1
00:00:01,920 --> 00:00:06,080
तो जय श्री राम सभी को। आशा करते हैं आप सभी कुशल

2
00:00:06,080 --> 00:00:10,640
पूर्वक होंगे और वैसे

3
00:00:10,640 --> 00:00:15,520
लाइव कल होने वाली थी पर अंतिम

4
00:00:15,520 --> 00:00:19,680
जब बिल्कुल होने वाले होने से थोड़ी देर पहले हमें एक पार्ट हमारा

5
00:00:19,680 --> 00:00:23,680
मिसिंग था जो जिसमें जो एक माउंट करने

6
00:00:23,680 --> 00:00:27,840
का पार्ट होता है कैमरे का उस कारण से फिर

7
00:00:27,840 --> 00:00:31,840
उस समय फिर नहीं हो पाई वो मामला बिगड़ गया खैर

8
00:00:31,840 --> 00:00:36,080
आज बहुत ढूंढना ढूंढा ढूंढने पर नहीं मिला है तो फिर कैमरे

9
00:00:36,080 --> 00:00:40,080
स्टैंड का इंतजाम किया गया है और अब व्यवस्था

10
00:00:40,080 --> 00:00:44,080
पूर्वक वो कैमरा सामने जब लगा अभी हम लोग लाइव हुए हैं।

11
00:00:44,080 --> 00:00:48,240
आज की लाइव रामपाल के मामले में और

12
00:00:48,240 --> 00:00:52,480
जो ज्ञानार्थक प्रतिकार है, खंडन है उसके

13
00:00:52,480 --> 00:00:56,640
मामले में बहुत रोचक होने वाली है। यह मैं आपको

14
00:00:56,640 --> 00:01:02,000
अभी से प्रॉमिस कर रहा हूं। वचन पूर्वक बात कह रहा हूं।

15
00:01:02,000 --> 00:01:06,320
तो जो रामपाल है वह डम

16
00:01:06,320 --> 00:01:10,320
डम डिगा डिगा ड्रामेबाजी बहुत सी करता

17
00:01:10,320 --> 00:01:14,320
है और जो उसने शास्त्रार्थ

18
00:01:14,320 --> 00:01:17,360
का जो वो सिग सगुफा

19
00:01:17,360 --> 00:01:21,840
सिगूफा क्या था दिया था चूर्ण अपने भगतों

20
00:01:21,840 --> 00:01:26,000
को तो उसका तो बैंड कैसा बजा है वो आपने देख ही लिया है हर तरफ

21
00:01:26,000 --> 00:01:30,320
से बेचारे पर ऐसी बिजलियां गिड़ी है गीली गिर रही है

22
00:01:30,320 --> 00:01:34,320
कि हम लोग हम लोगों ने यहां से सीधेसीधे उनके कॉल सेंटर्स में

23
00:01:34,320 --> 00:01:38,480
कॉल किया और पूछा भाई कि भाई यह लाइव

24
00:01:38,480 --> 00:01:42,800
कैसे है? क्या है? इसका निर्णय कैसे होगा? ये

25
00:01:42,800 --> 00:01:46,880
भाई जो जो चीज अस्तित्व में है ही नहीं उसका समूह का समूफा एक बना दिया

26
00:01:46,880 --> 00:01:50,960
कि आ जाना। अच्छा लोग कमेंट कहते रहते हैं कि आ जाना आ जाना। कहां आ

27
00:01:50,960 --> 00:01:55,120
जाना? भाई लाइव तुम ले नहीं रहे हो। अच्छा कुछ लोग धनाना आश्रम

28
00:01:55,120 --> 00:01:59,360
पहुंचे इनके तो वहां पर बेचारे रो-रो के हाथ जोड़ रहे हैं प्रशासन

29
00:01:59,360 --> 00:02:03,440
के कि इनको आने मत दो। तो कहां

30
00:02:03,440 --> 00:02:07,760
आ जाना हवा में आ जाना बस आ जाना आ जाना कहां आ जाना भाई तानाशाही

31
00:02:07,760 --> 00:02:12,560
नहीं चलेगी किसकी के किसी की भी वो हाल है इनका

32
00:02:12,560 --> 00:02:16,640
तो [हंसी] सबसे पहली बात है

33
00:02:16,640 --> 00:02:20,640
कि रामपाल ने जो चैलेंज दिया

34
00:02:20,640 --> 00:02:24,720
है उसमें शुरुआती विषय था सृष्टि रचना तो सृष्टि

35
00:02:24,720 --> 00:02:29,040
रचना के लिए सबसे पहली जो बात है कि वो जो सृष्टि रचना

36
00:02:29,040 --> 00:02:32,960
प्रस्तुत कर रहा है सनातन ियों के परिपेक्ष से पूछ रहा हूं।

37
00:02:32,960 --> 00:02:36,960
बाकी और वो अपने कबीर से जुड़े हुए ग्रंथ को लेकर

38
00:02:36,960 --> 00:02:41,600
के कुछ कहे। हालांकि उसमें भी एक बहुत बड़ा ढोल

39
00:02:41,600 --> 00:02:45,920
का पोल है। किसी दिन कोई फस जाएगा उस दिन उससे बात की जाए। कबीर

40
00:02:45,920 --> 00:02:50,080
सागर अगर 600 वर्ष पहले का है या कबीर वाणी कुछ

41
00:02:50,080 --> 00:02:54,880
वर्ष पहले की है जो भी है इनका गरीब दास की वाणी है कि कबीर

42
00:02:54,880 --> 00:02:59,200
वाणी है। क्योंकि कभी-कभी लोग कबीर वाणी को प्रमाण कहते हैं अंतिम। कभी कभी लोग गरीब

43
00:02:59,200 --> 00:03:03,200
दास की वाणी को प्रमाण कहते हैं। अंतिम कभी-कभी लोग गरीब दास की वाणी को छमम छमम

44
00:03:03,200 --> 00:03:07,360
वेद बताते हैं और कबीर कबीर वाणी को बताते हैं। वो इनका ढोल

45
00:03:07,360 --> 00:03:11,520
का बोल है। खैर वो मूल रूप से हस्तलिखित

46
00:03:11,520 --> 00:03:15,600
जिसकी कार्बन डेटिंग भी कराई जा सके। वो कबीर वाणी कहां पर

47
00:03:15,600 --> 00:03:19,840
है मूल रूप से और फिर मैच कराया जाए कि इन्होंने कबीर वाण

48
00:03:19,840 --> 00:03:24,080
कहां कहां पर कैसे क्या किया है कबीर वाणी के साथ। है ना? जैसे

49
00:03:24,080 --> 00:03:28,720
एक चीज सामने आई थी शुक्राईनाथ जी की उसमें बता रहे थे कि

50
00:03:28,720 --> 00:03:33,200
निराकार को निराकार कर दिया है। निराकार को निराकार कर दिया।

51
00:03:33,200 --> 00:03:37,200
ऐसा ही इसने गीता में कई जगह किया है। जब भगवान कह रहे हैं कि मेरे

52
00:03:37,200 --> 00:03:41,360
पास आकर के तेरे दुख दूर हो जाएंगे तो ये लिख रहा है कि दुख

53
00:03:41,360 --> 00:03:46,960
वो दुख आएंगे। समाप्त नहीं होंगे। आएंगे।

54
00:03:46,960 --> 00:03:48,000
भगवान कह रहे हैं कि

55
00:03:48,000 --> 00:03:52,080
भैया मैं ही पूर्ण पुरुषोत्तम हूं। अस्मि आ रहा है

56
00:03:52,080 --> 00:03:57,760
वहां पर। तो यह लिख रहा है वहां पर कि नहीं नहीं उससे कोई दूसरा पूर्ण पुरुषोत्तम

57
00:03:57,760 --> 00:04:03,440
यह सब चीजें हो रही तो

58
00:04:03,440 --> 00:04:07,600
सबसे पहली बात यह है कि कबीर वाणी में क्या

59
00:04:07,600 --> 00:04:11,760
है सृष्टि रचना क्या नहीं है जो रामपाल ने जो दावा

60
00:04:11,760 --> 00:04:16,000
किया है उसमें सबसे पहला जो विरोध है उसकी

61
00:04:16,000 --> 00:04:20,000
कही हुई बातों में वो पहला यह है कि सनातनी नहीं मानता

62
00:04:20,000 --> 00:04:24,160
कि कबीर भगवान है। ठीक है? हिंदू वह है वैदिक

63
00:04:24,160 --> 00:04:28,160
वा वैदिक वैदिक वांगमय को मानने वाला फिर वैदिक

64
00:04:28,160 --> 00:04:32,240
वांगमय का समर्थन करने वाले और उसके सिद्धांतों की सीमा

65
00:04:32,240 --> 00:04:36,640
में चल चलने वाले जो आगे शास्त्र है पुराण स्मृति ग्रंथ इत्यादि

66
00:04:36,640 --> 00:04:40,800
उनको मानने वाला कबीर को भगवान नहीं मानता है। तुमको कबीर को भगवान

67
00:04:40,800 --> 00:04:44,960
बनवाना है। यहीं से बात शुरू है ना? तो कबीर को भगवान

68
00:04:44,960 --> 00:04:49,120
बनवाने के लिए तुम कह रहे हो कि भैया जिन शास्त्रों

69
00:04:49,120 --> 00:04:54,000
को तुम मानते हो उनके साथ साथ एक कबीर वाणी को भी शास्त्र मानना पड़ेगा।

70
00:04:54,000 --> 00:04:58,240
क्यों? क्योंकि परमेश्वर की वाणी है। यानी कि

71
00:04:58,240 --> 00:05:02,320
जो जंग होने वाली है वो इस बात को लेकर होने वाली है कि रामपाल कबीर

72
00:05:02,320 --> 00:05:03,360
को भगवान मनवा

73
00:05:03,360 --> 00:05:07,360
रहा है सनातनियों को। रामपाल दावा कर रहा है कि

74
00:05:07,360 --> 00:05:11,520
कबीर भगवान है। मगर यह प्रतिस्पर्धा

75
00:05:11,520 --> 00:05:15,600
होने से पहले इस बात पर चर्चा होने से पहले तर्क वितर्क होने से

76
00:05:15,600 --> 00:05:20,000
पहले किसी भी प्रकार का

77
00:05:20,000 --> 00:05:24,000
जो पक्ष विपक्ष है वो प्रस्तुत होने से पहले ही रामपाल ये चाहता

78
00:05:24,000 --> 00:05:28,480
है कि हम ये मान ले कि कबीर वाणी जो है परमात्मा की वाणी है।

79
00:05:28,480 --> 00:05:32,560
ये है इनका सपा बजाओ ताली ठोको ताली। तो ये तो हो

80
00:05:32,560 --> 00:05:36,720
गई पहली बात। अब दूसरी बात ये आती है कि

81
00:05:36,720 --> 00:05:40,960
यह जो सृष्टि रचना बता रहा है यह सृष्टि रचना

82
00:05:40,960 --> 00:05:46,320
का सनातन धर्म ग्रंथों में प्रमाण कहां पर है?

83
00:05:46,320 --> 00:05:50,320
कहां प्रमाण है? जो सृष्टि रचना ये बता रहा है जिस

84
00:05:50,320 --> 00:05:54,320
क्रम में बता रहा है जो जो उसमें घटनाएं हैं उसका प्रमाण कहां

85
00:05:54,320 --> 00:05:58,480
है? कहीं नहीं है। तो इसका अर्थ

86
00:05:58,480 --> 00:06:02,560
है कि इसके द्वारा जो सृष्टि रचना बताई जा रही है उसको मानने के

87
00:06:02,560 --> 00:06:07,280
लिए जैसे कि वो प्रकृति ने हाथ उठाया,

88
00:06:07,280 --> 00:06:11,360
दुर्गा ने हाथ उठाया। फिर जो है इसने जो वहां पर अपनी

89
00:06:11,360 --> 00:06:15,360
अश्लीलता भरी है जो अश्लीलता इसको बबिता के प्रकरण में

90
00:06:15,360 --> 00:06:18,480
याद आती थी या जेल में याद आती होगी या

91
00:06:18,480 --> 00:06:22,880
इनके यहां जो बिना जननांग के

92
00:06:22,880 --> 00:06:26,880
प्राणी उत्पन्न होते हैं और फिर ये फेविकॉल से उसमें जननांग

93
00:06:26,880 --> 00:06:30,160
चिपका देते हैं।

94
00:06:30,160 --> 00:06:34,240
अपना मन चाहा जैसे मान लीजिए कि किसी का पुरुष

95
00:06:34,240 --> 00:06:38,480
के साथ गमन करने का मन है तो वहां पर स्त्री का

96
00:06:38,480 --> 00:06:43,120
जननांग चिपकाते हैं। क्योंकि इसने बताया है कि

97
00:06:43,120 --> 00:06:47,120
जो हिंदुओं की जो विवाह पद्धति है वो गलत है। क्यों गलत है?

98
00:06:47,120 --> 00:06:51,200
क्योंकि जो देव लोक में दय जो समागम हो रहे हैं देवी देवताओं के

99
00:06:51,200 --> 00:06:55,360
भगवान के वहां पर कहीं पर भी सात फेरे नहीं हुए।

100
00:06:55,360 --> 00:06:59,680
इसलिए यहां पर हम लोग सात फेरे लेकर के गलत कर रहे हैं।

101
00:06:59,680 --> 00:07:04,000
यानी कि वो जो दय घटनाएं होती है वो एज इट इज यहां पर मनुष्य लोक में लागू

102
00:07:04,000 --> 00:07:08,080
होती है। तो उसी आधार पर मैं ये बता रहा हूं कि इसके यहां पर ये

103
00:07:08,080 --> 00:07:12,160
दय घटना है एक कि एक बहन है।

104
00:07:12,160 --> 00:07:16,320
उसके भाई की उस पर कुदृष्टि हो गई। उस बहन के पास जननांग नहीं था।

105
00:07:16,320 --> 00:07:21,680
वो बहन क्यों है? ये रामपाल ही जानता है। मगर

106
00:07:21,680 --> 00:07:25,840
जननांग ना होते हुए भी वो बहन है, वो स्त्री है

107
00:07:25,840 --> 00:07:30,160
और उस पर उसके भाई की कुदृष्टि हो रही है। तो जब कुदृष्टि

108
00:07:30,160 --> 00:07:33,600
हो रही है तो अपना काम निकालने के लिए वो अपना उल्लू सीधा करने

109
00:07:33,600 --> 00:07:38,640
के लिए नाखूनों से वो जो आवश्यक

110
00:07:38,640 --> 00:07:42,720
इंद्रिय है जो भोग के लिए आवश्यक है। उस इंद्री को

111
00:07:42,720 --> 00:07:47,120
वो किसी तरीके से चिपकाता है। है ना

112
00:07:47,120 --> 00:07:51,360
अपनी बहन के यह रामपाल की दय घटना

113
00:07:51,360 --> 00:07:55,360
है। रामपाल के जो सड़ी हुई किताब है उन्होंने लिखी

114
00:07:55,360 --> 00:07:59,360
हुई है। हां वो बात और है कि हमारा विरोध इस बात

115
00:07:59,360 --> 00:08:03,440
को लेकर है कि ये चंपक कहानियां उसने

116
00:08:03,440 --> 00:08:07,520
हमारे देवी देवताओं के नाम से जोड़कर लिखी है। यह विरोध है। बाकी तू

117
00:08:07,520 --> 00:08:11,840
खूब चंपक कहानी लिख कोई दिक्कत नहीं। मनोहर कहानी मनोहर कहानी जो रेलवे स्टेशन

118
00:08:11,840 --> 00:08:16,560
के बाहर खेल पर मिलती है ना जो

119
00:08:16,560 --> 00:08:21,040
सरबिए भगड़ी नशेड़ी

120
00:08:21,040 --> 00:08:25,280
है ना जो जगह ढूंढ रहे होते हैं अपने काम वासनाओं की तृप्ति

121
00:08:25,280 --> 00:08:29,360
के लिए वो बेचारे जो है वो किताबें

122
00:08:29,360 --> 00:08:33,840
खरीद कर ही काम चलाते हैं अपना रेलवे स्टेशन के बाहर

123
00:08:33,840 --> 00:08:38,320
तो उस तरह की किताबें छापो कोई दिक्कत नहीं है अपने

124
00:08:38,320 --> 00:08:42,400
नाम पर कि रामपाल के जो है धर्म ग्रंथ यही है छापो उससे कोई दिक्कत

125
00:08:42,400 --> 00:08:46,480
नहीं है समस्या तब है जब हमारे देवी देवताओं से जोड़कर हमारे

126
00:08:46,480 --> 00:08:48,720
वैदिक प्रतीक चिन्हों से जोड़कर के तुम

127
00:08:48,720 --> 00:08:54,240
छापते हो। तो अ

128
00:08:54,240 --> 00:08:58,480
इसने ये बताया इसके अनुसार इसने हमारे यहां के विवाह की तुलना की। कहां से?

129
00:08:58,480 --> 00:09:02,720
देवलोक की घटनाओं से। तो इसके यहां की देवलोक की घटना है कि बहन

130
00:09:02,720 --> 00:09:06,800
पर भाई की कुदृष्टि हो गई। भाई ने आवश्यकता अनुसार

131
00:09:06,800 --> 00:09:10,880
वह जो जननांग होता है वह चिपका दिया बहन के

132
00:09:10,880 --> 00:09:15,760
और उसके बाद उसको अपनी वासना का

133
00:09:15,760 --> 00:09:19,760
बनाया शिकार बहन के साथ जबरदस्ती की

134
00:09:19,760 --> 00:09:24,000
फिर उसके बाद उस बहन में भी तथाकथित वो जो उसकी चंपक कहानी

135
00:09:24,000 --> 00:09:28,000
है चंपक नहीं चंपक तो अच्छे स्तर की किताब है वो रेलवे स्टेशन के

136
00:09:28,000 --> 00:09:32,240
बाहर वाली जो किताबें होती है तो बहन के अंदर भी फिर वो जाग गई वासना

137
00:09:32,240 --> 00:09:36,400
इत्यादि ये सब इसने लिखा है तो अब एज इट इज उन

138
00:09:36,400 --> 00:09:40,480
चीजों को लागू कर दो तो यह मानना पड़ेगा कि रामपाल के यहां भी बहन पर भाई को

139
00:09:40,480 --> 00:09:44,560
दृष्टि डालते हैं। एज इट इज लागू करना है ना देवलोक की घटनाओं

140
00:09:44,560 --> 00:09:48,640
को तो इसी के यहां की घटना है वो देवलोक की इसने बताया जैसा कि सृष्टि रचना के

141
00:09:48,640 --> 00:09:52,800
समय में तो उसको एज इट इज जब लागू करेंगे तो क्या निकल के आएगा

142
00:09:52,800 --> 00:09:57,440
कि भैया रामपाल के यहां भाइयों की कुदृष्टि हो जाती है बहनों पर

143
00:09:57,440 --> 00:10:01,440
और जो पिता होता है वो जब बहन शिकायत करने पहुंचती है

144
00:10:01,440 --> 00:10:03,840
कि भाई मुझ पर कुदृष्टि डाल रहा है तो पिता होता है

145
00:10:03,840 --> 00:10:08,000
वो और उसको जो है समर्थन कर देता है कि जा तू इसी

146
00:10:08,000 --> 00:10:12,080
के साथ भोग कर तेरे लिए मैं ये सब कर देता हूं इंतजाम तू उसके साथ अपनी

147
00:10:12,080 --> 00:10:16,320
बहन के साथ भोग कर ले। तो ये एज इट इज लागू हो

148
00:10:16,320 --> 00:10:21,280
गई। तो रामपाल को जो चीजें

149
00:10:21,280 --> 00:10:25,280
जो वासनाएं अपने यहां दिखती है या जेल में दिखी

150
00:10:25,280 --> 00:10:29,440
होगी जेल में जब वो 18 से 20 साल तक

151
00:10:29,440 --> 00:10:33,520
20 वर्ष तक रहा। कितने? 111 वर्ष तक रहा। वो असल

152
00:10:33,520 --> 00:10:37,600
में ऐसा इसलिए होता है ना 11 12 वर्ष मुझे 1820 में मुख से निकल

153
00:10:37,600 --> 00:10:41,680
गया। जब मैं देखता हूं कि 5000 एक

154
00:10:41,680 --> 00:10:46,640
लाख ऐसे लोग हैं जो समर्थन करते हो शायद

155
00:10:46,640 --> 00:10:50,640
है ना उसमें भी कट्टर भगत कितने होंगे वो सोचने वाली बात है मगर

156
00:10:50,640 --> 00:10:54,640
उसको जब ये लोग 15 करोड़ 20 करोड़ बता देते हैं तो भाई वहां

157
00:10:54,640 --> 00:10:58,640
पर हमारा वाकलन तो हो ही सकता है हमें तो भगवती का वरदान प्राप्त नहीं है आप लोगों को मालूम

158
00:10:58,640 --> 00:11:02,720
होगा भगवती वरदान किसको दिया था तो भैया जहां

159
00:11:02,720 --> 00:11:06,800
लोग 500 की संख्या को 1 लाख तक कह एक लाख की

160
00:11:06,800 --> 00:11:10,800
संख्या को 15 करोड़ 20 करोड़ कह देते हैं। उनको जरा भी

161
00:11:10,800 --> 00:11:15,040
उसमें शर्म नहीं आती है। कहते हुए लज्जा

162
00:11:15,040 --> 00:11:19,280
नहीं आती है। अपने ऊपर जरा भी संदेह

163
00:11:19,280 --> 00:11:23,360
नहीं होता है। तो फिर ऐसे में भाई 111 वर्ष को हम अगर 1820

164
00:11:23,360 --> 00:11:27,440
वर्ष बता दे तो क्या कौन सा बड़ा आंकड़ा हमने बदल दिया? है

165
00:11:27,440 --> 00:11:31,680
ना? खैर तो इनके यहां पर दैव

166
00:11:31,680 --> 00:11:35,680
लोक की घटनाएं सीधे यहां पर लागू होती है। तो इस हिसाब से फिर रामपाल

167
00:11:35,680 --> 00:11:39,840
भी अपनी आवश्यकता अनुसार जेल को काटते समय क्या-क्या करता रहा हो, कौन सा अंग

168
00:11:39,840 --> 00:11:43,840
अपने चिपकाता रहा हो, कौन सा अंग सामने वाले की चिपकाता रहा हो ये तो

169
00:11:43,840 --> 00:11:48,080
भगवान ही जाने। अगर उसको सीधे-सीधे

170
00:11:48,080 --> 00:11:52,080
लागू कर दिया गया। तो अब यह जो

171
00:11:52,080 --> 00:11:56,080
घटनाएं हैं जो इसने अपनी सृष्टि रचना में बताई है

172
00:11:56,080 --> 00:12:00,400
यह घटनाएं किसी भी सनातन शास्त्र में नहीं मिलती है।

173
00:12:00,400 --> 00:12:04,480
जबकि ये हिंदुओं को ये बताता है कि भाई शास्त्र की

174
00:12:04,480 --> 00:12:08,720
मानो शास्त्र के अनुसार चलो। ठीक है? पहली बात।

175
00:12:08,720 --> 00:12:13,680
दूसरी बात ये है कि कई ऐसी घटनाएं हैं जो इसकी घटनाओं को काट देती है।

176
00:12:13,680 --> 00:12:17,920
गलत कर देती है कि यहां तो कुछ और हो रहा है। जैसे कि अभी हम आगे चलेंगे। तो

177
00:12:17,920 --> 00:12:22,160
ऐसे में क्या मानना होगा इस चर्चा

178
00:12:22,160 --> 00:12:26,240
को करते समय रामपाल के साथ जब तर्क वितर्क हो रहा होगा और हिंदुओं

179
00:12:26,240 --> 00:12:30,400
को अपने शास्त्रों को मानना होगा तो अपने शास्त्रों को मानने के नाम पर उसे पहले

180
00:12:30,400 --> 00:12:34,480
ये मानना होगा कि हमारे शास्त्र जो है एक तो अधूरे हैं।

181
00:12:34,480 --> 00:12:38,640
उसमें केवल संकेत है। मुख्य बातें तो जो रामपाल के द्वारा

182
00:12:38,640 --> 00:12:42,800
रगड़ रगड़ के छापी गई जो किताबें हैं जिसका

183
00:12:42,800 --> 00:12:46,960
कि ना और है ना छोर। मुख्य बातें तो उसमें वो

184
00:12:46,960 --> 00:12:51,840
रेलवे स्टेशन की बाहर की जो खेल पर मिलने वाली किताबें होती है मुख्य बातें उसमें।

185
00:12:51,840 --> 00:12:55,920
दूसरी बात यह है कि हमारे शास्त्र झूठ भी बोलते हैं। यानी हमारे शास्त्रों को जिसने रचा

186
00:12:55,920 --> 00:13:00,080
है वो झूठ बोलते हैं। यानी कि जिसने रचा

187
00:13:00,080 --> 00:13:04,080
है वो झूठ भी बोलता है। तो इसका अर्थ ये है कि सनातनियों को अपने

188
00:13:04,080 --> 00:13:08,080
शास्त्रों को मानने के नाम पर सनातनियों को अपने शास्त्रों से श्रद्धा हटानी

189
00:13:08,080 --> 00:13:12,240
पड़ेगी। यानी यह मानना पड़ेगा यह शास्त्र तो गलत है। कुछ

190
00:13:12,240 --> 00:13:16,960
भी बोल सकते हैं। इनकी सब बातें हमें सच नहीं माननी है।

191
00:13:16,960 --> 00:13:21,040
तो उनके प्रति अश्रद्धा रखनी होगी और उनसे निकल कर

192
00:13:21,040 --> 00:13:25,120
के बाहर जाना होगा। वो दो जगह है रामपाल और रामपाल के द्वारा

193
00:13:25,120 --> 00:13:29,120
छापे गए ग्रंथ। वो भी तब तक जब तक रामपाल उस पर उंगली रख रहा है। वो

194
00:13:29,120 --> 00:13:33,440
कबीर वाणी को भी मना कर देगा अगर उसमें कुछ ले आए। इसीलिए मैंने कहा हस्तलिखित

195
00:13:33,440 --> 00:13:37,440
मनुस्कृत कहां है? भाई ऋग्वेद की 1500

196
00:13:37,440 --> 00:13:41,600
से 1800 वर्ष पूर्व की जो मनुस्क्रिप्ट है वो

197
00:13:41,600 --> 00:13:45,600
लिखी हुई है प्राप्त है ओरिएंटल ओरिएंटल रिसर्च

198
00:13:45,600 --> 00:13:49,600
इंस्टट्यूट शायद पुणे में है वहां पर रखी हुई

199
00:13:49,600 --> 00:13:53,120
है और

200
00:13:53,120 --> 00:13:57,360
ग्रंथों में जो यूनेस्को है उसने सबसे प्राचीन

201
00:13:57,360 --> 00:14:01,680
ग्रंथ माना है ऋग्वेद की उस प्रति को ठीक है तो हमें 1800

202
00:14:01,680 --> 00:14:05,760
वर्ष पूर्व की अपनी प्रति प्राप्त ऋग्वेद की ठीक

203
00:14:05,760 --> 00:14:10,160
है हस्त हस्तलिखित थी वो तो कबीर

204
00:14:10,160 --> 00:14:14,240
वाणी जो पिछले 500 या गरीब दास की वाणी जो भी आई हो पिछले 600

205
00:14:14,240 --> 00:14:18,240
से लेकर के उससे कम वर्षों में ये कबीर वाणी हस्तलिखित कहां

206
00:14:18,240 --> 00:14:22,240
है उसको प्रस्तुत किया जाए जिससे मिलान कर सके अब रामपाल ने अपने हाथों से लिखी

207
00:14:22,240 --> 00:14:26,560
होगी तो कार्बन डेटिंग में पता चल जाएगा है ना

208
00:14:26,560 --> 00:14:30,800
ये तो हो गई इनके चमचम वेद की बात दूसरी

209
00:14:30,800 --> 00:14:33,760
बात आती है

210
00:14:33,760 --> 00:14:37,840
कि अब पहले जो सृष्टि रचना बता रहा है कुल मिलाकर के सृष्टि रचना में

211
00:14:37,840 --> 00:14:42,400
जो मुख्य मूल कारण है सृष्टि रचना का

212
00:14:42,400 --> 00:14:46,560
वो रामपाल के अनुसार है इनका

213
00:14:46,560 --> 00:14:50,720
कबीर जो हमारे शास्त्रों में कहीं पर भी नहीं बताया गया कि कबीर मूल

214
00:14:50,720 --> 00:14:55,520
कारण है। ठीक है? और

215
00:14:55,520 --> 00:14:59,600
रामपाल यह कहता है कि हमारे शास्त्रों के अनुसार

216
00:14:59,600 --> 00:15:03,840
हमारे सनातन देवी देवताओं को अ पूर्ण

217
00:15:03,840 --> 00:15:04,880
ब्रह्म

218
00:15:04,880 --> 00:15:08,960
या पूर्ण मुक्ति देने वाला मानना गलत है। पूर्ण भगवान पूर्ण परम

219
00:15:08,960 --> 00:15:13,600
परमेश्वर मानना गलत है। यानी हमारे शास्त्रों में

220
00:15:13,600 --> 00:15:17,840
ब्रह्मा विष्णु महेश भवती गणेश इनको पूर्ण परमेश्वर मानने पर

221
00:15:17,840 --> 00:15:22,000
निषेध किया गया है। देवता स्वरूप तो मानो

222
00:15:22,000 --> 00:15:26,160
ये रामपाल कहता है। हालांकि इसमें भी एक पोल है।

223
00:15:26,160 --> 00:15:30,480
रामपाल की इस बात में भी एक पोल है। जब हम

224
00:15:30,480 --> 00:15:34,720
जैसे शास्त्रों में पितरों को स्वतंत्र सत्ता मान करके उनकी

225
00:15:34,720 --> 00:15:38,800
भक्ति करने पर निषेध किया गया। तो उन वाक्यों का उपयोग

226
00:15:38,800 --> 00:15:42,800
रामपाल इस रूप में करता है कि देखो देखो पितरों की साधना करने को तो मना किया

227
00:15:42,800 --> 00:15:47,120
जा रहा है। जबकि पितरों का जो तर्पण इत्यादि कर्म है पितरों की पूजा अतिथि की पूजा

228
00:15:47,120 --> 00:15:51,120
गुरु की पूजा माता पिता की पूजा कन्या पूजन ये सब

229
00:15:51,120 --> 00:15:55,120
हमारे यहां कर्तव्य कर्मों में आता है। धर्म में आता है। इस

230
00:15:55,120 --> 00:15:59,360
रूप में हम करते हैं और कहीं भी इनको स्वतंत्र सत्ता मान करके नहीं करते हैं। उसमें उसी

231
00:15:59,360 --> 00:16:03,360
परम परमेश्वर का दर्शन करते हैं। जिस समय जिसका पूजन कर

232
00:16:03,360 --> 00:16:07,760
रहे होते हैं जिस परम परमेश्वर को पूर्ण कहा गया है। ठीक है?

233
00:16:07,760 --> 00:16:11,920
मगर इन निषेध वचनों के आधार पर रामपाल पितरों का या

234
00:16:11,920 --> 00:16:16,560
इस तरह की और चीजों का सीधेसीधे खंडन कर देता है।

235
00:16:16,560 --> 00:16:20,000
अब बात ये आती है कि पितरों का ही पूजन श्राद्ध इत्यादि

236
00:16:20,000 --> 00:16:24,080
जो कर्म है उसकी आज्ञा हमें प्राप्त है। यजुर्वेद से प्राप्त

237
00:16:24,080 --> 00:16:30,080
है। ऋग्वेद से प्राप्त है। शास्त्रों से प्राप्त है। विभिन्न शास्त्रों में मेंशन

238
00:16:30,880 --> 00:16:35,200
गया महात्मा इत्यादि ये उसमें लिखा हुआ है। सब स्कंद

239
00:16:35,200 --> 00:16:40,160
पुराण सारे महात्म लिखे हैं। तो

240
00:16:40,160 --> 00:16:44,160
अब ये है [गला साफ़ करने की आवाज़] कि अब ये

241
00:16:44,160 --> 00:16:48,480
क्या करता है कि पितृ पूजन को निषेध करने

242
00:16:48,480 --> 00:16:52,480
वाले स्वतंत्र रूप से पितृ पूजन नहीं करना चाहिए। उसको निषेध

243
00:16:52,480 --> 00:16:56,640
करने वाले उसके आधार पर सीधे-सीधे खंडन कर देता है कि नहीं नहीं पितृ पूजा करनी

244
00:16:56,640 --> 00:17:01,280
नहीं है। ठीक है? अब क्या है कि इसने कई जगह यह लिखा है कि नहीं नहीं

245
00:17:01,280 --> 00:17:05,440
ब्रह्मा विष्णु महेश की पूजा करने वाले दूषित कर्म करने वाले नीच ठीक है

246
00:17:05,440 --> 00:17:09,440
यहां निष निषेध वाक्य में मिल गया उसके बावजूद भी ये ताल ठोकता है

247
00:17:09,440 --> 00:17:13,440
कि मैं ब्रह्मा विष्णु महेश की भक्ति करवाता हूं हालांकि करवाते नहीं है कुछ

248
00:17:13,440 --> 00:17:17,600
नहीं करवाते वो मगर लोगों को दिखाने के लिए तो कहते हैं ना तो

249
00:17:17,600 --> 00:17:21,600
चलो लोगों को दिखाने के लिए जो कह रहा है इसका मतलब निषेध परख वचन होने

250
00:17:21,600 --> 00:17:25,840
के बाद भी इसके यहां भी उन्हीं तत्वों

251
00:17:25,840 --> 00:17:29,840
की भक्ति करने की बात भी है। जिन तत्वों की भक्ति

252
00:17:29,840 --> 00:17:33,840
को इसके यहां निषेध किया गया है। इसका मतलब

253
00:17:33,840 --> 00:17:35,200
क्या है? वहां भी यही मानना

254
00:17:35,200 --> 00:17:39,200
पड़ेगा। ब्रह्मा विष्णु महेश की भक्ति तो है मगर पूर्ण ब्रह्म के रूप में नहीं है। उसी तरीके

255
00:17:39,200 --> 00:17:45,200
से पितृ पूजन है। ये पूर्ण ब्रह्म के रूप में नहीं है। तो

256
00:17:45,680 --> 00:17:49,920
अब बात ये आती है कि अ

257
00:17:49,920 --> 00:17:53,920
जो सृष्टि रचना जो ये बता रहा है वो हमारे शास्त्रों

258
00:17:53,920 --> 00:17:58,320
में है नहीं। फिर जिन शास्त्रों

259
00:17:58,320 --> 00:18:02,320
को जिन शास्त्रों को मानने की बात कर रहा है

260
00:18:02,320 --> 00:18:06,320
उन शास्त्रों को रामपाल के अनुसार माने जाने का अर्थ है कि उन शास्त्रों

261
00:18:06,320 --> 00:18:10,640
को ना मानना क्यों क्योंकि उनको अधूरा मानना है कि उसमें जो संकेत

262
00:18:10,640 --> 00:18:14,640
है दूसरे ग्रंथ का छमम छमम वेद का संकेत है। कबीर का

263
00:18:14,640 --> 00:18:18,720
संकेत है। कुछ भी क्लियर नहीं है। जो ये मनवाना चाहता है वो हमारे शास्त्रों में क्लियर नहीं

264
00:18:18,720 --> 00:18:22,880
है। हमारे शास्त्रों में उसका संकेत है। संकेत के आधार पर इसकी कही हुई बात मान

265
00:18:22,880 --> 00:18:27,280
लो बाबा की जेल कट्टू ठीक है तो

266
00:18:27,280 --> 00:18:31,280
हमें रामपाल के अनुसार शास्त्रों को मानने का अर्थ है

267
00:18:31,280 --> 00:18:35,360
शास्त्रों को ना मानो क्यों क्योंकि एक तो पहले उन्हें अधूरा मानो भले

268
00:18:35,360 --> 00:18:39,520
ही वेद घोषणा कर रहे हो कि वेद के अलावा दूसरा कोई मार्ग

269
00:18:39,520 --> 00:18:43,920
नहीं है ना और भले ही प्रत्येक

270
00:18:43,920 --> 00:18:48,000
पुराण प्रारंभ होते ही घोषणा कर रहा हो कि इसके अलावा

271
00:18:48,000 --> 00:18:50,400
सब और किसी शास्त्र की आवश्यकता नहीं है। फिर

272
00:18:50,400 --> 00:18:54,480
भी हमें यह मानना है कि यह सभी शास्त्र परम पवित्र तो हैं

273
00:18:54,480 --> 00:18:58,480
मगर झूठे भी है। परम पवित्र तो हैं मगर एक काम के नहीं है। ये

274
00:18:58,480 --> 00:19:02,560
मानना है रामपाल के अनुसार। ठीक है?

275
00:19:02,560 --> 00:19:07,040
दो बातें। अब तीसरी बात ये है कि रामपाल

276
00:19:07,040 --> 00:19:11,280
के अनुसार इनमें इन शास्त्रों में हम जिनकी

277
00:19:11,280 --> 00:19:15,280
पूजा करते हैं ब्रह्मा, विष्णु, महेश उनकी पूजा को निषेध

278
00:19:15,280 --> 00:19:19,360
किया गया है। पूर्ण ब्रह्म के रूप में निषेध किया गया है हमारे शास्त्रों में। तो

279
00:19:19,360 --> 00:19:23,360
अब इस बात का सवाल का जवाब कौन देगा कि हमने

280
00:19:23,360 --> 00:19:28,320
यह पूजा पूर्ण ब्रह्म के रूप में ब्रह्मा विष्णु महेश की करना क्यों शुरू की?

281
00:19:28,320 --> 00:19:32,560
उसका प्रमाण कहां है? इनके पास कुछ नहीं है। इनके पास इनके

282
00:19:32,560 --> 00:19:36,560
कबीर सागर को प्रामाणिक रूप से प्रस्तुत करने का कुछ नहीं आधार।

283
00:19:36,560 --> 00:19:40,640
जो भी ये दिखाएंगे उसमें ढोल में पोल हो जाएगी। तो ये तो

284
00:19:40,640 --> 00:19:44,960
रही इनकी सृष्टि रचना की बात। अब हम बहुत एक सरल सा खेल खेलेंगे क्योंकि

285
00:19:44,960 --> 00:19:49,360
रामपाल की बातों का जवाब देना खेल खेलने जैसा ही है।

286
00:19:49,360 --> 00:19:53,360
कोई व्यक्ति अगर तर्कसंगत व्यक्ति अगर बात

287
00:19:53,360 --> 00:19:58,240
का इनकी का जवाब दे तो रामपाल की बातों का जवाब देना

288
00:19:58,240 --> 00:20:02,320
एक खेल है बच्चों का खेल। वही हम आज खेलने जा रहे हैं और आपको बहुत आनंद आने

289
00:20:02,320 --> 00:20:05,600
वाला है। अच्छा इनका जो शास्त्रार्थ

290
00:20:05,600 --> 00:20:09,600
का सगुफा है वो भी आप जान ही चुके हो कि भाई इनसे सामने जाकर के शास्त्रार्थ करने

291
00:20:09,600 --> 00:20:13,760
नहीं देंगे। लाइव आएंगे नहीं। फिर अगर यह कहेंगे

292
00:20:13,760 --> 00:20:17,760
कि वीडियो बना के खंडन कर दो तो कितने लोग वीडियो बनाकर खंडेन कर देंगे और कितने

293
00:20:17,760 --> 00:20:21,760
खंडनों पर तुम कितने लोगों को 50-50 लाख दोगे? जनता का निर्णय

294
00:20:21,760 --> 00:20:25,920
तय कैसे होगा? जनता ने निर्णय क्या लिया? बहुत सी इसमें बहुत

295
00:20:25,920 --> 00:20:30,960
सारे चीजें हैं। एक बात ये भी आ जाती है कि अगर तुम अपने

296
00:20:30,960 --> 00:20:35,440
यहां बैठकर के आमने सामने तर्क वितर्क ना होने को भी शास्त्रार्थ

297
00:20:35,440 --> 00:20:39,440
कहते हो। चलो मान लिया कि अपने घर में बैठकर के अगर कोई बात कर रहा

298
00:20:39,440 --> 00:20:43,440
है और तुम कहीं और हो और तुम भले ही मेरा लाइव देखो ना देखो मैं तो वीडियो

299
00:20:43,440 --> 00:20:47,760
बना रहा हूं उसको भी तुम शास्त्रार्थ कहते हो ठीक है

300
00:20:47,760 --> 00:20:50,480
तो फिर

301
00:20:50,480 --> 00:20:54,480
अपने घर में बैठकर केवल अपने पक्ष रखने को क्या कहेंगे क्योंकि

302
00:20:54,480 --> 00:20:59,280
वो तो शास्त्रार्थ हो गया तो फिर केवल पक्ष रखना किसे कहेंगे

303
00:20:59,280 --> 00:21:03,280
क्योंकि केवल पक्ष रखने को तो तुमने शास्त्रार्थ बता दिया समझ रहे

304
00:21:03,280 --> 00:21:07,920
हो तुम भों जो रामपाल के चेले चाली देख रहे होंगे

305
00:21:07,920 --> 00:21:12,000
वो इस बात को समझे केवल अपने पक्ष रखने को तुमने क्या कहा

306
00:21:12,000 --> 00:21:16,240
ये तो शास्त्रार्थ है यानी ये तो भिड़ंत है ठीक है तो फिर केवल

307
00:21:16,240 --> 00:21:20,320
अपना पक्ष रखना वो क्या है सोचने वाली

308
00:21:20,320 --> 00:21:21,440
बात

309
00:21:21,440 --> 00:21:25,680
खैर अब बात आगे करते हैं

310
00:21:25,680 --> 00:21:29,920
सबसे जरूरी बात [गला साफ़ करने की आवाज़] तो पहले देखते

311
00:21:29,920 --> 00:21:34,000
हैं अब हम खोल रहे हैं चैट जीपीटी आपके सामने लाइव

312
00:21:34,000 --> 00:21:38,160
होगा आज चैट जीपीटी ठीक है क्योंकि रामपाल तो आएगा

313
00:21:38,160 --> 00:21:43,120
नहीं तो अब हम चैट जीपीटी से एक एक करके पूछ रहे हैं

314
00:21:43,120 --> 00:21:47,120
कि भैया षष्ठी रचना के विषय में जो रामपाल ने ताल ठोकी है

315
00:21:47,120 --> 00:21:51,200
उसके विषय में क्या कहता है हमारा कौन सा पुराण और पुराण से उसको वेरीफाई भी

316
00:21:51,200 --> 00:21:55,360
कर लेंगे चैट जीपीटी क्या कहेगा क्या बता रहा है मैं ये करके आपको

317
00:21:55,360 --> 00:21:59,520
इसलिए दिखा रहा हूं कि रामपाल की बातों में केवल

318
00:21:59,520 --> 00:22:03,600
वस्तुनिष्ठ बातें हैं किसका नाम क्या है किसका किसके

319
00:22:03,600 --> 00:22:08,080
साथ ये वस्तुनिष्ठ चीज वहां ना तर्क है ना तात्विक सिद्धांत

320
00:22:08,080 --> 00:22:12,320
जिसको समझने के लिए आपको बहुत मेहनत करनी पड़े गुरुओं से समझना

321
00:22:12,320 --> 00:22:17,600
पड़े केवल आपको वहां पर रटी हुई चीजें चाहिए होंगी उसका

322
00:22:17,600 --> 00:22:21,600
खंडन करने के लिए प्रतिकार करने के लिए तो रटी हुई चीजें तो आपको जानकारियां

323
00:22:21,600 --> 00:22:27,600
चैट जीपीडी बहुत सारी मिल जाएगी तो इसको शुरू करते हैं जरा देखते हैं

324
00:22:27,680 --> 00:22:33,680
तो सबसे पहले देखते हैं भाई

325
00:22:36,960 --> 00:22:41,120
हां जी मुझे यह जानना है कि

326
00:22:41,120 --> 00:22:45,200
विष्णु पुराण के अनुसार सृष्टि का मूल कारण

327
00:22:45,200 --> 00:22:50,160
किसे कहा गया है?

328
00:22:50,160 --> 00:22:54,320
एक सेकंड मेरे विचार दर्शन और

329
00:22:54,320 --> 00:22:58,480
पुराणों के नजरिए से देख तो आदि शक्ति को सभी शक्तियों का मूल

330
00:22:58,480 --> 00:23:02,640
स्रोत कहा जा सकता है। लेकिन यहां फर्क समझना जरूरी है। शक्ति

331
00:23:02,640 --> 00:23:06,640
वह सामर्थ्य है जिससे सृष्टि चलती है। जबकि आदि शक्ति उस

332
00:23:06,640 --> 00:23:10,960
शक्ति का सार्वभौमिक रूप मानी जाती है। शक्तिमान वो है

333
00:23:10,960 --> 00:23:15,200
जिसमें वह शक्ति निहित है। अलग-अलग दर्शनों में शक्ति और शक्तिमान

334
00:23:15,200 --> 00:23:19,520
का संबंध थोड़ा अलग बताया गया है। अगर आप चाहे तो मैं बता सकता हूं कि शाब्द

335
00:23:19,520 --> 00:23:24,000
दर्शन और दूसरे मतों में इसे कैसे अलग-अलग तरह से समझाया गया है।

336
00:23:24,000 --> 00:23:28,160
क्या आप शाण की बात है या किसी और परंपरा के?

337
00:23:28,160 --> 00:23:33,040
नहीं नहीं ऐसे नहीं। मुझे नाम लेकर बताइए विष्णु पुराण में

338
00:23:33,040 --> 00:23:37,200
जो सबसे परम परमेश्वर कहे गए हैं। उनका नाम

339
00:23:37,200 --> 00:23:41,120
क्या है? विष्णु पुराण के अनुसार।

340
00:23:41,120 --> 00:23:45,360
ठीक है। मैं विष्णु पुराण के अनुसार देखता हूं। विष्णु पुराण

341
00:23:45,360 --> 00:23:49,520
के अनुसार परमेश्वर का नाम भगवान विष्णु है। उदाहरण के लिए विष्णु पुराण

342
00:23:49,520 --> 00:23:52,160
प्रथम अंश अध्याय दो श्लोक अका

343
00:23:52,160 --> 00:23:56,160
से चार में सृष्टि स्थिति और विनाश के स्रोत के रूप में भगवान विष्णु

344
00:23:56,160 --> 00:24:00,320
को नमस्कार किया गया है। अगर आप किसी खास श्लोक से प्रमाण चाहते

345
00:24:00,320 --> 00:24:04,400
हैं तो अध्याय और श्लोक संख्या बताना जरूरी होगा। क्या

346
00:24:04,400 --> 00:24:08,400
विष्णु क्या आप उसी श्लोक को जानना चाहते हैं? नहीं नहीं ठीक है मैं देख ले। आपने

347
00:24:08,400 --> 00:24:12,480
जो प्रथम अंश का है मैं देख लूंगा। अभी मैं फिलहाल मैं ये पूछ रहा हूं।

348
00:24:12,480 --> 00:24:18,480
क्या विष्णु भगवान को विष्णु पुराण में अविनाशी कहा गया है? अविनाशी।

349
00:24:19,840 --> 00:24:24,080
एक सेकंड मैं देखता हूं। विष्णु पुराण में भगवान

350
00:24:24,080 --> 00:24:30,080
विष्णु को नारायण कहा गया है। अविनाशी अजन्मा

351
00:24:32,880 --> 00:24:37,040
एक मिनट मैं देखता हूं। आपका आखरी वाक्य थोड़ा स्पष्ट रह

352
00:24:37,040 --> 00:24:41,440
गया। क्या आप यह पूछ रहे हैं कि विष्णु पुराण में नारायण को भजने

353
00:24:41,440 --> 00:24:46,000
का या नारायण नाम के जप का प्रमाण कहां है? नहीं नहीं मैं पूछ रहा हूं

354
00:24:46,000 --> 00:24:50,080
तो मैं संबंधित श्लोक मैं पूछ रहा हूं विष्णु पुराण

355
00:24:50,080 --> 00:24:54,640
में भगवान विष्णु को

356
00:24:54,640 --> 00:25:00,640
अजन्मा अविनाशी ये कहां पर कहा गया है?

357
00:25:01,360 --> 00:25:06,160
देखता हूं।

358
00:25:06,160 --> 00:25:10,400
क्या आप पूछ रहे हैं कि विष्णु पुराण में भगवान विष्णु को अजन्मा

359
00:25:10,400 --> 00:25:14,720
और अव्यय कहां-कहां गया है? जी जी या किसी दूसरे शब्द का

360
00:25:14,720 --> 00:25:20,720
नहीं नहीं अजन्मा और अव्यय

361
00:25:32,480 --> 00:25:36,720
श्लोक 40 41 और श्लोक 55 में नारायण को अच

362
00:25:36,720 --> 00:25:41,200
और अव्यय कहा गया है। जो विशुद्ध बोध स्वरूप नित्य

363
00:25:41,200 --> 00:25:45,440
अजन्मा अक्षय अव्यक्त और अविकारी है। वही विष्णु का परम

364
00:25:45,440 --> 00:25:49,840
पद है। इस संदर्भ में नारायण को अजन्मा और अव्यय कहा गया है।

365
00:25:49,840 --> 00:25:54,640
आप चाहे तो मैं श्लोक 40 का हिंदी अर्थ भी बता सकता हूं। हां

366
00:25:54,640 --> 00:26:00,080
बताइए आप एक मिनट क्या आपने बताया है एक दो चार

367
00:26:00,080 --> 00:26:03,280
विष्णु पुराण का ना

368
00:26:03,280 --> 00:26:06,560
हिंदी अर्थ क्या है बताइए

369
00:26:06,560 --> 00:26:10,560
विष्णु पुराण के प्रथम अंश अध्याय नौ श्लोक 50 में

370
00:26:10,560 --> 00:26:14,880
लिखा है जो विशुद्ध बोध स्वरूप नित्य अजन्म अक्षय

371
00:26:14,880 --> 00:26:18,960
अव्यक्त और अविकारी है वही विष्णु का परम पद है

372
00:26:18,960 --> 00:26:21,200
श्लोक 51 में शक्ति के बारे में कहा

373
00:26:21,200 --> 00:26:25,360
है कि जिसकी अत्यंत सूक्ष्म अंश में यह विश्व शक्ति स्थित है। ऐसे

374
00:26:25,360 --> 00:26:29,360
परबह्म स्वरूप अव्यय भगवान को मैं प्रणाम करता हूं। अव्यय

375
00:26:29,360 --> 00:26:34,240
ठीक है। यानी वो अविनाशी भी है। और अव्ययम शब्द आए हैं। ठीक है। ठीक है।

376
00:26:34,240 --> 00:26:38,480
ठीक है। चलिए ठीक है। अब अब मुझे बता दीजिए क्या विष्णु पुराण

377
00:26:38,480 --> 00:26:44,480
में ये लिखा हुआ है कि विष्णु भगवान की पूजा करने से मोक्ष मिलेगा?

378
00:26:44,880 --> 00:26:49,040
एक मिनट मैं देखता हूं। हां विष्णु पुराण

379
00:26:49,040 --> 00:26:53,040
में स्पष्ट कहा गया है कि भगवान विष्णु वासुदेव की आराधना से

380
00:26:53,040 --> 00:26:57,200
मोक्ष मिलता है। उदाहरण के लिए प्रथम अंश अध्याय फोर

381
00:26:57,200 --> 00:27:01,360
श्लोक 18 में कहा गया है कि वासुदेव की आराधना किए बिना

382
00:27:01,360 --> 00:27:06,000
कोई मोक्ष नहीं पा सकता। साथ ही प्रथम अंश अध्याय 18

383
00:27:06,000 --> 00:27:10,160
श्लोक 23 24 में ज्ञान ध्यान और समाधि द्वारा हरि के तत्व

384
00:27:10,160 --> 00:27:14,240
को जानकर मोक्ष प्राप्त करने की बात है। निष्कर्ष यह है कि विष्णु पुराण

385
00:27:14,240 --> 00:27:18,560
के अनुसार विष्णु वासुदेव की आराधना मोक्ष का साधन है।

386
00:27:18,560 --> 00:27:22,560
और भी कई श्लोकों में यह विचार आता है। ठीक है। मुझे ज्यादा नहीं चाहिए। ज्यादा

387
00:27:22,560 --> 00:27:26,800
नहीं चाहिए। मुझे आप यह बताइए कि

388
00:27:26,800 --> 00:27:30,880
यह उन्हीं विष्णु की बात हो रही है। मतलब विष्णु पुराण में विष्णु भगवान की

389
00:27:30,880 --> 00:27:34,880
पहचान के चिन्ह जैसे वो शंख चक्र गधा धारण करते

390
00:27:34,880 --> 00:27:36,720
हैं। लक्ष्मी के पति हैं।

391
00:27:36,720 --> 00:27:40,880
है ना? इस तरह की पहचान कि हम उन्हीं विष्णु की बात कर रहे हैं। क्योंकि कुछ लोग हैं

392
00:27:40,880 --> 00:27:46,880
वो यह कहते हैं कि नहीं नहीं यह दूसरा विष्णु है।

393
00:27:47,360 --> 00:27:53,360
एक सेकंड मैं देखता हूं।

394
00:27:55,040 --> 00:27:59,360
हां अब समझ गया। आप पूछ रहे हैं कि विष्णु पुराण में जिन भगवान विष्णु

395
00:27:59,360 --> 00:28:03,600
का वर्णन है क्या वही शंख चक्र गदा और पद्मधारी विष्णु

396
00:28:03,600 --> 00:28:07,600
ही है? जी जी हां विष्णु पुराण में वही भगवान विष्णु का

397
00:28:07,600 --> 00:28:11,840
उल्लेख है। प्रथम अंश अध्याय फोर श्लोक 18 में

398
00:28:11,840 --> 00:28:16,000
वासुदेव की आराधना से मोक्ष प्राप्ति की बात है। और प्रथम अंश

399
00:28:16,000 --> 00:28:20,000
अध्याय 22 में उनके शंख चक्र गदा आदि आयु का वर्णन

400
00:28:20,000 --> 00:28:24,560
है। तो साफ है कि वहां इन्हें अलग देवता नहीं माना गया है। वासुदेव

401
00:28:24,560 --> 00:28:28,880
हरि और विष्णु एक ही परम तत्व के नाम है। बहुत बढ़िया।

402
00:28:28,880 --> 00:28:32,960
मैं जरा आपसे ना वैसे बात करता हूं लिख लिख के क्योंकि शायद आपकी आवाज कम जा रही

403
00:28:32,960 --> 00:28:38,960
होगी वहां। आवाज कैसी जा रही है मुझे कोई कमेंट करके बता दे।

404
00:28:45,680 --> 00:28:49,680
नारायण। आवाज ठीक आ रही है? तो इसको आगे बढ़ाएं नहीं तो मैं पढ़

405
00:28:49,680 --> 00:28:53,760
के बताऊं जो चैट जीपीटी [नाक से की जाने वाली आवाज़]

406
00:28:53,760 --> 00:28:58,160
आंसर दे रहा है। है ना?

407
00:28:58,160 --> 00:29:04,160
सही है। ठीक है। चलिए अब हम आगे जाते हैं इसी में।

408
00:29:09,040 --> 00:29:12,960
अह

409
00:29:12,960 --> 00:29:17,120
मोक्ष वाला हो गया। विष्णु पुराण से विष्णु भगवान का मोक्ष स्वरूप

410
00:29:17,120 --> 00:29:21,200
हो गया। सच्चिदानंद स्वरूप हो गया। सृष्टि बनाने

411
00:29:21,200 --> 00:29:25,280
वाला हो गया। और यह वही विष्णु है जो लक्ष्मी जी के पति हैं। और उनका हमने

412
00:29:25,280 --> 00:29:29,440
रूप भी देख लिया। वो शंख चक्र गदा वाला। ये सब आंसर इसने यहां दे दिए। और

413
00:29:29,440 --> 00:29:34,160
यहां पर श्लोक क्रमांक भी आ रहे हैं और कुछ श्लोक क्रमांक आपको स्क्रीन पर दिख जाएंगे।

414
00:29:34,160 --> 00:29:38,560
ठीक है? अब जो है

415
00:29:38,560 --> 00:29:44,560
और क्या [गला साफ़ करने की आवाज़] क्या प्रश्न होता है? हां। [नाक से की जाने वाली आवाज़]

416
00:30:06,510 --> 00:30:10,560
[खांसने की आवाज़][गला साफ़ करने की आवाज़] [नाक से की जाने वाली आवाज़] ये बताइए विष्णु

417
00:30:10,560 --> 00:30:14,720
पुराण में भगवान विष्णु विष्णु को परम पुरुष या पुरुषोत्तम कहीं पर कहा

418
00:30:14,720 --> 00:30:17,200
गया है?

419
00:30:17,200 --> 00:30:21,280
एक सेकंड हां मैं जरा चेक कर लो। हां बिल्कुल

420
00:30:21,280 --> 00:30:25,440
विष्णु पुराण में भगवान विष्णु को पुरुषोत्तम कहा गया है। इस प्रकार

421
00:30:25,440 --> 00:30:29,520
प्रथम अंश अध्याय दो श्लोक पांच से आठ के आसपास मिलता

422
00:30:29,520 --> 00:30:33,760
है। अलग-अलग संस्करणों में श्लोक क्रमांक बदल सकते हैं।

423
00:30:33,760 --> 00:30:37,920
अगर आप चाहे तो मैं सटीक अध्याय श्लोक नंबर मिलान करके दे

424
00:30:37,920 --> 00:30:42,400
दूं। हां जी हां जी। अगर आपके पास ऑनलाइन पाठ खुला है ऑनलाइन

425
00:30:42,400 --> 00:30:47,520
उपलब्ध पाठ में पुरुषोत्तम के लिए यही वर्णन मिलता है हां

426
00:30:47,520 --> 00:30:50,560
तो

427
00:30:50,560 --> 00:30:55,200
अभी तक हमने विष्णु पुराण से विष्णु के द्वारा सृष्टि रचना

428
00:30:55,200 --> 00:31:00,960
वही विष्णु जो लक्ष्मी के पति और जिनका जिस स्वरूप में हम लोग हिंदू लोग जो

429
00:31:00,960 --> 00:31:04,960
जिनकी पूजा करते हैं आराधना करते उन्हीं विष्णु की बात हो रही है। ठीक है। अब हम

430
00:31:04,960 --> 00:31:09,040
लोग शिव पुराण की बात करेंगे। शिव पुराण के तो हालांकि मेरे पास भी प्रमाण है पर आज मैं

431
00:31:09,040 --> 00:31:13,600
चैट जीपीटी से बताऊंगा। मेरे पास तो बहुत सारे कल मतलब बहुत

432
00:31:13,600 --> 00:31:17,840
टाइम लग जाएगा। पर मैं आज चैट जीपीटी से बात कर करके आपको बताऊंगा कितना सरल

433
00:31:17,840 --> 00:31:21,840
है रामपाल की बातों का जवाब देना। ठीक है? तो चैट जीपीटी से

434
00:31:21,840 --> 00:31:27,840
अब हम आगे करते हैं बात। [खांसने की आवाज़]

435
00:31:28,240 --> 00:31:31,360
ये बताइए

436
00:31:31,360 --> 00:31:35,440
शिव पुराण के अनुसार शिव पुराण के अनुसार हां

437
00:31:35,440 --> 00:31:39,520
सृष्टि को बनाने वाला जी सृष्टि को बनाने वाले का क्या

438
00:31:39,520 --> 00:31:45,040
नाम है? शिव पुराण के अनुसार

439
00:31:45,040 --> 00:31:49,440
मैं शिव पुराण में देख रहा हूं। शिव पुराण के अनुसार

440
00:31:49,440 --> 00:31:53,600
शक्ति की उत्पत्ति भगवान शिव से हुई है। श्री शिव महापुराण की

441
00:31:53,600 --> 00:31:57,840
रुद्र संहिता में शिव द्वारा अपने शरीर से देवी शक्ति को प्रकट

442
00:31:57,840 --> 00:32:02,080
करने का वर्णन मिलता है। मूल संस्कृत पाठ में भी यही

443
00:32:02,080 --> 00:32:06,400
भाव आता है। शक्ति को उत्पन्न करने वाले के रूप में सदाशिव का उल्लेख

444
00:32:06,400 --> 00:32:11,120
आता है। ठीक है, ठीक है।

445
00:32:11,120 --> 00:32:15,280
अ सृष्टि रचना करने वाले यही हैं। सृष्टि की रचना

446
00:32:15,280 --> 00:32:20,080
करने वाले मैं कंफर्म कर लेता हूं। हां जी

447
00:32:20,080 --> 00:32:24,240
शिव पुराण के इस प्रसंग के अनुसार शक्ति की रचना करने वाले शक्ति

448
00:32:24,240 --> 00:32:29,120
नहीं शक्ति नहीं मैं सृष्टि मैं सृष्टि बोल रहा हूं सृष्टि

449
00:32:29,120 --> 00:32:33,360
हां जी बोलिए मैं सृष्टि रचना कह रहा हूं सृष्टि की रचना

450
00:32:33,360 --> 00:32:36,240
करने वाले

451
00:32:36,240 --> 00:32:40,480
ठीक है अब साफ कर देता हूं शिव पुराण रुद्र संहिता सृष्टि खंड अध्याय

452
00:32:40,480 --> 00:32:44,800
छ श्लोक न में कहा गया है शक्ति सदा शिव के अपने स्वरूप

453
00:32:44,800 --> 00:32:49,120
से प्रकट हुई और उनसे अभिन्न है। अरे भाई मैं कह रहा हूं मैं शक्ति

454
00:32:49,120 --> 00:32:54,160
नहीं कह रहा हूं। मैं कह रहा हूं सृष्टि सृष्टि

455
00:32:54,160 --> 00:32:59,680
संसार की रचना करने वाला किसे कहा गया है?

456
00:32:59,680 --> 00:33:03,840
एक सेकंड मैं देखता हूं। अगर आपका प्रश्न ये है कि संसार

457
00:33:03,840 --> 00:33:08,320
की रचना करना किसका काम है? हम शिव पुराण के अनुसार रचना

458
00:33:08,320 --> 00:33:12,400
पालन और संहार के कार्य मिलते हैं। सृष्टि खंड

459
00:33:12,400 --> 00:33:16,640
अध्याय 16 श्लोक 47 से 48 में कहा गया है कि

460
00:33:16,640 --> 00:33:21,040
ब्रह्मा ने शिव की आज्ञा से सृष्टि की और वही शिव को परब्रह्म

461
00:33:21,040 --> 00:33:25,360
कहा गया है तथा ब्रह्मा विष्णु और रुद्र को उनके रूप बताया गया है।

462
00:33:25,360 --> 00:33:29,760
शिव जी को अब ये जो शिव पुराण सृष्टि खंड अध्याय 16

463
00:33:29,760 --> 00:33:33,920
बहुत बढ़िया अब ये जो शिव जी आपने बताए हैं कि शिव जी ने ब्रह्मा विष्णु

464
00:33:33,920 --> 00:33:38,320
महेश को मतलब ब्रह्मा विष्णु महेश के आविर्भाव

465
00:33:38,320 --> 00:33:42,400
के कारण जो है शिव जी हैं। ये जो आपने बताया है यह शिवजी वही

466
00:33:42,400 --> 00:33:46,560
शिव जी है ना जो त्रिशूल धारण करते हैं। क्या इनको कहीं पर कहा गया

467
00:33:46,560 --> 00:33:50,960
शिव जी को त्रिशूल धारण करने वाला, जटा में गंगा धारण करने वाला, चंद्रमा

468
00:33:50,960 --> 00:33:56,160
धारण करने वाला। ऐसा कहा गया है कहीं शिव पुराण में?

469
00:33:56,160 --> 00:33:59,760
हां, मैं चेक कर लेता हूं।

470
00:33:59,760 --> 00:34:04,320
हां शिव पुराण में उसी शिव को त्रिशूलधारी जटाधारी गंगाधर

471
00:34:04,320 --> 00:34:08,400
और चंद्रमा को मस्तक पर धारण करने वाला बताया गया है। सृष्टि खंड के

472
00:34:08,400 --> 00:34:12,720
अध्याय छह में इसका एक स्पष्ट प्रमाण मिलता है।

473
00:34:12,720 --> 00:34:18,720
बहुत बढ़िया।

474
00:34:18,720 --> 00:34:24,560
आप ये देखिए कि कितनी कितनी

475
00:34:24,560 --> 00:34:29,520
नेचुरल नेचुरल नहीं ऑर्गेनिक धुलाई हो रही है रामपाल ये ऑर्गेनिक

476
00:34:29,520 --> 00:34:34,160
इसमें कोई मिलावट नहीं है। सीधेसीधे प्रश्न कर रहा हूं चैट जीपीटी से।

477
00:34:34,160 --> 00:34:38,240
शिव पुराण में शिव पुराण एक मिनट एक मिनट एक मिनट एक

478
00:34:38,240 --> 00:34:42,240
मिनट चैट जीपीटी से जब पूछा गया शिव पुराण के अनुसार सृष्टि

479
00:34:42,240 --> 00:34:46,320
रचना किसने की है? तो सृष्टि रचना का प्रमाण से उसने उत्तर दे दिया कि

480
00:34:46,320 --> 00:34:50,560
शिव जी ने की है। अब मैंने ये कहा कि जब ये लोग करने लगे वो आदि शिव आदि

481
00:34:50,560 --> 00:34:54,720
शिव आदि गणेश आदि गणेश आदि राम आदि राम। ठीक है तो अब

482
00:34:54,720 --> 00:34:59,600
मैंने ये कहा कि एक मिनट आप सुन रहा हूं। अरे यार चुप हो जाओ।

483
00:34:59,600 --> 00:35:03,040
चुप हो जाओ एक मिनट।

484
00:35:03,040 --> 00:35:07,920
तो अब मैंने ये कहा कि अ

485
00:35:07,920 --> 00:35:11,200
क्योंकि ये लोग कहते हैं ना ये वो वाला शिव नहीं है। तो फिर मैंने ये कहा

486
00:35:11,200 --> 00:35:15,440
कि भाई शिव की पहचान भी बता दो जिसने सृष्टि रचना की है। तो शिव पुराण

487
00:35:15,440 --> 00:35:19,520
में शंख ये त्रिशूल धारण करने वाले जटा में गंगा

488
00:35:19,520 --> 00:35:24,000
धारण करने वाले जिस रूप की पूजा हम करते हैं वो कोई अलग नहीं काल नहीं

489
00:35:24,000 --> 00:35:28,000
उसी वही भगवान शिव शंकर। अच्छा यह भी कह देता हूं शंकर कहा

490
00:35:28,000 --> 00:35:32,960
है कि नहीं। ठीक है और आगे चलते हैं। हां

491
00:35:32,960 --> 00:35:37,440
तो शिव पुराण के अनुसार जिन भगवान

492
00:35:37,440 --> 00:35:41,520
शिव ने सृष्टि रचना की है और वही जो

493
00:35:41,520 --> 00:35:45,680
वही जो अपने जटा में गंगा चंद्रमा

494
00:35:45,680 --> 00:35:49,760
धारण करते हैं, त्रिशूल धारण करते हैं। क्या उनको शंकर भी कहा

495
00:35:49,760 --> 00:35:53,280
गया है?

496
00:35:53,280 --> 00:35:57,440
मैं चेक करता हूं। शिव पुराण के अनुसार आप यह पूछ

497
00:35:57,440 --> 00:36:01,440
रहे हैं कि शिव जी ने शक्ति की रचना कैसे की और शक्ति को अपने

498
00:36:01,440 --> 00:36:05,680
शरीर से प्रकट करने का क्या प्रसंग है? नहीं नहीं

499
00:36:05,680 --> 00:36:10,080
मैं ये नहीं पूछ रहा। मैं ये नहीं पूछ रहा हूं। मैं पूछ रहा हूं

500
00:36:10,080 --> 00:36:14,160
कि शिव पुराण में सृष्टि की रचना संसार की

501
00:36:14,160 --> 00:36:18,160
रचना करने वाले परम तत्व परमेश्वर शिव को कहीं पर

502
00:36:18,160 --> 00:36:23,120
शंकर भी कहा गया है?

503
00:36:23,120 --> 00:36:27,120
एक सेकंड मैं जांचता हूं। [गला साफ़ करने की आवाज़] जी अब आपका

504
00:36:27,120 --> 00:36:31,200
प्रश्न क्लियर है। आप पूछ रहे हैं कि शिव पुराण में सृष्टि करने वाले परम तत्व शिव

505
00:36:31,200 --> 00:36:35,360
को संकल्प कहा गया है या नहीं? शिव पुराण संहिता सृष्टि

506
00:36:35,360 --> 00:36:39,440
खंड अध्याय छ में उल्लेख है कि सृष्टि के समय के आने पर परम ब्रह्म

507
00:36:39,440 --> 00:36:43,840
के भीतर इच्छा उत्पन्न हुई कि वह एक से अनेक हो। इसके

508
00:36:43,840 --> 00:36:47,840
बाद निराकार परम ब्रह्म ईश्वर मूर्ति भगवान सदाशिव

509
00:36:47,840 --> 00:36:52,080
के रूप में प्रकट हुए। लेकिन अभी तक मुझे ऐसा सटीक श्लोक नहीं मिला

510
00:36:52,080 --> 00:36:56,080
है जिसमें भगवान शिव को स्वयं संकल्प नाम दिया गया हो।

511
00:36:56,080 --> 00:37:00,640
संकल्प नहीं अलग रखना चाहिए। संकल्प नहीं शंकर

512
00:37:00,640 --> 00:37:06,640
हां शंकर की बात कर रहा हूं शंकर

513
00:37:07,680 --> 00:37:11,680
हां समझ गए संकल्प नहीं शंकर पूछ रहे हैं कि शिव पुराण

514
00:37:11,680 --> 00:37:15,680
में सृष्टि के परम कारण भगवान शिव को शंकर ही कहा गया है या

515
00:37:15,680 --> 00:37:19,760
नहीं शिव पुराण के रुद्र संहिता सृष्टि खंड के प्रथम अध्याय के शुरुआती

516
00:37:19,760 --> 00:37:24,000
श्लोक में शिव को विश्व की उत्पत्ति स्थिति और लय का एकमात्र

517
00:37:24,000 --> 00:37:28,080
कारण बताया गया है और एक स्पष्ट उदाहरण शिव पुराण के महात्म

518
00:37:28,080 --> 00:37:32,160
के शुरुआत में मिलता है। जहां लिखा है कि हे शंकर मैं आपका दास

519
00:37:32,160 --> 00:37:36,400
हूं जो कर्म रूपी ग्राह से ग्रस्त है। इसे शिव पुराण में शंकर

520
00:37:36,400 --> 00:37:40,480
नाम के प्रयोग का प्रमाण मिलता है। हालांकि सृष्टि के परम कारण और

521
00:37:40,480 --> 00:37:44,640
शंकर नाम को एक ही संदर्भ में जोड़ने के लिए संबंधित अध्याय का पूरा

522
00:37:44,640 --> 00:37:48,800
श्लोक देखना उचित होगा। अगर आप चाहे तो मैं उस खाने का पूरा श्लोक

523
00:37:48,800 --> 00:37:52,800
खोजकर पढ़ सकता हूं। मैं मैं बता देता हूं। वायवीय सम्यता

524
00:37:52,800 --> 00:37:57,200
में संभवत पूर्व खंड है। जहां पर भगवान

525
00:37:57,200 --> 00:38:01,200
शिव की भक्ति करने की बात कही जा रही है। उन्हें अजर

526
00:38:01,200 --> 00:38:05,280
भी कहा जा रहा है। जरा से रहित कहा जा रहा है। वहीं पर उनकी भक्ति

527
00:38:05,280 --> 00:38:09,760
करने के लिए शंकराय नमः करके जो है

528
00:38:09,760 --> 00:38:15,760
मंत्र भी बताया गया है। वायवीय समिता पूर्व खंड

529
00:38:15,840 --> 00:38:20,240
एक सेकंड मैं देखता हूं। मैं समझ रहा हूं कि आप शिव पुराण की उस संहिता

530
00:38:20,240 --> 00:38:24,240
और खंड की बात कर रहे हैं जहां भगवान शिव को अजर और जरा रहित कहा

531
00:38:24,240 --> 00:38:28,320
गया है और उनकी उपासना के लिए शंकराया नमः जैसे मंत्र बताए

532
00:38:28,320 --> 00:38:32,320
गए हैं। आप कृपया ये स्पष्ट कर दे कि आप शत्रुद्रा संहिता की

533
00:38:32,320 --> 00:38:36,640
बात कर रहे हैं या वायवीय संहिता के पूर्व भाग मैं वायवीय

534
00:38:36,640 --> 00:38:40,960
संता की बात कर रहा हूं। थोड़ा सा अंश बता दे वायवीय

535
00:38:40,960 --> 00:38:45,120
संभिता की बात कर रहा हूं मैं। मैं जयकारा

536
00:38:45,120 --> 00:38:49,200
जी वायर संिता का ऑनलाइन संस्कृत पाठ उपलब्ध है और इसमें

537
00:38:49,200 --> 00:38:53,200
भगवान शिव के लिए शंकर नाम का प्रयोग मिलता है। अब उसी संगीता

538
00:38:53,200 --> 00:38:58,160
में आपके बताए अनुसार अजर और जारित वाले प्रसंग का मिलान करना होगा।

539
00:38:58,160 --> 00:39:02,560
लेकिन मैं अभी इसका सटीक अध्याय और श्लोक क्रमांक प्रमाणित नहीं कर पाया हूं।

540
00:39:02,560 --> 00:39:06,960
इसलिए कोई अनुमानित संदर्भ देना होगा। ठीक है। मैं देता हूं आपको अनुमानित संदर्भ।

541
00:39:06,960 --> 00:39:12,960
अध्याय या श्लोक नंबर बता दे। ठीक है। मैं बताता हूं।

542
00:39:15,600 --> 00:39:21,600
ये

543
00:39:43,680 --> 00:39:48,000
शिव पुराण वायवीय समिता द्वितीय खंड बोलिए

544
00:39:48,000 --> 00:39:54,000
भाई

545
00:39:54,480 --> 00:39:59,200
जहां पर शिव पुराण की भारतीय संभिता का अध्ययन और श्लोक से बताइए

546
00:39:59,200 --> 00:40:03,200
मैं उसी संस्कृत के आधार पर हां दूसरे

547
00:40:03,200 --> 00:40:07,920
भाग में है वायवी समिता

548
00:40:07,920 --> 00:40:13,920
दूसरे भाग में है संभता छठवा अध्याय रहा होगा

549
00:40:17,280 --> 00:40:21,440
जिसमें जो संध्या को भक्ति का वो बता

550
00:40:21,440 --> 00:40:25,040
रहे हैं ना

551
00:40:25,040 --> 00:40:31,040
भक्ति कैसे करनी है हम जी

552
00:40:32,240 --> 00:40:36,480
अब आपका मत वाला पसंद हो गया है। वशिष्ठ

553
00:40:36,480 --> 00:40:40,560
द्वारा ओम नमः शंकर मंत्र से जप तप करने का उपदेश

554
00:40:40,560 --> 00:40:44,880
शिव पुराण की रुद्र संहिता के सती खंड में दिया गया है। ना की वायवीय

555
00:40:44,880 --> 00:40:49,200
संहिता में ये प्रसंग अध्याय पांच में मिलता है। श्लोक लगभग

556
00:40:49,200 --> 00:40:53,280
60 से 68 के आसपास है। संस्करण के अनुसार क्रमांक बदल सकते हैं।

557
00:40:53,280 --> 00:40:57,280
जी वही इसी प्रसंग में शिव को धर्म अर्थ काम और मोक्ष का

558
00:40:57,280 --> 00:41:01,440
आदि कारण और पुरुषोत्तम भी कहा गया है। यह प्रमाण आपके तथ

559
00:41:01,440 --> 00:41:05,680
के लिए उपयोगी हो सकता है क्योंकि यह शंकर नाम उपासना के मंत्र

560
00:41:05,680 --> 00:41:10,160
में आता है और उसी प्रसंग में उन्हें सृष्टि का आदरण और पुरुषोत्तम

561
00:41:10,160 --> 00:41:16,160
बताया गया है। बहुत बढ़िया ये

562
00:41:16,400 --> 00:41:20,880
आपने कौन सा बताया? रुद्र समिता का सती खंड

563
00:41:20,880 --> 00:41:25,200
हां रुद्र संहिता का सती खंड हां रुद्र सम्यिता का सती खंड

564
00:41:25,200 --> 00:41:27,360
है

565
00:41:27,360 --> 00:41:31,440
रुद्र समिता का सती खंड अध्याय कौन सा

566
00:41:31,440 --> 00:41:35,600
बताया आपने छह एक सेकंड हां जी

567
00:41:35,600 --> 00:41:39,760
अध्याय छह भी बताया था इसे शिव पुराण की रुद्र संहिता का सती खंड

568
00:41:39,760 --> 00:41:44,000
द्वितीय खंड कहा जाता है। ध्यान दें। मैंने पहले जो श्लोक संख्या बताई

569
00:41:44,000 --> 00:41:48,240
थी वो सटीक रूप से स्रोत से सत्यापित नहीं की गई है। तो कृपया

570
00:41:48,240 --> 00:41:52,800
प्रमाण देते समय अध्याय और श्लोक संख्या अपने संस्करण से मिला ले।

571
00:41:52,800 --> 00:41:57,120
ये ये मिल गया मिल गया। देखिए ये पष्ठ संख्या 328

572
00:41:57,120 --> 00:42:00,080
निकालिए।

573
00:42:00,080 --> 00:42:04,000
शिव पुराण की अध्याय छक

574
00:42:04,000 --> 00:42:09,040
और ये है अध्याय छ का

575
00:42:09,040 --> 00:42:13,200
संध्या की भक्ति वाला प्रसंग मिल गया है। और इसमें

576
00:42:13,200 --> 00:42:19,200
है नम से 63वा श्लोक

577
00:42:20,880 --> 00:42:25,600
एक सेकंड जी सही आपके संस्करण के अनुसार संदर्भ

578
00:42:25,600 --> 00:42:29,200
ग्रंथ शिव महापुराणिता

579
00:42:29,200 --> 00:42:34,240
खंड अध्याय छ श्लोक 163 अंतिम प्रमाण के

580
00:42:34,240 --> 00:42:38,320
श्लोक संस्कृत पाठ भी देख ताकि शराय

581
00:42:38,320 --> 00:42:42,480
नमः मंत्र और भगवान शिव के स्वरूप के संबंध में छठवा नहीं है पांचवा

582
00:42:42,480 --> 00:42:46,640
है पांचवा अध्याय पांचवा है ऊपर जाइए हां इसी में और ऊपर

583
00:42:46,640 --> 00:42:51,360
बस बस बस बस बस सबसे ऊपर की लाइन देखिए ग्रंथ में संदर्भ शिव महाप्रभु

584
00:42:51,360 --> 00:42:55,360
ये देखिए क्या लिखा है इसको वो कर सकते हैं अंडरलाइन बड़ा कर

585
00:42:55,360 --> 00:42:59,520
सकते है इसको जो धर्म अर्थ काम और मोक्ष के आदि

586
00:42:59,520 --> 00:43:04,000
कारण तथा अद्भुत है उन्हीं संसार के एकमात्र

587
00:43:04,000 --> 00:43:08,000
आदि कारण पुरुषोत्तम भी हो गए वो छर अक्षर और पुरुषोत्तम करता है

588
00:43:08,000 --> 00:43:12,080
ना ये रामपाल पुरुषोत्तम है ना?

589
00:43:12,080 --> 00:43:15,200
तुम इस मंत्र से देवेश्वर शंभू का भजन करो।

590
00:43:15,200 --> 00:43:19,360
उससे तुम्हें समस्त पदार्थों की प्राप्ति हो जाएगी। इसमें संदेह नहीं है। और फिर

591
00:43:19,360 --> 00:43:23,360
आगे ओम नमः शंकराय मंत्र से मौन

592
00:43:23,360 --> 00:43:27,440
होकर इस प्रकार तपस्या का प्रारंभ करो। ठीक? तो आदि

593
00:43:27,440 --> 00:43:31,600
कारण अद्वैत स्वरूप धर्म अर्थ काम मोक्ष के आदि कारण एकमात्र

594
00:43:31,600 --> 00:43:35,600
संस्कार के संसार के एकमात्र कारण इसको अभी हम लोग

595
00:43:35,600 --> 00:43:39,200
जो हमारे पास जो

596
00:43:39,200 --> 00:43:43,200
क्या क्रमानुसार भी है पर अभी हम

597
00:43:43,200 --> 00:43:47,200
लोग वो खेल बता रहे हैं ना कितना आसान है रामपाल की बातों का जवाब देना वो बता रहे

598
00:43:47,200 --> 00:43:51,280
हैं तो अब हम चलते हैं अब हमें मिल गया कि भैया शिव पुराण के

599
00:43:51,280 --> 00:43:55,280
अनुसार सृष्टि रचना किसने की है शिव जी ने की है और वही

600
00:43:55,280 --> 00:43:59,440
शिवजी जो जटा में गंगा धारण करते हैं इसमें कोई इफेंट बट ना हो पाए।

601
00:43:59,440 --> 00:44:05,440
हटा दीजिए बस इतना

602
00:44:21,360 --> 00:44:25,360
हो सकता है कोई नेटवर्क प्रॉब्लम हो रहा हो तो

603
00:44:25,360 --> 00:44:29,600
आप सभी देखिए कितना बढ़िया खंडन चल रहा है इस लाइव स्ट्रीम

604
00:44:29,600 --> 00:44:33,840
को अधिक से अधिक शेयर करें और

605
00:44:33,840 --> 00:44:38,160
जिस तक पहुंचा सकते हैं ताकि इस खंडन का उपयोग हो सके

606
00:44:38,160 --> 00:44:42,320
ताकि ये लोग आपको भ्रमित ना कर सके रामपाल

607
00:44:42,320 --> 00:44:46,320
वाले तो ये सब प्रमाण आप अपने पास रख लीजिए। आज उसकी पूरी

608
00:44:46,320 --> 00:44:50,480
धुलाई होगी। ठीक है? उसके एक एक जो कुतर्क

609
00:44:50,480 --> 00:44:54,880
है ना रामपाल के उन सभी का एक एक करके खंडन होगा।

610
00:44:54,880 --> 00:44:58,400
ठीक है? तो

611
00:44:58,400 --> 00:45:02,560
नेटवर्क प्रॉब्लम हुआ है संभवता भैया को तो जब

612
00:45:02,560 --> 00:45:06,800
तक वो जुड़ रहे हैं तो आपने देखा ही अभी

613
00:45:06,800 --> 00:45:11,360
कि रामपाल का खंडन करना कितना सहज है मात्र

614
00:45:11,360 --> 00:45:15,440
चैट जीपीटी से पूछ लीजिए और खंडन हो गया ठीक है

615
00:45:15,440 --> 00:45:20,800
चैट जीपीटी से आप पूछ लेंगे तो कितने सारे खंडन हो जाएंगे उसके

616
00:45:20,800 --> 00:45:24,800
शास्त्र के प्रमाण सहित वो बता रहा है चैट जीपीटी अभी आप

617
00:45:24,800 --> 00:45:29,040
देख रहे हैं ना तो उन सभी प्रमाण को एक एक-एक करके जब हम यहां पे

618
00:45:29,040 --> 00:45:33,280
आपके सामने रख रहे हैं तो वो मिल भी रहे हैं। ठीक है? सही।

619
00:45:33,280 --> 00:45:36,560
हो सकता है कभी आगे पीछे हो जाए। तो

620
00:45:36,560 --> 00:45:41,200
अभी तो मुझे देखने को नहीं मिला तो देख लिया जाएगा। है ना?

621
00:45:41,200 --> 00:45:43,520
तो

622
00:45:43,520 --> 00:45:49,520
आप सभी लाइव स्ट्रीम को अधिक से अधिक शेयर करें। ठीक है?

623
00:45:52,720 --> 00:45:56,800
लिंक अभी नहीं दिया जाएगा। भैया अभी पूरा कंप्लीट कर

624
00:45:56,800 --> 00:46:01,120
ले पहले उनको जो जो दिखाना है जो प्रमाण

625
00:46:01,120 --> 00:46:05,440
है उनके पास बहुत सारे है ना तो

626
00:46:05,440 --> 00:46:09,280
आप सभी बने रहे जल्द से जल्द

627
00:46:09,280 --> 00:46:14,320
लाइव स्ट्रीम को शेयर करें ठीक है भगवान

628
00:46:14,320 --> 00:46:18,320
शिव के विषय में भगवान विष्णु के विषय में पुराणों

629
00:46:18,320 --> 00:46:22,400
से उनके ईश्वरत्व के लिए कई सारे प्रमाण आपके सामने अभी

630
00:46:22,400 --> 00:46:27,840
रखे गए हैं। अभी और भी रखे जाएंगे। अभी तो शुरुआत है तो

631
00:46:27,840 --> 00:46:31,840
शुरुआत तो दमदार दिख रही है और

632
00:46:31,840 --> 00:46:36,000
मजा आने वाला है। है ना? तो आप लोग

633
00:46:36,000 --> 00:46:42,000
अपना सहयोग बना के रखें चैनल के साथ। ठीक है?

634
00:47:10,080 --> 00:47:14,080
कुछ नेटवर्क प्रॉब्लम हो गया था पता नहीं आजकल

635
00:47:14,080 --> 00:47:18,800
हो रहा है तो

636
00:47:18,800 --> 00:47:22,800
जी आप सभी देखते रहिए कभी और प्रमाण आपको

637
00:47:22,800 --> 00:47:27,120
दिखाएंगे। है ना? यह जो प्रमाण है आपके

638
00:47:27,120 --> 00:47:31,600
सामने यहां पर क्या कहा गया था कि

639
00:47:31,600 --> 00:47:36,080
वो वही है वो जो शिव है वही शंकर है। ठीक है?

640
00:47:36,080 --> 00:47:40,240
उनहीं हे शुभानने तुम इस मंत्र

641
00:47:40,240 --> 00:47:44,480
से देवेश्वर शंभू का भजन करो। उससे तुम्हें समस्त

642
00:47:44,480 --> 00:47:50,480
पदार्थों की प्राप्ति हो जाएगी। इसमें संदेह नहीं है। ठीक है?

643
00:47:52,640 --> 00:47:56,720
यहां पर यह सब कहा गया है। जो धर्म, अर्थ, काम और

644
00:47:56,720 --> 00:48:00,880
मोक्ष के आदि कारण तथा अद्वैत स्वरूप हैं। उन्हीं

645
00:48:00,880 --> 00:48:05,440
संसार के एकमात्र आदि कारण पुरुषोत्तम

646
00:48:05,440 --> 00:48:09,840
का भजन करो। यह कहा गया है। ठीक है?

647
00:48:09,840 --> 00:48:13,840
तो वह पुरुषोत्तम कौन है? तो यहां पर आगे बताया गया है कि वह शंकर

648
00:48:13,840 --> 00:48:19,520
है। शंभू ठीक है। फिर उनका मंत्र बताया गया है।

649
00:48:19,520 --> 00:48:21,840
ठीक है?

650
00:48:21,840 --> 00:48:25,920
तो सभी आप देख सकते हैं यह प्रमाण बहुत ही

651
00:48:25,920 --> 00:48:31,920
महत्वपूर्ण है। है ना?

652
00:48:32,400 --> 00:48:36,560
जय श्री राम। जय श्री राम। सभी को

653
00:48:36,560 --> 00:48:40,880
जय श्री राम। अभी-अभी आनंद आना शुरू हुआ है। अभी

654
00:48:40,880 --> 00:48:45,600
आनंद बहुत आएंगे।

655
00:48:45,600 --> 00:48:48,320
तो

656
00:48:48,320 --> 00:48:53,600
भैया यहां पर थोड़ा सा साधनों का अभाव है तो उसको आपको

657
00:48:53,600 --> 00:48:57,760
सहन करना पड़ेगा। हमारे पास इन्वर्टर नहीं है तो ऐसा

658
00:48:57,760 --> 00:49:02,160
हो जाता है कि कभी-कभी विद्युत का प्रवाह बाधित हो जाता है

659
00:49:02,160 --> 00:49:06,240
तो उस कारण से होता है। तो भगवान शिव के बारे

660
00:49:06,240 --> 00:49:10,240
में हमने चैट जीपीटी से पूछ लिया। शिव पुराण के अनुसार मूल कारण श्लोक

661
00:49:10,240 --> 00:49:14,240
सहित प्रमाण सहित उसने बता दिया। अभी हम आगे आपको बताएंगे जो हमारे पास नोटेड है

662
00:49:14,240 --> 00:49:18,480
उससे भी बताएंगे। फिलहाल आप चैट जीपीटी क्या कहता है उससे पूछते जाइए। कितना

663
00:49:18,480 --> 00:49:22,560
सरल है रामपाल की चीजों का प्रतिकार करना वो मैं आपको बता

664
00:49:22,560 --> 00:49:26,560
रहा हूं। वह कहता है ना सृष्टि रचना सृष्टि रचना यह देख तेरे छमचम

665
00:49:26,560 --> 00:49:31,120
वेद की क्या हो रहा है तो

666
00:49:31,120 --> 00:49:35,120
हमने यह पता कर लिया कि ये वही यह जो शिव

667
00:49:35,120 --> 00:49:39,520
है जो सृष्टि का मूल कारण बताए जा रहे हैं वही शिव है जो जटाम गंगा

668
00:49:39,520 --> 00:49:43,600
और त्रिशूल धारण करते हैं चंद्रमा धारण करते हैं। ये सब श्लोक हैं

669
00:49:43,600 --> 00:49:47,520
शिव पुराण में और यह वही शिव है जिनको शंकर

670
00:49:47,520 --> 00:49:51,840
भी कहा जाता है। महेश्वर भी कहा जाता है। शंभू भी कहा जाता है।

671
00:49:51,840 --> 00:49:56,080
फिर यह वही शिव है जो

672
00:49:56,080 --> 00:50:00,800
उमापति हैं। गिरजापति हैं। देखिए कैसे

673
00:50:00,800 --> 00:50:04,880
है ना? अलग नहीं कर पाओगे आप। उमापति

674
00:50:04,880 --> 00:50:08,880
भी यही है। ये अलग अलग कुछ नहीं है। फिर मैं

675
00:50:08,880 --> 00:50:12,960
आप में इसमें रहस्य बताऊंगा कि ये अलग-अलग क्यों हो रहा है कि शिवजी के

676
00:50:12,960 --> 00:50:17,200
द्वारा बन रही है सृष्टि। फिर वो हो रहा है और इसमें रामपाल के भी चीजों को लूंगा

677
00:50:17,200 --> 00:50:21,280
जिससे तुम आप लोग समझ पाओ। है ना? अब चलते हैं आगे

678
00:50:21,280 --> 00:50:23,510
भैया।

679
00:50:23,510 --> 00:50:26,320
[गला साफ़ करने की आवाज़][खांसने की आवाज़]

680
00:50:26,320 --> 00:50:30,320
हां और एक चीज और अजर अमर अविनाशी

681
00:50:30,320 --> 00:50:34,320
पुरुषोत्तम ये सारे शब्द शिव जी के लिए आ गए अभी तक के जो चर्चा की है हम

682
00:50:34,320 --> 00:50:36,610
लोगों ने।

683
00:50:36,610 --> 00:50:41,440
[गला साफ़ करने की आवाज़] अच्छा ये बताइए कि क्या शिव पुराण में

684
00:50:41,440 --> 00:50:45,680
जो भगवान शिव है उन्हें कहीं पर

685
00:50:45,680 --> 00:50:51,040
अंबिका का पति गिरजा का पति बताया गया है?

686
00:50:51,040 --> 00:50:55,280
एक सेकंड देखता हूं।

687
00:50:55,280 --> 00:50:59,360
जी हां शिव पुराण में शिव को अंबिकापति गौरी पति

688
00:50:59,360 --> 00:51:03,440
और मुकेश पति तीनों नामों से संबोधित किया गया है और

689
00:51:03,440 --> 00:51:07,440
समझिए कि एक ही श्लोक में उन्हें संसार की उत्पत्ति स्थिति

690
00:51:07,440 --> 00:51:11,520
और लय का एकमात्र कारण भी बताया गया है। तो हां शिव पुराण में ये

691
00:51:11,520 --> 00:51:15,520
तीनों संबोधन मिलते हैं और खासकर गौरी पति वाला श्लोक उसी रुद्र

692
00:51:15,520 --> 00:51:20,240
संगीिता सृष्टि खंड अध्याय एक में मिलता है। आप

693
00:51:20,240 --> 00:51:24,560
तीनों का बता दीजिए कहांहां पर क्या-क्या है। गौरी पति उमापति गिरजापति

694
00:51:24,560 --> 00:51:28,880
अंबिकापति सॉरी

695
00:51:28,880 --> 00:51:33,520
एक सेकंड जरा मैं देखता हूँ

696
00:51:33,520 --> 00:51:37,600
अभी चेक कर रहा हूं जी शिव पुराण में तीनों संदर्भों का उल्लेख

697
00:51:37,600 --> 00:51:41,760
है गौरी पति ग्रंथ शिवपुराण रुद्र संहिता सृष्टि खंड अध्याय

698
00:51:41,760 --> 00:51:46,400
एक श्लोक एक में शिव को गौरी पति कहा गया है तो अंबिकापति

699
00:51:46,400 --> 00:51:50,400
शिव महापुराण विदेश्वर संहिता अध्याय सात श्लोक छ में मिलता है जहां

700
00:51:50,400 --> 00:51:54,400
शिव को अंबिका का पति कहा गया तीन गिरजापति शिव पुराण की

701
00:51:54,400 --> 00:51:58,720
रुद्र साहिबा पार्वती खंड अध्याय 43 में ओम गिरजापतिय नमः

702
00:51:58,720 --> 00:52:02,800
नाम रूप में मिलता है। मेरा सुझाव है कि आप अपने शिव पुराण संस्करण

703
00:52:02,800 --> 00:52:07,280
में वो अध्याय और श्लोक मिलान कर ले ताकि किसी भी अनुवाद भिन्नता

704
00:52:07,280 --> 00:52:11,760
से बचा जा सके। नहीं नहीं मैंने तो देखा हुआ है। मैं तो

705
00:52:11,760 --> 00:52:15,920
मेरे सामान्य दर्शक हैं जिनको रामपाल जैसा एक पाखंडी

706
00:52:15,920 --> 00:52:20,160
है जो झूठ बोला करता है। तो उनको मैं बता रहा हूं कि रामपाल से लड़ना

707
00:52:20,160 --> 00:52:24,400
रामपाल का प्रतिकार करना कितना सरल है।

708
00:52:24,400 --> 00:52:28,400
यह मैं उनको समझाना चाह रहा हूं। इसलिए मैं आपसे सुन रहा हूं। समझिए आप क्या कहना

709
00:52:28,400 --> 00:52:32,720
चाह रहे हैं। जी और अगर आप जनता को ये दिखाना चाहते हैं कि रामपाल

710
00:52:32,720 --> 00:52:36,720
जैसे दावों की तुलना में शिव पुराण में शिव को गौरी पति, अंबिकापति या

711
00:52:36,720 --> 00:52:40,720
गिरजापति कहा गया है और इसे मूल श्लोकों के साथ दिखाया जा सकता

712
00:52:40,720 --> 00:52:44,240
है। तो सबसे असरदार तरीका यही होगा कि श्लोक

713
00:52:44,240 --> 00:52:48,320
को शब्दश पढ़कर अर्थ सरल भाषा में समझाया जाए। फिर बताया जाए कि

714
00:52:48,320 --> 00:52:52,480
शंकराय नमः जैसे मंत्र उपासना के हैं और इन प्रसंगों

715
00:52:52,480 --> 00:52:56,480
में शिव को सृष्टि के कारण के रूप में बताया गया है। चाहे तो मैं

716
00:52:56,480 --> 00:53:00,560
श्लोक को सरल शब्दों में तोड़कर नहीं वो हमारे पास है। वो हमारे

717
00:53:00,560 --> 00:53:04,720
पास है। अब मेरा अगला प्रश्न यह है कि क्या शिव जी की

718
00:53:04,720 --> 00:53:09,040
भक्ति करने से जन्म और मरण से मुक्ति मिलती है? जन्म और मरण

719
00:53:09,040 --> 00:53:15,040
का पर रोक लग जाती है? यह कहीं लिखा है?

720
00:53:15,280 --> 00:53:19,280
एक सेकंड। शिव पुराण में भक्ति ज्ञान और मुक्ति

721
00:53:19,280 --> 00:53:23,280
का प्रसंग आता है। लेकिन जन्म मरण से परोक मुक्ति को लेकर

722
00:53:23,280 --> 00:53:27,280
कथन परंपराओं और शास्त्रीय व्याख्याओं में अलग-अलग मिल सकते हैं।

723
00:53:27,280 --> 00:53:31,360
कुछ सीधेसीधे जन्म और मरण से मुक्ति शब्द आया है शिव

724
00:53:31,360 --> 00:53:35,040
पुराण में।

725
00:53:35,040 --> 00:53:38,960
एक सेकंड जरा मैं चेक करता हूं।

726
00:53:38,960 --> 00:53:41,440
हम हम

727
00:53:41,440 --> 00:53:45,600
जी हां शिव पुराण में स्पष्ट रूप से श्रद्धा से शिवलिंग की पूजा करने

728
00:53:45,600 --> 00:53:50,160
और जन्म मृत्यु के बंधन से मुक्त होने की बात कही गई है। जैसे वित्तेश्वर

729
00:53:50,160 --> 00:53:54,400
संहिता अध्याय 16 में जन्म मृत्यु के बंधन से मुक्त होने के लिए श्रद्धा

730
00:53:54,400 --> 00:53:58,640
से शिवलिंग का पूजन करना चाहिए लिखा है और एक और स्थान पर निष्काम

731
00:53:58,640 --> 00:54:02,960
भाव से पूजन करने वाले को मुक्ति मिलने की बात आई है। हालांकि

732
00:54:02,960 --> 00:54:06,960
श्लोक संहिता शब्द विभाजन आपके संस्करण पर निर्भर करेंगे। हां

733
00:54:06,960 --> 00:54:10,960
हां मेरे पास है। मेरे पास है। एक एक प्रमाण और है मेरे पास। मैं चाहता हूं

734
00:54:10,960 --> 00:54:14,800
आप उसे बता दें। अह

735
00:54:14,800 --> 00:54:20,240
शिव जी की भक्ति

736
00:54:20,240 --> 00:54:26,240
एक सेकंड एक मिनट एक मिनट एक शिव जी की

737
00:54:29,600 --> 00:54:35,600
शिव जी की भक्ति करने वाले

738
00:54:37,600 --> 00:54:41,440
एक सेकंड चेक कर लो।

739
00:54:41,440 --> 00:54:46,400
देखिए अभी मोक्ष विदेश समिता का तो आपने बता दिया।

740
00:54:46,400 --> 00:54:50,480
अभी ये जो ये वाक्य आया था ना

741
00:54:50,480 --> 00:54:55,360
ये सृष्टि खंड वाला रुद्र समिता

742
00:54:55,360 --> 00:55:00,160
सृष्टि खंड सती खंड सती खंड

743
00:55:00,160 --> 00:55:06,160
कहां आया था? पांचवा संस्कार सृष्टि

744
00:55:08,240 --> 00:55:12,480
अत्याचार में को संसार के और मोक्ष की प्राप्ति

745
00:55:12,480 --> 00:55:16,480
का उपाय बताया मन और

746
00:55:16,480 --> 00:55:20,880
पूजन का बहुत बढ़िया अच्छा

747
00:55:20,880 --> 00:55:24,880
एक जगह और है जहां पर इनकी भक्ति से जन्म और मरण से निरोध बताया

748
00:55:24,880 --> 00:55:29,040
गया है मतलब रोक लग जाती है ना

749
00:55:29,040 --> 00:55:35,040
वो कहां पर है शायद वाया भी संता में भी है

750
00:55:42,240 --> 00:55:46,240
चलिए आपकी बात का प्रमाण शिव पुराण की संहिता के

751
00:55:46,240 --> 00:55:51,280
अध्याय 45 में मिलता है इसके अलावा

752
00:55:51,280 --> 00:55:55,280
शिव ज्ञान और जानने से जन्म मरण के पथों से

753
00:55:55,280 --> 00:55:59,520
मुक्ति प्राप्त होने का वर्णन अगर सीधे प्रमाण दिखाना है तो अपने

754
00:55:59,520 --> 00:56:04,160
संस्करण और

755
00:56:04,160 --> 00:56:10,160
अच्छा मैं देख लेता हूं भाई दिखाना ये वाला प्रमाण दिखा दो

756
00:56:10,160 --> 00:56:15,520
ये वायवी समिता में इन्होंने बताया है

757
00:56:15,520 --> 00:56:19,600
दोबारा बता दीजिए कहां पर बताया था आपने वायरी संता में

758
00:56:19,600 --> 00:56:23,760
शिव पुराण संहिता और दूसरा

759
00:56:23,760 --> 00:56:28,160
शिव पुराण की रुद्र संहिता के सृष्टि खंड अध्याय चार

760
00:56:28,160 --> 00:56:32,160
दोनों जगह शिव संसार से पहले

761
00:56:32,160 --> 00:56:38,160
तो अध्याय चार पहले अध्याय चार देख लेता हूं मैं

762
00:56:42,160 --> 00:56:48,160
शिव पुराण सृष्टि

763
00:56:57,280 --> 00:57:01,280
वायावी असमता वाला सृष्टि खंड वाला वो क्या है प्रमाण

764
00:57:01,280 --> 00:57:07,280
दोबारा बताइए जरा

765
00:57:09,520 --> 00:57:15,440
अध्याय चार दो अलग-अलग

766
00:57:15,440 --> 00:57:19,760
अध्याय तीन श्लोक अनेक जन्म की

767
00:57:19,760 --> 00:57:24,720
मुक्ति का उल्लेख है और इसी अध्याय में दो श्लोक विशेष रूप से

768
00:57:24,720 --> 00:57:29,200
श्लोक

769
00:57:29,200 --> 00:57:33,280
शिव होने पर और श्लोक 50 कहता

770
00:57:33,280 --> 00:57:38,320
है प्रसाद

771
00:57:38,320 --> 00:57:43,360
शिव योग से परम

772
00:57:43,360 --> 00:57:48,160
ठीक है ठीक है ठीक है ठीक है देख लेते है जरा भाई

773
00:57:48,160 --> 00:57:53,200
इन्होंने जो है

774
00:57:53,200 --> 00:57:57,440
शिव पुराण वायवीय समिता का पूर्व खंड अध्याय

775
00:57:57,440 --> 00:58:03,440
ये तो आपने इस समय षष्ठी खंड खोला है ना ठीक है षष्ठी खंड का अध्याय चार देख लेते हैं

776
00:58:03,990 --> 00:58:09,990
[गला साफ़ करने की आवाज़]

777
00:58:11,920 --> 00:58:16,400
षष्ठी खंड अध्याय चार में बताइए कहां पर है श्लोक

778
00:58:16,400 --> 00:58:21,200
कौन सा है

779
00:58:21,200 --> 00:58:26,000
षष्ठी खंड अध्याय चार में श्लोक कौन सा है शिव पुराण

780
00:58:26,000 --> 00:58:30,000
संिता सृष्टि खंड अध्याय चार श्लोक 28 में

781
00:58:30,000 --> 00:58:34,000
शिव भक्ति से मोक्ष की बात कही गई है। श्लोक में कहा गया है

782
00:58:34,000 --> 00:58:38,000
जिसकी भगवान शब्द में अंदर है और अटल भक्ति है उसी

783
00:58:38,000 --> 00:58:41,120
के लिए मोक्ष सुदा

784
00:58:41,120 --> 00:58:46,640
इसमें जन्म मरण के विरोध का शब्द और

785
00:58:46,640 --> 00:58:50,640
अच्छा जन्म और अच्छा यहां पर एक चीज मैं बता देता हूं। आप एक काम करो

786
00:58:50,640 --> 00:58:56,640
ठीक है भाई आप जो है पष्ठ संख्या निकालिए इसकी 214

787
00:58:59,360 --> 00:59:03,600
इस ऑर्गेनिक लाइव का लाइव आपको देखना

788
00:59:03,600 --> 00:59:07,680
इसलिए आवश्यक है कि पहली बात तो यह है कि

789
00:59:07,680 --> 00:59:11,920
कैसे किस तरीके से रामपाल के दावे ध्वस्त होते हैं। दूसरी

790
00:59:11,920 --> 00:59:15,120
बात यह भी है कि

791
00:59:15,120 --> 00:59:19,600
रामपाल जो लाइव कर रहा है जिसको वह लाइव नाम दे रहा है वह रिकॉर्डेड है एडिटेड

792
00:59:19,600 --> 00:59:23,600
है पहले से उसमें तैयारी है कट पिट है कट पेस्ट वगैरह और एआई भी

793
00:59:23,600 --> 00:59:27,760
है जो बातें रामपाल प्रभा से नहीं बोल सकता है क्या

794
00:59:27,760 --> 00:59:32,000
अनपढ़ है वो तो वो जो बातें प्रभा से नहीं बोल सकता

795
00:59:32,000 --> 00:59:36,880
है वो बातें उसमें उस तरह से लगा दी गई है सीधेसीधे

796
00:59:36,880 --> 00:59:41,040
एआई के द्वारा तो अब ये संस्कृत पढ़ने की भी कुछ

797
00:59:41,040 --> 00:59:45,040
लोग बात कह रहे हैं वो भी पढ़ेंगे वैसे हम तो पढ़ेंगे बाकी रामपाल ने कब कब संस्कृत पढ़ी है

798
00:59:45,040 --> 00:59:49,840
वो भी बता देना जरा कितना उच्चारण दिया संस्कृत का हम तो अभी दिखाएंगे

799
00:59:49,840 --> 00:59:54,240
बाकी मैं एक पेज दिखा रहा हूं

800
00:59:54,240 --> 00:59:56,480
214

801
00:59:56,480 --> 01:00:00,800
इसमें देखिए लिखा है जो मनुष्य नित्य अच्छा

802
01:00:00,800 --> 01:00:01,760
यहां पर शंकर भी कहा

803
01:00:01,760 --> 01:00:07,760
गया है भगवान को ठीक है ना 60 वाले में

804
01:00:10,320 --> 01:00:14,480
60 श्लोक में देखिए भगवान को शंकर कहा गया

805
01:00:14,480 --> 01:00:16,720
है।

806
01:00:16,720 --> 01:00:20,960
संस्कृत वाला दिखाइए इनको 60 हां ये ये देखिए शंकर

807
01:00:20,960 --> 01:00:25,040
नाम आ रहा है भगवान के लिए उसी को उन्होंने बाद में अनुवादक ने शिव कह दिया

808
01:00:25,040 --> 01:00:29,520
है वहां अनुवाद करते समय क्योंकि हमारे लिए तो शंकर और शिव में अंतर नहीं है।

809
01:00:29,520 --> 01:00:33,600
अनपढ़ गवारों के लिए है। खैर आगे देखिए भस्म के लिए क्या कहा

810
01:00:33,600 --> 01:00:37,600
जा रहा है? यह देखिए भस्म के लिए वैसे पूरा चैप्टर है वो

811
01:00:37,600 --> 01:00:41,760
मैं जब अपनी एक बुक है वह कंप्लीट कर रहा हूं आपको बताऊंगा बाकी पूरा

812
01:00:41,760 --> 01:00:46,000
चैप्टर है भस्म के लिए मगर अभी देखिए जो मनुष्य नित्य अपने शरीर

813
01:00:46,000 --> 01:00:50,000
को भस्म से पवित्र कर शिव की पूजा में लगा रहता है

814
01:00:50,000 --> 01:00:54,080
वह महान कष्ट देने वाले संसार रूपी अपार सागर को निश्चित ही पार

815
01:00:54,080 --> 01:00:59,680
कर जाता है। ठीक है?

816
01:00:59,680 --> 01:01:04,320
पार कर जाता है। लिखा है ना? और

817
01:01:04,320 --> 01:01:08,480
देखिए आगे क्या लिखा है? संपूर्ण वेदों का अवलोकन करके तीसरा

818
01:01:08,480 --> 01:01:12,880
पैरा इसी में एक पैराग्राफ छोड़कर आ जाइए। अगला संपूर्ण वेदों

819
01:01:12,880 --> 01:01:17,040
का अवलोकन करके पूर्ववर्ती विद्वानों ने निश्चय किया है कि

820
01:01:17,040 --> 01:01:21,280
भगवान शिव की ही पूजा संसार बंधन के नाश का उपाय

821
01:01:21,280 --> 01:01:25,520
है। ठीक है?

822
01:01:25,520 --> 01:01:29,680
देखते चलना। सूट बूट में आया कन्हैया बैंड

823
01:01:29,680 --> 01:01:32,480
बजाने को।

824
01:01:32,480 --> 01:01:36,560
तो यहां तक हमने यह जान लिया कि सृष्टि की रचना वही

825
01:01:36,560 --> 01:01:41,120
शिव पुराण के अनुसार जो है वो शिव जी के द्वारा हुई है। इसी प्रकार से

826
01:01:41,120 --> 01:01:45,760
सृष्टि की रचना देवी भागवत में कृष्ण जी के द्वारा बताई जा रही है।

827
01:01:45,760 --> 01:01:49,760
है ना? और अनेक अलग-अलग जगहों पर सृष्टि रचना करने वाले के रूप

828
01:01:49,760 --> 01:01:54,000
में परम तत्व के रूप में ब्रह्मा जी को भी ज्ञापित किया गया। अलग-अलग पुराणों

829
01:01:54,000 --> 01:01:58,160
में गणेश जी को भी रखा गया। मगर अभी हम सारी चीजें

830
01:01:58,160 --> 01:02:02,240
चैट जीपीटी से बात करते चलेंगे। पांचों देवताओं के बारे में दिखाएंगे

831
01:02:02,240 --> 01:02:06,480
प्रमाण तो लंबी हो जाएगी। आपको उदाहरणार्थ शिव

832
01:02:06,480 --> 01:02:10,560
जी और विष्णु जी का बता दिया गया। ठीक है? अब ये वाली बात तो

833
01:02:10,560 --> 01:02:14,560
हो गई। अब बात आती है कि भाई ये अलग-अलग सृष्टि रचना क्यों हो रही? तो ये सब

834
01:02:14,560 --> 01:02:15,060
अपने

835
01:02:14,800 --> 01:02:18,800
आप में बहुत बड़ा खंडन है। रामपाल का। बहुत

836
01:02:18,800 --> 01:02:23,040
बड़ा खंडन है। रामपाल के अनुसार स्वयं जो काल

837
01:02:23,040 --> 01:02:27,040
है वो जन्म और मरण उसका होता

838
01:02:27,040 --> 01:02:31,040
है। ठीक है? हां एक एक चीज और देख लेते हैं। ये

839
01:02:31,040 --> 01:02:35,120
भी देख लेते हैं। जन्म जन्म तो होता है अविनाशी तो है मगर वो फिर

840
01:02:35,120 --> 01:02:39,760
वहां जन्म क्यों लिखा है? उसका भी देख लेते हैं। हालांकि

841
01:02:39,760 --> 01:02:44,800
ये सब प्रमाण हमारे पास नोटेड है। पर हम इसका इससे पूछ लेते हैं चैट जीपीटी से।

842
01:02:44,800 --> 01:02:48,960
क्या शिव पुराण में भगवान के जन्म जन्म

843
01:02:48,960 --> 01:02:53,840
इत्यादि को केवल लीला कहा गया है?

844
01:02:53,840 --> 01:02:57,920
एक सेकंड मैं शिव पुराण के संदर्भ देख लेता हूं। शिवपुरा

845
01:02:57,920 --> 01:03:02,240
में शिव की सृष्टि और कोला कहा गया है। जैसे रुद्र संहिता सृष्टि

846
01:03:02,240 --> 01:03:06,240
के अध्याय सात श्लोक नौ भ्रमा शिव ने

847
01:03:06,240 --> 01:03:10,400
लीला से किया और संहिता अध्याय 10 श्लोक

848
01:03:10,400 --> 01:03:15,680
10 में आता है लीला जगत सृष्टि ईश्वर

849
01:03:15,680 --> 01:03:20,080
जगत की सृष्टि लेकिन भगवान के जन्म मात्र

850
01:03:20,080 --> 01:03:25,120
है ऐसा कोई शब्द श्लोक मुझे नहीं मिला चलिए कोई बात नहीं भागवत

851
01:03:25,120 --> 01:03:29,360
भागवत में एक जगह आया है भागवत में कि

852
01:03:29,360 --> 01:03:35,360
भगवान का जन्म जन्म वास्तविकता में लीला मात्र है।

853
01:03:37,920 --> 01:03:42,000
आपको श्रीमद् भागवत महापुराण का कोई खास हां मुझे यही वाला बताइए कहां

854
01:03:42,000 --> 01:03:45,920
पर मिलता है भागवत

855
01:03:45,920 --> 01:03:51,520
ठीक है मैं चेक करता हूं

856
01:03:51,520 --> 01:03:55,760
भागवत में आपके प्रश्न का बहुत सीधा प्रमाण श्रीमद् भागवत महापुराण प्रथम

857
01:03:55,760 --> 01:03:59,760
स्कंध अध्याय आठ श्लोक में मिलता है वहां माता कुंती

858
01:03:59,760 --> 01:04:03,840
भगवान के जन्म कर्म को की लीला बताती है इसके अतिरिक्त ततीय स्कंध अध्याय

859
01:04:03,840 --> 01:04:08,000
दो श्लोक 15 16 में भी भगवान के अजमा होते हुए वसुदेव जी के

860
01:04:08,000 --> 01:04:12,480
यहां जन्म लेने की लीला का वर्णन है। सही संदर्भ एक

861
01:04:12,480 --> 01:04:16,640
है। एक 89 नहीं ऐसे बताया गया

862
01:04:16,640 --> 01:04:21,200
कि वास्तविकता में तो ये उनकी लीला है भगवान का जन्म।

863
01:04:21,200 --> 01:04:26,080
मैं चेक करता हूं। एक सेकंड एक सेकंड

864
01:04:26,080 --> 01:04:30,480
हां मैं समझ गया। आप जोर दे रहे हैं कि बात सिर्फ अजन्मा होने की नहीं।

865
01:04:30,480 --> 01:04:34,800
यह कि उनका जन्म वास्तव में लीला है। श्रीमद् भागवत में इसका नजदीकी

866
01:04:34,800 --> 01:04:38,880
संदर्भ द्वितीय स्कंध अध्याय दो श्लोक 15 16 है। श्लोक

867
01:04:38,880 --> 01:04:42,880
15 में कहा गया है जो जाो भगवान यथा अग्नि अर्थात

868
01:04:42,880 --> 01:04:46,880
अजन्मा होते हुए भी वे प्रकट होते हैं। जैसे अग्नि प्रकट होती है।

869
01:04:46,880 --> 01:04:50,960
लेकिन अगर आप उनका जन्म केवल लीला है वह सबसे सटीक प्रमाण के रूप में रखना

870
01:04:50,960 --> 01:04:52,960
चाहते हैं तो प्रथम स्कंद अध्याय

871
01:04:52,960 --> 01:04:56,960
तीन में आगे बहुत साफ शब्दों में आता है कि जो वास्तव में जन्म रहित

872
01:04:56,960 --> 01:05:01,200
और कर्म रहित है उनके प्राकृत जन्म और कर्मों का वर्णन उसी तरह

873
01:05:01,200 --> 01:05:05,440
करते हैं। यही खंड आपके तर्क के लिए सबसे उपयुक्त है। एक

874
01:05:05,440 --> 01:05:10,000
एक और है वास्तविकता में भगवान का जन्म जो लीला है

875
01:05:10,000 --> 01:05:16,000
मैं आपको बता देता हूं।

876
01:05:16,320 --> 01:05:22,320
हां बिल्कुल बताइए मैं सुन रहा हूं।

877
01:06:10,240 --> 01:06:12,160
ये

878
01:06:12,160 --> 01:06:16,240
सीधेसीधे एक लाइन आई है एक पंक्ति आई है

879
01:06:16,240 --> 01:06:20,400
भागवत में कि वास्तविकता में उनका जन्म नहीं होता भगवान श्री

880
01:06:20,400 --> 01:06:25,360
कृष्ण के लिए वो लाइन आप बताएंगे कहां पर है

881
01:06:25,360 --> 01:06:31,360
चेक करता हूं एक सेकंड

882
01:06:33,040 --> 01:06:37,360
श्रीमद् भागवत महापुराण में इसका संदर्भ प्रथम अध्याय तीन

883
01:06:37,360 --> 01:06:41,360
श्लोक 35 में मिलता है। मूल संस्कृत श्लोक में भगवान

884
01:06:41,360 --> 01:06:45,520
को अनास कहा गया है यानी जन्म रहित इसमें शब्द

885
01:06:45,520 --> 01:06:49,760
शब्द केवल लीला ये शब्द नहीं है लेकिन यह बहुत साफ रूप से बताता

886
01:06:49,760 --> 01:06:54,000
है कि वह जन्म रहित है और उनके ततीय जन्म और कर्मों का वर्णन किया जाता

887
01:06:54,000 --> 01:06:59,040
है।

888
01:06:59,040 --> 01:07:03,680
अविनाशी नहीं है। अच्छा देखिए ये

889
01:07:03,680 --> 01:07:07,760
एक एक मिनट मैं जो बता रहा हूं मैं जो बता रहा हूं वो सुन लीजिए। जी

890
01:07:07,760 --> 01:07:10,400
बताइए

891
01:07:10,400 --> 01:07:15,200
हां हम पहला स्कंध

892
01:07:15,200 --> 01:07:19,520
तीसरा अध्याय और 35वा श्लोक इसमें स्पष्ट

893
01:07:19,520 --> 01:07:23,520
रूप से लिखा है कि

894
01:07:23,520 --> 01:07:27,520
भगवान श्री कृष्ण मतलब भगवान के जन्म और कर्म केवल लीला मात्र

895
01:07:27,520 --> 01:07:30,240
है।

896
01:07:30,240 --> 01:07:34,560
एक सेकंड चेक करता हूं। हां अब आपकी बात स्पष्ट

897
01:07:34,560 --> 01:07:38,720
है। आप श्रीमद् भागवत महापुराण प्रथम स्कंद अध्याय तीन श्लोक

898
01:07:38,720 --> 01:07:43,200
35 को प्रमाण मान रहे हैं। मूल श्लोक में अजनस्य

899
01:07:43,200 --> 01:07:47,360
शब्द है जिसका अर्थ है जन्म रहित लेकिन जन्म और कर्म केवल

900
01:07:47,360 --> 01:07:51,760
लीला मात्र है। यह शब्द उसी श्लोक में सीधे नहीं है। ये उसकी व्याख्या

901
01:07:51,760 --> 01:07:55,760
है। मतलब श्लोक जन्म रहित भगवान के जन्म और कर्मों का वर्णन करने

902
01:07:55,760 --> 01:07:59,920
की बात कहता है। केवल लीला वाले शब्द उसी में नहीं है।

903
01:07:59,920 --> 01:08:05,920
अच्छा लीला मात्र कहां पर कहा गया है?

904
01:08:06,240 --> 01:08:10,400
देखता हूं एक सेकंड श्रीमद् भागवत में दो स्पष्ट

905
01:08:10,400 --> 01:08:14,480
संदर्भ एक द्वितीय स्कंध अध्याय दो श्लोक 16

906
01:08:14,480 --> 01:08:18,720
जहां अजस जन्म कहा गया है यानी जन्म रहित भगवान

907
01:08:18,720 --> 01:08:22,800
का जन्म लेना और सेकंड दशम स्कंध अध्याय सात श्लोक

908
01:08:22,800 --> 01:08:27,120
दो में कहा गया है कि जो भगवान अपनी लीला से संसार की रचना पालन

909
01:08:27,120 --> 01:08:31,280
और सुन करते हैं वही धर्म की रक्षा के लिए प्रकट होते हैं। इसका अर्थ

910
01:08:31,280 --> 01:08:35,920
यह माना जाए कि जन्म शब्द आ जाने से भगवान का

911
01:08:35,920 --> 01:08:40,000
जन्म शब्द आ जाने से भगवान की उत्पत्ति और नाश यह नहीं माना जा

912
01:08:40,000 --> 01:08:44,240
सकता क्योंकि उनकी लीला मात्र है। भगवान तो सदा से थे हैं और रहेंगे।

913
01:08:44,240 --> 01:08:48,080
वो तो शाश्वत है। है ना?

914
01:08:48,080 --> 01:08:52,240
चेक करता हूं। जी हां। वैष्णव दर्शन के अनुसार आपका

915
01:08:52,240 --> 01:08:57,760
निष्कर्ष पूर्णता सही है। लेकिन शास्त्रीय प्रमाण

916
01:08:57,760 --> 01:09:02,880
हां।

917
01:09:02,880 --> 01:09:06,880
तो अब हमने यह देख लिया कि एक मिनट

918
01:09:06,880 --> 01:09:11,040
आपको मैं पॉज करता हूं। अब हमने ये देख लिया। अच्छा इसमें एक यजुर्वेद

919
01:09:11,040 --> 01:09:15,360
का बहुत अच्छा वो है यजुर्वेद का वो क्या है?

920
01:09:15,360 --> 01:09:19,520
319 यजुर्वेद 31 19 में कहा गया

921
01:09:19,520 --> 01:09:23,600
है कि वह यद्यपि वह अजन्मा है।

922
01:09:23,600 --> 01:09:27,760
यजुर्वेद हो तो दिखा दीजिए आपके पास। यद्यपि

923
01:09:27,760 --> 01:09:31,760
वह अजन्मा है। परंतु फिर भी अपनी

924
01:09:31,760 --> 01:09:35,840
माया के द्वारा वह विभिन्न रूपों में प्रकट

925
01:09:35,840 --> 01:09:39,920
होता है। जन्म लेता है। यद्यपि वह अजन्मा है तो अजन्मा जब शब्द

926
01:09:39,920 --> 01:09:43,920
आ गया तो आगे जो है अजन्मा होते हुए भी वो जन्म

927
01:09:43,920 --> 01:09:48,000
लेता है। तो वो उसकी लीला हो गई। कैसे जन्म लेता है? माया के द्वारा। तो ये

928
01:09:48,000 --> 01:09:52,000
सब जो चीजें हैं भर भर के इन सब शास्त्रों में आपको सनातन

929
01:09:52,000 --> 01:09:56,000
शास्त्रों में मिल जाएगी। अब हम आगे चलते हैं द्वितीय चरण की

930
01:09:56,000 --> 01:10:00,000
ओर। अब इसमें एक प्रश्न आ जाता है कि भाई जो अंबिका

931
01:10:00,000 --> 01:10:03,280
है उसको अगर उनहीं के जो पति

932
01:10:03,280 --> 01:10:07,520
है शंकर पहली बात तो ये हो गया कि शंकर से उत्पत्ति करने वाला वो कबीर अभीर

933
01:10:07,520 --> 01:10:11,840
कोई अलग नहीं है। शंकर और शिव ही उत्पत्ति कर रहे हैं। जैसे विष्णु पुराण में विष्णु

934
01:10:11,840 --> 01:10:16,000
भगवान उत्पत्ति कर रहे हैं सृष्टि की। कोई अलग नहीं। अब

935
01:10:16,000 --> 01:10:20,160
यह प्रश्न आ जाता है कि भाई त्रिदेव अंबिका को

936
01:10:20,160 --> 01:10:24,160
अगर उधर भगवान शिव को अंबिका पति कहा जा रहा है तो उधर

937
01:10:24,160 --> 01:10:28,160
जो है त्रिदेव जननी कहा जा रहा है। है ना? तो ये क्या

938
01:10:28,160 --> 01:10:32,240
चक्कर तो इसके लिए सबसे पहले इस

939
01:10:32,240 --> 01:10:36,480
बात को समझ लीजिए। क्या बात है? कि भगवान की अलग-अलग

940
01:10:36,480 --> 01:10:40,960
अलग-अलग प्रकार की शक्ति भी है। जैसे भगवान स्वयं ब्रह्मा विष्णु महेश

941
01:10:40,960 --> 01:10:44,960
भगवती और गणेश के रूप में प्रकट होते हैं। इस रूप से वो

942
01:10:44,960 --> 01:10:49,120
सृष्टि की रचना करते हैं। फिर इनहीं नामों से जो उनकी

943
01:10:49,120 --> 01:10:53,120
अमुक अमुक शक्ति अमुक अमुक शक्तियां होती है जो सृष्टि की

944
01:10:53,120 --> 01:10:57,360
उत्पत्ति स्थिति संहार में नियामक होती है। तो उस नाम से भी वो जाने

945
01:10:57,360 --> 01:11:02,400
जाते हैं। जैसे कि जो

946
01:11:02,400 --> 01:11:06,720
सृष्टि करने वाली जो शक्ति है उसको ब्रह्मा कहते हैं।

947
01:11:06,720 --> 01:11:10,720
तो ब्रह्मा रूप से वो उस तत्व में भी है। परम

948
01:11:10,720 --> 01:11:14,720
तत्व के रूप में भी विराजमान है। फिर अपनी एक पर्टिकुलर केवल सृष्टि

949
01:11:14,720 --> 01:11:18,960
करने वाली शक्ति के रूप में वो ब्रह्मा है। तो एक ब्रह्मा हो गया जो सृष्टि

950
01:11:18,960 --> 01:11:22,960
के हो जाने पर उत्पन्न हो रहा है और एक ब्रह्मा हो गया जिससे सब

951
01:11:22,960 --> 01:11:27,440
कुछ उत्पन्न हो रहा है। इसी प्रकार से विष्णु भगवान

952
01:11:27,440 --> 01:11:31,840
एक विष्णु हो गए जिनसे सब कुछ उत्पन्न हो रहा है और उसके

953
01:11:31,840 --> 01:11:36,080
बाद एक विष्णु हो गए जो सब

954
01:11:36,080 --> 01:11:40,080
कुछ उत्पन्न होने के बाद पालन करने वाली जो भगवान की शक्ति

955
01:11:40,080 --> 01:11:44,080
है उसको विष्णु कहा जा रहा है। तो ये जो ये शक्ति के

956
01:11:44,080 --> 01:11:48,080
रूप में जब प्रकट हो रहे हैं इसको आप देवता भी कह सकते हैं। इस रूप

957
01:11:48,080 --> 01:11:52,480
को देवता का देवता की उपाधि देते हुए

958
01:11:52,480 --> 01:11:56,640
अह बताया जाता है कि भाई क्योंकि यह प्रकट और प्रकट होती है

959
01:11:56,640 --> 01:12:00,640
शक्ति संसार बनने के बाद तो इस कारण से इसी के

960
01:12:00,640 --> 01:12:05,200
लिए जन्म और मरण हमारी भी मृत्यु होती है। ये जो शक्ति के रूप में पर्टिकुलर

961
01:12:05,200 --> 01:12:09,360
एक विशेष नियामक शक्ति के रूप में जब भगवान प्रकट होते हैं

962
01:12:09,360 --> 01:12:13,360
तो उसको कहा जाता है कि भाई इनका जन्म हो गया मरण हो गया। हालांकि

963
01:12:13,360 --> 01:12:17,520
वो जन्म और मरण भी उसका नहीं है। वो जिससे सब कुछ निकल

964
01:12:17,520 --> 01:12:21,520
रहा है जिससे सब कुछ उत्पन्न हो रहा है उस परम तत्व का नहीं है। वो जब लीला रूप

965
01:12:21,520 --> 01:12:25,680
में सृष्टि रचने के बाद अपनी ही सृष्टि के अंदर किसी एक पर्टिकुलर

966
01:12:25,680 --> 01:12:30,320
विशेष रूप में प्रकट होते हैं। उसके लिए वो कह रहे हैं उस

967
01:12:30,320 --> 01:12:34,320
देवता का रूप धारण करते हैं। और बस भ्रांति क्यों होती है?

968
01:12:34,320 --> 01:12:38,400
क्योंकि वहां पर भी वो विष्णु नाम से ही होते हैं। तो जो पालन करने वाली शक्ति

969
01:12:38,400 --> 01:12:42,400
है यानी देवता है विष्णु नाम से तो इसलिए वो कह रहे हैं मेरा हालांकि

970
01:12:42,400 --> 01:12:46,480
उनका भी प्रकट और अप्रकट होता है। जन्म मरण कुछ नहीं है क्योंकि शक्ति तो भगवान के

971
01:12:46,480 --> 01:12:50,480
अंदर सदा रहेगी पालन करने वाली तो वो नष्ट थोड़ी

972
01:12:50,480 --> 01:12:54,480
ना हो गई जब वो वहां पर रूप ले रहे हैं रूप धारण कर रहे हैं तो वो कह रहे हैं

973
01:12:54,480 --> 01:12:58,480
कि मेरा जन्म मरण होता है। अब वो त्रिदेव जननी

974
01:12:58,480 --> 01:13:02,640
क्यों कहा गया अंबिका को? इसलिए कहा गया क्योंकि ये जो शक्ति के रूप में प्रकट होने वाली

975
01:13:02,640 --> 01:13:07,040
बात है पर्टिकुलर एक तो रचनात्मक शक्ति

976
01:13:07,040 --> 01:13:11,360
तो ब्रह्मा हो गए स्थिति की शक्ति तो हो गए विष्णु

977
01:13:11,360 --> 01:13:15,440
संहार की शक्ति तो हो गए शिव तो पर्टिकुलर केवल संहार करने

978
01:13:15,440 --> 01:13:19,680
वाली शक्ति के रूप में जब वो प्रकट होते हैं अपनी बनाई हुई सृष्टि के

979
01:13:19,680 --> 01:13:23,920
अंदर तो सृष्टि के अंदर उत्पन्न होने के कारण

980
01:13:23,920 --> 01:13:28,080
त्रिदेव जननी कहा गया है ब्रह्मा विष्णु महेश वो देवता की उपाधि प्राप्त

981
01:13:28,080 --> 01:13:32,240
जब भगवान की जो शक्तियां उस रूप में जब वो प्रकट होते हैं तो क्यों

982
01:13:32,240 --> 01:13:32,740
कहां

983
01:13:32,560 --> 01:13:36,640
होते हैं? कहां पर प्रकटोंगी वो शक्तियां? सृष्टि में तो सृष्टि कहां

984
01:13:36,640 --> 01:13:41,120
होगी? यानी प्रकृति में संसार बनने के बाद तो इसलिए

985
01:13:41,120 --> 01:13:45,360
यहां पर कोई बायोलॉजिकली उत्पन्न नहीं होते ब्रह्मा विष्णु महेश अंबिका से

986
01:13:45,360 --> 01:13:49,440
है ना ये भी मैं बताऊंगा बायोलॉजिकली कैसे उत्पन्न हो रहे हैं तो तो

987
01:13:49,440 --> 01:13:53,840
बायोलॉजिकली उत्पन्न नहीं होते हैं मगर उनके उस पर्टिकुलर

988
01:13:53,840 --> 01:13:58,320
शक्ति के रूप में उत्पन्न होने के लिए ब्रह्मा विष्णु महेश के उत्पन्न होने के लिए

989
01:13:58,320 --> 01:14:02,400
जो शक्ति की अनिवार्यता है प्रकृति की अनिवार्यता है अंबिका

990
01:14:02,400 --> 01:14:06,640
की अनिवार्यता है उसके कारण कहा गया कि यह त्रिदेव जननी

991
01:14:06,640 --> 01:14:11,520
इसी के कारण हम प्रकट हुए हैं। समझ में आया? संसार

992
01:14:11,520 --> 01:14:15,760
में प्रकट होना है भगवान को तो उसके लिए संसार चाहिए। वो संसार ही अंबिका

993
01:14:15,760 --> 01:14:20,080
है। जगत ही अंबिका है। ठीक है? प्रकृति है। इसलिए

994
01:14:20,080 --> 01:14:24,240
प्रकृति को वो जो देवता को प्रकट करने वाली जो शक्ति है

995
01:14:24,240 --> 01:14:28,400
वो कहा गया। उसके लिए उसको त्रिदेव जननी कहा गया। अब इसको भी

996
01:14:28,400 --> 01:14:33,600
समझ लीजिए कि अगर वास्तविकता में देखा जाए तो यह जो

997
01:14:33,600 --> 01:14:37,920
शिव पुराण के अनुसार जो शिव पुराण का संदर्भ

998
01:14:37,920 --> 01:14:42,160
ले लेते हैं। कहां से प्रकट हो रहे हैं भगवान? क्या वो अंबिका के गर्भ

999
01:14:42,160 --> 01:14:46,480
से जन्म ले रहे हैं? कहां से ले रहे हैं? अच्छा सबसे पहले सबसे जरूरी

1000
01:14:46,480 --> 01:14:47,920
बात कि सृष्टि

1001
01:14:47,920 --> 01:14:51,920
रचना ये अपने अनुसार बताता है। जबकि यहां पर शिव पुराण की अगर

1002
01:14:51,920 --> 01:14:56,480
सृष्टि रचना देखेंगे तो क्या है कि भगवान

1003
01:14:56,480 --> 01:15:00,480
से ही भगवान की स्वरूप भूता शक्ति प्रकट हो रही है। जो

1004
01:15:00,480 --> 01:15:04,800
जगदंबा है जो अंबिका है और फिर उन उस स

1005
01:15:04,800 --> 01:15:08,960
वो प्रकट हो जाने के बाद यानी कि प्रकृति यानी स्पेस स्पेस

1006
01:15:08,960 --> 01:15:13,040
बन जाने के बाद उसमें अब संसार बनाना है। सूर्य, चंद्रमा

1007
01:15:13,040 --> 01:15:17,520
इत्यादि और फिर उसमें जीव इत्यादि उत्पन्न होने वो मामला है।

1008
01:15:17,520 --> 01:15:22,560
स्पेस का नाम क्या है? माता जगदंबा

1009
01:15:22,560 --> 01:15:28,000
तो उस स्पेस के क्रिएट हो जाने पर यह हुआ कि

1010
01:15:28,000 --> 01:15:32,160
जो परम तत्व है यानी शिव पुराण में जिनको शिव कहा गया

1011
01:15:32,160 --> 01:15:36,720
शंकर वही जटा में गंगा और गरे में डारे फिर रहे सांप

1012
01:15:36,720 --> 01:15:40,000
जिनको ये कहा गया

1013
01:15:40,000 --> 01:15:44,000
उनहीं के उन्हीं के स्वरूप भूता उनके वाम अंग से उनके शरीर से

1014
01:15:44,000 --> 01:15:48,160
निकलती है। पहली बात जबकि वहां पर प्रकृति कौन

1015
01:15:48,160 --> 01:15:52,240
है? इनकी सृष्टि रचना वाली प्रकृति कौन है? वो तो कबीर से उत्पन्न हो रही

1016
01:15:52,240 --> 01:15:56,320
है। उसको उत्पन्न नहीं किया इसने। जो वहां का वो है जिसको

1017
01:15:56,320 --> 01:16:00,400
सदा शिव कहते हैं, काल कहते हैं। ठीक है? तो अब चैट जीपीडी

1018
01:16:00,400 --> 01:16:02,960
से पूछते चलते हैं कि भाई तुम क्या

1019
01:16:02,960 --> 01:16:06,060
कह रहे हो?

1020
01:16:06,060 --> 01:16:12,060
[खांसने की आवाज़]

1021
01:16:12,240 --> 01:16:16,320
हां। शिव पुराण के अनुसार जो अंबिका है जिन्हें त्रिदेव

1022
01:16:16,320 --> 01:16:20,560
जननी भी कहा गया है शक्ति वो

1023
01:16:20,560 --> 01:16:25,200
किसके द्वारा उत्पन्न हुई है कहां से उत्पन्न हुई है इनके

1024
01:16:25,200 --> 01:16:29,200
उत्पन्न होने का वर्णन शास्त्रों में अलग-अलग रूप

1025
01:16:29,200 --> 01:16:32,960
नहीं मुझे शिव पुराण का बताइए आप

1026
01:16:32,960 --> 01:16:37,040
शिव पुराण में देवी को ब्रह्मांडीय शक्ति माना गया है जो

1027
01:16:37,040 --> 01:16:41,360
स्वयं अनादि और नित्य है उन्हें किसी एक पुरुष देव

1028
01:16:41,360 --> 01:16:45,440
की तरह उत्पन्न नहीं बताया गया है बल्कि वे मूल शक्ति है

1029
01:16:45,440 --> 01:16:49,440
जो शिव के साथ अभिन्न रूप से विद्यमान है। कभी-क ग्रंथों

1030
01:16:49,440 --> 01:16:53,680
में उन्हें जगन्न माता कहा गया है जिसका अर्थ है कि सारी सृष्टि उन्हीं

1031
01:16:53,680 --> 01:16:57,680
से प्रकट होती है और उन्हीं में विलीन होती है। अगर आप किसने

1032
01:16:57,680 --> 01:17:02,000
उत्पन्न किया पूछे तो शिव पुराण का स्वर यही कहेगा कि देवी

1033
01:17:02,000 --> 01:17:06,000
को किसी एक द्वारा नहीं बनाया गया है। शिव पुराण के

1034
01:17:06,000 --> 01:17:10,320
शिव पुराण के प्रारंभिक खंड में संभवत

1035
01:17:10,320 --> 01:17:14,400
रुद्रसम्यता सृष्टि खंड में भगवान शिव अपनी स्वरूप

1036
01:17:14,400 --> 01:17:18,160
भूता शक्ति को प्रकट करते हैं। कहां लिखा है ये? हाँ

1037
01:17:18,160 --> 01:17:22,240
बिल्कुल शिव पुराण में शिव पुराण के रूद्र संहिता

1038
01:17:22,240 --> 01:17:26,240
सृष्टि खंड में ये आता है कि भगवान शिव अपने ही स्वरूप पूता

1039
01:17:26,240 --> 01:17:30,560
शक्ति को प्रकट करते हैं। सटीक अध्याय और श्लोक नंबर बताने

1040
01:17:30,560 --> 01:17:34,800
के लिए पाठ के संस्करण के अनुसार थोड़ा अंतर हो सकता है। अगर

1041
01:17:34,800 --> 01:17:39,120
आपके पास कोई खास पाठ या संस्करण है तो मैं ठीक ठीक अध्याय

1042
01:17:39,120 --> 01:17:43,200
और श्लोक निकाल कर बता दूंगा। बस सामान्य रूप से सृष्टि खंड में

1043
01:17:43,200 --> 01:17:47,360
यही बताया गया है कि शक्ति शिव से अभिन्न है और सृष्टि के

1044
01:17:47,360 --> 01:17:51,360
आदि कारणों में मानी गई है। ठीक है मैं आपको बता देता हूं फिर आप

1045
01:17:51,360 --> 01:17:57,360
बता दो।

1046
01:18:41,280 --> 01:18:44,080
ये है

1047
01:18:44,080 --> 01:18:49,040
शिव पुराण रुद्र समिता षष्ठी खंड

1048
01:18:49,040 --> 01:18:55,040
छठवा अध्याय निकालो भाई

1049
01:19:00,720 --> 01:19:06,480
आप जिस प्रमाण की बात कर रहे हैं वह शिव

1050
01:19:06,480 --> 01:19:12,480
इसमें

1051
01:19:16,240 --> 01:19:18,960
और

1052
01:19:18,960 --> 01:19:21,520
माया

1053
01:19:21,520 --> 01:19:25,760
19 में स्पष्ट रूप से 19

1054
01:19:25,760 --> 01:19:29,920
से लेकर 22 तक है शायद

1055
01:19:29,920 --> 01:19:35,040
19 से 21 तक

1056
01:19:35,040 --> 01:19:39,200
और चाहे तो मैं इन श्लोकों का

1057
01:19:39,200 --> 01:19:43,360
संस्कृत अनुवाद हां जी दे दीजिए

1058
01:19:43,360 --> 01:19:49,360
दे दीजिए

1059
01:19:49,440 --> 01:19:53,440
अध्याय श्लोक 19 ये रहे श्लोक

1060
01:19:53,440 --> 01:19:56,240
19

1061
01:19:56,240 --> 01:19:58,800
स्वर्विग्रह

1062
01:19:58,800 --> 01:20:02,320
स्वयं स्वरा

1063
01:20:02,320 --> 01:20:06,400
अर्थात सदाशिव ने स्वेच्छा से विचरण करते हुए अपने ही विग्रह से

1064
01:20:06,400 --> 01:20:10,480
अविनाशी शक्ति को प्रकट किया श्लोक 30 प्रधानम

1065
01:20:10,480 --> 01:20:14,800
प्रकृति मायावती परा बुद्ध तत्वस जननी

1066
01:20:14,800 --> 01:20:17,760
मा

1067
01:20:17,760 --> 01:20:22,000
उस पर शक्ति को प्रधान प्रकृति मायावती परमवती

1068
01:20:22,000 --> 01:20:26,240
और बुद्ध तत्व की जननी कहा गया जो विकास रहित है

1069
01:20:26,240 --> 01:20:28,560
बहुत

1070
01:20:28,560 --> 01:20:32,800
अंबिका प्रकृति सकलेश्वरी त्रिदेव

1071
01:20:32,800 --> 01:20:36,880
जननी मिथ्या मूल कारण हां ये देखिए त्रिदेव जननी वाला भी

1072
01:20:36,880 --> 01:20:41,040
आ गया तो अब त्रिदेव जननी वाले मामले को भी समझ गए

1073
01:20:41,040 --> 01:20:45,920
आप त्रिदेव जननी क्यों कहा जा रहा है क्योंकि

1074
01:20:45,920 --> 01:20:50,480
संसार बनने के बाद जब भगवान स्वयं उस संसार में पुनः

1075
01:20:50,480 --> 01:20:54,880
किसी विशेष नियामक शक्ति के रूप में प्रकट होते हैं

1076
01:20:54,880 --> 01:20:59,040
तो उस उस शक्ति के रूप में प्रकट होने पर भी वह

1077
01:20:59,040 --> 01:21:03,920
जैसे उत्पत्ति स्थिति समार निग्रह अनुग्रह पांच शक्तियों में से किसी एक

1078
01:21:03,920 --> 01:21:07,920
कार्य के नियामक होते हैं तो वहां सृष्टि में उत्पन्न होने

1079
01:21:07,920 --> 01:21:12,240
के कारण उसको कहा जाता है कि भाई त्रिदेव जननी है।

1080
01:21:12,240 --> 01:21:16,320
ठीक है? क्योंकि संसार के बिना उत्पन्न कहां पर होंगे? जब संसार होगा

1081
01:21:16,320 --> 01:21:20,400
वही तो उत्पन्न होंगे। संसार में उत्पन्न होने के कारण उनको त्रिदेव जननी

1082
01:21:20,400 --> 01:21:24,480
कहा जाता है। बाकी जो परम तत्व है वही अंबिका

1083
01:21:24,480 --> 01:21:28,640
पति है वही गिरजापति है उमापति है। ये सब हमने

1084
01:21:28,640 --> 01:21:32,720
प्रमाण फिलहाल अभी तक एआई से समझ लिया। अब इसमें

1085
01:21:32,720 --> 01:21:36,800
एक बात आती है कि जो कल्प भेद की बात है जिसके कारण

1086
01:21:36,800 --> 01:21:41,520
यह वाला यह वाली चीज हो रही है कि शिव पुराण में विष्णु से सृष्टि हो रही है।

1087
01:21:41,520 --> 01:21:45,520
शिव पुराण में शिव जी से सृष्टि हो रही है। विष्णु पुराण में विष्णु से हो रही

1088
01:21:45,520 --> 01:21:49,600
है। और इसी तरीके से अलग-अलग पुराणों के अनुसार जो उनका

1089
01:21:49,600 --> 01:21:53,600
जो आराध्य देवता है उससे सृष्टि प्रारंभ हो रही है। तो कल्प वेद

1090
01:21:53,600 --> 01:21:57,600
से ये होता है कि कभी विष्णु के रूप से होती है। सृष्टि विष्णु रूप से होती है।

1091
01:21:57,600 --> 01:22:01,680
कभी विष्णु से सब कुछ उत्पन्न होता है। कभी शिव से सब कुछ उत्पन्न होता है। तो

1092
01:22:01,680 --> 01:22:06,000
यह वाला जो प्रश्न है कि कौन है ब्रह्मा का पिता? कौन है?

1093
01:22:06,000 --> 01:22:10,080
विष्णु का पिता कौन है महेश का

1094
01:22:10,080 --> 01:22:14,160
पिता? तो उनका पिता कोई है नहीं। वह स्वयं परम

1095
01:22:14,160 --> 01:22:18,320
तत्व हैं। वह क्रमश ब्रह्मा विष्णु

1096
01:22:18,320 --> 01:22:22,560
महेश इत्यादि रूपों को धारण करते हुए सृष्टि की रचना करते हैं।

1097
01:22:22,560 --> 01:22:26,720
सृष्टि रचना करने के लिए सर्वप्रथम अपनी शक्ति रूपी स्वरूप भूता जो शक्ति

1098
01:22:26,720 --> 01:22:27,280
होती है

1099
01:22:27,280 --> 01:22:31,360
देवी अगर भगवान विष्णु है तो वहां पर लक्ष्मी होती है। अगर भगवान शिव

1100
01:22:31,360 --> 01:22:35,520
है तो वहां पर पार्वती होती है। अगर भगवान ब्रह्मा है तो वहां पर सरस्वती होती है।

1101
01:22:35,520 --> 01:22:39,600
इस प्रकार से अपनी शक्ति को एक से दो होते हैं। वो परम तत्व जो होता है वो

1102
01:22:39,600 --> 01:22:43,920
एक से दो होता है। अब पुरुष और प्रकृति के रूप में हो जाता है। फिर यह पुरुष

1103
01:22:43,920 --> 01:22:47,920
और प्रकृति के द्वारा फिर संसार की रचना हो

1104
01:22:47,920 --> 01:22:52,080
जाती है। संसार की रचना में पुनः वही पुरुष फिर अमुक एक

1105
01:22:52,080 --> 01:22:56,160
नियामक शक्ति के रूप में प्रकट होता है। इस प्रकार से ये क्रम

1106
01:22:56,160 --> 01:23:00,480
जो है बदलता रहता है। तो पहली बात इनका कोई पिता नहीं है। इनकी

1107
01:23:00,480 --> 01:23:04,640
कोई माता नहीं है। क्योंकि मूल रूप से यही परम

1108
01:23:04,640 --> 01:23:10,480
तत्व है। ब्रह्मा विष्णु महेश भगवती और गणेश। अब हम

1109
01:23:10,480 --> 01:23:14,800
कल्पवेद का प्रमाण देखेंगे। हम डायरेक्ट यहां तो दिखाएंगे ही मगर हम एआई

1110
01:23:14,800 --> 01:23:18,800
से भी पूछेंगे क्योंकि रामपाल का खंडन तो एआई ही कर

1111
01:23:18,800 --> 01:23:21,040
देगा।

1112
01:23:21,040 --> 01:23:25,200
ये जो मैं कर रहा हूं इसकी आवश्यकता यही है कि रामपाल

1113
01:23:25,200 --> 01:23:30,240
का प्रतिकार कितना आसान है। कितना चूर्ण देता है वो अपने लोगों को। देखिए

1114
01:23:30,240 --> 01:23:34,560
हमने तो उसका संकलन किया ही है। मगर सोच ये कि एआई

1115
01:23:34,560 --> 01:23:38,560
तक ये चीजें जानता है। ठीक है? तो अब कल्प वेद का

1116
01:23:38,560 --> 01:23:44,560
आपको मुझे प्रमाण देना है। भैया आप कल्प वेद का चैप्टर खोलिए। वही वाला

1117
01:23:53,280 --> 01:23:57,280
एक मिनट। इससे पहले मैं आपको एक बात क्लियर कर दूं। अनेक शक्तियों के रूप में

1118
01:23:57,280 --> 01:24:01,440
प्रकट होने के कारण ही भगवान के कई नाम रूप हो जाते हैं। जिस

1119
01:24:01,440 --> 01:24:06,480
कारण से कहा गया शास्त्रों में एकम स विप्रदा वती

1120
01:24:06,480 --> 01:24:10,880
क्योंकि अनेक शक्तियों के रूप में प्रकट होने के कारण भगवान के बहुत सारे नाम हो गए।

1121
01:24:10,880 --> 01:24:15,120
ठीक है? पालन जो कृत है पालन नाम का उसकी नियामक शक्ति विष्णु

1122
01:24:15,120 --> 01:24:19,120
हो गए। वहां पर वो देवता जैसे हो गए। बाकी कर वही रहे हैं

1123
01:24:19,120 --> 01:24:23,200
ब्रह्मा विष्णु महेश भगवती और गणेश बन के। ठीक है? तो अब जो है

1124
01:24:23,200 --> 01:24:27,200
वो इनको कल्प भेद वाला दिखाइए चैप्टर। मैं एआई से पूछता हूं।

1125
01:24:27,200 --> 01:24:30,400
क्या उसको मालूम है कि नहीं?

1126
01:24:30,400 --> 01:24:34,400
ए आई से क्यों पूछ रहा हूं? इसलिए नहीं हमें एआई से मालूम करना है। हमारे पास तो पहले से

1127
01:24:34,400 --> 01:24:38,640
ही पूरा सब कुछ है। एआई से इसलिए पूछना है कि कितना

1128
01:24:38,640 --> 01:24:43,600
सरल है। एआई तक जवाब दे देगा रामपाल के।

1129
01:24:43,600 --> 01:24:47,840
ठीक है? तो देखिए भैया उधर ये आपके सामने

1130
01:24:47,840 --> 01:24:51,840
खुला 13वा अध्याय है। कल्प वेद से त्रिदेव विष्णु के एक

1131
01:24:51,840 --> 01:24:55,920
दूसरे से प्रादुर्भाव का वर्णन। अब बताइए यह कहता है कौन है ब्रह्मा

1132
01:24:55,920 --> 01:24:59,920
का पिता? कौन है विष्णु का पिता? कौन है? महेश

1133
01:24:59,920 --> 01:25:03,920
का पिता। यह कहता है ना यहां तो ब्रह्मा विष्णु महेश कल्प वेद से एक दूसरे

1134
01:25:03,920 --> 01:25:08,000
के द्वारा उत्पन्न हो रहे हैं। कोई किसी का पिता नहीं है क्योंकि

1135
01:25:08,000 --> 01:25:08,640
वह स्वयं

1136
01:25:08,640 --> 01:25:12,000
सबके पिता हैं।

1137
01:25:12,000 --> 01:25:14,800
देखिए कैसे

1138
01:25:14,800 --> 01:25:20,800
क्या शिव पुराण में कहीं पर कल्प भेद का वर्णन दिया गया है?

1139
01:25:21,200 --> 01:25:25,440
मैं अच्छा करता हूं। शिव पुराण में कल्प

1140
01:25:25,440 --> 01:25:29,600
भेद का उल्लेख होता है। जैसे रुद्र संगीिता सृष्टि खंड

1141
01:25:29,600 --> 01:25:34,000
अध्याय 16 में कल्प भेद में भी शब्द आता है

1142
01:25:34,000 --> 01:25:38,000
जो कल्प के भेद के अनुसार व्यवस्था बताता है। इसके अलावा

1143
01:25:38,000 --> 01:25:42,240
शिव पुराण के एक और प्रसंग में अलग-अलग कल्पों में ब्रह्मा

1144
01:25:42,240 --> 01:25:46,480
विष्णु और महेश की उत्पत्ति का क्रम बताया गया है। जैसे ऋषि उनकी

1145
01:25:46,480 --> 01:25:50,720
उत्पत्ति अब मैं श्रेष्ठता समझाने के लिए बताते हैं।

1146
01:25:50,720 --> 01:25:55,440
बोलिए बोलिए। अब यहां पर यह बात आती है। पहली

1147
01:25:55,440 --> 01:25:59,440
बात आती है कि जो यह अलग-अलग हो रहा है ना जैसे कहीं पर एक कल्प में

1148
01:25:59,440 --> 01:26:03,680
विष्णु से उत्पत्ति हुई दूसरे कल्प में शिव से उत्पत्ति हुई तो ये वाली

1149
01:26:03,680 --> 01:26:07,920
चीज आपको क्लियर हो गई। कल्प वेद से ये जो घटनाक्रम है कि विष्णु से सब

1150
01:26:07,920 --> 01:26:11,920
लोग निकले। ये घटनाक्रम बदलते हैं। अब रामपाल

1151
01:26:11,920 --> 01:26:16,000
की सृष्टि रचना की मौत क्यों है? क्योंकि रामपाल एक

1152
01:26:16,000 --> 01:26:20,320
ही सृष्टि रचना जानता है। एक ही क्रम जानता है। बस जो भी है। जबकि

1153
01:26:20,320 --> 01:26:24,960
वह भी यह कहता है काल जन्मता मरता है। पॉइंट क्या है?

1154
01:26:24,960 --> 01:26:29,200
जो आज का मूल विषय क्या है? रामपाल की सृष्टि

1155
01:26:29,200 --> 01:26:33,440
रचना की मौत। रामपाल के अनुसार भी जो काल

1156
01:26:33,440 --> 01:26:37,600
है वो जन्मता मरता है जिसके कारण सृष्टि होती है।

1157
01:26:37,600 --> 01:26:41,840
ठीक है? जो कुछ खुराफात कर देता है जिसके कारण फिर आगे

1158
01:26:41,840 --> 01:26:45,840
सृष्टि का विस्तार हो जाता है। तो रामपाल के पास

1159
01:26:45,840 --> 01:26:49,840
केवल यही एक कहानी है। जबकि हमारे शास्त्र कह रहे हैं कि नहीं

1160
01:26:49,840 --> 01:26:55,280
कई घटनाक्रम है। तो क्या है घटनाक्रम देखिए

1161
01:26:55,280 --> 01:27:00,320
चैट जीपीडी से वो एग्जैक्ट

1162
01:27:00,320 --> 01:27:04,400
आप ब्रह्मा विष्णु महेश का एक दूसरे से प्रादुर्भाव

1163
01:27:04,400 --> 01:27:08,480
वाला जो मामला है उसके संबंध में जो प्रमाण है वह आप दे दीजिए। कल्प

1164
01:27:08,480 --> 01:27:13,600
वेद से जो एक दूसरे से उत्पन्न होते हैं शिव पुराण में

1165
01:27:13,600 --> 01:27:18,240
एक सेकंड देखता हूं। शिव पुराण में ब्रह्मा,

1166
01:27:18,240 --> 01:27:22,640
विष्णु, महेश के एक दूसरे से प्रादुर्भाव का स्पष्ट संदर्भ

1167
01:27:22,640 --> 01:27:26,960
मिलता है। इसमें कहा गया है कि अलग-अलग कल्पों में इन तीनों देवताओं की उत्पत्ति

1168
01:27:26,960 --> 01:27:30,960
का क्रम अलग-अलग बताया गया है। ये चीज आप पूछ रहे थे। है ना? जी। ये रहा

1169
01:27:30,960 --> 01:27:35,040
पहला प्रमाण। कल्पे से त्रिदेवों की एक दूसरे से प्रादुर्भाव

1170
01:27:35,040 --> 01:27:39,520
का वर्णन आता है। जब आप इसका उल्लेख करें तो अपने संस्करण का अध्याय

1171
01:27:39,520 --> 01:27:43,920
और श्लोक क्रमांक जरूर मिला ले क्योंकि अलग-अलग संहिताओं में क्रमांक

1172
01:27:43,920 --> 01:27:48,640
बदल सकते हैं। ठीक है। अभी मैं इसको पढ़ के बता देता हूं आप लोगों को।

1173
01:27:48,640 --> 01:27:54,240
हां लाइए वो वाला जरा वो वाला पैराग्राफ लाइए कल्प भेद वाला।

1174
01:27:54,240 --> 01:27:58,320
ये रामपाल की जो षष्ठी रचना है ना उसकी

1175
01:27:58,320 --> 01:28:02,640
मौत है। ये क्यों मौत है? रामपाल के पास सृष्टि रचना

1176
01:28:02,640 --> 01:28:06,720
की एक ही कहानी है। एक ही कथा है। जबकि यहां

1177
01:28:06,720 --> 01:28:11,120
कहा जा रहा है कि हर बार कथा थोड़ी थोड़ी चेंज होती है कल्प भेद से और कल्प

1178
01:28:11,120 --> 01:28:15,600
भेद उसके यहां भी मानना पड़ेगा क्योंकि वहां पर भी उसकी मौत होती है काल की।

1179
01:28:15,600 --> 01:28:19,680
हालांकि उसमें बहुत सारे प्रश्न है उसकी सृष्टि रचना कि

1180
01:28:19,680 --> 01:28:23,680
मौत अगर कल काल के कारण हुआ है। एक गलती से उत्पन्न

1181
01:28:23,680 --> 01:28:28,160
हुई है। जैसे इस्लामिक स्टोरी है ना उसने फल नहीं खाने फल खा लिए वही

1182
01:28:28,160 --> 01:28:32,160
चिपका दी गई है आपको रामपाल के द्वारा और आप लोग ठोको ताली

1183
01:28:32,160 --> 01:28:36,480
ठोको ताली कर रहे हो तो यह देख लो भैया यह कह रहा है एक तरह की

1184
01:28:36,480 --> 01:28:40,560
एक घटनाक्रम नहीं है सृष्टि रचना का क्या है मैं आपको पढ़ के बता देता

1185
01:28:40,560 --> 01:28:45,280
हूं 13वा अध्याय है शायद वय समिता का है ये

1186
01:28:45,280 --> 01:28:51,280
है ना

1187
01:28:52,080 --> 01:28:56,400
इसका अर्थ क्या हो रहा है ब्रह्मा विष्णु महेश बार-बार प्रकट

1188
01:28:56,400 --> 01:29:00,400
ट हो रहे हैं। आविरो भाव हो रहा है। प्रादुर्भाव हो रहा है जिसको ये लोग जन्म और मृत्यु करते

1189
01:29:00,400 --> 01:29:04,720
हैं। जन्म और मृत्यु बार-बार ये लोग कर रहे हैं। इसमें भी एक वो है सवाल।

1190
01:29:04,720 --> 01:29:08,720
हालांकि हमने ये सिद्ध कर लिया कि जो भगवान का जन्म है वो लीला मात्र है। बहुत सारे

1191
01:29:08,720 --> 01:29:12,800
प्रमाण हमने एकत्रित कर रखे हैं। पर आज मैंने केवल चैट जीपीटी और इनके कॉल सेंटर

1192
01:29:12,800 --> 01:29:18,000
पर बात करने के लिए आज को छोड़ा था। तो ये कौन सा है जरा बताएंगे?

1193
01:29:18,000 --> 01:29:21,840
वायवीय समिता है ना?

1194
01:29:21,840 --> 01:29:27,840
वायवीय समता पूर्व खंड 771

1195
01:29:28,720 --> 01:29:34,720
ये आ गया भाई

1196
01:29:39,200 --> 01:29:45,200
ये है ना अब देखिए

1197
01:29:47,680 --> 01:29:52,080
आप ये देखिए ऑर्गेनिक कितना है मेरा मामला कि

1198
01:29:52,080 --> 01:29:57,280
मैं आपके सामने ही निशान लगा रहा हूं। मैंने निशान लगा के नहीं रखे इन लोगों की तरह।

1199
01:29:57,280 --> 01:30:03,120
आपके सामने निशान लगा रहा हूं। ये देखिए।

1200
01:30:03,120 --> 01:30:09,120
ठीक है भाई। ऐसे ही करते हैं हाईलाइट से चिलवे भगत।

1201
01:30:10,560 --> 01:30:14,640
क्या है? उन परमेष्ठी की पूर्ण रूप

1202
01:30:14,640 --> 01:30:18,800
से प्रसन्नता प्राप्त कर पूर्व कल्प में रुद्र ने ब्रह्मा और नारायण

1203
01:30:18,800 --> 01:30:22,880
को उत्पन्न किया। किसने उत्पन्न किया? रुद्र ने।

1204
01:30:22,880 --> 01:30:27,040
अच्छा। पुनः किसी दूसरे कल्प में जगन में

1205
01:30:27,040 --> 01:30:31,120
ब्रह्मा ने रुद्र और विष्णु को उत्पन्न किया। इसी प्रकार

1206
01:30:31,120 --> 01:30:35,120
किसी कल्प में भगवान विष्णु ने रुद्र और ब्रह्मा को उत्पन्न किया। पुनः

1207
01:30:35,120 --> 01:30:39,200
किसी कल्प में ब्रह्मा नारायण को किसी कल्प में रुद्र देव ने ब्रह्मा

1208
01:30:39,200 --> 01:30:43,440
को उत्पन्न किया। इसी प्रकार में ब्रह्मा विष्णु

1209
01:30:43,440 --> 01:30:47,520
तथा महेश्वर परस्पर हित करने की इच्छा से एक दूसरे के द्वारा

1210
01:30:47,520 --> 01:30:51,520
उत्पन्न होते रहते हैं। ठीक है? दूसरी

1211
01:30:51,520 --> 01:30:56,480
बात यह आती है कि अगर भगवान के इन उत्पन्न होने को हम लोग जन्म और मरण माने

1212
01:30:56,480 --> 01:31:00,720
और लीला ना माने। हालांकि इसमें बता भी दिया गया प्रमाण हमने

1213
01:31:00,720 --> 01:31:04,880
देख लिया। मगर प्रश्न ये उठता है कि तो फिर भगवान

1214
01:31:04,880 --> 01:31:09,280
ने इनकी मुक्ति करने का उपाय क्या रखा है? ये आ गया

1215
01:31:09,280 --> 01:31:13,920
द क्वेश्चन ऑफ आवान। आान के जो क्वेश्चन होते हैं ना

1216
01:31:13,920 --> 01:31:18,320
निकल के आते एकदम से टू स्टॉप द ट्रेन पुल द चैन वाले

1217
01:31:18,320 --> 01:31:22,560
है ना कि भाई ये शास्त्र अगर निषेध कर रहे हैं ब्रह्मा विष्णु महेश

1218
01:31:22,560 --> 01:31:27,120
की भक्ति का तो वो शास्त्र कौन से है जिसमें भक्ति बताई गई है ये ये है

1219
01:31:27,120 --> 01:31:31,360
क्वेश्चन रे बाय आन ये हमारी क्वालिटी के क्वेश्चन जिसमें

1220
01:31:31,360 --> 01:31:35,360
टू स्टॉप द ट्रेन पुल द चिन अर्थात तू थोड़ी बंद हो जाना तो

1221
01:31:35,360 --> 01:31:39,760
बात ये आती है कि जीवो की तो मुक्ति हो सकती है

1222
01:31:39,760 --> 01:31:44,080
तो क्या रामपाल ये कहेगा अगर यह सब बद्ध है ब्रह्मा विष्णु महेश बद्ध

1223
01:31:44,080 --> 01:31:48,080
है ठीक है अगर ब्रह्मा विष्णु महेश बद्ध है तो

1224
01:31:48,080 --> 01:31:52,080
फिर इनकी मुक्ति कब होगी और अगर ये भी

1225
01:31:52,080 --> 01:31:56,080
जीव है और वो भी मुक्ति नहीं हो रही है तो किस रूप में

1226
01:31:56,080 --> 01:32:00,160
इनको भगवान भगवान कहता है तू सोचने वाली बात

1227
01:32:00,160 --> 01:32:05,440
क्या इनके लिए अलग से वो है मंत्र इत्यादि

1228
01:32:05,440 --> 01:32:10,240
हम तो ये सब सोचने वाली बातें हैं

1229
01:32:10,240 --> 01:32:14,480
अब हम यह तो हमने देख लिया ब्रह्मा विष्णु महेश एक दूसरे

1230
01:32:14,480 --> 01:32:18,960
से उत्पन्न होते रहते हैं। शिव पुराण में प्रमाण देखिए ये इस तरह के पुराण

1231
01:32:18,960 --> 01:32:23,280
इस तरह के प्रमाण भरे पड़े हैं हमारे पास ये आए तो सही सामने

1232
01:32:23,280 --> 01:32:25,520
कोई

1233
01:32:25,520 --> 01:32:29,840
गंजा कर दिया जाएगा गंजा प्रमाण दे दे के दे दे

1234
01:32:29,840 --> 01:32:33,360
और कुछ नहीं करना अब क्या होता है

1235
01:32:33,360 --> 01:32:37,360
कि जैसे ब्रह सर्वप्रथम भगवान ने

1236
01:32:37,360 --> 01:32:41,680
एक कल्प में शिव और पार्वती के रूप में फिर आगे सृष्टि

1237
01:32:41,680 --> 01:32:45,760
की सृष्टि में फिर वो ब्रह्मा विष्णु भवती गणेश के रूप में नियामक शक्ति

1238
01:32:45,760 --> 01:32:50,000
के रूप में उत्पन्न हुए। ये क्रम देख लिया। अब क्या होता है कि जिस

1239
01:32:50,000 --> 01:32:54,480
जो कल्प चल रहा है मतलब जिस जिसकी प्रधानता से सृष्टि बन रही है

1240
01:32:54,480 --> 01:32:58,640
तो उस नाम से उस रूप से जब वो उत्पन्न होते हैं नियामक

1241
01:32:58,640 --> 01:33:02,800
शक्ति के रूप में तो वहां पर भी उसको विशेष कहा जाता है कि भैया

1242
01:33:02,800 --> 01:33:06,880
ये तो पूर्ण रूप से रुद्र ही आए हैं इस रूप में। कैसे कहा जाता है शिव

1243
01:33:06,880 --> 01:33:12,880
पुराण में? देखिए शिव पुराण का

1244
01:33:19,000 --> 01:33:25,000
[गला साफ़ करने की आवाज़]

1245
01:33:35,040 --> 01:33:41,040
षष्ठी खंड निकालिए शिव पुराण का

1246
01:33:41,600 --> 01:33:47,600
षष्ठी सृष्टि खंड

1247
01:33:49,120 --> 01:33:55,120
रुद्र समिता सृष्टि खंड

1248
01:34:20,080 --> 01:34:22,720
देखिए

1249
01:34:22,720 --> 01:34:28,720
रुद्र समिता सृष्टि खंड अध्याय पांच

1250
01:34:32,080 --> 01:34:38,080
हां अध्याय पांच निकालिए।

1251
01:34:48,090 --> 01:34:54,090
[गला साफ़ करने की आवाज़]

1252
01:34:57,760 --> 01:35:03,760
अध्याय पांच में श्लोक है 30

1253
01:35:10,080 --> 01:35:14,720
अब देखिए यहां पर मैंने आपको एक बात बताई कि भगवान भगवान स्वयं पुनः

1254
01:35:14,720 --> 01:35:19,040
अपने द्वारा बनाई गई जो उसकी जो माया शक्ति है यानी भगवती

1255
01:35:19,040 --> 01:35:23,120
है उस शक्ति के द्वारा जो संसार बना उसमें फिर वो नियामक शक्ति

1256
01:35:23,120 --> 01:35:27,280
के रूप में प्रकट होते हैं। तो स्वयं वही प्रकट हो रहे हैं। तो

1257
01:35:27,280 --> 01:35:31,360
यहां पर क्या कहा जा रहा है? ब्रह्मा, विष्णु और महेश ये तीनों देव यहां देव हो

1258
01:35:31,360 --> 01:35:35,600
गए वो। परमात्मा होकर के सृष्टि रचना की। फिर किसी

1259
01:35:35,600 --> 01:35:39,680
एक नियामक शक्ति के रूप में फिर वो देवता की उपाधि को प्राप्त हो गए। तो ये

1260
01:35:39,680 --> 01:35:43,840
तीनों देव शिव के ही अंश है। किसके अंश है? शिव के। और यह शिव कोई अलग शिव

1261
01:35:43,840 --> 01:35:48,080
नहीं है। वही शिव है। त्रिशूल धारण करने वाले, जटा में गंगा

1262
01:35:48,080 --> 01:35:52,160
धारण करने वाले वही शिव है जिनकी हम पूजा करते हैं। जिनकी पूजा शिवलिंग से होती है। ये

1263
01:35:52,160 --> 01:35:56,400
सारे प्रमाण मैंने आज आपको दिए नहीं। इस पर मेरा ग्रंथ कंप्लीट होने के कगार पर है।

1264
01:35:56,400 --> 01:36:00,880
कुछ ही दिनों में ग्रंथ आपको मिलने वाला है। उसमें सारे बिल्कुल क्रमानुसार

1265
01:36:00,880 --> 01:36:05,120
सारी जानकारियां आपको मिल जाएगी। पर फिर भी मैं आपको यह बताना चाह रहा हूं कि चैट

1266
01:36:05,120 --> 01:36:09,120
जीपीटी पर्याप्त है। गूगल पर्याप्त है रामपाल जैसों को मुंह तोड़

1267
01:36:09,120 --> 01:36:13,440
उत्तर देने के लिए और किसी की तो आवश्यकता छोड़िए। इसलिए

1268
01:36:13,440 --> 01:36:17,840
मैं इतना ऑर्गेनिकली ये वीडियो बना रहा हूं। नहीं तो चाहता तो मैं भी एक प्रोफेशनल

1269
01:36:17,840 --> 01:36:21,920
YouTube पर काम करने वाले की तरह सारा संकलन रखता और आपको धड़ाधड़ धड़ाधड़ यही पर

1270
01:36:21,920 --> 01:36:25,440
बता देता। मगर मैं आपको दिखाना चाहता हूं वास्तविकता

1271
01:36:25,440 --> 01:36:30,160
कितनी आसान है। तो इसमें क्या कहा गया है? अब जैसे भगवान शिव

1272
01:36:30,160 --> 01:36:34,160
के द्वारा सृष्टि प्रारंभ हो रही है। ठीक है? तो जब ब्रह्मा,

1273
01:36:34,160 --> 01:36:38,400
विष्णु, महेश ये तीनों इनके ही अंश है। ठीक है? मगर उनमें पूर्ण

1274
01:36:38,400 --> 01:36:44,400
अंश और स्वयं में परात शिव है। ठीक है?

1275
01:36:44,400 --> 01:36:48,400
महेश यह समझे आप बात कि तीनों देवताओं के रूप

1276
01:36:48,400 --> 01:36:53,360
में प्रकट होते हैं। पर प्रकट होने पर भी जो जिस

1277
01:36:53,360 --> 01:36:57,360
धारा में जिस देवता की श्रेष्ठता का वर्णन है उस कल्प

1278
01:36:57,360 --> 01:37:01,520
में उस पुराण में भगवान के भगवान का जो वो रूप

1279
01:37:01,520 --> 01:37:05,680
होता है उसको पूर्ण ही कहा जाता है। कि ब्रह्मा विष्णु महेश तो उनहीं के अंश

1280
01:37:05,680 --> 01:37:09,680
है जिससे सृष्टि प्रारंभ हो रही है जिसमें कि महेश जो है क्योंकि शिव से

1281
01:37:09,680 --> 01:37:14,000
ही सृष्टि प्रारंभ हुई तो महेश उनका पूर्ण अंश वो पूर्ण है।

1282
01:37:14,000 --> 01:37:18,160
ठीक है तो ये सारी चीजें हो गई बाकी बहुत सारी

1283
01:37:18,160 --> 01:37:22,240
चीजें थी। अब हम लगाएंगे इनके कॉल सेंटर पे फोन। ठीक है भाई?

1284
01:37:22,240 --> 01:37:26,320
तो हमने क्या-क्या जान लिया? ब्रह्मा विष्णु महेश का कोई

1285
01:37:26,320 --> 01:37:30,880
पिता नहीं है। वह स्वयं ही लीला पूर्वक एक दूसरे से प्रकट होते रहते हैं।

1286
01:37:30,880 --> 01:37:34,880
अच्छा एक चीज और बता दूं। जैसे ये बोलता है कि ब्रह्मा जी को ब्रह्मा जी किससे प्रकट

1287
01:37:34,880 --> 01:37:39,120
हुए हैं? वो क्या कहते हैं?

1288
01:37:39,120 --> 01:37:40,560
मां भगवती के गर्भ से

1289
01:37:40,560 --> 01:37:44,720
बताने की प्रयास करता है। फिर वो उसमें बहुत सारी अश्लील चीजें जोड़ता है। शिव पुराण

1290
01:37:44,720 --> 01:37:48,720
में तो ब्रह्मा जी क्या कहते हैं? दाहिने अंग से और विष्णु जी

1291
01:37:48,720 --> 01:37:53,120
वाम अंग से प्रकट हो रहे हैं। दिखा दो इनको प्रमाण। भाई

1292
01:37:53,120 --> 01:37:59,120
दिखा दो।

1293
01:38:01,840 --> 01:38:06,320
पष्ठ क्रमांक 225

1294
01:38:06,320 --> 01:38:10,560
और इसी प्रकार से आगे

1295
01:38:10,560 --> 01:38:14,800
ये षष्ठी क्रम बदलता है। मैंने बता दिया कल्प भेद से बदलता है। 225

1296
01:38:14,800 --> 01:38:20,800
निकालिए प्रश्न क्रमांक

1297
01:38:37,120 --> 01:38:41,280
तत्पश्चात कल्याणकारी परमेश्वर

1298
01:38:41,280 --> 01:38:45,440
सा सदा शिव ने पूर्ववत प्रयत्न करके मुझे अपने दाहिने अंग

1299
01:38:45,440 --> 01:38:49,600
से उत्पन्न किया। कहां से उत्पन्न किया? दाहिने अंग

1300
01:38:49,600 --> 01:38:53,840
से। इसमें कोई बायोलॉजिकल उत्पन्न नहीं हो रहा है। वहां तो क्या हो रहा है? मैं अपने गर्भ

1301
01:38:53,840 --> 01:38:58,240
से निकाल दूंगी। यह हो रहा है। यह सृष्टि रचना की मौत है रामपाल

1302
01:38:58,240 --> 01:39:04,240
की। ठीक है? इसको कहते हैं मौत।

1303
01:39:04,240 --> 01:39:08,240
और इसी प्रकार से वाम अंग से भगवान विष्णु प्रकट हुए हैं।

1304
01:39:08,240 --> 01:39:12,240
ये देखिए ये इसी अध्याय इसी अध्याय

1305
01:39:12,240 --> 01:39:18,240
का है क्या? नहीं। इससे पहले वाले अध्याय का 37वा श्लोक पष्ठ क्रमांक 222

1306
01:39:19,280 --> 01:39:23,280
तो भगवान ब्रह्मा जी और विष्णु जी किसी स्त्री

1307
01:39:23,280 --> 01:39:27,280
से प्रकट नहीं हो रहे हैं। भगवान के वाम और दाहिने अंग

1308
01:39:27,280 --> 01:39:33,280
से प्रकट हो रहे हैं। 37वा श्लोक दिखाइए इसका।

1309
01:39:42,880 --> 01:39:47,040
इससे पहले वाला 37वा वो 38 है।

1310
01:39:47,040 --> 01:39:51,280
ऐसा निश्चय करके शक्ति सहित सर्वव्यापी परमेश्वर

1311
01:39:51,280 --> 01:39:55,440
शिव ने अपने वाम अंग से दसवे अंग पर अमृत का सिंचन

1312
01:39:55,440 --> 01:39:59,520
किया। ठीक है? अब नीचे देखिए वाम अंग पे अमृत

1313
01:39:59,520 --> 01:40:04,640
का सिंचन किया। कोई बायोलॉजिकल वो है क्या जो बता रहे हो वहां

1314
01:40:04,640 --> 01:40:08,880
संभोग हुआ बलात्कार हुआ यही सब रोता

1315
01:40:08,880 --> 01:40:12,960
रहता है तुम लोगों के साथ इसीलिए यही सब बताया करते हो ठीक है

1316
01:40:12,960 --> 01:40:17,120
तो वाम भाग से प्रकट हुए अगले श्लोक का बता दीजिए वहां उसी

1317
01:40:17,120 --> 01:40:21,440
समय एक पुरुष प्रकट हुआ जो तीनों लोकों में सबसे अधिक सुंदर था

1318
01:40:21,440 --> 01:40:25,520
वह शांत था ठीक है यह विष्णु जी का प्रकटीकरण

1319
01:40:25,520 --> 01:40:29,600
है फिर बाद में रुद्र भी आते हैं रुद्र के रूप में भी भगवान स्वयं शिव

1320
01:40:29,600 --> 01:40:33,680
आते और शिव कोई अलग नहीं है। वो काल काल का पूरा चैप्टर है। अलग

1321
01:40:33,680 --> 01:40:35,360
से बताऊंगा।

1322
01:40:35,360 --> 01:40:39,680
पर फिलहाल आप लोगों को थोड़ी वो दे दूं। उसको

1323
01:40:39,680 --> 01:40:42,440
क्या कहते हैं भाई?

1324
01:40:42,440 --> 01:40:44,800
[गला साफ़ करने की आवाज़]

1325
01:40:44,800 --> 01:40:48,800
ये एंटरटेन दे दूं आपको। ये अभी तक

1326
01:40:48,800 --> 01:40:54,800
तो अध्ययन हो गया। थोड़ा सा आपको वो दे देता हूं।

1327
01:40:55,600 --> 01:40:59,120
मनोरंजन

1328
01:40:59,120 --> 01:41:03,040
तो मनोरंजन क्या है?

1329
01:41:03,040 --> 01:41:07,280
मनोरंजन है इनके फोन लगाना कॉल सेंटर पे। अब षष्ठी रचना

1330
01:41:07,280 --> 01:41:11,260
पूछेंगे।

1331
01:41:11,260 --> 01:41:15,280
[खांसने की आवाज़][गला साफ़ करने की आवाज़] तो आज के बाद आपको सर्व तो खत्म हो गया

1332
01:41:15,280 --> 01:41:19,680
ना। कौन ये ब्रह्मा का पिता कौन है? विष्णु का पिता कौन है?

1333
01:41:19,680 --> 01:41:24,880
प्रमाण सहित आपको उत्तर मिल गया। इतना ही पर्याप्त है। कि

1334
01:41:24,880 --> 01:41:29,280
परम तत्व कौन है? अगर आप शिव को लेकर के भी चल लो तो शिव जी

1335
01:41:29,280 --> 01:41:33,280
और कौन से शिव जी जो अंबिका के पति हैं जो त्रिशूल धारण करते हैं जिनकी

1336
01:41:33,280 --> 01:41:37,680
पूजा होती है मूर्ति से शिवलिंग से होती है। प्रमाण

1337
01:41:37,680 --> 01:41:42,080
है फिर अभी बात लंबा होता चला जाएगा। ठीक है? शिवलिंग से मूर्ति

1338
01:41:42,080 --> 01:41:46,240
शिवलिंग से जिनकी पूजा होती है और वो मोक्षदायक है। त्रिशूल

1339
01:41:46,240 --> 01:41:50,320
धारण करते हैं। जटा में गंगा धारण करते हैं। वही शंकर वही जिन्हें शंकर कहा जाता

1340
01:41:50,320 --> 01:41:54,720
है। जिन्हें शंभू कहा जाता है। वही शिव अंबिका के पति हैं।

1341
01:41:54,720 --> 01:41:59,040
वही अंबिका के द्वारा सा सदा शिव जगत

1342
01:41:59,040 --> 01:42:03,120
का निर्माण करते हैं। फिर उसमें पर्टिकुलर एक एक नियामक शक्ति के रूप में स्वयं प्रकट हो

1343
01:42:03,120 --> 01:42:07,200
जाते हैं। इनमें ब्रह्मा विष्णु महेश का कोई पिता अलग

1344
01:42:07,200 --> 01:42:11,440
से नहीं है। ठीक। अब

1345
01:42:11,440 --> 01:42:17,440
इनके कॉल सेंटर में फोन करते हैं।

1346
01:42:19,440 --> 01:42:23,440
अच्छा मैंने आज कुछ नोट किया था। उमा के प्रति विनाशी है।

1347
01:42:23,440 --> 01:42:27,440
मोक्ष दायक है। छर अक्षर से परे पुरुषोत्तम पुरुषोत्तम [हंसी] बता दिया।

1348
01:42:27,440 --> 01:42:31,760
छर अक्षर से परे किसी और दिन बता देंगे।

1349
01:42:31,760 --> 01:42:35,920
परात्पर परमात्मा की रज सत्व और तमोगुण के योग से क्रमश

1350
01:42:35,920 --> 01:42:39,920
ब्रह्मा विष्णु महेश तथा महेश्वर नामक तीन मूर्तियां यानी

1351
01:42:39,920 --> 01:42:43,920
तीन शक्तियां कही गई वही देव देवता वाला रूप यह

1352
01:42:43,920 --> 01:42:48,480
तीनों विग्रह परस्पर एक दूसरे में अनुरूप तथा एक दूसरे के उपजीवी

1353
01:42:48,480 --> 01:42:52,560
यानी एक दूसरे से आश्रित भी है। यह तीनों

1354
01:42:52,560 --> 01:42:57,840
परमेश्वर है और लीलावश एक दूसरे को प्रणाम करते हैं। ये भी हो गया।

1355
01:42:57,840 --> 01:43:01,920
ठीक है? तो इनमें आप ये नहीं कह सकते कि वो उससे उत्पन्न हो रहा है। भाई वो

1356
01:43:01,920 --> 01:43:06,080
बड़ा है वो छोटा है। क्योंकि एक ही परमात्मा के सृष्टि को

1357
01:43:06,080 --> 01:43:11,040
चलाने के निमित्त अलग-अलग रूप है। ये है आपका

1358
01:43:11,040 --> 01:43:15,360
श्लोक है 89 से 90 और इनको

1359
01:43:15,360 --> 01:43:21,360
वो भी दिखा दीजिए। चैप्टर कौन सा है ये?

1360
01:43:30,080 --> 01:43:33,760
यह कुर् पुराण है।

1361
01:43:33,760 --> 01:43:37,920
ठीक है? और अब तो क्योंकि एआई आ गया तो आपको

1362
01:43:37,920 --> 01:43:41,920
इस तरह से संदर्भ ढूंढने में बहुत ज्यादा परेशानी नहीं है। आप चैट जीपीटी को बोलो। पूर्व

1363
01:43:41,920 --> 01:43:46,000
पुराण में कहां पर है वो निकाल के दे देगा। पूर्व पुराण में अध्याय कौन

1364
01:43:46,000 --> 01:43:49,520
सा है?

1365
01:43:49,520 --> 01:43:55,440
दिखाइए उनको

1366
01:43:55,440 --> 01:43:59,040
हम पूर्ण पुराण

1367
01:43:59,040 --> 01:44:01,840
ये है आपका

1368
01:44:01,840 --> 01:44:04,800
दूसरा अध्याय

1369
01:44:04,800 --> 01:44:09,440
पूर्व भाग दूसरा अध्याय

1370
01:44:09,440 --> 01:44:13,760
ठीक है और श्लोक है श्लोक

1371
01:44:13,760 --> 01:44:19,760
क्रमांक दिखा दीजिए

1372
01:44:21,040 --> 01:44:25,200
परात परमात्मा रज सत्व एवं तमो ये

1373
01:44:25,200 --> 01:44:29,280
ये जो श्लोक है विभिन्न शक्तियों के रूप में प्रकट होना ये भी भर भर

1374
01:44:29,280 --> 01:44:33,280
के है। ठीक है? तो

1375
01:44:33,280 --> 01:44:37,680
रामपाल का जवाब देना रामपाल का उत्तर देना कितना सरल

1376
01:44:37,680 --> 01:44:41,680
है। चाहे जीपीटी से बातें करते जाइए सारे आपको प्रमाण

1377
01:44:41,680 --> 01:44:45,680
मिलते जाएंगे। क्या ब्रह्मा विष्णु महेश को अविनाशी कहा है? अजन्मा

1378
01:44:45,680 --> 01:44:49,760
कहा है? उनके जन्म को लीला कहा है। अजन्मा होते

1379
01:44:49,760 --> 01:44:54,000
हुए भी जन्म जन्म लेने वाला कहा है। क्या

1380
01:44:54,000 --> 01:44:58,080
ब्रह्मा विष्णु महेश को परमेश्वर कहा है? मोक्ष देने वाला कहा है। जन्म

1381
01:44:58,080 --> 01:45:02,080
और मरण से मुक्ति कर्म दिलाने वाला कहा है। सब आपको वही मिल जाएगा। कहीं जाने की

1382
01:45:02,080 --> 01:45:04,880
आवश्यकता नहीं।

1383
01:45:04,880 --> 01:45:09,120
ठीक है? बस इनके छमछम वेद पे जाओ। ये

1384
01:45:09,120 --> 01:45:13,360
सारे प्रमाण वगैरह हटा दो। कहीं से निषेध कुछ मिल जाए। जैसे

1385
01:45:13,360 --> 01:45:17,440
पितृ पक्ष का निषेध मिला उसके आधार पर इसको गलत मान लो इसको

1386
01:45:17,440 --> 01:45:22,720
छोड़ दो वहां चले जाओ वेद को छोड़ दो वहां चले जाओ

1387
01:45:22,720 --> 01:45:24,560
ठीक है अब दो एक दो

1388
01:45:24,560 --> 01:45:28,560
कॉल कर लेते हैं इनके यहां सृष्टि रचना के ऊपर ही बात करेंगे आज

1389
01:45:28,560 --> 01:45:34,560
ठीक है

1390
01:45:36,540 --> 01:45:39,280
[गला साफ़ करने की आवाज़]

1391
01:45:39,280 --> 01:45:45,200
कहां इनके नंबर नंबर है कि नहीं कुछ उड़ा दिए सब

1392
01:45:45,200 --> 01:45:51,200
या 8285वाला

1393
01:46:00,560 --> 01:46:04,720
में आपका स्वागत है। संत रामपाल जी महाराज से प्रार्थना

1394
01:46:04,720 --> 01:46:08,960
करने और प्रार्थना का आदेश पता करने के लिए एक दबाएं।

1395
01:46:08,960 --> 01:46:13,120
संत रामपाल जी महाराज के नाम दीक्षा की जानकारी के लिए कृपया

1396
01:46:13,120 --> 01:46:17,360
दो दबाएं। संत रामपाल जी महाराज द्वारा लिखित पुस्तक

1397
01:46:17,360 --> 01:46:21,600
संबंधी जानकारी के लिए कृपया तीन दबाएं। संत रामपाल

1398
01:46:21,600 --> 01:46:25,600
जी महाराज की ज्ञान से संबंधित किसी भी प्रकार की शंका

1399
01:46:25,600 --> 01:46:29,680
समाधान के लिए कृपया चार दबाएं। संत रामपाल जी महाराज

1400
01:46:29,680 --> 01:46:33,840
जी से संबंधित किसी भी प्रकार की अन्य जानकारी के लिए

1401
01:46:33,840 --> 01:46:38,080
हमारी प्रतिनिधि से बात करने के लिए नौ दबाएं। अन्य

1402
01:46:38,080 --> 01:46:39,760
जानकारी के लिए

1403
01:46:39,760 --> 01:46:42,240
आप

1404
01:46:42,240 --> 01:46:48,240
शंका समाधान के लिए जगत गुरु

1405
01:46:48,320 --> 01:46:52,640
कृपया लाइव पर बने रह आपका कॉल हमारे लिए महत्वपूर्ण

1406
01:46:52,640 --> 01:46:58,640
है। जल्दी हमारी प्रतिनिधि आपसे बात करेंगे।

1407
01:47:12,830 --> 01:47:18,830
[संगीत]

1408
01:47:27,360 --> 01:47:31,600
सत जी जी जय श्री राम

1409
01:47:31,600 --> 01:47:35,920
हां जी बोलिए सत साहेब ये रामपाल जी सृष्टि

1410
01:47:35,920 --> 01:47:39,920
रचना बता रहे थे तो उसमें बहुत सारी चीजें हैं जो हमें

1411
01:47:39,920 --> 01:47:44,160
सनातन शास्त्रों से बाहर दिख दिख रही है तो उसमें आप बताएंगे

1412
01:47:44,160 --> 01:47:49,040
थोड़ा अपने चैनल पे बताओ चैनल पे ही बता रहा हूं लाइव चल रहा है

1413
01:47:49,040 --> 01:47:53,200
नहीं तो आप अपने चैनल में अपनी बात रखो ना वही बात ही तो रख रहा हूं मैं

1414
01:47:53,200 --> 01:47:57,200
आपको सामने रख के बतानी थी वो बता दी आपको सामने रख के इसलिए

1415
01:47:57,200 --> 01:48:01,360
बात रख रहा हूं जिससे कि कम से कम सुनो बात सुनो एक बार जो संत

1416
01:48:01,360 --> 01:48:06,000
रामपाल जी महाराज जी ने उस वीडियो में बोला था उसी वीडियो को दोबारा दोहराता हूं संत रामपाल

1417
01:48:06,000 --> 01:48:10,080
जी ने आज साधना चैनल पर अपनी बात रख दी है चार किस्तों में अब

1418
01:48:10,080 --> 01:48:14,320
आपको अगर वो बात कुछ गलत लग रही है तो शास्त्रों से प्रमाणित करके अपने शास्त्रों से प्रमाणित

1419
01:48:14,320 --> 01:48:18,400
करके रख रहा हूं आगे होगा क्या यह तो बताइए अरे तो हमसे क्यों बात कर रहे हो आप

1420
01:48:18,400 --> 01:48:22,480
अरे तो भाई आप उनके प्रतिनिधि हो ना इस पर लिखा इस पर

1421
01:48:22,480 --> 01:48:28,480
आया था जब मैंने कॉल मिलाया था आपको कि आप उनके प्रति भाग गया

1422
01:48:29,440 --> 01:48:33,440
अच्छा देखिए अभी व्यूअर बढ़ जा रहे हैं 174 हो गए

1423
01:48:33,440 --> 01:48:37,440
इसलिए हो गए क्योंकि लोगों को भी मालूम

1424
01:48:37,440 --> 01:48:41,440
है कि यह जो रामपाल की जो खंडन है वह तो

1425
01:48:41,440 --> 01:48:45,520
चलते बिरिया में कोई भी कर देगा। आनंद तो इन चीजों का लेना है। क्यों

1426
01:48:45,520 --> 01:48:51,200
भाई? है ना? छमम छमम वेद का आनंद लेना है।

1427
01:48:51,200 --> 01:48:55,200
चलो भाई फिर से लगाते हैं। अब यहां से

1428
01:48:55,200 --> 01:48:59,280
दौड़ शुरू। इधर दौड़ है। उधर दौड़ है। ये रामपाल

1429
01:48:59,280 --> 01:49:03,440
यारों दौड़ है। [हंसी] बचने

1430
01:49:03,440 --> 01:49:08,640
की है दौड़ कहीं। चोरी करने की दौड़ कहीं।

1431
01:49:08,640 --> 01:49:13,680
दौड़ दमादम दौड़ अब ये दौड़ लगाएंगे

1432
01:49:13,680 --> 01:49:17,680
ठीक है तो भाई चलो ठीक है तुम

1433
01:49:17,680 --> 01:49:23,520
डाल डाल हम पातपात

1434
01:49:23,520 --> 01:49:27,600
बेचारे [हंसी] कैसे रो रहे हैं कि मैं फिर वही

1435
01:49:27,600 --> 01:49:31,600
बात दोहरा देता हूं अरे भाई मैं लाइव ही तो कर रहा हूं अपनी बात रख

1436
01:49:31,600 --> 01:49:37,600
तो रहा हूं अब इसका होना क्या है करो इसका फैसला

1437
01:49:38,960 --> 01:49:44,960
82

1438
01:49:45,120 --> 01:49:51,120
क्या था नंबर8054

1439
01:49:52,880 --> 01:49:56,960
हां भाई लगाओ भाई कॉल हमारा

1440
01:49:56,960 --> 01:50:02,960
डायल किया गया नंबर

1441
01:50:03,040 --> 01:50:06,240
82

1442
01:50:06,240 --> 01:50:12,240
80542

1443
01:50:16,000 --> 01:50:20,080
आश्रम बरवाला में आपका स्वागत है। संत रामपाल जी

1444
01:50:20,080 --> 01:50:24,240
महाराज से प्रार्थना करने और प्रार्थना का आदेश पता करने के

1445
01:50:24,240 --> 01:50:28,240
लिए एक दबाएं। संत रामपाल जी महाराज से नाम दीक्षा की

1446
01:50:28,240 --> 01:50:33,440
जानकारी के लिए कृपया दो दबाएं।

1447
01:50:33,440 --> 01:50:37,760
कृपया लाइव पर बने रहे। आपका कॉल हमारे लिए महत्वपूर्ण

1448
01:50:37,760 --> 01:50:43,760
है। जल्द ही हमारे प्रतिनिधि आपसे बात करेंगे।

1449
01:50:45,050 --> 01:50:51,050
[संगीत]

1450
01:50:54,480 --> 01:51:00,120
एक लोग पूछ रहे हैं नंबर क्या है? ये इनकी किताबों में लिखा है ना वेबसाइट पर लिखा है।

1451
01:51:00,120 --> 01:51:03,440
[संगीत] है ना?

1452
01:51:03,440 --> 01:51:07,520
हेलो हां जी जय श्री राम। श्री

1453
01:51:07,520 --> 01:51:11,680
राम राम जी। जी मैं ये पूछ रहा था। ये रामपाल

1454
01:51:11,680 --> 01:51:15,680
जी अपनी षष्ठी रचना में बता रहे हैं कि काल का

1455
01:51:15,680 --> 01:51:19,680
भी जन्म और मरण होता है। ज्ञान चर्चा करनी है

1456
01:51:19,680 --> 01:51:23,760
भैया तो आप नंबर लिखो। उससे बात करो। अच्छा आप शंका समाधान

1457
01:51:23,760 --> 01:51:27,920
नहीं करेंगे। ज्ञान चर्चा करनी है आपको। वो वो

1458
01:51:27,920 --> 01:51:32,080
वो भी यही कह देते हैं ना ज्ञान की बातें कर रहे हो। हां तो ये शंका

1459
01:51:32,080 --> 01:51:36,160
समाधान नहीं है। चर्चा के लिए नंबर दे रहे है ना। नंबर लिखो। शंका समाधान भी तो ज्ञान

1460
01:51:36,160 --> 01:51:38,960
की बातें ही है।

1461
01:51:38,960 --> 01:51:43,200
भाई साहब आपको कितनी बार बताया जाए वो ज्ञान तो शंका

1462
01:51:43,200 --> 01:51:47,520
समाधान भक्तों की शंका के लिए है। उसमें ऐसा बोलते नहीं है ना। आप उसको चेंज

1463
01:51:47,520 --> 01:51:51,600
नंबर दिया जा रहा है तो नंबर लिखो ना। आप उसको चेंज कर दो ना उसमें लिखो ये भक्तों

1464
01:51:51,600 --> 01:51:55,600
की शंका समाधान के नीचे खैर नंबर बोल दो नंबर बोल दो नंबर बोल

1465
01:51:55,600 --> 01:51:59,600
दो नंबर बोल दो नंबर नंबर बोल दो नंबर बोल

1466
01:51:59,600 --> 01:52:01,520
दो

1467
01:52:01,520 --> 01:52:07,520
देखो हम 9810

1468
01:52:10,720 --> 01:52:12,960
5250

1469
01:52:12,960 --> 01:52:16,640
हां

1470
01:52:16,640 --> 01:52:22,640
क्या बोला लास्ट में

1471
01:52:23,360 --> 01:52:27,440
ठीक है। अच्छा इस पर अगर जैसे कोई नहीं उठाएगा या जवाब

1472
01:52:27,440 --> 01:52:31,760
नहीं देगा तो क्या करें? जवाब देंगे ना?

1473
01:52:31,760 --> 01:52:35,760
नहीं जैसे हो जाता है कभी-कभी कॉल नहीं लग रहा है या फिर कहते हैं कि आप वीडियो बना

1474
01:52:35,760 --> 01:52:40,160
दो। नहीं नहीं लगता तो आप अपना नंबर बताएं।

1475
01:52:40,160 --> 01:52:46,160
आप पहले बात तो करो। मेरा नंबर है ना? ले लो। मेरा नंबर ले लो। 7408301869

1476
01:52:48,160 --> 01:52:52,640
एक मिनट एक मिनट वेट करिए हां

1477
01:52:52,640 --> 01:52:57,600
ज्ञान चर्चा करनी है ना हम आपको पहले आप इनसे कॉल करिए अगर नहीं लगता है तो बताइएगा

1478
01:52:57,600 --> 01:53:01,680
ठीक है हम ऊपर उनसे बात कर लेंगे ठीक है ठीक है अगर

1479
01:53:01,680 --> 01:53:05,680
वो आपको बात नहीं करते आपसे फिर हम बता देंगे आपको उनको ठीक

1480
01:53:05,680 --> 01:53:11,680
वो बात नहीं कर रहे है ठीक

1481
01:53:12,430 --> 01:53:18,430
[गहरी सांस लेने की आवाज़]

1482
01:53:19,280 --> 01:53:25,280
विशेषज्ञ का नंबर मिला है शायद कोई विशेषज्ञ होगा भाई

1483
01:53:31,360 --> 01:53:35,360
कौन कट किया था कैसे ठीक है जी यह तो इस व्यक्ति से बात हो

1484
01:53:35,360 --> 01:53:41,360
चुकी है हालांकि अब बात करते हैं दोबारा से

1485
01:54:04,000 --> 01:54:08,080
बेचारे सोच रहे होंगे हर तरह से तैयार रहता है ये तो आप

1486
01:54:08,080 --> 01:54:12,000
अपना नंबर दे दो

1487
01:54:12,000 --> 01:54:16,080
हेलो हां जी जय श्री राम [नाक से की जाने वाली आवाज़] नमस्कार सर

1488
01:54:16,080 --> 01:54:20,160
बताइए ये रामपाल जी ने जो चैलेंज

1489
01:54:20,160 --> 01:54:24,160
के अनुसार एक अपने दो दिन की जो पिछली एक तीन और चार

1490
01:54:24,160 --> 01:54:28,240
तारीख को षष्ठी रचना बताई तो रामपाल जी बताते हैं जो काल है उसका भी

1491
01:54:28,240 --> 01:54:32,880
जन्म और मरण होता है

1492
01:54:32,880 --> 01:54:37,120
हेलो बोलो सर बोलो हां बताओ बताओ सर

1493
01:54:37,120 --> 01:54:41,440
तो जन्म और मरण होता है तो यह काल जब मर

1494
01:54:41,440 --> 01:54:44,640
जाता है तब वो जो

1495
01:54:44,640 --> 01:54:50,080
सृष्टि होती है उसका क्या होता है?

1496
01:54:50,080 --> 01:54:54,240
काल जो सृष्टि होती है उसका क्या होता है? हां उसको बीज रूप में उठा

1497
01:54:54,240 --> 01:54:58,320
के साइड में रख दिया जाता है। बीज मतलब ये मुक्त

1498
01:54:58,320 --> 01:55:02,480
हो जाते हैं क्या? प्राणी जो है कोई मुक्त नहीं होता। एज इट इज रहती

1499
01:55:02,480 --> 01:55:07,120
है। जैसे पेड़ का जो बीज होता है ना जिस तरीके से

1500
01:55:07,120 --> 01:55:12,480
कितना सूक्ष्म होता है इस तरीके से सूक्ष्म रूप में

1501
01:55:12,480 --> 01:55:16,560
ये जो ब्रह्मांड है इसको उठा के एक बीज रूप में उठा के रख

1502
01:55:16,560 --> 01:55:20,640
दिया जाता है। काल जब मरता है तो कुछ लोग जीवित रहते

1503
01:55:20,640 --> 01:55:25,040
हैं। उस समय की सब मर चुके होते हैं। कोई नहीं जीवित रहता। पूरे

1504
01:55:25,040 --> 01:55:29,120
पूरे जो यहां पर जितने भी वो होते हैं सारे के सारे

1505
01:55:29,120 --> 01:55:33,760
विनाश को प्राप्त हो जाते हैं और वो बीज रूप में उठा के रख दिया जाता है।

1506
01:55:33,760 --> 01:55:38,000
और रखता कौन है? कौन रखता है? सिस्टम

1507
01:55:38,000 --> 01:55:42,000
है सारा कभी चलो ठीक है। चलो ठीक है। कोई रखता

1508
01:55:42,000 --> 01:55:46,800
होगा। तो बात यह है दोबारा काल जन्म लेता है

1509
01:55:46,800 --> 01:55:51,120
हां जी तो दोबारा से जो वो

1510
01:55:51,120 --> 01:55:56,720
जो सृष्टि रचना का क्रम है हर बार बिल्कुल एक जैसा रहता है

1511
01:55:56,720 --> 01:56:00,880
बिल्कुल ऐसा ही रहता है यानी दोबारा से वो तपस्या करता

1512
01:56:00,880 --> 01:56:05,760
है और उससे अट्रैक्ट हो जाती है

1513
01:56:05,760 --> 01:56:08,720
आत्माएं

1514
01:56:08,720 --> 01:56:13,440
और उसमें से एक आत्मा होती है जो प्रकृति बनती है जब

1515
01:56:13,440 --> 01:56:17,600
तक मुक्ति प्राप्त नहीं जब तक ये सारे के सारे सतलोक में नहीं जाएंगे

1516
01:56:17,600 --> 01:56:21,600
जीवात्मा नहीं मैं ये नहीं कह रहा मैं सृष्टि मैं अभी सृष्टि रचना की बात कर

1517
01:56:21,600 --> 01:56:25,680
रहा हूं सृष्टि रचना सृष्टि रचना की बात कर रहा

1518
01:56:25,680 --> 01:56:30,160
हूं कि जब काल दोबारा जन्म लेता है

1519
01:56:30,160 --> 01:56:34,320
तो आपने कहा कि दोबारा बिल्कुल पैटर्न जो सृष्टि का है वो एक जैसा रहता है

1520
01:56:34,320 --> 01:56:38,480
तो काल जब दोबारा जन्म लेता है

1521
01:56:38,480 --> 01:56:42,560
तो दोबारा से वही होता है कि जो जो जीवात्मा है उसके के साथ जाना चाहती है वो वो

1522
01:56:42,560 --> 01:56:46,560
हाथ खड़ा करती है। उनमें से जो पहली जीवात्मा होती है वो प्रकृति होती है। ऐसा है

1523
01:56:46,560 --> 01:56:50,880
क्या? हां जी। यानी कि जिसकी इच्छा होती है वो

1524
01:56:50,880 --> 01:56:55,360
काल के साथ आता है। फिर संसार में अगली बार

1525
01:56:55,360 --> 01:56:59,440
क्या होता है जिसका? जिसकी इच्छा होती है जो स्वेच्छा से आता

1526
01:56:59,440 --> 01:57:04,240
है। हां जो स्वेच्छा से आता है वो वही आता है।

1527
01:57:04,240 --> 01:57:08,240
मतलब काल से अट्रैक्ट हो के आता है। तो यह जो

1528
01:57:08,240 --> 01:57:12,320
तो यह जो बीज रूप में जो थे लेकिन उसमें

1529
01:57:12,320 --> 01:57:16,400
शिफ्ट कर दिए जाते हैं। एक्चुअल क्या होता है कि जैसे जो परमात्मा देते

1530
01:57:16,400 --> 01:57:20,560
हैं तो वो सूक्ष्म रूप में वो पहले से ही भगत

1531
01:57:20,560 --> 01:57:21,060
होते हैं।

1532
01:57:20,960 --> 01:57:25,360
जो पहले से ही अपनी इच्छा प्रकट कर चुके थे और उनके कर्म

1533
01:57:25,360 --> 01:57:29,760
इसी प्रकार के होते हैं। वो उसी आत्मा में ही होते हैं। वो

1534
01:57:29,760 --> 01:57:33,840
रूप में जैसे एज इट इज होता है। नहीं नहीं मेरा कहने का मतलब है कि जैसे

1535
01:57:33,840 --> 01:57:37,920
अभी यहां का कोई व्यक्ति है जो सारी

1536
01:57:37,920 --> 01:57:42,080
सृष्टि का विनाश हो चुका है। उसके बाद काल का विनाश होता है। ठीक है? तो जो

1537
01:57:42,080 --> 01:57:46,240
सारी सृष्टि का विनाश हो चुका है उसमें सबको तो मुक्ति मिल नहीं गई है कि मुक्ति

1538
01:57:46,240 --> 01:57:51,920
मिल गई है। उसके बाद होता है काल का विनाश। हां जी। हां।

1539
01:57:51,920 --> 01:57:56,080
क्या कह रहे हो? काल का विनाश काल का काल की जो मृत्यु

1540
01:57:56,080 --> 01:58:00,400
होती है वो सारे लोगों के मर जाने के बाद होती है ना।

1541
01:58:00,400 --> 01:58:04,400
नहीं ऐसा नहीं है। हां। देखो पर होती है। कई

1542
01:58:04,400 --> 01:58:08,560
तरीके की पर होती है। हां। एक होती है पर। ब्रह्मांड में ही

1543
01:58:08,560 --> 01:58:12,640
है ना आग लग जाती है। ब्रह्मांड में ही बहुत भयंकर विनाश हो

1544
01:58:12,640 --> 01:58:16,640
जाता है। और एक होती है आंशिक प्रलय एक होती

1545
01:58:16,640 --> 01:58:20,640
है महाप्रलय। इस तरीके से पल का भी अमेंजमेंट टाइप है। वो ठीक

1546
01:58:20,640 --> 01:58:25,360
है। मुझे आप ये बताइए जो क्या होता है कि एक बार एक

1547
01:58:25,360 --> 01:58:29,520
पूरे जिसमें तीनों लोक समाप्त होते हैं। इसमें तो

1548
01:58:29,520 --> 01:58:33,520
जो है ना जो है मतलब अलग-अलग तरीके की होती

1549
01:58:33,520 --> 01:58:36,080
है। जैसे ब्रह्मा का जो दिन होता है ब्रह्मा की

1550
01:58:36,080 --> 01:58:40,240
नहीं मैं मैं मैं समझ रहा हूं आप जो अलग-अलग प्रकार मैं ये पूछ रहा हूं कि ये वाली

1551
01:58:40,240 --> 01:58:44,800
कौन सी प्रलय है जब ये मरता है काल महाप्रलय होती है।

1552
01:58:44,800 --> 01:58:48,800
महाप्रलय होती है तो काल के कारण ही तो व्यक्ति बंधन में

1553
01:58:48,800 --> 01:58:53,200
है या और कोई कारण है इस जो इस ब्रह्मांड

1554
01:58:53,200 --> 01:58:57,200
की जो तीन टाइप की प्रलय होती है ना उसमें उसमें

1555
01:58:57,200 --> 01:59:01,200
ये महाप्रलय होती है आंशिक होती है लेकिन आंशिक के बाद

1556
01:59:01,200 --> 01:59:05,280
अक्षर पुरुष के जब नाश होते हैं तो उसको महाप्रलय कहते हैं। मैं ये पूछ

1557
01:59:05,280 --> 01:59:09,280
रहा हूं कि जो जीव जो है बंधन में है वो काल

1558
01:59:09,280 --> 01:59:13,280
के कारण है ना। हां जी हां जी। तो जब

1559
01:59:13,280 --> 01:59:17,360
काल मर गया तो जीव बंधन में कैसे रहा फिर? वो जो

1560
01:59:17,360 --> 01:59:21,360
शिक्षा होती है वो एज इट इज रहती है। जो हमारा जो सेब

1561
01:59:21,360 --> 01:59:25,360
खराब है वो पूरी की पूरी उसको ये बाहर चला

1562
01:59:25,360 --> 01:59:29,520
जाता है। यानी कि काल यानी कि काल बंधन का कारण नहीं है

1563
01:59:29,520 --> 01:59:33,920
और कुछ है? अगर ऐसा होता तो काल को काल खत्म हो जाता है।

1564
01:59:33,920 --> 01:59:37,920
सारा खत्म हो जाता है। तो वही तो वही तो मैं पूछ रहा हूं कि काल खत्म होने पर बंधन में क्यों है? हम

1565
01:59:37,920 --> 01:59:41,920
उस परमात्मा को जो पाप जो हम उस परमात्मा को जो छोड़

1566
01:59:41,920 --> 01:59:46,080
के आए हैं जो दोष है यानी जो यानी चित्त में जो विकार आया

1567
01:59:46,080 --> 01:59:51,440
तब तक हम अपने घर नहीं जाते यानी कि चित्त में जो विकार आया अज्ञानता

1568
01:59:51,440 --> 01:59:52,880
जो

1569
01:59:52,880 --> 01:59:56,960
अपने भगवान को छोड़ के हम विचार हो गए परमात्मा

1570
01:59:56,960 --> 02:00:01,200
को मतलब जो है परमात्मा छोड़ के किसी और पर आत हो गए

1571
02:00:01,200 --> 02:00:05,200
वो वो बीमारी हमारे अंदर जो घर है वो जब तक नहीं निकलेगी जब

1572
02:00:05,200 --> 02:00:09,520
तक हम अपने सतलोक में नहीं जा सकते यानी यानी जो पाप हम लोगों का जो

1573
02:00:09,520 --> 02:00:13,600
हम लोगों का आने का कारण होता है जीवो का आने का कारण वो पाप है।

1574
02:00:13,600 --> 02:00:17,680
मूल कारण वो काल नहीं है कि काल ने आपको बंधन में डाल रखा है।

1575
02:00:17,680 --> 02:00:21,840
सुनो पाप का मतलब परमात्मा को छोड़ के हम दूसरे

1576
02:00:21,840 --> 02:00:25,920
पर मतलब अव्यभचारणी जब भक्ति करते हैं

1577
02:00:25,920 --> 02:00:29,920
तब ये काम होता है। अव्यभचारणी नहीं व्यभचारणी व्यभचार अपने

1578
02:00:29,920 --> 02:00:34,160
आप में पाप है। हां विचार में जो भी है मतलब इसमें

1579
02:00:34,160 --> 02:00:38,480
हम जो परमात्मा को छोड़ के हम किसी दूसरे की भक्ति करते हैं तो

1580
02:00:38,480 --> 02:00:42,480
मेरा कहने का भाव है कि जब हम परमात्मा को छोड़ के दूसरे के ऊपर

1581
02:00:42,480 --> 02:00:46,480
आश्रित हो गए तो परमात्मा के उस से हम गिर जाते हैं

1582
02:00:46,480 --> 02:00:51,280
तो हमारे को जो हमारे को ये वो

1583
02:00:51,280 --> 02:00:55,360
पाप है जो ये जो अपराध है ना हरासमेंट है इस वजह

1584
02:00:55,360 --> 02:00:59,440
से हम यहां पर हां तो ये ये चीज हो गई कि मतलब केवल

1585
02:00:59,440 --> 02:01:03,680
काल के बंधन में नहीं है हम लोग केवल काल के बंधन

1586
02:01:03,680 --> 02:01:07,840
में ही तो है हम तो काल मर गया फिर बंधन नहीं होना चाहिए ना काल

1587
02:01:07,840 --> 02:01:08,340
के

1588
02:01:08,080 --> 02:01:12,240
ऊपर आश्रित हो गए अब हम पूर्ण परमात्मा की भक्ति दोबारा करेंगे अब इसको

1589
02:01:12,240 --> 02:01:16,560
हम दोबारा नहीं सपने में भी नहीं झांकेंगे नहीं वो भी किसी और की भक्ति

1590
02:01:16,560 --> 02:01:21,120
वो तो खैर अलग वो अलग अलग बात है। मैं मैं ये पूछ रहा हूं कि जैसे

1591
02:01:21,120 --> 02:01:25,760
काल काल के कारण काल ने हमें बंधन में डाल रखा है।

1592
02:01:25,760 --> 02:01:29,920
डाल रखा है ना? हां जी। काल ने हमें बंधन में डाल रखा

1593
02:01:29,920 --> 02:01:34,000
है तो काल जब मर गया रुकावट काल एक रुकावट कर रहा है

1594
02:01:34,000 --> 02:01:38,160
एक्चुअल हम उस परमात्मा के पद से गिर चुके हैं यानी कि बंधन

1595
02:01:38,160 --> 02:01:42,720
में डाला हुआ परमात्मा नहीं है ना एक तरीके से फिर मतलब

1596
02:01:42,720 --> 02:01:46,880
क्या बंधन में डाला हुआ है काल ने बंधन में डाल रखा है काल काल ने बंधन

1597
02:01:46,880 --> 02:01:50,880
में डाला है तो काल मर गया तो बंधन खत्म होना चाहिए फिर नहीं नहीं ऐसा नहीं

1598
02:01:50,880 --> 02:01:55,120
तो यानी परमात्मा व्यवस्था कर रहा है बंधन की ना परमात्मा

1599
02:01:55,120 --> 02:01:59,200
नहीं कर रहा तो कौन कर रहा है परमात्मा अपने नियम से बना

1600
02:01:59,200 --> 02:02:03,200
हुआ है कि जो गलत जो परमात्मा को छोड़कर और जो

1601
02:02:03,200 --> 02:02:07,280
भक्ति दूसरी करेगा उसको परमात्मा के होते 100 वर्ष सतगुरु

1602
02:02:07,280 --> 02:02:11,760
की पूजा एक दिन आ उपासी वो अपराधी आत्मा कब पड़े काल की फांसी

1603
02:02:11,760 --> 02:02:15,920
आपने सच्चे भक्ति 100 वर्ष कर ली एक दिन आ उपासना कर ली

1604
02:02:15,920 --> 02:02:19,920
तो आपको वो परमात्मा मतलब कोसों दूर हो जाएगा

1605
02:02:19,920 --> 02:02:23,520
आपसे कहने का मतलब यह है कि दो चीजें हैं इसमें

1606
02:02:23,520 --> 02:02:27,680
एक हम परमात्मा के पद को छोड़कर हम किसी और की भक्ति कर रहे हैं। सबसे बड़ा

1607
02:02:27,680 --> 02:02:31,760
अपराध जो आत्माना कहते हैं देश को वो उसकी वजह से हम

1608
02:02:31,760 --> 02:02:36,080
उस शलोक से दूर हुए और अपने पास रोक के रखने के लिए

1609
02:02:36,080 --> 02:02:40,080
काल ने जो व्यवस्था करी वो अपने को रोकने के

1610
02:02:40,080 --> 02:02:44,080
लिए कर रहा है। अब वो अगर वो मर भी जाता है मान लो तो वो हमारे अंदर जो

1611
02:02:44,080 --> 02:02:48,160
गिरावट है वो गिरावट पूरी नहीं हुई और जब तक वो गिरावट ठीक नहीं

1612
02:02:48,160 --> 02:02:52,160
होएगी तब तक हम सतलोक नहीं जा सकते। हमको अभी तक काल रोक

1613
02:02:52,160 --> 02:02:56,240
रहा था जाने से। काल जब मर गया तो कौन रोक रहा है? और हमारे अंदर

1614
02:02:56,240 --> 02:03:00,400
जो बता तो दिया कि हमारे अंदर क्या जो गिरावट है वो गिरावट जब तक

1615
02:03:00,400 --> 02:03:04,480
ठीक नहीं रहेगी जब तक काम नहीं तो यानी इस गिरावट की कोई देखरेख करता

1616
02:03:04,480 --> 02:03:08,480
है ना कोई काल के अलावा मैनेजिंग है ना व्यवस्था कोई

1617
02:03:08,480 --> 02:03:12,560
सिस्टम जो ये देख रहा है कि भैया जब काल हट गया फिर

1618
02:03:12,560 --> 02:03:16,560
भी ये वहीं रहने चाहिए ऐसा ना हो यहां आ जाए वो तो आत्मा से परमात्मा का

1619
02:03:16,560 --> 02:03:20,800
कनेक्शन है वो तो है ही है आप मेरी बात समझ नहीं रहे

1620
02:03:20,800 --> 02:03:24,800
आप मेरी बात पहली बात तो हम उसी से ही बाहर नहीं निकल पाते ना

1621
02:03:24,800 --> 02:03:28,880
आप मैं मैं मेरा प्रश्न कोई मेरा प्रश्न थोड़ा सा अलग है। मैं मैं

1622
02:03:28,880 --> 02:03:33,360
ये पूछ रहा हूं कि काल हमें रोक रहा है वास्तविक

1623
02:03:33,360 --> 02:03:37,600
परमेश्वर तक पहुंचने से परमेश्वर के लोग पहुंचने से। ठीक है?

1624
02:03:37,600 --> 02:03:38,640
मगर जब वो मर

1625
02:03:38,640 --> 02:03:42,800
जाता है तो कौन रोक रहा है? अब हमारे कर्म रोक रहे हमारे जो

1626
02:03:42,800 --> 02:03:46,960
जो हमने किए हुए हैं जिसकी वजह से परमात्मा से हम दूर हुए

1627
02:03:46,960 --> 02:03:51,040
वो अभी तक हमारे यानी कि परमात्मा के अलावा एक कर्मों वाला

1628
02:03:51,040 --> 02:03:55,040
कोई सिस्टम है जो यह तय करता है कि अगर किसी ने बुराई

1629
02:03:55,040 --> 02:03:59,200
कर्म किया है और उसको रोकने वाला जो काल नामक वो शैतान है

1630
02:03:59,200 --> 02:04:03,200
एंटिटी जो है वो अगर मर भी गया देखो

1631
02:04:03,200 --> 02:04:07,200
क्या होता है कि परमात्मा एक मिनट भाई साहब मैं मैं प्रश्न प्रश्न को

1632
02:04:07,200 --> 02:04:11,440
रख तो लेने दीजिए पूरी होगी पहले मेरी सुन लो आपका प्रश्न

1633
02:04:11,440 --> 02:04:15,520
हो जाएगा प्रश्न को रख मेरे प्रश्न को रख लेने दीजिए एक मिनट मेरी सुनो

1634
02:04:15,520 --> 02:04:19,600
आप अरे प्रश्न को मैंने आपका प्रश्न सुना है मेरे को एक बार सुन लो आप

1635
02:04:19,600 --> 02:04:24,080
अरे नहीं मेरा प्रश्न ये वाला आपने नहीं सुना जो मैं कह रहा हूं जो मैं कह रहा हूं

1636
02:04:24,080 --> 02:04:28,560
उसमें ये है कि अ

1637
02:04:28,560 --> 02:04:32,080
क्या कहते हैं जो काल है

1638
02:04:32,080 --> 02:04:36,240
वो तो मर गया अब जो इनको इनके कर्मों का फल

1639
02:04:36,240 --> 02:04:40,640
एक तरीके से क्योंकि इन्होंने कर्म किया है व्यभचारी भक्ति ठीक है?

1640
02:04:40,640 --> 02:04:45,040
तो उस कर्म का फल देने के निमित्त इनको जो है सतलोक नहीं पहुंचने

1641
02:04:45,040 --> 02:04:49,120
देना है। भले ही काल मर गया काल के वो 21 ब्रह्मांड भी खत्म हो गए।

1642
02:04:49,120 --> 02:04:53,120
है ना? काल मर गया तो 21 ब्रह्मांड भी खत्म हो गए। तो वो तो ये

1643
02:04:53,120 --> 02:04:54,000
जो जीवात्माएं

1644
02:04:54,000 --> 02:04:58,240
हैं वो कहां कहीं ना कहीं तो रहेंग। तो 21 ब्रह्मांड पहले

1645
02:04:58,240 --> 02:05:02,240
उनका एक मिनट। 21 ब्रह्मांड पहले उनका रहने की रहने का स्थान था।

1646
02:05:02,240 --> 02:05:06,400
वो हो गया नष्ट। तो कहां रहेंग यह तो कोई एक अलग से एक और शक्ति

1647
02:05:06,400 --> 02:05:10,560
है जो व्यवस्था देखती है। वो व्यवस्था क्या देखती

1648
02:05:10,560 --> 02:05:14,880
है? किस तरीके से प्रधानमंत्री है मान लो वो मर गया

1649
02:05:14,880 --> 02:05:19,360
तो क्या होता है जो संविधान होता है उसके हिसाब से परमात्मा

1650
02:05:19,360 --> 02:05:23,520
ने परमात्मा अपने लोक में रहता है। उसने कानून बना के छोड़

1651
02:05:23,520 --> 02:05:27,520
दिए हैं। ऑटोमेटिकली उस सिस्टम से चलता है। मान लो

1652
02:05:27,520 --> 02:05:31,520
ये जो पृथ्वी घूम रही है इसके अंदर क्या है? परमात्मा का वो वचन

1653
02:05:31,520 --> 02:05:35,520
काम कर रहा है। तो वो वचन के हिसाब से ये ऑटोमेटिकली चल रही है।

1654
02:05:35,520 --> 02:05:39,520
इसमें पेट्रोल डालने वाला कोई मैकेनिक नहीं है। पेट्रोल ले डालना भूल गया तो वो

1655
02:05:39,520 --> 02:05:43,520
बंद हो जाएगी। क्या होता है कि परमात्मा ने जो सिस्टम बना दिया

1656
02:05:43,520 --> 02:05:47,520
कि जिस प्रकार से इस चीज के लिए यह सिस्टम बनेगा वो

1657
02:05:47,520 --> 02:05:51,600
बीज रूप में अपने आप शिफ्ट होके वही रखा रह जाता

1658
02:05:51,600 --> 02:05:55,600
है। ऐसे अरबों खरबों ब्रह्मांड है परमात्मा वो जाता नहीं

1659
02:05:55,600 --> 02:05:59,600
है देखने के लिए चेक करने के लिए चल रही है या नहीं चल रही। अरे मैं यह नहीं कह रहा हूं

1660
02:05:59,600 --> 02:06:03,680
कि मैं यह पूछ रहा हूं जाता नहीं

1661
02:06:03,680 --> 02:06:08,400
है यानी कि परमात्मा ने अपनी एक शक्ति इस काम पे लगा रखी है। सीधी बात

1662
02:06:08,400 --> 02:06:10,000
है ना

1663
02:06:10,000 --> 02:06:14,000
परमात्मा की एक वो शक्ति का नाम क्या है? ऑटोमेटिकली चल रही है।

1664
02:06:14,000 --> 02:06:18,400
वो शक्ति का नाम क्या है? जो लगा रखी है इस काम पे। परमात्मा का वचन है। भगवान

1665
02:06:18,400 --> 02:06:22,480
के वचन से परमात्मा ने किसी को बिठा थोड़ी रखा है। शक्ति

1666
02:06:22,480 --> 02:06:26,560
कहां है? अभी पृथ्वी घूम रही है जो यानी एक मिनट एक मिनट मैं समझ गया

1667
02:06:26,560 --> 02:06:30,640
मैं समझ गया। मैं समझ गया हां वो उसमें भगवान की शक्ति है मैं समझ

1668
02:06:30,640 --> 02:06:34,720
गया भगवान की एक वचन वचन है कि भैया अगर

1669
02:06:34,720 --> 02:06:38,720
कोई व्यक्ति विभचारी भक्ति करेगा तो भले ही उसको काल रोके

1670
02:06:38,720 --> 02:06:42,720
या ना रोके मगर उसको सतलोक नहीं आने देना उसकी व्यवस्था तुमको करनी है कहां रहना है

1671
02:06:42,720 --> 02:06:46,800
क्या करना है ठीक है सतलोक आने के लिए परमात्मा ने नियम बना

1672
02:06:46,800 --> 02:06:50,800
रखे है अलग नियम क्या है वो वो नियम ही शक्ति के रूप

1673
02:06:50,800 --> 02:06:55,280
में सब जगह है वो निर्णय कर लेते हैं किस आत्मा को कहा रखना है ठीक है

1674
02:06:55,280 --> 02:06:59,440
वो परमात्मा जब इस सतलोक से बाहर जाता है कभी भी

1675
02:06:59,440 --> 02:07:03,520
नीचे के लोकों में अंतर पुरुष परम काल के

1676
02:07:03,520 --> 02:07:08,240
लोक में आएगा तो उस परमात्मा का एक नियम है वो स्वयं परमात्मा

1677
02:07:08,240 --> 02:07:12,320
उसको लेने के लिए जाता है यदि वो उस भक्ति को एक्सेप्ट करता है तो

1678
02:07:12,320 --> 02:07:16,400
ही वो इस लोक में आ सकता है नहीं तो वो वही पड़े रहेंगे मैं

1679
02:07:16,400 --> 02:07:20,480
समझ गया मतलब भगवान ने अपनी एक अपनी एक वचन शक्ति कर

1680
02:07:20,480 --> 02:07:24,640
रखी है शब्द शक्ति जो यह देखती है कि जिसने अभी

1681
02:07:24,640 --> 02:07:25,200
तक सही

1682
02:07:25,200 --> 02:07:29,440
कर्म नहीं किए सतलोक आने आने लायक उसको ना आने दिया जाए।

1683
02:07:29,440 --> 02:07:33,600
अगर अगर नियम अलग है भाई साहब इसका नियम अलग है। वो नियम

1684
02:07:33,600 --> 02:07:37,600
मैं नहीं कह रहा हूं। मैं नियम नहीं कह रहा हूं। मैं यह कह रहा हूं कि कोई एक शक्ति

1685
02:07:37,600 --> 02:07:41,760
है जो यह व्यवस्था देखती है कि सतलोक आने योग्य जो

1686
02:07:41,760 --> 02:07:45,840
नहीं हुआ है उसको अभी सतलोक नहीं आने देना है। भले ही काल और काल के लोक मर जाए,

1687
02:07:45,840 --> 02:07:50,560
खत्म हो जाए। पूर्ण परमात्मा खुद होता है

1688
02:07:50,560 --> 02:07:54,640
दायरे से बाहर यानी सतलोक से नीचे वाले लोकों में यदि

1689
02:07:54,640 --> 02:07:58,720
वो गिर चुका है तो स्वयं पूर्ण परमात्मा को उसको

1690
02:07:58,720 --> 02:08:02,720
लेने के लिए समझाने के लिए साथ में लाने का हकदार वो

1691
02:08:02,720 --> 02:08:07,040
पूर्ण परमात्मा है उसको वहां से पकड़ के ला भाई साहब मैं पूछ क्या रहा हूं

1692
02:08:07,040 --> 02:08:11,360
मैं मेरा प्रश्न ये था कि जब काल के लोग खत्म हो गए काल खत्म हो गया

1693
02:08:11,360 --> 02:08:15,440
तो सबसे पहली बात तो यह है कि वो आत्माएं रहेंगी कहां पर कौन से लोक

1694
02:08:15,440 --> 02:08:19,520
में रहेंगी रूप में रहेंग व आप एक बात बताओ जो समुंदर

1695
02:08:19,520 --> 02:08:23,760
में एक बहुत बड़ा जो है ना तूफान आ गया तो तूफान आने

1696
02:08:23,760 --> 02:08:28,160
से मछली मर गई वो व जो मरे हुए वही पड़े रहेंगे एज इट

1697
02:08:28,160 --> 02:08:32,160
यानी कि यानी कि ये जो ये जो प्रलय होती है जो काल की

1698
02:08:32,160 --> 02:08:36,400
जो काल की प्रलय होती है इसमें पृथ्वी वगैरह का सर्वनाश नहीं होता है।

1699
02:08:36,400 --> 02:08:40,320
हो जाता है कंप्लीट बिल्कुल जैसे ये जो है ना आपस में

1700
02:08:40,320 --> 02:08:44,560
पूरी घुल मिल के खत्म हो जाते हैं तो धारक तत्व कौन सा है फिर

1701
02:08:44,560 --> 02:08:48,960
कहां पर एक्सिस्ट करेगी वो आत्मा जो है कौन सी आत्मा

1702
02:08:48,960 --> 02:08:53,040
आत्मा कोई मरती थोड़ी आत्मा तो अरे मैं कहा कह रहा हूं मरती है भाई साहब मेरा

1703
02:08:53,040 --> 02:08:57,120
प्रश्न ये है कि जब पहले उसका रूप में रह जाती है कहां पे रहती

1704
02:08:57,120 --> 02:09:01,120
है वो उसी जैसे बीज रूप में कहां रहती है वही रहती है

1705
02:09:01,120 --> 02:09:06,400
आप तो कह रहे हो पृथ्वी नष्ट हो गई पृथ्वी पे रहती तो ठीक भी था कहां रहती है आकाश

1706
02:09:06,400 --> 02:09:10,560
इसका बहुत सूक्ष्म रूप हो जाता है। छोटा हो जाता है। आकाश में रहती

1707
02:09:10,560 --> 02:09:14,560
है या भगवान में रहती है या दिव्य उसका वर्णन नहीं किया

1708
02:09:14,560 --> 02:09:19,360
जा सकता। 21 ब्रह्मांड 21 ब्रह्मांड कहा चल रहा है आपको पता है?

1709
02:09:19,360 --> 02:09:23,520
अंतरिक्ष में चल रहा है। सृष्टि के अंदर चल रहा है। तो सृष्टि 21 ब्रह्मांड

1710
02:09:23,520 --> 02:09:27,680
जो है ये कहां पर है? ये बताओ इसकी व्यवस्था कहां पर है? सब कुछ

1711
02:09:27,680 --> 02:09:33,280
भगवान के अंदर ही है। सियाराम में सब जगह जाना।

1712
02:09:33,280 --> 02:09:37,360
सियाराम कहां है? यार आपने कहा तो आप आप तो मुझे अपनी बात

1713
02:09:37,360 --> 02:09:41,600
बता दो ना। आप मेरी बात मत मानो। मैं कहां कह रहा हूं कि मेरी बात मानो। मैं आपसे अपनी

1714
02:09:41,600 --> 02:09:47,600
आपकी बात पूछ रहा हूं। मेरी बात हां

1715
02:09:47,760 --> 02:09:51,840
देखिए देखिए मैं सुनिए चर्चा बहुत अच्छी जा रही है। दो

1716
02:09:51,840 --> 02:09:56,080
चीजें पहले जो मैटर चल रहे हैं दो क्लियर है। सारे मैटर सॉल्व कर दूंगा। सुनिए

1717
02:09:56,080 --> 02:10:00,240
तो क्लियर तो हो जाए। क्लियर हो जाए। मैटर हैं। करूंगा मैं एक-एक

1718
02:10:00,240 --> 02:10:04,240
बात क्लियर करूंगा। हां हां करिए। आप सुनते नहीं हो आप बीच में। नहीं

1719
02:10:04,240 --> 02:10:08,400
नहीं ऐसा है ना आप मेरे प्रश्न का जवाब देने की बजाय दो चार बातें अपनी और बोल

1720
02:10:08,400 --> 02:10:12,480
करके विस्तार कर देते हो जवाब दूंगा तभी दूंगा हां

1721
02:10:12,480 --> 02:10:16,480
हां तो मेरे को पहले एक हेडलाइन हेडलाइन हेडलाइन क्लियर कर देने

1722
02:10:16,480 --> 02:10:22,480
दो सबसे पहली बात तो ये है कि हां

1723
02:10:23,120 --> 02:10:27,200
सुनो एक वोट होता है ना अरे भाई मैं पहले हेडलाइन

1724
02:10:27,200 --> 02:10:31,280
क्लियर कर दूं काल जैसे मरता है तो अपनी मौत मरता है कोई उसे

1725
02:10:31,280 --> 02:10:35,600
मारता है यह बताइए जी भैया सुनो मेरी बात मैं कल सुबह

1726
02:10:35,600 --> 02:10:39,600
कॉल करना मैं एक्चुअली ना गाड़ी चला रहा हूं हाईवे पे मैं अच्छा अच्छा केवल

1727
02:10:39,600 --> 02:10:43,600
इतना बता दो आप ये सृष्टि रचना लिखी कहां पर है आपकी जो आपकी सृष्टि

1728
02:10:43,600 --> 02:10:47,840
रचना है ये इसके लिए भाग एक भाग दो भाग

1729
02:10:47,840 --> 02:10:51,920
तीन और आठ भाग भाई साहब आपसे आपसे फोन क्यों लगाया वो तो मैं

1730
02:10:51,920 --> 02:10:56,160
देख चुका हूं वो मैं देख चुका हूं मुझे अपने पुराण अपने पुराण मैंने पढ़

1731
02:10:56,160 --> 02:11:00,480
लिए अपने पुराण सारे पढ़ाएंगे आपको

1732
02:11:00,480 --> 02:11:05,520
अरे भैया तुम नाम बताओ ना अध्याय कौन कौन सा आपकी सृष्टि रचना का?

1733
02:11:05,520 --> 02:11:09,680
अरे भाई साहब समझ में नहीं आई। अरे आप ज्ञान चर्चा ज्ञान चर्चा आप करने के लिए आपका

1734
02:11:09,680 --> 02:11:13,840
नंबर दिया गया है। तो आप मुझे केवल आज भाग चार सुना दी आप

1735
02:11:13,840 --> 02:11:18,080
ये भाग कंप्लीट सुनो फिर बात करेंगे। अरे भैया एक और दो

1736
02:11:18,080 --> 02:11:23,760
मतलब ये कहां का नियम है? एक और

1737
02:11:23,760 --> 02:11:28,080
राउंड राउंड घुमाने के बाद

1738
02:11:28,080 --> 02:11:32,080
ये तो मैं थोड़ा सा व्यक्ति के साथ थोड़ा और खेल लेता

1739
02:11:32,080 --> 02:11:36,240
हूं थोड़ा सा नहीं तो जैसे ही वो आया ना टू

1740
02:11:36,240 --> 02:11:40,880
स्टॉप द ट्रेन पुल द चेन हो गया

1741
02:11:40,880 --> 02:11:44,960
तो अब मैं कहता हूं भाई उसको फोन लगा करके वह तो कह रहा हाईवे पर गाड़ी चला

1742
02:11:44,960 --> 02:11:49,870
रहा है वह भी बात नहीं कर पाएगा

1743
02:11:49,870 --> 02:11:55,870
[गला साफ़ करने की आवाज़]

1744
02:11:56,480 --> 02:12:00,480
जो भी आ रहा है मन में बोल दे रहे हैं। कह रहा हूं काल के

1745
02:12:00,480 --> 02:12:04,720
कारण बंधन में काल खत्म तो कौन किसके बंधन में वचन

1746
02:12:04,720 --> 02:12:08,960
के बंधन में यानी कोई वचन व्यवस्था है जो देखती है कि भैया यह काल

1747
02:12:08,960 --> 02:12:12,960
सतलोक नहीं पहुंचेगा। यह अब यहां रहेगा यानी कोई शक्ति है। अकाल

1748
02:12:12,960 --> 02:12:16,960
मरा कैसे? यानी कोई शक्ति है। तो यह जो मरा मरना और

1749
02:12:16,960 --> 02:12:21,040
कहीं पर रहना और वहां ना जाना इसके लिए कर्म फल व्यवस्था है। अब

1750
02:12:21,040 --> 02:12:25,040
जो कर्म फल व्यवस्था है वो अपने आप में कोई अलग से सिस्टम तो है नहीं जिसकी

1751
02:12:25,040 --> 02:12:29,360
अपनी बुद्धि हो या तो एक और सत्ता माननी पड़ेगी। अब वो सत्ता

1752
02:12:29,360 --> 02:12:34,000
अगर हो गई और वो यह सब कर पा रही है तो उसको सर्व नियंता मानना पड़ेगा। सर्वशक्तिमान

1753
02:12:34,000 --> 02:12:40,000
मानना पड़ेगा। मुक्त मानना पड़ेगा तो दो भगवान हो जाएंगे।

1754
02:12:40,320 --> 02:12:44,400
दो भगवान हो जाएंगे। इस ओर ले जा रहा था। या तो

1755
02:12:44,400 --> 02:12:48,480
यह मानना पड़ेगा कि भगवान ही यह व्यवस्था स्वयं देखते हैं। तो फिर

1756
02:12:48,480 --> 02:12:52,560
मानना पड़ेगा कि भगवान के ही बंधन में है। फिर मानना

1757
02:12:52,560 --> 02:12:55,280
पड़ेगा माया।

1758
02:12:55,280 --> 02:12:59,520
ये सब बहुत ऊंचे लेवल की बातें हैं। खैर अब इनसे प्रमाण ही पूछेंगे सीधे

1759
02:12:59,520 --> 02:13:05,520
सृष्टि रचना का।

1760
02:13:11,520 --> 02:13:15,760
ऐसे ही इनकी बैंड बजाएंगे। आश्रम बरवाला प्रतिदिन स्वागत

1761
02:13:15,760 --> 02:13:20,000
है। संत रामपाल जी महाराज से प्रार्थना करने और प्रार्थना

1762
02:13:20,000 --> 02:13:24,000
का आदेश पता करने के लिए एक दबाएं। संत रामपाल जी

1763
02:13:24,000 --> 02:13:28,320
महाराज से नाम दीक्षा की जानकारी के लिए कृपया दो दबाएं।

1764
02:13:28,320 --> 02:13:34,320
संत रामपाल जी महाराज द्वारा लिखित पुस्तक

1765
02:13:34,400 --> 02:13:38,640
कृपया ना आपका कॉल हमारे लिए महत्वपूर्ण

1766
02:13:38,640 --> 02:13:44,640
है। जल्द ही हमारे प्रतिनिधि आपसे बात करेंगे।

1767
02:13:44,640 --> 02:13:48,880
हाईवे पे गाड़ी चला रहा है। कहीं से

1768
02:13:48,880 --> 02:13:52,400
जय श्री राम।

1769
02:13:52,400 --> 02:13:56,560
हां जी। भाई साहब मैंने वहां फोन लगाया। मैंने षष्ठी रचना का प्रमाण

1770
02:13:56,560 --> 02:14:00,560
मांगा। कि रामपाल जी जो षष्ठी रचना बता रहे हैं अपने

1771
02:14:00,560 --> 02:14:04,640
वीडियोस में वह षष्ठी रचना का प्रमाण कहां है?

1772
02:14:04,640 --> 02:14:08,720
तो उन्होंने यही कहा कि भाई मैं हाईवे पर गाड़ी चला रहा हूं फिर बात करूंगा

1773
02:14:08,720 --> 02:14:13,840
मैं आपसे।

1774
02:14:13,840 --> 02:14:17,760
जय श्री राम।

1775
02:14:17,760 --> 02:14:22,000
जय जय श्री राम।

1776
02:14:22,000 --> 02:14:26,000
हो गया। चलो दूसरा मिलाते

1777
02:14:26,000 --> 02:14:30,400
हैं।

1778
02:14:30,400 --> 02:14:36,400
8280

1779
02:14:46,480 --> 02:14:50,480
इसको कहते हैं सृष्टि रचना की रामपाली सृष्टि रचना की

1780
02:14:50,480 --> 02:14:56,160
मौत संत रामपाल जी महाराज से प्रार्थना करने

1781
02:14:56,160 --> 02:15:00,240
के लिए ई दबाएं आराम से नाम दीक्षा

1782
02:15:00,240 --> 02:15:03,600
की चाल

1783
02:15:03,600 --> 02:15:07,920
कृपया लाइव पर बने रह कॉल हमारे लिए महत्वपूर्ण

1784
02:15:07,920 --> 02:15:12,000
है जल्द ही हमारे प्रतिनिधि आपसे बात करेंगे

1785
02:15:12,000 --> 02:15:16,000
अभी तक हम इस पर आ गए हैं कि काल के बंधन में

1786
02:15:16,000 --> 02:15:22,000
नहीं है व्यक्ति क्योंकि काल मर रहा है तब भी वो बंधन में है

1787
02:15:22,640 --> 02:15:27,040
हेलो हां जी ये जो

1788
02:15:27,040 --> 02:15:31,360
रामपाल जी सृष्टि रचना बता रहे हैं अपने वीडियोस में तीन

1789
02:15:31,360 --> 02:15:35,680
तीन और चार तारीख को और आगे इसके प्रमाण कहां पर है सृष्टि रचना

1790
02:15:35,680 --> 02:15:39,920
के संत रामपाल जी महाराज वीडियो में बता रहे

1791
02:15:39,920 --> 02:15:44,080
वहां जा नहीं नहीं प्रमाण नहीं दिया उन्होंने अपने जो

1792
02:15:44,080 --> 02:15:48,240
उनकी जो सृष्टि रचना उसका प्रमाण नहीं है वो काल का उत्पन्न

1793
02:15:48,240 --> 02:15:52,240
होना फिर वो दुर्गा का दुर्गा ये प्रकृति का

1794
02:15:52,240 --> 02:15:56,400
हाथ उठाना काल की ओर अट्रैक्ट होना इसका प्रमाण कहां इसका

1795
02:15:56,400 --> 02:16:02,160
कोई भाग है ना जो फर्स्ट भाग है ना

1796
02:16:02,160 --> 02:16:06,160
है ना उसी में बता रखा है ठीक है जी नहीं प्रमाण नहीं है

1797
02:16:06,160 --> 02:16:10,240
ना मैं बोल तो आप बता दो ना बता रखा है तो आप बता दो मुझे मेरे को तो नहीं

1798
02:16:10,240 --> 02:16:14,240
मिला देखो प्रमाण सहित वहां पे बताया गया अरे भाई साहब आप

1799
02:16:14,240 --> 02:16:18,240
उनके शिष्य हो ना देखो आप अपने लाइव प्रमाण

1800
02:16:18,240 --> 02:16:18,740
यानी कि वो

1801
02:16:18,720 --> 02:16:23,600
वीडियो भी चला सकते हो। अरे भाई साहब मैं पूछ रहा हूं आप उनके शिष्य हो कि नहीं?

1802
02:16:23,600 --> 02:16:27,840
अरे सुनो भैया बता तो रहे हैं आपको आप अपने चाहो तो लाइव

1803
02:16:27,840 --> 02:16:31,840
तो आप ये क्यों बता रहे हो आप तो वो प्रमाण बता दो ये वाला ग्रंथ

1804
02:16:31,840 --> 02:16:36,480
है ये अध्याय ये श्लोक है यहां लिखा है देखो दुर्गा ने हाथ उठाया

1805
02:16:36,480 --> 02:16:40,480
हम भी देख रहे है आप तो बैठे-बैठे आप वीडियो चलाओ जरा कौन सा वीडियो

1806
02:16:40,480 --> 02:16:44,560
विडियो चला दो अरे मैं क्यों चलाऊं भाई आप अपना वीडियो

1807
02:16:44,560 --> 02:16:48,720
चला के मुझे प्रमाण दे दो ना ताकि सारे लोग देखेंगे

1808
02:16:48,720 --> 02:16:52,880
हकीकत इसलिए चलाओ आप आप मुझे मैं नहीं चला सकता

1809
02:16:52,880 --> 02:16:56,880
भाई मेरे पर कॉपीराइट क्लेम भेज चुके हो आप लोग और बोलो

1810
02:16:56,880 --> 02:17:01,040
अरे वो तो YouTube भेजेगा ना मैं क्यों भेजूंगा आपको अरे तो आप किसके व्यक्ति हो

1811
02:17:01,040 --> 02:17:05,440
किससे बात कर रहा हूं मैं सतलोक आश्रम के प्रतिनिधि से ना

1812
02:17:05,440 --> 02:17:09,760
तो सतलोक आश्रम वाले कॉपीराइट भेज चुके हैं मुझे

1813
02:17:09,760 --> 02:17:14,160
सतलोक आश्रम के प्रतिनिधि आपको बता रहे हैं कि संत रामपाल

1814
02:17:14,160 --> 02:17:18,320
जी महाराज जी ने प्रमाण दे रखा है आप चलाने की बात पे जोर दे रहे हो तो मैंने कहा

1815
02:17:18,320 --> 02:17:22,400
कॉपीराइट भेजते हैं मैं नहीं चलाऊंगा अपने पे आप मुझे ये बता दीजिए बहुत सारे

1816
02:17:22,400 --> 02:17:26,400
लाइव बहुत सारे चैनलों पे लाइव चल रहा है। उनको तो कॉपीराइट नहीं आया।

1817
02:17:26,400 --> 02:17:30,560
तो इससे मैं क्या करूं? पता नहीं कौन उनका जानी दुश्मन हो किसको भेज दे। भाई

1818
02:17:30,560 --> 02:17:33,760
अगर बहुत सारे लोग बिना टिकट के यात्रा करते हैं इसका मतलब ये नहीं

1819
02:17:33,760 --> 02:17:38,080
कि टिकट बिना टिकट यात्रा करना वैध हो जाएगा।

1820
02:17:38,080 --> 02:17:40,400
ठीक है?

1821
02:17:40,400 --> 02:17:44,640
अब आप मुझे बताइए कि सृष्टि रचना का प्रमाण कहां है? जहां पर वो

1822
02:17:44,640 --> 02:17:48,880
जहां पर षष्ठी रचना का प्रमाण जहां पर दुर्गा ने हाथ उठाया प्रकृति

1823
02:17:48,880 --> 02:17:52,880
ने हाथ उठाया और वो जो काल है वो 21

1824
02:17:52,880 --> 02:17:56,960
ब्रह्मांडों का वो मालिक है और उसने जो है जबरदस्ती की ये सब ये

1825
02:17:56,960 --> 02:18:00,960
इनके श्लोक क्रमांक बताइए मुझे कहां पर है आपको

1826
02:18:00,960 --> 02:18:05,120
जो भी प्रमाण चाहिए आप वीडियो चला यानी आपको नहीं पता है

1827
02:18:05,120 --> 02:18:11,120
शंका समाधान करने वालों को नहीं है पता

1828
02:18:12,000 --> 02:18:18,000
शंका समाधान करने वालों को नहीं पता है ना

1829
02:18:28,000 --> 02:18:32,080
हो गया इनका।

1830
02:18:32,080 --> 02:18:36,080
अरे भाई बोलिए दावे करते हो आप लोग। भाई

1831
02:18:36,080 --> 02:18:42,080
हां तो ऐसे बोलो ना कि मैं बता रहा हूं।

1832
02:19:43,440 --> 02:19:43,940
अरे

1833
02:19:43,760 --> 02:19:47,680
कब तक लाइन पर रखोगे?

1834
02:19:47,680 --> 02:19:53,680
लाइन पर रहो।

1835
02:20:15,680 --> 02:20:19,840
बेचारों की बड़ी बुरी दशा है। बाबा ने कहां फंसा दिया?

1836
02:20:19,840 --> 02:20:24,880
अच्छा बाबा ने भी नहीं फंसाया है। मैंने देखा कि एआई के वीडियोस हैं।

1837
02:20:24,880 --> 02:20:29,040
उसमें एआई की भी आवाज आ रही है। क्योंकि रामपाल ऐसे

1838
02:20:29,040 --> 02:20:33,040
धारा प्रवाह बोलता ही नहीं है। और दूसरी बात है तो अभी इतना

1839
02:20:33,040 --> 02:20:37,440
एआई इतना एडवांस नहीं हुआ। बिल्कुल उसमें भाव आ जाए मनुष्यत्व वाले।

1840
02:20:37,440 --> 02:20:41,600
तो रामपाल जब बोलता है तो मनुष्य वाले भाव आते हैं उसमें कि हां भाई कोई

1841
02:20:41,600 --> 02:20:45,760
मनुष्य बोल रहा है वो रामपाल की आवाज जब वह एआई वाली

1842
02:20:45,760 --> 02:20:50,080
होती है तो सीधे जैसे कोई रीड करता है ना चीजों को ऐसे बोल रहा है

1843
02:20:50,080 --> 02:20:56,080
वो आपको समझ में आएगा

1844
02:20:56,160 --> 02:21:00,720
भैया कब तक लाइन पे रखना है

1845
02:21:00,720 --> 02:21:02,880
हेलो

1846
02:21:02,880 --> 02:21:07,920
स्कूल से लाइन पर रहो आप कब तक रहना है लाइन पे भाई साहब सुबह तक रखोगे क्या

1847
02:21:07,920 --> 02:21:12,000
एक टाइम आपसे बात नहीं हो जा रही है तब तक एक टाइम बता दो आप पांच मिनट

1848
02:21:12,000 --> 02:21:16,080
10 मिनट या तो 15 मिनट 15 मिनट तक लाइन

1849
02:21:16,080 --> 02:21:20,240
पर रहो आप 15 मिनट तक लाइन पर चलो ठीक है आज

1850
02:21:20,240 --> 02:21:24,320
15 मिनट तक रहते हैं दो घंटे 21 हो रहे हैं।

1851
02:21:24,320 --> 02:21:28,480
ठीक है भाई ढूंढ लो आप

1852
02:21:28,480 --> 02:21:32,640
तब तक हम लोग एक कार्य करते हैं छर और अक्षर

1853
02:21:32,640 --> 02:21:36,640
वाली बात देख लेते हैं रामपाल की बहुत सी चीजें

1854
02:21:36,640 --> 02:21:40,640
तो वैसे देख चुके हैं

1855
02:21:40,640 --> 02:21:45,520
हालांकि मैं बहुत देर से बोल रहा हूं और आज उपवास भी है

1856
02:21:45,520 --> 02:21:49,440
तो उपवास

1857
02:21:49,440 --> 02:21:53,200
थोड़ा सा

1858
02:21:53,200 --> 02:21:57,600
शरीर में ऊर्जा का स्तर घटता हुआ दिखाई दे रहा है।

1859
02:21:57,600 --> 02:21:59,840
खैर

1860
02:21:59,840 --> 02:22:03,600
अ

1861
02:22:03,600 --> 02:22:09,600
खैर अक्षर वाली बात करते हैं।

1862
02:22:22,160 --> 02:22:28,160
उसको कहते हैं रामपाली सृष्टि रचना की मौत।

1863
02:22:28,240 --> 02:22:32,240
तो भैया रामपाल का एक दावा है कि 15व अध्याय के शायद

1864
02:22:32,240 --> 02:22:36,320
15 से 17 श्लोक में जो तीन तरह के भगवान

1865
02:22:36,320 --> 02:22:40,480
की बात हुई है। छर पुरुष,

1866
02:22:40,480 --> 02:22:45,680
अक्षर पुरुष और फिर इन सबसे परे है पुरुषोत्तम पुरुष।

1867
02:22:45,680 --> 02:22:49,920
इसमें जो सीधी बात है कि पुरुष यहां पर पुरुष जो शब्द

1868
02:22:49,920 --> 02:22:53,920
है वह ब्रह्म का देवतक है। तो ब्रह्म जीव जगत और जगदीश्वर के रूप

1869
02:22:53,920 --> 02:22:57,920
में प्रकट होता है। तो उसी को बताया गया जीव यानी अक्षर पुरुष

1870
02:22:57,920 --> 02:23:02,560
जो है तो अविनाशी परंतु जो जगदीश्वर है

1871
02:23:02,560 --> 02:23:07,040
उसकी तरह मुक्त ना होने के कारण उससे थोड़ा उसका स्तर

1872
02:23:07,040 --> 02:23:11,280
नीचे है। तो जीव हो गया अक्षर पुरुष कभी ना नष्ट होने वाला

1873
02:23:11,280 --> 02:23:15,360
और जगदीश्वर वो तो है ही है पुरुषोत्तम और

1874
02:23:15,360 --> 02:23:19,120
क्षर पुरुष हो गया यानी प्रकृति ये मैंने आज से कई

1875
02:23:19,120 --> 02:23:24,560
बहुत समय पहले ये आपको प्रमाण दे दिया था

1876
02:23:24,560 --> 02:23:29,520
अब मैं इसका प्रमाण शिव पुराण से देता हूं कि छर अक्षर

1877
02:23:29,520 --> 02:23:35,520
क्या है और इनसे परे कौन

1878
02:23:37,440 --> 02:23:39,760
है

1879
02:23:39,760 --> 02:23:45,760
को रखा है कृपया

1880
02:23:49,040 --> 02:23:51,680
की

1881
02:23:51,680 --> 02:23:57,040
और

1882
02:23:57,040 --> 02:24:01,120
बात कर रही है

1883
02:24:01,120 --> 02:24:07,120
तो भैया आप निकालिए अब

1884
02:24:12,560 --> 02:24:18,240
शिव पुराण वायवीय समिता पूर्व खंड 51 16

1885
02:24:18,240 --> 02:24:24,240
निकालिए

1886
02:24:33,760 --> 02:24:36,720
और

1887
02:24:36,720 --> 02:24:41,360
आप से

1888
02:24:41,360 --> 02:24:47,040
रखा है बनी रहे

1889
02:24:47,040 --> 02:24:50,400
और

1890
02:24:50,400 --> 02:24:54,720
आप से बात कर रहे हैं उनके कॉल को

1891
02:24:54,720 --> 02:25:00,720
पर रखा है कृपया पर

1892
02:25:06,160 --> 02:25:12,160
है

1893
02:25:16,190 --> 02:25:21,360
[हंसी]

1894
02:25:21,360 --> 02:25:27,360
को रखा है लाइव पर बने रहिए

1895
02:25:27,440 --> 02:25:33,440
सोचिए कौन हो [हंसी]

1896
02:25:35,600 --> 02:25:39,200
पर रखा है

1897
02:25:39,200 --> 02:25:45,200
हां ये देखिए क्या लिखा है

1898
02:25:45,280 --> 02:25:49,520
प्रकृति को ही क्षर कहा गया मैंने क्या कहा जीव जगत और जगदीश्वर बन के प्रकट

1899
02:25:49,520 --> 02:25:53,920
होते हैं प्रकृति को ही क्षर कहा गया है

1900
02:25:53,920 --> 02:25:58,000
पुरुष उस जीव को अक्षर कहते हैं। और जिन जो इन दोनों से परे है

1901
02:25:58,000 --> 02:26:02,000
वह अक्षर और अक्षर दोनों से भिन्न तत्व ही परमेश्वर है। अब

1902
02:26:02,000 --> 02:26:08,000
ये परमेश्वर कौन है यह भी समझ लीजिए कौन है परमेश्वर।

1903
02:26:08,000 --> 02:26:14,000
तो पांचवे अध्याय के ही 11व और 13 वे श्लोक को निकालिए।

1904
02:26:22,560 --> 02:26:27,200
यह देखिए बहुत बढ़िया श्लोक है और यह उन लोगों के लिए भी है ये श्लोक

1905
02:26:27,200 --> 02:26:32,560
जो पशुपतिनाथ होने के कारण

1906
02:26:32,560 --> 02:26:36,560
पशुपतिनाथ होने के कारण कुत्ते को भी ले जा रहे हैं

1907
02:26:36,560 --> 02:26:40,800
मंदिर में आने वाले समय में उन मूर्खों

1908
02:26:40,800 --> 02:26:44,880
की बात कर रहा हूं मैं कि अरे वो तो पशुपतिनाथ है तो कुत्ता भी ले जाओ फिर

1909
02:26:44,880 --> 02:26:48,880
आने वाले टाइम में सूअर को भी अंदर अंदर ले जाना, गधों को अंदर

1910
02:26:48,880 --> 02:26:52,880
ले जाना और वहां पर सब शुद्धिकरण करवाना वहां

1911
02:26:52,880 --> 02:26:57,120
का तुम जैसे लोग अपने धर्म का इस प्रकार से अपमान

1912
02:26:57,120 --> 02:27:01,360
करते हैं ना तब इन जैसे लोगों का जन्म होता है। हमारा प्रमाद ही ये रामपाल

1913
02:27:01,360 --> 02:27:06,080
है। जिस दिन हम सुधर गए रामपाल जैसे लोग गायब हो जाएंगे।

1914
02:27:06,080 --> 02:27:10,560
तो सुनो ये लो भाई इसने काट दिया। काट

1915
02:27:10,560 --> 02:27:14,400
दिया भाई इसने भाग गया।

1916
02:27:14,400 --> 02:27:19,040
भाग गया। काट के भाग गया।

1917
02:27:19,040 --> 02:27:23,280
इसीलिए कहते हैं मत पड़ो चक्कर में। कोई

1918
02:27:23,280 --> 02:27:28,080
नहीं है टक्कर में। ठीक है?

1919
02:27:28,080 --> 02:27:34,080
लगभग 9 मिनट 49

1920
02:27:34,720 --> 02:27:39,040
नहीं 12 मिनट 18 सेकंड हमारा कॉल चला और भाग गया।

1921
02:27:39,040 --> 02:27:41,760
खैर

1922
02:27:41,760 --> 02:27:45,920
तो भैया इनसे हमने सृष्टि रचना का प्रमाण पूछा। एक मिनट एक मिनट बड़ी कर दीजिए

1923
02:27:45,920 --> 02:27:49,920
स्क्रीन तो इनसे हमने सृष्टि रचना का प्रमाण पूछा है। यह कहता है कि हम

1924
02:27:49,920 --> 02:27:54,240
शास्त्रों से सृष्टि रचना बता रहे हैं। शास्त्रों में सृष्टि रचना

1925
02:27:54,240 --> 02:27:58,480
का एक घटनाक्रम है ही नहीं। और इसका हमने आपको प्रमाण दे दिया।

1926
02:27:58,480 --> 02:28:03,120
शिव पुराण में बताया गया है कि कल्प कल्प भेद से

1927
02:28:03,120 --> 02:28:07,520
जो ब्रह्मा विष्णु महेश है वह एक दूसरे से उत्पन्न होते रहते हैं। वस्तुतः

1928
02:28:07,520 --> 02:28:11,600
ये तीनों एक ही है। एक ही परम तत्व के तीन रूप है।

1929
02:28:11,600 --> 02:28:15,840
जिसकी प्रधानता का वर्णन जिस कल्प में होता है, वह

1930
02:28:15,840 --> 02:28:19,840
इन तीनों में से एक के रूप में स्वयं अपने जैसे शिव जी की

1931
02:28:19,840 --> 02:28:24,480
प्रधानता का वर्णन है शिव पुराण वाले कल्प में तो

1932
02:28:24,480 --> 02:28:28,640
जब ब्रह्मा, विष्णु, महेश उत्पन्न होंगे तो उसमें स्वयं शिव जी महेश

1933
02:28:28,640 --> 02:28:33,440
के रूप में आएंगे। तो इस तरीके से यह देवता का

1934
02:28:33,440 --> 02:28:37,520
किसी एक नियामक शक्ति के रूप में देवता का देवता की भूमिका भी

1935
02:28:37,520 --> 02:28:38,400
निभाते हैं।

1936
02:28:38,400 --> 02:28:42,560
लीला करते हैं और लीला पूर्वक वहां पर तो है ही परम सत्य के रूप में।

1937
02:28:42,560 --> 02:28:46,640
ठीक है? ब्रह्मा विष्णु को अपने ही अंग से प्रकट करते हैं। अंबिका को अपने

1938
02:28:46,640 --> 02:28:51,600
ही अंग से प्रकट करते हैं। और क्या चाहिए आप लोगों को?

1939
02:28:51,600 --> 02:28:56,080
खैर

1940
02:28:56,080 --> 02:29:00,160
तो इससे हमने जब प्रमाण पूछा रामपाल जो बकवास

1941
02:29:00,160 --> 02:29:04,720
कर रहा है अपने उसमें इससे हमने जब प्रमाण पूछा कि रामपाल

1942
02:29:04,720 --> 02:29:09,040
जो अपने वीडियो में ये थोथाम थोथा चना

1943
02:29:09,040 --> 02:29:13,040
वाला जो ड्रामा कर रहा है डम डम डिगा डिगा का

1944
02:29:13,040 --> 02:29:17,200
उसमें जो वो सृष्टि रचना बता रहा है उसका प्रमाण का है तो ये भाग गए एक बोला मैं हाईवे

1945
02:29:17,200 --> 02:29:21,200
पे गाड़ी चला रहा हूं कल बात करूंगा और दूसरा होल्ड करके

1946
02:29:21,200 --> 02:29:27,120
रख के भाग गया। पर बात ऐसी है कि

1947
02:29:27,120 --> 02:29:31,440
सृष्टि रचना अगर ये जो रामपाल कहता है अगर उसको मान ले तो हमारे सारे शास्त्र

1948
02:29:31,440 --> 02:29:35,520
झूठे हो जाएंगे। क्योंकि शास्त्र कह रहे हैं कल्पांतर से सृष्टि रचना का जो क्रम होता

1949
02:29:35,520 --> 02:29:40,240
है घटनाक्रम होते हैं वो बदलते हैं थोड़े-थोड़े। कई

1950
02:29:40,240 --> 02:29:44,640
कभी रुद्र से ब्रह्मा विष्णु की उत्पन्न उत्पत्ति होती है। कभी ब्रह्मा

1951
02:29:44,640 --> 02:29:48,720
से रुद्र और विष्णु की उत्पत्ति होती है। कभी विष्णु से इन दोनों की उत्पत्ति होती है।

1952
02:29:48,720 --> 02:29:52,880
चल बदलता रहता है। और जिस रूप से यह क्रम

1953
02:29:52,880 --> 02:29:53,440
प्रारंभ

1954
02:29:53,440 --> 02:29:57,680
होता है जैसे विष्णु रूप से जो सृष्टि का प्रारंभ होगा, कल्प का प्रारंभ होगा

1955
02:29:57,680 --> 02:30:01,840
तो फिर वहां पर उनकी शक्ति के रूप में लक्ष्मी आएंगी। फिर

1956
02:30:01,840 --> 02:30:05,920
आगे का प्रवाह चलेगा। इसी प्रकार से जब शिव रूप

1957
02:30:05,920 --> 02:30:09,920
से जब प्रारंभ होगा कल्प का तो उनकी शक्ति के रूप में कौन आएंगी?

1958
02:30:09,920 --> 02:30:13,920
अंबिका तो इस तरीके से वो शिव की पत्नी भी हुई और

1959
02:30:13,920 --> 02:30:18,240
क्योंकि अंबिका के आने के बाद संसार का निर्मित

1960
02:30:18,240 --> 02:30:22,240
होना फिर उसमें ब्रह्मा विष्णु महेश नामक नियामक शक्ति के रूप

1961
02:30:22,240 --> 02:30:26,480
में भगवान का स्वयं फिर से अपनी सृष्टि में प्रकट होना लीला रूप में

1962
02:30:26,480 --> 02:30:31,600
तो उस रूप में वो त्रिदेव जननी भी कहलाती है। ठीक है ना?

1963
02:30:31,600 --> 02:30:35,600
उनको प्रकट करने वाली होने के रूप में और भगवान का जन्म और कर्म दिव्य

1964
02:30:35,600 --> 02:30:39,600
है। तो गीता में भी लिखा है। मैं अजन्मा अविनाशी होते हुए भी अपनी योग

1965
02:30:39,600 --> 02:30:43,680
माया को अपने अधीन करके योग माया को अपने अधीन करके यानी कि ये भगवान की

1966
02:30:43,680 --> 02:30:47,680
शक्ति उनके साथ में है। उनकी स्वरूप भूता उनको अधीन करके

1967
02:30:47,680 --> 02:30:51,840
फिर प्रकट होते हैं। उसी संसार में कितना सरल है।

1968
02:30:51,840 --> 02:30:55,840
बेकार में आप लोगों ने जटिल बना रखा है। खैर इसको समझ लेते हैं छर

1969
02:30:55,840 --> 02:30:59,920
अक्षर वाले को। तो [गला साफ़ करने की आवाज़]

1970
02:30:59,920 --> 02:31:04,000
छर और अक्षर कौन क्या है? करिए खोलिए

1971
02:31:04,000 --> 02:31:06,160
उसको

1972
02:31:06,160 --> 02:31:09,680
छर और अक्षर क्या है?

1973
02:31:09,680 --> 02:31:13,840
तो 11 से 13 में देखिए क्या है? मैं

1974
02:31:13,840 --> 02:31:18,080
मैं भी खोल लेता हूं यहां पर। [गला साफ़ करने की आवाज़] कौन

1975
02:31:18,080 --> 02:31:24,080
सा प्रश्न है ये?

1976
02:31:24,160 --> 02:31:28,320
अध्याय पांच 736

1977
02:31:28,320 --> 02:31:33,040
ये आ गया

1978
02:31:33,040 --> 02:31:37,040
अक्षर ही पशु कहा गया है। 13वा 13वा

1979
02:31:37,040 --> 02:31:41,760
श्लोक अक्षर ही पशु कहा गया। तो जो लोग पशुपतिनाथ

1980
02:31:41,760 --> 02:31:45,760
नाम होने के कारण शिव मंदिरों में कुत्ते को सूअर इत्यादि को ले जाने

1981
02:31:45,760 --> 02:31:49,920
की बातें कर रहे हैं। क्योंकि आज कह रहे हैं कि भाई कुत्तों को ले जाओ। कल को सूअरों

1982
02:31:49,920 --> 02:31:54,080
को भी ले जाओगे। उनके लिए मुंह पर तमाचा है

1983
02:31:54,080 --> 02:31:58,160
और अक्षर अक्षर और अक्षर से परे भगवान शिव

1984
02:31:58,160 --> 02:32:02,400
ही है पूर्ण पुरुषोत्तम है ना उनको पुरुषोत्तम ना मानने

1985
02:32:02,400 --> 02:32:06,480
वालों और अक्षर और अक्षर और परम ब्रह्म इन तीन भगवानों की बात करने

1986
02:32:06,480 --> 02:32:10,480
वाले रामपालियों जैसे के मुंह पर भी यह तमाचा है तो क्या

1987
02:32:10,480 --> 02:32:15,120
है अक्षर ही पशु कहा गया है यानी जीव

1988
02:32:15,120 --> 02:32:19,680
अक्षर क्या है जीव उसको पशु कहा गया है क्यों कहा गया जीव को पशु

1989
02:32:19,680 --> 02:32:24,080
क्योंकि वो पास में फस जाता है। पाश क्या है? छर।

1990
02:32:24,080 --> 02:32:24,800
पास क्या है?

1991
02:32:24,800 --> 02:32:29,120
छर। जो नाशवान है। अक्षर क्या है? जो नाशवान नहीं है। तो छर

1992
02:32:29,120 --> 02:32:33,360
रूपी पास में जो जीव है वो फस जाता है। इसलिए पास

1993
02:32:33,360 --> 02:32:37,920
में फंसने वाले को पशु कहा गया। और जो इनके सर्व नियंता

1994
02:32:37,920 --> 02:32:42,080
इनके नियामक हैं। इनके उद्धारक हैं भगवान शिव।

1995
02:32:42,080 --> 02:32:46,400
वो हो गए पशुपति। साफ साफ लिखा हुआ है।

1996
02:32:46,400 --> 02:32:50,560
तो आज के बाद जो लोग यह बोलते हैं ना पशुपतिनाथ है कुत्तों को

1997
02:32:50,560 --> 02:32:54,800
ले जाओ शिवलिंग में स्पर्श करवाओ। उनको

1998
02:32:54,800 --> 02:32:58,880
ये प्रमाण दिखाना कि पशुपतिनाथ का अर्थ क्या है? ठीक

1999
02:32:58,880 --> 02:33:02,880
है? तो 13वा 13वा देखिए क्या है?

2000
02:33:02,880 --> 02:33:07,760
अक्षर ही पशु कहा गया है। क्षर तत्व ही

2001
02:33:07,760 --> 02:33:11,840
क्षर तत्व का ही नाम पास है। तथा क्षर और अक्षर दोनों से

2002
02:33:11,840 --> 02:33:16,000
परे जो परम तत्व है उसी को पति या पशुपति कहते

2003
02:33:16,000 --> 02:33:20,240
हैं। फिर एक श्लोक छोड़ के

2004
02:33:20,240 --> 02:33:24,640
फिर देखिए वायुदेव क्या बोल रहे हैं। पशु प्रकृति

2005
02:33:24,640 --> 02:33:29,280
को ही छर कहा गया है। मैंने कहा था जीव जगत और जगदीश्वर प्रकृति

2006
02:33:29,280 --> 02:33:33,920
को ही छर कहा गया है। हम

2007
02:33:33,920 --> 02:33:38,160
वायुदेव क्या बोले उसका याद आ जाता है

2008
02:33:38,160 --> 02:33:40,720
राघव दास का

2009
02:33:40,720 --> 02:33:44,880
पादुर्भाव प्रकृति को ही छर कहा गया है पुरुष

2010
02:33:44,880 --> 02:33:49,040
को अक्षर कहते हैं जो इन दोनों को प्रेरित करता है वह क्षर और अक्षर से दोनों से भिन्न

2011
02:33:49,040 --> 02:33:53,040
तत्व परमेश्वर कहा गया है अब वो परमेश्वर कौन है ये भी यही आसपास

2012
02:33:53,040 --> 02:33:57,280
के श्लोकों में हमें प्राप्त हो जाता है कौन परमेश्वर है पशुपतिनाथ

2013
02:33:57,280 --> 02:34:03,280
तो मिल ही गया हमको ठीक ठीक है तो

2014
02:34:06,320 --> 02:34:10,400
वो परमेश्वर कौन है वो गिरजा का

2015
02:34:10,400 --> 02:34:16,400
पति जो अभी हमने पहले श्लोक जो बताए थे बता रहा हूं आपको

2016
02:34:38,480 --> 02:34:41,120
शिव पुराण

2017
02:34:41,120 --> 02:34:45,360
यही वायवीय समिता पूर्व खंड छ 23 छ

2018
02:34:45,360 --> 02:34:49,520
23 हां देखिए यहां पर साफ देखिए हां ये वाला भी देख लीजिए

2019
02:34:49,520 --> 02:34:53,600
पुरुष प्रेरक पुरुष वाला कि इनके के जो प्रेरक पुरुष है

2020
02:34:53,600 --> 02:34:57,760
वह कौन है? शिव। शिव ही इनके प्रेरक पुरुष है। वह तो

2021
02:34:57,760 --> 02:35:01,840
यहीं पे आ गया। छर और अक्षर से परे कौन है? ठीक है?

2022
02:35:01,840 --> 02:35:07,840
अब आगे हम देख लेते हैं।

2023
02:35:10,560 --> 02:35:14,560
शिव पुराण वायवी समिता और

2024
02:35:14,560 --> 02:35:18,000
पूर्व खंड

2025
02:35:18,000 --> 02:35:24,000
छ 23

2026
02:35:34,560 --> 02:35:38,800
ये देखिए

2027
02:35:38,800 --> 02:35:42,960
6 23 में इनको परम पुरुष कहा जा रहा है।

2028
02:35:42,960 --> 02:35:46,960
ठीक है? पुरुषोत्तम का अलग से दे देंगे प्रमाण। छ 23 में इनको

2029
02:35:46,960 --> 02:35:51,600
परम पुरुष कहा जा रहा है। देखिए संस्कृत दिखा दीजिए इनको।

2030
02:35:51,600 --> 02:35:56,480
इन्हें परम पुरुष कहते हैं। संस्कृत में भी देख लीजिए। पुरुषम परम।

2031
02:35:56,480 --> 02:36:01,040
ठीक है? और अब नीचे आ जाइए।

2032
02:36:01,040 --> 02:36:05,040
एक श्लोक छोड़ के नीचे आइए। मैं उस जरा रहित सर्वव्यापी तथा

2033
02:36:05,040 --> 02:36:09,360
सर्वज्ञ पुराण पुरुष को जानता हूं जिनके ध्यान से जन्म मरण आदि का निरोध

2034
02:36:09,360 --> 02:36:12,480
हो जाता है।

2035
02:36:12,480 --> 02:36:16,720
यह देखिए जिनके ध्यान से जन्म मरण आदि

2036
02:36:16,720 --> 02:36:21,280
का निरोध हो जाता है। वे अकेले महेश्वर ही सर्वप्रथम

2037
02:36:21,280 --> 02:36:25,280
अपनी शक्ति के साथ मिलकर बहुत प्रकार से इन तीनों लोकों

2038
02:36:25,280 --> 02:36:29,680
की सृष्टि करते हैं और अंत में उसका संहार भी करते हैं।

2039
02:36:29,680 --> 02:36:31,920
ठीक है?

2040
02:36:31,920 --> 02:36:33,040
इसीलिए कहते हैं मत

2041
02:36:33,040 --> 02:36:37,280
पड़ो चक्कर में और देख लीजिए इधर इससे

2042
02:36:37,280 --> 02:36:43,280
जस्ट पहले वाले पष्ठ पर आ जाइए 141 श्लोक निकालिए

2043
02:36:48,000 --> 02:36:53,600
सृष्टि के आरंभ में एक ही रुद्र देव विद्यमान रहते हैं।

2044
02:36:53,600 --> 02:36:57,600
दूसरा कोई नहीं होता। वे ही इस जगत की सृष्टि करके

2045
02:36:57,600 --> 02:37:01,920
इसकी रक्षा करते हैं और अंत में सबका संहार कर डालते हैं।

2046
02:37:01,920 --> 02:37:06,480
यह जो शास्त्र है ना पुराण वेद

2047
02:37:06,480 --> 02:37:10,560
में थोड़ा आपको ढूंढना पड़ेगा। ठीक है? मगर जब जैसे

2048
02:37:10,560 --> 02:37:14,640
आप शिव पुराण खोलोगे तो शिव की महिमा है। प्रचंड रूप

2049
02:37:14,640 --> 02:37:18,640
से और रामपाल कहता है इन शास्त्रों में शिव का निषेध है।

2050
02:37:18,640 --> 02:37:23,200
पूर्ण ब्रह्म कहा है। सृष्टि के आरंभ में एक रुद्र देव

2051
02:37:23,200 --> 02:37:29,200
विद्यमान रहते हैं। दूसरा कोई नहीं।

2052
02:37:29,440 --> 02:37:34,880
यही सृष्टि करते हैं। फिर रक्षा करते हैं। अंत में सबका संहार कर डालते हैं।

2053
02:37:34,880 --> 02:37:38,880
ये समार वाले तत्व से याद आया कि समार अगर उसको माना

2054
02:37:38,880 --> 02:37:42,880
जाए महाप्रलय को तो कबीर ही करेगा। अंत तो कबीर को आना

2055
02:37:42,880 --> 02:37:46,880
पड़ेगा समार के लिए। वो मान नहीं रहा था। वचन से होता है। वचन के

2056
02:37:46,880 --> 02:37:50,880
रूप में कबीर ही है। फस जाता अभी वह ज्यादा देर बात

2057
02:37:50,880 --> 02:37:53,760
करता तो

2058
02:37:53,760 --> 02:37:57,920
अच्छा हुआ उसे पादुर भाव याद आ गया। हायवे याद आ गया।

2059
02:37:57,920 --> 02:38:01,360
ठीक है। हर्ष

2060
02:38:01,360 --> 02:38:05,360
शास्त्रवाद जी आप आइए। फिर हम विराम देते हैं आज की चर्चा

2061
02:38:05,360 --> 02:38:11,360
को।

2062
02:38:12,240 --> 02:38:16,320
तो आज हमने क्या जान लिया है कि यह जो छरोक्षर

2063
02:38:16,320 --> 02:38:20,320
वाली गु्थी है ना सबसे बड़ी बात तो इसमें भगवान स्वयं के लिए कह रहे हैं मैं ही

2064
02:38:20,320 --> 02:38:24,320
पुरुषोत्तम हूं और वहां छर अक्षर वो तीन प्रकार के भगवान

2065
02:38:24,320 --> 02:38:28,400
की बात नहीं हो रही है जीव जगत जगदीश्वर की बात हो रही है ये प्रमाण देख लिया

2066
02:38:28,400 --> 02:38:32,480
हमने और अगर मान लो उनसे परे पुरुषोत्तम है भी तो भगवान श्री कृष्ण

2067
02:38:32,480 --> 02:38:36,720
स्वयं है उनके लिए पुरुषोत्तम बहुत बार आया है शिव जी के लिए पुरुषोत्तम हमने आपको

2068
02:38:36,720 --> 02:38:40,960
दिखा दिया पुरुषोत्तम शब्द शिव जी के लिए हमने

2069
02:38:40,960 --> 02:38:44,960
आपको दिखा दिया। एक बार और दिखा दीजिए। एक

2070
02:38:44,960 --> 02:38:49,120
एक दो में दिखा दीजिए। भरे पड़े हैं। जहां से शुरू करोगे वही

2071
02:38:49,120 --> 02:38:53,360
प्रमाण मिल जाएगा। एक एक दो

2072
02:38:53,360 --> 02:38:57,920
ये है एक एक दो रुद्र समिता षष्ठी खंड।

2073
02:38:57,920 --> 02:39:02,000
कितने प्रमाण दे भाई? प्रमाण लेते लेते थक जाओगे। गिनते गिनते

2074
02:39:02,000 --> 02:39:07,040
थक जाओगे।

2075
02:39:07,040 --> 02:39:11,360
इनके पास कोई शास्त्रोक्त खंडन तो है नहीं। यह शिवश सिर्फ

2076
02:39:11,360 --> 02:39:17,360
वीडियो में क्यूआर कोड लगाकर यह है वो है।

2077
02:39:18,880 --> 02:39:23,440
हां इसमें आइए एक एक से दो

2078
02:39:23,440 --> 02:39:27,680
सृष्टि खंड एक एक से दो यानी

2079
02:39:27,680 --> 02:39:33,680
पहला अध्याय

2080
02:39:34,800 --> 02:39:39,600
बच नहीं पाएगा रामपाल जिस दिन आ गया ना ज्ञानार्थक

2081
02:39:39,600 --> 02:39:45,600
दृष्टि से वो क्या है

2082
02:39:47,120 --> 02:39:52,480
गला पकड़ ले जब पापी का हो

2083
02:39:52,480 --> 02:39:57,520
सांस वही थम जाए वो वाली बात है

2084
02:39:57,520 --> 02:40:01,600
तो [गला साफ़ करने की आवाज़] क्या लिखा है मैं स्वभाव

2085
02:40:01,600 --> 02:40:06,880
से उन शांत स्वरूप अनादि

2086
02:40:06,880 --> 02:40:10,880
पुरुषोत्तम शिव की वंदना करता हूं। पुरुषोत्तम हो गए

2087
02:40:10,880 --> 02:40:14,880
शिव हो गए और ये वही शिव है जो गिरजा के

2088
02:40:14,880 --> 02:40:20,160
पति हैं। इससे पहले वाला श्लोक दिखा दो भैया।

2089
02:40:20,160 --> 02:40:24,320
ये वही शिव है। ये वही शिव है जो जटा में गंगा और गरे में डारे

2090
02:40:24,320 --> 02:40:28,320
फिर रहे सांप। जिनकी शिवलिंग से पूजा होती है। जिनकी भक्ति से

2091
02:40:28,320 --> 02:40:32,400
अभी हमने देखा जन्म और मरण से मुक्ति होती है। गिरिराज कुमारी युमा के

2092
02:40:32,400 --> 02:40:36,720
पति तत्वज्ञ। ठीक है।

2093
02:40:36,720 --> 02:40:41,120
बस करिए आज के लिए बच्चों की पढ़ाई बहुत है रामपालियों की। बाकी

2094
02:40:41,120 --> 02:40:45,440
फिर कभी कृपा करेंगे उनके ऊपर।

2095
02:40:45,440 --> 02:40:49,840
हां जी शास्त्रवाद जी आपने कुछ विचार रखे फिर हम लोग काफी लंबी हो गई।

2096
02:40:49,840 --> 02:40:54,000
आज विराम देंगे। जबरदस्त है। आज तो जबरदस्त हुआ। एक एक पोल

2097
02:40:54,000 --> 02:40:58,000
पट्टी खुल गई। कल से अगली बार चैट जीपीटी का उपयोग करेंगे हम लोग

2098
02:40:58,000 --> 02:41:02,480
ये दिखाने के लिए कि कितना सरल है रामपाल फड़ की बातों का खंडन

2099
02:41:02,480 --> 02:41:06,480
मगर अगली बार जो है ना कोई स्पीकर डिवाइस रख लेंगे

2100
02:41:06,480 --> 02:41:10,560
तो उसको लगा के जिससे आवाज जो उसकी उसका स्वर बहुत

2101
02:41:10,560 --> 02:41:14,560
तेज आए ध्वनि बढ़ जाए है ना जो आज थोड़ा सा

2102
02:41:14,560 --> 02:41:18,640
लोगों को परेशानी हो रही हो आवाज ठीक है और कैमरे का स्टैंड का

2103
02:41:18,640 --> 02:41:22,640
एक एक मुख्य पार्ट था वो कहीं खो

2104
02:41:22,640 --> 02:41:27,120
गया है तो अगर कोई सहायता करना चाहता हूं। कैमरे स्टैंड की जरूरत है हमें।

2105
02:41:27,120 --> 02:41:31,280
वह संपर्क कर सकता है। हां जी शास्त्रवाद

2106
02:41:31,280 --> 02:41:35,360
जी। आज तो जबरदस्त हुआ भैया। इसकी पोल पट्टी

2107
02:41:35,360 --> 02:41:39,360
अच्छे से खुल गई है और आपने कॉल लगा

2108
02:41:39,360 --> 02:41:43,600
के भी उसको धो दिया। शास्त्रवाद जी संभवत उपलब्ध नहीं है।

2109
02:41:43,600 --> 02:41:47,840
आवाज नहीं आ रही। तो ठीक है। इतना पर्याप्त

2110
02:41:47,840 --> 02:41:53,520
है। काफी लंबी चर्चा हुई है। आप लोगों को काफी कुछ मालूम भी पड़ा।

2111
02:41:53,520 --> 02:41:57,600
फिर मिलेंगे इनकी बैंड बजाने के लिए। है

2112
02:41:57,600 --> 02:42:00,080
ना?

2113
02:42:00,080 --> 02:42:00,640
धोती

2114
02:42:00,640 --> 02:42:04,640
अचला में आया शिवश बैंड बजाने को। आवाज नहीं आ रहा

2115
02:42:04,640 --> 02:42:08,960
क्या? हेलो तो इनकी डमडंग डिगा करेंगे।

2116
02:42:08,960 --> 02:42:12,960
और बाकी किसी भी प्रकार के वैचारिक मतभेद

2117
02:42:12,960 --> 02:42:18,960
के लिए वीडियो के अंत में दिए गए नंबर पर संपर्क करें 7408301869

2118
02:42:19,040 --> 02:42:23,200
और जिसकी मां ने उसको निष्ठा पूर्वक दूध पिलाया हो। वह आकर

2119
02:42:23,200 --> 02:42:27,360
के रामपाल के बातों को फड़ बातों को डम डम

2120
02:42:27,360 --> 02:42:31,520
डिगा डिगा बातों को सही सिद्ध करें। अगर

2121
02:42:31,520 --> 02:42:35,760
वह रामपाल के किसी

2122
02:42:35,760 --> 02:42:39,760
बड़े YouTube चैनल अगर वह हमें कहीं बीच

2123
02:42:39,760 --> 02:42:43,920
की जगह पर चर्चा के लिए बुलाना चाहता है किसी न्यूट्रल स्थान पर तो उसे अपने

2124
02:42:43,920 --> 02:42:47,920
नाम को घोषित करवाना होगा रामपाल के किसी बड़े चैनल के

2125
02:42:47,920 --> 02:42:52,160
द्वारा जिसके फॉलोअर्स एक डेढ़ लाख

2126
02:42:52,160 --> 02:42:56,320
से ऊपर हो उसके द्वारा वो घोषणा करें जैसे अभी अभिषेक फैक्ट

2127
02:42:56,320 --> 02:43:00,400
बाय अभिषेक है वो वो कहे कि हमारी ओर से ये आ रहा है अगर

2128
02:43:00,400 --> 02:43:04,560
अगर हमें बीच के स्थान पर बुलाना है तो तो किसी बड़े चैनल से घोषणा करवा

2129
02:43:04,560 --> 02:43:08,640
लो अपना नाम नहीं तो रामपाल से घोषणा करवा लो अपना नाम नहीं तो हमारे

2130
02:43:08,640 --> 02:43:12,720
चैनल पर आ जाओ क्योंकि तुम्हें ऐसे व्यक्ति भी होने चाहिए ना जिसके लिए मैं अपना समय

2131
02:43:12,720 --> 02:43:17,360
निकालू और फिर जो है किसी बीच के स्थान को ढूंढू ये सब करूं

2132
02:43:17,360 --> 02:43:21,440
इसलिए ऐसे व्यक्ति होने चाहिए बाकी अगर आप नगण्य व्यक्ति

2133
02:43:21,440 --> 02:43:27,040
हो तो हमारे चैनल पर आपका स्वागत है आ जाओ हो जाए

2134
02:43:27,040 --> 02:43:31,280
बाकी एक जो व्यक्तिगत मेरा परामर्श है

2135
02:43:31,280 --> 02:43:36,320
मत पड़ो चक्कर में कोई है नहीं चक्कर में

2136
02:43:36,320 --> 02:43:40,320
जय श्री राम जय श्री राम सभी को जय श्री राम
