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00:00:01:04 अभी कोई कमेंट करके बताएगा कि मुझे लग रहा है फिर से उसी दिन की तरह हो जाएगा आज भी आजय पर जाकर देख लेता हूं कि कैसे दिख रहा है ठीक
00:00:33:20 है आप जरा देखिए कैसा दिख मैं तो सीधा आ रहा हूं लेकिन आप ऐसे आ रहे हो मैं भी अब हा अब अभी रुक जाओ उधर आने में देर लगेगी ना इधर तो आप आ गए हां अब आप इधर सीधे हो गए हो यह देखो ठीक है ठीक है ठीक है ओके कुछ आवाज आपकी कम आ रही है आवाज तो कम नहीं आनी चाहिए यही है आवाज इसमें कोई सेटिंग वेटिंग है क्या इस प में कोई सेटिंग है जिससे नहीं ऐसी कोई सेटिंग तो नहीं है जैसे उस दिन आ रही थी आपकी आवाज वैसे नहीं आ रही है तो लेकिन मैं उस दिन भी इसी से किया था आज भी इसी से ही कर र अच्छा मैं इसके नजदीक जाकर बोलता हूं अभी कैसी आवाज आ रही है नहीं आवाज बहुत कम आ रही है आपकी अच्छा अ भी कम आ रही है तो एक काम करता हूं फिर मैं मोबाइल से ही जुड़ता हूं मैं अभी आईपैड से जुड़ा हुआ था एक्चुअली हा आप दोबारा आइए मोबाइल से मैं मोबाइल से जोड़ता हूं चलो इसमें से रिमूव कर दीजिए
00:01:51:10 अभी पियूष जी मैंने आपकी बात समझ लिए मैं अगली बार से ध्यान रखूंगा अच्छा मैंने यह देखा है कि इनकी तरफ के कई लोग थे जो लगातार कमेंट्स के माध्यम से लोहा ले रहे थे पर अपनी तरफ के कोई लोग नहीं थे जो मतलब एक के बाद एक अगर उधर से कुछ आए तो इधर से भी कहा जाए कुछ ना कुछ मैंने देखा है वहां पर ई से कुछ टाइटल था किसी के आईडी का व बड़ा कुतर्क ही होते हैं पर कर तो रहे
00:02:40:22 थे हमारी तरफ से ज्यादा वैसे भी जो आंखों देखी बात को भी झुट दिया जाए तो फिर उससे बात करके क्या फायदा वैसे भी हमारी चर्चा का जो उद्देश्य है वो कई बार ऐसा ऐसा बोला गया आप आ गए आप लाइव आ गए हैं क्या दोबारा आने वाले नहीं नहीं मैं हो गया ना लाइव आवाज आपकी अभी भी वैसी आ रही है मुझे लगता है कोई और परेशानी है चलिए ठीक है कोई और दिक्कत होगी क्योंकि आपकी आवाज तो ठीक कहां से शुरू करने वहीं से जहां पिछली बार हुआ हुई थी बातचीत वहीं से शुरू करें हा तो जैसा आपको जैसा आपको ठीक लगे हां तो सबसे पहली बात तो ये जिन लोगों ने पहले वाले नहीं देखी वो मैं कहूंगा कि बाद में देख लीजिएगा ईश्वर के विषय में हमारी और इनकी बातचीत हो रही थी एक जगह आकर के मुझे ऐसा लगा कि जिसका जो पक्ष सामने आना है क्योंकि बातचीत करने का जो उद्देश्य है मेरा किसी से भी वो यह उद्देश्य नहीं है कि सामने वाला नतमस्तक हो जाए सामने वाला मैं जो चाहूं वो बोले सामने वाले के मुख
00:03:55:26 से हम एज इट इज वो वर्ड प्राप्त कर ले वो शब्द प्राप्त कर ले जो हम चाहते हैं ये उद्देश्य नहीं है उद्देश्य ये है कि सामने वाले की मूल धारणाएं समाज के सामने आए इसलिए हम बातचीत किसी से भी करते हैं तो लास्ट टाइम जब इनसे बातें हो रही थी इन्होंने ईश्वर के अस्तित्व को नकारा उस ईश्वर के अस्तित्व को जिसे हम ईश्वर कहते हैं इनके अनुसार ईश्वर ईश्वर की एक परिभाषा और भी है वो भी बात होने वाली है पर इन्होंने उस ईश्वर के अस्तित्व को नकारा जिस परिभाषा के द्वारा हम ईश्वर को मानते हैं उस वो वो धारणा बाहर आ गई कि भाई कोई भी सर्वशक्तिमान नहीं है वो धारणा बाहर आ गई तो उससे यह पता लगा कि यह धनवान को ईश्वर मानते हैं और ईश्वर शब्द का प्रयोग करने के रूप में एक तरीके से अनश्वर वाद ही फैला रहे जो डार्विन ने फैलाया जो मार्क्स ने फैलाया अनश्वर वाद ही फैला रहे हैं और जब व्यक्ति अनश्वर वादी हो जाता है तो जाहिर सी बात है कि उसके जो एथिक्स होते हैं वो प्रभावित होते हैं तो आगे उससे रिलेटेड कुछ परिणाम दुष्परिणाम सामने आए तो जब मुझे ऐसा लगा अब इस चर्चा को आगे बढ़ाने का कोई और औ चित नहीं बचा है तो मैंने उस चर्चा को बंद किया था ऐसा नहीं है कि मैं इनका पक्ष जानना नहीं चाहता था इनका पक्ष इन्होने रख दिया था
00:05:11:10 कि ये मनुष्यों से परे किसी सत्ता को स्वीकार नहीं करते और दूसरी बात इनका जो मर्यादा है उसका कोई आधार नहीं है जिसके कारण मर्यादा कभी भी बदल सकती है टूट सकती है तो अभी हम लोग दोबारा से शुरू से प्रारंभ करेंगे सबसे पहली बात तो यह है
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00:05:30:15 कि आपने ईश्वर का अर्थ यह माना है कि ईश्वर वही है जिसके पास ज्यादा धन हो हा ज्यादा धन नहीं हो जितना धन है उतना ईश्वर है ईश्वर का मतलब ऐश्वर्य हा मतलब धन से आप ऐश्वर्य को ले रहे हा मतलब ईश्वर का मतलब ये नहीं होता कि एक ही ईश्वर है माने बहुत सारे ईश्वर है मैं ईश्वर आप ईश्वर जिसके पास जितना धन है वो उतना ईश्वर अब बात ये आती है इसको को मैं थोड़ा सा क्लियर कर दूं जी अब बात ये आती है कि इसमें आपके अनुसार जिसके पास जितना धन हो वो ईश्वर है है ना और कई ईश्वर हो सकते हैं आपके अनुसार जी पर हमारे अनुसार ईश्वर वो है जो हमारे अंदर य जो प्यास है असतो मा सद गम तम सोमा ज्योतिर गम मृत मतम गमाया इस प्यास का विषय है इस प्यार प्यास की पूर्ति कर सकने वाला क्षमता वान ईश्वर सब सर्वज्ञ ईश्वर है ठीक है सर्वशक्तिमान हमारे लिए ईश्वर है अब बात य आती है कि हमारे लिए हमारी मान्यता उसको आप यह कह सकते हैं कि अच्छा आप मानते हो चलो वो ठीक है आपका मानना ऐसा है तो यह मानने वाली यह मानने वाली जो बात है यह मैं भी आपसे कह सकता हूं कि आप ऐसा
00:06:45:20 मानते हो आपने जिस भाषा से तो मैं तो दिखा सकता हूं ना ठीक है मैं पूरी बात कंप्लीट कर लो अपनी आप दिखा सते आपने जिस भाषा से जिस डिक्शनरी से ईश्वर का लिया है कि जिसके पास ऐश्वर्य हो उसको ही क्यों माना जाए सार्वभौम और हमारी हमारी जिन किताबों को जिससे हमने ईश्वर का अर्थ लिया है उनको क्यों ना माना जाए फिर बात य आ जाएगी तो अगर मान्यता की बात रखनी तो वो दोनों तरफ है दिखा तो मैं भी सकता हूं आपको किताब में कि ईश्वर का अर्थ लिया जा रहा है सच्चितानंद ठीक है और सच्चितानंद का अर्थ लिया जा रहा है सत जो कभी मरता नहीं है जो एक ही रहता है देश काल परिस्थिति में और चित अखंड ज्ञानी उसका भी अर्थ लिया जा रहा है और आनंद यानी अनंत आनंद तो ये दिखाने वाली बात तो मैं भी दिखा सकता हूं बात यह है कि उसको आप क्यों मानेंगे और आपकी वाली को मैं क्यों मानूंगा ठीक है आपने किसी को भी अगर चुना है दुनिया में किसी भी डिक्शनरी को तो उसको मैं क्यों मानूंगा तो ईश्वर की परिभाषा आपकी अलग है मेरी अलग है अब इसमें आप ये नहीं कह सकते अच्छा आपका मानना अलग है और हमारे पास जो सार्वभौम चीज है वो सार्वभौम नहीं है
00:08:01:09 वो आपके अनुसार चुनी गई चीज है जो भी है जिसके अनुसार आपने अपनी ईश्वर की परिभाषा ली ठीक है आप बोल लीजिए आपका पूरा हो जाएगा तो मैं अपनी भी बात र अब आप बताइए इसम काउंटर करिए अगर कुछ है तो बताइए हां काउंटर यह है कि भाषा केवल मेरी नहीं है जब भी कोई शब्द का अर्थ देखा जाएगा तो सब सर्वप्रथम वो भाषा में देखा जाएगा अगर कोई शब्द संस्कृत भाषा का है तो वो संस्कृत भाषा वाला कौन है अरे सर सारे ग्रंथ आदमी नेही लिखे हैं लेकिन जब हम जिस भाषा में बात कर रहे हैं और उस भाषा के शब्दों का इस्तेमाल कर रहे हैं तो जो भाषा है उसको एज ए यूनिवर्सल लेना पड़ेगा ना आपके और मेरे अर्थ अगर अलग अलग होंगे अगर ईश्वर का आपका अर्थ अलग है मेरा अलग है तो मैं कहूंगा कि मैंने भाषा से लिया आप बोलेंगे नहीं किसी आदमी ने उस उस शब्द का अपने किसी ग्रंथ में जो कि भाषा का ग्रंथ नहीं है उसमें ऐसा अर्थ लिया है तो ये तो उसका अपना आपने ईश्वर का अर्थ य जो लिया है कि ऐश्वर्य वान ये हिंदी भाषा के किस ग्रंथ से लिया है हिंदी का ही शब्द है जी हिंदी और संस्कृत दोनों में ईश्वर ही यूज होता है मूल संस्कृत बताइए इसका आप शब्द कोश में देख लीजिए जो संस्कृत
00:09:16:12 का शब्द कोश है उस व शब्द कोश कौन सी प्रिंट से है कौन सी कंपनी का है कौन से पब्लिशर का है वो बताइए आप जिसमें ले रहे कोई भी उठा लीजिए आप कोई भी शब्दकोश उठा लीजिए सभी शब्द कोषों में ये है अरे तो मैं ऐसे तो मैं भी दिखा दूंगा कि ईश्वर वो वर जिसकी शब्द कोष में दिखाइए शब्द कोष में दिखा दीजिए आप दिखा शब्द कोश आपने तय किया है ना मैं आपको अ शब्द को कहा से उत्पन्न हो रहे किसके आधार पर संस्कृत कहां से उत्पन्न हो रही संस्कृत का सबसे पुराना ग्रंथ कौन सा है संस्कृत का सबसे पुराने ग्रंथ से नहीं होता है पहले भाषा होती है फिर उस भाषा में ग्रंथ लिखे जाते हैं हा तो संस्क आधार ग्रंथ है वो कौन सा है हां अभी तो पांडन वगैरह वो तो आप व्याकरण की बात कर रहे हैं लेकिन शब्दकोष तो शब्दकोश ही रहता है ना वो तो अपडेट होता रहता है टाइम टा वो शब्दकोश बना किससे कहां से बना क्या आधार है अरे भाषा का आधार भाषा एक मान्यता है अपने आप में अब आ गई ना मान्यता अरे भाषा मान्यता आ गई ना अरे भाई मान्यता आ गई ना आपकी अरे सर तो आपकी मान्यता ये है देखिए ये वाला जो टॉपिक है हमारे टॉपिक से रिलेट नहीं करता है फिर भी अगर इस आपको रुकना है तो
00:10:31:15 बात अलग है हमारे टॉपिक से रिलेट नहीं करता है मगर मान्यता है आपका बिलीव है कि आपने जिन किताबों जिन डिक्शनरी से उसका रे अरे भाई य बिलीफ नहीं है आप जब किसी से किसी भाषा में बात करोगे जैसे मान आप किसी से इंग्लिश में बात करते हो तो देखिए आपने जो उसका अर्थ लिया है जिस भाषा भाषा के उसी भाषा के जो सबसे अल्टीमेट ग्रंथ है मैं उन्ही से आपको बता उसकी परिभाषा अगर श्वर देखिए आपने कह दिया श्वान अब मैं उस श्वान को भी तो खोल रहा हूं हा आपने कह दिया श्वान अब मैं उस श्वान को खोल रहा हूं फिर उसम आ रहा है पूण श्वान उसम आ रहा है सत उसम आ रहा है चित उसम आ रहा है आनंद हर तरह से श्वान आप उस श्वान को धन पर सीमित कर रहे हो देखो उसको उसको भी देखेंगे ना आपने आप जिन ग्रंथों की बात कर रहे हो उन्होंने उस शब्द को कहां से लिया है वो आप बताइए उन्होंने उस शब्द को कहां से लिया है हां हम तो यह कह रहे हैं ना कि पहले वेद है फिर संस्कृत है अरे पहले वेद कैसे होगा वे वेद के लिए तो पहले संस्कृत चाहिए ना बिना संस्कृत
00:11:46:16 के वेद कैसे होंगे ये बताइए मुझे किसी भाषा के बिना कोई ग्रंथ कैसे होगा ये ठीक है मगर मेरा कहना ये है देखिए इस पर हम जो बात करेंगे ना सर अग ठीक है च सर अगर ठीक है तो इसी पर चलिए ना पहले संस्कृत होगी फिर कोई ग्रंथ होगा ना पहले कोई भाषा होगी फिर कोई उस पर आधारित ग्रंथ हो सकता है पहले ग्रंथ होगा भाषा बाद में होगी ये कैसे संभव है अब ये वही मैं कह रहा हूं ना कि ये हमारे टॉपिक से रिलेट नहीं करता है विषयात होगा और इसी प पूरी चर्चा हो जाएगी अरे सर रिलेट तो करता है ना कि के शब्द आपने कहां से लिया ये तो रिलेट करता है ना तो आप बताओ ना चलिए आप बताइए आपका शब्द कहां से आया ईश्वर का हमने तो बता दिया जब रहद उपनिषद से आया वेद से आया
00:12:31:24 की वो व्याख्या आई है हमारे वेद आद उपनिषदों से अब आपकी व्याख्या जो है वो कहां से आई है वही बता खा है मेरी व्याख्या वहां से आई है जहां से जिन ग्रंथों की आप बात कर रहे हो उन्होंने भी शब्दों को उसी शब्दकोश से उठाया है चलो ठीक किस शब्दकोश से उठाया है बताइए अरे संस्कृत का कोई भी शब् नाम बताइए मैंने नाम बताया ना अब आपको अब आप नाम बताइए किस शब्द को उठाया है अरे अरे भैया पॉइंट तो दीजिए भाई शुरुआती हम कैसे चेक करें आपकी बात जो आप कह रहे हो आपने शब्दकोश से उठाया है अच्छा चलो यहां से उठा लो इनका एक शब्दकोश है क्या नाम है ये जो गोरखपुर वाले हैं गोरखपुर प्रेस का गीता प्रेस गोरखपुर हां गीता प्रेस गोरखपुर उनका उठा लीजिए ऑक्सफोर्ड यूनिवर्सिटी है उसका भी सब ऑक्सफोर्ड यूनिवर्सिटी कैसे आ जाएगी हमारे में और संस्कृत हिंदी शब्दकोश है कई उनमें से कोई उठा लीजिए अरे आपने गीता प्रेस गोरखपुर का नाम लिया उसमें मुझे बताइए फलाने पेज पे फलाने पन्ने पे ऐसे ऐसे लिखा हुआ है कि ईश्वर का शब्द ईश्वर का अर्थ है पूर्ण ऐश्वर्य वान हां ये तो मैं आपको अगली बार दे ये तो मैं आपको अगली बार देख के बता दूंगा अब आपने बोला नहीं था किई मुझे डि बता इसीलिए मैं पूछ इसीलिए मैं कह रहा था
00:13:46:25 कि इस जो हम लोग जिस चीज पे अभी टॉपिक प बात कर रहे हैं ये विषयात हो जाएगा रिलेट भी नहीं करता है अरे तो कैसे तय करोगे फिर ईश्वर मतलब क्या है अगर शब्दकोश में ही ईश्वर का मतलब नहीं देखोगे तो कैसे तय करोगे श्वर का अर्थ आपने माना है कि ऐश्वर्य वान और श्वान मैंने मैंने नहीं माना ठीक ठीक है अभी हम आगे बढ़े कि नहीं बढ़े हां बढ़ी हां तो वही बात आ रही है ना जब मैंने आपसे तर्क तर्क और प्रमाण मांगा तो आपने कह दिया प्रमाण में अगली बार दिखाऊंगा हां मैं अगली बार दिखा दूंगा तो फिर आपने नहीं माना नहीं माना इसपे हम लोग बिरते रहे बस माना कि नहीं माना ना माना कि नहीं माना अरे भाई साहब उनकी उनकी जो शब्दकोश है वो मुझे रेफरेंस बता दीजिए पहला पहला सुनिए आप मुझे रेफरेंस भेजिएगा और वो एक एक काम करिएगा पोस्ट बना के भेजिएगा रिफरेंस उस पोस्ट में अगर आपने ये लिखा कि गीता प्रेस गोरखपुर में इतने नंबर के पन्ने पे ये लिखा हुआ है कि मैं कई दूंगा कई सारे एक मिनट ईश्वर का अर्थ है ऐश्वर्य वान फिर ऐश्वर्य वान का अर्थ है जिसके पास ज्यादा धन हो हां ब ये भी ध्यान रखिएगा अरे सर धन की बात नहीं हो रही है ऐश्वर्य का मतलब ऐश्वर्य होता है ऐश्वर्य आज ऐश्वर्य को आपने धन से कैसे जोन बोल सकते हो अरे आज आज की दुनिया में उसे धन कह सकते होय
00:15:02:21 कहाय आप मुझे सिद्धांत बताइए उस शब्दकोश से कि ऐश्वर्य वान का मतलब धनवान हा वो मैं बता दूंगा आपको वो आप मुझे बताइए गीता प्रेस गोर का प्रमाण मुझे भेजिए जिसके पास ज्यादा ही कई प्रमाण भेज दूंगा कई एक नहीं अब आगे बात करते हैं अब ये बताइए आपके अनुसार प्रतिपादित होने वाला जो ईश्वर है जी उसकी आवश्यकता उपयोगिता क्या है उसकी उपयोग यह है कि हर व्यक्ति सुखी होना चाहता है और सुखी होने के लिए ऐश्वर्य की जरूरत पड़ती है किसकी ये उसकी उपयोगिता है सुखी होने के लिए ऐश्वर्य की जरूरत पड़ती है नहीं नहीं नहीं ऐश्वर्य नहीं जैसे आपने बताया कि भाई जो मुझसे ज्यादा पैसे वाला है वो मेरा ईश्वर है ठीक है सी बात है हां तो अब वो जो व्यक्ति जो मेरा ईश्वर है आपके अनुसार कैसे आ रहा है वो उपयोग बता अरे भाई मेरा ईश्वर नहीं मुझसे बड़ा ईश्वर बोलिए मेरा क्यों बोल रहे हो उसे अरे आप के आपके परिपेक्ष से तो वो ईश्वर है ना आपका अरे भाई मैंने ईश्वर का अर्थ बताया कि जिसमें यह गुण दिखाई पड़ेगा वो ईश्वर है अब आप बोलो आपके पर्सपेक्टिव से कोई ईश्वर है कि नहीं आपका अरे मेरा ईश्वर क्यों होगा ईश्वर का अर्थ है वो मेरा उसको मेरा क्यों बना दे रहे हो आप ईश्वर
00:16:18:01 ईश्वर ईश्वर किसका है अच्छा बताइए अरे सब अरे जिसके पास ऐश्वर्य है वो ईश्वर है किसका और किसका नहीं स ले देना आपके लिए वो कोई मान नहीं रखता ईश्वर है पर वो आपके लिए कोई माने नहीं रखता रख भी सकता है नहीं भी रख सकता है दोनों बात है आपके लिए रखता है कि नहीं सर बताया तो कोई कोई ईश्वर मेरे लिए मायने रख सकता है कोई दूसरा ईश्वर मेरे लिए मायने नहीं रख सकता अमेरिका में कोई बैठ आपके लिए जो ईश्वर है वो कोई एक ईश्वर चुन लीजिए कोई भी एक दुनिया का ईश्वर जो आपके लिए मायने रखता हो है या नहीं है हां मेरे मेरे संपर्क में जितने भी हैं व सब मायने रखते हैं तो वो कोई बताइए ना अरे वो बहुत सारे हैं जैसे अभी तो आप ही है अभी आप मुझे सहयोग कर रहे हैं मुझे यहां बात रखने के लिए तो आप मेरे लिए इस मामले में ईश्वर हो गया आपके पास यह चैनल है य ऐश्वर्य आपके पास अब यहां पर ईश्वर की परिभाषा आपकी बदल गई कैसे बदल गई वही तो बात हो गया
00:17:20:07 उपयोगिता मिनट आपकी परिभाषा ईश्वर की यह थी कि भैया ईश्वर वो है जो धन दे मतलब धन दे नहीं जो धनवान हो ऐश्वर्य वान जिसको आ मुझे आपकी परिभाषा यह थी जो धनवान हो अभी आपकी परिभाषा य है जो हमको कुछ दे वो ईश्वर है अरे तो भाई किसी के धन का हमें तो कोई उपयोग होगा तभी वह हमारे लिए किसी काम का है ना अगर उसका धन तोष मेंडन हो गया ना आप पूरी परिभाषा बताइए मुझे आपकी आपने पूरी परिभाषा रखने का तो मौका ही नहीं दिया ना आप तो शुरू से सवाल र अभी तो अभी पूछ रहा हूं ना पूरी परिभाषा बताइए आप ईश्वर की हा हा अभी आपने उपयोग पूछा था तो उपयोग तो बता द मैं कहा मेरे संपर्क में जितने लोग तो आपसे बहुत पहले पिछले वाले में ही ईश्वर के बारे में पूछा था तो आपने कहा था जो ऐश्वर्य वान हो जिसके पास ज्यादा धन है वही ईश्वर है तो आपने पूछा था ईश्वर क्या है तो उसका अर्थ यही है उसका उसका उत्तर परिभाषा बदल रहे है ना कि जो आपको धन दे व ईश्वर अरे परिभाषा नहीं बदल रहे ईश्वर का जिसके पास धन होगा आपने बोला कि वो मेरे लिए उपयोगी आपने य अभी थोड़ी देर पहले सवाल पूछा मेरा जिसको आप ईश्वर कह रहे वो मेरे लिए कैसे उपयोगी है
00:18:35:08 तो मैंने कहा कि कोई ईश्वर मेरे लिए उपयोगी है कोई नहीं भी है आपने पूछा अच्छा उपयोगी है वो कौन है जो ईश्वर आपके लिए उपयोगी है व ईश्वर उपयोगी है कई ऐसे भी ईश्वर होंगे जो उपयोगी नहीं भी होंगे ठीक है मेरे लिए उपयोगी नहीं होंगे ब अब ये बताइए आपके पास कुल संपत्ति कितनी है आज की डेट में मेरे पास तो बहुत कम है मतलब हो सकता है एक दो लाख आप बोल सकते हो इससे ज्यादा नहीं हा एक दो लाख बोल सकते हो एक दो लाख मेरे पास 500 है मैं आपका ईश्वर कैसे हुआ आप मेरे ईश्वर ऐसे हो गए कि आप मुझे उपयोगी उपयोगी सिद्ध हो आपने कहा धन ये ध्यान रखिए आपने ये नहीं कहा कि मेरे पास धन ज्यादा होना चाहिए आपसे ज्यादा मेरा धन नहीं है मैं ईश्वर कैसे ह सिद्ध करिए अरे मैंने नहीं कहा कि जिसके पास ज्यादा धन है वो ईश्वर है मैंने कहा जिसके पास न है लो वाह लो भाई लो क्या अभी तक आप था वो क्या कहते हैं आपने बताया था दुनिया में सबसे जदा उसके पास सबसे ज्यादा पैसा है वो ईश्वर तो सबसे बड़ा ईश्वर वो है ठीक है ईश्वर मुझे सिद्ध करिए ना आपका आपके परिपेक्ष से मुझे ईश्वर सि कर हा बताया तो ईश्वर का मतलब ईश्वर का मतलब बताया कि जिसके पास ऐश्वर्य है और जिसके पास जितना
00:19:50:09 ऐश्वर्य वो उतना उतना ईश्वर तो उतना धन शब्द का उपयोग किया है अपनी परिभाषा में या नहीं किया धन के पहले ऐश्वर्य भी बोला है हां ऐश्वर्य बोला है फिर ऐश्वर्य के बाद उसका अर्थ धन से लगाया जिसके पास ज्यादा धन होगा हां और आज की दुनिया में ऐश्वर्य का मतलब होता है धन हां तो अभी मेरे पास आपसे ज्यादा आज की दुनिया में आज मुझसे मेरे पास आपके आपसे ज्यादा धन नहीं है मुझे ईश्वर सिद्ध करिए अपना हां तो आपके पास धन है इससे आप ईश्वर सिद्ध हो जाते हैं आपसे ज्यादा नहीं है ना अरे ज्यादा से मतलब नहीं है धन आपने मुझे अपना ईश्वर माना ना अभी अभी अभी माना हा उपयोगिता के आधार पर उपयोगी हो रहे यानी ईश्वर की परिभाषा ये नहीं है जो धनवान ज्यादा धनवान होगा वो ईश्वर है ईश्वर की उपयोगिता य ईश्वर की परिभाषा ये है ईश्वर की परिभाषा आपने ईश्वर की परिभाषा बदल दी खैर परिभाषा आपने बदली वो जनता डिसाइड करगी बदलेगी बदली जनता ड पहले आपकी परिभाषा ये थी जिसके पास ज्यादा धन है वो ईश्वर है आपने ये भी अभी अभी अभी अभी कहा आज पा मैंने पास मैंने कहा जिसके पास जितना धन है वो उतना ईश्वर है ऐसे बोला अब आपको याद
00:21:05:14 मैं क्या कर सकता अभी आपने मुझे अपना ईश्वर माना कि नहीं माना हां हां और बताया कि क्यों माना तो फिर मेरे जब मेरे पास आपसे ज्यादा धन नहीं है तो फिर मुझे ईश्वर क्यों माना आपने मैंने तो नहीं कहा कि जिसके पास ज्यादा धन होगा वही ईश्वर होगा मैंने कहा जिसके पास कम धन चलिए ठीक है आप इसको रिपीट एक बार दो बार इसको रिपीट कर दीजिए मैंने नहीं कहा जिसके पास श्वर होगा मैं चार बार रिपीट कर देता हूं चार बार कर दीजिए जिसके पास जितना धन होगा वो उतना ईश्वर है और जो जिसके लिए उपयोगी है वो उसका उस उस मामले में उतना उतना ईश्वर है आ बात समझ आप ये रिपीट करिए जिसके पास ज्यादा धन होगा वह ईश्वर है यह मैंने नहीं कहा य जिसके जिसके पास ज्यादा धन होगा केवल वही ईश्वर है ऐसा मैंने नहीं कहा नहीं केवल केवल मत कहिए केवल गाे आप कह रहे केवल केवल वही है कि जिसके पास ज्यादा धन है यानी कि यानी कि उस समय आपने अपनी परिभाषा पूरी नहीं कही थी नहीं आपने आपने जिस परिपेक्ष में पूछा था उस परिपेक्ष में पूरी थी आपका आपने तब ये सवाल नहीं पूछा परिपेक्ष में पूछा था मैंने पूछा था आपने पूछा था कि कौन ईश्वर कौन है मैंने बोला कि जिसके पास धन है फिर आपने बोला कि सबसे बड़ा जिसके पास सबसे ज्यादा धन है
00:22:21:03 तो तो यानी कि जिसके पास ज्यादा धन है आपके अनुसार वो ईश्वर है ना कि इसमें और भी कुछ ऐड करेंगे ईश्वर क्या है आप क्या मैं आपसे दोबारा एक बार पूछ रहा हूं आप मुझे ईश्वर क्या है बताइए दोबारा पूछ जिसके पास जिसके पास ऐश्वर्य है वो ईश्वर है अच्छा इसमें धन शब्द नहीं आएगा पहले तो आया था और ऐश्वर्य का मतलब आज की दुनिया में धन माने जिसके पास धन है वो ईश्वर है तो आज के अनुसार आपकी ईश्वर की परिभाषा दोबारा बताइए हां तो आज के हिसाब दोरा क्लियर पूछ रहा हूं जी हां आज के दुनिया में जिसके पास जितना धन है वो उतना ईश्वर है ठीक है अब धन आ गया ना य आज की दुनिया के परिपेक्ष से अब मुझे अपना अब मुझे अपना ईश्वर आप सिद्ध करिए हां क्योंकि आपके पास भी धन है आपने बताया कि 5 हज आपके पास धन है तो आप एक तो ईश्वर हो गए मैं आपका ईश्वर कैसे हुआ यह बताइए अरे वही बता रहा हूं पहले तो आपको ईश्वर बताना पड़ेगा ना ईश्वर होगे तभी ना किसी के हो सकोगे ईश्वर ईश्वर तो जिसके पास चवन्नी भी वो भी ईश्वर है यानी हर व्यक्ति लगभग ईश्वर ही है लगभग ऐसे समझ ऐसे समझ लो अब अब आप मुझे बताइए मैं आपका ईश्वर कैसे हुआ हां आप अगर मुझे किसी भी रूप से सहयोगी होते हैं तो आप मेरे लिए उस मामले में उतनी देर के लिए
00:23:36:03 ईश्वर हो जाते हैं जैसे अभी आप मुझे सहयोग कर रहे हैं कि आपने अपने चैनल पर मुझे बात रखने के लिए समय दिया ये दिया तो इस मामले में आप मेरे ईश्वर हो गए इतनी देर के लिए ठीक ठीक ये मुझे अच्छा लगा ये आपने जोय बात कही है बहुत अच्छी बात है और दूसरी बात मैं यह भी कह रहा हूं कि उस दिन मेरे शब्द क्या थे जो आज बदल गए जो आपकी की परिभाषा य बढ़ गई कि क्योंकि आप मुझे कुछ दे रहे हैं सहयोग कर रहे हैं मेरा प्रश्न बदल गया है उस दिन आप चर्चा छोड़ के भाग गए तो अगर पूछते उस समय तोय बा वो तो बात की बात है जब मैंने आपसे पूछा ईश्वर क्या है अभी भी मैंने आपसे पूछा ईश्वर क्या है उस दिन आप आज के परिपेक्ष से देखा जाए ईश्वर वो है जिसके पास ज्यादा जिसके पास जितना धन है उतना ही वो ईश्वर है ठीक है मैंने ये भी पूछा था इसका मतलब इसका मतलब आपसे ज्यादा यदि कोई पैसे वाला है तो आपका ईश्वर है उसमें भी आपने हां कहा अब मैंने उस दिन ऐसा क्या प्रश्न मेरे प्रश्न में उस दिन आज में क्या अंतर था जो आज आपकी परिभाषा थोड़ी सी बदली हुई है हां आपके प्रश्न में यह अंतर था कि आज आप और ज्यादा डिटेल में पूछ रहे हैं उस दिन आपने दोही चार सवाल पूछे थे उसके बाद तो आप चले गए थे छोड़ के नहीं नहीं डिटेल की बात तो मैंने पूछा क्या है आपसे
00:24:51:14 मैंने पूछा क्या है ईश्वर क्या है क्या पूछा है अरे सर ईश्वर क्या है जब आप ईश्वर क्या क्या है ऐसा तीन चार बार 10 बार पूछोगे तो डिटेल बढ़ती चली जाएगी हर बारक बढेगी चलिए ठीक आपने उस दिन डिटेल में नहीं बताया था आज आपने डिटेल में बताया आपने समय हा बिल्कुल आपने समय नहीं दिया उस दिन तो दिया अब दूसरी बात आती है इससे आ अभी भी छोड़ के चले जाएंगे तो हो सकता है अभी भी कोई डिटेल रह जाए जो आप आगे फिर पूछेंगे फिर आएगी नहीं देखिए उस दिन आपने मैंने आपने जब मुझे अपनी बात कही ना तो उसके बाद मैंने पूछा अच्छा ये ईश्वर है आपने कहा हा मतलब आप सेटिस्फाइड थे अपनी लाइन से ऐसा नहीं था कि आपके पास कुछ और बाकी था अरे स रडि वो रिकॉर्डिंग आपको भेज दूंगा जिसम आपने सेटिस्फेक्शन दिखाया ईश्वर की परिभाषा बोलने के बाद भाई रिकॉर्डिंग तो आपकी ट पर पड़ी है ना भेज देंगे क्या मतलब है जी जी कट करके भेज दूंगा कट करके आपको कट करे अगली बात यह है कि अब आप ये नहीं मानते कि इस दुनिया में कोई सर्वशक्तिमान है सर बताया तो जिसके पास सबसे ज्यादा धन है वो सर्व शक्तिमान हो गया उस परपे से नहीं उस परपे से नहीं दुनिया में ऐसी कोई शक्ति है जो अखंड ज्ञानी
00:26:06:19 हो जो अमर हो जो अनंत सुख जिसके सुख में कभी बादिता नहीं हो जो अबाध हो ऐसी कोई शक्ति है अब आप यह मानते हैं कि नहीं मानते मेरे अनुभव में तो नहीं है कोई ऐसा ठीक है अब आप यह बताइए कि वही बात दोबारा आ जाती है कि एक नास्तिक एक तरीके से हमारे परिपेक्ष से मैं इसको क्लियर कर दूं एक ईश्वर वादी जो उसको मानता है कि इस दुनिया में कोई सर्वशक्तिमान सत्ता है ईश्वर वादी व्यक्ति के परिपेक्ष से आप इस समय नास्तिक है आपकी अपनी एक डेफिनेशन है वो बात की बात है कि वो डेफिनेशन आपकी और मेरी में अंतर है ईश्वर की जो डेफिनेशन है मगर आप ना मतलब आपकी डेफिनेशन में मैं नास्तिक हूं यह बात हुई हा हर हर ईश्वर वादी जो सर्वशक्तिमान सत्ता को ईश्वर कहता है उसके परिपेक्ष से आप नास्तिक है ठीक है पता नहीं मैंने जो अभी तक अभी तक परिभाषा पढ़ी आस्तिक नास्तिक की ये है कि जो व्यक्ति मैं कह रहा हूं ना आपकी परिभाषा अलग है मैं कह रहा हूं हर ईश्वर हर वो ईश्वर वादी जो ईश्वर को सर्वशक्तिमान से मानता है ना कि कौन ईश्वर को किसी भी ईश्वर को जिस जो भी व्यक्ति सर बहुत सारे अरे सर बहुत सारे हैं सर देखो वेदों में ही तीन चार परिभाषा हम बात करेंगे इसम हम बात करेंगे
00:27:21:26 ये क्या है ना ये विषयात हो जाता है सुनिए ये विषयात हो जाएगा ये विषयात है कौन सा ईश्वर ये विषयात है मैं अभी आपको एक बात बता रहा हूं कि जो भी व्यक्ति ईश्वर का अर्थ ये लेता है कि कोई सर्व शक्तिमान सत्ता जो प्रकृति को भी कंट्रोल कर ले ठीक है कोई सर्वशक्तिमान सत्ता के रूप में जो ईश्वर को मानता है ईश्वर का अर्थ लेता है उस हर व्यक्ति के परिपेक्ष से आप नास्तिक है ठीक है ओ हां तो आपके अर्थों में आप जो अर्थ बता रहे हैं उस अर्थ में आप मुझे नाने क्या कहा मेरा अर्थ नहीं हर उस व्यक्ति के अर्थ में जो सर्वशक्तिमान मानता है ईश्वर का अर्थ आप भी उस व्यक्ति में है ना हा तो आप मुझ तक सीमित ना करे ऐसा लोग ना समझे कि मेरे अर्थ में हर वो व्यक्ति भले ही मुस्लिम हो ठीक है ये कोई भी आदमी हो जो ऐसा मानता है जैसा आप कह रहे हैं उसकी दृष्टि में उसके परपे वो ये ना समझे वो ये ना समझे कि ये भी ईश्वर की बात करता है ठीक है ओके जी जी अब आगे की बात यह है कि नास्तिक व्यक्ति जो मना कर रहा है इस दुनिया नास्तिक सर्वशक्तिमान को ना मानने वाला लोग परलोक को ना मानने वाला तो नास्तिक व्यक्ति नास्तिक व्यक्ति के मन
00:28:37:01 में भी यह जो प्यास आ रही है अमरता की कभी दुखी ना होने की यह क्यों आ रही है क्योंकि अभी तक अमरता की खोज नहीं हुई है या मान लीजिए सबकी सबकी खोज हो गई मैं कह रहा हूं जो अखंड ज्ञान है उसकी खोज नहीं हुई है अनंत सुख की खोज बिल्कुल नहीं हुई है तो यह प्यास क्यों आ रही है क्योंकि यह चाहत है उसकी इसलिए आ रही है तो यह चाहत निराधार है नहीं निराधार क्यों की इसका आधार है चेतन होने का मतलब य है कि कुछ चाहा ना चेतन कोई चीज भी चेतन है इसका मतलब य है कि वो कोई करेगी को वक्ति जिस चीज का अस्तित्व नहीं है उसे चाह रहा है जिस चीज का अस्तित्व नहीं है उसे चाह रहा है तो वो तो पागल कहलाएगा ना दार्शनिक कैसे कहलाएगा नहीं कहलाएगा पागल वो उस पर खोज करेगा उसकी संभावना है उसको संभावना के आधार पर खोज करना अलग है सुनिए खोज करना अलग है चाहना अलग है जैसे तो चाह के ही खोज करेगा भाई बता रहा इस इसम अंतर है जैसे की आज की डेट में अभी तक मृत्यु को जीत लेने का आविष्कार नहीं हुआ है चाहते नहीं लेकिन लोग ख रहे मैं पहुंच रहा हूं आपकी बात अभी मैं पूछ रहा हूं आज की डेट में अभी तक मृत्य
00:29:52:08 को जीत लेने का आविष्कार नहीं हुआ है ना हा अभी तो नहीं हुआ फिर भी एक नास्तिक व्यक्ति का कोई माता पिता या कोई प्रियजन जब हॉस्पिटल में डेड घोषित हो जाएगा साइंटिफिक रूल से उसके मन में ये बात बारबार आएगी कि जिंदा हो जाए यह मेरे अनुसार जीता जीवन जीता रहे हां हा बिल्कुल तो आज की डेट में वो भावना क्यों आ रही है जब अभी आविष्कार नहीं हुआ खोजना अलग चीज है हा हा इसलिए वो खोज नहीं रहा है वो खोजी भी नहीं है वो अपना कोई बैंक का एंप्लॉई है वो अपना कोई हा क्योंकि वो जी क्योंकि वो जीवित रहना चाहता है अभी सुख लेना चाहता है वही तो बात है आज की डेट में क्या बात ता सदा आनंदित रहना चाहता है अगर उसके मन में चा विद्यमान है सदा आनंदित रहने की सदा जीवित रहने की तो अगर वो ये कह रहा है कि इस दुनिया में इसका कोई अस्तित्व ही नहीं है तो वो तो पागल ही कहलाएगा ना दार्शनिक क्यों कहलाएगा अरे किसका अस्तित्व नहीं है सत चितता आनंद का अमरता का अज्ञ हीन जीवन का अरे भाई साहब आप मुझे बताइए कि आप जिसको सत और चित और आनंद बोल रहे हो उसके लिए कौन मना कर रहा है कि उसे सुख नहीं चाहिए क्यों जाते हैं भाई कि भैया स का तुम सिद्ध करके दिखा सकते हो कि नहीं भाई मैं ये कह रहा हूं कि मैं मैं सुनिए मैं ये कह रहा हूं मैं अमरता
00:31:07:15 को अमरता को प्रेजेंट करता हूं सत से मैं ये कह रहा ह मैं ये कह रहा हूं मैं अमरता को स प्रेंट करता हूं अरे भाई साहब सुनिए ना पहले जब जो चीज मैं कह रहा हूं आप मुझे उसे कह रहे हैं कि सिद्ध करो तो जो आप बोलेंगे मैं आपसे कहूंगा मैं ये नहीं कह रहा हूं ना येरी ये मेरी मान्यता नहीं मेरी ये सार्वभौम सिद्धांत है मैं ये नहीं कह रहा हूं ना आपने कहा वो सार्वभौम है आप ही तो क्या क्या सार्वभौम है मैंने यह कहा कि मैं यह मानता हूं कि मैं अमरता को सत से प्रेजेंट करता हूं मैंने तो कहा ही नहीं हा ओके आप कह रहे हैं कि आप अमरता को स हा अच्छा अमरता को सत से प्रेजेंट करते तो ठीक है सत की इच्छा है फिर हां तो वही मैं कह रहा हूं कि आज की डेट में जब आविष्कार नहीं हुआ तोन ईश्वर कैसे अरे सुनिए सुनिए सच्चितानंद का मतलब ईश्वर कैसे हो गया क्योंकि वो पूर्ण ऐश्वर्य वान है किसी भी प्रकार से बाधित नहीं है वो कैसे बताइए दिखाइए थोड़ा सा आपको अनुभव वही तो मैं अच्छा ठीक है चलिए सिद्धांत को मान लेते हैं ठीक है आपने जो चीज नहीं देखी है उसके अस्तित्व को स्वीकार नहीं करेंगे अरे अगर उसका अनुभव नहीं है कोई भी प्रकार से तो कैसे करेंगे आप पागल किसे क के र मुझे क्या पता पागल किसे कह रहे हैं अभी आपने कहा ना अरे पागल
00:32:23:09 मैंने तो नहीं कहा आपने कहां से सुन लिया भाई कोई बताएगा कमेंट करके हां करके बताओ और आप बाद में रिकॉर्डिंग भी सुनिए कमेंट करके कोई बताएंगे हां बताइए इनके मुंह से अभी निकला कि नहीं अरे पागल हां जी बताइए क्या मेरे मुंह से निकला और यह टाइम भी नोट हा कान ही बजे होंगे या मेरा कोई और शब्द आपको कुछ और लगा होगा मिलता जुलता होगा कोई दूसरा
00:32:56:25 शब्द कोई वच नहीं कर रहा क्या इस समय ये देख बोल तो र में से कोई तो बताए कोई एक कह रहा है बोला है कोई एक कह रहा है नहीं बोला है य देखो दोनों तरह के बोल रहे नहीं बोला बाद में बोल रहे नहीं बोला वाले आपकी तरफ के होंगे और बोला वाले मेरी तरफ के होंगे फ ठीक बाद रिकॉर्डिंग में सुनेंगे मर बो बोलिएगा रडि रिकॉर्डिंग हम थोड़ी बदल देंगे तो आप देख सकते हर्ष भाई जी डिबेट में आकर सवाल जवाब आज कर लीजिए जिससे कि हमें भी जानकारी मिल सके मूर्ख किसे कहते हैं और ज्ञानी किसे कहते
00:33:40:07 हैं तो अब बात य आती है जी मेरा प्रश्न वही आ जाएगा कि जब आज अमरता की खोज नहीं हुई है तो व्यक्ति के अंदर अमरता की चाह आना चाह आना इससे सिद्ध होता है कि या तो अमरता है आज भी जब तक अमरता की खोज वैज्ञानिकों द्वारा नहीं हुई है और या फिर ऐसा कहा जाना कि अमरता नहीं है फिर भी चाह आना ये पागलपन को रिप्रेजेंट करता है नहीं इससे नहीं सिद्ध होता ना इससे ये सिद्ध होता है कि ये पागलपन है और ना ये सिद्ध होता है कि च ये अब जनता डिसाइड करेगी कि इससे सिद्ध हो रहा है कि नहीं हो रहा है नहीं तो मुझे अपनी बात बोलने दीजिए इस मामले में आपने तो बोल दिया चाहत जो हमारी पैदा होती है वो हमारे हमारे अंदर से पैदा होती है कि वह चीज हम चाहते हैं हो सकता है वह चीज एजिस्ट करती हो यह भी हो सकता है कि वह चीज एजिस्ट ना करती हो यह हो सकता है कि आज नहीं एजिस्ट करती है लेकिन कल उसका अस्तित्व हो जाए यह भी हो सकता है कि उसका अस्तित्व कभी ना हो फिर भी हम चाहते हो क्योंकि चाहत का मतलब इतना होता है य देखिए यही प बात यही आती है ना कि आप चीज को चाह रहे देखिए आप में मुझ में क्या अंतर हुआ आप जिस चीज को चाह रहे हो उसके अस्तित्व को नहीं मान रहे हो
00:34:55:15 मैं जिस चीज को चाह रहा हूं उसके अस्तित्व को मान र आप जिस चीज को चाह रहे हो ये कह रहे हो इसका निवारण नहीं है आज की डेट में जिस चीज को चाह रहा मैं कह रहा उसका निवारण है इसीलिए चाह रहा हूं भाई व है तभी तो ये अंतर हुआ नास्तिक और आस्तिक अपने चा के विषय को स्वीकार कर रहा हूं आप चा के विषय को अस्वीकार कर रहे हैं क्या आपकी मृत्यु नहीं होगी मेरी मृत्यु नहीं होगी मैं फिलहाल बात ये हो रही है कि अमरता है कि नहीं इस दुनिया में जो मेरी मुक्ति नहीं होगी ये उस पर निर्भर करता है कि मैं कर्म कैसे करूंगा आगे हमारे द्वारा प्राप्त होने वाले सिद्धांत क्या है जिनको हमने स्वीकारा वो आगे सर आपके आसपास कोई भी ऐसा आदमी है कि जिसने अमरता की प्राप्ति कर ली हो एजिस्ट करती हो अमरता बिल्कुल हनुमान जी है अरे तो दिखाइ थो हनुमान जी को दिखाइए अरे भाई रे कोई अर होगा तो दिखेगा ना भाई जैसे आप ठी मैं बता रहा हूं अब ये बताइए हनुमान जी मेरे परमिशन से जाएंगे क्या मुझे क्या पता अब आप कह रहे हो तो य आपका काम है कि आप उन्ह प्रेजेंट करो नहीं तो उनका
00:36:05:20 नाम है में जब तक आप देख नहीं लेंगे मानेंगे नहीं ना अरे सर कैसे देख नहीं लेंगे मानेंगे नहीं ना जो देखने का विषय है अगर उसे देख नहीं लेंगे तो क्यों मानेंगे अच्छा ठीक है तो इस दुनिया में आपने सभी चीजों को देख लिया है हा कम से कम जिनसे मेरा इतना मतलब है कि मैं उन्ह मानू ना मानू कम से कम मैं देखना चाहूंगा कह रहा हूं साउथ अफ्रीका के जंगलो में कोई एक विशेष प्रकार का कीड़ा पाया जाता है अभी अगर हम ग ग सर्च करेंगे तो मिल जाएगा उसको देखा है आपने जी मैंने नहीं देखा उसको लेकिन ग पर देखेंगे स्वीकार करेंगे कि नहीं बस इसी रूप में करेंगे कि कोई कह रहा है हो भी सकता है नहीं भी हो सकता है जब तक मैं नहीं देख लूंगा मैं दावा नहीं कर सकता कि है ही मैं दावा का अधिकारी नहीं बनता हूं अच्छा अच्छा इस दुनिया के कितने कंट्रीज को आपने देखा है चार कंट्री को देखा है बस बस उसके अलावा नहीं देखा वो तो मैंने भारत को भी पूरा नहीं देखा है तो जिन जिन जिन कंट्रीज को आपने नहीं देखा है वो वो कंट्रीज का अस्तित्व नहीं है इस दुनिया में मुझे नहीं पता मैं दावा नहीं कर सकता ना मैं दावा करने का अधिकारी नहीं हूं ब बस ये जनता देखेगी अब आपके जो इस समय वक्तव्य आ रहे हैं जैसे आपने कौन-कौन
00:37:20:22 सी कंट्रीज को देखा है जो जो चीज आपने अभी तक अभी तक नहीं देखी आपने अभी तक किसकिस कंट्री में देखा मैं पूछ रहा हूं रशिया को देखा है नेपाल को देखा है और थोड़ा सा चाइना को देखा है बस अच्छा जापान इस दुनिया में नहीं है फिर उस हिसाब से आपके परिपेक्ष से सर होगा लेकिन मैं नहीं दावा कर सकता आपका बिलीव क्या है आज की डेट में जापान है कि नहीं अरे अरे सर मैं बिलीव की बात नहीं कर रहा देखा तो उसमें बिलीव से क्या लेना देना है बिलीव का मतलब है पूछ रहा हूं आपने क्या स्वीकार किया है आपने क्या स्वीकार किया है जापान करता कि नहीं भाई करता हो सकता है संभावना है पूरी यानी आप कन्फर्म नहीं है जापान प मैं कंफर्म नहीं हूं मैंने नहीं देखा ठीक बहुत बढ़िया चलिए ठीक है ये हो गया
00:38:11:27 हा जिस मामले में मैं कन्फर्म नहीं हूं मैं उसम कन्फर्म हूं ऐसा करके नहीं बोल सता ठीक ठी आपका मतलब कन्फर्म होने का आधार यही है कि आप जो है जिसको देख लेते हैं उसी को मानते है वो है जो चीज जिस तरह से अ उसके अलावा आपने नहीं माना है दुनिया में जापान अमेरिका है रूस है ये सब आपने नहीं माना यस यस यस वो खाली वो खाली मानने की बात है कि भाई न्यू चैनल बोल मतलब बिल्कुल बिल्कुल उसको स्वीकार कर लेना आत्मसात कर लेना ये बताए प मानने का मतलब होता है मानना मतलब है कि जाना नहीं है मान लिया है और जानने का मतलब है कि अब पता ही है कि हां यह चीज है या नहीं है ठीक है अभी मैं अभी मैं फिर पूछ रहा हूं आपसे आप क्या मानते पृथ्वी गोल है कि नहीं हा हां मुझे ये समझ में आती है कि पृथ्वी गोल टाइप की है एकदम गोल तो नहीं है गोल टाइप की है आपकी अभी आपको दिखती कैसी है पृथ्वी अलग-अलग जगह दिखती है कहीं सपाट दिखती है कहीं उबड़ खाबड़ दिखती है अलग-अलग जगह जाते तो अलग जगह दिखती है कहीं कहीं गोल भी दिखती है गोल मतलब पृथ्वी का आकार गोल ना कि उसका कोई हिस्सा कोई गोल पत्थर रखा हो वो ना कि कोई चटन अरे भाई साहब मैं धरती पर हूं तो मु
00:39:27:13 रूप क्या दिखता है आपको क्या समझ में आता है ओवरऑल रूप अरे सर जी जब मैं धरती के ऊपर हूं तो मुझे तो टुकड़े ही दिखाई देंगे ना धरती का कोई कोई ये टुकड़ा कोई वो टुकड़ा सारी धरती अ इसका अर्थ ये है कि अभी तक आपने पृथ्वी के उसको नहीं माना है कि फलाने फलाने डायमीटर में फैली हुई है पृथ्वी हा लेकिन मेरे पास ऐसे तरीके हैं कि उन तरीकों को जब मैं सोचता समझता हूं कैलकुलेट करता हूं तो उससे कैलकुलेशन से आता है कि यह गोल होनी चाहिए तो वो जो अच्छा वो जो तरीके आपने खुद ही कि थे नहीं कुछ लोगों ने भी इजाद किए हैं मतलब जैसे विज्ञान ने इजाद किए हैं और मैंने भी वह करके देखे तो वैसा ही पाया जैसे थोड़ा समझाएंगे आपने क्या करके देखा इसका जैसे एक अगर आप समुद्र के किनारे खड़े हो जाओ कहीं पर और कहीं दूर से कोई जहाज या नाव आ रही हो तो व उसका ऊपर का हिस्सा आपको पहले दिखाई पड़ेगा ऊपर का हिस्सा जबक वो समुद्र से कई कई फुट ऊपर होता है लेकिन ऊपर का हिस्सा पहले दिखेगा और जैसे जैसे वो आपके पास आता जाता है तो नीचे के हिस्से फिर दिखाई देने शुरू होते हैं ऐसा तभी हो सकता है जब समुद्र गुलाई में हो अगर समुद्र सपाट होता तो शुरू
00:40:42:13 से ही पूरा जहाज दिख रहा होता अच्छा अच्छा चलिए ठीक है तो ये तो आपने चलिए एक प्रयोग को लिया है किसी ने अगर सिद्धांत दिया होगा उसने प्रयोग करके देख लिया मगर कुल मिलाकर के कुल मिलाकर के अभी तक की अपनी बात ये है कि आप में उसम जापान सिद्ध नहीं है आप जापान को कन्फर्म नहीं करते हैं इस रूप में नहीं करता कि भाई मैंने उसको देखा है इस रूप में नहीं करता सूचना के रूप में अल्टीमेट आपकी मान्यता आपका बिलीव पूछ रहा हूं आज की डेट में वो एजिस्ट करता है आपके अनुसार कि नहीं करता है क्या बताएंगे अभी मान लीजिए मान लीजिए आप अपने बच्चे को बताएंगे जापान है कि नहीं है दुनिया में हा मैं उसको बताऊंगा कि भाई मैंने पुस्तकों में पढ़ा है मैं गया नहीं हूं पुस्तको में पढ़ है अरे भाई एट द एंड क्या बोलेंगे आप जापान है कि नहीं मैं उसको कंफर्म रूप में नहीं कह सकता हूं अच्छा ठीक है ठीक है अब आगे चलते हैं हां उसको मैं बोलूंगा तो यही बोलूंगा कि भाई सब लोग बोल रहे हैं मैंने भी तुम्ह ये ये सूचना दे दी ओके ठीक है अब आपके अनुसार जो आपने देखा नहीं है उसको आप नहीं मानते इसलिए जो सच्चिदानंद की चा है वो मैं चाह रहा हूं मगर उसका आधार नहीं है आज की टाइम में आज वो आप बात जो कर रहे हैं केवल
00:41:57:15 देखा हूं नहीं मत बोलो कोई भी तरह से अनुभव में कैलकुलेशन में नहीं आया अच्छा चलिए इसको डन कर देते आपकी परिभाषा में कोई भी तर से अनुभव अनुभव बहुत देर से मैं बहुत देर से बो अनुभव से आप स्वीकार कर लेते हैं तो अनुभवी तो मैं भी दे रहा था आपको कि आपके अंदर भी सच्चितानंद की प्यास आ रही है अनुभवी तो मैं भी दे रहा था अरे भाई साहब तो सच्चितानंद की प्यास है प्राप्ति नहीं है लेकिन सच्चित हो सकता है किसी भी चीज की प्यास आना तभी हो सकता है जब उस चीज का सब्जेक्ट हो मैंने आपको उदाहरण दिया भूख लगने से सिद्ध है कि दुनिया में भोजन है आंखों के अंदर देखने की क्षमता से सिद्ध है कि दुनिया में दृश्य है कानों के सुनने की क्षमता से सिद्ध है कि दुनिया में आवाज है तो मैंने भी आपको अनुभव दे दिया मगर आपने मुझे फिक्स किया ना नहीं मैं देखूंगा तभी मानूंगा इसलिए पूछा था मैंने अरे सर आपने अमरता का बोला के विष है चलिए आप मुझे उदाहरण दीजिए आप मुझे ब प्यास है हम मगर उस चीज का वो चीज एजिस्ट नहीं करती है बताइए उ जैसे अभी हम जैसे अभी हमें अमर होने की प्यास है लेकिन वह चीज अभी तक तो एजिस्ट नहीं करती है व्यवहारिक रूप में बताइए इस चीज पर तो लड़ाई हो ही
00:43:12:18 रही है अ तो भाई यही तो इस चीज में तो लड़ाई ई रही है अब ऐसे जैसे मैंने आपको खाने के बारे में बताया भूत का विषय खाना सिद्ध है ऐसे जैसे बता देता हूं जैसे बता जब जब मैं छोटा बच्चा था तो मुझे विश होती थी कि कोई चांद उठा मेरी हथेली पर र ये तो शक्ति की बात कर रहे हैं वे तो वही भगवान पर ही आ गए अरे सुनि शक्ति की बात कर रहे है ना आबाद सर्व शक्तिमता की बात कर रहे फिर भगवान प आ ग ऐसी चीज के बारे में बताइए जिसके अंदर आपके अंदर चाह भी हो उसको वही बता रहा हूं नाय ये मैं वही वि बता रहा हूं कि जो चाहती मगर एजिस्ट नहीं करती है भगवान प ही आ गए ना सर्वशक्ति मत्ता को चा रहे ना य तो अरे भगवान नहीं आ गया ना आपने मेरी पूरी बात नहीं सुनी तोत मैं क्या करूं आप कुछ भी आथ लगा लो बोलिए अगर मौका देंगे तो बोलूंगा देखो बोलिए बोलिए मुझे मुझे इच्छा हुई कि भाई ये जो चांद है इसे कोई मेरे हाथ प रख दे हथेली पर रख दे तो मैं इसे नजदीक से देखना चाहता हूं यह खेलना चाहता हूं इसके साथ में ऐसी इच्छा हुई लेकिन बाद में जोब बड़े हुए तो पता चला कि ये तो बचकानी इच्छा थी ऐसा तो एजिस्ट ही नहीं करता और ना कभी करेगा कि कोई चांद मेरी हथेली में आ जाएगा ऐसा पॉसिबल ही नहीं है तो ये एक ऐसी इच्छा थी जो अच्छा
00:44:27:22 ये पॉसिबल भी नहीं है ये सिद्ध हो गया है सिद्ध तो हो गया अच्छा विज्ञान मतलब ो खोज नहीं कर रहा है कि कल को हम चांद को भी हथेली पर रखवा ले इसकी कोई संभावना नहीं दूर दूर तक मतलब विज्ञान इस ओर कभी नहीं प्रयत्न करेगा कि इंसान अपना कद इतना बढ़ा सके कि वो चांद को भी हथेली पर रख ले ये सिद्ध तो किसी हां ये सिद्ध है ऐसा नहीं होगा मेरे लिए सिद्ध है जी हां ठीक है अब ये जनता देखेगी तो खैर अब आगे चलते हैं अब आ जाते
00:45:03:13 हैं अब बात ये आ जाती है कि आप जब किसी सर्वशक्तिमान सत्ता का अस्तित्व स्वीकार नहीं करते अपने जीवन में तो मैंने पिछली बार आपसे प्रश्न पूछा था कि आपके पास अपने माता को माता के दृष्टिकोण से देखने का आधार क्या है तो आपने कहा था सिर्फ भाषा वो शब्दकोष जिनके बारे में आप बता रहे हैं और उसमें भी पत्नी और माता के बीच में जो व्यवहार का अंतर है उसमें आपने कहा कि भाई अभी तक तो नहीं किया है पर हो सकता है आगे मैं जो है ऐसा व्यवहार भी कर दूं जो पत्नी के साथ करते हैं वो डिपेंड करता है उस समय की स्थिति पर परिस्थिति पर तो अब मैं पूछ रहा हूं कि आपके पास अच्छाई और बुराई का आधार क्या है अच्छाई और बुराई का आधार यही है कि व्यक्ति सब लोग सुखी होना चाहते अब देखिए मैं तसल्ली से पूछ रहा हूं एक मिनट पूरी परिभाषा बता दीजिएगा जिससे की बात में ड ऑन वाली चीज ना हो मैं बहुत अच्छे से सुन रहा हूं ठीक है जितना जितना आपने पूछा है उतना अगर बाद में कुछ और पूछेंगे तो फिर एडन हो सकता है आप अपनी पूरी व्याख्या बता दीजिए कि आपके पास मैं पूरी बोल रहा हूं पूरी कुछ बाकी ना रह जाए अच्छाई और बुराई का आधार क्या है हा अच्छाई और बुराई का आधार है कि कोई चीज अगर हमें सुखी करती है तो वह सही है और जो कोई चीज हमें दुखी करती है तो वह चीज गलत है य इतना सही आधार
00:46:18:19 है अच्छाई और बुराई का बस यही आधार है बस इतना ही अच्छाई और बुराई का जो चीज हमें सुखी करे वो अच्छी है जो चीज हमें दुखी करे वो अच्छी है तो इस अच्छाई और बुराई के इस आधार से हम समाज को व्यवस्थित कर पाएंगे बिल्कुल कर पाएंगे इसी के लिए इसी के लिए सारे लोग प्रयास करते हैं सुबह से लेकर सोने तक सब भाई हम सुखी हो तो आप एक बात बताइए जैसे मान लीजिए किसी की कोई पत्नी है या किसी घर की कोई मातृ शक्ति है अब कोई तीन लोग हैं जो उसके साथ दुराचार करना चाहते हैं तीनों एक साथ जी जी तो उनके लिए अच्छा यही कि वो दुराचार कर ले और जिसकी वो पत्नी है जिसके घर की वो स्त्री है उसके परिपेक्ष से वो गलत है तो अब यहां पर कैसे निर्णय होगा अच्छाई और बुराई का हो तो गया आपने बोल तो दिया कि ये उसके लिए गलत है और इनके लिए अच्छा है आप ही ने तो निर्णय कर दिया किया क्या जाए स्वीकारा क्या जाए सामाजिक दृष्टि से हां तो जब आप सामाजिक दृष्टि पर बोलेंगे तो सामाजिक दृष्टि का मतलब है कि जो चीज समाज को सुखी करती हो वो सही है और समाज में दुखी करती हो तो गलत है अगर समाज की द समा ठीक है तो समाज की अच्छाई और बुराई का आधार क्या है वही जो बात समाज को सुखी करती
00:47:33:25 हो वो सही है और जो बात समाज को दुखी करती है वो गलत तो मैं समाज को ही तो ब्रेक करके बता रहा हूं उसी समाज में एक लोग ऐसे हैं जो दुराचार करना चाहते हैं उसी समाज में दूसरा व्यक्ति ऐसा है जो नहीं करना चाहता है तो ये गलत हो गया ना अगर समाज में एक भी व्यक्ति को कोई बात नुकसान कर रही है दुखी कर रही तो वो बात गलत हो गई एक भी व्यक्ति को अगर कोई कोई दुख पहुंचाने वाली बात है तो वो दुखी हो ग हा वो बात गलत हो गई सामाजिक दृष्टि से व्यक्तिगत दृष्टि से नहीं हुई सामाजिक दृष्टि से हो गई एक भी व्यक्ति दुखी हो रहा है तो यहां पर तीन व्यक्ति दुखी हो रहे हैं ना कौन जो दुराचार करना चाहते हैं वोह तो सुखी हो रहे है ना वो दुखी कहां हो रहे उनको दुराचार करने को होने की स्थिति में जब आप ये ल लागू कर रहे हो मुझे पहले आप य बताइए दुराचार होना चाहिए कि नहीं होना चाहिए जिससे हम समझ पाए नहीं होना चाहिए नहीं होना चा नहीं होना चाहिए तो उस परिपेक्ष में तीन लोग होंगे कि नहीं होंगे हां बिल्कुल होंगे तो फिर ये दुखी होने वाली फिर क्या हुई आपने कहा जो एक भी व्यक्ति दुखी हो तो वह गलत है हा गलत है तो फिर बताइए कैसे हां बताया तो दुराचार नहीं करने दोगे तो भी दुखी है और दुराचार करने दोगे तो भी दुखी है दोनों ही अवस्था तो आप बताइए व्यवस्था क्या है आपका निर्णय ये क्यों हुआ कि दुराचार नहीं होना चाहिए अरे भाई इसीलिए
00:48:49:04 हुआ कि वो दुख पैदा कर रहा है किसी ना किसी को अरे तो आपके निर्णय से भी तो दुखी पैदा हो रहा है अरे भाई मेरे निर्णय आपका निर्णय इस आधार पे है ना आपका निर्णय इस आधार पे है कि उससे दुख पैदा ना हो मगर आपके निर्णय से भी तो दुख ही पैदा हो रहा है भाई अब आप तो मुझसे पूछिए ना कि क्या कोई ऐसा तरीका है जिसमें ना ये तीन दुखी हो ना वो एक दुखी हो ऐसा पूछिए ना अभी तो मैंने आपसे ये पूछा है कि अच्छाई और बुराई का आधार क्या है आपके चैप्टर पे आएंगे मुझे मालूम है आपको अपने चैप्टर्स को खोलना है यहां करके मुझे पता है नहीं मुझे नहीं नहीं मुझे नहीं खोलना आप पूछेंगे तभी खोलूंगा इसीलिए मैंने बोला आपको कि आप पूछिए तो खोलूंगा कर अच्छाई और बुराई का आधार क्या है अच्छाई बरा का आधार क्या है सुख और दुखी है और कोई आधार नहीं है तो सुख और दुख में मैंने आपसे पूछा ना कि जो दुराचार करना चाहता है ना होने पर दुखी होगा और जो दुराचार नहीं करना चाहता है वो होने पर दुखी होगा आपने निर्णय दिया नहीं होना चाहिए हा ये दोनों ही बातें गलत है क्योंकि या तो ये दुखी होगा या तो वो दुखी होगा तो दोनों ही बातें गलत है तो दोनों ही बातों में समाज में दुख तो आ गया ना तो बिल्कुल आएगा अब जब दोनों बात ही गलत है तो दोनों में दुख ही आएगा गलत का मतलब य कि दुख आ रहा है तो फिर तो फिर अच्छाई और बुराई का आधार ये कहना
00:50:04:07 कि जिससे दुख हो जिससे दुख हो किसी को भी एक भी व्यक्ति को दुख हो वो अच्छाई बुराई का आधार नहीं है अरे हो गया ना अगर दुख है तो बुरी चीज हो गई ना वो यही बराई आपने दुखी कर दियाना अपने निर्णय से अरे सर मैंने अपने निर्णय से कहां दुखी किया है आपने तो पूछा आपने कहा दोनों में से कोई काम नहीं होना चाहिए अब ऐसा तो हो नहीं सकता वो तो कह र है कि हम करेंगे ना करने प उनको दुख हो रहा है करने प इसको दुख हो रहा है तो वो तो मुझे पूछेंगे ना कि भाई ऐसा क्या हो सकता है कि ना इनको दुख हो ना उनको दुख हो वो बात सही होगी ये दोनों ही बातें गलत अच्छा मतलब आप एक आगे की चीज बताना चाहते हैं कि इनके मन में वो भावना ही ना आए कि दुराचार करें ऐसा कुछ है अरे सर इसका कोई कारण देखो हर चीज का कोई कारण होता है किसी के अंदर कोई ऐसी भावना आ रही है या इच्छा पैदा हो रही है उसका कारण है और अगर वो इच्छा गलत है ऐसा है कि वो किसी ना किसी को दुख पैदा करेगी तो उसके उसके क्या समाधान हो सकते हैं कि उनकी भी इच्छा पूरी हो जाए किसी दूसरे को दुख भी ना पैदा हो तो उस तरफ में आगे विचार चलेगा बात चलेगी वो अच्छा आप बताइए क्या है आपकी व्यवस्था बताइए हा बता व्यवस्था य व्यवस्था यह है जैसा मैंने बताया कि चूंकि आधार यही है कि वो
00:51:19:08 व्यवस्था सामाजिक रूप से सही होगी जो किसी को भी दुखी ना करती हो सबको सुखी करती हो और लोग को विश् भी वैसी ही पैदा हो मतलब विश् पैदा होने की इच्छा पैदा होने के भी वही कारण र मतलब आप कहना चाह रहे कि आपके पास एक ऐसी व्यवस्था है जो लोगों की विष को भी कंट्रोल कर लेगी जो कंट्रोल नहीं कर लेगी क्योंकि विश्व अनुशासित हो जाएंगी उनकी विष इस इसको पहले समझिए अगर आप अपने शब्दों को बसाएंगे सिर्फ वही चीज मांगी जाएंगी जो कि आज की धारणाओं के हिसाब से जो है वो अच्छी मानी जाए नाना ह देखो या तो आप बोल अच्छा दूसरी एक एक यहां पे एक फैक्ट आ रहा है आप बताइएगा मैं आपको सुनूंगा आपको सुनूंगा एक फैक्ट यहां पे ये आ रहा है जो व्यवस्था आप बता रहे हैं अभी तक लागू तो है नहीं हां अभी तक लागू नहीं है अभी इसका प्र मुझे अभी वो बताइए अच्छाई और बुराई का निर्णय कैसे हो आज की डेट में कैसे करते हैं लोग अभी अभी इसी तरह से करते हैं लोग के जिस चीज से कुछ बुराई फैलती है कुछ किसी को अरे तो वही बुराई किसी चीज को बुराई समझना किस आधार पे है ये बताइए ना दुख के आधार जिस चीज से बुराई फैलती है भाई बुराई को बुराई समझा किस
00:52:34:09 आधार पे ये बताइए मुझे दुख के आधार पे इतनी देर से बता तो रहा हूं महानुभाव तो मैं पूछ तो रहा हूं आपसे कि आपने मैंने पूछा आपसे कि एक दुराचारी है चार दुराचारी है जो एक स्त्री का हरण करना चाहते हैं ठीक है जी अब अगर आपके घर की वो महिला है तो आपने वहां निर्णय दे दिया नहीं होना चाहिए तो दुख तो इनको हुआ ना आपके निर्णय से आज की डेट में हां हां बिल्कुल तो वो उनके लिए तो उनके लिए तो बुरा है ना उनके लिए आप कहना चाह रहे हैं कि इसलिए आज की जो व्यवस्था है वो भंग है सब आपके पास कुछ इससे बेहतर व्यवस्था है सीधी सी बात है आज की व्यवस्था ही ऐसी है कि आप एक को रोकोगे तो दूसरे को दुख होगा दूसरे को रोकोगे तो पहले को दुख होगा आज की व्यवस्था ही ऐसी है आज तक अच्छा अच्छा ठीक है ठीक मैं आपकी व्यवस्था जरूर सुनूंगा और एक बात दोबारा से क्लियर कर दीजिए कुछ लोगों का उसमें कुछ अटकले थी वो यह नहीं कहना चाह रहे थे आप वो नहीं कहना चाह रहे थे कि आपके पास अपनी माता के साथ पत्नी जैसा व्यवहार ना करने का कोई कारण है या नहीं है नहीं है तो क्यों नहीं है अभी तक तो नहीं है अब आगे का पता नहीं मैं भविष्यवक्ता हूं नहीं पता नहीं क्या कारण खड़ा हो जाए अभी तक तो कोई कारण मतलब आगे ऐसा हो सकता है कि आप माता के साथ पत्नी जैसा व्यवहार कर दे दोबारा क्लियर पूछ रहा हूं आपसे लिख के दूं क्या यहां पर टाइप कर दो
00:53:50:02 नहीं हां के आगे भविष्य में क्या हो सकता है कुछ कहा नहीं जा सकता नहीं नहीं नहीं येय देखिए गोल मोल मत करिए उनको वैसे ही बिल्कुल क्लियर स्प बोलिए जिससे आपकी चीजों को मैं स्टेट कर पाऊ आप मुझे दोबारा बताइए क्या ऐसा हो सकता है भविष्य में कि आप माता के साथ पत्नी जैसा व्यवहार करें आपकी ब बताया तो आपने बोला सकता है मतलब आप पॉसिबिलिटी की बात कर रहे हैं तो हो सकता है मतलब आपके अपने आपने सिद्धांत को बिल्कुल जड़त नहीं वो स्वीकार किया कि मैं माता के साथ गमन नहीं करूंगा सर सिद्धांत यह है कि अगर कोई किसी चीज से मेरी माता और मुझे दोनों को सुख हो रहा है तो वो चीज करेंगे अच्छा तो वही तो मैं कह रहा हूं ये कह रहा ह इसका अर्थ है आपने इस सिद्धांत को नहीं स्वीकारा है कि मैं माता के साथ गमन नहीं करूंगा वो कोई सिद्धांत ही नहीं है वो तो व्यवहार है अरे तो ऐसे तो आपका भी वो सिद्धांत नहीं है उसपे शाब्दिक उस परिभाषा प क्यों जा रहे हैं उसूल फंडामेंटल लाइफ का आपकी लाइफ का फंडामेंटल है क्या चलिए दूसरे शब्द में पूछ रहा हूं क्या आपने ऐसा कोई नियम माना हुआ है ऐसा कोई नियम माना हुआ है जिसमें आप यह कहे कि मैं अपनी माता के साथ पत्नी जैसा व्यवहार
00:55:05:03 नहीं करूंगा मरते मर जाऊंगा पर नहीं करूंगा नहीं ऐसा तो मुझे तो दिखाई नहीं पड़ता कोई इस तरह की चीज मेरे अंदर परिस्थिति पड़ गई तो कर भी सकते हैं परिस्थिति पड़ गई तो कर भी सकते हैं हां ठीक अब भैया आप लोग क्लियर कर लेना जो लोग आए थे मुझसे कहने अब आप अपनी व्यवस्था बताइए चलिए हां जी जी व्यवस्था का आकलन जैसा कि आप अभी अभी तक की बातों से समझ ही गए होंगे कि हर व्यक्ति या बोले तो हर जीव और हम मनुष्य है तो अपने से खुद पूछ ही सकते हैं दूसरे की कोई ना भी माने तो हर व्यक्ति सुखी रहना चाहता है जितना भी उसकी यहां पर जीवन है जितना भी वह उस पूरे जीवन में सुखी रहना चाहता है और सुखी रहने का मतलब इतना ही है कि उसको जो इच्छाएं पूरी हो जो इच्छाएं उसको पैदा होती रहे वो पूरी हो जाए इतने से मतलब से हमें समझ में आता है कि कोई हमारी इच्छा पैदा हुई और अगर वो पूरी हो जाती है विदन ए टाइम जितने में हम समझ रहे हैं कि इतने में हो जाना चाहिए तो उसमें हम अपने आप को सुखी अनुभव करते हैं हमें लगता है कि अब ठीक है ये इतना ऐसे करते और ऐसा ही पूरे जीवन चले ऐसी हमारी इच्छा रहती है अब अभी तक की व्यवस्थाओं से यह हो नहीं पाया है जितना इतिहास या किस्से कहानियां
00:56:20:03 या जिस भी रूप में हमारे पास पीछे का इतिहास है उससे हमें यह समझ में आता है कि यह बात अभी तक सफल हुई नहीं है उसी तरह से जैसे आदमी अमरता चाहता है लेकिन अभी तक अमर नहीं हुआ है सुख सुखी चाहता है जिसको वो आनंद बोल रहे हैं तो अभी तक उसको आनंद नहीं हुआ है उस हिसाब से तो अब क्या यह कभी हो सकता है तो इस पर मैंने चिंतन मनन किया आप अपनी व्यवस्था बताए मैं व्यवस्था का इंतजार कर रहा हूं अभी तक आप केवल वो बता रहे समस्या मैं व्यवस्था का इंतजार कर रहा हूं मैंने आपका लेक्चर सुनने के लिए य बिल्कुल नहीं आपको बुलाया है मुझे आपका पक्ष जानना है सीधे पॉइंट पर आइए प्लीज पक्ष ही बता रहा हूं अगर पक्ष की पृष्ठभूमि आपको नहीं सुनने में आएगी तो आप समझेंगे नहीं कि मैं क्या बताऊ बहुत पढ़ने की कोशिश किया आपकी जो बुक है व पीडीएफ रूप में मुझे प्राप्त हुई थी उसको पढ़ने का प्रयास किया मगर उसमें सिर्फ यह बात होती रही ऐसा है वैसा है समाधान पर बात बहुत पता नहीं हुई भी है कि नहीं हुई चलिए आप बता दीजिए मुझे नहीं पता आपने कितनी बुक पढ़ी है आप आप बताइए आप बताइए समाधान क्योंकि पुस्तक में पहले समस्याए बताई गई है और फिर
00:57:28:27 समस्या बात कर तो ली कि क्या ऐसा आपके पास कोई सिद्धांत है जो व्यक्ति ना तोय दुराचार करने की भावना रखने वाला दुखी हो ना दुराचार से बचने की भावना रखने वाला दुखी हो हमसे समझ वो दे रहे हैं अब आप वो बताइए उसी के लिए तो भाई पृष्ठभूमि मुझे बतानी पड़ेगी ना पृष्ठभूमि तो नहीं बताई ना मैंने अभी हो गई आपकी पृष्ठभूमि अभी कहा हो गई अब आप बीच में रोक दे रहे तो मैं क्या करूं इस बात का भाई व्यवस्था है बड़ी चीज है आप सोच रहे हैं कि मैं आपको दला बता एक काम करते आज इस बंद करते क्योंकि हमारा टॉपिक आज का व्यवस्था का था ही नहीं ईश्वर के अस्तित्व था हमने अपना अपना पक्ष रख लिया ठीक है बात
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00:58:05:07 है यस यस भाई आप दो लाइ दो लाइन में बता दूं और फिर आप कहेंगे हमारा टॉपिक ईश्वर का अस्तित्व स्वीकार करना है कि नहीं करना है इस परे था आगे तो हमारी व्यवस्था पर तो टॉपिक पर बात थी नहीं तो बंद करें आप बिल्कुल आपकी इच्छा है आप अगर कहे तो मैं अपना टॉपिक रखूंगा आप अपने चैनल प सुनाएगा अपना समाधान ठीक है हमारे चैनल तो हम हम सुना ही रहे हैं और सुनाइए जहां आपको मौका मिले वहां सुनाइए ठीक है हां हां जहां भी मौका मिल रहा है वहां सुना ही रहे हैं आप भी मौका देंगे तो आपके यहां भी सुनाएंगे ठीक है हम मौका नहीं दे रहे क्योंकि हमारी चर्चा थी ईश्वर के अस्तित्व प वो हमने आपका पक्ष ले लिया अपना पक्ष ले लिया आशा करता हूं सभी ने सुन लिया होगा और मुझे इससे आगे इनका जो चीजें हैं सुनने में कोई इंटरेस्ट नहीं है आपको अगर जानना हो कि क्या कहते हैं तो इनकी बुक्स वगैरह है वो पढ़िए और जान लीजिए इनका पक्ष और और हमारा चैनल है यू एल एम हिंदी और भी कई भाषाओं में है तो वहां प आप वो आप प्रचार कर लीजिए चन वो तो आपने आपका नाम भी डाला है ट टैग डाला है रेट करके आपका नाम डाला है ठीक है भैया इनका पक्ष जानना हो इनका समाधान जानना हो तो इनके चैनल प जाकर के आप देख लीजिएगा और अब मैं फिर दोबारा कहता हूं कि जिस व्यक्ति का एक सिद्धांत यह नहीं है नियम नहीं है सिद्धांत छोड़ दो
00:59:20:07 यह नियम नहीं है जो अपनी माता के साथ गमन नहीं करेगा उससे मैं आगे कोई व्यवहारिक चर्चा ना करने में रुचि रखता हूं ठीक है व आपकी इच्छा है मैं इसके साथ अपने इसको बंद कर रहा हूं हा हम तो किसी के साथ भी बातचीत करते हैं वह चाहे हमारी किसी बात से राजी भी ना हो तब भी हम पूरी चर्चा उसको करने का ठीक
00:59:55:01 है किसी का कोई प्रश्न हो तो बता दो भैया एक्चुअली मुझे ऐसा लगता है कि अपनी बात का प्रचार प्रसार करने आते हैं चैनल पर और किसी तरीके से अपने पॉइंट पर आना चाहते हैं कि भाई मुझे यह कहने का मौका मिले कि मेरे पास जो व्यवस्था है और वह एक नंबर का कूड़ा है व कुछ नहीं है इन्होंने एक जगह कहा है कि अभी तक के सारे दर्शन भगोड़े हैं यह भी सुन लीजिए तो वो दर्शन भगोड़े इस पर वो व्यवस्था में बात आ जाती भगोड़े मतलब कि सब लोग विरक्त की बात करते हैं व्यवस्था की कोई बात नहीं करता है कौन कहता है मनुस्मृति व्यवस्था की बात नहीं करती अरे मैं सनातन की बात छोड़ी है यह क्या इस्लाम में व्यवस्था नहीं दी गई है किसके साथ क्या करना है क्या नहीं करना है बात यह है कि वो उस पर चलता नहीं ना व्यक्ति उस व्यवस्था के अनुसार वो चलता नहीं उसे फॉलो नहीं करता है अब यह भी एक व्यवस्था दे रहे हैं अब यह जो वस्था दे रहे हैं उसको यदि व्यक्ति नहीं मान रहा है और व्यवस्थित नहीं होगा तो कल को यह कहेंगे मेरी व्यवस्था भी बेकार थी इनका आधार यही है ना व्यवस्था दी गई उसको व्यवस्था अगर है तो उससे सिद्ध क्या हुआ कुछ नहीं तो अब इन्होंने अपनी
01:01:10:03 व्यवस्था का परिमाप भी पिछले वाला स्ट्रीम देख लीजिएगा कि हां मेरे पास ऐसी व्यवस्था है जिसको अगर माना जाएगा तो सब कुछ सही हो सकता है मेरे पास ऐसी व्यवस्था है तो अगर माना जाएगा तो वहां भी लागू हो जाता है ना जहां पर हम जिनके लिए हम यह कह रहे हैं भाई वो व्यवस्था होती तो आज तक कुछ ना कुछ होता तो यह इनकी अधूरी जानकारियों के चलते आपके सामने खड़े हुए हैं जापान का अस्तित्व सिद्ध नहीं है और अमेरिका इनके लिए अभी कंफर्म नहीं है असमंजस में अमेरिका है कि नहीं यह सारी चीजें हैं आपको जैसा भी लगे भाई उनकी तरफ के लोगों आपने भी देख लिया कुछ लोग आ रहे थे कि आपको यह बात नहीं लानी चाहिए थी उसके बारे में बता दूं वो बात क्यों आती है जब तक व्यक्ति के जीवन में अबाध सर्वशक्तिमान सत्ता की स्वीकार्यता नहीं आएगी उसके पास जो एथिक्स होंगे उनका कोई आधार ही नहीं होगा वह ऐसा ही व्यक्ति उत्पन्न होगा और हम जो यह प्रमाणिक गुरुओं के पास प्रमाणिक आचार्यों के पास जाने की बात बार-बार करते हैं वह इसीलिए करते हैं नक नकलियत लोगों को सचेत कराते हैं वह इसीलिए कराते हैं कि जब व्यक्ति प्रमाणिक आचार्यों से ऐसा नहीं होगा ये व्यक्ति ऐसे ही रहा हो सदैव ऐसा नहीं है
01:02:25:04 इस व्यक्ति ने अपने जीवन में खोज की होगी कि यह दर्शन क्या कह रहा है वो दर्शन क्या कह रहा है या यह सिद्धांत यह धर्म क्या कह रहा है इनकी नजरों में धर्म यह क्या कह रहा है हमारी नजरों में धर्मा भास दूसरे इनकी नजरों में भैया यह धर्म क्या कह रहा है वो धर्म क्या कह रहा है अब हुआ क्या हुआ ये कि इनके पल्ले जो पड़े वह खुद काल लेमी थे तो इनको सही बात पहुंच नहीं पाई अरे डार्विन भी तो पहले बाइबल को मानता था पर बाइबल के आधार पर जब उसने सृष्टि संरचना को देखा तो उसे बहुत निराधार बातें प्राप्त हुई तो उसने सोच लिया कि इसमें है ही नहीं दुनिया में कोई ईश्वर है ही नहीं उस तक कौन नहीं पहुंच पाया सनातन सनातन नहीं पहुंच पाया डार्विन तक व वो सनातन तक नहीं पहुंच पाया कहना ज्यादा उचित होगा तो कहने का अर्थ हम लोग जोय प्रमाणिक आचार्यों के प्रति सर्वशक्तिमान सत्ता के प्रति लोग ऐसे भी कमेंट करते हैं कि हर वीडियो में वही सर्वशक्तिमान ईश्वर धर्म का आधार है सर्वशक्तिमान ईश्वर और जैसे ही ईश्वर बाधित होगा व्यक्ति के जीवन में अधर्म आने लगेगा आप आपने ये देख लीजिए उसके पास माता को माता की दृष्टि से देखने का आधार नहीं बचेगा वह चाहे तो नकार दे वह चाहे तो अपना ले ऐसा होगा सिद्धांत अवाद
01:03:41:09 ईश्वर जब तक हम ईश्वर को अवाद नहीं रूप से ख्या पित करेंगे तब तक ऐसे ही लोग जन्म लेंगे इसीलिए हम पीछे पढ़ते हैं प्रामाणिक आचार अब आद ईश्वर के लिए अब हुआ क्या इन्होंने अपनी लाइफ में जब ये रहे होंगे यंग एज में सर्च किया ये किया वो किया तो इनके पल्ले पड़े कौन कालनेमी अब जब कालनेमी आपको मिलते हैं तो क्या होता है तर्क और प्रमाण के साथ व आपको संतुष्ट करने में असमर्थ होते हैं जैसे हम गए थे अभी कुछ दिन पहले लखनऊ प्रेसिडेंट इकन मंदिर अध्यक्ष के पास गए थे भाई 5500 लोगों को व भगवत गीता का पाठ पढ़ाते हैं पा 500 लोगों को हमने अपने कुछ छोटे से सवाल किए कि जिस प्रकार दूध से दही बन जाता है दही दही से दूध नहीं बन पाता है तो कृष्ण शिव बन सकते हैं शिव बनने के बाद वो कृष्ण क्यों नहीं बन सकते क्योंकि उनके अनुसार शिव जीी कृष्ण ही बनते हैं वो उनका एक्सपेंशन है शिव जीी तो फिर क्या हुआ कि आप तो बस हरे कृष्ण का जाप करो यहां से आती है नास्तिकता जो व्यक्ति भगवान को ढूंढने निकलेगा उसको अगर ऐसे लोग मिलेंगे जो भगवान के अस्तित्व को ही नहीं सिद्ध कर पाए उसकी सर्वशक्ति मत्ता को ही नहीं सिद्ध कर पाए तो ऐसे नास्तिक जन्म लेंगे जो अपनी माता के साथ माता जैसा व्यवहार क्यों करना है यह नहीं जानते होंगे उनके पास आधार नहीं होगा बस कर रहे हैं
01:04:57:08 सुख और दुख आधार है साब मर्यादा का आधार सुख और दुख है इनके लिए ठीक है भगवत गीता में तो कह ही दिया कि जो लोग सृष्टि की उत्पत्ति भगवान ने कहा जो लोग सृष्टि की उत्पत्ति केवल स्त्री पुरुष के संयोग को मानते हैं धोत राक्षस है तो एक श्रेणी में आते हैं अब ये इन राक्षसों को बनाने वाले कौन हुए वो कालनेमी जो किसी लालच वश द्वेष वश या फिर अज्ञानता वश स्वयं को आचार्य का चोंगा पहना उड़ाते हैं मैं अपने हर वीडियो में सर्वशक्तिमान ईश्वर की इसीलिए बात करता हूं आप कुछ मत पंथ संप्रदाय में मत जाओ एक चीज पकड़ लो आप केवल एक चीज कि मैं जिस धारणा को मान रहा हूं जिस मत को मैंने स्वीकार किया है उस मत के अनुसार प्रतिपादित होने वाला जो ईश्वर है क्या वह सर्वशक्तिमान है ईश्वर को सर्वशक्तिमान सिद्ध करने के हम सब पीछे पड़ जाए तो धर्म की स्थापना हो जाए दुनिया क्योंकि ईश्वर को बाधित करने की आड़ में या नकारने की आड़ में ही इस तरह का अधर्म जन्म लेता है इसीलिए हम प्रयास करते हैं प्रामाणिक आचार्य के पास जाइए भाई अगर अब यह हम लोग क्यों क्यों जागृत कर
01:06:12:13 जागरूक बनाते हैं दूसरों के प्रति इसलिए क्योंकि जब यह प्रेमजीत सिरोही जैसे लोग जब सर्च करने जाएंगे और इनको सही तर्क और प्रमाण के साथ उत्तर नहीं मिलेंगे तो य अपनी बुक लिखेंगे ईश्वर नहीं पे अपनी बुक लिखेंगे माता के साथ भी विवाह किया जा सकता है बहन के साथ भी विवाह किया जा सकता है या बहुत नीचे की नहीं होगी तो बीच की लिखेंगे तो बीच की क्या होते हैं धर्मा भास बीच के क्या होते हैं धर्मा भास तो अब आप यह बताइए कि जिस जगह पर प्रधानमंत्री की नेम प्लेट लगा कर के हजारों लोग घूम रहे हो अपने घर के आगे सबने प्रधानमंत्री लिख लिया अपने घर के बाहर सबने जिले के हिसाब से देख सबने एसपी लिख लिया सबने डीआईजी लिख लिया है तो व्यक्ति संभव नहीं है कि वह सही डीआईजी के पास सही प्रधानमंत्री के पास और सही इंस्पेक्टर के पास भी पहुंच पाए और जब नहीं पहुंचेगा तो वह जिस चीज के लिए निकला व उसे प्राप्त नहीं होगी और ऐसे ही नहीं हुई इनको प्राप्त इसीलिए हम कहते हैं प्रामाणिक आचार्य प्रामाणिक आचार्य परंपरा प्राप्त आचार्य सामर्थ्य वान आचार्य हर बात को सिद्ध कर पाए कभी जिनको क्रिटिसाइज करते हैं
01:07:27:18 जो लोग जो परंपरावादी नहीं होते हैं उनको भी उन्हीं का आलंबन लेकर के अपनी बातों को कहना पड़ता है अभी मैं आचार्य प्रशांत का वीडियो देख रहा था किसको प्रमाण के रूप में माना आदि शंकराचार्य जी को अरे भाई आदि शंकराचार्य जी ने खुद अपनी किताब आपको दी है क्या कैसे दिया उन्होंने अपना ग्रंथ आपको परंपरा से गुरु शिष्य परंपरा से अपने शिष्य को पढ़ाया फिर उसने अपने शिष्य को पढ़ाया फिर उसने अपने शिष्य को दिया ऐसे वो ग्रंथ आप तक आया है तो यदि आप उस ग्रंथ को प्रमाण के रूप में ले रहे हो आचार्य प्रशांत जी तो फिर जहां से वह ग्रंथ आपको मिला है उसकी बात को कैसे निका रहे हो या तो उस पर विश्वास होना सही नहीं है या तो उस ग्रंथ पर विश्वास होना उचित नहीं है या फिर उस उस स्त्रोत पर विश्वास ना होना उचित नहीं है जहां से व आपको मिला है चलिए ठीक है सभी को जय श्री राम
01:08:34:22 और
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