1
00:00:00,040 --> 00:00:04,040
से आता हूं इस शहर का नाम है गाजीपुर मुख्तार अंसारी यहीं

2
00:00:04,040 --> 00:00:08,280
के रहने वाले हैं समझ रहे हैं और इस शहर का एक आलम हुआ

3
00:00:08,280 --> 00:00:12,440
करता था एक जमाने में कि कोई उनके खिलाफ बोल नहीं सकता था

4
00:00:12,440 --> 00:00:16,800
आप समझ रहे हैं कोई उनके खिलाफ बोल नहीं सकता था आज वो स्थितियां

5
00:00:16,800 --> 00:00:20,920
परिवर्तित हो गई है है ना तो आप ये देखिए

6
00:00:20,920 --> 00:00:25,200
ये कैसे परिवर्तित हुई है यह राजनीति से परिवर्तित हुई है तो राजनीति भी उसका एकदम

7
00:00:25,200 --> 00:00:29,520
है ना कोई शंकराचार्य नहीं आ रहा था जब ऐसे बड़े बड़े माफिया

8
00:00:29,520 --> 00:00:34,080
डन हमारे गले के नीचे छुरी लेकर के खड़े थे समझ रहे हैं योगी जी आए

9
00:00:34,080 --> 00:00:38,120
आप समझ रहे हैं आप इन चीजों को समझिए और राजनीति और धर्म बिल्कुल एक

10
00:00:38,120 --> 00:00:42,760
दूसरे से जुड़े हुए अगर आप ये कहते हैं कि भाई राजनीति के लिए कि मैं कहता बिल्कुल राजनीति

11
00:00:42,760 --> 00:00:47,240
के लिए किया बिल्कुल राजनी अपनी बात जब खत्म कर ले तो मुझे

12
00:00:47,240 --> 00:00:51,920
बताइएगा एक दो मिनट और चाहिए बस ठीक है

13
00:00:51,920 --> 00:00:56,280
तो बिल्कुल राजनीति और धर्म एक दूसरे से कभी अलग हो ही नहीं सकते

14
00:00:56,280 --> 00:01:00,480
अच्छा जब हम लोग उस समय बात कर रहे थे तो आप मेरा ये कहना

15
00:01:00,480 --> 00:01:05,360
था कि भाई धर्म जो है

16
00:01:05,360 --> 00:01:09,400
वो क्या कहते है शास्त्र उनको सपोर्ट कर सकते हैं

17
00:01:09,400 --> 00:01:13,800
उनमें हेल्प कर सकते हैं लेकिन शास्त्र से ही धर्म है ऐसा नहीं है है ना

18
00:01:13,800 --> 00:01:15,240
शास्त्रों से पहले भी धर्म

19
00:01:15,240 --> 00:01:19,320
था जब शास्त्र नहीं रहेंगे तो भी धर्म रहेगा अच्छा इसका एक एग्जांपल

20
00:01:19,320 --> 00:01:23,320
देता हूं आपको साइंस के टर्म में दो शब्द होते हैं एक होता है इन्वेंशन दूसरा

21
00:01:23,320 --> 00:01:27,640
होता है डिस्कवरी है ना इन्वेंशन क्या होता है जैसे की बल्ब

22
00:01:27,640 --> 00:01:31,720
बल् है बल्ब का इन्वेंशन हुआ इंसान की सोची समझी चीज है उसने उसको

23
00:01:31,720 --> 00:01:36,200
बना दिया वो बल्ब है है ना वो बल्ब बना दिया है ना मजहब

24
00:01:36,200 --> 00:01:40,240
क्या है रिलीजन क्या है वो इन्वेंशन है समझ रहे है डिस्कवरी क्या होती है

25
00:01:40,240 --> 00:01:44,320
डिस्कवरी वो होती है जो पहले से हो जो सनातन हो जिसको

26
00:01:44,320 --> 00:01:48,400
कभी किसी ने बनाया ना हो आप समझ रहे जैसे की न्यूटन के नियम जो

27
00:01:48,400 --> 00:01:52,560
है ना वो न्यूटन नहीं था तो भी उसके नियम थे समझ

28
00:01:52,560 --> 00:01:56,920
रहे हैं इस सृष्टि में ज आत्मा ना कभी जन्म लेती है ना कभी मरती

29
00:01:56,920 --> 00:02:01,440
है जैसे जैसे कि न्यूटन का नियम है ग्रेविटी ऐसा थोड़ी

30
00:02:01,440 --> 00:02:05,840
नटन आया तो गटी न्यूटन से पहले भी ग्रेविटी ीने

31
00:02:05,840 --> 00:02:10,400
ग्रेविटी के बारे में बताया बस बता दिया है ना वैसे ही धर्म है

32
00:02:10,400 --> 00:02:14,520
है ना जो शास्त्र है वो धर्म के बारे में कुछ ज्ञान दे

33
00:02:14,520 --> 00:02:18,560
पाते हैं पूरा नहीं दे पाते व भी समझ रहे वो ब्रम के बारे में कुछ बता पाते

34
00:02:18,560 --> 00:02:22,560
हैं आप यह समझिए कि जैसे की एक और लास्ट एपल आपको देता हूं

35
00:02:22,560 --> 00:02:27,360
उसके बाद आप कर जैसे की मान लीजिए कोई व्यक्ति है

36
00:02:27,360 --> 00:02:30,320
वो दो व्यक्ति है है एक पानी

37
00:02:30,320 --> 00:02:34,760
को हाथ प लेकर के महसूस किया है कि पानी कैसा फील होता है है ना

38
00:02:34,760 --> 00:02:38,960
और दूसरा व्यक्ति है उसने पढ़ा है कि पानी को छूने पर कैसा

39
00:02:38,960 --> 00:02:43,000
कैसा महसूस होता है ठीक है आप ये मान लीजिए कि जिस

40
00:02:43,000 --> 00:02:47,200
व्यक्ति ने पानी को छुआ हुआ है वो कोई भाषा नहीं जानता वो किसीने कभी

41
00:02:47,200 --> 00:02:51,200
कोई पुस्तक पढ़ी ही ना हो ठीक है लेकिन दूसरा जो व्यक्ति है

42
00:02:51,200 --> 00:02:55,200
वो बहुत पढ़ा लिखा है और उसने सारे पानी के बारे में सारे रिसर्च

43
00:02:55,200 --> 00:02:59,440
पढ़ रखे हैं आप ये बताइए कि किसको पानी के बारे में ज्यादा ज्ञान

44
00:02:59,440 --> 00:03:03,480
है जिसने पानी को छू लिया है और जान लिलिया है कि वो कैसा फील होता है

45
00:03:03,480 --> 00:03:07,560
जिसने पानी के बारे में सब पढ़ा है कि उसको छूने पर ऐसा फील होता है वैसा फील होता है ऐसा फील

46
00:03:07,560 --> 00:03:11,800
होता है समझ रहे हैं आप तो ऐसा नहीं है कि जिसने ग्रंथ

47
00:03:11,800 --> 00:03:15,920
नहीं पढ़े हैं वो ब्रह्म को नहीं जानता है समझ रहे हैं बहुत

48
00:03:15,920 --> 00:03:20,160
सारे ऐसे व्यक्ति है धर्मात्मा है पुरुष है जो कि

49
00:03:20,160 --> 00:03:24,200
पानी को छू चुके हैं आप समझ रहे हैं मैं प्रतीक्षा कर रहा हूं अपनी बात

50
00:03:24,200 --> 00:03:28,200
की मेरा अवसर कब आएगा मैं तो सुन ही रहा हूं आपको काफी देर से सुन

51
00:03:28,200 --> 00:03:32,280
रहा बस 10 सेक उसम ऐसा है ना कि एक साथ बहुत सारे

52
00:03:32,280 --> 00:03:36,360
टॉपिक जब हो जाते तो कोई ना कोई टॉपिक जरूर छूट जाएगा इसलिए

53
00:03:36,360 --> 00:03:40,280
मैं सोच रहा था कि आप संक्षिप्त बात

54
00:03:40,280 --> 00:03:44,280
कस और फिर जो है पॉइंट टू पॉइंट जाएंगे उस तो मेरा

55
00:03:44,280 --> 00:03:45,600
वही था कि भाई जो पानी

56
00:03:45,600 --> 00:03:49,600
को छू चुका है व जानता है भले उसने कोई किताबें नहीं पढ़ी जो ब्रह्म

57
00:03:49,600 --> 00:03:53,880
को छू चुका है जो जान चुका है वो जानता है कि कैसा

58
00:03:53,880 --> 00:03:58,280
वो महसूस करता है और कराता है और क्या उसके भाव कैसे निकलते

59
00:03:58,280 --> 00:04:02,800
हैं उससे चाहे उसने कोई ग्रंथ ना पढ बस य

60
00:04:02,800 --> 00:04:07,360
ये तो मैं आपको अभी दो चीजें समझाऊं कि आप शंकराचार्य

61
00:04:07,360 --> 00:04:11,400
पर कहां कहा पर डिसएग्री होते हैं एक जातिवाद और

62
00:04:11,400 --> 00:04:15,760
दूसरा दूसरा शास्त्र के प्रति निष्ठा है ना

63
00:04:15,760 --> 00:04:19,960
नहीं ऐसा नहीं है कि शास्त्र के प्रति निषा नहीं है

64
00:04:19,960 --> 00:04:24,200
शास्त्र के प्रति अधीनता शास्त्र के प्रति अधीनता अधीन

65
00:04:24,200 --> 00:04:28,400
हो जाना की बिल्कुल और तीसरा थोड़ा बहुत कंप्रोमाइज हो

66
00:04:28,400 --> 00:04:32,640
जाना चाहिए राजनीति के अकॉर्डिंग योगी जी के अकॉर्डिंग मोदी जी

67
00:04:32,640 --> 00:04:37,920
के कॉम्प्रोमाइज नहीं इसे कहेंगे मैं ये कहूंगा

68
00:04:37,920 --> 00:04:41,960
कि अब मुझे एक शास्त्र अगर ये बात कह रहे हैं मान

69
00:04:41,960 --> 00:04:45,960
लीजिए यस और मोदी जी कह रहे हैं नो

70
00:04:45,960 --> 00:04:50,440
तो यहां पर शास्त्र के साथ कॉम्प्रोमाइज करना पड़ेगा ना अगर मोदी जी के साथ जाना है तो

71
00:04:50,440 --> 00:04:54,920
क्योंकि मोदी जी ने गुंडों को खत्म किया है नहीं नहीं मैं उसका उसका

72
00:04:54,920 --> 00:04:59,640
मार्ग बताता हूं मैं मतलब मेरे हिसाब से बताता हूं बाकी तो ज्ञानी लोग अपना बता

73
00:04:59,640 --> 00:05:00,920
अभी पहले अभी मैं विषय

74
00:05:00,920 --> 00:05:05,040
क्लियर कर रहा हूं मुझे विषय रख लेने दीजिए लोगों के समक्ष कि विषय

75
00:05:05,040 --> 00:05:09,040
ये है आपका एक तो जातिवाद के लेकर के शंकराचार्य जी

76
00:05:09,040 --> 00:05:13,120
से वो है डिसएग्रीमेंट और एक दूसरा डिसएग्रीमेंट है आपका

77
00:05:13,120 --> 00:05:17,720
कि भाई यह जो शास्त्र शास्त्रों के प्रति इतना निष्ठावान ना रहे

78
00:05:17,720 --> 00:05:22,240
ठीक है वो समय समय के अनुसार थोड़ा सा उसको कमप

79
00:05:22,240 --> 00:05:26,520
कर थोड़ा उसम किया जा सकता है किया जा यानी शास्त्र

80
00:05:26,520 --> 00:05:30,760
अगर बोले यस तो उसके साथ थोड़ा बहुत कंप्रोमाइज कर लो हां

81
00:05:30,760 --> 00:05:35,160
शास्त्र हो सकता है कि वो समय शास्त्र मानने का ना

82
00:05:35,160 --> 00:05:39,200
हो मैं समझ मैं पहली बात आपसे

83
00:05:39,200 --> 00:05:43,360
पूछूंगा कि आप भी मुझे धर्म रक्षक समझ में आ रहे हैं

84
00:05:43,360 --> 00:05:47,800
पहले तो मैं प्रश्न पूछने से पहले एक कहानी सुना दूं आपको छोटी सी

85
00:05:47,800 --> 00:05:52,080
दमयंती की कहानी है अभी कुछ दिनों पहले ब्रह्मचारी शिकश ब्रह्मचारी

86
00:05:52,080 --> 00:05:56,120
जी है उन्होंने मंच से सुनाई थी दमयंती को

87
00:05:56,120 --> 00:06:00,800
एक अजगर निकलने वाला था अजगर अजगर

88
00:06:00,800 --> 00:06:05,280
से दमयंती को व्याध ने बचा लिया अब

89
00:06:05,280 --> 00:06:09,680
व्याध का व्याध ने बचा तो लिया मगर उसकी कुदृष्टि हो गई दमयंती

90
00:06:09,680 --> 00:06:14,120
पर तो ऐसे में क्या दमयंती को अपनी जो गरिमा

91
00:06:14,120 --> 00:06:15,920
है उसको भंग

92
00:06:15,920 --> 00:06:19,960
कर देने की छूट दे देनी चाहिए व्याध को या नहीं दे देनी चाहिए नहीं

93
00:06:19,960 --> 00:06:24,000
देनी क्यक क्योंकि क्योंकि व्याध ने अभी अभी

94
00:06:24,000 --> 00:06:28,120
उसकी जान बचाई अगर वो जान ना बचाता तो दमती तो जीवित ही ना होती

95
00:06:28,120 --> 00:06:32,360
तो इसलिए एक पक्ष तो ये है कि जीवित नहीं होती तो फिर क्या होता दूसरा

96
00:06:32,360 --> 00:06:36,680
पक्ष ये है कि जान बड़ी है या गरिमा बड़ी है

97
00:06:36,680 --> 00:06:40,800
सम्मान बड़ा है तो कुल मिलाकर के यह जो एक

98
00:06:40,800 --> 00:06:45,000
चीज है ना यह जो तर्क है कि अभी शंकराचार्य जी कहां

99
00:06:45,000 --> 00:06:49,040
थे नीचे जब गोली लेकर के गुंडे घूम रहे थे तो ये

100
00:06:49,040 --> 00:06:53,120
वैसी ही कुछ कहानी है इसके आधार पर हम ये नहीं कह सकते कि नहीं अगर

101
00:06:53,120 --> 00:06:57,320
उन्होंने गुंडों से हमें बचाया तो सिद्धांत हो गया कि अब योगी जी जो कहेंगे

102
00:06:57,320 --> 00:07:02,280
जो करेंगे वही अंतिम निर्णय होगा बिल्कुल नहीं ये मैंने कभी नहीं क

103
00:07:02,280 --> 00:07:06,920
अब विषय अब अब मैं विषय को आगे बढ़ा दू विषय आगे का ये

104
00:07:06,920 --> 00:07:10,920
है कि आप कह रहे हैं आप भी सनातनी मैं भी

105
00:07:10,920 --> 00:07:15,000
सनातनी हूं ठीक है और हम सब धर्म के रक्षक है तो

106
00:07:15,000 --> 00:07:19,000
जब हम किसी चीज की रक्षा कर रहे हैं तो वो एक चीज

107
00:07:19,000 --> 00:07:23,040
निश्चित होनी चाहिए ना कि हम इसकी रक्षा कर रहे हैं तो वो सनातन

108
00:07:23,040 --> 00:07:27,160
धर्म की परिभाषा क्या है आपकी मेरी वो सनातन धर्म

109
00:07:27,160 --> 00:07:31,040
की वो सारी परिभाषा जो उपनिषद में है जो भगवत गीता में है

110
00:07:31,040 --> 00:07:35,120
आप बोलिए भगवत गीता में है जो है ना अच्छा

111
00:07:35,120 --> 00:07:39,320
यानी कि आप भगवत गीता को प्रमाण मानते हैं कि भाई

112
00:07:39,320 --> 00:07:44,080
यह हमारा धर्म है इसकी हम रक्षा कर रहे हैं ठीक है

113
00:07:44,080 --> 00:07:50,080
अच्छा एक

114
00:07:57,000 --> 00:08:01,240
मिनट आप कहने का अर्थ ये

115
00:08:01,240 --> 00:08:05,520
है कहने का अर्थ ये है कि भगवत गीता हमारा धर्म है और हम

116
00:08:05,520 --> 00:08:09,520
सारे हिंदू भगवत गीता की रक्षा कर रहे है उसम जो लिखा है वो हमारे लिए अंतिम

117
00:08:09,520 --> 00:08:13,680
प्रमाण है है ना उसी की रक्षा कर रहे है ना बिल्कुल

118
00:08:13,680 --> 00:08:17,320
उसकी तो होनी होनी चाहिए

119
00:08:17,320 --> 00:08:21,480
जी अब आपने दो बातें यहां पर की है उनका मैं बताने

120
00:08:21,480 --> 00:08:27,480
जा रहा हूं भगवत गीता 164

121
00:08:28,240 --> 00:08:34,240
16 [संगीत]

122
00:08:45,320 --> 00:08:49,400
कुल मिलाकर के आपका कहने का अर्थ कि हम सब लोग अगर देखा जाए आप सही कह

123
00:08:49,400 --> 00:08:53,480
रहे गलत नहीं कह रहे हम सब लोग अगर रक्षा कर रहे हैं तो भगवत गीता में दिए गए ज्ञान की

124
00:08:53,480 --> 00:08:57,600
रक्षा कर रहे हैं क भगवत गीता सभी सभी शास्त्रों का निचोड़ है

125
00:08:57,600 --> 00:09:02,160
निचोड़ है इसलिए इसलिए

126
00:09:02,160 --> 00:09:07,320
जाते उपनिषद भी काफी सक ज्ञान देते हैं

127
00:09:07,320 --> 00:09:11,760
ो इस सब निचोड़ हो जाता है इसमें भी खास दूसरा

128
00:09:11,760 --> 00:09:16,600
अध पैरामीटर सेट कर सकते हम भगवत गीता की रक्षा कर रहे हैं

129
00:09:16,600 --> 00:09:19,440
अब बात ये आती

130
00:09:19,440 --> 00:09:25,440
है

131
00:09:28,120 --> 00:09:33,160
कि

132
00:09:33,160 --> 00:09:37,200
यह सवा अध्याय है भगवत गीता

133
00:09:37,200 --> 00:09:43,200
का

134
00:09:43,240 --> 00:09:47,240
और यह सवा अध्याय भगवत

135
00:09:47,240 --> 00:09:51,440
गीता का और 24 वा श्लोक है इसमें

136
00:09:51,440 --> 00:09:55,880
भगवान श्री कृष्ण कह रहे हैं तेरे लिए

137
00:09:55,880 --> 00:10:00,200
कर्तव्य आप सुन पा रहे हैं मुझे देख पा रहे हैं एक सेकंड

138
00:10:00,200 --> 00:10:04,200
एक सेक हा बोलिए इसमें भगवान आपके पीछे शोर

139
00:10:04,200 --> 00:10:08,360
आ रहा है बहुत हा हा एक्चुअली आ रहा था इसलिए नीचे आ गया

140
00:10:08,360 --> 00:10:12,640
शप तो वो लोग आना जा इसम भगवान श्री कृष्ण

141
00:10:12,640 --> 00:10:16,760
कह रहे आपके लिए जो शास्त्र है एक तरीके से आपके लिए भगवत गीता

142
00:10:16,760 --> 00:10:21,480
जो है व आपका अंतिम वो है जीवन जीने का आधार हो गया ना

143
00:10:21,480 --> 00:10:25,600
धर्म अब इसमें लिखा हुआ है तेरे

144
00:10:25,600 --> 00:10:29,800
लिए कर्तव्य और अ

145
00:10:29,800 --> 00:10:34,320
कर्तव्य अच्छा और बुरा करने योग्य और ना करने योग्य

146
00:10:34,320 --> 00:10:38,400
की व्यवस्था में शास्त्र ही प्रमाण है

147
00:10:38,400 --> 00:10:43,080
शास्त्र ही प्रमाण है तो शास्त्र तो आप पकड़े हुए है ना

148
00:10:43,080 --> 00:10:47,160
हा आपने कहा शास्त्र ही प्रमाण है मगर आप ये कह

149
00:10:47,160 --> 00:10:51,280
रहे कि स्थितियों में शास्त्र को छोड़ देना चाहिए तो उस समय

150
00:10:51,280 --> 00:10:55,280
हमारा अच्छा बुरा किस आधार पर तय होगा और सबसे पहली बात तो

151
00:10:55,280 --> 00:10:58,560
ये आ जाती है क्या हम श्री कृष्ण के इस वचन से डिसएग्री

152
00:10:58,560 --> 00:11:04,560
है शास्त्र ही प्रमाण

153
00:11:04,760 --> 00:11:08,880
है शास्त्र ही प्रमाण है न शास्त्र सबके लिए अलग अलग हो सकता

154
00:11:08,880 --> 00:11:12,960
है [संगीत] नास्त्रे मुझे आप पहले बताइए

155
00:11:12,960 --> 00:11:17,240
क्या पहले एक चीज क्लियर करले क्या श्री कृष्ण के इस वचन से आप डिग्री

156
00:11:17,240 --> 00:11:19,760
करते

157
00:11:19,760 --> 00:11:24,120
हैं करता तो फिर आपकी वो जो लाइन है कि शास्त्र ही सब कुछ

158
00:11:24,120 --> 00:11:28,160
शास्त्र ही अंतिम नहीं होने चाहिए शास्त्र के साथ कॉम्प्रोमाइज हो जाना चाहिए उसका

159
00:11:28,160 --> 00:11:32,240
क्या करें नहीं तो उसम मैंने उसम मैंने आपको यह भी तो बताया कि मैं किन

160
00:11:32,240 --> 00:11:36,320
शास्त्रों को संरक्षित करने की बात कर रहा हूं मैं उपनिषद और भगवत गीता की बात कर

161
00:11:36,320 --> 00:11:40,760
रहा हूं पौराणिक शास्त्र कहेंगे मेरा पौराणिक शास्त्रों

162
00:11:40,760 --> 00:11:45,520
प मतलब कई जगह मतभेद हो जाएगा फिर मेरा

163
00:11:45,520 --> 00:11:50,120
ठीक है मतलब आप शास्त्र को व अंतिम मानते हैं ना इतना तो

164
00:11:50,120 --> 00:11:54,800
है शास्त्र को अंतिम मानते हैं पर पुराणों को नहीं मानते

165
00:11:54,800 --> 00:11:59,080
नहीं मतलब कई देखिए ऐसा नहीं

166
00:11:59,080 --> 00:12:03,160
पुराणों को सिरे से खारिज करता हूं ठीक है उसम भी जगह है उसम भी स्पेस

167
00:12:03,160 --> 00:12:07,200
है उसके लिए ठीक है कर कर

168
00:12:07,200 --> 00:12:11,280
पुराणों के साथ पूर्णत सहमत नहीं

169
00:12:11,280 --> 00:12:13,960
है

170
00:12:13,960 --> 00:12:14,960
सा

171
00:12:14,960 --> 00:12:19,120
अब य बताइए की जो राम मंदिर

172
00:12:19,120 --> 00:12:23,160
को ले लेते हैं राम मंदिर में जो प्राण प्रतिष्ठा हुई है

173
00:12:23,160 --> 00:12:27,280
मूर्ति का विग्रह विग्रह बनाया गया है भागवत पुराण

174
00:12:27,280 --> 00:12:32,080
से आप एग्रीड है एग्री नहीं भागवत पुराण

175
00:12:32,080 --> 00:12:36,880
से मैं काफी सारी जगहो पर डिग्रीड हूं उसका तो मतलब लिटरली मतलब साइंटिफिक

176
00:12:36,880 --> 00:12:42,880
मल आप कस्टमाइज है इन को लेकर के कस्टमाइज है इन को लेकर

177
00:12:57,840 --> 00:13:03,840
के

178
00:13:31,360 --> 00:13:36,720
आप किसी शांति वाली जगह पर जाए क्योंकि शोर में बात नहीं हो पाएगी

179
00:13:36,720 --> 00:13:40,760
यही है ना आन में

180
00:13:40,760 --> 00:13:45,560
शांति तो आपको समय नहीं देना चाहिए था य वाला

181
00:13:45,560 --> 00:13:49,640
एकली फिर मेरे पास कोई समय भी नहीं हैके अनुसार हमने समय रखा

182
00:13:49,640 --> 00:13:53,760
था हम अपनी चीजों को छोड़ करके शेड्यूल बना करके बैठे हुए भा

183
00:13:53,760 --> 00:13:57,760
चलिए आपसे चर्चा

184
00:13:57,760 --> 00:14:02,640
होगी मतलब ये है कि आप कहने का अर्थ ये है

185
00:14:02,640 --> 00:14:06,840
कहने का अर्थ ये है आप उधर बात कर लीजिए कोई आपसे बात

186
00:14:06,840 --> 00:14:10,680
करने को बोल रहा

187
00:14:10,680 --> 00:14:16,680
है किसी और को आना चाह आना है लाइव में तो

188
00:14:17,400 --> 00:14:23,400
बताएं जी धन्यवाद आपका ओबिटो

189
00:14:23,680 --> 00:14:27,880
जी अच्छा मुझसे टेक्निकल गलतियां कई बार हो जाती है वैंपायरो

190
00:14:27,880 --> 00:14:32,240
गेमिंग जी कह रहे भाई लाइव आ जाओ हम लोग लाइव आ चुके थे

191
00:14:32,240 --> 00:14:36,280
पर मैंने उसको गो लाइव उस पर टच

192
00:14:36,280 --> 00:14:40,880
नहीं किया था हम लोगों की कन्वर्सेशन चल रही थी तो यह टेक्निकली

193
00:14:40,880 --> 00:14:44,960
थोड़ा वीक हो जाता हूं यहां

194
00:14:44,960 --> 00:14:49,120
पर किसने बोला कि होगा 30 मिनट

195
00:14:49,120 --> 00:14:52,280
डिले स्टार्ट

196
00:14:52,280 --> 00:14:56,320
है हां जी अभी तो कम से कम 15 20 मिनट तो शांति

197
00:14:56,320 --> 00:15:00,400
के मिलेंगे हम लोग को चलिए कर ले हां तो कहने का अर्थ

198
00:15:00,400 --> 00:15:05,000
ये है कि शास्त्र तो आपके लिए अंतिम है है ना हां हां

199
00:15:05,000 --> 00:15:09,040
अंतिम शास्त्र है आपका जो धर्म है वो आपके उस अनुभव से स्फुट नहीं हो

200
00:15:09,040 --> 00:15:13,120
रहा है आपका धर्म शास्त्रों से स्फुट हो रहा है अनुभव से

201
00:15:13,120 --> 00:15:17,640
नहीं हो रहा है अनुभव नहीं नहीं नहीं अनुभव से भी है नहीं अच्छा

202
00:15:17,640 --> 00:15:21,640
ठीक ठीक इसका मतलब इसका मतलब आपके पास जो धर्म

203
00:15:21,640 --> 00:15:26,680
है से हु शास्त्र

204
00:15:26,680 --> 00:15:30,680
उसमें आपके लिए अंतिम निर्णायक क्या है

205
00:15:30,680 --> 00:15:35,800
शास्त्र है या नहीं है अच्छे बुरे का अंतिम निर्णय कहां से हो रहा है

206
00:15:35,800 --> 00:15:40,560
आपके वो तो अनुभव से हो रहा है अनुभव से हो हमेशा अनुभव से होगा

207
00:15:40,560 --> 00:15:44,720
ठीक है आचार्य चाणक चाणक्य जी ने एक बात कही थी धर्मे ना पशु

208
00:15:44,720 --> 00:15:49,080
भी समाना धर्म जो है वो स्टार्ट होता है शास्त्रों

209
00:15:49,080 --> 00:15:53,200
से देखिए आपने जो कहा धर्म था धर्म था है मगर

210
00:15:53,200 --> 00:15:57,760
वो व्यवहारिक जैसे ब्रह्म ब्रह्म है पर वो व्यवहारिक कब होता है

211
00:15:57,760 --> 00:16:02,000
जब वो हमें साकार सगुण साकार रूप में हमारे सामने प्रकट

212
00:16:02,000 --> 00:16:06,200
होता है जैसे एक काट की लकड़ी है उसमें अग्नि जो प्रज्वलन

213
00:16:06,200 --> 00:16:10,520
क्षमता है व पूरी लकड़ी में है मगर हमको उसका बोध तभी होता है जब वो जलती

214
00:16:10,520 --> 00:16:14,560
है उसका एक साकार स्वरूप हमें दिखाई देता है इसी तरीके से जो ब्रह्म

215
00:16:14,560 --> 00:16:18,840
है वो अव्यावहारिक है हमारे व्यवहार में आ सकने वाला नहीं है वो भले ही उसका अंतिम

216
00:16:18,840 --> 00:16:22,960
माधवाचार्य जी ने उसको सगुण साकार कहा हो या

217
00:16:22,960 --> 00:16:27,520
या निबार काचार्य जी ने उसको साकार कहा हो या राधा या शंकराचार्य जी ने उसको

218
00:16:27,520 --> 00:16:31,520
निर्गुण निराकार मगर सबने ये बात मानी है कि उनका वो जो शरीर है वो

219
00:16:31,520 --> 00:16:35,960
भौतिक इंद्रियों के द्वारा पकड़ में आने वाला नहीं है व्यवहार के योग्य नहीं है

220
00:16:35,960 --> 00:16:40,000
हम लोग व्यवहार उसके साथ नहीं कर सकते तो वही ईश्वर जो व्यवहारिक

221
00:16:40,000 --> 00:16:41,720
नहीं है वही ईश्वर जब वो

222
00:16:41,720 --> 00:16:45,720
होता है व्यवहारिक जो व्यवहारिक नहीं है वो जब व्यवहारिक होता है तो

223
00:16:45,720 --> 00:16:49,920
वो बन जाता है सगुण साकार उसी तरीके से जो धर्म था वो जब आपके

224
00:16:49,920 --> 00:16:54,080
व्यवहार के लिए होता है तो ये शास्त्रों का स्वरूप लेता है

225
00:16:54,080 --> 00:16:58,120
शास्त्रों का स्वरूप लेता है गुरु वाणी का स्वरूप लेता है तब वो आपके लिए व्यवहारिक हो जाता

226
00:16:58,120 --> 00:17:02,480
है ठीक है तो व्यवहारिक धर्म व्यवहारिक धर्म हमारा शास्त्रों

227
00:17:02,480 --> 00:17:06,640
से सुनिश्चित होता है अब बात य आती है कि आपने कहा कि मेरे पास

228
00:17:06,640 --> 00:17:10,760
जीवन को जीने के अच्छे बुरे को डिसाइड करने के लिए दो परिमाप है

229
00:17:10,760 --> 00:17:15,160
एक शास्त्र और दूसरा अनुभव ठीक है

230
00:17:15,160 --> 00:17:19,360
यानी कि आपका कहना है कि कोई व्यक्ति बिना शास्त्र के भी मनुष्य

231
00:17:19,360 --> 00:17:23,400
जैसा बन सकता है किसके जैसा बन

232
00:17:23,400 --> 00:17:27,400
सकता है बिना बिना शास्त्रों से के

233
00:17:27,400 --> 00:17:32,920
द्वारा जो ज्ञान मि उस ज्ञान के बिना भी व मनुष्य जैसा बन सकता

234
00:17:32,920 --> 00:17:36,960
है बिना शास्त्रों के ज्ञान के भी कोई व्यक्ति मनुष्य जैसा बन

235
00:17:36,960 --> 00:17:41,000
सकता है बिल्कुल बिना शास्त्र के ज्ञान के भी मनुष्य ऋषि और महर्षि

236
00:17:41,000 --> 00:17:43,640
बन सकता है

237
00:17:43,640 --> 00:17:48,720
नहीं आपसे आपसे आ चले आगे

238
00:17:48,720 --> 00:17:52,920
चलेंगे धर्मे पशु भी समाना अब

239
00:17:52,920 --> 00:17:57,400
धर्म हमको मिल रहा है शास्त्रों से जो वेद है वो हमारा

240
00:17:57,400 --> 00:18:01,440
अंतिम से भी मिल रहा है आप समझ अच्छा आपको अलग से भी मिल

241
00:18:01,440 --> 00:18:05,520
रहा है आपका कहना ये है अच्छा ये बताइए फिर इसका मतलब है कि

242
00:18:05,520 --> 00:18:09,600
हम दो प्रकार के धर्म की रक्षा कर रहे हैं एक भगवत गीता से जो मिलता है

243
00:18:09,600 --> 00:18:13,760
वो एक मिनट और दूसरा धर्म जो

244
00:18:13,760 --> 00:18:17,960
जो राय जी है गाजीपुर के रहने वाले उनको जो अनुभव हो रहा है

245
00:18:17,960 --> 00:18:22,000
उस धर्म की भी हम रक्षा कर रहे हैं नहीं वो दोनों एक ही है

246
00:18:22,000 --> 00:18:26,000
तो आपका अनुभव और दूसरे का अनुभव एक ही होगा

247
00:18:26,000 --> 00:18:30,280
धर्म के अगर व देखिए जब जब

248
00:18:30,280 --> 00:18:34,600
मैं अपना प्रश्न मैं अपना प्रश्न क्लियर कर दूं मैं अपना प्रश्न क्लियर कर दूं

249
00:18:34,600 --> 00:18:38,840
आपके अनुभव के आधार पर मैं बता दूंगा अभी आपको मैं आपको

250
00:18:38,840 --> 00:18:43,000
प्रश्न क्लियर कर दूं आपके अनुभव के आधार पर आपने अपना

251
00:18:43,000 --> 00:18:47,080
धर्म सुनिश्चित किया दूसरे ने अपने अनुभव के आधार पर अपना

252
00:18:47,080 --> 00:18:51,080
धर्म सुनिश्चित किया तो क्या आप ये मानते हैं कि दोनों का धर्म एक

253
00:18:51,080 --> 00:18:55,080
ही होगा वो सनातन भी कहलाएगा अगर वो अगर वो धार्मिक

254
00:18:55,080 --> 00:18:59,720
होगा तो व धर्म अनुभव एक होगा और वो धर्म के पक्ष में होगा

255
00:18:59,720 --> 00:19:03,760
यानी अनुभव से पहले र्म होना चा उसम भी होगा अब कैसे मैं बता दे

256
00:19:03,760 --> 00:19:07,840
रहा हूं आपको क्यों होगा वो मैं बता देर अब जैसे कि यानी सुनिए सुनिए

257
00:19:07,840 --> 00:19:11,960
शास्त्रों में भी होना चाहिए इस चीज को ले लेते हैं आपने कहा श ये आपने बहुत अच्छी चीज

258
00:19:11,960 --> 00:19:12,680
कही है

259
00:19:12,680 --> 00:19:16,680
शास्त्रों में भी होना चाहिए यानी कि जब हमें यानी

260
00:19:16,680 --> 00:19:21,280
कि हमारे लिए अंतिम निर्णायक अनुभव नहीं है शास्त्र है अगर हमें

261
00:19:21,280 --> 00:19:25,600
एक मिनट क्लियर कर दूं अगर कोई अभ आया बता

262
00:19:25,600 --> 00:19:30,440
दूंगा बोलने देंगे तो फिर मैं बताऊंगा कैसे सुनिए सु

263
00:19:30,440 --> 00:19:34,600
देखिए आपने काफी लंबा बोला था मैं बिल्कुल शांत था मैं ये कह रहा हूं

264
00:19:34,600 --> 00:19:38,640
ब मैं ये कह रहा हूं कि जैसे मुझे अनुभव आया अब ये अनुभव सही

265
00:19:38,640 --> 00:19:43,120
है या गलत है इसको अगर मैं शास्त्र से वेरीफाई कर रहा हूं

266
00:19:43,120 --> 00:19:47,480
तो तो मेरे लिए शास्त्र अंतिम प्रमाण है भले ही मुझे अनुभव आया मगर मैंने उसको वेरीफाई

267
00:19:47,480 --> 00:19:51,600
किया तो सत्यापन किससे हुआ शास्त्र से हुआ

268
00:19:51,600 --> 00:19:55,800
ना और केवल शास्त्र से भी नहीं आज की तारीख में हम केवल शास्त्र

269
00:19:55,800 --> 00:20:00,160
पर भी डिपेंड नहीं कर सकते गुरु गोविंद और ग्र क्योंकि शास्त्र

270
00:20:00,160 --> 00:20:04,440
तो कई कंपनियां छाप रही है भाई भगवत गीता स्पन भी छाप रही है आर्य समाज

271
00:20:04,440 --> 00:20:08,520
भी छाप रहा है यथार्थ गीता भी छप रही है ब्रह्मा कुमारी की गीता भी छप रही

272
00:20:08,520 --> 00:20:13,480
है आप कबीर पंथिया की गीता भी छप रही है तो केवल

273
00:20:13,480 --> 00:20:17,640
केवल उस शास्त्र पर नहीं परंपरा प्राप्त आचार्य द्वारा प्रमाणिक

274
00:20:17,640 --> 00:20:22,000
शास्त्र को हम आधार बना सकते कि मेरे मन में जो विचार आ रहा है अनुभव की वजह से

275
00:20:22,000 --> 00:20:26,280
क्या वो सही है कि नहीं तो उसके लिए हम जब परंपरा प्राप्त आचार्य

276
00:20:26,280 --> 00:20:27,920
द्वारा स्वीकार किए गए जो शास्त्र

277
00:20:27,920 --> 00:20:32,400
है उ से जब हम वेरीफाई कर लेंगे तो इसका अर्थ य कि हमारा जो धर्म है

278
00:20:32,400 --> 00:20:37,040
उसका अंतिम निर्णायक वही परंपरा प्राप्त शास्त्र ही है हमारा अनुभव

279
00:20:37,040 --> 00:20:41,160
हमारा अनुभव हमारा अनुभव हमें दे तो रहा है मगर उसका भी सत्यापन

280
00:20:41,160 --> 00:20:45,400
करने हम जा रहे हैं किसके पास शास्त्र के पास अच्छा इसमें

281
00:20:45,400 --> 00:20:49,560
बात ये आ जाती है पूरा कर लू इसमें बात ये भी आ जाती है कि यदि

282
00:20:49,560 --> 00:20:53,640
हमारा अंतिम निर्णायक शास्त्र कोई है ही नहीं कोई

283
00:20:53,640 --> 00:20:57,640
भी ऐसी चीज दुनिया में है ही नहीं जो हमारा अंतिम निर्णायक हो सिवाय हमारे अनुभव

284
00:20:57,640 --> 00:21:01,640
के तो इसका मतलब यह है कि हम अपने अनुभव की रक्षा

285
00:21:01,640 --> 00:21:06,080
करने के लिए लड़ रहे हैं और वह भी आपका अनुभव अलग मेरा अनुभव

286
00:21:06,080 --> 00:21:10,080
अलग अजीत भारती का अनुभव अलग इन अनुभवों की रक्षा

287
00:21:10,080 --> 00:21:14,640
को आप सनातन कहते हैं क्या नहीं फिर मैं आपको

288
00:21:14,640 --> 00:21:17,840
आप बोलिए आप

289
00:21:17,840 --> 00:21:23,000
बोलिए अब जैसे मान लीजिए की

290
00:21:23,000 --> 00:21:27,160
हमारे इस धरती पर जो है ठीक है

291
00:21:27,160 --> 00:21:31,280
खोज हो चुकी है ग्रेविटी की कोई न्यूटन आया उसने खोज कर दी या फिर उससे

292
00:21:31,280 --> 00:21:35,600
पहले हमारे आचार्य थे ऑलरेडी कर चुके थे है ना ग्रेविटी

293
00:21:35,600 --> 00:21:40,560
की खोज न्यूटन ने तो दोबारा है ना लिख के छाप दिया

294
00:21:40,560 --> 00:21:43,040
अच्छा मान लीजिए क्या

295
00:21:43,040 --> 00:21:47,040
ऐसा हो सकता है क्या कि ग्रेविटी के जो नियम है या फिर जो न्यूटन के नियम

296
00:21:47,040 --> 00:21:51,320
है वो मुझे कुछ और अनुभव हो जाए और किसी और को कुछ और अनुभव हो

297
00:21:51,320 --> 00:21:55,360
जाए नहीं नहीं नहीं होंगे ना और अगर किसी

298
00:21:55,360 --> 00:21:59,760
और को कुछ अनुभव हो जाता है तो उस अनुभव को सही भी नहीं कहा जाएगा

299
00:21:59,760 --> 00:22:04,160
प्रैक्टिकली व गलत साबित कर देगा कोई भी की भाई

300
00:22:04,160 --> 00:22:08,160
इस चर्चा को चर्चा चर्चा सुन लीजिए मैं यहां पर कह

301
00:22:08,160 --> 00:22:12,320
दू यह चर्चा विस्तृत ना हो जाए इसलिए मैं एक छोटा सा क्लू

302
00:22:12,320 --> 00:22:16,400
दे दूं यहां पर आपको न्यूटन का लॉ अगर किसी और को दूसरा

303
00:22:16,400 --> 00:22:20,440
अनुभव आएगा दूसरा अनुभव आएगा तो दोनों व्यवहारिक दृष्टि से उसे तुरंत सत्यापित

304
00:22:20,440 --> 00:22:24,520
कर सकते हैं कि पेड़ से फल नीचे गिरेगा कि नहीं गिरेगा सत्यापित

305
00:22:24,520 --> 00:22:28,560
आंखों के सामने किया जा सकता है ब्रह्म में कौन जाके हुआ कि

306
00:22:28,560 --> 00:22:32,640
नहीं हुआ इसका आप सत्यापन व्यवहारिक दृष्टि में नहीं कर सकते तो

307
00:22:32,640 --> 00:22:36,840
इसकी तुलना उससे ना करिए ऐसा नहीं

308
00:22:36,840 --> 00:22:41,160
जो विलीन हो रहा है ब्रह्म में वो वापस आक हमको यह नहीं बता सकता

309
00:22:41,160 --> 00:22:45,720
कि मैं ब्रह्म में विलीन हो गया इसलिए

310
00:22:45,720 --> 00:22:49,880
इसलिए न्यूटन का लॉ अगर किसी के दिमाग में गलत आएगा तो उसका हम

311
00:22:49,880 --> 00:22:54,040
सत्यापन कर लेंगे मगर ब्रह्म में जाने वाले का लॉ जब हमारे

312
00:22:54,040 --> 00:22:59,840
मन में गलत आ जाएगा तो उसका हम सत्यापन नहीं कर सकते गलत आया कि नहीं आया

313
00:22:59,840 --> 00:23:04,000
चलिए सही सामाजिक व्यवहार से भी धर्म को जाना जा सकता

314
00:23:04,000 --> 00:23:08,200
है समझ रहे हैं आप समाज में किस तरह का व्यवहार करते हैं और

315
00:23:08,200 --> 00:23:12,240
देखिए धर्म और ब्रह्म को जान क्या मेरे को जो

316
00:23:12,240 --> 00:23:16,400
सबसे ये लगता है कि सबसे पहले जो चीज नष्ट हो जाती है वो होती है व्यक्ति का ईगो

317
00:23:16,400 --> 00:23:20,400
नष्ट हो जाता है सबसे पहली चीज तो वो नष्ट हो जाती है है ना ये

318
00:23:20,400 --> 00:23:24,440
देखिए आपने कहा मेरे को लगती है ये आपका अनुभव आप ला रहे हो ना बारबार ये

319
00:23:24,440 --> 00:23:28,800
मेरा अनुभव है हां ये मेरा अनुभव है कि सबसे पहले जो

320
00:23:28,800 --> 00:23:32,800
मैं य पर आपको एक चीज कहना चाहूंगा मुस्लिम घर में जन्म लेने

321
00:23:32,800 --> 00:23:37,440
वाला बच्चा यह सोचता है कि मैं अपनी चचेरी बहन से विवाह कर लू

322
00:23:37,440 --> 00:23:42,040
उसका अनुभव है क्या करें इसका नहीं

323
00:23:42,040 --> 00:23:48,040
तो नहीं नहीं तो वो तो साइंटिफिकली भी ग प्रन है

324
00:23:49,800 --> 00:23:54,080
तुम ये आप कह रहे हो एक जान एक जानवर

325
00:23:54,080 --> 00:23:58,080
भी जब है ना वो करता है और अपने अपने बडि

326
00:23:58,080 --> 00:24:02,360
करता और बढ़ाता है तो उसमें से सबसे पहले क्या किया जाता है मेल मेंबर को निकाल फेंकता

327
00:24:02,360 --> 00:24:06,360
है व बाहर तुम जाओ तुम अपना अलग किंगडम बनाओ है ना ताकि

328
00:24:06,360 --> 00:24:10,480
तुम अपने ही जो है घर के उसके साथ ना करो

329
00:24:10,480 --> 00:24:14,480
ताकि वो तुम्हारी वंश खत्म ही ना हो जाए उससे

330
00:24:14,480 --> 00:24:18,520
उनके पास उनके पास भी साइंस पर आधारित उनके

331
00:24:18,520 --> 00:24:22,520
पास भी साइंस पर आधारित बहुत अच्छी अच्छी व्याख्या आपको मिल जाएंगी जिसमें

332
00:24:22,520 --> 00:24:26,520
वो आपको य बता देंगे हम इस कारण से मास खाते हैं प्रोटीन मिलता है

333
00:24:26,520 --> 00:24:30,560
मास से प्रोटीन अब अब मेरे पास भी

334
00:24:30,560 --> 00:24:34,560
बहुत सी साइंटिफिक ऐसी बातें बिलकुल नहीं

335
00:24:34,560 --> 00:24:38,800
खाना चाहिए देख देखिए मैं कह रहा हूं सभी हिंदुओं को

336
00:24:38,800 --> 00:24:42,800
आपके अनुसार अनुभव आएगा क्या यह संभव है

337
00:24:42,800 --> 00:24:46,880
आपके द्वारा स्वीकार किए जाने वाले सिद्धांत सभी हिंदू स्वीकार करेंगे

338
00:24:46,880 --> 00:24:51,680
क्या है संभव है दूसरी बात आपने भी साइंस का वो दिया आपने भी साइंस का वो दिया

339
00:24:51,680 --> 00:24:55,800
क्या साइंस के जो नियम होते हैं वो सनातन होते हैं क्या

340
00:24:55,800 --> 00:24:59,920
उन पर रि नियम होते आज साइंस

341
00:24:59,920 --> 00:25:04,640
नहीं होते हैं आज साइंस ये कह रही है आज साइंस ये कह रही है कि भाई

342
00:25:04,640 --> 00:25:05,140
अपने

343
00:25:05,040 --> 00:25:09,200
ही उसमें विवाह करना वो है गलत है मान लिया आपके अनुसार

344
00:25:09,200 --> 00:25:13,280
आपके अनुसार आप आज साइंस से कह रही है कि अपने ही उसमें विवाह करेंगे तो ऐसा

345
00:25:13,280 --> 00:25:17,520
ऐसा हो सकता है कल को साइंस कोई साइंटिस्ट होगा तो वो

346
00:25:17,520 --> 00:25:21,760
ये भी निकाल निकाल देगा कि भाई नहीं अब थोड़ा-थोड़ा ऐसे क्लूज मिल गए कि ऐसा

347
00:25:21,760 --> 00:25:26,040
नहीं है दूसरी बात इसमें भी दूस

348
00:25:26,040 --> 00:25:30,720
अरे क्यों नहीं ऐसा हुआ है जब बत बी बात रामानुजन

349
00:25:30,720 --> 00:25:34,880
मुझे लगता उनसे बड़ा मैथमे कोई सृष्टि में पैदा हुआ होगा

350
00:25:34,880 --> 00:25:39,000
उनकी बात दोहराना चाहता हूं ठीक है जो मैथ के नियम होते

351
00:25:39,000 --> 00:25:43,920
हैं ना ठीक है जैसे है ना की मैथ की बात नहीं कर रहा हूं

352
00:25:43,920 --> 00:25:47,920
सु सास मैथ तो साइंस का पट है तो

353
00:25:47,920 --> 00:25:52,160
पार्ट है मगर मगर जो साइंस के नियमों की बात कर रहे कि भाई

354
00:25:52,160 --> 00:25:56,400
अभी तक एड्स का इलाज नहीं था आगे एडस का इलाज है तो उसके

355
00:25:56,400 --> 00:26:02,400
आधार पर हमय नहीं मान सक य अच्छा य बुरा है साइंस के आधार

356
00:26:02,640 --> 00:26:06,840
पर सहारा दे सकती है बिल्कुल बिल्कुल दे

357
00:26:06,840 --> 00:26:11,000
सकती है और मैं यह बता रहा हूं कि साइंस और ईश्वर दो चीज नहीं है

358
00:26:11,000 --> 00:26:14,520
आप बता दे रहा

359
00:26:14,520 --> 00:26:18,680
हूं मगर जो हमारे

360
00:26:18,680 --> 00:26:22,680
सामने क य नहीं क रहाय नहीं क र सा

361
00:26:22,680 --> 00:26:27,720
ईश्वर अलग चीज कह रहा जो प्रस्तुत की जा रही है वही ईश्वर वाली साइंस है

362
00:26:27,720 --> 00:26:32,160
जो प्रस्तुत की जा रही है वही ईश्वर वाली साइंस है तो गलत है वही तो मैं कहना चाह रहा हूं

363
00:26:32,160 --> 00:26:36,520
सता है ईश्वर वाली साइंस दूसरी ओ प्रतु गलत

364
00:26:36,520 --> 00:26:40,920
वही तो मैं कह रहा हूं जैसे साइंस में आगे बढ़ने की और खोजने

365
00:26:40,920 --> 00:26:45,080
की और जानने की और बदलाव की जरूरत

366
00:26:45,080 --> 00:26:49,200
है इसका मतलब ये है कि आप ये कह रहे हैं कि मेरे को

367
00:26:49,200 --> 00:26:53,200
अनुभव हुआ जैसे किसी मुस्लिम को अनुभव बहतर करने के आप जैसे कि

368
00:26:53,200 --> 00:26:57,280
मैं एक छोटा सा एग्जांपल देता हूं देखिए जैसे ना जो जैसे कि मैं

369
00:26:57,280 --> 00:27:01,320
आप आपको यह बताता हूं कि हर व्यक्ति एक तरीके से मोक्ष नहीं प्राप्त

370
00:27:01,320 --> 00:27:05,440
कर सकता है ना जैसे कि मोक्ष प्राप्त करने का सबसे आसान मार्ग जो

371
00:27:05,440 --> 00:27:09,920
कि मास के लिए सबसे अच्छा मार्ग है व है भक्ति मार्ग

372
00:27:09,920 --> 00:27:14,160
है ना भक्ति में लीन रहिए इससे अच्छा मोक्ष का मार्ग नहीं होता

373
00:27:14,160 --> 00:27:18,160
य मा देखिए हम लोग विषय से भटक रहे हैं हम लोग विषय से भटक रहे

374
00:27:18,160 --> 00:27:22,400
हैं मैं आपको विषय बहलाता हूं दोबारा हम अगर किसी मुस्लिम से

375
00:27:22,400 --> 00:27:26,480
आपको अनुभव य आ रहा है कि अपनी चचेरी बहन से विवाह ना करो और

376
00:27:26,480 --> 00:27:30,000
हम किसी और किसी मुस्लिम के मन में ये आ रहा है किसी

377
00:27:30,000 --> 00:27:34,880
अ हिंदू के मन में ये मन आ रहा है या आजकल तो हिंदू भी ऐसे हो रहे हैं

378
00:27:34,880 --> 00:27:39,240
कि मैं अपनी चचेरी बहन से विवाह कर लू उसके मन में य आ रहा है और ज्यादातर

379
00:27:39,240 --> 00:27:43,240
ऐसा होता है संस्कारों की वजह से कि उनको अपने यहां संस्कार कैसे मिल रहे हैं ठीक है

380
00:27:43,240 --> 00:27:47,280
अब बात ये आती है कि आप उससे ये कह रहे हो कि नहीं भाई ये तो तू गलत कर

381
00:27:47,280 --> 00:27:51,600
सोच रहा है ये जो अनुभव है अब आप उसको साइंस भी दे दे रहे हो कि इसमें जो है साइंस

382
00:27:51,600 --> 00:27:55,640
भी है देख भाई इसका अर्थ क्या हुआ इसका अर्थ ये हुआ और आप फिर कह

383
00:27:55,640 --> 00:27:59,720
भी रहे हो कि साइंस का नाम है बदलाव आप ये भी स्वीकार कर रहे हो यानी कि

384
00:27:59,720 --> 00:28:04,040
आप उससे

385
00:28:04,040 --> 00:28:08,040
ब र एक मिनट एक मिनट यानी कि आप उससे यह कह रहे

386
00:28:08,040 --> 00:28:12,120
हो कि देख भाई तुझे जो अनुभव आ रहा है वो गलत है इस सिद्धांत के अनुसार जो

387
00:28:12,120 --> 00:28:16,240
कि आगे चलके बदल सकता है हो सकता है आगे चलके यह तेरा जो अनुभव सही

388
00:28:16,240 --> 00:28:20,520
सिद्ध हो मगर आज तू मेरी बात मान ले क्योंकि मेरा अनुभव ऐसा है

389
00:28:20,520 --> 00:28:24,600
नहीं मैं अपना अनुभव नहीं बता रहा हूं मैं प्रैक्टिकल अनुभव बता रहा हूं

390
00:28:24,600 --> 00:28:28,720
आप समल अ सास के आप नियम वो बदल रहे ना वो

391
00:28:28,720 --> 00:28:33,080
साइंस के नियम किसी साइंटिस्ट ने आपको दिए है ना

392
00:28:33,080 --> 00:28:37,160
के नियम ऐसे नहीं डिस्कवर किए जाते किसी ने कुछ भी लिख

393
00:28:37,160 --> 00:28:42,560
दिया और कोई भी कैसे भी मान लेता ठीक आपके जीवन

394
00:28:42,560 --> 00:28:46,760
का है जैसे आपने बताया ना कि व से जब तक गिरेगा

395
00:28:46,760 --> 00:28:50,840
नहीं तब तक वो नहीं मानेगा वैसे ही नियम आते हैं साइंस के कोई

396
00:28:50,840 --> 00:28:56,400
भी नियम

397
00:28:56,400 --> 00:29:00,520
हो रहस है जो साइंटिस्ट उजागर करता है वो रहस्य

398
00:29:00,520 --> 00:29:05,400
ईश्वर नहीं बनाए है वो न्यूटन का नियम ईश्वर ने बनाया

399
00:29:05,400 --> 00:29:10,360
और क्लियर कर लेता हूं थोड़ा सा विषय हमारा क्लियर हो जाए

400
00:29:10,360 --> 00:29:14,880
कि हम रक्षा कर रहे हैं उस धर्म की परिभाषा क्या

401
00:29:14,880 --> 00:29:20,880
है हम हम धर्म की रक्षा कर रहे

402
00:29:22,360 --> 00:29:26,480
हैं परित है मगर उसम आप य कर रहे हो भगवत गीता

403
00:29:26,480 --> 00:29:31,080
अतिम नहीं उस मेरा मतलब मेरे लिए

404
00:29:31,080 --> 00:29:35,120
लेकि मा केलिए नहीं बता या की हम सब रक्षा

405
00:29:35,120 --> 00:29:39,120
कर रहे व गीता की कर रहे आपके अनुभव की नहीं कर रहे ब

406
00:29:39,120 --> 00:29:45,120
अपने अ रक्ष कर

407
00:29:49,040 --> 00:29:53,080
रहा ू कैसे हो सकता है

408
00:29:53,080 --> 00:29:57,360
हिंदू एक कैसे हो सकता है भगवत गीता के आधार पर अगर उसम मलाला

409
00:29:57,360 --> 00:30:02,320
द कि आपका अनुभव क्या कहता है तो उस पॉइंट पर ू एक नहीं

410
00:30:02,320 --> 00:30:06,520
होगा मैं आपकी इस बात को स्वीकार कर रहा हूं वो उस

411
00:30:06,520 --> 00:30:10,880
बात करेंगे आपका आपके अनुभव प तो मैं इस बात को

412
00:30:10,880 --> 00:30:14,920
मतलब ये समझ ल कि भगवत गीता वो धर्म है जिसके जिसकी पूरा

413
00:30:14,920 --> 00:30:19,040
सनातन धर्म रक्षा कर रहा है इसमें कोई भी मिलावट नहीं होनी चाहिए ठीक

414
00:30:19,040 --> 00:30:23,040
है बिल्कुल अब भगवत गीता यह कह रही है कि भाई शास्त्र ही हमारे

415
00:30:23,040 --> 00:30:27,560
लिए प्रमाण है इस बात के लिए कि अच्छा हो बुरा हो भगवान श्री कृष्ण नहीं कह

416
00:30:27,560 --> 00:30:31,600
अनुभव हमारे लिए प्रमाण है क्योंकि भगवत गीता में अर्जुन यह कहता

417
00:30:31,600 --> 00:30:35,640
है कि मेरी इंद्रियों के द्वारा अगर मेरे मन में ऐसा भाव

418
00:30:35,640 --> 00:30:40,480
उत्पन्न हो जाएगा जो गलत काम करने के लिए मुझे प्रेरित करेगा तो मैं उसे कैसे पहचानू

419
00:30:40,480 --> 00:30:44,680
तो वहां पर भगवान ने कहा कि आपके मन में यदि भगवान के रूप में भी अगर

420
00:30:44,680 --> 00:30:49,160
ऐसा भाव उत्पन्न हो जाए कि भगवान आके कह रहे हैं ये काम करो तब भी उसे परंपरा

421
00:30:49,160 --> 00:30:53,240
प्राप्त शास्त्र और आचार्य से आप सत्यापित करवाए तो यहां पर

422
00:30:53,240 --> 00:30:59,240
यह बात मानी जाए या ना मानी जाए

423
00:31:01,360 --> 00:31:07,360
एक सेकंड एक

424
00:31:26,160 --> 00:31:32,160
सेकंड

425
00:31:50,120 --> 00:31:54,120
सॉरी सॉरी सॉरी जी तो अर्जुन ने यह बात कही

426
00:31:54,120 --> 00:31:58,360
कि भगवान मेरे मन में मेरी जो इंद्र है क्योंकि

427
00:31:58,360 --> 00:32:02,640
भगवान तो यह कह रहे हैं कि मैंने तो तुम्हें पशु व्रत बनाया है

428
00:32:02,640 --> 00:32:06,640
आपके अंदर जो मध्य मास मदरा मैथुन ये सब जो है यह

429
00:32:06,640 --> 00:32:10,760
भाव मैंने तुम्हारे अंदर इनबिल्ट किए माया से प्रभावित मैंने तुमको वो किया

430
00:32:10,760 --> 00:32:14,800
है तो अब यहां से तुम्हें अगर मुक्त

431
00:32:14,800 --> 00:32:16,640
होना है तो तुम्हें आलंबन

432
00:32:16,640 --> 00:32:21,160
लेना होगा धर्म का शास्त्रों का

433
00:32:21,160 --> 00:32:25,520
ठीक है अब आप कह रहे हैं कि मेरे मेरा जो धर्म है व्यक्तिगत वो वो भगवत

434
00:32:25,520 --> 00:32:29,640
गीता प्लस मेरा अनुभव है अनुभव भी मुझे बताएगा भले ही

435
00:32:29,640 --> 00:32:33,720
भले ही भगवत गीता उसके विरुद्ध जा रही होगी तो मैं वहां पर अनुभव को मानूंगा भगवत गीता

436
00:32:33,720 --> 00:32:38,320
को नहीं मानूंगा मैं अपने पर्सनल जीवन में जी हां

437
00:32:38,320 --> 00:32:42,320
आप वहां पर इसका अर्थ ये है कि आपका जो धर्म है वो

438
00:32:42,320 --> 00:32:46,640
वो आपका अनुभव है वो भगवत गीता आपका धर्म नहीं है पर हां आप समाज

439
00:32:46,640 --> 00:32:50,720
की रक्षा के लिए भगवत गीता के लिए लड़ रहे हो हां मैं

440
00:32:50,720 --> 00:32:54,840
समाजिक रूप से भगवत गीता के लिए लड़ रहा हूं लेकिन कहीं कहीं मेरा पसल

441
00:32:54,840 --> 00:32:59,000
पर्सनल जो धर्म है वो भगवत गीता नहीं है तो उससे उससे उससे उससे मैं वो

442
00:32:59,000 --> 00:33:03,000
मैं कभी समाज प थोपू भी तो नहीं ना उससे मैं नहीं नहीं मैं थोपने की बात नहीं कर रहा हूं एक

443
00:33:03,000 --> 00:33:07,120
चीज क्लियर कर ले आपका जो व्यक्तिगत धर्म है वो भगवत गीता नहीं है

444
00:33:07,120 --> 00:33:11,120
नहीं ऐसा बिल्कुल नहीं है वो भगवत गीता है अंतिम प्रमाण क्या है

445
00:33:11,120 --> 00:33:15,680
आपका अनुभव या भगवत गीता अंतिम प्रमाण मेरा अनुभव है

446
00:33:15,680 --> 00:33:19,680
तो फिर अंतिम प्रमाण ही तो धर्म होता है व्यक्ति का आपका मत

447
00:33:19,680 --> 00:33:23,800
क्या है आप किसकी ओर जाएंगे मेरे लिए समाज के लिए

448
00:33:23,800 --> 00:33:27,920
भगवत गीता अच्छा ठीक है ठीक है तो मैं आपसे वही

449
00:33:27,920 --> 00:33:31,760
पूछ रहा हूं आपका जो व्यक्तिगत धर्म है अंतिम प्रमाण क्या है आपके जीवन

450
00:33:31,760 --> 00:33:36,160
का मेरे लिए तो मेरा अनुभव है हां अनुभव है

451
00:33:36,160 --> 00:33:40,160
अब सनातन की परिभाषा और सनातनी की परिभाषा क्या

452
00:33:40,160 --> 00:33:45,200
है सनातन की और सनातनी की परिभाषा तो आप शास्त्रों से लेंगे

453
00:33:45,200 --> 00:33:49,200
ना सनातन की परिभाषा बताइए तो जिसकी आप रक्षा कर रहे हैं वह

454
00:33:49,200 --> 00:33:53,520
परिभाषा क्या है मतलब ऐसी कोई एक परिभाषा

455
00:33:53,520 --> 00:33:57,560
तो है नहीं ये तो अगर हम लोग बहुत बहुत

456
00:33:57,560 --> 00:34:01,880
संक्षिप्त में अगर ले तो सच्चिदानंद स्वरूप परमेश्वर

457
00:34:01,880 --> 00:34:06,400
जो कि मनुष्य की चाह का वास्तविक विषय है

458
00:34:06,400 --> 00:34:10,560
सच्चिदानंद स्वरूप परमेश्वर को प्राप्त कर सकने वाली मर्यादा का नाम धर्म

459
00:34:10,560 --> 00:34:14,760
है और सनातन का जो अर्थ है अथर्ववेद में दिया गया है जो

460
00:34:14,760 --> 00:34:19,400
किसी भी देश काल परिस्थिति में ना बदले उसका नाम सनातन है

461
00:34:19,400 --> 00:34:23,440
ठीक है ना ही वो उत्पन्न हो ना ही वो खत्म हो उसका नाम

462
00:34:23,440 --> 00:34:27,520
सनातन है अब आप अगर आज आपके मन में कोई

463
00:34:27,520 --> 00:34:31,520
एक अनुभव आता है जो कि हमारे जो परंपरा प्राप्त शास्त्र

464
00:34:31,520 --> 00:34:35,800
जो सृष्टि के प्रारब्ध से और ईश्वर के साथ सदैव से थे अनादी है

465
00:34:35,800 --> 00:34:39,920
उन शास्त्रों से मैच नहीं खा रहा है तो आपका जो

466
00:34:39,920 --> 00:34:44,240
अनुभव है वो आज आया वो शास्त्र कौन से है वो शास्त्र कौन से है

467
00:34:44,240 --> 00:34:46,760
वो बाद में बात करेंगे अभी शास्त्र अनुभव की अभी

468
00:34:46,760 --> 00:34:51,000
शास्त्र अभ नहीं नहीं नहीं सुनिए तो अभी शास्त्र

469
00:34:51,000 --> 00:34:55,080
मैं तो भगवत गीता को ही रख रहा हू मैं अभी अभी आपके

470
00:34:55,080 --> 00:34:59,600
समक्ष भगवत गीता को ही रख रहा हूं ना अभी तो मैंने कोई दूसरा शास्त्र नहीं लाया ठीक है

471
00:34:59,600 --> 00:35:03,640
तो अब आपका कहना है कि यदि मेरे मन के अंदर आज कोई अनुभव

472
00:35:03,640 --> 00:35:07,640
जनित वो आता है तो मैं वहां पर अपने अनुभव को स्वीकार करूंगा

473
00:35:07,640 --> 00:35:11,640
भगवत गीता को नहीं जो कि परंपरा प्राप्त तरीके से सृष्टि के प्रारब्ध से और

474
00:35:11,640 --> 00:35:15,880
वो भी ईश्वर के मुख से ईश्वर से ही आ रही है क्योंकि हमारे

475
00:35:15,880 --> 00:35:20,040
जो शास्त्र है वो सनातन शास्त्र है अब आपका जो अनुभव है वो आज जनित

476
00:35:20,040 --> 00:35:24,360
हो रहा है आप अपने अनुभव को आज प्रायोरिटी दे रहे हैं शास्त्र को पीछे कर रहे हैं

477
00:35:24,360 --> 00:35:28,600
तो आप व्यक्तिगत रूप से सनातनी कैसे हुए सनातन

478
00:35:28,600 --> 00:35:33,360
को ना मानने वाला सनातनी कैसे हुआ मैं बताता हूं आपको

479
00:35:33,360 --> 00:35:37,840
अच्छा एक बात इसीलिए तो मैं कह रहा हूं ना देखिए जैसे क्या होता है

480
00:35:37,840 --> 00:35:42,000
वैसे तो मेरे अनुभव कभी भी शास्त्र विरुद्ध कभी हुए नहीं जैसे आपने कहा कभी मेरे को ऐसा

481
00:35:42,000 --> 00:35:46,040
नहीं फील हुआ कि हा मुझे मुर्गा खा लेना चाहिए वो आपको नहीं होगा अभी मैं

482
00:35:46,040 --> 00:35:50,240
नियम बताऊंगा वो क्यों नहीं हो रहा है वो आपको नियम बताऊंगा क्यों नहीं हो रहा है

483
00:35:50,240 --> 00:35:54,360
समझ रहे जो मैं जिन शास्त्रों को मानता हूं उन शास्त्रों के विरुद्ध

484
00:35:54,360 --> 00:35:58,360
तो कभी अभी तक ऐसा मुझे जिन शास्त्रों को आप मान रहे

485
00:35:58,360 --> 00:36:01,800
हैं केवल उसकी सीमा में रहते हुए ही ये सिद्ध करूंगा

486
00:36:01,800 --> 00:36:06,520
कि आपको वो जो चीजें फील नहीं हो रही है वो क्यों नहीं हो रही है मैं

487
00:36:06,520 --> 00:36:10,680
आपको सिद्ध करूंगा जी ठीक बताइए तो मुझे अभी तक तो ऐसा फील

488
00:36:10,680 --> 00:36:15,400
नहीं हुआ लेकिन मुझे ऐसा लगता है कि हमेशा ना एक

489
00:36:15,400 --> 00:36:19,600
जैसे कि हम इससे पहले बात करते हमेशा एक ओपन स्पेस होना चाहिए जगह

490
00:36:19,600 --> 00:36:23,600
होनी चाहिए बदलाव की बदलाव का मतलब

491
00:36:23,600 --> 00:36:28,000
ये नहीं है कि हम सनातन के बेसिक रूल्स है उसको

492
00:36:28,000 --> 00:36:32,120
ही मोल्ड करने है ना उसको मोल्ड नहीं करेंगे है ना वो जस के

493
00:36:32,120 --> 00:36:36,240
तस रहेंगे है ना लेकिन उसम एक स्पेस बनाएंगे जहां से कि

494
00:36:36,240 --> 00:36:40,240
हम और लोगों को एंट्री दे सके और उनको भी इसमें सम्मिलित

495
00:36:40,240 --> 00:36:44,280
कर सके आप समझ रहे हैं इस बात को बात को अगर इस

496
00:36:44,280 --> 00:36:48,560
बात को अगर मैं व्यवहारिक रूप से देखूं तो हम लोग

497
00:36:48,560 --> 00:36:52,800
रक्षा कर रहे हैं धर्म की कि नहीं भाई माता के साथ माता जैसा

498
00:36:52,800 --> 00:36:56,920
व्यवहार होगा बहन के साथ बहन जैसा व्यवहार होगा

499
00:36:56,920 --> 00:37:00,960
इसके विरुद्ध हम लोग नहीं इस भाव की इस व्यवहार की हम रक्षा

500
00:37:00,960 --> 00:37:05,360
कर रहे हैं मगर दूसरे को अगर इसमें मिलाना है तो हम उससे कहते हैं

501
00:37:05,360 --> 00:37:10,840
चलो ठीक है थोड़े दिन तुम माता के साथ वैसा व्यवहार कर लो जैसा तुम चाह रहे हो

502
00:37:10,840 --> 00:37:15,400
नहीं फर अब हम बताते हैं अब देखिए य आप

503
00:37:15,400 --> 00:37:17,000
ये नहीं है जैसे की

504
00:37:17,000 --> 00:37:21,600
अब जैसे मान लीजिए आपके गुरु जी के गुरु जी करपात्री महाराज का ये कहना था

505
00:37:21,600 --> 00:37:25,600
कि मुसलमानों को कभी सम्मिलित नहीं किया जा सकता क्योंकि फिर आप उन्हे किस वर्ण

506
00:37:25,600 --> 00:37:29,880
में रखेंगे और मैं यह कहता हूं कि हमें वो ओपन स्पेस

507
00:37:29,880 --> 00:37:34,080
रखना चाहिए कि हम उनको भी रिवर्ट करके सना आपसे

508
00:37:34,080 --> 00:37:38,080
पूछ रहा हूं देखिए हम तार्किक हम तार्किक चीजों पर भी जाएंगे हम

509
00:37:38,080 --> 00:37:42,360
लोग जा रहे हैं रेशनल हूं मैं तार्किकता प हम जाएंगे ठीक है

510
00:37:42,360 --> 00:37:46,360
पहले हम निर्णय कर ले कि आप सनातनी कैसे आप स्वयं

511
00:37:46,360 --> 00:37:50,640
को सनातनी कह रहे हो कि नहीं हा कह रहा हूं कह रहे हो मगर

512
00:37:50,640 --> 00:37:54,920
आप यह कह रहे हो कि जो सनातन शास्त्र है अगर मेरे मन में कोई अनुभव

513
00:37:54,920 --> 00:37:59,480
आएगा तो मैं उसको ऊपर रखूंगा प सुनि सु

514
00:37:59,480 --> 00:38:04,240
मैं क्या कह रहा हूं सामाजिक

515
00:38:04,240 --> 00:38:08,560
त सामाजिक रूप से मैं जब समाज में व्यवहार कर

516
00:38:08,560 --> 00:38:12,760
आपकी बात समझ गया मैं आपकी व्यक्तिगत विचारधारा पूछ रहा हूं कि व्यक्तिगत

517
00:38:12,760 --> 00:38:17,160
क्या होगा जिन सनातन शास्त्रों को आप मान रहे हैं कि सनातन शास्त्र है

518
00:38:17,160 --> 00:38:21,360
वेद गीता उपनिषद ठीक है इनको मान रहे है ना वेद

519
00:38:21,360 --> 00:38:25,360
गीता उपनिषद यह सनातन शास्त्र है अब आपके मन में जो अनुभव आ

520
00:38:25,360 --> 00:38:29,440
रहा है उसको आप प्र दे रहे सनातन को ठुकरा रहे सनातन शास्त्रों को वहां पर ठुकरा रहे

521
00:38:29,440 --> 00:38:33,440
हैं ठीक है तो फिर आप सनातनी कैसे हो रहे हैं

522
00:38:33,440 --> 00:38:37,520
वो सिद्ध करिए मुझे क्योंकि सनातन का अर्थ क्या है कि वो जो

523
00:38:37,520 --> 00:38:41,560
किसी भी देश काल परिस्थिति में ना तो उत्पन्न हो अब जैसे की इस्लाम

524
00:38:41,560 --> 00:38:45,680
की बात करें तो इस्लाम सनातन क्यों नहीं है इस्लाम वाले अधिकतर ये

525
00:38:45,680 --> 00:38:49,800
कहते हैं कि भाई हमारा तो ईश्वर जो है उसी ने सृष्टि बनाई है इसलिए

526
00:38:49,800 --> 00:38:53,800
हम भी हमारा भी धर्म जो है शाश्वत है मगर दो 187 में

527
00:38:53,800 --> 00:38:58,400
कुरान में लिखा हुआ है कि

528
00:38:58,400 --> 00:39:02,560
जो पवित्र महीना उनके यहां का होता है रमदान उसमें स्त्री

529
00:39:02,560 --> 00:39:06,680
संग करना पहले मना था मगर आज मैं आप लोगों के लिए अलाउ कर दे रहा

530
00:39:06,680 --> 00:39:11,040
हूं पहले मना था मगर आज मैं आपको लोगों के लिए अलाउ कर दे रहा हूं

531
00:39:11,040 --> 00:39:15,240
यह क्या हुआ कि वो खुद बता रही है कि जो नियम पहले

532
00:39:15,240 --> 00:39:19,320
नहीं था वो आज मैं उत्पन्न कर रहा हूं वो खुद ये कह रही है तो फिर

533
00:39:19,320 --> 00:39:23,400
उस किताब से मिलने वाला जो मत है विचार है वो

534
00:39:23,400 --> 00:39:28,320
सनातन विचार सनातन नियम नहीं है वो खुद क मैं बदल रही

535
00:39:28,320 --> 00:39:32,920
हू तो अब जब आप इन सनातन शास्त्रों को अस्वीकार

536
00:39:32,920 --> 00:39:37,080
कर रहे हैं आज जो आपके मन में जनित हो रहा है उस विचार के आगे तो फिर

537
00:39:37,080 --> 00:39:41,160
आप सनातनी कैसे कह पा रहे खुद को मैं य जानना चाह रहा हूं चलिए फिर

538
00:39:41,160 --> 00:39:45,280
मैं आपसे कुछ जो है क्वे कर लेता हूं ठीक है यह

539
00:39:45,280 --> 00:39:49,880
बात बताइए जो गुरु शिष्य परंपरा से ना आया हो वह सनातनी

540
00:39:49,880 --> 00:39:54,040
है कि नहीं सनातनी के दो अर्थ है इसको

541
00:39:54,040 --> 00:39:58,840
समझिए एक दुनिया का प्रत्येक प्राणी सनातन है

542
00:39:58,840 --> 00:40:03,000
सृष्टि सनातन है ईश्वर सनातन है हमारे ग्रंथ सनातन

543
00:40:03,000 --> 00:40:07,520
है हम उस सनातनी की बात कर रहे हैं जो सनातन

544
00:40:07,520 --> 00:40:12,160
शास्त्र मूल रूप से वेद आदि पर आस्थान वित हो वह सनातनी

545
00:40:12,160 --> 00:40:16,240
है अगर व उसके प्रति आस्थान वित नहीं है तो वह दिखाई दे रहा

546
00:40:16,240 --> 00:40:20,920
है व्यवहारिक रूप से लोगों को दिख रहा है ऐसे भी लोग है

547
00:40:20,920 --> 00:40:24,960
जो शास्त्रों को नहीं मानते हैं वेदों को नहीं मानते मगर चंदन लगाए सब कुछ कर रहे

548
00:40:24,960 --> 00:40:29,280
हैं क्रॉस कर रहे हैं तो वो क्या हो जाएंगे अज्ञात नास्तिक

549
00:40:29,280 --> 00:40:33,360
अज्ञात सना गैर सनातनी अज्ञात अ हिंदू और आज

550
00:40:33,360 --> 00:40:34,560
हमारी जो सबसे ज्यादा

551
00:40:34,560 --> 00:40:38,680
जनसंख्या है वो ऐसी ही है सिद्धांत विहीन है वो उसको

552
00:40:38,680 --> 00:40:42,680
मालूम ही नहीं है कि हमारे मूल सिद्धांत है क्या अगर हमसे क्वेश्चन कर लिया जाए

553
00:40:42,680 --> 00:40:46,880
कि तुम हिंदू हो तो किस आधार पर हो और हिंदू नहीं हो तो किस आधार पर नहीं हो ज्यादातर

554
00:40:46,880 --> 00:40:51,120
हमारी जनसंख्या ऐसी है उसको कहते हैं भटका हुआ हिंदू जन्म तो हिंदू

555
00:40:51,120 --> 00:40:55,160
में हो गया जन्म तो हिंदू में हो गया और प्राणी है तो वो तो सनातन है

556
00:40:55,160 --> 00:40:59,440
आत्मा सनातन है नैनम छ सण नन दती पावक

557
00:40:59,440 --> 00:41:03,720
तो उस हिसाब से प्राणी मात्र भी है तो वो सनातन है मगर यहां बात हो रही है किसने

558
00:41:03,720 --> 00:41:07,800
सनातनी विचारधारा को एक्सेप्ट किया हुआ है और कौन सी विचारधारा

559
00:41:07,800 --> 00:41:12,080
है जो हमारे सनातन शास्त्रों से स्फुट हो रही है तो इसीलिए

560
00:41:12,080 --> 00:41:16,120
तो मेरा प्रश्न ये है कि जो जिसने जो गुरु

561
00:41:16,120 --> 00:41:20,160
शिष्य परंपरा से नहीं आता क्या वो सनातनी है कि नहीं

562
00:41:20,160 --> 00:41:24,480
सनातनी है वही मैं बोल रहा हूं अगर वो उसको ठुकरा

563
00:41:24,480 --> 00:41:28,680
देगा मालूम होने पर भी तो उसके सनातनी होने पर प्रश्न चिन्ह लग

564
00:41:28,680 --> 00:41:32,960
जाएगा अगर वो ये बता दिया जाए कि भा अगर गुरु शिष्य

565
00:41:32,960 --> 00:41:37,200
परंपरा से नहीं आता लेकिन मानता नहीं गुरु श परंपरा तो होनी चाहिए

566
00:41:37,200 --> 00:41:41,680
मानता नहीं जब उसके सामने रख दिया जब उसके सामने रख दिया

567
00:41:41,680 --> 00:41:45,760
कि भाई भगवत गीता तो यह कह रही है वेद तो यह कह रहे हैं तुम ये कैसे कर रहे

568
00:41:45,760 --> 00:41:50,000
हो सपोज ट आज की हमारी बहुत सी ऐसी परंपराएं है

569
00:41:50,000 --> 00:41:54,000
गली जो कस्बे है उनमें ऐसे वर्ण है जहां

570
00:41:54,000 --> 00:41:58,040
पर अपनी ममेरी फेरी बहनों से विवाह हो रहा ठीक है

571
00:41:58,040 --> 00:42:02,040
मनुस्मृति में दिया गया है कि ममेरी फुफेरी बहनों से विवाह कदाचित

572
00:42:02,040 --> 00:42:06,120
वर्जित नहीं है चचेरी बहन से ित वर्जित है वर्जित नहीं नहीं गलत कह

573
00:42:06,120 --> 00:42:10,200
दिया वर्जित है क्योंकि क्योंकि ये सभी बहने है अब हम उनको

574
00:42:10,200 --> 00:42:14,320
जाकर के मनुस्मृति दिखा रहे हैं जो कि सनातन शास्त्र है हम उनको

575
00:42:14,320 --> 00:42:18,320
जाकर के व शास्त्र दिखा रहे जो प्रभु श्री राम ने स्वीकार किया हुआ है

576
00:42:18,320 --> 00:42:22,480
जब बाली को प्रभु श्री राम ने तीर मारा था वाली ने उनका खंडन

577
00:42:22,480 --> 00:42:26,760
किया था कि अगर तुमने मुझे मांस खाने के लिए मारा है तो तुम मनुस्मृति

578
00:42:26,760 --> 00:42:31,360
के श्लोक उद्र की माली ने वहां पर और फिर जवाब में

579
00:42:31,360 --> 00:42:35,520
राम जी ने उनका खंडन किया कि मैंने तुम्हें मनु महाराज के द्वारा बताए गए

580
00:42:35,520 --> 00:42:39,560
इन इन श्लोकों के आधार पर मारा है तो

581
00:42:39,560 --> 00:42:43,600
यानी कि जो राम जी है उनके लिए जो

582
00:42:43,600 --> 00:42:47,600
शास्त्र अंतिम है प्रमाण है वो शास्त्र उन लोगों

583
00:42:47,600 --> 00:42:51,680
के लिए प्रमाण नहीं है जो अपनी ममेरी फुपी बहनों से विवाह कर रहे हैं मगर फिर भी वो

584
00:42:51,680 --> 00:42:55,760
स्वयं को राम का भक्त कह रहे हैं मगर फिर भी वो स्वयं को हिंदू कह रहे हैं

585
00:42:55,760 --> 00:43:00,120
तो वो हिंदू आप बताए वही मैं कह रहा

586
00:43:00,120 --> 00:43:04,240
वही मैं कह रहा हूं मैंने मैंने एक चार्ट बनाया मैं आपको चार्ट दिखा

587
00:43:04,240 --> 00:43:10,240
देता

588
00:43:18,440 --> 00:43:22,640
हूं हमारे पास एक चार्ट है यह वाले जो हिंदू

589
00:43:22,640 --> 00:43:26,640
है जो जिनके सिद्धांत नहीं है मैं आपको दिखा रहा

590
00:43:26,640 --> 00:43:30,240
हूं

591
00:43:30,240 --> 00:43:34,320
अपना हमें इन्ही हिंदुओं का वापस लाना है क्योंकि सबसे

592
00:43:34,320 --> 00:43:38,600
ज्यादा संख्या स्कन की नहीं है सबसे ज्यादा संख्या आर समाज की नहीं है सबसे

593
00:43:38,600 --> 00:43:42,840
ज्यादा संख्या ब्रह्मा कुमारी की नहीं है सबसे ज्यादा संख्या कबीर पंथिया की नहीं है

594
00:43:42,840 --> 00:43:46,960
सबसे ज्यादा संख्या है इन हिंदुओं की जिनको अपने सिद्धांत ही नहीं पता

595
00:43:46,960 --> 00:43:51,200
है और इन हिंदुओं को हम लोग शास्त्र गुरु गोविंद ग्रंथ की सहायता

596
00:43:51,200 --> 00:43:55,360
से जब एक कर लेंगे तो हम मुठी बन पाएंगे सत्य

597
00:43:55,360 --> 00:43:59,600
है क्योंकि ये लोग इनके सिद्धांत नहीं है सिद्धांत विहीन है रामचंद्र

598
00:43:59,600 --> 00:44:03,920
जी का नाम तो ले रहे हैं मगर रामचंद्र जी का ही विरोध कर रहे हैं कई जगहो पर

599
00:44:03,920 --> 00:44:08,040
जैसे कि आचार्य प्रशांत जीत हो सता है ये तो सही है आचार्य प्रशांत

600
00:44:08,040 --> 00:44:12,080
जी है आचार्य प्रशांत जी ने कहा मैं नहीं मानता कि किसी ने कभी मनुस्मृति

601
00:44:12,080 --> 00:44:16,520
को प्रमाण माना हो अब वो हिंदू धर्म का प्रचारक कहला रहे हैं और

602
00:44:16,520 --> 00:44:20,520
राम जी ने उसको प्रमाण मान लिया प्रशांत जी तो पता

603
00:44:20,520 --> 00:44:24,680
नहीं क्या ही प्रचार करते रहते उसका तो भाई

604
00:44:24,680 --> 00:44:29,240
बहुत ज्यादा उनसे तो मतलब उनकी क्या बात करें है

605
00:44:29,240 --> 00:44:33,320
ना मैं एक बात कह रहा हूं अब मैं उनकी इस चीज को डालू

606
00:44:33,320 --> 00:44:33,820
आना

607
00:44:33,520 --> 00:44:37,600
तो बहुत ही मतलब मेरे लिए खुद ही बहुत ही कठिन है तो मैं क्या बोल

608
00:44:37,600 --> 00:44:42,520
बात ये है मैं इसकी वजह बता रहा हूं आपको जैसे हमने श्री राम को जाना

609
00:44:42,520 --> 00:44:46,760
श्री राम जी भी गुरु वशिष्ठ के पास जाते हैं शिक्षा

610
00:44:46,760 --> 00:44:51,600
लेने बचपन से ही ठीक है इना तो मानते हैं आप

611
00:44:51,600 --> 00:44:55,600
श्री राम जी के लिए कहा गया वाल्मीकि रामायण 337 1

612
00:44:55,600 --> 00:44:59,600
राम विग्रहवां धर्मा आपको कुछ नहीं मालूम है

613
00:44:59,600 --> 00:45:03,960
राम ने जैसा जैसा किया वैसा वैसा कर लो आप धर्म का पालन कर लोगे

614
00:45:03,960 --> 00:45:08,800
मगर राम जी की गुरु के पास जाने वाली जो बात है उसको हम नहीं मानेंगे गुरु

615
00:45:08,800 --> 00:45:13,040
विहीन है हम लोग इसलिए जो बंदा है भटक रहा है इसलिए डॉक्टर

616
00:45:13,040 --> 00:45:17,240
जाकिर नायक किसी का ब्रेन वश कर पाता है इसलिए केरला स्टोरी जैसी

617
00:45:17,240 --> 00:45:21,400
फिल्में सामने आती है जिसमें बिटिया अपने ही पिता पर जाकर थूक देती है यह

618
00:45:21,400 --> 00:45:25,560
सारी कहानिया इसलिए है क्योंकि व्यक्ति गुरु विहीन है क्योंकि

619
00:45:25,560 --> 00:45:29,560
जैसे हम जब वाल्मीकि रामायण अगर पढ़ेंगे तो उसमें

620
00:45:29,560 --> 00:45:33,680
वृतांत आपको बता दूं हनुमान जी गए हैं सीता

621
00:45:33,680 --> 00:45:37,720
मैया को खोजने ठीक है अब वो सीता मैया

622
00:45:37,720 --> 00:45:42,080
के अंदरूनी अंगों के बारे में विचार कर रहे हैं स्पष्ट शब्द लिखे

623
00:45:42,080 --> 00:45:46,400
व नाम लिखे उन अंगों के अब इस ग्रंथ को यदि कोई बिना

624
00:45:46,400 --> 00:45:48,640
गुरु व्यक्ति पढ़ेगा तो

625
00:45:48,640 --> 00:45:53,240
क्या होगा अरे हनुमान जी तो माता सीता के बारे में ऐसी बातें सोच रहे

626
00:45:53,240 --> 00:45:57,480
मगर उन्होंने किस परिपेक्ष में वो बातें सोची इसको हम प्रैक्टिकली

627
00:45:57,480 --> 00:46:01,720
अगर देखें तो हम अपनी माताओं को अपनी बहनों को अगर किसी भीड़ में ढूंढने जाएंगे

628
00:46:01,720 --> 00:46:05,720
वहां पर तो हनुमान जी ने सीता माता को पहले कभी देखा ही नहीं था

629
00:46:05,720 --> 00:46:10,040
मगर हम अपनी माताओं बहनों को जब ढूंढने जाते हैं कहीं पर भी

630
00:46:10,040 --> 00:46:14,920
तो हमारे पास पहला जो प्रमाण होता है कि वो एक स्त्री है

631
00:46:14,920 --> 00:46:19,360
यही तो होता है कि हम एक स्त्री को ढूंढने निकले हैं भले व

632
00:46:19,360 --> 00:46:23,800
उसके मतलब उसके अंगों का विचार हमारे मन में होता है

633
00:46:23,800 --> 00:46:28,480
तो वो जो डीप लेवल का विचार है सनातन धर्म क्या करता है बिल्कुल खोल के रख देता है

634
00:46:28,480 --> 00:46:32,760
और जो चीज जो दर्शन जो ज्ञान ऐसा है जो खोल के नहीं रखता उसको

635
00:46:32,760 --> 00:46:36,800
उसको लगता है बुरा कर रहा है बुरा कर रहा है वो बुरा कर रहा है

636
00:46:36,800 --> 00:46:40,800
तो अब उसने वो वहां पर वाल्मीकि जी ने बिल्कुल स्पष्ट खोल दिया कि

637
00:46:40,800 --> 00:46:44,840
उन्होंने मन में क्याक सोचा उस समय क्या क्या विचार है तो मन में यही सोचा कि

638
00:46:44,840 --> 00:46:48,880
भाई स्त्री है तो उसके अंग ऐसे ऐसे होने चाहिए वो ऐसी

639
00:46:48,880 --> 00:46:52,960
होनी चाहिए अगर वो राज घराने की तो वो ऐसी होनी चाहिए उस दृष्टिकोण

640
00:46:52,960 --> 00:46:56,960
से सीता माता को पहचानने के लिए हनुमान जी ने वो सोचा मगर यदि

641
00:46:56,960 --> 00:47:01,040
इस तरह से व्याख्या करने वाला कोई मार्गदर्शक कोई गुरु नहीं होगा

642
00:47:01,040 --> 00:47:03,880
तो व्यक्ति भटक जाएगा इसीलिए स्कंद पुराण

643
00:47:03,880 --> 00:47:07,960
में वचन है सीधे सधे इसीलिए राम जी भी जब जन्म लेते हैं तो वशिष्ठ के पास

644
00:47:07,960 --> 00:47:12,240
जाते हैं इसीलिए कृष्ण जी जन्म लेते हैं तो व शीपन के पास जाते हैं

645
00:47:12,240 --> 00:47:16,320
मगर हमारा जो आज का 60 पर 65 पर जो हिंदू है बचा कुचा

646
00:47:16,320 --> 00:47:22,000
जो इकोन इन से बच गया है विचारधाराओं से वोह गुरु के पास नहीं जाता

647
00:47:22,000 --> 00:47:26,400
हैम इस जो मेरा क्रॉस क्वेन रहेगा

648
00:47:26,400 --> 00:47:30,760
और वो मुझे लगता है कि ये बहुत सारे लोग का होगा जैसे

649
00:47:30,760 --> 00:47:34,840
देखिए मेरा ये मानना है कि धर्म जो है ना नदी की तरह है

650
00:47:34,840 --> 00:47:39,040
उसम बहता पानी है पानी सनातन है उसमें लेकिन वो बहता रहता

651
00:47:39,040 --> 00:47:43,120
है आप समझ रहे हैं वो कहीं चौड़ा हो जाएगा जगह के अनुसार वो कहीं पतला

652
00:47:43,120 --> 00:47:47,840
हो जाएगा धारा उसकी कहीं तीव्र हो जाएगी कहीं धीमी हो जाएगी आप समझिए इस बात को

653
00:47:47,840 --> 00:47:51,840
अब जैसे जब आप त्रेता में होते हैं

654
00:47:51,840 --> 00:47:55,880
तो वचनबद्धता ही धर्म रहता है आप सुनिए सुनिए मैं

655
00:47:55,880 --> 00:47:59,960
एक आपको चार्ट भेजूंगा हम ये चार्ट बना चुके हैं प्रथम स्तर पर कौन

656
00:47:59,960 --> 00:48:04,000
हिंदू है जो सं पूर्णत धार्मिक है भगवत गीता में एक वचन

657
00:48:04,000 --> 00:48:06,880
आया है यदि आप

658
00:48:06,880 --> 00:48:10,960
अज्ञानता वश अथवा व्यवस्था वश धर्म का

659
00:48:10,960 --> 00:48:15,280
अनुकरण ना कर पाने की स्थिति में धर्म का अनुकरण

660
00:48:15,280 --> 00:48:17,160
ना कर पाने का पश्चाताप मन

661
00:48:17,160 --> 00:48:22,800
में रख के चल रहे हैं तो आप धार्मिक ही कहलाएंगे

662
00:48:22,800 --> 00:48:26,920
धर्मजीत यदि आप धर्म का अनुकरण ना कर पाने की स्थिति

663
00:48:26,920 --> 00:48:31,200
में उसको न्यायोचित ठहराए और जो आपका

664
00:48:31,200 --> 00:48:35,520
जो धर्म जो स्फुट हो रहा है शास्त्रों से उसको आप कहेंगे मैं नहीं मानता

665
00:48:35,520 --> 00:48:39,680
इसको तो वहां पर आप जो हमारा सेकंड जो हमारा दूसरे नंबर पर जो हिंदू

666
00:48:39,680 --> 00:48:44,000
है जो अभी तक किसी विशेष उसमें फसा नहीं है है ना

667
00:48:44,000 --> 00:48:48,000
तो वो सेकंड नंबर का जो हिंदू है वो यही है

668
00:48:48,000 --> 00:48:52,160
पता चल जाने पर भी उसके मन में ये आएगा कि मैं सही हूं शास्त्र गलत

669
00:48:52,160 --> 00:48:56,200
है भले ही वो शास्त्रों के उस वाक्य को ढूंढने जाए कहीं

670
00:48:56,200 --> 00:49:00,360
पर या ना जाए इसी के बारे में भगवान ने कहा संशय आत्मा विनती

671
00:49:00,360 --> 00:49:04,480
भगवत गीता 44 कि संशय में रहने वाले व्यक्ति का ना

672
00:49:04,480 --> 00:49:08,800
तो इस जन्म इस दुनिया में कुछ हो सकता है ना परलोक की तो बात बहुत दूर है

673
00:49:08,800 --> 00:49:13,160
मगर हिंदू धर्म को लेकर ही व्यक्ति के मन में पस संशय

674
00:49:13,160 --> 00:49:17,160
है वो संशय खत्म करने के लिए कहीं नहीं जा रहा है वो संशय

675
00:49:17,160 --> 00:49:21,360
लेकर ही घूम रहा है यह है हमारा जो जो ज्यादा संख्या

676
00:49:21,360 --> 00:49:25,720
हिंदुओं की जनसंख्या वो यही है गुरु विहीन हिंदू सिद्धांत

677
00:49:25,720 --> 00:49:29,840
हिंदू सिद्धांत है ही नहीं अब जो ममेरी फुफेरी बहनों

678
00:49:29,840 --> 00:49:32,320
से विवाह करने वाला है उसको हम यह बता

679
00:49:32,320 --> 00:49:36,400
रहे हैं कि भैया मनुस्मृति मना कर रही है आगे मत करना स्वीकार कर लो

680
00:49:36,400 --> 00:49:40,480
गलती हो गई व कह रहा जन है अगर इसके लिए

681
00:49:40,480 --> 00:49:45,240
मनुस्मृति की आवश्यकता पड़ रही है तो मतलब क्या कहा जाए फ तो जानवर से भी बेकार

682
00:49:45,240 --> 00:49:49,840
है देखिए यय बात हैका

683
00:49:49,840 --> 00:49:54,160
दृष्टिकोण है आपका दृष्टिकोण किसी और के लिए मान नहीं हो सकता है

684
00:49:54,160 --> 00:49:58,280
उसके लिए सुपीरियर अथॉरिटी का दृष्टिकोण मान्य हो सकता है मगर

685
00:49:58,280 --> 00:50:02,480
वो यह कह रहा है मैं राम को तो मानता हूं मगर राम जिसको मानता था मैं उसको नहीं मानता

686
00:50:02,480 --> 00:50:07,000
हूं वो यह कह रहा है फिर भी वो सनातनी है फिर भी वो राम भक्त

687
00:50:07,000 --> 00:50:11,040
है तो जो आपने प्रश्न पूछा था ना कि जो गुरु परंपरा

688
00:50:11,040 --> 00:50:15,400
से नहीं जुड़ा है आपने जो प्रश्न पूछा था कि जो गुरु परंपरा से नहीं जुड़ा है

689
00:50:15,400 --> 00:50:19,680
उस प्रश्न का उत्तर यही है कि यदि वोह गुरु परंपरा से नहीं जुड़ा

690
00:50:19,680 --> 00:50:23,880
है दूर रह कर के भी कुछ गलतियां कर भी रहा है मगर उसको यदि कभी पता चलता

691
00:50:23,880 --> 00:50:28,120
है कि परंपरा प्राप्त शास्त्रों का मैं खंडन कर रहा हूं उस स्थिति

692
00:50:28,120 --> 00:50:32,240
में वो स्वीकार कर लेता मान लीजिए वो तुरंत की तुरंत सुधर ना पाए जैसे

693
00:50:32,240 --> 00:50:36,600
कोई बच्चा है वो सिगरेट पी रहा है किसी दिन उसके पापा ने बताया भैया इससे फेफड़े

694
00:50:36,600 --> 00:50:40,720
खराब हो जाएंगे ऐसा ऐसा है नहीं पीनी चाहिए तार्किक और प्रमाणिक दोनों

695
00:50:40,720 --> 00:50:45,040
धरातल पर गुरु बताते गुरु कभी भी केवल प्रमाण नहीं देता है

696
00:50:45,040 --> 00:50:47,520
युक्ति और तर्क से युक्ति

697
00:50:47,520 --> 00:50:51,560
और तर्क से आपके संशय को मिटाता है कि य लिखा तो क्यों लिखा हमने

698
00:50:51,560 --> 00:50:56,520
अगर ये बात कही तो क्यों कही मगर व्यक्ति उसके पास जा ही नहीं रहा

699
00:50:56,520 --> 00:51:01,720
प्रणाम है मेरा ये प्रश्न था

700
00:51:01,720 --> 00:51:05,800
आप मैं वो बात पूरी कर लू तो बच्चे को जब पता चला कि

701
00:51:05,800 --> 00:51:10,120
पापा ने मुझे सही चीज बता दी है तो दो बातें हुई

702
00:51:10,120 --> 00:51:14,600
या तो बच्चे ने सोचा कि मैं जैसे तैसे करके इस आदत से भगवान निजात पाऊ

703
00:51:14,600 --> 00:51:18,720
जो पापा जो कह रहे हैं उनकी बात मान पाऊ पिताजी जो बात कह रहे वो बात मान पाऊ

704
00:51:18,720 --> 00:51:22,720
दूसरा बच्चा य नहीं पिताजी गलत कह रहे हैं पिताजी को क्या

705
00:51:22,720 --> 00:51:26,960
मालूम सिगरेट पीने से थोड़ा सा माइंड बूस्ट होता है पढ़ने में मन लगता

706
00:51:26,960 --> 00:51:31,040
है वो अपने आप को तार्किक सिद्ध कर रहा है मनी मन तो यह वो हिंदू

707
00:51:31,040 --> 00:51:35,280
है जो कि फिर पिताजी के पिताजी की तरफ आस्थान वित नहीं कहलाया जा सकता

708
00:51:35,280 --> 00:51:39,360
क्योंकि वह अपने विचारों को अपने अनुभव को वहां पर प्रायोरिटी दे रहा है और कह रहा

709
00:51:39,360 --> 00:51:43,160
है कि मैं सनातन हूं

710
00:51:43,160 --> 00:51:47,440
पता पता तो हिरण हो सकते आप समझ रहे ना हा

711
00:51:47,440 --> 00:51:51,520
नहीं तो मैंने क्या कहा य युक्ति और प्रमाण मैंने

712
00:51:51,520 --> 00:51:56,360
कहा युक्ति बिल्कुल बिल्कुल देखिए मैं आपको गुरु की व्याख्या बता दूं

713
00:51:56,360 --> 00:52:01,040
गुरु गुरु की व्याख्या बता दूं आपको गुरु की व्याख्या भी बता देता हूं अथर्ववेद

714
00:52:01,040 --> 00:52:02,960
11 पा 16

715
00:52:02,960 --> 00:52:07,440
अंतिम निर्णायक ब्रह्मचारी सन्यासी हो सकता है मनुस्मृति 12वां अध्याय

716
00:52:07,440 --> 00:52:11,600
112 से 114 पहली बात वो अंतिम निर्णायक आप किसी भी गुरु के सानिध्य

717
00:52:11,600 --> 00:52:15,840
में वो गुरु किसी सन्यासी के सानिध्य में हो

718
00:52:15,840 --> 00:52:20,360
अब हमारे टॉप लेवल पर जो बैठने वाले जो गुरु होते हैं शंकराचार्य निबार

719
00:52:20,360 --> 00:52:24,840
काचार्य मधवा चार्य रामानुजाचार्य इन पदों पर बैठने वाले जो गुरु होते हैं सन्यासी

720
00:52:24,840 --> 00:52:29,080
होते हैं दूसरी बात अब दूसरा आता है कि वो परंपरा

721
00:52:29,080 --> 00:52:33,280
प्राप्त होना चाहिए सेल्फ प्रोक्लेम नहीं होना चाहिए अपने अनुभव के आधार पर बना हुआ

722
00:52:33,280 --> 00:52:37,520
गुरु नहीं होना चाहिए आचार्य प्रशांत जैसा नहीं होना चाहिए आचार्य

723
00:52:37,520 --> 00:52:42,320
प्रशांत जी क्या है देखिए आचार्य प्रशांत जी की बात बताऊ कि

724
00:52:42,320 --> 00:52:46,320
की बात कर रहे हम लोग एक बात बता दूं जब बात आही गई है अब

725
00:52:46,320 --> 00:52:50,920
जैसे वो वो भी कहते मेरा अनुभव है मैं बता रहा हूं वो सही है क्या करेंगे हम

726
00:52:50,920 --> 00:52:54,240
लोग सही है

727
00:52:54,240 --> 00:52:58,480
और फिर हम फिर हम एक कैसे हो पाएंगे तो हम करेंगे

728
00:52:58,480 --> 00:53:02,960
उ बैठ के हम बैठेंगे ना उनके साथ हम उनको चैलेंज करेंगे ना कि आइए

729
00:53:02,960 --> 00:53:07,080
जैसे वही तो हम कर रहे हैं वही हम कर रहे हैं तो आप हमारा विरोध कर रहे हैं

730
00:53:07,080 --> 00:53:11,280
वही हम कर रहे हैं क्या बात कर र मैंने कभी आपका विरोध नहीं किया नहीं नहीं अच्छा

731
00:53:11,280 --> 00:53:15,480
अच्छ मैं बात पूरी कर लू आचार्य प्रशांत जी की बात पूरी कर पहले कमेंट में भी यही

732
00:53:15,480 --> 00:53:18,040
था कि मतलब कि आप भी सही है कुछ चीजों में आर्य

733
00:53:18,040 --> 00:53:22,160
समाज भी सही है कहीं आप भी गलत है कहीं वो भी गलत है मिल के बैठिए एक ऐसा मंच

734
00:53:22,160 --> 00:53:26,320
बनाइए सबको समम सबको एक साथ ले चला आर प्रशांत जी की बात पूरी

735
00:53:26,320 --> 00:53:30,560
कर आचार्य प्रशांत जी की बात पूरी कर लू वो अपनी

736
00:53:30,560 --> 00:53:34,640
इंजीनियरिंग की पढ़ाई कहां से की है यह प्रूफ करने के लिए वहा

737
00:53:34,640 --> 00:53:38,640
लिखा दिखाते हैं आई आई एम फलाना फलाना मैंने आईआईटी यहां से की

738
00:53:38,640 --> 00:53:42,760
दिखाते हैं इसका मतलब वो बता रहे हैं कि भाई अभियंत्रिकी की जो शिक्षा है

739
00:53:42,760 --> 00:53:46,760
मैंने फलानी जगह से प्राप्त की मगर धर्म की शिक्षा को रखते

740
00:53:46,760 --> 00:53:51,160
समय वह नहीं बताते कि मैंने कहां से प्राप्त की यानी कि

741
00:53:51,160 --> 00:53:55,280
भौतिकी का ज्ञान तो मैं बताऊंगा कि कहां से मिला मगर अध्यात्म का ज्ञान मुझे कहां

742
00:53:55,280 --> 00:53:59,520
मिला मैं नहीं बताऊंगा है ना तो ये हो गए तो दूसरा पॉइंट

743
00:53:59,520 --> 00:54:03,520
क्या है गुरु का पहला था ब्रह्मचारी सन्यासी दूसरा है परंपरा प्राप्त

744
00:54:03,520 --> 00:54:07,840
आचार्य ये कहां है आप देखिए भगवत गीता चौथा अध्याय दूसरा श्लोक

745
00:54:07,840 --> 00:54:11,920
भगवान कह रहे हैं भगवान जब किसी ज्ञान का सौंदर्य बता रहे हैं

746
00:54:11,920 --> 00:54:16,120
तो उस ज्ञान का सौंदर्य बताते समय यह बात रख रहे हैं कि परंपरा प्राप्त

747
00:54:16,120 --> 00:54:20,160
ज्ञान है ऐसा वैसा नहीं है परंपरा प्राप्त एवं परंपरा प्राप्ति

748
00:54:20,160 --> 00:54:24,240
मम अच्छा तीसरा अध्याय सवा श्लोक कि जो

749
00:54:24,240 --> 00:54:28,400
परंपरा से य जो चक्र के अनुसार जो चलते हैं परंपरा प्राप्त

750
00:54:28,400 --> 00:54:32,600
के अनुसार जो चलते हैं वही मोक्ष पा पाते हैं तीसरा अध्याय

751
00:54:32,600 --> 00:54:33,560
सवा शलोक

752
00:54:33,560 --> 00:54:37,760
तो परम तो दूसरा आ गया कि वो जो है परंपरा से होना चाहिए

753
00:54:37,760 --> 00:54:41,960
चौथा तीसरा क्या है तीसरा है कि वो सभी जितने

754
00:54:41,960 --> 00:54:46,080
भी शति स्मृति शास्त्र है उसमें सामंजस्य की शिक्षा दे अब इसमें

755
00:54:46,080 --> 00:54:50,240
क्या होगा इसमें वो व्यक्ति कट जाएंगे जो विष्णु पुराण को मानेंगे मगर

756
00:54:50,240 --> 00:54:54,400
शिव पुराण को नहीं मानेंगे 145 वा अध्याय 5वा

757
00:54:54,400 --> 00:54:58,440
शलोक है पुराण का कि जो गुरु हो वो

758
00:54:58,440 --> 00:55:02,640
शति स्मृति शास्त्रों में सामंजस की शिक्षा दे अब मालूम पड़ा

759
00:55:02,640 --> 00:55:07,000
हम लोग कह रहे हैं कि भाई कृष्ण ही भगवान है और

760
00:55:07,000 --> 00:55:11,040
महादेव भगवान नहीं है वो मोक्ष दायक नहीं है मगर श्वेता शतु

761
00:55:11,040 --> 00:55:15,080
उपनिषद में तो लिखा है यजुर्वेद में तो लिखा है इसका क्या करें नहीं वो

762
00:55:15,080 --> 00:55:19,080
सारी बातें भ्रामक है अच्छा राम जी कह रहे हैं राम जी भी कह

763
00:55:19,080 --> 00:55:23,480
रहे हैं भैया कि जो है भगवान है ईश्वर है नहीं नहीं राम जी भी ब्राह्मण

764
00:55:23,480 --> 00:55:27,800
है अब राम जी भी मर्यादा पुत्तम नहीं रहे वो भी झूठ बोल रहे

765
00:55:27,800 --> 00:55:32,000
वो भी चल कर रहे हैं चलिए कृष्ण जी की बात तो चलिए उन्होंने लीला की लीला

766
00:55:32,000 --> 00:55:36,040
रूप में उने भक्ति कर दी भगवान की मगर राम जी

767
00:55:36,040 --> 00:55:40,320
भी झूठ ही फैला रहे हैं उनके अनुसार तो तीसरा पॉइंट

768
00:55:40,320 --> 00:55:44,320
आ गया तीसरा पॉइंट आ गया कि सभी सुति स्मृति शास्त्रों में

769
00:55:44,320 --> 00:55:48,360
सामंजस्य की शिक्षा दे ऐसा ना करें यह कुछ कह रहा है यह कुछ कह रहा है

770
00:55:48,360 --> 00:55:48,860
इसको

771
00:55:48,560 --> 00:55:53,000
मान लो इसको ना मानो चौथा पॉइंट है गुरु वही जो आपके संचय

772
00:55:53,000 --> 00:55:57,080
को मिटा दे क्योंकि गुरु की आवश्यकता कब आई थी हमें अपना संशय

773
00:55:57,080 --> 00:56:01,240
दूर करना है कि गुरुदेव ये कह रहे हैं जातिवाद नहीं होना चाहिए शास्त्र में लिखा जातिवाद

774
00:56:01,240 --> 00:56:05,320
नहीं होना चाहिए ये क्यों लिखा है हमारा संशय दूर करो

775
00:56:05,320 --> 00:56:09,640
गुरु वही जो आपका संशय दूर कर दे आपको संतुष्ट करा दे तो गुरु

776
00:56:09,640 --> 00:56:14,280
का अंतिम जो निर्णायक है क्या है संशय दूर जो कर दे युक्ति और प्रमाण से करेगा

777
00:56:14,280 --> 00:56:18,360
मगर क्या है हम दूर ही दूर से गुरुओ को क्रिटिसाइज कर लेंगे दूर

778
00:56:18,360 --> 00:56:22,560
ही दूर से हम अपनी उनके बारे में धारणा बना लेंगे उनके पास जाएंगे नहीं कि गुरुदेव

779
00:56:22,560 --> 00:56:26,560
ऐसा बोला तो क्यों बोला और उनको नकारने की आड़

780
00:56:26,560 --> 00:56:31,560
में हम क्योंकि वो स्त्रोत है जो गीता प्रेस गोरखपुर

781
00:56:31,560 --> 00:56:35,560
है वो अगर किताबें छाप रही है तो परंपरा प्राप्त

782
00:56:35,560 --> 00:56:39,800
आचार्यों से लिया ज्ञान वो छाप रही है अगर हम परंपरा

783
00:56:39,800 --> 00:56:43,800
प्राप्त आचार्य को डिनायर रहे हैं तो हमें उन ग्रंथों पर भरोसा कैसे है अगर

784
00:56:43,800 --> 00:56:48,000
हमें उन पर विश्वास नहीं है परंपरा प्राप्त आचार्यों प तो हमें उनसे प्राप्त

785
00:56:48,000 --> 00:56:52,080
होने वाले ग्रंथों पर विश्वास कैसे है उसमें लिखा जो राम का वर्णन है

786
00:56:52,080 --> 00:56:56,240
उस पर विश्वास कैसे है कि राम ऐसे थे धनुष लेक चलते थे देखिए आप

787
00:56:56,240 --> 00:57:00,360
कितनी बौद्ध मत है जिसमें लिखा हुआ राम थे ही नहीं जैन

788
00:57:00,360 --> 00:57:04,000
थे ही नहीं उन्होंने तो यह तक कह दिया बौद्ध जैनों ने कि भाई जैनियों

789
00:57:04,000 --> 00:57:08,000
अचार सत्यार्थ प्रकाश में भी लिखा हुआ है कि जैन के मंदिरों को विष्णु

790
00:57:08,000 --> 00:57:12,200
के मंदिरों में बदला गया है अब बताइए जैन के मंदिरों

791
00:57:12,200 --> 00:57:16,280
को विष्णु के मंदिर में बदला गया तो इसका अर्थ क्या है कि हम जो ये भगवान को देख रहे हैं जिस

792
00:57:16,280 --> 00:57:20,280
स्वरूप में विष्णु भगवान को ये सब काल्पनिक आप देखेंगे तो बहुत बारी

793
00:57:20,280 --> 00:57:24,280
ये दोनों तरीके से चीज हुई है बहुत बार विष्णु मंदिर को भी बौद्ध मंदिरों

794
00:57:24,280 --> 00:57:28,520
में बदला गया और बध मंदिर फ विष्णु मंदिर में बदले गए उसका अलग बात

795
00:57:28,520 --> 00:57:32,640
अलग है वो बात एक अलग है मगर हम जो वर्णन पढ़ रहेने

796
00:57:32,640 --> 00:57:37,360
होता था जो नहीं हो रहा है करने के लिए क रहा होता

797
00:57:37,360 --> 00:57:41,480
क्या होता था जैनों के जो भी आचार्य होते थे और सनातनी आचार्य होते

798
00:57:41,480 --> 00:57:45,640
थे बौद्ध आचार्य होते थे बध तो उस टाइम नहीं था जैन ज्यादा पुराना है तो जैन

799
00:57:45,640 --> 00:57:49,800
और हिंदू आचार्य आपस में बैठ के श करते थे कभी कभी ऐसे राजा

800
00:57:49,800 --> 00:57:54,120
होते थे कि वो अपने पहले 20 साल सनातनी

801
00:57:54,120 --> 00:57:57,280
होते थे

802
00:57:57,280 --> 00:58:01,400
मैं इस चीज पर प्रकाश डाल रहा हूं कि अगर हम

803
00:58:01,400 --> 00:58:05,600
वो विषय मेरा विषय अलग है मैं वो नहीं कह रहा हूं मेरा विषय यह है जो

804
00:58:05,600 --> 00:58:09,760
मूर्ति हमें भगवान की दिख रही है और हम उसे राम मान रहे हैं उसे एक महापुरुष

805
00:58:09,760 --> 00:58:13,960
या भगवान मान रहे हैं हम उसके प्रति आस्थान वित है और यदि हम

806
00:58:13,960 --> 00:58:18,000
वो मूर्ति का वर्णन हमें प्राप्त हुआ गुरु परंपरा से हम गुरु परंपरा पर

807
00:58:18,000 --> 00:58:22,480
अविश्वास जता रहे बिना उसका पक्ष सुने बिना उसको अवसर दिए

808
00:58:22,480 --> 00:58:26,680
बिना उसके प्रश्न पूछे हम उसको नकार रहे नाई कर रहे हैं तो हम उससे

809
00:58:26,680 --> 00:58:30,960
प्राप्त होने वाले भगवान श्री राम के भगवान श्री कृष्ण के भगवान विष्णु के

810
00:58:30,960 --> 00:58:36,960
वर्णन को डिनायर हैं अप्रत्यक्ष रूप से

811
00:58:38,120 --> 00:58:42,120
और इसका एक छोटा सा उदाहरण आपको देना चाहता हूं स्कंद पुराण

812
00:58:42,120 --> 00:58:46,160
में सत्यनारायण की कथा है लगभग सभी हिंदुओं के घर में य होती

813
00:58:46,160 --> 00:58:50,320
होगी ठीक है ऐसी कोई

814
00:58:50,320 --> 00:58:54,680
ऐसा कोई स्कंद पुराण नहीं है जिसमें सत्यनारायण की कथा हो मगर उसम

815
00:58:54,680 --> 00:58:58,840
गुरु गीता ना हो उमा महेश्वर संवाद ना हो उमा महेश्वर

816
00:58:58,840 --> 00:59:03,040
संवाद है शिवजी और पार्वती के बीच में बातें हो रही है अब

817
00:59:03,040 --> 00:59:07,080
व्यक्ति बैठ कर के सत्यनारायण की कथा तो सुन रहा है और उस पर आस्थान

818
00:59:07,080 --> 00:59:11,320
वित भी है मगर जिस ग्रंथ से वह कथा मिल रही है उसी ग्रंथ

819
00:59:11,320 --> 00:59:15,360
में लिखा है मनुष्य चाहे चारों वेद पढ़ ले सारे पुराण

820
00:59:15,360 --> 00:59:19,520
पढ़ ले जप तप व्रत दान पुण्य कर्म तीर्थ दान यज्ञ

821
00:59:19,520 --> 00:59:23,640
सब कुछ व्यर्थ है अगर आपका गुरु नहीं है तो वो भी

822
00:59:23,640 --> 00:59:27,840
प्रमाणिक अब व्यक्ति से जब मैंने कहा भा आपका गुरु नहीं है

823
00:59:27,840 --> 00:59:32,280
वो कह रहा हम गुरु को नहीं मानते तो क्या कह रहा है हम स्कंद पुराण को नहीं मानते

824
00:59:32,280 --> 00:59:36,320
और क्या कह रहा है कि स्कंद पुराण को नहीं मानते तो अप्रत्यक्ष रूप से व यह

825
00:59:36,320 --> 00:59:40,920
कह रहा है कि मैं सत्यनारायण की कथा को भी नहीं मानता हूं

826
00:59:40,920 --> 00:59:45,000
यही है आज का 65 75 पर हिंदू

827
00:59:45,000 --> 00:59:49,000
सिद्धांत विहीन है लेकिन उसम सुनि वही

828
00:59:49,000 --> 00:59:53,320
तो मैं कह रहा हूं कि आप उसको छोड़ कर के अपने आप को होलियर देन दाव

829
00:59:53,320 --> 00:59:57,600
दिखा कर नहीं काम चला सकते आपको ऐसा मार्ग निकालना होगा

830
00:59:57,600 --> 01:00:02,160
उसको ले को छोड़ने की बात नहीं कर र क्या कह रहा

831
01:00:02,160 --> 01:00:06,160
आप मेरी बात सुनि ठीक आप इ दे बोल सुन रहा था सुनिए

832
01:00:06,160 --> 01:00:10,400
देखिए क्या होता है देखि आप ये कहे कि यार ये लड़का एलकेजी

833
01:00:10,400 --> 01:00:14,520
में पड़ता है इससे इसको हटाओ यहां से है ना एलकेजी वाले से हमारा क्या मतलब

834
01:00:14,520 --> 01:00:18,720
तो सिर्फ पीएचडी वालो से ही बात करेंगे और पीडी वाला ही मेरे मतलब का है नहीं नहीं नहीं

835
01:00:18,720 --> 01:00:22,920
हमको यह प्रयास करना है कि वो एल केजी वाला यूकेजी में जाए और

836
01:00:22,920 --> 01:00:27,000
पूरा दवी 12वी की कक्षा पार करके वो पीएचडी तक पहुंचे

837
01:00:27,000 --> 01:00:31,120
समझ रहे हैं आप आपको उसको छोड़ना नहीं है या फिर आपको

838
01:00:31,120 --> 01:00:35,240
उसको नीचा है नहीं दिखाना आप समझिए इस बात को आपको उसको अगर

839
01:00:35,240 --> 01:00:39,320
आप ज्ञानी है अगर आप कह रहे कि मैंने ठेका उठा रखा है भाई मैं

840
01:00:39,320 --> 01:00:43,400
ज्ञानी हूं तो फिर आपको उसका हाथ पकड़ के ऊपर खींचना पड़ेगा

841
01:00:43,400 --> 01:00:47,560
आप समझ रहे दूसरी बात मैं जब वो बात आपने कही

842
01:00:47,560 --> 01:00:51,760
थी कि राम विग्र वान धर्म कि भाई राम ने जो किया वही धर्म है

843
01:00:51,760 --> 01:00:56,240
तो फिर तो भीष्म पिता ज्यादा धर्म वाले हुए क नहीं हुए

844
01:00:56,240 --> 01:01:00,240
वचन बद्ध और अपने वचन पर अड़े रहे तो भीष्म कृष्ण ने तो

845
01:01:00,240 --> 01:01:04,240
बात बात पर वचन भी तोड़ दिए है ना बिल्कुल सही कह रहे हैं भगवान श्री

846
01:01:04,240 --> 01:01:08,440
कृष्ण स्वयं य कह रहे हैं भगवान श्री कृष्ण स्वयं ये कह रहे हैं बिल्कुल सही

847
01:01:08,440 --> 01:01:12,840
कह रहे हैं कृष्णो विग्रहवां धर्म शास्त्रों में नहीं है कहीं भी

848
01:01:12,840 --> 01:01:16,960
भगवान ने धर्म का प्रतिपादन कराया है सुन लीजिए कृष्ण को हम

849
01:01:16,960 --> 01:01:21,040
फॉलो नहीं कर सकते कृष्ण को ओबे करेंगे कृष्ण जो कह रहे हैं वो करेंगे

850
01:01:21,040 --> 01:01:25,200
अनुसरण और अनुकरण में अंतर है अनुसरण और अनुसरण

851
01:01:25,200 --> 01:01:29,360
करेंगे कृष्ण का मिट मैं पूरा कर लू मैं पूरा

852
01:01:29,360 --> 01:01:33,440
कर लू कृष्ण भगवान को हम अनुसरण कर सकते हो भगवान श्री राम को

853
01:01:33,440 --> 01:01:37,840
अनुकरण कर सकते हैं कृष्णों विग्रहवां धर्मा कहीं नहीं है शास्त्रों में

854
01:01:37,840 --> 01:01:41,920
शास्त्रों में है रामो विग्रहवां धर्मा अच्छा दूसरी बात भगवान श्री

855
01:01:41,920 --> 01:01:45,960
कृष्ण ने भगवत गीता में कहा कि भाई लोग हमेशा श्रेष्ठ को

856
01:01:45,960 --> 01:01:50,000
फॉलो करना चाहिए कहा ना श्रेष्ठ को उन्होंने कभी स्वयं को

857
01:01:50,000 --> 01:01:54,480
मर्यादा पुरुषोत्तम कहा या किसी और ने उनको मर्यादा पुरुषोत्तम कहा

858
01:01:54,480 --> 01:01:58,560
नहीं कहा राम को कहा तो जितनी भी चीजें राम के अंदर

859
01:01:58,560 --> 01:02:02,960
आएंगी सीमा में वो सारी चीजें हमारे लिए अनुकरणीय हो जाएंगी

860
01:02:02,960 --> 01:02:06,960
अगर वो कृष्ण है भीष्म है कोई भी है राम ने ख को मर्यादा पुतम थोड़ी कहा था

861
01:02:06,960 --> 01:02:11,720
वो तो लोगों ने उनको मर्यादा पुरुषोत्तम मैं वही कह रहा हूं किसी अनने

862
01:02:11,720 --> 01:02:15,920
कहा मुझे वही मैं वही कह रहा हूं किसी

863
01:02:15,920 --> 01:02:20,040
भी प्रमाणिक व्यक्ति ने उनको कृष्ण अ धार्मिक काम

864
01:02:20,040 --> 01:02:23,680
नहीं करेंगे आप समझिए इस बात को समझ रहे हैं जो धर्म विरुद्ध है वो भगवान

865
01:02:23,680 --> 01:02:28,520
नहीं कर सकते समझिए मैं ये कह रहा हूं र्

866
01:02:28,520 --> 01:02:32,720
सुन लीजिए आप इ देर बोल रहे थे थोड़ा मेरा भी सुनिए क करिए थोड़ा सा

867
01:02:32,720 --> 01:02:37,000
ठीक मैं क्या कह रहा हूं कि धर्म का जो बीज है जो मूल है जो

868
01:02:37,000 --> 01:02:41,720
कोर है ना वो चेंज नहीं होता समझ रहे हैं को भगवान

869
01:02:41,720 --> 01:02:45,840
चीज बोल ना गलत फहमी पहुच जाएगी मुझे कृष्ण का विरोधी मान लेंगे

870
01:02:45,840 --> 01:02:50,240
लोग एक चीज बोल लू भगवान श्री कृष्ण जो है वो लीला पुरुषोत्तम

871
01:02:50,240 --> 01:02:54,520
कहे गए हैं शास्त्रों में लीला पुरुषोत्तम लीला में सबसे

872
01:02:54,520 --> 01:02:58,520
लेवल पर कौन गया भगवान श्री कृष्ण मर्यादा में सबसे पीक

873
01:02:58,520 --> 01:03:03,200
लेवल पर कौन गया भगवान श्री राम तो मर्यादा की प्र

874
01:03:03,200 --> 01:03:07,720
भी कहा गया है भगवान श्री राम को मर्यादा पुरुषोत्तम

875
01:03:07,720 --> 01:03:11,880
माना गया मर्यादा पु जब भी बात आएगी मर्यादा की धर्म की तो

876
01:03:11,880 --> 01:03:16,120
वहां फॉलो किया जाएगा भगवान श्री राम को अनुसरण किया जाएगा भगवान

877
01:03:16,120 --> 01:03:20,200
श्री कृष्ण अनुसरण उनकी बात मानी जाएगी वो जो कह रहे हैं वो

878
01:03:20,200 --> 01:03:24,440
करिए मगर वो जो दिन में रात कर दे रहे हैं और दिन में रात कर

879
01:03:24,440 --> 01:03:28,480
के जो है वहां छल पूर्वक काल्या वन को मार रहे हैं बहुत 16000 शादियां कर रहे

880
01:03:28,480 --> 01:03:32,560
हैं लीलाएं कर रहे हैं वो सब हमारे लिए ग्राह नहीं है वो आध्यात्मिक वो

881
01:03:32,560 --> 01:03:36,560
आध्यात्मिक राल परने वा मेरे लिए है मैं बता रहा हूं आपको मेरे

882
01:03:36,560 --> 01:03:38,840
लिए है मेरे लिए बिल्कुल उनका

883
01:03:38,840 --> 01:03:42,920
अनुसरण और अनुकरण दोनों ही आवश्यक है खासकर आज के युग में

884
01:03:42,920 --> 01:03:46,920
तो इसका अर्थ वो आप ये कह रहे हैं कि भगवान श्री कृष्ण मर्यादा पुरुषोत्तम भी

885
01:03:46,920 --> 01:03:51,120
है मर्यादा पुरुषोत्तम भी है वो भी है धर्म के विरुद्ध

886
01:03:51,120 --> 01:03:55,360
अब ये जो मर्यादा पुरुषोत्तम वाली बात है आप रख लीजिएगा आप अब आप या

887
01:03:55,360 --> 01:03:59,360
तो यह कह रहे हैं कि धर्म के विरुद्ध कार्य किया आप

888
01:03:59,360 --> 01:04:03,360
तो ये कह रहे ना कि ईश्वर ने में धर्म के विरुद्ध कार्य करना शुरू कर दिया

889
01:04:03,360 --> 01:04:07,440
ता तक तो व धार्मिक था द्वापर में आ ईश्वर धम विरुद्ध हो गया

890
01:04:07,440 --> 01:04:12,080
ऐसा नहीं है अब आप सुन लीजिए ईश्वर धर्म विरुद्ध नहीं हुआ है देखिए

891
01:04:12,080 --> 01:04:16,560
देखिए गलत चीज चली जाएगी मुझे बता दे लोग देख रहे

892
01:04:16,560 --> 01:04:20,560
ईश्वर धर्म विरुद्ध नहीं हुआ है उसने धर्म का ही प्रतिपादन कराया उसने अपने

893
01:04:20,560 --> 01:04:24,760
जो गीता कही उसमें कहीं नहीं कहा कि ऐसे ऐसे करो ईश्वर

894
01:04:24,760 --> 01:04:28,840
ने स्वयं जो किया वो लीला पूर्वक बहुत सी ऐसी चीजें की है जिनके

895
01:04:28,840 --> 01:04:32,840
कोई आध्यात्मिक कुछ साइंटिफिक कुछ स्पिरिचुअल कारण है वो कारण समझने

896
01:04:32,840 --> 01:04:37,080
के लिए आपको की रासलीला इनके साइंटिफिक कारण है इनके साइंटिफिक अर्थ

897
01:04:37,080 --> 01:04:41,320
है मगर अगर हम श्री कृष्ण ने ये सब भगवत

898
01:04:41,320 --> 01:04:45,320
पुराण का हिस्सा है तो रासलीला में मैं तो उतना मानता भी नहीं हूं ठीक है चलिए वो

899
01:04:45,320 --> 01:04:49,800
जब आप उसका किसी गुरु के पास जाकर के अर्थ समझ लेंगे तो मानेंगे उसका

900
01:04:49,800 --> 01:04:53,920
अर्थ आपको आर स माजियो से प्राप्त है वही बात

901
01:04:53,920 --> 01:04:56,880
है

902
01:04:56,880 --> 01:05:01,800
ऐसे नहीं सुनिए उसका गलत प्रचार उस उसका सुन

903
01:05:01,800 --> 01:05:06,000
ली उसका गलत प्रचार प्रसार किया गया है

904
01:05:06,000 --> 01:05:10,200
एक आप य बुक खरीदिए एक आप य बुक खरीदिए

905
01:05:10,200 --> 01:05:14,360
एक आप बुक खरीदिए इसमें पुराणों को लेकर के जितने भी आक्षेप

906
01:05:14,360 --> 01:05:18,480
लगते हैं सुनिए पुराणों को लेकर के जितने भी आक्षेप लगते

907
01:05:18,480 --> 01:05:22,560
हैं इसमें सबका निदान है ब्रह्मा ने सरस्वती से विवाह क्यों किया इसका क्या अर्थ

908
01:05:22,560 --> 01:05:26,680
है शिव का मोहिनी तरफ आकर्षित हो जाने का क्या अर्थ है श्री

909
01:05:26,680 --> 01:05:30,800
कृष्ण की रासला का क्या अर्थ है सबका है जी बताइए अब

910
01:05:30,800 --> 01:05:35,080
वो उसको खोलेंगे ना तो पेंडोरा बॉक्स खुल जाएगा वो बहुत बड़ा पेंडोरा बॉक्स है ठीक है

911
01:05:35,080 --> 01:05:39,360
और उसम फिर आप आप भी नहीं आंसर दे पाएंगे बहुत सारे

912
01:05:39,360 --> 01:05:43,560
तो वो छोड़ दीजिए उसको दूसरी बात यह है कि देखिए

913
01:05:43,560 --> 01:05:47,760
कृष्ण कभी ईश्वर कभी मर्यादा के विरुद्ध और धर्म के विरुद्ध

914
01:05:47,760 --> 01:05:51,760
काम नहीं करता मैं बस ये कह रहा हूं और मैं थोड़ा कंक्लूजन वाले मोड में

915
01:05:51,760 --> 01:05:57,760
जा रहा हूं क्योंकि मेरे को नीचे काम दिया है ना मैं

916
01:05:59,960 --> 01:06:04,120
कंक्लूजन का जो प्रवाह है वो नदी

917
01:06:04,120 --> 01:06:08,240
की तरह होता है समझ रहे हैं वो मोड़ लेता है वो

918
01:06:08,240 --> 01:06:12,320
घूमता है फिरता वो वो ऐसे तालाब की तरह नहीं होता बस यही

919
01:06:12,320 --> 01:06:16,400
है तालाब में इतना पानी है वो अगर तालाब की तरह होगा तो उसम दुर्गंध आ जाएगा वो

920
01:06:16,400 --> 01:06:20,760
फिर वो वो खराब हो जाएगा आप समझ रहे हैं वो नदी के प्रवाह होता

921
01:06:20,760 --> 01:06:24,920
सिधांत ऐसे दीजिए सुन लीजिए पूरा सुन मेरी बात को पूरा

922
01:06:24,920 --> 01:06:28,960
सुनि जैसे जब द्वापर में मर्यादा को बचाए रखना है ना

923
01:06:28,960 --> 01:06:33,400
पिता ने जो कह दिया वही धर्म था अगर आप राम विवान

924
01:06:33,400 --> 01:06:37,480
धर्म एकदम अडिग रहेंगे तो आपको ऐसा लगेगा कि भीष्म

925
01:06:37,480 --> 01:06:41,520
पितामह से बड़ा धर्म परायण कोई था ही नहीं पिता

926
01:06:41,520 --> 01:06:45,600
अधर्मी निकल गए आप समझिए इस बात को उनसे बड़ा पित भक्त

927
01:06:45,600 --> 01:06:50,400
कोई था उनसे बड़ा वचन बद्ध कोई था पूरे महाभारत में कोई नहीं था

928
01:06:50,400 --> 01:06:54,440
पूछ रहे शत रभ मैं

929
01:06:54,440 --> 01:06:58,680
कं क्लूड कर लू उसके बाद तो मैं ये कहता हूं द्वापर में क्या हुआ

930
01:06:58,680 --> 01:07:03,000
द्वापर में धर्म का प्रवाह बदल गया धर्म का प्रवाह बदल जाता है कोर

931
01:07:03,000 --> 01:07:07,160
सेम रहेगा आप समझिए धर्म के जो बेसिक सनातन सिद्धांत

932
01:07:07,160 --> 01:07:11,600
है वो वैसे के वैसे ही रहेंगे लेकिन धर्म की क्या प्रवाह बदल जाता है

933
01:07:11,600 --> 01:07:15,240
है ना आज की स्थिति यह हो चुकी है कि मतलब अगर

934
01:07:15,240 --> 01:07:19,240
सही में ईश्वर और यह हर युग में हुआ है य हर युग में हुआ या आने वाले युग

935
01:07:19,240 --> 01:07:23,440
में भी होगा ज्ञान का अपने मठाधीश होने का ो

936
01:07:23,440 --> 01:07:27,560
इतना ज्यादा हो गया लोगों को अपने ज्ञान का ग इतना ज्यादा हो गया ईश्वर खुद

937
01:07:27,560 --> 01:07:31,560
अवतार लेकर आ जाए ना और कह दे य कृष्ण के साथ भी था य राम के साथ भी

938
01:07:31,560 --> 01:07:35,760
हुआ था और आज भी होगा लिखित कह देता हूं अगर ईश्वर लेके

939
01:07:35,760 --> 01:07:39,520
आ

940
01:07:39,520 --> 01:07:43,680
जाए इस मैं आपको कहता हूं मैं ऐसा मैं ऐसा

941
01:07:43,680 --> 01:07:47,720
एक खुद वीडियो बनाने वाला था जिसम मैं कहना चाहता हूं कि अच्छा

942
01:07:47,720 --> 01:07:51,760
हुआ आज भगवान रामचंद्र स्वयं आक आपसे नहीं बोल रहे

943
01:07:51,760 --> 01:07:55,760
कि भैया ये कार्यक्रम ऐसा ऐसा मत करो अशा स्त्री है या मैं

944
01:07:55,760 --> 01:07:59,840
इसम नहीं आऊंगा वरना आप लोग राम को भी क्रिसा करने लगते

945
01:07:59,840 --> 01:08:04,280
तुम गलत हो प्राण प्रतिष्ठा में नहीं आ रहे हो होता है

946
01:08:04,280 --> 01:08:08,360
अच्छा है अगर राम आ कर के क देते मैं तो आ गया हूं तो भी

947
01:08:08,360 --> 01:08:12,360
आप भीय कह देते नहीं नहीं तुम रा ड़ रे कहने से क्या होता

948
01:08:12,360 --> 01:08:16,360
हम ज्यादा जानते हम शास्त्र को जानते नहीं

949
01:08:16,360 --> 01:08:20,720
इस आपको बता सकता आप ये बताइए क्या आप ये बताइए पहली

950
01:08:20,720 --> 01:08:24,720
बात चलिए ो की बात छोड़ देते अब एक बात पूछ

951
01:08:24,720 --> 01:08:28,800
आप यह बताइए क्या भगवान सब कुछ कर सकता है या नहीं

952
01:08:28,800 --> 01:08:30,640
बिल्कुल कर सकता है

953
01:08:30,640 --> 01:08:34,720
झूठ बोल सकता है कि नहीं बिल्कुल बोल सकता है

954
01:08:34,720 --> 01:08:38,800
अधर्म कर सकता है कि नहीं करने करने

955
01:08:38,800 --> 01:08:43,440
का उसका वो रखता है लेकिन व कभी अपने बनाए नियम को तोड़ता नहीं

956
01:08:43,440 --> 01:08:49,160
वो कुछ भी भगवान विष्णु के अवतार को मानते हैं कि

957
01:08:49,160 --> 01:08:55,160
नहीं बुद्ध भगवान ने कहा वेदों को मत मानो

958
01:08:55,240 --> 01:08:59,240
नहीं नहीं नहीं पहली बात तो ये बुद्ध वो बुद्ध भी नहीं है जिन बुद्ध अवतार की बात

959
01:08:59,240 --> 01:09:03,600
होती है बौद्ध अवतार य जिस बुद्ध अवतार की बात मैं कर रहा हूं जो हमारे शास्त्रों

960
01:09:03,600 --> 01:09:08,000
में वर्णित है जो आप मान रहे हैं उसी बुद्ध का यही रोल ही था कि उन्होंने वेदों से अनाधिकृत

961
01:09:08,000 --> 01:09:12,080
लोगों को यज्ञों से अनाधिकृत लोगों को दूर करने के लिए

962
01:09:12,080 --> 01:09:16,120
उनको यह कहा कि वेदों में कुछ नहीं रखा है दूर हो जाओ हो

963
01:09:16,120 --> 01:09:20,400
सके उस समय के हिसाब से धर्म का अगर हम बुद्ध को मान ले वहां पर अगर हम बुद्ध

964
01:09:20,400 --> 01:09:25,680
को वहां पर मान ले अगर हम बुद्ध को वहां पर मान ले तो हम र

965
01:09:25,680 --> 01:09:29,760
जाएंगे इसका अर्थ य है इसका अर्थ यह है मैं कहना

966
01:09:29,760 --> 01:09:34,520
ये चाह रहा हूं कि जो धर्म है जो वेदा शास्त्र है वो मार्ग है

967
01:09:34,520 --> 01:09:40,520
और जो लक्ष्य हैरी परिभाषा की धर्म की तर

968
01:09:42,560 --> 01:09:46,840
कर व उस सम शायद धर्म यही था इसलिए ईश्वर ने आ कहा अभी

969
01:09:46,840 --> 01:09:50,920
वेद को रहने दो आप समझ रहे हम उनका अनुक कर

970
01:09:50,920 --> 01:09:54,960
रहे क्या अनुकरण कर रहे हैं क्या जब

971
01:09:54,960 --> 01:09:59,080
उन्होंने ऐसा कहा तो जो जिन जो लोग उनके फॉलोअर हुए आप

972
01:09:59,080 --> 01:10:03,480
समझ नहीं रहे आप सुनना नहीं चाह रहे मैं ये कह रहा हूं आप आप सास

973
01:10:03,480 --> 01:10:07,600
में फसे रह जाएंगे धर्म फिर प्रभाव बदलेगा धर्म फिर मोड़ देगा

974
01:10:07,600 --> 01:10:11,640
आपकी बात मैंने आपको बताई कि आज का हिंदू जो 65 पर

975
01:10:11,640 --> 01:10:15,680
है वो ऐसा क्यों है क्योंकि वो अपने संशय को मिटा नहीं रहा

976
01:10:15,680 --> 01:10:19,720
है रासलीला के बारे में क्या है 10 अवतार के बारे में क्या वो नहीं मिटा रहा है

977
01:10:19,720 --> 01:10:24,320
वो वैसे ही जीना चाहता है मैं आपके साथ हूं उस मैं आपके साथ हूं

978
01:10:24,320 --> 01:10:28,400
तो बात यही है कि अगर आपके मन में अपनी चीजों को लेकर

979
01:10:28,400 --> 01:10:33,040
के देखिए परंपरा प्राप्त शास्त्र ही हमारा धर्म है प्रमाण है हमारा

980
01:10:33,040 --> 01:10:37,080
अगर उनको लेकर के कहीं पर भी आपका डिसएग्रीमेंट आ रहा है तो

981
01:10:37,080 --> 01:10:41,080
आपका कर्तव्य वहां पर यह बनता है आप स्वयं जाए भाई कुआ तो

982
01:10:41,080 --> 01:10:45,200
प्यासे के पास आएगा नहीं सुनिए जो हमारे शंकराचार्य है जिनकी

983
01:10:45,200 --> 01:10:49,960
मैं बात कर रहा हूं सुनिए शरार

984
01:10:49,960 --> 01:10:54,600
नहीं पढ़े थे क्या द्रोणाचार्य परंपरा प्राप्त शास्त्र से नहीं पढ़े थे हम

985
01:10:54,600 --> 01:10:57,680
जदा ठीक ठीक है इसका जब प्रश्न

986
01:10:57,680 --> 01:11:03,440
पूछ लीजिए प्रश्न पूछ लीजिए बात

987
01:11:03,440 --> 01:11:08,920
करने

988
01:11:08,920 --> 01:11:13,120
केय नहीं क रहा आपने कुछ प्रश्न पूछा

989
01:11:13,120 --> 01:11:17,120
पूछ इस काउंटर करू ठीक है आपने द्रोणाचार्य रावण य

990
01:11:17,120 --> 01:11:21,120
सब क्या परंपरा प्राप्त शास्त्र से नहीं पढ़े थे क्या पहली बात

991
01:11:21,120 --> 01:11:25,160
तो य हैय तो व अच्छे लोग है कर रहे तो कह रहे कि मैं गलत कर

992
01:11:25,160 --> 01:11:29,360
रहा हूं यह वो अच्छे लोग है आज का आदमी तो गलत

993
01:11:29,360 --> 01:11:34,360
कर रहा है तो स्वीकार भी नहीं कर रहा कि मैं गलत कर रहा हूर

994
01:11:34,360 --> 01:11:39,520
सुनिए

995
01:11:39,520 --> 01:11:44,000
तो पूरी लाइन बोल दीजिए की जब द्रोणाचार्य

996
01:11:44,000 --> 01:11:48,320
कौरव शास्त्रों के विरुद्ध आचरण करते हैं तो कहते हैं ताल ठोकते

997
01:11:48,320 --> 01:11:52,800
हैं मैं अधर्म कर रहा हूं आओ तो बचा लो वो खुद प्रमाणित कर रहे

998
01:11:52,800 --> 01:11:56,960
यानी वय नहीं कह रहे कि मैं जो कर रहा हूं वो धर्म है गौरव ये नहीं कह रहे

999
01:11:56,960 --> 01:12:01,040
कि मैं जो कर रहा हूं वो धर्म है मगर मैं कर रहा हूं यानी कि वो खुद वेरीफाई

1000
01:12:01,040 --> 01:12:05,160
कर रहे हैं कि परंपरा प्राप्त जो चीजें है वो अलग है मैं अलग

1001
01:12:05,160 --> 01:12:09,360
कर रहा हूं मैं अलग जा रहा हूं

1002
01:12:09,360 --> 01:12:13,440
तो वो तो वप खुद ही बता रहे हैं ना ये चीज

1003
01:12:13,440 --> 01:12:17,600
नहीं नहीं ऐसा कौरव ने तो कभी एक्सेप्ट नहीं किया हा द्रोण और भीष्म जरूर एक्सेप्ट

1004
01:12:17,600 --> 01:12:22,480
करते हैं कौ दुर्योधन तो अपने ही मध्य में रहता है ना तो कृष्ण कोही बांध के चल देता

1005
01:12:22,480 --> 01:12:28,480
हैका जहा पर कौरवों की पार्टी के किसी भी व्यक्ति

1006
01:12:28,720 --> 01:12:32,880
ने किसी भी व्यक्ति ने कौरवों की तरफ के किसी

1007
01:12:32,880 --> 01:12:37,000
भी व्यक्ति ने यह स्वीकार अवश्य किया है कहीं पर ऐसा संदर्भ है जब उसने

1008
01:12:37,000 --> 01:12:41,000
ताल टोकी भाई मैं अधर्म कर रहा हूं तुम में दम है तो आके बचा लो इसका मतलब

1009
01:12:41,000 --> 01:12:45,120
जब उन्होंने धर्म के विरुद्ध गए उन्होने मान लिया तो आप

1010
01:12:45,120 --> 01:12:49,160
इनका उदाहरण कैसे दे रहे हैं कि भाई द्रोणाचार्य ने परंपरा प्राप्त पढ़ाई नहीं की थी ये तो वो

1011
01:12:49,160 --> 01:12:53,880
लोग है जो धर्म के विरुद्ध जब गए तो उन्होने माना कि हम धर्म विरुद्ध चले गए

1012
01:12:53,880 --> 01:12:54,520
वही वही

1013
01:12:54,520 --> 01:12:59,160
तो मैं कह रहा हूं ना कि वो परंपरा के साथ

1014
01:12:59,160 --> 01:13:03,240
दूसरी बात य है कि मैंने आपको केवल परंपरा नहीं कहा दूसरी बात य

1015
01:13:03,240 --> 01:13:07,400
मैंने आपको केवल परंपरा नहीं कहा मैंने कहा ब्रह्मचारी सन्यासी लक्षण

1016
01:13:07,400 --> 01:13:11,440
से वो क्या हो ब्रह्मचारी सन्यासी अंतिम दूसरा परंपरा प्राप्त हो

1017
01:13:11,440 --> 01:13:15,440
तीसरा सभी सुति शास्त्रों में सामंजस की शिक्षा दे चौथा आपका

1018
01:13:15,440 --> 01:13:19,520
संशय दूर कर दे मैंने आपको केवल परंपरा नहीं कहा केवल

1019
01:13:19,520 --> 01:13:23,800
परंपरा वाले हैं जो धूर्त भी है धूर्त भी है पर

1020
01:13:23,800 --> 01:13:28,560
से परंपरा से है मगर वो अपनी आमदनी के लिए कुछ दूसरी चीज कर रहे हैं

1021
01:13:28,560 --> 01:13:33,200
एक बहुत सुंदर वो है ये पुराणों की ही

1022
01:13:33,200 --> 01:13:38,080
किस पुराण में पता नारद जी जाते हैं विष्णु जी के पास और पूछते हैं कि भाई

1023
01:13:38,080 --> 01:13:42,720
आपका सबसे प्रिय भक्त कौन है नारा जी को ल गह

1024
01:13:42,720 --> 01:13:46,760
गृहस्थ गृहस्थ का नाम लेते किसान का जो कि सुबह एक बार राम बोलता है और

1025
01:13:46,760 --> 01:13:50,800
शाम को एक बार राम बोलता है बस दो बार राम बोलता है तो नारद जी कहते या हद हो

1026
01:13:50,800 --> 01:13:54,880
ग मतलब ये दो बार राम राम नाम दिया और आप प्र भक्त हो गया और मैं दिन

1027
01:13:54,880 --> 01:13:59,760
भर नारायण नारायण करता हूं मैं आपका प्र भक्त ही नहीं

1028
01:13:59,760 --> 01:14:03,760
ऐसा नहीं है ही तो मैं कह रहा हूं भगवान को प्रिय कोई भी हो

1029
01:14:03,760 --> 01:14:08,000
सकता है वो नहीं कह रहा भगवान ने क्या कहा शिक्षा किससे लो

1030
01:14:08,000 --> 01:14:09,840
सुनिए भगवान ने क्या कहा शिक्षा

1031
01:14:09,840 --> 01:14:13,880
किससे लो देखिए पहली बात तो य अथर्ववेद 11

1032
01:14:13,880 --> 01:14:17,880
16 में मेंशन है ब्रह्मचारी ही आचार्य बनेगा

1033
01:14:17,880 --> 01:14:22,080
अच्छा भगवान ने भगवत गीता में कहा 4 34 में

1034
01:14:22,080 --> 01:14:26,360
कि तत्वदर्शी गुरु से जाकर के शिक्षा लो तत्वदर्शी की व्याख्या

1035
01:14:26,360 --> 01:14:30,360
अगर आगे हम पढ़ेंगे तो एक व्याख्या आती है जिसका मान

1036
01:14:30,360 --> 01:14:34,480
मोह नष्ट हो चुका हो जिसकी काम इंद्रिया वगैरह सब वो

1037
01:14:34,480 --> 01:14:38,680
हो चुकी मतलब वो उन पर ध्यान ना देता हो कंट्रोल्ड हो यह सारे लक्षण

1038
01:14:38,680 --> 01:14:42,720
होते हैं सन्यासी के लक्षण से सन्यासी विद्या से

1039
01:14:42,720 --> 01:14:47,040
परंपरा और न्याय से सभी शति स्मृति शास्त्र

1040
01:14:47,040 --> 01:14:51,120
और फल स्वरूप आपका संशय मिटाने वाला होता है गुरु

1041
01:14:51,120 --> 01:14:55,320
गुरु की व्याख्या है कि अवतार का उपनिषद में गुरु की व्याख्या

1042
01:14:55,320 --> 01:14:59,400
है गु का मतलब अंधकार रू का मतलब अंधकार से निकालने

1043
01:14:59,400 --> 01:15:03,400
वाला तो गुरु का तो अर्थ ही वही है जो आपके प्रश्न का उत्तर

1044
01:15:03,400 --> 01:15:07,480
दे क्योंकि क्योंकि अज्ञानता क्या है अंधकार तो गुरु का अर्थ

1045
01:15:07,480 --> 01:15:11,520
क्या हुआ जो आपके प्रश्न का उत्तर दे भाई आपका अंधकार मिटाए कि

1046
01:15:11,520 --> 01:15:17,520
गुरुदेव मेरी रास लीला को लेके जातिवाद को लेकर येय समस्याए

1047
01:15:17,560 --> 01:15:22,040
है जति गम कर दे हा तो

1048
01:15:22,040 --> 01:15:24,920
हम ऐसे गुरु के आपको कभी नहीं बोलते किसी को

1049
01:15:24,920 --> 01:15:29,000
नहीं बोल रहे हैं जो तमसो मा ज्योतिर गमाया ना करे मगर

1050
01:15:29,000 --> 01:15:33,480
बात ये है कि व्यक्ति उस स्टेज तक आने से पहले ही निर्णय ले रहा है किय तमस

1051
01:15:33,480 --> 01:15:37,640
वाला नहीं अहंकारी है क्योंकि ऐसा प्रचार व्यवस्था है नहीं

1052
01:15:37,640 --> 01:15:42,120
देखिए इसलिए तो मैं कह रहा हूं एक ऐसा इशन

1053
01:15:42,120 --> 01:15:46,200
एक ऐसा वो ब अच्छा एक चीज रह गई आप जो अ अच्छा आपने याद दिला

1054
01:15:46,200 --> 01:15:50,320
दिया एक चीज मैं बता दूं आपने कहा था कि जब स्थिति खराब होती

1055
01:15:50,320 --> 01:15:56,320
है तो उसको नीचे से आपको हाथ पकड़ के खींचना है ठीक है

1056
01:16:14,570 --> 01:16:17,200
[संगीत]

1057
01:16:17,200 --> 01:16:21,360
चाहा पहली बात य है

1058
01:16:21,360 --> 01:16:25,600
की जब हम के मंदिर में गए अगर आपने हमारा वीडियो देखा

1059
01:16:25,600 --> 01:16:29,640
हो या हम किसी के भी पास जा रहे हैं जो भटका हुआ हमें लग रहा है कि

1060
01:16:29,640 --> 01:16:33,640
यहां शोधन हो सकता है तो हम वहां पर कैसा व्यवहार कर रहे हैं कि

1061
01:16:33,640 --> 01:16:37,720
हम तुमसे विरक्त है हम तुमसे अलग है तुम तिरस्कृत हो तुम अधिकृत नहीं ऐसा

1062
01:16:37,720 --> 01:16:40,280
व्यवहार आपने देखा आपने हमारे अन्य वीडियो देखे

1063
01:16:40,280 --> 01:16:44,640
क्या हम आर समाज के मंदिर में गए थे बाकायदा उनसे

1064
01:16:44,640 --> 01:16:48,840
आधे घंटे तक बातचीत हुई लगभग पन घंटे तक और सभी

1065
01:16:48,840 --> 01:16:52,920
विषयों पर बातचीत हुई थी मगर माइक खराब था तो केवल परंपरा पर बात हुई

1066
01:16:52,920 --> 01:16:57,000
थी जो बात है वो रिकॉर्ड हो पाई उसके बाद वो जो सज्जन थे

1067
01:16:57,000 --> 01:17:01,520
उन्होंने हम चाय भी पूछी वो हमारे पास समय का अभाव था तो हमने चाय नहीं पी पाए

1068
01:17:01,520 --> 01:17:05,680
वहां पर एक विवाह हो रहा था हमने उन्ह

1069
01:17:05,680 --> 01:17:09,680
कहा अलग हटा दिया अलग हमने कब हटाया अलग किसको हटाया

1070
01:17:09,680 --> 01:17:13,840
जो व्यक्ति शनी वक्ति है लेकिन उ

1071
01:17:13,840 --> 01:17:19,840
लोगों की बात कर रहा हू हम किसी को भी अलग उठ नहीं रहे हम

1072
01:17:22,000 --> 01:17:26,280
तोही

1073
01:17:26,280 --> 01:17:30,480
जो मैं उनकी बात कर रहा हूं उनको भी नहीं छोड़ना उन्ह भी खीच केर

1074
01:17:30,480 --> 01:17:34,720
ले आना समझ रहे ड़ना किसी को नहीं मैं जो आपने हाथ पकड़

1075
01:17:34,720 --> 01:17:38,880
के खींचने की बात कही उसी को करने का हम लोग प्रयास कर रहे

1076
01:17:38,880 --> 01:17:43,040
गुरुदेव की कृपा से राम जी की कृपा से कि भाई हम लड़ने नहीं जाते हैं

1077
01:17:43,040 --> 01:17:47,120
हम तो यह पूछते हैं क्या जिस विचारधारा को आपने स्वीकार किया

1078
01:17:47,120 --> 01:17:51,160
है उस विचारधारा के अनुसार प्रतिपादित होने वाला जो ईश्वर

1079
01:17:51,160 --> 01:17:55,240
है क्या वो सर्वशक्तिमान है और मैं तो यह आज भी कहता

1080
01:17:55,240 --> 01:17:59,480
हूं और बहुत टाइम से कह रहा हूं जो भी विचारधारा ऐसी है

1081
01:17:59,480 --> 01:18:03,520
जो हमें सर्वशक्तिमान ईश्वर परम स्वतंत्र मोक्ष

1082
01:18:03,520 --> 01:18:08,080
और शाश्वत सनातन धर्म देगी मैं उसी विचारधारा का व्यक्ति हूं

1083
01:18:08,080 --> 01:18:12,440
मैं किसी एक विशेष विचारधारा का व्यक्ति नहीं हूं मगर कैच ये है

1084
01:18:12,440 --> 01:18:16,800
कि जब हम इस पर आ जाएंगे कि नहीं भगवान को सर्वशक्तिमान सिद्ध करना है कैच

1085
01:18:16,800 --> 01:18:20,960
ये है जब हम इस पर आ जाएंगे नहीं मनुष्य को जो मोक्ष है वो परम स्वतंत्र देना है जब

1086
01:18:20,960 --> 01:18:25,440
हम इस पर आ जाएंगे नहीं मनुष्य को जो धर्म देना शाश्वत देना है तो हम आदि शंकराचार्य

1087
01:18:25,440 --> 01:18:29,760
जी की बात कर रहे होंगे उस दिन ये कैच है मगर

1088
01:18:29,760 --> 01:18:33,760
अगर इसको हटा भी दे अगर इसको हटा भी दे अगर हम

1089
01:18:33,760 --> 01:18:37,040
इसको हटा भी दे आदि शंकराचार्य

1090
01:18:37,040 --> 01:18:41,040
नेदार में शिव देखा था अगर

1091
01:18:41,040 --> 01:18:45,160
अगर हम इसको एक मिनट एक मिनट अगर हम इसको हटा भी

1092
01:18:45,160 --> 01:18:49,200
दे तो हम इतनी सी बात कर रहे लोगों से जाके भाई

1093
01:18:49,200 --> 01:18:53,200
हम लोगों को जो एक कर सकती है वो तीन चीज हैं व्यवहार में

1094
01:18:53,200 --> 01:18:57,200
सनातन धर्म उसका साधन क्या है सर्वशक्तिमान ईश्वर और

1095
01:18:57,200 --> 01:19:01,640
उसका परिणाम क्या है परम स्वतंत्र मोक्ष इन तीन चीजों की आप बात करो

1096
01:19:01,640 --> 01:19:05,840
बस हम तो यही जाके पूछते आ समायो से भी पूछते स्न वालो से भी पूछते

1097
01:19:05,840 --> 01:19:10,240
कबीर पंथ से भी पूछते हैं जिसको थोड़ा बहुत समझ में आएगा वापस आ जाएगा भाई

1098
01:19:10,240 --> 01:19:14,440
हम लोग एक जगह पर आ जाएंगे अगर ईश्वर हमारी

1099
01:19:14,440 --> 01:19:18,600
जिम्मेदारी बन गई है आप समझ लीजिए तो दूसरी बात

1100
01:19:18,600 --> 01:19:23,280
जो आपने बात बोली थी उसका हाथ पकड़ के खचो

1101
01:19:23,280 --> 01:19:27,720
जहां पर की है ना डेमोग्राफिक चेंज हो रहा है आप यह समझिए

1102
01:19:27,720 --> 01:19:31,720
ये आगे पया बहुत कठिन पैदा होने वाली है खासकर

1103
01:19:31,720 --> 01:19:36,280
य छोटे छोटे यूपी के शहर बिहार के शहर हरियाणा के शहर जहां

1104
01:19:36,280 --> 01:19:41,280
पर मैं तो आप य

1105
01:19:41,280 --> 01:19:45,800
मा रहे तो किस तरीके से आे हम उस भी विचार करना है आप समझ रहे

1106
01:19:45,800 --> 01:19:50,120
अब दूसरी बात ये आती है कि ऐसा नहीं है कि जो हमारे

1107
01:19:50,120 --> 01:19:54,320
आचार्य गण है भले ही व निर् काचार्य जी शंकराचार्य जी हो मधवा

1108
01:19:54,320 --> 01:19:58,400
चार जी की परंपरा से हो जो हमारे आचार्य गण है ऐसा नहीं है कि वो व्यवहारिकता पर

1109
01:19:58,400 --> 01:20:02,560
ध्यान नहीं देते हैं देते हैं जैसे अभी वो करपात्री

1110
01:20:02,560 --> 01:20:06,960
जी ने वहां पर नया विश्वनाथ मंदिर बना आपको शायद मालूम हो नया विश्वनाथ

1111
01:20:06,960 --> 01:20:11,040
मंदिर कैसे बना क्यों बना वो सारी चीजें आपको संभवत मालूम हो तो

1112
01:20:11,040 --> 01:20:15,040
ऐसा नहीं ध्यान नहीं देते मगर बात जब ये आ जाएगी कि किसी को नीचे

1113
01:20:15,040 --> 01:20:19,400
से निकालना है हाथ पकड़ के खींचना है उस समय भी हमारे

1114
01:20:19,400 --> 01:20:23,440
कुछ मर्यादा तो ऐसी होनी चाहिए कि जो ना टूटे

1115
01:20:23,440 --> 01:20:27,560
या बिल्कुल ही हम स्वछंद छोड़ दे मर्यादाओं को तब

1116
01:20:27,560 --> 01:20:31,840
भी कुछ ना कुछ पैरामीटर तो होंगे ना सुनिए

1117
01:20:31,840 --> 01:20:36,080
तो सुनिए मैं जो कहना चाह रहा हूं तब भी कुछ ना कुछ मर्यादा

1118
01:20:36,080 --> 01:20:40,120
है तो अब बात अब बात ये आएगी कि जब किसी को नीचे

1119
01:20:40,120 --> 01:20:44,480
से ऊपर खींचना है तो एक तो हम किसी को तकत कर ही नहीं रहे मुसलमान बिटिया

1120
01:20:44,480 --> 01:20:48,560
भी आकर के वहां पर प्रश्न कर रही है शंकराचार्य जी के पास इवन मैं खुद

1121
01:20:48,560 --> 01:20:52,960
ऐसी डिबेट में गया हूं जहा मुफ्ती लोग बैठे हैं वहा उनसे मैंने बातें की मैंने

1122
01:20:52,960 --> 01:20:56,280
ईश्वर सर्वशक्तिमान कैसे है आपका बताइए आपके द्वारा प्रतिपादित होने

1123
01:20:56,280 --> 01:21:00,280
वाला ईश्वर कैसे सर्वशक्तिमान है आपकी जो बुक है उसके अनुसार निकलने

1124
01:21:00,280 --> 01:21:04,320
वाला जो धर्म है वो कैसे शाश्वत है आप सिद्ध करिए चलिए हम आपके

1125
01:21:04,320 --> 01:21:08,360
हो जाएंगे आप कहेंगे मैं अपना नाम मुसलमान कर लूंगा सर्वशक्तिमान ईश्वर तो

1126
01:21:08,360 --> 01:21:12,880
दो सर्वशक्तिमान ईश्वर तो दे दो मैं अ समाजी बन जाऊंगा ईश्वर सर्वशक्तिमान

1127
01:21:12,880 --> 01:21:18,000
तो दो आप मैं मैं जो आप मुझे परम स्वतंत्र वो तो

1128
01:21:18,000 --> 01:21:22,120
दो आपको मैंने वहा पर केवल उदाहरण के लिए आपको अगर

1129
01:21:22,120 --> 01:21:26,320
इससे खु मि तो मैं अपने आप को आ समाजी कहने लगूंगा मुझे

1130
01:21:26,320 --> 01:21:30,920
तीन चीज दे दो कभी ना बदलने वाला धर्म परम स्वतंत्र मोक्ष ईश्वर सर्वशक्तिमान

1131
01:21:30,920 --> 01:21:36,920
तीन

1132
01:21:51,640 --> 01:21:57,640
चीज क्या शश भाई टेकल ग्लिच आ गया

1133
01:21:57,690 --> 01:22:00,240
[संगीत]

1134
01:22:00,240 --> 01:22:04,480
क्या जब हम जो दो बातें थी ना किसी को हाथ

1135
01:22:04,480 --> 01:22:08,360
[संगीत]

1136
01:22:08,360 --> 01:22:12,400
पकड़ करही नहीं रहे वो रहा है हम त्रित कर रहे दूसरी बात

1137
01:22:12,400 --> 01:22:16,560
ये है कि अगर नीचे से खींचना भी है तो कितना हम नियमों

1138
01:22:16,560 --> 01:22:21,200
को कॉम्प्रोमाइज करें कितना ना करें इसका निर्णय करता कौन होगा नहीं

1139
01:22:21,200 --> 01:22:25,880
नियम को कंप्रोमाइज हम नहीं करेंगे अरे हम क्यों करेंगे निम को कंप्रोमाइज नहीं नहीं अब जैसे

1140
01:22:25,880 --> 01:22:29,920
मैं आपको एक एग्जांपल देता हूं अपना रियल लाइफ एपल देता हूं मेरा एक फ्रेंड होता था है ना कॉलेज के

1141
01:22:29,920 --> 01:22:33,920
टाइम में अनुज है ना तो वो उस समय मानसा हार करता

1142
01:22:33,920 --> 01:22:38,240
था खूब मतलब जो है उसका मीट मानस चलता था खूब

1143
01:22:38,240 --> 01:22:42,360
दबा के पता था अच्छा मैंने कभी नहीं किया मैं अंडा तक नहीं खाता मेरे पिताजी

1144
01:22:42,360 --> 01:22:46,480
लहसुन प्याज भी नहीं खाते वो जो

1145
01:22:46,480 --> 01:22:50,520
है अब अगर मेरे को ये पता था अगर मैं इसको रोज बोलूंगा ना कि अबे मत

1146
01:22:50,520 --> 01:22:55,080
किया कर मत किया कर मत किया कर तो उसका ो हर्ट होगा और वो कभी नहीं छोड़ेगा

1147
01:22:55,080 --> 01:22:59,080
मानसा तो और आपको ऐसा रास्ता अपनाना

1148
01:22:59,080 --> 01:23:03,720
होगा कि उसको सेल्फ रिलाइजेशन हो जाए एक पॉइंट टाइम के बाद नहीं भाई

1149
01:23:03,720 --> 01:23:09,720
यज सही नहीं है आप समझ क्या कह

1150
01:23:09,920 --> 01:23:15,640
रहा

1151
01:23:15,640 --> 01:23:20,240
ों मार्ग अपनाना होगा जिसे के पॉट पर पहुच

1152
01:23:20,240 --> 01:23:25,950
करय जो मार्ग है मैं अब आपसे एक उदाहरण पूछ रहा हूं

1153
01:23:25,950 --> 01:23:30,120
[संगीत] कि उसको ज्ञान है

1154
01:23:30,120 --> 01:23:34,320
उसके हिसाब से उसने यह सोच कि मैं एक ऐसा मार्ग अपना रहा

1155
01:23:34,320 --> 01:23:38,680
हूं जो कि थोड़ा सा म्यूचुअल टाइप का है वहा से निकालने

1156
01:23:38,680 --> 01:23:43,680
के लिए व्यक्ति को गलत

1157
01:23:43,680 --> 01:23:47,680
अपनाया मर उससे सहमत नहीं हो रहे हैं तो ऐसे में

1158
01:23:47,680 --> 01:23:52,480
क्या करेंगे क्या उस राजा को नकार देंगे कि तुम गलत कर रहे हो

1159
01:23:52,480 --> 01:23:57,520
राजा को क्यों र वो देखि

1160
01:23:57,520 --> 01:24:03,310
उे आप जैसे वो वाला एमल दे रहे

1161
01:24:03,310 --> 01:24:07,520
[संगीत] थेप इंटरनेट का इशू आ रहा

1162
01:24:07,520 --> 01:24:11,800
बहुत ज्यादा लग रहा है गुरुदेव

1163
01:24:11,800 --> 01:24:16,620
या ऐसा प्रयास नहीं करते हैं कि लोग जो फस गए भटक

1164
01:24:16,620 --> 01:24:21,360
[संगीत]

1165
01:24:21,360 --> 01:24:25,560
ग मर्यादाओं को तय करने वाला कौन होगा

1166
01:24:25,560 --> 01:24:28,410
परंपरा प्राप्त

1167
01:24:28,410 --> 01:24:31,680
[संगीत]

1168
01:24:31,680 --> 01:24:35,680
आचार्य आई नहीं मेरे तक मतलब बा र इंटरनेट का

1169
01:24:35,680 --> 01:24:39,720
इ आ रहा चलिए फिर ऐसा

1170
01:24:39,720 --> 01:24:44,480
करते फिर किसी और दिन आज हमारे बीच के काफी मतभेद मिटे मुझे

1171
01:24:44,480 --> 01:24:49,720
आ ले मुझे भी क्लेरिटी आई [संगीत]

1172
01:24:49,720 --> 01:24:53,640
है ज्यादा दूर ना हो

1173
01:24:53,640 --> 01:24:57,640
ज्यादा ज्यादा दूर ना रहते हो तो प्रयागराज में गुरुदेव पाच

1174
01:24:57,640 --> 01:25:01,200
से लेकर के 16 तारीख तक

1175
01:25:01,200 --> 01:25:07,200
रहने अभी तो अभी

1176
01:25:10,560 --> 01:25:14,600
तो मेरा निवेदन है कि यदि संभव हो पाए तो अन्यथा

1177
01:25:14,600 --> 01:25:17,400
भगवान ने

1178
01:25:17,400 --> 01:25:21,600
तो आप मजबूर है विवश है धर्म का पूरी तरीके

1179
01:25:21,600 --> 01:25:26,080
से अनुकरण मगर आपके मन में य है एक दिन करूंगा या पश्चाताप है

1180
01:25:26,080 --> 01:25:30,160
तो आप धर्म चिंता मत करो ले आऊ कर

1181
01:25:30,160 --> 01:25:34,560
बकुल मतलब मैं ुद मिलना चाहूंगा आपका भी कभी साइड आना हो बनारस

1182
01:25:34,560 --> 01:25:39,120
से आगे गाजीपुर पड़ता है हमारा लहरी काशी कहते हमारे शहर को ठीक है

1183
01:25:39,120 --> 01:25:43,320
तो आ मुलाकात होगी और मम कभी उधर

1184
01:25:43,320 --> 01:25:47,760
लखनऊ आना हुआ तो बिल्कुल आपसे का

1185
01:25:47,760 --> 01:25:53,240
रते आ हु तो जरूर आएंगे ठीक है

1186
01:25:53,240 --> 01:25:57,400
वो चार्ट कटेग किया है सबसे

1187
01:25:57,400 --> 01:26:01,440
ज्यादा जो जनसंख्या है व किस हिंदु की है

1188
01:26:01,440 --> 01:26:07,440
क्योंकि हिंदुओ से हम यह भी पूछते हैं ना क्या

1189
01:26:07,800 --> 01:26:12,000
सय भी नहीं पता होता है

1190
01:26:12,000 --> 01:26:16,720
चलिए आपसे चर्चा करके अच्छा लगा

1191
01:26:16,720 --> 01:26:21,200
मुझे चलिए आपके आने के

1192
01:26:21,200 --> 01:26:25,600
लिए जी बिल्कुल आवाज

1193
01:26:25,600 --> 01:26:31,600
कट रही है [संगीत]

1194
01:26:35,040 --> 01:26:39,160
आपकी राम जय जय राम

1195
01:26:39,160 --> 01:26:43,920
श्री राम जय राम जय जय राम

1196
01:26:43,920 --> 01:26:48,600
श्री राम जय राम जय जय

1197
01:26:48,600 --> 01:26:52,840
राम चलिए सभी को जय श्री राम आपको मैं

1198
01:26:52,840 --> 01:26:56,880
जी जी ठीक है आपको मैं रिमूव कर देता हूं मैं देखता हूं अगर कोई आना चाहेगा तो

1199
01:26:56,880 --> 01:27:01,080
आएगा अन्यथा फिर बंद

1200
01:27:01,080 --> 01:27:07,080
कर जय श्री राम जय

1201
01:27:09,880 --> 01:27:14,080
श्रीम भाई यह बहुत ही महत्त्वपूर्ण था

1202
01:27:14,080 --> 01:27:18,360
यह विषय हम सभी प्रकार के हिंदुओं से बात कर रहे हैं

1203
01:27:18,360 --> 01:27:22,440
एक चार्ट है हम उसको अभी पहले डाल चुके पोस्ट में जा कर

1204
01:27:22,440 --> 01:27:26,880
के देखिएगा और इंस्टा आईडी पर भी डाल देंगे कल

1205
01:27:26,880 --> 01:27:31,160
तो उसमें हमने स्तर बनाए हैं चार्ट

1206
01:27:31,160 --> 01:27:35,200
गुरुदेव की कृपा से वो तैयार किया है कि भाई हम कौन सा हिंदू

1207
01:27:35,200 --> 01:27:39,240
कितने प्रतिशत और किस स्तर पर है तो यह भी

1208
01:27:39,240 --> 01:27:43,320
एक विषय है कि ऐसा नहीं है कि सिर्फ कबीर पंक्तियों से ही बात करनी है स्कन से ही

1209
01:27:43,320 --> 01:27:47,520
बात करनी है आर समाज से ही बात करनी है सबसे ज्यादा जो संख्या

1210
01:27:47,520 --> 01:27:52,720
है ना वो ऐसे हिंदुओं की है जिनके पास सिद्धांत है ही नहीं

1211
01:27:52,720 --> 01:27:58,320
तो इसलिए जो भाई साहब थे इनसे बात करना आवश्यक

1212
01:27:58,320 --> 01:28:02,640
था इस चर्चा को हम विराम देते हैं

1213
01:28:02,640 --> 01:28:06,640
आशा है इनके कई प्रकार के

1214
01:28:06,640 --> 01:28:10,720
जो संशय है आज मिट पाए हो भगवान से प्रार्थना करेंगे इनके जीवन में

1215
01:28:10,720 --> 01:28:14,800
वह इनको अपनी भक्ति प्रदान करें ज्यादा से ज्यादा और भगवान की भक्ति

1216
01:28:14,800 --> 01:28:16,240
करें जिससे और इनके संशय

1217
01:28:16,240 --> 01:28:21,040
मिटे ये जो गुरु

1218
01:28:21,040 --> 01:28:24,760
का

1219
01:28:24,760 --> 01:28:30,400
मेंशन है फल के बाद यह ज्ञान

1220
01:28:30,400 --> 01:28:35,320
व्यक्ति पुण्य कर्मों के बाद तो

1221
01:28:35,320 --> 01:28:39,560
यह एक रेशनल हिंदू थेय किसी भी विचारधारा से जुड़े हुए नहीं है अपने

1222
01:28:39,560 --> 01:28:43,880
आपको मगर ज्यादातर आप ऐसे हिंदुओं से जब आप मिलेंगे

1223
01:28:43,880 --> 01:28:47,920
जिनका गुरु नहीं है तो या तो वो ऐसे होंगे जो फ्लेक्सिबल

1224
01:28:47,920 --> 01:28:51,960
होंगे मतलब फ्लेक्सिबल जैसे ही आपने शास्त्र लिखा तो शास्त्र को अधीन हो गए

1225
01:28:51,960 --> 01:28:56,040
आपने जैसे शास्त्र बोले तो उसको मान लिया यह वह हिंदू है

1226
01:28:56,040 --> 01:29:00,080
जिनको जिनके पुण्य कर्म है जिसकी वजह से वह शास्त्र जब दिखाए जाते हैं तो

1227
01:29:00,080 --> 01:29:04,160
उसको सह स्वीकार कर लेते हैं तो यह भी प्रथम श्रेणी वाले हिंदू है

1228
01:29:04,160 --> 01:29:08,840
मगर ज्यादातर जो हिंदू आपको मिलेंगे जब आप उन्हें शास्त्र खोल के दिखाओगे वही शास्त्र

1229
01:29:08,840 --> 01:29:13,040
जिनके द्वारा प्रतिपादित होने वाले भगवान की हम पूजा कर रहे जिनके द्वारा

1230
01:29:13,040 --> 01:29:17,080
प्रतिपादित होने वाले विग्रह की हम प्राण प्रतिष्ठा कर रहे हैं वही

1231
01:29:17,080 --> 01:29:21,440
शास्त्र जब उनको खोल के दिखाओगे आर समाज हों के शास्त्र के द्वारा

1232
01:29:21,440 --> 01:29:26,120
प्र होने वाले भगवान को हम स्थापित नहीं करें राम मंदिर में

1233
01:29:26,120 --> 01:29:30,280
पौराणिक शास्त्रों के द्वारा प्रतिपादित होने वाले ईश्वर की स्थापना हुई है राम मंदिर

1234
01:29:30,280 --> 01:29:31,280
में

1235
01:29:31,280 --> 01:29:35,360
और पुराण कोई अलग से नहीं है व आर समाज कहते हैं वह बात एक अलग है मगर

1236
01:29:35,360 --> 01:29:39,440
पुराण तो वेदों का वेदांग है पुराण भी पाचवा वेद कहा जाता है पुराणों

1237
01:29:39,440 --> 01:29:43,720
को तो ज्यादातर हिंदू ऐसे होंगे जब आप पुराण

1238
01:29:43,720 --> 01:29:48,120
शास्त्रों के वचन उनके सामने खोल के रख देंगे तो वो उसको डिनायर

1239
01:29:48,120 --> 01:29:52,320
लगेंगे और वहां पर भी स्वयं को सनातनी नहीं कहेंगे

1240
01:29:52,320 --> 01:29:56,360
वहां पर भी स्वयं को पौराणिक भी कहेंगे वहां पर स्वयं को भगवान को साकार

1241
01:29:56,360 --> 01:30:00,560
मानने वाला भी कहेंगे और पुराण के द्वारा वर्णित भगवान की ही पूजा करेंगे

1242
01:30:00,560 --> 01:30:04,560
मगर स् उनको मना कर देंगे पुराणों को तो इसी चीज

1243
01:30:04,560 --> 01:30:08,560
पर प्रकाश डालने के लिए ये जो लाइव चर्चा है

1244
01:30:08,560 --> 01:30:12,600
वो रखी थी और आप लोगों ने देखी समय

1245
01:30:12,600 --> 01:30:18,600
भी दिया उसके लिए आभार सभी को जय श्री

1246
01:30:20,840 --> 01:30:26,840
राम

1247
01:30:28,960 --> 01:30:32,960
i
