1
00:00:01,960 --> 00:00:06,080
[घंटी की आवाज़] अब थोड़ा सा मूल विषयों पर आ जाते हैं

2
00:00:06,080 --> 00:00:10,240
कि इस कौन शिव जी को भगवान क्यों नहीं

3
00:00:10,240 --> 00:00:14,400
मानता है? मतलब अच्छा अच्छा अब मैं इसको क्लियर

4
00:00:14,400 --> 00:00:19,440
कर दूं कि शिवजी को भगवान नहीं मानता है और दूसरी तरफ

5
00:00:19,440 --> 00:00:23,440
कृष्ण और क्राइस्ट को कृष्ण यहोवा को कृष्ण और अल्लाह को एक

6
00:00:23,440 --> 00:00:27,760
करता है और शिव जी को भगवान नहीं मानता है। तो सबसे पहले तो इस संबंध

7
00:00:27,760 --> 00:00:31,760
में अ एक युक्ति दी जाती है।

8
00:00:31,760 --> 00:00:35,840
जिस प्रकार दूध से दही बनता है उसी प्रकार जिस प्रकार दूध से दही बन सकता

9
00:00:35,840 --> 00:00:40,320
है पर दही से दूध नहीं उसी प्रकार अ क्या कहते हैं

10
00:00:40,320 --> 00:00:44,640
शिव श्री कृष्ण से शिव तो बन सकते हैं मगर शिव जी से वापस

11
00:00:44,640 --> 00:00:49,600
कृष्ण नहीं बन सकते तो क्या ये युक्ति आपको सही लगती है

12
00:00:49,600 --> 00:00:53,840
तो यह जो श्लोक है ये ब्रह्म संहिता का श्लोक

13
00:00:53,840 --> 00:00:57,840
और इसका जो तात्पर्य है वो हमारे महान आचार्य श्री विश्वनाथ

14
00:00:57,840 --> 00:01:01,920
चक्रवर्ती ठाकुर जो जो गौ परंपरा के एक एक महान आचार्य

15
00:01:01,920 --> 00:01:06,080
हुए तो उन्होंने इस श्लोक का जो सार्थ दर्शनी जो टीका

16
00:01:06,080 --> 00:01:10,160
हुआ है मतलब उन्होंने जो अभी लिखा है उन श्लोक

17
00:01:10,160 --> 00:01:14,720
में वो उन्होंने इस श्लोक का बहुत बड़ा करके

18
00:01:14,720 --> 00:01:17,200
इनका जो व्याख्यान किया है और और

19
00:01:17,200 --> 00:01:21,280
अक्सर हम लोग जो जो मतलब कि

20
00:01:21,280 --> 00:01:25,360
ये श्लोक का जैसा अर्थ हम समझते हैं वैसा

21
00:01:25,360 --> 00:01:29,440
उन टीिका में नहीं लिखा हुआ है। अच्छा कृष्ण

22
00:01:29,440 --> 00:01:33,520
भगवान कृष्ण भगवान में और शिव जी में अंतर है और

23
00:01:33,520 --> 00:01:37,680
अंतर कैसे बताया जा रहा है कि कृष्ण भगवान तो शिव बन

24
00:01:37,680 --> 00:01:41,920
सकते हैं और शिव जी जो है कृष्ण नहीं बन सकते अब आप मुझे बता दीजिए शिव जी

25
00:01:41,920 --> 00:01:46,000
कृष्ण बन सकते हैं एज इट इज जो वाकई में कृष्ण है परम

26
00:01:46,000 --> 00:01:50,160
तत्व कि नहीं बन सकते बस ये बताइए कृष्ण भी

27
00:01:50,160 --> 00:01:54,160
शिव जी नहीं बन सकते ठीक है और शिव जी भी कभी कृष्ण

28
00:01:54,160 --> 00:01:58,320
नहीं बन सकते यही हां यही यही यही यही तो सिद्धांत

29
00:01:58,320 --> 00:02:02,480
है आप तो आप देखिए वहां पर क्या कहा गया है खीरंग यथा

30
00:02:02,480 --> 00:02:06,640
ददी विकार विशेष जोगा मतलब जैसे कि दूध

31
00:02:06,640 --> 00:02:10,720
के साथ आप आप अम्ल का जोड़ दें तो वो एक

32
00:02:10,720 --> 00:02:14,720
जो दही में रूपांतरित हो जाता है लेकिन भगवान

33
00:02:14,720 --> 00:02:20,240
में क्या विकार आ सकता है क्या कृष्णा में क्या कोई

34
00:02:20,240 --> 00:02:25,520
माया का कोई विकार आ गया और वो शिव जी बन गए ऐसा कभी हो सकता है क्या

35
00:02:25,520 --> 00:02:29,600
आप बोलिए ऐसा कभी हो सकता इसीलिए तो इसीलिए तो

36
00:02:29,600 --> 00:02:32,240
व्यवहार की सारी घटनाएं माया मात्र है प्रपंच

37
00:02:32,240 --> 00:02:36,480
मात्र है और क्यों है अद्वैत इसीलिए ईश्वर

38
00:02:36,480 --> 00:02:40,480
को सच्चिदानंद सर्वशक्तिमान सर्व नियंता सर्वाधार

39
00:02:40,480 --> 00:02:44,560
सिद्ध करने के लिए फिर ये मानना पड़ेगा कि भाई ये जो संसार

40
00:02:44,560 --> 00:02:49,200
है जितना भी व्यवहार जगत है ये माया मात्र है।

41
00:02:49,200 --> 00:02:53,280
ये बात होती है। खैर अब ये आप ये आपने मेरे से

42
00:02:53,280 --> 00:02:57,520
पूछा था तो मैंने अपनी चीजें बता दी। अब मैं वापस उस पे आता हूं जो विशेष

43
00:02:57,520 --> 00:03:01,520
मुद्दा चल रहा है। तो मैं यह कह रहा था कि इस के कई

44
00:03:01,520 --> 00:03:05,680
सारे प्रामाणिक रिप्रेजेंटेटिव ऐसे हैं जो यह जो श्लोक

45
00:03:05,680 --> 00:03:09,760
है दूध दही वाला इसकी हिंदी करते हुए यही बोलते

46
00:03:09,760 --> 00:03:13,760
हैं कि शिव और कृष्ण में वैसा ही भेद है जैसा कि दूध और दही में दूध

47
00:03:13,760 --> 00:03:18,080
तो दही बन सकता है पर दही दूध नहीं बन सकता। तो अब आप बताइए

48
00:03:18,080 --> 00:03:22,560
कि जो ऑथेंटिक लोग हैं वह श्लोक का जो अर्थ दे रहे हैं

49
00:03:22,560 --> 00:03:26,720
कि इस श्लोक का यही अर्थ है कि शिव तो कृष्ण तो शिव

50
00:03:26,720 --> 00:03:30,880
बन सकते हैं पर शिव जी कृष्ण नहीं बन सकते। यही ये अर्थ सही है या अर्थ

51
00:03:30,880 --> 00:03:35,680
गलत है? हां मैं तो हां आप मुझे बता

52
00:03:35,680 --> 00:03:39,840
कि जो भगवान श्री कृष्ण का जो प्रकाश है वो है बलदेव और

53
00:03:39,840 --> 00:03:44,640
उन बलदेव से आते हैं जो संकर्षण उन संकर्षण के जो

54
00:03:44,640 --> 00:03:47,280
जो प्रकाश है उसे कहते हैं कि

55
00:03:47,280 --> 00:03:50,720
आगे जो

56
00:03:50,720 --> 00:03:55,120
रुद्र कहते हैं और हां और और श्री भगवान

57
00:03:55,120 --> 00:03:59,120
के जो अंश के रूप में जो मतलब

58
00:03:59,120 --> 00:04:03,200
कि जिनको हम सदाशिव कहते वो वो साक्षात विष्णु

59
00:04:03,200 --> 00:04:07,280
तत्व है। मतलब वो जो सदा शिव जो अप्राकृत

60
00:04:07,280 --> 00:04:11,360
कैलाश धाम में है वो वो तो स्वयं ही विष्णु है। और

61
00:04:11,360 --> 00:04:15,360
वही इस इस अवतार में श्री अद्वैत आचार्य प्रभु के रूप

62
00:04:15,360 --> 00:04:19,440
में आए हैं जिसको इस भी पूजा करता है और और उनके चरणों

63
00:04:19,440 --> 00:04:23,520
में तुलसी पत्र भी अर्पण करता है। तो वो कौन है?

64
00:04:23,520 --> 00:04:27,680
स्वयं सदाशिव है। तो इस सदा शिव के चरण में तुलसी पत्र अर्पण कर रहा है।

65
00:04:27,680 --> 00:04:31,840
ये भी आपको देखना पड़ेगा। इस के आप आप जिस किसी भी

66
00:04:31,840 --> 00:04:36,560
आप आप मंदिर में जाइए और और आप जिज्ञासा कीजिए कि

67
00:04:36,560 --> 00:04:40,560
ये जो अद्वैत आचार्य है ये कौन है? तो आपको इसका

68
00:04:40,560 --> 00:04:44,720
उत्तर आपको ही मिल जाएगा। अद्वैत आचार्य

69
00:04:44,720 --> 00:04:48,880
ये हमारे जो जो गौर परंपरा के अनुसार गौ परंपरा

70
00:04:48,880 --> 00:04:52,880
के अनुसार कोई कोई वैष्णव यदि

71
00:04:52,880 --> 00:04:57,120
यदि शिवरात्रि यदि पालन नहीं करता तो तो उसे वैष्णव

72
00:04:57,120 --> 00:05:01,280
नहीं माना जाता। प्लीज प्लीज आप मुझे उस मंत्र का वो श्लोक का अर्थ

73
00:05:01,280 --> 00:05:02,320
आप श्लोक का अर्थ

74
00:05:02,320 --> 00:05:06,480
बताइए मुझे। हां हां हां तो हां तो वैसे

75
00:05:06,480 --> 00:05:10,480
तो अभी तक आपने अभी तक अभी तक

76
00:05:10,480 --> 00:05:14,480
आपने जो कहा है उसका मतलब ये है कि जो सदा शिव है और विष्णु है वो

77
00:05:14,480 --> 00:05:18,560
एक ही है। ऑब्वियसली हां सदा शिव विष्णु है ये तो हां

78
00:05:18,560 --> 00:05:23,600
ये तो शास्त्र का ये तो कोटेशन है। ठीक है। आप ठीक है आप बताइए।

79
00:05:23,600 --> 00:05:27,760
अरे भैया आप अपना दूध दही का अर्थ बताइए दूध दही

80
00:05:27,760 --> 00:05:31,760
का बताइए मेरे भाई प्रभु का है

81
00:05:31,760 --> 00:05:37,200
मेरे भाई दूध दूध दूध दही का अर्थ बताओ

82
00:05:37,200 --> 00:05:41,200
हां हां दूध और दही अच्छा अच्छा तो

83
00:05:41,200 --> 00:05:45,360
दूध जो है वो है मूल सारभ वस्तु वस्तुत दूध

84
00:05:45,360 --> 00:05:49,440
और दही में कोई अंतर नहीं है वस्तुत दूध और दही में

85
00:05:49,440 --> 00:05:54,000
कोई अंतर नहीं है किसका अंतर है केवल गुण का मतलब वो गुणगत

86
00:05:54,000 --> 00:05:58,400
जो भेद है उसी को मतलब कह रहे हैं

87
00:05:58,400 --> 00:06:02,480
गुणगत जो भेद मतलब भगवान के एक एक स्वरूप का जो

88
00:06:02,480 --> 00:06:06,800
गुण का जो भेद होता है सतगुण रजोगुण भेद

89
00:06:06,800 --> 00:06:10,880
है भेद है भी और अभेद है अभेद क्या

90
00:06:10,880 --> 00:06:14,960
है हां अभेद अभेद ही है कि वो

91
00:06:14,960 --> 00:06:17,600
शिव भगवान से अभिन्न है और वो चिन्मय

92
00:06:17,600 --> 00:06:23,040
है मतलब शिव जी कोई कोई ऐसा कोई वो जो

93
00:06:23,040 --> 00:06:27,200
मानने वाला कोई देव देवी ऐसा नहीं है। मतलब कि वो वो जन्म मृत्यु

94
00:06:27,200 --> 00:06:31,200
के अधीन है। ऐसा कोई बात नहीं है। ये इस भी ये मानता

95
00:06:31,200 --> 00:06:35,520
है कि शिव जी पूछ रहा हूं। मैं ये पूछ रहा हूं अभेद क्या है?

96
00:06:35,520 --> 00:06:39,520
ये आपका अभेद का मतलब होता है जहां पर भेद

97
00:06:39,520 --> 00:06:43,520
ना हो। अच्छा तो अचिंत भेदभेद ये कहां से

98
00:06:43,520 --> 00:06:48,720
आ गया? ये तो महाप्रभु ने दिया है ना ये तो आप बता

99
00:06:48,720 --> 00:06:53,440
अचिंत भेदाभेद तत्व का वर्णन ये जो पहले दिया

100
00:06:53,440 --> 00:06:58,640
इसका जो मतलब

101
00:06:58,640 --> 00:07:02,720
मैं सुनो सुनो सुनो सुनो ये

102
00:07:02,720 --> 00:07:06,880
बताओ अगर इस तरीके से देखेंगे कि उनमें भेद है

103
00:07:06,880 --> 00:07:10,960
भी और नहीं भी ठीक है तो है भी और नहीं भी वाली बात

104
00:07:10,960 --> 00:07:15,120
है भी और नहीं भी वाली बात अगर है कि शिव जी में और कृष्ण

105
00:07:15,120 --> 00:07:19,120
जी में भेद है भी और नहीं भी। अब भेद है क्यों? भेद

106
00:07:19,120 --> 00:07:23,280
है क्यों? क्योंकि उनमें वह सारे गुण नहीं है जो सारे गुण

107
00:07:23,280 --> 00:07:27,440
कृष्ण जी में है। ठीक है? यही बात है नहीं।

108
00:07:27,440 --> 00:07:33,200
वो जो है गुना है। मतलब की अवतार होता है और एक होता है अवतारी।

109
00:07:33,200 --> 00:07:37,280
सारे गुण है उसमें। शिवजी में सारे गुण है।

110
00:07:37,280 --> 00:07:41,280
जीव गोस्वामी पाद ने अपने जो जो संदर्भ के

111
00:07:41,280 --> 00:07:45,360
अंतर यही कहा है कि कि विष्णु जी में 60 गुण

112
00:07:45,360 --> 00:07:49,440
है और और यानी कि सारे गुण नहीं है ना यार

113
00:07:49,440 --> 00:07:53,600
आप लोग पता नहीं क्यों देर करते हो सारे गुण नहीं है और

114
00:07:53,600 --> 00:07:57,840
शिव जी में जो 55 गुण होते हैं और श्री कृष्ण में 64

115
00:07:57,840 --> 00:08:02,000
गुणावली होती है मैंने गोस्वामी मैंने क्या पूछा है

116
00:08:02,000 --> 00:08:06,080
मैंने आपसे क्या सारे गुण है कि नहीं ये बोल रहा हूं कि ये इसको नहीं

117
00:08:06,080 --> 00:08:10,240
बता रहा है ये शीला जीव गोस्वामी बात बोल रहा है मैंने आपसे पूछा सारे गुण है कि

118
00:08:10,240 --> 00:08:14,240
नहीं नहीं है और ये

119
00:08:14,240 --> 00:08:18,880
नहीं बोला है ये ये एक अलग विषय है कि ये आपके पूर्वाचार्य

120
00:08:18,880 --> 00:08:22,960
बोल रहे हैं कि कौन बोल रहा है जब आपकी बात हो रही है तो आपको अपनी बात को

121
00:08:22,960 --> 00:08:27,440
सही सिद्ध करना है सारे गुण नहीं है सारे गुण नहीं है

122
00:08:27,440 --> 00:08:31,760
शिव जी आए कहां से है शिव जी आए तो वो तो भगवान

123
00:08:31,760 --> 00:08:35,920
से ही है और हम भी आए भगवान ठीक है तो

124
00:08:35,920 --> 00:08:40,880
पूर्ण से जब कोई चीज निकलती है तो पूर्ण होती है ना

125
00:08:40,880 --> 00:08:44,880
पूर्ण होती है लेकिन वो पूर्णता का प्रकाश नहीं करते हैं। यही

126
00:08:44,880 --> 00:08:49,360
तो है मजा। मतलब उनके अंदर तो है लेकिन वो

127
00:08:49,360 --> 00:08:54,000
वो मतलब कि उनके जो जो स्वरूप का जो

128
00:08:54,000 --> 00:08:58,000
जो एक संभ्रम होता है उस उस

129
00:08:58,000 --> 00:09:02,000
संभ्रम को बजाए रखने के लिए उन्होंने ये ये गुण

130
00:09:02,000 --> 00:09:06,000
उन्होंने प्रकट किया है। देखिए माया

131
00:09:06,000 --> 00:09:10,240
के मैं समझ रहा हूं। एक मिनट यानी कि कृष्ण

132
00:09:10,240 --> 00:09:14,240
से जब शिव आए तो शिव जी पूर्ण है। बस वो

133
00:09:14,240 --> 00:09:18,240
दिखा नहीं रहे पूर्ण हूं। दिखा नहीं रहे मैं पूर्ण है

134
00:09:18,240 --> 00:09:22,400
ना? यानी तत्व से वो वही है। यानी तत्व से वो कृष्ण

135
00:09:22,400 --> 00:09:24,960
ही है।

136
00:09:24,960 --> 00:09:29,280
वो है कृष्ण तत्व और यह भी तत्व और यह तत्व। मैंने

137
00:09:29,280 --> 00:09:33,280
पूछा तत्व से वो पूर्ण है कि नहीं? वो दिखा नहीं

138
00:09:33,280 --> 00:09:38,800
रहे। मगर वास्तविकता में वह पूर्ण है कि नहीं?

139
00:09:38,800 --> 00:09:43,200
वास्तविकता में पूर्ण का सभी अंश ही पूर्ण बनेगा। यह तो इसपनिषद

140
00:09:43,200 --> 00:09:47,200
का वाक्य है। यानी कि यानी कि

141
00:09:47,200 --> 00:09:52,880
तत्व से शिवजी और कृष्ण में कोई भेद नहीं है।

142
00:09:52,880 --> 00:09:57,360
तत्वगतिक से नहीं वो तो विष्णु है।

143
00:09:57,360 --> 00:10:03,360
क्योंकि हां आप देखिए तत्व का मतलब क्या होता है?

144
00:10:03,360 --> 00:10:07,360
हां जो जो अंतिम सत्य है ना वो उस तत्व की बात

145
00:10:07,360 --> 00:10:11,840
कर रहा हूं। अंतिम सत्य जिसके बाद और कुछ बाकी नहीं रह जाता है।

146
00:10:11,840 --> 00:10:15,840
उस तत्व की दृष्टि से बात कर रहा हूं मैं। हां तो जी तो

147
00:10:15,840 --> 00:10:19,920
हां बोलिए। मैंने पूछा शिव जी और विष्णु जी में

148
00:10:19,920 --> 00:10:23,920
कोई भेद नहीं है। ये अभिकोण

149
00:10:23,920 --> 00:10:28,160
है। मैं पूछ रहा हूं। तत्व से कोई तत्व से कृष्ण भगवान

150
00:10:28,160 --> 00:10:32,240
और शिव भगवान में कोई भेद नहीं है ना? तत्व के

151
00:10:32,240 --> 00:10:36,240
दृष्टि से नहीं है। वैसे लेकिन

152
00:10:36,240 --> 00:10:40,320
गुण के दृष्टि से है। अरे वो तो यहां लीला में

153
00:10:40,320 --> 00:10:44,480
है ना फिर वो दिखा नहीं रहे। उनके अंदर गुण है। उनके अंदर भी है

154
00:10:44,480 --> 00:10:48,720
गुण मगर वो दिखा नहीं रहे। आपने ही कहा ना प्रकाशित नहीं करते। होता

155
00:10:48,720 --> 00:10:54,720
सब कुछ है। होता ही नहीं है।

156
00:10:59,120 --> 00:11:04,400
हेलो

157
00:11:04,400 --> 00:11:08,400
हां हां आप मुझे थोड़ा सा बोलने दीजिए मैं क्या

158
00:11:08,400 --> 00:11:10,880
बोल सकता हूं

159
00:11:10,880 --> 00:11:15,120
बोलो हां तो हां तो भगवान

160
00:11:15,120 --> 00:11:19,280
से मतलब की जो जो पूर्ण तत्व [हंसी] है उनसे जो कुछ भी निकलता

161
00:11:19,280 --> 00:11:23,760
है वो सब पूर्ण है लेकिन वो वो तत्वगत

162
00:11:23,760 --> 00:11:28,080
रूप में मतलब कि सेम है और

163
00:11:28,080 --> 00:11:32,240
और जो गुणगत रूप में वो वो अवैध है मतलब जो जो

164
00:11:32,240 --> 00:11:36,640
भगवान का क्वालिटी है और और उनसे सृष्ट जो कुछ भी है सबका क्वालिटी

165
00:11:36,640 --> 00:11:42,000
तो सेम है लेकिन वो जो क्वांटिटी है वो सेम नहीं है

166
00:11:42,000 --> 00:11:46,480
यानी कि शिवजी उनसे निकले हैं तो वो पूर्ण है कि नहीं हर तरह से

167
00:11:46,480 --> 00:11:50,480
हां क्वालिटी है यही तो है भेदाभेद मैं

168
00:11:50,480 --> 00:11:55,600
पूछ रहा हूं क्वांटिटिवली मैं पूछ रहा हूं क्वांटिटिवली कमी है

169
00:11:55,600 --> 00:11:59,840
हां क्वांटिटिवली वो दिखाते हैं कि वो जो हां जो कमी है लेकिन दिखाते

170
00:11:59,840 --> 00:12:04,160
हैं। दिखाते हैं। एक्चुअली कमी नहीं है पर वो दिखाते हैं।

171
00:12:04,160 --> 00:12:08,160
हां क्योंकि देखिए मतलब मतलब उनमें कमी देखना

172
00:12:08,160 --> 00:12:12,240
माया मात्र है। उनकी लीला मात्र है।

173
00:12:12,240 --> 00:12:16,400
देखिए कमी देखना माया मात्र नहीं है। उन्होंने मुझे

174
00:12:16,400 --> 00:12:21,680
नहीं उन्होंने अपने आप को ऐसा ही प्रकाश कराया है। हमारे सामने

175
00:12:21,680 --> 00:12:27,680
ठीक है। अगर वो खुश है खुश हैं।

176
00:12:31,280 --> 00:12:35,680
हां बोलिए मगर तत्व से वो पूर्ण है ना

177
00:12:35,680 --> 00:12:40,160
हां तत्व से तो सभी पूर्ण है तो उनके अंदर सारे

178
00:12:40,160 --> 00:12:44,400
तो उनके अंदर जितने भी गुण है सारे गुण है लेकिन

179
00:12:44,400 --> 00:12:48,480
वो मैंने बार-बार मैं बोल रहा हूं भाई साहब अब अब

180
00:12:48,480 --> 00:12:53,200
जरा अब जरा जरा मुझे बोल लेने दीजिए ठीक है ईश्वर सर्व्यापक

181
00:12:53,200 --> 00:12:57,360
है हां हां भगवान सर्व्यापक

182
00:12:57,360 --> 00:13:01,360
हां ठीक है। मगर भगवान अपने आप को एक कुरुक्षेत्र में खड़ा

183
00:13:01,360 --> 00:13:05,440
दिखा रहे हैं कि नहीं दिखा रहे हैं? हां वो हमें

184
00:13:05,440 --> 00:13:09,680
दिख रहे हैं। एक मिनट दिख रहे हैं। एक मिनट एक एक मिनट

185
00:13:09,680 --> 00:13:13,840
फिर भी हम ये मान रहे हैं सर्व्यापक है। जबकि वो हमें दिखा रहे हैं मैं रथ में खड़ा

186
00:13:13,840 --> 00:13:16,240
हुआ हूं। सारथी

187
00:13:16,240 --> 00:13:20,320
इसोपनिषद में ऐसा लिखा है कि भगवान

188
00:13:20,320 --> 00:13:24,720
मैं ये कह रहा हूं कि श्री कृष्ण भगवान किसी एक देश काल परिस्थिति

189
00:13:24,720 --> 00:13:29,200
में हमें दिख रहे हैं। फिर भी हम ये कह रहे हैं स्पष्ट कि ये सर्व्यापक

190
00:13:29,200 --> 00:13:33,440
है तत्व से क्योंकि हम जानते हैं उसी तरीके

191
00:13:33,440 --> 00:13:37,760
से भगवान है। यही भगवान का

192
00:13:37,760 --> 00:13:42,000
तो मैं पूछ रहा हूं। उसी प्रकार से भगवान शिव हमको आपकी

193
00:13:42,000 --> 00:13:46,640
जानकारी के अनुसार या आपकी थ्योरी के अनुसार भगवान शिव हमको

194
00:13:46,640 --> 00:13:50,640
कुछ कम गुणों से परिपूर्ण अपने आप को प्रस्तुत

195
00:13:50,640 --> 00:13:54,640
कर रहे हैं। ठीक है? सेवक का भाव से

196
00:13:54,640 --> 00:13:58,720
का भाव ठीक है मगर मगर

197
00:13:58,720 --> 00:14:04,000
वो तत्व से मगर वो मगर वो तत्व से पूर्ण है

198
00:14:04,000 --> 00:14:06,640
जैसे

199
00:14:06,640 --> 00:14:10,640
वो अभी बात करेंगे भाई साहब वो अभी बात करेंगे ठीक

200
00:14:10,640 --> 00:14:14,640
है अभी बात चल रही है शिव जी की कि जैसे भगवान

201
00:14:14,640 --> 00:14:18,960
कृष्ण कहीं पर कुरुक्षेत्र में महाभारत के रण

202
00:14:18,960 --> 00:14:23,040
में दिखाई दे रहे हैं किसी एक स्थान पर सारथी बन के बैठे फिर

203
00:14:23,040 --> 00:14:27,120
भी वो सर्वत्र व्याप्त है। है ना? है

204
00:14:27,120 --> 00:14:29,680
ना? सर्व्यापी

205
00:14:29,680 --> 00:14:32,400
हां तो हम उनको

206
00:14:32,400 --> 00:14:36,400
हां तो इसी तरीके तो हम श्री कृष्ण भगवान को सारथी बने

207
00:14:36,400 --> 00:14:40,640
बैठा देखकर ये नहीं मान लेते कि जो सारथी है हम कहते हैं कि नहीं तत्व

208
00:14:40,640 --> 00:14:44,800
से तत्व से सर्व्यापक है। पूर्ण है। ठीक है? इसी

209
00:14:44,800 --> 00:14:48,800
तरीके से आप इसी तरीके से आपकी थ्योरी के अनुसार शिव जी जो है

210
00:14:48,800 --> 00:14:52,800
अपने आप को थोड़े कम गुणों वाला प्रदर्शित कर रहे हैं।

211
00:14:52,800 --> 00:14:57,600
तो हम लीला में ये मान लेंगे व्यवहार में मान लेंगे

212
00:14:57,600 --> 00:15:01,680
तो हम लीला में ये मान लेंगे कि शिवजी जो है कम गुणों वाले हैं क्योंकि वो

213
00:15:01,680 --> 00:15:06,000
अपने आप को ऐसा प्रस्तुत कर रहे हैं। तो यहां पर व्यवहार में हमने ये मान लिया जैसा वो दिखाना

214
00:15:06,000 --> 00:15:10,240
चाह रहे हैं। मगर तत्व से वो वही है। तत्व से शिवजी पूर्ण

215
00:15:10,240 --> 00:15:14,320
है। तत्व से उनके अंदर कोई अभाव नहीं है। नहीं कोई

216
00:15:14,320 --> 00:15:20,320
अभाव नहीं तत्व से शिव और कृष्ण एक ही है।

217
00:15:22,000 --> 00:15:26,400
चली गई क्या आपकी? हां हां इसी को तो अभेद कहते हैं।

218
00:15:26,400 --> 00:15:31,280
मैंने कहा मैंने कहा तत्व से शिव और कृष्ण एक है।

219
00:15:31,280 --> 00:15:35,360
हां ऑब्वियसली एक है। मैं मैं आपसे सुनना चाह रहा हूं। आप

220
00:15:35,360 --> 00:15:39,440
बोल दीजिए। तत्व से शिव और कृष्ण एक है। एक है। शिव और

221
00:15:39,440 --> 00:15:43,600
कृष्ण एक है। मैंने बोल दिया। हां ठीक है। अब आप

222
00:15:43,600 --> 00:15:47,600
अब आप मुझे इस की किस प्रामाणिक पुस्तक में ये बात लिखी हुई

223
00:15:47,600 --> 00:15:52,080
है बता दीजिए। हां शिव और

224
00:15:52,080 --> 00:15:56,480
ये ये थोड़ा मुझे क्लियर करने दीजिए कि शिव और कृष्ण एक है। ये

225
00:15:56,480 --> 00:16:00,640
जो हमारे जो जो गौरी आचार्य है उनके लिखे हुए

226
00:16:00,640 --> 00:16:04,960
जो ग्रंथ है वो मुझे मुझे मुझे मुझे मुझे इस

227
00:16:04,960 --> 00:16:09,120
से दिक्कत है। मुझे इस से आप बताइए कहां लिखा है? आप जो

228
00:16:09,120 --> 00:16:13,680
भक्ति वेद जो जो लाइब्रेरी है वहां पर आप जाके आप आप स्वयं

229
00:16:13,680 --> 00:16:17,680
मुझे मुझे मुझे जीबीसी के द्वारा छापी जाने वाली

230
00:16:17,680 --> 00:16:23,680
किताबें बताइए कहां लिखा है क्या लिखा है कि

231
00:16:24,560 --> 00:16:28,640
हां यहां पर हां यहां पर मैं आपको श्रीमद् भागवतम

232
00:16:28,640 --> 00:16:32,720
से आपको दिखा सकता हूं और और वो इस के ही है इस के वेबसाइट

233
00:16:32,720 --> 00:16:37,600
से मैं आपको दिखा सकता हूं ठीक है बताइए बताइए तो

234
00:16:37,600 --> 00:16:42,080
हां तो हां तो मैं क्या आउट हो सकता हूं अभी थोड़ा

235
00:16:42,080 --> 00:16:46,560
आप मुझे बताइए मेरे पास वो है श्रीमद् भागवतम है

236
00:16:46,560 --> 00:16:50,720
अच्छा अच्छा तो मैं थोड़ा सर्च करके

237
00:16:50,720 --> 00:16:54,720
मैं आपको दे रहा हूं एक म एक बाद मैं

238
00:16:54,720 --> 00:16:58,800
आ रहा हूं थोड़ी देर बाद मैं मैं आपको दे रहा हूं

239
00:16:58,800 --> 00:17:02,880
वो अभी मतलब कि मेरे पास वो गन था

240
00:17:02,880 --> 00:17:07,040
तो अभी तो नहीं है ऑफलाइन में तो तो मैं आपको जो ऑनलाइन है

241
00:17:07,040 --> 00:17:11,120
मैं वही से आपको मैं आपको दिखाना चाहता हूं। ऐसा

242
00:17:11,120 --> 00:17:15,920
जाइए। ठीक है। ठीक है। जय श्री राम।

243
00:17:15,920 --> 00:17:20,150
हां।

244
00:17:20,150 --> 00:17:24,480
[गला साफ़ करने की आवाज़]

245
00:17:24,480 --> 00:17:28,640
हां। तो हां अब मैं बोलना। हां।

246
00:17:28,640 --> 00:17:33,200
आपके जो WhatsApp नंबर है मैं मैं वहां पर जो ईयर

247
00:17:33,200 --> 00:17:37,280
ट्री का जो एक लिखा है मतलब वो इस के ही भक्त के द्वारा

248
00:17:37,280 --> 00:17:41,520
दिया गया है तो वो आप देख सकते हैं अपने मैं उसका

249
00:17:41,520 --> 00:17:45,760
लिंक भी शेयर किया है और और उसका जो मैं

250
00:17:45,760 --> 00:17:50,000
पॉइंट आउट भी किया है

251
00:17:50,000 --> 00:17:54,160
लॉर्ड शिवा एक्चुअली नॉट डिफरेंट

252
00:17:54,160 --> 00:17:58,240
देन मैं आपसे एक बार और क्लियर

253
00:17:58,240 --> 00:18:02,240
कर लूं शिव और कृष्ण में कोई भेद नहीं है। तत्व से वास्तविक

254
00:18:02,240 --> 00:18:06,320
जो रियलिटी है रियलिटी में शास्त्रों में

255
00:18:06,320 --> 00:18:10,480
कहा गया है कि हां मैं मैं पहले बोल लूं

256
00:18:10,480 --> 00:18:14,800
ये शास्त्र श्लोक है कि कि जो व्यक्ति भगवान नारायण

257
00:18:14,800 --> 00:18:18,880
के साथ भगवान रुद्र और और ब्रह्मा को समान मानता

258
00:18:18,880 --> 00:18:22,880
है वो एक पाषांडी है। तो ये पूर्ण रूप

259
00:18:22,880 --> 00:18:26,880
से तो ये नहीं है। लेकिन अभेद भी है और भेद भी

260
00:18:26,880 --> 00:18:32,880
है। यही तो मैं कहना चाहता हूं। देखिए बात ऐसी है

261
00:18:37,520 --> 00:18:42,160
बात ऐसी है कि अगर हमने कहा कि

262
00:18:42,160 --> 00:18:46,880
तत्व से भगवान शिव में और विष्णु में कोई भेद नहीं है। ठीक है?

263
00:18:46,880 --> 00:18:51,280
अब आपने कहा कि शास्त्र का एक वचन है कि शिव और विष्णु को एक कोई मानता

264
00:18:51,280 --> 00:18:56,000
है तो वो पाखंडी है। ब्रह्मा और और

265
00:18:56,000 --> 00:19:00,080
बाकी सब देवता को मैं आपको क्या वो श्लोक दूं? अभी

266
00:19:00,080 --> 00:19:04,160
भाई साहब मुझे मेरी बात आप करने देंगे कि नहीं करने देंगे? अच्छा

267
00:19:04,160 --> 00:19:07,920
अच्छा बोल लीजिए।

268
00:19:07,920 --> 00:19:12,720
आपने कहा तत्व से शिव और कृष्ण में कोई भेद नहीं है। ठीक है।

269
00:19:12,720 --> 00:19:16,960
तो इस बात को हम माने कि ना माने?

270
00:19:16,960 --> 00:19:21,120
अभेद है और भेद भी है। इसको हमें मानना पड़ेगा। मैंने कहा

271
00:19:21,120 --> 00:19:25,120
इस बात को माने कि ना माने क्या है ये? पूर्ण रूप से तो

272
00:19:25,120 --> 00:19:30,400
अभेद भी नहीं है। मतलब पूर्ण रूप से तो एक भी नहीं है लेकिन एक है भी।

273
00:19:30,400 --> 00:19:34,560
मैं बता रहा हूं क्या है? ऐसा है कि व्यवहार की

274
00:19:34,560 --> 00:19:38,720
दृष्टि से राम जी कौशल्या माता से जन्म लेते हैं। और

275
00:19:38,720 --> 00:19:43,600
तत्व की दृष्टि से वो उससे प्रकट होते हैं। जन्म नहीं लेते।

276
00:19:43,600 --> 00:19:47,600
तो हमें तत्व से ये मानना पड़ेगा। तत्व से हमें मानना पड़ेगा कि

277
00:19:47,600 --> 00:19:50,960
शिव और विष्णु एक हैं।

278
00:19:50,960 --> 00:19:52,560
और व्यवहार से आप ये कह रहे

279
00:19:52,560 --> 00:19:56,640
हैं कि हमारे पास एक श्लोक है जिसमें कि उनको व्यवहार में शिव और विष्णु को

280
00:19:56,640 --> 00:20:01,360
अभेद शिव और विष्णु को अभेद मानने वाले पाखंडी है। ठीक है? हां

281
00:20:01,360 --> 00:20:05,600
हां तत्व से तत्व से शिव और विष्णु में

282
00:20:05,600 --> 00:20:09,840
रियलिटी में जो वास्तविक जो अंतिम रियलिटी है ट्रुथ उसमें

283
00:20:09,840 --> 00:20:14,240
शिव और कृष्ण में कोई भेद नहीं है और जो ये संसार भौतिक दृष्टि

284
00:20:14,240 --> 00:20:18,240
है इसमें आपके पास एक श्लोक है जिसके कारण आप ये मानने के

285
00:20:18,240 --> 00:20:22,240
लिए वो है कि व्यवहार में हम शिव और विष्णु में भेद मानते हैं। ठीक है?

286
00:20:22,240 --> 00:20:26,400
इसका मतलब केवल शास्त्र का ही एक शास्त्र वो शास्त्र ने जो चिन्हित किया

287
00:20:26,400 --> 00:20:30,400
है आपके अनुसार जो आपने शास्त्रों का अर्थ किया है उसके अनुसार

288
00:20:30,400 --> 00:20:34,400
शिव और विष्णु में भेद मानना मैंने मांगा

289
00:20:34,400 --> 00:20:38,880
है क्या आपसे जब मैं मांगूंगा तब दे दीजिएगा ना भाई

290
00:20:38,880 --> 00:20:42,960
मैंने जो मांगा था आपने दिया मैंने लिया आप जितनी बार मैं

291
00:20:42,960 --> 00:20:46,960
बोलता हूं बीचबीच में मैं मैं श्लोक दूं मैं श्लोक दूं ठीक

292
00:20:46,960 --> 00:20:50,480
है ठीक है आप बोलिए

293
00:20:50,480 --> 00:20:54,560
तो व्यवहार में आप ना मानने के लिए इसलिए मजबूर हैं क्योंकि आपको

294
00:20:54,560 --> 00:20:58,800
शास्त्र का एक वचन प्राप्त है जिसमें कि इनको अभेद मानने वाले पाखंड

295
00:20:58,800 --> 00:21:03,040
कुल मिलाकर के शास्त्र के एक वाक्य के कारण जो है आप मान रहे बाकी तत्व

296
00:21:03,040 --> 00:21:07,120
से आप भी शिव और कृष्ण को एक मानते हैं। हां

297
00:21:07,120 --> 00:21:11,200
ये तो हां ये तो है। ये तो वास्तव यानी

298
00:21:11,200 --> 00:21:15,600
यानी कि तत्व से शिव जी कोई अलग से दूसरा तत्व

299
00:21:15,600 --> 00:21:19,280
नहीं है। कृष्ण ही है।

300
00:21:19,280 --> 00:21:23,360
हां कृष्ण का प्रकाश है। कृष्ण का प्रकाश और यार [हंसी]

301
00:21:23,360 --> 00:21:28,160
अंतर है कि मैं पूछ रहा हूं अंतर है कि नहीं जरा सा भी

302
00:21:28,160 --> 00:21:32,240
प्रकाश जब जब आप प्रकाश लाओगे तो अंतर अंतर

303
00:21:32,240 --> 00:21:36,480
है तत्व से कह रहा हूं तत्व से कह रहा हूं तत्व से जरा सा तो अंतर

304
00:21:36,480 --> 00:21:40,240
है तत्व से कह रहा हूं

305
00:21:40,240 --> 00:21:44,720
तत्व से कह रहा हूं हां जरा सा तो अंतर है

306
00:21:44,720 --> 00:21:48,880
यानी तत्व से भी अंतर है जरा सा

307
00:21:48,880 --> 00:21:52,960
है अरे जरा आयए है ना भाई? हां हां

308
00:21:52,960 --> 00:21:57,040
पता नहीं क्यों आप लोग अपनी फिलॉसफी को स्वीकार करने में भी डरते हो

309
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यार। अच्छा ठीक है ठीक है। आप अब आप अपना आप

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अपना बोलो। बोलो बोलो बोलो। शर्म आती है क्या जो चीज गुरुओं

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ने सिखाई

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है जिनको आप गुरु कहते हो वो बातें एज इट इज बोलने में। नहीं

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जब आप अपनी चीजों को जब आप अपनी चीजों को अपनी मान्यताओं को एज इट इज

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बोलोगे नहीं तो हम बात किस पे करेंगे बताइए? जब मेरी बारी आई थी मैंने फट

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से बोला। भले ही आप बाद में कटाक्ष कर दो। मैंने फट से बोला ना।

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ठीक है। ठीक है। आप अपना बोलिए। बोलिए बोलिए। एक

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एक फ्लो में आप चर्चा करने की वो नियत रखते ही नहीं हो कि

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भाई हम सत्य की खोज करने बैठे हैं। ऐसे बोलो ऐसा

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उसमें दिमाग लगाओ कहीं हमारी पटकनी ना हो जाए। ये ध्यान है।

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नहीं नहीं आप बोलिए।

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भाई जो आपको बताया आपके गुरुओं ने जो आपने पढ़ा है जो आप मानते

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हो जो आप जानते उसको बोलो ना यार डंके की चोट पे

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वो गलत है सही है बाद में सिद्ध होगा वो उसी को अभी

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कह रहे थे तत्व से भेद नहीं है अब कह रहे हो जरा सा है अब मैं बार

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अब मैं बार-बार कह रहा हूं तत्व से भी तत्व से भी भेद है

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तत्व से भेद है

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है लेकिन वो जरा सा है वो हमें दिखाई

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दे रहा है वो हमें दिखाई दे रहा है लेकिन वास्तविक में वो नहीं है

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हो गया आप आप जाइए अब हो गया ठीक है अच्छा लगा आपकी बात कर जय

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श्री राम

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सही बात है भैया इसमें पहले बोला था कि कोई भेद नहीं है फिर

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उसके बाद मानने लगा जरा जरा सा भेद है जरा सा

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मतलब वो खुद क्लियर नहीं कर पा रहा खुद में इतना डाउट में है कि आखिर

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भेद है कि नहीं है उपनिषद का वो वाक्य वो

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माने कि नहीं माने

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क्या है इनका फिलसफी कुछ भी नहीं पता तथागत

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जी तथागत जी आप समझ लीजिए तत्व से

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अभेद है तत्व से अद्वैत है और व्यवहार में द्वैत है

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यही तो हम भी मानते जो आप मान रहे हो यही हम मानते हैं मगर क्या हुआ

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है कि आपको अवमानना करनी है शंकराचार्य की अपना घरौदा

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बसाना है आपको नहीं मतलब जिसको आप मान रहे हो उस तंत्र को तो

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इसलिए जरूरी है कि भैया हमको वो शब्द स्वीकार नहीं करना है

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उसी शब्द को शब्दांतर से शब्दांतर भेद से

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हम जो है उसी शब्द को दूसरे तरीके से स्वीकार करके कह देंगे हमारी फिलोसफी तो

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द्वैत है
