1
00:00:02,280 --> 00:00:07,560
सभी को जय श्री

2
00:00:07,560 --> 00:00:11,800
राम जिन जिनको आना है वह थोड़ा सा लेट है

3
00:00:11,800 --> 00:00:16,440
अभी तो इस कारण से

4
00:00:16,440 --> 00:00:20,920
हमें भी थोड़ा सा समय लग गया आने में

5
00:00:20,920 --> 00:00:25,160
तब तक अगर कोई और आना चाहे

6
00:00:25,160 --> 00:00:29,280
डिसएग्रीमेंट को लेकर के किसी प्रकार के तो आ सकता है

7
00:00:29,280 --> 00:00:35,280
फोटो के सा पेस्ट को रिवील करते

8
00:00:37,600 --> 00:00:41,720
हुए अभी हम लोग एक वीडियो लाने वाले हैं प्रॉपर जिसमें

9
00:00:41,720 --> 00:00:46,440
रामपाल के बारे में बात

10
00:00:46,440 --> 00:00:50,560
होगी यह जब हम मेले में गए थे तो वहां पर रामपाल का शिविर

11
00:00:50,560 --> 00:00:54,720
लगा हुआ था सतलोक आश्रम के नाम से वहां से एक कहानी

12
00:00:54,720 --> 00:01:00,360
शुरू हुई जब पहले पहले मैं गया तो

13
00:01:00,360 --> 00:01:04,760
जैसा उसमें बताया भी है कि हम लोग वीडियो रिकॉर्डिंग कर रहे थे सवाल जवाब करते

14
00:01:04,760 --> 00:01:09,360
समय और उन्होंने वीडियो बंद करवा दिया

15
00:01:09,360 --> 00:01:12,800
था तो मुझे

16
00:01:12,800 --> 00:01:16,880
इतना कष्ट हुआ था हृदय में कि पहले

17
00:01:16,880 --> 00:01:21,760
मैं उनके पास नहीं गया दोबारा पहले मैंने एक स्पीकर मंगवाया

18
00:01:21,760 --> 00:01:25,800
जो पोर्टेबल स्पीकर होता है मेरे पास है उसके

19
00:01:25,800 --> 00:01:31,640
उसकी सहायता से गोष्ठी आदि करने में भी सहज रहता

20
00:01:31,640 --> 00:01:35,680
तो वो स्पीकर मैंने मंगाया और उस स्पीकर

21
00:01:35,680 --> 00:01:40,040
को लेके वहां पर एक शो चल रहा था लखनऊ महोत्सव में

22
00:01:40,040 --> 00:01:44,240
इवेंट अलग मतलब वह एक मेला है मेले के अंदर

23
00:01:44,240 --> 00:01:48,640
स्टॉल्स लगे हुए हैं उनमें से एक स्टॉल सतलोक आश्रम के नाम से

24
00:01:48,640 --> 00:01:53,000
रामपाल की है और कबीर पंथिया

25
00:01:53,000 --> 00:01:57,160
की है और वही उसी मेले में लखनऊ

26
00:01:57,160 --> 00:02:01,360
महोत्सव का इवेंट चल रहा है वहां दिन में शो हो रहे हैं काव्य

27
00:02:01,360 --> 00:02:06,040
गान हो रहा है नृत्य हो रहा है ड्रामा हो रहा है ये सब चल रहा है

28
00:02:06,040 --> 00:02:10,280
तो मुझे इतना वहां पर कष्ट हुआ कि मैंने पहले उनके

29
00:02:10,280 --> 00:02:16,280
पास दोबारा ना जाकर के पहले मैंने एक स्पीकर मंगवाया

30
00:02:16,520 --> 00:02:21,080
और स्पीकर लेकर के वहां जहां शो हो रहा था जहां पब्लिक

31
00:02:21,080 --> 00:02:25,280
मंच की ओर देख रही है वहां मैं इधर से अपना स्पीकर अपने हाथ में लेकर

32
00:02:25,280 --> 00:02:31,280
गया और वहां हिंदुओं को ललकार नहीं लगा

33
00:02:32,400 --> 00:02:36,920
तुम्हारी आत्मा क्या मर चुकी है क्या तुम्हारा आत्म

34
00:02:36,920 --> 00:02:41,240
सम्मान नष्ट हो चुका है जिस मेले

35
00:02:41,240 --> 00:02:45,280
में जिस जगह बैठकर आप

36
00:02:45,280 --> 00:02:50,440
यहां पर मनोरंजन कर रहे हो उसी मेले में उसी

37
00:02:50,440 --> 00:02:54,600
जगह एक व्यक्ति ने एक स्टॉल लगाया हुआ है जहां पर वह कह रहा

38
00:02:54,600 --> 00:02:58,800
है कि ब्रह्मा विष्णु महेश भगवान नहीं है

39
00:02:58,800 --> 00:03:03,080
और दुर्गा के पति भगवान शंकर नहीं है शिव

40
00:03:03,080 --> 00:03:07,760
नहीं है बल्कि इनके द्वारा खड़ा किया गया एक

41
00:03:07,760 --> 00:03:11,880
तथाकथित काल नाम का ब्रह्म है

42
00:03:11,880 --> 00:03:16,720
उसको ब्रह्म भी नाम दिया इन्होंने मगर वो वो वाला ब्रह्म नहीं है जो सनातन ब्रह्म

43
00:03:16,720 --> 00:03:20,920
ब्रह्म नाम से है वैसे ही जैसे इसकन का

44
00:03:20,920 --> 00:03:25,200
कृष्ण इन्होंने उसको नाम दिया ब्रह्म

45
00:03:25,200 --> 00:03:29,320
ज्योति निरंजन तो मैंने कहा तुम्हें शर्म आनी चाहिए लज्जा आनी

46
00:03:29,320 --> 00:03:33,640
चाहिए कि यह मैं माइक पर बोलने लगा

47
00:03:33,640 --> 00:03:38,520
अब सब लोग परेशान हो गए जो दर्शक थे वह परेशान हो गए कि भाई

48
00:03:38,520 --> 00:03:42,840
मंच उधर है यहां से कौन सा कौन सा प्रस्तुति दी जा रही है

49
00:03:42,840 --> 00:03:47,200
और जो प्रबंधक थे वहां पर इवेंट के

50
00:03:47,200 --> 00:03:47,700
वह

51
00:03:47,480 --> 00:03:52,040
प्रबंधक प्रतिकार स्वरूप मेरे पास आने लगे के मतलब दंडात्मक

52
00:03:52,040 --> 00:03:56,120
कारवाई की जाए मगर जब वो मेरे पास आए तो मैंने

53
00:03:56,120 --> 00:04:00,280
जो बातें उनसे की उनका उनके पास उत्तर नहीं था प्रबंधक

54
00:04:00,280 --> 00:04:04,440
पूरे महोत्सव के थे जो वहां पर थे तो मैंने उनसे कहा कि आपने यहां

55
00:04:04,440 --> 00:04:07,400
पर

56
00:04:07,400 --> 00:04:11,440
क्यों आपने यहां पर क्यों ये स्टॉल लगने दिया

57
00:04:11,440 --> 00:04:15,920
है सतलोक आश्रम का आप भी इसके जिम्मेदार

58
00:04:15,920 --> 00:04:20,240
है अगर कोई व्यक्ति अपनी मूल धारा को छोड़

59
00:04:20,240 --> 00:04:24,440
कर के अपने जो मठ मंदिर है उन्हें छोड़ कर के अब इनके

60
00:04:24,440 --> 00:04:28,720
आश्रम जाने लगेगा ब्रह्मा विष्णु महेश को भगवान नहीं

61
00:04:28,720 --> 00:04:33,200
मानने लगेगा तो उसके जिम्मेदार आप भी होंगे

62
00:04:33,200 --> 00:04:37,360
तो फिर उन्होंने कहा कि आपको कोर्ट जाना चाहिए आपको यह करना चाहिए वो करना चाहिए

63
00:04:37,360 --> 00:04:41,360
मैंने कहा वो भी करेंगे समय आएगा ऐसा हुआ था तो

64
00:04:41,360 --> 00:04:46,800
वो जो मेले उसके बाद में उनके पास दोबारा गया था

65
00:04:46,800 --> 00:04:50,880
तो उसके बाद जब कबीर पंयो से चर्चा हुई है व पूरी चर्चा तो

66
00:04:50,880 --> 00:04:53,280
आपने देखी

67
00:04:53,280 --> 00:04:57,400
है फिर कबीर पंथिया की वो जो चर्चा है वो

68
00:04:57,400 --> 00:05:01,720
अभी भी हमारे चैनल पर सबसे ज्यादा वही वीडियो जो है

69
00:05:01,720 --> 00:05:02,760
देख रहे हैं लोग

70
00:05:02,760 --> 00:05:06,880
और शायद उससे जागरूकता आ रही है तो अब क्या हो रहा है कि

71
00:05:06,880 --> 00:05:11,320
जो कबीर पंथ ये तथाकथित कबीर पंथ क्योंकि ये कबीर पंथ

72
00:05:11,320 --> 00:05:15,520
वो वाला भी है जो सही उसपे है तो तथाकथित कबीर

73
00:05:15,520 --> 00:05:19,560
पंत है जो वो अ अब

74
00:05:19,560 --> 00:05:23,680
उसके फॉलोअर्स जो है अजीब अजीब तरीके से कुछ कुतर्क

75
00:05:23,680 --> 00:05:28,400
युक्त समाधान करने की का प्रयास करते हैं

76
00:05:28,400 --> 00:05:32,560
उस वीडियो के विरोध में और सामना होगा तो मेरे

77
00:05:32,560 --> 00:05:36,840
ख्याल से चर्चा में पाच 10 मिनट में ही उनका समाप्त

78
00:05:36,840 --> 00:05:41,000
हो जाता है क्योंकि हमारे जो सिद्धांत है बिल्कुल स्पष्ट है क्लियर

79
00:05:41,000 --> 00:05:43,360
है

80
00:05:43,360 --> 00:05:46,920
कि

81
00:05:46,920 --> 00:05:51,160
अ सर्वशक्तिमान ईश्वर परम स्वतंत्र मोक्ष और

82
00:05:51,160 --> 00:05:55,360
शाश्वत धर्म हम किसी के विरोध में नहीं है तीन चीजें

83
00:05:55,360 --> 00:05:59,360
जहां से मिलेगी वही सनातन है वही आपकी सही शिक्षा

84
00:05:59,360 --> 00:06:05,360
है शाश्वत धर्म सनातन

85
00:06:05,720 --> 00:06:09,800
नहीं व्यास करके हैं यह इनका नाम समझ में नहीं आ रहा

86
00:06:09,800 --> 00:06:14,200
है सियोन आगम शास्त्रों में स्त्रियों

87
00:06:14,200 --> 00:06:17,960
और शूद्रों को जने अलाउड

88
00:06:17,960 --> 00:06:23,960
है आपने आगम शास्त्रों का अध्ययन कहां से किया

89
00:06:27,040 --> 00:06:31,040
है यह शाश्वत धर्म वाला जो प उसके अंतर्गत आ जाता है

90
00:06:31,040 --> 00:06:35,480
प्रश्न जब कोई आपको विवादित

91
00:06:35,480 --> 00:06:40,440
बात बताने लगे तो हमारा पहला क्वेश्चन क्या होना चाहिए

92
00:06:40,440 --> 00:06:44,640
आपने आगम शास्त्रों का अध्ययन कहां से किया है

93
00:06:44,640 --> 00:06:49,160
मैं कई बार ऐसा सोचता हूं मुझे कई बार प्रश्न आते हैं कि

94
00:06:49,160 --> 00:06:53,160
कोई ऐसा विरोधी बात कह रहा है कोई ऐसा प्रमाण दे रहा है

95
00:06:53,160 --> 00:06:57,280
तो सभी सनातनी हों को सारे प्रमाण लेकर चलने की आवश्यकता

96
00:06:57,280 --> 00:07:02,080
नहीं है मैं ये बात रील बनाना चाह रहा था एक

97
00:07:02,080 --> 00:07:06,360
सभी सनातनी हों को सारे ग्रंथ के प्रमाण

98
00:07:06,360 --> 00:07:10,480
हाथ में लेकर चलने की आवश्यकता नहीं अपने धर्म की रक्षा के लिए उसके लिए

99
00:07:10,480 --> 00:07:15,680
क्या आवश्यक है केवल एक चीज याद कर लो परंपरा प्राप्त

100
00:07:15,680 --> 00:07:19,760
आचार जब भी कोई व्यक्ति विरोधी बात बोलेगा वह परंपरा

101
00:07:19,760 --> 00:07:22,560
से नहीं

102
00:07:22,560 --> 00:07:26,640
होगा वो व्यक्ति उसकी परंपरा सिद्ध नहीं हो पाएगी

103
00:07:26,640 --> 00:07:31,600
तो आपको क्वेश्चन जो रटना है वो यह रट टना

104
00:07:31,600 --> 00:07:35,720
है राम ने यह किया

105
00:07:35,720 --> 00:07:39,920
कहां से पढ़ा या आगम शास्त्रों

106
00:07:39,920 --> 00:07:45,480
में यह दिया है कहां से

107
00:07:45,480 --> 00:07:49,480
पढ़ा है ना तो पहले आपका क्वेश्चन होना चाहिए

108
00:07:49,480 --> 00:07:53,760
परंपरा प्राप्त जो ज्ञान आप दे रहे हैं

109
00:07:53,760 --> 00:07:59,760
वो आपने कहां से प्राप्त किया है

110
00:08:00,840 --> 00:08:04,840
और सभी प्रश्नों का उत्तर इसमें

111
00:08:04,840 --> 00:08:09,160
हो जाता है आपको कोई भी परेशान कर रहा है शास्त्रों का प्रमाण

112
00:08:09,160 --> 00:08:13,440
लेकर उसका अपने तरीके से अर्थ वगैरह करके तो सीधे पूछो

113
00:08:13,440 --> 00:08:17,640
आपने अध्ययन कहां से किया भाई हम परंपरा प्राप्त जो प्रामाणिक आचार्य शंकराचार्य

114
00:08:17,640 --> 00:08:21,640
उनके उनसे हम अपने सिद्धांत लेते हैं वो उन्होंने

115
00:08:21,640 --> 00:08:26,160
बताया हमने यहां से अध्ययन किया है और हम राघवाचार्य

116
00:08:26,160 --> 00:08:30,200
जी के शिष्य है हम या प्रेमानंद जी के शिष्य

117
00:08:30,200 --> 00:08:34,200
निंबार्काचार्य जी के शिष्य हैं तो यह सब परंपरा प्राप्त

118
00:08:34,200 --> 00:08:38,640
संत है आपने अध्ययन कहां से किया

119
00:08:38,640 --> 00:08:42,760
आर्य समाज पूज्य शंकराचार्य के शिष्यों से ही

120
00:08:42,760 --> 00:08:47,240
डर गया और शास्त्रार्थ करने की बात करते हैं

121
00:08:47,240 --> 00:08:51,480
पूज्य शंकराचार्य से यह मुझे थोड़ा सा लगा है व जो एक पत्र

122
00:08:51,480 --> 00:08:55,640
आया है अभी उसका सत्यापन नहीं हुआ वो जो पत्र कहां से निकला है क्या

123
00:08:55,640 --> 00:09:00,160
है मगर एक बात है कि वो यदि सत्य है तो तो

124
00:09:00,160 --> 00:09:00,660
उसमें

125
00:09:00,520 --> 00:09:04,600
य लिखा हुआ है उस पत्र में

126
00:09:04,600 --> 00:09:08,600
कि वो जो है जो व्यक्ति

127
00:09:08,600 --> 00:09:12,880
है मेरे बारे में बताया गया कि यह व्यक्ति है जो तरह तरह के सवाल करता है

128
00:09:12,880 --> 00:09:17,480
इसके साथ आप बैठ के चर्चा ना करें और अगर करें भी तो

129
00:09:17,480 --> 00:09:22,160
तिथि सुनिश्चित करें विषय सुनिश्चित करें और किसी

130
00:09:22,160 --> 00:09:26,280
अपने से श्रेष्ठ विद्वान से कराए तो वहां पर वह

131
00:09:26,280 --> 00:09:31,040
श्रेष्ठ विद्वान का पैरामीटर नहीं बताया जैसे

132
00:09:31,040 --> 00:09:35,080
स्कोन मैं कहता हूं ना स्कोन थोड़ा सा आर्य समाज की

133
00:09:35,080 --> 00:09:39,600
अपेक्षाकृत ठीक है भले ही विवादित परंपरा ही सही पर परंपरा

134
00:09:39,600 --> 00:09:43,640
बोलते तो हैं कि हमारे पास ऐसे ज्ञान आया परंपरा

135
00:09:43,640 --> 00:09:47,720
को सम्मान तो दिया विवादित सही वो उस पर प्रश्न

136
00:09:47,720 --> 00:09:51,800
चिन्ह है कि उनकी परंपरा पर प्रश्न है मगर

137
00:09:51,800 --> 00:09:56,560
कम से कम परंपरा का नाम तो लेते हैं इसके साथ ही साथ

138
00:09:56,560 --> 00:10:00,560
जैसे हमने कई बार पूछा कि आर्य समाज का अधिकृत किसे माना जाए किसे

139
00:10:00,560 --> 00:10:04,920
ना माना जाए इस संबंध में आर्य समाज की कोई नियमावली बता

140
00:10:04,920 --> 00:10:08,920
दें वो बात और है कि वो सनातन धर्म ग्रंथों से मैच करती है या

141
00:10:08,920 --> 00:10:13,320
नहीं मगर अभी तक मुझे वह नियमावली नहीं बताई गई है कि आर

142
00:10:13,320 --> 00:10:15,640
समाज का अधिकृत व्यक्ति कौन होगा क्या

143
00:10:15,640 --> 00:10:19,800
इसके लिए यह लोकतांत्रिक जो संविधान है उस पर निर्भर करते

144
00:10:19,800 --> 00:10:23,800
हैं अगर करते हैं तो फिर वोह तो शाश्वत नहीं है है

145
00:10:23,800 --> 00:10:27,840
ना वो तो बदल जाएगा नियमावली तो चेंज हो जाएगी जो सत्ता

146
00:10:27,840 --> 00:10:32,680
में पहुंचेगा जिसका बहुमत हो जाएगा बदल देगा संविधान संशोधित कर देगा

147
00:10:32,680 --> 00:10:36,880
तो इसका अर्थ यह है कि आपके यहां पर ऐसा

148
00:10:36,880 --> 00:10:41,600
कोई विधान नहीं है कि किसको अधिकृत माना जाए किसको ना माना जाए यह भी

149
00:10:41,600 --> 00:10:45,720
एक बहुत बड़ा प्रमाण है इस बात का कि आपके यहां पर गुरु परंपरा

150
00:10:45,720 --> 00:10:49,960
को फॉलो नहीं किया जाता है क्योंकि जो गुरु परंपराएं हैं

151
00:10:49,960 --> 00:10:54,000
उनके यहां पर जो गद्दी है वह सुरक्षित होती है सुनिश्चित

152
00:10:54,000 --> 00:11:00,000
होती है भाई इस परंपरा की जो सर्वोच्च गद्दी है वो ये है

153
00:11:02,520 --> 00:11:06,760
तो वो नहीं दिया जाता तो उसमें यह कहा गया है कि अपने से श्रेष्ठ से कराए

154
00:11:06,760 --> 00:11:10,800
अब बात यह आती है कि कोई व्यक्ति अपने को निम्न क्यों समझेगा किस आधार पर समझेगा

155
00:11:10,800 --> 00:11:15,440
क्योंकि नियमावली तो है नहीं उसको स्वविवेक का पालन ही करना पड़ेगा

156
00:11:15,440 --> 00:11:19,480
कि भाई मैं प्रयास करता हूं यह जो सज्जन आए हैं इनके प्रश्नों का उत्तर

157
00:11:19,480 --> 00:11:23,520
देने का मगर अब जब तक मुझसे वार्ता

158
00:11:23,520 --> 00:11:27,760
हुई नहीं है चीजें नहीं हुई है तो फिर

159
00:11:27,760 --> 00:11:32,040
वो क्या करें ऐसे

160
00:11:32,040 --> 00:11:36,240
तो इसका अर्थ यह है कि और यह बात कह कर के इन्होंने एक

161
00:11:36,240 --> 00:11:40,880
बात और पत्र के माध्यम से सिर्फ बता दी

162
00:11:40,880 --> 00:11:45,320
जैसे कि व जो मातृ शक्ति है जो

163
00:11:45,320 --> 00:11:50,720
निष्ठा विद्या अलंकार उनके साथ जो चर्चा हुई थी उसमें उन्होंने

164
00:11:50,720 --> 00:11:53,800
कहा

165
00:11:53,800 --> 00:11:57,960
कि जो व्यक्ति का उपनयन संस्कार है वो उसके

166
00:11:57,960 --> 00:12:02,320
पूर्वजों के अनुसार होता है उसके पूर्वज यदि क्षत्रिय होंगे

167
00:12:02,320 --> 00:12:06,440
तो उसका उपनयन होगा क्षत्रिय के अनुसार और

168
00:12:06,440 --> 00:12:10,520
उसके पूर्वज यदि ब्राह्मण होंगे तो उसका उपनयन होगा ब्राह्मण के

169
00:12:10,520 --> 00:12:14,880
अनुसार तो फिर यहां से वंश परंपरा के अकॉर्डिंग

170
00:12:14,880 --> 00:12:18,920
जिसको जन्म जन्मना वर्ण व्यवस्था कहा जाता है उसको स्वीकार

171
00:12:18,920 --> 00:12:23,440
कर लिया क्यों क्योंकि जिसके क्षत्रिय पूर्वज होंगे उसका तो क्षत्रिय के अनुसार हो जाएगा

172
00:12:23,440 --> 00:12:27,760
मगर जिसके पूर्वज शूद्र रहे होंगे उसका तो होगा ही नहीं

173
00:12:27,760 --> 00:12:31,080
आपके ही अकॉर्डिंग

174
00:12:31,080 --> 00:12:35,160
तो ऐसा कहा उन्होंने ठीक विपरीत है ये आर्य

175
00:12:35,160 --> 00:12:39,800
समाज की जो विचारधारा है उसके मगर फिर

176
00:12:39,800 --> 00:12:43,920
भी उनको गर्गी कहा गया आधुनिक गर्गी कहा

177
00:12:43,920 --> 00:12:47,920
गया सब कुछ कहा गया मगर यदि य पत्र सही है तो उसमें

178
00:12:47,920 --> 00:12:51,960
यह जाहिर किया गया कि अभी तक हमारी चर्चा जिससे भी हुई है उन्होंने हमारे

179
00:12:51,960 --> 00:12:56,800
प्रश्नों के उत्तर ठीक से नहीं दिए गए दिए हैं और

180
00:12:56,800 --> 00:13:01,040
और आगे से ज अगर किसी के पास व्यक्ति पहुंचते हैं तो अपने से श्रेष्ठ

181
00:13:01,040 --> 00:13:05,120
से चर्चा कराए तो अनकहे तौर पर यह मान लिया गया कि अभी तक जितने से

182
00:13:05,120 --> 00:13:09,160
भी चर्चा हुई है वह सब जो है उत्तर नहीं दे पाए और व कहीं ना कहीं निम्न

183
00:13:09,160 --> 00:13:15,160
थे उनके पास जवाब नहीं

184
00:13:15,200 --> 00:13:19,360
था हां तो काफी देर

185
00:13:19,360 --> 00:13:25,360
हो रही है लगभग 10 से 15 मिनट हो चुके

186
00:13:25,480 --> 00:13:29,640
हैं आप लाइव आ जाओ ना अगर कोई कबीर पंथी है

187
00:13:29,640 --> 00:13:34,520
चर्चा करना चाहता है तो लाइव आ

188
00:13:34,520 --> 00:13:38,560
जाओ है कोई कबीर पंथी अभी नयन नाम का

189
00:13:38,560 --> 00:13:44,560
है

190
00:13:51,320 --> 00:13:55,560
और आपको कैसे पता कि स्त्रियों ने वेद लिखने में हेल्प की किसने

191
00:13:55,560 --> 00:14:00,120
बताया आपको वेदांत राणा जी बोल रहे

192
00:14:00,120 --> 00:14:02,360
हैं

193
00:14:02,360 --> 00:14:06,520
हम कैसे पता पहली बात तो ये है कि जिनका

194
00:14:06,520 --> 00:14:11,560
जिनकी आप तुलना कर रहे हो यह 64

195
00:14:11,560 --> 00:14:15,600
नारायण नयनार में चार से पांच फीमेल ऋषि थे

196
00:14:15,600 --> 00:14:19,640
अच्छा आप एक बात बताओ आप बोलते हो जैसे आर्य समाज की ऋषि परंपरा

197
00:14:19,640 --> 00:14:23,920
है उसमें कितनी महिलाएं स्त्रियां

198
00:14:23,920 --> 00:14:28,400
थी जिनसे होते हुए वो ज्ञान आ रहा है आपके पिछले पाच 10 में कितने

199
00:14:28,400 --> 00:14:30,880
ऋषि पर में आपकी स्त्रियां

200
00:14:30,880 --> 00:14:35,680
थ और पहली बात यह है वेदांत राणा जी कि

201
00:14:35,680 --> 00:14:39,760
उपनयन कराना वेदा अध्ययन करना वेदों को ठीक उसी

202
00:14:39,760 --> 00:14:44,120
प्रकार से पढ़ना जिस प्रकार से वेद रूप में जाने जाने वाले जो ग्रंथ

203
00:14:44,120 --> 00:14:48,280
है यह मनुष्य का लक्ष्य नहीं है तो अगर वेदों का ही

204
00:14:48,280 --> 00:14:52,280
मर्म उन्हे पुराण के आधार पर मिल रहा है या

205
00:14:52,280 --> 00:14:56,640
वेदों का ही ज्ञान उन्हें गीता के आधार पर मिल रहा है तो उस कोई

206
00:14:56,640 --> 00:15:00,720
अंतर नहीं है कोई उनको फर्क नहीं पड़ जाता क्योंकि कहीं अगर शास्त्र में

207
00:15:00,720 --> 00:15:05,160
आप यह दिखा दो लिखा हुआ कि जीवन का जो मुख्य उद्देश्य मूल उद्देश्य

208
00:15:05,160 --> 00:15:10,360
है वह वेद के स्वरूप वेद जिस स्वरूप में उसी स्वरूप में उसका

209
00:15:10,360 --> 00:15:14,400
अध्ययन जो मूल मूल उद्देश्य है मनुष्य जीवन का वह

210
00:15:14,400 --> 00:15:18,400
है मोक्ष भगवत प्राप्ति और वह कहीं

211
00:15:18,400 --> 00:15:23,720
पर भी मना नहीं किया गया कि वो नहीं हो सकता यहां पर अपने

212
00:15:23,720 --> 00:15:27,960
अपने स्व स्व कर्मणा अपने अपने कर्मों की जो

213
00:15:27,960 --> 00:15:31,960
शास्त्रो चित जो कर्म उनकी सीमा में रहते हुए धर्म का निर्वाह

214
00:15:31,960 --> 00:15:37,680
करते हुए भेद का निर्वाह करते हुए अभेद की प्राप्ति

215
00:15:37,680 --> 00:15:41,840
ही बताई गई है

216
00:15:41,840 --> 00:15:46,040
यह माय गुरु जी माय गॉड संत रामपाल जी की

217
00:15:46,040 --> 00:15:50,400
गुरु परंपरा संत गरीब दास से चलती

218
00:15:50,400 --> 00:15:54,400
आ रही है अच्छा गरीब दास लिखा वो आप

219
00:15:54,400 --> 00:15:58,440
आ जाइए लोग साक्षात आमने सामने बैठ

220
00:15:58,440 --> 00:16:04,440
कर के पता कर लेते

221
00:16:10,040 --> 00:16:14,160
हैं आप योगेश भारद्वाज जी से चर्चा कीजिए उनका

222
00:16:14,160 --> 00:16:18,760
नंबर दे दीजिए और अगर हमारा नंबर होना दे सके तो

223
00:16:18,760 --> 00:16:22,960
वो भी हो जाए 740 किसी

224
00:16:22,960 --> 00:16:27,240
को भी कोई वैचारिक मतभेद है तो वह इस नंबर पर व

225
00:16:27,240 --> 00:16:30,080
करें 740

226
00:16:30,080 --> 00:16:34,160
830 18

227
00:16:34,160 --> 00:16:38,160
69 इस पर ट करने पर आपको एक फॉर्म मिल जाएगा

228
00:16:38,160 --> 00:16:42,240
वैचारिक मतभेद के निमित्त चर्चा उस फॉर्म को

229
00:16:42,240 --> 00:16:46,440
आप भर देंगे हम आपसे संपर्क करले बस एक

230
00:16:46,440 --> 00:16:50,640
उसमें कंडीशन है कि आप अपनी फोटो आपको देनी होगी आपको अपने

231
00:16:50,640 --> 00:16:56,640
चेहरे के साथ आना होगा तो

232
00:17:00,000 --> 00:17:06,000
चेहरे के साथ साथ आना होगा आपको

233
00:17:08,840 --> 00:17:14,840
और अगर आप भरते हैं तो हमारी बिल्कुल चर्चा संभव

234
00:17:17,840 --> 00:17:22,680
है उसको हम बता तो चुके हैं अभी

235
00:17:22,680 --> 00:17:26,800
उसने बीइंग द स्पिरिट सोल वाले ने एक वीडियो और बनाया है राम जी

236
00:17:26,800 --> 00:17:31,080
के उसमें तो मुझे बड़ा अच्छा लगा कि उसने आंसर दिया ही नहीं

237
00:17:31,080 --> 00:17:35,400
हमने तो यह पूछा ना अपने वीडियो में कि भाई

238
00:17:35,400 --> 00:17:39,560
जब किसी की कोई कही हुई बात श्री राम को

239
00:17:39,560 --> 00:17:43,680
काटने लगेगी तो वहां पर श्री राम की बात माननी पड़ेगी जैसे स्मृति की कही हुई बात

240
00:17:43,680 --> 00:17:47,800
अगर श्रुति को काटने लगे स्मृति का अगर हम ऐसा

241
00:17:47,800 --> 00:17:52,160
अर्थ निकाल रहे हैं जो श्रुति का खंडन हो रहा है तो वहां पर श्रुति की बात को रखना पड़ेगा ना

242
00:17:52,160 --> 00:17:56,480
या फिर स्मृति का ऐसा अर्थ निकालिए नहीं तो उसने प्रभु

243
00:17:56,480 --> 00:18:00,680
श्री राम ने कहा कि शिव और राम

244
00:18:00,680 --> 00:18:04,760
शिव और विष्णु में कोई भेद नहीं है तो उसने इसके जवाब में कहा कि देखो देखो शिव

245
00:18:04,760 --> 00:18:09,080
ही तो यह कह रहे हैं भा हमने भी तो शिव का प्रमाण लिया था कि हां शिव

246
00:18:09,080 --> 00:18:13,280
ने ऐसा कहा अनन्य को प्रकट करने की दृष्टि से उन्होंने

247
00:18:13,280 --> 00:18:18,040
कहा कि जो मुझ में और तुम में अंतर नहीं मानते वह गलत है

248
00:18:18,040 --> 00:18:22,160
मगर ठीक इसी प्रकार की बात जब उन्होंने राम के सामने कही तो शिव

249
00:18:22,160 --> 00:18:26,240
जी का खंडन करते हुए राम ने कहा कि शिव और विष्णु में कोई भेद नहीं मुझ

250
00:18:26,240 --> 00:18:30,240
में और तुम में कोई भेद नहीं इस बात का कोई जवाब नहीं राम को क्यों ना

251
00:18:30,240 --> 00:18:33,360
माना जाए राम की बात को झुट दें

252
00:18:33,360 --> 00:18:37,520
क्या जो भगवान के अन्य जितने भी स्वरूप

253
00:18:37,520 --> 00:18:41,680
हैं व लीला में ऐसे कार्य कर सकते हैं

254
00:18:41,680 --> 00:18:45,880
जो कि सत्य नहीं है मगर भगवान श्री राम ऐसे ही

255
00:18:45,880 --> 00:18:50,040
कार्य करते हैं जो धर्म है शाश्वत धर्म

256
00:18:50,040 --> 00:18:54,080
तो क्या हम उनकी किसी कार्य को किसी कथन को झूठ मान ले तो इस

257
00:18:54,080 --> 00:18:58,280
पर उसने बात ही नहीं किया हमने पूछा गायत्री

258
00:18:58,280 --> 00:19:02,720
का जप किसके लिए किया अपने लिए किया तो अद्वैत

259
00:19:02,720 --> 00:19:06,880
सिखाया राम ने द्वैत खत्म हो गया अपना जब करना

260
00:19:06,880 --> 00:19:10,960
सिखाया राम ने यह मान सकते हैं कि अपने पूर्ण जो हम लोग

261
00:19:10,960 --> 00:19:15,040
कि हम ईश्वर का ही अंश है और यहां पर द्वैत

262
00:19:15,040 --> 00:19:19,360
का निर्वाह करते हुए हम आपका जप कर रहे हैं ईश्वर का तत्व

263
00:19:19,360 --> 00:19:24,000
हम एक जैसे हनुमान जी ने कहा था रामचरित मानस में

264
00:19:24,000 --> 00:19:28,080
तो इसका भी कोई आंसर नहीं तो वही गन्ने वाली बात

265
00:19:28,080 --> 00:19:32,320
है वो तो कुछ कुछ ना कुछ तो कहता ही रहेगा वो कभी ये थोड़ी ना क कह देगा कि मैं आपकी

266
00:19:32,320 --> 00:19:35,680
बात मान चुका

267
00:19:35,680 --> 00:19:38,320
हूं

268
00:19:38,320 --> 00:19:42,440
तो हां कोई आ आएगा नहीं बस कमेंट में ही

269
00:19:42,440 --> 00:19:48,440
सही कहा आपने

270
00:20:12,640 --> 00:20:18,640
अंबेडकर आप लिंक दे दीजिए हां मैं लिंक दे देता हूं

271
00:20:36,000 --> 00:20:42,000
आ गया

272
00:20:46,920 --> 00:20:52,920
क्या लिंक आया

273
00:20:53,800 --> 00:20:59,800
क्या यह है

274
00:20:59,880 --> 00:21:05,880
नहीं मैं इसको स्टार कर दे रहा हूं स्टार कमेंट लिंक

275
00:21:05,920 --> 00:21:11,320
को एक गेस्ट आए हैं

276
00:21:11,320 --> 00:21:14,880
आलोक जी आपका

277
00:21:14,880 --> 00:21:20,880
चेहरा आलोक

278
00:21:20,920 --> 00:21:26,920
जी आपका चेहरा नहीं दिख रहा लोक जी

279
00:21:31,360 --> 00:21:35,000
आलोक जी आपका चेहरा नहीं दिख रहा

280
00:21:35,000 --> 00:21:41,000
है हटा दूं

281
00:21:52,400 --> 00:21:54,640
आपको

282
00:21:54,640 --> 00:21:59,200
वशिष्ठ आपका चेहरा

283
00:21:59,200 --> 00:22:03,080
चेहरा लेकर

284
00:22:03,080 --> 00:22:09,080
आए चेहरा छोड़ आए क्या वशिष्ठ

285
00:22:21,000 --> 00:22:25,120
जी जी वश जी ट

286
00:22:25,120 --> 00:22:29,120
टू स्टेज

287
00:22:29,120 --> 00:22:33,480
मेरा आपसे क्वेश्चन था जी बताए जगनाथ

288
00:22:33,480 --> 00:22:37,680
टेंपल के अंदर बोल सकता हूं

289
00:22:37,680 --> 00:22:41,040
क्या बोलिए

290
00:22:41,040 --> 00:22:46,720
बोलिए टपल के

291
00:22:46,720 --> 00:22:50,960
अंदर इस बारे में हम लोग बात कर चुके हैं सबके अपने

292
00:22:50,960 --> 00:22:55,800
अपने धर्मानुसार अपने अपने अधिकार है

293
00:22:55,800 --> 00:22:59,800
और एक प्रोटोकॉल है बहुत बार समझा चुका हूं

294
00:22:59,800 --> 00:23:03,800
ब्राह्मण क्षत्रिय वैश्य शूद्र में दार्शनिक धरातल पर क्या अंतर

295
00:23:03,800 --> 00:23:07,880
है और जो जेनेटिक समय प्राप्त होते हैं उसके आधार पर भी अंतर

296
00:23:07,880 --> 00:23:11,880
होता है तो जिस तरह का हमारे पूर्व जन्म में हमने कर्म किए हैं

297
00:23:11,880 --> 00:23:16,400
उस उन कर्मों की सीमा में इस जन्म में हमें

298
00:23:16,400 --> 00:23:20,680
एक कुल प्राप्त होता है उस कुल की सीमा में शरीर प्राप्त

299
00:23:20,680 --> 00:23:24,920
होता है शरीर की सीमा में हमारा वर्ण प्राप्त होता है और उस वर्ण

300
00:23:24,920 --> 00:23:29,200
की सीमा में हमारा दोबारा से इस जन्म का धर्म रूपी कर्म प्राप्त

301
00:23:29,200 --> 00:23:33,520
होता है तो वह जो कर्म है उसके अनुसार यह सब विधि

302
00:23:33,520 --> 00:23:36,600
निषेध है कि किसको क्या करना है किसको क्या नहीं करना है

303
00:23:36,600 --> 00:23:40,840
मगर इससे यह सिद्ध नहीं होता है कि यह शूद्रों

304
00:23:40,840 --> 00:23:44,960
के अहित में है क्योंकि जो

305
00:23:44,960 --> 00:23:50,200
मंदिर जाने का उद्देश्य है वह है भगवत प्राप्ति

306
00:23:50,200 --> 00:23:54,440
तो शूद्रों की भगवत प्राप्ति के लिए कहा गया है कि आप मंदिर

307
00:23:54,440 --> 00:23:58,640
की अगर धवज को देख लेंगे तो आपको उ

308
00:23:58,640 --> 00:24:02,720
से भगवत प्राप्ति हो जाएगी तो जब उसको ध्वज से भगवत प्राप्ति हो

309
00:24:02,720 --> 00:24:06,800
रही है फिर भी वह इस बात के लिए यदि तुल रहा है कि मुझे

310
00:24:06,800 --> 00:24:10,800
अंदर ही जाना है हालांकि वो लता नहीं है शूद्र से नहीं होते यह

311
00:24:10,800 --> 00:24:15,000
क्या किया जाता है हमको तोड़ने के लिए यह समस्या

312
00:24:15,000 --> 00:24:19,400
को पहले जन्म दिया जाता है और फिर उसको हमसे जोड़ दिया जाता है

313
00:24:19,400 --> 00:24:23,560
कि भाई पहले फैलाया गया कि नहीं मंदिर

314
00:24:23,560 --> 00:24:27,760
के अंदर जाना ही वो है तभी भगवत प्राप्ति

315
00:24:27,760 --> 00:24:31,840
होगी मंदिर के जान मंदिर के अंदर जाकर ही भगवत प्राप्ति होगी

316
00:24:31,840 --> 00:24:35,920
जब हमने पहले इसको इंपॉर्टेंट बना दिया और उसके बाद जब उसे

317
00:24:35,920 --> 00:24:39,920
इंपोर्टेंट बना दिया फिर कहा कि देख वो तुझे मंदिर

318
00:24:39,920 --> 00:24:44,400
के अंदर नहीं जाने दे रहे हैं जबकि शास्त्र में ऐसा नहीं लिखा है

319
00:24:44,400 --> 00:24:49,880
कि मंदिर के अंदर जाकर ही भगवत प्राप्ति हो सकती है केवल और

320
00:24:49,880 --> 00:24:51,920
केवल तो यहां क्या हुआ

321
00:24:51,920 --> 00:24:56,080
अब जो अब अब जब हमने किसी को ऐसा बना दिया कि उसके मन में डाल दिया

322
00:24:56,080 --> 00:25:00,400
कि देख वो भगवत प्राप्ति वो तुझे मंदिर के अंदर नहीं जाने दे रहे हैं और जबक भगवत

323
00:25:00,400 --> 00:25:04,840
प्राप्ति मंदिर के अंदर जाए बिना भी हो सकती है जो उसका मूल उद्देश्य है

324
00:25:04,840 --> 00:25:08,920
जब वो मंदिर के अंदर जाने के लिए लड़ रहा है तो इसका अर्थ यह

325
00:25:08,920 --> 00:25:13,160
हुआ कि उसका वो यह नहीं मानता कि मेरे

326
00:25:13,160 --> 00:25:17,560
जीवन का उद्देश्य जो है मोक्ष है वह

327
00:25:17,560 --> 00:25:21,600
अपनी जो सिद्धि है वह इस बात में ढूंढ रहा है कि मैं अंदर जा सकता हूं कि नहीं

328
00:25:21,600 --> 00:25:25,880
अगर वह ऐसा कर रहा है अगर वो ऐसा कर रहा है तो फिर इतने

329
00:25:25,880 --> 00:25:29,920
अंश में वो फिर जिस मंदिर जिस धर्म के द्वारा तय किया गया

330
00:25:29,920 --> 00:25:34,000
बनाया गया निर्मित जो मंदिर है जिसमें वो जाने की जाने की

331
00:25:34,000 --> 00:25:38,160
वो रखता है मगर उसी धर्म के द्वारा बताया गए सिद्धांतों का खंडन करके

332
00:25:38,160 --> 00:25:42,360
वह उस मंदिर के अंदर जो विराजमान ईश्वर है व उसका भी खंडन कर

333
00:25:42,360 --> 00:25:46,400
र अगर वह ऐसा सोच रहा है कि मेरे जीवन का उद्देश्य

334
00:25:46,400 --> 00:25:49,480
मोक्ष नहीं है मंदिर के अंदर

335
00:25:49,480 --> 00:25:53,560
जाना जी बोले नहीं मेरा क्वेश्चन

336
00:25:53,560 --> 00:25:57,600
ही नहीं मेरा क्वेश्चन ये था कि अपन शुद्ध को अलाव नहीं

337
00:25:57,600 --> 00:26:02,040
करते मंदिर जाना आप जो वर्ण बता

338
00:26:02,040 --> 00:26:06,320
रहे बता रहे कर्म के

339
00:26:06,320 --> 00:26:07,080
पूर्व जन्म के

340
00:26:07,080 --> 00:26:09,880
कर्म के

341
00:26:09,880 --> 00:26:13,960
अनुसार पूर्व जन्म के कर्मों के अनुसार इस जन्म में प्राप्त होने

342
00:26:13,960 --> 00:26:18,040
वाले शरीर के अनुसार सनातन शास्त्रों द्वारा तय किया गया

343
00:26:18,040 --> 00:26:22,360
है कि किसकी क्या सीमाए है बो

344
00:26:22,360 --> 00:26:26,520
मेरे शरीर का एक ण होता है मतलब आपके अकॉर्डिंग मेरे शरीर

345
00:26:26,520 --> 00:26:30,720
का अपना एक वण है आपका जिस कुल में जन्म हुआ है

346
00:26:30,720 --> 00:26:34,720
उस कुल के अनुसार आपका वर्ण सुनिश्चित है ठीक

347
00:26:34,720 --> 00:26:38,840
है अगर मेरे कर्म उस अकॉर्डिंग नहीं है तो फिर मेरा कौन सा वण होगा मतलब

348
00:26:38,840 --> 00:26:43,640
मान लीजिए मैं ब्राह्मण और तो आप

349
00:26:43,640 --> 00:26:47,760
तो आप कर्म संकर कहलाएंगे पतित हो जाएंगे अगर ब्राह्मण के घर में जन्म हुआ

350
00:26:47,760 --> 00:26:51,880
है ब्राह्मण उचित कर्म नहीं है ब्राह्मण की तरह जीवन

351
00:26:51,880 --> 00:26:56,120
का निर्वाह नहीं है तो पतित ब्राह्मण हो जाएगा और ज्यादातर जो कलयुग

352
00:26:56,120 --> 00:27:00,400
में है वह पतित ब्राह्मण पतित क्षत्रिय पतित

353
00:27:00,400 --> 00:27:05,560
वैश्य है इसीलिए भागवत पुराण में य आया है

354
00:27:05,560 --> 00:27:10,240
कि भागवत पुराण में सभी को शूद्र नहीं बता बनाया गया सुन लीजिए

355
00:27:10,240 --> 00:27:14,480
भागवत पुराण में फिर यह आया है कि वेदोक्त अनुष्ठानों

356
00:27:14,480 --> 00:27:19,120
को करते समय होने वाली जो संभावित भूल चूक है

357
00:27:19,120 --> 00:27:23,320
उसके कारण वह भूल चूक के कारण उनको कोई अपराध ना लग जाए

358
00:27:23,320 --> 00:27:27,600
प्रज्ञा शक्ति क्योंकि कमजोर हो जाती है जब हम पतित होते चले जाते हैं तो प्रज्ञा शक्ति कमजोर

359
00:27:27,600 --> 00:27:31,840
होती है तो वेदोक्त कर्मों में गलती ना हो जाए जैसे हम मंत्र पढ़ रहे हैं गायत्री

360
00:27:31,840 --> 00:27:35,920
मंत्र पढ़ रहे हैं उसको कहां कहा पर स्टॉप लगना है कहां कहां पर नहीं लगना है

361
00:27:35,920 --> 00:27:40,320
उसको मन में पढ़ना है कितनी आवाज में पढ़ना है बहुत बारीक चीजें होती है

362
00:27:40,320 --> 00:27:44,640
तो उसमें गलतियां ना हो गलतियों के कारण हमारे जीवन में दुष्प्रभाव

363
00:27:44,640 --> 00:27:48,640
ना आए इस कारण से उनके लिए पतित पतित

364
00:27:48,640 --> 00:27:52,800
द्विज और जो शूद्र स्त्री आदि के लिए सभी के लिए पुराणों का विधान किया

365
00:27:52,800 --> 00:27:58,240
गया है पौराणिक जो वो है

366
00:27:58,240 --> 00:28:02,280
जो इसमें जो ना जाने की बात है उस ना जाने की बात

367
00:28:02,280 --> 00:28:06,320
को जैसे मंदिर के अंदर ना जाना या या वेदोक्त अनुष्ठानों में ना

368
00:28:06,320 --> 00:28:10,720
जाना इस बात को हम ऐसे देखते हैं कि भाई जाने से मना किया मगर

369
00:28:10,720 --> 00:28:15,280
देखना ऐसे चाहिए कि आपको उस जिम्मेदारी

370
00:28:15,280 --> 00:28:20,160
से मुक्त किया गया है क्योंकि आपका जीवन ऑलरेडी कठिन है

371
00:28:20,160 --> 00:28:24,640
आपका जीवन ऑलरेडी कठिन है इसलिए वो और कठिन हो जाएगा अगर आपको

372
00:28:24,640 --> 00:28:28,680
यह वेदोक्त जो पूजा पद्धति है इसमें आएंगे

373
00:28:28,680 --> 00:28:32,800
अगर आप तो उसमें क्या है कि आपको इतने कुल्ले करने हैं इतने मट्टी लेकर

374
00:28:32,800 --> 00:28:36,840
के चलना है बैठ कर के ही मूत्र त्याग करना है और दो बार

375
00:28:36,840 --> 00:28:41,200
मूत्र त्याग के बाद और चार बार बहुत से उसमें ऐसे नियम है

376
00:28:41,200 --> 00:28:45,400
जो आपका जीवन जो व्यवहारिक जीवन है वो और कठिन हो जाएगा तो आपको

377
00:28:45,400 --> 00:28:49,400
ये जिम्मेदारियां ना उठानी पड़े इसलिए सीधे एक एक कट

378
00:28:49,400 --> 00:28:53,400
चार विभाग किए गए भाई कोई हम लॉ लागू कर रहे हैं ना इस ग्रुप

379
00:28:53,400 --> 00:28:57,600
से कह दो यह करे इस ग्रुप से कह दो ये करे तो क्या हुआ चार विभाग किए गए उसमें

380
00:28:57,600 --> 00:29:01,600
जो यह वाला विभाग है इसको मुक्त कर दिया गया कि आप जाना ही मत तो आपको ये वाली

381
00:29:01,600 --> 00:29:05,840
टेंशन नहीं रहेगी सारे नियमों को फॉलो करने की क्योंकि

382
00:29:05,840 --> 00:29:11,840
आपका ऑलरेडी कठिन है ठीक

383
00:29:16,600 --> 00:29:20,680
है हम और

384
00:29:20,680 --> 00:29:24,840
कुछ ठीक है अब मेरे को ये बताइए कि अगर मान लो मैं शूद्र में हूं

385
00:29:24,840 --> 00:29:29,760
अभी और अगर मेरे कर्म ब्राह्मण जैसे हैं तो फिर मेरे को तो भी अला नहीं हो पाए

386
00:29:29,760 --> 00:29:33,880
आपको ब्राह्मण बनना क्यों है मैं शंकराचार्य नहीं बन

387
00:29:33,880 --> 00:29:37,960
सकता जीवन एक मिनट मैं शंकराचार्य नहीं बन सकता तो क्या

388
00:29:37,960 --> 00:29:42,720
मैं खत्म हो गया मेरा जीवन हमारे जीवन का उद्देश्य है

389
00:29:42,720 --> 00:29:47,280
क्या कहते हैं भगवत प्राप्ति आप ये पूछिए भगवत प्राप्ति हो सकती है कि नहीं

390
00:29:47,280 --> 00:29:51,640
अच्छा चलो अभी तो आप कह रहे हो कि मैं ब्राह्मण नहीं बन सकता इसको हटा देते हैं

391
00:29:51,640 --> 00:29:55,680
अब इसके बाद लोग ये कहेंगे कि मैं अगर कुछ मैंने ये करा लिया वो

392
00:29:55,680 --> 00:30:00,200
करा लिया तो मैं क्या स्त्री नहीं बन सकता तो क्या ये उचित

393
00:30:00,200 --> 00:30:04,880
है स्त्री क्यों बनना है

394
00:30:04,880 --> 00:30:09,040
स्त्री क्यों बनना है नहीं मेरा वो उद्देश्य नहीं स्त्री बनना तो आप शरीर

395
00:30:09,040 --> 00:30:13,040
के ऊपर बात करें बॉडी लेवल प काम कर हो अध्यात्म बुद्धि शरीर के शरीर के ऊपर

396
00:30:13,040 --> 00:30:17,040
ही तो है शूद्र ब्राह्मण क्षत्रिय वैश्य शूद्र किसके ऊपर है

397
00:30:17,040 --> 00:30:21,200
मेरा पहला क्वेश्चन आपसे येय था कि ब्राह्मण क्षत्रिय व शूद्र अगर शरीर के ऊपर है

398
00:30:21,200 --> 00:30:25,240
अगर मेरा शरीर उस लेवल प मतलब ब्राह्मण के अकॉर्डिंग प्योर हो गया मतलब ब्राह्मण

399
00:30:25,240 --> 00:30:29,360
ब्राह्मण क्वालिटी के अकॉर्डिंग मेरा प्योर हो चुका शरीर तो क्या तो भी मैं नहीं हो पागा

400
00:30:29,360 --> 00:30:31,920
तो भगवान उतर करके आपका

401
00:30:31,920 --> 00:30:36,120
वर्ण घोषित करेंगे जैसे विश्वामित्र जी के अंदर जो ब्राह्मण उचित

402
00:30:36,120 --> 00:30:40,520
तत्व थे वोह शेष थे उन्होंने बहुत तपस्या की परंपरा प्राप्त

403
00:30:40,520 --> 00:30:45,400
आचार्य जो वशिष्ठ जी हैं उनके पास गए कई बार

404
00:30:45,400 --> 00:30:49,640
और कहा कि हमने इतना तप कर लिया हमको ब्राह्मण घोषित कर दो वशिष्ठ

405
00:30:49,640 --> 00:30:53,720
जी ने मना कर दिया परंपरा प्राप्त आचार्य देखिए मना कर दिया नहीं

406
00:30:53,720 --> 00:30:58,160
आप राज ऋषि हैं आप ब्रह्म ऋषि नहीं है उन्होंने और उसके कारण

407
00:30:58,160 --> 00:31:02,160
उनकी शत्रुता भी हुई वशिष्ठ जी के वशिष्ठ जी को काफी क्षति भी

408
00:31:02,160 --> 00:31:06,320
पहुंची मगर वो मना करते रहे अंत तो गत्वा क्या हुआ कि उन्होंने इतनी

409
00:31:06,320 --> 00:31:12,320
तपस्या की इतनी तपस्या की तब [संगीत]

410
00:31:26,920 --> 00:31:31,120
ब्रह्मादेवी वर्ण है वो गुण कर्म के आधार पर विभाजन है गुण कर्म विभाजन

411
00:31:31,120 --> 00:31:35,200
से तो तो मैंने कर्म माना ना हां अगर मान

412
00:31:35,200 --> 00:31:39,200
लीजिए गुण कर्म दोनों ही अगर उसके ब्राह्मणी कल कहते हैं तो फिर आप अपन कैसे

413
00:31:39,200 --> 00:31:43,880
बोल सकते हैं कि वो शूद्र में ही है शरीर के हिसाब से अरे भाई

414
00:31:43,880 --> 00:31:48,280
जो मैंने आपको तरीका पूरा बताया तो है आपके सवाल का आंसर भी दिया है

415
00:31:48,280 --> 00:31:52,360
पहली बात जो ये है जो आप गुण कम जो आप गुण कर्म विभाग कह रहे हो

416
00:31:52,360 --> 00:31:56,360
वो गुण कर्म पिछले जन्म के आधार पर इस जन्म के पिछले जन्म

417
00:31:56,360 --> 00:32:00,600
के कर्मों के आधार पर इस जन्म के वो सेक्शनिंग हुई दूसरी बार उसमें

418
00:32:00,600 --> 00:32:05,520
भगवान कह रहे हैं मया सटम क्या कह रहे

419
00:32:05,520 --> 00:32:09,560
हैं क्या कह रहे भी तो यही कह रहा हूं

420
00:32:09,560 --> 00:32:13,680
मैं भी तो यही कह रहा हूं कि ब्राह्मण क्षत्रिय वैश्य सूत्र की शूद्र

421
00:32:13,680 --> 00:32:17,760
की जो सृष्टि है वह भगवान करते हैं अगर आप तब करो

422
00:32:17,760 --> 00:32:22,280
आप इतना बदल यह गवाही कौन देगा कि आपके अंदर वह तत्व आ गया बताओ

423
00:32:22,280 --> 00:32:26,560
कौन देगा य गवाही किसकी गवाही मानने होगी चलो

424
00:32:26,560 --> 00:32:31,120
हा देखो मेरा आप से जब उन्होंने वहां पर मया सटम कहा है

425
00:32:31,120 --> 00:32:35,920
तो मैं भी तो वही कह रहा हूं भगवान आकर के अगर बोल दे कि भई यहां

426
00:32:35,920 --> 00:32:40,520
उन पहले तो वेदो जो हमारे परंपरा प्राप्त आचार्य गण हो जो परंपरा प्राप्त

427
00:32:40,520 --> 00:32:42,160
वेदा दि शास्त्र सम्मत वो

428
00:32:42,160 --> 00:32:46,440
स्वरूप हो भगवान का वो आक के कहेगा कि हां ये हो गए

429
00:32:46,440 --> 00:32:51,080
है ना तो मान्य है तो मया सिस्टम का निर्वाह तो करो उसमें

430
00:32:51,080 --> 00:32:55,320
तो अगर हम यह कह दे कि नहीं ब्राह्मण क्षत्रिय वैश्य शूद्र जो है कोई

431
00:32:55,320 --> 00:32:59,640
व्यक्ति घोषित कर सकता है तो पहली बात तो व्यक्ति की अधिकारिता होनी

432
00:32:59,640 --> 00:33:03,680
चाहिए कि कौन करेगा ऐसी कोई अधिकारिता किसी व्यक्ति की

433
00:33:03,680 --> 00:33:07,960
नहीं है कि वह फलाना व्यक्ति घोषित करेगा कोई नियम नहीं है

434
00:33:07,960 --> 00:33:12,440
दूसरी बात यह भी है कि जब मनुष्य

435
00:33:12,440 --> 00:33:16,680
कर रहा है सृष्टि ब्राह्मण क्षत्रिय वै शूद्र का तो फिर

436
00:33:16,680 --> 00:33:20,800
उन्होंने कृष्ण का माया सिस्टम कहां

437
00:33:20,800 --> 00:33:25,080
गया नहीं भगवा भगवाने ब उन्होने

438
00:33:25,080 --> 00:33:29,200
कहा मस्टम मैं बनाता हूं किसी ब्राह्मण क्षत्रिय वैश शूद्र

439
00:33:29,200 --> 00:33:33,320
मैं बनाता हूं तो यहां तो हम बना रहे हैं ना नहीं

440
00:33:33,320 --> 00:33:37,360
मनुष्य के हाथ में हो गया ना आप एक बार समझो उन्होने क्या कहा

441
00:33:37,360 --> 00:33:41,760
अब सुनिए सुनिए अब इसको थोड़ा उलट लेते हैं दुर्जन तोष न्याय प आ जाते हैं

442
00:33:41,760 --> 00:33:46,240
अब ये बताइए कि कर्म के अनुसार आप

443
00:33:46,240 --> 00:33:50,880
वर्ण को बदलने की बात स्वीकार कर रहे हैं तो आप मुझे यह बताएं

444
00:33:50,880 --> 00:33:55,400
कि कर्मानुसार जो वर्ण व्यवस्था है उसका परवन क्या

445
00:33:55,400 --> 00:33:57,240
है उसका फायदा क्या

446
00:33:57,240 --> 00:34:01,320
है हां मैं बताता ब्राह्मण की क्वालिटी बताई

447
00:34:01,320 --> 00:34:05,360
11 क्वालिटी होती ब्राह्मण के अंदर मैंने बोला फायदा क्या है वो हमारे

448
00:34:05,360 --> 00:34:09,600
काम कैसे आएगा अगर हम यह जानते हैं कि ब्राह्मण है अगर हम यह जानते

449
00:34:09,600 --> 00:34:13,800
हैं क्षत्रिय है तो वह व्यवस्था में कैसे उपयोग होगा इस बात

450
00:34:13,800 --> 00:34:18,000
का देखो ब्राह्मण की अपनी एक रेसिटी होती है सोसाइटी के अंदर उसको

451
00:34:18,000 --> 00:34:22,440
क्या नॉलेज करना सोसाइटी को लीड करना है और

452
00:34:22,440 --> 00:34:26,640
एक जब हम ये बोलो कि यानी कि जब हमें

453
00:34:26,640 --> 00:34:30,680
कुछ ज्ञान प्राप्त करने की आवश्यकता होगी तत्व प्राप्त करने की आवश्यकता

454
00:34:30,680 --> 00:34:35,320
होगी तो हम ब्राह्मण के पास जाएंगे हा बिल्कुल जाएंगे

455
00:34:35,320 --> 00:34:39,600
ना हा ब्राह्मण लीड करता नलेज को और हमें जब रक्षा की आवश्यकता

456
00:34:39,600 --> 00:34:43,760
होगी तो हम के पास जाएंगे

457
00:34:43,760 --> 00:34:47,840
सही है ना अब यह बताइए जो आपके अनुसार जो वर्ण

458
00:34:47,840 --> 00:34:52,000
व्यवस्था है कर्मानुसार वर्ण व्यवस्था इसमें जब एक व्यक्ति

459
00:34:52,000 --> 00:34:56,000
को रक्षा की आवश्यकता हुई और वोह गया क्षत्रिय के घर

460
00:34:56,000 --> 00:35:00,240
वो क्षत्रिय एक मिनट प ब्राह्मण बन गया आपके अनुसार

461
00:35:00,240 --> 00:35:04,360
अब क्या होगा नहीं मैंने केवल कर्म का नाम नहीं लिया मैंने गुण का भी नाम

462
00:35:04,360 --> 00:35:08,440
लिया उसके गुण भी वैसे होने चाहिए ब्राह्मण जैसे अरे मैं पूछ

463
00:35:08,440 --> 00:35:12,360
तो रहा हूं वो ब्राह्मण चलिए अब इस

464
00:35:12,360 --> 00:35:16,480
सीन में बताइए कि उसने गेट खटखटाया वो क्या करे उसको रक्षा

465
00:35:16,480 --> 00:35:20,640
की आवश्यकता है बता

466
00:35:20,640 --> 00:35:24,720
अगर उसने ब्राह्मण कचर अडॉप्ट कर लिया है ब्राह्मण के अंदर

467
00:35:24,720 --> 00:35:28,880
ब्रा कैटेगरी में आ चुका वो तो उसका काम लेकिन

468
00:35:28,880 --> 00:35:33,360
एक होता ब्राहमण का काम होता पहले बताता आपको

469
00:35:33,360 --> 00:35:37,480
भाई किसी को रक्षा की आवश्यकता है किसी को गोली लगने वाली है व

470
00:35:37,480 --> 00:35:41,600
बचने के लिए क्षत्रिय के पास आया अभी व क्या करे व गेट खटखटाने

471
00:35:41,600 --> 00:35:45,760
के बाद एक ब बोलने दीजिए परीक्षित महाराज महाराज क्या

472
00:35:45,760 --> 00:35:49,960
राज थे मतलब व क् क्वालिटी ब्रा

473
00:35:49,960 --> 00:35:55,960
क्लिटी अ

474
00:35:58,120 --> 00:36:02,640
मैं यह आपसे कह रहा हूं मेरी बात आप समझिए कि कर्मणा

475
00:36:02,640 --> 00:36:06,760
कर्मानुसार व्यवस्था के आधार पर हम किसी को उसके

476
00:36:06,760 --> 00:36:11,080
कमान वो ण वर्णो चित धर्म के लिए बाध्य नहीं कर सकते समझिए

477
00:36:11,080 --> 00:36:15,280
मैं जो पूरी बात कह रहा हूं एक मिनट एक मिनट बाद नहीं कर सकते मतलब

478
00:36:15,280 --> 00:36:19,480
जैसे हम कहते हैं कि यह तेरे पिता है तेरा इनके प्रति कर्तव्य तो यह करना

479
00:36:19,480 --> 00:36:23,520
चाहिए यह क्या है हम उसके पुत्र धर्म के लिए उसको बाध्य कर पा रहे

480
00:36:23,520 --> 00:36:27,640
हैं मगर जब हम कर्मानुसार कर लेते हैं तो हम किसी

481
00:36:27,640 --> 00:36:32,080
से नहीं कह सकते कि तू क्षत्रिय है तुझे काम करना पड़े करना चाहिए बाध्यता

482
00:36:32,080 --> 00:36:36,120
नहीं दे सकते वो ये कहेगा वो ये कह सकता है कि मैं जो है ब्राह्मण हो गया हूं

483
00:36:36,120 --> 00:36:40,280
अब मैं क्षत्रिय नहीं रहा मेरा धर्म अब जो है रक्षा करना नहीं है

484
00:36:40,280 --> 00:36:44,320
मेरा धर्म अब जो है ब्राह्मण बनके ज्ञान देना है तो

485
00:36:44,320 --> 00:36:48,400
इस हम किसी को बाध्य नहीं कर सकते उसके वर्ण उचित धर्म के अनुसार

486
00:36:48,400 --> 00:36:52,680
जबकि भगवान श्री कृष्ण ने गीता में अर्जुन को बाध्य किया

487
00:36:52,680 --> 00:36:57,560
के तू क्षत्रिय है जाके रक्षा कर ठीक है

488
00:36:57,560 --> 00:37:01,840
अ मेरी बात मेरे को बोलने दीजिए मैं ये कह रहा हूं मैं बाध्यता की बात नहीं कर रहा

489
00:37:01,840 --> 00:37:05,960
मैं बता रहा हूं कि परीक्षित महाराज थे उन्होंने क्या से सोसाइटी को लीड

490
00:37:05,960 --> 00:37:10,240
मैं जब आप जब आप हिस्ट्री में जाने लगेंगे तो मैं परंपरा प आऊंगा इसलिए

491
00:37:10,240 --> 00:37:13,200
अभी हम सिर्फ तर्क पर बात करें मेरे पास बहुत सारे

492
00:37:13,200 --> 00:37:17,360
मैंने अभी आपको मैंने भी आपको दे दिया ना अभी आपको मैं और प्रमाण

493
00:37:17,360 --> 00:37:21,400
दे दूं आप स्तंभ सूत्र में लिखा है कि जो ब्राह्मण क्षत्रिय वैश सूत्र जन्म से होते

494
00:37:21,400 --> 00:37:26,520
हैं आप मानोगे इसे नहीं देखो भगवतगीता का

495
00:37:26,520 --> 00:37:30,960
कांटेक्ट बता आप मुझे तर्क बताइए आप मुझे तर्क बताइए

496
00:37:30,960 --> 00:37:35,400
किय कर्मणा वर्ण व्यवस्था का क्या वो है लाभ वो

497
00:37:35,400 --> 00:37:39,520
बताइए एक बार बो क आपको आपने

498
00:37:39,520 --> 00:37:43,760
बोला की बाध्यता नहीं की जा सकती मैं मानता बाध्यता नहीं की जा सकती

499
00:37:43,760 --> 00:37:48,240
आपने अभी दिया मेरे को की भगवत गीता में भगवान ने अर्जुन को बाध्य

500
00:37:48,240 --> 00:37:52,280
किया था तो देखो आपको बताता हूं कि भगवान ने एक और शलोक

501
00:37:52,280 --> 00:37:56,360
का कहा था र्म और एक ने था परन

502
00:37:56,360 --> 00:38:00,400
साधु नाम मतलब भगवान ने कहा मैं दो कारण के कारण ही आऊगा केवल

503
00:38:00,400 --> 00:38:04,840
या तो धर्म की गलानी या तो धर्म का विनाश हो रहा होगा

504
00:38:04,840 --> 00:38:08,840
या दूसरा परिता साधु नाम यानी मेरे भक्तों की रक्षा के लिए और विनाश

505
00:38:08,840 --> 00:38:12,920
दु नाम या दु को नाश करने के लिए ठीक

506
00:38:12,920 --> 00:38:17,000
है तो अब आप बोलन को बाद कि गया था वो क्त्र उसको

507
00:38:17,000 --> 00:38:21,080
युद्ध करना है तो देखो ऐसा जरूरी नहीं है उसको बाद किया गया था क्योंकि लास्ट में भगवान खु बोल

508
00:38:21,080 --> 00:38:25,240
रहे स पम करू लास्ट में भगवान ने बोला सारे धर्म छोड़

509
00:38:25,240 --> 00:38:28,360
दो तुम मेरे को सनम कर लो

510
00:38:28,360 --> 00:38:28,860
और

511
00:38:28,520 --> 00:38:32,600
फिर एक और लास्ट में भगवान ने एक और लोक का कहा था यथा इच्छ तथा कुरु जैसी

512
00:38:32,600 --> 00:38:38,600
आपकी इच्छा है वैसे करो तो आप ये नहीं कह सकते कि भगवान ने अर्जुन को बाध्य किया गया

513
00:38:38,720 --> 00:38:42,840
था बाध्य करने का मतलब यह है

514
00:38:42,840 --> 00:38:46,960
कि उसको उसका धर्म बताया गया कि धर्म क्या है बाद में उन्होंने यह कहा

515
00:38:46,960 --> 00:38:51,000
कि बाकी अब तू अपने स्वविवेक से जो समझ में आया वो कर समझ रहे

516
00:38:51,000 --> 00:38:55,080
हो मैं तुझे तेरा धर्म बता दे रहा हूं वो क्या करना चाहिए

517
00:38:55,080 --> 00:38:59,120
वो यह है अब तू अपने स्वविवेक से दूसरी बात आपने कहा पहली बात

518
00:38:59,120 --> 00:39:03,720
तो ये आप इस कौन से हैं नहीं इस

519
00:39:03,720 --> 00:39:07,880
कौन से नहीं है आपने ये सारा अध्ययन कहां से किया है

520
00:39:07,880 --> 00:39:12,040
ये तो आपको मालूम है ये मैंने भग भगवत गीता कौन

521
00:39:12,040 --> 00:39:16,360
सी भगवत गीता कौन सी गीता प्रेस से छपने वाली या

522
00:39:16,360 --> 00:39:21,080
यह वाली इस कन वाली देखो ये वाली

523
00:39:21,080 --> 00:39:25,280
ये स् कौन की भगवत गीता है आप कन के फॉलो

524
00:39:25,280 --> 00:39:29,360
है आप स् कन के फॉलोअर है वो इकन का ही

525
00:39:29,360 --> 00:39:33,880
पक्ष रखने आए हैं मगर इसलिए खुल के नहीं बोल रहे हैं कि अगर हारू

526
00:39:33,880 --> 00:39:37,920
तो सिर्फ मैं हारू एक मिनट अगर मेरी बात गलत साबित हो जाए तो सिर्फ मैं

527
00:39:37,920 --> 00:39:42,520
गलत साबित हो जाऊ और अगर जीत जाऊ तो स्कन सही हो जाए

528
00:39:42,520 --> 00:39:43,640
क्या बात

529
00:39:43,640 --> 00:39:47,920
मेरा च च कोई बात नहीं कोई बात नहीं कोई बात नहीं कोई बात नहीं

530
00:39:47,920 --> 00:39:52,040
अभी मैं आपको बात पूछ रहा हूं आपने कहा कि सर्व धर्म को छोड़ दे

531
00:39:52,040 --> 00:39:56,080
सारे धर्मों को छोड़ दे क्या इसका अर्थ हम ये ले कि बहन को बहन

532
00:39:56,080 --> 00:40:00,280
नहीं मानना चाहिए इसको भी छोड़ दे

533
00:40:00,280 --> 00:40:05,240
मिनट मिट माता को माता की दृष्टि से देखना बंद कर दे इसको भी छोड़ दे

534
00:40:05,240 --> 00:40:09,240
नहीं इस इसम कहा धर्म को

535
00:40:09,240 --> 00:40:13,360
छोड़ दे तो माता को माता की दृष्टि से देखना धर्म है धर्म पशु

536
00:40:13,360 --> 00:40:15,640
भी

537
00:40:15,640 --> 00:40:18,440
समाना

538
00:40:18,440 --> 00:40:22,840
तान कौन धम करना क्या बताया गया है

539
00:40:22,840 --> 00:40:27,360
जी अवनी जी बताए जय श्री राम

540
00:40:27,360 --> 00:40:31,440
आपका मेन काम है कि आपको जो नॉलेज है वो देना है मतलब आपका जो

541
00:40:31,440 --> 00:40:35,480
भगवान की जो सेवा करनी है आपको मेनली वही करनी है जो भगवान की इंस्ट्रक्शन यानी कि सभी धर्मों

542
00:40:35,480 --> 00:40:39,640
को नहीं छोड़ना है ना अरे सारे धर्म छोड़ने हैं और भगवान के जो इंस्ट्रक्शन

543
00:40:39,640 --> 00:40:43,720
है वही मानने है मेनली यही काम है मैं आपसे पूछ रहा हूं सभी धर्मों को छोड़ना है

544
00:40:43,720 --> 00:40:48,080
कि नहीं पहले ये समझाओ कि धर्म है क्या

545
00:40:48,080 --> 00:40:52,280
आपके अकॉर्डिंग धर्म क्या है इसीलिए तो मैं कहता हूं कि विषयात

546
00:40:52,280 --> 00:40:56,360
ना हो इसलिए मैं एक ही चीज पर पकड़े रहता हूं आपको मैं आपसे पूछ

547
00:40:56,360 --> 00:41:00,400
रहा हूं सभी धर्मों को छोड़ना है कि नहीं देखो भगवान कह रहे सब

548
00:41:00,400 --> 00:41:04,600
धर्म प सारे धर्म छोड़ सकते हैं सारे धर्म तो यानी की माता

549
00:41:04,600 --> 00:41:08,720
को माता की दृष्टि से देखना भी छोड़ दे क्या मैं मात धर्म छोड़ दूंगा

550
00:41:08,720 --> 00:41:12,960
तो इसका मतलब मैं किसी को माता की दृष्टि से नहीं देखूंगा आपके अंग अरे भाई

551
00:41:12,960 --> 00:41:17,640
आप अपनी माता को माता की दृष्टि से देखना बंद कर दे नॉर्मल न्यूट्रलाइज

552
00:41:17,640 --> 00:41:21,760
हो जाए उसको भी पत्नी की दृष्टि से देख सके क्या इस

553
00:41:21,760 --> 00:41:25,840
धर्म का त्याग कर देंगे आप क्या मा धर्म ये सिखाया भगवान

554
00:41:25,840 --> 00:41:29,840
श्री कृष्ण ने नहीं क्या मात धर्म को छोड़ने का मतलब ये होता है कि उनको माता

555
00:41:29,840 --> 00:41:33,800
की दृष्टि से नहीं देखना अरे तो मुझे बताइए ना

556
00:41:33,800 --> 00:41:37,840
सुनिए पहले आप ये समझिए पहले आप चलिए पहले इसको समझ

557
00:41:37,840 --> 00:41:41,880
लीजिए धर्म किसे कहा जा रहा है रामो विग्रहवां धर्मा

558
00:41:41,880 --> 00:41:46,160
कहा गया कि नहीं हां हां बिल्कुल वाल्मीकि

559
00:41:46,160 --> 00:41:50,280
रमाया 3 3 13 और राम जी को मर्यादा पुरुषोत्तम कहा

560
00:41:50,280 --> 00:41:54,600
गया कि नहीं हां बिल्कुल कहा गया है तो राम का नाम

561
00:41:54,600 --> 00:41:59,080
धर्म है और राम जो है मर्यादा पुरुषोत्तम है इसका अर्थ क्या

562
00:41:59,080 --> 00:42:03,160
आया चलो ठीक है मैं मानता हूं एक बारका अर्थ क्या आया इसका

563
00:42:03,160 --> 00:42:08,120
अर्थ क्या आया पूछ रहा हूं हा मर्यादा क्या आया

564
00:42:08,120 --> 00:42:12,400
मर्यादा धर्म है तो अब जो माता को माता की दृष्टि से देखने

565
00:42:12,400 --> 00:42:16,640
की मर्यादा है माता को पत्नी की दृष्टि से ना देखने की मर्यादा

566
00:42:16,640 --> 00:42:20,720
है क्या इसको छोड़ सकते हैं भगवान के उस जो उन्होंने कहा

567
00:42:20,720 --> 00:42:24,760
है कि सर धर्म सारे धर्मों को छोड़ दे इसको छोड़ सकते हैं

568
00:42:24,760 --> 00:42:28,880
इस धर्म का त्याग कर सकते हैं अब बोल सकता हूं एक बार आप मेरे को बोलने दो

569
00:42:28,880 --> 00:42:33,000
मैं पूछ तो रहा हूं पहले इसको क्लियर करिए आप ठीक है मैं उसका आंसर दूंगा अभी नेक्स्ट

570
00:42:33,000 --> 00:42:37,080
क्वेश्चन में आपका इसी का आंसर दूंगा एक बार मुझे बोलने दीजिए देखिए दूसरे लोग वेट कर रहे हैं और शायद वो भी

571
00:42:37,080 --> 00:42:41,160
आने वाले हैं तो मुझे पहले आप इसका आंसर दीजिए कि अगर सभी धर्मों

572
00:42:41,160 --> 00:42:45,360
को छोड़ने की बात है तो क्या इस धर्म का त्याग किया जा सकता

573
00:42:45,360 --> 00:42:49,040
है इस मर्यादा का कि नहीं अरे आप बोल

574
00:42:49,040 --> 00:42:53,040
ही गलत रहे हैं आपके अ मात धर्म को छोड़ने का मतलब है माता को माता की

575
00:42:53,040 --> 00:42:57,400
दृष्टि से नहीं देखना यही तो मतलब आपके मात धर्म का भाई

576
00:42:57,400 --> 00:43:01,680
मातृ धर्म मैंने नहीं बोला मैंने मातृ धर्म बोला ही नहीं मैंने बोला

577
00:43:01,680 --> 00:43:05,960
एक मर्यादा हमें दी गई है कि माता को किस दृष्टि से देखना है पत्नी की दृष्टि

578
00:43:05,960 --> 00:43:10,240
से नहीं देखना है यह हमारी मर्यादा है यह हमारा धर्म है क्या इस धर्म

579
00:43:10,240 --> 00:43:14,280
का हम त्याग कर सकते हैं क्योंकि भगवान ने कहा है सभी धर्मों का त्याग

580
00:43:14,280 --> 00:43:18,480
करके मेरी शरण में आ जा हा ठीक है और भगवान फर उससे पहले सिखा भी रहे

581
00:43:18,480 --> 00:43:23,080
आपको बता मैं अब जो है प्लीज आप क्लियर करिए

582
00:43:23,080 --> 00:43:28,080
त्याग कर सकते हैं कि नहीं क्या मैं मानता हूं कि क्या माता को

583
00:43:28,080 --> 00:43:32,240
कर सकते है कि नहीं मैं पूछ रहा हूं त्याग कर सकते हैं कि नहीं अरे

584
00:43:32,240 --> 00:43:36,480
ये धर्म में काउंट नहीं होता य तो नेचुरल बात है कि आपको माता की दष्ट से देखना ही होगा तो कोई

585
00:43:36,480 --> 00:43:41,240
धर्मल हैय हम धर्म से नहीं मिलता धर्म से नहीं

586
00:43:41,240 --> 00:43:45,440
मिलता धर्म से नहीं मिलता अरे धर्म है क्या पले आप य समझो तो सही

587
00:43:45,440 --> 00:43:49,440
बार कोशिश करो अरे भाई मैं समझूंगा आप एक एक चीज क्लियर करते चलो सुनो

588
00:43:49,440 --> 00:43:54,000
धर्म क्या है सुनलो सुनलो धर्म क्या है सच्चिदानंद

589
00:43:54,000 --> 00:43:58,200
जीव की चाह का जो वास्तविक विषय सच्चिदानंद

590
00:43:58,200 --> 00:44:03,080
स्वरूप परमेश्वर को परिभाषित कर सकने वाले शास्त्रों द्वारा

591
00:44:03,080 --> 00:44:04,080
बताई जाने

592
00:44:04,080 --> 00:44:08,280
वाली सच्चिदानंद स्वरूप परमेश्वर को प्राप्त करने

593
00:44:08,280 --> 00:44:12,280
के निमित्त बताई जाने वाली विधि का नाम धर्म है

594
00:44:12,280 --> 00:44:16,520
आ गया अब जो आपको डू एंड डोंट दिए गए हैं ब्रह्म

595
00:44:16,520 --> 00:44:21,240
प्राप्ति के लिए जो आपको डू एंड डों दिए गए हैं यह धर्म है

596
00:44:21,240 --> 00:44:25,280
यही मर्यादा है यही नैतिकता है अब आपने कहा कि नेचुरल

597
00:44:25,280 --> 00:44:27,600
होता है

598
00:44:27,600 --> 00:44:31,760
आपने कहा नेचरल होता है नेचरल है ये नेचुरल होता है आपकी

599
00:44:31,760 --> 00:44:35,880
स्कोन की बुक में मैं दिखाऊ धर्मे हीना पशु भी समाना लिखा गया

600
00:44:35,880 --> 00:44:39,880
है पशुओं के पास धर्म होता है क्या नहीं पशु के पास में

601
00:44:39,880 --> 00:44:44,080
कोई धर्म नहीं होता मैं मानता हूं औरन को आप क रहे नेचुरल होता है पहले इसको सही

602
00:44:44,080 --> 00:44:48,240
करो नेचुरल होता है कि नहीं अरे मेरी बात आप समझो किस

603
00:44:48,240 --> 00:44:52,400
मदा हमें सिखाई जाती है नेचुरल नहीं होता है हमें बाहर

604
00:44:52,400 --> 00:44:57,080
से मिलती है माता पिता के द्वारा गुरु जनों के द्वारा अन

605
00:44:57,080 --> 00:45:01,680
भी पशु बनेंगे नेचुरल नहीं होता है ये ये हमें सिखाया जाता है

606
00:45:01,680 --> 00:45:05,760
कौन माता है कौन पिता है कौन नहीं होता नेचुरल

607
00:45:05,760 --> 00:45:10,040
नेचुरली अगर कहे तो हमारे पास नेचुरली सिर्फ चार चीजें हैं आहार

608
00:45:10,040 --> 00:45:14,160
निद्रा भय मैथुन हमें नहीं पता कौन माता है हां ठीक है मैं एक्सेप्ट करता

609
00:45:14,160 --> 00:45:18,440
हूं चलो है मैं आपकी बात एक्सेप्ट कर रहा हूं एक्सेप्ट किया आपने क्लियर करिए पहले धर्म

610
00:45:18,440 --> 00:45:19,160
नेचुरल नहीं होता

611
00:45:19,160 --> 00:45:23,520
वो सिखाया जाता है और धर्म के अकॉर्डिंग होती है मैं एक बात क्वेश्चन पूछ रहा हूं आपसे

612
00:45:23,520 --> 00:45:27,880
क्वे नहीं आप क्वेश्चन बाद में पूछना पहले एक क्लियर करेंगे बहुत सारे

613
00:45:27,880 --> 00:45:31,880
देखिए विषयात क्यों नहीं करने देता मैं इसीलिए नहीं करने लोग मुझ पर आरोप लगाते

614
00:45:31,880 --> 00:45:35,960
तुम सामने वाले को बोलने नहीं देना चाहते हो इसलिए क्योंकि वो विषयात करता है हमारी

615
00:45:35,960 --> 00:45:39,960
बात कहां पर शुरू हुई थी कि मंदिरों में प्रवेश है कि नहीं जब

616
00:45:39,960 --> 00:45:44,040
मैंने कोई बात बोली तो आपने उसको काउंटर नहीं किया आपने दूसरे प्रश्न ले

617
00:45:44,040 --> 00:45:48,160
आए विषयात बात सुनिए तो सुनिए जब

618
00:45:48,160 --> 00:45:52,160
आपने पूछा कि जो मंदिर मंदिर प्रवेश

619
00:45:52,160 --> 00:45:56,280
से सूद को क्यों रोका जाता है मैंने उसमें कुछ चीजें बताई आपने इन चीजों को काउंटर ना

620
00:45:56,280 --> 00:46:00,360
करके प्रश्न दूसरा खड़ा कर दिया ये होता है

621
00:46:00,360 --> 00:46:04,720
अब क्या है प्रश्न होते होते होते होते जब मैंने कहा जब मैंने कहा

622
00:46:04,720 --> 00:46:08,760
कि भगवान ने मया सटम कहा है तो फिर मनुष्य कैसे बना लेगा

623
00:46:08,760 --> 00:46:13,280
अपना वर्ण तो फिर आप आ गए सर्व धन प्रत प तो

624
00:46:13,280 --> 00:46:17,360
वो अब जब मैं पूछ रहा हूं अब जब मैं पूछ रहा हूं कि भाई

625
00:46:17,360 --> 00:46:21,520
अगर सभी धर्मों को त्याग करना है तो माता को माता की दृष्टि

626
00:46:21,520 --> 00:46:25,560
से देखना और पत्नी की दृष्टि से ना देखना यह जो मर्यादा है इसका

627
00:46:25,560 --> 00:46:29,560
त्याग करोगे या नहीं करोगे तो आपने पहले तो बहुत देर लगाई

628
00:46:29,560 --> 00:46:33,800
और देर लगाने के बाद आप उसको क्लियर ना करते हु बारबार दूसरा प्रश्न

629
00:46:33,800 --> 00:46:34,360
दूसरा प्रश्न

630
00:46:34,360 --> 00:46:39,440
दूसरा प्रश्न दूसरा प्रश्न करते रहोगे कभी हम निष्कर्ष प आएंगे ही

631
00:46:39,440 --> 00:46:43,440
नहीं द अपनी भड़ास निकाल लूंगा मैं आपको बोलने का मौका

632
00:46:43,440 --> 00:46:48,240
दूंगा आपको प्रतीक्षा करनी होगी तो अब बात आती है

633
00:46:48,240 --> 00:46:52,240
कि आपने कहा कि सभी धर्मों का त्याग करके तू मेरी शरण

634
00:46:52,240 --> 00:46:56,280
में आ जा तो क्या इसका अर्थ हमें यह लेना चाहिए कि हमें

635
00:46:56,280 --> 00:47:00,400
सभी का त्याग करना है या फिर इसमें अमुक अमुक कई सारी

636
00:47:00,400 --> 00:47:04,920
और चीज जो हमने इस पर प्रॉपर एक वीडियो बनाया हुआ है वैसा मानना चाहिए

637
00:47:04,920 --> 00:47:09,560
तो क्या मानते हैं आप ठीक एक बार बोल सकता हूं

638
00:47:09,560 --> 00:47:13,920
क्या बात उ क्या अब आप पहले

639
00:47:13,920 --> 00:47:18,000
मत जाइए अब आप प्लीज पहले मत जा अभी आपने पूछा बताइए मुझे

640
00:47:18,000 --> 00:47:22,040
देर हो रही है मुझे दूसरे को लेना पड़ेगा मुझे दूसरे को

641
00:47:22,040 --> 00:47:26,200
लेना पड़ेगा मैं आपको आउट करूंगा आप पहले इसका जवाब दीजिए सभी

642
00:47:26,200 --> 00:47:31,760
धर्म को छोड़ना है की नहीं छोड़ना

643
00:47:31,760 --> 00:47:36,760
है मुझे बोलने दीजिए नहीं नहीं बोलने दूंगा मैं आपको आउट

644
00:47:36,760 --> 00:47:40,760
करूंगा मोनो आप स्वतंत्र है आप

645
00:47:40,760 --> 00:47:44,960
अपने निर्णय लेने के लिए स्वतंत्र है ठीक

646
00:47:44,960 --> 00:47:49,240
है आपको समझना है अभी पहले आप इसको क्लियर करके जाइए

647
00:47:49,240 --> 00:47:53,240
आप इसको पहले क्लियर करिए कि सभी धर्मों का त्याग करना है कि

648
00:47:53,240 --> 00:47:57,280
नहीं करना है पहले इसको क्लियर करिए भगवान नेहा सभी

649
00:47:57,280 --> 00:48:01,320
धर्मों का त्याग करना है सारे धर्म तो इसको माता को माता की दृष्टि

650
00:48:01,320 --> 00:48:05,400
से देखना और पत्नी की दृष्टि से ना देखना इसका त्याग

651
00:48:05,400 --> 00:48:10,240
करना है कि नहीं करना है अ

652
00:48:10,240 --> 00:48:14,480
समझ धर्म को किस काटे में कहा गया उन्होने उन्होने

653
00:48:14,480 --> 00:48:18,520
बताया या यानी की जो धर्म के दूसरे स्वरूप है

654
00:48:18,520 --> 00:48:22,960
उनका त्याग नहीं करना है अरे धर्म के स्वरूप मुझे एक बात बताइए

655
00:48:22,960 --> 00:48:27,160
मुझे बाता अभी आपने माना ना मर्यादा का नाम धर्म है

656
00:48:27,160 --> 00:48:31,360
मैं मानता हूं कि मर्यादा बिल्कुल रिलीजन से हमें चीजें मिलती है उसको हम

657
00:48:31,360 --> 00:48:35,440
क्या क्या क्या रिलीजन से रिलीजन

658
00:48:35,440 --> 00:48:39,440
धर्म नहीं है आप अपनी जानकारी सुधार फिर आइएगा दोबारा

659
00:48:39,440 --> 00:48:43,800
हां ठीक है चलो धर्म से मिलती मैं मानता हूं मर्यादा ठीक है मेरा क्वेश्चन ये है मेरे

660
00:48:43,800 --> 00:48:47,800
क्वेन नहीं क्वेश्चन मत करिए अभी क्वेश्चन नहीं पहले आप अपना

661
00:48:47,800 --> 00:48:52,080
जवाब दीजिए प्लीज नहीं आप कृपा करके यह बताइए

662
00:48:52,080 --> 00:48:56,240
सभी धर्मों का परित्याग करना है कि नहीं करना है मैं दो बार दे चुका हूं तीसरी

663
00:48:56,240 --> 00:49:00,440
बार दे रहा हूं सारे धर्म छोड़ने है यानी ये माता को माता मानना

664
00:49:00,440 --> 00:49:05,080
छोड़ दे माता को भी पत्नी की दृष्टि से देख सकते हैं मर्यादा छोड़ सकते हैं हम

665
00:49:05,080 --> 00:49:09,680
क्या मात धर्म को छोड़ने का मतलब यह होता है कि माता को माता नहीं मानना मैं आपसे

666
00:49:09,680 --> 00:49:13,720
पूछ बिल्कुल होता है बिल्कुल होता है अगर मातृ धर्म

667
00:49:13,720 --> 00:49:17,760
ये है अगर मातृ धर्म यह है कि माता को पत्नी दृष्टि से नहीं देखना

668
00:49:17,760 --> 00:49:21,880
है तो अगर हम उसका त्याग कर रहे हैं तो उसका मतलब है कि हम हम स्वतंत्र

669
00:49:21,880 --> 00:49:25,240
हो गए उसको भी हम क्या कहते हैं पत्नी की दृष्टि से देख

670
00:49:25,240 --> 00:49:29,400
सकते हैं बिल्कुल होता है अगर मात्र धर्म यही

671
00:49:29,400 --> 00:49:33,520
है कि मर्यादा है कि माता को पत्नी की दृष्टि से नहीं देखना है

672
00:49:33,520 --> 00:49:37,720
तो अगर हम उस धर्म का त्याग कर रहे हैं तो उसका मतलब है कि हम जो है इस मर्यादा का

673
00:49:37,720 --> 00:49:43,040
त्याग कर रहे हैं कि हम उसको भी पत्नी की दृष्टि से देख

674
00:49:43,040 --> 00:49:47,080
सकेंगे अब आप ठीक है बहुत सारा समय हमने आपको दे दिया आप

675
00:49:47,080 --> 00:49:51,120
जाए और अगली बार तैयारी के साथ आए तयारी के साथ आप बोलने का

676
00:49:51,120 --> 00:49:55,120
मौका नहीं दे रहे मेरे को बात आप गलत बोल

677
00:49:55,120 --> 00:49:59,160
रहे हो ना ऐसा हम नहीं कर सकते माता माता की दष्ट पनी

678
00:49:59,160 --> 00:50:03,600
की से देख पहले आपको पहले वास्तविकता

679
00:50:03,600 --> 00:50:07,680
को स्वीकार करना चाहिए क्या था कि जगन्नाथ टेंपल के अंदर अलाउ है

680
00:50:07,680 --> 00:50:11,880
कि नहीं बात आप ख गुण कर्म आप लिख धम उसके ऊप

681
00:50:11,880 --> 00:50:16,160
क्या नाम है वण के ऊपर मैंने आपको बताया कि वन का निधान गुण कर्म के आधार पर किया गया है

682
00:50:16,160 --> 00:50:20,360
आपने बताया पिछले जम के कर्म के आधार होता है मैं मानता हूं ठीक है पिछले

683
00:50:20,360 --> 00:50:24,400
जम के तो भगवान ने कहा है कि गुण कर्म के इसका विभाजन किया गया फिर आप नेक्स्ट क्वेन

684
00:50:24,400 --> 00:50:28,840
आपने उठाया मैं उसी वि आप पदा रहे फिर आप मुझे लेके आए कहां प

685
00:50:28,840 --> 00:50:33,160
जो विभाजन किया गया है वो गुण क्रम के आधार पर नहीं जो लास्ट जन्म के अपने बट

686
00:50:33,160 --> 00:50:37,360
है उसके पुन लास्ट ब में जोने कर्म कि उसके आधार पर विभाजन किया गया है ठीक है

687
00:50:37,360 --> 00:50:40,440
फ मैंने कहा आपको कि आपने बताया कि ठीक है मैंने

688
00:50:40,440 --> 00:50:44,440
आपको कहा कि अगर मैं शुद्ध तो मैं ब्राह्मण में नहीं जा सकता आपके अकॉर्डिंग तो

689
00:50:44,440 --> 00:50:48,840
फिर आपने मुझे बताया आपने ही मुझे बताया कि मेरा कर्मा क्या नाम था

690
00:50:48,840 --> 00:50:53,040
कर्म के आधार पर होता है ना वण विभाजन आपने एक वर्ड नाम दिया था मेरे को

691
00:50:53,040 --> 00:50:57,240
कि कर्म के आधार पर वर्ण का विभाजन आपने ही विषत पैदा किया कर्म के आधार विभाजन

692
00:50:57,240 --> 00:51:01,480
मैंने नहीं किया वो पैदा फिर मैं आपको आगे नेक्स्ट क्वेन लेके आया क्या सर्व धर्मा

693
00:51:01,480 --> 00:51:05,680
प अगर आपके कर्म के आधार प आप विभाजन कर रहे हैं तो मैं आगे लेके आया स धर्मा परज

694
00:51:05,680 --> 00:51:09,720
फिर आपने उसम भी क्या कांटेस्ट पैदा कर दिया मातृ धर्म का मतलब आपने गलत मीनिंग

695
00:51:09,720 --> 00:51:13,840
निकाला मातृ धर्म का ये सारी चर्चा जनता ने देखी

696
00:51:13,840 --> 00:51:18,120
है वो निर्णय कर लेगी कि कौन सही था कौन गलत ठीक है आने के लिए आभार

697
00:51:18,120 --> 00:51:22,120
आपका मैं निर्णय के लिए नहीं आया था य नि आप

698
00:51:22,120 --> 00:51:26,320
ये कह रहे हो कि माता को पत्नी की दृष्टि से ना देखने की मर्यादा

699
00:51:26,320 --> 00:51:30,360
का त्याग किया जा सकता है क्या यही धर्म है क्या मैं

700
00:51:30,360 --> 00:51:34,680
ये पूछ रहा हूं अब आपसे ये भी धर्म है इसीलिए कह रहा हूं ये भी धर्म है आपने

701
00:51:34,680 --> 00:51:38,680
कहा सब धर्मों का त्याग करो सब धर्मों में से एक धर्म ये भी

702
00:51:38,680 --> 00:51:42,760
है ये ही नहीं ये भी आपको कहना होगा कि

703
00:51:42,760 --> 00:51:46,800
कुछ धर्मों को छोड़ के त्याग कर दो तब तो मान ही जाएगी बात आप

704
00:51:46,800 --> 00:51:50,920
अगर कहोगे सभी धर्मों का त्याग कर दो तो उसमें तो ये आ गया चलो ठीक

705
00:51:50,920 --> 00:51:55,080
है एक बार के लिए मैं आपकी बात मान लेता हूं कि चलो ये नहीं एक बार के लिए मत मानिए आपसे

706
00:51:55,080 --> 00:51:55,580
चर्चा हो

707
00:51:55,560 --> 00:51:59,760
गई है आगे एक और क्वेश्चन उठेगा कि भगवान ने ऐसा क्यों कहा आगे ये क्वेन

708
00:51:59,760 --> 00:52:03,880
उठेगा फिर आपसे कि भगवान ने ऐसा क्यों कहा इस पर हमने वीडियो बना दिया है आप जाकर वहां

709
00:52:03,880 --> 00:52:09,440
देखिएगा इस पर हमने वीडियो बना दिया देखिएगा ब

710
00:52:09,440 --> 00:52:13,760
श्रीधर स्वामी की जो टीका है सुनिए श्रीधर

711
00:52:13,760 --> 00:52:19,760
स्वामी की जो टीका है श्रीमद भागवत प

712
00:52:36,600 --> 00:52:40,920
यह रामन चार सं की टी का है

713
00:52:40,920 --> 00:52:44,960
यह साधक सुदा राम सुखदास जी की

714
00:52:44,960 --> 00:52:49,280
और जय दयाल गोविंद का जी की रामानुजाचार्य आपके

715
00:52:49,280 --> 00:52:53,640
अनुसार प्रामाणिक श्रीधर स्वामी

716
00:52:53,640 --> 00:52:58,200
चैतन्य महाप्रभु के अनुसार प्रामाणिक इन्होंने इसमें

717
00:52:58,200 --> 00:53:02,800
यह माना है सभी प्रमाणिक आचार्यों में श्लोक का अर्थ

718
00:53:02,800 --> 00:53:07,040
पहली बात जो हमारा इंद्रियों का धर्म है आसक्त

719
00:53:07,040 --> 00:53:10,560
होना मोह होना इन धर्मों को त्यागने की

720
00:53:10,560 --> 00:53:14,880
बात की जा रही है दूसरी बात कि भगवत

721
00:53:14,880 --> 00:53:20,520
गीता की शुरुआत में एक श्लोक आया है जहां पर कहा गया है कि सभी

722
00:53:20,520 --> 00:53:25,480
जो सैनिक है वो युद्ध स्थल में

723
00:53:25,480 --> 00:53:29,920
अपने प्राणों को त्याग कर पहुंचे हैं प्राणों को त्याग कर

724
00:53:29,920 --> 00:53:34,000
अब अगर हम यह मान ले उसको एस इट कि व प्राणों को त्याग कर पहुंचे तो हमें य

725
00:53:34,000 --> 00:53:38,600
मानना पड़ेगा कि उनके अंदर भी जान नहीं जो व लड़ सके तो कर क्या रहे हैं

726
00:53:38,600 --> 00:53:42,600
तो हमें मानना पड़ेगा कि प्राण जब होंगे तो जीवन

727
00:53:42,600 --> 00:53:46,760
की जो आसक्ति होती है मनुष्य के जीवन की आसक्ति उस आसक्ति को त्याग

728
00:53:46,760 --> 00:53:50,800
कर पहुंचे हैं तो इसी प्रकार से भगवान एक मिनट

729
00:53:50,800 --> 00:53:54,840
इसी प्रकार से भगवान ने जब यह कहा कि सभी धर्मों को छोड़कर आ

730
00:53:54,840 --> 00:53:58,960
जा तो जो हम धर्म का पालन करते हैं उससे जो हमें यथोचित

731
00:53:58,960 --> 00:54:03,080
यज्ञ कर रहे तो अर्थ की प्राप्ति जो उससे होने वाले जो लाभ है

732
00:54:03,080 --> 00:54:07,160
उनके प्रति आसक्ति है उसको छोड़कर तू आ मेरी शरण

733
00:54:07,160 --> 00:54:11,480
में तो अपना कुल मिलाकर के बात वही हुई कि जो आपका इंद्रिय

734
00:54:11,480 --> 00:54:15,520
जनित धर्म है उसको छोड़ कर के मेरी शरण में आ जा ठीक

735
00:54:15,520 --> 00:54:19,640
है अगर आप कहेंगे सभी धर्मों को छोड़कर मेरी शरण में आ जा तो

736
00:54:19,640 --> 00:54:23,840
फिर उसमें माता के प्रति जो वो धर्म होता है

737
00:54:23,840 --> 00:54:25,720
वो भी आ जाएगा

738
00:54:25,720 --> 00:54:29,760
पिता के जो धर्म होता है वो भी आ जाएगा पत्नी के प्रति जो धर्म होता है वो सब

739
00:54:29,760 --> 00:54:34,680
आ जाएगा हर धर्म आ जाएगा अगर आप ये कह दोगे सभी धर्मों को छोड़कर

740
00:54:34,680 --> 00:54:38,840
और आपसे ही पूछ लूंगा सभी धर्मों को छोड़ने के बारे में 10

741
00:54:38,840 --> 00:54:43,160
नाम अपराध इस कौन क्लेम करता है यह भी धर्म है 10 नाम अपराध को मानना

742
00:54:43,160 --> 00:54:47,880
इस कौन के अकॉर्डिंग इसको भी त्याग करके क्या भगवान की शरण में जाना उचित है

743
00:54:47,880 --> 00:54:52,040
फस जाओगे ठीक है मेरी बात सुनिए क्या आपने

744
00:54:52,040 --> 00:54:56,400
कहा कि अभी भगवतगीता के फर्स्ट चैप्टर में कहीं आता है कि स्टार्टिंग में ऐसा करिए

745
00:54:56,400 --> 00:55:01,760
सुनिए मेरी बात सुनिए आप हमें फोन करिएगा ट नंबर है

746
00:55:01,760 --> 00:55:05,880
740819 इस पर आप करिए फॉर्म मिलेगा

747
00:55:05,880 --> 00:55:10,000
उसमें फॉर्म भरिए और हम आपसे संपर्क करेंगे दोबारा से आप

748
00:55:10,000 --> 00:55:14,640
जो है समय लेकर के विषय वो करके निश्चित करके दोबारा आइए

749
00:55:14,640 --> 00:55:18,640
क्योंकि आज हम आपके लिए नहीं आए थे टाइम बीत रहा था तो हमने आपको ले

750
00:55:18,640 --> 00:55:24,640
लिया और कई और भी लोग है ठीक है ठीक

751
00:55:25,320 --> 00:55:29,320
हैम 18 69 पर करें और सुन

752
00:55:29,320 --> 00:55:33,320
लीजिए जो गीता आप पढ़ रहे हैं उस गीता को लिखने वाले भी

753
00:55:33,320 --> 00:55:37,480
प्रॉपर पूरी तरीके से नहीं मानते कि जो

754
00:55:37,480 --> 00:55:41,520
जन्म से है कुछ नहीं होता है इसमें बहुत सारे ट्विस्ट है उस पर भी

755
00:55:41,520 --> 00:55:45,760
अध्ययन कर लीजिएगा इस बीच क्योंकि स्कोन यह नहीं कहता है कि जन्म

756
00:55:45,760 --> 00:55:49,840
से मिलने वाली जो चीजें वो कुछ नहीं होती है चैतन्य महाप्रभु ने कहा

757
00:55:49,840 --> 00:55:53,920
था कि गैया अगर दूध देना बंद कर देगी तो हम

758
00:55:53,920 --> 00:55:58,200
उसके प्रति जो सम्मान की भावना है वो कम नहीं कर देंगे ब्राह्मण

759
00:55:58,200 --> 00:56:02,560
पतित हो जाएगा तो उसको हम वेदोक्त कर्मों से आउट कर देंगे मंत्र पढवा

760
00:56:02,560 --> 00:56:06,720
बंद कर देंगे उसको जो ब्राह्मण के स्थान पर जो बैठा कर के पूजन

761
00:56:06,720 --> 00:56:10,800
पूजन अर्चन किया जाता है उसमें लेना बंद कर देंगे मगर उसको कहा ब्राह्मण ही

762
00:56:10,800 --> 00:56:14,880
जाएगा इसी प्रकार से जब आंख अगर अंधी

763
00:56:14,880 --> 00:56:19,320
हो जाए फिर भी उसकी जो संज्ञा है व आंख ही

764
00:56:19,320 --> 00:56:23,520
रहेगी सबन की तरफ से प्राप्त होने वाली चीज है इकोन के ही

765
00:56:23,520 --> 00:56:28,120
अध्यक्ष है जिनके ऊपर मैंने वीडियो बनाया ये कह रहे हैं

766
00:56:28,120 --> 00:56:32,360
एक मिनट एक मिनट लेट मी फिनिश एक मिनट तो स्न

767
00:56:32,360 --> 00:56:36,640
के ही अध्यक्ष है उन पर मैंने वीडियो बनाया उसमें वह कह रहे हैं कि

768
00:56:36,640 --> 00:56:40,680
अगर व सामने वाला भक्त है तो वह

769
00:56:40,680 --> 00:56:44,800
ब्राह्मण हो गया ठीक है अगर सामने वाला भक्त है तो ब्राह्मणों

770
00:56:44,800 --> 00:56:49,120
से भी ऊंचा हो गया वैष्णव हो गया और

771
00:56:49,120 --> 00:56:53,640
क्या कहते हैं यह अगर वो सामने वाला भी भक्त है तो वैष्णव हो गया

772
00:56:53,640 --> 00:56:58,160
और उसके बाद वो कहते हैं तो हम उससे से विवाह कर सकते हैं फिर भी

773
00:56:58,160 --> 00:57:02,280
वो बेस्ट होगा यदि वोह जन्म से भी हो ब्राह्मण और फिर

774
00:57:02,280 --> 00:57:06,480
वो भक्त भी हो जाए तो बेस्ट क्यों हुआ अंतर

775
00:57:06,480 --> 00:57:10,720
क्यों रहा यानी कि कन भी इस बात को मान रहा है कि जो शरीर जो

776
00:57:10,720 --> 00:57:15,200
जन्म से प्राप्त जो चीज है वो होती है और ठीक है

777
00:57:15,200 --> 00:57:19,320
आपके द्वारा प्राप्त होने वाली जो कर्मणा वर्ण व्यवस्था उसको स्वीकार

778
00:57:19,320 --> 00:57:23,400
की जाएगा तो उसको स्वीकार करने का अर्थ है कि कोई व्यवस्था है ही

779
00:57:23,400 --> 00:57:27,440
नहीं क्योंकि जब जिसकी शरुआत होगी उसके उस जरूरत को

780
00:57:27,440 --> 00:57:32,040
पूरा करने के लिए वह व्यक्ति धर्म की सीमा में बाध्य नहीं है अर्जुन

781
00:57:32,040 --> 00:57:36,320
कह सकता है भैया मैं ब्राह्मण बन गया और अगर

782
00:57:36,320 --> 00:57:40,360
अगर घोषित नहीं हुआ है तो कौन घोषित करता है इसके निमित क्या नियमावली है

783
00:57:40,360 --> 00:57:44,480
यह सारी चीजें प्रॉपर हमने वीडियो बना दिया आप देखिएगा ठीक है मेरा

784
00:57:44,480 --> 00:57:48,480
क्वेन है क्या जज का क्वे नहीं क्वेन

785
00:57:48,480 --> 00:57:54,480
नहीं लेंगे आप दोबारा आइएगा ठीक ठीक है क्या जज का बेटा

786
00:58:02,040 --> 00:58:08,040
रामानुज जी आप अपना चेहरा दिखाएं

787
00:58:08,910 --> 00:58:14,910
[संगीत]

788
00:58:27,680 --> 00:58:33,680
रामानुज जी आप अपना चेहरा

789
00:58:48,600 --> 00:58:54,600
दिखाएं जी अवनीश जी बताए आप कुछ कह रहे

790
00:58:54,680 --> 00:58:58,880
थे ग ब्राह्मण लाइक अनन्या पांडे एंड

791
00:58:58,880 --> 00:59:03,080
पूनम पांडे गीता प्रेस का भगवत गीता सही

792
00:59:03,080 --> 00:59:07,200
है जी काफिर आजम इंडिया

793
00:59:07,200 --> 00:59:13,000
में इतने सारे रिलीजन है कोई क्यों वण

794
00:59:13,000 --> 00:59:17,120
व्यवस्था मानेगा मानेगा बिल्कुल मानेगा जिस

795
00:59:17,120 --> 00:59:21,160
दिन हम जैसे किसी मनुवादी व्यक्ति से चर्चा हो जाएगी

796
00:59:21,160 --> 00:59:27,160
मानेगा वरना व निशब्द हो जाएगा

797
00:59:36,720 --> 00:59:41,280
हां बनाएंगे दास जी बुद्धिस्ट के ऊपर भी वीडियोस

798
00:59:41,280 --> 00:59:45,440
बनाएंगे बीच में एक बार वह जो क्या नाम

799
00:59:45,440 --> 00:59:48,600
है

800
00:59:48,600 --> 00:59:52,720
उसका साइंस जर्नी वो हमारे एक वीडियो

801
00:59:52,720 --> 00:59:56,800
पर आए थे बोले कि डिबेट वेट कर लो तो हमने

802
00:59:56,800 --> 01:00:01,000
उनसे कहा चेहरा दिखाओ तो शायद उनके अंदर कोई कायरता थी जिस कारण

803
01:00:01,000 --> 01:00:05,200
से उन्होंने उस बात को माना नहीं बनाएंगे समय

804
01:00:05,200 --> 01:00:09,240
निकालेंगे बनाएंगे मैं यही कह रहा था कि कोई अभद्र भाषा का उपयोग

805
01:00:09,240 --> 01:00:15,240
कर रहा था उसको देखने के लिए बोला था बस अच्छा अच्छा

806
01:00:26,240 --> 01:00:31,320
हां तो यह हम भी मानते हैं ना इसको आप क्लियर

807
01:00:31,320 --> 01:00:35,680
करिए जन्म से नॉमिनेशन नॉट सिलेक्शन

808
01:00:35,680 --> 01:00:40,400
पहले जन्म से नॉमिनेशन उसके बाद उसकी योग्यता के अनुसार उसका

809
01:00:40,400 --> 01:00:44,480
सिलेक्शन जैसे कहीं पर जब कोई रिक्रूटमेंट होता

810
01:00:44,480 --> 01:00:49,760
है भर्ती होती है तो उसमें क्या होता है

811
01:00:49,760 --> 01:00:53,880
कि आपकी जो उस प्रतियोगिता से पहले की जो

812
01:00:53,880 --> 01:00:58,000
योग्यता है वो इस कारण उसके आधार पर केवल आप

813
01:00:58,000 --> 01:01:02,000
यहां आ सकते हो प्रतियोगिता में प्रतियोगिता में आने के

814
01:01:02,000 --> 01:01:06,160
बाद जो आप करेंगे परफॉर्म करेंगे उसके आधार पर आपका सिलेक्शन

815
01:01:06,160 --> 01:01:11,080
होगा तो यह जो मनुष्य जीवन है यह भी एक प्रतियोगिता है

816
01:01:11,080 --> 01:01:15,360
इसमें आने से पहले की जो आपकी योग्यता थी उसके आधार पर आपको

817
01:01:15,360 --> 01:01:19,440
एक प्रतियोगिता में आने का भाग मिल गया कि आप यहां इस रूप में आ सकते हो आप इस रूप में

818
01:01:19,440 --> 01:01:23,480
आ सकते हो अब आगे यहां पर आने के बाद आप जो वो करेंगे

819
01:01:23,480 --> 01:01:27,760
उसके अनुसार आपका सिलेक्शन होगा अमुक कर्मों में जैसे कि

820
01:01:27,760 --> 01:01:31,920
बॉलर बैट्समैन के रूप में व्यक्ति जो है मैदान में उतरता

821
01:01:31,920 --> 01:01:35,920
है मगर वहां पर होने वाले जो

822
01:01:35,920 --> 01:01:41,920
चीजें होती है स्थितियां होती हैं उनके अनुसार उनका उपयोग किया जाता

823
01:01:44,080 --> 01:01:48,320
है और आपातकालीन स्थिति में किसी का भी उपयोग कर लेने

824
01:01:48,320 --> 01:01:52,520
की भी कर लेने का भी प्रावधान है इस पर मत कहिए

825
01:01:52,520 --> 01:01:58,520
कि हा बॉलर का बैट्समैन के रूप में उपयोग है क्या वो आपातकालीन

826
01:02:05,720 --> 01:02:09,800
होता यह देखिए चेहरा बहुत

827
01:02:09,800 --> 01:02:14,120
बेकार है भैया आपके जैसा हीरो सब थोड़ी

828
01:02:14,120 --> 01:02:19,880
ही लगता अच्छा अच्छा अरे ऐसी बात नहीं है

829
01:02:19,880 --> 01:02:24,080
भाई पीपल डोंट अंडरस्टैंड द पॉलिटिकल

830
01:02:24,080 --> 01:02:28,280
एडवांटेज ऑफ हैविंग कास्ट यह जहर घोला

831
01:02:28,280 --> 01:02:32,280
गया है इससे कोई मतलब थोड़ी ना है भाई कोई आपको आप अगर ब्राह्मण नहीं कहला रहे तो

832
01:02:32,280 --> 01:02:36,320
उससे दिक्कत क्या है दिक्कत होनी चाहिए जब आपको जो है भगवत प्राप्ति के लिए

833
01:02:36,320 --> 01:02:42,320
मना कर दिया

834
01:02:48,640 --> 01:02:53,120
जाए सात दीप नव खंड में

835
01:02:53,120 --> 01:02:57,280
गुरु से बड़ा ना कोई आप आ जाइए प्रभु सिंह

836
01:02:57,280 --> 01:03:03,280
जी लाइव आ जाइए मेरी एक रिक्वेस्ट

837
01:03:08,000 --> 01:03:12,720
है य भाई यह

838
01:03:12,720 --> 01:03:18,000
क्या मेरी एक रिक्वेस्ट है

839
01:03:18,000 --> 01:03:22,040
कि अगर कोई किसी के पास हमारा वह लिंक है तो उसको

840
01:03:22,040 --> 01:03:26,360
कॉपी करके दोबारा पेस्ट कर दे यहां कमेंट सेक्शन में

841
01:03:26,360 --> 01:03:32,360
अविगत कबीर आप आ जाइए ईश्वर को सर्वशक्तिमान सिद्ध

842
01:03:38,760 --> 01:03:42,880
करिए कार्टून जी आप अपने विज्ञान के आधार पर कायरता

843
01:03:42,880 --> 01:03:47,560
छोड़िए साहस एकत्रित करिए और सामना करने का साहस

844
01:03:47,560 --> 01:03:53,560
दिखाइए आपसे कह रहा हूं कार्टून जी

845
01:04:03,000 --> 01:04:07,680
राम कृष्ण से कौन बड़ा उन्होंने भी गुरु

846
01:04:07,680 --> 01:04:11,880
न तीन लोक के नी गुरु आगे अधीन

847
01:04:11,880 --> 01:04:16,120
धरती पर भगवान है सारी दुनिया

848
01:04:16,120 --> 01:04:22,120
अनजान है सनातन धर्म महान

849
01:04:26,400 --> 01:04:30,560
हिंदू की हिंदू के बारे में जो आप बात कर रहे हैं कृष्णा

850
01:04:30,560 --> 01:04:35,920
जी वोह हिंदू धर्म आपके पास कैसे आया यह

851
01:04:35,920 --> 01:04:40,120
बताएं अपने आप को सनातनी कहने वाला पहले यह बताया कि उसके पास

852
01:04:40,120 --> 01:04:45,600
य सनातन ज्ञान आया कहां से ठीक

853
01:04:45,600 --> 01:04:50,480
है सबसे पहली बात कुछ चार पांच चीजें आपको ध्यान रखनी चाहिए

854
01:04:50,480 --> 01:04:54,720
जन्मना और कर्मणा में पहली बात जन्मना का अर्थ ये नहीं है कि नहीं ब्राह्मण है वो

855
01:04:54,720 --> 01:04:58,720
कर्म कैसे भी करे उसको ले लिया जाएगा नहीं ब्राह्मण है

856
01:04:58,720 --> 01:05:02,760
तो उसको जो है अ चेक

857
01:05:02,760 --> 01:05:07,160
किया जाएगा ब्राह्मण घर से चेक किया जाएगा और आगे जो है उसके अनुसार

858
01:05:07,160 --> 01:05:13,160
कार्य किया जाएगा कन्हैया आपका

859
01:05:15,280 --> 01:05:21,280
चेहरा कन्हैया जी आपका चेहरा

860
01:05:38,040 --> 01:05:42,200
सही शिक्षा यह जो जातिवाद

861
01:05:42,200 --> 01:05:46,280
का गलत स्वरूप समाज में फैलाया गया है इसकी सही शिक्षा जनजन तक

862
01:05:46,280 --> 01:05:50,440
पहुंचाना यह बताना कि जन्म से केवल नॉमिनेशन होगा उसके

863
01:05:50,440 --> 01:05:54,560
कर्मों के आधार पर उसका सिलेक्शन अथवा रिजेक्शन होगा और

864
01:05:54,560 --> 01:05:59,240
दूसरी बात यह कि अगर कहीं कहीं पर विधि निषेध के रूप में कुछ मना किया गया है

865
01:05:59,240 --> 01:06:04,200
तो इसका अर्थ यह नहीं है कि उनसे कोई बैर है शास्त्र को धर्म को

866
01:06:04,200 --> 01:06:08,360
अगर कहीं पर जाने से आपको रोका जा रहा है तो उसका आपका हित भी सिद्ध होता है

867
01:06:08,360 --> 01:06:12,440
जैसे एक बच्चे को पिता को छूने से रोका जाता है जब पिता जो

868
01:06:12,440 --> 01:06:16,560
है कार्य कर रहे होते हैं बिजली का उस समय अगर बच्चे से मना किया जा रहा

869
01:06:16,560 --> 01:06:21,440
है कि पिता को मत छुओ तो इसका मतलब यह नहीं बच्चे से प्यार नहीं है

870
01:06:21,440 --> 01:06:25,880
इसके बाद आप यहां पर आपको जो वहां से मना किया गया वो आपको उस

871
01:06:25,880 --> 01:06:30,000
दायित्व से मुक्त किया गया है जो अत्यंत कठिन हो जाएगा निर्वाह

872
01:06:30,000 --> 01:06:31,280
करने

873
01:06:31,280 --> 01:06:36,040
में दूसरी बात कर्मणा वर्ण व्यवस्था से जो समाज होगा

874
01:06:36,040 --> 01:06:40,200
उसमें विपलव होगा जो आज है तीसरी बात बात करें अगर

875
01:06:40,200 --> 01:06:44,240
प्रमाण की तो प्रमाण में भी भगवान अगर वो जो

876
01:06:44,240 --> 01:06:48,520
धर्म है वो जो ण वर्णानु सार धर्म है वो अगर बदला

877
01:06:48,520 --> 01:06:52,640
जा सकता है कर्म के आधार पर तो फिर भगवान उसको बाद नहीं

878
01:06:52,640 --> 01:06:56,720
कर सकते कि तेरा वर्ण यह है और तू यह कर बाद तभी कर सकते

879
01:06:56,720 --> 01:07:00,720
हैं जब उसको बदला ना जा सके दूसरी बात भगवान कह रहे हैं मया

880
01:07:00,720 --> 01:07:04,840
सटम मैंने बनाया तो फिर यहां इंसान क्यों बना रहा है तीसरी बात अगर

881
01:07:04,840 --> 01:07:09,080
इंसान बना रहा है तो कौन किस आधार पर बना रहा है कौन कब

882
01:07:09,080 --> 01:07:13,120
कैसे किस आधार पर बनाएगा ठीक है

883
01:07:13,120 --> 01:07:17,440
तो यह भी है और

884
01:07:17,440 --> 01:07:21,560
अगर इसको हम लोग एक थर्ड पार्टी बन कर के अगर देखें तो

885
01:07:21,560 --> 01:07:25,760
मैंने एग्जांपल दिया था कि जो जन्म से जो गुणवत्ता प्राप्त हो

886
01:07:25,760 --> 01:07:30,040
आप कितनी भी आप ट्रेनिंग दे दो वो जो गुणवत्ता होंगी अगर उसके

887
01:07:30,040 --> 01:07:34,280
अनुसार ट्रेनिंग दोगे तो ज्यादा लाभ होगा और जो गुणवत्ता नहीं है उसके अंदर जन्म

888
01:07:34,280 --> 01:07:38,360
से और उसके अनुसार ट्रेनिंग देंगे तो कम लाभ होगा तो हम जब तक हमें जन्मा

889
01:07:38,360 --> 01:07:42,560
निसार प्राप्त है तो हम क्यों आपातकालीन धर्म को लागू कर दे

890
01:07:42,560 --> 01:07:46,280
वहां जब हमें रट वेलर प्राप्त है तो हम क्यों

891
01:07:46,280 --> 01:07:50,600
उसको क्षत्रिय के रूप में उपयोग करने की बजाय हम क्यों लेब्राडोर को उपयोग करें

892
01:07:50,600 --> 01:07:54,600
क्षत्रिय बना कर के उसको खुख बना कर के चार टाइम खाना देना बंद करो

893
01:07:54,600 --> 01:07:59,040
भाई रट वेलर को लेब्राडोर को तो थोड़ी थोड़ी हिंसक प्रवृत्ति आएगी खामा

894
01:07:59,040 --> 01:08:03,240
खा उसको मारना शुरू करो तो वो चिड़चिड़ा होगा क्रोध आए और उसके

895
01:08:03,240 --> 01:08:07,400
बावजूद भी कोई गारंटी नहीं है कि जितना अच्छा रट

896
01:08:07,400 --> 01:08:11,800
वेलर जो हिंसक है क्षत्रिय है उतना ही अच्छा वो लेब्राडोर बन जाएगा

897
01:08:11,800 --> 01:08:16,040
वो भी एक गारंटी नहीं शरीर तो वैसा मिलेगा ही नहीं ताकतवर कितने

898
01:08:16,040 --> 01:08:20,320
टन का बाइट होता है रट वेलर का और कितने टन का बाइट होता है लेब्राडोर

899
01:08:20,320 --> 01:08:24,680
का ये सब अंतर शारीरिक भेद तो आएगा ही तो वो जो जेनेटिकली

900
01:08:24,680 --> 01:08:28,720
जो हमें मिला है उसके अनुसार जब हम उसको उपयोग करेंगे तो हमें ज्यादा

901
01:08:28,720 --> 01:08:32,720
व्यवस्थित और ज्यादा अच्छा समाज प्राप्त होगा तो शास्त्र केवल उसकी बात कर

902
01:08:32,720 --> 01:08:36,800
रहे हैं कि जेनेटिकली अच्छा इसमें एक बात और मैंने पिछली बार भी बताया था कि

903
01:08:36,800 --> 01:08:41,560
हमको गुण कर्म के आधार पर उसको ढूंढना है

904
01:08:41,560 --> 01:08:45,560
क्या कहते हैं क्षत्रिय को बेटी का विवाह

905
01:08:45,560 --> 01:08:49,720
कराना है क्षत्रिय का अपनी बिटिया का विवाह कराना है तो गुण कर्म के आधार

906
01:08:49,720 --> 01:08:53,840
पर अगर हम ढूंढेंगे तो हम उसको लेकर सीधे मेले में चले जाए

907
01:08:53,840 --> 01:08:58,160
जो मिल रहा है उसको हिला हिला के देखें उसके अंदर कौन-कौन से गुण है कौन-कौन से कर्म

908
01:08:58,160 --> 01:09:01,360
है अगर हमने कोई भी पैरामीटर शुरुआती

909
01:09:01,360 --> 01:09:05,920
तय किया तो यही तो वर्ण व्यवस्था है आप जन्मना हो गए

910
01:09:05,920 --> 01:09:10,720
जैसे हमने यह कह दिया कि अच्छा घर देखेंगे वहां

911
01:09:10,720 --> 01:09:14,840
मिलेगा वहां देखेंगे क्षत्रिय है कि नहीं इसका मतलब क्या हुआ हमने

912
01:09:14,840 --> 01:09:18,920
यह मान लिया कि हम जो है जन्म किसी अच्छे घर में जन्म लेने

913
01:09:18,920 --> 01:09:23,280
वाले के लिए अपेक्षा कर रहे हैं कि वह हमारे अनुरूप हो

914
01:09:23,280 --> 01:09:27,600
उसके जन्म से गुणों को हम करने जा रहे हैं कि वो ज जन्म से गुणों

915
01:09:27,600 --> 01:09:31,640
के अनुसार कर्म कर रहा है कि नहीं अगर हमने यहां पर

916
01:09:31,640 --> 01:09:35,920
कास्ट का नाम नहीं लिया वर्ण का नाम नहीं लिया हमने कह दिया अच्छा घर

917
01:09:35,920 --> 01:09:40,360
अपनी बिटिया के विवाह के लिए अच्छा घर जितने भी कर्मणा मानने वाले

918
01:09:40,360 --> 01:09:44,600
हैं वो यह ना कहे अपने जीवन में कि अपनी

919
01:09:44,600 --> 01:09:48,600
बेटी की शादी अपनी बहन की शादी मैं अच्छे घर में करूंगा बंद कर

920
01:09:48,600 --> 01:09:52,720
दे क्योंकि वहां वो प्राथमिकता से पहले जन्म को मान

921
01:09:52,720 --> 01:09:57,000
रहे हैं पहले अपेक्षा कर रहे हैं कि भाई वहां जाक लड़के को देखने जाए बाद में लड़के

922
01:09:57,000 --> 01:10:01,400
के अगर गुण उस घर के अकॉर्डिंग जैसा हमने सोचा हमारे अकॉर्डिंग नहीं मिलेंगे

923
01:10:01,400 --> 01:10:05,600
तो हम दूसरा अच्छा घर देखेंगे मगर जब कर्मणा वर्ण

924
01:10:05,600 --> 01:10:09,760
व्यवस्था मानते हैं तो आपके पास कोई शुरुआती पॉइंट है ही नहीं कुछ नहीं बोल सकते

925
01:10:09,760 --> 01:10:13,800
आप यहां जाएंगे अगर हमने बोला कि अच्छा घर अच्छे घर

926
01:10:13,800 --> 01:10:16,800
में जाएंगे हम लड़के को चेक करने तो

927
01:10:16,800 --> 01:10:21,360
क्या यह आवश्यक है कि अच्छे घर का लड़का भी अच्छा ही हो

928
01:10:21,360 --> 01:10:26,280
नहीं हमें उसके कर्मों को चेक करना पड़ेगा यही है नॉमिनेशन ऑफ सिलेक्शन

929
01:10:26,280 --> 01:10:30,320
नॉमिनेट कैसे हुआ हमारे अकॉर्डिंग व अच्छा है क्या नॉमिनेट कैसे

930
01:10:30,320 --> 01:10:34,560
हुआ कि हमारी जानकारी में ब्राह्मण है क्या हमारी जानकारी

931
01:10:34,560 --> 01:10:38,840
में क्षत्रिय है क्या तब उसके पास जाएंगे और तब हम उसको

932
01:10:38,840 --> 01:10:42,840
कहेंगे और अगर वह अपने क्षत्रिय वर्ण के अनुसार कार्य नहीं कर रहा है

933
01:10:42,840 --> 01:10:46,840
अगर वह नहीं कर रहा है ब्राह्मण वर्ण के अनुसार कार्य तो उसको हम कह सकते हैं

934
01:10:46,840 --> 01:10:51,680
कि यहां पर तुम जो है शास्त्रो चित आचरण नहीं कर रहे

935
01:10:51,680 --> 01:10:55,720
मगर जब कर्मणा होगी तो हम उसे बाद कर ही नहीं सकते क्योंकि

936
01:10:55,720 --> 01:10:59,840
जो वह अपने धर्म को छोड़कर जो दूसरे के धर्म को अपना के जो कार्य कर रहा है वह

937
01:10:59,840 --> 01:11:04,000
भी धर्म है क्योंकि भाई जन्म वो कर्म

938
01:11:04,000 --> 01:11:08,040
के अनुसार बदल जाएगा जो वो करेगा वो हो जाएगा उसका फिर फायदा क्या है

939
01:11:08,040 --> 01:11:12,080
क्योंकि हम ब्राह्मण के पास जाएंगे तो ब्राह्मण हो सकता है क्षत्रिय मिले क्षत्रिय पास जाए क्षत्रिय हो

940
01:11:12,080 --> 01:11:16,840
सकता है ब्राह्मण मिले तो यह वर्गीकरण का फायदा क्या रहा क्लासिफिकेशन का

941
01:11:16,840 --> 01:11:21,400
फायदा तो यह है ना कि ज्यादा आसानी से हम एक दूसरे तक पहुंच सके

942
01:11:21,400 --> 01:11:25,400
ब्राह्मण की आवश्यकता हो तो ब्राह्मण को प्राप्त कर सक क्षत्रिय की आवश्यकता

943
01:11:25,400 --> 01:11:31,280
क्षत्रिय प्राप्त कर

944
01:11:31,280 --> 01:11:37,280
सके अविगत

945
01:11:39,880 --> 01:11:45,880
कबीर

946
01:11:45,960 --> 01:11:50,360
मनोहर कन्हैया

947
01:11:50,360 --> 01:11:54,640
जी जी कन्हैया जी बताए

948
01:11:54,640 --> 01:11:59,520
भाई हरे राम हरे कृष्णा जय श्री राम

949
01:11:59,520 --> 01:12:03,560
जय श्री राम अरे आपने तो मेरा चेहरा कई बार देखा हुआ है तो कई बार बात

950
01:12:03,560 --> 01:12:07,800
हुई है बारबार आप मेरे से चेहरा दिखाने के क्यों बोलते हैं भाई

951
01:12:07,800 --> 01:12:12,040
मैंने बात ये है ना कि मैं ये नहीं जानता था ये कन्हैया लाल चौधरी

952
01:12:12,040 --> 01:12:16,080
भाई वाले कन्हैया लाल हां मैं मतलब वही तो कह रहा हूं तो आप

953
01:12:16,080 --> 01:12:20,440
तो मेरे से कई बार मिल चुके हो कई बार बात बात भी कर चुके हो सब काम कर चुके हो एक्चुअली

954
01:12:20,440 --> 01:12:25,640
मैं इस समय ना अपने चेंबर में बैठा हुआ हूं मैं चेंबर में बैठा हुआ हूं इसलिए मैं

955
01:12:25,640 --> 01:12:29,680
मतभेद तो है नहीं हमसे नहीं मैं तो ऐसे ही आ गया आपसे मुलाकात करने

956
01:12:29,680 --> 01:12:33,920
के लिए मुलाकात आप अदर वाइज करिए ना चलिए ठीक है

957
01:12:33,920 --> 01:12:39,920
चलो चलो

958
01:12:48,960 --> 01:12:53,480
ठीक मनोहर मनोहर जी आपका चेहरा

959
01:12:53,480 --> 01:12:59,480
योयो 77

960
01:13:01,840 --> 01:13:06,240
जी योयो जी आपका

961
01:13:06,240 --> 01:13:09,840
नाम मेरा नाम रत्न है

962
01:13:09,840 --> 01:13:12,040
सर

963
01:13:12,040 --> 01:13:16,280
जी कहां से हैं

964
01:13:16,280 --> 01:13:18,880
जालौर

965
01:13:18,880 --> 01:13:22,640
राजस्थान अच्छा

966
01:13:22,640 --> 01:13:27,000
बोलिए सर वो एक कमेंट में कर रहा था अंतरजातीय

967
01:13:27,000 --> 01:13:31,080
विवाह वाला कार्टून

968
01:13:31,080 --> 01:13:35,880
वीडियो हां आप ही

969
01:13:35,880 --> 01:13:40,000
हो हां वो मैं ही हूं

970
01:13:40,000 --> 01:13:44,000
अच्छा अच्छा आप तो बहुत सारे अजीब अजीब से प्रश्न किया

971
01:13:44,000 --> 01:13:48,080
करते हो शायद मैंने देखा थोड़ा दूर जाइए चेहरा तो दिखाइए थोड़ा सा

972
01:13:48,080 --> 01:13:53,400
दूर से लीजिए अच्छा हां बोलिए अंतरजातीय

973
01:13:53,400 --> 01:13:57,480
विवाह सर वैसे मेरा आपसे कोई व्यक्तिगत

974
01:13:57,480 --> 01:14:01,520
विरोध नहीं है किंतु मेरे जो चीजें समझ में नहीं आती

975
01:14:01,520 --> 01:14:05,640
मैं अपने चारों ि पहली बात तो ये है कि जो

976
01:14:05,640 --> 01:14:10,120
आपने आधार बनाया है अंतरजातीय विवाह का

977
01:14:10,120 --> 01:14:14,240
पहले बताऊं आपको कि अभी मैंने जैसे एक उदाहरण दिया रट

978
01:14:14,240 --> 01:14:18,800
वेलर का तो क्या रोट वेलर का

979
01:14:18,800 --> 01:14:22,960
संबंध लेब्राडोर के साथ होगा तब भी हमें वैसी क्वालिटी का

980
01:14:22,960 --> 01:14:28,360
रट वेलर प्राप्त हो सकता है

981
01:14:28,360 --> 01:14:32,400
वैसे तो नहीं होगा नहीं होगा अच्छा दूसरी बात यह कह

982
01:14:32,400 --> 01:14:36,480
रहा हूं क्या जो साइंस के द्वारा बताए

983
01:14:36,480 --> 01:14:40,720
गए सिद्धांत होते हैं वह शाश्वत होते

984
01:14:40,720 --> 01:14:44,800
हैं शाश्वत तो नहीं होते अच्छा

985
01:14:44,800 --> 01:14:48,880
मतलब वह कभी भी बदल सकते हैं आज उन्होंने एक पैरामीटर दिया अच्छा है हो

986
01:14:48,880 --> 01:14:53,080
सकता है कल को ये भी हो जाए गलत है हां यानी

987
01:14:53,080 --> 01:14:57,520
कि उनके उनके आधार पर हम रिलाई नहीं कर सकते

988
01:14:57,520 --> 01:15:01,600
किंतु आप भी तो अपनी बात को वेरीफाई करने के लिए विज्ञान

989
01:15:01,600 --> 01:15:05,680
के पास ही जाओगे आपको कैसे पता चला कि जो हमारे पिता से जो गुण

990
01:15:05,680 --> 01:15:09,680
मिलते हैं वह वैसे ही होंगे वो सहारा मात्र लिया जा

991
01:15:09,680 --> 01:15:13,760
सकता है उसके ऊपर डिपेंड नहीं है पूरी तरीके से बात करते

992
01:15:13,760 --> 01:15:18,000
समय कुछ भौतिक उदाहरणों का सहारा लिया जा सकता है मगर

993
01:15:18,000 --> 01:15:22,080
उसके ऊपर ही डिपेंड नहीं है दूसरी बात मैं उस पर आ रहा हूं

994
01:15:22,080 --> 01:15:26,320
जैसे कि हम अपने घर की स्त्रियों का अच्छा

995
01:15:26,320 --> 01:15:31,600
नहीं मानते हैं किसी पर पुरुष के साथ आप मानते हैं कि

996
01:15:31,600 --> 01:15:35,880
नहीं नहीं नहीं नहीं मैं पूछ रहा हं

997
01:15:35,880 --> 01:15:40,360
व्यर्थ क्यों किया जाए व्यर्थ का ना हो नहीं नहीं व्यर्थ नहीं

998
01:15:40,360 --> 01:15:44,240
मान लीजिए कोई व्यक्ति है उसकी आसक्ति हो रही है

999
01:15:44,240 --> 01:15:48,480
कि किसी के घर की स्त्री का मैं चुंबन ले लू गाल प

1000
01:15:48,480 --> 01:15:52,600
तो यह उचित मान इसको ना करना या इसको

1001
01:15:52,600 --> 01:15:56,680
रोकना इससे क्या यह आप मानते हैं ऐसा होना चाहिए कि

1002
01:15:56,680 --> 01:16:00,920
नहीं होना चाहिए नहीं मेरे को व्यक्तिगत रूप से ये

1003
01:16:00,920 --> 01:16:04,960
ठीक नहीं लगता अच्छा तो यह साइंस ने कहा है

1004
01:16:04,960 --> 01:16:08,960
क्या कि ऐसा नहीं होना चाहिए नहीं विज्ञान ने तो

1005
01:16:08,960 --> 01:16:12,960
नहीं कहा ऐसा ठीक है अच्छा कहा और

1006
01:16:12,960 --> 01:16:17,120
कोई प्रश्न है आपका सर धर्म सभी

1007
01:16:17,120 --> 01:16:21,240
चीजों का अंत थोड़ी है डार्विन का सिद्धांत आप

1008
01:16:21,240 --> 01:16:25,760
कैसे का करोगे उसको

1009
01:16:25,760 --> 01:16:30,680
डार्विन का सिद्धांत मार्क्स वाद और रामराज आप पढ़िए

1010
01:16:30,680 --> 01:16:36,000
विस्तृत है आप पढ़ लीजिएगा डार्विन का सिद्धांत आप यह बताइए

1011
01:16:36,000 --> 01:16:40,040
कि आप अपने जीवन में मर्यादा

1012
01:16:40,040 --> 01:16:44,600
का पालन करते हैं क्या मानव

1013
01:16:44,600 --> 01:16:48,960
उचित हां जितनी मर्यादा है शायद उतनी

1014
01:16:48,960 --> 01:16:53,440
नहीं किंतु बहुत सारी मर्यादाओं का पालन होता माता को माता की दृष्टि से देखना

1015
01:16:53,440 --> 01:16:57,480
पत्नी की दृष्टि से ना देखना इसका पालन तो करते हैं ना हां

1016
01:16:57,480 --> 01:17:01,480
करते हैं का से सीखा यह

1017
01:17:01,480 --> 01:17:07,480
तो हमें हमारे पिता से ही पता चला पिता भी नास्तिक

1018
01:17:07,800 --> 01:17:12,280
थे नहीं पिताजी इतने नहीं थे किंतु उन्होने

1019
01:17:12,280 --> 01:17:16,280
बताया धर्म को मानते थे या नहीं मानते थे मानते

1020
01:17:16,280 --> 01:17:20,720
थे हा तो धर्मे ना पशु भी

1021
01:17:20,720 --> 01:17:25,240
समाना आपके जीवन में आप अगर थोड़ी भी मानवो चित

1022
01:17:25,240 --> 01:17:29,440
मर्यादा का आलंबन ले रहे हो उसका मूल धर्म है

1023
01:17:29,440 --> 01:17:33,520
साइंस आपको मर्यादा नहीं सिखाती है साइंस आपको

1024
01:17:33,520 --> 01:17:37,520
आपके उसके अनुसार प्रोजेक्ट देते रहती है कि आज यह

1025
01:17:37,520 --> 01:17:41,680
अच्छा है ये अच्छा है ऐसे हो ग तो ऐसे कर सकते हैं मगर वह धर्म मर्यादा

1026
01:17:41,680 --> 01:17:45,680
नहीं देती है दूसरी बात ये कह रहा हूं कि आप अगर धर्म

1027
01:17:45,680 --> 01:17:51,440
को नहीं मानते हैं तो इसका अर्थ है कि आप ईश्वर को नहीं मानते

1028
01:17:51,440 --> 01:17:55,720
हैं नहीं मर्यादा टूटने से अंत

1029
01:17:55,720 --> 01:18:01,720
में क्या हो जाएगा मैं आपसे पूछ रहा हूं ईश्वर को मानते हैं कि नहीं

1030
01:18:01,800 --> 01:18:05,960
मानते पता नहीं क्योंकि मैंने कभी देखा नहीं है उनको महसूस

1031
01:18:05,960 --> 01:18:10,240
नहीं किया है तो जब आपने जब आप उस आप उसमें प्रमाण

1032
01:18:10,240 --> 01:18:14,440
का इंतजार कर रहे हो यानी उसकी एक्जिस्टेंस पर आपको सवाल है सवाल है तो आप नहीं मानते

1033
01:18:14,440 --> 01:18:19,080
हो आज की स्थिति तो यही है ना

1034
01:18:19,080 --> 01:18:25,080
यही हुई ना अब आप ये बताओ अब आप ये बताओ

1035
01:18:25,720 --> 01:18:30,560
आपके मन में ऐसा भाव आता है कि नहीं बारिश ज्यादा पड़ रही तो कम हो जाए

1036
01:18:30,560 --> 01:18:34,560
हा आता है ना साइंस ने कहा है कि आप बारिश को कंट्रोल

1037
01:18:34,560 --> 01:18:37,080
कर सकते

1038
01:18:37,080 --> 01:18:41,400
हो साइंस ने अभी दुबई में किया था ना

1039
01:18:41,400 --> 01:18:46,200
बारिश को कंट्रोल कर सकते हो धूप को कंट्रोल कर सकते हो

1040
01:18:46,200 --> 01:18:50,440
नहीं इस रिसर्च हो सकती है नहीं रिसर्च हो सकती

1041
01:18:50,440 --> 01:18:56,040
है नहीं अभी का सीन क्या है अभी क्लेम हो

1042
01:18:56,040 --> 01:19:01,000
के मन में इच्छा क्यों आ रही है जिसका अस्तित्व नहीं

1043
01:19:01,000 --> 01:19:05,360
है ये तो मन है और शरीर

1044
01:19:05,360 --> 01:19:07,120
है इसलिए

1045
01:19:07,120 --> 01:19:11,680
हां मतलब आपके मन में जिसका अस्तित्व नहीं है उसकी भी इच्छा है

1046
01:19:11,680 --> 01:19:15,720
हां है तो जिसका अस्तित्व नहीं है

1047
01:19:15,720 --> 01:19:19,720
आपके अनुसार भगवान का अस्तित्व नहीं है उसकी

1048
01:19:19,720 --> 01:19:24,240
इच्छा है आपके अंदर भगवान का अर्थ समझ लीजिए क्या है

1049
01:19:24,240 --> 01:19:28,240
सत चित आनंद सच्चिदानंद स्वरूप परमेश्वर यह

1050
01:19:28,240 --> 01:19:32,680
भगवान की व्याख्या हो सत चित आनंद का मतलब है सत

1051
01:19:32,680 --> 01:19:36,920
मैं बोल रहा हूं बोलले सत का मतलब है जो कभी

1052
01:19:36,920 --> 01:19:40,960
देश काल मतलब सत शाश्वत सत्य ठीक है

1053
01:19:40,960 --> 01:19:45,080
तो एक नास्तिक व्यक्ति के अंदर भी कभी ना मरने की

1054
01:19:45,080 --> 01:19:49,080
चाह विद्यमान है भले ही साइंस कहे या ना कहे

1055
01:19:49,080 --> 01:19:53,760
कभी मरना नहीं चाहता है एक नास्तिक व्यक्ति के अंदर भी

1056
01:19:53,760 --> 01:19:58,000
सारा ज्ञान प्राप्त कर लेने की चाह विद्यमान है भविष्य तक देख लेने की चाह

1057
01:19:58,000 --> 01:20:02,120
विद्यमान है इंडिया पाकिस्तान का मैच चल रहा है तो आंकड़े लगाने लगेंगे

1058
01:20:02,120 --> 01:20:06,280
कौन है जो नहीं अभी तक घोषित हुआ साइंस

1059
01:20:06,280 --> 01:20:10,280
की तरफ से वह आंकड़े भी लगाने लगेंगे माता-पिता 200 वर्ष

1060
01:20:10,280 --> 01:20:14,280
की उम्र में भी अगर हॉस्पिटल में एडमिट होंगे तो एक इच्छा होगी किसी तरीके

1061
01:20:14,280 --> 01:20:18,280
से बच जाए लेकिन कल को ये चीजें

1062
01:20:18,280 --> 01:20:22,200
सारी इंसान के कंट्रोल में आ पूरा पूरा पूरा कहने दीजिए

1063
01:20:22,200 --> 01:20:26,360
मुझे पूरा कहने दीजिए वो भी मैं बताऊंगा वो भी बता कल को ये चीज साइंस के कंट्रोल

1064
01:20:26,360 --> 01:20:30,600
में आ गए वो भी बताऊ अब इसके बाद तीसरी इच्छा

1065
01:20:30,600 --> 01:20:34,640
है सदा आनंदित रहने की

1066
01:20:34,640 --> 01:20:38,800
कि मैं कभी दुखी ना हू मेरे कभी झुरिया ना पड़े मेरे

1067
01:20:38,800 --> 01:20:42,920
कार के टायर कभी बिसे ना मेरा कभी मोबाइल में एक भी स्क्रैच ना

1068
01:20:42,920 --> 01:20:47,000
आए तो अब क्या है कि यदि हमारे अंदर कोई

1069
01:20:47,000 --> 01:20:51,320
ऐसी इच्छा होती है जो पूरी नहीं हो सकती जो बकवास है

1070
01:20:51,320 --> 01:20:55,760
उस इच्छा से हम आसानी से स्वयं को अलग कर सकते हैं जैसे

1071
01:20:55,760 --> 01:21:00,080
कि एक छोटे बच्चे ने कहा कि मैं बिल्डिंग को हाथ में उठाना

1072
01:21:00,080 --> 01:21:04,280
चाहता हूं मैं कार को तान देना चाहता हूं यह कहा छोटे बच्चे

1073
01:21:04,280 --> 01:21:08,320
ने भौतिक स्वरूप से तो उसकी मां ने कहा पागल है

1074
01:21:08,320 --> 01:21:12,960
ऐसा कभी नहीं हो सकता साइंटिफिकली वो जो पा किलो का बच्चा है वह

1075
01:21:12,960 --> 01:21:17,400
8900 किलो की कार को नहीं उठा सकता या बनी बनाई बिल्डिंग को हाथ पर नहीं उठा सकता

1076
01:21:17,400 --> 01:21:21,440
तो वह बच्चा जो है वो प्रत्यक्ष रूप से वो कार्य करने की जो

1077
01:21:21,440 --> 01:21:25,480
इच्छा थी उसके अंदर उसको छोड़ दिया उसने और उसके बिना वो खुश

1078
01:21:25,480 --> 01:21:29,920
है मगर साइंस हमसे कह रही है कि आप मरोगे

1079
01:21:29,920 --> 01:21:33,960
आज की आज की तारीख का रिजल्ट यही है साइंस ने नहीं कहा कि आप

1080
01:21:33,960 --> 01:21:37,480
अमर हो फिर भी मृत्यु का ख्याल तक आते ही आप उसको

1081
01:21:37,480 --> 01:21:41,560
झटका देते हो आप उससे अलग हटाते हो अपने

1082
01:21:41,560 --> 01:21:45,640
मन को तो आप साइंस के विरुद्ध जाते हुए मृत्यु से भाग रहे

1083
01:21:45,640 --> 01:21:50,160
हो मृत्यु बहीन जीवन साइंस ने नहीं कहा कि आप भविष्य देख सकते हो

1084
01:21:50,160 --> 01:21:54,680
मगर साइंस के विरुद्ध जाते हुए आप सब कुछ जान लेने की कामना कर रहे हो भविष्य

1085
01:21:54,680 --> 01:21:59,560
जान लेने की कामना कर रहे हो यानी कि अज्ञ विहीन जीवन

1086
01:21:59,560 --> 01:22:03,720
और साइंस ने नहीं कहा कि आपके कभी जररिया नहीं पड़ेंगी आप कभी ये नहीं होगे

1087
01:22:03,720 --> 01:22:08,040
वो नहीं होगे आपकी कार कभी खराब नहीं होगी फिर भी आप साइंस के विरुद्ध

1088
01:22:08,040 --> 01:22:12,120
जाकर के उन सारी स्थितियों को ही कामना कर रहे हो इसका

1089
01:22:12,120 --> 01:22:16,520
मतलब दुख रहित जीवन तो जिस

1090
01:22:16,520 --> 01:22:20,520
अब क्या है कि जो हमारे अंदर इनबिल्ट इच्छा है इनबिल्ट मतलब जिससे हम

1091
01:22:20,520 --> 01:22:24,840
अलग नहीं हो पा रहे कुछ इच्छा है जिनको हम छोड़ कर के अलग हो जाते खुश रहते

1092
01:22:24,840 --> 01:22:30,840
मगर इन इच्छाओं को छोड़ के हम अलग नहीं हो पा रहे यह तो सदा ही व्याप्त है हमारे अंदर

1093
01:22:31,600 --> 01:22:35,760
ले यह जो इनबिल्ट इच्छाएं है इनसे ही सिद्ध

1094
01:22:35,760 --> 01:22:39,840
होता है कि इस दुनिया में कोई सच्चिदानंद स्वरूप परमेश्वर है जिसको एक नास्तिक

1095
01:22:39,840 --> 01:22:43,840
भी प्राप्त करना चाहता है अब बात यह आती आपने एक बात कही कि

1096
01:22:43,840 --> 01:22:47,880
वैज्ञानिकों ने अगर इस सबको कंट्रोल कर लिया तो

1097
01:22:47,880 --> 01:22:52,400
इसका मतलब यह है ना कि वो वही पहुंचे जहां हम जा रहे हैं

1098
01:22:52,400 --> 01:22:56,560
अगर उन्होंने सच्चिदानंद स्वरूप ति को ढूंढ लिया तो

1099
01:22:56,560 --> 01:23:01,040
उन्होंने ढूंढा तो वही ना जिसको हम भगवान कहते हैं नास्तिक

1100
01:23:01,040 --> 01:23:05,200
और आस्तिक में फर्क सिर्फ इतना है कि नास्तिक जिधर भाग

1101
01:23:05,200 --> 01:23:10,640
रहा है व यह मानता है कि मैं जिधर भाग रहा हूं वो जगह इस दुनिया में है ही

1102
01:23:10,640 --> 01:23:14,760
नहीं मतलब वह खुद ही कह रहा है कि मैं जहां जा रहा हूं वह दुनिया में है ही

1103
01:23:14,760 --> 01:23:18,840
नहीं मगर मैं जा रहा हूं आस्तिक का आस्तिक का आस्तिक

1104
01:23:18,840 --> 01:23:22,960
की स्थिति है कि वो जिधर जा रहा है वो ये कहता है कि वो दुनिया में है ये अंतर

1105
01:23:22,960 --> 01:23:26,960
है दोनों में अंतर नास्तिक खुद ही खुद को मूर्ख कह रहा

1106
01:23:26,960 --> 01:23:31,360
है कहां जा रहे हो कि मैं सत चित आनंद को प्राप्त करने जा रहा हूं

1107
01:23:31,360 --> 01:23:35,400
सच्चिदानंद है नहीं है सच्चिदानंद को ही भगवान कहा

1108
01:23:35,400 --> 01:23:39,400
गया ना सच्चिदानंद स्वरूप परमेश्वर तो सच्चिदानंद है नहीं है

1109
01:23:39,400 --> 01:23:43,400
तो उसने क्या करा वो उस चीज को मांगने जा रहा है जिसको वो खुद ये कह रहा है वो है

1110
01:23:43,400 --> 01:23:47,280
ही नहीं तो मूर्ख कौन हुआ

1111
01:23:47,280 --> 01:23:50,720
या तो उसर भागना बंद कर

1112
01:23:50,720 --> 01:23:55,000
दे लेकिन आप इसको एक शरीर धारी या

1113
01:23:55,000 --> 01:23:59,120
आप जिस तरह भी भगवान को मानते हो उस तरह मान रहे हो लेकिन विज्ञान के लिए तो

1114
01:23:59,120 --> 01:24:03,400
यह केवल एक वस्तु मात्र होगी कैसे होगी वस्तु मात्र

1115
01:24:03,400 --> 01:24:07,440
वो बताओ भाई सच्चिदानंद का मतलब हुआ

1116
01:24:07,440 --> 01:24:11,640
अध्य अवाद का मतलब हुआ कुछ भी

1117
01:24:11,640 --> 01:24:15,640
कर सकने वाला तो अगर वस्तु मात्र होगी तो

1118
01:24:15,640 --> 01:24:19,800
व कुछ भी थोड़ी ना कर सकती है तो बाद है

1119
01:24:19,800 --> 01:24:25,800
बाद की अ अवाद के अस्तित्व को स्वीकार करना पड़ेगा ना आपको

1120
01:24:26,920 --> 01:24:31,000
आज आपने चेहरा दिखाया अच्छा लगा आपने साहस दिखाया बहुत बढ़िया रहा आपके कमेंट्स

1121
01:24:31,000 --> 01:24:35,880
में पढ़ता रहता था जा में

1122
01:24:35,880 --> 01:24:39,880
र हा नहीं आप लगे रहते जब भी हमारा वीडियो आता है तो

1123
01:24:39,880 --> 01:24:44,000
आप उसमें थोड़ा निरंतर में देखता हूं कभी कभी मैंने आपको कहा भी होगा

1124
01:24:44,000 --> 01:24:48,160
कि लाइव आइएगा नहीं सर मेरा व्यक्तिगत विरोध

1125
01:24:48,160 --> 01:24:52,880
नहीं है लेकिन मैं इतना ज्यादा दिमाग खराब हो गया है तो प्रश्न

1126
01:24:52,880 --> 01:24:56,920
पूछने के लिए आप यहां से स्टार्ट करो कि अगर भगवान नहीं

1127
01:24:56,920 --> 01:25:01,080
है इस दुनिया में आप यहां से अपना जीवन में स्टार्ट करो अगर भगवान नहीं

1128
01:25:01,080 --> 01:25:05,200
अगर सच्चिदानंद स्वरूप नहीं तो मैं इसको छोड़ क्यों नहीं पा रहा हूं सच्चिदानंद को

1129
01:25:05,200 --> 01:25:09,840
प्राप्त करने की जो भावना है उसको त्याग करके हम रह सकते हैं क्या

1130
01:25:09,840 --> 01:25:13,880
नहीं रह सकते वो तो हमारे इनबिल्ट है हा

1131
01:25:13,880 --> 01:25:18,440
तो बस यही से स्टार्ट करो इसका मतलब है कि इस दुनिया में जैसे हमारे पास

1132
01:25:18,440 --> 01:25:22,720
प्यास है तो दुनिया में पानी है भूख है तो खाना है देखने की क्षमता

1133
01:25:22,720 --> 01:25:26,720
है तो दुनिया में दृश्य है सुने की क्षमता है तो दुनिया में आवाज है मतलब हमारे

1134
01:25:26,720 --> 01:25:30,800
अंदर इनबिल्ट प्यास से ही सिद्ध हो गया कि दुनिया में उसका

1135
01:25:30,800 --> 01:25:34,880
जो सब्जेक्ट है उसका निवारण करता है वो मौजूद है तो इसी प्रकार

1136
01:25:34,880 --> 01:25:39,160
हमारे अंदर जो ये इनबिल्ट प्यास है सच्चिदानंद की उसी से सिद्ध

1137
01:25:39,160 --> 01:25:41,920
हो जाता है कि दुनिया में सच्चिदानंद स्वरूप परमेश्वर

1138
01:25:41,920 --> 01:25:45,960
है और यदि कोई कह रहा है कि नहीं है तो फिर वो

1139
01:25:45,960 --> 01:25:50,400
खुद को मूर्ख कह रहा है क्योंकि वह चाहता तो उसी को है जो वैज्ञानिक

1140
01:25:50,400 --> 01:25:54,520
है जो नास्तिक वैज्ञानिक है वो चाहते तो वही है भाई

1141
01:25:54,520 --> 01:25:58,800
मैं अगर आज एक प्रश्न पूछूं कि वह कौन सा आविष्कार होगा

1142
01:25:58,800 --> 01:26:02,840
जिसके बाद वैज्ञानिक चैन से बैठेंगे कि अब मैं आराम करूंगा अब मैं कोई

1143
01:26:02,840 --> 01:26:07,680
खोज नहीं करूंगा वोह अविष्कार एक ही है सच्चिदानंद

1144
01:26:07,680 --> 01:26:12,120
स्वरूप अवाद चंद्रमा के साथ फुटबॉल खेल

1145
01:26:12,120 --> 01:26:16,280
सके हाथी को पूछ से उड़ा कर के फेंक सके इतना

1146
01:26:16,280 --> 01:26:20,560
मतलब कुछ भी मन में जो सोचे वो कर सके तो यानी

1147
01:26:20,560 --> 01:26:24,600
कि जा वो भी उधर ही रहे हैं जिधर हम जा रहे हैं बस वो मना कर

1148
01:26:24,600 --> 01:26:28,600
वो है ही नहीं हम कह रहे है इतना अंतर है और फिर आगे बहुत सी

1149
01:26:28,600 --> 01:26:32,800
चीज है तो आप एक शुरुआत करिए य से सोचना

1150
01:26:32,800 --> 01:26:37,280
मार्क्सवाद और रामराज ग्रंथ है यह पढ़िए

1151
01:26:37,280 --> 01:26:41,280
इसमें डार्विन ही नहीं इसमें डार्विन नहीं

1152
01:26:41,280 --> 01:26:45,360
डार्विन जैसे बहुतों का तर्क और प्रमाण यहां जो

1153
01:26:45,360 --> 01:26:49,480
मैंने बताया कुछ भी नहीं है मगर उसके लिए एक डिक्शनरी ले लीजिएगा क्योंकि

1154
01:26:49,480 --> 01:26:53,480
गुरुदेव की हिंदी बहुत वैसी शुद्ध हिंदी है तो कई शब्द होंगे

1155
01:26:53,480 --> 01:26:56,960
जो बाउंस हो सकते तो डिक्शनरी ले लीजिएगा चौखंबा पब्लिकेशन

1156
01:26:56,960 --> 01:27:01,520
से आती है डिक्शनरी सब कुछ इसको पढ़िए अच्छा

1157
01:27:01,520 --> 01:27:05,600
लगेगा भगवान को भगवान को महसूस करने के लिए कुछ कर

1158
01:27:05,600 --> 01:27:10,360
सकते हैं भगवान को आप महसूस कर रहे हो ना बारबार

1159
01:27:10,360 --> 01:27:15,280
जब जब आप अपनी मृत्यु से अमरता की ओर जाने की कोशिश कर रहे हो असत सगम

1160
01:27:15,280 --> 01:27:21,280
तब तब आप भगवान को महसूस कर रहे हो जब

1161
01:27:22,160 --> 01:27:26,240
जबन जैसे मीरा जी ई ऐसे भक्त महसूस करते

1162
01:27:26,240 --> 01:27:30,440
थे इस तरह वो जब आप किशोर जैसे आज आपने

1163
01:27:30,440 --> 01:27:34,560
जिज्ञासा बस आक के कुछ प्रश्न किए कुछ संतुष्टि कहीं पर

1164
01:27:34,560 --> 01:27:38,680
कुछ मिली उसके आधार पर फिर आपने उसके अनुरूप काम करना शुरू किया धीरे-धीरे

1165
01:27:38,680 --> 01:27:42,840
आपकी जो जीवन में प्रेजेंस है भगवान की वो बढ़ती जाएगी और

1166
01:27:42,840 --> 01:27:46,960
जिनके जीवन में बहुत ज्यादा बढ़ जाती है वो मोक्ष को प्राप्त

1167
01:27:46,960 --> 01:27:49,280
हो जाते

1168
01:27:49,280 --> 01:27:53,600
हैं ठीक है हां सर धन्यवाद सर

1169
01:27:53,600 --> 01:27:59,600
अच्छा लगा जय श्री राम

1170
01:28:07,040 --> 01:28:11,920
जय राहुल शर्मा जी

1171
01:28:11,920 --> 01:28:17,920
कृष्णा कृष्णा आप अपना चेहरा दिखाएं

1172
01:28:24,320 --> 01:28:30,320
राहुल शर्मा

1173
01:28:34,440 --> 01:28:38,600
जी जी बताएं राहुल शर्मा जी जी नमस्ते

1174
01:28:38,600 --> 01:28:42,600
पत जी जय श्री राम जय श्री राम मुझे

1175
01:28:42,600 --> 01:28:46,720
तो आज आपके चैनल का पता चला तो मैं बस कुछ

1176
01:28:46,720 --> 01:28:51,120
जिज्ञासा है मेरी उसी को जानने के लिए आपके साथ जुड़ गया मैं तो

1177
01:28:51,120 --> 01:28:55,120
असल में यहां पर हम जिज्ञासाओं के लिए बात नहीं करते जिज्ञासाओं के

1178
01:28:55,120 --> 01:28:59,200
लिए हमारी क्लास होती है हर शनिवार को रात को 9 बजे धर्म रक्षा

1179
01:28:59,200 --> 01:29:03,320
अभियान के निमित्त व आयोजित की जाती है तो आप उसमें आया करिए उसमें भी

1180
01:29:03,320 --> 01:29:07,520
आप आ सकते हैं जिज्ञासा है तो हां यहां पर हम लोग बात करते हैं वैचारिक

1181
01:29:07,520 --> 01:29:11,840
मतभेद के निमित्त या फिर जिज्ञासा वाला भी करते हैं सेशन कभी-कभी

1182
01:29:11,840 --> 01:29:16,000
मगर आज वह नहीं है नहीं मैं मतलब वही प्रश्न

1183
01:29:16,000 --> 01:29:20,280
पूछूंगा जो आज का विषय है उसी के अनुरूप की क्या होता है कि

1184
01:29:20,280 --> 01:29:22,080
जैसे सोशल मीडिया पर या फिर

1185
01:29:22,080 --> 01:29:26,160
य पर कई लोग बारबार य आक्षेप लगाते हैं

1186
01:29:26,160 --> 01:29:30,240
कि ब्राह्मणों ने सवर्णों ने दलितों का 5

1187
01:29:30,240 --> 01:29:36,240
हज सालों तक वो किया दमन किया उनको वो बना

1188
01:29:37,280 --> 01:29:41,400
र उनके मन में क्यों चली ग

1189
01:29:41,400 --> 01:29:45,440
भ्रांति भ्रांति देखिए आज बड़े

1190
01:29:45,440 --> 01:29:50,360
शहरों की लड़कियां छोटे कपड़े पहनना चाहती है बड़े

1191
01:29:50,360 --> 01:29:54,440
युवाओं में य आ गया बिना शादी के ही बिना विवाह के ही जो

1192
01:29:54,440 --> 01:29:58,560
है संबंध बना ले किसी महिला से किसी स्त्री से है ना अपनी

1193
01:29:58,560 --> 01:30:03,320
मर्यादा को लांग कर अब यह मेंटालिटी उनके अंदर क्यों आ

1194
01:30:03,320 --> 01:30:07,640
गई प्रश्न होगा ना क्यों आ गई मतलब ये चीज

1195
01:30:07,640 --> 01:30:12,120
बनाई ग है जो शिक्षा प्रद है जो शिक्षा व्यवस्था है

1196
01:30:12,120 --> 01:30:16,520
उसको भंग करने का प्रयास किया गया मैक्स मलर का खत आप लोगों को पता होगा

1197
01:30:16,520 --> 01:30:21,040
उसने स्पष्ट लिखा था हिंदुओं को हराना है तो उनकी शिक्षाओं में मिलावट करो

1198
01:30:21,040 --> 01:30:25,160
तो वोह आज का दृश्य है हम जैसे जैसे अपनी शिक्षाओं से दूर जाएंगे

1199
01:30:25,160 --> 01:30:29,880
वैसे वैसे सब चीजें आती जाएंगी बढ़ता जाएगा

1200
01:30:29,880 --> 01:30:33,880
है ना हा वो तो है लेकिन क्या है कि जैसे हम

1201
01:30:33,880 --> 01:30:37,520
जब हिंदू राष्ट्र की बात करते हैं कि हम तो उसमें अकेले ब्राह्मण

1202
01:30:37,520 --> 01:30:41,520
थोड़ र समझ लीजिए हिंदू राष्ट्र का अर्थ समझ लीजिए अन्यों के

1203
01:30:41,520 --> 01:30:45,520
हित का ध्यान रखते हुए कोई व्यक्ति अगर स्वयं को हिंदू नहीं मान रहा है

1204
01:30:45,520 --> 01:30:49,560
तो ऐसा नहीं है कि उसका जो है वो हो रहा है अन्यों के हित

1205
01:30:49,560 --> 01:30:54,000
का ध्यान रखते हुए सुसंस्कृत सुशिक्षित

1206
01:30:54,000 --> 01:30:58,440
सुसंगत सुरक्षित संपन्न स्वस्थ सेवा परायण

1207
01:30:58,440 --> 01:31:04,440
व्यक्ति और समाज की संरचना ही हिंदू राष्ट्र का उद्देश्य

1208
01:31:06,120 --> 01:31:10,400
है यह आपकी बात सही है य पूरी के शंकराचार्य जी

1209
01:31:10,400 --> 01:31:14,600
बताते हैं यह परिभाषा मैंने सुना है उनको तो लेकिन मेरा प्रश्न

1210
01:31:14,600 --> 01:31:19,280
कि उन लोगों के मन में यह गणा कैसे आ गई जब मैं गांव जाता हूं

1211
01:31:19,280 --> 01:31:24,720
बोल तो रहा शिक्षा पद्धति में मिलावट करके आई बोल तो रहा हूं

1212
01:31:24,720 --> 01:31:28,960
शा से ज दूर रहने लगेगा वक्ति सामर्थ्य मान गुरुओं

1213
01:31:28,960 --> 01:31:33,240
से जब दूर रहने लगेगा व्यक्ति तो इस तरह से जो है विप्लव

1214
01:31:33,240 --> 01:31:37,480
की स्थितियां आने लगती है दूर कैसे कर सकते हैं सामर्थ वान गुरुओं से

1215
01:31:37,480 --> 01:31:42,440
मिलाइए ज्यादा से ज्यादा सामर्थ वान गुरुओं तक पहुंचाए लोगों को

1216
01:31:42,440 --> 01:31:46,920
परंपरा प्राप्त हो अंतिम निर्णायक सन्यासी

1217
01:31:46,920 --> 01:31:51,000
हो और समस्त शति स्मृति शास्त्रों में सामंजस्य की

1218
01:31:51,000 --> 01:31:52,760
शिक्षा देता हो और

1219
01:31:52,760 --> 01:31:57,080
अंततोगत्वा वो अज्ञानता रूपी संशय रूपी जो अंधकार

1220
01:31:57,080 --> 01:32:01,280
है वह दूर करने वाला हो यह चार सिद्धांतों

1221
01:32:01,280 --> 01:32:06,240
के ऊपर जो आपको गुरु गुरुजन हमारे मिल रहे हैं आज भी हैं

1222
01:32:06,240 --> 01:32:10,680
उन तक लोगों को पहुंचाए जितना वो लोगों के बीच पहुंचेंगे

1223
01:32:10,680 --> 01:32:14,760
तो इस तरह की जो शंकाएं उनका समाधान होगा और शिक्षा

1224
01:32:14,760 --> 01:32:18,880
फैले गी जैसे आज देखिए कुछ अंशों में ही सही

1225
01:32:18,880 --> 01:32:22,880
मैं नहीं जानता हूं कितना हुआ मगर वो जो धर्म को नहीं मानते थे

1226
01:32:22,880 --> 01:32:27,360
नास्तिकता को अनुगमन करते थे अभी अभी अभी सामर्थ्य

1227
01:32:27,360 --> 01:32:31,400
वान गुरुओं के कारण एक नास्तिक जो है आस्तिक की ओर प्रविष्ट हुआ

1228
01:32:31,400 --> 01:32:35,400
ना क्यों क्योंकि उसको अभी तक सामर्थ्य वान कोई नहीं मिला था

1229
01:32:35,400 --> 01:32:39,600
आज उसको करपात्री जी के द्वारा जो शिक्षा दी गई पुरी के शंकराचार्य को

1230
01:32:39,600 --> 01:32:43,960
पुरी के शंकराचार्य जी द्वारा जो थोड़ा बहुत प्रवचन मैंने सुना उनका

1231
01:32:43,960 --> 01:32:48,000
उसके आधार पर जो मैंने वक्तव्य दिया उसके आधार पर एक नास्तिक के मन में

1232
01:32:48,000 --> 01:32:52,080
भी आस्तिक का बीच जो है वो अंकुरित हो गया हुआ ना

1233
01:32:52,080 --> 01:32:56,480
तो यह सामर्थ्य वान गुरुओं के द्वारा ही यह जो

1234
01:32:56,480 --> 01:33:00,680
भ्रष्ट आ रही है समाज में व्यवस्था में

1235
01:33:00,680 --> 01:33:05,120
उनके वो भ्रष्ट होता दूर हो सकती है जैसे हम लोग एक

1236
01:33:05,120 --> 01:33:08,240
सबसे पहला निचले स्तर से हम यह कर सकते हैं

1237
01:33:08,240 --> 01:33:12,280
कहीं पर भी कोई कथा हो रही है कथा कहने वाला किस

1238
01:33:12,280 --> 01:33:16,600
परंपरा से वहां लिखवाना शुरू करो इससे दो बातें होंगी एक तो

1239
01:33:16,600 --> 01:33:21,080
कथा कहने वाले का वेरिफिकेशन हो जाएगा और

1240
01:33:21,080 --> 01:33:25,400
दूसरा लोगों के अंदर उत्सुकता होगी परपरा होती क्या है

1241
01:33:25,400 --> 01:33:29,520
आज लोग परंपरा को जानते ही नहीं है जबकि सर्टिफिकेट मार्कशीट

1242
01:33:29,520 --> 01:33:34,200
आदि के रूप में लोग परंपरा का ही अनुगमन कर रहे हैं

1243
01:33:34,200 --> 01:33:38,200
कि य आदमी यहां से पास है मार्कशीट तो

1244
01:33:38,200 --> 01:33:42,480
मार्कशीट क्या है परंपरा है ना मगर

1245
01:33:42,480 --> 01:33:47,040
कोई जानता नहीं है अगर उससे परंपरा का नाम लो तो लोग सोचते हैं रूढ़ीवादी

1246
01:33:47,040 --> 01:33:51,160
या कट्टर पंथी ऐसी बातें करने लगते हैं तो हमें इन

1247
01:33:51,160 --> 01:33:55,200
चीजों को बताना है लोगों को सामर्थ्य वान गुरुओं तक

1248
01:33:55,200 --> 01:33:59,480
पहुंचा दें तो पूरा शासन तंत्र मीडिया तंत्र

1249
01:33:59,480 --> 01:34:03,480
सब कुछ शोधित हो जाएगा आज हम अपने सामर्थ्य वान गुरुओं से दूरी

1250
01:34:03,480 --> 01:34:07,560
दूर हैं इसी कारण से यह सारी स्थिति है और

1251
01:34:07,560 --> 01:34:12,760
यही उसका निवारण भी है इस पर हमने वीडियो बनाया है

1252
01:34:12,760 --> 01:34:18,760
जी पंडित जी ठीक है जय श्री राम जय श्री राम

1253
01:34:24,720 --> 01:34:30,720
कृष्णा जी आपका चेहरा

1254
01:34:45,080 --> 01:34:51,080
दिखाएंगे प्यारा हिंदू जी आप अपना चेहरा दिखाएं

1255
01:34:56,320 --> 01:34:59,440
ऑन करिए

1256
01:34:59,440 --> 01:35:05,360
कैमरा जी बोलिए प्यारा इंदू

1257
01:35:05,360 --> 01:35:09,360
जी हां मैं स्टेज में हूं ना धन्यवाद

1258
01:35:09,360 --> 01:35:13,480
आप कैमरा न कर कैमरा ऑन करले मैं

1259
01:35:13,480 --> 01:35:17,640
चेहरा रिवील नहीं कर सकता उसके लिए चेहरे के बिना हम बात नहीं करते हमने कई

1260
01:35:17,640 --> 01:35:22,160
बार बताया है करेंगे

1261
01:35:22,160 --> 01:35:26,320
मतलब मेरा मुसलमानों से थोड़ा पंगा चलता है मतलब किसी और चैनल पर मैं काम करता

1262
01:35:26,320 --> 01:35:30,800
हूं तो तो वहां प आप चेहरे के साथ होते हैं या चेहरे के बिना होते हैं

1263
01:35:30,800 --> 01:35:35,000
चेहरे के बिना हमारे में किसी का भी चेहरा रिब चेहरे के बिना होते हैं तो यहां पर चेहरा

1264
01:35:35,000 --> 01:35:39,040
दिखाने में क्या आपत्ति है मतलब वही डॉक्सिंग

1265
01:35:39,040 --> 01:35:43,040
वगैरह का दिक्कत है मतलब थोड़ा जब वहां प कोई जानता ही नहीं है कि

1266
01:35:43,040 --> 01:35:47,480
यहां पर जो व्यक्ति बोल रहा है वही वहां वाला है तो फिर कैसे आपको दिक्कत है

1267
01:35:47,480 --> 01:35:51,760
या तो वहां पर चेहरा दिखाया होता तो यहां दिखाने में दिक्कत होती खैर

1268
01:35:51,760 --> 01:35:55,800
हमारी मर्यादा है हम लोग चेहरे के साथ ही बात करते हैं कृपा करके

1269
01:35:55,800 --> 01:36:00,040
आप चेहरा दिखाए सॉरी भैया वो नहीं हो पाएगा ऐसे

1270
01:36:00,040 --> 01:36:04,120
बात नहीं कर सकता आपका वे कोई बात नहीं आप अपने सिद्धांतों के साथ किसी

1271
01:36:04,120 --> 01:36:08,400
अन्य को भेजे हम बात करेंगे चर्चा करेंगे आपका विषय क्या है

1272
01:36:08,400 --> 01:36:12,960
वर्ण व्यवस्था प ही है मतलब मैंने शास्त्र पढ़े हैं थोड़े बहुत तो मेरा

1273
01:36:12,960 --> 01:36:15,280
कहां से पढ़े

1274
01:36:15,280 --> 01:36:19,440
मैंने मतलब ऑनलाइन ही पढ़े हैं कोई गुरुकुल में मैं रहा नहीं निरुक्त में

1275
01:36:19,440 --> 01:36:23,600
प्रमाण है कि आचार्य याक जो है व

1276
01:36:23,600 --> 01:36:27,680
कह रहे हैं कि उन्होंने परंपरा प्राप्त अर्थ दिया है भगवत

1277
01:36:27,680 --> 01:36:31,880
गीता चार दो में भगवान कह रहे हैं श्री कृष्ण यह ज्ञान मुझे परंपरा से

1278
01:36:31,880 --> 01:36:36,000
यह ज्ञान जो परंपरा से प्रचलित था वह मैंने तुम्हें दिया

1279
01:36:36,000 --> 01:36:40,240
3 16 में कह रहे हैं परंपरा प्राप्त ज्ञान ही जो है वह अनुकरणीय है

1280
01:36:40,240 --> 01:36:44,360
चांदो उपनिषद में लिखा हुआ है परंपरा प्राप्त आचार्यों द्वारा

1281
01:36:44,360 --> 01:36:49,520
प्राप्त विद्या ही मोक्ष दायक है वहां पर इंटरनेट शब्द नहीं आया

1282
01:36:49,520 --> 01:36:53,640
है इंटरनेट से पढ़ाई के आधार पर अपने सिद्धांतों को सुना

1283
01:36:53,640 --> 01:36:57,800
स्वीकार धर्म को ना स्वीकारें परंपरा प्राप्त आचार्यों

1284
01:36:57,800 --> 01:37:01,840
के सानिध्य में जाएं कोई भी निर्णय लेने से पहले

1285
01:37:01,840 --> 01:37:06,440
परंपरा प्राप्त रामानुजाचार्य परंपरा निबार काचार्य परंपरा

1286
01:37:06,440 --> 01:37:10,800
है वल्लभाचार्य परंपरा है रामानंदाचार्य परंपरा है

1287
01:37:10,800 --> 01:37:14,880
शंकराचार्य परंपरा है सार्वभौम सर्वोच्च जगतगुरु जो है

1288
01:37:14,880 --> 01:37:19,440
वह बैठे आपको बताने के लिए धर्म और अधर्म में निर्णय करने के लिए अगर आप

1289
01:37:19,440 --> 01:37:23,560
सनातनी है धर्म पर विश्वास रखने वाले हैं तो

1290
01:37:23,560 --> 01:37:27,680
सनातन शास्त्रों का आलंबन लेते हुए धर्म को जाने राम

1291
01:37:27,680 --> 01:37:30,280
जी वशिष्ठ के पास गए थे कृष्ण जी सांदीपन

1292
01:37:30,280 --> 01:37:34,480
के पास गए थे आप इंटरनेट के पास गए मतलब

1293
01:37:34,480 --> 01:37:38,720
हमारा हमारा क्या है ना कि घर वाले थोड़े मतलब वो नहीं

1294
01:37:38,720 --> 01:37:42,880
करते तो फिर उसके आधार पर जो चलिए आप नहीं गए तो उसके

1295
01:37:42,880 --> 01:37:47,000
आधार पर बनाए गए सिद्धांतों पर अड़ ए मत फिर जब जो आपको बताया जा रहा

1296
01:37:47,000 --> 01:37:53,000
है उसको स्वीकार कर लीजिए फ

1297
01:37:53,680 --> 01:37:57,960
मैं कर लूंगा मतलब मेरा बस डाउट ही है मतलब जैसे मैंने स् अगर डाउट

1298
01:37:57,960 --> 01:38:01,960
है अच्छी बात है हम लोगों की क्लास होती है ह हर शनिवार

1299
01:38:01,960 --> 01:38:06,240
रात 9 बजे आप जब हमें ट करेंगे तो आपको एक फॉर्म

1300
01:38:06,240 --> 01:38:10,320
मिलेगा उसमें यहां आने के लिए भी फॉर्म होगा और क्लास में आने

1301
01:38:10,320 --> 01:38:14,400
के लिए भी अलग फॉर्म होगा आप वो भर दीजिएगा हर हर बार क्लास

1302
01:38:14,400 --> 01:38:19,280
में आई वहा फेस दिखाना आवश्यक नहीं होता है ठीक है

1303
01:38:19,280 --> 01:38:23,720
74836 ये नंबर है इस पर आप करिए

1304
01:38:23,720 --> 01:38:27,880
जो है वो फ्री है वो निशुल्क है उसमें कोई ऐसा नहीं वो क्लास

1305
01:38:27,880 --> 01:38:32,160
भी नहीं है बात करते हैं सब चर्चा होती है धर्म की और भगवान

1306
01:38:32,160 --> 01:38:36,480
को जानने का प्रयास करते हैं ठीक है अच्छा लगा आप आए हा डिस्क्रिप्शन

1307
01:38:36,480 --> 01:38:40,960
में है ना मतलब फोन नंबर जी दिया है दिया है डिस्क्रिप्शन में

1308
01:38:40,960 --> 01:38:46,960
हा

1309
01:38:49,920 --> 01:38:53,920
मैम ठीक है तो अब तो कोई कोई मुझे नहीं

1310
01:38:53,920 --> 01:38:58,200
लग रहा है हाउ डू वी कनेक्ट एवोल्यूशन एंड वर्ण व्यवस्था

1311
01:38:58,200 --> 01:39:02,200
वी हैव एनफ एविडेंस ू प्रू एवोल्यूशन

1312
01:39:02,200 --> 01:39:06,400
एंड वि चलिए अब आज की

1313
01:39:06,400 --> 01:39:09,400
इसको पूरा करते

1314
01:39:09,400 --> 01:39:14,240
हैं अच्छा लगा आज की चर्चा में एक जो हमारे बीच में एक

1315
01:39:14,240 --> 01:39:18,560
नास्तिक विचारधारा वाले थे वह सकारात्मकता उन्होंने दिखाई और

1316
01:39:18,560 --> 01:39:22,600
अपने जीवन में कुछ नहीं केवल

1317
01:39:22,600 --> 01:39:26,760
इस बात की खोज करने लगी कि मैं मनुष्य क्यों हूं किस

1318
01:39:26,760 --> 01:39:32,760
आधार पर मनुष्य यहीं से बस शुरू करिए आस्तिक हो

1319
01:39:35,920 --> 01:39:40,040
जाएंगे ठीक है तो बंद करते हैं तो

1320
01:39:40,040 --> 01:39:44,040
सभी को जय श्री राम और एक बात ध्यान रखें हमारा

1321
01:39:44,040 --> 01:39:48,160
उद्देश्य किसी भी तंत्र अथवा संस्थान को जो

1322
01:39:48,160 --> 01:39:52,280
सनातन के नाम से धर्म की व्याख्या कर रहा है उसको नष्ट करने का नहीं

1323
01:39:52,280 --> 01:39:56,360
है हमारा उद्देश्य है अगर उनमें कोई ऐसी शिक्षा

1324
01:39:56,360 --> 01:40:00,960
है जो कि विवाद खड़े कर रही है जो कि

1325
01:40:00,960 --> 01:40:04,960
मत मता बना रही है विभाजन कर रही है हिंदुओं का किसी

1326
01:40:04,960 --> 01:40:09,040
आधार पर कि नहीं यह वाले हिंदू ये मानते हैं ये वाले हिंदू य मानते हैं तो उसमें जो सही चीज

1327
01:40:09,040 --> 01:40:13,120
हो सकती है वो देने का प्रयास हम कर रहे हैं जिससे कि उस सही चीज के आधार

1328
01:40:13,120 --> 01:40:17,880
पर दो अलग-अलग हो चुके हिंदू एक हो जाए है ना

1329
01:40:17,880 --> 01:40:21,880
तो हमारा बिल्कुल नहीं है कि हमें इसको नष्ट करना है इस समाज को नष्ट करना है

1330
01:40:21,880 --> 01:40:25,920
हमें उसको फलानी विदेश से आई संस्था है उसे नष्ट करना नहीं सब हिंदू

1331
01:40:25,920 --> 01:40:30,040
भाई है हमारे अगर कोई ऐसी शिक्षा है जिसके आधार पर हम लोग

1332
01:40:30,040 --> 01:40:34,080
बट रहे हैं तो उसमें सही क्या होना चाहिए उसको हम

1333
01:40:34,080 --> 01:40:38,120
प्रचारित प्रसारित करने का प्रयास मात्र कर रहे हैं सवा घंटे की भक्ति

1334
01:40:38,120 --> 01:40:42,560
करते रहिए भगवान के नाम का जप शुरू करिए

1335
01:40:42,560 --> 01:40:46,680
जिस रूप में भी भगवान को देखते हैं भगवान के नाम का जप जरूर

1336
01:40:46,680 --> 01:40:50,760
करिए महाभारत के अनुसार छंद उपनिषद के अनुसार अगर चलेंगे तो

1337
01:40:50,760 --> 01:40:51,260
दिन

1338
01:40:51,000 --> 01:40:55,120
भर में पांच बार भगवान का स्मरण करिए 1515 मिनट तो आपकी सवा

1339
01:40:55,120 --> 01:40:59,280
घंटे की भक्ति पूरी हो जाएगी वही भक्ति आपको बल देगी समय

1340
01:40:59,280 --> 01:41:03,360
आने पर आप अपने परिवार के देश के राष्ट्र के

1341
01:41:03,360 --> 01:41:07,360
मानवता के काम आ सकेंगे और अपनी जो भगवत प्राप्ति है

1342
01:41:07,360 --> 01:41:11,640
अपना जो मोक्ष है उसको भी सुनिश्चित कर सकेंगे आचार्यों के प्रवचन

1343
01:41:11,640 --> 01:41:15,760
सुनिए कोई भी सवाल मन में आता है तो उसका

1344
01:41:15,760 --> 01:41:20,320
सवाल के आगे उस सवाल को टाइप करके और पूरी शंकराचार्य लिख कर के गोवर्धन

1345
01:41:20,320 --> 01:41:24,480
मठ उनका ू चैनल है वहां पर जाकर के प्रयास करें ने का ना

1346
01:41:24,480 --> 01:41:28,600
हो सके तो उनका ट चैनल भी चलता है गोवर्धन मट का गुरुदेव का वहां

1347
01:41:28,600 --> 01:41:32,720
पर जाएं और धर्म रक्षा अभियान में जुड़ने के लिए भी वहां नंबर दिया गया वहां

1348
01:41:32,720 --> 01:41:36,720
जड़ सकते हैं हमसे संपर्क कर सकते हैं हमारी जो क्लासेस चलती

1349
01:41:36,720 --> 01:41:40,760
है जिसमें हम लोग बैठ कर के इसी तरीके से वार्तालाप करते हैं उसमें

1350
01:41:40,760 --> 01:41:45,440
आ सकते हैं एक बार और नंबर बोल दे रहा हूं 74838

1351
01:41:45,440 --> 01:41:49,440
69 सभी को जय स्टडी राम
