1
00:00:03,120 --> 00:00:09,120
तो आप सभी का स्वागत

2
00:00:09,760 --> 00:00:14,560
है आज एक रैंडम ये ऑर्गेनाइज हुई है लाइव

3
00:00:14,560 --> 00:00:19,240
स्ट्रीम इ प हमारा एक अकाउंट है एक

4
00:00:19,240 --> 00:00:23,440
महानुभाव है स्कन से तो

5
00:00:23,440 --> 00:00:27,480
उनसे मैंने सुबह एक

6
00:00:27,480 --> 00:00:31,520
पोस्ट डाली थी रील डाली थी ा पर जिसमें मैंने ये कहा था

7
00:00:31,520 --> 00:00:35,760
कि अगर हम इस कन की शिक्षा को फॉलो करते तो उस शिक्षा के द्वारा जो

8
00:00:35,760 --> 00:00:40,080
स्पित होने वाला जो ईश्वर है यानी कि भगवान श्री कृष्ण वो

9
00:00:40,080 --> 00:00:46,080
पूर्ण नहीं है बाद है अपूर्ण है

10
00:00:58,920 --> 00:01:04,920
तो

11
00:01:15,440 --> 00:01:19,600
उनसे काफी देर से बातचीत हो रही थी सुबह से तो वो भी अपनी तरफ से कुछ चीजें प्रस्तुत

12
00:01:19,600 --> 00:01:23,680
कर रहे थे होता क्या है कि जब मैसेजिंग के थ्रू या चैट के थ्रू

13
00:01:23,680 --> 00:01:27,960
सारी बातें सब अपने सारे विचार प्रकट कर पाने में काफी

14
00:01:27,960 --> 00:01:32,040
दिक्कत आती है तो तो इसीलिए एक शॉर्ट नोट य होता है

15
00:01:32,040 --> 00:01:36,280
कि भाई अगर आपको बहुत ज्यादा बिलीव है आपको फेथ

16
00:01:36,280 --> 00:01:40,400
है अपनी चीजों पर तो आप एक बार सामने आ जाए तो कई बार क्या होता है कि हम कुछ पूछना चाह

17
00:01:40,400 --> 00:01:44,560
रहे हैं किसी प्रश्न का जवाब हम जानना चाह रहे मगर उस प्रश्न पर बात

18
00:01:44,560 --> 00:01:48,560
ना हो कर के बारबार उससे भिन किसी अलग विषय पर बात चली जाती

19
00:01:48,560 --> 00:01:52,840
है यह भी होता है हम चैट के जरिए टाइप कर करके पूछते

20
00:01:52,840 --> 00:01:57,800
हैं और उसमें कई बार य भी होता है कि

21
00:01:57,800 --> 00:02:01,920
कोई व्यक्ति जो अपनी चीजों

22
00:02:01,920 --> 00:02:06,000
को बे बुनियादी तरीके से निराधार तरीके से अगर रखना चाहता है तो वहां

23
00:02:06,000 --> 00:02:10,080
पर बहुत अमर्यादित हो कर के भी रख सकता है हालांकि ये जो सज्जन है इन्होंने

24
00:02:10,080 --> 00:02:14,440
कहीं पर भी अमर्यादित व्यवहार नहीं किया हां एक दो बार इन्होंने ऐसी

25
00:02:14,440 --> 00:02:18,560
कुछ जय सीताराम सिद्धार्थ जी

26
00:02:18,560 --> 00:02:22,760
एक दो बार इन्होंने ऐसी कुछ मान्यताएं मुझ पर मण जरूर

27
00:02:22,760 --> 00:02:26,840
दी जैसे कि मान लीजिए अगर मैं कोई बात रख रहा हूं तो आप ऐसा

28
00:02:26,840 --> 00:02:31,520
करना चाहते हो आप व्यू कमाना चाहते हो आप फेमस होना चाहते हो तो

29
00:02:31,520 --> 00:02:36,040
इस तरह की चीजें वहां पर हुई मगर

30
00:02:36,040 --> 00:02:40,800
हां यह कहेंगे कि कोई भी अंग लैंग्वेज जो अशली शब्द होते हैं जिसके

31
00:02:40,800 --> 00:02:45,320
ऐसे भी कर देते लोग सब अपनी फेक आईडी बनाकर रहते हैं

32
00:02:45,320 --> 00:02:49,480
ऐसा इन्होने कुछ नहीं किया तो उनके फाइनली जब मैं काफी देर से हुआ

33
00:02:49,480 --> 00:02:53,560
तो मैंने बस यही पूछा कि भाई जिस प्रकार दूध से

34
00:02:53,560 --> 00:02:57,600
दही बन सकता है उसी प्रकार दही से दूध नहीं बन

35
00:02:57,600 --> 00:03:02,040
सकता तो इस प्रकार जो कृष्ण है

36
00:03:02,040 --> 00:03:06,760
आप कहते हैं कि इसी प्रकार कृष्ण तो शिव बन सकते हैं मगर शिव कृष्ण नहीं बन

37
00:03:06,760 --> 00:03:10,840
सकते कुशल गोस्वामी जी हा यही है

38
00:03:10,840 --> 00:03:14,960
जो लाइव आना चाहते थे मगर कुशल जी आपने अपने फेस

39
00:03:14,960 --> 00:03:19,000
को ऑफ कर रखा है आप प्लीज अपने

40
00:03:19,000 --> 00:03:22,800
फेस के साथ

41
00:03:22,800 --> 00:03:26,920
आइए क्योंकि हम चर्चा

42
00:03:26,920 --> 00:03:32,920
तभी कर पाएंगे जब आप अपने फेस के साथ आए फेस रिवील

43
00:03:35,960 --> 00:03:40,760
करें जी कुशल जी कैसे हैं जय श्री राम

44
00:03:40,760 --> 00:03:44,760
जय श्री राम हरे कृष्णा जी क्या बात है

45
00:03:44,760 --> 00:03:48,800
आपका स्वागत है लाइव स्ट्रीम में आपका भी

46
00:03:48,800 --> 00:03:54,800
स्वागत है एक

47
00:03:58,680 --> 00:04:04,680
मिनट

48
00:04:06,200 --> 00:04:10,280
जी कुशल जी मैं यह कह रहा था कि जो सुबह आज मैंने री

49
00:04:10,280 --> 00:04:14,800
ाली थी उसम यह था की सीधे हम लोग विषय परही आते हैं और

50
00:04:14,800 --> 00:04:18,840
औपचारिकता तो होती रहेगी सुब मैंने ाली थी

51
00:04:18,840 --> 00:04:22,960
उसम मैंने यह कहा था कि भाई जिस प्रकार दूध से दही बन सकता

52
00:04:22,960 --> 00:04:27,760
है मगर दही से दूध नहीं बन सकता उसी प्रकार कृष्ण तो शिव बन सकते हैं

53
00:04:27,760 --> 00:04:28,680
मगर शिव बनने

54
00:04:28,680 --> 00:04:33,280
के बाद वो वापस जो मूल उनकी फॉर्म थी उसम वापस नहीं आ सकते हैं

55
00:04:33,280 --> 00:04:37,280
तो यहां पर आपको नहीं लगता कि कृष्ण बाधित हो रहे

56
00:04:37,280 --> 00:04:41,480
हैं एक्चुअली क्या है मैंने आपको समझाने का प्रयास किया दो तीन

57
00:04:41,480 --> 00:04:45,480
बार लेकिन आप समझ नहीं पा रहे जब आप बात करते

58
00:04:45,480 --> 00:04:49,840
हैं कृषण से शिव बनते हैं तो आप बनने की प्रक्रिया क्या समझते

59
00:04:49,840 --> 00:04:53,840
हैं आप बताइए क्या है मैं तो समझना ही चाहता हूं मैंने उस

60
00:04:53,840 --> 00:04:57,960
रील में कहा भी है मैंने उस रील में यह कहा था कि मुझे आप सर्व शक्तिमान

61
00:04:57,960 --> 00:05:02,520
ईश्वर दे दीजिए मुझे परम स्वतंत्र मोक्ष दे दीजिए मैंने यही कहा था

62
00:05:02,520 --> 00:05:06,520
आप मुझे बता दीजिए कैसे बनते है मैं इसलिए पूछना

63
00:05:06,520 --> 00:05:10,840
चाह रहा हूं क्योंकि तीन चार बार समझाने के बाद भी आप समझ

64
00:05:10,840 --> 00:05:15,720
नहीं आ रहा समझ नहीं आ रहा नहीं आपने हा या ना में कोई उत्तर नहीं दिया आपने

65
00:05:15,720 --> 00:05:19,760
य नहीं बताया कि क्या शिव बनने के बाद वापस कृष्ण

66
00:05:19,760 --> 00:05:24,520
बन सकते हैं या नहीं दरअसल क्या मैं समझाता हूं आपको

67
00:05:24,520 --> 00:05:28,920
जी आपने ये तो पढ़ा होगा

68
00:05:28,920 --> 00:05:33,200
जब आप तार या कोई स्वरूप रखते हैं वो दो तरह के स्वरूप होते है

69
00:05:33,200 --> 00:05:37,600
एक होता है स्व अंश एक होता है विभान अंश इतना

70
00:05:37,600 --> 00:05:40,360
तो पता होगा

71
00:05:40,360 --> 00:05:43,840
तो आप बताते जाइए आपको मैं अपनी चीज रखूंगा

72
00:05:43,840 --> 00:05:48,720
आप बताते जाइए अच्छा स्वयं अंश जितने भी होते हैं

73
00:05:48,720 --> 00:05:52,800
वो चाहे ब्रह्मा हो विष्णु हो या शंकर हो वो स्वयं

74
00:05:52,800 --> 00:05:56,920
अंश होते वो भगवान भगवान तुल भी होते

75
00:05:56,920 --> 00:06:01,120
लेकिन जब शंभू भगवान से प्रकट होते

76
00:06:01,120 --> 00:06:05,360
हैं तो प्रकट होने का अर्थ यह नहीं होता कि श्री

77
00:06:05,360 --> 00:06:09,520
कृष्ण अपने वेष भूषा बदल के वो बने नहीं नहीं कृष्ण

78
00:06:09,520 --> 00:06:13,800
का अस्तित्व रहा उसके बाद शिवजी का स्वरूप उन्होंने

79
00:06:13,800 --> 00:06:17,920
धारण किया दूसरा यानी कि अगर शिव को कृष्ण बनना होगा

80
00:06:17,920 --> 00:06:22,440
तो शिव कृष्ण में समा जाएंगे या

81
00:06:22,440 --> 00:06:27,120
फिर हेलो जी मैं सुन रहा हूं हा सुन रहे

82
00:06:27,120 --> 00:06:31,240
हा या फिर अगर आप चाहते हैं नहीं उसमें समाना नहीं है शिव

83
00:06:31,240 --> 00:06:35,640
जो है उनके अस्तित्व को कृष्ण बना है तो ऐसा स्वरूप वो बना सकते हैं क्योंकि

84
00:06:35,640 --> 00:06:39,720
महाराष्ट्र में हम पढ़ते हैं और भी लीला में पढ़ते कि कृष्ण के एकदम

85
00:06:39,720 --> 00:06:43,760
सदृश उन्ही का स्वरूप उन्होने अपना प्रदान किया उधव

86
00:06:43,760 --> 00:06:49,760
महा भागवत में भी आया है उद्धव को जो स्वरूप प्रदान था वो स्वयं कृष्ण

87
00:06:50,200 --> 00:06:54,240
जैसे वो अच्छा आप जो श्लोक की बात कर

88
00:06:54,240 --> 00:06:58,240
रहे या कि आप ये कह रहे कि भगवान श्री कृष्ण

89
00:06:58,240 --> 00:06:58,920
अल्प

90
00:06:58,920 --> 00:07:02,920
जो अपना उनका एक अंश है वो शिव का रूप धारण करता है पूरे के पूरे श्री

91
00:07:02,920 --> 00:07:07,000
कृष्ण नहीं करते शिव का रूप धारण नहीं अगर सुनि

92
00:07:07,000 --> 00:07:11,240
मैं बताता हूं जैसे कि 5200 वर्ष पहले भगवान कृष्ण

93
00:07:11,240 --> 00:07:15,400
का पूर्ण अवतार अवतरित हुए थे तो उसके बाद ये नहीं हो गया कि गोलोक

94
00:07:15,400 --> 00:07:19,400
धाम खाली हो गया था नहीं ऐसा नहीं होता उनका पूर्ण रूप सदा एक

95
00:07:19,400 --> 00:07:23,760
बना रहता है उसके बाद वो अवतार भी लेते हैं यानी कि उन्होंने जब शंभू

96
00:07:23,760 --> 00:07:27,920
मैं ये मैं ये नहीं कह रहा हूं मैं ये कह रहा हूं कि एक तरीके

97
00:07:27,920 --> 00:07:32,160
से वो पूर्ण पूर्ण रूप पूर्ण रूप आप यह कह रहे हैं कि शिव जब

98
00:07:32,160 --> 00:07:36,240
वो बने तो आपके हिसाब से आपके अनुसार वो पूर्ण पूर्ण

99
00:07:36,240 --> 00:07:40,600
शक्तियों के साथ शिव बने या फिर उन्होंने अपने कुछ

100
00:07:40,600 --> 00:07:44,960
कुछ शक्तियों को शिव रूप दिया हा मैं वही बताना चाह रहा हूं

101
00:07:44,960 --> 00:07:49,120
जी बनने का मतलब होता है प्रकट करना जो शंभु रूप प्रकट हुआ वो भगवान कृष्ण

102
00:07:49,120 --> 00:07:53,200
से हुआ और जी भगवान कृष्ण में ही समा जाएगा आपकी भाषा में कह

103
00:07:53,200 --> 00:07:57,320
तो वो दोबारा शिव बन जाएंगे और मेरे मेरी भाषा में वो कृष्ण

104
00:07:57,320 --> 00:08:01,560
समा जाएंगे दूसरी बात आपने बोला कि सारी शक्तिया प्रकट नहीं होते सारे गुण प्रकट

105
00:08:01,560 --> 00:08:05,640
नहीं होते तो शास्त्र में ऐसा कोई भी स्वरूप नहीं

106
00:08:05,640 --> 00:08:09,640
है जिसमें पूर्ण शक्ति प्रकट की हो भगवान कृष्ण के

107
00:08:09,640 --> 00:08:13,680
अतिरिक्त जैसे कि अब आप कहेंगे ये तो मैं एकदम गलत बात क रहा

108
00:08:13,680 --> 00:08:14,600
हूं भवान

109
00:08:14,600 --> 00:08:18,720
देखिए ये क्या है ना विषयात हो रहा है अगर हमारा जो टॉपिक है वो

110
00:08:18,720 --> 00:08:22,760
यह है कि वो जब वो शिव ब जो वहां पर दूध

111
00:08:22,760 --> 00:08:27,080
दही का उदाहरण दिया गया है वो उनके अल्पा के लिए दिया गया है या पूर्णा

112
00:08:27,080 --> 00:08:31,360
अंश के लिए दिया गया है विभिन लिए स्वस के लिए

113
00:08:31,360 --> 00:08:35,600
नहीं आप समझ नहीं रहे बात को आप पूरा लोक ध्यान से पढ़ेंगे उसमें

114
00:08:35,600 --> 00:08:39,880
क्लियर लिखा है जैसे ई और दूध होता है दोनों में भेद

115
00:08:39,880 --> 00:08:44,040
नहीं है दोनों में भेद नहीं है फिर भी वो अलग है

116
00:08:44,040 --> 00:08:48,520
इसलिए च महाप सुनि सम

117
00:08:48,520 --> 00:08:52,800
इसलिए चैत महाप्रभु ने सिद्धांत बताया शंभु का

118
00:08:52,800 --> 00:08:56,920
व अच बताया क्यों बताया उन्होने

119
00:08:56,920 --> 00:09:01,360
अचिंत भदा भेद जो बताया है ना पहली बात तो अचिंत वेदा भद का जो उपयोग

120
00:09:01,360 --> 00:09:05,600
किया जाता है स्कोन की तरफ से वो फिर विषयात हो जाएगा वही वाली बात है नहीं

121
00:09:05,600 --> 00:09:09,800
नहीं वो मैं समझ रहा हूं वो अचिंत वेदा भद का जो उपयोग किया जाता है स्कोन

122
00:09:09,800 --> 00:09:13,800
की तरफ से वो दर्शन के लिए किया जाता है ना कि हरि हर के भेद के लिए मगर जहां पर

123
00:09:13,800 --> 00:09:17,960
बात पड़ती है व हरि हर के भेद के लिए भी उपयोग हो जाता है अब अगर मूल

124
00:09:17,960 --> 00:09:21,960
तत्व के साथ देखा जाए तो अचत वेदा भेद नाम का उनका दर्शन है इस

125
00:09:21,960 --> 00:09:26,400
बारे में कोई प्रमाणिक सिद्धांत है ही नहीं क्योंकि उनके आठ ही श्लोक प्राप्त है हम

126
00:09:26,400 --> 00:09:29,840
हा अब आते अब आते है इस लाइन तो नहीं इस लाइन

127
00:09:29,840 --> 00:09:33,960
प मत आइए आप पहले वो क्लियर करिए कि दूध जिस प्रकार दूध से दही

128
00:09:33,960 --> 00:09:38,040
बन जाता है पर दही से दूध नहीं तो उसी प्रकार कृष्ण तो शिव बन

129
00:09:38,040 --> 00:09:42,280
सकते हैं पर शिव बने हुए कृष्ण वापस कृष्ण नहीं बन सकते तो ये जो ईश्वर

130
00:09:42,280 --> 00:09:46,360
है वो बाधित हुआ कि नहीं हुआ नहीं देखिए आप पहली लाइन पहले क्लियर करेंगे उसके

131
00:09:46,360 --> 00:09:50,440
बाद दूसरी लाइन प आएंगे पहली लाइन क्या है पहली लाइन ये है कृष्ण से शंभू

132
00:09:50,440 --> 00:09:54,720
प्रकट होते हैं प्रकट होना और बनना दूसरी चीज है जब

133
00:09:54,720 --> 00:09:58,840
जो चीज जिसे प्रकट होगी अंत में उसी में लय हो जाएगी उसी में सम जाएगी

134
00:09:58,840 --> 00:10:03,040
तो तो आप किस चीज में किस बेस पर लेकर बोल रहे कि शिव जी को कृष्ण ही बनाना

135
00:10:03,040 --> 00:10:07,040
अगर शिव जी कृष्ण भी बनेंगे तो बनने में कोई वो नहीं है लेकिन उनका मूल

136
00:10:07,040 --> 00:10:10,440
सूप तो रहेगा जिससे शिवजी प्रकट

137
00:10:10,440 --> 00:10:14,480
हुए मतलब आप यह कहना चाहते हैं कि अगर उनका अल्पा अलग होता

138
00:10:14,480 --> 00:10:18,480
है एक तरीके से अल्पा विश

139
00:10:18,480 --> 00:10:23,080
और स्वांश में इस फरक जानि पले विनाश क्या

140
00:10:23,080 --> 00:10:27,120
है बता स्वयं अंश होता है जिसकी

141
00:10:27,120 --> 00:10:31,200
सारी शक्ति उनके स्वरूप में हो लेकिन प्रकट ना हो प्रकट व

142
00:10:31,200 --> 00:10:35,240
उतनी होती है जितनी उनके कार्य के लिए जरूरत है जैसे

143
00:10:35,240 --> 00:10:39,280
कि हा जैसे की राम अवतार हुए 12 गुण की आवश्यकता थी

144
00:10:39,280 --> 00:10:43,360
12 गुण हुए ये भी विष है ये भी चैलेंजेबल है जो आप 12

145
00:10:43,360 --> 00:10:45,200
गुण वाली बात बता रहे

146
00:10:45,200 --> 00:10:49,440
र चलिए आप अपनी बात बोलिए नहीं नहीं ये तो तुलसीदास

147
00:10:49,440 --> 00:10:53,440
जी ने खुद स्वीकार किया और उन्होंने बोला 12 12 गुण प्रकट हुए उतने ही

148
00:10:53,440 --> 00:10:57,640
मेरे काफी है और होना भी चाहिए इसमें भेदभाव नहीं होना चाहिए क्योंकि भगवान राम

149
00:10:57,640 --> 00:11:02,480
में भी 16 गुण पूरे थे लेकिन जरूरत के मुताबिक जितने प्रकट होने चाहिए उन्होने

150
00:11:02,480 --> 00:11:06,480
अच्छा य तो दूसरा टॉपिक है हा तो आप वो श्लोक पढ़ेंगे उसम

151
00:11:06,480 --> 00:11:10,520
क्लियर लिखा है दोनों में भेद नहीं है लेकिन तत्व रूप से उन्होंने बताया

152
00:11:10,520 --> 00:11:15,480
कि कृष्ण से संभू प्रकट होते हैं और फिर आगे की रचना

153
00:11:15,480 --> 00:11:20,120
होती नहीं वहां तो जो डायलॉग है जो आपके जोन

154
00:11:20,120 --> 00:11:24,120
के जो प्रतिनिधि डायलॉग देते हैं वो सीधे सधे कहते जिस प्रकार दूध से दही बन सकता है पर

155
00:11:24,120 --> 00:11:28,160
दही से दूध नहीं उसी प्रकार कृष्ण तो शिव बन सकते हैं पर शिव कृष्ण नहीं बन

156
00:11:28,160 --> 00:11:32,440
सकते नहीं नहीं वो एक्चुअली लोगों को समझाने के लिए है

157
00:11:32,440 --> 00:11:37,080
जब मतलब वो बात ठीक नहीं है नहीं क्यों ठीक नहीं है

158
00:11:37,080 --> 00:11:41,160
मैंने आपका वो लेक्चर भी देखा था प आपने उसम भी यही ऐसे बोला था

159
00:11:41,160 --> 00:11:45,200
यह बात ठीक नहीं है बिल्कुल ठीक है अ जिसको समझना है वो

160
00:11:45,200 --> 00:11:49,320
स सही तरीके से समझ सकता है मेरे ख्याल से जो कमेंट मेरे पढ़े होंगे लोगों ने समझा

161
00:11:49,320 --> 00:11:53,480
भी होगा मैं क्या कहना चाह रहा हूं मैं ये कहना चाह रहा हूं कि और ये नहीं

162
00:11:53,480 --> 00:11:57,600
देखिए स्कोन के सिद्धांत को आप गलत राना चाहते हैं जबक वैष्णव सिद्धांत में हर जगह यही

163
00:11:57,600 --> 00:12:00,200
मान्य है वो देखिए वो तो

164
00:12:00,200 --> 00:12:04,480
फिर अगला विषय हो जाएगा मेरे पास भी ग्रंथ

165
00:12:04,480 --> 00:12:08,640
रखा हुआ है जो रामानुजाचार्य परंपरा के हैं श्री मधवा चार्य

166
00:12:08,640 --> 00:12:12,840
जी उनका ग्रंथ रखा है और जो इसन जो सिद्धांत दे रहा है उसका पूरा

167
00:12:12,840 --> 00:12:17,000
पूरा खंडन है उसम तो अब कन के हिसाब से प्रमाणिक

168
00:12:17,000 --> 00:12:21,080
है रामर तो र संप्रदाय आप समझ

169
00:12:21,080 --> 00:12:25,080
नहीं रहे तत्विक सिद्धांत एक होता है

170
00:12:25,080 --> 00:12:29,080
तत्विक सिद्धांत वैष्णव का एक हैने मायावा

171
00:12:29,080 --> 00:12:33,480
श्लोक को स्वीकार किया है पदम पुराण के

172
00:12:33,480 --> 00:12:37,520
हा इसको ने स्वीकार किया है कि नहीं किया है पदम

173
00:12:37,520 --> 00:12:41,920
पुराण का जो श्लोक है

174
00:12:41,920 --> 00:12:45,960
मायावादी नहीं करते मैं नहीं अद्वैत

175
00:12:45,960 --> 00:12:50,000
की बात नहीं कर रहा हूं मैं पूछ रहा हूं इस कन ने मायावादी किया

176
00:12:50,000 --> 00:12:54,080
है या नहीं बिल्कुल किया है ब हा तो राम चार परंपरा

177
00:12:54,080 --> 00:12:58,800
तो कह रही है कि नहीं भाई वो मूर्ख है जो उसको स्वीकार करते हैं वही

178
00:12:58,800 --> 00:13:02,880
प्रमाणिक है वही वही मैं समझाना चाह रहा हूं जी

179
00:13:02,880 --> 00:13:06,960
तक जो सिद्धांत है वो सबसे पहले ये माना जाता है कि विष्णु राम या

180
00:13:06,960 --> 00:13:11,600
कृष्ण को सुप्रीम मानना बाकियों को उनके अवतार या स्वांश मानना

181
00:13:11,600 --> 00:13:15,600
त सिद्धांत होता है बाकी आगे जाके पद्धति में कितने बदलाव होते हैं

182
00:13:15,600 --> 00:13:19,760
वो हर जगह होते रहेंगे जैसे की आपके गद्दी धारी चार शंकर

183
00:13:19,760 --> 00:13:23,800
चार सबके थोड़े थोड़े मतभेद है अलग नहीं वो तो व्यावहारिक मतभेद है ना

184
00:13:23,800 --> 00:13:28,880
परमार्थिक रूप से मतभेद थोड़ी आपको मैं उसम दिखा दूंगा

185
00:13:28,880 --> 00:13:33,040
सिद्धांति मतभेद दिखा दूंगा और बताइए सिद्धांति मतभेद आप मुझे

186
00:13:33,040 --> 00:13:37,080
दिखाइए मैं बिल्कुल दिखाऊंगा फिलहाल फिलहाल फिलहाल हम लोग

187
00:13:37,080 --> 00:13:41,600
फिर विषय से हट जाते हैं आप मुझे ये बताइए कि

188
00:13:41,600 --> 00:13:45,760
एक एक बिल्कुल सरल तरीके से कि

189
00:13:45,760 --> 00:13:50,040
जिस प्रकार दूध से दही बन सकता है पर दही से दूध नहीं बन सकता तो

190
00:13:50,040 --> 00:13:54,200
शिव जो जो कृष्ण है विभिन्ना में जब वो शिव बन रहे हैं तो अपनी

191
00:13:54,200 --> 00:13:57,040
पूरी शक्तियों के साथ बन रहे हैं या पूरी शक्तियों

192
00:13:57,040 --> 00:14:01,400
के साथ नहीं बन रहे हैं कैसे बन रहे हैं देखिए और क्या वो वापस

193
00:14:01,400 --> 00:14:05,600
अपने अपने मूल फॉम में आ सकते हैं वहां से कि नहीं आ सकते हैं मैं समझ

194
00:14:05,600 --> 00:14:09,640
रहा हूं समझ रहा हूं जी आप सबसे पहले यह

195
00:14:09,640 --> 00:14:14,280
जो श्लोक है दूध और दही का यह भौतिक प्राणियों के लिए है क्योंकि

196
00:14:14,280 --> 00:14:18,840
ये एक जो हमने कल्पना द है दूध और की ये

197
00:14:18,840 --> 00:14:23,280
एक भौतिक लोगों समझाने के लिए अब

198
00:14:23,280 --> 00:14:27,320
बात हो रही है मतलब आपका कहने का मतलब है कि ये व्यवहारिकता के लिए है

199
00:14:27,320 --> 00:14:31,960
परमार्थ के लिए नहीं है नहीं दे बात कर

200
00:14:31,960 --> 00:14:36,040
ये लोगों को समझाने के लिए आप जो क रहे भौतिक

201
00:14:36,040 --> 00:14:40,160
उसको व्यवहारवाद कहते

202
00:14:40,160 --> 00:14:44,360
हैं भ व्यवहारवाद नहीं होता माया माया माया के अंदर

203
00:14:44,360 --> 00:14:48,520
जो भी चीज है व भौतिकवाद हमारी नजर में व उसी

204
00:14:48,520 --> 00:14:52,840
को व्यवहारवाद भी कहते हैं ववा वरवा तो सबका अलग है

205
00:14:52,840 --> 00:14:56,960
माया के अंदर एक ही नियम होता है सब माया के अंदर है फिर विष

206
00:14:56,960 --> 00:15:01,120
हो रहा है आप उस द वाले हा मैं दूध दही वाले प

207
00:15:01,120 --> 00:15:05,160
दूध दही वाला जो एग्जांपल दिया गया वो तो दही दृष्टि से

208
00:15:05,160 --> 00:15:09,160
दिखाने के लिए दिया गया लेकिन जो मेन सिद्धांत है शंभू जब कृष्ण से प्रकट

209
00:15:09,160 --> 00:15:13,200
होते हैं उसी में ले होंगे जब उसम ल होंगे तो आप उनको शिव स्वरूप

210
00:15:13,200 --> 00:15:17,480
कृष्ण स्वरूप मान लीजिए आप य बताइए चलिए मैं इसको ऐसे ले लेता हूं

211
00:15:17,480 --> 00:15:21,640
जब वो शंभू कृष्ण से प्रकट हो रहे हैं तो शंभू में उतनी पावर

212
00:15:21,640 --> 00:15:26,160
नहीं है जितनी पावर श्री कृष्णन

213
00:15:26,160 --> 00:15:30,280
का भी गचार का भी लेचर नहीं है अच्छे से तो हमेशा ये

214
00:15:30,280 --> 00:15:34,400
बोलते हैं कि उनमें पूर्ण शक्ति है जब जब स्वांश जो होते हैं उनमें

215
00:15:34,400 --> 00:15:38,480
पूर्ण शक्ति होती है लेकिन जरूरत के मुताबिक प्रकट होती है जो शंभू अवतार हुआ

216
00:15:38,480 --> 00:15:42,520
वो संघार के लिए हुआ और आगे सृष्टि के लिए हुआ तो उतनी शक्ति

217
00:15:42,520 --> 00:15:47,280
उनमें यूज होगी यानी कि ये जो ये जो लाइन है कि वो

218
00:15:47,280 --> 00:15:52,000
वो बनते हैं ये परमार्थ रूप से देखने के लिए मनुष्य के पर्सपेक्टिव से नहीं है

219
00:15:52,000 --> 00:15:55,720
बिल्कुल बिल्कुल मनुष्य के पर्सपेक्टिव से नहीं है ना ये लाइन

220
00:15:55,720 --> 00:15:59,760
मनुष्य पर्सपेक्टिव से आप देखेंगे तो दूध दही तक ही रह जाएंगे ना हां तो

221
00:15:59,760 --> 00:16:03,880
मतलब ये जो ये जो क्रिया दिखाई गई है परमार्थिक क्रिया है पारलौकिक क्रिया

222
00:16:03,880 --> 00:16:07,920
है बिल्कुल बिल्कुल तो पारलक अब बात ये आ जाती है कि यहां

223
00:16:07,920 --> 00:16:12,320
पर आपका वो जो सिद्धांत है कि दुनिया माया नहीं है सत्य है वो कट जाता

224
00:16:12,320 --> 00:16:16,360
है क्या कट जाता है जब मतलब कि आप यह कह

225
00:16:16,360 --> 00:16:20,440
रहे हैं कि कृष्ण के दो रूप है जो वहा हां वो जब आए थे धरती पर तो एज

226
00:16:20,440 --> 00:16:24,800
इट इज आए थे ये आपका कहना है जिस रूप में वो वहां रहते हैं उसी रूप में यहां आए थे

227
00:16:24,800 --> 00:16:28,840
अच्छा पता नहीं मैं क्या समझा द आप कंटेस्ट कहां ले जाते मैंने तो ये कहा

228
00:16:28,840 --> 00:16:33,680
ही नहीं कृष्ण के दो स्वरूप है य आते तो माया के भीन हो जाते

229
00:16:33,680 --> 00:16:37,880
तो आप ये जो क्रिया हो रही है परमार्थिक क्रिया है ना नहीं मैंने ये

230
00:16:37,880 --> 00:16:41,880
लोगों को समझ में ना लोगों के व्यवहार का विषय नहीं है ना ये क्रिया य व्यवहार का विषय

231
00:16:41,880 --> 00:16:45,960
है नहीं मैं बताना चाह रहा हूं जैसे कि ईश्वर ईश्वर की

232
00:16:45,960 --> 00:16:50,720
आप कोई भी कल्पना कर ले हम भौतिक से बने हैं हम उतना ही सोचेंगे

233
00:16:50,720 --> 00:16:54,840
तो दही और दूध का एमल तो बाद की बात है ये ये वो

234
00:16:54,840 --> 00:16:59,120
वाली बातें खत्म करने वाली मैं ये पूछ रहा हूं ये जो क्रिया है है

235
00:16:59,120 --> 00:17:03,200
यह मनुष्य के व्यवहार का विषय है या फिर परमार्थ का जीव के

236
00:17:03,200 --> 00:17:07,280
परमार्थ का मनुष्य को समझाने के मतलब मनुष्य

237
00:17:07,280 --> 00:17:10,960
को समझ में आने वाली चीज है पारलौकिक चीज है यह तभी

238
00:17:10,960 --> 00:17:15,800
पता चलेगी जब वो जीव बन के वहां पहुंचेगा लोक में परलोक में य

239
00:17:15,800 --> 00:17:20,120
जीव माया को नहीं समझ सकता ईश्वर को क्या

240
00:17:20,120 --> 00:17:24,320
समझेगा भैया तो हमारा धर्म तो इसी पर खड़ा हुआ है था तो धर्म जिज्ञासा था

241
00:17:24,320 --> 00:17:29,400
तो ब्रह्म जिज्ञासा इसको कहां ले जाए जब समझना ही नहीं है तो कुछ भी

242
00:17:29,400 --> 00:17:33,440
सुनिए ईश्वर सर्वशक्तिमान असीमित है असीमित है

243
00:17:33,440 --> 00:17:37,560
का मतलब होता है कि उसे समझाया नहीं जा सकता हां आप एक स्टेज तक

244
00:17:37,560 --> 00:17:41,600
उसे जान सकते हैं जब ऐसा नहीं है नहीं नहीं यहां पर मेरा ओपिनियन अलग

245
00:17:41,600 --> 00:17:45,600
है ईश्वर सर्वशक्तिमान है मुझे बताइए

246
00:17:45,600 --> 00:17:49,600
आद शंकराचार्य ने क्यों बोला एकम शास्त्र देव की पुत्र

247
00:17:49,600 --> 00:17:53,600
गीतम तो उसमें गीता का अर्थ आपका वाला क्यों ले उन्हीं की

248
00:17:53,600 --> 00:17:57,680
गीता का अर्थ लेंगे ना भाई जब उन्होंने कहा एकम शास्त्रम देव की

249
00:17:57,680 --> 00:18:01,680
पुत्र गीता तो उन्ही की उन्ही के अर्थ लेंगे वहा पर उन्होंने तो

250
00:18:01,680 --> 00:18:06,040
अर्थ में ऐसा नहीं किया उन्होंने तो अर्थ में सबको स्वीकारा है

251
00:18:06,040 --> 00:18:10,080
आप गीता उसकी लेते हो प्रमाण रूप में और अथ अपना देते हो हमारी

252
00:18:10,080 --> 00:18:14,080
ए इट वाली उन्होंने तो अल्लाह को नहीं दिया कि भाई

253
00:18:14,080 --> 00:18:18,360
कृष्ण अल्ला एक समान है अगर सुनिए अगर इसन

254
00:18:18,360 --> 00:18:22,600
की ए गीता में अगर ऐसा लिखा होगा तो आप

255
00:18:22,600 --> 00:18:25,960
बतान की एट गीता वो जो अभी थोड़े दिन

256
00:18:25,960 --> 00:18:29,960
पहले वायरल हुई थी वन की ए गीता नहीं वो किसी भक्त ने

257
00:18:29,960 --> 00:18:34,080
किसी को समझाने के लिए ट्रांसलेट किया आपके लखनऊ में आप आपका

258
00:18:34,080 --> 00:18:38,360
परिचय बता दीजिए थोड़ा सा कौन से किस प्रकार से आप संबंधित है मैं नोएडा

259
00:18:38,360 --> 00:18:42,560
रहता हूं और अभी इटेड नहीं लेकिन काफी टाइम से फलो

260
00:18:42,560 --> 00:18:46,720
करर अच्छा मतलब आप कोई पदाधिकारी नहीं हैन के

261
00:18:46,720 --> 00:18:51,080
नहीं वो तो मैंने कमेंट में आपको पहले बताया तो इकन के जो पदाधिकारी

262
00:18:51,080 --> 00:18:55,160
है लखनऊ इकन मंदिर के अध्यक्ष उनका स्टेटमेंट है

263
00:18:55,160 --> 00:18:59,400
कि शिवजी भगवान नहीं है शिवजी भगवान के वो परम ब्रह्म

264
00:18:59,400 --> 00:19:03,760
नहीं है सुन लीजिए सुन लीजिए और कृष्ण अल्लाह और जो बाइबल

265
00:19:03,760 --> 00:19:07,840
का ईश्वर है यहोवा यानी क्राइस्ट उसमें कोई भेद नहीं है

266
00:19:07,840 --> 00:19:12,160
वो एक ही है तो तो अब अब देखिए बाद

267
00:19:12,160 --> 00:19:16,360
कहां कहा से निकलता है अगर अल्लाह से हम कृष्ण को जोड़ते हैं तो अल्लाह

268
00:19:16,360 --> 00:19:20,360
और हमारे जो इस्लाम दर्शन है और हिंदू सनातन दर्शन है उसमें

269
00:19:20,360 --> 00:19:24,640
एक सबसे बड़ा फैक्ट यही है कि सनातन धर्म का ईश्वर बाधित नहीं है

270
00:19:24,640 --> 00:19:28,680
वो कण कण में है और जो इस्लाम का ईश्वर है वो एक जगह बैठ दुनिया को

271
00:19:28,680 --> 00:19:32,960
बनाता है वो कण कण में नहीं है उसकी शक्ति हर जगह पर है

272
00:19:32,960 --> 00:19:37,040
और दूसरी बात वो ये कहता है वो ये कहता है कि मैं अवतार नहीं लेता

273
00:19:37,040 --> 00:19:41,040
मेरी कोई संतान नहीं हो सकती और कृष्ण कहते हैं कि जब

274
00:19:41,040 --> 00:19:45,080
जब धरती पर पाप बढ़ेगा मैं अवतार लूंगा तो फिर ये दोनों की जब अलग-अलग

275
00:19:45,080 --> 00:19:49,120
बिल्कुल प्योर फीचर इसके अलावा कुछ शिक्षाओं में भी बहुत भेद है

276
00:19:49,120 --> 00:19:53,120
शिक्षाए अगर हम पकड़े तो हमें सिखाया गया राम के द्वारा रघुकुल रीत सदा

277
00:19:53,120 --> 00:19:57,200
चली आई प्राण जाई परवचन ना जाई उनके यहां कुछ और सिखाया गया इसके विपरीत

278
00:19:57,200 --> 00:20:01,360
बिल्कुल अर्थ निकलता है तो फिर यहां पर ये दोनों अलग शिक्षा देने

279
00:20:01,360 --> 00:20:05,400
वाले और दोनों अलग क्वालिटी वाले एक हो रहे हैं इससे बाधित सिद्ध

280
00:20:05,400 --> 00:20:09,680
होते हैं दूसरा आपने दूध दही का उदाहरण जब दिया तो दूध दही एक व्यावहारिक

281
00:20:09,680 --> 00:20:13,920
चीज है मनुष्य को समझ में आने वाली चीज है उससे आपने कंपेयर किया

282
00:20:13,920 --> 00:20:18,760
भगवानों को तो यहां से यह अर्थ निकलता है कि जो

283
00:20:18,760 --> 00:20:22,760
यह जो क्रिया है यह भी व्यवहारिक क्रिया है परमार्थिक क्रिया नहीं है मगर

284
00:20:22,760 --> 00:20:27,040
आप कह रहे हो कि परमार्थिक क्रिया है तब वहां पर अगर आप परमार्थिक क्रिया

285
00:20:27,040 --> 00:20:31,280
उ मान भी लेंगे तो क्या कहते वहां पर यह हो जाएगा

286
00:20:31,280 --> 00:20:35,400
कि आपको यह मानना पड़ेगा कि यहां पर इस दुनिया में जो है भगवान

287
00:20:35,400 --> 00:20:39,400
श्री कृष्ण अग अगर शिव बनेंगे तो शिव भी कृष्ण बन जाएंगे यह तो मानोगे

288
00:20:39,400 --> 00:20:43,880
ना तो परमार्थिक क्रिया पर रह रहे हो आप अभी आपका प्रश्न है ना अभी

289
00:20:43,880 --> 00:20:46,160
तीन

290
00:20:46,160 --> 00:20:50,320
प्रश् जब हम जब हम ऐसा मान लेंगे तो इसका मतलब हमें

291
00:20:50,320 --> 00:20:54,320
ये मानना पड़ेगा कि जो कृष्ण है उनका एक पारलौकिक स्वरूप अलग है

292
00:20:54,320 --> 00:20:56,120
और यहां पर दिखाई देने वाला व्यवहार

293
00:20:56,120 --> 00:21:00,360
में आने वाला स्वरूप अलग है तो य जो आप लोग कहते हो कि नहीं भा ये दुनिया

294
00:21:00,360 --> 00:21:04,560
वो मनुष्य को जो व्यवहार का विषय है जो भगवान का वैसा भौतिक स्वरूप

295
00:21:04,560 --> 00:21:08,640
दिखाई देने वाला वो जो है आप कहते हो कि नहीं वो तो एज इट इज आया तो

296
00:21:08,640 --> 00:21:13,120
फिर वहां पर आपका वो सिद्धांत खंडित हो रहा है तो इसके बारे में थोड़ा प्रकाश डाले

297
00:21:13,120 --> 00:21:17,840
देखिए आपके तीन प्रश्न हो गए है ना अभी एक्स्ट्रा मत पूछ पहला भूल जाऊगा

298
00:21:17,840 --> 00:21:21,840
जी और लास्ट में जो आपने बोला ऐसा मैंने बिल्कुल नहीं कहा कृष्ण के दो स्वरूप

299
00:21:21,840 --> 00:21:26,080
है ये अवत सिद्धांत है कि कृष्ण के दो स्वरूप थे

300
00:21:26,080 --> 00:21:30,080
एक माया इसको क्लियर कर लेते हैं अगर दो स्वरूप नहीं

301
00:21:30,080 --> 00:21:34,200
है तो फिर वो जो क्रिया है वो पारलौकिक नहीं है व्यवहारिक है वो पहला

302
00:21:34,200 --> 00:21:38,760
सवाल से स्टार्ट होगा हा चलिए चली पहले से कर लीज

303
00:21:38,760 --> 00:21:42,800
था आप लखनऊ के आचार्य गुरुजी प्रभुजी उन पास मुझे

304
00:21:42,800 --> 00:21:48,800
मुझे एक मिनट का समय

305
00:21:57,040 --> 00:22:03,040
द

306
00:22:10,760 --> 00:22:15,280
जी बोलिए हा

307
00:22:15,280 --> 00:22:19,480
जी आपकी वीडियो एकदम ब्रेक हो चल रही

308
00:22:19,480 --> 00:22:24,040
है क्या हो गया अच्छा आ रही है

309
00:22:24,040 --> 00:22:29,520
हा हा तो लखनऊ वाले प्रभु जी का आपने जो टॉपिक छड़ा

310
00:22:29,520 --> 00:22:33,720
मुझे नहीं पता नहीं मैंने केवल उन्ही का नहीं अमोक लीला जी ने भी कई जगह ऐसा इंडिकेशन

311
00:22:33,720 --> 00:22:37,840
दिया है कि बाइबल का ईश्वर ये ईश्वर हमारा ईश्वर एक है वो पहला

312
00:22:37,840 --> 00:22:42,400
सवाल नहीं पहला सवाल है की शिवजी और वो अलग है या नहीं

313
00:22:42,400 --> 00:22:46,600
पहला सवाल य था आपका नहीं अलग नहीं है यहां पर देखिए विषयात

314
00:22:46,600 --> 00:22:51,080
हो जाएगा शिवजी बात ये नहीं है जो अगर कृष्ण को भी भगवान मानू

315
00:22:51,080 --> 00:22:55,160
तो कम से कम उसको सर्वशक्तिमान तो सिद्ध करें आप मैं कह रहा हूं ठीक है

316
00:22:55,160 --> 00:22:59,480
कृष्ण के अलावा अन्य कोई रूप नहीं है वो एक अलग चर्चा का विषय हो सकता है

317
00:22:59,480 --> 00:23:04,200
कह रहा वो चर्चा का एक अलग विषय हो सकता है चदा

318
00:23:04,200 --> 00:23:08,840
का सिद्धांत क्या था चत महाप्रभु क्या मानते थे पहले मैं

319
00:23:08,840 --> 00:23:12,320
या वैष्णव आचार का सिद्धांत बता दू कि वैष्णव संप्रदाय

320
00:23:12,320 --> 00:23:16,520
में विष्णु तत्व को सुप्रीम मानते हैं और उनके जितने

321
00:23:16,520 --> 00:23:21,560
भी स्वरूप है मैं ये नहीं मैं ये नहीं कह रहा मैं यह कह रहा हूं

322
00:23:21,560 --> 00:23:26,080
जोभी आपने बोला लखनऊ में गया था उन्होने बोला

323
00:23:26,080 --> 00:23:30,160
बा वाले बाद वाले बोला कि वहां पर उन्होंने अल्लाह को कंपेयर किया

324
00:23:30,160 --> 00:23:34,520
था कृष्ण से हा अब अल्लाह को क्यों किया मैं बताता हूं सु हा वो बताइए

325
00:23:34,520 --> 00:23:38,680
आप बुरा मत मानिए इकन के अलावा शायद

326
00:23:38,680 --> 00:23:42,960
ही कोई ऐसी संस्था होगी जिन्होंने इंडिया से बाहर निकल के प्रचार किया

327
00:23:42,960 --> 00:23:47,040
मेरी पूरी बात सुनिए देखिए ये भी चर्चा का एक अलग विषय है चर्चा

328
00:23:47,040 --> 00:23:51,040
के बहुत विषय है सुनिए मैं बताऊ बता जी है

329
00:23:51,040 --> 00:23:55,320
ना इंडिया से बाहर निकल के किसी ने प्रचार किया और जब

330
00:23:55,320 --> 00:23:59,360
देखिए आप इस तरह से अगर करेंगे तो फिर मुझे मुझे भी बोलना पड़े क्योंकि ये

331
00:23:59,360 --> 00:24:03,560
तो भाई पूरी दुनिया देख सकती है इस वीडियो को तो मुझे बताना पड़ेगा कि जिस

332
00:24:03,560 --> 00:24:07,600
चीजों का आप प्रचार कर रहे हो वो चीजें आपके हाथ में आई कहां से

333
00:24:07,600 --> 00:24:11,880
कैसे आई गीत गीता गीता हमारे इसको

334
00:24:11,880 --> 00:24:16,120
ने तो बनाई नहीं नहीं बनाई जिन श्लोकों का अर्थ आपने

335
00:24:16,120 --> 00:24:20,480
किया है वो श्लोक आपको प्राप्त कैसे हुए शंकराचार्य ने बौद्धों को हराया

336
00:24:20,480 --> 00:24:24,560
ना होता लुप्त हो चुका था हिंदू हिंदू धर्म उसके बाद भी आज भी हम

337
00:24:24,560 --> 00:24:27,480
सबसे पुरानी जो वो देखते हैं भाष्य वेदों

338
00:24:27,480 --> 00:24:31,480
का तो वेदों पर जो सबसे पुराना भाष्य प्राप्त है वो सायण भाष्य

339
00:24:31,480 --> 00:24:35,600
शकरा शंकर परंपरा के है तो आपको मिला कहां से अगर हमने

340
00:24:35,600 --> 00:24:39,760
धर्म की रक्षा ना की होती तो आप आप जो भी है आप बाहर जाकर जो कर रहे

341
00:24:39,760 --> 00:24:44,160
वो तो अलग पर्सपेक्टिव हो सनातन को फैला रहे हैं सनातन के नाम पर

342
00:24:44,160 --> 00:24:48,280
वो सनातना भास है वो एक अलग विषय है इसीलिए तो मैं चाह रहा हूं

343
00:24:48,280 --> 00:24:52,520
पहले दूध दही वाला टॉपिक क्लियर हो आप आप आप पहले जवाब

344
00:24:52,520 --> 00:24:56,520
सुनते नहीं दूसरा जवाब कर देते अलग टॉपिक आपने अलग बात

345
00:24:56,520 --> 00:25:00,680
कही ना मैं ये बताऊंगा पूरी दुनिया में कोई नहीं है जो उसके जैसे काम कर रहा हो

346
00:25:00,680 --> 00:25:04,800
ये अलग टॉपिक ले आए ना नहीं नहीं आपने अल्लाह और जीसस की बात

347
00:25:04,800 --> 00:25:08,960
करी तब मैंने जाके ये टॉपिक छ आप वही वही उसी जो

348
00:25:08,960 --> 00:25:13,000
सिद्धांत प बात हो रही है जिस विषय प आप वही बोलिए अगर आप अपनी चीजों को बोलेंगे

349
00:25:13,000 --> 00:25:17,320
तो मुझे भी बोलना पड़ेगा ना जब तक आप सुनोगे नहीं तो फिर कैसे समझ

350
00:25:17,320 --> 00:25:21,400
आएगा भाई साब आपने एक ऐसी बात बोली जिससे हमारी

351
00:25:21,400 --> 00:25:25,440
इस चर्चा का कोई संबंध नहीं है आपने उसकी तारीफ की स्कन की

352
00:25:25,440 --> 00:25:29,440
कि भाई हमारा जो स्कन है वो पूरी दुनिया में वो कर रहा है प्रचार तो मुझे

353
00:25:29,440 --> 00:25:33,440
वहां बताना पड़ेगा ना कि भाई हम क्या कर रहे हैं ये कोई ऐसा तो है नहीं कि

354
00:25:33,440 --> 00:25:38,240
सिर्फ दो लोग बातें कर रहे हैं पूरी दुनिया जी अरे आप सुन नहीं

355
00:25:38,240 --> 00:25:42,360
मैंने आपको ये बताया कि अल्लाह को रेफरेंस में या फिर जीसस को रेफरेंस में हम क्यों

356
00:25:42,360 --> 00:25:42,860
लेते

357
00:25:42,840 --> 00:25:46,920
हैं चलिए बताइए क्योंकि अगर हम रेफरेंस ना ले

358
00:25:46,920 --> 00:25:51,000
तो रशिया जैसी जगह जहां प इस कन प इतने केस हो चुके हैं लोग बोलते

359
00:25:51,000 --> 00:25:55,080
हैं क्रिश्चन एजेंडा है स्कन ये बताइए जितने स्कन प केस

360
00:25:55,080 --> 00:26:00,160
हुए रशिया में कोई साथ खड़ा हुआ कोई खड़ा नहीं हुआ स्न फिर भी जीता

361
00:26:00,160 --> 00:26:04,240
और मैं जानता हूं मैं आपका ये जो तर्क है मैं जानता हूं कई स्कन वालों

362
00:26:04,240 --> 00:26:08,760
ने मुझे दिया अब मुझे ये बताइए इसका अर्थ ये है कि ये जो शिक्षाएं

363
00:26:08,760 --> 00:26:12,760
दी जा रही है जिसमें अल्लाह और बाइबल के ईश्वर को कंपेयर किया जा रहा है कृष्ण के

364
00:26:12,760 --> 00:26:16,960
साथ ये एक छलावा है क्या जी यह

365
00:26:16,960 --> 00:26:21,520
केवल उन लोगों को मनाने के लिए झूठ है ना ये इसमें सत्यता नहीं है

366
00:26:21,520 --> 00:26:25,960
ना एक सिद्धांत तो हर जगह सही होता है क्या सिद्धांत

367
00:26:25,960 --> 00:26:30,000
नहीं पहले इसको उत्तर तो दीजिए आप आपने कहा ऐसा इसलिए कहना पड़ता है जी उसी

368
00:26:30,000 --> 00:26:34,360
का उसी का उत्तर दे रहा हूं जी जी एक सिद्धांत तो सब में मान्य होता है कि सभी

369
00:26:34,360 --> 00:26:38,360
जीव ईश्वर की उपासना कर रहे हैं फिर चाहे वो अपने किसी भी मत से कर रहे हो ये बात

370
00:26:38,360 --> 00:26:42,960
का टॉपिक है ठीक है चाहे भाई साहब ईश्वर की उपासना कर रहे हैं मगर

371
00:26:42,960 --> 00:26:46,960
जिसकी आप बात कर रहे हैं वो ईश्वर नहीं है वो वो अलग चीज है वो कहां

372
00:26:46,960 --> 00:26:51,040
से डिफाइन हुई है किस किससे डिफाइन हुई है उससे आप कैसे कंपेयर कर देंगे

373
00:26:51,040 --> 00:26:55,760
ईश्वर की उपासना कर रहे हैं आप वो सिद्ध तो करिए कि वो ईश्वर है भाई कृष्ण ब्रह्म है

374
00:26:55,760 --> 00:26:58,040
तो आप ये सिद्ध करिए कि वो ब्रह्म है

375
00:26:58,040 --> 00:27:02,160
अरे भाई आप समझ नहीं रहे हो एक अज्ञानी है वो

376
00:27:02,160 --> 00:27:06,680
ये मान रहा है किय ईश्वर है मैं इनको पूज रहा हूं ठीक है वो

377
00:27:06,680 --> 00:27:11,000
उस अज्ञानी को झूठ बोला गया ना व क्या बोला गया

378
00:27:11,000 --> 00:27:15,120
अरे कि भाई तुम्हारा य ये जो है और ये कृष्णा एक है यह झूठ

379
00:27:15,120 --> 00:27:19,160
बोला ना मुझे मुझे एक भीटी दिखाई है जो जीसस

380
00:27:19,160 --> 00:27:23,480
जीस जप रहा हो अल्लाह अल्ला जप रहा हो मैं भाई साहब देखिए

381
00:27:23,480 --> 00:27:27,560
अब आप बात को बदल रहे हैं जपने की बात नहीं हो रही स्टेटमेंट आपके

382
00:27:27,560 --> 00:27:31,800
अधिकृत व्यक्तियों का है आपकी किताबों में मेंशन है ऑफिशियल वेबसाइट पर है

383
00:27:31,800 --> 00:27:36,120
कि प्रभुपाद जी ने उनको वैष्णव बोला है मोहम्मद साहब को जब

384
00:27:36,120 --> 00:27:40,120
जब लोग यह बोलते हैं कि गीता की आड़ में बाइबल

385
00:27:40,120 --> 00:27:44,200
पढ़ाई जा रही है आप एक चीज देखिए कि गांधी जी को कितना कहा जाता

386
00:27:44,200 --> 00:27:48,920
है आज के टाइम में कि ईश्वर अल्लाह एक है जो उन्होंने कह दिया गाने में

387
00:27:48,920 --> 00:27:52,960
है ना सुंदर विग्रह मेगा श्याम की जगह उन्होंने वो लाइन गाधी ईश्वर अल्ला गांधी को

388
00:27:52,960 --> 00:27:57,560
कितना टारगेट किया जाता है और वही चीज तो स्कन भी कह रहा है

389
00:27:57,560 --> 00:28:01,800
तो ऐसा अब आपने कहा कि ऐसा उनको मनाने के लिए कहा जाता है क्योंकि

390
00:28:01,800 --> 00:28:05,800
वहां पर सरवाइव करना बहुत ही डिफिकल्ट होता है तो मैं उससे वो नहीं कर रहा

391
00:28:05,800 --> 00:28:09,960
मैं क्लियर करना चाह रहा हूं क्या वो वहां पर जो है छलावा होता है उनके साथ

392
00:28:09,960 --> 00:28:13,560
हमारे साथ नहीं क्या वो छलावा होता है उनके साथ या

393
00:28:13,560 --> 00:28:17,640
वो संत कहते हैं जो कहते हैं ईश्वर अल्लाह एक है या नहीं है वही बताता

394
00:28:17,640 --> 00:28:21,920
हूं अगर थोड़ा कोई किसी को साइकोलॉजी से कोई देख रहा होगा य वो समझेगा अगर

395
00:28:21,920 --> 00:28:25,920
किसी का फेथ किसी पर अड़ गया है किसी को मारने लग गया

396
00:28:25,920 --> 00:28:30,160
तो वो फेथ ऐसे नहीं हटेगा मैं सीध बोल अरे भगवान कृष्ण को मानो तो यानी

397
00:28:30,160 --> 00:28:34,160
कि वो थोड़ी देर के लिए सुनिए सुनिए फर

398
00:28:34,160 --> 00:28:38,200
मैं क्या बताऊंगा आपके जो प्रोफेट मोहम्मद आए थे या जीसस आए थे

399
00:28:38,200 --> 00:28:42,320
अब आप अब आप ये बताइए चलिए प्रोफेट मोहम्मद

400
00:28:42,320 --> 00:28:46,360
का मैं मान भाई साब मैं ये नहीं पूछ रहा कि उन्होंने सही किया या गलत किया मैं य पूछ रहा हूं यह

401
00:28:46,360 --> 00:28:50,480
सत्य है असत्य है आप विषय अंतर हो रहा है मैंने पूछा यह

402
00:28:50,480 --> 00:28:54,800
सत्य बात है ईश्वर अल्लाह एक है या असत्य है आप ये बोल रहे हो कि नहीं

403
00:28:54,800 --> 00:28:58,880
उन्होंने किया तो है पर उसमें कोई गलत नहीं है मैं सही गलत का आरोप नहीं लगा

404
00:28:58,880 --> 00:29:03,200
रहा हूं मैं यह पूछ रहा हूं यह सत्य है असत्य है मुझे मुझे पहले आप यह बताइए

405
00:29:03,200 --> 00:29:07,480
जीसस को आप किस कैटेगरी में गिने क्योंकि निश्चलानंद सरस्वती महाराज जी ने बोला है

406
00:29:07,480 --> 00:29:11,720
कि पुरी में रहे थे जीसस 12 साल और वैष्णव रिचल फॉलो करे थे

407
00:29:11,720 --> 00:29:15,840
और य तक भविष्य पुराण में जीसस का उसका फिर भाई साब

408
00:29:15,840 --> 00:29:19,960
विषयात हो रहा है यह राजनीतिक बहस हो रही है मेरा प्रश्न य

409
00:29:19,960 --> 00:29:24,200
है क्या ईश्वर अल्ला एक है तो आप पहले समझा रहे थे आपने

410
00:29:24,200 --> 00:29:28,280
आपने शुरू किया कि भाई ईश्वर वैसे वाले शंकराचार्य जी

411
00:29:28,280 --> 00:29:28,780
ने जो कहा

412
00:29:28,720 --> 00:29:32,720
है उसका सब बहुत संतुष्टि जनक जवाब है मगर अभी क्या है विषयात हो जाएगा

413
00:29:32,720 --> 00:29:37,080
और ऐसे विषयात होते होते विषयात होते होते सुनिए तो विषयात

414
00:29:37,080 --> 00:29:41,160
होते होते बात हो ही नहीं पाएगी ईश्वर अल्लाह को एक कह रहे

415
00:29:41,160 --> 00:29:45,280
हैं तो यह उनको उनके पर्सपेक्टिव से जहां वो कह रहे हैं वो सत्य

416
00:29:45,280 --> 00:29:49,360
बोल रहे हैं या असत्य बोल रहे हैं ये बताइए वो गलत नहीं कर रहे मैं भी नहीं कह रहा वो

417
00:29:49,360 --> 00:29:53,520
गलत है सही है बाद में देखेंगे सत्य है या असत्य है मैं बता

418
00:29:53,520 --> 00:29:57,640
रहा हूं जैसा कि पूरी शंकराचार्य जी में जैसे जितना

419
00:29:57,640 --> 00:30:01,840
उन्होंने समझाया ना भाई साहब मेरा जो वीडियो था मेरा जो वीडियो

420
00:30:01,840 --> 00:30:05,880
था उसमें मैंने बात कही थी क्या स्कोन के द्वारा प्रतिपादित होने

421
00:30:05,880 --> 00:30:10,080
वाला ईश्वर वादित है अगर आप उसको सर्वशक्तिमान सिद्ध कर दे तो मैं आपका

422
00:30:10,080 --> 00:30:14,080
हो जाऊंगा अब आप आपके लोग उसको जोड़ रहे तो आप जो है

423
00:30:14,080 --> 00:30:18,120
दूसरे दूसरे टॉपिक उठा रहे हो आपके पास जवाब नहीं है मैं आपसे सिर्फ क्लियर बात

424
00:30:18,120 --> 00:30:22,200
पूछ रहा हूं वो असत्य है या सत्य है आपने जो वहां पर वो कह

425
00:30:22,200 --> 00:30:26,240
रहे हैं वो क्रिश्चन क्रिश्चन देशों में जाकर कह रहे हैं कि बाइबल का ईश्वर और गीता का

426
00:30:26,240 --> 00:30:30,600
ईश्वर एक है और जो कहते हैं अमोग लीला जी कहते हैं कि बाइबल जो है

427
00:30:30,600 --> 00:30:34,720
वो क्या वो जो भगवत गीता है वो बाइबल

428
00:30:34,720 --> 00:30:38,840
का अगला भाग है वो ये सब जो कहते हैं के शंकराचार्य जी ने

429
00:30:38,840 --> 00:30:43,000
कहा सेम ऐसा ही स्कोन वाले समझाते हैं पुरी के शंकराचार्य जी

430
00:30:43,000 --> 00:30:43,800
ने ये कहा

431
00:30:43,800 --> 00:30:47,920
है कि 10 साल वो जब यहां पर रहे थे तो उस उन दिनों

432
00:30:47,920 --> 00:30:51,920
उन्होंने जितनी शिक्षा प्राप्त की वही शिक्षा वहां पर जो है वो मान्य

433
00:30:51,920 --> 00:30:56,240
है बाकी एकट एकट यही इस कोन में बोला जाता है

434
00:30:56,240 --> 00:31:00,400
आप एक थोड़ी ना कहा पूरी शंकराचार्य जी का वीडियो दिखा दूंगा

435
00:31:00,400 --> 00:31:05,080
मैं एकट कैसे आप कह रहे दिखा दूंगा

436
00:31:05,080 --> 00:31:09,200
शंकराचार्य जी का वीडियो आप देख लीजिएगा ईश्वर अल्ला एक नहीं और सीधे सधे

437
00:31:09,200 --> 00:31:13,280
मना करते हैं नहीं ईश्वर अल्लाह एक नहीं है सब लोग एक ही ईश्वर को पाना चाहते

438
00:31:13,280 --> 00:31:17,320
परर देख तो लो कि ईश्वर के बारे में मान्यता क्या है आप कैसे कहोगे ईश्वर

439
00:31:17,320 --> 00:31:21,520
अल्ला एक है साईं बाबा के बारे में शंकराचार्य ने बताया दुनिया को साई

440
00:31:21,520 --> 00:31:25,560
बाबा कौन थे आप समझ रहे हो अमो वडियो में

441
00:31:25,560 --> 00:31:29,600
कई बार बोला है जितनी शिक्षा उन को देनी चाहिए थी जीसस ने दी

442
00:31:29,600 --> 00:31:33,640
उस भाई साहब आप जो है मगर मतलब

443
00:31:33,640 --> 00:31:37,640
उत्तर के बगल से निकल जाओगे मगर सही उत्तर आप दोगे नहीं मैं पूछ

444
00:31:37,640 --> 00:31:42,000
रहा हूं वो जो शिक्षा दी जाती है ईश्वर अल्लाह एक है वहां के लोगों को

445
00:31:42,000 --> 00:31:46,080
मनाने के लिए जो भी है समझाने के लिए वो सत्य सत्य

446
00:31:46,080 --> 00:31:50,160
शिक्षा है असत्य है यह बताइए इसका पर्सपेक्टिव दो नजरियों

447
00:31:50,160 --> 00:31:54,320
से देख सकते हो बताइए दुनिया में कोई भी परम सत्ता

448
00:31:54,320 --> 00:31:58,720
है जो जिसको जो भी अगर परम सत्ता किसी को मान रहा है

449
00:31:58,720 --> 00:31:59,220
वो

450
00:31:58,840 --> 00:32:03,440
भगवान है चाहे भगवान कृष्ण कहो शिव कहो आपके जो हो उसको ठीक है अच्छा

451
00:32:03,440 --> 00:32:07,480
वो वही है अब वो किसी और नाम से बोले अगर आप ये बोल दो परम

452
00:32:07,480 --> 00:32:12,200
सत्ता का मीनिंग आप क्या समझते हैं अगर वो मान रहा है तो

453
00:32:12,200 --> 00:32:16,400
परम सत्ता अगर वो किसी को सुप्रीम पावर बोल सुप्रीम

454
00:32:16,400 --> 00:32:21,120
पावर तो वही है ना जो कुछ भी कर सकता हो सर्वशक्तिमान हो बिल्कुल इस्लाम

455
00:32:21,120 --> 00:32:25,800
के द्वारा प्रतिपादित होने वाला ईश्वर 611 में कह रहा है मेरी संतान नहीं हो सकती

456
00:32:25,800 --> 00:32:29,960
आप सर वही वाली बात इसका अर्थ है कि जो

457
00:32:29,960 --> 00:32:34,000
देखिए आप उसको परम सत्ता कहिए आप उसको परम सत्ता कहिए आप उसको अल्लाह तो

458
00:32:34,000 --> 00:32:38,480
मत कहिए आप उसको परम सत्ता कहिए ना कि परम सत्ता और कृष्ण एक है

459
00:32:38,480 --> 00:32:42,520
मगर व जो व्यक्ति है जो वहां पर अल्लाह को मानता है क्रिश्चियनिटी

460
00:32:42,520 --> 00:32:46,680
वाले ईश्वर को मानता है वो उसको परम सत्ता नहीं कहता वो अल्लाह कहता है जब हम

461
00:32:46,680 --> 00:32:50,800
अल्लाह कह देते हैं तो अल्लाह का मतलब है कुरान के द्वारा परिभाषित होने

462
00:32:50,800 --> 00:32:54,880
वाली शक्ति कुरान के द्वारा तो कुरान के नियमों

463
00:32:54,880 --> 00:32:59,000
के हिसाब से देखा जाए तो बिल्कुल मिसमैच है कृष्ण में और उसम बिल्कुल

464
00:32:59,000 --> 00:33:03,120
मिसम है मिसम है तो फिर अब मुझे बताइए क्या ये जो शिक्षा

465
00:33:03,120 --> 00:33:07,680
दी जाती है कि ईश्वर और अल्ला एक है यह गलत है या सही शिक्षा है

466
00:33:07,680 --> 00:33:11,720
वहा पर वहा पर जो दी जाती है यहां पर बाद में आएंगे प्रभुपाद जी

467
00:33:11,720 --> 00:33:14,120
ने जीसस को हमेशा ईश्वर

468
00:33:14,120 --> 00:33:18,200
का पुत्र बताया कभी ईश्वर नहीं बताया नहीं जीसस नहीं क्राइस्ट की बात हो रही

469
00:33:18,200 --> 00:33:22,720
है अंतर है बाइबल का ईश्वर क्राइस्ट है

470
00:33:22,720 --> 00:33:27,240
बाइबल का ईश्वर जो है व क्राइस्ट है यहोवा उन्होंने यहोवा से एक किया है जो

471
00:33:27,240 --> 00:33:31,400
यहां के जो वो है प्रभु जी आपके स्कोन मंदिर के उन्होंने यहोवा

472
00:33:31,400 --> 00:33:36,080
का नाम लिया जीसस का नाम नहीं लिया इंटरव्यू में उन्होंने कहा जीसस

473
00:33:36,080 --> 00:33:40,240
और क्या कहते हैं आपका ये अल्लाह और कृष्ण जो है एक

474
00:33:40,240 --> 00:33:44,560
है इनम कोई भेद नहीं है उन्होने उन्होने क्या इसम अब मैं अपनी

475
00:33:44,560 --> 00:33:49,360
कुछ चीज बोल दू क्योंकि आप उस चीज को बोलेंगे नहीं

476
00:33:49,360 --> 00:33:53,480
पहली चीज है की क्या वो शिक्षा असत्य है अच्छा चलिए मान

477
00:33:53,480 --> 00:33:57,600
लीजिए कि किसी के भले के लिए आप दे रहे हैं तो वो शिक्षा उन लोगों को क्यों

478
00:33:57,600 --> 00:34:01,920
दी जा रही है जो लोग पहले से सनातनी है पहला दूसरा

479
00:34:01,920 --> 00:34:06,440
यह है कि जब आप दूसरे को बहलाने फुसला के लिए य कह सकते हो

480
00:34:06,440 --> 00:34:10,600
कि भाई तुम्हारे और तुम जिसे ईश्वर मान रहे हो उसम और कृष्ण में कोई अंतर नहीं है तो

481
00:34:10,600 --> 00:34:14,640
आपको अपने भाई बहनों के लिए यह बात याद नहीं आती जब आप शिव के लिए कहते हो कि शिव

482
00:34:14,640 --> 00:34:18,840
जी भगवान नहीं है तब आपको ये बात नहीं याद आती कि इनको भी बहलाया फुलाया जाए

483
00:34:18,840 --> 00:34:22,840
इनको भी कहा जाए शिव और कृष्ण आओ आओ तुम हमारे मंदिर आओ तब ये बात याद

484
00:34:22,840 --> 00:34:27,000
नहीं आती आपको तो पहली बात तो ये है कि इसीलिए कहा जाता है

485
00:34:27,000 --> 00:34:29,160
कि जो पीछे से मधवा चार्य

486
00:34:29,160 --> 00:34:33,320
जी है आपके गड़िया संप्रदाय के अन्य आचार्य है क्या इन्होंने कहीं पर कहा ईश्वर

487
00:34:33,320 --> 00:34:37,360
अल्लाह एक है तो जब गुरु ने नहीं कहा और आप ऐसी शिक्षा को परोस रहे

488
00:34:37,360 --> 00:34:41,480
हैं तो किस अधिकार से परोस रहे हैं य शिक्षा यानी कि आपने अपने मंतव्य से

489
00:34:41,480 --> 00:34:45,560
चुनाव किया महा ऋषि वेदव्यास स्मृति कहती है दो

490
00:34:45,560 --> 00:34:49,560
एक 11 व्यक्तिगत तर का मान्य भय से लोभ से

491
00:34:49,560 --> 00:34:53,680
क्रोध से मोह से किसी भी कारण से धर्म का त्याग मत करो जैसे ही करोगे वैसे

492
00:34:53,680 --> 00:34:57,960
ही वो धर्म आप ही के लिए हानि पहुंचाएगा देखिए आप अगर अजीब

493
00:34:57,960 --> 00:35:02,320
गरीब बात करेंगे आप बोल रहे हैं कि मधवा चार ने क्यों नहीं बोला मधवा चार के समय इंडिया

494
00:35:02,320 --> 00:35:06,520
में कौन से मुस्लिम थे हां मुझे बताए

495
00:35:06,520 --> 00:35:10,560
तो मुस्लिम मुस्लिम नहीं थे मान लीजिए मान लीजिए मुस्लिम नहीं थे

496
00:35:10,560 --> 00:35:14,560
परिस्थिति के हिब परिथि मैं ये कह रहा हूं क्या इस तरह की कहीं पर कोई

497
00:35:14,560 --> 00:35:18,640
सिद्धांत है कि आप इस तरह से करने के लिए दूसरा अगर नास्तिक

498
00:35:18,640 --> 00:35:22,680
हो या किसी अन्य को राक्षस को ईश्वर मान रहा हो या किसी भी शक्ति किसी

499
00:35:22,680 --> 00:35:27,280
भी दैवीय शक्ति को मान रहा हो किसी भी चमत्कारिक शक्ति को मान रहा हो जो उसके लिए

500
00:35:27,280 --> 00:35:31,520
हो तो उसको आप ब्रह्म के साथ मिला दीजिए ऐसी कोई सनातन सिद्धांत है

501
00:35:31,520 --> 00:35:36,240
सुनि मैं बताता अगर अगर यह बात और

502
00:35:36,240 --> 00:35:40,400
ये बात तो तब की है जब हम पहले य माने कि हा उन्होंने असत्य कहा

503
00:35:40,400 --> 00:35:44,160
तो पहले तो इसको क्लियर कर दीजिए उसके बाद हम आगे बढ़े सुनिए सुनि मेरी

504
00:35:44,160 --> 00:35:48,400
बात अगर यह बात बताकर किसी को कृष्ण भक्ति में लगाया जा सकता है

505
00:35:48,400 --> 00:35:52,640
तो यह बात एक बार नहीं हजार बार कहनी चाहिए क्यों ये बात

506
00:35:52,640 --> 00:35:57,000
सत्य है कि असत्य है यह बताइए प कौन सी बात

507
00:35:57,000 --> 00:36:01,640
ईश्वर वो कृष्ण और अल्लाह एक है कृष्ण और यवा एक है

508
00:36:01,640 --> 00:36:06,080
अरे मैं मैं क्या कह रहा हूं अगर कोई भी आप बोलेंगे ही नहीं देगा

509
00:36:06,080 --> 00:36:10,360
आप उसको साइड से निकलेंगे आप उसको अरे आप क्योंकि आप तत्व

510
00:36:10,360 --> 00:36:14,400
समझ नहीं रहे हो कोई भी स परम सत्ता मैं समझ रहा हूं वो बात की बात

511
00:36:14,400 --> 00:36:18,480
है कि वो अच्छा है कि बुरा है पहले आप ये बताइए शिक्षा अब

512
00:36:18,480 --> 00:36:22,480
आप अपनी लाइन खुद बोल चुके ये बात की बात है वो अच्छा है या गलत है कुरान में नहीं पता

513
00:36:22,480 --> 00:36:26,600
क्या गलत है या सही है अगर वो किसी व्यक्ति ऐ को मान रहा है परम सत्ता को मान रहा

514
00:36:26,600 --> 00:36:31,240
है तो वो श्री कृष्ण भगवान राम ही है हमारा य मान क्या

515
00:36:31,240 --> 00:36:35,400
अगर कोई किसी को परम सत्ता को मान रहा है तो हा वो भगवान कृष्ण या राम

516
00:36:35,400 --> 00:36:39,760
ही है अच्छा और वो वहा पर कह रहा है कि मैं जन्म नहीं लेता य

517
00:36:39,760 --> 00:36:44,160
राम कह रहे है मैं जन्म लेता हूं मगर राम को ही मान रहा है सुनि

518
00:36:44,160 --> 00:36:48,360
सुनि उनके सिद्धांत में जो बात की गई है वो धीरे धीरे आएगा और आते हैं

519
00:36:48,360 --> 00:36:52,440
प्रमाणिक हमने देखे चाहे मुस्लिम हो क्रिन भाई

520
00:36:52,440 --> 00:36:56,720
साब आप ये बताइए कि जो यहोवा है जो इलाम

521
00:36:56,720 --> 00:37:00,120
के ईश्वर है ये कौन है और कहां से प्रतिपादित होते हैं

522
00:37:00,120 --> 00:37:04,720
सुनिए जी जीसस कहां से प्रतिपादित होते हैं सुनि जीसस 2020

523
00:37:04,720 --> 00:37:08,880
साल पहले पैदा हुए नहीं नहीं प्रतिपादित कह रहा हूं आप कैसे जानते

524
00:37:08,880 --> 00:37:13,040
हैं जीसस को किस माध्यम से जानते हैं

525
00:37:13,040 --> 00:37:17,200
देखिए तस्मा शास्त्र प्रमाण उनका जो शास्त्र प्रमाण है बाइबल उनके थ्रू हम जानते

526
00:37:17,200 --> 00:37:21,280
हैं हम शास्त्र के तो तो उसकी जो कैरेक्टरिस्टिक है उनको छोड़ देंगे क्या

527
00:37:21,280 --> 00:37:25,520
केवल नाम को लेंगे क्या अभी अभी आपने बोला ना ये तो बात की बात है सही है या गलत है

528
00:37:25,520 --> 00:37:29,760
ये तो बात की बात है अरे सही है गलत कैसे भाई

529
00:37:29,760 --> 00:37:34,280
हम इस बात पर बात कर रहे हैं कि सत्य के असत्य कृष्ण और अल्लाह एक है बस ये

530
00:37:34,280 --> 00:37:38,440
बताइए ये सत्य है कि असत्य इस पर बात करते हैं ये

531
00:37:38,440 --> 00:37:42,440
ये असत्य होते हुए भी कहना यह बात की बात है कि सही है

532
00:37:42,440 --> 00:37:46,560
कि गलत है हम बात कर रहे य सत्य है या असत्य है

533
00:37:46,560 --> 00:37:50,640
मुझे बताइए शंकराचार्य जी ने भाई साहब

534
00:37:50,640 --> 00:37:54,680
आप फिर वही सही गलत पर जा रहे हैं असत्य बोलना सही है कि गलत है वो बात

535
00:37:54,680 --> 00:37:58,880
की बात है आप मुझे बताइए यह जो शिक्षा दी जा रही है कृष्ण

536
00:37:58,880 --> 00:38:03,560
और अल्ला एक है यह सत्य है कि असत्य है अगर इस शिक्षा से

537
00:38:03,560 --> 00:38:07,920
कश्चन फिर वही बात देखिए आप घुमाएंगे अब

538
00:38:07,920 --> 00:38:11,920
अब आप देखिए अब आप विषयात कर अगर इस शिक्षा से किसी का घर बस रहा है

539
00:38:11,920 --> 00:38:15,160
किसी का भला हो रहा है तो आप फिर बजा रहे मैं पूछ

540
00:38:15,160 --> 00:38:19,360
रहा हूं गलत है मतलब गलत मतलब यह सही सत्य लाइन है या

541
00:38:19,360 --> 00:38:23,640
असत्य लाइन है यह बताइए मुझे यन केन प्रका म

542
00:38:23,640 --> 00:38:27,720
क किसी का अगर मन कृष्ण लग रहा

543
00:38:27,720 --> 00:38:31,880
है कृष्ण में नहीं लग रहा है भाई साहब कृष्ण में नहीं लग रहा

544
00:38:31,880 --> 00:38:35,960
भगवान ने ये भी कहा है जो लोग गलत धारणाओं के द्वारा अलग देवी देवताओं को ध्या

545
00:38:35,960 --> 00:38:39,960
रहे वो ढूंढ तो मुझे ही रहे हैं मगर अधि पूर्वक अ विधि पूर्वक होने की वजह से

546
00:38:39,960 --> 00:38:44,080
वो मुझ तक नहीं पहुंचते ये कहा है कि नहीं में वो

547
00:38:44,080 --> 00:38:48,120
धार भगवान कृ ल तो अगर तो इसका अर्थ ये है कि

548
00:38:48,120 --> 00:38:52,120
वो अधि विधि गलत होने की वजह से हम ये नहीं कह सकते कि नहीं साहब तुम सही

549
00:38:52,120 --> 00:38:56,160
तरीके से ईश्वर को ध्यान कर रहे हो तो ये शिक्षा सही है या गलत

550
00:38:56,160 --> 00:39:00,160
है कुल मिला के फिर वही बात आ गई कृष्ण शरण में

551
00:39:00,160 --> 00:39:04,280
आने के बाद विधि कौन सी चेंज हो गई तो भगवान कृष्ण की विधि लगी ना तो

552
00:39:04,280 --> 00:39:09,800
वो कृष्ण की शरण में आए कहां वो तो नाम बदल गया

553
00:39:09,800 --> 00:39:14,440
केवल वो भाई साहब वो तो नाम बदल गया वो केवल नाम बदल गया अगर

554
00:39:14,440 --> 00:39:18,640
ईश्वर और कृष्ण और अल्लाह को हमने एक बता दिया कि कृष्ण

555
00:39:18,640 --> 00:39:22,680
और अल्ला एक है और कोई कृष्ण का नाम जपने लगा तो वो तो कृ अल्लाह का ही नाम जप रहा है

556
00:39:22,680 --> 00:39:26,960
वहा तो क आया कृष्ण की शरण में नाम जपने की स

557
00:39:26,960 --> 00:39:30,360
सिद्धि आपको फिर पता ही नहीं है जिस व्यक्ति जिसका

558
00:39:30,360 --> 00:39:34,480
चित्त होगा उसी का नाम माना जाएगा अगर

559
00:39:34,480 --> 00:39:38,560
जैसे की वाल्मीकि जी ने रमा मरा मरा जपा जी तो

560
00:39:38,560 --> 00:39:42,800
मरा का फल नहीं मिला उनका चि भगवान राम में था तो उसका फ इसका अर्थ

561
00:39:42,800 --> 00:39:47,040
यह है कि आप उन्हें यह कहते हुए कि अल्लाह और कृष्ण एक आप उन्ह कृष्ण

562
00:39:47,040 --> 00:39:51,400
का नाम पकड़ते हो वस्तुतः अल्लाह और कृष्ण एक नहीं है

563
00:39:51,400 --> 00:39:55,680
दे वस्तुत नहीं है मैं बताता हूं क्यों नहीं है तो ये लाइन गलत है ना कृष्णा अल्ला

564
00:39:55,680 --> 00:39:59,760
एक है सुनिए मेरी बात जी उनको

565
00:39:59,760 --> 00:40:03,800
यह बोला जाता है कि जो भी परम सत्ता है फिर से आप उसको अल्लाह कहते हो कुछ भी कहते

566
00:40:03,800 --> 00:40:07,880
हो वो एक ही है फर उनको धीरे धीरे समझाया जाता है कि स्वग

567
00:40:07,880 --> 00:40:13,200
मतलब शुरुआत में जो शिक्षा दी जाती है व भ्रामक होती है

568
00:40:13,200 --> 00:40:17,400
ना भ्रामक नहीं भाई साहब आप जो है वो

569
00:40:17,400 --> 00:40:21,400
ठीक से आप जैसे शुरू में आप कट टू कट रह रहे थे मगर अभी आप कट टकट नहीं रह

570
00:40:21,400 --> 00:40:26,400
रहे अरे आप समझ ही नहीं रहे हो जहार बोनिया समझ रही हैया

571
00:40:26,400 --> 00:40:30,640
जी आप एक प्रश्न का जवाब नहीं दे रहे हो कि वहां पर वो उनको कृष्ण से जोड़ने

572
00:40:30,640 --> 00:40:34,640
के लिए थोड़ी देर के लिए ये झूठ बोलते हैं कि कृष्ण और अल्लाह

573
00:40:34,640 --> 00:40:39,040
एक है ये झूठ बोलते हैं थोड़ी देर के लिए मुझे ये बताइए निश्चल

574
00:40:39,040 --> 00:40:43,280
जी ने झूठ बोला मैं ये नहीं कह रहा ये बात की बात है वो अच्छा

575
00:40:43,280 --> 00:40:45,480
काम है बुरा काम है बाद में बात करेंगे

576
00:40:45,480 --> 00:40:49,640
झूठ बोलते हैं कि नहीं ये बताइए नहीं तो निश्चलानंद महाराज जी ने झूठ

577
00:40:49,640 --> 00:40:53,960
बोला मैं पूछ कब बोला यही की बो

578
00:40:53,960 --> 00:40:58,240
जीसस जो इंडिया रहे थे उन्होंने सनातन धर्म सीखा था ये झूठ बोला उन्होंने

579
00:40:58,240 --> 00:41:03,040
भैया ऐसा तो है नहीं दुनिया में जितने भी दार्शनिक वो है अध्याय

580
00:41:03,040 --> 00:41:07,160
उन सारे दर्शनों में ऐसा थोड़ी नाय पूरी अवद चीज भरी पड़ी है कहीं ना

581
00:41:07,160 --> 00:41:11,320
कहीं उनका जो मूल स्रोत है वो तो वैदिक ही है अगर आज के टाइम में कोई

582
00:41:11,320 --> 00:41:15,600
अपनी आप आ ग लाइन प आप आ ग लाइन प इसका मतलब य

583
00:41:15,600 --> 00:41:20,360
इसका मतलब ये हुआ वो कहीं ना कहीं उस परात्पर सत्य को खोज रहा है

584
00:41:20,360 --> 00:41:24,840
उसकी मानता अलग हो तो आप उससे ये कहिए ना कि वो परास्त एक है

585
00:41:24,840 --> 00:41:28,880
जिस परस्पर सत्य को आप आप ढूंढ रहे हो वो और कृष्ण एक है आप यह क्यों

586
00:41:28,880 --> 00:41:33,000
कह रहे हो कि अल्लाह और कृष्ण एक है अल्लाह जब आप कर दोगे तो सिर्फ

587
00:41:33,000 --> 00:41:37,040
और सिर्फ वो ईश्वर है जो कुरान के द्वारा कुरान की सीमा के द्वारा प्रतिपादित होने वाला

588
00:41:37,040 --> 00:41:41,520
ईश्वर है जब आप यहोवा कह दोगे तो सिर्फ और सिर्फ बाइबल के द्वारा प्रतिपादित

589
00:41:41,520 --> 00:41:45,720
होने वाला ईश्वर है आप परस्पर सत्ता कहो आप वो जो आपने अभी पहले

590
00:41:45,720 --> 00:41:49,840
कहा था परम सत्ता कहो कि भाई देखो जिस भी परम सत्ता को तुम ढूंढ रहे हो वो और कृष्ण

591
00:41:49,840 --> 00:41:54,240
एक ही है आप ये कहो आप जब ये कह दोगे अल्लाह यानी आपने सीमित कर दिया

592
00:41:54,240 --> 00:41:58,640
उस किताब के द्वारा जो डिफाइन होते हैं वो कैरेक्टरिस्टिक

593
00:41:58,640 --> 00:42:01,360
वाला जो ईश्वर है वो

594
00:42:01,360 --> 00:42:05,400
है डिपेंड करता है आप उस बुक से आप क्या पढ़ा रहे हो प्रभुपाद ने

595
00:42:05,400 --> 00:42:09,640
उसी बुक से पढ़ाया कि जीसस जो है भगवान कृष्ण के पुत्र है और सब समझे

596
00:42:09,640 --> 00:42:14,200
कृष्ण को फादर स्वीकार करा और कृष्ण की भक्ति में लग

597
00:42:14,200 --> 00:42:18,320
भाई साहब मैंने तो उस बुक में बहुत सी ऐसी चीज पढ़ी है जो बिल्कुल

598
00:42:18,320 --> 00:42:22,440
भी वद मैं 10 मिनट रुकने को तैयार हूं आप भगवत गीता

599
00:42:22,440 --> 00:42:27,000
में से एक भी लोक ऐसा दिखाता प्रभुपाद ने गलत लिखा हो मैं कहा

600
00:42:27,000 --> 00:42:31,120
मैं तो यह कह रहा हूं प्रभुपाद जी ने गलत लिखा है मैं दिखा दूंगा 50 चीज

601
00:42:31,120 --> 00:42:35,360
मगर अभी बात जो हो रही ना विषय बदल जाएगा विषय बदल जाएगा आप विषय

602
00:42:35,360 --> 00:42:39,400
बताइए आपके अधिकृत लोग जो य टिप्पणी करते हैं ईश्वर अल्ला एक

603
00:42:39,400 --> 00:42:43,520
है यह सही टिप्पणी है या नहीं

604
00:42:43,520 --> 00:42:47,760
चाहे अल्लाह हो कोई भी परात्पर सत्य हो पपर सत्य नहीं कहते

605
00:42:47,760 --> 00:42:51,760
वो वो अल्लाह कहते हैं और अल्लाह का एक ही मतलब है जो कुरान के द्वारा प्रतिपादित होने

606
00:42:51,760 --> 00:42:56,320
वाला ईश्वर वो है भाई मुस्लिम को क्या समझाओ

607
00:42:56,320 --> 00:43:00,480
नहीं बोलोगे तो वो तो चला जाएगा तो जो उनकी

608
00:43:00,480 --> 00:43:05,280
भाषा में जो बात है वो वो भाषा अलग है ये नाम है ये संज्ञा है

609
00:43:05,280 --> 00:43:09,520
ये ये कोई वो कैरेक्टरिस्टिक डिफाइन नहीं हो रही है ये अल्लाह नाम है नाम

610
00:43:09,520 --> 00:43:13,920
दिया गया है वहा भागवत में एक श्लोक आया है

611
00:43:13,920 --> 00:43:16,360
जी अनंत नाम रूपाय

612
00:43:16,360 --> 00:43:22,360
तो आप ये कह रहे हो कृष्ण का नाम अल्लाह है अनंत नाम हो सकते

613
00:43:23,000 --> 00:43:27,280
उन आप अल्लाह के बारे में क्या जानते देखिए य पर आपकी चीज सामने

614
00:43:27,280 --> 00:43:31,600
आ गई है कि आप अल्लाह और कृष्ण को एक मानते हैं नहीं

615
00:43:31,600 --> 00:43:35,800
हम मानते सुनिए हम भगवान बुद्ध को भगवान का अवतार

616
00:43:35,800 --> 00:43:40,600
मानते हैं सिद्धांत नहीं मानते हम कुरान को नहीं मानते उनका सिद्धांत नहीं मानते

617
00:43:40,600 --> 00:43:44,600
अरे तो भाई उसी सिद्धांत में तो अल्लाह की व्याख्या की गई है अल्लाह को आप जानते कहां

618
00:43:44,600 --> 00:43:48,640
से हो कृष्ण के माध्यम से जानते हो क्या आप समझ नहीं रहे हो आप भगवान को

619
00:43:48,640 --> 00:43:52,640
बाधित कर रहे हो कि उनका ये नाम नहीं हो सकता वो नाम नहीं हो सकता आप वादित कर रहे हो मैं

620
00:43:52,640 --> 00:43:57,320
बाद व्यावहारिक रूप से वादित कर रहा हूं परमार्थिक रूप से बाधित कर रहा हूं भगवान सुनिए

621
00:43:57,320 --> 00:44:01,800
भगवान के दो तरीके के रूप है एक परमार्थ वाला एक व्यवहार वाला परमार्थ

622
00:44:01,800 --> 00:44:06,160
वाला जो रूप है व बाधित है भाई ऐसा तो नहीं हो सकता सुन लीजिए

623
00:44:06,160 --> 00:44:10,240
एक लाइन बोल दे लीजिए ऐसा तो नहीं हो सकता कि कोई वेदों का मार्ग अपना

624
00:44:10,240 --> 00:44:14,320
भगवान उसके साथ अन्याय कर दे मगर कहां परमार्थ में यहां कर सकते हैं रावण के रूप

625
00:44:14,320 --> 00:44:18,520
में वो अन्याय कर दिया नहीं मुझे मुझे बताइए आपने बोला भगवान के दो रूप

626
00:44:18,520 --> 00:44:22,560
है जब य आते बाधित हो जाते नहीं यहां नहीं परमार्थ में

627
00:44:22,560 --> 00:44:26,560
परमार्थ में यहां तो कुछ भी कर सकने वाले हैं सुनि भगवान

628
00:44:26,560 --> 00:44:30,840
का सर्वशक्तिमान है उनका कोई रूप बाधित नहीं होता है

629
00:44:30,840 --> 00:44:31,440
आप मुझे

630
00:44:31,440 --> 00:44:35,880
भैया देखिए ये हो गया शब्दों का खेल आप मुझे ये बताइए

631
00:44:35,880 --> 00:44:40,200
क्या आप कृष्ण और अल्लाह को एक मानते हैं या नहीं देखिए

632
00:44:40,200 --> 00:44:44,400
ईश्वर के अनेक नाम हो सकते हैं है अल्लाह

633
00:44:44,400 --> 00:44:48,400
का जो मैं अल्लाह नाम से वो ख्या पित कर रहा हूं

634
00:44:48,400 --> 00:44:52,600
जो कुरान के द्वारा प्रतिपादित होने वाला ईश्वर है अब बताइए क्या कृष्ण

635
00:44:52,600 --> 00:44:56,600
और कुरान के द्वारा प्रतिपादित होने वाला ईश्वर एक है नहीं

636
00:44:56,600 --> 00:45:00,680
उ नहीं उसमें प्रता होने वाला एक ईश्वर नहीं है तो फिर वो क्यों

637
00:45:00,680 --> 00:45:05,080
कह रहे हैं ईश्वर अल्ला एक है अरे नाम अनेक हो सकते हैय बताइए

638
00:45:05,080 --> 00:45:09,120
यानी वो वो वो समय आने पर लोगों को यह भी कह सकते इसन के लोग कि भाई

639
00:45:09,120 --> 00:45:13,200
नाम अनेक हो सकते हैं तो अल्लाह का जाप कर लो जब नाम अनेक हो सकते

640
00:45:13,200 --> 00:45:17,520
हैं नहीं क्यों नहीं क्योंकि जो कुरान का कहना

641
00:45:17,520 --> 00:45:22,240
है उसमें निराकार की उपासना है बिना रूप की उपासना है जबक

642
00:45:22,240 --> 00:45:26,280
का सिद्धांत है बिना रूप के उपासना करते ही

643
00:45:26,280 --> 00:45:30,680
अलग है तो आप उस सिद्धांत वाले नाम को यहां क्यों आप एक कर रहे

644
00:45:30,680 --> 00:45:34,680
हैं सिद्धांत नाम यह बताइए मुझे वाल्मीकि ने

645
00:45:34,680 --> 00:45:38,920
मरा नाम जपा किस शास्त्र में लिखा है मरा नाम तो उने

646
00:45:38,920 --> 00:45:43,120
अनंत नाम हो सकते तो हम ये समझाते हैं की भगवान के अनेको

647
00:45:43,120 --> 00:45:46,520
नाम है आप जो जप रहे हैं वो भी हो सकता है लेकिन उससे

648
00:45:46,520 --> 00:45:51,160
आगे का मार्ग कृष्ण मार्ग है जहा आपको रस रूप लीला गुण धाम सब

649
00:45:51,160 --> 00:45:55,240
अच्छा अच्छा अच्छा ठीक है ठीक है अब मैं इस आ गया वाल्मीकि जी से आपने तुलना

650
00:45:55,240 --> 00:45:59,400
की वाल्मीकि जी से आपने तुलना की वाल्मीकि जी ने गलती से मरा

651
00:45:59,400 --> 00:46:04,080
मरा जपा था ना नहीं गलती से नहीं

652
00:46:04,080 --> 00:46:08,200
हा नहीं उस टाइम उनकी पता नहीं क्या उनकी उस टाइम

653
00:46:08,200 --> 00:46:12,320
उतनी चेतना स्थर नहीं थी उस लेवल प ठीक है तो उन्होने वो

654
00:46:12,320 --> 00:46:16,520
उन्होंने उन्होंने सही नाम नहीं जपा फिर भी व मोक्ष को पा गए ना

655
00:46:16,520 --> 00:46:20,520
तो इसका मतलब जब जब उनको यह कहा जा रहा है कि अल्लाह और कृष्ण

656
00:46:20,520 --> 00:46:24,800
एक है तो यह बात सही नहीं है वो बात अलग है कि वो उससे मोक्ष पा

657
00:46:24,800 --> 00:46:29,120
जाएंगे जब आप वाल्मीकि से जोड़ रहे हैं तो यही बात हुई ना देखिए

658
00:46:29,120 --> 00:46:33,200
अगर मैं भागवत का ये श्लोक मानता हूं कि भगवान कृष्ण के अनेको नाम है

659
00:46:33,200 --> 00:46:38,160
अनंत नाम है तो आप ये बात मानते हो कि कृष्ण को अल्लाह भी कहा जा सकता है

660
00:46:38,160 --> 00:46:42,240
कृष्ण को कृष्ण के अनेकों नाम है अनेकों अल्लाह नाम कहा जा सकता है या

661
00:46:42,240 --> 00:46:46,680
नहीं सुनिए मेरी बात हां या ना में जवाब नहीं होता है तो आप

662
00:46:46,680 --> 00:46:50,720
आप क्लियर बात आप कर ही नहीं रहे ना शुरू से आप कोई भी उपनिषद उठाइए उसमें

663
00:46:50,720 --> 00:46:54,880
हां या ना में जवाब नहीं दिया गया नहीं तो आप उपनिषद थोड़ी ना पढने बैठे

664
00:46:54,880 --> 00:46:59,040
हैं नहीं आप उपनिषद पढ़ा रहे हैं क्या मुझे बात तो उसी

665
00:46:59,040 --> 00:47:01,600
की हो रही है ना अरे तो बात हो रही तो बात

666
00:47:01,600 --> 00:47:06,040
हो रही है जब हम व्यवहारिकता से आमने सामने है ना हम पढ़ थोड़ी ना रहे ग्रंथ यहां प

667
00:47:06,040 --> 00:47:10,120
देखिए शास्त्र में कहा गया नाम नाम आकारी बहुदा अगर हाया ना की

668
00:47:10,120 --> 00:47:14,240
बात मैं आपको करूं तो ऐसे बहुत से उदाहरण दे दूंगा ज राम ने कुछ पूछा और उनको

669
00:47:14,240 --> 00:47:18,720
आया ना में उत्तर मिला सुनि जैसे कि एक

670
00:47:18,720 --> 00:47:22,840
क्या नाम है अरबी शब्द है जिसमें बोलते है रब अब

671
00:47:22,840 --> 00:47:26,960
रब को ट्रांसलेट करेंगे वो विष्णु निकल के आता है मतलब मैं एक बात ये

672
00:47:26,960 --> 00:47:31,040
समझ लेता हूं कि इकोन वाले लोग जब ये कह रहे होते हैं कि

673
00:47:31,040 --> 00:47:35,200
क्या कहते कृष्ण और अल्लाह एक है तो उनकी वो ये कह रहे होते

674
00:47:35,200 --> 00:47:39,520
हैं कि एक परम शक्ति है जिसको तुम जानते नहीं हो वो एक है और समझने

675
00:47:39,520 --> 00:47:43,560
वाला ये समझ लेता है उसका अर्थ कि भाई मैं जिसको बाधित को जानता हूं जो

676
00:47:43,560 --> 00:47:48,320
कुरान के द्वारा प्रतिपादित होने वाले को जानता हूं ये उसकी बात कर रहे हैं

677
00:47:48,320 --> 00:47:52,400
हा वो समझ सकते हैं तो एक तरीके से ये भी तो वहां पर

678
00:47:52,400 --> 00:47:56,440
उनको जो जानते हुए कि आदमी मिसगाइड हो जाए तो ये उनको एक

679
00:47:56,440 --> 00:48:00,440
तरीके से छलावा ही हुआ ना कि वो हम यह जानते हैं कि मेरे इस शब्द का

680
00:48:00,440 --> 00:48:04,640
अर्थ ये क्या लेगा देखिए देखिए जैसे सूर्य होता है

681
00:48:04,640 --> 00:48:08,680
सूर्य को इंग्लिश में सन कहते हैं अंग्रेजी मुस्लिम जो

682
00:48:08,680 --> 00:48:12,920
है चांद कहते हैं लेकिन सूर्य एकही है भया देखिए मेरी मेरा सिद्धांत

683
00:48:12,920 --> 00:48:16,600
समझ लीजिए मैं कभी भी कृष्ण को अल्लाह नहीं कहूंगा मैं कभी भी

684
00:48:16,600 --> 00:48:20,680
कृष्ण को अल्लाह नहीं कहूंगा आप कहिए आपके सिद्धांत से सृष्टि नहीं चलती

685
00:48:20,680 --> 00:48:25,000
है भगवान ने जब बोल दिया अनेको नाम तो अने में कुछ भी हो सकते है तो अनेको

686
00:48:25,000 --> 00:48:29,160
तो आप आप ये पोस्टर लगाइए ना भैया कृष्ण अल्ला एक है कृष्ण बराबर अल्ला

687
00:48:29,160 --> 00:48:33,280
फिर आप इसको स्वीकार नहीं कर रहे हम सिद्धांत को स्वीकार नहीं करते

688
00:48:33,280 --> 00:48:37,640
हैं किसको स्वीकार किया आपने हम भागवत के श्लोक को स्वीकार करते हैं

689
00:48:37,640 --> 00:48:42,080
भागवत के श्लोक को स्वीकार किया आपने अल्लाह को स्वीकार किया उसके आधार पर की

690
00:48:42,080 --> 00:48:46,280
नहीं अल्लाह को क्यों करेंगे अल्लाह को आप कह तो रहे हो कि उसके अनेको

691
00:48:46,280 --> 00:48:50,320
नाम हो सकते हैं सुनिए आप समझ नहीं रहे हो आपने भारत का लोक स्वीकार

692
00:48:50,320 --> 00:48:54,360
कर लिया कि भगवान के अनेको नाम है तो फिर

693
00:48:54,360 --> 00:48:58,600
आपको अगर कुछ बोल हा ये नाम हो सकता है तो आप क्या मना कर देंगे नहीं य नहीं हो सकता

694
00:48:58,600 --> 00:49:02,680
नहीं नहीं मना नहीं करेंगे मगर जब हमें मालूम होगा कि हम जब अल्लाह बोल

695
00:49:02,680 --> 00:49:06,960
रहे तो अल्लाह के बारे में हमें पता होगा कि वेल नोन वो अल्लाह कौन है

696
00:49:06,960 --> 00:49:11,240
तो हम कहेंगे भैया देखो हम अल्लाह बोल तो रहे हैं मगर इसको वो अल्लाह मत समझना जो तुम्हारी

697
00:49:11,240 --> 00:49:15,320
कुरान से प्रतिपादित हो रहा है हा ये नाम का खेल खेल रहे

698
00:49:15,320 --> 00:49:19,400
ना तो आप इस पर सुनिए कि जब हम ये बोल रहे होंगे ना तो उस अल्लाह

699
00:49:19,400 --> 00:49:23,680
को मत लेना कुरान से प्रतिपादित हो रहा है फिर हम तो ये कहेंगे ना ये अल्लाह शब्द

700
00:49:23,680 --> 00:49:27,880
नाम हो सकता है मगर वो अल्लाह नहीं जो कुरान से प्रतिपादित हो रहा है या यहोवा

701
00:49:27,880 --> 00:49:31,760
शब्द की बात हो सकती मगर वो यहोवा नहीं जो बाइबल से प्रतिपादित हो रहा है

702
00:49:31,760 --> 00:49:35,880
अरे सिंपल सी बात है जिस तरह हमने भगवान बुद्ध को स्वीकार किया उनका

703
00:49:35,880 --> 00:49:40,040
सिद्धांत को स्वीकार नहीं किया हमने अपने भागवत के श्लोक को स्वीकार किया भ

704
00:49:40,040 --> 00:49:44,280
हमने भगवान बुद्ध को इसलिए स्वीकार किया है क्योंकि हमारे प्रमाणिक जो आश ग्रंथ

705
00:49:44,280 --> 00:49:48,480
है उनमें उनका उल्लेख है अल्लाह का उल्लेख नहीं है यहोवा का उल्लेख

706
00:49:48,480 --> 00:49:52,640
नहीं है हमारे य बिल्कुल नहीं है तो उ सिद्धांत को नहीं माना लेकिन ये तो शलोक

707
00:49:52,640 --> 00:49:56,840
मानो अरे ऐसे कैसे हम श को मानते हैं ना शास्त्र

708
00:49:56,840 --> 00:50:01,000
को मानेंगे व्यक्तिगत तर्क को मानेंगे आप समझ नहीं शास्त्र ही कह रहा है अनेको

709
00:50:01,000 --> 00:50:05,160
नाम है तो अनेकों नाम है तो हम जब जब जब हम ये

710
00:50:05,160 --> 00:50:09,400
जान जब हम यह जानते हैं कि हम जो नाम ले रहे हैं वो वेल

711
00:50:09,400 --> 00:50:13,520
नोन नेम है दुनिया जानती है कि वो नाम किसका है तो हम ये

712
00:50:13,520 --> 00:50:17,600
जब कहेंगे तो हम ये बात तो याद दिलाएंगे कि हम जब अल्लाह कह रहे हैं तो हम एक परम शक्ति की बात कर

713
00:50:17,600 --> 00:50:21,720
रहे हैं उस शक्ति की बात नहीं कर रहे जो कुरान के द्वारा प्रतिपादित हो रही है तो हम

714
00:50:21,720 --> 00:50:25,760
उतना ही हम कभी कुरान का प्रचार करते हैं इसको हमने देखा कुरान का प्रचार करते हुए अरे

715
00:50:25,760 --> 00:50:30,120
तो ये भी एक मैं प्रचार की बात ही नहीं कर रहा खूब करिए भाई वो भी वो भी एक आइडल

716
00:50:30,120 --> 00:50:34,200
जीी है जैसे आपकी आइडल जीी वैसे उनकी आइडल जीी है उनका कोई वो थोड़ी ना है ठीक

717
00:50:34,200 --> 00:50:38,200
है अपनी अपनी आईडियोलॉजी मगर मैं यह कह रहा हूं क्या कृष्ण

718
00:50:38,200 --> 00:50:42,560
यानी भगवत गीता के द्वारा प्रतिपादित होने वाला ईश्वर और कुरान के द्वारा प्रतिपादित

719
00:50:42,560 --> 00:50:47,200
होने वाला ईश्वर एक है तो आपने कहा नहीं है नहीं है

720
00:50:47,200 --> 00:50:51,600
अब मेरे जो अगले सवाल है वो ये है कि अगर आप सिर्फ नाम को यूज कर रहे हैं

721
00:50:51,600 --> 00:50:55,720
तो आपको फिर यह साथ में बोलना चाहिए ना इतना वेल नोन नेम है पूरी दुनिया

722
00:50:55,720 --> 00:50:59,800
जानती है कि अल्लाह कौन है तो जब आप कहते हो कि कृष्ण और अल्लाह एक है तो आपको कहना चाहिए

723
00:50:59,800 --> 00:51:03,880
मैं उस अल्लाह की बात नहीं कर रहा जो कुरान से प्रतिपादित हो रहा है देखिए हम जैसे

724
00:51:03,880 --> 00:51:08,000
समझाते हैं हम ये समझाते हैं परम सत्य को अनेको नाम से बोला जाता है राम आप

725
00:51:08,000 --> 00:51:12,280
यहां पर घुमा रहे हो आप भी वहां पर लोगों को घुमा ही रहे हो उनको जोड़ने

726
00:51:12,280 --> 00:51:16,480
के लिए सही व देखिए ये दुनिया देखेगी ये वीडियो आप

727
00:51:16,480 --> 00:51:20,640
उन लोगों को घुमा ही रहे हो ठीक है आप लोगों को घुमा रहे हो कि भाई कृष्ण

728
00:51:20,640 --> 00:51:24,760
अल्लाह एक है तो जब आपसे प्रश्न किया गया कि कृष्ण अल्ला एक है तो भैया आपने कह

729
00:51:24,760 --> 00:51:28,840
दिया हजारों नाम हो सकते वा वा क्या बात है नहीं तो आप क्या चाहते

730
00:51:28,840 --> 00:51:32,920
हो सनातन धर्म ना अपनाए कृष्ण नहीं अपनाए बिल्कुल अपनाए मगर सत्य

731
00:51:32,920 --> 00:51:37,120
के साथ अपनाए कृष्ण को कृष्ण जानते हुए अपनाए बिल्कुल

732
00:51:37,120 --> 00:51:41,160
अपनाए कृष्ण को कृष्ण जानते हुए राम को राम जानते हुए ईश्वर को

733
00:51:41,160 --> 00:51:45,320
ईश्वर जानते हु ब्रह्म को ब्रह्म जानते हुए चोटी र ये नहीं नहीं

734
00:51:45,320 --> 00:51:49,400
भाई हमारा कृष्ण तुम्हारे ही जैसा है तो इसलिए कृष्ण का नाम जपो साब

735
00:51:49,400 --> 00:51:53,800
अरे कौन सा नमाज पढ़ते हुए देख लि तुमने नहीं देखा ना ये बात

736
00:51:53,800 --> 00:51:57,920
बाद की है और आप करके बात कर रहा तो कपया आपसे मुझे अपेक्षा

737
00:51:57,920 --> 00:52:02,080
करता हूं कि आप भी आप करके बात करें बिल्कुल आप बो आपने

738
00:52:02,080 --> 00:52:03,080
क

739
00:52:03,080 --> 00:52:07,440
हम मुस्लिम धर्म का प्रचार कर नहीं नहीं भागवत का जो हमारे शास्त्र

740
00:52:07,440 --> 00:52:11,440
में जो जो बताया अनेक रूप आपके द्वारा खित होने वाला जो ईश्वर

741
00:52:11,440 --> 00:52:15,640
है व सेम वैसा ही ईश्वर है जो ईश्वर बाइबल और कुरान

742
00:52:15,640 --> 00:52:20,520
के द्वारा प्रतिपादित होता है तो आडलज आप दुनिया को दे क्या रहे हो

743
00:52:20,520 --> 00:52:24,640
आइजी दे रहे हो ब्रा चलिए र दो चीज थी एक

744
00:52:24,640 --> 00:52:28,720
वो आपने वो परमार्थिक है वहां पर आपका वो चीज कट गई कि भाई वो

745
00:52:28,720 --> 00:52:32,720
अपने मूल रूप से आए थे जो मेन था कि दूध से दही बनता

746
00:52:32,720 --> 00:52:36,720
है तो आपने कहा कि वो परमार्थिक क्रिया है यानी कि व व्यवहारिक क्रिया

747
00:52:36,720 --> 00:52:40,800
नहीं है और व्यवहारिक क्रिया नहीं है इसका मतलब वहा जो व रूप है जो

748
00:52:40,800 --> 00:52:44,920
रंग है वो है वो जो मनुष्य है उसके व्यवहार का विषय

749
00:52:44,920 --> 00:52:49,040
नहीं है आपने स्वीकार किया उस व्यवहार का विषय

750
00:52:49,040 --> 00:52:53,080
नहीं है वो तो जब भगवत प्राप्ति होगी तब समझ में आएगा लेकिन जब लौकिक

751
00:52:53,080 --> 00:52:57,520
प्रक्रिया होती है तो उसम समझाने के लिए दूध और दही का एग्जांपल लिया जाता है ना

752
00:52:57,520 --> 00:53:01,760
नहीं वो मैंने आपका मान लिया मैंने ये इससे निष्कर्ष निकाला

753
00:53:01,760 --> 00:53:05,960
कि जो आपके अनुसार भी आप कह रहे हो कि भगवान के दो रूप है एक व्यवहार

754
00:53:05,960 --> 00:53:10,240
का विषय और एक अव्यावहारिक भाई आप क्यों बारबार मेरे अपने मत को मेरे

755
00:53:10,240 --> 00:53:14,720
मत प छ मैंने कब बोला भगवान के आप घुमा फिरा के बात तो वही बोल रहे हो

756
00:53:14,720 --> 00:53:18,080
वही बोल रहे हो सुनिए ये अद सिद्धांत है

757
00:53:18,080 --> 00:53:22,160
भगवान के अपना बता दीजिए आप अपना बता दीजिए यह मनुष्य के व्यवहार

758
00:53:22,160 --> 00:53:26,760
का विषय है कि नहीं ये जो क्रिया है कि वो जो भगवान

759
00:53:26,760 --> 00:53:31,000
श्री कृष्ण शिव बनते हैं मगर शिव बनने के बाद वापस कृष्ण नहीं बन सकते

760
00:53:31,000 --> 00:53:35,480
मैंने ये नहीं बोला मैंने बोला कृष्ण से प्रकट होते हैं कृष्ण में समा जाते हैं

761
00:53:35,480 --> 00:53:39,760
कृष्ण से प्रकट होते हैं कृष्ण से कृष्ण में समा जाते हैं

762
00:53:39,760 --> 00:53:44,080
अच्छा जितनी देर वो कृष्ण से प्रकट हुए हैं उतनी देर वो पूर्ण

763
00:53:44,080 --> 00:53:48,440
ऐश्वर्य वान है कि नहीं कौन जो शिव है

764
00:53:48,440 --> 00:53:53,080
क्यों नहीं तो पूर्ण ऐश्वर्य वान है सर्वशक्तिमान वो भी है उस समय

765
00:53:53,080 --> 00:53:57,080
मैंने क्या बोला आपने स्टार्टिंग में पूछा था मैंने तभी बोला अभी अभी मैं क्लियर कर

766
00:53:57,080 --> 00:54:01,320
रहा हूं एक एंडिंग एंडिंग सेशन का एंडिंग कर रहा हूं मैं पूछ रहा हूं

767
00:54:01,320 --> 00:54:05,400
कि जितनी देर वो प्रकट हुए हैं अपने आप में वो शिवजी सर्वशक्तिमान है

768
00:54:05,400 --> 00:54:09,640
सब कुछ कर सकने वाले हैं कि नहीं भगवान सचिदानंद है कि

769
00:54:09,640 --> 00:54:13,840
नहीं बिल्कुल सच्चिदानंद आप का लेक्चर सुनिए

770
00:54:13,840 --> 00:54:17,880
बोला गया भगवान हा भगवान शिव का जो है भगवान

771
00:54:17,880 --> 00:54:22,600
कृष्ण भेद नहीं है तो देखिए जब आपने ये मान लिया कि जितनी देर वो

772
00:54:22,600 --> 00:54:26,680
मैंने आपने जब ये मान लिया कि जितनी देर शिवजी प्रकट हुए वो भी पूर्ण

773
00:54:26,680 --> 00:54:30,720
है तो बात ही खत्म हो गई जब शिवजी भी पूर्ण है तो फिर कोई बात ही नहीं है

774
00:54:30,720 --> 00:54:33,600
फिर तो कोई भेद ही नहीं रहा अब यहां पर तो आपकी जो आडलज

775
00:54:33,600 --> 00:54:37,880
है वो विरुद्ध दिख रही है मुझे इस कन के अब यहां प तो आपने उसके विरुद्ध अगेंस्ट

776
00:54:37,880 --> 00:54:42,040
लॉजी और ये जो अगर आप चाहे तो अब हम दूसरी चर्चा

777
00:54:42,040 --> 00:54:46,120
कर सकते हैं मधवा चार्य चैतन्य महाप्रभु जो भी आपको बोलनी

778
00:54:46,120 --> 00:54:50,480
है बिल्कुल लेकिन ये जो आईडियोलॉजी मैंने बोली ये गडिया

779
00:54:50,480 --> 00:54:54,720
वैष्णव स्कोन का सिद्धांत है आपको एक नहीं कम से कम दस लेक्चर दिखा दूंगा

780
00:54:54,720 --> 00:54:58,880
जिसमें अमोग लीला प्रभु सहित बहुत सारे लेक्चर में बोला है कि भगवान

781
00:54:58,880 --> 00:55:03,760
शिव में और कृष्ण में भेद नहीं है लेकिन आदि कारण हम कृष्ण को मानते हैं

782
00:55:03,760 --> 00:55:07,840
समझ रहे आप नहीं देखिए 2.2 की व्याख्या

783
00:55:07,840 --> 00:55:11,840
में आपकी भगवत गीता एज इट इज में लिखा हुआ है कि ये

784
00:55:11,840 --> 00:55:16,560
जो ब्रह्मा विष्णु और शिव विष्णु और ब्रह्मा

785
00:55:16,560 --> 00:55:20,800
ये तीनों ही जीव है और ये कृष्ण की तरह पूर्ण ऐश्वर्य

786
00:55:20,800 --> 00:55:26,400
वान नहीं है ये लिखा है बोल के देखिए नहीं सुनिए

787
00:55:26,400 --> 00:55:30,560
अब आप पली आप कह रहे हो कि वो पूर्ण श्वान है जब

788
00:55:30,560 --> 00:55:34,600
आप डीली जाएंगे तब ना आप गही से पढ़ते नहीं आप ब्रम समता भी

789
00:55:34,600 --> 00:55:38,680
सही से पढ़ेंगे तो उसम सदाशिव ब्रम समता तो र बाद में चलिए

790
00:55:38,680 --> 00:55:42,960
आप ये बताइए वो पूण आप ये मानते हो शिव भगवान भी पूर्ण स्वान

791
00:55:42,960 --> 00:55:46,960
है सुनि आपने अभी दो दो ब्रह्मा जी की बात करी इसलिए

792
00:55:46,960 --> 00:55:49,280
थोड़ा डिटेल में समझा दे रहा आपको

793
00:55:49,280 --> 00:55:53,400
ब्रह्मा और शिव भी दो प्रकार के होते हैं सदाशिव और शिव

794
00:55:53,400 --> 00:55:57,400
और जो ब्रह्मा होते वो भी दो होते आपने कभी पुराणों में पढ़

795
00:55:57,400 --> 00:56:01,520
होगा एक जीव ब्रह्मा होते है एक स्वा ब्रह्मा होते है जब जी ब्रह्मा किसी पोस्ट पर

796
00:56:01,520 --> 00:56:06,320
नहीं होता है होते हैं संभालने के लिए तो स्वयं अंश अपना

797
00:56:06,320 --> 00:56:10,880
भगवान कृष्ण स्वयं बन जाते ब्रह्मा ये ये आपन की आइजी

798
00:56:10,880 --> 00:56:15,520
बता रहे हो यानी कि एक जो नारायण जीव है नारायण नाम का जो जीव है

799
00:56:15,520 --> 00:56:19,680
प्लीज इस शब्द को वापस ले क्योंकि आईडियोलॉजी पूरे वृंदावन की पूरे

800
00:56:19,680 --> 00:56:23,800
वैष्णव संप्रदाय की वो मैं आऊंगा पूरे वैष्णव संप्रदाय की है कि नहीं

801
00:56:23,800 --> 00:56:27,880
मैं आपको अभी खोल के दिखा लजी आप मेरे पास किताब सामने है

802
00:56:27,880 --> 00:56:31,960
मैं खोल के दिखाऊंगा आपको आडलज नम ये सिद्धांत सारे

803
00:56:31,960 --> 00:56:35,960
वृंदावन के आचार्य का है चाहे कृपालु महाराज का ले लीजिए आप चाहे प्रेमानंद महाराज

804
00:56:35,960 --> 00:56:40,120
का ले लीजिए चाहे प्रेमानंद महाराज तो साफ कहते हैं जैसे

805
00:56:40,120 --> 00:56:44,160
दो आख वैसे हरि हर में कोई अंतर नहीं है इसके

806
00:56:44,160 --> 00:56:48,560
आगे य नहीं कहते अंतर है इसके आगे अंतर है आप कहते हैं अरे

807
00:56:48,560 --> 00:56:52,640
उनका आप पूरा लेक्चर सुनिए उन्होंने खुद बोला है कि भगवान कृष्ण से प्रकट होते

808
00:56:52,640 --> 00:56:56,760
हैं ब्रह्मा विष्णु महेश और अने कृष्ण तो भगवान कृष्ण से

809
00:56:56,760 --> 00:57:00,880
प्रकट होते हैं तो कृष्ण और शिव में कोई अंतर नहीं है ना यानी कि जब

810
00:57:00,880 --> 00:57:05,240
जहां पर जिस कृष्ण की बात हो रही है वहीं पर शिव की भी बात हो रही है

811
00:57:05,240 --> 00:57:09,360
जैसे जीव ब्रह्मा होते हैं आपने गीता का श्लोक पढ़ा होगा कि ब्रह्म लोक तक

812
00:57:09,360 --> 00:57:13,760
जाके भी वहां देखिए ये एक एक पॉइंट क्लियर करते चले

813
00:57:13,760 --> 00:57:17,760
एक बात ये हो रही है क्या जितनी देर वो प्रकट होते हैं

814
00:57:17,760 --> 00:57:22,680
शिव जी वो सर्वशक्तिमान और पूरी तरीके से कृष्ण के बराबर

815
00:57:22,680 --> 00:57:26,760
पावर रखने वाले होते हैं कि नहीं ब्रह्मांड को संचालित करने वाले

816
00:57:26,760 --> 00:57:30,920
होते हैं कि नहीं बिल्कुल होते हैं क्यों नहीं होते वो पूर्ण

817
00:57:30,920 --> 00:57:35,440
ईश्वर होते हैं बिल्कुल आदि आदि कारण हमने माना कृष्ण

818
00:57:35,440 --> 00:57:39,480
को आपने माना मगर वो शिव जी जब प्रकट होते हैं आपके अनुसार तो वो

819
00:57:39,480 --> 00:57:43,520
पूर्ण ही होते हैं अपूर्ण नहीं होते हैं अपूर्ण े अपूर्ण होंगे तो वो ईश्वर नहीं है

820
00:57:43,520 --> 00:57:47,680
फिर हां तो अब देखिए यहां प देखिए यहां प वही वाला कैच

821
00:57:47,680 --> 00:57:51,840
है जैसे आप कह रहे हो ना वहां पूर्ण वाले को आप कह रहे हो कि चलो चलो कृष्ण को पकड़ो खैर

822
00:57:51,840 --> 00:57:57,840
मैं आपको अभी भगवत गीता दिखा देता हूं

823
00:57:59,720 --> 00:58:03,720
कार्तिक जी पूछ रहे हैं डेमी गोड किस शास्त्र में लिखा है मुझे बताइए

824
00:58:03,720 --> 00:58:08,480
कि महादेव का कौन सा शब्द होता है इंग्लिश में

825
00:58:08,480 --> 00:58:12,480
अंग्रेजों को महादेव का शब्द भैया महादेव होता है इंग्लिश में कृष्ण का

826
00:58:12,480 --> 00:58:16,640
कौन सा शब्द होता है इंग्लिश में अच्छा महादेव कहने आप ना

827
00:58:16,640 --> 00:58:20,680
ये बहलाने वाली बातें बंद करिए महादेव का कौन सा शब्द होता

828
00:58:20,680 --> 00:58:25,160
है भाई कृष्ण को इंग्लिश में आप कृष्ण कह रहे हो तो महादेव को महादेव को

829
00:58:25,160 --> 00:58:29,280
अरे गड क्यों उनके लिए आपको अंग्रेजी का शब्द चाहिए क्यों

830
00:58:29,280 --> 00:58:33,680
भगवान के लिए गॉड यूज होता है नहीं होता है आपने कहा ना वो भी भगवान है

831
00:58:33,680 --> 00:58:37,680
अरे महादेव शब्द के लिए हमें यूज करना पड़ा क्योंकि अंग्रेजी में ऐसा कोई शब्द था

832
00:58:37,680 --> 00:58:41,720
नहीं अरे भैया तो आपने तो माना ना कि भगवा वो भी भगवान है गॉड शब्द

833
00:58:41,720 --> 00:58:45,840
यूज करो आप उनको क्यों नहीं कर रहे सुनिए जब हमें

834
00:58:45,840 --> 00:58:49,880
सुप्रीम पर्सनालिटी कृष्ण को इंग्लिश में कृष्ण कहोगे महादेव के लिए आपको शब्द

835
00:58:49,880 --> 00:58:54,240
चाहिए इंग्लिश वाला अरे कृष्ण नाम है कृष्ण

836
00:58:54,240 --> 00:59:00,240
नाम है और भगवान जो है उनका

837
00:59:01,120 --> 00:59:05,480
तत्व दो प दो यह देखिए

838
00:59:05,480 --> 00:59:09,600
इसमें आपको शायद दिख रहा हो आपने पढ़ा होगा य

839
00:59:09,600 --> 00:59:13,680
वाला कि नहीं बिल्कुल है मेरे तोय आप

840
00:59:13,680 --> 00:59:16,920
इसम पास में जाके दिखा रहा हूं एक

841
00:59:16,920 --> 00:59:21,760
मात्र कृष्ण ही ऐसा दावा कर सकते हैं

842
00:59:21,760 --> 00:59:25,880
क्योंकि वह भगवान है ब्रह्मा

843
00:59:25,880 --> 00:59:26,880
शिव

844
00:59:26,880 --> 00:59:30,920
नारायण दिख रहा हो सभी को आशा करता हूं

845
00:59:30,920 --> 00:59:35,080
सहित कोई भी जीव 2 ना हा कृष्ण

846
00:59:35,080 --> 00:59:40,320
के समान पूर्ण ऐश्वर्य वान नहीं है आपने कहा वो कृष्ण के समान ही

847
00:59:40,320 --> 00:59:46,320
है 2 प2 बोला आपने

848
00:59:47,320 --> 00:59:51,760
जी कौन सी लाइन है ये

849
00:59:51,760 --> 00:59:56,520
इसकी व्याख्या में है

850
00:59:56,520 --> 01:00:02,000
व्याख्या देखिए नेक्स्ट पेज 5 नंबर पेज

851
01:00:02,000 --> 01:00:05,680
आ

852
01:00:05,680 --> 01:00:10,440
मिली ऊपर से न टूथ पहला पैराग्राफ छोड़ करके न टूथ

853
01:00:10,440 --> 01:00:16,440
फ फिथ लाइन में

854
01:00:20,960 --> 01:00:26,160
है अच्छा य

855
01:00:26,160 --> 01:00:30,200
आप हां अब देखिए अब यही तो मुझे समझ में नहीं आता आप सही

856
01:00:30,200 --> 01:00:34,800
से क्यों नहीं पढ़ते जब मैंने आपको पहले बोल दिया कि भगवान के दो स्वरूप होते हैं एक विवांश

857
01:00:34,800 --> 01:00:38,800
एक स्वांश इसमें क्या बोला है ब्रह्मा शिव या नारायण

858
01:00:38,800 --> 01:00:43,000
कोई भी जीव श्री कृष्ण के जीव के लिए यूज हुआ है विनाश के

859
01:00:43,000 --> 01:00:47,160
लिए मैंने बो ये लोग जीव

860
01:00:47,160 --> 01:00:51,360
है अरे आप समझ ही नहीं रहे हो शिव जी और ब्रह्मा

861
01:00:51,360 --> 01:00:55,520
जी भी ये दो प्रकार के होते हैं नारायण सुनिए आप गीता

862
01:00:55,520 --> 01:00:59,520
का श्लोक तो टाल नहीं सकते गीता में बताया है ना कि ब्रह्म लोक तक जाने के बाद वापस आ जाते

863
01:00:59,520 --> 01:01:03,600
हैं उस मैं नारायण पूछ रहा हूं नारायण भी दो प्रकार के होते

864
01:01:03,600 --> 01:01:07,640
हैं जब ब्रह्मांड में रचना होती है तो ब्रह्मा विष्णु महेश हर

865
01:01:07,640 --> 01:01:11,960
जीव का एक अलग स्वरूप बनाते है जैसे कि विष्णु जो है वो तीन प्रकार के अब आप

866
01:01:11,960 --> 01:01:16,000
वो भी नहीं मानोगे कारण वो वो ठीक है वो

867
01:01:16,000 --> 01:01:20,160
बात करेंगे आप मुझे प्रूव करिए कि जो नारायण स्वरूप है वो पूर्ण पूर्ण

868
01:01:20,160 --> 01:01:20,800
श्वा

869
01:01:20,800 --> 01:01:24,800
नहीं है पहले मेरे को ये बताइए आपने श्लोक में ये पूरा क्यों नहीं पढ़ा यहां पर

870
01:01:24,800 --> 01:01:28,920
जीव शब्द यूज हुआ है ईश्वर शब्द नहीं जीव मैंने पढ़ा अभी पूरा पढ़ा जीव के साथ पढ़ा

871
01:01:28,920 --> 01:01:33,120
मैंने तो ये जीव क्यों माने जा रहे हैं और अगर जीव माने

872
01:01:33,120 --> 01:01:37,400
जा रहे हैं आप ये मान रहे हो कि भगवान के दो स्वरूप हो रहे हैं जितनी भी

873
01:01:37,400 --> 01:01:41,800
क्रियाए हो रही है आध्यात्मिक उनके दो स्वरूप हो रहे हैं एक व्यवहारिक और एक परमार्थिक

874
01:01:41,800 --> 01:01:46,720
तो फिर आप आपकी वो चीज खंडित होती है कि आप इसको दुनिया को माया नहीं मानते

875
01:01:46,720 --> 01:01:51,200
हैं सु पहले प पहले वाले का आंसर देता हूं हा

876
01:01:51,200 --> 01:01:55,280
आपके सिद्धांत में ये मानते हो ना मानते हो लेकिन हमारे व सिद्धांत में ये

877
01:01:55,280 --> 01:01:59,360
मानते हैं कि हर कोई ब्रह्मा तक बन सकता है और रुद्र के

878
01:01:59,360 --> 01:02:04,280
भगवान शंकर के 11 में रुद्र तक पोस्ट ले सकता है

879
01:02:04,280 --> 01:02:08,680
हा तो उन जीव की बात हो रही है य पर नहीं

880
01:02:08,680 --> 01:02:12,760
मतलब कि परमार्थिक जीव या व्यवहारिक लौकिक जीव

881
01:02:12,760 --> 01:02:17,000
ये आप अपने सिद्धांत मत करिए ना कि परमार और लक अरे भाई

882
01:02:17,000 --> 01:02:21,160
मनुष्य को समझ में आने वाला ईश्वर का रूप है ये

883
01:02:21,160 --> 01:02:25,920
या मनुष्य को समझ में ना आने वाला ईश्वर का रूप है ये

884
01:02:25,920 --> 01:02:30,120
भगवान भगवान अपने एक चेला अपने गुरु

885
01:02:30,120 --> 01:02:34,440
को भी नहीं समझ सकता भगवान को क्या समझेगा नहीं क्यों नहीं राम जी को समझते

886
01:02:34,440 --> 01:02:35,960
हैं हम देखते हैं कंधा इधर से चालू

887
01:02:35,960 --> 01:02:40,040
हुआ इधर तक खत्म हुआ यह नाक है भगवान के दो क्वालिटीज हो गई ना

888
01:02:40,040 --> 01:02:44,120
एक परमार्थिक और एक व्यवहारिक ये हमारा सिद्धांत है मगर आप जब ये कहते

889
01:02:44,120 --> 01:02:48,400
हो कि दुनिया माया नहीं है ये दुनिया जो है भ्रम नहीं है अभी आपने गीता

890
01:02:48,400 --> 01:02:52,520
खोली उसी में आगे लिखा है नहीं लिखा कि ना मुझे देवता गढ जानते ना मुझे ऋषि

891
01:02:52,520 --> 01:02:56,520
मुनि जानते अरे तो तो वो उसम य भी तो उसम

892
01:02:56,520 --> 01:03:00,640
ये भी तो लिखा है मैं राम हूं मैं सिंह हूं मैं ये हूं मैं वो हूं

893
01:03:00,640 --> 01:03:04,720
ये भी तो लिखा है अब देखिए वो विषयात हो जाएगा शास्त्रार्थ

894
01:03:04,720 --> 01:03:08,760
करने नहीं बैठे हैं मैं एक बात पूछ रहा हूं आपसे क्या आप यह

895
01:03:08,760 --> 01:03:12,840
मानते हैं कि भगवान के दो स्वरूप होते हैं एक व्यवहारिक और एक

896
01:03:12,840 --> 01:03:17,120
परमार्थिक नहीं नहीं मानते नहीं मानते

897
01:03:17,120 --> 01:03:21,200
सुनिए मेरी बात भगवान के आप मुझे नहीं पता आपके सिद्धांत में क्या

898
01:03:21,200 --> 01:03:25,240
पढ़ा जाता है मेरे सिद्धांत में और विवांश पढ़ा जाता

899
01:03:25,240 --> 01:03:29,280
है विवांश तक पोस्ट हम ले सकते हैं व उपाधि हम ले सकते हैं

900
01:03:29,280 --> 01:03:33,520
भैया ये उपाधि की बात आ कहां से रही है मैं आपसे ये पूछ रहा हूं

901
01:03:33,520 --> 01:03:37,560
भगवान के दो स्वरूप होते हैं कि एक जो हम दिखाई दे रहा है एक जिसकी

902
01:03:37,560 --> 01:03:41,880
हम पूजा कर रहे हैं एक जो हम नहीं जानते कि वो क्या है मामला तो

903
01:03:41,880 --> 01:03:45,920
ये जो दो स्वरूप है आप मान रहे हैं कि नहीं मान रहे हैं हमें हमें कौन सा दिखाई दे रहा है

904
01:03:45,920 --> 01:03:49,960
मैं समझा नहीं भाई आपने जैसे कहा कि ये जो ब्रह्मा विष्णु महेश

905
01:03:49,960 --> 01:03:51,040
है जीव की बात हो रही

906
01:03:51,040 --> 01:03:55,160
है तो ये जीव जो है मनुष्य के व्यवहार का विषय वाला जीव मतलब वो विष्णु

907
01:03:55,160 --> 01:03:59,160
है जिसकी पूजा होती है वो विष्णु है जिसको परमेश्वर माना जाता

908
01:03:59,160 --> 01:04:03,200
है वो शिव है जिसको परमेश्वर माना जाता है उसकी बात हो रही है यहां

909
01:04:03,200 --> 01:04:07,440
पर या फिर कोई और किसी और परलोक में कोई छोटे

910
01:04:07,440 --> 01:04:12,000
मोटे विष्णु बना दिए गए हैं उनकी बात हो रही है ये यह जीव वह है

911
01:04:12,000 --> 01:04:16,760
जो माया से परे हो गया है लेकिन सदा जीव ही रहेगा

912
01:04:16,760 --> 01:04:21,040
मतलब पारलौकिक बात है ना ये हा तो इसका अर्थ

913
01:04:21,040 --> 01:04:25,040
ये हुआ कि आपके यहां भी दो चीजें मानी जा रही है कि य अच्छा यहां का जो विष्णु

914
01:04:25,040 --> 01:04:29,120
है वो अलग है ना फिर जिसको हम परमेश्वर मानते हैं धरती

915
01:04:29,120 --> 01:04:33,240
पर आप मुझे पता नहीं आप क्या समझाना चाह रहे हो धरती पर आप

916
01:04:33,240 --> 01:04:37,720
किस विष्णु की बात कर रहे हो चलिए खैर चलिए ये टॉपिक ये टॉपिक

917
01:04:37,720 --> 01:04:41,800
ये टॉपिक फिर ये टॉपिक छोड़ दीजिए ये बड़ा होता जा रहा है और

918
01:04:41,800 --> 01:04:45,920
भी हमारे पास ब्रह्मांड के विष्णु होते हैं धरती के विष्णु नहीं होते हैं

919
01:04:45,920 --> 01:04:49,960
क्या विष्णु ब्रह्मांड के होते हैं धरती के नहीं होती मैं वो पूछ रहा

920
01:04:49,960 --> 01:04:54,120
हूं जिस विष्णु की हम पूजा करते हैं ओम जय जगदीश हरे हां

921
01:04:54,120 --> 01:04:58,400
विष्णु भगवान जो शेष नाग पर लेटते हैं लक्ष्मी माता उनके पैर दबाती

922
01:04:58,400 --> 01:05:02,400
है वो आपके सिद्धांत मानते है एक बा आपके

923
01:05:02,400 --> 01:05:06,960
विष्णु है ही नहीं क्या हम विष्णु को सर्वोपरि मानते हैं

924
01:05:06,960 --> 01:05:11,080
सर्वोपरि मतलब माया माया नहीं मान

925
01:05:11,080 --> 01:05:15,400
मैं माया मतलब आपका कहने का मतलब है व माया मतलब यह मनुष्य की आंखों

926
01:05:15,400 --> 01:05:19,640
से देखे जा सकने वाले नहीं है विष्णु नहीं अगर भगवान

927
01:05:19,640 --> 01:05:24,360
कृपा करेंगे वो दिव दृष्टि देंगे तो मगर फिलहाल उने क्र

928
01:05:24,360 --> 01:05:28,480
नहीं है कि विष्णु को आप विष्णु आपकी आंखों का विषय बने नहीं

929
01:05:28,480 --> 01:05:32,560
जब तक भगवत कृपा नहीं होगी कैसे देख सकते वो एक अलग बात है कि भगवत कृपा

930
01:05:32,560 --> 01:05:37,480
हुई कि नहीं भगवत कृपा नहीं होगी तो मैं आपसे बात नहीं कर पाऊंगा भाई साहब व

931
01:05:37,480 --> 01:05:41,560
भगवत कृपा नहीं होगी तो मैं आपसे बात ही नहीं कर पाऊंगा कहने का अर्थ ये हुआ कि जो

932
01:05:41,560 --> 01:05:45,680
विष्णु का स्वरूप भागवत में भागवत के अनुसार य मूर्तियां बनाई गई है

933
01:05:45,680 --> 01:05:50,000
वो सारे जो वो है वो व्यवहार के विषय नहीं है मगर मूर्तियां बना दी गई

934
01:05:50,000 --> 01:05:55,920
है नहीं नहीं नहीं अच्छा आप य ले जा

935
01:05:55,920 --> 01:06:00,200
देखिए डिपेंड करता है कि आपकी पात्रता क्या है आपकी पात्रता

936
01:06:00,200 --> 01:06:04,200
जितनी होगी ना उस मूर्ति में भगवान उतने ही प्रकट होंगे अगर आप मूर्ति

937
01:06:04,200 --> 01:06:08,320
के भाव से देखोगे तो मूर्ति ही रहेगी लेकिन अब उसम ईश्वर का भाव लेकर आओगे जितनी

938
01:06:08,320 --> 01:06:12,680
पात्रता आपकी साफ होगी उतना ही प्रकट मैं भाई साहब आप जो यह कह रहे हैं

939
01:06:12,680 --> 01:06:16,720
कि यह जो विष्णु है यह वो विष्णु नहीं है जिनको आप

940
01:06:16,720 --> 01:06:20,840
परमेश्वर नहीं कह सकते य अलग विष्णु है अलग विष्णु कह रहे है ना मैंने ऐसा

941
01:06:20,840 --> 01:06:23,000
बिल्कुल नहीं कहा

942
01:06:23,000 --> 01:06:27,120
मैंने ने कहा कि जैसे ब्रह्मा होते हैं वो जीव

943
01:06:27,120 --> 01:06:31,480
भी होते हैं और भगवान के स्वरूप भी होते हैं और जैसे शिव होते हैं उनके 11 रुद्र

944
01:06:31,480 --> 01:06:35,600
में एक रुद्र की उपाधि हम ले सकते हैं उन उनके बारे में गीता

945
01:06:35,600 --> 01:06:39,600
में बताया तो उनके बारे में बताया है तो वही विष्णु तो यहां

946
01:06:39,600 --> 01:06:43,600
पर सर्व शक्तिमान है जिनकी हम पूजा कर रहे हैं तुम पूर्ण परमात्मा तुम

947
01:06:43,600 --> 01:06:48,120
अंतर्यामी पारम परमेश्वर तुम सबके स्वामी वही विष्णु है अलग है

948
01:06:48,120 --> 01:06:52,240
नहीं वही है और कौन से वही है तो जब वही है तो उनके लिए

949
01:06:52,240 --> 01:06:56,360
क्यों लिखा है कि तुम पूर्ण ऐश्वर्य वान नहीं अच्छा आप ये कह रहे कि वो

950
01:06:56,360 --> 01:07:00,600
विष्णु एक रोल निभाने जा रहे हैं जब जीव का तब कहा जा रहा है एक सिंपल

951
01:07:00,600 --> 01:07:04,960
सा आंसर बताता भागवत कान मध्यम

952
01:07:04,960 --> 01:07:09,040
ब्रहम परमा भगवान शब्द य हुआ

953
01:07:09,040 --> 01:07:13,280
है निराक तीनों एक है उसम य हु तीनों

954
01:07:13,280 --> 01:07:17,360
एक है निराकार ब भगवान कृष्ण का ही रूप है है लेकिन

955
01:07:17,360 --> 01:07:21,760
उसम सार शक्तिया प्रकट नहीं होती परमात्मा तीन स्वरूप का होता है कारणो

956
01:07:21,760 --> 01:07:25,800
शरो और गर्भ लेकिन उनमें भी लिमिटेड शक्तियां

957
01:07:25,800 --> 01:07:29,920
प्रकट होती है जैसे विष्णु उनमें भी लिमिटेड होती है भाई साहब

958
01:07:29,920 --> 01:07:34,280
मैं एक सिद्धांत आपको बता दूं असतो मा सद गमाया

959
01:07:34,280 --> 01:07:38,040
तमसो मा ज्योतिर गमाया मृत्युर मा अमृतम गमाया

960
01:07:38,040 --> 01:07:42,520
सत चित आनंद की चा है जहां से यह सारा

961
01:07:42,520 --> 01:07:47,120
जो सारी जो यात्रा है वो प्रारंभ होती है मनुष्य की

962
01:07:47,120 --> 01:07:51,280
उसके अंदर ये तीन तरह की चा है सत चित आनंद की चा

963
01:07:51,280 --> 01:07:55,440
सब कुछ कर सकने वाला बनने की चाह अगर इसका निचोड़ हम निकाल

964
01:07:55,440 --> 01:07:59,520
द मैंने अपने अन वीडियोस में इसके बारे में कई बार बातें की है सब कुछ कर

965
01:07:59,520 --> 01:08:04,000
सकने वाला बनने की चाह तो का नहीं

966
01:08:04,000 --> 01:08:08,000
आप सचित आनंद को य चा में कैसे कर रहे आनंद अलग होता है चाहत अलग

967
01:08:08,000 --> 01:08:12,120
होती है आनंद सत चित आनंद भैया जो

968
01:08:12,120 --> 01:08:16,160
ये मनुष्य जीव का जीव की चाहा य बताई जा रही है ये जो बात

969
01:08:16,160 --> 01:08:20,200
देखिए जैसे मैंने आपकी बात सुनी ना पूरी अब मुझे कह लेने दीजिए

970
01:08:20,200 --> 01:08:24,880
असतो मा सद गम तमसो मा जति गम मत

971
01:08:24,880 --> 01:08:28,880
इसके अनुसार प्रत्येक जीव इसी के आधार पर हम नास्तिकता

972
01:08:28,880 --> 01:08:33,000
का भी खंडन कर सकते हैं इसी के आधार पर इसके आधार इसके अनुसार

973
01:08:33,000 --> 01:08:37,520
प्रत्येक जीव की चा का चाह है कि वह जो है सच्चिदानंद

974
01:08:37,520 --> 01:08:41,720
स्वरूप को ढूंढ रहा है तो उस इस चा का जो विषय है ना

975
01:08:41,720 --> 01:08:45,800
वही होगा जो सच्चिदानंद स्वरूप हो मगर आप कई

976
01:08:45,800 --> 01:08:50,480
जगह पर विष्णु को बाधित कर रहे यानी कि वो इस चाह का विषय नहीं है

977
01:08:50,480 --> 01:08:53,280
आप कृष्ण को भी वादित कर रहे हैं क्योंकि वह दूध

978
01:08:53,280 --> 01:08:57,560
से दही बन सकता जब मैंने पूछा दूध से दही तोय पारलौकिक घटना है

979
01:08:57,560 --> 01:09:01,760
विष्णु को ऐसा कहा जाना पारलौकिक घटना है फिर आप कहते हैं कि यह दुनिया

980
01:09:01,760 --> 01:09:06,560
भ्रामक नहीं है आपकी अपनी कडिटिंग चल रही है

981
01:09:06,560 --> 01:09:10,760
आप आप क्या करते आप जवाब लेते लेकिन अपने तरीके से प्रकट

982
01:09:10,760 --> 01:09:15,160
करते आप क्लियर करके कुछ भी चल ही नहीं रहे शुरू से

983
01:09:15,160 --> 01:09:19,760
आपने ना तो दूध दही वाला क्लियर किया बिल्कुल ना ही आपने वो कृष्णला

984
01:09:19,760 --> 01:09:24,280
एक वाला क्लियर किया भल भल मैंने पूछा आपसे कि भैया य बता

985
01:09:24,280 --> 01:09:28,640
मान लो उनको मनाने के लिए प करते ठीक

986
01:09:28,640 --> 01:09:33,000
भगवान कृ प्रकट होते हैं उनमें लय हो जाते हैं

987
01:09:33,000 --> 01:09:37,280
कुछ तो आप ये मानते हो कि भगवान शिव भी पूर्ण ऐश्वर्य

988
01:09:37,280 --> 01:09:41,280
वान है भगवान भगवान शिव भी पूर्ण श्वर के

989
01:09:41,280 --> 01:09:45,480
साथ प्रकट होते हैं पूर्ण ऐश्वर्य वान है कि नहीं

990
01:09:45,480 --> 01:09:49,720
सर्वशक्तिमान है कि नहीं वहां पर कृष्ण के समान सर्वशक्तिमान है

991
01:09:49,720 --> 01:09:53,920
कि नहीं आपने शायद सही से पढ़ा नहीं है इसन

992
01:09:53,920 --> 01:09:58,120
बुक को वहां पर क्लियर बोला गया है कि शिवजी और कृष्ण

993
01:09:58,120 --> 01:10:02,200
भेद नहीं है लेकिन उनका मगर एक लाइन आगे जोड़ दना

994
01:10:02,200 --> 01:10:06,200
वो नहीं भेद है नहीं उनका आधार जो है

995
01:10:06,200 --> 01:10:08,640
वो कृष्ण है इसलिए अभेद भी है इसलिए

996
01:10:08,640 --> 01:10:12,680
यूज किया गया तो मैं वही बता रहा हूं जो भगवान शिव

997
01:10:12,680 --> 01:10:16,920
है वो सर्वशक्तिमान पूर्ण स्वान है कि नहीं आपने मुझसे इतने सवाल

998
01:10:16,920 --> 01:10:21,080
पूछे आपसे पूछना चाहता हूं क्या हम भगवान ईश्वर बन सकते

999
01:10:21,080 --> 01:10:25,400
हैं भगवान में समा सकते बिल्कुल सकते ईश्वर

1000
01:10:25,400 --> 01:10:29,520
बन सकते है ना बिल्कुल बन सकते हैं यही तो चा है ईश्वर यही तो मनुष्य

1001
01:10:29,520 --> 01:10:33,640
की चा है मगर यह जो है ईश्वर बन सकने वाली बात यह

1002
01:10:33,640 --> 01:10:37,640
परमार्थ का विषय व्यवहार में द्वैत है आदि शंकराचार्य जी

1003
01:10:37,640 --> 01:10:41,840
ने कहीं पर भी ऐसा नहीं किया कि द्वैत को माना ही नहीं द्वैत मनुष्य

1004
01:10:41,840 --> 01:10:46,160
को व्यवहार के विषय और जो अद्वैत है वो मनुष्य का परमार्थ का विषय है

1005
01:10:46,160 --> 01:10:50,240
जब आप द्वैत के मार्ग पर चलोगे तब आपको अद्वैत की प्राप्ति

1006
01:10:50,240 --> 01:10:54,440
होगी सुनि ईश्वर एक होता है नहीं बनते

1007
01:10:54,440 --> 01:10:58,520
ठीक है ना जब आपको जब आपको शिव को छोटा करना होता है तो

1008
01:10:58,520 --> 01:11:03,040
आप यह कहते हो जब आपको विष्णु को छोटा करना होता है हजार नहीं होते

1009
01:11:03,040 --> 01:11:07,280
फिर जब आपको जब आपको किसी को किसी को भ्रम फैलाना होता है तो आप कहते

1010
01:11:07,280 --> 01:11:11,360
हो नहीं भाई ईश्वर के हजारों नाम हो सकते हैं मैंने पहले स्वांश और विवांश की

1011
01:11:11,360 --> 01:11:15,560
परिभाषा आपको बता दी थी नहीं नहीं जैसे अभी आप कह रहे हो ईश्वर एक होता

1012
01:11:15,560 --> 01:11:19,800
हजार नहीं हो सकता ये आपको तब नहीं याद आता जब आप कृष्ण और अल्लाह को एक करते हो

1013
01:11:19,800 --> 01:11:23,680
य आपको तब नहीं याद आता जब आप कृष्ण यवा को एक करते हो वहा

1014
01:11:23,680 --> 01:11:27,920
तो नहीं ईश्वर के हजारों नाम हो सकते तो शिव क्यों नहीं हो सकता ईश्वर का नाम हमने कुरान

1015
01:11:27,920 --> 01:11:32,000
के अल्लाह को स्वीकार नहीं किया है हमने अपने भागवत के श्लोक को स्वीकार किया है

1016
01:11:32,000 --> 01:11:36,240
अल्ला अल्लाह नाम से अल्लाह नाम से ना अनेको नाम से अनेको

1017
01:11:36,240 --> 01:11:40,360
नाम से तो तो फिर आपको यह कहने में दिक्कत क्यों आती है कि शव और अल्लाह

1018
01:11:40,360 --> 01:11:44,480
भी एक शव और कृष्ण भी एक है मैं तो अभी दो मिनट पहले स्वीकार किया है

1019
01:11:44,480 --> 01:11:48,520
और ये भी बताया कि उसम अच भेद क्यों यूज किया गया है आधार

1020
01:11:48,520 --> 01:11:52,680
श्री कृष्ण ने इसलिए भेद अभेद बताया दूध का एपल

1021
01:11:52,680 --> 01:11:56,920
देखिए अचत वेदा वेद की बात तो ऐसी है कि वो फिर चैतन्य महाप्रभु वाला चैप्टर

1022
01:11:56,920 --> 01:12:01,000
खुल जाएगा सुनिए मेरी बात य आप आपने जो

1023
01:12:01,000 --> 01:12:05,080
उत्तर दिया ईश्वर एक है ना कोई बन सकता है ना रावण बना ना

1024
01:12:05,080 --> 01:12:09,080
हिरण कशु बना जिसने चाहा उसका अच्छा मनुष्य

1025
01:12:09,080 --> 01:12:13,400
मनुष्य की चा क्या है ये बताइए चलिए अब अगर ईश्वर ईश्वर

1026
01:12:13,400 --> 01:12:17,520
कोई बन नहीं ईश्वर में कोई समा नहीं सकता है ल नहीं हो सकता है तो मनुष्य की

1027
01:12:17,520 --> 01:12:21,720
चाह क्या है ये बताइए आपके हिसाब से मनुष्य की चाह क्या है

1028
01:12:21,720 --> 01:12:25,760
पशु पति कीत आदि जो भी सृष्टि में है सबका एक

1029
01:12:25,760 --> 01:12:29,920
ही उद्देश्य है आनंद पाना ईश्वर वो आनंद है

1030
01:12:29,920 --> 01:12:34,280
उनको पा उनकी सेवा में लग सकते हैं हम ईश्वर नहीं बन सकते

1031
01:12:34,280 --> 01:12:38,360
अच्छा अब मुझे एक बात बताइए कि क्या मनुष्य के अंदर

1032
01:12:38,360 --> 01:12:38,920
यह चाह

1033
01:12:38,920 --> 01:12:43,040
आती है कि मैं भविष्य देख सकू भक्तों के अंदर

1034
01:12:43,040 --> 01:12:47,160
नहीं आती जानियो के अंदर आती है अच्छा ये चा देखिए

1035
01:12:47,160 --> 01:12:51,280
दो चीज है एक आता है कि मन में ख्याल आना और दूसरा होता है कि उसको

1036
01:12:51,280 --> 01:12:55,320
इंप्लीमेंटेशन करना मैं जो कल इंडिया पाकिस्तान

1037
01:12:55,320 --> 01:12:59,760
का मैच होगा चार मार दे चार मार दे ये कर दे वो कर दे दूसरी बात दूसरा देख लीजिए

1038
01:12:59,760 --> 01:13:03,800
क्या लोगों के अंदर य बात आती है कि भाई क्या

1039
01:13:03,800 --> 01:13:08,080
कहते बारिश ज्यादा हो रही है तो कम हो जाए धूप ज्यादा पड़ रही है तो कम हो जाए

1040
01:13:08,080 --> 01:13:12,120
यह चा आती है कि नहीं ये कर्मियों के अंदर आते हु मैंने भक्तो के अंदर तो

1041
01:13:12,120 --> 01:13:16,280
नहीं देखी अच्छा भक्त व्यक्ति बनेगा कब सुनिए मेरी बात

1042
01:13:16,280 --> 01:13:20,280
इसलिए ठी मान लीजिए भक्तो के अंदर नहीं आती नर्मल व्यक्ति

1043
01:13:20,280 --> 01:13:24,320
तो भक्त बनता है एक दिन थ सुन गीता में भी

1044
01:13:24,320 --> 01:13:28,400
केवल भगवान कृष्ण ने भक्तों को अलाव किया उन्होंने बोला भक्त माम अभ

1045
01:13:28,400 --> 01:13:32,600
जान केवल भक्त मैं आपकी बात मान लूंगा भाई साहब एक स्टेप

1046
01:13:32,600 --> 01:13:36,640
वाइज अगर चले आप गीता को बीच में लाएंगे फिर मैं अपने शंकराचार्य

1047
01:13:36,640 --> 01:13:40,640
वाले अर्थ दूंगा मैं आपसे पूछ रहा हूं आप एक

1048
01:13:40,640 --> 01:13:45,040
साधारण व्यक्ति के पर्सपेक्टिव से बताइए जो अभी तक जिसने ईश्वर को स्वीकार नहीं किया है

1049
01:13:45,040 --> 01:13:49,400
उसके अंदर ये चाह आती है कि नहीं कौन सी कि मैं भविष्य

1050
01:13:49,400 --> 01:13:53,600
देख सकू मैं पास्ट में जा सकू बोला कर्मी

1051
01:13:53,600 --> 01:13:54,100
अंदर आ

1052
01:13:53,920 --> 01:13:58,040
है साधारण लोगों के अंदर आती है इस चा

1053
01:13:58,040 --> 01:14:02,200
का मतलब क्या है अतो मा सदम तम

1054
01:14:02,200 --> 01:14:06,400
जति म मतम का अर्थ क्या है क्या लेते आप अ

1055
01:14:06,400 --> 01:14:10,440
अगर कोई भविष्य देखना चाहता है ना तो उसे भविष्य में इंटरेस्ट नहीं है भविष्य

1056
01:14:10,440 --> 01:14:14,560
में देखने में जो आनंद मिलेगा वो इसलिए देखना चाहता है मैं आपसे य पूछ रहा

1057
01:14:14,560 --> 01:14:18,760
हूं भाई साहब आप जो है किसी भी बात का उत्तर सीधा सीधा देंगे ही नहीं शुरू

1058
01:14:18,760 --> 01:14:23,440
से ते मैं ये पूछ रहा हूं क्या मनुष्य

1059
01:14:23,440 --> 01:14:27,680
अंदर सब कुछ कर सकने वाला बनने की चाह है या नहीं

1060
01:14:27,680 --> 01:14:31,720
है बिल्कुल है है तो आप

1061
01:14:31,720 --> 01:14:35,760
उसे मोक्ष में क्या दे रहे हो वह सब कुछ कर सकने वाला बना

1062
01:14:35,760 --> 01:14:39,800
आनंद मनुष्य की परम गति क्या है

1063
01:14:39,800 --> 01:14:43,840
आपके हिसाब से मनुष्य की परम गति क्या हुई भगवान का अस्तित्व

1064
01:14:43,840 --> 01:14:48,800
सिद्ध होता है अतो मा सद गम से आपके

1065
01:14:48,800 --> 01:14:52,840
सिद्धांत नहीं वो वो मैं वही तो पूछ रहा हूं आप आप

1066
01:14:52,840 --> 01:14:56,840
जो है जिस ईश्वर को पकड़ा रहे हो कि आप जो है अंत में जाकर के ईश्वर को

1067
01:14:56,840 --> 01:15:01,040
देख लोगे आपको आनंद प्राप्त होगा ठीक है और मनुष्य बनना

1068
01:15:01,040 --> 01:15:05,880
क्या चाहता था शुरू में कि मैं प्रकृति को कंट्रोल कर सकू

1069
01:15:05,880 --> 01:15:09,320
कर सकने वाले को देख सकू यह नहीं था प्रकृति

1070
01:15:09,320 --> 01:15:13,640
को कंट्रोल कर सकू और यह तभी होगा जब हम समुद्र की एक बूंद

1071
01:15:13,640 --> 01:15:17,800
है और बूंद जाकर के जब दोबारा समुद्र में मिल जाएगी और समुद्र बन जाएगी

1072
01:15:17,800 --> 01:15:21,840
तभी ये सिद्धांत प्रतिपादित होगा वो शुरू में तो आप इस शलोक को

1073
01:15:21,840 --> 01:15:26,600
नहीं मानते वाले शलोक को आप नहीं मानते

1074
01:15:26,600 --> 01:15:30,880
अमा ये लोक क्या बोल रहा है और आप क्या समझाना चाह रहे हो आप

1075
01:15:30,880 --> 01:15:34,960
मैं तो वो बता रहा जो करपात्री जी महाराज ने बताया है उन्होने पता

1076
01:15:34,960 --> 01:15:38,960
नहीं क्या समझाया होगा लेकिन आपको समझाया गया क्या इसके

1077
01:15:38,960 --> 01:15:43,040
बारे में मैं पूछ रहा आपको समझाया गया क्या

1078
01:15:43,040 --> 01:15:48,320
इसके बारे में नहीं मुझे नहीं अच्छा सुन लीजिए तो मैं बता देता

1079
01:15:48,320 --> 01:15:54,040
हूं ये जरूरी है ये आधार है भैया सु

1080
01:15:54,040 --> 01:15:58,040
मा ज्योति गमाया और मृत मा मतम गमाया इसका अर्थ है

1081
01:15:58,040 --> 01:16:02,160
कि पहला है असतो मा सद गम मुझे असत से सत की ओर ले

1082
01:16:02,160 --> 01:16:06,920
चलो दूसरा है तमसो मा सद गम तमस ज्योति गम

1083
01:16:06,920 --> 01:16:10,960
मुझे अंधकार से अंधकार से उजाले

1084
01:16:10,960 --> 01:16:15,080
की तरफ अज्ञानता से ज्ञान की तरफ और तीसरा है क्या कहते

1085
01:16:15,080 --> 01:16:19,240
मृत मतया मुझे मृत्यु से अमरता की ओर आप ले चलो

1086
01:16:19,240 --> 01:16:23,560
यह मनुष्य की इनबिल्ट चा है जिसके साथ वो

1087
01:16:23,560 --> 01:16:24,480
मैं पूरा कर लू

1088
01:16:24,480 --> 01:16:28,640
मैं पूरा कर लू अब क्या है जब इस चाह का हम निचोड़ देखते हैं ना

1089
01:16:28,640 --> 01:16:32,760
और इसी एक इसी एक चाह के आधार पर हम ईश्वर

1090
01:16:32,760 --> 01:16:36,840
के अस्तित्व को सिद्ध कर सकते हैं इसी एक चाह के आधार पर कि चाह

1091
01:16:36,840 --> 01:16:40,920
है क्यों उसके अंदर ऐसी चाह क्यों हो रही है अब आप

1092
01:16:40,920 --> 01:16:44,960
अब आप ये कहते हैं कि अब आप ये कहते हैं उसकी जो चा है इसका

1093
01:16:44,960 --> 01:16:49,000
जब हम निचोड़ निकालेंगे कि ऐसा मेरा अस्तित्व हो जो कभी ना

1094
01:16:49,000 --> 01:16:53,800
बदला जा सके ऐसा मेरा मुझे सब कुछ दुनिया का मालूम हो

1095
01:16:53,800 --> 01:16:57,800
और और तीसरा क्या है मैं कभी मृत्यु हीन जीवन को पालू

1096
01:16:57,800 --> 01:17:01,880
तो इसकी चाह का विषय क्या हुआ चाह इसकी ये है इनका निचोड़

1097
01:17:01,880 --> 01:17:05,920
अगर करेंगे कि म हर जीव दुनिया का हर जीव सब

1098
01:17:05,920 --> 01:17:09,960
कुछ कर सकने वाला दुनिया को कंट्रोल करने वाला सारे नियमों

1099
01:17:09,960 --> 01:17:14,240
को तोड़ देने वाला बनना चाहता है य आप अंत में

1100
01:17:14,240 --> 01:17:18,080
जैसे बना चाहता था

1101
01:17:18,080 --> 01:17:22,200
कंट्रोल तो वो व्यवहारिक व्यवहारिक धर्म की मर्यादा को तोड़ के बनना

1102
01:17:22,200 --> 01:17:26,240
चाहता था ये इट चा भागवत में ये वाला शलोक भी

1103
01:17:26,240 --> 01:17:30,280
है जिसम भगवान ने कहा है कि मैंने तुम्ह ऐसा ही पैदा किया है

1104
01:17:30,280 --> 01:17:34,320
मगर तुम तुम अपने आप को मेरे हवाले कर दो मैंने तुमहे ऐसा ही

1105
01:17:34,320 --> 01:17:38,480
बनाया है जो आपने शलोक बोला उसम कहीं भी नहीं लिखा की जीव

1106
01:17:38,480 --> 01:17:39,840
ईश्वर बन सकता है

1107
01:17:39,840 --> 01:17:43,880
या बनना चाहिए नहीं मैं ये नहीं कह रहा मैं य क नहीं रहा मैं ये कह रहा हूं जीव के

1108
01:17:43,880 --> 01:17:48,280
अंदर ईश्वर बनने की चा है कि नहीं बताइए आप के अंदर है

1109
01:17:48,280 --> 01:17:52,360
जैसे रावण के तो य यहा पर फिर हमारी डिबेट आप समाप्त कर

1110
01:17:52,360 --> 01:17:56,440
दीजिए ने कुछ कुछ निष्कर्ष में बता दूं पहला था कि

1111
01:17:56,440 --> 01:18:00,640
वो दूध दही वाला वो क्लियर किया नहीं आपने वो आपने बोल दिया उसम

1112
01:18:00,640 --> 01:18:04,680
आपको समझ नहीं आया और नहीं वो किसी को नहीं आएगा आप आप जो

1113
01:18:04,680 --> 01:18:08,800
बोल रहे हैं बोलगा जो करता है कि भगवान

1114
01:18:08,800 --> 01:18:13,680
ने गीता में क्लियर बोला माम एव अंश जीव भूते जीव सनातना

1115
01:18:13,680 --> 01:18:17,840
सनातन मेरा अंश था है और रहेगा भाई साब भगवान ने

1116
01:18:17,840 --> 01:18:21,880
तो यह भी बोला है भगवान ने कि जब जब धरती पर पाप होता है मैं अवतार

1117
01:18:21,880 --> 01:18:25,920
लेता हूं कहते हो कि वो कुरान के जो ईश्वर है उसके समान

1118
01:18:25,920 --> 01:18:30,280
है जो अवतार नहीं लेता भगवान ने त उपनिषद दूसरे अध्याय

1119
01:18:30,280 --> 01:18:34,760
में पहले दूसरे अध्याय के पहले श्लोक में तत्र उपनिषद में ये भी कहा है

1120
01:18:34,760 --> 01:18:39,040
कि भैया सत्यम ज्ञानम अनंतम ब्रह्म सत्यम ज्ञानम अनंतम

1121
01:18:39,040 --> 01:18:43,240
ब्रम ईश्वर किसी भी प्रकार के नियम के नीचे नहीं है वह सभी नियमों

1122
01:18:43,240 --> 01:18:47,400
को बनाने वाला सर्व नियामक है तो आप उसको किसी नियम

1123
01:18:47,400 --> 01:18:51,560
के नीचे कैसे ला देंगे कि वो शिव बनने के बाद वापस शिव

1124
01:18:51,560 --> 01:18:55,000
नहीं बन सकता फिर आप फिर आप अपने ही लोगों

1125
01:18:55,000 --> 01:19:00,320
को जब शिव की शिव से कृष्ण की ओर लाना होगा तो

1126
01:19:00,320 --> 01:19:04,480
उनको कुछ बोल शिव से जब उन्हे कृष्ण की ओर लाना होगा

1127
01:19:04,480 --> 01:19:08,760
तो आप उनको बोलोगे कि नहीं शिव जी भगवान नहीं है कृष्ण भगवान

1128
01:19:08,760 --> 01:19:13,400
है ओनली मगर जब इस्लामिक व्यक्ति को लाना होगा तो आप बोलोगे नहीं

1129
01:19:13,400 --> 01:19:17,520
अल्लाह और कृष्ण एक है अच्छा दूसरी बात जो जो

1130
01:19:17,520 --> 01:19:21,720
जो भ्रामक शिक्षा आपने वहां के लिए बनाई वो भ्रामक शिक्षा

1131
01:19:21,720 --> 01:19:25,800
आप यहां हिंदुस्तान में भारत के लोगों को भी बांट रहे हैं मैं भगवान बन

1132
01:19:25,800 --> 01:19:29,800
सकता हूं मैंने उसका उत्तर दिया था लेकिन आप मैं भगवान के मैं भगवान

1133
01:19:29,800 --> 01:19:34,280
की स्थिति को प्राप्त कर सकता हूं भगवान में लय हो सकता हूं लय

1134
01:19:34,280 --> 01:19:38,400
समुद्र की एक बूंद की तरह आपने सुनी नहीं लगता पूरी बात नहीं आपने स्टार्टिंग में बोला

1135
01:19:38,400 --> 01:19:42,600
हा भगवान बन सकता तो भाई तो पूरी बात सुनोगे ना कि केवल

1136
01:19:42,600 --> 01:19:46,600
एक ही लाइन एक ही लाइन सुनोगे पूरी बात सुनोगे मैंने बोला कि समुद्र की एक

1137
01:19:46,600 --> 01:19:50,640
बूंद मेरा मकसद है जीवन का समुद्र में जाकर मिल जाना आपने तो अगर

1138
01:19:50,640 --> 01:19:54,800
मैंने आखिर में समुद्र के दर्शन कर लिए तो मुझे मोक्ष क मिला परम स्वतंत्रता कहां

1139
01:19:54,800 --> 01:19:59,240
मिली आखिर में मैं अधीन हूं ना आपने लय होने का उद्देश्य क्या बताया

1140
01:19:59,240 --> 01:20:03,640
पूरी दुनिया को कंट्रोल करना यह कोई उद्देश होता है भक्तो का नहीं एकदम गलत

1141
01:20:03,640 --> 01:20:07,640
तो तो यहां से आपका और मेरा वो अलग हो जाता है जब आप इस चीज को नहीं मानते

1142
01:20:07,640 --> 01:20:10,000
हैं तो आप यहां पर आप आप जाके खुद

1143
01:20:10,000 --> 01:20:14,080
चिंतन मनन करिएगा क्या व्यक्ति के अंदर सारे प्राकृतिक

1144
01:20:14,080 --> 01:20:18,080
नियमों को तोड़ने की चाह है कि नहीं है वो

1145
01:20:18,080 --> 01:20:22,240
भक्त भक्त जो होते हैं वो भले ही उसको बाहर ना निकाले एजीक्यू ना करें

1146
01:20:22,240 --> 01:20:26,320
उस चा का मगर भक्त के अंदर भी वो चाह है इसीलिए इसीलिए वो भगवान को

1147
01:20:26,320 --> 01:20:30,520
ढूंढता है इसीलिए भगवान की भक्ति होती है क्योंकि उसके अंदर चाह

1148
01:20:30,520 --> 01:20:34,720
है प्रकृति से प्राप्त सभी नियमों को तोड़ देने की रावण की

1149
01:20:34,720 --> 01:20:38,840
चाह थी कि जो प्रकृति में माना जाने वाला जो ईश्वर

1150
01:20:38,840 --> 01:20:43,160
है वो बन जाने की नहीं थोड़ा सा सुनेंगे वो हमारा परमार्थिक

1151
01:20:43,160 --> 01:20:47,440
मिशन है यहां का जो इस दुनिया का जो मिशन है व्यवहारिक मिशन वो है भगवान की भक्ति

1152
01:20:47,440 --> 01:20:51,560
करना परमार्थिक वो है कि भगवान की भक्ति करने से स्वतः प्राप्ति

1153
01:20:51,560 --> 01:20:55,640
होगी कि भगवान में हम म ध्रुव महाराज की इच्छा थी पूरी

1154
01:20:55,640 --> 01:20:59,720
सृष्टि उनके अंदर में रहे लेकिन जब भगवान के दर्शन हुए उन्होंने बोला मुझे नहीं

1155
01:20:59,720 --> 01:21:03,800
चाहिए सब मुझे चाहिए आपकी सेवा ये भक्त ये व्यवहारिक है ये

1156
01:21:03,800 --> 01:21:07,960
व्यवहारवाद है ये व्यवहारवाद है भैया तो आपका कहने का मतलब

1157
01:21:07,960 --> 01:21:12,080
है कि भगवान भगवान ने जो जो पुराणों में लीला बताई है केवल वर के लिए बताई

1158
01:21:12,080 --> 01:21:16,320
है वो उनका कोई प्रत्यक्ष प्रमाण नहीं है क्यों नहीं है प्रतिष्ठित प्रमाण

1159
01:21:16,320 --> 01:21:20,720
है भगवान ने जो भी लीलाएं की है वो भगवान ने कुछ ना कुछ समझाने

1160
01:21:20,720 --> 01:21:24,760
के लिए की है मगर अंततः वो जो लीलाए है वो

1161
01:21:24,760 --> 01:21:25,260
कोई ना

1162
01:21:25,120 --> 01:21:29,240
कोई प्रतीकात्मक व्याख्या कर रही है और ऐसा भी नहीं है कि वो जो लीलाए है वो कभी

1163
01:21:29,240 --> 01:21:33,760
घटित नहीं हुई व घटित हुई प्रतीकात्मक व्याख्या दिखाने के लिए गठित हुई

1164
01:21:33,760 --> 01:21:37,880
ला को गलत बता रहे हो उन्होने क्लियर बोला मुझे संसार में कुछ नहीं चाहि पहले

1165
01:21:37,880 --> 01:21:42,000
तो ऐसी बात है कि आप जो जो संदर्भ दोगे ना ऐसे तो पूरा शास्त्र ना तो आप लेक

1166
01:21:42,000 --> 01:21:46,080
बैठे हो आप दीजिए मैं तो

1167
01:21:46,080 --> 01:21:50,240
मैं का संदर्भ मैं तो आपको भागवत पुराण का अभी वो लोक बता दू शलोक क्रमांक के साथ जय

1168
01:21:50,240 --> 01:21:54,440
लिखा हुआ है भागवत का एक मात्र प्रति विषय ब्रह्म और जीव

1169
01:21:54,440 --> 01:21:58,480
की एकता मैं अभी आपको शलोक क्रमांक दिखा दू मैं दिखा देता

1170
01:21:58,480 --> 01:22:02,520
हूं रुक आप ईश्वर बनना चाहता सुनि इसलिए रावण

1171
01:22:02,520 --> 01:22:06,520
व्यवहारिक दुनिया का ईश्वर बनना चाहता था भैया व्यवहारिक दुनिया का व्यवहार में

1172
01:22:06,520 --> 01:22:11,040
रहते हुए कि मैं ये जो मनुष्य इनको कंट्रोल यही की यही कर लू

1173
01:22:11,040 --> 01:22:15,880
वो उसका परमार्थिक मिशन नहीं था ये परमार्थिक मिशन है

1174
01:22:15,880 --> 01:22:20,000
तीनों लोग का स्वामी बनना चाहता था आप गलत आपने कहा

1175
01:22:20,000 --> 01:22:24,600
कि अल्लाह और कृष्ण एक है हमारे लिए मगर वो वो अल्लाह की बात नहीं करते हम

1176
01:22:24,600 --> 01:22:28,680
वो अल्लाह की बात नहीं करते हम जो अल्लाह कुरान के द्वारा प्रतिपादित हो रहा है यानी कि

1177
01:22:28,680 --> 01:22:32,920
आप जो है वहां पर झूठ बोलते हैं इसलिए

1178
01:22:32,920 --> 01:22:37,840
नाम परव नहीं है अनेको नाम है परव नहीं है

1179
01:22:37,840 --> 01:22:40,760
आप ही कह रहे हो ना आप ही तो कह रहे हो

1180
01:22:40,760 --> 01:22:45,080
अच्छा सुनो चलो ठीक है भगवान के अनेको नाम है इस बात कर लेते हैं न 15

1181
01:22:45,080 --> 01:22:49,160
2 पढ़ आप श्रीमद भागवत का भाष्य उसमें क्या लिख रहे हैं लिखने

1182
01:22:49,160 --> 01:22:54,080
वाले वो प्रभुपाद जी ने लिखा है कि नहीं मुझे नहीं पता 3 152

1183
01:22:54,080 --> 01:22:58,320
3 1525 में वो लिख रहे हैं कि श्री कृष्ण नाम जप

1184
01:22:58,320 --> 01:23:02,360
की तरह शिव दुर्गा काली के नाम नाम का जप करने

1185
01:23:02,360 --> 01:23:06,480
वाले समझने वाले मूर्ख है अपराधी है तो भगवान

1186
01:23:06,480 --> 01:23:10,560
का जब वो नाम हो सकता है सुनिए ये जो आप कह रहे हो ये पदम

1187
01:23:10,560 --> 01:23:14,640
पुराण का श्लोक है य आपको मैं भेज भी दूंगा क्योंकि पुराण

1188
01:23:14,640 --> 01:23:18,840
आप मुझे भेज दीजिएगा आप मुझे भेज दीजिएगा फिलहाल वहां पर रेफरेंस दिया नहीं गया

1189
01:23:18,840 --> 01:23:23,120
है 15 2 भागवत बास्य में ये पद पुराण रेफरेंस

1190
01:23:23,120 --> 01:23:27,320
नहीं दिया गया है नाम अपराध व पर बता रहे प्रभुपाद जी द नाम

1191
01:23:27,320 --> 01:23:31,360
अपरा जब हमने पढ़े वहा पर हरि और हर में भेद समझना पाप है और वहां

1192
01:23:31,360 --> 01:23:35,440
पर क्या हो रहा है हरि हर को एक समझना पाप है आप आप शलोक

1193
01:23:35,440 --> 01:23:39,520
आपको लोक पता है ला कौन सा यही

1194
01:23:39,520 --> 01:23:43,800
द नाम अपरा का दूसरा तीसरा है शायद

1195
01:23:43,800 --> 01:23:48,480
दूसरा श्र विष्णु यही गुण नाम सल

1196
01:23:48,480 --> 01:23:52,760
य वाला शलोक शलोक का अगर देखेंगे

1197
01:23:52,760 --> 01:23:56,120
ना रूप गोस्वामी इसकी व्याख्या कर तो उसम भी

1198
01:23:56,120 --> 01:24:00,480
उसका व्याख्या पूरा पढ़ेंगे आपने थो गोस्वामी महाराज ने रामचरित

1199
01:24:00,480 --> 01:24:04,920
मानस को जैसे ही पहला पन्ना ओपन होता है तो गणपति की पूजा की है

1200
01:24:04,920 --> 01:24:09,360
आपने की है क्या नहीं सुनिए आपने किया क्या

1201
01:24:09,360 --> 01:24:13,400
हम ऐसा मना ही नहीं करते कि उनकी पूजा मत करो अरे पूजा मत

1202
01:24:13,400 --> 01:24:17,520
करो नहीं उन्होंने माना तुम ब्रह्म हो उन्होंने कई जगह गोस्वामी महाराज के मैं आपको वो

1203
01:24:17,520 --> 01:24:21,640
दे दूंगा वो पांचों को ब्रह्म मानते हैं राम रूप में ब्रह्म की पूजा

1204
01:24:21,640 --> 01:24:25,920
करते हैं पाच ब्रम मानते हैं तुलसीदास जी कैसी बातें कर रहे हैं

1205
01:24:25,920 --> 01:24:30,920
सुनि सुनि मेरी बात शायद य ऑफ होने वाला है

1206
01:24:30,920 --> 01:24:34,750
अच्छा चलिए एक बात एक

1207
01:24:34,750 --> 01:24:38,360
[संगीत]

1208
01:24:38,360 --> 01:24:44,160
और हां बताइए

1209
01:24:44,160 --> 01:24:48,240
जी बोलिए बो एक बात जब राम गोस्वामी जी की बात आ

1210
01:24:48,240 --> 01:24:52,920
गई तो मैं आपको बता दूं रामो विग्रहवां धर्म 37

1211
01:24:52,920 --> 01:24:56,960
वाल्मीकि रामायण अब राम धर्म का रूप है एक मिनट

1212
01:24:56,960 --> 01:25:01,040
फिनिश कर लू एक फिनिश कर लू राम धर्म का रूप है अब राम

1213
01:25:01,040 --> 01:25:05,080
जी बोल रहे हैं कि शिवजी भगवान है प पुराण में बोल रहे हैं सब जगह बोल रहे

1214
01:25:05,080 --> 01:25:09,440
हैं शिवजी भगवान है शिवजी परम ब्रम है और सुनिए

1215
01:25:09,440 --> 01:25:13,800
तो उनकी पूजा भी कर रहे हैं मगर उनका भी कर रहे हैं मगर

1216
01:25:13,800 --> 01:25:17,800
आप कह रहे हो कि नहीं साहब शिवजी का जाप करने वाला दुर्गा काली का जाप

1217
01:25:17,800 --> 01:25:21,880
करने वाला जो है मूर्ख है अपराधी है नहीं सुनिए पहली

1218
01:25:21,880 --> 01:25:26,160
बात आप गलत समझ रहे हो जब इकन के हेड क्वार्टर मायापुर में जाओगे ना

1219
01:25:26,160 --> 01:25:30,320
तो आपको शिव जीी की और विष्णु की आधी आधी मूर्ति मिलेगी दोनों में समाहित आप

1220
01:25:30,320 --> 01:25:34,400
समझ नहीं रहे हो सिद्धांत तो ये तो ये जो प्रचार हो रहा है कन की तरफ से फिर

1221
01:25:34,400 --> 01:25:38,520
वो भ्रामक होगा फिर वो गलत लोग कर रहे होंगे बिल्कुल भ्रामक नहीं है आप

1222
01:25:38,520 --> 01:25:42,640
जब आपको विनाश और स्वांश का अंतर ही नहीं पता तो अब मैं क्या समझाऊ आपको आपको ब

1223
01:25:42,640 --> 01:25:47,120
तो भैया आपको भी तो नहीं पता जब मूल तत्व आपको अतो सगम त्र

1224
01:25:47,120 --> 01:25:51,200
आपने इस श्लोक को जाना ही नहीं तो आपने धर्म की बात कहां से की फिर बताओ आपने

1225
01:25:51,200 --> 01:25:53,400
सुनिए पूरे लोक में एक भी जगह ऐसा

1226
01:25:53,400 --> 01:25:57,520
नहीं लि जो आपने श्लोक पढ़ा पूरे श्लोक मेंसा क नहीं लिखा कि जो है

1227
01:25:57,520 --> 01:26:01,680
हम ईश्वर बन सकते हैं लेकिन आप ये क कह रहा हू मैंने कहा ही नहीं है आप गलत

1228
01:26:01,680 --> 01:26:06,080
बात बोल रहे हैं मैंने एक कब कहा कि श्लोक का ये अर्थ है आपने उसी आपको

1229
01:26:06,080 --> 01:26:10,320
मैं ईश्वर ईश्वर और जीव की एकता वाला है ना वो मैं आपको बता दूं

1230
01:26:10,320 --> 01:26:14,360
वो भागवत में भागवत से आपको दे दूंगा कि कि भागवत का एक मात्र

1231
01:26:14,360 --> 01:26:18,640
प्रतिपाद्य विषय है जीव और ब्रह्म की एकता सुनिए

1232
01:26:18,640 --> 01:26:22,640
वेदों से लेके सभी अब आप ये बता दीजिए सुनिए सु

1233
01:26:22,640 --> 01:26:26,920
वो अधूरे ही र जाएंगे चेतन महाप्रभु की बात कर लीजिए चेतन महाप्रभु

1234
01:26:26,920 --> 01:26:31,120
जी किसको मानते थे गुरु एक सेकंड एक सेकंड एक सेकंड वेद

1235
01:26:31,120 --> 01:26:35,280
से लेकर पुराण तक सब में द्वैत और अद्वैत की बात हुई है सुनि पूरा सुनिए

1236
01:26:35,280 --> 01:26:39,360
ठीक है इसलिए चैतन्य महाप्रभु का जो सिद्धांत जैसे आपने पहले बोला अचिंत भदा

1237
01:26:39,360 --> 01:26:43,600
भेद है जो जहां पर भी एक की बात होती है ना जीव और चैतन्य

1238
01:26:43,600 --> 01:26:47,680
महाप्रभु का सिद्धांत अचिंत भदा भेद है सिद्ध करिए पहले सुनिए मेरी

1239
01:26:47,680 --> 01:26:51,800
बात वही मैं बता रहा हूं ये किस बेस प उन्होंने कहा इस बेस

1240
01:26:51,800 --> 01:26:56,000
प कहा नहीं नहीं उन्होने ये कहा ये तो सिद्ध करिए तब तो हम आगे

1241
01:26:56,000 --> 01:27:00,320
बात करें सुनि आप चेतन भागवत नहीं मानेंगे आप चेतन

1242
01:27:00,320 --> 01:27:04,360
चरिता आप लोग खुद कहते हैं चैतन्य महाप्रभु ने सिर्फ आठ श्लोक

1243
01:27:04,360 --> 01:27:08,440
दिए हैं क्या उसम य है चिंत वेदा वेद

1244
01:27:08,440 --> 01:27:13,000
अरे मेरी बात सुनिए बताइए

1245
01:27:13,000 --> 01:27:19,000
क्या उन आठ श्लोकों में अचत वेदा वेद है आप चेतन

1246
01:27:21,120 --> 01:27:25,320
चरितामृथम क्या इसका कोई प्रमाण है कि चैतन्य चैतन्य

1247
01:27:25,320 --> 01:27:29,480
महाप्रभु ने ये जो आप ही आप ही ने कहा वो जो वीडियो है ना

1248
01:27:29,480 --> 01:27:33,560
इसकन अध्यक्ष के इंटरव्यू वाला वो आप देख लीजिएगा उसमें

1249
01:27:33,560 --> 01:27:37,640
उन्होंने खुद कहा है कि चैतन्य महाप्रभु जी के केवल हमें आठ श्लोक वो है

1250
01:27:37,640 --> 01:27:41,760
प्राप्त केवल आठ श्लोक क्या उन आठ श्लोकों में अचिंत

1251
01:27:41,760 --> 01:27:45,920
भदा भेद प्राप्त है हमें सुनिए चैत

1252
01:27:45,920 --> 01:27:50,280
चैन चैतन्य महाप्रभु का पूरा वर्णन केवल आठ श्लोक में नहीं होता चेतन चता

1253
01:27:50,280 --> 01:27:54,280
प्रमाण शिष्य ने लिख है अगर आप ऐसे करेंगे

1254
01:27:54,280 --> 01:28:00,280
तो फिर य भी मान नहीं होगा शंकराचार्य के कौन से असली ग्रंथ है या

1255
01:28:01,040 --> 01:28:05,040
नहीं सनातन धर्म के आचार्य कोई झूठे नहीं है जो आप य मानेंगे य

1256
01:28:05,040 --> 01:28:09,040
नहीं मानेंगे आपकी बात जहा मैच होती

1257
01:28:09,040 --> 01:28:13,120
है आप मान लेते हो जहा मैच नहीं होती उसे गलत बोलते नहीं डिग्री नहीं कर रहा

1258
01:28:13,120 --> 01:28:17,320
एक पॉइंट को क्लियर करता चल रहा यानी य मानना गलत है कि हमें केवल आठ

1259
01:28:17,320 --> 01:28:21,560
ही शलोक प्राप्त है उनकी अन्य चीज भी प्राप्त है और क्या प्राप्त है

1260
01:28:21,560 --> 01:28:25,720
तो ये लाइन उन्होने गलत कही कि केवल आठ चीज आठ लोक प्राप्त

1261
01:28:25,720 --> 01:28:31,720
है मुझे मुझे ये बताइए

1262
01:28:45,400 --> 01:28:49,600
चैतन्य प्राप्त है नहीं छट

1263
01:28:49,600 --> 01:28:53,600
गोस्वामी ने ही बताया आप पता नहीं क्यों नहीं क्लियर

1264
01:28:53,600 --> 01:28:57,720
करते मैं पूछ रहा हूं ये मानना बंद कर द कि आठ लोक प्राप्त है या नहीं हां या ना

1265
01:28:57,720 --> 01:29:01,760
उत्तर दीजिए इसमें आप एक्स्ट्रा लैंग्वेज क्यों मिला रहे हैं आठ श्लोक

1266
01:29:01,760 --> 01:29:05,800
भी प्राप्त है उसके अतिरिक्त भी जो और ग्रंथ है वो भी प्राप्त है वो भी उनके द्वारा

1267
01:29:05,800 --> 01:29:09,880
लिखे थे वो सब वो छठ गोस्वामी उनके शिष्य द्वारा

1268
01:29:09,880 --> 01:29:14,080
शिष्यों द्वारा लिखे है अब ठीक है मतलब कि उनके लिखे हुए आठ ही श्लोक

1269
01:29:14,080 --> 01:29:16,160
प्राप्त है मगर उनकी कही हुई वाणी

1270
01:29:16,160 --> 01:29:20,320
को सट गो सावियो ने लिखा हां हां इस तरह से प्राप्त

1271
01:29:20,320 --> 01:29:24,400
है ठीक है जैसे भगवान कृष्ण की गीता को

1272
01:29:24,400 --> 01:29:28,440
गणेश जी ने लिखा वेदव्यास ने बोला अब आप

1273
01:29:28,440 --> 01:29:32,480
ये ये मत बोल ठीक है वो मान लिया मान लिया आपकी

1274
01:29:32,480 --> 01:29:36,520
वो बात मैंने मान ली कि ये कहना गलत होगा इसपे हम

1275
01:29:36,520 --> 01:29:40,520
बाद में इसपे हम बाद में वो करेंगे अभी हम एक चीज ले लेते हैं यह कहना गलत

1276
01:29:40,520 --> 01:29:44,680
होगा कि चैतन्य महाप्रभु के द्वारा केवल आठ श्लोक प्राप्त है

1277
01:29:44,680 --> 01:29:48,800
उनके शिष्य के द्वारा उनके प्रमाणिक शिष्यों के द्वारा हमें और भी कई चीजें

1278
01:29:48,800 --> 01:29:53,160
प्राप्त है बिल्कुल ठीक है ठीक है ठीक है जो चैतन्य

1279
01:29:53,160 --> 01:29:57,280
महाप्रभु की सोच थी वो हमें प्राप्त हो गई अब मुझे आप ये बता दीजिए कि

1280
01:29:57,280 --> 01:30:01,440
चैतन्य महाप्रभु गुरु किसको मानते थे उनके ईश्वर

1281
01:30:01,440 --> 01:30:05,520
पूरी गुरु थे अच्छा क्या उन्होंने कभी

1282
01:30:05,520 --> 01:30:09,520
शंकराचार्य के मत को स्वीकार किया शंकराचार्य जी के भाष्य को स्वीकार किया

1283
01:30:09,520 --> 01:30:13,800
कभी किसने चैतन्य महाप्रभु ने

1284
01:30:13,800 --> 01:30:17,880
आठ श्लोक में और छट गोस्वामी द्वारा श्लोक में कहीं भी ऐसा वर्णन

1285
01:30:17,880 --> 01:30:22,000
नहीं है कि उनके मत को स्वीकार किया अच्छा तो

1286
01:30:22,000 --> 01:30:25,960
अब मैं आपको चैतन्य चरितामृथम

1287
01:30:25,960 --> 01:30:30,760
आपके यहां से पब्लिश है ना वो चैतन्य चरितामृथम आपको

1288
01:30:30,760 --> 01:30:31,260
प्रसंग

1289
01:30:31,160 --> 01:30:35,160
दिखा दूंगा जहां पर वो साफ साफ कह रहे हैं कि भगवान कृष्ण को

1290
01:30:35,160 --> 01:30:39,200
मैं श्रीधर स्वामी के द्वारा रचित टीके से जानता हूं श्रीधर स्वामी

1291
01:30:39,200 --> 01:30:43,240
तत्कालीन शंकराचार्य वो साफसाफ कह रहे हैं कि भगवान

1292
01:30:43,240 --> 01:30:47,320
को मैं उनके द्वारा जानता हूं उनको मैं जगत गुरु समझता हूं और कब और क्यों कह

1293
01:30:47,320 --> 01:30:51,520
रहे ये भी सुन लीजिए कब और क्यों कह रहे हैं जब वल्लभाचार्य जी

1294
01:30:51,520 --> 01:30:55,800
उनके पास पहुंचे थे अपना भाष्य दिखाने के लिए ये देखो मैंने भी भाष्य लिखा है

1295
01:30:55,800 --> 01:31:00,000
तो उन्होंने ये कहा था कि श्रीधर स्वामी के से भिन्न जो भी भाष्य लिखने

1296
01:31:00,000 --> 01:31:04,200
की प्रयास करता है वो मेरे लिए व्या के समान है प्रोस्टिट्यूट के समान

1297
01:31:04,200 --> 01:31:08,360
है तो यहां पर उन्होंने ये भी जाहिर कर दिया कि सीध स्वामी

1298
01:31:08,360 --> 01:31:12,400
से भिन्न कोई भी टीका मत लिख है वो पर्याप्त है आपको समझाने के लिए

1299
01:31:12,400 --> 01:31:16,560
देख अब आपका भेद बुद्धि मैं दिखाता हूं आपने चेतन चम

1300
01:31:16,560 --> 01:31:20,640
को उस श्लोक को तो प्रमाणिक मान लिया मैंने आपकी बात को रख लिया है तब मैं आगे

1301
01:31:20,640 --> 01:31:24,680
बढ़ा हूं मैंने आपकी बात को रख लिया दूसरी बात ये मैं आपके

1302
01:31:24,680 --> 01:31:28,720
प्रमाण आपके सामने रखूंगा आप चैतन्य चमत के पूरे सिद्धांत

1303
01:31:28,720 --> 01:31:33,640
कोख नहीं रहे दिख नहीं रहे आप आप दिख नहीं रहे

1304
01:31:33,640 --> 01:31:37,840
नहीं मेरा ऑन है मैं कह रहा हूं आप चेतन ताम के आपकी स्क्रीन

1305
01:31:37,840 --> 01:31:41,840
ऑफ हो रही है आपकी ऑफ नहीं है

1306
01:31:41,840 --> 01:31:45,920
ब्लैक हो गया सब अच्छा सुनिए च अच्छा कोई कमेंट करके

1307
01:31:45,920 --> 01:31:46,600
बता दीजिए

1308
01:31:46,600 --> 01:31:52,120
क्या ये भाई साहब दिख रहे हैं सामने वाले कौशल जी

1309
01:31:52,120 --> 01:31:56,760
कुशल जी कोई कमेंट करके बताएगा

1310
01:31:56,760 --> 01:32:00,960
स्क्रीन स्क्रीन हैंग हो गई है आपकी भी रुक गई है मेरी

1311
01:32:00,960 --> 01:32:06,960
भी रुक गई हां कोई कारण

1312
01:32:07,000 --> 01:32:11,760
होगा दोनों में से कोई दिख रहा है नहीं दिख रहा ये कमेंट कीजिए

1313
01:32:11,760 --> 01:32:16,280
दोनों में से कोई दिख रहा है कि नहीं दिख रहा है ये कमेंट करके बता

1314
01:32:16,280 --> 01:32:20,440
दीजिए दुनिया विद्यार्थी जी कह रहे हैं नहीं दिख रहे अच्छा सुनिए

1315
01:32:20,440 --> 01:32:24,760
मेरी बात मैं दिख रहा हूं मैं दिख रहा हूं रंजीत कुमार जी कह रहे हैं नहीं दिख

1316
01:32:24,760 --> 01:32:29,280
रहे नवीन शर्मा जी कह रहे हैं आप दिख रहे हैं मैं दिख रहा हूं

1317
01:32:29,280 --> 01:32:33,560
तो क्या करना चाहिए इसका अब देख लीजिए

1318
01:32:33,560 --> 01:32:39,560
जैसा आपको उचित लगे हमें तो हमारी चीजें काफी सारी प्राप्त हो गई है

1319
01:32:40,280 --> 01:32:44,360
अ हां चलिए बात कर सकते हैं कोई नहीं आपको देख तो लिया

1320
01:32:44,360 --> 01:32:49,280
ही है लोगों ने हा तो मैं ये कह रहा मैं ये कह रहा था

1321
01:32:49,280 --> 01:32:53,360
कि आपने कहा कि वो कभी भी उन्होंने शंकराचार्य को स्वीकार

1322
01:32:53,360 --> 01:32:57,920
नहीं किया मगर आपकी जो चेतन तामृत है उसी में लिखा हुआ है कि

1323
01:32:57,920 --> 01:33:02,080
उन्होंने शंकराचार्य के मत को स्वीकार किया नहीं नहीं ये नहीं लिखा

1324
01:33:02,080 --> 01:33:06,240
बिल्कुल बिल्कुल देखि आप अलग से मत जोड़िए उसम ये नहीं लिखा उसमें

1325
01:33:06,240 --> 01:33:10,280
लिखा है कि उनकी उनका जो व्याख्या हुई है

1326
01:33:10,280 --> 01:33:14,440
उनके द्वारा मैंने कृष्ण को माना उनकी मतलब एक्सेप्ट किया मैं इसको नहीं नहीं

1327
01:33:14,440 --> 01:33:18,520
उनके द्वारा जानता हूं जानता हूं जानने का मतलब

1328
01:33:18,520 --> 01:33:22,800
जो कृष्ण के बारे में ज्ञान है जो चीजें हैं वो उन्होंने उनका स्वीकार

1329
01:33:22,800 --> 01:33:26,920
किया है वही सुनी है मेरी बात पूरी हा अच्छा अब एक बात और बता दूं

1330
01:33:26,920 --> 01:33:31,040
इस प्रश्न के उत्तर में आपकी ऑफिशियल वेबसाइट पर लिखा है कि वो जो है वो

1331
01:33:31,040 --> 01:33:35,160
वैष्णव थे अंदर से मगर बाहर से दिखाते थे कि वो शंकर शंकर मत

1332
01:33:35,160 --> 01:33:39,160
को मानने वाले हैं मैं हा मैं इसी लाइन प आने वाला था अभी

1333
01:33:39,160 --> 01:33:43,200
देखिए आप आप आप देखिए जब आप इस लाइन प आएंगे तो पूर्व में ही आपकी बात को रख

1334
01:33:43,200 --> 01:33:47,400
दूं अभी थोड़ी देर पहले आपने कैसे नाक फुलाई थी कि आप जब

1335
01:33:47,400 --> 01:33:51,600
बोल रहे थे कि क्या सारे सट गोस्वामी वगैरह अपमा है झूठ बोलते हैं

1336
01:33:51,600 --> 01:33:55,440
सारे आचार्य अब आप उन परे क्या तोत मत लगा रहे हैं कि वो अंदर से वैष्णव

1337
01:33:55,440 --> 01:33:59,520
वो थे मगर वो दिखाते थे कि मैं शंकर मत को मानने वाला हूं नहीं

1338
01:33:59,520 --> 01:34:04,200
छठ गोस्वामी पहली बात ये नहीं आ हा ऐसे ही करते हैं

1339
01:34:04,200 --> 01:34:08,880
ऐसे ही होता है अभी थोड़ी देर पहले देखिए आपने अपने आचार्यों के लिए क्या कहा

1340
01:34:08,880 --> 01:34:12,960
तो मैंने वहां प उनका अपमान नहीं किया अब आप वहां प कह रहे हां मैं वही बात कहने वाला हूं यानी

1341
01:34:12,960 --> 01:34:17,280
कि मैंने अपमान सुनिए आप आप क्यों बोल रहे हैं मैंने अपमान कब किया मैंने क्या बोला

1342
01:34:17,280 --> 01:34:22,000
आपने अभी आपने अभी अच्छा चलिए बताइए आप क्या कहने वाले हैं ठीक है बताइए

1343
01:34:22,000 --> 01:34:26,000
चैतन्य चमत का आपने केवल एक श्लोक क्यों उठाया पूरा अगर पढ़ेंगे तो पूरा सिद्धांत को

1344
01:34:26,000 --> 01:34:30,640
मानेंगे ना पूरे सिद्धांत क्लियर लिखा है अचत वेद का सिद्धांत उनका अचिंत

1345
01:34:30,640 --> 01:34:34,720
वेदा भद का अर्थ आप जो समझते हैं वो मैं नहीं समझता हूं अचिंत

1346
01:34:34,720 --> 01:34:38,840
वेदा भद का मतलब यह है कि ईश्वर और जीव अंत

1347
01:34:38,840 --> 01:34:43,360
में एक हो जाने हैं मगर अभी आपको यह नहीं मानना है कि आप और वो एक है

1348
01:34:43,360 --> 01:34:47,360
क्योंकि अगर आप एक मानेंगे तो आप भक्ति नहीं कर पाएंगे इसके बारे

1349
01:34:47,360 --> 01:34:51,560
में चिंता मत करिए अचिंत हैय विषय अचिंत भदा भेद का अर्थ हो

1350
01:34:51,560 --> 01:34:55,880
मैं जानता हूं आप आप दूसरा जान रहे हो कि है भी और नहीं भी आप मेरा विषय

1351
01:34:55,880 --> 01:35:00,000
सुनेंगे आप अच भदा भेद का मतलब है कि हम ईश्वर

1352
01:35:00,000 --> 01:35:04,080
की कुछ चीजों में समान है जैसे कि हम हमारी आत्मा भी सनातन वो

1353
01:35:04,080 --> 01:35:08,120
भी सनातन हम भी चेतन यही तो मैं कह रहा हूं इसीलिए

1354
01:35:08,120 --> 01:35:10,520
मैं कह रहा हूं क्या वो शंकराचार्य को मानते थे

1355
01:35:10,520 --> 01:35:14,880
या नहीं कौन वो

1356
01:35:14,880 --> 01:35:19,080
उन्होंने कभी शंकराचार्य जी के बारे में जिक्र नहीं है चेतन चत में अगर है तो आप

1357
01:35:19,080 --> 01:35:23,480
ये श्रीधर स्वामी कौन थे श्री श्रीधर श्रीधर स्वामी की जो भाष्य

1358
01:35:23,480 --> 01:35:27,880
है वो स्वीकार किया था लेकिन किस वजह से उनको उन्होंने जगतगुरु

1359
01:35:27,880 --> 01:35:32,080
कहा है पूरी दुनिया के गुरु आप मानते हैं शंकराचार्य जगतगुरु

1360
01:35:32,080 --> 01:35:38,080
होते हैं मैं पूरी चेतन

1361
01:35:43,920 --> 01:35:48,000
चरितामृथम के उस से जानता हूं मैं

1362
01:35:48,000 --> 01:35:52,240
भागवत को श्रीधर स्वामी के उस से जानता हूं और आप स्वामी को पढ़ेंगे

1363
01:35:52,240 --> 01:35:56,400
जाकर के तो वो तो पूरा अद्वैत दर्शन है अरे आप मुझे ये बताइए जब

1364
01:35:56,400 --> 01:36:00,520
चैतन्यम में आप ये पढ़ रहे हैं तो चैतन्य चरम का पूरा भाष्य पढ़ेंगे ना वो मानेंगे ना

1365
01:36:00,520 --> 01:36:04,760
फिर आप तो बताइए क्या है बताए के केवल एक कांटेस्ट

1366
01:36:04,760 --> 01:36:08,960
थोड़ी उठाएंगे उसमें से नहीं तो एक कांटेस्ट का अर्थ तो बताइए कि वो अगर कंट्रा टिंग

1367
01:36:08,960 --> 01:36:13,000
लाइन है तो क्यों है अगर वो मधुवा चार्य ने भी मधवा चार्य

1368
01:36:13,000 --> 01:36:17,080
जी ने भी भाष्य लिखा था तो उन्होंने अपनी गुरु परंपरा के भाष्य को क्यों नहीं लिया

1369
01:36:17,080 --> 01:36:21,120
उन्होंने शंकर गुरु परंपरा के भाष्य को क्यों लिया जो कि आपसे बिल्कुल अपोजिट

1370
01:36:21,120 --> 01:36:25,360
है क्यों लिया मचार जी का भाष्य काफी नहीं था क्या भागवत

1371
01:36:25,360 --> 01:36:25,860
पर

1372
01:36:25,800 --> 01:36:29,920
सुनिए अगर अपोजिट होते तो चेतन चरता में क्यों उनका नाम होता आप खुद

1373
01:36:29,920 --> 01:36:33,960
सोचिए जरा अरे यही से तो देखिए जो झूठ होता

1374
01:36:33,960 --> 01:36:38,080
है ना उसको उसको झूठ को झूठ को उसको याद रखना पड़ता

1375
01:36:38,080 --> 01:36:42,360
है और कई बार ऐसा होता है कि हम सही करते करते करते करते भी गलती

1376
01:36:42,360 --> 01:36:47,080
कर बैठते हैं ये झूठ की खासियत होती है तो आप जब चैतन्य चरितामृथम

1377
01:36:47,080 --> 01:36:51,760
खुद ही अपना ही तोड़ लिख रखा है जैसे की एक बात बताता हूं आपको

1378
01:36:51,760 --> 01:36:56,040
सुनि भगवत गीता यथारूप में दूसरे अध्याय के 62 श्लोक

1379
01:36:56,040 --> 01:37:00,200
में लिखा हुआ है जो शिवजी है वो अपनी इंद्रियों पर कंट्रोल

1380
01:37:00,200 --> 01:37:04,360
नहीं कर सकते इंद्रियों के अधीन है और भागवत के भाष्य में लिखा हुआ

1381
01:37:04,360 --> 01:37:09,000
स्कोन के द्वारा प्रकाशित पुस्तक में ही शिवजी को

1382
01:37:09,000 --> 01:37:13,320
उनके पार्वती के साथ देख करके इंद्रियों के अधीन समझने वाले मूर्ख

1383
01:37:13,320 --> 01:37:17,600
है तो ये क्या हु मुझे बताइए आप लोग हमेशा आधा अधूरा क्यों मानते हो

1384
01:37:17,600 --> 01:37:21,600
अभी आधा अधूरा आप मान रहे भया आप

1385
01:37:21,600 --> 01:37:25,840
चीजों को सही कर दीजिए वो शंकराचार्य को स्वीकार करते हैं कि नहीं करते

1386
01:37:25,840 --> 01:37:30,200
हैं की वीडियो देख रहा था उन्होंने भी बोला कि पदम पुराण में कुछ श्लोक

1387
01:37:30,200 --> 01:37:34,800
अलग से ऐड कर दिए हैं वो भी ऐसे बोल रहे थे आप

1388
01:37:34,800 --> 01:37:39,000
किसकी अभी मैं वीडियो देख रहा था कल निश्चलानंद स्वरूप

1389
01:37:39,000 --> 01:37:41,440
महाराज जी की तो उन्होंने भी बोला कि

1390
01:37:41,440 --> 01:37:45,600
वो जगतगुरु शंकराचार्य ने हां जी तोन उन्होंने

1391
01:37:45,600 --> 01:37:49,880
बोला कि पदम पुराण में कुछ श्लोक ऐड कर दिए गए आप चेतन चरम

1392
01:37:49,880 --> 01:37:54,240
की बोल रहे हो कि ये श्लोक कर दिया बाकी जो है हम नहीं मानेंगे

1393
01:37:54,240 --> 01:37:58,280
मानो तोरा मानो ना शरार

1394
01:37:58,280 --> 01:38:02,520
हम आपके प्रमाणों को आपके सामने रख रहे हैं आपके प्रमाण जो बातें

1395
01:38:02,520 --> 01:38:06,720
आप बोल देखिए धर्म अधर्म की क्या होती है अच्छा सुनि अधर्म की जो

1396
01:38:06,720 --> 01:38:10,720
लक्षण होते हैं वो ये होते हैं कि जिन सिद्धांतों को हम स्वयं स्वीकार करते

1397
01:38:10,720 --> 01:38:14,840
हैं ना हम उन्ही सिद्धांतों को कुछ ही क्षणों बाद छोड़ देते

1398
01:38:14,840 --> 01:38:19,040
हैं अभी आप अभी आप छोड़ेंगे अब मुझे बताइए श आदि

1399
01:38:19,040 --> 01:38:23,080
शंकराचार्य जी का जो अवतार हु क्यों हुआ था आप पदम

1400
01:38:23,080 --> 01:38:27,640
पुराण के इस श्लोक को नहीं मानेंगे मुझे पता है मैं नहीं मानूंगा क्योंकि आपके रामानुजाचार्य

1401
01:38:27,640 --> 01:38:31,720
संप्रदाय के जिसको आप प्रमाणिक बोल रहे हैं वो कह रहे कि इसको प्रमाणिक मानने वाला

1402
01:38:31,720 --> 01:38:35,720
लोक को मूर्ख है यानी कि आपके अनुसार आप मूर्ख हो या तो आप इस सिद्धांत

1403
01:38:35,720 --> 01:38:39,920
को छोड़ दोगे रामानुजाचार्य परंपरा प्रमाणिक है आपको खोल के दिखा देता हूं

1404
01:38:39,920 --> 01:38:43,920
मैं दिख रहा हूं कि नहीं आपको अभी आपरा आप दिख रहे हो अभी आप मैं दिख रहा हूं

1405
01:38:43,920 --> 01:38:49,920
मैं एक मिनट आपको दिखाता

1406
01:38:50,120 --> 01:38:56,120
हूं

1407
01:39:06,120 --> 01:39:12,120
हा तब तक आप बोलते रहिए मैं पुस्तक दिखा देता हूं देखिए

1408
01:39:12,200 --> 01:39:16,280
य ये बिल्कुल भी स्वीकार नहीं होगा आप पदम पुराण को भी बता

1409
01:39:16,280 --> 01:39:20,520
दो कि उसमें भी गलत लिखा है तो यानी कि आपके अनुसार रामन चार संप्रदाय

1410
01:39:20,520 --> 01:39:24,720
प्रमाणिक नहीं है देखो यही मैं कह रहा था ना कि अपने ही सिद्धांत

1411
01:39:24,720 --> 01:39:29,160
को खुद ही छोड़ेगा व्यक्ति ये अधर्म के लक्षण होते हैं छोड़

1412
01:39:29,160 --> 01:39:33,400
हमारा हमारा सिद्धांत गडिया सिद्धांत है ना तो रामानुजाचार्य

1413
01:39:33,400 --> 01:39:37,680
परंपरा को प्रमाणिक मानते हैं कि नहीं मानते हैं यह बताइए बिल्कुल मानते हैं

1414
01:39:37,680 --> 01:39:41,800
तो राम जाचार्य के जो कह रहे वो प्रमाणिक चीज नहीं है हम प्रमाणिक इसलिए

1415
01:39:41,800 --> 01:39:46,120
मानते हैं क्योंकि श्री संप्रदाय का वर्णन पदम पुराण में है इसलिए मानते हैं हम अरे

1416
01:39:46,120 --> 01:39:50,200
तो जहां से मिलने वाली शिक्षा भ्रामक होगी या सही होगी ये

1417
01:39:50,200 --> 01:39:54,240
बताइए श्री संप्रदाय में जो भाई साहब आप कभी भी

1418
01:39:54,240 --> 01:39:58,520
जब कट टू कट की बात आती है आप बिल्कुल उसको टालने लगते हो मैं पूछ रहा हूं

1419
01:39:58,520 --> 01:40:02,800
यहां से मिलने वाली शिक्षा श्री संप्रदाय से मिलने वाली शिक्षा भ्रामक

1420
01:40:02,800 --> 01:40:05,160
होगी या फिर सही होगी प्रमाणिक

1421
01:40:05,160 --> 01:40:09,280
होगी मैं वही बता रहा हूं श्री संप्रदाय काही बता रहा हूं श्री संप्रदाय में आदि

1422
01:40:09,280 --> 01:40:13,360
शंकर जा को अवतार जो माना वो इसी विषय में माना जो पदम पुराण में बताया

1423
01:40:13,360 --> 01:40:18,120
गया है इस विषय में जो क्या कहते हैं कि वो

1424
01:40:18,120 --> 01:40:22,160
भ्रम फैलाने आए थे जिसे कि लोग वापस आ पाए हां बिल्कुल उसपे उस परे हम आ

1425
01:40:22,160 --> 01:40:26,520
जाएंगे अभी आप मुझे बता दीजिए य जो पुराण दिग दर्शन है ये

1426
01:40:26,520 --> 01:40:30,520
आपके श्री संप्रदाय है बहुत ही महान आचार इनके तो मैं चरणों

1427
01:40:30,520 --> 01:40:34,520
की वंदना करू सुनि भाई आप मुझे बता दीजिए क्या ये

1428
01:40:34,520 --> 01:40:38,520
झूठे हैं अभी आप नाक फुला के बोल रहे थे ना सर गोस्वामी

1429
01:40:38,520 --> 01:40:42,880
हमारे सारे आचार्य अच्छा ये बताइए वैष्णव तो ये व वैष्णव चार्य

1430
01:40:42,880 --> 01:40:47,080
झूठे है क्या नहीं मुझे ये बताइए जब मैं आपसे भाई साब

1431
01:40:47,080 --> 01:40:51,160
पूछ रहा हूं अभी मैं आपको श्लोक दिखा देता हूं अरे मैं माया आप

1432
01:40:51,160 --> 01:40:55,280
अपनी तब तक बात बोलिए मैं यह कह रहा हूं श्रुति ग्रंथ में और कृति

1433
01:40:55,280 --> 01:40:59,480
ग्रंथ में जब मतभेद होगा तो अब किसको आप स्वीकार करेंगे श्रुति ग्रंथ को स्वीकार करें कृति

1434
01:40:59,480 --> 01:41:03,520
ग्रंथ को तो ये जो ये जो बात बोल रहे

1435
01:41:03,520 --> 01:41:07,640
हैं ये तो बात ये बात जो ये बोल रहे हैं ये तो उसी के बारे में बोल रहे

1436
01:41:07,640 --> 01:41:11,840
हैं ना कि वो चीज मान्य नहीं है प्रक्षिप्त है और इन्होने इन्होंने ऐसा

1437
01:41:11,840 --> 01:41:16,000
नहीं है कि अपने मन से बोल दिया इन्होने प्रमाण के साथ बोला है आप इसका इसका

1438
01:41:16,000 --> 01:41:20,480
अर्थ ये है ना इसका अर्थ ये है कि आप ये मानते हैं कि आचार्य झूठ बोल सकते हैं

1439
01:41:20,480 --> 01:41:24,480
नहीं मैं य मानता हूं कि कृति ग्रंथ में और शति ग प्रमाणिक

1440
01:41:24,480 --> 01:41:29,160
परंपरा के आचार्य भी झूठ बोल सकते हैं कि नहीं ये बताइए अरेब

1441
01:41:29,160 --> 01:41:33,360
यह बताइए आप शास्त्र को पदम पुराण को झूठ बोल रहे हैं आप क्लियर पदम पुराण

1442
01:41:33,360 --> 01:41:38,280
में मिक्सिंग की गई है उस पूरे के पूरे शास्त्र को थोड़ी झूठ बोल रहा हूं

1443
01:41:38,280 --> 01:41:42,280
उसम एक लोक है जो मिलावट है जो हमारे प्रमाणिक आचार्य प्रमाण के साथ प्रस्तुत

1444
01:41:42,280 --> 01:41:46,280
कर रहे दिखाता आपको आपके सिद्धांत को वो प्रत्यक्ष

1445
01:41:46,280 --> 01:41:50,840
नहीं करता इसलिए व आपको झूठ लग रहा अरे तो आपसे

1446
01:41:50,840 --> 01:41:54,840
प्रमाणिक कह रहे हैं वो कह रहे हैं ना उसे आप मेरे अनुसार प्रमाणिक नहीं है मेरे अनुसार

1447
01:41:54,840 --> 01:41:59,200
तो है सम्माननीय प्रमाणिक भी है मगर वो आपके अनुसार है मैं आपका

1448
01:41:59,200 --> 01:42:03,280
आपके द्वारा दिया जाने वाला सिद्धांत आपको बोल रहा हूं ये प्रमाणिक आचार्य है

1449
01:42:03,280 --> 01:42:07,280
कि नहीं है बिल्कुल है क्यों नहीं है है तो फिर फिर है

1450
01:42:07,280 --> 01:42:12,200
तो फिर इनसे द्वारा प्राप्त होने वाली शिक्षा भ्रामक है सुनिए सुनिए

1451
01:42:12,200 --> 01:42:16,760
पदम पुराण में ही श्री संप्रदाय के बारे में बताया गया है इसलिए प्रमाण है

1452
01:42:16,760 --> 01:42:21,000
उसी में आदि शंकराचार्य वाले के बताया है वो भी प्रमाण है आप एक

1453
01:42:21,000 --> 01:42:25,200
शंकराचार्य के लिए नहीं वो कालिको के लिए आया था दक्ष के यज्ञ

1454
01:42:25,200 --> 01:42:29,280
में माता सती ने जब आत्म द कर लिया तब पहले इन्होंने

1455
01:42:29,280 --> 01:42:33,480
शिव गणों ने उनको श्राप दिया उनकी मुक्ति के लिए वैष्णव

1456
01:42:33,480 --> 01:42:36,000
आगम शास्त्र लिखे गए जिसमें से एक ब्राह्मण

1457
01:42:36,000 --> 01:42:40,160
आगम शास्त्र है ब्रह्म समिता और जो देवी

1458
01:42:40,160 --> 01:42:44,160
भागवत पुराण है उसमें साफ मेंशन है कि जो आगम शास्त्र है

1459
01:42:44,160 --> 01:42:48,160
ये कहीं कहीं प अवद भी हो जाते हैं तो इनके उतने ही अंश को स्वीकारा जाए

1460
01:42:48,160 --> 01:42:52,400
जो वैदिक है सुनिए सुनिए अगर आप पूर्णतया यानी कि इनके

1461
01:42:52,400 --> 01:42:56,600
सत्यापन के लिए हमें पीछे के ग्रंथों को देखना पड़ेगा पर रिलाई नहीं कर सकते पूरी तरह

1462
01:42:56,600 --> 01:43:01,000
से पीछे पीछे के अगर आप पदम पुराण को बेस नहीं मानेंगे तो

1463
01:43:01,000 --> 01:43:05,160
उसके बाद के बात को शास्त्र भैया देखिए जो सनातन

1464
01:43:05,160 --> 01:43:09,400
धर्म है ना वो ना तो केवल ईश्वर पर आधारित है ना ही वो केवल

1465
01:43:09,400 --> 01:43:13,880
गुरु गोविंद पर आधारित है ना ही वो केवल ग्रंथ पर आधारित है ना ही वो केवल

1466
01:43:13,880 --> 01:43:17,920
क्या कहते गुरु पर आधारित है जब गुरु गोविंद और ग्रंथ इन तीनों

1467
01:43:17,920 --> 01:43:21,920
के परस्पर उससे संगम से शिक्षा हमें प्राप्त होती

1468
01:43:21,920 --> 01:43:25,960
है वो होती है अगर गोविंद हमारा बाधित हो जाएगा शास्त्र

1469
01:43:25,960 --> 01:43:30,280
कहेंगे गुरु कहेंगे तो हम नहीं मान पाएंगे अगर श

1470
01:43:30,280 --> 01:43:34,280
हमारा हो जाएगा और कभी भी कृति ग्रंथ का प्रमाण देखना

1471
01:43:34,280 --> 01:43:38,440
हो तो श्रुति से मैच करना होता है कभी श्रुति प्रमाण का ग्रंथ वो शति है ही नहीं

1472
01:43:38,440 --> 01:43:42,920
पहली बात वो शति है कहां से बताइए क्या शति शास्त्र है

1473
01:43:42,920 --> 01:43:47,160
वो स्मृति स्मति स्मति है तो आप उसको शति क्यों बोल रहे

1474
01:43:47,160 --> 01:43:51,080
वही अगर कृति गं का प्रमाण

1475
01:43:51,080 --> 01:43:55,200
स्मृति का प्राण देखना हो तो श्रुति से यह सिद्धांत कहता है

1476
01:43:55,200 --> 01:43:59,240
कहां लिखा है जितने भी वैष्णव आचार सबका

1477
01:43:59,240 --> 01:44:03,400
सिद्धांत यही है मैं आपको पूछ रहा हूं लिखा कहां है क्या

1478
01:44:03,400 --> 01:44:07,520
लिखा है कहीं क्या चीज य सिद्धांत जो आप बोल रहे

1479
01:44:07,520 --> 01:44:12,320
हैं सुति से देखना चाहिए भाई हम तो सुनिए

1480
01:44:12,320 --> 01:44:16,560
बोला गुरु का और ये मैच होना चाहिए तब होगा

1481
01:44:16,560 --> 01:44:21,160
कहां पर लिखा है गुरु के आवश्यक वो मैच होने चाहिए बिल्कुल बिल्कुल बिल्कुल

1482
01:44:21,160 --> 01:44:25,360
पुराण का मैं श्लोक क्रमांक दे दे रहा हूं हा दे दीजिए गुरु गुरु जो है सभी संश

1483
01:44:25,360 --> 01:44:29,840
का वेदन करते हैं प्रमाण युक्ति और तर्क से तो प्रमाण क्या हुआ

1484
01:44:29,840 --> 01:44:34,240
नहीं नहीं प्रमाण से प्रमाण शास्त्र हु है ना हा शास्त्र

1485
01:44:34,240 --> 01:44:38,240
हा गुरु गुरु गुरु प्रमाण नहीं है गुरु श तो यानी कि

1486
01:44:38,240 --> 01:44:42,320
आप आप जो है जब गुरु कहेगा कि बेटा ये जो श्लोक है प्रमाणिक नहीं

1487
01:44:42,320 --> 01:44:47,280
है छाप दिया गया है तो आप गुरु को नहीं मानेंगे आप उसको मानेंगे

1488
01:44:47,280 --> 01:44:52,320
देखिए आप आपके

1489
01:44:52,320 --> 01:44:56,680
सुनिए पूरे गडिया आचार्य में वृंदावन में किसी ने भी ऐसा नहीं आपके अनुसार

1490
01:44:56,680 --> 01:45:00,680
ये झूठे है ना ये जो मधवा चार्य जी है झूठे हैं पदम

1491
01:45:00,680 --> 01:45:04,760
पुराण में किसी भी वैष्णव आचार्य ने ऐसा देखो आप आप सत्य को कभी जिस

1492
01:45:04,760 --> 01:45:09,160
चीज को आप अपने आचरण एक्शन स्पीक्स लाउडर देन वॉइस आप अपने आचरण

1493
01:45:09,160 --> 01:45:13,200
से जिस तथ्य को खपत करते हैं जब मैं उसे क्लियर कट स्वीकार करने को कहता हूं

1494
01:45:13,200 --> 01:45:17,400
तो आप बचते हैं यही उन्होंने भी किया था हमेशा आप जो है सत्य

1495
01:45:17,400 --> 01:45:23,000
से के बगल से निकलते हैं अरे आप

1496
01:45:23,000 --> 01:45:27,120
कर हमारा समाज तर रहेगा अभी

1497
01:45:27,120 --> 01:45:31,360
तक आपने तीन शास्त्र ऐसे बोल दिया जो बोल दिया आगम है मिश्रित है अरे ऐसे थोड़ी

1498
01:45:31,360 --> 01:45:35,680
होता है आप हर किसी को आप तो आर समाज हो रहे होरे आ आ समाज

1499
01:45:35,680 --> 01:45:40,160
नहीं हो रहा हं आप हो रहे गैर सनातनी आप हो रहे गैर सनातनी

1500
01:45:40,160 --> 01:45:44,160
देख गैर सनातनी ऐसे हो रहे क्योंकि आप गुरु परंपरा को नहीं मान रहे गुरु जो

1501
01:45:44,160 --> 01:45:48,440
कह रहा है गुरु आपके हिसाब से प्रमाणिक गुरु जो कह रहा है बेटा ये लोक

1502
01:45:48,440 --> 01:45:52,880
जो है प्रमाणिक नहीं है इसको प्रमाणिक समझने वाले

1503
01:45:52,880 --> 01:45:57,560
आप कह रहे हो कि नहीं साहब गुरु की बात नहीं मानेंगे पदम पुराण तो

1504
01:45:57,560 --> 01:46:01,880
आपको जो पदम पुराण प्राप्त कैसे हुआ ये बताइए कैसे प्राप्त होता है आपको

1505
01:46:01,880 --> 01:46:05,960
आपको आपको कहां से होते है सारे सा मेरे को तो गुरु गुरु परंपरा से मिलता है भाई

1506
01:46:05,960 --> 01:46:07,480
तो मेरे तो अगर गुरु कहेगा

1507
01:46:07,480 --> 01:46:12,400
कि गीता प्रेस के गोरखपुर में अगर फलाना श्लोक प्रक्षिप्त है तो मैं उसको प्रक्षिप्त मानूंगा

1508
01:46:12,400 --> 01:46:16,880
ये जो आपके पास बुक है ये कहीं से प्रिंट होके आई है ना हां तो फिर

1509
01:46:16,880 --> 01:46:21,040
तो इसका मतलब ये है कि आपके यहां पर भी जो भी ग्रंथावली है वो मानी

1510
01:46:21,040 --> 01:46:25,240
जा सकती है व संदेहास्पद है नहीं मेरा कहने का मतलब

1511
01:46:25,240 --> 01:46:29,360
है हमारे गुरु ने प्रमाणिक माना सारे शास्त्रों को

1512
01:46:29,360 --> 01:46:33,360
तो जब आपके द्वारा आपके गुरु ने इनको प्रमाणिक कहा है तो इनकी

1513
01:46:33,360 --> 01:46:37,680
बात आप मानेंगे की नहीं मानेंगे कल को अगर वेदों में भी आपके सिद्धांत

1514
01:46:37,680 --> 01:46:42,320
के अकॉर्डिंग नहीं मिलेगा देखिए हाइपोथेटिकल बात मत करिए नहीं मिलेगा

1515
01:46:42,320 --> 01:46:46,440
टिकल नहीं मैंने बार बोली टिकल बात कर रहे

1516
01:46:46,440 --> 01:46:50,600
अरे आप जो बोल रहे हो वही बता रहा आपने पदम पुराण को गलत बोल

1517
01:46:50,600 --> 01:46:54,600
दिया आप जो पुराण को गलत नहीं बोला है उस श्लोक को गलत बोला है

1518
01:46:54,600 --> 01:46:58,840
और उसके बाद भी अगर उसे आप लेंगे तो वो कापालिक के ऊपर फिर बैठता

1519
01:46:58,840 --> 01:47:03,480
है अच्छा तो ये बताइए वो श्लोक किसने ऐड किया होगा कौन करेगा वैश्णवा चार्य

1520
01:47:03,480 --> 01:47:07,560
अरे कोई भी ऐड कर दे जिसका मन है वो ऐड कर दे क्या बात है इसीलिए तो गुरु

1521
01:47:07,560 --> 01:47:11,840
परंपरा होती है कि परंपरा प्राप्त जो गुरु गण है वो हमको बताएंगे कि

1522
01:47:11,840 --> 01:47:16,080
कौन सा श्लोक सही है कौन सा नहीं है आज वेद हमें जो प्राप्त है कैसे प्राप्त है

1523
01:47:16,080 --> 01:47:20,640
परंपरा से अब हम गुरुओं को जब गुरु ये कहेगा कि नहीं भाई ये श्लोक जो है

1524
01:47:20,640 --> 01:47:22,640
तो हम कहते नहीं हम तुम्ह नहीं मानते हम तो उसको मानते

1525
01:47:22,640 --> 01:47:27,120
हैं जो किताब है अरे मैं अपने गुरु परंपरा बता रहा हूं ना वैष्णव आचार

1526
01:47:27,120 --> 01:47:31,240
आपकी परंपरा ही तो कह रही है ये भी आपकी है किसी ने नहीं नकारा

1527
01:47:31,240 --> 01:47:35,240
केवल आपसे आपसे मैं पूछ रहा हूं ये भी तो किसी ने नहीं

1528
01:47:35,240 --> 01:47:39,280
नकारा की बात तो फिर कर लेंगे फिलहाल मैं पूछ रहा हूं आपके अनुसार य प्रमाणिक है कि

1529
01:47:39,280 --> 01:47:43,360
नहीं पूरा पदम प्राण प्रमाणिक है नहीं नहीं ये

1530
01:47:43,360 --> 01:47:47,680
यह प्रमाणिक है कि नहीं ये क्या जो माधवाचार्य जी

1531
01:47:47,680 --> 01:47:52,120
है अभी मैंने आपके स गो स्वामियों बात आ रही थी मैं भी कह दू

1532
01:47:52,120 --> 01:47:56,600
कि भाई उनके द्वारा लिखित जो आठ श्लोक है आप कह रहे हो वो है और सट गोस्वामी

1533
01:47:56,600 --> 01:48:00,800
ने हो सकता है अपने मन से मिला दिया झूठ कह दिया मैंने तो ऐसा नहीं कहा मैंने तो आपकी बात रखी

1534
01:48:00,800 --> 01:48:05,080
सट गो स्वामियों के सम्मान को रखा अब आप अपने ही द्वारा मैं ये नहीं क रहा शंकराचार्य

1535
01:48:05,080 --> 01:48:09,080
जी को आप प्रमाणिक मानिए आप अपने ही द्वारा स्वीकार गए प्रमाणिक आचार्य

1536
01:48:09,080 --> 01:48:13,120
को कह र नहीं उन्होने झूठ लिखा आपने चेतन ताम का अपने श्लोक

1537
01:48:13,120 --> 01:48:17,280
माना केवल उसके अलावा अचिंत भदा भेद को नहीं माना अचिंत भदा

1538
01:48:17,280 --> 01:48:21,320
भेद का अर्थ आप ले रहे हैं वो अलग है मेरे हिसाब से व मेरे हिसाब

1539
01:48:21,320 --> 01:48:25,320
से है कि भगवान और जीव में कोई भेद नहीं है मगर इस अभेद के बारे में सोचना

1540
01:48:25,320 --> 01:48:29,640
नहीं है अभेद स्थिति है व प्राप्त होगी य आपको दत का निर्वाह करना है

1541
01:48:29,640 --> 01:48:33,720
तब अवत की स्थिति प्राप्त होगी जैसे की जैसे की सुनिए

1542
01:48:33,720 --> 01:48:37,640
जैसे की पृथ्वी जैसे की सुनिए तो एक अच्छा त अच्छा

1543
01:48:37,640 --> 01:48:41,840
लगेगा आपको सुन लीजिए एक जैसे की पृथ्वी जो है वो मूल

1544
01:48:41,840 --> 01:48:45,880
जो वस्तुत है वो गोल है मगर जो पृथ्वी के साथ व्यवहार करते हैं

1545
01:48:45,880 --> 01:48:49,960
वो चपटी होने का व्यवहार करते हैं इधर चले जाओ उधर चले जाओ पूर्व दि

1546
01:48:49,960 --> 01:48:53,760
में

1547
01:48:53,760 --> 01:48:57,760
भाषा बो रहे हम तो कभी चपटी नहीं मानते उसे अरे

1548
01:48:57,760 --> 01:49:01,920
भाई आपका व्यवहार तो चपटे अनुसार है ना आप क्या गोल प मोटरसाइकिल चलाते

1549
01:49:01,920 --> 01:49:06,320
हैं नहीं सुनिए हमारे आप गोलाई में मोटरसाइकिल चलाते हैं क्या

1550
01:49:06,320 --> 01:49:10,400
ईस्ट वेस्ट सुनिए व्यवहार आप समझ ही नहीं रहे मैं क्या बोल रहा हूं

1551
01:49:10,400 --> 01:49:14,480
हम लोग व्यवहार सुनिए व्यवहार हम लोग क्या करते हैं पृथ्वी के साथ

1552
01:49:14,480 --> 01:49:18,520
हम लोग व्यवहार करते हैं चपटी होने वाला अरे व्यवहार व्यवहार वो करता है ना

1553
01:49:18,520 --> 01:49:22,600
जो अज्ञानी हो जिसे अरे भाई साहब आप ईस्ट वेस्ट साउथ साउथ

1554
01:49:22,600 --> 01:49:26,680
नॉर्थ ये सब बोलते हैं आदमी को कि नहीं आदमी रास्ता पूछता है उसको उंगली दिखाते है

1555
01:49:26,680 --> 01:49:30,680
कि नहीं उधर चले जाओ अरे यह बताओ जिसको ज्ञान हो चुका है कि यह चपटी

1556
01:49:30,680 --> 01:49:34,680
नहीं है वो क्यों व्यवहार करेगा वैसा तो इसका मतलब आप व्यवहार गोल

1557
01:49:34,680 --> 01:49:38,800
का करते हैं पृथ्वी के साथ और क्या गोल है चलिए ठीक ये बात

1558
01:49:38,800 --> 01:49:43,120
भी नोट कर लो आप व्यवहार गोल का करते हो यानी कि आप जब उंगली

1559
01:49:43,120 --> 01:49:47,360
दिखा रहे हैं कि ईस्ट में है तो आपकी उंगली मालूम है गोल के आधार प आपकी उंगली अंतरिक्ष

1560
01:49:47,360 --> 01:49:52,240
में जा रही है अगर आप वर चप

1561
01:49:52,240 --> 01:49:56,320
आपसे मैं पूछ रहा हूं आपने कभी उंगली दिखाई कि उधर चले जाओ किसको

1562
01:49:56,320 --> 01:50:00,840
किसी को मार दिखाया कि भाई वो उधर है सुनिए

1563
01:50:00,840 --> 01:50:04,880
ये ये तो आपसे मैं पूछ मैं आपसे पूछ रहा हूं आपने

1564
01:50:04,880 --> 01:50:08,960
आज तक किसी को रास्ता दिखाया कि उधर चले जाओ अभी अभी अभी आपकी बात कट

1565
01:50:08,960 --> 01:50:13,360
जाएगी दो मिनट में ही आप मुझे ये बताइए जब साइंटिस्ट ने व समुद्र

1566
01:50:13,360 --> 01:50:17,440
के किनारे था व जब तक उसे अज्ञान था लेकिन समुद्र किनारे

1567
01:50:17,440 --> 01:50:21,440
पर जाकर उसने क्या बोला यह तो धरती गोल है उसे ज्ञान हुआ हु अरे मैं

1568
01:50:21,440 --> 01:50:25,440
वही तो कह रहा हूं आपसे धरती गोल है मगर वो तब आपको व

1569
01:50:25,440 --> 01:50:29,600
जो आपके व्यवहार जो आपको वो चीज बिल्कुल वस्तुत समझ में आती है तब जब

1570
01:50:29,600 --> 01:50:33,840
आप धरती से बाहर निकल के देखते हो जैसे एरोप्लेन एरोप्लेन

1571
01:50:33,840 --> 01:50:38,000
की जो परम स्थिति होती है वो होती है उड़ना मगर धरती से छूट

1572
01:50:38,000 --> 01:50:42,000
जाना मगर धरती से छूटने के लिए वो पहले धरती पर ही दौड़ता है सुनिए मेरी

1573
01:50:42,000 --> 01:50:46,120
बात इसी प्रकार से जो पृथ्वी का जो मूल स्वरूप है वो आपको पता करने

1574
01:50:46,120 --> 01:50:50,200
के लिए आपको उस पर्सपेक्टिव से देखना पड़ेगा जब पथवी को छोड़

1575
01:50:50,200 --> 01:50:54,880
के बाहर से देखो तब समझ में आएगा ये गोल है व्यवहार आज भी आप और मैं दोनों

1576
01:50:54,880 --> 01:50:58,960
सिर्फ आप भले ही आप रबली कह ले आप और मैं दोनों पृथ्वी के साथ

1577
01:50:58,960 --> 01:51:03,400
व्यवहार जो करते हैं चपटी वाला करते हैं जब हम किसी को मार्ग दिखाते हैं ना इधर चले जाओ

1578
01:51:03,400 --> 01:51:07,560
तो उसमें हमारी जो उंगली होती है धरती को छोड़ के आकाश की ओर जा रही होती है

1579
01:51:07,560 --> 01:51:11,640
मगर हमें लगता नहीं हम उसको सामने भेज रहे हैं जिसको ज्ञान हो चुका

1580
01:51:11,640 --> 01:51:16,040
है धरती गोल है वो आपका ज्ञान है मेरे भाई आपका व्यवहार

1581
01:51:16,040 --> 01:51:20,200
नहीं है वो व्यवहार आपका चपटी वाला है आप समझ नहीं रहे मैं क्या कह रहा हूं

1582
01:51:20,200 --> 01:51:24,400
हा देखिए अभी तक आप समझ रहे थे अब आप ये भी नहीं समझ रहे मैं जो कह रहा हूं

1583
01:51:24,400 --> 01:51:28,440
आपको ज्ञान है मगर आपको व्यवहार वो आपके व्यवहार

1584
01:51:28,440 --> 01:51:32,440
में अभी वो गोलाई नहीं आई है आपके व्यवहार में अभी चपटा है आपको ज्ञान

1585
01:51:32,440 --> 01:51:36,560
है कि ये धरती गोल है वस्तुत बस यही जो भेद है ऐसा ही भेद

1586
01:51:36,560 --> 01:51:40,960
है सुनि आदमी की जो परम स्थिति है वो अद्वैत अवश्य है

1587
01:51:40,960 --> 01:51:45,240
मगर यहां पर उसको इस चीज पर ध्यान ना दे कर के व्यवहार का विषय द्वैत कि भगवान

1588
01:51:45,240 --> 01:51:49,560
वो सामने खड़े हैं मुझे उनसे पूछना है मुझे उन्हें पूछना है वो मेरे ईस्ट

1589
01:51:49,560 --> 01:51:53,840
है मेरे सब कुछ है मेरे प्रेम का विषय मेरी भक्ति का विषय सब कुछ और उनको

1590
01:51:53,840 --> 01:51:58,440
पूछने से ही मेरी को वो स्थिति वि स्थिति जो भी है प्राप्त नी हो जाएगी अद्वैत

1591
01:51:58,440 --> 01:52:02,440
अद्वैत केवल इसलिए कहा गया क्योंकि हम सनातन है और चेतन है ईश्वर

1592
01:52:02,440 --> 01:52:06,480
सनातन है और चेतन है इसके अतिरिक्त शास्त्रों में कोई भी वर्णन नहीं है कि कोई ईश्वर

1593
01:52:06,480 --> 01:52:10,800
बना हो या बन सकता आपने जो एक बात कही ना कि हम धरती के साथ चपटे का व्यवहार

1594
01:52:10,800 --> 01:52:14,880
नहीं करते आप पूरे पूरे संसार को घूम लेना भाई साहब हर मनुष्य जो

1595
01:52:14,880 --> 01:52:18,920
है संसार का हर मनुष्य धरती के साथ चपटा व्यवहार

1596
01:52:18,920 --> 01:52:22,640
करता है आप इस मुझे किसी वेद शास्त्र में

1597
01:52:22,640 --> 01:52:26,720
आप प्रमाण दे दीजिए कि किसी ने ईश्वर की स्थिति प्राप्त करी हो

1598
01:52:26,720 --> 01:52:30,840
ईश्वर बना हो क्या चीज कोई

1599
01:52:30,840 --> 01:52:35,000
भी जीव ईश्वर बना हो मुझे प्रमाण दे दीजिए कोई भी जीव ईश्वर

1600
01:52:35,000 --> 01:52:39,040
बना हो हां भाई मोक्ष क्या है मोक्ष मोक्ष ईश्वर की

1601
01:52:39,040 --> 01:52:43,160
स्थिति है हां तो मोक्ष ईश्वर की स्थिति है तो ईश्वर सुनिए

1602
01:52:43,160 --> 01:52:47,600
ईश्वर तो ईश्वर बन जाना है आपको ईश्वर का मतलब नहीं पता

1603
01:52:47,600 --> 01:52:52,040
आपको नहीं पता भाई साब ईश्वर का मतलब होता है जो सर्जन करता प्रलय करता

1604
01:52:52,040 --> 01:52:56,200
जो जिसके अंडर में होता हो मोक्ष ईश्वर का अर्थ होता है सत्यम ज्ञान

1605
01:52:56,200 --> 01:53:00,680
अनंतम ब्रह्म सुनिए मेरी बात हा

1606
01:53:00,680 --> 01:53:05,120
सर्जन कौन करता है मोक्ष कण के बाद कोई अतो मा सदम तमस

1607
01:53:05,120 --> 01:53:09,320
मा ज्योतिर गमाया मृत मतम गमाया इस इच्छा का चाह

1608
01:53:09,320 --> 01:53:14,040
का विषय वो ईश्वर है जो सत्यम ज्ञानम अनंतम ब्रम वो है ईश्वर

1609
01:53:14,040 --> 01:53:19,000
सुनिए मेरी बात सत्यम ज्ञानम अनंतम ब्रम

1610
01:53:19,000 --> 01:53:23,040
अगर अगर उसम जीव में और उसम कोई भेद है तो वो अनंत नहीं हुआ

1611
01:53:23,040 --> 01:53:27,040
फिर मुझे मुझे यह बताइए अगर दुनिया में कोई ऐसी जगह है जहां

1612
01:53:27,040 --> 01:53:31,160
पर ईश्वर नहीं है मेरा शरीर भी तो फिर वो ईश्वर बाधित है मेरे

1613
01:53:31,160 --> 01:53:35,240
शरीर के अंदर वो नहीं आ पाया मोक्ष होने के बाद सिर्फ एक ही चीज होती है जो

1614
01:53:35,240 --> 01:53:37,720
आनंद ईश्वर में होता है वो गुरु या

1615
01:53:37,720 --> 01:53:41,880
उसके भक्त को प्रदान कर देते हैं बाकी सर्जन करता संघार करता ईश्वर कार

1616
01:53:41,880 --> 01:53:45,880
खुद करते हैं वही ईश्वर की देखिए अभी देखिए टॉपिक चेंज हो गया मैंने आपको

1617
01:53:45,880 --> 01:53:49,960
पृथ्वी का उदाहरण दिया आपने वो माना कि मैं पृथ्वी के साथ च

1618
01:53:49,960 --> 01:53:54,000
बिहेव नहीं करता हूं मैं तो गोल बिहेव करता हूं यानी कि जब आप मोटरसाइकिल चला

1619
01:53:54,000 --> 01:53:58,120
रहे होते तो फ्लैट धरती पर नहीं चला रहे होते आप सोच रहे होते कि मौत के कुए में गाड़ी चला

1620
01:53:58,120 --> 01:54:02,120
रहा हूं व्यवहार मस्तिष्क से होता है आपके मस्तिष्क में जब है धरती गोल

1621
01:54:02,120 --> 01:54:06,440
है तो आप वैसा ही नहीं नहीं ऐसे कैसे अभी आपने वहा पर स्वीकारा व पारलौकिक

1622
01:54:06,440 --> 01:54:10,720
वो है क्रिया वो समझाने के लिए बता दिया गया मगर वो पारलौकिक क्रिया

1623
01:54:10,720 --> 01:54:14,720
है वो क्या आपकी आवाज कट रही है मैं आपको

1624
01:54:14,720 --> 01:54:18,680
जरा एक मिनट आप मुझे दीजिए मैं आपको

1625
01:54:18,680 --> 01:54:24,680
मायावादी

1626
01:54:40,320 --> 01:54:44,360
मायावा वर्णन आक्षेप और उसका समाधान दोस्तों

1627
01:54:44,360 --> 01:54:48,360
आपकी स्क्रीन रुक चुकी है मुझे दिख नहीं रहा है कुछ ये बुक कौन सी है

1628
01:54:48,360 --> 01:54:52,360
वैसे नाम बता दीजिए मुझे पुराण दिग्दर्शन

1629
01:54:52,360 --> 01:54:56,480
किसके द्वारा ख माधवाचार्य शास्त्री जी और

1630
01:54:56,480 --> 01:55:00,480
इन्होंने अपने मन से नहीं लिखा है इन्होने वहा प्रमाण दिए वही दिखा रहा हूं मैं आपको

1631
01:55:00,480 --> 01:55:04,480
असल में पीडीएफ में पूरा सब कुछ है मगर वो मोबाइल के अंदर है मोबाइल इस समय चालू है तो

1632
01:55:04,480 --> 01:55:08,640
इसलिए मैं उसको छेड़ नहीं रहा हूं मुझे मुझे आपकी स्क्रीन बिल्कुल

1633
01:55:08,640 --> 01:55:12,800
दिखाई नहीं दे रही है हैंग हो चुकी है कोई कमेंट

1634
01:55:12,800 --> 01:55:15,760
करके बताएगा

1635
01:55:15,760 --> 01:55:21,760
कोई मैं दिखाई दे रहा हूं क्या आपको कोई कमेंट करेगा

1636
01:55:24,840 --> 01:55:28,880
अच्छा आपकी काफी देर से आपका फेस नहीं दिख रहा है तो

1637
01:55:28,880 --> 01:55:33,960
आप अपना फेस रिवील कर लीजिए अरे कैसे करूं मैं क्या करूं इसमें

1638
01:55:33,960 --> 01:55:38,200
बताओ तो फिर किसी दिन रख लेते हैं क्योंकि आज की पूरी

1639
01:55:38,200 --> 01:55:42,240
व्यर्थ चली जाएगी मुझे यह बताइए एक तो यह बुक जो आप

1640
01:55:42,240 --> 01:55:46,280
दिखा रहे हो मैं दिख रहा हूं कि नहीं जरा आप आपकी स्क्रीन दिख रही है ये

1641
01:55:46,280 --> 01:55:50,480
झूठ बोल रहे हैं अब आप आ ग अब आप आ गए अच्छा समय आ

1642
01:55:50,480 --> 01:55:54,480
गया 200 17 पेज नंबर भाई

1643
01:55:54,480 --> 01:55:58,520
जो ये बोल रहे हैं कि ये झूठ बोल रहे हैं नहीं नहीं वो ठीक है वो हो गया अब

1644
01:55:58,520 --> 01:56:02,840
ये देखिए भैया मैं क रहा इस पर ध्यान दीजिए

1645
01:56:02,840 --> 01:56:06,960
पेज नंबर 217 नहीं मुझे ये बताइए बुक कौन सी है और किसने लिखी

1646
01:56:06,960 --> 01:56:11,000
है पहले पुराण दिग्दर्शन माधवाचार्य शास्त्री राम अजाचार परंपरा

1647
01:56:11,000 --> 01:56:15,320
के प्रमाणिक आचार्य इनकी फोटो भी दिखा देता हूं आपको

1648
01:56:15,320 --> 01:56:21,040
और इन्होंने भी सामंजस्य के उसको माना है

1649
01:56:21,040 --> 01:56:25,120
ये इन्होंने ही पुस्तक लिखी है क्यों जिसमें हमारे

1650
01:56:25,120 --> 01:56:29,480
धर्म पर लगने वाले बहुत सारे आक्षेप है जिनका खंडन है नहीं माधवाचार्य

1651
01:56:29,480 --> 01:56:31,160
जी ने लिखी है या उनके अनुयायियों

1652
01:56:31,160 --> 01:56:35,720
ने लिखी है माधवाचार्य शास्त्री माधवा माधवा मधवा नहीं

1653
01:56:35,720 --> 01:56:39,880
अच्छा अच्छा अा येल मधवा नहीं माधवाचार्य शास्त्री ठीक

1654
01:56:39,880 --> 01:56:44,120
है ठीक है जैसे जैसे श्री प्रभुपाद जी ऐसे ही माधवाचार्य

1655
01:56:44,120 --> 01:56:49,480
शास्त्री जी वैसे ही वर्तमान के शंकराचार्य

1656
01:56:49,480 --> 01:56:53,680
लगा जगतगुरु माधवाचार्य वो वो मधवा चार्य

1657
01:56:53,680 --> 01:56:58,240
है माधवाचार्य नहीं है मधवा चार बोल रहे मधवा चार्य

1658
01:56:58,240 --> 01:57:02,280
ये मैं बोल रहा हूं ना आपको माधवाचार्य तो इन्होंने जो प्रमाण दिए है

1659
01:57:02,280 --> 01:57:06,280
वो माधवाचार्य जी के दिए है माधवाचार्य जी ने प्रमाण के साथ

1660
01:57:06,280 --> 01:57:10,320
ये दिया है देखिए क्या है अब मैं

1661
01:57:10,320 --> 01:57:14,360
इसमें आपको पढ़ के बता रहा हूं इसमें लिखा है नहीं ये श्लोक

1662
01:57:14,360 --> 01:57:18,400
किस ग्रंथ का है वही पद पुराण वाला मायावा अ

1663
01:57:18,400 --> 01:57:20,960
शास्त्र हां जी हा जीी

1664
01:57:20,960 --> 01:57:25,000
प्रतिवादी को मानो आक्षेप करने के लिए किसी पुराण का कोई मूल

1665
01:57:25,000 --> 01:57:29,080
श्लोक मिलता ही नहीं है इसलिए व प्रक्षिप्त श्लोकों के आधार पर आक्षेप

1666
01:57:29,080 --> 01:57:33,160
की इमारत खड़ी करता है पद पुराण के जिस मायावा श्लोक को

1667
01:57:33,160 --> 01:57:37,640
ऊपर के आक्षेप में प्रमाण के रूप में प्रस्थ किया गया है यह भी वस्तुतः

1668
01:57:37,640 --> 01:57:41,720
प्रक्षिप्त है श्री पंडित कालूराम शास्त्री आदि ने इसको प्रक्षिप्त

1669
01:57:41,720 --> 01:57:45,920
ही सिद्ध किया है कदाचित मास है जिसे जी इसे

1670
01:57:45,920 --> 01:57:50,040
मूल मानने का आग्रह करें तब भी पूर्व लिखित व्यवस्था

1671
01:57:50,040 --> 01:57:54,160
के अनुसार त्रिकालदर्शी त्रिकालदर्शी वेदव्यास जी ने

1672
01:57:54,160 --> 01:57:58,960
अपने से परिवर्ती श्री शंकराचार्य का

1673
01:57:58,960 --> 01:58:03,080
मायावादी बात नहीं है इसके अतिरिक्त हम पूर्व में कह चुके

1674
01:58:03,080 --> 01:58:07,560
हैं कि उक्त आचार्य ने किसी नवीन मत का प्रचार नहीं किया

1675
01:58:07,560 --> 01:58:11,960
बल्कि वेदोक्त किंतु कालक्रम से विलुप्त सिद्धांतों का ही पुनरुद्धार

1676
01:58:11,960 --> 01:58:15,960
मात्र किया है यदि मायावादी वैदिक जाननी हो तो

1677
01:58:15,960 --> 01:58:18,240
नीचे लिखे प्रमाणों का मनन कीजिए

1678
01:58:18,240 --> 01:58:22,880
इंद्रो माया भी पुरूप ते ऋग्वेद 6

1679
01:58:22,880 --> 01:58:28,880
47 18 ये मायावादी कि

1680
01:58:30,680 --> 01:58:34,680
मायावादी है देखिए इनका चता

1681
01:58:34,680 --> 01:58:39,440
एक मिनट स्वेता उपनिषद का फिर दिया है जिसम ये क्या कह रहे हैं

1682
01:58:39,440 --> 01:58:43,560
और फिर दिया उन्होने आगे ऋग्वेद का फिर से दिया

1683
01:58:43,560 --> 01:58:47,560
अब इसमें इस तरह यदि अनादि वेदोक्त मायावादी

1684
01:58:47,560 --> 01:58:51,640
के प्रचारित मायावा को ये देखिए सबसे पहली आप य बात देखिए कि यह

1685
01:58:51,640 --> 01:58:55,800
किस तरह से प्रस्तुत कर रहे हैं शंकराचार्य जी ने ऐसा मत नहीं दिया

1686
01:58:55,800 --> 01:58:59,840
है जो कि वो मूर्ख कह रहे उसको उपयोग

1687
01:58:59,840 --> 01:59:03,840
करने वाले और यह कह रहे अपने मन से नहीं दिया है वेदोक्त है वो वेदों में दिया गया

1688
01:59:03,840 --> 01:59:08,160
है व मत और इन्होंने इस बात को माना है कि शंकराचार्य

1689
01:59:08,160 --> 01:59:12,320
ने भी वही बात कही है जो घुमा फिरा करके माधवाचार्य जी ने कही

1690
01:59:12,320 --> 01:59:16,440
है जो घुमा फिरा कर के अन्य शब्दों में रामर जाचार्य जी ने भी वही बात कही

1691
01:59:16,440 --> 01:59:20,600
है विशिष्टा दत में और सबसे ज्यादा बे मेेल है वो

1692
01:59:20,600 --> 01:59:24,760
है शंकराचार्य का मत और माधवाचार्य जी का मत मगर माधवाचार्य जी

1693
01:59:24,760 --> 01:59:28,840
ने भी अपने गीता के भाष्य में लिखा है उसमें उन्होंने क्या लिखा

1694
01:59:28,840 --> 01:59:33,120
है कि सभी जीव अंत में विष्णु के शरीर में रहते हैं अब

1695
01:59:33,120 --> 01:59:33,620
अगर

1696
01:59:33,440 --> 01:59:37,880
मान लीजिए आप अद्वैत को नहीं मानते अंत में आप क्या हो रहे अच्छा

1697
01:59:37,880 --> 01:59:42,240
ये दूसरा टॉपिक है मैं पहले इनका बोलता हं ठीक है इनके चरित्र के बारे में मैंने पढ़ा नहीं

1698
01:59:42,240 --> 01:59:46,280
माधवाचार्य के चरित्र मैंने पढ़ा है श्री संप्रदाय के रामाचार्य के चरित्र में

1699
01:59:46,280 --> 01:59:50,720
पढ़ा है सबका मत शंकराचार्य जी के मत आप मुझे प्रमाण दिखाइए

1700
01:59:50,720 --> 01:59:55,000
प्रमाण मैंने आपको प्रमाण दिखाया है रामानुजाचार्य जो है इसको वो प्रक्षिप्त

1701
01:59:55,000 --> 01:59:59,320
मानते हैं प्रमाण दिखाइए मैंने आपको दिखा दिया अरे उनका सिद्धांत ही दोत

1702
01:59:59,320 --> 02:00:03,600
दोत है वशिष्ठ तो मुझे मुझे आप प्रमाण दिखाइए कि वो इस श्लोक

1703
02:00:03,600 --> 02:00:07,720
को प्रक्षिप्त मानते हैं मुझे आप प्रमाण दिखाइए आपको कुछ पढ़ने की जरूरत नहीं है

1704
02:00:07,720 --> 02:00:12,000
आप दोनों का गीता भाष्य पढ़ लीजिए मैंने मैंने

1705
02:00:12,000 --> 02:00:16,200
मैंने वो सब चीजें देखी ये जो ये जो महान आचार्य है ना इन्होंने ऐसा

1706
02:00:16,200 --> 02:00:20,240
नहीं है कि अपने सब लिखा है कि किसके

1707
02:00:20,240 --> 02:00:24,240
भाष्य में क्या मेल है क्या मेल नहीं है ये जो गीता जो मधवा चार्य

1708
02:00:24,240 --> 02:00:28,800
जी के बारे में बोल रहा हूं यह भी इन्हीं से मुझे प्राप्त हुआ है तो आप

1709
02:00:28,800 --> 02:00:33,320
सबसे बड़ी बात है कि मैंने आपको प्रमाण दिखा दिया कि रामानुजाचार्य संप्रदाय

1710
02:00:33,320 --> 02:00:37,320
इसको मानता है कि ये प्रक्षिप्त है आप कह रहे हैं कि नहीं रामानुजाचार्य

1711
02:00:37,320 --> 02:00:41,840
प्रक्षिप्त नहीं मानता तो आप मुझे प्रमाण दिखाइए कि रामानुजाचार्य ने

1712
02:00:41,840 --> 02:00:46,160
कहीं पर इसको यूज किया उस श्लोक को कि जो शंकराचार्य

1713
02:00:46,160 --> 02:00:48,480
जी है वो माया फैलाने आए थे आपने मुझे जो

1714
02:00:48,480 --> 02:00:52,520
दिखाया और उसके बाद भी अंत में भी मैंने आपको वेदों के प्रमाण भी

1715
02:00:52,520 --> 02:00:56,640
दिखा दिए जो इन्होंने दिखाए हैं जो इन्होंने दिखाए हैं ना आप पहले तो बात

1716
02:00:56,640 --> 02:01:00,760
सुनिए आपने मधवा चार्य के प्रमाण नहीं दिखाए आपने उनके संप्रदाय में कोई

1717
02:01:00,760 --> 02:01:05,080
पंडित मधवा चार्य की तो बात ही नहीं हो रही मेरे भाई साहब

1718
02:01:05,080 --> 02:01:09,320
मधवा चार्य की बात ही कहां हो रही है मधवा चार तो आपके वो है आपके द्वारा

1719
02:01:09,320 --> 02:01:13,800
बताए जाने वाले कि हमारे सबसे पहले गुरु मधवा चार्य है आदि दैविक तो इनका

1720
02:01:13,800 --> 02:01:17,840
चरि इनका चरित्र तो शायद 99 पर कोई

1721
02:01:17,840 --> 02:01:21,960
आचार्य जानते नहीं होंगे आप ये बहुत बड़ी भूल कर रहे हैं

1722
02:01:21,960 --> 02:01:26,200
अब अब आप बहुत बड़ी भूल कर रहे हैं चलिए ये भी नोट कर लिया इसका मतलब

1723
02:01:26,200 --> 02:01:30,200
यह है ना कि आपके अनुसार य झूठ बोल रहे हैं कुल मिला के नहीं नहीं मैं यह

1724
02:01:30,200 --> 02:01:34,280
कह रहा हूं आप उनकी बात को नकार भी रहे हैं और आप ये भी कह

1725
02:01:34,280 --> 02:01:38,280
रहे कि वो झूठ नहीं मैं किसी के जब उनको जानता ही नहीं उनके चरित्र को जानता ही नहीं

1726
02:01:38,280 --> 02:01:42,360
तो मैं क्या उन पर टिपड़ी करूं लेकिन मैं जाड़ी है कि वो जो शिक्षा है शिक्षा

1727
02:01:42,360 --> 02:01:46,400
को आप मान रहे हैं कि नहीं मान रहे हैं वो जो शिक्षा दे रहे हैं प्रमाणिक है

1728
02:01:46,400 --> 02:01:50,840
कि नहीं है हम जो स्वीकार करते हैं हम अरे मैं पूछ रहा हूं ये इनकी

1729
02:01:50,840 --> 02:01:54,880
शिक्षा प्रमाणिक है कि नहीं है देखो सच बोलने से क्यों कतराते हो भाई जिस चीज

1730
02:01:54,880 --> 02:01:58,960
को आप अपने कृत्यों से जाहिर कर रहे हो उसको वाणी के

1731
02:01:58,960 --> 02:02:03,160
द्वारा क्यों नहीं स्वीकार करते हो आप इनके ये जो यहां पे इन्होंने कहा

1732
02:02:03,160 --> 02:02:03,920
है

1733
02:02:03,920 --> 02:02:08,600
उसको स्वीकार क्यों नहीं कर रहे हैं आप मैं इनको क्यों स्वी तो प्रमाणिक या अपमा

1734
02:02:08,600 --> 02:02:13,120
नहीं मैं इनको क्यों स्वीकार करूंगा जो तो नहीं करेंगे तो आप तो आपके हिसाब से अपमा

1735
02:02:13,120 --> 02:02:17,280
है ना जो पुराण कहती है सुनिए जो पुराण क आपके हिसाब से अप प्रमाणिक है ना जो पुराण

1736
02:02:17,280 --> 02:02:21,440
कहती है जो आचार्य कहती है पुराण क्या आपके पास डायरेक्ट आए हैं तो

1737
02:02:21,440 --> 02:02:25,480
यह भी आपके पास डायरेक्ट नहीं आई है तो नहीं आए तो यह तो गुरु परंपरा से आज

1738
02:02:25,480 --> 02:02:29,520
जो इनके शिष्य जैसे मैंने सड़ गो स्वामियों पर बिलीव किया था आपके कहने पर

1739
02:02:29,520 --> 02:02:33,640
नहीं तो ना करता क्या डायरेक्ट आपके पास आया था आपने कहा कि उनके शिष्य

1740
02:02:33,640 --> 02:02:37,880
थे तोई गुरु परंपरा तो मानना पड़ेगा स गो स्वामियों के द्वारा

1741
02:02:37,880 --> 02:02:42,000
प्राप्त होने वाला उनके अगर गुरु परंपरा पर भरोसा नहीं है तो आज

1742
02:02:42,000 --> 02:02:46,160
के टाइम में धर्म बचेगा कैसे मेरी गुरु परंपरा 18

1743
02:02:46,160 --> 02:02:50,240
पुराण पूरे पूरे के पूरे प्रमाणिक बताए अगर उस पर कोई उंगली

1744
02:02:50,240 --> 02:02:54,800
उठाता है तो किसने बताए किसने बताए हमारे गुरु परंपरा में सबने बताए

1745
02:02:54,800 --> 02:02:59,080
हा तो आपके द्वारा सबने ये भी तो कहा है कि ये गुरु परंपरा प्रमाणिक है

1746
02:02:59,080 --> 02:03:03,280
अगर कोई भी पुराण को मि मैं आपसे पूछ रहा हूं आपके आपके

1747
02:03:03,280 --> 02:03:08,000
पूरे संप्रदाय में ये भी तो बताया गया है कि रामन चार संप्रदाय प्रमाणिक है

1748
02:03:08,000 --> 02:03:12,280
वो नहीं सुनिए वो पदम पुराण बताता है इसलिए हमारे मान

1749
02:03:12,280 --> 02:03:16,400
नहीं आप आप उसको स्वीकार करते हैं कि नहीं करते ये बताइए पदम पुराण की बात को

1750
02:03:16,400 --> 02:03:19,080
पदम पुराण की एक एक बात को हम स्वीकार करते हैं

1751
02:03:19,080 --> 02:03:23,160
स्वीकार करते हैं तो फिर उसमें उन्होंने कहा कि ये जो जो ये परंपरा है ये

1752
02:03:23,160 --> 02:03:27,240
प्रमाणिक है अब जो हमारे जो वो है लक्षण ये सन्यासी है

1753
02:03:27,240 --> 02:03:31,440
ये परंपरा से आचार्य है अब आप कह रहे हो नहीं मैं इनकी बात को नहीं मानता तो इनडायरेक्ट

1754
02:03:31,440 --> 02:03:35,560
वे में आप कह रहे हो कि ये इनकी बात हमारे लिए प्रमाणिक नहीं है आप पहले तय

1755
02:03:35,560 --> 02:03:39,880
कर लो रामानुजाचार्य परंपरा परंपरा जो है वो प्रमाणिक है या नहीं है आपको सिद्धांत

1756
02:03:39,880 --> 02:03:44,000
ही नहीं पता है पूरे पूरे उनके आचार्य जो है वो द्वैत सिद्धांत प चल रहे हैं और आप कह

1757
02:03:44,000 --> 02:03:49,040
रहे हो वो दो नहीं वो तो शंकराचार्य के सिद्धांत को मानते थे जब उनके सिद्धांत को मानते थे तो

1758
02:03:49,040 --> 02:03:53,040
पता ऐसा नहीं है दत सिद्धांत पर तो हम भी चल रहे हमने कने कब कहा

1759
02:03:53,040 --> 02:03:57,320
हम नहीं चल रहे द सिद्धांत प जो अद्वैत है वो प्राप्ति

1760
02:03:57,320 --> 02:04:01,360
का विषय है वो हमारे व्यवहार का विषय नहीं है तो व्यवहार तो हम भी द काही कर रहे

1761
02:04:01,360 --> 02:04:05,360
हम भी राम केही भक्त है हम भी कृष्ण के भक्त है नहीं आपका अंतिम जो सिद्धांत

1762
02:04:05,360 --> 02:04:09,880
वो क्या है वो प्राप्ति का विषय है नहीं आपका सिद्धांत क्या है आप क्लियर करिए

1763
02:04:09,880 --> 02:04:14,040
मनुष्य की दृष्टि से दैत और ब्रह्म की तरफ से देखने

1764
02:04:14,040 --> 02:04:18,080
पर अवत ये है सिंपल मनुष्य होते हुए अगर तो

1765
02:04:18,080 --> 02:04:22,200
आप भगवान बारे में सोचेंगे तो द्वैत है ईश्वर और जब ब्रम मुक्त

1766
02:04:22,200 --> 02:04:26,240
की तरफ से जब ब्रह्म की तरफ से आप इस दुनिया को देखोगे तोय सब क्या है प्रपंच

1767
02:04:26,240 --> 02:04:30,520
माया मुझे बताइए आपकी परम गति क्या होगी द्वत अद्वैत भगवान

1768
02:04:30,520 --> 02:04:34,080
में ल हो जाना अवत अद्वैत आप ईश्वर बन जाओगे

1769
02:04:34,080 --> 02:04:38,320
मतलब आप कह सकते हो बिल्कुल ईश्वर को प्राप्त कर लेंगे ईश्वर

1770
02:04:38,320 --> 02:04:42,360
की स्थिति को प्राप्त कर लेंगे किसी भी वैष्णव चार संप्रदाय में य फिलस है ही

1771
02:04:42,360 --> 02:04:46,360
नहीं कि हम ईश्वर बन जाएंगे बात खम यह तो मेरा है ना मैं तो नहीं कह रहा

1772
02:04:46,360 --> 02:04:50,640
कि य बात य बोल रहे मैंने कहासे कह रहा हूं यह कह रहे हैं मायावा जो

1773
02:04:50,640 --> 02:04:54,680
वाला जो श्लोक है वो प्रक्षिप्त है प्रक्षिप्त है इन्होंने माना अब इसको आप

1774
02:04:54,680 --> 02:04:58,680
मानते हो कि नहीं इसमें मुझे क्यों ला रहे हो आप नहीं आप मुझे क्यों ला रहे हो

1775
02:04:58,680 --> 02:05:03,240
मैं बात ये चल रही है क्या आप इनको प्रमाणिक मानते हैं या नहीं मानते ये बताइए

1776
02:05:03,240 --> 02:05:07,640
नहीं नहीं नहीं हम पदम पुराण को ही प्रमाणिक आप इसको इनको प्रमाणिक

1777
02:05:07,640 --> 02:05:11,680
नहीं मानते नहीं मैंने इनके चरित पढ़ तो इसलिए मैं कुछ कह नहीं सकता तो बात

1778
02:05:11,680 --> 02:05:15,720
ही खत्म हो गई जब आप जब आपके अनुसार आप कह रहे हो रामाचार्य परंपरा जो है

1779
02:05:15,720 --> 02:05:20,520
प्रमाणिक परंपरा है उसके अनुसार आप इसके बारे में चेक कर लीजिएगा फिर आइएगा दोबारा

1780
02:05:20,520 --> 02:05:24,560
ये प्रमाणिक है कि नहीं नहीं मैं इनको दुनिया जानती है रावण चार संप्रदाय का

1781
02:05:24,560 --> 02:05:28,680
शायद ही कोई ऐसा प्रमाणिक आचार्य जो इनको ना जानता हूं अरे अरे श्री

1782
02:05:28,680 --> 02:05:32,720
संप्रदाय में माधव संप्रदाय में द्वत ही भैया श्री संप्रदाय

1783
02:05:32,720 --> 02:05:36,880
की ही बात कर रहा हूं मैं आपसे एक एक करके आगे बढ़ेंगे सबको मत लीजिए श्री संप्रदाय

1784
02:05:36,880 --> 02:05:41,400
की आपसे बात कर रहा हूं किसी भी किसी भी श्री संप्रदाय में जो है अद्वैत

1785
02:05:41,400 --> 02:05:45,760
का जिक्र ही नहीं किया है कि हमें अद्वैत सिद्धांत मानना है

1786
02:05:45,760 --> 02:05:49,640
मैंने कब कहा कि आप इन्होने अद्वैत के लिए कहा है कहा क्या

1787
02:05:49,640 --> 02:05:54,160
नहीं मैंने कहा आपसे आप आप क्या कर रहे हो ना जैसे होता है ना वो

1788
02:05:54,160 --> 02:05:58,240
जब अदालत में कोई केस बस चल रहा होता है तो पहले दिखाते जस साहब देखिए ये फोटो ये

1789
02:05:58,240 --> 02:06:02,320
फोटो भाई उन फोटो से तो कुछ नहीं हो रहा है आप अपनी बात में वजन डालने

1790
02:06:02,320 --> 02:06:06,560
के लिए उन बातों को यहां पर बोल रहे हो जिससे कोई मतलब नहीं है इस विषय का मैंने आपको बस ये पूछा

1791
02:06:06,560 --> 02:06:11,200
है ये शिक्षा दे रहे हैं कि

1792
02:06:11,200 --> 02:06:15,240
मायावादी है ये बोल रहे हैं अब आप कह रहे हो मैं नहीं मानता आप

1793
02:06:15,240 --> 02:06:19,240
कह रहे हो मैं ी संप्रदाय को प्रमाणिक मानता हूं पद पुराण को मानता हूं अब आप उसी

1794
02:06:19,240 --> 02:06:23,240
के द्वारा प्रमाणिक आचार्य है उसको आप नहीं मानते तो आपका किसी भी आचार्य

1795
02:06:23,240 --> 02:06:27,960
को चयन करने का आधार क्या है फिर सुनिए सुनिए किसी भी

1796
02:06:27,960 --> 02:06:32,680
जब संप्रदाय के आ को चयन करने का आधार क्या है आपका

1797
02:06:32,680 --> 02:06:36,760
किसी भी आचार्य केब प्रमुख ग्रंथ हमारे पास हो श्री संप्रदाय के

1798
02:06:36,760 --> 02:06:42,760
तो फिर पहले उन्हें माना आपने कहा श्री संप्रदाय

1799
02:06:44,640 --> 02:06:48,800
मायावादी प्रमाण आप मुझे प्रमाण दे दीजिए मायावा को माया

1800
02:06:48,800 --> 02:06:52,840
वाले श्लोक को प्रक्षिप्त नहीं मानता है अब उन उनका मुझे नहीं पता

1801
02:06:52,840 --> 02:06:56,840
ना मेरे तो इसका मतलब आपका ये जो है ये अंदाजा है नहीं

1802
02:06:56,840 --> 02:07:01,120
नहीं हां पढ़ा नहीं है आपने पढ़ा है उन्होने कहीं प उन्होंने

1803
02:07:01,120 --> 02:07:06,040
कहीं प ये श्लोक यूज किया है कि भा ऐसा ऐसा कहा गया है शंकराचार्य के बारे में

1804
02:07:06,040 --> 02:07:10,120
अरे उनका मैं क्यों लूंगा मैं तो अपने अरे भाई अजीब बात है आप कह रहे

1805
02:07:10,120 --> 02:07:14,960
हैं कि सभी श्री संप्रदाय वाले उसको मायावादी मानते हैं आप कह रहे हैं ना

1806
02:07:14,960 --> 02:07:19,080
तो ये मायावादी संप्रदाय वाले मैं क्या कह रहा

1807
02:07:19,080 --> 02:07:23,160
हूं किसी भी संप्रदाय में वैष्णव संप्रदाय में ऐसा नहीं कहा गया कि

1808
02:07:23,160 --> 02:07:27,320
पदम पुराण में मिश्रित किया गया है श्लोक और ये आपने जो दिखाया इसके बारे

1809
02:07:27,320 --> 02:07:31,520
में मैंने कुछ पढ़ा नहीं है ना आप पढ़ लीजिए फिर आइए आप पढ़ लीजिए

1810
02:07:31,520 --> 02:07:35,600
फिर आइए ठीक है आप जानकारी कर लीजिए पढ़ लीजिए शी

1811
02:07:35,600 --> 02:07:40,400
श्री संप्रदाय श्री संप्रदाय पर ये जो

1812
02:07:40,400 --> 02:07:44,760
मायावादी मानता है कि नहीं मानता यदि आपके अनुसार मानता है

1813
02:07:44,760 --> 02:07:49,120
तो मेरे को प्रमाण लाके दिखाइए आप जैसे मैंने आपको प्रमाण दिखाया सु

1814
02:07:49,120 --> 02:07:53,240
फिलहाल मैंने आपको प्रमाण दिखा दिया आपके पास प्रमाण नहीं है सुनि सुनिए मेरी

1815
02:07:53,240 --> 02:07:57,480
बात जी मैं किसी के सिद्धांत को मानूंगा तो श्री संदाय के रामानुज आचार्य

1816
02:07:57,480 --> 02:07:59,760
के सिद्धांत को तो रामानुजाचार्य का प्रमाण ला

1817
02:07:59,760 --> 02:08:04,120
दीजिए कि उन्होंने इस वाले श्लोक को जो है वो किया हो एक्सेप्ट उनका सिद्धांत

1818
02:08:04,120 --> 02:08:08,320
ला दीजिए प्रमाण और दूसरी बात आप ये बात तो मत करिए फिर तो मैं ये कहूंगा

1819
02:08:08,320 --> 02:08:12,520
आप मधवा चार को मानिए सीधे मधवा चार तो आज है नहीं चैतन्य महा प्रभु

1820
02:08:12,520 --> 02:08:16,720
तो आज है नहीं तो इसका मतलब आपको गुरु की प्राप्ति नहीं हो सकती फिर तो गुरु परंपरा

1821
02:08:16,720 --> 02:08:20,800
का आप खंडन कर रहे हैं चार का कोई भी ऐसा दिखाइए जिन्होने बोला हो

1822
02:08:20,800 --> 02:08:25,360
कि पुराण में मिश्रित हो ग मैं तो ये कह रहा हूं ना कि आप आप जो है रामानुज

1823
02:08:25,360 --> 02:08:29,720
जैसे मैंने आपको परंपरा से किसी प्रमाणिक गुरु का दिखा दिया आप श्री संप्रदाय

1824
02:08:29,720 --> 02:08:33,720
के किसी प्रमाणिक आचार का लि आइए मैंने कब कहा कि राण आचार का

1825
02:08:33,720 --> 02:08:37,760
लाइए मैंने कहा आप उस परंपरा से जो वर्तमान के

1826
02:08:37,760 --> 02:08:41,840
उस परंपरा से जो वर्तमान के आचार्य गण हो उनका आप ले आइए प्रमाण

1827
02:08:41,840 --> 02:08:46,480
जो उन्होंने ये स्वीकारा हो कि माया ये जो श्लोक है मायावादी

1828
02:08:46,480 --> 02:08:50,480
नहीं है आप समझ जो जिसको संदेह

1829
02:08:50,480 --> 02:08:54,560
है जिसको पुराण में संदेह है वो लिखेगा ना जिसको संदेह

1830
02:08:54,560 --> 02:08:58,800
नहीं है वो क्यों लिखेगा तो मैं आपको प्रमाण कहां से लाऊंगा फिर अरे मेरे भाई यह बताओ

1831
02:08:58,800 --> 02:09:02,880
गुरु परंपरा पर आप विश्वास करते हो कि नहीं करते हो बिल्कुल करते

1832
02:09:02,880 --> 02:09:07,600
हैं तो यह परंपरा प्राप्त प्रमाणिक गुरु है आप इनको नहीं जानते

1833
02:09:07,600 --> 02:09:12,000
तो सॉरी अरे हम अपनी परंपरा पर विश्वास करेंगे ना

1834
02:09:12,000 --> 02:09:14,800
लेकिन अरे तो आप इस परंपरा प नहीं करते तो क्यों बोलते

1835
02:09:14,800 --> 02:09:18,920
हो कि श्री संप्रदाय प्रमाणिक है श्री श्री संप्रदाय प्रमाणिक उसम

1836
02:09:18,920 --> 02:09:22,960
जो आचार उन्होने क्या लिखा अच्छा श संप्रदाय प्रमाणिक है

1837
02:09:22,960 --> 02:09:28,480
मगर उसके जो परंपरा होगी गुरु परंपरा वो हमारे लिए प्रमाणिक नहीं

1838
02:09:28,480 --> 02:09:30,880
है

1839
02:09:30,880 --> 02:09:34,920
हेलो हेलो आप ऐसा करिए मधवा चार जी को जान लीजिए

1840
02:09:34,920 --> 02:09:40,920
माधवाचार्य जी को और भी कई टॉपिक है ये जो चेतन चरितामृथम

1841
02:09:48,400 --> 02:09:52,680
पाते श्री कृष्ण वादित है कि नहीं श्री कृष्ण अल्लाह में अंतर है कि नहीं अगर अंतर

1842
02:09:52,680 --> 02:09:56,760
नहीं है तो श्री कृष्ण शिव में अंतर है कि नहीं आप यह बात जो है आपने इस

1843
02:09:56,760 --> 02:10:00,960
बात का भी उत्तर नहीं दिया कि जब वो वहां पर उनके लिए कह सकते

1844
02:10:00,960 --> 02:10:05,040
हैं कि उनको बुरा ना लगे और उनकी बात चल जाए तो यहां क्यों नहीं ध्यान रखते शिवजी की

1845
02:10:05,040 --> 02:10:09,040
शिव जी के भक्तों को बुरा ना लग जाए यहां प भी वो शिव को स्वीकार कर ले कि चलो शिव

1846
02:10:09,040 --> 02:10:13,120
और कृष्ण एक आओ हरे कृष्ण का जाप करें देखिए सुनिए आप घुमा

1847
02:10:13,120 --> 02:10:17,320
फिरा के वही सवाल पूछते हो जिसका उत्तर मैं दे चुका हूं आपको पहले ही बता चुका

1848
02:10:17,320 --> 02:10:21,320
सुनि सुनिए नहीं दिया है खैर आपसे बात करके अच्छा लगा

1849
02:10:21,320 --> 02:10:25,320
आप थोड़ी सी तैयारी करिए और ये जो श्री संप्रदाय है इसका प्रमाण

1850
02:10:25,320 --> 02:10:29,480
लेके आइए किसी भी आचार्य ने कि भी आचार्य ने मायावा

1851
02:10:29,480 --> 02:10:30,040
वाले लोक

1852
02:10:30,040 --> 02:10:34,040
को स्वीकार किया उत्तर नहीं सुनेंगे तो फिर आप कुछ अपनी बात रखना चाह रहे हो

1853
02:10:34,040 --> 02:10:38,200
केवल मैं भाई साहब आपका 50 बार सुन चुका हूं आप शुरू से बारबार अपनी जो बात

1854
02:10:38,200 --> 02:10:42,360
बोलते हो उसको जब मैं क्लियर क्लियर शब्दों में पूछता हूं तो आप बगल से निकल जाते हो

1855
02:10:42,360 --> 02:10:46,520
आपने यह बताइए भागवत का श्लोक यह माना नहीं माना कि भगवान के अनेक नाम

1856
02:10:46,520 --> 02:10:51,080
है बहुत नाम है हा बिल्कुल माना बिल्कुल माना

1857
02:10:51,080 --> 02:10:55,240
बिल्कुल माना तो सारे नाम एक ही है ना अरे मेरा भी नाम है फिर

1858
02:10:55,240 --> 02:10:59,240
तो उसम और बिल्कुल हैय तो आप ये कहना चालू करो शिव और

1859
02:10:59,240 --> 02:11:03,480
कृष्ण शिवांश और कृष्ण एक है फिर अपना भी नाम लो उसम अरे तो हमने अरे

1860
02:11:03,480 --> 02:11:07,800
हमने मना की किया मैंने तो 10 बार बोला

1861
02:11:07,800 --> 02:11:12,480
फर फिर दिक्कत हो जाएगी नहीं शिव दुर्गा काली के नाम का जप करने वाले

1862
02:11:12,480 --> 02:11:16,560
नाम को समान समझने वाले अपराधी है आप इसका भी श्लोक नहीं मानोगे ये भी पदम

1863
02:11:16,560 --> 02:11:20,720
पुराण का श्लोक है मैं इसको मान लूंगा आप लाइए मैं तो भाई मैं गुरु

1864
02:11:20,720 --> 02:11:25,000
परंपरा पर मैं तो गुरु गोविंद और ग्रंथ पर चलने वाला व्यक्ति हूं

1865
02:11:25,000 --> 02:11:29,040
मुझे आप सर्वशक्तिमान ईश्वर दे दीजिए परम स्वतंत्र गति दे

1866
02:11:29,040 --> 02:11:33,320
दीजिए मनुष्य की जीव की और मनुष्य के लिए व्यवहारिक जो धर्म है वो अटल दे दीजिए

1867
02:11:33,320 --> 02:11:37,440
कभी ना बदलने वाला लचर धर्म नहीं कि वहां पर गए वहां

1868
02:11:37,440 --> 02:11:41,640
पर गए और वहां जाकर के उन लोगों को प्रभावित करने के लिए जो हमने बातें लिख

1869
02:11:41,640 --> 02:11:45,560
दी जो ब्राह्मण थी वही बातें आकर के आप हिंदुओं को बढ़ा रहे

1870
02:11:45,560 --> 02:11:49,680
हैं और फिर जब हिंदू पूछ रहा है क् कृष्ण अल्ला एक कैसे तो आप बता

1871
02:11:49,680 --> 02:11:53,760
रहे हो मैंने जब अल्ला कहा तो मैंने उस कांटेक्ट में कहा जो परम शक्ति अरे

1872
02:11:53,760 --> 02:11:57,920
भाई तो इसको आपने क उजागर किया सत्य को आप बोल रहे आपने

1873
02:11:57,920 --> 02:12:02,240
कहीं बुक में लिखा जब हम अल्लाह कह रहे तो ये वाला वो कुरान के द्वारा प्रतिपादित ईश्वर

1874
02:12:02,240 --> 02:12:06,280
नहीं आपने कहीं बुक में लिखा आपने अधिकृत रूप से कहीं पर स्वीकार किया ये

1875
02:12:06,280 --> 02:12:10,360
आज आप कह रहे हो आप ये बात बुलवा देना आप ये बात किसी प्रमाणिक

1876
02:12:10,360 --> 02:12:14,840
जो आप तो अधिकृत हो नहीं आप कुछ भी बोल दोगे वो लोग नाय कर देंगे

1877
02:12:14,840 --> 02:12:18,960
आप ये बात बुलवाना आप किसी प्रतिनिधि से बात बलवा दो

1878
02:12:18,960 --> 02:12:23,080
कि जब हम अल्लाह कह रहे हैं तो वो अल्लाह वो नहीं है जो कुरान के द्वारा प्रतिपादित होने वाला

1879
02:12:23,080 --> 02:12:27,160
है जब हम अल्ला कह रहे हैं तो वो तो परम शक्ति की बात कर रहे हैं बात खत्म हो जाएगी

1880
02:12:27,160 --> 02:12:31,160
आप पता नहीं कहां की बात कहां ले जाते हैं आप यह बताइए कि मैंने

1881
02:12:31,160 --> 02:12:35,400
यह बोला कि अल्लाह का नाम अल्लाह का नाम इसलिए बोला गया क्योंकि हमारे भागवत

1882
02:12:35,400 --> 02:12:39,440
के श्लोक में अनेक नाम बताए गए लेकिन मैं आपसे ये पूछ

1883
02:12:39,440 --> 02:12:43,520
रहा हूं आपने जब अल्लाह वहां पर बोलते हो तो वो उनकी कुरान के द्वारा

1884
02:12:43,520 --> 02:12:47,640
प्रतिपादित होने वाला अल्लाह नहीं होता वो तो परम शक्ति होती है यही तो बात है

1885
02:12:47,640 --> 02:12:51,840
सुनिए पहले पूरी बात यही बात है क्या आप पूरी बात खत्म क्यों नहीं होने देते

1886
02:12:51,840 --> 02:12:56,120
चलिए बोलिए बोलिए बोलिए बोलिए बोलिए जिस तरह हमने

1887
02:12:56,120 --> 02:13:00,200
बुद्ध को स्वीकार किया लेकिन उनके बुद्ध को बुद्ध को हमने

1888
02:13:00,200 --> 02:13:00,920
कहां स्वीकार

1889
02:13:00,920 --> 02:13:04,960
किया कौन सा उनका मंदिर हम पूछते हैं जाकर के उन्हे किस मंदिर में हमारे

1890
02:13:04,960 --> 02:13:09,120
बुद्ध की मूर्ति मिलती है हमें बताइए कहां स्वीकार किया हमने ये मान लिया

1891
02:13:09,120 --> 02:13:13,120
हम कोई बुद्ध बुद्ध रूप में अवतार लिया था उन्होने वेदों की रक्षा करने

1892
02:13:13,120 --> 02:13:17,360
के लिए अवतार लिया था सुनिए श्रीमद् भागवत में 10 अवतार

1893
02:13:17,360 --> 02:13:22,000
में उनका नाम है तो मैं मैं कहां कह रहा हूं अल्लाह का नाम है क्या

1894
02:13:22,000 --> 02:13:26,720
अरे बात सुनिए ना मेरी हां हां तब आपने ये स्वीकार कर लिया ठीक

1895
02:13:26,720 --> 02:13:31,080
है वही आप मुझे आप देखिए आप बहुत लंबा खींचते

1896
02:13:31,080 --> 02:13:35,480
हैं इसीलिए मैं उसको शॉर्ट करता हूं आपने खुद अभी ये थोड़ी देर पहले स्वीकार किया है

1897
02:13:35,480 --> 02:13:39,760
कि हम वहां पर जब अल्लाह नाम लेते हैं किसी से ये कहते हैं कि अल्लाह और कृष्ण एक है

1898
02:13:39,760 --> 02:13:43,840
तो हम उस अल्लाह के बारे में बात नहीं कर रहे होते हैं जो कुरान के द्वारा परिभाषित

1899
02:13:43,840 --> 02:13:48,280
किया गया है कर रहे होते हैं क्या मैंने ये नहीं बोला मैंने ये बोला आपने बोला भाई साहब

1900
02:13:48,280 --> 02:13:52,760
ड है ठीक है इसको मैं बोल दू इसको मैं दिखा दूंगा आपको आपने बोला

1901
02:13:52,760 --> 02:13:56,760
सुनिए मैंने क्या बोला मैंने बोला आप भैया सुनिए सुनिए फर्स्ट ऑफ ल अब आप ऐसा करिए या

1902
02:13:56,760 --> 02:14:00,840
तो अपना फेस रिवील करिए क्योंकि आप जो बातें बोलेंगे वो फिर हम बता नहीं

1903
02:14:00,840 --> 02:14:04,840
पाएंगे लोगों को आपने बोली तो आप अपना फेस रिवील करिए हम लोग किसी और दिन रख

1904
02:14:04,840 --> 02:14:08,880
लेते हैं आज काफी देर भी हो गई है0 ब आप जो रिवील रिवील कर रहे

1905
02:14:08,880 --> 02:14:13,080
हैं ना मैंने स्क्रीनशॉट ले लिया है ठीक है ये मैंने कोई बंद नहीं किया यह हैंग हो रखा

1906
02:14:13,080 --> 02:14:16,040
है अभी भी मेरा फेस उसी प है नहीं वो ठीक है बात वो नहीं है

1907
02:14:16,040 --> 02:14:20,120
जैसे अभी जो आपसे दोबारा से चर्चा गुण तत्व चालू हो रही है हम

1908
02:14:20,120 --> 02:14:24,160
इसको वीडियो में यूज नहीं कर पाएंगे मैं रखते रखते

1909
02:14:24,160 --> 02:14:28,920
अपना क्लियर कर दूं जो आपके प्रश्न थे उनके ठीक है पहला प्रश्न यह

1910
02:14:28,920 --> 02:14:33,040
शंभू कृष्ण के स्वरूप है और उन्हीं में समा जाते हैं एक

1911
02:14:33,040 --> 02:14:37,520
हो जाते हैं और सुनिए उनमें कोई भेद नहीं है और लेकिन आधार

1912
02:14:37,520 --> 02:14:42,240
सुनि और आधार श्री कृष्ण से है इसलिए हम अभेद भी बानते हैं उन्हेल मिला

1913
02:14:42,240 --> 02:14:46,840
कुल मिलाकर के आप क्या है नान का खंडन

1914
02:14:46,840 --> 02:14:51,120
अप्रत्यक्ष रूप से का खंडन और जो है शंकराचार्य का समर्थन

1915
02:14:51,120 --> 02:14:57,120
करते हैं सुनि वही वाली बात है

1916
02:14:57,640 --> 02:15:02,040
जैसे के सारे जितने भी लोग है अगर उनकी स्त्रियो पर

1917
02:15:02,040 --> 02:15:06,200
अगर बात आ जाए मात्र शक्तियों पर बात आ जाए तो उनकी रक्षा में हिंसा

1918
02:15:06,200 --> 02:15:10,240
करने लगेंगे जबक बौद्ध धर्म में लिखा हुआ किसी भी हाल में हिंसा मत करना तो क्या

1919
02:15:10,240 --> 02:15:14,320
हुआ उतने अंश में खुद को बध कहते हु भी व हिंदू बन गए

1920
02:15:14,320 --> 02:15:18,600
अरे तो वही तो मैंने बोला उनका सिद्धांत स्वीकार नहीं है क्या सिद्धांत

1921
02:15:18,600 --> 02:15:22,680
स्वीकार नहीं है बहुत दिखा सिद्धांत स्वीकार नहीं है हमें आपने

1922
02:15:22,680 --> 02:15:26,760
मेरी बात समझी नहीं दोबारा बोल रहा हूं मैं दोबारा बोल रहा हूं

1923
02:15:26,760 --> 02:15:30,760
कि बौद्ध धर्म में क्या है मैं उस बौद्ध धर्म की बात कर रहा हूं

1924
02:15:30,760 --> 02:15:35,040
जो ये सुनिए सुनिए एक और चीज मैं वीडियो डालूंगा

1925
02:15:35,040 --> 02:15:39,080
जिसमें इकन के प्रभु जी ही कह रहे हैं कि शिवजी और कृष्ण भेद नहीं

1926
02:15:39,080 --> 02:15:43,560
है आपको कोलब करूंगा आपको एक्सेप्ट करनी पड़ेगी आप जो कह रहे होन

1927
02:15:43,560 --> 02:15:47,560
केवल ये बोलते हैं कि एक नहीं है मैंने तो नहीं कहा मैंने जहां आप अच्छी बात

1928
02:15:47,560 --> 02:15:51,560
बो बो आपका स्वागत है मैंने तो नहीं कहा कि केवल यही बोलते हैं मैंने

1929
02:15:51,560 --> 02:15:55,640
कहा ये क्यों बोलते हैं मैंने नहीं कहा केवल ये बोलते हैं ये केवल शब्द आप लगा रहे

1930
02:15:55,640 --> 02:15:59,920
हो जहां जहां प आप अच्छी बात बोलोगे आपका स्वागत है आइए हम दोनों

1931
02:15:59,920 --> 02:16:04,320
एक साथ हो कर के प्रचार करेंगे धर्म का मैंने आपको यह भी बताया कि अभेद

1932
02:16:04,320 --> 02:16:08,800
शब्द क्यों यूज किया गया जो बौद्ध धर्म मेरे मुह से गलत निकल गया जो बौद्ध

1933
02:16:08,800 --> 02:16:12,680
वो है आईडियोलॉजी उसके अनुसार उसमें एक कहा गया कुछ

1934
02:16:12,680 --> 02:16:16,840
भी हो जाए किसी भी स्थिति में आप हिंसा मत करना ऐसी स्थिति में

1935
02:16:16,840 --> 02:16:20,840
जब कोई व्यक्ति अपने मन में यह सोचता है कि मैं जो है मेरे साथ अगर

1936
02:16:20,840 --> 02:16:25,360
कोई अधर्म हो रहा होगा तो मैं जरूर अपनी आत्मरक्षा करूंगा तो उतने अंश में वो व्यक्ति

1937
02:16:25,360 --> 02:16:29,560
बौद्ध वो हिंदू बन जाता है वो बौद्ध उसी प्रकार से जैसे जहां

1938
02:16:29,560 --> 02:16:33,760
जहां प आप ये चीजें स्वीकार करते जा रहे हैं ना वहां वहां प आप स्कन के अगेंस्ट

1939
02:16:33,760 --> 02:16:37,840
और शंकराचार्य के साथ में खड़े हैं यही मैंने कहा था अपने वीडियो में जो रील जिससे

1940
02:16:37,840 --> 02:16:42,160
आपसे चर्चा शुरू हुई मैंने कहा था जिस दिन जिस दिन आप ऐसा

1941
02:16:42,160 --> 02:16:46,400
ऐसी बात बोलेंगे जिसमें कि ईश्वर सर्वशक्तिमान मैंने

1942
02:16:46,400 --> 02:16:50,480
भी बात कही है वो परम स्वतंत्र और जो

1943
02:16:50,480 --> 02:16:54,960
धर्म है शाश्वत प्राप्त होगा तो वो जो

1944
02:16:54,960 --> 02:16:59,000
वो जो बात होगी वो शंकराचार्य की बात होगी शंकराचार्य की हम सिद्धांत

1945
02:16:59,000 --> 02:17:03,120
नहीं मानते हमने इकोन की बात करी है और इकोन आप इकन का सिद्धांत

1946
02:17:03,120 --> 02:17:07,160
का मान मुझे लिखा दिखा दीजिए इसन की तरफ से कि वहां पर कुरान के ईश्वर की कुरान के

1947
02:17:07,160 --> 02:17:11,880
अल्लाह की बात नहीं हो रही होती है दिखा दीजिए आप मैंने तो आपको दिखा दिया

1948
02:17:11,880 --> 02:17:15,920
अधिकृत लोगों के द्वारा आप कहीं पर अधिकृत लोगों के द्वारा अपनी बात दिखा दीजिए

1949
02:17:15,920 --> 02:17:19,920
कि वहां पर जब वो अल्लाह कह रहे होते कुरान का अल्ला नहीं होता है बता दीजिए ये तो

1950
02:17:19,920 --> 02:17:23,960
य ये ऐड आपने करा अलग से मैंने आपने खुद बोला अभी थोड़ी देर पहले अब आप

1951
02:17:23,960 --> 02:17:27,760
पलट रहे हैं चलो आप है ना एक काम करना आप रिकॉर्डिंग चल रही है ना आप

1952
02:17:27,760 --> 02:17:31,760
दिखा देना अगर मैंने ये लाइन बोली हो तो आपने बो हां बोला

1953
02:17:31,760 --> 02:17:36,360
है आपने हां बोला हां आप अपने कांटेस्ट प बोलोगे

1954
02:17:36,360 --> 02:17:40,560
तो तब मैं समझाने के लिए बोलूंगा लेकिन मेरा कहने का मतलब ये था

1955
02:17:40,560 --> 02:17:44,760
हमारे सा अब ये बताइए कि अब कब क अच्छा चलिए इसका

1956
02:17:44,760 --> 02:17:48,760
फैसला कैसे होगा आप कब मे समझाने के लिए बोल रहे हैं और

1957
02:17:48,760 --> 02:17:52,800
कब बिल्कुल क्लियर कट सत्य बोल रहे हैं ऐसे तो मैं आपकी हर बात को यही मानू कि

1958
02:17:52,800 --> 02:17:57,080
भैया आपने जितने भी मुझे तथ्य बताए वो सब आपने कुछ और दृष्टि से बनाए

1959
02:17:57,080 --> 02:18:01,120
भाई जब अविश्वास आ गया तो अविश्वास तो सब पर आएगा आप भगवान के अनेको

1960
02:18:01,120 --> 02:18:05,200
नाम मानने को रेडी नहीं हो पहली बात तो मैं भगवान केने को नाम मानने को रेडी नहीं हूं

1961
02:18:05,200 --> 02:18:09,400
मगर मैं उस ईश्वर को मानने को रेडी नहीं हूं जो

1962
02:18:09,400 --> 02:18:13,440
क्या अरे तो नाम तो हर किसी के व्यक्ति के हो सकते हैं हम उनके सिद्धांत को

1963
02:18:13,440 --> 02:18:17,800
नका ना हम अपने अरे भाई मैं यह कह रहा हूं आपने

1964
02:18:17,800 --> 02:18:21,800
पर य उल्लेखित किया है क्या कि हम जब कह रहे हैं कि बाइबल का ईश्वर और कुरान का

1965
02:18:21,800 --> 02:18:25,840
ईश्वर और कृष्ण एक है तो कहीं पर जो आप बात बोल रहे हैं मगर हम उस

1966
02:18:25,840 --> 02:18:29,840
ईश्वर की बात नहीं कर रहे आप जब कह रहे कुरान आप जब

1967
02:18:29,840 --> 02:18:33,840
कह रहे एक मिनट मिनट गलत निकल गया जब आप कह रहे हैं कि कृष्ण अल्लाह एक है जब आप कह

1968
02:18:33,840 --> 02:18:37,840
रहे हैं कि कृष्ण और यहोवा एक है आपने कहीं पर उल्लेखित किया है कि

1969
02:18:37,840 --> 02:18:42,120
बाइबल के द्वारा प्रतिपादित होने वाला जो यहोवा हम उसकी बात नहीं कर रहे कुरान

1970
02:18:42,120 --> 02:18:43,000
के द्वारा प्रतिपादित

1971
02:18:43,000 --> 02:18:47,040
होने वाला यवा है उसकी बात नहीं कर रहे कहीं प आपने मेंशन हैय आप अपने मन से बोल

1972
02:18:47,040 --> 02:18:51,040
रहे हैं हमने तो यह भी नहीं बोला कि जो कुरान में लिखा है हम उसको फॉलो कर रहे हैं उसको फॉलो करो

1973
02:18:51,040 --> 02:18:55,120
हमने तोय आपने कहा कि अल्लाह और कृष्ण एक है आप य बताइए

1974
02:18:55,120 --> 02:18:59,160
हमने इसलिए बोला आपने कहा अल्लाह और कृष्ण फिर आपने ये कहा कि अल्लाह

1975
02:18:59,160 --> 02:19:03,200
हम लोग जब अल्लाह कह रहे हैं पूरा संसार यहोवा और अल्लाह

1976
02:19:03,200 --> 02:19:07,200
को जो जानता है वो ये जानता है कि बाइबल के द्वारा प्रतिपादित होने वाला ईश्वर

1977
02:19:07,200 --> 02:19:11,440
कृष्ण के द्वारा प्रतिपादित होने वाला ईश्वर तो उसमें आप एक कैच बता रहे कि हम जब अल्लाह कहते

1978
02:19:11,440 --> 02:19:15,560
हैं तो क्य उस पर्सपेक्टिव से कहते कि भगवान के कई नाम हो सकते

1979
02:19:15,560 --> 02:19:19,720
हैं इसलिए हम कहते मगर वो कुरान के द्वारा प्रतिपादित होने वाला

1980
02:19:19,720 --> 02:19:24,000
ईश्वर नहीं है हमारा अल्लाह हमारा यवा बाइबल के द्वारा प्रतिपादित

1981
02:19:24,000 --> 02:19:28,160
होने वाला ईश्वर नहीं है तो यह जब आप कह रहे हैं तो क्या इसका कोई आपके

1982
02:19:28,160 --> 02:19:32,400
पास प्रूफ है कि इसकन ऐसा मानता है इसकन ने हमेशा हर वीडियो में यह बोला

1983
02:19:32,400 --> 02:19:36,680
है कि भगवान के अनंत नाम है यह भी हो सकता है और

1984
02:19:36,680 --> 02:19:40,720
लेकिन हमने कभी कुरान को या बाइबल को सपोर्ट नहीं किया कि इसके सिद्धांत

1985
02:19:40,720 --> 02:19:44,720
को मानो अगर किया है तो मुझे आप एक वीडियो दिखा दीजिए मैं आपसे जो

1986
02:19:44,720 --> 02:19:48,760
पूछ रहा हूं वो बताइए आप यह बोल रहे हो कि जब व अल्लाह बोलते पूरी दुनिया

1987
02:19:48,760 --> 02:19:53,040
जानती है कि अल्लाह कौन है यहोवा कौन है यहोवा बाइबल

1988
02:19:53,040 --> 02:19:57,120
के द्वारा प्रतिपादित होने वाले ईश्वर है और जो अल्लाह है वो

1989
02:19:57,120 --> 02:19:58,240
कुरान के द्वारा प्रतिपादित

1990
02:19:58,240 --> 02:20:02,440
होने वाला ईश्वर पूरी दुनिया जानती है अब आप वहां जाकर के ऐसा नाम जो

1991
02:20:02,440 --> 02:20:06,720
हर कोई जानता है उस नाम के लिए आप कहते हो कि भाई मैंने तो अल्लाह का

1992
02:20:06,720 --> 02:20:11,160
अब आप फिर बाद में एक मन की बात जो है जो बताते नहीं दुनिया को

1993
02:20:11,160 --> 02:20:15,520
कि भाई मैंने तो इस कॉन्टेक्स्ट में कहा कि उनका कृष्ण का नाम अल्लाह भी हो सकता है

1994
02:20:15,520 --> 02:20:19,760
क्यों नहीं हो सकता है भगवान मेरे अनंत नाम है तो क्यों नहीं हो सकता है आप क्यों

1995
02:20:19,760 --> 02:20:25,760
अरे तो फिर इस बात को आप लिखा दिखाइए ना कि हमने उस कांटेक्ट में कहा

1996
02:20:25,920 --> 02:20:30,000
है हमने उस कांटेक्ट में कहा है इसको लिख कर दिखाइए

1997
02:20:30,000 --> 02:20:34,120
चलिए खैर आपसे बात करके अच्छा लगा और

1998
02:20:34,120 --> 02:20:38,560
क्या कहते हैं मतलब एक लेवल बातचीत हुई अच्छा लगा आपसे बात कर

1999
02:20:38,560 --> 02:20:42,680
और ये माधवाचार्य जी के बारे में पढ़िए माधवाचार्य जी के बारे में श्री संप्रदाय

2000
02:20:42,680 --> 02:20:48,440
के बहुत ही प्रमाणिक आचार्य है और शायद ही ऐसे कोई आचार्य जोको

2001
02:20:48,440 --> 02:20:52,440
विश् विख्यात है

2002
02:20:52,440 --> 02:20:56,440
नके ग्र है इनके ग्रंथ विश्व विख्यात है उन्होने

2003
02:20:56,440 --> 02:21:00,920
पदम पुराण के सभी लोको को माना है अरे तो पहले

2004
02:21:00,920 --> 02:21:06,200
ठीक है आप अपनी बात बोल लीजिए मैं तो यह कह रहा हूं आप इनके बारे में जान तो लीजिए

2005
02:21:06,200 --> 02:21:10,400
जा दूसरी बात बो क उन्होने सभी लोको को माना

2006
02:21:10,400 --> 02:21:14,520
है और क्या माने कपा महाराज सुनि

2007
02:21:14,520 --> 02:21:18,880
कृपालु महाराज ने भी वो भी जगतगुरु उपाधि हुए उन्होने

2008
02:21:18,880 --> 02:21:22,960
अरे भाई ये जगतगुरु की उपाधि की बात बाद में कर लेंगे आपने एक बात

2009
02:21:22,960 --> 02:21:27,000
कही मैं इनको नहीं जानता हूं भाई आपने एक बात कही मैं इनको नहीं जानता हूं

2010
02:21:27,000 --> 02:21:31,000
मैं कह रहा हूं आप जान के आइए दोबारा बात करेंगे काफी टाइम हो गया बक बिल्कुल

2011
02:21:31,000 --> 02:21:35,160
इनके बारे में पंगा लेकिन मैं पढ़िए और इनसे इनके

2012
02:21:35,160 --> 02:21:39,480
इनके पास जाके पूछिए कि आपने क्यों लिखा कि वो मायावा का श्लोक जो है प्रक्षिप्त

2013
02:21:39,480 --> 02:21:44,280
है हम आपको प्रमाणिक कहते हैं आप अपमा बातें करते हैं नहीं नहीं मैं

2014
02:21:44,280 --> 02:21:48,360
आचार्यों की बात कर रहा हूं कृपालु महाराज और पवान महाराज और गड़ी आचार कोई वो

2015
02:21:48,360 --> 02:21:52,520
नहीं है उन्होने आचार नहीं है क्या बकल आचार नहीं मानते

2016
02:21:52,520 --> 02:21:56,720
आप बिल्कुल होंगे आपके आपके मतलब की बातें थी आपने मा मेरे मतलब

2017
02:21:56,720 --> 02:22:00,760
की नहीं इसम इसमें मनुष्य मात्र के मतलब की बात है भैया इन्होने ऐसे

2018
02:22:00,760 --> 02:22:04,960
ग्रंथ लिखे है ना उसम कहीं कोई वो है ही नहीं कोई लड़ाई

2019
02:22:04,960 --> 02:22:07,600
की बात है ही नहीं मगर आपको वो जाननी नहीं है

2020
02:22:07,600 --> 02:22:11,960
फोन कटने के बाद एक छोटा सा देख लीजिएगा य पर डा लीजिएगा कृपालु महाराज

2021
02:22:11,960 --> 02:22:15,960
आपको मैं एक लोक दे दूंगा भागवत पुराण का आप कपाल

2022
02:22:15,960 --> 02:22:19,040
महाराज को मानो

2023
02:22:19,040 --> 02:22:23,120
के लिए पदम पुराण का श्लोक उन्होने प्रमाणित दिया है भागवत पुराण का

2024
02:22:23,120 --> 02:22:27,200
वो श्लोक मानोगे जहा लिखा है जीव और आत्मा की एकता ही प्रतिपाद्य विषय

2025
02:22:27,200 --> 02:22:31,520
है जीव और ब्रह्म की एकता भागवत में अनेको जगह लिखा है कि भिन्न

2026
02:22:31,520 --> 02:22:35,560
भी है और अभिन्न भी है भिन्न मैंने कब कहा भिन्न नहीं है व्यवहार में भिन्न है

2027
02:22:35,560 --> 02:22:39,960
और परमार्थ में एक है मैंने कब कहा आप मानो एक कहां प मान रहे हो चलो

2028
02:22:39,960 --> 02:22:44,200
आप एक कहां प मान रहे हो बोलो मैंने पहले भी तीन चार बार को बता दिया सनातन

2029
02:22:44,200 --> 02:22:48,560
है और चेतन है इस पर माना हमने अरे तो उसको रप से समझे

2030
02:22:48,560 --> 02:22:53,400
सनातन ईश्वर माना जो अद अद्वैत का सिद्धांत श्लोक

2031
02:22:53,400 --> 02:22:58,240
है अह ब्रह्मा और त्सी

2032
02:22:58,240 --> 02:23:02,520
इसका भी अर्थ यही है कि हम ईश्वर की तरह चेतन है और

2033
02:23:02,520 --> 02:23:07,040
सनातन है इसलिए इस तर तर तरह वाला वो आया है क्या इसम

2034
02:23:07,040 --> 02:23:11,320
क्या इसमें तरह की संस्कृत है क्या ब्रह्मा में मतलब

2035
02:23:11,320 --> 02:23:15,320
तरह की संस्कृत है क्या इसमें प्रकार जब आप आप प्रकार की बात कर रहे हो ना

2036
02:23:15,320 --> 02:23:19,400
प्रकार की संस्कृत है क्या इसमें और दूसरी बात चलो चलो आप

2037
02:23:19,400 --> 02:23:22,600
ये जो मान रहे हो कि हम ईश्वर के समान है

2038
02:23:22,600 --> 02:23:26,960
आपने ये माना हमने समान है सनातन

2039
02:23:26,960 --> 02:23:30,960
में में हमारी जीव आत्मा जो है सनातन है

2040
02:23:30,960 --> 02:23:35,040
जब से भगवान जब से हम सनातन का अर्थ क्या होता है बताइए

2041
02:23:35,040 --> 02:23:39,200
जिसको ना कभी कभी पैदा हुआना जिसकी मृत्यु होगी वो सनातन

2042
02:23:39,200 --> 02:23:43,680
जिसकी ना शुरुआत ना अंत नहीं नहीं नहीं सनातन का अर्थ केवल इतना नहीं है

2043
02:23:43,680 --> 02:23:48,000
सनातन का अर्थ है किसी भी देश काल परिस्थिति में ना बदल

2044
02:23:48,000 --> 02:23:52,600
वाला वो ये नहीं है वो भी है लेकिन आत्मा

2045
02:23:52,600 --> 02:23:56,840
नहीं वो भी नहीं है जो सही परिभाषा तो यही है आप तो अधूरी बोल रहे हो

2046
02:23:56,840 --> 02:24:01,080
कि जिसका ज जो जन्म हुआ है जिसको ना मारा जा सकता है वो नहीं है सनातन

2047
02:24:01,080 --> 02:24:05,160
किसी भी देश काल परिस्थिति में जो ना बदले वही शाश्वत है वही सनातन

2048
02:24:05,160 --> 02:24:09,400
है शाश्वत भी है अनादि भी है उसको भी आत्मा

2049
02:24:09,400 --> 02:24:13,920
को भी बोलते हैं वो समझने तो बात ये है

2050
02:24:13,920 --> 02:24:18,280
आप 10 लाइन अलग बोल के व्यक्ति अपने को भगवान

2051
02:24:18,280 --> 02:24:22,320
जैसा समझे या ना समझे बिल्कुल ना समझे भगवान का ना समझे तो

2052
02:24:22,320 --> 02:24:26,480
आप क आप कह रहे हो फिर मैं मानता हूं अद्वैत को तो कौन से हिस्से में मानते हो

2053
02:24:26,480 --> 02:24:30,520
आदमी समझे क्या खुद कोने पूरी गीता करने के बाद उन्होने पर ब्रम स्वीकार किया

2054
02:24:30,520 --> 02:24:34,800
और खुद को दास स्वीकार किया तो मैं भी करता हूं मैं भी करता हूं मगर ये व्यवहार

2055
02:24:34,800 --> 02:24:37,720
का विषय है करने का विषय है जैसे की बर्गर

2056
02:24:37,720 --> 02:24:41,920
बर्गर किस रूप में हमारी आथ को इंटेस्टाइन की को फुलफिल करेगा

2057
02:24:41,920 --> 02:24:45,960
वो अलग बैटर है मगर मैं प्रयत्न करता हूं बर्गर के लिए शास्त्र में कहीं

2058
02:24:45,960 --> 02:24:50,120
भी प्रमाण नहीं है कि हम ईश्वर बन सकते हैं आपके सिद्धांत में है तो आप बनो य

2059
02:24:50,120 --> 02:24:54,120
बमा क्या है फिर अ बमा का मतलब है मैं ब्रम उनका अंश

2060
02:24:54,120 --> 02:24:58,480
सनातन हू तो ये तो आप निकाल रहे हो ना भाई

2061
02:24:58,480 --> 02:25:02,520
ब्रमी का शब्द वाला अर्थ करिए शाब्दिक अर्थ गीता के

2062
02:25:02,520 --> 02:25:07,360
च अर्थ क्या है अर्थ क्या है ब्रह्मा

2063
02:25:07,360 --> 02:25:11,440
का अपनी टप मत दीजिए मत दीजिए आप

2064
02:25:11,440 --> 02:25:14,160
शिक अर्थ

2065
02:25:14,160 --> 02:25:19,080
बताइए ब्रह्मा का शादिक अर्थ बताइए भैया

2066
02:25:19,080 --> 02:25:23,240
मैं भ्रम हूं शाब्दिक अर्थ बताइए सुनिए मैं भ्रम हूं यह शाब्दिक

2067
02:25:23,240 --> 02:25:27,440
अर्थ है तो तो यानी कि अगर संस्कृत को हिंदी में कर रहे तो मैं ब्रम हूं

2068
02:25:27,440 --> 02:25:31,720
वो आप वो आपकी व्याख्या है आपने पूछा शास्त्र में कहीं प्रमाण

2069
02:25:31,720 --> 02:25:35,760
दिखा दीजिए कहीं लिखा हो आप ही बोल रहे हो मैं ब्रह्म हूं वो

2070
02:25:35,760 --> 02:25:39,760
आपकी व्याख्या है पीछे की जो आप ऐड कर रहे हो उस व्याख्या को हम माने या ना

2071
02:25:39,760 --> 02:25:44,480
माने वो अलग मैटर है आपने कहा प्रमाण दिखाइए ठीक है अब मैं बताऊ

2072
02:25:44,480 --> 02:25:49,160
अब मानोगे हा बताओ अध

2073
02:25:49,160 --> 02:25:52,720
शलोक में भगवान श्री कृष्ण कह रहे ब्रह्मण ही पति ब्रम

2074
02:25:52,720 --> 02:25:56,880
की प्रतिष्ठा मुझ से है यानी कि जो आत्मा है उनकी

2075
02:25:56,880 --> 02:26:00,880
प्रतिष्ठा परमात्मा से है शलोक क्रमांक बताइए जरा इसकी भी हिंदी वि

2076
02:26:00,880 --> 02:26:04,080
करले आप बहुत देर से

2077
02:26:04,080 --> 02:26:09,360
भगवता भगवत गीता अध्याय 14 लोक

2078
02:26:09,360 --> 02:26:11,640
27

2079
02:26:11,640 --> 02:26:15,800
बोलेते ऐसा

2080
02:26:15,800 --> 02:26:21,240
करें

2081
02:26:21,240 --> 02:26:25,440
यू आर लाइव लाइव लाइव बोलो बोलो बोलो

2082
02:26:25,440 --> 02:26:30,120
दोबारा चालू हो गई क्या आपने लेफ्ट करा था फिर चालू हो गई

2083
02:26:30,120 --> 02:26:34,160
मेरे ख्याल से कुछ मामला है इतनी देर से ज्यादा नहीं होगा

2084
02:26:34,160 --> 02:26:38,320
मेरी तो स्वा अध्याय और 27

2085
02:26:38,320 --> 02:26:42,440
वा श्लोक उसमें भगवान क्लियर कह रहे हैं कि

2086
02:26:42,440 --> 02:26:46,800
भ्रम की प्रतिष्ठा मुझसे है यानी कि जिससे प्रतिष्ठा

2087
02:26:46,800 --> 02:26:51,720
खोल लू जरा खोल जिस प्रतिष्ठा हुई है कौन सा कौन सा श्लोक

2088
02:26:51,720 --> 02:26:57,200
अध्याय 14 श्लोक

2089
02:26:57,200 --> 02:27:01,240
27 और गीता में पहले भी कह दिया कि सनातन अंश

2090
02:27:01,240 --> 02:27:06,200
है सनातन अंश है मतलब सनातन हमेशा ही अंश रहेगा पूर्ण कभी नहीं होगा अच्छा

2091
02:27:06,200 --> 02:27:10,480
ठीक है तो आप ये कह रहे हो कि जो ब्रह्म

2092
02:27:10,480 --> 02:27:15,160
का जो ब्रह्म से भी ऊपर कृष्ण बैठे हैं कहीं ये कह रहे

2093
02:27:15,160 --> 02:27:19,920
हो बिल्कुल मतलब कृष्ण और ब्रह्म एक नहीं है

2094
02:27:19,920 --> 02:27:24,200
एक है गु प्रकट नहीं होते उ मैंने भागवत का श्लोक आपको स्टार्टिंग में

2095
02:27:24,200 --> 02:27:29,040
सुनाया था वदंति त तव यज्ञन मध्यम भ्रम परमात्मने

2096
02:27:29,040 --> 02:27:33,160
ति शब्द तीनों एक ही है लेकिन भ्रम में सारे

2097
02:27:33,160 --> 02:27:37,400
गुण प्रकट नहीं होते आदि शंकराचार्य ने भी बोला ब्रह्म में शक्तियां नहीं है फिर बाद में माना

2098
02:27:37,400 --> 02:27:41,440
भी शक्तिया है अरे मेरे भाई मैं तो आपको कही रहा हूं ना कि

2099
02:27:41,440 --> 02:27:45,600
हम खुद को पूछने वाले लोग नहीं है यह आप लोगों ने भ्रामक चीजें

2100
02:27:45,600 --> 02:27:50,040
फैलाई है कन हम गीता की ब्रा चीज फैला रहे हैं अगर 14

2101
02:27:50,040 --> 02:27:55,560
14 अध्याय का 27 श्लोक में बता रहा हूं भ्रामक

2102
02:27:55,560 --> 02:27:58,560
है

2103
02:27:58,560 --> 02:28:04,560
हेलो

2104
02:28:21,600 --> 02:28:23,760
ार

2105
02:28:23,760 --> 02:28:28,240
कर आप अपने पिता काको प्यार दज

2106
02:28:28,240 --> 02:28:32,240
जबल हो तो दो दिन के लिए आप चले जा दिन के

2107
02:28:32,240 --> 02:28:36,280
लिए जैसे रा कर पा मा जब सामने

2108
02:28:36,280 --> 02:28:42,280
पड़े

2109
02:28:45,600 --> 02:28:51,600
तो

2110
02:28:56,680 --> 02:29:02,680
सब कु छोड़या

2111
02:29:15,520 --> 02:29:20,400
कर वृति धारण करना चाहते हैं तो आप का आदर कीजिए

2112
02:29:20,400 --> 02:29:26,400
अपने पिता का

2113
02:29:45,520 --> 02:29:51,520
आदर

2114
02:29:58,960 --> 02:30:02,960
ब
