1
00:00:00,400 --> 00:00:04,400
स्पन को फॉलो करते हैं पियूष नाम है इनका

2
00:00:04,400 --> 00:00:09,000
और अभी रिसेंट हमने एक शॉर्ट वीडियो डाला था जिसमें हमने

3
00:00:09,000 --> 00:00:13,040
मैं वृंदावन से वापस आ रहा था रात

4
00:00:13,040 --> 00:00:17,280
में मैंने ट्रेन में देखा कि एक फॉरेनर थे जो

5
00:00:17,280 --> 00:00:22,120
वहां पर कुछ बुक्स को सेल कर रहे थे

6
00:00:22,120 --> 00:00:26,240
और मैंने जब उनसे उनके उनसे मिला इंटरेक्ट

7
00:00:26,240 --> 00:00:30,520
हुआ बहुत सी चीजें ऐसी पता चली जो जिह नैतिक

8
00:00:30,520 --> 00:00:34,520
नहीं कह सकते जैसे सबसे पहली बात तो उनके पास ना तो वहां जहां

9
00:00:34,520 --> 00:00:40,280
पर वो थे वहां पर उनके पास उपयुक्त टिकट था ना

10
00:00:40,280 --> 00:00:44,440
ही ना टिकट था ना उनकी आईडी थी उनके पास फिर उनसे

11
00:00:44,440 --> 00:00:48,520
हमने ये पूछा कि भाई आप कौन से स्कन मंदिर से जुड़े हुए हैं

12
00:00:48,520 --> 00:00:52,760
तो उन्होंने बोला कि मैं रशियन हूं और मैं स्कन मंदिर

13
00:00:52,760 --> 00:00:57,640
कानपुर है वहां से मैं बिलोंग करता हूं वहां से मैं जुड़ा हुआ हूं

14
00:00:57,640 --> 00:01:01,880
इसके बाद फिर हमने उनकी बुक्स देखी तो जैसा कि उस वीडियो में बताया गया कि बुक्स

15
00:01:01,880 --> 00:01:06,200
में प्रेज किया गया था ऐसी बुक्स थी उनके पास जो प्रेस

16
00:01:06,200 --> 00:01:10,320
कर रही थी कुरान के ईश्वर को और बाइबल के ईश्वर

17
00:01:10,320 --> 00:01:15,040
को तो हमारा कहना यह है कि भाई कृष्ण भक्ति के नाम पर

18
00:01:15,040 --> 00:01:15,540
जो

19
00:01:15,440 --> 00:01:19,600
अब्राह्मिक आडलज है ब्राहमम जो चीज है उसको

20
00:01:19,600 --> 00:01:24,240
क्यों सनातन के साथ मिक्स किया जा रहा है अब इसमें

21
00:01:24,240 --> 00:01:28,240
जो पियूष जी है इनको आपत्ति कुछ इन्होने जताई उसी शर्ट में उसी शर्ट वीडियो

22
00:01:28,240 --> 00:01:32,360
में तो फिर वहा पर चर्चा हुई और चर्चा के दौरान फिर ये हुआ कि चलिए

23
00:01:32,360 --> 00:01:36,400
लाइव आ कर के चर्चा करते हैं तो जी पीयूष जी

24
00:01:36,400 --> 00:01:40,600
सबसे पहले मैं आप थोड़ा सा ये बता दीजिए कि आप स्पन से कहां से जुड़े

25
00:01:40,600 --> 00:01:44,840
हैं किस प्रकार से आप स्पन को फॉलो करते हैं वो बता हां तो

26
00:01:44,840 --> 00:01:48,880
पहले मैं एक्चुअली शिव जी को बहुत फॉलो करा करता था पहले मैं 2023 की

27
00:01:48,880 --> 00:01:52,920
बात है कि मैं शिव जी को बहुत फॉलो करा करता था पहले मैं मैं आपसे

28
00:01:52,920 --> 00:01:56,920
ये नहीं पूछ रहा हूं आप गलत जा रहे हैं मैं आपसे पूछ हं वो बता

29
00:01:56,920 --> 00:02:01,280
रहा हूं वो बता रहा हूं कि कैसे जड़ा का जो स्कन से कनेक्शन

30
00:02:01,280 --> 00:02:05,600
है जैसे आप अहमदाबाद के स्कन से हैं या आपके टीचर कौन है

31
00:02:05,600 --> 00:02:09,840
वस्तुनिष्ठ बात पूछ रहा हं बात अंदर अभी भक्त नहीं बना

32
00:02:09,840 --> 00:02:14,120
मैंचली उसका फॉलो करता हूं फलो मतलब अनुयाई

33
00:02:14,120 --> 00:02:17,360
मैं आपसे वही पूछ रहा हं

34
00:02:17,360 --> 00:02:21,200
अनुयाई करता बहुत

35
00:02:21,200 --> 00:02:25,520
मानता कौन सा कौन सा वो हैन मंदिर

36
00:02:25,520 --> 00:02:29,920
और किनकी शिक्षाओं से आप इफेक्टेड है वो पूछ रहा हूं मैंको

37
00:02:29,920 --> 00:02:30,800
अहमदाबाद

38
00:02:30,800 --> 00:02:35,000
से मतलब मैं मतलब वहा जाता हूं और मैं अमोग लीला

39
00:02:35,000 --> 00:02:39,000
प्रभु से मतलब मैं उनसे मैंने सीखा बहुत कुछ और उनसे मैंने

40
00:02:39,000 --> 00:02:43,000
शिक्षा ली है सारी अच्छा अमोग लीला जी को फॉलो करते

41
00:02:43,000 --> 00:02:47,560
हुए आप इस कंट अमोग लीला प्रभु को

42
00:02:47,560 --> 00:02:51,800
अच्छा वैसे आप माइंड नहीं करिएगा मैं एक छोटा सा क्वेश्चन था काफी दिनों से मैं उलझन

43
00:02:51,800 --> 00:02:55,800
में था तो आप आ गए तो मैं आपसे भी पूछ लेता हूं ये बीच में एक बात

44
00:02:55,800 --> 00:03:00,080
हुई थी कि अमोग लीला जी को सस्पेंड किया गया था हम

45
00:03:00,080 --> 00:03:04,200
अब जैसे मान लीजिए आप अमोग लीला जी को फॉलो कर रहे हैं तो एक कहीं

46
00:03:04,200 --> 00:03:08,720
ना कहीं व आपके एक तरीके से गुरु है है ना हा मेरे एक्चुअली

47
00:03:08,720 --> 00:03:13,000
वो को जानते नहीं है एक्चुअली वो य दूर रहकर ही

48
00:03:13,000 --> 00:03:17,560
आप उनको फॉलो कर रहे हैं आपके लिए वो गुरु है हा वो मेरे लिए एक्चुअली

49
00:03:17,560 --> 00:03:21,800
गुरु हैलिए गुरु है तो अब बात यह आती है कि जब स्कोन ने उन्हे

50
00:03:21,800 --> 00:03:25,960
सस्पेंड किया तो जिस पद पर वो है

51
00:03:25,960 --> 00:03:30,240
उस पद पर वो नहीं थे निलंबित हो गए उन्होंने

52
00:03:30,240 --> 00:03:34,320
स्वामी विवेकानंद को उन्होंने कुछ मेरा प्रश्न मेरा प्रश्न पूरा हो जाने

53
00:03:34,320 --> 00:03:38,480
दीजिए वो आपके गुरु है इकोन ने एक महीने के लिए उनको

54
00:03:38,480 --> 00:03:42,640
बैन किया अब बैन का मतलब है कि ये जो भी कार से जुड़े हुए थे उसमें

55
00:03:42,640 --> 00:03:45,960
वो बैन हो गए बंद हो गया उनका वो कार हां एक महीने के लिए

56
00:03:45,960 --> 00:03:50,120
वो गोवर्धन पर रहने चले गए थे हां तो जो एक महीने की अवधि है

57
00:03:50,120 --> 00:03:54,280
उस बीच आपने उनको गुरु माना था कि नहीं माना था क्योंकि वो तो

58
00:03:54,280 --> 00:03:58,880
ब नहीं उनके मैं वीडियोस देखता था ऐसे ही जो पहले अपलोड

59
00:03:58,880 --> 00:04:03,160
उस बीच उनके प्रति आपकी गुरुत्व वाली भावना थी या नहीं थी हा मानता

60
00:04:03,160 --> 00:04:07,440
था उन्होने बो उन्होने सॉरी बोल दिया बात ही खत्म हो गई

61
00:04:07,440 --> 00:04:11,560
मेरा प्रश्न समझ नहीं पा रहे जब वो सस्पेंड हुए

62
00:04:11,560 --> 00:04:16,000
तो वो उस पोजीशन पर नहीं थे जिस पोजीशन पर वो पहले थे

63
00:04:16,000 --> 00:04:20,360
है इसी को कहते ना सस्पेंशन हा व पोजीशन

64
00:04:20,360 --> 00:04:24,480
मलब नॉलेज तो उनके पास है उन की मतलब वो सस्पेंड हो गए

65
00:04:24,480 --> 00:04:28,480
उन्होने सॉरी बोला और गोवर्धन चले भी गए आप आगे जा रहे मैं

66
00:04:28,480 --> 00:04:32,520
आपसे पूछ रहा हूं मैं आपसे य पूछ रहा हूं कि जब वो सस्पेंड हुए

67
00:04:32,520 --> 00:04:36,640
थे अमोला जी तो जो एक महीने की अवधि है

68
00:04:36,640 --> 00:04:42,640
उस बीच आपकी भावना उनके प्रति गुरुत्व वाली थी कि नहीं

69
00:04:42,800 --> 00:04:47,040
नहीं एक महीने के लिए उनको मानता था ऐसा कुछ बात नहीं है

70
00:04:47,040 --> 00:04:51,160
गुरु के रूप में मानते थे तो फिर उस बीच उस बीच जब आपने उनको

71
00:04:51,160 --> 00:04:55,600
गुरु के रूप में माना तो फिर आपने वहां पर इकन का खंडन कर दिया ककन

72
00:04:55,600 --> 00:05:00,280
कह रहा हैय आदमी बन है हमारी तरफ से हा

73
00:05:00,280 --> 00:05:04,480
स्कन ये कह रहा है वो इंसान तो खुद अच्छे

74
00:05:04,480 --> 00:05:08,520
स्कन ये कह रहा है स्कन ये कह रहा है ये आदमी बैन

75
00:05:08,520 --> 00:05:12,640
है हमारी तरफ से हम इसको बैन कर रहे हैं बैन

76
00:05:12,640 --> 00:05:16,760
मतलब एक तरीके से फुल स्टॉप बंद कर देना उसकी चीजों को ओके तो उसके बावजूद

77
00:05:16,760 --> 00:05:20,760
जब स्कोन ने उनको बैन किया फिर भी आप उनके प्रति गुरु का भाव कैसे रख

78
00:05:20,760 --> 00:05:24,800
रहे हैं वो एक वैष्णव है तो

79
00:05:24,800 --> 00:05:28,920
वैष्णव का उनकी बैन की गई ना एक महीने एक महीने नहीं थे ना वो

80
00:05:28,920 --> 00:05:33,120
जो भी थे तो है उन दिल से तो वैष्णव है ही वो

81
00:05:33,120 --> 00:05:38,360
मैं आपसे कह रहा हूं चलिए इन है

82
00:05:38,360 --> 00:05:40,920
चलिए

83
00:05:40,920 --> 00:05:45,200
कता आप मेरा प्रश्न समझ नहीं पा रहे हैंस

84
00:05:45,200 --> 00:05:49,280
वो जिस डेजिग्नेशन पर थे जो भी डेजिग्नेशन है उनकी उससे उन्हे

85
00:05:49,280 --> 00:05:53,320
बैन किया किसने स्न ने अब अभी भी आप अगर उनके साथ वैसा

86
00:05:53,320 --> 00:05:57,960
ही व्यवहार कर रहे है जैसा पहले कर रहे थे उनकी

87
00:05:57,960 --> 00:06:02,040
नेशन उनकी क्वालिटी के तोन ने ज

88
00:06:02,040 --> 00:06:06,040
हा तोन ने क्योंकि उनको बैन किया है ना तो आपको या तो स्न

89
00:06:06,040 --> 00:06:10,440
को मानना होगा उस बीच या फिर आपको को मानना होगा

90
00:06:10,440 --> 00:06:14,960
इनम से किसको माना आपने मैं तो दोनों को ही माना था

91
00:06:14,960 --> 00:06:19,040
मतलब ऐसे कुछ था नहीं माइंड में उनको मा आपको सोचना

92
00:06:19,040 --> 00:06:23,560
चाहिए देखिए मान लीजिए कोई व्यक्ति है पुलिस ऑफिसर

93
00:06:23,560 --> 00:06:27,760
है अब उस पर चार्ज लग गया सस्पेंशन का तो जो उसके

94
00:06:27,760 --> 00:06:32,360
नीचे के वो होंगे जो उससे ऑर्डर्स लेते होंगे चीज लेते होंगे

95
00:06:32,360 --> 00:06:36,440
वो उस बीच उसको वैसे देखेंगे क्या अपने अधिकारी के रूप में अफसर के रूप

96
00:06:36,440 --> 00:06:40,960
में नहीं अगर देखेंगे तो डिपार्टमेंट का विरोध है

97
00:06:40,960 --> 00:06:45,040
और नहीं देखेंगे ऑफिसर का विरोध तो करना ही है क्योंकि वो सस्पेंड है तो

98
00:06:45,040 --> 00:06:49,040
वही मैं कह रहा हूं कि बीच में आपने उनको देखा तो उतनी देर

99
00:06:49,040 --> 00:06:53,560
के लिए आपने खुद ही स्कन का विरोध किया ना इकन का

100
00:06:53,560 --> 00:06:57,640
उसन का मैंने विरोध मतलब ऐसा कह तो नहीं सकते

101
00:06:57,640 --> 00:07:02,640
इनडायरेक्ट वे में आपने नहीं दिया इस बात पे

102
00:07:02,640 --> 00:07:06,760
हां अच्छा एक चीज और है आप आए हैं तो फिर मैं मन कर

103
00:07:06,760 --> 00:07:11,200
रहा है पूछने का ये इसकन का अंतिम निर्णायक कौन है

104
00:07:11,200 --> 00:07:12,960
अंतिम फैसला लेने वाला कौन

105
00:07:12,960 --> 00:07:17,080
है अंतिम फैसले लेने वाला जीबीसी

106
00:07:17,080 --> 00:07:21,120
है शायद त जीबीसी कोई व्यक्ति है क्या नहीं

107
00:07:21,120 --> 00:07:25,920
वो उनको मैं जानता वो ग्रुप ऑफ जिन्होंने वो

108
00:07:25,920 --> 00:07:30,200
प्रिंटिंग में पता नहीं वो क्या करते हैं आपको ये नहीं पता आपके

109
00:07:30,200 --> 00:07:34,840
पास जो शिक्षा आ रही है उसका अंतिम निर्णायक कौन है

110
00:07:34,840 --> 00:07:39,000
जैसे कोई गड़िया वैष्णव संप्रदाय को फॉलो कर रहा है उसको मालूम है कि भाई

111
00:07:39,000 --> 00:07:43,000
अंतिम निर्णायक पुंडर जी है कोई शंकराचार्य शंकर मत

112
00:07:43,000 --> 00:07:47,000
को फॉलो कर रहा है उसको मालूम है अंतिम निर्णायक शंकराचार्य कोई रामानुजा

113
00:07:47,000 --> 00:07:51,080
चार को फॉलो कर रहा है तो उसको मालूम अंतिम निर्णायक जो है जो रामानुजा चार

114
00:07:51,080 --> 00:07:55,240
के पद पर बैठे हुए जो आचार्य होंगे वो होंगे निंबार्का को फॉलो कर रहा है तो निंबार्क

115
00:07:55,240 --> 00:07:59,560
होंगे आपके अंतिम निर्णायक कौन है इस कन के तो जो अ प्र

116
00:07:59,560 --> 00:08:03,560
वो जो शिक्षा पढ़ाते हैं वो सब प्रभुपाद की बुक्स को

117
00:08:03,560 --> 00:08:07,600
लेकर पढ़ाते हैं प्रभुपाद जी जीवित नहीं है ना नहीं

118
00:08:07,600 --> 00:08:11,600
वो पर उन्होंने खुद कहा है कि मेरे जाने के बाद मैं अपने बुक्स में तो जिंदा

119
00:08:11,600 --> 00:08:16,360
रहूंगा ही अरे बुक्स में जिंदा है ठीक है

120
00:08:16,360 --> 00:08:20,360
बुक्स में तो जिंदा है और और बड़े बड़े आचार्य जैसे

121
00:08:20,360 --> 00:08:24,920
निंबार्क आचार्य हो गए आप प्रश्न से भटक रहे हैं

122
00:08:24,920 --> 00:08:28,160
आप प्रश्न से भटक रहे मेरा कहने का अर्थ ये है कि

123
00:08:28,160 --> 00:08:32,160
आपके यहां पर मान कि अभी अमोग लीला का

124
00:08:32,160 --> 00:08:36,240
और किसी दूसरे स्पन के व्यक्ति का आपस में

125
00:08:36,240 --> 00:08:40,440
झगड़ा हो मान लो झगड़ा ना हो का और

126
00:08:40,440 --> 00:08:44,440
हा किसी का मनमुटाव कोई वैचारिक मतभेद आम बात है ऐसा हो

127
00:08:44,440 --> 00:08:48,640
जाना किसी एक पॉइंट को लेकर किसी एक पॉइंट को लेकर के दोनों लोग आपस

128
00:08:48,640 --> 00:08:53,200
में सहमत ना हो ऐसा हो सकता है जब ऐसा हो सकता है

129
00:08:53,200 --> 00:08:57,440
जब ऐसा हो सकता है तो ऐसी स्थिति में जब स्कोन वाले का दूसरे

130
00:08:57,440 --> 00:09:01,560
स्कोन वाले से सहमति नहीं हो रही है तो वहा निर्णायक कौन

131
00:09:01,560 --> 00:09:05,680
है मतलब अभी जो हो रहा है मतलब अभी ऐसा कुछ

132
00:09:05,680 --> 00:09:09,720
हुआ तो निर्णय करने वाला कौन है जैसे अमोग लीला जी ने कुछ गलत बोल

133
00:09:09,720 --> 00:09:13,800
दिया बोला ना तो जी तो ऊपर से

134
00:09:13,800 --> 00:09:17,880
उनके ऊपर की अथॉरिटी ने यह कहा कि अमोग लीला जी को बैन किया

135
00:09:17,880 --> 00:09:22,200
जाता है है ना अब ये बताइए मुझे कि फाइनल

136
00:09:22,200 --> 00:09:26,320
अथॉरिटी में कौन बैठा हुआ है इसकन में उन्होंने वो

137
00:09:26,320 --> 00:09:30,560
इकन बैठा हुआ है एक्चुअली अरेन कोई आदमी है ना जो साइन

138
00:09:30,560 --> 00:09:34,640
करेगा अमोग लीला जी पर ठप्पा लगाएगा बैन कर रहे हैं हम इसे वो नहीं खबर कोई

139
00:09:34,640 --> 00:09:38,760
व्यक्ति होगा ना कि कंप्यूटर होगा नहीं वो नहीं खबर है मेरे को कि न्हों

140
00:09:38,760 --> 00:09:42,840
उनको बैन किया वो उन्होंने स्वामी विवेकानंद के ऊपर उन्होने कुछ गलत बोल

141
00:09:42,840 --> 00:09:43,340
दिया

142
00:09:43,160 --> 00:09:47,200
वो मुझे पता है वो मुझे पता है वो क्या हुआ था सब कुछ पता है मेरा कहने का

143
00:09:47,200 --> 00:09:51,240
अर्थ ये है आपको ये नहीं पता है कि आपके पास जो शिक्षा आ रही

144
00:09:51,240 --> 00:09:55,240
है उसमें अंत में कौन बैठा हुआ है जो साइन करेगा

145
00:09:55,240 --> 00:09:59,720
कोई कंप्यूटर तो बैठा नहीं है बड़े बड़े मतलब वो शिक्षा जो बता दे

146
00:09:59,720 --> 00:10:03,800
उसके बारे में कह रहे हो वो शिक्षा देते हैं वो जैसे कि अभी एक निर्णय

147
00:10:03,800 --> 00:10:07,920
लिया गया कि अमोग लीला जी ने गलती कर दी है उनको बैन किया जाता है

148
00:10:07,920 --> 00:10:12,080
ये निर्णय लेने का हक किसके पास है लास्ट फाइनल जिसके ऊपर कोई ना हो

149
00:10:12,080 --> 00:10:16,240
कौन है वो वो तो नहीं खबर मेरे को जो उसका प्रेसिडेंट होगा इकन

150
00:10:16,240 --> 00:10:20,400
का वही बोलेगा जो प्रेसिडेंट है जैसे वो आपको पता होना चाहिए ना कि आपके इकन

151
00:10:20,400 --> 00:10:24,640
का प्रेसिडेंट कौन है हम मोहन रूपा प्रभु मोहन रूपा प्रभु

152
00:10:24,640 --> 00:10:28,680
जो प्रेसिडेंट है मोहन रूपा अंतिम निर्णायक है हो

153
00:10:28,680 --> 00:10:32,720
सकते हैं क् वो प्रेसिडेंट है और हो सकते हैं पर बात नहीं होती देखिए मैं

154
00:10:32,720 --> 00:10:36,720
आपको ये सवाल दे दे रहा हूं आप पता करिएगा वापस जाके इसकन

155
00:10:36,720 --> 00:10:40,800
का अंतिम निर्णायक कौन है कल को अगर कोई बात होगी इसी तरीके की दोबारा कोई बात

156
00:10:40,800 --> 00:10:45,360
होती है तो अंतिम फैसला कौन लेगा इस कन में कौन है ओके

157
00:10:45,360 --> 00:10:49,400
अच्छा भाई कोई कंपनी तो है नहीं बोर्ड ऑफ डायरेक्टर्स की कि बोर्ड ऑफ डायरेक्टर्स मिलकर के

158
00:10:49,400 --> 00:10:53,480
तो ये ये बताइए कि ये कंपनी है वो लोग ही है वो लोग ही हैसा उन्होंने बोला

159
00:10:53,480 --> 00:10:57,600
था कि उन्होंने क्यों बोला विवेकानंद के बारे में नहीं नहीं वो अलग देखिए

160
00:10:57,600 --> 00:10:58,440
उन्हो वो सही

161
00:10:58,440 --> 00:11:02,720
थे कि गलत है वो सही थे कि गलत थे वो तो एक अलग

162
00:11:02,720 --> 00:11:06,760
परिपेक्ष है कि अमोग लीला जी सही थे कि गलत थे वो एक अलग परिपेक्ष

163
00:11:06,760 --> 00:11:11,240
है मेरा जानने का अर्थ ये है क्या स्कन को फॉलो करने वाला

164
00:11:11,240 --> 00:11:15,280
व्यक्ति एक आम व्यक्ति यह जानता है कि उसके पास

165
00:11:15,280 --> 00:11:19,520
जो भी चीजें आ रही है उसका फैसला कौन कर रहा है

166
00:11:19,520 --> 00:11:24,320
अंतिम निर्णय कौन ले रहा है यह नहीं मालूम है ना उसके बारे में नहीं मालू

167
00:11:24,320 --> 00:11:28,400
हा मालूम होना चाहिए वैसे चलिए अब अब हम

168
00:11:28,400 --> 00:11:33,480
लोग मुख्य विषय पर आते हैं ओके

169
00:11:33,480 --> 00:11:37,720
कि मुख्य विषय ये है कि हां

170
00:11:37,720 --> 00:11:42,040
मुझे भी ऐसा ही है मालूम है कि कोई जद्वेत नानाम के कन्वर्टेड हिंदू

171
00:11:42,040 --> 00:11:46,280
हैं जो ये सब देखते हैं तो विषय तो वैसे बहुत बहुत ज्यादा

172
00:11:46,280 --> 00:11:50,880
है मुझे ये बताइए कि ये जो तामसिक कहते हैं जो

173
00:11:50,880 --> 00:11:55,000
शिव पुराण आदि को ये क्या है चक्कर है एक्चुअली देखो कुल

174
00:11:55,000 --> 00:12:00,080
मिला के 18 पुराण है कुल मिला के 18 ओके

175
00:12:00,080 --> 00:12:04,120
उसमें से छह पुराण है तामसिक लोगों के लिए मतलब उनको वो तामसिक में नहीं

176
00:12:04,120 --> 00:12:08,160
आते हैं उनको तामसिक से ऊपर उठाने के लिए तामसिक लोगों के लिए

177
00:12:08,160 --> 00:12:12,240
वो तामसिक पुराण में नहीं आते हैं छह पुराण है तामसिक लोगों के लिए छह पुराण

178
00:12:12,240 --> 00:12:16,320
राजसिक लोगों के लिए और ऑथें सिटी ऑथें सिटी

179
00:12:16,320 --> 00:12:20,360
जो सात्विक पुराण की ज्यादा मानी जाती है क्यों क्योंकि भगवत गीता में

180
00:12:20,360 --> 00:12:24,560
कहा गया है सतोगुण से ज्ञान की प्राप्ति होती है

181
00:12:24,560 --> 00:12:28,800
सतोगुण से ज्ञान की प्राप्ति होती है तो छह पुराण जो सात्विक माने जाते

182
00:12:28,800 --> 00:12:32,800
उसम परमहंस पुराण जो जो निर्गुण है वो है

183
00:12:32,800 --> 00:12:38,400
श्रीमद भगवत भागवत अच्छा जो

184
00:12:38,400 --> 00:12:43,120
हा तो छह पुराण तामसिक है

185
00:12:43,120 --> 00:12:47,600
उनको उनको तामसिक से ऊपर उठाने के लिए अच्छा ठीक है

186
00:12:47,600 --> 00:12:48,600
तोय

187
00:12:48,600 --> 00:12:52,720
के लिएन के टेंपल में कोई व्यक्ति जब आता है

188
00:12:52,720 --> 00:12:56,800
तो किसी डेटोनेटर से चेक किया जाता है कि यह आदमी तामसिक

189
00:12:56,800 --> 00:13:00,960
है या सात्विक है शिक्षा जो जो

190
00:13:00,960 --> 00:13:05,040
शिवजी को ही मानते हैं उनके लिए है

191
00:13:05,040 --> 00:13:09,080
यानी कि स्कन के गेट प आप पूछते हैं कि आप शिवजी को तो नहीं मानते अगर शिवजी को मानते हो तो

192
00:13:09,080 --> 00:13:13,360
अंदर मत आओ आप जाओ तामसिक पुराण पढ़ो नहीं नहीं ऐसा नहीं है समझो

193
00:13:13,360 --> 00:13:17,360
कोई कोई तामसिक है समझो मैं को खबर वो तामसिक है वो भी

194
00:13:17,360 --> 00:13:21,360
श्रीमद भागवत पढ़ सकता है कह र ह मेरा प्रश्न आप

195
00:13:21,360 --> 00:13:25,400
सुनिए मेरा प्रश्न आप पहले समझ लीजिए आपने कहा कि जो

196
00:13:25,400 --> 00:13:29,760
तामसिक पुराण है वो तामसिक प्रवृत्ति

197
00:13:29,760 --> 00:13:33,800
वाले लोगों के लिए उनको वहां से निकालने के लिए वहां से ऊपर उठाने

198
00:13:33,800 --> 00:13:37,920
के लिए अब स्कन के पास वो कौन सी प्रणाली है

199
00:13:37,920 --> 00:13:42,160
जिससे वह यह चेक करता है कि कौन व्यक्ति तामसिक है कौन नहीं है और

200
00:13:42,160 --> 00:13:46,280
क्या इस कन इस बात को इंप्लीमेंटेशन भी करता है क्या वो

201
00:13:46,280 --> 00:13:50,320
कुछ लोगों को एक मिनट क्या आज तक उसने कुछ लोगों

202
00:13:50,320 --> 00:13:54,400
से ऐसा कहा कि आप लोग अंदर मत आइए आप लोग हमारी भगवत गीता मत

203
00:13:54,400 --> 00:13:58,520
लीजिए आप लोग भागवत नहीं आप लोग शिव पुराण पढ़िए क्या इस कौन ने ऐसा कहा

204
00:13:58,520 --> 00:14:03,440
अभी तक नहीं ही है जैसे देखो

205
00:14:03,440 --> 00:14:03,940
नहीं करता

206
00:14:03,760 --> 00:14:07,880
है इसका अर्थ है इसका अर्थ है कि इस कन के अनुसार दुनिया

207
00:14:07,880 --> 00:14:12,240
में कोई भी तामसिक है ही नहीं मैं बताता हूं जैसे देखो जितनी मेडिसिन

208
00:14:12,240 --> 00:14:16,520
होती है जितनी बीमारिया उतनी मेडिसिन ठीक है

209
00:14:16,520 --> 00:14:20,600
जैसे कोई तामसिक है वो भी श्रीमद् भागवत को मान सकता है जो राजस है वो भी मान सकता

210
00:14:20,600 --> 00:14:25,720
है सबका इलाज एक मतलब जितनी प्रॉब्लम है उतनी ही दवाइया

211
00:14:25,720 --> 00:14:30,360
याका इलाज है श्रीमद् भागवत इलाज है

212
00:14:30,360 --> 00:14:34,840
तो कोई श्रीमद भागवत पढ़ लेगा उसने सब कुछ पढ़ लिया अच्छा बताओ

213
00:14:34,840 --> 00:14:39,800
कितने श्लोक है सारे पुराण पुराण देखो तो 5 लाख लोक है

214
00:14:39,800 --> 00:14:43,800
5 लाख शलोक कौन ब इने सारे आप विषय से भटक रहे हो मेरा

215
00:14:43,800 --> 00:14:48,080
कहने का अर्थ य है जब जब आपने कहा कि छह पुराण तामसिक है

216
00:14:48,080 --> 00:14:50,800
वो छ

217
00:14:50,800 --> 00:14:54,840
पुराण उनको र उठने के लिए ऊपर उठाने के लिए तो

218
00:14:54,840 --> 00:14:59,000
आपके पास कोई गाइडलाइन होनी चाहिए ना कि भाई ये व्यक्ति

219
00:14:59,000 --> 00:15:03,080
तामसिक होता है और इस इस व्यक्ति को हमें भागवत नहीं देना है इस व्यक्ति को हमें शिव

220
00:15:03,080 --> 00:15:07,240
पुराण देना है नहीं मैंने ऐसा बोला कि जो ताम सबका

221
00:15:07,240 --> 00:15:11,680
इलाज एक कोई तामसिक जब सबका इलाज है तो

222
00:15:11,680 --> 00:15:15,800
तो फिर तामसिक की अलग से आवश्यकता क्या है जब सबका इलाज भागवत पुराण

223
00:15:15,800 --> 00:15:19,040
ही है तो फिर तामसिक की अलग से क्या आवश्यकता है

224
00:15:19,040 --> 00:15:23,280
है क्यों मतलब उनकी आवश्यकता नहीं जैसे वेदव्यास जी को 17

225
00:15:23,280 --> 00:15:27,320
पुराण लिखने के बाद ही उनको संतुष्टि मिली थी भक्ति भक्ति लिखने

226
00:15:27,320 --> 00:15:31,480
के बाद ही उनको संतुष्टि मिली जब नारद मुनि ने जब नारद मुनि ने कहा

227
00:15:31,480 --> 00:15:35,960
य बात सुनिए यह बात मेंशन है व 17 पुराण लिख गए

228
00:15:35,960 --> 00:15:40,040
थे आंकड़ मेंशन है व

229
00:15:40,040 --> 00:15:46,040
मैं दिख रहा हूं नहीं दिख र

230
00:15:52,400 --> 00:15:58,400
अरेली अब दिख रहा हूं नहीं दिख र

231
00:16:06,480 --> 00:16:10,560
हा अट आप एक काम करट करके दोबारा आ

232
00:16:10,560 --> 00:16:16,560
जाइए वही लिंक दबा हा वही लिंक

233
00:16:18,800 --> 00:16:23,000
से भाई को इतने क्लेम दिए फिर भी नहीं समझ

234
00:16:23,000 --> 00:16:29,000
पा रहा था अभी भैया जी के सामने

235
00:16:30,960 --> 00:16:35,360
अच्छा आप है आपके साथ ही इनकी चर्चा हो रही

236
00:16:35,360 --> 00:16:39,400
थी हां तो मैं कह रहा था मेरा कहने

237
00:16:39,400 --> 00:16:43,520
के मतलब यह है आपने कहा कि वोह तामसिक लोगों के लिए है यानी कि

238
00:16:43,520 --> 00:16:48,080
दुनिया में कुछ लोग हैं जो तामसिक है जिनके लिए शिव पुराण है हा

239
00:16:48,080 --> 00:16:52,080
है ना तो उन लोगों को पहचानने का क्राइटेरिया क्या है स् कन

240
00:16:52,080 --> 00:16:56,440
का और दूसरी बात क्या आज तक इसकन ने ऐसा किया है कि यह लोग ममस

241
00:16:56,440 --> 00:17:02,440
है इनको हम भागवत नहीं शिव पुराण पढ़ाएंगे

242
00:17:02,480 --> 00:17:06,880
अगर भागवत पुराण में सबका इलाज है तो फिर शिव पुराण तो लिखने का कोई औचित्य

243
00:17:06,880 --> 00:17:10,880
नहीं था यानी की वेदव्यास जी ने वो बकारी लिखा हम नहीं कह सते

244
00:17:10,880 --> 00:17:14,920
जो वेदव्यास जी है वो वेदों को व्यास करने वाले हैं बो जो टीका

245
00:17:14,920 --> 00:17:19,080
सब लिखने वाले तो उनको नहीं कह सकते का क्या मतलब है आप तो उनके

246
00:17:19,080 --> 00:17:23,120
पक्ष उनके पक्ष को रखने आए है ना हम नहीं कह सकते

247
00:17:23,120 --> 00:17:25,760
काम तो नहीं

248
00:17:25,760 --> 00:17:30,600
चलेगा जब उन्होने देखा कि भक्ति स्रे है

249
00:17:30,600 --> 00:17:34,920
तो जब उन्होने भक्ति लिखी श्रीमद् भागवत में तब उनको शांति मिली उनको

250
00:17:34,920 --> 00:17:38,920
त अच्छा ये बताइए यह बताइए यह कैसे सिद्ध होता है कि

251
00:17:38,920 --> 00:17:43,480
17 पुराण लिख चुके थे और भागवत पुराण अंत में लिखा गया

252
00:17:43,480 --> 00:17:47,720
एक्चुअली जब व 1 पुराण लिख चुके थे तो शास्त्र में वणन आता है कि

253
00:17:47,720 --> 00:17:52,280
नार उनके पास आए थे 1 पुराण मेंशन है क्या

254
00:17:52,280 --> 00:17:56,640
17 पुराण मेंशन मतलब भागवत में लिखा है कि वो व्यास

255
00:17:56,640 --> 00:18:00,920
जी थे उन्होंने 17 पुराण ख लिए थे उसके बाद उन्होंने

256
00:18:00,920 --> 00:18:05,560
अवा पुराण भागवत लिखा ऐसा मेंशन है क्या हा

257
00:18:05,560 --> 00:18:09,720
1 1 शब्द आया है क्या 17 हा 17 कुल

258
00:18:09,720 --> 00:18:13,760
मिलाकर 18 पुराण है तो वही कह रहा हूं आप ये बताइए 17 शब्द

259
00:18:13,760 --> 00:18:17,520
आया है वहा भागवत में 17 पुराण लिख चुके थे 17

260
00:18:17,520 --> 00:18:21,520
पुराण ऐसा मैंने पढ़ा नहीं है मतलब एकली है य आपने

261
00:18:21,520 --> 00:18:25,640
ये मैं बता रहा हूं आपने सुना है आपने सुना है

262
00:18:25,640 --> 00:18:29,640
और जिनके द्वारा सुना है ये उनके द्वारा प्रचार प्रसारित की जाने

263
00:18:29,640 --> 00:18:34,200
वाली एक मिथ्या है वहां पर देखिए

264
00:18:34,200 --> 00:18:39,000
देखिए मैंने आपसे पूछा क्या आपने

265
00:18:39,000 --> 00:18:43,200
आप सुन लीजिए आप सुन लीजिए मैं आपसे आपको दूंगा अवसर दूंगा

266
00:18:43,200 --> 00:18:47,600
आपने पूछा मैंने आपसे पूछा क्या जो आप बोल रहे हो आपने लिखा देखा है

267
00:18:47,600 --> 00:18:51,920
तो आपने कहा नहीं मैंने लिखा नहीं देखा है मैंने लिखा देखा है

268
00:18:51,920 --> 00:18:56,000
जिस जगह की आप बात कर रहे हैं मैं आपको चाहो तो थोड़ा टाइम

269
00:18:56,000 --> 00:19:00,680
लगे क्योंकि वो प्रमाण जो है फोन में ही है है

270
00:19:00,680 --> 00:19:04,760
और मेरे पास मेरे पास भागत आप पूरी नहीं करने देते हो बात

271
00:19:04,760 --> 00:19:08,760
ओके ओके हा ओके मेरे पास भागवत रखा हुआ है जहां पर

272
00:19:08,760 --> 00:19:13,880
यह है मैं एक मिनट आपको दिखाता हूं ओके

273
00:19:13,880 --> 00:19:19,880
मैं भी आपको शास्त्र प्रमाण को दिखाना चाहता हूं कि शिव जी असल में कह क्या रहे पदम पुराण

274
00:19:21,040 --> 00:19:25,480
में हा दिखा द चलिए आप भी दिखा दीजिए आप ही दिखा दीजिए

275
00:19:25,480 --> 00:19:29,720
पद्म पुराण में एक्चुअली प पुराण

276
00:19:29,720 --> 00:19:33,920
में और एक स्कंद पुराण है आप

277
00:19:33,920 --> 00:19:38,240
मिट आप पहले शास्त्र थोड़ा साइड में रख दीजिए फिर बात कर थो थोड़

278
00:19:38,240 --> 00:19:42,280
मैं आपको एक बार दिखा द ली ब आप दिखा दीजिएगा मैं बताऊंगा तब दिखाइएगा

279
00:19:42,280 --> 00:19:46,560
अभी शास्त्र को लाने की आवश्यकता नहीं है एक मिनट मुझे

280
00:19:46,560 --> 00:19:50,600
बताइए कि भागवत में आपने ये लिखा नहीं देखा है ना कि

281
00:19:50,600 --> 00:19:54,760
17 पुराण है नहीं 1 पुरा 17 पुराण लिखे

282
00:19:54,760 --> 00:19:58,800
जा चुके थे हा ऐसा मत ऐसा बोला ही जाता है जो

283
00:19:58,800 --> 00:20:03,600
नारद मुनि है उन्होंने आके बोला था कि आपको कुछ भक्ति के ऊपर लिखना चाहिए

284
00:20:03,600 --> 00:20:07,720
वो वेद भी लिख चुके थे वो लिख चुके थे वो वेद वो वेद के

285
00:20:07,720 --> 00:20:11,840
चार भाग कर चुके थे पहले तो क्लियर हो जाइए वेद लिखे नहीं थे उन्होंने वेद के चार भाग किए

286
00:20:11,840 --> 00:20:15,880
थे नहीं वेदों को व्यास करने वाले उसका नाम

287
00:20:15,880 --> 00:20:19,880
ही वो है वेद को व्यास करने वाले वेदों को लिखने वाला कोई नहीं मेरे

288
00:20:19,880 --> 00:20:24,040
भाई नहीं वेदव्यास ही है नहीं कोई

289
00:20:24,040 --> 00:20:28,200
नहीं अप है ार उपनिषद दो च 10 बदार

290
00:20:28,200 --> 00:20:32,240
उपनिषद दो वेद जो है अपर है उनको

291
00:20:32,240 --> 00:20:37,280
किसी ने नहीं लिखा वेद्या जी मेंप

292
00:20:37,280 --> 00:20:41,320
वेदव्यास जी वेदव्यास जी लिखते नहीं है उसके चार भाग करते मतलब कोई चीज

293
00:20:41,320 --> 00:20:45,320
पहले से है उसको उन्होंने चार भागों में विभाजित किया है

294
00:20:45,320 --> 00:20:49,320
वेदव्यास जी ऐसा ओके नहीं ऐसा

295
00:20:49,320 --> 00:20:53,920
नहीं मैं बोल रहा हूं ना श्लोक क्रमांक मैं श्लोक क्रमांक बता रहा हूं ना आपको

296
00:20:53,920 --> 00:20:57,960
ार उपनि दो च 10 वेद अरुष है वो कभी लिखे नहीं

297
00:20:57,960 --> 00:21:02,080
गए उनकी रचना नहीं हुई कभी नहीं वेद

298
00:21:02,080 --> 00:21:06,280
बोला जाता वेदव्यास जी नेही लिखे मैंने देखा था अच्छा आप ये बताइए

299
00:21:06,280 --> 00:21:10,440
अगर वेदव्यास जी ने लिखे होते वैसे तो इस बात पर बात करना बेकार है द्वापर

300
00:21:10,440 --> 00:21:15,400
से पहले वेद नहीं थे क्या थे नहीं किसने लिख

301
00:21:15,400 --> 00:21:19,480
वेद आप तो द्वापर की बात कर रहे हैं ना श्री कृष्ण भगवत गीता

302
00:21:19,480 --> 00:21:23,760
में कह रहे हैं वेदों का संचालन करता मैं ही हूं वेदों के द्वारा मुझे ही जानना है आप

303
00:21:23,760 --> 00:21:27,920
विषय से भटक रहे हैं मैंने पूछा उन्होने जो लिखने की बात कही

304
00:21:27,920 --> 00:21:32,480
है द्वापर क है ना हां

305
00:21:32,480 --> 00:21:36,960
तो फिर द्वापर से पहले वेद नहीं थे त्रेता में वेद नहीं थे

306
00:21:36,960 --> 00:21:41,160
थे तो फिर तो त्रेता में थे वो वेद थे

307
00:21:41,160 --> 00:21:45,480
और चार भागों में विभाजित करते हैं जो वेद व्यास जी

308
00:21:45,480 --> 00:21:49,520
ठीक है और वहां जो बात हुई है कि जो विभाजन किया उन्होंने वेद वेदा आदि का

309
00:21:49,520 --> 00:21:53,000
जो विभाजन किया है और जो उन्होंने ये उपनिषदों

310
00:21:53,000 --> 00:21:57,320
में व्याख्या की है ये सब की बात वहां वो कर रहे हैं वहां वो 1

311
00:21:57,320 --> 00:22:02,240
पुराण की बात नहीं कर रहे दूसरी बात अगर आप ये कहो ऐसा ही हैरा

312
00:22:02,240 --> 00:22:06,240
आप बोलने तो दो मुझे पूरा 17 पुराण की बात वो नहीं कर रहे हैं

313
00:22:06,240 --> 00:22:10,360
वहां पर वो इनकी वे वेद का विभाजन करने की बात कर रहे हैं

314
00:22:10,360 --> 00:22:14,800
और वो श्लोक मैंने पढ़ा है अभी फोन में क्रमांक

315
00:22:14,800 --> 00:22:20,800
नहीं तो मैं आपको दिखाता

316
00:22:37,520 --> 00:22:41,200
आप एक्चुअली अटक चुके हैं

317
00:22:41,200 --> 00:22:45,200
आप मैं दिख रहा हूं क्या हां देख रहे हो

318
00:22:45,200 --> 00:22:51,200
हां मैं आपको भागवत खोल के दिखा देता हूं

319
00:23:24,360 --> 00:23:28,960
48 मैं आपको एक एग्जांपल भी दे सकता हूं कि सुखदेव गोस्वामी

320
00:23:28,960 --> 00:23:33,000
जनी देखिए जो उनकी असंतुष्ट

321
00:23:33,000 --> 00:23:37,040
की बात हो रही है मैं अभी दिखा रहा हूं आपको यह हो रही

322
00:23:37,040 --> 00:23:41,480
है यह भागवत नहीं है आप जो दिखा रहे हो य भागवत नहीं

323
00:23:41,480 --> 00:23:45,880
है ये क्या है भागवत क्या है भागवत

324
00:23:45,880 --> 00:23:50,120
क्या है भागवत क्या है 12 चैप्टर

325
00:23:50,120 --> 00:23:54,680
आते हैं वोन की है वो वो है ना भागवत

326
00:23:54,680 --> 00:23:59,040
यही तो बात है आपको यह नहीं पता न

327
00:23:59,040 --> 00:24:03,040
चला कौन रहा है मगर आपके लिए अंतिम निर्णायक स्न ही हैन

328
00:24:03,040 --> 00:24:07,080
रहा वही स देत बता रहे देवी भागवत मैं आपको भागवत बता

329
00:24:07,080 --> 00:24:11,160
रहा हूं भागवत ठीक अभी अभी दिखा रहा हूं

330
00:24:11,160 --> 00:24:15,240
अभी दिखा रहा पहले जो मैं दिखा रहा हूं पहले जो

331
00:24:15,240 --> 00:24:20,000
मैं दिखा रहा व देख लीजिए पहले जो मैं दिखा रहा हूं व देख लीजिए फिर मैं आपको

332
00:24:20,000 --> 00:24:24,640
दिखाता यद्यपि व्यास जी

333
00:24:24,640 --> 00:24:29,400
इस प्रकार अपनी पूरी शक्ति से सदा सदा

334
00:24:29,400 --> 00:24:33,480
प्राणियों के कल्याण में ही लगे रहे कब

335
00:24:33,480 --> 00:24:37,480
लगे रहे जब उन्होंने महाभारत इतिहास

336
00:24:37,480 --> 00:24:39,480
की रचना कर ली वेदों के

337
00:24:39,480 --> 00:24:44,440
चार भाग कर लिए उनका मन कुछ छिन्न

338
00:24:44,440 --> 00:24:48,560
खिन्न सा हो गया यहां पर कहीं भी 17 पुराणों की बात नहीं हो रही

339
00:24:48,560 --> 00:24:52,800
है और यह जो है नाय भक्ति

340
00:24:52,800 --> 00:24:57,280
सुधा सागर यही श्रीमद् भागवत है अवा पुराण

341
00:24:57,280 --> 00:25:01,560
और सुन लीजिए 1 अध्याय में इसकी

342
00:25:01,560 --> 00:25:05,920
लिस्ट दी गई है अगर लिस्ट के अनुसार भी देखें तो भागवत

343
00:25:05,920 --> 00:25:10,040
तो आता बता अमोग लीला प्रभु ने खुद बोला

344
00:25:10,040 --> 00:25:14,120
हैमो लीला प्रभु आपके लिए अंतिम निर्णायक है

345
00:25:14,120 --> 00:25:18,520
हमारे लिए नहीं है सार्वभौम नहीं है और अमो लीला प्रभु

346
00:25:18,520 --> 00:25:23,040
सुन लीज अमो लीला प्रभु की बात आप मान कैसे सकते हो जब उनको भी कोई बैन करने वाला

347
00:25:23,040 --> 00:25:27,320
है अमोला

348
00:25:27,320 --> 00:25:31,640
प्रभु लिखा मतलब ऐसा बोला जाता है उन्होंने जो बोला आपने देखा

349
00:25:31,640 --> 00:25:35,640
है 1 पुराण लिख जाने मैंने आपसे

350
00:25:35,640 --> 00:25:40,160
प्रश्न किया 17 पुराण लिखे जा चुके थे ये बात आपने देखी है भागवत

351
00:25:40,160 --> 00:25:44,880
खोल के संस्कृत में नहीं

352
00:25:44,880 --> 00:25:48,880
नहीं यही दिक्कत है चिल्लाते रहो यह

353
00:25:48,880 --> 00:25:53,440
हो गया वो हो गया मगर कभी खुद खोल के मत देखो

354
00:25:53,440 --> 00:25:57,640
हम जो एक जगह भागे जा रहे हैं 1 17 1 आपके जितने भी रटे

355
00:25:57,640 --> 00:26:01,840
रटा डालो को सिखा जाते जो

356
00:26:01,840 --> 00:26:06,280
सुखदेव गोस्वामी थे उन्होंने जो परमहंस थे पहले से ही उन्होंने

357
00:26:06,280 --> 00:26:10,680
कृष्ण जी ने उनको क्या बोलते हैं ये

358
00:26:10,680 --> 00:26:14,680
ज्ञानी परमहंस से उनको प्रेमी परमहंस बनाया उन्होने श्रीमद

359
00:26:14,680 --> 00:26:18,800
भागवत एक मिनट एक मिनट विषय से भटक मत

360
00:26:18,800 --> 00:26:24,400
एक मिनट

361
00:26:24,400 --> 00:26:30,400
चतुष्कोण प्रेमी परमहंश

362
00:26:32,040 --> 00:26:38,040
और एक्चुअली श्रीम भगवतम ग्रंथ अवतार

363
00:26:38,240 --> 00:26:42,320
है विभिन्न पुराणों की श्लोक संख्या

364
00:26:42,320 --> 00:26:46,360
देखिए क्या लिखा है विभिन्न

365
00:26:46,360 --> 00:26:50,680
पुराणों की श्लोक संख्या लिखा है दिख रहा

366
00:26:50,680 --> 00:26:54,680
है हां अब हम लोग खोल रहे हैं

367
00:26:54,680 --> 00:27:00,680
12वां स्कंद 117

368
00:27:16,000 --> 00:27:20,120
1167 ठीक

369
00:27:20,120 --> 00:27:25,560
है इसमें

370
00:27:25,560 --> 00:27:29,640
देखिए इसमें जो भागवत पुराण आया है यहां

371
00:27:29,640 --> 00:27:33,800
पर लिस्ट दी गई है सारे पुराणों की 18 पुराणों की लिस्ट

372
00:27:33,800 --> 00:27:38,320
है यहां पर उस लिस्ट में जो भागवत है

373
00:27:38,320 --> 00:27:43,800
वह बीच में आया है अंत में नहीं आया है यह

374
00:27:43,800 --> 00:27:48,040
देखिए नहीं अंत में ही आया है अरे जब आपको

375
00:27:48,040 --> 00:27:52,280
ये भागवत दिखा रहा हूं मैं आपने तो देखा नहीं है मैं दिखा रहा हूं तो फिर आप कह रहे

376
00:27:52,280 --> 00:27:56,360
अंत में आया नहीं नहीं एक्चुअली श्रीम भागवत ऐसा ही बोला जाता है मैं तो ऐ

377
00:27:56,360 --> 00:28:00,400
ही मानता अरे यार बात कर रहे हो मैं आपको य पर ग्रंथ

378
00:28:00,400 --> 00:28:04,800
दिखा रहा हूं आप क रहे बोला जाता है और मैं आपकी बात मान पर ग्रंथ की बात

379
00:28:04,800 --> 00:28:08,960
मान देवी भागवत को भी भागवत बोल देते ऐसा नहीं है यह देवी

380
00:28:08,960 --> 00:28:11,960
भागवत नहीं है

381
00:28:11,960 --> 00:28:16,000
उन्होने भागत नहीं ही सुखदेव वाली भागवत है

382
00:28:16,000 --> 00:28:20,120
पह बात वेदव्यास जी ने कन्वर्ट किया था कवर्ट नहीं मतलब थोड़ा

383
00:28:20,120 --> 00:28:24,360
उसको भागवत से उनको श्रीमद भागवत नाम मिला था वो श्रीमद

384
00:28:24,360 --> 00:28:28,520
भागवत जब कोई प्रेस अपने नाम से ग्र

385
00:28:28,520 --> 00:28:31,120
तो अपने अलग अलग नाम देती है ऐसे ही नाम उसने

386
00:28:31,120 --> 00:28:35,120
दिया हैन ने श्रीमद् भागवत ऐसे ही नाम इन्होंने दिया है भक्ति सुधा

387
00:28:35,120 --> 00:28:39,480
सागर यह सब अपने अपने प्रेस अपने नाम दे देती है भागवत हैय

388
00:28:39,480 --> 00:28:43,520
और इसमें रवे स्कंद में सूची दी गई है जहां पर लिखा जा

389
00:28:43,520 --> 00:28:47,840
रहा है पुराणों की अलग अलग श्लोक संख्या उनका जोड़ श्रीमद भागवत का प्रतिपाद्य

390
00:28:47,840 --> 00:28:52,280
और उसका प्रयोजन सुनिए तो पहला पुराण उन्होने लिखा ब्रह्म पुराण

391
00:28:52,280 --> 00:28:56,560
दूसरा पुराण इन्होने लिखा विष्णु पुराण तीसरा पुराण इन्होने लिखा शिव पुराण

392
00:28:56,560 --> 00:29:01,280
फिर नारद पुराण फिर पंड पुराण फिर भविष्य पुराण फिर वरा पुराण

393
00:29:01,280 --> 00:29:05,440
फिर लिखा इन्होने गरुण पुराण फिर

394
00:29:05,440 --> 00:29:09,680
ब्रह्मांड पुराण

395
00:29:09,680 --> 00:29:13,840
और श्रीमद भागवत पर साक

396
00:29:13,840 --> 00:29:17,840
पुराण जो भी आती है उनको उनकी थ देखिए वो आप अपनी जो एनालिसिस है

397
00:29:17,840 --> 00:29:21,840
वो अभी हमारा बात ये चल रही है क्या भागवत अंत

398
00:29:21,840 --> 00:29:26,360
में लिखा जाना सिद्ध होता है कि नहीं होता है अभी बात ये चल रही

399
00:29:26,360 --> 00:29:30,360
है अभी बात श्रीमद भागवत

400
00:29:30,360 --> 00:29:34,600
परम शिव जी खुद कह रहे मैं आपको दिखा सकता हूं मैंने कहा

401
00:29:34,600 --> 00:29:39,520
देखो आप चैप्टर बदल रहे हो मैंने कहा श श्रीमद

402
00:29:39,520 --> 00:29:43,520
भागवत श्रीमद भागवत लास्ट में लिखा गया है कि नहीं बात ये चल रही

403
00:29:43,520 --> 00:29:47,040
है परम और उसकी

404
00:29:47,040 --> 00:29:51,120
नहीं लास्ट में लिखी गई है नहीं भाई आप समझ

405
00:29:51,120 --> 00:29:55,200
नहीं रहे हो बात देखो एक एक करके विषय क्लियर करते हैं ना

406
00:29:55,200 --> 00:30:00,280
बात ये चल रही है श्रीमद भागवत लास्ट में लिखी नहीं

407
00:30:00,280 --> 00:30:05,120
कहीं से सि नहीं होता कहां देखा बताइए

408
00:30:05,120 --> 00:30:09,160
कहा देखा य तो बीच में आ रहा है मैंने पढ़ नहीं अभी

409
00:30:09,160 --> 00:30:13,280
अने खुद बोला तो जब आपके पास कंठस्थ जानकारी नहीं

410
00:30:13,280 --> 00:30:17,360
है जिसके बारे में उसकी चीज का पक्ष आप क्यों ले रहे वहा पर स स

411
00:30:17,360 --> 00:30:21,600
ढ़ डेढ़ स आप वहा पर कमेंट कर रहे हैं आ कर के आपने पढ़ा है नहीं

412
00:30:21,600 --> 00:30:24,840
नहीं मैं वो कमेंट में ऐसे कमेंट में ऐसे बोल रहा

413
00:30:24,840 --> 00:30:28,920
था कि ऐसे ही कृष्णा जी प्रम मैं ऐसा बताना

414
00:30:28,920 --> 00:30:32,920
चाह वो बाद में बात करेंगे अभी मुझे बताइए कि

415
00:30:32,920 --> 00:30:37,000
यह जो लिखा है कि श्रीमद् भागवत

416
00:30:37,000 --> 00:30:41,640
17 पुराण लिखे जा चुके थे उसके बाद लिखा गया यह कहां से सिद्ध होता

417
00:30:41,640 --> 00:30:46,520
है मैं वो मैं मे पास अभी वो नहीं है पर मैं

418
00:30:46,520 --> 00:30:52,080
व नहीं होगा वो आजीवन नहीं होगा चलिए अब अगला चैप्टर खोलते

419
00:30:52,080 --> 00:30:58,080
हैं अब यह बताइए कि

420
00:30:58,840 --> 00:31:03,040
कि अगर तामस है कोई शास्त्र तो उसमें लिखी हुई बातों को झूठी

421
00:31:03,040 --> 00:31:07,080
मानना है या मानना है कि नहीं मानना है मान सकते हैं वो पुराण

422
00:31:07,080 --> 00:31:11,720
है कोई मान सकते नहीं हां कि ना यह धर्म हैय

423
00:31:11,720 --> 00:31:16,160
धर्म की बात हो रही है इसमें कोई वो कॉम्प्रोमाइजिंग चीज नहीं चलती

424
00:31:16,160 --> 00:31:20,240
बहन जी कि अपनी जो बहन है हा शिव जी अपने

425
00:31:20,240 --> 00:31:24,360
कार्तिक को उनको इंस्ट्रक्ट कर रहे हैं पार्वती को इंस्ट्रक्ट कर रहे हैं जो भी

426
00:31:24,360 --> 00:31:28,560
पुराण जो मेरे बारे में लिखी गई है और जो भी पुराण बाकी सारे देवी

427
00:31:28,560 --> 00:31:32,720
देवताओं के बारे में बोल रही है बस व बेविल्डर करने के लिए

428
00:31:32,720 --> 00:31:36,720
जो भी पुराण श्री विष्णु विष्णु के बारे मैंने अभी

429
00:31:36,720 --> 00:31:40,920
आपसे यह पूछा है मैं आपसे उसके

430
00:31:40,920 --> 00:31:45,080
पीछे की वजह बाद में पूछूंगा पहले मुझे क्लियर करिए

431
00:31:45,080 --> 00:31:49,200
कि जो पुराण तामसिक है उसमें लिखी हुई बातों को झूठ

432
00:31:49,200 --> 00:31:52,680
मानना है कि सच मानना है

433
00:31:52,680 --> 00:31:56,840
उनको शिवजी ने जैसा खुद ही बोला है कि उनको ब मैं आपसे

434
00:31:56,840 --> 00:32:01,000
कारण नहीं पूछ रहा हूं आपके आपके निर्णय का कारण नहीं पूछ रहा हूं

435
00:32:01,000 --> 00:32:05,160
मैं पूछ रहा हूं नहीं मानना है नहीं मानना है

436
00:32:05,160 --> 00:32:09,360
अब ये बताइए शिव पुराण तामसिक है ना तामसिक लोगों के लिए है

437
00:32:09,360 --> 00:32:13,960
नामिक वो पुराण नहीं है उनको लोगों को ऊपर उठाने के लिए बस

438
00:32:13,960 --> 00:32:18,040
तामसिक लोगों को ऊपर उठाने के लिए और उसकी बातें सच नहीं है श्री

439
00:32:18,040 --> 00:32:22,720
कृष्णा ने ऐसा क्यों मैं पूछ रहा हूं उसकी बातें सच है कि नहीं है

440
00:32:22,720 --> 00:32:26,960
क्या आपने बोला उसकी बातें सच नहीं है

441
00:32:26,960 --> 00:32:31,080
नहीं मैं आपको मैं आपको वही बता रहा अरे भाई अभी आपने बोला

442
00:32:31,080 --> 00:32:35,280
ना उसकी बात को सच नहीं मानना है बता रहा हूं उनको सच क्यों नहीं मानना

443
00:32:35,280 --> 00:32:39,400
वो मैं आपको बता रहा हूं श्री कृष्ण ने ये सब क्यों मैं आपसे ये

444
00:32:39,400 --> 00:32:43,520
नहीं जानना मैं आपसे एक एक स्टेप करके बात करूंगा ना क्यों आगे बढ़ रहे हो

445
00:32:43,520 --> 00:32:47,520
पहले बताओ पहले रीजन मत बताओ पहले ये तो क्लियर करो

446
00:32:47,520 --> 00:32:51,640
उसको उसको सच मानना है कि नहीं मानना है नहीं मानना है बोला ना मैंने

447
00:32:51,640 --> 00:32:55,680
नहीं मानना है अब ये बताइए अब नहीं वो मुझे जान

448
00:32:55,680 --> 00:32:59,720
मैं पूछूंगा तो बताइएगा बताइए शिव पुराण में लिखी

449
00:32:59,720 --> 00:33:04,040
हुई घटनाएं जो है वो झूठी है उनको सच नहीं मानना है

450
00:33:04,040 --> 00:33:08,520
तो अब मुझे बताइए कि ये जो तुलसी

451
00:33:08,520 --> 00:33:12,600
जी की उत्पत्ति है जिनको विष्णु जो विष्णु

452
00:33:12,600 --> 00:33:17,040
भगवान को बहुत प्रिय है यह कथा भागवत में कहां आई है

453
00:33:17,040 --> 00:33:21,200
और अगर नहीं आई है तो आपने कैसे मान ली तुलसी

454
00:33:21,200 --> 00:33:25,600
की उत्पत्ति कैसे हुई वो मैं वो एक्चुअली वो नहीं जानता

455
00:33:25,600 --> 00:33:29,080
तो तुलसी जी विष्णु को प्रिय है मानते हैं कि नहीं मानते

456
00:33:29,080 --> 00:33:33,320
हा जरूर यह बात शिव पुराण में लिखी हुई है अब ये माने

457
00:33:33,320 --> 00:33:37,400
कि ना माने वो तो है ही मैं आपको बताना चाहता

458
00:33:37,400 --> 00:33:41,960
हूं कि एक मिनट पहले क्लियर करले पहले पहले क्लियर कर लीजिए

459
00:33:41,960 --> 00:33:46,400
ये माने कि ना माने माने

460
00:33:46,400 --> 00:33:50,440
पर पुराण मैं आपको बताना चाहता हूं अरे भाई एक एक करके चले

461
00:33:50,440 --> 00:33:54,440
अभी आपने कहा था शिव पुराण में लिखी हुई बातें झूठी है अभी आप कह रहे हो

462
00:33:54,440 --> 00:33:58,840
कि तुलसी जी वाली जो बात है वो सच्ची है माननी है तो ये पैरामीटर

463
00:33:58,840 --> 00:34:02,920
कहां पर दिया गया है कि इतनी बात माननी है इतनी नहीं माननी है

464
00:34:02,920 --> 00:34:06,960
नहीं ऐसा कुछ नहीं है ऐसा कुछ अगर अगर चलिए आंशिक रूप

465
00:34:06,960 --> 00:34:10,960
से माननी भी है तो जहां पर आप यह कह रहे हो कि वो तामसिक है उसे

466
00:34:10,960 --> 00:34:15,000
नहीं मानना है वहा आप यह कहना चाहिए कि वहां पर कुछ कुछ बातें ऐसी है जो मानने

467
00:34:15,000 --> 00:34:19,200
योग्य नहीं है और कुछ बातें ऐसी जो मानने योग्य है

468
00:34:19,200 --> 00:34:23,440
आपने तो आपने तो पूरे पुराण को डिनाइड कर दिया ना नहीं पुराण

469
00:34:23,440 --> 00:34:28,240
सच्चा भी जैसे उ माना जाता है कि जो शिवजी सुप्रीम मत सच्चा भी है मतलब अभी जो आप क

470
00:34:28,240 --> 00:34:32,400
व उस बातो को नहीं मानना है ऐसे गलत था नहीं उसम मानना

471
00:34:32,400 --> 00:34:37,400
मतलब जहा पर भी विष्णु का ज गुणगान होहा उसको ही

472
00:34:37,400 --> 00:34:42,920
मानना तो फिर आपने पूरे पुराण को क्यों नकारा

473
00:34:42,920 --> 00:34:44,160
आपने पूरे पुराण को नकारा

474
00:34:44,160 --> 00:34:48,160
ना अभी पा मिनट पहले आपने उसकी बातो को स नहीं

475
00:34:48,160 --> 00:34:52,920
मानना काति को कर रहे आपसे

476
00:34:52,920 --> 00:34:57,080
मेरे पास भी मेरे पास भी बताने के लिए बहुत सारी बात

477
00:34:57,080 --> 00:35:01,400
बत आ रही थक जाओगे इसलिए कह रहा हूं जो विषय है

478
00:35:01,400 --> 00:35:05,680
उससे भटको मत मैं आपसे पूछ रहा हूं

479
00:35:05,680 --> 00:35:09,720
आप डेफिनेशन बता रहे हैं मैं आपको बता

480
00:35:09,720 --> 00:35:13,840
मैं आपको ये बोल रहा हूं मैं आपको ये बोल रहा हूं कि

481
00:35:13,840 --> 00:35:17,920
जब आपको थोड़ा बहुत शिव पुराण मानना है तो फिर यह क्यों कह रहे

482
00:35:17,920 --> 00:35:22,080
हो शिव पुराण को नहीं मानना है उसको झूठ मानना है उनको वैसे झूठ नहीं मानना

483
00:35:22,080 --> 00:35:26,200
है शिवजी खुद बता रहे हैं ना पदम अभी आपने बोला ना आज सच नहीं मानना हैर

484
00:35:26,200 --> 00:35:30,360
करने के लिए जो भी मेरे बेविल्डर करने के लिए है मतलब घुमाने के लिए

485
00:35:30,360 --> 00:35:34,560
है वो सारी पुराने जहां हरि का गुणगान हो रहा है उनको

486
00:35:34,560 --> 00:35:38,640
ही मानना है देखो शास्त्रों में शुरुआत में मिडल में

487
00:35:38,640 --> 00:35:43,280
फिलहाल फिलहाल एक बात क्लियर हो गई फिलहाल एक बात क्लियर हो गई

488
00:35:43,280 --> 00:35:47,840
नहीं फिलहाल एक बात क्लियर हो गई कि शिव पुराण पूरी की पूरी अमान्य नहीं है

489
00:35:47,840 --> 00:35:51,840
जहां पर हरि का गुणगान है वहां व जहां पर हरि का गुणगान नहीं

490
00:35:51,840 --> 00:35:55,920
है वहां अमान्य है बाकी शिव पुराण भी मान्य है हां

491
00:35:55,920 --> 00:35:59,280
क्योंकि खुद कह रहे हैं एक मिनट वो वो मैं जानता हूं

492
00:35:59,280 --> 00:36:03,920
वो आप आप जो बता रहे हो वो सब जानते हैं हमारे दर्शक भी जानते हैं वो जानते हैं सब जानते पराण

493
00:36:03,920 --> 00:36:07,960
तो इसका मतलब आपने कहा कि जहां पर भी हरि का गुणगान नहीं है दूसरे

494
00:36:07,960 --> 00:36:12,280
देवी देवता का गुणगान है वो भ्रम है झूठ है वो एक्चुअली

495
00:36:12,280 --> 00:36:16,480
बता रहा हूं मैं आपको वही बता रहा हूं घुमाने के भटकाने के लिए आपको अरे

496
00:36:16,480 --> 00:36:20,880
भाई मैं पहले आप बाद में डिफाइन बाद में करोगे पहले अपना

497
00:36:20,880 --> 00:36:24,920
जो पक्ष है वो तो रखो कि मैं ये बताने जा रहा हूं आप गलत बोल रहे हो ना इसकी वजह से बता

498
00:36:24,920 --> 00:36:29,120
रहा हूं मैं आप जो शिव पुराण है एक

499
00:36:29,120 --> 00:36:33,720
एक तो मैं क्लियर कर रहा हूं आपको अपनी चीज शिव पुराण जो है

500
00:36:33,720 --> 00:36:37,800
उसमें जहां पर भी हरि की बजाय किसी दूसरे को बड़ा

501
00:36:37,800 --> 00:36:41,840
कहा जा रहा है परब्रह्म कहा जा रहा है वो बातें भ्रामक है बाकी सब

502
00:36:41,840 --> 00:36:46,000
चीजें ग्रहण करने लायक है यही कह रहे हो ना आप नहीं एक्चुअली ये सब

503
00:36:46,000 --> 00:36:50,120
पुराण जो है वो सब भगवान ने क्यों दी क्यों दी

504
00:36:50,120 --> 00:36:54,280
क्योंकि कुछ लोग ऐसे हैं कि उनको यहां तक ही पॉइंट है उनका

505
00:36:54,280 --> 00:36:58,640
तो वहां तक उसको मान के वो अपनी जिंदगी मतलब ऐसा जी सकते हैं पर

506
00:36:58,640 --> 00:37:02,840
भगवान विष्णु ही परम भगवान है ऐसा खुद शिवजी मैंने

507
00:37:02,840 --> 00:37:07,080
देखिए फिर आप फिर जो है आप आप जो है ना आप जहां जितना

508
00:37:07,080 --> 00:37:11,080
वहां पर मेहनत कर रहे थे आप उसका एक परसेंट भी यहां नहीं मेहनत कर रहे हैं

509
00:37:11,080 --> 00:37:14,720
मैं आपसे पूछ रहा हूं जो आप विषय को चेंज मत होने दीजिए

510
00:37:14,720 --> 00:37:19,000
जब तक एक विषय है अभी एक विषय हमने क्लियर किया कि जहां पर

511
00:37:19,000 --> 00:37:23,080
हरि की बजाय किसी दूसरे की भक्ति बताई जा रही है वो

512
00:37:23,080 --> 00:37:27,560
जग वो सारी चीजें भ्रामक है उसको नहीं मानना है बाकी चीजों को मानना है क्योंकि

513
00:37:27,560 --> 00:37:31,560
कह रहे हो वो तामसिक मतलब वो तामसिक लोगों के लिए है वो अलग ही चीज विषय है

514
00:37:31,560 --> 00:37:35,560
पूरा अच्छा तामसिक लोग कौन है जिनको आप भागवत नहीं पढ़ाते

515
00:37:35,560 --> 00:37:39,720
हो सब लोग मैंने जैसा बोला कि सब लोग पढ़ सकते

516
00:37:39,720 --> 00:37:44,240
तो फिर से पुराण की कोई उपयोगिता ही नहीं है ना हां

517
00:37:44,240 --> 00:37:48,280
बेकार है मतलब सब लोग श्रीमद भागवत ही

518
00:37:48,280 --> 00:37:53,160
पढ़े ऐसा श्रीमद् भागवत भाई जब आप सब

519
00:37:53,160 --> 00:37:58,080
आप अपने स्कोन के गेट पर बोर्ड लगाते हो जो तामसिक लोग हो वो

520
00:37:58,080 --> 00:38:02,240
जो तामसिक लोग हो वो हमारी भगवत गीता ना ले सते

521
00:38:02,240 --> 00:38:06,280
उन्ह पहचानने का अपने सिपाहियों को अपने गार्ड्स को उन्होंने कोई

522
00:38:06,280 --> 00:38:11,280
मंत्र दिया है क्या कि भैया अंदर आने से पहले देख लेना जो

523
00:38:11,280 --> 00:38:17,280
अंदर सबका इला ही मेडिसन से हो रहा है श्रीमद भागवत

524
00:38:17,400 --> 00:38:21,800
में मैं आपसे आप क्या रोबोट हो क्या

525
00:38:21,800 --> 00:38:25,800
के जो चीज रटी आई है बस वही रट रहे हो मैं पूछ रहा कुछ और ह

526
00:38:25,800 --> 00:38:30,120
बोल कुछ और रहे हो मैंने से पूछा कि हरि के अलावा

527
00:38:30,120 --> 00:38:34,880
किसी दूसरे की भक्ति जब बताई जा रही है व भ्रामक है ना आपके हिसाब से

528
00:38:34,880 --> 00:38:39,320
वो एक्चुअली हां एक्चुअली हां

529
00:38:39,320 --> 00:38:43,520
क्लियर नहीं हो हां थोड़ा मतलब जहां पर हरि का गुणगान किया

530
00:38:43,520 --> 00:38:48,080
हुआ है वही सच है क्योंकि वही परम भगवान है और जहां पर किसी दूसरे का गुणगान है वो झूठ

531
00:38:48,080 --> 00:38:52,120
है वो क्या है वो जैसे गु दूसरे का गुणगान

532
00:38:52,120 --> 00:38:56,160
क्या है मेरे भाई देखो बहुत सारे शा आपने

533
00:38:56,160 --> 00:39:00,560
अभी थोड़ी देर पहले बोला है भ्रामक है उसको नहीं मानना है अभी बोला फिर देखो

534
00:39:00,560 --> 00:39:04,680
ये वो आप क्लियर नहीं हो क्या अपने सिद्धांतों प जो जैसे

535
00:39:04,680 --> 00:39:09,080
ब्रह्मा जी का गुणगान किया गया जो राजसिक में किया गया है और देवी मां का गुणगान राजसिक

536
00:39:09,080 --> 00:39:13,160
में किया गया है मैं आपसे पूछ रहा हूं विष्णु के अलावा किसी और का जो

537
00:39:13,160 --> 00:39:17,240
गुणगान है किसी और को परब्रह्म बोला गया है वह भ्रम है

538
00:39:17,240 --> 00:39:21,480
या सत्य है वो एक्चुअली

539
00:39:21,480 --> 00:39:26,200
जो लोग जैसे उनका गुण है उनके लिए सत्य है ऐसे सत्य नहीं है वो

540
00:39:26,200 --> 00:39:30,200
ऐसा ऐसे सत्य नहीं है तो यानी कि व्यक्ति

541
00:39:30,200 --> 00:39:32,560
ग्रंथ को पढ़ने से पहले यह जानता हो

542
00:39:32,560 --> 00:39:36,840
कि कौन से गुण मेरे अंदर है कौन से नहीं है ग्रंथ को खोलने से पहले

543
00:39:36,840 --> 00:39:41,480
यानी कि धर्म से पहले व्यक्ति धार्मिक होना चाहिए

544
00:39:41,480 --> 00:39:45,720
धर्म से पहले व्यक्ति धार्मिक होना चाहिए क्योंकि धर्म तो मिलेगा ग्र से

545
00:39:45,720 --> 00:39:49,960
वो जिस भी अपने जिसको मानता है उसके हिसाब से वो उस पुराण

546
00:39:49,960 --> 00:39:53,960
को पढ़ के अपना वो कर सकता है क्या कर सकता है

547
00:39:53,960 --> 00:39:58,520
मतलब उनको मान सकता है या य कह रहे हो

548
00:39:58,520 --> 00:40:03,760
आप जो यह कह रहे हो कि शिव पुराण जो है आप

549
00:40:03,760 --> 00:40:08,360
दिया था पहले कि शिव पुराण तामसिक है उसकी बातों को सच नहीं मानना है

550
00:40:08,360 --> 00:40:12,440
अरे वही बात यार तामसिक लोगों की उन्नति के लिए क्यों बेकार में

551
00:40:12,440 --> 00:40:16,640
आप वहा पर अटक जाते हो आपको ऐसा लग रहा है और आपके

552
00:40:16,640 --> 00:40:21,560
जो गुरुजन है ना जिनको आप फॉलो करते हो व तामसिक ही बोलते उसे स्ट्रेट फॉरवर्ड

553
00:40:21,560 --> 00:40:25,600
नहीं नहीं नहीं बोल चलिए य भी बाद में दिखा दूंगा

554
00:40:25,600 --> 00:40:29,600
आपकी बात रिकॉर्ड हो गई है नहीं बोलते और मैं आपकी इस कटिंग के

555
00:40:29,600 --> 00:40:33,760
साथ और उनका वो लगा दूंगा ठीक है कि वो बोलते ताम से

556
00:40:33,760 --> 00:40:37,880
अच्छा दूसरी बात आपको दिखा सकता हूं नहीं बोलते मैं भी आपको दिखा सकता हूं अभी

557
00:40:37,880 --> 00:40:42,400
मैं पूछ रहा हूं अभी मैं य पूछ रहा हूं कि

558
00:40:42,400 --> 00:40:46,640
जो विष्णु के अलावा कहीं किसी और को परब्रह्म माना

559
00:40:46,640 --> 00:40:47,720
जा रहा है वो

560
00:40:47,720 --> 00:40:50,560
सत्य है कि असत्य

561
00:40:50,560 --> 00:40:54,920
है असत्य है एक्चुअली जै मैंने बताया

562
00:40:54,920 --> 00:40:58,920
जैसे उनके गुण है अंदर अच्छा मतलब य वक्ति के पर्सपेक्टिव से है कि कौन सा

563
00:40:58,920 --> 00:41:03,000
व्यक्ति है उसके पर्सपेक्टिव से है ठीक तो

564
00:41:03,000 --> 00:41:07,080
आपके पास सनातन सिद्धांत नहीं है

565
00:41:07,080 --> 00:41:11,200
सनातन सिद्धांत का मतलब समझते हो भागवत जो परमहंस है उसको जो

566
00:41:11,200 --> 00:41:15,400
पढ़ेगा मैं आपसे पूछ रहा हूं कि फाइनल आंसर

567
00:41:15,400 --> 00:41:19,640
क्या है शिव पुराण को सच समझना है या नहीं

568
00:41:19,640 --> 00:41:24,040
सत्य क्या है उनको सच समझना है समझना है

569
00:41:24,040 --> 00:41:28,080
पुराण को सच समझना है

570
00:41:28,080 --> 00:41:32,240
एक्चुअली नहीं नहीं समझना है नहीं समझना है

571
00:41:32,240 --> 00:41:37,200
भ्रम समझना है हा भ्रम समझना है

572
00:41:37,200 --> 00:41:41,280
ना हा ठीक है तो शिव पुराण को भ्रम समझना है जहां

573
00:41:41,280 --> 00:41:45,360
पर विष्णु की भक्ति हो रही है उसको जो है वो समझना है

574
00:41:45,360 --> 00:41:49,480
सच यह तो ठीक है मतलब मैं आपको बताना

575
00:41:49,480 --> 00:41:53,480
चाहता हूं शास्त्रों में जो शुरुवात में जिसका गुणगान होता है और

576
00:41:53,480 --> 00:41:57,560
जो बीच में होता है मेरे भाई जब एक चीज हमारी क्लियर हो गई आपने ने कहा

577
00:41:57,560 --> 00:42:01,720
शिव पुराण जहां पर भी विष्णु के अलावा किसी और की भक्ति बताई जा रही है श्रेष्ठता

578
00:42:01,720 --> 00:42:05,720
बताई जा रही है उसको सच नहीं समझना है क्लियर

579
00:42:05,720 --> 00:42:09,840
उनको सच नहीं समझना है हमें श्रीमद् भागवत को ही सच समझना है

580
00:42:09,840 --> 00:42:13,920
हां श्रीमद खैर अच्छा श्रीमद् भागवत में अगर कहीं

581
00:42:13,920 --> 00:42:18,120
शिव जी को श्रेष्ठ बताया जा रहा हो तो क्या करें शिव जी को कहां

582
00:42:18,120 --> 00:42:20,800
है बताओ मेरे

583
00:42:20,800 --> 00:42:24,920
को टाइम लगेगा मैं निकाल के दिखा देता हूं भाई ग्रंथ एक्चुअली

584
00:42:24,920 --> 00:42:29,000
वो ग्रंथ अवतार माना जाता है श्रीमद् भागवत नहीं श्रीमद् भागवत

585
00:42:29,000 --> 00:42:34,080
में अगर शिव जी को श्रेष्ठ बताया जा रहा होगा तो क्या

586
00:42:34,080 --> 00:42:38,240
करोगे नहीं बताया जाता है जैसा मैंने सुना है नहीं बताया जाता

587
00:42:38,240 --> 00:42:42,520
ऐसा फिर सुना है जाकर पढ़ाई करो थोड़ी अपने ग्रंथों

588
00:42:42,520 --> 00:42:43,800
को खुद भी देखो

589
00:42:43,800 --> 00:42:47,800
उसमें लिखा हुआ है शिव जी को भी परब्रह्म बताया गया है मगर फिलहाल मैं

590
00:42:47,800 --> 00:42:51,840
आपकी इस बात को नहीं ले रहा हूं भागवत को समझना है

591
00:42:51,840 --> 00:42:55,880
मैं आपकी पद्म पुराण की उस बात को ले रहा हूं पद्म पुराण में लिखा हुआ है आप लोग

592
00:42:55,880 --> 00:43:00,680
जो क्लेम करते हो एक मिनट पद पुराण खोलो मत खोलो मत खोलो मत

593
00:43:00,680 --> 00:43:04,760
मैं आपकी पद पुराण की उस बात को ले रहा हूं जो आप लोग क्लेम करते हो

594
00:43:04,760 --> 00:43:08,800
कि विष्णु के अलावा किसी की भी भक्ति जो बताई जा रही है व

595
00:43:08,800 --> 00:43:13,520
सब ब्रम है तो क्लेम करते हो ना वो सब ब्रम है है ना

596
00:43:13,520 --> 00:43:17,520
अच्छा अब ये बताओ जो राम है वो मर्यादा पुरुषोत्तम है

597
00:43:17,520 --> 00:43:21,520
कि नहीं जरूर हा मर्यादा का अर्थ

598
00:43:21,520 --> 00:43:25,520
क्या होता है मर्यादा में मतलब सही तरीके

599
00:43:25,520 --> 00:43:30,240
से मतलब मतलब कोई गॉडल बिहेव मत करना मतलब

600
00:43:30,240 --> 00:43:34,320
मर्यादा में जो प्रभु श्री राम है वो झूठ फैला सकते हैं कि

601
00:43:34,320 --> 00:43:38,400
नहीं ये बताइए नहीं नहीं

602
00:43:38,400 --> 00:43:42,840
फैला सकते नहीं नहीं फैला सकते हां नहीं

603
00:43:42,840 --> 00:43:47,800
नहीं फैला सकते पक्का अब इस बात से तो पलट

604
00:43:47,800 --> 00:43:52,040
नहीं नहीं फैला सकते नहीं फैला सकते वो नहीं फैला सकते

605
00:43:52,040 --> 00:43:56,200
क्योंकि वो राम है और राम के लिए आया है वाल्मीकि रामायण में

606
00:43:56,200 --> 00:43:59,760
हमारे सभी मि को पता होगा क्या आया

607
00:43:59,760 --> 00:44:03,800
मित्रों रामो विग्रहवां धर्म वे

608
00:44:03,800 --> 00:44:08,200
वामी रामायण वाल्मीकि रामायण वाल्मीकि रामायण

609
00:44:08,200 --> 00:44:12,360
337 1 रामो विग्रहवां धर्म तो

610
00:44:12,360 --> 00:44:16,840
भगवान श्री राम जो है वो झूठ नहीं फैलाते है ना

611
00:44:16,840 --> 00:44:20,880
अब बात ये आती है कि प्रभु श्री राम ने शिव जीी को परम ब्रह्म बोला

612
00:44:20,880 --> 00:44:24,960
है कई जगह कई जगह हा ओके

613
00:44:24,960 --> 00:44:29,000
ये झूठ है कि सत्य है देख बहुत सारे कल्पों में मैं

614
00:44:29,000 --> 00:44:33,240
आपसे पूछ रहा हूं ये झूठ है कि सत्य है नहीं ऐसा नहीं हो सकता

615
00:44:33,240 --> 00:44:37,280
ऐसा तो श्री राम नहीं नहीं श्री राम ने झूठ

616
00:44:37,280 --> 00:44:41,400
बोला नहीं अच्छ नहीं एक्चुअली आप जो कह

617
00:44:41,400 --> 00:44:45,720
रहे हैं वो एक्चुअली कोई और कल्पों में ऐसा होता होगा वो लीला में ही ऐसा

618
00:44:45,720 --> 00:44:49,960
आता है श्री राम ने उनको अंतिम अंतिम ब्रह्म माना

619
00:44:49,960 --> 00:44:54,160
श्री राम ने उन्हें अंतिम ब्रह्म माना सारी दुनिया का किसम

620
00:44:54,160 --> 00:44:58,200
लिखा है ऐसा पद पुराण में लिखा है

621
00:44:58,200 --> 00:45:02,200
पदम पुराण में तो नहीं है पद पुराण में लिखा है नहीं हो सकता

622
00:45:02,200 --> 00:45:06,720
शिवजी ख आपने पढ़ली आपने पढ़ ली पूरी नहीं मैंने

623
00:45:06,720 --> 00:45:11,400
नहीं मैंने नहीं पढ़ी तो फिर क्यों कह रहे हो ऐसा नहीं हो सकता है मैं

624
00:45:11,400 --> 00:45:14,960
आपको सेनी चाबी बड़ी अभग उतना चले

625
00:45:14,960 --> 00:45:19,280
खिलौना है ब्लाइंड फेथ और क्या

626
00:45:19,280 --> 00:45:23,360
कुछ पढ़ा नहीं है कुछ देखा नहीं है कुछ मालूम नहीं है फिर भी ब्लाइंड उसके लिए लड़ने

627
00:45:23,360 --> 00:45:27,520
आए हो क्या हैय आपको दो लोक बता सकता पुराण मैंने

628
00:45:27,520 --> 00:45:31,880
आपसे पूछा क्या राम ने कृष्ण की भक्ति की है

629
00:45:31,880 --> 00:45:36,200
राम वो तो खुद कृष्ण है वो क्यों करेंगे अरे भाई मानव

630
00:45:36,200 --> 00:45:40,200
रूप में आकर के जब उन्होंने किसी वो भगवान होते हुए जब दशरथ के यहां जन्म

631
00:45:40,200 --> 00:45:44,320
ले सकते हैं भगवान भगवान कुछ भी कर सकते हैं हां

632
00:45:44,320 --> 00:45:48,360
तो झूठ एक मिनट तो उन्होंने गलत आचरण

633
00:45:48,360 --> 00:45:52,440
करके दिखाया ना किस जो लोगों

634
00:45:52,440 --> 00:45:56,520
को नहीं करना था वो उन्होंने करके दिखाया ना मतलब किसको नहीं

635
00:45:56,520 --> 00:46:00,560
करना था क्या बोल रहे चाहते राम हमारे लिए आदर्श है

636
00:46:00,560 --> 00:46:04,880
आदर्श का मतलब होता है कि जो जो वो कर रहे वोव हमें फॉलो कर सकते हैं

637
00:46:04,880 --> 00:46:09,040
हम ठीक है तो राम ने भी कुछ ऐसी चीजें की है आपके

638
00:46:09,040 --> 00:46:13,080
अनुसार जो हमें नहीं करनी चाहिए नहीं

639
00:46:13,080 --> 00:46:17,160
ऐसा ऐसा कुछ नहीं है राम जी जो करते हैं वो तो राम जी ने राम

640
00:46:17,160 --> 00:46:21,400
जी ने किसकी भक्ति की राम जी ने किसी की वो एक्चुअली

641
00:46:21,400 --> 00:46:25,440
शिवजी उपासना कर रहे हैं क्यों उपासना कर मैं आपको बता दूं अरे भाई भक्ति

642
00:46:25,440 --> 00:46:31,440
की नहीं की शिव जी की हा

643
00:46:31,440 --> 00:46:35,680
नहीं क्यों पानी चढ़ चुप हो जाइए आप आगे

644
00:46:35,680 --> 00:46:39,760
चलिए बताना अरे देखिए भैया आपकी जो

645
00:46:39,760 --> 00:46:43,760
रटी रटाई चीज मैं जानता हूं इसीलिए मैं उन पर जा ही नहीं रहा हूं मैं आपसे पूछ रहा

646
00:46:43,760 --> 00:46:48,680
हूं राम जी ने शिवजी की भक्ति की व झूठी थी या सच्ची थी

647
00:46:48,680 --> 00:46:52,920
नहीं व सच्ची थी क्योंकि वो उके हम वो करना चाहिए कि नहीं करना चाहिए शिवजी

648
00:46:52,920 --> 00:46:56,960
उनके भक्त हैली अरे वो जो

649
00:46:56,960 --> 00:47:01,200
आप जो कह रहे हो ना रामेश्वर का मतलब है कि राम जिसके

650
00:47:01,200 --> 00:47:05,440
ईश्वर है राम जिसके ईश्वर है अब ये बताओ नर्मदेश्वर का

651
00:47:05,440 --> 00:47:09,600
अर्थ क्या है नर्मदा जिसकी ईश्वर है नहीं

652
00:47:09,600 --> 00:47:13,800
क्यों आप बताओ गोपिया गोपेश्वर का मतलब फिर क्या हुआ गोपियां जिनके ईश्वर

653
00:47:13,800 --> 00:47:17,920
है गोपियों के ईश्वर गोपेश्वर हां तो रामेश्वर

654
00:47:17,920 --> 00:47:22,080
का मतलब राम के ईश्वर गोपी जिनके ईश्वर गिन ई

655
00:47:22,080 --> 00:47:26,160
चलो चलो चलो मैं जानता हूं विषय अंतर होगा विषय अंतर नहीं करने देंगे हम फिर आते हैं हम

656
00:47:26,160 --> 00:47:30,960
फिर आते हैं राम ने शिव जी को परम ब्रह्म कहा है

657
00:47:30,960 --> 00:47:35,200
इसको माने कि ना माने नहीं नहीं मान

658
00:47:35,200 --> 00:47:39,280
तो राम जी य झूठे है नहीं पर नहीं बोल

659
00:47:39,280 --> 00:47:43,760
सकते देखो बहुत सारे कल्पों में बहुत सारे कल्प में बहुत तरह की लीलाए होती है

660
00:47:43,760 --> 00:47:46,640
मतलब मतलब आप ये कहना चाहते हो कि वैसे

661
00:47:46,640 --> 00:47:51,200
शिवजी भगवान है परम ब्रह्म है मगर इस कल्प में नहीं है

662
00:47:51,200 --> 00:47:55,920
में वि है ऐसे बहुत सारे कल्पों में ऐसा भी है कि जो रावण की

663
00:47:55,920 --> 00:48:00,440
ता मतलब देखिए देखिए

664
00:48:00,440 --> 00:48:04,560
जो विषय है उससे भटक मत राम ने कहा शिवजी जो

665
00:48:04,560 --> 00:48:08,880
है भगवान है परम ब्रह्म है इसको माने कि ना माने देखो

666
00:48:08,880 --> 00:48:13,640
नहीं ऐसा नहीं है शिवजी राम जी की बात नहीं मानेंगे इस कौन की बात मानेंगे है ना

667
00:48:13,640 --> 00:48:18,240
नहीं एक्चुअली बहुत सारे आचार ने बो

668
00:48:18,240 --> 00:48:22,360
ब्रेन वश कहते हैं ऐसे लोगों को राम जी की बात मानने से मना

669
00:48:22,360 --> 00:48:26,360
कर देंगे मगर स्कोन की बात मानने से मना नहीं करेंगे लजा आती है आप जैसे

670
00:48:26,360 --> 00:48:31,160
लोग को देखते हैं तो आप मेरे को बताओ कि क्या बताऊ

671
00:48:31,160 --> 00:48:36,120
क्या बताऊ पदम पुराण पढ़ के देख लेना श्लोक क्रमांक बता दूंगा मैसेज कर दूंगा बाद में

672
00:48:36,120 --> 00:48:40,160
प ना राम जी को स्वयं ईश्वर माना है राम जी का नाम लेके

673
00:48:40,160 --> 00:48:44,160
राम जी को शिवजी ने ईश्वर माना राम जी ने शिवजी को ईश्वर माना

674
00:48:44,160 --> 00:48:48,480
मैं मैं आपको भेज दूंगा आप यही तो है आप उतना ही देखते हो पूप

675
00:48:48,480 --> 00:48:52,640
मंडूक की तरह जितना इसकन के कुए में दिखता है नहीं राम गीता

676
00:48:52,640 --> 00:48:56,800
में लिखा है ऐसा किसमें ये कहां लिखा है ऐ

677
00:48:56,800 --> 00:49:00,880
उनको माना परब्रह्म माना पर उसमें पदम पुराण में लिखा

678
00:49:00,880 --> 00:49:01,880
है

679
00:49:01,880 --> 00:49:05,920
नहीं ऐसा नहीं है मैंने तो ठीक है इस बात को अब इससे हम

680
00:49:05,920 --> 00:49:10,000
आगे चलते हैं आप देखिएगा पंत पुराण में लिखा है कि नहीं मैं आपको मैसेज कर दूंगा ठीक

681
00:49:10,000 --> 00:49:14,680
है ओके हां ठीक है आप देखिएगा अब बात आती

682
00:49:14,680 --> 00:49:16,800
है

683
00:49:16,800 --> 00:49:21,280
क्या कृष्ण और इकन

684
00:49:21,280 --> 00:49:26,160
के द्वारा प्रतिपादित होने वाला जो ईश्वर है कृष्ण और ओके

685
00:49:26,160 --> 00:49:30,560
जो क्या वो सर्वशक्तिमान है

686
00:49:30,560 --> 00:49:34,760
हां आप हां है हां हां अरे आप

687
00:49:34,760 --> 00:49:39,960
तो खुद ही कंफ्यूज लगते हो है हां है है

688
00:49:39,960 --> 00:49:45,360
तो क्या वो सब कुछ कर सकता है

689
00:49:45,360 --> 00:49:49,680
हां यह आपकी बुक है

690
00:49:49,680 --> 00:49:54,440
कौन सी ये भगवत गीता

691
00:49:54,440 --> 00:49:56,840
की

692
00:49:56,840 --> 00:50:02,000
कौन की बुक है इसकन की बुक है बेसिक्स ऑफ भगवत गीता

693
00:50:02,000 --> 00:50:06,320
हम इसमें लिखा हुआ है

694
00:50:06,320 --> 00:50:10,400
जो भगवान है वो पूर्ण है क्या है

695
00:50:10,400 --> 00:50:16,400
पूर्ण है

696
00:50:20,960 --> 00:50:25,120
हां इसमें मांक उपनिषद का श्लोक भी यहां मेंशन किया गया है

697
00:50:25,120 --> 00:50:28,640
कि भगवान जो है वो पूर्ण है

698
00:50:28,640 --> 00:50:33,040
ये प्रणव को ना पढ़िए हा भगवान पूर्ण

699
00:50:33,040 --> 00:50:37,080
पूर्ण मदम ठीक है पूर्ण का

700
00:50:37,080 --> 00:50:41,080
अर्थ होता है जिसमें कोई कमी ना हो जिसमें कोई बाधा ना लगे है

701
00:50:41,080 --> 00:50:45,200
ना हां तो क्या श्री कृष्ण सब

702
00:50:45,200 --> 00:50:49,400
कुछ कर सकते हैं हां हां

703
00:50:49,400 --> 00:50:53,440
सब कुछ कर सकते हैं हम ये जो शिव जी निकलते हैं वो

704
00:50:53,440 --> 00:50:57,800
श्री कृष्ण का ही एक्सपेंशन है ना हम जरूर हां एक्सपेंशन

705
00:50:57,800 --> 00:51:01,880
है ना अवतार उनके भक्त अवतार है वो

706
00:51:01,880 --> 00:51:06,000
श्री कृष्ण से ही निकले ना हा हा हां

707
00:51:06,000 --> 00:51:10,840
तो क्या श्री कृष्ण से जो निकल रहा है उनका

708
00:51:10,840 --> 00:51:15,440
अंश वो अंश सब कुछ कर सकता है क्या श्री कृष्ण की

709
00:51:15,440 --> 00:51:19,440
तरह हां कर सकता है यानी कि वह

710
00:51:19,440 --> 00:51:23,480
क्या अपने अंदर से श्री कृष्ण निकाल सकता है एक और जो बिल्कुल बराबर

711
00:51:23,480 --> 00:51:27,760
हो श्री कृष्ण के अगर आप श्री कृष्ण को दही दे दोगे तो वो वापस

712
00:51:27,760 --> 00:51:31,960
दूध बना देंगे वो श्री कृष्ण कुछ भी कर सकते हैं

713
00:51:31,960 --> 00:51:36,000
तो शिव के रूप में सब कुछ कर सकते हैं क्या हां कर

714
00:51:36,000 --> 00:51:40,080
सकते हैं शिव जी भी चाहे तो विष्णु जी बन सकते यानी शिवजी में भी वो सारी

715
00:51:40,080 --> 00:51:44,360
शक्तियां है जो कृष्ण में है देखो आप जो कह रहे हो ऐसा जनरली ऐसा

716
00:51:44,360 --> 00:51:48,440
कभी होगा भी नहीं ऐसा कभी जनरली ऐसा होता है नहीं ठीक है मैं

717
00:51:48,440 --> 00:51:52,760
आपसे पूछ रहा हूं क्या श्री कृष्ण शिव बनने

718
00:51:52,760 --> 00:51:56,960
के बाद शिव के रूप में सब कुछ कर सकते हैं कि नहीं बीच

719
00:51:56,960 --> 00:52:01,080
का तत्व है शिव जी पर शिव जी एक्चुअली बीच का तत्व

720
00:52:01,080 --> 00:52:05,440
है वो जीव तत्व भी नहीं है और भगवत तत्व भी नहीं है पर मैंने आपसे तत्व

721
00:52:05,440 --> 00:52:09,640
पूछा है क्या मैं आपसे पूछ रहा हूं कि शिव जी कृष्ण

722
00:52:09,640 --> 00:52:13,760
ही बनते हैं ना शिव जी नहीं शिव जी चाहे तो विष्णु

723
00:52:13,760 --> 00:52:18,080
जी बन सकते हैं कृष्ण ही शिव बनते हैं ना

724
00:52:18,080 --> 00:52:22,160
हा फिर वस विष्णु बन सकते हैं कृष्ण

725
00:52:22,160 --> 00:52:26,480
नहीं बन सकते वही विष्णु जो कृष्णा ही है ना वो तो

726
00:52:26,480 --> 00:52:30,600
विष्णु अच्छा वापस अच्छा वो बन सकते हैं तो आपके

727
00:52:30,600 --> 00:52:34,720
जो ग्रंथ है ब्रह्म समता का कोट किया जाता है जिस प्रकार दूध से दही बनता है दही

728
00:52:34,720 --> 00:52:38,760
से दूध नहीं उसी प्रकार कृष्ण तो शिव बन सकते हैं पर शि

729
00:52:38,760 --> 00:52:43,560
शिव जी कृष्ण नहीं बन सकते तो गलत लिखा है वो तत्व की

730
00:52:43,560 --> 00:52:48,000
जो तत्व है उनका वो बता रहे हैं एग्जांपल ये जो ये जो है

731
00:52:48,000 --> 00:52:51,040
ब्रह्म समता का कोट है एक मिनट एग्जांपल

732
00:52:51,040 --> 00:52:55,240
दे रहे हैं इस एग्जांपल को सच माने या झूठ माने सच माने क्योंकि

733
00:52:55,240 --> 00:52:59,480
ऐसा है भगवान माया के संपर्क में आ जाते हैं माया के

734
00:52:59,480 --> 00:53:03,560
तो वो उनका तत्व दूध में विकार आ जाता है दूध में

735
00:53:03,560 --> 00:53:07,960
जब विकार आ जाता है तो तत्व अलग हो जाता है शिव तत्व

736
00:53:07,960 --> 00:53:12,080
और तत्व अलग अलग आ जाता हैसा ठीक है मुझे आप

737
00:53:12,080 --> 00:53:16,960
ये बताइए मैं आपसे उतना ज्यादा आपके जैसा ज्ञानी नहीं हूं मुझे आप यह बताइए

738
00:53:16,960 --> 00:53:21,120
कि जो शिव है कृष्ण ही बन रहे हैं ना हा मैंने

739
00:53:21,120 --> 00:53:25,320
जैसा कि बोला शिव जी वापस विष्णु बन सकते हैं बन सकते हैं तो आप

740
00:53:25,320 --> 00:53:29,360
कह रहे हो कि बन सकते मगर जो दही दही और दूध के एग्जांपल से उन्ह फिर क्यों

741
00:53:29,360 --> 00:53:33,640
लिया जा रहा है जब शिवजी कृष्ण बन सकते हैं क्या समझाना

742
00:53:33,640 --> 00:53:38,040
चाहते हैं जो रहे जब जैसे जो दुर्गम

743
00:53:38,040 --> 00:53:42,280
आए उनके संपर्क माया के संपर्क में भगवान जब आ जाते हैं त

744
00:53:42,280 --> 00:53:46,400
उनका तत्व चेंज हो जाता है विकार आ जाता है दूध

745
00:53:46,400 --> 00:53:50,680
में तो वापस वो बन सकते हैं वापस उस विकार से छूट सकते हैं कि नहीं

746
00:53:50,680 --> 00:53:54,720
बन सकते हैं तो फिर व क्यों कह रहे हैं कि दही जैसे दही दूध नहीं बन

747
00:53:54,720 --> 00:53:58,840
सकता वैसे ही वो नहीं बन सकते एक एग्जांपल दे रहे हैं कि

748
00:53:58,840 --> 00:54:02,880
अरे तो एग्जांपल इससे सेट तो हो इस बात से जब यहां पर ये वापस

749
00:54:02,880 --> 00:54:06,040
आ सकते हैं अपनी रियल फॉर्म में तो वहां पर वो

750
00:54:06,040 --> 00:54:10,200
कह रहे हैं दही से दूध नहीं आ सकता है यहां पर वो कह रहे हैं आ सकता है

751
00:54:10,200 --> 00:54:14,480
तो एग्जांपल तो वैसा देते हैं जो सेट हो वहा पर जाकर के जनरली

752
00:54:14,480 --> 00:54:18,520
ऐसा कभी होता है नहीं आप बोलोगे ऐसा हो नहीं जाएगा ऐसा कि वो वापस विष्णु

753
00:54:18,520 --> 00:54:22,880
बन जाएंगे मैं नहीं कह रहा सकते हैं कि नहीं कैपेसिटी

754
00:54:22,880 --> 00:54:27,040
है कि नहीं कर सकते तो ब्रह्म समता वा बात है

755
00:54:27,040 --> 00:54:31,160
तो ब्रह्म समता वाली व जो बात है व झूठी है झूठी नहीं है

756
00:54:31,160 --> 00:54:35,160
वो एपल जैसा कि मैंने बोला एप भाई मेरे एग्जांपल

757
00:54:35,160 --> 00:54:39,280
हम वो देना जो उसम सेट हो वो सेट कहां हो रहा है ठीक उल्टा बता रहा

758
00:54:39,280 --> 00:54:44,000
है वहां पर दही से दूध नहीं बन पा रहा है वहां दही से दूध नहीं

759
00:54:44,000 --> 00:54:48,000
देख आप हो नहीं जाएगा सदाशिव कभी विष्णु नहीं बन जाएंगे ठीक

760
00:54:48,000 --> 00:54:52,160
है आप तो कह रहे हो बन सकते हैं वो जनरली ऐसा नहीं होता है बन

761
00:54:52,160 --> 00:54:56,440
सकते है क्या जनरली जली क्या सम

762
00:54:56,440 --> 00:55:00,520
कोई लिमिट नहीं लगती है बन सकते हैं नहीं लगती तो फिर क्यों कह रहे हो सदा विष्णु नहीं बन

763
00:55:00,520 --> 00:55:05,240
सकते बोलने से सदाशिव वापस विष्णु नहीं बन जाएंगे

764
00:55:05,240 --> 00:55:09,760
अरे मेरे बोलने क्षमता पूछ रहा हूं ब

765
00:55:09,760 --> 00:55:14,560
देख बमा जीने बोला है आचार्य है

766
00:55:14,560 --> 00:55:18,640
खुद ब्रह्मा जी ने बोला है तो ब्रह्मा जी पूर्ण को

767
00:55:18,640 --> 00:55:21,360
अपूर्ण बोलेंगे तो भी मानोगे

768
00:55:21,360 --> 00:55:25,560
आप गुन किया है ब्र समता में मैं कह रहा हूं या तो उन्ह

769
00:55:25,560 --> 00:55:29,680
पूर्ण मत मानो या तो ब्रह्मा जी को मान लो ब्रह्म समता वाले या

770
00:55:29,680 --> 00:55:35,520
तो ब्रह्म समता वाले ब्रह्मा जी को मान लो या फ श्री कृष्ण को पू मत

771
00:55:35,520 --> 00:55:40,480
क अरे होगा या नहीं अच्छा होगा नहीं चलो ठीक है

772
00:55:40,480 --> 00:55:44,640
कर सकते हैं मगर करते नहीं है तो इसका मतलब वहा जो वहा जो कहा

773
00:55:44,640 --> 00:55:49,440
गया जिस प्रकार दूध से दही दही से दूध नहीं बन सकता

774
00:55:49,440 --> 00:55:53,640
बोलने नहीं देते हो मैं पूछ रहा हूं ब्रह्म समता की जो बात लिखी

775
00:55:53,640 --> 00:55:58,160
हुई है दही से दूध नहीं बन सकता उस प्र शिव कृष्ण नहीं बन सकते

776
00:55:58,160 --> 00:56:02,240
यह बात झूठ है क्योंकि वास्तविकता यह है कि शिव जी कृष्ण बन

777
00:56:02,240 --> 00:56:06,320
सकते हैं बन सकते हैं विष्णु बन सकते य बात ूठी हुई

778
00:56:06,320 --> 00:56:10,400
ना ब्रम समता झूठी हुई ना देखो

779
00:56:10,400 --> 00:56:14,400
नहीं है झूठी कितनी ब एपल

780
00:56:14,400 --> 00:56:18,480
है किस चीज के लिए एपल है हम एग्जांपल उसको देते हैं

781
00:56:18,480 --> 00:56:22,640
जहां पर हमें सच को सच साबित करना हो य एपल दे रहे

782
00:56:22,640 --> 00:56:26,840
वो नहीं बन सकते वहा पर आप क रहे बन सकते भगवान माया संपर्क

783
00:56:26,840 --> 00:56:31,000
में आ जाते हैं वही मैंने बोला ना दूध में जब विकार आ जाता है माया के संपर्क

784
00:56:31,000 --> 00:56:35,080
में आने के बाद क्या वो दोबारा वैसे ही हो सकते जैसे पहले

785
00:56:35,080 --> 00:56:36,520
थे हा

786
00:56:36,520 --> 00:56:41,160
हो सकते हो सकते हैं मगर जो दही है वो दूध जैसा नहीं हो सकता है

787
00:56:41,160 --> 00:56:45,240
भगवान कुछ भी कर सकते बो मैंने पूछा दही दही दू

788
00:56:45,240 --> 00:56:49,240
मैंने पूछा दूध दही नहीं बन सकता ना

789
00:56:49,240 --> 00:56:53,520
दही बन सकता है दही हा दही

790
00:56:53,520 --> 00:56:57,560
दही दूध बन सकता है श्री कृष्ण को दूध दे दोगे वापस वो

791
00:56:57,560 --> 00:57:01,560
दूध वो मैं यहां पर भगवान की बात नहीं कर रहा हूं मैं यहां पर साधारण

792
00:57:01,560 --> 00:57:05,840
बात कर रहा हूं क्या दही दूध बन सकता है नहीं अगर भगवान

793
00:57:05,840 --> 00:57:10,240
की इच्छा हो तो बन सकता हैन मगर सामान्य मगर

794
00:57:10,240 --> 00:57:14,360
सामान्यता नहीं बन सकता हां तो

795
00:57:14,360 --> 00:57:18,440
यानी कि अगर अगर शिव के रूप में भगवान की इच्छा

796
00:57:18,440 --> 00:57:23,360
हुई तो वो वापस विष्णु कृष्ण बन सकते हैं

797
00:57:23,360 --> 00:57:28,920
है ना यानी उनके अंदर भी वो सारी क्वालिटीज कृष्ण के अंदर है

798
00:57:28,920 --> 00:57:33,040
हा है ना तो फिर अंतर क्या है फिर शिवजी के अंदर

799
00:57:33,040 --> 00:57:37,040
व उतनी क्वालिटीज नहीं शिवजी के अंदर 55 क्वालिटी है वि अच्छा

800
00:57:37,040 --> 00:57:41,200
शिव जी के अंदर कम क्वालिटी है तो इसका मतलब जब कृष्ण जो है कृष्ण से शिव

801
00:57:41,200 --> 00:57:45,280
निकलते हैं तो उस कृष्ण में जो निकल रहा है शिव के रूप में

802
00:57:45,280 --> 00:57:49,320
उसमें कमी आ जाती है नहीं आ जाती है उसम आप तो कह

803
00:57:49,320 --> 00:57:51,840
रहे प है कमी आ गई ना

804
00:57:51,840 --> 00:57:55,880
नहीं पर एक्चुअली भगवान अगर चाहे तो वापस विष्णु भी बना

805
00:57:55,880 --> 00:57:59,960
स अपने आप मैं पूछ रहा हूं मैं पूछ

806
00:57:59,960 --> 00:58:04,120
रहा हूं क्या कृष्ण से जब उनका अंश निकलता है

807
00:58:04,120 --> 00:58:08,400
शिव के रूप में उस रूप में कोई कमी आ जाती है आप खाली

808
00:58:08,400 --> 00:58:12,440
ये भेद बता रहे हैं भेद तो विष्णु और कृष्ण में भी है

809
00:58:12,440 --> 00:58:16,640
देखा जाए तो मुझे पता है मगर एक साथ सारे चैप्टर

810
00:58:16,640 --> 00:58:20,880
नहीं खोलेंगे ना नहीं तो आप आप जो है आपकी चीज आपकी सच्चा बाहर नहीं आए

811
00:58:20,880 --> 00:58:25,400
सारे चैप्टर अगर खोल देंगे एक ही बार में देखो

812
00:58:25,400 --> 00:58:29,440
बात है शिव जी वो रूप में वो कार्य नहीं करते जो विष्णु जी वो रूप में करते

813
00:58:29,440 --> 00:58:33,480
हैं यानी कि करने वाले वही है सिर्फ रूप अलग

814
00:58:33,480 --> 00:58:37,560
है रूप अलग है करने वाला वही एक ही है

815
00:58:37,560 --> 00:58:41,680
हा करने वाला एक है अब अद्वैत को मान

816
00:58:41,680 --> 00:58:45,680
लिया आपने नहीं हा भगवान करने

817
00:58:45,680 --> 00:58:50,360
वाला वही है बस रूप अलग हो रहा है उसका

818
00:58:50,360 --> 00:58:54,840
यही तो है नहीं देखो कंबल में और धागे में फर्क होता है

819
00:58:54,840 --> 00:58:59,000
हा तो क में धागे में फरक य होता है कि जो धागा है व कंबल

820
00:58:59,000 --> 00:59:03,640
नहीं बन सकता अब बताओ नहीं बन सकता हा

821
00:59:03,640 --> 00:59:07,480
आत्मा जैसे आत्मा जब भगवान से अलग होती है त

822
00:59:07,480 --> 00:59:11,560
वापस मैंने आपसे पूछा रूप बदल रहा

823
00:59:11,560 --> 00:59:15,720
है तत्व एक ही है ना हा तत्व मतलब शिव

824
00:59:15,720 --> 00:59:20,480
तत्व और भगवत तत्व में इतना भी अंतर नहीं है इतना उतना क्या

825
00:59:20,480 --> 00:59:24,640
इतना मतलब इतना भी थोड़ा सा अंतर है क्या थोड़ा सा अंतर

826
00:59:24,640 --> 00:59:30,040
है क्या अंतर है और पूर्णता मतलब उन दोनों में

827
00:59:30,040 --> 00:59:34,800
एक डिफरेंस ज्यादा और वननेस कम है पर वननेस है

828
00:59:34,800 --> 00:59:39,440
ऐसा बताना चाहता हूं मैं आपसे फिर से पूछ रहा हूं

829
00:59:39,440 --> 00:59:44,080
कि जब कृष्ण से शिव तत्व निकला

830
00:59:44,080 --> 00:59:48,560
तो शिव के रूप में कृष्ण पूर्ण है या अपूर्ण है

831
00:59:48,560 --> 00:59:53,000
पूर्ण है पूर्ण है यानी कि उनके अंदर वो सारी क्वालिटीज

832
00:59:53,000 --> 00:59:57,640
है जो कृष्ण में पहले थी वो कुछ भी कर सकते शिव के बाद भी

833
00:59:57,640 --> 01:00:01,760
नहीं वो शिव जी वो नहीं कर सकते जो मैं आपको बोल रहा हूं वो रूप में वो कार्य नहीं

834
01:00:01,760 --> 01:00:05,960
करते हैं जो विष्णु जी अपने रूप में करते हैं यानी कि केवल रूप का अंतर

835
01:00:05,960 --> 01:00:10,120
है कि जब वो जब वो कृष्ण वाले कार्य करेंगे तो कृष्ण कहलाएंगे

836
01:00:10,120 --> 01:00:14,440
इतना अंतर है अंतर नहीं समझते हो आप द सुप्रीम

837
01:00:14,440 --> 01:00:18,840
वि द सुप्रीम गॉड है वो विष्णु है

838
01:00:18,840 --> 01:00:22,520
ऐसा है यह तो आप अपना क्लेम कर

839
01:00:22,520 --> 01:00:26,680
रहे हो जब इसको हम एक्सप्लेन कर रहे हैं इसको खोल रहे एक्सप्लोर कर रहे हैं

840
01:00:26,680 --> 01:00:32,040
तो उसमें आप चीजें क्लियर नहीं कर रहे हो इसको क्लियर करनारा

841
01:00:32,040 --> 01:00:36,160
अगर भगवान चाहे तो शिव जी वापस विष्णु बन सकते हैं हां

842
01:00:36,160 --> 01:00:40,160
शिव तो शिव के रूप में चाहे तो बन सकते हैं कि नहीं कि कृष्ण के रूप में चाहे

843
01:00:40,160 --> 01:00:44,240
तो बन सकते हैं बन सकते हैं बन सकते बन सकते हैं तो यहां पर आपने

844
01:00:44,240 --> 01:00:48,480
आपने जो है यहां पर ब्रह्म जो समता है आपकी उसका क्लेम गलत कर दिया क्योंकि

845
01:00:48,480 --> 01:00:52,520
वो कह रही है नहीं बन सकते नहीं एक्चुअली मैं

846
01:00:52,520 --> 01:00:56,600
को जनरली ऐसा नहीं होता है इसकी वजह से वो नहीं बता रही जनरली क्या

847
01:00:56,600 --> 01:01:00,840
है देखो शिव जी कभी आपके बोलने से नहीं हो भाई जनरली ऐसा

848
01:01:00,840 --> 01:01:04,920
नहीं होता तो वहा ये लिखा होता ना कि ऐसा होता नहीं है आप जो बोल रहे हो

849
01:01:04,920 --> 01:01:08,960
वो लिखा होता वहां बोल रहे सता नहीं क्यों ऐसा होगा ऐसा होगा नहीं

850
01:01:08,960 --> 01:01:13,320
ऐसा होगा नहीं वहां ये लिखा है क्या वहां ये लिखा है क्या

851
01:01:13,320 --> 01:01:17,360
ऐसा कभी नहीं होगा वहां ये लिखा है क्या किधर ऐसा

852
01:01:17,360 --> 01:01:21,640
कभी नहीं होगा लिखा है वहां हां ऐसा कभी नहीं होगा व

853
01:01:21,640 --> 01:01:26,160
मैं पूछ रहा हूं ब्रह्म समता में ये लिखा है वहां ऐसा कभी नहीं होगा व

854
01:01:26,160 --> 01:01:30,360
खा ऐसा हो ही नहीं सकता क्या लिखा है वा

855
01:01:30,360 --> 01:01:34,400
वा लिखा है वहा क्या लिखा है ऐसा हो ही नहीं सकता तो

856
01:01:34,400 --> 01:01:37,640
सक्ता में और ना होने में अंतर है ना

857
01:01:37,640 --> 01:01:41,800
होना मतलब मेरी इच्छा के ऊपर है कि मैं ऐसा कभी नहीं करूंगा और सक्ता में करही

858
01:01:41,800 --> 01:01:46,440
नहीं सकता भगवान कुछ भी कर सकते हैं वो चाहे विष्णु बन सकते

859
01:01:46,440 --> 01:01:50,480
हा तो ब्रह्म समता यहा पर रिफ्यूट हो गई ना आपके द्वारा नहीं हुई

860
01:01:50,480 --> 01:01:54,520
है व वो कह रहे हैं कि नहीं सकता भगवान

861
01:01:54,520 --> 01:01:58,520
जो शिव है वो कृष्ण नहीं बन सकते नहीं ऐसा नहीं

862
01:01:58,520 --> 01:02:03,480
है अगर खा व वहा क्या लिखा है

863
01:02:03,480 --> 01:02:08,120
पर ऐसा कभी जनरली ऐसा होता नहीं कितनी बछ अच्छा कभी कभी होता है क्या

864
01:02:08,120 --> 01:02:12,120
कभी कभी नहीं होता ऐसा कभी हो सकता है क्या

865
01:02:12,120 --> 01:02:16,280
कभी अगर भगवान चाहे तो कुछ भी हो सकता है हो सकता है ना तो वहा

866
01:02:16,280 --> 01:02:20,720
पर ये क्यों लिखा है कि नहीं हो सकता

867
01:02:20,720 --> 01:02:24,840
देखो अभी हम बमा जी से पूछना पड़ेगा ब्रह्मा जी ने खुद लिखी है ठीक

868
01:02:24,840 --> 01:02:29,240
हैका मब आप ब्रह्मा जी की बातों को समझ नहीं पाए हैं समझ के आइएगा दोबारा

869
01:02:29,240 --> 01:02:33,320
चलिए आगे चलते हैं नहीं ऐसा आगे चलते हैं अब ये

870
01:02:33,320 --> 01:02:37,520
बताइए कि क्या कुरान

871
01:02:37,520 --> 01:02:42,000
के द्वारा प्रतिपादित होने वाला जो ईश्वर है और इसकन

872
01:02:42,000 --> 01:02:47,920
के द्वारा प्रतिपादित होने वाला ईश्वर है वो एक है या अलग-अलग है

873
01:02:47,920 --> 01:02:52,160
अ देखो फिर से वही आप क्वेश्चन पूछते हो जो हर बार आप पूछते

874
01:02:52,160 --> 01:02:56,760
हो मैंने आपका वीडियो देखे हुए हैं हां सुबह से देख रहे थे पूछ

875
01:02:56,760 --> 01:03:00,840
पहले भी देखते थे आप पहले भी देखते थे या अभी आज ही देख रहे थे एक

876
01:03:00,840 --> 01:03:04,960
जतिन आया था आपने उससे भी यही सेम सवाल पूछा था वही आंसर है

877
01:03:04,960 --> 01:03:09,040
जहां पे सुप्रीम बताई जाती है जहां प सुप्रीमेसी बताई जाती है वो

878
01:03:09,040 --> 01:03:13,080
कृष्ण ही है क्योंकि अल्लाह जैसा कुछ होता है नहीं अच्छा अल्लाह

879
01:03:13,080 --> 01:03:17,200
काल्पनिक है आपके हिसाब से अल्लाह जैसा हां एक्चुअली कुछ

880
01:03:17,200 --> 01:03:21,280
नहीं होता है मतलब हां मतलब कुरान के कुरान में जिस

881
01:03:21,280 --> 01:03:27,280
ईश्वर की बात की जा रही है वो काल्पनिक है

882
01:03:27,320 --> 01:03:31,720
उनके लिए सच है पर हमारे लिए हम उनको हम जनरली कुरान को नहीं सनातन सिद्धांत

883
01:03:31,720 --> 01:03:35,920
क्या है सनातन सिद्धांत जो देश काल परिस्थिति

884
01:03:35,920 --> 01:03:39,960
में ना बदले वो मत बताइए जो देश काल परिस्थिति में बदल जाए उनके

885
01:03:39,960 --> 01:03:44,200
लिए सच है हमारे लिए नहीं है ये है वो वो मत बताइए सनातन सिद्धांत

886
01:03:44,200 --> 01:03:48,240
क्या है कुरान के द्वारा प्रतिपादित होने वाला ईश्वर और

887
01:03:48,240 --> 01:03:52,760
सनातन ईश्वर एक है कृष्ण एक है या नहीं है हा भगवान तो

888
01:03:52,760 --> 01:03:57,000
एक ही है भगवान सबका भगवान एक है मैं जन्म

889
01:03:57,000 --> 01:04:01,240
नहीं ले सकता मेरी संतान नहीं हो सकती तो क्या यह वाला जो ईश्वर

890
01:04:01,240 --> 01:04:05,240
है जो कह रहा है मेरी संतान नहीं हो सकती य और कृष्ण जो कह रहे

891
01:04:05,240 --> 01:04:09,400
हैं य धर्म भारता अ

892
01:04:09,400 --> 01:04:13,680
धर्म ये और कुरान का ईश्वर एक है देख कुरान में एकली

893
01:04:13,680 --> 01:04:19,000
क्या है आपको बताना डिटेल में नहीं दिया गया उसम कुछ भी डिटेल में नहीं

894
01:04:19,000 --> 01:04:23,280
दिने आपसे पहले एक चीज क्लियर करो क्या कुरान

895
01:04:23,280 --> 01:04:27,360
का जो अल्लाह है और सनातन का जो वो एक है या नहीं है

896
01:04:27,360 --> 01:04:31,760
पहले क्लियर कर दो देखो जहा प अल्लाह देखो

897
01:04:31,760 --> 01:04:35,880
उ बताया जाता है कि व या ना उत्तर नहीं दोगे मैं

898
01:04:35,880 --> 01:04:40,120
पूछ रहा हूं एक है या नहीं सिंपल बताइए एक है कि नहीं बताना चा

899
01:04:40,120 --> 01:04:42,360
रहा हा या ना तो पहले हा या

900
01:04:42,360 --> 01:04:46,440
ना तो करो एक है कि नहीं है नहीं वो एक्चुअली

901
01:04:46,440 --> 01:04:50,520
एक है वो हा एक है एक है बताओ

902
01:04:50,520 --> 01:04:56,040
भाई इनडायरेक्टली एक है इनडायरेक्टली अच्छ

903
01:04:56,040 --> 01:05:00,640
उसम बताया गया है कि समझा दीजिए मैं समझने बैठा हूं आपसे

904
01:05:00,640 --> 01:05:05,320
समझाइए भगवान है वो अल्लाह है और उन्होने अपना

905
01:05:05,320 --> 01:05:09,520
रंग अरेब को दिया तो श्याम वण के तो एक ही भगवान है

906
01:05:09,520 --> 01:05:14,160
व श्याम सुंदर श्री कृष्णा तो ऐसा बताना चाह रहा हूं

907
01:05:14,160 --> 01:05:18,240
अब यह बताइए मैं आपसे फिर से पूछ रहा हूं यह आपने अपनी फिलॉसफी

908
01:05:18,240 --> 01:05:22,640
दे दी है क्या यह कुरान में लिखी है श्याम मण के बताए जाते हैं

909
01:05:22,640 --> 01:05:26,680
मैंने आपसे पूछा क्या यह कुरान में लिखा है जो आप रहे हो हा

910
01:05:26,680 --> 01:05:30,920
लिखा है क्या कि जो श्याम

911
01:05:30,920 --> 01:05:35,240
वण का रंग है उन्होंने अरेब को दिया ऐसा बोला जाता है ना

912
01:05:35,240 --> 01:05:39,680
ऐसा कहां लिखा है कौन सी वो है

913
01:05:39,680 --> 01:05:43,920
आयत वो नहीं क चलिए ठीक है

914
01:05:43,920 --> 01:05:48,320
तो अब वहां पर जो दूसरी बात यह लिख के आ रही है कि उसकी संतान

915
01:05:48,320 --> 01:05:53,000
नहीं हो सकती उसकी मूर्ति नहीं बन सकती तो इसका क्या करें

916
01:05:53,000 --> 01:05:57,400
देखो जहां पे नस्त प्रतिमा लिखा प्रतिमा का मतलब अलग

917
01:05:57,400 --> 01:06:01,480
अरे भाई मैं आपसे वेदों की बात नहीं कर रहा हूं क्या उम्र है

918
01:06:01,480 --> 01:06:05,760
आपकी आयु कितनी है मेरी 20

919
01:06:05,760 --> 01:06:10,000
अरे क्या हो रहा है मैं आपसे पूछ रहा हूं कुरान

920
01:06:10,000 --> 01:06:14,080
में लिखा है कि ईश्वर जन्म नहीं ले सकता इसका क्या करे ईश्वर

921
01:06:14,080 --> 01:06:18,520
की संतान नहीं हो सकती ईश्वर कुरा के कुरान के द्वारा प्रतिपादित

922
01:06:18,520 --> 01:06:22,760
होने वाला जो ईश्वर है वो बाध है बाधित है सब कुछ कर सकने

923
01:06:22,760 --> 01:06:26,840
वाला नहीं है और अभी आपने कहा कि जो कृष्ण है वो सब कुछ

924
01:06:26,840 --> 01:06:31,040
कर सकने वाले हैं तो फिर आप क्यों कह रहे हो कि अल्लाह और जो

925
01:06:31,040 --> 01:06:35,040
कुरान के अल्लाह और यह जो सनातन के कृष्ण

926
01:06:35,040 --> 01:06:39,080
एक है सुप्रीम बताई जाती है

927
01:06:39,080 --> 01:06:43,440
व भगवान तो एक ही है सबके मैं आपसे पूछ रहा हूं कुरान

928
01:06:43,440 --> 01:06:48,120
में बाधित ईश्वर है और कृष्ण जो है वो बाधित नहीं है

929
01:06:48,120 --> 01:06:52,760
तो फिर आप किस हिसाब से इसको एक कह रहे हो

930
01:06:52,760 --> 01:06:56,840
नहीं कृष्ण व कुछ भी कर सकते हैं पर जो अल्लाह है वो

931
01:06:56,840 --> 01:07:01,080
सब कुछ नहीं कर सकते तो फिर आप क्यों कह रहे हो कि कृष्ण ही अल्ला है क्योंकि

932
01:07:01,080 --> 01:07:06,680
जो अल्ला कर सकते हैं वो श्री कृष्ण वो भी मतलब उम सब कुछ है श्री कृष्ण

933
01:07:06,680 --> 01:07:10,960
में जो कृष्ण कर सकते हैं वो कृष्ण

934
01:07:10,960 --> 01:07:12,560
सब कुछ कर सकते हैं अल्लाह सब कुछ

935
01:07:12,560 --> 01:07:17,000
नहीं कर सकता इसलिए कृष्ण अल्ला एक है वाह बहुत बढ़िया

936
01:07:17,000 --> 01:07:21,080
हा ऐसा नहीं है हा अच्छा

937
01:07:21,080 --> 01:07:25,480
एक बात बताइए मैं मैं कुछ कार्य कर सकता हूं और

938
01:07:25,480 --> 01:07:29,520
कृष्ण जो मैं कर सकता हूं सब कुछ कर सकते है तो मैं भी कृष्ण हूं हमने अल्लाह

939
01:07:29,520 --> 01:07:32,720
और कृष्ण को क्यों बताया

940
01:07:32,720 --> 01:07:36,800
क्योंकि भगवान दे टू गड्स ऐसा देर

941
01:07:36,800 --> 01:07:41,480
कैन नॉट बी टू गड हां सही बात है मैंने पूछा

942
01:07:41,480 --> 01:07:45,560
क्या कुरान के द्वारा प्रतिपादित होने वाला ईश्वर मैंने ये नहीं कहा कि देर

943
01:07:45,560 --> 01:07:50,120
आर टू गॉड्स मैं कह रहा हूं क्या कुरान के द्वारा प्रतिपादित

944
01:07:50,120 --> 01:07:54,440
होने वाला डिफाइन होने वाला ईश्वर और हमारा जो सनातन कृष्ण है

945
01:07:54,440 --> 01:07:58,440
वो एक है या आपको यह कहना पड़ेगा नहीं भाई

946
01:07:58,440 --> 01:08:02,480
कुरान में जो भी बातें ईश्वर को लेकर के वह समझ में ना आ सकने के लायक है

947
01:08:02,480 --> 01:08:06,560
इसलिए हमारा कृष्ण को उससे मत जोड़ो हमारा कृष्ण तो सर्वशक्तिमान है

948
01:08:06,560 --> 01:08:10,600
पूर्ण है और जो कुरान के द्वारा प्रतिपादित होने वाला ईश्वर है वो बाधित

949
01:08:10,600 --> 01:08:14,960
है ऐसा ही है तो फिर अब यह जो ऐसा

950
01:08:14,960 --> 01:08:19,360
ही वाला स्टेटमेंट है इसकन का कहां लिखा हुआ

951
01:08:19,360 --> 01:08:23,360
है मतलब आप क्या बोलना चाहते हैं कुरान के

952
01:08:23,360 --> 01:08:27,400
द्वारा प्रतिपादित होने वाला ईश्वर और सनातन कृष्ण एक

953
01:08:27,400 --> 01:08:27,900
नहीं

954
01:08:27,640 --> 01:08:31,720
है यह कन ने कहां क्लेम किया है ऐसा तो

955
01:08:31,720 --> 01:08:35,800
कहीं लिखा ही नहीं हुआ है मगर इन बुक्स मगर इन बुक्स में

956
01:08:35,800 --> 01:08:40,000
लिखा हुआ है कुरान का ईश्वर और बाइबल और

957
01:08:40,000 --> 01:08:44,040
बाइबल का ईश्वर और नहीं एक्चुअली

958
01:08:44,040 --> 01:08:48,480
मिनट मिनट एक मिनट कृष्ण

959
01:08:48,480 --> 01:08:52,960
और कृष्ण भगवान और कुरान का ईश्वर और बाइबल का ईश्वर एक ही है

960
01:08:52,960 --> 01:08:57,760
ये इन सब बुक्स में लिखा है ये बुक्स आपके मंदिरों बाटी जा रही है

961
01:08:57,760 --> 01:09:01,880
क्यों वो जब ये दोनों एक नहीं है तो इनको एक

962
01:09:01,880 --> 01:09:06,120
कहने वाली पुस्तकें क्यों बेच रहा है कन वो तो उनसे ही पूछना

963
01:09:06,120 --> 01:09:10,360
पड़ेगा तो आप उनका पक्ष लेने क्यों आए जब आपको पता नहीं है तो

964
01:09:10,360 --> 01:09:14,680
नहीं मैं एक्चुअली इतना बोलने आया हूं कि इसकन जो कर रहा है वो मतलब

965
01:09:14,680 --> 01:09:18,880
आप उनको आप इसकन को गलत मत मानिए मतलब इसकन कभी अरे आपको

966
01:09:18,880 --> 01:09:23,400
जब पता नहीं है कि वो ऐसा क्यों कर रहा है आपको कैसे पता कि वो सही है

967
01:09:23,400 --> 01:09:28,000
ठीक आपने कहा ना कि वोन कोही पता होगा कि वो ऐसा क्यों कर रहा है

968
01:09:28,000 --> 01:09:32,680
तो फिर आपको कैसे पता है इस कन गलत है कि सही है मैं आपको पूछ के बता दूंगा मैं आपको

969
01:09:32,680 --> 01:09:37,320
तो पूछ के तब आते ना पक्ष लेने तब आइए जब आप कंफर्म हो

970
01:09:37,320 --> 01:09:41,720
आप तो कंफर्म ही नहीं है और आप आए यहां पर पक्ष लेने वहां पर श

971
01:09:41,720 --> 01:09:42,720
स मैसेज

972
01:09:42,720 --> 01:09:46,840
कमेंट्स कर रहे हैं आप हमारा इतना ज्यादा आपका इतना ज्यादा

973
01:09:46,840 --> 01:09:50,960
आपके चाबी भर दी गई है आप खुद कंफर्म नहीं है मगर उसके लिए लोहा

974
01:09:50,960 --> 01:09:55,360
ले रहे हैं चन देख आपका क्या नाम है

975
01:09:55,360 --> 01:10:00,040
हनाम बताया उन्होने देखो हरि नाम देखो ऐसा है

976
01:10:00,040 --> 01:10:04,320
जो मैं यह केवल स्कन के लिए नहीं बोल रहा हूं जो काल नेमी

977
01:10:04,320 --> 01:10:08,400
है वह अच्छी बातें ही करता है मगर एक बात

978
01:10:08,400 --> 01:10:12,480
ऐसी करता है जो अधर्मी होती है

979
01:10:12,480 --> 01:10:16,600
ओके तो उन 90 पर बातों के लिए हम उस एक पर बात

980
01:10:16,600 --> 01:10:21,200
को 10 पर बात को नजरअंदाज नहीं कर सकते ओके

981
01:10:21,200 --> 01:10:25,280
हा इस बात को समझिए ओके और थोड़ा

982
01:10:25,280 --> 01:10:29,560
पहले समझिए इस कौन का अंतिम निर्णायक कौन है हम तो हरि

983
01:10:29,560 --> 01:10:33,640
मानते हम कोई ऐसा हम अल्लाह का नाम नहीं लेते हरे आप अल्लाह का नाम नहीं

984
01:10:33,640 --> 01:10:38,520
लेते मगर मैं पूछ रहा हूं कि अल्लाह के साथ कृष्ण को क्यों खड़ा कर रहे हो

985
01:10:38,520 --> 01:10:42,760
क्या जरूरत है कारण क्या है क्योंकि देखो हम

986
01:10:42,760 --> 01:10:47,320
हम चाहते हैं कि मतलब जो इसकन चाह रहा है वो जो कन्वर्जन करता है

987
01:10:47,320 --> 01:10:51,600
कन्वर्जन जो करता है वो ये कहां लिखा है इस कन ने कि वो ऐसा इसलिए

988
01:10:51,600 --> 01:10:55,800
करता है क्योंकि उनको सनातन धर्म

989
01:10:55,800 --> 01:10:57,880
कन्वर्ट कराने के लिए स्कन

990
01:10:57,880 --> 01:11:02,000
ऐसा करता है यन ने कहा लिखा है खुद मैंने सुना है

991
01:11:02,000 --> 01:11:06,160
अमला प्रभु से फिर वही बात मैंने

992
01:11:06,160 --> 01:11:10,200
सुना वही बात है ना अच्छा ठीक है अगर य

993
01:11:10,200 --> 01:11:14,280
इसमें जो लिखा हुआ है कन्वर्ट कराने के लिए है तो

994
01:11:14,280 --> 01:11:19,040
किसको कन्वर्ट कराने के लिए मुस्लिमों को मुस्लिम

995
01:11:19,040 --> 01:11:23,120
को मिनट ठीक है अब ये बताइए मैं

996
01:11:23,120 --> 01:11:27,400
समझ गया अब ये बताइए क्या भारत में रहने वाले जितने

997
01:11:27,400 --> 01:11:31,960
भी हिंदू है वोह सब कंठस्थ हो चुके हैं अपने धर्म के

998
01:11:31,960 --> 01:11:36,640
लिए हा आज मतलब आज ये जो बुक्स है

999
01:11:36,640 --> 01:11:41,360
ये जो बुक्स है दूसरी दूसरी कंट्री के लिए बनी है कि भारत के लिए

1000
01:11:41,360 --> 01:11:45,640
सबके लिए बनी है सबके लिए बनी है यानी की हिंदुओ के लिए भी बनी है

1001
01:11:45,640 --> 01:11:49,640
हिंदू मतलब वो पढ़ सकते हैंक मैं य पूछ

1002
01:11:49,640 --> 01:11:53,840
रहा इसम क लिखा है कि इस्लाम के लिए इसको हिंदू को कोई आवश्यकता

1003
01:11:53,840 --> 01:11:57,960
नहीं पड़ने की क्योंकि कन्वर्ट कराने के लिए कन्वर्ट

1004
01:11:57,960 --> 01:12:02,080
देखो दो तरह की कन्वर्जन होती है एक हॉरिजॉन्टल कन्वर्जन होती है और एक वर्टिकल कन्वर्जन होती

1005
01:12:02,080 --> 01:12:06,400
है वर्टिकल कन्वर्जन जो इकन करता है उसमें समझा

1006
01:12:06,400 --> 01:12:11,200
के शास्त्रों प आधार मतलब ब्रेन वश करता है वो

1007
01:12:11,200 --> 01:12:13,120
ब्रेन वॉश करता है वो

1008
01:12:13,120 --> 01:12:17,160
नहीं नहीं करता है ब्रेन वॉश मैं आपसे ये पूछ रहा हूं

1009
01:12:17,160 --> 01:12:21,520
क्या सारे हिंदू अपने धर्म के लिए पक्के हो चुके हैं जो मुस्लिमों

1010
01:12:21,520 --> 01:12:26,800
को पहले कन्वर्ट करने की आवश्यकता पड़ रही है और धीरे-धीरे आज

1011
01:12:26,800 --> 01:12:31,120
मैं मैं देखो जो सवाल पूछा उसका जवाब दो हो चुके हैं या नहीं हो चुके हैं

1012
01:12:31,120 --> 01:12:35,120
अच्छा अब एक बात बताइए कि जिस बुक के द्वारा कोई

1013
01:12:35,120 --> 01:12:39,200
मुस्लिम हिंदू बन सकता है कन्वर्ट हो सकता है उसी बुक

1014
01:12:39,200 --> 01:12:43,760
को पढ़कर कोई हिंदू मुस्लिम बन सकता है कि

1015
01:12:43,760 --> 01:12:48,000
नहीं नहीं अगर ये किताब अगर

1016
01:12:48,000 --> 01:12:52,200
ये किताब अगर य अगर यह बुक एक ब्रिज है

1017
01:12:52,200 --> 01:12:56,200
अगर यह बुक एक ब्रिज है मुस्लिम से हिंदु जम

1018
01:12:56,200 --> 01:13:00,360
में आने के लिए क्रिश्चियनिटी से हिंदु जम में आने के लिए तो इसी ब्रिज

1019
01:13:00,360 --> 01:13:04,440
का इस्तेमाल करके कोई हिंदू क्रिश्चियनिटी में जा सकता है कि नहीं इसी

1020
01:13:04,440 --> 01:13:09,080
ब्रिज का इस्तेमाल करके कोई हिंदू एक मिनट

1021
01:13:09,080 --> 01:13:13,320
वो नहीं जा सकता आप बोलोगे भाई जो बोलना है भले ही वो लॉजिकल हो

1022
01:13:13,320 --> 01:13:17,880
प्रूफ हो लॉजिक हो नहीं बोलना वही है जो बोलना है

1023
01:13:17,880 --> 01:13:22,960
ल एरिया अब ये बताओ अब ये बताओ कि

1024
01:13:22,960 --> 01:13:27,320
धर्म परिवर्तन कराने के लिए शिक्षा में परिवर्तन शिक्षा

1025
01:13:27,320 --> 01:13:28,120
में मिलावट की

1026
01:13:28,120 --> 01:13:32,360
जा सकती है क्या यह कोई सनातन सिद्धांत है कहीं

1027
01:13:32,360 --> 01:13:36,560
दी है इस बात की परमिशन नहीं शिक्षा में तो कोई परिवर्तन

1028
01:13:36,560 --> 01:13:40,680
नहीं किया गया है अरे इसमें सच लिखा है क्या कृष्णला

1029
01:13:40,680 --> 01:13:44,960
एक है इसको वर्टिकल कन्वर्जन कहते हैं एक्चुअली

1030
01:13:44,960 --> 01:13:49,080
क्या वर्टिकल कन्वर्जन स समझाइए भाई नहीं एक्चुअली जो शास्त्रों

1031
01:13:49,080 --> 01:13:53,080
पर जो आधारित है वोकन बताता है और उनको

1032
01:13:53,080 --> 01:13:58,560
कन्वर्ट ये शास्त्रों पर आधारित है यह शास्त्रों पर आधारित

1033
01:13:58,560 --> 01:14:02,560
है नहीं नहीं तो अब मैं आपसे

1034
01:14:02,560 --> 01:14:06,840
पूछ रहा हूं कि इस तरह की जो भ्रामक शिक्षा है

1035
01:14:06,840 --> 01:14:11,200
मुस्लिम को हिंदू बनाने के लिए जैसा कि आपने अभी स्वीकारा

1036
01:14:11,200 --> 01:14:15,280
इस बात की परमिशन कहां दी गई है परमिशन क नहीं दी

1037
01:14:15,280 --> 01:14:19,800
गई सनातन ध अच्छा मैं आपको मैं आपको एक चीज दिखा देता हूं

1038
01:14:19,800 --> 01:14:24,480
मैं आपको एक चीज दिखा देता हूं प्रभुपाद जी को मानते हैं किसको

1039
01:14:24,480 --> 01:14:30,480
प्रभुपाद जी को मानते हैं जरूर हां

1040
01:14:45,560 --> 01:14:51,560
हां यह देखिए क्या लिखा है

1041
01:14:52,040 --> 01:14:56,040
पढ़िए पढ़ने में नहीं आ रहा मेरे एक्चुअली नहीं आ

1042
01:14:56,040 --> 01:15:00,280
रहा मैं दिखा देता इसमें लिखा है इसमें लिखा

1043
01:15:00,280 --> 01:15:04,280
है गुरु को चाहिए कि एक डाकिए के समान व

1044
01:15:04,280 --> 01:15:08,360
बिना जोड़े तोड़े भगवान के संदेश को

1045
01:15:08,360 --> 01:15:12,840
यथारूप आगे प्रदान कर दे

1046
01:15:12,840 --> 01:15:17,440
बिल्कुल बिना जोड़े तोड़े जोड़े जोड़े मतलब

1047
01:15:17,440 --> 01:15:21,480
बाहर से कुछ भी जोड़ना नहीं है और तोड़े मतलब यहां से कुछ भी अलग

1048
01:15:21,480 --> 01:15:25,480
नहीं करना है आप क्या कर रहे हो वेद वेद के साथ किसको

1049
01:15:25,480 --> 01:15:29,680
जोड़ रहे हो नहीं एक्चुअली मैं मैंने बु क्या लिखा है यहां पे मैंने ये बुक्स नहीं लिखी

1050
01:15:29,680 --> 01:15:34,120
है एक मिनट वेद के साथ आप किसको जोड़ रहे हो वेदास और इस्लाम

1051
01:15:34,120 --> 01:15:38,160
इसकन वो बात में गलत होगा मैं एक्चुअली मैं हा ठीक है ठीक है

1052
01:15:38,160 --> 01:15:42,240
थैंक यू थैंक यू एक बात आपने स्वीकारी कि इसमें गलत होगा चलो ठीक है

1053
01:15:42,240 --> 01:15:46,320
ओके अब मैं आपकी बात सुनता हूं बताइए आपको पूछ के मैं आपको फिर वो पॉइंट प आऊंगा

1054
01:15:46,320 --> 01:15:50,760
मैं हम हां बोलिए आप अपनी बात बोलिए

1055
01:15:50,760 --> 01:15:55,240
क्या मतलब अच्छा आप कुछ बोल रहे थे ना

1056
01:15:55,240 --> 01:15:59,360
पद्म पुराण वो वो नहीं चाहिए वो उसकी आवश्यकता नहीं पढ़ा है मैंने

1057
01:15:59,360 --> 01:16:01,520
उसकी आवश्यकता नहीं है

1058
01:16:01,520 --> 01:16:07,120
बताइए देखिए आज की हमारी कन्वर्सेशन का सार सुन

1059
01:16:07,120 --> 01:16:11,200
लीजिए पहली बात ये कि जब आपने अमोग लीला जी

1060
01:16:11,200 --> 01:16:15,320
को फॉलो किया तो उतनी उतनी देर में अमोग लीला जी बहन थे फिर

1061
01:16:15,320 --> 01:16:19,480
भी आपने अमोग लीला जी को फॉलो किया तो उतने अंश में आपने उस समय

1062
01:16:19,480 --> 01:16:23,760
स्कोन का खंडन किया स्कोन का विरोध किया क्योंकि इकन का आदेश था

1063
01:16:23,760 --> 01:16:28,880
अमोग लीला जी बैन दूसरा नहीं ऐसा कुछ नहीं

1064
01:16:28,880 --> 01:16:32,880
वव जो वैष्णव होता है उनको मैं उनको मैं

1065
01:16:32,880 --> 01:16:37,000
फॉलो करता ही हूं मैं ऐसा नहीं कि मैं भले इस कौन मना करे

1066
01:16:37,000 --> 01:16:41,040
उन्होंने सॉरी बोल दिया ना पर बात ही खतम हो अरे जितनी देर सॉरी नहीं

1067
01:16:41,040 --> 01:16:45,320
बोला जितनी देर सॉरी नहीं बोला उतनी देर किया था फॉलो

1068
01:16:45,320 --> 01:16:49,440
उतनी देर के लिए मैं गलत हो सकता हूं पर जब सॉरी बोल दिया बस वही वही वही

1069
01:16:49,440 --> 01:16:55,040
मैं सुनना चाह रहा था ठीक है हो गया मान लिया मान लिया

1070
01:16:55,040 --> 01:16:59,040
बात मान ली दूसरा पॉइंट यह है कि आप अपनी

1071
01:16:59,040 --> 01:17:03,880
जीवन का फैसला अपने जीवन का निर्णय अपने धर्म अधर्म का निर्णय

1072
01:17:03,880 --> 01:17:08,480
वहां से ले रहे हैं जहां आपको खुद नहीं पता है कि कौन कर रहा है मेरे जीवन का निर्णय

1073
01:17:08,480 --> 01:17:12,720
आपको नहीं पता है अंतिम निर्णायक कौन है इस बुक में

1074
01:17:12,720 --> 01:17:16,680
क्या छपे क्या नहीं छपे किस शब्द का अर्थ क्या लिखा

1075
01:17:16,680 --> 01:17:20,840
जाएगा क्या नहीं लिखा जाएगा मानता हूं मिनट देखो

1076
01:17:20,840 --> 01:17:24,920
जब मैं सार बोल रहा हूं जब मैं सार बोल रहा हूं बोल लेने दो

1077
01:17:24,920 --> 01:17:29,040
आपके जीवन का जो आपके जीवन का जो निर्णय करने वाला

1078
01:17:29,040 --> 01:17:33,120
व्यक्ति है वो आपको पता ही नहीं है कि आपके जीवन में अगर आपने

1079
01:17:33,120 --> 01:17:37,120
किसी बुक को स्वीकार किया है तो उसमें किस शब्द का

1080
01:17:37,120 --> 01:17:41,320
अर्थ क्या होगा क्या नहीं होगा यह निर्णय कौन कर रहा है आपको

1081
01:17:41,320 --> 01:17:45,480
नहीं पता है दूसरी बात कि आपका ये जो क्लेम है कि जो

1082
01:17:45,480 --> 01:17:49,520
शिव पुराण है वो तामस है उसको नहीं फॉलो करना चाहिए वो भी अधूरा

1083
01:17:49,520 --> 01:17:53,920
है क्योंकि सही बात ये है कि जो वो तामस है उसका कुछ अंश

1084
01:17:53,920 --> 01:17:58,120
आपने माना कि स्वीकार है और कुछ अंश स्वीकार नहीं है जितना अंश

1085
01:17:58,120 --> 01:18:02,160
स्वीकार नहीं है उसमें आपने कहा हरि भक्ति के विरोध में जो भी बताया जाएगा

1086
01:18:02,160 --> 01:18:06,360
वो स्वीकार नहीं है मगर भागवत में भी हरि भक्ति बताई गई है तो उसका क्या करें

1087
01:18:06,360 --> 01:18:10,400
और राम जी ने भी हरि भक्ति बताई है उसका क्या करें ये आप जा करर के वापस देखेंगे

1088
01:18:10,400 --> 01:18:14,400
ये आप देख लीजिएगा मैं आपको श्लोक क्रमांक भेज दूंगा इसके बाद हमने बात

1089
01:18:14,400 --> 01:18:18,560
की क्या ईश्वर सर्वशक्तिमान है ब्रह्म समता में कहा गया है कि वो वापस नहीं

1090
01:18:18,560 --> 01:18:22,680
बन सकता आपने कहा बन सकता है तो इतने अंश में ब्रह्म समता भी

1091
01:18:22,680 --> 01:18:26,680
खंडित हो गई आपके द्वारा कुछ भी कर सकते ब्रह्मा जी

1092
01:18:26,680 --> 01:18:30,840
बोलेंगे वो फ्लेस होगा ठीक है ब्रह्मा जी व खुद ब्रह्मा जी बोल रहे हैं ठीक

1093
01:18:30,840 --> 01:18:31,760
है व

1094
01:18:31,760 --> 01:18:35,960
ब्रह्मा अच्छा य बताइए भगवान ब्रह्मा जी के बोले हुए

1095
01:18:35,960 --> 01:18:40,440
के विरुद्ध कुछ कर सकते हैं या नहीं आचार्य है

1096
01:18:40,440 --> 01:18:44,600
आप मैं पूछ रहा हूं मैं पूछ रहा हूं भगवान ब्रह्मा जी

1097
01:18:44,600 --> 01:18:48,640
की वाणी के विरोध में जाकर कुछ कर सकते हैं या नहीं ब्रह्मा

1098
01:18:48,640 --> 01:18:53,360
जी के विरोध में हा नहीं नहीं कर सकते

1099
01:18:53,360 --> 01:18:57,440
नहीं तो यहां पर पूर्णता खत्म हो गई नहीं

1100
01:18:57,440 --> 01:19:01,760
देखो ब्रह्मा जी एक्चुअल में आचार्य है एक्चुअली मैंने आपसे

1101
01:19:01,760 --> 01:19:05,760
पूछा भगवान पूर्ण है या नहीं पूर्ण है

1102
01:19:05,760 --> 01:19:09,840
तो पूर्ण है तो सब कुछ कर सकते हैं हां

1103
01:19:09,840 --> 01:19:13,880
ब्रह्मा जी के विरोध में जाकर के कुछ कर सकते हैं कि नहीं वो

1104
01:19:13,880 --> 01:19:18,680
क्यों वो ऐसा क्यों करेंगे मैं करेंगे या नहीं करेंगे बाद की बात

1105
01:19:18,680 --> 01:19:22,760
कर सकते है कि नहीं कैपेबल है कि नहीं ब्रह्मा जी के

1106
01:19:22,760 --> 01:19:27,600
कैपेबल है कैपेबल ब्रह्माल वो क्योंकि भक्त है वो उनके

1107
01:19:27,600 --> 01:19:31,640
अच्छा ये ये ये आपने अपनी लिमिट लगा दी उन पर अच्छा ठीक है मैं बता देता

1108
01:19:31,640 --> 01:19:35,960
हूं बुद एक मिनट बुद्ध अवतार उन्हीं का था

1109
01:19:35,960 --> 01:19:40,120
हां उन्होंने वेद को उनका ही बुद्ध अवतार उनका था कि नहीं

1110
01:19:40,120 --> 01:19:44,200
उनका ही था तो किया कि नहीं विरोध किसका विरोध

1111
01:19:44,200 --> 01:19:46,920
किया वेदों का वेदों

1112
01:19:46,920 --> 01:19:51,040
का क्यों विरोध किया क्योंकि उसम उसम ब अरे क्यों विरोध किया यार मैं पूछ रहा हूं कि

1113
01:19:51,040 --> 01:19:55,280
किया कि नहीं अजीब बात कर रहे हो किया किया किया किया किया

1114
01:19:55,280 --> 01:19:59,400
पर उसम क्यों किया व बताना चाहता क्यों किया वेदों का विरोध किया ना

1115
01:19:59,400 --> 01:20:04,240
ब्रह्मा जी की वाणी का विरोध किया ना आचार्य की वाणी का विरोध किया ना

1116
01:20:04,240 --> 01:20:08,280
देखो बेकार में समय खराब करते हो यार आ कर के

1117
01:20:08,280 --> 01:20:12,560
आगे चलो आगे क्या था ब्रह्म

1118
01:20:12,560 --> 01:20:16,720
समता के बाद हम लोग आए अल्ला वाले प वहां पर आपने बताया कि उतने अंश में इस

1119
01:20:16,720 --> 01:20:20,840
कौन गलत हो सकता है इन बुक्स के कारण ठीक है तो आप ये

1120
01:20:20,840 --> 01:20:24,880
सारे जो क्वेश्चन हमने एक साथ ले लिए हैं आप इन पर जाकर के

1121
01:20:24,880 --> 01:20:28,880
करिए उनसे पूछिए ईश्वर सब कुछ कर सकता है कि नहीं इसके बाद एक

1122
01:20:28,880 --> 01:20:32,920
दो चैप्टर और है पर मुझे लगता है कि घड़ा खाली हो चुका है आप इतनी चीज

1123
01:20:32,920 --> 01:20:37,080
लेकर चली जाइए वैसे स्कन जो है वो भी बात आती है कि वो

1124
01:20:37,080 --> 01:20:41,320
शब्दों को क्यों बदल रहा है नहीं वो नहीं ऐसे नहीं बदलता वो उन्होंने

1125
01:20:41,320 --> 01:20:45,400
भक्ति लिखी गीता प्रेस में बहुत बार ब्रह्म दिया गया पर

1126
01:20:45,400 --> 01:20:49,440
मैं पूछ रहा हूं कि जो

1127
01:20:49,440 --> 01:20:53,600
शील प्रभुपाद जी है वो जो लिख के गए हैं उनको क्यों बदल

1128
01:20:53,600 --> 01:20:57,640
रहा है कन नहीं बदलता वो क्यों बदलेगा इस

1129
01:20:57,640 --> 01:21:01,960
कन और बदला हुआ दिखा दिया तो नहीं ऐसा

1130
01:21:01,960 --> 01:21:05,960
ऐसा कुछ ऐसा उनको प्रभुपाद के रोज मतलब

1131
01:21:05,960 --> 01:21:10,200
मैं पूछ रहा हूं बदला हुआ दिखा दिया तो हा आप जाके स्टडी

1132
01:21:10,200 --> 01:21:14,680
करिएगा जतिन वाला वीडियो पूरा देखिए उसम दिखाया है मैंने ठीक है

1133
01:21:14,680 --> 01:21:19,560
तो आने के लिए आपका धन्यवाद अच्छा लगा आपने चीजों को स्वीकार किया पॉजिटिवली

1134
01:21:19,560 --> 01:21:24,880
और मेरी मेरा आपसे मेरा आपसे निवेदन है

1135
01:21:24,880 --> 01:21:29,440
बोला शाश्वत वर्ड है इटरनल हा वही बोला

1136
01:21:29,440 --> 01:21:34,400
अरे उसम एक नहीं है और भी है एक नहीं है और भी है

1137
01:21:34,400 --> 01:21:38,520
और भी है उनने भक्ति ऐड कर दी है 300 लोक के ऊपर अरे भाई

1138
01:21:38,520 --> 01:21:42,680
प्रभुपाद जी की चीजों को क्यों बदल रहे ये पूछ रहा हूं प्रभुपाद ने भक्ति ऐड

1139
01:21:42,680 --> 01:21:46,800
की है ना प्रभुपाद की तो प्रभुपाद जी

1140
01:21:46,800 --> 01:21:50,960
के तो प्रभुपाद जी के लिखने के बाद चेंजिंग क्यों आ रही

1141
01:21:50,960 --> 01:21:54,960
है पूछ रहा हूं मैं उसम एक वर्ड में चेंज आ गया

1142
01:21:54,960 --> 01:21:59,280
पूरी गीता ही रंग हो गई एक वर्ड में चेंज क्यों आया

1143
01:21:59,280 --> 01:22:03,360
एक वर्ड में चेंज क्यों आया वो शलोक का मीनिंग एकली सेम है

1144
01:22:03,360 --> 01:22:07,440
आप जो मीनिंग मीनिंग तो बाद में देखेंगे मैं पूछ

1145
01:22:07,440 --> 01:22:11,840
रहा हूं प्रभुपाद जी ने गलत लिखा था क्या प्रने

1146
01:22:11,840 --> 01:22:15,880
गलत नहीं लिखा था मतलब उसम एक शश गलत लिखा था या

1147
01:22:15,880 --> 01:22:16,960
नहीं पहले इसको क्लियर

1148
01:22:16,960 --> 01:22:21,280
कर लिखा था नहीं हिंदी में लिखा गया था शाश्वत नीचे लिखा हुआ जने

1149
01:22:21,280 --> 01:22:25,320
आपको बताया था आपको मैंने देखा था कुछ नहीं बताया था उसने

1150
01:22:25,320 --> 01:22:29,440
बताया था मैं बोल रहा हूं प्रभुपाद जी ने वो उसने बताया

1151
01:22:29,440 --> 01:22:33,520
था वर्ड मीनिंग में जब हमने उसका ट्रांसलेशन देखा तो

1152
01:22:33,520 --> 01:22:37,920
प्रभुपाद जी ने ट्रांसलेशन में टर्नल का अर्थ लिखा है

1153
01:22:37,920 --> 01:22:42,200
शाश्वत आपको दिखा दूं क्या दोबारा शाश्वत

1154
01:22:42,200 --> 01:22:46,800
ही है ना उसका मीनिंग शाश्वत मलब जो इटरनल है वही मीनिंग है

1155
01:22:46,800 --> 01:22:50,920
तो उसको जो आज की भगवत गीता है उसमें हटा दिया गया है लोग कुछ

1156
01:22:50,920 --> 01:22:55,080
अलग नहीं समझेंगे मतलब वही सेम ही समझेंगे जो देखिए जो

1157
01:22:55,080 --> 01:22:59,080
देखो लोग जो समझेंगे कि नहीं समझेंगे इसके लिए हमें पड़नी सूत्र

1158
01:22:59,080 --> 01:23:03,440
पढ़ना पड़ेगा

1159
01:23:03,440 --> 01:23:07,920
अष्टाध्यायी समझेंगे मीमांसा दर्शन पढ़ना पड़ेगा

1160
01:23:07,920 --> 01:23:12,160
ब्रह्म सूत्र पढ़ना पड़ेगा बहुत कुछ पढ़ना पड़ेगा कि लोग समझेंगे और क्या नहीं समझेंगे

1161
01:23:12,160 --> 01:23:16,160
उस पर मत जाइए मैं पूछ रहा हूं प्रभुपाद जी का लिखा हुआ बदला

1162
01:23:16,160 --> 01:23:20,800
क्यों क्या दिक्कत थी उससे एक शब्द बदल गया तो इसका मलब

1163
01:23:20,800 --> 01:23:25,440
एक शब्द नहीं बदला है उसम बहुत सारे चेंस है वो एक शब्द मैंने दिखाया

1164
01:23:25,440 --> 01:23:29,480
है वो मुझे याद है मेमोराइज हो गया इसलिए मैं हर जगह वो बोलता

1165
01:23:29,480 --> 01:23:33,800
हूं वो बदला बहुत कुछ है मैंने नोट्स बना रखे उसके कि उन्होंने

1166
01:23:33,800 --> 01:23:37,840
क्या क्या बदला है ओके भेज दूंगा आपको

1167
01:23:37,840 --> 01:23:43,840
ओके तो ये सब पता करिएगा आने के लिए धन्यवाद जय श्री

1168
01:23:53,440 --> 01:23:57,440
राम m
