1
00:00:02,320 --> 00:00:06,560
तो जय श्री राम सभी को। आशा करता हूं आप सभी कुशल

2
00:00:06,560 --> 00:00:10,560
पूर्वक होंगे और

3
00:00:10,560 --> 00:00:14,640
जैसा कि आप सबको पता है हमारी लाइव चर्चा

4
00:00:14,640 --> 00:00:19,440
निर्धारित हुई है आर्य समाजी आचार्य हैं जो

5
00:00:19,440 --> 00:00:23,520
अग्निव्रत जी के साथ। तो उस संबंध

6
00:00:23,520 --> 00:00:28,000
में भी हम कुछ बातें करेंगे और मुझे लगता है कि

7
00:00:28,000 --> 00:00:33,760
हमारी जब

8
00:00:33,760 --> 00:00:38,320
चर्चा सुनिश्चित हो गई है। उसके बाद

9
00:00:38,320 --> 00:00:42,720
शायद उनका एक वीडियो निर्गत हुआ है जिसमें उन्होंने कुछ

10
00:00:42,720 --> 00:00:46,720
चीजें कही हैं। हमने भी पहली बार उनका कोई वीडियो तभी देखा। वैसे देखा था कि

11
00:00:46,720 --> 00:00:50,880
वो हैं। यह कहीं ना कहीं दिख जाता था। उनका फोटो वगैरह

12
00:00:50,880 --> 00:00:55,120
आर्य समाज के किसी कार्यक्रम में कहीं पर YouTube पर स्क्रॉलिंग

13
00:00:55,120 --> 00:00:59,120
में आ जाता था सामने शायद। तो हम यह जानते थे कि यह आर्य

14
00:00:59,120 --> 00:01:03,200
समाजी आचार्य हैं। पर हमने कभी ऐसा कुछ

15
00:01:03,200 --> 00:01:07,200
सुनने का प्रयास नहीं किया था उनकी ओर से। तो फिर

16
00:01:07,200 --> 00:01:11,440
भाई हमको जैसे कि उनके एक संदेश में हमें प्राप्त

17
00:01:11,440 --> 00:01:15,680
हुआ था उनका एक संदेश WhatsApp के माध्यम से तो उस संदेश

18
00:01:15,680 --> 00:01:17,440
में उन्होंने बताया था कि उनके लोग हमारे

19
00:01:17,440 --> 00:01:21,520
बारे में उन्हें बता रहे हैं। तो इसी प्रकार से उनके लोगों ने मतलब हमारे लोगों ने

20
00:01:21,520 --> 00:01:25,840
भी इनके बारे में हमको बताया। कुछ वीडियोस भेजे।

21
00:01:25,840 --> 00:01:29,840
तो जो इनका एक लेटेस्ट वीडियो है शायद चर्चा सुनिश्चित होने

22
00:01:29,840 --> 00:01:34,400
के बाद का ही है या शायद

23
00:01:34,400 --> 00:01:37,600
अ

24
00:01:37,600 --> 00:01:42,160
चर्चा सुनिश्चित होने से शायद एकद दिन पहले का होगा। उसमें भाव कुछ मिलेजुले

25
00:01:42,160 --> 00:01:46,240
से हैं। मतलब ऐसा भी लग रहा है कि चर्चा सुनिश्चित हो चुकी है और ऐसा भी

26
00:01:46,240 --> 00:01:50,240
लग रहा है कि चर्चा अभी सुनिश्चित नहीं हुई है। उससे पहले का जो उनके अंदर

27
00:01:50,240 --> 00:01:54,320
हमें लेकर के जो रोष है तो वह उसमें

28
00:01:54,320 --> 00:01:58,720
दिखाई दे रहा है कुल मिलाकर के। तो उसमें उन्होंने कुछ क्वेश्चंस

29
00:01:58,720 --> 00:02:02,800
उठाए हैं। कुछ यहां पर अभी सनातन शंकर जी

30
00:02:02,800 --> 00:02:08,240
भी जुड़ने वाले हैं और

31
00:02:08,240 --> 00:02:12,400
अनिकेत जी भी जुड़ेंगे और यह

32
00:02:12,400 --> 00:02:17,040
लाइव चर्चा आपको सनातन शंकर जी के चैनल पर भी दिखेगी। संभवत

33
00:02:17,040 --> 00:02:21,920
कुछ सेटिंग्स वगैरह हो पाई है कि नहीं क्योंकि थोड़ा सा समय कम रहता है।

34
00:02:21,920 --> 00:02:25,920
तो तकनीकी हाथ कमजोर है। पहले से ही बता दूं मैं

35
00:02:25,920 --> 00:02:30,000
आपको। हां। तो

36
00:02:30,000 --> 00:02:33,200
[खांसने की आवाज़]

37
00:02:33,200 --> 00:02:37,680
अ

38
00:02:37,680 --> 00:02:43,680
एक मिनट

39
00:02:58,560 --> 00:03:02,480
तो

40
00:03:02,480 --> 00:03:06,640
सबसे पहली बात उन्होंने मुझे जो मैंने हालांकि वो जो वीडियो है वो

41
00:03:06,640 --> 00:03:10,640
थोड़ी सरसरी निगाहों से देखा था तो उसमें मुझे

42
00:03:10,640 --> 00:03:15,360
एक सार जो समझ में आया वो कुछ दो तीन चीजें थी उनकी एक

43
00:03:15,360 --> 00:03:19,600
कि आर्य समाज पर प्रहार क्यों कर रहे हैं? आर्य समाज पर ही क्यों

44
00:03:19,600 --> 00:03:23,760
कर रहे हैं? और घुमा फिरा के शायद हमारी बात हो रही थी क्योंकि उन्होंने नाम

45
00:03:23,760 --> 00:03:27,920
लेकर के भी कहा कि गुरुदेव का नाम लिया था और फिर कहा कि उनके शिष्य

46
00:03:27,920 --> 00:03:33,920
जगह-जगह जाकर के इंटरव्यू कर रहे हैं और

47
00:03:33,920 --> 00:03:38,320
क्या कहते हैं

48
00:03:38,320 --> 00:03:42,640
इसमें उन्होंने बताया कि आर्य समाज की अच्छाइयां भी तो देखो। आर्य

49
00:03:42,640 --> 00:03:46,960
समाज ने यह किया है, वह वो किया है। तो आप क्यों

50
00:03:46,960 --> 00:03:51,360
ऐसा कर रहे हैं? फिर उन्होंने बाद में कुछ चीजों को लेकर के दयानंद

51
00:03:51,360 --> 00:03:57,360
जी के मत को भी या दयानंद जी के नाम से जो वर्तमान में जो

52
00:03:57,840 --> 00:04:02,320
सत्यार्थ प्रकाश जो छप रही है उसको लेकर के भी उन्होंने कुछ आपत्तियां

53
00:04:02,320 --> 00:04:07,280
प्रकट की जो क्रम से हम

54
00:04:07,280 --> 00:04:12,880
अभी लेने का प्रयास करेंगे।

55
00:04:12,880 --> 00:04:17,200
अनिकेत जी हमारे साथ जुड़ चुके हैं

56
00:04:17,200 --> 00:04:19,840
और

57
00:04:19,840 --> 00:04:24,080
अ उनका कहना था कि आर्य समाज ने बहुत सारे क्रांतिकारी दिए

58
00:04:24,080 --> 00:04:28,480
हैं। बहुत सी कुछ चीजें थी। मुझे लगता है कि मुझे

59
00:04:28,480 --> 00:04:32,640
इन बातों पर अपनी प्रतिक्रिया देनी आवश्यक है। इसलिए मैं उपस्थित हुआ हूं और

60
00:04:32,640 --> 00:04:37,440
वैसे भी क्योंकि हमारी चर्चा सुनिश्चित हो गई है। तो

61
00:04:37,440 --> 00:04:41,520
इस चर्चा को लेकर के जो दर्शक गण हैं

62
00:04:41,520 --> 00:04:47,520
उनमें भी एक कौतहल बना हुआ होगा कि भाई आज क्या होने वाला है

63
00:04:47,600 --> 00:04:51,680
तो कोई भी कार्य जो हम करते हैं निरर्थक नहीं होता है बहुत

64
00:04:51,680 --> 00:04:55,840
महत्वपूर्ण होता है और उसका बहुत सार अगर उसका सारगर्भित

65
00:04:55,840 --> 00:05:00,080
हम ध्यान दें तो बहुत ही

66
00:05:00,080 --> 00:05:04,560
जरूरी कार्य होता है तो वैसा ही एक ये वीडियो है अंत तक देखें बने रह

67
00:05:04,560 --> 00:05:08,640
और कुल मिलाकर के जो उन्होंने अपने वीडियोस में अपने

68
00:05:08,640 --> 00:05:12,640
वीडियो में यह वीडियो जिसमें उन्होंने इस तरह से नाम लिया कि पूरी

69
00:05:12,640 --> 00:05:17,040
शंकराचार्य जी का नाम लेकर के उन्होंने कहा कि उनके शिष्य जगह-जगह जाकर के आर्य समाज में इंटरव्यू

70
00:05:17,040 --> 00:05:21,040
ले रहे हैं और वीडियो का नाम डाला है आर्य समाज पर यह आक्रमण क्यों ये

71
00:05:21,040 --> 00:05:22,320
वीडियो भी स्क्रॉलिंग में

72
00:05:22,320 --> 00:05:26,560
मेरे सामने आया था पर मैंने उसे देखना जरूरी नहीं समझा पर फिर मुझे मेरे परिचितों

73
00:05:26,560 --> 00:05:30,560
ने जब ये चर्चा सुनिश्चित हो गई उसके बाद उन्होंने ये मुझे इसकी

74
00:05:30,560 --> 00:05:34,560
कटिंग भेजी तब मैंने देखा कि अरे इसमें तो हमारी हमें हम ही को लेकर के

75
00:05:34,560 --> 00:05:38,640
क्वेश्चन किया गया कि आर्य समाज पर ही आक्रमण क्यों तो सबसे पहले तो

76
00:05:38,640 --> 00:05:42,800
आपका स्वागत है सनातन शंकर जी जय श्री राम अनिकेत जी जय श्री

77
00:05:42,800 --> 00:05:47,760
राम जय श्री राम जी जय श्री राम जी

78
00:05:47,760 --> 00:05:51,760
अच्छा [गला साफ़ करने की आवाज़] मैं ये सोच रहा था कि जब तक आपकी वो डिबेट ना हो जाती तब तक हम

79
00:05:51,760 --> 00:05:55,840
इस विषय पर कुछ नहीं बोलेंगे क्योंकि ये वीडियो मैंने देखा था पहले भी आपने

80
00:05:55,840 --> 00:05:59,840
इस विषय को आज उठा ही दिया है तो फिर अब हम भी अपने पॉइंट रख ही

81
00:05:59,840 --> 00:06:04,000
देंगे इसमें जी जी नहीं हम एक बात पहले ही क्लियर कर दे

82
00:06:04,000 --> 00:06:08,080
कि यहां पर जो है नकारात्मक रूप से ऐसा कुछ नहीं

83
00:06:08,080 --> 00:06:12,320
होने वाला बस एक जैसे उन्होंने अपना पक्ष रखा है तो उसी

84
00:06:12,320 --> 00:06:16,320
प्रकार से अपना पक्ष रखूंगा। पर सर्वप्रथम मैं एक बात कहना चाहूंगा कि जैसे

85
00:06:16,320 --> 00:06:20,640
मैंने उनको सुना और उनके कुछ वीडियोस देखे भी हैं अभी इन्हीं दो-तीन

86
00:06:20,640 --> 00:06:25,200
दिन में तो मैंने देखा कि इनकी शैली थोड़ी सी

87
00:06:25,200 --> 00:06:29,200
जो एक अपमानजनक शैली होती है आर्य समाजियों की

88
00:06:29,200 --> 00:06:33,360
यूजुअली है ना मूर्ति पूजकों के प्रति और

89
00:06:33,360 --> 00:06:37,840
क्योंकि वो जो एक आक्रामकता है सामान्य

90
00:06:37,840 --> 00:06:42,160
आर्य समाजियों में जनरल तरीके से अगर देखें और

91
00:06:42,160 --> 00:06:46,880
जो YouTube पर वक्ता के रूप में उपस्थित होते हैं उनमें

92
00:06:46,880 --> 00:06:50,880
तो उनमें उनसे इनकी शैली जो है काफी भिन्न मुझे प्राप्त हुई।

93
00:06:50,880 --> 00:06:54,960
उस तरह से आक्रामकता और जो है भड़काऊ भाषण

94
00:06:54,960 --> 00:06:59,760
जो है मुझे नहीं देखने को मिला। शैली इनकी अ

95
00:06:59,760 --> 00:07:04,560
ठीक थी और दूसरी बात एक ये भी देखी मैंने इनकी शब्दों में

96
00:07:04,560 --> 00:07:08,720
अ एक सम्मान की भावना भी देखी।

97
00:07:08,720 --> 00:07:12,720
अवमानना बहुत ज्यादा लेकर के हमारी परंपराएं जो

98
00:07:12,720 --> 00:07:17,440
हैं उनको लेकर के या हमारी मान्यताएं जो हैं जो मौलिक

99
00:07:17,440 --> 00:07:21,600
सनातन धर्म के जो घटक हैं उनको लेकर के इनकी जो

100
00:07:21,600 --> 00:07:25,680
शैली थी उसमें कोई ऐसा विनम्रता ही दिखी मुझे तो

101
00:07:25,680 --> 00:07:29,760
मैंने देखा तो उस चीज को तो हम भाई उसका स्वागत करते हैं। अभिनंदन

102
00:07:29,760 --> 00:07:34,080
करते हैं ऐसी शैली अपनाने का और इस तरह से ही सौहार्दपूर्ण वातावरण

103
00:07:34,080 --> 00:07:38,080
बना करके हम एकजुट एक मंच पर हो भी सकते हैं।

104
00:07:38,080 --> 00:07:42,240
है ना बिल्कुल मैं इसमें इनका अभिनंदन करूंगा इनकी जो शैली है तो

105
00:07:42,240 --> 00:07:46,880
हम लोग इसमें दोनों भागों में बात करेंगे कि

106
00:07:46,880 --> 00:07:50,880
इन्होंने अपनी वीडियो में जो प्रश्न उठाए हैं हमें लेकर के

107
00:07:50,880 --> 00:07:52,960
उन पर और फिर कुछ और

108
00:07:52,960 --> 00:07:57,280
जो तत्व हैं जो इनसे जुड़े हुए हैं इस वीडियो से या आने वाली

109
00:07:57,280 --> 00:08:01,520
उससे उससे पहले मैं चाहूंगा अगर सनातन शंकर जी कुछ अपनी बात रखना चाहे

110
00:08:01,520 --> 00:08:05,520
जो वीडियो में जो तथ्य हैं उन उनमें और उनके निराकरण

111
00:08:05,520 --> 00:08:09,600
में नहीं मगर एक अगर कुछ आप रखना चाहे शुरू करने से पहले तो आप

112
00:08:09,600 --> 00:08:13,920
रख दीजिए। जी जी बिल्कुल बिल्कुल और

113
00:08:13,920 --> 00:08:18,080
ये जो चर्चा आपकी होने वाली है काफी सौहार्दपूर्ण चर्चा हम देख रहे हैं इसको

114
00:08:18,080 --> 00:08:22,240
के एक अच्छी हमें चर्चा देखने को मिलेगी।

115
00:08:22,240 --> 00:08:26,480
बाकी उन्होंने जो वीडियो में बातें कही तो उन्होंने काफी

116
00:08:26,480 --> 00:08:30,560
जगह पर जो है जैसे गौ रक्षा आंदोलन की जो बात कही वहां पर उन्होंने कृपात्री

117
00:08:30,560 --> 00:08:34,640
जी महाराज जी का भी जो है वहां पर एक अच्छा ही

118
00:08:34,640 --> 00:08:39,200
पक्ष रखा है। हालांकि वो एक अलग बात है कि वह हर चीज में

119
00:08:39,200 --> 00:08:43,360
अपने पक्ष वालों को बीच में जरूर जोड़ते हैं। वो एक

120
00:08:43,360 --> 00:08:47,440
ठीक बात है क्योंकि हमें मिलकर ही चलना चाहिए बिना किसी

121
00:08:47,440 --> 00:08:51,520
का उपहास उड़ाए। जी बाकी और

122
00:08:51,520 --> 00:08:55,600
जो बातें हैं वो आगे हम बताएंगे इस वीडियो के माध्यम से रूप से चलेंग

123
00:08:55,600 --> 00:09:01,600
फिर अनिकेत जी आपको रखना चाहेंगे प्रीफिक्स के रूप में

124
00:09:08,000 --> 00:09:12,480
हां एक कमेंट आ रहा है जी

125
00:09:12,480 --> 00:09:16,560
हां शिव शर्मा जी शिवश जी आपने उनको पूरा

126
00:09:16,560 --> 00:09:20,640
सुना नहीं उनकी भाषा भी वैसी ऐसी है जैसे अन्य आर्य समाजियों

127
00:09:20,640 --> 00:09:24,800
की पर बिल्कुल खराब नहीं है। बस बस वही कह रहा हूं मैं वही कह रहा हूं। शैली

128
00:09:24,800 --> 00:09:28,800
है विरोध देखिए जो हमारा

129
00:09:28,800 --> 00:09:33,040
हमारी जानकारी जो है कि जो सनातन

130
00:09:33,040 --> 00:09:37,200
परंपरा है ज्ञान विज्ञान की वैदिक ज्ञान विज्ञान की

131
00:09:37,200 --> 00:09:41,280
उसके विरोध पर ही आर्य समाज का अस्तित्व है। तो स्वरूप

132
00:09:41,280 --> 00:09:45,680
भूत लक्षण है विरोध कटाक्ष भड़काऊ बातें करना

133
00:09:45,680 --> 00:09:49,760
उन परंपराओं के प्रति। ठीक है? ठीक है? यह स्वरूपभूत लक्षण हमें प्राप्त होता है

134
00:09:49,760 --> 00:09:53,920
आर्य समाज का। फिर उसमें थोड़ा सा अगर कोई विनम्र

135
00:09:53,920 --> 00:09:57,920
हो रहा है या थोड़ा सा लाइट हो रहा है तो लगता है कि भाई यह तो बड़ी

136
00:09:57,920 --> 00:10:02,160
हालांकि उनकी शैली में भी विरोध है जगह-जगह घुमा फिरा

137
00:10:02,160 --> 00:10:06,240
करके है पर कंपैरेटिवली वो एक

138
00:10:06,240 --> 00:10:10,400
होता है ना कि हमने जब इतना देखा है तब कोई इतना

139
00:10:10,400 --> 00:10:14,400
सा भी अंतर मिलता है तो लगता है कि चलो भाई यहां पे थोड़ी शांति है वो वाली

140
00:10:14,400 --> 00:10:18,480
बात है तो ऐसा नहीं है बिल्कुल वो नहीं

141
00:10:18,480 --> 00:10:22,720
है और विरोध तो है ही ठीक है तो अनंकेत जी आप कुछ अपनी बात रखना

142
00:10:22,720 --> 00:10:23,220
चाहेंगे

143
00:10:23,040 --> 00:10:29,040
या हम लोग शुरू करें

144
00:10:29,120 --> 00:10:33,120
ठीक है अनिकेत जी शायद अभी नहीं रख रहे हैं तो अभी जी आपकी

145
00:10:33,120 --> 00:10:37,280
आवाज नहीं आ रही है अंकित जी माइक

146
00:10:37,280 --> 00:10:39,920
देख लीजिए

147
00:10:39,920 --> 00:10:43,920
तो अभी जब यह चर्चा पूरी हो जाए मतलब हमारा जो मुख्य विषय है वो पूरा हो

148
00:10:43,920 --> 00:10:47,920
जाएगा तो थोड़ी देर के लिए हम कुछ लोगों को लेंगे भी विचार व्यक्त करने के

149
00:10:47,920 --> 00:10:51,920
लिए और कोई डिबेट वाला सीन नहीं है कि किसी

150
00:10:51,920 --> 00:10:56,240
को डिबेट के लिए आना है। उसके लिए किसी भी प्रकार के वैचारिक

151
00:10:56,240 --> 00:11:00,560
मतभेद के निमित्त YouTube पर चर्चा लाइव चर्चा

152
00:11:00,560 --> 00:11:04,640
करने के हेतु WhatsApp नंबर पर वो इस

153
00:11:04,640 --> 00:11:10,560
वीडियो के अंत में दिए गए नंबर पर WhatsApp करें। जी अनकित जी

154
00:11:10,560 --> 00:11:15,440
अनम्यूट कर भैया अभी आ रही है आवाज? हां अब आ रही है आवाज जी गुड

155
00:11:15,440 --> 00:11:19,840
आवाज आ रही है? आ रही है ना? बिल्कुल बिल्कुल आ रही है।

156
00:11:19,840 --> 00:11:24,080
हां तो हां तो

157
00:11:24,080 --> 00:11:28,160
यह है कि हमेशा लगभग सबका ऐसे ही

158
00:11:28,160 --> 00:11:34,160
रहता है कि जैसे इस हो गया ब्रह्मा कुमारी

159
00:11:36,240 --> 00:11:41,280
कुछ इंटरनेट का यह भी देखने मिलता है एक

160
00:11:41,280 --> 00:11:45,680
कुछ आपकी बात बीच में कट गई थी शुरू से ही बताइए आप

161
00:11:45,680 --> 00:11:50,720
कुछ नेट का दिक्कत चल रहा है आपके यहां हम

162
00:11:50,720 --> 00:11:54,800
हां शायद अभी आ रही है क्लियर अब आ रही है अब आ रही है कंटिन्यू आ रही है फ्लो

163
00:11:54,800 --> 00:12:00,720
में आ रही है

164
00:12:00,720 --> 00:12:04,800
मैं कह रहा हूं कि तकरीबन यह भी देखने मिलता है कि ब्रह्मा कुमारी

165
00:12:04,800 --> 00:12:08,800
हो गए या फिर इस हो गए या फिर यही आर्य समाज या कोई भी

166
00:12:08,800 --> 00:12:12,880
ऐसे हैं ग्रामपाली हो गए ये सब देखने को मिलता

167
00:12:12,880 --> 00:12:17,360
है कि हमारे यहां आइए हमारे यहां पर केवल हमारे यहां पर ही ऑथेंटिक

168
00:12:17,360 --> 00:12:21,360
ज्ञान दिया जाता है। केवल ये दर्शाने का प्रयास करता है।

169
00:12:21,360 --> 00:12:25,360
बाकी अन्य परंपरा जो है कभी यह नहीं कहते कि केवल हमारे पास

170
00:12:25,360 --> 00:12:29,840
है। वो यह कहते कि आपकी जहां पर आपका परंपरागत

171
00:12:29,840 --> 00:12:33,920
आचार्य में मन लगे आप वहां पर जाए।

172
00:12:33,920 --> 00:12:38,000
हम जैसे भगवान श्री कृष्ण ने सारा गीता का ज्ञान देने के बाद

173
00:12:38,000 --> 00:12:42,480
अर्जुन को कहा कि अब तुम्हारी अपनी इच्छा है। सिद्धांत हमने बता दिया।

174
00:12:42,480 --> 00:12:47,360
अकाट्य उसके बाद आपकी जहां श्रद्धा हो पा रही है। जिस कार्य में जिस

175
00:12:47,360 --> 00:12:51,600
विधि में उसका आप आलंबन लीजिए। बिल्कुल ठीक बात। तो मैं

176
00:12:51,600 --> 00:12:56,320
[गला साफ़ करने की आवाज़] सबसे पहले

177
00:12:56,320 --> 00:13:00,560
जो इनका वीडियो का जो टाइटल था

178
00:13:00,560 --> 00:13:05,040
आचार्य अग्निवत जी के वीडियो का उसमें टाइटल में था

179
00:13:05,040 --> 00:13:09,440
कि कि आर्य समाज पर ही आक्रमण

180
00:13:09,440 --> 00:13:13,600
क्यों? ठीक है? यह इनके वीडियो का टाइटल

181
00:13:13,600 --> 00:13:18,160
था। तो मतलब पहला प्रश्न यह आता है कि जो हम लोग हैं

182
00:13:18,160 --> 00:13:22,240
मैं हुआ आप हुए क्या अच्छा मूलत मेरी बात करें क्योंकि

183
00:13:22,240 --> 00:13:26,800
मैं जाता हूं इनके कई मंदिरों में जा चुका हूं और

184
00:13:26,800 --> 00:13:30,800
यदि आवश्यकता पड़ी तो आगे भी जाना जारी रहेगा और मुझे नहीं लगता आवश्यकता

185
00:13:30,800 --> 00:13:34,800
तो पड़ने ही वाली है तो आगे भी जाना जारी

186
00:13:34,800 --> 00:13:38,800
रहेगा अब वो बात अलग है कि इन्होंने अगर मेरे खिलाफ फतवा निकाल दिया है

187
00:13:38,800 --> 00:13:42,800
तो हो सकता है कि मेरे को वो इनके मंदिरों

188
00:13:42,800 --> 00:13:46,960
के बाहर एक जो है वांटेड टाइप से एक चेहरा [हंसी] दिखाई दे

189
00:13:46,960 --> 00:13:51,120
मेरा फोटो लगा हुआ कि इस आदमी के इस व्यक्ति के आते ही

190
00:13:51,120 --> 00:13:55,120
मंदिर में ताला लगा के भाग जाना। [हंसी] ये हो सकता

191
00:13:55,120 --> 00:13:59,060
है। खैर चलिए

192
00:13:59,060 --> 00:14:03,440
[गला साफ़ करने की आवाज़] तो अग्निवत जी का ऐसा मानना है कि हम केवल आर्य समाज

193
00:14:03,440 --> 00:14:08,080
को ही प्रश्न करते हैं और आर्य समाज के मंदिरों में जाकर के ही

194
00:14:08,080 --> 00:14:12,080
अ ये जो धार्मिक चर्चा है करते हैं। तो

195
00:14:12,080 --> 00:14:16,720
ये आपकी गलतफहमी है। इसमें होता क्या है? प्रॉब्लम यह है कि

196
00:14:16,720 --> 00:14:20,720
हम लोग धर्म का प्रचार बहुत करते हैं। प्रचार बहुत करते

197
00:14:20,720 --> 00:14:24,720
हैं पर उसको धारण नहीं करते। यह सबसे बड़ी समस्या है

198
00:14:24,720 --> 00:14:28,880
धार्मिक प्रचारकों में। बहुत बड़ी समस्या है।

199
00:14:28,880 --> 00:14:33,040
पूरे तरीके से सामने वाले का पक्ष जाने बिना ही निर्णय कर

200
00:14:33,040 --> 00:14:37,040
लेना। किस आधार पर? कि हमको जो आधी अधूरी जो सूचनाएं दी जा

201
00:14:37,040 --> 00:14:41,280
रही है उस आधार पर। नहीं। आप सामने वाले का पक्ष तो सुनिए।

202
00:14:41,280 --> 00:14:45,280
क्या है? कहां-कहां गया है? आपको जिसने बता दिया कि वो आर्य

203
00:14:45,280 --> 00:14:49,600
समाज के मंदिरों में जाते हैं। आपने मान लिया आपने वक्तव्य निर्गत कर दिया।

204
00:14:49,600 --> 00:14:53,680
उसने आपको अधूरी जानकारी दी। हम इस के मंदिर में भी जाते हैं।

205
00:14:53,680 --> 00:14:57,760
हम ब्रह्मा कुमारी के यहां भी जाते हैं। रामपाल को तो खदेड़ रखा है। यह सब

206
00:14:57,760 --> 00:15:01,920
उसने आपको नहीं बताया। तो ऐसा नहीं

207
00:15:01,920 --> 00:15:06,160
है कि हम सिर्फ आर्य समाज से ही प्रश्न कर रहे हैं। है ना?

208
00:15:06,160 --> 00:15:10,560
हम सनातन धर्म के नाम से जो जो व्यक्ति परंपरा

209
00:15:10,560 --> 00:15:14,160
प्राप्त सिद्धांतों का विरोध कर रहा है और जो जो एक किसी

210
00:15:14,160 --> 00:15:18,320
सशक्त कल्ट के रूप में उद्भाषित हो गया है। अभी बहुत से कल्ट हमारी

211
00:15:18,320 --> 00:15:22,400
लिस्ट में क्या कहते हैं लिखे हुए

212
00:15:22,400 --> 00:15:26,480
हैं। उन पर अभी हम नहीं जा पाए हैं। मगर आगे भविष्य में निकट भविष्य में वहां

213
00:15:26,480 --> 00:15:30,640
भी जाने की बारी है। और आपको बता दूं कि आर्य समाज का नंबर तो बाद

214
00:15:30,640 --> 00:15:34,880
में आया था। पहले इस से शुरुआत हुई थी। तो आपका यह जो टाइटल

215
00:15:34,880 --> 00:15:39,280
है ना यही अपने आप में बहुत संशय पूर्ण है जो यह प्रस्तुत करता है

216
00:15:39,280 --> 00:15:43,520
कि आपको हमारे विरोध में भटकाया गया। नहीं उससे पहले मुफ्ती

217
00:15:43,520 --> 00:15:47,600
मुफ्ती जी से भी हुई थी आपकी शुरुआत सबसे पहली शुरुआत वहीं से हुई थी शायद। जी

218
00:15:47,600 --> 00:15:51,760
जी वो वो एक अगला चरण है। अगला चरण

219
00:15:51,760 --> 00:15:56,720
मैं उस पर आ रहा हूं। उनके द्वारा जो तथ्य दिया गया है। जी जी तो

220
00:15:56,720 --> 00:16:00,880
अब मैं सबसे पहले एक रीजनिंग बता दूं। क्या है कि इन्होंने जो लाइव

221
00:16:00,880 --> 00:16:03,920
का वो दिया था।

222
00:16:03,920 --> 00:16:07,920
ट्रेलर इन्होंने दिया है जो लाइव इनके चैनल पर सुनिश्चित हुई है। तो

223
00:16:07,920 --> 00:16:12,000
उन्होंने वहां पर ट्रेलर एक दिया है। ट्रेलर में कहा है कि हमने उनको जो है आमने सामने से

224
00:16:12,000 --> 00:16:16,000
कहा मगर उन्होंने कहा कि नहीं ऐसे ऑनलाइन में ऑनलाइन का ही

225
00:16:16,000 --> 00:16:20,160
प्रस्ताव दिया। तो इनकी ओर से मुझे WhatsApp पे मैसेज

226
00:16:20,160 --> 00:16:24,160
आया था पहले सर्वप्रथम। उस मैसेज में थोड़ी सी मेरे को लेकर के

227
00:16:24,160 --> 00:16:28,240
कटाक्ष भी थे। हालांकि वह यहां पर रह बात करने का उनका कोई

228
00:16:28,240 --> 00:16:29,360
मतलब नहीं है क्योंकि

229
00:16:29,360 --> 00:16:33,520
वह कटाक्ष फिर जब मैंने आपत्ति प्रकट की कि जब आपको सैद्धांतिक चर्चा करनी

230
00:16:33,520 --> 00:16:37,600
है तो कटाक्षों से दूर ही बनाएं। तो कटाक्ष थे फिर उन्होंने उस मैसेज

231
00:16:37,600 --> 00:16:41,680
मैसेज को डिलीट कर दिया। फिर दूसरा मैसेज जो डाला मुझे वो एज

232
00:16:41,680 --> 00:16:45,840
इट इज इन्होंने ट्रेलर में लगाया है। वो जो कटाक्ष थे वो उसमें से गायब

233
00:16:45,840 --> 00:16:49,920
कर दिए। तो उस मैसेज में और यह

234
00:16:49,920 --> 00:16:54,160
जो ट्रेलर में लगाया इसमें एक सिमिलरिटी है यह दिखाने का हल्का सा प्रयास

235
00:16:54,160 --> 00:16:58,480
है कि मैं सामने से जब मुझे वहां बुलाया गया तो मैं नहीं गया

236
00:16:58,480 --> 00:17:02,640
और जो है मैंने लाइव लाइव मतलब उससे मैंने दूरी बनाई

237
00:17:02,640 --> 00:17:06,880
वो लाइव चर्चा के प्रति मैं हुआ और उसमें एक हेडलाइन

238
00:17:06,880 --> 00:17:11,280
थी कि ऐसा देखा गया है कि मैं आर्य समाज के मंदिरों में जाकर

239
00:17:11,280 --> 00:17:15,360
के शिवश नारायण द्विवेदी और हम प्रश्न करते हैं या चर्चा

240
00:17:15,360 --> 00:17:19,360
करते हैं या इंटरव्यू लेते हैं। तो अब इसमें दो बातें हैं।

241
00:17:19,360 --> 00:17:23,520
पहली बात है कि क्या मैं आर्य समाज के मंदिरों में जाकर के ही ऐसा करता हूं? नहीं

242
00:17:23,520 --> 00:17:27,760
मैं रामपाल के यहां पर पुलिस लेकर के गया हूं। वहां छापा डलवाया है। उसकी किताबें

243
00:17:27,760 --> 00:17:32,320
ढूंढी जा रही हैं। हाई कोर्ट में केस चल रहा है। ये सब चीजें जानिए।

244
00:17:32,320 --> 00:17:36,640
इन सब विषयों में हम और आप एक होंगे शायद। रामपाल जैसे

245
00:17:36,640 --> 00:17:40,800
से लड़ने में। ठीक है? दूसरी बात कि मैं

246
00:17:40,800 --> 00:17:44,640
अन्य कई ऐसे कल्ट्स बन चुके हैं, तंत्र

247
00:17:44,640 --> 00:17:48,640
बन चुके हैं जो जिनके यहां जाकर के मैं

248
00:17:48,640 --> 00:17:52,640
सवाल कर रहा हूं। अब बात आती है कि वो

249
00:17:52,640 --> 00:17:56,880
जो दूरी बनाने वाली बात है उसमें एक बात आती है कि आपने

250
00:17:56,880 --> 00:18:00,960
मुझे जो है आमने सामने से चर्चा करने का प्रस्ताव रखा। अब मेरे

251
00:18:00,960 --> 00:18:05,040
पास एक कॉल आता है जिसमें कि कोई एक लड़का है।

252
00:18:05,040 --> 00:18:09,120
मुझे नहीं मालूम वह कौन है और मेरे पास 36 कॉल डेली आते हैं

253
00:18:09,120 --> 00:18:13,120
जिसमें कि मुझे गुमनाम कॉल होते हैं। अज्ञात होते हैं। वो किसी

254
00:18:13,120 --> 00:18:17,440
तरीके से भड़काऊ बातें करते हैं या वहीं पर मेंटली टॉर्चर

255
00:18:17,440 --> 00:18:21,440
करने का प्रयास कर प्रयास करते हैं। डिबेट करने का प्रयास करते हैं। आज भी आया था।

256
00:18:21,440 --> 00:18:25,680
आर्य समाज की ओर से भी आज आया था। तो ऐसा

257
00:18:25,680 --> 00:18:29,760
प्रतिदिन होता रहता है मेरे साथ। तो जब कोई व्यक्ति अचानक से कॉल करेगा और

258
00:18:29,760 --> 00:18:34,160
यह कहेगा कि भाई जो आचार्य अग्निव्रत से बात क्यों नहीं करते

259
00:18:34,160 --> 00:18:38,720
तो मैं कहूंगा कि भाई आचार्य अग्निव्रत से बात कराओ और मैं उसको भी सस्पेक्टेड

260
00:18:38,720 --> 00:18:42,800
ही समझूंगा। मैंने उस दिन भी वही किया। मैंने कहा आचार्य अग्निवृत

261
00:18:42,800 --> 00:18:46,800
जी से बात कराइए अगर अगर उन्होंने मुझसे संपर्क करवाया

262
00:18:46,800 --> 00:18:52,480
तो तो हालांकि वो आ गए तो मेरे लिए तो वो चीज एक

263
00:18:52,480 --> 00:18:56,560
अनएक्सेक्टेड चीज थी क्योंकि मेरे लिए वो जो कॉलर था वो फ्रॉड था

264
00:18:56,560 --> 00:18:59,840
मेरी जानकारी फ्रॉड था। पर चलिए

265
00:18:59,840 --> 00:19:03,840
अग्निव्रत जी आ गए तो फिर उन्होंने जब मुझे बात कही कि आप राजस्थान आ

266
00:19:03,840 --> 00:19:07,920
जाइए तो मैंने अपने जितने शेड्यूल चल रहे हैं

267
00:19:07,920 --> 00:19:12,000
क्या-क्या होने वाला है कब कब होने वाला है उन सबको देख के या

268
00:19:12,000 --> 00:19:16,080
तो मैं उनको डेट बताऊं कि मैं कब आ सकता हूं दो महीने बाद आ सकता

269
00:19:16,080 --> 00:19:20,320
हूं भाई बीच में दिल्ली जाना है यहां जाना है तो उसको

270
00:19:20,320 --> 00:19:24,720
बताऊं और जबकि बहुत आसान सा रास्ता है कि हम लोग अभी इंटरनेट

271
00:19:24,720 --> 00:19:29,520
के जरिए आमने सामने बैठ जाए और बातें कर लें क्या गोली मारनी है एक दूसरे को

272
00:19:29,520 --> 00:19:33,520
तो जब एक सरल रास्ता हमें प्राप्त है तो उस पर कर लीजिए। बाकी मैंने यह

273
00:19:33,520 --> 00:19:37,600
भी कहा कि जब बाकी अगर नहीं हो सकता तो फिर आएंगे कभी उधर की ओर तो

274
00:19:37,600 --> 00:19:41,600
देखा जाएगा। अगर वहां पर वो ऑनलाइन के लिए नहीं मानते तो मैं मना थोड़ी ना करता।

275
00:19:41,600 --> 00:19:45,600
मैं कहता ठीक है मैं देखूंगा कब आ सकता हूं। और पहुंचता किसी ना

276
00:19:45,600 --> 00:19:49,600
किसी दिन मगर वो मैंने बताया उनको कि बहुत सरल रास्ता है।

277
00:19:49,600 --> 00:19:53,840
मैं कोई बात नहीं कर रहा हूं। अच्छा अब उसमें एक छोटी सी तर्कसंगत बातें

278
00:19:53,840 --> 00:19:58,000
हैं कि जब वो ये कह रहे हैं कि भाई लाइव चर्चा में तो चालाकी

279
00:19:58,000 --> 00:20:02,560
हो जाती है तो चालाकी सीधी सी बात है वो यही कह रहे हैं कि हमसे हो जाती है

280
00:20:02,560 --> 00:20:06,560
तो जब हमसे चालाकी वो अपेक्षा कर रहे हैं कि वो

281
00:20:06,560 --> 00:20:10,560
ऐसा आरोप हम पर लगा रहे हैं कि हम चालाकी कर सकते हैं तो

282
00:20:10,560 --> 00:20:14,800
फिर वो हमसे यह एक्सपेक्ट क्यों कर रहे हैं कि हम ऐसा ना सोचे कि

283
00:20:14,800 --> 00:20:15,300
आप

284
00:20:15,040 --> 00:20:19,200
भी चालाकी कर सकते हो। यह महाभारत का जो सिद्धांत है मैंने

285
00:20:19,200 --> 00:20:23,200
कहा ना धर्म का प्रचार सब करते हैं मगर धारण कोई कोई

286
00:20:23,200 --> 00:20:27,200
करता है। धारण नहीं करता कि हमको किसी ने बता दिया कि वो आर्य समाज

287
00:20:27,200 --> 00:20:31,200
में जाकर के चर्चा करते हैं। बस इतना ही सत्य है। वो कहां-कहां

288
00:20:31,200 --> 00:20:35,280
किस-किस से लड़े हैं? कौन-कौन से युद्ध उन्होंने धरातल पर लड़े हैं? कुछ नहीं जानना है।

289
00:20:35,280 --> 00:20:39,440
आर्य समाज उनकी क्या पहचान है? आर्य समाज में जाकर के प्रश्न करते हैं। यह उनको

290
00:20:39,440 --> 00:20:43,520
बता दिया। उन्होंने मान लिया। उन्होंने बिल्कुल नहीं सोचा कि भाई इससे परे भी कोई

291
00:20:43,520 --> 00:20:47,520
सत्य हो सकता है। इसके इस सीमा के बाहर भी कुछ ऐसे तथ्य हो सकते हैं

292
00:20:47,520 --> 00:20:51,520
जो मुझे जानने जरूरी हो और उसी पर अपने कमेंटबाजी चालू कर दी। खैर

293
00:20:51,520 --> 00:20:55,760
इस पर आते हैं। आप सामने वाले से उसके समक्ष

294
00:20:55,760 --> 00:21:00,080
खड़े होकर के सीधे-सीधे बोल रहे हो कि भैया हमें तुम पर विश्वास

295
00:21:00,080 --> 00:21:04,080
नहीं है। और एट दी सेम टाइम उससे अपेक्षा कर रहे हो कि तुम हम

296
00:21:04,080 --> 00:21:08,400
पर विश्वास कर लो। मैंने कहा ना कि चालाकी तो राजस्थान में भी हो सकती है। तो बोले

297
00:21:08,400 --> 00:21:12,560
यहां नहीं होगी। मतलब हम आपके शब्द को प्रमाण मान लें और आप

298
00:21:12,560 --> 00:21:17,360
यह दिखाओ कि हम जो है धोखा देंगे। ऐसे नहीं चलेगा ना।

299
00:21:17,360 --> 00:21:21,520
यहीं पर धर्म को धारण करने वाली बात आती है। इस इस पर आपको विचार करना चाहिए।

300
00:21:21,520 --> 00:21:25,600
खैर ऐसी कोई बात नहीं थी कि हमारे मन में ऐसा कुछ था कि वहां आएंगे तो अब

301
00:21:25,600 --> 00:21:29,680
कुछ हो जाएगा और ना ही हमारे मन में कोई ऐसी बात थी कि आप हमारे चैनल

302
00:21:29,680 --> 00:21:30,180
पर आएंगे

303
00:21:30,080 --> 00:21:34,160
तो हम कोई षड्यंत्र रच देंगे। हमको जब लगता है कि कोई व्यक्ति

304
00:21:34,160 --> 00:21:38,560
ऐसा है इस योग्य है जिसके स्थान पर

305
00:21:38,560 --> 00:21:42,800
जाया जा सकता है तो हम जाते हैं। वहां फिर हम ये ना भय दिखाते हैं

306
00:21:42,800 --> 00:21:46,800
वो चलिए उनकी बात नहीं करेंगे। छोड़िए

307
00:21:46,800 --> 00:21:50,880
बाद में कर लेंगे उनकी बात। हम भय नहीं दिखाते कि हम भैया आपके स्थान पर

308
00:21:50,880 --> 00:21:54,960
क्यों आए? क्या है क्या नहीं है। सीधे जाते हैं। तो जब ऐसी बात

309
00:21:54,960 --> 00:21:58,960
है आपके चैनल पर जाने को भी तैयार। तो यह वहां पर जो यह

310
00:21:58,960 --> 00:22:03,040
दिखाया गया कि सामना करने से बचने के लिए इंटरनेट आया

311
00:22:03,040 --> 00:22:07,040
तो ऐसा कुछ नहीं है। इंटरनेट पर भी आपके चैनल पर आपके समक्ष उपस्थित

312
00:22:07,040 --> 00:22:11,040
होना इसके लिए भी जो है कई लोग मना कर देंगे अगर बराबरी की बात है

313
00:22:11,040 --> 00:22:15,120
तो निष्पक्ष जगह आइए। हम तो आपके निसंकोच रूप से हमने आपको

314
00:22:15,120 --> 00:22:19,280
कहा कि आपके चैनल पर तो यह इस तरह से प्रदर्शित करना बेकार है। दूसरी

315
00:22:19,280 --> 00:22:23,360
बात यह है कि यह जो जाने का आरोप है कि प्रश्न करने के

316
00:22:23,360 --> 00:22:27,600
लिए जाते हैं। इसमें जो भूमिका आपके समक्ष हमारी बनाई गई है

317
00:22:27,600 --> 00:22:31,840
वो भूमिका गलत तरीके से बनाई गई है। हमारी

318
00:22:31,840 --> 00:22:36,000
जानकारी में और इसमें एक आगे तथ्य

319
00:22:36,000 --> 00:22:40,400
और आएगा। मस्जिद और चर्च में क्यों नहीं जाते? उस पर हम तभी बात करेंगे।

320
00:22:40,400 --> 00:22:44,480
मगर मैं एक मोटी मोटी बात बता दूं कि आपको ऐसा बताया गया है

321
00:22:44,480 --> 00:22:45,440
और आपकी जानकारी

322
00:22:45,440 --> 00:22:49,920
में ऐसा है कि हमारा उद्देश्य आर्य समाज को नीचा दिखाना है

323
00:22:49,920 --> 00:22:53,920
ना नीचा दिखाना हमारा उद्देश्य नहीं है या आर्य

324
00:22:53,920 --> 00:22:58,560
समाज को नष्ट कर देना है ना यह उद्देश्य हमारा नहीं है

325
00:22:58,560 --> 00:23:01,360
मेरी आत्मा

326
00:23:01,360 --> 00:23:05,520
पीड़ित हो चुकी थी अपने सनातन धर्म का

327
00:23:05,520 --> 00:23:11,040
अपमान देखतेदे रोया हूं मैं रातरात भर

328
00:23:11,040 --> 00:23:15,120
बटे हुए सनातनी एक गली में एक नहीं है। एक गली

329
00:23:15,120 --> 00:23:19,200
में 10 घर जाओगे 10 घर बटे हुए हैं। कोई आर्य समाजी

330
00:23:19,200 --> 00:23:23,760
कोई ब्रह्मा कुमारी कोई स्कनी है। कोई मूर्ति पूजक है। कोई कबीर वाला है, कोई रामपाली

331
00:23:23,760 --> 00:23:28,400
है। कौन जाएगा मंदिर को बचाने? कौन जाएगा

332
00:23:28,400 --> 00:23:32,960
स्वामी प्रसाद मौर्या को रोकने? जब वो रामचरितमानस जलाएगा।

333
00:23:32,960 --> 00:23:36,960
कौन जाएगा उन निठल्ले लोगों को रोकने?

334
00:23:36,960 --> 00:23:41,360
जो मंच पर खड़े होकर के हमारे राम और सीता का मजाक उड़ाएंगे। कौन

335
00:23:41,360 --> 00:23:45,600
जाएगा? सब तो बटे हुए हैं। तो जब

336
00:23:45,600 --> 00:23:49,760
मैंने अपने जीवन का एक बहुत बड़ा भाग

337
00:23:49,760 --> 00:23:55,360
इस तरह से तड़प तड़प करके बिताया है ना उसके बाद

338
00:23:55,360 --> 00:23:59,840
बहुत प्रयास करके प्रयत्न करके और भगवत कृपा से

339
00:23:59,840 --> 00:24:00,480
भगवान की

340
00:24:00,480 --> 00:24:05,200
कृपा से कुछ हथियार प्राप्त किए।

341
00:24:05,200 --> 00:24:09,520
वह हथियार हैं गुरु गोविंद और ग्रंथ सार्वभौम

342
00:24:09,520 --> 00:24:13,840
सनातन सिद्धांत राम यह सब मेरे हथियार हैं

343
00:24:13,840 --> 00:24:18,080
और इनको धारण करने के बाद वो चीजें जो हमें बांट

344
00:24:18,080 --> 00:24:22,320
के रख दे रही हैं वो धारणाएं वो विचार जो हमें बांट

345
00:24:22,320 --> 00:24:27,120
रहे हैं केवल उन विचारों का शोधन करने के लिए

346
00:24:27,120 --> 00:24:31,520
मैं जाता हूं चर्चा करने और जाता रहूंगा वास्तविक

347
00:24:31,520 --> 00:24:35,760
चेहरा बाहर लाने के लिए कि जिस सिद्धांत के द्वारा

348
00:24:35,760 --> 00:24:41,120
सनातन समाज को बांटा जा रहा है, वह सिद्धांत गलत है। ठीक नहीं है।

349
00:24:41,120 --> 00:24:45,360
हां, अगर सनातन धर्म अगर सनातन समाज उन सिद्धांतों के कारण बटे

350
00:24:45,360 --> 00:24:49,440
नहीं तो मुझे कोई आपत्ति नहीं है। खूब चलाइए ब्रह्मा कुमारी। खूब

351
00:24:49,440 --> 00:24:54,080
चलाइए इस खूब चलाइए आर्य समाज। मगर बट रहा है।

352
00:24:54,080 --> 00:24:58,160
ब्रह्मा कुमारी वाले को कोई इंटरेस्ट नहीं है उसके घर के पास में जो शिव मंदिर

353
00:24:58,160 --> 00:25:02,480
है वहां पर आने का और लड़ने उसके लिए उसके लिए जो है

354
00:25:02,480 --> 00:25:06,480
प्रतिकार करने का जब मंदिर पर आक्रमण होगा यह

355
00:25:06,480 --> 00:25:10,560
स्थिति है। आर्य समाजी जो सिद्धांतवादी

356
00:25:10,560 --> 00:25:14,640
आर्य समाजी उसे कोई दिलचस्पी नहीं रह गई है कि वह जाकर के

357
00:25:14,640 --> 00:25:15,760
हमारे मंदिर मठ मंदिरों

358
00:25:15,760 --> 00:25:19,840
की रक्षा करें। रामचरितमानस की रक्षा करें क्योंकि उनके मन में तो घुस

359
00:25:19,840 --> 00:25:23,840
ही दिया है ना। कि भैया वह रामचरितमानस तो फेक है और

360
00:25:23,840 --> 00:25:28,080
वह मंदिर तो मूर्ति पूजा तो अधर्म है। यह

361
00:25:28,080 --> 00:25:32,160
सब आपने किया है। आपने अर्थात आर्य समाज ने किया

362
00:25:32,160 --> 00:25:36,240
है। अब आप कह दोगे कुछ आर्य समाजी ऐसे होते हैं जो जाते हैं रक्षा करने के लिए। जितने

363
00:25:36,240 --> 00:25:40,240
अंश में कोई आर्य समाजी मूर्ति की रक्षा करने के लिए

364
00:25:40,240 --> 00:25:44,560
जा रहा है उतने अंश में वह आर्य समाज का विरोधी है।

365
00:25:44,560 --> 00:25:48,400
हम जिस प्रकार से कोई मुसलमान

366
00:25:48,400 --> 00:25:52,720
जिस प्रकार से कोई मुस्लिम कुरान में आस्था

367
00:25:52,720 --> 00:25:56,960
रखने वाला अगर कुछ ऐसी चीजों में इन्वॉल्व होने लगे जिसके लिए कुरान मना

368
00:25:56,960 --> 00:26:00,960
कर रही है तो उसके उतने में क्या मानेंगे? कुरान बहुत अच्छी

369
00:26:00,960 --> 00:26:04,960
है। हम यह मानेंगे कि उतने अंश में उस व्यक्ति ने कुरान

370
00:26:04,960 --> 00:26:08,960
का कुरान की सीमा का उल्लंघन किया है ना। क्या मानेंगे?

371
00:26:08,960 --> 00:26:13,120
कुरान का विरोध किया है। बिल्कुल। तो उसी प्रकार से आर्य समाज के जो सिद्धांत

372
00:26:13,120 --> 00:26:18,080
आपने दिए हैं जो विरोध भर रहे हैं

373
00:26:18,080 --> 00:26:22,400
और आपने ही नहीं ब्रह्मा कुमारी है, स्कॉन है

374
00:26:22,400 --> 00:26:26,480
बहुत सारे हो गए। कल्कि वाले हैं। तरह-तरह से वो लोग लोग जो है बट रहे

375
00:26:26,480 --> 00:26:30,640
हैं। तो इसलिए हम जाते हैं और हमारा उद्देश्य नष्ट करना

376
00:26:30,640 --> 00:26:31,140
नहीं

377
00:26:30,880 --> 00:26:35,040
है। खत्म करना नहीं है। हमारा उद्देश्य है जिन धारणाओं को

378
00:26:35,040 --> 00:26:39,120
लेकर के बंटवारा हो रहा है वो धारणाएं शोधित हो जाए।

379
00:26:39,120 --> 00:26:43,120
वो धारणाएं धीरे-धीरे जो है उनसे ओवरकम

380
00:26:43,120 --> 00:26:47,280
किया जाए। या तो उनको लेकर के आप प्रचार मत करिए। अपना धारण

381
00:26:47,280 --> 00:26:51,280
कर रहे हैं। ठीक है करिए। मगर जब वह समाज का

382
00:26:51,280 --> 00:26:55,520
हिस्सा बन जाएगा तो आप रोक भी नहीं पाएंगे ना उसको। तो यह कारण होता

383
00:26:55,520 --> 00:26:59,680
है और इसी में [गला साफ़ करने की आवाज़] अब

384
00:26:59,680 --> 00:27:03,840
बढ़ते हुए क्रम में मैं आगे अगला वो ले लूं आपका। जैसे आप फिर

385
00:27:03,840 --> 00:27:07,920
वही बात कि पूरी जानकारी आपको दी नहीं गई हमारे बारे में। आपने कहा कि

386
00:27:07,920 --> 00:27:12,960
मस्जिद में क्यों नहीं जाते? चर्च में क्यों नहीं जाते? हां।

387
00:27:12,960 --> 00:27:17,520
तो मेरे भाई क्या आपको लगता है कि

388
00:27:17,520 --> 00:27:21,600
चर्च और मस्जिद में हम लोग जाएंगे और हम

389
00:27:21,600 --> 00:27:25,760
जो है इस तरह से वैचारिक क्रांति लाने का प्रयास करेंगे तो वह हमारा वेलकम करने वाले

390
00:27:25,760 --> 00:27:30,720
हैं। क्या लगता है आपको? यह जो विधर्मी

391
00:27:30,720 --> 00:27:34,800
तंत्र हैं, ये जो विधर्मी तत्व है और एक आपने बहुत

392
00:27:34,800 --> 00:27:39,440
अच्छा बीड़ा उठाया हुआ है वामपंथियों से लड़ने का। बिल्कुल अच्छा बीड़ा है

393
00:27:39,440 --> 00:27:43,680
जो नास्तिकवाद है इनसे हमारा कोई वैचारिक

394
00:27:43,680 --> 00:27:46,720
युद्ध नहीं है। इनसे

395
00:27:46,720 --> 00:27:50,720
हमारा व्यवहारिक युद्ध है। वैचारिक

396
00:27:50,720 --> 00:27:54,960
युद्ध नहीं है। वैचारिक युद्ध तो शोधन के लिए हो सकता है।

397
00:27:54,960 --> 00:27:59,360
हम में और आप में मगर वहां व्यवहारिक युद्ध है।

398
00:27:59,360 --> 00:28:03,440
जिनके यहां जाने की आप बात कर रहे हैं। कैसे लडूंगा? कैसे जाऊंगा?

399
00:28:03,440 --> 00:28:08,080
ब्रह्मा कुमारी आर्य समाज इस कौन

400
00:28:08,080 --> 00:28:12,160
इनको ले जाऊंगा ये जाएंगे मेरे साथ मेरे भाई को

401
00:28:12,160 --> 00:28:16,080
तो मुझसे छीन लिया है ना

402
00:28:16,080 --> 00:28:20,560
मेरे छोटे भाई को बड़े भाई को मुझसे छीन लिया गया है

403
00:28:20,560 --> 00:28:24,800
कैसे लडू उन ताकतों से जो हमारे सनातन धर्म को नष्ट

404
00:28:24,800 --> 00:28:28,800
करना चाहती हैं। आपका उद्देश्य बहुत अच्छा है। बहुत अच्छा होगा।

405
00:28:28,800 --> 00:28:33,440
सनातन धर्म को बचाना है। वामपंथियों से लड़ना है। कैसे लड़ोगे?

406
00:28:33,440 --> 00:28:37,440
हमारे भाइयों को तो हमसे छीन लिया गया ना। तू चल मेरे साथ।

407
00:28:37,440 --> 00:28:41,440
लेखराज जी आएंगे। ब्रह्मा जी के शरीर में आएगा परमात्मा। रोज

408
00:28:41,440 --> 00:28:45,440
ज्ञान देगा। मुरली सुन चल मेरे साथ। तू चल मेरे साथ।

409
00:28:45,440 --> 00:28:49,600
शिव की भक्ति करने वाले अभक्त होते हैं। उनका संग भी नहीं करना चाहिए। उनका चेहरा

410
00:28:49,600 --> 00:28:55,440
भी देख लेगा तो वैसा ही है जैसे काफिर है वो। कैसे?

411
00:28:55,440 --> 00:28:59,600
एक भाई को छीन लिया गया। ईश्वर अवतार नहीं ले सकता।

412
00:28:59,600 --> 00:29:03,280
जो कहेगा अवतार लेगा वो दुश्मन है।

413
00:29:03,280 --> 00:29:06,240
हम

414
00:29:06,240 --> 00:29:10,400
जिन पूर्वजों से परंपरा से जो चीजें प्राप्त

415
00:29:10,400 --> 00:29:15,040
हुई उनको ही धिक्कारने लगा। वही भाई मेरा

416
00:29:15,040 --> 00:29:19,360
वो जो आप यह जो निर्भय की गालियों वाला सीन है

417
00:29:19,360 --> 00:29:23,360
निर्भय ने गालियां दी। केरला स्टोरी में जो लड़की अपने

418
00:29:23,360 --> 00:29:27,600
माता-पिता पर थूकती है ना निर्भय की गालियां वही थूक

419
00:29:27,600 --> 00:29:31,920
है। किसने छीना मेरे भाई को मुझसे? ऐसी

420
00:29:31,920 --> 00:29:36,880
विचारधाराओं ने छीना ना हम

421
00:29:36,880 --> 00:29:40,960
लगा था कि शोधित होने लगा है और जो है बातें हुई हमारे और उसके बीच

422
00:29:40,960 --> 00:29:45,120
में ठीक है मुझे लगा कि इससे शायद अब एक

423
00:29:45,120 --> 00:29:49,280
नई किरण मिली है और शायद हम कुछ अच्छा दे पाएंगे समाज

424
00:29:49,280 --> 00:29:53,520
को आने वाले समय में मगर क्या हुआ

425
00:29:53,520 --> 00:29:57,920
जो भड़काऊ तत्व थे हमारे बीच में एक वो कोई

426
00:29:57,920 --> 00:30:01,920
मातृशक्ति आई बाहर से ठीक है। उनसे

427
00:30:01,920 --> 00:30:06,080
हमारा किसी और बात को लेकर के विवाद हुआ। आपने तो देखा ही था सनातन शंकर

428
00:30:06,080 --> 00:30:10,160
जी किसी और बात को लेकर उस मातृ शक्ति से कुछ

429
00:30:10,160 --> 00:30:14,160
वैचारिक विवाद हुआ और उस मातृशक्ति के आने

430
00:30:14,160 --> 00:30:18,320
के कारण और यह जो

431
00:30:18,320 --> 00:30:22,400
मेरे और निर्भय के बीच में जो थोड़ा बहुत वो एक

432
00:30:22,400 --> 00:30:27,040
क्या कहें? भ्रातत्व भाव का निर्माण हुआ था। आग लगा दी उसमें

433
00:30:27,040 --> 00:30:31,120
भड़काने वालों ने। पहले उसको प्रश दिया गया उसी के

434
00:30:31,120 --> 00:30:35,360
मंच से। मेरे मजाकिया वीडियोस बनाए गए मेरे उसी के मंच

435
00:30:35,360 --> 00:30:39,360
से। और जब मैंने इन बातों को लेकर के विरोध जताया। एक छोटे

436
00:30:39,360 --> 00:30:43,680
भाई होने के नाते उसने हाथ खड़े कर लिए।

437
00:30:43,680 --> 00:30:47,680
तो आग लगाने वाले वो कौन हैं? किन

438
00:30:47,680 --> 00:30:52,960
लोगों ने आग लगाई? मेरे भाई को मुझसे किसने छीना?

439
00:30:52,960 --> 00:30:57,200
ऐसे बंटवारा करने वाले लोगों ने जो इस प्रकार का बंटवारा

440
00:30:57,200 --> 00:31:01,360
करके अपना फायदा ढूंढते हैं। उन्होंने देखा होगा भाई ये निर्भय

441
00:31:01,360 --> 00:31:04,720
तो कुछ काम का है ही नहीं।

442
00:31:04,720 --> 00:31:08,800
भड़काऊ बातें करनी पड़ेगी। भड़काऊ करो। किसी तरीके से इनका जो ये

443
00:31:08,800 --> 00:31:13,040
तालमेल जो बैठा है वो दूर करो। और फिर वो दूर हुआ तो ऐसा हुआ

444
00:31:13,040 --> 00:31:17,360
कि अब तो शायद राम ही जाने। खैर

445
00:31:17,360 --> 00:31:21,360
कम टू द पॉइंट कहीं और इसमें इसमें निर्भय वाले मैं बता दूं

446
00:31:21,360 --> 00:31:25,600
निर्भय काम का तो अभी भी नहीं रहा उसका वीडियो देखा लाइव स्ट्रीम मैंने भी

447
00:31:25,600 --> 00:31:29,920
तो तुम्हारे काम का तो वो अभी भी नहीं रहा है लेकिन तुमने भड़का

448
00:31:29,920 --> 00:31:34,000
तो दिया ना जहां पर उससे मित्रता की बात हो रही थी और

449
00:31:34,000 --> 00:31:39,360
वो सारी चीजें समझ रहा था वो तो वहां पर फूट डाल दी गई है

450
00:31:39,360 --> 00:31:43,440
उसके बावजूद भी की कहानी देख के मुझे सौदागर

451
00:31:43,440 --> 00:31:47,760
का वो सीन याद आता है जिसमें जब वह पकड़

452
00:31:47,760 --> 00:31:52,000
लिया जाता है ना वहां पर वो ईलू ईलू वाला जो अभिनेता था

453
00:31:52,000 --> 00:31:56,320
उसको वह जब राजकुमार के यहां होता है राजू के यहां मतलब जो अमीर

454
00:31:56,320 --> 00:32:00,400
वाला मित्र था उसके यहां जब वो होता है और वो पकड़ लिया जाता

455
00:32:00,400 --> 00:32:04,400
है तो वो जाते-जाते एक बात कह के जाता है कि आपकी और

456
00:32:04,400 --> 00:32:09,840
दादा वीर की महाभारत का सबसे बड़ा शकुनी जो है ना वो यह चुनिया है।

457
00:32:09,840 --> 00:32:13,840
तो हमारे बीच में यह मैं देख देख पा रहा हूं।

458
00:32:13,840 --> 00:32:17,920
कोई बुद्धिजीवी होगा देख किस तरीके से एक जो आग दोबारा

459
00:32:17,920 --> 00:32:22,800
से भड़काई गई। तो मैं दोबारा पॉइंट पर आ जाता हूं कि

460
00:32:22,800 --> 00:32:27,040
बैक टू द पॉइंट मेरे भाई को मुझसे छीन लिया गया है।

461
00:32:27,040 --> 00:32:31,360
मेरे भाइयों को मुझसे छीना गया है। यह कह करके मूर्ति पूजा अधर्म है।

462
00:32:31,360 --> 00:32:35,520
हैं और जो शिव की पूजा करने वाले अभक्त हैं। और इसी तरीके

463
00:32:35,520 --> 00:32:39,600
के कुछ डायलॉग इनके यहां है। रामपाल के यहां भी

464
00:32:39,600 --> 00:32:43,680
है। वहां पर चलता है वह जगत के लोग और भगत के लोग। जगत

465
00:32:43,680 --> 00:32:47,840
वाले हैं हम। रामपाल के यहां पर क्या है मालूम है? हम लोग जगत वाले हैं।

466
00:32:47,840 --> 00:32:51,920
और वो लोग जो है संगत वाले हैं। वो लोग संगत वाले हैं। हम लोग भगत

467
00:32:51,920 --> 00:32:56,080
वो जगत वाले हैं। ये रामपाल के यहां है। तो सबके यहां पर इस तरीके से

468
00:32:56,080 --> 00:33:00,160
इस इस पैमाने पर मेरे भाई को मुझसे छीना गया है। तो व्यवहारिक

469
00:33:00,160 --> 00:33:03,040
युद्ध कैसे लडूंगा?

470
00:33:03,040 --> 00:33:07,280
किसको साथ में लेकर लडूंगा? तो तब जाकर के

471
00:33:07,280 --> 00:33:11,360
मैंने कहा कि मैं अपने भाई को वापस लाऊंगा। मैं जाऊंगा

472
00:33:11,360 --> 00:33:15,440
आर्य समाज मैं वहां जाकर बात करूंगा जिस

473
00:33:15,440 --> 00:33:19,520
बात को लेकर के अलग हुआ है मेरा भाई उस बारे में बात करूंगा मैं जाऊंगा स्कॉन मैं

474
00:33:19,520 --> 00:33:23,600
जाऊंगा ब्रह्मा कुमारी मैं जाऊंगा रामपाल के यहां वहां बात करूंगा

475
00:33:23,600 --> 00:33:25,040
वहां पर वैचारिक क्रांति

476
00:33:25,040 --> 00:33:29,120
लाऊंगा सार्वभौम सिद्धांतों को ले जाऊंगा

477
00:33:29,120 --> 00:33:33,280
कोई नीचा दिखाना मेरा मकसद नहीं है नीचा दिखाना वाला

478
00:33:33,280 --> 00:33:37,600
दिखाने वाला जो तत्व आता है वह आता है जब कोई व्यक्ति सामने

479
00:33:37,600 --> 00:33:41,920
से व्यक्तिगत कटाक्ष करता है और हम उसको को व्यक्तिगत कटाक्ष करते हैं

480
00:33:41,920 --> 00:33:47,680
तब चालू होता है। वह दिखाई देता है। हमारा मंतव्य कभी नहीं रहा।

481
00:33:47,680 --> 00:33:51,760
यदि इस तरह के कटाक्ष पूर्ण ऋषि वाचन चैनल से चालू ना किए गए होते तो

482
00:33:51,760 --> 00:33:55,920
हम कभी इस तरह के कटाक्ष करने भी नहीं वाले थे। जो कटाक्ष हुए यद्यपि

483
00:33:55,920 --> 00:34:00,160
हमने इस बात का ध्यान रखा कभी दयानंद जी के लिए कोई अपमानजनक कोई

484
00:34:00,160 --> 00:34:04,240
बात नहीं बोलनी तो नहीं बोलनी है। प्रभुपाद जी के लिए कोई अपमानजनक बात

485
00:34:04,240 --> 00:34:08,400
नहीं बोलनी नहीं बोलनी है। सैद्धांतिक विरोध है पर व्यक्तिगत कोई विरोध

486
00:34:08,400 --> 00:34:12,640
नहीं। रामायण में भगवान श्री राम ने लक्ष्मण जी को कहा था जब व्यक्ति देह

487
00:34:12,640 --> 00:34:16,880
त्याग कर देता है उसके बाद कोई दुश्मनी बाकी नहीं रह जाती और दुश्मनी तो हम में कभी

488
00:34:16,880 --> 00:34:21,280
थी नहीं ना हमारे भी तो वैचारिक चीजें हैं ना महाभारत

489
00:34:21,280 --> 00:34:25,920
का सिद्धांत हमारी आपस की बात है हम पांच वो 100

490
00:34:25,920 --> 00:34:29,920
कोई बाहर का आ जाए तो 105 तो यह सबसे पहले जान

491
00:34:29,920 --> 00:34:34,080
लीजिए कि हम केवल आपके यहां नहीं गए और हमारे जाने

492
00:34:34,080 --> 00:34:38,080
का उद्देश्य क्या है और अब रही वो मस्जिद और चर्च वाली

493
00:34:38,080 --> 00:34:40,080
वाली बात तो पहली बात तो यह है कि मैं जाऊं

494
00:34:40,080 --> 00:34:44,960
क्यों? दूसरी बात ऐसा है छोड़ते किसी को नहीं है।

495
00:34:44,960 --> 00:34:49,600
आप देखिए हमारे वीडियोस हैं। अगर कोई जो

496
00:34:49,600 --> 00:34:53,760
है इस्लाम को मानने वाला कोई वहां का कोई व्यक्ति हमसे टकराया तो हमने

497
00:34:53,760 --> 00:34:58,000
उससे चर्चा की है। आप जाके देखिए। अभी-अभी हमारा लेटेस्ट वीडियो

498
00:34:58,000 --> 00:35:02,000
चर्च में जाकर के। आपको अधूरी जानकारियां मिल रही है। आप निर्णय ले रहे हो, वक्तव्य दे रहे हो। ये

499
00:35:02,000 --> 00:35:06,720
गलत बात है। धर्म को धारण भी करिए। केवल प्रचार मत करिए।

500
00:35:06,720 --> 00:35:10,880
जितना मालूम है उतना धारण कर लीजिए। निर्भय का कहना एक और

501
00:35:10,880 --> 00:35:15,040
था। मुझे ज्ञात हुआ। उसने आरोप लगाया कि भैया हमने

502
00:35:15,040 --> 00:35:19,280
जो है वो जो उनके साथ जो मातृ शक्ति गई थी निर्भय के साथ तो उसको

503
00:35:19,280 --> 00:35:23,360
लेकर के मैंने गलत बोल दिया। और वैसे भाई मैंने गलत नहीं मैंने क्या

504
00:35:23,360 --> 00:35:27,440
बोला? क्या बोला मैंने? मैंने जो सामने चीजें

505
00:35:27,440 --> 00:35:32,880
हैं वो बोला ज्यों की त्यों। और भाई अगर

506
00:35:32,880 --> 00:35:37,280
गलत वो क्या कहते हैं उसको? नरेटिव

507
00:35:37,280 --> 00:35:41,280
गलत नैरेटिव तुम खुद बना रहे हो। पहला वीडियो मेरा देखोगे तो उसमें

508
00:35:41,280 --> 00:35:45,600
तो उस मातृ शक्ति के बारे में मैंने कोई बात ही नहीं की थी कि भाई मातृ शक्ति बारे में कोई बात नहीं की।

509
00:35:45,600 --> 00:35:49,680
जब मैंने निर्भय का वीडियो देख लिया उसमें देखा कि वो मातृशक्ति पूरी तरीके से

510
00:35:49,680 --> 00:35:53,840
इनवॉल्व हो रही है। तब उस मातृशक्ति के जो घटक वहां पर मुझे प्राप्त

511
00:35:53,840 --> 00:35:55,360
हुए थे। मैंने उससे पूछा था आप बहन

512
00:35:55,360 --> 00:35:59,440
है इसकी। तीन चार बार पूछा मगर उन्होंने बात को डायवर्ट किया। बात को

513
00:35:59,440 --> 00:36:03,440
घुमाया। जवाब नहीं दिया कि नहीं मैं बहन हूं। तो मैं क्या

514
00:36:03,440 --> 00:36:07,440
करूं? यूं ही तुम्हारी बहन घोषित कर दूं उसको और बाद में कुछ

515
00:36:07,440 --> 00:36:11,040
और निकली तो वह पाप नहीं है।

516
00:36:11,040 --> 00:36:15,040
भाई अगर मैं बहन घोषित कर दूं और बाद में कुछ और निकले तो वो भी तो

517
00:36:15,040 --> 00:36:19,120
पाप लगा। हमारे यहां पर ध्यान रखना पड़ता है ना हमें शब्दों की

518
00:36:19,120 --> 00:36:23,120
मर्यादा हम आर्य समाजी नहीं ना भाई और

519
00:36:23,120 --> 00:36:27,200
दिखावे दिखावे वाले राम के अनुयाई भी नहीं है। हमारी कोशिश होती

520
00:36:27,200 --> 00:36:31,200
है कि हम वही बोले जो हम उस पर अग रहे तो इसलिए

521
00:36:31,200 --> 00:36:35,360
हमें कुछ ऐसा शब्द चाहिए था ना कि हम क्या बताएं उसको और वो

522
00:36:35,360 --> 00:36:39,520
इनवॉल्व तो थी ही तो उसके बारे में फिर बात करना आवश्यक हो गया था। तो यह सारी बातें

523
00:36:39,520 --> 00:36:43,600
हैं। तो चर्च में हमारा वीडियो अभी भी देख सकते हैं।

524
00:36:43,600 --> 00:36:47,840
अभी-अभी हाल ही का है और आगे भी बहुत सारी चर्चाएं आपको सुनाई देंगी। मुस्लिम्स

525
00:36:47,840 --> 00:36:51,920
के साथ हमारी चर्चाएं हो चुकी है काफी आगे भी सुनाई देगी। मगर फिर भी

526
00:36:51,920 --> 00:36:56,640
प्राथमिकता इनकी इसलिए नहीं है क्योंकि आपको मैंने बता दिया कि हमारा व्यवहारिक

527
00:36:56,640 --> 00:37:00,720
विरोध किससे है और वैचारिक शोधन की दृष्टि से विरोध किससे है।

528
00:37:00,720 --> 00:37:05,920
तो इस कारण से हम जाते थे जाते हैं और जाते रहेंगे।

529
00:37:05,920 --> 00:37:09,920
हमारा समाज सनातन समाज जब तक बटा रहेगा हम लोग

530
00:37:09,920 --> 00:37:10,560
प्रयास करते

531
00:37:10,560 --> 00:37:14,720
रहेंगे उसको एक करने का और इस चर्चा में कोई हम बम बारूद ले

532
00:37:14,720 --> 00:37:18,800
नहीं जाते हैं ठीक है कि वहां कोई

533
00:37:18,800 --> 00:37:22,800
जो है हमें धमाका कर देना है वो आपके समक्ष हमारी भूमिका गलत तरीके से प्रस्तुत

534
00:37:22,800 --> 00:37:26,880
की गई तो हम क्या करें केवल अपने लोगों की बात सुनकर के आप निर्णय ले लो यही होता

535
00:37:26,880 --> 00:37:31,840
आया है यही होता है ऐसे ही भाई को छीना जाता है भाई से

536
00:37:31,840 --> 00:37:36,160
जी तो अभी तक आप जो है कुछ बोलना चाहते तो बोले आप

537
00:37:36,160 --> 00:37:41,440
जी [गला साफ़ करने की आवाज़][खांसने की आवाज़] नहीं बिल्कुल अच्छा एक चीज और भैया

538
00:37:41,440 --> 00:37:47,440
आपका एक वीडियो था जिसमें एक वाला था

539
00:37:50,560 --> 00:37:56,560
रुक जी का नेट का कुछ इशू है शायद हां

540
00:37:58,480 --> 00:38:02,560
रोड पर जो बेच रहा था वाला जो जो

541
00:38:02,560 --> 00:38:06,640
वीडियो आज भारत अजीत भारती के टाइम स्टैंप

542
00:38:06,640 --> 00:38:10,640
के साथ भेजा है। नहीं अभी मैंने आपका वीडियो नहीं देखा है। ऋषभ

543
00:38:10,640 --> 00:38:16,640
जी

544
00:38:19,920 --> 00:38:24,080
एक भाई साहब कह रहे हैं मूर्ति पूजा और मूर्त मूर्ति रक्षा में बहुत

545
00:38:24,080 --> 00:38:28,560
अंतर है। ये शायद आर्य समाज के पक्ष से कह रहे हैं क्या?

546
00:38:28,560 --> 00:38:32,560
भाई देखो सीधी सी बात है जिस चीज के लिए निष्ठा नहीं होगी उस

547
00:38:32,560 --> 00:38:36,880
चीज के लिए वह जो युद्ध की भावना दिखाना या वो सब

548
00:38:36,880 --> 00:38:40,880
फिर व्यंग मात्र है। जब आपने उसका अपमान ही कर दिया

549
00:38:40,880 --> 00:38:44,960
अधर्म है तो कोई व्यक्ति उसका साथ जब दे रहा होगा तो उसमें

550
00:38:44,960 --> 00:38:49,040
उसकी प्रायोरिटी यही होगी अंदरूनी रूप से अधर्म है अंतत गतवा वो उस

551
00:38:49,040 --> 00:38:53,120
निष्ठा से नहीं लड़ पाएगा उसकी रक्षा के लिए जिस निष्ठा से मैं लडूंगा

552
00:38:53,120 --> 00:38:57,360
ठीक है और फिर उद्देश्य यह भी तो होता है उसमें के मूर्ति रक्षा

553
00:38:57,360 --> 00:39:01,600
के नाम पर फिर बाद में उपहास भी तो उड़ाओगे

554
00:39:01,600 --> 00:39:06,240
बिल्कुल

555
00:39:06,240 --> 00:39:10,320
जी आप बोले सनातन शंकर जी जी हां मैं बस यह

556
00:39:10,320 --> 00:39:14,720
कह रहा था कि अग्निव्रत जी का जो पूरा वीडियो था उसमें

557
00:39:14,720 --> 00:39:18,720
उन्होंने एक तरह से जो संबोधन किया है

558
00:39:18,720 --> 00:39:22,720
वो वही जो आम होता है इनका कि पौराणिक है ना और जब भी मैं

559
00:39:22,720 --> 00:39:26,720
यह शब्द सुनता हूं तो मुझे ऐसा लगता है जैसे आर्य समाज कहीं ना कहीं

560
00:39:26,720 --> 00:39:31,040
यह डिक्लेअ कर रहा है कि जो पौराणिक बोल के कि भाई इनका वेदों से कोई संबंध

561
00:39:31,040 --> 00:39:35,120
नहीं है और हम लोग वेदों पर अधिकार

562
00:39:35,120 --> 00:39:39,360
रखते हैं। हम ही अधिकृत हैं वेदों पर बोलने के लिए। इसलिए वह एक

563
00:39:39,360 --> 00:39:43,600
पौराणिक बोलकर कहीं ना कहीं आम सनातनियों

564
00:39:43,600 --> 00:39:48,000
को अलग कर रहे हैं। और दूसरा उन्होंने एक और बात बोली थी बीच में ही। बोला नहीं सनातनी

565
00:39:48,000 --> 00:39:52,000
नहीं बोलना चाहिए। वेद ही सनातन है। उन्होंने यह भी कहा था कि इनको

566
00:39:52,000 --> 00:39:56,080
सनातनी भी नहीं बोलना चाहिए। तो ये भी एक जो बात

567
00:39:56,080 --> 00:40:00,240
है वहां पर हमें विचार करनी चाहिए कि किस तरह से अलग किया

568
00:40:00,240 --> 00:40:04,640
जाता है और बाकी जो नहीं खैर आजादी की लड़ाई में

569
00:40:04,640 --> 00:40:08,720
जो नहीं वो वो घटक अभी आने वाले हैं वो अगला चरण है आजादी की

570
00:40:08,720 --> 00:40:14,720
लड़ाई वाला इसका एक मिनट हां

571
00:40:20,880 --> 00:40:26,720
कबीर दास मूर्ति पूजक को मिटाना

572
00:40:26,720 --> 00:40:31,840
खैर इतनी बात हो गई और

573
00:40:31,840 --> 00:40:36,080
अब उसमें मैंने ये देखा कि जैसे वो खैर हम भी अलंकारी अलंकार

574
00:40:36,080 --> 00:40:40,160
समाज तो कहते ही हैं अलंकारी कहते ही हैं और उनको हमारी नजरों में वो

575
00:40:40,160 --> 00:40:44,480
वैदिक नहीं है। उनकी नजरों में हम वैदिक नहीं है इसलिए उन्हें हमारे लिए पौराणिक

576
00:40:44,480 --> 00:40:48,880
शब्द का उपयोग करना पड़ता है और

577
00:40:48,880 --> 00:40:53,040
हमारी नजरों में वो वैदिक नहीं है पूर्णतया और वेदों पर

578
00:40:53,040 --> 00:40:57,520
उन्होंने जो है अलंकार रूपी आवरण डाल के रखा है

579
00:40:57,520 --> 00:40:59,840
तो

580
00:40:59,840 --> 00:41:05,360
एक मिनट

581
00:41:05,360 --> 00:41:09,440
वो भी है दूसरा शुरुआत किसने की

582
00:41:09,440 --> 00:41:13,760
यहां पर यह पॉइंट भी हमें विचार करना करना चाहिए कि

583
00:41:13,760 --> 00:41:17,840
सबसे पहले जो है कटाक्ष रूप में किसने यह बातें बोलना शुरू

584
00:41:17,840 --> 00:41:22,240
की थी। तो यह भी पॉइंट है उसमें।

585
00:41:22,240 --> 00:41:28,000
अच्छा कन्हैया जी कह रहे हैं लिंक दे दो निजदर्शन जी।

586
00:41:28,000 --> 00:41:32,960
आपकी आवाज नहीं आ रही है। आवाज आपकी चली गई शिवास जी।

587
00:41:32,960 --> 00:41:38,480
अच्छा अब इसमें एक बात आगे आती है कि

588
00:41:38,480 --> 00:41:42,560
अब इनका एक बात थी यह कहना कि भाई

589
00:41:42,560 --> 00:41:46,640
आर्य समाज ने क्या-क्या किया है बहुत

590
00:41:46,640 --> 00:41:50,640
चीजें गिनाई उसमें उन्होंने कि भाई आर्य समाज ने बहुत सारे क्रांतिकारी दिए

591
00:41:50,640 --> 00:41:54,720
हैं और ऐसा हुआ है वैसा हुआ है जिस समय ऐसा

592
00:41:54,720 --> 00:41:59,440
था वैसा था यह सब बातें हैं तो

593
00:41:59,440 --> 00:42:05,440
इसमें पहली बात आती है कि

594
00:42:06,240 --> 00:42:10,240
जब सत्यार्थ प्रकाश में पंडे और पोप बोला जा

595
00:42:10,240 --> 00:42:14,320
रहा है परंपरा प्राप्त आचार्यों को मूर्ति पूजा को अधर्म बोला

596
00:42:14,320 --> 00:42:18,320
जा रहा है तब आपके लोगों ने या आपने सत्यार्थ

597
00:42:18,320 --> 00:42:22,400
प्रकाश छापने छापते टाइम प्रचार करते टाइम यह नहीं सोचा

598
00:42:22,400 --> 00:42:26,960
कि इन लोगों ने क्या किया कि क्या-क्या और सुंदर-सुंदर चीजें की है। उसी

599
00:42:26,960 --> 00:42:30,960
आप जो कह रहे हो वो तो आप बोल रहे हो इसलिए हम उसको दुर्जनोष न्याय से चलो

600
00:42:30,960 --> 00:42:35,120
इस अभी बात करने के लिए रख ले रहे हैं। मगर जिनका आप अपमान

601
00:42:35,120 --> 00:42:39,200
कर रहे हो उनके उनकी महिमा का गान तो आपके सत्यार्थ प्रकाश में ही

602
00:42:39,200 --> 00:42:43,600
हो रहा है और इधर-उधर जाने की आवश्यकता नहीं है। तो उतने अंश

603
00:42:43,600 --> 00:42:47,600
अगर किसी के किसी भी अच्छे कार्य के कारण उसके जो

604
00:42:47,600 --> 00:42:51,600
गलत कार्य हैं उनका विरोध नहीं होना चाहिए या उन पर बात ही नहीं होनी

605
00:42:51,600 --> 00:42:56,560
चाहिए तो फिर आपने क्या किया है?

606
00:42:56,560 --> 00:43:00,720
भाट पौराणिक पोप पंडे सब

607
00:43:00,720 --> 00:43:04,960
क्या है क्या आवश्यकता थी इसकी सैद्धांतिक

608
00:43:04,960 --> 00:43:09,040
खंडन करते केवल हम ख्नस भरी

609
00:43:09,040 --> 00:43:13,120
थी क्या कोई ये सब सोचने वाली बात है कि ये एक बेकार

610
00:43:13,120 --> 00:43:17,760
की बात है फिर क्या व्यर्थ है ये व्यर्थ ही तो हो गया ये

611
00:43:17,760 --> 00:43:20,720
कि

612
00:43:20,720 --> 00:43:25,600
ये कहना कि भाई आर्य समाज ने कितना भाई आप जो

613
00:43:25,600 --> 00:43:29,600
जर्मनी से वेद ला रहे हो और उसको

614
00:43:29,600 --> 00:43:33,680
भी केरल में जाकर के प्रामाणिक करवा रहे हो। वेद

615
00:43:33,680 --> 00:43:37,680
जिनके ऊपर आज आप अपना ताना-बाना स्ट्रक्चर जिनके नाम से आपने खड़ा

616
00:43:37,680 --> 00:43:41,680
किया तो वो जो स्ट्रक्चर है वो आपको प्राप्त

617
00:43:41,680 --> 00:43:45,760
कैसे हुआ? उसको किसने प्रिजर्व करके रखा? तो तब

618
00:43:45,760 --> 00:43:50,320
आपको नहीं सोच ध्यान आया था कि हम पौराणिक को पंडित किसे कह रहे हैं?

619
00:43:50,320 --> 00:43:54,400
1990 के दिनों का मेरे पास वीडियो आया अभी कुछ दिन पहले

620
00:43:54,400 --> 00:43:58,560
सड़क पर निकल कर के विरोध कर रहे हैं परंपरा प्राप्त आचार्यों का जुलूस

621
00:43:58,560 --> 00:44:02,960
निकाल रहे हैं आर शर्मा जी आजकल बंद हो गया है जुलूस

622
00:44:02,960 --> 00:44:07,040
निकल रहा है ये वैचारिक क्रांति अच्छा जो

623
00:44:07,040 --> 00:44:12,240
काशी शास्त्रार्थ स्मृति स्थल बनाया हुआ है बड़े दंभ के साथ

624
00:44:12,240 --> 00:44:16,800
किसने बनवाया है और किसके साथ उसमें वैचारिक युद्ध दिखाया है

625
00:44:16,800 --> 00:44:21,520
मुसलमानों के साथ क्रिश्चियन के साथ ना

626
00:44:21,520 --> 00:44:25,600
वो जो एक शास्त्रार्थ हुआ था जिसमें दयानंद जी हार गए थे हारने के बाद अपनी हार को

627
00:44:25,600 --> 00:44:29,600
स्वीकार नहीं कर पा रहे थे जिसके उपलक्ष में उन्होंने बाद में

628
00:44:29,600 --> 00:44:33,600
पर्चे छपवाना शुरू किए न्यूज़ में अपनी बातें डलवाना शुरू की

629
00:44:33,600 --> 00:44:37,680
अपने मन की और फिर बाद में जो है जहां सबसे बड़ी हार हुई थी वहीं पर जो है सबसे बड़ी जीत

630
00:44:37,680 --> 00:44:42,160
का एक स्मारक इसी तरीके से बनवा लिया बनवाया तो बनवाया

631
00:44:42,160 --> 00:44:46,160
यहां तो आपकी बात ही खंडित हो रही है किन के विरोध में जो आपको वेद

632
00:44:46,160 --> 00:44:50,320
प्रिजर्व करके दे रहे हैं किन के विरोध जिन्होंने अपने

633
00:44:50,320 --> 00:44:54,400
समय में सबने एक से बढ़कर एक बड़े क्रांतिकारी कार्य

634
00:44:54,400 --> 00:44:58,400
किए हैं और आज भी कर रहे हैं। राम

635
00:44:58,400 --> 00:45:02,640
मंदिर का सबसे बड़ा एक युद्ध माना जाता है हमारे देश में चलने वाला। किसने

636
00:45:02,640 --> 00:45:07,120
लड़ा है? आर्य समाज ने लड़ा है क्या? राम मंदिर का युद्ध।

637
00:45:07,120 --> 00:45:13,120
वहां जाकर के श्रेय तो सबने लिया है। लड़ा किसने?

638
00:45:13,360 --> 00:45:17,360
तो यह सब बातें फिर व्यर्थ की हो

639
00:45:17,360 --> 00:45:21,520
जाती हैं। इस तरह की बातें करना कि भैया जो है उनकी अच्छाइयां भी

640
00:45:21,520 --> 00:45:25,520
तो हैं। दूसरी बात हम कोई आपका शटर बंद करने की बात नहीं कर

641
00:45:25,520 --> 00:45:29,520
रहे हैं। आप बिल्कुल गायब ही हो जाओ। अस्तित्व ही खत्म हो जाए।

642
00:45:29,520 --> 00:45:33,600
हम तो उन बातों पर बात कर रहे हैं जिन बातों के कारण समाज में बंटवारा हो रहा है।

643
00:45:33,600 --> 00:45:37,680
बंटवारा नहीं होगा हमें कोई मतलब नहीं है। आप अपने घर अच्छे हम अपने

644
00:45:37,680 --> 00:45:41,760
घर अच्छे हैं। होली दिवाली पर राम राम श्याम श्याम भी करिए।

645
00:45:41,760 --> 00:45:45,920
अभी भी करते हैं। मगर वह बंटवारा हो रहा है।

646
00:45:45,920 --> 00:45:50,000
हम बट रहे हैं। और यह खतरे की घंटी है।

647
00:45:50,000 --> 00:45:54,320
जब हम हाथी बन के बैठेंगे, इकट्ठा होकर के बैठेंगे, किसी माई के लाल में हिम्मत

648
00:45:54,320 --> 00:45:58,480
नहीं होगी हमारे खिलाफ बोलने की। क्यों बोल पा रहा है व्यक्ति? क्यों

649
00:45:58,480 --> 00:46:02,480
स्वतंत्र है? क्योंकि हम एकजुट नहीं है। एकजुट क्यों नहीं

650
00:46:02,480 --> 00:46:06,480
है? क्योंकि आप हमारा विरोध करना शुरू किए हो ना। हमने थोड़ी

651
00:46:06,480 --> 00:46:10,640
ना आपका विरोध शुरू किया। आपका तो अस्तित्व ही नहीं था। आपने खुद कहा आर्य समाज

652
00:46:10,640 --> 00:46:14,640
नहीं था। तो यह वाली बात है। दूसरी बात फिर यह कहते हैं

653
00:46:14,640 --> 00:46:19,040
कि आगे बढ़ते हैं, कहते हैं हमने यह क्रांतिकारी दिए, वो क्रांतिकारी

654
00:46:19,040 --> 00:46:23,680
दिए। तो पहली बात तो ये जो क्रांतिकारियों का श्रेय लिया जाता है

655
00:46:23,680 --> 00:46:27,760
इस श्रेय में भी बहुत सारा विवाद है। जितने क्रांतिकारियों

656
00:46:27,760 --> 00:46:28,560
का नाम लेंगे

657
00:46:28,560 --> 00:46:32,800
उन सब की बात अगर की जाएगी तो उसमें से कई ऐसे क्रांतिकारी निकलेंगे

658
00:46:32,800 --> 00:46:36,880
जो एक सामान्य हिंदू मात्र थे। उन्होंने अभी डिसाइड

659
00:46:36,880 --> 00:46:42,880
ही नहीं किया था कि ईश्वर साकार है कि निराकार है कि मूर्ति पूजा अधर्म में है कि नहीं है।

660
00:46:42,960 --> 00:46:47,360
ठीक है? ये कह सकते हो कि किसी ने उस समय उनके

661
00:46:47,360 --> 00:46:51,440
समकालीन जो है अभी भी दुर्जंत ने ऐसे मान लेता हूं कि दयानंद जी

662
00:46:51,440 --> 00:46:55,440
ने कुछ ऐसी बातें कही जिससे प्रभावित हो गया। ठीक है? बहुत

663
00:46:55,440 --> 00:46:59,440
से लोग हो सकते हैं किसी से भी। मगर क्या दयानंद जी को स्वीकार

664
00:46:59,440 --> 00:47:03,600
कर लिया था? आर्य समाझी हो गए थे। जो उनके सिद्धांत है मोटे मोटे उनको जान

665
00:47:03,600 --> 00:47:08,880
करके मान लिया था। तो ऐसे आधे से ज्यादा जिनके आप नाम लेंगे

666
00:47:08,880 --> 00:47:12,880
वो पता चलेगा। उनको ये सब मालूम ही नहीं था आप क्या सोचते हैं क्या नहीं सोचते हैं।

667
00:47:12,880 --> 00:47:15,760
और दूसरी बात

668
00:47:15,760 --> 00:47:20,000
कि आप जितने भी नाम ले लो जितने भी 100

669
00:47:20,000 --> 00:47:24,400
ले लोगे 500 ले लोगे 1000 ले लोगे। क्या केवल उन 1000

670
00:47:24,400 --> 00:47:28,640
लोगों ने आजादी दिलवाई है? उस समय भी उन 1000

671
00:47:28,640 --> 00:47:32,720
लोगों के अलावा जितने लोग बचते हैं जो आर्य समाजी नहीं थे वह कौन थे? मूर्ति

672
00:47:32,720 --> 00:47:36,720
पूजक थे जिन्होंने स्वतंत्रता की लड़ाई

673
00:47:36,720 --> 00:47:41,360
लड़ी। यह तो मैं अभी आपकी बात को रख के बात कर रहा हूं।

674
00:47:41,360 --> 00:47:44,000
तब की बात है तर्कपूर्ण।

675
00:47:44,000 --> 00:47:48,080
आप 10 नाम गिनाओगे, 20 नाम गिनाओगे, जो बच जाएंगे, वह क्रांतिकारी कौन सिद्धू है? जो

676
00:47:48,080 --> 00:47:53,120
आर्य समाजी नहीं था, मूर्ति पूजक था। यह सब तो थे ही नहीं। तब

677
00:47:53,120 --> 00:47:56,140
छुटैया लोग

678
00:47:56,140 --> 00:48:00,480
[हंसी] जो कालांतर में उद्भाषित हुए सब तो थे ही नहीं। तो सनातन

679
00:48:00,480 --> 00:48:04,720
धर्म के नाम से प्रचार करने वाली जो इकाइयां थी उनमें जो है

680
00:48:04,720 --> 00:48:08,800
आर्य समाज जो है उसके बाहर जो था वह सब मूर्ति पूजक थे। वर्णाश्रमी थे।

681
00:48:08,800 --> 00:48:13,520
यानी कहीं ना कहीं अपने परंपरा प्राप्त सिद्धांतों से जुड़े हुए थे।

682
00:48:13,520 --> 00:48:17,840
तो यह एक बहुत बड़ा भ्रम है कि आर्य समाज

683
00:48:17,840 --> 00:48:22,080
ने ही केवल स्वतंत्रता संग्राम लड़ने वाले क्रांतिकारी दिए। अच्छा दूसरी

684
00:48:22,080 --> 00:48:26,320
बात जैसे आपने पीछे भी कहा कि आर्य समाज की अच्छाइयां

685
00:48:26,320 --> 00:48:30,480
देखो क्या शंकराचार्य की अच्छाइयां नहीं है बौद्धों से जीत के

686
00:48:30,480 --> 00:48:34,640
सनातन धर्म की स्थापना करते हुए आपको वैदिक धर्म प्रदान किया वो

687
00:48:34,640 --> 00:48:39,520
शंकराचार्य की अच्छाई नहीं है फिर क्यों कहा अपने

688
00:48:39,520 --> 00:48:43,920
खून की होली खेल के जो लोग आकर को आकर के आपका वैदिक वांगमय

689
00:48:43,920 --> 00:48:48,000
आपको पकड़ा रहे हैं उनका अपमान क्यों सैद्धांतिक लड़ाई

690
00:48:48,000 --> 00:48:52,240
लड़ते हम तो सैद्धांतिक लड़ाई लड़ रहे हैं आज भी हमने तो व्यक्तिगत

691
00:48:52,240 --> 00:48:56,320
अपमान किया ही नहीं है। उसका किया जो सामने से आगे कर रहा है। हमने कभी नहीं

692
00:48:56,320 --> 00:49:00,480
किया दयानंद जी का जो है अपमान

693
00:49:00,480 --> 00:49:04,640
व्यक्तिगत रूप से सैद्धांतिक विरोध जरूर किया। सैद्धांतिक कटाक्ष किए

694
00:49:04,640 --> 00:49:08,960
मगर कभी कोई अगर करता है तो उसको रोकते हैं। भागवतानंद ने

695
00:49:08,960 --> 00:49:13,040
दयानंद इनके लिए तू तड़ाक कहा था। दयानंद करके। दयानंद जी नहीं

696
00:49:13,040 --> 00:49:17,360
लगाया था। भागवतानंद इस तरह से बात कर रहा था तू तड़ाक करके। और इस मामले

697
00:49:17,360 --> 00:49:21,440
में मुझे भागवतानंद ठीक नहीं लगता। उसकी जो शैली है अमर्यादित

698
00:49:21,440 --> 00:49:25,440
शैली है। गुदा द्वार ये वो सब बातें कर देगा।

699
00:49:25,440 --> 00:49:29,760
सबसे जोड़ के सब तरह की बातें वो बोल देगा क्योंकि उसको जो है मसालेदार वीडियोस

700
00:49:29,760 --> 00:49:34,160
बनाने होते हैं। मगर वो यह भूल जाता है कि यदि वो स्वयं को आचार्य

701
00:49:34,160 --> 00:49:39,440
कह रहा है और आजकल तो जगत गुरु भी बन गए हैं। [हंसी]

702
00:49:39,440 --> 00:49:45,440
तो वो किस रूप में सनातन धर्म को प्रस्तुत कर रहा है समाज के समक्ष।

703
00:49:46,320 --> 00:49:50,400
सब बातें कर देगा वो। प्रचार शैली

704
00:49:50,400 --> 00:49:54,400
जो है हर समाज की ले रखी है उन्होंने भी। अरे वो और भी ज्यादा

705
00:49:54,400 --> 00:49:58,400
दो कदम आगे वाली है। खैर तो

706
00:49:58,400 --> 00:50:04,400
मुद्दे पे आ जाते हैं। तो ये जो

707
00:50:06,720 --> 00:50:10,960
बुद्ध से जीत के वैदिक वांगमय आप तक कौन लाया? वही

708
00:50:10,960 --> 00:50:15,040
ना जिनका आप सड़कों में निकल के विरोध कर रहे थे। अच्छा और

709
00:50:15,040 --> 00:50:19,120
बाद में आ जाइए क्या शंकराचार्य परंपरा

710
00:50:19,120 --> 00:50:23,360
रामानुजाचार्य परंपरा अपने अपने समय पर सबने लोहा नहीं लिया नास्तिकों से विधर्मियों

711
00:50:23,360 --> 00:50:27,440
से सब सबने अपनेप जगह अपनीपनी जगह पर बहुत

712
00:50:27,440 --> 00:50:31,440
लड़ाईयां लड़ी है और आप आप शायद जानते होंगे क्योंकि मुझे लग रहा

713
00:50:31,440 --> 00:50:35,520
है कि आप मर्मज्ञ हो इतिहास इत्यादि के तो जानकर अनजान बन रहे हो तो ये गलत

714
00:50:35,520 --> 00:50:39,360
है धर्म को धारण करें ना पहले

715
00:50:39,360 --> 00:50:43,600
ये बात हो गई दूसरी बात यदि नहीं जानते तो बिना जाने आपको कहना

716
00:50:43,600 --> 00:50:47,680
नहीं चाहिए। तो जो आरोप अब आप हम पर लगा

717
00:50:47,680 --> 00:50:51,680
रहे हैं वह सबसे पहले तो उन बातों से आपका ही विरोध हो रहा है। यह

718
00:50:51,680 --> 00:50:57,360
विचारणीय है। अब आगे एक बात आती है

719
00:50:57,360 --> 00:51:01,360
हरिहर बुक्का को किसने खड़ा किया?

720
00:51:01,360 --> 00:51:02,000
मुसलमानों

721
00:51:02,000 --> 00:51:06,320
के ही विरोध में ले लें जो मुगल साम्राज्य स्थापित

722
00:51:06,320 --> 00:51:10,400
हो रहा था। अब हरिहर बुक्का को किसने स्थापित किया? देश

723
00:51:10,400 --> 00:51:14,400
का जो सबसे स्वर्णिम इतिहास माना जाता है राजा

724
00:51:14,400 --> 00:51:18,640
कृष्णदेव राय अभी भी वहां पर जो हम्पी

725
00:51:18,640 --> 00:51:22,960
है वहां पर वो जो है उसको जो है विश्व धरोहर

726
00:51:22,960 --> 00:51:27,280
में गिना जाता है हम्पी पूरे विश्व की मार्केट वहां लगती

727
00:51:27,280 --> 00:51:31,280
थी हम्पी में राजा कृष्ण देवराय सबसे सुनहरा

728
00:51:31,280 --> 00:51:35,840
पीरियड माना जाता है वह एंपायर किसने खड़ा करवाया था

729
00:51:35,840 --> 00:51:40,160
विद्या स्वामी और आचार्य सायण के शिष्य थे हरियर

730
00:51:40,160 --> 00:51:44,160
बुक्का खड़े हुए उनहीं के क्रम में आगे चलकर के राजा कृष्ण देवराय वहां

731
00:51:44,160 --> 00:51:48,560
पर छत्रपति शिवाजी मूर्ति पूजक समर्थ रामदास

732
00:51:48,560 --> 00:51:52,720
जी के समर्थ रामदास जी के शिष्य थे बिल्कुल महाराणा

733
00:51:52,720 --> 00:51:56,880
प्रताप मूर्ति पूजक इन सबका बलिदान आपको

734
00:51:56,880 --> 00:52:00,960
ध्यान नहीं आता केवल एक आर्य समाज नहीं वो 101 आपके पास जो

735
00:52:00,960 --> 00:52:05,040
नाम है जो विवादित बस वही है अच्छा दूसरी बात यह है आपका

736
00:52:05,040 --> 00:52:09,120
एक कहना और था कि भाई उस समय अगर आर्य समाज था ही नहीं तो तब की बात क्यों करो अरे

737
00:52:09,120 --> 00:52:13,760
भैया इसमें दो बातें निकल के आई। इन्होंने कहा उस समय आर्य समाज था ही नहीं

738
00:52:13,760 --> 00:52:17,280
और एक तरफ कहते हैं कि हमारी बातें जो है वह परंपरा जो है जैमिनी

739
00:52:17,280 --> 00:52:21,600
से आ रही है। इस समय इसका मतलब आर्य समाज के सिद्धांतों की

740
00:52:21,600 --> 00:52:25,600
पोषित करने वाला व्यक्ति था ना उस समय भी क्या कर रहा था?

741
00:52:25,600 --> 00:52:29,440
क्यों ना बात की जाए फिर उस समय

742
00:52:29,440 --> 00:52:33,520
और तुम आप खुद कह रहे हो कि उस समय था ही नहीं। यार समाज तो परंपरा टूटी

743
00:52:33,520 --> 00:52:37,520
है। इसका मतलब अपना है सब कुछ। कुछ वैदिक वांगमय का अर्थ

744
00:52:37,520 --> 00:52:42,560
जो कर रहे हो ये वाली बात भी आ गई

745
00:52:42,560 --> 00:52:46,640
और अगर आप थे नहीं और उस समय हमने

746
00:52:46,640 --> 00:52:50,720
कुछ किया है तो हम उसको बताएं ना उसको मत बताओ

747
00:52:50,720 --> 00:52:54,720
वो बताओ जो आर्य समाज के क्रिएशन के बाद का है बस हां अच्छा चलिए

748
00:52:54,720 --> 00:52:59,920
आर्य समाज के बाद की लड़ाईयां राम सेतु के लिए आप लड़े हैं क्या

749
00:52:59,920 --> 00:53:03,840
राम मंदिर के लिए आप लड़े हैं क्या

750
00:53:03,840 --> 00:53:09,840
हां वैदिक मैथमेटिक्स पूरे विश्व में किसने फैलाई है?

751
00:53:11,120 --> 00:53:15,360
तो आप यह क्यों सोच रहे हो कि आप ही ने सब कुछ किया है। हमने

752
00:53:15,360 --> 00:53:19,440
तो नहीं कहा कि हमने ये किया है। हम तब यह कह रहे हैं जब आप यह कह रहे हैं कि हमने ये

753
00:53:19,440 --> 00:53:24,320
किया इसलिए हमें हमारे चीजों पर प्रश्न मत उठाओ। ऐसा नहीं होता है।

754
00:53:24,320 --> 00:53:28,320
दमयंती जो थी नल की पत्नी उसको जो अजगर था वो निगल

755
00:53:28,320 --> 00:53:32,400
जाने वाला था। एक शिकारी ने आकर के दमयंती के प्राणों की रक्षा

756
00:53:32,400 --> 00:53:36,480
की थी और प्राणों की रक्षा करने

757
00:53:36,480 --> 00:53:40,640
के बाद शिकारी की कुदृष्टि हो गई दमयंती पर

758
00:53:40,640 --> 00:53:44,640
अब दमंती क्या करें अरे शिकारी ने तो बहुत अच्छे

759
00:53:44,640 --> 00:53:49,120
काम किए हैं मेरे प्राणों की रक्षा की करने दो जो कर रहा है ये करना चाहिए

760
00:53:49,120 --> 00:53:54,560
नहीं श्राप देकर के प्राण हर लिए दमयंती के

761
00:53:54,560 --> 00:53:59,280
तो जितने अंश में आपके अच्छे कार्य बहुत प्रशंसा अभिनंदन है स्वागत है

762
00:53:59,280 --> 00:54:03,520
हम साथ भी हैं। मगर जितने अंश में आपके कार्यों

763
00:54:03,520 --> 00:54:07,520
से हमें बाधा आएगी, समाज में अव्यवस्था फैलेगी।

764
00:54:07,520 --> 00:54:11,600
हां, समाज के मंदिरों में देखिए क्या हो रहा है। ₹5100 ले ले के किसी

765
00:54:11,600 --> 00:54:15,840
से भी ब्याह हो सकता है। किसी का भी धरातल की सच्चाई

766
00:54:15,840 --> 00:54:20,640
यही है। कितना भी उससे मुंह फेर लीजिए।

767
00:54:20,640 --> 00:54:24,640
आर्य समाज मैरिज बन के बैठ गया है। देखिए आप

768
00:54:24,640 --> 00:54:26,320
अपने निर्भय आर का ही वीडियो उसने

769
00:54:26,320 --> 00:54:31,440
खुद स्वीकारा है। यह धरातल की सच्चाई है।

770
00:54:31,440 --> 00:54:35,200
हम तो नहीं करवाते।

771
00:54:35,200 --> 00:54:41,200
हमारे आचार्य तो कह देते क्या कुत्ता बिल नहीं है क्या जो अपने मन से शादी करेंगे?

772
00:54:41,600 --> 00:54:45,840
ऐसे कह देते हैं। तो इन सब बातों

773
00:54:45,840 --> 00:54:50,160
पर विचार होना चाहिए और

774
00:54:50,160 --> 00:54:54,160
यह कहना गलत है कि केवल आर्य समाज ने ही किया। वर्तमान में भी लड़ाई

775
00:54:54,160 --> 00:54:58,560
जो है बहुत वायसराय आने वाले थे

776
00:54:58,560 --> 00:55:03,520
कौन सा पता नहीं कौन विदेशी वायसराय शंकराचार्य से कहा गया

777
00:55:03,520 --> 00:55:07,600
हम शंकराचार्य से बोला गया कि भैया जो

778
00:55:07,600 --> 00:55:11,680
है आप घोषणा कर दीजिए कि वायसराय जो आ रहे हैं उनका स्वागत वैसे ही होना

779
00:55:11,680 --> 00:55:16,080
चाहिए जैसे जो है किसी अवतार का स्वागत होता है।

780
00:55:16,080 --> 00:55:20,240
किसी अवतार का जिस तरह से स्वागत होता है हमारे यहां

781
00:55:20,240 --> 00:55:24,560
उस तरह से वायसराय का स्वागत होना चाहिए। तत्कालीन शंकराचार्य

782
00:55:24,560 --> 00:55:28,560
ने मना कर दिया। एक साल तक कारावास

783
00:55:28,560 --> 00:55:33,120
में रहे। अंग्रेजों के राज्य में

784
00:55:33,120 --> 00:55:37,280
यह विरोध नहीं है। अरे भैया जो धर्माचार्य हैं उनका सबसे

785
00:55:37,280 --> 00:55:41,440
बड़ा जो कार्य है ना महत्वपूर्ण वो धर्म को

786
00:55:41,440 --> 00:55:45,680
धर्म को बचा के रखे रहना कि कोई अच्छा समय आ जाएगा तब

787
00:55:45,680 --> 00:55:49,680
जो है कर लेंगे जो करना होगा। सबसे

788
00:55:49,680 --> 00:55:54,480
जो जरूरी कार्य है ना धर्माचार्य का दायित्व सिद्धांत

789
00:55:54,480 --> 00:55:58,560
को बचा के रख लो भाई। असतो मा सद्गमया

790
00:55:58,560 --> 00:56:03,760
तमसो मा ज्योतिर्गमया मृत्यु मृतमया इसको बचा लो

791
00:56:03,760 --> 00:56:08,240
नहीं तो सारी मर्यादाएं कलंकित हो जाएंगी ये लुप्त हो गया तो

792
00:56:08,240 --> 00:56:13,120
नास्तिकता जीत जाएगी ये लुप्त हो गया तो हम

793
00:56:13,120 --> 00:56:17,120
उसके बाहर जाकर के भी धरातल पर विरोध कर रहे

794
00:56:17,120 --> 00:56:21,360
हैं। शासन प्रशासन से टकरा रहे हैं। विपरीत परिस्थितियों

795
00:56:21,360 --> 00:56:25,360
में कार्य कर रहे हैं। ये सब उनका काम नहीं है।

796
00:56:25,360 --> 00:56:29,680
वशिष्ठ जी क्या रावण से लड़ने जाते थे क्या युद्ध राम

797
00:56:29,680 --> 00:56:33,760
जी को भेजा था धर्माचार्य के कार्य नहीं है मगर

798
00:56:33,760 --> 00:56:37,840
वो गए विपरीत परिस्थितियों पर भी उतरे और आप कह रहे हैं कि भैया

799
00:56:37,840 --> 00:56:41,920
आप ही ने सब कुछ किया है ये सब विचारणीय है ऐसी चीजों को

800
00:56:41,920 --> 00:56:47,200
कहने से बचे जो सिद्ध ना हो पाए और तर्कपूर्ण भी नहीं है

801
00:56:47,200 --> 00:56:51,200
तो यह सारी बातें थी अभी तक जो इससे फिर

802
00:56:51,200 --> 00:56:55,360
आगे का पार्ट अलग है। आप अपने अपने पक्ष को रखें। जी सनातन

803
00:56:55,360 --> 00:56:56,800
शंकर जी स्वागत

804
00:56:56,800 --> 00:57:01,040
है पंडित जी बड़े दिनों बाद। जय श्री राम। जय

805
00:57:01,040 --> 00:57:05,120
श्री राम। जय श्री राम पंडित जी। कैसे हैं आप लोग? मैं तो बहुत मैं

806
00:57:05,120 --> 00:57:09,600
तो बस देख रहा था आप लोगों का लाइव। मेरी अभी ऑफर्स की कॉल खत्म हुई थी तो मैं सोचा कि

807
00:57:09,600 --> 00:57:14,640
अच्छा टॉपिक तो बहुत अच्छा है। वैसे आपका तो जिज्ञासा जो है वो

808
00:57:14,640 --> 00:57:18,720
समाधान उनका मिला कि नहीं दर्शकों को? भाई

809
00:57:18,720 --> 00:57:22,960
प्रयास तो किया है मैंने। [हंसी] आगे महादेव

810
00:57:22,960 --> 00:57:28,320
की इच्छा हम क्या है ना हम दम भी नहीं है ताल नहीं ठोकते हम

811
00:57:28,320 --> 00:57:32,720
कर्मन्यवादी कारस मा फलसु कदाचना केवल इसका प्रचार नहीं करते

812
00:57:32,720 --> 00:57:37,600
खून में है ये हमारे प्रचार नहीं करते केवल

813
00:57:37,600 --> 00:57:41,920
जी जी सुना शंकर जी आवाज मेरी ठीक आ रही है ना

814
00:57:41,920 --> 00:57:46,000
हां कुछ बोलना है तो बोल बताइए नहीं नहीं

815
00:57:46,000 --> 00:57:50,720
मैं बस आप लोगों को अभी सुनने आया हूं जी जी जी जी

816
00:57:50,720 --> 00:57:54,960
अच्छा शणाचार्य जी का भी उपहास उड़ाया उन्होंने अपने उस वीडियो में

817
00:57:54,960 --> 00:57:59,120
और शनाचार्य जी के भाष को लेकर उन्होंने बस

818
00:57:59,120 --> 00:58:04,000
वो बलि को लेकर और जो ये कहा कि वहां बहुत अश्लीलता

819
00:58:04,000 --> 00:58:08,080
ये सारी सैद्धांतिक बातें हैं हम लोग इनमें अभी सैद्धांतिक वो खंडन मंडन अभी

820
00:58:08,080 --> 00:58:11,840
नहीं करेंगे जो व्यवहारिक जो उनके आरोप थे ना सैद्धांतिक

821
00:58:11,840 --> 00:58:15,920
खंडन मंडन ईश्वर साकार निराकार बलि ये वो सब जो चीजें

822
00:58:15,920 --> 00:58:20,000
हैं और वो एक अलग पक्ष हो जाएगा तो तो

823
00:58:20,000 --> 00:58:24,080
हम लोग जो है आज जो बात कर रहे हैं जो व्यवहारिक आक्षेप और वो चल रहा है ना

824
00:58:24,080 --> 00:58:29,600
ग्रंथ जो वो वाली बात है ना वेद का अर्थ उनका सही कि हमारा सही

825
00:58:29,600 --> 00:58:34,000
हम इस बात को छोड़ते हुए बस जो उन्होंने

826
00:58:34,000 --> 00:58:39,040
बात तो सही है वो तो है ही है चर्चा का विषय जी हम

827
00:58:39,040 --> 00:58:43,040
बाकी ये एक और चीज उन्होंने कही है इसमें एक चीज

828
00:58:43,040 --> 00:58:47,120
आप एक चीज आप सही कह रहे हैं इसमें एक चीज आपने सही कह रहे हैं जिस वीडियो में

829
00:58:47,120 --> 00:58:51,200
वो स्वयं ये कह रहे हैं एक हो जाओ जिस वीडियो में वो स्वयं ये कह

830
00:58:51,200 --> 00:58:55,280
रहे हैं कि इतने अच्छे-अच्छे काम किए ये नहीं दिखते आपको। तो भाई आपने क्या आंखों

831
00:58:55,280 --> 00:58:59,360
पर कौन सा ऐसा चश्मा लगाया? आप तो वैदिक फिजिक्स वाले हैं। पूरा इतना बड़ा

832
00:58:59,360 --> 00:59:03,360
एंपायर खड़ा हुआ है आपका। तो आपके यहां पर ऐसे कौन से डिजिटल चश्मे

833
00:59:03,360 --> 00:59:07,360
हैं जो आपको ये सब सत्यता देखने से रोक रहे हैं कि शंकराचार्य क्या

834
00:59:07,360 --> 00:59:11,600
कर रहे हैं? या वैष्णवाचार्य क्या कर रहे हैं?

835
00:59:11,600 --> 00:59:15,760
फिर तो यह तो गलत बात है। अच्छा हम इस तरह का आरोप लगाते ही नहीं कभी

836
00:59:15,760 --> 00:59:20,320
कि आर्य समाज ने जो है कुछ किया ही नहीं है।

837
00:59:20,320 --> 00:59:24,480
ये कभी आरोप लगाया? नहीं नहीं हमने तो ऐसा कुछ नहीं हमारा बस

838
00:59:24,480 --> 00:59:26,880
सिद्धांतिक ही होता है कि भाई टू द पॉइंट

839
00:59:26,880 --> 00:59:31,280
इधर उधर की बात टू द पॉइंट हां बस बस व्यक्तिगत

840
00:59:31,280 --> 00:59:36,000
आक्षेप भी नहीं लगाते। अपन किसी व्यक्ति के ऊपर क्या है कि वो भी नहीं हम लगाते।

841
00:59:36,000 --> 00:59:40,000
है ना? इसने उसको हरा दिया। एक कोई प्रश्न पूछने गया कहता

842
00:59:40,000 --> 00:59:44,080
है जी मैं तो शंकराचार्यों को हरा दिया। प्रश्न पूछने से ही शंकराचार्यों को

843
00:59:44,080 --> 00:59:48,160
मतलब उसने हारा हुआ मान लिया। ऐसी चीजें तो हम नहीं करते हैं। अब

844
00:59:48,160 --> 00:59:52,240
उसके खुद के लोगों ने नहीं माना है। हम क्यों नहीं

845
00:59:52,240 --> 00:59:57,360
माना है? मान लिया होता तो अग्निवत जी का फोन कैसे आ जाता मेरे पास?

846
00:59:57,360 --> 01:00:01,520
अग्निव्रत इनको भी तो पीछे से काफी फोन कर रहे हैं ना। वो उन्होंने खुद ही लिखा

847
01:00:01,520 --> 01:00:07,200
है कि भ मेरे को काफी लोगों ने बताया कि शिवश जी तो ऐसे हैं। नहीं

848
01:00:07,200 --> 01:00:11,440
उस मामले से वह जनता संतुष्ट नहीं थी आर्य समाजी जनता इतना

849
01:00:11,440 --> 01:00:15,440
तो सिद्ध हो ही गया ना क्योंकि आर्य समाज जनता संतुष्ट नहीं थी तभी

850
01:00:15,440 --> 01:00:19,520
तो इन तक मेरी बात पहुंची कि भैया इसको आप उत्तर दो या इनको

851
01:00:19,520 --> 01:00:25,200
लगा उत्तर देना चाहिए इतना तो

852
01:00:25,200 --> 01:00:29,440
जी ये पॉइंट तो है कि इनके इनको

853
01:00:29,440 --> 01:00:33,600
आना पड़ा सामने ये भी बात है जी या

854
01:00:33,600 --> 01:00:38,080
फिर आपकी जो चर्चाएं हुए हैं। उससे यह इनको

855
01:00:38,080 --> 01:00:41,920
मतलब मजबूर हो गए ये बिल्कुल कि अब तो हमें

856
01:00:41,920 --> 01:00:47,280
आना ही पड़ेगा। जी

857
01:00:47,280 --> 01:00:51,440
जी बोले बोले सिंह जी हां कन्हैया

858
01:00:51,440 --> 01:00:55,440
जी को [गला साफ़ करने की आवाज़] सुने क्या कन्हैया जी भी जुड़ गए हैं। हां ये काफी देर से कह रहे थे

859
01:00:55,440 --> 01:00:59,520
लिंक दो। मैंने इनको लिंक भी दिया था। जी कन्हैया जी जय श्री राम। स्वागत

860
01:00:59,520 --> 01:01:04,080
है। मेरा चेहरा ब्लर आ रहा है। साफ आ रहा है।

861
01:01:04,080 --> 01:01:08,160
मुझे लग रहा है ब्लर आ रहा है ना मेरा चेहरा। सही आ रहा है।

862
01:01:08,160 --> 01:01:12,640
साफ है। साफ है। साफ है। जी

863
01:01:12,640 --> 01:01:17,870
बोल। जी कन्हैया जी। चेहरे पे आज वो वो तेज नहीं है आपके।

864
01:01:17,870 --> 01:01:22,000
[हंसी] [अचानक ज़ोर से सांस लेने की आवाज़] नहीं

865
01:01:22,000 --> 01:01:26,960
तेज है। कैमरे ने ही कुछ किया होगा। ब्लर हां वही वही ब्लर इनका वो पीछे

866
01:01:26,960 --> 01:01:31,120
पीछे का वो ब्लर आता है सर बैकग्राउंड हां बैकग्राउंड तो ब्लर हो सकता है बैकग्राउंड

867
01:01:31,120 --> 01:01:35,200
तो ब्लर आता ही है इसमें कोई समस्या नहीं है हम वो भी फोकस कर रहा होगा ना

868
01:01:35,200 --> 01:01:39,280
कैमरा ये हट गया है वहां सर तो सब्जेक्ट हट गया है तो कैमरा फोकस

869
01:01:39,280 --> 01:01:44,160
नहीं कर पा रहा होगा हां कन्हैया जी बोलिए आप बोलिए बात बताइए अपनी

870
01:01:44,160 --> 01:01:48,640
हां मैं ये कह रहा हूं कि जो आपकी चर्चा होने वाली है अग्निवस्टिक

871
01:01:48,640 --> 01:01:53,440
जी से अंतत आपको सिर्फ निराशा ही मिलेगी कुछ नहीं मिलेगा आपको

872
01:01:53,440 --> 01:01:56,960
अच्छा अच्छा आपने पहले ही भविष्यवाणी कर दी। क्यों? मैं आपको

873
01:01:56,960 --> 01:02:01,840
बता रहा हूं ना। हां मैं आपको बताता हूं। अभी देखो

874
01:02:01,840 --> 01:02:05,920
मेरा एक निवेदन है कन्हैया जी पांच मिनट का टाइम आप मुझे दीजिए। तब तक आप मेरे विषय

875
01:02:05,920 --> 01:02:10,000
से संबंधित ना बोले। मैं जरा इसको ब्लर है जो कर लूं तब

876
01:02:10,000 --> 01:02:14,080
तक आप कुछ और विषय जो आपका है वो आप रख लीजिए। कन्हैया जी मैं आपको देता

877
01:02:14,080 --> 01:02:18,400
हूं पॉइंट। मैं उसमें इन्वॉल्व हो पाऊंगा ना। आप जो बात करेंगे उसमें इन्वॉल्व

878
01:02:18,400 --> 01:02:22,560
हो पाऊंगा। जी जी जी अच्छा कन्हैया जी जो इन्होंने सत्यार्थ

879
01:02:22,560 --> 01:02:26,960
प्रकाश में जो मिलावट तो मानी है नेस्टिक जी ने अपने उस वीडियो में

880
01:02:26,960 --> 01:02:31,200
उन्होंने खुद ही कहा है कि इन्होंने क्या किया

881
01:02:31,200 --> 01:02:35,840
इन्होंने एक वीडियो बनाई थी कौन करेगा वेदों का सही भाष्य

882
01:02:35,840 --> 01:02:40,000
अच्छा हां तो इसका मतलब आर्य समाजियों का भाष्य ठीक

883
01:02:40,000 --> 01:02:44,960
नहीं है ये स्वयं मानते हैं भाई हम तो नहीं कह रहे ना इस चीज को

884
01:02:44,960 --> 01:02:49,120
हम नहीं इन्होंने कौन करेगा सही भाष इन्होंने

885
01:02:49,120 --> 01:02:53,520
वो एक पुस्तक लिखी थी ना उभरते प्रश्न गरजते

886
01:02:53,520 --> 01:02:57,520
उत्तर ऐसा कुछ था वो मैंने तो मैंने भेजी आपको भेजी तो थी

887
01:02:57,520 --> 01:03:01,760
आपको मैंने हां आप ही ने भेजी थी तो उसमें

888
01:03:01,760 --> 01:03:05,760
अच्छा इन्होंने क्या किया प्रकाश में जो चीजें नहीं आ पाई उनको उन्होंने

889
01:03:05,760 --> 01:03:10,880
वहां पर एक्सप्लेन किया है उन्होंने

890
01:03:10,880 --> 01:03:15,280
तो मैं बस ये यहां पर अभी सोच रहा था कि शिवा जी कह रहे थे कि इनको

891
01:03:15,280 --> 01:03:19,280
ऐसी चीजें करनी चाहिए जिससे आपसी बने तो

892
01:03:19,280 --> 01:03:23,520
भैया आप उभरते प्रश्न गरजते उत्तर

893
01:03:23,520 --> 01:03:27,520
जो है हमारे जो बाकी शास्त्र के विषय में

894
01:03:27,520 --> 01:03:31,920
क्यों नहीं जब हमारे शास्त्रों के आक्षेप लगते हैं

895
01:03:31,920 --> 01:03:36,240
नकार क्यों देते हो वहां पर क्यों नहीं कहते हो कि भैया इनके भी हम गरजते उत्तर देंगे

896
01:03:36,240 --> 01:03:40,960
तो ये प्रश्न भी मेरे मन में आया जब मैंने इनको वो वीडियो देखा के

897
01:03:40,960 --> 01:03:45,680
आज हम भी तो उत्तर दे पा रहे हैं अगर कोई आक्षेप लगाता है तो हम उसको

898
01:03:45,680 --> 01:03:50,160
गरज कर उत्तर दे रहे हैं तो आप क्यों नहीं उसमें आते हो आप पीछे क्यों हट जाते हो उसको प्रक्षेपित

899
01:03:50,160 --> 01:03:54,160
मानकर क्यों पीछे हटने का जो आप इशारा करते

900
01:03:54,160 --> 01:03:58,400
हैं यह भी आपको नहीं करना चाहिए जबकि

901
01:03:58,400 --> 01:04:02,480
प्रश्न के उत्तर ऐसा नहीं है कि नहीं है जितने भी आक्षेप लगते हैं सब

902
01:04:02,480 --> 01:04:06,560
प्रश्नों के उत्तर हम देते ही हैं अपने माध्यम से जिस

903
01:04:06,560 --> 01:04:10,640
तरह से हम दे सकते हैं। चाहे वह जातिवाद का जो है

904
01:04:10,640 --> 01:04:14,800
आरोप हो, है ना? या शास्त्रों में जो ऐसी बातें आती

905
01:04:14,800 --> 01:04:19,200
हैं जिन जिनकी व्याख्या जो है हमारे आचार्य करते हैं। वो व्याख्या को ना मानकर

906
01:04:19,200 --> 01:04:23,200
अपनी अलग व्याख्या देना या उसको बिल्कुल नकार

907
01:04:23,200 --> 01:04:26,000
देना। तो वहां पर हमारे आचार्यों के द्वारा दी

908
01:04:26,000 --> 01:04:30,800
हुई व्याख्या जो है वो हमें तो समझ में आती है।

909
01:04:30,800 --> 01:04:35,040
है ना? तो यह भी वहां पर बात है कि सत्यार्थ प्रकाश के ऊपर उठते

910
01:04:35,040 --> 01:04:39,040
हैं जब सवाल तब तो गरजते उत्तर दिए जाते हैं लेकिन

911
01:04:39,040 --> 01:04:43,680
बाकी चीजों पर गरजते उत्तर ना देकर उसको प्रक्षेपित

912
01:04:43,680 --> 01:04:47,840
बोल दिया जाता है यह नहीं करना आप सभी

913
01:04:47,840 --> 01:04:51,920
लोगों सभी लोगों को आप सभी लोगों को शायद एक इनकी प्रतिज्ञा याद नहीं

914
01:04:51,920 --> 01:04:56,000
है इन्होंने एक प्रतिज्ञा भी दी थी आपको पता है शायद कभी शायद कभी सुनी हो इनकी एक प्रतिज्ञा

915
01:04:56,000 --> 01:05:00,960
थी एक सार्वभौम प्रतिज्ञा थी इनकी पूरे विश्व स्तर पर

916
01:05:00,960 --> 01:05:05,360
उन्होंने ये कहा था कि मैं ईश्वर की सिद्धि कर दूंगा इतने समय तक। मुझे

917
01:05:05,360 --> 01:05:09,360
पूरा तरह से याद नहीं है क्योंकि एक्सैक्ट मैं नहीं बता पाऊंगा लेकिन शायद कुछ ऐसा ही ऐसा

918
01:05:09,360 --> 01:05:13,360
ही था कि मैं इतने समय तक ईश्वर की सिद्धि नहीं कर पाया या कुछ ऐसा कुछ

919
01:05:13,360 --> 01:05:17,680
ऐसा मैटर था तो मैं अपने प्राण त्याग दूंगा।

920
01:05:17,680 --> 01:05:21,680
ऐसा इन्होंने बोला था। अग्निव्रत जी ने हां

921
01:05:21,680 --> 01:05:25,680
हां मुझे नहीं पता टॉपिक क्या था लेकिन था कुछ ऐसा ही

922
01:05:25,680 --> 01:05:30,000
वो इधर दिखाओ हां शुरू में

923
01:05:30,000 --> 01:05:34,400
शुरू में जब ये नए-नए YouTube पे ज्ञापित हुए थे तब इन्होंने

924
01:05:34,400 --> 01:05:38,480
कुछ लेकर बिग बैंग को लेकर मैंने उनके कुछ वीडियो देखे थे हां

925
01:05:38,480 --> 01:05:41,440
हां कुछ तो ये मतलब हमेशा मरने

926
01:05:41,440 --> 01:05:45,440
मारने की बातें क्यों करते हैं मुझे समझ नहीं आई मैंने तो हनुमान जी के

927
01:05:45,440 --> 01:05:49,520
लिए भी तो ये बात बोल दी थी ना कि हनुमान जी उठते हैं वो तो स्वीकार ते हैं शायद इस बात

928
01:05:49,520 --> 01:05:54,080
को और उनके ही

929
01:05:54,080 --> 01:05:58,560
ग्रुप में जो आदि जो उनके उनके जो है फ्रेंड्स उन्हें स्वीकारते

930
01:05:58,560 --> 01:06:02,640
हैं तो ये हां बहुत इस पर

931
01:06:02,640 --> 01:06:06,720
इस पर बहुत विरोध हुआ था। बहुत विरोध हुआ था इस चीज पर। हां। बहुत

932
01:06:06,720 --> 01:06:10,720
विरोध हुआ था। अग्निव्रत नष्टिक जी का बहुत विरोध हुआ था। इवन इवन

933
01:06:10,720 --> 01:06:14,800
मैं अपने बारे में भी बताना चाहता हूं आपको जब मैंने इनका एक वो वाला

934
01:06:14,800 --> 01:06:18,800
पढ़ा था ना मैंने इन्होंने सृष्टि कर्म रचना वगैरह इत्यादि सब किए थे तो

935
01:06:18,800 --> 01:06:22,800
मैं भी इनको बहुत सुनता था पहले बहुत मुझे कुछ बातें अच्छी लगती थी

936
01:06:22,800 --> 01:06:26,960
इनकी तो उस समय मेरे को मतलब ऐसा लगता था कि मतलब कुछ बातें

937
01:06:26,960 --> 01:06:30,960
लगता है कि शायद ये ठीक कह रहे हैं लेकिन जब बाद में मैंने जब उन्ही ग्रंथों को पढ़ के

938
01:06:30,960 --> 01:06:35,280
देखा तो उसमें ऐसा कुछ है ही नहीं समस्या वो निकली मेरे को मैंने कहा कि ग्रंथों

939
01:06:35,280 --> 01:06:39,440
को अपने हिसाब से मोल्ड करके बताना उस समय मैं संस्कृत थोड़ी कम जानता था

940
01:06:39,440 --> 01:06:43,680
मैं तो उनके मैं अर्थ जो करता था उतना कर नहीं पाता था मैं तो जब जब से मैंने

941
01:06:43,680 --> 01:06:47,680
संस्कृत जाना थोड़ा सीखा मैंने और फिर मैंने ग्रंथों में चेक किया तो

942
01:06:47,680 --> 01:06:51,680
मुझे वो ऐसा कोई डिफरेंस मिला ही नहीं जो बोलते थे तो मैंने अपने मन से तो कोई व्यक्ति

943
01:06:51,680 --> 01:06:55,760
कुछ भी बोल सकता है ना फिर सबसे ज्यादा मुझे थोड़ा

944
01:06:55,760 --> 01:06:56,560
गलत लगा ये कि

945
01:06:56,560 --> 01:07:01,520
जो अपने मन से जो व्याख्या होती है वो गलत लगी मेरे को

946
01:07:01,520 --> 01:07:05,520
तो अब [गला साफ़ करने की आवाज़] दूसरी चीज दूसरी चीज शिव जी मैं आपसे ये कहना

947
01:07:05,520 --> 01:07:09,600
चाह रहा हूं कि अभी आपने कहा था ना कि जैसे इनका स्वभाव जो है थोड़ा सौभा भाद्र था या

948
01:07:09,600 --> 01:07:13,760
मतलब मीठा था। तो मैं आपको एक चीज बताना चाहता हूं कि हम जैसे कि एक वर्ग

949
01:07:13,760 --> 01:07:17,760
ऐसा है समाज में जो बहुत कटुता है। इसमें एक वर्ग ऐसा है जो बहुत मीठा

950
01:07:17,760 --> 01:07:22,320
है। तो आप ये मान के चलिए चलिए कि एक ज्यादा

951
01:07:22,320 --> 01:07:26,720
तीखा खाने वाले को बीपी हो जाता है और ज्यादा शुगर खाने वाले को

952
01:07:26,720 --> 01:07:31,880
ज्यादा मीठा खाने वाले को शुगर हो जाता है। लेकिन अल्टीमेटली होनी बीमारी ही है।

953
01:07:31,880 --> 01:07:36,080
[हंसी] समझे ना? तो मैं नहीं मानता कि देखो कि

954
01:07:36,080 --> 01:07:40,080
आपको कुछ भी हासिल होगा इन लोग इस आचार्य अग्निवर नेक्स्ट जी से मैं

955
01:07:40,080 --> 01:07:44,240
भी इनसे पहले प्रभावित था लेकिन बाद में जब मैंने जैसे जैसे जैसे जैसे हुआ

956
01:07:44,240 --> 01:07:48,480
तो फिर मेरा फिर इनसे मुंह भंग हो गया पहले मैं सुनता था वो

957
01:07:48,480 --> 01:07:53,360
वीडियो सुनता था मैं इनकी खैर मैं मैं इसमें एक बात ये कहना चाहूंगा

958
01:07:53,360 --> 01:07:57,360
कि देखिए बहुत अच्छा एक्सपीरियंस उनके लोगों का भी हमारे साथ

959
01:07:57,360 --> 01:08:01,440
नहीं रहा होगा भाई देखिए वो बाद की बात है कि हम दोनों में

960
01:08:01,440 --> 01:08:05,760
से सही कौन है ये तो अब अब चर्चा का विषय है ना चर्चा होने वाली है

961
01:08:05,760 --> 01:08:10,480
मगर वो बहुत अच्छा एक्सपीरियंस उनका भी मेरे साथ नहीं रहा होगा

962
01:08:10,480 --> 01:08:11,680
और जाहिर सी

963
01:08:11,680 --> 01:08:15,760
बात है कि हमारा भी हमारे लोगों का भी कैसे रहेगा उनके साथ अच्छा एक्सपीरियंस इसीलिए

964
01:08:15,760 --> 01:08:20,000
तो हम लोग हम लोगों के बीच में कुछ दूरियां है वैचारिक दूरियां वो

965
01:08:20,000 --> 01:08:24,560
तो एक अलग विषय है पर आज उस

966
01:08:24,560 --> 01:08:28,960
पक्ष में कि भाई नैस्टिक जी का वो एक जो व्यक्तिगत

967
01:08:28,960 --> 01:08:33,040
समीक्षा केवल उस वीडियो को लेकर के जो बात है जो उस

968
01:08:33,040 --> 01:08:37,040
वीडियो में हमने देखा तो उसको लेकर के हम लोग बात करने बैठे थे अब

969
01:08:37,040 --> 01:08:41,040
वो पुराना उनका रिव्यु लेना फिर वही वाली बात हो जाएगी जो उन्होंने हमारे

970
01:08:41,040 --> 01:08:46,240
बारे में लिख दिया कह दिया वही वाली बात जो है

971
01:08:46,240 --> 01:08:50,320
देंगे मैं तो मैं तो शिवशी एक्सपीरियंस बता रहा हूं ना अपना खुद का मैं मैं ये नहीं

972
01:08:50,320 --> 01:08:54,320
कहता किसी का ये मेरा खुद का एक्सपीरियंस है मैं ये नहीं कहता किसी और का कैसा एक्सपीरियंस है

973
01:08:54,320 --> 01:08:58,560
मेरा खुद का रहा है एक एक्सपीरियंस मेरी एक आध बार चर्चा भी हुई है इनसे

974
01:08:58,560 --> 01:09:02,720
ऐसा नहीं है कि फोन पे चर्चा भी हुई है टेलीफोनिक चर्चा भी इनसे मेरी खुद पर्सनल इनसे

975
01:09:02,720 --> 01:09:07,040
ही चर्चा हुई है अच्छा ऐसा नहीं है लेकिन प्रॉब्लम ये है कि

976
01:09:07,040 --> 01:09:11,680
भाई भाई अल्टीमेटली आपको मिलना कुछ नहीं है। मैं ये कहना चाह रहा हूं जैसे मैंने

977
01:09:11,680 --> 01:09:16,960
नहीं बताया नहीं तो हम बहुत पहले इनसे संपर्क कर चुके होते।

978
01:09:16,960 --> 01:09:21,120
आपका कभी मौका मिला ही नहीं ना। हां उस तरह का वो ध्यान

979
01:09:21,120 --> 01:09:25,280
में नहीं आया। कभी नहीं आया। आप जब मैंने आपको

980
01:09:25,280 --> 01:09:26,800
देखा कि आपकी चर्चा इनसे होने वाली

981
01:09:26,800 --> 01:09:30,800
है। तब मुझे आया मैंने आपको मिलना कुछ नहीं है। कुछ नहीं

982
01:09:30,800 --> 01:09:35,920
मिलना आपको। कर्मवादी कारसुदा।

983
01:09:35,920 --> 01:09:39,920
अरे वो तो देखते हैं कि अब क्या होता है वो तो तब का तभी

984
01:09:39,920 --> 01:09:44,880
पता लगेगा। देखिए ऐसा है ना कि ऐसा है

985
01:09:44,880 --> 01:09:50,240
कि जिस युद्ध में पहले से ही

986
01:09:50,240 --> 01:09:54,240
हमें यह परिणाम प्राप्त हो जाए कि हम ही जीतेंगे

987
01:09:54,240 --> 01:09:58,400
वो युद्ध युद्ध कैसा हालांकि ये युद्ध नहीं है मगर

988
01:09:58,400 --> 01:10:02,560
एक बात कह रहा हूं उदाहरणार्थ जिसमें आपकी जो

989
01:10:02,560 --> 01:10:06,560
चीज करने जा रहे उद्देश्य प्राप्ति होगी ही वो सुनिश्चित हो जाए वो युद्ध

990
01:10:06,560 --> 01:10:10,880
युद्ध कैसा उसमें तो आपका मोरल वैसे ही मान लीजिए आपको किसी चमत्कार

991
01:10:10,880 --> 01:10:14,880
के द्वारा बता दिया कि यह देख तू जीतेगा भाई इस काम में तुझे यहां सफलता

992
01:10:14,880 --> 01:10:19,120
प्राप्त हो जाएगी तो फिर उसमें संघर्ष का लेवल कितना डाउन हो जाएगा व्यक्ति

993
01:10:19,120 --> 01:10:24,480
केवल हाथ हिलाएगा उसको मालूम है कि भाई मैं तो जीतने ही वाला हूं तो

994
01:10:24,480 --> 01:10:28,720
क्या होगा हमारा उद्देश्य तो यह रहता है इस प्रकार की चर्चाओं से ऐसा

995
01:10:28,720 --> 01:10:32,880
कुछ नहीं रहता है कि सामने वाला जो है पराजित घोषित हो जाए या वो स्वयं

996
01:10:32,880 --> 01:10:37,360
स्वीकार कर ले कि मैं आज ही आर्य समाज को छोड़ रहा हूं वो तो अलग बात है मगर जब

997
01:10:37,360 --> 01:10:41,440
सामान्य जन इस वार्ता को देखते हैं

998
01:10:41,440 --> 01:10:42,320
तो उनके

999
01:10:42,320 --> 01:10:46,480
बुद्धि में कुछ आता है। वो कुछ ग्रहण करते हैं और

1000
01:10:46,480 --> 01:10:50,880
उससे शोधन होता है। ये हमारा

1001
01:10:50,880 --> 01:10:54,960
देखो मैं बता रहा हूं आपको। मैं मैं एक्सपीरियंस बता रहा हूं। देखो आपको बता रहा हूं।

1002
01:10:54,960 --> 01:10:59,360
मैं क्या अल्टीमेटली मैं बता देता हूं। आपको परिणाम बता देता हूं मैं। अल्टीमेटली आचार्य अग्निवत

1003
01:10:59,360 --> 01:11:03,440
नष्टिक जी को सिर्फ बुराई मिलने वाली है और कुछ नहीं मिलने वाला। इसके बाद

1004
01:11:03,440 --> 01:11:07,920
में मैं बता रहा हूं आपको। मैंने पहले ही बता दिया।

1005
01:11:07,920 --> 01:11:11,920
मिलने वाली है। मैं बता उनका जो विरोध

1006
01:11:11,920 --> 01:11:16,080
करेंगे उनके पक्ष वाले विरोध करेंगे वो तो वो तो

1007
01:11:16,080 --> 01:11:20,240
मैं आपको बता दूं कि जैसे मैं आपको बताऊं

1008
01:11:20,240 --> 01:11:24,320
होगा क्या जैसे अभी भी मैं देख रहा हूं कि कई लोग होंगे

1009
01:11:24,320 --> 01:11:28,800
आर्य समाज के प्रामाणिक रूप से जो नैिक रूप से सैद्धांतिक रूप में

1010
01:11:28,800 --> 01:11:32,880
पूरी तरह सहमत नहीं होंगे कि दयानंद जी का मत यही था जो ये बता रहे हैं।

1011
01:11:32,880 --> 01:11:37,200
है ना? मैं मैं इस चीज को महसूस कर पा रहा हूं क्योंकि उनके जो कुछ वीडियोस

1012
01:11:37,200 --> 01:11:41,440
देखे उसमें जो बातें कह रहे हैं वह कई जगह जाकर के अल्टर हो जा रहा है। जो दयानंद

1013
01:11:41,440 --> 01:11:45,440
जी के नाम से प्रचारित चीजें हैं उनके बिल्कुल थोड़ा सा इधर जा रहा है।

1014
01:11:45,440 --> 01:11:49,600
तो होगा क्या वही वही वही तो आपसे कह रहा हूं। इसमें होगा

1015
01:11:49,600 --> 01:11:53,600
क्या कि जैसे मान लीजिए कि नैस्टिक जी का

1016
01:11:53,600 --> 01:11:57,360
जो पक्ष है वो इसमें पुष्ट हो जाता है चर्चा में कि हां

1017
01:11:57,360 --> 01:12:02,080
भाई उनका पक्ष पुष्ट हो गया मेरे समक्ष। तो

1018
01:12:02,080 --> 01:12:06,160
जो लोग इनके विरोध में थे कि नहीं नहीं यह दयानंद जी

1019
01:12:06,160 --> 01:12:11,760
का मत नहीं है वह इस मत को स्वीकार कर लेंगे। [हंसी]

1020
01:12:11,760 --> 01:12:16,000
अब यही दयानंद जी का मत है। और यदि वो पुष्ट

1021
01:12:16,000 --> 01:12:20,000
नहीं हो पाया तो ये तो दयानंद जी का मत था ही नहीं। क्या

1022
01:12:20,000 --> 01:12:23,350
कर लोगे?

1023
01:12:23,350 --> 01:12:27,520
[हंसी] ये होने वाला है। ये होने वाला है। ये बहुत साधारण सा

1024
01:12:27,520 --> 01:12:31,600
तरीका है। डिसोन कर दो व्यक्ति को। बस मैंने आपको

1025
01:12:31,600 --> 01:12:35,680
कहा ना मैंने बस यही होगा जो आप आप मैंने जो समझाना चाह रहा था मैंने आपको

1026
01:12:35,680 --> 01:12:39,680
बस आप समझ गए देखो मैं कह रहा हूं देखो वो अपने आप में

1027
01:12:39,680 --> 01:12:43,600
अपने क्षेत्र में देखो सही व्यक्ति है

1028
01:12:43,600 --> 01:12:47,760
यदि सिद्ध हो जाता मैं कहना चाह रहा हूं मैं मैं कुछ कहना चाह रहा हूं

1029
01:12:47,760 --> 01:12:51,760
कि देखो वो अपने आप में अपना एक एक नंबर है जो भी

1030
01:12:51,760 --> 01:12:55,760
है नम्र है काफी सौहार्दपूर्ण है रीजन क्या होगा कि कुछ

1031
01:12:55,760 --> 01:12:59,840
नहीं होगा बस केवल क्या है कि मैं बस इनके इनका विरोध बढ़ने लग जाएगा बस कुछ

1032
01:12:59,840 --> 01:13:03,840
नहीं होगा इससे ज्यादा बस हम ये हो सकता है बेकार किसी

1033
01:13:03,840 --> 01:13:08,560
भी व्यक्ति हां मैं बता रहा हूं ना इनका देखो अभी जैसे उन्होंने हनुमान जी के ऊपर वीडियो बनाई

1034
01:13:08,560 --> 01:13:12,480
उन्होंने बहुत सही बनाई वीडियो सही बनाई थी बिल्कुल क्योंकि योग दर्शन

1035
01:13:12,480 --> 01:13:16,800
के हिसाब से ये पॉसिबल है लेकिन उनका कितना विरोध हुआ बहुत ज्यादा विरोध हुआ

1036
01:13:16,800 --> 01:13:20,880
उन्होंने कई टॉपिक्स ऐसे बनाए हां उन्होंने कई टॉपिक

1037
01:13:20,880 --> 01:13:24,930
ऐसे बनाए थे जैसे हां उड़ सकते हैं उन्होंने बनाया था इस नहीं

1038
01:13:24,930 --> 01:13:29,120
[गला साफ़ करने की आवाज़] उन्होंने योग दर्शन की बहुत सी ऐसी चीजों को उन्होंने बताया है कि जो व्यक्ति के लिए पॉसिबल

1039
01:13:29,120 --> 01:13:33,280
है शरीर को बढ़ा बढ़ा भी सकता है, जल पर चल सकता है, कांटों पर चल

1040
01:13:33,280 --> 01:13:37,280
सकता है। तो ये कई चीजें बनाई इन्होंने और वो योग दर्शन के हिसाब

1041
01:13:37,280 --> 01:13:42,400
से ठीक भी थी। वो गलत नहीं थी। लेकिन फिर भी क्या मैं जो है इनका बहुत विरोध हुआ।

1042
01:13:42,400 --> 01:13:46,720
इनके अपने ही लोगों के द्वारा इसलिए कह रहा हूं कि आप अष्ट

1043
01:13:46,720 --> 01:13:51,280
सिद्धि जो कही जाती है ना कि वो अणिमा गणिमा जो उनकी

1044
01:13:51,280 --> 01:13:55,520
मैं वही सूक्ष्म भी हो सकते हैं। वो विशाल

1045
01:13:55,520 --> 01:13:59,760
भी हो सकते हैं। मैं मैं कह रहा हूं कि यह जो

1046
01:13:59,760 --> 01:14:02,880
मामला है

1047
01:14:02,880 --> 01:14:06,880
पहली बात तो परंपरा है नहीं तो कौन प्रामाणिक है कौन

1048
01:14:06,880 --> 01:14:10,880
नहीं अपने आप में ही एक विषय है बहुत लंबी अच्छे से

1049
01:14:10,880 --> 01:14:14,880
चर्चा हो सकती है परंपरा के है नहीं घोषित कौन करे कि आर्य समाज का

1050
01:14:14,880 --> 01:14:18,960
वास्तविक सिद्धांत क्या है यही तो मैं कहता हूं कि आज अगर

1051
01:14:18,960 --> 01:14:23,200
मैं एक सत्यार्थ प्रकाश छाप दूं तो इनमें से कोई उसको

1052
01:14:23,200 --> 01:14:27,360
अप्रामाणिक नहीं कह पाएगा उसमें गिल्ली डंडा बता दूं गिल्ली डंडे

1053
01:14:27,360 --> 01:14:27,860
से

1054
01:14:27,520 --> 01:14:30,720
मोक्ष

1055
01:14:30,720 --> 01:14:34,800
है ना? तो परंपरा ना होने के स्थिति में यह

1056
01:14:34,800 --> 01:14:38,880
हाल है। दूसरी बात कि अब परंपरा

1057
01:14:38,880 --> 01:14:43,040
नहीं है। तो अब क्या है कि मैंने बताया आपको कि अगर इनके

1058
01:14:43,040 --> 01:14:47,200
पक्ष की पुष्टि हो जाती है उस चर्चा में तो ज्यादातर लोग जो

1059
01:14:47,200 --> 01:14:51,520
है उस पक्ष को स्वीकार कर लेंगे कि यही आर्य समाज जो पक्ष जीत के आएगा

1060
01:14:51,520 --> 01:14:55,680
या जो पक्ष जो है सिद्ध हो जाएगा वही पक्ष हमारा है आर्य समाज के नाम

1061
01:14:55,680 --> 01:14:59,760
से। और कल को कोई ऐसा आ जाएगा कि आर्य समाज

1062
01:14:59,760 --> 01:15:03,760
के नाम से अद्वैत और यह सारे सिद्धांत थोड़े से शब्दों के हरफेर के साथ बताने

1063
01:15:03,760 --> 01:15:07,760
लगेगा और [हंसी] वो भी वो उसको भी अपना

1064
01:15:07,760 --> 01:15:11,920
लेंगे क्योंकि बात वहां व्यक्ति निष्ठता है। संस्था निष्ठता

1065
01:15:11,920 --> 01:15:16,800
है। बात वहां सत्य निष्ठा नहीं है। है ना?

1066
01:15:16,800 --> 01:15:20,880
आर्य समाज में जो ज्यादातर जो लोग हैं उनकी बात कर रहा हूं। आर्य समाज की जो मौलिक

1067
01:15:20,880 --> 01:15:25,040
विचारधारा है उसकी बात कर रहा हूं। तो वहां पर सत्य निष्ठा की कमी है। व्यक्ति

1068
01:15:25,040 --> 01:15:29,040
निष्ठ निष्ठता और संस्था निष्ठता की भावना

1069
01:15:29,040 --> 01:15:33,120
ज्यादा है। तो कोई भी चीज जो आर्य समाज के नाम पर आएगी यदि वो जाकर

1070
01:15:33,120 --> 01:15:37,600
के और वो कहीं पर अपना झंडा गाड़ ले रही है तो बस यही है हमारा

1071
01:15:37,600 --> 01:15:41,760
और अगर विफल हो गया तो हमारा भी था उसको भी डिसऑन कर देंगे। हम नहीं

1072
01:15:41,760 --> 01:15:43,360
जानते कौन है।

1073
01:15:43,360 --> 01:15:47,440
ये तो अंडर कवर कोई एजेंट था जो मारा गया वहां पे धुरंधर में। हम

1074
01:15:47,440 --> 01:15:52,400
थोड़ी ना जानते हैं वो वाली बात है। तो

1075
01:15:52,400 --> 01:15:56,480
यही ऐसा ऐसा हुआ था कि बात चर्चा मैंने चर्चा करी काफी

1076
01:15:56,480 --> 01:16:00,560
वीडियो सुनी कुछ लिया तो फिर मैंने क्या किया पर इनकी तरफ मैंने इसलिए नहीं किया क्योंकि

1077
01:16:00,560 --> 01:16:04,720
उम्र में बहुत बड़े हैं तो किसी भी व्यक्ति से किसी व्यक्ति से

1078
01:16:04,720 --> 01:16:08,960
बहस करो तो उस लेवल के व्यक्ति से करो जो अपने से बराबर हो या जाओ।

1079
01:16:08,960 --> 01:16:12,960
अब इतने बड़े उम्र के व्यक्ति से हम कोई बहस करें तो ये भी एक तरह से

1080
01:16:12,960 --> 01:16:17,040
तरह से बड़ों का ना करिए। तो फिर मेरे कभी फिर मैंने ना इनके चैनल

1081
01:16:17,040 --> 01:16:21,360
पे कभी कमेंट किया कभी ना कुछ किया मैंने कहा इनको अब

1082
01:16:21,360 --> 01:16:25,360
जो कहना है कहने दो इनको फिर मैंने इनकी तरफ ध्यान ही नहीं दिया क्योंकि

1083
01:16:25,360 --> 01:16:29,520
भाई इतने उम्र में कितने बड़े व्यक्ति है हमसे तो इनसे अगर बहस करेंगे तो सही भी नहीं है

1084
01:16:29,520 --> 01:16:34,320
इसीलिए मैंने बहस मुझे नहीं लगता हमारे बीच में कोई बहस का दृश्य आएगा

1085
01:16:34,320 --> 01:16:39,440
मुझे लगता है कि एक दूसरे की बातों को समझने में ही पूरी चर्चा निपट जाएगी

1086
01:16:39,440 --> 01:16:44,800
उसी में ही समझ में आ जाएगा तात्विक सार सार गर्भित बात क्या है

1087
01:16:44,800 --> 01:16:48,800
है ना? ऐसा मुझे नहीं लग रहा कि कोई वैसा

1088
01:16:48,800 --> 01:16:52,880
जो हीटेड डिबेट वाला सीन है मुझे नहीं लगता कि ऐसा कुछ होने वाला है। नहीं

1089
01:16:52,880 --> 01:16:57,280
हीटेड तो नहीं हुआ। ये तो पक्की है। ये तो पक्का है कि हीटेड नहीं होगा।

1090
01:16:57,280 --> 01:16:58,480
हां मुझे भी लग

1091
01:16:58,480 --> 01:17:01,440
रहा है उनसे बात

1092
01:17:01,440 --> 01:17:05,520
समझ में। मैं बता रहा हूं आपको। आपके हुआ क्या? अब होगा ये

1093
01:17:05,520 --> 01:17:09,680
कि जब आप देखोगे कि भाई किल क्या है कि भाई ये उम्र में हमसे बड़े

1094
01:17:09,680 --> 01:17:14,000
हैं तो ज्यादा बहस नहीं करनी चाहिए तो आप स्वयं ही स्वयं ही हट जाओगे

1095
01:17:14,000 --> 01:17:18,000
देख लेना यही होगा और फिर इनका इनका विरोध शुरू हो जाएगा जैसे जैसे

1096
01:17:18,000 --> 01:17:22,080
इन्होंने अपने आपके चैनल पे आएंगे आर्य समाज की तरफ से इनका विरोध शुरू हो जाएगा हमारे

1097
01:17:22,080 --> 01:17:26,080
चैनल ये नहीं चाहते हम हम उनके

1098
01:17:26,080 --> 01:17:30,080
चैनल पे उनके चैनल पे किसी चैनल पे हो

1099
01:17:30,080 --> 01:17:33,600
किसी चैनल पे हो

1100
01:17:33,600 --> 01:17:38,000
किसी भी चैनल पे विरोध तो हुआ ही। ठीक है। अब थोड़ा सा आगे

1101
01:17:38,000 --> 01:17:43,280
बात चालू कर लेते हैं। अब [गला साफ़ करने की आवाज़]

1102
01:17:43,280 --> 01:17:47,360
अच्छा जो अभी आप बात कर रहे थे सनातन शंकर जी अनिकेत जी आप कुछ कहने

1103
01:17:47,360 --> 01:17:51,360
वाले थे। हां मैं कह रहा था कि

1104
01:17:51,360 --> 01:17:56,080
विरोध नहीं होगा शायद भैया क्योंकि कॉल रिकॉर्डिंग पे तो ऐसा लगा नहीं।

1105
01:17:56,080 --> 01:18:00,080
बड़ा मृदभाषी कोई पहली बार मैंने कोई मृदभाषी दिखा मुझे

1106
01:18:00,080 --> 01:18:05,040
उनमें कोई बात करने वाला। नहीं फिर

1107
01:18:05,040 --> 01:18:09,120
एक आयु का भी वो रहता है ना कि भाई व्यक्ति ने इतनी लाइफ देख ली होता

1108
01:18:09,120 --> 01:18:13,440
क्या है मैंने मैंने अपनी लाइफ में खुद खुद ये फील किया है हां

1109
01:18:13,440 --> 01:18:17,440
कि जब मैं 17 18 का था तो नईनई

1110
01:18:17,440 --> 01:18:21,920
बाइक जब मुझे मिली जी तो दे तेरी एक्सलरेटर

1111
01:18:21,920 --> 01:18:26,320
दे तेरी एक्सलरेटर घुमा घुमा के उसके कान उमेट उमेट के

1112
01:18:26,320 --> 01:18:30,720
और पूरा पिकअप और पूरा ये वो और गिरे भी

1113
01:18:30,720 --> 01:18:35,040
गिरते भी हैं चोट भी लगती है। तो एक दिन पिताजी

1114
01:18:35,040 --> 01:18:39,120
साथ में बैठे थे और उनको बैठा के मैंने वैसे ही वह पल्सर

1115
01:18:39,120 --> 01:18:43,440
वो 220 थी मेरे पास उसका एक्सलरेटर ले लिया वो घुमक

1116
01:18:43,440 --> 01:18:47,760
के तो जैसे ही पिकअप लिया तो पिताजी

1117
01:18:47,760 --> 01:18:48,720
बोले बेटा

1118
01:18:48,720 --> 01:18:53,440
जिनको बड़ी-बड़ी रेस में दौड़ना होता है बड़ी-बड़ी

1119
01:18:53,440 --> 01:18:57,840
वो छोटी-छोटी रेसों में रिस्क नहीं लेते। तो

1120
01:18:57,840 --> 01:19:01,840
मुझे समझ में आया। खैर वो उस समय तो ठीक नहीं हुआ। उन्होंने एक

1121
01:19:01,840 --> 01:19:05,840
कहानी और सुनाई सुनाई थी। मैं बता देता हूं। छोटी सी है।

1122
01:19:05,840 --> 01:19:10,080
थोड़ा सा मूड सबका चेंज हो जाएगा। उन्होंने बताया उस समय

1123
01:19:10,080 --> 01:19:14,320
कि उन्होंने एक मतलब कोई उनकी लाइफ में उन्होंने देखा होगा

1124
01:19:14,320 --> 01:19:18,320
कोई कैरेक्टर था जिनका नाम था पांडे जी। उनको वो बोले पांडे

1125
01:19:18,320 --> 01:19:22,400
जी। तो वो बड़े प्रसन्न था। प्रसन्न थे उस दिन। उन्होंने

1126
01:19:22,400 --> 01:19:26,560
कहा पांडे जी बहुत प्रसन्न थे। क्यों? उस दिन उनके लड़के का फलदान

1127
01:19:26,560 --> 01:19:30,880
था। लगन आने वाला फलदान होने वाला था।

1128
01:19:30,880 --> 01:19:36,880
तो जिस दिन लड़के का फलदान होता है उस दिन लड़के वाले बड़े प्रसन्न होते हैं ना।

1129
01:19:36,960 --> 01:19:41,120
क्यों प्रसन्न होते हैं? भाई उस दिन काफी कुछ आ

1130
01:19:41,120 --> 01:19:45,360
रहा होता है और माहौल होता है। एक वातावरण होता है। खुशियों भरा

1131
01:19:45,360 --> 01:19:49,440
तो जो लड़के का पक्ष होता है एक अलग ही तरंग होती है। वैसे वरवधु दोनों के यहां होती

1132
01:19:49,440 --> 01:19:53,680
है। मगर वो एक तरंग तरंग होती है। भाई उत्सव जैसा वातावरण

1133
01:19:53,680 --> 01:19:58,160
होता है। तो पांडे जी बड़े तरंग में थे और तरंग के कारण वो जो है एक्सलरेटर

1134
01:19:58,160 --> 01:20:02,480
खूब घुमा रहे थे। मोटरसाइकिल का और

1135
01:20:02,480 --> 01:20:03,920
शाम होते होते

1136
01:20:03,920 --> 01:20:08,480
एक अस्पताल का नाम बताया कानपुर के शाम होते होते

1137
01:20:08,480 --> 01:20:12,880
पुरसला में भर्ती थे एक पैर में जो है पस्तर

1138
01:20:12,880 --> 01:20:17,360
मधा हुआ था वो टंगा हुआ था पैर तो ये कुछ स्मृतियां

1139
01:20:17,360 --> 01:20:21,440
है पिताजी के साथ वाली तो होता

1140
01:20:21,440 --> 01:20:25,440
क्या है जब 17 18 की आयु का व्यक्ति होता है तो उसके अंदर एक अलग

1141
01:20:25,440 --> 01:20:29,440
पिकअप रहता है पिकअप हर चीज में यह

1142
01:20:29,440 --> 01:20:33,760
पिकअप आपको मिल जाएगा 171 से लेकर 25 26 तक।

1143
01:20:33,760 --> 01:20:38,240
सही कहा आपने। और इस बीच क्या होता है कि 25 26 तक होते

1144
01:20:38,240 --> 01:20:42,320
वह एक दो ऐसी चोट खा लेता है। जीवन में ऐसा उतार-चढ़ाव

1145
01:20:42,320 --> 01:20:46,480
कुछ देख लेता है कि अब यहां 26 27 से हल्का सा ठहराव वाली चीजें

1146
01:20:46,480 --> 01:20:50,560
चालू होती है। पिकअप जाता हुआ और ठहराव आता हुआ 35

1147
01:20:50,560 --> 01:20:55,040
होते उसकी चीजों में थोड़ी स्थिरता आने लगती है।

1148
01:20:55,040 --> 01:20:59,360
मैच्योरिटी दिखाई देने लगती है। तो आयु उनकी जो है

1149
01:20:59,360 --> 01:21:03,360
उसमें कितना ठहराव होगा यह तो दिखता ही है।

1150
01:21:03,360 --> 01:21:07,360
इसमें क्या बात करें? खैर इसलिए मुझे नहीं

1151
01:21:07,360 --> 01:21:11,520
लगता ऐसा कोई हीटेड डिबेट वाला माहौल बनेगा।

1152
01:21:11,520 --> 01:21:16,160
कुल मिलाकर के अब थोड़ा सा हम आगे बढ़ते हैं तथ्यों पर।

1153
01:21:16,160 --> 01:21:19,360
ये भी चीज जी जी एक चीज बताऊंगा

1154
01:21:19,360 --> 01:21:23,920
भैया। शुरू में जो बताने वाला था मैं जो आपने एक चीज कहा था कि

1155
01:21:23,920 --> 01:21:28,000
भाई को भाई से अलग कर दिया गया वाला। ये चीज बहुत पहले आपने

1156
01:21:28,000 --> 01:21:32,160
सड़क पर एक व्यक्ति इस का गीता बेच रहा था। तो उसमें

1157
01:21:32,160 --> 01:21:36,160
आपने एक को पूछा कि इसमें प्रभुपाद जी के शब्द को

1158
01:21:36,160 --> 01:21:40,320
बदल दिया गया है। तो उसने पीछे से कटाक्ष किया था जो ऑफिशियल

1159
01:21:40,320 --> 01:21:44,560
था इस का उसने कहा कि ये अभक्त है इसको

1160
01:21:44,560 --> 01:21:48,560
हटाओ छोड़ो। तो आपने कहा था कि बस यही हो गया है। भाई को भाई

1161
01:21:48,560 --> 01:21:52,640
से अलग कर दिया है। हां। जबकि वो थोड़ा सा आपने

1162
01:21:52,640 --> 01:21:56,640
उसको पूछा कि आपने अभी मुझे भैया कहा ना अब मेरी बात सुनो। और

1163
01:21:56,640 --> 01:22:00,640
वो प्रेम पूर्वक सुन भी रहा था। लेकिन उसने खाली बोल दिया अभक्त है।

1164
01:22:00,640 --> 01:22:04,640
भागो यहां से अभक्त है मतलब खा जाएगा कोई। अपराध

1165
01:22:04,640 --> 01:22:10,080
लग जाएगा। पाप हो जाएगा तुमसे इसकी संगत में रहने से। हां

1166
01:22:10,080 --> 01:22:14,160
जी। तो वही मैं कह रहा हूं ना मेरी आत्मा चितकारती है। मेरे भाई

1167
01:22:14,160 --> 01:22:19,520
को मुझसे मेरे भाई को मुझसे छना गया है। जी

1168
01:22:19,520 --> 01:22:25,200
तो अब हम थोड़ा सा आगे चलें।

1169
01:22:25,200 --> 01:22:29,280
सबसे पहली बात एक चीज यह है कि जो सिद्धांत

1170
01:22:29,280 --> 01:22:33,280
वाली समानता वाली बात तो हमने कर ही ली और मैंने देखा कि अग्निव्रत जी

1171
01:22:33,280 --> 01:22:37,920
ने स्वयं अपनी वीडियो में माना है सत्यार्थ प्रकाश को लेकर के वो

1172
01:22:37,920 --> 01:22:42,160
कुछ चीजें हैं जो विवादास्पद है वह चाहते हैं कि वह चीजें उसमें बढ़ाई गई है। उन्होंने

1173
01:22:42,160 --> 01:22:46,160
सत्यार्थ प्रकाश की प्रामाणिकता पर भी आपत्ति जताई है। ऐसे

1174
01:22:46,160 --> 01:22:50,240
में यह भी एक चर्चा का बहुत महत्वपूर्ण विषय बनता है कि आर्य समाज की ओर

1175
01:22:50,240 --> 01:22:54,240
से सच बताने वाला व्यक्ति कौन है? अपने आप में

1176
01:22:54,240 --> 01:23:00,160
एक प्रमाणिकता का विषय है और [गला साफ़ करने की आवाज़]

1177
01:23:00,160 --> 01:23:04,240
वामपंथ से जो उनकी लड़ाई है वो उसका हम स्वागत करते हैं वो अच्छी चीज

1178
01:23:04,240 --> 01:23:08,320
है और एक मंत्र शक्ति की जो बात है ना जो उन्होंने मंत्र की शक्ति को

1179
01:23:08,320 --> 01:23:12,320
माना है जो मुझे इनके यहां लोप दिखाई देता है और मंत्र

1180
01:23:12,320 --> 01:23:16,400
शक्ति को ही मानते हुए अगर हम आगे बढ़ेंगे इनकी जो बात है मंत्र शक्ति वाली उसको

1181
01:23:16,400 --> 01:23:20,720
अगर बहुत ज्यादा आगे बढ़ जाएंगे तो उसमें मुझे बिल्कुल स्पष्ट दिखाई दे रहा है कि जो जो

1182
01:23:20,720 --> 01:23:24,720
चीजें मंत्र शक्ति के नाम के उसमें में अर्थ में बता रहे हैं तो उसमें

1183
01:23:24,720 --> 01:23:29,280
बिल्कुल हम लोग वर्णाश्रमी जो वर्णाश्रम हमारा है वही वर्णाश्रम इनका भी हो जाएगा।

1184
01:23:29,280 --> 01:23:33,280
मंत्र शक्ति की बात है ऐसी तो मंत्र शक्ति

1185
01:23:33,280 --> 01:23:37,360
की जो इनकी बातें हैं उसमें अगर हम और आगे चलते चले जाए तो उसमें आगे जाकर के

1186
01:23:37,360 --> 01:23:40,400
आपको वर्णाश्रम भी प्राप्त हो जाएगा। मंत्र शक्ति

1187
01:23:40,400 --> 01:23:44,400
मंत्रों में देखिए वर्णाश्रम अगर हम इसमें लाएं कि कौन वेद पढ़े

1188
01:23:44,400 --> 01:23:48,480
कौन ना पढ़े अगर इस चीज में लाएं तो वर्णाश्रम इस

1189
01:23:48,480 --> 01:23:52,960
बात पर आधारित है कि मंत्रों में शक्ति है। अब जिसको मंत्रों में शक्ति दिखाई नहीं देती

1190
01:23:52,960 --> 01:23:56,960
वो कहां से इस वर्णाश्रम के बारे में सोचेगा कि किसके मुख से मंत्र उच्चारित हो

1191
01:23:56,960 --> 01:24:01,040
और किसके मुख से ना हो। जिसको मंत्र में शक्ति दिखाई देगी

1192
01:24:01,040 --> 01:24:05,120
वो ये बात करेगा ना। अब जैसे विवाह हो रहा है। व्यक्ति ने कहा कि विवाह

1193
01:24:05,120 --> 01:24:09,680
वेदोक्त रीति से ही होना चाहिए। कि भाई वेदोक्त रीति से होने से विवाह में क्या हो गया?

1194
01:24:09,680 --> 01:24:13,760
क्यों उसको मान लिया कि उसमें कुछ गजब हो गया। भाई हिंदी में बोल दिया आज से तुम पति पत्नी

1195
01:24:13,760 --> 01:24:17,760
हो गए। वो शपथ दिलवा दी। क्यों वहां पर मंत्रों की आवश्यकता है? अगर विशेष

1196
01:24:17,760 --> 01:24:21,840
रूप से वैदिक मंत्रों की आवश्यकता है तो आपको ये मानना चाहिए ना कि उन मंत्रों में कुछ शक्ति है

1197
01:24:21,840 --> 01:24:26,080
जिसके कारण वहां पर एक दय गठबंधन माना जा रहा है।

1198
01:24:26,080 --> 01:24:30,080
नहीं तो उन्हीं मंत्रों की आवश्यकता क्यों है? तो ये

1199
01:24:30,080 --> 01:24:34,080
जो लोग मंत्रों में शक्ति नहीं देख पाते उनके लिए वर्णाश्रम

1200
01:24:34,080 --> 01:24:38,400
को समझना मुश्किल होता है और जो मंत्रों में शक्ति देखेगा उसके लिए वर्णाश्रम को समझना

1201
01:24:38,400 --> 01:24:42,400
कठिन नहीं होगा तो इन्होंने जो मंत्रों में शक्तियों को स्वीकार किया उसका भी स्वागत

1202
01:24:42,400 --> 01:24:46,480
करना चाहिए और बाकी तो सारी बातें मैंने कह ही दी आप

1203
01:24:46,480 --> 01:24:51,040
अपनी बात रख लीजिए फिर अब जी नहीं बिल्कुल है

1204
01:24:51,040 --> 01:24:55,200
बिल्कुल उन्होंने मैं एक और पॉइंट उठा रहा था जब कन्हैया जी थे कि उन्होंने वो लिखा

1205
01:24:55,200 --> 01:24:55,700
था ना

1206
01:24:55,520 --> 01:25:00,000
कि उभरते प्रश्न गरजते उत्तर सर तो जब सत्यार्थ

1207
01:25:00,000 --> 01:25:04,160
प्रकाश पर प्रश्न उठे तब तो उन्होंने गरजते उत्तर वाली बात सोची

1208
01:25:04,160 --> 01:25:08,320
लेकिन जब हमारे जो मूल शास्त्र हैं वेदादि शास्त्र पुराण इतिहास इन पर

1209
01:25:08,320 --> 01:25:12,400
जब कोई प्रश्न उठता है तब वो गरजते उत्तर क्यों नहीं सोच पाते हैं आर्यमा

1210
01:25:12,400 --> 01:25:17,120
जी ये एक बड़ा विचारणीय प्रश्न है वहां पर है ना

1211
01:25:17,120 --> 01:25:21,440
वहां पर फिर वो प्रक्षिप्त बोल के उसको नकार दो तो आप ये

1212
01:25:21,440 --> 01:25:25,440
फिर सत्यार्थ प्रकाश के साथ भी यही कर रहे हैं भैया अच्छा वो मिलावटी है तो

1213
01:25:25,440 --> 01:25:29,440
जब सूर्य के ऊपर प्रजा का प्रश्न आता है तब उन्होंने बड़ा उसमें विस्तार

1214
01:25:29,440 --> 01:25:33,520
से उत्तर देने की कोशिश की है अपने शब्दों में तो यहां पर

1215
01:25:33,520 --> 01:25:37,600
एक चीज यह भी आती है कि भाई दयानंद जी का जो वहां पर उत्तर था वो इनको संतोष

1216
01:25:37,600 --> 01:25:41,680
संतोषजनक नहीं लगा होगा तो फिर उन्होंने अपनी व्याख्या बीच में जोड़ी और

1217
01:25:41,680 --> 01:25:46,000
आगे ऐसा कितनी बार होगा ये बात है अगर हजार

1218
01:25:46,000 --> 01:25:50,000
आर्य समाझी होंगे तो हजार तरह के फिर वो अनुवाद करेंगे

1219
01:25:50,000 --> 01:25:54,400
मैंने मैंने एक चीज देखी दयानंद जी से विरोध रखते हैं कि नहीं रखते वो तो मैं

1220
01:25:54,400 --> 01:25:58,560
स्पष्ट नहीं कह सकता मगर मगर इतना जरूर है कि वर्तमान जो

1221
01:25:58,560 --> 01:26:02,800
वांगमय छप रहा है दयानंद जी के नाम का उससे जरूर असंतुष्ट है

1222
01:26:02,800 --> 01:26:06,960
और उसको जरूर विशुद्ध कर रहे हैं। जैसे विशुद्ध उन्होंने सत्यार्थ प्रकाश भी बनाई

1223
01:26:06,960 --> 01:26:10,560
है। हम हम है ना ये सब चीजें मैंने लिखी।

1224
01:26:10,560 --> 01:26:15,360
जी बिल्कुल बिल्कुल तो

1225
01:26:15,360 --> 01:26:19,840
बाकी तो सिद्धांतिक चीजें हैं सारी उन्होंने वीडियो में जो कही है। है ना?

1226
01:26:19,840 --> 01:26:23,840
अच्छा अच्छा एक एक कहानी अक्सर ये सुनाते हैं अरे मां जी

1227
01:26:23,840 --> 01:26:28,400
कि भाई एक क्रिश्चियन मिशनरी के साथ कोई

1228
01:26:28,400 --> 01:26:32,560
पौराणिक बात कर रहा था। अच्छा वह शायन भाषा

1229
01:26:32,560 --> 01:26:36,720
को लेकर आया तो वह जवाब नहीं दे पाए। फिर उस पौराणिक

1230
01:26:36,720 --> 01:26:40,720
ने क्या किया? आर्य समाज जी को बोला कि तुम दयानंद जी का भाष्य लेकर

1231
01:26:40,720 --> 01:26:44,960
आओ। तब जाके वो जान बची। ऐसा कुछ ये एक स्टोरी बनाते

1232
01:26:44,960 --> 01:26:49,040
हैं। मैंने काफी बार ये सुनी हुई है। बहुत सारे आर्य यही बात अग्निव्रत जी ने

1233
01:26:49,040 --> 01:26:53,280
उस वीडियो में भी कही। हम है ना? खैर

1234
01:26:53,280 --> 01:26:57,520
आर्य समाज में अलंकार समाज में बहुत

1235
01:26:57,520 --> 01:27:01,600
सारी स्टोरियां बनाई गई हैं। जैसे काशी शास्त्रार्थ स्मृति स्थली देख लीजिए

1236
01:27:01,600 --> 01:27:06,000
आप बहुत सारी स्टोरी बनाई गई है। फिलहाल एक प्रामाणिक परंपरा

1237
01:27:06,000 --> 01:27:10,160
प्राप्त आचार्य के द्वारा बताई गई स्टोरी मैं भी बता देता हूं। कि

1238
01:27:10,160 --> 01:27:15,040
मुसलमान जो है आर्य समाज की खूब बैंड बजा रहे थे एक समय।

1239
01:27:15,040 --> 01:27:19,200
हम है ना? बहुत खींच खींच के बैंड बजा रहे आर्य

1240
01:27:19,200 --> 01:27:23,520
समाज के पास छुपने की जगह नहीं मिल रही थी आर्य समाज को तब करपात्री

1241
01:27:23,520 --> 01:27:25,680
जी ने कलम उठाई थी और

1242
01:27:25,680 --> 01:27:29,680
करपात्री जी के आसपास के लोगों ने कहा था कि भाई आर्य समाज तो हमारी

1243
01:27:29,680 --> 01:27:33,680
धज्जियां उड़ाते हैं ये करते हैं वो करते हैं हमारी मतलब हमारी अवमानना

1244
01:27:33,680 --> 01:27:38,080
करते हैं तो आप उनके पक्ष में क्यों जा रहे हैं वो धज्जियां

1245
01:27:38,080 --> 01:27:42,240
उड़ा रहे हैं मुसलमान तो उनको उड़ाने दो उनकी धज्जियां तो करपात्री

1246
01:27:42,240 --> 01:27:46,480
जी ने कहा था नहीं

1247
01:27:46,480 --> 01:27:51,920
आर्य समाजी वो हमारे घर के हैं हमारे उनकी अपनी बात है। हमारी अपनी बात है।

1248
01:27:51,920 --> 01:27:56,160
मगर कोई बाहर का आकर के उन पर बोलेगा तो मैं जरूर जाऊंगा।

1249
01:27:56,160 --> 01:28:00,880
हम और वहां पर उन्होंने वो सिद्धांत बताया था महाभारत का।

1250
01:28:00,880 --> 01:28:05,760
ये भी जानना चाहिए। हम

1251
01:28:05,760 --> 01:28:09,840
एक बात और है। ये तो सच्ची घटना है। ये कोई वो नहीं है। एक वीडियो

1252
01:28:09,840 --> 01:28:14,080
है। जी एक वीडियो और मैंने इनकी देखी थी।

1253
01:28:14,080 --> 01:28:18,080
देखी तो मैंने बहुत सारी खैर इनकी लेकिन एक वीडियो देखी थी। इन्होंने इसमें वीडियो में

1254
01:28:18,080 --> 01:28:22,080
बोला था कि बिना व्याकरण सीखे वेद भाष्य कैसे

1255
01:28:22,080 --> 01:28:26,240
मतलब आचार्य अग्निवत नष्टिक जी हैं वो संस्कृत व्याकरण को नहीं जानते

1256
01:28:26,240 --> 01:28:30,000
मतलब उन्होंने पढ़ा नहीं है

1257
01:28:30,000 --> 01:28:34,080
अच्छा और इन्होंने हां और इन्होंने खुद स्वीकार किया है इनकी वीडियो है।

1258
01:28:34,080 --> 01:28:39,360
उन्होंने ये कहा था कि निश्चित ही आचार्य सायन से बड़ा विद्वान

1259
01:28:39,360 --> 01:28:43,520
कोई नहीं है। ये अपनी वीडियो में बोला है इन्होंने क्या

1260
01:28:43,520 --> 01:28:47,920
निश्चित ही आचार्य सायंस थे ज्यादा विद्वान ओवट हुए

1261
01:28:47,920 --> 01:28:52,160
इत्यादि जो पुराने विद्वान थे वो संस्कृत के बहुत बड़े विद्वान थे लेकिन उनसे

1262
01:28:52,160 --> 01:28:56,240
गलतियां हो गई लेकिन अब सबसे बड़ी चीज

1263
01:28:56,240 --> 01:29:00,400
मुझे क्या लगी कि स्वयं कह रहे हैं कि मैंने संस्कृत नहीं पढ़ा मुझे

1264
01:29:00,400 --> 01:29:04,400
संस्कृत का ज्ञान नहीं है। कुछ विशेष ज्ञान नहीं है। लेकिन मैं वेद भाष

1265
01:29:04,400 --> 01:29:09,920
मेरे जो वेद भाष्य है मेरे ब्राह्मण ग्रंथ का जो भाष्य है वो सर्वश्रेष्ठ है। सबसे अच्छा है।

1266
01:29:09,920 --> 01:29:14,080
अब बताओ इस कैसे विश्वास किया जाए? [हंसी] ठीक है।

1267
01:29:14,080 --> 01:29:18,160
ये सब बातें चर्चा का विषय है। हो सकता है कि

1268
01:29:18,160 --> 01:29:20,800
बातें हो। है ना? ठीक है।

1269
01:29:20,800 --> 01:29:25,120
फिर मुझे लगता है सभी बातें पूरी हो चुकी है। अनिकेत जी आप अगर कुछ बताना

1270
01:29:25,120 --> 01:29:29,200
कहना चाहे तो एक चीज रहता है हमेशा भैया

1271
01:29:29,200 --> 01:29:34,000
कि ये जो कहते हैं कि भगवान कृष्ण को और भगवान रामचंद्र जी इत्यादि को

1272
01:29:34,000 --> 01:29:38,160
महापुरुष महापुरुष कहते हैं। ठीक है? और जो

1273
01:29:38,160 --> 01:29:42,160
महापुरुष जिनको ये महापुरुष कहते हैं वह महापुरुष तो अपने आप को भगवान कहते

1274
01:29:42,160 --> 01:29:46,240
हैं। तो क्या महापुरुष झूठ भी कहते हैं क्या? और झूठ कहते तो महापुरुष

1275
01:29:46,240 --> 01:29:51,280
कैसे हो जाते हैं? ये सारे सैद्धांतिक विषय हैं।

1276
01:29:51,280 --> 01:29:55,440
समय है इनमें [हंसी] सारी चीजें अभी

1277
01:29:55,440 --> 01:30:00,800
सारी चीजें अभी कर देंगे तो संडे रविवार को क्या करेंगे?

1278
01:30:00,800 --> 01:30:05,040
17 18 से 25 वाला वही कर दिया

1279
01:30:05,040 --> 01:30:10,240
कान खींच के। [हंसी] इनका एक बच्चा गैंग

1280
01:30:10,240 --> 01:30:14,960
अलंकार समाज का एक बच्चा गैंग है ना वो एक्सलरेटर दिए रहता है

1281
01:30:14,960 --> 01:30:19,040
टांग टांग टांग टूटे चाहे कुछ टूटे [हंसी] लगभग

1282
01:30:19,040 --> 01:30:23,200
ऐसे ही है नहीं पर अग्निव्रतज जी ठीक है बातचीत करने

1283
01:30:23,200 --> 01:30:27,440
में काफी मतलब इनकी वाणी में बड़ा कंट्रोल होता मैंने वीडियो देखे

1284
01:30:27,440 --> 01:30:31,680
तो मुझे ये समझ में आया कि मैच्योरिटी है और मैच्योर है काफी

1285
01:30:31,680 --> 01:30:35,760
ज्ञान ज्ञान भी रखते हैं फिजिक्स के हैं तो फिजिक्स का भी ज्ञान रखते

1286
01:30:35,760 --> 01:30:36,560
हैं

1287
01:30:36,560 --> 01:30:40,640
हालांकि ऐसे लोगों की जरूरत भी है कि जो कि साइंस के जरिए

1288
01:30:40,640 --> 01:30:44,800
से हमारी चीजों को प्रस्तुत करें। सनातन धर्म को प्रस्तुत करें ज्यादा से ज्यादा

1289
01:30:44,800 --> 01:30:49,120
जिससे कि और हमारे लोग भी करते ही हैं और इनका

1290
01:30:49,120 --> 01:30:53,440
भी स्वागत है अगर इस तरह से कर रहे हैं और वामपंथ से लड़ाई है नास्तिक तो नास्तिकों

1291
01:30:53,440 --> 01:30:57,520
से लड़ाई है तो हम कौन सा पीछे कदम से कदम मिला के खड़े हुए हैं नास्तिकों

1292
01:30:57,520 --> 01:31:01,840
के लिए तो ठीक है तो बहुत बढ़िया आप

1293
01:31:01,840 --> 01:31:06,160
लोगों ने समय दिया और कुछ गलतफहमियां

1294
01:31:06,160 --> 01:31:10,240
अच्छा सभी लोग अच्छा सभी लोग सभी लोग एक एक जरूर बोलेंगे आचार्य अग्निव्रत

1295
01:31:10,240 --> 01:31:15,600
जी को सभी लोग जाएंगे यहां से तो जय श्री राम बोलते हो जरूर जाना सभी

1296
01:31:15,600 --> 01:31:19,600
नहीं बोलते हैं वो जय श्री राम तो बोला था उन्होंने जय जय श्री राम नहीं बोलते हैं

1297
01:31:19,600 --> 01:31:23,680
इसीलिए तो अग्नि जी को जय श्री राम हम रविवार को

1298
01:31:23,680 --> 01:31:28,400
इंतजार करेंगे उनका बहुत ही आदरणीय व्यक्ति है बहुत ही सम्मानीय व्यक्ति है

1299
01:31:28,400 --> 01:31:32,480
उनका वेट करेंगे देखें कुछ निकलता है कि नहीं निकलता लेकिन मेरे हिसाब

1300
01:31:32,480 --> 01:31:36,640
से मेरा हो सकता है अंदाजा गलत हो सकता है मैं तो भाई एक छोटा सा व्यक्ति

1301
01:31:36,640 --> 01:31:40,960
हूं तो मेरा अंदाज गलत निकल सकता है हो सकता है कुछ बढ़िया परिणाम निकले

1302
01:31:40,960 --> 01:31:45,120
बिल्कुल बिल्कुल निकलेगा। उम्मीद रखिए आप तो वही हमने प्रयास किया

1303
01:31:45,120 --> 01:31:49,280
कि बहुत मर्यादा में रहते हुए क्योंकि उनकी आयु भी हमसे ज्यादा

1304
01:31:49,280 --> 01:31:51,680
है और जाहिर सी बात है कि ज्ञान विज्ञान

1305
01:31:51,680 --> 01:31:55,920
में भी हमसे आगे ही हैं। है ना? मुझसे तो आगे ही है बड़े बिल्कुल

1306
01:31:55,920 --> 01:31:59,920
बिल्कुल नहीं ज्ञान विज्ञान में तो है ही आगे भी नॉलेज में तो आगे

1307
01:31:59,920 --> 01:32:04,720
है ही हमसे तो जो है वो बात अलग है कि सिद्धांत

1308
01:32:04,720 --> 01:32:08,880
पीछे वो बैठे हैं ना गुरु गोविंद और ग्रंथ तो वो

1309
01:32:08,880 --> 01:32:13,040
बात है कि वहां पे चीजें चर्चा का विषय है कि वहां क्या है क्या नहीं

1310
01:32:13,040 --> 01:32:17,040
है मगर वो जो है कई चीजों

1311
01:32:17,040 --> 01:32:21,040
में हमारे हमसे जो है वरिष्ठ है तो उसके लिए सम्मान

1312
01:32:21,040 --> 01:32:25,920
रखते हुए और मर्यादा में रहते हुए प्रया प्रयास किया कि जो उनको गलतफहमियां

1313
01:32:25,920 --> 01:32:30,080
हैं हमें लेकर के और हमारे बारे में जो आधी अधूरी सूचनाएं प्रदान की गई

1314
01:32:30,080 --> 01:32:34,320
है उनके आधार पर निर्णय ना ले और कुछ ऐसी चीजें जो शायद

1315
01:32:34,320 --> 01:32:38,320
जाने अनजाने में उनके द्वारा जो है तर्कपूर्ण मुझे

1316
01:32:38,320 --> 01:32:42,320
दिखाई नहीं दी तो उनको मैंने मर्यादा में रहते हुए बताने का प्रयास

1317
01:32:42,320 --> 01:32:46,480
किया ठीक है बाकी सभी को जय श्री राम और रविवार को

1318
01:32:46,480 --> 01:32:50,560
है उनके चैनल पर चर्चा हमारे चैनल पर भी प्रदर्शित होने वाली

1319
01:32:50,560 --> 01:32:54,720
है दोनों ही चैनल पर होगी तो आप आप लोग जुड़े उससे

1320
01:32:54,720 --> 01:32:59,440
टाइमिंग 9 बजे है सुबह ना भैया सुबह 9 बजे है क्या

1321
01:32:59,440 --> 01:33:03,440
मैंने देखा नहीं कल सुबह 9 कर 9

1322
01:33:03,440 --> 01:33:06,960
बजे सुबह 9 बजे जय श्री राम सभी को

1323
01:33:06,960 --> 01:33:11,040
जय श्री राम ठीक है जय श्री राम जय श्री राम सभी को जय श्री राम जय श्री राम

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सभी जय श्री राम
