1
00:00:28,960 --> 00:00:32,040
सभी को जय श्री राम

2
00:00:32,040 --> 00:00:35,840
थोड़ा सा लेट हो गए हमलोग पाच मिनट

3
00:00:35,840 --> 00:00:40,800
संभवत तो अभी हमारे

4
00:00:40,800 --> 00:00:44,840
जो मित्र है वह अभी आए नहीं है तक हम लोग

5
00:00:44,840 --> 00:00:50,240
मैसेज पढ़ लेते

6
00:00:50,240 --> 00:00:54,320
हैं भगवान विष्णु सुप्रीम भगवान शिव जी और विष्णु

7
00:00:54,320 --> 00:00:58,920
जी एक है लॉर्ड इ सुप्रीम

8
00:00:58,920 --> 00:01:02,640
वैष्णव

9
00:01:02,640 --> 00:01:08,640
जगतगुरु शंकराचार्य भगवान की

10
00:01:19,280 --> 00:01:23,960
जय राम

11
00:01:23,960 --> 00:01:28,840
राम हमने उन्हें लिंक दे दिया है वो आ नहीं अभी आए नहीं

12
00:01:28,840 --> 00:01:34,840
है

13
00:03:29,800 --> 00:03:30,320
महाराष्ट्र

14
00:03:30,320 --> 00:03:35,520
से हूं कृपया बताइए कि शंकराचार्य जी से कैसे

15
00:03:35,520 --> 00:03:40,200
जुड़े वर्तमान में तो सबसे अच्छा जो अवसर है वो आप

16
00:03:40,200 --> 00:03:44,240
प्रयागराज जाने का प्रयास करें

17
00:03:44,240 --> 00:03:48,320
जय श्री राम मैक्स नियोन जी आर्थिक

18
00:03:48,320 --> 00:03:52,680
सहायता प्रदान करने हे तो आपका आभार और

19
00:03:52,680 --> 00:03:56,880
गुरुदेव का वहां पर पाच से लेकर 15 तारीख तक

20
00:03:56,880 --> 00:04:01,000
प्रवास है उसमें आप आ सकते हैं और या

21
00:04:01,000 --> 00:04:05,000
फिर आप प्रतीक्षा कर सकते कि गुरुदेव आपके

22
00:04:05,000 --> 00:04:09,400
निवास स्थान निवास क्षेत्र के निकट से

23
00:04:09,400 --> 00:04:13,720
कब

24
00:04:13,720 --> 00:04:18,240
निकलेंगी का जी का जी

25
00:04:18,240 --> 00:04:24,240
ने आपने अभिवादन किया है

26
00:04:24,400 --> 00:04:28,880
आपका जी ये हमारे जो मित्र है इसकन

27
00:04:28,880 --> 00:04:34,880
से वो आ चुके हैं

28
00:04:40,880 --> 00:04:43,440
संभवत जी भया जय श्री राम

29
00:04:43,440 --> 00:04:47,640
हरे कृष्णा प्रभु जी जय श्री राम हरे कृष्णा आप ही

30
00:04:47,640 --> 00:04:51,880
आपसे ही बात हो रही थी अभी जो दिन भर कन्वर्सेशन हो रहा था जी

31
00:04:51,880 --> 00:04:57,880
जी जी प्रभुजी जी हां

32
00:04:58,280 --> 00:05:02,360
जी तो तो

33
00:05:02,360 --> 00:05:06,480
आपको किस चीज से असहमत है आप हमारी जो आपने हमसे

34
00:05:06,480 --> 00:05:10,720
संपर्क किया था प्रभु जी जैसे

35
00:05:10,720 --> 00:05:14,720
आपकी मैंने वीडियोस देखी है कि आप एक ही चीज

36
00:05:14,720 --> 00:05:19,120
को टारगेट करते हो कि जो शिव जी है

37
00:05:19,120 --> 00:05:23,600
जो विष्णु जी है उसको लेके तो उसमें मैं थोड़ा

38
00:05:23,600 --> 00:05:27,720
असहमत था अच्छा इसके अलावा बाकी की चीजें

39
00:05:27,720 --> 00:05:32,440
जो है हमारी उससे आप सहमत है

40
00:05:32,440 --> 00:05:36,560
जी बहुत कुछ चीज ऐसा देखा है कि हम सिर्फ शिव

41
00:05:36,560 --> 00:05:41,280
विष्णु के बारे में बात करते हैं या फिर अन्य चीज भी जानते हैं आप

42
00:05:41,280 --> 00:05:45,800
हमारी अन्य थोड़ी बहुत जानता हूं जैसे कि अभी

43
00:05:45,800 --> 00:05:50,240
शंकराचार्य प्रभु जी की बातें चल रही है हाल फिलहाल में उनके मैंने

44
00:05:50,240 --> 00:05:54,280
आपने हमारा कबीर पंथिया के साथ वीडियो देखा है नहीं

45
00:05:54,280 --> 00:05:58,840
नहीं प्रभु जी आपने हमारा आर्य समाज के

46
00:05:58,840 --> 00:06:03,120
लिए वीडियो देखा है नहीं नहीं प्रभु जी आपने हमारा

47
00:06:03,120 --> 00:06:07,440
इस्लाम के लिए वीडियो देखा है थोड़ा थोड़ा देखा है

48
00:06:07,440 --> 00:06:11,480
आर्य समाज के लिए भी मैंने थोड़ी सी वीडियो देखी थी आज ही और इस्लाम

49
00:06:11,480 --> 00:06:16,120
के लिए भी मैंने थोड़ी वीडियो देखी थी अच्छा अच्छा

50
00:06:16,120 --> 00:06:20,120
जी जी तो स्कोन को लेकर के जो वैचारिक

51
00:06:20,120 --> 00:06:24,160
स्पष्टता है संशय है या फिर जो हमारे प्रश्न है

52
00:06:24,160 --> 00:06:28,480
वो केवल एक नहीं है कि हरि और हर में भेद क्यों यह बहुत सारे प्रश्नों

53
00:06:28,480 --> 00:06:31,440
में से एक प्रश्न है

54
00:06:31,440 --> 00:06:36,080
तो ठीक है तो बताइए आप कि केवल

55
00:06:36,080 --> 00:06:40,080
विष्णु ही भगवान है उनको ही भगवान मानना चाहिए या

56
00:06:40,080 --> 00:06:44,440
सीधे इस पर आ जाते हैं कि आपके श्रीमद् भागवत में न

57
00:06:44,440 --> 00:06:47,560
1525 में लिखा हुआ है कि शिव दुर्गा

58
00:06:47,560 --> 00:06:51,720
काली के नाम को कृष्ण के नाम के समान

59
00:06:51,720 --> 00:06:55,800
समझने वाले मूर्ख है अपराधी हैं उनका नाम जप करना मतलब

60
00:06:55,800 --> 00:06:59,800
उनको भगवान समझना कृष्ण के समान भगवान समझना उन्हें पाप

61
00:06:59,800 --> 00:07:04,160
है मूर्खता है तो यह इससे आप सहमत है

62
00:07:04,160 --> 00:07:08,360
इस बात से जी जी प्रभु ऐसे मूर्ख

63
00:07:08,360 --> 00:07:12,680
नहीं कह सकते क्योंकि वो भी जो देवी देवता है वो भी उनके अंश

64
00:07:12,680 --> 00:07:16,760
है ऐसे म नहीं मैं पूछ

65
00:07:16,760 --> 00:07:21,120
रहा हूं क्या वह उनके समान है कि नहीं नहीं समान

66
00:07:21,120 --> 00:07:25,240
नहीं है प्रभु जी समान नहीं है अच्छा समान ना होने के लिए

67
00:07:25,240 --> 00:07:29,600
आपका ऐसा क्यों बिलीफ है समान नहीं है क्यों

68
00:07:29,600 --> 00:07:33,640
प्रभु जी बहुत सारी चीजें है जो कि मैंने भगवत गीता में पढ़ी है

69
00:07:33,640 --> 00:07:37,920
और श्री विष्णु पुराण में पढ़ी है बहुत सारी चीजें है

70
00:07:37,920 --> 00:07:42,040
जो आपने उपनिषदों में भी प्रमाण देखा है क्या प्रभु

71
00:07:42,040 --> 00:07:46,400
जी देखो अभी मैंने सिर्फ अभी मैं प्राण पुराण पढ़ना आरंभ

72
00:07:46,400 --> 00:07:50,520
किया मैंने अभी उपनिषद नहीं पढ़े तो जब आपने पूरा पूरा

73
00:07:50,520 --> 00:07:54,840
अभी आप आप अभी किसी निर्णय पर नहीं पहुंचना चाहिए ना जब आपने अध्ययन कंप्लीट

74
00:07:54,840 --> 00:07:59,120
नहीं किया है तो फिर आप क्यों कह रहे हैं कि नहीं उनको समान समझना पाखंड

75
00:07:59,120 --> 00:08:02,760
है पाखंड तो मैंने शब्द यूज नहीं किया प्रभु

76
00:08:02,760 --> 00:08:05,600
जी क्योंकि ये

77
00:08:05,600 --> 00:08:10,560
जोख विचारधारा का समर्थन कर रहे हैं जो पाखंड कह रही है

78
00:08:10,560 --> 00:08:14,680
अब आप मुझे बताइए चलिए मैं पूछता हूं आपसे क्या शिव दुर्गा

79
00:08:14,680 --> 00:08:19,440
काली को कृष्ण के समान समझना मूर्खता है या नहीं

80
00:08:19,440 --> 00:08:23,440
नहीं मूर्खता नहीं है क्योंकि गरुण प्राण में मूर्खता नहीं है तो मतलब आप

81
00:08:23,440 --> 00:08:27,520
ये जो भगवत श्रीमद् भागवत भाष्य में लिखा है

82
00:08:27,520 --> 00:08:31,760
प्रभु जी पहले मुझे हम पहले सुनिए तो हम पहले

83
00:08:31,760 --> 00:08:35,880
एक विषय तय करेंगे फिर उस पर व्याख्या हम आपकी सुनेंगे विषय

84
00:08:35,880 --> 00:08:40,040
इसलिए तय करना आवश्यक होता है जैसे मैंने आपसे ये नहीं कहा क्यों मैं यह पूछ

85
00:08:40,040 --> 00:08:44,240
रहा हूं तो आप जब यह कह रहे हैं कि मूर्खता नहीं है तो आपका जो

86
00:08:44,240 --> 00:08:48,560
इसकन का श्रीमद भागवत भाष्य है उसमें जो य लाइन मेंशन है कि उसको समझना

87
00:08:48,560 --> 00:08:52,760
मूर्खता है व सही लाइन है या गलत लाइन है इस

88
00:08:52,760 --> 00:08:56,840
बारे में आप मूर्खता और पाखंड इन

89
00:08:56,840 --> 00:09:00,880
दोनों शब्दों में बहुत बड़ा अंतर है मूर्ख ये दोनों शब्द हमें स्कन

90
00:09:00,880 --> 00:09:05,680
से प्राप्त है मूर्ख दोनों शब्द हमें स्कन से प्राप्त है मूर्खता

91
00:09:05,680 --> 00:09:09,840
आपकी ग्रंथ में मेंशन है और पाखंड आपके अधिकृत व्यक्ति

92
00:09:09,840 --> 00:09:13,920
ने बोला है दूसरी बात मैंने प्रश्न आपसे पाखंड का नहीं किया मैंने बोला

93
00:09:13,920 --> 00:09:17,920
मूर्खता मैं दोबारा अपना प्रश्न क्लियर कर देता हूं कि

94
00:09:17,920 --> 00:09:21,920
क्या क्या शिव दुर्गा काली को

95
00:09:21,920 --> 00:09:26,040
क्या कद पहले यूज किया था तभी मैं पाखंड हमने इसलिए बोला

96
00:09:26,040 --> 00:09:30,680
क्योंकि स्कोन के अधिकृत व्यक्ति ने यह बात बोली है पाखंड बो

97
00:09:30,680 --> 00:09:35,600
प्रभु जी मैं यहां पर स्कन की बात करने के लिए नहीं आया आप

98
00:09:35,600 --> 00:09:39,720
तो आप आप स्कन की इस बात से सहमत है उसे पाखंड बोलना मैं आपसे पूछ

99
00:09:39,720 --> 00:09:44,600
रहा हूं अभी नहीं पाखंड पाखंड बोलने से सहमत है आप

100
00:09:44,600 --> 00:09:48,760
पाखंड अगर शब्द यूज हुआ है तो वो गलत है मूर्खता आप उसका

101
00:09:48,760 --> 00:09:53,000
विरोध करेंगे यहां से जाने के बाद किसका

102
00:09:53,000 --> 00:09:57,160
जिसने पाखंड शब्द यूज किया है नहीं प्रभु जी

103
00:09:57,160 --> 00:10:01,520
ऐसे तो हमें देखा जाए बहुत सारे एग्जांपल है हमारे पास

104
00:10:01,520 --> 00:10:05,800
मैं आपसे पूछ रहा हूं विरोधाभासी भावना रखेंगे जैसे आपने हमारा विरोध किया एक तरीके

105
00:10:05,800 --> 00:10:09,800
से कमेंट किया मान लीजिए कमेंट ही किया कमेंट के द्वारा आपने

106
00:10:09,800 --> 00:10:14,040
असमर्थ अपना प्रकट किया तो इसी प्रकार से कम से कम आप असमर्थ

107
00:10:14,040 --> 00:10:18,480
प्रकट करेंगे उनका जो पाखंड कह रहे हैं नहीं

108
00:10:18,480 --> 00:10:22,520
असमर्थ नहीं मैं उनसे प्रश्न जरूर करूंगा जैसे कि मैं आपसे कर रहा

109
00:10:22,520 --> 00:10:27,200
हूं अस समर्थन नहीं करूंगा क्योंकि मेरा जा

110
00:10:27,200 --> 00:10:31,280
आप इसका विरोध नहीं करते हैं कि पाखंड बोला है इस बात से आपको विरोध नहीं

111
00:10:31,280 --> 00:10:32,960
है बस आप जानना चाहते कि क्यों बोला

112
00:10:32,960 --> 00:10:37,080
है हा क्यों बोला उसका रीजन क्या है जब तक मुझे वो पूरा नहीं पता

113
00:10:37,080 --> 00:10:42,160
होगा तो अब आप ये तो मानते हैं मूर्खता

114
00:10:42,160 --> 00:10:46,480
जी जी मूर्खता तो कही जगह कई जगह यूज हो जाता बड कभी

115
00:10:46,480 --> 00:10:50,480
ऐसा हो जाता है कि आप क्या स्वीकार कर रहे हैं क्या शिव दुर्गा

116
00:10:50,480 --> 00:10:54,760
काली को मानने वाले कृष्ण के समान समझने वाले मूर्ख

117
00:10:54,760 --> 00:11:00,760
हैं आप क्या मानते हैं फिलहाल मूर्ख है या नहीं है

118
00:11:00,920 --> 00:11:05,120
प्रभु जी वो मूर्ख है क्योंकि वह परम ब्रह्म है

119
00:11:05,120 --> 00:11:09,320
और परम ब्रह्म को अगर देवता से मूर्ख मानते है ना बस अब य

120
00:11:09,320 --> 00:11:13,520
अब ये थोड़ा सेट हुआ है अब हम उससे आगे आपकी व्याख्या सुनते हैं कि क्यों आप क्यों

121
00:11:13,520 --> 00:11:17,520
कह रहे हैं कि वो मूर्ख है जी जी जैसे

122
00:11:17,520 --> 00:11:21,840
प्रभु जी आप एक चीज देखो एक पिता होते हैं

123
00:11:21,840 --> 00:11:25,920
एक पिता होते हैं उनका पुत्र होता है और जब वो पुत्र हो जाता है

124
00:11:25,920 --> 00:11:31,000
क्या वो पुत्र दोबारा वही पिता बन जा जिससे वो आया

125
00:11:31,000 --> 00:11:35,040
है अच्छा ये बताइए पुत्र क्या अलग से कहीं से

126
00:11:35,040 --> 00:11:39,680
निकलता है उसका हा अलग होता है

127
00:11:39,680 --> 00:11:43,800
में क्या उतनी ही एबिलिटीज होती है जितनी पिता में है या सेम

128
00:11:43,800 --> 00:11:47,880
होता है पुत्र अपने पिता पर निर्भर

129
00:11:47,880 --> 00:11:48,380
करता

130
00:11:48,120 --> 00:11:53,000
है या नहीं करता है प्रभु जी पहले आप एक चीज

131
00:11:53,000 --> 00:11:57,080
क्लियर करो कि जब एक पुत्र पैदा होता है पिता से

132
00:11:57,080 --> 00:12:02,000
तो क्या वो दोबारा वही पता वही पर जा सकता

133
00:12:02,000 --> 00:12:06,280
इसको और करता हं यही अंतर है मानवों में और ईश्वर

134
00:12:06,280 --> 00:12:10,440
में ईश्वर से जब कुछ निकलेगा तो पूर्ण ही निकलेगा क्योंकि ईश्वर पूर्ण

135
00:12:10,440 --> 00:12:14,600
है मानव पूर्ण नहीं है उससे जब कुछ निकलेगा तो व पूर्ण निकलेगा दूसरी

136
00:12:14,600 --> 00:12:20,600
बात इसको और आगे चलते हैं क्या आप वेदों के

137
00:12:22,720 --> 00:12:27,120
या तो सिर्फ परब्रह्म है बा जो इनके तत्व है वो तो अपूर्ण

138
00:12:27,120 --> 00:12:31,280
है वो पूर्ण नहीं है पर कह रहे हैं कि वो

139
00:12:31,280 --> 00:12:35,280
पर्र बाकी सब उनके तत्व है जी ग्रंथों

140
00:12:35,280 --> 00:12:39,320
के आधार परही कह रहा हूं प्रभु जी श्री विष्णु पुराण

141
00:12:39,320 --> 00:12:43,480
उठा के देख लो उसमें स्वयं भगवान शिव उनकी

142
00:12:43,480 --> 00:12:47,800
आपको वेदों का वाक्य दिखा दूं कि शिव की भक्ति करना मोक्ष दायक

143
00:12:47,800 --> 00:12:52,120
है उपनिषद का वाक्य दिखा दूं

144
00:12:52,120 --> 00:12:56,400
तब आपका फैसला क्या होगा प्रभु जी गरुण

145
00:12:56,400 --> 00:13:00,440
प्राण में 12 12 ऐसे आप मुझे पुराण का उदाहरण दे रहे

146
00:13:00,440 --> 00:13:04,680
हैं मैं आपको श्रुति का वो दे रहा हूं प्रमाण श्रुति मैं भी प्रभु जी

147
00:13:04,680 --> 00:13:08,920
मैं आपको श्रुति का दे रहा हूं अगर मैं आपसे आपको उपनिषद का वाक्य दिखा दूं

148
00:13:08,920 --> 00:13:13,000
कि शिव की भक्ति करना मोक्ष दायक है तो आपका निर्णय

149
00:13:13,000 --> 00:13:17,200
क्या होगा क्या आपका निर्णय बदल जाएगा या यही रहेगा जो अभी है

150
00:13:17,200 --> 00:13:21,280
जो अभी है प्रभु जी जो मैंने पढ़ा मैं अपने निर्णय पर रहूंगा जो आपने

151
00:13:21,280 --> 00:13:25,400
पढ़ तो आप श्रुति को नहीं मान जब मैं आपको पढ़ा दूंगा मैं तब की बात कर रहा

152
00:13:25,400 --> 00:13:29,560
हूं तो क्या आप कुरान को नहीं मानते हो पुराण

153
00:13:29,560 --> 00:13:33,560
को मानता हूं फिर मैं भी उपनिषदों को मानता हूं जब मैं पढ़ूंगा तब

154
00:13:33,560 --> 00:13:37,680
मैं उसको तो मैं पुराण को मानने से मना कहां कर रहा हूं जब ये कहा गया कि

155
00:13:37,680 --> 00:13:38,180
विष्णु

156
00:13:38,120 --> 00:13:42,160
जी परम ब्रह्म है तो मैंने उनको परम ब्रह्म माना जब यह

157
00:13:42,160 --> 00:13:46,160
कहा गया कि शिवजी परम ब्रह्म है तो मैंने उसको भी परम ब्रह्म माना आपने

158
00:13:46,160 --> 00:13:50,720
जब विष्णु को कहा गया तब तो माना मगर जब शिव को कहा गया तब नहीं माना

159
00:13:50,720 --> 00:13:54,800
दूसरी बात आपने कुछ श्लोकों सेय आप किसी भी श्लोक से सिद्ध नहीं

160
00:13:54,800 --> 00:13:58,880
कर सकते कि शिव और विष्णु में भेद है मगर भेद नहीं हैय ये

161
00:13:58,880 --> 00:14:02,920
मैं नारद पुराण से सिद्ध कर सकता हूं भेद नहीं है ये मैं भागवत से सिद्ध कर

162
00:14:02,920 --> 00:14:06,960
सकता हूं मुझे पूरा कर ले दीजिए भेद नहीं इसके अलावा इसके

163
00:14:06,960 --> 00:14:11,600
अलावा एक वचन है पुराणों का ही वचन है मत्स पुराण 145

164
00:14:11,600 --> 00:14:16,280
वा अध्याय 5वा श्लोक सभी श्रुति स्मृति शास्त्रों में सामंजस्य

165
00:14:16,280 --> 00:14:20,320
की शिक्षा साधु सम्मत धर्म है अगर कोई ऐसी शिक्षा है जो

166
00:14:20,320 --> 00:14:24,560
दूसरे का खंडन कर रही है तो हमको ऐसा अर्थ निकालना पड़ेगा खंडन

167
00:14:24,560 --> 00:14:29,040
वाला अर्थ नहीं हमें ऐसा अर्थ निकालना पड़ेगा जिसमें किसी का भी खंडन ना हो

168
00:14:29,040 --> 00:14:33,120
तो श्रुति शास्त्रों में शिव की भक्ति को मोक्ष कहा जा रहा है उपनिषद

169
00:14:33,120 --> 00:14:39,120
में कहा जा रहा है मैं आपको अभी श्लोक खोल के दिखा देता

170
00:14:57,680 --> 00:15:03,680
हूं

171
00:15:09,840 --> 00:15:13,840
जब विष्णु को परम ब्रह्म कहा जा रहा है तो हमने मानने से मना थोड़ी ना किया

172
00:15:13,840 --> 00:15:18,640
है मगर ये कहीं नहीं लिखा है कि विष्णु और शिव में भेद

173
00:15:18,640 --> 00:15:23,080
है नहीं भेद ये तो मैं

174
00:15:23,080 --> 00:15:27,760
ये यजुर्वेद का श्लोक है यजुर्वेद यजुर्वेद का श्लोक है

175
00:15:27,760 --> 00:15:32,040
इसका संस्कृत का उच्चारण मैं नहीं पढ़ूंगा मगर सीधे-सीधे इसमें

176
00:15:32,040 --> 00:15:36,720
शिव स्वरूप कल्याण दाता और मोक्ष दाता कहा गया

177
00:15:36,720 --> 00:15:38,920
है

178
00:15:38,920 --> 00:15:43,000
मोक्ष ओके ओ अब इसको आप नहीं मानेंगे

179
00:15:43,000 --> 00:15:47,080
प्रभु जी ज जब मैं उसको अच्छे

180
00:15:47,080 --> 00:15:51,320
से मैं पढ़ूंगा पूरा जब अभीर आपको आने की आवश्यकता

181
00:15:51,320 --> 00:15:55,640
नहीं है आप पहले अपना अच्छे से अध्ययन करिए तब आते आप फिर आप आए क्यों है

182
00:15:55,640 --> 00:15:59,840
प्रभु जी इसमें मेरी जो मैं बातें बोल रहा हूं इतना पढ़ लिया है

183
00:15:59,840 --> 00:16:04,000
तो हम उसके आधार पर आपसे बात करें जना आप पढ़ के आए हो उसके बाहर से हम बात

184
00:16:04,000 --> 00:16:08,440
ना करें जबक उसके बाहर भी

185
00:16:08,440 --> 00:16:13,240
आपको कितना लग रहा है प्रभु जी कि आपने आप मेरी बात कंप्लीट नहीं होने दे रहे आपको

186
00:16:13,240 --> 00:16:17,080
जने जो

187
00:16:17,080 --> 00:16:21,760
चीने बात बोलिए अपनी बात बोलिए

188
00:16:21,760 --> 00:16:26,440
हा हा बोलिए अपनी बात जो वीडियो में आपने

189
00:16:26,440 --> 00:16:30,560
मैंने जो कमेंट किया था उसम आपको ने बताया कि गरुण प्राण में

190
00:16:30,560 --> 00:16:34,840
ऐसा मेंशन है कि ब्रह्मा विष्णु और शिव में कोई अंतर

191
00:16:34,840 --> 00:16:38,920
नहीं है और कोई भी उनमें भेद करता है तो उसको गौ हत्या

192
00:16:38,920 --> 00:16:43,080
के बराबर पाप लगता है ठीक है प्रभु जी अब अब आते

193
00:16:43,080 --> 00:16:47,360
हैं उसके आगे कि परब्रह्म जो है

194
00:16:47,360 --> 00:16:51,600
वो विष्णु से भी ऊपर है जिनको हम श्री कृष्ण कहते हैं

195
00:16:51,600 --> 00:16:55,640
भगवत गीता में ऐसा वर्णन है जहां पर वो खुद कहते हैं कि मैं ही

196
00:16:55,640 --> 00:17:00,040
परम ब्रह्म हूं किसी भी जितने भी शिव जी है

197
00:17:00,040 --> 00:17:04,400
और ब्रह्मा जी हैं और यह अपने विष्णु

198
00:17:04,400 --> 00:17:08,520
जी है यह कहीं भी ऐसा नहीं कहते कि मैं परब्रह्म हूं पर श्री कृष्ण

199
00:17:08,520 --> 00:17:12,560
भगवान ने भगवत गीता में कहा है अर्जुन को और उन्होंने

200
00:17:12,560 --> 00:17:16,840
अपना प्रमाण भी दिया है विश्वर रूप दिखा के अर्जुन को क्योंकि

201
00:17:16,840 --> 00:17:20,920
उस टाइम उसको भी विश्वास नहीं हो रहा था एक मिथ्या है अब

202
00:17:20,920 --> 00:17:25,160
हो गई आपकी बात पूरी हो गई मैं बोलू अब जी जी जी बो

203
00:17:25,160 --> 00:17:28,480
ये एक मिथ्या है कि केवल श्री कृष्ण भगवान

204
00:17:28,480 --> 00:17:32,480
ने स्वयं को परम ब्रह्म कहा है मिथ्या हैय जो फैलाई गई है

205
00:17:32,480 --> 00:17:36,600
शिव पुराण में शिव जी ने स्पष्ट कहा है मैं हूं परम ब्रह्म

206
00:17:36,600 --> 00:17:40,960
राम गीता में अध्यात्म रामायण में राम जी ने कहा है मैं हूं परम ब्रह्म

207
00:17:40,960 --> 00:17:45,320
भगवती पुराण में भगवती भगवती ने कहा है मैं हूं परम ब्रह्म

208
00:17:45,320 --> 00:17:49,720
यह एक मिथ्या फैलाई गई है शिव पुराण में आपको दिखाऊ प्रभु

209
00:17:49,720 --> 00:17:54,040
जी विश्वरूप किसने दिखाया फिर अगर ऐसा कह दिया उन्होंने तो विश्वरूप

210
00:17:54,040 --> 00:17:58,040
य सनातन सिद्धांत है कि जो विश्वरूप दिखाएगा उसको ही परम ब्रम

211
00:17:58,040 --> 00:18:02,120
माना जा जाएगा यही तो मेन प्रमाण है नहीं तो कलयुग में ऐसे

212
00:18:02,120 --> 00:18:06,240
लोग आप ये सनातन सिद्धांत है कि जो विश्वरूप दि अब मैं कह

213
00:18:06,240 --> 00:18:10,240
दूं हलाहल विष किसने पिया भाई प्रहलाद महाराज

214
00:18:10,240 --> 00:18:14,360
आप मुझसे पूछोगे हलाहल विष पीने से सिद्ध नहीं होता कि विष पीने वाला ही

215
00:18:14,360 --> 00:18:18,600
परम ब्रह्म है हलाल पार्वती माता के साथ विवाह किसने

216
00:18:18,600 --> 00:18:22,680
किया भाई अब आप मुझसे पूछोगे यह कहां का सिद्धांत है कि जो पार्वती

217
00:18:22,680 --> 00:18:27,400
से ब्याह करेगा वही वही परम ब्रह्म है तो यह आपका अपना व्यक्तिगत तर्क है

218
00:18:27,400 --> 00:18:30,080
जब

219
00:18:30,080 --> 00:18:34,640
मषि वेदव्यास स्मति दो एक व्यक्तिगत तर्क

220
00:18:34,640 --> 00:18:38,760
अमान्य व्यास जी को पुराणों को मानते हैं ना तो

221
00:18:38,760 --> 00:18:42,840
व्यास जी ने कहा है व्यक्तिगत तर्क अमान्य आप इसका शास्त्रों से मुझे

222
00:18:42,840 --> 00:18:43,560
दीजिए

223
00:18:43,560 --> 00:18:47,840
कि जो विराट स्वरूप दिखाएगा वही परम ब्रह्म माना जाएगा

224
00:18:47,840 --> 00:18:52,000
दूसरी बात अब ये बताइए सीधे इस आ जाते हैं कहते

225
00:18:52,000 --> 00:18:56,240
प्रभु जी वही बताते हैं कि अर्जुन कहते हैं कि अगर आप

226
00:18:56,240 --> 00:19:00,400
परम ब्रह्म हो तो मुझे अपना वही स्वरूप दिखाओ तब कृष्ण भगवान

227
00:19:00,400 --> 00:19:04,440
ने उनको विश्वर रूप दिखाया था तो तो शिवजी ने शिव जी से किसी ने नहीं

228
00:19:04,440 --> 00:19:08,560
कहा शिव जी को वो चीज नहीं करनी थी शिव जी को दूसरी चीजें करनी थी

229
00:19:08,560 --> 00:19:12,760
शिव जी से किसी ने नहीं कहा ये चीज उनकी लीलाए अलग है उनकी कथा अलग है

230
00:19:12,760 --> 00:19:17,160
अच्छा चलो अब सीधे आ जाते हैं क्या इसकन के द्वारा पूजित

231
00:19:17,160 --> 00:19:22,400
होने वाला जो ईश्वर है कृष्ण वो सर्वशक्तिमान है

232
00:19:22,400 --> 00:19:26,720
इसकन के साथ नहीं प्रभु जी उनको पूरा जगत पूछता है इसकन

233
00:19:26,720 --> 00:19:31,080
ही नहीं मैं कोईन इस कोन की विचारधारा के अनुसार पूजित

234
00:19:31,080 --> 00:19:35,240
होने वाला जो कृष्ण है क्या वो सर्वशक्तिमान सिद्ध होता है

235
00:19:35,240 --> 00:19:39,320
जी प्रभु अच्छा तो जी

236
00:19:39,320 --> 00:19:43,680
जो ईश्वर है उसकी एक चीज है कि वह अबाध है सर्वशक्तिमान है

237
00:19:43,680 --> 00:19:48,600
वह किसी भी नियम के नीचे नहीं है बल्कि सभी नियमों को बनाने वाला सर्व नियामक है

238
00:19:48,600 --> 00:19:52,720
अब आप ये बताइए जिस प्रकार दूध से दही बन जाता है पर

239
00:19:52,720 --> 00:19:56,800
दही से दूध नहीं उसी प्रकार कृष्ण तो शिव बन जाते हैं पर शिव से

240
00:19:56,800 --> 00:19:58,640
कृष्ण नहीं बन पाते तो यहां पर

241
00:19:58,640 --> 00:20:02,920
जो आपका कृष्ण है इसकन का कृष्ण यह कृष्ण रुक क्यों रहा है

242
00:20:02,920 --> 00:20:07,080
शिव बनने से वापस कृष्ण क्यों नहीं बन पा रहा

243
00:20:07,080 --> 00:20:11,160
है ये जैसे एक वो है

244
00:20:11,160 --> 00:20:15,520
बल्ब है बल्ब के अंदर लाइट होती है तो क्या वो लाइट बल्ब

245
00:20:15,520 --> 00:20:20,280
बन सकती है ईश्वर वही है जो कुछ भी कर सकता है बन सकती है

246
00:20:20,280 --> 00:20:24,360
ईश्वर है यहां बात बाधित चीजों की नहीं

247
00:20:24,360 --> 00:20:28,520
हो रही है श कृष्ण है इसका मतलब आप ये कह रहे

248
00:20:28,520 --> 00:20:33,040
ईश्वर भी कुछ कार्य है जो नहीं कर पाता है आप ये कह रहे हैं ना

249
00:20:33,040 --> 00:20:37,240
कुछ कार्य है जो ईश्वर भी नहीं कर सकता ये कह रहे हैं ना आप मैंने

250
00:20:37,240 --> 00:20:41,280
तो ऐसा नहीं कहा मैं तो बोल रहा तो बल्ब से आप जो मैच करा के कह

251
00:20:41,280 --> 00:20:45,280
रहे हैं क्या बल्ब से वो लाइट बल्ब बन सकती है तो वही तो मैं कह रहा हूं

252
00:20:45,280 --> 00:20:49,360
ईश्वर से शिव बन रहे हैं तो शिव से निकल कर के पूर्ण से पूर्ण

253
00:20:49,360 --> 00:20:53,680
ही निकलता है वेदों में वाक्य है पूर्ण से पूर्ण ही निकलता है

254
00:20:53,680 --> 00:20:59,680
तो पूर्ण जब निकल रहा है तो जब वो पूर्ण है तो वो वापस क्यों नहीं बन सकता है पूर्ण

255
00:21:05,040 --> 00:21:09,160
आपकी आवाज आपकी आवाज वो हो रही है संतुलन

256
00:21:09,160 --> 00:21:11,960
नहीं आ रहा है

257
00:21:11,960 --> 00:21:17,960
आपका बोलिए दोबारा बोलिए आपकी आवाज जी

258
00:21:27,040 --> 00:21:29,440
बोलिए

259
00:21:29,440 --> 00:21:35,440
व्यवहार में भिन्न है परमार्थ में नहीं

260
00:21:36,680 --> 00:21:40,960
है व्यवहार में नहीं बन सकता परमार्थ में बन सकता उसी को अद्वैत

261
00:21:40,960 --> 00:21:46,960
कहा जाता

262
00:21:50,440 --> 00:21:54,600
है नहीं नहीं आपने मेरे सवाल का जवाब नहीं दिया मैंने आपके

263
00:21:54,600 --> 00:21:58,680
सवाल का जवाब दिया व्यवहार में नहीं बन सकता परमार्थ में वही उसकी प्राप्ति

264
00:21:58,680 --> 00:22:04,680
है वही लक्ष्य है उसका मोक्ष आपका वो चेहरा नहीं दिख रहा

265
00:22:06,920 --> 00:22:12,920
है आप एक काम करिए एग्जिट हो जाइए दोबारा से जवाइन

266
00:22:26,960 --> 00:22:32,960
करिए

267
00:22:59,080 --> 00:23:03,080
कभी-कभी मैं स्कन के कुछ फॉलोअर

268
00:23:03,080 --> 00:23:07,160
से बात करता हूं तो मुझे कभी-कभी वैसा लगने लगता है कि

269
00:23:07,160 --> 00:23:11,160
जो इनको मालूम है बस यह उतना

270
00:23:11,160 --> 00:23:15,160
ही बोलेंगे उतना ही पढ़ेंगे उसके आगे ना एक इंच इनको

271
00:23:15,160 --> 00:23:19,280
जानना है ना जानने की उत्सुकता है तो यह सब देख

272
00:23:19,280 --> 00:23:23,360
के बड़ा हृदय को दुख होता है और यह हमारे हिंदू भाई है जो

273
00:23:23,360 --> 00:23:26,880
हमसे छीने जा रहे

274
00:23:26,880 --> 00:23:32,880
हैं

275
00:23:36,800 --> 00:23:41,120
एक जब तक ईश्वर को सर्वशक्तिमान सिद्ध नहीं

276
00:23:41,120 --> 00:23:45,640
करेंगे तब तक हम धर्म की स्थापना नहीं कर पाएंगे

277
00:23:45,640 --> 00:23:49,760
और तब तक हमारी मातृ शक्ति सुरक्षित नहीं हो पाएगी धर्म

278
00:23:49,760 --> 00:23:53,760
अधर्म की जो लड़ाई है वो मूलत एक आधार पर

279
00:23:53,760 --> 00:23:59,200
मातृ शक्ति का शोषण या मातृ शक्ति की रक्षा

280
00:23:59,200 --> 00:24:04,320
तो मैं जोय लोगों से जाकर के प्रश्न करता हूं ना बार-बार

281
00:24:04,320 --> 00:24:08,400
कि आपका ईश्वर सर्वशक्तिमान है कि नहीं ईश्वर को

282
00:24:08,400 --> 00:24:12,800
बाधित करने की आड़ में दुनिया में शोषण

283
00:24:12,800 --> 00:24:16,960
शुरू होता है अधर्म शुरू होता है कि भाई सर्वशक्तिमान ईश्वर

284
00:24:16,960 --> 00:24:18,840
ने तो बात वो दे दी है

285
00:24:18,840 --> 00:24:23,080
मर्यादा तोब कैसे कैसे मर्यादा को लांगाह शोषण

286
00:24:23,080 --> 00:24:27,200
किया जाए तो चलो एक नया ईश्वर लाते हैं

287
00:24:27,200 --> 00:24:31,400
फिर उसे किया जाता है जी जी जी बोलिए

288
00:24:31,400 --> 00:24:35,640
प्रभु जी तो मैं यह कह रहा था

289
00:24:35,640 --> 00:24:39,800
कि इसका अर्थ य आप यह मानते हैं कि श्री कृष्ण भी

290
00:24:39,800 --> 00:24:44,080
कुछ कुछ कार्य है जो नहीं कर सकते

291
00:24:44,080 --> 00:24:48,280
नहीं मैंने तो ऐसा बोला नहीं प्रभु कि हा वो को कोई कार्य नहीं कर सकते

292
00:24:48,280 --> 00:24:52,800
आप कुछ बोलते नहीं है मगर मगर अपनी परिभाषा में जो बात करते

293
00:24:52,800 --> 00:24:58,000
हैं तो प्रभु वही है जो सब कुछ कर सकते हैं जी

294
00:24:58,000 --> 00:25:02,440
तो अब जब वो शिव बने तो उसके बाद वापस कृष्ण क्यों नहीं बन पा रहे हैं

295
00:25:02,440 --> 00:25:07,040
शिव वो नहीं बने शिव शिव उनका एक अंश है तो

296
00:25:07,040 --> 00:25:11,160
यानी हां इसको थोड़ा मैं समझ लू अच्छा है आपने य बात बोली कि शिव

297
00:25:11,160 --> 00:25:15,160
उनका एक अंश है तो यानी कि उनके उनका

298
00:25:15,160 --> 00:25:19,320
कोई एक हिस्सा अगर उनसे अलग हो जाता है एक मुझे

299
00:25:19,320 --> 00:25:23,440
पूरा करने दीजिए मुझे पूरा करने दीजिए मुझे पूरा करने दीजिए

300
00:25:23,440 --> 00:25:27,800
मुझे पूरा करने दीजिए मुझे पूरा करने दीजिए आप पूरा नहीं करने देंगे

301
00:25:27,800 --> 00:25:32,040
उन 64 गुण है पूरा नहीं करने देंगे आप पूरा नहीं करने

302
00:25:32,040 --> 00:25:34,160
देंगे जी जी जी बोले

303
00:25:34,160 --> 00:25:38,240
बोले तो जब उनका कोई एक हिस्सा उनसे अलग हो जाता है तो वह

304
00:25:38,240 --> 00:25:42,360
अपने उस कण में वो इतना सा हिस्सा है मान लीजिए उस कण

305
00:25:42,360 --> 00:25:46,520
में वह पूर्ण नहीं है क्या उनको वो तभी तक पूर्ण है जब तक

306
00:25:46,520 --> 00:25:51,200
वह पूरे रहेंगे उनका अगर वह अंश अलग हो जाएगा तो उस अंश में

307
00:25:51,200 --> 00:25:55,600
उस अंश में वो पूर्ण नहीं है

308
00:25:55,600 --> 00:25:59,600
क्या जी जी अंश में पूर्ण नहीं है तभी तो वो उनका अंश

309
00:25:59,600 --> 00:26:03,600
है अगर वो पूर्ण होते अंश में पूर्ण नहीं है इसका मतलब आप ये

310
00:26:03,600 --> 00:26:07,600
कह रहे हैं कि जो ईश्वर है वो अपने अंश में पूर्ण नहीं हो

311
00:26:07,600 --> 00:26:11,800
सकता पूर्ण हो सकता है पर वह उन्होंने अपना पूर्ण रूप

312
00:26:11,800 --> 00:26:15,840
दिया नहीं उस अंश को जैसे मतलब ये आप कह

313
00:26:15,840 --> 00:26:19,840
रहे कि ईश्वर की इच्छा पर निर्भर है कि वो अगर अपने अंश को पूर्ण

314
00:26:19,840 --> 00:26:24,600
दे तो वो पूर्ण होगा नहीं देंगे तो नहीं होगा इच्छा पर है ना जी

315
00:26:24,600 --> 00:26:28,840
तो फिर तो इसका मतलब इसको छोड़ दीजिए जब उनकी इच्छा तो वो तो चाहे जो करें

316
00:26:28,840 --> 00:26:32,960
वो देंगे पूर्णता नहीं देंगे फिर आप वादित क्यों कर रहे हैं कि वो नहीं कर सकते

317
00:26:32,960 --> 00:26:37,000
ऐसा कहीं प्रमाण है कि उन्होंने ये किया किन्ने

318
00:26:37,000 --> 00:26:41,040
वो नहीं देते शिव जीी को अपनी संपूर्ण शक्तियां ऐसा कुछ लिखा है

319
00:26:41,040 --> 00:26:46,000
शिवजी जब उनसे निकलते हैं तो शिवजी को अपनी संपूर्ण

320
00:26:46,000 --> 00:26:49,360
हा प्रभु जी बहुत सारे प्रमाण है जहां पर शिव जी का

321
00:26:49,360 --> 00:26:53,760
और कृष्ण भगवान का युद्ध हुआ है वहां आप देख सकते हो और सबसे

322
00:26:53,760 --> 00:26:57,840
सबसे मेन चीज जो परब्रह्म होता है वो कभी मोह माया

323
00:26:57,840 --> 00:27:01,960
नहीं पड़ता पर जब विष्णु भगवान ने मोहिनी अवतार लिया था तब

324
00:27:01,960 --> 00:27:06,160
शिवजी भी मोह मोह बस उनमें फस गए थे और

325
00:27:06,160 --> 00:27:10,800
उन्हें विष्णु भगवान ने बोला कि आप समझो आप तो वो

326
00:27:10,800 --> 00:27:15,280
त्रि देव में से एक हो आप इस मोहमाया के चक्कर में क्यों फस

327
00:27:15,280 --> 00:27:19,680
हो आपने बहुत अच्छा किया ये आपने बहुत अच्छा किया

328
00:27:19,680 --> 00:27:24,480
एक मिनट आप होता तो वो मोहमाया में फसता है क्या

329
00:27:24,480 --> 00:27:28,840
अब ठीक है अब आपने बहुत अच्छा किया ये कह कर के

330
00:27:28,840 --> 00:27:32,920
इसका अर्थ यह है कि परब्रह्म जो है मोह माया में नहीं फस सकता

331
00:27:32,920 --> 00:27:37,200
बाधित हो गया ना जी सीमा लग गई ना जी जी जी

332
00:27:37,200 --> 00:27:41,360
जी जी बाधित हो गया जी जी मोह माया में नहीं फस

333
00:27:41,360 --> 00:27:45,400
सकता ना जी जी बोलिए बोलिए अरे मैं आपसे पूछ

334
00:27:45,400 --> 00:27:50,000
रहा हूं एक सीमा आ गई ना कि परब्रह्म जो है मोह माया में नहीं फस

335
00:27:50,000 --> 00:27:54,120
सकता ये क्या है ये कोई सीमा ये सीमा अच्छा ये सीमा

336
00:27:54,120 --> 00:27:54,680
नहीं है ये क्या

337
00:27:54,680 --> 00:27:59,000
है ये ये नियम नहीं है मोहमाया

338
00:27:59,000 --> 00:28:03,000
आपसे पूछ रहा हूं ये नियम नहीं है क्या ये

339
00:28:03,000 --> 00:28:07,800
नियम नहीं है क्या लिए कोई सीमा ही नहीं

340
00:28:07,800 --> 00:28:11,920
है ठीक है ये नियम है कि नहीं मैं पूछ रहा हूं य नियम

341
00:28:11,920 --> 00:28:16,280
है कि नहीं क्या है ये जो आप बोल रहे हैं ऐसे ही कुछ दिन पहले

342
00:28:16,280 --> 00:28:20,440
अब मैं एक बात बता दूं ऐसे ही कुछ दिन पहले हमारी

343
00:28:20,440 --> 00:28:24,440
कबीर पंथिया से बात हुई कबीर पंयो से हमने पूछा क्या आपका

344
00:28:24,440 --> 00:28:28,600
ईश्वर सब कुछ कर सकता है बोले हां मैंने पूछा क्या वो माता के गर्भ से

345
00:28:28,600 --> 00:28:32,720
जन्म ले सकता है बोले ना मैंने बोलाय तो नियम लग गया तो पता है वो क्या बोले

346
00:28:32,720 --> 00:28:37,120
यह नियम नहीं है तो क्या है ये क्यों बोल रहे हो जब नियम नहीं है तो

347
00:28:37,120 --> 00:28:41,240
अगर यह कुछ है ही नहीं इसका अस्तित्व नहीं है तो बोल क्यों रहे हो यह

348
00:28:41,240 --> 00:28:45,480
नियम ही तो है कि परब्रह्म माया से प्रभावित

349
00:28:45,480 --> 00:28:49,720
नहीं हो सकता क्या है ये चलिए वो दर्शक देख लेंगे आपका कहना

350
00:28:49,720 --> 00:28:53,720
है परब्रह्म माया से प्रभावित नहीं हो सकता परब्रह्म अपने अंश

351
00:28:53,720 --> 00:28:58,400
में पूर्ण नहीं हो सकता मगर फिर भी वो सर्वशक्तिमान है

352
00:28:58,400 --> 00:29:02,880
जी क्योंकि परब्रह्म ईश्वर की जो हमारी डेफिनेशन है

353
00:29:02,880 --> 00:29:07,200
अब मैं बता दूं ईश्वर की जो हमारी डेफिनेशन है वह है पहला

354
00:29:07,200 --> 00:29:11,200
नंबर है अस्तो मा सद गमय तमसो मा ज्योतिर

355
00:29:11,200 --> 00:29:15,280
गमय मृत मा मतम गमय इसका अर्थ है

356
00:29:15,280 --> 00:29:20,120
अगर भाव में जाएंगे तो दुनिया के प्रत्येक प्राणी के अंदर

357
00:29:20,120 --> 00:29:24,680
सत चित आनंद की चा है और अगर इसको देखेंगे

358
00:29:24,680 --> 00:29:27,040
तो वह ढूंढ रहा है सब कुछ कर

359
00:29:27,040 --> 00:29:31,080
सक ने वाले को सब कुछ किसी भी तरीके की बाधा से

360
00:29:31,080 --> 00:29:35,400
रहित तो इस चाह का जो सब्जेक्ट होता है जैसे भू भूख का विषय

361
00:29:35,400 --> 00:29:39,560
क्या होता है खाना जो भूख को मिटा सके तो सत चित आनंद की

362
00:29:39,560 --> 00:29:44,400
चाह का जो विषय होता है वह होता है सच्चिदानंद स्वरूप परमेश्वर

363
00:29:44,400 --> 00:29:48,480
अगर हमारा जो परमेश्वर है जिसको हम परमेश्वर कह रहे हैं वह सब

364
00:29:48,480 --> 00:29:52,920
कुछ कर सकने वाला नहीं है तो वह मनुष्य की चाह का विषय नहीं है

365
00:29:52,920 --> 00:29:57,360
इसका अर्थ है कि ऐसे ऐसे ईश्वर को मनुष्य अपने

366
00:29:57,360 --> 00:30:01,840
विकल्प के अनुसार या तो प्राप्त करना चाहेगा या तो प्राप्त करना नहीं चाहेगा

367
00:30:01,840 --> 00:30:05,920
तो नास्तिकों के सामने इस ईश्वर का अस्तित्व सिद्ध नहीं कर

368
00:30:05,920 --> 00:30:09,920
सकते जो कहेगा कि मैं माया से प्रभावित नहीं हो सकता समझने

369
00:30:09,920 --> 00:30:14,000
का प्रयास करिएगा हम क्यों करते हैं क्यों क्यों ईश्वर का सर्व शक्तिमान सिद्ध

370
00:30:14,000 --> 00:30:18,040
होना आवश्यक है नास्तिकों के सामने इस ईश्वर का अस्तित्व

371
00:30:18,040 --> 00:30:22,160
सिद्ध हम नहीं कर पाएंगे जो खुद ही कह रहा है कि मैं माया से प्रभावित

372
00:30:22,160 --> 00:30:26,240
नहीं हो सकता जब नहीं कर पाएंगे तो क्या है धर्मेन हीना

373
00:30:26,240 --> 00:30:30,680
पशु भी समाना सामने खड़ी हुई तीन स्त्रियों में से

374
00:30:30,680 --> 00:30:34,920
कौन माता है कौन बहन है कौन पिता है यह हमें धर्म से पता लगता

375
00:30:34,920 --> 00:30:39,040
है और धर्म क्या है सच्चिदानंद स्वरूप परमेश्वर

376
00:30:39,040 --> 00:30:42,040
को प्राप्त करवाने वाली मर्यादा का नाम धर्म

377
00:30:42,040 --> 00:30:46,080
है तो जब सच्चिदानंद स्वरूप परमेश्वर सच्चिदानंद स्वरूप हो ही नहीं

378
00:30:46,080 --> 00:30:50,160
रहा है वह अबाध हो ही नहीं रहा है तो फिर उसको प्राप्त करने

379
00:30:50,160 --> 00:30:54,240
की कोई प्रयास क्यों करेगा जो मर्यादाओं का आलंबन ले तो जब मर्यादाओं

380
00:30:54,240 --> 00:30:58,240
का आलंबन नहीं लेगा तो उसके पास धर्म होने का कोई आधार नहीं बचा

381
00:30:58,240 --> 00:31:02,440
तो हमारा जो ईश्वर है तो वो है मनुष्य की इस चाह का विषय

382
00:31:02,440 --> 00:31:06,720
असतो मा सद्गमय तमसो मा जोगम मृत्य मतम गम इसका

383
00:31:06,720 --> 00:31:10,880
विषय है सत्यम ज्ञानम अनंतम ब्रम ईश्वर किसी

384
00:31:10,880 --> 00:31:15,120
भी प्रकार के नियम के नीचे नहीं है वह सभी नियमों को बनाने वाला

385
00:31:15,120 --> 00:31:19,160
सर्व नियामक है इसीलिए अगर कोई कहे कि ईश्वर जन्म

386
00:31:19,160 --> 00:31:23,240
नहीं ले सकता तो वो राम कृष्ण आदि के रूप में जन्म लेकर दिखाएगा अगर कोई कहे

387
00:31:23,240 --> 00:31:27,320
कि वो अपनी देह का नाश नहीं कर सकता तो अपनी देह का नाश भी करके दिखाएगा

388
00:31:27,320 --> 00:31:31,480
अगर कोई कहे कि वह कुर्म नहीं बन सकता वह कुर्म अवतार लेगा वरा नहीं बन सकता वरा

389
00:31:31,480 --> 00:31:35,640
अवतार लेगा कोई कहे वह वामन नहीं बन सकता मत्स नहीं बन सकता

390
00:31:35,640 --> 00:31:39,680
वो सारे अवतार ले कोई कहे कि वो आधा जानवर आधा इंसान नहीं बन सकता वो वो भी बन

391
00:31:39,680 --> 00:31:44,360
के दिखाएगा कोई कहे कि वो झूठ नहीं बोल सकता वो कृष्ण बनेगा

392
00:31:44,360 --> 00:31:48,400
कोई कहे कि वो छल नहीं कर सकता वो मोहिनी बनेगा कोई कहे कि वो

393
00:31:48,400 --> 00:31:52,480
रा वो सच नहीं बोल सकता तो वो राम बनेगा यह है ईश्वर वो

394
00:31:52,480 --> 00:31:56,720
हर उस बाधा को तोड़ सकता है जो एक मनुष्य सोच सकता है इसका अर्थ

395
00:31:56,720 --> 00:31:57,720
क्या हुआ

396
00:31:57,720 --> 00:32:01,880
कि दुनिया में किसी भी कार्य के कारण हम यह नहीं कह सकते

397
00:32:01,880 --> 00:32:05,960
कि सनातन ईश्वर के सामने एक लाइन लिखी जा सकती है कि दुनिया में कोई

398
00:32:05,960 --> 00:32:10,200
भी कार्य ऐसा है जिसके लिए उसके सामने लिखा जा सके कि ही कांट डू

399
00:32:10,200 --> 00:32:14,600
इट यही लाइन है जो सनातन को सर्वशक्तिमान ईश्वर

400
00:32:14,600 --> 00:32:18,640
प्रदान करती जिसकी वजह से सनातन अलग हो जाता है दुनिया की सारी

401
00:32:18,640 --> 00:32:22,800
सनातन विरोधी विचारधाराओं से अगर केरल स्टोरीज वाली लड़कियों

402
00:32:22,800 --> 00:32:26,800
से जब पूछा जाएगा ये तुम्हारा कैसा ईश्वर है जो रो रहा है य

403
00:32:26,800 --> 00:32:30,920
तु कैसा ईश्वर है जो रास रचा रहा है यह तुम्हारा कैसा ईश्वर है जो अपनी

404
00:32:30,920 --> 00:32:35,160
पत्नी के खो जाने पर वानरों की सहायता ले रहा है तो

405
00:32:35,160 --> 00:32:39,520
हमको उन बच्चियों को केवल एक नियम बताना होगा कि ईश्वर

406
00:32:39,520 --> 00:32:43,520
वही है जो कुछ भी कर सकता है तो

407
00:32:43,520 --> 00:32:47,720
भगवान ने जो विभिन्न प्रकार की लीलाएं की है उसमें उन्होंने बहुत

408
00:32:47,720 --> 00:32:51,840
सारे साइंटिफिक स्पिरिचुअल फिलोस फिकल अर्थ बताए ब्रह्मा सरस्वती विवाह

409
00:32:51,840 --> 00:32:56,080
गणेश जी का सर काटना शिव जी का मोहिनी के प्रति आकर्षित हो जाना भगु

410
00:32:56,080 --> 00:33:00,360
ऋषि की पत्नी का गल काट देना विष्णु जी के कान से मधु

411
00:33:00,360 --> 00:33:04,480
कटप का उत्पन्न हो जाना जिससे विष्णु जी ही नहीं जीत पा रहे हैं

412
00:33:04,480 --> 00:33:09,040
माता को आकर के उनका वध करना यह सब लीलाओं के अपने अपने अर्थ तो है

413
00:33:09,040 --> 00:33:12,960
मगर एक बात भगवान बार-बार हमें बता रहे हैं

414
00:33:12,960 --> 00:33:17,120
ईश्वर वही है जो कुछ भी कर सकता है इसी बात को भगवान

415
00:33:17,120 --> 00:33:21,200
ने भगवत गीता में भी कहा कि वोह लोग जो मुझे मनुष्य देह में देख कर के मेरा

416
00:33:21,200 --> 00:33:25,840
ब्रह्म ब्रह्म तत्व भूल जाते मेरा ब्रह्मवरा वो मूर्ख है

417
00:33:25,840 --> 00:33:29,960
वो बताने आए कि भाई मेरे ऊपर ये मर्यादा लागू नहीं होती मुझे

418
00:33:29,960 --> 00:33:33,000
फिनिश कर

419
00:33:33,000 --> 00:33:37,360
लेनी मिनट मि पूरा करले दीजिए मुझे पूरा करने दीजिए

420
00:33:37,360 --> 00:33:41,400
मुझे पूरा करले दीजिए तो वो आपको इन लीलाओं के माध्यम

421
00:33:41,400 --> 00:33:45,640
से बता रहे हैं मोहिनी के प्रति आकर्षित भी होंगे उनके कान से मधु कटप

422
00:33:45,640 --> 00:33:49,720
भी उत्पन्न होंगे व माता बनके भी रक्त बीज का वध करेंगे ब्रह्मा विष्णु

423
00:33:49,720 --> 00:33:53,720
महेश तीनों एक साइड खड़े हो जाएंगे और काल्या वन से श्री कृष्ण के रूप में

424
00:33:53,720 --> 00:33:57,760
भागेंगे भी रण छोड़ कर के भागेंगे व ये भी करके दिखाएंगे कि

425
00:33:57,760 --> 00:34:02,000
मैं भाग रहा हूं देखो मैं डर भी सकता हूं वह सब कुछ करके दिखाएंगे क्योंकि

426
00:34:02,000 --> 00:34:06,200
ईश्वर वही है जो कुछ भी कर सकता है हमें इसी बात

427
00:34:06,200 --> 00:34:10,400
को हम प्रचारित प्रसारित करने का प्रयास कर रहे हैं आपका ईश्वर कौन है

428
00:34:10,400 --> 00:34:14,520
जो बाधित हो रहा है जो माया से मोहित नहीं हो सकता उस पर

429
00:34:14,520 --> 00:34:18,600
एक बाधा लग रही है और जब जब ईश्वर पर बाधा लगती है तब तब

430
00:34:18,600 --> 00:34:23,160
अधर्मी तंत्र उत्पन्न होते हैं अब बताइए आप

431
00:34:23,160 --> 00:34:28,600
अब मुझे प्रभु जी एक चीज बताओ कि माया में भगवान कब

432
00:34:28,600 --> 00:34:33,400
एक दो मे को तथ ब टेस्ट लेने आए वस्तुनिष्ठता

433
00:34:33,400 --> 00:34:37,480
का नहीं आप सिंक बात करिए आपका सिद्धांत क्या अपने

434
00:34:37,480 --> 00:34:41,520
पॉइंट को रखिए आप जी जी जी मैं वही रख रहा हूं

435
00:34:41,520 --> 00:34:45,560
कि आपने अभी बोला कि भगवान माया में भी फस सकते हैं तो मुझे एक

436
00:34:45,560 --> 00:34:49,560
दो जगह बताइए जहां पर व माया में फसे हो जो परब्रह्म है वह कहां पर

437
00:34:49,560 --> 00:34:53,800
माया में फसे अरे भाई शिवजी के रूप में फस

438
00:34:53,800 --> 00:34:57,960
गए रूप में फस ग माया में परब्रह्म

439
00:34:57,960 --> 00:35:02,280
माया में फसते तो वो वृंदावन से वहां नहीं जाते मथुरा

440
00:35:02,280 --> 00:35:06,440
नहीं जाते वो माया में फस के वही रह जाते क्योंकि उनको मैं आपसे

441
00:35:06,440 --> 00:35:10,600
ये कह रहा हूं कि शिवजी के रूप में वो माया से प्रभावित हो गए अब बताइए

442
00:35:10,600 --> 00:35:14,640
लीला करके दिखा दी मगर इसका अर्थ ये नहीं है कि ये मान लिया जाए कि वो

443
00:35:14,640 --> 00:35:18,720
जो है उनसे अलग हो गए उन्होंने लीला करके भाई शास्त्रों

444
00:35:18,720 --> 00:35:23,400
में तो ये भी वर्णन है कि राक्षसों ने ब्रह्मा जी के साथ दुष्कर्म किया है अब

445
00:35:23,400 --> 00:35:27,560
बताइए कौन से साथ ब्रह्मा जी के साथ दुष्कर्म हुआ है तो इसका अर्थ

446
00:35:27,560 --> 00:35:31,680
क्या है ब्रह्मा जी इतने ग उनके साथ दुष्कर्म हो जाए भगवान य

447
00:35:31,680 --> 00:35:35,800
जो पटांग लीलाए है इसको करके स्ल और

448
00:35:35,800 --> 00:35:38,360
तरह तरह के अर्थ तो देते हैं परंतु

449
00:35:38,360 --> 00:35:42,520
एक अर्थ व बारबार दे रहे हैं कि ईश्वर वही है जो कुछ

450
00:35:42,520 --> 00:35:46,520
भी कर सकता है चलिए अब य वाला टॉपिक

451
00:35:46,520 --> 00:35:51,600
आपने स्वीकार कर लिया कि यदि ईश्वर ईश्वर

452
00:35:51,600 --> 00:35:55,840
आपने कौन से शास्त्र में ब्र जी के साथ दुष्कर्म हुआ है

453
00:35:55,840 --> 00:36:00,000
मैं भी जरा देख ल प्रभु जी मुझे चलिए अब दिखा देता हूं जी

454
00:36:00,000 --> 00:36:06,000
जी

455
00:36:25,720 --> 00:36:31,720
जी

456
00:36:45,320 --> 00:36:51,280
यह वैसे यह हेडिंग देख रहे

457
00:36:51,280 --> 00:36:55,360
हैं साइड में कर थ राइट में राइट में करिए

458
00:36:55,360 --> 00:36:59,480
राइट में प्रभु जी ये अरे

459
00:36:59,480 --> 00:37:03,720
राइट में करो प्रभु जी लेफ्ट में नहीं राइट में आपका राइट

460
00:37:03,720 --> 00:37:07,720
ट मेरा राइट अब

461
00:37:07,720 --> 00:37:11,760
दिखा थोड़ा इधर करो अभी ददा पढ़ लिया से

462
00:37:11,760 --> 00:37:15,840
आगे इधर करो थोड़ा लेफ्ट में करो सही से दिख नहीं रहा प्रभु जी कैमरे में

463
00:37:15,840 --> 00:37:19,840
सही से लगाओ कोई बात नहीं आप बाद में पढ़ लीजिएगा

464
00:37:19,840 --> 00:37:24,400
ये बुक का नाम है बाद में पढ़ाऊंगा मैं आपको और

465
00:37:24,400 --> 00:37:30,400
शलोक क्रमांक दे रहा हूं आपको पेज नंबर ओपन कर हा 433 नाम

466
00:37:41,120 --> 00:37:45,400
बताओ इसका वैदिक स्वरूप भी है श्रीमद् भागवत

467
00:37:45,400 --> 00:37:50,480
में तीसरा स्कंध 20वां अध्याय 26

468
00:37:50,480 --> 00:37:55,240
से यह देखिए श्रीमद् भागवत का श्लोक है

469
00:37:55,240 --> 00:38:01,240
दिख रहा है श्लोक क्रमांक दिया गया

470
00:38:03,000 --> 00:38:07,200
है बाकी मैं और दे दूंगा आपको मैसेज कर दूंगा

471
00:38:07,200 --> 00:38:12,080
श्रीमद् भागवत का है यह ठीक है अब चलिए आगे चले

472
00:38:12,080 --> 00:38:16,960
अब या हो गया और कुछ आपको प्रूफ करना है

473
00:38:16,960 --> 00:38:22,960
आपकी आवाज नहीं आ

474
00:38:25,520 --> 00:38:31,520
रही आवाज नहीं आ रही

475
00:38:39,080 --> 00:38:43,160
आपकी आप ऐसा करिए एग्जिट हो जाइए और दोबारा

476
00:38:43,160 --> 00:38:47,160
से हम आपको ले लेंगे अभी इनको ले लेते हैं जिष्णु

477
00:38:47,160 --> 00:38:51,880
शर्मा जी को ठीक है आप पहले

478
00:38:51,880 --> 00:38:56,640
ये ये तो क्लियर कर लो ये तो क्लियर कर लो कि कौन से

479
00:38:56,640 --> 00:39:00,800
पुराण कौन सा है और श्रीमद

480
00:39:00,800 --> 00:39:04,880
भागवत बताया तो आपको जी जी जी आप एक बारी दिखाओगे

481
00:39:04,880 --> 00:39:09,440
पढ़ के बताओगे मेरे को क्या लिखा गया है तो आप पढ़ लीजिएगा ना बाद में भाई

482
00:39:09,440 --> 00:39:14,040
इस पर क्या आपको आपको विश्वास नहीं आप पढ़ लीजिएगा आराम से उसको

483
00:39:14,040 --> 00:39:18,520
आपने वैसे भी कहा मैंने बहुत सारे अभी ग्रंथ नहीं पढ़े पढ़ लीजिएगा

484
00:39:18,520 --> 00:39:22,600
मैंने यहां डाला है अगर ऐसा कुछ होगा तो अपने प अनाउंस करेंगे कि उस दिन हमने गलत

485
00:39:22,600 --> 00:39:26,680
बोल दिया था ठीक है ये जो माधवाचार्य शास्त्री श्री संप्रदाय

486
00:39:26,680 --> 00:39:30,720
रामन चार संप्रदाय उनकी ब उस

487
00:39:30,720 --> 00:39:34,960
उने कहा प भागवत लिखा है भागवत कहां पे है यह भागवत

488
00:39:34,960 --> 00:39:39,040
तो है नहीं अरे भाई यह एक ये

489
00:39:39,040 --> 00:39:40,520
एक संकलन है जिसमें

490
00:39:40,520 --> 00:39:44,560
की जितने भी पौराणिक आक्षेप लगाते हैं ना आर्य समाजी पुराणों पर

491
00:39:44,560 --> 00:39:48,880
आक्षेप लगाते हैं उसका जवाब दिया है रामानुजाचार्य संप्रदाय के

492
00:39:48,880 --> 00:39:53,320
आचार्य इन्होंने जवाब दिए सारे आक्षेप के तो इसमें

493
00:39:53,320 --> 00:39:57,360
वो सारी घटनाए है शिव मोहिनी प्रकरण भी है गणेश जी का सर

494
00:39:57,360 --> 00:40:01,520
भी है जितनी भी पौराणिक घटनाएं हैं जो आक्षेप लगाए जाते

495
00:40:01,520 --> 00:40:05,720
हैं खास विशेष तौर पर आर्य समाज यों के द्वारा पुराणों पर उसका

496
00:40:05,720 --> 00:40:09,800
इसमें उत्तर है आप ले लीजिएगा अच्छी अच्छा ग्रंथ हैय आप

497
00:40:09,800 --> 00:40:13,920
आप आप मेरे को वो पूरा प्रसंग पढ़ के बताओ ना थोड़ा लोग भी जाने

498
00:40:13,920 --> 00:40:17,960
कि हां ऐसा है नहीं वो मैं निर्णय करूंगा कि अभी क्या करना है कौन सा

499
00:40:17,960 --> 00:40:22,080
प्रसंग पढ़ के बताना है आपने इच्छा प्रकट की है मगर फिलहाल मैं

500
00:40:22,080 --> 00:40:26,360
इसमें नहीं हूं कि उस प्रसंग पर बहुत ज्यादा समय बिताऊ अच्छा

501
00:40:26,360 --> 00:40:30,400
अभी आप अभी अभी अभी एक निर्णय आ रहा है सामने कि आपने

502
00:40:30,400 --> 00:40:34,400
ये माना आपने ये माना कि जो परब्रह्म है

503
00:40:34,400 --> 00:40:38,600
वो जो है माया से प्रभावित होकर नहीं दिखा सकता दिखा

504
00:40:38,600 --> 00:40:42,960
सकता है पर वो प्रभावित हुआ नहीं है ऐसा कहीं भी वर्णन नहीं है

505
00:40:42,960 --> 00:40:47,240
अरे भाई तो शिव जीी के रूप में कौन प्रभावित हो रहा है शिव

506
00:40:47,240 --> 00:40:51,400
जी उनके अंश है वो मोह माया में अंश के रूप में अंश के रूप

507
00:40:51,400 --> 00:40:55,400
में वो सर्वशक्तिमान नहीं रहता क्या मैं पूछ रहा हूं अंश के

508
00:40:55,400 --> 00:40:56,720
रूप

509
00:40:56,720 --> 00:41:01,280
आप बोललो फिर पूछूंगा हा जी क्या आपने राम जी को देखा मोहमाया

510
00:41:01,280 --> 00:41:06,040
में फसते हुए क्या वो घर पर रुके थे इसको भी समझ लीजिए

511
00:41:06,040 --> 00:41:10,160
ईश्वर बोल लीजिए ईश्वर वो है जो सब कुछ करता है ठीक

512
00:41:10,160 --> 00:41:14,200
है अब इसमें आगे देखे तो जैसे हनुमान जी हैं

513
00:41:14,200 --> 00:41:18,240
हनुमान जी को हम लोग ब्रह्मचारी कहते हैं इसका अर्थ है कि वह स्त्री को

514
00:41:18,240 --> 00:41:22,320
नहीं छूते स्त्रियों से दूर रहते हैं मगर जब भगवान ने विराट स्वरूप लिया तो

515
00:41:22,320 --> 00:41:26,800
उनका एक सर हनुमान जी का था कि नहीं था कृष्ण भगवान ने

516
00:41:26,800 --> 00:41:30,800
स्त्रियों को छुआ था कि नहीं छुआ था इसका अर्थ क्या हुआ व्यवहार में

517
00:41:30,800 --> 00:41:34,840
बजरंग बली ब्रह्मचारी है परमार्थ में बजरंग बली कृष्ण भी

518
00:41:34,840 --> 00:41:39,160
है है ना तो क्या हुआ इसका अर्थ इसका अर्थ ये है कि ईश्वर

519
00:41:39,160 --> 00:41:43,360
तो सब कुछ कर रहा है सुनिए ईश्वर तो सब कुछ कर रहा है मगर

520
00:41:43,360 --> 00:41:47,360
हम ईश्वर को हनुमान तब मानेंगे हनुमान के रूप में तब ग्रहण

521
00:41:47,360 --> 00:41:52,160
करेंगे जब वोह ब्रह्मचारी हो राम जी को हम राम जी तब मानेंगे राम

522
00:41:52,160 --> 00:41:56,560
जी को राम जी हम तब मानेंगे जब वो एक ही विवाह करे

523
00:41:56,560 --> 00:42:00,840
श्री कृष्ण को हम श्री कृष्ण तभी मानेंगे जिसने रुक्मिणी माता से विवाह

524
00:42:00,840 --> 00:42:05,120
किया होगा जिसने राधा जी के साथ रासलीला प्रसंग किए होंगे उनको हम श्री कृष्ण

525
00:42:05,120 --> 00:42:09,320
जिसने गीता का ज्ञान दिया होगा उसको हम श्री कृष्ण मानेंगे तो ये हमारी

526
00:42:09,320 --> 00:42:11,880
सीमा है ईश्वर सीमित नहीं है हमारी

527
00:42:11,880 --> 00:42:16,200
सीमा है कि हम अपने वाल्मीकि रामायण महाभारत इनसे सीमित

528
00:42:16,200 --> 00:42:20,240
है कि हम किसी को भी हनुमान तब मानेंगे अब जैसे भगवान ने तो

529
00:42:20,240 --> 00:42:24,640
हनुमान का अवतार दोबारा ले लिया वो आके विवाह कर ले वो कहे मैं हनुमान

530
00:42:24,640 --> 00:42:28,640
हूं सुन तो लीजिए वो कहे वो कहेंगे मैं

531
00:42:28,640 --> 00:42:32,880
हनुमान हूं पर हम हनुमान उन्हे मानेंगे नहीं पर ब्रह्म के

532
00:42:32,880 --> 00:42:37,480
जो परब्रह्म के जो मूल 10 अवतार है उनमें से जो ब्रह्मचारी

533
00:42:37,480 --> 00:42:41,680
है वो परशुराम भगवान मैं आपसे ये पूछ रहा हूं जब उन्होंने 10

534
00:42:41,680 --> 00:42:45,680
जब उन्होंने विराट स्वरूप दिखाया था उसमें से एक स्वरूप एक मुख उनका हनुमान

535
00:42:45,680 --> 00:42:49,760
जी का था कि नहीं उसमें तो सूर्यदेव भी थे उसम तो

536
00:42:49,760 --> 00:42:53,920
चंद्र देव मतलब कि उस कृष्ण के

537
00:42:53,920 --> 00:42:58,160
कृष्ण के रूप में बजरंग बली ने स्त्रियों को छू लिया ना मगर

538
00:42:58,160 --> 00:43:02,360
वो परमार्थ है व्यवहार में बजरंग बली ब्रह्मचारी है

539
00:43:02,360 --> 00:43:05,720
व्यवहार और परमार्थ का अंतर

540
00:43:05,720 --> 00:43:10,200
है अंश के भी अंश है प्रभु जी आप

541
00:43:10,200 --> 00:43:14,240
देखिए आप मुझसे प्रमाण मांग रहे थे हमने बात की अब अब जो है

542
00:43:14,240 --> 00:43:18,480
उस आ जाते हैं अब उस आ जाते तर्क प प्रमाण प्रमाणों

543
00:43:18,480 --> 00:43:23,120
प हमने बात की अब तर्क प आ जाते हैं सीधी सीधी सी बात बताइए

544
00:43:23,120 --> 00:43:26,960
क्या श्वर सारे बोलने का मौका तो दे

545
00:43:26,960 --> 00:43:31,040
नहीं रहे हो आप ही बोल रहे हो आप बोलो फिर आप जो बताना चाहते हो

546
00:43:31,040 --> 00:43:35,720
आप को मौका दे रहा हूं आप बोलो बताओ क्या बोलना है बताइए आप

547
00:43:35,720 --> 00:43:39,800
मैं वही बोल रहा हूं कि जो भगवान के 10 अवतार जो परब्रह्म

548
00:43:39,800 --> 00:43:43,920
के 10 अवतार है वो अलग है वो जो शिवजी उनके अंश है उनके

549
00:43:43,920 --> 00:43:47,920
भी अंश है हनुमान जी आपका पूरा हो जाए जब आपका

550
00:43:47,920 --> 00:43:50,720
पूरा हो जाए तो मुझे

551
00:43:50,720 --> 00:43:54,960
बताइएगा सुन अच्छा मैं आप मैं आपसे कुछ प्रश्न करना

552
00:43:54,960 --> 00:43:59,160
चाहता हूं क्या अभी अभी जो आपने बोला उसके बाद मैं उस पर एक बात कहना

553
00:43:59,160 --> 00:44:03,800
चाहता हूं उसके बाद आप पूछिए जो पूछना है ओके

554
00:44:03,800 --> 00:44:07,960
जैसे ब्रह्मचारी का आपने वो किया है बताया है कि

555
00:44:07,960 --> 00:44:12,120
हनुमान जी आपने जो अभी जो ईश्वर सर्व शक्तिमान है जो विषय चल रहा है उस

556
00:44:12,120 --> 00:44:16,800
पर अपनी बात जब आपकी खत्म हो जाए तो मुझे बताइएगा मुझे उस पर बात बोलनी है

557
00:44:16,800 --> 00:44:21,040
मतलब बोलने तो दो मुझे पहले तभी तो मैं बोलू अभी आप बीच में दूसरा टॉपिक

558
00:44:21,040 --> 00:44:25,040
लाने लगे थे इसलिए मैं क्लियर कर रहा हूं अच्छा परब्रह्म

559
00:44:25,040 --> 00:44:29,120
की मैं बातें कर रहा हूं परब्रह्म जो है वो श्री कृष्ण है उन्हीं

560
00:44:29,120 --> 00:44:33,280
से सब कुछ आता है वो जो शिव जी है वो उनके एक अंश

561
00:44:33,280 --> 00:44:37,920
मात्र है है वो भी आते वही उसी में आते हैं वो भी मुक्तिदाता

562
00:44:37,920 --> 00:44:41,920
है यही मैं बात आपसे पहले कहना चाह रहा था कि गरुण

563
00:44:41,920 --> 00:44:42,420
प्राण

564
00:44:42,240 --> 00:44:46,320
में यह वर्णन आता है कि जब हम शिव जी की भी भक्ति करते हैं तब भी

565
00:44:46,320 --> 00:44:50,480
हमें मोक्ष प्राप्त होता है उसी बात को मैं आपसे पहले कहना

566
00:44:50,480 --> 00:44:54,720
चाह रहा था पर आप सुन ही नहीं रहे हो आप अपना बोले जा रहे हो वो उनके

567
00:44:54,720 --> 00:44:59,040
अंश है उनकी पूजा करके भी मुक्ति मिल सकती है ये भी वर्णन

568
00:44:59,040 --> 00:45:04,560
है यानी कि उनको उनको भगवान समझने वाले लोग पापी और मूर्ख नहीं

569
00:45:04,560 --> 00:45:08,600
है नहीं भगवान तो एक ही है वो तो उनका अंश है भगवान

570
00:45:08,600 --> 00:45:12,880
का मैं पूछ रहा हूं उनकी पूजा करने वाले उनको भगवान समझने वाले पापी

571
00:45:12,880 --> 00:45:16,920
और मूर्ख नहीं है नहीं है तो वो भागवत का

572
00:45:16,920 --> 00:45:21,000
जो आपका श्लोक है न 15 25 उसका क्या करें कौन से

573
00:45:21,000 --> 00:45:25,320
भागवत का ये वो करता है ना मैटर करता

574
00:45:25,320 --> 00:45:29,560
मैं तो न से नहीं हू प्रभु जी मैंने तो बोला ही नहीं तो आप उससे समर्थन नहीं करते

575
00:45:29,560 --> 00:45:33,600
मैं पूछ रहा हूं आपसे आप उसका समर्थन नहीं करते मैं तो

576
00:45:33,600 --> 00:45:38,040
सबका समर्थन करता हूं मैं आपसे पूछ रहा हूं उसकी जो ये लाइन है उसका समर्थन

577
00:45:38,040 --> 00:45:42,120
आप करते हैं कि नहीं श्रीमद् भागवत में 3 1525 में लिखा

578
00:45:42,120 --> 00:45:46,280
है कि शिव दुर्गा काली को कृष्ण के समान भगवान समझने वाले

579
00:45:46,280 --> 00:45:50,520
पापी और मूर्ख हैं नहीं प्रभु जी अगर

580
00:45:50,520 --> 00:45:54,680
उनको समान नहीं माना जा सकता जैसे एक पिता को पुत्र के समान नहीं

581
00:45:54,680 --> 00:45:57,320
माना जा सकता वैसे ही परब्रह्म को

582
00:45:57,320 --> 00:46:01,400
उनके अंश के बराबर समान नहीं माना जा सकता

583
00:46:01,400 --> 00:46:05,680
तो तो ठीक है तो इसका अर्थ यह है कि आप यह कह रहे हैं कि जो

584
00:46:05,680 --> 00:46:09,680
जब अंश अलग होता है ईश्वर से उस अंश में

585
00:46:09,680 --> 00:46:14,960
वह सर्वशक्तिमान नहीं हो सकता सर्व

586
00:46:14,960 --> 00:46:19,080
बाकी शक्तिमान है पर पर ब्रह्म के बराबर श्वर के समान

587
00:46:19,080 --> 00:46:23,120
सर्वशक्तिमान नहीं हो सकता ना नहीं उनमें कुछ गुण

588
00:46:23,120 --> 00:46:27,520
कम होते 64 गुण है 6 गु य है कि जब ईश्वर

589
00:46:27,520 --> 00:46:31,720
अपना अंश अलग करेगा तो उसमें वह पूर्ण नहीं हो

590
00:46:31,720 --> 00:46:35,880
सकता हो सकता अगर वह चाहे तो तो वह तो कुछ

591
00:46:35,880 --> 00:46:40,440
भी चाह सकता है वह तो शास्त्रों का विरोध भी चाह सकता है

592
00:46:40,440 --> 00:46:44,560
अगर आप यह कहो कि विष्णु भगवान ने य सुनो अगर आप यह कहो कि विष्णु

593
00:46:44,560 --> 00:46:48,640
भगवान ने स्वयं यह कहा है कि मैं नहीं मान मैं जो है शिव जी को सारी शक्तियां नहीं

594
00:46:48,640 --> 00:46:52,960
देता हूं वह अपनी वाणी से पलट भी सकते हैं ईश्वर वही है जो किसी भी नियम से वादित

595
00:46:52,960 --> 00:46:57,720
नहीं है यानी कि देखिए उन्होंने उनकी वाणी है भगवत

596
00:46:57,720 --> 00:47:01,720
गीता मिनट एक मिनट उनकी वाणी है भगवत गीता

597
00:47:01,720 --> 00:47:05,920
एक मिनट उनकी वाणी पूरा बोलने नहीं देते हो बीच में शुरू

598
00:47:05,920 --> 00:47:10,600
हो जाते हो मैंने आपको बोलने दिया कि नहीं पूरा एक मिनट

599
00:47:10,600 --> 00:47:12,360
मैंने आपको पूरा बोलने दिया कि नहीं

600
00:47:12,360 --> 00:47:16,600
अभी मुझे बोलने दीजिए हा तो बताना मैं आपसे बोलूंगा आप बोलो

601
00:47:16,600 --> 00:47:21,240
मैं आपसे बोलूंगा कि अब आप बोलो मैं आपसे बोलूंगा जी जी जीकी

602
00:47:21,240 --> 00:47:25,440
वाणी है भगवत गीता उसके अलावा उन्होंने बुद्ध अवतार

603
00:47:25,440 --> 00:47:29,520
लिया और वेदों का विरोध किया गीता का विरोध कर दिया किया कि

604
00:47:29,520 --> 00:47:33,560
नहीं किया अर्थात ईश्वर अपने कहे से मुकर भी सकता है तो

605
00:47:33,560 --> 00:47:37,600
इसका अर्थ ये है हम यह नहीं कह सकते कि अगर ईश्वर ने भी कह दिया है कि मैं

606
00:47:37,600 --> 00:47:41,600
शिव जी को सारी शक्तियां नहीं दूंगा इसलिए व इसलिए वो शिव

607
00:47:41,600 --> 00:47:45,800
जी सर्वशक्तिमान नहीं है मगर नहीं वह अपनी बात से पलट भी सकते हैं ईश्वर

608
00:47:45,800 --> 00:47:49,880
तो वो है ईश्वर तो हर जगह है ना जहां पर अपराध

609
00:47:49,880 --> 00:47:53,960
भी हो रहा है वहां भी ईश्वर है अपराध नहीं भी हो रहा है पुण्य हो रहा है वहां भी ईश्वर है

610
00:47:53,960 --> 00:47:57,960
ईश्वर तो वो है मैं आपको क्या कह रहा हूं मैं भी तो वही

611
00:47:57,960 --> 00:48:02,120
कह रहा हूं कृष्ण भगवान ने प्रतिज्ञा की थी महाभारत के युद्ध में मैं अस्त्र

612
00:48:02,120 --> 00:48:06,760
शस्त्र नहीं उठाऊंगा 20 में पितामह ने प्रतिज्ञा की थी

613
00:48:06,760 --> 00:48:11,000
आप ये कैसे कह सकते हैं कि जब वो शिव बनाएंगे अपने से तो वो उसको

614
00:48:11,000 --> 00:48:15,920
सर्व शक्तियां नहीं देंगे मैंने तोय बो प्र

615
00:48:15,920 --> 00:48:20,720
मैंने यह बोला कि वो कर सकते हैं वो उनकी इच्छा है

616
00:48:20,720 --> 00:48:25,040
फिर हम ये नहीं कह सकते ना कि शिवजी से कृष्ण नहीं बन सकते

617
00:48:25,040 --> 00:48:27,640
नहीं बन तो बन सकते है ना

618
00:48:27,640 --> 00:48:31,680
बन सकते वो इच्छा

619
00:48:31,680 --> 00:48:36,040
ठीक है देखिए वो जो देख रहे है वो समझ गए आप आप वो मुह से स्वीकार

620
00:48:36,040 --> 00:48:40,120
नहीं करोगे मगर सोचोगे ठीक है आप प्रश्न बोलिए अपनाते वो बन सकते

621
00:48:40,120 --> 00:48:44,160
हैं पर वो नहीं बनेंगे क्योंकि वो उनका स्वरूप है ही नहीं कि वो वहा

622
00:48:44,160 --> 00:48:48,160
से पूर्ण होकर वापस आए क्योंकि उन जितने गुण है

623
00:48:48,160 --> 00:48:52,400
वो उतने गुणों से रहे देखने वालो को पता लगेगा कि आपके द्वारा पूजित

624
00:48:52,400 --> 00:48:56,440
होने वाला जो ईश्वर है वो बाधित है वो बनने के बाद वो

625
00:48:56,440 --> 00:49:00,520
पूर्णता पूर्ण कृष्ण को नहीं निकाल पा रहा है वो माया से प्रभावित नहीं

626
00:49:00,520 --> 00:49:04,640
हो पा रहा है वो समझेंगे जो आपसे डिस्कशन लाइव इसलिए नहीं किया

627
00:49:04,640 --> 00:49:09,080
कि मैं आज आपका शोधन करूं मगर लोगों को पता चलेगा कि क्यों

628
00:49:09,080 --> 00:49:13,080
किस तरह से ईश्वर को सर्वशक्तिमान सिद्ध किया जा सकता है जब आप यहां

629
00:49:13,080 --> 00:49:17,080
पर सब कुछ होने के बाद ये कहते हैं ना नहीं कर सकते आप कह

630
00:49:17,080 --> 00:49:21,640
भी रहे हैं कि नहीं कर सकते उसके बाद ये भी कह रहे हैं कि ईश्वर सर्वशक्तिमान है

631
00:49:21,640 --> 00:49:25,800
ईश्वर तो परब्रह्म तो श्री कृष्ण है ठीक है श्री कृष्ण ऐसे

632
00:49:25,800 --> 00:49:30,400
ही जो आपसे पिछले वाले आए थे ऐसे ही रट्टा लगाए थे वो भी उनका काट काट के लगाया था

633
00:49:30,400 --> 00:49:35,040
वहां ओके काटोगे यहां प्रभु जी पूरी बात तो डालोगे नहीं तो

634
00:49:35,040 --> 00:49:39,040
ढ़ मिनट की ल में हम दो घंटे का वीडियो नहीं दिखा सकते ना यही तो

635
00:49:39,040 --> 00:49:42,800
बात है आप मेरे पो काटना पड़ेगा काट के लगाना पड़ेगा और

636
00:49:42,800 --> 00:49:47,000
और वो वीडियो भी पूरा का पूरा यहां पर अवेलेबल है जिसको पूरी स पूरा देखना हो

637
00:49:47,000 --> 00:49:51,080
य देख लेगा उसम ऐड करूंगा मैं उसमें से कुछ कट नहीं करूंगा

638
00:49:51,080 --> 00:49:55,480
आप मेरे चैनल पर आओ मैंने आपका चैनल देखा है जिसमें 38 38

639
00:49:55,480 --> 00:49:59,480
4 4 मिनट की वीडियो है आप चाहे तो इसको भी पूरी डाल सकते हो

640
00:49:59,480 --> 00:50:03,560
पर आप नहीं डालोगे क्योंकि आपको भी पता है आप क्यों नहीं डालोगे

641
00:50:03,560 --> 00:50:07,680
किसको पूरी नहीं डालूगा किसको पू ये वीडियो

642
00:50:07,680 --> 00:50:11,800
पूरी डालूंगा पूरी डली हुई है मैंने अभी तक जितनी भी लाइव स्ट्रीम सब पूरी

643
00:50:11,800 --> 00:50:15,880
डली है अभी तो आपने बोला प्रभु जी मैं शर्ट कर करके

644
00:50:15,880 --> 00:50:19,960
डालूंगा कट करना पड़गा नहीं ये आप सुन आप समझते नहीं हो

645
00:50:19,960 --> 00:50:24,560
वो थोड़ा पता नहीं कहां क्या कर रहे हो यह तो डला ही रहेगा

646
00:50:24,560 --> 00:50:28,600
इसके अलावा बनाऊगा इससे इसके अलावा रील बनाई

647
00:50:28,600 --> 00:50:32,880
जाएगी मैं यह कह रहा हूं यह तो डला ही रहेगा मैंने नहीं कहा इसको हटाएंगे रील

648
00:50:32,880 --> 00:50:37,040
इससे निकाल के बनाएंगे क्या मैं आपसे कुछ प्रश्न कर सकता हूं

649
00:50:37,040 --> 00:50:41,800
हा आप बताइए आपका प्रश्न जी प्रभु

650
00:50:41,800 --> 00:50:45,800
वैसे एक बात क्लियर कर दूं ये जो हमने लाइव सेशन रखा

651
00:50:45,800 --> 00:50:50,000
था इस बात पर इस बात पर रखा था कि हमने कोई बात

652
00:50:50,000 --> 00:50:54,240
इस कन से कही एक जिज्ञासु की तरह एक शास्त्रार्थ की तरह

653
00:50:54,240 --> 00:50:58,120
नहीं जिज्ञासु की तरह कुछ प्रश्न रखे स् कन के सामने

654
00:50:58,120 --> 00:51:02,160
कि भाई श प्रभ सुन लीजिए सुन लीजिए

655
00:51:02,160 --> 00:51:06,760
मुझे मुझे पूरा कहने दीजिए पूरा कहने दीजिए मुझे पूरा कहने दीजिए

656
00:51:06,760 --> 00:51:11,200
पूरा नहीं कहने देंगे हमने पूछा शील प्रभुपाद

657
00:51:11,200 --> 00:51:15,520
जी के द्वारा लिखी गई बात को इस कन क्यों बदल रहा है

658
00:51:15,520 --> 00:51:19,920
इसका उत्तर हमें नहीं मिला व आप उनसे पूछिए प्रभु

659
00:51:19,920 --> 00:51:24,640
हा तो आप वहां पर इन बातों का विरोध करने आए थे

660
00:51:24,640 --> 00:51:28,920
हमारा करने आप आए थे और आपने सुनिए आपको

661
00:51:28,920 --> 00:51:33,200
मैंने सुबह एक डिजाइन तैयार करके दिया था जिसको आपने अपनी स्टोरी

662
00:51:33,200 --> 00:51:37,680
पर शेयर किया उसमें आपकी पहचान लिखी हुई थी स्कन डिवटी

663
00:51:37,680 --> 00:51:41,920
उसको आपने अपनी स्टोरी पर शेयर कर दिया उसके बाद आपको किसी ने समझाया

664
00:51:41,920 --> 00:51:46,160
आपके दिमाग में आया पता नहीं क्या सुन लीजिए पूरा सुन लीजिए आपका आता

665
00:51:46,160 --> 00:51:50,200
है कि भाई मुझे स्न डिवटी मत कहिए आपने अपनी

666
00:51:50,200 --> 00:51:54,320
पहचान को छिपाने का प्रयास किया भाई मुझे स्कन डिवटी मत कहिए मुझे दूसरी

667
00:51:54,320 --> 00:51:58,120
चीज कहिए ठीक

668
00:51:58,120 --> 00:52:02,440
है दास का दास हूं मैं कोई डिवटी नहीं हूं मैं इस

669
00:52:02,440 --> 00:52:06,480
सं नहीं आप अपना प्रश्न रखिए व जनता जो देख

670
00:52:06,480 --> 00:52:10,480
रहे हैं वो सब समझ जाएंगे आपकी यह वाली क्लिप्स भी लगाएंगे कि आप

671
00:52:10,480 --> 00:52:13,400
कौन है आप अपनी अपनी आइडेंटिटी को रिवील

672
00:52:13,400 --> 00:52:17,720
नहीं कर पा रहे आपने तो अपने गुरु का नाम दिया आपने अपने गुरु का नाम दिया जोन

673
00:52:17,720 --> 00:52:22,000
से है मगर फिर भी आप से नहीं अब मैं कुछ प्रश्न करू

674
00:52:22,000 --> 00:52:26,000
आपने अपने गुरु का नाम दिया था कि नहीं दिया था ठीक है

675
00:52:26,000 --> 00:52:30,160
कर लीजिएगा आपने अपने गुरु का नाम दिया था कि नहीं दिया था कुछ प्रश्न करता हूं

676
00:52:30,160 --> 00:52:34,240
आपसे कि आप कर लीजिएगा मैं पूछ रहा हूं आपने अपने गुरु का नाम दिया था कि नहीं दिया

677
00:52:34,240 --> 00:52:38,360
था बा सुन लीजिए बा सुनूंगा मैं आपसे आगे बढूंगा

678
00:52:38,360 --> 00:52:42,440
अभी जब आपकी आइडेंटिटी की बात हो रही है आपने अपने गुरु

679
00:52:42,440 --> 00:52:46,520
का नाम दिया था कि नहीं दिया था मैं इससे ऐसे आगे नहीं बढूंगा

680
00:52:46,520 --> 00:52:50,560
मैं पूछूंगा पहले इसका आप उत्तर दीजिए आपने अपने गुरु का नाम मुझे दिया

681
00:52:50,560 --> 00:52:54,640
था कि नहीं दिया था जिनसे मैंने क्लास ली मैंने उनका

682
00:52:54,640 --> 00:52:58,720
नाम दिया गुरु जिसे कुछ भी सीखते हैं जिससे

683
00:52:58,720 --> 00:53:03,240
हम कुछ भी सीखते हैं वो हमारे गुरु होते हैं य प आप कु

684
00:53:03,240 --> 00:53:07,240
वो कौन है वो कौन है सब गुरु जहा से मुझे

685
00:53:07,240 --> 00:53:12,000
कुछ भी सने जिसका नाम आपने दिया वो कौन है सीधी बात नहीं करेंगे

686
00:53:12,000 --> 00:53:16,280
आप भी गु जिसका नाम आपने दिया वो कौन है सब गुरु

687
00:53:16,280 --> 00:53:20,440
है आप भी गुरु है भी गुरु मैं आपसे पूछ रहा हूं जिसका नाम आपने मुझे दिया

688
00:53:20,440 --> 00:53:24,640
था वह कौन है क्या नाम है उनका गुरु है मैंने

689
00:53:24,640 --> 00:53:30,560
बताया था मैंने उनसे भगवत भगवत गीता क्लासेस ली है हा

690
00:53:30,560 --> 00:53:34,680
हा क्या नाम है उनका जिसका नाम आपने मुझे

691
00:53:34,680 --> 00:53:38,760
दिया था उनका क्या नाम है आप चेक

692
00:53:38,760 --> 00:53:42,920
कर लो आप बोलने में आपको दिक्कत हो रही है

693
00:53:42,920 --> 00:53:47,000
जैसे आपको प्रभु जी अभी वो बोलने में श्लोक बोलने में दिक्कत हो रही थी पढ़ के

694
00:53:47,000 --> 00:53:51,080
बताने में आपका थोड़ा टाइम जा रहा था तो आपने तो उनसे दीक्षा

695
00:53:51,080 --> 00:53:55,560
नहीं ली है ना ऑफिली तो आप नाम बोल सकते हैं

696
00:53:55,560 --> 00:53:59,760
नहीं जी जी नहीं ली ना तो आप नाम बोल सकते हैं

697
00:53:59,760 --> 00:54:03,840
नहीं प्रभु जी क्यों आप भी वो श्लोक पढ़ के बता सकते हो कहां ब्रह्मा

698
00:54:03,840 --> 00:54:07,960
जी के साथ में दुष्कर्म हुआ अभी वो वो तो टाइम की वजह से

699
00:54:07,960 --> 00:54:11,960
आप समय की वजह से समय की वजह से नहीं बता रहे अभी भी आप

700
00:54:11,960 --> 00:54:16,320
टाइम वेस्ट ही कर रहे हो प्रभु जी ये तो वास्तविकता को बाहर लाना चाह रहा हूं मैं आपसे

701
00:54:16,320 --> 00:54:20,360
ये पूछ रहा हूं आप जो ये छुपा रहे हो कि मैं इसकन से नहीं हं आप

702
00:54:20,360 --> 00:54:26,200
ये कह रहे हो आप स्कन से नहीं हो क्या क्या शंकराचार्य

703
00:54:26,200 --> 00:54:30,400
कर कर अगर आप अपनी आइडेंटिटी को नहीं बताएंगे मैं

704
00:54:30,400 --> 00:54:34,520
आपको रिमूव कर दूंगा शंकराचार्य समाज क्या लोगों के ऊपर हाथ

705
00:54:34,520 --> 00:54:39,120
उठाता है वो मुह से डिबेट करते हैं से ट करते

706
00:54:39,120 --> 00:54:43,800
आप अगर आप अगर अपनी आइडेंटिटी नहीं बताएंगे मैं आपको रिमूव कर

707
00:54:43,800 --> 00:54:45,600
दूंगा लास्ट बार बोल रहा

708
00:54:45,600 --> 00:54:50,360
हूं आइडेंटिटी बताइए वो जो आपके गुरु है कौन से हैं कि

709
00:54:50,360 --> 00:54:54,520
नहीं अब अपने प आई शंकराचार्य प्रभु को मैं बात करने

710
00:54:54,520 --> 00:54:58,680
को तयार हूं मैं बात करूंगा मुझे आपकी बातें अभी सुनाई नहीं दे रही मुझे आप पहले अपनी

711
00:54:58,680 --> 00:55:02,720
आइडेंटिटी बताइए आपके गुरु इसन से जिससे आपने शिक्षा

712
00:55:02,720 --> 00:55:07,240
ली है आवाज नहीं आ रही ठीक है मैं आपको रिमूव कर देता हूं

713
00:55:07,240 --> 00:55:11,280
बस यही करोगे प्रभु जी जब अपनी क्या कर आप अपनी आइडेंटिटी क्यों

714
00:55:11,280 --> 00:55:15,440
छपा रहे अपने गुरु को क्यों छिपा रहे हैं आप

715
00:55:15,440 --> 00:55:19,680
मेरे है नहीं आप भी गुरु है आपके गुरु जिससे आपने श्रीमद्

716
00:55:19,680 --> 00:55:24,280
भागवत पढ़ी है भगवत गीता पढ़ी है व कौन से हैं कि नहीं

717
00:55:24,280 --> 00:55:28,440
मैंने अटेंड की कुछ क्लासेस अटेंड की व स्कन की क्लासेस

718
00:55:28,440 --> 00:55:31,280
थी कि

719
00:55:31,280 --> 00:55:35,680
नहीं कितनी शर्म आ रही है कितनी शर्म आ रही है अपनी

720
00:55:35,680 --> 00:55:40,480
अपनी जहां से आप अध्ययन कर रहे हो उसको बताने में शर्म आ रही है

721
00:55:40,480 --> 00:55:44,480
रहे वो आपको आ रही है मे मुझे नहीं आ रही मैं तो तैयार हूं

722
00:55:44,480 --> 00:55:48,520
मैं आपके प्रश्न को जानता हूं और डेली कम से कम 10 लोगों से बातें

723
00:55:48,520 --> 00:55:52,520
करता हूं इसी सब बारे में जहां से भी कुछ भी सीखता हूं वो सब

724
00:55:52,520 --> 00:55:56,640
मेरे गुरु है मैं ग्रंथों से सीखता हूं आपसे पूछ रहा हूं क्या

725
00:55:56,640 --> 00:56:00,640
आपने जो आपने भगवत गीता की क्लासेस की बात कर रहे हैं वन

726
00:56:00,640 --> 00:56:06,080
है कि नहीं नहीं प्रभु मैं तो

727
00:56:06,080 --> 00:56:10,160
घर मैंने भगवत गीता घर पर पढ़ आपने जो क्लासेस की बात की है

728
00:56:10,160 --> 00:56:14,280
वन की क्लासेस नहीं थी मैंने तो घर पर ली

729
00:56:14,280 --> 00:56:19,160
है मैंने कहा वन के द्वारा आयोजित नहीं थी

730
00:56:19,160 --> 00:56:23,920
कितना झूठ बोलोगे झूठ के लिएन के दवारा आयोजित नहीं थी

731
00:56:23,920 --> 00:56:28,240
व बोला ही नहीं झूठ मैं तो खुद बोल रहा हूं मैंने घर पर पढ़ी है दो बारी

732
00:56:28,240 --> 00:56:32,560
भगवत गीता मैं आपसे पूछ रहा हूं आपने अभी बोला मैंने क्लासेस अटेंड की थी

733
00:56:32,560 --> 00:56:36,640
वो किस ऑर्गेनाइजेशन के द्वारा आयोजित थी वो मंदिर

734
00:56:36,640 --> 00:56:40,800
में जाके की मैंने जगन्नाथ भगवान के मंदिर में जाके क्लास अटेंड की व

735
00:56:40,800 --> 00:56:44,840
इसकन वो इकन के द्वारा तो नहीं था वो नहीं

736
00:56:44,840 --> 00:56:48,880
ये कृष्ण मंदिर था वहा प गया मैंने वन

737
00:56:48,880 --> 00:56:53,880
से रिलेटेड नहीं है वो ये मुझे इतना वो नहीं

738
00:56:53,880 --> 00:56:57,880
है सग खा कए आपको पता नहीं

739
00:56:57,880 --> 00:57:02,160
है मैं आप आप उसकी शिव पुराण

740
00:57:02,160 --> 00:57:06,360
की सौगंध खाके कहिए कि आपका जो संप्रदाय किसी ने हाथ नहीं उठाया किसी

741
00:57:06,360 --> 00:57:10,840
मीडिया वाले प हाथ उठाया क्यों नहीं उठाया द्रोणाचार्य ने हाथ उठाया विश्वामित्र ने हाथ उठाया

742
00:57:10,840 --> 00:57:14,960
वशिष्ठ ने हाथ उठाया किसने नहीं उठाया आपके गुरु हां

743
00:57:14,960 --> 00:57:15,760
वशिष्ठ जी ने

744
00:57:15,760 --> 00:57:20,360
हाथ उठाया ना श जो शंकराचार्य संप्रदाय है उसमें

745
00:57:20,360 --> 00:57:25,240
ये एक बहुत बड़ा बहुत बड़ा आधार है कि वो कभी भी हाथ पैरों से बात

746
00:57:25,240 --> 00:57:29,600
करते ये कहां लिखा है विषम परिस्थितियों में हथियार तक उठाने

747
00:57:29,600 --> 00:57:34,120
का आदेश है शास्त्रों में ब्राह्मण के लिए लड़ने का आदेश है

748
00:57:34,120 --> 00:57:38,640
क्षत्रिय धर्म का छात्र धर्म का आलंबन लेने का आदेश है

749
00:57:38,640 --> 00:57:44,160
फिर आप राम मंदिर क्यों नहीं गए राम मंदिर नहीं जा

750
00:57:44,160 --> 00:57:48,160
पाया राम मंदिर राम मंदिर में आपके जो चार आचार्य है

751
00:57:48,160 --> 00:57:52,240
वो क्यों नहीं गए उन्होंने क्यों विरोध किया राम मंदिर का के पूर्ण नहीं हुआ

752
00:57:52,240 --> 00:57:56,400
जब शिवजी का एक मंदिर बना था कासी में तब वो भी पूर्ण नहीं हुआ

753
00:57:56,400 --> 00:58:00,520
था पर वहां पे वो गए उन्होंने प्राण प्रतिष्ठा कराई और जब

754
00:58:00,520 --> 00:58:04,520
राम मंदिर की बात आई वो डिबेट करनी शुरू कर दी उन्होंने फैक्ट

755
00:58:04,520 --> 00:58:08,840
और फिगर्स दिखाइए फैक्ट और फिगर्स क्या

756
00:58:08,840 --> 00:58:12,920
है पूरा इंटरव्यू जाके देख लीजिए अपने शंकराचार्य वो

757
00:58:12,920 --> 00:58:16,960
वो इंटरव्यू मैं देखूंगा उसके बाद आपसे इस विषय प बात करूंगा फैक्ट और फिगर्स तो आप बता नहीं रहे

758
00:58:16,960 --> 00:58:21,200
कौन सी डेट में हुआ था क्या था लेके आए हो फिर आप भी थोड़ा इतना सा ज्ञान

759
00:58:21,200 --> 00:58:25,680
लेके आए हो मेरे से डिबेट कर बात ये है सुनिए

760
00:58:25,680 --> 00:58:29,680
बे पता आपको प्रभु जी अपने बारे मैं बता दूं आपको मैं

761
00:58:29,680 --> 00:58:30,800
बता दूं मैं क्यों ऐसा बोल

762
00:58:30,800 --> 00:58:34,880
रहा हूं है ऐसा कि जो वाराणसी है वहां पर शिवलिंग जो

763
00:58:34,880 --> 00:58:39,040
है प्रकट होती है अगर प्रकट होती है तो उसकी प्राण प्रतिष्ठा का कार्यक्रम अलग

764
00:58:39,040 --> 00:58:43,360
से नहीं होता है उसमें जाया जा सकता है प्राण प्रतिष्ठा जब होगी किसी

765
00:58:43,360 --> 00:58:47,560
विग्रह को बना कर के अलग से लाया जाएगा तो उसमें बिल्कुल जो शास्त्र

766
00:58:47,560 --> 00:58:51,800
सम्मत कार्यक्रम होंगे उसके अनुसार होंगे आपके यहां भी जो

767
00:58:51,800 --> 00:58:57,000
जो भी आपका वैष्णव का जैसे आप ये तो स्वीकार कर नहीं रहे हो कि मैं

768
00:58:57,000 --> 00:59:01,520
आपने भी अलग अलग कर दिया ना आपका मतलब राम भगवान

769
00:59:01,520 --> 00:59:05,600
आप अलग हो ईश्वर को बाधित नहीं कहता हूं आप अलग हो

770
00:59:05,600 --> 00:59:09,920
मैं इस बात को गर्व के साथ कहता हूं कि मैं इसन से अलग

771
00:59:09,920 --> 00:59:14,680
हूं द प्र होने वाला ईश्वर है

772
00:59:14,680 --> 00:59:19,440
समान अलग कर रहे हो तभी आप यह सारी चीज कर दो वैष्णव वर्सेस

773
00:59:19,440 --> 00:59:24,040
वो आप यह चीज करते हो क्योंकि आप वो करना चाहते हो

774
00:59:24,040 --> 00:59:27,680
ठीक है

775
00:59:27,680 --> 00:59:33,680
चलिए जिष्णु शर्मा जी आप

776
00:59:50,280 --> 00:59:56,280
आएंगे कभी-कभी मुझे जॉम्बीज याद आने लगते हैं

777
00:59:56,400 --> 01:00:00,400
हर बात का एक ही जवाब कि वो माया से प्रभावित

778
01:00:00,400 --> 01:00:04,920
नहीं हो सकते मगर वह सर्वशक्तिमान है उनके अंश में

779
01:00:04,920 --> 01:00:08,960
पूर्ण पूर्णता नहीं है मगर वह सर्वशक्तिमान है

780
01:00:08,960 --> 01:00:14,840
क्या बात

781
01:00:14,840 --> 01:00:20,840
है भाई जो भी देख रहा है इनका मैं आपको बता

782
01:00:21,120 --> 01:00:27,120
दूं इनसे आप लोग संपर्क कर सकते हैं

783
01:00:37,920 --> 01:00:42,080
स्वयं भी कर सकते हैं क्योंकि यह थोड़े

784
01:00:42,080 --> 01:00:46,200
से विषयों से विषयात करते हुए केवल अपने कुछ बवासी

785
01:00:46,200 --> 01:00:50,320
में आए थे कुछ इनको बोलना था इसी के लिए आए थे ये जो कि आपने देखा होगा

786
01:00:50,320 --> 01:00:54,400
कि कुछ चीजें तैयार करके लाए थे कि हमें शंकराचार्य के लिए ऐसा ऐसा बोलना

787
01:00:54,400 --> 01:00:58,440
है जा कर के निराधार तर्क हीन तरीके से बात कर रहे थे तो

788
01:00:58,440 --> 01:01:02,680
इसलिए हमने इनको रिमूव किया है अगर कोई इनसे बात

789
01:01:02,680 --> 01:01:08,680
करना चाहता है तो

790
01:01:21,280 --> 01:01:25,600
वो एच ए आर आई अंडर

791
01:01:25,600 --> 01:01:29,720
स्कोर एन ए आर ए वाई ए एन

792
01:01:29,720 --> 01:01:34,000
अंडर स्कोर डी ए एस

793
01:01:34,000 --> 01:01:38,120
एस हरि नारायण दास यह इनकी आईडी

794
01:01:38,120 --> 01:01:42,800
है तो आप इनसे जाकर के जो भी इनसे संपर्क करना चाहे कर सकता है

795
01:01:42,800 --> 01:01:48,800
जिष्णु शर्मा जी आप

796
01:01:53,440 --> 01:01:59,440
आएंगे

797
01:02:32,080 --> 01:02:36,680
हम यहां पर उपस्थित होते हैं कि दार्शनिक धरातल पर आध्यात्मिक

798
01:02:36,680 --> 01:02:41,320
धरातल पर सैद्धांतिक अंतर क्यों आ रहा है लोगों में वह मिटाया

799
01:02:41,320 --> 01:02:45,720
जाए तो उनके पास वो तो है नहीं कुछ भी कि सिद्धांतों

800
01:02:45,720 --> 01:02:50,080
में बात कर सके कि ईश्वर सर्वशक्तिमान है कि नहीं द्वैत या द्वैत चैतन्य

801
01:02:50,080 --> 01:02:54,920
महाप्रभु कोई भी ऐसा उनके पास नहीं है उनके पास य है कि शंकराचार्य ने हाथ

802
01:02:54,920 --> 01:02:59,000
उठाया और यह उनको नहीं बताया कि हमारे जो जिस परंपरा से हम

803
01:02:59,000 --> 01:03:03,040
आ रहे हैं उसमें छात्र धर्म का आलंबन लेने की

804
01:03:03,040 --> 01:03:08,960
बात भी की गई है समय पढ़ने पर धर्म की रक्षा के लिए

805
01:03:08,960 --> 01:03:13,120
खैर तो मैंने एक अतिथि और है उनके लिए भेजा

806
01:03:13,120 --> 01:03:18,360
है मैं तब तक मैसेजेस देख लेता हूं

807
01:03:18,360 --> 01:03:22,920
आर एस पदा जी जय श्री राम जय महाकाल

808
01:03:22,920 --> 01:03:27,040
पदा जी प्रणव का उच्चारण से बचा करें नमः

809
01:03:27,040 --> 01:03:31,360
शिवाय बोला करें बहुत अच्छा लगेगा आनंद आएगा राज डांगर

810
01:03:31,360 --> 01:03:35,680
जी आप श्री वैष्णव और मधुवा वालों से कब बात करोगे कि

811
01:03:35,680 --> 01:03:39,840
वह क्यों हरि हर भेद करते हैं जब

812
01:03:39,840 --> 01:03:43,920
समय मिल जाएगा जब सामर्थ्य हो जाएगा तब बात करेंगे और अभी प्रायोरिटी

813
01:03:43,920 --> 01:03:47,120
क्या है स्कन आर्य समाज कबीर

814
01:03:47,120 --> 01:03:52,640
पंथी ब्रह्मा कुमारी आचार्य प्रशांत

815
01:03:52,640 --> 01:03:57,360
जी और भी अगर कोई सेल्फ प्रोक्लेम जो है

816
01:03:57,360 --> 01:04:01,800
तो प्रायोरिटी इनसे है और समय मिलने पर उनसे भी बात की जाएगी हरिहर

817
01:04:01,800 --> 01:04:06,240
भेद अगर करते हैं तो वैसे जो अगर आप यह वाला ग्रंथ पढ़ेंगे रामानुजा

818
01:04:06,240 --> 01:04:10,560
चार की परंपरा के ही है ये और इन्होंने बहुत सामंजस

819
01:04:10,560 --> 01:04:14,560
बिठाया है सभी विचारधाराओं में तो पढ़िए बहुत अच्छा ग्रंथ है और

820
01:04:14,560 --> 01:04:18,640
सबसे बड़ी बात है ईश्वर के साकार स्वरूप को नकारने वालों

821
01:04:18,640 --> 01:04:23,000
को ये बहुत अच्छे जवाब देते है पुराणों का मजाक उड़ाया गया है सत्यार्थ

822
01:04:23,000 --> 01:04:27,480
प्रकाश में तो इसमें बहुत अच्छे उत्तर है तो आप उनको पढ़े

823
01:04:27,480 --> 01:04:31,520
जिससे कि कभी इस्कोन वाले शुद्ध धर्म को

824
01:04:31,520 --> 01:04:35,760
नाश कर देंगे अल्लाह को यीशु को कृष्ण के समान मानते

825
01:04:35,760 --> 01:04:41,760
हैं लेकिन शिव को कृष्ण के समान नहीं मानते

826
01:04:43,800 --> 01:04:48,120
जी हर धार्मिक संस्था में कुछ लोगों की वजह से विवाद पैदा

827
01:04:48,120 --> 01:04:52,120
हो जाते हैं हिंदू धर्म तो पॉलिटिक्स बन गया

828
01:04:52,120 --> 01:04:56,400
धर्म नहीं बना है समाज बना है धर्म अगर नहीं

829
01:04:56,400 --> 01:05:00,560
धर्म अगर पॉलिटिक्स बन जाएगा तो माता को माता

830
01:05:00,560 --> 01:05:04,720
की दृष्टि से देखने का आधार नष्ट हो जाएगा और हम पशु बन जाएंगे

831
01:05:04,720 --> 01:05:08,760
सारे के सारे जब तक एक भी व्यक्ति

832
01:05:08,760 --> 01:05:12,880
धर्म का आलंबन लेने वाला जीवित है तब

833
01:05:12,880 --> 01:05:17,360
तक हमारा धर्म जीवित है और तभी तक मनुष्य

834
01:05:17,360 --> 01:05:21,600
मनुष्य मैं गुरुदेव के जो भी गुरुदेव के प्रति जो भी आस्थान वित है शंकराचार्य

835
01:05:21,600 --> 01:05:25,840
के प्रति जो भी आस्थान वित है जो भी उनके शिष्य हैं जो मेरे गुरु भाई हैं

836
01:05:25,840 --> 01:05:30,520
मैं उन सबसे कहना चाहता हूं गुरुदेव एक बात बहुत कहते हैं

837
01:05:30,520 --> 01:05:35,160
कि बहुत सारे लोगों की आवश्यकता नहीं है एक मनुवादी

838
01:05:35,160 --> 01:05:39,560
एक मनुवादी पर्याप्त है धर्म की स्थापना के लिए

839
01:05:39,560 --> 01:05:44,200
तो मेरा उन सारे गुरु भाइयों से यह निवेदन है

840
01:05:44,200 --> 01:05:48,520
कि जब भी वह अपने बारे में सोचा करें तो स्वयं को वही मनुवादी सोचा करें

841
01:05:48,520 --> 01:05:52,520
जिसके बारे में गुरुदेव बात कर रहे हैं

842
01:05:52,520 --> 01:05:56,520
आप सोचिए कि जब गुरुदेव क क एक मनुवादी मुझे चाहिए तो वो

843
01:05:56,520 --> 01:05:59,240
एक मनुवादी आप ही हो

844
01:05:59,240 --> 01:06:05,240
यही अपनी आइडेंटिटी आप माना करो तभी हम लोग अधर्म से लड़

845
01:06:10,600 --> 01:06:14,680
पाएंगे विष्णु पुराण ने कहा है भगवान

846
01:06:14,680 --> 01:06:18,880
विष्णु से निकले सभी अवतार पूर्ण है

847
01:06:18,880 --> 01:06:22,920
हा वो सही बात है व पूर्ण से पूर्ण ही निकल सकता है वेदों का भी

848
01:06:22,920 --> 01:06:27,160
प्रमाण है और अगर वह पूर्ण से पूर्ण

849
01:06:27,160 --> 01:06:31,640
नहीं निकल रहा है तो वो अपूर्ण है अगर पूर्ण जो अंश निकल रहा है वो पूर्ण नहीं है

850
01:06:31,640 --> 01:06:36,080
तो और और भी बातें देखें कि अगर ईश्वर सर्वत्र

851
01:06:36,080 --> 01:06:40,400
व्याप्त है तो कोई अंश मान लीजिए यह ईश्वर है इससे

852
01:06:40,400 --> 01:06:44,400
अगर कोई अंश निकलेगा तो जहां निकला वहां भी ईश्वर है और

853
01:06:44,400 --> 01:06:48,480
हर कण में ईश्वर है तो अलगाव आया कहां कहां

854
01:06:48,480 --> 01:06:52,680
अलग हुआ इसीलिए अद्वैत को माने बिना

855
01:06:52,680 --> 01:06:58,320
आप ईश्वर को सर्वशक्तिमान सर्वव्यापक सिद्ध नहीं कर

856
01:06:58,320 --> 01:07:02,520
पाएंगे तो कुल मिलाकर के जो दुनिया में जो भेद

857
01:07:02,520 --> 01:07:06,920
आया है ना वह आया है इस व्यवहार और परमार्थ को ना समझने के कारण

858
01:07:06,920 --> 01:07:11,840
कि व्यवहार हमें द्वैत का करना है फल स्वरूप प्राप्त होगा अद्वैत

859
01:07:11,840 --> 01:07:15,840
गुरुदेव का भी वचन है भेद का निर्वाह करते हुए अभेद स्थिति

860
01:07:15,840 --> 01:07:19,960
को प्राप्त करना मनुष्य जीवन है अब वह कह रहे हैं कि

861
01:07:19,960 --> 01:07:24,000
भाई शिव जी की भक्ति भी मोक्ष दे सकती है

862
01:07:24,000 --> 01:07:28,040
तो भगवान का जो अस्तित्व का जो उद्देश्य है वो तो यही है

863
01:07:28,040 --> 01:07:32,200
मोक्ष प्रदान करना तो जब व्यक्ति को मोक्ष प्राप्त हो जा रहा

864
01:07:32,200 --> 01:07:36,200
है फिर भी उसकी पूजा उसकी भक्ति उसको भगवान समझने

865
01:07:36,200 --> 01:07:40,320
वाले लोग जो है पाखंडी हैं मूर्ख हैं अपराधी है कितनी

866
01:07:40,320 --> 01:07:43,120
अच्छी बात

867
01:07:43,120 --> 01:07:47,160
है बिल्कुल अच्छी बात कही आपने मोक्ष से कई गुना बड़ी है भगवान की

868
01:07:47,160 --> 01:07:52,040
भक्ति बहुत अच्छी बात है सही बात

869
01:07:52,040 --> 01:07:58,040
है सबसे ज्यादा तो भगवान की भक्ति में ही

870
01:08:00,560 --> 01:08:05,120
है जय श्री राधे कृष्ण

871
01:08:05,120 --> 01:08:09,400
ठीक है चलिए अब मुझे लगता है कोई नहीं आएगा समाप्त

872
01:08:09,400 --> 01:08:13,640
करते हैं नारायण समारंभा शंकराचार्य

873
01:08:13,640 --> 01:08:17,800
मध्यमाम अस्म चार्य पर्यंत वंदे गुरु

874
01:08:17,800 --> 01:08:22,840
परंपराम सभी को जय श्री

875
01:08:22,840 --> 01:08:26,840
राम
