1
00:00:04,360 --> 00:00:08,440
तो सभी को जय श्री राम जैसा कि

2
00:00:08,440 --> 00:00:12,640
सभी को हमारी चर्चाएं होती रहती है ज्ञात

3
00:00:12,640 --> 00:00:16,840
है सभी को तो अभी हम लोग आपके

4
00:00:16,840 --> 00:00:22,840
समक्ष लाइव

5
00:00:27,800 --> 00:00:31,800
आए तो प्रभु जी आप थोड़ा सा पहले अपना इंट्रोडक्शन दे

6
00:00:31,800 --> 00:00:36,280
दीजिए लोगों को ओके मैं आराध्य

7
00:00:36,280 --> 00:00:40,800
भगवान दास इसको नागपुर में भी सेवा कर रहा हूं मेरा

8
00:00:40,800 --> 00:00:45,040
जो आध्यात्मिक जगत में जन्म जो है मेरा भुवनेश्वर में हुआ वहां

9
00:00:45,040 --> 00:00:49,560
पर प्रभुपाद जी के परम शिष्य है डिवाइन

10
00:00:49,560 --> 00:00:54,360
ग्रेस गौर गोविंद गोस्वामी महाराज तो उनके शिक्षाओं से मैं प्रेरित हुआ

11
00:00:54,360 --> 00:01:00,360
और उसके बाद मैं अभी नागपुर इकोन नागपुर में सेवा कर रहा हूं

12
00:01:01,880 --> 00:01:06,280
अच्छा आपका थोड़ा बता देंगे

13
00:01:06,280 --> 00:01:10,760
जी मैं अभी बताता हूं एक कुछ टेक्निकल चीजों में

14
00:01:10,760 --> 00:01:16,760
देख रहा हूं थोड़ा सा यह जो फुल स्क्रीन कैसे होगी यह देख रहा हूं

15
00:01:26,750 --> 00:01:32,640
[संगीत]

16
00:01:32,640 --> 00:01:36,800
आपको स्क्रीन पर आप दिखाई आप कंपलीट क्लियर दिखाई

17
00:01:36,800 --> 00:01:41,200
दे र हो मैं भी दिखाई दे रहा हूं मेरा वाला छोटा दिखाई दे रहा है आपका बड़ा दिखाई दे रहा है

18
00:01:41,200 --> 00:01:45,640
ऐसा क्या च को ठीक है

19
00:01:45,640 --> 00:01:51,640
ठीक है ठीक

20
00:02:01,560 --> 00:02:05,760
चलिए ठीक है ऐसे ही करते हैं अभी फिलहाल

21
00:02:05,760 --> 00:02:09,840
तो आपने हमसे संपर्क किया तो कुछ बताएंगे क्यों किया था कैसे

22
00:02:09,840 --> 00:02:14,160
आपको संपर्क मिला मैंने ऑलरेडी य में कुछ डिस्कशन

23
00:02:14,160 --> 00:02:18,400
मैंने देखा था हा तो मेरे को लगा

24
00:02:18,400 --> 00:02:23,040
कि ये आध्यात्मिक जगत के भक्त लोग ने के आपस में लड़ते क्यों रहते

25
00:02:23,040 --> 00:02:27,080
हैं तो मेरे को अा लगा गधे लोग ड़ते रहते

26
00:02:27,080 --> 00:02:31,080
अपने आपस में अरे इतने सारे लोगों के साम झगड़ा करना है इतने सारे

27
00:02:31,080 --> 00:02:35,120
मुस्लिम लोग हैं यह लोग हैं उनका हम कुछ नहीं करते

28
00:02:35,120 --> 00:02:39,240
लेकिन हिंदू लोग झगड़ झगड़ के मरेंगे तो इसलिए मेरे को अच्छा

29
00:02:39,240 --> 00:02:43,560
लगा की एक दूसरे को काटना पीटना यह सबने क्या हमारे सनातन

30
00:02:43,560 --> 00:02:48,000
धर्म में इतना चलता है एक दूसरे का टासे ते बोलते है ना

31
00:02:48,000 --> 00:02:52,280
तो इसलिए नहीं सोच रहा हूं कि एक दूसरे का हम मदद

32
00:02:52,280 --> 00:02:56,560
करके प्रचार को क्यों ना बढ़ाए लोगों को ज्यादा से ज्यादा सनातन धर्म

33
00:02:56,560 --> 00:03:00,600
को क्यों ना लाए रदर ने आपस में झगड़ा करते

34
00:03:00,600 --> 00:03:04,840
हैं और हमें नहीं क्या एक दूसरे का जब हम गलतिया निकालते

35
00:03:04,840 --> 00:03:09,160
हैं तो उसका बेनिफिट नहीं क्या कोई तीसरा उठाता

36
00:03:09,160 --> 00:03:13,200
है यह मेरा कसन था प्रूफ करना व सब

37
00:03:13,200 --> 00:03:16,560
करना तो व तो चलो ठीक है व तो बाकी बात है और हा

38
00:03:16,560 --> 00:03:20,760
मेरे को ये भी पूछना था कि आप कहां से क्वालिफाइड हो आप

39
00:03:20,760 --> 00:03:25,400
कैसा है क्या है आपका एज कितना है सब टेल आप वो भी बता दीजिएगा

40
00:03:25,400 --> 00:03:29,440
मेरा नाम शिवांश नारायण द्विवेदी है और श्रीमत

41
00:03:29,440 --> 00:03:33,920
जग गु शंकराचार्य पुरी पीठाधीश्वर जी का एक अल्पज्ञ शिष्य

42
00:03:33,920 --> 00:03:37,920
हू मेरा परिचय बस इतना ही है कि उनके

43
00:03:37,920 --> 00:03:42,160
सानिध्य में उनके निर्देशन में मैंने जो भी स्वा अध्ययन किया है उसी

44
00:03:42,160 --> 00:03:46,800
के आधार पर भगवान को भगवान को प्राप्त करने की इच्छा रखता हूं

45
00:03:46,800 --> 00:03:51,000
और मैंने जो यह जोय

46
00:03:51,000 --> 00:03:55,160
चैनल ओपन किया या फिर जो भी सोशल मीडिया पर मैंने जो अपने

47
00:03:55,160 --> 00:03:59,840
संदेश देने शुरू किए वो सर्वप्रथम मैंने

48
00:03:59,840 --> 00:04:04,000
जो सनातन विरुद्ध तंत्र है उनको केंद्रित रख करके बनाए

49
00:04:04,000 --> 00:04:08,160
थे जो सनातन पर आघात करते हैं सनातन को नष्ट करना

50
00:04:08,160 --> 00:04:12,200
चाहते हैं सनातन से जिनकी बनती नहीं पर

51
00:04:12,200 --> 00:04:16,680
जब मैंने उन पर यह चीज उनसे बात करना चालू किया उनकी चीजों

52
00:04:16,680 --> 00:04:21,560
को उनकी चीज जो हमारे विरुद्ध फैलाई जा रही थी उनके समक्ष

53
00:04:21,560 --> 00:04:25,720
एक सशक्त प्रतिकार प्रस्तुत करना शुरू किया तो

54
00:04:25,720 --> 00:04:29,720
मैंने पाया कि उनको जो बल प्राप्त होता है वो

55
00:04:29,720 --> 00:04:32,040
वहां से होता है जहां से

56
00:04:32,040 --> 00:04:36,760
सनातन के नाम पर सनातना भाष प्रस्तुत किया जाता है अध्यात्म

57
00:04:36,760 --> 00:04:40,760
के नाम पर अध्यात्मा भाष प्रस्तुत किया जाता है धर्म के नाम पर

58
00:04:40,760 --> 00:04:45,160
धर्मा भास प्रस्तुत किया जाता है तो फिर मैंने अपना जो ट्रैक

59
00:04:45,160 --> 00:04:49,280
है ऐसा नहीं है कि मैं बोलता नहीं हूं समय मिल जाता है तो सनातन ध तंत्रों पर

60
00:04:49,280 --> 00:04:53,440
भी बोलता हूं पर ज्यादा जो मेरा ध्यान केंद्रित

61
00:04:53,440 --> 00:04:57,560
होता है वो समाज का विघटन करने वाले जो तंत्र है या जो ऐसी

62
00:04:57,560 --> 00:05:01,920
शिक्षाए दे रहे हैं या जो कुछ व्यक्ति शेष है जिनकी

63
00:05:01,920 --> 00:05:05,920
शिक्षाओं से जो है हमारी जो जड़े है वो

64
00:05:05,920 --> 00:05:10,040
प्रभावित होती है जिनकी शिक्षाओं के कारण हमारा

65
00:05:10,040 --> 00:05:14,040
समाज बढ़ता है हमारे समाज में विपलव उत्पन्न होता है तो

66
00:05:14,040 --> 00:05:18,040
उन तंत्रों से मैंने बात करना शुरू किया और इन तंत्रों से

67
00:05:18,040 --> 00:05:22,240
बात करने का जो उद्देश्य मेरा यह नहीं है किय तंत्र नष्ट हो जाए

68
00:05:22,240 --> 00:05:26,720
बंद हो जाए क्योंकि कहीं ना कहीं जो इनकी भावनाएं

69
00:05:26,720 --> 00:05:30,920
है वो सनातन को ही प्रस्तुत करने के लिए उसके पीछे सनातना भाष प्रस्तुत

70
00:05:30,920 --> 00:05:35,000
अगर कर भी दे रहे हैं तो ये नहीं जत है कि य इनकी अज्ञानता है

71
00:05:35,000 --> 00:05:39,720
या फिर ये इनकी इनके अंदर कोई द्वेष है अथवा लालच है

72
00:05:39,720 --> 00:05:43,760
ये नहीं पता है इसलिए उनको नष्ट करने की भावना नहीं है

73
00:05:43,760 --> 00:05:47,320
हां शोधन शोधन करने की भावना

74
00:05:47,320 --> 00:05:51,400
अवश्य कि उनकी जो जो शिक्षाए

75
00:05:51,400 --> 00:05:55,480
शोधित हो सकती है ओके वो

76
00:05:55,480 --> 00:06:00,160
वो शिक्षाए शोधित हो जानी चाहिए अच्छा

77
00:06:00,160 --> 00:06:04,280
तो अब हम किसी मूल प्रश्न पर आते हैं सीधे

78
00:06:04,280 --> 00:06:09,480
जो मेरा सबसे पहले ये बताइए आप हमारा जो

79
00:06:09,480 --> 00:06:13,320
ये मेरी एज है

80
00:06:13,320 --> 00:06:19,320
35 ओके तो हम लोग

81
00:06:20,840 --> 00:06:25,120
हैने वाला है अभी 35 होगा मैं तो आप

82
00:06:25,120 --> 00:06:29,120
आप नागपुर जो मंदिर है नागपुर मंदिर महाराष्ट्र में इकन

83
00:06:29,120 --> 00:06:33,200
मंदिर तो उसम आप कोई पद भार संभाले है या केवल सेवा

84
00:06:33,200 --> 00:06:37,360
दे रहे हैं क्या पद है आपका कुछ बताए मैं

85
00:06:37,360 --> 00:06:41,480
यहां पर कांग्रेगेशन प्रचार करता हूं और यूथ प्रीचर हू

86
00:06:41,480 --> 00:06:46,120
और साथ ही साथ मंदिर का फंड रेजर में सेवा करता

87
00:06:46,120 --> 00:06:50,640
हूं बचारी भी है क्या मैं ब्रह्मचारी आराध

88
00:06:50,640 --> 00:06:54,760
भगवान दास ब अच्छा तो क्या होता है ना कि मेरे पास ऐसे

89
00:06:54,760 --> 00:06:58,920
कमेंट कई बार आते कि भाई किसी ब्रह्मचारी से बात करो जा ऐसे

90
00:06:58,920 --> 00:07:03,240
कमेंट आपने मेरे साथ बात कर रहे जी जी

91
00:07:03,240 --> 00:07:07,280
जी जी जी हा तो ऐसे कमेंट आते हैं कि ब्रह्मचारी से किसी से

92
00:07:07,280 --> 00:07:11,320
बात करो तब पता चलेगा तो वही मैंने कहा कि मैं अय कन्फर्म कर लू कि आप

93
00:07:11,320 --> 00:07:15,640
ब्रह्मचारी है अच्छा सबसे पहली बात मैं ये कहूंगा क्या आपने हमारा

94
00:07:15,640 --> 00:07:19,800
जो स्न मंदिर लखनऊ के जो अध्यक्ष है

95
00:07:19,800 --> 00:07:24,920
श्यामदास जी वो देखा है तो उसम

96
00:07:24,920 --> 00:07:29,560
उने जितने भी डिबेट आपने किया है मैंने प्राय सबको देखा है

97
00:07:29,560 --> 00:07:33,600
आपका मैंने सोच को कंपलीटली पढ़ा है आप क्या सोचते हो आप

98
00:07:33,600 --> 00:07:35,960
क्या चाहते हो मैं कंपलीटली उसको

99
00:07:35,960 --> 00:07:40,200
समझने के बाद मैं पहले से ही ट्राई कर रहा था आपसे कांटेक्ट करने के लिए लेकिन काट

100
00:07:40,200 --> 00:07:44,280
मिल नहीं रहा था जैसे ही मिला मेरे को भाग्य मिला कि आपसे

101
00:07:44,280 --> 00:07:48,400
डायरेक्ट बात कर पा रहा हूं मैं तो लगता था सामने सामने बैठ और भी अच्छा लगता लेकिन

102
00:07:48,400 --> 00:07:52,440
चलिए तना तो नहीं नहीं बिल्कुल अगर ऐसा होता तो हो सकता है मैं नागपुर

103
00:07:52,440 --> 00:07:56,520
आ जाता वहा पर बैठ कर के बात होती तो और भी अच्छा रहता

104
00:07:56,520 --> 00:08:00,520
तो मैं तो मैं एक आपसे य पूछना

105
00:08:00,520 --> 00:08:04,840
चाह रहा था तो ये जो स्न मंदिर लखनऊ वालों के साथ हमारा

106
00:08:04,840 --> 00:08:09,320
हुआ था बातचीत हुई उसको शास्त्र कहते तो

107
00:08:09,320 --> 00:08:13,680
उसम जो अध्यक्ष महोदय की तरफ से जो

108
00:08:13,680 --> 00:08:18,600
पक्ष प्रस्तुत किया गया था क्या उससे संतुष्ट है

109
00:08:18,600 --> 00:08:22,880
अब देखिए मैं यहां पर मेरा जो अंडरस्टैंडिंग है

110
00:08:22,880 --> 00:08:27,360
मैंने इकन और इकन के बाहर से भी क्या

111
00:08:27,360 --> 00:08:31,440
एजुकेशन लिया है और सब घूमने के बाद मेरे

112
00:08:31,440 --> 00:08:35,880
को इकन का जो फिलोसोफी है मेरे को बहुत अच्छा

113
00:08:35,880 --> 00:08:40,240
लगा मैं पहले खुद क्या मैं भुवनेश्वर से हूं

114
00:08:40,240 --> 00:08:44,400
तो वहां पर हमारे लिंगराज जी का हम भक्त

115
00:08:44,400 --> 00:08:48,600
थे उनकी कृपा से ही नहीं कि आज हम यहां पर आए हैं भक्ति से तो

116
00:08:48,600 --> 00:08:51,080
इस प्रकार से नहीं क्या थोड़ा बहुत हमारे हर

117
00:08:51,080 --> 00:08:55,160
प्रकार के नॉलेज है तो इस प्रकार से तो मैंने सब कुछ सुना

118
00:08:55,160 --> 00:08:59,440
है और उसका मेरे को कुछ आसर भी मेरे पास है और

119
00:08:59,440 --> 00:09:03,480
और मैं पहला ये मेरा जो मतलब ये है कि

120
00:09:03,480 --> 00:09:07,520
हम लोग जो भी कर रहे हैं ये डिस्कशन

121
00:09:07,520 --> 00:09:11,560
आद इसमें नहीं क्या हमारा एक दूसरे को अगर मदद

122
00:09:11,560 --> 00:09:15,720
करने की भाव रहो रदर नहीं क्या दूसरे को अपमानित करने

123
00:09:15,720 --> 00:09:20,000
की इच्छा से अगर ना करें तो यह ज्यादा हमारा नि क्या सनातन

124
00:09:20,000 --> 00:09:24,280
धर्म बढ़ेगा हम क्या करते हैं इसको ड़ साले ऐसे

125
00:09:24,280 --> 00:09:28,280
है और वो ऐसे है ये सब अगर नहीं क्या

126
00:09:28,280 --> 00:09:32,320
मैं बोलूंगा कि अरे ये मायावादी लोग हैं अरे भाई एक साथ अगर

127
00:09:32,320 --> 00:09:36,600
नहीं कि हम मिलके अगर काम करते तो मेरे ख्याल से ज्यादा अच्छा होगा वो

128
00:09:36,600 --> 00:09:40,680
मेरा मेन नहीं नहीं नहीं नहीं वो आप सही कह रहे हैं मैंने

129
00:09:40,680 --> 00:09:45,480
तो ऐसा कुछ भी कभी तक किया नहीं है मेरी जानकारी में कि मैंने

130
00:09:45,480 --> 00:09:49,600
डायरेक्ट कोई व्यक्तिगत प्रहार कर दिया हो किसी पर कोई कटाक्ष किया हो

131
00:09:49,600 --> 00:09:54,160
मैं तो बचता हूं इन चीजों से क्योंकि हमारे गुरुदेव हमेशा सिखाते हैं कि दर्शन

132
00:09:54,160 --> 00:09:58,280
विज्ञान और व्यवहार को साध के अपनी बात बोलो सदैव तो मैंने अभी तक ऐसा

133
00:09:58,280 --> 00:10:02,400
कोई प्रयास किया नहीं है किसी को नीचा दिखाने तो मेरी

134
00:10:02,400 --> 00:10:06,200
जानकारी में नहीं किया यदि किसी किसी को ऐसा लगता हो कि नीचा दिखाने

135
00:10:06,200 --> 00:10:11,080
का मैंने कोई प्रयास किया हो तो बताएगा मुझे बताए मैं स्वागत करता हूं उसका

136
00:10:11,080 --> 00:10:15,160
मैं ये पूछ रहा था कि जो वहां पर लखनऊ स्कोन मंदिर

137
00:10:15,160 --> 00:10:19,520
के जो अध्यक्ष है उन्होंने जो हमें उत्तर दिए

138
00:10:19,520 --> 00:10:23,520
समाधान या कहीं कहीं पर नहीं भी दिए उन्होंने कहीं कहीं पर

139
00:10:23,520 --> 00:10:27,880
ये तक कह दिया कि शास्त्रों की गहराई में जाना हमारा उद्देश्य नहीं है

140
00:10:27,880 --> 00:10:32,000
देखिए नॉलेज कितना है वो मेरे को नहीं पता

141
00:10:32,000 --> 00:10:36,320
अब नहीं क्या हम जितना पढ़े हैं और

142
00:10:36,320 --> 00:10:40,400
मुझे अपनी बात तो पूरी करने दीजिए मुझ एक चीज

143
00:10:40,400 --> 00:10:44,400
कर देते हैं पहले तो ज्यादा अच्छा रहेगा कि हम जो डिस्कशन कर रहे हैं

144
00:10:44,400 --> 00:10:48,400
डिस्कशन में नहीं क्या ऐसा हो कि पाच या 10 मिनट नहीं क्या

145
00:10:48,400 --> 00:10:52,640
आप बोल सकते हो और फिर कंपलीटली पा 10 मिनट नहीं क्या मुझे दिया जाए

146
00:10:52,640 --> 00:10:56,680
तो बीच में क्या है कि और आप मैं जो बोल रहा हूं आप बोल देंगे या फर आप जो

147
00:10:56,680 --> 00:11:00,680
बोल रहे मैं बोल दूं ऐसा नहीं होगा एक काम करिएगा अगर आप

148
00:11:00,680 --> 00:11:04,720
पा मिनट पले बोलिए अगर आपको फिर से ज्यादा बोलना ये जो चीज जो अभी

149
00:11:04,720 --> 00:11:08,720
आप बता रहे फिर दोबारा किसी दिन बैठेंगे तो हम टाइमर गगर लेकर के बैठ

150
00:11:08,720 --> 00:11:13,120
सकते हैं वहा क्योंकि अभी यहा पर सब मैनेज नहीं हो पाएगा दूसरी

151
00:11:13,120 --> 00:11:17,280
बात हो गया पा मिनट य बताने के लिए भी पा

152
00:11:17,280 --> 00:11:21,320
मिनट हो गया बताने के लिए भी एक निर्णायक पक्ष होगा बगल में क्या भाई तुम्हारा टाइम

153
00:11:21,320 --> 00:11:26,680
ओवर हो गया जैसे मंडन मिश्र और उनका शास्त्रार्थ हुआ था शंकराचार्य

154
00:11:26,680 --> 00:11:30,880
तो उस तरीके से होना पड़ेगा नहीं है मैं अपनी

155
00:11:30,880 --> 00:11:34,960
तरफ से पूरा प्रयास करूंगा मैं सकारात्मक सोच के साथ आया हूं मैं चाहता हूं कि

156
00:11:34,960 --> 00:11:38,960
स्न का वो पक्ष सामने आए जो शायद कई लोग

157
00:11:38,960 --> 00:11:43,320
नहीं देख पा रहे हैं इकन से जो जुड़ रहे हैं वो तो देखते मगर जो स्न

158
00:11:43,320 --> 00:11:47,360
से नहीं जुड़े हैं उनके सामने स्कन की वो छवि बाहर आए जो शायद हम लोग

159
00:11:47,360 --> 00:11:51,480
नहीं देख पा रहे मैं यह सोच करके आया हूं तो मैं ऐसा नहीं है कि आपको बोलने

160
00:11:51,480 --> 00:11:56,280
नहीं दूंगा मेरी मैं ये कहना चाह रहा था वहां पर कि

161
00:11:56,280 --> 00:12:00,280
जो इस इकोन मंदिर के जो अध्यक्ष महोदय उन्होंने जो हमें

162
00:12:00,280 --> 00:12:04,520
उत्तर प्रस्तुत किए थे तो उनसे आप सहमत

163
00:12:04,520 --> 00:12:08,520
आपने आपने वो डिबेट आपने वो चर्चा देखी है तो

164
00:12:08,520 --> 00:12:12,640
आप उससे सहमत है उनके जो उन्होंने जो कहा कि शास्त्रों

165
00:12:12,640 --> 00:12:16,760
की गहराई में जाना हमारा उद्देश्य नहीं है तो आप इससे सहमत

166
00:12:16,760 --> 00:12:21,000
है नहीं मैं आपके क्वेश्चन का आंसर

167
00:12:21,000 --> 00:12:25,840
देने के लिए आया हूं मेरे को किसने क्या बोला आई डोंट केयर

168
00:12:25,840 --> 00:12:29,920
आप मेरे को डायरेक्ट प्रश्न ठीक ठीक है ठीक है ठीक है ठीक है

169
00:12:29,920 --> 00:12:34,760
तो अब मेरा पहला जो क्वेश्चन है वो यही है कि

170
00:12:34,760 --> 00:12:38,400
इकोन क्या

171
00:12:38,400 --> 00:12:43,080
इसकन कुरान के द्वारा प्रतिपादित होने वाला जो ईश्वर है

172
00:12:43,080 --> 00:12:47,240
अल्लाह मैं प्रश्न बोल क्या इसकन

173
00:12:47,240 --> 00:12:51,640
कुरान के द्वारा प्रतिपादित होने वाला जो ईश्वर है अल्लाह

174
00:12:51,640 --> 00:12:55,640
और सनातन धर्म ग्रंथों के द्वारा प्रतिपादित होने वाले जो ईश्वर

175
00:12:55,640 --> 00:13:01,640
है कृष्ण वो इनको एक क्यों कहता है

176
00:13:02,840 --> 00:13:07,440
देखिए अगर मैं आपको इसको थोड़ा सा लॉजिक से समझाता हूं

177
00:13:07,440 --> 00:13:12,000
अगर नहीं क्या एक परिवार में पिता अगर कौन है

178
00:13:12,000 --> 00:13:16,080
पाच लोग है पिता कौन है तो यह व्यक्ति पिता है व हमको

179
00:13:16,080 --> 00:13:20,880
पता है कि वो कृष्ण है

180
00:13:20,880 --> 00:13:25,080
अबने क्या कुछ लोग बोल रहे हैं कि घर का पिता

181
00:13:25,080 --> 00:13:29,240
सबसे बड़ा होता है घर का पिता बड़ा

182
00:13:29,240 --> 00:13:33,400
होता उनको पता नहीं पिता कौन है तो आंख बंद करके नहीं क्या वहा बोलना पड़ेगा

183
00:13:33,400 --> 00:13:37,480
पिता बोले तो यह होता है उनको पता नहीं

184
00:13:37,480 --> 00:13:41,480
पिता कौन है क्या है उनको पता नहीं य परिवार में पिता बड़ा है

185
00:13:41,480 --> 00:13:45,560
तो ये अल्लाह जो मानते हैं वो लोग क्या बोलते हैं

186
00:13:45,560 --> 00:13:49,640
अल्ला इ सुप्रीम अगर सुप्रीम अगर कोई हो सकता

187
00:13:49,640 --> 00:13:53,840
है ट इ सुप्रीम पर्सनालिटी कृष्णा

188
00:13:53,840 --> 00:13:57,880
तो अगर नहीं क्या वो जो कुरान के हिसाब से या फिर बाइबल के हिसाब से

189
00:13:57,880 --> 00:14:02,040
वो क्या बोल रहे कौन है उनको नहीं पता कृष्णा कौन है उनको

190
00:14:02,040 --> 00:14:06,040
नहीं पता सॉरी ये जो गड कौन है उनको नहीं पता जवा

191
00:14:06,040 --> 00:14:10,440
कौन है उनको नहीं पता उनका कोई पर्सनालिटी दिखा नहीं पाते है तो हम बोलते हैं

192
00:14:10,440 --> 00:14:14,640
कि अगर आपको पता है अल्लाह कौन है बताओ अगर नहीं पता है

193
00:14:14,640 --> 00:14:20,640
देन कृष्णा है एक्सेप्ट करो

194
00:14:21,720 --> 00:14:26,120
सिंपल नहीं मैंने मेरा प्रश्न आपद समझ नहीं पाए मैंने कहा

195
00:14:26,120 --> 00:14:30,240
कुरान के द्वारा प्र होने वाला देखि

196
00:14:30,240 --> 00:14:34,280
आप समझ देखि मैंने आपको पूरा बोलने दिया मगर जब मैं बोलने लगा तो

197
00:14:34,280 --> 00:14:38,320
आपने मुझे काट दिया

198
00:14:38,320 --> 00:14:42,520
सॉरी तो मैंने कहा आप मेरा प्रश्न नहीं समझ पाए मैंने

199
00:14:42,520 --> 00:14:46,800
कहा मैंने य नहीं कहा कि वो लोग सुप्रीम किसे मानते हैं किसे नहीं मानते

200
00:14:46,800 --> 00:14:51,120
मैंने कहा कुरान के द्वारा डिफाइन होने वाला जो ईश्वर है

201
00:14:51,120 --> 00:14:55,160
कुरान की सीमा का जो ईश्वर है कुरान के द्वारा प्रतिपादित

202
00:14:55,160 --> 00:14:59,520
होने वाला जो ईश्वर है क्या वो और हमारे कृष्ण एक

203
00:14:59,520 --> 00:15:03,680
है क्योंकि जब हम कुरान की बात करते हैं तो उसकी डेफिनेशन हमें

204
00:15:03,680 --> 00:15:08,320
लेनी पड़ेगी डेफिनेशन क्या है डेफिनेशन है

205
00:15:08,320 --> 00:15:12,400
कि उसकी मूर्ति नहीं बन सकती उस वो अवतार नहीं लेता

206
00:15:12,400 --> 00:15:16,480
उसकी संतान नहीं हो सकती वो कई जगह अपने आप को बाउंड करता है वो

207
00:15:16,480 --> 00:15:20,960
स्वयं बता रहा है मैं बाउंड हूं यस तो क्या हमारे कृष्ण

208
00:15:20,960 --> 00:15:25,040
को उसके समान फिर हम क्यों कहते हैं इस कन क्यों कहता है या तो

209
00:15:25,040 --> 00:15:30,840
आप ये कहिए कि हम केवल वर्ड ले रहे हैं समझ लि

210
00:15:30,840 --> 00:15:34,840
एक मिनट या या तो आप ये कहिए कि हम केवल शब्द ले रहे हैं

211
00:15:34,840 --> 00:15:39,120
हम कुरान के द्वारा प्रतिपादित होने वाले ईश्वर की बात नहीं कर रहे हम उसको

212
00:15:39,120 --> 00:15:43,360
कृष्ण नहीं मानते हम केवल शब्द मानते हैं हम केवल अल्लाह नाम का उपयोग

213
00:15:43,360 --> 00:15:47,480
कर रहे हैं क्योंकि अगर वह अपने ईश्वर को अगर व सुप्रीम

214
00:15:47,480 --> 00:15:53,240
अथॉरिटी को अल्लाह नाम से संबोधित करते तो ठीक है कोई बात

215
00:15:53,240 --> 00:15:54,800
नहीं

216
00:15:54,800 --> 00:15:58,960
मगर क्या कहते हैं मगर जो उनकी जो डेफिनेशन है

217
00:15:58,960 --> 00:16:03,040
कुरान की उसके द्वारा प्रतिपादित होने वाले अल्ला की हम बात नहीं कर रहे

218
00:16:03,040 --> 00:16:07,040
जी ठीक आपको एक चीज दिखा रहा य अगर आपको

219
00:16:07,040 --> 00:16:09,960
दिख रहा होगा स्क्रीन

220
00:16:09,960 --> 00:16:14,080
पर मुझे जो है इसको करने के लिए बहुत सारी चीज कर

221
00:16:14,080 --> 00:16:18,280
क्या दिखा रहे पढ़ के बता दीजिए हा देखिए यहां पर नहीं क्या

222
00:16:18,280 --> 00:16:22,920
एक वस्तु है जिसका नहीं क्या दोनों तरफ से क्या

223
00:16:22,920 --> 00:16:26,240
उसका शैडो

224
00:16:26,240 --> 00:16:30,240
है तो एक शैडो गोल दिख रहा और एक सेड जो

225
00:16:30,240 --> 00:16:34,480
है व चतुष्कोण दिख रहा है तो

226
00:16:34,480 --> 00:16:38,520
अब यह जो हमारे सिलेंडर जो हमने रखा है

227
00:16:38,520 --> 00:16:42,680
यह अगर कृष्ण है तो यह अल्ला वालो को सिर्फ इतना

228
00:16:42,680 --> 00:16:45,280
पता है गोल

229
00:16:45,280 --> 00:16:51,280
वाला मतलब अगर कृष्ण अगर ह

230
00:16:51,280 --> 00:16:55,320
पर सम जाएगा अगर कृष्णा अगर ने क्या ह

231
00:16:55,320 --> 00:16:59,440
पर भगवान है उनका आंशिक सत्य उनको

232
00:16:59,440 --> 00:17:03,520
पता है जैसे अगर एक व्यक्ति जैसे कृष्ण

233
00:17:03,520 --> 00:17:07,760
है वो घर में भी रहते हैं जसे पलो नरेंद्र मोदी नरेंद्र मोदी

234
00:17:07,760 --> 00:17:11,960
नहीं क्या भारत का प्रधानमंत्री है और घर में भी नहीं क्या उसके

235
00:17:11,960 --> 00:17:16,120
कोई नाना ताता पापू बोल रहे होंगे लो जो घर वाले लोग

236
00:17:16,120 --> 00:17:20,360
हैं उनको लगता है कि साधारण व्यक्ति है हमारे जैसा लेकिन

237
00:17:20,360 --> 00:17:24,880
जो उसको पूर्ण मात्रा में जानता है वो जानता है कि ये प्राइम मिनिस्टर है

238
00:17:24,880 --> 00:17:28,920
तो वैसा ही उन लोगों का ज्ञान कम है कि अला गड

239
00:17:28,920 --> 00:17:33,000
बोल कोई व्यक्ति है वो नहीं क्या नीचे उतर नहीं सकता बच्चा पैदा नहीं

240
00:17:33,000 --> 00:17:37,160
कर सकता लेकिन हम नहीं क्या ज्यादा ज्ञानी होने के कारण उनको

241
00:17:37,160 --> 00:17:41,400
पता है कि वो जो अल्लाह के बारे में बता रहे हो ना बेटा वो अल्लाह नहीं क्या कृष्ण है और वो

242
00:17:41,400 --> 00:17:45,520
नहीं क्या सब कुछ कर सकता है हम नहीं क्या उनको जाके इतना बताते हैं तुम्हारा

243
00:17:45,520 --> 00:17:49,640
अल्लाह का अंडरस्टैंडिंग जो है 10 पर है हमारा 100%

244
00:17:49,640 --> 00:17:54,200
है तो तुम्हारे हिसाब से तुमने इतना जाना है अभी तक अब

245
00:17:54,200 --> 00:17:58,280
हायर स्टडी करो वेद पढ़ो तुमको पता चल जाएगा वही अल्लाह जो है क्या

246
00:17:58,280 --> 00:18:02,760
आगे चल कृष्ण होते या ब्रह्म होते है

247
00:18:02,760 --> 00:18:05,360
य

248
00:18:05,360 --> 00:18:06,360
अंडरस्ट

249
00:18:06,360 --> 00:18:10,480
ऐसा है बारबार प्रश्न बदल जा रहा है प्रश्न मैं कर रहा

250
00:18:10,480 --> 00:18:14,960
हूं क्या कुरान की सीमा का ईश्वर कुरान की सीमा

251
00:18:14,960 --> 00:18:19,640
वो लोग क्या समझ रहे हैं व सोच क्या रहे हैं वो नहीं कुरान

252
00:18:19,640 --> 00:18:23,640
देख बोलने दीजिए मुझे बोलने दीजिए मैं आपको कहूंगा तब बोलिएगा

253
00:18:23,640 --> 00:18:27,640
कुरान की सीमा का ईश्वर कुरान जो बातें

254
00:18:27,640 --> 00:18:31,760
कह रही है उसको अगर मान लिया जाए यथावत मान लिया जाए तो

255
00:18:31,760 --> 00:18:35,760
क्या वो कृष्ण है और अगर नहीं है तो फिर हमें यह कहना

256
00:18:35,760 --> 00:18:39,880
चाहिए कि कुरान का ईश्वर और जो सनातन म धर्म

257
00:18:39,880 --> 00:18:43,920
ग्रंथों का ईश्वर है वो एक नहीं है और

258
00:18:43,920 --> 00:18:48,120
अगर अगर यह वाली बात हम कहे कि वो लोग इतना

259
00:18:48,120 --> 00:18:52,160
जानते हैं और हम इतना जानते हैं तो हर वो व्यक्ति जो

260
00:18:52,160 --> 00:18:56,360
ईश्वर की बात करने लगेगा अगर मैं भी अभी नया पंथ और मत चालू करना चाहूं

261
00:18:56,360 --> 00:19:00,360
तो कर सकता हूं ईश्वर के बारे में दो चार बात कहूंगा मेरे जो नाम मैं

262
00:19:00,360 --> 00:19:04,480
दूंगा ईश्वर को वो भी आपको ले लेना पड़ेगा कि आप भी सही कह रहे हो आप 5 पर

263
00:19:04,480 --> 00:19:09,000
जानते हो हम 10 पर जानते हैं तो ये तो एक अलग बात रही 5 पर और 10 पर वाली

264
00:19:09,000 --> 00:19:13,080
मेरा कहने का मतलब है कि कुरान की सीमा कुरान ने जो कहा

265
00:19:13,080 --> 00:19:17,400
है ईश्वर के बारे में क्या वो सही कहा है एक तो ये हो

266
00:19:17,400 --> 00:19:21,360
गया अब दूसरी बात ये कहते हैं कि कम ज्यादा कम

267
00:19:21,360 --> 00:19:25,520
जानना और पूरा जानना ये दोनों बातें अलग-अलग है

268
00:19:25,520 --> 00:19:29,560
कम जानना और पूरे जानने में डिफरेंस हो सकता है कि भाई कोई उस चीज को

269
00:19:29,560 --> 00:19:33,560
आधा जान पाया मगर अगर कुरान को सत्य माने तो वो आधा

270
00:19:33,560 --> 00:19:37,720
नहीं है कम नहीं है वो असत्य है आपके पर्सपेक्टिव से बात कर रहा

271
00:19:37,720 --> 00:19:41,720
हूं अगर कुरान को जो व्यक्ति सत्य मानर है तो उसको आपको कहना पड़ेगा

272
00:19:41,720 --> 00:19:46,080
यह सत्य नहीं है दूसरी बात यह है कि अधूरा जानना

273
00:19:46,080 --> 00:19:50,320
और पूरा जानना तो एक तरफ माना जा सकता है मगर ठीक

274
00:19:50,320 --> 00:19:54,680
विपरीत जानना ठीक विपरीत जानना यह तो नहीं स्वीकारा

275
00:19:54,680 --> 00:19:58,800
जा सकता जैसे मान लीजिए कि वो लोग नहीं जानते कि ईश्वर

276
00:19:58,800 --> 00:20:02,880
ले सकता है मगर वहा पर तो ठीक विपरीत ठीक वि

277
00:20:02,880 --> 00:20:07,320
लिखा हुआ कि नहीं उसकी कोई संतान नहीं हो सकती

278
00:20:07,320 --> 00:20:12,000
वहा लिखा ना होता संतान के बारे में तो बात अलग है तो कहते अधूरा है

279
00:20:12,000 --> 00:20:16,000
वो पॉइंट आता ही ना तो कहते वो अधूरा है मगर वहा पर

280
00:20:16,000 --> 00:20:20,120
पॉइंट है वो विरोध कर रहा है उसकी कोई मूर्ति नहीं हो सकती वो विरोध

281
00:20:20,120 --> 00:20:24,320
कर रहा है वो विरोध कर रहा है कि उसकी संतान नहीं हो सकती

282
00:20:24,320 --> 00:20:29,160
पहली बात दूसरी बात दूसरी बात शिक्षा में डिफरेंस है

283
00:20:29,160 --> 00:20:33,200
हमारे जो कृष्ण है राम के रूप में आते हैं और कहते हैं कि रामो दना

284
00:20:33,200 --> 00:20:36,400
भी भाष राम के रूप में कहते

285
00:20:36,400 --> 00:20:40,680
हैं कि मैं अपनी पत्नी को त्याग सकता हूं अपने छोटे भाई को त्याग सकता हूं

286
00:20:40,680 --> 00:20:45,040
और मैं जो है अपनी अपने प्राणों को भी त्याग सकता हूं पर

287
00:20:45,040 --> 00:20:49,680
मैं अपने कहे हुए वचन से मुक नहीं सकता यह सिखाते है सनातन धर्म

288
00:20:49,680 --> 00:20:54,120
और वहां पर वो सिखा रहा है कुरान के जो ईश्वर है वो सिखा रहे 33 च में

289
00:20:54,120 --> 00:20:58,120
कि तुमने अगर अपने मुख से किसी को बहन बेटी या मां कह भी दिया

290
00:20:58,120 --> 00:21:02,480
है तुम्हारे मुह की बातें मतलब उसकी कोई मान्यता नहीं है मुख

291
00:21:02,480 --> 00:21:07,280
के वचनों की कोई मान्यता नहीं है उतनी वैल्यू नहीं है जितनी हमारे य

292
00:21:07,280 --> 00:21:11,320
हमारे य सिखाया जाता है ल रीत सदा चली आई प्राण जाई पर वचन

293
00:21:11,320 --> 00:21:15,800
ना जाई और वहा सिखाया जा रहा है कि भाई नहीं मुख से अगर कह दिया

294
00:21:15,800 --> 00:21:20,400
तो तुम इसके ठीक विपरीत कार्य कर सकते हो तो यह अधूरा नहीं है

295
00:21:20,400 --> 00:21:24,600
इसको अधूरा नहीं कहेंगे यह विरोध है ये अगेंस्ट है और अगर

296
00:21:24,600 --> 00:21:28,760
ये अगेंस्ट नहीं है तो अगेंस्ट क्या होता है ये बताइए फिर आप ठीक है बत

297
00:21:28,760 --> 00:21:29,260
अच्छी बात

298
00:21:29,120 --> 00:21:33,120
है देखिए मैथमेटिक्स में जब नहीं क्या बच्चा छोटा रहता है उसको

299
00:21:33,120 --> 00:21:37,200
बोला जाता है बड़े संख्या से छोटा संख्या जा सकता है मतलब

300
00:21:37,200 --> 00:21:41,680
माइनस हो सकता है लेकिन व उसको अगर कहा जाए

301
00:21:41,680 --> 00:21:45,760
दो माइनस अगर तीन अगर कहा जाए बो इंपॉसिबल संभव भी नहीं है बोलेगा

302
00:21:45,760 --> 00:21:49,800
वो अरे भाई हमारे टीचर ने नहीं क्या हमको बोला है कि बड़े से

303
00:21:49,800 --> 00:21:53,800
नहीं क्या छोटा जाता है छोटे से बड़ा जाता नहीं तुम पागल हो गए

304
00:21:53,800 --> 00:21:57,880
हो व हमको उल्टा गाली देगा तो अब क्या होगा

305
00:21:57,880 --> 00:22:01,960
कि अब ठीक है कि तू प्राइमरी बच्चा है अब आगे पढ़ेगा त नो

306
00:22:01,960 --> 00:22:05,960
डाउट ली कोई एक टीचर तो आएगा ना पढ़ाने के लिए तेरे को जब नहीं क्या हमारे

307
00:22:05,960 --> 00:22:10,080
जैसे टीचर वहां पर जाएंगे उसको बोलेंगे कि बेटा अभी तेरा पढ़ाई

308
00:22:10,080 --> 00:22:11,960
हो गया अब ज्यादा पढ़ आगे

309
00:22:11,960 --> 00:22:14,720
चलके पढ़ेगा कि 2 माइ 3

310
00:22:14,720 --> 00:22:18,920
माइनस व होता है वैसा ही थोड़ा सा विषयात हो रहा

311
00:22:18,920 --> 00:22:23,000
है थोड़ा थोड़ा विषयात हो रहा है मैं आपको एक बात याद

312
00:22:23,000 --> 00:22:27,280
दिला विषत नहीं हो रहा है आपको ये बता

313
00:22:27,280 --> 00:22:31,400
विषयात वि भैया विषयात हो रहा है विष

314
00:22:31,400 --> 00:22:37,360
से क्या बात बदल जाती हो ही नहीं रहा आप चिंता मत

315
00:22:37,360 --> 00:22:41,720
करो बता बताइए बताइए बताइए

316
00:22:41,720 --> 00:22:44,000
अपनी बात कहिए

317
00:22:44,000 --> 00:22:48,560
उनके कुरान के हिसाब से उनको जो भी ज्ञान है थोड़ा बहुत उनको

318
00:22:48,560 --> 00:22:52,560
भगवान बोले कोई है यह तो उनको पता है अब

319
00:22:52,560 --> 00:22:56,680
नहीं क्या हम जाकर उनको बताते हैं अरे बेटा तुम जो भगवान या

320
00:22:56,680 --> 00:23:01,000
अल्लाह जिसको मानते हो अब नहीं क्या उससे भी नहीं क्या थोड़ा आगे जानो

321
00:23:01,000 --> 00:23:05,040
अल्लाह नहीं क्या ऐसा भी हो सकता है वो उसका नाम भी है उसका नाम

322
00:23:05,040 --> 00:23:09,080
है कृष्णा तो फिर उनको समझ में आ जाता है जिसको समझ

323
00:23:09,080 --> 00:23:13,360
में आ जाता है वो फिर से सनातन धर्म पस जाता है वो फिर

324
00:23:13,360 --> 00:23:16,040
माला करने लगता है जब करने लगता है सब कुछ करता

325
00:23:16,040 --> 00:23:20,280
है सिंपल है इसमें विषत को बात ही नहीं हुआ ना

326
00:23:20,280 --> 00:23:24,520
देखिए बात ऐसी है कि आपने

327
00:23:24,520 --> 00:23:28,680
कर आप अगर समझने की कोशिश करेंगे तो हो जाएगा आप जबरदस्त

328
00:23:28,680 --> 00:23:32,840
क्या इसको पकड़ के खी चेंगे देखिए समझने की कोशिश तो मैं भी कह सकता हूं

329
00:23:32,840 --> 00:23:37,640
कि आप समझने की कोशिश करेंगे तो भी हो जाएगा

330
00:23:37,640 --> 00:23:41,640
तो समझने की कोशिश करिए मैं यह बता रहा हूं कि इकन

331
00:23:41,640 --> 00:23:46,240
की सीमा का जो हमें जब किसी को यह बताना है कि कृष्ण भगवान है

332
00:23:46,240 --> 00:23:50,280
या कृष्ण ही ईश्वर है तो हमें उसको कहना पड़ेगा कि

333
00:23:50,280 --> 00:23:54,680
कुरान में जो ये बात लिखी हुई है कि ईश्वर अवतार नहीं ले सकता है गलत

334
00:23:54,680 --> 00:23:58,760
है ये बात गलत है रान में

335
00:23:58,760 --> 00:24:03,000
बात लिखी हुई है एक मिनट एक मिनट मिनट एक

336
00:24:03,000 --> 00:24:07,200
मिनट भैया मैंने आप मैं आपको बोलने दे रहा हूं आप मुझे बोलने

337
00:24:07,200 --> 00:24:11,440
नहीं दे रहे यहां से बात बिगड़ेगी फिर इसलिए मैं पहले बोला 10 10 मिनट कर लेंगे तो ज्यादा अच्छा रहेगा

338
00:24:11,440 --> 00:24:15,960
तो हमें उसको बताना पड़ेगा कि कुरान

339
00:24:15,960 --> 00:24:20,240
हां हां बोलिए बोलिए क्या कह रहे हैं मैं

340
00:24:20,240 --> 00:24:24,440
बोला कि बोलिए हमें बताना पड़ेगा कि कुरान में जो ये बात लिखी

341
00:24:24,440 --> 00:24:28,760
है कि तुम अपने मुख के वचनों को बोल स बदल सकते हो ये गलत लिखी है

342
00:24:28,760 --> 00:24:31,040
ये तुम गलत सोच रहे हो हमें

343
00:24:31,040 --> 00:24:35,120
उसको ये बताना पड़ेगा ये नहीं बताना पड़ेगा अधूरा है अगर अधूरा है तो क्या हमारे

344
00:24:35,120 --> 00:24:39,360
यहां कौन सी स्टेज पर बताया जाता है कि अपने मुख्य वचनों को बदलो अगर किसी को बहन

345
00:24:39,360 --> 00:24:43,360
मानते हो तो उसको उसके साथ विवाह कर लो कौन सी स्टेज पर हमारे यहां बताया जाता

346
00:24:43,360 --> 00:24:47,600
है बताइए हां अगर

347
00:24:47,600 --> 00:24:51,800
कोई व्यक्ति अगर नहीं क्या उसका मानसिक इतना

348
00:24:51,800 --> 00:24:55,960
कमजोर है कि वो शास्त्र को अभी मानने के लिए योग्य नहीं बना

349
00:24:55,960 --> 00:25:00,040
है जिसका स्थिति इतना अभी नहीं है कि जो

350
00:25:00,040 --> 00:25:04,200
शास्त्र को मानने के योग्य हुआ है तो उसको क्या करते हैं पहले

351
00:25:04,200 --> 00:25:08,320
थोड़ मनुष्य बनाते हैं ठीक है ना अभी जो व्यक्ति पागल है

352
00:25:08,320 --> 00:25:12,520
उसको तो क्या हम शास्त्र के हिसाब से ऐसा नहीं करना चा

353
00:25:12,520 --> 00:25:16,880
मैं आपसे पूछ रहा हूं मैं आपसे पूछ रहा हूं क्या सनातन धर्म ग्रंथों

354
00:25:16,880 --> 00:25:21,040
में किसी स्तर के व्यक्ति के लिए बात कही गई है क्या कि आप

355
00:25:21,040 --> 00:25:25,200
अपनी बहन अगर किसी को बहन मानते हो तो उससे विवाह कर सकते हो मुख्य

356
00:25:25,200 --> 00:25:28,720
वचनों की कोई वैल्यू नहीं होती

357
00:25:28,720 --> 00:25:34,720
हा तो आप इसम इसमें प्रूफ क्या करना चाहते हो

358
00:25:35,720 --> 00:25:40,920
बोलके देखि हमारा ग्रंथ नहीं क्या यह बताया गया

359
00:25:40,920 --> 00:25:45,000
है हमारे ग्रंथों में हमारे देखिए जो आप स्तर

360
00:25:45,000 --> 00:25:49,000
पर जा रहे ना व्यक्ति के स्तर की बात पहली बात तो यह है जब आप यह

361
00:25:49,000 --> 00:25:53,080
बात बोलते हैं कि भाई कुरान का ईश्वर प्रश्न एक ही

362
00:25:53,080 --> 00:25:57,120
है तो आप व्यक्ति का स्तर पूछते हैं क्या कौन किस स्तर पर है पूछ

363
00:25:57,120 --> 00:26:01,240
रहे होते हैं क्या देखो आप क्या क्या कर रहे हो आर्गुमेंट

364
00:26:01,240 --> 00:26:05,960
को समझने की कोशिश नहीं कर रहे हो आपको जितना है आर्मेंट तो फिर व्यक्ति क्या

365
00:26:05,960 --> 00:26:11,960
करेगा नहीं

366
00:26:13,600 --> 00:26:17,960
नहीं देख ऐसा हैब तस्मा शास्त्र प्रमाण

367
00:26:17,960 --> 00:26:23,560
आप मुझे शास्त्र से बोलिए तो आपकी बात स्वीकार करता जाऊगा

368
00:26:23,560 --> 00:26:27,560
आप शस्त्र में क्या लिखा है बताता भागवत में

369
00:26:27,560 --> 00:26:31,880
खा है पुलिल कसा आर सुंभ यना

370
00:26:31,880 --> 00:26:35,880
कसा दया यना बो कौन मुस्लिम

371
00:26:35,880 --> 00:26:40,360
उनको भी नहीं किया अगर भगवान का नाम देंगे तो आगे चलकर

372
00:26:40,360 --> 00:26:44,560
वह भी भक्त बन जाएंगे उनका भी उद्धार होगा वह भी सनातन धर्म वापस

373
00:26:44,560 --> 00:26:48,560
आएंगे ह पर आएंगे मैंने आपसे य पूछा है

374
00:26:48,560 --> 00:26:53,120
भाई साहब देखिए मैंने आपसे य पूछा है मैंने आपसे य पूछा है

375
00:26:53,120 --> 00:26:57,240
कि व्यक्ति का स्तर आप नापते हैं क्या और व्यक्ति का स्तर

376
00:26:57,240 --> 00:27:01,320
नापने का सनातन सिद्धांत क्या है और व्यक्ति को

377
00:27:01,320 --> 00:27:05,440
यह कहां पर कौन से स्तर पर सिखाया जा रहा है हमारे यहां पर कि वो यदि

378
00:27:05,440 --> 00:27:09,680
किसी को बहन कह रहा है तो उसको बहन के विपरीत व्यवहार करते हुए उससे विवाह

379
00:27:09,680 --> 00:27:13,920
कर ले और संबंध बना

380
00:27:13,920 --> 00:27:18,200
यह तीन प्रश्नों का उत्तर दीजिए ठीक है आप

381
00:27:18,200 --> 00:27:22,280
पहला आपको क्या ये जो शिक्षा है यह शिक्षा

382
00:27:22,280 --> 00:27:26,320
हमारे सनातन धर्म ग्रंथों से प्राप्त होने वाली शिक्षा के विरुद्ध नहीं है

383
00:27:26,320 --> 00:27:28,600
इसको आप अधूरा कहेंगे अधूरी इा है

384
00:27:28,600 --> 00:27:32,840
विरुद्ध नहीं है और अगर ये विरुद्ध नहीं है तो विरुद्ध होता क्या है दुनिया में ये बता

385
00:27:32,840 --> 00:27:36,920
दीजिए ठीक है देखिए जो असुर लोग हैं वो

386
00:27:36,920 --> 00:27:41,080
नियम कानून को अच्छे से फॉलो नहीं कर पाते हैं

387
00:27:41,080 --> 00:27:45,080
तो इसीलिए हमको क्या कर कुरान अर्थात ये जो

388
00:27:45,080 --> 00:27:49,080
अर्थात आपके अनुसार जो कुरान की शिक्षाए व असुर जैसे लोगों के लिए

389
00:27:49,080 --> 00:27:53,240
है आपको डाउट है क्या नहीं

390
00:27:53,240 --> 00:27:58,320
मुझे मैं आपसे सुनना चाह रहा हूं ना बताइए ना मुझे नहीं मैं

391
00:27:58,320 --> 00:28:02,480
कुछ ट तो बताओ नहीं मैं पूछ तो रहा हू डाउट

392
00:28:02,480 --> 00:28:06,720
है इसलिए तो पूछ रहा आपसे मैं आपको प्रश्न पूछ रहा हूं

393
00:28:06,720 --> 00:28:10,800
आपको कुछ डाउट है क्या इसमें भाई आप एक तरफ

394
00:28:10,800 --> 00:28:15,040
यह कहते हैं ना कि कृष्ण और अल्ला एक ही है

395
00:28:15,040 --> 00:28:20,000
तो मुझे जानना है कि आपका परपट है क्या

396
00:28:20,000 --> 00:28:24,560
मैंने बोला की भगवान व एक व्यक्ति को मानते हैं व है अल्लाह

397
00:28:24,560 --> 00:28:28,680
और उनका पूरा नॉलेज उनके पास है नहीं तो उनको

398
00:28:28,680 --> 00:28:32,920
पूरा नॉलेज देने का जो कर्तव्य है वो किसका है वो

399
00:28:32,920 --> 00:28:37,160
हम सनातनी हों का है अगर हम उनको अगर पूरा नॉलेज

400
00:28:37,160 --> 00:28:41,160
नहीं देंगे तो व मैं पूरे और अधूरे की बात नहीं कर

401
00:28:41,160 --> 00:28:44,560
रहा हूं मैंने आपसे एक प्रश्न पूछा कि यह विपरीत

402
00:28:44,560 --> 00:28:48,640
हैट आंसर है अगर वहा पर आपका क्लियर कट आंसर

403
00:28:48,640 --> 00:28:52,680
है आपको अगर आपको क्लियर आंसर

404
00:28:52,680 --> 00:28:56,680
दे रहा हूं भगवान एक ही है और जब नहीं

405
00:28:56,680 --> 00:29:00,840
क्या वो किसी व्यक्ति को अगर भगवान बोलते हैं तो उसका डेफिनेशन

406
00:29:00,840 --> 00:29:04,920
भले नहीं क्या वो अधूरा दे या कम दे लेकिन क्योंकि वह एक

407
00:29:04,920 --> 00:29:09,000
भगवान एक ईश्वर की बात कर रहे हैं वो एक ईश्वर जो है वो कृष्ण

408
00:29:09,000 --> 00:29:13,120
है उनको ज्ञान आधा है पूरा ज्ञान देने का अधिकार हमको

409
00:29:13,120 --> 00:29:17,840
है आपको अभी कुछ प्र य से बता

410
00:29:17,840 --> 00:29:22,160
आपको मैंने बारबार वही प्रश्न किया अगर

411
00:29:22,160 --> 00:29:26,280
हमारा धर्म यह सिखाता है कि बहन के साथ

412
00:29:26,280 --> 00:29:30,480
जिसको बहन बोल दो तो उस चन को निभाओ जो वचन बोल दो उसे निभाओ

413
00:29:30,480 --> 00:29:34,480
अगर कुरान य कह रही है कि जो वचन बोल दिया है उसको जरूरी नहीं

414
00:29:34,480 --> 00:29:39,160
है उसको निभाना ठीक है अब य आपके हिसाब से अधूरा

415
00:29:39,160 --> 00:29:43,560
अरे भाई बोलने दोगे फिर तभी तो बात बिगड़ती है

416
00:29:43,560 --> 00:29:49,560
बोलने तो दीजिए मुझे मैं आपकी पूरी बात सुन रहा हूं

417
00:29:49,720 --> 00:29:53,720
तो टूट जाता है ना फलो से तो मैं ये पूछ

418
00:29:53,720 --> 00:29:58,280
रहा हूं कि हमारा धर्म सिखाता है कि

419
00:29:58,280 --> 00:30:02,600
अगर आपने मुख से कुछ बोला है तो आप उस पर डटे रहिए

420
00:30:02,600 --> 00:30:06,680
रल री सदा चली आई प्राण जा परवचन ना जाए मगर कोई है

421
00:30:06,680 --> 00:30:10,760
जो यह कह रहा है कि नहीं तुमने अगर मुख से कुछ बोल दिया तो कोई नहीं

422
00:30:10,760 --> 00:30:14,760
आप उसे बदल दो बदल सकते हो ठीक है अब

423
00:30:14,760 --> 00:30:18,920
आपके हिसाब से यह गलत नहीं है यह विरोध नहीं है य अधूरा ज्ञान है पहले

424
00:30:18,920 --> 00:30:23,440
तो यह बताइए हा कि

425
00:30:23,440 --> 00:30:28,360
ना अपूर्ण ज्ञान है य

426
00:30:28,360 --> 00:30:32,480
य गलत नहीं है कौन सा जब

427
00:30:32,480 --> 00:30:36,520
नहीं आपको पूछ रहा हूं हमारे य सिखाया हमारे य

428
00:30:36,520 --> 00:30:40,560
सिखाया जा रहा है कि मुख का वचन मत बोलो बहन का मतलब बहन

429
00:30:40,560 --> 00:30:44,680
मां का मतलब मां बेटी का मतलब बेटी इसको आप बदल नहीं सकते अगर आपने किसी

430
00:30:44,680 --> 00:30:48,800
को बेटी बोल दिया तो बेटी बोलो उसको बेटी की नजरो से ही देखो

431
00:30:48,800 --> 00:30:52,800
मगर वहा दरी जगह सिखाया जा रहा है कि आप मुख के वचनों को बदल सकते हैं

432
00:30:52,800 --> 00:30:57,080
तो अब आप ये बताइए अधूरा है अपूर्ण है या फिर ये गलत है

433
00:30:57,080 --> 00:31:01,440
वि विरु सनातन के बहुत अच्छा

434
00:31:01,440 --> 00:31:05,440
तो आपका इसको आंसर ऐसा है मैंने जै आपको पहले

435
00:31:05,440 --> 00:31:09,640
बोला था की 3 माइनस ू जो है व छोटा

436
00:31:09,640 --> 00:31:14,080
बच्चा समझता है लेकिन माइनस नहीं समझ पाता है मैंने देखि

437
00:31:14,080 --> 00:31:18,480
एक करके चलेंगे भाई साब तो हो कुछ क्लियर नहीं होगा

438
00:31:18,480 --> 00:31:22,680
वो जलेबी बन र जाएगा मैंने आपसे पूछा अपूर्ण है यह अपूर्ण

439
00:31:22,680 --> 00:31:26,800
है या फिर विरुद्ध है यह अपूर्ण है या फिर गलत है यह

440
00:31:26,800 --> 00:31:29,000
बताइए

441
00:31:29,000 --> 00:31:33,240
हां मैं जस्टिफिकेशन नहीं मांग रहा हूं

442
00:31:33,240 --> 00:31:37,440
तो आपको देखो अभी नहीं क्या आपको सिंपल वे में समझाया

443
00:31:37,440 --> 00:31:38,520
उस समय

444
00:31:38,520 --> 00:31:44,040
मैं भाई साहब आपसे पूछ रहा हूं कि ये जो ये जो शिक्षा दी जा

445
00:31:44,040 --> 00:31:48,120
रही सिपल है देखिए भा मैं आप एक प्रश्न पूछ रहा हूं

446
00:31:48,120 --> 00:31:52,120
क्या हम यहां पर वैदिक साहित्य और कुरान के साथ कंपेयर कर रहे

447
00:31:52,120 --> 00:31:56,320
हैं हमारा लक्ष्य क्या कंपर कर इसको

448
00:31:56,320 --> 00:32:00,320
कहते हैं वित इसको कहते विषयात अभी मैंने

449
00:32:00,320 --> 00:32:04,600
आपसे क्लियर प्रश्न पूछा है आपने कहा उनका

450
00:32:04,600 --> 00:32:08,600
ज्ञान अधूरा है मैं आपसे पूछ रहा हूं कि

451
00:32:08,600 --> 00:32:12,960
कि क्या यह गलत है सनातन विरुद्ध है या फिर यह अपूर्ण

452
00:32:12,960 --> 00:32:17,360
है इसको क्या कहा जाएगा अपूर्ण या फिर विरुद्ध अपूर्ण या फिर

453
00:32:17,360 --> 00:32:22,120
गलत आपके हमारे सनातन पर्सपेक्टिव से क्या कहेंगे हम

454
00:32:22,120 --> 00:32:26,440
उसको सनातन ध धर्म के प्रोस्पेक्टिव के हिसाब से अपूर्ण भी कहा जाएगा

455
00:32:26,440 --> 00:32:29,640
और गलत भी कहा जाएगा

456
00:32:29,640 --> 00:32:33,880
अच्छा अपूर्ण भी कहा जाएगा और गलत भी कहा जाएगा बहुत बढ़िया

457
00:32:33,880 --> 00:32:38,120
तोब मुझे अपूर्ण की अब अब मुझे अपूर्ण और गलत में अंतर

458
00:32:38,120 --> 00:32:42,760
बताते हुए दोनों की परिभाषा बता दीजिए आप य विष हो

459
00:32:42,760 --> 00:32:46,920
गया नहीं कैसे विष अंतर हो गया क्योंकि आप आप अपने मन

460
00:32:46,920 --> 00:32:50,960
से जो आ रहा है वो बोल रहे हो ना अगर वो गलत है

461
00:32:50,960 --> 00:32:54,280
तो आप गलत की परिभाषा दीजिए गलत ये होता है

462
00:32:54,280 --> 00:32:58,320
आप गलत परिभाषा दीजिए दोनों मित्र बात

463
00:32:58,320 --> 00:33:02,520
कर रहे हैं ओके किसकी हम

464
00:33:02,520 --> 00:33:06,560
दोनों मि के जैसे बात कर रहे मित्र मित्र हा हा

465
00:33:06,560 --> 00:33:11,160
मि मित्रों से ऐसे ही बात करता हूं

466
00:33:11,160 --> 00:33:15,320
कर तो अभी मैं ये बता रहा हूं आप यहां पर जज नहीं है

467
00:33:15,320 --> 00:33:19,320
कि आपका देखो आपके सिद्धांत को नहीं कि आपने फिक्स

468
00:33:19,320 --> 00:33:23,760
जमा दिया पहले और आपके कुल मिलाकर के आप इस

469
00:33:23,760 --> 00:33:27,880
बात का जवाब नहीं देंगे कि ये जो ज्ञान है वो अपूर्ण है

470
00:33:27,880 --> 00:33:32,040
तो अपूर्ण क्यों है और गलत है तो गलत क्यों अपर्ण भी है

471
00:33:32,040 --> 00:33:36,120
और गलत भी है और कुछ सुनना चाहते हैं आप मेरे से

472
00:33:36,120 --> 00:33:40,680
चलो ये ये इतना मैंने आपसे सुना कि गलत है तो इससे थोड़ा

473
00:33:40,680 --> 00:33:44,840
सुनिए इतना मैंने आपसे सुन लिया कि अपूर्ण के साथ आपने गलत बोला

474
00:33:44,840 --> 00:33:48,960
इतना मुझे हृदय को बड़ी ठंडक मिली है इस वाकई में

475
00:33:48,960 --> 00:33:53,200
मैं आपके हाथ जोड़ के आप मतलब वो अभिवादन करना चाहूंगा आपने चलिए

476
00:33:53,200 --> 00:33:58,240
अपूर्ण के साथ ही गलत बोल दिया मगर गलत तो बोला ठीक है

477
00:33:58,240 --> 00:34:02,360
बात ये है हां ठीक है अब आगे ये चलते

478
00:34:02,360 --> 00:34:06,520
हैं कि इसका अर्थ है अगर हम बात करते स्तर

479
00:34:06,520 --> 00:34:09,400
की तो स्तर का अर्थ हो गया कि भाई

480
00:34:09,400 --> 00:34:13,920
वो किसी विशेष देश काल परिस्थिति के अनुसार दिया जाने वाला ज्ञान है

481
00:34:13,920 --> 00:34:18,760
उसको हम परमानेंट नहीं मान सकते इतना तो पक्का है ना 100

482
00:34:18,760 --> 00:34:23,000
पर हा ठीक तो इसका मतलब यह है कि कुरान

483
00:34:23,000 --> 00:34:28,800
का जो ज्ञान है वो सनातन ज्ञान नहीं है नहीं

484
00:34:28,800 --> 00:34:33,000
नहीं है ना तो सनातन ज्ञान नहीं है तो कुरान का ईश्वर फिर वही

485
00:34:33,000 --> 00:34:37,280
बात आ जाती है कि कुरान का जो ज्ञान है सनातन ज्ञान नहीं है और

486
00:34:37,280 --> 00:34:41,760
वह किसी विशेष देश काल स्थिति के वशीभूत हो कर के लिखा पढ़ाया

487
00:34:41,760 --> 00:34:46,440
कहा गया है तो सनातन के द्वारा प्रतिपादित होने वाला जो ईश्वर है

488
00:34:46,440 --> 00:34:50,640
कृष्ण उसके साथ उस देश काल स्थिति के व जो ज्ञान दिया

489
00:34:50,640 --> 00:34:54,880
गया उसके जो उसके द्वारा उस सीमित व्याख्या के द्वारा

490
00:34:54,880 --> 00:34:59,080
प्रतिपादित होने वाला ईश्वर है उसके साथ उस क्यों खड़ा किया जा रहा

491
00:34:59,080 --> 00:35:03,160
है और अगर खड़ा किया जा रहा है तो इस क्या कहीं

492
00:35:03,160 --> 00:35:07,200
पर यह बता रहा हैन की हम कुरान के द्वारा प्रतिपादित

493
00:35:07,200 --> 00:35:11,240
कुरान की सीमा के ईश्वर को नहीं मानते हैं हम कृष्ण को अल्लाह

494
00:35:11,240 --> 00:35:15,520
भी कह देते हैं बस इतना कुरान के सीमा के ईश्वर

495
00:35:15,520 --> 00:35:19,480
को हम नहीं मानते क्या यह कहता है

496
00:35:19,480 --> 00:35:24,240
इसको क्योंकि कुरान जो है वो अपूर्ण नहीं है कुरान

497
00:35:24,240 --> 00:35:24,740
एक

498
00:35:24,440 --> 00:35:29,440
मिनट क्योंकि कुरान जो है व अपूर्ण नहीं है विरोध कर

499
00:35:29,440 --> 00:35:33,800
भगवान कह रहे य धर्म भार

500
00:35:33,800 --> 00:35:38,120
स ऋगवेद में लिखा है कि वो गर्भ में जाता है विचरण करता है अने

501
00:35:38,120 --> 00:35:42,160
तरह तरह के माया से रूप बनाता है सब जगह लिखा है रूप लेता है लेता प्रकट

502
00:35:42,160 --> 00:35:46,480
होता सबग मगर कुरान य कह रही है उसकी मूर्ति

503
00:35:46,480 --> 00:35:50,680
नहीं बन सकती उसकी पूजा नहीं हो सकती हमारे यय

504
00:35:50,680 --> 00:35:54,880
ये अधूरा नहीं है अधूरा तब माना जाएगा जो अधूरे की डेफिनेशन है य हो सकती

505
00:35:54,880 --> 00:35:58,920
है कि वहा पर विग्रह पूजा के बारे में बा नहीं हो व

506
00:35:58,920 --> 00:36:03,080
संतान प्राप्ति के बारे में मिनट एक मिनट

507
00:36:03,080 --> 00:36:07,200
अधूरा अधूरा अपूर्ण तब माना जाएगा जब वहा पर संतान के बारे में बात

508
00:36:07,200 --> 00:36:11,600
ही नहीं होती कि ईश्वर के संतान हो सकती है कि नहीं हो सकती मगर

509
00:36:11,600 --> 00:36:15,600
वहां पर बात हो रही है और हो करके उस उस सिद्धांत को

510
00:36:15,600 --> 00:36:20,680
मना किया जा रहा है जो सिद्धांत य दिया तो व अपूर्ण नहीं है व विरुद्ध

511
00:36:20,680 --> 00:36:25,160
है तो हमें ये कहने में क्यों

512
00:36:25,160 --> 00:36:29,840
हैल मिलाकर वही बात आ प्रश्न वही था कि यदि

513
00:36:29,840 --> 00:36:33,880
वो सनातन ज्ञान नहीं है तो सनातन ईश्वर के साथ उसका कंपेरिजन क्यों किया जा रहा

514
00:36:33,880 --> 00:36:37,880
है आप लोग कहिए कि हम कृष्ण को मानते हैं अल्लाह के समान मानते

515
00:36:37,880 --> 00:36:39,560
हैं मगर ये वो अल्लाह नहीं है जो कुरान

516
00:36:39,560 --> 00:36:43,640
के द्वारा प्रतिपादित होता है क्योंकि कुरान के द्वारा जो ईश्वर की व्याख्या की गई है वो

517
00:36:43,640 --> 00:36:48,280
अधूरी है वो सीमित है ऐसा कहां पर आप कहते

518
00:36:48,280 --> 00:36:52,560
हैं आपने लेक्चर सुना है क्या इसकन

519
00:36:52,560 --> 00:36:56,600
की बिल्कुल बिल्कुल मैंने भी कुछ लेक्चर

520
00:36:56,600 --> 00:37:00,960
दिया सुन लीजिए ठीक है ना देखिए यहां पे दो चीज है

521
00:37:00,960 --> 00:37:05,040
कि अगर आप अगर आप ऐसा कह रहे हैं तो बहुत अच्छी बात

522
00:37:05,040 --> 00:37:09,200
है अगर आप हम यही चाहते हैं हम यही चाहते हैं हमारा उद्देश्य यही है

523
00:37:09,200 --> 00:37:13,720
अगर आप ऐसा लेक्चर में कह रहे हैं आपको फिर उन जो

524
00:37:13,720 --> 00:37:17,840
ऐसा कह रहे है कि नहीं हम इसको कुरान का अल्लाह और हमारा कृष्ण एक ही

525
00:37:17,840 --> 00:37:21,960
है तो फिर आपको उनको फोन मिलाना चाहिए आपको उनका विरोध करना चाहिए कि आप इसकन

526
00:37:21,960 --> 00:37:26,680
की तरफ से ऐसे बयान मत दीजिए आपको ये करना चाहिए

527
00:37:26,680 --> 00:37:30,720
100% अब सुनिए हम यहां पर क्या बात कर कि

528
00:37:30,720 --> 00:37:35,120
कुरान में जो अल्लाह का जो उन्होंने ईश्वर का जो भी वर्णन दिया है व अधूरा

529
00:37:35,120 --> 00:37:38,720
है पह

530
00:37:38,720 --> 00:37:43,160
यरा मिला है हमारा जो प्रश्न है कुल मिला के बात

531
00:37:43,160 --> 00:37:49,160
हमारा कृष्ण है वो कुरान की सीमा के ईश्वर के समान नहीं

532
00:37:49,520 --> 00:37:53,520
हैने आपको दो चीज बताया सुनि अ सुन लीजिए मैंने दो

533
00:37:53,520 --> 00:37:58,240
चीज बताया उनका फिलोसोफी अधूरा है और गलत भी है

534
00:37:58,240 --> 00:38:02,320
तो क्या बोल रको स्पष्ट आपकी ही बात को मैं

535
00:38:02,320 --> 00:38:07,640
स्पष्ट कर रहा हूं कुरान की सीमा अगर कुरान कोही प्रमाण

536
00:38:07,640 --> 00:38:12,600
मानले भाई साहब आपली बता देता फिर आप बता

537
00:38:12,600 --> 00:38:16,640
तो जब मैं बता रहा हूं कि कुरान में दिया गया ईश्वर जो

538
00:38:16,640 --> 00:38:20,840
है वह अधूरा है कहां पर अधूरा है जहां पर नहीं किया

539
00:38:20,840 --> 00:38:24,960
वो भगवान को ने क्या लिमिटेड कर देते हैं वो बोलते हैं भगवान

540
00:38:24,960 --> 00:38:29,360
तो एक ही है तो वो चीज सही है भगवान अब बोलते हैं कि भगवान

541
00:38:29,360 --> 00:38:33,400
ये नहीं कर सकता वहा पर वो अधूरा हो जाता है कि ये नहीं कर सकता मतलब इनका

542
00:38:33,400 --> 00:38:37,920
ज्ञान नहीं है अधूरा नहीं होता ये बात गलत है वहां पर वो गलत होता है

543
00:38:37,920 --> 00:38:42,040
अगर हमारा अगर वास्तविकता ये है कि ईश्वर जन्म ले सकता

544
00:38:42,040 --> 00:38:46,960
है तो फिर ये कहने वाला कि ईश्वर जन्म नहीं ले सकता अगर हमारी

545
00:38:46,960 --> 00:38:51,000
अगर वास्तविकता ये है कि ईश्वर जन्म ले सकता है तो यह कहने वाला कि

546
00:38:51,000 --> 00:38:55,440
वो जन्म नहीं ले सकता वो गलत है और अगर वो गलत नहीं है अधूरा है तो

547
00:38:55,440 --> 00:38:59,880
गलत की डेफिनेशन क्या है अधूरे की डेफिनेशन मुझे बताइए

548
00:38:59,880 --> 00:39:03,880
आप स्पष्ट बोलने से क्यों पीछे हटते अरे चिंता मत करो हम

549
00:39:03,880 --> 00:39:04,560
क्या छती ठोक के

550
00:39:04,560 --> 00:39:09,280
बोलने वाले है डरने वाले नहीं चिंता मत करो बाबा

551
00:39:09,280 --> 00:39:13,960
आपके सामने अब देखिए भगवत गता भ

552
00:39:13,960 --> 00:39:18,120
अगने आपसे प्रश् पूछ देखो प्रॉब्लम

553
00:39:18,120 --> 00:39:22,240
क्या है कि अबने इसलिए नहीं मेरे को बोलने देना पड़ेगा ना क्योंकि आपको

554
00:39:22,240 --> 00:39:26,360
मेरे से आंसर चाहिए हा तो पहला चीज है की भगवान श्री कृष्ण

555
00:39:26,360 --> 00:39:30,680
क्या कहते हैं कि मैं अजन्मा हूं

556
00:39:30,680 --> 00:39:34,560
एक जगह बताते हैं

557
00:39:34,560 --> 00:39:39,280
ना आप अपनी बात पूरी कर लीजिए फिर मुझे बताइएगा तो मैं बोलूंगा

558
00:39:39,280 --> 00:39:43,680
हां मैं आपको ये प्रश्न पूछ रहा हूं क्या भगवान ने भगवत गीता में कहा है कि मैं अजन्मा हूं

559
00:39:43,680 --> 00:39:48,080
ऐसा बोला है हां या ना उन्होंने कहा है मैं अजन्मा

560
00:39:48,080 --> 00:39:52,880
अविनाशी होते हुए भी अपनी माया को अपने

561
00:39:52,880 --> 00:39:57,400
अधीन करके जन्म लेता हूं प्रकट होता हूं अवतार लेता हूं

562
00:39:57,400 --> 00:40:01,560
मैंने आपको यह पूछा कि भगवान ने भगवत गीता में क्या यह बोला है

563
00:40:01,560 --> 00:40:05,840
कि मैं अजन्मा हूं हां या ना हा

564
00:40:05,840 --> 00:40:10,240
बोला बोला है बोला है ऐसे ही किसी

565
00:40:10,240 --> 00:40:14,400
बोला कुछ जो लिमिटेड बुद्धि वाले लोग है नहीं क्या व

566
00:40:14,400 --> 00:40:18,760
अगर पकड़ लि भगवान तो जन्म लेते ही नहीं भगवान तो जन्म लेते ही नहीं

567
00:40:18,760 --> 00:40:19,640
ठीक है इसको पकड़

568
00:40:19,640 --> 00:40:24,360
लिया तो यानी कि आपका कहने का मतलब है आपका कहने का अर्थ है

569
00:40:24,360 --> 00:40:29,080
नहीं हुआ मेरा प्रश्न नहीं हुआ अब अच्छा

570
00:40:29,080 --> 00:40:33,360
उन कैटेगरी के लोगों को हम अधूरा बोलेंगे या फिर गलत बोलेंगे

571
00:40:33,360 --> 00:40:37,400
आप बताइए ठीक है अब मैं आपसे पूछ

572
00:40:37,400 --> 00:40:41,880
रहा हूं आपने कहा क्योंकि वहां पर एक वाक

573
00:40:41,880 --> 00:40:46,040
आप बोलने नहीं देंगे क्या आंसर दीजिए ना पहले मैं जो पूछा उसका

574
00:40:46,040 --> 00:40:50,400
आंसर दीजिए मैं आंसर मेंही आंसर ही दे रहा हूं आपको

575
00:40:50,400 --> 00:40:54,480
आंसर है अगर मैं पॉइंट से अगर मैं पॉइंट से हटू तो ये डिबेट यहीं प बंद

576
00:40:54,480 --> 00:41:00,000
हो जाएगी ये ये जो चर्चा

577
00:41:00,000 --> 00:41:04,080
तो मैं उस प्रश्न का जवाब दे रहा हूं ना आप अगर गलत

578
00:41:04,080 --> 00:41:08,240
गलत ट्रैक में जाऊ अगर मैं गलत ट्रैक में जाऊ तो आप मुझे याद दिलाएगा

579
00:41:08,240 --> 00:41:13,600
मैंने आपसे य पूछा था हा तो मैंने

580
00:41:13,600 --> 00:41:17,800
आपको भगवान नेे मुझे आपको सुनना होगा

581
00:41:17,800 --> 00:41:22,360
मुझे आपको बोलने का अवसर देना

582
00:41:22,360 --> 00:41:26,600
होगा अगर मैंने कहा सुनिए मैंने कहा मेरा नाम

583
00:41:26,600 --> 00:41:30,720
शिवा वेद है अगर इस वाक्य में से दुनिया में

584
00:41:30,720 --> 00:41:35,320
किसी ने मैंने शब्द पर एक किताब लिख दी उसके किताब में मैंने आ गया

585
00:41:35,320 --> 00:41:39,360
तो यह और भले ही उसने लिखा हो मैं मेरा नाम जो है व

586
00:41:39,360 --> 00:41:43,440
वो मेरा नाम जो है अब्राहम है तो हम यह कहेंगे क्योंकि

587
00:41:43,440 --> 00:41:47,440
मैंने शब्द हमारी किताब में भी है और उनकी किताब में भी मैंने शब्द है इसलिए

588
00:41:47,440 --> 00:41:52,160
उनका ज्ञान अधूरा है क्योंकि मैंने तो यहां पर तुमने भी बोला था

589
00:41:52,160 --> 00:41:56,240
हम यही कहेंगे ना फिर तो क्योंकि हमारे से

590
00:41:56,240 --> 00:42:00,240
मिलता जुलता एक भी शब्द उनके य आ गया तो उनकी किताब अधूरी है विरुद्ध नहीं

591
00:42:00,240 --> 00:42:04,560
है पहली बात और जब यह विरुद्ध नहीं है तो दुनिया में मैं बता दूं

592
00:42:04,560 --> 00:42:09,480
कोई भी किताब सनातन विरुद्ध है ही नहीं फर तो फिर विरुद्ध है क्या

593
00:42:09,480 --> 00:42:13,600
दुनिया कोई भी किताब नहीं होगी हर चीज सनातन में होगी

594
00:42:13,600 --> 00:42:15,120
अगर का अक्षर कहीं पर

595
00:42:15,120 --> 00:42:19,400
यूज हो गया होगा दुनिया में तो का तो हमारे भी है ना तो का अक्षर

596
00:42:19,400 --> 00:42:24,200
यूज हो गया अगर कहीं पर तो इसका मतलब है वो ज्ञान जो अधूरा है विरुद्ध नहीं

597
00:42:24,200 --> 00:42:28,200
है आप यह कहना चाहते हैं आप कंक्लूजन दे

598
00:42:28,200 --> 00:42:32,320
रहे हैं या फिर आंसर दे रहे हैं मैंने तो आपको पूछ लिया

599
00:42:32,320 --> 00:42:36,320
ना आंसर दे दिया अगर कहीं पर हमारे यहां के

600
00:42:36,320 --> 00:42:40,400
ग्रंथों से मिलता जुलता कोई शब्द आ गया कोई वाक्य आ गया

601
00:42:40,400 --> 00:42:44,920
तो उससे हम ये नहीं कह देंगे कि वो ज्ञान अधूरा है विरुद्ध नहीं है क्योंकि

602
00:42:44,920 --> 00:42:48,920
इस तरीके से तो दुनिया में आईएस आईएस वाले भी विरुद्ध नहीं होंगे जो

603
00:42:48,920 --> 00:42:53,000
हत्या कर रहे हैं फिर कहा जाएगा देखो वो भगवान ने कहा

604
00:42:53,000 --> 00:42:57,200
था ना अर्जुन को युद्ध कर तो आईएस आईएस वाले युद्ध कर रहे हैं तो उनका जन

605
00:42:57,200 --> 00:43:01,760
अधूरा है विरुद्ध नहीं है गलत नहीं है आप ये

606
00:43:01,760 --> 00:43:05,760
कहोगे मैं ऐसा कुछ बोले नहीं आप ही कंक्लूजन दे र आप आंसर दे रहे

607
00:43:05,760 --> 00:43:10,000
हो आपने तो बोला ना कि अगर मेरे हमारे ग्रंथ में आ गया

608
00:43:10,000 --> 00:43:14,200
कि मैं अजन्मा हूं तो उन्होंने इसको ले लिया केवल अजन्मा को इसलिए

609
00:43:14,200 --> 00:43:18,240
उनका जन अधूरा कहा जाएगा उनका जन गलत नहीं कहा जाएगा तो फर गलत

610
00:43:18,240 --> 00:43:22,360
कहा किसे जाएगा आपने फिर से नहीं अरे

611
00:43:22,360 --> 00:43:26,560
नहीं लिया हमारे य मैं कह रहा हूं हमारे य से मैच कर रहा है हमारे

612
00:43:26,560 --> 00:43:30,240
य से कर रहा है तो उनका ज्ञान अधूरा बोला

613
00:43:30,240 --> 00:43:34,640
जाएगा हमारे य बोला जा रहा है स्पष्ट के मुख के वचनों का मूल

614
00:43:34,640 --> 00:43:38,720
है उनके य बोला जा रहा है मुख के वचनों का मूल नहीं है अब क्योंकि मुख

615
00:43:38,720 --> 00:43:42,920
के वचन शब्द यहां भी और वहा भी है तो हम ये कहेंगे विरुद्ध नहीं है अधूरा

616
00:43:42,920 --> 00:43:46,120
येय कहेंगे

617
00:43:46,120 --> 00:43:50,480
हम मैंने आपको सिंपल प्रश्न पूछा आप उसको आंसर

618
00:43:50,480 --> 00:43:54,480
नहीं दे इधर मेरा प्रश्न ऐसा है देखिए जो जनता

619
00:43:54,480 --> 00:43:58,480
देख रही है उसको ये समझ में आएगा कि मैंने क्या आपको आंसर दिया या नहीं

620
00:43:58,480 --> 00:44:02,560
दिया है जो जनता देख रही है ना उसको समझ में आएगा

621
00:44:02,560 --> 00:44:06,600
भले ही माने या ना माने मैंने आपको आंसर दिया है कि आपका य जो

622
00:44:06,600 --> 00:44:10,600
तर्क है वो गलत है कि अगर हमारे यहां पर अजन्मा कह दिया भगवान ने स्वयं

623
00:44:10,600 --> 00:44:14,920
को इसलिए उनके यहां पर अजन्मा जो लिखा है वो अधूरा है गलत नहीं है हमारे

624
00:44:14,920 --> 00:44:18,920
यहां पर जो कहा गया है वो ये कहा गया है कि ईश्वर जन्म

625
00:44:18,920 --> 00:44:22,960
ले सकता है वहां पर कहा जा रहा है नहीं ले सकता है आप इसे काउंटर

626
00:44:22,960 --> 00:44:27,400
कीजिए सुलो आपने

627
00:44:27,400 --> 00:44:31,520
अगर हमारे य की एक भी चीज उनके आ रही है

628
00:44:31,520 --> 00:44:35,880
तो अगर इसको मानना है तो फिर तो दुनिया में कुछ भी विरुद्ध है ही नहीं तो मुझे आप विरु

629
00:44:35,880 --> 00:44:39,960
की परिभाषा बताइए विरु होता क्या मैंने आपको

630
00:44:39,960 --> 00:44:44,720
कुछ बोला ही नहीं आप नहीं पूरा परा खोल रहे हो प्रभ

631
00:44:44,720 --> 00:44:48,960
आपको गलत व्यक्ति से फर क्या य कर र देखो आपको वितर

632
00:44:48,960 --> 00:44:53,280
होने भी नहीं दूंगा ना मैं वितर करूंगा भी आपको मैं सिंपल

633
00:44:53,280 --> 00:44:57,280
वे में बता रहा हूं अगर क्या कोई व्यक्ति भगवान को को

634
00:44:57,280 --> 00:45:01,320
अगर अजन्मा मानता है खाली अब वो अधूरा

635
00:45:01,320 --> 00:45:05,400
ज्ञान है या वो गलत है वो मेरे को बताइए सिंपल सी फर्मूला

636
00:45:05,400 --> 00:45:09,520
वो हिंदू व्यक्ति मैं मैं आपको बता रहा हूं अगर वो ये कह रहा

637
00:45:09,520 --> 00:45:13,600
है कि भगवान अजन्मा है तो ये अधूरा है मगर वो ये कह रहा है भगवान जन्म

638
00:45:13,600 --> 00:45:17,720
नहीं ले सकता तो ये गलत है विरुद्ध है हां एकदम

639
00:45:17,720 --> 00:45:21,960
परफेक्ट ऐसा ही नहीं क्या जब वो हिंदू हो मुस्लिम हो

640
00:45:21,960 --> 00:45:25,960
अगर जब नहीं क्या वो बोलता है कि भगवान अजन्मा है वो अधूरा

641
00:45:25,960 --> 00:45:30,040
हो गया जब बोलता है कि वो जन्म नहीं लिख सकता वो गलत है

642
00:45:30,040 --> 00:45:34,200
इस तरह से नहीं कि कुरान प्रतिपादित किया हु अल्लाह है

643
00:45:34,200 --> 00:45:38,440
उनका ज्ञान अधूरा है और गलत भी है तो हम बड़े भाइयों

644
00:45:38,440 --> 00:45:42,760
का काम क्या हैरे अरे मेरे भाई आप कुरान

645
00:45:42,760 --> 00:45:46,760
को चलिए इसको भी पकड़ लेते पकड़ने की बात है तो इसको भी

646
00:45:46,760 --> 00:45:50,880
पकड़ेंगे ठीक है अब मुझे आप बताइए आपने कुरान

647
00:45:50,880 --> 00:45:55,040
पूरी लिखने के बाद देखी है या जिस समय वो लाइन लिखी जा रही

648
00:45:55,040 --> 00:45:59,200
थी तब देख ली थी आपने कुरान को कब लिया

649
00:45:59,200 --> 00:46:03,200
जब वो पूरी कुरान कंपाइल हो गई है तब देखा है या जब उसकी एक

650
00:46:03,200 --> 00:46:07,400
पंक्ति लिखी जा रही थी तब देखा है देखि मैं कुरान का भक्त

651
00:46:07,400 --> 00:46:11,400
नहीं हूं बाबा देखो यही तो होता

652
00:46:11,400 --> 00:46:15,760
मैंने आपसे एक चीज पूछी बत सिंपल आपने कुरान को कब देखा पूरी कंपाइल

653
00:46:15,760 --> 00:46:20,280
होने के बाद देखा या एक एक पंक्ति लिखी जा रही थी तब देखा

654
00:46:20,280 --> 00:46:24,960
आपके खुशी खबर है आज तक कुरान कैसे दिखता दिखा नहीं

655
00:46:24,960 --> 00:46:28,960
तो फिर इसका अर्थ है कि आपको य कहना चाहिए कि इस विषय में मुझे ज्ञान

656
00:46:28,960 --> 00:46:33,080
नहीं है कि इसकन जो है कुरान को और इसके ईश्वर

657
00:46:33,080 --> 00:46:37,160
को एक क्यों कहता है जब आप उस विषय में जानते नहीं है तो फिर बात क्यों कर रहे

658
00:46:37,160 --> 00:46:41,360
हैं आप एकदम बच्चे के जैसा बात करते हो प्रभु सच बता रहा हूं आप

659
00:46:41,360 --> 00:46:45,440
पा साल ये समाज देखिए ये देखिए आपने कहा

660
00:46:45,440 --> 00:46:49,920
था कि आप यहां के कोई जज नहीं है आपने अभी थोड़ी देर पहले कहा था

661
00:46:49,920 --> 00:46:54,000
ना कहा था कि नहीं कहा था 100% बोला था और अब

662
00:46:54,000 --> 00:46:57,800
जज कौन बन रहा है अब जज कौन बन रहा है निर्णायक

663
00:46:57,800 --> 00:47:02,000
कौन बन रहा हैय कौन दे रहा है बता

664
00:47:02,000 --> 00:47:06,160
एक सवाल पूछ रहा आपसे निर्णय कौन दे रहा है इस समय हा

665
00:47:06,160 --> 00:47:10,240
अभी मैं बोला जैसे जैसे आप जज बनते होने अभी त एक बार भी

666
00:47:10,240 --> 00:47:14,560
निय दिया है क्या नि दिया है क्या

667
00:47:14,560 --> 00:47:18,960
भाई साब मैंने एक बार नि दिया क्या आपसे पूछ रहा

668
00:47:18,960 --> 00:47:23,080
मैंने आपको कहा कि आप बातो को घमा रहे मैं बिल्कुल

669
00:47:23,080 --> 00:47:27,240
नहीं रहा हमारा एकदम क्लियर कट क्या

670
00:47:27,240 --> 00:47:31,480
मैंने निर्णय दिया क्या मैं तो जो आप बोल रहे हो केवल उसी

671
00:47:31,480 --> 00:47:35,640
से प्रश्न करता जा रहा हूं मैंने अभी तक एक बत भी आपको कोई उपमा नहीं दी आपने

672
00:47:35,640 --> 00:47:39,720
मुझे कह दिया कि आप जो है यहां पर वो आप जीतने के उद्देश्य से बात

673
00:47:39,720 --> 00:47:43,880
कर रहे हो आप बच्चों के जैसे से बात कर रहे हो ये आप निर्णायक बन रहे हो और आप मुझसे कह रहे

674
00:47:43,880 --> 00:47:47,960
हो कि आप यहां पर कोई जज नहीं हो हां तो अब सुनिए अब

675
00:47:47,960 --> 00:47:52,280
नहीं क्या हमारा बीच नहीं क्या बात ये है कि कुरान में

676
00:47:52,280 --> 00:47:56,440
देखिए देखिए देखिए देखिए अभी मैं आपको एक चीज पूछ रहा हूं आपने मुझे थोड़ी देर पहले जज

677
00:47:56,440 --> 00:47:59,160
कहा था

678
00:47:59,160 --> 00:48:03,160
आप यहां पर कोई जज नहीं है अभी आपने मुझे निर्णय दिया कि मैं बच्चों के

679
00:48:03,160 --> 00:48:07,520
जैसी बात कर रहा हूं ये निर्णय नहीं है क्या हा

680
00:48:07,520 --> 00:48:11,760
मैं बोला ना हम दोनों जब इक्वल है तो इक्वल में नहीं कैसे होता एक व्यक्ति

681
00:48:11,760 --> 00:48:12,840
रखना पड़ेगा जो व्यक्ति जो

682
00:48:12,840 --> 00:48:17,160
नहीं जज रहेगा इसलिए मैंने बोला कि पा मिनट मिनट बो

683
00:48:17,160 --> 00:48:21,400
देखिए मैं आप मैं ये बताना चाह रहा हूं लोगों को कि इस समय आप निर्णायक बने

684
00:48:21,400 --> 00:48:25,560
जब आप आपने किसी बात का जवाब यह दिया कि आप बच्चों के जैसी

685
00:48:25,560 --> 00:48:30,720
बात कर रहे हैं हा हा कर रहे ना

686
00:48:30,720 --> 00:48:36,720
यही तो निर्णायक है इसी को कहते जज

687
00:48:38,600 --> 00:48:42,840
बनना नहीं आपने मुझे जब कहा था व्यर्थ कहा

688
00:48:42,840 --> 00:48:46,960
था और अभी आप खुद जज बन रहे हो अय बताओ जज होना चाहिए आपको कि नहीं

689
00:48:46,960 --> 00:48:51,080
होना चाहिए जब नहीं कि आप जज बन जाते

690
00:48:51,080 --> 00:48:55,240
हो तो मेरे को भी जज बनना पड़ता है अच्छा मैं कहां पर जज

691
00:48:55,240 --> 00:48:59,960
बना बताइए हा अब हम आप इस तरह से बन रहे

692
00:48:59,960 --> 00:49:03,960
मैंने आपको कौन सी उपमा दी है मैंने अभी तक आपको कौन सी उपमा

693
00:49:03,960 --> 00:49:08,240
दी है कि आप ऐसी बात कर रहे हो आप गलत बात कर रहे हो मैंने बोली है

694
00:49:08,240 --> 00:49:12,800
क्या हा आपको पूरा आपका मतलब य में भरा पड़ा है

695
00:49:12,800 --> 00:49:17,120
प्रभु आपका जिस तरह से आप अच्छा इसका मतलब

696
00:49:17,120 --> 00:49:21,120
है इसका मतलब है हमें अन्य चर्चाओं के बारे में भी य पर

697
00:49:21,120 --> 00:49:25,320
बात करनी है हा कर स अभी शुरू

698
00:49:25,320 --> 00:49:28,000
में आपने कहा था कि मैं दूसरों के बारे में बात

699
00:49:28,000 --> 00:49:32,240
करने नहीं आया हूं हां यहां पे आपने

700
00:49:32,240 --> 00:49:36,360
जब उनके बारे में पूछा तो फिर आप जो अब आप जोय मुझे

701
00:49:36,360 --> 00:49:40,640
जज सिद्ध कर रहे हैं वो अन्य चर्चाओं के आधार पर सिद्ध कर रहे हैं और मैं आपको जो जज

702
00:49:40,640 --> 00:49:44,720
सिद्ध कर रहा हूं वो इसी चर्चा में हो रही बातों के आधार पर सिद्ध कर रहा हूं अब

703
00:49:44,720 --> 00:49:48,840
आप जब अन्य चर्चाओं का संदर्भ लेंगे तो इसका मतलब है लखनऊ मंदिर के अध्यक्ष

704
00:49:48,840 --> 00:49:53,120
के साथ जो चर्चा हुई है उसका भी संदर्भ ले रहे हैं

705
00:49:53,120 --> 00:49:57,120
या उसम भी सिलेक्टिव है देखो अभी नहीं क्या आप को जो

706
00:49:57,120 --> 00:50:01,320
बोला जा रहा है वो आप सुन नहीं रहे हो और आप आपका ही पॉइंट को

707
00:50:01,320 --> 00:50:05,360
नहीं किया जो तथ्य विहीन है अभी मैं आपको चर्चा

708
00:50:05,360 --> 00:50:09,520
को आगे बढ़ाने के लिए बोल रहा हूं आप आप निर्णायक ना बनिए आप यह मत

709
00:50:09,520 --> 00:50:14,080
बोलिए कि आप बच्चों की तरह बात कर रहे हो ठीक है अब हम आगे बढ़ते हैं

710
00:50:14,080 --> 00:50:18,080
आगे बढ़ तो अब आपने आपका एक स्टेटमेंट

711
00:50:18,080 --> 00:50:22,240
प्राप्त हुआ है कि जो कुरान की कुरान

712
00:50:22,240 --> 00:50:26,240
का जो ज्ञान है व अरा भी है और गलत भी है जहां पर वो ये

713
00:50:26,240 --> 00:50:30,280
कह रहा है जन्मा है वो अधूरा है और जहां पर वो ये कह रहा है कि वो जन्म नहीं ले

714
00:50:30,280 --> 00:50:34,680
सकता वो गलत अब मैंने जब आपसे पूछा कि आपने

715
00:50:34,680 --> 00:50:38,720
सिर्फ जो जब कुरान को देखा तो वो लिखी जा रही थी तब देख

716
00:50:38,720 --> 00:50:42,800
लिया जो आप उसको अपूर्ण बोल रहे हो कि पूरी कुरान जब लिख गई जब ये निचोड़

717
00:50:42,800 --> 00:50:43,300
आ गया

718
00:50:43,040 --> 00:50:47,240
कि उनके य मूर्ति पूजा नहीं है निचोड़ में उनके अवतारवाद नहीं है निचोड़ में

719
00:50:47,240 --> 00:50:51,360
उसके बाद भी आप ये कह रहे हो कि ये जो है वो अधूरी लाइन वाली लिखी हुई

720
00:50:51,360 --> 00:50:55,400
है तो मैंने आपसे जब ये पूछा तो इस बारे में आपने कोई उत्तर नहीं दिया मगर

721
00:50:55,400 --> 00:50:59,480
एक बात आपने कहा कि जिस परिवार में सुप्रीम नाम जो बोला जाता

722
00:50:59,480 --> 00:51:03,520
है अल्लाह तो अगर वो अल्लाह मान रहे तो हम ये कह रहे बेटा

723
00:51:03,520 --> 00:51:07,520
वो जो है जिसको तुम अल्लाह कह रहे हो वो हमारा कृष्ण ही है हम

724
00:51:07,520 --> 00:51:11,520
यह समझाते हैं अब इसको लेक आगे बढ़ते हैं तो जब आप कुरान

725
00:51:11,520 --> 00:51:15,760
के ईश्वर को कृष्ण के समान कहते हो लोगों को समझाने के लिए

726
00:51:15,760 --> 00:51:19,880
कि जिसको तुम अल्लाह कह र हो वो कृष्ण ही है तो आप शिव पुराण

727
00:51:19,880 --> 00:51:24,400
के ईश्वर को कृष्ण के समान क्यों नहीं बोलते बहुत

728
00:51:24,400 --> 00:51:28,560
परफेक्ट क्वेश्चन पूछा आपने बहुत बहुत धन्यवाद आपको

729
00:51:28,560 --> 00:51:32,920
अब ये देखिए जैसे मैंने आपको पहले एक एग्जांपल दिया था

730
00:51:32,920 --> 00:51:36,960
कि ये एक परिवार है और परिवार में पता ये

731
00:51:36,960 --> 00:51:41,160
है और पिता के नीचे नी क्या एक उनका पुत्र होता है

732
00:51:41,160 --> 00:51:45,400
या फिर छोटा भाई होता है तो जब नहीं क्या कोई व्यक्ति यह बोलता है

733
00:51:45,400 --> 00:51:49,400
क्या यह छोटा भाई जो है क्या यह कृष्ण बन सकता है

734
00:51:49,400 --> 00:51:53,520
तो हम बोलते हैं कि नहीं बन सकता

735
00:51:53,520 --> 00:51:57,720
अब आपको आंसर मिला या नहीं मिला मैं एक्सन कर बताइए

736
00:51:57,720 --> 00:51:58,280
मैं अपना

737
00:51:58,280 --> 00:52:02,280
प्रश्न दोबारा करता हूं जो लोग जो लोग जो लोग

738
00:52:02,280 --> 00:52:06,400
ईश्वर को अल्लाह के रूप में समझते हैं उनसे आप कह देते हो

739
00:52:06,400 --> 00:52:10,640
कि कृष्ण और अल्लाह एक ही है उसके पीछे की वजह आप जस्टिफाई करे

740
00:52:10,640 --> 00:52:15,040
ना करे वो एक अलग बात हो गई आप जो लोग अल्लाह

741
00:52:15,040 --> 00:52:19,240
के रूप में कुरान के ईश्वर के रूप में ईश्वर को देखते हैं समझते

742
00:52:19,240 --> 00:52:23,320
हैं सोचते हैं उनसे कह देते हो कि तुम्हारा जो अल्ला है वो और कृष्ण एक

743
00:52:23,320 --> 00:52:27,640
ही है तो जो लोग शिव पुराण की सीमा से ईश्वर को देखते सोचते

744
00:52:27,640 --> 00:52:31,840
समझते हैं उनसे आप य क्यों नहीं कहते हो कि शिव और कृष्ण एक

745
00:52:31,840 --> 00:52:35,960
ही है अभ फिर से मैं आपको आंसर

746
00:52:35,960 --> 00:52:40,200
दे रहा हूं आपके घर में आपके पिता है

747
00:52:40,200 --> 00:52:44,280
आपके छोटे भाई है बहुत सारे लोग है सुनो सुनो

748
00:52:44,280 --> 00:52:48,760
आप सु बाबा चिंता कर रहे होब तो बोला नहीं

749
00:52:48,760 --> 00:52:53,280
इशारा किया मर सुन रहा तो अबने

750
00:52:53,280 --> 00:52:57,280
क्या अगर घर के परिवार में पिता सबसे बड़ा होता है

751
00:52:57,280 --> 00:53:01,400
तो अब देखो अब क्या होगा य पर किसी का नाम नहीं लिया गया है तो हम

752
00:53:01,400 --> 00:53:05,520
बोलते पिता बोले तोय जब नहीं क्या वहां परनाम लिया

753
00:53:05,520 --> 00:53:10,400
जाता है कि पिता का छोटा भाई है क्या यह छोटा भाई

754
00:53:10,400 --> 00:53:13,520
ये बाप के जैसा है तो हम बोलते कि नहीं नहीं शिवजी

755
00:53:13,520 --> 00:53:19,520
जो है वो छोटे भाई है या फिर छोटे पुत्र है वो कृष्ण के साथ समान नहीं

756
00:53:22,320 --> 00:53:26,640
है मैंने आपसे बोला कि जब व्यक्ति का स्तर

757
00:53:26,640 --> 00:53:31,040
बेकार होता है तो आप उससे बोल देते हैं कि जिसको तुम कृष्ण समझ रहे हो

758
00:53:31,040 --> 00:53:35,320
जिसको तुम शिव समझ रहे हो वो कृष्ण ही है उसका स्तर कम है इसीलिए

759
00:53:35,320 --> 00:53:38,080
वो समझ रहा है ना

760
00:53:38,080 --> 00:53:42,840
शिव क्या क्या फिर से बोलिए पूछ रहा फिर से

761
00:53:42,840 --> 00:53:46,920
बोलिए मैंने कहा जब आप स्तर के स्तर के

762
00:53:46,920 --> 00:53:51,000
कम होने की वजह से जिस स्तर पर जो जिस नाम से जिस रूप में ईश्वर को भज

763
00:53:51,000 --> 00:53:55,080
रहा है उससे कह देते हो कि कृष्ण और तुम्हारा जो ईश्वर है जिस नाम से तुम भज

764
00:53:55,080 --> 00:53:59,440
रहे हो वो एक ही तो आप शिव के भक्तों से ये क्यों नहीं कह सकते

765
00:53:59,440 --> 00:54:03,560
कि कृष्ण और शिव एक ही है हां अब इसका मैं आंसर

766
00:54:03,560 --> 00:54:07,720
दे रहा हूं अगर नहीं क्या कोई बोलेगा कि आपके परिवार में

767
00:54:07,720 --> 00:54:11,960
पिता कौन है तो हम बोलते पिता बोले तो कृष्ण है

768
00:54:11,960 --> 00:54:16,160
बेटा अच्छा आपके परिवार में

769
00:54:16,160 --> 00:54:21,160
ये जो शिव कौन है हम बोलते हैं हमारे पिताजी के छोटे भाई

770
00:54:21,160 --> 00:54:25,320
तो अब नहीं क्या आप मेरा प्रश्न समझ नहीं पा रहे आप आप मेरा

771
00:54:25,320 --> 00:54:28,640
प्रश्न नहीं समझ रहे सम मैं बोल रहा

772
00:54:28,640 --> 00:54:32,720
हूं जो व्यक्ति शिव के रूप मैं बोल रहा

773
00:54:32,720 --> 00:54:37,360
हूं जो व्यक्ति शिव के रूप में भगवान को जानता है

774
00:54:37,360 --> 00:54:42,000
उसको आप य क्यों नहीं बोलते कि जिसे तुम शिव समझ रहे हो वो कृष्ण ही है

775
00:54:42,000 --> 00:54:46,080
जब कि जो व्यक्ति अल्लाह के रूप में भगवान को जानता है उससे आप

776
00:54:46,080 --> 00:54:50,200
ये बोल रहे हो कि जिसे तुम अल्लाह समझ रहे हो वह कृष्ण

777
00:54:50,200 --> 00:54:54,440
ही है जो व्यक्ति यहोवा के रूप में भगवान को जानता है उससे

778
00:54:54,440 --> 00:54:58,800
आप ये बोल रहे हो कि तु जिसे यवा कह रहे हो वो कृष्ण ही है तो आप

779
00:54:58,800 --> 00:55:02,840
शिव वालो सेय क्यों नहीं बोल रहे कि जिसे तुम शिव कह रहे हो वो कृष्ण

780
00:55:02,840 --> 00:55:06,920
ही है हा तो आपने

781
00:55:06,920 --> 00:55:11,000
इसको और फिर से नहीं क्या मैं आपको फिर से बता रहा हूं जब एक परिवार

782
00:55:11,000 --> 00:55:15,520
में पिता का पोजीशन दिया जाता है पिता कौन हो सकता है

783
00:55:15,520 --> 00:55:19,600
तो आंख बंद करके नहीं क्या बोलते हैं कि पिता और कोई नहीं है एक ही पिता है वह

784
00:55:19,600 --> 00:55:22,040
है

785
00:55:22,040 --> 00:55:26,760
कृष्ण इतना समझ में आया आगे बोलिए हां

786
00:55:26,760 --> 00:55:30,760
अगर नहीं हा अगर कोई बोलता है कि ये जो

787
00:55:30,760 --> 00:55:35,080
हमारे शिव जी है शिवजी जो अगर मैं शिवजी

788
00:55:35,080 --> 00:55:39,400
का पूजा कर रहा हूं और शिव जी का मैं भक्त हूं उसमें कोई गलत नहीं है

789
00:55:39,400 --> 00:55:43,680
बहुत अच्छी बात है लेकिन हम बोलते हैं कि शिवजी अलग है और

790
00:55:43,680 --> 00:55:47,760
कृष्ण अलग है कृष्ण बाप है तो शिवजी

791
00:55:47,760 --> 00:55:52,520
उनके पुत्र या फिर उनका भाई अब इसको समझ में आया आपको

792
00:55:52,520 --> 00:55:56,680
कोई कमेंट करके बताएगा क्या कोई कमेंट करके बता दे कि

793
00:55:56,680 --> 00:56:00,720
मैं जो प्रश्न पूछ रहा हूं ये उसी का आंसर दे रहे हैं कुछ और

794
00:56:00,720 --> 00:56:06,720
दे रहे हैं कोई कमेंट करेगा

795
00:56:23,080 --> 00:56:27,840
क्या चलिए किसी का कमेंट अगर आ भी रहा है तो हम लोग देख नहीं पा रहे

796
00:56:27,840 --> 00:56:30,120
उसे

797
00:56:30,120 --> 00:56:34,680
तो मेरा प्रश्न आप समझ नहीं पा रहे हैं मैं कह रहा हूं

798
00:56:34,680 --> 00:56:38,880
आपने कहा कि हम लोग यह बताते

799
00:56:38,880 --> 00:56:43,160
हैं लोगों को कि जो

800
00:56:43,160 --> 00:56:47,200
पिता है अरे जबरन परिवार बना

801
00:56:47,200 --> 00:56:52,040
रहा है अज्ञानी त्रिशूल कहां है

802
00:56:52,040 --> 00:56:54,400
भैया

803
00:56:54,400 --> 00:56:58,840
चलिए जी मैं ये कह रहा हूं कि

804
00:56:58,840 --> 00:57:02,840
आपने कहा कि जब कोई व्यक्ति गलत समझ रहा

805
00:57:02,840 --> 00:57:06,960
होता है भाई को पिता समझ रहा होता है तो हम उसे कहते हैं नहीं वो पिता है वो

806
00:57:06,960 --> 00:57:11,280
भाई है वो पिता है ठीक है हा यहां पे शिजी

807
00:57:11,280 --> 00:57:15,400
को नहीं किया हम बोल रहे हैं जब

808
00:57:15,400 --> 00:57:19,880
कोई व्यक्ति गलत समझ रहा है भाई को पिता समझ रहा है तब हम कहते हैं

809
00:57:19,880 --> 00:57:24,080
कि तुम गलत समझ रहे हो तुम भाई को पिता कह रहे हो जबकि पिता

810
00:57:24,080 --> 00:57:28,800
जो है कृष्ण है और भाई जो है वो शिव है यही है ना

811
00:57:28,800 --> 00:57:32,920
हा हां ठीक है तो इसका अब मैं बोल रहा हूं

812
00:57:32,920 --> 00:57:37,680
कि जब कोई व्यक्ति गलत यह समझ रहा है कि अल्लाह ही ईश्वर है

813
00:57:37,680 --> 00:57:41,760
कुरान की सीमा का वही ईश्वर है तो उसको आप क्यों नहीं कह

814
00:57:41,760 --> 00:57:45,920
रहे हो कि अल्लाह नहीं वो अल्ला वो अल्ला भाई है और वो जो किस्म है वो पिता

815
00:57:45,920 --> 00:57:50,000
है हा अब देखिए यहां पर अल्लाह को इसलिए कहा

816
00:57:50,000 --> 00:57:54,040
जा रहा है क्योंकि वो अल्लाह का अलावा किसी को जानते नहीं और वो अल्लाह

817
00:57:54,040 --> 00:57:58,040
कौन है वो भी उनको नहीं पता जब ने क्या यहां पर

818
00:57:58,040 --> 00:58:02,160
पिता शब्द आरहा सुप्रीम पर्सनालिटी यह सुप्रीम है तो

819
00:58:02,160 --> 00:58:06,720
जैसे पिता एक क्या है कि एक पोस्ट है

820
00:58:06,720 --> 00:58:10,840
समझ लो एक परिवार मेरा एक सिंपल सा प्रश्न भाई

821
00:58:10,840 --> 00:58:14,000
साहब मेरा एक सिंपल सा प्रश्न है जिसको आप आप

822
00:58:14,000 --> 00:58:19,480
उससे अलग हटके वो दे रहे हैं मैंने आपसे

823
00:58:19,480 --> 00:58:23,520
पूछ पुराण के द्वारा प्रतिपादित होने वाले ईश्वर को

824
00:58:23,520 --> 00:58:27,680
कृष्ण के समान बोल सकते हैं तो शिव पुराण के द्वारा प्रतिपादित होने वाले ईश्वर

825
00:58:27,680 --> 00:58:31,760
को कृष्ण के समान क्यों नहीं बोल रहे यह बताइए ठीक

826
00:58:31,760 --> 00:58:35,960
है अभी कुरान में जो दिया हुआ अल्लाह कौन है अच्छा

827
00:58:35,960 --> 00:58:40,040
आप एक बात बताइए सि आपने इसको मैं समझा देता हूं

828
00:58:40,040 --> 00:58:45,040
प्रश्न को थोड़ा सा आपने कहा जो जो वो

829
00:58:45,040 --> 00:58:49,120
है कुरान का जो ज्ञान है वो अधूरा है है

830
00:58:49,120 --> 00:58:53,280
ना इसलिए हम उनको य बताते कि तुमको जो जो नहीं पता है वो सारी

831
00:58:53,280 --> 00:58:57,880
चीज कृष्ण में भी है इसलिए कृष्ण अल्ला एक ही है पुरान की चीजें जो है लिमिटेड

832
00:58:57,880 --> 00:59:02,040
अधूरा है मगर यहां पर आप शिव पुराण के द्वारा प्रतिपादित होने वाले

833
00:59:02,040 --> 00:59:06,040
भगवान से कृष्ण को अलग कर देते हो तो क्या आप यह कहना चाहते

834
00:59:06,040 --> 00:59:10,240
हो कि पुराण का ज्ञान तो अपूर्ण है मगर शिव पुराण का ज्ञान

835
00:59:10,240 --> 00:59:14,280
विरुद्ध है इसलिए शिव पुराण के ईश्वर को हम कृष्ण के समान नहीं

836
00:59:14,280 --> 00:59:18,480
खड़ा करते मगर कुरान के ईश्वर को कृष्ण के समान खड़ा

837
00:59:18,480 --> 00:59:22,640
कर देते हैं हा तो अभी आपका प्रश्न

838
00:59:22,640 --> 00:59:26,800
यह है कि आपको यह पता चल गया कि अल्लाह जो है कौन है

839
00:59:26,800 --> 00:59:29,160
उनको नहीं पता ना आपको पता है

840
00:59:29,160 --> 00:59:33,320
और क्योंकि उसको सुप्रीम कह रहे हैं लिए अल्लाह जो भी है

841
00:59:33,320 --> 00:59:37,400
वो कुरान की सीमा का ईश्वर है कुरान की सीमा का

842
00:59:37,400 --> 00:59:42,360
ईश्वर और मैं कभी य नहीं कहूंगा कि कृष्ण राम के समान है आप

843
00:59:42,360 --> 00:59:46,560
कए देखो अने क्या आपने क्या अगर इसको समझने की कोशिश करो

844
00:59:46,560 --> 00:59:50,560
तो आराम से समझ जाओगे मैं क्या बोल रहा हूं शिव शिव जी के पास हम बाद में आएंगे

845
00:59:50,560 --> 00:59:54,920
पहले आप इसको समझ लो अगर नहीं क्या वो किसी को भी अगर बोल रहे हैं

846
00:59:54,920 --> 00:59:59,160
यह सुप्रीम है तो हम बोलते हैं कि सुप्रीम बेटा एक ही है व है कृष्णा

847
00:59:59,160 --> 01:00:03,200
आपको इसमें कुछ प्रॉब्लम है क्या

848
01:00:03,200 --> 01:00:07,280
प्रॉब्लम है आप यह बोलते हैं कि क जो सुप्रीम हमारा कृष्ण है वही

849
01:00:07,280 --> 01:00:11,280
तुम्हारा अल्ला है आप ये बोलते हैं हा हम उनको बोलते

850
01:00:11,280 --> 01:00:15,360
हैं कि अब कृष्ण को एक्सेप्ट करो तो फिर नहीं

851
01:00:15,360 --> 01:00:19,400
कृष्ण को एक्सेप्ट करो ठीक है आप आप शिव के भक्तो से

852
01:00:19,400 --> 01:00:23,600
क्यों नहीं बोलते कि भाई हमारा जो कृष्ण सुप्रीम है वही तुम्हारा शिव

853
01:00:23,600 --> 01:00:28,160
है आप कृष्ण को वो एक्सेप्ट करो हा देखो

854
01:00:28,160 --> 01:00:32,400
बोलते हो शिवजी नहीं है

855
01:00:32,400 --> 01:00:35,920
जो लोग नहीं क्या शिवजी के भक्त

856
01:00:35,920 --> 01:00:40,040
है जो व्यक्ति शिव जी के भक्त है

857
01:00:40,040 --> 01:00:44,840
शिव जी ने क्या उनको क्या करते हैं कृष्णा भक्ति में आके रख देते

858
01:00:44,840 --> 01:00:48,880
हैं एक बहुत सार एपल है तो जब नहीं

859
01:00:48,880 --> 01:00:53,000
कि हमको पता है कि शिव जीी कौन है जैसे

860
01:00:53,000 --> 01:00:57,240
मैं खुद भी नहीं शिवजी का भक्त था आपने वृंदावन में जो

861
01:00:57,240 --> 01:01:01,360
प्रेमानंद महाराज आप आप ये जो कह रहे हैं ना कि शिवजी

862
01:01:01,360 --> 01:01:06,280
कौन है आप ये जो कह रहे हैं शिवजी कौन है

863
01:01:06,280 --> 01:01:10,320
आप कह रहे क्योंकि इनको पता है शिवजी कौन है इसलिए हम कहते हैं कि

864
01:01:10,320 --> 01:01:15,360
शिवजी जो है कृष्ण नहीं है आप ये कह

865
01:01:15,360 --> 01:01:20,280
रहे यस पर और उनको नहीं पता है कि अल्लाह कौन है

866
01:01:20,280 --> 01:01:24,440
हा तो फिर क अच्छा तो अल्लाह की डेफिनेशन क्या है आपके

867
01:01:24,440 --> 01:01:27,640
हिसाब से जो उनकी है

868
01:01:27,640 --> 01:01:31,880
अगर वो बोलते हैं कि अल्लाह एक ईश्वर है तो आंख

869
01:01:31,880 --> 01:01:36,000
बंद करके बोलने का कि तुम्हारा जो य ईश्वर तुम जिसको मानते हो जो तुम

870
01:01:36,000 --> 01:01:41,080
नहीं जानते हो देखिए मैंने अगर बगर मत

871
01:01:41,080 --> 01:01:45,680
बोलिए अगर मगर बोलिए मैं ये बोल रहा हूं

872
01:01:45,680 --> 01:01:50,640
ना अगर मगर बोलना पड़ेगा प्रभु

873
01:01:50,640 --> 01:01:55,080
क्योंकि बोल रहे अल्लाह अगर वो उसको सुप्रीम

874
01:01:55,080 --> 01:01:59,120
बोल रहे हैं तो हम सिंपल क्वेश्चन पूछते हैं आपको अगर अल्लाह

875
01:01:59,120 --> 01:01:59,880
कौन है पता है

876
01:01:59,880 --> 01:02:04,240
तो बताओ नहीं पता है तो हमारे कृष्ण को एक्सेप्ट

877
01:02:04,240 --> 01:02:10,240
करो अगर आपको पता है अल्लाह कौन हैन है चलिए अब मैं बोल रहा

878
01:02:10,560 --> 01:02:14,760
हूं अच्छा ठीक है कि आपने अगर

879
01:02:14,760 --> 01:02:19,240
पढ़ा है कि अल्लाह कौन है तो बताओ तो

880
01:02:19,240 --> 01:02:23,360
यह कौन ये जो आप बोल रहे हैं कि क्योंकि

881
01:02:23,360 --> 01:02:27,440
उनको पता नहीं है ये कहां से बोल रहे कैसे किस आधार पर बोल रहे

882
01:02:27,440 --> 01:02:31,560
उनको पता नहीं वो तो बताएंगे ना वो बताएंगे कि अल्लाह कौन है अल्लाह वो

883
01:02:31,560 --> 01:02:35,760
है जिसने संसार बनाया अल्लाह वो है जो कुरान के द्वारा डिफाइन किया जाता है

884
01:02:35,760 --> 01:02:39,800
अल्लाह वो है जिसकी पांच वक्त की नमाज पढ़ी जाती है अल्लाह वो है सात आसमान

885
01:02:39,800 --> 01:02:44,280
पर बैठता है ये आपको किसने कह दिया ये आपको किसने कह दिया

886
01:02:44,280 --> 01:02:48,440
अल्लाह कौन है उन्हे पता नहीं है अगर नहीं उनको पूछा जाए

887
01:02:48,440 --> 01:02:52,840
अल्लाह जो व्यक्ति है वो व्यक्ति कौन है वो बताओ वो कैसे दिखता है

888
01:02:52,840 --> 01:02:57,040
क्या करता है क रहता है तो तो

889
01:02:57,040 --> 01:03:01,080
तो तो इसका मतलब यह है कहने का मतलब है कि दिखने

890
01:03:01,080 --> 01:03:05,360
से य पता अगर किसी व्यक्ति को उसका रूप मालूम है तो यह बात

891
01:03:05,360 --> 01:03:09,800
सिद्ध होगी कि वो उसको य मालूम है कि वो कौन है अन्यथा

892
01:03:09,800 --> 01:03:14,000
नहीं सिद्ध होगी य बात अच्छा

893
01:03:14,000 --> 01:03:15,000
तो

894
01:03:15,000 --> 01:03:19,080
चलिए अब आपने यह माना कि आपको यह पता है कि कृष्ण कैसे दिखते

895
01:03:19,080 --> 01:03:23,160
हैं इसलिए आप ये कह सकते हो कि आप ये

896
01:03:23,160 --> 01:03:27,160
जानते हो कि कृष्ण कौन है और क्योंकि अ वाले लोग जो है नहीं

897
01:03:27,160 --> 01:03:31,320
जानते वो कैसा दिखता है इसलिए वो ये कह रहा व

898
01:03:31,320 --> 01:03:35,440
उनके लिए उनको नहीं पता है अल्लाह अल्लाह कौन

899
01:03:35,440 --> 01:03:39,440
है है ना यानी कि रूप ना मालूम होने से यह सिद्ध होता है

900
01:03:39,440 --> 01:03:43,720
कि हमें नहीं पता है कि वो कौन

901
01:03:43,720 --> 01:03:47,920
है रूप ना मालूम होने से सिद्ध होता है कि हमें नहीं पता

902
01:03:47,920 --> 01:03:52,000
है कि वो कौन है उनको कुछ भी नहीं क्योंकि

903
01:03:52,000 --> 01:03:56,200
उनको यह नहीं पता कि अल्ला इसके बारे में कोई व्याकरण

904
01:03:56,200 --> 01:04:00,400
अब इसके बारे में आपको सनातन धर्म ग्रंथ का प्रमाण मुझे बताइए ज लिखा

905
01:04:00,400 --> 01:04:04,640
हो कि रूप ना मालूम होने से सिद्ध होता है कि हमें नहीं पता है कि वो कौन

906
01:04:04,640 --> 01:04:09,040
है हा बहुत अच्छी बात बो आपने

907
01:04:09,040 --> 01:04:13,320
यह तो व्यक्तिगत त हो गया मतलब देख

908
01:04:13,320 --> 01:04:17,440
आप अगर मतलब जो जुक्ति जो नहीं देना चाहिए वही

909
01:04:17,440 --> 01:04:21,720
देंगे आपको विषय को बढ़ाना है आपको समझना नहीं है

910
01:04:21,720 --> 01:04:25,920
तो हम क्या कर सकते बता सिपल बन फि

911
01:04:25,920 --> 01:04:29,960
आप निर्णायक भाई आपने अपना एक सिद्धांत देखिए

912
01:04:29,960 --> 01:04:30,460
आप

913
01:04:30,240 --> 01:04:34,240
अपना सिद्धांत क्यों दे रहे हैं कि अगर हमको किसी का रूप नहीं मालूम

914
01:04:34,240 --> 01:04:38,440
है तो हम ये नहीं जानते कि वो कौन

915
01:04:38,440 --> 01:04:42,480
है बहुत सी ऐसी चीज होंगी दुनिया में जिसके रूप के बारे में आपको

916
01:04:42,480 --> 01:04:46,640
नहीं पता होगा मगर फिर भी आप कहोगे मुझे मालूम है वो कौन है मैंने

917
01:04:46,640 --> 01:04:50,640
आज तक को नहीं देखा मगर मैं उसके बारे में बता सकता हूं वो

918
01:04:50,640 --> 01:04:54,800
कौन है अगर मैंने उसका रूप नहीं देखा तो य सिद्ध हो गया कि मैं जो है वो

919
01:04:54,800 --> 01:04:58,640
कौन है मैं नहीं जान

920
01:04:58,640 --> 01:05:02,720
अगर कोई ऐसी बात फसेगी जो आपका सिद्धांत

921
01:05:02,720 --> 01:05:07,040
आप बताओगे और तो मुझे स्वीकार नहीं होगा तो फिर उसके लिए हम शास्त्र को लेंगे ना

922
01:05:07,040 --> 01:05:11,120
शास्त्र से प्रमाण देना पड़ेगा तस्मा शास्त्र प्रमाण ग को

923
01:05:11,120 --> 01:05:15,120
शास्त्र देने की जरूरत नहीं है ना जो लोग गधे है उनको पता ही नहीं

924
01:05:15,120 --> 01:05:19,640
क्या कुछ है उनको क्या जरत है

925
01:05:19,640 --> 01:05:25,640
तोब शास्त्र देने की जरूरत नहीं है य भी आप सनातन से दीजिए

926
01:05:25,960 --> 01:05:30,120
हां तो सिंपल सी बात है अगर नहीं कोई इसका अर्थ तो

927
01:05:30,120 --> 01:05:34,360
ये है इसका अर्थ आप जो कह रहे हैं उसका अर्थ पता है क्या है उसका अर्थ

928
01:05:34,360 --> 01:05:38,560
ये है कि हमें किसी को भी धर्म का ज्ञान देना ही नहीं चाहिए

929
01:05:38,560 --> 01:05:42,720
और व्यक्ति क्योंकि पशु होता है पैदा होता है तो तो हमें उसे धर्म

930
01:05:42,720 --> 01:05:47,240
का ज्ञान देना ही नहीं चाहिए क्यों नहीं देना चाहिए क्योंकि वो पशु है

931
01:05:47,240 --> 01:05:51,320
नहीं नहीं क्योंकि वो मनुष्य है पशु के जैसा बिहेवियर कर

932
01:05:51,320 --> 01:05:56,400
रहा है उसको प मनुष्य बनाएंगे हां

933
01:05:56,400 --> 01:06:00,400
तो इसका मतलब आपसे प्रमाण मांग रहा है आपसे जोय प्रमाण

934
01:06:00,400 --> 01:06:04,560
मांग रहा है टोटल पशु है आपसे जो प्रमाण मांग रहा

935
01:06:04,560 --> 01:06:09,040
है मिनट मिनट आपसे जो प्रमाण मांग रहा है

936
01:06:09,040 --> 01:06:13,160
ो उसके बाद उसको भक्त बनाएंगे भाई

937
01:06:13,160 --> 01:06:17,240
साहब मैं आपसे पूछ रहा हूं जो आपसे प्रमाण मांग रहा है व टोटल

938
01:06:17,240 --> 01:06:19,720
पशु है

939
01:06:19,720 --> 01:06:23,760
क्या आपको क्या कुछ प्रॉब्लम है क्या प्रभु आपने कहाना ग

940
01:06:23,760 --> 01:06:27,800
को देने की आवश्यकता नहीं होती है हां तो मैं जब बो

941
01:06:27,800 --> 01:06:32,000
आपने जो गधा वर्ड है किसके लिए यूज किया मेरे लिए या फिर कुरान को फॉलो करने वालो

942
01:06:32,000 --> 01:06:36,040
के लिए ये भी बता दीजिए आपके लिए नहीं भाई आप तो इतने

943
01:06:36,040 --> 01:06:40,160
बड़े महान इतने शास्त्र का जानते हैं आप तो ज्ञानी है मैं तो आपको गुरु के जैसा

944
01:06:40,160 --> 01:06:41,680
मानता हूं प्रभ

945
01:06:41,680 --> 01:06:45,680
तो मैं उन लोगों के लिए बोल रहा हूं जो लोग ने क्या भगवान को नहीं

946
01:06:45,680 --> 01:06:47,960
जानते

947
01:06:47,960 --> 01:06:52,400
हैं अब जब उनको मैं कह रहा हूं ना कहा

948
01:06:52,400 --> 01:06:56,440
ये कहा का अगर हम सिद्धांत को अंतिम मान ले कि

949
01:06:56,440 --> 01:07:00,640
यह जो उसको शास्त्रीय प्रमाण नहीं द जाए व गधे है तो

950
01:07:00,640 --> 01:07:05,240
इसका मतलब है कि जो भी व्यक्ति पशु के जैसा व्यवहार कर रहा है उसको शास्त्र का

951
01:07:05,240 --> 01:07:09,360
जन नहीं मैंने क्या बोला मैंने बोला की शास्त्र जन तभी देना

952
01:07:09,360 --> 01:07:14,120
चाहिए जब शास्त्र ज्ञान लेने के अधिकारी बन जाए

953
01:07:14,120 --> 01:07:19,480
जब बच्चा रहता है ब क्या

954
01:07:19,480 --> 01:07:23,960
करतेस आधार होगी उस

955
01:07:23,960 --> 01:07:28,480
देते आप बचपन ज पैदा हुए

956
01:07:28,480 --> 01:07:32,480
जब कोई बच्चा पैदा होता हैरे शास्त्र नहीं पढे मगर आज

957
01:07:32,480 --> 01:07:36,720
हमारे अंदर जितनी भी मानवता है व शास्त्र से ही आई है ना

958
01:07:36,720 --> 01:07:40,920
वो माता पिता के द्वारा प्रथम गु माता पिता होते भागवत में लिखा

959
01:07:40,920 --> 01:07:45,040
है तो हमको क्या क्या करना पड़ेगा उनका माता पिता बनके उनको

960
01:07:45,040 --> 01:07:49,480
प संस्कार देना पड़ेगा माता पिता ने शास्त्र के

961
01:07:49,480 --> 01:07:53,520
बाहर का ज्ञान दिया क्या अगर अगर हम आज मनुष्य

962
01:07:53,520 --> 01:07:57,600
जैसे बन पाए तो तो हमको क्या माता पिता ने

963
01:07:57,600 --> 01:08:01,800
शास्त्रों के बाहर का ज्ञान दिया था क्या एगजैक्टली वैसा

964
01:08:01,800 --> 01:08:05,840
ही नहीं कि हम क्या कर रहे हैं शास्त्रों का ज्ञान लेके वो जैसे उसको समझ

965
01:08:05,840 --> 01:08:10,120
सकते हैं उसको वैसा बना के वो बच्चों लोगों को जो लोग अभी

966
01:08:10,120 --> 01:08:14,200
मूर्ख हैं उनको हम पिला देते हैं ये है शास्त्रों का ज्ञान

967
01:08:14,200 --> 01:08:18,360
अब वो लोग ये जब पी लेते हैं तो आगे चलकर मनुष्य बन जाते हैं फिर उनको

968
01:08:18,360 --> 01:08:22,680
हम बोल देते हैं कि आप अभी नहीं क्या भगवत गीता पढ़ो हरे कृष्णा का जप करो

969
01:08:22,680 --> 01:08:26,760
अब मुस्लिम एंड क्रिश्चियन कुल मिलाकर के मैं तो कुल मिलाकर के मैं

970
01:08:26,760 --> 01:08:31,000
तो आपसे पूछ रहा हूं ना अरे भाई

971
01:08:31,000 --> 01:08:36,600
ठीक है ठीक है ठीक है मैं तो आपसे

972
01:08:36,600 --> 01:08:40,880
पूछ अभी मैं तो आपसे पूछ रहा हूं ना मैं तो आपके हिसाब

973
01:08:40,880 --> 01:08:44,960
से पशु नहीं गदा नहीं ना आप तो महान हम

974
01:08:44,960 --> 01:08:49,240
गुरु तुल्य मित्र है लेकिन गुरु तुल्य

975
01:08:49,240 --> 01:08:53,240
हा तो अभी मैं आपसे पूछ रहा हूं कि अगर किसी ने रूप

976
01:08:53,240 --> 01:08:57,320
के बारे में नहीं सुना है तो वो जो है य नहीं जानता है कि

977
01:08:57,320 --> 01:09:01,440
वो कौन है इसका शास्त्रीय प्रमाण मुझे दीजिए मैं तो

978
01:09:01,440 --> 01:09:07,440
पूछ रहा हूं किसका शास्त्र प्रमाण भगवान

979
01:09:07,680 --> 01:09:11,760
का नहीं इस नियम का सिद्धांत आपने

980
01:09:11,760 --> 01:09:15,760
दिया है कि अगर कोई व्यक्ति उसके रूप के बारे में नहीं जानता है

981
01:09:15,760 --> 01:09:19,840
तो इससे सिद्ध होता है कि वो नहीं जानता कि वो कौन है जब तक वो रूप के बारे

982
01:09:19,840 --> 01:09:24,320
में नहीं जानेगा उससे सिद्ध होगा कि वो नहीं जानता कि वो कौन है

983
01:09:24,320 --> 01:09:28,440
ये इसके लिए मुझे प्रमाण चाहिए हा अभी नहीं क्या

984
01:09:28,440 --> 01:09:32,600
मैं आपको एक बार एक मुस्लिम ने मैं जब कुछ फल खरीद रहा

985
01:09:32,600 --> 01:09:36,800
था तो उस समय क्या उन्होने बो आपका सुन लेता

986
01:09:36,800 --> 01:09:40,920
आपका व्याख्यान सुन लेता हूं मगर मैं उससे पहले पूछ

987
01:09:40,920 --> 01:09:44,920
रहा पूछ रहा हूं क्या आपके पास इस बारे में शास्त्रीय प्रमाण

988
01:09:44,920 --> 01:09:49,200
है या नहीं ई शास्त्र प्रमाण दे रहा सनातन शास्त्र

989
01:09:49,200 --> 01:09:51,720
का प्रमाण है सनातन शास्त्र का प्रमाण

990
01:09:51,720 --> 01:09:56,840
दे रहा बाबा चिंता मत तो एक व्यक्ति जब को

991
01:09:56,840 --> 01:10:01,040
जी आज एकादशी है थोड़ा फ्रूट ज्यादा दीजिए और वो फल वाला

992
01:10:01,040 --> 01:10:06,280
जो है मुस्लिम था तो उसने बोला क्यों आपका भगवान खाते हैं

993
01:10:06,280 --> 01:10:10,520
क्या तो उसने बोला कि आपके भगवान जब खाते हैं तो फोटो घीस

994
01:10:10,520 --> 01:10:14,560
के भेज देना मेरे को तो मैंने उसको तुरंत बोला क्यों भाई

995
01:10:14,560 --> 01:10:18,800
आप जब नमाज पढ़ते हो उसको कोई सुनता है क्या

996
01:10:18,800 --> 01:10:22,840
जब नहीं क्या बोलता हा हमारा ला सुनता है ना जब सुनता है

997
01:10:22,840 --> 01:10:26,120
तो फोटो ीच के भेज देना

998
01:10:26,120 --> 01:10:30,200
मैंने भी वैसे ही बताया उसको तो अबने का क्या हुआ

999
01:10:30,200 --> 01:10:34,280
वो बोला कि हां सुनता तो है मैं बोला कैसे सुनता है

1000
01:10:34,280 --> 01:10:38,800
उसने मेरे बो तुम कैसे सुनते हो मैं बोला मैं अपने कान से सुनता हूं

1001
01:10:38,800 --> 01:10:43,120
तो उसने क्या बोला हमारे आले भी अपने कान से सुनते हैं

1002
01:10:43,120 --> 01:10:47,280
हां अगर तुम्हारा अल्लाह का कान है तो सिर्फ

1003
01:10:47,280 --> 01:10:51,760
कान ही है क्या आंख नहीं है नाक नहीं है मुख नहीं

1004
01:10:51,760 --> 01:10:56,160
है खाली कान तो नहीं हो सकता ना सब कुछ हो सकता है हां अगर तुमको

1005
01:10:56,160 --> 01:11:00,320
नहीं पता अभी अब नहीं क्या हमारे मुख और भगवान के मुख

1006
01:11:00,320 --> 01:11:04,600
में बहुत सारा फर्क है भगवान कैसे है कंदर प कोट कमनीय विशेष

1007
01:11:04,600 --> 01:11:06,960
शोभ वो करोड़ काम देव से

1008
01:11:06,960 --> 01:11:11,520
क्या ज्यादा सुंदर है उनका बात करते हैं उसी प्रकार आपके

1009
01:11:11,520 --> 01:11:15,600
जो अल्लाह है उसका भी अगर कान है तो आख कान नाक सब

1010
01:11:15,600 --> 01:11:19,760
कुछ है तो यह बताओ तुमको अल्लाह कौन है तुमको पता है क्या व बो

1011
01:11:19,760 --> 01:11:23,880
मुझे नहीं पता तो हम जो बता रहे सुनो वही अल्लाह ने क्या हमारे

1012
01:11:23,880 --> 01:11:27,080
कृष्ण है

1013
01:11:27,080 --> 01:11:31,240
क्या है क्या बता रहे हो आप वही तु

1014
01:11:31,240 --> 01:11:35,240
जो तुम बोल रहे हो कि व अल्लाह जो सुनता है बोल रहे हो ना आपको पता है

1015
01:11:35,240 --> 01:11:39,400
वै कैसा दिखता है क्या करता है बोले नहीं पता तो हम बोले

1016
01:11:39,400 --> 01:11:43,680
अगर तुमको नहीं पता तो हमारा स्वीकार करो वो अल्ला कृष्ण है उसको

1017
01:11:43,680 --> 01:11:49,200
पूजा करो अच्छा ठीक है अब ये

1018
01:11:49,200 --> 01:11:53,680
बताइए क्या आप गुरु परंपरा को मानते हैं

1019
01:11:53,680 --> 01:11:56,240
100 पर

1020
01:11:56,240 --> 01:11:58,440
ठीक

1021
01:11:58,440 --> 01:12:02,520
तो यदि कोई सनातन धर्म के रेफरेंस से

1022
01:12:02,520 --> 01:12:06,640
संदर्भ से कोई बयान कहीं पर दे देगा

1023
01:12:06,640 --> 01:12:11,240
और वो परंपरा प्राप्त आचार्य के द्वारा दिया गया बयान नहीं होगा

1024
01:12:11,240 --> 01:12:15,320
तो क्या उसको हिंदू धर्म की तरफ से माना जाना चाहिए सनातन सिद्धांतों के सनातन

1025
01:12:15,320 --> 01:12:19,840
की तरफ से माना जाना चाहिए हा देखिए

1026
01:12:19,840 --> 01:12:22,080
कोई हिंदू घर में जन्म लेकर के

1027
01:12:22,080 --> 01:12:26,120
हिंदू कोई हिंदू घर में जन्म लेकर के यदि कहीं पर कोई बयान

1028
01:12:26,120 --> 01:12:30,160
दे दे और वो बयान हमारी जो परंपरा है गुरु परंपरा

1029
01:12:30,160 --> 01:12:34,320
उससे उससे जो है प्रमाणिक बयान ना हो तो क्या हम उसे

1030
01:12:34,320 --> 01:12:38,480
हिंदू धर्म का बयान मान ले

1031
01:12:38,480 --> 01:12:42,600
हा तो अगर यहां पे आप बोल रहे हो कि अगर

1032
01:12:42,600 --> 01:12:47,280
कोई व्यक्ति अगर कुछ भी बोल दे तो उसको क्या प्रामाणिक माने यही प्रश्न है

1033
01:12:47,280 --> 01:12:51,400
ना मैं बोल रहा हूं हिंदू धर्म के संदर्भ से यदि

1034
01:12:51,400 --> 01:12:55,400
कोई व्यक्ति कोई भी उटांग बात बोल दे कहीं प तो क्या

1035
01:12:55,400 --> 01:12:59,520
ये माने कि ये हिंदू पूरा जो सनातन धर्म है उसका स्ट्रक्चर है ये उसका

1036
01:12:59,520 --> 01:13:02,960
निचोड़ है ये जो बोल रहा है

1037
01:13:02,960 --> 01:13:07,040
ना तो फिर आप जो मुस्लिम की तरफ से जो पक्ष

1038
01:13:07,040 --> 01:13:11,160
प्रस्तुत कर रहे हो वो कौन था क्या था कुछ पता है आपको अगर आप

1039
01:13:11,160 --> 01:13:15,160
मुफ्ती वहां के जो वहां के जो स्कॉलर्स होते हैं वहां के जो

1040
01:13:15,160 --> 01:13:19,280
वो होते हैं वो बोलते आपको कि भाई हमारा जो अल्लाह है वो बिना कानों के

1041
01:13:19,280 --> 01:13:23,280
सुन सकता है उसको कानों की आवश्यकता नहीं है हमारा जो अल्लाह है व

1042
01:13:23,280 --> 01:13:27,680
बिना आंखों के देख सकता है उसको आप की आवश्यकता नहीं है व बोलता

1043
01:13:27,680 --> 01:13:31,760
आपको तो आप एक किसी अज्ञात व्यक्ति के

1044
01:13:31,760 --> 01:13:35,880
आधार पर उनकी मान्यताओं को डिसाइड कर ले रहे हो जज कर ले रहे हो यह कहां

1045
01:13:35,880 --> 01:13:37,400
तक सही

1046
01:13:37,400 --> 01:13:42,200
है आपने अभी तक फिर भी नहीं समझा मैं यह बोल रहा हूं

1047
01:13:42,200 --> 01:13:47,120
जब नहीं क्या हम उसको नहीं क्या ये प्रूव करके बता रहे हैं

1048
01:13:47,120 --> 01:13:51,200
क्या जिससे आपने बात की थी वो वहा का कोई परंपरा प्राप्त विद्वान

1049
01:13:51,200 --> 01:13:55,920
है क्योंकि सेन लेशन को वो भी मानते

1050
01:13:55,920 --> 01:14:00,400
क्या जिससे आपने बात की थी वो कोई परंपरा प्राप्त वहा का विद्वान

1051
01:14:00,400 --> 01:14:04,560
था एक्चुअली मैंने परंपरा प्राप्त विद्वान से भी बात

1052
01:14:04,560 --> 01:14:07,760
किया

1053
01:14:07,760 --> 01:14:12,080
है वह कौन था

1054
01:14:12,080 --> 01:14:16,800
उनके मौलवी वगैरे थे जो सनातन उनके जो

1055
01:14:16,800 --> 01:14:21,040
इलाम के मौलवी उनके जो पुजारी जो लोग रहते ना पुजारी

1056
01:14:21,040 --> 01:14:25,960
उनके पंडित नाम क्या था उन

1057
01:14:25,960 --> 01:14:29,120
नाम क्या मोहम्मद

1058
01:14:29,120 --> 01:14:33,640
अली अभी भी है वो

1059
01:14:33,640 --> 01:14:37,680
से प्रमाण य वीडियो देखेंगे तो देखेंगे उनका पक्ष

1060
01:14:37,680 --> 01:14:42,120
कैसे उन्होने रखा है बोल रहे अला से खाता चलो

1061
01:14:42,120 --> 01:14:46,120
आगे बढ़ते अगर आपने वहा के ट्रेडिशनल विद्वान से बात की

1062
01:14:46,120 --> 01:14:49,800
थ तोय अच्छी बात

1063
01:14:49,800 --> 01:14:54,000
है मगर फिर भी मगर फिर भी एक बात

1064
01:14:54,000 --> 01:14:58,160
य पर अधूरी कि अगर हमने किसी के रूप को नहीं देखा

1065
01:14:58,160 --> 01:15:02,240
है तो इससे सिद्ध नहीं होता है कि हम उसे नहीं

1066
01:15:02,240 --> 01:15:06,920
जानते हैं और अगर सिद्ध होता है तो आपको मुझे

1067
01:15:06,920 --> 01:15:10,920
आपको मुझे संतुष्ट करने के लिए सनातन सिद्धांत देना

1068
01:15:10,920 --> 01:15:15,080
है मैंने अभी आपसे पूछा था क्या आपके पास सनातन सिद्धांत है

1069
01:15:15,080 --> 01:15:19,400
तो आपने कहा था आपको सनातन सिद्धांत ही दे रहा हूं शास्त्र से दे रहा हूं

1070
01:15:19,400 --> 01:15:23,400
मगर अभी तक आपने शास्त्र से वो वचन नहीं दिया कि अगर हम

1071
01:15:23,400 --> 01:15:27,120
किसी के रूप को नहीं जान

1072
01:15:27,120 --> 01:15:31,160
नहीं तो इससे हो जाएगा हम उसको नहीं

1073
01:15:31,160 --> 01:15:35,280
जानते कि वो कौन हैमा जी आप अपना दिमाग लगा के प्रश्न

1074
01:15:35,280 --> 01:15:39,400
देखिए आपने शास्त्र पढ़े हो बहुत अच्छे तर्क लगाने में भी नहीं बहुत पंगत हो

1075
01:15:39,400 --> 01:15:43,600
आप आप क्या करते हो इधर से उधर से मोड़ के नहीं क्या आप अपना

1076
01:15:43,600 --> 01:15:47,680
दिखाना चाहते हो सिंपल सी बात है आपको मैंने पहले बता दिया

1077
01:15:47,680 --> 01:15:52,120
आप मेरे मित्र जैसे हो इसलिए क्या मैं आपको क्लियर कट बता रहा हूं

1078
01:15:52,120 --> 01:15:56,440
जब नहीं क्या एक शास्त्र में दिया गया है किरा ंद

1079
01:15:56,440 --> 01:16:00,520
पुलिन पुल कसाद आबीर सुंभ यवन कसा दया

1080
01:16:00,520 --> 01:16:04,960
इन सब लोगों ने क्या अगर भगवान का अगर नाम लेंगे तो उनका उद्धार

1081
01:16:04,960 --> 01:16:09,240
हो सकता है तो उनको भगवान का नाम देने का

1082
01:16:09,240 --> 01:16:13,840
अगर कोई जाकर दे रहा है तो वो कोई गलत नहीं कर रहा है पहला चीज

1083
01:16:13,840 --> 01:16:18,160
आपको मतलब मैंने आपसे नहीं पूछा

1084
01:16:18,160 --> 01:16:22,240
कि आप जो कर रहे हैं वो सही कर रहे हैं नाम दे कर के या गलत कर रहे

1085
01:16:22,240 --> 01:16:27,000
हैं ये विषय अंतर होता है आप पहले बात हो रही है

1086
01:16:27,000 --> 01:16:31,000
अभी बात ये अटकी है हमारी कि अगर हम किसी को नहीं जानते हैं

1087
01:16:31,000 --> 01:16:35,000
तो अगर हमने किसी को देखा नहीं है अगर हम उसके रूप

1088
01:16:35,000 --> 01:16:39,240
को नहीं जानते देखिए आप मुझे नहीं बोलने देंगे नहीं अभी बोलने

1089
01:16:39,240 --> 01:16:43,360
नहीं दूंगा इसलिए क्योंकि आप इसको पहले बताओ कि हम जो कर रहे हैं वो

1090
01:16:43,360 --> 01:16:47,360
सही है या गलत बाकी बात बाद में गलत हम अगर

1091
01:16:47,360 --> 01:16:51,640
गलत गलत कर रहे सनातन के नाम पर सनातना भास बांटते हो आप

1092
01:16:51,640 --> 01:16:56,680
धर्म के नाम पर धर्मा भास बांटते हो आप आध्यात्म क्या

1093
01:16:56,680 --> 01:17:00,720
जजमेंट बनता अगर कहीं अगर सुनिए पर्शियन भाषा में सुनिए अब

1094
01:17:00,720 --> 01:17:04,880
नाम बाटने की बात ही बता देर हू आपने क्या पर्शियन भाषा में राम का

1095
01:17:04,880 --> 01:17:08,920
अर्थ नौकर होता है पर्शियन भाषा

1096
01:17:08,920 --> 01:17:13,080
में राम का अर्थ नौकर होता है उस परिपेक्ष में यदि कोई राम नाम

1097
01:17:13,080 --> 01:17:17,880
का रट लगाएगा तो हम उसके साथ नहीं है

1098
01:17:17,880 --> 01:17:20,080
अगर वो राम का अर्थ नौकर समझते

1099
01:17:20,080 --> 01:17:25,760
हुए टेगा तो हम उसके साथ नहीं है ये श्लोक का मिनिंग बता भागवत

1100
01:17:25,760 --> 01:17:31,760
आपने मुझसे पूछा सही और गलत आपने मुझसे पूछा सही और गलत

1101
01:17:32,160 --> 01:17:36,640
सुनि आपने मुझसे पूछा है सही और गलत

1102
01:17:36,640 --> 01:17:41,320
अभी अभी अभी अभी देखिए आप निर्णायक मत बनिए

1103
01:17:41,320 --> 01:17:45,520
नहीं तो व ब हो जाए नि बर निर्णय बने तो नि

1104
01:17:45,520 --> 01:17:49,680
बना पड़ेगा आपसे मैंने जो पूछा है जो आप

1105
01:17:49,680 --> 01:17:53,720
उसके पीछे डेफिनेशन दे रहे हैं क्या वो सही है तो

1106
01:17:53,720 --> 01:17:57,880
आपसे मैंने पूछ अभी आपने कहा यदि कोई व्यक्ति किसी

1107
01:17:57,880 --> 01:18:02,000
के रूप को नहीं जानता है तो उससे सिद्ध होता है कि

1108
01:18:02,000 --> 01:18:06,080
हम उसे नहीं जानते हम नहीं जानते वो कौन है अब मैं आपसे पूछ रहा

1109
01:18:06,080 --> 01:18:10,120
हूं रूप को ना जानने से यह सिद्ध कहां से होता है कि हम नहीं जानते वो

1110
01:18:10,120 --> 01:18:14,120
कौन है दुनिया में ऐसी बहुत सी चीज जिनके बारे में मैंने

1111
01:18:14,120 --> 01:18:18,200
सिर्फ सुना है उनके रूप के बारे में मैंने कुछ नहीं सुना है फिर भी मैं जानता हूं वो

1112
01:18:18,200 --> 01:18:22,240
कौन है आपने भी दुनिया में ऐसी बहुत सी चीज है जिनके बारे में आपने

1113
01:18:22,240 --> 01:18:26,240
सुना है कि वो ऐसे ऐसे है मगर उनके के बारे में आपने नहीं सुना फिर भी

1114
01:18:26,240 --> 01:18:30,600
आप जानते हो आप कहते हो कि वो कौन है अगर आप मेरी बात से सहमत नहीं है

1115
01:18:30,600 --> 01:18:34,640
तो मुझे संतुष्ट कराने के लिए मुझे शास्त्र का वचन दीजिए आपने

1116
01:18:34,640 --> 01:18:35,240
कहा

1117
01:18:35,240 --> 01:18:39,400
कि मैं शास्त्र का वचन दे रहा हूं मगर आपने दिया नहीं आपने एक

1118
01:18:39,400 --> 01:18:43,400
आपके साथ जो घटनाक्रम हुआ रू दिया मत

1119
01:18:43,400 --> 01:18:47,800
बोलिए मैंने शास्त्र का प्रमाण दिया किरा हु पुलि पुलक

1120
01:18:47,800 --> 01:18:51,960
आर सुभ कया शस्त्र

1121
01:18:51,960 --> 01:18:56,160
का प्रमाण मैंने आपसे इस बारे में मा मैंने आपसे

1122
01:18:56,160 --> 01:19:01,040
शास्त्र का प्रमाण इस बारे में मांगा है कि हमारे

1123
01:19:01,040 --> 01:19:05,200
किसी के रूप किसी के रूप के बारे में ना जानने से ये सिद्ध

1124
01:19:05,200 --> 01:19:09,320
होता है कि हम उसे नहीं जानते इसके लिए कोई शास्त्रीय प्रमाण दीजिए

1125
01:19:09,320 --> 01:19:13,440
अगर आप चाहते हैं कि मैं आपके इस बात को मान लू भा क्यों

1126
01:19:13,440 --> 01:19:17,880
बेक फालतू का डिबेट कर रहे हो आप गलत मत बोलो

1127
01:19:17,880 --> 01:19:22,000
ये तो ये तो जनता देखेगी कौन निर्णायक बन रहा है कौन फालतू बोल

1128
01:19:22,000 --> 01:19:28,000
रहा है कौन विषयात कर रहा है ये सब जनता देखेगी

1129
01:19:28,600 --> 01:19:33,080
देखो आप कर रहे हो आप ये भी बोलो आप ये भी बोलो

1130
01:19:33,080 --> 01:19:37,240
आप य भी बोलो सब बोलूंगा चिंता मत करो मैं कोई डरने वाला व्यक्ति

1131
01:19:37,240 --> 01:19:39,800
से

1132
01:19:39,800 --> 01:19:43,960
नहीं अच्छा चलिए नेक्स्ट टॉपिक पर आते है

1133
01:19:43,960 --> 01:19:48,320
अब नेक्स्ट टॉपिक पर आ जाते है यस नेक्स्ट टॉपिक

1134
01:19:48,320 --> 01:19:52,360
क्या क्या स्न के द्वारा प्रतिपादित होने वाला जो

1135
01:19:52,360 --> 01:19:58,360
ईश्वर है वो सर्वशक्तिमान है

1136
01:20:00,880 --> 01:20:05,080
यस ठीक क्या वो किसी भी प्रकार के नियम

1137
01:20:05,080 --> 01:20:09,120
के नीचे नहीं है क्या वो किसी प्रकार के नियम के नीचे आने वाला

1138
01:20:09,120 --> 01:20:15,120
ना होकर सभी नियमों को बनाने वाला सर्व नियामक है

1139
01:20:15,400 --> 01:20:19,720
यस अच्छा तो

1140
01:20:19,720 --> 01:20:23,800
क्या वो सब कुछ कर सकता है

1141
01:20:23,800 --> 01:20:27,320
यस

1142
01:20:27,320 --> 01:20:31,360
ठीक है अब मुझे बताइए क्या वो शिव बनने के बाद वापस

1143
01:20:31,360 --> 01:20:35,520
कृष्ण बन सकता

1144
01:20:35,520 --> 01:20:40,960
है अगर कृष्णा चाहे

1145
01:20:40,960 --> 01:20:45,480
तो अगर कृष्ण चाहे तो बन सकता

1146
01:20:45,480 --> 01:20:49,680
है शिव जी चाहे तो ब यानी कि जब शिव के रूप में

1147
01:20:49,680 --> 01:20:55,240
यानी कि जब शिव के रूप में कृष्ण आते हैं तब भी वो पूर्ण होते हैं

1148
01:20:55,240 --> 01:20:59,320
ह पर पूण होते हैं वो सब

1149
01:20:59,320 --> 01:21:04,120
कुछ कर सकते हैं जो कृष्ण कर सकते

1150
01:21:04,120 --> 01:21:08,360
हैं अच्छा तो इसका अर्थ है कि जो य बात बोली जाती है कि

1151
01:21:08,360 --> 01:21:12,520
जिस प्रकार दू से दही बनता है पर दही से र नहीं उसी प्रकार से

1152
01:21:12,520 --> 01:21:16,560
से कृष्ण बनते हैं व कृष्ण से शिव बनते हैं पर कृष्ण से शिव से कृष्ण

1153
01:21:16,560 --> 01:21:20,680
नहीं बन सकते य बात गलत है अगर कृष्ण

1154
01:21:20,680 --> 01:21:25,560
चाहे तो दही को दूध बना सकते हैं

1155
01:21:25,560 --> 01:21:29,720
मैंने आपसे यह पूछा है यह बातन की तरफ से बोली जाती है कि कृष्ण

1156
01:21:29,720 --> 01:21:34,080
तो शिव बन सकते हैं पर शिव कृष्ण नहीं बन सकते य बात गलत है

1157
01:21:34,080 --> 01:21:38,160
अभी बहुत अच्छा चीज बोले कि कृष्ण जो है शिव बन सकते हैं शिव

1158
01:21:38,160 --> 01:21:42,240
जो है वो कृष्ण शिव अगर चाहे तो नहीं बन सकते क्योंकि भगवान

1159
01:21:42,240 --> 01:21:46,240
ने एक पूर्ण व्यक्ति बनाया और सुनि सु एक्स सुन

1160
01:21:46,240 --> 01:21:50,480
लीजिए येने क्या सपोज पकड़ लो मैं कृष्ण हूं और मैंने

1161
01:21:50,480 --> 01:21:54,560
ऐसे नहीं य शिवजी निकाला यह शिव जी पूर्ण है और

1162
01:21:54,560 --> 01:22:00,560
कृष्ण ने उनको बोला कि आप ये ये

1163
01:22:03,360 --> 01:22:07,480
ये सुन रहा हूं आपकी बात सुन रहा हूं ओके तो

1164
01:22:07,480 --> 01:22:11,480
अगर सपोज मैं ली सपोज बोल रहा हूं य है नहीं अगर मैं कृष्ण हूं

1165
01:22:11,480 --> 01:22:15,960
तो मैंने ऐसे करके शिवजी निकाला तो यह पूर्ण है य शिवजी

1166
01:22:15,960 --> 01:22:19,960
और इनको नहीं क्या कृष्ण ने कार्य दिया आपको ये ये

1167
01:22:19,960 --> 01:22:24,200
ये कार्य करना है तो बोले ठीक है तो अगर

1168
01:22:24,200 --> 01:22:28,320
नहीं ऐसा दे दिया तो अब नहीं के शिवजी जो है व

1169
01:22:28,320 --> 01:22:32,480
पूर्ण होने के बाद भी व वही कार्य करेंगे जितना उनको दिया गया व

1170
01:22:32,480 --> 01:22:36,560
ज्यादा नहीं करेंगे हा अगर कृष्ण अगर चाहे तो

1171
01:22:36,560 --> 01:22:40,600
वो शिव जी से भी प्रकट हो सकते हैं

1172
01:22:40,600 --> 01:22:45,120
उसके लिए आपको उदाहरण भी दे दूंगा साउथ में एक

1173
01:22:45,120 --> 01:22:49,840
शिवलिंग है उनको वो

1174
01:22:49,840 --> 01:22:53,960
एक राजा थे तो उन्होंने उनके जो भक्त थे उनको बोला कि तुम ओम

1175
01:22:53,960 --> 01:22:58,400
नम श लेकिन वो व्यक्ति वैष्णव थे इसलिए

1176
01:22:58,400 --> 01:23:02,480
नहीं उन्होंने कहा कि मैं ओम नम शिवाय नहीं बोलूंगा तो उन्होंने कहा

1177
01:23:02,480 --> 01:23:06,520
ओम नमो नरसिंहा तो तुरंत नहीं किया उस समय क्या

1178
01:23:06,520 --> 01:23:10,720
हुआ जैसे ही व राजा वो व्यक्ति को मारने के लिए गए तो शिवलिंग

1179
01:23:10,720 --> 01:23:14,880
को फाड़ के नरसिंह प्रकट हुए और वह राजा को मार दिए

1180
01:23:14,880 --> 01:23:19,400
मतलब शिवजी से भी कृष्णा प्रकट होते

1181
01:23:19,400 --> 01:23:24,640
हैं आपको कोई डाउट है तो बताइए

1182
01:23:24,640 --> 01:23:28,880
हा डाउट में पूछ रहा हूं बोलिए आपने

1183
01:23:28,880 --> 01:23:34,880
कहा कि ये मान लीजिए कृष्ण है

1184
01:23:34,920 --> 01:23:39,480
हा आपने कहा कि मान लीजिए कृष्ण ठीक है हा

1185
01:23:39,480 --> 01:23:43,480
अब इससे आपने शिव जी को अलग किया तो जो पूर्ण

1186
01:23:43,480 --> 01:23:47,640
की परिभाषा है वो ये कहती है कि पूर्ण से पूर्ण ही

1187
01:23:47,640 --> 01:23:51,640
निकलेगा हा ठीक है और आपने बाद में

1188
01:23:51,640 --> 01:23:55,800
माना भी आपने माना भी कि कृष्ण जो है

1189
01:23:55,800 --> 01:23:59,920
चाहे तो जो शिव जी है वो

1190
01:23:59,920 --> 01:24:04,120
भी उनसे भी प्रकट हो सकते इसका मतलब है कि शिवजी

1191
01:24:04,120 --> 01:24:08,760
में कृष्ण वाली सारी बात होनी चाहिए

1192
01:24:08,760 --> 01:24:14,280
हा तभी तो प्रकट होंगे ना कृष्ण शिवजी

1193
01:24:14,280 --> 01:24:18,520
से तो शिवजी में कृष्ण वाली सारी बातें होनी चाहिए या नहीं

1194
01:24:18,520 --> 01:24:24,520
य बताइए हा होना चाहिए

1195
01:24:24,520 --> 01:24:28,840
होना चाहिए बिल्कुल क रहे

1196
01:24:28,840 --> 01:24:32,840
तो जब शिव जी में कृष्ण वाली सारी बातें है शिवजी भी पूर्ण

1197
01:24:32,840 --> 01:24:36,840
है और कृष्ण भी पूर्ण है तो फिर आप क्यों कह रहे है

1198
01:24:36,840 --> 01:24:41,000
की शिव से कृष्ण नहीं बन सकते और अगर नहीं कह रहे हैं तो फिर

1199
01:24:41,000 --> 01:24:45,280
आपकी जो व बात है कही जाती है जिस प्रकार दूध से दही और सब वो गलत

1200
01:24:45,280 --> 01:24:49,640
है क्या अ क्या इसको फिर से आपको मैं बहुत क्लियर

1201
01:24:49,640 --> 01:24:53,760
समझा देता हूं अब नहीं क्या शिव जी जब प्रकट हुए तो शिवजी

1202
01:24:53,760 --> 01:24:57,880
कितना का करेंगे व कौन डिसाइड करेगा व

1203
01:24:57,880 --> 01:25:01,920
कृष्ण ही करेंगे कृष्ण तो मेरे अंडर

1204
01:25:01,920 --> 01:25:06,640
में क्या आपके अंडर में तो नहीं है ना मैं आपसे पूछ रहा हूं अगर

1205
01:25:06,640 --> 01:25:11,480
आपको आंसर दे रहा ह काम कन करेगा नहीं कह

1206
01:25:11,480 --> 01:25:15,600
रहा आपका कहने का अर्थ य है की क्योंकि कृष्ण नहीं

1207
01:25:15,600 --> 01:25:19,800
चाहते आपका कहने का अर्थ य है क्योंकि कृष्ण नहीं चाहते

1208
01:25:19,800 --> 01:25:24,920
इसलिए शिव से कृष्ण नहीं बनते ठीक है हा यस

1209
01:25:24,920 --> 01:25:30,760
क्योंकि कृष्ण बाधित नहीं

1210
01:25:30,760 --> 01:25:34,160
है नहीं

1211
01:25:34,160 --> 01:25:38,200
चाहते मैं आपसे एक करके पूछ आपका

1212
01:25:38,200 --> 01:25:42,240
कहने का मतलब यह है की क्योंकि कृष्ण नहीं चाहते

1213
01:25:42,240 --> 01:25:46,400
इसलिए जो शिव है उनसे

1214
01:25:46,400 --> 01:25:50,440
जो है कृष्ण नहीं बन सकते क्योंकि कृष्ण चाहते नहीं है और

1215
01:25:50,440 --> 01:25:54,600
जाहिर सी बात है उन्होने बोला होगा भागवत

1216
01:25:54,600 --> 01:26:00,600
में आपके पास प्रमाण होगा हां

1217
01:26:01,640 --> 01:26:05,640
है हा तो अगर कृष्ण नहीं

1218
01:26:05,640 --> 01:26:09,760
क्योंकि कृष्ण नहीं चाहते हैं इसलिए आप ये बोलते हैं कि शिव से

1219
01:26:09,760 --> 01:26:14,520
कृष्ण नहीं बन सकते

1220
01:26:14,520 --> 01:26:20,520
हम अच्छा अब मुझे आप ये बताइए क्या

1221
01:26:21,400 --> 01:26:25,920
कृष्ण बोलिए मतलब आप मेरे को ये बताइए आप जो

1222
01:26:25,920 --> 01:26:31,000
से बाधित है या फिर वो पूर्ण ईश्वर

1223
01:26:31,000 --> 01:26:35,400
है पूर्ण श्वर हा तो

1224
01:26:35,400 --> 01:26:39,560
अगर आपे तो उनके अन रूप भी पूर्ण है

1225
01:26:39,560 --> 01:26:44,040
वो जितने बात है बात की बात है

1226
01:26:44,040 --> 01:26:48,160
पहले कृष्ण पूर्ण है और वो जो चाहते हैं व उनके कोई

1227
01:26:48,160 --> 01:26:52,800
बाधा नहीं है ना ठीक है तो अब ऐसा हुआ

1228
01:26:52,800 --> 01:26:57,080
कृष्ण चाहते शिवजी प्रकट हो और एक दो तीन

1229
01:26:57,080 --> 01:27:01,400
चार पाच यह पांच कार्य शिवजी

1230
01:27:01,400 --> 01:27:06,480
करे तो अगर अगर वो उतना कर रहे

1231
01:27:06,480 --> 01:27:10,920
हैं तो हमको या आपको कुछ प्रॉब्लम

1232
01:27:10,920 --> 01:27:15,000
है नहीं प्रॉब्लम नहीं है मैं

1233
01:27:15,000 --> 01:27:19,160
ये पूछ रहा हूं क्या शिवजी में वो सारी एबिलिटीज है देखिए करना ना

1234
01:27:19,160 --> 01:27:23,480
करना अलग बात जैसे राम जीने

1235
01:27:23,480 --> 01:27:27,640
ला कम उनकी लाए हा क्योंकि देखिए

1236
01:27:27,640 --> 01:27:30,160
भगवान श

1237
01:27:30,160 --> 01:27:36,160
भगवान श्री कृष्ण की इच्छा है एबिलिटी

1238
01:27:37,560 --> 01:27:41,640
है एबिलिटी है

1239
01:27:41,640 --> 01:27:45,760
ना श्री कृष्ण भगवान के समान शिव जी में भी

1240
01:27:45,760 --> 01:27:50,000
सारी कलाए सारी शक्तियां सब कुछ है हा जब

1241
01:27:50,000 --> 01:27:54,680
कृष्ण चाहे तो वो प्रकट करा सकते हैं

1242
01:27:54,680 --> 01:27:58,680
मैं आपसे जो पूछ रहा हूं ये कह रहा हूं कि भगवान शिव में

1243
01:27:58,680 --> 01:28:03,440
भी वो सारे गुण है जो श जो श्री कृष्ण में है

1244
01:28:03,440 --> 01:28:07,480
हां खाली शिव जीी से नहीं आप में भी है भगवान चाहे तो आप में भी प्रकट

1245
01:28:07,480 --> 01:28:11,640
कर सकते हैं आपको भी नहीं क्या जैसे कोई जीव कभी कभी नहीं कि उनको भी अवतार कहा जाता

1246
01:28:11,640 --> 01:28:15,840
है तो अगर कृष्ण चाहे तो कहीं पर भी नहीं कि पूर्ण

1247
01:28:15,840 --> 01:28:19,920
होके प्रकट करा सकते हैल है अब आप अद्वैत अब आप द्वैत

1248
01:28:19,920 --> 01:28:25,760
को छोड़ के अद्वैत में पहुंच रहे हैं अब क्या कर

1249
01:28:25,760 --> 01:28:29,800
देखो प्रभ हम क्या कर अचिंत भदा द को भी ले साथ में को साथ

1250
01:28:29,800 --> 01:28:35,120
अचिंत भदा भी जाएंगे अगर य चर्चा ज्यादा लंबी नहीं हुई

1251
01:28:35,120 --> 01:28:41,120
तो मैं ये देख रहा हूं कोई कमेंट कैसे

1252
01:28:44,760 --> 01:28:48,560
आएगा पर मैं बैठा

1253
01:28:48,560 --> 01:28:52,600
हूं मतलब भगवान शिव जी को भगवान कृष्ण नेही

1254
01:28:52,600 --> 01:28:56,720
दिया है तो इसीलिए शिव जी ने क्या

1255
01:28:56,720 --> 01:29:00,960
कभी कृष्ण बनते नहीं है वह अपने मर्यादा में रहते हैं हां

1256
01:29:00,960 --> 01:29:05,320
अगर कृष्ण चाहे तो शिवजी में भी कृष्ण प्रकट हो सकते हैं

1257
01:29:05,320 --> 01:29:09,520
अगर अगर कृष्ण चाहे तो खंबे फाड़ के भी प्रकट हो सकते हैं अगर कृष्ण

1258
01:29:09,520 --> 01:29:13,720
चाहे तोय पूछ रहा हूं इसका मतलब यह कह रहे हैं आपके शिवजी

1259
01:29:13,720 --> 01:29:18,160
में वो सारी शक्तिया है वो सारी गुण है जो सारी

1260
01:29:18,160 --> 01:29:22,480
कलाए है जो कृष्ण में भी है हा लेकिन उनको भगवान

1261
01:29:22,480 --> 01:29:28,480
ने इतना काम करने के लिए दिया है पाच काम करने का बेटा ज्यादा नहीं करने

1262
01:29:28,480 --> 01:29:32,560
का नहीं नहीं वो सही है वो सही है आप जो

1263
01:29:32,560 --> 01:29:36,720
कह रहे हैं वो सही है व आप वो अभी के लिए मान लेता हूं अब मैं ये कह रहा

1264
01:29:36,720 --> 01:29:40,760
हूं कि क्योंकि आप को भगवान

1265
01:29:40,760 --> 01:29:44,680
श्री कृष्ण ने यह बताया है

1266
01:29:44,680 --> 01:29:48,840
कि मैंने शिव जी को बनाया है और शिवजी जो है

1267
01:29:48,840 --> 01:29:52,960
वही कार्य कर सकते हैं जो मैं कहता हूं इसलिए वो वो नहीं बन

1268
01:29:52,960 --> 01:29:56,960
सकते क्योंकि मैं नहीं कि उससे जो है कृष्ण निकल सके इसलिए आप

1269
01:29:56,960 --> 01:30:01,000
ये बातें कहते हैं कि कृष्ण तो शिव बन सकते हैं मगर शिव जो

1270
01:30:01,000 --> 01:30:05,200
है कृष्ण नहीं बन सकते क्योंकि भगवान नहीं चाहते ठीक है और ये बात आपको

1271
01:30:05,200 --> 01:30:09,200
भगवान ने बताई भी है ठीक अब मैं आपसे

1272
01:30:09,200 --> 01:30:13,760
पूछ रहा हूं क्या भगवान अपनी कही हुई बातों के विरुद्ध

1273
01:30:13,760 --> 01:30:18,840
कार्य कर सकते हैं कर सकते

1274
01:30:18,840 --> 01:30:23,120
है भगवान तो फिर जब आपको उन्होने ये बताया है कि

1275
01:30:23,120 --> 01:30:27,320
जो है शिव जीी जो है कृष्ण नहीं बनेंगे तो क्या उसके उलट शिवजी कृष्ण

1276
01:30:27,320 --> 01:30:32,000
बन सकते हैं बना है मैंने आपको उदाहरण भी दिया

1277
01:30:32,000 --> 01:30:36,600
एक जगह शिवजी कृष्ण बने आपको उदाहरण दिया एक भक्त है विषक सेन

1278
01:30:36,600 --> 01:30:40,680
तो फिर तो फिर तो फिर तो फिर ये कहना फिर गलत है

1279
01:30:40,680 --> 01:30:44,680
तो फिर ये कहना गलत है तो फिर ये कहना गलत है कि जिस प्रकार

1280
01:30:44,680 --> 01:30:48,720
दूध से दही बन जाता है पर दही से दूध नहीं मगर उसी प्रकार कृष्ण तो शिव बन जाते

1281
01:30:48,720 --> 01:30:52,920
हैं पर शिव जो है कृष्ण नहीं बन सकते तो फिर ये कहना गलत हो गया हम

1282
01:30:52,920 --> 01:30:55,840
बाउंड कर रहे

1283
01:30:55,840 --> 01:31:00,240
हा आपने सही बोला अ शिवजी चाहे तो कृष्ण नहीं बन

1284
01:31:00,240 --> 01:31:04,560
सकते शिवजी शिवजी के अंदर शिवजी शिवजी एक मिनट शिवजी

1285
01:31:04,560 --> 01:31:08,840
चाहे तो कृष्ण नहीं बन सकते यानी कि शिवजी के अंदर कुछ ऐसा है जो कृष्ण में है

1286
01:31:08,840 --> 01:31:13,640
शिवजी में नहीं है हां वो है व

1287
01:31:13,640 --> 01:31:17,640
भगवान के इच्छा के अनुसार काम करते हैं भगवान

1288
01:31:17,640 --> 01:31:21,960
हो कृष्ण हो गए भगवान में भगवान में एक गुण ज्यादा

1289
01:31:21,960 --> 01:31:27,520
है भगवान के पास गु ज्यादा है

1290
01:31:27,520 --> 01:31:31,560
वो ले सकते हैं शिवजी निर्णय नहीं ले सकते तभी तो

1291
01:31:31,560 --> 01:31:34,240
जा बाधित नहीं हुए ना अगर नहीं कि हम जबरदस्ती

1292
01:31:34,240 --> 01:31:38,360
नहीं किया बोल देंगे कि शिवजी जो चाहे व करित हो गए मतलब भगवान श्री

1293
01:31:38,360 --> 01:31:42,960
कृष्ण कुछ चाहते हैं व हो नहीं रहा है

1294
01:31:42,960 --> 01:31:47,280
नहीं देखिए कह रहा हूं

1295
01:31:47,280 --> 01:31:53,280
एक गुण श्री कृष्ण भगवान में एक गुण ज्यादा है एक गुण ज्यादा

1296
01:31:57,000 --> 01:32:01,000
बोलिए बोलिए बोलिए मैं तो बोल

1297
01:32:01,000 --> 01:32:05,120
ही रहा हूं ना मैं बोल रहा हूं एक गुण ज्यादा है

1298
01:32:05,120 --> 01:32:09,400
श्री कृष्ण में वो निर्णय ले सकते हैं मगर शिवजी निर्णय नहीं ले सकते

1299
01:32:09,400 --> 01:32:13,680
एक गुण ज्यादा है हा आपने जैसे

1300
01:32:13,680 --> 01:32:18,080
हमने बोला कि आपके कृष्ण क्या बाधित है हम

1301
01:32:18,080 --> 01:32:22,360
बाधित नहीं है भगवान श्री कृष्ण चाहे कि उनकी जब इच्छा

1302
01:32:22,360 --> 01:32:26,440
हुई तो शिवजी प्रकट हुए शिव जी कितना काम करेंगे वो कृष्ण ने

1303
01:32:26,440 --> 01:32:30,760
डिसाइड किया अगर नहीं क्या अगर कृष्ण चाहते हैं

1304
01:32:30,760 --> 01:32:35,000
मैंने आपसे पूछा क्या कृष्ण भगवान के पास एक

1305
01:32:35,000 --> 01:32:41,000
एक शक्ति ज्यादा है निर्णय लेने की भगवान शिव से है कि

1306
01:32:41,120 --> 01:32:45,360
नहीं इसका हां और ना मैंने का जवाब नहीं है मैंने आपको फिर से बो बोला

1307
01:32:45,360 --> 01:32:49,760
क्योंकि कृष्ण बाधित नहीं है और उन्होंने शिव जी को प्रकट किया

1308
01:32:49,760 --> 01:32:54,560
और उनको कहा कि तुमको यह पांच कार्य करना है वो उतना करते हैं

1309
01:32:54,560 --> 01:32:58,560
वो कभी भी नहीं क्या कृष्ण के ऊपर जका अर्थ तो य

1310
01:32:58,560 --> 01:33:02,760
दिख रहा है की केवल केवल कार अल अलग है वही

1311
01:33:02,760 --> 01:33:07,920
व्यक्ति ही शिव बन रहा है उम बाकी कोई तात्विक भेद नहीं

1312
01:33:07,920 --> 01:33:12,040
है जैसे की कोई व्यक्ति अपने कपड़ बदल रू ार

1313
01:33:12,040 --> 01:33:16,040
करता और व स्वयं भगवान भी है लेकिन वो काम करते हैं

1314
01:33:16,040 --> 01:33:20,320
कृष्ण के हिसाब से अब

1315
01:33:20,320 --> 01:33:24,440
पूछ है देखिए एपल दे मैं जो

1316
01:33:24,440 --> 01:33:28,520
आपसे पूछ रहा हूं आपने कहा शिवजी पूर्ण है शिवजी में

1317
01:33:28,520 --> 01:33:32,680
भी वो सारी बातें है जो कृष्ण में है तो शिवजी में य वाली बात

1318
01:33:32,680 --> 01:33:36,920
नहीं है कि वह अपनी इच्छा अनुसार कुछ कर सके व

1319
01:33:36,920 --> 01:33:41,000
कृष्ण के अनुसार करते है तोय

1320
01:33:41,000 --> 01:33:45,000
ये वाली बात नहीं है ना अपनी इा के अनुसार करने की तो

1321
01:33:45,000 --> 01:33:49,080
वो इसलिए नहीं क्या भगवान जो है पूर्ण पुरुषोत्तम भगवान

1322
01:33:49,080 --> 01:33:53,200
श्री कृष्ण है और बाकी सब लोग पूर्ण है तो इसका मतलब की

1323
01:33:53,200 --> 01:33:57,720
कृष्ण और शिव में अंतर है आपको

1324
01:33:57,720 --> 01:34:02,320
कुछ प्रॉब्लम है क्या उसमें तो

1325
01:34:02,320 --> 01:34:04,880
मैं वही तो आपसे पूछ रहा हूं ये कौन सी बात होती है जब

1326
01:34:04,880 --> 01:34:08,960
भी मैं आपसे कोई दृष्टांत पूछता हूं आप कहते हो आपको कुछ प्रॉब्लम है

1327
01:34:08,960 --> 01:34:13,600
क्या उसमें भाई यहां पर हम लोग प्रॉब्लम है तभी तो आए हैं

1328
01:34:13,600 --> 01:34:17,760
हा मेरे को तो प्रॉब्लम दिखने रहा है इसलिए मैं बोल रहा हूं अभी देखिए आपको एक और

1329
01:34:17,760 --> 01:34:21,760
एक एग्जांपल मैं आपसे वही तोब जब आपसे दो टू बात

1330
01:34:21,760 --> 01:34:25,800
पूछी जाती है तो आप ये बोलने लगते हो कि आपको कुछ प्रॉब्लम है भाई मैं पूछ

1331
01:34:25,800 --> 01:34:30,160
आपने कहा शिवजी में वो सारी चीजें है जो कृष्ण में है मगर अभी आप ये कह रहे हो

1332
01:34:30,160 --> 01:34:34,400
शिवजी अपनी इच्छा अनुसार कार्य नहीं कर सकते कृष्ण कर सकते हैं

1333
01:34:34,400 --> 01:34:38,440
यानी कि अंतर है हम अगर शिव जी को हमें

1334
01:34:38,440 --> 01:34:42,560
पूर्ण मानना है पूर्ण सिद्ध करना है तो हमें मानना पड़ेगा कि कृष्ण ही शिव

1335
01:34:42,560 --> 01:34:46,600
बने हैं इसलिए उनमें कोई कमी नहीं है और हम ये जो कह रहे हैं ये केवल भक्ति

1336
01:34:46,600 --> 01:34:50,760
रस के वशीभूत हो कर के कह रहे हैं कि जो कृष्ण का भक्त है उसको कृष्ण

1337
01:34:50,760 --> 01:34:56,040
में ही सब कुछ दिखाई दे रहा है रस के रस के कारण वो ऐसी बातें कर रहा है

1338
01:34:56,040 --> 01:35:00,160
कि कृष्ण तो शिव बन सकते हैं पर शिव कृष्ण नहीं बन सकते रस

1339
01:35:00,160 --> 01:35:04,160
के कारण शिव पुराण में भी ऐसी बातें है कि शिवजी जो कर सकते हैं वो कृष्ण नहीं कर

1340
01:35:04,160 --> 01:35:08,160
सकते रस के कारण मगर इनको हम तात्विक रूप से अंतिम निर्णायक

1341
01:35:08,160 --> 01:35:12,440
रूप से सिद्धांत नहीं मान सकते कि जो शिव जीी

1342
01:35:12,440 --> 01:35:16,440
कर सकते हैं वो कृष्ण नहीं कर सकते और जो कृष्ण कर सकते वो शिवजी नहीं कर सकते हम इसको

1343
01:35:16,440 --> 01:35:20,080
तात्विक सिद्धांत के रूप में नहीं ले सकते हां मैंने

1344
01:35:20,080 --> 01:35:24,200
अ भी वही बोला अब देखिए शिव जी का बात हम छोड़ दीजिए अभी

1345
01:35:24,200 --> 01:35:28,280
देखिए जगन्नाथ बलदेव सुभद्रा महारानी है तो बलदेव भी नहीं

1346
01:35:28,280 --> 01:35:32,400
क्या भगवान ही है लेकिन वो भी नहीं क्या भगवान की

1347
01:35:32,400 --> 01:35:36,680
इच्छा के अनुसार काम करते हैं हमारा जो सिद्धांत

1348
01:35:36,680 --> 01:35:40,680
ऐसा है अकेला ईश्वर कृष्णा और बाकी सब भृति

1349
01:35:40,680 --> 01:35:44,920
उनके सब दास है तो इसीलिए नहीं किया जो

1350
01:35:44,920 --> 01:35:48,920
जी वो आपका भक्ति भाव हो सकता है मगर उसको आप अंतिम निर्णायक के

1351
01:35:48,920 --> 01:35:53,720
रूप में नहीं ठोक सकते ना लोगों पर क्योंकि वो

1352
01:35:53,720 --> 01:35:57,800
सचाई नहीं है देखो देखो आपके ऊपर हमने कभी आके थोपा

1353
01:35:57,800 --> 01:36:01,840
नहीं कि आप जबरदस्ती नहीं कृष्ण को मानो चलिए ठीक चलिए इसको

1354
01:36:01,840 --> 01:36:05,960
इसको भी ले लेते हैं हम इसको भी लेंगे हम इसको भी ले लेते हैं अब

1355
01:36:05,960 --> 01:36:09,960
आपने कहा कि हमारा ऐसा है आपने क्या कहा

1356
01:36:09,960 --> 01:36:14,640
कि हमारा ऐसा है ठीक है तो यहां पर परिस्थिति लग गई

1357
01:36:14,640 --> 01:36:19,360
इसका मतलब आपके द्वारा दी जाने वाला जो ज्ञान है वो सनातन नहीं है

1358
01:36:19,360 --> 01:36:23,600
100 पर है अरे कैसे

1359
01:36:23,600 --> 01:36:27,880
सनातन के लिए अथ वेद में आया जो किसी भी देश काल परिस्थिति से प्रभावित

1360
01:36:27,880 --> 01:36:32,320
ना हो आप वो ज्ञान दे रहे कि हमारा ऐसा है

1361
01:36:32,320 --> 01:36:35,200
आप सनातन सिद्धांत क्या है वो

1362
01:36:35,200 --> 01:36:39,560
बताइए हमारा ऐसा मत बताइए सनातन सिद्धांत बताइए

1363
01:36:39,560 --> 01:36:43,760
सनातन सिद्धांत बताता हूं हमारे सिद्धांत के हिसाब से हम अगर कृष्ण

1364
01:36:43,760 --> 01:36:48,320
भक्त है फिर हमारा ये हमारा जो परिस्थिति हो गई ना

1365
01:36:48,320 --> 01:36:52,520
परिस्थिति हो गई ना हमारा ग है क्या ये सनातन विरुद्ध है

1366
01:36:52,520 --> 01:36:56,640
क्या हमारे सिधांत के हिसाब से हमारा श मत कर हमारा करेंगे

1367
01:36:56,640 --> 01:37:00,920
तो सनातन नहीं है तो सनातन क्या सनातन

1368
01:37:00,920 --> 01:37:06,000
सि बता सनातन सनातन सिधांत क्या होता

1369
01:37:06,000 --> 01:37:10,280
बता बोल दे प्र

1370
01:37:10,280 --> 01:37:14,440
नहीं होता इससे मतलब नहीं कोई

1371
01:37:14,440 --> 01:37:18,520
मेरा ऐसा मानना है उसका ऐसा सोचना है वसा माना जाता है तो

1372
01:37:18,520 --> 01:37:22,520
व सनातन नहीं

1373
01:37:22,520 --> 01:37:26,600
है किसका क्या मानना है वो मत बताइए हां मेरे

1374
01:37:26,600 --> 01:37:30,880
को ये बताइए भगवत गीता में भगवान श्री कृष्ण कहते हैं मन मना भव मत

1375
01:37:30,880 --> 01:37:34,880
भक्तो मया जीी माम नमस्कर तो यह सनातन है तो मैं

1376
01:37:34,880 --> 01:37:40,880
शक्र करता हूं नहीं है तो फिर आप डिसाइड करिए क्या करना

1377
01:37:41,520 --> 01:37:45,560
चाहिए मैं आपसे पूछ तो रहा हूं मैंने आपको बोला

1378
01:37:45,560 --> 01:37:49,680
आपने कहा कि शिवजी में वो सारी चीजें हैं जो कृष्ण में भी

1379
01:37:49,680 --> 01:37:53,920
है और लीला पूर्वक जब श्री कृष्ण

1380
01:37:53,920 --> 01:37:58,040
से लीला पूर्वक तात्विक रूप से नहीं लीला पूर्वक जब श्री कृष्ण जो है शिव बनते

1381
01:37:58,040 --> 01:38:02,400
हैं तो वो लीला पूर्वक कृष्ण की बात मानते हैं

1382
01:38:02,400 --> 01:38:06,400
लिखा मगर वास्तविकता में कृष्ण कौन

1383
01:38:06,400 --> 01:38:10,840
शास्त्र में अरे मैं लिखा हुआ नहीं बता रहा हूं मैं लि

1384
01:38:10,840 --> 01:38:15,040
लिखा हुआ भी बता दूंगा लिखा हुआ भी बता दूंगा अगर अभी मैं ये नहीं कह रहा हूं सिद्धांत

1385
01:38:15,040 --> 01:38:19,080
है मैं आपके भाव को मैं आपके भाव को समझने का प्रयास कर रहा हूं

1386
01:38:19,080 --> 01:38:23,080
वो बोल रहा हूं आपका कहने का अर्थ यह है कि शिवजी में वो

1387
01:38:23,080 --> 01:38:27,200
सारी बाते हैं जो कृष्ण में भी है मगर लीला पूर्वक

1388
01:38:27,200 --> 01:38:31,560
जब कृष्ण शिव बन जाते हैं तो शिव के रूप में वो सारे कार्य नहीं करते हैं

1389
01:38:31,560 --> 01:38:35,560
जो सारे कार्य वो कृष्ण बनके कर सकते हैं

1390
01:38:35,560 --> 01:38:37,640
मगर तात्विक रूप से इनम कोई भेद नहीं है

1391
01:38:37,640 --> 01:38:43,640
अगर तात्विक रूप से भेद नहीं है तो फिर यह कहना गलत है कि शिवजी में कम क्वालिटीज

1392
01:38:45,280 --> 01:38:49,280
है और अगर तात्विक रूप से भेद है तो यह कहना गलत है

1393
01:38:49,280 --> 01:38:53,760
कि शिवजी में भी वो सारी क्वालिटीज है जो कृष्ण में है

1394
01:38:53,760 --> 01:38:57,960
से कौन सी बात माने अभी तत्व के हिसाब से

1395
01:38:57,960 --> 01:39:02,000
दूध से दही बनता है और दही कभी दूध नहीं बन सकता फिर आप भक्तो

1396
01:39:02,000 --> 01:39:06,040
देखिए मैं सनातन सिद्धांत की आप बात करिए भक्तों के हिसाब से क्या मत बात करिए

1397
01:39:06,040 --> 01:39:10,040
परिस्थिति मत बताइए बाबा मैं सनातन सिद्धांत की बात कर रहा

1398
01:39:10,040 --> 01:39:14,120
हूं ब्रह्म संहिता में लिखा है ब्रह्म

1399
01:39:14,120 --> 01:39:18,200
देखिए फिर वही बात आ जाएगी हमारे जो पुराण ग्रंथ है

1400
01:39:18,200 --> 01:39:22,320
ब्रह्म समता ग्रंथ है इनमें कई जगह पर रस पूर्वक बात भी हुई

1401
01:39:22,320 --> 01:39:26,360
है जैसे आपकी 2.2 भगवत गीता में ही रस पूर्वक का कि

1402
01:39:26,360 --> 01:39:30,360
विष्णु में वो सारी बातें नहीं है जो कृष्ण में है अब इसको रस

1403
01:39:30,360 --> 01:39:36,240
मानेंगे या ये माने कि कृष्ण जो है कृष्ण विष्णु से भी अलग है

1404
01:39:36,240 --> 01:39:41,040
है तत्व है क्या है तत्व

1405
01:39:41,040 --> 01:39:45,320
तो चलिए उस पर आ जाएंगे अभी आप ये मत बताइएगा

1406
01:39:45,320 --> 01:39:49,320
कि भक्ति भक्ति का ये है सनातन बताइए आप ये

1407
01:39:49,320 --> 01:39:53,600
मत बताइए हमारा सिद्धांत है हां ठीक है

1408
01:39:53,600 --> 01:39:57,600
हमारा बोले तो मैं सनातन बोल रहा था अगर आपका कुछ अलग है तो मेरे

1409
01:39:57,600 --> 01:40:01,600
को नहीं पता अभी भाग सनातन की डेफिनेशन क्या है भाई साहब

1410
01:40:01,600 --> 01:40:06,480
आप ये बताइए मुझे पहले हा बहुत अच्छी प्रश्न पूछा आपने

1411
01:40:06,480 --> 01:40:11,120
सत चित और आनंद से आता है

1412
01:40:11,120 --> 01:40:16,120
सनातन जो कहा लिखा है

1413
01:40:16,120 --> 01:40:20,120
बोलिए बोलिए कहां लिखा है क लिखा है सच्चिदानंद

1414
01:40:20,120 --> 01:40:24,200
कहा लिखा है हा लिखा है क जग

1415
01:40:24,200 --> 01:40:28,200
लिखा है सत्य ब कई जगह लिखा

1416
01:40:28,200 --> 01:40:32,160
सचन वही कृष्ण

1417
01:40:32,160 --> 01:40:36,320
है मैंने आपसे पूछा सनातन की परिभाषा शास्त्रों

1418
01:40:36,320 --> 01:40:40,360
से बताइए शस्त्र मैंने बाहर

1419
01:40:40,360 --> 01:40:44,440
से बताया क्या अरे और क्या

1420
01:40:44,440 --> 01:40:49,000
सनातन की परिभाषा है नित्य स्थाई सनातन नित

1421
01:40:49,000 --> 01:40:53,680
स्थाई जो किसी भी देश काल परिस्थिति में ना बदले उसका नाम

1422
01:40:53,680 --> 01:40:57,720
है अब आप सच्च आनंद कोला रहे हां

1423
01:40:57,720 --> 01:41:02,280
कृष्ण परिवर्तन नहीं होते है अरे भाई कृष्ण की बात ही नहीं हो रही

1424
01:41:02,280 --> 01:41:06,480
जब मैं आपसे ये पूछ रहा हूं कुछ

1425
01:41:06,480 --> 01:41:10,960
नहीं दिख रहा है कुछ नहीं दिख रहा है सेटिंग्स की दिक्कत है

1426
01:41:10,960 --> 01:41:16,960
कोई कमेंट्स नहीं दिख रहे इस

1427
01:41:17,920 --> 01:41:22,440
समय [संगीत] तो

1428
01:41:22,440 --> 01:41:26,880
ठीक है नित जो मैंने आपसे पूछा है

1429
01:41:26,880 --> 01:41:31,160
सनातन की परिभाषा क्या है तो आप जो है जो प्राप्त

1430
01:41:31,160 --> 01:41:35,200
है मनुष्य का वो बता रहे हैं सच्चिदानंद मैंने कहा सनातन

1431
01:41:35,200 --> 01:41:39,280
की परिभाषा क्या है कुल मिलाकर के सनातन की परिभाषा जो है वो ये है

1432
01:41:39,280 --> 01:41:43,320
जो किसी भी देश का परिस्थिति में ना बदले मगर आप जब ज्ञान दे रहे हैं तो कह रहे कि हम

1433
01:41:43,320 --> 01:41:47,520
किसी पर थोप नहीं रहे हम ऐसा मानते हैं तो आप जब ये कह देंगे

1434
01:41:47,520 --> 01:41:51,760
कि हम ऐसा हमारा ऐसा मानना है तो फिर वो सनातन ज्ञान नहीं कहलाएगा क्योंकि सनातन

1435
01:41:51,760 --> 01:41:55,960
ज्ञान प परिस्थिति हम बोले तो क्या हम बोले तो क्या हम

1436
01:41:55,960 --> 01:42:00,320
बोले तो शस्त्र आपने कहा हमारा ऐसा मानना वैष्णव लोगों का

1437
01:42:00,320 --> 01:42:04,320
अरे भाई हमारा बोले तो हमारे सनातन जो सिद्धांत के

1438
01:42:04,320 --> 01:42:08,360
हिसाब से मैं बोल रहा हूं शास्त्र से बोलूंगा देखिए श्रीमद भागवत में एक श्लोक

1439
01:42:08,360 --> 01:42:13,400
आता है ते च अंश कला

1440
01:42:13,400 --> 01:42:17,480
उमस भगवान की अनेक कला है अंश है अंश

1441
01:42:17,480 --> 01:42:22,280
के अंश है लेकिन कृष्ण स्तु भगवान

1442
01:42:22,280 --> 01:42:24,640
स्वयं

1443
01:42:24,640 --> 01:42:29,600
तो अभी नहीं जब कृष्णत भगवान स्वय कहा गया

1444
01:42:29,600 --> 01:42:33,040
तो अब मेरे को इसको स्वीकार करना चाहिए कि मेरे को आप स्वीकार

1445
01:42:33,040 --> 01:42:37,320
करना बताइ आप अगर भगवतम से बड़े हैं

1446
01:42:37,320 --> 01:42:41,440
भाई बात तो ये चल रही थी ना सुनिए मैं देखिए

1447
01:42:41,440 --> 01:42:46,080
आप विषयात कर रहे हैं आप विष कर रहे

1448
01:42:46,080 --> 01:42:50,120
सनातन की परिभाषा मैंने तब पूछी आपसे इसलिए पूछी

1449
01:42:50,120 --> 01:42:54,280
क्योंकि आप ये कह रहे हैं कि जब

1450
01:42:54,280 --> 01:42:58,520
कृष्ण से शिव बने तो शिव के अंदर सारी एबिलिटी

1451
01:42:58,520 --> 01:43:02,880
है मगर वो जो है जब

1452
01:43:02,880 --> 01:43:07,040
क्या कहते है एक एबिलिटी नहीं है कि अपनी इच्छा अनुसार कार्य कर सके य

1453
01:43:07,040 --> 01:43:11,040
एटी में नहीं है ठीक है अब जब मैंने आपसे

1454
01:43:11,040 --> 01:43:15,080
ये पूछा यदि शिव के अंदर एक एक सूत

1455
01:43:15,080 --> 01:43:19,520
भी कमी है तो इसका अर्थ है कि जो शिव है व

1456
01:43:19,520 --> 01:43:24,400
पूण नहीं है तो आपका यह कहना गलत है शिव पूर्ण है

1457
01:43:24,400 --> 01:43:28,480
और अगर वो उनके अंदर व सारी चीज व अपनी इच्छा

1458
01:43:28,480 --> 01:43:32,680
अनुसार भी कार्य कर सकते हैं एक भी चीज ऐसी नहीं है जो ऐसी ना हो जो कृष्ण

1459
01:43:32,680 --> 01:43:37,240
में उम ना हो तो फिर आपका यह कहना गलत है कि व अपनी इच्छा अनुसार निर्णय नहीं कर सकते

1460
01:43:37,240 --> 01:43:41,360
यह सब रस की बाते है तो जब मैंने आपसे प्रश्न किया उसके

1461
01:43:41,360 --> 01:43:45,520
उत्तर में आपने कहना चालू किया कि हमारा ऐसा मानना है

1462
01:43:45,520 --> 01:43:49,600
हम किसी पर थोप नहीं रहेरा

1463
01:43:49,600 --> 01:43:53,680
सनातन सिद्धांत अगर बता रहे हैं तो हमारा ऐसा मानना नहीं कहेंगे

1464
01:43:53,680 --> 01:43:58,240
वो सत्य बता रहे हम किसी को मानना हो तो मानो नहीं मानना है तो मत मानो

1465
01:43:58,240 --> 01:44:02,480
यही सत्य है हमारा ऐसा मानना है ये नहीं है

1466
01:44:02,480 --> 01:44:06,480
तो इस इस परिपेक्ष में मैंने आपसे पूछा पहले आप जब

1467
01:44:06,480 --> 01:44:10,480
आप ये नहीं मानोगे कि सनातन की परिभाषा क्या तो मैंने उस

1468
01:44:10,480 --> 01:44:14,640
परिपेक्ष में आपसे सनातन की परिभाषा पूछी जब आपसे मैंने सनातन की परिभाषा पूछी

1469
01:44:14,640 --> 01:44:19,080
तो आपने भागवत उस क भगवान सनातन नहीं है क्या आपकी बात माने

1470
01:44:19,080 --> 01:44:24,120
मैंने कहा है क्या कि भगवान नहीं है मैंने कहा क्या

1471
01:44:24,120 --> 01:44:28,120
तोब क्या कहना चाहते हो अरे भाई

1472
01:44:28,120 --> 01:44:32,160
पहले पहले मुझे बताइए मैंने कहा कृष्ण भगवान नहीं है कि कहा

1473
01:44:32,160 --> 01:44:36,320
कि नहीं कहा ये बताइए हां और देखिए वहां पे

1474
01:44:36,320 --> 01:44:40,800
जब कहा गया कि भगवान मैंने ये कहा कृष्ण भगवान नहीं है

1475
01:44:40,800 --> 01:44:45,200
मैंने ये कहा कृष्ण भगवान नहीं है

1476
01:44:45,200 --> 01:44:49,600
मैंने ये कहा कृष्ण भगवान नहीं है हां

1477
01:44:49,600 --> 01:44:54,160
पूछ रहा हू मैं आपसे पूछ

1478
01:44:54,160 --> 01:44:58,240
हा बोलिए क्या प्रश्न पूछ रहे है मैंने अभी आपसे पूछा है कि कृष्ण

1479
01:44:58,240 --> 01:45:02,760
भगवान है नहीं है मैंने ऐसा बोला क्या अने

1480
01:45:02,760 --> 01:45:04,680
कुछ हा आपने ऐसा

1481
01:45:04,680 --> 01:45:08,760
कुछ बोला नहीं है कि भगवान पूर्ण पुरुषोत्तम भगवान श्री कृष्ण है तो आपने य

1482
01:45:08,760 --> 01:45:13,000
क्यों कहा कि भागवत की माने की आपकी माने हा क्योंकि

1483
01:45:13,000 --> 01:45:17,200
उसी भागवत में भगवान स्वयं को मैं नहीं मानता हूं ये मैंने

1484
01:45:17,200 --> 01:45:21,240
कब बोला कृष्ण भगवान स्व को नहीं मानता हूं य मैंने कब

1485
01:45:21,240 --> 01:45:26,160
बोला अगर मैंने नहीं बोला तो आप ने क्यों कहा कि आपकी माने कि भागवत की माने

1486
01:45:26,160 --> 01:45:30,720
आप बोल रहे हैं कि जो आपने मुझे भागवत के अगेंस्ट क्यों

1487
01:45:30,720 --> 01:45:34,920
दिखाया इसलिए दिखाया क्योंकि भागवत में यह कहा गया है कि वैष्णव

1488
01:45:34,920 --> 01:45:38,960
नाम यथा संभु आपने मुझे भागवत के

1489
01:45:38,960 --> 01:45:43,000
क्यों दिखाया इसलिए दिखाया क्योंकि

1490
01:45:43,000 --> 01:45:47,160
आप बोल रहे हैं कि शिवजी और कृष्ण जो है भगवान

1491
01:45:47,160 --> 01:45:53,160
स्वयं आपला

1492
01:45:53,240 --> 01:45:57,440
आप शिवजी और क की है आपने

1493
01:45:57,440 --> 01:46:01,520
क भगवान स्वयं लाइन य की है उसके बारे में बताइए क्या मैंने

1494
01:46:01,520 --> 01:46:07,520
उसका विरोध किया है और अगर नहीं किया तो

1495
01:46:07,920 --> 01:46:12,160
आपने है कृष्णा और शिवजी

1496
01:46:12,160 --> 01:46:16,240
अगर इक्वल है जब बोल रहे हैं यह बात मैं नहीं आप बोल रहे

1497
01:46:16,240 --> 01:46:20,680
चलिए आपसे काफी देर चर्चा हो गई आप आए आभार है ठीक है बहुत

1498
01:46:20,680 --> 01:46:24,840
ठीक आपसे बात ई बात ई अब

1499
01:46:24,840 --> 01:46:29,720
किसी और दिन हम लोग चर्चा करेंगे दो घंटे लगभग हो चुके बात करते

1500
01:46:29,720 --> 01:46:34,040
करते आपके आने के लिए आवान दर्शकों से दर्शकों

1501
01:46:34,040 --> 01:46:39,040
से मेरा व है अपील कि आप अपने

1502
01:46:39,040 --> 01:46:45,040
रिव्यू दीजिए की यह जो भाई साहब जो आए

1503
01:46:46,080 --> 01:46:52,080
हैं इनका जो है कैसा रहा आना और जाना

1504
01:47:14,520 --> 01:47:19,200
तो अभी मैं दर्शकों को केवल अ

1505
01:47:19,200 --> 01:47:23,840
ठीक है आराध जी फिर आपको किसी दिन आमंत्रित करेंगे आपके

1506
01:47:23,840 --> 01:47:29,040
आने के लिए

1507
01:47:29,040 --> 01:47:33,040
आभार जी तो आपको मैं आशा करता हूं

1508
01:47:33,040 --> 01:47:37,920
आज की चर्चा अच्छी लगी हो और आप किसी त तक पहुंच

1509
01:47:37,920 --> 01:47:42,080
पाए कुछ टेक्निकल दिक्कत है तो मैं आप लोग कमेंट्स नहीं देख पा रहा

1510
01:47:42,080 --> 01:47:46,920
हूं अगली बार और तैयारी के साथ आएंगे और चर्चा

1511
01:47:46,920 --> 01:47:52,920
में आने के लिए सभी का धन्यवाद जय श्री राम

1512
01:48:02,160 --> 01:48:06,680
अच्छा एक कुछ बातें मैं आपको जाते जाते बता दूं जैसे

1513
01:48:06,680 --> 01:48:10,840
कि जो कंक्लूजन निकला व वही निकला कुल मिलाकर के जो हमेशा निकलता

1514
01:48:10,840 --> 01:48:15,040
है जब हमने इनसे पूछा कि कुरान की सीमा

1515
01:48:15,040 --> 01:48:19,040
का ईश्वर कृष्ण है तो ये बोलते नहीं है उनका ज्ञान

1516
01:48:19,040 --> 01:48:23,080
अधूरा और गलत भी है अधूरा क्यों है क्योंकि भाई जो एक लाइन हमारे य लिखी है

1517
01:48:23,080 --> 01:48:27,080
वही उनके य भी ख इसलिए वो अधूरा है विरुद्ध नहीं है गलत नहीं है

1518
01:48:27,080 --> 01:48:32,520
इसके बाद फिर हमने जब इनसे पूछा कि वो जब आप कुरान के ईश्वर

1519
01:48:32,520 --> 01:48:38,000
को कह सकते हो कृष्ण के समान है तो आप

1520
01:48:38,000 --> 01:48:42,400
अ शिव पुराण के ईश्वर को क्यों नहीं कह सकते हो इसमें भी इनका

1521
01:48:42,400 --> 01:48:44,200
जवाब था कि क्योंकि वो

1522
01:48:44,200 --> 01:48:48,240
जानते नहीं है कि वो कौन है अल्लाह इसलिए हम अल्लाह

1523
01:48:48,240 --> 01:48:53,280
से मैच करा देते हैं मगर शिव को नहीं जान शिव को जानते इसलिए हम शिव से मैच नहीं कराते

1524
01:48:53,280 --> 01:48:57,520
इस पर भी आप देख लीजिएगा कितना बड़ा अच्छा तर्क है और इसके

1525
01:48:57,520 --> 01:49:02,160
बाद फिर बाद में दू ही वाली बात आई उन्होने बोला

1526
01:49:02,160 --> 01:49:06,320
कि शिव जी में सारी एबिलिटी है जो कृष्ण में है मगर फिर बाद

1527
01:49:06,320 --> 01:49:10,560
में जब य वाली बात आएगी व क्यों नहीं बन सकते तो अपनी इच्छा अनुसार नहीं बन सकते तो इच्छा वाली

1528
01:49:10,560 --> 01:49:14,680
एबिलिटी है वो शिव में नहीं है वो अंतर हो रहा है इसका मतलब कृष्ण से जब

1529
01:49:14,680 --> 01:49:19,000
शिव बन रहे हैं तो वो पूर्ण नहीं है मगर क्या है कि इनको

1530
01:49:19,000 --> 01:49:23,040
ऐसी बात बोलनी है कि सबका मन रह जाए तो इसलिए ऐसी बात बा

1531
01:49:23,040 --> 01:49:27,040
बोलेंगे कि शि पूर्ण भी है और अपनी इच्छानुसार काम भी

1532
01:49:27,040 --> 01:49:31,120
नहीं कर सकते भाई अगर वो इच्छानुसार काम नहीं कर सकते तो पूर्ण क्या से बाधित

1533
01:49:31,120 --> 01:49:35,360
हो गए और अगर अपनी इच्छा अनुसार कार्य कर सकते तो बाधित नहीं हुए

1534
01:49:35,360 --> 01:49:39,560
तो इनको यह भी कहने में दिक्कत है कि वो बाधित है ये भी कहने में दिक्कत

1535
01:49:39,560 --> 01:49:43,560
है कि वो अपनी इच्छा अनुसार काम कर

1536
01:49:43,560 --> 01:49:47,640
सकते हैं तो इनको इसीलिए सारी बातें कहते हैं उनका ज्ञान

1537
01:49:47,640 --> 01:49:51,800
जैसे कुरान के विषय में उका ज्ञान और ये अभी और बड़े मंच पर होंगे ना और

1538
01:49:51,800 --> 01:49:56,040
बड़े मंच पर होंगे तो य भी नहीं कहे जोभी इन्होने अधूरा औरण

1539
01:49:56,040 --> 01:49:59,720
कहा है तो संभवत य क जो इनके बड़े

1540
01:49:59,720 --> 01:50:04,200
डर य भी नहीं कहे और

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01:50:04,200 --> 01:50:08,200
इनके कई ग्रंथ है हमारे पास जोभी ले नहीं

1542
01:50:08,200 --> 01:50:12,240
तो ठीक है ये तीन पॉइंट पर बात हुई है काफी लंबी चर्चा

1543
01:50:12,240 --> 01:50:16,760
हो गई दो घंटे हो चुके जहा बैठा हुआ य पर

1544
01:50:16,760 --> 01:50:21,040
हवा की और कोई व्यवस्था नहीं है तो धीरे धीरे देखि स्वेटिंग

1545
01:50:21,040 --> 01:50:25,760
आ चुकी पसीना आ चुका है तो इसलिए दो घंटे हो चुके तो मैंने कहा कि अब

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01:50:25,760 --> 01:50:30,880
इसको जो है आगे बढ़ाया सभी को जय श्री

1547
01:50:30,880 --> 01:50:35,360
राम हा मगर एक चीज और अच्छी है

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01:50:35,360 --> 01:50:39,400
की इनका जो व्यवहार था व अभी तक जो आए थे उनसे थोड़ा

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01:50:39,400 --> 01:50:43,400
बेटर थाक आधे अधूरे सही मगर

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01:50:43,400 --> 01:50:47,640
सनातन से जुड़े हुए हैं व सनातना भास है व अलग बात है धर्मा भास है

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01:50:47,640 --> 01:50:51,640
सभी को ज श्रम
