1
00:00:02,320 --> 00:00:08,280
तो सभी को जय श्री

2
00:00:08,280 --> 00:00:12,480
राम लाइव स्टार्ट होते समय हम बता दें

3
00:00:12,480 --> 00:00:16,560
कि जो हम चर्चाएं करते हैं वह किसी भी प्रकार

4
00:00:16,560 --> 00:00:21,440
से किसी मत पंथ

5
00:00:21,440 --> 00:00:25,840
संप्रदाय संस्था समाज के अस्तित्व

6
00:00:25,840 --> 00:00:30,040
को नष्ट करने के लिए नहीं है पितु

7
00:00:30,040 --> 00:00:34,120
उसमें व्याप्त जो ऐसी कुछ शिक्षाएं हैं जो हम

8
00:00:34,120 --> 00:00:38,400
सनातनी हों को बांट रही हैं उन शिक्षाओं को सार्वभौम

9
00:00:38,400 --> 00:00:42,480
अकाट्य सिद्धांतों के द्वारा शोधित करने का हमारा उद्देश्य है

10
00:00:42,480 --> 00:00:46,680
जिससे कि हम हिंदुओं को संगठित कर सके जो छोटे-छोटे समूह में बटक रह

11
00:00:46,680 --> 00:00:50,720
गया है और समय आने पर अपनी रक्षा के लिए

12
00:00:50,720 --> 00:00:55,360
हिंदू एक शत्र हो कर के खड़ा हो सके

13
00:00:55,360 --> 00:01:00,200
और हम हिंदुओं को दुनिया का कोई भी नेतृत्व

14
00:01:00,200 --> 00:01:04,840
हम हिंदुओं की जो सबसे बड़ी परेशानी है वह है बहु नित वाद

15
00:01:04,840 --> 00:01:09,120
हम कहते अवश्य है कि हम सनातनी है हम हिंदू है मगर हम बहु निवाद

16
00:01:09,120 --> 00:01:13,400
में फसे हुए हमारे पास सार्वभौम तत्व शास्त्रों

17
00:01:13,400 --> 00:01:18,040
द्वारा है तर्क प्रमाण द्वारा है मगर हम

18
00:01:18,040 --> 00:01:22,160
उसका आलंबन नहीं ले रहे ल् विकल्प के रूप में भी हमने मान लीजिए

19
00:01:22,160 --> 00:01:26,240
हम शास्त्र और प्रमाण के आधार पर तत्व नहीं

20
00:01:26,240 --> 00:01:30,280
लेना है मगर फिर भी वैकल्पिक भी हमने जो तव बनाया है वो बहु

21
00:01:30,280 --> 00:01:34,440
नेतृत्व एक से ज्यादा है जिस कारण से हम बटे हुए हैं

22
00:01:34,440 --> 00:01:38,480
तो हमारा उद्देश्य विभिन्न मत मता तरों में बटे हुए

23
00:01:38,480 --> 00:01:42,600
सनातन समाज में जो भ्रांतियां है उनको सार्वभौम

24
00:01:42,600 --> 00:01:46,600
सिद्धांतों द्वारा दूर करते हुए सनातन समाज को

25
00:01:46,600 --> 00:01:51,560
संगठित सुरक्षित करना एक मात्र हमारा उद्देश्य है

26
00:01:51,560 --> 00:01:56,040
और हमें संगठित सुरक्षित कौन कर सकता

27
00:01:56,040 --> 00:02:00,800
है गुरु गोविंद और ग्रंथ इनके सानिध्य में

28
00:02:00,800 --> 00:02:06,800
संगठित हो सकते हैं मैं कहीं

29
00:02:06,930 --> 00:02:12,930
[संगीत]

30
00:02:13,520 --> 00:02:17,520
पर मैं कहीं पर काफी देर

31
00:02:17,520 --> 00:02:21,800
तक धर्म के बारे में धर्म चर्चाएं हो रही थी मैंने उस सभा

32
00:02:21,800 --> 00:02:25,800
को देखा काफी उसम बीच-बीच में जिसके हिसाब का जो पॉइंट

33
00:02:25,800 --> 00:02:31,800
होते थे वो उसमें ताली बजाता था उसमें

34
00:02:32,320 --> 00:02:36,360
वो पार्टिसिपेट करता था मगर अंत में जब जय

35
00:02:36,360 --> 00:02:40,680
श्री राम का नारा लगा तो जय श्री राम सभी ने बोला

36
00:02:40,680 --> 00:02:44,960
तो इससे क्या पता लगता है कि हमको कोई सरकार

37
00:02:44,960 --> 00:02:49,080
कोई नेता कोई मीडिया तंत्र कोई शासन तंत्र एक

38
00:02:49,080 --> 00:02:53,400
छत्र नहीं कर सकता है हिंदुओं को संगठित कर सकता है उसका गुरु गोविंद

39
00:02:53,400 --> 00:02:57,760
और ग्रंथ अगर हमारा गोविंद एक होगा तो हम एक

40
00:02:57,760 --> 00:03:01,920
हमारा ग्रंथ एक होगा तो हम एक हमारा गुरु एक होगा तो हम एक

41
00:03:01,920 --> 00:03:05,960
और हमारी ऐसी कोई मेंटालिटी नहीं है कि हम सबको कह रहे

42
00:03:05,960 --> 00:03:09,960
हैं कि भाई आप जो है जो जगतगुरु शंकराचार्य उनसे आप दीक्षित हो

43
00:03:09,960 --> 00:03:15,200
जाइए उनसे आप उनके शिष्य बन जाइए जो व्यावहारिक स्तर

44
00:03:15,200 --> 00:03:19,520
पर पूज्य शंकराचार्य जी द्वारा जो मान्य सिद्धांत है वही व्यवहारिक

45
00:03:19,520 --> 00:03:22,040
स्तर पर रामो जाचार्य जी द्वारा भी

46
00:03:22,040 --> 00:03:26,320
स्वीकार सिद्धांत है व्यवहार मतलब कि हमें वर्ण व्यवस्था

47
00:03:26,320 --> 00:03:30,400
कैसे माननी है कर्म कांडों का आलंबन कैसे लेना है

48
00:03:30,400 --> 00:03:34,840
यह सब ऑलमोस्ट सेम है इसमें कहीं कोई वैचारिक मतभेद नहीं है

49
00:03:34,840 --> 00:03:39,080
ब्रह्म को लेकर के वैचारिक मतभेद ब्रह्म को लेकर के शाब्दिक रूप

50
00:03:39,080 --> 00:03:43,080
में दिखाई देने वाले भेद है वोह बाद की बात है मगर जो

51
00:03:43,080 --> 00:03:47,120
व्यवहारिक जो धर्म है क्या कहते हैं धर्म मे मांसा

52
00:03:47,120 --> 00:03:51,160
वो सबकी एक है तो ऐसा नहीं है कि रामानुजाचार्य जी जो धर्म बता

53
00:03:51,160 --> 00:03:57,160
रहे हैं वह गलत होगा

54
00:04:00,560 --> 00:04:04,760
निंबार्क निंबार्काचार्य जी जो धर्म बता रहे हैं वह और शंकराचार्य

55
00:04:04,760 --> 00:04:09,000
जी द्वारा बताया गया धर्म अलग है कहीं पर एक कोई शाब्दिक भेद अवश्य

56
00:04:09,000 --> 00:04:13,160
दिखाई दे सकता है ब्रह्म को लेकर के बाकी सब परंपरा प्राप्त जितने भी आचार्य

57
00:04:13,160 --> 00:04:17,160
गण है उनका धर्म उनके द्वारा प्राप्त होने वाला जो धर्म है वो एक

58
00:04:17,160 --> 00:04:21,160
ही है ठीक है तो गुरु के सानिध्य

59
00:04:21,160 --> 00:04:25,200
में प्रामाणिक आचार्य यदि सबके हैं प्रामाणिक परंपरा प्राप्त आचार्य सबके

60
00:04:25,200 --> 00:04:29,360
हैं तो हमारा जो व्यवहार होगा एक जैसा हो जाएगा सबका व्यवहार

61
00:04:29,360 --> 00:04:34,040
का मतलब मतलब युद्ध की स्थिति में क्या करना है हम लोग एक है

62
00:04:34,040 --> 00:04:38,240
है ना तो यह हमारा एकमात्र उद्देश्य

63
00:04:38,240 --> 00:04:42,240
है इसको याद रखें और धर्म की रक्षा करनी

64
00:04:42,240 --> 00:04:46,320
है धर्म के लिए थोड़ी भी सांस आती है दिन भर की सांसों

65
00:04:46,320 --> 00:04:50,520
में से कुछ भी सांस आती है आपके अंदर तो सबसे पहले स्वयं को उसके

66
00:04:50,520 --> 00:04:55,680
योग्य बनाए उपासना सेवा संकीर्तन स्वाध्याय

67
00:04:55,680 --> 00:04:59,880
उपासना करें भगवान की दिन भर में कम से कम सवा घंटा

68
00:04:59,880 --> 00:05:04,080
की भक्ति करें सेवा संकीर्तन अभी हम लोग कुछ दिनों में नाम जप

69
00:05:04,080 --> 00:05:08,200
के सुबह के सेशन शुरू कर देंगे तो उसमें जो भी आना चाहे

70
00:05:08,200 --> 00:05:12,560
आ सकते हैं सेवा संकीर्तन संकीर्तन आप

71
00:05:12,560 --> 00:05:15,640
जो गोष्ठी होती है हिंदू राष्ट्र गोष्ठी जो गुरुदेव

72
00:05:15,640 --> 00:05:19,760
की तरफ से हो रही है उसके द्वारा कर सकते हैं उसमें आप साप्ताहिक रूप

73
00:05:19,760 --> 00:05:24,120
से एक जगह हिंदुओं को एक मठ मंदिर को दुर्ग बनाइए वहां पर एकत्रित होइए वहां संकीर्तन

74
00:05:24,120 --> 00:05:28,160
करिए भगवान के नाम संकीर्तन सेवा भी वही से

75
00:05:28,160 --> 00:05:32,320
हो जाएगी सब लोग मिलकर के कुछ आयोजन कर दे मेडिकल कैंप लगवा दे चेक अप

76
00:05:32,320 --> 00:05:38,320
कैंप या कोई शिक्षाप्रद

77
00:05:41,200 --> 00:05:45,440
क्लासेस या कोई शिक्षा प्रद क्लासेस लगवा दे वहां पर वैदिक मैथमेटिक्स

78
00:05:45,440 --> 00:05:49,440
की क्लासेस लगवाए यह सेवा हो जाएगी

79
00:05:49,440 --> 00:05:53,480
और सेवा के लिए आप प्रसाद बांट सकते हैं सब लोग मिलजुल कर के तो इस

80
00:05:53,480 --> 00:05:58,160
तरह से सेवा और स्वाध्याय उपासना

81
00:05:58,160 --> 00:06:02,160
सेवा संकीर्तन स्वाध ये चार चीजें अपने जीवन में अवश्य

82
00:06:02,160 --> 00:06:06,280
लाए और इन सबके लिए आवश्यक है कुछ भी ना समझ में आए तो सबसे पहले

83
00:06:06,280 --> 00:06:10,280
नाम जप भगवान के नाम का जप तुरंत अभी

84
00:06:10,280 --> 00:06:12,880
से स्टार्ट

85
00:06:12,880 --> 00:06:17,360
कर ठीक है तो आज का हमारा जो

86
00:06:17,360 --> 00:06:22,000
विषय है वो है वर्ण व्यवस्था जन्म से या कर्म से

87
00:06:22,000 --> 00:06:26,280
और हमारे सामने हैं रविंद्र कुमार जी इनको मैं सेल्फ स्टडी

88
00:06:26,280 --> 00:06:30,640
हिंदू कहूं स्वा अध्ययन करने वाले है

89
00:06:30,640 --> 00:06:34,920
ना ठीक है कह लीजिए प्रभु जी भैया जी जो भी आप

90
00:06:34,920 --> 00:06:37,080
क

91
00:06:37,080 --> 00:06:41,160
वैसे मैं बता रहा हूं मैंने भगवान शंकराचार्य जी को य के माध्यम

92
00:06:41,160 --> 00:06:45,440
से बहुत बार सुना है और वहा से बहुत जानकारिया प्राप्त की है इसकन

93
00:06:45,440 --> 00:06:49,440
के भी लगभग 50 बार मंदिर गया हूं वहा से कुछ जानकारी मिली लेकिन वहा से संतुष्ट

94
00:06:49,440 --> 00:06:53,560
नहीं हुआ मैं इसके अतिरिक्त हा स्वाध्याय भी किया है हनुमान प्रसाद पदार जी की

95
00:06:53,560 --> 00:06:57,560
श्रीमद रामचरित मानस पड़ी है तुलसीदास जीत

96
00:06:57,560 --> 00:07:02,800
उनका टीका का है तो आप जो वो कह ले

97
00:07:02,800 --> 00:07:06,960
नहीं इसमें एक अंतर है देखिए ऐसा

98
00:07:06,960 --> 00:07:11,360
नहीं है कि जवाब नहीं होता है नास्तिक का जवाब है

99
00:07:11,360 --> 00:07:15,440
सनातन विरोधी ईश्वर को मानने वाले का जवाब है उसके बाद जब

100
00:07:15,440 --> 00:07:20,480
सनातनी हो गए तो परंपरा प्राप्त गुरु

101
00:07:20,480 --> 00:07:24,680
विरोधी सनातनी कहने वाले का भी जवाब है मगर होता क्या

102
00:07:24,680 --> 00:07:28,920
है कि जब हमें यह मालूम पड़ जाता है कि सामने वाली

103
00:07:28,920 --> 00:07:33,120
व्यक्ति के पास निश्चित नियमावली कौन सी है तो हम उस

104
00:07:33,120 --> 00:07:37,280
नियमावली के अंदर रहते हुए उससे बात करते हैं समझ रहे

105
00:07:37,280 --> 00:07:41,320
हैं जैसे कि किसी ने कह दिया जैसे किसी ने कह दिया कि मैं

106
00:07:41,320 --> 00:07:45,600
नास्तिक हूं मगर उसने यह मान लिया कि मानव हूं

107
00:07:45,600 --> 00:07:46,100
तो

108
00:07:45,720 --> 00:07:50,000
फिर हमें ज्यादा उधेड़बुन करने की जरूरत नहीं है उससे यही बस पूछेंगे

109
00:07:50,000 --> 00:07:54,120
कि मानवो चित मूल्य जो आपने स्वीकार किए उसका आधार आपका क्या

110
00:07:54,120 --> 00:07:58,120
है तो फिर हम उसको बहुत ज्यादा डिटेलिंग में बाद में जा

111
00:07:58,120 --> 00:08:02,640
सकते हैं मगर पहला हमारा यही हो जाएगा अगर उसने कह दिया कि हम मानव

112
00:08:02,640 --> 00:08:06,640
इसी प्रकार यदि उसने कह दिया कि मैं ईश्वर को स्वीकार करने

113
00:08:06,640 --> 00:08:10,840
वाला हूं मगर सनातनी जो वेदों द्वारा प्राप्त होने वाला ईश्वर है सनातन

114
00:08:10,840 --> 00:08:14,960
ईश्वर है उसको नहीं मानता मैं इस्लाम के द्वारा बाइबल के द्वारा

115
00:08:14,960 --> 00:08:19,760
ईश्वर को मान लिया तो फिर हम और बहुत सारी

116
00:08:19,760 --> 00:08:24,120
तर्क और और बहुत सारी चीजें लाने की वजह सबसे पहले यही पूछेंगे

117
00:08:24,120 --> 00:08:28,200
क्या आपका ईश्वर सर्वशक्तिमान है है

118
00:08:28,200 --> 00:08:32,560
ना जब ईश्वर है ब तो ईश्वर इसीलिए कि वो पावरफुल है

119
00:08:32,560 --> 00:08:37,400
है ना ईश्वर इसीलिए हा अल्टीमेट पावरफुल है

120
00:08:37,400 --> 00:08:41,480
ना तो फिर यही बात पूछ ली जाएगी तो सनातन विरुद्ध

121
00:08:41,480 --> 00:08:45,560
जितने भी तंत्रों ने ईश्वर खड़ा किया है वो बाधित है अब उसके

122
00:08:45,560 --> 00:08:49,600
बाद उसके बाद यदि यह हमें

123
00:08:49,600 --> 00:08:53,720
मालूम पड़ जाता है कि वो सनातन के अंदर रहते हुए वेदों के नाम

124
00:08:53,720 --> 00:08:57,880
पर मगर बाधित ईश्वर की ही व्याख्या कर रहा

125
00:08:57,880 --> 00:09:01,400
है तो कम से कम उस के जो तंत्रों के द्वारा

126
00:09:01,400 --> 00:09:05,600
जितने जितने संदर्भ में वेद को स्वीकारा गया है उसके आधार पर हम प्रश्न

127
00:09:05,600 --> 00:09:09,960
कर सकते हैं पूछ सकते हैं जैसे मान लीजिए स्कोन वाले हैं

128
00:09:09,960 --> 00:09:14,040
वो अगर यह कहेंगे कि हम जो है स्कोन वाले हैं इकोन का कहना है कि हम

129
00:09:14,040 --> 00:09:18,040
चैतन्य महाप्रभु को मानते हैं तो चैतन्य महाप्रभु श्रीधर स्वामी को मानते

130
00:09:18,040 --> 00:09:22,040
हैं उनका भा भाष्य कहां है श्रीमद भागवत का बहुत सारे

131
00:09:22,040 --> 00:09:26,920
वहां से प्रश्न खड़े हो जाएंगे तो इसलिए

132
00:09:26,920 --> 00:09:31,160
अपना जो जब व्यक्ति अपना स्टैंड क्लियर करता है

133
00:09:31,160 --> 00:09:35,320
तो फिर उससे बात करने में आसानी रहती है कि हम किस विषय को आधार बनाते

134
00:09:35,320 --> 00:09:38,160
हुए उससे बात करें

135
00:09:38,160 --> 00:09:42,160
अब आपने कहा कि आपने हनुमान प्रसाद पौदार को भी

136
00:09:42,160 --> 00:09:46,400
पढ़ाया आपने कहा आपने कहा पूज्य शंकराचार्य

137
00:09:46,400 --> 00:09:50,520
जी को भी आपने सुना है जगतगुरु शंकराचार्य जी को आपने कहा

138
00:09:50,520 --> 00:09:55,600
कि मैं स्कन वालों को भी फॉलो करता हूं मगर यदि आप

139
00:09:55,600 --> 00:09:59,920
शंकरा यदि आप शंकराचार्य को फॉलो कर रहे हैं

140
00:09:59,920 --> 00:10:04,360
तो आप स्कोन के कई अंशों में आप स्कोन की जो शिक्षाए

141
00:10:04,360 --> 00:10:09,120
है उनको स्वीकार नहीं कर सकते ने

142
00:10:09,120 --> 00:10:13,200
कहा उतर से हा तो अब

143
00:10:13,200 --> 00:10:16,480
दूसरी बात आती है कि आप संतुष्ट तो जाहिर

144
00:10:16,480 --> 00:10:20,720
सी बात यदि आप यहां पर है तो आप संतुष्ट नहीं है पूज्य

145
00:10:20,720 --> 00:10:24,800
जगतगुरु शंकराचार्य जी के उत्तर से भी यही बात है ना

146
00:10:24,800 --> 00:10:28,840
अभी त अभी तक तो यही है अब इसके बाद आपने कहा हनुमान

147
00:10:28,840 --> 00:10:32,840
प्रसाद पौदार अगर आप यहां पर है तो जो

148
00:10:32,840 --> 00:10:37,080
पूरी गीता प्रेस गोरखपुर है उसने वर्ण को जन्म से माना

149
00:10:37,080 --> 00:10:41,200
है वर्ण को जन्म से माना है तो

150
00:10:41,200 --> 00:10:45,280
अगर आप यहां पर है वर्ण जन्म से को लेकर के

151
00:10:45,280 --> 00:10:49,480
तो भी आप मतलब आपने पूरी तरीके से संतुष्ट नहीं है तो अब मामला

152
00:10:49,480 --> 00:10:54,280
ये आ जाता है कि जब आपका कोई गुरु नहीं है तो आपको क्या कहा जाए

153
00:10:54,280 --> 00:10:59,400
क्योंकि आप किसी से किसी में गुरु भाव नहीं देख पा रहे

154
00:10:59,400 --> 00:11:04,160
हां वैसे गुरु भाव देख रहा हूं किंतु जो कहते हैं ना लाइसेंसी अप्रूव्ड

155
00:11:04,160 --> 00:11:08,520
ऐसे गुरु चेला नहीं बन पाया हूं अभी तक मैं संतुष्ट नहीं हो पा नहीं

156
00:11:08,520 --> 00:11:12,920
गुरु भाव तो मतलब य होता है जिसके प्रति विरोधी भावना ना

157
00:11:12,920 --> 00:11:17,160
आए विरोधी भावना ना आए जिसके सिद्धांतों के विरुद्ध

158
00:11:17,160 --> 00:11:21,200
भावना ना आए भावना ऐसा मन करे किसी दिन गुरुदेव मिल

159
00:11:21,200 --> 00:11:25,520
जाएंगे तो यह वाली शंका जो है पूछ लूंगा मगर विरुद्ध

160
00:11:25,520 --> 00:11:29,720
भावना निर्मित ना हो कि नहीं कर्म से होता है अगर शंकराचार्य कह रहे जन्म

161
00:11:29,720 --> 00:11:31,560
से होता है तो विरुद्ध

162
00:11:31,560 --> 00:11:35,600
भावना है कि नहीं कर्म से होता है अगर यह भावना आ रही है तो इसका मतलब

163
00:11:35,600 --> 00:11:39,720
है गुरु भाव नहीं रख रहे हा आप ऐसा कह सकते हैं लेकिन

164
00:11:39,720 --> 00:11:43,840
मैं यह नहीं कह रहा हूं कि आप गलती बोल रहे हैं मैंने पहले भी कहा था कि मेरी शंका है और

165
00:11:43,840 --> 00:11:48,120
मैं उसका समाधान चाहता हूं ऐसे मैंने कहा था कि भाई

166
00:11:48,120 --> 00:11:52,280
मेरे कुछ प्रश्न उनका आप आंसर दीजिए संतुष्ट होता हूं तो निश्चित रूप से

167
00:11:52,280 --> 00:11:56,320
आपका शिष्य बनूंगा आज जीवन के लिए ऐसा ही मैंने उनसे कहा था और यही मेरी य पर

168
00:11:56,320 --> 00:12:00,920
अभिला है

169
00:12:00,920 --> 00:12:05,040
जी अरुण याग वलक जी बस प्रभु श्री राम की कृपा है हम

170
00:12:05,040 --> 00:12:09,160
पर थोड़ी बहुत जो भी है उसी की वजह से जो भी दिख रहे हैं आपको जैसे

171
00:12:09,160 --> 00:12:15,160
भी आप ही बताए

172
00:12:18,800 --> 00:12:22,960
कैसे तो अब बात ऐसी है कि वर्ण व्यवस्था के बारे

173
00:12:22,960 --> 00:12:27,200
में आपका जो दृष्टिकोण है वो क्या है आप क्या मानते

174
00:12:27,200 --> 00:12:29,480
हैं

175
00:12:29,480 --> 00:12:33,880
मेरा मानना है जब मैंने श्रीमद् भगवत गीता का अध्ययन किया तो उसमें है कि स्वभाव

176
00:12:33,880 --> 00:12:38,040
से उत्पन्न जो गुण हमारे होते हैं उनके द्वारा हमारे जो कर्म होते हैं उनके आधार

177
00:12:38,040 --> 00:12:42,200
पर होनी चाहिए वर्ण व्यवस्था ना कि जन्म पर और

178
00:12:42,200 --> 00:12:46,280
ना केवल कर्म पर इसका मैं एक छोटा सा एग्जांपल दूंगा अभी हमारे बरेली का ही एक

179
00:12:46,280 --> 00:12:50,400
फरीदपुर थाना है वहां के इंस्पेक्टर महोदय साढ़े लाख रुप की घुस लेते हुए

180
00:12:50,400 --> 00:12:54,640
पकड़े गए और फरार चल रहे हैं यह घुस लीय उनका स्वाभाविक कर्म था व

181
00:12:54,640 --> 00:12:59,160
इंस्पेक्टर थे ये उनका कर्म था केवल ड्यूटी की धन अर्जित करने के लिए कर्म कर रहे थे

182
00:12:59,160 --> 00:13:03,320
लेकिन घुसली उनका स्वाभाविक कर्म था तो मैं कह रहा

183
00:13:03,320 --> 00:13:08,240
स्वाभाविक कर्मों के आधार पर हमको यह मानना चाहिए मेरा यह मतलब है

184
00:13:08,240 --> 00:13:12,720
ठीक अब मुझे आप यह बताइए कि स्वाभाविक

185
00:13:12,720 --> 00:13:17,000
कर्म के आधार पर जो वर्ण व्यवस्था बनाई जाएगी उसका परव

186
00:13:17,000 --> 00:13:20,520
सान किसम

187
00:13:20,520 --> 00:13:25,200
है पर्यान मतलब थ और अर्थ बताइए इसका

188
00:13:25,200 --> 00:13:29,280
उससे लाभ क्या है उससे लाभ

189
00:13:29,280 --> 00:13:33,280
ये है जो अभी हमारी आपने देखा होगा भारतवर्ष में छिटपुट घटना होती रहती

190
00:13:33,280 --> 00:13:37,280
है कुछ जगह ब्राह्मण विरोधी नारे लगते हैं अथवा किसी विरोधी नारे लगते है यह सारे के सारे

191
00:13:37,280 --> 00:13:41,480
समाप्त हो जाने चाहिए क्या जैसा

192
00:13:41,480 --> 00:13:46,000
अभी आप हा बता रहा हूं ना हमारे भारतवर्ष में

193
00:13:46,000 --> 00:13:50,120
मुझे आप प्रैक्टिकली बताइए कि हमें इस तरह से वो काम में आएगी

194
00:13:50,120 --> 00:13:54,200
जैसे कि पहले अखबारों में आता था वर्गीकृत

195
00:13:54,200 --> 00:13:58,440
एक पेज आता था क्लासिफाइड अब

196
00:13:58,440 --> 00:14:02,560
भी आता है नहीं मुझे नहीं पता उसमें वर वधु की तलाश करते थे

197
00:14:02,560 --> 00:14:06,560
वधु का भी आता था उसम क्या होता था

198
00:14:06,560 --> 00:14:10,960
उसमें क्या होता था लिखा होता था कि भाई ब्राह्मण

199
00:14:10,960 --> 00:14:15,120
लड़की ब्राह्मण लड़का ठीक है

200
00:14:15,120 --> 00:14:19,760
तो यह फायदा हुआ जब हमने जन्म से माना

201
00:14:19,760 --> 00:14:24,000
तो हमको ब्राह्मण परिवार को ढूंढने में आसानी

202
00:14:24,000 --> 00:14:28,160
हुई ठीक है अब आप बताए कि स्वभाव से मानी जाने

203
00:14:28,160 --> 00:14:32,280
वाली जो वर्ण है उसके आधार पर इस तरह का कोई एक उदाहरण

204
00:14:32,280 --> 00:14:35,600
देते हुए बताइए यह फायदा हुआ ठीक

205
00:14:35,600 --> 00:14:40,200
है आपने जो जन्म से मानी कि हमें बर चाहिए अथवा बधु चाहिए इसमें

206
00:14:40,200 --> 00:14:44,240
भारत में और उसम तो खर कमी है लेकिन फिर भी इक्का दुक्का या जो भी

207
00:14:44,240 --> 00:14:48,280
कहे एक दो परसेंट ऐसे केसेस मिलते जिनम तलाक उर्दू का शब्द है हिंदी

208
00:14:48,280 --> 00:14:53,080
में कहे तो अलग हो जाते हैं सेपरेट हो जाते हैं विवाह के बाद

209
00:14:53,080 --> 00:14:57,120
यदि हम पहले ही है आपसे

210
00:14:57,120 --> 00:15:01,200
मैंने जी आप मेरी में ोट मत निकालिए मैं अभी

211
00:15:01,200 --> 00:15:05,440
अपनी चीजें बताऊंगा अभी आप जो आपने स्वीकार किया वह

212
00:15:05,440 --> 00:15:09,680
बताइए मैं वही बता रहा हूं जो मैं वही बता रहा हूं भाई साहब आप सुनिए

213
00:15:09,680 --> 00:15:13,800
ना मैं बता रहा हूं जो हमने जन्म से माना उसमें इका दुका तलाकी समस्या

214
00:15:13,800 --> 00:15:17,840
आती है यदि हम स्वभाव से ऐसा ढूंढने लगेंगे तो फिर यह समस्याएं

215
00:15:17,840 --> 00:15:21,960
भी नहीं आएंगी अरे भाई तो ढूंढ के बताओ ना कि

216
00:15:21,960 --> 00:15:26,160
ऐसे ढूंढा जा सकता है वो उदाहरण तो दो कि ये

217
00:15:26,160 --> 00:15:30,880
ये लोग स्वभाव से हैं ऐसा कोई अखबार छापोल

218
00:15:30,880 --> 00:15:35,840
से कैसे ढूंढोगे उसको एमप्लीफाई करके दिखाओ एग्जांपल दो

219
00:15:35,840 --> 00:15:39,960
स्वभाव के हमारे लिए ऐसे क किसी के चेहरे पर लिखा हुआ नहीं होता स्वभाव जब

220
00:15:39,960 --> 00:15:44,080
हम उसके साथ चार छह बार मैं बता रहा हूं जब हम उसके बा चार छ

221
00:15:44,080 --> 00:15:48,320
बार मैत्री संबंध के स्वरूप में उससे मिलेंगे तब हमें उसका स्वभाव पता लग जाएगा

222
00:15:48,320 --> 00:15:50,640
गुड गुड और जाहिर सी बात है

223
00:15:50,640 --> 00:15:55,200
कि शादी विवाह केवल एक बार में नहीं हो जाता गुड गुड

224
00:15:55,200 --> 00:16:00,160
तो आपका कहने का मतलब है कि हम किसी से चार छह बार मिले

225
00:16:00,160 --> 00:16:04,520
और तब उसके स्वभाव का पता लगाए ये बात बिल्कुल सही है तो

226
00:16:04,520 --> 00:16:08,560
हम लोग जब मिलने उससे जाएंगे तो क्या सोच के जाएंगे मन

227
00:16:08,560 --> 00:16:12,680
में किससे मिलने जा रहे हैं शुरुआत कहां से

228
00:16:12,680 --> 00:16:16,760
करोगे हां बता रहा हूं ना जैसा कि पहले ही मैंने कहा कि जब

229
00:16:16,760 --> 00:16:21,320
हम शुरुआत करेंगे तो हम से मिलने जाएंगे मान लिया मेरी एक

230
00:16:21,320 --> 00:16:25,600
पुत्री हो उसके लिए एक ब ढूंढने जा रहा हूं तो मेरे दिमाग में पहला तो यही आईडिया

231
00:16:25,600 --> 00:16:30,560
है कि मुझे एक अपनी पुत्री के लिए उपयुक्त चाहिए

232
00:16:30,560 --> 00:16:34,720
मैं गया मुझे लगा भ इसका चेहरा ठीक है स्वभाव ठीक है इसका चेहरा

233
00:16:34,720 --> 00:16:38,880
ठीक है सॉरी शकल से शकल से आपका प्रारंभिक

234
00:16:38,880 --> 00:16:42,920
वो होगा चुनाव प्रारंभ शकल से बता रहा हूं ना

235
00:16:42,920 --> 00:16:46,920
यानी आप यानी आप यानी आप घर से बाहर निकले सड़क

236
00:16:46,920 --> 00:16:51,720
पर कोई अच्छी शक्ल वाला मिल गया तो आप उसको चेक करेंगे उसके साथ फिर

237
00:16:51,720 --> 00:16:55,760
हां उसके पश्चात प्रथम दृष्टांत जो होगा वो सकल से होगा कि सकल

238
00:16:55,760 --> 00:16:59,840
भाई अनुरूप है हमारी पुत्री के लिए य कोई रिक्शे

239
00:16:59,840 --> 00:17:03,840
वाला भी रि रिक्शा चालक जा रहा है टेंपो चालक जा रहा

240
00:17:03,840 --> 00:17:05,680
है कोई पान की दुकान पर

241
00:17:05,680 --> 00:17:09,800
खड़ा हुआ है आप वहां जाकर के अगर उसकी शक्ल आपको अच्छी लगी तो उसी

242
00:17:09,800 --> 00:17:13,800
से आप चालू कर देंगे कि भाई मुझे आपको पांच छ दिन जानना है और

243
00:17:13,800 --> 00:17:18,680
उसके बाद जो है मैं आपसे अपनी पुत्री का या बहन का विवाह करूंगा

244
00:17:18,680 --> 00:17:22,720
नहीं नहीं नहीं नहीं ये हम डायरेक्ट नहीं कहेंगे मैं बता रहा हूं

245
00:17:22,720 --> 00:17:27,040
ना हम डायरेक्ट नहीं कहेंगे अप पुत्री का अथवा अपनी बहन का आपसे विवाह करूंगा

246
00:17:27,040 --> 00:17:31,600
हम उससे मैत्री संबंध बनाएंगे जैसी हर हर महादेव जो भी हमारा अपना स्लोगन होगा उसे

247
00:17:31,600 --> 00:17:35,720
बोलेंगे मत मतलब आप अपने मंतव्य को उससे छुपाए

248
00:17:35,720 --> 00:17:39,960
शुरू में हा कुछ समय के लिए छु पाएंगे निश्चित रूप से छु पाएंगे गुड

249
00:17:39,960 --> 00:17:44,120
गुड बहुत बढ़िया फिर तो मतलब आपका चुनाव होगा

250
00:17:44,120 --> 00:17:48,120
आपका चुनाव यही है कि सड़क पर उतर जाओ और कोई भी अच्छी शक्ल वाला मिले वहां से

251
00:17:48,120 --> 00:17:52,240
शुरू कर दो केवल सड़क पर उतरना नहीं होता है हमारे जो और पूर्व समय

252
00:17:52,240 --> 00:17:56,920
के मैत्री स रिश्तेदार उनसे हम कहेंगे कोई एक बर बताइए हमारे

253
00:17:56,920 --> 00:18:01,520
लिए आपना ये जो प्रारंभिक बिंदु आपने चुना

254
00:18:01,520 --> 00:18:05,600
कि मेरे जो मैत्रीय संबंध होंगे उनसे हम बताएंगे यही

255
00:18:05,600 --> 00:18:09,600
प्रारंभिक बिंदु होता है जन्मना वर्ण व्यवस्था

256
00:18:09,600 --> 00:18:13,960
आपने अभी एक प्रारंभिक बिंदु चुना ना कि हमारे जो और मि

257
00:18:13,960 --> 00:18:18,240
मित्र गण होंगे उनसे हम कहेंगे कोई अच्छा वर बताइए तो इसका

258
00:18:18,240 --> 00:18:20,680
मतलब क्या है कि आपके मित्रगण जो वर बता देंगे

259
00:18:20,680 --> 00:18:24,840
वो अच्छा ही होगा मैं नहीं

260
00:18:24,840 --> 00:18:30,760
कह रहा हूं कि वो अच्छा ही होगा भाई वो बताएंगे उसके बाद हम

261
00:18:30,760 --> 00:18:35,040
ये जो मेरा कहने का मतलब ये है भाई साहब कि ये जो प्रारंभिक

262
00:18:35,040 --> 00:18:39,160
बिंदु आपने बताया है कर्म तो चेक किए जाएंगे आचरण चेक किया जाएगा

263
00:18:39,160 --> 00:18:43,360
स्वभाव चेक किया जाएगा मगर प्रारंभिक बिंदु क्या

264
00:18:43,360 --> 00:18:47,560
होगा वो प्रारंभिक बिंदु ही जन्मना वर्ण व्यवस्था है ऐसा

265
00:18:47,560 --> 00:18:51,840
नहीं है कि जन्म ले लिया ब्राह्मण के घर में तो उससे शादी करनी ही करनी नहीं

266
00:18:51,840 --> 00:18:55,840
उसके बाद भी जाएंगे ब्राह्मण घर को देखेंगे तो यह जो

267
00:18:55,840 --> 00:19:00,800
जो आपने नाम लिया ना अपने मित्र बंधु अब जैसे आप

268
00:19:00,800 --> 00:19:05,680
आप ब्राह्मण है मान लीजिए थोड़ी देर के लिए मान ली क्षत्रिय

269
00:19:05,680 --> 00:19:09,720
तो क्षत्रिय है आपने अपने मित्र बंधु बंधु में भाई आ

270
00:19:09,720 --> 00:19:14,120
गए ठीक है तो आपने उसको क्षत्रिय

271
00:19:14,120 --> 00:19:18,240
नाम ना दे कर के आपने उसको जो है वर्ण का नाम नाना दे कर के आपने भी एक

272
00:19:18,240 --> 00:19:23,560
पॉइंट स्टार्टिंग पॉइंट ले लिया कि अपने मित्र बंधुओं में

273
00:19:23,560 --> 00:19:27,640
देखेंगे लिया ना यही अब ऐसा नहीं है कि

274
00:19:27,640 --> 00:19:31,720
मित्र बंधु मित्र बंधु के संपर्क में जितने भी लोग होंगे जितने भी

275
00:19:31,720 --> 00:19:35,800
लड़के होंगे उनके यहां पर उनके घर में या उनकी जान पहचान में वो सब अच्छे

276
00:19:35,800 --> 00:19:39,880
होंगे मगर एक स्टार्टिंग पॉइंट के रूप में आपने लिया कि भाई

277
00:19:39,880 --> 00:19:44,080
इससे मेरी जो तलाश का जो क्राइटेरिया है ना मेरी खोज का जो क्राइटेरिया

278
00:19:44,080 --> 00:19:48,440
है वो पूरी पृथ्वी नहीं है अब मेरी खोज का क्राइटेरिया मेरे अपने हैं

279
00:19:48,440 --> 00:19:53,360
उनके बाद मैं वो उन अपनों के द्वारा बताए गए लड़के को भी चेक करूंगा

280
00:19:53,360 --> 00:19:57,640
यही है जन्मना वर्ण वस्था जो हमने प्रारंभिक क्राइटेरिया

281
00:19:57,640 --> 00:20:01,960
ले लिया ब्राह्मण वै शूद्र उसके बाद भी मैं उस ब्राह्मण समाज

282
00:20:01,960 --> 00:20:06,000
में भी चेक करूंगा कि कौन सा लड़का हमें मिल रहा है

283
00:20:06,000 --> 00:20:10,840
उसके आचरण कैसे हैं उसके स्वभाव कैसा है उसके कर्म कैसे हैं

284
00:20:10,840 --> 00:20:15,120
जैसे कि जैसे कि एक उदाहरण

285
00:20:15,120 --> 00:20:19,080
मैंने कल भी दिया था

286
00:20:19,080 --> 00:20:23,480
कि यह क्या कहते हैं एक नौकरी

287
00:20:23,480 --> 00:20:27,680
जब रिक्रूटमेंट होता है कई बार भर्ती होती है तो वहां पर

288
00:20:27,680 --> 00:20:31,840
उस प्रतियोगिता में आने से पहले उसके लिए

289
00:20:31,840 --> 00:20:36,200
जो कंपटीशन हो रहा होता है एक क्राइटेरिया फिक्स किया जाता है

290
00:20:36,200 --> 00:20:40,280
कि भाई ओनली 10थ पास ही आ सकते हैं ओनली 12थ पास ही

291
00:20:40,280 --> 00:20:44,560
आ सकते हैं ऐसा नहीं है कि वहां से आने के बाद उनको चेक नहीं किया जाएगा वहां

292
00:20:44,560 --> 00:20:48,920
के परफॉर्मेंस प भी बात है मगर वहां नॉमिनेशन अपनी जो खोज

293
00:20:48,920 --> 00:20:53,400
है उसका क्राइटेरिया छोटा करने के लिए खोज में मेहनत कम लगे

294
00:20:53,400 --> 00:20:57,560
इसलिए वहां पर एक शुरुआती पॉइंट दे दिया कि जो जिसके पास

295
00:20:57,560 --> 00:21:01,680
10थ का 10थ पास आउट का सर्टिफिकेट होगा वही इस कंपटीशन में आ सकता

296
00:21:01,680 --> 00:21:05,800
है और उसके बाद उनकी परीक्षा ली गई तब तो आपने तब

297
00:21:05,800 --> 00:21:09,840
तो आपका क्राइटेरिया बहुत छोटा रहा वरना आपका कोई क्राइटेरिया है

298
00:21:09,840 --> 00:21:14,280
ही नहीं शुरुआत करने का पूरी दुनिया का

299
00:21:14,280 --> 00:21:18,400
कोई क्राइटेरिया नहीं है दो साल का बच्चा भी उस रिक्रूटमेंट में आ सकता

300
00:21:18,400 --> 00:21:23,040
है क्यों जरूरी है कि 20 साल वाला योग्य हो

301
00:21:23,040 --> 00:21:27,240
समझ रहे हैं तो एक क्राइटेरिया व्यवस्था बनाने के लिए

302
00:21:27,240 --> 00:21:31,240
क्राइटेरिया है जो जिसको आपने दूसरे शब्दों में कहा कि

303
00:21:31,240 --> 00:21:34,160
भाई मैं मित्रों में देखूंगा बंधुओ में देखूंगा उसी

304
00:21:34,160 --> 00:21:38,160
को यहां पर ब्राह्मण नाम का क्राइटेरिया दिया गया छत्रिय नाम का क्राइटेरिया दिया गया

305
00:21:38,160 --> 00:21:42,280
यही है जन्मना जन्म से नॉमिनेशन

306
00:21:42,280 --> 00:21:46,400
जन्म से नॉमिनेशन और कर्म से सिलेक्शन

307
00:21:46,400 --> 00:21:50,520
ठीक है अब मैं आपसे सवाल पूछूंगा कि आपने

308
00:21:50,520 --> 00:21:54,760
जो कहा है कि उसके स्वभाव का पता

309
00:21:54,760 --> 00:21:58,800
लगाए और आपने कहा कि चार छ दिन यह

310
00:21:58,800 --> 00:22:02,800
बात आपकी क्यों मानी जाए हम

311
00:22:02,800 --> 00:22:06,920
यह बात आपकी क्यों मानी जाए आप मुझे ये बताइए क्यों नहीं

312
00:22:06,920 --> 00:22:11,160
मानी जाए आप जन्म से देखते हैं तब भी य करते हैं देखिए

313
00:22:11,160 --> 00:22:15,240
पहली बात तो अभी आपके बात करने के तेवर से मुझे पता लग गया जैसे आपने कहा

314
00:22:15,240 --> 00:22:19,240
ना स्वभाव का पता लगाए तो मैंने आपके स्वभाव का पता लगाया है

315
00:22:19,240 --> 00:22:23,600
आप यहां पर आए हैं प्रतिकार करने यह कहते हुए कि मैं जो है जिज्ञासा

316
00:22:23,600 --> 00:22:27,840
बसाया हूं ठीक है यह आपके स्वभाव से मुझे पता लगा जैसे पान

317
00:22:27,840 --> 00:22:31,840
की दुकान प आप ने बताया था ना पान की दुकान पर आपने बताया था

318
00:22:31,840 --> 00:22:35,920
तो आपके बात करने के तरीके से स्वभाव से पता लग गया कि आप जो

319
00:22:35,920 --> 00:22:40,000
है यहां पर जिज्ञासा बस नहीं आए हैं आप प्रतिकार स्वरूप आए खैर कोई बात नहीं किसी

320
00:22:40,000 --> 00:22:44,000
भी तरीके से आए हो हा ये आपका अपना क्यों क्यों

321
00:22:44,000 --> 00:22:48,240
नहीं माना जाए हां य यह बात मैं करूंगा यह बात मैं करूंगा

322
00:22:48,240 --> 00:22:49,160
यह भी बात मैं करूंगा

323
00:22:49,160 --> 00:22:53,400
कि आपका मत है ठीक है झगड़े की फसाद तो यही होती है

324
00:22:53,400 --> 00:22:57,480
ना अब आपने वहां पर उस लड़के को अपने मत के

325
00:22:57,480 --> 00:23:01,560
अनुसार कर दिया कि तुम ब्राह्मण नहीं हो तुम क्षत्रिय नहीं हो आपकी बात

326
00:23:01,560 --> 00:23:06,280
क्यों मानी जाए वो भी कहेगा यह आपका मत है

327
00:23:06,280 --> 00:23:10,360
आप उसका आचरण है वो अच्छा नहीं है मगर

328
00:23:10,360 --> 00:23:14,880
आपने घोषित कर दिया ये जो है ये जो स्वभाव है इसका ये जो है

329
00:23:14,880 --> 00:23:20,880
वो नहीं है ब्राह्मण का नहीं है तो आपकी बात क्यों मानी

330
00:23:21,120 --> 00:23:25,200
जाए जिसके तलाश में मैं मैं बता रहा हूं ना जिसकी

331
00:23:25,200 --> 00:23:29,120
तलाश मुझे है इस

332
00:23:29,120 --> 00:23:33,680
उसके स्वभाव से आप ये घोषित करेंगे कि नहीं ये क्षत्रिय नहीं है

333
00:23:33,680 --> 00:23:37,760
हां अपने लिए करूंगा ना भाई मैं अपनी पुत्री बहन के लिए मतलब

334
00:23:37,760 --> 00:23:42,120
अपने लिए करेंगे मतलब वास्तविकता में वो क्षत्रिय होगा वास्तविकता

335
00:23:42,120 --> 00:23:48,120
पूरी दुनिया का हमने ठेका नहीं ले रखा है भाई किसी और के लिए पसंद आ रहा है तो वो

336
00:23:48,480 --> 00:23:52,480
जाने पसंद की बात आपने कहा ब्राह्मण क्षत्रिय वैश्य सूत्र

337
00:23:52,480 --> 00:23:56,640
जो है वो स्वभाव से होना चाहिए और आप जब अपनी बहन

338
00:23:56,640 --> 00:24:00,720
के लिए क्षत्रिय को ढूंढने जा रहे हैं तो आप आपने उसके स्वभाव सेय जांचा कि

339
00:24:00,720 --> 00:24:04,800
ये जो है क्षत्रिय नहीं है आप यह कह सकते हैं लड़का मुझे पसंद नहीं है मगर यह

340
00:24:04,800 --> 00:24:08,800
नहीं कह सकते कि ये क्षत्रिय नहीं है क्षत्रिय नहीं है कहेंगे तो आपसे क्वेश्चन

341
00:24:08,800 --> 00:24:13,240
किया जाएगा कि आपने किस पैरामीटर के हिसाब से किया या फिर आप ये

342
00:24:13,240 --> 00:24:17,960
जैसे अभी आप मुझे कह रहे हैं कि आपका ये आपका व्यक्तिगत वो हो सकता

343
00:24:17,960 --> 00:24:22,840
है तो फिर उसको क्षत्रिय क्यों ना माना जाए

344
00:24:22,840 --> 00:24:27,000
मैं क्या कह रहा हूं पसंद ना पसंद

345
00:24:27,000 --> 00:24:31,120
नहीं पसंद ना पसंद नहीं जो आप स्वभाव देखने जाएंगे उससे यह तय करेंगे किय

346
00:24:31,120 --> 00:24:35,240
लड़का मेरी बहन के लिए उपयुक्त है कि नहीं या यह तय करेंगे क्षत्रिय है कि

347
00:24:35,240 --> 00:24:39,360
नहीं हम छत्री देखने नहीं जा रहे हैं आपने प्रश्न पहले ही किया था कि आप अगर

348
00:24:39,360 --> 00:24:43,360
किसी को देखने जाएंगे य मैं अपने व का देखने हं

349
00:24:43,360 --> 00:24:44,400
बस यानी आप

350
00:24:44,400 --> 00:24:48,600
व पर ये तय करेंगे यानी आप वहां पर ये तय करेंगे लड़का मुझे पसंद

351
00:24:48,600 --> 00:24:52,760
है कि नहीं वहां ये तय नहीं करेंगे वहां ये तय

352
00:24:52,760 --> 00:24:56,760
नहीं करेंगे कि ये क्षत्रिय है कि नहीं हां तो

353
00:24:56,760 --> 00:25:00,200
फिर हम लोग बात किस पर कर रहे

354
00:25:00,200 --> 00:25:04,600
आपने हम लोगों का विषय हम लोगों का विषय य हैट

355
00:25:04,600 --> 00:25:08,880
मैं अपना विषय क्लियर कर दूं हम लोगों का विषय ये है कि किस आधार पर ब्राह्मण

356
00:25:08,880 --> 00:25:13,320
क्षत्रिय व शूद्र घोषित किया जाएगा फिर बाद में

357
00:25:13,320 --> 00:25:17,640
वो बात अलग है मगर आप आप किसकी बात कर रहे हैं कि मैं स्वभाव से क्या पता लगाऊंगा

358
00:25:17,640 --> 00:25:21,920
कि वह मुझे पसंद है कि नहीं भाई आप पता लगाने गए हो कि वो क्षत्रिय

359
00:25:21,920 --> 00:25:26,080
है कि नहीं मुझे आप यह बताओ क्षत्रिय का पता कैसे लगाओगे हा

360
00:25:26,080 --> 00:25:30,240
अब आप ये प्रश्न आया क्षत्रिय वाला आपका प्रश्न ये था कि आप कैसे तलाश होगे अपनी पुत्री

361
00:25:30,240 --> 00:25:34,600
अथवा बहन के लिए एक

362
00:25:34,600 --> 00:25:38,600
रिश्तेदार अपनी बहन के लिए ठीक है अभी मैं पूछ रहा हूं आप

363
00:25:38,600 --> 00:25:42,880
कैसे तलाश होगे अपनी बहन के लिए क्षत्रिय चलिए हा क्षत्रिय

364
00:25:42,880 --> 00:25:46,920
आपने यह कहा फिर मेरा वही सेम उत्तर होगा कि मैं जाऊंगा उसका स्वभाव

365
00:25:46,920 --> 00:25:51,760
देखूंगा कय वास्तव में शूरवीर भी है इसके अंदर तेज है

366
00:25:51,760 --> 00:25:56,320
मुझे लग रहा करगे फिर आप य घोषित कर दोगे क्षत्रिय नहीं है

367
00:25:56,320 --> 00:26:00,440
अपने लिए घोषित मैंने कर दिया अपनी लिए बताता

368
00:26:00,440 --> 00:26:04,520
तो बताओ किसी आदमी का वर्ण कैसे तय होगा वो वास्तविकता तो

369
00:26:04,520 --> 00:26:08,720
बताओ ये तो आपने अपने लिए कर दिया वो वास्त बताओ

370
00:26:08,720 --> 00:26:12,760
कैसे तय होगा हा तो क्षत्रिय ऐसे तय होगा अब यदि उसका

371
00:26:12,760 --> 00:26:17,000
कहीं पर उसके समुख कहीं पर कोई गलत अपराध हो रहा है और चकि

372
00:26:17,000 --> 00:26:21,360
मैं उ क्षत्रिय के स्वभाव सेने गया हूं वह उसम एक

373
00:26:21,360 --> 00:26:25,920
न्यूट्रल कोई कार्य नहीं कर रहा है इसका अर्थ क्या हो रहा है वो क्षत्रिय नहीं

374
00:26:25,920 --> 00:26:30,080
है बात इस दिन तक अगर आपके सामने

375
00:26:30,080 --> 00:26:34,240
उसके सामने कोई ऐसा कार्य नहीं हुआ जिसम उसकी रक्षा की आवश्यकता

376
00:26:34,240 --> 00:26:38,280
हो तो य जो है वो पड़ा रहेगा कोपड

377
00:26:38,280 --> 00:26:41,280
ये

378
00:26:41,280 --> 00:26:45,920
मामला हा बकुल जब तकने

379
00:26:45,920 --> 00:26:50,320
नहीं होगी उसके सामने जब तक वो घटना नहीं होगी तब तक ना वो ब्राह्मण क्षत्रिय

380
00:26:50,320 --> 00:26:54,320
वै ना शूद्र है उससे पहले वो क्या है यह मुझे जानकारी

381
00:26:54,320 --> 00:26:58,680
नहीं है हो सकता है वो ब्राह्मण हो हो सकता क्षत्रिय हो अच्छा अच्छ जानकारी

382
00:26:58,680 --> 00:27:03,200
नहीं है ठीक है अब मुझे बताइए जैसे आपने आपने

383
00:27:03,200 --> 00:27:07,360
कितना इस बारे में सोचा है कि किसी का जो ब्राह्मण

384
00:27:07,360 --> 00:27:11,680
क्षत्रिय वैश्य शूद्र हो ब्राह्मण हो क्षत्रिय हो शूद्र

385
00:27:11,680 --> 00:27:15,680
वैश्य यह कितने दिन की जांच के बाद हम लोग निर्णय कर सकते हैं

386
00:27:15,680 --> 00:27:19,720
कि इतने दिन में हम लोगों ने स्वभाव देखा वो कितने दिन की जांच

387
00:27:19,720 --> 00:27:24,200
के बाद हम घोषित कर सकते हैं क्षत्रिय है यह ब्राह्मण है य शूद्र है ये वैश्य

388
00:27:24,200 --> 00:27:28,200
है यह प्रत्येक व्यक्ति की अपनी अपनी मेंटालिटी है क्या पता कौन कितना

389
00:27:28,200 --> 00:27:32,520
बुद्धिमान है कुछ लोग तो एक ही बार में हाई स्कूल कर लेते हैं कुछ लोगों को चार छ चार

390
00:27:32,520 --> 00:27:36,600
वर्ष लग जाते तने दिन का किसी के ब्राह्मण क्षत्रिय वैश्य शूद्र के जो

391
00:27:36,600 --> 00:27:40,800
टैग दिए जाए किसी को वो कितने दिन के जांच के बाद होना

392
00:27:40,800 --> 00:27:44,920
चाहिए कम से कम मैं बता पटर

393
00:27:44,920 --> 00:27:48,960
बता रहा हूं ना जो व्यक्ति जांच कर रहा है उसकी बुद्धि मानता

394
00:27:48,960 --> 00:27:53,000
यहां पर पैरामीटर है भाई कुछ लोग बुद्धिमान होते हैं एक वर्ष में या इसका

395
00:27:53,000 --> 00:27:56,440
कोई पैरामीटर यानी कि इसका कोई निश्चित पैरामीटर नहीं

396
00:27:56,440 --> 00:28:00,640
है जो व्यक्ति जांच करने गया है उसकी बुद्धि पैरामीटर है वो कितने

397
00:28:00,640 --> 00:28:04,880
दिन में कर पाएगा हर किसी के पास ये ये जो पैरामीटर

398
00:28:04,880 --> 00:28:09,320
आप बता रहे हो ये निश्चित नहीं है ना हर व्यक्ति की बुद्धि अलग

399
00:28:09,320 --> 00:28:13,520
है हा प्र मतलब

400
00:28:13,520 --> 00:28:17,920
वो पांच छ दिन वाली बात अलग है अब एक बात और बताए

401
00:28:17,920 --> 00:28:22,200
हर व्यक्ति की बुद्धि अलग है हर व्यक्ति की बुद्धि अलग है तो

402
00:28:22,200 --> 00:28:26,200
पांच छ लोग उसको देखने जाएंगे आपने कहा कि ब्राह्मण है दूसरे ने कहा

403
00:28:26,200 --> 00:28:30,320
शूद्र है तीसरे ने कहा वैश्य है चौथे ने कहा कि

404
00:28:30,320 --> 00:28:34,320
फलाना है तो क्या माना जाए उनमें से उसको

405
00:28:34,320 --> 00:28:38,360
जरूरी क्या है पाच छ लोग जाए अरे भाई जैसे आप गए हो अपनी

406
00:28:38,360 --> 00:28:42,680
बहन के लिए क्षत्रिय ढूंढने कोई और भी गया है मगर उसने पता लगाया क्षत्रिय

407
00:28:42,680 --> 00:28:46,760
है ही नहीं तो फिर उसकी आइडेंटिटी क्या

408
00:28:46,760 --> 00:28:51,400
हुई तो वो मुझे आकर थोड़ी ना बताएगा अरे

409
00:28:51,400 --> 00:28:55,720
अरे भाई उसकी आइडेंटिटी क्या हुई समाज के लिए

410
00:28:55,720 --> 00:28:59,920
उसकी आइडेंटिटी कैसे घोषित होगी समाज

411
00:28:59,920 --> 00:29:04,160
जाना जाए समाज के लिए उसकी जो पहचान है

412
00:29:04,160 --> 00:29:08,600
वो उसी कर्मों से घोषित होगी अब र आप पा लोग जाए

413
00:29:08,600 --> 00:29:11,720
सुनिए पा लोग गए यदि उसका स्वभाव है घुस

414
00:29:11,720 --> 00:29:15,920
लेना तो पाच छ लोगों के सामने भी घुस ही लेगा ना केवल एक के सामने

415
00:29:15,920 --> 00:29:20,640
घुस लेगा दूसरे सामने ईमानदार बन जाएगा अरे भाई

416
00:29:20,640 --> 00:29:24,800
कहा मैं आपको कह रहा हूं क्या ऐसा हो सकता है कि पाच

417
00:29:24,800 --> 00:29:30,040
छ लोगों की राय उसके लिए अलग अलग हो

418
00:29:30,040 --> 00:29:34,240
भाई साहब पाच छ लोग हो सकता है मौखिक रा अलग हो लेकिन उसका स्वभाव पाच

419
00:29:34,240 --> 00:29:38,440
लोग के लिए अलग अलग नहीं हो सकता मैं कह रहा हूं मैं कह रहा हूं

420
00:29:38,440 --> 00:29:44,240
जो आप बोलोगे वही पांच छ लोग दूसरे बोलेंगे बिल्कुल ऐसा फिक्स

421
00:29:44,240 --> 00:29:49,120
है हा यदि उसका स्वभाव सभी लोग देखने गए तो वो यही बोलेंगे

422
00:29:49,120 --> 00:29:53,360
नहीं बोला तो नहीं बोला तो तो वो व्यक्ति

423
00:29:53,360 --> 00:29:58,320
मता 400 बीसी कर रहा है यही अर्थ हुआ ना जिस

424
00:29:58,320 --> 00:30:02,400
सामने सुनिए आपके सामने उसने घूस दी दूसरे के

425
00:30:02,400 --> 00:30:06,400
सामने उसने दान दे दिया तीसरे के सामने उस पर बात ही

426
00:30:06,400 --> 00:30:10,480
नहीं हुई सबने अपने अपने एंगल से जितना अंश उन्होंने देखा उस पाच छ

427
00:30:10,480 --> 00:30:14,560
दिन में अपने अपने हिसाब से वो दे दिया तो उसका ब्राह्मण चत्र वैश

428
00:30:14,560 --> 00:30:18,680
शूद्र कैसे घोषित हुआ फिर भाई साहब उसके लिए टाइम और

429
00:30:18,680 --> 00:30:22,840
लिया जाएगा ना हां वो टाइम बताइए कोई तो लिमिट होगी

430
00:30:22,840 --> 00:30:26,880
ना उस टाइम की वो टाइम क्या है तो टाइम की लिमिट कोई जरूरी

431
00:30:26,880 --> 00:30:30,880
थोड़ी है टाइम की लिमिट हो भाई साहब भा ये हमारा टारगेट है हम इस करेंगे या

432
00:30:30,880 --> 00:30:35,720
कुछ भी निश्चित है ही नहीं सुनिए यानी की कुछ भी निश्चित है ही नहीं

433
00:30:35,720 --> 00:30:39,840
कुछ है हा समय निश्चित नहीं है

434
00:30:39,840 --> 00:30:43,880
बाकी हम उसकी आडर पता ही करनी है ये निश्चित हम पता

435
00:30:43,880 --> 00:30:48,080
करेंगे तो वह पता करने से आपकी बात समाज क्यों मान

436
00:30:48,080 --> 00:30:52,520
ले कई बार समाज ने उनको दूसरे रूप में देखा है

437
00:30:52,520 --> 00:30:56,680
कोई 10 गवा आपको मिल जाएंगे जो ये कहेंगे व्यक्ति तो दानी है दान

438
00:30:56,680 --> 00:31:00,680
करता है

439
00:31:00,680 --> 00:31:04,800
उसकी जो मौलिक आइडेंटिटी होगी वह क्या रहेगी वह एक क्षत्रिय होते हुए

440
00:31:04,800 --> 00:31:08,920
बुरा क्षत्रिय हो सकता है वह आप लेकर के चले आए मगर जो उसकी मूलभूत

441
00:31:08,920 --> 00:31:13,040
आइडेंटिटी है वह क्या रहेगी अब मैं

442
00:31:13,040 --> 00:31:17,280
आपसे पूछ हं वही तो बता रहा व चलिए चलिए इसको थोड़ा

443
00:31:17,280 --> 00:31:22,840
आगे बढ़ाते तो समझ में आ जाएगा अब मैं आपसे पूछ रहा हूं आपने जो नियम बताए

444
00:31:22,840 --> 00:31:28,680
मिनट मिनट सेकंड केवल

445
00:31:28,680 --> 00:31:32,920
मैं ये कह रहा था उसकी आइडेंटिटी जो आप कह रहे हैं भाई साहब स्वभाव किसी का छड़

446
00:31:32,920 --> 00:31:36,960
छड़ नहीं बदलता स्वभाव व्यक्ति का नेचुरल ही रहता है बहुत

447
00:31:36,960 --> 00:31:40,960
ज के बता जिसको आपने स्वभाव माना है उसी

448
00:31:40,960 --> 00:31:45,760
को दूसरा भी स्वभाव मान रहा है यह गवाही किसकी मान्य होगी

449
00:31:45,760 --> 00:31:49,800
आपकी क्यों मान ये गवाही हम स्वभाव के अनुसार

450
00:31:49,800 --> 00:31:53,960
देखेंगे शास्त्र बताते है ना जिसको आप स्वभाव मान रहे हैं उसको

451
00:31:53,960 --> 00:31:59,400
दूसरा स्वभाव नहीं मान रहा वो उसकी और किसी चीज को स्वभाव मान रहा है

452
00:31:59,400 --> 00:32:03,840
जब भाई साहब हम पांच छ लोग गए हैं तो हम एक मत के गए हैं ना

453
00:32:03,840 --> 00:32:07,840
आप एक बात आप क्या

454
00:32:07,840 --> 00:32:12,280
क्या होके गए आपने अभी कहा

455
00:32:12,280 --> 00:32:16,280
मैंने य अभी कहा आपने कहा पाछ लोग जाइए जब हम पाछ लोग जाएंगे

456
00:32:16,280 --> 00:32:20,320
तो हम सबका एक टारगेट होगा हा

457
00:32:20,320 --> 00:32:24,320
एक मत होंगे एक मत मतलब आप य कहना चाह रहे हैं कि

458
00:32:24,320 --> 00:32:28,560
हम लोगों की बुद्धि एक जैसी होगी हा हम लोग परीक्षा बुद्धि

459
00:32:28,560 --> 00:32:32,640
लगभग लगभग एक जैसी होगी 100% नहीं क रहा ल

460
00:32:32,640 --> 00:32:36,920
हम उनको लेके जाएंगे जिनकी बुद्धि हमारे जैसी

461
00:32:36,920 --> 00:32:41,000
हो हेलो हेलो जी सुन रहा हूं भाई

462
00:32:41,000 --> 00:32:47,000
साहब हम उनको लेकर जाएंगे जिनकी बुद्धि हमारे जैसी

463
00:32:47,360 --> 00:32:51,400
हो अरे मैं पूछ रहा हूं हम उनको लेकर जाएंगे जिनकी बुद्धि हमारे

464
00:32:51,400 --> 00:32:55,480
जैसी हो यदि हम पुत्री अथवा बहन के लिए गए हैं तब तो हम ऐसे

465
00:32:55,480 --> 00:32:59,560
लोगों को लेकर जाएंगे जो हमारी बुद्धि के जैसे हो बिल्कुल हमारे जैसे

466
00:32:59,560 --> 00:33:03,640
हो बिल्कुल हमारे जैसी सोच विचार हो सब कुछ हो ठीक है लगभग हमारे

467
00:33:03,640 --> 00:33:07,640
जैसे सोच हो हा हां तो यह जब आप जब आप पुत्री

468
00:33:07,640 --> 00:33:12,000
के पुत्री का विवाह करने जाएंगे तब आप ऐसा करेंगे कि अपने जैसे पांच छ लोगों को इकट्ठा

469
00:33:12,000 --> 00:33:16,200
करेंगे कि भाई हम लोगों की बुद्धि बिल्कुल एक जैसी वैसे आपके घर में ऐसे लोग होंगे

470
00:33:16,200 --> 00:33:20,440
जो बिल्कुल वैचारिक मतभेद नहीं होगा अमूमन क्या होता है आजकल ऐसे घर भी नहीं मिलते

471
00:33:20,440 --> 00:33:24,600
हैं जहां पर एक जैसे विचार भाई भाई के बिल्कुल सेम विचार हो खैर

472
00:33:24,600 --> 00:33:29,080
फिर भी मैं मान ता हूं कि आपके पास ऐसे भाई होंगे जो पांच छ भाई

473
00:33:29,080 --> 00:33:31,280
जो उसको डिसाइड करेंगे कि ये

474
00:33:31,280 --> 00:33:35,560
जो है क्षत्रिय है कि नहीं है ना हम अब बात वही

475
00:33:35,560 --> 00:33:40,440
आ जाती है घूम फिर कर के कि समाज उन छह भाइयों की बात क्यों माने

476
00:33:40,440 --> 00:33:44,440
अगर उन्होंने कह दिया कि क्षत्रिय नहीं है स्वभाव से भाई

477
00:33:44,440 --> 00:33:48,800
साहब समाज इसलिए मानेगा जैसे मैंने अभी सबसे पहले एग्जांपल दिया था हमारे र

478
00:33:48,800 --> 00:33:52,920
में द बोल रहे हो ये क्यों माने ये क्यों मानेगा आप सच ही

479
00:33:52,920 --> 00:33:56,920
बोल रहे बता तो रहा हूं सुनिए तो मैं बता तो रहा हूं भाई साहब आप सुनते

480
00:33:56,920 --> 00:34:00,920
नहीं बोल देते हैं बता हमारे दरोगा जी पकड़े ग सा

481
00:34:00,920 --> 00:34:04,920
लाख घुस लेते हुए जब उसका पूरी दुनिया ने कहा घुस

482
00:34:04,920 --> 00:34:09,320
लेते पकड़े गए अब कोई भी व्यक्ति य नहीं कहेगा कि बा घूसखोर नहीं

483
00:34:09,320 --> 00:34:13,800
है इने सुनि

484
00:34:13,800 --> 00:34:18,000
भी कोई कह रहा है यह व्यक्ति घूसखोर नहीं है यह तो बहुत दानी है तो यह भाई

485
00:34:18,000 --> 00:34:22,760
साहब वो नैन का अंधा है नैन होते हुए भी अंधा कहा जाएगा ठीक है

486
00:34:22,760 --> 00:34:26,880
तो ये यानी की आपका मानना ये है कि जब तक कोई प्रत्यक्ष प्रमाण

487
00:34:26,880 --> 00:34:31,040
नहीं होगा तब तक उसको जो है उसका जो वर्ण है वो घोषित

488
00:34:31,040 --> 00:34:35,160
नहीं होगा हा समाज तो तभी घोषित करेगा जब उसके लिए प्रत्यक्ष मिल जाएगा

489
00:34:35,160 --> 00:34:39,320
उसका स्वभाव प्रत्यक्ष प्रमाण यानी कि स्वभाव कुछ भी हो व्यक्ति का

490
00:34:39,320 --> 00:34:43,440
अगर कोई प्रत्यक्ष प्रमाण उसके लिए मिल गया उसी से उसका वो घोषित

491
00:34:43,440 --> 00:34:46,280
होगा भाई साहब प्रत्यक्ष प्रमाण देगा

492
00:34:46,280 --> 00:34:50,280
कहां से अपने कर्म से नहीं देगा स्वाभाविक कर्म से देगा ना अरे

493
00:34:50,280 --> 00:34:54,280
भाई स्वभाव उसका कुछ रहा हो उस पाच मिनट के बीच में उसके

494
00:34:54,280 --> 00:34:58,760
घुस लेने की लालच आ गया उसने पूरी जिंदगी जो अच्छा काम किया

495
00:34:58,760 --> 00:35:02,800
तो उसका वो घोषित हो जाएगा ना प्रत्यक्ष प्रमाण से

496
00:35:02,800 --> 00:35:07,280
भाई साहब क्या उसकी प जिगी किसी पले आप य बताइए

497
00:35:07,280 --> 00:35:11,320
स्वभाव उसका मूल स्वभाव कुछ भी रहा हो फिर भी इंद्रियों के

498
00:35:11,320 --> 00:35:15,360
वशीभूत हो कर के व ठीक स्वभाव से उलट काम कर देता है इंसान की नहीं

499
00:35:15,360 --> 00:35:19,920
कर देता है ददा कदा कर देता है

500
00:35:19,920 --> 00:35:24,160
कर देता है ना उसी समय प्र प्रमाण बन गया तो उसका ब्राह्मण क्षत्रिय

501
00:35:24,160 --> 00:35:28,360
व शूद्र वही से घोषित हो जाएगा बिल्कुल वही से नहीं होगा भाई साहब

502
00:35:28,360 --> 00:35:33,240
अगर किसी ने 10 दिन एक कार्य किया है ठीक है मेरा एक नर्मल उ

503
00:35:33,240 --> 00:35:37,480
आपकी बात सम हा सुनाइए सुना अगर कोई व्यक्ति मैं भाई

504
00:35:37,480 --> 00:35:41,520
कोई व्यक्ति 10 दिन जीवित रहा 10 दिन उसने न दिन दान धर्म किया

505
00:35:41,520 --> 00:35:45,520
10 दिन उसने घुस ले ली तो उसका न दिन का रिजल्ट रहेगा ना रहेगा

506
00:35:45,520 --> 00:35:50,840
एक दिन में हम थोड़ कर तुम तो शद हो या तुमय हो

507
00:35:50,840 --> 00:35:55,000
अब बात ये आ गई अब बात ये आ गई कुल मिलाकर के मैंने आप कुछ नियम

508
00:35:55,000 --> 00:35:59,040
समझे कि पहली बात तो हम जब

509
00:35:59,040 --> 00:36:01,320
अपनी बेटी के लिए रिश्ता देखने जाएंगे तो

510
00:36:01,320 --> 00:36:05,320
अपने जैसे लोगों को लेकर जाएंगे मगर बात

511
00:36:05,320 --> 00:36:09,440
यह हो रही है कि समाज जो है समाज आपकी बात को

512
00:36:09,440 --> 00:36:12,880
क्यों माने कि

513
00:36:12,880 --> 00:36:17,120
भाई आपने एक नियम दिया कि जब हम अपने बेटी के लिए रिश्ता देखने

514
00:36:17,120 --> 00:36:21,240
जाएंगे तो अपने जैसे लोगों को देखने जाएंगे तो यानी कि आप वहा पर किसी

515
00:36:21,240 --> 00:36:25,320
ब्राह्मण क्षत्रिय वैश शूद्र को ब्राह्मण क्षत्रिय वैश शूद्र घोषित करने

516
00:36:25,320 --> 00:36:29,640
नहीं जा रहे हैं बल्कि अपने लिए अपनी बिटिया या बहन के

517
00:36:29,640 --> 00:36:33,760
लिए लड़का देखने जा रहे हैं है ना मगर फिर

518
00:36:33,760 --> 00:36:38,000
ये बात चाह रहे हैं कि हमने उन पाछ दिनों में 10 दिनों में जो भी देखा समझा

519
00:36:38,000 --> 00:36:42,000
जाना तो उसको समाज जो है स्वीकार कर ले अब उसके बाद

520
00:36:42,000 --> 00:36:46,200
आपने अपनी बात को बल देने के लिए पूरा करने दीजिए अपनी बात को बल देने

521
00:36:46,200 --> 00:36:50,720
के लिए आपने कहा कि प्रत्यक्ष प्रमाण हम रखेंगे जैसे कि

522
00:36:50,720 --> 00:36:55,000
शायद आजकल के युग में फोटोग्राफी वीडियोग्राफी उसका कोई

523
00:36:55,000 --> 00:36:59,120
पकड़ लिया गया रंगे आतो है ना वह हम रखेंगे तो समाज

524
00:36:59,120 --> 00:37:03,160
मानेगा ठीक है और तीसरी बात यह कि पा 10 दिन में उसका

525
00:37:03,160 --> 00:37:07,280
जो है निचोड़ आ ही जाएगा ठीक हो

526
00:37:07,280 --> 00:37:11,560
सकता है ये निश्चित नहीं ये भी निश्चित नहीं है ये भी निश्चित

527
00:37:11,560 --> 00:37:15,720
नहीं मैंने समय किसी भी टाइम पर निश्चित नहीं कि किसी एक भी बार मैंने नहीं कहा

528
00:37:15,720 --> 00:37:17,080
कि समय पा

529
00:37:17,080 --> 00:37:21,080
बताइए ना कि हम कब तक किसी को देखे कब तक किसी को चेक करते रहे कि

530
00:37:21,080 --> 00:37:25,360
ब्राह्मण क्षत्रिय वैश सूद है कि नहीं यदि

531
00:37:25,360 --> 00:37:29,600
हम अपने बहन या पुत्री के लिए देखने गए हैं तो हम पाच दिन में देख लेंगे

532
00:37:29,600 --> 00:37:34,520
हमें पसंद आ रहा अगर हम ये घोषित करने गए हैं

533
00:37:34,520 --> 00:37:38,640
हा अगर हम य घोषित करने गए हैं अगर हम ये घोषित करने गए

534
00:37:38,640 --> 00:37:42,720
हैं कि यह सामाजिक दृष्टिकोण से ब्राह्मण क्षत्रीय वैश शूद्र

535
00:37:42,720 --> 00:37:47,200
है कि नहीं तो क्या है उसका नियम सामाजिक दृष्टिकोण

536
00:37:47,200 --> 00:37:51,280
से हम देखने गए तो उसका हम जो जीवन गुजरा है 20 22 244 25

537
00:37:51,280 --> 00:37:55,480
साल का उसके बारे में उसके जो मित्र संबंधी है अथवा और जो संबंधी

538
00:37:55,480 --> 00:37:59,560
है उनसे जानकारी लेंगे कि इसका कैसा रिकर्ड रहा है इन्ही आधार पर

539
00:37:59,560 --> 00:38:03,760
हम उसका अपने लिए घोषित कर लेंगे यानी कि वो जो मित्र संबंधी

540
00:38:03,760 --> 00:38:08,000
होंगे उन्ह उन पर आपको विश्वास होना चाहिए मैं

541
00:38:08,000 --> 00:38:12,200
भाई साहब अगर उसके 10 मित्र है दस से मैं पूछूंगा अब उसम रिजल्ट

542
00:38:12,200 --> 00:38:16,680
निकलेगा अगर छ कह रहे गलत है डेफिनेटली बात खत्म हो गई य

543
00:38:16,680 --> 00:38:20,800
पर मित्रों से पूछेंगे या कितनों से पूछेंगे उसके

544
00:38:20,800 --> 00:38:24,920
कितने मित्र होने चाहिए कम से कम जितने भी मैक्सिमम मिल जाएंगे

545
00:38:24,920 --> 00:38:28,880
जरूरी नहीं है 10 15 20 2 अगर मुझे

546
00:38:28,880 --> 00:38:32,640
सकता अच्छा चलिए ठीक है अब मैं आपसे पूछता हूं आप जो नियमावली बना

547
00:38:32,640 --> 00:38:36,720
बता रहे हैं कि किसी को ब्राह्मण क्षत्रिय वैश्य शूद्र घोषित करना है तो कैसे किया

548
00:38:36,720 --> 00:38:40,760
जाए सबसे पहले तो य ये बताइए कि ये आप करेंगे

549
00:38:40,760 --> 00:38:45,360
इसके लिए क्या पैरामीटर है शास्त्र

550
00:38:45,360 --> 00:38:49,560
का शास्त्र का मतलब आप ये चाह रहे हैं कि मैं शास्त्रों से कोई आपको एविडेंस

551
00:38:49,560 --> 00:38:53,760
दूं शास्त्रों भाई आपकी बात जैसे आपने जिम्मेदारी

552
00:38:53,760 --> 00:38:57,800
ली कि मैं आज घोषित करने जा रहा हूं किसी को कि ब्राह्मण क्षत्रिय वैश शुद्र

553
00:38:57,800 --> 00:39:02,280
है कि नहीं तो फिर दुनिया आपकी बात क्यों माने कि यू आर एलिजिबल

554
00:39:02,280 --> 00:39:06,360
और नॉट आप अधिकृत है कि नहीं किसी को ब्राह्मण क्षत्रीय वैश शूद्र घोषित

555
00:39:06,360 --> 00:39:10,360
करने के लिए मैंने ये नहीं क कि

556
00:39:10,360 --> 00:39:14,480
हां मैंने ये नहीं क कि मेरी बात इस फर्क यानी कि बात ये आपको इससे

557
00:39:14,480 --> 00:39:19,040
मतलब नहीं है कि समाज माने ना माने मैं मैं अपना समझ लूंगा इतनी सी बात है

558
00:39:19,040 --> 00:39:23,200
सुनिए बात भाई साहब आप कह रहे हैं समाज क्यों माने तो समाज

559
00:39:23,200 --> 00:39:27,640
मानेगा उसके स्वभाव देखकर ठीक है उसके स्वभाव

560
00:39:27,640 --> 00:39:33,040
क्या अपना काम धाम छोड़ कर के उसका स्वभाव देखने बैठ जाएंगे क्या उसके

561
00:39:33,040 --> 00:39:38,080
पास क्यों बैठ जाएंगे स्वभाव देखने क्यासे

562
00:39:38,080 --> 00:39:40,400
देखो

563
00:39:40,400 --> 00:39:44,680
स्से क्या पूरा समाज बै उसको स्व दिखेगा स् तोई

564
00:39:44,680 --> 00:39:48,280
साबता किसको बताओ किसको

565
00:39:48,280 --> 00:39:52,440
अरे बोल रहा बोलने दीजिए मिनट बोल रहा बोलने दीजिए

566
00:39:52,440 --> 00:39:56,560
किसको किस आधार पर भेजा जाए ये बताइए पूरा समाज ना जाए किसी को एक

567
00:39:56,560 --> 00:40:00,680
को किसी को एक को निश्चित करके भेजा जाए वो किस आधार पर भेजा

568
00:40:00,680 --> 00:40:05,240
जाए भाई साहब कोई एक व्यक्ति नहीं जाएगा अरे

569
00:40:05,240 --> 00:40:09,320
चार जाएंगे 10 जाएंगे किसको किस आधार पर चुना जाए कि यह

570
00:40:09,320 --> 00:40:13,480
जाकर के चेक करेगा इसका स्वभाव क्या है किसको किस आधार पर वो

571
00:40:13,480 --> 00:40:17,520
सेना किस आधार पर चुनी जाएगी मैं कह तो रहा हूं क्यों

572
00:40:17,520 --> 00:40:21,760
चुनी जाएगी सेना भाई साहब अरे किसी का ब्राह्मण क्षत्रिय वैश

573
00:40:21,760 --> 00:40:25,840
शूद्र घोषित करना है कि नहीं आपको स्वभाव के आधार प नहीं करना

574
00:40:25,840 --> 00:40:29,920
है भाई साब मुझे नहीं करना ये उसका स्वभाव स्वयं घोषित कर रहा

575
00:40:29,920 --> 00:40:34,240
है यानी कि वो खुद बताएगा कि मैं छत्रिय

576
00:40:34,240 --> 00:40:38,520
में ब भाई साहब वो नहीं बताएगा उसका स्वभाव बताएगा

577
00:40:38,520 --> 00:40:42,920
स्व पता कैसे चलेगा इसका ये स्वभाव है कैसे चलेगा

578
00:40:42,920 --> 00:40:47,200
जब तक उसको देखोगे नहीं कुछ दिन जो आपने कहा जो आपने

579
00:40:47,200 --> 00:40:51,480
कहा जब तक उसको कुछ दिन तक देखोगे नहीं कैसे पता चलेगा

580
00:40:51,480 --> 00:40:55,680
हां हां जैसे आपने मेरे बारे में पता कर लिया कि मैं यहां पर प्रतिकार स्वरूप

581
00:40:55,680 --> 00:41:00,120
बैठा हूं ठीक है आपने कर लिया ना

582
00:41:00,120 --> 00:41:03,480
आपने मान लिया आपने माना मेरी बात को

583
00:41:03,480 --> 00:41:07,960
नहीं माना मतलब इसका मतलब सिद्धांत ये सिद्धांत

584
00:41:07,960 --> 00:41:12,000
नहीं है हमें एक करने वाला ये मेरा व्यक्तिगत निर्णय हो सकता

585
00:41:12,000 --> 00:41:18,000
है सुनिए ये मेरा व्यक्तिगत निर्णय हो सकता है मगर ये

586
00:41:21,360 --> 00:41:25,640
काउंटरेक्ट तो हमें सिद्धांत चाहिए व्यवस्था करे जो लड़ाई करवाए

587
00:41:25,640 --> 00:41:29,680
वो वाला नहीं आप मुझे वो बताइए अगर किसी को ब्राह्मण क्षत्रिय वै सूत्र

588
00:41:29,680 --> 00:41:34,080
घोषित करना है तो उसको उसके स्वभाव को जानने के लिए किसको

589
00:41:34,080 --> 00:41:38,200
किस आधार पर भेजा जाएगा भाई

590
00:41:38,200 --> 00:41:42,200
साहब कोई भी व्यक्ति दूसरे का ब्राह्मण क्षत्रिय सूत्र घोषित

591
00:41:42,200 --> 00:41:46,320
नहीं करेगा पहली बात अब आप कहेंगे उ कौन करेगा

592
00:41:46,320 --> 00:41:50,360
कौन करेगा अब आपका दूसरा क्वेश्चन उसका स्वभाव

593
00:41:50,360 --> 00:41:54,640
कन मतलब उसे कौन घोषित करेगा तो ये उसके

594
00:41:54,640 --> 00:41:58,760
जो जीवन गुजरा है वो घोषित करेंगे और द जो ग्रंथ के अकॉर्डिंग है

595
00:41:58,760 --> 00:42:04,360
उसको घोषित करेंगे उसके गुरुदेव जैसा कि मैंने मनुस्मृति में पढ़ा

596
00:42:04,360 --> 00:42:08,560
है मैं आपसे पूछ आपसे आऊा एक एक करके बातें चलूंगा

597
00:42:08,560 --> 00:42:12,600
आपने क्या करा आपने क्या कहा कौन घोषित करेगा मैं आपने क्या बताया

598
00:42:12,600 --> 00:42:17,280
कोई घोषित नहीं करेगा बण

599
00:42:17,280 --> 00:42:18,880
सूत्र है कि नहीं

600
00:42:18,880 --> 00:42:22,880
हा मनुस्मृति के अनुसार तो यही होगा होना चाहिए

601
00:42:22,880 --> 00:42:28,880
म के अनुसार गुरु घोषित करेंगे ब्राह्मण क्षत्रिय वै सूत्र है कि नहीं

602
00:42:32,200 --> 00:42:36,400
हाब बा लीजिए केवल मेरे अनुसार नहीं य

603
00:42:36,400 --> 00:42:40,400
हमारा ग्रंथ है मन स्मति उसके अनुसार भी है ठीक है ठीक है अभी

604
00:42:40,400 --> 00:42:44,440
आएंगे ग्रंथ पर भी आएंगे हम ग्रंथ पर भी आएंगे अभी

605
00:42:44,440 --> 00:42:48,960
मैं पूछ रहा हूं यह कहीं पर नियम है कि उसके गुरु उसका जो

606
00:42:48,960 --> 00:42:53,000
वो है घोषित करेंगे हा हा यह नियम

607
00:42:53,000 --> 00:42:57,240
है मनुस्मृति में वहा पर एक लोक है खा है

608
00:42:57,240 --> 00:43:01,400
गुरु घोषित करेंगे उसका उसका वर्ण क्या हैय गुरु घोषित करेंगे

609
00:43:01,400 --> 00:43:07,400
बताइए अभी बता रहा हूं एक मिनट

610
00:43:20,310 --> 00:43:25,520
[संगीत]

611
00:43:25,520 --> 00:43:29,960
हम आप आप केवल श्लोक क्रमांक बता दीजिए हम देख लेंगे

612
00:43:29,960 --> 00:43:35,320
हा मेरे पास लिखे हु बता रहा हूं भाई साहब

613
00:43:35,320 --> 00:43:39,240
यह बताइएगा कि गुरु घोषित करता

614
00:43:39,240 --> 00:43:45,240
है हां यही तो मैंने भी कहा

615
00:43:48,000 --> 00:43:52,240
जी हां यह है अपना मनु स्मृति ठीक है भाई साहब

616
00:43:52,240 --> 00:43:57,080
और अध्याय नंबर है दो और श्लोक नंबर है 148

617
00:43:57,080 --> 00:44:03,080
अध्याय दो हां श्लोक है

618
00:44:07,560 --> 00:44:12,200
148 इसका संस्कृत है आचार्य तस

619
00:44:12,200 --> 00:44:17,200
यम जाति विधि बद वेद पारगी

620
00:44:17,200 --> 00:44:21,760
सावित्र सा सत्य सा अजरा अमरा

621
00:44:21,760 --> 00:44:25,880
ठीक है परंतु वेदों के पारंगत गुरु जो विधि पूर्वक सावित्री

622
00:44:25,880 --> 00:44:31,880
के द्वारा उसके लिए जन्म उत्पन्न करते हैं वह

623
00:44:32,760 --> 00:44:36,920
वास्तविक क्या उत्पन्न करते हैं क्या उत्पन्न करते

624
00:44:36,920 --> 00:44:40,920
हैं जन्म तो ये तो उसका दूसरा जन्म हो रहा है

625
00:44:40,920 --> 00:44:44,960
क्योंकि उसका यज्ञ पवित हुआ है इसमें ये कहा आ रहा है कि गुरु डिसाइड

626
00:44:44,960 --> 00:44:49,880
करेंगे गुरु घोषित करेंगे कि उसका वो क्या है

627
00:44:49,880 --> 00:44:54,040
और कैसे घोषित किया जाएगा ये घोषित नहीं हो रहा ये आपको नहीं लग रहा है मतलब यहां पर

628
00:44:54,040 --> 00:44:58,360
क्लियर सुनि अच्छा ठीक है इस क्लियर कर लेते हैं

629
00:44:58,360 --> 00:45:02,520
ब्राह्मण का जनेऊ किस समय हो रहा है बताइए हम

630
00:45:02,520 --> 00:45:06,520
ब्राह्मण के जनेऊ की मियाद क्या है मनुस्मृति में

631
00:45:06,520 --> 00:45:10,840
नहीं भाई साहब ये हमने नहीं पढ़ा है ये नहीं पढ़ा है हमने प पढ़ो पढ़ो दूसरे

632
00:45:10,840 --> 00:45:15,080
में है दूसरे ही उसम ठीक है पढ़ लेंगे ब्राह्मण

633
00:45:15,080 --> 00:45:20,840
का जने मैं बता रहा हूं

634
00:45:20,840 --> 00:45:24,920
आपको ब्राह्मण का जनव होता है आठ

635
00:45:24,920 --> 00:45:29,080
से 12 वर्ष की उम्र के बीच आयु के बीच

636
00:45:29,080 --> 00:45:33,160
आठ से 12 वर्ष की आयु के बीच और अगर

637
00:45:33,160 --> 00:45:37,400
और अच्छा बनाना है और अच्छा बनाना है उसे ब्राह्मण तो उसका पाच

638
00:45:37,400 --> 00:45:41,840
से 11 या 12 वर्ष की आयु के बीच होता है ठीक है

639
00:45:41,840 --> 00:45:46,080
ठीक है ना पा से 12 से 12 पहला वाला आपका आ से 12 था

640
00:45:46,080 --> 00:45:50,200
अरे आठ से 12 भी है और अगर आपका मन है कि आप उसे और अच्छा

641
00:45:50,200 --> 00:45:54,240
ब्राह्मण बनाना चाहते हैं ज्ञानी बनाना चाहते हैं तो पांच से भी है वो भी

642
00:45:54,240 --> 00:45:58,960
लिखा है मिल जाएगा ठीक है ठीक है अच्छा

643
00:45:58,960 --> 00:46:03,280
तो यहां इस उम्र तक इस आयु तक वह गुरु के पास रहा

644
00:46:03,280 --> 00:46:07,320
नहीं होता है हां ठीक है

645
00:46:07,320 --> 00:46:11,560
तो यहां पर गुरु किस आधार पर उसको ब्राह्मण क्षत्रिय अथवा वैश

646
00:46:11,560 --> 00:46:15,560
के आधार पर उसका उपनीत कर रहा है जो उसका

647
00:46:15,560 --> 00:46:19,640
दूसरा जन्म हो रहा है वह आठ या पाच की उम्र में हो रहा

648
00:46:19,640 --> 00:46:23,680
है तो यहां पर किस आधार पर गुरु उसको ब्राह्मण क्षत्रिय अथवा

649
00:46:23,680 --> 00:46:27,800
वैश्य बना रहा है यह भाई साहब उस

650
00:46:27,800 --> 00:46:31,880
आधार बनाएगा कि व्यक्ति मेरे पास पाच वर्ष रहा है 12 वर्ष रहा है या

651
00:46:31,880 --> 00:46:36,040
अपने घर रहा है घर से मुझे मतलब नहीं है नहीं नहीं वो आया

652
00:46:36,040 --> 00:46:40,560
ही वहां प है ना पाच वर्ष की उम्र में अब उसको क्या बनाए वो गुरु

653
00:46:40,560 --> 00:46:44,800
अब अब उसके लिए बनाने के लिए आठ से 12 मतलब कुल मिलाकर के आठ

654
00:46:44,800 --> 00:46:48,920
या 12 वर्ष तक उसके पास रहना पड़ेगा कुल मिलाकर के 12 भाई

655
00:46:48,920 --> 00:46:53,880
सुनिए पहले आप अपनी वो ठीक करिए जानकारी ये जो

656
00:46:53,880 --> 00:46:57,920
यज्ञ पवित है ब्राह्मण क्षत्रिय अथवा वै के अनुसार

657
00:46:57,920 --> 00:47:02,160
यह बताया गया है कि बालक की आयु जब आठ वर्ष

658
00:47:02,160 --> 00:47:06,680
की हो तब उसको उपनीत करा दीजिए आठ से लेकर 12 वर्ष के बीच में

659
00:47:06,680 --> 00:47:10,880
ब्राह्मण के लिए ये नहीं है वो आठ से 12 वर्ष तक रहेगा गुरु

660
00:47:10,880 --> 00:47:15,040
के साथ ना आठ वर्ष का जब वो हो वहां से लेकर

661
00:47:15,040 --> 00:47:19,200
12 वर्ष के बीच में उसका यज्ञ पवित हो जाना चाहिए गुरु के द्वारा और उसके बाद वो गुरु

662
00:47:19,200 --> 00:47:23,280
के पास रहकर पढ़ता है तो पढ़ने से पहले गुरु के

663
00:47:23,280 --> 00:47:27,440
साथ रहने से पहले उसको किस आधार पर ब्राह्मण क्षत्रिय अथवा

664
00:47:27,440 --> 00:47:31,480
वैश्य बनाया जा रहा है बताइए ये भाई साहब

665
00:47:31,480 --> 00:47:36,240
आप कहां से बता रहे हैं कि मतलब पाच से 12 वर्ष के बीच ही बताया जाएगा अब मुझे भी लोक बताइए

666
00:47:36,240 --> 00:47:42,240
मनु स्मृति सेही बता रहा हूं यार अभी बताता

667
00:47:48,040 --> 00:47:54,040
हूं रुको ढूंढना पड़ेगा

668
00:48:02,800 --> 00:48:07,120
यह देखिए मनुस्मृति दूसरा अध्याय

669
00:48:07,120 --> 00:48:11,240
36 वा श्लोक गर्भ से आठवें

670
00:48:11,240 --> 00:48:15,800
वर्ष में ब्राह्मण का उपनयन संस्कार कराना चाहिए

671
00:48:15,800 --> 00:48:20,000
ठीक है ठीक है गर्भ से आठवा गर्भ

672
00:48:20,000 --> 00:48:24,080
से गर्भ से 11वें वर्ष में क्षत्रियों का

673
00:48:24,080 --> 00:48:28,120
और गर्भ से बवे वर्ष में वैश्य का उपनयन संस्कार कराना

674
00:48:28,120 --> 00:48:32,760
चाहिए तो यहां पर जब तक वह गुरु के साथ नहीं रहा है

675
00:48:32,760 --> 00:48:36,760
यज्ञ पवित्र होने के बाद उसको रहना है गुरु के साथ तो यहां पे

676
00:48:36,760 --> 00:48:40,880
गुरु किस प्रकार उसको घोषित कर रहा है कि वह जो है ब्राह्मण है वैश्य अथवा

677
00:48:40,880 --> 00:48:45,880
क्षत्रिय

678
00:48:45,880 --> 00:48:49,920
है यदि वो घोषित कर रहे हैं इस आध जो आपने बताया कि भाई

679
00:48:49,920 --> 00:48:54,080
वो गर्भ से लिख रहे हैं ठीक है बढ़िया बात है इसे मैंने अभी पढ़ा नहीं है पढ़ लूंगा उसके बाद

680
00:48:54,080 --> 00:48:58,200
आपको मैं फिर से बता दूंगा दूसरी बात यदि हम इसको मानले तो आ वर्ष

681
00:48:58,200 --> 00:49:02,280
का बच्चा केवल चेपो चेपो करना जानता है बहुत

682
00:49:02,280 --> 00:49:05,720
जदा होशियार नहीं होता इस

683
00:49:05,720 --> 00:49:09,760
आधार में आप मनुम विरोधी है

684
00:49:09,760 --> 00:49:13,400
इतने में म विरोधी

685
00:49:13,400 --> 00:49:15,760
है

686
00:49:15,760 --> 00:49:20,000
उसका आप दूसरे को सुनेंगे भी मैं य नहीं मनुस्मृति विरोधी

687
00:49:20,000 --> 00:49:25,720
हूं मैं यह केवल इसको सही मान ले तो स्कंद

688
00:49:25,720 --> 00:49:29,840
पुराण स्कंद पुराण और ये है

689
00:49:29,840 --> 00:49:34,040
खंड 18 अध्याय 239 श्लोक संख्या 31 से 34 तक

690
00:49:34,040 --> 00:49:38,720
इसका विरोध हो रहा है ग्रंथों में ही जन्मने जाता

691
00:49:38,720 --> 00:49:43,360
बात करूंगा मैं इस पर बात करूंगा जन्मना जाते सूत्रा बोलिए अब आप

692
00:49:43,360 --> 00:49:47,720
यही बोलेंगे हा ये पूरा श्लोक है जन्मना

693
00:49:47,720 --> 00:49:51,760
जाति शूद्र बोलेंगे ना हां कहा पर

694
00:49:51,760 --> 00:49:56,280
आया है एक जगह पर आया है धर्मे हीना पशु भी समाना

695
00:49:56,280 --> 00:50:00,320
हां जिस व्यक्ति के पास जिस व्यक्ति के पास धर्म नहीं

696
00:50:00,320 --> 00:50:01,240
है वह पशु

697
00:50:01,240 --> 00:50:05,320
है पशु है हा इसका मतलब क्या है कि वो माता पिता

698
00:50:05,320 --> 00:50:09,400
भी उसके पशु थे या वह उसका शरीर पशु वाला है मनुष्य

699
00:50:09,400 --> 00:50:13,480
का शरीर नहीं है इसका मतलब क्या है नहीं इसका देखि

700
00:50:13,480 --> 00:50:17,480
उसम लिखा है धर्म हीना म मनुष्य पशु ही समाना

701
00:50:17,480 --> 00:50:22,840
ठीक है पशु के समान है ना कि

702
00:50:22,840 --> 00:50:26,920
उसका स्कंद पुराण गुरु गीता में लिखा है जिसका गुरु नहीं

703
00:50:26,920 --> 00:50:30,920
है वो पशु है सीधे लिखा है पशु समान नहीं इस

704
00:50:30,920 --> 00:50:35,000
जिस जिसका गुरु नहीं है वह पशु है तो इसका अर्थ क्या

705
00:50:35,000 --> 00:50:39,200
हुआ कि वह शरीर से पशु पैदा हुआ

706
00:50:39,200 --> 00:50:43,320
है जानवर पैदा हुआ है या यह माने कि वह

707
00:50:43,320 --> 00:50:47,600
पशु वत है पशु वत है इसी प्रकार से

708
00:50:47,600 --> 00:50:51,760
जब इसी प्रकार से जब तक किसी चीज

709
00:50:51,760 --> 00:50:56,640
का किसी का उपनयन नहीं हुआ है तब तक वो शूद्र वत है

710
00:50:56,640 --> 00:51:00,880
शूद्र ही नहीं है शूद्र वत है उस कांटेक्ट में यहां पर ये जन्मना जाते

711
00:51:00,880 --> 00:51:05,000
आता है अब दूसरी बात ये आती है कि आप प्रमाणों की अगर बात कर रहे

712
00:51:05,000 --> 00:51:09,200
हैं कि यहां पर ये लिखा है यहां पर ये लिखा है कांट्रडिक्शन हो जाता है आपने

713
00:51:09,200 --> 00:51:13,960
किस परंपरा प्राप्त आचार्य के पास जाकर के इनका अध्ययन किया

714
00:51:13,960 --> 00:51:16,360
है आपने परंपरा प्राप्त

715
00:51:16,360 --> 00:51:20,640
आचार्य से पूछा कि भाई अगर क्या कहते वो चैपो चैपो

716
00:51:20,640 --> 00:51:25,040
करता है आठ से 11 वर्ष की उम्र में तो फिर वो ये जन्मन

717
00:51:25,040 --> 00:51:29,920
जा शूद्र क्यों लिखा है आपने पूछा परंपरा प्राप्त आचार्य के पास जाकर

718
00:51:29,920 --> 00:51:34,240
उसी मैं आज आपके पास आया हूं आप आचार्य नहीं है लेकिन किसी आचार्य के शिष्य

719
00:51:34,240 --> 00:51:38,520
है ये मैंने पहले तो मैं आचार्य द्वारा बताया

720
00:51:38,520 --> 00:51:42,680
गया जो निर्णय है वो आपको बता रहा हूं जहां पर जन्मन जाते आया

721
00:51:42,680 --> 00:51:46,840
है वहां पर कहा गया है कि वहां शूद्र वत है वो राम

722
00:51:46,840 --> 00:51:50,880
जी का जने जब तक नहीं हुआ था उनके लिए कहीं भी शूद्र लिखा हुआ नहीं

723
00:51:50,880 --> 00:51:55,280
आया है बचपन से कृष्ण जी का जब तक जनेऊ

724
00:51:55,280 --> 00:51:59,480
नहीं हुआ था एक जगह उनको शूद्र नहीं बोला गया है बचपन से

725
00:51:59,480 --> 00:52:03,480
कोई एक एक ऐसा उदाहरण आप देख कर के बताइएगा शास्त्र में जिसका

726
00:52:03,480 --> 00:52:07,680
जनव नहीं हुआ हो तब तक उसे शूद्र कहा गया हो अगर वो क्षत्रिय कुल में जन्म

727
00:52:07,680 --> 00:52:11,800
लिए तो उन्हें क्षत्रिय कहा जा रहा है राघव कहा जा रहा है

728
00:52:11,800 --> 00:52:15,920
इसका चंद खैर आप

729
00:52:15,920 --> 00:52:20,040
है खैर खैर आप परंपरा प्राप्त आचार्यों का निर्णय

730
00:52:20,040 --> 00:52:24,160
पूछने आए थे यह रामानुजाचार्य जी का निर्णय है

731
00:52:24,160 --> 00:52:28,320
रामानुजाचार्य परंपरा का एक ग्रंथ है क्यों इसमें इन्होंने

732
00:52:28,320 --> 00:52:31,720
जन्म बनाम कर्म

733
00:52:31,720 --> 00:52:36,160
गुण ये सब इसमें इनका संशोधन किया हुआ है इन्होंने इसमें

734
00:52:36,160 --> 00:52:40,440
प्रमाण भास भी बताए हैं कि कौन-कौन से प्रमाण भास है जिनका आलंबन

735
00:52:40,440 --> 00:52:44,600
लेते हैं लोग और उनका खंडन किया है यह परंपरा प्राप्त है

736
00:52:44,600 --> 00:52:48,880
ठीक है शंकराचार्य जी परंपरा प्राप्त है उनका भी कहना है

737
00:52:48,880 --> 00:52:52,880
कि जन्मना जाते शूद्र का अर्थ है कि जो जन्म जन्म से

738
00:52:52,880 --> 00:52:57,040
जो यज्ञ पवित होने तक वो शूद्र वत होता है क्योंकि शिक्षा नहीं होती उसके

739
00:52:57,040 --> 00:53:01,080
पास अज्ञानी होता है मगर उसका जोव है

740
00:53:01,080 --> 00:53:05,360
ब्राह्मण है वो उसका रहेगा ही ठीक है न

741
00:53:05,360 --> 00:53:09,680
इवन इकोन के अंदर भी इकोन जो कि पूरी तरीके

742
00:53:09,680 --> 00:53:14,040
से वर्ण व्यवस्था जो है जन्म जन्मना नहीं स्वीकार

743
00:53:14,040 --> 00:53:18,320
करता है वह भी जन्मना वर्ण व्यवस्था को आंशिक रूप से शाब्दिक

744
00:53:18,320 --> 00:53:22,360
भेद से मानते हैं दूसरी बात

745
00:53:22,360 --> 00:53:27,000
य है जैसे आपने कहा कि

746
00:53:27,000 --> 00:53:31,520
गुण कर्म और स्वभाव तो

747
00:53:31,520 --> 00:53:36,960
ो उपनिषद था शायद 10 पा साल

748
00:53:36,960 --> 00:53:41,120
छंद उपनिषद में पूर्व जन्म के कर्मों के आधार

749
00:53:41,120 --> 00:53:45,120
पर उसको इस जन्म का शरीर प्राप्त होता है और शरीर

750
00:53:45,120 --> 00:53:46,760
के आधार पर उसको शरीर

751
00:53:46,760 --> 00:53:50,840
के आधार पर उसको कुल प्राप्त होता है वर्ण प्राप्त होता है

752
00:53:50,840 --> 00:53:55,680
और उसके आधार पर उसके आधार पर इस जन्म के उसको

753
00:53:55,680 --> 00:53:59,800
दोबारा से कर्म प्राप्त होते हैं अब अगर वो अपने वर्ण उचित कर्म

754
00:53:59,800 --> 00:54:04,120
को करेगा तो वो शुद्ध क्षत्रिय शुद्ध ब्राह्मण शुद्ध सूत्र

755
00:54:04,120 --> 00:54:08,160
शुद्ध वैश्य कहलाएगा अगर वो नहीं करेगा तो पतित

756
00:54:08,160 --> 00:54:12,480
ब्राह्मण पतित क्षत्रिय पतित वैश्य पतित शूद्र कहलाएगा इतना है

757
00:54:12,480 --> 00:54:16,680
उसको छका जाएगा मगर जो उसका ब्राह्मण क्षत्रिय वैश्य शूद्र जो जन्म

758
00:54:16,680 --> 00:54:22,680
से है वो माना ही जाएगा और आपको दिखा दूं प्रमाण

759
00:54:23,160 --> 00:54:29,160
भाष भाई साहब मेरा एक प्रश्न है अब आपसे यहीं पर आप सुनेंगे

760
00:54:33,600 --> 00:54:37,760
क्या जी भैया जी क्या आप मुझे सुन रहे हैं एक मिनट एक

761
00:54:37,760 --> 00:54:42,200
मिनट बताता हूं एक मिनट ठीक

762
00:54:42,200 --> 00:54:46,640
है यह देखिए यह रामानुजाचार्य परंपरा के आचार्य

763
00:54:46,640 --> 00:54:51,080
मैं अपनी परंपरा नहीं बता रहा हूं जगतगुरु शंकराचार्य जी की परंपरा से नहीं बता रहा हूं

764
00:54:51,080 --> 00:54:56,760
यह वो परंपरा है जो इकोन के द्वारा भी प्रामाणिक मानी जाती है

765
00:54:56,760 --> 00:55:00,760
कोई भी प्रामाणिक परंपरा ऐसी नहीं है रामानंदाचार्य निबार काचार्य

766
00:55:00,760 --> 00:55:04,800
रामानुजाचार्य हो कोई भी परंपरा ऐसी नहीं है जो जन्म से नहीं

767
00:55:04,800 --> 00:55:08,880
मानती है सिर्फ परंपरा का आलंबन लेते हुए तथाकथित

768
00:55:08,880 --> 00:55:13,000
जो स्कोन वाले हैं व कहते हैं नहीं जन्म और कर्म उसम मिक्स बात कहते हैं

769
00:55:13,000 --> 00:55:17,360
क्लियर बोलते ही नहीं है कुछ जब भी पूछो वो क्लियर नहीं बोलेंगे उनके फॉलोअर्स

770
00:55:17,360 --> 00:55:21,360
बोल देंगे लीडर्स क्लियर नहीं बोलेंगे अमोग लीला जी से पूछा

771
00:55:21,360 --> 00:55:26,680
गया कि भाई राम जी का कौन सा वो है वर्ण माना जाए

772
00:55:26,680 --> 00:55:30,840
राम जी कहीं पर ब्राह्मण दिखते हैं ज्ञान दे रहे हैं कहीं पर वो

773
00:55:30,840 --> 00:55:34,880
क्षत्रिय दिखते हैं वध कर रहे हैं तो कौन सा माना जाए तो

774
00:55:34,880 --> 00:55:38,160
वहां अमोग लीला जी ने कह दिया व वो कुछ नहीं है वो तो भगवान

775
00:55:38,160 --> 00:55:42,200
है अरे भाई भगवान है तो हमारे आदर्श कैसे हो गए भगवान आदर्श

776
00:55:42,200 --> 00:55:46,520
नहीं होते हैं मानवो चित रूप में जब भगवान मर्यादा

777
00:55:46,520 --> 00:55:50,560
पुरुषोत्तम हुए तब व हमारे आदर्श हुए भगवान आदर्श थोड़ी ना भगवान तो पृथ्वी

778
00:55:50,560 --> 00:55:56,520
बना रहे चंद्रमा बना रहे हैं सूर्य को खा जा रहे हैं वो आदर्श कैसे हो गए

779
00:55:56,520 --> 00:56:00,840
वो हमारे लिए टपल रूप में नहीं हो सकते उदाहरण नहीं है वो हमारा

780
00:56:00,840 --> 00:56:05,320
क्योंकि हम वो जो कर सकते हैं व हम नहीं कर सकते उदाहरण के लिए राम है

781
00:56:05,320 --> 00:56:09,560
अगर राम है तो हम उसको यह कहते वो तो भगवान है उनको अलग कर दो नहीं अलग नहीं कर सकते

782
00:56:09,560 --> 00:56:13,640
मर्यादा पुरुषोत्तम रामो विवान धर्मा तो वोह अपनी

783
00:56:13,640 --> 00:56:18,040
बातें कभी स्पष्ट कहते ही नहीं है ठीक है ये निषे प्रमाण

784
00:56:18,040 --> 00:56:23,000
है ये निषे प्रमाण है

785
00:56:23,000 --> 00:56:27,360
निषे प्रमाण में इन्होंने कहा

786
00:56:27,360 --> 00:56:32,520
ऋगवेद विश्लेषण भी करेंगे एक

787
00:56:32,520 --> 00:56:37,160
149 पांचवा मंत्र अयम सा होता यो द जन्मा

788
00:56:37,160 --> 00:56:41,240
जन्म से जो जन्म से दज होता

789
00:56:41,240 --> 00:56:46,480
है वही वेदोक्त कर्मों में अधिकृत

790
00:56:46,480 --> 00:56:50,920
है र

791
00:56:50,920 --> 00:56:53,200
आप अब बात करते हैं कि

792
00:56:53,200 --> 00:56:57,240
आपने परंपरा प्राप्त आचार्य से शास्त्रों का अध्ययन किया

793
00:56:57,240 --> 00:57:01,400
शस्त्र का संदर्भ साब और बात बाद में कर लेना पहले

794
00:57:01,400 --> 00:57:05,440
जो अभी आपने अपने प्रमाण दिए उनसे मेरा कुछ प्रश्न है

795
00:57:05,440 --> 00:57:09,440
सबसे प आपने लास्ट वाला एक प्रमाण दिया श्री राम जी का भगवान श्री

796
00:57:09,440 --> 00:57:13,440
राम जी का इन्होंने जो अवतार लिया जिसे हम जन्म कह सकते

797
00:57:13,440 --> 00:57:17,720
हैं कुछ लोग कहते हैं वैसे नहीं भी कहना चाहिए जैसा सूटेबल लगे ठीक है

798
00:57:17,720 --> 00:57:22,440
कौन से कुल में लिया था भाई साब क्षत्रिय कुल में जी

799
00:57:22,440 --> 00:57:27,400
क्षत्रिय कुल में लिया था अब क्षत्रिय कुल में लेने के बाद क्षत्रिय हो गए

800
00:57:27,400 --> 00:57:31,600
ठीक है अब क्षत्रिय कुल में जन्म लेने के बाद उनके जो श्रीमद

801
00:57:31,600 --> 00:57:35,600
भगवत गीता के अनुसार उनके जो कार्य होने चाहिए थे वीरता शक्ति

802
00:57:35,600 --> 00:57:39,840
संकल्प दक्षता युद्ध में धैर्य उदार था नेतृत्व यह उनके पास

803
00:57:39,840 --> 00:57:44,360
थे लेकिन अब वो ज्ञान भी देते हैं

804
00:57:44,360 --> 00:57:48,640
सा वो तो क्षत्रिय में थे उनका तो वण क्षत्रिय है वो ब्राह्मण

805
00:57:48,640 --> 00:57:52,880
वाले कर्तव्य क्यों कर रहे हैं अरे भाई इसीलिए

806
00:57:52,880 --> 00:57:56,960
तो मैं कह रहा हूं कि कर्म के आधार पर आपका वर्ण

807
00:57:56,960 --> 00:58:01,360
सुनिश्चित नहीं होता है इसीलिए तो ये कह रहे हैं

808
00:58:01,360 --> 00:58:05,600
कर्म तो एक ही दिन में सुनिए एक ही दिन में माता का स्वभाव है अपने

809
00:58:05,600 --> 00:58:08,920
बच्चे की रक्षा करना वो हो गई क्षत्रिय

810
00:58:08,920 --> 00:58:12,920
उसका स्वभाव है बच्चे की सेवा करना वो हो गई शूद्र उसका स्वभाव है

811
00:58:12,920 --> 00:58:17,040
अपने बच्चे को खाना खिलाना वो गई वैश्य उसका स्वभाव है

812
00:58:17,040 --> 00:58:21,120
क्या कहते हैं अंदर जाकर के वो बच्चे को पढ़ाना वो गई ब्राह्मण कितनी बार

813
00:58:21,120 --> 00:58:25,120
बदलेगा वण यह कोई व्यवस्था है क्या आपकी व्यवस्था

814
00:58:25,120 --> 00:58:29,120
देखिए सुनिए आपकी व्यवस्था देखिए पहले भाई

815
00:58:29,120 --> 00:58:33,440
साहब आप सुनिए एक मिनट मुझे पूरा करने दीजिए आपकी

816
00:58:33,440 --> 00:58:37,640
आपकी वस्था देखिए आपकी व्यवस्था देखिए पहले कि भाई कौन

817
00:58:37,640 --> 00:58:41,960
जाएगा सुनिश्चित करने पता नहीं कितने दिन तक चेक किया जाएगा

818
00:58:41,960 --> 00:58:46,000
पता नहीं उसको दूसरे लोग मानेंगे कि नहीं मानेंगे पता नहीं

819
00:58:46,000 --> 00:58:50,000
जब आपसे मैंने पूछा कि भैया ये यहां पर लिखा हुआ है कि आ वर्ष की उम्र

820
00:58:50,000 --> 00:58:54,040
में जनेऊ हो रहा है वहां पर गुरु आपने कहा गुरु घोषित करेगा तो जब मैंने

821
00:58:54,040 --> 00:58:58,080
कहा कि गुरु तो भैया आठ वर्ष की उम्र में कर रहा तो आपने कहा पता नहीं तो आप

822
00:58:58,080 --> 00:59:02,080
पहले ये सब चीज पता कर दूसरी बात अब सीधी बात आ जाती है जब

823
00:59:02,080 --> 00:59:06,120
आप जब आप प्रमाण की बात करते हैं ग्रंथ

824
00:59:06,120 --> 00:59:10,720
की बात करते हैं तो आपको ग्रंथ प्राप्त कैसे हुए यह

825
00:59:10,720 --> 00:59:15,000
बताइए हा ग्रंथ प्राप्त कैसे हुए यदि आपका ये सवाल है किंतु

826
00:59:15,000 --> 00:59:19,080
आप यह ध्यान रखना कि आपने अपना प्रमाण दिया और उनके जो मैं प्रश्न कर रहा था उनके

827
00:59:19,080 --> 00:59:23,120
उत्तर नहीं दिए आपने तब तक आपने अपना प्रश्न कर आपने

828
00:59:23,120 --> 00:59:24,400
से प्राप्त किएरा

829
00:59:24,400 --> 00:59:28,600
प्रश् ठीक आप बताइए होता

830
00:59:28,600 --> 00:59:32,840
जाएगा इसलिए आप बताए ग्रंथ की अगर आप बात कर रहे हैं तो आपने ग्रंथों का अध्ययन

831
00:59:32,840 --> 00:59:37,000
कहां से किया है मैं आपको विषय ध्यान दिला देता हूं

832
00:59:37,000 --> 00:59:41,400
विषय ध्यान दिला देता हूं मैंने कहा कि आठ से 11 वर्ष की उम्र में

833
00:59:41,400 --> 00:59:45,480
ब्राह्मण का जनेऊ होना चाहिए तो गुरु वहां पर किस आधार पर

834
00:59:45,480 --> 00:59:49,560
उसका जनेय करेगा ब्राह्मण क्षत्रिय अथवा वैश्य के आधार पर

835
00:59:49,560 --> 00:59:53,600
तो आपने मुझसे कहा किय मैं पढ़ूंगा एक मिनट तो आपने मुझसे कहाय मैं

836
00:59:53,600 --> 00:59:57,920
देखूंगा क्योंकि यहां पर विरोध हो रहा है जन्मना जा शूद्र का ठीक है

837
00:59:57,920 --> 01:00:02,000
तो अब जब आपने यहां पर विरोध किया तो फिर मैं कहूंगा कि यह जो ग्रंथ

838
01:00:02,000 --> 01:00:06,920
की वजह से आप असमंजस में है वोह ग्रंथ आपने पढ़े कहां से हैं

839
01:00:06,920 --> 01:00:11,080
यह प्रश्न आएगा ना आपको कैसे मिला स्कंद

840
01:00:11,080 --> 01:00:15,200
पुराण हा तो आपने जब ये पूछा तो बता द

841
01:00:15,200 --> 01:00:19,320
समस्या का कारण है जो आपकी समस्या का कारण है वो समस्या

842
01:00:19,320 --> 01:00:23,400
आपके पास आई कहां से है हा आप यह पूछ रहे

843
01:00:23,400 --> 01:00:28,440
आपने ग्रंथ कहां से प्राप्त किए तो श्रीमद् भगवत गीता गीता प्रस गोरखपुर से प्राप्त की

844
01:00:28,440 --> 01:00:32,720
गीता कैसे आए यह उनको पता होगा उनसे पूछिए

845
01:00:32,720 --> 01:00:37,480
आप तो फिर जब आपको पता ही नहीं है फिर आपसे बात क्या करें

846
01:00:37,480 --> 01:00:39,680
भाई गीता प्रेस गोरखपुर आपके लिए

847
01:00:39,680 --> 01:00:44,080
गीता प्रेस गोरखपुर आपके लिए प्रमाण है या नहीं आपने

848
01:00:44,080 --> 01:00:48,480
मुझसे यह पूछा आपके पास ग्रंथ कहां से आए

849
01:00:48,480 --> 01:00:52,800
मैं आपसे अगला प्रश्न पूछ रहा हूं अगला प्रश्न गीता प्रेस गोरखपुर

850
01:00:52,800 --> 01:00:56,880
आपके लिए प्रमाण है कि नहीं के द्वारा जो ग्रंथ

851
01:00:56,880 --> 01:01:00,920
आए हैं उम जो श्लोक लिखे हुए उसका अथ लिखा हुआ है गीता प्रेस गोरखपुर

852
01:01:00,920 --> 01:01:04,560
आपके लिए प्रमाण है कि

853
01:01:04,560 --> 01:01:09,000
नहीं भाई वो पढ़ूंगा सब बताऊंगा हा प्रमाण है एक प्रकार से

854
01:01:09,000 --> 01:01:13,760
प्रमाण का आधार क्या है प्रमाण का आधार क्या है

855
01:01:13,760 --> 01:01:18,400
आपका क्या है प्रमाण का आधार प्रमाण का आधार भाईब

856
01:01:18,400 --> 01:01:24,320
आपको यह लगता है कि नहीं कि उसने सच छापा है कि झूठ छापा

857
01:01:24,320 --> 01:01:28,440
है हा अब ये सच छापा है झूठ छापा है ये आपके

858
01:01:28,440 --> 01:01:32,680
लिए या मेरे लिए केवल मैं आप वो निश्चित

859
01:01:32,680 --> 01:01:36,680
नहीं करेंगे इसके लिए बहुत पब्लिक है पूरी दुनिया है यदि सभी लोग सही मान रहे हैं

860
01:01:36,680 --> 01:01:40,720
जैसा कि भगवान राम के सम हुआ संख्या बल के आधार पर तय होगा

861
01:01:40,720 --> 01:01:44,960
कि सच है या झूठ है बिल्कुल तो दुनिया

862
01:01:44,960 --> 01:01:49,160
में सबसे ज्यादा ईसाइयों की तादाद है

863
01:01:49,160 --> 01:01:53,240
उनका कहना है हमारे जो ग्रंथ है उनके बाद मुस्लिम उनका कहना

864
01:01:53,240 --> 01:01:54,840
हमारे ग्रंथ सब गलत

865
01:01:54,840 --> 01:01:58,920
है हम तो मान ले इस बात को क्यों मान

866
01:01:58,920 --> 01:02:03,040
ले यदि मैं ईसाई होता तो मैं मानता यदि मैं मुस्लिम होता तो मैं मानता ना

867
01:02:03,040 --> 01:02:07,400
चलिए चलिए ठीक है आपसे बात करके अच्छा लगा बहुत बढ़िया अच्छा लगा

868
01:02:07,400 --> 01:02:11,480
और आप परंपरा प्राप्त आचार्यों के सानिध्य में अध्ययन करें और उसके

869
01:02:11,480 --> 01:02:15,600
बाद समझ में ना आए क्या आपने जो आंसर

870
01:02:15,600 --> 01:02:20,480
दिया जो आपने आंसर दिया उनके तर्क है उनका उत्तर देना चाहेंगे या नहीं

871
01:02:20,480 --> 01:02:24,480
आपसे मैंने पूछा आप आपकी बातें सारी

872
01:02:24,480 --> 01:02:28,800
खत्म हो रही है ना जब आप कह रहे हो मैं ईसाई हगा तो ई की बात मानूंगा

873
01:02:28,800 --> 01:02:33,080
भाई शाश्वत सत्य क्या है आपकी प्रमाण बुद्धि क्यों है स्कंद

874
01:02:33,080 --> 01:02:37,720
पुराण में गीता प्रश् पर विश्वास है कि नहीं है

875
01:02:37,720 --> 01:02:41,800
अरे विश्वास है मैंने कहा तो था और कैसे कहूंगा फिर आपने कहा किस आधार प

876
01:02:41,800 --> 01:02:46,360
तो गीता प्रने माना है क्या जन्म से ब्राह्मण क्षत्रिय वै शूद्र नहीं

877
01:02:46,360 --> 01:02:50,400
होते मैंने तो ये नहीं कहा हा मैंने कुछ किताबें पढ़ी है उनमें लिखा हुआ

878
01:02:50,400 --> 01:02:54,440
है कि जन्म से नहीं होते श्रीमद रामचरित मानस में भी लिखा हुआ है आप जो कह रहे

879
01:02:54,440 --> 01:02:59,000
हैं ना कि भाई जन्म से होता है य यह सब सही है तो गोस्वामी

880
01:02:59,000 --> 01:03:03,120
श्री तुलसीदास जी ने य जो राम चरित मानस है इसम गलत लिख दिया और उसके

881
01:03:03,120 --> 01:03:07,120
टीका का की श्री हनुमान प्रसाद जीता क्या लिखा

882
01:03:07,120 --> 01:03:09,840
है क्या लिखा है इसम बता रहा

883
01:03:09,840 --> 01:03:14,240
एक मिनट भाई सा इसमें है उत्तर कांड और श्लोक नंबर

884
01:03:14,240 --> 01:03:18,480
है व सॉरी दोहा नंबर 86

885
01:03:18,480 --> 01:03:24,160
861

886
01:03:24,160 --> 01:03:30,160
[संगीत]

887
01:03:42,600 --> 01:03:46,680
भैया रामचरित मानस का वो जो दोहा है जरा वह कोई टाइप

888
01:03:46,680 --> 01:03:51,000
कर दीजिए शूद्र शूद्र ना पूजू वेद प्रणा वाला

889
01:03:51,000 --> 01:03:55,100
वो कोई टाइप कर दीजिए जरा

890
01:03:55,100 --> 01:03:59,120
[संगीत] पहले इस मैं बोल दू एक बार सब लोग सुन भी लेंगे आपके

891
01:03:59,120 --> 01:04:03,400
दर्शक है हां 86 पॉइंट क्या बताया आपने

892
01:04:03,400 --> 01:04:07,400
उत्तरकांड हां 861 ये है एक पिता के

893
01:04:07,400 --> 01:04:11,840
विपुल उत्तरकांड ठीक है

894
01:04:11,840 --> 01:04:16,000
हम एक पिता के विपुल कुमारा होय पतक गुण शल

895
01:04:16,000 --> 01:04:20,120
अचारा को पंडित को तापस ज्ञाता और को धनवंत

896
01:04:20,120 --> 01:04:24,240
सूर को उदाता अब यहां पर लिख रहे हैं कोई भाई एक ही पिता के पुत्र है

897
01:04:24,240 --> 01:04:29,040
कोई पंडित है कोई तपस्वी कोई ज्ञानी है कोई धनी है कोई शूरवीर है

898
01:04:29,040 --> 01:04:33,240
और कोई दानी है य पर य पर आपके

899
01:04:33,240 --> 01:04:37,280
मत के अनुसार जन्म से होना चाहिए था एक पिता यदि ब्राह्मण

900
01:04:37,280 --> 01:04:41,320
है तो उसके सभी पुत्र ब्राह्मण होते इसलिए कह रहा हूं क्योंकि इसीलिए तो मैं

901
01:04:41,320 --> 01:04:46,240
कह रहा हूं कि कर्मों के आधार पर नहीं डिसाइड होता है

902
01:04:46,240 --> 01:04:50,280
वर्ण योग्यता ड होती है मैंने और क्या कहा अब यह

903
01:04:50,280 --> 01:04:54,600
बताइए आप रामचरित मानस आपके पास कैसे आई

904
01:04:54,600 --> 01:04:58,600
फिर आपने भाही प्रश्न कर लिया मैंने आपको पहले बताया मेरे पास राम चरित मानस गीता प्र

905
01:04:58,600 --> 01:05:03,520
से आई अब अब मैं आपको दोआ पढ़ के बता रहा

906
01:05:03,520 --> 01:05:07,520
हूं इसका वो श्लोक क्रमांक भी दे दीजिए पूज विप सकल

907
01:05:07,520 --> 01:05:11,760
गुनीना शूद्र न पूजू वेद

908
01:05:11,760 --> 01:05:16,200
प्रणा इसी में लेख लीजिए पूज विप सकल गुण ना

909
01:05:16,200 --> 01:05:20,400
शूद्र न पूज वेद प्रवीणा जब वेद प्रवीण

910
01:05:20,400 --> 01:05:24,600
होने से ही ब्राह्मण तय हो रहा है तो फिर वेद प्रवीण

911
01:05:24,600 --> 01:05:28,760
होने के बाद उसको कहते हुए ना पूछने की बात क्यों की जा रही है

912
01:05:28,760 --> 01:05:33,240
यही रामचरित मानस में इसीलिए कह रहा हूं रामचरित

913
01:05:33,240 --> 01:05:37,480
मानस रामचरित मानस लिखी है तुलसीदास जी ने सुनिए

914
01:05:37,480 --> 01:05:42,040
तुलसीदास जी है रामानंदाचार्य परंपरा के

915
01:05:42,040 --> 01:05:46,120
जो है आचार्य उसके बाद उस परंपरा के जो वर्तमान के

916
01:05:46,120 --> 01:05:50,240
आचार्य है वह है रूप नरेशा आचार्य

917
01:05:50,240 --> 01:05:54,320
उनसे जाकर के आपने पढ़ा रामचरित मानस को कि यहां पर ये लिखा है यहां

918
01:05:54,320 --> 01:05:58,360
पर य लिखा है अगर वेद में प्रवीण होना अगर

919
01:05:58,360 --> 01:06:02,640
ज्ञानी हो जाना अगर ज्ञानी हो जाना ही यह तय करता

920
01:06:02,640 --> 01:06:06,920
है कि वोह जो है शूद्र नहीं ब्राह्मण है तो फिर वेद प्रवीण

921
01:06:06,920 --> 01:06:10,960
हो जाने के बाद भी उसको शूद्र कहते हुए ना पूछने की बात क्यों की जा

922
01:06:10,960 --> 01:06:15,440
रही है

923
01:06:15,440 --> 01:06:19,560
बताइए मेरी बात भी सुन लीजिए आपरी चर्चा आपसे काफी देर

924
01:06:19,560 --> 01:06:23,720
तक हो गई है जनता को जो समझना था वो समझ चुकी है आपके पास कई

925
01:06:23,720 --> 01:06:27,760
सारी चीजों का आपने उत्तर नहीं दिया आपने नहीं बताया कि उसको 10

926
01:06:27,760 --> 01:06:31,840
दिन देखना है कि 50 दिन देखना है आपने नहीं बताया कि घोषित कौन

927
01:06:31,840 --> 01:06:35,880
करेगा एक मिनट एक मिनट जब घोषित करने की बात आई तो आपने

928
01:06:35,880 --> 01:06:40,080
यह कहा कि भाई गुरु घोषित करेगा बहुत देर के बाद आई वो बात हालांकि कि

929
01:06:40,080 --> 01:06:44,080
गुरु घोषित करेगा जब मैंने शुरुआती पैरामीटर पूछा था तब भी आपने ये बता

930
01:06:44,080 --> 01:06:48,120
दिया कि भाई मैं अपने मित्रों में देखूंगा जिसको हमने क्लेरिफाई किया यही होती

931
01:06:48,120 --> 01:06:52,240
है जन्म एक मिनट एक मिनट

932
01:06:52,240 --> 01:06:56,720
मुझे पूरा कर मुझे पूरा करने

933
01:06:56,720 --> 01:07:01,000
पूरा करने दीजिए मैं बोल रहा हूं उसके बाद आप भागना नहीं मुझे बोलने

934
01:07:01,000 --> 01:07:05,080
मिनट एक मिनट ये सब कुछ हुआ उसके बाद क्या

935
01:07:05,080 --> 01:07:09,240
हुआ कि जब यह वाली बात आई मैंने कहा जब आपने यह कहा कि गुरु

936
01:07:09,240 --> 01:07:13,280
घोषित करेगा तो मैंने आपको बताया कि गुरु आठ वर्ष की उम्र में कैसे घोषित कर

937
01:07:13,280 --> 01:07:17,560
रहा है जब वो पहली बार संभवत मिल रहा है शिष्य से एक मिनट पूरा बोलने

938
01:07:17,560 --> 01:07:21,880
दीजिए अब जब गुरु की बात आ गई तो आपने कहाय फिर तो एक कांट्रडिक्शन

939
01:07:21,880 --> 01:07:26,320
है इसका मतलब आप प्रमाण के आधार पर ही मानते हो आपके पास तर्क तो प्र

940
01:07:26,320 --> 01:07:30,400
प्रमाण के आधार पर आप यह मानते हैं कि जो है

941
01:07:30,400 --> 01:07:30,900
वर्ण

942
01:07:30,720 --> 01:07:35,400
व्यवस्था जो है जन्म से क्योंकि आप जन्म सूद को ले आए ठीक अब मैं ज

943
01:07:35,400 --> 01:07:39,440
जन्मना जाते शूद्र को जब लाया तो मैंने आपसे पूछा आपके गुरु

944
01:07:39,440 --> 01:07:43,720
कौन है आपका गुरु कोई नहीं है ना गीता प्रेस है

945
01:07:43,720 --> 01:07:48,240
ना ही रूप नरेशा आचार्य है ना शंकराचार्य ना राघवाचार्य है

946
01:07:48,240 --> 01:07:52,720
कोई आपका गुरु है ही नहीं आप मुझे बताइए कहां लिखा है इंटरनेट

947
01:07:52,720 --> 01:07:56,840
से या फिर ग्रंथों को खरीदकर स्वयं पढ़े मैं स्कंद पुराण में आपको दिखा

948
01:07:56,840 --> 01:08:01,160
रहा हूं गुरु गीता में साफ साफ लिखा हुआ है मैं यहां पर बाद में डाल भी दूंगा

949
01:08:01,160 --> 01:08:05,200
इसके डिस्क्रिप्शन में कि मनुष्य चाहे चारों वेद पढ़

950
01:08:05,200 --> 01:08:09,320
ले सारे शास्त्र पढ़ ले सारे

951
01:08:09,320 --> 01:08:10,400
उप पुराण पढ़ ले

952
01:08:10,400 --> 01:08:14,560
पुराण पढ़ ले जप तप व्रत दान पुण्य कर्म तीर्थ दान यज्ञ सब कुछ

953
01:08:14,560 --> 01:08:18,680
व्यर्थ है अगर उसका कोई गुरु नहीं है क्योंकि ये सभी चीजें

954
01:08:18,680 --> 01:08:19,960
आपकी मति को भ्रष्ट

955
01:08:19,960 --> 01:08:24,080
कर देंगी और वो हो रहा है भाई आपको अगर कोई चीज

956
01:08:24,080 --> 01:08:28,640
समझ में नहीं आ रही है तो आप को गुरु के पास जाने की आवश्यकता है आप किस गुरु के पास

957
01:08:28,640 --> 01:08:32,680
गए ग्रंथों के लिए हमारे हमारे सनातन धर्म में

958
01:08:32,680 --> 01:08:37,600
केवल ग्रंथ पर आधारित बात नहीं है गुरु गोविंद और ग्रंथ

959
01:08:37,600 --> 01:08:42,040
राम जी व के पास गए रामो विक्रय वान धर्मा

960
01:08:42,040 --> 01:08:44,840
आपके गुरु कौन

961
01:08:44,840 --> 01:08:48,880
है कौन है आपके गुरु मैंने बताया था भाई साहब

962
01:08:48,880 --> 01:08:53,040
मैंने जिन जिन से शिक्षा लिए उनके नाम मैंने आपको बताए अरे आप उनका विरोध कर रहे

963
01:08:53,040 --> 01:08:57,160
हो आप उनका विरोध कर रहे हो तुलसीदास जी की शिक्षा का आप विरोध कर रहे हो

964
01:08:57,160 --> 01:09:01,640
तुलसीदास जी कह रहे शिक्षा का मैं प्रमाण दे रहा हूं आपको विरोध लगर

965
01:09:01,640 --> 01:09:05,640
ना तुलसीदास जी के जो अच्छा ठीक है चलिए एक

966
01:09:05,640 --> 01:09:10,080
बात बताइए तीन बेर खाती थी वह तीन बेर खाती है

967
01:09:10,080 --> 01:09:14,720
इसमें बेर शब्द का उपयोग दो बार हो रहा है अब आप

968
01:09:14,720 --> 01:09:18,920
दोनों का मुझे अर्थ बताइए कि किस बार बेर का शब्द का उपयोग किस वजह

969
01:09:18,920 --> 01:09:22,960
से लिया है अब आपके प्रश्नों का उत्तर मैं बाद में दूंगा

970
01:09:22,960 --> 01:09:27,080
पहले जो आपने विश्लेषण किया ना कि आ से 12 वर्ष के बीच और राम

971
01:09:27,080 --> 01:09:31,080
जी का वर्ण क्या आप उस पर उत्तर देंगे अपने केवल आप प्रश्न करने आए

972
01:09:31,080 --> 01:09:35,120
है या आप अपने भी उत्तर देने आए हैं मैं आया था आपकी जिज्ञासा शांत

973
01:09:35,120 --> 01:09:39,400
करने मैंने को जो पब्लिक को दिखाना था वो दिखा दिया

974
01:09:39,400 --> 01:09:43,520
जिज्ञासा मेरी शांत होनी थी तो मेरे प्रश्न होते ना आप जिज्ञासा मैंने आपको बता

975
01:09:43,520 --> 01:09:47,720
दिया आप गुरु के पास जाइए परंपरा प्राप्त गुरु के पास जाइए वहां से जब वहां

976
01:09:47,720 --> 01:09:52,120
से जब आप अध्ययन कर ले तब आइए तब आप

977
01:09:52,120 --> 01:09:56,160
जिज्ञासा यदि आपके बस का नहीं जिज्ञासा सांत करना तो क्यों आए यहां पर आप

978
01:09:56,160 --> 01:10:00,240
कहते थे भाई मैं तुम्हारी जिज्ञासा शत नहीं कर सकता मेरी बात मान

979
01:10:00,240 --> 01:10:04,280
ही नहीं रहे हो तो मैं क्या करूंगा मैं आपके करके आपको अपनी बात

980
01:10:04,280 --> 01:10:08,400
बुलवा आपसे मैंने कहा आपका गुरु कौन है आपका गुरु

981
01:10:08,400 --> 01:10:13,120
कौन है फिर पूछ रहा हूं मैं कह तो रहा ह आपसे मैं आपकी

982
01:10:13,120 --> 01:10:17,400
सुनिए तो मैं आपकी बात मानूंगा आपने मुझसे कहा ये ये होना चाहिए

983
01:10:17,400 --> 01:10:21,520
अब मैं उसमें कह रहा हूं ठीक है आपकी बातें मेरा इसमें कुछ प्रश्न उठ रहा है आप उसका उत्तर

984
01:10:21,520 --> 01:10:26,680
देंगे अब आप मेरे गुरु के पास जाओ दे तो दिया और नहीं दिया ना

985
01:10:26,680 --> 01:10:30,720
बता बताइए सबसे पहले आपने दो प्रमाण दिए थे एक तो

986
01:10:30,720 --> 01:10:34,760
दिया था राम जी का वर्ण तो जन्म से अगर हम ण माने

987
01:10:34,760 --> 01:10:39,080
तो उनका वर्ण हो गया क्षत्रिय भाई साब फिर वो ज्ञान क्यों दे रहे मुझे इसका उत्तर दीजिए

988
01:10:39,080 --> 01:10:43,200
अरे क्षत्रिय होने का मतलब ये नहीं है कि वो कुछ भी बोलेंगे

989
01:10:43,200 --> 01:10:47,440
ही नहीं कि तुम ये करो या तुम्हे ये करना चाहिए इसीलिए कह रहा हूं कर्म से

990
01:10:47,440 --> 01:10:50,120
इसीलिए कह रहा हूं कर्म से वर्ण घोषित नहीं

991
01:10:50,120 --> 01:10:54,800
होता है क्योंकि वो जो क्षत्रिय भी है वो भी य काम करता है

992
01:10:54,800 --> 01:10:59,960
वो भी ब्राव की दृष्टि से देख सकते

993
01:10:59,960 --> 01:11:04,680
हो नहीं समझना है आपको मना करना है तो आपकी बात है

994
01:11:04,680 --> 01:11:08,880
मेरा प्रश्न यह नहीं था कर्म से होता नहीं होता मेरा प्रश्न था राम जी का वर्ण जब क्षत्रिय

995
01:11:08,880 --> 01:11:13,320
है तो उनको सूर वरता वाले कार्य करने चाहिए फिर वो ज्ञान क्यों दे रहे हैं

996
01:11:13,320 --> 01:11:17,680
ये कार्य तो ब्राह्मण के लिए दिया जन दे रहे हैं अमुक अमुक स्थितियों में

997
01:11:17,680 --> 01:11:21,880
ज्ञान देना उस क्षत्रिय की सीमा में भी आ जाता है मगर ऑफिली वो ज्ञान

998
01:11:21,880 --> 01:11:26,120
नहीं दे सकते ऑफिली वो ज्ञान नहीं मतलब

999
01:11:26,120 --> 01:11:30,160
अमुक अमुक समय में मतलब अमुक अमुक समय

1000
01:11:30,160 --> 01:11:34,320
में व्यक्ति का जो कर्म है वो बदल जाएगा मतलब कर्म सनातन

1001
01:11:34,320 --> 01:11:38,440
नहीं धर्म नहीं बदलेगा नहीं कर्म संता कैसे आ जाएगी कर्म संता

1002
01:11:38,440 --> 01:11:42,480
कैसे आ जाएगी वो व्यास ग में बैठ सुनिए ब्राह्मण

1003
01:11:42,480 --> 01:11:46,480
मैं बता रहा हूं ब्राह्मण क्षत्रिय वैश शूद्र होने के नाते उनका जो ऑफिशियल

1004
01:11:46,480 --> 01:11:50,520
जो वर्ण का काम आएगा वो व्यास गद्दी में बैठे क्या

1005
01:11:50,520 --> 01:11:54,680
या व्यास गद्दी बैठे क्या उन्होंने यज्ञ करवाया क्या

1006
01:11:54,680 --> 01:11:58,920
उन्होने ज उन्होंने ज्ञान दिया अरे भाई ज्ञान

1007
01:11:58,920 --> 01:12:02,960
तो ये भी है कि अगर मैं ए फर एप्पल सिखा दूं वो भी ज्ञान हो जाएगा उसको उसका

1008
01:12:02,960 --> 01:12:05,280
वर्ण थोड़ी ना मान लेंगे वर्ण के बाहर की बात

1009
01:12:05,280 --> 01:12:09,560
कर रहा है उन्होने एल नहीं सखा उन्होने भक्ति का ज्ञान दिया था नवदा

1010
01:12:09,560 --> 01:12:13,000
भक्ति दिया रामचरित मानस में

1011
01:12:13,000 --> 01:12:17,000
हा उन्होने जो उसको भगवत चर्चा कहते हैं उसको

1012
01:12:17,000 --> 01:12:21,120
व्यास बनना नहीं कहते हैं वो व्यास नहीं बने उसको भगवत चर्चा

1013
01:12:21,120 --> 01:12:24,160
कहते हैं

1014
01:12:24,160 --> 01:12:28,200
उन्होने अगर अगर उससे किसी को ज्ञान मिल रहा है तो उस ज्ञान

1015
01:12:28,200 --> 01:12:32,400
को क्षत्रिय की सीमा में लिया जा सकता है

1016
01:12:32,400 --> 01:12:36,640
अच्छा ये कहा से अने प्रमाणित कर दिया ये गुरुओं से परंपरा प्राप्त

1017
01:12:36,640 --> 01:12:40,720
आचार्यों से अच्छा मतलब गुरुओं ने कर दिया ग्रंथों ने नहीं किया गुरुओं

1018
01:12:40,720 --> 01:12:44,800
ने कर दिया चलिए बढ़िया बात है परंपरा प्राप्त गुरु कर सकते हैं इसीलिए तो

1019
01:12:44,800 --> 01:12:48,920
इसीलिए तो परंपरा प्राप्त आचार्य होते हैं वो सवाल

1020
01:12:48,920 --> 01:12:52,920
ही नहीं है दूसरा मेरा ये प्रश्न था आपने जो कहा ब्राह्मण का जन् आ से 12

1021
01:12:52,920 --> 01:12:56,960
वर्ष के बीच मतलब जो ब्राह्मण है अब आठ से 12 वर्ष के व्यक्ति

1022
01:12:56,960 --> 01:13:01,000
के लिए ब्राह्मण बना दिया अब उसके पश्चात उस पर नियम लागू हो जाते

1023
01:13:01,000 --> 01:13:05,320
हैं ब्राह्मण बनने के बाद अब क्या कार्य करेगा सुनिए ठीक है उसे

1024
01:13:05,320 --> 01:13:09,360
शांति प्रिय रहना है आत्म संयम रखना है तपस्या करनी पवित्रता रखनी

1025
01:13:09,360 --> 01:13:13,400
है ससता रखनी है सत्य निष्ठा रखनी ज्ञान रखना है अब आ से 12 वर्ष के

1026
01:13:13,400 --> 01:13:18,000
व्यक्ति को आपने अभी से जन पहना दिया वो क्या ज्ञान देगा क्या ज्ञान है उसके पास

1027
01:13:18,000 --> 01:13:21,520
यानी कि आप मनुस्मृति को नहीं

1028
01:13:21,520 --> 01:13:25,600
मानते मेरा प्रश्न यह नहीं है मनुस्मृति वाला मेरा प्रश्न कुछ है और

1029
01:13:25,600 --> 01:13:29,960
आप उत्तर कुछ भी दे रहे हैं अरे भाई तो पहले मैं डिसाइड करूं ना कि आप सनातनी

1030
01:13:29,960 --> 01:13:34,040
है सनातन की सीमा के बाहर है मैं आपको जवाब दूंगा पहले आप अपना स्

1031
01:13:34,040 --> 01:13:38,040
है क्लियर करिए आप आप अपना उत्तर नहीं दे रहे जिस प्रकार आप दूसरे से

1032
01:13:38,040 --> 01:13:42,240
उत्तर चाहते हैं कि इसी का उत्तर दो जस्ट आप उत्तर नहीं देते आप उसने सवाल

1033
01:13:42,240 --> 01:13:46,400
को छड़ते हो मैं उत्तर दे चुका हूं दे भी रहा हूं आपको उत्तर दूंगा

1034
01:13:46,400 --> 01:13:50,600
आप अपना स्टैंड क्लियर करिए इतनी जगह पर आपको मनुष पति

1035
01:13:50,600 --> 01:13:56,160
पर शंका हो रही है या नहीं इतनी जगह पर आपको

1036
01:13:56,160 --> 01:14:00,400
ये आपके दर्शक देख रहे हैं ठीक है आपने उत्तर मेरे प्रश्न का दिया है या नहीं दिय

1037
01:14:00,400 --> 01:14:04,480
आपके दर्शक देख रहे हैं मेरा प्रश्न था आ से 12 आ से 11 वर्ष के

1038
01:14:04,480 --> 01:14:08,600
व्यक्ति का ब्राह्मण ने गुरुदेव ने जने कर दिया उसे ब्राह्मण बना दिया उसके

1039
01:14:08,600 --> 01:14:13,640
बाद व कहां से ज्ञानी हो गया कहां से उसके अंदर ये सब गुण आ गए ब्राह्मण वाले

1040
01:14:13,640 --> 01:14:17,840
ये ये सब गुण आएंगे उसम वो सीखेगा लर्न करेगा उसका

1041
01:14:17,840 --> 01:14:22,120
ब्राह्मण सुनिए ब्राह्मण के अनुसार उसका जनेऊ हो गया है

1042
01:14:22,120 --> 01:14:26,400
अब वो अपनी क्या कहते हैं जो क्या कहते गुरु गुरुकुल

1043
01:14:26,400 --> 01:14:30,960
है वहां रह कर के वेदा अध्ययन करेगा पाठ करेगा नियम संयम सीखेगा

1044
01:14:30,960 --> 01:14:34,960
और यदि वो इन सब में फेल हुआ तो वो पतित ब्राह्मण हो जाएगा

1045
01:14:34,960 --> 01:14:36,640
अगर पास हुआ अगर वो

1046
01:14:36,640 --> 01:14:40,800
करना सीख गया तो वो ब्राह्मण ब्राह्मण उचित ब्राह्मण कहलाएगा ब्राह्मण उचित

1047
01:14:40,800 --> 01:14:44,800
कार्य करने वाला ब्राह्मण मतलब वो प्रॉपर एक परफेक्ट ब्राह्मण

1048
01:14:44,800 --> 01:14:49,320
बनके बाहर निकलेगा अन्यथा जो ब्राह्मण के वेदोक्त कार्य

1049
01:14:49,320 --> 01:14:53,680
होंगे उनसे बहिष्कृत किया जाने वाला तिरस्कृत किया जाने वाला पतित

1050
01:14:53,680 --> 01:14:57,800
ब्राह्मण बनकर बाहर निकले यह आपने गुरु परंपरा से बोल

1051
01:14:57,800 --> 01:15:02,320
दिया है या किसी ग्रंथ से बोला है कि ग्रंथ में ऐसे लिखा हुआ है

1052
01:15:02,320 --> 01:15:06,360
कैसा जो आपने अभी बोला ने जो भी

1053
01:15:06,360 --> 01:15:10,480
बताया है वो ग्रंथ के आधार परही बताया है ग्रंथों के आधार

1054
01:15:10,480 --> 01:15:14,520
पर ही बताया है मगर आपकी भाषा में आपके शब्दों में

1055
01:15:14,520 --> 01:15:19,000
बिल्कुल एज इट इज लिखा हुआ हो यह कोई आवश्यक नहीं है

1056
01:15:19,000 --> 01:15:23,160
मैंने आपको बताया ऋग्वेद में ऋग्वेद में क्या बताया कि जन्म से जो

1057
01:15:23,160 --> 01:15:27,560
होता होगा जन्म से जो दज होगा वही यज्ञ में होता हो सकता है

1058
01:15:27,560 --> 01:15:31,760
जन्म से और यह आपको मैंने प्रमाण दिखा दिया ऋगवेद का

1059
01:15:31,760 --> 01:15:35,880
अब यहां पर लिखा हुआ जन्म जन्म से होने के बाद उसके कर्म अगर होंगे तो

1060
01:15:35,880 --> 01:15:39,920
वो होता बनेगा कर्म नहीं होंगे तो हटा दिया जाएगा मगर

1061
01:15:39,920 --> 01:15:44,080
मगर हमक किसको करेंगे जो जन्म से होगा जैसे आपने कहा हम चेक किसको करेंगे

1062
01:15:44,080 --> 01:15:48,520
बिटिया की विवाह के लिए अपने भाई बंधुओं में देखेंगे यह जो शुरुआती

1063
01:15:48,520 --> 01:15:51,880
पैरामीटर है यही है जन्म से वर्ण मगर ऐसा

1064
01:15:51,880 --> 01:15:55,880
नहीं है कि उसको हटाया नहीं जाएगा अगर उसके कर्म जो है उसके अनुसार नहीं होंगे

1065
01:15:55,880 --> 01:16:01,000
तो हटा दिया

1066
01:16:01,000 --> 01:16:05,040
जाएगा अब आपसे कात चर्चा हो गई है जो हमें

1067
01:16:05,040 --> 01:16:09,200
सामने लाना था आपले आए जनता डिसाइड करेगी आपका

1068
01:16:09,200 --> 01:16:14,040
आने के लिए आभार रविंद्र कुमार जी ठीक है

1069
01:16:14,040 --> 01:16:18,120
आभार और आपने जो आंसर दिया उनको जनता देख रही है आपने कितने सटीक आंसर दिया राम

1070
01:16:18,120 --> 01:16:24,120
जी का आपने बताया ज उरण करके बता दिया

1071
01:17:05,560 --> 01:17:10,040
वह अपना द्वेष कुछ द्वेष था उनके मन

1072
01:17:10,040 --> 01:17:14,360
में उसके लिए वह आए थे और

1073
01:17:14,360 --> 01:17:19,680
कह रहे थे कि भाई मुझे कोई वह नहीं है एक माइंड सेट होता है ना पता होता है

1074
01:17:19,680 --> 01:17:23,680
खैर इनके पास इस बात के जवाब नहीं

1075
01:17:23,680 --> 01:17:27,760
है कि अगर हम कर्म के अनुसार किसी व्यवस्था को स्वीकार

1076
01:17:27,760 --> 01:17:32,520
करते तो वो व्यवस्था एमप्लीफाई कैसे होगी समाज में एमप्लीफाई

1077
01:17:32,520 --> 01:17:36,760
करने की तो जगह ही नहीं है कि अगर किसी को पहचान करनी है तो हम कहां

1078
01:17:36,760 --> 01:17:40,960
से शुरुआत करें अगर हमने कोई भी स्टार्टिंग पॉइंट बोल दिया तो हम वहां पर एक

1079
01:17:40,960 --> 01:17:45,120
काउंटर कर सकते हैं कि नहीं भाई क्या जरूरी है कि पान की दुकान पर खड़ा हुआ व्यक्ति

1080
01:17:45,120 --> 01:17:49,160
वही हो अच्छा हो क्षत्रियो हो वैश्य शूद्र हो स्टार्टिंग पॉइंट

1081
01:17:49,160 --> 01:17:53,160
हर कोई अपने घर में अगर आर समाजी भी है अगर

1082
01:17:53,160 --> 01:17:57,160
वो आर समाज में तो कई जगहो पर कुल की बात की गई है कि

1083
01:17:57,160 --> 01:18:01,200
अपने से उच्च कुल में करें सत्यार्थ प्रकाश तो लोग

1084
01:18:01,200 --> 01:18:05,400
अपने घर में अच्छा घर हो अब ये अच्छे घर का जो पैरामीटर लिया गया है इससे सेट

1085
01:18:05,400 --> 01:18:09,880
नहीं होता है कि अच्छे घर का लड़का अच्छा होगा तो

1086
01:18:09,880 --> 01:18:13,880
इसका मतलब ये जो हम लोग वैकल्पिक वर्ण व्यवस्था तो तब भी ले रहे हैं

1087
01:18:13,880 --> 01:18:17,960
जन्म से अच्छा कर कह के अपने मित्रों में देखूंगा ये कह के मगर

1088
01:18:17,960 --> 01:18:20,560
जो शास्त्रो चित है परंपरा प्राप्त गुरुओं द्वारा दी गई

1089
01:18:20,560 --> 01:18:24,560
है उसको हम नकार क्योंकि हमारे मन में बीज डाला गया है नकारने

1090
01:18:24,560 --> 01:18:29,160
का भाई आप किसी रिक्शा चालक के यहां क्यों नहीं जाते

1091
01:18:29,160 --> 01:18:33,200
यह देखने कि उसका बेटा अच्छा है कि नहीं क्यों जाएंगे आप किसी

1092
01:18:33,200 --> 01:18:37,240
अच्छे घर में ही जो आपके अनुरूप अच्छा हुआ आप किसी

1093
01:18:37,240 --> 01:18:41,360
किसी भी श्रम कार्य करने वाले श्रमिक के घर क्यों नहीं जाएंगे चेक करने

1094
01:18:41,360 --> 01:18:45,560
कि उसका बेटा कहीं विदेश में नौकरी तो नहीं कर रहा है आपकी शुरुआती नजर अच्छे

1095
01:18:45,560 --> 01:18:49,840
घर पर ही क्यों होगी जो आपके अनुसार अच्छा है यही तो आपकी वैकल्पिक

1096
01:18:49,840 --> 01:18:54,040
जन्मना वर्ण व्यवस्था है जिसको आपने स्वीकार कर रखा है बस

1097
01:18:54,040 --> 01:18:58,200
वो नाम नहीं लेते आप ब्राह्मण क्षत्रिय वैश शूद्र का क्योंकि आपको

1098
01:18:58,200 --> 01:19:02,920
विरोध करना है परंपरा का परंपरा प्राप्त आचार्यों का

1099
01:19:02,920 --> 01:19:07,240
तो पूरी जो सार है जब इनसे बोला गया कि

1100
01:19:07,240 --> 01:19:11,480
कुल मिलाकर के बात आई प्रमाण कि जब उसका जने

1101
01:19:11,480 --> 01:19:15,880
होता है बचपन में तो वहां पर पहली बात इन्होंने कहा कि गुरु घोषित

1102
01:19:15,880 --> 01:19:18,200
करता

1103
01:19:18,200 --> 01:19:22,240
है गुरु घोषित गुरु के द्वारा घोषित होने पर

1104
01:19:22,240 --> 01:19:26,280
जब इनसे कहा गया प्रमाण दो तो इन्होंने प्रमाण नहीं दिया गुरु घोषित करता है इन्होंने कहा

1105
01:19:26,280 --> 01:19:30,280
कि गुरु वहां पर उनका अच्छा प्रमाण जब इन्होंने

1106
01:19:30,280 --> 01:19:34,360
वहां पर प्रमाण प्रस्तुत किया तो उसी से निकल के आया भाई जब गुरु यज्ञ पवित करता

1107
01:19:34,360 --> 01:19:35,720
है जब उसको दूसरा जन्म देता

1108
01:19:35,720 --> 01:19:39,960
है तो वहां घोषित हो जाता है ठीक है इसको घोषणा मान ली गई अब क्या आ रहा है कि वो यज्ञ

1109
01:19:39,960 --> 01:19:43,960
पवित कब होता है 11 वर्ष की उम्र तक तो इनको पता

1110
01:19:43,960 --> 01:19:48,760
नहीं है फिर ये शास्त्रों का मजाक उड़ा रहे हैं चैपो चैपो

1111
01:19:48,760 --> 01:19:53,280
कि उसको यह हो जाएगा वो हो जाएगा तो फिर ये सब है फिर इनके मन में कंट्रक्शन

1112
01:19:53,280 --> 01:19:57,400
है शास्त्रों को लेकर जन्म शूद्र तो फिर ये पूछा गया आपने शास्त्र

1113
01:19:57,400 --> 01:20:01,480
कहां से पढ़े तो वो पता नहीं है वो आधा आधा इसकी ईट उसका रोड़ा

1114
01:20:01,480 --> 01:20:05,600
और भानुमति का कुनबा जोड़ा है तो जिनका आप

1115
01:20:05,600 --> 01:20:09,600
शास्त्र लेकर पढ़ रहे हो उसी में लिखा हुआ है कि भैया गुरु के पास

1116
01:20:09,600 --> 01:20:13,800
जाकर अध्ययन करो तो अध्ययन क्यों नहीं किया अब जिसने किया है यदि

1117
01:20:13,800 --> 01:20:18,040
उससे शंका पटानी है तो उसने अपने गुरु के द्वारा क्या बात बताई गई बता दिया आपको

1118
01:20:18,040 --> 01:20:22,600
कि जहां पर जन्मना जाते शूद्र है वो शूद्र वत कहा गया है

1119
01:20:22,600 --> 01:20:27,040
शूद्र नहीं कह दिया गया है जैसे जिसका गुरु नहीं वो पशु है

1120
01:20:27,040 --> 01:20:31,040
तो पशु नहीं है अब ऋग्वेद में कहा गया जो भ्रूण की हत्या करते भ्रूण

1121
01:20:31,040 --> 01:20:35,080
को खाते हैं वो राक्षस है वोह राक्षस योनि में नहीं

1122
01:20:35,080 --> 01:20:39,760
है राक्षसों जैसे हैं मगर उनको राक्षस कहा गया सीधे-सीधे

1123
01:20:39,760 --> 01:20:43,960
जो अंडा खाते हैं है ना

1124
01:20:43,960 --> 01:20:49,960
तो उनको सीधे-सीधे राक्षस कहा गया रूण हत्या करने वालों को राक्षस कहा

1125
01:20:51,280 --> 01:20:55,280
गया तो ये सारी बातें हैं इसके बाद इनको बस को तर्क करने

1126
01:20:55,280 --> 01:20:59,360
हैं कि क्या कहते हैं वो शुरू में आए थे कि भाई मैं तो अपनी

1127
01:20:59,360 --> 01:21:03,400
जिज्ञासा शांत करने आया हूं तो जिज्ञासा शांत करनी है तो आपको बता दिया गया कि

1128
01:21:03,400 --> 01:21:07,440
जो आपके रेफरेंसेस है उसमें शूद्र वत की बात हो रही है तुलसीदास जी

1129
01:21:07,440 --> 01:21:11,680
की बात पूछी गई तो तुलसीदास जी का ही प्रमाण भी दे दिया गया

1130
01:21:11,680 --> 01:21:15,680
कि पूज वि प्र सकल गुण हीना और

1131
01:21:15,680 --> 01:21:20,000
शूद्र ना पूजू वेद प्रवीणा वो भी दे दिया गया तो उसमें भी नहीं राजी

1132
01:21:20,000 --> 01:21:24,040
है मतलब हम मानेंगे शास्त्र को मगर आंशिक रूप से जितना जितना

1133
01:21:24,040 --> 01:21:28,560
हम तय कर उतना मानेंगे यह सारी चीजें हैं

1134
01:21:28,560 --> 01:21:34,560
तो आज हिंदू राष्ट्र गोष्ठी का आयोजन

1135
01:21:35,000 --> 01:21:37,400
है

1136
01:21:37,400 --> 01:21:43,400
अ सभी शुद्ध

1137
01:21:46,120 --> 01:21:50,160
सनातनी हा अंतरजातीय ववा करने से बचे और इसका जो

1138
01:21:50,160 --> 01:21:54,840
मेन उद्देश्य है वो यही है कि जो वंश परंपरा द्वारा आपको जो

1139
01:21:54,840 --> 01:21:58,960
प्राप्त है वो जो जीनस है वो जो जेनेटिक्स

1140
01:21:58,960 --> 01:22:03,400
मिल रहे हैं आपको वंश से उसकी शुद्धता बनी रहे इसके लिए आवश्यक है कि

1141
01:22:03,400 --> 01:22:07,560
जितना हो सके हम शास्त्रोक्त नियमों के अनुसार विवाह करें जिससे कि

1142
01:22:07,560 --> 01:22:11,920
एक शुद्ध ब्राह्मण बचा रहे पृथ्वी पर एक शुद्ध क्षत्रिय

1143
01:22:11,920 --> 01:22:16,040
एक शुद्ध वैश्य एक शुद्र शुद्ध शूद्र बचा रहे अब

1144
01:22:16,040 --> 01:22:20,440
बात ये आती है कि यदि इसके

1145
01:22:20,440 --> 01:22:24,840
उलट इनसे जब पूछा जाएगा तो इनके पास कोई उत्तर नहीं है कि गुरु

1146
01:22:24,840 --> 01:22:29,440
कैसे घोषित कर रहा है भाई इनकी व्यवस्था क्या है वो तो इन्होने बताई नहीं

1147
01:22:29,440 --> 01:22:33,480
कि किसके द्वारा किसी का ब्राह्मण क्षत्रिय वैश्य शूद्र घोषित होगा

1148
01:22:33,480 --> 01:22:37,600
इनके पास क्या व्यवस्था है इसके बारे में क्योंकि जो

1149
01:22:37,600 --> 01:22:41,680
य व्यवस्था बता रहे वह शास्त्रों में तो है नहीं जब इन्होने शास्त्रों से आंसर

1150
01:22:41,680 --> 01:22:45,920
दिया तो काउंटर हो रहा है क्योंकि वो आ साल की उम्र वाली बात आ गई तो इनके

1151
01:22:45,920 --> 01:22:50,120
पास ये क्या है कि कोई व्यक्ति किस आधार पर अपने आप को अधिकृत

1152
01:22:50,120 --> 01:22:54,720
करेगा कि मैं इसका ब्राह्मण क्षत्रिय वैश और शूद्र घोषित करूंगा तो इन

1153
01:22:54,720 --> 01:22:58,960
बातो में इनका व रहा यह समरी मैंने आज की चर्चा की बताई हालांकि

1154
01:22:58,960 --> 01:23:03,360
रोचक थी व्यक्ति ने कई तरह से विषयात

1155
01:23:03,360 --> 01:23:07,440
कर करके कर करके काफी देर तक चर्चा की आगे आप लोगों के ऊपर

1156
01:23:07,440 --> 01:23:12,040
है जो भी निर्णय ले और सर जी

1157
01:23:12,040 --> 01:23:16,280
राम यह शिवलिंग का क्या अर्थ है आप जरा

1158
01:23:16,280 --> 01:23:20,400
बताएं फिर किसी दिन हम बता देंगे जो शिवलिंग

1159
01:23:20,400 --> 01:23:24,680
है राम राम य शिवलिंग का अर्थ क्या है शिवलिंग जो

1160
01:23:24,680 --> 01:23:28,880
प्रतीक भी है लिंग का अर्थ केवल वो गुप्तांग ही नहीं होता है

1161
01:23:28,880 --> 01:23:32,880
प्रतीक भी होता है लिंग का अर्थ और कई जगहो

1162
01:23:32,880 --> 01:23:37,160
पर शास्त्रों में प्रतीक के रूप में ही लिंग की वही है उपस्थिति बहुत

1163
01:23:37,160 --> 01:23:43,160
कुछ आप देखो बहुत मजा आएगा

1164
01:23:46,680 --> 01:23:50,760
आपको देखिए परंपरा प्राप्त आचार्य का मापदंड पूछ रहे

1165
01:23:50,760 --> 01:23:54,840
हैं वो गलत बात बोल सकता है बिल्कुल बोल सकता है मगर यदि आप उस पर

1166
01:23:54,840 --> 01:23:59,640
विश्वास नहीं है तो उसकी किसी चीज पर विश्वास मत करो ना उस धर्म को छोड़ दो

1167
01:23:59,640 --> 01:24:04,120
जो आपको परंपरा से प्राप्त हुआ है उस धर्म को छोड़ दो कह दो मैं नहीं मानता सनातन

1168
01:24:04,120 --> 01:24:08,960
खुद को वैदिक क्यों कह रहे हो फिर मत कहो पहले वेदों से बाहर जाओ

1169
01:24:08,960 --> 01:24:13,600
सनातन से बाहर जाओ विधर्मी बनो फिर हम आपको आंसर करेंगे हम आंसर करेंगे

1170
01:24:13,600 --> 01:24:17,680
मगर सबसे पहले अपनी जोय संज्ञा है कि हम सनातनी है सनातनी क्यों है परंपरा

1171
01:24:17,680 --> 01:24:21,760
प्राप्त आचार्य द्वारा प्राप्त होने वाले परंपरा प्राप्त ग्रंथों को मानने के कारण अब जब

1172
01:24:21,760 --> 01:24:26,040
आप परंपरा प्राप्त जो आचार्य पर अविश्वास प्रस्ताव

1173
01:24:26,040 --> 01:24:30,040
ला रहे हैं तो लाइए मगर फिर आप वैदिक नहीं हुए ना

1174
01:24:30,040 --> 01:24:36,040
ठीक

1175
01:24:37,440 --> 01:24:41,680
है गुरु होते ही इसलिए हैं कि जब दो एक दूसरे

1176
01:24:41,680 --> 01:24:46,560
के विरोधी बातें आने लगे शास्त्रों में मति भ्रष्ट होने लगे तो उसको क्लेरिफाई करें

1177
01:24:46,560 --> 01:24:52,280
इस पर हमने एक वीडियो बनाया

1178
01:24:52,280 --> 01:24:56,360
था शिवांश भाई मैं खुद आयुष पासी

1179
01:24:56,360 --> 01:25:01,000
प्रयागराज में खुद पासी समाज से आया हूं आपके

1180
01:25:01,000 --> 01:25:05,440
अवध में रावत वर्मा इत्यादि नाम के नाम से जाने जाते हैं और सनातनी

1181
01:25:05,440 --> 01:25:10,400
है यद्यपि भारत में जनरल ओबीसी

1182
01:25:10,400 --> 01:25:14,480
एससी में सभी आते हैं जी बहुत बढ़िया बहुत

1183
01:25:14,480 --> 01:25:18,520
अच्छे इससे कोई फर्क नहीं पड़ता है कि हम लोग वर्ण से क्या है बस अपने वर्ण

1184
01:25:18,520 --> 01:25:24,520
की सीमा में रहकर यदि हम अपने धर्म का पालन कर रहे हैं तो हम श्रेष्ठ है

1185
01:25:27,880 --> 01:25:32,480
आपका पहला वीडियो है जो बेकार लगा हो सकता है

1186
01:25:32,480 --> 01:25:38,480
भाई शिवांश भाई हमने निर्णय ले लिया है कि वह मूड था और कुछ

1187
01:25:43,280 --> 01:25:47,360
नहीं मूर्ति पूजा का रेफरेंस बहुत जगह है

1188
01:25:47,360 --> 01:25:51,760
हम लोग यह मूर्ति पूजा का रेफरेंस आप

1189
01:25:51,760 --> 01:25:56,240
देखिएगा इसके डिस्क्रिप्शन में हम लोग डाल अथर्ववेद

1190
01:25:56,240 --> 01:26:02,240
में है ऋग्वेद में है जहां तक

1191
01:26:16,920 --> 01:26:22,920
है चलिए आने के लिए बहुत-बहुत धन्यवाद आपको

1192
01:26:25,720 --> 01:26:30,080
जिसको भी कोई वैचारिक मतभेद है और उसको लगता है कि वह सशक्त

1193
01:26:30,080 --> 01:26:34,240
है अपने विचारों को लेकर के और रख सकते हैं तो वह

1194
01:26:34,240 --> 01:26:38,640
आए और अपने विचार यहां पर रख सकते हैं हमसे चर्चा कर सकते हैं

1195
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चर्चा करने का तरीका आप नंबर नोट कर ले

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7408

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30169 और वहां जब आप ट करेंगे तो आपको फॉर्म

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मिलेंगे एक फम होगा वैचारिक मतभेद के निमि

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निमित्त चर्चा उसको आप भरिए और हम आपसे लाइव में आ करके बातचीत करेंगे

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दूसरा एक फॉर्म होगा धर्म रक्षा अभियान से जुड़ने के लिए अगर आप वहां जुड़ना चाहते

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जुड़ सकते हैं एक फॉर्म होगा आवान की जो क्लासेस चलती

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है उनमें आने के लिए तो आप उस फॉर्म को भी भर सकते हैं जो

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आइडल जिकल डिसएग्रीमेंट के अलावा

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जो क्या कहते हैं जो दो फॉर्म है उनको जब

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आप भर देंगे तो उसके बाद एक प्रक्रिया होगी आपका वेरिफिकेशन

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वगैरह किया जाता है उसके बाद ही आपको उन ग्रुप्स में जोड़ा जाएगा

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तो उसके लिए उसको आप जान मतलब यथा योग्य तरीके से

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जानते हो तभी उस फॉर्म को

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भरे राम जी हैं हमारे ईस्ट श्री राम जी हैं राम जी का

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जब करते हैं अच्छा अभी तो

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सबको सॉरी ता है जिसको इंजीनियर बनना उसके लिए

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शिक्षा उपलब्ध

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है शुरुआत से पढ़िए नास्तिक भी आस्तिक से पढ़े पर

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पात्र जी की जो बुक हो

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उसको इसके लिए जन्मना वर्ण व्यवस्था के लिए उनके बहुत

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सारे ग्रंथ है आदि शंकराचार्य जी के उनका आप अध्ययन कर

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सकते हैं ममना मा अनुशासनम में ये चीज मिल जाएंगे

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आपको इफ यू कैन डिफीट ए फेमिनिस्ट यू कैन बी

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ए यू कैन बी हिंदू पता नहीं क्या लिखा

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है समझ में नहीं आ रहा लास्ट में ठीक है तो सभी को जय

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शीराम ब
