1
00:00:03,800 --> 00:00:08,320
तो सभी को जय श्री राम आज की य जो चर्चा है हमारी

2
00:00:08,320 --> 00:00:12,360
रिकॉर्ड नहीं होने वाली है तो अगर आपके फोन में जो भी

3
00:00:12,360 --> 00:00:16,520
हमारे दर्शक है जो देख रहे हैं अगर कोई इस रिकॉर्डिंग को रिकॉर्ड

4
00:00:16,520 --> 00:00:20,640
करना चाहता है स्क्रीन रिकॉर्डिंग आदि के माध्यम से तो रिकॉर्ड

5
00:00:20,640 --> 00:00:24,720
कर ले क्योंकि कुछ टेक्निकल चीज थी जो अभी रेंडम

6
00:00:24,720 --> 00:00:28,720
उनका निदान नहीं हो पाया है और ये लाइव स्ट्रीम जो है पहले से

7
00:00:28,720 --> 00:00:32,880
थी तो आपके फोन में अगर मेमोरी

8
00:00:32,880 --> 00:00:37,000
हो तो आप उसको रिकॉर्ड कर लीजिएगा जिससे कि

9
00:00:37,000 --> 00:00:39,920
बाद में हम आपसे ले

10
00:00:39,920 --> 00:00:44,080
पाए तो आज हमारे साथ में है अभी हमने पिछले कुछ

11
00:00:44,080 --> 00:00:48,120
दिनों पूर्व माग में एक सज्जन थे

12
00:00:48,120 --> 00:00:52,360
जिनका हमने जिनके साथ चर्चा की थी माग मेले

13
00:00:52,360 --> 00:00:56,400
में उस कैप में जो मुख्य संदेश हमें प्राप्त हो

14
00:00:56,400 --> 00:01:01,040
रहा था वो यह था कि कलकी का अवतार हो चुका है

15
00:01:01,040 --> 00:01:07,040
सदानंद जी महाराज के रूप में

16
00:01:07,400 --> 00:01:11,720
और और उनके पर उनके दृष्टिकोण से वहां पर अध्यात्मिकता

17
00:01:11,720 --> 00:01:15,840
का प्रचार किया जा रहा था सनातन धर्म से जोड़ करके

18
00:01:15,840 --> 00:01:19,960
तो वोह वीडियो जिन लोगों तक गया है उनमें

19
00:01:19,960 --> 00:01:24,040
से कुछ जो उस तंत्र को फॉलो करते

20
00:01:24,040 --> 00:01:28,160
हैं सधन जी वाले तंत्र को संस्था को तो उनमें से आज

21
00:01:28,160 --> 00:01:31,400
हमारे सामने

22
00:01:31,400 --> 00:01:35,440
उपस्थित है यहां पर रोहित कुमार शुक्ला जी और उनके साथ

23
00:01:35,440 --> 00:01:39,480
में भी कोई है तो आप पहले अपना परिचय स्वय

24
00:01:39,480 --> 00:01:45,480
थोड़ा सा दे दीसे आपको समझ ले सभी लोग देखने

25
00:01:45,800 --> 00:01:49,840
वाले इस शरीर का नाम रोहित

26
00:01:49,840 --> 00:01:54,680
शुक्ला जी और हम लोग लगभग

27
00:01:54,680 --> 00:02:00,120
भगवान सदानंद के शिष्य है

28
00:02:00,120 --> 00:02:04,680
साल से ऊपर हो गया 14 साल 13 14 साल से

29
00:02:04,680 --> 00:02:09,600
थोड़ा सा तेज बोलेंगे क्योंकि मुझे जो है आपकी आवाज कम सुनाई दे रही

30
00:02:09,600 --> 00:02:14,120
है तो हम लोग भगवान सदानंद के शिष्य हैं

31
00:02:14,120 --> 00:02:18,320
जी और उन्हीं के ज्ञान विधान सिद्धांत का हम लोग

32
00:02:18,320 --> 00:02:22,320
प्रचार करते हैं यह वही ज्ञान है जो पूर्व में

33
00:02:22,320 --> 00:02:27,560
भगवान विष्णु जी राम जी और कृष्ण जी ने

34
00:02:27,560 --> 00:02:31,760
दिया अच्छा ठीक है जन का प्र तो मैं सीधे

35
00:02:31,760 --> 00:02:36,560
से मुख्य विषय पर आता हूं बहुत ज्यादा मेरे पास चीज नहीं होती

36
00:02:36,560 --> 00:02:41,000
है जानने के लिए गाजियाबाद

37
00:02:41,000 --> 00:02:45,040
से हमारे एक फ्रेंड है वो शायद अगर देख रहे हो तो उनसे

38
00:02:45,040 --> 00:02:49,320
भी मैं कहूंगा कि स्क्रीन की रिकॉर्डिंग करें क्योंकि यह जो लाइव स्ट्रीम

39
00:02:49,320 --> 00:02:53,440
है रिकॉर्ड नहीं होगी बाद में जो है आपकी

40
00:02:53,440 --> 00:02:57,560
आपकी तरफ के कोई लोग हो तो आप उनको बोल दीजिएगा कि रिकॉर्ड

41
00:02:57,560 --> 00:03:01,080
कर ले इसको

42
00:03:01,080 --> 00:03:05,120
ठीक है आगे चला तो मेरे जो दो मेरे जो मुख्य दो प्रश्न है उसमें से

43
00:03:05,120 --> 00:03:09,400
पहला यही है कि

44
00:03:09,400 --> 00:03:13,440
सदानंद जी को भगवान आप किस आधार पर मानते हैं

45
00:03:13,440 --> 00:03:17,640
कल्कि का

46
00:03:17,640 --> 00:03:21,840
अवतार अगर इस प्रश्न का उत्तर हम एक प्रश्न में

47
00:03:21,840 --> 00:03:26,000
दे जी कि भगवान राम

48
00:03:26,000 --> 00:03:32,000
जी को भगवान कृष्ण जी को भगवान किस आधार पर स्वीकार किया

49
00:03:32,800 --> 00:03:36,880
शास्त्र श शास्त्र शास्त्र

50
00:03:36,880 --> 00:03:40,960
था तब रामायण तो राम जी के जाने के बाद बनी

51
00:03:40,960 --> 00:03:45,200
भागवत महापुराण तो कृष्ण जी के जाने के बाद बना अब शास्त्र

52
00:03:45,200 --> 00:03:50,000
अवतार जब चला जाता है तब शास्त्र का निर्माण होता है

53
00:03:50,000 --> 00:03:55,480
और उसके बाद आप भागवत प को सनातनी मानते

54
00:03:55,480 --> 00:04:00,120
हैं आप देखेंगे उसके महात्म में ही

55
00:04:00,120 --> 00:04:04,320
पूछा गया है कि आखिर यह भागवत कब कब

56
00:04:04,320 --> 00:04:08,720
सुनाया गया तो भगवान कृष्ण के चले जाने के लगभग 30 वर्ष के

57
00:04:08,720 --> 00:04:13,200
बाद सको सुनाया गया और उसके लगभग 50

58
00:04:13,200 --> 00:04:16,360
सु मतलब लगभग 1 स साल बाद एप्रोक्सीमेट सुना

59
00:04:16,360 --> 00:04:20,680
यानी भगवान कृष्ण के चले जाने के बाद महर्षि व्यास का संतोष

60
00:04:20,680 --> 00:04:24,920
एक चैप्टर आता है भागवत में यानी महर्षि व्यास जब सारे

61
00:04:24,920 --> 00:04:29,120
वेद वेदांग की रचना कर दी लेकिन उनको संतुष्टि नहीं हुई नारद

62
00:04:29,120 --> 00:04:33,480
जी आए तो उने पूछा हमको तो संतुष्टि नहीं हो रही है जबक हमने वेदों का सरलीकरण

63
00:04:33,480 --> 00:04:37,520
करके इतने सारे थोड़ा सा विषयात हो रहा है थोड़ा सा थोड़ा

64
00:04:37,520 --> 00:04:42,520
विषयात हो रहा है आपने थो

65
00:04:42,520 --> 00:04:46,680
देखिए आपने मुझसे प्रश्न किया था कि आप राम जी

66
00:04:46,680 --> 00:04:50,680
को भगवान किस आधार पर मानते हैं क्योंकि हमारे

67
00:04:50,680 --> 00:04:54,880
शास्त्र कहते हैं आपने कहा कि शास्त्रों की रचना राम के बाद हुई

68
00:04:54,880 --> 00:04:59,160
है तो ये एक अलग परिपेक्ष हो जाएगा कि वो शास्त्र जो है जिन शास्त्रों

69
00:04:59,160 --> 00:05:03,320
के आधार पर हम मानते हैं या नहीं मानते हैं वह

70
00:05:03,320 --> 00:05:07,720
शास्त्र मानने है कि नहीं मानने ये एक अलग विषय हो जाएगा है

71
00:05:07,720 --> 00:05:12,040
ना अभी मैं आपसे य पूछ रहा हूं कि आप किस आधार पर मानते हैं यह

72
00:05:12,040 --> 00:05:16,520
बताइए साब आप हमारी बात को पकड़ नहीं पाए अवतार

73
00:05:16,520 --> 00:05:20,680
जब धरती पर आता है तो तुरंत

74
00:05:20,680 --> 00:05:24,920
उसकी मान्यता कहा कृष्ण जी को भगवान लोगों ने स्वीकार कर

75
00:05:24,920 --> 00:05:29,000
लिया स्वीकार आपसे अपना प्रश्न

76
00:05:29,000 --> 00:05:31,560
दोबारा पूछ रहा हूं कि आप

77
00:05:31,560 --> 00:05:35,760
किस आधार पर मानते हैं हमने

78
00:05:35,760 --> 00:05:39,800
मैं अपनी बात बता दूंगा आपको जन भवान विष्णु राम और कृष्ण

79
00:05:39,800 --> 00:05:43,800
ने दिया जो ज्ञान भगवान राम और

80
00:05:43,800 --> 00:05:48,000
कृष्ण ने दिया उस ज्ञान को वर्तमान में भगवान सदानंद

81
00:05:48,000 --> 00:05:52,160
ने दिया इस आधार प क्योंकि ज्ञान ही पहचान है भगवान

82
00:05:52,160 --> 00:05:56,200
का उस ज्ञान को उन्होंने दिया उसके आधार पर उनको भगवान

83
00:05:56,200 --> 00:06:00,440
स्वीकार किया जा यानी कि आपका जो ज्ञान जो ज्ञान

84
00:06:00,440 --> 00:06:04,480
राम और कृष्ण ने दिया था उस ज्ञान के आधार पर क्योंकि सदानंद

85
00:06:04,480 --> 00:06:09,680
जी भी बात करते हैं तो इसलिए आप यह मानते हो सदानंद जी

86
00:06:09,680 --> 00:06:14,200
भगवान बात नहीं करते थे व प्रत्यक्ष दिखाते

87
00:06:14,200 --> 00:06:18,200
थे ठीक है प्र प्रत्यक्ष दिखाने वाली बात प्रत्यक्ष

88
00:06:18,200 --> 00:06:22,320
दि प्रत्यक्ष दिखाने वाली बात प भी आएंगे अभी हम एक टॉपिक

89
00:06:22,320 --> 00:06:26,360
को पकड़ ले क्योंकि सदानंद जी ने भी वही ज्ञान दिया जो राम कृष्ण

90
00:06:26,360 --> 00:06:30,840
ने दिया इसलिए आप य मानते कि सदन जी

91
00:06:30,840 --> 00:06:34,920
भगवान है थे तो अब मेरा प्रश्न कुल

92
00:06:34,920 --> 00:06:40,080
मिला के आपका भी तो आपका भी जो आधार है वो शास्त्र ही हो गया

93
00:06:40,080 --> 00:06:44,280
ना शास्त्र क आपको जो आपको

94
00:06:44,280 --> 00:06:47,240
आपको जो मैच करने का जो पैरामीटर

95
00:06:47,240 --> 00:06:51,480
मिला है वो किस आधार पर मिला शास्त्र से ही मिला ना

96
00:06:51,480 --> 00:06:55,640
देखिए बिल्कुल शास्त्र भी है प्रत्यक्ष

97
00:06:55,640 --> 00:07:01,640
प्रमाण भी है आप देखिए एक एक करके चलिए

98
00:07:03,640 --> 00:07:07,840
आपका एक साथ बहुत सारे चैप्टर खोल देंगे तो कोई चैप्टर क्लियर

99
00:07:07,840 --> 00:07:12,080
नहीं हो पाएगा एक एक करके चलते

100
00:07:12,080 --> 00:07:16,400
कर नहीं हो रहे आप ऐसा करिए आप जो है नोट पन लेकर

101
00:07:16,400 --> 00:07:20,840
के आपको कौन ककन से चीज बोल विषय आपके वो लिख लीजिए

102
00:07:20,840 --> 00:07:26,080
जिससे कि वो रह ना जाए मगर एक साथ सारे चैप्टर आ

103
00:07:26,080 --> 00:07:30,080
आपने य बात

104
00:07:30,080 --> 00:07:34,120
भगवान की पहचान का आधार है ज्ञान तो क्योंकि जो ज्ञान श्री

105
00:07:34,120 --> 00:07:38,160
कृष्ण और राम ने दिया था और वही ज्ञान इन्होंने दिया इसलिए

106
00:07:38,160 --> 00:07:42,280
हम य मानते हैं कि वोह है भगवान ठीक है अब

107
00:07:42,280 --> 00:07:46,280
इस तर्क में बात य आती है कि आपका भी आधार उ मानने

108
00:07:46,280 --> 00:07:50,480
का शास्त्र ही है क्योंकि शास्त्र के बिना

109
00:07:50,480 --> 00:07:54,600
आपको कैसे मालूम पड़ा कि भगवान मैं बोल रहा हूं

110
00:07:54,600 --> 00:07:58,600
तो बोलने दीजिए ना क्योंकि शास्त्र के बिना आपको मालूम

111
00:07:58,600 --> 00:08:02,600
नहीं पड़ेगा कि मम जी ने या कृष्ण जी ने क्या ज्ञान दिया

112
00:08:02,600 --> 00:08:06,680
था बिलकुल सही है नहीं पड़ेगा

113
00:08:06,680 --> 00:08:10,760
ना है ना हां तो

114
00:08:10,760 --> 00:08:15,720
अब मेरा अगला प्रश्न है कि वो शास्त्र शाप तक आए

115
00:08:15,720 --> 00:08:18,440
कैसे

116
00:08:18,440 --> 00:08:22,560
अच्छा आप इस विषय में कहना क्या चाहते

117
00:08:22,560 --> 00:08:26,760
हैं मल जो शास्त्रों के आधार पर

118
00:08:26,760 --> 00:08:30,560
मैंने आपसे

119
00:08:30,560 --> 00:08:34,720
दूध नि दूध आ आप हमसे कहने का प्रयोजन

120
00:08:34,720 --> 00:08:38,760
क्या है मैं सीधा दूध पही आ रहा हूं ना जो शास्त्र आपके

121
00:08:38,760 --> 00:08:42,840
लिए प्रमाण है जीवन का जो शास्त्र आपके लिए

122
00:08:42,840 --> 00:08:48,840
प्रमाण है जीवन का वह शास्त्र आप तक कैसे

123
00:08:51,160 --> 00:08:56,280
आए वेदस जीने उसका रचना किया

124
00:08:56,280 --> 00:09:00,640
रचना करने के पश्चात क्रमश वो ऋषियों

125
00:09:00,640 --> 00:09:04,760
द्वारा आज प्राप्त हुआ वो ऋषियों

126
00:09:04,760 --> 00:09:09,360
की वंशावली क्या है आपकी 10 पीढ़ी तक की तो वंशावली बताइए पीछे

127
00:09:09,360 --> 00:09:13,400
की क्या करेंगे उसको जानकर उसको जानने

128
00:09:13,400 --> 00:09:17,440
प्रयोजन अरे भाई मुझे मुझे ये जानना है कि आपकी

129
00:09:17,440 --> 00:09:21,800
आपकी जो परंपरा है वो वहां से व्यास जी से कनेक्टेड है कि नहीं वो बताइए

130
00:09:21,800 --> 00:09:26,520
आप परंपरा अपनी क्या है गीता प्राप्त हुई कि

131
00:09:26,520 --> 00:09:30,560
नहीं गीता हमको प्रात हु आप इसको

132
00:09:30,560 --> 00:09:34,160
नहीं मानते व्यास जी ने लिखा उसको

133
00:09:34,160 --> 00:09:38,480
मैं वही तो कह रहा हूं मानते हैं मगर उसका जो अर्थ है

134
00:09:38,480 --> 00:09:42,560
जिसने हमको किताब दी है जिसने हमको ग्रंथ दिया है उसी उसी

135
00:09:42,560 --> 00:09:46,560
का अर्थ मान रहे हैं हम एक हम उसी

136
00:09:46,560 --> 00:09:51,120
का अर्थ मान रहे हैं या हम अपने मन से अर्थ मान रहे हैं

137
00:09:51,120 --> 00:09:55,440
आपके पास वेदव्यास का लिखा हुआ या दो अरब खरब दो खरब

138
00:09:55,440 --> 00:09:59,480
वर्ष पहले के जो वेद आदि शास्त्र है वो कैसे आए यह बताइए

139
00:09:59,480 --> 00:10:03,840
और अगर परंपरा से आए हैं तो अपने पिछले कम से कम 10 12

140
00:10:03,840 --> 00:10:09,000
गुरुओं के नाम बताइए सदानंद जी से पहले के

141
00:10:09,000 --> 00:10:13,040
देखिए कहने का अभिप्राय यह है कि जितने

142
00:10:13,040 --> 00:10:17,120
भी शास्त्र है करोड़ों वर्ष की गणना तो आपके पास

143
00:10:17,120 --> 00:10:21,200
भी नहीं होगी हमारे पास

144
00:10:21,200 --> 00:10:25,480
वर्ष की गणना आपके पास भी नहीं है हा

145
00:10:25,480 --> 00:10:29,480
हमारे पास है आप भी शंकराचार्य जी के बाद

146
00:10:29,480 --> 00:10:34,080
शंकराचार्य जी के बाद में आप बता देखिए विषयात

147
00:10:34,080 --> 00:10:38,360
मत करिए मैंने देखिए मैं गलत हूं मैं मान लेता हूं सुनिए थोड़ी

148
00:10:38,360 --> 00:10:42,920
देर के लिए दुर्जन तोष न्याय के आधार पर मैं मान लेता

149
00:10:42,920 --> 00:10:47,040
हूं मैं गलत हू मेरे पास नहीं है मगर मेरे गलत होने से आपका सही

150
00:10:47,040 --> 00:10:49,320
सिद्ध होना सिद्ध नहीं होता है तो

151
00:10:49,320 --> 00:10:53,720
आप अपने पक्ष के लिए मुझे बताइए कि आपके पास जो शास्त्र

152
00:10:53,720 --> 00:10:56,600
है वो कैसे

153
00:10:56,600 --> 00:11:00,880
आए शास्त्र तोसे आए अगर हम

154
00:11:00,880 --> 00:11:04,920
सीधा कहे गीता प्रेस गोरखपुर ने छापा

155
00:11:04,920 --> 00:11:08,920
उसको और उसने छापा और उसके माध्यम से दुकानों

156
00:11:08,920 --> 00:11:13,040
में गए उसके माध्यम से हम लोग को प्राप्त हुए तो

157
00:11:13,040 --> 00:11:17,400
गता को ब्यास जी ने स्वयं दिया था क्या

158
00:11:17,400 --> 00:11:22,160
गीता प्रेस को वेदव्यास जी ने स्वयं दिया था क्या

159
00:11:22,160 --> 00:11:26,640
लेकिन आप क्या प्रमाण है रिकॉर्ड बताइए ना कैसे गीता प्रेस पर

160
00:11:26,640 --> 00:11:30,840
पहुंचे मैं वही तो पूछ रहा हूं आपसे मैं एक जिज्ञासु बनके आपके

161
00:11:30,840 --> 00:11:36,000
सामने खड़ा हुआ हूं अभी मैं आपसे प्रश्न कर रहा हूं मेरे प्रश्नों का समाधान

162
00:11:36,000 --> 00:11:40,040
करिए तो प्रचलित शास्त्र मैं आपसे पूछ रहा हूं गीता प्रेस

163
00:11:40,040 --> 00:11:44,160
के पास वो जो शास्त्र है कैसे आए

164
00:11:44,160 --> 00:11:48,240
नहीं इसका कोई प्रमाण नहीं है हमारे पास कि गीता प्रेस को कैसे आए ये तो गीता

165
00:11:48,240 --> 00:11:52,760
प्रेस में बताएगी हम लोगों का जब जन्म हुआ तो हमने गीता

166
00:11:52,760 --> 00:11:57,000
को आप जिस देखिए देखिए देख देखिए

167
00:11:57,000 --> 00:12:01,320
जो शास्त्र आते हैं जो शास्त्र आते हैं

168
00:12:01,320 --> 00:12:06,680
मैं आपको बता दूं ये

169
00:12:06,680 --> 00:12:10,720
मा गीता प्रस गीता प्रेस के शास्त्र आपके लिए प्रमाण

170
00:12:10,720 --> 00:12:14,920
है क्या शास्त्र हमारे लिए

171
00:12:14,920 --> 00:12:19,600
जिस में भी जीवात्मा परमात्मा का ज्ञान है वो सब प्रमाण है चाहे कुरान हो

172
00:12:19,600 --> 00:12:23,920
चाहे बाइबल हो अरे भाई मैं पूछ रहा हूं गीता प्र

173
00:12:23,920 --> 00:12:28,240
से मिलने वाले जो शास्त्र है वो आपके लिए प्रमाण है कि नहीं है पूरी तरीके

174
00:12:28,240 --> 00:12:31,640
से बिल्कुल कं

175
00:12:31,640 --> 00:12:35,920
प्रमाण है प्रमाण अब मैं आपको ये बता रहा हूं

176
00:12:35,920 --> 00:12:41,920
मांड को

177
00:12:58,120 --> 00:13:02,400
उपनिषद ये मांड में पहला पहले

178
00:13:02,400 --> 00:13:06,480
अध्याय में पहले अध्याय में जो पहला मांड

179
00:13:06,480 --> 00:13:11,480
उपनिषद में दिया गया है इसमें ब्रह्मा जी से लेकर

180
00:13:11,480 --> 00:13:15,880
और जो सोनक ऋषि है सोनक मुनि है उन

181
00:13:15,880 --> 00:13:19,960
तक शास्त्र कस्त्र ज्ञान कैसे आ रहा है य बताया जा रहा

182
00:13:19,960 --> 00:13:24,240
है मांड उपनिषद एक से चार पहला अध्याय

183
00:13:24,240 --> 00:13:28,320
अब इसमें जो सोनक मुनि है वो तक बता रहे हैं कि हमारी गुरु

184
00:13:28,320 --> 00:13:34,320
परंपरा क्या है है ठीक

185
00:13:37,640 --> 00:13:43,640
है ये गीता प्र एक और ग्रंथ

186
00:13:44,200 --> 00:13:50,200
है इसमें तीसरे अध्याय

187
00:13:56,760 --> 00:14:02,760
का सवा श्लोक

188
00:14:03,720 --> 00:14:08,120
मुंडकोपनिषद का तीसरे अध्याय का सवा लोक

189
00:14:08,120 --> 00:14:12,160
मंड कोप निषद का पहले अध्याय का पहले से चार तक का

190
00:14:12,160 --> 00:14:16,440
और भगवत गीता का तीसरे अध्याय का सवा

191
00:14:16,440 --> 00:14:21,160
श्लोक जो पुरुष इस लोक में

192
00:14:21,160 --> 00:14:25,360
परंपरा से प्रचलित सृष्टि चक्र के अनुकूल

193
00:14:25,360 --> 00:14:29,160
परंपरा से प्रचलित किससे परंपरा से परंपरा

194
00:14:29,160 --> 00:14:33,520
से प्रचलित सृष्टि चक्र के अनुकूल नहीं बरतते

195
00:14:33,520 --> 00:14:37,560
अपने कर्तव्य का पालन नहीं करते वह

196
00:14:37,560 --> 00:14:41,360
इंद्रियों के द्वारा भोगों में रमण करने वाला पापायी

197
00:14:41,360 --> 00:14:44,520
जीता

198
00:14:44,520 --> 00:14:50,240
है चौथे अध्याय का दूसरा

199
00:14:50,240 --> 00:14:54,320
श्लोक ब्रह्मा जी हो गया आपका चौथे अध्याय का

200
00:14:54,320 --> 00:14:57,240
दूसरा

201
00:14:57,240 --> 00:15:02,160
श्लोक नहीं हुआ चौथे अध्याय का दूसरा शलोक बता रहा

202
00:15:02,160 --> 00:15:06,440
हूं भगवान श्री कृष्ण बता रहे हैं

203
00:15:06,440 --> 00:15:10,720
एवं परंपरा प्राप्ति भगवान श्री कृष्ण भी बता रहे हैं ज्ञान

204
00:15:10,720 --> 00:15:14,840
प्राप्त हो रहा है परंपरा से भगवान

205
00:15:14,840 --> 00:15:19,680
कौन सालोक क बता रहे ज्ञान प्राप्त होता है परंपरा से

206
00:15:19,680 --> 00:15:24,200
अब जो अब जो हमारे परमाचार्य गण है ब्रह्मा जी

207
00:15:24,200 --> 00:15:28,200
आदि वो अपने पिछले के गुरुओं के नाम बता रहे ब्रह्मा जी

208
00:15:28,200 --> 00:15:32,320
के बाद सोनक आते तो सोन ऋषि आदि बता रहे ब्रह्मा जी से हम तक कैसे

209
00:15:32,320 --> 00:15:36,320
आए आपको सदानंद जी से पहले का कोई आपके पास व

210
00:15:36,320 --> 00:15:40,680
नहीं है गीता प्रेस तक कैसे आया हो जिसके आधार पर आपने सदानंद जी को मान लिया

211
00:15:40,680 --> 00:15:45,160
इसका अर्थ ये है कि अगर गीता प्र अगर गीता प्रेस

212
00:15:45,160 --> 00:15:49,280
का गीता प्रश्न वो ज्ञान आपको सही पहुंचाया है कि नहीं पहुंचाया

213
00:15:49,280 --> 00:15:53,680
है इसका कोई वो नहीं है क्योंकि आपके पास परंपरा तो है नहीं

214
00:15:53,680 --> 00:15:56,480
यह बताने के लिए उसम वही शलोक छापे जा रहे जो शलोक

215
00:15:56,480 --> 00:15:59,920
पीछे से आए

216
00:15:59,920 --> 00:16:04,760
तो कुल मिलाकर के आपकी परंपरा क्या है

217
00:16:04,760 --> 00:16:08,880
बो एक चीज बताइए न कितने

218
00:16:08,880 --> 00:16:13,680
प्रकार का कौन सा ज्ञान आया क्या

219
00:16:13,680 --> 00:16:17,800
कौन सा ज्ञान देखिए विषयात मत करिए

220
00:16:17,800 --> 00:16:22,560
अभी एक एक करके हम लोग हर चैप्टर पर आएंगे विषयात

221
00:16:22,560 --> 00:16:27,920
करके हर चैप्टर पर आएंगे आप मुझे बताइए जिस ज्ञान

222
00:16:27,920 --> 00:16:32,120
के बोलिए बीच में आपको हमने धैर्य से सुना है ना

223
00:16:32,120 --> 00:16:36,400
हम अपना बात खत्म करें भा तो ये विषयात कर रहे हैं अब ये क्वेश्चन कर रहे हैं ज्ञान

224
00:16:36,400 --> 00:16:40,560
कितने प्रकार के आप मुझे अपनी बात बोलिए आप पूछिए मत जब बात हमारी

225
00:16:40,560 --> 00:16:44,760
खत्म हो जाए उसके बाद आप कहिए विषयात है आपका नहीं तो वो ठीक

226
00:16:44,760 --> 00:16:48,800
है मगर ये जो प्रश्न ये जो प्रश्न कर रहे हैं ज्ञान कितने प्रकार के हो रहे

227
00:16:48,800 --> 00:16:53,040
हैं ये अपनी बात बोले ना बोल दिया आपने हमने

228
00:16:53,040 --> 00:16:57,080
हम कृष्ण जी का ज्ञान कह रहे हैं आप ब्रह्मा जी की परंपरा बता रहे हैं आप

229
00:16:57,080 --> 00:17:01,160
कृष्ण जी की परंपरा भी बताई है मैंने कृष्ण जी का

230
00:17:01,160 --> 00:17:05,240
भी बताया है पास क जी वाला देखिए अगर आपको लड़ना है तो हम लोग चर्चा

231
00:17:05,240 --> 00:17:09,880
को बंद कर देते हैं लड़ना है तो चर्चा को बंद कर देते

232
00:17:09,880 --> 00:17:11,720
अगर आपको लड़ना है तो चर्चा को बंद

233
00:17:11,720 --> 00:17:15,800
कर देते हैं मैं फिर बोल रहा हूं अगर आपको

234
00:17:15,800 --> 00:17:20,200
लड़ना है तो चर्चा को बंद कर बंद करना है

235
00:17:20,200 --> 00:17:24,200
हा बताइए लड़ने वाला तो शब्द भी नहीं आया बीच में ये लड़ाई कहां से बीच

236
00:17:24,200 --> 00:17:29,760
में शबद आ गया लड़ने वाली बात कहां से आई देखिए वो वो जो दर्शक हैइ

237
00:17:29,760 --> 00:17:33,880
आपने जिस लोक को बताया है सुनिए सुनि आपने जिस श्लोक को

238
00:17:33,880 --> 00:17:38,400
बताया है वो चतुर्थ अध्याय का दूसरा श्लोक

239
00:17:38,400 --> 00:17:40,600
ठीक

240
00:17:40,600 --> 00:17:45,280
है चतुर्थ अध्याय का दूसरा श्लोक कहता है कि परंपरा

241
00:17:45,280 --> 00:17:51,160
से प्राप्त इस योग

242
00:17:51,160 --> 00:17:56,200
को बोलिए

243
00:17:56,200 --> 00:18:00,200
बोलिए योग और तत्व ज्ञान में अंतर

244
00:18:00,200 --> 00:18:04,200
है भगवान कृष्ण के पास जो ज्ञान था है जो

245
00:18:04,200 --> 00:18:09,000
परंपरागत आता है या कर्मकांड का जो ज्ञान है व परंपरागत आता है

246
00:18:09,000 --> 00:18:15,000
भगवान विष्णु राम और कृष्ण का जो ज्ञान है वो ज्ञान वास्तव

247
00:18:20,760 --> 00:18:24,920
में गत नहीं आता है यदा यदा ही धर्म

248
00:18:24,920 --> 00:18:29,000
भारत अन अधर्म को तत्व का ज्ञान कहते हैं और आप

249
00:18:29,000 --> 00:18:33,480
जिस ज्ञान की बात कर रहे क् परंपरागत आया है व तत्व का ज्ञान ना हो कर के

250
00:18:33,480 --> 00:18:37,600
योग या अध्यात्म का ज्ञान अवा कर्मकांड का ज्ञान गीता में भगवान कृष्ण

251
00:18:37,600 --> 00:18:42,120
ने कहा ते त ब्र सम आध्यात्म कमलम

252
00:18:42,120 --> 00:18:46,480
अर्थात तीन प्रकार के ज्ञान है कर्मकांड आध्यात्म और तत्व

253
00:18:46,480 --> 00:18:50,640
का ज्ञान जिनके पास तुम जाओगे दो मिलेगा

254
00:18:50,640 --> 00:18:54,720
बात पूरी हो जाए तो मुझे बता दीजिएगा आपकी बात जब पूरी हो जाए तो मुझे

255
00:18:54,720 --> 00:18:59,440
बता दीजिएगा मुझे कब बोलना

256
00:18:59,440 --> 00:19:02,040
या हमारे

257
00:19:02,040 --> 00:19:06,280
कने और क जी

258
00:19:06,280 --> 00:19:10,320
वाे अभी आप मुझे बोलने दे रहे थे भाई साब इस तरह

259
00:19:10,320 --> 00:19:16,320
से बात नहीं हो पाएगी आपने क दिया बताइए तो आप मुझे बोलने

260
00:19:18,360 --> 00:19:22,880
दीजिए अब मैं पूछ रहा हूं मैंने आपको केवल भगवत

261
00:19:22,880 --> 00:19:28,880
गता के बारे में बताया है या मुंडकोपनिषद भी बताया है

262
00:19:29,680 --> 00:19:34,520
दूसरी बात यह है एक प्रश्न तो यह हो गया दूसरा प्रश्न यह हो गया

263
00:19:34,520 --> 00:19:39,320
कि जिस चीज को आप प्रमाण अपने जीवन का मान रहे हैं

264
00:19:39,320 --> 00:19:43,880
वह चीज आप तक कहां से आई है जिसके आधार पर आप सदानंद

265
00:19:43,880 --> 00:19:49,880
जी को भगवान मान रहे

266
00:19:52,080 --> 00:19:58,080
हैं भाई कोई रिकॉर्डिंग कर रहा है कि नहीं कर रहा स्क्रीन रिकॉर्डिंग

267
00:20:04,040 --> 00:20:10,040
हां नहीं हुआ है मगर थोड़ा सा बात तो

268
00:20:14,600 --> 00:20:18,640
करें इनकी गोली मारकर मैंने ऐसा मुझे पक्का नहीं पता है मगर

269
00:20:18,640 --> 00:20:23,720
गोली मारकर हत्या हुई थी सनन जी की

270
00:20:23,720 --> 00:20:29,720
जी कोई रिकर्ड कर रहा है क्या जवाब दे मुझे कर रहा है तो

271
00:20:32,640 --> 00:20:36,760
देखिए आपको सभी विरोधी तंत्रों से

272
00:20:36,760 --> 00:20:40,800
जितने भी तंत्र है ऐसे जो

273
00:20:40,800 --> 00:20:44,840
वेदा आदि शास्त्र सम्मत ज्ञान की बात तो करते हैं मगर उसके ज्ञान के

274
00:20:44,840 --> 00:20:49,120
बीच में से अपनी बात डाल देते हैं उनसे जो बचाने वाली चीजें

275
00:20:49,120 --> 00:20:53,440
हैं वही गुरु परंपरा

276
00:20:53,440 --> 00:20:57,600
है जी आ गया तो मैं कह रहा

277
00:20:57,600 --> 00:21:01,720
था अ जी मैं यह कह रहा था पहला

278
00:21:01,720 --> 00:21:05,840
प्रश्न तो यह है कि मैंने केवल भगवत गीता आपको प्रमाण के रूप में नहीं दी है

279
00:21:05,840 --> 00:21:09,920
मेरे पास मुंडकोपनिषद है मेरे पास छंद उपनिषद

280
00:21:09,920 --> 00:21:14,080
है जैसे छंद उपनिषद में कहा जा रहा है कि परंपरा प्राप्त आचार्य

281
00:21:14,080 --> 00:21:18,160
के पास जाकर के जो विद्या प्राप्त होती है वही फलदाई है मेरे

282
00:21:18,160 --> 00:21:22,280
पास निरुक्त का निरुक्त का उदाहरण है जो जो शब्दकोश माना

283
00:21:22,280 --> 00:21:26,440
जाता है किसका वेदा शास्त्रों का डिक्शनरी कहते जिसे निरुक्त

284
00:21:26,440 --> 00:21:31,800
और मेरे पास सात ये क्या कहते

285
00:21:31,800 --> 00:21:35,840
हैं ये मुंडकोपनिषद का मैंने आपको बता ही दिया इतनी जगह पर बात

286
00:21:35,840 --> 00:21:39,920
हुई है उसम से एक जगह भगवान श्री कृष्ण की बात है दूसरी बात मैं

287
00:21:39,920 --> 00:21:44,120
यह नहीं कह रहा हूं इस प्रमाणों को साइड में हटा दीजिए मैं आपसे सीधे

288
00:21:44,120 --> 00:21:47,800
सधे पूछ रहा हूं कि आपने यदि वेदा आदि शास्त्रों

289
00:21:47,800 --> 00:21:51,920
को गीता प्रस गोरखपुर के शास्त्रों को प्रमाण रूप में स्वीकार किया तो

290
00:21:51,920 --> 00:21:57,920
क्या आपकी आस्था है गीता प्रस गोरखपुर पर

291
00:21:58,800 --> 00:22:03,240
खाली खाली हमने गीता प्रेस गोरखपुर के प्रमाणों को मात्र देखकर नहीं स्वीकार

292
00:22:03,240 --> 00:22:07,440
किया जो ज्ञान हमारे भगवान सदानंद

293
00:22:07,440 --> 00:22:11,760
जी ने दिया दिखाया हम लोगों को जब जीव

294
00:22:11,760 --> 00:22:17,160
दर्शन या यानी प्रमा

295
00:22:17,160 --> 00:22:21,320
है जब आत्मा दर्शन कराया तो उन्होने कहा देखो ग्रंथ खाली

296
00:22:21,320 --> 00:22:25,520
वही नहीं उपनिषद से भी उन्होने प्रमाण

297
00:22:25,520 --> 00:22:30,320
दिया और यह कहा कि जो उपनिषद है

298
00:22:30,320 --> 00:22:34,880
बात पूरी कर लीजिए फिर बताऊ कनि की

299
00:22:34,880 --> 00:22:39,320
बात पूरी कर ली फर बताए और की जो आप बात कर रहे हैं

300
00:22:39,320 --> 00:22:43,640
अरे वेद और वेदांग को पढ़ने मात्र से क्या होगा

301
00:22:43,640 --> 00:22:46,880
क्या अर्थ है

302
00:22:46,880 --> 00:22:51,120
इसका देखि लाम को बंद कर दूंगा य पर आपके प्रवचन

303
00:22:51,120 --> 00:22:55,120
सुनने नहीं बैठा हुआ हूं आपके प्रवचन सुनने नहीं

304
00:22:55,120 --> 00:23:00,680
बैठा हुआं प्रश्न और उत्तर पर बात होगी ठीक है

305
00:23:00,680 --> 00:23:04,880
बोलिए बोलिए आप हा तो मैं आपसे पूछ

306
00:23:04,880 --> 00:23:08,880
मैं आपसे पूछ रहा हूं जिन चीजों को आपने प्रमाण के रूप में स्वीकार किया

307
00:23:08,880 --> 00:23:12,880
है जहां से आपने उन चीजों को लिया है उस

308
00:23:12,880 --> 00:23:18,880
जगह पर आपको विश्वास है कि नहीं बकल

309
00:23:19,320 --> 00:23:23,360
आपने यहां पर दो स्थितियां यहां पर दो स्थितियां नजर

310
00:23:23,360 --> 00:23:27,480
आ रही है एक कि आपने गीता प्रस के ज्ञान के आधार पर

311
00:23:27,480 --> 00:23:31,680
सदानंद जी जी को भगवान माना या फिर सदानंद जी की कही हुई

312
00:23:31,680 --> 00:23:36,000
बातों के कारण गीता प्रस को प्रमाण माना एक मिनट

313
00:23:36,000 --> 00:23:40,320
श्रीमद भगवत गीता के आधार पर क अरे सुन लीजिए केवल भगवत

314
00:23:40,320 --> 00:23:44,600
गीता के आधार पर हा केवल भगवत गीता

315
00:23:44,600 --> 00:23:50,120
के आधार पर भगवत गीता नहीं सारे ग्रंथों के आधार

316
00:23:50,120 --> 00:23:54,440
पर सारे ग्रंथों के आधार पर तो अब इसको दोबारा क्लियर कर लेते

317
00:23:54,440 --> 00:23:58,880
तो उसका मुझे कुछ नाम तो बता दीजिए कि फलानी जगह से छपते हैं तो मैं मानता हूं

318
00:23:58,880 --> 00:24:03,080
उनको भाई अभी कोई व्यक्ति अगर भगवत गीता

319
00:24:03,080 --> 00:24:07,080
के नाम से आपको आप एक बात बताइए आप

320
00:24:07,080 --> 00:24:11,160
एक बात बताइए एक बहुत साधारण सी बात बोल रहा हूं क्या

321
00:24:11,160 --> 00:24:15,640
आपको सारे वेदा शास्त्रों के श्लोक याद है क्या

322
00:24:15,640 --> 00:24:19,840
ठीक है बिल्कुल नहीं है नहीं है इसका

323
00:24:19,840 --> 00:24:23,920
अर्थ यह है कि आप किसी ना किसी पब्लिकेशन पर भरोसा करेंगे ना

324
00:24:23,920 --> 00:24:28,600
कि भाई इस पब्लिकेशन पर मुझे भरोसा है ये गलत श्लोक नहीं छापे गी

325
00:24:28,600 --> 00:24:32,720
करती हम क्या कर रहे हैं मान्यता प्राप्त है वो आपके

326
00:24:32,720 --> 00:24:36,360
नहीं मानने से क्या हो जाएगा हा

327
00:24:36,360 --> 00:24:40,960
रा क्लियर करना जरूरी है अब बात अब बात ये आती है

328
00:24:40,960 --> 00:24:45,240
अब बात ये आती है कि आपने जो इसको

329
00:24:45,240 --> 00:24:49,400
प्रमाण के रूप में स्वीकार किया है वह ज्ञान जो ये ज्ञान

330
00:24:49,400 --> 00:24:53,760
जो सदानंद जी ने दिया था उनके ज्ञान के आधार पर इसको स्वीकार किया है

331
00:24:53,760 --> 00:24:57,840
या फिर इनके आधार पर सदानंद जी को भगवान स्वीकार किया है इनमें

332
00:24:57,840 --> 00:25:01,880
से कौन स्थिति है ग्रंथ के आधार पर आपने सदानंद जी

333
00:25:01,880 --> 00:25:06,360
को वो माना ईश्वर या ईश्वर के आधार पर आपने ग्रंथों को

334
00:25:06,360 --> 00:25:10,440
माना ग्रंथ क्या है इनम से दोनों

335
00:25:10,440 --> 00:25:14,440
एक साथ दोनों एक साथ दोनों एक साथ

336
00:25:14,440 --> 00:25:18,440
मुझे थोड़ा प्रैक्टिकली समझाइए प्रैक्टिकली समझा रहे

337
00:25:18,440 --> 00:25:22,520
हैं जैसे मान लीजिए आप है शिवास द्विवेदी जी है

338
00:25:22,520 --> 00:25:26,640
अब जब तक हमने शिवांश द्विवेदी का नाम खाली सुना है तब तक

339
00:25:26,640 --> 00:25:30,920
पूर्ण परिचय हमको आपका प्राप्त नहीं लेकिन जब हम शिवांश दिवेदी

340
00:25:30,920 --> 00:25:35,440
जी को आमने सामने देख लेंगे बात व्यवहार हमेशा हो जाएगा

341
00:25:35,440 --> 00:25:39,760
तब आपका पूर्ण पर प्राप्त हो जाएगा अर्थात नाम रूप

342
00:25:39,760 --> 00:25:44,280
और स्थान ये तीनों यदि आपका

343
00:25:44,280 --> 00:25:48,320
प्राप्त हो गया हमको तो हम समझ जाएंगे कि पूर्ण परिचय आपका प्राप्त हो गया

344
00:25:48,320 --> 00:25:51,400
अब देखिए अब जो कोई भी ग्रंथ है चाहे वेद

345
00:25:51,400 --> 00:25:55,400
है चाहे उपनिषद है चाहे वेदांग है ब्राह्मण है आरण्यक है गीता है या

346
00:25:55,400 --> 00:25:59,560
महापुराण है कोई भी है उसमें क्या लिखा है उसम तो शब्द लिखा है

347
00:25:59,560 --> 00:26:03,760
ना उसमें रूप तो है नहीं जैसे जीव लिखा है या आत्मा लिखी

348
00:26:03,760 --> 00:26:08,120
है या परमात्मा लिखा है तो ग्रंथ में तो खाली शब्द ही ना लिखा है

349
00:26:08,120 --> 00:26:12,840
सकल तो है नहीं कि आत्मा कैसे दिख कैसे देख सकते हैं

350
00:26:12,840 --> 00:26:17,040
अगर य लिखा भी होगा तो आप उसको पढ़कर तो जान नहीं सकते हैं

351
00:26:17,040 --> 00:26:21,120
जानना तो किसी सक्षम गुरु से ही होगा आपको तो जब

352
00:26:21,120 --> 00:26:25,400
तक उन्होंने क्या किया हमको पहले प्रत्यक्ष दिखाया पहले

353
00:26:25,400 --> 00:26:29,760
रूप को सामने किया कि देखो ये आत्मा है जी उसके

354
00:26:29,760 --> 00:26:34,080
आधार पर उन्होने कहा ग्रंथ देखो ग्रंथ जिस प्रकार वर्णन

355
00:26:34,080 --> 00:26:38,320
कर रहा है ठीक उसी प्रकार जो हमने दिखाया है कि नहीं है

356
00:26:38,320 --> 00:26:42,840
उस दर्शन से ग्रंथ प्रमाणित हो गया और ग्रंथ से दर्शन प्रमाणित हो गया

357
00:26:42,840 --> 00:26:47,080
इसका अथ सही है बात

358
00:26:47,080 --> 00:26:51,800
य आती है ग आपने

359
00:26:51,800 --> 00:26:56,320
देखे जिन ग्र का अथ आपने

360
00:26:56,320 --> 00:27:01,840
सुनली हमारी बात आप केवल ग

361
00:27:01,840 --> 00:27:06,640
ना केवल दर्शन से कुछ कर सकते हैं क्योंकि ग्रंथ में

362
00:27:06,640 --> 00:27:10,640
आज शंकराचार्य जी ने कहा है न गच्छति

363
00:27:10,640 --> 00:27:15,040
बिना पानम ब्या ष शब्द बिना परोक्षा

364
00:27:15,040 --> 00:27:19,240
अनुभवम शबद ब्रहम मु सा

365
00:27:19,240 --> 00:27:23,280
शंकराचार्य जी कहते हैं कि खाली दवा दवा दवा दवा कहोगे तो

366
00:27:23,280 --> 00:27:27,400
वास्तव में आपका जो है रोग नहीं जाएगा जब तक प्रत्यक्ष

367
00:27:27,400 --> 00:27:31,520
दर्शन नहीं होगा बिना परोक्षा भव ब्रह्म

368
00:27:31,520 --> 00:27:35,560
शते ब्रह्म ब्रह्म आत्मा आत्मा परमात्मा परमात्मा चिल्लाने

369
00:27:35,560 --> 00:27:39,680
से मोक्ष नहीं होने को है जो पुरुषार्थ मनुष्य जीवन का लक्ष्य है अरे

370
00:27:39,680 --> 00:27:44,200
भैया बातो को रिपीट क्यों कर रहे हो मुझे भी तो बोलने दो

371
00:27:44,200 --> 00:27:48,200
बोलिए उम हा बात

372
00:27:48,200 --> 00:27:52,240
ये आती है क्या आप शंकराचार्य जी की बात स्वीकार की

373
00:27:52,240 --> 00:27:56,920
गई बातों को प्रमाण मानते हैं

374
00:27:56,920 --> 00:27:59,320
बिल्कुल

375
00:27:59,320 --> 00:28:03,640
अभी तक जो तीन बातें अटक रही है व यह है पहली बात कि

376
00:28:03,640 --> 00:28:07,640
आपको यह जो ज्ञान है जो मैच कर रहा है सदानंद

377
00:28:07,640 --> 00:28:11,800
जी के ज्ञान से यह ज्ञान आपको कहां से प्राप्त हुआ

378
00:28:11,800 --> 00:28:15,880
आपको कुछ नहीं पता है पहली बात यसे

379
00:28:15,880 --> 00:28:20,040
आपने कहा हमारे पास कोई प्रमाण नहीं है कहा से आया गीता प्रेस के पास दूसरी

380
00:28:20,040 --> 00:28:21,880
बात य है आपने

381
00:28:21,880 --> 00:28:26,080
जहा से ग मुझे बोलने दीजिए अब मुझे बोलने

382
00:28:26,080 --> 00:28:30,200
दीजिए दूसरी बात य है गता प्रस के पास जहां से आया

383
00:28:30,200 --> 00:28:34,200
और जो गीता प्रस के शास्त्रों का अर्थ आप ले

384
00:28:34,200 --> 00:28:38,480
रहे हैं वो जो वो अर्थ जो सदानंद जी के ज्ञान से मैच

385
00:28:38,480 --> 00:28:42,840
खा रहा है उस अर्थ को आपने वहां से वेरीफाई कराया

386
00:28:42,840 --> 00:28:47,360
जहां से गीता प्रेस के पास वो ज्ञान आ रहा है नहीं कराया

387
00:28:47,360 --> 00:28:51,360
दूसरी बात ये आती है कि जब आप अपनी बात बोल रहे हैं

388
00:28:51,360 --> 00:28:55,640
तो आप मुझे उन्ही शास्त्रों का प्रमाण दे रहे हैं जो सनातन धर्म ग्रंथों

389
00:28:55,640 --> 00:28:59,640
के नाम से जाने जाते हैं मगर जब मैं अपनी बातो को बोलने के लिए

390
00:28:59,640 --> 00:29:05,640
सनातन धर्म ग्रंथ का प्रमाण दे रहा हूं तो उसे आप नकार

391
00:29:08,080 --> 00:29:10,880
रहेमा

392
00:29:10,880 --> 00:29:15,400
हमने भाई शंकराचार्य की अगर बात को आप प्रमाण मानते

393
00:29:15,400 --> 00:29:19,880
हैं तो शंकराचार्य के द्वारा बताया हुआ चीज आप स्वीकार करिए पूरी की पूरी

394
00:29:19,880 --> 00:29:24,920
नहीं तो उनके द्वारा उनके द्वारा जो स्वीकारी ग बात उनका उदाहरण मत दीजिए

395
00:29:24,920 --> 00:29:29,560
य मत करिए आपने उनकी मान

396
00:29:29,560 --> 00:29:34,640
ली स्वीकार नहीं की स की

397
00:29:34,640 --> 00:29:39,320
बहा भाई भाई इसमें ंद

398
00:29:39,320 --> 00:29:43,440
में लिखा हुआ है छ अध्याय के

399
00:29:43,440 --> 00:29:47,480
च इसमें लिखा हुआ है कि जो आपकी

400
00:29:47,480 --> 00:29:51,880
जो विद्या है आचार से प्राप्त विद्या ही फलदाई है तो आप सदानंद

401
00:29:51,880 --> 00:29:56,720
जी के आचार के आचार के आचार चार पाच नाम बताइए मुझे

402
00:29:56,720 --> 00:30:00,800
अन्यथा वो विद्या फ नहीं इसको मानिए

403
00:30:00,800 --> 00:30:06,160
सुनिए आप हमने आपको क्या

404
00:30:06,160 --> 00:30:10,200
कहा भवान अब आप इसको मानेंगे कि नहीं पहले तोय

405
00:30:10,200 --> 00:30:15,920
बताइए पहले आप मुझे बताइए इसको मानेंगे कि नहीं मानेंगे

406
00:30:15,920 --> 00:30:20,120
अरे भाई भगवान श्री राम जब होते

407
00:30:20,120 --> 00:30:24,200
हैं तो वो स्वयं वशिष्ठ के पास जाते हैं ज्ञान लेने

408
00:30:24,200 --> 00:30:29,080
सदानंद जी के गुरु के गुरु के गुरु दो चार नाम बताइए मुझे

409
00:30:29,080 --> 00:30:33,680
खुद आक के पैरो में गिरे हैं प्रभु

410
00:30:33,680 --> 00:30:37,800
छोड़ देते हम काफी देर हमने काफी देर बात कर ली परंपरा

411
00:30:37,800 --> 00:30:42,240
वाली बात अब लोगों को जो भी निष्कर्ष निकालना होगा निकाल

412
00:30:42,240 --> 00:30:46,520
ठीक अब अब हम चर्चा को आगे बढ़ते दूसरा चैप्टर खोलते

413
00:30:46,520 --> 00:30:50,760
हैं अब य बताइ आपे

414
00:30:50,760 --> 00:30:55,520
जी वालान राम जी हो गया

415
00:30:55,520 --> 00:30:59,600
आपके पास है नहीं उस बात नहीं करेंगे नहीं चर्चा आगे नहीं बढ़ेगी

416
00:30:59,600 --> 00:31:03,720
वो चैप्टर बदलते परंपरा वाली बात छोड़ देते हैं अब

417
00:31:03,720 --> 00:31:07,760
मुझे एक बात बताइए आप कह रहे प्रत्यक्ष को देखा मैंने प्रत्यक्ष देख

418
00:31:07,760 --> 00:31:13,760
कर के मुझे ऐसा समझ में आया वो जरा समझा दीजिए आपने क्या

419
00:31:14,000 --> 00:31:18,440
देखा जैसा भगवान कृष्ण ने अर्जुन को दिखाया

420
00:31:18,440 --> 00:31:22,640
ठीक उसी प्रकार अरे भगवान श्री कृष्ण

421
00:31:22,640 --> 00:31:26,760
ने अर्जुन को जो दिखाया था वो जहां से आपके पास आ रहा

422
00:31:26,760 --> 00:31:31,600
है उनका अ आप मानोगे क्या शास्त्रों का

423
00:31:31,600 --> 00:31:35,760
आपको लगता है कि गीता प्र सारे अ बदल

424
00:31:35,760 --> 00:31:39,800
दिए नहीं बदले मगर गीता प्रेस तो मान रही है

425
00:31:39,800 --> 00:31:43,800
गीता प्रेस के पास जो चीज आई शंकराचार्य आद जो हमारे राव

426
00:31:43,800 --> 00:31:47,800
से आई है और यह जोय जो बोल रहे व क कलकी अवतार होना

427
00:31:47,800 --> 00:31:52,560
अभी बहुत साल बाकी है उसम कलकी अवतार [संगीत]

428
00:31:52,560 --> 00:31:56,840
में या तो या तो परंपरा प्राप्त आचार्य को आपको मानना

429
00:31:56,840 --> 00:32:01,080
होगा या नहीं हो दोनों में से एक चीज चूज करिए ना

430
00:32:01,080 --> 00:32:05,160
अपनी बात को रखने के लिए परंपरा की चीज आप ला रहे हो और जब मैं वो

431
00:32:05,160 --> 00:32:09,200
बात कह रहा हूं तो आप फुकरा रहे हो आपने गीता प्रेस के जो अर्थ आप

432
00:32:09,200 --> 00:32:13,480
समझ रहे हैं वो अर्थ किसी परंपरा प्राप्त आचार्य के पास जाकर

433
00:32:13,480 --> 00:32:18,000
के वेरीफाई किए हैं क्या रामानुजाचार्य परंपरा निंबार्काचार्य परंपरा

434
00:32:18,000 --> 00:32:22,200
वल्लभाचार्य परंपरा शंकराचार्य परंपरा

435
00:32:22,200 --> 00:32:26,200
कि भैया मैं सोच रहा हूं ये 2006 में जो ज्ञानानंद जी जो दर्शन रूप दिखा

436
00:32:26,200 --> 00:32:29,080
रहे विराट स्वरूप ये वही स्वरूप है जो श्री कृष्ण ने

437
00:32:29,080 --> 00:32:33,880
दिखाया था मैं सही समझ रहा हूं कि नहीं समझ रहा हूं ये बताइए मुझे

438
00:32:33,880 --> 00:32:38,040
देखिए एक बात आपने नहीं किया है तो अब अब

439
00:32:38,040 --> 00:32:42,080
मैं आपसे पूछ रहा हूं कि जो जो रूप सदानंद जी

440
00:32:42,080 --> 00:32:46,240
ने दिखाया विराट रूप के रूप में वह स्वरूप वही रूप था

441
00:32:46,240 --> 00:32:52,240
जो श्री कृष्ण ने दिखाया अर्जुन को यह कैसे पता चला

442
00:32:52,240 --> 00:32:56,600
आपको बोले मतलब यह है कि अगर मैंने आपको

443
00:32:56,600 --> 00:33:00,800
ग्रंथ दिया है और मैं उसका अर्थ भी आपको बता रहा हूं आप दोनों

444
00:33:00,800 --> 00:33:04,960
चीजों को स्वीकार कर रहे हैं तब तो आपका प्रमाण के रूप में उस ग्रंथ को उपयोग

445
00:33:04,960 --> 00:33:09,320
करना उचित सिद्ध होता है आपने ग्रंथ तो मुझसे लिया

446
00:33:09,320 --> 00:33:13,600
मगर उसम अर्थ अपनी दृष्टि से देख रहे हो मैं कह रहा हूं भाई सुन इसका अर्थ भी लेता जा

447
00:33:13,600 --> 00:33:19,600
मगर आप मना कर रहे हो नहीं तुम्हारा अर्थ गलत है तो यह तो वो हो गया

448
00:33:19,880 --> 00:33:23,960
ई शंकराचार्य क्या मान रहे है क्या सदानंद

449
00:33:23,960 --> 00:33:28,120
जी ने शंकराचार्य ने शंकराचार्य मान रहे क्या

450
00:33:28,120 --> 00:33:32,280
सदानंद जी ने जो दर्शन दिखाया है विराट स्वरूप

451
00:33:32,280 --> 00:33:38,280
का वही विराट स्वरूप श्री कृष्ण ने दिखाया था सदानंद जी मान रहे इस बात को शंकराचार्य

452
00:33:38,440 --> 00:33:42,640
वो तो कराही भगवान सदानंद तो कराए ही वो दर्शन

453
00:33:42,640 --> 00:33:44,160
शंकराचार्य के पास दर्शन ही नहीं

454
00:33:44,160 --> 00:33:48,160
था नहीं नहीं करा वो दर्शन वही दर्शन था

455
00:33:48,160 --> 00:33:52,240
जो जो श्री कृष्ण ने दिखाया था यह शंकराचार्य जी ने स्वीकार किया

456
00:33:52,240 --> 00:33:56,320
है क्यार जी का स्वीकार करेंगे तब सदानंद

457
00:33:56,320 --> 00:34:00,480
जी थे ही नहीं सदानंद जी थेरे भाई तो शंकराचार्य

458
00:34:00,480 --> 00:34:05,240
जी की गुरु गद्दी परक की गुरु गद्दी

459
00:34:05,240 --> 00:34:09,760
शंकराचार्य जी ने ममना अनुशासन में बोला ना कि मेरे द्वारा प्रतिष्ठित

460
00:34:09,760 --> 00:34:14,160
पीठ पर आरू होने वाला जो सन्यासी है वह अंतिम निर्णायक

461
00:34:14,160 --> 00:34:18,160
होगा वो मेरा स्वरूप माना जाएगा और

462
00:34:18,160 --> 00:34:22,240
अगर अगर आपको अगर आपको अपने मन का ज्ञान लेना है तो

463
00:34:22,240 --> 00:34:26,480
ठीक है ये परंपरा प्राप्त शास्त्र छोड़ दीजिए सीधे कहिए हम ज्ञान

464
00:34:26,480 --> 00:34:31,040
दे रहे स जी नाम से एक नया धर्म खोल

465
00:34:31,040 --> 00:34:35,160
लीजिए छो शंकराचार्य से पहले क्या ग भाई

466
00:34:35,160 --> 00:34:39,360
मेरा कोई मेरा कोई कॉपीराइट नहीं है आप मुझे बताइए आपके पास ग्रंथ

467
00:34:39,360 --> 00:34:44,040
कैसे आए शंकराचार्य से पहले ग्रंथ नहीं थे क्या

468
00:34:44,040 --> 00:34:48,120
उनके बाद मान लीजिए शंकराचार्य के पहले शंकराचार्य के

469
00:34:48,120 --> 00:34:52,520
पहले की गुरु परंपरा भी है ना अरे सुन लीजिए

470
00:34:52,520 --> 00:34:56,800
सुन लीजिए आपने कहा इसीलिए कह रहा परंपरा वाले टॉपिक

471
00:34:56,800 --> 00:35:00,960
को छो टॉपिक पर आते हैं फर आप टॉपिक बदल रहे

472
00:35:00,960 --> 00:35:05,400
इसीलिए कह रहा हूं सुनिए इसीलिए कह रहा हूं परंपरा वाले टॉपिक को छोड़िए

473
00:35:05,400 --> 00:35:09,560
सीधे अगले टॉपिक पर आते वो समझ

474
00:35:09,560 --> 00:35:14,360
में आ गया जो दर्शक है व अपना निर्णय निकाल लेंगे

475
00:35:14,360 --> 00:35:19,680
दर्क आपसे कह रहा दूसरे टॉपिक पर बात

476
00:35:19,680 --> 00:35:23,840
करेंगे मैं य कह रहा हं दर्शक जो है वो अपना निर्णय

477
00:35:23,840 --> 00:35:28,040
निकाल लेंगे आपको अगर दूसरे टॉपिक पर बात करनी है तो बताइए ना इसको ए

478
00:35:28,040 --> 00:35:32,040
करे हो गया परपरा वाले टॉपिक बात नहीं

479
00:35:32,040 --> 00:35:36,120
करेंगे अगला टॉपिक लेले पर को भगवान कृष्णम की कोई

480
00:35:36,120 --> 00:35:40,480
परंपरा थी नहीं उन्होने ज्ञान दिया उ

481
00:35:40,480 --> 00:35:44,640
किसने कहा यही तो बात है अपनी को सि

482
00:35:44,640 --> 00:35:46,800
करने के लिए आप श दिखाते

483
00:35:46,800 --> 00:35:51,760
जब शास्त्र दिखाता तो आप मना कर देते हैं राम जी के गुरु

484
00:35:51,760 --> 00:35:55,840
ान को मैं तुम्ह दिखा रहा हूं तुझसे पहले किसी

485
00:35:55,840 --> 00:36:00,840
ने नहीं देखा स्पष्ट होता है कि वो परंपरागत ज्ञान

486
00:36:00,840 --> 00:36:04,960
है वो ज्ञान परंपरागत परंपरा

487
00:36:04,960 --> 00:36:09,440
अगर किसी ने नहीं देखा तो इसका मतलब जो वेद है वो झूठे है आपके अनुसार

488
00:36:09,440 --> 00:36:13,760
श्री कृष्ण भगवान वैदिक नहीं थे एक नया धर्म उन्होने चलाया था भगवत गीता धर्म वेद

489
00:36:13,760 --> 00:36:17,840
में कर्मकांड भरा है वेद में कर्मकांड है अरे और

490
00:36:17,840 --> 00:36:22,160
वेद का चलिए ठीक है ये भी बात ये भी बात आपकी ये लोग सुनेंगे वेद

491
00:36:22,160 --> 00:36:26,280
में वेद में कर्मकांड भरा है ये भी बात लोग देखेंगे जांच

492
00:36:26,280 --> 00:36:30,320
पेंगे दर्शक ये दर्शकों पर छोड़ दीजिए दूसरे दूसरे टॉपिक

493
00:36:30,320 --> 00:36:34,600
पर आए क्या भाई साहब आपको बात सुननी

494
00:36:34,600 --> 00:36:38,720
नहीं है आपको लग रहा है बोलने आए केवल बोलने

495
00:36:38,720 --> 00:36:42,840
नहीं आए हैं आप बोल रहे हैं तो हम चुप हो रहे हैं तो हम बोल रहे तो आप ही

496
00:36:42,840 --> 00:36:47,800
तो सुनने की क्षमता होनी चाहिए आपके पास आप उसको सुन नहीं रहे हैं

497
00:36:47,800 --> 00:36:52,040
चलिए अब अगला नया टॉपिक लाए ये टॉपिक छोड़ कर के दूसरा

498
00:36:52,040 --> 00:36:56,280
टॉपिक लाए 47 11 अध्याय

499
00:36:56,280 --> 00:37:00,560
का ऐसे भाई साहब मैं कह रहा हूं दूसरा

500
00:37:00,560 --> 00:37:02,600
टॉपिक लाए

501
00:37:02,600 --> 00:37:06,640
दूसरा टॉपिक लाए इसको

502
00:37:06,640 --> 00:37:11,160
शोता तो क्लियर

503
00:37:11,160 --> 00:37:15,640
हो आपकी आवाज समय लोग नहीं सुन रहे हैं

504
00:37:15,640 --> 00:37:21,640
मैं कह रहा हूं दूसरा टॉपिक लाए

505
00:37:21,640 --> 00:37:27,640
अब आप मुझे बताइए आप दूसरे टॉपिक पर बात करेंगे

506
00:37:54,600 --> 00:37:58,600
मैं कह रहा हूं दूसरे टॉपिक पर बात करें अब कौन सा टॉपिक

507
00:37:58,600 --> 00:38:03,400
है आपका ये क्लियर है नहीं हुआ

508
00:38:03,400 --> 00:38:07,480
हा मैं ये कह रहा था आप यह

509
00:38:07,480 --> 00:38:11,640
कह रहे थे कि जो आपके पोस्टर जो मैंने माग मेले में लगे

510
00:38:11,640 --> 00:38:17,400
हुए देखे थे उसम मैंने देखा था

511
00:38:17,400 --> 00:38:20,040
कि

512
00:38:20,040 --> 00:38:23,280
जो

513
00:38:23,280 --> 00:38:28,040
ये भगवान कण कण में नहीं है एक जगह बैठा हुआ है

514
00:38:28,040 --> 00:38:31,800
बिल्कुल

515
00:38:31,800 --> 00:38:36,480
हां इस पर बात करनी है तो

516
00:38:36,480 --> 00:38:41,320
भगवान जब कड़कड़ में नहीं है तो भगवान क्या

517
00:38:41,320 --> 00:38:46,120
सर्वव्यापक रूप से नित्य नहीं है क्या

518
00:38:46,120 --> 00:38:49,000
स्याप

519
00:38:49,000 --> 00:38:53,400
तो तो आप तो कह रहे हो ककड़ में नहीं है

520
00:38:53,400 --> 00:38:58,320
लेकिन आपकी आप जिस प्रकार से समझ रहे वसा कण कण में नहीं है

521
00:38:58,320 --> 00:39:02,400
अर्जुन ने जब देखा आर एकज बताइए जिसने भी कहा है

522
00:39:02,400 --> 00:39:06,640
क क में है क कण में है उसने तो मुझसे अर्जुन वगैरा

523
00:39:06,640 --> 00:39:10,760
की बात मत करिए अब मुझे आपक पर बात

524
00:39:10,760 --> 00:39:14,920
करिए प्रमाण मत दिखाइ स परमात्मा

525
00:39:14,920 --> 00:39:19,080
आप अपने दर्शन को समझाइए मुझे उदाहरण गीता से मत दीजिए देखिए

526
00:39:19,080 --> 00:39:25,080
आप गीता से उदाहरण मत दीजिए अपने दर्शन समझाइए अपना

527
00:39:28,360 --> 00:39:32,680
ष गीता से आप गीता से आप गीता

528
00:39:32,680 --> 00:39:36,720
से उदाहरण मत दीजिए का दर्शन नहीं था

529
00:39:36,720 --> 00:39:40,880
आत्मा का दर्शन मैं आपको हटा देता हूं ठीक

530
00:39:40,880 --> 00:39:45,160
है आपसे आप आए अच्छा लगा ओ

531
00:39:45,160 --> 00:39:49,200
भैया कहा जा रहे मैं

532
00:39:49,200 --> 00:39:53,280
लास्ट बात पूछ रहा हूं ना आपसे आप मुझे ग्रंथों का मत दीजिए

533
00:39:53,280 --> 00:39:57,440
प्रमाण क्योंकि ग्रंथ आपके लिए प्रमाण नहीं है आप अपनी बात बताइए मुझे

534
00:39:57,440 --> 00:40:01,680
जाइए कि भगवान कड़कड़ में है कि नहीं है बस वो बताइए

535
00:40:01,680 --> 00:40:05,680
मुझे ग्रंथों का प्रमाण मत दीजिए क्योंकि ग्रंथों का प्रमाण

536
00:40:05,680 --> 00:40:10,200
आपने स्वीकार नहीं किया है कण कण में अनक

537
00:40:10,200 --> 00:40:14,440
शियस एनर्जी है जड़ शक्ति है

538
00:40:14,440 --> 00:40:18,280
जिसको भगवान कृष्ण ने

539
00:40:18,280 --> 00:40:22,320
कहान अरे फिर आप फिर आप भगवत गीता की बात करने

540
00:40:22,320 --> 00:40:26,480
लगे फिर मैं पूछूंगा भगवत गीता का जो अर्थ आप ले रहे हो कहा से आया आपके पास

541
00:40:26,480 --> 00:40:30,560
वो कहोगे से आया मगर शब्द वो लेना इसलिए

542
00:40:30,560 --> 00:40:34,680
कि खुद को सनातनी दिखाना है बहुत सारे तंत्र आप जैसे

543
00:40:34,680 --> 00:40:38,960
समय कार्य कर रहे हैं आप मुझे अपनी बात बताइए भगवत गीता अध्यात्म शास्त्रों

544
00:40:38,960 --> 00:40:43,040
का कोट मत करिए अपनी बात बताइए जो आपका

545
00:40:43,040 --> 00:40:44,000
दर्

546
00:40:44,000 --> 00:40:48,200
वो समझाइए हा तो परमात्मा जो

547
00:40:48,200 --> 00:40:52,600
है परमात्मा जो है व परमात्मा सारी सृष्टि

548
00:40:52,600 --> 00:40:58,520
को घेर करके स्थित है ना कि सब में स्थित है

549
00:40:58,520 --> 00:41:03,040
सारी सर्वम आव सबको घेर करके थित

550
00:41:03,040 --> 00:41:07,040
है भाई साहब मैं आपको हटा रहा आपसे रहा नहीं जाएगा क्योंकि

551
00:41:07,040 --> 00:41:11,400
आप सनातन शास्त्रों का कोट करेंगे और मेरे सनातन शास्त्रों द मेरे

552
00:41:11,400 --> 00:41:15,680
जो प्रमाण है व आपने ठुकरा दिए परंपरा को आप मान नहीं रहे आप बता नहीं रहे आपके पास ग्रंथ

553
00:41:15,680 --> 00:41:20,840
कैसे आए तो मैं आपसे चर्चा नहीं कर पाऊंगा या तो आप अपने पर नियंत्रण रखिए

554
00:41:20,840 --> 00:41:26,240
आप जो सनातन शास्त्र है उनको कोट मत करिए केवल अपना दर्शन

555
00:41:26,240 --> 00:41:30,520
समझाइए शंकराचार्य की ठीक है जागीर नहीं है मैंने आपसे

556
00:41:30,520 --> 00:41:34,640
पूछा आपके पास जो आप प्रमाण के रूप में प्रस्तुत कर रहे हैं कहां से आया

557
00:41:34,640 --> 00:41:38,880
तो आपके पास कोई जवाब नहीं है आपने कहा प्रमाण नहीं है मेरे पास कहां

558
00:41:38,880 --> 00:41:43,560
से आया आपके पास बस आ गया कहां से आया नहीं पता

559
00:41:43,560 --> 00:41:47,720
जहां से आया है मैं बता रहा हूं तो उन पर आपको विश्वास नहीं है

560
00:41:47,720 --> 00:41:51,840
जहां से आया है उनके नाम मैं आपको गिना रहा हूं तो उन

561
00:41:51,840 --> 00:41:55,960
पर आपको विश्वास नहीं है तो जब जहां से ग्रंथ आ रहा है

562
00:41:55,960 --> 00:41:59,280
उस पर विश्वास नहीं है तो से प्राप्त ग्रंथ पर आपको विश्वास

563
00:41:59,280 --> 00:42:03,240
होना तार्किक सिद्ध नहीं

564
00:42:03,240 --> 00:42:07,560
होता नहीं बता सारा प्रमाण हम शास्त्र ग्रंथों

565
00:42:07,560 --> 00:42:12,040
से दे रहे हैं आपने मुंडकोपनिषद बताया मुंडकोपनिषद से प्रमाण दिया

566
00:42:12,040 --> 00:42:18,040
आपने गीता बताया हमने गीता से प्रमाण दिया अब

567
00:42:21,280 --> 00:42:27,280
आप भाई ये लोग कहां से आते हैं मैं समझ नहीं पाता हूं

568
00:42:28,840 --> 00:42:34,840
कल्की का अवतार करा देते

569
00:42:38,800 --> 00:42:44,800
हैं हां किसी का कोई प्रश्न हो तो पूछ

570
00:42:45,720 --> 00:42:49,760
ले आप लोग बताइएगा कि आपको यह

571
00:42:49,760 --> 00:42:55,560
जो समीक्षा हुई है न्याय प्रिय लगी कि नहीं

572
00:42:55,560 --> 00:43:00,520
लगी व वो ऐसा है ना मैं इनको यह सब प्रमाण

573
00:43:00,520 --> 00:43:04,720
विश्वत जी मैं इनको प्रमाण इसलिए नहीं देता हूं

574
00:43:04,720 --> 00:43:08,760
कि जब मैं इनको प्रमाण देने चलूंगा तो ये उसको म मानते मानते नहीं है

575
00:43:08,760 --> 00:43:12,840
ये लोग इसलिए इनके द्वारा स्वीकार किए गए तथ्यों

576
00:43:12,840 --> 00:43:16,880
पर बात करते हैं जब मैं इनको अपने प्रमाण दूंगा कि भाई यहां पर यह

577
00:43:16,880 --> 00:43:20,920
कह रहे नहीं तुमने अपना अर्थ कर लिया है यह कहेंगे प्रॉब्लम ये है

578
00:43:20,920 --> 00:43:25,000
कि प्रभु जी ने किया सुखदेव जी मोक्ष को प्राप्त हुए ये सब नहीं मानेंगे

579
00:43:25,000 --> 00:43:29,040
सुखदेव जी जो मोक्ष को प्राप्त हुए भाई जो शंकराचार्य परंपरा

580
00:43:29,040 --> 00:43:34,560
के गुरु है ये सब ये नहीं मानेंगे

581
00:43:34,560 --> 00:43:39,560
तो वही है कि

582
00:43:39,560 --> 00:43:44,000
अ ये इसकी ईट उसका रोड़ा और भानुमती

583
00:43:44,000 --> 00:43:48,240
का कुनबा जोड़ा अपने मन से जितनी बात गीता प्रेस गोरखपुर

584
00:43:48,240 --> 00:43:52,640
से लेनी है अपनी मंतव्य को सिद्धि के लिए उतनी गीता प्रेस से ले ली हमसे

585
00:43:52,640 --> 00:43:56,720
अपने मंतव्य की सिद्धि के लिए जितना आपको लेना है कुरान से वो से उससे ले

586
00:43:56,720 --> 00:44:01,640
लिया बाइबल से लेना उससे ले लिया और उसके बाद

587
00:44:01,640 --> 00:44:06,120
अपना एक स्ट्रक्चर खड़ा कर दिया मगर स्वयं को सनातनी जरूर

588
00:44:06,120 --> 00:44:10,280
सनातनी कहना आवश्यक है नहीं तो हमारा जो धर्म उसको व प्रसिद्धि

589
00:44:10,280 --> 00:44:13,480
नहीं मिल पाएगी सनातन

590
00:44:13,480 --> 00:44:17,640
है यह सारी बातें हैं

591
00:44:17,640 --> 00:44:21,760
कल्की पुराण में भगवान कल्की के डिटेल्स है

592
00:44:21,760 --> 00:44:27,400
जी हा बिल्कुल होंगे कल की पुराण होगा तो

593
00:44:27,400 --> 00:44:31,880
उसमें है तो इसीलिए मैं इनको पहले

594
00:44:31,880 --> 00:44:36,000
जब मैं इनको अर्थ बता रहा हूं जब

595
00:44:36,000 --> 00:44:40,080
मैं इनको खोल खोल के दिखा रहा हूं कि भाई जो सोनक मुनि

596
00:44:40,080 --> 00:44:44,240
है वो तक बता रहे हैं कि मेरी गुरु परंपरा क्या है

597
00:44:44,240 --> 00:44:48,720
आपके पास जहां से ज्ञान आ रहा है वेदार शास्त्रों का आप

598
00:44:48,720 --> 00:44:49,920
वेदार शास्त्रों

599
00:44:49,920 --> 00:44:53,920
को प्रमाण के रूप में अपने अनुसार अर्थ करके जो है और अपने मंतव्य

600
00:44:53,920 --> 00:44:58,040
को सिद्ध करना चाह रहे हो मगर जहां से वो वेदा शास्त्र आप ले रहे

601
00:44:58,040 --> 00:45:03,320
हो वो वो जो अर्थ बता रहा है वो आपको नहीं मानना

602
00:45:03,320 --> 00:45:07,360
है तो इसीलिए ये होता है जब गुरु परंपरा से बाहर

603
00:45:07,360 --> 00:45:11,440
जाता है ना व्यक्ति तो वो यह करता है

604
00:45:11,440 --> 00:45:15,480
कि शब्द ले लिए इसके जिससे कि हम सनातनी कहलाए अर्थ लगा दिया

605
00:45:15,480 --> 00:45:19,680
अपना परंपरा प्राप्त गुरुओ का अर्थ लगाया नहीं इसलिए परंपरा एक बहुत

606
00:45:19,680 --> 00:45:23,600
बड़ा हमारे पास शस्त्र

607
00:45:23,600 --> 00:45:27,880
है अपना दर्शन सिद्धांत नहीं है उनका वो

608
00:45:27,880 --> 00:45:31,920
अब उन्होंने कहा कि जो शक्ति है वो जड़

609
00:45:31,920 --> 00:45:35,960
है जो कड़कड़ में व्याप्त जो शक्ति है वो जड़ है

610
00:45:35,960 --> 00:45:40,800
इसका अर्थ क्या हुआ इसका अर्थ यह हुआ कि जो

611
00:45:40,800 --> 00:45:44,840
भगवान है वो अलग बैठे हैं शक्ति अपने आप निर्णय नहीं ले सकती जिस समय कोई गलत

612
00:45:44,840 --> 00:45:48,880
पाप कर्म हो रहा है कुछ हो रहा है तो उस समय वो शक्ति निर्णय कुछ भी करना है भगवान को

613
00:45:48,880 --> 00:45:52,960
तो शक्ति भगवान अवेलेबल नहीं है थोड़ा सा टाइम लगेगा भगवान को

614
00:45:52,960 --> 00:45:56,960
वहा आने में जब जो है वो शक्ति अपना कार्य कर पाएगी क्योंकि कॉशसनेस

615
00:45:56,960 --> 00:46:01,280
तो है नहीं उसम है ना ये

616
00:46:01,280 --> 00:46:04,560
चीज

617
00:46:04,560 --> 00:46:08,640
चलिए हां इन्होने इनको मिला है दिव चक्षु मिला है और ये

618
00:46:08,640 --> 00:46:12,760
दर्शन कराते थे इसलिए मानते हैं वो जो है भगवान है इसीलिए कहा

619
00:46:12,760 --> 00:46:17,080
जाता है कि गुरु गोविंद और ग्रंथ के माध्यम से प्रतिपादित होने वाली जो शिक्षा

620
00:46:17,080 --> 00:46:21,240
है ज्ञान है वही फलदाई ऐसा नहीं है कि आपसे भगवान भरोसा

621
00:46:21,240 --> 00:46:25,280
कर लो जो भगवान आपके पास आए हैं वो भगवान ही है ये भी आपको

622
00:46:25,280 --> 00:46:29,360
गुरु ग्रंथ के आधार पर मानना होगा ना अब मालूम

623
00:46:29,360 --> 00:46:33,360
पड़ा जो भगवान आए हैं वो खुद ही ऐसी चीजें कर रहे हैं जिनको आप भगवान

624
00:46:33,360 --> 00:46:37,360
समझ रहे हो जबक वो खुद ऐसी बातें कर रहे है कि वो सब शक्तिमान नहीं है

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हो सकता है कोई चमत्कारिक शक्तियों युक्त कोई बुरी शक्ति

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आपके पास भगवान का रूप लेके आई हो तो इसलिए भगवान

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00:46:45,560 --> 00:46:49,880
को भी वेरीफाई कौन करेगा गुरु और ग्रंथ

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00:46:49,880 --> 00:46:54,920
गुरु को वेरीफाई कौन करेगा गोविंद और ग्रंथ ग्रंथ को वेरीफाई कौन

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करेगा गुरु और गोविंद यह तीनों इंटरडिपेंडेंट

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00:46:59,680 --> 00:47:03,680
है आपस में इन तीनों में से एक भी पाया

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अगर हटा दिया जाएगा गुरु गोविंद और ग्रंथ में से तो जो धर्म है

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वह अपने निश्चित जो सही स्वरूप है उसमें आपको प्राप्त नहीं हो

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पाएगा चलिए ठीक है आप लोग आए सभी को जय श्री

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राम ब
