1
00:00:02,560 --> 00:00:05,920
सभी को जय श्री राम।

2
00:00:05,920 --> 00:00:10,000
आशा करते हैं आप सभी कुशल पूर्वक होंगे

3
00:00:10,000 --> 00:00:14,320
और आपने टाइटल देख ही लिया होगा। हमारे साथ में के एक फॉलोअ

4
00:00:14,320 --> 00:00:20,320
हैं जुड़ चुके हैं। हम उन्हें ऊपर ले लेते हैं।

5
00:00:22,880 --> 00:00:28,880
जी तथागत जी आप अपना कैमरा ऑन कर लें।

6
00:00:29,920 --> 00:00:34,960
जय श्री राम जी

7
00:00:34,960 --> 00:00:39,040
थोड़ा सा तथागत जी आप हमारे [गला साफ़ करने की आवाज़] दर्शकों को अपना एक परिचय

8
00:00:39,040 --> 00:00:43,520
दे दीजिए कहां से जुड़े हुए हैं कौन से स्क मंदिर में जाते हैं कौन है आपके मेंटोर

9
00:00:43,520 --> 00:00:47,600
वहां पर जो आपको

10
00:00:47,600 --> 00:00:52,720
शिक्षा दीक्षा दे हरे कृष्णा मैं

11
00:00:52,720 --> 00:00:56,960
हूं मैं वेस्ट बंगाल से हूं तो इसलिए मेरा जो जो

12
00:00:56,960 --> 00:01:00,960
हिंदी है वो वो थोड़ा वीक होगा तो इसके लिए मैं मैं

13
00:01:00,960 --> 00:01:05,920
पहले ही आप सभी के

14
00:01:05,920 --> 00:01:10,320
माफी मांगता हूं। तो उसके बाद मैं कहना चाहता हूं कि

15
00:01:10,320 --> 00:01:14,960
मैं दो साल से इस को फॉलो कर रहा हूं और और

16
00:01:14,960 --> 00:01:19,920
उनके दिए हुए जो नीति नियम है और और

17
00:01:19,920 --> 00:01:24,560
वो गुरु परंपरा है उनके नियम अनुसार

18
00:01:24,560 --> 00:01:30,400
हम भारतीय जीवन का अनुसरण करने का प्रयास कर रहे हैं। तो बस

19
00:01:30,400 --> 00:01:36,080
जो मतलब जो

20
00:01:36,080 --> 00:01:40,400
परिचय है वो इतना ही है। आपकी आवाज

21
00:01:40,400 --> 00:01:44,560
बहुत कम आ रही है।

22
00:01:44,560 --> 00:01:49,120
मेरी आवाज ठीक आ रही है? आपकी आवाज आ रही है।

23
00:01:49,120 --> 00:01:55,120
नहीं मैं दर्शकों से पूछ रहा हूं।

24
00:01:59,280 --> 00:02:03,840
आवाज ठीक आ रही है मेरी सबको कोई कमेंट

25
00:02:03,840 --> 00:02:08,080
कर दे मेरी ठीक है आप क्या कुछ हेडफोन वगैरह

26
00:02:08,080 --> 00:02:12,160
लगा के बात कर रहे हैं क्या नहीं कुछ हेडफोन आप

27
00:02:12,160 --> 00:02:18,160
आप अगर हो सके तो मोबाइल को ऐसे रखिए वो अच्छा रहेगा ज्यादा

28
00:02:23,120 --> 00:02:29,120
ठीक है थोड़ा थोड़ा सेंटर में आ जाइए बस।

29
00:02:30,720 --> 00:02:36,320
थोड़ा आपका सर भी कट रहा है।

30
00:02:36,320 --> 00:02:40,400
ठीक है। ठीक है। [गला साफ़ करने की आवाज़] अब ठीक आ

31
00:02:40,400 --> 00:02:44,640
रही है सबको आवाज इनकी। बोलिए जरा। ठीक

32
00:02:44,640 --> 00:02:50,640
आ रही है मुझे? तो ठीक आ रही है। चलिए तो

33
00:02:51,840 --> 00:02:56,560
आपने मुझे लग रहा है हमारे रीसेंट वीडियोस देखे होंगे। हां

34
00:02:56,560 --> 00:03:02,560
जिसके जिसके कारण आपने फैसला लिया कि आपको हमसे चर्चा करनी चाहिए।

35
00:03:02,720 --> 00:03:06,800
देखिए मैं तो इतना लायक नहीं हूं कि आपके साथ मैं चर्चा कर

36
00:03:06,800 --> 00:03:10,800
सकूं। मैं तो एक छोटा सा बालक हूं। लेकिन जो मेरे मन

37
00:03:10,800 --> 00:03:14,800
में जो जो आंसर देने की उत्तर देने की

38
00:03:14,800 --> 00:03:18,880
जो इच्छा जगी मैं बस उसी को ही व्यक्त करने के लिए

39
00:03:18,880 --> 00:03:22,960
यहां पर आया हूं और और मैं पहले ही ये बता देना चाहती हूं

40
00:03:22,960 --> 00:03:27,200
कि मैं यहां पर कोई तर्क या डिबेट करने के लिए मैं

41
00:03:27,200 --> 00:03:33,200
यहां पर नहीं आई हूं क्योंकि जो

42
00:03:40,480 --> 00:03:45,280
आपका जो वीडियो है जो त है इसके मध्य कभी भी जो

43
00:03:45,280 --> 00:03:49,440
परम सत्य है उनको नहीं जाना जा सकता है। एक

44
00:03:49,440 --> 00:03:55,440
मिनट एक मिनट केवल मात्र महाजन ग अर्थात जो

45
00:03:56,480 --> 00:04:01,680
है उनको भी रुक गई है। हेलो हेलो

46
00:04:01,680 --> 00:04:05,840
आपको सुनाई दे रहा है मेरी आवाज? आपकी पिक्चर

47
00:04:05,840 --> 00:04:09,920
फ्रीज हो गई है। हां हां सुनाई दे

48
00:04:09,920 --> 00:04:15,920
ठीक है। आप मोबाइल मोबाइल को ऐसे रखें कि बार-बार हिले ना।

49
00:04:16,080 --> 00:04:20,160
अच्छा अच्छा ठीक है। ठीक है। नहीं हां कोई नेटवर्क इशू

50
00:04:20,160 --> 00:04:26,000
होगा नेटवर्क।

51
00:04:26,000 --> 00:04:30,400
बार बार हिलाइए मत। उसको एक जगह रख दीजिए।

52
00:04:30,400 --> 00:04:34,480
अभी भी मूव कर रहा है।

53
00:04:34,480 --> 00:04:39,360
अच्छा रुकिए।

54
00:04:39,360 --> 00:04:45,040
ऐसे हम क्या बात? नहीं ऐसे बात नहीं कर सकते।

55
00:04:45,040 --> 00:04:50,080
नहीं ऐसे बात नहीं कर सकते। आप चेहरे के साथ ही बात करें।

56
00:04:50,080 --> 00:04:55,600
शिवश जी भीख सिंह पाली

57
00:04:55,600 --> 00:05:01,600
हां जी जय श्री राम।

58
00:05:08,560 --> 00:05:12,720
अब ठीक है जो लोग हां ठीक

59
00:05:12,720 --> 00:05:18,240
है काम चल जाएगा अ

60
00:05:18,240 --> 00:05:22,720
हां देखिए आपने कहा कि भगवान

61
00:05:22,720 --> 00:05:26,960
को तर्क से नहीं जाना जा सकता है। अच्छी बात है। तो फिर तर्क

62
00:05:26,960 --> 00:05:32,640
देकर के दूसरे की मान्यता पर प्रहार भी ना करें।

63
00:05:32,640 --> 00:05:35,520
है ना?

64
00:05:35,520 --> 00:05:39,680
अब दूसरे को क्रॉस आ रही है। हां फिर बोलिए।

65
00:05:39,680 --> 00:05:43,840
मेरी आवाज आ रही है सबको? हां। हेलो आवाज

66
00:05:43,840 --> 00:05:47,920
आ रही है मेरी? हां बोलिए बोलिए।

67
00:05:47,920 --> 00:05:52,000
मैं कह रहा हूं आपने जैसे कि कहा कि तर्क

68
00:05:52,000 --> 00:05:56,480
से भगवान को जाना नहीं जा सकता है। प्राप्त नहीं किया जा सकता है।

69
00:05:56,480 --> 00:06:00,560
ठीक है अच्छी बात है। महाभारत का श्लोक एक मिनट भाई साहब एक

70
00:06:00,560 --> 00:06:05,600
मिनट फिर तर्क से आप दूसरे की मान्यता के लिए तर्क प्रस्तुत मत करिए ना।

71
00:06:05,600 --> 00:06:09,840
हां आप दूसरे की मान्यता पर तर्क प्रस्तुत करके

72
00:06:09,840 --> 00:06:13,920
अपनी मान्यता को हावी करना चाहते हैं। और जब वह तर्क करता है तब आप कहते हैं

73
00:06:13,920 --> 00:06:18,320
कि तर्क करो ही मत। ये गलत है।

74
00:06:18,320 --> 00:06:22,480
है ना? नहीं। एक होता है प्रश्न और एक होता है तर्क।

75
00:06:22,480 --> 00:06:26,000
इन दोनों में अंतर है।

76
00:06:26,000 --> 00:06:30,080
क्या अंतर है और ये कहां लिखा है? मतलब

77
00:06:30,080 --> 00:06:34,400
प्रश्न का एक

78
00:06:34,400 --> 00:06:38,640
एक जो प्रश्न है उनके पीछे में मतलब

79
00:06:38,640 --> 00:06:43,200
उनके जो ये होता है मतलब हिंदी में उसकी

80
00:06:43,200 --> 00:06:47,760
म उन उनका जो रीजन होता है तो वो यदि जो

81
00:06:47,760 --> 00:06:51,840
जो ज्ञान है उसको लाभ करने के लिए यदि हम

82
00:06:51,840 --> 00:06:56,000
हम एक जिज्ञासा करते

83
00:06:56,000 --> 00:07:00,320
हैं तो वो बहुत अच्छी बात है। लेकिन जो मेरा

84
00:07:00,320 --> 00:07:03,120
जो मत है वही एकमात्र सही मत

85
00:07:03,120 --> 00:07:07,120
है और और जो बाकी जो जो आचार्य लोग

86
00:07:07,120 --> 00:07:11,200
है वो सब गलत है तो ऐसा जो जो चीज

87
00:07:11,200 --> 00:07:15,280
है ये होता है तर्क और और इसलिए

88
00:07:15,280 --> 00:07:20,320
ही कहा गया है ये कहां लिखना है

89
00:07:20,320 --> 00:07:24,880
ये कहां लिखा है ये तर्क है वो जो महाभारत

90
00:07:24,880 --> 00:07:27,440
का जो

91
00:07:27,440 --> 00:07:33,440
यह तर्क की जो परिभाषा आपने दी है यह कहां

92
00:07:34,800 --> 00:07:39,680
नाना मुनी नाना

93
00:07:39,680 --> 00:07:43,920
मैं अभी अभी बोल रही हूं आपकी आवाज बार-बार फ्रीज

94
00:07:43,920 --> 00:07:49,120
हो रही है। आपकी पिक्चर बार-बार फ्रीज हो रही है। इसको थोड़ा फिक्स करिए आप प्लीज।

95
00:07:49,120 --> 00:07:54,880
और तब तक थोड़ा सा कोई अगर जुड़ना चाहता है

96
00:07:54,880 --> 00:08:00,880
[गहरी सांस लेने की आवाज़] तो वह जुड़ सकता है। हां जो महाभारत का जो वन पर्व में

97
00:08:01,440 --> 00:08:06,720
हम

98
00:08:06,720 --> 00:08:10,800
महाभारत का जो वन पर्व है उसमें कहा गया है कि

99
00:08:10,800 --> 00:08:15,840
जो ये जो श्रुति है तो इसमें बहुत

100
00:08:15,840 --> 00:08:19,920
सारे भेद है लेकिन इस भेद को

101
00:08:19,920 --> 00:08:24,480
जो अपने दृष्टिकोण से जो देखना चाहता है तो वही तर्क है।

102
00:08:24,480 --> 00:08:29,040
महाभारत के वन पर्व का यह श्लोक है। युधिष्ठिर महाराज यहां पर कह रहे हैं

103
00:08:29,040 --> 00:08:33,040
विदुर जी को। अरे भाई मैं प्रश्न ये कर रहा हूं

104
00:08:33,040 --> 00:08:38,640
अपने दृष्टिकोण से देखना सिद्ध कैसे होगा सामने वाले?

105
00:08:38,640 --> 00:08:42,640
आपको मेरी बात सुनाई दे रही है क्या? ऐसा नहीं। मेरी

106
00:08:42,640 --> 00:08:47,120
बात आपको सुनाई दे रही है क्या? सुनाई दे रही है। बोलिए प्रभुपाद

107
00:08:47,120 --> 00:08:51,680
जी ने प्रभुपाद जी ने अपनी बुक में

108
00:08:51,680 --> 00:08:54,960
अपने जो गुरुजन है उनके अलावा कौन-कौन से संप्रदाय

109
00:08:54,960 --> 00:08:58,960
को यह मान लिया है। क्या किसी भी गुरुजन या किसी भी

110
00:08:58,960 --> 00:09:03,040
आचार्य को उन्होंने ऐसा कहा है कि वो वो भी सही बात बता रहे हैं।

111
00:09:03,040 --> 00:09:07,040
प्योर पूरी शंकराचार्य के लिए तो उन्होंने लिख दिया कि वो

112
00:09:07,040 --> 00:09:11,040
तो मायावादी हैं। और उनको नहीं सुनना चाहिए। ये

113
00:09:11,040 --> 00:09:15,120
क्या है? बहुत सारे जो इस

114
00:09:15,120 --> 00:09:19,200
के गीता बोलिए या जो मैंने क्या

115
00:09:19,200 --> 00:09:23,360
मैंने भाई साहब मैंने प्रश्न ये किया है भाई

116
00:09:23,360 --> 00:09:27,360
साहब भाई साहब अपना इंटरनेट सही कर लीजिए आप अपना इंटरनेट सही कर

117
00:09:27,360 --> 00:09:31,360
लीजिए आप इस तरह से बात नहीं हो पाएगी क्योंकि मुझे लगता है मेरी आवाज आप तक

118
00:09:31,360 --> 00:09:35,520
पहुंच नहीं रही है। आप अपनीप बोलते जाते हो आगे बढ़ जाते हो। मैंने आपसे

119
00:09:35,520 --> 00:09:40,000
एक प्रश्न यह किया है कि प्रभुपाद जी ने अगर आचार्य

120
00:09:40,000 --> 00:09:44,320
आचार्य को गलत नहीं कहना है तो उन्होंने शंकराचार्य को गलत क्यों कहा? दूसरी

121
00:09:44,320 --> 00:09:48,640
बात इस पर एक प्रश्न ये उठ सकता है कि पहले जो दूसरा व्यक्ति

122
00:09:48,640 --> 00:09:52,800
है जिसको हम आचार्य कह करके प्रश्न ना करने प्रश्न करने

123
00:09:52,800 --> 00:09:57,040
पर आपत्ति जता रहे उसका आचार्यत्व सिद्ध करो। तो आचार्यत्व सिद्ध

124
00:09:57,040 --> 00:10:01,120
करने के लिए उसको धर्म का बोध कराने वाला सिद्ध करना होगा।

125
00:10:01,120 --> 00:10:05,120
ईश्वर का बोध कराने वाला सिद्ध करना होगा। और जब धर्म और ईश्वर का

126
00:10:05,120 --> 00:10:09,120
बोध कराने वाला उसको हम सिद्ध करेंगे। जब धर्म और ईश्वर का

127
00:10:09,120 --> 00:10:10,320
बोध कराने वाला सिद्ध

128
00:10:10,320 --> 00:10:14,480
करेंगे तो वहां पर वही बात आ जाएगी कि जो हमारी मान्यता है धर्म और ईश्वर के संबंध

129
00:10:14,480 --> 00:10:19,120
में वही सही है और दूसरे की मान्यता को हम काटेंगे। यही

130
00:10:19,120 --> 00:10:22,400
होगा ना? अंततवा

131
00:10:22,400 --> 00:10:26,480
दूसरी बात दूसरी बात। दूसरी बात ये है। देखिए मेरी

132
00:10:26,480 --> 00:10:30,480
बात सुन लीजिए। पूरा कर लेने दीजिए। अंतत गत्वा बात यह

133
00:10:30,480 --> 00:10:35,120
है कि जब मैं प्रश्न कर रहा हूं तो आप यह आक्षेप

134
00:10:35,120 --> 00:10:39,280
लगाने वाले नहीं हो सकते हैं कि मैं प्रश्न जो है

135
00:10:39,280 --> 00:10:43,680
जो है क्या कहते हैं तर्क कर रहा हूं या दूसरे को हराने के लिए कर रहा हूं

136
00:10:43,680 --> 00:10:48,000
वहां पर यह भी हो सकता है कि मैं वास्तविकता में मेरे अंदर से वो प्रश्न उठ रहा होगा

137
00:10:48,000 --> 00:10:52,240
जैसे अर्जुन के मन से उठा था प्रश्न जैसे अथातो धर्म जिज्ञासा

138
00:10:52,240 --> 00:10:56,320
अथातो अथातो ब्रह्म जिज्ञासा सुन लीजिए पूरा सुन लीजिए तो

139
00:10:56,320 --> 00:11:00,480
हमारा जो हमारा जो धर्म है हमारा जो वैदिक वांगमय

140
00:11:00,480 --> 00:11:06,480
है वह प्रश्न करने के लिए ही कहता है। ठीक है?

141
00:11:06,640 --> 00:11:10,880
एक मिनट भाई साहब बीच में प्लीज तो प्रश्न करने के लिए ही कहता

142
00:11:10,880 --> 00:11:16,240
है और प्रश्न जो होता है

143
00:11:16,240 --> 00:11:20,320
प्रश्न करने के लिए कहता है। बस वो यह कहता है कि मरदित होकर के करें। सत्य की

144
00:11:20,320 --> 00:11:24,480
खोज करने के लिए करें। अपना दबदबा बनाने के लिए सामने

145
00:11:24,480 --> 00:11:25,600
वाले को नीचा दिखाने

146
00:11:25,600 --> 00:11:29,840
के लिए ना करें। अब यह जो बात है अपना दबदबा बनाना और सामने

147
00:11:29,840 --> 00:11:34,000
वाले को नीचा दिखाना इस मामले में एक मिनट

148
00:11:34,000 --> 00:11:38,080
भाई साहब अब यह जो बात है अपना दबदबा

149
00:11:38,080 --> 00:11:42,320
बनाना सामने वाले को नीचा दिखाना प्रश्न करने के पीछे मेरा

150
00:11:42,320 --> 00:11:46,400
क्या भाव है यह सामने वाला पता नहीं लगा सकता है वह बात और

151
00:11:46,400 --> 00:11:50,400
है कि उसके उसके पास अधिकार है कि वह प्रश्न का उत्तर देना चाहता है कि नहीं

152
00:11:50,400 --> 00:11:54,400
देना चाहता है देने पर क्या असर होगा यह जनता देखेगी ना देने

153
00:11:54,400 --> 00:11:58,560
पर क्या होगा यह भी जनता देखेगी| वो बात एक अलग है। पर वह यह क्लेम

154
00:11:58,560 --> 00:12:02,800
नहीं कर सकता है कि मैं इसलिए ऐसा कर रहा हूं। यह क्लेम कौन

155
00:12:02,800 --> 00:12:06,800
कर सकता है? भगवान। क्योंकि वो अंतर्यामी है। वो

156
00:12:06,800 --> 00:12:11,040
मेरे हृदय में जानते हैं कि मैं क्या सोच रहा हूं। ठीक है? तो

157
00:12:11,040 --> 00:12:15,280
यह जो लाइन है ना कि प्रश्न जो है सामने वाले को नीचा दिखाने के लिए नहीं

158
00:12:15,280 --> 00:12:19,360
होगा तो वह तर्क है तो वह प्रश्न है और यदि सामने वाले को

159
00:12:19,360 --> 00:12:23,600
नीचा दिखाने के लिए होगा तो वो तर्क है जो आपने लाइन कही है ये

160
00:12:23,600 --> 00:12:27,680
लाइन भगवान के लिए है जो ये पता लगाएंगे कि अगर मैंने

161
00:12:27,680 --> 00:12:31,760
तर्क किया है तो मेरे साथ क्या होना है एक एक मिनट भाई साहब और

162
00:12:31,760 --> 00:12:35,920
मैंने प्रश्न किया है तो मेरे साथ क्या होना है दूसरी बात यह है आचार्य

163
00:12:35,920 --> 00:12:40,000
यास्क भी प्रमाण और युक्ति के आधार पर निरुक्त

164
00:12:40,000 --> 00:12:40,720
का अर्थ करते

165
00:12:40,720 --> 00:12:44,720
हैं। और यह भी एक तर्क है कि प्रमाण आप शास्त्र से क्यों

166
00:12:44,720 --> 00:12:49,040
दे रहे हो? यह तर्क है। इसमें लॉजिक है कि मैं शास्त्र से अपनी बात बता रहा हूं।

167
00:12:49,040 --> 00:12:53,120
यह भी अपने आप में एक लॉजिक है। शास्त्र से ही क्यों बता रहे? तो

168
00:12:53,120 --> 00:12:57,360
यह लॉजिक है तो प्रमाण और युक्ति के परस्पर सामंजस्य

169
00:12:57,360 --> 00:13:01,600
से चला जाता है और यह वाली जो बात है यह बात

170
00:13:01,600 --> 00:13:05,680
है जब आपके जो तर्क है वह निराधार होते

171
00:13:05,680 --> 00:13:09,760
हैं और आप जो है सभा की जो मर्यादा है उसको भंग

172
00:13:09,760 --> 00:13:14,000
करते हुए करते हैं उन विषयों के लिए है और यदि ऐसा होगा भी

173
00:13:14,000 --> 00:13:18,000
तब जो निराधार तर्क कर रहा होगा उसको भी नेस्तोनाबूत तो किया ही

174
00:13:18,000 --> 00:13:22,480
जाएगा ऐसा नहीं है कि उसको छोड़ दिया जाए यदि कोई नास्तिक

175
00:13:22,480 --> 00:13:26,480
आ जाए। चलो ठीक है। हम और आप शास्त्र को मानते हैं। ठीक

176
00:13:26,480 --> 00:13:30,480
है? इसलिए हम यह बात कर रहे हैं। नास्तिक आएगा तो क्या हम उसको भगवान की

177
00:13:30,480 --> 00:13:35,120
सिद्धि ना करें उसके समक्ष छोड़ दें।

178
00:13:35,120 --> 00:13:39,200
वो तो साक्ष को नहीं मानता है। नहीं छोड़ेंगे तो उसको तो तर्क के जवाब

179
00:13:39,200 --> 00:13:43,280
देने पड़ेंगे ना। इसलिए तर्क को सर्वदा के लिए नहीं छोड़

180
00:13:43,280 --> 00:13:47,280
देना है। ये धर्म में परायण लोगों की बात है कि हम लोगों

181
00:13:47,280 --> 00:13:51,280
को ऐसी प्रैक्टिसिंग करनी चाहिए। यह स्वाता सुखाय के

182
00:13:51,280 --> 00:13:55,360
लिए है। सामने वाला मुझे रोक नहीं सकता तर्क तार्किक प्रश्न

183
00:13:55,360 --> 00:13:59,680
करने से। यह भगवान हमको दंड देंगे। यदि मैंने द्वेष पूर्ण तर्क

184
00:13:59,680 --> 00:14:02,960
किया होगा तो। समझ रहे हैं? ठीक है ना? अच्छा

185
00:14:02,960 --> 00:14:08,320
अब थोड़ा सा मूल विषयों पे आ जाते हैं कि इस कौन

186
00:14:08,320 --> 00:14:13,040
शिव जी को भगवान क्यों नहीं मानता है? मतलब अच्छा अच्छा।

187
00:14:13,040 --> 00:14:17,280
अब मैं इसको क्लियर कर दूं कि शिवजी को भगवान नहीं मानता

188
00:14:17,280 --> 00:14:21,440
है और दूसरी तरफ कृष्ण और क्राइस्ट को कृष्ण

189
00:14:21,440 --> 00:14:25,680
यहोवा को कृष्ण और अल्लाह को एक करता है और शिव जी को भगवान नहीं मानता

190
00:14:25,680 --> 00:14:30,480
है। तो सबसे पहले तो इस संबंध में एक

191
00:14:30,480 --> 00:14:34,560
युक्ति दी जाती है। जिस प्रकार दूध से दही बनता है उसी प्रकार जिस प्रकार

192
00:14:34,560 --> 00:14:39,200
दूध से दही बन सकता है पर दही से दूध नहीं उसी प्रकार क्या

193
00:14:39,200 --> 00:14:43,360
कहते हैं? शिव श्री कृष्ण से शिव तो बन सकते हैं मगर

194
00:14:43,360 --> 00:14:47,600
शिव जी से वापस कृष्ण नहीं बन सकते। तो क्या यह युक्ति आपको सही

195
00:14:47,600 --> 00:14:50,240
लगती है?

196
00:14:50,240 --> 00:14:54,480
अच्छा अब मैं बोल रहा हूं। तो यह जो श्लोक

197
00:14:54,480 --> 00:14:59,040
है यह ब्रह्म संगीिता का श्लोक और इसका जो तात्पर्य

198
00:14:59,040 --> 00:15:03,200
है वो हमारे महान आचार्य श्री विश्वनाथ चक्रवर्ती ठाकुर जो जो गौ

199
00:15:03,200 --> 00:15:07,520
परंपरा के एक एक महान आचार्य हुए आज से लगभग 400

200
00:15:07,520 --> 00:15:11,600
साल पहले तो उन्होंने इन इस श्लोक का तो तब तो

201
00:15:11,600 --> 00:15:15,920
इस वगैरह कोई नहीं था। तो उन्होंने इस श्लोक का जो सार्थ दर्शनी

202
00:15:15,920 --> 00:15:18,240
जो टीका हुआ है मतलब

203
00:15:18,240 --> 00:15:22,240
उन्होंने जो अभी लिखा है उन श्लोक में उन्होंने

204
00:15:22,240 --> 00:15:26,240
इस श्लोक का बहुत बड़ा करके इनका जो व्याख्यान

205
00:15:26,240 --> 00:15:30,240
किया है और और अक्सर हम लोग जो जो

206
00:15:30,240 --> 00:15:34,720
मतलब कि ये श्लोक का जैसा अर्थ हम समझते हैं

207
00:15:34,720 --> 00:15:37,680
वैसा उन टीिका में नहीं लिखा हुआ

208
00:15:37,680 --> 00:15:41,840
है। तो वहां पर क्या मतलब

209
00:15:41,840 --> 00:15:45,840
वहां पर क्या क्या मतलब वहां पर

210
00:15:45,840 --> 00:15:50,160
क्या लिखा हुआ है वहां पर लिखा हुआ है कि जो भगवान

211
00:15:50,160 --> 00:15:54,320
जो महाविष्णु है उन महा विष्णु जब कारणोदक

212
00:15:54,320 --> 00:15:59,200
शाही मतलब जो जो

213
00:15:59,200 --> 00:16:04,960
कारण समुद्र में जब

214
00:16:04,960 --> 00:16:09,600
टीका ना सार्थ दर्शनी

215
00:16:09,600 --> 00:16:13,600
विश्वनाथ पाद जी का है ना? हां हां

216
00:16:13,600 --> 00:16:17,760
भगवत गीता नहीं नहीं भगवत गीता के नहीं ब्रह्म

217
00:16:17,760 --> 00:16:21,840
संगीता के अरे भगवत गीता के भाष्य में

218
00:16:21,840 --> 00:16:26,400
इस श्लोक का सही अर्थ बताया ना उन्होंने नहीं नहीं ऐसा कहां पर नहीं

219
00:16:26,400 --> 00:16:30,480
जो हमारे ये आपने बोला विश्वनाथ

220
00:16:30,480 --> 00:16:34,560
पाद जी ने सार्थ दर्शनी टीका में

221
00:16:34,560 --> 00:16:38,720
सार्थ दर्शनी किसकी टीका है दर्शनी उन्होंने मतलब

222
00:16:38,720 --> 00:16:44,240
की लिखा हुआ है लेकिन मैं मैं बोल रहा हूं कि जो लोगों

223
00:16:44,240 --> 00:16:48,320
भाई साहब मैं पूछ रहा हूं सार्थनी एक मिनट

224
00:16:48,320 --> 00:16:52,480
सार्थ दर्शनी सार्थ दर्शनी किसका किस पर कमेंट्री

225
00:16:52,480 --> 00:16:52,980
की है

226
00:16:52,800 --> 00:16:57,440
उन्हें कौन से ग्रंथ पर कमेंट्री है वो गीता के भाष्य

227
00:16:57,440 --> 00:17:01,440
तो ये विश्वनाथ पाद जी का गीता भाष्य है

228
00:17:01,440 --> 00:17:05,920
सार्थ वर्ष इसका नाम सार्थ दर्शनी नहीं है वर्ष है

229
00:17:05,920 --> 00:17:10,000
नहीं मैं इनका नहीं

230
00:17:10,000 --> 00:17:13,680
जो

231
00:17:13,680 --> 00:17:18,000
सॉरी सॉरी गलती हुआ है एक मिनट एक मिनट ये विश्वनाथ

232
00:17:18,000 --> 00:17:22,880
पाद जी का ही टीका है उसका हिंदी अनुवाद फिर किया गया है अब आप बताइए

233
00:17:22,880 --> 00:17:26,880
हां तो यहां पर मतलब जो ब्रह्म संिता

234
00:17:26,880 --> 00:17:31,440
का टीका है मैं उनके ऊपर बात बोल रहा हूं सारदनी या

235
00:17:31,440 --> 00:17:36,240
मुझे नाम सटीक नहीं हो रहा है लेकिन

236
00:17:36,240 --> 00:17:40,400
वो जो ब्रह्म संहिता के ऊपर उन्होंने जो जो टीका दिया

237
00:17:40,400 --> 00:17:44,720
हुआ है वो आप गूगल करके आप आप अभी आप निकाल सकते हैं

238
00:17:44,720 --> 00:17:49,040
और जो वो है लघु

239
00:17:49,040 --> 00:17:53,040
क्या डालू गूगल में जो कहता है

240
00:17:53,040 --> 00:17:58,400
हां वही हां हां मैं बोल रहा हूं जो अच्छा

241
00:17:58,400 --> 00:18:02,480
श्री विश्वनाथ चक्रवर्ती ठाकुर है सॉरी मैं बांग्ला में

242
00:18:02,480 --> 00:18:06,480
बोल रहा हूं तो ब्रह्मा संिता टीका आप आप

243
00:18:06,480 --> 00:18:08,080
आप डाल दीजिए गौरिया

244
00:18:08,080 --> 00:18:12,240
मठ या कोई भी आप जो गौरिया मठ का जो टीका है ना

245
00:18:12,240 --> 00:18:16,720
वहां पर उनका जो लिखा है वहां पर ये

246
00:18:16,720 --> 00:18:20,720
ये हुआ है कि पब्लिश किया गया है गौ मठ का जो टीका

247
00:18:20,720 --> 00:18:24,720
है आप आप निकालिए ब्रह्म संगीिता के ऊपर मैं वहां से ही बोल

248
00:18:24,720 --> 00:18:28,880
रही हूं

249
00:18:28,880 --> 00:18:33,040
ब्रह्म संगीिता हां और वो जो श्लोक

250
00:18:33,040 --> 00:18:37,920
है उन श्लोक आपको आप निकालिए

251
00:18:37,920 --> 00:18:43,440
उसके बाद मैं बोल रही हूं। एक मिनट

252
00:18:43,440 --> 00:18:47,920
गोिया मठ आपने लिखा है? एक मिनट

253
00:18:47,920 --> 00:18:50,800
हां ठीक है।

254
00:18:50,800 --> 00:18:55,600
सिद्धांत सरस्वती का टीका है इंग्लिश में इनका।

255
00:18:55,600 --> 00:19:00,160
हिंदी में मतलब हां आप अपनी बात

256
00:19:00,160 --> 00:19:04,320
आप अपनी बात बताइए। हां तो वहां पर जो लिखा हुआ है और

257
00:19:04,320 --> 00:19:09,120
और इसके साथ लघु भागवतम जो जो ग्रंथ है लघु भागवतम

258
00:19:09,120 --> 00:19:13,440
वहां पर भी ये लिखा हुआ है कि जब जब महा

259
00:19:13,440 --> 00:19:17,520
विष्णु मतलब वो जो कारण विष्णु है

260
00:19:17,520 --> 00:19:21,760
वो जब इस इस ज ब्रह्मांड की सृष्टि की इच्छा

261
00:19:21,760 --> 00:19:24,080
प्रकट करते हैं तब

262
00:19:24,080 --> 00:19:28,160
उनके उनके बाम अंग से शिव जी और

263
00:19:28,160 --> 00:19:32,320
और दाहिने अंग से ब्रह्मा जी प्रकट होते हैं। ऐसा वहां पर कहा गया है

264
00:19:32,320 --> 00:19:36,480
और एक स्थान पर यह भी कहा गया है उसी टीका में यह भी

265
00:19:36,480 --> 00:19:41,040
कहा गया है कि जब भगवान महा विष्णु

266
00:19:41,040 --> 00:19:45,280
जो महातत्व है अर्थात इस समग्र जगत की

267
00:19:45,280 --> 00:19:49,840
जो जो जननी है मतलब कि महामाया दुर्गा देवी

268
00:19:49,840 --> 00:19:54,080
उनके ऊपर जब दृष्टि डालते हैं मतलब वो ऐसा नहीं कि

269
00:19:54,080 --> 00:19:58,320
वो देवी है और उनको जस्ट इशन कर रहे हैं नहीं ऐसा नहीं

270
00:19:58,320 --> 00:20:02,560
मैं बोल रहा हूं कि महत्वत मतलब मतलब जो ये जो

271
00:20:02,560 --> 00:20:06,640
अष्ट आवरण के जो अधश्वरी है उनका

272
00:20:06,640 --> 00:20:10,800
जो लोक है तो उसको कहा जाता है वो

273
00:20:10,800 --> 00:20:14,800
महत्वत तो उनके तो उस उस महत्व

274
00:20:14,800 --> 00:20:18,960
के ऊपर जब महा विष्णु जब अवलोकन करता है मतलब कि इशन करता

275
00:20:18,960 --> 00:20:23,680
है ये वर्ड वहां पर एकजेक्टली लिखा है शत अर्थात

276
00:20:23,680 --> 00:20:28,160
इशन जब करता है तो वो जो इशन है मतलब उनका जो

277
00:20:28,160 --> 00:20:33,120
जो दृष्टि है भगवान का उस उस दृष्टिपात

278
00:20:33,120 --> 00:20:37,280
से ही ये जो ये जो लिंगो जो भूता वहां

279
00:20:37,280 --> 00:20:39,200
पर ये वर्ड है कि

280
00:20:39,200 --> 00:20:43,200
ये जो वो जो दृष्टिपात है वो है लिंग के स्वरूप

281
00:20:43,200 --> 00:20:47,840
और और इसको भी शिव जी के स्वरूप माना गया है तो

282
00:20:47,840 --> 00:20:52,000
वो अर्थ क्या हुआ कि जो भगवान

283
00:20:52,000 --> 00:20:57,360
स्वयं अपनी जो बहिरंगा शक्ति है महामाया उनके साथ

284
00:20:57,360 --> 00:21:01,520
डायरेक्ट रिलेशन में कभी नहीं आता डायरेक्ट रिलेशन में जब आना

285
00:21:01,520 --> 00:21:06,160
होता है तब वो तब उनके जो दृष्टिपात

286
00:21:06,160 --> 00:21:10,400
है उनसे जो भगवान शिव जी का जो जो लिंग प्रकट

287
00:21:10,400 --> 00:21:14,880
होता है तो वही मतलब शिव जी के रूप में जो

288
00:21:14,880 --> 00:21:19,360
भगवान का जो दृष्टिपात है वही आ रहा है और जैसे भगवान

289
00:21:19,360 --> 00:21:23,360
के वाक्य में और भगवान में कोई अंतर नहीं मतलब

290
00:21:23,360 --> 00:21:27,440
की भगवान के दृष्टि में और भगवान में कोई अंतर नहीं

291
00:21:27,440 --> 00:21:31,680
मेरी बात सुनिए भाई भाई साहब आप खामखा ना बहुत ज्यादा एक्सप्लेनेशन

292
00:21:31,680 --> 00:21:36,000
कर रहे हैं। प्रश्न यह है कि क्या

293
00:21:36,000 --> 00:21:40,000
मैं वही उत्तर दे रहा हूं। नहीं उत्तर आप खामखा

294
00:21:40,000 --> 00:21:44,480
एक्सटेंडेड चीज है। एक्सटेंडेड वर्जन मेरी बात सुन लीजिए। मेरा प्रश्न सटीकता से समझिए

295
00:21:44,480 --> 00:21:49,200
थोड़ा कि विष्णु और शिव में अंतर है।

296
00:21:49,200 --> 00:21:53,280
कृष्ण भगवान में मैं सीधे कृष्ण की बात कर रहा हूं। अभी महा विष्णु

297
00:21:53,280 --> 00:21:54,720
भी छोड़ दीजिए।

298
00:21:54,720 --> 00:21:58,880
अच्छा कृष्ण भगवान कृष्ण भगवान में और शिव जी में अंतर

299
00:21:58,880 --> 00:22:03,040
है और अंतर कैसे बताया जा रहा है कि कृष्ण भगवान

300
00:22:03,040 --> 00:22:07,040
तो शिव बन सकते हैं और शिव जी जो है कृष्ण नहीं बन सकते। अब आप मुझे बता

301
00:22:07,040 --> 00:22:11,440
दीजिए शिव जी कृष्ण बन सकते हैं एज इट इज जो वाकई में कृष्ण

302
00:22:11,440 --> 00:22:15,680
है परम तत्व कि नहीं बन सकते? बस ये बताइए

303
00:22:15,680 --> 00:22:19,680
ये वैसा नहीं है। देखिए इस प्रश्न का उत्तर

304
00:22:19,680 --> 00:22:24,160
देने के पहले हमें थोड़ा सा कॉन्टेक्स्ट एक थोड़ा सा तो समझना पड़ेगा क्योंकि

305
00:22:24,160 --> 00:22:28,560
यहां पर ऐसा नहीं है कि मेरी बात समझिए मैं एक एक

306
00:22:28,560 --> 00:22:32,720
मिनट मैं एक चीज क्लियर कर दूं। कोई नहीं करना। एक एक

307
00:22:32,720 --> 00:22:37,040
मिनट एक मिनट भाई साहब कॉन्टेक्स्ट की आवश्यकता तब होती है

308
00:22:37,040 --> 00:22:41,200
जब हमें यह मालूम होता है कि हम क्या जानने निकले हैं। एक

309
00:22:41,200 --> 00:22:45,440
हेडलाइन तो आप पहले हेडलाइन को क्लियर कर दीजिए। फिर उस हेडलाइन

310
00:22:45,440 --> 00:22:49,440
पे अगर मुझे आपत्ति होगी या मुझे कॉन्टेक्स्ट चाहिए होगा ये कैसे वो कैसे

311
00:22:49,440 --> 00:22:53,520
तो आप कॉन्टेक्स्ट समझा दीजिए। मुझे आपकी हेडलाइन तो क्लियर करिए

312
00:22:53,520 --> 00:22:57,520
कि शिवजी और कृष्ण में भेद है कि नहीं और अगर भेद

313
00:22:57,520 --> 00:23:01,520
है तो क्या यही भेद है कि शिवजी जो है कृष्ण नहीं बन सकते। बस ये

314
00:23:01,520 --> 00:23:05,680
क्लियर करिए फिर श्री कृष्ण की गुणवतारजी है

315
00:23:05,680 --> 00:23:09,760
श्री कृष्ण की ही गुण अवतार अवतार और और अवतारी में जैसा भेद

316
00:23:09,760 --> 00:23:13,760
होता है वैसा ही भेद है और और जैसा अभेद होता है वैसा ही अभेद भी है

317
00:23:13,760 --> 00:23:18,640
यही तो मैं पूछ रहा हूं बन सकते हैं कि नहीं

318
00:23:18,640 --> 00:23:24,640
कौन कौन क्या बन सकते हैं बन सकते हैं कि नहीं

319
00:23:24,880 --> 00:23:25,380
कृष्ण

320
00:23:25,360 --> 00:23:29,520
भी शिव जी नहीं बन सकते ठीक है और शिव जी भी कभी कृष्ण

321
00:23:29,520 --> 00:23:33,680
नहीं बन सकते यही हां यही यही यही तो सिद्धांत

322
00:23:33,680 --> 00:23:38,240
है आप मतलब जो प्रचार है

323
00:23:38,240 --> 00:23:43,120
तो जो दूध वाला एग्जांपल है वो तो कैंसिल हो गया

324
00:23:43,120 --> 00:23:47,280
मैं बोल रहा हूं तो हां तो आप देखिए वहां पर क्या कहा

325
00:23:47,280 --> 00:23:51,360
गया है खीरंग यथा ददी विकार विशेष मतलब जैसे

326
00:23:51,360 --> 00:23:56,000
कि दूध के साथ आप आप अम्ल का जोड़ दें तो वो

327
00:23:56,000 --> 00:24:00,080
एक जो दही में रूपांतरित हो जाता है लेकिन

328
00:24:00,080 --> 00:24:04,320
लेकिन भगवान में क्या विकार आ सकता है? क्या कृष्णा में क्या

329
00:24:04,320 --> 00:24:08,320
कोई माया का कोई विकार आ गया और वो शिव

330
00:24:08,320 --> 00:24:12,400
जी बन गए। ऐसा कभी हो सकता है क्या? अब बोलिए ऐसा

331
00:24:12,400 --> 00:24:16,400
कभी हो सकता है इसीलिए तो इसीलिए तो व्यवहार की

332
00:24:16,400 --> 00:24:21,520
सारी घटनाएं माया मात्र है। प्रपंच मात्र है और क्यों है द्वैत?

333
00:24:21,520 --> 00:24:25,520
वो बात अच्छा अच्छा अच्छा अच्छा अच्छा हां तो

334
00:24:25,520 --> 00:24:29,520
भगवान की जो माया है तो वो इतना पार तो वो

335
00:24:29,520 --> 00:24:33,600
इतना मतलब कि है ऐसा होता है सुन

336
00:24:33,600 --> 00:24:38,320
लीजिए अच्छा आप सुन लीजिए ऐसा होता है

337
00:24:38,320 --> 00:24:42,960
कि जो भी कुछ चीजें हो रही हैं संसार में घटित

338
00:24:42,960 --> 00:24:47,040
वो जब हम ईश्वर से जोड़ेंगे तो वो वो जब ईश्वर से जोड़ेंगे तो ये

339
00:24:47,040 --> 00:24:51,200
सारी चीजें आने लगेंग ऐसा हो सकता है क्या ऐसा भला हो सकता है क्या ऐसा

340
00:24:51,200 --> 00:24:55,200
भला हो सकता है क्या? तब अंत में सारी फिलोसफीस के बाद हमें लाना पड़ता

341
00:24:55,200 --> 00:24:59,520
है अद्वैत कि भाई वास्तविकता में कुछ हो ही नहीं रहा है। इसलिए

342
00:24:59,520 --> 00:25:03,520
कोई भी दोष ईश्वर पर लग ही नहीं सकता। समझ रहे हो? जैसे

343
00:25:03,520 --> 00:25:07,520
कि ईश्वर को सृष्टि एक एक मिनट। ईश्वर को

344
00:25:07,520 --> 00:25:12,400
सृष्टि बनाने की आवश्यकता क्या है? अभाव था क्या कोई ईश्वर को?

345
00:25:12,400 --> 00:25:16,560
ऐसा हो सकता है क्या कि उसको अभाव हो जाए? तो इस तरीके से जितने

346
00:25:16,560 --> 00:25:20,720
भी कुछ भी करने जाओगे वह जब ईश्वर से आप लगाओगे क्योंकि ईश्वर

347
00:25:20,720 --> 00:25:24,880
है सच्चिदानंद पूर्ण तो जब वो ईश्वर से आप कनेक्ट करोगे तो वहां

348
00:25:24,880 --> 00:25:28,960
लॉजिकल चीजें आने लग जाएंगी। ऐसा हो सकता है क्या? ऐसा हो सकता है क्या?

349
00:25:28,960 --> 00:25:33,200
इसीलिए ईश्वर को सच्चिदानंद सर्वशक्तिमान सर्व

350
00:25:33,200 --> 00:25:37,200
नियंता सर्वाधार सिद्ध करने के लिए फिर यह मानना पड़ेगा

351
00:25:37,200 --> 00:25:41,520
कि भाई यह जो संसार है जितना भी व्यवहार जगत है यह माया

352
00:25:41,520 --> 00:25:45,520
मात्र है। यह बात होती है। खैर अब

353
00:25:45,520 --> 00:25:49,520
ये आपने मेरे से पूछा था तो मैंने अपनी चीजें बता दी। अब मैं

354
00:25:49,520 --> 00:25:52,960
वापस उस पर आता हूं जो विशेष मुद्दा चल रहा है वो

355
00:25:52,960 --> 00:25:57,200
ये चल रहा है। अब इसमें तीन चीजें हो गई। एक तो

356
00:25:57,200 --> 00:26:01,680
कि जो लोग आपके यहां के जो रिप्रेजेंटेटिव हैं ऑथेंटिक

357
00:26:01,680 --> 00:26:06,000
वो शिव जी में और कृष्ण जी में भेद करते समय स्पष्ट बोलते

358
00:26:06,000 --> 00:26:10,560
हुए मिल जाएंगे। कईयों के बहुत

359
00:26:10,560 --> 00:26:14,800
मुझे पता है। पता है। एक मिनट भाई साहब एक मिनट।

360
00:26:14,800 --> 00:26:18,960
थोड़ा सा प्रयास करें। मतलब जैसे अगर मैं कोई धारा में कोई बात बोल रहा हूं

361
00:26:18,960 --> 00:26:23,040
और बहुत फ्लुएंटली बोल रहा हूं। मैं आपकी तरह रुक रुक के अटक अटक के नहीं बोल रहा हूं और

362
00:26:23,040 --> 00:26:27,520
टू द पॉइंट बात कर रहा हूं। तो थोड़ा प्रयास करें कि बीच-बीच में एक इंटरप्ट

363
00:26:27,520 --> 00:26:31,520
ना करें। वैसे ये ह्यूमन नेचर होता है कि हमें कोई बात ठीक नहीं लग

364
00:26:31,520 --> 00:26:35,680
रही है या फिर ठीक लग रही तो हम अपना रिएक्शन दे देते हैं। तो अगर

365
00:26:35,680 --> 00:26:39,680
होगा तो कोई बात नहीं है। मगर प्रयास करें कि ना हो। उससे क्या होता है कि

366
00:26:39,680 --> 00:26:44,560
वो भंग हो जाता है ध्यान जो बोलना होता है। खैर

367
00:26:44,560 --> 00:26:48,880
चलिए आगे चलते हैं। तो क्या है?

368
00:26:48,880 --> 00:26:53,520
कहां पर था? बुलवा दिया।

369
00:26:53,520 --> 00:26:58,000
क्या चल रहा था? क्या बोल रहा था मैं?

370
00:26:58,000 --> 00:27:02,560
कुछ तो नहीं चल रहा है क्योंकि सब तो माया ही है।

371
00:27:02,560 --> 00:27:06,640
देखिए अगर आप कटाक्ष के उद्देश्य से आए तो कटाक्ष मेरे पास डलिया

372
00:27:06,640 --> 00:27:10,880
भर के है। मैं इतने कटाक्ष सुनाऊंगा आपको मैं इतने कटाक्ष

373
00:27:10,880 --> 00:27:14,880
सुनाऊंगा आपको आप खून के आंसू रोओगे। आपको ये भावनाएं तक

374
00:27:14,880 --> 00:27:19,040
आ सकती है कि मैं आत्महत्या कर लूंगा। अभी के अभी तो कटाक्ष के बारे में मत सोचिए।

375
00:27:19,040 --> 00:27:23,040
मैं फ्रेंडली आपसे बात करने के लिए बैठा हूं। फ्रेंडली बात करिए। टू

376
00:27:23,040 --> 00:27:27,120
द पॉइंट बात करिए। ठीक है? अगर आपने स्वीकार

377
00:27:27,120 --> 00:27:31,360
कर लिया कुछ नहीं चल रहा है तो आप जा सकते हैं फिर क्यों बैठे हुए हैं स्वीकार

378
00:27:31,360 --> 00:27:35,360
कर लिया ना कुछ नहीं चल रहा है हां तो फिर क्यों बैठे

379
00:27:35,360 --> 00:27:39,520
हुए हैं तो ये तो आप स्वीकार कर रहे हैं ना मैं तो आपसे स्वीकार

380
00:27:39,520 --> 00:27:43,840
आपने आपने स्वीकार कर लिया ना के सब वो कुछ नहीं चल रहा सब माया है

381
00:27:43,840 --> 00:27:47,920
स्वीकार कर लिया कि नहीं कर लिया कर लिया कि नहीं बोल लिया

382
00:27:47,920 --> 00:27:51,920
तो फिर आप ये जवाब क्यों दे रहे हो अपनी ओर से आप ये क्यों कह रहे हो कि कुछ नहीं चल रहा

383
00:27:51,920 --> 00:27:55,920
है आपने ये क्यों कहा कि कुछ नहीं चल रहा आप तो उसको काउंट

384
00:27:55,920 --> 00:27:59,760
करो आपको उसको

385
00:27:59,760 --> 00:28:03,840
नहीं आपने उसको लिया मैं कोई मैं कोई डिबेट के भावना से नहीं बोल

386
00:28:03,840 --> 00:28:07,840
रहा हूं तो आपने ये कटाक्ष क्यों किया सम्मान के मैडम आप है

387
00:28:07,840 --> 00:28:08,560
मैं पूछ रहा हूं कि

388
00:28:08,560 --> 00:28:12,640
आप कटाक्ष क्यों किया ये ठीक है ठीक है आप बोलिए बोलिए

389
00:28:12,640 --> 00:28:17,440
यही तो बात है सम्मान रास नहीं आता है किसी को

390
00:28:17,440 --> 00:28:21,680
हां हां मैंने आपके पति सम्मान

391
00:28:21,680 --> 00:28:25,680
अच्छे भाव से तुम्हारे साथ बैठा हुआ हूं तो तुम कटाक्ष कर रहे हो यही

392
00:28:25,680 --> 00:28:30,000
यही होता है देने का फायदा ये कटाक्ष ही था भाई साहब

393
00:28:30,000 --> 00:28:34,160
अब फिर इस पर बहस होगी जब आपकी वो फिलोसफी आपको स्वीकार

394
00:28:34,160 --> 00:28:39,120
नहीं है आप क्यों बोल रहे हो कुछ नहीं चल रहा सब माया ही तो है ये

395
00:28:39,120 --> 00:28:43,200
मैं मैं द्वेष से नहीं कह रहा ये आपने जस्ट कहा इसलिए मैंने

396
00:28:43,200 --> 00:28:47,280
अपने मुंह से ये मतलब की निकल आया ठीक है अच्छा यदि आपके

397
00:28:47,280 --> 00:28:51,360
मन में हां यदि कोई दुख है तो

398
00:28:51,360 --> 00:28:55,360
इसके लिए माफी मांग लेते हो ठीक है ठीक है मैं माफी

399
00:28:55,360 --> 00:28:59,440
मांगते माफ़ मांग रहे हो माफी मांग रहे हो तो ये माफी मांग रहे हो तो यह मत कहो

400
00:28:59,440 --> 00:29:03,680
कि कटाक्ष नहीं था स्वीकार करो वो कटाक्ष ही था

401
00:29:03,680 --> 00:29:07,920
वो कटाक्ष था तब तुम माफी मांगो तब तो सही भी है अंधे

402
00:29:07,920 --> 00:29:10,960
में माफी क्यों मांगोगे

403
00:29:10,960 --> 00:29:14,960
अंधेरे में माफी क्यों मांगोगे भाई जब आपको यह लग ही नहीं रहा कि आपने कुछ

404
00:29:14,960 --> 00:29:20,080
गलत किया तो माफी क्यों मांगोगे नहीं नहीं जो

405
00:29:20,080 --> 00:29:23,600
आपके हृदय में यदि कोई दुख हुआ तो तो उसके लिए ही मैं

406
00:29:23,600 --> 00:29:27,760
मांग रहा हूं वो कटा था ना अच्छा सुनिए चलिए

407
00:29:27,760 --> 00:29:32,000
हृदय में दुख अगर हम कोई सामने वाला गलत कर रहा होगा और हम कुछ करेंगे

408
00:29:32,000 --> 00:29:36,160
उसके अगेंस्ट तो उसके हृदय में दुख होगा कि नहीं होगा हां होगा

409
00:29:36,160 --> 00:29:41,280
तो हम क्या माफी मांगेंगे उससे जो पापी होगा उसका वध करते टाइम

410
00:29:41,280 --> 00:29:45,440
नहीं नहीं क्योंकि वो तो धर्म है ना हां तो फिर

411
00:29:45,440 --> 00:29:49,440
अगर हम सही बात कर रहे हैं सही राह पे चल रहे हैं और सामने वाले को दुख

412
00:29:49,440 --> 00:29:53,680
हो भी रहा है तो डजंट मैटर क्योंकि हम सत्य पे हैं तो

413
00:29:53,680 --> 00:29:57,680
दो तो आपको माफ़ी कब मांगनी है? जब हम गलत राह पे चल

414
00:29:57,680 --> 00:30:01,760
रहे हैं और सामने वाले को दुख दुख रहा है। तब माफ़ी मांगते हैं। [हंसी] ठीक है।

415
00:30:01,760 --> 00:30:04,480
ठीक है। हां।

416
00:30:04,480 --> 00:30:08,560
तो मैंने कहा तो फिर आप ये क्यों कह रहे हो कि ये क्यों कह रहे हो

417
00:30:08,560 --> 00:30:12,720
कि वो जो है कटाक्ष नहीं था। ये मत कहो कटाक्ष नहीं था।

418
00:30:12,720 --> 00:30:16,800
हां मेरी कोई द्वेष भावना नहीं है। मैं यही आपने कोई

419
00:30:16,800 --> 00:30:21,040
भावना नहीं है आपके प्रति द्वेष नहीं वो सम्मान

420
00:30:21,040 --> 00:30:25,120
की भावना के साथ साथ आपने अभी कटाक्ष किया है। आप अपनी अंतरात्मा

421
00:30:25,120 --> 00:30:30,160
से पूछिए क्यों किया है? अच्छा ठीक है।

422
00:30:30,160 --> 00:30:34,240
अच्छा अच्छा अच्छा ठीक है। नहीं सीधा ठीक है। अच्छा ठीक है। नहीं

423
00:30:34,240 --> 00:30:38,480
सीधा ठीक है। काम चलाने वाला ठीक है नहीं?

424
00:30:38,480 --> 00:30:39,040
हां

425
00:30:39,040 --> 00:30:43,040
ठीक है। कटाक्षिया है।

426
00:30:43,040 --> 00:30:47,920
चलिए ठीक है ठीक है

427
00:30:47,920 --> 00:30:51,920
अभी आपको कुछ एक्सप्लेनेशन देनी है कटाक्ष पर नहीं

428
00:30:51,920 --> 00:30:56,000
नहीं आप आप बोलिए आप बोलिए नहीं कटाक्ष पे वो देनी

429
00:30:56,000 --> 00:31:00,080
है एक्सप्लेनेशन नहीं नहीं वो

430
00:31:00,080 --> 00:31:04,160
मुद्दे से आउट हो जाएगा नहीं मुद्दे से आउट नहीं आप उसको क्लियर

431
00:31:04,160 --> 00:31:08,160
करिए अब आपने गलती की है कि नहीं कटाक्ष करके

432
00:31:08,160 --> 00:31:12,480
नहीं नहीं आपने जो कह रहे थे थोड़े थोड़े से पहले तो

433
00:31:12,480 --> 00:31:18,320
मैंने बस उसको वो क्या सहमत किया आप जो

434
00:31:18,320 --> 00:31:24,320
आपने सहमत किया सहमत किया मेरे से आपने

435
00:31:24,480 --> 00:31:28,560
आपकी दृष्टिकोण से मैंने सहमत किया क्यों क्यों किया इसकी

436
00:31:28,560 --> 00:31:32,640
आवश्यकता क्या थी क्या क्या क्योंकि मैं

437
00:31:32,640 --> 00:31:35,760
हमारे बीच में

438
00:31:35,760 --> 00:31:39,840
मैं इसके बाद जो जो मेरा वाला जो एक्सप्लेनेशन है

439
00:31:39,840 --> 00:31:44,240
मैं वो वो देने वाला हूं। इसलिए ही मैंने ये बोला था। ठीक है?

440
00:31:44,240 --> 00:31:48,320
कौन से कौन से एक्सप्लेनेशन? दो तरीके का एक्सप्लेनेशन है। एक है कि

441
00:31:48,320 --> 00:31:52,480
माया के विरोध में आपको एक्सप्लेनेशन करना है या फिर जो अपना मुद्दा

442
00:31:52,480 --> 00:31:56,560
चल रहा है दूर वाला उसका एक्सप्लेनेशन करना है। हां वो जो

443
00:31:56,560 --> 00:32:00,800
माया के विरोध में वही कहना है। माया का विरोध करना है। तो माया

444
00:32:00,800 --> 00:32:04,800
का विरोध करने के लिए आप यह कहेंगे कि आप जो बोल रहे हो माया मान रहे हो

445
00:32:04,800 --> 00:32:08,880
जगत को वो गलत कह रहे हो। या यह कहेंगे कि सब माया ही तो है। कुछ नहीं चल रहा था। जब मैं

446
00:32:08,880 --> 00:32:12,880
पूछ रहा हूं मैं क्या कह रहा था? आपने किस बात के लिए कहा है कि मैं क्या कह रहा

447
00:32:12,880 --> 00:32:16,960
था? आपने कहा कि कुछ नहीं चल रहा है। सब माया ही

448
00:32:16,960 --> 00:32:20,960
तो है। आप अगर माया का खंडन करने आ रहे हो तो आप यह

449
00:32:20,960 --> 00:32:25,760
कहोगे ये संसार माया नहीं है। अब मैं सिद्ध करूंगा। आपने

450
00:32:25,760 --> 00:32:29,040
जब मैं जब मैं

451
00:32:29,040 --> 00:32:33,040
आपने जब मैं ये बोल रहा हूं कि मैं क्या कह रहा था तो आपने कहा कुछ भी तो

452
00:32:33,040 --> 00:32:38,240
नहीं चल रहा। सब माया ही तो है। ये क्या था?

453
00:32:38,240 --> 00:32:39,840
क्या हूं? हूं ये

454
00:32:39,840 --> 00:32:45,200
थोड़ा सा लड़ो ये थोड़ा सा टिप्पणी है। टिप्पणी

455
00:32:45,200 --> 00:32:49,920
हां टिप्पणी है काहे की टिप्पणी मतलब

456
00:32:49,920 --> 00:32:54,240
हां मेरा जो मतवाद है मतलब

457
00:32:54,240 --> 00:32:58,240
हां मेरा जो मत है उसके उसके जो बोलने

458
00:32:58,240 --> 00:33:02,640
के पहले जो पटभूमि होता है उन उसको ही मैं

459
00:33:02,640 --> 00:33:06,640
मतलब कि तैयार करना चाह रहा था। इसलिए ही मैंने ये बोला था। तो

460
00:33:06,640 --> 00:33:10,640
यह वाली बात पर क्यों बोल रहे हो कि क्या चल रहा है भाई जब अभी तक

461
00:33:10,640 --> 00:33:14,800
आपने संसार को माया माना नहीं है

462
00:33:14,800 --> 00:33:18,880
एक मिनट एक एक मिनट आपने मेरे पहली बात

463
00:33:18,880 --> 00:33:22,880
तो माया के संबंध में मेरे पूर्व पक्ष को अभी तक पूरा जाना ही नहीं

464
00:33:22,880 --> 00:33:27,120
है कि संसार माया होने के बावजूद भी उसमें

465
00:33:27,120 --> 00:33:31,280
कुछ होना ना होना यह मानते हैं नहीं मानते हैं मानते

466
00:33:31,280 --> 00:33:36,000
हैं तो क्यों मानते हैं नहीं मानते हैं तो क्यों नहीं मानते हैं जब उस पर मेरी पूरी एक्सप्लेन

467
00:33:36,000 --> 00:33:40,160
आपने सुनी नहीं। दूसरी बात यदि आपको सैद्धांतिक खंडन करना

468
00:33:40,160 --> 00:33:44,240
था तो आप सैद्धांतिक खंडन करते। ये जगत माया नहीं

469
00:33:44,240 --> 00:33:48,320
है। आपने मेरी एक चीज जो हमारे बीच में बातें हो रही

470
00:33:48,320 --> 00:33:52,320
है सब लोग देख रहे हैं। तो आप ये मेरा पक्ष एक मिनट

471
00:33:52,320 --> 00:33:55,280
भाई साहब आप मेरा पक्ष जानते नहीं है कि व्यवहार और परमार्थ

472
00:33:55,280 --> 00:33:59,440
में क्या है? क्या नहीं है। ठीक है? फिर आपने मैं कुछ पूछ

473
00:33:59,440 --> 00:34:03,440
रहा हूं कि क्या बोल रहा था मैं और मैं उससे जस्ट पहले आपसे बताया बता रहा हूं कि आप

474
00:34:03,440 --> 00:34:07,440
बीच में बोलते तो मैं भूल जाता हूं। ठीक है आप प्रयास

475
00:34:07,440 --> 00:34:11,440
एक मिनट एक मिनट एक मिनट तो मैंने जब आपसे पूछा कि मैं क्या

476
00:34:11,440 --> 00:34:15,520
बोल रहा था आपने कहा कुछ भी नहीं चल रहा है सब माया ही तो है जबकि आप माया

477
00:34:15,520 --> 00:34:19,760
का खंडन करने भी नहीं बैठे थे आप बैठे थे दूध दही वाली एक्सप्लेनेशन के लिए

478
00:34:19,760 --> 00:34:24,000
वो मेन मुद्दा था और माया की बात तो तब आ गई जब आपने मुझसे

479
00:34:24,000 --> 00:34:28,160
कहा क्या ऐसा हो सकता है क्या तब मुझे आपको बताना पड़ा क्या कुछ भी कर्म

480
00:34:28,160 --> 00:34:32,960
करेंगे तो वो आक्षेप लग जाएगा ईश्वर पे इसलिए माया मानना पड़ता है

481
00:34:32,960 --> 00:34:37,040
कुछ भी हम करते हैं तो आक्षेप ईश्वर पर जाता है। इसलिए माया मानना पड़ता

482
00:34:37,040 --> 00:34:41,040
है संसार को। ईश्वर की सिद्धि के लिए ईश्वर को

483
00:34:41,040 --> 00:34:45,040
सर्वशक्तिमान सिद्ध करने के लिए ईश्वर की जीव ईश्वर

484
00:34:45,040 --> 00:34:49,120
को जीव की चाह का वास्तविक विषय सिद्ध करने के लिए नास्तिकों का

485
00:34:49,120 --> 00:34:54,160
मुंह बंद करने के लिए माया के अस्तित्व को स्वीकार करना पड़ेगा।

486
00:34:54,160 --> 00:34:58,160
और वही अद्वैत है। ये अंत में ये हमारी

487
00:34:58,160 --> 00:35:02,160
बात दूसरी है। बाद की बात है। ठीक है? अब जब मैं आ रहा था वापस अपने

488
00:35:02,160 --> 00:35:06,400
टॉपिक पर तो आपने एक छोटा सा एक कटाक्ष किया हंसते हुए कि

489
00:35:06,400 --> 00:35:10,320
भाई यह कटाक्ष आपने किया क्या बोल रहे थे

490
00:35:10,320 --> 00:35:14,320
आप कुछ भी तो नहीं बोल सब माया ही तो है तो इसका

491
00:35:14,320 --> 00:35:18,320
ना तो कोई पूर्व पक्ष से मतलब है क्या कर रहे थे

492
00:35:18,320 --> 00:35:22,400
एक मिनट भाई साहब इसका ना तो पूर्व पक्ष से कोई मतलब है कि

493
00:35:22,400 --> 00:35:26,480
आप मेरा पूर्व पक्ष रख रहे हैं। पूर्व पक्ष रख रहे होते तो आप ये कहते कि आपने कहा कि संसार

494
00:35:26,480 --> 00:35:30,720
माया मात्र है। अब मैं इसका खंडन कर रहा हूं। आप पर्टिकुलर व्यक्तिगत

495
00:35:30,720 --> 00:35:35,280
मेरी किसी कार्य विधि को बोल रहे हैं कि अरे सम माया ही तो है। यह कटाक्ष

496
00:35:35,280 --> 00:35:39,520
है। अब बोलिए। हां

497
00:35:39,520 --> 00:35:43,920
मैं बोल तो मेरे जो ये जो आचरण है तो

498
00:35:43,920 --> 00:35:48,240
ये मैंने इसलिए किया कि

499
00:35:48,240 --> 00:35:52,320
कि मुझे एक आचार्य का याद आ गया और उन्होंने ऐसा ही किया था तो

500
00:35:52,320 --> 00:35:56,560
इसलिए ही मैं उनका ही पुन किया उन्होंने

501
00:35:56,560 --> 00:36:00,720
उन्होंने सुनो उन्होंने किसी पर कटाक्ष किया होगा ना

502
00:36:00,720 --> 00:36:06,320
उन्होंने किसी पर कटाक्ष किया होगा

503
00:36:06,320 --> 00:36:10,400
उन्होंने किसी उन्होंने उन्होंने किसी उन्होंने किसी के बारे में विनोद किया

504
00:36:10,400 --> 00:36:14,480
होगा, कटाक्ष किया होगा। ये कटाक्ष ही तो है। कटाक्ष किसे कहते

505
00:36:14,480 --> 00:36:18,880
हैं? बताइए। अब वो हां

506
00:36:18,880 --> 00:36:22,960
तो अब वो स्टोरी जरा सुन लीजिए। मैं एक मिनट में ही मैं अभी

507
00:36:22,960 --> 00:36:27,520
बोल रही हूं कि एक वन में एक बाग आ रहा था और

508
00:36:27,520 --> 00:36:31,600
और जो और अरे भैया जो आपकी फिलॉसफी को नहीं

509
00:36:31,600 --> 00:36:37,040
मानते हैं उनका हंसी उनकी हंसी उड़ा रहे थे ना इसके द्वारा।

510
00:36:37,040 --> 00:36:41,120
जो आपकी फिलोसफी को नहीं मानते हैं इस कहानी के द्वारा उनकी

511
00:36:41,120 --> 00:36:45,200
हंसी उड़ाते हो ना सीधी बात करो ना यार भय क्यों लगता है सच

512
00:36:45,200 --> 00:36:49,360
बोलने से आप भाग रहे हो नहीं नहीं

513
00:36:49,360 --> 00:36:53,680
आप सामने वाले को आपने नीचा प्रकाश

514
00:36:53,680 --> 00:36:57,760
से हां ये ज्ञानार्थक भागना होता

515
00:36:57,760 --> 00:37:01,840
है और चलो इसको कहते हैं ज्ञानार्थक भागना बैठे वहीं

516
00:37:01,840 --> 00:37:06,000
पर हो पर विषय छोड़ के कहीं और जा रहे हो इसको इसको

517
00:37:06,000 --> 00:37:10,320
कहते हैं ज्ञानार्थक भागना जैसे की जैसे

518
00:37:10,320 --> 00:37:14,480
की अर्जुन सुनिए और आप ये माया पर आपने

519
00:37:14,480 --> 00:37:18,720
कटाक्ष कटाक्ष आपने क्यों किया अच्छा माया पे क्यों आया आपने मुझसे पूछा

520
00:37:18,720 --> 00:37:21,760
था ना ऐसे क्या हो सकता है क्या

521
00:37:21,760 --> 00:37:25,840
मैंने ये बोल रहा था कि भगवान में क्या विकार आ सकता है क्या

522
00:37:25,840 --> 00:37:29,840
मैं ये मैं उसका उत्तर दे रहा हूं ना मेरा क्या मानना

523
00:37:29,840 --> 00:37:33,840
है उस बारे में मैं बताऊंगा ना जब आप पूछोगे क्या या तो आप लिख दो जब मैं

524
00:37:33,840 --> 00:37:38,880
पूछू तो बताना मत

525
00:37:38,880 --> 00:37:43,120
भाई जब आप जब आप कुछ पूछोगे ऐसा हो सकता है क्या तो उस बारे

526
00:37:43,120 --> 00:37:47,200
में मेरे पास क्या एक्सप्लेनेशन है मेरे पास उस उत्तर क्या है वो मैं

527
00:37:47,200 --> 00:37:51,280
बताऊंगा वो मैंने बताया जब मैंने बताया तो आप गए और

528
00:37:51,280 --> 00:37:55,360
कटाक्ष और कटाक्ष सीरियस सीरियस मोड पे नहीं किया आपने हंसते हुए

529
00:37:55,360 --> 00:37:59,520
किया बत्तीसी दिखाते हुए वीडियो दिखाऊं आपका वीडियो दिखाऊं

530
00:37:59,520 --> 00:38:03,600
आपका मैं क्या बोल रहा हूं मैं

531
00:38:03,600 --> 00:38:07,600
क्या बोल रहा था हां मैं क्या बोल

532
00:38:07,600 --> 00:38:11,600
रहा था? ये प्रश्न क्या आप मुझे कर रहे थे कि

533
00:38:11,600 --> 00:38:15,840
मैं मैं अभी क्या बोल रहा था? ये प्रश्न क्या आप क्या मुझे कह रहे थे

534
00:38:15,840 --> 00:38:20,160
क्या? या आप अपने ही मन में मैं

535
00:38:20,160 --> 00:38:24,240
अगर मैं कह रहा हूं कि आपको अगर मैं एक जनरल तरीके से

536
00:38:24,240 --> 00:38:28,480
कह रहा हूं कि शायद कोई मेरी मदद कर दे। स्पेशली आपके लिए नहीं दर्शकों

537
00:38:28,480 --> 00:38:34,080
के लिए भी है। तो आपने वहां पर बोला कुछ भी तो नहीं चल रहा है।

538
00:38:34,080 --> 00:38:36,960
आपने हां अब आप आप

539
00:38:36,960 --> 00:38:41,600
तो मुझे बोलने दीजिए प्लीज। हां आपने आपने

540
00:38:41,600 --> 00:38:45,840
आपने मुझे जैसे मतलब मुझको टारगेट

541
00:38:45,840 --> 00:38:50,080
कर कर नहीं जैसे बोल रहे थे वैसे मैं भी आपको टारगेट कर कर नहीं बोल रहा था। मैं

542
00:38:50,080 --> 00:38:54,240
यहां पर बैठे हूं और और मैं यहां पर ही मेरे

543
00:38:54,240 --> 00:38:58,800
मन में जो बात आया मैं मैं वही बोल रहा हूं

544
00:38:58,800 --> 00:39:02,800
वो बात मुझसे संबंधित नहीं थी वो बात वो बात मुझसे संबंधित

545
00:39:02,800 --> 00:39:06,880
थी कि नहीं और आपके उत्तर समाप्त

546
00:39:06,880 --> 00:39:10,960
हो गया है ये समझकर मैंने वो बोल रहा था और मैं यहीं से मेरा

547
00:39:10,960 --> 00:39:15,680
जो एक्सप्लेनेशन है वो मैं शुरू करना चाह रहा था तो आप

548
00:39:15,680 --> 00:39:20,080
ये बताइए तो आप माफी क्यों मांग रहे हैं चलिए हां

549
00:39:20,080 --> 00:39:24,320
मैं माफी मांग रहा हूं कि यदि आपके हृदय में थोड़ा सा भी दुख हो

550
00:39:24,320 --> 00:39:29,680
तो इसके लिए मैं मैं आपके चरणों में जब आपने कुछ

551
00:39:29,680 --> 00:39:33,920
जब आपने कुछ गलत किया नहीं तो माफी क्यों मांगोगे? दिखावा करोगे पाखंड करोगे।

552
00:39:33,920 --> 00:39:38,080
माफी होती है पश्चाताप पूर्वक। तो आपने तो कोई

553
00:39:38,080 --> 00:39:43,440
पाप नहीं किया। तो मैं क्यों मांग रहे हो?

554
00:39:43,440 --> 00:39:48,160
हां नहीं माफी हां

555
00:39:48,160 --> 00:39:52,080
मुझे बोलने दीजिए माफी दो केस

556
00:39:52,080 --> 00:39:56,400
पे हम मांग सकते हैं कि आपने अधर्म किया है

557
00:39:56,400 --> 00:40:00,800
मतलब आपने कुछ गलत आपने कुछ काम कर दिया है और

558
00:40:00,800 --> 00:40:05,200
और इसके और इसके लिए मैं आपको कोई दुख दिया

559
00:40:05,200 --> 00:40:09,360
तो तो यहां पर मेरी माफी मांगने की कोई आपके

560
00:40:09,360 --> 00:40:13,600
पास भगवत गीता है गीता है ले आइए

561
00:40:13,600 --> 00:40:19,600
सामने दिखाइए। अच्छा

562
00:40:21,520 --> 00:40:25,680
हां है मेरे पास जो बंगाली वाला वो है। ठीक है।

563
00:40:25,680 --> 00:40:29,680
इस पर हाथ रख के कहिए कि मैंने आपकी बात के उत्तर में वो बात नहीं कही थी। मेरे

564
00:40:29,680 --> 00:40:33,680
मन में बस यूं ही भाव आ गया। वो बात आ गई याद। कुछ भी तो नहीं चल रहा। मेरे

565
00:40:33,680 --> 00:40:38,080
मुंह से निकल गई। रखिए। हां। यह मैं

566
00:40:38,080 --> 00:40:42,080
इस जो गीता को मैं हाथ रखकर मैं बोल रहा हूं कि

567
00:40:42,080 --> 00:40:46,240
मैं यह बात सिर्फ आपको उद्देश्य करके नहीं कहा

568
00:40:46,240 --> 00:40:50,480
था। ठीक है? अब तो विश्वास हुआ। अब तो विश्वास हुआ ना? विश्वास

569
00:40:50,480 --> 00:40:54,560
विश्वास नहीं हुआ है। विश्वास नहीं

570
00:40:54,560 --> 00:40:58,560
करता हूं तो ये जो भगवान है वो तो उन्होंने तो मुझको

571
00:40:58,560 --> 00:41:03,600
तो दंड देगा ही ना। हम तो

572
00:41:03,600 --> 00:41:07,360
ठीक है। ठीक है। कोई बात नहीं। ठीक है। विश्वास नहीं हुआ है। मगर

573
00:41:07,360 --> 00:41:11,520
इस कारण से अब हम इस चर्चा को आगे बढ़ा सकते हैं। ठीक है? क्योंकि आपने जो

574
00:41:11,520 --> 00:41:15,600
है वो हाथ रख के कह दिया है। और ये

575
00:41:15,600 --> 00:41:19,680
ध्यान रखिए कि इस तरह की चीजें ना हो जो खामखा एक दूसरे

576
00:41:19,680 --> 00:41:23,840
वे पे चली जाए बात। है ना? और मैंने शुरू में भी यही कहा था। जब आपने

577
00:41:23,840 --> 00:41:27,920
आपके मुख से कटाक्ष निकला था ना तो आप शुरू में सबसे पहले ये कह सकते थे कि

578
00:41:27,920 --> 00:41:31,920
भाई मैंने आपको टारगेट करके नहीं कहा है। वो ऐसे मुझे कुछ याद आ गया। आपने कुछ कहा

579
00:41:31,920 --> 00:41:36,400
था तो उससे रिलेटेड मुझे याद आ गया तो मेरे मुख से निकल गया। वही बात खत्म हो जाती।

580
00:41:36,400 --> 00:41:40,480
आपने पहले कहा कि भाई मैं तो आपका पूर्व पक्ष रख रहा था। आपने कहा कि

581
00:41:40,480 --> 00:41:44,640
नहीं कहा? अब आप कह रहे हो कि आपको टारगेट करके नहीं रखा है। मैं तो आपकी बात के खंडन

582
00:41:44,640 --> 00:41:48,880
के लिए रख रहा था। हां नहीं मैं ऐसा कभी नहीं। मतलब

583
00:41:48,880 --> 00:41:53,040
कि मैं भी ऐसा करके या मैं ऐसा करके कुछ

584
00:41:53,040 --> 00:41:57,440
भी बोलूं। तो इसका मतलब यह नहीं है कि मैं कह रहा हूं। आपने

585
00:41:57,440 --> 00:42:01,600
आपने यह कहा था अभी थोड़ी देर पहले कि भाई मैं आपकी

586
00:42:01,600 --> 00:42:07,200
बात का खंडन करने के लिए वो प्लेस कर रहा था आपकी चीज को

587
00:42:07,200 --> 00:42:09,680
यानी

588
00:42:09,680 --> 00:42:14,080
यानी यानी कि मुझसे रिलेट करके ही बोला ना फिर वो भाई खंडन

589
00:42:14,080 --> 00:42:19,120
मेरा कर रहे हो किसका कर रहे हो वेट वेट आप मैंने

590
00:42:19,120 --> 00:42:22,400
ये समझ लिया कि आपका ये जो आपका

591
00:42:22,400 --> 00:42:26,640
जो उत्तर वो समाप्त हो गया है और इसके बात

592
00:42:26,640 --> 00:42:31,040
मैं जो कह रहा था कि कि मेरे मन में जो याद आ रहा था मैं वही

593
00:42:31,040 --> 00:42:35,040
कहा था बस इसके आपने आपने भाई साहब

594
00:42:35,040 --> 00:42:39,120
ये थोड़ी देर पहले एक एक मिनट भाई साहब आपने थोड़ी देर

595
00:42:39,120 --> 00:42:43,200
पहले ये बोला है कि मैं एक तरीके से आपका पूर्व पक्ष प्लेस कर रहा था

596
00:42:43,200 --> 00:42:47,360
क्योंकि उसके बाद मुझे उसका खंडन करना था ये आपने बोला हां

597
00:42:47,360 --> 00:42:52,400
हां उसके बाद आपको उसका खंडन करना था हां

598
00:42:52,400 --> 00:42:56,480
मुझे वो मैं अभी एक्सप्लेन

599
00:42:56,480 --> 00:43:00,560
नहीं हां मैं अभी स्टार्ट नहीं किया किसका देना

600
00:43:00,560 --> 00:43:04,560
था एक्सप्लेनेशन किस बात का देना था मैं अभी एक्सप्लेनेशन स्टार्ट नहीं

601
00:43:04,560 --> 00:43:08,800
किया था ना मैं पूछ रहा हूं किसकी बात का एक्सप्लेनेशन देना था

602
00:43:08,800 --> 00:43:12,800
वो जो माया के बारे में वो माया का टॉपिक आया कहां

603
00:43:12,800 --> 00:43:16,880
से था आपने ही तो वो बोला था इसलिए

604
00:43:16,880 --> 00:43:21,680
इसका मतलब मेरा इसका मतलब मेरे लिए बोली गई थी ना वो लाइन फिर

605
00:43:21,680 --> 00:43:25,680
आपने जो बोला था तो उनको सुनकर मेरे मन में जो याद याद

606
00:43:25,680 --> 00:43:29,920
आया तो मैंने वो मतलब कि मेरे मुंह से निकल गया लेकिन इसका

607
00:43:29,920 --> 00:43:35,920
मतलब यह नहीं है कि आप सामने बैठे हो और और मैंने

608
00:43:36,080 --> 00:43:37,680
जो अभी आपने कहा कि

609
00:43:37,680 --> 00:43:42,240
आपने मेरे लिए नहीं बोला यही कहा ना

610
00:43:42,240 --> 00:43:48,160
अब आपने आपके लिए नहीं कहा

611
00:43:48,160 --> 00:43:52,400
यहां पे कुछ भी नहीं है आप प्रभुपाद जी की जो एक्सप्लेनेशन

612
00:43:52,400 --> 00:43:56,880
है उसके लिए यहां बैठे हो मैं शंकराचार्य की जो एक्सप्लेनेशन उसके लिए यहां बैठा हूं। स्पेसिफिकली

613
00:43:56,880 --> 00:44:00,960
हमारे आपके बीच में कुछ भी नहीं है। हां आप वो जो है ना वो जो

614
00:44:00,960 --> 00:44:04,960
बात मैंने कही है कि क्या बोल रहा था मैं क्या कह रहा था मैं उस पर अगर

615
00:44:04,960 --> 00:44:09,280
आप डायरेक्ट उस पर आप अगर डायरेक्ट ये कहेंगे

616
00:44:09,280 --> 00:44:13,360
कि भैया कुछ भी तो नहीं हो रहा है। माया मात्र तो जरूर वो स्पेसिफिकली आपने मेरी

617
00:44:13,360 --> 00:44:17,360
किसी चीज को पकड़ के बात कही। ठीक है? वो एक मानी जाएगी। मगर अभी

618
00:44:17,360 --> 00:44:21,840
मैं एक बात कह रहा हूं। आपने कहा कि मैं

619
00:44:21,840 --> 00:44:25,920
मैंने एक बात कही माया के ऊपर। आपने कहा कि

620
00:44:25,920 --> 00:44:30,320
मैं आपकी बात यूं ही निकल गई और उस पर मैं एक्सप्लेनेशन देने वाला था।

621
00:44:30,320 --> 00:44:34,560
ठीक है? और वो बात आई कहां से थी? मेरे द्वारा आई। अब आप कह रहे हो वो

622
00:44:34,560 --> 00:44:38,720
वो वो हां तो वो जो है अब आप ये कह रहे हो वो एक्सप्लेनेशन मेरी

623
00:44:38,720 --> 00:44:43,600
बात का मेरी बात का काउंटर नहीं था। वो नहीं नहीं था। नहीं था।

624
00:44:43,600 --> 00:44:47,520
एकदम नहीं था।

625
00:44:47,520 --> 00:44:51,600
एक एक मनुष्य का एक एक भावना होता है। तो मैं अपनी भावना को अपने

626
00:44:51,600 --> 00:44:55,920
ही अब आप आप उसको एक्सप्लेन मत करिए। आगे

627
00:44:55,920 --> 00:44:59,920
चलिए आप उसको एक्सप्लेन मत करिए। ठीक है?

628
00:44:59,920 --> 00:45:01,680
हां। ठीक है। तो मैं ये कह

629
00:45:01,680 --> 00:45:06,080
रहा था कि इस के कई सारे प्रामाणिक रिप्रेजेंटेटिव ऐसे हैं

630
00:45:06,080 --> 00:45:10,160
जो यह जो श्लोक है दूध दही वाला इसकी हिंदी

631
00:45:10,160 --> 00:45:14,160
करते हुए यही बोलते हैं कि शिव और कृष्ण में वैसा ही भेद है जैसा

632
00:45:14,160 --> 00:45:17,440
कि दूध और दही में दूध तो दही बन सकता है पर दही दूध नहीं बन

633
00:45:17,440 --> 00:45:21,760
सकता। तो सबसे पहले आप जब यह कह रहे हैं कि इसका वो मीनिंग नहीं है जो प्रचलित

634
00:45:21,760 --> 00:45:25,760
है जो माना जाता है। सबसे पहले आप उन सारे रिप्रेजेंटेटिव को

635
00:45:25,760 --> 00:45:29,760
गलत कह रहे हैं। वो ये गलत कहते हैं। अच्छा ठीक

636
00:45:29,760 --> 00:45:33,760
है। आप बोलिए। हां। मैं उसके बाद मैं पूछ रहा हूं आपसे। पूछ रहा

637
00:45:33,760 --> 00:45:37,920
हूं आपसे। हम बोलिए। वो गलत कहते

638
00:45:37,920 --> 00:45:41,920
हैं। तो देखिए जब सिद्धांत

639
00:45:41,920 --> 00:45:45,920
जब जब वो जब सही होगा तो तो सबको ही वो

640
00:45:45,920 --> 00:45:50,160
सही लगेगा। लेकिन जब वो सही नहीं मतलब कि सही ढंग से वो

641
00:45:50,160 --> 00:45:54,160
वो प्रचार नहीं किया जाएगा तो तो इसका जो

642
00:45:54,160 --> 00:45:58,160
जो गलत अर्थ वो मतलब कि थोड़ा सा जो गलत अर्थ

643
00:45:58,160 --> 00:46:02,480
वो वो समझ जा सकता ही है। मतलब ये

644
00:46:02,480 --> 00:46:05,920
बात

645
00:46:05,920 --> 00:46:10,400
सही बोल रहे हैं। हां सही बोल रहे हैं लेकिन सही एक्सप्लेनेशन

646
00:46:10,400 --> 00:46:14,400
नहीं है। मतलब कि जो एक्सप्लेनेशन देना चाहिए वैसा

647
00:46:14,400 --> 00:46:18,400
एक्सप्लेनेशन नहीं हो रहा है। मैं यही बोलना चाहता हूं। तो वो लोग

648
00:46:18,400 --> 00:46:22,800
वहां पर एक्सप्लेनेशन देने के लिए बैठे हैं ना। हां हां

649
00:46:22,800 --> 00:46:27,520
लेकिन देखिए ये भी तो

650
00:46:27,520 --> 00:46:31,680
एक मिनट भाई साहब नहीं तो आप ये कहिए जो ऐसा बोल रहे हैं जो प्रचलित

651
00:46:31,680 --> 00:46:37,440
है जिनके वीडियोस में वो लोग गलत है। ये कहिए आपने कहीं सही जगह सीख लिया।

652
00:46:37,440 --> 00:46:42,000
ना एक बात देखिए कि

653
00:46:42,000 --> 00:46:46,400
आम का रंग एक जो पीला होता है

654
00:46:46,400 --> 00:46:50,400
लेकिन ऐसा नहीं है कि कि आम का रंग हर समय ही

655
00:46:50,400 --> 00:46:54,800
वो हम जो पीला रहे हैं और और उसके मतलब

656
00:46:54,800 --> 00:46:58,800
उसके जो रीजन है वो अलग-अलग

657
00:46:58,800 --> 00:47:02,960
हो सकता है कि कि आम बहुत पक गए हैं या

658
00:47:02,960 --> 00:47:07,200
या जो क्लोरोफिल वाला सॉरी सॉरी क्लोरोफिल जो

659
00:47:07,200 --> 00:47:11,680
जो फ्रूट के छिलके के जो जो

660
00:47:11,680 --> 00:47:17,120
पिगमेंटेशन जो फैक्टर है उनके कारण भी हो सकता है तो

661
00:47:17,120 --> 00:47:20,960
ये तो वाक्य तो सही है लेकिन इनका जो एक्सप्लेनेशन वो

662
00:47:20,960 --> 00:47:24,960
थोड़ा सा वाक्य तो भाई साहब वाक्य तो हमें ग्रंथ से मिल

663
00:47:24,960 --> 00:47:29,840
जा रहा है ना अभी बात कर रहा हूं इस वाक्य का अर्थ जो लोग बताते हैं

664
00:47:29,840 --> 00:47:33,920
कि भैया शिव और शिव और कृष्ण में वही भेद है जो दूध और दही में भेद है क्योंकि

665
00:47:33,920 --> 00:47:38,880
दूध तो दही बन सकता दही दूध नहीं बन सकता वाक्यता

666
00:47:38,880 --> 00:47:43,840
का है अच्छा हां ब्रह्म संिता में

667
00:47:43,840 --> 00:47:49,840
वाक्य ब्रह्म सम्यता का है ददी वो वाला ठीक है

668
00:47:50,240 --> 00:47:54,320
ठीक है अब अब आपने कहा वाक्य तो सही है तो वाक्य सही वाली बात तो

669
00:47:54,320 --> 00:47:58,480
ले रहा हूं मैं ठीक है अब उसके बाद एक्सप्लेनेशन देते हैं आपके ऑथेंटिक

670
00:47:58,480 --> 00:48:02,480
रिप्रेजेंटेटिव ठीक है वो यह कहते हैं कि इसका अर्थ

671
00:48:02,480 --> 00:48:07,040
यह है कि जिस प्रकार दूध से दही नहीं बन सकता। दही से दूध नहीं।

672
00:48:07,040 --> 00:48:11,120
उसी प्रकार शिव जी कृष्ण तो शिव बन सकते पर शिव

673
00:48:11,120 --> 00:48:17,120
जी कृष्ण नहीं बन सकते।

674
00:48:39,920 --> 00:48:44,480
ऐसी सूचना प्राप्त हो रही है कि भाई जो इस का बोबड़ा

675
00:48:44,480 --> 00:48:48,480
गुंडा है उसका कहना है कि हमने आवाहन को कई बार

676
00:48:48,480 --> 00:48:54,080
जो है सामने सामने वार्ता के लिए बुलाया है और वो वो आया नहीं

677
00:48:54,080 --> 00:48:58,560
भाई तूने अपना कोई सूचना संपर्क

678
00:48:58,560 --> 00:49:02,720
सूत्र इत्यादि क्या छोड़ा था जब बुलाया था हमने तो छोड़ा हुआ है तू

679
00:49:02,720 --> 00:49:06,720
फोन कर अपने लोगों के द्वारा तू नहीं कर सकता तू अगर गूंगा बह रहा है कुछ

680
00:49:06,720 --> 00:49:10,800
है तो भैया किसी से करवा फोन क्यों नहीं करवाया अब तो खैर

681
00:49:10,800 --> 00:49:15,120
तूने ऐसी कोई कसर छोड़ी नहीं है जो तेरे तेरी शक्ल मनुष्य

682
00:49:15,120 --> 00:49:19,200
शक्ल को देखा जाए मगर फिर भी अगर तुझे ऐसा ही था तो

683
00:49:19,200 --> 00:49:23,280
हमने तो अपना नंबर सार्वजनिक कर रखा है ना सीधे बात करो और

684
00:49:23,280 --> 00:49:27,760
चर्चा फिक्स करो। मगर नहीं अपने

685
00:49:27,760 --> 00:49:32,640
लोगों को उल्लू बनाना है कि हमने बड़ा बुलाया बार-बार वो आया नहीं।

686
00:49:32,640 --> 00:49:36,720
हम लोगों के यहां घर में घुस घुस कर जा के उनका उनके मुंह पर टेप लगा के आ रहे हैं।

687
00:49:36,720 --> 00:49:42,720
बोबड़े का बोबड़े से हम बचते घूमेंगे। ह

688
00:49:43,600 --> 00:49:48,140
यही रह गया है। बस अब यही दिन देखना बाकी रह गया था शिवश नारायण द्विवेदी को।

689
00:49:48,140 --> 00:49:51,760
[हंसी]

690
00:49:51,760 --> 00:49:57,760
कि वो बोबड़े से डर डर के भाग रहे हैं। शिवाश नारायण द्विवेदी।

691
00:49:58,560 --> 00:50:02,560
कहां गए भाई साहब? ये सज्जन व्यक्ति लग रहे थे। वो इनसे हो गया।

692
00:50:02,560 --> 00:50:06,880
नेचर वो होता है ना एक जो स्वरूप भूत लक्षण तो

693
00:50:06,880 --> 00:50:10,880
इनके यहां पर एक स्वरूप भूत लक्षण है शंकर परंपरा

694
00:50:10,880 --> 00:50:15,120
वालों के विरोध में उनको मायावादी कह कह करके और जो है ये

695
00:50:15,120 --> 00:50:19,200
ये जो हंसी है हीन हीन भावना है कटाक्ष है सब भरे

696
00:50:19,200 --> 00:50:23,360
हुए हैं तो वो स्वरूप भूत लक्षण निकलेगा बाहर जिसके

697
00:50:23,360 --> 00:50:27,600
बिना ये जी नहीं सकते वो आ गया था बाहर विचारों का हैं सज्जन मगर

698
00:50:27,600 --> 00:50:32,000
वो उसमें पिरो दिया गया इंजेक्ट कर दिया गया है इसलिए

699
00:50:32,000 --> 00:50:36,160
लिए अब वो बेचारे पहले बोल रहे हैं कि मैंने आपका पूर्व पक्ष प्लेस किया था

700
00:50:36,160 --> 00:50:42,160
और हंसते हुए किया था। दांत दिखाते हुए किया था। हां।

701
00:50:42,960 --> 00:50:48,160
इसीलिए कहते हैं मत पड़ो चक्कर में कोई नहीं टक्कर में।

702
00:50:48,160 --> 00:50:54,160
सर्वशक्तिमान धर्म।

703
00:50:59,040 --> 00:51:04,320
अनिकेत जी आप जुड़ सकते हैं। शास्त्रवाद जी भी जुड़ सकते हैं।

704
00:51:04,320 --> 00:51:10,320
लिंक मैंने सेंड किया हुआ है।

705
00:51:15,120 --> 00:51:18,530
तो

706
00:51:18,530 --> 00:51:24,530
[संगीत][घंटी की आवाज़]

707
00:51:26,390 --> 00:51:32,390
[खांसने की आवाज़][गला साफ़ करने की आवाज़] तो

708
00:51:32,400 --> 00:51:36,560
आप देख सकते हैं किस तरीके से व्यक्ति एक अच्छे से चलती हुई

709
00:51:36,560 --> 00:51:40,560
यही यही कुछ दिन पहले जो है एक व्यक्ति आया था

710
00:51:40,560 --> 00:51:44,720
आर्य समाज की ओर से उसने भी यही किया था जब हम अच्छे से

711
00:51:44,720 --> 00:51:49,200
बात करना चाहते हैं सामने वाले से तो व्यक्ति कटाक्ष में आता है

712
00:51:49,200 --> 00:51:53,840
और कटाक्ष सामने वाले को हीन दिखाना हंसी उड़ाना

713
00:51:53,840 --> 00:51:57,840
यह सब इस बात का द्योतक होता है कि उसका जो सैद्धांतिक पक्ष है ना वो कहीं ना कहीं

714
00:51:57,840 --> 00:52:01,840
कमजोर है जिस कारण से उसे सैद्धांतिक चर्चा के बीच में ये सब करना पड़ रहा

715
00:52:01,840 --> 00:52:07,840
है

716
00:52:12,240 --> 00:52:18,080
[खांसने की आवाज़] तो [गला साफ़ करने की आवाज़] भाई मैंने मैंने

717
00:52:18,080 --> 00:52:24,080
मैंने जो है लिंक प्रोवाइड करा दिया है।

718
00:52:24,320 --> 00:52:27,920
अनिकेत जी आ गए हैं।

719
00:52:27,920 --> 00:52:32,960
जय श्री राम। अनिकेत जी

720
00:52:32,960 --> 00:52:38,960
जय श्री राम। जय श्री राम।

721
00:52:42,000 --> 00:52:46,000
तो जो है ये व्यक्ति क्या हुआ? कहां

722
00:52:46,000 --> 00:52:49,040
जाने गए भैया?

723
00:52:49,040 --> 00:52:55,040
पता नहीं क्या हुआ। आपके पीछे बहुत शोर आ रहा है।

724
00:53:18,400 --> 00:53:21,040
[गला साफ़ करने की आवाज़]

725
00:53:21,040 --> 00:53:27,040
यहां पे भी लिंक दे दीजिए। किसी को आना हो चेहरे के साथ तो वो आ सकता है।

726
00:53:27,280 --> 00:53:31,520
जय श्री राम। सैद्धांतिक मतभेद के निमित्त यदि चर्चा करनी

727
00:53:31,520 --> 00:53:35,600
है तो आप फॉर्म भर के आएंगे। अभी सैद्धांतिक मतभेद

728
00:53:35,600 --> 00:53:41,600
के निमित्त चर्चा केवल उनसे हो रही है जिनका नाम है

729
00:53:41,760 --> 00:53:45,840
क्या कहते हैं जिनका नाम है अभी जो आए थे ना

730
00:53:45,840 --> 00:53:50,320
तथागत जी केवल उनके साथ सैद्धांतिक मतभेद होगा।

731
00:53:50,320 --> 00:53:55,440
तथागत जी वापस आ गए।

732
00:53:55,440 --> 00:53:59,760
हां जय श्री राम सासवाद जी। हरे कृष्णा।

733
00:53:59,760 --> 00:54:04,080
तो मेरे जो नेटवर्क थे वो थोड़ा सा

734
00:54:04,080 --> 00:54:08,240
गड़बड़ रही तो इसलिए आप आप एक जगह स्थाई होकर

735
00:54:08,240 --> 00:54:10,720
बात करें।

736
00:54:10,720 --> 00:54:16,720
जय श्री राम। एक जगह बैठ के बात करिए आप।

737
00:54:17,040 --> 00:54:21,680
हां। ठीक है। हम अब आप बता दीजिए कि

738
00:54:21,680 --> 00:54:25,760
ठीक है।

739
00:54:25,760 --> 00:54:30,720
भैया अपना कैमरा ऑन कर लीजिएगा जिसको भी स्टेज पर आना है।

740
00:54:30,720 --> 00:54:31,360
हां अब

741
00:54:31,360 --> 00:54:35,360
आप बताइए कि जो ऑथेंटिक लोग हैं वो श्लोक का जो अर्थ

742
00:54:35,360 --> 00:54:40,000
दे रहे हैं कि इस श्लोक का यही अर्थ है कि शिव

743
00:54:40,000 --> 00:54:44,080
कृष्ण तो शिव बन सकते हैं पर शिव जी कृष्ण नहीं बन सकते। यही ये अर्थ सही

744
00:54:44,080 --> 00:54:46,880
है या अर्थ गलत है?

745
00:54:46,880 --> 00:54:51,520
हम यह तो सही है। यानी

746
00:54:51,520 --> 00:54:56,000
वो ऑथेंटिक जो लीडर्स है वो सही बोल रहे हैं। सही एक्सप्लेनेशन है।

747
00:54:56,000 --> 00:55:00,000
हां सही। हां सही। अभी थोड़ी देर अभी थोड़ी देर

748
00:55:00,000 --> 00:55:04,720
पहले तो आप कह रहे थे एक्सप्लेनेशन एक्सप्लेनेशन अधूरी।

749
00:55:04,720 --> 00:55:08,720
एक्सप्लेनेशन मतलब की थोड़ा सा डिटेल्स होना चाहिए।

750
00:55:08,720 --> 00:55:12,800
ऐसे छोटे से वाक्य में नहीं होना चाहिए। मैं यही बोल। अब अब

751
00:55:12,800 --> 00:55:17,040
आप बता दीजिए। चलिए अच्छा इतना क्लियर है कि उनको

752
00:55:17,040 --> 00:55:21,200
ये सोचना चाहिए कि हम ऐसी सेंसिटिव चीजों पर बात कर रहे हैं तो

753
00:55:21,200 --> 00:55:26,160
और डिटेल से बता दे जिससे कि किसी को हर्ट ना हो। ये तो आप मानते हैं।

754
00:55:26,160 --> 00:55:30,960
फिर हां हां येस इतने

755
00:55:30,960 --> 00:55:36,640
में इतने अंश में वो गलती कर रहे हैं वो।

756
00:55:36,640 --> 00:55:41,120
देखिए गलती मैं किसे कहूंगा? गलती मैं कहूंगा कि वो

757
00:55:41,120 --> 00:55:45,600
वो एक काम जो जो कर रही है वो अनुचित है और और

758
00:55:45,600 --> 00:55:49,760
एक सत्य को जो एक्सप्लेनेशन नहीं करना मतलब

759
00:55:49,760 --> 00:55:53,840
कि डिटेल्स में एक्सप्लेनेशन नहीं करना ये

760
00:55:53,840 --> 00:55:58,080
तो कोई गलत बात नहीं है ना मतलब कि ये तो उतना गलत

761
00:55:58,080 --> 00:56:01,920
तो नहीं है ना और थोड़ा सा भी गलत नहीं है क्योंकि वो तो सत्य ही कह रहे

762
00:56:01,920 --> 00:56:07,920
हैं वो तो मिथ्या कुछ नहीं कह रहे थे

763
00:56:10,800 --> 00:56:15,920
देखिए ऐसा है [गला साफ़ करने की आवाज़] कि

764
00:56:15,920 --> 00:56:20,000
जब हमें ये मालूम है कि ये मैटर जो है एक शिव भक्तों की

765
00:56:20,000 --> 00:56:24,160
हम बात कर रहे हैं। शिव जी के और कृष्ण के बीच की बात कर रहे हैं। और

766
00:56:24,160 --> 00:56:29,040
उस टॉपिक पर आकर आपसे ही कह रहा हूं।

767
00:56:29,040 --> 00:56:33,120
जब हम जब हम शिव जी शिव जी की बात कर रहे हैं कृष्ण जी की बात कर रहे हैं

768
00:56:33,120 --> 00:56:37,120
वो लोग जानते हैं कि कुछ लोग हैं जो शिव के भक्त हैं और उनको बुरा लगता है जब

769
00:56:37,120 --> 00:56:41,520
हम ऐसे कहते हैं तो उनको वहां पर जब ये टॉपिक बताते

770
00:56:41,520 --> 00:56:45,680
हैं तो ऑथेंटिकली ये सही से बताना चाहिए। आप मुझे एक

771
00:56:45,680 --> 00:56:50,960
वीडियो दिखा दीजिए जहां पर उन्होंने सही एक्सप्लेनेशन किया हो। पूरा कंप्लीट

772
00:56:50,960 --> 00:56:55,520
एक वीडियो हां हां YouTube में है मैं

773
00:56:55,520 --> 00:56:59,760
आपको हां वो आपको लिंक भेजूंगा जो आज गोविंद स्वामी जो है

774
00:56:59,760 --> 00:57:03,840
प्रभुपाद जी के जो शिष्य है उनके ऐसा बहुत सारे

775
00:57:03,840 --> 00:57:07,920
जो शिव तत्व के ऊपर जो बहुत सारे मैं

776
00:57:07,920 --> 00:57:12,080
उन मैं उन लीडर्स की बात कर रहा हूं जिन लीडर्स के वीडियोस प्रसिद्ध है

777
00:57:12,080 --> 00:57:17,760
उनमें से ही किसी एक लीडर का आप सही से पूरा वीडियो

778
00:57:17,760 --> 00:57:18,260
का

779
00:57:17,920 --> 00:57:23,280
एक एक बहुत बड़ा गुरु है और उनका वीडियो बहुत प्रसिद्ध है।

780
00:57:23,280 --> 00:57:27,280
ठीक है? तो आप वो चैनल का नाम बताइए।

781
00:57:27,280 --> 00:57:31,920
तप्त जीवनम करके है या आप

782
00:57:31,920 --> 00:57:36,320
आप एक काम करिए। आप यहां से लीव करिए। आप

783
00:57:36,320 --> 00:57:40,320
यहां से लीव करिए। लीव करके वो मुझे सेंड कर दीजिए। वो लिंक

784
00:57:40,320 --> 00:57:45,360
जिससे कि मैं अपने ऑपरेटर को सेंड कर दू। फिर हम लोग बात करते हैं।

785
00:57:45,360 --> 00:57:49,440
अभी तो मुझे सर्च करना पड़ेगा ना। मतलब

786
00:57:49,440 --> 00:57:53,440
से लगभग एक साल पहले मैं ये सुना था अब अब वो वीडियो

787
00:57:53,440 --> 00:57:57,840
में मैं कब आऊंगा ये तो थोड़ा आपके

788
00:57:57,840 --> 00:58:02,800
पास प्रूफ नहीं है प्रूफ

789
00:58:02,800 --> 00:58:07,440
अभी अभी आप जो इस बात का कि वो लोग सही एक्सप्लेनेशन

790
00:58:07,440 --> 00:58:11,920
देते हैं इस बात का प्रूफ है ऑब्वियसली है

791
00:58:11,920 --> 00:58:16,240
आज आज भी दे सकते हैं एक घंटे के

792
00:58:16,240 --> 00:58:20,320
एक घंटे के अंदर मैं मैं आपको दे सकता हूं। ठीक है? एक घंटे

793
00:58:20,320 --> 00:58:24,400
के अंदर या आधा घंटे आप दीजिए। आधा घंटे के अंदर

794
00:58:24,400 --> 00:58:28,880
मैं आपको दे सकता हूं। अच्छा मुझे भी तो

795
00:58:28,880 --> 00:58:33,280
करना पड़ेगा ना। एक एक घंटे के अंदर आप ये प्रूफ देंगे

796
00:58:33,280 --> 00:58:37,280
कि इसकी जो सही एक्सप्लेनेशन है ये जो जितनी

797
00:58:37,280 --> 00:58:41,520
एक्सप्लेनेशन सुनाई जाती है उससे आगे बढ़कर एक्सप्लेनेशन है वो दी गई है इस

798
00:58:41,520 --> 00:58:46,000
के प्रीचर्स के द्वारा। हां अब आप अब आप एक्सप्लेनेशन

799
00:58:46,000 --> 00:58:46,720
बता दीजिए क्या

800
00:58:46,720 --> 00:58:51,440
है? हां मैं तो हां आप मुझे बता

801
00:58:51,440 --> 00:58:55,600
कि जो भगवान श्री कृष्ण का जो प्रकाश है वो है बलदेव और

802
00:58:55,600 --> 00:59:00,400
उन बलदेव से आते हैं जो संकर्षण उन संकर्षण के जो

803
00:59:00,400 --> 00:59:06,400
जो प्रकाश है उसे कहते हैं कि आगे जो

804
00:59:06,480 --> 00:59:10,880
रुद्र कहते हैं और हां और और श्री भगवान

805
00:59:10,880 --> 00:59:14,880
के जो अंश के रूप में जो मतलब

806
00:59:14,880 --> 00:59:19,040
कि जिनको हम सदाशिव कहते है वो वो साक्षात विष्णु

807
00:59:19,040 --> 00:59:23,040
तत्व है मतलब वो जो सदा शिव जो अप्राकृत

808
00:59:23,040 --> 00:59:27,120
कैलाश धाम में है वो वो तो स्वयं ही विष्णु है और

809
00:59:27,120 --> 00:59:31,120
वही इस इस अवतार में श्री अद्वैत आचार्य प्रभु के रूप

810
00:59:31,120 --> 00:59:35,200
में आए हैं जिसको इस भी पूजा करता है और और उनके चरणों

811
00:59:35,200 --> 00:59:39,280
में तुलसी पत्र भी अर्पण करता है तो वो कौन है

812
00:59:39,280 --> 00:59:43,440
स्वयं सदा शिव है तो इस सदा शिव के चरण में तुलसी पत्र अर्पण कर रहा है

813
00:59:43,440 --> 00:59:47,600
ये भी आपको देखना पड़ेगा इस के आप आप जिस किसी भी

814
00:59:47,600 --> 00:59:51,760
आप आप मंदिर में जाइए और और आप जिज्ञासा कीजिए कि

815
00:59:51,760 --> 00:59:55,760
कि यह जो अद्वैत आचार्य है ये कौन है? तो

816
00:59:55,760 --> 00:59:59,920
आपको इसका उत्तर आपको ही मिल जाएगा। अद्वैत

817
00:59:59,920 --> 01:00:01,920
आचार्य ये हमारे जो

818
01:00:01,920 --> 01:00:06,160
गौ परंपरा के अनुसार गौ परंपरा के अनुसार कोई कोई

819
01:00:06,160 --> 01:00:10,160
वैष्णव यदि यदि शिवरात्रि यदि पालन

820
01:00:10,160 --> 01:00:14,560
नहीं करता तो तो उसे वैष्णव नहीं माना जाता। प्लीज प्लीज

821
01:00:14,560 --> 01:00:19,200
आप मुझे उस मंत्र का वो श्लोक का अर्थ आप श्लोक का अर्थ बताइए मुझे।

822
01:00:19,200 --> 01:00:23,840
हां हां तो हां तो वैसे तो

823
01:00:23,840 --> 01:00:27,920
अभी तक आपने अभी तक अभी तक आपने जो कहा है उसका मतलब

824
01:00:27,920 --> 01:00:32,320
ये है कि जो सदा शिव है और विष्णु है वो एक ही है। ऑब्वियसली

825
01:00:32,320 --> 01:00:36,880
हां सदा शिव विष्णु है ये तो ये तो शास्त्र का ये तो कोटेशन है

826
01:00:36,880 --> 01:00:41,120
ठीक है आप ठीक है बताइए अरे भैया आप अपना दूध

827
01:00:41,120 --> 01:00:46,000
दही कर दूध दही बताइए

828
01:00:46,000 --> 01:00:50,000
प्रभु का है मेरे गाय दूध दूध दही

829
01:00:50,000 --> 01:00:52,960
का अर्थ बताओ।

830
01:00:52,960 --> 01:00:56,960
हां हां दूध और दही। अच्छा अच्छा तो

831
01:00:56,960 --> 01:01:01,120
दूध जो है वो है मूल सारभ वस्तु। वस्तुतः दूध

832
01:01:01,120 --> 01:01:05,200
और दही में कोई अंतर नहीं है। वस्तुत दूध और दही में

833
01:01:05,200 --> 01:01:09,760
कोई अंतर नहीं है। किसका अंतर है? केवल गुण का। मतलब वो गुणगत

834
01:01:09,760 --> 01:01:14,160
जो भेद है उसी को मतलब कह रहे हैं

835
01:01:14,160 --> 01:01:17,120
गुणगत जो भेद मतलब भगवान के एक एक

836
01:01:17,120 --> 01:01:22,160
स्वरूप का जो गुण का जो भेद होता है सतगुण रजोग

837
01:01:22,160 --> 01:01:26,480
भेद है भेद है भी और अभेद है अभेद

838
01:01:26,480 --> 01:01:30,720
क्या है हां अभेद अभेद ही है कि वो

839
01:01:30,720 --> 01:01:35,440
शिव भगवान से अभिन्न है और वो चिन्मय है मतलब शिव जी कोई

840
01:01:35,440 --> 01:01:39,440
कोई ऐसा कोई वो जो और मानने वाला कोई

841
01:01:39,440 --> 01:01:43,600
देव देवी ऐसा नहीं है। मतलब कि वो वो जन्म मृत्यु के अधीन

842
01:01:43,600 --> 01:01:47,680
है। ऐसा कोई बात नहीं है। ये इस भी ये मानता है कि

843
01:01:47,680 --> 01:01:52,800
शिव जी पूछ रहा हूं। मैं ये पूछ रहा हूं अभेद क्या है? आपका

844
01:01:52,800 --> 01:01:57,200
अभेद का मतलब होता है जहां पर भेद ना हो।

845
01:01:57,200 --> 01:02:01,600
अच्छा तो अचिंत भेदभेद ये कहां से आ गया? ये तो महाप्रभु ने दिया है।

846
01:02:01,600 --> 01:02:05,600
ये तो आप बताओ ना मुझे अचिंत भेदाभेद

847
01:02:05,600 --> 01:02:09,680
तत्व का वर्णन ये जो पहले इसका

848
01:02:09,680 --> 01:02:15,680
जो मतलब

849
01:02:16,480 --> 01:02:20,480
सुनो सुनो सुनो सुनो ये बताओ अगर इस

850
01:02:20,480 --> 01:02:24,720
तरीके से देखेंगे कि उनमें भेद है भी और नहीं भी। ठीक है

851
01:02:24,720 --> 01:02:29,200
तो है भी और नहीं भी वाली बात है भी और नहीं भी वाली बात अगर है

852
01:02:29,200 --> 01:02:33,520
कि शिव जी में और कृष्ण जी में भेद है भी और नहीं भी। अब भेद

853
01:02:33,520 --> 01:02:37,520
है क्यों? भेद है क्यों? क्योंकि उनमें वो सारे गुण नहीं

854
01:02:37,520 --> 01:02:41,840
है जो सारे गुण कृष्ण जी में है। ठीक है?

855
01:02:41,840 --> 01:02:45,840
यही बात है ना? वो जो है गुना है मतलब कि अवतार होता

856
01:02:45,840 --> 01:02:50,480
है और एक होता है अवतारी। तो सारे गुण है उसमें

857
01:02:50,480 --> 01:02:54,720
शिव जी में सारे गुण है जीव गोस्वामी पाद ने

858
01:02:54,720 --> 01:02:59,600
अपने जो जो संदर्भ के अंतर यही कहा है कि

859
01:02:59,600 --> 01:03:03,600
विष्णु जी में 60 गुण है और और यानी कि सारे

860
01:03:03,600 --> 01:03:07,600
गुण नहीं है ना यार आप लोग पता नहीं क्यों देर करते हो सारे

861
01:03:07,600 --> 01:03:11,760
गुण नहीं है और शिव जी में जो 55 गुण

862
01:03:11,760 --> 01:03:16,720
होते हैं और श्री कृष्ण में 64 गुणावली होती है

863
01:03:16,720 --> 01:03:20,720
मैंने क्या पूछा मैंने आपसे सारे गुण है कि नहीं? मैं ये बोल रहा

864
01:03:20,720 --> 01:03:24,960
हूं कि इसको नहीं बता रहा है। ये जीव बोल रहा है। मैंने आपसे पूछा

865
01:03:24,960 --> 01:03:30,000
सारे गुण है कि नहीं? नहीं है। और ये

866
01:03:30,000 --> 01:03:31,760
नहीं बोला है। ये ये

867
01:03:31,760 --> 01:03:35,840
एक अलग विषय है कि ये आपके पूर्वाचार्य बोल रहे हैं कि कौन बोल

868
01:03:35,840 --> 01:03:40,000
रहा है? जब आपकी बात हो रही है तो आपको अपनी बात को सही सिद्ध करना है।

869
01:03:40,000 --> 01:03:44,000
सारे गुण नहीं है। सारे गुण नहीं है। शिवजी आए

870
01:03:44,000 --> 01:03:48,320
कहां से है? जी आए तो वो तो भगवान से ही है

871
01:03:48,320 --> 01:03:52,320
और हम भी आए भगवान ठीक है तो पूर्ण से

872
01:03:52,320 --> 01:03:56,640
जब कोई चीज निकलती है तो पूर्ण होती है ना

873
01:03:56,640 --> 01:04:00,640
पूर्ण होती है लेकिन वो पूर्णता का प्रकाश नहीं करते है यही

874
01:04:00,640 --> 01:04:05,120
तो है मजा मतलब उनके अंदर तब तो है लेकिन वो

875
01:04:05,120 --> 01:04:09,840
वो मतलब कि उनके जो जो स्वरूप का जो

876
01:04:09,840 --> 01:04:14,240
जो एक संभ्रम होता है उस उस संभ्रम

877
01:04:14,240 --> 01:04:18,560
को बनाए रखने के लिए उन्होंने ये ये गुण उन्होंने प्रकट

878
01:04:18,560 --> 01:04:22,560
किया है। देखिए माया के

879
01:04:22,560 --> 01:04:26,720
मैं समझ रहा हूं। एक मिनट यानी कि कृष्ण से जब शिव

880
01:04:26,720 --> 01:04:31,120
आए तो शिव जी पूर्ण है। बस वो दिखा नहीं रहे

881
01:04:31,120 --> 01:04:35,520
पूर्ण हूं। दिखा नहीं रहे है मैं पूर्ण। है ना? यानी तत्व

882
01:04:35,520 --> 01:04:40,720
से वो वही है। यानी तत्व से वो कृष्ण ही है।

883
01:04:40,720 --> 01:04:45,040
वो है कृष्ण दत्त और यह विश्व और यह तत्व। मैंने

884
01:04:45,040 --> 01:04:47,040
पूछा तत्व से वो

885
01:04:47,040 --> 01:04:51,040
पूर्ण है कि नहीं? वो दिखा नहीं रहे। मगर वास्तविकता में

886
01:04:51,040 --> 01:04:54,320
वो पूर्ण है कि नहीं?

887
01:04:54,320 --> 01:04:58,320
हां वास्तविकता में पूर्ण का सभी अंश ही पूर्ण बनेगा। यह तो

888
01:04:58,320 --> 01:05:02,400
इस का वाक्य है। यानी कि यानी

889
01:05:02,400 --> 01:05:08,400
कि तत्व से शिवजी और कृष्ण में कोई भेद नहीं है।

890
01:05:08,640 --> 01:05:13,200
तत्वत दिक से नहीं वो तो विष्णु तत्व है।

891
01:05:13,200 --> 01:05:19,120
क्योंकि हां आप देखिए तत्व का तत्व का मतलब क्या होता है?

892
01:05:19,120 --> 01:05:23,120
हां जो जो अंतिम सत्य है ना वो उस तत्व की बात

893
01:05:23,120 --> 01:05:27,600
कर रहा हूं। अंतिम सत्य जिसके बाद और कुछ बाकी नहीं रह जाता है।

894
01:05:27,600 --> 01:05:31,600
उस तत्व की दृष्टि से बात कर रहा हूं मैं। हां तो जी भी तो

895
01:05:31,600 --> 01:05:35,680
हां बोलिए मैंने पूछा शिव जी और विष्णु जी में

896
01:05:35,680 --> 01:05:39,680
कोई भेद नहीं है। हां ये अभेद दृष्टिकोण

897
01:05:39,680 --> 01:05:43,920
है। मैं पूछ रहा हूं तत्व से कोई तत्व से कृष्ण भगवान

898
01:05:43,920 --> 01:05:48,000
और शिव भगवान में कोई भेद नहीं है ना? तत्व के

899
01:05:48,000 --> 01:05:52,080
दृष्टि से नहीं है वैसे। लेकिन

900
01:05:52,080 --> 01:05:56,080
गुण के दृष्टि से है। अरे वो तो यहां लीला में

901
01:05:56,080 --> 01:06:00,080
है ना। फिर वो दिखा नहीं रहे। उनके अंदर गुण है। उनके अंदर भी

902
01:06:00,080 --> 01:06:02,240
है गुण मगर वो दिखा नहीं रहे। आपने

903
01:06:02,240 --> 01:06:06,400
ही कहा ना प्रकाशित नहीं करते। होता सब कुछ है। यह होता

904
01:06:06,400 --> 01:06:12,400
ही नहीं है।

905
01:06:14,880 --> 01:06:20,880
हेलो

906
01:06:23,760 --> 01:06:29,760
[नाक से की जाने वाली आवाज़]

907
01:06:38,240 --> 01:06:42,750
नारायण

908
01:06:42,750 --> 01:06:46,800
[नाक से की जाने वाली आवाज़] ठीक है। इनके यहां नेटवर्क की कुछ वो है। आज हमने

909
01:06:46,800 --> 01:06:51,040
ये पता कर लिया कि भैया ये भी धीमीधीमी तौर पर

910
01:06:51,040 --> 01:06:55,040
इनके यहां पर भी वो इन्हें मानना ही पड़ रहा है कि शिव और विष्णु में कोई भेद नहीं

911
01:06:55,040 --> 01:06:59,120
है। शिव और कृष्ण में कोई भेद नहीं है। वह बात अलग है कि जब बिल्कुल क्लियर कट मानना

912
01:06:59,120 --> 01:07:03,600
पड़ेगा तो इस तरह से अटकेंगे लोग। इतना है कि आज हमने

913
01:07:03,600 --> 01:07:08,320
शिव जी की कृष्ण के साथ इस वालों के ही द्वारा जो है

914
01:07:08,320 --> 01:07:12,400
जो तत्व से अभेद होना प्राप्त कर लिया। वो लीला में शिव जी

915
01:07:12,400 --> 01:07:16,400
कुछ अलग गुण प्रकाशित कर रहे हैं और कृष्ण भगवान कुछ अलग गुण प्रकाशित कर रहे।

916
01:07:16,400 --> 01:07:22,400
इतनी बात है। है ना? [नाक से की जाने वाली आवाज़]

917
01:07:29,120 --> 01:07:33,360
हां अब ठीक है। हां जी तथागत जी

918
01:07:33,360 --> 01:07:37,360
गुण उनके अंदर पूरे होते हैं। गुण उनके अंदर पूरे होते हैं।

919
01:07:37,360 --> 01:07:41,680
मगर वो लीला में दिखाते नहीं है। बस

920
01:07:41,680 --> 01:07:45,760
हां हां आप मुझे थोड़ा सा बोलने दीजिए। मैं क्या बोल

921
01:07:45,760 --> 01:07:48,080
सकता हूं?

922
01:07:48,080 --> 01:07:52,400
बोलो हां तो हां तो भगवान

923
01:07:52,400 --> 01:07:56,560
से मतलब कि जो जो पूर्ण तत्व है उनसे जो कुछ भी निकलता

924
01:07:56,560 --> 01:08:00,960
है वो सब पूर्ण है लेकिन वो वो तत्वगत

925
01:08:00,960 --> 01:08:05,520
रूप में मतलब कि सेम है और और

926
01:08:05,520 --> 01:08:09,920
जो गुणगत रूप में वो अवैध है मतलब जो जो भगवान

927
01:08:09,920 --> 01:08:14,080
का क्वालिटी है और और उनसे सृष्टि जो कुछ भी है सबका क्वालिटी तो

928
01:08:14,080 --> 01:08:19,200
सेम है लेकिन वो जो क्वांटिटी है वो सेम नहीं है

929
01:08:19,200 --> 01:08:23,680
यानी कि शिवजी उनसे निकले तो वो पूर्ण है कि नहीं हर तरह से

930
01:08:23,680 --> 01:08:27,680
हां क्वालिटी है यही तो है भदाभेद मैं

931
01:08:27,680 --> 01:08:33,040
पूछ रहा हूं क्वांटिटिवली मैं पूछ रहा हूं क्वांटिटिवली कमी है

932
01:08:33,040 --> 01:08:37,040
क्वांटिटिवली वो दिखाते हैं कि भोज जो कमी है लेकिन दिखाते

933
01:08:37,040 --> 01:08:41,360
हैं दिखाते हैं एक्चुअली कमी नहीं है पर वो दिखाते हैं

934
01:08:41,360 --> 01:08:45,360
हां क्योंकि देखिए मतलब मतलब उनमें कमी देखना

935
01:08:45,360 --> 01:08:49,440
माया मात्र है उनकी लीला मात्र है

936
01:08:49,440 --> 01:08:53,600
देखिए कमी देखना है उन्होंने मुझे

937
01:08:53,600 --> 01:08:56,720
नहीं उन्होंने अपने आप को ऐसा ही प्रकाश कर

938
01:08:56,720 --> 01:09:01,280
रहा है हमारे सामने ठीक है तो मगर वो से है

939
01:09:01,280 --> 01:09:07,280
मगर तत्व से है

940
01:09:08,560 --> 01:09:12,880
हां बोलिए मगर तत्व से वो पूर्ण है ना

941
01:09:12,880 --> 01:09:17,360
हां तत्व से तो सभी पूर्ण है तो उनके अंदर सारे

942
01:09:17,360 --> 01:09:21,680
तो उनके अंदर जितने भी गुण है सारे गुण लेकिन

943
01:09:21,680 --> 01:09:25,680
वो मैंने बार-बार मैं बोल रहा हूं कि भाई साहब अब

944
01:09:25,680 --> 01:09:30,320
जरा अब जरा जरा मुझे बोल लेने दीजिए। ठीक है। ईश्वर सर्वव्यापक

945
01:09:30,320 --> 01:09:34,640
है। हां हां भगवान सर्व्यापक है।

946
01:09:34,640 --> 01:09:38,880
हां ठीक है। मगर भगवान अपने आप को एक कुरुक्षेत्र में खड़ा दिखा

947
01:09:38,880 --> 01:09:42,880
रहे हैं कि नहीं दिखा रहे हैं? हां वो हमें दिख

948
01:09:42,880 --> 01:09:46,880
रहे हैं। एक मिनट दिख रहे हैं। एक मिनट एक एक मिनट

949
01:09:46,880 --> 01:09:50,880
फिर भी हम ये मान रहे हैं सर्व्यापक है। जबकि वो हमें दिखा रहे मैं रथ में

950
01:09:50,880 --> 01:09:53,520
खड़ा हुआ हूं।

951
01:09:53,520 --> 01:09:57,520
इसोपनिषद में ऐसा लिखा है कि भगवान

952
01:09:57,520 --> 01:10:01,920
मैं ये कह रहा हूं कि श्री कृष्ण भगवान किसी एक देश काल परिस्थिति

953
01:10:01,920 --> 01:10:06,480
में हमें दिख रहे हैं। फिर भी हम ये कह रहे हैं स्पष्ट कि ये सर्व्यापक

954
01:10:06,480 --> 01:10:10,640
है तत्व से क्योंकि हम जानते हैं। उसी तरीके

955
01:10:10,640 --> 01:10:12,960
से भगवान

956
01:10:12,960 --> 01:10:17,040
यही भगवान का मैं पूछ रहा हूं। उसी प्रकार से

957
01:10:17,040 --> 01:10:21,200
भगवान शिव हमको आपकी जानकारी के अनुसार या आपकी थ्योरी

958
01:10:21,200 --> 01:10:25,600
के अनुसार भगवान शिव हमको कुछ कम गुणों

959
01:10:25,600 --> 01:10:30,480
से परिपूर्ण अपने आप को प्रस्तुत कर रहे हैं। ठीक है?

960
01:10:30,480 --> 01:10:35,040
सेवक का भाव से का भाव ठीक है।

961
01:10:35,040 --> 01:10:39,040
मगर मगर वो तत्व से मगर वो मगर वो तत्व से

962
01:10:39,040 --> 01:10:43,840
पूर्ण है।

963
01:10:43,840 --> 01:10:48,400
वो अभी बात करेंगे भाई साहब। वह अभी बात करेंगे। ठीक है?

964
01:10:48,400 --> 01:10:52,720
अभी बात चल रही शिव जी की कि जैसे भगवान कृष्ण

965
01:10:52,720 --> 01:10:57,040
कहीं पर कुरुक्षेत्र में महाभारत के रण में

966
01:10:57,040 --> 01:11:01,120
दिखाई दे रहे हैं किसी एक स्थान पर सारथी बन के बैठे हुए फिर भी वो सर्वत्र

967
01:11:01,120 --> 01:11:06,880
व्याप्त है। है ना? है ना? सर्व्यापी

968
01:11:06,880 --> 01:11:11,200
हां तो हम उनको हां तो इसी तरीके

969
01:11:11,200 --> 01:11:15,360
तो हम श्री कृष्ण भगवान को सारथी बने बैठा देखकर ये नहीं मान लेते कि जो

970
01:11:15,360 --> 01:11:19,440
सारथी है हम कहते हैं कि नहीं तत्व से तत्व से सर्व्यापक

971
01:11:19,440 --> 01:11:23,520
है पूर्ण है ठीक है इसी तरीके से आप इसी

972
01:11:23,520 --> 01:11:27,600
तरीके से आपकी थ्योरी के अनुसार शिवजी जो है अपने आप को थोड़े कम गुणों

973
01:11:27,600 --> 01:11:28,400
वाला प्रदर्शित

974
01:11:28,400 --> 01:11:32,560
कर रहे हैं तो हम लीला में मान लेंगे व्यवहार

975
01:11:32,560 --> 01:11:36,560
में मान लेंगे लीला तो हम लीला में ये मान लेंगे कि

976
01:11:36,560 --> 01:11:40,560
शिव जी जो है कम गुणों वाले हैं क्योंकि वो अपने आप को ऐसा प्रस्तुत कर रहे हैं। तो यहां

977
01:11:40,560 --> 01:11:44,640
पर व्यवहार में हमने ये मान लिया जैसा वो दिखाना चाह रहे हैं। मगर तत्व

978
01:11:44,640 --> 01:11:48,640
से वो वही है। तत्व से शिव जी पूर्ण है। तत्व से

979
01:11:48,640 --> 01:11:53,200
उनके अंदर कोई अभाव नहीं है। नहीं कोई अभाव नहीं है।

980
01:11:53,200 --> 01:11:58,960
तत्व से शिव और कृष्ण एक ही है।

981
01:11:58,960 --> 01:12:03,600
आवाज चली गई क्या आपकी? हां हां इसी को तो अभेद कहते हैं।

982
01:12:03,600 --> 01:12:08,480
मैंने कहा मैंने कहा तत्व से शिव और कृष्ण एक है।

983
01:12:08,480 --> 01:12:12,560
हां ऑब्वियसली एक है। मैं मैं आपसे सुनना चाह रहा हूं। आप

984
01:12:12,560 --> 01:12:16,640
बोल दीजिए। तत्व से शिव और कृष्ण एक है। एक है। शिव और

985
01:12:16,640 --> 01:12:21,280
कृष्ण एक है। मैंने बोल दिया। हां ठीक है। तत्व से अब आप

986
01:12:21,280 --> 01:12:26,880
मुझे इस की किस प्रामाणिक पुस्तक में ये बात लिखी हुई है बता दीजिए।

987
01:12:26,880 --> 01:12:31,040
हां। शिव और ये ये थोड़ा मुझे क्लियर करने

988
01:12:31,040 --> 01:12:35,600
दीजिए कि शिव और कृष्ण एक है। ये जो हमारे जो जो

989
01:12:35,600 --> 01:12:39,760
गौरी आचार्य है उनके लिखे हुए जो ग्रंथ है वो मुझे मुझे

990
01:12:39,760 --> 01:12:43,520
मुझे मुझे मुझे इस से दिक्कत है। मुझे इस

991
01:12:43,520 --> 01:12:47,520
से आप बताइए कहां लिखा है? आप जो भक्ति वेदांत जो

992
01:12:47,520 --> 01:12:51,600
जो लाइब्रेरी है वहां पर आप जाके आप स्वयं मुझे

993
01:12:51,600 --> 01:12:55,920
मुझे मुझे जीबीसी के द्वारा छापी जाने वाली किताबें बताइए

994
01:12:55,920 --> 01:13:01,920
कहां लिखा है? क्या लिखा है कि

995
01:13:02,720 --> 01:13:06,960
यहां पर हां यहां पर मैं आपको श्रीमद् भागवतम से आपको दिखा सकता हूं

996
01:13:06,960 --> 01:13:11,200
और और वो के ही है के वेबसाइट से मैं आपको दिखा सकता हूं

997
01:13:11,200 --> 01:13:15,520
ठीक है बताइए बताइए तो

998
01:13:15,520 --> 01:13:19,600
हां तो मैं क्या आउट हो सकता हूं अभी थोड़ा आप

999
01:13:19,600 --> 01:13:23,840
मुझे बताइए मेरे पास वो है श्रीमद् भागवतम है

1000
01:13:23,840 --> 01:13:28,000
अच्छा अच्छा तो मैं थोड़ा सर्च करके

1001
01:13:28,000 --> 01:13:32,000
मैं आपको दे रहा हूं। एक म एक बाद मैं

1002
01:13:32,000 --> 01:13:36,080
आ रहा हूं। थोड़ी देर बाद मैं मैं आपको दे रहा हूं।

1003
01:13:36,080 --> 01:13:40,160
वो अभी मतलब कि मेरे पास वो गन था

1004
01:13:40,160 --> 01:13:44,240
तो अभी तो नहीं है ऑफलाइन में तो तो मैं आपको जो ऑनलाइन है

1005
01:13:44,240 --> 01:13:48,400
मैं वही से आपको मैं आपको दिखाना चाहता हूं। ऐसा

1006
01:13:48,400 --> 01:13:51,840
जाइए। ठीक है। जय

1007
01:13:51,840 --> 01:13:57,020
श्री राम।

1008
01:13:57,020 --> 01:14:03,020
[खांसने की आवाज़]

1009
01:14:12,880 --> 01:14:17,040
ये ऐसा है ना ये जो आप इसको थोड़ा

1010
01:14:17,040 --> 01:14:21,040
सा समझिए अनऑफिशियली कुछ भी स्वीकार करने को तैयार

1011
01:14:21,040 --> 01:14:25,120
है। जैसे अनऑफिशली वो चर्च वाले ने सब कुछ मान लिया ना

1012
01:14:25,120 --> 01:14:29,120
इसी तरीके से यह लोग अनऑफिशियली कुछ भी मान लेते हैं। वो

1013
01:14:29,120 --> 01:14:34,320
वहां ईस्ट ऑफ कैलाश मंदिर में अनऑफिशली उसने सब मान लिया कि नहीं मान लिया?

1014
01:14:34,320 --> 01:14:39,440
खैर हमारे लिए तो अच्छा ही है। अनऑफिशियली सही यहां तो आकर के माना ना।

1015
01:14:39,440 --> 01:14:43,520
तो जब ऐसा है तो अभी अगला प्रश्न आएगा ना कि फिर भागवत में ये क्यों लिखा है

1016
01:14:43,520 --> 01:14:47,760
कि शिव शिव को शिव के नाम को जपने वाले श्री कृष्ण के समान

1017
01:14:47,760 --> 01:14:51,920
समझने वाले सब नीच है, मूर्ख है, पापी हैं। हां

1018
01:14:51,920 --> 01:14:56,640
इसका क्या मतलब है? अच्छा एक बात और आ गई यहां से।

1019
01:14:56,640 --> 01:15:00,640
अभी ये धीरे-धीरे व्यवहार परमार्थ में अंतर करते हुए ये अद्वैत की ओर ही जा

1020
01:15:00,640 --> 01:15:05,040
रहे हैं। भाई जब कुछ तत्व

1021
01:15:05,040 --> 01:15:06,880
से तो सब कुछ एक ही है। तो ये तो

1022
01:15:06,880 --> 01:15:11,040
अद्वैत मान रहे हैं। तो अद्वैत की फिलॉसफी को नए नाम से चिपकाया

1023
01:15:11,040 --> 01:15:16,000
जा रहा है ना। फिर तो यह हो जाएगा। अद्वैत

1024
01:15:16,000 --> 01:15:20,000
की फिलोसफी को नए नाम से चिपकाया जा रहा है। जब सब कुछ एक ही है। उनसे निकल रहा है। सब कुछ

1025
01:15:20,000 --> 01:15:23,600
पूर्ण है।

1026
01:15:23,600 --> 01:15:27,680
तो वहां भी जा रहे हैं। अगर ये वापस आते हैं तो अच्छा रहेगा।

1027
01:15:27,680 --> 01:15:31,840
अनिकेत जी और शास्त्रवाद जी अगर जुड़ सकते हैं तो जुड़े। फिर

1028
01:15:31,840 --> 01:15:35,920
आज की लाइव ओवर करते हैं। अगर ये आएंगे तो फिर इनसे कल बात

1029
01:15:35,920 --> 01:15:40,000
होगी। अब एक घंटे 15 मिनट हो ही चुका है। बेकार में इन्होंने वह कटाक्ष

1030
01:15:40,000 --> 01:15:46,000
कर दिया जिसके कारण [खांसने की आवाज़] [गला साफ़ करने की आवाज़]

1031
01:15:46,080 --> 01:15:52,080
शौर्य सिंह जी आप अपना चेहरा दिखाएं।

1032
01:15:54,640 --> 01:15:58,800
एक एक मिनट हां एक मिनट। यह आज हमारा वीडियो

1033
01:15:58,800 --> 01:16:02,800
रिलीज हो गया है चर्च का। कैथोलिक चर्च है ऋषिकेश

1034
01:16:02,800 --> 01:16:07,040
में और इसमें बहुत सारी रोचक बातें आपको जानने को मिलेंग

1035
01:16:07,040 --> 01:16:11,040
कि किस तरीके से कार्य करते हैं कैथोलिक चर्च और यह वह जगह

1036
01:16:11,040 --> 01:16:16,160
है जहां पर पूरे भारतवर्ष के जो

1037
01:16:16,160 --> 01:16:20,400
अलग-अलग चर्च है वहां के जो प्रीस्ट नियुक्त किए

1038
01:16:20,400 --> 01:16:24,480
जाते हैं वो प्रीस्ट अपनी मतलब फादर

1039
01:16:24,480 --> 01:16:28,720
जिन्हें हम कहते हैं वो अपनी

1040
01:16:28,720 --> 01:16:32,720
वहां पर ज्वाइन करने से पहले

1041
01:16:32,720 --> 01:16:36,880
चर्च को ज्वाइन करने से पहले एक साल के लिए यहां पर आकर ट्रेन किए जाते

1042
01:16:36,880 --> 01:16:41,040
हैं और उनका मेन उद्देश्य यही होता

1043
01:16:41,040 --> 01:16:44,640
है कि

1044
01:16:44,640 --> 01:16:48,800
उनका मुख्य उद्देश्य यही होता है कि किस प्रकार से

1045
01:16:48,800 --> 01:16:52,000
हम

1046
01:16:52,000 --> 01:16:56,160
सनातन धर्म इत्यादि जो हैं जो अन्य सभ्यताएं हैं अन्य

1047
01:16:56,160 --> 01:17:00,400
मान्यताएं हैं उनकी चीजों को जान सके और उन उस जानकारी

1048
01:17:00,400 --> 01:17:04,960
को प्राप्त करते हुए उस जानकारी का पर्यावसान उपयोग विनियोग

1049
01:17:04,960 --> 01:17:09,040
हम कर सके किस में चर्च के प्रचार प्रसार में

1050
01:17:09,040 --> 01:17:15,040
क्रिश्चियनिटी के प्रचार प्रसार में जी शास्त्रवाल जी जय श्री राम

1051
01:17:16,480 --> 01:17:20,640
जय श्री राम भैया जय श्री राम आज का लाइव तो बहुत

1052
01:17:20,640 --> 01:17:24,640
बढ़िया हुआ उसने तो मान ही लिया आखिरकार शिव और कृष्ण में कोई भेद

1053
01:17:24,640 --> 01:17:27,680
नहीं है

1054
01:17:27,680 --> 01:17:32,480
जय श्री राम सौर जी जय श्री राम चौहान जी

1055
01:17:32,480 --> 01:17:37,280
जी जी मेरी आवाज आ रही है जी आ रही है बताइए

1056
01:17:37,280 --> 01:17:41,280
जी मेरा एक जिज्ञासा थी आपसे आपका

1057
01:17:41,280 --> 01:17:45,600
परिचय जैसे कि जी मेरा नाम शौर्य सिंह गौर

1058
01:17:45,600 --> 01:17:50,160
है। मैं सूर्यवंशी क्षत्रिय हूं और

1059
01:17:50,160 --> 01:17:54,240
मैं किसी गुरु जी से ऐसे भी जुड़ा नहीं हूं। मैं बस ऑनलाइन

1060
01:17:54,240 --> 01:17:58,640
देखता हूं जो परंपरागत गुरु जी वगैरह होते हैं जैसे शंकराचार्य

1061
01:17:58,640 --> 01:18:03,120
जी महाराज तो मेरी जिज्ञासा थी जैसे

1062
01:18:03,120 --> 01:18:07,200
आप कहते हैं कि जो वेद है वो जिज्ञासा जिज्ञासा की क्लासेस

1063
01:18:07,200 --> 01:18:11,360
होती है हमारी फ्री में वहां पर आइए यहां पर वैचारिक

1064
01:18:11,360 --> 01:18:15,440
मतभेद के निमित्त चर्चा होती है वरना सब हम लोग समीक्षा

1065
01:18:15,440 --> 01:18:19,600
करते हैं जो जैसे वो एक काउंटर भी उसे आप कह सकते हैं कि जो आप कहते हैं सर एक काउंटर

1066
01:18:19,600 --> 01:18:24,240
मतलब मैं करता नहीं करना चाहता एक प्रश्न आ रहा है जैसे देखिए

1067
01:18:24,240 --> 01:18:28,560
अगर आप अगर आप समर्पित भाव से प्रश्न को रखना चाहते हैं काउंटर

1068
01:18:28,560 --> 01:18:32,880
है वो एक तो आप क्लासेस में आ जाइए और अगर आप

1069
01:18:32,880 --> 01:18:36,960
एज ए काउंटर आ के यहां पर उसको एक विवाद का रूप देना चाहते

1070
01:18:36,960 --> 01:18:41,040
हैं तो आप फॉर्म भर सकते हैं लाइव डिस्कशन के लिए तो आप यहां

1071
01:18:41,040 --> 01:18:42,960
आ सकते हैं ठीक है

1072
01:18:42,960 --> 01:18:48,960
जी मैं क्लास में जी जय श्री राम

1073
01:18:49,280 --> 01:18:54,160
हां जी शास्त्र जी बताएं

1074
01:18:54,160 --> 01:18:58,160
जी भैया आपने बहुत बढ़िया से उसे

1075
01:18:58,160 --> 01:19:02,320
जो अभी इस व्यक्ति आया था आपने उसे बहुत बढ़िया से समझा

1076
01:19:02,320 --> 01:19:06,800
दिया कि कैसे कृष्णा सिर्फ एक है बेचारे को मानना पड़ गया अभी तक तो

1077
01:19:06,800 --> 01:19:11,200
मान नहीं रहा था इधर उधर जा रहा था हिचक रहा था मानने

1078
01:19:11,200 --> 01:19:15,280
से लेकिन आखिरकार उसने मान ही लिया ये बहुत बड़ा आज का लाइफ का

1079
01:19:15,280 --> 01:19:19,760
एक बात है ऐसे ही करके एक एक व्यक्ति

1080
01:19:19,760 --> 01:19:23,840
अभी अभी अभी मैं उस पे आने वाला हूं। पहले तो थोड़ा सा वो शिव जी की बातें

1081
01:19:23,840 --> 01:19:28,000
पूरी करूंगा। उसके बाद फिर आऊंगा कि आपने कहा था कि भगवान से निकलने वाली

1082
01:19:28,000 --> 01:19:32,160
सभी चीजें जो है वास्तविक तत्व से तो वो पूर्ण है।

1083
01:19:32,160 --> 01:19:36,480
तो कहीं कोई भेद है ही नहीं। अंतर आ ही नहीं रहा है। फिर [नाक से की जाने वाली आवाज़] ये सृष्टि

1084
01:19:36,480 --> 01:19:41,040
कहां पर बनी है भाई? ये सृष्टि कहां पर बन गई?

1085
01:19:41,040 --> 01:19:45,120
जब सब जगह एक ही तत्व है तो ये बीच में अलग-अलग ये क्या है?

1086
01:19:45,120 --> 01:19:49,200
फिर भैया यह तो लीला मात्र है, प्रपंच मात्र है, माया मात्र है। इसका

1087
01:19:49,200 --> 01:19:53,280
मतलब एक ही तत्व है सब जगह। अलग-अलग तत्व का तो गैप होगा

1088
01:19:53,280 --> 01:19:57,440
ना बीच में। यहां है, वहां नहीं है। जीव यहां है, वहां नहीं है।

1089
01:19:57,440 --> 01:19:58,000
मगर अगर

1090
01:19:58,000 --> 01:20:04,000
उसको पूर्ण मानोगे जीव को तो सब वो सब जगह है जीव।

1091
01:20:04,800 --> 01:20:08,960
खैर [गला साफ़ करने की आवाज़] हां भैया अर्पित जी को आप हमारा नंबर

1092
01:20:08,960 --> 01:20:13,040
दे दीजिए। एक ये कह रहे हैं अर्पित जी से लाइव कर लीजिए। अर्पित जी

1093
01:20:13,040 --> 01:20:17,040
को हमारा नंबर दे दीजिए। लाइव हो जाएगी उनके साथ और क्या

1094
01:20:17,040 --> 01:20:21,040
है रियलिस्ट आजाद अगर तमीज के साथ बात करोगे

1095
01:20:21,040 --> 01:20:25,040
और यह ह्यूमन वि साइंस वाला व्यक्ति एक बार अभी आया था मेरे संपर्क में

1096
01:20:25,040 --> 01:20:31,040
तो

1097
01:20:50,960 --> 01:20:56,960
भैया कहां चले गए?

1098
01:21:00,000 --> 01:21:04,000
सभी दर्शकों से अनुरोध है कि आप इस लाइव को ज्यादा से ज्यादा शेयर करें

1099
01:21:04,000 --> 01:21:08,240
ताकि लोगों को पता चले कि किस प्रकार से एक स्कनी व्यक्ति

1100
01:21:08,240 --> 01:21:12,240
जो अभी-अभी मानना है कि कृष्ण और शिव में कोई

1101
01:21:12,240 --> 01:21:16,800
भेद नहीं है। यह आज के लाइफ का बहुत बड़ा

1102
01:21:16,800 --> 01:21:22,800
बात रहा है।

1103
01:21:58,240 --> 01:22:03,120
इस समय हम उस चर्च के अंदर ही बैठे हुए हैं। तो ये 12 से लेकर

1104
01:22:03,120 --> 01:22:07,200
के 30 के बीच में जीसस कहां रहे? तो अब ये आता है कि

1105
01:22:07,200 --> 01:22:11,280
क्या क्रिश्चियनिटी का जो ईश्वर है यहोवा वो सर्वशक्तिमान

1106
01:22:11,280 --> 01:22:15,040
है? अगर क्रिश्चियनिटी से देखा जाए तो जो भी व्यक्ति क्रिस्टनिटी के

1107
01:22:15,040 --> 01:22:19,360
अनुसार विवाह नहीं किया है वो अवैध विवाह है। या है ना?

1108
01:22:19,360 --> 01:22:23,520
तो अब उस विवाह से उत्पन्न होने वाली संतान क्या कहलाएगी? तो

1109
01:22:23,520 --> 01:22:28,580
लॉजिकली हम ईश्वर को सिद्ध कर सकते हैं किसी के समक्ष क्रिश्चियनिटी के अकॉर्डिंग।

1110
01:22:28,580 --> 01:22:34,400
[हंसी]

1111
01:22:34,400 --> 01:22:38,640
तो सभी को जय श्री राम। आप देख रहे हैं आहान कॉल ऑफ Dharma

1112
01:22:38,640 --> 01:22:44,640
YouTube चैनल।

1113
01:22:48,400 --> 01:22:52,560
यह वाला लोग जरूर देखें। अवश्य ही देखें। यह वाला चर्चा बहुत

1114
01:22:52,560 --> 01:22:58,560
ही अच्छा हुआ है। इसमें बहुत कुछ जानने को मिलेगा।

1115
01:23:26,880 --> 01:23:31,360
[गला साफ़ करने की आवाज़] यहां थोड़ा सा वो आंधी तूफान आ रहा है ना

1116
01:23:31,360 --> 01:23:34,240
तो

1117
01:23:34,240 --> 01:23:38,320
बिजली कट गई थी। तो कहने का मतलब यह है

1118
01:23:38,320 --> 01:23:42,400
कि अभी भाई साहब अभी थोड़ा सा इन्होंने अटकती हुई आवाज में माना

1119
01:23:42,400 --> 01:23:46,640
इन्होंने कि कृष्ण और शिव में भेद नहीं है

1120
01:23:46,640 --> 01:23:50,800
और अभी इसके आगे एक दो प्रश्न और इससे बात से किए

1121
01:23:50,800 --> 01:23:55,440
जाएंगे। इसके बाद फिर वही वाली बात आ जाएगी। सब कुछ जब पूर्ण ही है

1122
01:23:55,440 --> 01:23:58,320
तो

1123
01:23:58,320 --> 01:24:03,280
फिर अलगाव कहां से आया? भेद कहां से आया? तो अभेद हो गया। द्वैत हो गया।

1124
01:24:03,280 --> 01:24:07,360
और देखिए वो एक बात है कि जब सारे सारी चीजें

1125
01:24:07,360 --> 01:24:11,680
चुप हो जाती है तब अद्वैत बोलता है। हर बात की हर मर्ज की दवा

1126
01:24:11,680 --> 01:24:16,000
है अद्वैत के शहर में आप अपना

1127
01:24:16,000 --> 01:24:20,960
चेहरा दिखाएं सौमित्रो दे जी

1128
01:24:20,960 --> 01:24:25,840
जय जय आदि शंकराचार्य भगवान नमस्ते

1129
01:24:25,840 --> 01:24:29,840
जय हो नमस्ते मैं भी बांग्लादेश से

1130
01:24:29,840 --> 01:24:34,800
हूं बांग्लादेश से हूं

1131
01:24:34,800 --> 01:24:39,040
मुझे लगता है वो जो व्यक्ति थी वो ठीक से

1132
01:24:39,040 --> 01:24:44,480
म हिंदी बोल नहीं सकता तो अ उनको

1133
01:24:44,480 --> 01:24:49,440
कोई बंगाली अद्वैतवादी से

1134
01:24:49,440 --> 01:24:54,080
डिबेट करने की

1135
01:24:54,080 --> 01:24:58,240
गुंजारिश हो तो मैं मैं वीडियो ऑन नहीं कर सकता। मेरी लैपटॉप

1136
01:24:58,240 --> 01:25:03,040
में शायद कोई इशू हो रहा ही है।

1137
01:25:03,040 --> 01:25:07,280
कोई बात नहीं मगर आपका भी हाल उनके ही जैसा है। मैं

1138
01:25:07,280 --> 01:25:12,400
भी मैं तो बांग्लादेश से हूं। मैं तो और भी नहीं जानता।

1139
01:25:12,400 --> 01:25:16,640
चलिए बहुत-बहुत आभार आपका। जय श्री राम। जय श्री राम।

1140
01:25:16,640 --> 01:25:20,720
तो उनको बोलेंगे। उन्होंने सुन उन्होंने

1141
01:25:20,720 --> 01:25:26,720
सुन लिया होगा। सुन लिया होगा। उन्होंने अपने जो कहा उन्होंने सुन लिया होगा।

1142
01:25:28,710 --> 01:25:34,710
[गला साफ़ करने की आवाज़] ठीक है शास्त्रवाद जी कैसा लगा आज का लाइव आपको

1143
01:25:37,120 --> 01:25:41,440
भैया बहुत बढ़िया है आज सही देखेंगे तो बहुत बढ़िया

1144
01:25:41,440 --> 01:25:46,640
हम काफी अच्छा है ठीक है

1145
01:25:46,640 --> 01:25:50,880
अनिकेत जी भी आ गए अनिकेत जी को जोड़ दीजिए सही आ गए क्या तथागत जी

1146
01:25:50,880 --> 01:25:55,440
आ गए आ गए तथागत जी मोबाइल को वैसे रख लेते

1147
01:25:55,440 --> 01:25:57,360
अच्छा अच्छा ठीक

1148
01:25:57,360 --> 01:26:01,520
हां तो हां अब मैं बोलना हां

1149
01:26:01,520 --> 01:26:05,680
आपके जो WhatsApp नंबर है मैं मैं वहां पर जो इस

1150
01:26:05,680 --> 01:26:09,680
डिज ट्री का जो एक लिखा है मतलब वो इस के ही भक्त

1151
01:26:09,680 --> 01:26:13,680
के द्वारा दिया गया है तो वो आप देख सकते हैं अपने

1152
01:26:13,680 --> 01:26:18,000
मैं उसका लिंक भी शेयर किया है और और उसका जो

1153
01:26:18,000 --> 01:26:22,800
मैं पॉइंट आउट भी किया है

1154
01:26:22,800 --> 01:26:27,040
लॉर्ड शिवा एक्चुअली नॉट डिफाइन

1155
01:26:27,040 --> 01:26:31,040
देन कृष्णा। मैं आपसे एक बार और क्लियर

1156
01:26:31,040 --> 01:26:35,120
कर लूं। शिव और कृष्ण में कोई भेद नहीं है। तत्व से वास्तविक

1157
01:26:35,120 --> 01:26:39,120
जो रियलिटी है रियलिटी में शास्त्रों

1158
01:26:39,120 --> 01:26:43,440
में कहा गया है कि हां मैं मैं पहले बोल लूं।

1159
01:26:43,440 --> 01:26:47,680
यह शास्त्रों का श्लोक है कि कि जो जो व्यक्ति भगवान नारायण

1160
01:26:47,680 --> 01:26:51,760
के साथ भगवान रुद्र और और ब्रह्मा को समान मानता

1161
01:26:51,760 --> 01:26:55,760
है वो एक पासंडी है। तो यह पूर्ण रूप

1162
01:26:55,760 --> 01:26:59,840
से तो यह नहीं है लेकिन अभेद भी है और भेद भी

1163
01:26:59,840 --> 01:27:05,840
है। यही तो मैं कहना चाहता हूं। देखिए बात ऐसी है

1164
01:27:07,840 --> 01:27:10,480
नारायण

1165
01:27:10,480 --> 01:27:15,040
बात ऐसी है कि अगर हमने कहा कि

1166
01:27:15,040 --> 01:27:19,760
तत्व से भगवान शिव में और विष्णु में कोई भेद नहीं है। ठीक है?

1167
01:27:19,760 --> 01:27:23,760
अब आपने कहा कि शास्त्र का एक वचन है कि शिव और विष्णु को एक कोई

1168
01:27:23,760 --> 01:27:27,920
मानता है तो वो पाखंडी है। ब्रह्मा

1169
01:27:27,920 --> 01:27:32,560
और और बाकी सब देवता को मैं आपको क्या वो श्लोक दूं?

1170
01:27:32,560 --> 01:27:36,720
अभी भाई साहब मुझे मेरी बात आप करने देंगे कि नहीं करने देंगे?

1171
01:27:36,720 --> 01:27:40,880
अच्छा अच्छा अच्छा बोल लीजिए।

1172
01:27:40,880 --> 01:27:45,680
आपने कहा तत्व से शिव और कृष्ण में कोई भेद नहीं है। ठीक है।

1173
01:27:45,680 --> 01:27:49,920
तो इस बात को हम माने कि ना माने?

1174
01:27:49,920 --> 01:27:54,000
अभेद है और भेद भी है। इसको हमें मानना पड़ेगा। मैंने कहा

1175
01:27:54,000 --> 01:27:58,080
इस बात को माने कि ना माने क्या है ये? [गला साफ़ करने की आवाज़] पूर्ण रूप से तो

1176
01:27:58,080 --> 01:28:03,360
अभेद भी नहीं है। मतलब पूर्ण रूप से तो एक भी नहीं है लेकिन एक है भी।

1177
01:28:03,360 --> 01:28:07,440
मैं बता रहा हूं क्या है? ऐसा है कि व्यवहार की

1178
01:28:07,440 --> 01:28:11,440
दृष्टि से राम जी कौशल्या माता से जन्म लेते हैं।

1179
01:28:11,440 --> 01:28:15,520
और तत्व की दृष्टि से वो उसे प्रकट होते हैं। जन्म नहीं

1180
01:28:15,520 --> 01:28:19,680
लेते। तो हमें तत्व से ये मानना पड़ेगा। तत्व से हमें

1181
01:28:19,680 --> 01:28:23,840
ये मानना पड़ेगा कि शिव और विष्णु एक हैं।

1182
01:28:23,840 --> 01:28:28,080
और व्यवहार से आप ये कह रहे हैं कि हमारे पास एक श्लोक है जिसमें कि उनको व्यवहार

1183
01:28:28,080 --> 01:28:32,320
में शिव और विष्णु को अभेद शिव और विष्णु को अभेद मानने वाले पाखंडी

1184
01:28:32,320 --> 01:28:36,480
है। ठीक है? तत्व से

1185
01:28:36,480 --> 01:28:40,560
तत्व से शिव और विष्णु में रियलिटी [नाक से की जाने वाली आवाज़] में जो वास्तविक जो

1186
01:28:40,560 --> 01:28:44,960
अंतिम रियलिटी है ट्रुथ उसमें शिव और कृष्ण में कोई भेद नहीं है।

1187
01:28:44,960 --> 01:28:49,040
और जो संसार भौतिक दृष्टि है। इसमें आपके पास एक

1188
01:28:49,040 --> 01:28:53,200
श्लोक है जिसके कारण आप यह मानने के लिए वो है कि व्यवहार में हम शिव और विष्णु

1189
01:28:53,200 --> 01:28:56,240
में भेद मानते हैं। ठीक है? इसका मतलब केवल

1190
01:28:56,240 --> 01:29:00,800
शास्त्र का ही एक शास्त्र वो शास्त्र ने जो चिन्हित किया है आपके अनुसार

1191
01:29:00,800 --> 01:29:06,640
जो आपने शास्त्रों का अर्थ किया है उसके अनुसार शिव [नाक से की जाने वाली आवाज़] और विष्णु में भेद मानना।

1192
01:29:06,640 --> 01:29:10,640
मैंने मांगा है क्या आपसे? जब मैं मांगूंगा तब दे दीजिएगा ना

1193
01:29:10,640 --> 01:29:14,960
भाई। मैंने जो मांगा था आपने दिया। मैंने लिया

1194
01:29:14,960 --> 01:29:19,760
आप जितनी बार मैं बोलता हूं बीचबीच में मैं मैं श्लोक दूं मैं श्लोक दूं

1195
01:29:19,760 --> 01:29:23,440
ठीक है ठीक है आप बोलिए

1196
01:29:23,440 --> 01:29:27,520
तो व्यवहार में आप ना मानने के लिए इसलिए मजबूर हैं क्योंकि आपको

1197
01:29:27,520 --> 01:29:31,760
शास्त्र का एक वचन प्राप्त है जिसमें कि इनको अभेद मानने वाले पाखंड

1198
01:29:31,760 --> 01:29:36,000
कुल मिलाकर के शास्त्र के एक वाक्य के कारण जो है आप मान रहे बाकी तत्व

1199
01:29:36,000 --> 01:29:40,080
से आप भी शिव और कृष्ण को एक मानते हैं। हां

1200
01:29:40,080 --> 01:29:44,080
ये तो हां ये तो है ये तो वास्तव यानी

1201
01:29:44,080 --> 01:29:48,080
यानी कि तत्व से शिव जी कोई अलग से दूसरा

1202
01:29:48,080 --> 01:29:52,240
तत्व नहीं है। कृष्ण ही है।

1203
01:29:52,240 --> 01:29:56,240
हां कृष्ण का प्रकाश है। कृष्ण का प्रकाश और

1204
01:29:56,240 --> 01:30:01,120
अंतर है कि मैं पूछ रहा हूं अंतर है कि नहीं? जरा सा भी

1205
01:30:01,120 --> 01:30:05,200
प्रकाश जब आप प्रकाश लाओगे तो अंतर अंतर

1206
01:30:05,200 --> 01:30:09,360
है। तत्व से कह रहा हूं। तत्व से कह रहा हूं। तत्व से जरा सा तो अंतर

1207
01:30:09,360 --> 01:30:12,080
है। तत्व से कह रहा हूं।

1208
01:30:12,080 --> 01:30:16,080
हां। तत्व से कह रहा हूं। हां जरा सा तो

1209
01:30:16,080 --> 01:30:21,120
अंतर है। यानी तत्व से भी अंतर है।

1210
01:30:21,120 --> 01:30:25,360
जरा सा है। अरे जरा सा है। है ना भाई?

1211
01:30:25,360 --> 01:30:29,440
हां हां। पता नहीं क्यों आप लोग अपनी फिलॉसफी को स्वीकार करने में भी

1212
01:30:29,440 --> 01:30:33,920
डरते हो यार। अच्छा ठीक है। ठीक है। आप अब आप अपना

1213
01:30:33,920 --> 01:30:38,160
आप अपना बोलो। बोलो बोलो बोलो। शर्म आती है क्या जो चीज़ गुरुओं

1214
01:30:38,160 --> 01:30:42,480
ने सिखाई है जिनको आप गुरु कहते हो वो बातें एज इट इज बोलने में

1215
01:30:42,480 --> 01:30:46,640
नहीं जब आप अपनी चीजों को जब आप अपनी चीजों को अपनी

1216
01:30:46,640 --> 01:30:50,720
मान्यताओं को एज इट इज बोलोगे नहीं तो हम बात किस पे करेंगे बताइए जब मेरी

1217
01:30:50,720 --> 01:30:54,880
बारी आई थी मैंने फट से बोला भले ही आप बाद में कटाक्ष कर दो मैंने फट

1218
01:30:54,880 --> 01:31:00,080
से बोला ना ठीक है ठीक है आप अपना बोलिए बोलिए बोलिए

1219
01:31:00,080 --> 01:31:04,160
एक एक फ्लो में आप चर्चा करने की वो नियत रखते ही नहीं

1220
01:31:04,160 --> 01:31:08,400
हो कि भाई हम सत्य की खोज करने बैठे हैं। ऐसे बोलो

1221
01:31:08,400 --> 01:31:14,400
ऐसा उसमें दिमाग लगाओ कहीं हमारी पटकनी ना हो जाए। यह ध्यान है।

1222
01:31:15,200 --> 01:31:18,720
नहीं नहीं आप बोलिए

1223
01:31:18,720 --> 01:31:22,880
भाई जो आपको बताया आपके गुरुओं ने जो आपने पढ़ा है जो आप मानते

1224
01:31:22,880 --> 01:31:26,960
हो जो आप जानते उसको बोलो ना यार डंके की चोट पे

1225
01:31:26,960 --> 01:31:31,040
वो गलत है सही है बाद में सिद्ध होगा वो उसी को अभी

1226
01:31:31,040 --> 01:31:35,040
कह रहे थे तत्व से भेद नहीं है अब कह रहे हो जरा सा है अब मैं बार

1227
01:31:35,040 --> 01:31:41,040
अब मैं बार-बार कह रहा हूं तत्व से भी तत्व से भी भेद है

1228
01:31:43,920 --> 01:31:48,000
तत्व से भेद है तत्व से

1229
01:31:48,000 --> 01:31:52,160
है लेकिन वो जरा सा है वो हमें दिखाई

1230
01:31:52,160 --> 01:31:57,040
दे रहा है वो हमें दिखाई दे रहा है लेकिन वास्तविक में वो नहीं है

1231
01:31:57,040 --> 01:32:01,120
हो गया आप आप जाइए अब हो गया ठीक है अच्छा लगा आपकी बात कर जय

1232
01:32:01,120 --> 01:32:07,120
श्री राम

1233
01:32:08,260 --> 01:32:14,260
[हंसी]

1234
01:32:20,400 --> 01:32:23,440
हां

1235
01:32:23,440 --> 01:32:27,520
शास्त्रवाद जी कहां गए? उग्रतापस

1236
01:32:27,520 --> 01:32:33,520
जी अपना कैमरा ऑन करें।

1237
01:32:33,520 --> 01:32:38,240
जी मेरी आवाज आ रही है? नमस्कार। जय श्री राम।

1238
01:32:38,240 --> 01:32:42,480
जी कैमरा तो मैं ऑन नहीं कर सकता हूं। कुछ

1239
01:32:42,480 --> 01:32:48,400
कारण है तो ऐसे वार्तालाप हो सकती है क्या? किस बारे में?

1240
01:32:48,400 --> 01:32:52,640
किस बारे में? आदि शंकराचार्य जी का फोटो लगा के यहां पर हमको

1241
01:32:52,640 --> 01:32:56,560
मूर्ख समझा है। क्या?

1242
01:32:56,560 --> 01:33:00,720
ठीक है? जहां से सोचना शुरू कर जहां पर सोचना तुम्हारा बंद होता है ना, वहां से हमारी

1243
01:33:00,720 --> 01:33:06,640
चीजें शुरू होती हैं।

1244
01:33:06,640 --> 01:33:12,640
जो व्यक्ति अपनी बात पर अडिग नहीं रह रहा है, उससे क्या बात करें?

1245
01:33:23,040 --> 01:33:27,040
पूर्व पक्षी फिक्स नहीं है। जब वह यह इसका जवाब दे तो वो उस पर

1246
01:33:27,040 --> 01:33:31,450
भाग जाओ। उसका जवाब दे। इसीलिए एक शब्द निकाला है अचिंत वेदाभेद।

1247
01:33:31,450 --> 01:33:37,450
[हंसी]

1248
01:33:39,680 --> 01:33:44,880
जय श्री राम।

1249
01:33:44,880 --> 01:33:48,880
हां जी अनकत जी जय श्री राम जय

1250
01:33:48,880 --> 01:33:52,880
श्री राम [हंसी] यार व्यक्ति परेशान है

1251
01:33:52,880 --> 01:33:58,880
क्या बोल दूं यार मैं आके फंस गया हूं क्या

1252
01:33:58,880 --> 01:34:02,960
आपकी आवाज नहीं आ रही है अंकित जी

1253
01:34:02,960 --> 01:34:08,720
आप बोले शास्त्र जी तब तक

1254
01:34:08,720 --> 01:34:09,220
सही

1255
01:34:09,040 --> 01:34:13,200
बात है भैया इसने पहले बोला था कि कोई भेद नहीं फिर उसके

1256
01:34:13,200 --> 01:34:17,680
बाद मानने लगा जरा सा जरा सा भेद है जरा सा मतलब

1257
01:34:17,680 --> 01:34:21,840
वो खुद क्लियर नहीं कर पा रहा खुद में इतना डाउट में है कि आखिर भेद

1258
01:34:21,840 --> 01:34:25,920
है कि नहीं है शतर उपनिषद का वो वाक्य वो माने

1259
01:34:25,920 --> 01:34:30,960
कि नहीं माने

1260
01:34:30,960 --> 01:34:35,040
क्या है इनका फिलोसफी कुछ भी नहीं पता तथागत

1261
01:34:35,040 --> 01:34:39,040
जी तथागत जी आप समझ लीजिए तत्व से

1262
01:34:39,040 --> 01:34:43,200
अभेद है तत्व से अद्वैत है और व्यवहार में द्वैत है।

1263
01:34:43,200 --> 01:34:47,440
यही तो हम भी मानते हैं जो आप मान रहे हो। यही हम मानते हैं। मगर क्या हुआ

1264
01:34:47,440 --> 01:34:51,840
है कि आपको अवमानना करनी है शंकराचार्य की। अपना घरौदा

1265
01:34:51,840 --> 01:34:55,840
बसाना है। आपको नहीं मतलब जिसको आप मान रहे हो उस तंत्र को। तो

1266
01:34:55,840 --> 01:34:59,840
इसलिए जरूरी है कि भैया हमको वह शब्द स्वीकार नहीं करना है।

1267
01:34:59,840 --> 01:35:04,320
उसी शब्द को शब्दांतर से शब्दांतर भेद से

1268
01:35:04,320 --> 01:35:08,320
हम जो है उसी शब्द को दूसरे तरीके से स्वीकार करके कह देंगे हमारी फिलोसफी

1269
01:35:08,320 --> 01:35:10,320
तो द्वैत है।

1270
01:35:10,320 --> 01:35:13,200
वो लोग नहीं मानते।

1271
01:35:13,200 --> 01:35:18,000
द्वैत फिलॉसफी में अंत में नहीं माना गया कि एक ही है।

1272
01:35:18,000 --> 01:35:22,000
और अगर माना गया तो फिर शब्दांतर भेद वहां भी आएगा। ज्यादातर तो जितने

1273
01:35:22,000 --> 01:35:26,000
जो पूर्वाचार्य हैं जो आचार्य हैं उनमें और

1274
01:35:26,000 --> 01:35:30,400
यह देखने में मिलता है शब्दांतर भेद है। बस शंकराचार्य जी की बात को

1275
01:35:30,400 --> 01:35:35,520
आदि शंकराचार्य जी की बात को दूसरे शब्दों में मान लिया।

1276
01:35:35,520 --> 01:35:39,520
बस उस एग्जैक्ट शब्द से नहीं माना जिस जिस शब्द से आदि शंकराचार्य

1277
01:35:39,520 --> 01:35:43,760
जी ने सिद्धांत कहा है।

1278
01:35:43,760 --> 01:35:49,760
[गला साफ़ करने की आवाज़] अनिकेत जी नहीं आ रहे क्या?

1279
01:35:51,600 --> 01:35:56,000
कौन से डिस्कशन की बात कर रहे हैं आप? जी आएंगे शायद ना।

1280
01:35:56,000 --> 01:36:00,160
अच्छा मैं एक बार फिर से बता दूं ऋषिकेश

1281
01:36:00,160 --> 01:36:04,320
में कैथोलिक चर्च में बैठकर के एक बहुत अच्छा डिस्कशन

1282
01:36:04,320 --> 01:36:09,680
हुआ है जिसमें आपको मालूम पड़ेगा कि किस तरीके से

1283
01:36:09,680 --> 01:36:14,160
जो चर्च वाले हैं कैथोलिक चर्च से जुड़े हुए लोग हैं

1284
01:36:14,160 --> 01:36:19,280
अपना काम कर रहे हैं

1285
01:36:19,280 --> 01:36:23,760
और [गला साफ़ करने की आवाज़] हम इस समय ऋषिकेश में हैं।

1286
01:36:23,760 --> 01:36:28,960
हां यह यह दिखा दीजिए आप।

1287
01:36:28,960 --> 01:36:33,040
यह शो कर दीजिए। तो आप जरूर वह चर्चा देखें और आप

1288
01:36:33,040 --> 01:36:37,360
उसमें देखें कि किस तरीके से कार्य कर रहे हैं और हिंदुओं की चीजों को सीखने

1289
01:36:37,360 --> 01:36:41,520
जाते हैं। विशेषतः विशेष रूप से हिंदुओं के मंदिरों

1290
01:36:41,520 --> 01:36:45,680
में जाते हैं। बड़े-बड़े बद्रीनाथ और जितने भी

1291
01:36:45,680 --> 01:36:49,760
तीर्थ स्थल है वहां जाते हैं। उनको समझते हैं। उनकी फिलॉसफी को समझते हैं। और फिर किस तरीके

1292
01:36:49,760 --> 01:36:53,760
से उनका पर्यावसान क्रिश्चियनिटी के प्रचार प्रसार में किया जा सकता है। इसमें

1293
01:36:53,760 --> 01:36:58,080
बहुत अच्छे से सब सारी चीजें आपको प्राप्त होंगी और आप इन इस

1294
01:36:58,080 --> 01:37:02,080
वीडियो के द्वारा जो आपके आसपास बहुत तेजी से कन्वर्जन हो

1295
01:37:02,080 --> 01:37:06,160
रहा है उस पर आप उसके लिए कुछ सार्थक प्रयास

1296
01:37:06,160 --> 01:37:12,160
कर सकते हैं।

1297
01:37:20,640 --> 01:37:24,080
मुझे [गला साफ़ करने की आवाज़] लगता है आएंगे नहीं।

1298
01:37:24,080 --> 01:37:30,080
यह वो डिस्कशन है आप लोग जरूर देखें।

1299
01:37:30,720 --> 01:37:34,800
ऋषिकेश की कंट्रोवर्सी उन्होंने प्राइवेसी की स्ट्राइक मार

1300
01:37:34,800 --> 01:37:38,880
के फिलहाल वीडियो हटवा दिया है। अभी हम लोग कोर्ट का रुख कर चुके हैं।

1301
01:37:38,880 --> 01:37:42,960
बहुत जल्द वो वीडियो वापस आएगा। जिस तरह से रामपाल ने

1302
01:37:42,960 --> 01:37:47,040
फेक स्ट्र्राइक्स लगवा करके एक बार हमारे कुछ वीडियोस हटवाए थे और

1303
01:37:47,040 --> 01:37:51,040
उसके बाद हमारा चैनल भी बंद होने की कगार पर था। पर हम लड़े और जीते उस

1304
01:37:51,040 --> 01:37:55,760
लड़ाई को। [नाक से की जाने वाली आवाज़]

1305
01:37:55,760 --> 01:37:59,760
हां जी अंकित जी मुझे लगता है आप ज्यादा अच्छे से डिफाइन कर पाओगे

1306
01:37:59,760 --> 01:38:05,760
आज की चीजों को।

1307
01:38:06,240 --> 01:38:10,480
जी भैया आवाज आ रही है मेरी? अब आ रही है।

1308
01:38:10,480 --> 01:38:14,720
[नाक से की जाने वाली आवाज़] हां नेटवर्क का इशू है थोड़ा। मैं कह रहा हूं वो बंदा लगता

1309
01:38:14,720 --> 01:38:18,720
है जा रहा है कोई ढूंढ के आता है फिर जॉइ करता है

1310
01:38:18,720 --> 01:38:23,920
फिर जाता है जॉइ करता है ढूंढता है जॉइ करता है

1311
01:38:23,920 --> 01:38:28,000
और वो यह भी देखता है कि मुझे जाके कहना क्या है मतलब मुझसे

1312
01:38:28,000 --> 01:38:32,080
कुछ गलती हो गई अब यह कहूंगा अब तो मैं यह कह आया मगर अब

1313
01:38:32,080 --> 01:38:37,520
मैं यह कहूंगा

1314
01:38:37,520 --> 01:38:43,360
जी शास्त्रवाद जी

1315
01:38:43,360 --> 01:38:47,520
जी भैया मेरे यहां पर आपका आवाज थोड़ा कट रहा है क्योंकि

1316
01:38:47,520 --> 01:38:51,840
मेरा इंटरनेट थोड़ा आज वीक है।

1317
01:38:51,840 --> 01:38:56,240
जो भी है आज का चर्चा देखने में बहुत ही अच्छा लगा। आज उस व्यक्ति ने बहुत

1318
01:38:56,240 --> 01:39:00,240
बढ़िया से माना है। माना भी है और बाद में नहीं भी माना

1319
01:39:00,240 --> 01:39:04,480
है। बेचारा कंफ्यूज था। इसमें भी इसमें

1320
01:39:04,480 --> 01:39:09,280
भी इसमें भी अचंत वेदाभेद है। [हंसी]

1321
01:39:09,280 --> 01:39:12,400
माना भी और नहीं भी।

1322
01:39:12,400 --> 01:39:16,560
देखो सीधी सी बात है कि हम लोग जीते कैसे कि हम

1323
01:39:16,560 --> 01:39:21,120
ऐसी चीज बोलेंगे कि कोई एक बात पर व्यक्ति प्रश्न ना कर पाए।

1324
01:39:21,120 --> 01:39:25,120
अगर हम इससे कहे ये कैसे कहा? हमने ये भी तो कहा है। वही मैंने

1325
01:39:25,120 --> 01:39:29,200
कहा था ना वो था ना वो एक

1326
01:39:29,200 --> 01:39:33,520
वो थी ना थ्री इडियट्स उसमें वो कहता है हां कि मोटर

1327
01:39:33,520 --> 01:39:37,680
कैसे स्टार्ट होती है? तो वह उसमें था उसने

1328
01:39:37,680 --> 01:39:43,200
शायद कोई नशीला पदार्थ का सेवन किया था। तो वो कहता है

1329
01:39:43,200 --> 01:39:47,520
याद है थ्री इयर्स में कॉलेज

1330
01:39:47,520 --> 01:39:51,840
का सीन था। जी भैया जी भैया जिन्होंने देखा होगा वो याद होगा।

1331
01:39:51,840 --> 01:39:56,240
तो ऐसे ही इस वालों से ऐसे इस वालों से कोई पूछता

1332
01:39:56,240 --> 01:40:00,640
है कि भाई तुम्हारी फिलॉसफी क्या है? तुम्हारा सिद्धांत

1333
01:40:00,640 --> 01:40:05,110
क्या है? तो ये भी क्या करते हैं?

1334
01:40:05,110 --> 01:40:09,200
[हंसी] ए से ले जेड तक सब बोल दो। कुछ रह

1335
01:40:09,200 --> 01:40:13,360
ना जाए। है ना? तो

1336
01:40:13,360 --> 01:40:17,520
उसमें क्या होगा कि अरे भाई तुमने कैसे बोल दिया? अरे अरे

1337
01:40:17,520 --> 01:40:21,600
हमने वो भी तो बोला है। अरे तुमने वो कैसे बोल दिया?

1338
01:40:21,600 --> 01:40:25,920
हमने ये भी तो बोला है। हमने तो सब कुछ बोला है। हमारा सिद्धांत क्या है?

1339
01:40:25,920 --> 01:40:31,310
हमारा कोई हमारा सिद्धांत क्या है? हमारा कोई सिद्धांत नहीं है।

1340
01:40:31,310 --> 01:40:35,360
[हंसी] ये है स्थिति लोग ये लोग

1341
01:40:35,360 --> 01:40:39,360
मानेंगे भी नहीं भी मानेंगे मतलब ये व्यक्ति पहले तो

1342
01:40:39,360 --> 01:40:44,400
बोलता है कि हम मतलब सबसे बड़ा बात जो वहां पे आया कि

1343
01:40:44,400 --> 01:40:48,400
बोलता है कि कटाक्ष जब उसने किया और बाद में बोलता

1344
01:40:48,400 --> 01:40:52,480
है हम कटाक्ष नहीं कर रहे थे। यह जो बात है मुझे

1345
01:40:52,480 --> 01:40:56,480
एक मिनट उग्र तापस जी आप अभी जाइए और

1346
01:40:56,480 --> 01:40:58,320
हमारे वीडियो के अंत में हमारा नंबर

1347
01:40:58,320 --> 01:41:02,560
दिया होता है। ठीक है? वहां पर हमसे संपर्क करिए और फिर बताइए

1348
01:41:02,560 --> 01:41:06,560
कि आपको क्या चर्चा करनी है। बेकार में परेशान होने की

1349
01:41:06,560 --> 01:41:12,560
आवश्यकता नहीं है आपको। हां बोलिए शास्त्रवाद जी।

1350
01:41:16,720 --> 01:41:20,880
जी भैया। उसने जो पहले कहा कि उसने आप पे कटाक्ष नहीं किया जबकि

1351
01:41:20,880 --> 01:41:24,960
उसने कटाक्ष किया था मुझे ऐसा लगा और वही

1352
01:41:24,960 --> 01:41:30,240
बात सभी पता नहीं अब वो तो

1353
01:41:30,240 --> 01:41:34,320
जी लेकिन वो तो कह रहा था कि अब कटाक्ष नहीं किए जबकि कैसे सिद्ध हुआ

1354
01:41:34,320 --> 01:41:38,400
वो मैंने कमेंट में भी लिखा था कि आपने आप जो बात कर रहे थे कि

1355
01:41:38,400 --> 01:41:41,680
इस के जो कुछ

1356
01:41:41,680 --> 01:41:45,760
जो बड़े-बड़े लोग होते हैं वो लोग ऐसा कुछ श्री कृष्ण और

1357
01:41:45,760 --> 01:41:50,240
शिव जी के विषय में कुछ बोल स्पष्ट बोलते हैं। दूध दही का एग्जांपल

1358
01:41:50,240 --> 01:41:54,400
देते हुए बोलते हैं दूध दही का एग्जांपल देते हुए

1359
01:41:54,400 --> 01:41:58,480
इस के कई ऑथेंटिक रिप्रेजेंटेटिव है जो ये दावा

1360
01:41:58,480 --> 01:42:02,640
करते हैं कि जिस प्रकार दूध से दही बनता है पर दही से दूध नहीं उसी प्रकार कृष्ण

1361
01:42:02,640 --> 01:42:06,720
तो शिव बन सकते हैं पर शिव से कृष्ण नहीं तो ये बोलते हैं तो ये मैं बोल

1362
01:42:06,720 --> 01:42:10,800
रहा था उसके बीच में उन्होंने कुछ तो बोल दिया तो मैंने फिर मैंने उनको बताया

1363
01:42:10,800 --> 01:42:13,360
कि मैं भूल जाता हूं तो इसलिए आप ठोके ना

1364
01:42:13,360 --> 01:42:17,440
अब उन्होंने इतने में भूल गया मेरे मुख से निकला कि भाई मैं क्या बोल रहा था कि

1365
01:42:17,440 --> 01:42:21,440
कुछ भी तो नहीं बोल रहे थे। सब माया ही तो है। कुछ नहीं हो रहा था। यह

1366
01:42:21,440 --> 01:42:25,520
कटाक्ष था उनका क्योंकि वो वहां से सहम गए थे ना। ऐसा

1367
01:42:25,520 --> 01:42:29,520
हो सकता है ऐसा हो सकता है क्या? मतलब वो इसके बियों्ड कभी गए नहीं

1368
01:42:29,520 --> 01:42:33,360
ना। ऐसा हो सकता है क्या?

1369
01:42:33,360 --> 01:42:37,520
ये जो चीज आती है ना ऐसा हो सकता है क्या? ये लोग इसके बियों्ड कभी गए नहीं।

1370
01:42:37,520 --> 01:42:41,680
अगर जाते तो अद्वैती हो जाते।

1371
01:42:41,680 --> 01:42:45,840
बिल्कुल बिल्कुल। यहां पर उसने माया शब्द जो ले आया कि माया

1372
01:42:45,840 --> 01:42:50,480
ही है कट। तो भाई जब माया का बात चल ही नहीं रहा तो तुम माया क्यों बोल रहे हो?

1373
01:42:50,480 --> 01:42:54,960
अगर तुम माया बोल रहे हो तो यह सीधी बात है कटाक्ष है कि तुम कह रहे हो कि

1374
01:42:54,960 --> 01:42:59,120
सब तो माया ही है कुछ हो नहीं रहा। जबकि भैया पूछ रहे हैं कि क्या हुआ? क्या चल

1375
01:42:59,120 --> 01:43:03,680
रहा था? तो उसने बोला कुछ चल ही नहीं रहा। सब माया ही है। तो यह तो कटाक्ष ही है ना।

1376
01:43:03,680 --> 01:43:07,680
इसको कोई कैसे बोल देगा? कटाक्ष नहीं है। ऊपर से भाई इसने तो

1377
01:43:07,680 --> 01:43:11,840
बहुत बड़ा बात कर दिया। आज तो अपने भगवत गीता पे हाथ रख

1378
01:43:11,840 --> 01:43:16,400
के इसने ये बात बोली है कि मैंने आपके ऊपर आपके आपको विशेष करके नहीं बोला।

1379
01:43:16,400 --> 01:43:20,720
जबकि सभी जानते हैं आप ही ने पूछा था और फिर उसने ऐसा बात बोला

1380
01:43:20,720 --> 01:43:25,360
तो फिर उसका ये बात मुझे झूठ ही लग रहा है। लेकिन अब

1381
01:43:25,360 --> 01:43:29,200
क्या बोले? उसके लिए भगवत गीता का भी कोई मूल नहीं है क्या?

1382
01:43:29,200 --> 01:43:33,200
बात ये है कि भाई अगर तुमने मेरे लिए नहीं बोला तो

1383
01:43:33,200 --> 01:43:37,360
अपनी बोलने की टाइमिंग का आप ध्यान रखो ना। हम

1384
01:43:37,360 --> 01:43:41,360
जैसे मान लो कि जी कोई मुझसे

1385
01:43:41,360 --> 01:43:45,440
कोई मुझसे मेरे पिता का नाम पूछे या मैं तथागत जी से उनके पिता

1386
01:43:45,440 --> 01:43:49,680
का नाम पूछूं कि इनके पिता का नाम है और इतने

1387
01:43:49,680 --> 01:43:53,760
में कोई बोल दे किसी और नाम को हम और मंच पर

1388
01:43:53,760 --> 01:43:57,920
बात चल रही हो सार्वजनिक रूप से बात चल रही हो तो तथागत जी कहेंगे ना क्या कर रहे हो भाई

1389
01:43:57,920 --> 01:44:02,240
होश संभाल के रहो ना पिता का नाम बोला जा रहा है तुम उसमें ये बोल दे रहे हो

1390
01:44:02,240 --> 01:44:06,400
नाम बदल दे रहे हो पिता का जबकि अब वो व्यक्ति कह कि भाई मैंने तुम्हारे

1391
01:44:06,400 --> 01:44:10,880
लिए नहीं बोला था। मेरे मुंह से निकल गया। तो भाई मुंह से निकलना नहीं चाहिए।

1392
01:44:10,880 --> 01:44:15,040
यह गलती है। होश रखो। बच्चे

1393
01:44:15,040 --> 01:44:21,040
नहीं हो। है ना?

1394
01:44:21,220 --> 01:44:23,440
[गला साफ़ करने की आवाज़]

1395
01:44:23,440 --> 01:44:27,440
जी अनिकेत जी बोलिए। जी मेरी आवाज आ रही है

1396
01:44:27,440 --> 01:44:31,600
भैया? आ रही है। बिल्कुल साफ बोलिए। हां हां अब नेटवर्क

1397
01:44:31,600 --> 01:44:35,680
थोड़ा तो मैं यह कह रहा था कि वो व्यक्ति कटाक्ष

1398
01:44:35,680 --> 01:44:39,760
ही कर रहा था। मुझे भी कई लोगों ने मैसेज किया कह रहे हैं कि

1399
01:44:39,760 --> 01:44:43,840
शिवश भैया से कहिए कि थोड़ा सा वो हंसकर बोल रहे हैं सीधा है

1400
01:44:43,840 --> 01:44:47,840
साधा है। कटाक्ष देखिए समझ में आ जाता है। सब माया है। सब माया

1401
01:44:47,840 --> 01:44:51,840
है। ये जो व्यक्ति आए थे ना अभी इन्होंने कई बार मैंने देखा

1402
01:44:51,840 --> 01:44:56,080
है लाइव में भी और हमारे उसमें भी कमेंट कई बार किए

1403
01:44:56,080 --> 01:45:00,080
हैं कटाक्ष भरे। मैं अभी मिल जाएगा। उसने डिलीट नहीं किया होगा

1404
01:45:00,080 --> 01:45:04,160
तो मैं निकाल के दिखा दूंगा। ये कई दिनों से जो है वो देख

1405
01:45:04,160 --> 01:45:08,400
रहे हैं वीडियो। बस शर्त ये है कि मैं एक

1406
01:45:08,400 --> 01:45:12,880
चीज कहना चाहूंगा जो भी जुड़ना चाहता है इस की तरफ से

1407
01:45:12,880 --> 01:45:17,280
वो पहले जाकर के शिवश भैया का वीडियो देख ले। उन्होंने

1408
01:45:17,280 --> 01:45:21,360
लगभग एक जैसे ही प्रश्न किए और आप लोग का लगभग एक जैसा ही उत्तर आता है।

1409
01:45:21,360 --> 01:45:25,520
अलग नहीं आता है। तो थोड़ा सा उसको देख लीजिए। कहां पर आपके लोग फंसते

1410
01:45:25,520 --> 01:45:29,600
हैं फिर थोड़ा सा प्रिपेयर होकर आइएगा वो दूध दही लस्सी दूध दही लस्सी

1411
01:45:29,600 --> 01:45:33,840
एक ही चीज ब्रह्म समिता ब्रह्म समिता खैर लेकिन ये अच्छा

1412
01:45:33,840 --> 01:45:36,240
लगा बहुत अच्छा लगा भैया नया चीज देखने

1413
01:45:36,240 --> 01:45:40,960
मिला कि ये व्यक्ति ने माना

1414
01:45:40,960 --> 01:45:45,200
कि शिव और हरि में कोई भेद नहीं है।

1415
01:45:45,200 --> 01:45:48,000
बढ़िया था ये।

1416
01:45:48,000 --> 01:45:52,000
वह असल में क्या है कि आप यदि सिद्धांत

1417
01:45:52,000 --> 01:45:56,160
की रक्षा करने जाओगे तो धीरे धीरे धीरे धीरे करके आप वो

1418
01:45:56,160 --> 01:46:00,320
अद्वैती हो जाओगे शंकराचार्य की शरण में आ जाओगे या

1419
01:46:00,320 --> 01:46:04,320
फिर आप इन प्रश्नों से बचते रहोगे जो बिल्कुल क्लियर कट प्रश्न आएंगे

1420
01:46:04,320 --> 01:46:08,400
तो उनसे फिर आप बचोगे यही तो मैं कहता हूं कि व्यक्ति अगर वास्तव

1421
01:46:08,400 --> 01:46:12,960
में सिद्धांत की रक्षा करने निकलेगा तो व्यवहार में द्वैत

1422
01:46:12,960 --> 01:46:17,200
परमार्थ में अद्वैत कोई दिक्कत नहीं है तो सिद्धांत की रक्षा

1423
01:46:17,200 --> 01:46:21,680
करने निकलोगे तो अपने आप आप शंकराचार्य वाले हो जाओगे और

1424
01:46:21,680 --> 01:46:25,680
वो व्यक्ति सिद्धांत की रक्षा करने के चक्कर में उसने जो है ये चीजें

1425
01:46:25,680 --> 01:46:29,760
मान ली बस वो बात अलग है कि जब उसने कैमरा ऑफ किया या जहां वो

1426
01:46:29,760 --> 01:46:33,920
गया तो उसको चीजें पता चली नहीं नहीं नहीं नहीं नो नो नो नो नो नो

1427
01:46:33,920 --> 01:46:38,240
जैसे वो राम लखन में अंत में गाने के अंत में होता है ना

1428
01:46:38,240 --> 01:46:42,320
वो एक कंपटीशन चल रहा होता है वो कहता

1429
01:46:42,320 --> 01:46:46,720
है कि मैं हीरो हूं और वो कहता है मैं जीरो हूं तो लास्ट में वो

1430
01:46:46,720 --> 01:46:51,040
नहीं हां लास्ट में जो नायक होता है वह खलनायक

1431
01:46:51,040 --> 01:46:51,540
पक्ष

1432
01:46:51,360 --> 01:46:55,520
को उसके ही मुख से निकलवा देता है जो उसका पक्ष था।

1433
01:46:55,520 --> 01:46:59,600
नायक अपने विपक्षी को अपने पक्ष

1434
01:46:59,600 --> 01:47:03,840
की बात विपक्षी के मुख से निकलवा देता है। तो जब विपक्षी के मुख से

1435
01:47:03,840 --> 01:47:07,920
बात निकल जाती है उसको सिद्ध करना था कि मैं हीरो हूं और वो बोल देता

1436
01:47:07,920 --> 01:47:11,920
है मैं जीरो हूं। तो जब वो जीरो बोल देता है तो बोलता है नो नो नो

1437
01:47:11,920 --> 01:47:15,920
नो नो नो नो तो वही हाल इनका हो रहा था कि इन्होंने बोल तो दिया

1438
01:47:15,920 --> 01:47:20,720
कि शिव और कृष्ण एक है। नो नो नो नो नो नो जरा सा अंतर है।

1439
01:47:20,720 --> 01:47:26,720
ये जरा सा अंतर है। जरा सा भाई एक बार बोलो ना सिद्धांत क्या है?

1440
01:47:34,480 --> 01:47:38,480
बात यही है कि अब देखिए कुछ ना कुछ ढूंढ कर लाएंगे।

1441
01:47:38,480 --> 01:47:43,760
प्रयास तो करेंगे कि आज

1442
01:47:43,760 --> 01:47:46,240
हां जी

1443
01:47:46,240 --> 01:47:50,240
अरे भैया उन्होंने तो आज आज तो इतना ही ये भी

1444
01:47:50,240 --> 01:47:55,040
कह दिया कि कृष्ण भी शिव नहीं बन सकते [हंसी]

1445
01:47:55,040 --> 01:47:59,200
ये जो है ना स्टार्टिंग में उन्होंने बोला था अभी अभी अभी वो वाली बात आनी

1446
01:47:59,200 --> 01:48:04,240
बाकी रह गई थी यहां तो बाधित भी कर दिया बाधित

1447
01:48:04,240 --> 01:48:09,040
भी कर दिया यहां लो तो वही बात है

1448
01:48:09,040 --> 01:48:13,440
वही कल जो बोबड़ा हमें

1449
01:48:13,440 --> 01:48:17,520
कल बोबड़ा सोल बोल रहा था ना कि जब जब हम फसेंगे तो फिर

1450
01:48:17,520 --> 01:48:21,520
कृष्ण भी बाधित है बस निरोत्तर नहीं होना चाहिए

1451
01:48:21,520 --> 01:48:25,040
बस यही हाल है

1452
01:48:25,040 --> 01:48:29,200
बोबड़ा बोबड़ा सोल आज बातें कर रहा है कृष्ण

1453
01:48:29,200 --> 01:48:33,280
भी शिव नहीं बन सकते भैया बोबड़ा सोल आज बातें कर

1454
01:48:33,280 --> 01:48:37,440
रहा है कि भाई उसने हमारे विरुद्ध जो है ऐसा वीडियो बनाया है

1455
01:48:37,440 --> 01:48:41,600
इसलिए हम जवाब दे रहे हैं और यह यह भ्रम फैला रहा है कि हमने शिवश

1456
01:48:41,600 --> 01:48:45,680
नारायण द्विवेदी को चर्चा के लिए बुलाया। भाई मुझे मेरी जानकारी जो है इसने यह

1457
01:48:45,680 --> 01:48:49,520
कहा था कि भाई संस्कृत में होगी और मेरा यह कहना था भाई तू संस्कृत

1458
01:48:49,520 --> 01:48:53,600
में पहले तू वीडियो तो बना संस्कृत में तो हम देखेंगे संस्कृत में होगी कि नहीं

1459
01:48:53,600 --> 01:48:57,840
होगी। मेरा क्या है मैं किसी ट्रांसलेट को ले आऊंगा अगर मुझे नहीं भी आती होगी तो।

1460
01:48:57,840 --> 01:49:01,840
वो तो बाद की बात है। तुम अपने जो संभाषण है संस्कृत में करो ना।

1461
01:49:01,840 --> 01:49:05,920
फिर देखते हैं उसका खंडन करना है कि नहीं करना है। दूसरी बात

1462
01:49:05,920 --> 01:49:10,320
कि भाई सीधी सी बात है चर्चा के लिए हमने अपना नंबर दिया हुआ है।

1463
01:49:10,320 --> 01:49:14,640
फिर नंबर पर संपर्क करो और चर्चा सुनिश्चित करो।

1464
01:49:14,640 --> 01:49:18,720
पर नहीं अपने लोगों को मूर्ख बनाना है। अभी बोबड़ों से डर के

1465
01:49:18,720 --> 01:49:23,280
भागना पड़ेगा। और एक चीज और बता रहा है कि हमने उसका उसकी अवमानना की है।

1466
01:49:23,280 --> 01:49:27,280
सालों से वो तोता वो हज करने गए। वो तोता बने

1467
01:49:27,280 --> 01:49:31,280
वो ये है वो वो है सालों से हैवान ये वो करता जा रहा

1468
01:49:31,280 --> 01:49:35,520
है शक्ल शक्ल बिगाड़ता जा रहा है और फिर आज वो कह रहा है हमने

1469
01:49:35,520 --> 01:49:40,240
उसके ऊपर वीडियो बनाया है उसकी अवमानना कर दी है

1470
01:49:40,240 --> 01:49:44,400
थोड़ा सा विनोद पूर्ण वीडियो है वो हो गई उसकी अवमानना और तुम

1471
01:49:44,400 --> 01:49:48,560
सालों से जो है यह पी पी कर रहा है

1472
01:49:48,560 --> 01:49:53,280
ये वो सब कर रहे हो तब तुम्हें याद नहीं आया खैर कोई बात नहीं

1473
01:49:53,280 --> 01:49:59,280
वो क्या कहते हो उसे वह

1474
01:50:00,320 --> 01:50:05,600
शंकराचार्य की लाइब्रेरी में कानून की किताब भी पढ़ी है हमने

1475
01:50:05,600 --> 01:50:09,600
तो खेल अच्छा है तुम्हारा व्यक्ति गलत चुन

1476
01:50:09,600 --> 01:50:13,600
लिया तो चीजें अभी आगे आपको प्रस्तुत की जाएगी

1477
01:50:13,600 --> 01:50:17,600
बहुत सारी अच्छी अच्छी खैर तो फिर ठीक है पूरी

1478
01:50:17,600 --> 01:50:21,600
पूरी करें चर्चा आज समापन वो सोचता होगा बस एक चीज

1479
01:50:21,600 --> 01:50:25,680
भैया वो सोचता होगा कि जिसका वो चेहरा बिगाड़ता

1480
01:50:25,680 --> 01:50:29,760
है और जो भी चीज वो कहता है उससे शायद शिवाय नारायण द्विवेदी को

1481
01:50:29,760 --> 01:50:33,260
दुख हो जाएगा।

1482
01:50:33,260 --> 01:50:37,360
[हंसी] वो ये सोचता होगा शायद शिवाय नारायण द्विवेदी को दुख होगा

1483
01:50:37,360 --> 01:50:41,120
तो वो बनाना बंद कर देगा वीडियो।

1484
01:50:41,120 --> 01:50:45,360
हां ऐसा ही सोचता होगा या एक एक ये भी बात होती है कि भाई

1485
01:50:45,360 --> 01:50:49,360
मैं कुछ कर तो सकता नहीं हूं। है ना? वो एक

1486
01:50:49,360 --> 01:50:53,440
नपुंसक चेहरा तक नहीं दिखा सकता हूं। तो चलो यही कर लेते हैं।

1487
01:50:53,440 --> 01:50:57,760
एक ज्ञानार्थक नपुंसकता भी होती है ना भाई। व्यवहारिक नपुंसकता

1488
01:50:57,760 --> 01:51:02,000
अलग है पर कुछ ना करने के संबंध में एक ज्ञानार्थक नपुंसकता

1489
01:51:02,000 --> 01:51:06,000
भी होती है कि ना कुछ कर पाने वाली जो हीन भावना है मन

1490
01:51:06,000 --> 01:51:10,080
में उसके लिए क्या करें कि चलो एडिटिंग कर देते हैं। इतना तो कर ही

1491
01:51:10,080 --> 01:51:14,240
सकते हैं। है ना? तो शारीरिक रूप से भले ही नपुंसकता

1492
01:51:14,240 --> 01:51:18,240
ना हो मगर वो मानसिक रूप से कुछ ना कर सकने वाली भावना तो मन में आ ही

1493
01:51:18,240 --> 01:51:22,400
रही है ना। वैचारिक तो है ही है ना नपुंसकता वो

1494
01:51:22,400 --> 01:51:26,480
चीज चलिए ठीक है किसी भी प्रकार के

1495
01:51:26,480 --> 01:51:30,640
वैचारिक मतभेद के निमित्त हम इस वीडियो के अंत में दिए गए WhatsApp पर

1496
01:51:30,640 --> 01:51:34,800
नंबर पर WhatsApp करें और लाइव चर्चा के लिए फॉर्म भरे। ठीक है?

1497
01:51:34,800 --> 01:51:38,800
और एक बात ध्यान रखें कि हां

1498
01:51:38,800 --> 01:51:42,880
एक बात ध्यान रखें कि कोई नहीं

1499
01:51:42,880 --> 01:51:46,960
एक बात ध्यान रखें कि यहां पर आपके साथ अच्छा

1500
01:51:46,960 --> 01:51:48,480
एक सौहार्दपूर्ण

1501
01:51:48,480 --> 01:51:52,480
चर्चा हो सकती है। आप अपने जो स्वरूप भूत लक्षण है

1502
01:51:52,480 --> 01:51:56,800
उनको थोड़ा कंट्रोल में करके आए जो आपके पिंच किए गए शोम शोम शोम सामो

1503
01:51:56,800 --> 01:52:00,880
साशा वाला है ना कि वो जो

1504
01:52:00,880 --> 01:52:05,280
भरा गया आपके अंदर उस पर थोड़ा कंट्रोल करके आइए ठीक

1505
01:52:05,280 --> 01:52:07,840
है।

1506
01:52:07,840 --> 01:52:10,960
ठीक है शास्त्रवाद जी

1507
01:52:10,960 --> 01:52:15,120
जी भैया ठीक है जय श्री राम सभी को

1508
01:52:15,120 --> 01:52:21,120
जय श्री राम जी भैया जी भैया जय श्री राम

1509
01:52:42,950 --> 01:52:46,950
[संगीत]
