> 02:03:40,920
है ठीक है वो इमोशन हो सकता है रियल है हैली

1735
02:03:40,920 --> 02:03:45,080
रियल है व ठीक है लेकिन पत्नी प्रेम कर रही है यह चीज रियल नहीं

1736
02:03:45,080 --> 02:03:49,520
एक्टिंग है ठीक है ठीक है

1737
02:03:49,520 --> 02:03:53,680
तो अभी जो मुझे एक्सपीरियंस हो रहा यह तो रियल था मगर जिस

1738
02:03:53,680 --> 02:03:55,000
कारण से एक्सपीरियंस हो रहा था

1739
02:03:55,000 --> 02:04:01,000
वो

1740
02:04:21,840 --> 02:04:26,240
बंद हो जाती है वो कौन सी इंफॉर्मेशन है जिससे व बंद हो जाती है आप जनरली

1741
02:04:26,240 --> 02:04:30,400
जनरल की बात कर रहे वीडियो गेम वाली बात कर रहा

1742
02:04:30,400 --> 02:04:31,840
हू वीडियो

1743
02:04:31,840 --> 02:04:35,880
गेम में उसको लग रहा है मैं मरने वाला हूं गड्ढे में गिरने वाला हूं या हीरो से

1744
02:04:35,880 --> 02:04:39,960
अगर व कनेक्ट है हीरो को दुख हो रहा है फिल्म के तो उसको लगता है कि अरे

1745
02:04:39,960 --> 02:04:44,240
यार इसके साथ गलत हुआ मगर कौन सी इंफॉर्मेशन ऐसी होती है

1746
02:04:44,240 --> 02:04:48,320
जिसके कारण वो सस्टेंड कर पाता है व तब भी नॉर्मल

1747
02:04:48,320 --> 02:04:52,880
रह पाता है विचलित नहीं होता है कौन सी

1748
02:04:52,880 --> 02:04:58,000
हा जब उसको ये पता चलता है कि जो सामने दिखाया गया था ये सि एक्टिंग था

1749
02:04:58,000 --> 02:05:02,000
हा ये झूठ था

1750
02:05:02,000 --> 02:05:06,760
जो दिखाया गया स समझ रहा था बसरा

1751
02:05:06,760 --> 02:05:10,760
मेरा य तक हो गया दिखाया गया था

1752
02:05:10,760 --> 02:05:14,960
जो दिखाया गया था वो प्रॉपर एक्शन थे सुनो जो दिखाया गया था वो रियल एक्शन

1753
02:05:14,960 --> 02:05:19,080
थे रियल एक्शन थे भावना झूठी थी एक्टिंग

1754
02:05:19,080 --> 02:05:20,280
था समझ रहे हो अभी

1755
02:05:20,280 --> 02:05:24,520
आप कह रहे हो भावना सही वो कारण झूठ है अब आप कह रहे हो भावना

1756
02:05:24,520 --> 02:05:28,680
भावना झूठी है कारण सही है

1757
02:05:28,680 --> 02:05:32,720
नहीं मैं वो चीज नहीं कह रहा मेरे भाई मैं आपको य क रहा क्या क

1758
02:05:32,720 --> 02:05:37,120
मे भाई जो सामने सुनो सुनो जो एक्सपीरियंस

1759
02:05:37,120 --> 02:05:41,440
कर रहा है जो व्यक्ति उसको ऐसा लग रहा है कि एक दूसरे से प्रेम करते हैं

1760
02:05:41,440 --> 02:05:45,520
व ऐसा सोच रहा है कि एक दूसरे से प्रेम करते हैं तो उनका प्रेम देख के मुझे खुशी

1761
02:05:45,520 --> 02:05:50,640
मिल रही है मेरे अंदर मुझ खुशी फील हो रही है तो

1762
02:05:50,640 --> 02:05:51,960
उन प्रेम

1763
02:05:51,960 --> 02:05:55,960
है सुनो जो प्रेम है वो एजिस्ट नहीं करता क्योंकि वो एक्टिंग है लेकिन

1764
02:05:55,960 --> 02:06:00,000
जो एक्टिंग है वो तो रियल है ना कि हां भाई एक्टिंग हो रही है एक्टिंग की बात नहीं

1765
02:06:00,000 --> 02:06:04,320
कह रहा हूं मैं उनके बीच में जो मैं प्रेम मान रहा हूं यह रियल है

1766
02:06:04,320 --> 02:06:08,320
क्या अगर मैं उनके उनके बीच में जो प्रेम हो रहा है जो मैं

1767
02:06:08,320 --> 02:06:12,400
मान रहा हूं कि प्रेम हो रहा है तो मैं जो मान रहा हूं ये एसिस्टिंग है रियल

1768
02:06:12,400 --> 02:06:16,520
है ठीक है लेकिन उनमें जो प्रेम है वो रियल नहीं है यानी

1769
02:06:16,520 --> 02:06:20,920
कि वो जिसको मैं प्रेम समझ रहा हूं वो रियल नहीं है

1770
02:06:20,920 --> 02:06:25,240
हां तरीके से कह सकते हैं वो झूठ

1771
02:06:25,240 --> 02:06:29,640
है झूठ मतलब एक तरीके से एक तरीके से झूठ बोल

1772
02:06:29,640 --> 02:06:34,120
एक तरीके से बोल सकते हैं झूठ है ही होता है ऐसे ही फसते हैं

1773
02:06:34,120 --> 02:06:34,620
जब

1774
02:06:34,320 --> 02:06:38,400
माया के माया माया माया को मना कर देते हैं तो ऐसे ही फसते हैं एक

1775
02:06:38,400 --> 02:06:42,640
तरीका आम स्पिरिचुअल दया स्पिरिचुअल प्रेम

1776
02:06:42,640 --> 02:06:46,920
एक तरीका यही होता है चलिए अब दूसरी बात करते हैं वो दर्शको

1777
02:06:46,920 --> 02:06:50,960
को मिल गया होगा अभी क्लेम किया है नहीं नहीं बताइए चलिए

1778
02:06:50,960 --> 02:06:55,320
बोलिए फसते हो जब आप फसते सुनो सुनो जैसे आप फसते

1779
02:06:55,320 --> 02:06:59,400
जैसे आप फस जाते हो आप बोलते हो चलो दूसरी बात करते चलो दूसरी बात करते

1780
02:06:59,400 --> 02:07:04,200
अरे फ फलिए मुझ मन

1781
02:07:04,200 --> 02:07:08,680
तरीके से रियल का क्या मतलब है एक तरीके से झूठ का क्या मतलब है बताइए

1782
02:07:08,680 --> 02:07:13,160
हा अब मैं आपको बताता हूं कि जैसे की फर एपल

1783
02:07:13,160 --> 02:07:18,320
शब्द आता मिथ्या जो आप साबित करना चाह

1784
02:07:18,320 --> 02:07:22,600
बक ठीक है मिथ्या मिथ्या शब्द मुझे पता है कि आप अ

1785
02:07:22,600 --> 02:07:26,640
है आप मायावा संप्रदाय से है मैं सब जानता हूं और

1786
02:07:26,640 --> 02:07:30,880
आप आपका इंटेंशन क्या है वो भी मैं जानता हूं फिर निर्णायक हो रहे

1787
02:07:30,880 --> 02:07:35,240
आप मुझे य पर मायावादी नहीं कए नहीं तो मैं लाइव स्ट्रीम बंद कर दूंगा आप फिर निर्णायक

1788
02:07:35,240 --> 02:07:39,560
हो रहे हैं हमारी उस बारे में चर्चा हुई है वो लोगों ने देखा है लोग डिसाइड

1789
02:07:39,560 --> 02:07:43,640
करेंगे आप मायावादी अगर कहेंगे ये यही पर स्टॉप कर दूंगा

1790
02:07:43,640 --> 02:07:47,760
ठीक है अच्छा अच्छा ठीक है ठीक हैय देंगे निर्णय देंगे तो स्टॉप

1791
02:07:47,760 --> 02:07:49,400
करूंगा चलिए बताइए ठी

1792
02:07:49,400 --> 02:07:53,440
ठीक चलो कोई बात नहीं कोई बात नहीं तो आप बोल सीधा-सीधा की मिथ्या

1793
02:07:53,440 --> 02:07:57,680
शब्द की बात कर रहे बोलिए बोलिए आप बोलिए अपना बात बोलिए अपनी

1794
02:07:57,680 --> 02:08:01,680
बात बोलिए क्या आप यहां पर झूठ का मिथ्या शब्द किसे

1795
02:08:01,680 --> 02:08:06,520
ले रहे हैं क्या कह

1796
02:08:06,520 --> 02:08:10,560
रहे करना चाह रहे हैं आप यहां पर जो चीज स्थापित करना चाह रहे

1797
02:08:10,560 --> 02:08:14,880
हैं ठीक है तो क्या आपका इसका

1798
02:08:14,880 --> 02:08:19,160
करना मैं अपनी स्थापित क्या करना चाह रहा हूं वो मैं बता देता हूं उसको मिथ्या

1799
02:08:19,160 --> 02:08:23,160
कहो कुछ भी कहो क्योंकि मिथ्या का भी वि बहुत है मिथ्या

1800
02:08:23,160 --> 02:08:27,320
का भी विस्तार बहुत है मैं स्थापित क्या करना चाहता हूं सुनिए कि

1801
02:08:27,320 --> 02:08:31,320
वो जो ये समझ रहा था कि वो मेरी मां है यह सारी जो भौतिक इंफॉर्मेशन

1802
02:08:31,320 --> 02:08:35,400
मुझे पता चल रही थी यह सब झूठ था अल में ये

1803
02:08:35,400 --> 02:08:39,600
माया था जो कि एजिस्ट ही नहीं कर रहा था ये सारी इंफॉर्मेशन गलत थी अब मुझे

1804
02:08:39,600 --> 02:08:43,720
पता चला कि ये सब झूठ था तो मैं मुक्त हो पाया जब मुझे पता चला कि वीडियो गेम

1805
02:08:43,720 --> 02:08:47,760
बंद हुआ मुझे पता चला ये झूठी दुनिया थी जिससे मैं बचना चाह रहा था मर रहा

1806
02:08:47,760 --> 02:08:51,880
था ये हो रहा था वो हो रहा था मुझे पता चला तो मुझे मैं मुक्त हो गया वीडियो

1807
02:08:51,880 --> 02:08:56,000
गेम से वो वीडियो गेम का जो संसार था वो झूठा था मैं

1808
02:08:56,000 --> 02:09:00,080
उससे मुक्त हो गया ये मैं स्थापित करना चाहता हूं अब आप काउंटर करिए ओके

1809
02:09:00,080 --> 02:09:04,120
ओके ओके क्या आप ये स्थापित करना चाहते हो कि ये वीडियो गेम की वीडियो गेम

1810
02:09:04,120 --> 02:09:04,620
की तरह

1811
02:09:04,520 --> 02:09:08,640
है जो एजिस्ट नहीं करता एक्चुअली क्योंकि वीडियो गेम में जो चीजें हो रही है ठीक

1812
02:09:08,640 --> 02:09:13,240
है वो एक्चुअली में एजिस्ट नहीं करती लेकिन इस संसार में जो

1813
02:09:13,240 --> 02:09:17,880
करती उसका एजिस्ट करती है उसका मुझसे कोई संपर्क नहीं है

1814
02:09:17,880 --> 02:09:22,320
जो मैं प्रभावित हो रहा हूं यह प्रभावित होने की जो भावना है यह गलत है यह एजिस्ट

1815
02:09:22,320 --> 02:09:26,680
नहीं करती य झूठ है मुझे जो अविद्या है जो अविद्या

1816
02:09:26,680 --> 02:09:30,680
है उसे स्वेता सत्र उपनिषद में नित्य कहा गया है वो ब्रम में अविद्या और विद्या

1817
02:09:30,680 --> 02:09:35,600
दोनों साथ में रहती है तो हम ये नहीं कह सकते कि अविद्या एस्ट ही नहीं करती जैसे

1818
02:09:35,600 --> 02:09:39,720
कि मिनट मिनट गेम प वीडियो

1819
02:09:39,720 --> 02:09:43,800
गेम पहले कसे एक मिनट एक मिनट एक मिनट

1820
02:09:43,800 --> 02:09:48,120
एक मिनट वीडियो गेम पहले कैसेट के रूप में आता था

1821
02:09:48,120 --> 02:09:52,120
ठीक है वो वीडियो गेम की कैसेट मेरे पास रखी है मेरे से जुड़ी

1822
02:09:52,120 --> 02:09:56,720
मेरे शर्ट की पॉकेट में रखी है मगर

1823
02:09:56,720 --> 02:10:00,920
उस पॉकेट में उस वीडियो गेम की कैसेट में वो है वह संसार है

1824
02:10:00,920 --> 02:10:04,920
मगर व संसार मेरा नहीं है मैं उससे कनेक्टेड नहीं हूं उसको

1825
02:10:04,920 --> 02:10:09,320
अपना मानना उससे कनेक्ट हो जाना ये झूठ है

1826
02:10:09,320 --> 02:10:13,360
वो काल्पनिक संसार काल्पनिक संसार की

1827
02:10:13,360 --> 02:10:17,440
शक्ति मेरे पास हा झूठ का म गल

1828
02:10:17,440 --> 02:10:20,400
झूठ का मतलब य गलत से ले रहे हो

1829
02:10:20,400 --> 02:10:24,720
आप ही मुझे बता बता दीजिए आपने अभी बोला एक तरीके से कैसे

1830
02:10:24,720 --> 02:10:28,800
अरे पॉइंट आप रख रहे हो मैं एटलीस्ट सामने वाले का क्लेरिटी तो ले लू ना कि बोलना क्या चाह रहा

1831
02:10:28,800 --> 02:10:32,800
है तो मैंने क्लेरिटी कर दिया ना अब आप अपनी काउंटर करिए अब आप सवाल त पूछिए अब आप

1832
02:10:32,800 --> 02:10:36,840
काउंटर करिए अरे अरे सामने वाले का समझ में तो आना

1833
02:10:36,840 --> 02:10:40,920
चाहिए तो आप काउंटर करिए ना नहीं आया आपको समझ में मैंने क्या

1834
02:10:40,920 --> 02:10:44,960
बोला मैंने आपको क्या खाली लास्ट का मैंने आपका पूछा कि जो मैं एक्सपीरियंस

1835
02:10:44,960 --> 02:10:49,320
कर रहा था वो झूठ था ठीक है तो झूठ मतलब किस तर की नॉन एसिस्टिंग

1836
02:10:49,320 --> 02:10:53,680
झूठ गलत था करना चाए हां

1837
02:10:53,680 --> 02:10:57,840
क्या कह रहे हैं वो नॉन एसिस्ट आपने जो क्या आपने कहा लास्ट में

1838
02:10:57,840 --> 02:11:02,000
कि मैं जो एक्सपीरियंस कर रहा था ये सब झूठ था आपने उसे

1839
02:11:02,000 --> 02:11:07,160
उसे अपने से कनेक्टेड समझना झूठ है कि नहीं यह

1840
02:11:07,160 --> 02:11:11,160
बताइए उसको अपने आप से कनेक्टेड समझना झूठ है

1841
02:11:11,160 --> 02:11:16,160
कि नहीं ऐसा पूछ रहे हो गलत है झूठ नहीं है

1842
02:11:16,160 --> 02:11:20,240
अच्छा चलिए अब ठीक है इसपे जनता निर्णय ले लेगी ठीक है आपने बोल

1843
02:11:20,240 --> 02:11:24,520
दि जनता नहीं आप नहीं नहीं जनता जनता नहीं आप प्रूव करिए

1844
02:11:24,520 --> 02:11:28,560
जनता नहीं मैंने मैं नहीं करूंगा आप मेरे ऑथराइज है क्या थर जो आप मुझे

1845
02:11:28,560 --> 02:11:32,560
वो दे रहे हैं निर्देश अरे तो अरे अरे तो डिस्कशन भा मैंने अपनी बात कह

1846
02:11:32,560 --> 02:11:35,440
दी आपने अपनी बात कह दी अब हम इस पर नहीं अटक सकते क्योंकि

1847
02:11:35,440 --> 02:11:40,040
आप वो बात बोल नहीं रहे हैं वो सिद्ध हो चुकी है वो जनता देखेगी सिद्ध हुई है कि नहीं हुई

1848
02:11:40,040 --> 02:11:44,240
अब मैं क्या करूं इस मैंने अपनी बात बोल दी अब आप उसको नहीं मान रहे उसम

1849
02:11:44,240 --> 02:11:48,280
बोल सबको साफ हो गया कि वो इंफॉर्मेशन जब वीडियो आपने ये भी

1850
02:11:48,280 --> 02:11:53,000
कहा एक तरीके से देखा जाए तो वो झूठे ही है व एक तरीका क्या

1851
02:11:53,000 --> 02:11:59,000
है हा तो आपको बताया दो तरीके बता एक तरीका नहीं दो तरीका बता

1852
02:12:00,160 --> 02:12:05,040
बताइए दोबारा बता हा एक बार फिर से बता

1853
02:12:05,040 --> 02:12:09,560
दू फिर से बता है व क्या है

1854
02:12:09,560 --> 02:12:13,920
हा झूठ सुनन झूठ का मतलब होता है कि जो एस्ट

1855
02:12:13,920 --> 02:12:19,920
नहीं करता ू मतलब

1856
02:12:21,640 --> 02:12:22,140
मैं

1857
02:12:21,840 --> 02:12:26,000
तो मैं तो मिथ्या शब्द यूज कर रहा हूं ना आपने बोला कि नहीं एक तरीके

1858
02:12:26,000 --> 02:12:28,640
से झूठ

1859
02:12:28,640 --> 02:12:32,840
है मैंने आपके अकॉर्डिंग पूछा कि कौन से तरीके से झूठ है आपके अकॉर्डिंग

1860
02:12:32,840 --> 02:12:37,000
पूछ रहा हूं मैं कि झूठ किस तरीके से बोल रहे हो आप उसको आपसे पूछ रहा कहा

1861
02:12:37,000 --> 02:12:41,120
हू य अब यहां पर गाड़ी अटक रही है आप अपने बोले हुए शब्द को समझ

1862
02:12:41,120 --> 02:12:45,720
नहीं पा रहे ध्यान नहीं कर पा रहे अब अगला चैप्टर खोले मैं आप मैं ये लाइव स्ट्रीम बंद

1863
02:12:45,720 --> 02:12:46,720
करू

1864
02:12:46,720 --> 02:12:51,400
आप सुनो सुनो देखो आपकी

1865
02:12:51,400 --> 02:12:56,120
क्या कह रहा हूं आप टॉपिक खत्म नहीं करते ठीक है आपसे कुछ पूछ ों

1866
02:12:56,120 --> 02:13:00,120
य हम और आप निर्णायक है दोनों लोग जब कोई तीसरा निष्पक्ष

1867
02:13:00,120 --> 02:13:04,120
निर्णायक होगा वहा टॉपिक खत्म होगा अभी मैंने अपना पक्ष रख दिया आपने

1868
02:13:04,120 --> 02:13:09,000
अपना पक्ष रख दिया जनता देख लेगी क्या सही था क्या गलत था निर्णय कैसे हो जाए

1869
02:13:09,000 --> 02:13:13,000
निर्णय होगा नहीं आपको जो आपको बोलना नहीं है कि वो झूठ है

1870
02:13:13,000 --> 02:13:17,320
उसको गलत बोलते रहोगे उसको गलत बोल कर उससे बचते रहोगे माया

1871
02:13:17,320 --> 02:13:21,440
से मिथ्या से बचते रगे अगर देखो सुनो जब आपने

1872
02:13:21,440 --> 02:13:25,520
कोई क्लेम किया था मेरे ऊपर ज आपने मेरे ऊपर कोई क्लेम किया था या जो भी आपने

1873
02:13:25,520 --> 02:13:29,800
मेरी बात को मिस इंटरप्रेट किया कुछ जगह प तो मैंने आपको सिद्ध किया कि देखो ऐसा ऐसा है

1874
02:13:29,800 --> 02:13:34,280
ठीक है तो मैं आपको सिद्ध करके दिखा रहा हूं मैं तो मैं तो पीछे नहीं हट रहा कि नहीं नहीं जाए

1875
02:13:34,280 --> 02:13:38,360
समझ ऐसा लग रहा है ना कि आपने सिद्ध कर दिया मैं उससे सहमत

1876
02:13:38,360 --> 02:13:42,680
नहीं हूं अब आगे बढ़े आप गलत अगर सहमत नहीं है तो फिर काउंटर

1877
02:13:42,680 --> 02:13:47,560
करो फिर मैंने मैं भाई अपनी बातें क्या रिपीट करता रहूं बार-बार

1878
02:13:47,560 --> 02:13:51,880
एक ही बात को रिपीट करता रहूं

1879
02:13:51,880 --> 02:13:55,960
बट किया है आपको सुनो मैंने कितनी सारी बात रिपीट कर आपको फिर भी समझ में

1880
02:13:55,960 --> 02:13:59,960
नहीं आई मैं फिर भी प्रयास कर रहा हूं ठीक है आपने प्रयास कर लिया

1881
02:13:59,960 --> 02:14:01,720
जनता ने देख लिया भ भव्य

1882
02:14:01,720 --> 02:14:06,000
राधा कृष्ण दास जी अब हम लोग दूसरे चैप्टर पर बात कर ले जनता

1883
02:14:06,000 --> 02:14:10,280
देख लेगी आपने सिद्ध किया था कि नहीं किया था अब हम दूसरे

1884
02:14:10,280 --> 02:14:16,200
चैप्टर पर बात कर ले आप आपने अपनी ओर से संतुष्टि जनक जवाब दे दिया

1885
02:14:16,200 --> 02:14:20,280
ना आप संतुष्ट हुए मैं संतुष्ट

1886
02:14:20,280 --> 02:14:26,280
नहीं हूं आपने शब्द से बच रहे है वो झूठ नहीं है वो गलत है

1887
02:14:26,800 --> 02:14:30,920
पर तो फ वही सुनो ये तो वही बात हो गई फिर आप जाके बोलोगे कि

1888
02:14:30,920 --> 02:14:35,400
एक स्कन वाला आया था वो संतुष्ट करके नहीं गया जब मैं प्रयास कर रहा हूं पूरा 100%

1889
02:14:35,400 --> 02:14:39,480
अरे मेरे भाई मैं बोल तो रहा हूं मैं संतुष्ट क्योंकि बात

1890
02:14:39,480 --> 02:14:43,680
ये है कि आप आप ऐसा बोलिए आप ऐसा बोलिए

1891
02:14:43,680 --> 02:14:48,080
आपके पास काउंटर नहीं ऐसा बोलिए कि उसने मुझे ऐसा समझाया लेकिन को रिटर्न काटर नहीं

1892
02:14:48,080 --> 02:14:52,080
काटर है मैं बोल रहा हूं बोल रहा जो भावना मेरे

1893
02:14:52,080 --> 02:14:57,160
माइंड के अंदर एजिस्ट करती है वो भावना कहां चली

1894
02:14:57,160 --> 02:15:01,160
जाएगी जो माइंड रहेगा जो आत्मा है सुनो सुनो सुनो अबे

1895
02:15:01,160 --> 02:15:05,280
बताता हूं सुनो बताता हूं जो भावना मेरे माइंड के अंदर एजिस्ट करती है

1896
02:15:05,280 --> 02:15:09,360
वो भावना कहां चली जाएगी पहली बात तो पहली बात

1897
02:15:09,360 --> 02:15:13,360
तो जो भावना है जो एक्सपीरियंस करने वाला वो माइंड नहीं होता पहली बात तो अगर आपको थोड़ा

1898
02:15:13,360 --> 02:15:16,840
बहुत साइकोलॉजी अगर पता हो आत्मा के अंदर एजिस्ट करती है

1899
02:15:16,840 --> 02:15:22,240
चेतना के अंदर एजिस्ट करती है बिल्कुल एजिस्ट मतलब

1900
02:15:22,240 --> 02:15:26,400
के अंदर भावना करती है वो कहा चली जाएगी

1901
02:15:26,400 --> 02:15:30,480
सुनो जो एक्सपीरियंस उस जीवात्मा को हुए हैं ठीक है जो एक्सपीरियंस

1902
02:15:30,480 --> 02:15:34,560
उसने लिए है वो एक्सपीरियंस का जो इंफॉर्मेशन है वो इंफॉर्मेशन

1903
02:15:34,560 --> 02:15:38,640
उस जीवात्मा के साथ रहेगा हमेशा के लिए ठीक

1904
02:15:38,640 --> 02:15:43,560
है लेकिन अपने को अलग समझेगी मैं

1905
02:15:43,560 --> 02:15:47,720
बोल लू बोलो हा अभी कट मत करना

1906
02:15:47,720 --> 02:15:51,920
ठीक है जो जीवात्मा जीवात्मा जीवात्मा है जो इस बॉडी के अंदर

1907
02:15:51,920 --> 02:15:56,200
है जो सब कुछ एक्सपीरियंस कर रही है जो मोक्ष

1908
02:15:56,200 --> 02:16:00,200
भी मिल जाएगा तो उसके पास जब उसको मोक्ष मिल जाएगा उसके पास अभी भी

1909
02:16:00,200 --> 02:16:04,480
वो इंफॉर्मेशन रहेगी उसकी जैसे कि कृष्णा है फॉर एग्जांपल कृष्णा है

1910
02:16:04,480 --> 02:16:08,640
कृष्णा सर्वज्ञ है भगवत गीता में कृष्णा भाई मैं भी तो यही कह रहा हूं

1911
02:16:08,640 --> 02:16:13,080
कि वो इंफॉर्मेशन रहेगी मगर उस इंफॉर्मेशन से हम अपने आप को डिटैच

1912
02:16:13,080 --> 02:16:17,640
कर लेंगे 30 सेकंड में बुरा नहीं बोला और आपने कट कर दिया है मैं आपको कुछ उदाहरण

1913
02:16:17,640 --> 02:16:22,080
दे देखिए देखिए

1914
02:16:22,080 --> 02:16:26,200
खाखा लाइव स्ट्रीम लंबी हो रही है मुझे य भी ध्यान रखना होगा कि हमारी

1915
02:16:26,200 --> 02:16:30,240
लाइव स्ट्रीम खामा खा लंबी ना हो तो अब आप दूसरा चैप्टर पर आए

1916
02:16:30,240 --> 02:16:31,920
हो गया जनता देख लेगी

1917
02:16:31,920 --> 02:16:36,200
आप काउंटर किया था कि नहीं ठीक है मैंने

1918
02:16:36,200 --> 02:16:40,440
आप कि क्या स्न के द्वारा प्रतिपादित

1919
02:16:40,440 --> 02:16:44,880
होने वाला ईश्वर सर्वशक्तिमान है कि नहीं तालिया

1920
02:16:44,880 --> 02:16:49,840
हो जाए एक बार हमारे सबसे अच्छे सबसे मेन प्रश्न है

1921
02:16:49,840 --> 02:16:54,560
एक बार तालिया हो जाए भाई क्या स्पन के द्वारा प्रतिपादित

1922
02:16:54,560 --> 02:16:59,400
होने वाला ईश्वर सर्वशक्तिमान है या नहीं

1923
02:16:59,400 --> 02:17:03,760
बहुत शक्तिमान है बहुत शक्तिमान है क्या उसके

1924
02:17:03,760 --> 02:17:08,200
ऊपर कोई भी नियम लागू होता है या नहीं

1925
02:17:08,200 --> 02:17:09,000
कोई नियम लागू

1926
02:17:09,000 --> 02:17:13,280
नहीं होता और ना ही व नियम कोई तोड़ता है कोई नियम लागू

1927
02:17:13,280 --> 02:17:17,600
नहीं होता ना ही व कोई नियम तोड़ता है यह नियम लागू

1928
02:17:17,600 --> 02:17:21,640
है क्या कोई लागू है

1929
02:17:21,640 --> 02:17:25,840
कि नहीं नियम लागू नहीं है सीधी सी बात है

1930
02:17:25,840 --> 02:17:29,880
यानी वह सभी नियमों के ऊपर सर्व नियामक

1931
02:17:29,880 --> 02:17:34,560
है क्या वापस बोल सेक लास्ट वाला समझा नहीं

1932
02:17:34,560 --> 02:17:39,160
वो सभी नियमों के ऊपर सर्व नियामक है या नहीं

1933
02:17:39,160 --> 02:17:43,160
म सर सारे नियमों को कंट्रोल करने वाला है

1934
02:17:43,160 --> 02:17:44,560
उसके ऊपर कोई नियम

1935
02:17:44,560 --> 02:17:48,560
लागू नहीं होगा कि वो ऐसा नहीं कर सकता

1936
02:17:48,560 --> 02:17:52,680
नहीं नहीं ऐ ऐसा कोई ऐसा कोई नियम नहीं है वो सब कुछ कर सकता है

1937
02:17:52,680 --> 02:17:57,120
इनफ कुछ भी कर सकता है ठीक हा

1938
02:17:57,120 --> 02:18:01,800
अच्छा ये बताइए जो भगवान श्री कृष्ण जब आए थे तो ए इट आए थे ना दुनिया

1939
02:18:01,800 --> 02:18:05,880
में हा आते हैं जब वो तो ए इट आते है ना गोलोक से

1940
02:18:05,880 --> 02:18:10,440
सीधे हा डायरेक्टली अच्छा तो

1941
02:18:10,440 --> 02:18:14,960
जो वो उठकर सीधे आ रहे हैं डायरेक्टली हा

1942
02:18:14,960 --> 02:18:19,120
अपने शरीर को नष्ट कर सकते हैं या नहीं हा कर सकते

1943
02:18:19,120 --> 02:18:21,480
हैं अगर वो चाहे शक्तिशाली

1944
02:18:21,480 --> 02:18:25,760
है कि नष्ट कर सकते है तो फिर उस समय उसका एक्जिस्टेंस

1945
02:18:25,760 --> 02:18:29,880
कैसे रहेगा वो तो साकार है अंत तो गवा लेकिन अभी तो आपने

1946
02:18:29,880 --> 02:18:34,200
क्वेश्चन पूछा कि कर सकते कि नहीं करते ये थोड़ी ना तो अब मैं पूछ रहा हूं ना

1947
02:18:34,200 --> 02:18:38,240
कि जिस समय वो कर देंगे उस समय उसका एेंस कैसे रहेगा एपल

1948
02:18:38,240 --> 02:18:42,480
देता हूं मैं आपको एग्जांपल देता हूं जैसे कि अगर आपने ऐसा क्वेश्चन पूछ लिया जैसे आपने क्वेश्चन

1949
02:18:42,480 --> 02:18:46,960
पूछ लिया कि क्या ईश्वर एक

1950
02:18:46,960 --> 02:18:51,360
थोड़ मे बी हो सकता है कि मेरा एग्जांपल थोड़ा गलत साउंड करे हो सकता है एपल

1951
02:18:51,360 --> 02:18:55,360
मुझे क्षमा कर देना उसके लिए लेकिन क्वेश्चन ऐसा है कि क्या ईश्वर रेप कर सकता

1952
02:18:55,360 --> 02:18:59,800
है क्या ये क्वेश्चन भी लोग पूछते हैं ठीक है म मैं आपकी बात नहीं कर रहा

1953
02:18:59,800 --> 02:19:03,800
ए से जब मैं बात करता हूं तो ऐसे क्वेश्चन पूछते हैं तो करने के

1954
02:19:03,800 --> 02:19:09,200
लिए व कर सकते लेकिन करते नहीं ठीक है उसकी

1955
02:19:09,200 --> 02:19:12,440
वो बुराई के कार्य नहीं

1956
02:19:12,440 --> 02:19:16,640
करते करते नेचर नहीं गलत

1957
02:19:16,640 --> 02:19:22,640
कार्य नहीं करते नहीं करते अच्छा

1958
02:19:23,920 --> 02:19:28,240
नहीं करते मगर आप जब ये कह रहे हैं कि वो अपने शरीर को नष्ट

1959
02:19:28,240 --> 02:19:32,680
कर सकते हैं तो इसका मतलब है कि उनके

1960
02:19:32,680 --> 02:19:36,720
शरीर के बिना भी य दुनिया एजिस्ट करती है

1961
02:19:36,720 --> 02:19:40,800
नहीं ऐसा नहीं है यानी कि ऐसा

1962
02:19:40,800 --> 02:19:45,360
है कि वह अपने शरीर को नष्ट कर सकते हैं इस दुनिया के साथ

1963
02:19:45,360 --> 02:19:49,360
कर सकते हैं कर सकते हैं और करते हैं इसमें

1964
02:19:49,360 --> 02:19:53,400
अंदर है मैं पूछ रहा हूं क्या वो इस दुनिया के साथ

1965
02:19:53,400 --> 02:19:57,640
अपने शरीर को नष्ट कर सकते हैं अरे वो कर सकते हैं लेकिन

1966
02:19:57,640 --> 02:19:58,560
करेंगे तो ऐसे ऐसे

1967
02:19:58,560 --> 02:20:02,600
ईश्वर को कोई स्वीकार नहीं करेगा तो वो इस नियम

1968
02:20:02,600 --> 02:20:05,840
से बने क्योंकि ईश्वर को स्वीकार कर ले इसलिए मैं नहीं करूंगा

1969
02:20:05,840 --> 02:20:10,400
अरे य तो ये तो ये तो पूरा का अब्राहम वाला हो गया कि भाई

1970
02:20:10,400 --> 02:20:15,240
अल्लाह ने तुमको यहां पर डाला है अपनी अपनी मर्जी से तुमको यहां पर डाला है आवाज मत

1971
02:20:15,240 --> 02:20:19,360
करिए अल्लाह ने अपनी मर्जी से तुमको य प डाला टेस्ट लेने के लिए फिर बोले कि भाई

1972
02:20:19,360 --> 02:20:23,400
वो टेस्ट कैसे ले रहा है हमारा हम से पूछे तो बोला हां भाई वो तो सब कुछ कर सकता है ना वो तो ईश्वर है

1973
02:20:23,400 --> 02:20:28,720
वो कुछ भी कर सकता है तो कर रहा है ये लॉजिक है ऐसा ईश्वर

1974
02:20:28,720 --> 02:20:32,840
ने जो ऑडियंस आपकी देख रही है एक सेकंड जो ऑडियंस आपकी देख रही है

1975
02:20:32,840 --> 02:20:37,000
ठीक है अगर वो अगर वो भौतिक शरीर धारण करता है ईश्वर पर

1976
02:20:37,000 --> 02:20:42,480
अगर वो भौतिक शरीर धारण करता है तो इसका मतलब उसको मटेरियल नेचर की जरूरत पड़ रही

1977
02:20:42,480 --> 02:20:46,920
है अपनी इच्छा मरियल अपनी इच्छा से

1978
02:20:46,920 --> 02:20:51,520
अपनी इच्छा से अपनी इच्छा से म

1979
02:20:51,520 --> 02:20:56,400
अच्छा खैर खर टॉपिक बदल जाएगा मैं अपना क्वेश्चन और सही कर द

1980
02:20:56,400 --> 02:21:00,520
कर सुनो आंसर दे रहा हूं ठीक है एक

1981
02:21:00,520 --> 02:21:04,560
होता है कि क्या ईश्वर उटपटांग हरकत कर सकता है और करता है इसमें

1982
02:21:04,560 --> 02:21:08,920
बहुत अंतर है ठीक है

1983
02:21:08,920 --> 02:21:13,040
और यार बात को मैं हाथ जोड़ रहा हूं मैं कहा कह रहा वो करता

1984
02:21:13,040 --> 02:21:18,000
है त बोल रहा भाई मैं कहा कहता हूं कि करता है

1985
02:21:18,000 --> 02:21:22,000
जब आप ये कह रहे कि वो ऐसा कर सकता है है तो मैं

1986
02:21:22,000 --> 02:21:26,880
आपसे पूछ रहा हूं इसका मतलब ईश्वर के बिना भी इस दुनिया का एक्जिस्टेंस

1987
02:21:26,880 --> 02:21:31,600
है क्योंकि ईश्वर अपने आप को खत्म कर सकता है

1988
02:21:31,600 --> 02:21:35,640
अगर व खत्म अरे कर सकता है और करता है उसम अंतर है ना

1989
02:21:35,640 --> 02:21:36,640
भाई

1990
02:21:36,640 --> 02:21:40,720
अरे भाई जब आप यह कह रहे हो कि उनका शरीर नष्ट हो सकता है तो इसका मतलब वो

1991
02:21:40,720 --> 02:21:45,200
नित्य नहीं है ना शाश्वत नहीं है ना उनका शरीर

1992
02:21:45,200 --> 02:21:49,200
एक सेकंड हम एक ऐसी सिचुएशन के बारे में सोच रहे हैं जो एजिस्ट नहीं

1993
02:21:49,200 --> 02:21:53,200
करती उस सिचुएशन में नहीं हो सकता जैसा आप सोच रहे हो

1994
02:21:53,200 --> 02:21:57,240
आप ये बताइए उनका शरीर नित्य है कि नहीं उनका

1995
02:21:57,240 --> 02:22:01,320
शरीर नित्य है बिल्कुल है तो तो नित्य की

1996
02:22:01,320 --> 02:22:05,720
परिभाषा क्या है जो हमेशा से एसिस्टिंग

1997
02:22:05,720 --> 02:22:10,040
हो जो हमेशा से एसिस्टिंग हो और जो कभी खत्म ना हो

1998
02:22:10,040 --> 02:22:14,040
हां शाश्वत हां तो आप कह रहे हो वो कर

1999
02:22:14,040 --> 02:22:18,080
सकते हैं आप कह रहे हो कर सकते हैं क्योंकि शक्तिमान है

2000
02:22:18,080 --> 02:22:22,240
कर सकते हैं क्योंकि सर्व शक्तिशाली है वो जो तो शरीर शाश्वत

2001
02:22:22,240 --> 02:22:24,480
कहां रहा अरे

2002
02:22:24,480 --> 02:22:28,680
अरे भाई अरे यार आपके क्वेश्चन पता है आपके क्वे

2003
02:22:28,680 --> 02:22:32,680
क्वेन पता हैसे क्या ईश्वर रेप कर सकता है तो बोलेगा भाई देख ईश्वर तो

2004
02:22:32,680 --> 02:22:36,920
बहुत ही दयालु है अभ भी आे रेप

2005
02:22:36,920 --> 02:22:39,520
नो किया

2006
02:22:39,520 --> 02:22:43,520
है कट नहीं कर सकते मुझे पता है देखो अरे आवान आप

2007
02:22:43,520 --> 02:22:48,800
अद्वैत हो यार मैं एथ लोगों को संभाल चुका इस टॉपिक प

2008
02:22:48,800 --> 02:22:53,600
अरे क कर नहीं तो मैं आपको रिमूव कर दूंगा

2009
02:22:53,600 --> 02:22:57,760
मैं व्यक्तिगत कटाक्ष नहीं कर रहा बोलते आपने

2010
02:22:57,760 --> 02:23:01,840
अभ बोला अवती जैसे हीनता के साथ तो मैं

2011
02:23:01,840 --> 02:23:05,960
य बैठ करके आपकी हीनता का ध करने नहीं आया हूं आपके

2012
02:23:05,960 --> 02:23:09,960
द्वारा ठीक है आप अगर इस तरह से वगत कटाक्ष करेंगे तो मैं

2013
02:23:09,960 --> 02:23:14,600
आपको रिम कर दूंगा अभी तक मैंने कितनी बार आपको व्यक्तिगत कटाक्ष किया

2014
02:23:14,600 --> 02:23:19,120
किया है आपने मेरी ठीक ठी बोलने कीट उसने

2015
02:23:19,120 --> 02:23:23,160
बोला है अरे तो मैंने उसको सुधारने के लिए बोला आपने जब रिपीट की तो

2016
02:23:23,160 --> 02:23:27,320
मैंने बोला कि आप मत कर तो मैं अपना होना छोड़ दू इसलिए

2017
02:23:27,320 --> 02:23:31,760
बोल रहे आप छोड़ो क्योंकि क्योंकि जीवर स्वरूप कृष्ण नित्य दस छो

2018
02:23:31,760 --> 02:23:35,760
निर्णय मत लीजिए और आपने जहां प बोला था निर्णय कर

2019
02:23:35,760 --> 02:23:39,600
रहे आप बता रहा मैंने जब ठी जब मैंने ठीके प उंगली

2020
02:23:39,600 --> 02:23:44,120
उठाई थी तो आपने बोला हां ये गलत है मैं अब नहीं करूंगा

2021
02:23:44,120 --> 02:23:48,360
मैं जब आप अद्वैत प उंगली रहे तो मैं ये नहीं बोल रहा

2022
02:23:48,360 --> 02:23:52,520
हूं मैंने क्या बोला आपको व्यक्तिगत कटाक्ष करना है

2023
02:23:52,520 --> 02:23:56,600
तो मैं आपको हटाऊ आप मुझे क्लियर करिए व्यक्तिगत कटाक्ष करना है

2024
02:23:56,600 --> 02:24:00,640
व्यक्तिगत कटाक्ष करना है मैं पूछ रहा हूं करना है मैं पूछ रहा

2025
02:24:00,640 --> 02:24:04,760
हूं मैं पूछ रहा हूं करना है मैं करी नहीं है मैंने कर नहीं है मैंने करी

2026
02:24:04,760 --> 02:24:09,160
नहीं है अभी आपने बोला अरे यार आप अद्वैत हो यार मैं ये करता हूं ये क्या

2027
02:24:09,160 --> 02:24:13,240
इतना बेसिक समझते हो मैं क रहा आप अद्वैत हो इतना बेसिक तो चीज समझते हो एथ

2028
02:24:13,240 --> 02:24:17,560
लोग नहीं समझते ऐसा कह रहा था मैं आपने गलत उसको ले लिया आप अद्वैत हो आप शास्त्र

2029
02:24:17,560 --> 02:24:21,680
को जानते होए कहना चाहिए आपने भी व्यक्तिगत कटाक्ष किया

2030
02:24:21,680 --> 02:24:25,920
था आप मुझे ये कहते कि मैंने इस कॉन्टेक्स्ट में कहा आपने किया है आपने किया है व्यक्तिगत

2031
02:24:25,920 --> 02:24:30,200
कटाक्ष नहीं किया क्योंकि मैंने जिस चीज प किया था वो आपने मानी कि मैं अभी ये नहीं

2032
02:24:30,200 --> 02:24:34,240
करूंगा वो मैंने इसलिए मानी क्योंकि आप बीच-बीच में टोक रहे हो तो मैं चल ठीक है भाई मैं

2033
02:24:34,240 --> 02:24:39,000
नहीं करूंगा तो आप ठीक है ठीक है बोलोगे अभी मैं पूछ रहा हूं

2034
02:24:39,000 --> 02:24:43,040
अच्छा ठीक है आप मुझे बताइए कि आप ब्रह्म को सर्व शक्तिशाली इसीलिए

2035
02:24:43,040 --> 02:24:47,960
कह रहा हूं इसीलिए कह रहा हूं कोई मत पढो टक्कर में कोई नहीं है टक्कर में

2036
02:24:47,960 --> 02:24:52,000
आप कौन सा टक्कर दे रहे हो अभी आप चार टॉप चार टॉपिक्स आपने बढ़ा दिए

2037
02:24:52,000 --> 02:24:54,640
चलो छोड़ो ये छोड़ो आगे करो तो इसको टक्कर बोलते हैं

2038
02:24:54,640 --> 02:24:59,520
इसको टक्कर नहीं बोलते अभी मैं आपको हटा दूं अगला विषय खोलूं कि नहीं

2039
02:24:59,520 --> 02:25:03,600
खोलू पहले पहले इस विषय पर रो कि ब्रह्म सर्व शक्तिशाली है कि नहीं वो सब

2040
02:25:03,600 --> 02:25:07,760
कुछ कर सकता है नहीं रो वही वही वही अपने मूल विषय प ही आ रहा हूं अपने मूल

2041
02:25:07,760 --> 02:25:11,800
विषय प ही आ रहा हूं उसी जो चल रहा है आपके जो ब्रम है हां ठीक है तो दोनों साइड से बात

2042
02:25:11,800 --> 02:25:15,840
करेंगे ना आपके ब्रम है वो सर्वशक्ति अभ बात करेंगे पहले जो चल रहा था उसको खत्म

2043
02:25:15,840 --> 02:25:19,840
करें जो चल रहा था उसको खत्म करें चल क्या रहा था खत्म करेंगे कैसे

2044
02:25:19,840 --> 02:25:23,840
खत्म कर मैं पूछ रहा हूं ना आपसे क्या

2045
02:25:23,840 --> 02:25:24,720
भगवान श्री

2046
02:25:24,720 --> 02:25:28,920
कृष्ण का जो वो है शरीर जिसको लेके वो आए थे गोलोक

2047
02:25:28,920 --> 02:25:33,640
धाम से वो शाश्वत था या नहीं शाश्वत था

2048
02:25:33,640 --> 02:25:38,240
बिल्कुल था आप कह रहे हो कि वो उसको नष्ट कर सकते हैं

2049
02:25:38,240 --> 02:25:42,360
तो या तो वो शत नहीं है या उसको नष्ट नहीं किया कर सकते

2050
02:25:42,360 --> 02:25:46,400
हैं वाली एबिलिटी का होना अलग बात है और कर

2051
02:25:46,400 --> 02:25:50,840
मेरे भाई शाश्वत की डेफिनेशन क्या है शाश्वत

2052
02:25:50,840 --> 02:25:54,880
की डेफिनेशन यह है जो हमेशा वैसे का वैसा ही रहे जिसको

2053
02:25:54,880 --> 02:25:59,360
मारा नहीं जा सकता आपकी स्न की बुक में लिखा है

2054
02:25:59,360 --> 02:26:03,440
अरे नहीं मारा जा सकता भाई ख अरे मैं खुद

2055
02:26:03,440 --> 02:26:08,280
कह रहा हूं कि नहीं मारा जा सकता अरे भाई सुनो अब मेरी बात सुनो

2056
02:26:08,280 --> 02:26:13,600
मैं ये नहीं कह रहा हैरी बात है क्लियर बात ही नहीं करते

2057
02:26:13,600 --> 02:26:17,640
शाश्वत और शाश्वत भी है और जो है मार भी सकते हैं

2058
02:26:17,640 --> 02:26:21,880
वाह वो शाश्वत भी है मार भी सकते मैंने मैंने

2059
02:26:21,880 --> 02:26:25,960
क्या बोला कि ईश्वर सर्व शक्तिशाली है वो जो चाहे वो

2060
02:26:25,960 --> 02:26:29,960
कर सकता है उसकी लिमिटेशन हम ईश्वर शाश्वत चीजों को भी

2061
02:26:29,960 --> 02:26:34,120
नष्ट कर सकता है ईश्वर के पास जो उसकी

2062
02:26:34,120 --> 02:26:38,400
शक्तियां है ईश्वर अनंत शक्तिशाली है वो सब चीज कर सकता है व

2063
02:26:38,400 --> 02:26:39,960
कर सकता है वो

2064
02:26:39,960 --> 02:26:44,080
जो कर सकता है वाली जो क्वालिटी है उसकी उसमें और

2065
02:26:44,080 --> 02:26:48,080
कर देता है वाला जो भाव है उसमें अंतर है ना मैंने

2066
02:26:48,080 --> 02:26:49,560
आपसे कहा कि वो कर रहे हैं

2067
02:26:49,560 --> 02:26:53,680
क किया उन्होने मैंने आपसे कहा वो करते है कि नहीं मैंने आपसे

2068
02:26:53,680 --> 02:26:57,840
पूछ करते नहीं मैंने आपसे पूछा क्या करते है कि नहीं पहले तो आप अपना

2069
02:26:57,840 --> 02:27:01,840
फेस सीधा दिखाइए मुझे आपका टे फेस है इटेट लग रहा है

2070
02:27:01,840 --> 02:27:05,400
मुझे सीधा

2071
02:27:05,400 --> 02:27:09,400
रख टे हो आ रहा करके तो टेट करता

2072
02:27:09,400 --> 02:27:13,960
है थो दूर से बात करम में थोड़ दूर से बात कर प्ज

2073
02:27:13,960 --> 02:27:17,960
ठीक है मैं आपको पहले बो दूर रखा है लेकिन थोड़ा सा इस तरीके

2074
02:27:17,960 --> 02:27:22,200
से जा रहा है पहले बोला था आपने बो ठीक को बात नहीं अ दिक्कत

2075
02:27:22,200 --> 02:27:26,320
दे रहा है आप थोड़ा पीछे रह के बात करिए कैमरे से जी ठीक है तो

2076
02:27:26,320 --> 02:27:28,520
मैं आपसे ये कह रहा था शिवांश जी

2077
02:27:28,520 --> 02:27:32,760
ठीक है ईश्वर है वो सब कुछ कर सकता है सब कुछ

2078
02:27:32,760 --> 02:27:36,760
कर सकता है ये शक्ति हो ना उसके पास वो हर एक चीज कर सकता

2079
02:27:36,760 --> 02:27:40,960
है यह उसकी उसके शक्तिमान होने का उदाहरण है ठीक है

2080
02:27:40,960 --> 02:27:45,160
वो सब कुछ कर सकता है लेकिन क्या वो सब कुछ करता है ये

2081
02:27:45,160 --> 02:27:49,280
बात नहीं है कि जैसे कि क्या आपसे कहा कहा लोग करते हैं

2082
02:27:49,280 --> 02:27:53,760
कि नहीं मैं कट करूंगा मैंने आप

2083
02:27:53,760 --> 02:27:57,800
कही नहीं है वो क्यों ला रहे आप बीच में आपसे पूछ रहा हं उनका

2084
02:27:57,800 --> 02:28:02,000
शरीर शाश्वत है आपने कहा है आप कह रहे हैं कि उनके शरीर को

2085
02:28:02,000 --> 02:28:06,080
नष्ट कर सकते हैं और और शाश्वत कौन होता है जो कभी नष्ट

2086
02:28:06,080 --> 02:28:10,200
नहीं होता तो या तो वह शाश्वत नहीं है और या फिर वो

2087
02:28:10,200 --> 02:28:14,720
वो नहीं कर सकते अपने शरीर को नष्ट नहीं कर सकते आपको या तो यह मानना पड़ेगा

2088
02:28:14,720 --> 02:28:19,350
या फिर ये मानना पड़ेगा दोनों में सेन

2089
02:28:19,350 --> 02:28:23,520
[संगीत] मैंने ये नहीं कहा मैंने ये नहीं कहा कि वो करते हैं मैं

2090
02:28:23,520 --> 02:28:27,560
ये पूछ रहा हूं अगर शरीर शाश्वत है तो वो नष्ट नहीं हो सकता और

2091
02:28:27,560 --> 02:28:30,560
अगर वो सर्वशक्तिमान है तो नष्ट कर सकते

2092
02:28:30,560 --> 02:28:34,720
हैं तो इसका मतलब अगर वो कर सकते हैं तो उनका शरीर शाश्वत

2093
02:28:34,720 --> 02:28:38,920
नहीं है और अगर वो नहीं कर सकते तो वह सर्वशक्तिमान नहीं है अच्छा

2094
02:28:38,920 --> 02:28:43,080
अच्छा अच्छा तो जो ईश्वर है वह सर्व शक्तिशाली मतलब उसको कोई डिफीट

2095
02:28:43,080 --> 02:28:47,280
भी नहीं कर सकता ना उसको कोई हरा नहीं सकता ना उसको

2096
02:28:47,280 --> 02:28:52,120
व्यवहार में कोई नहीं हरा सकता व्यवहार मतलब क्या

2097
02:28:52,120 --> 02:28:56,720
दो डायमेंशन एक जो मायाव दुनिया है और एक जो ब्रह सय

2098
02:28:56,720 --> 02:29:01,160
डायमेंशन क बता कहां बताई गई डायमेंशन डायमेंशन क बताई गई

2099
02:29:01,160 --> 02:29:06,080
हैरे क च स्क्रीन से चले गए

2100
02:29:06,080 --> 02:29:10,120
हा आ ग कहां है मतलब इसका वर्णन का है

2101
02:29:10,120 --> 02:29:14,240
शास्त्र में वर्णन क्या है इसका अच्छा शास्त्र के प्रमाण

2102
02:29:14,240 --> 02:29:18,280
डायमेंशन यही है कि जैसे अह ब्रह्मा कहा गया शास्त्र में ठीक

2103
02:29:18,280 --> 02:29:22,320
है अ जब शस्त्र में कहा गया तो उसका मतलब यह

2104
02:29:22,320 --> 02:29:26,840
है कि मैं ही ब्रह्म हूं यह बताया जा रहा है जीवात्मा को जिस स्थ

2105
02:29:26,840 --> 02:29:31,080
अभी अभी आपने पूछा है तो सुनिए अभी आपने

2106
02:29:31,080 --> 02:29:35,320
पूछ तो सुभ आपने पूछ तो सुनि अभी आपने पूछा

2107
02:29:35,320 --> 02:29:41,320
है तो सुनिए प्लीज आगे ी

2108
02:29:42,760 --> 02:29:46,960
बगा हम ब्रह्मा जब कहा गया शास्त्र में तो

2109
02:29:46,960 --> 02:29:50,960
उसको प्राप्त बताया गया कि तुम्हे यहां तक पहुंचना इस चेतना

2110
02:29:50,960 --> 02:29:55,200
चेतन अवस्था तक तुम्हें पहुंचना है ऐसा नहीं है कि अभी के अभी तुम्ह मान लेना है

2111
02:29:55,200 --> 02:29:59,240
मगर वास्तविकता में तुम्हें इस चेतन अवस्था तक पहुंचना है कि अहम ब्रह्मास्मि

2112
02:29:59,240 --> 02:30:03,520
इससे पता चलता है कि वहां से देखने पर ब्रह्म

2113
02:30:03,520 --> 02:30:08,200
की ओर से देखने पर य जो जगत है वो मिथ्या है वो माया है

2114
02:30:08,200 --> 02:30:12,320
जिसको हम सच समझ रहे हैं व्यवहार में तो व्यवहार में ईश्वर कुछ

2115
02:30:12,320 --> 02:30:16,400
भी कर सकता है मनुष्य जो सोच सकता है वो ईश्वर कर

2116
02:30:16,400 --> 02:30:17,520
सकता है अभी

2117
02:30:17,520 --> 02:30:21,560
आपने कहा कि डायमेंशन कोई अलग है नहीं ये भी सत्य वो भी सत्य है

2118
02:30:21,560 --> 02:30:25,560
आपका ईश्वर वहां से उठकर के यहां पर सीधा आता है सीधा आता है

2119
02:30:25,560 --> 02:30:29,600
उसका जो शरीर है वो नित्य है अगर नित्य है तो वह अपने शरीर को

2120
02:30:29,600 --> 02:30:33,600
मार नहीं सकता अगर मार नहीं सकता तो व सर्वशक्तिमान नहीं है और अगर

2121
02:30:33,600 --> 02:30:38,440
वो मार सकता है तो शरीर नित्य नहीं है प्लीज कंटिन्यू

2122
02:30:38,440 --> 02:30:38,940
ठीक है

2123
02:30:38,800 --> 02:30:42,960
आपका हो गया मैंने आपसे प्रमाण माने इंटरप्रिटेशन सुनो

2124
02:30:42,960 --> 02:30:47,560
क्या होता है एक चीज फैक्ट है कि आपके पास इसका शास्त्र प्रमाण नहीं

2125
02:30:47,560 --> 02:30:51,920
है व्यवहारिक धरा व्यवहारिक धरातल की बात कर रहे

2126
02:30:51,920 --> 02:30:56,000
देखिए इसीलिए को नहीं लाता हूं कि जब उस पर हम लोग व्याख्या

2127
02:30:56,000 --> 02:31:00,120
करेंगे तो आप कहेंगे उसकी व्याख्या ये है और मैं कहूंगा उसकी व्याख्या

2128
02:31:00,120 --> 02:31:04,160
य है सुनिए तो इसमें हमारा टाइम वेस्ट होगा इसलिए मैं कह रहा हूं

2129
02:31:04,160 --> 02:31:08,320
आप मुझे तर्क बताइए क्या ईश्वर सतिमान है कि नहीं इस

2130
02:31:08,320 --> 02:31:14,120
कन का प्लीज

2131
02:31:14,120 --> 02:31:18,120
प्लीज है कि नहीं शिवा जी ईश्वर

2132
02:31:18,120 --> 02:31:18,620
सर्व

2133
02:31:18,400 --> 02:31:22,560
शक्तिशाली है ठीक तो क्या वो अपने शरीर को नष्ट कर सकता है

2134
02:31:22,560 --> 02:31:26,880
कि नहीं सुनो सुनो सुनो आप

2135
02:31:26,880 --> 02:31:32,880
अभी मैं बोल लू मैं पहले इसको क्लियर करिए कर सकता है या नहीं

2136
02:31:33,880 --> 02:31:38,280
प्लीज इस तरीके अगर हम ऐसा देखे कि उसकी इच्छा नहीं है प्

2137
02:31:38,280 --> 02:31:43,200
प्लीज मुझे बताइए कर सकता है कि नहीं क्या मेरी हेलो

2138
02:31:43,200 --> 02:31:47,400
ना बताइए पहले उसके बाद व्याख्या बताइए व्याख्या बताइए मैं आपको बोलूंगा व्याख्या

2139
02:31:47,400 --> 02:31:51,600
बता हां कि ना बताइए कर सकता है

2140
02:31:51,600 --> 02:31:55,720
कि नहीं बोलिए मैं हा और ना जो आंसर मेरा होगा

2141
02:31:55,720 --> 02:31:59,920
वो मैं व्याख्या के साथ ही बताऊंगा बिना व्याख्या के मैं नहीं बताऊंगा

2142
02:31:59,920 --> 02:32:03,920
चलिए बोलिए अच्छा ठीक है कि

2143
02:32:03,920 --> 02:32:04,960
हां वह अपने आप

2144
02:32:04,960 --> 02:32:09,480
को नष्ट कर सके सर्व शक्तिशाली तो हा ऐसी एक हो सकता है कि मे भी वो

2145
02:32:09,480 --> 02:32:14,200
उसके शक्ति है ठीक है लेकिन वो नहीं कर सकता

2146
02:32:14,200 --> 02:32:18,360
अभी फिर से कट मत करना देख रहे हैं लोग अभी भाई अगर कोई चीज

2147
02:32:18,360 --> 02:32:22,360
होगी जो आप गलत बोल रहे हैं शतर कर रहे हैं तो मुझे कट करना पड़ेगा

2148
02:32:22,360 --> 02:32:26,600
आप हो सकता है बात नहीं हो रही है क्लियर कट ची बोलिए

2149
02:32:26,600 --> 02:32:30,800
बिल्कुल ठोक के ूठा गा के बोलिए ो

2150
02:32:30,800 --> 02:32:34,880
के बोल रहा लेकिन बोल नहीं देते हो सकता है एक तरीके से

2151
02:32:34,880 --> 02:32:39,520
और वो स्पिरिचुअल है यह है वो है यह मलमा मिक्सचर मत बोलिए

2152
02:32:39,520 --> 02:32:43,600
स्पष्ट बोलिए कर सकता है या नहीं मैं स्पष्ट ही कह

2153
02:32:43,600 --> 02:32:47,720
रहा हूं सुनिए आंसर मेरा स्पष्ट है बस आप बोलने दीजिए अभी आप कुछ

2154
02:32:47,720 --> 02:32:51,880
मत बोलिए ठीक हैसर दूंगा आंसर मैं जो दूंगा सिर्फ

2155
02:32:51,880 --> 02:32:55,920
आपके अकॉर्डिंग नहीं है आपकी देखने वाली ऑडियंस के अकॉर्डिंग भी है और मेरी देखने

2156
02:32:55,920 --> 02:33:00,080
वाली ऑडियंस के अकॉर्डिंग भी है आप आप राधा कृष्ण दास जी आप यहां

2157
02:33:00,080 --> 02:33:04,560
पर अगर व्यर्थ का अब आप कुछ भी बोलेंगे मैं इसको स्ट्रीम को समाप्त करूंगा

2158
02:33:04,560 --> 02:33:08,720
मत बोलिए आप वो जो टॉपिक चल रहा है उसको बोलिए प्लीज बोल

2159
02:33:08,720 --> 02:33:12,800
रहा हूं मैं नहीं बोल रहे वो ऑडियंस के लिए है ये इसके लिए

2160
02:33:12,800 --> 02:33:16,960
उसके लिए मत बताइए आप वो आंसर दीजिए जो आंसर मैं दूंगा

2161
02:33:16,960 --> 02:33:22,960
मैं अपने हिसाब से दूंगा ठीक है आप सुनने

2162
02:33:23,680 --> 02:33:28,080
अरे आप फिर से ब्लैक आउट हो गया पूरा स्क्रीन ब्लैक आउट हो गया स्क्रीन पूरा ब्लक

2163
02:33:28,080 --> 02:33:32,240
दीजिए राधा कृष्ण जी 439

2164
02:33:32,240 --> 02:33:38,200
हो रहा है मुझे 441 तक का टाइम चाहिए बोलने के

2165
02:33:38,200 --> 02:33:42,640
लिए दो मिनट चाहिए मुझने के लिए कितना हो रहा है

2166
02:33:42,640 --> 02:33:47,080
कितना हो रहा है अभ टाइम टाइम 439 हो रहा है मुझे

2167
02:33:47,080 --> 02:33:51,080
442 तक टाइम दे दीजिए 439 हो

2168
02:33:51,080 --> 02:33:55,120
रहा है 442 तीन मिनट आपको चाहिए नाना नहीं

2169
02:33:55,120 --> 02:33:59,200
पा मिनट ले लो पा मिनट पूरा आपको पा मिनट आप

2170
02:33:59,200 --> 02:34:03,280
नहीं सुन पाओगे मुझको मैं इसलिए क रहा मुझे दो मि ठीक है बोला तो

2171
02:34:03,280 --> 02:34:08,200
नहीं सुनूंगा अगर आपने बीच में क्वेश्चन के ठीक है ठीक है बोला तो नहीं सुनूंगा

2172
02:34:08,200 --> 02:34:12,240
काम करते सुनो सुनो एक काम करते हैं

2173
02:34:12,240 --> 02:34:16,240
ताकि हम दोनों के लिए इजी हो जाए य जो चर्चा हमारे लिए इी हो जाए हम एक काम

2174
02:34:16,240 --> 02:34:20,240
करेंगे कि आप अपने आप को म्यूट करिए जब मैं बोलूंगा जी अभी

2175
02:34:20,240 --> 02:34:24,760
आप बोलिए मैं जब ये बोलूंगा आवान जी बोलिए फिर आप बोलना स्ट कर

2176
02:34:24,760 --> 02:34:29,640
अगर आपने सारी लिमिट क्रॉस कर दी तीन पाछ सा उसका क्या करेंगे

2177
02:34:29,640 --> 02:34:33,960
दो मिनट से भी ज्यादा नहीं लूंगा तो आप मुझे कंट्रोल

2178
02:34:33,960 --> 02:34:38,080
कर रहे हैं अपने आप को कंट्रोल नहीं करेंगे आप मुझे अभी

2179
02:34:38,080 --> 02:34:38,680
मुझे कंट्रोल

2180
02:34:38,680 --> 02:34:43,000
मैं तो आपको बस इतना बोला सिर्फ दो मिनट दे आदत है गलत है जब तक आपकी उत्तर

2181
02:34:43,000 --> 02:34:47,800
पूरा नहीं हुआ तब तक आप सामने वाले से मत पूछिए किय ठीक है कि नहीं

2182
02:34:47,800 --> 02:34:52,760
गलत को सही कर मुझे मत कल मैंने मैंने

2183
02:34:52,760 --> 02:34:57,040
सब मत बोलिएगा आप अपना आंसर दीजिए राधा

2184
02:34:57,040 --> 02:35:01,400
कृ दास जी यह जो चर्चा है खामा खा टाइम लंबा हो रहा है

2185
02:35:01,400 --> 02:35:06,000
आप समझिए मेरी बात को बो लेकिन आप लेक्चर

2186
02:35:06,000 --> 02:35:10,320
बोलिए या पा पा मिनट हो गए आप उत्तर नहीं बोलेंगे सब कुछ बोलेंगे

2187
02:35:10,320 --> 02:35:15,120
अच्छा ठीक है बोल रहा मुझे बोलने हा बोलो बो बो प्

2188
02:35:15,120 --> 02:35:19,680
प्लीज हा मुझे बस दो मिनट बोलने दो बिल्कुल टोए नहीं मैं कुछ भी बोलू

2189
02:35:19,680 --> 02:35:24,520
तो बेसिकली हां ठीक है बोल रहा हूं मैं बोल रहा हूं सो बेसिकली

2190
02:35:24,520 --> 02:35:28,800
क्या होता है जब आपका जो क्वेश्चन था कि क्या ईश्वर सर्व शक्तिशाली

2191
02:35:28,800 --> 02:35:32,800
है क्या ईश्वर सर्व शक्तिशाली हैय आपका क्वेश्चन था तो क्या

2192
02:35:32,800 --> 02:35:36,800
वो अपने आप को नष्ट कर सकता है तो मैंने उस कांटेक्ट में बोला कि हां वो तो सर्व शक्तिशाली

2193
02:35:36,800 --> 02:35:40,800
है वो कुछ भी कर सकता है सर्व शक्तिशाली का अर्थ ये होता है कि वो सब कुछ कर

2194
02:35:40,800 --> 02:35:44,800
सकता है ठीक है तो उस कांटेक्ट में उस कॉन्टेक्स्ट कांटेक्ट की बात कर रहा हूं उस

2195
02:35:44,800 --> 02:35:49,160
कोंटेक्स्ट में ऐसा है कि हां वो कर सकता है क्योंकि वो सर्व शक्तिशाली है

2196
02:35:49,160 --> 02:35:53,760
दूसरा क्या व ऐसा सच में कर सकता है क्या सच में ऐसा वो कर सकता है

2197
02:35:53,760 --> 02:35:57,920
वास्तव में तो उसका उसका आंसर है नहीं व ऐसा नहीं कर सकता क्योंकि अगर वो ऐसा

2198
02:35:57,920 --> 02:36:01,960
कर देगा तो उसकी जो इटरनल उसकी क्वालिटी है वो नष्ट हो जाएगी और वो अपनी

2199
02:36:01,960 --> 02:36:06,160
इटरनल क्वालिटी को कभी नष्ट नहीं करेंगे ठीक है और वो नहीं कर सकते

2200
02:36:06,160 --> 02:36:10,320
क्योंकि उनके अंदर इच्छा भी नहीं है व ऐसे है मल है

2201
02:36:10,320 --> 02:36:14,480
वो नहीं कर सकते हा नहीं कर सकते लेकिन फिर भी आंसर

2202
02:36:14,480 --> 02:36:18,520
मैंने आपको दो तरीके से दे दिए और दोनों आंसर सही है एकदम वो जनता

2203
02:36:18,520 --> 02:36:22,640
देखेगी जनता ी आपने अपना बोल दिया आपने अपना

2204
02:36:22,640 --> 02:36:27,800
बोल दिया कि वो कर सकते हैं मगर वास्तविकता में नहीं कर

2205
02:36:27,800 --> 02:36:32,080
सकते वास्तव मैंने ये बोला कि वो कर सकते हैं

2206
02:36:32,080 --> 02:36:33,880
लेकिन वो करते नहीं है क्योंकि उनके अंदर

2207
02:36:33,880 --> 02:36:37,920
ऐसा नेर पू वो करते हैं कि नहीं मुझे ये बताइए

2208
02:36:37,920 --> 02:36:41,920
कर सकते हैं कि नहीं अरे ये ये जो

2209
02:36:41,920 --> 02:36:46,200
क्वेश्चन है ना क्वेश्चन ही तो अपने आप में एक ऐसा है ना कि यहां पे पैराडॉक्स आ सकता है यहां पे आपका

2210
02:36:46,200 --> 02:36:51,720
क्वेश्चन ही ऐसा है अरे बोलिए मुझे बताइए ना बोलिए

2211
02:36:51,720 --> 02:36:54,640
बताइए सुनि आपका जो क्वेन है सुनि आपका

2212
02:36:54,640 --> 02:36:58,720
जो क्वेश्चन है वो क्वेन अपने आप में ऐसा है कि उसका लोग गलत इंटरप्रिटेशन

2213
02:36:58,720 --> 02:37:03,040
निकाल सकते हैं उस चीज का ठीक है मेरे भाई

2214
02:37:03,040 --> 02:37:07,080
अभी आपसे आपने इंटरप्रिटेशन बता दिया नहीं बताया तो और बता लीजिए उसके

2215
02:37:07,080 --> 02:37:11,240
बाद लास्ट में मैं पूछ लूंगा आपसे दोबारा कर सकता है

2216
02:37:11,240 --> 02:37:15,400
कि नहीं ईश्वर नहीं कर सकता बस

2217
02:37:15,400 --> 02:37:20,040
खुश अपने शरीर को नष्ट नहीं कर सकता

2218
02:37:20,040 --> 02:37:24,960
नहीं कर सकता क्योंकि उसकी इच्छा नहीं है बस बात खत्म नहीं कर सकता

2219
02:37:24,960 --> 02:37:29,680
ना नहीं कर सकता क्योंकि उसकी इच्छा नहीं है अरे

2220
02:37:29,680 --> 02:37:33,680
क्योंकि उसकी इच्छा नहीं क्या उसकी इच्छा हो सकती है कि नहीं चलो

2221
02:37:33,680 --> 02:37:38,560
इस पर आ जाओ हो हो भी जिस प्रकार का ईश्वर है

2222
02:37:38,560 --> 02:37:42,600
ईश्वर को मैं मानता हूं तो उस उसके अंदर तो ऐसी इच्छा नहीं आ सकती जिस ईश्वर

2223
02:37:42,600 --> 02:37:47,040
को लेकिन आप निम लाग है एक नियम लागू है

2224
02:37:47,040 --> 02:37:51,960
उसकी इच्छा नहीं हो सकती

2225
02:37:51,960 --> 02:37:56,120
हां एक तरीके से है अगर अगर ऐसा ईश्वर है कि उसकी ऐसी इच्छा भी हो स

2226
02:37:56,120 --> 02:38:00,920
लागू है एक नियम से बाधित है

2227
02:38:00,920 --> 02:38:04,840
ना एक तरीके से हां भी एक तरीके से है भी और एक तरीके से नहीं भी

2228
02:38:04,840 --> 02:38:08,880
हां वो वो तरीके निकालते रहो चलो ठीक है आप

2229
02:38:08,880 --> 02:38:13,560
भी तरीके निकालते रहो आप भी तरीके निकालते रभी मैं पूछ रहा हूं

2230
02:38:13,560 --> 02:38:17,800
पूछ मक करोगे तो मुझे भी मक करना आता है शिवान जी अगर आप मौक कर सकते हो मुझे भी करना आता है

2231
02:38:17,800 --> 02:38:21,880
आप बड़े हो इसलिए रिस्पेक्ट से बात कर रहा हूं अच्छा चलो अब नहीं करूंगा सॉरी अब

2232
02:38:21,880 --> 02:38:25,880
नहीं करूंगा इट्स ओके इट्स ओके मैं ये कह रहा

2233
02:38:25,880 --> 02:38:29,920
हूं कि अब आ जाते हैं

2234
02:38:29,920 --> 02:38:34,080
कि ये जो भगवान शिव को

2235
02:38:34,080 --> 02:38:38,480
बोला गया है कि भाई हरि के अलावा विष्णु

2236
02:38:38,480 --> 02:38:42,560
के अलावा किसी की भी भक्ति जो है वो भ्रामक है

2237
02:38:42,560 --> 02:38:46,600
हां हां सत्य है या उसको हम क्या समझे क्या ना समझे

2238
02:38:46,600 --> 02:38:50,640
वो बताइए देखिए शिवांश जी अ थोड़ा मुझे

2239
02:38:50,640 --> 02:38:54,720
एक चीज बुरी लग एक मिनट एक मिनट एक मिनट ये टॉपिक बाद में अपना एक टॉपिक रह गया

2240
02:38:54,720 --> 02:38:58,880
कमेंट में देख लिया एक टॉपिक रह गया मुझे

2241
02:38:58,880 --> 02:39:02,920
अच्छी लगी आवाज नहीं आ करेंगे करेंगे करेंगे उस करेंगे एक

2242
02:39:02,920 --> 02:39:07,240
टॉपिक रह गया मैंने लिखा था आ रही है जी मेरी आवाज आ रही है

2243
02:39:07,240 --> 02:39:13,160
आ रही है हेलो आ रही है हेलो आवाज आ रही

2244
02:39:13,160 --> 02:39:17,240
है हां हा हां हा मुझे अभी आई अभी आई थोड़ा पता नहीं आई

2245
02:39:17,240 --> 02:39:19,840
थिंक नेटवर्क हो गा आप

2246
02:39:19,840 --> 02:39:24,120
अपने मोबाइल में डू नॉट डिस्टर्ब लगा

2247
02:39:24,120 --> 02:39:28,400
दीजिए कोई दिक्कत वाली बात नहीं है ठीक है मैं ये कह रहा था कि

2248
02:39:28,400 --> 02:39:32,400
मुझे कुछ प्रश्न थे वो तो आप आगे बढ़ते हैं आगे बढ़ते हैं

2249
02:39:32,400 --> 02:39:36,400
करेंगे करेंगे करेंगे करेंगे करेंगे अभी ये जो टॉपिक चल रहा था

2250
02:39:36,400 --> 02:39:40,560
ना जो टॉपिक चल रहा था उसी टॉपिक से उसी टॉपिक से

2251
02:39:40,560 --> 02:39:44,720
क्वेश्चन उठा था कि वो गलत कार्य कर सकता है कि

2252
02:39:44,720 --> 02:39:48,960
नहीं उसके पास इतनी शक्ति है ईश्वर के पास

2253
02:39:48,960 --> 02:39:53,000
इतनी शक्ति है कुछ भी कर सता एक तो नियम ये लागू है कि उसकी इच्छा

2254
02:39:53,000 --> 02:39:57,440
नहीं हो सकती उसकी इच्छा नहीं है मैंने बोला हो सकती

2255
02:39:57,440 --> 02:40:01,840
स्वयं के शरीर को नष्ट कर सकता है पर उसकी इच्छा नहीं हो सकती

2256
02:40:01,840 --> 02:40:05,880
ये आपने बोला है मैंने क्या बोला मैं जो

2257
02:40:05,880 --> 02:40:10,080
बोला कि नहीं हो सकती वो मैंने शास्त्र के आधार पर बोला है ठीक है मगर

2258
02:40:10,080 --> 02:40:14,440
आपका जो सिद्धांत है वोय अपने शरीर को नष्ट कर सकता है उनका शरीर शाश्वत

2259
02:40:14,440 --> 02:40:18,720
नहीं है मगर वो इसलिए नहीं होता है नष्ट वो क्योंकि ईश्वर की इच्छा

2260
02:40:18,720 --> 02:40:22,880
नहीं होती और ईश्वर इतने अंश में बाधित है सुनो सुनो

2261
02:40:22,880 --> 02:40:26,920
सुनो पहली बात तो ना आपका क्वेश्चन अपने आप में थोड़ा सा एक गलत है देखो हम

2262
02:40:26,920 --> 02:40:31,120
ज बात आत्मा की करते हैं आत्मा की ज बात करते हैं तो हमको वहा प नष्ट

2263
02:40:31,120 --> 02:40:34,840
हो सकता है ये हो सकता है वैसा हो सकता है उसके बारे में हमको बात नहीं

2264
02:40:34,840 --> 02:40:37,840
करनी

2265
02:40:37,840 --> 02:40:42,400
चाहिए यानी कि इस सवाल का जवाब नहीं मिलेगा

2266
02:40:42,400 --> 02:40:46,520
अरे मिलेगा ना क्यों नहीं मिलेगा मैं आपको बोहा आपने जवाब

2267
02:40:46,520 --> 02:40:50,560
दिया है जो जवाब दिया है वो ये है आपने जो जवाब दिया

2268
02:40:50,560 --> 02:40:54,760
है वो यह है वह अपने शरीर को नष्ट तो कर सकता है मगर अपनी इच्छा उसकी

2269
02:40:54,760 --> 02:40:58,840
इच्छा नहीं होती और उसकी इच्छा नहीं होती इसलिए उसके शरीर

2270
02:40:58,840 --> 02:41:03,600
को शाश्वत कहा गया है इच्छा है ही नहीं इच्छा है ही नहीं

2271
02:41:03,600 --> 02:41:07,600
इच्छा है ही नहीं उसकी इच्छा नहीं है शरीर को नष्ट करने की ठीक

2272
02:41:07,600 --> 02:41:11,920
है तो शरीर को नष्ट करने की इच्छा नहीं है इससे वो बाधित है

2273
02:41:11,920 --> 02:41:15,960
कैसे बाधित कैसे हो गया वो अरे भाई इच्छा है

2274
02:41:15,960 --> 02:41:20,000
ही नहीं वो नहीं कर सकता ना क्योंकि उसके अंदर इच्छा नहीं अपने

2275
02:41:20,000 --> 02:41:24,320
शरीर को नष्ट करने की अरे वो परमात्मा है आप सुसाइड

2276
02:41:24,320 --> 02:41:28,880
सुसाइड क्या होता है बताओ सुसाइड क्या होता है नष्ट करना

2277
02:41:28,880 --> 02:41:32,920
मैं तो क नहीं मैंने कहा वो अपने शरीर को जिस शरीर को लेकर

2278
02:41:32,920 --> 02:41:37,400
वो बैकुंठ राम में बैठा है वो जब नीचे आएंगे भगवान श्री कृष्ण

2279
02:41:37,400 --> 02:41:41,480
तो अपने उस शाश्वत शरीर को आपके अकॉर्डिंग वो शाश्वत है

2280
02:41:41,480 --> 02:41:45,560
तो उस शाश्वत शरीर को वो नष्ट कर सकते हैं नहीं आपने हमें

2281
02:41:45,560 --> 02:41:49,680
आंसर दे दिया कि वो कर तो सकते हैं मगर उनकी इच्छा नहीं

2282
02:41:49,680 --> 02:41:50,180
हो

2283
02:41:49,960 --> 02:41:55,960
करने की इच्छा नहीं होती ऐसे व बा है उनको इच्छा नहीं हो

2284
02:41:56,280 --> 02:42:01,240
सकती आंसर यह है खुद को मार देना खुद को मार देना

2285
02:42:01,240 --> 02:42:05,400
फसी से लटका दिया मैंने खुद को ठीक है तो यह एक यह

2286
02:42:05,400 --> 02:42:09,960
मेरे शरीर को खत्म कर रहा आत्मा कभी खत्म नहीं होती उसे

2287
02:42:09,960 --> 02:42:14,240
यानी कि उनकी आत्मा और अलग है

2288
02:42:14,240 --> 02:42:19,200
उससे आपको इसलिए आप क्वे गलत है नष्ट नहीं होती वो चीज

2289
02:42:19,200 --> 02:42:23,240
मैंने कहा यानी कि जिस शरीर से वो यहां आते हैं उस

2290
02:42:23,240 --> 02:42:27,480
शरीर को नष्ट कर सकते हैं मगर उससे जो ईश्वर का मौलिक स्वरूप

2291
02:42:27,480 --> 02:42:31,600
है वो नष्ट नहीं हो सकता अगर शरीर नष्ट हो जो शरीर

2292
02:42:31,600 --> 02:42:35,880
है व स्वयं हरि तो है स्वयं हरि है वो जो फॉम है स्वयं हरि है

2293
02:42:35,880 --> 02:42:40,080
स्वयं स्वयं परमा फम है जब वो फॉम है तो उसकी तुलना हमारे

2294
02:42:40,080 --> 02:42:45,680
शरीर से क्यों कर रहे हैं हमारा शरीर फॉर्म थोड़ी ना है हमारा शरीर तो

2295
02:42:45,680 --> 02:42:50,280
हैर से ह के शरीर की तुलना मत करिए हमारा शरीर तोटे है

2296
02:42:50,280 --> 02:42:54,400
उनका शरीर तो है हां तो तो वही मैं कह रहा हूं तो आप भी ऐसे

2297
02:42:54,400 --> 02:42:58,480
उदाहरण मत दीजिए कि क्या वो नष्ट कर सकता है क्योंकि वो नष्ट हां तो वैसे ही

2298
02:42:58,480 --> 02:43:02,640
जैसे शरीर है हमारा भौतिक शरीर है वो आपके साथ आते हैं मिलते

2299
02:43:02,640 --> 02:43:05,160
हैं हमारे साथ हमारे बीच में रहते हैं

2300
02:43:05,160 --> 02:43:09,160
तो जब वो ऐसा करते हैं तो क्या वो सब कुछ कर सकते हैं कि नहीं नीचे आने

2301
02:43:09,160 --> 02:43:13,440
के बाद हां कर सकते हैं तो वो अपने शरीर का नाच

2302
02:43:13,440 --> 02:43:17,640
कर सकते हैं कि नहीं अरे कर सकते हैं की बात अलग है करते

2303
02:43:17,640 --> 02:43:21,680
हैं उसकी बात अलग है ना कह रहा कि उन्होंने किया कि नहीं मैं पूछ रहा हूं कर

2304
02:43:21,680 --> 02:43:26,160
सकते हैं या नहीं ये क्वेश्चन ऐसा है आपका

2305
02:43:26,160 --> 02:43:31,440
जिसके दो आंसर चलिए अभी मैं पूछ रहा

2306
02:43:31,440 --> 02:43:35,560
हं आप मुझको आंसर देने नहीं दे रहे हो जब सुनो

2307
02:43:35,560 --> 02:43:39,680
ये अभी मैं समझने आंसर दे दिया है का इंफॉर्मेशन आपने मान

2308
02:43:39,680 --> 02:43:43,920
लिया उसकी इच्छा नहीं होती आपने मान लिया उसकी इच्छा नहीं हो सकती

2309
02:43:43,920 --> 02:43:49,920
आपने मान लिया कि उतने अंश में अगर बाद होगा तो है मैं उसके

2310
02:43:50,520 --> 02:43:54,600
मैंने आपको क्या बोला कि उसके अंदर इच्छा नहीं होती टॉपिक प बात

2311
02:43:54,600 --> 02:43:59,400
नहीं करनी नहीं करनी मुझे दूसरे टॉपिक प बात करनी करनी है आपको

2312
02:43:59,400 --> 02:44:04,640
मुझे तो करनी है मुझे सब टॉपिक्स प बात करनी है लेकिन मेरा भी तो आपने तो एक भी टॉपिक नहीं लिया मेरा

2313
02:44:04,640 --> 02:44:08,760
सुनिए वो क्या आपका भी ब्रम सर्व शक्तिशाली है कि नहीं उसका भी तो आंसर दो

2314
02:44:08,760 --> 02:44:13,680
वो वो मैं बताऊंगा अभी जो ये टॉपिक खोला था उसका

2315
02:44:13,680 --> 02:44:19,320
एक ये टॉपिक प प्लीज शिवांश जी प्लीज एकही टॉप

2316
02:44:19,320 --> 02:44:25,320
उसका एक भाग रह गया वो आवश्यक है जनता को बताना सुन

2317
02:44:26,640 --> 02:44:31,280
लो एक बार सुन लो आपने कहा

2318
02:44:31,280 --> 02:44:35,720
कि ईश्वर रेप कर सकता है मगर रेप करता नहीं है

2319
02:44:35,720 --> 02:44:39,760
ठीक है ठीक है हम तो ईश्वर

2320
02:44:39,760 --> 02:44:43,960
बुराई नहीं करता है आपके अनुसार नहीं करता नहीं करता

2321
02:44:43,960 --> 02:44:48,000
पक्का ठीक है हां अब ये बताइए जहां पर रेप हो रहा है वहां

2322
02:44:48,000 --> 02:44:52,360
पर ईश्वर है कि नहीं ईश्वर हर जगह है

2323
02:44:52,360 --> 02:44:56,880
ईश्वर के अंदर उस रेप को रोकने की क्षमता है कि नहीं हां

2324
02:44:56,880 --> 02:45:01,160
है बिल्कुल है तो वो ना रोक कर उस रेप

2325
02:45:01,160 --> 02:45:05,600
को ये बुराई नहीं है ना रोकना क्या

2326
02:45:05,600 --> 02:45:09,800
ना रोकना बुराई नहीं है अच्छा तो मतलब

2327
02:45:09,800 --> 02:45:13,880
अभी फिर से मतलब आपने अभी कहा कि हम अभी सुनना आपने अभी

2328
02:45:13,880 --> 02:45:18,000
जस्ट थोड़ी देर पहले कहा कि हम हमारी तुलना उनसे नहीं कर सकते तो आपका

2329
02:45:18,000 --> 02:45:22,200
रेप ना रोकना अरे क्योंकि आपने खुद कहा कि मेरा जो शरीर

2330
02:45:22,200 --> 02:45:26,240
है वो मैटेरियलिस्टिक है और जो हरि का शरीर है वो अपने आप में

2331
02:45:26,240 --> 02:45:30,440
ही वो आत्मा है वो अपने आप में ही परमात्मा है वो उसका कोई अलग से

2332
02:45:30,440 --> 02:45:34,520
कोई रूप नहीं है इसलिए मैंने कहा था यहां दो चीज है हमारे शरीर का

2333
02:45:34,520 --> 02:45:38,640
नाश होने से आत्मा का नाश नहीं होगा मगर शरीर वहा हरि

2334
02:45:38,640 --> 02:45:42,480
के शरीर का नाश होने से हरीर के शरीर का वो हरि का नाश हो जाएगा

2335
02:45:42,480 --> 02:45:46,720
आपने ये कहा था उस पर मैंने कहा था इससे तुलना नहीं कर सकते क्योंकि

2336
02:45:46,720 --> 02:45:50,920
हम और हमारा शरीर अलग अलग है दो चीज वहां एक ही चीज है हरि

2337
02:45:50,920 --> 02:45:54,920
और ह का शरीर एकही है तो इसमें भी तुलना

2338
02:45:54,920 --> 02:45:59,400
नहीं कर सकते क्योंकि ईश्वर सही और गलत के परे है इसीलिए

2339
02:45:59,400 --> 02:46:03,680
ईश्वर किसके परे है यह तो बिल्कुल अच्छी बात कही

2340
02:46:03,680 --> 02:46:08,000
मैं भी मानता हूं ईवर सही और गलत के परे है मगर हम ये नहीं

2341
02:46:08,000 --> 02:46:12,000
वो सही और गलत के परे है तो हम यह नहीं कह सकते हैं कि

2342
02:46:12,000 --> 02:46:16,160
भाई वो ईश्वर यह नहीं कर सकता है हमको यह मानना होगा

2343
02:46:16,160 --> 02:46:21,400
कि यह दुनिया उसने बनाई है उसके लिए कुछ भी सही और गलत है ही

2344
02:46:21,400 --> 02:46:25,440
नहीं और जो भी व्यक्ति यह कह रहा है कि दुनिया में व किसी भी

2345
02:46:25,440 --> 02:46:29,600
तरह के ईश्वर को मानता हो अगर वो ईश्वर को मानता है तो उसे मानना पड़ेगा कि दुनिया

2346
02:46:29,600 --> 02:46:33,800
में कहीं भी जो बुराई हो रही है वो उसकी इच्छा से हो रही है उसकी

2347
02:46:33,800 --> 02:46:38,080
मर्जी में आता है वो तब हो रही है मगर वहां पर वह पार मार्थी दुनिया

2348
02:46:38,080 --> 02:46:44,080
से वह देख रहा है जहां से वह अच्छाई बुराई मैटर ही नहीं करती उसके

2349
02:46:44,720 --> 02:46:49,000
लिए अरे लेकिन यह जो क्वेश्चन आपने पूछा है शिवांस जी

2350
02:46:49,000 --> 02:46:53,000
आपके ऊपर भी तो लागू होता है कि आपके जो ब्रह्म है क्या वो भी ऐसा करते हैं कि नहीं

2351
02:46:53,000 --> 02:46:57,440
मैं बोल तो रहा हूं मैं बता रहा हूं अब मेरा आंसर आप सुन लीजिए यह दुनिया

2352
02:46:57,440 --> 02:47:01,840
एक नकली दुनिया है ये दुनिया एक नकली दुनिया है

2353
02:47:01,840 --> 02:47:06,080
इसमें ईश्वर कुछ भी कर सकता है वो आता है अपनी फॉर्म

2354
02:47:06,080 --> 02:47:10,200
बनाएगा वह अपनी फॉर्म नष्ट भी कर सकता है कुछ भी कर सकता है

2355
02:47:10,200 --> 02:47:14,280
तो यह वाला जो दोष है वह मेरे ईश्वर पर नहीं लग सकता कि उसने बुराई

2356
02:47:14,280 --> 02:47:18,520
की कि नहीं की मगर आपका ईश्वर आपके अनुसार यह नकली

2357
02:47:18,520 --> 02:47:23,240
दुनिया नहीं है यह वास्तविक दुनिया आपके अनुसार आपका इंसान

2358
02:47:23,240 --> 02:47:27,400
आपका जो ईश्वर है भगवान श्री कृष्ण के रूप में जो ईश्वर की आप व्याख्या कर रहे हैं वो

2359
02:47:27,400 --> 02:47:31,480
एज इट इज इस वास्तविक दुनिया में आता है तो अगर यहां उसके रहते

2360
02:47:31,480 --> 02:47:35,880
हुए कुछ गलत काम हो रहा है तो ये दोष उस पर लग जाता है सिंपल

2361
02:47:35,880 --> 02:47:39,960
ले लेकिन लेकिन ईश्वर जो है सुनिए सुनिए अब मैं आपको बोलता हूं कि वो यहां पर आ रहा है

2362
02:47:39,960 --> 02:47:44,120
आपका यह था कि वो यहां पर आ रहा है वो रुक नहीं रहा ठीक है पहली

2363
02:47:44,120 --> 02:47:48,320
बात तो एक चीज आपको ध्यान में रखनी चाहिए कि भगवान का जो साकार जो स्वरूप

2364
02:47:48,320 --> 02:47:52,360
है भगवान उनका ठीक है जिससे वो लीलाएं करते हैं ट्रेवल करते हैं अलग-अलग

2365
02:47:52,360 --> 02:47:56,360
जगह लेकिन एट द सेम टाइम भगवान जो है ब्रह्म जब निराकार रूप में या

2366
02:47:56,360 --> 02:47:59,760
परमात्मा के रूप में वो हर जगह पर प्रेजेंट है

2367
02:47:59,760 --> 02:48:03,760
भगवान और भगवान जो है वो किसी के भी कर्म के बीच में ये

2368
02:48:03,760 --> 02:48:07,960
नहीं करते कि उसके कर्म के बीच में आ जाएंगे ठीक है वो कभी ऐसा नहीं

2369
02:48:07,960 --> 02:48:12,880
करते तो इस नियम से बंधे हुए हैं ना वो

2370
02:48:12,880 --> 02:48:17,000
अरे नियम कैसे वो नहीं करना चाहते वो किसी के किसी के ऊपर अपनी जोर

2371
02:48:17,000 --> 02:48:21,520
जबरदस्ती नहीं डालना चाहते चाहते से बंधे हुए हैं ना वो

2372
02:48:21,520 --> 02:48:25,560
बंधे हुए मतलब कैसे नहीं करना चाहते इस नियम से

2373
02:48:25,560 --> 02:48:29,800
बंधे हुए हैं ना ये नियम थोड़ी ना हुआ ये तो ये तो परमात्मा का नेचर

2374
02:48:29,800 --> 02:48:33,840
हो गया अरे भाई वो अपने नेचर के विपरीत नहीं जा

2375
02:48:33,840 --> 02:48:37,840
सकते ये नियम है बोलो हां तो अगर वो अपने

2376
02:48:37,840 --> 02:48:41,960
देखो जा सकते हैं और नहीं जाते इसमें फिर से आ गया फ मैं नहीं कह रहा हूं मैं

2377
02:48:41,960 --> 02:48:46,080
नहीं कह रहा हूं जा सकते हैं कि नहीं नहीं यूजुअली तो नहीं जा

2378
02:48:46,080 --> 02:48:50,200
सकते नहीं जा सकते तो ये भी एक नियम है ठीक अभी मैं पूछ रहा

2379
02:48:50,200 --> 02:48:54,320
हूं आपसे कि जहां पर गलत हो रहा है

2380
02:48:54,320 --> 02:48:58,560
निम ये भगवान का जो नेचर है य परमात्मा

2381
02:48:58,560 --> 02:49:02,560
का जो नेचर हैय भाई साब ये जनता डिसाइड करेगी वो नहीं जा सकते

2382
02:49:02,560 --> 02:49:06,920
ये नियम है कि नहीं प्लीज आप केवल उसका नाम बदल रहे

2383
02:49:06,920 --> 02:49:11,520
नियम और क्या है आप बता रहे हो ये नहीं हो सकता यही तो नियम है

2384
02:49:11,520 --> 02:49:15,000
आपने कहा कुछ भी कर सकता है अब आप क अपने नेचर के विरुद्ध

2385
02:49:15,000 --> 02:49:19,000
नहीं जा सकते अरे क नहीं जाना चाहते इसलिए नहीं जा सकते नहीं

2386
02:49:19,000 --> 02:49:23,120
जाना चाह रहे वो उनकी इच्छा नहीं है नहीं जाना चाह रहे अपने नेचर के विरुद्ध नहीं

2387
02:49:23,120 --> 02:49:27,120
जा सकते ना अल्टीमेटली अरे नहीं जा सकते क्योंकि इच्छा

2388
02:49:27,120 --> 02:49:31,120
नहीं है सिपल पूछ रहा जा सकते हैं कि नहीं कैपेबिलिटी बताइए चाहते

2389
02:49:31,120 --> 02:49:35,120
हैं कि नहीं ये मत बताइए कैपेबिलिटी है कि नहीं कैपेबिलिटी होने में

2390
02:49:35,120 --> 02:49:39,320
और नेचर होने में अंतर है अच्छा ठीक

2391
02:49:39,320 --> 02:49:43,320
है अब हम दूसरा दूसरा कर लेते इसको जनता ने देख लि पले

2392
02:49:43,320 --> 02:49:47,400
आप मुझे बता क्या आप मानते कैपेबिलिटी होने में और कोई कार्य करने में अंतर होता है मानते

2393
02:49:47,400 --> 02:49:51,480
हो आप इस चीज को अरे तो मैंने पूछा ही नहीं है ना कोई कार्य करते हैं

2394
02:49:51,480 --> 02:49:56,080
कि नहीं मैं पूछ रहा हूं उनके अंदर करने की कैपेबिलिटी है कि नहीं

2395
02:49:56,080 --> 02:50:00,240
इंटेंशन क्या क्वेश्चन पूछने का वो इंटेंशन तो क्लियर

2396
02:50:00,240 --> 02:50:04,320
रखो भाई दूसरा सुनो दूसरा दूसरा करते हैं आगे

2397
02:50:04,320 --> 02:50:08,480
बात बढ़ाते इसी में आगे बात है आपने कहा कि ईश्वर बुराई नहीं कर

2398
02:50:08,480 --> 02:50:13,120
सकता ईश्वर बुराई नहीं कर सकता ईश्वर बुराई नहीं कर

2399
02:50:13,120 --> 02:50:17,160
सकता आपने पांच टॉप ऐसे हो गए हैं जो आप स्प

2400
02:50:17,160 --> 02:50:23,160
करके चले जी अगर आप विषयात करेंगे

2401
02:50:24,600 --> 02:50:28,960
तो प् उस प्लीज उस पर

2402
02:50:28,960 --> 02:50:33,680
रहि ठीक उसी वि का मतलब विय को

2403
02:50:33,680 --> 02:50:37,800
मत बोलिए दूसरी बात मुझे बोलने दीजिए जो मैं बोल रहा हूं

2404
02:50:37,800 --> 02:50:42,200
बोलो बोलो बोलो मैं ये पूछ रहा हं आपने कहा

2405
02:50:42,200 --> 02:50:46,400
ईश्वर बुरे कार्य नहीं कर सकता तो यह बताइए बुराई

2406
02:50:46,400 --> 02:50:50,200
को बनाना बुराई है कि नहीं

2407
02:50:50,200 --> 02:50:54,440
बुराई को बनाना भगवान ने बुराई बनाई है सब क रहे अभी मैंने जो पूछा

2408
02:50:54,440 --> 02:50:58,480
है वो बताइए मैंने आपको क्या बोला क्या ईश्वर

2409
02:50:58,480 --> 02:51:03,000
ने बुराई बनाई है आप यह कहना चाह रहे हो हा या ना आप य

2410
02:51:03,000 --> 02:51:07,120
आप मुझे यह बताइए वो बुराई को बना बुराई को बनाना बुराई है

2411
02:51:07,120 --> 02:51:11,360
कि नहीं यह बताइए पहले इसको क्लियर करिए मैं आपके क्वेन का आंसर

2412
02:51:11,360 --> 02:51:15,760
दूंगा पर पहले मैंने पूछा तो आप इसको क्लियर करिए बुराई को

2413
02:51:15,760 --> 02:51:19,920
बुराई को बनाना बुराई है कि नहीं बुराई को बनाना बुराई

2414
02:51:19,920 --> 02:51:24,360
है कि नहीं देखो मैं आपको बताता हूं बुराई को बनाना मतलब क्या होता है पहले उसको समझिए

2415
02:51:24,360 --> 02:51:28,760
बुराई क्या है पहले बुराई क्या है उसका पहले डेफिनेशन तो समझिए कि बुराई है क्या

2416
02:51:28,760 --> 02:51:32,840
आप बोल रहे हो कि बुराई को बनाना बुराई है कि नहीं है आप बुराई का डेफिनेशन तो समझिए पहले कि

2417
02:51:32,840 --> 02:51:36,240
क्या होता

2418
02:51:36,240 --> 02:51:40,240
है हम आंसर है तो बता दीजिए नहीं है तो फिर आगे

2419
02:51:40,240 --> 02:51:44,400
बढ़ते हैं नहीं मेरे पास आंसर है आप जो है विषयात करने

2420
02:51:44,400 --> 02:51:48,600
के लिए बोल रहे हैं अगर कोई रेप रे सुनिए बुराई है

2421
02:51:48,600 --> 02:51:52,760
रेप करना बुराई है ठीक है हा अब रेपिस्ट

2422
02:51:52,760 --> 02:51:56,920
को बनाना बुराई है कि नहीं अच्छा रेपिस्ट को बनाना बुराई

2423
02:51:56,920 --> 02:52:01,120
है कि नहीं अच्छा मुझे एक बात बताइए वो रेपिस्ट जो है शरीर में है व शरीर

2424
02:52:01,120 --> 02:52:05,240
में आकर वो खुद से इच्छा कर रहा है ठीक है क्या उसको क्या परमात्मा उससे करवा रहा

2425
02:52:05,240 --> 02:52:09,720
है ये चीज क्या चीज

2426
02:52:09,720 --> 02:52:14,080
दोबारा बोलिए मैं कमेंट पढ़ रहा था

2427
02:52:14,080 --> 02:52:18,240
कमेंट मत पढ़िए इधर ध्यान दीजिए मैं आपको क्या कह रहा हं ध्यान उधर चला

2428
02:52:18,240 --> 02:52:22,320
गया जैसे आपकी स्क्रीन पर जब आ रहा था तो आपको दिक्कत हो रही थी एक कमेंट प मेरा ऐसे

2429
02:52:22,320 --> 02:52:26,400
ही ध्यान चला गया अब आप बताइए मैं ध्यान दे रहा हूं बोलिए मुझे तो यहां से कोई कमेंट दिख

2430
02:52:26,400 --> 02:52:30,480
नहीं रहा स्ट्रीम यार्ड पे बस आप ही दिख रहे हो लेकिन ठीक है कोई बात नहीं

2431
02:52:30,480 --> 02:52:34,640
मैं ये कह रहा था क्वेश्चन प हम टिके रहते

2432
02:52:34,640 --> 02:52:38,680
हैं यार कितना ऐसे ना डिस्ट्रक्शन नहीं होना चाहिए प्रभु जी

2433
02:52:38,680 --> 02:52:43,040
शिवांश प्रभु ऐसे डिस्ट्रक्शन नहीं हो ऐसे ना लिंक जो लिंक होता है ना एक कन्वर्सेशन को लिंक

2434
02:52:43,040 --> 02:52:47,240
टूट जाता है आप दोबारा बोलिए क्या बोला आपने

2435
02:52:47,240 --> 02:52:51,400
मैंने ये बोला था रेपिस्ट को बनाना रेपिस्ट को तैयार

2436
02:52:51,400 --> 02:52:55,640
करना बुराई है कि नहीं रेपिस्ट को

2437
02:52:55,640 --> 02:52:59,680
बुराना रेपिस्ट को बनाना रेपिस्ट को बनाना रेपिस्ट को बनाने

2438
02:52:59,680 --> 02:53:03,920
का अर्थ मैं आपको रेपिस्ट कोई कैसे बनता है पहले उस पर आते हैं ठीक है मैं एक्सप्लेन करता हूं

2439
02:53:03,920 --> 02:53:08,040
रेपिस्ट कोई तब बनता है जब माता-पिता या जैसा एसोसिएशन

2440
02:53:08,040 --> 02:53:12,600
उसको मिलता है जैसा असोसिएशन उसको मिलता है उससे जो वो

2441
02:53:12,600 --> 02:53:16,880
उससे जो सीख रहा है ठीक है तो को वैसा एसोसिएशन देने वाले

2442
02:53:16,880 --> 02:53:20,960
उसको भी पाप लगता है बुराई उसकी भी है ठीक है और जो पाप कर रहा है क्योंकि वो

2443
02:53:20,960 --> 02:53:25,240
अपनी इच्छा से कर रहा है व किसी ने उसको फोर्स नहीं किया कि भाई तुम ये इच्छा करो कि तुम ये रेप करो

2444
02:53:25,240 --> 02:53:29,680
ये फोर्स कोई नहीं कर रहा है वो अपनी डिजायर्स वो खुद अनकंट्रोल होती है उसकी

2445
02:53:29,680 --> 02:53:33,680
ठीक है और फिर व रेप करता है तो बुराई को बनाने वाला तो

2446
02:53:33,680 --> 02:53:37,800
रेपिस्ट हुआ ना अच्छा अभी

2447
02:53:37,800 --> 02:53:42,080
मुझे आप ये बताइए कि क्या ईश्वर को मालूम

2448
02:53:42,080 --> 02:53:46,200
है कि नहीं कि आगे क्या करने वाला है जिसको मैं जन्म दे रहा हूं

2449
02:53:46,200 --> 02:53:49,600
अरे लेकिन अरे लेकिन

2450
02:53:49,600 --> 02:53:55,600
ठीक है ठीक आप पूछ लीजिए पहले सॉरी पूछा मैंने

2451
02:54:03,080 --> 02:54:07,720
सुना अभी मैं बोल रहा हूं अभी मैं बोल रहा हूं

2452
02:54:07,720 --> 02:54:11,760
कि क्या ईश्वर को मालूम होता है कि नहीं कि जिसको मैं बना रहा हूं जिसको मैं

2453
02:54:11,760 --> 02:54:16,000
जन्म दे रहा हूं यह एक दिन वहां जाकर ऐसे ऐसे करके रेप करेगा

2454
02:54:16,000 --> 02:54:20,000
हा ईश्वर को पता है तो इसका मतलब उसकी भी

2455
02:54:20,000 --> 02:54:24,120
मर्जी शामिल हो गई ना रेप होने में नहीं उसकी उसकी मर्जी शामिल कैसे हुई

2456
02:54:24,120 --> 02:54:28,200
उसको तो पता है ना कि ऐसा होने वाला है फ्यूचर में मतलब मतलब दुनिया में कुछ

2457
02:54:28,200 --> 02:54:32,520
ऐसा भी है जो उसकी मर्जी के बाहर होता है देखो मैं आपको इसका

2458
02:54:32,520 --> 02:54:36,520
आंसर देता हूं इस दुनिया में जो कुछ भी होता है जीवात्मा जो कुछ भी

2459
02:54:36,520 --> 02:54:40,880
भोग करती है इस संसार में वो जीवात्मा अपनी इच्छा से करती है

2460
02:54:40,880 --> 02:54:45,040
ठीक है वो परमात्मा से करवाता नहीं है ईश्वर का कंट्रोल

2461
02:54:45,040 --> 02:54:49,120
नहीं होता है उस पर ईश्वर का कंट्रोल नहीं होता है

2462
02:54:49,120 --> 02:54:53,400
ईश्वर कंट्रोल कर सकता है लेकिन कंट्रोल नहीं अगर आपकी इच्छा है वो चीज को भोगने

2463
02:54:53,400 --> 02:54:57,440
की तो नहीं उसका होता है कंट्रोल व चाहे तो उसको रोक सकता

2464
02:54:57,440 --> 02:55:01,520
है हा रोक सकता है लेकिन वो स्वतंत्र इ

2465
02:55:01,520 --> 02:55:05,720
इतने अंश में ईश्वर के द्वारा बुराई होना सिद्ध हो गया ना कैसे बुराई

2466
02:55:05,720 --> 02:55:09,800
सिद्ध हुआ यह बताओ फिर से सिद्ध कैसे हुआ बुराई होना ईश्वर में अरे

2467
02:55:09,800 --> 02:55:13,840
भाई व बुराई होने दे रहा है व जिसको बना रहा है उसको पता है

2468
02:55:13,840 --> 02:55:18,760
बम लगाएगा बम लगाएगा पता फिर भी व बना रहा है उसको

2469
02:55:18,760 --> 02:55:22,800
अरे लेकिन आपका ईश्वर भी तो बुरा होने दे रहा है ना व हि सबब से अरे

2470
02:55:22,800 --> 02:55:26,920
भाई मेरे ईश्वर के लिए यह सब चीजें सच्ची है ही नहीं ना कुछ बुराई

2471
02:55:26,920 --> 02:55:31,240
है ना कोई झूठ है ना कोई अच्छा है ना कोई बुरा है कुछ भी नहीं एजिस्ट

2472
02:55:31,240 --> 02:55:35,240
नहीं करता सब बकवास है ये सब शास्त्र प्रमाण दो

2473
02:55:35,240 --> 02:55:39,280
फिर इसका एक शास्त्र प्रमाण दो कि ये चीज एजिस्ट ही नहीं हो रही जो जो आप आप वहां

2474
02:55:39,280 --> 02:55:43,840
प जा बांग्लादेश के लिए लड़ रहे थे वो एजिस्ट नहीं हो रहा बोल दो फिर आप

2475
02:55:43,840 --> 02:55:48,040
क्योंकि वास्तविकता है ही नहीं क्योंकि ब्रम सत्य जानता है ना एक सेकंड ब्रम जो है वो सत्य जानता

2476
02:55:48,040 --> 02:55:52,360
है तो आपने ब्रम के लिए वो चीज एसिस्ट नहीं हो रही है तो इसका मतलब है कि ब्रम

2477
02:55:52,360 --> 02:55:56,360
सत्य को जानता है आपके जो सो कल्का परमार्थिक धरातल है उसके

2478
02:55:56,360 --> 02:56:00,400
अकॉर्डिंग ब्रम चाहता है ब्रम जानता है उस ब्र जानता है कि जो कुछ भी

2479
02:56:00,400 --> 02:56:04,400
हो रहा है वो असत्य है मतलब ब्रम का जो थॉट प्रोसेस है उसका

2480
02:56:04,400 --> 02:56:08,400
है जो बुराई और अच्छाई है यस्ट करती है

2481
02:56:08,400 --> 02:56:12,400
आपने कहा मैंने कहा एस्ट ही नहीं करती वो वो सब बकवास

2482
02:56:12,400 --> 02:56:16,760
की चीज है हमारे लिए अच्छाई और बुराई है भगवान के लिए अच्छाई

2483
02:56:16,760 --> 02:56:19,680
और बुराई कुछ नहीं हैस्ट

2484
02:56:19,680 --> 02:56:23,760
अरे एजिस्ट करता है तो जब करता है तो ये दोष भगवान

2485
02:56:23,760 --> 02:56:28,000
प आएगा हम हम दोनों बात कर रहे हैं अभी आपने इतना चिल्लाया

2486
02:56:28,000 --> 02:56:32,040
एस्ट हु शस्त्र प्रमाण दो अब मैं आपको शास्त्र प्रमाण दूंगा अरे

2487
02:56:32,040 --> 02:56:33,920
नहीं पहले नहीं नहीं पहले मुझे

2488
02:56:33,920 --> 02:56:37,960
पार मार्थी धरातल और व्यवहारिक धरातल का मुझे प्रमाण दो

2489
02:56:37,960 --> 02:56:42,120
और जो अभी जो मैंने आपको क्वेश्चन पूछा है कि जो जो ब्रह्म है आपने कहा ब्रह्म

2490
02:56:42,120 --> 02:56:46,600
के लिए कुछ भी एसिस्टिंग नहीं है ब्रह्म के लिए कुछ भी एसिस्टिंग नहीं है

2491
02:56:46,600 --> 02:56:50,680
तो क्या आप ये कह रहे हो या तो देखो दो चीज हो सकती है अभी सुनना सुनना

2492
02:56:50,680 --> 02:56:54,800
दो चीज हो सकती है या तो आपके ब्रम को सत्य नहीं पता आपके

2493
02:56:54,800 --> 02:56:58,880
ब्रम को सत्य नहीं पता या फिर या फिर जो हो रहा

2494
02:56:58,880 --> 02:57:03,040
है वो एसिस्ट कर रहा है बस अच्छा पहली बात

2495
02:57:03,040 --> 02:57:07,440
तो ये हो गया कि परमार्थिक धरातल का मैं आपको उदाहरण दू प्रमाण दू प्रमाण

2496
02:57:07,440 --> 02:57:11,520
उ नहीं उदाहरण नहीं चाहिए मुझे एकदम स्पष्ट मैंने

2497
02:57:11,520 --> 02:57:15,560
बोल तो दिया यार बोला मैंने प्रमाण मैंने बोला

2498
02:57:15,560 --> 02:57:20,120
उरण के बाद मैं प्रमाण दे रहा हूं आपको हा त दो क

2499
02:57:20,120 --> 02:57:26,120
दिया मैं नोट्स बना रहा तब

2500
02:57:32,120 --> 02:57:36,440
तक यार आप कह रहे हो कि आप सत्य पर बात करते हो तो मुझे इसके ऊपर भी क्वेश्चन

2501
02:57:36,440 --> 02:57:42,440
लेन ठीक है मैं आप अपना आंसर दे दीजिए फिर मैं क्वेश्चन रखता हूं

2502
02:57:51,280 --> 02:57:57,280
प्रभु ये पेन का इंक शायद खत्म हो गया थ दूसरा पेन लेके आ सकते

2503
02:58:02,120 --> 02:58:06,320
हो आई होप मेरे जितने स्कन के दोस्त है वो एंजॉय कर रहे हो

2504
02:58:06,320 --> 02:58:12,320
यह डिस्कशन

2505
02:58:20,520 --> 02:58:26,520
[संगीत]

2506
02:58:26,840 --> 02:58:31,120
हम ब्रह्मास्मि को आप प्रमाण नहीं मानते हैं

2507
02:58:31,120 --> 02:58:35,480
मैं हर चीज को प्रमाण मानता हूं लेकिन मेरा इंटरप्रिटेशन अलग होगा पहले मैं बेसिक्स को क्लियर करूंगा

2508
02:58:35,480 --> 02:58:39,480
इंटरप्रिटेशन के बोलिए ना मुझसे आप इंटरप्रिटेशन

2509
02:58:39,480 --> 02:58:43,640
बोलो आप प्रमाण क्यों बो अभी अभी अहम ब्रह्मास्मि

2510
02:58:43,640 --> 02:58:48,400
की बात य पर है ही नहीं अभी बात यहां पर ये चल रही है सुनो

2511
02:58:48,400 --> 02:58:52,400
अभी जो पहले मेन टॉपिक जो चल रहा था उसके ऊपर आ जाते हैं ठीक है क्योंकि आपने पाच

2512
02:58:52,400 --> 02:58:56,520
बार आगे आगे आगे करके आगे टॉपिक जाते आगे टॉपिक जाते अरे पुराने कितने सारे मेरे

2513
02:58:56,520 --> 02:59:02,160
प्रश्न रह गए आवान जी मैं पूछू कि नहीं

2514
02:59:02,160 --> 02:59:06,320
पूछू पूछू कि नहीं पूछू हवान जी बताइए

2515
02:59:06,320 --> 02:59:11,200
मैं आपको एक वो बता रहा हूं नहीं नहीं पहले

2516
02:59:11,200 --> 02:59:15,320
मुता प्रमाण प्रमाण आप मुझे बाद में देना जब मैं आपसे प्रमाण मांगूंगा

2517
02:59:15,320 --> 02:59:19,360
तब आप प्रमाण देना प्रमाण मागा है वो दे रहा हूं आपको बहुत अच्छा वाला प्रमाण

2518
02:59:19,360 --> 02:59:23,760
दे अच्छा अच्छा म क्वेन पूछा था उसका आपके आसर

2519
02:59:23,760 --> 02:59:29,760
इसका प्रमाण है प्रमाण नहीं मा क्या

2520
02:59:30,520 --> 02:59:34,680
मैंने राधा कृष्ण दास जी आपने अभी दो चीज बोली थी

2521
02:59:34,680 --> 02:59:38,800
एक मुझे प्रमाण दो और दूसरा आपने और कुछ बोला था भूल रहा

2522
02:59:38,800 --> 02:59:42,600
हूं

2523
02:59:42,600 --> 02:59:46,600
हा आपने क्या बोला आपने क्या बोला जो

2524
02:59:46,600 --> 02:59:50,680
ब्रम है उसके लिए ये सब ये एसिस्टिंग नहीं है आपने ये वर्ड यूज किया

2525
02:59:50,680 --> 02:59:54,760
कि एसिस्टिंग नहीं है एजिस्ट करता ही नहीं है तो आप फ

2526
02:59:54,760 --> 02:59:58,760
वो बांग्लादेश के ऊपर वीडियो क्यों बना रहे हो जब ये सब एजिस्ट ही नहीं कर रहा तो सत्य

2527
02:59:58,760 --> 03:00:03,120
है व्यवहारिक सत्य है व्यवहार और परमार्थ में अंतर

2528
03:00:03,120 --> 03:00:07,520
है ईश्वर की ईश्वर की दो

2529
03:00:07,520 --> 03:00:11,600
प्रकार की दो प्रकार की डायमेंशन है एक है

2530
03:00:11,600 --> 03:00:15,840
व्यवहारिक सत्य व्यवहारिक सत्ता और एक है पार मर्थक सत्ता

2531
03:00:15,840 --> 03:00:20,040
जब तक मुझे जीव भाव प्राप्त है जब तक मैं इस जीव भाव से जुड़ा

2532
03:00:20,040 --> 03:00:24,320
हुआ हूं तब तक मुझे यहां के जो मुझे इंफॉर्मेशन प्राप्त

2533
03:00:24,320 --> 03:00:29,000
हो रही है उनके अकॉर्डिंग ली अपने जीवन का निर्वाह करना है और

2534
03:00:29,000 --> 03:00:33,560
अगर मैं शास्त्र सम्मत तरीके से करूंगा तो एक दिन इन इंफॉर्मेशन से

2535
03:00:33,560 --> 03:00:38,000
मैं मुक्त हो जाऊंगा और मुझे पता चलेगा ये इंफॉर्मेशन सारी झूठी थी

2536
03:00:38,000 --> 03:00:42,320
जिस प्रकार से सुनिए जिस प्रकार से पृथ्वी जो है गोल

2537
03:00:42,320 --> 03:00:45,600
है मगर आज हम उसके साथ बिहेव करते हैं

2538
03:00:45,600 --> 03:00:49,640
चपटे पन का मगर लाइट की नजरिए से हमें यह पता

2539
03:00:49,640 --> 03:00:53,680
है कि यह दुनिया जो है यह पृथ्वी जो है गोल है मगर हम व्यवहार में

2540
03:00:53,680 --> 03:00:57,680
क्या करते हैं हम व्यवहार में उसके साथ चपटे पन का

2541
03:00:57,680 --> 03:01:01,680
वो करते हैं क्या कहते हैं व्यवहार चपटे पन का तो अब

2542
03:01:01,680 --> 03:01:05,680
मुझे यहां पर अगर इस चपटे पन से मुक्त होना है तो मुझे कोई स्पेस

2543
03:01:05,680 --> 03:01:09,800
शिप चाहिए कुछ ऐसी चीजें चाहिए जिससे कि मैं बाहर से जाकर के इसकी

2544
03:01:09,800 --> 03:01:14,160
गोलाई को देखूं वो स्पेस शिप बनाते बनाने के लिए

2545
03:01:14,160 --> 03:01:18,640
मुझे कुछ मशीनस बनानी होंगी इधर उधर जाना होगा आना जाना पड़े

2546
03:01:18,640 --> 03:01:23,600
और उतनी देर के लिए मुझे इस चपके पन का ही उपयोग करना पड़ेगा

2547
03:01:23,600 --> 03:01:27,600
तो इसका अर्थ क्या हुआ कि यह दुनिया जो है एक मिनट यह दुनिया

2548
03:01:27,600 --> 03:01:31,760
जो है व एजिस्ट नहीं करती है मगर पमार्ट से बाहर

2549
03:01:31,760 --> 03:01:36,000
की दृष्टि से मुक्त की दृष्टि से एजिस्ट करती है बंधक की दृष्टि

2550
03:01:36,000 --> 03:01:40,160
से जो यहां फसा हुआ है उसकी दृष्टि से तो इसी कारण

2551
03:01:40,160 --> 03:01:44,240
से क्योंकि इसकी जो मेरी दृष्टि है यहां की यह पर्सपेक्टिव

2552
03:01:44,240 --> 03:01:48,360
इसके हिसाब से मैं बांग्लादेश के लिए बोलने गया था ठीक

2553
03:01:48,360 --> 03:01:52,440
है आपको चल गया अभी अभी मैं थोड़ा सा और बाकी

2554
03:01:52,440 --> 03:01:56,680
है वो मैं बोल दूं ओ ओके शर मैं

2555
03:01:56,680 --> 03:02:00,800
उसके लिए गया था और उसके बाद यह जो

2556
03:02:00,800 --> 03:02:05,240
उदाहरण आप देख लीजिए कि एरोप्लेन

2557
03:02:05,240 --> 03:02:10,280
एरोप्लेन का जो मुख्य गंतव्य होता है वो होता है आकाश में उड़ना

2558
03:02:10,280 --> 03:02:14,720
मगर उसको आकाश में उड़ने लायक बन पाने के लिए पहले

2559
03:02:14,720 --> 03:02:18,800
बनने के लिए पहले धरती का ही सहारा लेना पड़ता है तो उसी

2560
03:02:18,800 --> 03:02:23,000
तरीके से मेरा उद्देश्य तो जीवन का है इस माया से मुक्त होना

2561
03:02:23,000 --> 03:02:27,360
इस मोह से मुक्त होना मगर इसी मोह का ऐसी माया का सहारा

2562
03:02:27,360 --> 03:02:31,360
लेना होगा तो माया का सहारा माया का निर्वाह करके लिया जा

2563
03:02:31,360 --> 03:02:35,880
रहा है भेद का निर्वाह करके अभेद की प्राप्ति

2564
03:02:35,880 --> 03:02:40,160
यह है हमारी थ्योरी तो अब आपने कहा कि बांग्लादेश क्यों गए थे क्योंकि

2565
03:02:40,160 --> 03:02:45,080
यह मेरा व्यवहारिक सत्य है जैसे की मुझे पता है कि मेरा जो

2566
03:02:45,080 --> 03:02:49,280
वास्तविक मेरा जो मूल स्वरूप है वो है आत्मा और उसको

2567
03:02:49,280 --> 03:02:53,640
कभी भी काटा नहीं जा सकता मारा नहीं जा सकता जलाया नहीं जा सकता डुबाया

2568
03:02:53,640 --> 03:02:57,720
नहीं जा सकता गीला नहीं किया जा सकता मगर फिर भी अगर कोई

2569
03:02:57,720 --> 03:03:01,800
मेरे ऊपर अभी हाथ उठाएगा तो मेरी पलक झपके गी यह भय होगा मुझे कि

2570
03:03:01,800 --> 03:03:06,080
मेरे ऊपर आक्रमण हुआ इसका मतलब क्या हुआ यह मेरा व्यवहारिक सत्य

2571
03:03:06,080 --> 03:03:10,640
है य यह मेरा व्यवहारिक सत्य है कि यहां की इंफॉर्मेशन जब

2572
03:03:10,640 --> 03:03:14,800
तक मैं जीव भाव को प्राप्त हूं तब तक यहां की इंफॉर्मेशन को सत्य मानकर

2573
03:03:14,800 --> 03:03:15,880
मुझे काम करना

2574
03:03:15,880 --> 03:03:20,080
है और य आपकी एकस मुझे काफी अच्छी लगी बत

2575
03:03:20,080 --> 03:03:24,280
डिटेल में आपने एक्सन किया लेकिन जीव भाव क्यों है और मब

2576
03:03:24,280 --> 03:03:28,480
मुझे पता है कैसे है की ब्रम के ऊपर माया का आ लेकिन क्यों

2577
03:03:28,480 --> 03:03:32,720
अभीरा टॉपिक है बदल रहा है बदल नहीं रहा टॉपिक

2578
03:03:32,720 --> 03:03:36,880
वही है बभी

2579
03:03:36,880 --> 03:03:41,120
बात य हो रही है अभी बात य हो रही हैवर ईश्वर

2580
03:03:41,120 --> 03:03:45,400
बुराई कर सकता है कि नहीं तो उसके लिए आपने कहा उसके लिए

2581
03:03:45,400 --> 03:03:49,480
आपने यह कहा कि ईश्वर बुराई नहीं कर सकता क्योंकि उसकी इच्छा

2582
03:03:49,480 --> 03:03:53,520
नहीं होती फिर मैंने बताया कि ईश्वर की मर्जी से ही इसमें बुराई

2583
03:03:53,520 --> 03:03:57,760
जन्म ले रही है तो जन्म देने वा ब्रहम

2584
03:03:57,760 --> 03:04:02,480
की इच्छा नहीं हो सकती ना कि बुराई व करे या कुछ देखे

2585
03:04:02,480 --> 03:04:06,480
ब्रह्म की इच्छा नहीं हो सकती पर्थ धरातल की बात

2586
03:04:06,480 --> 03:04:10,800
कर रहा हूं आपके अंग पारिक रा क्या हो सकती

2587
03:04:10,800 --> 03:04:15,240
नहीं हो सकती और बोलिए

2588
03:04:15,240 --> 03:04:19,480
सकब उसकी इच्छा ही नहीं है उस इच्छा ही नहीं है ब्रह्म की पारिक

2589
03:04:19,480 --> 03:04:23,600
धरातल पे तो फिर वो माया और जीव बंद क्यों रहा है फिर प्रयोजन क्या है इस चीज का य

2590
03:04:23,600 --> 03:04:27,840
यूं ही हां यूं ही यूं ही यूं ही कैसे

2591
03:04:27,840 --> 03:04:32,000
ऐसे यू ही ये भी लिखा है इसका शास्त्र में प्रमाण में डाल दूंगा

2592
03:04:32,000 --> 03:04:36,080
पिन कमेंड में ये भी लिखा है उपनिषदों में यूं ही करते हैं मैं

2593
03:04:36,080 --> 03:04:40,200
बता देता हूं अरे मतलब मतलब अच्छा एक सेकंड जो आप देख रहे हैं जितने लोग

2594
03:04:40,200 --> 03:04:44,480
देख रहे हैं अभी मैं बता रहा हूं आप ये बताइए आप ये बताइए आप ये बताइए

2595
03:04:44,480 --> 03:04:48,880
अभी आपने ऐसे किया एक मिनट अभी आपने ऐसे किया हो सकती

2596
03:04:48,880 --> 03:04:53,200
ब्रह्म की इच्छा नहीं हो सकती तो यूंही कैसे हो ग आपने पहले क्लियर कट कहा कि ब्रह्म

2597
03:04:53,200 --> 03:04:57,320
के अंदर इच्छा नहीं होती और नहीं हो सकती ब्रम के अंदर इच्छा पारिक

2598
03:04:57,320 --> 03:05:01,520
धरातल पर है जब प अरे

2599
03:05:01,520 --> 03:05:05,800
यार यही भाई कंपलीट तो करने दो यार अरे लेकिन लेकिन

2600
03:05:05,800 --> 03:05:10,000
मुझे एक बात बताओ जब वो निर्गुण है निराकार है उसमें इच्छा

2601
03:05:10,000 --> 03:05:14,000
नहीं है कुछ भी नहीं है उसके अंदर तो कर्म भी नहीं है उसके अंदर

2602
03:05:14,000 --> 03:05:18,160
तो कर्म डेवलप कैसे करर कुछ नहीं कुछ कैसे आ सकता है बोल तो मेरे

2603
03:05:18,160 --> 03:05:22,320
भाई जो वो कर रहा है वो सब नकली है रियल नहीं है इसलिए

2604
03:05:22,320 --> 03:05:26,440
नहीं कर रहा है अरे अरे अरे नकली अरे भाई मुझे एक बात

2605
03:05:26,440 --> 03:05:30,920
बताओ आप नकली है वो माया की वजह से आप समझ रहे हो तो माया आई कहां

2606
03:05:30,920 --> 03:05:35,080
से माया उसी के अंदर है और बोलो किसके अंदर

2607
03:05:35,080 --> 03:05:39,360
है किसके अंदर है ब्रम के अंदर ब्रह्म के अंदर ब्रह्म के अंदर

2608
03:05:39,360 --> 03:05:43,400
मैंने कहा ना वीडियो गेम की कैसेट हमारे पास है

2609
03:05:43,400 --> 03:05:49,400
ऐसे ही ब्रह्म के पास माया है स्वेता शत्र उपनिषद में लिखा है

2610
03:05:52,920 --> 03:05:58,920
माया इनल है कि नहीं है माया है व इनल है नहीं

2611
03:05:59,440 --> 03:06:03,680
माया रा टनल है माया जो है माया जो है

2612
03:06:03,680 --> 03:06:07,720
वो अभाव पदार्थ नहीं है इसका मतलब ये है

2613
03:06:07,720 --> 03:06:13,720
ऐसा नहीं है इसको समझा देता सुनिए ऐसा नहीं है

2614
03:06:18,400 --> 03:06:22,480
आपको बता रहा हूं हमारा टॉपिक चेंज हो गया बहुत ज्यादा चेंज हो गया पर मैं आपको ये बात बता

2615
03:06:22,480 --> 03:06:27,120
देता हूं इसके बाद हम दोबारा टॉपिक प आएंगे

2616
03:06:27,120 --> 03:06:31,640
है कि माया का अस्तित्व तभी है जब अविद्या

2617
03:06:31,640 --> 03:06:35,800
का अस्तित्व तभी है जब विद्या नहीं है ऐसा नहीं है अविद्या और

2618
03:06:35,800 --> 03:06:39,880
विद्या दोनों साथ में रह सकती है फॉर एग्जांपल आप जब वीडियो

2619
03:06:39,880 --> 03:06:43,880
गेम खेल रहे होते हो तो आपके अंदर विद्या है यह जानते हो आप

2620
03:06:43,880 --> 03:06:47,880
कि यह सब नकली है और अविद्या भी है जिसके कारण आप वीडियो

2621
03:06:47,880 --> 03:06:51,880
गेम के अंदर होने वाले जो चीजें हैं उनसे प्रभावित हो रहे हो ये

2622
03:06:51,880 --> 03:06:56,120
चीज प्रूव कर रही है कि विद्या एक मिनट मुझे मुझे पूरा

2623
03:06:56,120 --> 03:07:00,280
करने दीजिए यह चीजें प्रूव कर रही है कि विद्या और अविद्या साथ में रह

2624
03:07:00,280 --> 03:07:04,400
सकती है रहती है ठीक है अभी हमारा जो टॉपिक चल

2625
03:07:04,400 --> 03:07:08,720
रहा था उस टॉपिक प हम वापस आएंगे टॉपिक नहीं आएंगे

2626
03:07:08,720 --> 03:07:13,080
इसको मैं लाइव सेशन को बंद करूंगा मैं बहुत हो गया आपसे मुझे जो लेना था ले लिया

2627
03:07:13,080 --> 03:07:17,200
अभी जो टॉपिक चल रहा था पहले उस आएंगे जी ठीक है आगे

2628
03:07:17,200 --> 03:07:21,400
बढ़ेंगे ये सब अगर रियल है ये सब अगर रियल है

2629
03:07:21,400 --> 03:07:25,880
तो भगवान क्षमता होते हुए भी इसको नहीं रोकते हैं

2630
03:07:25,880 --> 03:07:30,040
ये ना रोकना उनको मालूम है कि रेपिस्ट रेप करेगा वो

2631
03:07:30,040 --> 03:07:34,360
उसको नहीं रोकते हैं क्या ये बुराई नहीं है

2632
03:07:34,360 --> 03:07:38,360
मैं आपको क्या कह रहा हूं आपने तो मेरी बात सुनी ही नहीं क्योंकि देखो कैसा होता

2633
03:07:38,360 --> 03:07:42,400
है जब हम मुझे मैं उस टॉपिक पे आऊंगा आप लिख लीजिए विद्या विद्या वाले पे

2634
03:07:42,400 --> 03:07:46,400
मैं आऊंगा आप उसको लिख लीजिए लेकिन अभी आप ल नहीं नहीं आप अभी ऑलरेडी हो विद्या

2635
03:07:46,400 --> 03:07:50,640
विद्या वाले टॉपिक प आपने वो टॉपिक छोड़ दिया है मेरा जो ईश्वर में बुराई

2636
03:07:50,640 --> 03:07:56,000
हो सकती है कि नहीं आपने वो टॉपिक छोड़ दिया है

2637
03:07:56,000 --> 03:08:00,240
अरे ये टॉपिक मैंने बिल्कुल भी नहीं छोड़ा है आवान जी सुनि शिवा

2638
03:08:00,240 --> 03:08:06,000
जी ब आप इसको बुराई को बताइए

2639
03:08:06,000 --> 03:08:10,080
बुराई को बनाना बराई है कि नहीं बुराई को होते हुए देखते

2640
03:08:10,080 --> 03:08:14,200
रना होते हुए भी बुराई है कि

2641
03:08:14,200 --> 03:08:19,360
नहीं शिवांश जी बिना ए बी सीडी जाने लिटरेचर नहीं पढ़ा

2642
03:08:19,360 --> 03:08:23,880
जाता फिर बात होगी न घंटे हो चुके है आपसे फिर बात

2643
03:08:23,880 --> 03:08:29,040
आप मुझे एक बात बताइए अविद्या परमा धरातल पर कैसे

2644
03:08:29,040 --> 03:08:33,080
मैं आपसे इस बारे में कोई भी बात करूंगा आप इसको लिख लीजिए आप

2645
03:08:33,080 --> 03:08:37,120
मुझे पहले बताइए आप मुझे बताओ अ कैसे है

2646
03:08:37,120 --> 03:08:41,560
ब के अंदर वो भी परमार्थिक धरातल प

2647
03:08:41,560 --> 03:08:46,000
पार मार्क धरातल पर अविद्या कैसे हैसे

2648
03:08:46,000 --> 03:08:49,400
इसका क्या मतलब है है तो है इसमें क्या कर तो है

2649
03:08:49,400 --> 03:08:53,440
मत तो मतलब मतलब तो मतलब अविद्या और ब्रह्म दो हो गए ना फिर हित आ गया ना

2650
03:08:53,440 --> 03:08:57,560
यहां पे ब्रह्म के अंदर है ना दो कहां हुए हा तो ब्रह्म के अंदर

2651
03:08:57,560 --> 03:09:01,560
है हां तो ब्रह्म के हा तो जैसे जैसे पानी है सुनो जैसे पानी है पानी है बोतल के अंदर तो

2652
03:09:01,560 --> 03:09:05,640
दो चीज हो गई पानी और बोतल अच्छा ठीक है मैं थोड़ी देर के लिए दुर्जन तोष न्याय

2653
03:09:05,640 --> 03:09:09,920
से ये मान रहा हूं कि दो हो गए हमारा टॉपिक ये नहीं है कि द्वैत

2654
03:09:09,920 --> 03:09:14,040
और अद्वैत है कि नहीं हमारा टॉपिक ये नहीं है कि द्वैत और अद्वैत

2655
03:09:14,040 --> 03:09:18,200
है कि नहीं मुझे आप ये बताइए अगर ये दुनिया रियल है अगर

2656
03:09:18,200 --> 03:09:22,240
यह दुनिया रियल है और जो भगवान है वो ये जानते

2657
03:09:22,240 --> 03:09:26,520
हैं कि जिसको मैं बना रहा हूं वो रेप करेगा और उनके अंदर क्षमता

2658
03:09:26,520 --> 03:09:30,640
भी है उसको रोकने की जब रेप हो रहा है तब तो वो उसको ना रोक

2659
03:09:30,640 --> 03:09:34,800
कर यह बुराई नहीं है अरे तो मतलब आप

2660
03:09:34,800 --> 03:09:39,040
ये कहना चाह रहे हो ठीक है मैं आपका समझ गया तो बेसिकली आप ये कहना चाह रहे हो कि ब्रह्म

2661
03:09:39,040 --> 03:09:43,080
जो है वो ब्रह्म अपनी ही अविद्या में फस जाता है और खुद ही रेप

2662
03:09:43,080 --> 03:09:47,600
करता है आपका ये है बेसिकली वो कुछ कर

2663
03:09:47,600 --> 03:09:52,120
झूठ है उसके लिए वो कुछ नहीं करता जो जो आप

2664
03:09:52,120 --> 03:09:56,160
आप वीडियो गेम के सुनिए वीडियो गेम के अंदर जो आप गड्ढे में गिर रहे हो

2665
03:09:56,160 --> 03:10:00,480
आपकी चेतना वहां डर रही है गड्ढे में गिर रहे हो वो क्या रियल है क्या अरे

2666
03:10:00,480 --> 03:10:04,440
तो मतलब पार मार्तिक धरातल और व्यावहारिक धरातल में भी तो डिफरेंस तो दत

2667
03:10:04,440 --> 03:10:08,560
आ गया ना यहां प फिर से कहां आ गए अलग है अरे

2668
03:10:08,560 --> 03:10:13,400
क्योंकि वो पूरा माया का बना हुआ है और माया और ब्रम आपने बोला अलग अलग है फिर बोल र

2669
03:10:13,400 --> 03:10:17,640
जैसे मैंने अगर एक वीडियो गेम बनाया उस वीडियो गेम के अंदर जो भी अच्छा

2670
03:10:17,640 --> 03:10:21,880
बुरा हो रहा है वो मेरी नजर में अच्छा बुरा नहीं है क्योंकि मैंने उसे बनाया

2671
03:10:21,880 --> 03:10:26,040
है वोह नकली है सब कुछ जैसे एक ईश्वर पेंटिंग बनाता है तो

2672
03:10:26,040 --> 03:10:30,160
पेंटिंग के पेंटिंग में वो चाहे आंखों में कलर भरे या स्त्री

2673
03:10:30,160 --> 03:10:34,360
की पेंटिंग है तो वो अन्य अंगों में कलर भरे उसके लिए सब

2674
03:10:34,360 --> 03:10:38,440
समान है एक रस है उसको उसे फर्क नहीं पड़ता उसकी नजर में उसने कोई

2675
03:10:38,440 --> 03:10:42,760
बुराई नहीं की इसका मतलब कि ब्रह्म की दृष्टि से वो बुराई

2676
03:10:42,760 --> 03:10:46,800
है ही नहीं एजिस्ट ही नहीं करती जीव की दृष्टि से बुराई एजिस्ट

2677
03:10:46,800 --> 03:10:50,960
करती है अरे लेकिन आप एग्जांपल कहेंगे

2678
03:10:50,960 --> 03:10:55,400
नहीं य रियल हैय बुराई ब्रह्म की दृष्टि से भी यह बुराई है यह बुराई

2679
03:10:55,400 --> 03:10:59,480
ही है तो फिर हमें य मानना पड़ेगा कि जो ब्रह्म है जो भगवान है

2680
03:10:59,480 --> 03:11:05,480
वो ये होने दे रहे हैं हमें ये मानना

2681
03:11:05,880 --> 03:11:09,880
पड़ आपके भी ब्रम होने दे रहे हैं इस चीज को रेप को मेरे भी ब्रम

2682
03:11:09,880 --> 03:11:13,960
होने दे रहे ठीक है ये वाला टॉपिक भी हो

2683
03:11:13,960 --> 03:11:19,800
चुका है अब हम और दूसरा ट आप अपना टिक

2684
03:11:19,800 --> 03:11:23,800
आप क टॉपले आप अपना टॉपिक बोलिए पांच टॉपिक

2685
03:11:23,800 --> 03:11:27,920
नहीं मैं इसी टॉपिक प रहना चाहता हूं हां बोलिए हा बोल

2686
03:11:27,920 --> 03:11:32,240
दिया मैंने मेरा क्वेश्चन रख दिया कि आपके आप जो क रहे ब्रह्म के अंदर अविद्या

2687
03:11:32,240 --> 03:11:37,000
है ठीक है तो पहले मुझे थोड़ा एक बार बता अविद्या मतलब

2688
03:11:37,000 --> 03:11:41,400
क्या अविद्या मतलब जो भगवान की शक्ति होती है माया

2689
03:11:41,400 --> 03:11:45,680
शक्ति जिससे वो संसार को रचते हैं कल्पना करते हैं संसार की वो

2690
03:11:45,680 --> 03:11:49,680
अविद्या अच्छा वो अविद्या है अच्छा अच्छा तो मतलब

2691
03:11:49,680 --> 03:11:53,840
मतलब ब्रम एक ऐसी चीज एक ऐसी शक्ति को यूज करके इस संसार

2692
03:11:53,840 --> 03:11:58,040
का सृजन कर रहे हैं बराबर जी ह

2693
03:11:58,040 --> 03:12:02,080
द्वैत आ गया ना यहां पे और कर्म भी आ गया यहां पे अरे भाई हम

2694
03:12:02,080 --> 03:12:06,080
यहां द्वैत और अद्वैत की बात नहीं कर रहे मैंने बोला तो मैंने आपका द्वैत मान

2695
03:12:06,080 --> 03:12:10,200
लिया थोड़ी देर के लिए मैं दत य

2696
03:12:10,200 --> 03:12:14,440
करने नहीं आया हूं मैं आपसे प्रश्न ये था कि अगर ये दुनिया

2697
03:12:14,440 --> 03:12:18,480
रियल है अच्छाई बुराई रियल है पथिक धरातल

2698
03:12:18,480 --> 03:12:20,880
पर द अ भी आपने प्रूफ किया है सबके

2699
03:12:20,880 --> 03:12:25,560
सामने कि पर्थ ब्रम है अवि शक्ति है

2700
03:12:25,560 --> 03:12:30,240
आपको ह दूंगा मैं आपको हटा दूंगा प्लीज मैं आपको हटाऊ

2701
03:12:30,240 --> 03:12:34,480
प् अगर आपके उत्तर नहीं तो फिर मैं क्या कर सकता शवा ठीक है

2702
03:12:34,480 --> 03:12:39,440
फिलहाल के लिए आप यही समझ लीजिए उत्तर नहीं है ठीक है

2703
03:12:39,440 --> 03:12:44,360
ले अगर य जो पाप और पुण्य है ये रियल है

2704
03:12:44,360 --> 03:12:48,520
भगवान के र पाप और पुण्य का दोष लगता कि नहीं पाप होने का दोष

2705
03:12:48,520 --> 03:12:52,880
लगा कि नहीं लगा अरे लेकिन अविद्या तो एक क्वालिटी है ना यार अविद्या

2706
03:12:52,880 --> 03:12:56,920
क्वालिटी है क्या बता रहे उसका डेफिनेशन दे रहे हो क्वालिटी का डेफिनेशन दे रहे हो आप कभी बोलते

2707
03:12:56,920 --> 03:13:01,120
निर्गुण है कभी बोलते निर्गुण है फिर बोलते उस मे अार है

2708
03:13:01,120 --> 03:13:05,720
भाई आप तो नहीं मानते ना आप तो नहीं

2709
03:13:05,720 --> 03:13:10,400
मानते रहे हो बता आप रहे हो मुझको आपका सिद्धांत

2710
03:13:10,400 --> 03:13:14,440
आप क् कर रहा हूं भग राधा कृष्ण दास जी मैं

2711
03:13:14,440 --> 03:13:18,520
आपसे क्वेश्चन कर रहा हूं कि आप मुझे

2712
03:13:18,520 --> 03:13:23,280
बताएं अगर ये पाप और पुण्य रियल है यह दुनिया रियल है

2713
03:13:23,280 --> 03:13:27,280
तो आप मुझे बताएं कि यहां पे होने वाले पाप का दोष भगवान

2714
03:13:27,280 --> 03:13:31,280
श्री कृष्ण को क्यों नहीं लगता जो गोलोक धाम में बैठे हुए हैं बता

2715
03:13:31,280 --> 03:13:36,000
सुनो सुनो सुनो है मैं इसका इसका आंसर देता हूं

2716
03:13:36,000 --> 03:13:40,200
कि कृष्णा के ऊपर दोष क्यों नहीं लगता फर्स्ट रीजन कि कृष्णा वो स्वयं

2717
03:13:40,200 --> 03:13:44,640
नहीं कर रहे दूसरा रीजन जीवात्मा है जो उससे दहित है उससे अलग

2718
03:13:44,640 --> 03:13:48,680
है परमात्मा और जीवात्मा अलग है उससे द्वत है तो

2719
03:13:48,680 --> 03:13:52,840
जो जीवात्मा है वो कर्म कर रहा है ठीक है तो उसका उसका जो रिएक्शन

2720
03:13:52,840 --> 03:13:56,840
है वो ब्रह्म के ऊपर नहीं आएगा लेकिन लेकिन यहां पर द्वैत सिद्ध हो

2721
03:13:56,840 --> 03:14:00,920
रहा है आपके भी आपका भी जो उदाहरण है आपका भी जो ब्रह्म है उसमें भी द्वैत सिद्ध

2722
03:14:00,920 --> 03:14:05,440
हो रहा है क्योंकि अविद्या क्वालिटी और आपका ईश्वर इसका अर्थ है कि निर्गुण नहीं

2723
03:14:05,440 --> 03:14:10,040
है गुण आ गया व तो क्या आपका ईश्वर क्या

2724
03:14:10,040 --> 03:14:14,080
आपने अभी सुनो एक सेकंड आपने अभी थोड़ी देर बोला कि चलो ठीक है थोड़ी देर के लिए मान

2725
03:14:14,080 --> 03:14:18,360
लेते हैं कि परमार्थिक लेवल पर ब्रह्म और अविद दोनों है

2726
03:14:18,360 --> 03:14:23,160
ठीक है तो मतलब आपने इस चीज को द्वत को आपने मान लिया

2727
03:14:23,160 --> 03:14:27,320
है हम टॉपिक से ना बदले जिससे टॉपिक से ना बदले

2728
03:14:27,320 --> 03:14:31,320
मैं उसको क्लियर करूंगा आप जो पूछ रहे हैं आप जो पूछ रहे

2729
03:14:31,320 --> 03:14:35,320
हैं मैं उसे क्लियर करूंगा लाइव स्ट्रीम तीन घंटे

2730
03:14:35,320 --> 03:14:41,080
की हो चुकी है ऑलरेडी लाइव स्ट्रीम तीन घंटे की ऑलरेडी हो चुकी

2731
03:14:41,080 --> 03:14:45,200
है तीन घंटे में सिर्फ मैंने आंसर दिया आपने एक भी आंसर नहीं दिया तीन घंटे

2732
03:14:45,200 --> 03:14:49,440
में मैं लगातार आंसर दिए जा रहा हूं अभी अभी अभी आपको इसका आंसर

2733
03:14:49,440 --> 03:14:51,160
देना है अगर ये दुनिया

2734
03:14:51,160 --> 03:14:55,280
रियल है तो यहां होने वाले पाप और पुण्य भी रियल है अगर

2735
03:14:55,280 --> 03:14:59,560
यह पाप और पुण्य रियल है और वह भगवान के कंट्रोल में है तो भगवान

2736
03:14:59,560 --> 03:15:03,760
को क्यों लग रहा क्यों नहीं लगेगा वो दोष अरे लेकिन अरे लेकिन अरे

2737
03:15:03,760 --> 03:15:07,800
मैं इसका जवाब देने के लिए रेडी हूं लेकिन पहले एटलीस्ट हम बेसिस को तो समझ लेंगे

2738
03:15:07,800 --> 03:15:12,240
कि आपकी और मेरी अंडरस्टैंडिंग क्या है कि प्रयोजन क्या है हर चीज का

2739
03:15:12,240 --> 03:15:16,400
प्रयोजन पर आप बात नहीं कर रहे आप इफेक्ट के ऊपर बात करो कॉज के ऊपर तो आप बात नहीं कर रहे

2740
03:15:16,400 --> 03:15:20,040
क्या आपने

2741
03:15:20,040 --> 03:15:24,120
इसको ऐसा करते हैं हम लोग अब इसको कंटिन्यू करेंगे फिर किसी दिन

2742
03:15:24,120 --> 03:15:28,120
आज की हमय समाप्त करते आप दोबारा एक बार आइएगा य से स्टार्ट

2743
03:15:28,120 --> 03:15:32,960
करेंगे द निर्ग निराकार वो सब हम लोग बता देंगे ठीक है

2744
03:15:32,960 --> 03:15:37,200
नहीं बिल्कुल भी नहीं बिल्कुल भी नहीं आप इसका आंसर कर इसका आंसर दीजिए

2745
03:15:37,200 --> 03:15:41,680
मुझे एक बात बताइए कि अविद्या जो कि गुण है क्वालिटी है अविद्या अपने पूरा डेफिनेशन

2746
03:15:41,680 --> 03:15:45,680
बताया जो चीज निर्गुण होती है उसका कोई ऐसी क्वालिटी ठीक है क्वालिटी क्या होती

2747
03:15:45,680 --> 03:15:50,160
है उस अब उसको डिफाइन कर सको उसको बोलते क्वालिटी आपने अभी क्या बोला

2748
03:15:50,160 --> 03:15:54,280
कि हा ब्रहम के इसम अविद्या भी है और ब्रम भी है व साइमल

2749
03:15:54,280 --> 03:15:58,560
एस्ट कर रहा है तो निर्गुण होना भी क्वालिटी हो

2750
03:15:58,560 --> 03:16:02,640
गया अरे भाई पहली बात तो य है अभी

2751
03:16:02,640 --> 03:16:06,280
पह पहली बात य है कि जो गुण है वो होता क्या है य

2752
03:16:06,280 --> 03:16:11,720
बताइए गुण मत को किसी

2753
03:16:11,720 --> 03:16:15,960
चीज कोई भी चीज होती है उसके जो लक्षण

2754
03:16:15,960 --> 03:16:20,000
होते है कोई भी चीज होती है उसके गुण धर्म लक्षण होते हैं उसको बताना उसको

2755
03:16:20,000 --> 03:16:24,040
बोलते क्वालिटी कि हा ये चीज है ये ऐसी दिखती है या इसके अंदर

2756
03:16:24,040 --> 03:16:29,640
ये फीलिंग है या इसके अंदर ये चीज

2757
03:16:29,640 --> 03:16:33,720
है दे एपल तो देने दो मेरे भाई एग्जांपल देने

2758
03:16:33,720 --> 03:16:37,760
दो जैसे कि फॉर एग्जांपल पानी है ठीक है तो

2759
03:16:37,760 --> 03:16:41,760
प्याज बुझाती है तो प्याज बुझाना उसकी क्वालिटी है कोई

2760
03:16:41,760 --> 03:16:45,760
जैसे कि अग्नि है तो अग्नि आपको हीट देती है

2761
03:16:45,760 --> 03:16:49,960
जलाती है ठीक है प्रकाश देती है तो ये क्वालिटी है ठीक

2762
03:16:49,960 --> 03:16:54,360
है आपका ब्रम एजिस्ट भी अगर कर रहा है आपका ब्रम अगर एजिस्ट

2763
03:16:54,360 --> 03:16:58,760
भी कर रहा है तो आप बोलते हो सच्चिदानंद है ठीक है तो उसके अंदर ये तीनों फीचर्स

2764
03:16:58,760 --> 03:17:03,040
है वो सत है वो इटरनल है आप उसको डिफाइन कर सकते हो जिस चीज को डिफाइन

2765
03:17:03,040 --> 03:17:08,720
किया जाए उसको बोलते

2766
03:17:08,720 --> 03:17:13,040
क्वालिटी भाई मेरी तबीयत खराब हो चुकी है तीन घंटे

2767
03:17:13,040 --> 03:17:17,960
से इनके साथ मैंने जितना हो सकता था निर्वाह किया

2768
03:17:17,960 --> 03:17:22,240
अभी इनका जो क्वेश्चन है निर्गुण निराकार क्यों है

2769
03:17:22,240 --> 03:17:26,360
वह मैं बता के जा रहा हूं और किसी और दिन इनके इस क्वेश्चन

2770
03:17:26,360 --> 03:17:30,440
का जवाब भी देंगे यहां पर भी यह चीज छूट गई है कि इन्होंने यह

2771
03:17:30,440 --> 03:17:33,240
नहीं बताया

2772
03:17:33,240 --> 03:17:37,280
कि यह नहीं बताया उन्होंने कि अगर यह

2773
03:17:37,280 --> 03:17:42,760
दुनिया रियल है और यहां पर होने वाले जो पाप और पुण्य है

2774
03:17:42,760 --> 03:17:47,160
वो क्या कहते हैं अगर वो रियल है तो भगवान को उसका दोष क्यों नहीं लग

2775
03:17:47,160 --> 03:17:52,320
ठीक है अभी निर्गुण की बात कर लेते हैं कि अगर हम विद्या

2776
03:17:52,320 --> 03:17:56,320
होना या फिर सृष्टि बनाने का यूं ही मन होना

2777
03:17:56,320 --> 03:18:00,840
इसको हम गुण मानते हैं तब भी यह गुण

2778
03:18:00,840 --> 03:18:05,040
पार मार्थी धरातल पर है व्यवहारिक पर नहीं

2779
03:18:05,040 --> 03:18:09,080
है और हम यह वहां पर रखेंगे कि

2780
03:18:09,080 --> 03:18:13,280
अभी भी आपके लिए वो निर्गुण निराकार है यह जो गुण

2781
03:18:13,280 --> 03:18:19,280
भी अगर सिद्ध हो रहे हैं तो पार मार्थी दृष्टि से सिद्ध हो रहे हैं तब

2782
03:18:24,320 --> 03:18:28,840
तब जब आपने उसको ब्रह्म मान लिया जिसको हम ब्रह्म बता रहे हैं

2783
03:18:28,840 --> 03:18:32,880
तो जब आपने उसको ब्रह्म मान लिया जिसको हम बना बता रहे हैं तो

2784
03:18:32,880 --> 03:18:36,880
आपका फिर ना मानना सिद्ध नहीं होगा अगर नाम अगर उसको आप ब्रह्म

2785
03:18:36,880 --> 03:18:41,120
नहीं मानते तो उसके अनुसार उसके द्वारा दुनिया बनाना उसके अंदर अविद्या

2786
03:18:41,120 --> 03:18:45,720
का होना सिद्ध नहीं होगा और अगर ब्रह्म मान लिया तो

2787
03:18:45,720 --> 03:18:49,760
अगर ब्रह्म लिया तो उस आधार पर उसको ना मानना सिद्ध

2788
03:18:49,760 --> 03:18:54,240
नहीं होगा कि उसके अंदर तो अविद्या है जैसे कि

2789
03:18:54,240 --> 03:18:58,920
एक सोता हुआ व्यक्ति यह नहीं कह सकता

2790
03:18:58,920 --> 03:19:03,480
कि मैं किसी के आवाज देने पर जाग गया क्यों नहीं कह सकता

2791
03:19:03,480 --> 03:19:07,960
क्योंकि अगर वह सुन रहा है तो उसका सोना सिद्ध नहीं होता

2792
03:19:07,960 --> 03:19:10,480
और अगर

2793
03:19:10,480 --> 03:19:14,680
वह क्या कहते हैं अगर वह सो

2794
03:19:14,680 --> 03:19:15,180
रहा है

2795
03:19:15,000 --> 03:19:19,880
तो उसका सुनना सिद्ध नहीं होता और अगर वो सुन रहा है तो उसका

2796
03:19:19,880 --> 03:19:23,960
सोना सिद्ध नहीं होता उसी प्रकार से अगर आपने उस ब्रह्म को मान

2797
03:19:23,960 --> 03:19:28,880
लिया कि वही ब्रह्म है जिसके अंदर अविद्या

2798
03:19:28,880 --> 03:19:33,240
है जिसके अंदर अविद्या है तो फिर आप उस अविद्या

2799
03:19:33,240 --> 03:19:37,440
के होने के आधार पर उसको नकार नहीं सकते और अगर

2800
03:19:37,440 --> 03:19:41,760
आप नकार रहे हैं तो जैसे ही आप नकार तो आपका उस ब्रह्म

2801
03:19:41,760 --> 03:19:45,880
को मानना बंद हो जाएगा जब मानना बंद हो गया मानना

2802
03:19:45,880 --> 03:19:50,200
नहीं रहा तो तो उसके अंदर अविद्या होना नहीं रहा तो उसके द्वारा सृष्टि

2803
03:19:50,200 --> 03:19:54,200
की रचना होना इन सब चीजों परब हम क्वेश्चन करते हैं यह क्वेश्चन कई बार आता

2804
03:19:54,200 --> 03:19:58,240
है कि भाई उसने सृष्टि बनाई क्यों आंख देखती क्यों है आंख आंख तब

2805
03:19:58,240 --> 03:20:02,400
तक है जब तक वो देखती है अगर वो नहीं देखती है क्योंकि वो देखने वाली

2806
03:20:02,400 --> 03:20:06,560
निष्क्रिय भी तब भी वो देखने वाली चीज है इसलिए उसको आंख कहा गया तो

2807
03:20:06,560 --> 03:20:10,840
अगर हम इस पर ही सवाल उठा देंगे कि उसने दुनिया बनाई क्यों है

2808
03:20:10,840 --> 03:20:14,960
तो क्या होगा कि उसका ईश्वर होना सिद्ध नहीं हुआ और अगर उसका

2809
03:20:14,960 --> 03:20:19,200
ईश्वर होना सिद्ध नहीं हुआ तो उसके पुनः दुनिया का सृजन होना सिद्ध

2810
03:20:19,200 --> 03:20:23,320
नहीं हुआ तो हम इस बात के आधार पर कि उसने अनावश्यक दुनिया

2811
03:20:23,320 --> 03:20:29,320
क्यों बनाई इस बात के आधार पर उसके ईश्वर ईश्वर का खंडन नहीं कर

2812
03:20:33,520 --> 03:20:37,720
सकते और दूसरी बात यह है कि

2813
03:20:37,720 --> 03:20:42,240
जो वहां पाप पुण्य वगैरह सब कुछ हो रहे हैं ईश्वर का जो मौलिक स्वरूप है

2814
03:20:42,240 --> 03:20:46,680
या फिर यहां से जो आत्माएं मुक्त हो जाती है

2815
03:20:46,680 --> 03:20:50,680
उन आत्माओं के लिए ये उसको तब पता ईश्वर को तो पता ही है

2816
03:20:50,680 --> 03:20:54,800
कि सब जो है वो गलत है मगर आत्मा जो मुक्त हो गई उसको ये पता चलता

2817
03:20:54,800 --> 03:20:59,720
है भाई मैं जिसको रियल समझ रहा था वो झूठ था वो माया था

2818
03:20:59,720 --> 03:21:04,000
तो अ क्या कहते हैं इस

2819
03:21:04,000 --> 03:21:08,040
मेरा जो है सर जो है घूम चुका है घूम चुका है

2820
03:21:08,040 --> 03:21:12,280
एक तो बात ये होती है कि हर बात हर बार

2821
03:21:12,280 --> 03:21:16,880
जो अगर कोई एक वर्ड आ गया तो उस वर्ड गलत वर्ड जो

2822
03:21:16,880 --> 03:21:21,080
ज कांटेक्ट से बाहर का उसी के ऊपर बात होने लगेगी इतना इतना ज्यादा

2823
03:21:21,080 --> 03:21:25,520
मुद्दे पर लाने का प्रयास करना चाहता है कि पूछे नहीं

2824
03:21:25,520 --> 03:21:29,520
तो ठीक है हम यह बातें किसी और दिन फ्रेश मूड के साथ दोबारा से कर

2825
03:21:29,520 --> 03:21:33,560
लेंगे मेरे पास अभी मैंने काफी देर पहले अपना कोई मील

2826
03:21:33,560 --> 03:21:37,680
लिया था और अभी मैं लो हो रहा है काफी मैं

2827
03:21:37,680 --> 03:21:41,800
जैसे की चर्चा हुई है सबने देखा है तो इस वजह से मुझे उन्हें

2828
03:21:41,800 --> 03:21:46,000
हटाना पड़ा इसमें वो ना समझिए कोई द्वेश पूर्वक

2829
03:21:46,000 --> 03:21:48,560
हटाया है भाई हम आपको दोबारा ले लेंगे चर्चा

2830
03:21:48,560 --> 03:21:52,960
से पीछे नहीं हट रहे और एक चीज और कि

2831
03:21:52,960 --> 03:21:57,280
हां मैंने आपको हटाया बिना पूछे इसलिए क्योंकि मुझे यह मालूम है कि जब मैं आपको हटाऊ

2832
03:21:57,280 --> 03:22:01,320
तो आप कहोगे आपके पास उत्तर नहीं है ठीक है तो वो लाइन मुझे नहीं सुननी

2833
03:22:01,320 --> 03:22:05,520
है नहीं आपको कहने देना है इस वजह से मैंने आपको बिना

2834
03:22:05,520 --> 03:22:09,600
पूछे हटाया और आप दोबारा आ सकते हैं जिस पर

2835
03:22:09,600 --> 03:22:13,720
हम ये निर्गुण निराकार पर बात करेंगे अभी हमारी य बात हो रही है कि अगर यहां के होने

2836
03:22:13,720 --> 03:22:17,840
वाले पाप पुण्य सही है तो उन पाप पुण्यं का दोष ईश्वर पर लग जाएगा

2837
03:22:17,840 --> 03:22:21,960
और हमारी फिलोसोफी ये है कि ये सब कुछ नकली है ईश्वर के अकॉर्डिंग

2838
03:22:21,960 --> 03:22:26,080
तो उसको पाप पुण्य का दोष कैसे लगेगा जैसे हमारे घर में छोटे-छोटे

2839
03:22:26,080 --> 03:22:30,240
बच्चे होते हैं जो कुछ फालतू की चीज ना मिलने के कारण रो रहे होते हैं मगर

2840
03:22:30,240 --> 03:22:34,440
जो मां-बाप होते हैं वो जानते हैं कि ये फालतू की चीज के लिए रो रहा है वास्तविकता

2841
03:22:34,440 --> 03:22:38,920
में सुखदायक नहीं है वास्तविकता कुछ और है

2842
03:22:38,920 --> 03:22:43,000
तो क्या होता है हम लोग हसते हैं ऐसे ही ईश्वर हसता है यहां के

2843
03:22:43,000 --> 03:22:47,120
जो पाप पुण्य है इसी प्रकार से जो मुक्त आत्मा है वो भी से जब मुक्त

2844
03:22:47,120 --> 03:22:51,120
हो जाएगी और उसको जब यह पता चलेगा कि भाई यह सब जो दुनिया को

2845
03:22:51,120 --> 03:22:55,280
अभी तक मैं असली समझ रहा था यह सब नकली था इसीलिए वो वहां पर चैन

2846
03:22:55,280 --> 03:22:59,560
से सुख के साथ रहेगा इनकी फिलोसोफी की बात कर रहा हूं जो गोलोक

2847
03:22:59,560 --> 03:23:03,680
धाम में वो रहेगा तो इन्होंने भी अगर इनकी फिलोसोफी के

2848
03:23:03,680 --> 03:23:07,680
आधार पर भी तो ये वहां पर उ शब्द से बचते हैं कि वो जो इंफॉर्मेशन मिल रही

2849
03:23:07,680 --> 03:23:12,360
है वो झूठ नहीं है वो गलत है वो इंफॉर्मेशन झूठ नहीं है वो गलत

2850
03:23:12,360 --> 03:23:16,680
तो इनकी फिलोसोफी को ये इस तरह से डिफाइन करते हैं

2851
03:23:16,680 --> 03:23:20,960
और दूसरी बात यह भी है कि अगर उसको वहां पर कोई कमी महसूस

2852
03:23:20,960 --> 03:23:25,000
हो रही है किसी भी प्रकार की तो मुक्त नहीं कहलाएगा तो बहुत सारी चीजें हमारे

2853
03:23:25,000 --> 03:23:29,000
कुछ आगे के टॉपिक्स हो सकते थे यह लोग कृष्ण और अल्लाह को एक क्यों कहते

2854
03:23:29,000 --> 03:23:33,000
हैं क्योंकि हमारा जो हम जो अब देखिए शंकराचार्य

2855
03:23:33,000 --> 03:23:37,160
जी का मधुवा चार्य जी के साथ या रामानुजाचार्य जी के साथ

2856
03:23:37,160 --> 03:23:41,160
जो कुछ कुछ परसेंटेज मतभेद है

2857
03:23:41,160 --> 03:23:45,680
हम कभी भी उसको अपने यहां पर लेकर नहीं आते कभी भी नहीं लाते

2858
03:23:45,680 --> 03:23:50,040
ईश्वर की सर्वशक्ति मत्ता की बात करते हैं और जो ये तथाकथित तंत्र

2859
03:23:50,040 --> 03:23:54,920
है जो कैसे हमारे हिंदुइज्म में धीरे-धीरे

2860
03:23:54,920 --> 03:23:59,000
ब्राहमम चीजों को जोड़ रहे हैं जाने में या अनजाने में वो अलग बात

2861
03:23:59,000 --> 03:24:03,600
है मगर जड़ रहा है ईश्वर एक जगह बैठा है फिर ईश्वर सब जगह भी है भाई

2862
03:24:03,600 --> 03:24:07,680
अगर ईश्वर एक जगह बैठा है और वो निराकार रूप में सब जगह भी

2863
03:24:07,680 --> 03:24:11,760
है तो फिर ये क्यों कह रहे हो कि ईश्वर उसका शरीर है वो निराकार वाला भी

2864
03:24:11,760 --> 03:24:15,760
तो उसका शरीर है मगर आपको सिर्फ वही शरीर शाश्वत

2865
03:24:15,760 --> 03:24:18,680
है मगर से मारा जा सकता है आपको वही बात है

2866
03:24:18,680 --> 03:24:22,680
कि शिव जीी जो है बहुत अच्छे हम शिव जी को बहुत

2867
03:24:22,680 --> 03:24:26,760
मानते हैं मगर वह भगवान नहीं है ठीक है शिव जी को हम बहुत

2868
03:24:26,760 --> 03:24:30,800
मानते हैं मगर वह भगवान नहीं है भगवान के दास मात्र है शिव जी को

2869
03:24:30,800 --> 03:24:34,880
हम बहुत मानते हैं मगर वह परम वैष्णव भी नहीं है उनसे अच्छा वैष्णव

2870
03:24:34,880 --> 03:24:38,880
वो हरिदास ठाकुर था जिसके बारे में 2.62 में बताया गया

2871
03:24:38,880 --> 03:24:42,880
है कि वह अपनी इंद्रियों पर कंट्रोल कर लिए और शिवजी कंट्रोल

2872
03:24:42,880 --> 03:24:46,880
नहीं कर पाए तो वो परम वैष्णव भी

2873
03:24:46,880 --> 03:24:50,920
नहीं है क्योंकि वो हरिदास जी ज्यादा अच्छे वैष्णव थे तो ये वही वाली बात

2874
03:24:50,920 --> 03:24:55,240
है कि हम शब्द तो यूज कर रहे हैं क्योंकि उस शब्द से बच नहीं सकते

2875
03:24:55,240 --> 03:25:00,000
मगर उसकी डेफिनेशन ही बदल दे रहे हैं कुल मिलाकर वही वाली बात आर्य समाज वाली

2876
03:25:00,000 --> 03:25:04,040
तो यह सारी चर्चा थी आप लोगों को कैसी लगी साढ़े

2877
03:25:04,040 --> 03:25:08,240
तीन घंटे हो चुके थे हम लोग फिर कभी अगर उनके मन में कुछ फस है बाकी

2878
03:25:08,240 --> 03:25:12,240
है तो फिर से इस पर बात कर लेंगे अगर उन्हें हमारी एक्सप्लेनेशन जो हमने

2879
03:25:12,240 --> 03:25:16,920
उनको हटाने के बाद दी है वो उनको समझ में नहीं आई

2880
03:25:16,920 --> 03:25:22,920
सभी को जय श्री

2881
03:25:34,360 --> 03:25:38,360
राम जय श्री राम
