1
00:00:18,400 --> 00:00:24,400
सभी को जय श्री

2
00:00:25,240 --> 00:00:29,320
राम ा पर हमारी बातचीत हुई है

3
00:00:29,320 --> 00:00:35,320
जतिन सेन जी से य स्न के फॉलोअर्स है

4
00:00:37,480 --> 00:00:42,040
और कुछ हमारे ऐसे उनके

5
00:00:42,040 --> 00:00:47,400
बीच वार्तालाप हुआ है कमेंट्स के माध्यम

6
00:00:47,400 --> 00:00:52,240
से जिसमें उनकी तरफ से हमारे कुछ सिद्धांतों के लिए सममिति प्रकट

7
00:00:52,240 --> 00:00:56,800
की गई है उसी के निमित्त एक ये

8
00:00:56,800 --> 00:01:02,800
लाइव चर्चा रखी है

9
00:01:14,880 --> 00:01:19,720
वेट कर रहे हैं उनका कि वोह आए

10
00:01:19,720 --> 00:01:25,720
लाइव चर्चा

11
00:01:28,840 --> 00:01:34,840
में

12
00:01:39,120 --> 00:01:45,120
अगर

13
00:01:58,840 --> 00:02:04,840
कोई

14
00:04:19,040 --> 00:04:25,040
अरविंद

15
00:04:28,600 --> 00:04:34,600
सिंह

16
00:04:37,160 --> 00:04:42,160
अरविंद जी आप सुन पा रहे

17
00:04:42,160 --> 00:04:47,600
हैं जी जय श्री

18
00:04:47,600 --> 00:04:53,600
राम आप अपना कैमरा ऑन कर लीजिए अवि

19
00:04:57,320 --> 00:05:02,560
जी इधर दिख नहीं रहा

20
00:05:02,560 --> 00:05:08,060
जी अर जय श्री राम जय श्री राम जय श्री

21
00:05:08,060 --> 00:05:12,400
[प्रशंसा]

22
00:05:12,400 --> 00:05:17,120
राम आप इसकन की तरफ से चर्चा करने करना चाहते

23
00:05:17,120 --> 00:05:22,200
हैं क्योंकि हमारी यह शेड्यूल है यह चर्चा जो

24
00:05:22,200 --> 00:05:26,600
है यह चर्चा जो है शेड्यूल्ड है आपसे ही बात हो रही थी अभी ा

25
00:05:26,600 --> 00:05:30,640
पर नहीं जतिन जी से बात हो रही थी मेरे को जतिन जी ने लिंक भेजा है

26
00:05:30,640 --> 00:05:34,640
ये तो अ तो वो नहीं आ रहे हैं

27
00:05:34,640 --> 00:05:40,640
इस चैट में इस लाइव स्ट्रीम में वो

28
00:05:40,720 --> 00:05:46,720
आएंगे एक

29
00:05:58,480 --> 00:06:04,480
मिनट

30
00:06:04,600 --> 00:06:08,760
जी वो एक ही मेंबर जुड़ सकता है तो वो आएंगे उनसे बात हो गई है

31
00:06:08,760 --> 00:06:14,760
तो आप को मैं हटा रहा हूं कोई बात

32
00:06:28,400 --> 00:06:34,400
नहीं

33
00:06:56,880 --> 00:07:01,200
जी जतिन जी जय श्री राम जय श्री राम कैसे हैं

34
00:07:01,200 --> 00:07:05,600
आप मैं ठीक हूं आप कैसे हैं ब सारी की कृपा है

35
00:07:05,600 --> 00:07:09,600
आपकी आवाज बहुत कम आ रही है एक

36
00:07:09,600 --> 00:07:15,600
सेकंड मैं देखता

37
00:07:16,320 --> 00:07:21,440
हूं मेरे पास माइक नहीं है ना तो फोन

38
00:07:21,440 --> 00:07:25,560
सही नहीं बहुत ज्यादा कमा रही है मतलब इतना तो मैं

39
00:07:25,560 --> 00:07:29,560
सुन नहीं पाऊंगा और कोई भी शायद हमारी जो वार्तालाप होगी जो

40
00:07:29,560 --> 00:07:35,560
भी उसको सुनने में बड़ी असुविधा होगी अब ठीक है

41
00:07:35,560 --> 00:07:39,720
थोड़ी कह सकते हैं कि काम चल जाएगा

42
00:07:39,720 --> 00:07:43,920
जी बताए आपने हमसे संपर्क किया था कि आपको

43
00:07:43,920 --> 00:07:48,520
लाइव चैट पर आना है बताए

44
00:07:48,520 --> 00:07:53,280
संपर्क इसलिए किया था मैंने क्योंकि मुझे बस य

45
00:07:53,280 --> 00:07:57,800
थोड़ा आप लाउड बोलिए क्योंकि सबसे पहले तो मुझे

46
00:07:57,800 --> 00:08:01,960
मुझे बस आपसे यह जानना है कि आपको वैष्ण विजम से दिक्कत है या इस कौन

47
00:08:01,960 --> 00:08:04,960
से दिक्कत

48
00:08:04,960 --> 00:08:08,960
है मुझे जहां पर भी ईश्वर का खंडन होगा वेदों

49
00:08:08,960 --> 00:08:13,080
का खंडन होगा सार्वभौम सनातन

50
00:08:13,080 --> 00:08:17,440
सिद्धांतों का खंडन होगा उससे दिक्कत है और वैष्णव से मुझे कोई दिक्कत

51
00:08:17,440 --> 00:08:21,760
नहीं है क्योंकि मैं स्वयं भी वैष्णव हूं आपके

52
00:08:21,760 --> 00:08:26,400
लिए आपने सुबह एक स्टोरी लगाई थी उसमें आपने लिखा था विष्णु

53
00:08:26,400 --> 00:08:30,720
द्रोही हां हमारे बारे में विष्णु द्रोही लिखा था

54
00:08:30,720 --> 00:08:35,640
तो आप हमें एक्सप्लेन करेंगे कि विष्णु द्रोही का अर्थ आप क्या लेते

55
00:08:35,640 --> 00:08:39,800
हैं सबसे पहली बात तो जो दूसरे देवताओं को और किसी

56
00:08:39,800 --> 00:08:45,720
को भी विष्णु समान मानता है व द्रोही है विष्णु का दही ये कहां लिखा हुआ

57
00:08:45,720 --> 00:08:50,120
है देखिए इसके पीछे बहुत सारी चीज

58
00:08:50,120 --> 00:08:54,360
मैंने आपसे एक चीज पूछी है देखिए विषयात ना करें इसीलिए लाइव

59
00:08:54,360 --> 00:08:58,600
चैट की है विष्णु के समान शिव

60
00:08:58,600 --> 00:09:02,640
दुर्गा का को समझना यह वेद वाक्य है पुराण

61
00:09:02,640 --> 00:09:06,840
का वाक्य है कहां का वाक्य है यह पद्म

62
00:09:06,840 --> 00:09:10,920
पुराण का वाक्य है एक्चुअली मैं आपको बता देता हूं य स्वयं

63
00:09:10,920 --> 00:09:16,160
भगवान शिव ने ही कहा था परमो विष्णु रेवत ज्ञानम मुक्ति साधन शास्त्र

64
00:09:16,160 --> 00:09:20,000
नाम बाकी सब भ्रम प्रदान करने

65
00:09:20,000 --> 00:09:24,000
समझ गया उतना संस्कृत में जाने की आवश्यकता ही नहीं है मैं समझ गया आप जो

66
00:09:24,000 --> 00:09:28,360
कह रहे हैं वो सब मतलब हमने उस पर रिसर्च किया पढ़ा देखा

67
00:09:28,360 --> 00:09:32,520
अब मैं आपको बोलू कि शिवजी ने ही शिव पुराण में यह कहा है कि

68
00:09:32,520 --> 00:09:36,680
मैं विष्णु से बड़ा हूं तो क्या करें मैंने

69
00:09:36,680 --> 00:09:40,840
वही तो अभी बोला अगर आप उसका अर्थ समझेंगे तो शिवजी ने ही यह कहा है कि

70
00:09:40,840 --> 00:09:44,840
उसके अलावा जो भी ये बात शिवजी ने दो प्रकार की बातें कर दी

71
00:09:44,840 --> 00:09:48,920
अब किसी एक बात को माने या फिर कोई ऐसी बात माने जिसमें दोनों का

72
00:09:48,920 --> 00:09:53,040
मान रह जाए अगर आप मुझे सुनेंगे तभी तो जवाब

73
00:09:53,040 --> 00:09:57,160
दूंगा बरी बात तो पूरी होने दीजिए इसमें भगवान

74
00:09:57,160 --> 00:10:01,160
शिव स्वयं से यही कह रहे हैं ना कि उसके अलावा जो भी बातें कही जाती

75
00:10:01,160 --> 00:10:06,320
है वो सिर्फ मोह प्रदान करने के लिए भ्रम पैदा करने के लिए हैं

76
00:10:06,320 --> 00:10:11,680
अच्छा तो मैं यह कह रहा हूं कि यह बात कही किसने

77
00:10:11,680 --> 00:10:15,880
है शिव जी ने कही तो यानी कि हमें शिवजी

78
00:10:15,880 --> 00:10:20,040
पर विश्वास है बिल्कुल परम वैष्णव शज पर विश्वास

79
00:10:20,040 --> 00:10:24,200
है ना हा वैष्णव हा तो शिवजी

80
00:10:24,200 --> 00:10:30,200
ही तो दूसरी जगह य कह रहे हैं कि मैं हूं विष्णु

81
00:10:32,200 --> 00:10:36,280
शास्त्र रेफरेंस दीजिए शिवजी ने य कहा में क रहे शिव पुराण में कह रहे

82
00:10:36,280 --> 00:10:40,800
हैं बहुत सी जगह भागवत पुराण में कहा जा रहा है श्री कृष्ण

83
00:10:40,800 --> 00:10:46,080
लिए हा उन्होंने यह कहा कि मैं विष्णु

84
00:10:46,080 --> 00:10:50,080
हूं मैं विष्णु हूं मैं ही विष्णु मैं ही ब्रह्मा हूं यह भी

85
00:10:50,080 --> 00:10:54,080
कहा है और मेरे से तुम सबकी उत्पत्ति हुई है यह भी कहा है

86
00:10:54,080 --> 00:10:58,080
और श्री कृष्ण ने विष्णु भगवान ने भी यह स्वीकारा है कि आपसे

87
00:10:58,080 --> 00:11:02,480
हम सबकी उत्पत्ति भागवत में यह है कि शिव जी से सबकी उत्पत्ति

88
00:11:02,480 --> 00:11:07,200
हुई है तो क्या इन बातों पर इन बातों को हम नजरअंदाज कर

89
00:11:07,200 --> 00:11:11,200
दे तो इसका अर्थ तो यह भी है कि कृष्ण तो भगवत गीता

90
00:11:11,200 --> 00:11:15,320
के सातव अध्याय के सातव श्लोक में तो यह भी कह रहे हैं मत प्रतर किंच दस

91
00:11:15,320 --> 00:11:19,400
धनंजय मुझसे परम कोई तत्व ही नहीं है मैं ही परम तत्व हूं क्या कृष्ण झूठ बोल रहे हैं

92
00:11:19,400 --> 00:11:23,680
कृष्ण दो तरह की बात वो परम तत्व है हमने मना थोड़ी ना किया है

93
00:11:23,680 --> 00:11:27,800
मगर वही तो शिव है मगर आप यह कहते हो कि जब

94
00:11:27,800 --> 00:11:31,880
वो शिव बनते हैं तो शिव चलिए इसको थ्योर कली समझ लेते थोड़ा

95
00:11:31,880 --> 00:11:36,360
आगे चलते हैं अभी क्लियर हो जाएगा अब आप मुझे बताइए आपकी ब्रह्म समता

96
00:11:36,360 --> 00:11:40,560
है उसमें लिखा हुआ है कि जिस प्रकार दूध से दही बन जाता

97
00:11:40,560 --> 00:11:44,760
है पर दही से दूध नहीं उसी प्रकार विष्णु तो शिव बन जाते हैं कृष्ण

98
00:11:44,760 --> 00:11:47,360
तो शिव बन जाते हैं पर शिव से वो

99
00:11:47,360 --> 00:11:52,120
कृष्ण नहीं बन पाते हैं क्या कृष्ण

100
00:11:52,120 --> 00:11:57,960
शिव बनने के बाद बाधित हो जाते

101
00:11:57,960 --> 00:12:03,000
हैं

102
00:12:03,000 --> 00:12:07,080
द्वारा ठीक है और इसमें जो कि आपके

103
00:12:07,080 --> 00:12:11,680
जो गुरुदेव है उनका भी इसमें सहायता उन्होने ली है इसमें विष्णु

104
00:12:11,680 --> 00:12:16,240
विष्णु अष्टपदी है य शंकराचार्य जी ने लिखी है आदि शंकराचार्य मैंने

105
00:12:16,240 --> 00:12:20,280
आपसे एक सवाल पूछा है क्या क मैंने

106
00:12:20,280 --> 00:12:24,600
आपसे सवारी किताबों का रेफरेंस दीजिएगा

107
00:12:24,600 --> 00:12:30,320
पहले हम एक विषय तो तय कर ले हम बात किस पर कर रहे हैं मैंने आपसे पूछ

108
00:12:30,320 --> 00:12:34,560
जिस ईश्वर की पूजा कर रहे हैं क्या इकन के द्वारा प्रतिपादित

109
00:12:34,560 --> 00:12:38,640
होने वाला ईश्वर सर्वशक्तिमान है या नहीं है

110
00:12:38,640 --> 00:12:43,880
अगर है बिल्कुल अगर है आप मानते हैं वह सर्वशक्तिमान

111
00:12:43,880 --> 00:12:47,920
है बिल्कुल कोई ठीक है आप मानते अब मैं

112
00:12:47,920 --> 00:12:52,240
आपसे पूछ रहा हूं कि जिस प्रकार दूध से दही बन जाता है पर दही से दूध नहीं

113
00:12:52,240 --> 00:12:56,360
ये आपकी ब्रह्म समता में लिखा है आप इसको मानते हैं हां

114
00:12:56,360 --> 00:13:00,440
इसका उत्तर शिव जीी ही देते हैं अगर आप सुनना चाहे तो हां एक विषय

115
00:13:00,440 --> 00:13:02,760
तय कर ले एक विषय तय कर लेते हैं

116
00:13:02,760 --> 00:13:06,880
एक विषय तय कर लेते हैं तो अब बात ये आती है कि कृष्ण जी

117
00:13:06,880 --> 00:13:11,480
शिव बनने के बाद दोबारा कृष्ण नहीं बन पा रहे हैं क्या वह सर्वशक्तिमान

118
00:13:11,480 --> 00:13:15,680
नहीं है यहां उनकी शक्ति घट जाती है इसमें

119
00:13:15,680 --> 00:13:20,000
ना आपको दो चीजों को पहले तो समझना पड़ेगा ठीक है एक जो मैं बताने जा रहा हूं वो सुना

120
00:13:20,000 --> 00:13:24,080
पड़ेगा और दूसरा जो ब्रह्म मद्व गोड़ी वैष्णव संप्रदाय का जो सिद्धांत है उसको

121
00:13:24,080 --> 00:13:28,280
समझना पड़ेगा सबसे पहली बात ये है शंकराचार्य स्वयं शव

122
00:13:28,280 --> 00:13:32,280
है कि नहीं आप शुरू करेंगे उससे पहले मैं कुछ चीजें क्लियर कर दूं आप किसी

123
00:13:32,280 --> 00:13:36,400
भी चीज को ये कहते हुए कि ब्रह्म वैष्णव गड़िया संप्रदाय का सिद्धांत

124
00:13:36,400 --> 00:13:40,480
है वह सिद्ध नहीं कर सकते आपको उसे वैदिक जो सनातन वैदिक

125
00:13:40,480 --> 00:13:44,920
वांग्मय है उससे सिद्ध करना पड़ेगा अगर आप यह कहते हैं कि हम भाई

126
00:13:44,920 --> 00:13:49,000
उनको मानते हैं वैष्णव को मानते हैं भले ही आप यह सिद्ध नहीं कर पा रहे

127
00:13:49,000 --> 00:13:53,000
कि वो सिद्धांत वेदों से पुराणों से मैच हो पा रहे हैं कि नहीं तो इसका

128
00:13:53,000 --> 00:13:57,760
अर्थ तो यह माना जाएगा ना कि आप उनको मानते हैं जो वेदों का विरोध करते

129
00:13:57,760 --> 00:14:01,920
हैं वेदों का विरोध किसने अगर कोई वैष्णव अगर ब्रह्म मध गोड़ी

130
00:14:01,920 --> 00:14:06,280
वैष्णव संप्रदाय का वेदों के विरोधी है क्या मैं वही तो कह रहा हूं

131
00:14:06,280 --> 00:14:10,280
आप शास्त्रों से दीजिए आप अपने संप्रदाय का मत मत बताइए शास्त्रों

132
00:14:10,280 --> 00:14:14,920
से बात करिए प्रमाण आप शास्त्रों से दीजिए

133
00:14:14,920 --> 00:14:18,520
अरे मैं आपके संप्रदाय की बुक ले

134
00:14:18,520 --> 00:14:22,520
मैंने बस आपसे य क्वेश्चन किया कि विष्णु अष्टपदी शंकराचार्य जीने द्वारा रचित है कि

135
00:14:22,520 --> 00:14:27,000
नहीं है आप अपनी बात कहिए क्या कहना चाहते हैं

136
00:14:27,000 --> 00:14:31,160
तो विष्णु अष्टपदी में ही शंकराचार्य ने लिखा है कि मुझ में और आप में भेद ना

137
00:14:31,160 --> 00:14:35,400
होने पर भी मैं आपका हूं आप मेरे नहीं है क्योंकि तरंग

138
00:14:35,400 --> 00:14:39,480
ही समुद्र की होती है तरंग का समुद्र नहीं होता है तो दूध दही की जो

139
00:14:39,480 --> 00:14:43,720
बात की जाती है ना वैसे ही समुद्र और तरंग का जो रेफरेंस है दिया जाता है

140
00:14:43,720 --> 00:14:47,760
जो समुद्र है वो विष्णु है और तरंग जो है वो शिव है समुद्र से तरंग

141
00:14:47,760 --> 00:14:51,720
हो सकते है लेकिन तरंग से समुद्र

142
00:14:51,720 --> 00:14:56,480
नहीं ठीक है आपकी बात पूरी हो गई

143
00:14:56,480 --> 00:15:01,000
जी अब यहां से दो क्वेश्चन पुट अप होते हैं एक शंकराचार्य

144
00:15:01,000 --> 00:15:05,400
जी ने का जो एक महावाक्य है शंकराचार्य जी ने जो

145
00:15:05,400 --> 00:15:10,440
उससे लिया है महावाक्य उसको कहा है अहम ब्रह्मास्मि

146
00:15:10,440 --> 00:15:14,720
उन्होंने कहा मैं ही ब्रह्म हूं इस चीज को स्वीकारा तो

147
00:15:14,720 --> 00:15:18,760
यह है परमार्थिक धरातल दो धरातल होते हैं एक

148
00:15:18,760 --> 00:15:22,840
व्यवहारिक धरातल एक परमार्थिक धरातल परमार्थिक

149
00:15:22,840 --> 00:15:26,920
धरातल पर यह तत्व सिद्ध है कि एक ही तत्व है दूसरा कोई

150
00:15:26,920 --> 00:15:31,120
तत्व ही नहीं है व्यवहारिक पर ऐसा कहा जा सकता है कि हा भाई लीला रूप

151
00:15:31,120 --> 00:15:35,400
में भगवान अलग अलग रूपों में प्रकट हो रहे हैं जीव भी बन रहे हैं जीव जगत जगदीश्वर

152
00:15:35,400 --> 00:15:39,440
के रूप में प्रकट हो रहे हैं तो अगर आप इस थ्योरी को मानेंगे शंकराचार्य जी

153
00:15:39,440 --> 00:15:43,840
की थ्योरी को मानेंगे तो शंकराचार्य जी की बाकी थ्योरी को भी मानना पड़ेगा तो शंकराचार्य

154
00:15:43,840 --> 00:15:48,040
जी की बाकी थ्योरी है उसके अनुसार तो एक तत्व के अलावा

155
00:15:48,040 --> 00:15:52,120
दूसरा तत्व ही नहीं है तो कहने का अर्थ यह है

156
00:15:52,120 --> 00:15:56,400
कि जो दिखाई दे रहा है वो व्यवहारिक धरातल

157
00:15:56,400 --> 00:16:00,720
पर दिखाई दे रहा है वस्तुतः सब कुछ एक ही है जैसे

158
00:16:00,720 --> 00:16:05,600
कि पृथ्वी गोल है पृथ्वी गोल है ना

159
00:16:05,600 --> 00:16:06,840
आप आप पृथ्वी

160
00:16:06,840 --> 00:16:11,760
को गोल मानते हैं ना गोल मानते हैं कि नहीं बिल्कुल गोल

161
00:16:11,760 --> 00:16:17,520
है ना पृथ्वी हां जी हां जी बकल हमारा व्यवहार कैसा होता है पृथ्वी के साथ बिल्कुल

162
00:16:17,520 --> 00:16:21,560
अ दिखने में तो बिल्कुल ऐसे स्ट्रेट हमारा व्यवहार

163
00:16:21,560 --> 00:16:25,560
पृथ्वी चपटी है और वास्तविकता ये है कि पृथ्वी गोल है

164
00:16:25,560 --> 00:16:29,800
तो जो पृथ्वी की जो वास्तविकता है कि पृथ्वी गोल है वो हो गया प्राप्त

165
00:16:29,800 --> 00:16:33,880
व्य परमार्थिक धरातल एक तरीके से और जो व्यावहारिक धरातल

166
00:16:33,880 --> 00:16:38,080
है उसके अनुसार पृथ्वी हमारे लिए गोल है उसी तरीके से कि लीला

167
00:16:38,080 --> 00:16:42,480
रूप में जो भेद दिखाई दे रहा है लीला रूप में तत्व की दृष्टि से सब कुछ एक है

168
00:16:42,480 --> 00:16:46,520
तो यह आदि शंकराचार्य जी का सिद्धांत है और दूसरी बात

169
00:16:46,520 --> 00:16:51,160
य आती है अगर मान लिया जाए कि आदि शंकराचार्य जी ने भी ये लिखा है

170
00:16:51,160 --> 00:16:55,200
मैं तो आपसे पूछ रहा हूं क्या आप जिस ईश्वर की पूजा

171
00:16:55,200 --> 00:16:59,240
कर रहे हैं वह सर्वशक्तिमान है कि नहीं इसमें

172
00:16:59,240 --> 00:17:03,240
मेरे को बार-बार दोहराने की आवश्यकता नहीं है कि सर्वशक्तिमान है और आपके जो प्रश्न था

173
00:17:03,240 --> 00:17:07,360
उसका उत्तर मैंने ऑलरेडी शंकराचार्य कीने कहा वो जो

174
00:17:07,360 --> 00:17:12,120
लहर बनती है अब लहर पर आ जाते हैं आपने कहा वो जो लहर बनती है

175
00:17:12,120 --> 00:17:16,240
वो जो है शंकराचार्य ने कहा नहीं नहीं शंकराचार्य ने तो व्यावहारिक

176
00:17:16,240 --> 00:17:20,440
धरातल पर कहा है ना व्यवहारिक धरातल और परमार्थिक

177
00:17:20,440 --> 00:17:22,280
धरातल को आपको समझना होगा व्यवहारिक

178
00:17:22,280 --> 00:17:26,680
धरातल पर जैसे कि जो हनुमान जी है हनुमान

179
00:17:26,680 --> 00:17:31,600
जी है हम कहते हैं सत्यम ज्ञान अनंतम ब्रह्म

180
00:17:31,600 --> 00:17:35,800
सच्चिदानंद स्वरूप परमेश्वर किसी भी प्रकार के नियम से रहित है वह सभी नियमों

181
00:17:35,800 --> 00:17:39,920
को बनाने वाला सर्व नियामक है हमने कहा सुन लीजिए एक मिनट

182
00:17:39,920 --> 00:17:44,280
सुन लीजिए मुझे पूरा करने दीजिए हमने कहा सच्चिदानंद स्वरूप परमेश्वर

183
00:17:44,280 --> 00:17:48,760
जो है वह सभी नियमों को बनाने वाला सर्व नियामक है अब मान के चलिए

184
00:17:48,760 --> 00:17:53,080
कृष्ण ही है कृष्ण भगवान क्या किसी स्त्री

185
00:17:53,080 --> 00:17:57,600
के साथ दुराचार कर सकते हैं नहीं

186
00:17:57,600 --> 00:18:01,800
नहीं कर सकते तो तो यहां तो इसका मतलब बाधित हो गया ईश्वर अर्थात

187
00:18:01,800 --> 00:18:05,920
यह है कि हमारे लिए कृष्ण भगवान का वही स्वरूप मान्य

188
00:18:05,920 --> 00:18:10,080
है जो कि स्त्री के साथ दुराचार ना करे तभी हम उसे कृष्ण के रूप

189
00:18:10,080 --> 00:18:14,440
में स्वीकारें हमारे लिए राम वही है जो कि एक स्त्री

190
00:18:14,440 --> 00:18:18,480
से ज्यादा विवाह ना करें तभी हम उसको राम के रूप में स्वीकार करेंगे

191
00:18:18,480 --> 00:18:23,160
हमारे लिए हनुमान जी वोह है जो ब्रह्मचर्य का पालन करें

192
00:18:23,160 --> 00:18:27,200
तभी हम उनको हनुमान जी के रूप में स्वीकार करेंगे वरना जब श्री

193
00:18:27,200 --> 00:18:31,240
कृष्ण ने विराट स्वरूप दिखाया तो उसमें से एक मुख हनुमान जी का

194
00:18:31,240 --> 00:18:35,320
भी था तो उस परमार्थिक धरातल पर देखा जाए तो हनुमान

195
00:18:35,320 --> 00:18:37,400
जी भी कृष्ण ही है तो

196
00:18:37,400 --> 00:18:41,800
उस तरह से देखा जाए तो हनुमान जी ने स्त्री को छुआ कृष्ण के रूप में परंतु

197
00:18:41,800 --> 00:18:45,960
हम हनुमान जी उसी रूप को मानेंगे जो स्त्री को नहीं छुए तो

198
00:18:45,960 --> 00:18:50,040
ये व्यवहार और परमार्थ के अंतर को समझिए जो आदि शंकराचार्य जी ने कहा है

199
00:18:50,040 --> 00:18:54,480
आदि शंकराचार्य जी का आज मैंने दिन में भी दिया था

200
00:18:54,480 --> 00:18:59,320
मणि रत्न माला है बहुत सरल उसमें है व्याख्या में प्र प्रश्नोत्तरी

201
00:18:59,320 --> 00:19:03,520
उसमें दसवें नंबर में उनके शिष्य ने उनसे पूछा कि मैं उद्धार के लिए

202
00:19:03,520 --> 00:19:08,200
क्या करूं तो उन्होंने बताया कि विष्णु की पूजा करो

203
00:19:08,200 --> 00:19:12,240
शिव की पूजा करो उन्होंने भेद नहीं माना दूसरी बात जिस

204
00:19:12,240 --> 00:19:16,240
प्रकार से उन्होंने विष्णु के लिए कृष्ण के लिए अनेका अनेक

205
00:19:16,240 --> 00:19:22,240
ग्रंथ लिखे हैं उसी प्रकार से मैं एक मिनट लाकर दिखा देता

206
00:19:27,240 --> 00:19:31,320
हूं मैं आशा करता हूं कि मुझे भी बोलने के लिए थोड़ा

207
00:19:31,320 --> 00:19:37,320
समय इतना

208
00:19:50,600 --> 00:19:54,640
मिलेगा उसी प्रकार से उन्होंने

209
00:19:54,640 --> 00:19:58,640
करीब 72 त्र लिखे हैं अलग-अलग भगवान के के अलग-अलग

210
00:19:58,640 --> 00:20:02,640
रूपों के प्रति उन सब में वो सभी जो भगवान जिसकी बात कर रहे

211
00:20:02,640 --> 00:20:07,120
हैं उसी की श्रेष्ठता वर्णित कर रहे हैं जैसे कि भगवान वेदव्यास

212
00:20:07,120 --> 00:20:11,240
ने जिस समय भगवती पुराण लिखा है उसमें भगवती को ही श्रेष्ठ लिखा

213
00:20:11,240 --> 00:20:15,560
है जिस समय शिव पुराण लिखा है उस समय शिव को ही श्रेष्ठ लिखा है

214
00:20:15,560 --> 00:20:19,760
जिस समय विष्णु पुराण लिखा है उस समय विष्णु को ही श्रेष्ठ लिखा है तो जिस

215
00:20:19,760 --> 00:20:23,960
समय जिसकी बात हो रही है जिसकी जिससे संबंधित वो व्याख्या है

216
00:20:23,960 --> 00:20:28,360
उसी को श्रेष लिखा है पूरी के शंकराचार्य जी का वक्तव्य दिखा दूंगा जिसमें वो एक जगह

217
00:20:28,360 --> 00:20:32,840
जी को बड़ा क रहे भगवती को बड़ा कह रहे वो तो चलो

218
00:20:32,840 --> 00:20:37,080
बात क्या क पर उने

219
00:20:37,080 --> 00:20:41,320
और शिव में भेद है देखो आपने अभी

220
00:20:41,320 --> 00:20:42,240
एक क्वेश्चन किया य

221
00:20:42,240 --> 00:20:46,440
किया आपने पहले मेरे को एक क्वेश्चन का आंसर करिए पहले आप आप

222
00:20:46,440 --> 00:20:50,440
ब्रह्म में मानते हैं या शिव और विष्णु में मानते हैं पले

223
00:20:50,440 --> 00:20:56,440
य अपने बिव विष्णु परमार्थिक धरातल पर

224
00:20:56,440 --> 00:21:00,480
ब्रम ब्रह्म अच्छा फिर आपने क्या वो ब्रह्म सच्चिदानंद

225
00:21:00,480 --> 00:21:04,560
रूप है आपने जैसे अभी बोला अगर वो सच्चिदानंद रूप है तो व ब्रह्म कैसे है

226
00:21:04,560 --> 00:21:09,320
क ब्रह्म तो होता है तो निराकार हो सकता है तो उसका सच्चिदानंद रूप कैसे हो सकता है

227
00:21:09,320 --> 00:21:13,360
जो सच्चिदानंद स्वरूप परमेश्वर है वही अपने आप को

228
00:21:13,360 --> 00:21:17,400
पांच रूपों में व्यक्त करता है वह व्यवहारिक हो जाता है

229
00:21:17,400 --> 00:21:21,480
जब वह ऋग्वेद में वचन है ऋग्वेद में वचन है कि

230
00:21:21,480 --> 00:21:25,640
जब वह अव्यावहारिक है जब उसके प्रति व्यवहार नहीं किया जा सकता है

231
00:21:25,640 --> 00:21:29,720
हम उसे छू नहीं सकते हम उसे देख नहीं सकते हम उसे सुन नहीं सकते यह

232
00:21:29,720 --> 00:21:35,600
अव्यावहारिक हो गया व्यवहार में ना आ सकने वाला

233
00:21:35,600 --> 00:21:40,000
जब सत चित आनंद

234
00:21:40,000 --> 00:21:43,560
सत चित आनंद

235
00:21:43,560 --> 00:21:47,760
जानते म हा ब्रह्म

236
00:21:47,760 --> 00:21:52,640
में आनंद कैसे है सत चित आनंद का अर्थ क्या है

237
00:21:52,640 --> 00:21:56,800
सत का अर्थ है कभी ना बदला जाने वाला सत

238
00:21:56,800 --> 00:22:00,880
और चित का अर्थ है अखंड ज्ञान और आनंद का अर्थ है

239
00:22:00,880 --> 00:22:05,160
कभी ना खत्म होने वाला आनंद हां तो ब्रह्म में आनंद

240
00:22:05,160 --> 00:22:09,240
कैसे है देखिए हम लोगों की जो कन्वर्सेशन है वह बदलती

241
00:22:09,240 --> 00:22:14,080
जाएगी मैं दोबारा से एक बार आपको याद दिला दूं क्वेश्चन यह है क्या

242
00:22:14,080 --> 00:22:18,160
जो भगवान श्री कृष्ण है वह सर्वशक्तिमान है कि नहीं

243
00:22:18,160 --> 00:22:22,440
तो अपने आप दूध दही वाले उदाहरण के अनुसार उनको सही सर्वशक्तिमान

244
00:22:22,440 --> 00:22:26,520
सिद्ध करिए वो बताइए आप देखिए आपने जो बोला है मैं तो बस

245
00:22:26,520 --> 00:22:30,560
उसका उत्तर देने का प्रयास कर रहा हूं अगर आप पांच बातें बोल के मुझे कहोगे मेरी पहली वाली बात

246
00:22:30,560 --> 00:22:34,680
का उत्तर दो तो ऐसे तो नहीं चलेगा अगर आपने पांच बा ठी आप बात की पांच बातें

247
00:22:34,680 --> 00:22:38,880
छोड़ दीजिए एक एक बात को पकड़िए पहले इसको क्लियर करिए

248
00:22:38,880 --> 00:22:43,120
क्या जो इकोन के द्वारा पूजित होने वाला कृष्ण है

249
00:22:43,120 --> 00:22:47,200
वो सर्वशक्तिमान है कि नहीं यह बताइए आप तो

250
00:22:47,200 --> 00:22:50,720
इसका अर्थ तो यही हुआ अगर आप मुझसे प्रश्न करेंगे कि कोई दूध

251
00:22:50,720 --> 00:22:54,840
बन दूध से दही बन सकती है और दही से दूध नहीं बन सकता इसका उत्तर दीजिए और अगर

252
00:22:54,840 --> 00:22:59,240
मैं शंकराचार्य को कोट करके कोई उत्तर दूंगा तो आप यही बोल देंगे नहीं परमार्थ

253
00:22:59,240 --> 00:23:03,240
शरार जी कीकर शंकराचार्य जी की और भी तो

254
00:23:03,240 --> 00:23:07,360
बुक्स है जिसम उन्होने उनको सर्वशक्तिमान कहा बोल तो रहा हूं रेफरेंस

255
00:23:07,360 --> 00:23:12,040
दे तो रहा हूं आपको यह तो देखो

256
00:23:12,040 --> 00:23:18,040
तो भाष्य सवाद है वो तो सारा

257
00:23:22,160 --> 00:23:26,520
मायावादी आगे उस पर हम बात कर लेंगे अभी फिलहाल आप इसकन

258
00:23:26,520 --> 00:23:30,520
के द्वारा पूजित होने वाले कृष्ण को सर्वशक्तिमान सिद्ध करिए यह जो

259
00:23:30,520 --> 00:23:35,480
ब्रह्म समता में रेफरेंस दिया गया है इसमें कहा गया है जिस प्रकार

260
00:23:35,480 --> 00:23:39,520
इसमें जो कहा गया है कि दूध से दही नहीं दही से दूध नहीं

261
00:23:39,520 --> 00:23:44,760
बन सकता है इसके आधार पर आप श्री कृष्ण को सर्वशक्तिमान सिद्ध

262
00:23:44,760 --> 00:23:48,760
करिए खैर ठीक है आपने श्रीपाद आदि शंकराचार्य का जो मैंने उत्तर दिया

263
00:23:48,760 --> 00:23:53,200
उसमें आपने भेद कर लिया चलो ठीक है अब अब देखिए ऐसा है जो

264
00:23:53,200 --> 00:23:57,240
सिद्धांतहा सदा उतर दे रहा हं उत्तर दे रहा हू उत्तर

265
00:23:57,240 --> 00:24:01,400
दे रहा हूं बन रहे उत्तर दे रहा हूं आप निर्णायक बन रहे हैं वो

266
00:24:01,400 --> 00:24:05,440
जो लहर सुनिए उस उत्तर को सुन लीजिए वो जो लहर आ रही है वो केवल

267
00:24:05,440 --> 00:24:06,000
हमारा

268
00:24:06,000 --> 00:24:10,200
जो हमें जो दिखाई दे आदि शंकराचार्य के नजरिए से देखे तो वो जो

269
00:24:10,200 --> 00:24:14,360
लहर आ रही है उसमें रूप का भेद है तत्व का रूप का भेद नहीं है

270
00:24:14,360 --> 00:24:18,520
वही लहर है वही पानी है जो लहर दिखाई दे रहा है इसका अर्थ

271
00:24:18,520 --> 00:24:22,560
है तात्विक रूप से हम एक है तो फिर इसका मतलब है अगर इस सिद्धांत के

272
00:24:22,560 --> 00:24:26,800
अनुसार आप ईश्वर को सर्वशक्तिमान सिद्ध कर रहे हैं तो फिर तो आप

273
00:24:26,800 --> 00:24:30,880
शंकर मान रहे जिसम जिसमें की रूप अलग-अलग

274
00:24:30,880 --> 00:24:34,920
दिखाई दे रहे हैं परंतु वास्तविक रूप एक ही है तो फिर

275
00:24:34,920 --> 00:24:39,440
उस रूप में आकर के बा हो गया ईश्वर अगर वो ब्रह्म जो पांच रूप

276
00:24:39,440 --> 00:24:43,600
ये तो मैं तब मान रहा हूं ना जब मैं ईश्वर के जो दिखाई देने वाला रूप है उसको

277
00:24:43,600 --> 00:24:48,360
ये मानू कि व जो है भ्रम है यह तो तब है ना

278
00:24:48,360 --> 00:24:52,800
यह तो तब है ना जो आप जो बात कह रहे हो वो जो दिखाई देने वाला रूप है

279
00:24:52,800 --> 00:24:56,920
वो भ्रम है जब उसको भ्रम मानेंगे तब आप यह कह पाएंगे

280
00:24:56,920 --> 00:25:00,960
कि हां वो बाधित हुआ अगर आप वो भ्रम नहीं मानेंगे आप तो

281
00:25:00,960 --> 00:25:04,960
भ्रम नहीं मानते उसको आप तो कहते हो जो भी आंखों से दिखाई दे रहा है सब

282
00:25:04,960 --> 00:25:09,120
कुछ सत्य है माया को मानते ही नहीं हो आप

283
00:25:09,120 --> 00:25:11,880
आप

284
00:25:11,880 --> 00:25:15,920
मानते माया विष्णु से सदाशिव महाविष्णु से

285
00:25:15,920 --> 00:25:20,240
सदाशिव का रूप अगर आप घोड़ वैष्ण कहा

286
00:25:20,240 --> 00:25:24,240
हमलोग भटक जाएंगे बात ी हो जाएगी मैं आपसे

287
00:25:24,240 --> 00:25:28,240
कह रहा हूं शंकराचार्य जी का जो आपने कोट किया है उसको आप साइड

288
00:25:28,240 --> 00:25:32,400
में रखिए आप अपने सिद्धांत के अनुसार यह सिद्ध करिए जो आप

289
00:25:32,400 --> 00:25:37,000
जानते हो जो आप मानते हो उसके अनुसार य सिद्ध करिए कि

290
00:25:37,000 --> 00:25:41,520
क्या कहते हैं कि इसकन के द्वारा पूजित होने वाला जो ईश्वर है वह सर्वशक्तिमान

291
00:25:41,520 --> 00:25:45,640
है यह बताइए आप मैं आपने जो दूध दही के

292
00:25:45,640 --> 00:25:49,760
आप आए हैं ना बात प उसी का उत्तर दूंगा मैं दूध मतलब महाविष्णु ठीक है

293
00:25:49,760 --> 00:25:53,920
और दही मतलब सदाशिव अब दूध से दही तो बना विष्णु तत्व से शिव तत्व

294
00:25:53,920 --> 00:25:58,120
अलग तो हुआ परंतु अब ये समझने की चीज है महा विष्णु

295
00:25:58,120 --> 00:26:02,200
से शिव निकले हैं अब अगर आप सिद्धांत की बात कर रहे आपका सिद्धांत क्या मैं वो

296
00:26:02,200 --> 00:26:06,240
समझा रहा हूं जो कि महाविष्णु से सदा शिव निकले ठीक है लेकिन वो

297
00:26:06,240 --> 00:26:10,360
सदा महाविष्णु सदाशिव में नहीं जा सकते हैं वो सदाशिव महाविष्णु में वापस चले जाएंगे

298
00:26:10,360 --> 00:26:14,360
परंतु वो सदाशिव महाविष्णु नहीं बन सकते हैं क्यों क्योंकि हमारा जो

299
00:26:14,360 --> 00:26:19,240
सिद्धांत है वो यही है कि कृष्ण ही

300
00:26:19,240 --> 00:26:23,960
परमेश्वर अभी मैंने आप करने कोश

301
00:26:23,960 --> 00:26:28,320
कर इसको एक एक करके क्लियर करते हैं जब महाविष्णु

302
00:26:28,320 --> 00:26:32,400
शिव बने तो उनके अंदर कुछ विकृति आई कुछ

303
00:26:32,400 --> 00:26:36,440
कमी आई क्वालिटीज में गिरावट आई क्या आई वो पूर्ण

304
00:26:36,440 --> 00:26:40,520
नहीं रहे के संपक में माया के

305
00:26:40,520 --> 00:26:44,520
संपर्क में जब शिव होते हैं व तो

306
00:26:44,520 --> 00:26:48,520
इसका अर्थ य है कृष्ण माया के संपर्क में आते हैं तो उन

307
00:26:48,520 --> 00:26:53,000
वो बाधित हो जाते हैं कृष्ण माया के संपर्क में नहीं आते हैं कृ

308
00:26:53,000 --> 00:26:57,040
कृष्ण कृष्ण के कृष्ण

309
00:26:57,040 --> 00:27:01,600
से अलग होते हैं सदाशिव वो माया के संपर्क में आते कृ की

310
00:27:01,600 --> 00:27:05,880
इ जब कृ कोई तत्व अलग

311
00:27:05,880 --> 00:27:10,760
इसका मतलब अगर इच्छा हुई तो वापस कृष्ण बन सकते हैं

312
00:27:10,760 --> 00:27:14,880
वह कृष्ण नहीं बन सकते वो कृष्ण में समा सकते हैं ऐसा हम कह सकते हैं मैं

313
00:27:14,880 --> 00:27:19,000
ये पूछ रहा हूं अगर इच्छा हुई तो वापस कृष्ण बन सकते शव कृष्ण नहीं बन

314
00:27:19,000 --> 00:27:23,000
सकते हैं शिव कृष्ण नहीं बन सकते ये ये तो आपका क्लेम है अभी हम

315
00:27:23,000 --> 00:27:27,040
बात कर रहे हैं आप ऐसे उंगली दिखा कर के अपने क्लेम को आखरी बात मत बताइए मैं

316
00:27:27,040 --> 00:27:31,120
आपसे पूछ रहा हूं कि जब विष्णु माया के संपर्क में आते हैं विष्णु

317
00:27:31,120 --> 00:27:34,360
से अलग होने के बाद वो जो टुकड़ा है वो जो अंश है जो

318
00:27:34,360 --> 00:27:38,520
शिव कह रहे हो जिसे आप वो जब माया के संपर्क में आता है वो अपूर्ण हो जाता है

319
00:27:38,520 --> 00:27:42,920
तो मैं पूछ रहा हूं क्या अपने एक तिनके मात्र के अंश में ईश्वर

320
00:27:42,920 --> 00:27:47,160
सर्वशक्तिमान है कि नहीं शिव

321
00:27:47,160 --> 00:27:51,480
जीी भी सर्वशक्तिमान है क्योंकि वो विष्णु तत्व से निकले हैं शिव तत्व से निकले

322
00:27:51,480 --> 00:27:55,520
वो सारे कार्य कर सकते हैं जो विष्णु कर सकते हैं मैं पूछ

323
00:27:55,520 --> 00:27:59,840
रहा हूं वो सारे कार्य कर सकते हैं जो सब कार्य कर सकते आप मेरे को सुन नहीं रहे हैं

324
00:27:59,840 --> 00:28:04,080
अगर आप सुने अगर मेरे को बीच बच में का अगर आप बीच

325
00:28:04,080 --> 00:28:08,880
बीच में काटेंगे तो फिर नहीं हो सकता है ये सब है ना विष्णु

326
00:28:08,880 --> 00:28:13,280
देखो मेरी बात को समझने का प्रयास कीजिए महाविष्णु जो तत्व

327
00:28:13,280 --> 00:28:17,800
उनसे विष्णु से जो तत्व अलग होता है व शिव तत्व है ठीक है परंतु

328
00:28:17,800 --> 00:28:22,200
विष्णु तत्व से शिव तत्व आ सकता है शिव तत्व से विष्णु तत्व नहीं आ सकता है अब कोई कहे

329
00:28:22,200 --> 00:28:26,440
कि वो विष्णु ही है जो शिव बने विष्णु शिव नहीं बने हैं विष्णु ने

330
00:28:26,440 --> 00:28:30,480
एक क्रिएशन वि की क्रिएशन है वो शिव

331
00:28:30,480 --> 00:28:35,120
नहीं बनते हैं आप यह कह रहे हो जी ये मैं य कह रहा हूं

332
00:28:35,120 --> 00:28:39,360
मतलब विष्णु ने अपने मन में विष्णु भगवान ने कुछ सोचा और

333
00:28:39,360 --> 00:28:43,760
जो है सामने वो प्रकट हो का उधार करने

334
00:28:43,760 --> 00:28:48,000
तामस का उद्धार करने के लिए इसलिए उन्होने

335
00:28:48,000 --> 00:28:49,400
विषय अंतर हो जाएगा वो आगे

336
00:28:49,400 --> 00:28:54,200
बात कर लेंगे वि

337
00:28:54,200 --> 00:28:58,280
भगवान मैं पूछ रहा हूं आपने कहा वो क्रिएट बनते नहीं

338
00:28:58,280 --> 00:29:02,440
है आपने य कहाना उसका उतर ऐसा दे रहा हूं क्योंकि

339
00:29:02,440 --> 00:29:06,840
उ आपसे पूछ रहा व क्रिएट करते हैं बनते नहीं है

340
00:29:06,840 --> 00:29:12,840
नहीं अपने में से तत्व को अलग करते हैं ऐसा किससे

341
00:29:13,280 --> 00:29:17,400
किससे विष्णु त विष्णु से जब तत्व अलग

342
00:29:17,400 --> 00:29:21,400
होता है तो मैं वही पूछ रहा हूं जब मुझसे मेरा कोई टुकड़ा

343
00:29:21,400 --> 00:29:26,320
अलग हुआ तो उस टुकड़े में मैं सर्वशक्तिमान हूं कि

344
00:29:26,320 --> 00:29:30,440
नहीं शक्तिमान नहीं है बिल्कुल शिव सर्व शक्तिमान विष्णु

345
00:29:30,440 --> 00:29:35,440
के बराबर शक्तिमान नहीं है ठीक है नहीं है

346
00:29:35,440 --> 00:29:39,840
इसका मेरे से जब कोई टुकड़ा अलग होता है तो मैं उसमें बाधित

347
00:29:39,840 --> 00:29:43,880
होता हूं मेरे से लग होता

348
00:29:43,880 --> 00:29:48,040
है तो मैं उस उस उस टुकड़े में पूर्ण नहीं हो

349
00:29:48,040 --> 00:29:52,280
सकता मैं अपने एक प्रैक्टिकल

350
00:29:52,280 --> 00:29:56,320
और देख लीजिए मैं अपने शरीर के एक अंग में पूर्ण नहीं हो

351
00:29:56,320 --> 00:30:00,320
सकता आप यह कहना चाह रहे हैं मैं तो ये कहना ही नहीं

352
00:30:00,320 --> 00:30:04,560
चाह रहा आप एक्चुअली समझना नहीं चाह रहे मैं क्या कहना चाह रहा हूं विष्णु विष्णु हमेशा पूर्ण

353
00:30:04,560 --> 00:30:09,000
ही रहेंगे ठीक है क्योंकि देखो आप जो है लिमिटेड

354
00:30:09,000 --> 00:30:13,280
है आप जो लिमिटेड है लिमिटेड में से कुछ निकालो तो उसको

355
00:30:13,280 --> 00:30:17,320
कमी होगी लेकिन जो इनफाइकिल भी जाएगा तब भी वो इनफा

356
00:30:17,320 --> 00:30:21,920
ही रहेगा तो विष्णु जो है

357
00:30:21,920 --> 00:30:26,080
कृ मेरा मेरा जो अंश अलग हुआ है

358
00:30:26,080 --> 00:30:30,240
उस अंश में सर्वशक्तिमान की पूरी ताकत है या नहीं यह

359
00:30:30,240 --> 00:30:34,520
बताइए सर्वशक्तिमान की पूरी ताकत नहीं जो टुकड़ा अलग हुआ यानी

360
00:30:34,520 --> 00:30:38,680
कि विष्णु का विष्णु भगवान का अगर एक अंग अलग हो जाता है तो

361
00:30:38,680 --> 00:30:42,760
वो जो अंग है वो सर्वशक्तिमान नहीं है विष्णु अपने

362
00:30:42,760 --> 00:30:47,120
अंश में विष्णु अपने अंश में सर्वशक्तिमान

363
00:30:47,120 --> 00:30:51,320
नहीं हो सकते विष्णु जब पूरे के पूरे हैं

364
00:30:51,320 --> 00:30:56,040
तभी वो सर्वशक्तिमान हो सकते हैं विष्णु हमेशा से ही सर्वशक्तिमान शिव

365
00:30:56,040 --> 00:31:00,840
सर्वशक्तिमान नहीं है मैं आप शक्तिमान हैव शक्तिमान नहीं

366
00:31:00,840 --> 00:31:05,080
बस आपकी बात हो गई खम हो गई आपकी बात खत्म

367
00:31:05,080 --> 00:31:09,120
करने ही नहीं दे रहे आपसे पूछ रहा हूं विष्णु तभी तक सर्वशक्तिमान है जब तक वो

368
00:31:09,120 --> 00:31:13,320
पूरे हैं अगर वो अपने एक अंश रूप में चले जाएंगे

369
00:31:13,320 --> 00:31:17,360
तो वह सर्वशक्तिमान नहीं रह जाएंगे क्या आप अंश और तत्व में भेद नहीं

370
00:31:17,360 --> 00:31:21,880
समझते हैं क्या हम भेद नहीं समझते ना इसीलिए तोत

371
00:31:21,880 --> 00:31:26,000
ये समय कहते हैं सुनिए हम तो ये कहते हैं कि विष्णु

372
00:31:26,000 --> 00:31:30,600
ही शिव बने कोई पावर्स का अंतर ही नहीं आया और वो दोनों ही

373
00:31:30,600 --> 00:31:35,400
बना प क्या विष्णु बाधित है बिना शिव बने को कार्य नहीं कर सकते

374
00:31:35,400 --> 00:31:37,600
बन का कर सते

375
00:31:37,600 --> 00:31:41,680
भगवान को य संसार बनाना क्यों पड़ा भगवान

376
00:31:41,680 --> 00:31:45,680
को य संसार बनाना क्यों पड़ा अभी

377
00:31:45,680 --> 00:31:49,720
अगर अपने सिद्धांत की बात करूंगा क्योंकि हमारा जो सिद्धांत है व भक्ति है भैया

378
00:31:49,720 --> 00:31:53,800
हरि नाम संकीर्तन है भक्ति है अरे आपसे पूछ रहा भगवान ने संसार की

379
00:31:53,800 --> 00:31:57,800
रचना क्यों की भगवान ने संसार की र क्योंकि अगर

380
00:31:57,800 --> 00:32:02,800
मैं आपको वो समझाने को आऊंगा तो आप समझेंगे नहीं अगर आप चाहते हैं कि अपने सिद्धांत के हिसाब

381
00:32:02,800 --> 00:32:06,920
सेल में लाइन आती है सुप्रीम एंजॉयर एंजॉय के लिए

382
00:32:06,920 --> 00:32:11,000
किया ना नहीं भगवान को भगवान के लिए करते हैं विष्णु

383
00:32:11,000 --> 00:32:15,680
बनते हैं शिव बनते हैं माता दुर्गा भगवती बनते हैं काली बनते हैं

384
00:32:15,680 --> 00:32:20,000
य स्कार करने में आपको क्या दिक्कत हो रही है अगर आप कहेंगे

385
00:32:20,000 --> 00:32:24,400
की शिव अलग से कोई तत्व है विष्णु से तो फिर तव

386
00:32:24,400 --> 00:32:28,880
कई हो जाएंगे आपका द सिद्धांत भी खंडित हो जाए द

387
00:32:28,880 --> 00:32:32,800
सि मानते नहीं हम अचिंत

388
00:32:32,800 --> 00:32:36,800
भद आ जाएंगे कुछ देर बाद अचत भदा भी आएंगे

389
00:32:36,800 --> 00:32:41,120
विषयात ना हो जाए फिलहाल

390
00:32:41,120 --> 00:32:45,720
सिद्ध नहीं कर पा रहे हैं कि विष्णु जब दिया

391
00:32:45,720 --> 00:32:50,080
नहीं कर विष्णु जब अपना एक अंश निकालते हैं अपने से अलग

392
00:32:50,080 --> 00:32:54,640
तो उस अंश के रूप में विष्णु सर्वशक्तिमान नहीं होते

393
00:32:54,640 --> 00:32:58,880
अंश के रूप में व विष्णु है ही नहीं अब को क्यों नहीं समझ रहेरी

394
00:32:58,880 --> 00:33:03,480
बात वो जो अंश हुआ है अलग कहां से हुआ है

395
00:33:03,480 --> 00:33:07,880
शिव तत्व विष्ण त कहा से हुआ है अंश

396
00:33:07,880 --> 00:33:12,160
क्या होता है ना मैं आपको

397
00:33:12,160 --> 00:33:16,640
बताऊ जो भगवान के अवतार हो बोगे नहीं बात घुमाओ

398
00:33:16,640 --> 00:33:20,920
मैं पूछ रहा हूं अभी आपने कहा विष्णु के है आपने टुकड़े

399
00:33:20,920 --> 00:33:25,000
करके दो कर दिया अब आप भी तो एक प नहीं टिके टुकड़े करके दो कर दिया आपने

400
00:33:25,000 --> 00:33:31,000
भी आप तो कहते मान

401
00:33:33,240 --> 00:33:37,400
इस शिव सर्वशक्तिमान नहीं है विष्णु ही सर्वशक्तिमान है ये

402
00:33:37,400 --> 00:33:42,040
तो आपका क्लेम है तभी तो मैंने

403
00:33:42,040 --> 00:33:46,520
से शिव निकल रहे हैं तो अपने छोटे अंश में क्या विष्णु

404
00:33:46,520 --> 00:33:50,160
सर्वशक्तिमान नहीं

405
00:33:50,160 --> 00:33:54,920
होते कहीं और से आते शिवजी कहीं और से आते हैं क्या

406
00:33:54,920 --> 00:33:59,000
आपको अभी पढ़ने की जरूरत है अंश और तत्व क्या होता है थोड़ा सा है ना आप अपने

407
00:33:59,000 --> 00:34:05,000
चीज पढ़ अच्छ तो ये बात तो आप मुझे

408
00:34:27,600 --> 00:34:31,640
जिसन ईश्वर को सर्वशक्तिमान सिद्ध करने के पीछे

409
00:34:31,640 --> 00:34:35,640
पड़ जाएंगे तब आप आप ये व्यवहारिक धरातल और परमार्थिक धरातल

410
00:34:35,640 --> 00:34:40,480
को जानेंगे देखिए आप शकर को जानेंगे तब

411
00:34:40,480 --> 00:34:44,480
आप श सम शंकराचार्य को समझना ही नहीं है शंकराचार्य

412
00:34:44,480 --> 00:34:48,520
वैष्णव थे वो वैष्णव से वैष्णव

413
00:34:48,520 --> 00:34:52,520
के अंदर जो मिलावटी लोग है जो समर्थ बनना चाहते उनको अलग करने के लिए आए थे मायावा

414
00:34:52,520 --> 00:34:56,880
देने के लिए आए थे पद्म पुराण में शिवजी स्वयं बता रहे हैं

415
00:34:56,880 --> 00:35:01,320
वो हम देख लेंगे वो भी हम आएंगे विषयात हो जाएगा अभी आप इस चीज से आ

416
00:35:01,320 --> 00:35:05,280
ब आप अपनी बात बोल करके पीछे हट जाते हैं और

417
00:35:05,280 --> 00:35:09,440
जब मैं उस बात पर पहुंचता तो आप कहते वि अभी एक ही टॉपिक चल रहा है

418
00:35:09,440 --> 00:35:14,080
क्या विष्णु भगवान से जो अंश अलग होता है जिसको आप शिव कहते हो

419
00:35:14,080 --> 00:35:18,520
वह जो अंश अलग होता है क्या विष्णु भगवान अपने अंश में पूर्ण

420
00:35:18,520 --> 00:35:22,600
नहीं होते क्या पूर्ण नहीं होते अपनी इच्छा से

421
00:35:22,600 --> 00:35:27,040
हो सकते हैं परंतु नहीं होते अगर उनकी इच्छा ई तो हो सकते हैं

422
00:35:27,040 --> 00:35:31,160
उनकी इच्छा हो तो सब कुछ हो सकते हैं उनकी इच्छा हो तो

423
00:35:31,160 --> 00:35:36,000
अपने अंश के रूप में पूर्ण होने की उनकी इच्छा हुई तो हो सकते हैं

424
00:35:36,000 --> 00:35:40,200
बिल्कुल हो सकते हैं तो इसका मतलब यह क्लेम करना गलत है कि वापस विष्णु

425
00:35:40,200 --> 00:35:44,320
नहीं बन सकता उनसे कोई नहीं शिव विष्णु नहीं बन सकता जो शिव है विष्णु

426
00:35:44,320 --> 00:35:48,640
में समा सकते हैं इच्छा हो तब भी नहीं हो सकता हा जी इच्छा

427
00:35:48,640 --> 00:35:52,960
हो तब भी नहीं हो सकता इच्छा विष्णु की इच्छा होगी नहीं विष्णु अपने रूप

428
00:35:52,960 --> 00:35:57,160
में करेगा शिवजी का जो स्वरूप है वो

429
00:35:57,160 --> 00:36:01,840
नहीं नहीं विष्णु भगवान की इच्छा होगी कि नहीं होगी आप डिसाइड करोगे

430
00:36:01,840 --> 00:36:06,000
भगवान विष्णु डिसाइड करेंगे लेकिन अगर आपको थोड़ी सी भगवान

431
00:36:06,000 --> 00:36:10,040
विष्णु डिसाइड करेंगे तो अगर उनकी इच्छा हो गई कि मैं भाई शिव

432
00:36:10,040 --> 00:36:14,320
से एक और विष्णु निकाल दूं तो आप उसमें रोक दोगे कि नहीं निकल सकता

433
00:36:14,320 --> 00:36:18,320
एक और विष्णु देखिए जो जो पहला

434
00:36:18,320 --> 00:36:20,320
स्वरूप है भगवान का वो विष्णु का

435
00:36:20,320 --> 00:36:24,520
है शिव का स्वरूप बाद में आता है तो ओरिजिनल जो स्वरूप है भगवान

436
00:36:24,520 --> 00:36:28,280
का वो विष्णु का है कृष्ण का है तो आप

437
00:36:28,280 --> 00:36:32,400
पहला स्वरूप है वो विष्णु है मगर ऐसा नहीं है कि जो शिव स्वरूप है जो

438
00:36:32,400 --> 00:36:36,440
सेकंड नंबर पर जो स्वरूप है जो रूप ले रहे हैं आपको यह कहना चाहिए

439
00:36:36,440 --> 00:36:40,480
कि ऐसा नहीं है कि वो अपूर्ण है ऐसा नहीं है कि वह सर्वशक्तिमान नहीं है विष्णु

440
00:36:40,480 --> 00:36:44,760
भगवान ही शिव बनते हैं आप आ गए हमारी जगह पर जो हम कह रहे

441
00:36:44,760 --> 00:36:49,120
बनते नहीं ऐसा तो नहीं है आप अगर जबरदस्ती

442
00:36:49,120 --> 00:36:53,240
घ रहे बात करेंगे आप अगर पहले स्वरूप की बात करेंगे

443
00:36:53,240 --> 00:36:57,240
तो एक व्यक्ति जैसे आप वो उदाहरण देते हैं आपके कई लोग देते हैं कि एक

444
00:36:57,240 --> 00:37:01,280
व्यक्ति घर में अलग रूप में होता है और बाहर अलग रूप में होता है और कहीं ऑफिस

445
00:37:01,280 --> 00:37:05,360
में अलग रूप में होता है तो ठीक है अच्छी बात है मगर इन अलग-अलग रूपों में

446
00:37:05,360 --> 00:37:09,520
उस व्यक्ति जो घर में था उसके अंदर कोई विकृति थोड़ी ना आई वो तो अपने रूप बदल

447
00:37:09,520 --> 00:37:13,520
रहा है इसका अर्थ य अगर यह वाली बात आप लेंगे जो पहला रूप है विष्णु

448
00:37:13,520 --> 00:37:17,600
दूसरा रूप है शिव या तीसरा रूप है शिव तो इसमें तो ये विष्णु ही शिव बन रहे

449
00:37:17,600 --> 00:37:21,720
हैं शिव ही ब्रह्मा बन रहे हैं तो इनम तो भेद है ही नहीं फिर रूप अलग अलग हो रहे

450
00:37:21,720 --> 00:37:25,760
है अब किसी व्यक्ति को उनके ऑफिशियल रूप से प्यार हो गया

451
00:37:25,760 --> 00:37:30,120
किसी व्यक्ति को के घरेलू रूप से प्यार हो गया ये व्यक्ति की श्रद्धा है आप उस पर थोप

452
00:37:30,120 --> 00:37:34,200
मत नहीं पहले वाले रूप प ही

453
00:37:34,200 --> 00:37:38,200
जाओ सुनिए शांत हो जाइए प्रभु सुनिए जी अब अगर अभी

454
00:37:38,200 --> 00:37:42,640
आपना ये चीज बता रहे हैं कि हम यह सोचते हैं कि वो उनमें हम भेद करते हैं

455
00:37:42,640 --> 00:37:46,800
इस तरह से कि वो एक नहीं है मतलब कि एक ही नहीं है इन द सेंस आपके वाला

456
00:37:46,800 --> 00:37:52,800
द्वैतवाद नहीं एक नहीं इन द सेंस की शिव ही विष्णु और शिव

457
00:37:54,040 --> 00:37:58,160
में नहीं मानता है कि महाविष्णु सदा भेद है

458
00:37:58,160 --> 00:38:02,520
परंतु कहने का अर्थ जो यह है कि जो सदाशिव है व महाविष्णु

459
00:38:02,520 --> 00:38:06,920
से निकले हैं जो सदाशिव महाविष्णु में ही जाते वो निकले नहीं है

460
00:38:06,920 --> 00:38:10,960
महाविष्णु ही शिव बने अगर इसको मानेंगे तो तो ठीक है निकले हैं

461
00:38:10,960 --> 00:38:15,000
कहेंगे और फिर कहेंगे कि उनमें कमी आ गई अभी आपने कहा व सर्वशक्तिमान

462
00:38:15,000 --> 00:38:19,040
नहीं है वो पूर्ण नहीं है शिवजी तो अगर आप यह कहेंगे तो विष्णु में ही तो

463
00:38:19,040 --> 00:38:23,120
अपूर्णता आई अगर वो निकले हैं तो फिर विष्णु

464
00:38:23,120 --> 00:38:27,160
बाधित है अगर वो विष्णु बने हैं तो विष्णु बाधित

465
00:38:27,160 --> 00:38:31,240
फिर व अपर्ण नहीं है शिवजी आप

466
00:38:31,240 --> 00:38:35,520
शिव और वि को शिव और विष्णु को एक जगह पर रखने की कोशिश कर रहे लेकिन

467
00:38:35,520 --> 00:38:40,080
हम एक जगह आपका क्लेम है और व चैलेंजिंग

468
00:38:40,080 --> 00:38:46,080
उसी को चैलेंज कर

469
00:38:46,440 --> 00:38:50,840
रहा शास्त्र कोट कर रहा परम विष्णु न मुक्ति साधन

470
00:38:50,840 --> 00:38:55,080
परम विष्णु है अगर यहा पर हो सता परम विष्णु शिव

471
00:38:55,080 --> 00:38:59,400
ऐसा हो सकता था लेकिन प अा मैं आपको शास्त्र कोट करू तो

472
00:38:59,400 --> 00:39:04,040
चलेगा चलेगा बिल्कुल चलेगा आप क्या ही शस्त्र तो

473
00:39:04,040 --> 00:39:10,040
शरार के शास्त्र कोट करेंगे आदि शंकराचार्य का दिया भाष्य वैसे ही

474
00:39:12,720 --> 00:39:17,160
मायावादी आपको हां जी बोलिए अभी

475
00:39:17,160 --> 00:39:21,520
अभी मैं दिख रहा था कुछ देर के लिए जब मैंने स्क्रीन ऑफ की थी

476
00:39:21,520 --> 00:39:27,520
नहीं स्टिल हो गई थी आपकी फोटो अच्छा ठीक है तो मैं अभी आपको कोट कर रहा

477
00:39:55,400 --> 00:40:01,400
हम

478
00:40:33,480 --> 00:40:37,880
कहां गए भैया ना सुनाई दे रहे ना दिखाई दे रहे हो श्रीमद्

479
00:40:37,880 --> 00:40:43,200
भागवत का बता रहा हूं मैं

480
00:40:43,200 --> 00:40:49,200
आपको चाछ 50 शिव जीी ही सबके मूल

481
00:40:51,280 --> 00:40:55,320
हैं शिवजी ही सबके मूल हैं मूल का अर्थ क्या होता

482
00:40:55,320 --> 00:40:57,600
है

483
00:40:57,600 --> 00:41:01,600
और 8 सा 21 से 31 शिव जी की

484
00:41:01,600 --> 00:41:06,160
व्याख्या है परम सब कुछ परम वही है विष्णु भी उनसे ही निकले हैं सब

485
00:41:06,160 --> 00:41:10,600
कुछ विष्णु भी उनसे निकले हैं ठीक है आपको अभी

486
00:41:10,600 --> 00:41:14,640
दो तीन चीज और समझने की जरूरत है महाविष्णु और सदाशिव की हमने

487
00:41:14,640 --> 00:41:18,800
बात कही थी जैसे तो उसके बाद गर्भ दक्षा

488
00:41:18,800 --> 00:41:22,800
विष्णु शिरो दक्षा विष्णु की व्याख्या अगर आप भागवत भी पढ़ेंगे तो भागवत में आपको य भी

489
00:41:22,800 --> 00:41:26,880
पढ़ना चाहिए कि गर्भ दक्ष और शिरो दक्ष विष्णु भी है जैसे कि महाविष्णु

490
00:41:26,880 --> 00:41:31,120
सदाशिव एक ही प्लेटफार्म पर है तो उनके महाभारत अनुशासन

491
00:41:31,120 --> 00:41:35,480
पर्व 14 एक 18 उसमें लिख रहे हैं कि जो विष्णु

492
00:41:35,480 --> 00:41:39,520
जो शिव है वही सबके मूल है और सबके दृष्टा शिव है

493
00:41:39,520 --> 00:41:44,240
ब्रह्मा विष्णु महेश के भी दृष्टा शिव है अब बताइए क्या करें

494
00:41:44,240 --> 00:41:48,240
अब इसमें तो शिव जी सेही पूछना पड़ेगा और शिव जी तो यह बता रहे हैं कि ऐसी जो भी बातें कही

495
00:41:48,240 --> 00:41:52,240
जाती है भ्रम फैलाने के लिए कही जाती है तो फिर जब एक ही व्यक्ति

496
00:41:52,240 --> 00:41:56,640
खुद कह रहा है जो व्यक्ति एक बात कह रहा है वही व्यक्ति अपनी बात के लिए ब्रम

497
00:41:56,640 --> 00:41:58,280
कह रहा है तो दोनों में से किसी एक

498
00:41:58,280 --> 00:42:04,280
बात को हम किस आधार पर मानेंगे व इस आधार पर मानेंगे

499
00:42:05,200 --> 00:42:09,280
इस आधार पर नहीं मानेंगे ना जब वो खुद अपनी बात

500
00:42:09,280 --> 00:42:13,520
को कह रहे हैं कि मैं विश्वास के योग्य नहीं हूं भाई

501
00:42:13,520 --> 00:42:17,680
जिसको भ्रम फैलाना है वह भ्रम फैलाए जब वह

502
00:42:17,680 --> 00:42:21,840
कह रहे हैं कि मेरी अन्य बातें भ्रम फैलाने के लिए हैं तो उनकी

503
00:42:21,840 --> 00:42:25,880
यह बात पर विश्वास कैसे होगा कि यह बात भ्रम फैलाने

504
00:42:25,880 --> 00:42:29,880
के लिए जो व्यक्ति एक बार कोय कह दे जो व्यक्ति एक

505
00:42:29,880 --> 00:42:35,160
बार को ये कह दे कि मैं भ्रम फैलाता हूं तो वो पता नहीं कहां कहा प भ्रम

506
00:42:35,160 --> 00:42:39,240
फैलाए जो अब्राम सोच है अब्राम सोच

507
00:42:39,240 --> 00:42:43,880
है दो 106 में अब्राम ईश्वर ने यह कहा

508
00:42:43,880 --> 00:42:48,120
कि मैं अपनी आयतों को बदल देता हूं मैं जो

509
00:42:48,120 --> 00:42:52,160
आदेश देता हूं उनको मैं समय समय पर बदल देता हूं तो फिर यह हो गया कि

510
00:42:52,160 --> 00:42:56,320
अब वो कौन सी आयत को बदलेगा किसको नहीं बदलेगा य तो भ्रम हो गया

511
00:42:56,320 --> 00:42:59,520
इसलिए पम

512
00:42:59,520 --> 00:43:03,720
पुराण हमारा जो आधार होता है इसलिए हमारा जब आधार

513
00:43:03,720 --> 00:43:08,080
होता है निर्णय करने का कि कौन सी बात माने कौन सी नहीं माने

514
00:43:08,080 --> 00:43:12,320
उसका आधार होता है वेद उसका आधार होता है श्रुति

515
00:43:12,320 --> 00:43:13,360
अगर कोई ऐसी बात

516
00:43:13,360 --> 00:43:17,360
है जो शति का खंडन कर रही है तो वो नहीं मानी जाएगी

517
00:43:17,360 --> 00:43:21,680
अगर कोई ऐसी बात है जो शति का खंडन नहीं कर रही है तो मानी जाएगी तो

518
00:43:21,680 --> 00:43:25,840
वेदों ने तो रुद्र को रुद्र सूक्त में परमेश्वर माना हैय कौन कर सकता

519
00:43:25,840 --> 00:43:29,920
है हां निर्णय निर्णय कौन कर सकता है

520
00:43:29,920 --> 00:43:34,160
निर्णय मैं अच्छा एक आपके सामने मैं एक चीज रखता हूं या आप

521
00:43:34,160 --> 00:43:38,200
निर्णय करेंगे या मैं निर्णय करूंगा या कि शास्त्र देने वाले वेदव्यास निर्णय

522
00:43:38,200 --> 00:43:42,320
कर सकते हैं बताओ वेदव्यास निर्णय कर सकते हैं हा वेदव्यास वेदव्यास निर्णय

523
00:43:42,320 --> 00:43:46,520
क्यों नहीं कर सकते बिल्कुल कर सकते हैं मगर उनका दिया हुआ निर्णय तभी

524
00:43:46,520 --> 00:43:51,080
मान्य होगा जब वो वेदों के आधारित हो ऐसा नहीं

525
00:43:51,080 --> 00:43:55,320
है ऐसा नहीं है कि कोई वेदों का गलत वेदों

526
00:43:55,320 --> 00:43:59,440
का गलत अर्थ बता दे वेदव्यास जी की बात का गलत अर्थ बता दे तो हम वेदों से उसको

527
00:43:59,440 --> 00:44:03,800
मैच करेंगे ना तो मैं आपको श्लोक बता रहा हूं ना आलोम

528
00:44:03,800 --> 00:44:08,120
सर्व शस्त्राणि विचार पुन पुन इदम सु प्रश्नम यो

529
00:44:08,120 --> 00:44:12,160
नारायण सदा कि बारबार विचार करने पर अलग-अलग शास्त्रों

530
00:44:12,160 --> 00:44:16,400
के पुनः पुनः विचार करने पर एक ही बात सिद्ध होती है कि नारायण ही परम सत्य

531
00:44:16,400 --> 00:44:20,440
है आप ये वेदव्यास जी का एक आप वेदव्यास जी का यह

532
00:44:20,440 --> 00:44:25,000
तो दिखाइए कि उन्होंने कहा हो नारायण शिव नहीं

533
00:44:25,000 --> 00:44:27,120
है

534
00:44:27,120 --> 00:44:28,680
देखिए बात ऐसी है वेदव्यास

535
00:44:28,680 --> 00:44:33,120
जी ने जिसको भी जहां पर भी कहा है जिसका महिमा मंडन कहा है मैंने कहा ना

536
00:44:33,120 --> 00:44:37,280
अभी मैंने क्या कहा कि महा भारत में वेदव्यास जी लिख रहे हैं कि शिव जीी सबके

537
00:44:37,280 --> 00:44:41,360
मूल है शिवजी दृष्टा है तो उनकी वह बात उन्होंने कहा है

538
00:44:41,360 --> 00:44:47,360
क्या मेरी बात मत मानू पहले तो मुझे ये

539
00:44:47,400 --> 00:44:51,440
मायावादी अभी आपसे मैं फिर पूछ रहा हूं आपका ईश्वर

540
00:44:51,440 --> 00:44:55,480
सर्वशक्तिमान सिद्ध हुआ क्या हां कृष्ण तो परम

541
00:44:55,480 --> 00:44:59,520
सर्वशक्ति मुझे सिद्ध करने की जरूरत नहीं है स्वयं भगवान क रहे तो आप

542
00:44:59,520 --> 00:45:03,560
आए सि नहीं करना तो मैंने तो सिद्ध कर दिया

543
00:45:03,560 --> 00:45:07,880
ना आपको मानना नहीं बात मैं आपसे पूछ रहा हूं

544
00:45:07,880 --> 00:45:12,080
अल बनते या विष्णु के अंदर से निकलते हैं

545
00:45:12,080 --> 00:45:16,320
विष्णु के अंदर से निकलते हैं परंतु विष्णु निते तो विष्णु के

546
00:45:16,320 --> 00:45:20,960
अंदर का जो पार्ट अलग हो रहा है उस पार्ट में विष्णु सर्वशक्तिमान

547
00:45:20,960 --> 00:45:25,040
है कि नहीं शिव सर्वशक्तिमान नहीं है

548
00:45:25,040 --> 00:45:29,080
विष्णु जो है महाविष्णु उसी प्रकार विष्णु जी का जो पार्ट निकल रहा

549
00:45:29,080 --> 00:45:33,120
है उनके अंदर से जिसको आप शिव नाम दे रहे हो वोह सर्वशक्तिमान

550
00:45:33,120 --> 00:45:37,360
है कि नहीं नहीं तो फिर विष्णु

551
00:45:37,360 --> 00:45:41,400
बाधित हो गया विष्णु कैसे बा हो जब अपने

552
00:45:41,400 --> 00:45:43,680
शरीर जब वो अपने पूरे शरीर में है तब

553
00:45:43,680 --> 00:45:47,880
तक वो बाधित नहीं है मगर अगर वो अपने अंश में अलग हो जाएंगे

554
00:45:47,880 --> 00:45:51,880
तो बाधित हो जाएंगे ऐसा तो मैं भी कह सकता हूं कि आप भगवान को बाधित कर

555
00:45:51,880 --> 00:45:55,880
रहे हैं किस प्रकार अगर विष्णु के अंदर से कंश अलग होता है

556
00:45:55,880 --> 00:45:59,920
अगर भगवान अगर विष्णु चाहते हैं कि उसमें पूर्ण शक्ति ना हो तो इसका अर्थ

557
00:45:59,920 --> 00:46:04,040
आप कहते हैं कि नहीं नहीं ऐसा नहीं हो सकता विष्णु पूर्ण शक्ति ही दे पाएंगे

558
00:46:04,040 --> 00:46:08,040
मैं नहीं कह रहा हूं मैं तो यह कह रहा हूं कि भगवान चाहते होंगे तो वो पूर्ण सर्व

559
00:46:08,040 --> 00:46:12,120
शक्तिमान रहेंगे नहीं चाहते होंगे तो नहीं रहेंगे वो चाते

560
00:46:12,120 --> 00:46:16,800
होंगे कि शिवजी से वो चाहते होंगे शिव जी से कृष्ण ना निकले तो नहीं निकलेंगे

561
00:46:16,800 --> 00:46:20,960
चाहते होंगे शिवजी से कृष्ण निकल आए तो निकल आएंगे

562
00:46:20,960 --> 00:46:26,000
हां तो परंतु शास्त्र देखने से शास्त्र की अगर बात करें शास्त्र में तो हमेशा विष्णु

563
00:46:26,000 --> 00:46:30,520
हम कर रहे ना कि आपसे जब आपका टुकड़ा अलग होगा

564
00:46:30,520 --> 00:46:34,520
इसमें तो भगवान को इनफा बता रहा हूं भगवान की इच्छा है कहा बता

565
00:46:34,520 --> 00:46:38,640
रहे आप बता रहे हैं कि जब उनसे एक टुकड़ा अलग हुआ तो

566
00:46:38,640 --> 00:46:43,000
वो जो टुकड़ा था जिसको हम शिव कहते हैं वो टुकड़ा पूर्ण नहीं

567
00:46:43,000 --> 00:46:47,000
है अगर वो पूर्ण है तो फिर अंतर क्या आया शिव और विष्णु

568
00:46:47,000 --> 00:46:51,120
में तो फिर शिव को भगवान के संतुल्य समझने वाले पापी क्यों

569
00:46:51,120 --> 00:46:55,240
हो गए देखो यह बात इस प्रकार

570
00:46:55,240 --> 00:46:58,720
है ना अगर अगर आप इस सिद्धांत को नहीं समझेंगे

571
00:46:58,720 --> 00:47:02,960
देखो आप अगर सिं पूछ रहा हूं आपसे तब से

572
00:47:02,960 --> 00:47:07,200
सिद्धांत को नहीं समझना पड़ेगा ना उसके लिए महाविष्णु सदाशिव को एक ही बराबर

573
00:47:07,200 --> 00:47:11,560
रखा जाता है ठीक है महाविष्णु और सदाशिव को एक ही बराबर रखा जाता है परंतु विष्णु

574
00:47:11,560 --> 00:47:15,680
के भी तीन प्रकार हैं गर्भ दक्ष विष्णु और शरो दक्ष विष्णु अगर कहीं ये

575
00:47:15,680 --> 00:47:19,920
बात की जाती कि सदाशिव से शिव विष्णु निकले हैं महाविष्णु सदाशिव को

576
00:47:19,920 --> 00:47:24,040
सते हो क्योंकि वो लिमिटेड कार्य कर रहे हैं क्योंकि

577
00:47:24,040 --> 00:47:28,120
वो फला फला चीजें कर रहे तो हम उनको मानते हैं कि शिवजी जो

578
00:47:28,120 --> 00:47:32,320
है सर्वशक्तिमान नहीं है मगर तात्विक रूप से शिव और विष्णु में कोई भेद

579
00:47:32,320 --> 00:47:36,560
नहीं है आप यह कह सकते हो कि लीला रूप में विष्णु लीला

580
00:47:36,560 --> 00:47:40,560
रूप में विष्णु और शिव में भेद है तात्विक रूप में नहीं है आपको यह कहना

581
00:47:40,560 --> 00:47:44,800
पड़ेगा मगर जब आप क दोगे तो आप शंकराचार्य के सिद्धांति हो

582
00:47:44,800 --> 00:47:49,680
जाओगे तत्व ूप नहीं शंकराचार्य का सिद्धांति कैसे हो जाऊंगा भैया

583
00:47:49,680 --> 00:47:54,080
उससे ऊप जा बताओ आप बिना उनको माने सर्वशक्तिमान सिद्ध

584
00:47:54,080 --> 00:47:58,160
करो देखिए तत्व के रूप में तत्व के रूप में सबसे पहली

585
00:47:58,160 --> 00:48:02,160
बात इसमें मैं शंकराचार्य को स्वीकार नहीं कर रहा हूं पर तत्व के रूप

586
00:48:02,160 --> 00:48:06,840
में महाविष्णु सदाशिव में कोई भेद नहीं है ठीक है

587
00:48:06,840 --> 00:48:11,000
यानी की या ताक रूप से भेद नहीं है व्यवहारिक

588
00:48:11,000 --> 00:48:14,440
रूप से भेद है यही आप कह रहे हो ना

589
00:48:14,440 --> 00:48:18,760
शक्ति रूप से व्यवहारिक रूप से भेद है शक्ति जो है

590
00:48:18,760 --> 00:48:23,000
तरीके से लीला रूप से हां तो लीला का जो रचना रचयिता है

591
00:48:23,000 --> 00:48:27,000
व महाविष्णु है शिव जी नहीं है अरे भाई जब आप कह रहे हो

592
00:48:27,000 --> 00:48:31,000
तात्विक रूप से एक है तो उसको या तो विष्णु कह लो या शिव कह लो अंतर

593
00:48:31,000 --> 00:48:35,400
क्या आ रहा है बहुत अंतर आ रहा है शिव

594
00:48:35,400 --> 00:48:39,400
आपने कहा तात्विक रूप से एक है तो ख खैर आपने यह

595
00:48:39,400 --> 00:48:43,600
तो माना कि सदाशिव ही महाविष्णु से निकलते हैं इस बात को आप स्वीकार करते हैं मैंने माना

596
00:48:43,600 --> 00:48:48,160
नहीं है मैं तो आपकी बात के अनुसार बात कर रहा हूं तब कह रहा हूं

597
00:48:48,160 --> 00:48:52,440
मैंने माना नहीं है वो कल्प भेद से कभी विष्णु से शिव निकलते

598
00:48:52,440 --> 00:48:57,160
हैं कभी शिव से विष्णु निकलते हैं शिव

599
00:48:57,160 --> 00:49:01,520
शिव विष्णु क निकलते शिव से विष्णु क़ है आपने कम

600
00:49:01,520 --> 00:49:06,440
पुराण नहीं पढ़ा

601
00:49:06,440 --> 00:49:10,840
है कल्पे समझंग से विष्णु निकले

602
00:49:10,840 --> 00:49:16,840
की नहीं मैं कल्प समझ गया आप क्या कहना चाह रहे

603
00:49:18,800 --> 00:49:22,920
हैं आपने पूछा कि शिवजी से विष्णु कब निकले मैं

604
00:49:22,920 --> 00:49:26,960
पूछ रहा हूं शिवजी के वाम से विष्णु निकले कि

605
00:49:26,960 --> 00:49:31,120
नहीं हां गर्भ दक्षा विष्णु कह सकते

606
00:49:31,120 --> 00:49:35,400
यह उसमें लिखा है क्या शिव पुराण में गर्भ दक्षा विष्णु थे

607
00:49:35,400 --> 00:49:40,120
वो आप अभी आप कोट कर रहे थे उसको

608
00:49:40,120 --> 00:49:44,160
अपने भागवत को भागवत पढ़ेंगे तो आपको ये विवरण मिल जाएगा

609
00:49:44,160 --> 00:49:48,560
तीन विष्णु का महाविष्णु गर्भ विष्णु विष्णु शज

610
00:49:48,560 --> 00:49:52,840
के जो शिवजी के वाम अंग से निकलते हैं वो गर्भ दक्षा विष्णु

611
00:49:52,840 --> 00:49:56,880
है यह आप सिद्ध कर देंगे सिद्ध कर दूं शिव जी के

612
00:49:56,880 --> 00:50:00,920
ंग से निकलते हैं महाविष्णु से गर्भ दक्ष विष्णु आते

613
00:50:00,920 --> 00:50:05,080
हैं लेकिन महाविष्णु और सदाशिव में तत्व के रूप में कोई भेद नहीं है ठीक

614
00:50:05,080 --> 00:50:09,240
है और इस अद्वैतवाद नहीं है सबसे पहली बात तो अद्वैतवाद तो

615
00:50:09,240 --> 00:50:13,320
मायावादी अगर आप अद्वैतवाद मानेंगे तो आप आप जो बात

616
00:50:13,320 --> 00:50:17,520
कर रहे हैं उसम आपकी एक उसम आपका एक चिड़चिड़ापन

617
00:50:17,520 --> 00:50:21,600
नजर आ रहा है अववा के लिए जैसे आप बीच बीच

618
00:50:21,600 --> 00:50:25,680
में बारबार बोलते हैं ना अद्वैतवाद मायावादी बात जो

619
00:50:25,680 --> 00:50:30,040
आप कर रहे हैं मैं भी कर सकता हूं पर मैं मर्यादित हो कर के बात कर रहा हूं

620
00:50:30,040 --> 00:50:34,040
बीच बीच में आप जो करते हैं नाय ये जो करते हैं उंगली

621
00:50:34,040 --> 00:50:38,920
मैं भी कर सकता हूं पर मैं मर्यादा में रह कर के बात करना चाह रहा हूं

622
00:50:38,920 --> 00:50:43,120
आत वो ऐसा नहीं हो सकता वो सर्व शक्तिमान है यह क्या है मालूम है

623
00:50:43,120 --> 00:50:46,480
यह है स्वयं

624
00:50:46,480 --> 00:50:50,560
संप्रभुता स्वयं को स्वयं की वर्चस्व को बस सामने वाले के ऊपर

625
00:50:50,560 --> 00:50:54,560
थोप दो नहीं आपने आपसे सिद्ध करने को कहा आप बारबार

626
00:50:54,560 --> 00:50:58,760
सीधे निर्णय सुना मैंने आपसे अभी तक एक भी बार कोई ऐसी चीज

627
00:50:58,760 --> 00:51:02,840
नहीं कही आक्षेप नहीं कहा कि भाई आपका तो यह है आप 10 बार बोल

628
00:51:02,840 --> 00:51:06,920
चुके मायावा है मायावा है माया बाद है व तो वो

629
00:51:06,920 --> 00:51:11,360
तो है देखो फिर कह र वो तो है ही चलो कोई बात नहीं कहते

630
00:51:11,360 --> 00:51:15,600
बता अभी तक आप य स नहीं कर पाए कि विष्णु

631
00:51:15,600 --> 00:51:19,640
से जब कृष्ण अलग होते हैं विष्णु से जब शिवजी अलग होते हैं

632
00:51:19,640 --> 00:51:23,640
तो उस टुकड़े में वो सर्वशक्तिमान होते हैं कि नहीं होते

633
00:51:23,640 --> 00:51:27,640
10 बार सिद्ध कर दूंगा तो आप माने एक अलग बात है क्योंकि चलो ठीक है

634
00:51:27,640 --> 00:51:30,480
इस टॉपिक को खत्म करते हैं अब ये बताइए

635
00:51:30,480 --> 00:51:34,880
कि इकोन के द्वारा पूजित होने वाला जो ईश्वर है और कुरान

636
00:51:34,880 --> 00:51:36,880
के द्वारा माना जाने वाला जो ईश्वर

637
00:51:36,880 --> 00:51:41,120
क्या वो एक है वो तो आपके जो गुरुदेव शंकराचार्य

638
00:51:41,120 --> 00:51:45,280
वो अच्छी तरह से बता सकते हैं क्योंकि वो नमाजियों से

639
00:51:45,280 --> 00:51:49,360
क्या चदर उड़वा हैं दूसरे साधु संतों को देखा मैंने ऐसा एक वीडियो में तो वो शायद अच्छे

640
00:51:49,360 --> 00:51:53,600
से बता सकते है कुरान शायद कुरान के बारे में बाकी उन्होने कभी ये नहीं बोला

641
00:51:53,600 --> 00:51:57,760
है उनका मैं आपको वीडियो दे दूंगा कि कुरान के द्वारा प्रतिपादित होने वाला

642
00:51:57,760 --> 00:52:01,800
जो ईश्वर है अल्लाह और जो हमारा ईश्वर है वह

643
00:52:01,800 --> 00:52:06,120
एक है उन्होंने कहा कुरान की सीमा का ईश्वर अवतार

644
00:52:06,120 --> 00:52:10,120
नहीं ले सकता वह हमारा ईश्वर नहीं है हम जिस

645
00:52:10,120 --> 00:52:14,520
ईश्वर को मानते हैं वह जीव जगत और जगदीश्वर के रूप में

646
00:52:14,520 --> 00:52:18,560
प्रकट होते हैं अभी आपने बहुत अनादर वाली बात कही है खैर मैं बात हो

647
00:52:18,560 --> 00:52:22,840
रही है तो मैं बता देता हूं शंकराचार्य जी जो चादर चढ़ने

648
00:52:22,840 --> 00:52:27,160
नहीं गए थे जब राम सेतु का आंदोलन चल रहा था तो उनका

649
00:52:27,160 --> 00:52:31,280
सहयोग किया था कोई अरविंद तिवारी जी है उन्होंने उन्होंने

650
00:52:31,280 --> 00:52:35,280
कहा कि मेरे जो गुरु है उनकी समाधि पर चलिए वह समाधि उनके

651
00:52:35,280 --> 00:52:39,880
गुरु की थी और वहां पर केवल पुरी के शंकराचार्य जी नहीं गए थे कई

652
00:52:39,880 --> 00:52:44,440
अच्छे संत गए थे जो राम जो राम सेतु आंदोलन के निमित्त जुड़े हुए थे

653
00:52:44,440 --> 00:52:48,600
उस कार्यक्रम के निमित्त व वहां गए और समय आने पर मीडिया ने

654
00:52:48,600 --> 00:52:51,960
उन चीजों को फैलाया खैर अब मैं आपको बता देता हूं

655
00:52:51,960 --> 00:52:56,240
आप मेरे टब चैनल पर देख लीजिएगा इसकन के अधिकृत व्यक्ति

656
00:52:56,240 --> 00:53:00,960
कह रहे हैं और मैं आपको उनका वो वीडियो भी दिखा दूंगा जिसमें

657
00:53:00,960 --> 00:53:05,640
जब कोई व्यक्ति कह रहा है कि मोहम्मद अवतार थे ये है तो वो मना कर रहे हैं स्पष्ट

658
00:53:05,640 --> 00:53:09,800
कि कुरान की सीमा का ईश्वर और हमारा जो ईश्वर है जो अवतार लेता

659
00:53:09,800 --> 00:53:13,960
है उसमें अंतर है हम उस ईश्वर को नहीं मानते जो कुरान का ईश्वर है

660
00:53:13,960 --> 00:53:18,480
अलग है नहीं मानते हम अच्छा अब आपका मैं बता दूं

661
00:53:18,480 --> 00:53:22,520
कि आपके अधिकृत आप आप अधिकृत हो कि नहीं आपका परिचय नहीं बताया आपने

662
00:53:22,520 --> 00:53:26,720
आप अधिकृत हो कि नहीं नहीं कैसे हो क्या

663
00:53:26,720 --> 00:53:30,000
हो

664
00:53:30,000 --> 00:53:34,000
मैं मैं गोड़ी वैष्ण विजम को फलो गोड़ी वैष्ण विजम को

665
00:53:34,000 --> 00:53:38,320
फॉलो करने वाला हूं मैं फलो ब आप फॉलोअर है

666
00:53:38,320 --> 00:53:42,720
अच्छा ठीक है मतलब आप एक ऑफिशियल रिप्रेजेंटेटिव नहीं है है ना नहीं

667
00:53:42,720 --> 00:53:43,800
हा तो

668
00:53:43,800 --> 00:53:48,000
जो आपके ऑफिशियल रिप्रेजेंटेटिव है उनका य वक्तव्य

669
00:53:48,000 --> 00:53:52,520
है कि कृष्ण अल्लाह और बाइबल का ईश्वर ज होवा

670
00:53:52,520 --> 00:53:54,160
इसमें कोई अंतर नहीं

671
00:53:54,160 --> 00:53:58,280
है अब बताइए कहां लिखा है प्रभुपाद के द्वारा कहां लिखा

672
00:53:58,280 --> 00:54:02,440
है तो इसका मतलब आप नाय करते हैं कि वो आपके ऑफिशियल वो

673
00:54:02,440 --> 00:54:06,880
नहीं है जिन्होने बोला इसके पीछे मैं आपको एक कारण बताता हूं इसके पीछे

674
00:54:06,880 --> 00:54:11,480
कारण बताता हूं क्यक जो गोड़ वैष्णव जो गोड़ वैष्णव संप्रदाय

675
00:54:11,480 --> 00:54:15,800
कौन के अधिकारी ने बोला है आप नाय डिसन करते उनकी बात

676
00:54:15,800 --> 00:54:21,800
को आप मेरे से यही सुनना चाहते हैं कि इसका जवाब सुनना चाहते हैं

677
00:54:22,000 --> 00:54:26,160
पले पहले हमारा विशेष निश्चित हो जाए कि बात किस पर कर रहे

678
00:54:26,160 --> 00:54:30,880
हैं क्या आप इस बात कर नहीं मैंने

679
00:54:30,880 --> 00:54:31,800
आपसे मैंने मेरा

680
00:54:31,800 --> 00:54:35,920
प्रश्न है पहले आप हा या ना में उत्तर यह तो बताइए तब हम आगे चले कि

681
00:54:35,920 --> 00:54:40,600
आप उनकी इस बात को डिसन करते हैं या आप उन्हीं को डिसन करते

682
00:54:40,600 --> 00:54:44,720
हैं पर्सनली उनकी बातों को डिसन करता

683
00:54:44,720 --> 00:54:49,200
हूं नहीं करता हूं ओके और सोशली करता हूं

684
00:54:49,200 --> 00:54:53,200
अब मैं आपको बताता समझते नहीं आप

685
00:54:53,200 --> 00:54:57,200
समझ नहीं रहे मेरी बात को क्या आप सिर्फ बोले जा रहे हैं बोले जा

686
00:54:57,200 --> 00:55:01,960
रहे बोले जा रहे हैं देखिए जो स्कोन है ये

687
00:55:01,960 --> 00:55:06,320
अकेली एक ऐसी संस्था है थोड़ा सा लाउड बोलिए आवाज आपकी कम आ रही

688
00:55:06,320 --> 00:55:08,200
है जो इस कोन

689
00:55:08,200 --> 00:55:12,240
है वो अकेली एक ऐसी संस्था है जो विदेशों में फैल रही है इस कोन की वजह से

690
00:55:12,240 --> 00:55:16,320
ही हरे कृष्ण महामंत्र और हरि नाम संकीर्तन फैल रहा है अगर आपको किसी

691
00:55:16,320 --> 00:55:20,600
को जोड़ना है आपको उसका खंडन नहीं कर सकते हैं सीधा अगर आप उसका खंडन

692
00:55:20,600 --> 00:55:24,600
करेंगे तो वो दूर जाएगा लेकिन अगर आपको किसी को जोड़ना है साथ में तो आपको

693
00:55:24,600 --> 00:55:28,720
उसकी प्रेस करके अपने अंदर लेना होगा धीरे-धीरे उसके मन में कृष्ण भक्ति पैदा करनी

694
00:55:28,720 --> 00:55:32,840
होगी कृष्ण भक्ति जागृत करनी होग एक तरीके से एक तरीके से ये झूठ ही होता है ना

695
00:55:32,840 --> 00:55:37,320
ये बात जो कही जाती है इस कौन की तरफ से बिल्कुल क्यों

696
00:55:37,320 --> 00:55:41,600
क्यों क्यों उसके बीने बोल दिया बहुत अच्छा किया

697
00:55:41,600 --> 00:55:45,840
चलिए ठीक है कारण कारण बताया मैंने आपको जी और सम

698
00:55:45,840 --> 00:55:50,080
आपका कारण धर्म को पने पहले उनको झूठ बोला जाता है फिर उनसे

699
00:55:50,080 --> 00:55:54,680
अपने आप में विलय कराया जाता है उनका फिर धीरे-धीरे सच्चाई बताई जाती है

700
00:55:54,680 --> 00:55:58,800
ठीक ठीक

701
00:55:58,800 --> 00:56:02,960
हैन अब तीन प्रश्न हो जाते हैं आपके इस वक्तव्य को

702
00:56:02,960 --> 00:56:06,960
के लिए मैं तैयार था पर आप आज पहले व्यक्ति है जिसने इस बात को स्वीकार किया है

703
00:56:06,960 --> 00:56:11,000
इससे पहले जो भी मिलते थे वो आते थे यहां तक मगर मुंह से वो नहीं

704
00:56:11,000 --> 00:56:15,080
स्वीकार करते थे कि हा यह बात झूठ है आपने आज स्वीकार किया चलिए

705
00:56:15,080 --> 00:56:19,800
अब तीन प्रश्न आते हैं क्या कोई सनातन सिद्धांत है ऐसा

706
00:56:19,800 --> 00:56:24,240
जो यह कहता है कि धर्म का प्रचार प्रसार करने के लिए आप

707
00:56:24,240 --> 00:56:28,680
झूठ बोल करके प्रचार प्रसार करो सनातन सिद्धांत

708
00:56:28,680 --> 00:56:33,160
दूसरा तीन प्रश्न है मैंने तीन प्रश्न सुन लीजिए तीन प्रश्न सुन लीजिए

709
00:56:33,160 --> 00:56:37,280
दूसरा कि जब आप अल्लाह के भक्तों

710
00:56:37,280 --> 00:56:41,360
को अपने से जोड़ने के लिए अल्लाह के अनुगा मियों को अपने से जोड़ने के लिए कह देते हो

711
00:56:41,360 --> 00:56:45,520
कि कृष्ण अल्लाह एक है तो यह बात आपको शिव के अनुवा मियों के लिए ध्यान

712
00:56:45,520 --> 00:56:49,680
नहीं रह जाती तीसरा

713
00:56:49,680 --> 00:56:53,760
क्या भारत में सभी लोग अपने धर्म को पूर्णतया जान

714
00:56:53,760 --> 00:56:57,760
चुके हैं जो जो हम इस चीज पर फोकस करें कि भाई विदेशों

715
00:56:57,760 --> 00:57:01,880
में धर्म फैल रहा है कि नहीं इसलिए वहां पर हम

716
00:57:01,880 --> 00:57:06,200
झूठ बोले दूसरी बात सबसे पहली बात दूसरी

717
00:57:06,200 --> 00:57:10,720
च एक चौथा प्रश्न और है चौथा प्रश्न ये है

718
00:57:10,720 --> 00:57:13,800
कि जब हम झूठ बोल

719
00:57:13,800 --> 00:57:18,040
रहे हैं वहां पर और झूठ बोल कर के किसी को अपने में मिला रहे हैं

720
00:57:18,040 --> 00:57:22,360
तो वही झूठ उनको क्यों बोला जा रहा है जो पहले से हिंदू

721
00:57:22,360 --> 00:57:26,480
है किसी हिंदू को हिंदुइज्म में

722
00:57:26,480 --> 00:57:30,880
मिलाने के लिए जो जो बातें बोली जा रही है वही बातें हिंदुओं

723
00:57:30,880 --> 00:57:34,960
को क्यों बोली जा रही है सिलेबस अलग होना चाहिए चार प्रश्न

724
00:57:34,960 --> 00:57:39,000
हो चार का जवाब दीजिए जो चौथा और पहला है जो सिमिलर

725
00:57:39,000 --> 00:57:40,960
ही है आपका प्रश्न

726
00:57:40,960 --> 00:57:45,000
तो जो पहला और चौथा उसका उत्तर य है कि सबसे पहली बात झूठ

727
00:57:45,000 --> 00:57:50,240
बोल कर के नहीं है झूठ बोल कर क्या होता झूठ है

728
00:57:50,240 --> 00:57:53,800
झूठ झूठ

729
00:57:53,800 --> 00:57:57,840
है गता पढ़ेंगे अगर आप भगवत गीता को पढ़ेंगे अगर

730
00:57:57,840 --> 00:58:01,840
आप भगवत गीता को समझेंगे तो भगवान ने यही कहा है कोई किसी भी रूप में किसी

731
00:58:01,840 --> 00:58:05,880
को भी पूछता है तो वो मुझे ही इनडायरेक्टली पूज रहा

732
00:58:05,880 --> 00:58:09,880
है ठीक है जैसे की कोई मुस्लिम है उसकी

733
00:58:09,880 --> 00:58:14,240
श्र आपने आज तक य कहा क्या शिव और विष्णु एक

734
00:58:14,240 --> 00:58:18,840
है शिव और विष्णु तो एक है ही नहीं स

735
00:58:18,840 --> 00:58:23,720
आप कह रहे शिव और विष्णु में भेद है भेद नहीं

736
00:58:23,720 --> 00:58:26,920
है

737
00:58:26,920 --> 00:58:31,880
आवाज नहीं आ रही आपकी कट रही है बीच में आप यह कह रहे हो कि शिव और विष्णु

738
00:58:31,880 --> 00:58:37,880
मैं भेद है और आप कह रहे हो अल्लाह और कृष्ण में कोई भेद नहीं

739
00:58:40,080 --> 00:58:44,120
है आवाज नहीं आ रही

740
00:58:44,120 --> 00:58:49,560
आपकी आवाज आ रही है आपको

741
00:58:49,560 --> 00:58:53,960
मेरी कटकट के आ रही है

742
00:58:53,960 --> 00:58:58,800
अभी सा आ रही है क्या हां अब ठीक है

743
00:58:58,800 --> 00:59:01,480
जी

744
00:59:01,480 --> 00:59:05,600
बताइए भगवान कृष्ण ने अभी आपने जो ये कहा था कि

745
00:59:05,600 --> 00:59:09,920
यह बात झूठ है वो झूठ नहीं है

746
00:59:09,920 --> 00:59:14,840
कौन सी बात हां ये वाली बात अभी आपने ये कहा था

747
00:59:14,840 --> 00:59:19,000
अभी आपने ये कहा था थोड़ी देर पहले हां बिल्कुल झूठ है

748
00:59:19,000 --> 00:59:23,000
तो जो बिल्कुल झूठ है इस बात को इस तरह

749
00:59:23,000 --> 00:59:27,200
समझिए अगर कोई किसी दूसरे इस पहले देखिए

750
00:59:27,200 --> 00:59:31,240
समने से पहले पहले आप एक बात क्लियर किया करिए आप समझाइए बाद में

751
00:59:31,240 --> 00:59:33,640
पहले आप क्लियर करिए हम किस पर बात कर रहे हैं

752
00:59:33,640 --> 00:59:38,320
क्या आपने अभी थोड़ी देर पहले इस बात को झूठ स्वीकार किया था या नहीं किया था

753
00:59:38,320 --> 00:59:40,600
झूठ स्वीकार नहीं किया था यह

754
00:59:40,600 --> 00:59:44,840
जरू हा बिल्कुल मैंने पूछा क्या

755
00:59:44,840 --> 00:59:48,960
बात ू है आपने बोला हां बिल्कुल आप मेरा उत्तर एक ही शब्द

756
00:59:48,960 --> 00:59:53,080
में लेना चाहते हैं कि मैं बोलू आप दीजिएगा पहले इसको क्लियर कर

757
00:59:53,080 --> 00:59:57,080
दीजिए मैंने आप से पूछा था क्या यह बात झूठ है तो

758
00:59:57,080 --> 01:00:01,440
आपने कहा था हां बिल्कुल मैंने कहा था पर्सनली

759
01:00:01,440 --> 01:00:06,120
मैं बिल्कुल मानता हूं पर्सनली पहले वाली लाइन अलग थी

760
01:00:06,120 --> 01:00:10,160
पर्सनली वाली लाइन आपकी थी वो अलग थी बाद में मैंने आपसे क्लियर

761
01:00:10,160 --> 01:00:14,480
कट पूछा क्या ये बात झूठ है तो आपने कहा हां बिल्कुल उसके

762
01:00:14,480 --> 01:00:19,440
बाद मैंने क्लियर भी किया कि अच्छा हुआ आज आपने य बात स्वीकार कर

763
01:00:19,440 --> 01:00:23,560
ली आप क्लेरिफाई करिएगा पहले हमारा पॉइंट तो क्लियर हो जाए

764
01:00:23,560 --> 01:00:27,640
कि किस पॉइंट को क्लियर कर रहे आपने जब मैंने आपसे

765
01:00:27,640 --> 01:00:29,640
पूछा क्या यह बात झूठ है तो

766
01:00:29,640 --> 01:00:33,880
आपने कहा हां बिल्कुल उसके बाद मैंने यह भी कहा उसके बाद उसके बाद मैंने

767
01:00:33,880 --> 01:00:38,160
ये भी कहा कि अच्छा है आज आपने बात कही है आज तक जितने भी लोग आए उन्होंने

768
01:00:38,160 --> 01:00:42,200
यहां आ कर के घुमा दिया बात को उन्होंने कभी स्वीकार नहीं किया कि हां ये

769
01:00:42,200 --> 01:00:46,240
बात झूठ है आज आपने स्वीकार किया आप सुनते रहे जब मैंने आगे अपने

770
01:00:46,240 --> 01:00:50,600
चार प्रश्न बोले हैं तो आप बोलने लगे नहीं यह बात झूठ नहीं है भगवत गीता पर आधारित

771
01:00:50,600 --> 01:00:52,280
बात

772
01:00:52,280 --> 01:00:56,480
है मैंने यह नहीं कहा कि भगवत गता पर आधारित बात है जो यह बात

773
01:00:56,480 --> 01:01:00,520
है कि उनका जो अल्लाह पूज रहे हैं वह कृष्ण ही है

774
01:01:00,520 --> 01:01:04,640
यह बात बिल्कुल झूठ है परंतु ऐसा क्यों कहा जाता है मैं अभी भी अपनी बात

775
01:01:04,640 --> 01:01:09,000
पर अड़ी गई हूं ये झूठ ही है परंतु ऐसा क्यों कहा जाता है क्योंकि

776
01:01:09,000 --> 01:01:13,040
जोन है मतलब अब आप बीच में यह बदलिए मत कि यह

777
01:01:13,040 --> 01:01:17,040
बात झूठ झूठ नहीं है तो इसके लिए भगवत गीता का रेफरेंस देने की

778
01:01:17,040 --> 01:01:21,920
आपको आवश्यकता नहीं है अब आप यह यह बताइए कि हम ऐसा क्यों करते हैं बस

779
01:01:21,920 --> 01:01:26,040
आवश्यकता क्यों नहीं अरे भाई मेरी बात तो सुन तो लीजिए

780
01:01:26,040 --> 01:01:30,240
आप चाहते आप चाहते हैं कि जो आप पूछे

781
01:01:30,240 --> 01:01:34,280
आप चाहते हैं कि जो आप पूछे मैं उसका उत्तर देता रहूं पर आप वो बोलिए आप

782
01:01:34,280 --> 01:01:38,360
वो बोलिए जो आप चाहते हैं बोलिए

783
01:01:38,360 --> 01:01:44,360
तो भगवत गीता में भगवान स्वयं ऐसा बोल रहे हैं कि जो

784
01:01:49,120 --> 01:01:53,160
भी अब उसकी बुद्धि तो नहीं काम ना कि कृष्ण ही परम भगवान है कृष्ण

785
01:01:53,160 --> 01:01:57,480
ही परम नियंता है तो इसीलिए वो अपनी अपनी तरफ से उनको अपने अपने भगवानों

786
01:01:57,480 --> 01:02:01,600
को पूजा पूछता जा रहा है इनडायरेक्टली क्योंकि वो तो एजिस्ट ही नहीं करते हैं वो

787
01:02:01,600 --> 01:02:03,720
तो

788
01:02:03,720 --> 01:02:09,120
परम जो हैं कृष्ण जो है इतने

789
01:02:09,120 --> 01:02:13,120
अदयालम वो तो नहीं है कटू तो नहीं है कि उनको उनका फल

790
01:02:13,120 --> 01:02:17,240
उनको ना मिले इसी प्रकार इनडायरेक्टली वो कृष्ण की पूजा करते हैं डायरेक्टली वो कृष्ण

791
01:02:17,240 --> 01:02:21,400
की पूजा नहीं करें अल्लाह कृष्ण नहीं है परंतु वो जिस अल्लाह को पूछ रहे हैं इनडायरेक्टली वो कृष्ण

792
01:02:21,400 --> 01:02:25,480
को जा रहा है क् कृष्ण बहुत मर्सी फुल है प्रकार जब अल्लाह

793
01:02:25,480 --> 01:02:29,480
कृष्ण नहीं है तो आपने कहा कि अल्लाह ही

794
01:02:29,480 --> 01:02:33,600
कृष्ण है तो कहने का अर्थ य है यह जो आप बोल रहे हैं व्यक्ति

795
01:02:33,600 --> 01:02:37,640
को अपने में विलय कराने के लिए मात्र बोल रहे हैं

796
01:02:37,640 --> 01:02:42,280
परंतु यह झूठ नहीं है पूरी तरह से वह मान रहे हैं

797
01:02:42,280 --> 01:02:46,520
डायरेक्टली वो कृष्ण की ही पूजा कर रहे हैं इनडायरेक्टली

798
01:02:46,520 --> 01:02:50,760
वो कृष्ण की तो जब वो इनडायरेक्टली

799
01:02:50,760 --> 01:02:55,360
हर व्यक्ति कृष्ण की पूजा कर रहा है तो एक जगह पर दिखा द

800
01:02:55,360 --> 01:02:59,520
जहां इकोन यह कहता हो कि शिव और कृष्ण में कोई भेद

801
01:02:59,520 --> 01:03:02,040
नहीं

802
01:03:02,040 --> 01:03:04,280
है अरे भाई इस

803
01:03:04,280 --> 01:03:09,600
कोन की देखो इस कोन के पीछे क पड़े अगर आप इस कोन से हट के भी बात करोगे ना रामाचार्य

804
01:03:09,600 --> 01:03:13,640
मचार से आपका सही होना सिद्ध नहीं होता है अगर दुनिया

805
01:03:13,640 --> 01:03:17,760
में आपकी तरह और भी लोग गलत कर रहे हैं तो उससे आपका सही होना सिद्ध नहीं होता

806
01:03:17,760 --> 01:03:21,840
है आप स्वयं को सही सिद्ध करिए अगर आप इसलिए अल्लाह

807
01:03:21,840 --> 01:03:26,080
और कृष्ण को एक बताते हो जिससे कि व्यक्ति हो जाए बुरा ना माने

808
01:03:26,080 --> 01:03:30,600
उसके उसके लिए भी आपके पास भगवत गीता का एक आधार है उसके आधार पर आप कह ते

809
01:03:30,600 --> 01:03:34,800
तो आप शिव और विष्णु को एक क्यों नहीं हिंदू

810
01:03:34,800 --> 01:03:38,840
में विने के लिए हिंदू में विलय नहीं कराना भक्ति में

811
01:03:38,840 --> 01:03:42,840
भक्ति में बहुत उसम बहुत अंतर है वो इनडायरेक्टली कृष्ण का नाम जप रहा है

812
01:03:42,840 --> 01:03:46,960
इससे अच्छा वो डायरेक्टली कृष्ण का नाम जपे भक्ति

813
01:03:46,960 --> 01:03:51,800
में विलय कराने के लिए आपको हिंदु जम से कोई मतलब नहीं है आपको भक्ति से मतलब है

814
01:03:51,800 --> 01:03:55,800
केवल तो भैया पता नहीं कहां भटक

815
01:03:55,800 --> 01:04:00,640
जाते हो कि आपकी बात रिपीट कर लेता हूं

816
01:04:00,640 --> 01:04:04,720
आप भक्ति में विलय कराने के लिए अल्लाह के अनुयायियों से

817
01:04:04,720 --> 01:04:08,920
यह कहते हो कि अल्लाह और कृष्ण एक है तो आप शिव

818
01:04:08,920 --> 01:04:13,400
के अनुया से क्यों नहीं कहते हो कि शिव और कृष्ण एक है

819
01:04:13,400 --> 01:04:17,920
शिव और कृष्ण एक देखिए इसलिए उनको ऐसा बताते हैं ना

820
01:04:17,920 --> 01:04:21,960
जो शिव है वो परम वैष्णव है बस अब होने लगा मैं

821
01:04:21,960 --> 01:04:26,080
आपसे एक बात पूछ रहा हूं कि सेव और कृष्ण एक है कहां से आपके

822
01:04:26,080 --> 01:04:30,240
ऑफिशियल लोगों ने बोला देखिए

823
01:04:30,240 --> 01:04:34,280
मेरी अगर आप एक बात समझेंगे ना तो छोटी सी बात ये है कि हर वैष्णव

824
01:04:34,280 --> 01:04:38,440
संप्रदाय है विष्णु को परम मानता है शिव को नहीं मानता हर वैष्णव संप्रदाय जो अन्य

825
01:04:38,440 --> 01:04:42,920
वैष्णव संप्रदाय है वो कृष्ण अल्लाह को एक नहीं कहते एक दिखा दीजिए आप

826
01:04:42,920 --> 01:04:47,000
एक दिखा दीजिए मधवा चार निता में मानते हैं

827
01:04:47,000 --> 01:04:51,560
मैं कह रहा हूं मधवा चारचार वल्लभ चार किसी ने भी एक कहा हो

828
01:04:51,560 --> 01:04:55,800
हमने भी नहीं कहा ये तो कृष्ण ने कहा कि इनडायरेक्टली मेरी पूजा करते हैं वो इनडायरेक्टली

829
01:04:55,800 --> 01:04:59,920
शब्द है इनडायरेक्टली शब्द है क्या वहां पर जब आप कह रहे

830
01:04:59,920 --> 01:05:03,000
हो कृष्ण अल्ला एक

831
01:05:03,000 --> 01:05:07,000
है एक सेकंड भगवत गीता ही कोट करता हूं अब

832
01:05:07,000 --> 01:05:11,440
आप चूज कीजिए ये वाली करूं कि ये वाली करूं गजस गोरखपुर पर आपको

833
01:05:11,440 --> 01:05:16,160
भरोसा कोई भी कर लीजिए उसको तमाशा करने की आवश्यकता नहीं

834
01:05:16,160 --> 01:05:20,320
है तमाशा करने की आवश्यकता मैं तमाशा नहीं कर रहा हूं मैं आपके

835
01:05:20,320 --> 01:05:24,560
बस इस बात का जवाब दे रहा हूं कि भगवान ये कह रहे हैं

836
01:05:24,560 --> 01:05:28,600
क्यों आपको जवाब नहीं आ रहा मेरी बातो अ फिलहाल मेरे को तो सवाल

837
01:05:28,600 --> 01:05:32,640
करने दिया ही नहीं आपने वो अलग बात है मेरे बहुत सारे

838
01:05:32,640 --> 01:05:38,640
सवाल थे जवाब देने तो आप आए थे सवाल तो मैंने उठाए थे इग्राम

839
01:05:39,640 --> 01:05:45,640
पर तो जो मैंने जवाब दिया आपने उसका भी भेद कर दिया

840
01:05:47,360 --> 01:05:51,480
आपने आपसे पूछा क्या विष्णु से निकलता है तो

841
01:05:51,480 --> 01:05:55,800
उस टुकड़े के अंदर वो सर्वशक्तिमान हो सकते नहीं तो आपने कहा

842
01:05:55,800 --> 01:06:01,800
नहीं समान हैट बस क

843
01:06:01,800 --> 01:06:05,920
रहा शास्त्र कह रहे शास्त्र कह रहे मैं शास्त्र को कोट करूंगा आप कहोगे

844
01:06:05,920 --> 01:06:10,880
संस्कृत मत बोलो शास्त्र से तो मैंने भी आपको बता दिया

845
01:06:10,880 --> 01:06:15,480
पुराण भगवती पुराण कितना बताऊ मैं आपको पूरी लिस्ट दे दूंगा आपको

846
01:06:15,480 --> 01:06:19,560
पूरी लिस्ट दे दूंगा लिस्ट तो मेरे पास भी है मैं

847
01:06:19,560 --> 01:06:23,560
भी तैयार करके नीचे पिन कमेंट में डाल दूंगा पिन कमेंट

848
01:06:23,560 --> 01:06:27,600
में डाल दूंगा कितने रेफरेंसेस है तो मैं

849
01:06:27,600 --> 01:06:32,040
भी आपको ा प पूरा दो चार पेज भेज दूंगा फिर बहुत सारे रेफरेंस

850
01:06:32,040 --> 01:06:36,160
इसका अर्थ ये हुआ कि शिव के लिए भी श्रेष्ठता वाले श्लोक है शास्त्रों में और विष्णु

851
01:06:36,160 --> 01:06:40,280
के लिए भी है तो मैं कहां मना कर रहा हूं विष्णु जी परम नहीं है मगर शिवजी

852
01:06:40,280 --> 01:06:44,560
परम नहीं है आप मना कर रहे हो आप दोनों को मैं सम

853
01:06:44,560 --> 01:06:48,680
मैं इस बात को समझता हूं आप अद्वैतवाद को बीच में लेकर आते हो लेकिन जब मैं अद्वैतवाद

854
01:06:48,680 --> 01:06:52,880
की बात करता हूं तो आप कहते कि नहीं नहीं नहीं आप अद्वैतवाद को बीच में नहीं लेके आ सकते क्या

855
01:06:52,880 --> 01:06:55,560
ये अद्वैतवाद है ना मैंने कब कहा

856
01:06:55,560 --> 01:06:59,960
मैंने कब कहा को बीच में ना लाओ थोड़ी देर पहले आपने कहा कि अद्वैतवाद

857
01:06:59,960 --> 01:07:04,280
को बीच में ले आते हो अर कि जो जो आप जल

858
01:07:04,280 --> 01:07:08,440
से जो जल से आप जो लहर का उठना बता रहे हैं उसमें

859
01:07:08,440 --> 01:07:12,520
तो यह है कि वो हमें दिखाई मात्र दे रहा है भेद जबक कोई भेद है नहीं तात्विक

860
01:07:12,520 --> 01:07:16,960
रूप से आपने फिर कहा तत्व से शिव और विष्णु एक है मगर व्यवहारिक

861
01:07:16,960 --> 01:07:21,640
रूप से लीला रूप से एक नहीं है उसके बाद फिर कहने लगे शंकराचार्य स्वयं

862
01:07:21,640 --> 01:07:25,680
स्वयं यह कह रहे हैं कि मैं आप नहीं बन सकता उन्होने यह बोला है कि मैं आप

863
01:07:25,680 --> 01:07:30,520
नहीं बन सकता हूं था व्यवहारिक रूप से नहीं बन सकता

864
01:07:30,520 --> 01:07:34,800
व्यवहारिक रूप से नहीं बन सक अच्छा ये बताइए

865
01:07:34,800 --> 01:07:39,200
कि शंकराचार्य जी के शास्त्रों को आपने उनकी किस परंपरा के किस आचार्य

866
01:07:39,200 --> 01:07:43,200
से समझा है आप

867
01:07:43,200 --> 01:07:48,000
आपने शंकराचार्य जी को कोट किया है आपने उनके सिद्धांतों को

868
01:07:48,000 --> 01:07:52,920
उनकी परंपरा के किस आचार्य से समझा है यह बताइए

869
01:07:52,920 --> 01:07:57,000
इसी बुक से समझा आप गुरुदेव नहीं अच्छा तो आप आप

870
01:07:57,000 --> 01:08:01,120
यह कह रहे हैं कि परंपरा से अध्ययन करने की आवश्यकता नहीं है हम

871
01:08:01,120 --> 01:08:05,280
शास्त्रों से अध्ययन कर सकते हैं केवल परंपरा से अध्ययन करने

872
01:08:05,280 --> 01:08:09,320
की आवश्यकता है परंतु आपने शंकराचार्य के सिद्धांतों

873
01:08:09,320 --> 01:08:10,600
को शंकर

874
01:08:10,600 --> 01:08:14,600
परंपरा के किस आचार्य से जाकर समझा

875
01:08:14,600 --> 01:08:19,200
मुझे समझने की आवश्यकता नहीं है ठीक है तो फिर आप केवल शास्त्रों

876
01:08:19,200 --> 01:08:23,480
के आधार पर अपना वक्तव्य दे सकते हैं क्या आप इस नियम को मानते हैं

877
01:08:23,480 --> 01:08:27,560
केवल शास्त्रों से नियम मिल सकते हैं हमें गुरु की आवश्यकता नहीं है नियमों को

878
01:08:27,560 --> 01:08:31,760
मैं नहीं मानता हूं परंतु शिवजी ये कह रहे हैं पदम पुरा में

879
01:08:31,760 --> 01:08:35,920
आचार्य की तरफ से कुछ कोट कर रहे हैं तो शंकर के सिद्धांतों को आपने किसी

880
01:08:35,920 --> 01:08:39,960
परंपरा प्राप्त आचार्य से समझा जो उनकी परंपरा के आचार्य है या अपने

881
01:08:39,960 --> 01:08:44,000
मन से समझ लिया आप तो उस परंपरा के हैं आप तो उस परंपरा के है तो जो

882
01:08:44,000 --> 01:08:48,120
मैंने बोला मैं तो बता रहा हूं ना व्यवहारिक धरातल प एक नहीं हो सकते बोल

883
01:08:48,120 --> 01:08:52,800
तो रहा हूं मैंने तो आप जिस

884
01:08:52,800 --> 01:08:57,440
संप्रदाय उनकी परंपरा के जो आचार्य उनसे समझाया आप बताइए

885
01:08:57,440 --> 01:09:01,440
कि आपने इन शास्त्रों को लेकर के उनकी परंपरा के किस आचार्य

886
01:09:01,440 --> 01:09:05,440
के पास गए अगर आप मुझसे पूछो कि आप इसकन के किस आचार्य के

887
01:09:05,440 --> 01:09:10,320
पास गए तो मैं फिर बता दूंगा इसन टेंपल लखनऊ उसके अध्यक्ष

888
01:09:10,320 --> 01:09:14,360
उनके पास हम जब गए उनसे हमने जब कंफर्म किया कि भाई मैं आपकी

889
01:09:14,360 --> 01:09:18,920
किताबों का ये ये अर्थ समझ रहा हूं क्या यह सही है उन्होंने कहा यह सही है

890
01:09:18,920 --> 01:09:22,960
उन्होंने उस पर सत्यापन किया आप बताइए कि आप जो समझ रहे हैं शंकराचार्य

891
01:09:22,960 --> 01:09:25,840
के सिद्धांतों के बारे में इसका सत्यापन आपने

892
01:09:25,840 --> 01:09:30,120
कहां से कराया है क्योंकि आप मेरी व्यवहारिक और परमार्थिक वाली परिभाषा को समझ

893
01:09:30,120 --> 01:09:34,200
नहीं पा रहे मैंने आपको उदाहरण भी दे दिया

894
01:09:34,200 --> 01:09:38,240
कि व्यवहार में पृथ्वी च अगर आप आप ये बता सकते हैं

895
01:09:38,240 --> 01:09:43,200
अभी हम आपसे प्रश्न करना चाहता हूं कि अगर आप यह बता रहे हैं कि कोई

896
01:09:43,200 --> 01:09:47,440
आचार्य जो संप्रदाय का है वही बता सकता है कि सत्य है कि नहीं है

897
01:09:47,440 --> 01:09:51,840
तो ऐसा क्यों बोला गया है शिव जी के द्वारा कि माया का सिद्धांत

898
01:09:51,840 --> 01:09:55,880
जो मायावा सिद्धांत है वो दुष्ट और छ बुद्ध कहा जाता है इसको

899
01:09:55,880 --> 01:10:00,120
और मैंने एक ब्राह्मण के रूप में कलयुग में इसको दूंगा ऐसा क्यों लिखा है पदम पुराण

900
01:10:00,120 --> 01:10:04,200
में हा चलो ठीक है इसको भी बोल देते हैं पद्म

901
01:10:04,200 --> 01:10:08,680
पुराण का य जो श्लोक है इसके बारे में मधवा

902
01:10:08,680 --> 01:10:12,760
चार मधवा चार परंपरा के है जो अभी आपको दिखाता

903
01:10:12,760 --> 01:10:18,760
हूं एक

904
01:10:19,080 --> 01:10:25,080
मिनट अच्छा आप क्या मानते द्वैतवाद मायावादी

905
01:11:13,000 --> 01:11:17,560
चलिए यह पुराण दिग्दर्शन

906
01:11:17,560 --> 01:11:21,840
है और यह लिखी किसने श्री संप्रदाय राम

907
01:11:21,840 --> 01:11:26,040
अनुजा चार संप्रदाय के जो प्रमाणिक

908
01:11:26,040 --> 01:11:32,040
आचार्य यह अपनी पुस्तक में लिख रहे

909
01:11:33,240 --> 01:11:37,800
हैं आप बार-बार जो बोल रहे हैं कि इसको क्यों बोला है

910
01:11:37,800 --> 01:11:41,800
भाई सबसे पहले तो यह ना लक्षण से भी तो वह सिद्ध होना चाहिए

911
01:11:41,800 --> 01:11:46,400
आपका सिद्धांत जब वेदों में दिया गया है

912
01:11:46,400 --> 01:11:50,480
मायावादी सबसे पहली बात तो यह है आपने एक

913
01:11:50,480 --> 01:11:54,920
आरोप लगाया कि मायावादी पहली बात ये है कि शंकराचार्य

914
01:11:54,920 --> 01:11:58,920
वो ब्राह्मण है ये कैसे सिद्ध होता है अच्छा शंकराचार्य

915
01:11:58,920 --> 01:12:03,240
द्वारा दिया गया सिद्धांत कहां लिखा कि वो माया वाद है ये तो आपने

916
01:12:03,240 --> 01:12:08,920
लगाया है उसके ऊपर

917
01:12:08,920 --> 01:12:13,000
मायावादी देखिए हां वो अपने आचार्य को पढ़ लेते यह भी

918
01:12:13,000 --> 01:12:17,120
बात है अभी जैसे थोड़ी देर पहले मैं आपके सिद्धांतों के आधार पर आपसे बात कर रहा

919
01:12:17,120 --> 01:12:21,120
था ऐसे ही हमारे किसी आचार्य ने थोड़ी देर अगर बात कर ली तो उसके लिए हो

920
01:12:21,120 --> 01:12:25,160
गया उन्होंने मान लिया वो माया वाद है माया को मायावा तब माना

921
01:12:25,160 --> 01:12:29,560
जाएगा जब हमारे सनातन शास्त्र उसको सत्यापित करेंगे

922
01:12:29,560 --> 01:12:33,680
ऐसे नहीं शंकर परंपरा के किसी आचार्य ने

923
01:12:33,680 --> 01:12:37,760
उसके लिए अगर मायावा को थोड़ी देर बहस के टाइम पर शास्त्रार्थ के टाइम पर थोड़ी

924
01:12:37,760 --> 01:12:42,520
देर के लिए अगर उसको मायावा से संबोधित कर दिया तो

925
01:12:42,520 --> 01:12:46,880
मायावादी संदाय इसको प्रमाणिक मानते हैं कि नहीं

926
01:12:46,880 --> 01:12:51,400
मानता हूं प्रमाणिक मानते हैं यह श्री संप्रदाय के आचार्य

927
01:12:51,400 --> 01:12:57,080
है और यह मायावादी ये

928
01:12:57,080 --> 01:13:00,720
मायावादी दे रहा है

929
01:13:00,720 --> 01:13:04,760
आपको हां दिखाई दे तो इसमें मायावादी

930
01:13:04,760 --> 01:13:09,640
और उसका समाधान बता रहे हैं पृष्ठ संख्या 217

931
01:13:09,640 --> 01:13:14,600
और ये क्या कह रहे हैं यह कह रहे हैं

932
01:13:14,600 --> 01:13:19,040
यह देखिए आपका वाला श्लोक भी है आप जो श्लोक बोल रहे हैं लिखा है

933
01:13:19,040 --> 01:13:24,440
क्या हम हां ये लिख रहे हैं

934
01:13:24,440 --> 01:13:25,360
कि प्रतिवादी

935
01:13:25,360 --> 01:13:29,440
को मानो आक्षेप करने के लिए किसी पुराण का कोई

936
01:13:29,440 --> 01:13:33,440
मूल श्लोक मिलता ही नहीं इसलिए वह प्रक्षिप्त

937
01:13:33,440 --> 01:13:38,280
श्लोकों के आधार पर आक्षेप की इमारत खड़ी करना चाहता है

938
01:13:38,280 --> 01:13:38,780
अब आप

939
01:13:38,720 --> 01:13:42,960
बताइए इनको माने कि आपको माने

940
01:13:42,960 --> 01:13:47,040
नहीं अपने और साथ ही साथ सुन लीजिए सुन लीजिए मायावा

941
01:13:47,040 --> 01:13:51,200
साथ ही साथ इन्होंने ऋग्वेद का वो भी दिया है

942
01:13:51,200 --> 01:13:55,280
कि अगर सृष्टि को माया मान ना यह वैदिक

943
01:13:55,280 --> 01:13:59,360
है वेदों का है ये ये शंकराचार्य ने अपनी तरफ से नहीं दिया

944
01:13:59,360 --> 01:14:03,360
है यह देखिए नीचे ऋग्वेद का श्लोक उरत

945
01:14:03,360 --> 01:14:07,800
किया है आपको दिख रहा हो संभवत

946
01:14:07,800 --> 01:14:11,880
ठीक है दिख रहा है दूसरी बात अगर यह मान भी

947
01:14:11,880 --> 01:14:16,120
लिया जाए कि शिव जी ने ऐसा कोई अवतार लिया था

948
01:14:16,120 --> 01:14:20,160
जिसमें कि उन्होंने झूठ फैलाया तो यह जो मैच खाता है यह

949
01:14:20,160 --> 01:14:24,280
उस प्रकरण से मैच खाता है जहां पर दक्ष के यज्ञ में शिव

950
01:14:24,280 --> 01:14:28,560
गणों ने सामने वाले गणों को श्राप दे दिया था

951
01:14:28,560 --> 01:14:32,680
कि आपका जन्म ऐसी ऐसी योनि में होगा जहां आप मास मधरा का अवैध

952
01:14:32,680 --> 01:14:36,880
पूजा पाठ करोगे अवैध जीवन जियोगे और फिर वही श्राप

953
01:14:36,880 --> 01:14:41,280
उन्होंने इनको दे दिया था शिव गणों को और दोनों के उद्धार

954
01:14:41,280 --> 01:14:45,440
के लिए वैष्णों के लिए भी और इनके लिए भी का

955
01:14:45,440 --> 01:14:49,760
यह तय हुआ कि हम ऐसे शास्त्रों की रचना करेंगे जो अ वैदिक अवद

956
01:14:49,760 --> 01:14:53,880
लोगों तक लोगों को वैदिक वैदिक तक पहुंचाए इसके

957
01:14:53,880 --> 01:14:58,040
निमित्त ऐसे शास्त्रों की रचना की गई जिनको आगम शास्त्र कहा जाता है

958
01:14:58,040 --> 01:15:02,080
आपकी जो ब्रह्म समता है वह भी एक आगम शास्त्र है उसके

959
01:15:02,080 --> 01:15:06,480
लिए देवी भागवत में सीधे सधे मेंशन किया गया है

960
01:15:06,480 --> 01:15:10,720
कि यह जो आगम शास्त्र होते हैं इसमें अपने संप्रदाय

961
01:15:10,720 --> 01:15:15,240
की धारणा को वरीयता देते हुए लिखा जाता है इसलिए

962
01:15:15,240 --> 01:15:19,920
और यह कहीं कहीं पर अवैध भी हो जाते हैं इसलिए इनकी उन बातों को ही मानना

963
01:15:19,920 --> 01:15:23,880
जो बातें वैदिक हो

964
01:15:23,880 --> 01:15:28,240
तो यह जो दूध दही वाला आपका उदाहरण है ना ब्रह्म समता का यह अवैध

965
01:15:28,240 --> 01:15:32,360
है क्योंकि यह रुद्र सूक्त का खंडन करता है

966
01:15:32,360 --> 01:15:36,680
खैर अब हम दोबारा उस बात पर आ जाते हैं जो हमने पांच प्रश्न

967
01:15:36,680 --> 01:15:40,720
उठाए थे आपकी उस बात पर क्योंकि य विषयात हो

968
01:15:40,720 --> 01:15:44,720
जाएगा आपने हमने पाच प्रश्न उठाए थे

969
01:15:44,720 --> 01:15:48,720
हमने पांच प्रश्न उठाए थे जी उसका तो

970
01:15:48,720 --> 01:15:52,840
उसी का उत्तर चल रहा था अभी आपने अगर इन चीजों को बोला तो

971
01:15:52,840 --> 01:15:56,960
मेरा य प्रश्न है कि आप अपने आचार्य को नहीं मानते हैं क्या अभी आपने कहा

972
01:15:56,960 --> 01:16:01,080
कि किसी आचार्य ने मायावादी मिश्र गोविदा

973
01:16:01,080 --> 01:16:05,280
नंद गोविंदा और अनंद गिरी ने भामती भाष्य रत्न प्रभा वाक्य

974
01:16:05,280 --> 01:16:09,400
और न्याय निर्णय यह शास्त्र लिखे हैं आपके ही आचार्य शंकर

975
01:16:09,400 --> 01:16:13,400
संप्रदाय से तो इन्होने ब्रह्मसूत्र भाष्य की टिप्पणी

976
01:16:13,400 --> 01:16:15,760
की

977
01:16:15,760 --> 01:16:21,760
है उ किया

978
01:16:22,120 --> 01:16:24,280
मायावादी

979
01:16:24,280 --> 01:16:28,400
और किसी व्यक्ति के किसी आचार्य के स्वीकार करने से कि यह

980
01:16:28,400 --> 01:16:34,400
सिद्धांत

981
01:16:36,640 --> 01:16:40,680
मायावादी है सुनि बात आपके शलोक में हो रही

982
01:16:40,680 --> 01:16:45,080
है जिस मायावा की बात आपके लोक में हो रही है हमारे

983
01:16:45,080 --> 01:16:49,160
आचार्य उसी मायावादी बात कर रहे हैं कि नहीं बात य है अब जैसे

984
01:16:49,160 --> 01:16:53,360
माया को आपके भी शास्त्रों में लिखा है लिखा है कि नहीं लिखा

985
01:16:53,360 --> 01:16:57,480
है तो आप अपने आचार्य को झूठ मानते हैं आपके

986
01:16:57,480 --> 01:17:01,480
शास्त्रों में माया लिखा है कि नहीं लिखा है कौन से शास्त्र में कहां

987
01:17:01,480 --> 01:17:06,040
माया लिखा है उस किस संदर्भ में लिखा है वो देखना पड़ेगा संदर्भ

988
01:17:06,040 --> 01:17:10,040
लिखा है चलिए मैं दिखाता हूं रुकिए दिखाइए किस संदर्भ में मि

989
01:17:10,040 --> 01:17:14,280
वो भी बताइएगा और मेरे को पेज नंबर भी बताइएगा जरा मैं भी देख लू

990
01:17:14,280 --> 01:17:18,280
अच्छा मतलब आपके जो आचार्य बोले व सब संदर्भ की बात कह रहा

991
01:17:18,280 --> 01:17:22,000
हूं ना मैं उन्होंने

992
01:17:22,000 --> 01:17:26,080
मायावादी क्या उन्होने स्वीकार किया क्या उन्होंने

993
01:17:26,080 --> 01:17:30,280
स्वीकार किया कि पद्म पुराण में जो वाक्य

994
01:17:30,280 --> 01:17:34,640
आया है कि मायावादी है क्या उन्होंने यह स्वीकार किया हम उसी मायावादी

995
01:17:34,640 --> 01:17:39,160
बात कर रहे हैं क्योंकि माया तो आपके इस भी

996
01:17:39,160 --> 01:17:44,320
आप आप अपने आप अपने आचार को झूठा मानते हैं

997
01:17:44,320 --> 01:17:47,240
क्या

998
01:17:47,240 --> 01:17:51,120
बताइए कहां लिखा

999
01:17:51,120 --> 01:17:55,320
है बहुत फेमस श्लोक है आपका य जिसमें आपने शिव जी का बहुत

1000
01:17:55,320 --> 01:17:59,760
तिरस्कार किया है ना तिरस्कार क्या ये ले

1001
01:17:59,760 --> 01:18:04,160
हम तो वैष्णव यथा वैष्णव का तिरस्कार हम कहां करेंगे

1002
01:18:04,160 --> 01:18:08,400
ये देखिए माया शब्द दिख रहा है माया देवी अच्छा माया देवी अच्छा

1003
01:18:08,400 --> 01:18:12,680
अच्छा तो माया शब्द आ गया ना आपके में भी तो हो गया भगवान

1004
01:18:12,680 --> 01:18:16,960
की शक्ति माया की भगवान की शक्ति माया की बात माया

1005
01:18:16,960 --> 01:18:20,360
शब्द आ जाने से क्या वो

1006
01:18:20,360 --> 01:18:24,400
मायावादी आचार्य मावाद बोल रहे और देखिए मैं तो ये

1007
01:18:24,400 --> 01:18:28,480
कह रहा हूं ना मेरे आचार्य ने उसको माया कहा दूसरे माया वाद को माया वाद कहा

1008
01:18:28,480 --> 01:18:32,880
है पद्म पुराण वाले को नहीं कहा मैं तो स्पष्ट आपके मैं तो स्पष्ट

1009
01:18:32,880 --> 01:18:36,920
आपके आचार्य का लिखा दिखा रहा हूं जो श्लोक आप बोल रहे हैं उसी श्लोक

1010
01:18:36,920 --> 01:18:37,420
के

1011
01:18:37,080 --> 01:18:42,000
बारे में बात हो रही है इनको मानेंगे कि नहीं मानेंगे जिस

1012
01:18:42,000 --> 01:18:46,480
श्लोक को आप बोल रहे हैं उस श्लोक के बारे में बोल रहे हैं कि झूठा श्लोक

1013
01:18:46,480 --> 01:18:50,760
है इनको मानेंगे कि नहीं मानेंगे तो

1014
01:18:50,760 --> 01:18:56,360
ये श्री संप्रदाय के है ना परंतु मैं आप आप देखिए

1015
01:18:56,360 --> 01:19:00,600
मा तो आप तोय बता रहे ना उन्होने अपने सिद्धांत को मायावा

1016
01:19:00,600 --> 01:19:04,800
कहा आपने क्या बोला था अभी आपने क्या बोला था अभी आपने ये बोला था

1017
01:19:04,800 --> 01:19:09,120
अगर आपको किसी संप्रदाय किसी सिद्धांत को जानना है तो आपको उ चार

1018
01:19:09,120 --> 01:19:13,200
से जानना चाहिए तो मैं तो आपके आचार से जान रहा हूं ना मैंने उनको पढ़ा जो आपने

1019
01:19:13,200 --> 01:19:17,200
किताब दी है मैंने पढ़ी नहीं हैसे

1020
01:19:17,200 --> 01:19:21,440
आपने मेरे आचार्यों का नाम लिया कि उन्होंने मायावा कहा है तो आपने उनकी परंपरा

1021
01:19:21,440 --> 01:19:27,440
के आचार्यों से जाकर व्यवहारिक तौर पर ये पूछा क्या ये जो

1022
01:19:37,160 --> 01:19:41,280
मायावादी के चार पाच भेद करते हैं फिर उसको अद्वैतवाद बोलते

1023
01:19:41,280 --> 01:19:45,920
हैं जब उसम कई सारे द्वैत चतुर्वेद बार हो गए पर अद्वैतवाद कैसे हु

1024
01:19:45,920 --> 01:19:50,120
ठीक है अभी मैंने आपसे एक प्रश्न पूछा अगर आप किसी की शिक्षा

1025
01:19:50,120 --> 01:19:54,200
प्राप्त होने का क्लेम करेंगे तो उनके परंपरागत आचार्यों के

1026
01:19:54,200 --> 01:19:58,760
पास जाकर सत्यापित करेंगे कि केवल ग्रंथों से क्लेम को मान लेंगे

1027
01:19:58,760 --> 01:20:03,160
अच्छा ग्रंथों से क्लेम को नहीं मानना चाहिए तो इसीलिए

1028
01:20:03,160 --> 01:20:07,960
आप ये मान रहे हैं कि मायावा उन्होने बोल दिया तो ये वही मायावा बो

1029
01:20:07,960 --> 01:20:11,400
बोले तो जब

1030
01:20:11,400 --> 01:20:15,560
आप तो मेरे आचार्य एक ही मावाद नहीं है ना मायावा

1031
01:20:15,560 --> 01:20:19,600
कही है बेर खाती थी वो तीन बेर खाती है बेर

1032
01:20:19,600 --> 01:20:23,720
शब्द का अर्थ एक बार है थ्री टाइम्स इन ए डे दूसरी बार है

1033
01:20:23,720 --> 01:20:27,800
थ्री फ्रूट्स इन ए डे अब मुझे पता करना है कि भैया ये

1034
01:20:27,800 --> 01:20:31,880
दो बार जो बेर शब्द आया है इसमें एक बार क्या अर्थ है दूसरी बार क्या अर्थ

1035
01:20:31,880 --> 01:20:35,920
है तो मैं तो जाऊंगा उनके परंपरागत आचार्यों से पूछूंगा जाकर

1036
01:20:35,920 --> 01:20:40,240
के भैया बेर शब्द का क्या अर्थ है जो आपने य मुझे फिनिश करने दीजिए

1037
01:20:40,240 --> 01:20:44,400
तो आप तो यह जो शब्द है इनका तो बहुत बड़ा खेल है जैसे

1038
01:20:44,400 --> 01:20:48,440
कि टेलीविजन टेलीविजन का अर्थ है दूर का दर्शन मगर आज के

1039
01:20:48,440 --> 01:20:52,160
टाइम में अगर हम किसी से कह दे कि मैं टेलीविजन देख रहा हूं दूर का दर्शन कर रहा हूं

1040
01:20:52,160 --> 01:20:56,280
तो वो तो सोचेगा वो टीवी देख रहा हूं अगर मैं छत पर खड़ा होके दूरबीन

1041
01:20:56,280 --> 01:21:00,120
से छत पर खड़ा हो कर के दबन

1042
01:21:00,120 --> 01:21:04,160
से पते पूरी बात तो करने दो पूरी

1043
01:21:04,160 --> 01:21:08,440
बात तो करने दो छ ड़ा हो करके कोई दूर

1044
01:21:08,440 --> 01:21:12,680
की वस्तु विशेष देख रहा हूं तो मैं कहूंगा भाई मैं दूर के दर्शन कर रहा हूं

1045
01:21:12,680 --> 01:21:16,720
व्यक्ति सोचेगा मैं टीवी देख रहा हूं तो इसलिए

1046
01:21:16,720 --> 01:21:20,760
हमें परंपरागत आचार्य के पास जाक कन्फर्म करना होगा कि

1047
01:21:20,760 --> 01:21:24,800
जो हम आपकी बात का मतलब समझ रहे क्या वही है या कुछ और है

1048
01:21:24,800 --> 01:21:28,920
आपने कंफर्म नहीं किया मैंने कन्फर्म किया मैंने इस कन के अधिकृत

1049
01:21:28,920 --> 01:21:33,000
व्यक्ति के पास जाकर के जो मैं समझ रहा हूं वो कन्फर्म किया अब आप

1050
01:21:33,000 --> 01:21:37,040
दोबारा से आ जाइए वह पांच सवाल उन परे अब

1051
01:21:37,040 --> 01:21:37,540
यह

1052
01:21:37,360 --> 01:21:41,400
बताइए कि अगर वह झूठ बोलते हैं या वहां पर

1053
01:21:41,400 --> 01:21:45,440
उनको अपने में भक्ति में लाने के लिए ऐसा बोलते हैं तो

1054
01:21:45,440 --> 01:21:49,480
क्या यह कोई सनातन सिद्धांत है कि अपने मन से ऐसा करते हैं

1055
01:21:49,480 --> 01:21:53,560
दूसरी बात ये अगर वो अल्लाह दूसरी बात य कि अगर वो

1056
01:21:53,560 --> 01:21:57,720
अल्लाह के अनुयायियों के लिए ऐसा कर सकते हैं तो शिव के अनुयायियों के लिए ऐसा क्यों

1057
01:21:57,720 --> 01:22:01,840
नहीं कर सकते तीसरी बात य कि अगर वो सिद्धांत गैर हिंदुओं

1058
01:22:01,840 --> 01:22:05,920
के लिए बना था कृष्ण को ना मानने वालों के लिए बना था तो कृष्ण को

1059
01:22:05,920 --> 01:22:10,120
मानने वालों के क्यों बताया जाता है सिद्धांत चौथी बात

1060
01:22:10,120 --> 01:22:14,200
ये है जो आप ये बोल रहे हो कि मुसलमानों को भक्ति में लाने के लिए ऐसा

1061
01:22:14,200 --> 01:22:18,280
किया जाता है बाइबल को बाइबल वालों को उसमें लाने के लिए ऐसा किया जाता

1062
01:22:18,280 --> 01:22:22,320
है तो क्या कहीं पर अधिकृत व्यक्ति द्वारा यह कोट किया गया

1063
01:22:22,320 --> 01:22:23,160
है है

1064
01:22:23,160 --> 01:22:27,400
आप जो कह रहे हो और एक पांचवा प्रश्न

1065
01:22:27,400 --> 01:22:31,720
और था वो भूल गया हूं फिर मैं बताऊंगा बताइए अरे वो पहला प्रश्न

1066
01:22:31,720 --> 01:22:36,480
पांचवा प्रश्न एक ही था आपका तो एक सेकंड हां

1067
01:22:36,480 --> 01:22:40,520
तो ऐसा इस प्रकार है अभी आपने कहा कि शवों के लिए वो यूज नहीं किया जाता और

1068
01:22:40,520 --> 01:22:44,680
हिंदुओं के लिए यूज किया जाता है पता नहीं आप शैव और हिंदू को अलग क्यों समझ रहे हैं

1069
01:22:44,680 --> 01:22:48,800
आप तो अद्वैतवाद है फिर भी शैव और हिंदू अलग कर रहे हैं आप तो ऐसा इस प्रकार है

1070
01:22:48,800 --> 01:22:53,040
कि आप करते हो ना किई शिवजी भगवान नहीं है

1071
01:22:53,040 --> 01:22:57,280
भवान है कृष्ण अला है आप

1072
01:22:57,280 --> 01:23:01,280
ये कहते हैं कि हम जो है मगर कृष्ण

1073
01:23:01,280 --> 01:23:05,280
अल्लाह में कोई अंतर नहीं है ये आप कहते हो तब मैं कह रहा हूं उस आधार

1074
01:23:05,280 --> 01:23:09,440
पर मैं कह रहा हूं कि जब आप अल्लाह वालों से कह सकते हो कि अल्लाह और कृष्ण

1075
01:23:09,440 --> 01:23:13,480
एक है उन्हें मनाने के लिए बहलाने फुसला के लिए तो

1076
01:23:13,480 --> 01:23:17,800
आप शिव वालों से क्यों नहीं कह सकते हो क्योंकि

1077
01:23:17,800 --> 01:23:21,800
इसके पीछे एक कारण यह समझना पड़ेगा कि अल्लाह एजिस्ट नहीं करता है अल्लाह

1078
01:23:21,800 --> 01:23:25,800
एजिस्ट नहीं करता में प्र

1079
01:23:25,800 --> 01:23:29,920
ब नहीं करते बिल्कुल बनाएगा

1080
01:23:29,920 --> 01:23:34,040
अभी आप देखिए ऐसा है कि अल्लाह एजिस्ट नहीं करता है अल्लाह नाम की कोई चीज

1081
01:23:34,040 --> 01:23:38,880
नहीं है ठीक है वो भक्ति में आ भक्ति में

1082
01:23:38,880 --> 01:23:43,600
किसी अधिकृत व्यक्ति ने ऐसा कहीं बोला है क्या स्टेटमेंट है क्या

1083
01:23:43,600 --> 01:23:47,680
तो इसको कैसे मान ले आप बो रहे सब प

1084
01:23:47,680 --> 01:23:52,000
सबसे पहली मैं वही बता रहा हूं आपको सबसे पहली बात तो आपको ये समझना पड़ेगा

1085
01:23:52,000 --> 01:23:56,360
मैं अपनी इच्छा से आया हूं यहां पर आपको पता है मैं अपनी इच्छा से आया हूं

1086
01:23:56,360 --> 01:24:00,400
ना मेरे ना अपने मेंटर से परमिशन लेकर के आया हूं ना

1087
01:24:00,400 --> 01:24:04,400
मैं किसी को य क रहा मैं आपसे पूछ रहा हूं यह जो आप स्न की तरफ

1088
01:24:04,400 --> 01:24:08,400
से वक्तव्य दे रहे हैं क्या यह शिक्षा कहीं पर हमें मिल सकती

1089
01:24:08,400 --> 01:24:12,480
है कि वाकई में कन ऐसा मानता है अगर मिल

1090
01:24:12,480 --> 01:24:17,520
जाएगी तो हमें बड़ा अच्छा लगेगा चलो एक चीज तो कम हुई

1091
01:24:17,520 --> 01:24:21,640
क्या बात करेंगे अधिकृत व्यक्ति की अगर आप बात करेंगे तो

1092
01:24:21,640 --> 01:24:25,760
एक नेटिव इ डालती हैय चीज अगर आप अगर आप

1093
01:24:25,760 --> 01:24:29,760
कसे माने पूर्ण तरीके से यह बात तो

1094
01:24:29,760 --> 01:24:33,840
पूर्ण तरीके से है कि आपके य अद्वैतवाद में कहीं भक्ति नहीं

1095
01:24:33,840 --> 01:24:38,000
है भक्ति कहीं भी नहीं है दूर दूर तक भक्ति नहीं

1096
01:24:38,000 --> 01:24:42,120
आपका वक्त मत है बाद बात करेंगे देखिए होता क्या है जब हम

1097
01:24:42,120 --> 01:24:46,840
किसी एक विषय पर बात कर रहे हैं तो आप विषयात करने लगते हैं अभी मैं पूछ रहा हूं

1098
01:24:46,840 --> 01:24:50,920
नहीं कर उता पर आपको लगता है उत्तर

1099
01:24:50,920 --> 01:24:54,240
दे देगा आपको या उत्तर दे देगा इसको रोको आप

1100
01:24:54,240 --> 01:25:00,160
ऐसा समझते हैं इसको रोको इसको पीछे खींच के लाओ है ना ऐसा ही है

1101
01:25:00,160 --> 01:25:04,160
आप अंतर्यामी ये चाहते हैं कि आपको मैं बस

1102
01:25:04,160 --> 01:25:08,400
हां या ना में उत्तर देता रहू हा या ना मत उत्तर दीजिए

1103
01:25:08,400 --> 01:25:12,440
पहले हम एक बात को क्लियर करें कि आप अगर कोई टॉपिक समझा रहे हैं

1104
01:25:12,440 --> 01:25:16,640
तो वह कौन सा टॉपिक है इसलिए मैं आपसे पहले

1105
01:25:16,640 --> 01:25:20,880
पहले एक हेडलाइन चाहता हूं कि जैसे अभी मैं आपसे पूछ रहा हूं

1106
01:25:20,880 --> 01:25:25,360
कि क्या किसी इकन के अधिकृत व्यक्ति ने यह कहा है

1107
01:25:25,360 --> 01:25:27,400
कि हम ऐसा मानते हैं

1108
01:25:27,400 --> 01:25:31,680
तो ऐसा है तो कोई हमें प्रमाण दीजिए अगर नहीं कहा है तो हम कैसे माने

1109
01:25:31,680 --> 01:25:35,720
कि स् कन ऐसा ही सोचता है अधिकृत व्यक्ति के

1110
01:25:35,720 --> 01:25:39,800
ऐसे अधिकृत व्यक्ति ने ऐसा कभी नहीं कहा है परंतु जितना मैं इसमें

1111
01:25:39,800 --> 01:25:44,000
रहा हूं रहा हूं मैंने क्योंकि मैं भक्ति

1112
01:25:44,000 --> 01:25:48,000
मूवमेंट में रहा हूं मैं उनके साथ रहा हूं तो अंदर मुझे रहते रहते ये

1113
01:25:48,000 --> 01:25:52,400
बात समझ में आई है कि अगर किसी को कृष्ण किसी कृष्ण के प्रति प्रति

1114
01:25:52,400 --> 01:25:56,640
कुछ और है और बाहरी धारणा कुछ और है दिखाई देने वाली धारणा कुछ और है

1115
01:25:56,640 --> 01:26:00,640
और अंदरूनी धारणा कुछ और है धारणा आप समझ नहीं रहे

1116
01:26:00,640 --> 01:26:05,120
हैं आप पता ये क्या कहना चाहर कि अंदर खाते कुछ और चलता है बाहर बहर कुछ और चलता है नहीं

1117
01:26:05,120 --> 01:26:09,280
आप ही तो कह रहे हो मैं उनके साथ रहा हूं तो इसका मतलब है वो जो मंचों पर जाकर कहते

1118
01:26:09,280 --> 01:26:13,320
हैं अल्लाह और कृष्ण एक है वो गलत है अंदर से वो मानते हैं अल्लाह

1119
01:26:13,320 --> 01:26:17,480
और कृष्ण एक नहीं है इसका मतलब वो कहते कुछ है अंदर से मानते कुछ

1120
01:26:17,480 --> 01:26:21,680
है करते कुछ है कहते कुछ है क्योंकि मुस्लिमों के लिए अल्लाह क्या है परम

1121
01:26:21,680 --> 01:26:26,200
नियंता है उनके लिए अल्लाह परम नियंता है हमारे लिए कृष्ण पर

1122
01:26:26,200 --> 01:26:30,440
आपकी चीज को जई करने के उस स्टेप प आऊंगा पर एक चीज

1123
01:26:30,440 --> 01:26:34,720
क्लियर कर लीजिए कि आपको यह मानना पड़ेगा कि वह कहते

1124
01:26:34,720 --> 01:26:38,800
कुछ है अंदर से उनकी धारणा कुछ और है धारणा यही

1125
01:26:38,800 --> 01:26:42,400
है कि कृष्ण ही परम भगवान है ठीक अल्ला अल्ला एस्ट नहीं करते

1126
01:26:42,400 --> 01:26:46,440
इस कन की धारणा है ना अंदर से ज्यादातर भक्त यही

1127
01:26:46,440 --> 01:26:50,280
मानते हैं मैं फिर क्लियर शब्दों में पूछ रहा हूं अल्लाह

1128
01:26:50,280 --> 01:26:55,440
एसिस्ट नहीं करते इसन की धारणा अंदर से

1129
01:26:55,440 --> 01:27:00,000
इस कोन की धारणा क्या है आप समझना ही नहीं चाहते इस बात

1130
01:27:00,000 --> 01:27:04,520
कोयत होती है उतर बात

1131
01:27:04,520 --> 01:27:08,840
आप थोपना थोपना चाहते हैं बात को आप थोपना चाहते

1132
01:27:08,840 --> 01:27:13,560
आप ही तो कह रहे हो मैं उनके साथ अंदर रहा हूं मुझे अंदर का पता पर्सनली

1133
01:27:13,560 --> 01:27:17,560
मैंने पर्सनली 10 11 मुसलमानों को भगवत गीता और श्रीमन चैतन्य

1134
01:27:17,560 --> 01:27:21,600
महाप्रभु के बारे में चैतन्य चमत प्रीच की है अगर मैं उनको जाकर

1135
01:27:21,600 --> 01:27:25,600
के बोल भैया आपका अल्ला जो है ऐसा ऐसा ऐसा है तो

1136
01:27:25,600 --> 01:27:29,880
आप नहीं कह रहा हूं कि जो आपने किया वो गलत है आप जस्टिफाई

1137
01:27:29,880 --> 01:27:31,280
प क्यों चले जा रहे हैं पहले

1138
01:27:31,280 --> 01:27:35,280
एक चीज क्लियर करिए अंदर सेय मानता है

1139
01:27:35,280 --> 01:27:40,120
अल्लाह एजिस्ट नहीं करते मगर वो बाहर से कहता है कि अल्लाह और कृष्ण है

1140
01:27:40,120 --> 01:27:44,920
स्कोन ऑफिशियल अगर हम बात करें तो बड़े

1141
01:27:44,920 --> 01:27:49,080
जिन भक्तो के साथ रहा हूं जिन भक्तों के साथ मैं रहा हूं के साथ आप मुझे

1142
01:27:49,080 --> 01:27:53,240
निचोड़ बताइए आप भक्तों की बात मत करिए आप अंदर रहे हैं आप बताइए कौन

1143
01:27:53,240 --> 01:27:58,240
धारणा अंदर से क्या अल्लाह के बारे में यह बताइए

1144
01:27:58,240 --> 01:28:02,320
इस प्रकार है कि अल्लाह और कृष्ण एक है लेकिन किस किस रूप

1145
01:28:02,320 --> 01:28:06,440
में एक है उसको आप समझना परम नियंता के रूप में वो एक है परंतु अगर आप

1146
01:28:06,440 --> 01:28:10,480
यह कहेंगे कि नहीं नहीं अल्लाह जो है कृष्णन

1147
01:28:10,480 --> 01:28:14,680
अल्लाह कौन है अरबी अरबी में उसको अल्लाह कहते हैं परंतु

1148
01:28:14,680 --> 01:28:19,000
वैसे तो भगवान अल्लाह कौन है आपकी जानकारी में अल्लाह कौन

1149
01:28:19,000 --> 01:28:23,360
है अल्लाह कृष्ण है अरबी अरबिक

1150
01:28:23,360 --> 01:28:27,360
इसमें भाषा भाषा का भेद है भाषा का भेद है भाषा का भेद

1151
01:28:27,360 --> 01:28:31,560
है किसी से कह रहे होते हैं कि अल्लाह और कृष्ण

1152
01:28:31,560 --> 01:28:35,680
एक है तो आपको वहां यह नहीं मालूम होता है कि जब मैं कहूंगा अल्लाह और

1153
01:28:35,680 --> 01:28:39,840
कृष्ण एक है तो उस पंक्ति में वह जो अल्लाह शब्द है उसका अर्थ

1154
01:28:39,840 --> 01:28:44,480
व निकालेगा कुरान से प्रतिपादित होने वाला

1155
01:28:44,480 --> 01:28:48,600
ईश्वर क्या किसी से कहते हैं जब आप किसी

1156
01:28:48,600 --> 01:28:52,760
से कहते हैं कि अल्लाह और कृष्ण एक है तो आपको यह नहीं मालूम होता है

1157
01:28:52,760 --> 01:28:57,240
सामने वाला इस मत होने

1158
01:28:57,240 --> 01:29:01,280
वा कुरान से प्रतिपादित होने वाला ईश्वर और कृष्ण एक है आपको

1159
01:29:01,280 --> 01:29:04,240
यह नहीं मालूम होता

1160
01:29:04,240 --> 01:29:08,360
है देखिए आपको भक्ति मूवमेंट नहीं पता

1161
01:29:08,360 --> 01:29:12,560
ना इसलिए आप ये सब चीज बोल सकते हैं क्योंकि अगर आपको भक्ति के बारे में थोड़ा

1162
01:29:12,560 --> 01:29:16,760
भी ज्ञात होता तो आपको मद व

1163
01:29:16,760 --> 01:29:21,000
आप मेरी परीक्षा मत लीजिए मैंने आपसे अभी तक एक बार भी ऐसे नहीं कहा है

1164
01:29:21,000 --> 01:29:25,640
कि आप ऐसे आप वैसे हैं आपने 10 बार सितो को

1165
01:29:25,640 --> 01:29:29,680
आपने मुझको आप यह नहीं जानते आपने अध्ययन और करिए आपने सब कुछ

1166
01:29:29,680 --> 01:29:33,840
कह लिया मुझे कुछ नहीं मद

1167
01:29:33,840 --> 01:29:38,560
वहार कर रहा हूं तो मैं अपेक्षा करता हूं आप भी मर्यादित व्यवहार करें

1168
01:29:38,560 --> 01:29:42,920
ठीक है मर्यादित व्यवहार जो आपका बिलीफ है मैं उस हिसाब से जवाब दूंगा ना आपको

1169
01:29:42,920 --> 01:29:47,160
क आपको पता नहीं है आपने अध्यन नहीं किया ये क्या है

1170
01:29:47,160 --> 01:29:51,160
अरे आपका बिलीफ है ना कि अल्लाह और सब एक ही है क्योंकि अद्वैतवाद का तो अर्थ यही

1171
01:29:51,160 --> 01:29:55,200
होता है ना कि सब एक अल्ला आप मुझे बताइए अभी प्रश्न चल रहा

1172
01:29:55,200 --> 01:29:59,360
है कि क्या इसकन ऊपर से कहता है अल्लाह एसिस्ट

1173
01:29:59,360 --> 01:29:59,860
नहीं

1174
01:29:59,520 --> 01:30:03,840
करते क्या आप इसकन अंदर से यही मानता है

1175
01:30:03,840 --> 01:30:07,920
कि कुछ और मानता है नहीं नहीं क्या मानता है

1176
01:30:07,920 --> 01:30:11,960
क्योंकि आप भी तो वही जो आप मानते वही मानते हैं कि सब एक ही है अल्लाह

1177
01:30:11,960 --> 01:30:15,960
और कृष्ण और जीसस क्राइस्ट सब एक ही है आप भी तो यही मानते

1178
01:30:15,960 --> 01:30:20,000
के द्वारा प्रतिपादित होने वाला ईश्वर ईश्वर ही नहीं है सर्वशक्तिमान नहीं है वो तो

1179
01:30:20,000 --> 01:30:24,040
हम तो मानते फिर वो अलग है वो अलग है वो है ही नहीं

1180
01:30:24,040 --> 01:30:28,360
तो फिर अद्वैतवाद कहां गया इसमें क्योंकि देखिए आपका बिलीफ है उसकी रिस्पेक्ट

1181
01:30:28,360 --> 01:30:33,360
करता हूं

1182
01:30:33,360 --> 01:30:37,440
व करते यही तो दिक्कत है यही तो फोगे आप

1183
01:30:37,440 --> 01:30:41,840
यही फस अरे आप फस रहे हो करब

1184
01:30:41,840 --> 01:30:46,080
आपको उत्तर मिल जाता है जब आपको उत्तर मिल जाता तो रा करते

1185
01:30:46,080 --> 01:30:50,160
आपसे बारबार पूछ रहा हूं कि इस कौन य कहता है कृष्ण अल्ला एक

1186
01:30:50,160 --> 01:30:54,320
है पहले आपने कहा किसने कहा दिखाओ फिर मैंने आपको प्रमाण दिया

1187
01:30:54,320 --> 01:30:58,440
तो आपने बोला वो उनको विलय कराने के लिए भक्ति में लाने के लिए बोलते

1188
01:30:58,440 --> 01:31:02,600
हैं फिर मैंने कहा कि ये अधिकृत कैसे माने तो मैं उनके साथ अंदर रहा हूं

1189
01:31:02,600 --> 01:31:06,720
आपको आपको हम प्रमाण मान ले फिर मैंने जब इसको भी क्लियर करना चाहा

1190
01:31:06,720 --> 01:31:11,000
तो हम यह मान ले कि इस कौन बाहर से कुछ कह रहा है मगर उसकी जो धारणा अंदरूनी

1191
01:31:11,000 --> 01:31:15,040
रूप से कुछ और है तो वो भी आप क्लियर नहीं कर रहे और क मैं उसका उत्तर

1192
01:31:15,040 --> 01:31:19,360
क्लियर उत्तर दे रहा हूं अल्लाह और कृष्ण एक

1193
01:31:19,360 --> 01:31:23,680
लाइन है अल्लाह और कृष्ण एक है या तो झूठी लाइन है

1194
01:31:23,680 --> 01:31:27,720
या फिर यह झूठी नहीं है हां कि ना

1195
01:31:27,720 --> 01:31:29,560
यह सच्ची लाइन है सच्ची

1196
01:31:29,560 --> 01:31:34,320
लाइन ला अल्ला और ये जो लाइन है अल्लाह और

1197
01:31:34,320 --> 01:31:38,360
कृष्ण और शिव एक नहीं है ये जो लाइन है ये सच्ची लाइन है

1198
01:31:38,360 --> 01:31:42,560
या झूठी लाइन है आप बात को समझ नहीं रहे

1199
01:31:42,560 --> 01:31:46,680
यह भी सच्ची लाइन है कि महाविष्णु और सदाशिव एक ही है समझ

1200
01:31:46,680 --> 01:31:51,000
रहे हैं आप महाविष्णु आपने क पर कही बात शिव और विष्णु

1201
01:31:51,000 --> 01:31:54,760
एक हैव जहां जहां परम नियंता की बात

1202
01:31:54,760 --> 01:31:58,800
है जहां जहां परम नियंता की बात आती है वो कृष्ण है परम

1203
01:31:58,800 --> 01:32:02,800
नियंता की बात क अल्लाह को कोई परम नियंता करके संबोधित करता है

1204
01:32:02,800 --> 01:32:06,800
अगर अल्लाह को कोई परम नियंता कह के संबोधित करता है तो इसका अर्थ यही है कि वो

1205
01:32:06,800 --> 01:32:11,120
कृष्ण को संबोधित कर रहा है अगर क्राइस्ट को कोई परम नियंता कहके संबोधित

1206
01:32:11,120 --> 01:32:15,440
करता है तो इसका अर्थ यही है कि वो कृष्ण को संबोधित कर रहा है क्राइस्ट का अर्थ

1207
01:32:15,440 --> 01:32:19,520
होता इसका मतलब यह है कि कौन सच बोलता है ये वाली बात कृष्ण और अल्ला

1208
01:32:19,520 --> 01:32:23,560
एक है जी बिल्कुल बोलता है अंदर से कोई धारणा अलग

1209
01:32:23,560 --> 01:32:27,640
नहीं है ना नहीं अभी थोड़ी देर पहले तो आप कह रहे थे अलग

1210
01:32:27,640 --> 01:32:32,680
है तो मेरी पर्सनल व हैय

1211
01:32:32,680 --> 01:32:37,240
क्या आपने क्या है यह क्या है जब आप बोल रहे क्या

1212
01:32:37,240 --> 01:32:38,240
है

1213
01:32:38,240 --> 01:32:43,200
देखिए स्कोन की जो देखि आपको जो विचारधारा

1214
01:32:43,200 --> 01:32:47,640
पसन क्या

1215
01:32:47,640 --> 01:32:52,280
जाने आप पर्सनली क्या जाने के बारे में

1216
01:32:52,280 --> 01:32:56,200
यही जानता हूं कि जो श्रीमन चैतन्य महाप्रभु का

1217
01:32:56,200 --> 01:33:00,200
जो हरि नाम संकीर्तन जो अल्लाह के बारे में आपने थोड़ी देर पहले बोला था कि

1218
01:33:00,200 --> 01:33:00,700
वो

1219
01:33:00,440 --> 01:33:04,880
ये मानते हैं कि अल्लाह एजिस्ट ही नहीं करते अंदर से य मानता है स्कोन आपने

1220
01:33:04,880 --> 01:33:08,880
जाना है क्या कोन की बात नहीं की मैंने मैंने कुछ कुछ लोगों की

1221
01:33:08,880 --> 01:33:12,880
बात की मेरे जैसे लोग लोगन कन ऐसा नहीं मानता अभी

1222
01:33:12,880 --> 01:33:16,920
आप पर्सनली क्या मानते हैं इसकन के बारे में क्या मानता है अरे भैया

1223
01:33:16,920 --> 01:33:21,640
परम नियंता की जहां बात आती है वो कृष्ण की बात होती

1224
01:33:21,640 --> 01:33:25,720
उत्तर दे रहा हू महाराज तो मैं आपको उत्तर दे रहा हूं

1225
01:33:25,720 --> 01:33:30,200
जहां परम नियंता की बात आती है चाहे उसको अल्लाह नाम से पुकारे किसी भी नाम से पुकारे

1226
01:33:30,200 --> 01:33:34,280
नाम कि मेरा जो क्वेश्चन है वो ये नहीं है मेरा क्वेश्चन ये है

1227
01:33:34,280 --> 01:33:38,720
अभी आपने अपना पर्सनल वाला अलग कर लिया स्कन से ठीक है किया ना

1228
01:33:38,720 --> 01:33:43,160
अब मैं आपसे पूछ रहा हूं पर्सनली आप स्कन के बारे में क्या जानते हैं

1229
01:33:43,160 --> 01:33:47,200
क्या अंदर से उसकी धारणा यह है कि अल्लाह एजिस्ट नहीं

1230
01:33:47,200 --> 01:33:50,400
करते या नहीं है उसकी धारणा ये

1231
01:33:50,400 --> 01:33:54,440
धारणा यही है कि चाहे वो अल्लाह को ही कहे चाहे वो कुछ भी कहे जहां व

1232
01:33:54,440 --> 01:33:59,200
परम की बात परसनल बात कही है कन के लिए नहीं थी

1233
01:33:59,200 --> 01:34:03,760
नहीं आप ऐसा सोचते हो इस कन के बारे

1234
01:34:03,760 --> 01:34:07,840
में आप ऐसा सोचते हो इस कन के बारे में इस कन ऐसा नहीं

1235
01:34:07,840 --> 01:34:11,720
सोचता है अपने बारे

1236
01:34:11,720 --> 01:34:15,840
में ग नहीं है किसी भी हद प व गलत बिल्कुल भी नहीं है आपको

1237
01:34:15,840 --> 01:34:19,880
सी बात कह लेते सारी बात कह लेते हो यही तो

1238
01:34:19,880 --> 01:34:24,000
दिक्कत है जहां पर जाओगे हा वो भी बा गलत नहीं वो भी बात गलत नहीं य भी गलत नहीं गलत

1239
01:34:24,000 --> 01:34:28,240
नहीं तो भाई एक निष्कर्ष तो दो आपके अनुसार

1240
01:34:28,240 --> 01:34:32,400
ार क्या है अला के बारे में इसको

1241
01:34:32,400 --> 01:34:38,120
उन की धारणा क्या है अल्लाह के बारे में अगर आप सुनना समझना नहीं चाह रहे पता नहीं जहां

1242
01:34:38,120 --> 01:34:43,040
जहा बने न

1243
01:34:43,040 --> 01:34:47,840
मानता है बेत कर रहा है इसन मानता है

1244
01:34:47,840 --> 01:34:51,880
के बारे बात कर रहा है मगर जब आपने बताया कि मैंने अंदर रह कर जाना है इस

1245
01:34:51,880 --> 01:34:55,920
कोन य मानता है अल्लाह एजिस्ट ही नहीं करते अब इसमें से कौन सी बात को माने इस

1246
01:34:55,920 --> 01:35:00,120
कोन के बारे में मैंने अंदर रह कर के इसकन की अंदर रह कर के नहीं जाना भक्तों

1247
01:35:00,120 --> 01:35:04,280
के साथ रह कर के कुछ भक्तों के विचार जाने मैंने ऐसा बोल रहा हूं पर्सनली विचारों

1248
01:35:04,280 --> 01:35:05,720
से आपको क्या लगान

1249
01:35:05,720 --> 01:35:09,720
की धारणा का पता लगा कि नहीं पता लगा इकोन की

1250
01:35:09,720 --> 01:35:13,920
धारणा का पता लगा इस कोन की धारणा यही है कि चाहे कोई अल्लाह बोले या जीसस बोले

1251
01:35:13,920 --> 01:35:18,040
जहां वो परम नियंता की बात कर इस बात को समझना

1252
01:35:18,040 --> 01:35:22,320
नहीं चाहते हैं आप मेरी बात को हां या ना में जवाब लेना चाहते हैं

1253
01:35:22,320 --> 01:35:26,520
तो मुझे समझ नहीं आरहा करते ये बात आपने क्यों बोली है आप क्या मानते

1254
01:35:26,520 --> 01:35:30,640
हो अल्लाह एसिस्ट करते हैं कि नहीं करते हैं अल्लाह एजिस्ट

1255
01:35:30,640 --> 01:35:34,760
करते हैं नहीं करते हैं देखिए वो शाब्दिक भेद है अभी आपसे पूछ रहा हूं अल्लाह

1256
01:35:34,760 --> 01:35:38,920
एजिस्ट करते हैं कि नहीं करते आप क्या मानते हो निरा निराकार अगर

1257
01:35:38,920 --> 01:35:43,000
उसकी कोई ये डेफिनेशन देता है कि निराकार ब्रह्म है वो एजिस्ट करता है तो वो

1258
01:35:43,000 --> 01:35:47,280
नहीं करता है मतलब करता भी है लेकिन वो कृष्ण कृष्ण से ही आता है

1259
01:35:47,280 --> 01:35:51,440
ठीक है और अगर कोई कहे कि परम अंता है वो अल्ला

1260
01:35:51,440 --> 01:35:56,360
होने वाला ईश्वर है वो एजिस्ट करता है कि नहीं करता है

1261
01:35:56,360 --> 01:36:00,560
अगर कुरान में ये डेफिनेशन है उसकी कि वो निराकार ब्रम है

1262
01:36:00,560 --> 01:36:05,520
वो फम नहीं ले सकता मैंने कुरान नहीं पढ़ी नहीं पढ़ी

1263
01:36:05,520 --> 01:36:09,680
उसके बारे में डिसीजन कैसे दे रहे हैं कुरान का जो यह पोर्शन

1264
01:36:09,680 --> 01:36:14,000
है कि वह फॉर्मलेस है और वो निराकार है जो अल्लाह की व्याख्या है उस भेद

1265
01:36:14,000 --> 01:36:18,080
उस उस उस तरीके से देखेंगे तो इस प्रकार है कि वो फॉर्मलेस है

1266
01:36:18,080 --> 01:36:20,960
तो वो अल्लाह एजिस्ट नहीं करता है पर शब्द

1267
01:36:20,960 --> 01:36:25,120
अगर शब्द की बात करेंगे अल्लाह को भगवान को अल्लाह के रूप में संबोधित करते हैं

1268
01:36:25,120 --> 01:36:29,480
तो अल्लाह कृष्ण को हम अल्लाह के रूप में संबोधित कर सकते हैं उसमें क्या है यानी कि आप ये कहना

1269
01:36:29,480 --> 01:36:33,600
चाहते हैं कि जब हम कहते हैं कि अल्लाह और कृष्ण एक है तो हम ये नहीं कह

1270
01:36:33,600 --> 01:36:39,600
रहे कुरान के दवारा प्र होने वाला ईश्वर हम कह रहे बस अल्लाह नाम की कोई एंटिटी

1271
01:36:40,200 --> 01:36:44,360
है मैं उसको बता रहा हूं आपका भगवत दर्शन मेरा भगवत

1272
01:36:44,360 --> 01:36:48,600
दर्शन अलग है आप मानते हैं इस बात को इसलिए हमा हमारी विचार धरा अलग है भगवान

1273
01:36:48,600 --> 01:36:52,920
को लेक जब मेरे से भगवान की बात करेंगे तो मैं कृष्ण समझूंगा अगर आपसे भगवान

1274
01:36:52,920 --> 01:36:58,120
की बात करेंगे तो आप बाकी देवी देवताओं को भी बीच में सम्मिलित करेंगे इसी

1275
01:36:58,120 --> 01:37:02,280
प्रकार है वो हमारे ईस्ट है हम राम को हम राम को ईस्ट

1276
01:37:02,280 --> 01:37:06,640
रूप में मानते हैं राम को तो आप राक्षस मानते हैं अभी अभी मुक्तेश्वरा

1277
01:37:06,640 --> 01:37:10,720
अंद जी ने बोला था राक्षस उसम प्रवेश कर जाएगा ऐसा कुछ बोला उन्होंने तो

1278
01:37:10,720 --> 01:37:14,880
खैर अगर आप सामने होते तो जरूर आपको मैं ये चुनौती देता

1279
01:37:14,880 --> 01:37:18,960
कि इसको सिद्ध करिए अभी ऑनलाइन पर बैठ कर आप कुछ भी

1280
01:37:18,960 --> 01:37:23,960
कर सकते हैं खैर सारी बातें ऑन रिकॉर्ड है आ

1281
01:37:23,960 --> 01:37:28,280
बते क्या कहा जी को रक्षस नहीं कहा क्या उन्होने राम जी की मूर्ति

1282
01:37:28,280 --> 01:37:32,320
को कहा तो राम जी की मूर्ति को उसम

1283
01:37:32,320 --> 01:37:35,960
कैसे राक्षस घुस जाएगा भैया उसमें कैसे राक्षस घुस जाएगा आप शास्त्रों को

1284
01:37:35,960 --> 01:37:40,320
नहीं मानते मैं तो शास्त्र को मानता हूं इसी प्रकार आप

1285
01:37:40,320 --> 01:37:44,920
पहले अगर को य जवाब दे सकते बताइए राम जी कौन है

1286
01:37:44,920 --> 01:37:49,800
अगर आप मुझे ये जवाब दे सकते हैं कि उसम असुर कैसे प्रवेश कर जाएगा

1287
01:37:49,800 --> 01:37:54,200
तिरस्कार कर रहे हैं मे लोगों का मैंने अभी तक तिरस्कार किया क्या

1288
01:37:54,200 --> 01:37:58,360
तिरस्कार कहा नहीं आप राम जी का तिरस्कार करें

1289
01:37:58,360 --> 01:38:04,360
बने उनका कहीं से कोई एक

1290
01:38:05,240 --> 01:38:09,240
रा सवाल ये चल रहा था सवाल यह चल रहा था

1291
01:38:09,240 --> 01:38:13,400
कि राम कौन है सवाल यह चल रहा था कि अल्लाह और कृष्ण

1292
01:38:13,400 --> 01:38:17,480
एक कैसे हैं इसको बात करिएना अभ मुक्तेश्वरा जी को क्यों ला रहे बीच

1293
01:38:17,480 --> 01:38:21,960
में क्यों आ रहे आपका पला हका प रहा

1294
01:38:21,960 --> 01:38:25,960
इसलिए मुझे बुरा लगे मुझे अच्छा महसूस ना हो इसलिए

1295
01:38:25,960 --> 01:38:29,960
आप ऐसी बातें बोल रहे हैं मैं तिल मिलाऊ श्रीमन चैतन्य महाप्रभु को बीच में लेके नहीं

1296
01:38:29,960 --> 01:38:34,400
आया अभी मैं क्योंकि वो भी आप श्रीमन चैतन्य महाप्रभु को मानते हैं क्या

1297
01:38:34,400 --> 01:38:38,960
श्रीमन चैतन्य महाप्रभु को क्योंकि देखिए विषयात मत करिए

1298
01:38:38,960 --> 01:38:43,200
आप ये बताइए क्या इसकन अल्लाह

1299
01:38:43,200 --> 01:38:47,280
को मानता है वो एजिस्ट करते हैं या नहीं करते हैं प कही मैंने

1300
01:38:47,280 --> 01:38:51,800
यही बात पहले कही आप आप चाहते हैं कि मैं हां बोलू या ना बोलू

1301
01:38:51,800 --> 01:38:55,400
आपने कहा या मैं हां बोलू या मैं ना बोलू लेकिन मैंने

1302
01:38:55,400 --> 01:38:59,560
कहा कि आपका भगवत दर्शन अलग है मेरा भगवत दर्शन अलग है उसी प्रकार से शब्द में

1303
01:38:59,560 --> 01:39:03,600
वो अल्लाह बुलाते हैं परंतु उनका दर्शन अलग है हमारा अल्ला दर्शन अल बात

1304
01:39:03,600 --> 01:39:08,320
समझने का प्रयास कर रहा हूं आप मेरा प्रश्न समझिए मैं ये बोल रहा हूं

1305
01:39:08,320 --> 01:39:12,440
जब आप कहते हैं अल्लाह और कृष्ण एक है तो क्या आप

1306
01:39:12,440 --> 01:39:16,520
यह कहना चाहते हैं कि जब आप अल्लाह और कृष्ण को एक बताते हैं तो

1307
01:39:16,520 --> 01:39:18,360
आप कुरान के द्वारा प्रतिपादित

1308
01:39:18,360 --> 01:39:24,360
होने वाले ईश्वर की बात नहीं कर रहे होते हैं

1309
01:39:24,560 --> 01:39:28,680
जब आप कहते हैं अल्लाह और कृष्ण एक है तो क्या आप तब कुरान के द्वारा प्रतिपादित

1310
01:39:28,680 --> 01:39:32,800
होने वाले ईश्वर की बात नहीं कर रहे होते हैं उसी

1311
01:39:32,800 --> 01:39:36,880
का जवाब दे आपकी आवाज नहीं आ रही उसी का जवाब दे रहा हूं

1312
01:39:36,880 --> 01:39:42,880
मैं आपकी आवाज नहीं आ

1313
01:39:43,360 --> 01:39:47,760
रही आवाज आ रही [संगीत] है

1314
01:39:47,760 --> 01:39:53,760
आवाज आ रही है नहीं आ रही नहीं आ रही नहीं आ रही नहीं आ

1315
01:39:58,360 --> 01:40:04,360
रही आवाज आ रही है अब आ रही

1316
01:40:06,840 --> 01:40:12,840
है अब आ रही है

1317
01:40:14,560 --> 01:40:19,680
आवाज आवाज आ रही है नहीं आ रही आरही

1318
01:40:19,680 --> 01:40:23,680
दोबारा री जॉइन करूं आवाज नहीं आ रही आपकी

1319
01:40:23,680 --> 01:40:29,680
दोबारा न

1320
01:40:31,480 --> 01:40:37,480
करू अब आ रही

1321
01:40:41,360 --> 01:40:45,440
है अब आ रही

1322
01:40:45,440 --> 01:40:49,920
है मैं दोबारा

1323
01:40:49,920 --> 01:40:55,920
आ

1324
01:41:17,960 --> 01:41:22,200
अब आ रही है आवाज हां आ रही है मेरा स स यह है

1325
01:41:22,200 --> 01:41:26,280
कि जब आप कहते हैं कि अल्लाह और कृष्ण एक है तो क्या हम यह माने

1326
01:41:26,280 --> 01:41:30,400
कि आप कुरान के द्वारा प्रतिपादित होने वाले ईश्वर की बात नहीं कर रहे

1327
01:41:30,400 --> 01:41:35,880
हैं बिल्कुल अच्छा ठीक है

1328
01:41:35,880 --> 01:41:40,320
देखि ऐसा तो आपको कहीं भी कोई भी कोटेशन नहीं मिलेगी किसी भी आचार्य

1329
01:41:40,320 --> 01:41:44,400
की कि उसी की बात हो रही अल्लाह का अर्थ है परम नियंता अगर परम

1330
01:41:44,400 --> 01:41:48,720
क समझ रहा हूं देखिए आप जो कह रहे हैं ना वही मैं समझता हूं

1331
01:41:48,720 --> 01:41:52,760
मगर बात यह कि सच्चाई को बाहर लाना ठीक है मैं यही समझता

1332
01:41:52,760 --> 01:41:57,040
हूं इसकन जब यह कहता है मगर प्रॉब्लम यहां पर यह आ जाती है

1333
01:41:57,040 --> 01:42:01,160
क्या इसकन को नहीं मालूम है कि जब हम कहेंगे अल्लाह

1334
01:42:01,160 --> 01:42:06,000
तो सारी दुनिया सोचेगी कुरान के द्वारा प्रतिपादित होने वाला

1335
01:42:06,000 --> 01:42:10,040
ईश्वर सारी दुनिया उसको परम नियंता के रूप में पहले मानती

1336
01:42:10,040 --> 01:42:14,200
है नहीं ऐसा नहीं है कुरान के द्वारा प्रतिपादित होने वाला ईश्वर समझेगी

1337
01:42:14,200 --> 01:42:18,360
या नहीं समझेगी यह बात मालूम है कि नहीं इस कौन को

1338
01:42:18,360 --> 01:42:22,360
देखिए वो मैं तो नहीं समझ स क्यों देखिए

1339
01:42:22,360 --> 01:42:26,520
प आते हैं मैं सीध बात रहा हं क्या इस कौन को ये मालूम

1340
01:42:26,520 --> 01:42:27,020
है कि

1341
01:42:26,800 --> 01:42:30,800
नहीं जब हम बोलेंगे अल्लाह तो सारी दुनिया सोचेगी कुरान के द्वारा

1342
01:42:30,800 --> 01:42:34,920
प्रतिपादित होने वाला ईश्वर क्या इस कौन को यह बात नहीं मालूम

1343
01:42:34,920 --> 01:42:35,920
है

1344
01:42:35,920 --> 01:42:39,960
या तो व या तो व ये कहे कि हां अल्लाह और कृष्ण

1345
01:42:39,960 --> 01:42:44,480
एक है मगर कुरान के द्वारा प्रतिपादित होने वाला ईश्वर अल्लाह नहीं

1346
01:42:44,480 --> 01:42:48,680
यह अलग अल्लाह की बात कर रहे अगर अल्लाह को आप परम नियंता मानो तो ठीक है

1347
01:42:48,680 --> 01:42:52,720
मगर आप यह मत सोचना कि कुरान के द्वारा प्रतिपादित होने वाला ईश्वर

1348
01:42:52,720 --> 01:42:56,920
और हमारा ईश्वर कृष्ण एक है क्या ऐसा बोला उन्होंने

1349
01:42:56,920 --> 01:43:00,960
कहीं अल्लाह को दुनिया परम नियंता के रूप में मानती है नहीं मानती पूरी

1350
01:43:00,960 --> 01:43:05,560
दुनिया नहीं क्या स्न वाले जानते हैं

1351
01:43:05,560 --> 01:43:10,080
जब हम अल्ला बोलेंगे जब हम अल्लाह बोलेंगे क्या

1352
01:43:10,080 --> 01:43:14,440
नहीं नहीं आप समझना नहीं आप समझना नहीं चाहते

1353
01:43:14,440 --> 01:43:18,640
बा चाहते फसो अब मैं दूसरा प्रश्न बोल

1354
01:43:18,640 --> 01:43:23,240
रहा तो फस ही नहीं रहा भया आप हर जगह फसे कौन सी

1355
01:43:23,240 --> 01:43:27,360
बात आप केवल मुह से बोल रहे जनता को दिखाई देगा आप कहां

1356
01:43:27,360 --> 01:43:31,360
फसे जो देखेगा इसको लाइव चैट को वो देखेगा आप कहां

1357
01:43:31,360 --> 01:43:35,400
क फसे हैं आप ह मुझे चाहते कि हा ना में जवाब

1358
01:43:35,400 --> 01:43:39,640
दू आप तो किसी टॉपिक को शुरू करने से पहले आपकी व्याख्या सुनने

1359
01:43:39,640 --> 01:43:43,720
से पहले आपका मत तो पता चले कि आप किस बारे में बताने जा रहे

1360
01:43:43,720 --> 01:43:47,880
हैं मैं आपसे पूछ को भगवान मानते नहीं देखिए ये

1361
01:43:47,880 --> 01:43:50,960
वो अरे मैं विष्णु को भगवान मानता हूं हां

1362
01:43:50,960 --> 01:43:55,160
अब मैं आपको बताऊंगा क्यों मानता हूं यह अगला स्टेप है अभी आपसे मैंने

1363
01:43:55,160 --> 01:43:59,320
पूछा जब स्कोन वाले कहते हैं कि शिव और अल्लाह

1364
01:43:59,320 --> 01:44:03,400
एक है तो क्या उनको नहीं मालूम होता है कि हम जब कहेंगे अल्लाह तो

1365
01:44:03,400 --> 01:44:07,480
इसका अर्थ पूरी दुनिया यह समझेगी कि कुरान के द्वारा प्रतिपादित होने वाले ईश्वर की बात

1366
01:44:07,480 --> 01:44:10,320
हो रही

1367
01:44:10,320 --> 01:44:14,720
है देखिए मेरी बात उने अ

1368
01:44:14,720 --> 01:44:18,920
कहा उन्होंने जब अल्लाह कहा तो क्या किसी अधिकृत व्यक्ति ने कहीं

1369
01:44:18,920 --> 01:44:22,960
लिखा है कहां है ऑन वीडि कि हम कुरान के द्वारा प्रतिपादित

1370
01:44:22,960 --> 01:44:27,080
होने वाले ईश्वर की बात नहीं कर रहे हैं तो सबसे पहली

1371
01:44:27,080 --> 01:44:31,160
बात तो आपको यही समझनी पड़ेगी जो हम हम जो है जो सनातनी

1372
01:44:31,160 --> 01:44:35,320
है वो तो ऑलरेडी कृष्ण को परम भगवान मानते हैं सनातनी इन द सेंस की

1373
01:44:35,320 --> 01:44:39,400
वैष्णव तो दूसरी बात जो आप कह रहे हैं कि

1374
01:44:39,400 --> 01:44:43,480
पूरी इसको को पूरी व्याख्या करनी चाहिए कि अल्लाह कृष्ण है परंतु

1375
01:44:43,480 --> 01:44:47,520
जो कुराण के द्वारा प्रतिपादित होने वाला अल्लाह है वो नहीं अब इसी

1376
01:44:47,520 --> 01:44:52,240
बात को कह रहे ना कि पूरी क्लीयरेंस देनी चाहिए इसी बात को तो कह रहे परंतु

1377
01:44:52,240 --> 01:44:56,240
क्या अरेबिक वर्ल्ड इस चीज को समझेगा क्या जो कि मुस्लिम है क्या व इस

1378
01:44:56,240 --> 01:45:00,440
बात को समझेंगे क्या नहीं कक अल्ला की बात आ हो मेरे भाई

1379
01:45:00,440 --> 01:45:04,440
आप जस्टिफाई कर रहे हो अभी आपने

1380
01:45:04,440 --> 01:45:06,640
क्वेन किया

1381
01:45:06,640 --> 01:45:10,640
जब पूछ रहा क्या विष्णु को भगवान मानते हो तो पहले आप य बताओगे हा मानते

1382
01:45:10,640 --> 01:45:15,160
उसके बाद बताओगे क्यों मानते हैं अभी मैंने आपसे पूछा है

1383
01:45:15,160 --> 01:45:19,440
जब कहते अला तो उनको नहीं मालूम होता है कि सारी दुनिया समझेगी

1384
01:45:19,440 --> 01:45:23,560
कुरान के दवारा होने वाला ईश्वर

1385
01:45:23,560 --> 01:45:27,560
सारी दुनिया देखिए जो उसको मानने वाला है अल्लाह को मानने वाला इसके

1386
01:45:27,560 --> 01:45:31,920
बारे में बताइए क्या जब स्कोन अल्लाह शब्द का उपयोग करता है तो

1387
01:45:31,920 --> 01:45:36,440
वो यह नहीं जानता है कि लोग समझेंगे कुरान के द्वारा प्रतिपादित होने वाला

1388
01:45:36,440 --> 01:45:40,840
ईश्वर आपको ना इसमें दो चीजें समझने वाली है अब मैं आप कहेंगे

1389
01:45:40,840 --> 01:45:45,120
क्लेरिफाई कर रहा तो भैया आपने क्वेश्चन किया तो उसको क्लेरिफाई तो करूंगा क्

1390
01:45:45,120 --> 01:45:49,280
जब अपना आप अपना आप मुझे मत तो बताइए आप क्या क्लेरिफाई करने वाले

1391
01:45:49,280 --> 01:45:53,280
हैं अगर उसको क्लेरिफाई करने की आवश्यकता होगी तभी तो उसम टाइम वेस्ट

1392
01:45:53,280 --> 01:45:57,360
किया जाए भाई आप पहले क्लियर तो करिए टाइम वेस्ट कैसे

1393
01:45:57,360 --> 01:46:01,360
टाइम वेस्ट ऐसे कि जब आप मान लीजिए मैं मान लीजिए सपोज करिए

1394
01:46:01,360 --> 01:46:05,640
मैं कह रहा हूं कि विष्णु भगवान नहीं है मान लीजिए सपोज और आप

1395
01:46:05,640 --> 01:46:09,720
आपसे मैंने पूछा क्या विष्णु को भगवान मानते हैं आपने कहा नहीं मानता तो ब

1396
01:46:09,720 --> 01:46:13,840
बात खत्म हो गई इसमें कुछ क्लेरिफाई करने की आवश्यकता ही नहीं है अभी वही बात अभी

1397
01:46:13,840 --> 01:46:17,840
वही बात सुनि अपना म तो बता ही नहीं रहे

1398
01:46:17,840 --> 01:46:21,680
ना मैं पूछ रहा हूं क्या इस जब अल्लाह शब्द का उपयोग

1399
01:46:21,680 --> 01:46:25,720
करता है तो क्या उसको यह मालूम नहीं होता है कि लोग अल्लाह

1400
01:46:25,720 --> 01:46:29,840
शब्द का अर्थ समझेंगे कुरान के द्वारा प्रतिपादित होने वाला

1401
01:46:29,840 --> 01:46:33,960
ईश्वर तो अभी मैं आपसे पूछता हूं क्या आप चाहते हैं कि मैं हां ना मैं उत्तर दूं

1402
01:46:33,960 --> 01:46:38,240
या फिर मैं उत्तर दूं अरे आप अपना पूरा बताइएगा इस चीज को पहले कोट

1403
01:46:38,240 --> 01:46:42,360
करिए क्या उसको मालूम होता है या नहीं होता है तो

1404
01:46:42,360 --> 01:46:46,360
जिस जैसे आपने अभी कहा उसको मालूम होता है कि नहीं होता

1405
01:46:46,360 --> 01:46:46,880
है ये

1406
01:46:46,880 --> 01:46:50,880
पहले बता दीजिए फिर आगे चलिए अल्लाह को मानने वाले ऑलरेडी हैं तो उनके

1407
01:46:50,880 --> 01:46:56,160
मन में तो अल्लाह की वही छवि है ना जो कुरान में दी गई है ऐसे सुन लीजिए

1408
01:46:56,160 --> 01:47:00,200
फिर जब हम मुसलमान से अल्लाह कहेंगे तो व यह समझेगा कि कुरान

1409
01:47:00,200 --> 01:47:04,400
के द्वारा प्रतिपादित होने वाले ईश्वर की बात हो रही है ये कन को मालूम

1410
01:47:04,400 --> 01:47:08,400
होता है बिल्कुल होता है इसका मतलब इसकन सोच

1411
01:47:08,400 --> 01:47:12,480
समझ के वहां पर झूठ बोल रहा होता है क्योंकि वो कुरान के द्वारा प्रतिपादित होने

1412
01:47:12,480 --> 01:47:16,720
वाले ईश्वर की बात नहीं कर रहा है वो जानता है कि ये क्या समझ रहा है मेरे अल्लाह

1413
01:47:16,720 --> 01:47:19,920
का मतलब फिर भी वो वहां पर क्लेरिफाई नहीं करता है

1414
01:47:19,920 --> 01:47:24,000
इसको तो मैं क्लेरिफाई कर देता हूं अगर आप सुने पहले पहले इसको क्लियर

1415
01:47:24,000 --> 01:47:28,600
तो करिए पहले क्या ऐसा ही है जो मैं समझ रहा हूं हां ऐसा ही

1416
01:47:28,600 --> 01:47:32,760
आप जो समझ रहे हैं वैसा नहीं है आप जो समझ रहे हैं वैसा नहीं है

1417
01:47:32,760 --> 01:47:35,360
मैं बताता हूं कैसे इस प्रकार है जैसे

1418
01:47:35,360 --> 01:47:39,640
कि अगर अल्लाह शब्द का प्रयोग होता है तो अल्लाह को मानने वाले तो यही समझेंगे

1419
01:47:39,640 --> 01:47:43,800
जो कुरान के द्वारा प्रतिपादित हो रहा है वो वाला अल्लाह परफेक्ट तो

1420
01:47:43,800 --> 01:47:48,440
लेकिन जो कि इस कोन में या फिर जो वैष्णव मानते हैं कृष्ण परम भगवान है

1421
01:47:48,440 --> 01:47:52,440
समझ गए आप मेरी बात तो उनके जो मन में अल्लाह की

1422
01:47:52,440 --> 01:47:56,440
जो छवि है कि वो फॉर्मलेस है वो ये है वो तो ये सब गुण कृष्ण में भी है

1423
01:47:56,440 --> 01:48:00,520
तो कृष्ण भी कर सकते हैं ये सब अगर आप कहेंगे नहीं कर सकते

1424
01:48:00,520 --> 01:48:04,560
हैं तो फिर आप बाधित कर रहे हैं उनको मैं तो नहीं कह रहा कि नहीं कर सकते मैंने

1425
01:48:04,560 --> 01:48:09,360
कब कहा तो बस फिर आपने एक्सेप्ट कर लिया कि जो अल्लाह की बात होती है कृष्ण ही है

1426
01:48:09,360 --> 01:48:13,480
अल्लाह की जो बात होती है वो कृष्ण ही है चाहे जो जो अल्लाह के फीचर्स

1427
01:48:13,480 --> 01:48:17,480
है वो सब कृष्ण कर सकते हैं तो मैंने एक्सेप्ट कर लिया अल्लाह कृष्ण

1428
01:48:17,480 --> 01:48:22,440
एक है कर सकते हैं क्या नहीं कर सकते हैं कर सकते हैं

1429
01:48:22,440 --> 01:48:27,360
तो बस फिर एक्सेप्ट कर लिया कैसे बस फिर कैसे ब

1430
01:48:27,360 --> 01:48:32,080
बस फिर क्या होता है हो सि हो गया

1431
01:48:32,080 --> 01:48:36,480
अगर उस अल्लाह की बात भी करता है जो कुरान में प्रतिपादित

1432
01:48:36,480 --> 01:48:40,800
मैंने अगर यह कहा कि मैं अपने छोटे बच्चे के बराबर

1433
01:48:40,800 --> 01:48:44,800
तेज स्पीड में चल सकता हूं तो इसका मतलब य हो गया कि मेरे और छोटे बच्चे के बीच

1434
01:48:44,800 --> 01:48:49,560
में कोई अंतर नहीं है भाई मेरी अपनी भी तो कैपेसिटी है वो कहां चली जाएगी

1435
01:48:49,560 --> 01:48:50,440
कृष्ण की अपनी

1436
01:48:50,440 --> 01:48:54,920
कैपेसिटी कहां चली जाएगी कि मैं अवतार ले सकता हूं अपनी कैपेसिटी

1437
01:48:54,920 --> 01:49:00,000
कहां जाएगी कृष्ण की तो किसी चीज को

1438
01:49:00,000 --> 01:49:04,320
एक कि जो जो अल्लाह कर सकते हैं वो वो कृष्ण कर सकते हैं

1439
01:49:04,320 --> 01:49:08,320
तो इससे वो सिमिलर हो गए कृष्ण सिमिलर यार आप समझ नहीं

1440
01:49:08,320 --> 01:49:12,400
रहे हैं मेरी बात को इस प्रकार है कि कृष्ण अगर फॉर्मलेस है तो कृष्ण

1441
01:49:12,400 --> 01:49:16,520
फॉर्म भी ले सकते हैं बस फिर बस फिर वो बताइए पहले बस

1442
01:49:16,520 --> 01:49:21,160
फिर क्या था वो तो वो तो आपने एक्सेप्ट किया ना तो मैंने यही बोला

1443
01:49:21,160 --> 01:49:25,320
अल्ला है जो अल्लाह है उनके मन जो अल्लाह को मानने वाले हैं जैसे

1444
01:49:25,320 --> 01:49:29,480
कि मुस्लिम है तो उनके मन में अल्लाह की छवि ये है कि वह एक निराकार है वो

1445
01:49:29,480 --> 01:49:35,480
निर्ब है वो सर्वशक्तिमान है यही उनकी छवि है

1446
01:49:36,080 --> 01:49:37,520
तो कृष्ण

1447
01:49:37,520 --> 01:49:41,600
में यही गुण है कुछ ऐसी चीज है जो अल्लाह से अलग है बिल्कुल जो अल्लाह

1448
01:49:41,600 --> 01:49:46,280
में है ही

1449
01:49:46,280 --> 01:49:50,360
नहीं कृष्ण में

1450
01:49:50,360 --> 01:49:55,520
आपकी आवाज नहीं आ रही कृष्ण में अल्लाह से एक्स्ट्रा गुण भी है

1451
01:49:55,520 --> 01:49:59,600
ना उनको कहां ले जाओगे कृष्ण में अल्लाह

1452
01:49:59,600 --> 01:50:03,800
से एक्स्ट्रा गुण भी है अल्लाह 61 में कह रहे हैं मेरी संतान

1453
01:50:03,800 --> 01:50:08,720
नहीं हो सकती आपकी आवाज नहीं आ

1454
01:50:08,720 --> 01:50:13,200
रही अब आ रही है नहीं आ

1455
01:50:13,200 --> 01:50:19,040
रही

1456
01:50:19,040 --> 01:50:25,040
आता

1457
01:50:44,200 --> 01:50:46,320
हां बारी मैं यह कह रहा

1458
01:50:46,320 --> 01:50:50,840
हूं कि अगर कृष्ण में वो सारी क्वालिटीज है जो अल्लाह में है

1459
01:50:50,840 --> 01:50:55,080
मगर अल्लाह से अलग क्वालिटीज भी है कृष्ण शिक्षा अलग देते हैं अल्लाह शिक्षा

1460
01:50:55,080 --> 01:50:59,120
अलग देते हैं तो मैं य मान लूंगा क्योंकि अल्लाह वाली क्वालिटी कृष्ण

1461
01:50:59,120 --> 01:51:00,360
में इसलिए हो गया कि कृष्ण

1462
01:51:00,360 --> 01:51:04,360
अल्ला एक है आप देखिए इस बात को ऐसे

1463
01:51:04,360 --> 01:51:08,400
समझना पड़ेगा बोला कृष्ण में एक्स्ट्रा क्वालिटीज भी

1464
01:51:08,400 --> 01:51:12,640
है इनफा क्वालिटी होता क्या है पहले एक चीज बता दूं होता

1465
01:51:12,640 --> 01:51:16,760
क्या है कि हम लोग जो एक पॉइंट होता है वो क्लियर कट होने

1466
01:51:16,760 --> 01:51:21,120
से पहले ही हम दूसरे पॉइंट पर चले जाते हैं अभी बात हो रही है

1467
01:51:21,120 --> 01:51:25,640
कि जब इसकन किसी को अल्लाह कहता है जब इसकन

1468
01:51:25,640 --> 01:51:31,640
अल्लाह की बात कर रहा है एक मुस्लिम सेवा आवाज नहीं आ

1469
01:51:48,960 --> 01:51:54,960
रही

1470
01:51:55,600 --> 01:52:00,240
मैं पूछ रहा हूं जब इसकन किसी मुस्लिम से यह कहता है

1471
01:52:00,240 --> 01:52:02,440
कि अल्लाह और कृष्ण एक है तो वह जानता

1472
01:52:02,440 --> 01:52:06,520
है कि जब मैं अल्लाह कह रहा हूं तो अपने कुरान के अल्लाह को अल्लाह समझ रहा है है

1473
01:52:06,520 --> 01:52:10,560
ना हां जानता है ब व क्या वो वहां पर उसकी गलतफहमी दूर

1474
01:52:10,560 --> 01:52:14,640
कर रहा होता है या उस बात को जाने देता

1475
01:52:14,640 --> 01:52:19,280
है तो अगर आप किसी को यह बोलेंगे कि अल्लाह और

1476
01:52:19,280 --> 01:52:23,280
फिर कर रहे यही तो बात है आप क्लियर नहीं करते वो जाने

1477
01:52:23,280 --> 01:52:27,480
देता है कि नहीं जाने देता है क्लियर करता है मुसलमान को वो एक मुसलमान

1478
01:52:27,480 --> 01:52:31,600
से जब ये कहता है कि तुम्हारा अल्लाह कृष्ण हमारा कृष्ण एक है तो क्या

1479
01:52:31,600 --> 01:52:35,680
वो व वो उसको क्लेरिफाई करता है

1480
01:52:35,680 --> 01:52:40,000
कि मैं तुम्हारे कुरान के अल्लाह की बात नहीं कर रहा हूं यह क्लेरिफाई

1481
01:52:40,000 --> 01:52:42,960
करता है वहा वो कुरान के अल्लाह की ही बात हो

1482
01:52:42,960 --> 01:52:47,360
रही है तो व जो कुराण का अल्लाह है वो भी कृष्ण ही है समझ रहे

1483
01:52:47,360 --> 01:52:51,560
कुरान का अल्ला कृष्ण हैरान आप मेरे से

1484
01:52:51,560 --> 01:52:56,080
क्योंकि जो आप जो सुन जो सुनना चाहते हैं ना तो आप वही चाहते कि मैं वही बोलू

1485
01:52:56,080 --> 01:53:00,880
जब गलत सत प होता है व

1486
01:53:00,880 --> 01:53:05,320
जब सि होता है व्यक्ति तो फसता है आप फेंगे आप सि

1487
01:53:05,320 --> 01:53:09,320
की बात करें तो फिर अवत से बड़ा सिद्धांत गलत कोई है ही नहीं अब आप सिद्धांत प

1488
01:53:09,320 --> 01:53:13,320
मेरी सिद्धांत प उंगली उठाएंगे तो अद्वैत से बड़ा बत गलत मैंने तो आपका

1489
01:53:13,320 --> 01:53:14,280
सिद्धांत मैं

1490
01:53:14,280 --> 01:53:18,400
आपका मैं प्रूफ करने के बाद बोल रहा हूं मैं आपसे पूछ रहा हूं क्या

1491
01:53:18,400 --> 01:53:22,600
मुस्लिम को यह कहते समय अल्लाह और कृष्ण एक है वहां व यह

1492
01:53:22,600 --> 01:53:26,640
क्लियर करते हैं कि यह कुरान का अल्लाह नहीं है जिसकी हम बात कर रहे

1493
01:53:26,640 --> 01:53:30,840
हैं वही चीज है जो आपने एक्सेप्ट की थी कि अल्लाह और कृष्ण

1494
01:53:30,840 --> 01:53:34,920
में एक ही क्वालिटीज है कृष्ण में ज्यादा है पर अला

1495
01:53:34,920 --> 01:53:38,920
अला के अंदर जित क्टी वो सब इसके अंदर है कृष्ण के अंदर

1496
01:53:38,920 --> 01:53:43,160
मगर अल्लाह और कृष्ण के अंदर एक ही क्वालिटी नहीं है कृष्ण अवतार

1497
01:53:43,160 --> 01:53:45,560
लेते

1498
01:53:45,560 --> 01:53:47,920
ता

1499
01:53:47,920 --> 01:53:51,920
धर्म कृष्ण तो कुछ भी कर सकने वाले ईश्वर है सत्यम ज्ञानम

1500
01:53:51,920 --> 01:53:56,040
अनंतम ब्रह्म कृष्ण जो है असतो मा सद गम तमसो मा ज्योतिर

1501
01:53:56,040 --> 01:54:00,160
गम मृत मतम गम ये चा का विषय है कृष्ण

1502
01:54:00,160 --> 01:54:04,400
अल्लाह नहीं है अल्लाह 61 में कह रहे है मैं नीचे नहीं आ सकता अल्लाह

1503
01:54:04,400 --> 01:54:08,440
कह रहे हैं दो दो 106 में कि मैं अपनी बातों को बदल ता हूं

1504
01:54:08,440 --> 01:54:12,440
रामो दना भी भाष प्रभु श्री राम कह रहे हैं राम दो प्रकार की बातें नहीं

1505
01:54:12,440 --> 01:54:16,760
करता है रकुल री सदा चल जाई प्राण जाई पर वचन ना जाई

1506
01:54:16,760 --> 01:54:20,760
इसका अर्थ है मां का मतलब मां बहन का मतलब बहन बेटी जो मैंने बोला

1507
01:54:20,760 --> 01:54:24,760
था सुला 33 अध्याय के 33 अध्याय के अपनी चौथी आयत में

1508
01:54:24,760 --> 01:54:28,760
बता रहे हैं कि भाई अगर आपने अपने मुख से किसी को बहन बेटी

1509
01:54:28,760 --> 01:54:29,400
या मां बोल

1510
01:54:29,400 --> 01:54:33,600
दिया है कुछ भी रिश्ता बना लिया है उन रिश्तों की कोई वैल्यू नहीं

1511
01:54:33,600 --> 01:54:37,760
है तो इतनी सारी चीजें अलग है इसलिए ये सिद्ध

1512
01:54:37,760 --> 01:54:38,680
होता है कि कृष्ण और

1513
01:54:38,680 --> 01:54:42,800
अल्लाह एक नहीं है अब मैं आपसे पूछ रहा अल्लाह की बात करते तो क्वालिटीज की बात कर रहे

1514
01:54:42,800 --> 01:54:46,840
हैं अल्लाह की क्वालिटीज की बात कर रहे हैं वो कृष्ण में भी है उसको अल्लाह कोट करते

1515
01:54:46,840 --> 01:54:51,000
हैं क्या कोट करते हैं दोबारा बोलिए जब

1516
01:54:51,000 --> 01:54:55,960
आप अल्लाह की बात करते हैं कि अल्लाह और कृष्ण एक है तो ऑफकोर्स कृ

1517
01:54:55,960 --> 01:54:59,960
नहीं करता पलेही करत कर रहा अपनी बात करहा अपनी बात कर

1518
01:54:59,960 --> 01:55:00,520
रहा हूं

1519
01:55:00,520 --> 01:55:05,040
तो जब हम ये कोट करते हैं कि कृष्ण और अल्लाह एक है तो इसका अर्थ है अल्लाह में क्वालिटी

1520
01:55:05,040 --> 01:55:09,080
है वो कृष्ण में भी है कृष्ण में चाहे इनफा है परंतु अल्लाह

1521
01:55:09,080 --> 01:55:10,880
का

1522
01:55:10,880 --> 01:55:13,240
[संगीत]

1523
01:55:13,240 --> 01:55:18,080
सुप्रीम होने वाला ईश्वर इनफिट है क्या

1524
01:55:18,080 --> 01:55:22,080
इनफिट है अगर वो परम तो कृष्ण है मैं पूछ

1525
01:55:22,080 --> 01:55:26,240
रहा हूं कुरान के द्वारा प्रतिपादित होने वाला ईश्वर इनफिट है क्या दोबारा पूछ

1526
01:55:26,240 --> 01:55:30,560
रहा हूं क्लियर जवाब दीजिए इनफा इस प्रकार

1527
01:55:30,560 --> 01:55:34,680
है कि जो उसमें गुण है जो उसमें कला जितनी वह जानते हैं समझ रहे

1528
01:55:34,680 --> 01:55:39,040
हो आप मेरी बात इस बात को इस प्रकार से समझिए उदित

1529
01:55:39,040 --> 01:55:43,320
होने वाला ईश्वर है वो इनफिट नहीं है आप गलत है यहां पे

1530
01:55:43,320 --> 01:55:47,320
नहीं अरे आप मेरी बात को समझ नहीं रहे हैं आप मेरी बात को सुन नहीं रहे हैं आप सुनना चाहते ही

1531
01:55:47,320 --> 01:55:51,320
नहीं है जिस प्रकार आपका और मेरा सिधांत अलग है आपका भगवत दर्शन और

1532
01:55:51,320 --> 01:55:55,480
मेरा भगवत दर्शन अलग है उनका भगवत दर्शन अलग है वो अल्ला को किसी और रूप में देखते

1533
01:55:55,480 --> 01:55:59,960
हैं वो कृष्ण को अलाह के रूप में देखते उनकी क्वालिटी उनकी कमते

1534
01:55:59,960 --> 01:56:03,960
पूछ र कुरान के द्वारा डिफाइन होने वाला ईश्वर इनफिट

1535
01:56:03,960 --> 01:56:09,120
है क्या उनकी अगर आप

1536
01:56:09,120 --> 01:56:13,960
डेफिनेशन कुरान के सीमा का ईश्वर इनफिट है क्या

1537
01:56:13,960 --> 01:56:18,160
तो आप वही बात है मैंने जो कही आप हां ना में जवाब चाहते हैं हा ना जवाब

1538
01:56:18,160 --> 01:56:22,240
दूंगा फिर ल बना आप उनकी उनकी धारणा मैं मुसलमानों

1539
01:56:22,240 --> 01:56:26,040
की धारणा की बात नहीं कर रहा हूं कुरान जो गं है पुस्तक

1540
01:56:26,040 --> 01:56:31,640
है उसके द्वारा डिफाइन किया जाने वाला ईश्वर इनफिट है

1541
01:56:31,640 --> 01:56:35,680
क्या मैं उसका जवाब दे रहा हूं आपको अगर आप सुनेना नहीं होता है ना

1542
01:56:35,680 --> 01:56:39,800
जवाब स्पष्ट जवाब देते ही नहीं आप हा ना में जवाब दूंगा ही नहीं मैं हां ना में जवाब

1543
01:56:39,800 --> 01:56:44,120
इसका अर्थ है कि मैं आपको र कभी दू

1544
01:56:44,120 --> 01:56:48,880
दूंगा ही नहीं आभ क्योंकि अगर आपरे

1545
01:56:48,880 --> 01:56:52,920
डल दो ने बात की है उन्होंने ऐसे ही किया है ऐसे ही किया है

1546
01:56:52,920 --> 01:56:57,000
और फिर वो तिल मिलाते फिर कहते मैं आ रहा हूं आज विष्णु द्रोही कते तो नहीं रहा

1547
01:56:57,000 --> 01:57:00,200
मैं तो

1548
01:57:00,200 --> 01:57:04,400
आपने मुझे विष्णु द्रोही कहा ना मैंने आज तक एक भी आपत्ति

1549
01:57:04,400 --> 01:57:09,240
जनक शब्द कहा है क्या आपके लिए एक भी आपत्ति जनक शब्द बताइए

1550
01:57:09,240 --> 01:57:13,400
कहा है क्या मैंने मुझे लगता है मैंने भी आपके लिए कोई आपत्ति जनक शब्द नहीं कहा

1551
01:57:13,400 --> 01:57:17,600
आपने विष्णु द्रोही कहा ना मुझे मैं राम का उपासक हूं आप कह रहे विष्णु

1552
01:57:17,600 --> 01:57:21,680
द्रोही तो आप तो फिर मैं उस बात पर उस बारे

1553
01:57:21,680 --> 01:57:25,760
में बात करूंगा तो आप क कहेंगे मर्यादा भूल रहे हैं बा बोल रहे हैं तो उस बात पर मैं

1554
01:57:25,760 --> 01:57:29,800
नहीं जाना चा मर्यादा वाली बात है ना वो तो आप किसी दिन अगर प्रत्यक्ष रूप

1555
01:57:29,800 --> 01:57:34,240
से मिलते और आप फिर ऐसी बातें करते तब मैं आपको समझा पाता कि क्यों नहीं करनी चाहिए

1556
01:57:34,240 --> 01:57:39,200
अब आप प्रत्यक्ष रूप से तो है नहीं मेरे सामने तो आप कुछ भी बोल लीजिए दूर बैठे

1557
01:57:39,200 --> 01:57:43,240
हुए दूर बैठे बोलने कहां दे रहे हैं आप तो कहते कि मैं हा ना हा ना हा ना

1558
01:57:43,240 --> 01:57:47,240
हा ऐसे करता अरे भाई जब हम किसी चीज को डिफाइन करेंगे उससे

1559
01:57:47,240 --> 01:57:51,520
पहले हम यह तो समझ ले कि आप कहना क्या ने वाले क्या हो आप हमें क्या समझाने

1560
01:57:51,520 --> 01:57:56,000
जा रहे हो तो मैं आपको वही समझाना चारहा

1561
01:57:56,000 --> 01:58:00,160
कुरान के द्वारा प्रपात होने वाला जो ईश्वर है वो इनफिट

1562
01:58:00,160 --> 01:58:04,320
है क्या हां तो उसका उत्तर है ना लेकिन

1563
01:58:04,320 --> 01:58:08,480
क्यों ये सु ऐसे बोला करो ना लेकिन क्यों अब मैं सुनूंगा

1564
01:58:08,480 --> 01:58:12,880
आपकी बात ऐसे बोला करो ना लेकिन क्यों अब बताओ क्यों बताओ

1565
01:58:12,880 --> 01:58:15,280
लेकिन क्यों जिस प्रकार आपका और

1566
01:58:15,280 --> 01:58:19,480
मेरा भगवत दर्शन अलग है उसी प्रकार कुराण उनको मानने वा

1567
01:58:19,480 --> 01:58:23,840
यन कुरान का ईश्वर इनाइट नहीं है तो डिफाइन करने की आवश्यकता

1568
01:58:23,840 --> 01:58:28,600
क्या रह गई फिर अगर आप कहते अच्छा अभी आप कह रहे हैं कि क्

1569
01:58:28,600 --> 01:58:32,640
नहीं चलो ठीक है आप आपने कहा कि हां ना में जवाब दो फिर बोलो

1570
01:58:32,640 --> 01:58:36,920
अब मैं हां ना में जवाब देके बोलता हं तो आप मत बो लीजिए आप कर लीजिए डिफाइन कर लीजिए

1571
01:58:36,920 --> 01:58:40,960
मगर कोई आवश्यकता नहीं है क्योंकि आप अगर कहते हां इनफिट

1572
01:58:40,960 --> 01:58:45,120
है तो आवश्यकता होती उसको सिद्ध करने की ये तो मैं सहमत

1573
01:58:45,120 --> 01:58:49,120
सहमत हूं इस बात से कि नहीं है इफना तो इसको सिद्ध करना की आवश्यकता ही नहीं

1574
01:58:49,120 --> 01:58:53,320
है अब लेकिन यह बात मैं बोलूंगा क्यों बोलूंगा क्योंकि उसके

1575
01:58:53,320 --> 01:58:57,400
पीछे कारण आप इसलिए बोलेंगे कि हम फिर कहते क्यों जब वो इनाइट नहीं है तो हम एक क्यों

1576
01:58:57,400 --> 01:59:01,680
बताते हैं उसे वो आप इसलिए बोलेंगे क्योंकि ना इफट

1577
01:59:01,680 --> 01:59:05,800
नहीं है क्योंकि जिस प्रकार हर एक का भगवत दर्शन अलग होता है उसी प्रकार उनका भगवत

1578
01:59:05,800 --> 01:59:09,960
दर्शन अलग है उनके हिसाब से क्वालिटीज जो है वो इनफा

1579
01:59:09,960 --> 01:59:14,400
नहीं है उन्होंने नहीं लिखी जितनी उनको क्वालिटीज पता थ उतनी लिख दी उन्होंने कृष्ण की क्वालिटी

1580
01:59:14,400 --> 01:59:18,440
समझ रहे हैं नहीं समझ रहे जैसे मेरा और आपका भगवत दर्शन अलग है उनका

1581
01:59:18,440 --> 01:59:22,480
भगवत दर्शन अलग अगर सनातन धर्म की भी बात करेंगे

1582
01:59:22,480 --> 01:59:26,600
तो अगर आर्य समाजों की बात करते तो वो भी इनफा नहीं मानते

1583
01:59:26,600 --> 01:59:30,400
हैं वो भी क्वा कम क्वालिटी लिमिटेड क्वालिटीज मानते हैं परंतु स्वयं

1584
01:59:30,400 --> 01:59:34,440
को हिंदू बताते हैं उसी प्रकार मुस्लिम है वो स्वयं को मुस्लिम बताते हैं

1585
01:59:34,440 --> 01:59:38,520
लेकिन अल्लाह जो है उसकी क्वालिटीज को लिमिटेड बताते हैं तो हम उसी प्रकार

1586
01:59:38,520 --> 01:59:42,800
उनको कहते हैं कि आपका जो भगवत दर्शन है वो अलग है आपकी जो क्वालिटीज है वो लिमिटेड

1587
01:59:42,800 --> 01:59:46,840
है हालांकि भगवान की क्वालिटीज बंड है अनलिमिटेड है उनके भगवत

1588
01:59:46,840 --> 01:59:50,960
दर्शन में भगवान की क्वालिटीज लिमिटेड है उसी प्रकार से

1589
01:59:50,960 --> 01:59:55,040
होप आप मेरी बात समझ रहे टेड है आप जानते हो तो

1590
01:59:55,040 --> 01:59:59,200
फिर अल्लाह कृष्ण को क्यों कहते हो और अगर आप केवल

1591
01:59:59,200 --> 02:00:03,240
उनको अपने में मिलाने के लिए कहते हो तो क्या आप उनको यह बताते हो कि

1592
02:00:03,240 --> 02:00:07,800
आप जो लिमिटेड ईश्वर जिसको जानते हो हम उस अल्लाह की बात नहीं कर रहे

1593
02:00:07,800 --> 02:00:12,040
हैं श्वर को लिमिटेड समझते हो हम उस लिमिटेड ईश्वर

1594
02:00:12,040 --> 02:00:16,200
की बात नहीं कर रहे हैं आप उनको य बताते हो सबसे

1595
02:00:16,200 --> 02:00:20,200
पहले तो आपको य जानना होगा खुद को मिलाने और भगवान की भक्ति प्रदान करने में

1596
02:00:20,200 --> 02:00:24,400
इसमें कितना बड़ा डिफरेंस होता है खुद में मिलाने का अता है कि आ जाओ आ जाओ जो मैं फॉलो करर मेरे शब्द

1597
02:00:24,400 --> 02:00:29,320
में वापस लेता हूं भक्ति में मला विलय करा रहे हो ठीक है

1598
02:00:29,320 --> 02:00:30,760
अब बात करिए क्या

1599
02:00:30,760 --> 02:00:34,880
आप भक्ति में विलय कराते हुए यह उनको बताते हो कि जिस

1600
02:00:34,880 --> 02:00:39,040
लिमिटेड ईश्वर के रूप में आप अल्लाह शब्द का उपयोग करते हो हम उस अल्लाह की बात

1601
02:00:39,040 --> 02:00:43,280
नहीं कर रहे हैं जैसे ही वो भक्ति से जुड़ते हैं श्रीमन चैतन्य महाप्रभु

1602
02:00:43,280 --> 02:00:47,520
बते फिर वही कर रहे आप पहले क्लियर करिए फिर आगे चलिए पहले क्लियर

1603
02:00:47,520 --> 02:00:50,560
करिए क्या आप उन्हें बताते हो तो

1604
02:00:50,560 --> 02:00:54,920
बता रहे हैं कैसे बता रहे हैं वो बता रहा हूं मैं आपको आपने अभी जैसे कहा था ना

1605
02:00:54,920 --> 02:00:59,000
ना सुनिए ऐसे बताइए मुझे उसी प्रकार हा

1606
02:00:59,000 --> 02:01:03,120
बताते हैं परंतु कैसे बताते हैं हां बताते हैं परंतु कैसे बताते हैं वो बता

1607
02:01:03,120 --> 02:01:08,720
रहा हूं मैं आपको हा सुनना था ना मु से

1608
02:01:08,720 --> 02:01:12,800
बता गए हो मंदिर या नहीं गए हो तो वहां पर भागवत भगवत गीता की

1609
02:01:12,800 --> 02:01:16,960
क्लासेस चलती रहती है श्रीमन चैतन्य महाप्रभु की चैतन्य चरिता चलती रहती

1610
02:01:16,960 --> 02:01:21,160
है जब वो उसमें बैठ कर के भगवान की लीलाओं का आनंद लेंगे तो स्वयं

1611
02:01:21,160 --> 02:01:25,240
से उनको बोध होने लगेगा इस बातों का इसका

1612
02:01:25,240 --> 02:01:29,400
मतलब जब वो धीरे धीरे आपके हो जाते तो उन्हें स्वयं अपने आप पता लग

1613
02:01:29,400 --> 02:01:33,640
जाता है आप इसके लिए कोई विशेष प्रयास नहीं करते हो महाप्रभु

1614
02:01:33,640 --> 02:01:37,800
के हो जाते हैं उनको पता चल जाता है ठीक है पता चल जाता है कुल मिलाकर के बात

1615
02:01:37,800 --> 02:01:41,840
ये है कि जो सच्चाई है वह आपको शुरुआत में नहीं बता रहे हो

1616
02:01:41,840 --> 02:01:45,920
ना सच्चाई क्या अरे यार आपको पता नहीं समझ में क्यों नहीं र

1617
02:01:45,920 --> 02:01:50,080
वो सच्चाई जानते हैं परंतु वो आदि सच्चाई जानते हैं अरे जो आप

1618
02:01:50,080 --> 02:01:54,200
उनको पूरी सच्चाई नहीं बता रहे हो ना वहां पर पूरी

1619
02:01:54,200 --> 02:01:58,280
सच्चाई नहीं बता रहे अच्छा आप यह कह रहे कि हम उनको पूरा पूरा सिद्धांत नहीं बता रहे हैं इसी प्रकार

1620
02:01:58,280 --> 02:02:02,320
कह रहे ना अल्लाह और कृष्ण एक नहीं है यह

1621
02:02:02,320 --> 02:02:06,800
सच्चाई है अल्लाह और कृष्ण एक है ये आप बता रहे

1622
02:02:06,800 --> 02:02:10,960
हो अभी कुछ देर पहले आप ही ने एक्सेप्ट किया था कि हां अल्लाह और

1623
02:02:10,960 --> 02:02:14,960
कृष् अभी तक एक्ट नहीं किया है आप झूठ बोल रहे हैं मैंने

1624
02:02:14,960 --> 02:02:19,040
कहा अल्लाह के अंदर जितनी क्वालिटीज है वो सारी क्वालिटीज

1625
02:02:19,040 --> 02:02:23,520
कृष्ण के अंदर भी है मगर कृष्ण के अंदर मगर कृष्ण के अंदर कुछ ऐसी

1626
02:02:23,520 --> 02:02:27,600
क्वालिटीज है जो अल्लाह के अंदर नहीं है इससे सिद्ध होता है कृष्ण

1627
02:02:27,600 --> 02:02:32,320
अल्लाह एक नहीं है जैसे कि दुनिया के किसी भी ग्रंथ को पढ़ेंगे

1628
02:02:32,320 --> 02:02:36,320
तो बहुत सी चीजें अच्छी ऐसी है जो मिल जाएंगी आपको जो वेदों में भी है उनमें भी

1629
02:02:36,320 --> 02:02:40,320
है मगर वेदों के अंदर बहुत सी ऐसी अच्छी चीजें हैं जो

1630
02:02:40,320 --> 02:02:44,480
दुनिया के सभी ग्रंथों में नहीं मिलेंगी इसलिए वेद ही एक मात्र

1631
02:02:44,480 --> 02:02:48,960
सनातन सिद्धांत है तो अगर आप आप जो

1632
02:02:48,960 --> 02:02:53,000
कुछ क्टी मैच कर रही है तो हम ये कह वे वेदों के द्वारा प्रतिपादित धर्म

1633
02:02:53,000 --> 02:02:57,040
और कुरान के द्वारा प्रतिपादित धर्म एक कह रहे हैं हम एक तो किसी ने कहा ही

1634
02:02:57,040 --> 02:03:01,160
नहीं भैया मैं आपको क्या बता रहा आप ये मेरे ऊपर कह रहे हो ना आप नेभी थोड़ी देर पहले

1635
02:03:01,160 --> 02:03:05,400
माना था माना था इन द सेंस कि आपने ये तो माना थाइए

1636
02:03:05,400 --> 02:03:09,800
कि अधिकृत रूप सेय कहां पर लिख ये बहुत बहुत लंबा डिस्कशन हो गया

1637
02:03:09,800 --> 02:03:13,800
अभ आप मुझे बताइए अधिकृत रूप से इस कौन ये कहां पर कहता है जो

1638
02:03:13,800 --> 02:03:17,960
हम इस बात को माने कि व्यक्ति को यह पता चल जाए कि अल्लाह और कृष्ण

1639
02:03:17,960 --> 02:03:22,160
एक नहीं है उस को पता चल जाए कि मैं यहां पर आकर के कुरान

1640
02:03:22,160 --> 02:03:27,000
के द्वारा प्रतिपादित होने वाले ईश्वर को नहीं पूछ रहा हूं

1641
02:03:27,000 --> 02:03:31,240
तो वो तो अधिकृत रूप से कहने की क्या जरूरत है जब वो स्पिरिचुअल प्रैक्टिसेस

1642
02:03:31,240 --> 02:03:35,240
करेगा तो तो आप अगर आप देखेंगे मतलब यन की तरफ से

1643
02:03:35,240 --> 02:03:39,400
कुछ भी कह दिया जाए उसको अधिकृत रूप से कहने की आवश्यकता नहीं है

1644
02:03:39,400 --> 02:03:43,600
कोई भी आ कर के कुछ भी बोल देन के बारे

1645
02:03:43,600 --> 02:03:47,600
में आप यह कहना चाह रहे हैं ना कि अधिकृत रू की तरफ

1646
02:03:47,600 --> 02:03:52,000
से किसी बात को प्रमाण कब माना जाए आप ये बताइए मुझे प्रमाणिक

1647
02:03:52,000 --> 02:03:56,320
तब माना जाए जब जब कोई भी उनसे जुड़ता है और भागवत भगवत

1648
02:03:56,320 --> 02:04:00,480
गीता इसका जब लेक्चर सुनता जो मंच प हम उन्हे

1649
02:04:00,480 --> 02:04:04,760
सुनते हैं टीवी पर वीडियोस देखते हैं उनको वहां पर ना सुने

1650
02:04:04,760 --> 02:04:09,040
ना माने उनकी बातें बातें तो उनकी बात

1651
02:04:09,040 --> 02:04:13,280
मेरे को ना आपकी बात समझ में नहीं आ रही है क्यों तीन तरह की बात

1652
02:04:13,280 --> 02:04:17,560
कते दो तीन तरह की बात कहते हैं फिर चलो प्रश्

1653
02:04:17,560 --> 02:04:21,640
पूछ रहा हूं जो चीजें मुसलमानों को भ से जोड़ने

1654
02:04:21,640 --> 02:04:26,200
के लिए बताई है जो कृष्ण को नहीं जानते जो बाधित ईश्वर को जानते हैं

1655
02:04:26,200 --> 02:04:30,200
वही बातें हिंदुओं को जो कृष्ण को जानते हैं क्यों

1656
02:04:30,200 --> 02:04:34,400
बताई जा रही है कौन से कृष्ण हिंदू को देखिए

1657
02:04:34,400 --> 02:04:37,360
बहुत सारे लोग हैं जो इस्लामी परंपरा

1658
02:04:37,360 --> 02:04:42,040
को ही फॉलो करते आ रहे हिंदू सनातन धर्म आरे समाज को देखिए

1659
02:04:42,040 --> 02:04:46,360
रामपाल को चलिए ठीक है तो फिर आपने कोई सिलेबस बनाया है क्या

1660
02:04:46,360 --> 02:04:50,680
कि जो आर्य समाजी ना हो जो आर समाज जी उसको यह जो मुसलमान

1661
02:04:50,680 --> 02:04:55,080
हो उसको यह जो बाइबल वाला हो उसको यह और जो पूर्ण सनातनी

1662
02:04:55,080 --> 02:04:59,600
हो उसको यह सुनाना है कोई ऐसा सिलेबस है क्या

1663
02:04:59,600 --> 02:05:03,600
इस प्रकार हम डंडा लेकर तो घूमते नहीं है कि जो दिखा तो उसको मार दिया इस

1664
02:05:03,600 --> 02:05:07,600
प्रकार यानी कि आप सबको एक ही लकड़ी से हाक रहे हैं और आप

1665
02:05:07,600 --> 02:05:11,960
एक ही आप एक ही चीज बता रहे हैं कि भैया आपका अल्लाह

1666
02:05:11,960 --> 02:05:16,560
भी कृष्ण है और आपका शिव कृष्ण नहीं है आप सबको यही चीज बता रहे

1667
02:05:16,560 --> 02:05:20,720
हैं मुस्लिमों के लिए नहीं है गैर सनातनी के लिए नहीं है

1668
02:05:20,720 --> 02:05:25,000
यह सबके लिए है देख जो शिव को मान रहा है तो ऑलरेडी हम

1669
02:05:25,000 --> 02:05:29,480
देखिए आपको यह समझना पड़ेगा कि वैष्णव दर्शन जो है वो शिव

1670
02:05:29,480 --> 02:05:34,160
को नारायण को परम मानता कई बार क्या हुआ है

1671
02:05:34,160 --> 02:05:38,520
समझनी पड़गी इकन के लोगों से तो आप मुझे बात बता

1672
02:05:38,520 --> 02:05:43,080
छोटी सी बात आपको ये बता रहा हूं कि आपको यह मानना पड़ेगा कि जैसे

1673
02:05:43,080 --> 02:05:48,040
वव सिद्धांत यही है वैष्णव सिद्धांत यही है कि नारायण परम है

1674
02:05:48,040 --> 02:05:52,280
आपको य मानना पड़ेगा आपको शैव वैष्णव स्मार्त

1675
02:05:52,280 --> 02:05:52,780
पढ़ने

1676
02:05:52,560 --> 02:05:56,720
पड़ेंगे पहले वैष्णव में यही है कि विष्णु सुप्रीम है अब शैव है

1677
02:05:56,720 --> 02:06:01,320
अब शव के पास जाकर के अपनी चीज नहीं समझा सकते हैं क्योंकि वो मानते हैं कि शिव सुप्रीम

1678
02:06:01,320 --> 02:06:05,360
है समझ रहे कैसे कैसे वो सनातन संस्कृति

1679
02:06:05,360 --> 02:06:09,640
कोते हु एक बात कही थी कि भगवान ने यह कहा

1680
02:06:09,640 --> 02:06:10,140
कि

1681
02:06:09,800 --> 02:06:14,120
मेरे कई नाम हो सकते हैं मेरे कई रूप है इस संदर्भ में आपने कुछ बताया

1682
02:06:14,120 --> 02:06:18,120
था अच्छा आप नहीं मानते हैं नहीं नहीं मैं मानता हूं

1683
02:06:18,120 --> 02:06:22,120
फिर मैं आप मानते हैं कि नहीं मैं पूछ रहा हूं तसल्ली कर रहा हूं मानते हैं

1684
02:06:22,120 --> 02:06:26,160
मानते हैं अच्छा इसीलिए आप कह देते हो कि कृष्ण अल्लाह एक

1685
02:06:26,160 --> 02:06:30,400
है अल्लाह शब्द कृष्ण ही है हां ठीक है अल्लाह शब्द कृष्ण

1686
02:06:30,400 --> 02:06:35,160
ही है ठीक है तो आप हरे अल्लाह हरे अल्लाह करवा सकते हैं क्या

1687
02:06:35,160 --> 02:06:39,160
हरे अल्लाह नहीं करवा सकते क्यों क्योंकि उनके सिद्धांत में शक्ति नहीं है

1688
02:06:39,160 --> 02:06:43,200
हरे का श जब आप अल्ला शब्द ले रहे हो तो सिद्धांत सिद्धांतों

1689
02:06:43,200 --> 02:06:47,240
के अनुसार प्रतिपादित होने वाला अल्लाह ले रहे हो आप यह बात सोचो ना कि

1690
02:06:47,240 --> 02:06:51,640
हम तो परम नियंता की बात कर रहे हैं हरे अल्लाह हरे अल्लाह करवाओ परत

1691
02:06:51,640 --> 02:06:56,200
पर उनकी उनको मानने वालों की उसकी नजर देख

1692
02:06:56,200 --> 02:07:00,240
सतो के अनुसार प्रतिपादित होने वाले अल्लाह की बात नहीं कर रहे हो ना बेसलेस बात

1693
02:07:00,240 --> 02:07:04,600
कर रहे हैं आप बेसलेस बात कर रहे हैं बेले आपसे पूछ रहा हूं क्या आप

1694
02:07:04,600 --> 02:07:08,600
उनके सिद्धांतों के अनुसार प्रतिपादित अल्लाह की बात कर रहे हो अभी आपने कहा था नहीं

1695
02:07:08,600 --> 02:07:12,760
कर रहे उनके सिद्धांत उनके सिद्धांतों के अनुसार अल्लाह

1696
02:07:12,760 --> 02:07:16,840
की बात कर रहे हैं इसलिए हरे अल्लाह नहीं बोल सकते क्योंकि उनके सिद्धांत के अनुसार उनके

1697
02:07:16,840 --> 02:07:21,440
अल्लाह की कोई शक्ति नहीं है जिस प्रकार कृष्ण की शक्ति राधा रानी है मैं आपसे

1698
02:07:21,440 --> 02:07:24,880
पूछ रहा हूं अभी आपने थोड़ी देर पहले माना था कि जब हम उनसे बात

1699
02:07:24,880 --> 02:07:28,880
करते हैं तो हम कुरान के द्वारा प्रतिपादित होने वाले ईश्वर की बात

1700
02:07:28,880 --> 02:07:32,960
नहीं करते हैं और यह बात उनको धीरे-धीरे अपने आप पता लग जाती है

1701
02:07:32,960 --> 02:07:37,040
जब व भक्ति में आते हैं तो ये माना था ना आपने मैंने

1702
02:07:37,040 --> 02:07:41,240
तो ये भी माना था जो कलाए जो कलाए अल्लाह क

1703
02:07:41,240 --> 02:07:43,880
को अल्लाह कहा जा सकता

1704
02:07:43,880 --> 02:07:48,720
है कहा जा सकता है बिल्कुल तो फिर अरे अल्लाह क्यों नहीं करेंगे

1705
02:07:48,720 --> 02:07:53,160
तो भैया अल्लाह किसके लिए अल्लाह अगर बताते हैं तो किसको बताते हैं

1706
02:07:53,160 --> 02:07:58,120
सबसे पहली बात तो इसका उत्तर है किसको बताना है अल्लाह आपको थोड़ी अगर

1707
02:07:58,120 --> 02:08:02,160
भी बता रहे क्या हरे अल्लाह कर सकते हैं उसी को जिसको बता रहे हैं उसको हरे अल्ला कवा

1708
02:08:02,160 --> 02:08:06,480
सकते हैं हा क्योंकि उसके उसके मत में अल्लाह है लेकिन

1709
02:08:06,480 --> 02:08:10,480
शक्ति नहीं है इसलिए हल्ला भाई तो आप तो जिस अल्लाह की

1710
02:08:10,480 --> 02:08:14,560
बात कर रहे हो वो अल्लाह वो नहीं है ना उसके मत वाला अल्लाह तो हम

1711
02:08:14,560 --> 02:08:18,600
वो बात कर क्यों रहे हैं उसके उसके साथ य बात करें तो उसके मत की बात करेंगे है

1712
02:08:18,600 --> 02:08:22,640
ना हां समझ नहीं रहे ठी तो मैं पूछ रहा

1713
02:08:22,640 --> 02:08:26,800
हूं उसके मत के लिए आप हरे अल्लाह भी करवा सकते हो उसके

1714
02:08:26,800 --> 02:08:30,840
मत में शक्ति है ही नहीं अल्लाह की उसके मत हर एक अर्थ

1715
02:08:30,840 --> 02:08:34,960
समझ मैं आपसे पूछ रहा हूं उसके मत के लिए आप अल्लाह

1716
02:08:34,960 --> 02:08:39,920
नाम का जब करवा सकते हो उससे नहीं

1717
02:08:39,920 --> 02:08:44,400
क्यों क्यों क्योंकि वो कृष्ण का नाम ले क्यों

1718
02:08:44,400 --> 02:08:48,480
भाई कृष्ण अल्लाह तो एक है ना आपके अनुसार परंतु

1719
02:08:48,480 --> 02:08:53,160
उसके मत में क्योंकि उसके मत में अल्लाह श आप बात नहीं कर रहे हो

1720
02:08:53,160 --> 02:08:57,680
ना अरे तो भाई अल्लाह शब्द का प्रयोग होने के लिए अल्ला है ना

1721
02:08:57,680 --> 02:08:59,200
वो जानता नहीं तो क्या ता

1722
02:08:59,200 --> 02:08:59,960
क्या सोच रहे हो

1723
02:08:59,960 --> 02:09:03,960
आप ये समझ रहे हो कि इस कौन अल्लाह को मानता है कृष्ण को नहीं मानता है

1724
02:09:03,960 --> 02:09:08,440
अल्लाह को मैं ये बताना चाहता हूं समाज को

1725
02:09:08,440 --> 02:09:12,520
कौन दो प्रकार की बातें करता है इसको ब

1726
02:09:12,520 --> 02:09:16,760
की बात करता है जो कृष्ण नाम समते धारणा कुछ और है वो अपना

1727
02:09:16,760 --> 02:09:18,920
प्रचार करने के लिए कुछ और कहता है मैं

1728
02:09:18,920 --> 02:09:23,760
ये बताना चा कुछ नहीं इस प्रकार है कि जो अल्लाह

1729
02:09:23,760 --> 02:09:29,080
कृष्ण नाम नहीं समझता है अच्छा थोप दीजिए थोप दीजिए

1730
02:09:29,080 --> 02:09:33,120
आप थोप रहे हैं बेसिकली आप थोप रहे वो जनता देखेगी जो अभी तक की

1731
02:09:33,120 --> 02:09:37,400
कन्वर्शन है जनता देख आपकी ही जनता है बता

1732
02:09:37,400 --> 02:09:41,440
क्या आप प्रभुपाद जी की द्वारा दी हुई शिक्षा को लेकर के आगे

1733
02:09:41,440 --> 02:09:45,920
बढ़ रहे हैं जी बिल्कुल इकोन का

1734
02:09:45,920 --> 02:09:51,920
अर्थन प्रभुपाद के बिना तो बिना अर्थ का है ना

1735
02:09:52,560 --> 02:09:57,280
अच्छा अब मुझे बताइए क्या

1736
02:09:57,280 --> 02:10:01,520
आप इस जो प्रभुपाद जी है उनके शब्दों

1737
02:10:01,520 --> 02:10:05,680
को बदलकर छापी गई भगवत गीता को मानते हैं या नहीं मानते हैं

1738
02:10:05,680 --> 02:10:09,760
मानेंगे या नहीं मानेंगे नहीं मानेंगे कहां उ

1739
02:10:09,760 --> 02:10:15,760
नहीं मानेंगे नहीं नहीं मानेंगे तो

1740
02:10:15,880 --> 02:10:20,400
ये प्रभुपाद जी ने 1972 का वर्जन है

1741
02:10:20,400 --> 02:10:24,680
भगवत गीता ए इट हा इसमें लिखा

1742
02:10:24,680 --> 02:10:29,040
हुआ है दूसरा अध्याय 30 वा

1743
02:10:29,040 --> 02:10:33,120
श्लोक और इसमें लिखा है कि ही हु

1744
02:10:33,120 --> 02:10:38,720
डल्स इन द बॉडी इ टर्नल एंड कैन नेवर बी

1745
02:10:38,720 --> 02:10:42,960
स्लेन अब इसका अर्थ आप जो आज भगवत गीता पढ़ रहे हैं

1746
02:10:42,960 --> 02:10:47,240
उसमें देखिए क्या लिखा है आपने कौन सा श्लोक

1747
02:10:47,240 --> 02:10:53,240
बोला दूसरा अध्याय तीसरा लोक 30 वा

1748
02:11:09,840 --> 02:11:14,280
30 इतने आप बताइए आप क्या समझते हैं इससे

1749
02:11:14,280 --> 02:11:18,680
नहीं मैं समझता हूं कि यहां पर एक वर्ड है टर्नल

1750
02:11:18,680 --> 02:11:22,840
यह शब्द हटा दिया गया है आज का जो वर्जन है उसमें

1751
02:11:22,840 --> 02:11:27,680
शब्द नहीं है कहां गया क्यों बदला देहीनो

1752
02:11:27,680 --> 02:11:31,760
दे सर्वस्य भारत देही यही वाला

1753
02:11:31,760 --> 02:11:35,960
है आपको मेरे पास भी है मैं दिखा दू

1754
02:11:35,960 --> 02:11:40,680
नहीं मुझे पता है आपके पास है आपके पास सब कुछ बता

1755
02:11:40,680 --> 02:11:45,880
आप पूरा शस्त्र शास्त्र लेकर घूमते

1756
02:11:45,880 --> 02:11:49,920
है इनम शलोक की बात करते थे कि उसके तात्पर्य की बात

1757
02:11:49,920 --> 02:11:53,960
कर रहे थे मैं हिंदी जो उसका अनुवाद किया गया

1758
02:11:53,960 --> 02:11:58,680
इंग्लिश में ट्रांसलेशन उसकी बात कर रहा हूं हा तो

1759
02:11:58,680 --> 02:12:03,600
इस दूसरे अध्याय के 30 श्लोक में एक वर्ड यूज किया

1760
02:12:03,600 --> 02:12:08,000
टर्नल और वह शब्द आज की जो भगवत गीता है उसमें नहीं

1761
02:12:08,000 --> 02:12:12,160
है अच्छा नहीं है तो इसमें तो य लिखा हैना शरीर में रहने वाले

1762
02:12:12,160 --> 02:12:16,160
का कभी भी ब भाव मत जाइए प्रभुपाद जी का लिखा हुआ शब्द क्यों

1763
02:12:16,160 --> 02:12:20,120
बदला गया है लिखा

1764
02:12:20,120 --> 02:12:24,160
नहीं अर्थ सुनिए तो अर्थ एक ही है तो प्रभुपाद जी ने व टनल क्यों लिखा फिर

1765
02:12:24,160 --> 02:12:28,520
उन्होने गलत लिखा था उन्होंने

1766
02:12:28,520 --> 02:12:32,680
टनल टनल का मतलब क्या है नहीं मतलब नहीं मैं पूछ

1767
02:12:32,680 --> 02:12:38,200
रहा हूं प्रभुपाद जी के शब्द को हटाया क्यों गया है गलत लिखा था क्या

1768
02:12:38,200 --> 02:12:42,720
उन्होंने उन्होंने गलत लिखा था क्या अरे

1769
02:12:42,720 --> 02:12:47,040
फिर बात भगत गता पेंगे

1770
02:12:47,040 --> 02:12:51,400
प ये प्रभुपाद की तो अब इसमें जो प्रभुपाद

1771
02:12:51,400 --> 02:12:55,920
जी की भगवत गीता 1972 वाली इसका यह शब्द हटाया

1772
02:12:55,920 --> 02:13:00,760
क्यों गया इससे क्या प्रॉब्लम है प्रॉब्लम क्या है इससे

1773
02:13:00,760 --> 02:13:01,260
क्यों

1774
02:13:01,040 --> 02:13:05,200
हटाया गया है कहां हटाया गया भैया

1775
02:13:05,200 --> 02:13:09,440
तोय शब्द दिखाइए अपनी अपनी भगवत गीता में शब्द दिखाइए

1776
02:13:09,440 --> 02:13:13,560
मेरे पास हिंदी एडिशन है आपको इलिश एडिशन

1777
02:13:13,560 --> 02:13:18,840
का दिखा रहा हिंदी एडिशन नहीं मैं आपको इंग्लिश का दिखा रहा हूं

1778
02:13:18,840 --> 02:13:23,040
इसमें जो लिखा है मैं आपको एक बार बता देता हूं

1779
02:13:23,040 --> 02:13:27,120
आपकी ये देखिए इसमें

1780
02:13:27,120 --> 02:13:31,320
कहीं भी आपको टर्नल शब्द दिख रहा है क्या ही ल् इन द बॉडी कैन

1781
02:13:31,320 --> 02:13:35,440
नेवर बी स्लेन टर्नल श क्या है

1782
02:13:35,440 --> 02:13:40,280
कैन नेवर बी स्लेन का अर्थ क्या है कैन नेवर बीन

1783
02:13:40,280 --> 02:13:45,040
भी है मेरे भाई कैन नेवर बी स्लेन इसम भी हैनल

1784
02:13:45,040 --> 02:13:49,520
शब्द से प्रॉब्लम क्या थी मैं ये पूछ रहा हूं एक शब्द से

1785
02:13:49,520 --> 02:13:54,080
शब्द से प्रॉब्लम क्या है मैं ये पूछ रहा हूं क्या प्रॉब्लम

1786
02:13:54,080 --> 02:13:58,760
थी क्या प्रॉब्लम है जो प्रभुपाद जी के लिखे हुए को हटा दिया

1787
02:13:58,760 --> 02:14:02,920
गया जो यहां पर बोला गया उसका अर्थ भी तो इटरनल ही है भैया

1788
02:14:02,920 --> 02:14:06,920
अरे मेरे भाई मैं मैं पूछ रहा हूं जो चीज प्रभुपाद

1789
02:14:06,920 --> 02:14:10,960
जी ने लिखी है उसको हटाया क्यों

1790
02:14:10,960 --> 02:14:15,320
वो सही है गलत है वो वैसा का वैसा ही भाव दे रहा है व सब कुछ सब अच्छा है

1791
02:14:15,320 --> 02:14:16,160
मैं पूछ रहा हूं

1792
02:14:16,160 --> 02:14:20,240
उनका लिखा हुआ टर्नल शब्द हटाया क्यों तो

1793
02:14:20,240 --> 02:14:24,360
ये आप जो ये जो प्रश्न है ना ये आप जीबीसी से करिए क्योंकि क्योंकि जितनी

1794
02:14:24,360 --> 02:14:28,640
मेरी बु ठीक है तो इसका जब आपके पास हा क्योंकि उस जितनी

1795
02:14:28,640 --> 02:14:32,640
मेरी बुद्धि है उसमें तो यही समझ आ रहा है कि अर्थ एक ही है अब अब अर्थ में बात

1796
02:14:32,640 --> 02:14:37,000
करते हैं आपके पास नहीं है ठीक है अब अर्थ में बात करते हैं अब जिसको

1797
02:14:37,000 --> 02:14:42,520
मारा ना जा सके क्या वह शाश्वत है

1798
02:14:42,520 --> 02:14:46,520
हां अच्छा जिसको मारा ना जा सके वो ये

1799
02:14:46,520 --> 02:14:50,920
जिसको मारा नहीं जा सकता वो श शाश्वत है

1800
02:14:50,920 --> 02:14:54,960
वो वो आदि भी है जो अनंत है वो आदि भी है

1801
02:14:54,960 --> 02:14:58,960
आदि नहीं आदि नहीं है जो तो टनल शब्द का अर्थ क्या

1802
02:14:58,960 --> 02:15:04,960
है इटरनल का अर्थ है जो कि शाश्वत है जो कि हमेशा

1803
02:15:05,240 --> 02:15:09,600
से हमेशा से जो हमेशा आद है ना अंत है

1804
02:15:09,600 --> 02:15:13,720
यही तो है श जिसको मारा नहीं जा सकता उसका अंत नहीं है

1805
02:15:13,720 --> 02:15:17,880
मगर वो अनादि नहीं है जिसको मारा नहीं जा सकता वह अनंत है

1806
02:15:17,880 --> 02:15:22,280
अनादि नहीं है तो यहां से शाश्वत शब्द को हटाया गया प्रॉब्लम

1807
02:15:22,280 --> 02:15:26,440
यह है और इसमें एक नहीं है ऐसे बहुत से ऐसे

1808
02:15:26,440 --> 02:15:30,520
बहुत से वो है जैसे कि दो 51 भी है शायद ऐसे ही

1809
02:15:30,520 --> 02:15:31,400
मुझे वर्बल

1810
02:15:31,400 --> 02:15:37,400
याद नहीं है ऐसे बहुत से अंतर है

1811
02:15:41,480 --> 02:15:46,800
इसमें प्रभुपाद जी के शब्दों को खूब बदला गया है

1812
02:15:46,800 --> 02:15:51,480
इसमें

1813
02:15:51,480 --> 02:15:55,840
इसका अर्थ ये है कि आप प्रभुपाद जी की भगवत गीता नहीं पढ़ रहे उनके

1814
02:15:55,840 --> 02:16:00,080
शब्दों को बदल कर छापी गई भगवत गीता पढ़ रहे हैं उसम फोटो है प्रभुपाद

1815
02:16:00,080 --> 02:16:04,120
जी की आज जाइए

1816
02:16:04,120 --> 02:16:08,440
संशय में शोधन करिए जीबीसी से पूछिए ऐसा क्यों किया ठीक है

1817
02:16:08,440 --> 02:16:12,640
अर्थ तो मुझे अर्थ तो एक ही है भैया अर्थ कैसे एक है मैंने आपसे

1818
02:16:12,640 --> 02:16:16,640
पूछा शाश्वत का अर्थ क्या है क्या है शाश्वत का

1819
02:16:16,640 --> 02:16:20,720
अर्थ बताइए जिसका ना आदि है ना अंत है

1820
02:16:20,720 --> 02:16:24,760
है ना जो अनादि है जो अनंत है और जो मारा नहीं जा सकता उसका

1821
02:16:24,760 --> 02:16:29,360
मतलब है जो अनंत है वो अनादि नहीं है आप अगर

1822
02:16:29,360 --> 02:16:33,640
जो मारा नहीं जा सकता व अनादि नहीं है वो अनंत है अच्छा आप कहीं

1823
02:16:33,640 --> 02:16:38,240
पर लिखा दिखा सकते हैं कि शाश्वत का अर्थ है

1824
02:16:38,240 --> 02:16:42,320
जिस जो क्या कहते आप शाश्वत का अर्थ य दिखा दिए जो अमर

1825
02:16:42,320 --> 02:16:46,520
है वहां लिखा होगा जो नाना पैदा हुआ

1826
02:16:46,520 --> 02:16:50,960
जो ना मरेगा जिसकी ना शुरुआत हुको

1827
02:16:50,960 --> 02:16:55,200
इसका अर्थ पता है सबको इसका अर्थ पता है कि शाश्वत का अर्थ होता है

1828
02:16:55,200 --> 02:16:59,520
ना आदि हो जिसका नात हो शाश्वत का अर्थ यही होता है ना इस शाश्वत

1829
02:16:59,520 --> 02:17:01,760
नहीं

1830
02:17:01,760 --> 02:17:05,800
लिखालो अगर नेवर बी दूसरी बात यह है कि

1831
02:17:05,800 --> 02:17:10,120
अगर कैन नेवर बी स्लेन पर्याप्त था टर्नल लिखने की आवश्यकता नहीं थी

1832
02:17:10,120 --> 02:17:14,280
तो टर्नल प्रभुपाद जी ने लिखा क्यों और जब लिख दिया है तो

1833
02:17:14,280 --> 02:17:18,400
उसको उनके अनुयायियों ने हटाया क्यों आप एक कह रहे हैं कि शाश्वत

1834
02:17:18,400 --> 02:17:23,280
शब्द हटा दिया इसमें से अ यही कह रहे हैं ना

1835
02:17:23,280 --> 02:17:27,680
हां ये क्या लिखा है हां तो ये तो यह तो मैं कह ही रहा हूं

1836
02:17:27,680 --> 02:17:31,840
यह तो मैं कह ही रहा हूं जब शाश्वत शब्द उन्होंने मीनिंग में माना

1837
02:17:31,840 --> 02:17:36,600
है तो नीचे उनके अनुवाद से क्यों हटाया गया तो बात

1838
02:17:36,600 --> 02:17:41,120
पूछ र ह कि पेज नंबर पेज नंबर

1839
02:17:41,120 --> 02:17:45,120
ट्रिपल आप थोड़ी सी बुद्धि ये लगाइए कि अगर किसी को हटाना

1840
02:17:45,120 --> 02:17:49,120
होता किसी को छुपाना होता किसी को छुपाना हो होता तो वो मीनिंग में भी क्यों

1841
02:17:49,120 --> 02:17:53,840
देता भैया जो व्यक्ति चोरी करता है वह सबूत

1842
02:17:53,840 --> 02:17:58,080
छोड़ देता है जो व्यक्ति चोरी करता है जिसको

1843
02:17:58,080 --> 02:18:02,360
धीमी चोरी करनी होती है वह धीरे-धीरे चोरी करता

1844
02:18:02,360 --> 02:18:06,640
है चलिए और एक पूछ लेता हूं मैं आपसे और

1845
02:18:06,640 --> 02:18:10,840
छोड़िए ठीक है अब इसका तात्पर्य पढ़िए तात्पर्य में भी बताया बताया गया है

1846
02:18:10,840 --> 02:18:15,080
अभी फिलहाल आप ये समझ ग भाई मैं कह रहा हूं प्रभुपाद जी का शब्द

1847
02:18:15,080 --> 02:18:19,440
क्यों हटाया गया मैं पूछ रहा हूं आपसे प्रभुपाद जी का शब्द

1848
02:18:19,440 --> 02:18:23,520
क्यों हटाया गया क्या वह गलत लिखते थे गलत सोचते थे गलत बताते थे जाना

1849
02:18:23,520 --> 02:18:27,640
होता तो पूरी तरह हटाया जाता यही तो बात है

1850
02:18:27,640 --> 02:18:32,080
यही तो बात है मैं इसीलिए पूछ रहा हूं थोड़ा भी क्यों ह अच्छा चलिए ठीक है

1851
02:18:32,080 --> 02:18:36,840
क्या आप भगवान के मंदिर में एक तिनका झूठ रख

1852
02:18:36,840 --> 02:18:41,080
देंगे नहीं क्यों रखना होता

1853
02:18:41,080 --> 02:18:45,840
तो पूरी थाली रखते एक तिनके से क्या हो रहा

1854
02:18:45,840 --> 02:18:50,040
है पूरी थाली जब रख दी जाएगी झूठी तभी माना जाएगा कि झूट कूट

1855
02:18:50,040 --> 02:18:54,440
हो गई भाई मैं ये पूछ रहा हूं उन्होंने टर्नल जब लिखा है

1856
02:18:54,440 --> 02:18:59,000
उसको क्यों

1857
02:18:59,000 --> 02:19:03,040
हटाया तो मतलब आप प्रभुपाद के फैन तो हैं ऐसे मैं हर उस

1858
02:19:03,040 --> 02:19:07,320
व्यक्ति का फैन हूं जो भगवान का फैन है चलो

1859
02:19:07,320 --> 02:19:11,560
अच्छी बात है ये तो आपने दिल जीता इस बात प तो मेरा तो

1860
02:19:11,560 --> 02:19:16,280
बेसिकली आपका जो आपका कहने का

1861
02:19:16,280 --> 02:19:20,360
अर्थन है गलत है आप य कहना चाह रहे हैं मैं ये प्रश्न उठा रहा हूं

1862
02:19:20,360 --> 02:19:24,480
कि जीबीसी प्रभुपाद के लिखे हुए में चेंस क्यों कर रहा है

1863
02:19:24,480 --> 02:19:28,480
सने सने इसमें 50 इसमें 50 बदलाव है

1864
02:19:28,480 --> 02:19:32,640
मेरे मोबाइल में मैंने नोट करके रखे हैं 50 बदलाव

1865
02:19:32,640 --> 02:19:36,680
बदलाव एक ब को भेजिएगा और आप उस अध्ययन करिए

1866
02:19:36,680 --> 02:19:41,560
और जीबीसी का पता लगाइए व ऐसा क्यों कर रहा है अब ये बताइए

1867
02:19:41,560 --> 02:19:46,240
कि क्या आप चैतन्य महाप्रभु को मानते हैं

1868
02:19:46,240 --> 02:19:50,400
बिल्कुल तो चैतन्य महाप्रभु ने

1869
02:19:50,400 --> 02:19:55,480
श्री चैतन्य चरितामृथम [संगीत]

1870
02:19:55,480 --> 02:19:59,800
को जगतगुरु मानता हूं मैं उनके

1871
02:19:59,800 --> 02:20:04,000
द्वारा भगवान को जान पाया हूं मैं उनके द्वारा

1872
02:20:04,000 --> 02:20:08,000
भागवत को समझ पाया हूं तो श्रीधर

1873
02:20:08,000 --> 02:20:12,120
स्वामी तत्कालीन शंकराचार्य हां बिल्कुल मुझे पता

1874
02:20:12,120 --> 02:20:16,160
था यही बोलेंगे श्रीमन चैतन्य महाप्रभु ने उस समय ऐसा

1875
02:20:16,160 --> 02:20:20,240
क्यों किया कि उस समय जो कि बौद्ध धर्म और

1876
02:20:20,240 --> 02:20:24,440
उसके बाद शंकराचार्य जब आए तो उन्होंने बध धर्म आपसे पूछ रहा हूं क्या उन्होंने सच

1877
02:20:24,440 --> 02:20:28,680
बोला था या झूठ बोला था पहले तो ये स्वीकार कर था क्योंकि उन्होंने

1878
02:20:28,680 --> 02:20:33,040
उनको गुरु स्वीकार किया था इसलिए उन्होंने सच बोला था तो इसका अ

1879
02:20:33,040 --> 02:20:38,160
वो शकर परंपरा के सिद्धांतों से भगवान को जानते हैं

1880
02:20:38,160 --> 02:20:42,280
ऐसा तो नहीं है बताइए बिल्कुल भी

1881
02:20:42,280 --> 02:20:46,720
ऐसा नहीं है उन्होंने तो यह भी बोला है मायावादी

1882
02:20:46,720 --> 02:20:50,800
बात आ जब कोई व्यक्ति मायावा की बात कर रहा है तो मायावा कई

1883
02:20:50,800 --> 02:20:55,440
प्रकार के हैं जब चैतन्य महाप्रभु ने बोला मायावा

1884
02:20:55,440 --> 02:20:59,640
किस माया के लिए क आप ये प्रकार समझाएगा मेरे को ये प्रकार

1885
02:20:59,640 --> 02:21:03,920
नहीं समझ आ रहे कौन बहुत से प्रकार है जैसे आपके ग्रंथ में माया शब्द का उपयोग हो गया इसम

1886
02:21:03,920 --> 02:21:07,920
मायावा आ गया माया देवी की बात हो रही है माया वाद आ गया इसमें

1887
02:21:07,920 --> 02:21:10,520
कई जगह माया कहा गया है सृष्टि को माया कई जगह कहा

1888
02:21:10,520 --> 02:21:15,400
गया है इसमें कई जगह सृष्टि को माया कहा गया है

1889
02:21:15,400 --> 02:21:19,400
अब मुझे आप यह बताइए कि उन्होंने जो कहा चलिए

1890
02:21:19,400 --> 02:21:23,480
उन्होंने बुराई भी कर दी माया बात की ठीक है तो अब हम दो बातों में से किसी

1891
02:21:23,480 --> 02:21:27,640
एक बात को किसको माने और क्यों माने यह बता दीजिए एक

1892
02:21:27,640 --> 02:21:31,640
तरफ वह मायावादी श्रीधर स्वामी की तारीफ कर रहे हैं दूसरी तरफ

1893
02:21:31,640 --> 02:21:37,080
वह

1894
02:21:37,080 --> 02:21:39,360
मायावादी

1895
02:21:39,360 --> 02:21:43,480
सबसे पहले श्रीमन चैतन्य महाप्रभु का अवतरण क्यों है इसको

1896
02:21:43,480 --> 02:21:47,840
समझने की आवश्यकता है समझ रहे हैं आप ह

1897
02:21:47,840 --> 02:21:51,840
संकीर्तन पूछ रहा हूं कि वो जिसे जगतगुरु मान रहे हैं जिसकी

1898
02:21:51,840 --> 02:21:55,920
वजह से भागवत को समझ पा रहे हैं आप उसको जगतगुरु मानते हैं कि

1899
02:21:55,920 --> 02:22:01,640
नहीं मानते हैं जगतगुरु

1900
02:22:01,640 --> 02:22:05,640
देखिए संदर्भ में कहा था किस संदर्भ में जैसे कि आप मुझे कह

1901
02:22:05,640 --> 02:22:09,880
रहे हैं जैसे कि आप मुझे कह रहे हैं कि एक श्लोक को देख कर के आप नहीं बता सकते

1902
02:22:09,880 --> 02:22:14,200
इसलिए मैं भी कहता हूं एक श्लोक को आप देख मैं आपसे पूछ रहा हूं कि उनकी दो बातों

1903
02:22:14,200 --> 02:22:18,280
में से किस एक बात को मानेंगे और क्यों माने आप से पूछ रहा हूं मैं निर्णय

1904
02:22:18,280 --> 02:22:22,440
नहीं कर रहा हूं मैं आपसे पूछ रहा हूं जगतगुरु का

1905
02:22:22,440 --> 02:22:25,760
जगतगुरु का अर्थ क्या है इस सृष्टि के गुरु

1906
02:22:25,760 --> 02:22:30,280
जगत गुरु का इस जगत गु के गुरु जगत गुरु

1907
02:22:30,280 --> 02:22:34,520
जगत के गुरु ठीक है सबसे पहली बात शंकराचार्य भारत के बाहर तो कहीं गए

1908
02:22:34,520 --> 02:22:38,520
नहीं खैर दूसरी बात ये है कि उनका जगत

1909
02:22:38,520 --> 02:22:42,720
गुरु कहने का अर्थ ये था उन्होने शास्त्र ये जो अभी आपने पंक्ति बोली

1910
02:22:42,720 --> 02:22:47,520
है वो भारत के बाहर नहीं हैय आपकी फ्रस्ट्रेशन थी लॉजिकल बात

1911
02:22:47,520 --> 02:22:51,560
आपके पास अभी अभी तक चीज हुई है वो फ्रस्ट्रेशन आप ऐसे निकालते हो

1912
02:22:51,560 --> 02:22:55,560
मैंने कहीं पर आपकी चीजों की अलना की क्या मैंने प्रभुपाद जी के बारे में

1913
02:22:55,560 --> 02:23:00,000
कुछ कहा है क्या आप कितने आक्षेप लगा चुके

1914
02:23:00,000 --> 02:23:04,040
हो अभी तक आपके केवल आक्षेप को गिरेंगे तो

1915
02:23:04,040 --> 02:23:08,160
एक अच्छी खासी रील बनेगी उस पर रील तो बनाएंगे

1916
02:23:08,160 --> 02:23:13,080
मुझे पता है उसका प्रचार भी अच्छे से करेंगे मेरी बातों को दबा करके बट खैर

1917
02:23:13,080 --> 02:23:17,520
मैं आपको यह कहना चाह रहा हूं कि इसमें इसमें गलत क्या कहा मैंने जगतगुरु

1918
02:23:17,520 --> 02:23:21,960
सृष्टि के गुने टप

1919
02:23:21,960 --> 02:23:26,960
वो बात अलग है शंकराचार्य जी तो भारत से

1920
02:23:26,960 --> 02:23:30,960
क्याय तो मेरी सोच थी

1921
02:23:30,960 --> 02:23:34,960
बतासे क्या मतलब इसका आप मुझे यह

1922
02:23:34,960 --> 02:23:37,080
बता

1923
02:23:37,080 --> 02:23:40,800
द जगतगुरु कैसे हो सकते हैं मेरी भी कन्फ्यूजन है इसलिए

1924
02:23:40,800 --> 02:23:44,200
इस पर्ट को दोबारा

1925
02:23:44,200 --> 02:23:48,240
पढा शीख रहे शास्त्र सीख रहे हैं

1926
02:23:48,240 --> 02:23:52,320
तो आप उसको गुरु स्वीकार करते हैं इसमें कोई बड़ी बात नहीं है तो

1927
02:23:52,320 --> 02:23:56,480
गुरु का अर्थ क्या होता है अभी

1928
02:23:56,480 --> 02:24:00,480
गुरु शब्द के भी कई अर्थ है परंतु गु का अर्थ है अंधकार रु का अर्थ है

1929
02:24:00,480 --> 02:24:04,480
तेज जो अंधकार से तेज की ओर कर के जाए वो गुरु है तो इसका अर्थ है कि जब हम किसी

1930
02:24:04,480 --> 02:24:09,920
को गुरु कह रहे हैं तो हम उसके सिद्धांतों को स्वीकार कर रहे हैं कि यं ही कह रहे हैं

1931
02:24:09,920 --> 02:24:13,920
गुरु इस प्रकार ऐसी बात है ना आप उसको उस उस

1932
02:24:13,920 --> 02:24:18,840
समय काल के बारे में अगर सोचेंगे तो समय काल में जो कि स्मार्त

1933
02:24:18,840 --> 02:24:23,080
है वही जो है गुरु बनते थे जिस प्रकार ब्रह्मचारी

1934
02:24:23,080 --> 02:24:29,080
गुरु सन्यासी समझ रहे आप इसलिए

1935
02:24:31,240 --> 02:24:36,720
अगर ऐसा नहीं कहा उस काल की बात कर रहा हूं उस

1936
02:24:36,720 --> 02:24:40,720
काल सबके गुरु मिलेंगे स्मार्थ गुरु नहीं

1937
02:24:40,720 --> 02:24:45,000
मिलेंगे लेकिन ज्यादातर सन्यासी जो है व उस समय पर

1938
02:24:45,000 --> 02:24:49,160
शंकर संप्रदाय से थे मायावादी थे बेसिकली मैं पूछ रहा हूं मैंने

1939
02:24:49,160 --> 02:24:53,240
आपको सन्यास के लिए नहीं कहा मैंने ये नहीं कहा कि उन्होंने शंकर संप्रदाय से सन्यास की दीक्षा

1940
02:24:53,240 --> 02:24:57,400
ली मैंने अभी ये नहीं कहा मैंने कहा वह भागवत को समझ

1941
02:24:57,400 --> 02:25:02,120
पाए हैं शंकराचार्य शंकर परंपरा के आचार्य के आधार पर

1942
02:25:02,120 --> 02:25:06,480
वह भगवान को समझ पाए हैं शंकरा शंकर परंपरा के आचार्य

1943
02:25:06,480 --> 02:25:10,720
के आधार पर अब आप ये बताइए कि आधार पर समझने का अर्थ

1944
02:25:10,720 --> 02:25:14,800
क्या होता है कि हम उनके दर्शन को उसके सिद्धांतों को भगवत दर्शन

1945
02:25:14,800 --> 02:25:18,800
को मानेंगे कि नहीं मानेंगे सबसे पहली बात

1946
02:25:18,800 --> 02:25:22,840
तो श्रीमन चैतन्य महाप्रभु स्वयं भगवान है ठीक है

1947
02:25:22,840 --> 02:25:27,040
18 में से 15 पुराण इसकी पुष्टि कर पर झूठ बोला है क्या

1948
02:25:27,040 --> 02:25:31,240
कि मैं भगवान को समझ पाया हूं क्योंकि

1949
02:25:31,240 --> 02:25:35,400
वह एक भक्त के रूप में अवतार हुए रिक धरातल परमार्थिक

1950
02:25:35,400 --> 02:25:39,640
धरातल हो गया उसको एक मत करिए व्यावहारिक धरातल पर वो एक भक्त है परमार्थिक

1951
02:25:39,640 --> 02:25:44,160
धरातल पर आपके अनुसार वो एक भगवान है ठीक

1952
02:25:44,160 --> 02:25:46,640
है आपके आपके शास्त्रों

1953
02:25:46,640 --> 02:25:50,720
के अर्थों के अनुसार परमार्थिक धरातल पर भगवान है ठीक है आपकी बात

1954
02:25:50,720 --> 02:25:55,000
मान ली मगर व्यवहारिक धरातल पर वो भक्त है और व्यवहारिक धरातल

1955
02:25:55,000 --> 02:25:59,480
पर उन्होंने ये कहा कि मैं भगवान को समझ पाया हूं तत्कालीन

1956
02:25:59,480 --> 02:26:04,440
शंकराचार्य श्रीधर स्वामी के द्वारा

1957
02:26:04,440 --> 02:26:08,600
अब यह बताइए क्या श्रीधर स्वामी का भागवत भाष्य इकन में पढ़ाया

1958
02:26:08,600 --> 02:26:10,720
जाता

1959
02:26:10,720 --> 02:26:15,040
है नहीं क्योंकि श्री चैतन्य जो कि

1960
02:26:15,040 --> 02:26:19,200
बिल्कुल उन्होंने क्या नाम है का जो वेदव्यास

1961
02:26:19,200 --> 02:26:23,200
जी की भागवत है उसका अर्थ होता है वहां पर उसको पढ़ाया

1962
02:26:23,200 --> 02:26:27,200
जाता है क्योंकि वेग श्रीधर स्वामी की

1963
02:26:27,200 --> 02:26:31,200
वेदव्यास जी की भागत वेदस भागत अथ

1964
02:26:31,200 --> 02:26:34,200
किया श्रीधर

1965
02:26:34,200 --> 02:26:38,200
स्वामी वेदव्यास जी की भागवत हैया अलग भागवत

1966
02:26:38,200 --> 02:26:42,880
नहीं श्रीधर स्वामी जी ने वेदव्यास भागवत का अर्थ किया

1967
02:26:42,880 --> 02:26:47,160
उससे समझ पाए चैतन्य महाप्रभु क्या आप उसी से समझ

1968
02:26:47,160 --> 02:26:49,560
भगवान

1969
02:26:49,560 --> 02:26:54,000
को गतम मैं आपसे पूछ रहा हूं क्या आप श्रीधर

1970
02:26:54,000 --> 02:26:58,400
स्वामी के भाष्य से भगवान को समझते हैं

1971
02:26:58,400 --> 02:27:02,720
नहीं तो फिर आप चैतन्य महाप्रभु के फॉलोवर कैसे

1972
02:27:02,720 --> 02:27:06,920
हुए तो श्री चैतन्य महाप्रभु ने यह कहीं पर भी नहीं आज्ञा दी कि आप भी इन्हीं

1973
02:27:06,920 --> 02:27:11,160
से समझिए भाई आप चैतन्य महाप्रभु को फॉलो करते हो कि नहीं फॉलो

1974
02:27:11,160 --> 02:27:15,320
फॉलो का अर्थ क्या होता है तो श्री चैतन्य महाप्रभु की टीचिंग को फॉलो

1975
02:27:15,320 --> 02:27:19,320
करते हैं परंतु शी चैतन्य प्रभु ने उसका खंडन भी किया है अपनी टीचिंग

1976
02:27:19,320 --> 02:27:23,360
का ठीक है अपनी टीचिंग का नहीं उनकी टीचिंग का मायावादी

1977
02:27:23,360 --> 02:27:27,360
किया शंकर भाष्य का खंडन भी किया उन्होने अरे भैया शंकर भास का

1978
02:27:27,360 --> 02:27:31,480
तो फिर मुझे बताओ जब उन्होंने दो बातें कर दी एक दूसरे के

1979
02:27:31,480 --> 02:27:35,800
पॉजिट तो इनमें से किसी एक बात को आपने माना किसको माना

1980
02:27:35,800 --> 02:27:39,960
और फिर क्यों माना यह बताओ

1981
02:27:39,960 --> 02:27:44,000
इस बात के लिए ना इस बात के लिए अगर मैं कहूं कि इस संदर्भ में

1982
02:27:44,000 --> 02:27:48,360
मैं इस चीज के बारे में मैंने चलिए बस बस बस ठीक

1983
02:27:48,360 --> 02:27:49,360
है

1984
02:27:49,360 --> 02:27:53,440
इतना काफी है आपने नहीं पढ़ा आप ये कुछ प्रश्नों

1985
02:27:53,440 --> 02:27:57,680
पर और जो पिछले कुछ प्रश्न उस पर और थोड़ा सा क्लियर तरीके से

1986
02:27:57,680 --> 02:28:01,720
जिससे कि कुछ हम निष्कर्ष निकाल पाए ऐसे आप दोबारा आइएगा

1987
02:28:01,720 --> 02:28:05,840
और अभी बहुत सारी और भी क्वेरी हो सकती है पर दो ढाई

1988
02:28:05,840 --> 02:28:09,880
घंटे हो चुके हैं तो आप तैयारी करिए फिर दोबारा किसी दिन मिलेंगे ठीक

1989
02:28:09,880 --> 02:28:14,120
है बात करके आपसे अच्छा ल जाने से पहले थोड़ा

1990
02:28:14,120 --> 02:28:18,840
क मर्यादित हो जाते हैं अपनी बातो को रखने आचार

1991
02:28:18,840 --> 02:28:23,120
होते टिप करते वो कर कर टिप्पणी का अर्थ टिप्पणी

1992
02:28:23,120 --> 02:28:27,320
नहीं की मैंने मैंने जैसे आप मे से क्वेश्चन कर रहे कहा शंकराचार्य

1993
02:28:27,320 --> 02:28:31,920
कभी भी विदेश नहीं गए बाहर नहीं गए इसका

1994
02:28:31,920 --> 02:28:35,960
हमारे था उससे कोई मतलब नहीं था केवल आपने हीन

1995
02:28:35,960 --> 02:28:40,000
भावना प्रकट करने के लिए इस बात को कहा हीन

1996
02:28:40,000 --> 02:28:44,080
भावना सामने वाले व्यक्ति को बुरा लगे मेरे भाई ऐसा

1997
02:28:44,080 --> 02:28:49,000
है हीन भावना नहीं है एक लॉजिकल चीज है एक लॉजिकल

1998
02:28:49,000 --> 02:28:53,000
त है आप कह रहे हैं कि जगत गुरु जगत गुरु

1999
02:28:53,000 --> 02:28:57,120
सम जगत गु क्या भगवान श्री कृष्ण कभी एशिया

2000
02:28:57,120 --> 02:29:01,440
से बाहर गए थे वह तो ब्रह्मांड के पति है भैया

2001
02:29:01,440 --> 02:29:04,520
मैं कह रहा हूं व्यवहारिक धरातल पर कभी वह एशिया

2002
02:29:04,520 --> 02:29:09,800
से बाहर गए थे लीला रूप में कभी एशिया से बाहर गए

2003
02:29:09,800 --> 02:29:13,920
थे नहीं परं रिक धरातल सबके भगवान

2004
02:29:13,920 --> 02:29:18,360
नहीं है केवल परमार्थिक धरातल पर ही है आध्यात्मिक धरातल प है

2005
02:29:18,360 --> 02:29:22,760
आप मेरे को एक चीज ये समझनी है इसके बारे में पढ़ूंगा ये धरातल

2006
02:29:22,760 --> 02:29:26,960
कितने होते हैं राल कितने होते हैं कितने

2007
02:29:26,960 --> 02:29:31,000
प्रकार के होते पढ़ेगा अगली बार और तैयारी के साथ आइएगा

2008
02:29:31,000 --> 02:29:35,160
चलिए फिर खत्म करें श्री राम जय राम जय जय राम कर ले थोड़ा

2009
02:29:35,160 --> 02:29:39,480
कर लेते हैं श्री राम जय राम

2010
02:29:39,480 --> 02:29:43,680
जय जय राम श्री राम जय राम

2011
02:29:43,680 --> 02:29:47,960
जय जय राम श्री राम जय राम जय

2012
02:29:47,960 --> 02:29:52,920
जय

2013
02:29:52,920 --> 02:29:58,320
राम श्री राम जय राम जय जय

2014
02:29:58,320 --> 02:30:02,600
राम श्री राम जय श्री

2015
02:30:02,600 --> 02:30:07,000
राम जय राम जय जय

2016
02:30:07,000 --> 02:30:11,440
राम राम जय राम जय जय

2017
02:30:11,440 --> 02:30:15,440
राम श्री राम जय राम जय जय

2018
02:30:15,440 --> 02:30:18,320
राम

2019
02:30:18,320 --> 02:30:22,480
श्री राम जय राम जय जय राम ठीक है फिर

2020
02:30:22,480 --> 02:30:26,520
फिर कभी आपसे भेंट होती है सभी को जय श्री राम और

2021
02:30:26,520 --> 02:30:31,640
हा मैं लखनऊ आता रहता हूं जब आऊंगा तो मिलूंगा आपसे आप मिलिए अवश्य

2022
02:30:31,640 --> 02:30:35,880
मिलिए साथ बैठ कर के फिर बिल्कुल बिल्कुल खाएंगे पिएंगे

2023
02:30:35,880 --> 02:30:39,400
प्रसाद भगवान का बिल्कुल

2024
02:30:39,400 --> 02:30:44,200
ठीक है जय सियाराम जय श्री राम

2025
02:30:44,200 --> 02:30:49,000
कैसे बंद होती

2026
02:30:49,000 --> 02:30:53,000
क
