1
00:00:00,000 --> 00:00:04,400
पाकिस्तान और भारत का पार्टीशन हुआ। लगभग 52 इयर्स का आपका एक्सपीरियंस [संगीत]

2
00:00:04,400 --> 00:00:08,400
है। जी जी आदि सनातन यह मतलब आदि विरोध कर

3
00:00:08,400 --> 00:00:12,480
रहा है। सनातन का जहां द्वेत है, अनेकता है वहां

4
00:00:12,480 --> 00:00:16,640
अशांति है। तो ये धर्म जो है ना राजे ये सारे हमारे आए

5
00:00:16,640 --> 00:00:18,640
हैं द्वापर युग से। तो क्या असल

6
00:00:18,640 --> 00:00:22,720
समय आने पे ऐसा भी हो सकता है कि हमें आईएस आईएस यदि कहे कि [संगीत] ये धर्म है तो हम

7
00:00:22,720 --> 00:00:24,480
कहे कि हां ये धर्म है।

8
00:00:24,480 --> 00:00:29,200
जैसे इस्लाम है उसमें भी मतभेद हैं। तो हम फिर ये धर्म क्यों कह रहे हैं?

9
00:00:29,200 --> 00:00:33,360
है वो है वो कहे कि तुम्हारा [संगीत] बाप है हमें कैसे मालूम है पिताजी

10
00:00:33,360 --> 00:00:37,920
है ही नहीं जैसे ईश्वर को सर्व्यापक

11
00:00:37,920 --> 00:00:42,580
सर्वव्यापक विभू से एक शब्द आया था गीता में विभूत

12
00:00:42,580 --> 00:00:47,440
[संगीत] जो नेगेटिविटी है वो ईश्वर की सत्ता से बाहर है

13
00:00:47,440 --> 00:00:51,280
मतलब उसके दायरे [संगीत] के बाहर है कोई

14
00:00:51,280 --> 00:00:55,600
व्यक्ति ये कहता है कि मेरे पास भी आओ वो आपके ठीक उलट बात करता है

15
00:00:55,600 --> 00:01:00,080
और वो भी कहता है [संगीत] मेरे पास आके भगवान कि आप मेरी बातों को मानो।

16
00:01:00,080 --> 00:01:04,080
जजमेंट आपकी है। आवाज आती है गलत। आवाज आती है। मगर

17
00:01:04,080 --> 00:01:08,080
प्रॉब्लम यह है ना कि जैसे [संगीत] कोई किसी की बहन के प्रति कुदृष्टि हो

18
00:01:08,080 --> 00:01:08,580
रही है।

19
00:01:08,480 --> 00:01:14,480
हां। है ना? पढ़ना शुरू कर देती है। तो अध पहले से था ना उसके अंदर?

20
00:01:15,980 --> 00:01:20,080
[संगीत] तो सभी को जय श्री राम। आप देख रहे हैं YouTube

21
00:01:20,080 --> 00:01:24,320
चैनल आवान कॉल ऑफ धर्म। मैं शिवश नारायण द्विवेदी श्रीमद् जगुरु

22
00:01:24,320 --> 00:01:29,760
शंकराचार्य पूरी पीठाधीश्वर जी का एक अल्पज्ञ शिष्य। और आज हम

23
00:01:29,760 --> 00:01:33,760
दिल्ली में इस देश की जो राजधानी है वहां पर हैं। और वहां

24
00:01:33,760 --> 00:01:37,760
पर भी जो सबसे बड़े ब्रह्माकुमारी के

25
00:01:37,760 --> 00:01:42,240
जो सेंटर्स हैं उनमें से एक सेंटर राजौरी गार्डन

26
00:01:42,240 --> 00:01:46,320
वहां पर हम इस समय बैठे हुए हैं। यहां की मुख्य संचालिका हैं। दीदी जो

27
00:01:46,320 --> 00:01:50,560
यहां पर देखरेख करती है। सबसे पहले दीदी जी आपको मेरा

28
00:01:50,560 --> 00:01:54,640
ससम्मान अभिवादन। ओम शांति। जी

29
00:01:54,640 --> 00:01:58,640
दीदी थोड़ा सा हमारे दर्शकों को आप अपने बारे में थोड़ा सा बता दें। एक संक्षिप्त

30
00:01:58,640 --> 00:02:04,320
विवरण कुछ यहां के अपने बारे में बता ओम शांति।

31
00:02:04,320 --> 00:02:09,120
यह हमारा प्रजापिता ब्रह्मा कुमारी ईश्वरीय विश्वविद्यालय है

32
00:02:09,120 --> 00:02:13,200
जिसकी स्थापना सन 1936 में सिंध हैदराबाद में

33
00:02:13,200 --> 00:02:17,840
हुई और सेवाओं के लिए 51 में

34
00:02:17,840 --> 00:02:22,400
भारत में आए जब पाकिस्तान और भारत का पार्टीशन हुआ।

35
00:02:22,400 --> 00:02:23,840
माउंट आबू राजस्थान

36
00:02:23,840 --> 00:02:28,000
में। वहां पर पिता श्री प्रजापिता

37
00:02:28,000 --> 00:02:32,240
ब्रह्मा ने लगभग 350 भाई बहनों को बहुत सुंदर

38
00:02:32,240 --> 00:02:36,480
ट्रेनिंग दी। राजयोग मेडिटेशन सिखाया और

39
00:02:36,480 --> 00:02:40,880
फिर 53 में इस संस्था

40
00:02:40,880 --> 00:02:44,960
को और आगे बढ़ाने के लिए सबसे पहले दिल्ली

41
00:02:44,960 --> 00:02:49,280
गंगा के ये अपने जमुना के कंठे पर आए और

42
00:02:49,280 --> 00:02:53,520
यहां पर ईश्वरीय सेवाएं शुरू की। जी जिसमें

43
00:02:53,520 --> 00:02:57,600
यह रजोरी गार्डन जहां पर स्वयं पिता श्री

44
00:02:57,600 --> 00:03:01,840
ब्रह्मा बाबा और मातेश्वरी जगदंबा जो सामने आप देख रहे

45
00:03:01,840 --> 00:03:06,160
हैं यह दोनों ही यहां इस भूमि पर आए भी

46
00:03:06,160 --> 00:03:10,640
और यह भूमि इन्हों को मम्मा बाबा को

47
00:03:10,640 --> 00:03:14,880
एक परिवार ने दान में दी डोनेट

48
00:03:14,880 --> 00:03:19,200
की जिसका एरिया है 2600 गज तो

49
00:03:19,200 --> 00:03:23,840
यहां पर पहले हमारी परम परम आदरणीय रुक्मणी दादी जी, गुलजार

50
00:03:23,840 --> 00:03:28,000
दादी जी और सभी दादियां जो ईश्वरीय सेवा करती

51
00:03:28,000 --> 00:03:32,080
रही। अच्छा अभी दादियां हमारी अव्यक्त

52
00:03:32,080 --> 00:03:36,080
हुई शरीर छोड़ दिया है जी तो लगभग आठ वर्ष हुए

53
00:03:36,080 --> 00:03:39,040
हैं रुक्मणी दादी जी को शरीर छोड़े तो अभी

54
00:03:39,040 --> 00:03:43,440
हम यहां पर ये सारी कारोबार संभालते हैं जी और यहां विद्यालय

55
00:03:43,440 --> 00:03:47,600
में एक्चुअली जनजन को यह परमात्मा का संदेश देने

56
00:03:47,600 --> 00:03:51,680
के लिए सेवन डेज कोर्स कराया जाता है। अच्छा

57
00:03:51,680 --> 00:03:56,480
से डेज कोर्स के अंदर फर्स्ट डे सेल्फ रियलाइजेशन

58
00:03:56,480 --> 00:04:00,560
गॉड रियलाइजेशन और कर्म फिलोसफी क्या

59
00:04:00,560 --> 00:04:04,880
है? साथ-साथ राजयोग मेडिटेशन

60
00:04:04,880 --> 00:04:09,600
क्या है? तो कैसे घर परिवार में रह के

61
00:04:09,600 --> 00:04:13,680
हम सिर्फ एक घंटे के लिए जो भी आने वाले विद्यार्थी आते

62
00:04:13,680 --> 00:04:17,840
हैं उनको राजयोग की शिक्षा देते हैं। वह घर

63
00:04:17,840 --> 00:04:21,920
परिवार में रहकर ही अपना व्यवसाय संभालते हुए यह

64
00:04:21,920 --> 00:04:26,080
राजयोग मेडिटेशन का अभ्यास करते हैं। और

65
00:04:26,080 --> 00:04:31,200
राजयोग मेडिटेशन जो से डेज कोर्स है उसको करने के बाद

66
00:04:31,200 --> 00:04:36,320
डेली हमारी क्लासेस होती हैं जिसको राजयोग

67
00:04:36,320 --> 00:04:40,320
मेडिटेशन और साथ में जो परमपिता परमात्मा

68
00:04:40,320 --> 00:04:44,640
ने प्रजापिता ब्रह्मा के द्वारा महावाक्य उच्चारण

69
00:04:44,640 --> 00:04:48,800
किए उनको हम मुरली कहते हैं। मुरली जी वो

70
00:04:48,800 --> 00:04:53,280
मुरली सुनने के लिए सुबह सभी विद्यार्थी लगभग

71
00:04:53,280 --> 00:04:54,080
100 से भी

72
00:04:54,080 --> 00:04:58,160
ऊपर यहां पर आते हैं। अच्छा एक घंटा छ से सात

73
00:04:58,160 --> 00:05:02,480
मेडिटेशन करते हैं और सात से आठ वो

74
00:05:02,480 --> 00:05:07,440
मुरली सुनते हैं। थर्सडे और संडे

75
00:05:07,440 --> 00:05:11,840
कम से कम 150 200 भाई बहन होते हैं क्योंकि संडे हॉलिडे

76
00:05:11,840 --> 00:05:16,000
होता है और थर्सडे हम सभी भाई

77
00:05:16,000 --> 00:05:20,400
बहनों के लिए सभा में भोग लगाते हैं। परमात्मा को प्रसाद

78
00:05:20,400 --> 00:05:24,480
स्वीकार कराते हैं। फिर सबको प्रसाद देते हैं। फिर

79
00:05:24,480 --> 00:05:28,880
सब अपनेप घरों में जाते हैं। बाकी सारा दिन

80
00:05:28,880 --> 00:05:32,960
नए-नए लोग आते रहते हैं। उनको सब स्पोर्ट्स कराते हैं। जी और

81
00:05:32,960 --> 00:05:37,280
शाम को भी हमारी क्लास होती है। छ से सात योग सॉरी

82
00:05:37,280 --> 00:05:41,440
पांच से छह योग और छ से सात क्लास चलती है।

83
00:05:41,440 --> 00:05:45,520
बहुत सुंदर बहुत सुंदर। दीदी इसमें जैसे आपने बताया कि

84
00:05:45,520 --> 00:05:49,600
यहां पे जितनी भी सीनियर जो हमारी दीदी रही हैं

85
00:05:49,600 --> 00:05:53,920
वो इस सेंटर को उन्होंने संचालित किया है सीधे

86
00:05:53,920 --> 00:05:58,160
जी तो इसमें आपकी नियुक्ति होना ये प्रकट करता है कि कहीं ना कहीं आपका

87
00:05:58,160 --> 00:06:02,320
भी एक बहुत अच्छा अनुभव और ज्ञान के विषय में ब्रह्मा कुमारीज

88
00:06:02,320 --> 00:06:06,640
की ओर से आपका एक स्थान होगा तभी इतना प्रमुख सेंटर

89
00:06:06,640 --> 00:06:09,120
में आपको नियुक्त किया गया जी तो इस संबंध

90
00:06:09,120 --> 00:06:13,360
में थोड़ा सा प्रकाश डालें मतलब आपका जो अपना पर्सनल जो एक कि

91
00:06:13,360 --> 00:06:18,000
आप कैसे यहां पर आई हैं? इतना मतलब इतना महत्वपूर्ण सेंटर आपको

92
00:06:18,000 --> 00:06:23,200
दिया। मैं एक्चुअली वैसे

93
00:06:23,200 --> 00:06:27,600
जन्मभूमि मेरी सहारनपुर की है। हम और दिल्ली में हमारे

94
00:06:27,600 --> 00:06:31,680
मामा जी रहते थे। हम उन्होंने मुझे विशेष ये

95
00:06:31,680 --> 00:06:35,760
ज्ञान देने के लिए अपने पास बुलाया। तो

96
00:06:35,760 --> 00:06:39,760
यह 68 की बात है। 68 में मैंने

97
00:06:39,760 --> 00:06:43,840
इस ज्ञान को सुना और सुनने के बाद मैंने

98
00:06:43,840 --> 00:06:49,120
इसको धारण किया। अच्छा लगा मुझे और उसके पश्चात

99
00:06:49,120 --> 00:06:53,440
74 में क्योंकि यहां जो ब्रह्मा कुमारी बहनें रहती

100
00:06:53,440 --> 00:06:57,600
हैं उनकी पहले बकायदे ट्रेनिंग होती है। ट्रेनिंग में

101
00:06:57,600 --> 00:07:01,840
उनको लगभग एक डेढ़ महीने की ट्रेनिंग होती है। जी और ट्रेनिंग

102
00:07:01,840 --> 00:07:06,000
में सब जो भी यहां की गतिविधियां होती हैं वो

103
00:07:06,000 --> 00:07:10,000
सब ट्रेनिंग में बताई जाती हैं। तो मैंने 74 में ट्रेनिंग की।

104
00:07:10,000 --> 00:07:14,160
74 में ट्रेनिंग कर चुकी हैं? हां। मतलब लगभग आज से 50 साल

105
00:07:14,160 --> 00:07:19,200
पहले 50 साल का जी तो 74

106
00:07:19,200 --> 00:07:23,440
में ट्रेनिंग करके और पहले मैं

107
00:07:23,440 --> 00:07:24,160
यहीं रजोरी

108
00:07:24,160 --> 00:07:28,240
गार्डन पहले हमारा डी7 है किराए पर हम

109
00:07:28,240 --> 00:07:33,040
लोग रहते थे। अच्छा अच्छा वहां पर दादी रुक्मणी जी के पास में आई

110
00:07:33,040 --> 00:07:37,280
और मैं समझो 17 वर्ष की थी।

111
00:07:37,280 --> 00:07:41,680
अच्छा और उनके साथ ही मैं लगभग 50 वर्ष रही हूं हम

112
00:07:41,680 --> 00:07:46,160
और यहां पर जो हमारा यह राजयोग भवन है

113
00:07:46,160 --> 00:07:51,040
यहां पर सभी जो इस ईश्वरीय विश्वविद्यालय की मुख्य

114
00:07:51,040 --> 00:07:55,440
आदि रतन जो सिंध हैदराबाद में प्रजापिता

115
00:07:55,440 --> 00:07:59,760
ब्रह्मा के साथ रही दादी दादा लेखराज जी के साथ रही

116
00:07:59,760 --> 00:08:04,160
हैं तो वो सब यहां क्योंकि एयरपोर्ट पास में है कैंटोमेंट

117
00:08:04,160 --> 00:08:08,400
रेलवे स्टेशन भी पास में है तो यहीं पर आते आते थे। आगे उनको जाना

118
00:08:08,400 --> 00:08:12,400
होता था। इधर ही आते थे और बहुत बड़ी-बड़ी सेवाएं यहां पर

119
00:08:12,400 --> 00:08:17,040
होती थी। मैं कहूंगी कि जब देवगोड़ा

120
00:08:17,040 --> 00:08:21,200
जी प्रधानमंत्री रहे हैं वो भी यहां पर एक बार

121
00:08:21,200 --> 00:08:25,520
आए हैं और क्योंकि माउंट आबू

122
00:08:25,520 --> 00:08:29,520
हमारा बहुत अच्छे महात्माएं सन्यासी देवी

123
00:08:29,520 --> 00:08:33,680
घोड़ा ऐसे करके हां देवघोड़ा जी उनके गुरु जी

124
00:08:33,680 --> 00:08:38,080
यहां पर थे और वो भी ब्रह्मा कुमारी से

125
00:08:38,080 --> 00:08:39,200
संबंध था। हां

126
00:08:39,200 --> 00:08:43,360
क्योंकि माउंट आबू में एक बहुत बड़ा सम्मेलन हुआ था जिसमें

127
00:08:43,360 --> 00:08:47,760
सब जो भी भारत के महात्माएं थे साधु सन्यासी

128
00:08:47,760 --> 00:08:52,080
उन सबको बुलाया गया था। दादी प्रकाश मुनि जी थे मुख्य प्रशासिका

129
00:08:52,080 --> 00:08:56,160
यहां के उनको बुलाया गया था। तो फिर वो यहां उनको

130
00:08:56,160 --> 00:09:00,800
मिलने के लिए आए थे। हम तो उस टाइम में हमारी

131
00:09:00,800 --> 00:09:05,440
दादी जानकी जी जो मुख्य प्रशासिका रह चुकी हैं।

132
00:09:05,440 --> 00:09:09,840
दादी गुलजार जी वो भी मुख्य प्रशासिका रह चुकी हैं। तो ये सभी

133
00:09:09,840 --> 00:09:14,560
दादियां यहां पर आए और बहुत अच्छे से भव्य

134
00:09:14,560 --> 00:09:18,720
उनका स्वागत किया गया। प्रोग्राम हुआ तो इस प्रकार से यहां प्रोग्राम

135
00:09:18,720 --> 00:09:22,800
चलते रहते थे और अभी भी चलते ही है लेकिन

136
00:09:22,800 --> 00:09:27,120
अभी हमारा गुड़गावा में ओआरसीडी

137
00:09:27,120 --> 00:09:31,200
सेंटर बना है जी वो भी लगभग 23 एकड़ में है

138
00:09:31,200 --> 00:09:35,600
तो वहां पर अभी प्रोग्राम चलते हैं वहां सब लोग आते हैं वो बड़ा है

139
00:09:35,600 --> 00:09:39,760
अब वो जब बड़ा हो गया थोड़ा छोटा पड़ गया तो और प्रोग्राम यहां पर थोड़ा

140
00:09:39,760 --> 00:09:44,640
मूल मूल में तो मूल यही है फाउंडेशन मतलब हम ये कह सकते हैं कि

141
00:09:44,640 --> 00:09:48,960
अगर जैसे जितने जितनी भी प्रशासिका दीदी जो रही है सी

142
00:09:48,960 --> 00:09:53,040
और वो यहां पर उन्होंने देखरेख की है और आज वो नहीं है उनकी जगह

143
00:09:53,040 --> 00:09:54,320
पे आप है तो आपके रूप

144
00:09:54,320 --> 00:09:58,480
में वो नहीं देख रहे हैं एक तरीके से और ये ये

145
00:09:58,480 --> 00:10:02,880
भी हम मतलब इसमें भी कोई वो नहीं है मतलब आपका लगभग 52

146
00:10:02,880 --> 00:10:07,040
इयर्स का आपका एक्सपीरियंस है जी इतना अज्ञान है तो मतलब ब्रह्मा

147
00:10:07,040 --> 00:10:11,040
कुमारीज के वरिष्ठ विद्वानों में से एक हैं जिनके साथ आज हम

148
00:10:11,040 --> 00:10:15,280
बैठे हुए हैं। इसमें कोई दो राय नहीं है। बहुत सुंदर परिचय दिया।

149
00:10:15,280 --> 00:10:18,160
अच्छा थोड़ा सा दीदी इसमें आते हैं स्पिरिचुअल

150
00:10:18,160 --> 00:10:22,160
जो बात करता है ब्रह्मा कुमारी इसमें

151
00:10:22,160 --> 00:10:26,240
जैसे ब्रह्मा कुमारी कहता है कि सभी धर्मों

152
00:10:26,240 --> 00:10:30,320
की बात कहता है ब्रह्मा कुमारी तो धर्म क्या है ब्रह्मा कुमारी

153
00:10:30,320 --> 00:10:33,040
के अनुसार

154
00:10:33,040 --> 00:10:37,120
पहले मैं धर्म कहूं तो मैं कौन हूं

155
00:10:37,120 --> 00:10:41,440
हम दो शब्द सुबह से लेकर के रात्रि

156
00:10:41,440 --> 00:10:45,600
तक संबोधित करते हैं। मैं और मेरा तो मैं कहने

157
00:10:45,600 --> 00:10:49,760
वाली सत्ता अलग है और मेरा अलग है।

158
00:10:49,760 --> 00:10:53,920
जैसे साड़ी अलग है और मैं अलग हूं। ऐसे

159
00:10:53,920 --> 00:10:58,240
ही शरीर को चलाने वाली सत्ता एक अति सूक्ष्म

160
00:10:58,240 --> 00:11:02,400
ज्योति बिंदु आत्मा है। एनर्जी है। जी जो इस शरीर

161
00:11:02,400 --> 00:11:08,400
को चलाती है। तो आत्मा

162
00:11:09,120 --> 00:11:13,440
मेन एक पॉइंट है कि जो हम आज इसको

163
00:11:13,440 --> 00:11:18,240
भूले हुए हैं। आप देखेंगे शरीर के अंदर आत्मा नहीं है।

164
00:11:18,240 --> 00:11:22,320
आंखें हैं देख नहीं सकती। मुख है बोल नहीं सकता। कान है सुन नहीं

165
00:11:22,320 --> 00:11:27,040
सकते तो देखने सुनने बोलने हर कर्म करने वाली

166
00:11:27,040 --> 00:11:31,120
वह अति सूक्ष्म ज्योति बिंदु आत्मा ही है तो

167
00:11:31,120 --> 00:11:35,440
आत्मा की जो नॉलेज है वह यहां पर मैं

168
00:11:35,440 --> 00:11:39,680
जैसा अनुभव करती हूं और जैसे मैं जान पाई हूं 50 55

169
00:11:39,680 --> 00:11:43,840
वर्षों में उस परमपिता परमात्मा ने ही नॉलेज दी

170
00:11:43,840 --> 00:11:48,080
है। आज दिन तक हमने शास्त्रों में सुना है थोड़ा आत्मा

171
00:11:48,080 --> 00:11:52,400
है। आत्मा यह करती है आत्मा। लेकिन एक्चुअली अभ्यास जो कराया

172
00:11:52,400 --> 00:11:56,960
जाता है, उसकी प्रैक्टिस जो कराई जाती है, वह हम यहां पर

173
00:11:56,960 --> 00:12:01,040
ना केवल मैं आने वाले विद्यार्थी जो भी यहां के

174
00:12:01,040 --> 00:12:05,040
रेगुलर विद्यार्थी हैं या जो भी हमारी दीदियां हैं, दादियां हैं,

175
00:12:05,040 --> 00:12:09,040
वरिष्ठ हैं, उन्होंने भी यह अभ्यास किया। इवन साकार प्रजापिता

176
00:12:09,040 --> 00:12:13,040
ब्रह्मा ने भी यह अभ्यास किया कि मैं आत्मा हूं और

177
00:12:13,040 --> 00:12:17,040
मेरा यह शरीर है। अगर इस शरीर के अंदर आत्मा नहीं

178
00:12:17,040 --> 00:12:21,040
तो शरीर जड़ है, डेड बॉडी है और इसको जाकर के जला दिया जाता

179
00:12:21,040 --> 00:12:24,960
है। आत्मा अजर है, अमर है, अविनाशी

180
00:12:24,960 --> 00:12:28,960
है। जी जो कभी भी मरती नहीं है। जी आत्मा

181
00:12:28,960 --> 00:12:32,960
के लिए कहा जाता है पर प्रैक्टिकल है। आत्मा को

182
00:12:32,960 --> 00:12:38,960
जल डुबो नहीं सकता। अग्नि जला नहीं सकती। शस्त्राण

183
00:12:41,360 --> 00:12:45,360
जी ऐसे है यह आत्मा जो चोला चेंज करती रहती है

184
00:12:45,360 --> 00:12:49,840
पर अजर अमर अविनाशी है जी तो

185
00:12:49,840 --> 00:12:54,000
यहां पर यही एक मेन नॉलेज दी जाती है और अभ्यास भी साथ-साथ कराया जाता

186
00:12:54,000 --> 00:12:58,080
है। जी यहां सिर्फ यह नहीं है कि आए और सुना और

187
00:12:58,080 --> 00:13:02,080
चले गए। जी। यह एक पाठशाला भी है,

188
00:13:02,080 --> 00:13:06,240
स्कूल है जहां पर हम परमात्मा के एक छोटे बच्चे

189
00:13:06,240 --> 00:13:10,480
हैं। पढ़ाई पढ़ते हैं। सीखते हैं, पढ़ाई पढ़ते हैं।

190
00:13:10,480 --> 00:13:14,960
और जैसे वहां एक पढ़ाई का लक्ष्य होता है जो बच्चे लोग पढ़ते हैं। जी। इंजीनियर

191
00:13:14,960 --> 00:13:19,120
बन जाएंगे, जज बन जाएंगे, वकील बन जाएंगे, डॉक्टर बन जाएंगे। वहां पे

192
00:13:19,120 --> 00:13:23,280
अपना आत्मस्वूप का बोध होना लक्ष्य है। बहुत जरूरी है। और

193
00:13:23,280 --> 00:13:27,360
उस आत्मा का लक्ष्य है मनुष्य से देवता बनना। सामने

194
00:13:27,360 --> 00:13:31,680
चित्र देख रहे हैं। कहते हैं ना नर ऐसी करनी करे नारायण बन जाए।

195
00:13:31,680 --> 00:13:35,760
जी नारी ऐसी करनी करे जो लक्ष्मी बन जाए। जी

196
00:13:35,760 --> 00:13:39,760
पर वो लक्ष्मी नारायण कैसे बनते हो? वो लक्ष्य हमारा

197
00:13:39,760 --> 00:13:40,260
कौन

198
00:13:40,080 --> 00:13:44,320
सा है? वो कौन दे सकता है? वो परमपिता परमात्मा ही दे सकता है। दीदी

199
00:13:44,320 --> 00:13:48,480
ये तो ठीक है। मतलब इसमें क्या है? जैसे हमने बात कही कि

200
00:13:48,480 --> 00:13:52,720
हम आत्मा हैं वास्तविकता में तो ये तो

201
00:13:52,720 --> 00:13:56,720
वो स्थिति है जो हमें धर्म का पालन करने से प्राप्त धर्म

202
00:13:56,720 --> 00:14:00,720
की बात मैं बताने जा रही थी क्योंकि मैं तो आत्मा का धर्म हां

203
00:14:00,720 --> 00:14:05,040
पहले हमें जानना है आत्मा का धर्म जी शांति है क्योंकि

204
00:14:05,040 --> 00:14:09,360
मानव जीवन में शांति चाहता है। धर्म शांति है। कर्म शांति

205
00:14:09,360 --> 00:14:13,360
है। शांति देश से आत्मा आई है। शांति दाता

206
00:14:13,360 --> 00:14:17,360
आत्मा का परमपिता परमात्मा है। और विश्व में शांति स्थापन

207
00:14:17,360 --> 00:14:21,520
करना यह हमारा एक संदेश है। लेकिन

208
00:14:21,520 --> 00:14:25,760
जब आत्मा मनुष्य से देवता बन जाती है तो

209
00:14:25,760 --> 00:14:29,920
वह धर्म है आदि सनातन देवी देवता धर्म। आदि

210
00:14:29,920 --> 00:14:34,160
मींस पुराने ते पुराना सनातन मींस आदि मींस

211
00:14:34,160 --> 00:14:38,560
शुरू का और सनातन मींस पुराने से पुराना का

212
00:14:38,560 --> 00:14:42,720
अर्थ तो है ना शाश्वत नृत्य। शाश्वतना खत्म होता है। लेकिन यह धर्म

213
00:14:42,720 --> 00:14:46,800
इसमें आदि लगा देंगे तो वो तो शुरू हो रहा है। हां लेकिन आदि इसलिए हम लगाते

214
00:14:46,800 --> 00:14:50,880
हैं क्योंकि शुरुआत जो होती है वो यहां से होती है। यह जो समय

215
00:14:50,880 --> 00:14:55,120
चल रहा है नहीं तो सनातन की तो शुरुआत नहीं हुई ना सनातन भी लगा है ना उसमें

216
00:14:55,120 --> 00:14:59,360
आदि सनातन यह मतलब आदि विरोध कर रहा है सनातन शुरू का शुरू

217
00:14:59,360 --> 00:15:03,440
से आदि का मींस शुरू से तो सनातन तो कभी शुरू नहीं हुआ वो

218
00:15:03,440 --> 00:15:07,760
तो नित्य है हां क्योंकि जब अभी देखो रात दिन का खेल है

219
00:15:07,760 --> 00:15:11,920
दुख सुख का खेल है राजजीत का खेल है वो तो वो तो नित्य

220
00:15:11,920 --> 00:15:15,920
समाप्त नहीं होती है सृष्टि भी तो शुरू फिर शुरू क्यों कह रहे हैं इसको आदि क्यों

221
00:15:15,920 --> 00:15:20,080
कह रहे हैं आदि इसीलिए कह रहे हैं क्योंकि वर्तमान समय जो पुरानी पुरानी

222
00:15:20,080 --> 00:15:24,160
दुनिया है कलयुग घोर कलयुग है। ऐसी

223
00:15:24,160 --> 00:15:28,320
दुनिया जब हो जाती है तब उस परमपिता परमात्मा को सृष्टि

224
00:15:28,320 --> 00:15:32,400
पर यह वाला जो राउंड शुरू हुआ है उसकी वजह से शुरुआत है वो

225
00:15:32,400 --> 00:15:36,560
सनातन ही है वो शादी की वैसे आवश्यकता नहीं मूल रूप से वो सनातन ही

226
00:15:36,560 --> 00:15:40,720
तो कहने में आ जाता है क्योंकि शुरुआत यहां से होती है इस इस राउंड की

227
00:15:40,720 --> 00:15:44,800
लेकिन वो तो सदा है ही है हां वो सदा है वही सदा है विरोध कर रहा है ना

228
00:15:44,800 --> 00:15:48,800
आदि हां आदि नहीं कह करके आप समझ लीजिए कि सनातन

229
00:15:48,800 --> 00:15:53,360
कह लीजिए सनातन देवी देवता धर्म जी जी अच्छा तो

230
00:15:53,360 --> 00:15:57,440
दीदी इसमें जैसे ये बात आई ना कि शांति उसका धर्म है आत्मा का

231
00:15:57,440 --> 00:16:01,600
आत्मा का तो एक्चुअली है क्या जितनी मेरी थोड़ी सी जानकारी

232
00:16:01,600 --> 00:16:05,920
है कि शांति तो हमारा गोल है हम

233
00:16:05,920 --> 00:16:09,920
जैसे नारायण बनकर के क्या प्राप्त होगा शांति गोल हैस लक्ष्मी बन

234
00:16:09,920 --> 00:16:10,420
के क्या

235
00:16:10,240 --> 00:16:14,400
प्राप्त होगा शांति आत्मा अपने आत्म स्वरूप को जान के क्या प्राप्त

236
00:16:14,400 --> 00:16:19,200
होगा शांति तो शांति हमारा गोल है जी और

237
00:16:19,200 --> 00:16:23,200
क्या कहते हैं जैसे आपने कहा ऐसी करनी करिए जिससे नर नारायण होए हमने

238
00:16:23,200 --> 00:16:27,200
कहा तो ये जो करनी है इसमें मैं मतलब

239
00:16:27,200 --> 00:16:31,360
जो धर्म शब्द है वो ज्यादा लागू होता है कि धर्म क्या है करना क्या है करना नहीं क्या

240
00:16:31,360 --> 00:16:35,520
है तो मतलब धर्म क्या है ब्रह्मा आपके अनुसार ब्रह्मा कुमारीज

241
00:16:35,520 --> 00:16:39,760
के अनुसार क्योंकि शांति तो हमारा लक्ष्य है हां लक्ष्य तो

242
00:16:39,760 --> 00:16:43,840
का जब पालन करेंगे तो शांति मिलेगी वो तो स्थिति है। जैसे हम देवता बन

243
00:16:43,840 --> 00:16:48,240
गए जैसे मान लीजिए देवी देवता को देवत्व को प्राप्त कर लिया देवी देवत्व

244
00:16:48,240 --> 00:16:52,320
को प्राप्त कर लिया तो यह तो हमें फिर उसके बाद धर्म की आवश्यकता है ही नहीं

245
00:16:52,320 --> 00:16:56,800
है तो पहुंच गए जहां पहुंचना तो ये जो पहुंचने वाली बात है इसका कैसे

246
00:16:56,800 --> 00:17:00,800
किया है धर्म क्या है नहीं इसका धर्म तो माना आत्मा का

247
00:17:00,800 --> 00:17:04,880
धर्म शांति हुआ और लक्ष्य हुआ देवता धर्म

248
00:17:04,880 --> 00:17:08,960
वही माना देखो अभी कोई धर्म पूछेंगे आप अनेकानेक

249
00:17:08,960 --> 00:17:14,640
धर्म है इस संसार में अनेकानेक धर्म वही वही मैं

250
00:17:14,640 --> 00:17:18,800
ऐसी किस चीज किसी मेंटालिटी को हम धर्म कब और किस आधार पे कह रहे हैं वही पूछ

251
00:17:18,800 --> 00:17:22,880
रहा हूं। धर्म माना जहां एकता हो एक भाषा

252
00:17:22,880 --> 00:17:25,360
एक कुल एक राज्य सत्ता एक के हाथ

253
00:17:25,360 --> 00:17:29,760
में हो। जहां कोई दुख का नाम निशान ना हो, लड़ाई ना हो, झगड़ा ना हो,

254
00:17:29,760 --> 00:17:34,000
घर-घर में कोई मतभेद ना हो, भाषा भेद ना हो, जाति

255
00:17:34,000 --> 00:17:38,000
भेद ना हो। उसको हम धर्म कहते हैं। यह तो दीदी फिर से

256
00:17:38,000 --> 00:17:42,080
वही हो गया ना कि हम लोग जब ऐसा करेंगे तो हमें यह प्राप्त होगा

257
00:17:42,080 --> 00:17:46,320
कि लड़ाई नहीं होगी। हां तो यही धर्म हो गया ना हमारा वो फिर गोल

258
00:17:46,320 --> 00:17:50,880
हो गया। गोल हुआ हमारा शांति की प्राप्ति। क्योंकि उस

259
00:17:50,880 --> 00:17:54,880
युग में शांति होगी। क्यों होगी शांति?

260
00:17:54,880 --> 00:17:59,040
क्योंकि एकता होगी। जहां द्वेत है, अनेकता है

261
00:17:59,040 --> 00:18:03,120
वहां अशांति है। क्योंकि जब अभी हम समझो दो

262
00:18:03,120 --> 00:18:07,280
जने हैं। मतलब जैसे किसी मेंटालिटी को धर्म कहा है।

263
00:18:07,280 --> 00:18:11,440
इसलिए कहा है कि वहां पर मतभेद नहीं है। जी और जहां

264
00:18:11,440 --> 00:18:15,520
मतभेद है हम उसको धर्म नहीं कहते। अंडरस्टुड? तो फिर हम

265
00:18:15,520 --> 00:18:19,840
जैसे कई स्टेटमेंट जैसे आते हैं कि हिंदू मुस्लिम भी धर्म है।

266
00:18:19,840 --> 00:18:24,160
तो जैसे इस्लाम है उसमें भी मतभेद हैं। तो हम फिर ये धर्म क्यों कह रहे हैं इसको?

267
00:18:24,160 --> 00:18:28,240
एक्चुअली हम इसको नहीं कहते। अगर

268
00:18:28,240 --> 00:18:32,240
मैं हूं मैंने मुस्लिम के परिवार में जन्म लिया। मैं

269
00:18:32,240 --> 00:18:36,320
मुस्लिम कहलाई। जी। कहीं मैं गुजरातियों के परिवार

270
00:18:36,320 --> 00:18:42,320
में पैदा हुई तो गुजराती कहलाई और कहीं मैं

271
00:18:42,480 --> 00:18:46,880
और किसी धर्म बुद्धिस्ट के यहां जन्म लिया तो मैं बुद्धिस्ट कहलाई

272
00:18:46,880 --> 00:18:50,880
लेकिन वास्तव में ये धर्म है ही नहीं अच्छा हम क्या कहते हैं

273
00:18:50,880 --> 00:18:55,520
हिंदू मुस्लिम सिख ईसाई आपस में सब भाईाई

274
00:18:55,520 --> 00:18:59,760
जब हम शरीर में प्रवेश करते हैं धर्म हमने बनाए हैं मनुष्य

275
00:18:59,760 --> 00:19:03,920
ने बनाए पर परमात्मा ने कोई धर्म नहीं बनाया उस तरह

276
00:19:03,920 --> 00:19:08,160
का हम सभी आत्माएं एक ही पिता की संतान है। क्या कहते हैं? हे

277
00:19:08,160 --> 00:19:12,320
परमपिता परमात्मा हम सब हैं तेरी आत्मा।

278
00:19:12,320 --> 00:19:16,880
पापों का करो खात्मा हम सब बने धर्मात्मा।

279
00:19:16,880 --> 00:19:21,040
धर्म का अर्थ होता है धारणा। जो हमारे जीवन में धारणाएं हैं

280
00:19:21,040 --> 00:19:25,360
जैसे परिटी है। रॉयल्टी है।

281
00:19:25,360 --> 00:19:29,360
इसी तरह से जो हम व्यवहार हमें धारण करना है। वो

282
00:19:29,360 --> 00:19:33,600
वो धर्म है हमारा। जो हम अच्छाइयों को धारण करते हैं, दिव्यता

283
00:19:33,600 --> 00:19:37,600
को धारण करते हैं, पावनता को धारण करते हैं, अलौकिकता को धारण

284
00:19:37,600 --> 00:19:41,840
करते हैं। जिससे कि शांति प्राप्त जो गोल है फाइनली ऑटोमेटिकली होगी वो जी

285
00:19:41,840 --> 00:19:45,840
वो जो गोल है, जो हमारा लक्ष्य है वो हमें ऑटोमेटिकली मिलेगा। तो

286
00:19:45,840 --> 00:19:50,080
कहना चाहिए अगर सनातन धर्म है हम उसे सनातन से जोड़ रहे हैं।

287
00:19:50,080 --> 00:19:54,160
यानी कि वो धारणाएं जिन्हें हम कभी जिन्हें हम लॉन्ग टाइम तक

288
00:19:54,160 --> 00:19:57,760
धारण कर पाए। ऐसी धारणाएं सनातन धर्म कहलाएंगी। वह वह

289
00:19:57,760 --> 00:20:02,080
कहलाती है। वह धारणाएं जिन्हें हम हमेशा के लिए धारण नहीं कर सकते।

290
00:20:02,080 --> 00:20:06,240
अह जैसे मान लीजिए मनुष्य में मनुष्य रूप में हूं मैं तो मैं जिन धारणाओं

291
00:20:06,240 --> 00:20:10,320
को अ धारण नहीं कर सकता हूं। जी मान लीजिए कि

292
00:20:10,320 --> 00:20:14,320
मेरे अंदर कुछ गलत चीजें आ रही है। चीजें जो कि ह्यूमैनिटी के

293
00:20:14,320 --> 00:20:18,480
विरुद्ध है। जाहिर सी बात है हम बहुत देर तक उसको धारण नहीं कर पाएंगे। जैसे

294
00:20:18,480 --> 00:20:22,720
कि व्यभचार, मांसाहार, झूठ बोलना, चोरी करना जितने जो पाप

295
00:20:22,720 --> 00:20:26,800
कर्म आदि हैं उनको हम धारण नहीं कर पाएंगे। बिल्कुल। इसलिए वो

296
00:20:26,800 --> 00:20:30,800
सब सनातन धर्म कहलाए कि उसको जो है सस्टेन तरीके से

297
00:20:30,800 --> 00:20:35,280
हम धारण कर सकते हैं। जी हां। तो फिर जो ऐसी मेंटालिटीज

298
00:20:35,280 --> 00:20:39,440
हैं जो कि ऐसी चीजें बोल रही हैं जैसे आपने बौद्ध

299
00:20:39,440 --> 00:20:43,520
बुद्ध का नाम लिया हम तो बुद्ध वाले तो कहते हैं कि वो नास्तिक

300
00:20:43,520 --> 00:20:47,680
थे। बुद्ध तो ईश्वर को माना ही नहीं उन्होंने। हम और इस्लाम

301
00:20:47,680 --> 00:20:52,240
का भी कुछ ऐसी चीजें हैं जिनको हम धारण नहीं कर सकते। जैसे कि

302
00:20:52,240 --> 00:20:56,560
जैसे मैंने आपको दीदी बोला तो हमारे यहां पर क्या है भारतीय परंपरा

303
00:20:56,560 --> 00:21:00,640
के अनुसार कि दीदी अगर बोल दिया है तो आपको दूसरी दृष्टि से नहीं देखा जा

304
00:21:00,640 --> 00:21:04,640
सकता। ये परंपरा है। मगर उस वहां पर कुछ ऐसा भी कहा गया

305
00:21:04,640 --> 00:21:08,720
है कि यदि आपने मुंह से कोई रिश्ता बनाया तो उसकी वैल्यू नहीं है।

306
00:21:08,720 --> 00:21:12,720
आपकी जब आप माता के गर्भ से जन्म होगा उसी के अनुसार जो रिश्ते हैं

307
00:21:12,720 --> 00:21:13,280
वही

308
00:21:13,280 --> 00:21:17,360
उन्हीं की वैल्यू है और मुंह से कही हुई बातों के उलट आप व्यवहार कर सकते हो।

309
00:21:17,360 --> 00:21:21,360
जी तो जिन धारणाओं को हम लंबे समय तक धारण नहीं कर पा रहे

310
00:21:21,360 --> 00:21:25,600
उनको भी हम धर्म क्यों कह रहे हैं? नहीं तो मनुष्य जब धर्म

311
00:21:25,600 --> 00:21:29,840
भ्रष्ट कर्म भ्रष्ट हो जाता है खुद को भूल जाता है। परमात्मा

312
00:21:29,840 --> 00:21:34,160
को भूल जाता है तो ये सारी धारणाएं भी भूल जाता है क्योंकि कोई हमें सिखाने

313
00:21:34,160 --> 00:21:38,240
वाला नहीं है। ये कलयुगी दुनिया में ये सब होता है। नहीं मगर

314
00:21:38,240 --> 00:21:42,240
वहां तो मोहम्मद जी ने कहा है ना कि वो हां वो ये धर्म जो

315
00:21:42,240 --> 00:21:46,320
है ना राजे ये सारे हमारे आए हैं द्वापर युग से। नहीं

316
00:21:46,320 --> 00:21:50,320
लेकिन इसको फिर धर्म कहना उचित है इस्लाम को जो कह रहे हैं

317
00:21:50,320 --> 00:21:54,560
क्योंकि धर्म स्थापक तो है ना उन आत्माओं ने परमधाम से आकर

318
00:21:54,560 --> 00:21:58,720
के धर्म की स्थापना तो की ना धर्म तो हम उसे कह रहे हैं ना जिसको हम नहीं

319
00:21:58,720 --> 00:22:02,960
उनके हिसाब से तो कहेंगे ना हम नहीं कहे

320
00:22:02,960 --> 00:22:07,120
मान लो लेकिन वो जो आए हैं धर्म स्थापक उन्होंने अपने-अपने

321
00:22:07,120 --> 00:22:11,280
भिन्न भिन्न भिन्न-भिन्न धर्मों की स्थापना तो की नहीं मगर दीदी इससे ऐसा नहीं लगता

322
00:22:11,280 --> 00:22:15,280
कि जैसे कोई भी व्यक्ति जो आएगा और मान लीजिए उसका एक गुट बन

323
00:22:15,280 --> 00:22:19,440
जाए बहुत सारे लोग उसे मानने वाले हो जाए और वो कोई भी धारणा कहेगा धारणा

324
00:22:19,440 --> 00:22:23,520
को फैला रहा होगा उचित अनुचित ना देखते हुए वो अगर कह रहा है धर्म

325
00:22:23,520 --> 00:22:27,920
है तो हम उसको धर्म कह दें ऐसा नहीं हो जाएगा इससे नहीं हम नहीं भी कहेंगे

326
00:22:27,920 --> 00:22:28,420
लेकिन वो तो

327
00:22:28,320 --> 00:22:32,320
कहेंगे ना हमारे ना कहने से तो वो मानेंगे ही नहीं वही मैं कह रहा हूं कि

328
00:22:32,320 --> 00:22:36,560
हमारे ये हो गए माने द्वापर से लेकर के कलयुग

329
00:22:36,560 --> 00:22:40,960
एंड तक अनेक धर्म आए जो सिर्फ धर्म स्थापक कहलाए

330
00:22:40,960 --> 00:22:45,200
तो वो तो धर्म है ही धर्म आत्मा कहलाए परमात्मा वो नहीं बन सकते

331
00:22:45,200 --> 00:22:49,600
हैं। परमात्मा जो आते हैं जब इस सृष्टि रूपी रंगमंच पर ज्योति

332
00:22:49,600 --> 00:22:53,760
बिंदु परमात्मा वो एक धर्म की स्थापना करते हैं। अनेक को एकता

333
00:22:53,760 --> 00:22:58,000
में ले आते हैं। जो सनातन धर्म हम कह रहे हैं उसकी

334
00:22:58,000 --> 00:23:02,000
वो परमा परमात्मा आकर के स्थापना करते हैं। इंसान

335
00:23:02,000 --> 00:23:06,160
भिन्न-भिन्न अपना वो आप आए आपने धर्म स्थापन कर दिया। वो आए उन्होंने अपना

336
00:23:06,160 --> 00:23:10,320
कर लिया। आपने कहा ना कि बुद्ध जो है वो बौद्ध है। उनका मानना है कि

337
00:23:10,320 --> 00:23:14,560
दुनिया में कोई सनातन सत्ता है ही नहीं। हां वो फिर अपनेप उसका मानते

338
00:23:14,560 --> 00:23:18,560
हैं ना उनको हम जब वो ईश्वर को स्वीकार ही नहीं कर रहे

339
00:23:18,560 --> 00:23:22,640
तो हम उसे धर्म कैसे कह रहे हैं हम नहीं कह रहे हैं वो कह रहे हैं वो कह रहे

340
00:23:22,640 --> 00:23:26,720
हैं तो हमारे हिसाब से है या नहीं है वो हम उनको गलत नहीं कह रहे उनकी

341
00:23:26,720 --> 00:23:30,880
बात को हां अपमान भी नहीं कर रहे हैं क्योंकि

342
00:23:30,880 --> 00:23:35,040
परमात्मा ने हमें सिखाया किसी का भी निरादर अपमान किसी

343
00:23:35,040 --> 00:23:39,120
की कमी कमजोरी हमें नहीं देखने जो हैं जैसे हैं वो चल

344
00:23:39,120 --> 00:23:43,120
रहे हैं लेकिन हमें अपने जीवन को धारणा युक्त बनाने तो दीदी

345
00:23:43,120 --> 00:23:43,620
धर्म

346
00:23:43,440 --> 00:23:47,600
अर्थात धारणा इस तरीके से जैसे नेपोलियन बोनापार्ट आए हिटलर

347
00:23:47,600 --> 00:23:52,240
आए जिन्हें एंटी क्राइस्ट तक कहा गया बहुत ज्यादा नशंसता की गईंगा

348
00:23:52,240 --> 00:23:56,960
बिल्ला आए या फिर आईएसआईएस जैसी जो खंखार आतंकवादी

349
00:23:56,960 --> 00:24:01,440
जो संस्थाएं हैं उनके हिसाब से वो जो कर रहे हैं वो भी ठीक है और

350
00:24:01,440 --> 00:24:05,440
धर्म की परिभाषा यही है जो करने में ठीक है वही धर्म है तो क्या

351
00:24:05,440 --> 00:24:09,520
समय आने पे ऐसा भी हो सकता है कि हमें आईएस आईएस यदि कहे कि ये धर्म है तो हम

352
00:24:09,520 --> 00:24:13,520
कहे कि हां ये धर्म है मतलब हमारा हमारा कोई क्राइटेरिया होना चाहिए ना धर्म

353
00:24:13,520 --> 00:24:17,520
को धर्म कहने का ये बात है क्योंकि जब ये कलयुग आता है

354
00:24:17,520 --> 00:24:21,520
ना तो कलयुग में अनेकता आती है हमारा एक चार

355
00:24:21,520 --> 00:24:25,760
है ये भी एक आप ऐसे खार लोग हैं ये सब है वो सब करके गए हैं

356
00:24:25,760 --> 00:24:30,160
तो ये कलयुग में माना एक मैं क्या कहूंगी कि होना जरूरी

357
00:24:30,160 --> 00:24:34,240
है क्योंकि जब रात हो जाती है ना अज्ञानता की अंधकार छा जाता है

358
00:24:34,240 --> 00:24:38,240
संसार में तो ये सब आते हैं अपना अपना कार्य क्योंकि

359
00:24:38,240 --> 00:24:42,960
सृष्टि एक नाटक है नाटक में हम सभी एक्टर हैं

360
00:24:42,960 --> 00:24:47,120
और नाटक में दुख सुख का हार जीत का रात दिन का नहीं वो

361
00:24:47,120 --> 00:24:51,120
आते तो हैं पर वो फिर ये जो खंकार है ये आए इनको हम धर्म कहें क्या

362
00:24:51,120 --> 00:24:55,120
कहें तो वो अपना धर्म म अपना ये कार्य तो करते ही हैं ना

363
00:24:55,120 --> 00:24:58,880
मतलब एक तरीके से हम बस उस मामले में मौन है साक्षी

364
00:24:58,880 --> 00:25:03,120
बस हम साक्षी हो के देखें जैसे ड्रामा को हम देखते हैं 3 घंटे का ड्रामा

365
00:25:03,120 --> 00:25:07,200
है उसमें कोई मर्डर भी कर रहा है कोई किसी को सुख भी दे रहा है कोई

366
00:25:07,200 --> 00:25:11,360
लड़ाई भी जैसे कि मान लीजिए मर्डर करना अधर्म अधर्म

367
00:25:11,360 --> 00:25:15,440
है। मगर कोई कह रहा है कि यह धर्म है। उसको मानने वाले लोग बहुत हैं।

368
00:25:15,440 --> 00:25:19,440
तो क्या हम उसे धर्म कहेंगे? नहीं, हम उसको धर्म नहीं कह सकते। वही तो यहां हो रहा

369
00:25:19,440 --> 00:25:23,600
है। मुंह बोली बहन से जैसे मुंह बोले स्टोक को हम मानते हैं कि ये धर्म

370
00:25:23,600 --> 00:25:27,680
है और उससे मुकरना अधर्म है। मगर हम फिर भी इस्लाम को कह रहे हैं कि वो

371
00:25:27,680 --> 00:25:32,000
धर्म है। ये एक्चुअली ये है ना क्योंकि वो आत्माएं आई हैं। वो कर रही हैं। हमको

372
00:25:32,000 --> 00:25:36,080
ये धारणा अपने मन में बना करके रखनी है। कि वो क्या है क्या नहीं।

373
00:25:36,080 --> 00:25:40,240
हम मन की धारणा तो रखेंगे मगर कह देंगे कि हां ये भी धर्म है। वो भी धर्म है।

374
00:25:40,240 --> 00:25:44,320
क्या क्या है? दुनिया कह रही है तो हमको कहने में अच्छा ठीक है। मैं

375
00:25:44,320 --> 00:25:48,400
समझती हूं कि क्या कह सकते हैं उसको हम? कोई

376
00:25:48,400 --> 00:25:52,640
नहीं कोई नहीं। बहुत अच्छे। अच्छा दीदी इसमें थोड़ा सा आगे चलें कि

377
00:25:52,640 --> 00:25:57,120
आजकल के युवाओं के द्वारा एक वो आता है। प्रश्न

378
00:25:57,120 --> 00:26:01,280
आता है कि ये ईश्वर है। इसको सिद्ध कैसे किया? मतलब ईश्वर है। इसको कैसे हम

379
00:26:01,280 --> 00:26:05,520
स्वीकार करें? ईश्वर नाम की कोई चीज भी है? यह

380
00:26:05,520 --> 00:26:09,600
तो 100% ईश्वर क्योंकि

381
00:26:09,600 --> 00:26:13,600
देखो जैसे इस संसार में चिड़िया का

382
00:26:13,600 --> 00:26:14,240
बच्चा चिड़िया

383
00:26:14,240 --> 00:26:18,320
जैसा घोड़े का बच्चा घोड़े जैसा इंसान का बच्चा इंसान

384
00:26:18,320 --> 00:26:22,720
जैसा जो मैं आत्मा हूं

385
00:26:22,720 --> 00:26:26,880
देखने में नहीं आती कभी भी आत्मा ने गर्भ में प्रवेश

386
00:26:26,880 --> 00:26:31,040
किया किसी ने देखा

387
00:26:31,040 --> 00:26:35,680
जब आत्मा शरीर से निकल जाती है तब देखा आंख

388
00:26:35,680 --> 00:26:39,840
खुली रह गई कहा आंख से निकल गई मुख खुला रह गया मुख से निकल गई

389
00:26:39,840 --> 00:26:44,240
कैसी है क्या है यह कोई नहीं देख पाता जी क्योंकि आत्मा अति

390
00:26:44,240 --> 00:26:48,240
सूक्ष्म ज्योति बिंदु है तो आत्मा का पिता है परमपिता

391
00:26:48,240 --> 00:26:50,640
परमात्मा

392
00:26:50,640 --> 00:26:54,640
हम आत्माओं का पिता परमपिता परमात्मा है वो

393
00:26:54,640 --> 00:26:59,360
परमपिता परमात्मा की हम संतान है तो आपने क्वेश्चन किया

394
00:26:59,360 --> 00:27:03,440
कि ईश्वर है ईश्वर है या नहीं ये सिद्ध सिद्ध कैसे

395
00:27:03,440 --> 00:27:07,600
होता है? मतलब कैसे मान ले कि ईश्वर है? हां, हम लोग तो यहां पर यह

396
00:27:07,600 --> 00:27:12,960
मानते हैं क्योंकि आत्मा का पिता परमपिता परमात्मा है। देखो जो नहीं मानता

397
00:27:12,960 --> 00:27:16,960
और उसको कुछ ऐसे हम बात कर रहे हैं कुछ भी कह रहे हैं वो

398
00:27:16,960 --> 00:27:21,040
नहीं उसका आंसर दे पा रहा है या नहीं वो कुछ कर पा रहा है तो क्या

399
00:27:21,040 --> 00:27:25,120
कहता है ईश्वर ईश्वर पर छोड़ दो। ऊपर वाला जाने वो मालिक

400
00:27:25,120 --> 00:27:29,280
जाने वो मालिक जाने उसके लिए ही कहते हैं ना।

401
00:27:29,280 --> 00:27:33,280
तो इसलिए उसके बिना तो ये संसार चल ही नहीं सकता

402
00:27:33,280 --> 00:27:37,520
है। परमपिता परमात्मा चलना ही यह प्रमाण

403
00:27:37,520 --> 00:27:41,840
देता है कि इस सृष्टि को चलाने वाला कोई है। उसने ही कोई नई दुनिया स्थापना

404
00:27:41,840 --> 00:27:46,000
यह वाली दुनिया उसने नहीं बनाई जो हम कहे दुख सुख परमात्मा दे रहा है। कोई मर्डर

405
00:27:46,000 --> 00:27:50,320
कर रहा हो परमात्मा कर रहा है। कोई किसी को दुख दे रहा है। परमात्मा दे रहा है। नहीं

406
00:27:50,320 --> 00:27:54,320
परमात्मा ने जब यह सृष्टि बनाई थी नई सृष्टि

407
00:27:54,320 --> 00:27:58,400
बनाई थी। स्वर्ग बनाया था। पैराडाइज बनाया था। और बनाने वाला भी

408
00:27:58,400 --> 00:28:02,720
वही है क्योंकि सृष्टि का डायरेक्टर रचयिता

409
00:28:02,720 --> 00:28:06,960
हम कौन हो सकता है? परमात्मा ही हो सकता है ना। इतना सारा

410
00:28:06,960 --> 00:28:10,960
विश्व है इतनी सारी प्रकृति है। यानी कि क्योंकि

411
00:28:10,960 --> 00:28:15,040
बहुत सुंदर संसार बना इसलिए उसको बनाने वाला कोई एक हो

412
00:28:15,040 --> 00:28:19,040
सकता है। कोई होगा ना जिसकी रचना इसकी सुंदर वो कोई लॉजिकली

413
00:28:19,040 --> 00:28:23,840
आंसर नहीं है कि ईश्वर है ये कैसे ये लॉजिकली है क्योंकि

414
00:28:23,840 --> 00:28:27,920
जब मैं आत्मा हूं तो मेरा बाप भी होगा। क्या कहते हैं? तुम मात पिता

415
00:28:27,920 --> 00:28:32,240
हम बालक तेरे तुमरी कृपा ते सुख घनेरे हम ऐसे थोड़ी कहते हैं। हम तो अनुभव

416
00:28:32,240 --> 00:28:36,480
करते हैं। मतलब कोई चीज एक्सिस्ट कर रही है तो इसका मतलब उसका कोई पिता होगा। अंडरस्टुड

417
00:28:36,480 --> 00:28:41,600
ऐसे तो ये ये एक्चुअली ये काउंटर आता है। वो ये कहते हैं कि

418
00:28:41,600 --> 00:28:44,640
अगर ये वाली बात मानेंगे तो फिर परमपिता का भी कोई परमपिता

419
00:28:44,640 --> 00:28:48,640
होगा। नहीं यही है। यही यही बात है। मैं यही आना चाह

420
00:28:48,640 --> 00:28:53,440
रही जी जी देखो हर आत्मा धर्मात्मा हो सकता है

421
00:28:53,440 --> 00:28:57,440
और वो महात्मा हो सकता है

422
00:28:57,440 --> 00:29:01,680
लेकिन परमात्मा आप संसार में किसी को भी नहीं

423
00:29:01,680 --> 00:29:06,000
कह सकते परमात्मा का कोई पिता नहीं हो सकता है

424
00:29:06,000 --> 00:29:10,160
जितने भी देवी देवताएं हुए मतलब ये है कि परमात्मा

425
00:29:10,160 --> 00:29:14,320
है ही वो जिसका कोई पिता नहीं है हां जिसके कोई मात पिता नहीं है

426
00:29:14,320 --> 00:29:18,480
सबका मात पिता है वो सर्व आत्माओं का पिता फिर बात वही

427
00:29:18,480 --> 00:29:22,720
यही आ जाती है ना कि सर्व आत्माओं का पिता किस रूप में है कि आत्माओं को उसने

428
00:29:22,720 --> 00:29:26,880
बनाया है। आत्माओं को नहीं बनाया। आत्माओं को आकर

429
00:29:26,880 --> 00:29:30,880
के परिवर्तन किया। पावन बनाया। आत्मा तो बनी बनाई

430
00:29:30,880 --> 00:29:35,040
है। आत्मा का कहा ना होना चाहिए। चिंता भी नहीं है। एक तरीके से देखा

431
00:29:35,040 --> 00:29:39,120
जाए तो मतलब जो हम कह रहे हैं तो है नहीं जैसे हमने कहा

432
00:29:39,120 --> 00:29:43,360
कि हम है इससे पता लगता है कि हमें बनाने वाला कोई है। हां तो हम आत्म

433
00:29:43,360 --> 00:29:47,600
स्वरूप है। देखो आत्मा को बनाया नहीं जाता। परमात्मा को भी बनाया

434
00:29:47,600 --> 00:29:51,840
नहीं जाता। लेकिन आत्मा जब पतित बन जाती है, विकारी

435
00:29:51,840 --> 00:29:56,000
बन जाती है, दुखी हो जाती है, अशांत हो जाती है तो परमात्मा

436
00:29:56,000 --> 00:29:59,680
आकर के आत्माओं को पतित से पावन बनाता है। यानी

437
00:29:59,680 --> 00:30:03,760
हमारे एक्सिस्टेंस से उसका सिद्ध नहीं हो रहा है। नहीं वो नहीं होता है। हम है तो

438
00:30:03,760 --> 00:30:08,320
इसलिए वो है। हां हम है तो इसलिए है ऐसा नहीं है। वो आकर के विश्व परिवर्तन

439
00:30:08,320 --> 00:30:12,480
करता है। ये तो हमारा क्लेम है दीदी। फिर हम कहे क्या मतलब कि कि

440
00:30:12,480 --> 00:30:16,480
ईश्वर है है वो है वो कोई कहे कि तुम्हारा

441
00:30:16,480 --> 00:30:20,480
बाप है मैं कैसे मानूं मेरा पिताजी है ये है ना क्योंकि मुझे

442
00:30:20,480 --> 00:30:24,560
पैदा किया है लेकिन यहां पैदा वाली बात नहीं आती है क्योंकि परमात्मा

443
00:30:24,560 --> 00:30:28,880
पॉइंट ऑफ लाइट ज्योति बिंदु सर्वशक्तिमान ऑलमाइटी अथॉरिटी

444
00:30:28,880 --> 00:30:32,880
है जी तो दीदी ये बनाया नहीं जाता ना वो बनता जैसे

445
00:30:32,880 --> 00:30:36,880
ये वाली चीज है ना कि है तो मतलब कि मेरा बाप है तुम कहो

446
00:30:36,880 --> 00:30:41,120
मेरे पिता है तो है तो उसमें कहेंगे ठीक है तुम्हारे तुम्हारे पिता है। फिर आप ये क्यों कह रहे हो

447
00:30:41,120 --> 00:30:45,280
तुम्हारे भी है। सबके हैं। हां नहीं क्योंकि वो आत्माओं का है। बॉडी का वो

448
00:30:45,280 --> 00:30:49,360
पिता नहीं है। वो हम बॉडी का नहीं है। बॉडी का मैंने आपको पहले ही

449
00:30:49,360 --> 00:30:53,520
बताया चिड़िया का बच्चा चिड़िया जैसा। घोड़े का बच्चा घोड़े जैसा। मनुष्य

450
00:30:53,520 --> 00:30:57,680
का बच्चा मनुष्य जैसा है। आपके पिता अलग हैं, उनके अलग हैं। उनके अलग

451
00:30:57,680 --> 00:31:01,760
है, मेरे अलग हैं। लेकिन जिसको कहा जाता है

452
00:31:01,760 --> 00:31:05,840
सर्व आत्माओं का, सर्व धर्मात्माओं का, सर्व देवी देवताओं

453
00:31:05,840 --> 00:31:10,080
का वो पिता है। पॉइंट ऑफ लाइट ज्योति बिल वो सदा है।

454
00:31:10,080 --> 00:31:14,240
उसको सदा शिव कहते हैं। सदा शिव

455
00:31:14,240 --> 00:31:14,800
है।

456
00:31:14,800 --> 00:31:18,800
आजकल बच्चे क्या है? लॉजिक मानते हैं कि हमको भाई हां। लेकिन यहां

457
00:31:18,800 --> 00:31:23,200
पर हमारे शिशु विश्वविद्यालय में जब हम ये एक दिन में तो नहीं समझा जाता है।

458
00:31:23,200 --> 00:31:27,600
सेवन डेज कोर्स होता है और सेवन डेज कोर्स में भी ये मैं

459
00:31:27,600 --> 00:31:31,680
सर्टेन नहीं कह सकती कि वो मान ही ले। कई लोग तो एकद दिन में मान लेते हैं।

460
00:31:31,680 --> 00:31:35,760
नहीं मान कैसे मानना मानना उसको रियलाइज करते हैं। मान लो अनुभव कर

461
00:31:35,760 --> 00:31:39,840
मानने की बात तो एक अलग है। मगर हमारे पास कुछ होना चाहिए ना थ्योरिकली कि हम उसको कुछ

462
00:31:39,840 --> 00:31:44,800
कहे। वो वो मात-पिता कह रहे हैं जी वो तो है ही हमारे मात-पिता।

463
00:31:44,800 --> 00:31:49,120
वो परम बाप है, परम टीचर है, परम सतगुरु है जिसकी पालना

464
00:31:49,120 --> 00:31:53,760
में हम पल रहे हैं। 55 साल हो गए जीवन कन्या का

465
00:31:53,760 --> 00:31:57,760
हम लोग वो जी रहे हैं और उनकी बदौलत हमने

466
00:31:57,760 --> 00:32:01,840
तो अनुभव किया है। प्रैक्टिकल अनुभव किया है कि वो हमारा मात-पिता है। केवल

467
00:32:01,840 --> 00:32:06,160
मात-पिता ही नहीं वो परम टीचर भी है। वो परम सतगुरु भी है।

468
00:32:06,160 --> 00:32:08,720
वो हमारा साजन भी है। हम उसकी आत्मा रूप

469
00:32:08,720 --> 00:32:13,120
में ऐसे नहीं लग रहा दीदी कि जैसे हमने पूछा

470
00:32:13,120 --> 00:32:17,120
कि मोटरसाइकिल है ये मैं कैसे मानूं क्योंकि मोटरसाइकिल अभी सामने

471
00:32:17,120 --> 00:32:21,120
नहीं है। किसी भी तरह से इंद्रियों का विषय नहीं है। तो फिर हमने

472
00:32:21,120 --> 00:32:25,280
कहा कि मोटरसाइकिल के दो हाथ हैं। मतलब एक्सलरेटर हैंडल है।

473
00:32:25,280 --> 00:32:29,360
दो पहिए मैं आपकी बात को काट रही हूं। जी वो चार

474
00:32:29,360 --> 00:32:33,600
अंधे थे। एक हाथी खड़ा हुआ है। वाली स्टोरी है। वो है ना? रस्सी

475
00:32:33,600 --> 00:32:37,760
को जिसने जो पकड़ी वही वही उन्होंने नहीं उसने

476
00:32:37,760 --> 00:32:42,080
किसी ने पूछा जैसे आप पूछ रहे हैं कि भगवान कौन है क्या है कैसा है

477
00:32:42,080 --> 00:32:46,160
तो किसी ने कहा छाज जैसा है कान पकड़ लिया किसी ने उसकी टांगे

478
00:32:46,160 --> 00:32:50,320
पकड़ ली तो कहा वो खंभे जैसा किसी ने सू पकड़ ली तो कहा

479
00:32:50,320 --> 00:32:54,320
वो लाठी जैसा है किसी ने पूछ पकड़ ली कहा वो एक

480
00:32:54,320 --> 00:32:58,640
डंडे जैसा है किसी ने रस्सी जैसा पूछ रस्सी जैसा

481
00:32:58,640 --> 00:33:02,640
है तो ऐसे हर एक की वो मानने की बात है वो ऐसे

482
00:33:02,640 --> 00:33:06,640
ऐसे मान लेते हैं। पर परमा मेरा उदाहरण दूसरा था। मैं ये कह

483
00:33:06,640 --> 00:33:07,140
रहा

484
00:33:06,720 --> 00:33:10,960
था जैसे हम ये कह रहे हैं कि जैसे प्रश्न किया लड़के

485
00:33:10,960 --> 00:33:15,120
ने मुझसे हां कि ईश्वर है ये मैं कैसे मान लूं? तो मैं उससे

486
00:33:15,120 --> 00:33:19,200
जैसे उसने कहा कि मोटरसाइकिल है मैं कैसे मान लूं? हां तो मैंने उसको कहना

487
00:33:19,200 --> 00:33:23,520
चालू किया कि दो पह के

488
00:33:23,520 --> 00:33:27,520
हैंडल होता है। सीट होती है। अभी उसको लड़के को कुछ दिख

489
00:33:27,520 --> 00:33:31,680
नहीं रहा है। बस मैंने बता मगर ये उसका जो डिस्क्रिप्शन

490
00:33:31,680 --> 00:33:35,680
मैं दे रहा हूं कि वो ऐसा होता है। उससे उसका होना सिद्ध नहीं हो रहा

491
00:33:35,680 --> 00:33:39,760
है। अभी तो हम उसके और क्लेम्स करते जा रहे हैं कि वो कैसा कैसा है। तो कुछ इसी

492
00:33:39,760 --> 00:33:43,920
तरीके से जैसे ये वाली बात है कि ईश्वर है। मैं कैसे मान लो तो वो गुरु है।

493
00:33:43,920 --> 00:33:48,000
वो माता-पिता है। वो निराकार है। वो सर्वशक्तिमान है। तो

494
00:33:48,000 --> 00:33:52,080
ये वो डिस्क्रिप्शन है। इस संबंध में इस दिशा में नहीं

495
00:33:52,080 --> 00:33:56,080
है कि ईश्वर है सिद्ध कैसे होता है? नहीं लेकिन मैं ये तो मानने

496
00:33:56,080 --> 00:34:00,640
वाली बात नहीं है। हम तो अनुभव कर रहे हैं प्रैक्टिकल में

497
00:34:00,640 --> 00:34:04,800
कि अनुभव कराएंगे। हां हम अनुभव कराएंगे। जब वो आते हैं हम उनको अनुभव

498
00:34:04,800 --> 00:34:08,880
कराते हैं और लोगों को अनुभव होता है। लाखों अभी तो

499
00:34:08,880 --> 00:34:13,280
मैं कहूंगी करोड़ों हो गए। हम हम ऐसी मनुष्य आत्माएं

500
00:34:13,280 --> 00:34:17,360
जो अनुभव करती है और प्रैक्टिकल में वह उस जीवन को जी

501
00:34:17,360 --> 00:34:21,760
रही है। परमात्मा एक एनर्जी है एक्चुअली राजे वो

502
00:34:21,760 --> 00:34:26,000
देखने वाली चीज नहीं है। अनुभव अनुभव करने की चीज है। ऐसा

503
00:34:26,000 --> 00:34:30,800
क्या अनुभव होता है जिससे हम ये मानते हैं कि वो ईश्वर को हम अनुभव कर रहे हैं। क्या

504
00:34:30,800 --> 00:34:35,360
भाई प्रत्यक्ष को प्रमाण क्या है? मेरा जीवन देख लीजिए आप। नहीं

505
00:34:35,360 --> 00:34:39,440
जैसे पूरे माना हम अपने मित्र संबंधी आदि उन

506
00:34:39,440 --> 00:34:43,840
सबको छोड़ के यहां जो हम एक जीवन जी रहे हैं

507
00:34:43,840 --> 00:34:48,000
और लाखों मनुष्य आत्माओं की सेवा कर रहे हैं और हमारा जीवन

508
00:34:48,000 --> 00:34:52,240
जो चल रहा है जी उसी की बदौलत आज

509
00:34:52,240 --> 00:34:56,640
हम यहां इस तरह से जी बैठे हम तो दिन रात अनुभव करते हैं विरक्तता

510
00:34:56,640 --> 00:35:00,960
से ये सिद्ध होता है कि आपको आपने ईश्वर का अनुभव किया है

511
00:35:00,960 --> 00:35:05,840
डेफिनेटली अनुभव मतलब मैं मैं एक्चुअली ये पूछ रहा था जैसे

512
00:35:05,840 --> 00:35:09,840
जैसे रसगुल्ला है तो रसगुल्ला खाने से हमें सुख का अनुभव हुआ

513
00:35:09,840 --> 00:35:14,000
मीठामीठा हुआ बिल्कुल हमने ये कहा कि मैंने अनुभव किया रसगुल्ले

514
00:35:14,000 --> 00:35:18,080
को है ना तो एक अनुभव था स्वाद के रूप में जी्हा से जो मेरे को

515
00:35:18,080 --> 00:35:22,080
आया जी तो ऐसे ही वो अनुभव होता है जिससे हम

516
00:35:22,080 --> 00:35:26,160
सिद्ध करते हैं ये जो है ईश्वर का अनुभव है वो क्या अनुभव होता है वही कहते

517
00:35:26,160 --> 00:35:30,240
हैं ना जहां ना पहुंचा रवि वहां पहुंचा कभी जहां ना पहुंचा अनुभवी अनुभव जीवन

518
00:35:30,240 --> 00:35:34,400
की बहुत बड़ी अथॉरिटी होती है आज के विश्व में ऐसे संसार

519
00:35:34,400 --> 00:35:36,800
में रहते हुए जहां

520
00:35:36,800 --> 00:35:41,120
पर मानव धर्म भ्रष्ट कर्म भ्रष्ट बन चुका है। एकदम नास्तिक

521
00:35:41,120 --> 00:35:45,120
बन चुका है। जी मैं इसीलिए इस चीज को थोड़ा सा एलबोरेट कर रहा हूं। तो

522
00:35:45,120 --> 00:35:49,120
ऐसे संसार में हम रह रहे हैं। पनप रही है और मैं तो कह रहा हूं कि

523
00:35:49,120 --> 00:35:53,120
धर्म का चोला ओढ़ के भी कई लोग नास्तिकता फैला रहे हैं। एक्चुअली एक्चुअली राइट यू

524
00:35:53,120 --> 00:35:57,120
आर राइट बिल्कुल राइट है। आज युवा ही

525
00:35:57,120 --> 00:36:01,280
नहीं और भी मनुष्य बड़े नास्तिक बन गए। जब आप भी

526
00:36:01,280 --> 00:36:05,680
कह रहे हैं मैं बाबा हूं मैं भगवान हूं। मैं भी कह रही हूं मैं भगवान हूं।

527
00:36:05,680 --> 00:36:10,000
वो भी कह रहे हैं भगवान। यह भी कह रही भगवान वो भी सब कहते हैं मैं भगवान।

528
00:36:10,000 --> 00:36:14,000
आइए मैं रास्ता बताता हूं। आइए मैं रास्ता बताता हूं। जी तो

529
00:36:14,000 --> 00:36:18,320
आजकल की जो युवा पीढ़ी है वो यही समझती

530
00:36:18,320 --> 00:36:22,320
है धर्म नाम की कर्म नाम की या परमात्मा नाम की कोई चीज ही हां

531
00:36:22,320 --> 00:36:26,720
वो इस पे आ जाती है छोड़ वो नास्तिक हो जाते हैं हम कोई भगवान भगवान नहीं

532
00:36:26,720 --> 00:36:30,720
लेकिन यहां पर सिर्फ कहते नहीं है हम अपने को भगवान नहीं कह रहे

533
00:36:30,720 --> 00:36:34,800
हम अपने को वैसे भी नहीं कह रहे हम धर्म स्थापक के परमात्मा ही आकर

534
00:36:34,800 --> 00:36:39,280
के एक साधारण तन में प्रवेश करके

535
00:36:39,280 --> 00:36:43,600
उनके माध्यम से ही सारा ज्ञान हमें देते हैं। वो स्वयं बताते

536
00:36:43,600 --> 00:36:47,760
हैं कि मैं परमपिता परमात्मा तुम आत्माओं का पिता हूं।

537
00:36:47,760 --> 00:36:51,840
तो जो जैसे आपने कहा कि अनुभव होता है मैं और थोड़ा सा जैसे

538
00:36:51,840 --> 00:36:56,560
कि मान लीजिए अगर ये सिद्धांत हो लॉ कि अगर

539
00:36:56,560 --> 00:37:00,560
जब यदि ईश्वर होगा तो वो घंटी

540
00:37:00,560 --> 00:37:04,720
बजेगी है ना? अब जब मैंने आपने अनुभव कराया

541
00:37:04,720 --> 00:37:08,720
घंटी बज गई। इससे सिद्ध हो गया कि ईश्वर है। तो फिर इसी तरीके

542
00:37:08,720 --> 00:37:12,800
से क्या ऐसा होता है जिसकी वजह से कोई यह कहता है

543
00:37:12,800 --> 00:37:16,800
कि हां ईश्वर है मैं मान गया। लाखों युवाएं भी यहां पर

544
00:37:16,800 --> 00:37:20,880
कितने मैं समझती हूं 50000 से मतलब कोई एक स्पेसिफिक क्रिया नहीं है। हां

545
00:37:20,880 --> 00:37:24,880
वो हर एक का अपना अपना माना क्योंकि परमात्मा दिव्य

546
00:37:24,880 --> 00:37:29,520
दृष्टि विधाता है। दिव्य बुद्धि विधाता है। तो

547
00:37:29,520 --> 00:37:33,760
हर कोई इस परमात्मा को पहचानेगा भी नहीं। गीता में लिखा है कोटों

548
00:37:33,760 --> 00:37:37,760
में को में भी को मुझे पहचानते हैं। मूढ़ मती लोग तुझ समझ

549
00:37:37,760 --> 00:37:42,240
मुझे गाली देते हैं। वरना भगवान को नहीं हम जो धर्म के

550
00:37:42,240 --> 00:37:46,880
नाम पर ये कार्य करते हैं उनको फिर गाली देते हैं। हर कोई उसको पहचान

551
00:37:46,880 --> 00:37:50,960
ले और फिर अनुभव करें यह भी जरूरी नहीं। मगर हमारे पास थ्योरिकली तो काट होनी चाहिए

552
00:37:50,960 --> 00:37:55,040
ना एथिज्म में भी। नहीं तो काट हां नास्तिकता जैसे हम ज्ञान दे रहे

553
00:37:55,040 --> 00:37:59,040
हैं संसार में राज हम देख रहे हैं कितनी नास्तिकता है

554
00:37:59,040 --> 00:38:03,680
माना आज मनुष्य ये तो ऐसे हो गया ना मानना पहनना

555
00:38:03,680 --> 00:38:06,960
और नहीं नहीं यहां तो अनुभव किया जाता है ना जो आते हैं उनको

556
00:38:06,960 --> 00:38:11,200
जब हम कोर्स कराते हैं मेडिटेशन मेडिटेशन सीखते हैं वो और सेल्फ

557
00:38:11,200 --> 00:38:15,760
रियलाइजेशन करते हैं यहां मेन बात है सेल्फ रियलाइजेशन

558
00:38:15,760 --> 00:38:19,760
करना और जब वो यह करते हैं आत्मा को पहचान जाते हैं

559
00:38:19,760 --> 00:38:24,000
अनुभव करते हैं परमात्मा अनुभूति ना हो यह नहीं हो सकता है।

560
00:38:24,000 --> 00:38:28,720
मतलब अनुभव है थ्योरी नहीं मिल पा थ्योरी नहीं अनुभव अच्छा

561
00:38:28,720 --> 00:38:32,800
तो दीदी थोड़ा सा आगे चलते हैं जो ईश्वर के बारे में हम बात कर रहे

562
00:38:32,800 --> 00:38:36,960
थे तो आपने कहा ईश्वर सर्वशक्तिमान है ऑलमाइटी

563
00:38:36,960 --> 00:38:40,960
है सर्वज्ञ है पॉइंट ऑफ लाइट एक

564
00:38:40,960 --> 00:38:45,040
एनर्जी है परम एनर्जी तो वो सनातन सत्ता

565
00:38:45,040 --> 00:38:49,120
है या मतलब वो भी मनुष्य तो नहीं तो सनातन सत्ता से अलग वो

566
00:38:49,120 --> 00:38:53,280
सत्यम शिवम सुंदरम है सनातन गॉड इज ट्रुथ ट्रुथ ही गॉड

567
00:38:53,280 --> 00:38:57,520
है जी तो वो वो भी नित्य है ना सनातन हां नित्य है डेफिनेटली

568
00:38:57,520 --> 00:39:01,600
नित्य है परमात्मा सदा है सदा है आत्मा जैसे सदा

569
00:39:01,600 --> 00:39:05,600
परमात्मा भी सदा है वो कभी मरता ही नहीं है तो

570
00:39:05,600 --> 00:39:09,760
दीदी जैसे क्या ब्रह्मा कुमारी ईश्वर को सर्वव्यापक भी कहता

571
00:39:09,760 --> 00:39:14,320
है सर्वव्यापक विभ से एक शब्द आया ना गीता में विभु नहीं

572
00:39:14,320 --> 00:39:18,560
विभु नहीं मानता आपने कहा अभी सर्वशक्तिमान सर्वज्ञ ऑलमाइटी

573
00:39:18,560 --> 00:39:22,000
अथॉरिटी सब परमात्मा त्मा हो जाए उसे आने

574
00:39:22,000 --> 00:39:27,200
की आवश्यकता ही नहीं सब परमात्मा नहीं हो जाए सर्वव्या सबके अंदर भी हो जाए

575
00:39:27,200 --> 00:39:31,200
समझो आपके अंदर मेरे मेरे अंदर इनके सबके

576
00:39:31,200 --> 00:39:37,200
अंदर परमात्मा है हम तो क्या कहा जाता है ब्रदरहुड

577
00:39:37,360 --> 00:39:41,360
ब्रदरहुड कहा जाता है ना हिंदू मुस्लिम सिख ईसाई आपस में सब भाई भाईाई

578
00:39:41,360 --> 00:39:45,520
नहीं तो फादरहुड होना चाहिए सब भगवान भगवान भगवान हम हम

579
00:39:45,520 --> 00:39:49,840
सर्वज्ञ मानते हैं सर्वशक्ति मानते नहीं है ही हम सर्व

580
00:39:49,840 --> 00:39:53,920
व्यापक नहीं व्यापक नहीं तो इसमें दीदी जैसे हम कहते हैं कि ईश्वर सनातन

581
00:39:53,920 --> 00:39:58,240
है तो सनातन का अर्थ जो निकल के आता है नित्य स्थाई

582
00:39:58,240 --> 00:40:02,400
स्थाई ना जो किसी भी देश काल परिस्थिति से बाधित

583
00:40:02,400 --> 00:40:06,560
ना हो है ना जैसे सनातन के बारे

584
00:40:06,560 --> 00:40:10,800
में हम कहते हैं कि जो मतलब सनातन सत्य

585
00:40:10,800 --> 00:40:14,960
वो है जिसके लिए ये उसके बारे में अगर कोई लाइन कही जाए

586
00:40:14,960 --> 00:40:18,960
तो वो बदलेगी नहीं वही सनातन सत्य है। किसी भी सिचुएशन में बदल नहीं

587
00:40:18,960 --> 00:40:23,280
सकती थी। जैसे कि मैंने कहा कि मैं अह

588
00:40:23,280 --> 00:40:28,400
अब वर्तमान का समय चल रहा है। शिवश नारायण द्विवेदी 2026

589
00:40:28,400 --> 00:40:32,720
में जीवित थे। जीवित हैं। एक्सिस्ट करते हैं। मगर यही जो सत्य

590
00:40:32,720 --> 00:40:36,800
है 2075 में बदल जाएगा। अब एक्सिस्ट नहीं करते। शिवश नारायण

591
00:40:36,800 --> 00:40:37,300
द्विवेदी

592
00:40:37,200 --> 00:40:41,280
नहीं करते। आत्मिक रूप से करते पर शिवांश नारायण द्विवेदी

593
00:40:41,280 --> 00:40:45,280
जो उपाधि प्राप्त है शरीर के माध्यम से वो नहीं है। एक्सिस्ट नहीं करती।

594
00:40:45,280 --> 00:40:49,360
यानी कि ये सनातन सत्य नहीं है। शिवश नारायण द्विवेदी है ना क्योंकि यह

595
00:40:49,360 --> 00:40:53,360
असत्य है। यह सत्य है। हां। तो इसी तरीके से दूसरी एक बिंदु

596
00:40:53,360 --> 00:40:57,600
आती है कि शिवश नारायण द्विवेदी चेयर पे बैठे हैं। चेयर पे बैठा है शिवश

597
00:40:57,600 --> 00:41:01,920
नारायण द्विवेदी मगर सोफे पे नहीं बैठा है। इससे भी ये सिद्ध हो रहा है कि

598
00:41:01,920 --> 00:41:05,920
मैं सनातन सत्य नहीं हूं। क्योंकि मैं यहां हूं वहां नहीं हूं। मेरी जो

599
00:41:05,920 --> 00:41:10,160
ये मेरा जो सत्य है वो बदल रहा है। तो जब हम ईश्वर को सनातन

600
00:41:10,160 --> 00:41:14,320
कह रहे हैं। ईश्वर सनातन है। तो वो तो था और है और रहेगा। तो

601
00:41:14,320 --> 00:41:18,320
इसमें तो वो सनातन है। मगर उसके लिए हम कहें कि ईश्वर यहां है और

602
00:41:18,320 --> 00:41:22,400
वहां नहीं है। तो ये सत्य बदल गया उसका। तो ये सनातन

603
00:41:22,400 --> 00:41:26,800
का टकराव हो रहा है ना। एक्चुअली ऐसा नहीं है ईश्वर

604
00:41:26,800 --> 00:41:30,960
यहां है वह तो एक माना इतनी परमात्मा

605
00:41:30,960 --> 00:41:35,280
की और मेरी दूरी है सेकंड में मैं चाहूं जो वो

606
00:41:35,280 --> 00:41:39,280
परमधाम निवासी है ब्रह्मांड का निवासी है शांति

607
00:41:39,280 --> 00:41:43,520
हां सेकंड में देखो आज पहुंचेगा तो दीदी मगर हमने कहा वो

608
00:41:43,520 --> 00:41:47,520
यहां नहीं है इसका मतलब कहीं पे है कहीं पे नहीं है तो उसका जो

609
00:41:47,520 --> 00:41:51,600
सत्य है वो बदल रहा है नहीं वो अभी जैसे देखो आप हैं अभी आप

610
00:41:51,600 --> 00:41:53,280
कहां

611
00:41:53,280 --> 00:41:57,360
म आप कहीं जा रहे हैं आ रहे हैं यहां नहीं है कहीं कहीं जाएंगे ना सब जगह

612
00:41:57,360 --> 00:42:01,360
तो नहीं जाएंगे ना तो मैं जहां उसकी हां क्योंकि बॉडी है

613
00:42:01,360 --> 00:42:05,440
बॉडी सनातन सत्य नहीं हूं जी जी मैं आत्मा सनातन सत्य ईश्वर सनातन

614
00:42:05,440 --> 00:42:10,080
सत्य है सनातन सत्य माने सदा ही है मतलब उसको

615
00:42:10,080 --> 00:42:14,080
से बाधित नहीं है मगर देश से बाधित है हां कहीं आप उसको बुलाओ उसको आप याद

616
00:42:14,080 --> 00:42:18,880
करो सेकंड में हाजिर हो जाएगा हां क्योंकि उसके लिए कोई

617
00:42:18,880 --> 00:42:23,040
बॉडी नहीं है। तो दीदी जो ये वाला अर्थ है ना सनातन निज स्थाई

618
00:42:23,040 --> 00:42:27,040
हर तरह से स्थाई है। मतलब तीन तरह की बाधाएं होती है। एक

619
00:42:27,040 --> 00:42:31,760
होती है कालकृत, एक होती है देशत, एक होती है परिस्थिति। परिस्थिति

620
00:42:31,760 --> 00:42:35,840
बाधा कैसी हो गई कि भाई परिस्थिति

621
00:42:35,840 --> 00:42:40,480
बाधा ऐसी कि ये मेरी बहन है। मैं विवाह नहीं कर सकता। ये परिस्थिति

622
00:42:40,480 --> 00:42:44,640
बाधा है। है ना? तो इसी तरीके से जो ईश्वर है उसके

623
00:42:44,640 --> 00:42:48,960
लिए हमने जो भी कुछ कहा वो ना तो देश से बदलना चाहिए

624
00:42:48,960 --> 00:42:52,960
ना ही काल से ना ही परिस्थिति से। मगर देश से बदल रहा है।

625
00:42:52,960 --> 00:42:57,040
हमने कहा ईश्वर ईश्वर अपनी कही उनका लोक है।

626
00:42:57,040 --> 00:43:01,120
मान लीजिए हां लेकिन उसका जो लोक है इस

627
00:43:01,120 --> 00:43:05,280
दुनिया से पार चांद सितारों से पार सूक्ष्म लोक से भी पार

628
00:43:05,280 --> 00:43:08,480
अखंड ज्योति तत्व तो वो है वहां वो वहां वो

629
00:43:08,480 --> 00:43:12,480
यहां नहीं तो ये उसका वहां होना यहां ना होना ये देश कृत

630
00:43:12,480 --> 00:43:16,640
बाधा से बाधित हो रहा है तो वो मतलब वो सनातन कैसे कहा जाए फिर उसे क्योंकि

631
00:43:16,640 --> 00:43:21,040
सनातन सनातन काल नहीं आता सनातन आप कह रहे हैं मैं नहीं कह रही हूं अच्छा वो सनातन

632
00:43:21,040 --> 00:43:25,120
ईश्वर नहीं है हां परमात्मा तो सदा शिव सत्यम शिवम सुंदरम गॉड

633
00:43:25,120 --> 00:43:29,280
इस ट्रुथ ट्रुथ ही गॉड है तो सनातन सत्य तो कहते हैं उसे परमात्मा को सनातन सत्य

634
00:43:29,280 --> 00:43:33,520
नहीं है शाश्वत सत्य शाश्वत सत्य तो वही तो हुआ जो देश माना

635
00:43:33,520 --> 00:43:38,000
आप वो सनातन फिर आप शब्द ले लेते हैं इस सृष्टि पर

636
00:43:38,000 --> 00:43:42,560
मुझे ऐसा सृष्टि में नहीं रहता है मुझे ऐसा लगता है कि

637
00:43:42,560 --> 00:43:46,800
ब्रह्मा कुमारी के अनुसार जो ईश्वर है वो कालकृत

638
00:43:46,800 --> 00:43:50,880
बाधा से तो बाधित नहीं है कि है और रहेगा वो नहीं अनादि अनंत है

639
00:43:50,880 --> 00:43:55,120
अगर देश कृत बाधा से बाधित है

640
00:43:55,120 --> 00:43:59,920
वो किसी बंधन बनता ही नहीं है। कोई बाधा उसके अंदर है ही नहीं।

641
00:43:59,920 --> 00:44:04,000
वो न्यूट्रल और न्यारा और प्यारा

642
00:44:04,000 --> 00:44:08,000
है। सारे विश्व से न्यारा है। सारे विश्व का वो प्यारा है। नहीं

643
00:44:08,000 --> 00:44:12,080
इस इस बाधा से बाधित है ना कि वो यहां है तो वहां नहीं है। नहीं ये

644
00:44:12,080 --> 00:44:16,240
तो हम हम तो जहां उसको बुलाए वो आ जाएगा। आज मैं अगर कहीं तो अलग बात है

645
00:44:16,240 --> 00:44:20,560
हां तो वो वही है ना ऊपर परमधाम जिसको ज्योति मह

646
00:44:20,560 --> 00:44:23,600
तत्व कहते हैं वो ज्योति

647
00:44:23,600 --> 00:44:27,600
जो सभी ज्योति आत्माएं वो भी वहीं से आती है सृष्टि रूपी रंगमंच पर

648
00:44:27,600 --> 00:44:31,680
पाठ प्ले करने के लिए और परमात्मा एक ही बार इस सृष्टि पे आता

649
00:44:31,680 --> 00:44:35,680
है इस सृष्टि का परिवर्तन करने के लिए जो कलयुगी दुनिया है

650
00:44:35,680 --> 00:44:40,080
उसको सतयुगी पैराडाइज बहिस्त बनाने के लिए आता है

651
00:44:40,080 --> 00:44:44,320
उसके लिए वो ज्ञान योग की शिक्षा देता है राजयोग मेडिटेशन सिखलाता

652
00:44:44,320 --> 00:44:48,400
उसको सीख के जो हमने कहा कि नर नारायण नारी लक्ष्मी बन

653
00:44:48,400 --> 00:44:52,960
जाती है। मतलब वो आता जाता है मगर वो सनातन रूप से

654
00:44:52,960 --> 00:44:57,040
क्योंकि जैसे अभी मैं आत्मा हूं गर्भ में प्रवेश किया मैंने और

655
00:44:57,040 --> 00:45:01,120
फिर मैं बच्चा बच्ची बन गई तो मैं 15 साल 20 साल 100

656
00:45:01,120 --> 00:45:05,120
साल तक भी मैं रहूंगा। इस शरीर में बंधन है। परमात्मा को इस तरह

657
00:45:05,120 --> 00:45:09,360
का बंधन नहीं है। वह सेकंड में आ जा सकता है क्योंकि उसका रीइकार्नेशन होता है।

658
00:45:09,360 --> 00:45:13,440
उसका अवतरण होता है। मगर दीदी इसमें तो ये है ना कि परिस्थिति कृत

659
00:45:13,440 --> 00:45:17,440
बाधा से हम बाधित होते हैं। वो नहीं जैसे वो नहीं होता। जैसे हमने कहा कि हम इस शरीर में आ

660
00:45:17,440 --> 00:45:21,440
गए। तो हम क्योंकि बाधित हैं इसलिए बंधन फील करेंगे। जी मगर

661
00:45:21,440 --> 00:45:25,920
जैसे ईश्वर है ईश्वर के लिए मान लीजिए वीडियो गेम हो हां

662
00:45:25,920 --> 00:45:30,240
वीडियो [गला साफ़ करने की आवाज़] गेम हम खेल रहे हैं और हम उसके अंदर जो कारें आ रही हैं हमको धक्का

663
00:45:30,240 --> 00:45:34,240
लग रहा है तो झटका भी आ रहा है मगर फिर भी हम ये जानते हैं ये वीडियो गेम मैंने चालू किया

664
00:45:34,240 --> 00:45:38,240
मैं इसको बंद कर सकता हूं तो परमात्मा इस तरीके से उसमें रहते हुए भी

665
00:45:38,240 --> 00:45:38,800
मुक्त भी

666
00:45:38,800 --> 00:45:42,800
रहता है है ना डिटच अच्छा एक चीज इसमें ये आ रही

667
00:45:42,800 --> 00:45:47,440
है कि जैसे हमने कहा ऑलमाइट ऑलमाइटी है ना ऑलमाइटी अथॉरिटी

668
00:45:47,440 --> 00:45:52,080
तो क्या मतलब ऑलमाइटी का मतलब अनंत अनंत सामर्थ्यवान सर्वशक्तिमान

669
00:45:52,080 --> 00:45:56,080
अनंत ऑलमाइटी मन हां या सर्वशक्तिमान पावरफुल अनंत

670
00:45:56,080 --> 00:46:00,160
सामर्थवान हां सामर्थवान समर्थ है सदा

671
00:46:00,160 --> 00:46:04,400
अनंत शक्ति है उसकी अनंत उसका कोई मना ऐसे माफ

672
00:46:04,400 --> 00:46:08,480
लिमिटेड नहीं अनलिमिटेड है मतलब कुछ भी उसके उसमें आ सकता है वो कुछ भी कर

673
00:46:08,480 --> 00:46:12,640
सकता है कुछ भी कर सकता है अच्छा पॉजिटिव अच्छा नेगेटिव कुछ

674
00:46:12,640 --> 00:46:16,720
नहीं करेगा पॉजिटिव वो उसके लिए एवरीथिंग पॉसिबल है हमारे लिए भी एवरीथिंग

675
00:46:16,720 --> 00:46:21,360
पॉसिबल है पॉजिटिव मगर नेगेटिव

676
00:46:21,360 --> 00:46:25,600
तो यह दुनिया है। नेगेटिविटी तो खत्म करते हैं। मतलब यह जो नेगेटिविटी है

677
00:46:25,600 --> 00:46:29,760
वह ईश्वर की सत्ता से बाहर है। मतलब उसके दायरे

678
00:46:29,760 --> 00:46:34,000
के बाहर है। ये बिल्कुल इसका पूरा कोर्स है

679
00:46:34,000 --> 00:46:38,400
अगर आप करेंगे क्योंकि ये एक सेकंड में मैं नहीं समझा पाऊंगा। हां। क्योंकि

680
00:46:38,400 --> 00:46:42,400
जो परमात्मा प्योर सत्ताएं हैं

681
00:46:42,400 --> 00:46:46,400
वो इस दुनिया की जो नेगेटिविटी है नेगेटिविटी क्या

682
00:46:46,400 --> 00:46:50,720
है? काम है, क्रोध है, लोभ है, मोह है, अहकार है,

683
00:46:50,720 --> 00:46:54,000
ईर्ष्या है, द्वेष है, बदले की भावना है,

684
00:46:54,000 --> 00:46:58,000
नफरत है। यह नेगेटिविटी है। समझो

685
00:46:58,000 --> 00:47:02,080
एक पिता है, एक माता है, बच्चा गुस्सा करता है, किसी को

686
00:47:02,080 --> 00:47:06,160
गलत दृष्टि से देखता है, कुछ करता है तो वो भी उसको समझाएगा। बेटे

687
00:47:06,160 --> 00:47:10,400
ये ठीक नहीं है। ऐसा नहीं करना चाहिए आपको। तो उसको भी

688
00:47:10,400 --> 00:47:14,960
अच्छा नहीं लगेगा क्योंकि उसको पता है यह नेगेटिविटी है। यह गलत है। परमात्मा

689
00:47:14,960 --> 00:47:19,280
तो सर्वोच्च है। ऑलमाइटी अथरिटी पोरिटी उसके

690
00:47:19,280 --> 00:47:23,680
अंदर सदा ही है तो वह परमात्मा यह काम क्रोध

691
00:47:23,680 --> 00:47:27,760
लोभ मोह अहंकार ईर्ष्या द्वेष नफ तो नहीं आता

692
00:47:27,760 --> 00:47:31,760
ये नहीं आ सकता तो मुक्त है ना सदा के लिए सदा के लिए मगर बच्चों को भी मुक्त बनाकर चाहता

693
00:47:31,760 --> 00:47:35,920
है हम कह रहे हैं कि जैसे मान लीजिए वो सर्वशक्तिमान है बुरे कार्य नहीं करता नहीं

694
00:47:35,920 --> 00:47:40,080
करता है क्योंकि वास्तविकता में तो उसकी नजरों में तो ये नाटक मात्र है कुछ भी बुरा

695
00:47:40,080 --> 00:47:44,400
कार्य है ही नहीं कुछ है ही नहीं नाटक मात्र माया मात्र है प्रपंच

696
00:47:44,400 --> 00:47:48,880
तो जैसे जैसे उसने जैसे हमने कहा सर्वशक्तिमान

697
00:47:48,880 --> 00:47:52,880
तो फिर हम ये क्यों कहते हैं कि वो अवतार नहीं ले सकता कि योग नहीं लेता

698
00:47:52,880 --> 00:47:56,880
है अवतार मां के गर्भ से जन्म नहीं लेता नहीं पर काया प्रवेश करता है

699
00:47:56,880 --> 00:48:01,040
हां वो माना स्वयं नहीं है स्वयं से प्रकट नहीं नहीं अगर मैंने आपको

700
00:48:01,040 --> 00:48:05,120
एग्जांपल दिया ना कि जैसे आप है मैं हूं हम आ गए एक बार गर्भ में

701
00:48:05,120 --> 00:48:09,200
फिर हम बच्चा बन गए अब हम अगर आत्मा निकल जाएगी तो कहेंगे मर

702
00:48:09,200 --> 00:48:13,680
गया लेकिन परमात्मा का जो अवतरण ऋण कार्नेशन

703
00:48:13,680 --> 00:48:17,760
होता है वह आता और जाता है आता और जाता बंधन में नहीं बंधा हुआ है। बंधन में

704
00:48:17,760 --> 00:48:21,760
कहां आया? नहीं आया। नहीं बंधन में आ सकता। कर्म से भी प्रकट हुआ तो बंधन में कहां

705
00:48:21,760 --> 00:48:25,760
आया? मेरा शरीर का बंधन ही हो गया ना। मैं किसी की मां हूं, किसी की

706
00:48:25,760 --> 00:48:30,000
बहन हूं, किसी की पत्नी हूं। किसी की क्या किसी की क्या

707
00:48:30,000 --> 00:48:34,160
तो मैं इस शरीर को अगर छोड़ दूं मैं आत्मा हूं। मैं बोल रही हूं आत्मा। नहीं

708
00:48:34,160 --> 00:48:38,560
जैसे ईश्वर ने केवल एक लीला की कि वो प्रकट

709
00:48:38,560 --> 00:48:42,720
हुए हम और भाई बहन बने सबके जो भी बनना है हम और उसके

710
00:48:42,720 --> 00:48:46,800
बाद वो अप्रकट हो गए। हम तो उन्होंने तो वास्तविकता में लीला

711
00:48:46,800 --> 00:48:50,800
की है। मगर देखने में यह भी लग रहा है कि जो है देह त्याग

712
00:48:50,800 --> 00:48:54,880
कर दिया। हां लेकिन लीला में हम सभी इनवॉल्व है ना। लीला में

713
00:48:54,880 --> 00:48:59,120
आप भी मैं भी ये भी हम सब लीला में है ना तो हम उसने जो लीला की

714
00:48:59,120 --> 00:49:03,360
या जो रचना रची तो वो रचना रची कि हम 100

715
00:49:03,360 --> 00:49:07,520
साल 150 साल 50 साल 60 साल इस शरीर को छोड़

716
00:49:07,520 --> 00:49:11,520
नहीं सकते। छोड़ना माना क्या होगा? जैसे

717
00:49:11,520 --> 00:49:15,600
शास्त्रों में कहा गया ना दीदी नृत्य अवतार नहीं भगवान का अभी

718
00:49:15,600 --> 00:49:19,680
यह भी बहुत गहरी पॉइंट है समझने की जी एक्चुअली

719
00:49:19,680 --> 00:49:23,920
उसका अवतार इस तरह के सब होते ही नहीं एक ही अवतार होता है हां

720
00:49:23,920 --> 00:49:24,420
वो तो

721
00:49:24,320 --> 00:49:28,560
आप आपने बताया परमेश्वर वो वाला वो तो एक बात है मगर

722
00:49:28,560 --> 00:49:32,640
एक पूछने वाली जब वो ऑलमाइटी है वो सब कुछ कर सकता है

723
00:49:32,640 --> 00:49:36,640
तो फिर वो अवतार धारण करने में दिक्कत क्या है और जो हम अवतार भी उसको इसलिए

724
00:49:36,640 --> 00:49:40,640
लेना पड़ता है अगर यह कहें कि जैसे वो बंधनों से बंध जाता

725
00:49:40,640 --> 00:49:44,800
तो जैसे फॉर एग्जांपल एक वीडियो गेम खेलने वाले के लिए वीडियो

726
00:49:44,800 --> 00:49:48,880
गेम में होते हुए भी वीडियो गेम से वो मुक्त रहता है। मुक्त रहता है ना? तो तो

727
00:49:48,880 --> 00:49:52,880
ईश्वर तो क्योंकि उसने वीडियो गेम बनाया तो वो कभी भी वीडियो गेम से फंसता ही नहीं है। वो नहीं

728
00:49:52,880 --> 00:49:56,960
फंसेगा। मतलब फिर भले ही वो अवतार धारण करे या ना करे उससे क्या फर्क पड़ता है? वो तो

729
00:49:56,960 --> 00:50:01,040
कभी बंधन में आए ही। नहीं अगर वीडियो गेम में कोई वो फंस गया कुछ हो गया तो उसको

730
00:50:01,040 --> 00:50:05,120
निकालना तो पड़ेगा ना। तो उसको निकालने के लिए तो कोई दूसरा अगर

731
00:50:05,120 --> 00:50:09,120
मैं नहीं इस वीडियो गेम को ठीक कर पा रही हूं। कुछ ऐसा गड़बड़ हो गया

732
00:50:09,120 --> 00:50:13,280
जिसको आता है वह तो फिर ठीक करेगा ना तो परमात्मा तो वो है ना जो जिसने

733
00:50:13,280 --> 00:50:18,320
उसको बनाना ठीक करना चालू करना बंद करना सब कुछ मालूम है

734
00:50:18,320 --> 00:50:22,320
नहीं वो वो ठीक है आपकी बात लेकिन परमात्मा ने जो

735
00:50:22,320 --> 00:50:26,640
सी सृष्टि रची वो जो परमात्मा आता है वो हम मनुष्य

736
00:50:26,640 --> 00:50:30,720
आत्माओं के सदस्य संसार में नहीं आता और दीदी जो ये वाला वाक्य है गीता

737
00:50:30,720 --> 00:50:34,960
का यदा यदा धर्मसानी सजाम में हम मैं अपना

738
00:50:34,960 --> 00:50:39,200
सृजन करता हूं हां तो वो सजन करता है नहीं सृष्टि का नहीं सजाम

739
00:50:39,200 --> 00:50:39,700
में

740
00:50:39,360 --> 00:50:43,440
हम मैं सजन करता हूं अपना सृजन मींस स्वयं के

741
00:50:43,440 --> 00:50:47,440
रूप का सृजन करता हूं हां तो आता है ना लेकिन

742
00:50:47,440 --> 00:50:51,440
परकाया परकाया देखो आपने परकाया नहीं कहा हम तो ये कहते

743
00:50:51,440 --> 00:50:55,920
हैं नहीं गीता में लिखा है परकाया प्रवेश करता हूं ये जो श्लोक है परकाया

744
00:50:55,920 --> 00:51:00,480
प्रवेश भी ईश्वर कर सकता है इसमें कोई दिक्कत नहीं है बहुत बार बहुत सारी चीजें

745
00:51:00,480 --> 00:51:04,640
जो शिव अवतार शंकराचार्य जी हैं उनके ही बारे में आता है कि उन्होंने एक राजा के शरीर

746
00:51:04,640 --> 00:51:08,640
में परकाया प्रवेश करके और वो जो उनसे एक शास्त्रार्थ

747
00:51:08,640 --> 00:51:12,640
के बीच में एक कुछ प्रश्न पूछ लिया गया था। जी तो उन्होंने वो वो जो

748
00:51:12,640 --> 00:51:16,640
अनुभव था उनको अनुभव नहीं था तो उन्होंने वो अनुभव लिया था राजा के शरीर में प्रवेश करने

749
00:51:16,640 --> 00:51:21,280
का तो ये तो बहुत छोटी सी बात हो गई मगर उन्होंने वहां पर कहा

750
00:51:21,280 --> 00:51:25,680
परकाया प्रवेश से कोई दिक्कत नहीं है मगर जब वो ये कह रहे हैं ना यदा यदा धर्मस

751
00:51:25,680 --> 00:51:29,680
ग्लन भवती भारत अभस तदात्म शजाम में

752
00:51:29,680 --> 00:51:33,840
हम मैं अपना सृजन करता हूं अपने रूप का सृजन करता हूं

753
00:51:33,840 --> 00:51:37,840
ना वो फिर प्रलोप हो जाते हैं मींस कि वो जब आते हैं सृष्टि

754
00:51:37,840 --> 00:51:42,000
रूपी रंगमंच पर सृष्टि की स्थापना करते हैं नई सृष्टि की फिर अपने

755
00:51:42,000 --> 00:51:46,000
आप को परमधाम में जैसे आते हैं फिर वो चले जाते हैं। नहीं नहीं जो उन्होंने

756
00:51:46,000 --> 00:51:50,000
कहा ना मैं अपना सृजन करता हूं। ये सृजन कर रहे हैं ना अपना

757
00:51:50,000 --> 00:51:54,320
स्वयं के रूप का सृजन कर रहे हैं। ऐसा है गीता जो है ना बहुत सारी गीताएं

758
00:51:54,320 --> 00:51:55,120
हैं।

759
00:51:55,120 --> 00:51:59,200
ये श्लोक तो सब में है ना? हां। तमिल गीता, टैगोर गीता,

760
00:51:59,200 --> 00:52:03,440
गांधी गीता। अब हम उस गीता की बात को सत्य

761
00:52:03,440 --> 00:52:07,520
कैसे मान ले? तो गीता को हम सत्य नहीं मान रहे। नहीं माना।

762
00:52:07,520 --> 00:52:12,000
कोई उसमें श्लोक किसी ने अपने भी मिक्स किए होंगे या कुछ ऐसा किया होगा

763
00:52:12,000 --> 00:52:16,160
तो उस बात को हम कैसे सत्य मान ले तो फिर गीता है ये हमें कैसे पता

764
00:52:16,160 --> 00:52:20,400
नहीं ये देखो कोई भी घटना घटती है पहले घटना

765
00:52:20,400 --> 00:52:24,400
घटित होती है फिर वो पेपर में आता है या टीवी पर आता है

766
00:52:24,400 --> 00:52:28,560
बाद में जो गीता है महाभारत का अंश है हां है ना अच्छा

767
00:52:28,560 --> 00:52:32,880
महाभारत से प्रथम बार शंकराचार्य जी ने गीता निकाली थी आदि शंकराचार्य

768
00:52:32,880 --> 00:52:37,360
जी जिनको शिव अवतार भी माना गया तो उन्होंने क्या किया था कि

769
00:52:37,360 --> 00:52:41,760
महाभारत का वह पार्ट है गीता उसको निकाल के उन्होंने जो है उसका ट्रांसलेशन

770
00:52:41,760 --> 00:52:45,840
किया था कमेंट्री की थी फर्स्ट टाइम गीता ऐसे बनी थी वरना पहले महाभारत ही था

771
00:52:45,840 --> 00:52:49,920
महाभारत से गीता इस तरह से अलग की थी तो आदि शंकराचार्य जी ने जो गीता

772
00:52:49,920 --> 00:52:54,080
के श्लोक स्वीकार किए महाभारत में भी वो श्लोक मिलते हैं तो अगर

773
00:52:54,080 --> 00:52:58,320
हम ये कह रहे हैं कि जैसे उसमें मिलावट हो गई तो फिर अगर जिससे हम गीता

774
00:52:58,320 --> 00:53:02,480
को ले रहे हैं हम कह रहे हैं कि मिलावट हो गई तो फिर हम ये कैसे कह रहे हैं कि कृष्ण थे

775
00:53:02,480 --> 00:53:06,560
एक्सिस्ट करते थे देखो आप शंकराचार्य जी कह रहे हम शिवाचार्य

776
00:53:06,560 --> 00:53:10,480
जी कह रहे हैं जी हमें शिवाचार्य जी ने यह बताया

777
00:53:10,480 --> 00:53:14,480
कि मेरा रीइकारनेशन होता है सिर्फ बच्चों को परिवर्तन करने

778
00:53:14,480 --> 00:53:18,480
के लिए प्रवेश हां और इस सृष्टि का परिवर्तन करने के

779
00:53:18,480 --> 00:53:22,560
लिए तो मेरा ऐसा सर्जन ये नहीं वो तो समझो शंकराचार्य जी

780
00:53:22,560 --> 00:53:26,560
तो मनुष्य हुए है ना नहीं वो शास्त्रों में उनको शास्त्रों

781
00:53:26,560 --> 00:53:30,560
में हां वो तो शंकर भगवान अब यहां ये भी पॉइंट एकदम अलग

782
00:53:30,560 --> 00:53:34,640
हो जाती है शिव और शंकर दोनों में महान अंतर है ये भी एक

783
00:53:34,640 --> 00:53:38,720
पूरा लेसन शिव पुराण में यही कहा गया है कि वो मैं ही शिव हूं। हां

784
00:53:38,720 --> 00:53:42,720
आपके पुराण में ये कहा गया पर स्वयं शिव परमात्मा ने हमें

785
00:53:42,720 --> 00:53:46,800
जो बताया जो हमने सीखा जो हमने समझा शिव और

786
00:53:46,800 --> 00:53:51,440
शंकर दोनों में अंतर है तो एक तरीके से तो ये भी पूरा एक हमारा

787
00:53:51,440 --> 00:53:55,600
मना वो लेसन है जो हम इसको समझते हैं और लोगों को समझाते

788
00:53:55,600 --> 00:53:59,680
हैं तो दीदी ये जो मतलब एक तरीके से जो एक तरीके से पूरी तरीके

789
00:53:59,680 --> 00:54:03,760
से शास्त्रों पर डिपेंड नहीं है जो जितनी चीजें सभी

790
00:54:03,760 --> 00:54:08,000
शास्त्रों का सार आकर के मैं बतलाता हूं हम

791
00:54:08,000 --> 00:54:12,240
साधु संत महात्माओं का भी आकर के मैं उद्धार करता हूं।

792
00:54:12,240 --> 00:54:16,480
मतलब सीधे भगवान आकर बता रहे हैं। जी तो इसलिए हम उसको प्रायोरिटी

793
00:54:16,480 --> 00:54:20,560
देते हैं और गीता और बाकी शास्त्र उतने मान है जितने कि

794
00:54:20,560 --> 00:54:24,640
लोग मानते हैं उनका भी सार परमात्मा आकर के बतलाते हैं। जैसे कोई बात

795
00:54:24,640 --> 00:54:25,600
है आपको कोई बताई

796
00:54:25,600 --> 00:54:29,600
जा रही है। मुझे बताइए। एक चीज आती है कि जैसे

797
00:54:29,600 --> 00:54:33,760
मान लीजिए हमारे पास तो भगवान स्वयं आ रहे हैं। तो हमने उनकी बात मान ली।

798
00:54:33,760 --> 00:54:37,840
जी मगर जैसे कोई व्यक्ति ये कहता है कि मेरे पास भी आ रहे हैं वो आपके

799
00:54:37,840 --> 00:54:42,000
ठीक उलट बात करता है और वो भी कहता है मेरे पास आके भगवान ने कहा है

800
00:54:42,000 --> 00:54:46,080
तो फिर ये कैसे पता किसकी बात सही है किसकी बात गलत है एक चीज एक

801
00:54:46,080 --> 00:54:50,560
बिल्कुल राइट तो ये बात हो गई दूसरी बात एक ये आती है कि परमात्मा

802
00:54:50,560 --> 00:54:54,720
ने सब कुछ बनाया है हम खैर आपने ये कहा कि

803
00:54:54,720 --> 00:54:59,120
नई सृष्टि बनाई नई सृष्टि बनाई है मगर आपने कहा कि वो सर्वशक्तिमान

804
00:54:59,120 --> 00:55:03,200
है जी अ वो सिर्फ अच्छे कार्य करता है जी मगर

805
00:55:03,200 --> 00:55:07,360
मगर जब हम देखते हैं वो सर्वशक्तिमान है और अच्छे कार्य करता है तो

806
00:55:07,360 --> 00:55:11,440
सृष्टि जब बिगड़ रही है तो परमात्मा उसको रोक सकता है बिगड़ने से

807
00:55:11,440 --> 00:55:15,760
मगर किनहीं कारणों से नहीं रोक रहा है वो होने दे रहा है है ना हम

808
00:55:15,760 --> 00:55:20,000
तो इसमें क्या आ गया कि ये जो बिगड़ा परमात्मा की सत्ता

809
00:55:20,000 --> 00:55:24,160
में ही बिगड़ा हम परमात्मा अगर वो सर्वशक्तिमान है तो रोक

810
00:55:24,160 --> 00:55:28,480
सकता है और रोकना तो अच्छा कार्य है रोकना तो पॉजिटिव है ना

811
00:55:28,480 --> 00:55:33,040
तो वो रोक सकता है मगर उसने नहीं रोका तो परमात्मा की सत्ता में बिगड़ा

812
00:55:33,040 --> 00:55:37,040
हम तो इसका मतलब कि अगर कोई आकर के हमसे गलत बात कहेगा परमात्मा

813
00:55:37,040 --> 00:55:40,640
के नाम से तो वह भी परमात्मा की सत्ता में ही आ गया ना। यह

814
00:55:40,640 --> 00:55:44,800
नहीं है राज हम क्योंकि परमात्मा जो यह

815
00:55:44,800 --> 00:55:49,360
सृष्टि है क्योंकि यह नाटक है दुख और सुख हार और जीत का

816
00:55:49,360 --> 00:55:53,440
अभी इस दुनिया में जो कलयुगी दुनिया चल रही है इसमें सब कुछ

817
00:55:53,440 --> 00:55:57,440
नेगेटिव नेगेटिव माना गलत गलत गलत हो रहा है लेकिन वह

818
00:55:57,440 --> 00:56:01,840
गुप्त वेश में अपना कार्य कर रहा है। संदेशवाहक

819
00:56:01,840 --> 00:56:06,080
हैं हम सभी को संदेश दे रहे हैं कि सृष्टि पुरानी हो चुकी

820
00:56:06,080 --> 00:56:10,240
है। अब इस सृष्टि को नया बनाने के लिए परमपिता परमात्मा

821
00:56:10,240 --> 00:56:14,240
आ चुका है। तो जो आप यह बात कह रहे थे कैसे माने कि यहां

822
00:56:14,240 --> 00:56:18,400
परमात्मा है देखो हम उनको आप आप भी हो गए

823
00:56:18,400 --> 00:56:22,720
मैं भी हो गई मैं आपको सुना रही हूं बता रही हूं अपने अनुभव के आधार पर

824
00:56:22,720 --> 00:56:26,720
जो मैंने यह ज्ञान सुना है और सुनकर के अपने जीवन में धारण करना

825
00:56:26,720 --> 00:56:30,720
किया है वो मैं आपको बता रही हूं कंपलसरी नहीं

826
00:56:30,720 --> 00:56:34,960
है कि आप मेरी बातों को मानो जजमेंट आपकी है

827
00:56:34,960 --> 00:56:39,440
कि वो भी आपने सुना ये भी आपको आप सुन रहे हैं तो उसकी जजमेंट

828
00:56:39,440 --> 00:56:43,440
आपने करनी है जी हम लोगों को यही बताते हैं। यह भी आप सुन रहे हैं।

829
00:56:43,440 --> 00:56:47,440
वह भी हम आपको यह नहीं कहते कि आपको यह बात माननी ही है।

830
00:56:47,440 --> 00:56:51,760
तो इसलिए आपकी अपनी जजमेंट है। हम कहें शास्त्र गलत है, महात्माएं

831
00:56:51,760 --> 00:56:55,680
गलत है, वो गलत है। नेवर हम ये नहीं कहते हैं। आपने अपनी बात बता दी

832
00:56:55,680 --> 00:56:59,920
और जितना उसको सुनना है और सुनकर के उसको जजमेंट उसने

833
00:56:59,920 --> 00:57:04,000
करनी है। मतलब कहने का ये है कि अगर कोई आकर के ये कहता है मुझे भी परमात्मा ने कुछ

834
00:57:04,000 --> 00:57:08,240
बताया तो हम ठीक है भैया। तुम्हें अगर परमात्मा बता रहे हैं तो ठीक है। फिर चाहिए।

835
00:57:08,240 --> 00:57:13,520
वैसे देखो मुझे एक बात याद आती है कि रावण था

836
00:57:13,520 --> 00:57:17,840
बहुत उसने वेद शास्त्र क्या है ना कि जब हम

837
00:57:17,840 --> 00:57:22,080
अ कहीं आज के युवाओं के बीच में खड़े हैं तो ये लूप

838
00:57:22,080 --> 00:57:26,480
होल्स वो लोग पकड़ते हैं जैसे आपको आ के भगवान बता रहे हैं डायरेक्ट

839
00:57:26,480 --> 00:57:30,880
ठीक है हमको वो वाला कह रहा है वो मेरे पास आ रहे हैं तो फिर चूज़ कैसे करें और अनुभव

840
00:57:30,880 --> 00:57:34,960
करके ही चूज़ होगा तो हमें वहां अगर उसने कहा कि आप हमारे यहां सात

841
00:57:34,960 --> 00:57:39,040
दिन नहीं 50 दिन आओ वो 50 दिन का अनुभव उसको को देना पड़ेगा और

842
00:57:39,040 --> 00:57:43,200
फिर अगर हमें अनुभव नहीं हुआ उसके बाद तो कोई तीसरा कहेगा 100 देना हो

843
00:57:43,200 --> 00:57:47,840
तो हमें उसको अनुभव देना तो हमें कुछ ना कुछ एक शुरुआती का

844
00:57:47,840 --> 00:57:52,000
जैसे कुछ भी कहने का पैरामीटर एक रखना पड़ेगा और उसमें ये वाली

845
00:57:52,000 --> 00:57:56,000
बात आती है कि जैसे हमने कहा कि ईश्वर सब कुछ अच्छा कर सकता

846
00:57:56,000 --> 00:58:00,240
है। अच्छा तो मतलब है कि वो रक्षा कर सकता है। जी तो जैसे

847
00:58:00,240 --> 00:58:04,400
कोई झूठ बोलने आ रहा है ईश्वर उसका मुंह बंद कर सकता है। ये तो अच्छा

848
00:58:04,400 --> 00:58:08,480
कार्य है। सत्य की स्थापना मगर उसने नहीं किया जबकि वो कर

849
00:58:08,480 --> 00:58:11,120
सकता है। तो इसका मतलब जो झूठ बोला गया

850
00:58:11,120 --> 00:58:15,120
ईश्वर के नाम से वो उसकी सत्ता में आ गया। मतलब उसके अंडर में आ

851
00:58:15,120 --> 00:58:19,120
गया। अब उसने क्यों नहीं बोला वो उसकी एक रीजनिंग अलग है कि वो पकड़ता

852
00:58:19,120 --> 00:58:23,120
क्यों नहीं है उसका मुंह। है ना? मगर उसकी सत्ता में हुआ। उसकी सत्ता

853
00:58:23,120 --> 00:58:27,120
में यदि हुआ तो फिर हम यह पता कैसे लगाएं कि कौन सी गलत चीज उसकी सत्ता में

854
00:58:27,120 --> 00:58:31,200
हो रही है? कौन सी चीज उसकी सत्ता में नहीं हो रही है? यह वाली चीज से ये

855
00:58:31,200 --> 00:58:35,200
तो साफ मालूम पड़ता है एक चोर है, चोरी कर रहा है, झूठ बोल रहा है। ये

856
00:58:35,200 --> 00:58:39,360
भी कर रहा है। ये एक कर्म फिलॉसफी है। हां। तो उसके

857
00:58:39,360 --> 00:58:43,440
पास एक सवाल एक्सजेक्टली ये है कि उसके पास एक रीजनिंग है उसका मुंह

858
00:58:43,440 --> 00:58:47,520
बंद ना करने के ठीक। तो इसका मतलब है कि जो किसी कारण

859
00:58:47,520 --> 00:58:51,760
से ही सही यदि कोई झूठा ज्ञान दे रहा है भगवान के नाम से

860
00:58:51,760 --> 00:58:55,760
वो उसी की सत्ता में हो रहा है। वो होने दे रहा है। हां हो रहा है। चल

861
00:58:55,760 --> 00:58:59,760
रहा है उसको क्या कहूं? न्यारा प्यारा है। तो फिर जो एक्टर एक्टिंग कर रहा है ये भी एक

862
00:58:59,760 --> 00:59:03,920
एक्टिंग ही है। कि किसी कारण से धर्म के नाम से गलत ज्ञान

863
00:59:03,920 --> 00:59:08,000
देना भी ईश्वर की उसमें आ गया सत्ता में। तो फिर इसमें एक दिक्कत ये

864
00:59:08,000 --> 00:59:12,000
आती है कि ईश्वर जब स्वयं आकर के हमसे कुछ कह रहे हैं तो हो सकता है कि वो भी

865
00:59:12,000 --> 00:59:16,400
एक फिलॉसफी के अनुसार हो। जैसे उसने कहीं पर जैसे उसने फॉर एग्जांपल

866
00:59:16,400 --> 00:59:20,560
जैसे उसने कहीं पर किसी को धर्म के नाम से झूठ बोलने दिया उसका मुंह

867
00:59:20,560 --> 00:59:24,720
नहीं पकड़ा। ठीक है? तो क्योंकि किसी का कर्म ऐसा रहा होगा कि उसको

868
00:59:24,720 --> 00:59:26,320
धर्म के नाम से झूठ मिले

869
00:59:26,320 --> 00:59:30,480
और किसी का कर्म ऐसा रहा होगा कि वो धर्म के नाम से झूठ बोले। इसलिए उसने ऐसा होने

870
00:59:30,480 --> 00:59:34,560
दिया। तो उसने नहीं होने दिया राज

871
00:59:34,560 --> 00:59:38,560
क्योंकि यह कर्म फिलॉसफी ऐसी है कि कर्म के बंधन में मनुष्य

872
00:59:38,560 --> 00:59:42,640
ऐसा बन जाता है कई बार उसको यह मालूम होता है यह गलत है क्योंकि

873
00:59:42,640 --> 00:59:46,880
कॉन्शियस माइंड सबकॉन्शियस माइंड दो चीजें होती है जो मनुष्य

874
00:59:46,880 --> 00:59:50,880
जैसे चोरी करता है झूठ बोलता है उसकी कॉन्शियस ये अलऊ ही

875
00:59:50,880 --> 00:59:55,120
नहीं करती है कि यह मैं गलत कर रहा हूं पहले उसकी

876
00:59:55,120 --> 00:59:59,200
कॉन्शस ये हां सॉरी यह एहसास उसको एहसास होता

877
00:59:59,200 --> 01:00:03,600
है कि जो मैं यह काम कर रहा हूं। यह गलत है। लेकिन ऐसे कुछ

878
01:00:03,600 --> 01:00:07,840
अपने संस्कारों के वशीभूत आत्मा हो जाती है जो ना चाहने के बावजूद

879
01:00:07,840 --> 01:00:12,080
भी झूठ भी बोल रहा है तो आप चोरी भी कर रहे हैं। वो कर लेता है। ये बात तो

880
01:00:12,080 --> 01:00:16,320
बाकी कोई भी मनुष्य ऐसा नहीं है। अंदर से एक आवाज आती है गलत आवाज आती है। मगर प्रॉब्लम

881
01:00:16,320 --> 01:00:20,560
ये है ना कि जैसे कोई किसी की बहन के प्रति कुदृष्टि हो रही है।

882
01:00:20,560 --> 01:00:24,560
है ना? मगर उसके अंदर से आवाज आई। उसने अंदर की आवाज को दबा दिया। दबा

883
01:00:24,560 --> 01:00:28,720
दिया। तो हम उससे यह नहीं कह सकते अगर हमने एक निश्चित

884
01:00:28,720 --> 01:00:33,040
पैरामीटर नहीं बनाया ना धर्म तो हम उससे ये नहीं कह सकते कि तू इसकी ओर कुदृष्टि

885
01:00:33,040 --> 01:00:37,280
मत डाल क्योंकि वो ये कहेगा कि क्यों ना डालूं तो हम कहेंगे धर्म ने कहा है

886
01:00:37,280 --> 01:00:41,440
या ईश्वर ने कहा है मैं क्यों मानू तो तो वो ये कहेगा वो ये कहेगा कि मेरे

887
01:00:41,440 --> 01:00:45,440
पास जो ईश्वर आ रहा है वो वो ये कह रहा है और इसमें हम सिद्ध नहीं कर सकते हां

888
01:00:45,440 --> 01:00:49,520
इसमें नहीं लॉजिकली कुछ नहीं कर सकते इस चीज बिल्कुल ये चीज है अच्छा

889
01:00:49,520 --> 01:00:53,600
दीदी एक बात और है थोड़ा सा एक टॉपिक और है छोटा सा कि

890
01:00:53,600 --> 01:00:57,840
जैसे हम हम ये कहते हैं कि ईश्वर सर्व दृष्टा तो है।

891
01:00:57,840 --> 01:01:00,720
हम

892
01:01:00,720 --> 01:01:04,800
दृष्टि रखता है। साक्षी होकर देखता है। पूरे विश्व को जानता

893
01:01:04,800 --> 01:01:09,280
है कि कौन क्या कर रहा है क्या नहीं कर रहा। वो देख रहा है। लेकिन वो

894
01:01:09,280 --> 01:01:13,280
क्योंकि यही बात आ जाती है। वो आत्मा कर्म के बंधन में है जो करती

895
01:01:13,280 --> 01:01:17,440
ही है और करेगी। क्योंकि उस परमात्मा से जैसे अभी मैं

896
01:01:17,440 --> 01:01:21,520
कह सकती हूं मेरा डायरेक्ट संबंध है क्योंकि राजयोग के

897
01:01:21,520 --> 01:01:25,600
द्वारा कंट्रोलिंग पावर आती है। अगर मैं गलत संकल्प भी कर रही

898
01:01:25,600 --> 01:01:29,840
हूं ना तो मैं उस संकल्प को भी खत्म करूंगी। मैं पॉजिटिव

899
01:01:29,840 --> 01:01:34,080
संकल्प करूंगी। बोल भी पॉजिटिव बोलूंगी। कर्म भी पॉजिटिव करूंगी। क्योंकि

900
01:01:34,080 --> 01:01:38,800
डायरेक्ट उससे कनेक्शन होने से मुझे वो सर्वशक्तिमान

901
01:01:38,800 --> 01:01:42,800
परमात्मा से शक्ति प्राप्त होती है कि मैं गलत ना करूं। मैं

902
01:01:42,800 --> 01:01:46,880
वही कह रहा हूं। वो अगर सर्वद है हां तो यानी कि उसकी

903
01:01:46,880 --> 01:01:51,040
दृष्टि सब जगह है। हम वो सब देख रहा है। देख सकता है। तो कई ऐसी

904
01:01:51,040 --> 01:01:55,120
चीजें होती हैं इस संसार में जिन्हें देखना हमारे लिए पाप होता है। है

905
01:01:55,120 --> 01:01:56,480
ना? हम मगर वो उनको

906
01:01:56,480 --> 01:02:00,480
देख रहा है। हम इसका अर्थ यह माना जाए कि जो हमारे लिए पाप है उसके

907
01:02:00,480 --> 01:02:05,360
लिए पाप नहीं है। या फिर यह माना जाए वो इतने अंश में वो भी पाप कर रहे हैं। नहीं

908
01:02:05,360 --> 01:02:09,360
नहीं वो न्यूट्रल है। न्यूट्रल है क्योंकि उसको वो देखते हुए भी

909
01:02:09,360 --> 01:02:13,600
उसको कोई मतलब ही नहीं है। न्यूट्रल है। देखते हुए भी नहीं देखता। वही मैं कह रहा हूं कि बुरी

910
01:02:13,600 --> 01:02:17,680
चीजों से हम लोग ये सोच जैसे अभी हम होते हैं ना कहीं जा रहे हैं। हमें पता है कचरा पड़ा है।

911
01:02:17,680 --> 01:02:21,840
कहीं नॉनवेज है ये है। तो एकदम ऐसे कर लेंगे। पता है

912
01:02:21,840 --> 01:02:26,000
यह ऐसे है। पर देखते हुए भी हम जैसे इग्नोर करते हैं। जैसे डॉक्टर

913
01:02:26,000 --> 01:02:30,080
का उदाहरण हां डॉक्टर कई अंशों में ऐसी चीजें कर रहा होता है जो दूसरे सामान्य

914
01:02:30,080 --> 01:02:34,240
व्यक्ति के द्वारा देखा जाना पाप है। मगर डॉक्टर देखता है तो हम देखने देते

915
01:02:34,240 --> 01:02:38,480
हैं क्योंकि वो डेफिनेटली क्योंकि वो पाप है तो क्योंकि

916
01:02:38,480 --> 01:02:42,880
वो उसको ठीक कर रहा है क्योंकि उसका उसका उद्देश्य वहां पर वो गलत नहीं है। गलत

917
01:02:42,880 --> 01:02:46,960
जिस हिसाब से जिन कर्मों से मनुष्य को दोषी माना जाता है उन्हीं कर्मों

918
01:02:46,960 --> 01:02:51,200
से ईश्वर को दोषी नहीं माना जाएगा क्योंकि उसका जो वो किसी भी

919
01:02:51,200 --> 01:02:55,440
अहम के लिए विषय के लिए आसक्त नहीं है। अच्छा

920
01:02:55,440 --> 01:02:59,600
है ना भूख के लिए आसक्त नहीं है। इसीलिए वो किसी भी उससे माना नहीं जाएगा। तो फिर

921
01:02:59,600 --> 01:03:04,080
फिर किसी सभी कर्मों से को करने में क्या दिक्कत है? क्योंकि नहीं

922
01:03:04,080 --> 01:03:08,240
दिक्कत क्यों नहीं? कर्म प्रधान है ना जो मनुष्य कर्म कर लेता है उसका फल

923
01:03:08,240 --> 01:03:11,680
चाहे वह समुद्र की गहराई में चला जाए या कहीं भी चला जाए

924
01:03:11,680 --> 01:03:15,680
वह फल तो उसको मिलेगा ही मिलेगा ये मनुष्य आत्माओं के कर्म अकर्म

925
01:03:15,680 --> 01:03:19,680
विकर्म की गति है परमात्मा इन सबसे भी न्यारा है

926
01:03:19,680 --> 01:03:23,680
जी नहीं उनको उसको कुछ सही है मैं ये कह

927
01:03:23,680 --> 01:03:27,920
रहा था जैसे हमने कहा ना वो बुरे कर्म नहीं करता तो परमात्मा के लिए जो हमारे

928
01:03:27,920 --> 01:03:32,000
लिए बुराई है वो तो बुराई है ही नहीं देखो ऐसा है ऐसा नहीं है वो इस दृष्टिकोण

929
01:03:32,000 --> 01:03:36,000
से नहीं देखता है क्योंकि उसके लिए किसी जैसे उन्होंने ने कहा ना मैं किसी समस्त कर्मों

930
01:03:36,000 --> 01:03:40,080
को करते हुए मैं करता हूं तो मैं क्योंकि मैं किसी भी कर्म के

931
01:03:40,080 --> 01:03:44,080
फल में लिप्त नहीं हूं। लिफ्ट नहीं होता क्योंकि उनको जैसे मान लीजिए वो कहीं पर है और

932
01:03:44,080 --> 01:03:48,320
उसको कुछ दिख रहा है जो पाप है जिसको देखना हमारे लिए क्योंकि हमारे अंदर उसके

933
01:03:48,320 --> 01:03:52,320
लिए वासना है जिसको देख के पाप आ रहा है पाप का दोष लग रहा है मगर

934
01:03:52,320 --> 01:03:56,320
ईश्वर तो मुक्त है न्यारा प्यारा चाहिए ही नहीं जब चाहिए नहीं तो

935
01:03:56,320 --> 01:04:00,400
उसको देखने से उसे पाप नहीं लग रहा क्योंकि वो आसक्त नहीं है तो फिर हम फिर एक्चुअली

936
01:04:00,400 --> 01:04:04,400
हम इन चरम चक्षु से देख रहे हैं ना इसलिए उसमें बंध गए हम

937
01:04:04,400 --> 01:04:08,480
तो फिर क्योंकि देखना भी पाप है ना जो कहा और ये डेफिनेटली

938
01:04:08,480 --> 01:04:12,480
है किसी को हम देख रहे हैं और उसको कुछ नहीं कर पा रहे हैं। ये भी पाप हो जाता है।

939
01:04:12,480 --> 01:04:16,800
लेकिन परमात्मा इन नेत्रों से नहीं देखता है। हम वो जानता

940
01:04:16,800 --> 01:04:20,960
है, पहचानता है सब कुछ कि संसार ऐसा हो रहा है। इसलिए

941
01:04:20,960 --> 01:04:25,120
इसमें रचक मात्र भी इनवॉल्व नहीं होता है।

942
01:04:25,120 --> 01:04:27,040
तो फिर दीदी वो तो अच्छाई और बुराई

943
01:04:27,040 --> 01:04:31,120
से परे हो गया ना। परे हो गया। तो जब परे हो गया तो हम ये क्यों कह रहे हैं कि मतलब वो सिर्फ

944
01:04:31,120 --> 01:04:35,200
अच्छे काम करता है और बुरे काम नहीं करता। करता नहीं है वो सिखलाता है

945
01:04:35,200 --> 01:04:39,200
सिर्फ। देखो अभी समझो। नहीं नहीं किसी ने नहीं। किसी

946
01:04:39,200 --> 01:04:43,200
ने रास्ता पूछा मेरे से तो मैंने उसको रास्ता बता दिया। रास्ता उधर जा रहा

947
01:04:43,200 --> 01:04:47,520
है। यह रास्ता उधर जा रहा है। अगर एक दुख का रास्ता मैं उधर जा रही तो मैं दुखी होऊंगी।

948
01:04:47,520 --> 01:04:51,520
डेफिनेटली अगर सुख के रास्ते पे जाऊंगी सुखी होंगी। लेकिन आपने

949
01:04:51,520 --> 01:04:55,600
तो बता दिया और बता के आप चले गए। मगर यदि कर्म किया

950
01:04:55,600 --> 01:04:59,840
होगा कि उसको दंड मिलना है कि उसको जो है इधर

951
01:04:59,840 --> 01:05:05,040
भेजा जाए। भटकाया ही जाए। तो वो उसको भटकाएगा नहीं।

952
01:05:05,040 --> 01:05:09,360
भगवान नहीं भटका सकता ना। मनुष्य भी जो सही मनुष्य

953
01:05:09,360 --> 01:05:13,440
होगा वह भी उसको भटकाएगा नहीं। बाकी मनुष्य कर्म का भगवान के लिए

954
01:05:13,440 --> 01:05:17,520
तो कुछ भी अच्छा और बुरा है ही नहीं ना जैसा हमने अभी पता किया। हां नहीं

955
01:05:17,520 --> 01:05:21,680
अच्छा बुरा नहीं है। अगर देखिए जैसे दुख हर्ता सुख्ता तो है ना। मैं एक

956
01:05:21,680 --> 01:05:26,000
चीज बता जैसे कि हमारे लिए अच्छाई और बुराई इस बात पर डिपेंड है कि हमें देवत्व

957
01:05:26,000 --> 01:05:30,160
को प्राप्त करना है। मगर ईश्वर तो पहले से ही देवत्व को प्राप्त किए हुए हैं। उसको

958
01:05:30,160 --> 01:05:34,240
देवत्व को नहीं है। वो तो परम परम पद को प्राप्त किए हुए हैं। है ना? सदा ही

959
01:05:34,240 --> 01:05:38,640
है। सदा ही है। सदा ही है। तो फिर उसको ये अच्छाई बुराई में कैसे फर्क इंटरेस्ट

960
01:05:38,640 --> 01:05:42,160
वगैरह उसको तो ये इंटरेस्ट नहीं है। ज्ञाता तो सारी सृष्टि का है ना।

961
01:05:42,160 --> 01:05:46,160
ज्ञान का सागर है वो। हां। तो फिर हम उससे उससे धर्म

962
01:05:46,160 --> 01:05:50,320
का पाल तो हर ज्ञान हमें देता है। वो समझ देता है। ये

963
01:05:50,320 --> 01:05:54,320
समझ दे रहा है। अब उस पर चलना ना चलना और चलते हैं नहीं चलते

964
01:05:54,320 --> 01:05:58,400
हैं। वैसा ही फल हम पाते हैं। जो करेगा सो पाएगा। जैसा करेगा

965
01:05:58,400 --> 01:06:02,640
वैसा पाएगा। जितना करेगा उतना पाएगा। तो वह सिर्फ हमें एक कर्म

966
01:06:02,640 --> 01:06:06,640
फिलॉसफी बताता है। उस पर चलना ना चलना यह हमारे ऊपर

967
01:06:06,640 --> 01:06:11,200
है। नहीं उसने बता दी वह ठीक है। मगर ये जो गलत विचार आ रहे हैं

968
01:06:11,200 --> 01:06:15,280
मन में क्योंकि संसार ऐसा है ना तो ये ऑटोमेटिकली आते हैं।

969
01:06:15,280 --> 01:06:19,600
हां ये कोई भगवान नहीं देता है। तो दूसरी चेतन आत्मा के नहीं आत्मा

970
01:06:19,600 --> 01:06:23,920
चेतन शक्ति है ना। हां। आत्मा चेतन शक्ति है। आत्मा

971
01:06:23,920 --> 01:06:28,080
के अंदर मन बुद्धि संस्कार है। जी जी जी नहीं मैं समझ

972
01:06:28,080 --> 01:06:32,320
गया। इसमें ऐसे करते हैं। जैसे आत्मा है वो खाली है।

973
01:06:32,320 --> 01:06:36,560
मतलब जब मुक्ति है तो खाली है। उस टाइम में खाली कहेंगे

974
01:06:36,560 --> 01:06:40,640
लेकिन क्योंकि उसमें वो संस्कार उस तरह के है तो सही जैसे

975
01:06:40,640 --> 01:06:44,720
फोन है, डेड है। हमने चार्ज नहीं किया। मतलब आत्मा के अंदर ये पहले से ही

976
01:06:44,720 --> 01:06:48,800
है। बुरे कर्म। पूरे आत्मा के अंदर जैसे फोन के अंदर

977
01:06:48,800 --> 01:06:53,280
सभी चिप के अंदर सब होता है। लेकिन समय अनुसार वो उसकी रिकॉर्डिंग

978
01:06:53,280 --> 01:06:57,280
जैसे भरी गई उसको आप कहां प्रेस करते हैं वो चलती रहती है। यानी कि

979
01:06:57,280 --> 01:07:01,360
आत्मा का ये स्वभाव है बुरे कर्म कर्म। ये आत्मा के अंदर

980
01:07:01,360 --> 01:07:06,000
रिकॉर्डिंग भरी हुई है। लेकिन मर्ज इमर्ज होती है।

981
01:07:06,000 --> 01:07:10,000
तो फिर ये तो फिर वो हो गया ना कि भाई जैसे हमने कहा था आत्मा का धर्म में शांति है।

982
01:07:10,000 --> 01:07:14,000
अब आत्मा का धर्म बुरे कर्म हो गया। नहीं क्योंकि दोनों पार्ट है

983
01:07:14,000 --> 01:07:18,000
ना उसमें तो संसार ही संसार ही दुख सुख का नहीं

984
01:07:18,000 --> 01:07:22,000
आत्मा का धर्म शांति है। नेचुरल इनबिल्ट है ना उसमें

985
01:07:22,000 --> 01:07:26,240
हां नेचुरल नेचर तो शांति ही है लेकिन जब बॉडी कॉन्शियसनेस

986
01:07:26,240 --> 01:07:30,560
में आते हैं तो मन अशांत होता है। आप यह अनुभव करके देखो

987
01:07:30,560 --> 01:07:34,640
कि जब मैं सोल कॉन्शियसनेस में हूं जी मैं आत्मा

988
01:07:34,640 --> 01:07:38,640
शांत स्वरूप हूं। प्रेम स्वरूप हूं। सुख स्वरूप हूं। ज्ञान स्वरूप

989
01:07:38,640 --> 01:07:43,040
हूं। पवित्र स्वरूप हूं। शक्ति स्वरूप हूं। जी यह आत्मा की नेचुरल

990
01:07:43,040 --> 01:07:47,280
नेचर है। लेकिन जब मैं बॉडी कॉन्शसनेस में आती हूं

991
01:07:47,280 --> 01:07:51,440
तो मेरी वृत्तियां भी खराब होती है, गुस्सा भी आता है, लालच भी

992
01:07:51,440 --> 01:07:55,520
आता है, मोह भी पैदा होता है, ईगो भी अहंकार भी आता है।

993
01:07:55,520 --> 01:07:59,680
दिक्कत यही पे यहीं पे कंफ्यूजन है कि पहले जब शरीर से पहले आत्मा

994
01:07:59,680 --> 01:08:03,840
में वो चीजें थी कि नहीं थी? थी थी। तो फिर उसका उसके मूल में जैसे

995
01:08:03,840 --> 01:08:07,840
शांति है आत्मा के अंदर तो जैसे ही वो शरीर में आती है तो शांति भी

996
01:08:07,840 --> 01:08:12,160
ढूंढती है। तो ऐसे ही जब वो मूल में उसके शांति के साथसाथ बुराई भी है।

997
01:08:12,160 --> 01:08:12,660
तो

998
01:08:12,320 --> 01:08:16,320
जब वो शरीर से जुड़ती है तो बुराई भी ढूंढती है। फिर बुराई ऑटोमेटिकली आ जाती है।

999
01:08:16,320 --> 01:08:20,320
यानी कि आत्मा का धर्म सिर्फ शांति नहीं है। बुराई भी है। आत्मा का धर्म

1000
01:08:20,320 --> 01:08:24,400
आत्मा का धर्म नहीं कहेंगे। जब बॉडी में आती है तो अधर्म करना

1001
01:08:24,400 --> 01:08:28,400
शुरू कर देती है। तो अनंत पहले से था ना उसके अंदर नहीं आत्मा में

1002
01:08:28,400 --> 01:08:33,040
है या नहीं है लेकिन बॉडी कॉन्शियसनेस नहीं आत्मा में था ना शुरू से

1003
01:08:33,040 --> 01:08:37,040
में तो भरा हुआ है सारा 84 जन्मों का आत्मा में पार्ट भरा

1004
01:08:37,040 --> 01:08:41,040
हुआ है मतलब उसके अंदर बुराई इनबिल्ट है तो अगर वो शांति में

1005
01:08:41,040 --> 01:08:45,040
जाएगी तो उसको एक ना एक दिन बुराई करनी ही करनी है और अगर वो बुराई में जाएगी तो

1006
01:08:45,040 --> 01:08:49,200
एक ना एक दिन शांति पानी ही पानी आएगी क्योंकि 50-50 है वो होती रहती है जब

1007
01:08:49,200 --> 01:08:53,360
द्वापर से आत्मा आती है कि आत्मा के दोनों धर्म हो गए शांति भी हो गई बुराई भी हो गई

1008
01:08:53,360 --> 01:08:57,680
जब वो शांति को पकड़ेगी तो बुराई नहीं आएगी। जब बुराई को पकड़ेगी तो शांति खाएगी।

1009
01:08:57,680 --> 01:09:02,240
यही कह सकते हैं जब सोल कॉन्शसनेस है तो शांति है। बॉडी कॉन्शियसनेस

1010
01:09:02,240 --> 01:09:06,640
है तो अशांति है। और अशांति से माना बॉडी से सारे विकार

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जितने भी संसार में आत्मा में शरीर में आ जाते हैं। जैसे देवत्व में प्राप्त

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हो गए। फिर नहीं होगा। फिर नहीं तो वहीं से तो गिरता है ना दोबारा आता है। हां पहले

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तो 16 कला संपूर्ण संपूर्ण निर्विकारी मर्यादा पुरुषोत्तम अहिंसा परमो

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धर्म है। हो गए। फिर धीरे-धीरे उतरता जाता उतरता जाता फिर वो

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शांति से अधर्म की ओर अधर्म से शांति शांति तो दोनों धर्म हो

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गए

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खेल हो गया ये आत्मा के दोनों धर्म हो गए दुख सुख का जीत का खेल कहेंगे

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इसको बहुत बहुत धन्यवाद दीदी आपका ये ईश्वरीय विश्वविद्यालय

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कोरा कागज है कोई कुछ भी पूछे किसी भी

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स्टेज पर पूछे कहां भी पूछे जो हम हैं वो हम पूछ सकते तो

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जैसे ज्यों का त्यों ही बताया जाता है कोई बात नहीं ठीक है दीदी बहुत-बहुत आपका

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आभार आपने इतना समय मैं दिया और मेरा अनुभव बहुत अच्छा रहा आपके साथ। बहुत सारी

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चीजें जानने को मिली। इसके लिए आपको बहुत-बहुत धन्यवाद। तो आप लोगों को ये

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चर्चा कैसी लगी? आप लोग अवश्य बताएं और दीदी से यदि आपको मिलना है तो

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राजौरी गार्डन में है। बहुत ही वरिष्ठ विद्वान है ब्रह्मा कुमारीज की।

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तो आप लोग बताएं कैसा लगा और यहां जब भी आए दिल्ली में तो जरूर

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एक बार राजरी गार्डन दिल्ली से आकर जय श्री राम।

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ओम शांति।

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[संगीत]
