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00:00:03:13 तो सभी को जय श्री राम। लोकेश पांचाल जी पहले आप अपने बारे में थोड़ा सा ये बता दीजिए। होता क्या है कि जब हम किसी के साथ चर्चा बता दूंगा मैं समझ गया। हमें समझ गया हूं तो जी तो मैं बता देता हूं अपने बारे में। हां मैं लोकेश पांचाल हूं। ठीक है। मैं इंदौर लोकेशन से हूं। एमपी इंडिया और मैंने रामपाल जी महाराज जी से अभी-अभी रिसेंटली फरवरी में ही नाम दीक्षा ली है। मुझे छ सात महीने हुए हैं। ज्यादा टाइम हुआ नहीं है। और उसके बाद में मैंने फिर ज्ञान गंगा पुस्तक से मुझे भी ज्ञान प्राप्त हुआ तो मेरा कोई पहले मतलब ऐसे विशेष गुरु नहीं राधास्वामी पंथ से जुड़ा हुआ था पहले मैं 810 साल क्योंकि था पहले कबीर पंथी ही मैं तो इसलिए क्या हुआ कि जब ये ज्ञान गंगा पुस्तक और ये थोड़ा बहुत ज्ञान मुझे मेरे पिताजी जुड़ गए थे पहले तो उन्होंने मुझे बताया कि राम जी महाराज जी है तो फिर क्या हुआ था कि थोड़ा बता दो ना दो मिनट अपने बारे में मैं कैसे जुड़ गया नहीं नहीं ये नहीं जानना है असल में मेरा क्वेश्चन दूसरा था ठीक है होता क्या है कि जब भी हम किसी से बात करते हैं हम तो बाद में जो जिस कम्युनिटी के व्यक्ति से हम बात कर रहे हैं। उसकी कम्युनिटी वाले ये कहते हैं कि आप जो है किसी एरेगरे को पकड़ के उसके साथ चर्चा करते हो। हम अब हमने किसी

00:01:18:16 को रोका नहीं है। आपने वहां पर अप्लाई किया फॉर्म भरा तो हम आपके समक्ष आ गए। अब जो सामर्थ्यवान है वह क्यों नहीं प्रयास कर रहे हैं संपर्क करने का तो यह इस बारे में हमें नहीं पता है। मगर इस पर मेरा प्रश्न यह है कि रामपाल जी की तरफ से किसी को भी एक अधिकृत व्यक्ति समझने के लिए क्या व्यवस्था है? क्या नियमावली है? कि हम किसी को अधिकृत समझे अथवा ना समझे? भाई साहब देखो आप जिस विषय में बात कर रहे हैं ना मतलब मैं तो यहां इसलिए जाइन किया है कि आपने एक वीडियो में बोला था कि अगर रामपाल जी महाराज के किसी शिष्य ने मां का दूध पिया है तो वो मुझसे ज्ञान चर्चा करें। ठीक है आपने जो बोला था अभी आप मुकरना चाहो तो मुकर सकते हो। देखो मैं तो सत्य को मानने वाला हूं। मेरे गुरु जी ने सत्य बोलना सिखाया है। अब उस उस का्टेक्स्ट में मैं नहीं आया हूं कि मेरे गुरु जी का क्या ज्ञान है? ज्ञानी है। मैं अपने एक गुरु का शिष्य का फर्ज निभाने के हिसाब से मैं आपसे ज्ञान चर्चा करने आया हूं। बस इतना ही है। मैं ज्ञान चर्चा करने बैठे हैं। वो आप सही कह रहे हैं। और थोड़ा सा वर्डिंग्स थोड़ी सी शायद चेंज है। माता जी का माता जी ने निष्ठा पूर्वक दूध तो पिलाया ही होगा। ऐसा वर्डिंग्स थी। मां का दूध पिया है।

00:02:33:27 मतलब हां ऐसे नहीं बोला। जी वर्डिंग थोड़ी जी। ठीक है। तो वो वो दास जो दास वो गुरु जी का जो अभी मैं देखिए मेरा जो प्रश्न है मैं वो ज्ञान चर्चा के लिए आप आए हैं। मैं ऐसे ही जस्ट फॉर एक जनरल क्वेरी कर रहा हूं। क्या रामपाल जी के द्वारा या रामपाल जी के शास्त्रों में उनकी ओर जैसे रामपाल जी आज हैं हो सकता है वो कल को परलोक चले जाए या स्वर्ग में मतलब अपने जो आपके अनुसार वो भगवान है ना आपके अनुसार वो भगवान गुरु जी भगवान है हो सकता है वो सतलोक में चले जाए देखो आप आपके हिसाब से बता दो फिर मेरा क्या काम है मेरा प्रश्न ये है मेरा मैं जो प्रश्न है वो कर रहा हूं कि रामपाल जी जब उपलब्ध नहीं है। उस दशा में उनकी तरफ से अधिकृत व्यक्ति कौन है जो उस ज्ञान को बाकी के लोगों को देगा? इस बारे में कोई व्यवस्था है कि नहीं है? बस यह मैं जानना चाह रहा हूं। रामपाल जी महाराज के द्वारा ऐसी व्यवस्था की गई है कि अगले 1000 साल तक सिर्फ रामपाल जी महाराज के ही सत्संग सुनाए जाएंगे। टीवी पे जो आज वहां जेल में 10 साल से होते हुए भी उनके सत्संग आज भी चल रहे हैं। आज भी नाम दीक्षा उन्हीं के द्वारा दी जा रही है और अगले 1000 साल तक की व्यवस्था कर दी गई है। नहीं नहीं 1000 साल नहीं

00:03:49:03 षष्ठी तो उसके बाद भी रहेगी। व्यवस्था क्या है उसके बाद की? 1000 साल के बाद तो कोई व्यवस्था है कि नहीं है? रामपाल जी के ना होने की स्थिति में कोई व्यवस्था है कि नहीं है? अगले 1000 साल तक की ये दास गारंटी लेता है। उसके बाद की तो प्रलय आनी है। फिर प्रलय आने पर तो कौन बचेगा? आप ही बताओ। मतलब अगर रामपाल जी नहीं है, अगर रामपाल जी नहीं है तो उस दशा में उनकी तरफ से कोई अधिकृत व्यक्ति नहीं है। इस इस बारे में कोई वो नहीं है व्यवस्था। अच्छा अगर मैं जानना चाहूं कि आप शंकराचार्य के से जैसे शंकराचार्य हो और आप भी अपने आप को क्या मानते हो? मतलब आपको कहीं सर्टिफिकेट दे रखा है क्या ज्ञान चर्चा करने का? आपके मैं दूसरा मैं दूसरा प्रश्न पूछ रहा हूं। सर्टिफिकेट मैं आपको मैं आपको ब्लेम नहीं कर रहा हूं। मैं केवल यह जानना चाह रहा हूं कि क्या ऐसी कोई आपके यहां पर कोई व्यवस्था है जिसमें रामपाल जी की अनुपस्थिति में उनकी ओर से किसी को उनका उत्तराधिकारी या उनका जो है अधिकृत नहीं है उत्तराधारी तो इसका मतलब जब रामपाल जी नहीं है तो किसकी माने किसकी ना माने ये कुछ फिक्स नहीं है शायद आपने सुना ही नहीं मैंने क्या बोला कि आप सुनना ही नहीं चाहते हो मुझे सुनना सुनना चाहते हो आप भी चाहिए मैं बोल रहा हूं कि

00:05:04:04 आज रामपाल जी महाराज जी को 10 साल हो गए जेलधाम गए हुए। यह बात आप जानते हो कि नहीं जानते हो? 10 साल से टीवी पर सत्संग चल रहे हैं। जानते हो या नहीं जानते हो? साधना चैनल है। 7:30 बजे रोज सत्संग आता है। आज उनके 514 नाम द सेंटर है। देलधाम जाने के बाद खुले गए। ठीक है? तो वो चल रहे हैं। देखिए वो चर्चा थोड़ी बदल रही है। देखिए अब मैं आपको प्रैक्टिकली बताता हूं दिक्कत क्या है। जैसे आपने कहा कि उनके 514 नाम दान अंतर है। ठीक है? हां अब उसमें रामपाल जी तो नहीं है 514 जगह रामपाल जी तो जेल में है रामपाल जी के नाम से जो वहां पर शिक्षा दी जा रही है वो कुछ और लोग कह दे रहे हैं तो जब कुछ और लोग रामपाल जी के नाम से शिक्षा वहां पर दे रहे हैं हां ऐसा नहीं रामपाल जी महाराज जी ने जो नियम बनाया है ना वो वो नियम से ही चल रहे जो वो देखिए मैंने मैंने आपको एक ज्ञान गंगा पुस्तक पकड़ाई ठीक अब ज्ञान गंगा पुस्तक में वही लिखा है जो रामपाल जी ने लिखा था या बदल दिया गया है। यह आपको कैसे पता चलेगा? वो तो हमारे गुरु जी वो जो पुस्तक छपा जब तक आप जेल नहीं जाओगे जब तक आप रामपाल जी के पास नहीं जाओगे तब तक आपको पता नहीं चलेगा

00:06:19:08 ना। या तो आपको मान या तो आपको विश्वास करना पड़ेगा जो रामपाल जी के नाम से आपको पुस्तक दे रहा है। आपको एक मानना पड़ेगा कि चलो इस पर विश्वास कर लेते हैं। ये वही ये वही ज्ञान दे रहा है जो रामपाल जी ने दिया। मानना पड़ेगा। है ना? यानी कि आपने किसी और पर रामपाल जी की तरफ से विश्वास किया। तो मैं यह कह रहा हूं यह जो विश्वास करने वाला नियम है यह रामपाल जी ने अपनी किसी पुस्तक में दिया है कि नहीं दिया है? दे रखे उन्होंने जो भी देखो भाई साहब है ना अपन उस पॉइंट पे आते हैं जहां से ज्ञान चर्चा करेंगे। ठीक है? ये क्या है? हम ये भी देखिए ये भी ये भी ज्ञान चर्चा है। मैं देखिए इसमें कोई हारजीत वाली बात नहीं। मैं आपसे बस जानकारी ले रहा हूं। क्या रामपाल जी ने विश्वास किस पे करना है मेरी तरफ से और किस पे नहीं करना है। इस बारे में कोई नियम दिया है क्या? जैसे हमारे पास एक नियम दिया जैसे मैं अपनी बात बताऊं आदि शंकराचार्य जी ने मटामना मान शासनम लिखा उसमें उन्होंने लिख दिया जो मेरे द्वारा स्थापित पीठ पर आरूढ़ लक्षण संपन्न सन्यासी होगा वो मुझ शिव का रूप ही मान्य है तो ये क्या हुआ नियम दे दिया अब भाई उनकी ओर से जो भी आएगा उनका उनके द्वारा उनका शिष्य फिर उनका शिष्य फिर उनका शिष्य तो वो हमारे लिए उसी रूप में मान्य हो जाएगा

00:07:34:12 तो ये नियमावली हमें प्राप्त है और ये नियम ये ये ये भी जो नियम है यह आधारित है शास्त्रों के जो आदि शंकराचार्य जी ने जो नियम लिखा छ 23 श्वेता शत्रोपनिषद के आधार पर उन्होंने लिखा तो कहने का अर्थ यह है क्या ऐसा कोई नियम उन्होंने बनाया है मैं मान लीजिए मैं अभी एक ज्ञान गंगा छपवा लूं प्रिंटर से और उसमें कुछ ऐसी बातें लिख दूं जो रामपाल जी ने नहीं लिखी है तो आपको कैसे पता चलेगा कि यह जो चीजें हैं वो रामपाल जी ने नहीं लिखी आप तो उसको रामपाल जी की मानोगे नहीं तो हो सकता है इसके उसमें क्या है मतलब करने तो इसका मतलब इसका कोई सही ढांचा आपके पास नहीं है। किस पुस्तक को लेना है, किसको नहीं लेना है। ठीक है हां मान गए पर सत्संग तो सुन रहे हैं उनके लाइव वो वो तो सुन सकते हैं। सत्संग सुन रहे हैं मगर फिर भी सत्संग में पूरा बहद ग्रंथावली तो नहीं आ जाएगी ना। सत्संग में उनके 3000 से ज्यादा एपिसोड है जिसमें 1000 ज्ञान गंगा पुस्तकें और बनाई जा सकती है। यानी कि उन्होंने इतना सत्संग कर दिया है कि उसी से सब कुछ हो जाएगा। सत्संग सुनने से सब अब मुझे भी तो वही से ज्ञान प्राप्त हुआ। अब मेरे को यह पैदा होते से रामपाल जी महाराज का शिष्य तो था। अच्छा एक बात बताइए सत्संग से सब हो जाएगा। अभी आजकल एआई का जमाना आ गया है। एआई से किसी ने रामपाल जी की कॉपी करते हुए रामपाल

00:08:49:22 जी के नाम से गलत सत्संग बना दिया। फिर क्या करेंगे? अच्छा एक काम करते हैं। पहले एक मेरे सवाल का जवाब दे दीजिए आप। नहीं नहीं मैं हम लोग अभी मेन टॉपिक पे आएंगे। मगर अभी अभी जैसे आप पूरी तरीके से आप पूरी तरीके से डिपेंड हो गए हैं वीडियो पे तो वीडियो अगर किसी ने ये जो एआई वगैरह का जमाना आ गया है इसमें वीडियो वो हो ऑडियो मिक्सिंग हो रही है तो रामपाल जी के नाम से रामपाल जी के चित्र आदि का एडिटिंग वेडिटिंग करके आपको कुछ गलत उसमें दिखा दिया सत्संग में तो आप फिर वहां पर आपका वो क्या है सोर्स निर्णायक मुझे आप मुझे बताइए ना कि वो जो वीडियो है वो वीडियो है वो कौन डालेगा आप बताओ कोई गलत व्यक्ति जो रामपाल जी की शिक्षा आप तक नहीं पहुंचाना चाहता है। हां तो वो व्यक्ति साधना टीवी 7:30 बजे जो जाता है तो उस पर कोई आधिकारिक व्यक्ति उन्होंने बिठा रखा रामपाल जी महाराज जी ने कि ये आज का सत्संग हां मतलब कि मतलब कि साधना टीवी उनका आधिकारिक चैनल है। वहां पे आधिकारिक चैनल उनका नहीं भाई साहब उसके मतलब उनकी ओर से सही चीज दिखाता है। हां वहां पे कोई बैठा है जो उस उनका सत्संग प्रसारित करने वाला कोई बैठा होगा ना वहां पे। हां तो मैं मेरा कहना यही है कि आज वो अच्छा व्यक्ति है। साधना चैनल वाले का ओनर बदल गया। कंपनी एक दूसरे से खरीद

00:10:04:26 लेती हैं। हां। उसका मन बदल गया। अब मुझे रामपाल के विरोध में दिखाना है, मिक्सिंग करनी है। तो हमारे पास कोई पैरामीटर होना चाहिए ना कि हमें क्या चीज किस पैरामीटर के हिसाब से सही माननी है, किसके हिसाब से नहीं माननी है। अब हमारे पास पैरामीटर सेट है। और आपके पास वो सेट है कि नहीं? मैं ये पूछ रहा था। चलिए अब हम मुख्य विषय पर आते हैं। समझ गया समझो मैं बता नहीं मैं बता देता हूं मैं समझ गया था जवाब भी सुन लीजिए रामपाल जी महाराज ने अपनी तरफ से कोई ज्ञान दिया नहीं है जो भी ज्ञान दिया है उन्होंने कहां से दिया है एक है कबीर सागर दूसरा है गरीब दास जी का अमर ग्रंथ ठीक है तो जहां पर भी गड़बड़ होगी तो कबीर सागर मेरे पास रखा हुआ है देखो दिखा दो नहीं तो आप बोलोगे आपके पास कबीर सागर में देख लीजिए तो जिस दिन मुझे लगे पढ़ रखा है दास ने तो वो समझ जाएगा कि इसमें मिलावट हो रही है आपके लिए अंतिम प्रमाण कबीर सागर है या वेद है वेद वेद नहीं है भाई साहब। मैं वही तो पूछना चाह रहा हूं कि वेद का ज्ञान किसने दिया? ये मेरा पहला सवाल ही आपसे है। वेद का ज्ञान किसने? अभी इन सब हम लोग एक एक करके चलते हैं। पहले एक फिर दूसरा उसके बाद सवाल नहीं है। इस पर हम लोग सबसे पहले आते हैं कि अगर हम ये कहते हैं कि कबीर साहब भगवान है। कबीर साहब भगवान है। हम तो

00:11:20:14 क्या वो सर्वशक्तिमान है? सर्वशक्तिमान है। यहां है क्या वो सर्व नियामक है? नहीं अभी रुको ना भाई साहब। अभी रुको ना अभी एक एक पे चलते हैं ना। आप हिसाब उसको भी क्लियर करते चले कि आपने जो ज्ञान जो समझा है क्या वो सही भी है या नहीं है। भाई साहब देखिए पहले मैं बता दूं एक आपको एक बात बता दूं पहले कि क्लेम सुनिए क्लेम आपने पहले शुरू किया है कि भाई वेदों में प्रमाण है कवि साहब भगवान है। ये क्लेम आपने शुरू किया है पहले। ठीक है? याद है आप ना अभी आप अभी आप उनकी तरफ से आए हो ना हमारे पास अभी आप उनकी तरफ से ही आए हो ना तो अब जब हम हम जब ये मानने को तैयार हो जाए कि कबीर साहब भगवान है तो हमें ये जानना होगा ना कि वो भगवान वाले फीचर्स उनके पास है कि नहीं कि यूं ही कह रहे हैं भगवान है और मैं मेरे को ये नहीं चाहिए कि आप कुछ करके दिखा दो कबीर साहब की तरफ से नहीं बस वो नियम तो बताओ कि क्या ये नियम आपने स्वीकार कर रखे हैं जो जो नियम ईश्वर होने के आवश्यक है। तो अभी मैं पूछ रहा हूं बोल रहा हूं कि आपने किस कौन से आधार पर नियम बना रखे कि ईश्वर की यह नियम है। आप कैसे पहचानोगे? कल को अगर ईश्वर अवतार देखिए ये जनता तय कर लेगी। अभी हम लोग कन्वर्सेशन करते हैं कि मैंने जो चीजें बोली

00:12:35:18 है वो गलत है या सही है वो जनता तय करेगी। हम यहां किसी जिद्दोजहद के लिए नहीं आए हैं। ठीक है? एक-एक करके चलते हैं। अभी मैं पूछ रहा हूं आपसे क्या रामपाल दास जी के द्वारा प्रतिपादित होने वाला जो ईश्वर है कबीर नाम है जिसका वो सर्वशक्तिमान है या नहीं? सर्वशक्तिमान है वो वो ईश्वर क्या उसके ऊपर कोई भी नियम एक मिनट भाई अब हमारे को तो बोलने दो। हम तो ज्ञान आया है ना। आपके द्वारा प्रतिपादित भाई जब आपकी जब आप एक बात खत्म आप उसको पॉइंट को लिख लो। तो मैं बताऊंगा। मैं आपको हमारे द्वारा प्रतिपादित होने वाला ईश्वर बताऊंगा। ठीक है? अभी जब एक पॉइंट इसको कंप्लीट होने दो पहले इसको आप कंप्लीट होने दो। हां इसको आप कंप्लीट होने दो। तो यदि वो सर्वशक्तिमान है। यदि आपका कबीर सर्वशक्तिमान है तो क्या वो किसी भी प्रकार के नियम के नीचे है कि नहीं है? बिल्कुल वो उनके बनाए हुए नियम के नीचे है। मैं मानता हूं। अच्छा मतलब संसार में ऐसे बहुत से काम है जो वो नहीं कर सकता। बिल्कुल हां सत्य सत्य तो फिर वो बाधित है सीमित है। उसकी शक्तियां सीमित है। बिल्कुल सर्वशक्तिमान तो है

00:13:50:24 पर उसकी जो सीमित है वैसा नहीं कि अच्छा सर्वशक्तिमान का अर्थ क्या होता है? मैं आपसे जानना चाह रहा हूं भाई कि क्या है सर्वशक्तिमान का अर्थ आप बताओ मुझे सर्वशक्तिमान सर्वशक्ति सर्वशक्ति सभी कार्य सर्व यानी सभी सभी कार्यों को करने की शक्ति को रखने वाला सर्वशक्तिमान अब सभी कार्यों में आप कह रहे हो कि नहीं नहीं कुछ कार्य ऐसे हैं जो वो नहीं कर सकता क्या प्रैक्टिकल है ये आप जो बोल रहे हो क्या प्रैक्टिकली सही है बिल्कुल प्रैक्टिकल मैं बिल्कुल सिद्ध कर दूंगा पहले अभी आप आपको पहले एक्सेप्ट करना होगा कि वो सर्व अरे भाई मैं यह कह रहा हूं कि मेरे पास ईश्वर है ही नहीं। मैं अभी आपको कह रहा हूं है ही नहीं ईश्वर। अब आप अपने ईश्वर को सर्वशक्तिमान तो सिद्ध करोगे कि नहीं करोगे कि दुनिया को नास्तिक बना दोगे? नहीं नहीं क्योंकि किसी के पास नहीं है क्योंकि किसी के पास नहीं है इसलिए मेरा सही है। नहीं नहीं ऐसा क्योंकि किसी के पास क्योंकि किसी के पास टिकट नहीं है इसलिए मेरे पास भी टिकट ना होना उचित है। ऐसा तो नहीं है। दूसरे के पास टिकट है या नहीं है डजंट मैटर। आपके पास टिकट है कि नहीं ये मैटर करता है। अभी आपसे बात हो रही है। ईश्वर है वो उसके कुछ नियम है उस नियम को फॉलो करता है वो ऐसे नहीं वो नियम यानी वो अपने बनाए हुए नियम नहीं तोड़ सकता बिल्कुल

00:15:06:09 सही यानी कि अपने नियमों को तोड़ने की शक्ति उसमें नहीं है नहीं है शक्ति वो शक्ति नहीं है इसके अंदर तो फिर सर्वशक्तिमान कैसे हुआ तो फिर वो नहीं हुआ फिर सर्वशक्तिमान फिर आपका ईश्वर सर्व बोलो आप ये पहले आप ये पहले जनता के सामने थोड़ा एक्सेप्ट करो कि हां वो क्लियर कि कबीर सर्वशक्तिमान नहीं है तो भाई एक बात बताओ मुझे आपने ऐसा बोला ठीक है अरे भाई आपने बोला ना नहीं है अब बोलो अब आपने अभी आपने बोला ना नहीं है सर्वशक्तिमान पहले बोलो बोलो ठीक है मेरा ईश्वर सर्वशक्तिमान नहीं है बोल दिया मेरा नहीं कबीर कबीर सर्वशक्तिमान नहीं है बोलो कबीर सर्वशक्तिमान नहीं है बोल दिया बढ़िया अब आप बताइए कि जब वो सर्वशक्तिमान नहीं है जब वो सर्वशक्तिमान नहीं हाथ जोड़ के निवेदन है। अब आप ईश्वर कोच [गला साफ़ करने की आवाज़] लेना चाहिए ना यहां पर। चलो अच्छा अब हमारे ईश्वर के बारे में पूछो। चलो। हां। ईश्वर सर्वशक्तिमान है। जानते हो? ठीक है। जी। अभी श्रावण के महीने में 12 बच्चे [गला साफ़ करने की आवाज़] मना रहे थे। उसमें से नौ बच्चे उनके ऊपर दीवार गिर गए। वो मर गए वो दब कर। सर्वशक्तिमान ईश्वर जो थे उन्हें क्यों नहीं बचा पाए?

00:16:21:18 अच्छा ठीक है। अब मुझे आप एक बात बताओ क्या यह जो संसार है यह भगवान के लिए क्या है? हमारे हमारे हिसाब से तो ये तो आपके ईश्वर के हिसाब से है ये सब चीजें हमारे हिसाब से तो काल का जाल है ये। मैं जिस ईश्वर को जानता हूं आपके ईश्वर के यहां पे होने वाली घटनाएं क्या आपके ईश्वर को प्रभावित करती है या नहीं? मतलब कि नहीं करती मतलब कि यहां पर किसी का रेप हो रहा है तो उसको दुख होगा या नहीं होगा? मेरे ईश्वर को इस बात से दुख होता जरूर है। ठीक है। यानी ईश्वर को भी दुख होता है। हां बिल्कुल उनको दुख होता है। उनके ही बच्चे हैं सब मेरे कबीर को दुख होता है। बिल्कुल वो बोलते हैं मैं रोव सृष्टि को ये सृष्टि। अब आप ईश्वर की व्याख्या करिए जरा। अब ईश्वर से ईश्वर का अर्थ क्या समझते हैं आप? अब मैं तो बता रहा हूं ना कि जिस ईश्वर ने हमें जन्म दिया या जिसने हमारी उत्पत्ति करी है वो हम दुखी होते तो ईश्वर को भी दुख होता है। ठीक है? हम हमारे अज्ञान के कारण इस काल के लोक में बैठकर दुखी हो रहे हैं। मतलब कि यहां से जो सभी जो मुक्ति कही गई है वो मुक्ति भी मुक्त नहीं क्योंकि हमारा ईश्वर भी दुखी होता है। क्यों

00:17:36:21 नहीं दुखी होंगे बताओ? अगर आपने उसके बच्चे तो फिर वो मुक्त कहां से? तो फिर हम हम मुक्ति जो हमें कह रहे हैं कि हम इन सारे रोग दोष क्लेशों से मुक्त हो जाएंगे दुखों से मुक्त हो जाएंगे वहां जाकर के जब जिसका जो हमारा भगवान है वही दुखी हो रहा है तो हमारे को उस भगवान तक जाने की क्या आवश्यकता है भाई तो जब आपका भगवान भी दुखी हो रहा है तो भगवान सुखी भी तो है जब यहां से आत्माएं सतलोक को चली जाती है तो सुखी भी तो होता है वो सुखी अरे ऐसे तो हम यहां भी खुश होते हैं यहां हम खुश नहीं होते क्या यहां के तो सारे सुख ही नकली है कौन सा सुख अरे मैं कह रहा हूं सुख नकली है दुख नकली है ठीक है मगर वहां भी जाकर के दुख तो है ना नहीं है ना दुखों से सवाल का जवाब नहीं दिया भाई कि वो ईश्वर मैं भाई मैं जब आपका जब बात यहां पर खत्म हो रही है क्योंकि मैं तो सारे सवालों के जवाब देने बैठा हूं। नहीं नहीं मेरे ईश्वर के साइड हो गए ना। अब तो आपके ईश्वर की बात चल रही है कि आपका ईश्वर उन बच्चों को क्यों नहीं बचा पाया? सर्वसम क्योंकि सुनिए मैं बता रहा हूं। बचा पाने की बात नहीं है। बचा पाने की बात नहीं। पहले सुनिए क्योंकि इस संसार को बनाने वाले ईश्वर हैं। इसका अर्थ यह है कि उन बच्चों के साथ जो घटना हो रही है ना उस घटना को भी भगवान ने ही बनाया है और बच्चों को भी भगवान

00:18:51:27 ने ही बनाया है। भगवान के लिए भगवान के लिए यह केवल एक खेल है और इससे ज्यादा कुछ नहीं है। इसलिए यहां पर होने वाली अच्छाई अथवा बुराई भगवान से नहीं चिपकती। क्योंकि भगवान ने बुलाया। जैसे मान लीजिए फॉर एग्जांपल एक पेंटर है जो पेंटिंग कर रहा है। ठीक है? एक स्त्री की पेंटिंग कर रहा है वह। क्या उस जब वह पेंटिंग करेगा उसकी आंखों में कलर भरेगा तो उसके जो नीचे के पार्ट्स होंगे जो आपत्तिजनक होते हैं हमारी दृष्टि से स्त्री के लिए। मगर क्या पेंटर जब पेंटिंग करेगा उसके उन पार्ट्स में जहां पर आपत्ति हो सकती है मनुष्य दृष्टि से तो क्या वो बुरा माना जाएगा? पर आपने मेरा जवाब दिया। इसका मतलब है सुनिए इसका मतलब है जो निर्माता है जिसने एक मिनट यार एक मिनट अभी मुझे पूरा करने दो जो निर्माता है उसके अनुसार जो अच्छाई और बुराई है उसमें कोई फर्क नहीं है क्योंकि दोनों को उसी ने बनाया है फर्क हमारे लिए है। हमारे लिए अच्छाई और बुराई है। क्यों? क्योंकि हमें ईश्वर को प्राप्त करना है। ईश्वर को किसी को प्राप्त नहीं करना है। जिससे जिसके लिए कुछ भी अच्छा बुरा नहीं है। सब कुछ एक समान है। हम लोग घबरा रहे हैं। जैसे कि घर में जब छोटे बच्चे होते हैं वो बेकार की

00:20:07:01 चीजों को लेकर के रोने लगते हैं। बेकार की चीजों को लेकर के एक्साइटेड होने लगते हैं। अरे मुझे वो दिला दो, वो दिला दो। हम लोग सच्चाई जानते हैं। ये बेकार में ही टेंशन ले रहा है। ऐसे ही ईश्वर सच्चाई जानते हैं कि बेकार में टेंशन ले रहा है। वस्तुतः तो ये मुक्त है। इसको मुक्त होना है। इसका वास्तविक स्वरूप तो कुछ और है। नैन छिनती नैन दति पावका ना चैन क्लेद शोष मारता। जब आत्मा को कोई नुकसान होता ही नहीं है तो भगवान उससे क्यों दुखी हो? मगर आत्मा जो जीव भाव को प्राप्त मनुष्य शरीर के अंदर आ गई है उसको टेंशन होती है क्योंकि वह अज्ञानता में है। ईश्वर अज्ञानी नहीं है जो वह यह ना समझ पाए बेकार में ही हो रही है परेशानी तो बच्चे जो मरते हैं यह होते हैं आत्मा को कुछ नहीं होता यह बात भगवान जानते हैं दुखी हम होते हैं क्योंकि हम जीव भाव को प्राप्त है भगवान जीव भाव को प्राप्त नहीं है मगर आपका भगवान है नहीं नहीं आपका भगवान है आपका जवाब बिल्कुल गलत है बता रहा हूं ना भाई देखो दिल्ली में आरुष आरुषी हत्याकांड हुआ था आरुषी हत्याकांड उसमें मेरी बात सुनो पहले एक बस में एक लड़की के साथ पांच दरिंदे जबरदस्ती साम बलात्कार कर रहे थे। उनके गुप्तांगों में लोहे की लाड डाल दी थी। तो उस लड़की को दर्द नहीं हो रहा था क्या? उस आत्मा को दर्द नहीं हो रहा था। अच्छा चलिए ठीक है। कबीर को हो

00:21:22:04 रहा था? क्या? ठीक है। कबीर को हो रहा था? मैं पूछ रहा हूं कबीर नहीं हो रहा था। भाई सुनिए आत्मा अज्ञानता वश ने स्वीकारा कि मेरा परमात्मा सर्व आपने आपने कुछ आपने एक प्रश्न पूछा है। सर्वक्तिमान नहीं ना भाई सिद्ध हो गया। आप आपके परमात्मा की बात चल रही है कि आपका अरे तो मैंने तो बता दिया ना कि दुख नहीं हो रहा है नैनती शस्त्राण नैन धरती पावका मैंने गीता से बता दिया अरे भाई परमात्मा अरे मेरे भाई मैंने मैंने गीता से बता दिया है आपको सुनना नहीं है आपको सुनना नहीं है मैंने गीता से बता दिया आत्मा को कुछ नहीं होता है तो ये जो मरना जीना है ये हम अज्ञानता वश देख रहे है वस्तुतः आत्मा को कुछ नहीं होता है मैंने गीता से प्रमाण दे दिया और भी ढेर सारे प्रमाण है अहम ब्रह्मास्म लिखा हुआ है। सुनिए ना आपके हिसाब से ईश्वर इस शरीर की मदद करने कभी नहीं आएंगे। आ सकता है उसका मन है। उसका मन है। उसका मन है। अच्छा ये बताइए उसका मन उसका मन है। वो आए या ना आए। मगर वो प्रभावित नहीं हो सकता कि नहीं नहीं बचाना ही है। बाउंड नहीं हो सकता। तो अगर मान लो ईश्वर को रक्षा के समय याद करने पर भी ईश्वर नहीं आता है तो फिर वो वो कण कण में व्याप्त होते हुए वहां पर होते हुए वहां पर ईश्वर है वो देख रहा अरे मेरे भाई

00:22:37:20 ये ये पॉइंट तो आपके ईश्वर पर भी लागू हो रहा है ये मैं आपसे भी पूछ सकता हूं मेरा सर्वशक्तिमान नहीं आपका सर्वशक्तिमान तो सर्वशक्तिमान नहीं है तो कौन-कौन सी शक्ति है पहले ये बता दो कबीर में है कौन-कौन सी शक्तियां मैं बताऊंगा तो आप सुनोगे भी हां सुनूंगा बताओ जब वो जब वो जब आप ये कह रहे हो कि वो बचाने नहीं आ सकता है कौन कौन सी शक्तियां है फिर उसके अंदर मेरे ईश्वर जो कबीर परमेश्वर है उन्होंने पहले बोल दिया कि आप लोग काल के लोक में बैठे हो यानी की सुनिए एक मिनट एक मिनट मैं पॉइंट विषयंतर हो रहा है विषयंतर हो रहा है इसलिए मैं बता दूं आप जब कबीर का प्रमाण दे रहे हो तो हम माने मैंने अपना प्रमाण दे दिया मैंने अपना प्रमाण दे दिया कि हम वस्तुतः आत्मा है आत्मा को कुछ नहीं होता मनवर्दी का मन हो गए वो कोई रक्षा के बुलाएगा तो आपका ईश्वर वहां नहीं पहुंच सकता तो सर्वशक्तिमान कैसे हो गया बताओ फिर क्यों भक्ति अरे भाई वो मजबूर नहीं है पहुंचने के लिए वो पहुंच सकता है वो मजबूर नहीं है मैं मजबूरी की बात आप मजबूर कर रहे हो वो मजबूर नहीं है पहुंचने के लिए क्योंकि उसके लिए वस्तुत ये खेल है जिसके साथ रेप हो रहा है वो याद है अब सुनिए क्यों नहीं पहुंच रहा है तो याद कर रहा है कि भाई भगवान मुझे बचाओ ये लोग मेरे साथ बड़े गलत व्यवहार कर रहे हैं तो वो क्यों नहीं पहुंचता अरे तो भाई ये बताइए जब बच्चे को खामखा

00:23:52:28 का दुख हो रहा होता है तो क्या मां-बाप उस समय दुखी होते आपके घर में मतलब आप बच्चे को जब बच्चे को ये दुख अरे तो अच्छा अच्छा एक बात बताओ जीव अच्छा अच्छा एक बात बताओ जीव अविनाशी है कि नहीं मैं बोल रहा हूं आपके हिसाब से मैं मैं बताओ मुझे मैंने पूछा जो है वो तो बताओ मैंने जो पूछा है वो तो अरे भाई आप झक मारने आए हो मैं समझ गया झक लड़ाने आए हो मैं समझ गया सर्वशक्तिमान जीव को अविना नाशी मानते हो कि नहीं मानते हो? जूता अविनाशी है तो गीता जी भी बोलती है मैं मानता भी हूं गीता जी भी और गीता जी को अब गीता जी की बात छोड़ो रामपाल भी तो कहते हैं जीव अविनाशी है ठीक है तो इसका मतलब वो भी ये मानते हैं देह के नाश से आत्मा का नाश नहीं होता नहीं होता सही बात है नहीं होता तो वो बच्चे मरे तो उनका नाश हो गया क्या? बच्चों के देह का तो नाश हो गया। अरे उनका नाश हुआ क्या? अच्छा देह देह उनका वास्तविक स्वरूप है क्या? नहीं वास्तविक स्वरूप नहीं था भाई पर वो वो भी तो देह के जो यहां पर देह मिली थी वो जो वो दुख है देखिए पहली बात तो ये है अभी एक एक कंक्लूजन निकाल ले अभी तक की चर्चा का

00:25:08:04 पहली बात तो ये आपने स्वीकार कर लिया कबीर सर्वशक्तिमान नहीं है दूसरी बात ये स्वीकार कर लिया कि वो भी दुखी होता है वो मुक्त नहीं है वो भी दुखी होता है ना दुख होता है उनकी मर्जी से जैसा आपका ईश्वर मर्जी से आता है मर्जी से जाता है उनके मन में आता है दया करके आ जाते हैं ज्ञान देने नहीं मन में आता आपने खुद कहा है ना वो दुखी होता है तो उनके मर्जी का है ना हो सकता है वो अपने बच्चों को मुझे दुखी होना है कि नहीं होना है किस बात पे होना है मेरी मर्जी है मेरी मर्जी बिल्कुल सही ठीक है ठीक है तो अभी जो आप मैंने आपसे पूछा कि यहां के जो लोगों पे जो गड़बड़ होती है उनके साथ यहां के लोगों के साथ कि मैं मर रहा हूं मैं जी रहा हूं मुझे दर्द हो रहा है मुझे ये हो रहा है इन सबका प्रभाव कबीर पर होता है कि नहीं कबीर जी पर होता है वो तभी तो यहां आते हैं भाई मैं झूठ क्यों बोलूंगा होता है वो हमारे कबीर पे होता है हां ये काल के लोग वो भी वो भी वो भी यहां के जो रोग दोष क्लेश है इनसे प्रभावित होते हैं। बिल्कुल हम उनके बच्चे हैं यार हम दुखी है तो वो दुखी होते हैं। आपका ईश्वर नहीं होता होगा मेरा ईश्वर होता है। बिल्कुल यानी कि कबीर भी मुक्त नहीं है। दुख से मुक्त नहीं है। कबीर जी? आपके ईश्वर को दुख होता है कि नहीं? आप ये बताओ। अरे मैंने बता तो दिया मेरे भाई कि मेरे ईश्वर के लिए जो यह जानता है कि यह जो जीव है यह अज्ञानता वश अपने आप को दुखी कर रहा है। वस्तुत इसकी स्थिति अविनाशी

00:26:23:13 है। यह खामखा भय कर रहा है। वस्तुतः इसकी स्थिति जो है अविनाशी है। इसलिए वो जब मन आता है उस खेल सुनिए जब मन आता है तो उस खेल में उसको बचाने आता है जो उसके लिए खेल है और जब मन आता है तो नहीं भी आता है। वो उसकी मर्जी है। मगर आपका ईश्वर तो वो है जो दुखी होता है वो मजबूरी में आता है। आपके हाथ में गरम सर पकड़ा दिए जाए तो आप बोलोगे जीव अपने आप ही दुखी हो रहा है। ये जो दुख हो रहा है जिससे बोले आ रहे हैं आपके हाथ में गरम सर पकड़ा दिए जाए तो आपका ईश्वर ये सोचेगा कि ये तो जब हो रहा है ये हां सुनिए ये सुनिए ये व्यवहार और परमार्थ का अंतर होता है। सुनिए जैसे पृथ्वी जो है जैसे पृथ्वी जो है वो वास्तव में गोल है। ठीक है? सेटेलाइट इत्यादि के द्वारा जब हम देखें तो पृथ्वी क्या है? गोल। हमें दिख कैसी रही है? फ्लैट है। दिखती फ्लैट है। फ्लैट दिख रही है। तो इसी प्रकार से जो हमारा वास्तविक स्वरूप है वो अविनाशी है। मगर हमें दिख कैसा रहा है कि उसका विनाश हो रहा है। उसको दर्द हो रहा है। उसको वो हो रहा है। ये हमारे दृष्टिकोण पे निर्भर। जब हम मुक्त हो जाएंगे तो हम भी कहेंगे हां पृथ्वी गोल है। मतलब पृथ्वी से जब व्यक्ति मुक्त हो जाएगा तो वो भी पृथ्वी को देख के कहेगा हां

00:27:38:14 यार ये तो गोल थी। अच्छा मुझे मुक्त होने के लिए आपको दर्द होता है कि अगर कोई आपको पीछे से चार लठ मार दे जम देखिए अब जो है हमारी जो ये चर्चा है ना वो बेकार की हो रही है। सुनिए बेकार की हो रही है। आपका ईश्वर सर्वशक्तिमान नहीं है। आपका ईश्वर दुखी भी होता है। वो मुक्ति नहीं है वहां जाना। आप ये बताइए मुक्ति का क्या मतलब है? आपके अनुसार मुक्ति का क्या मतलब है? मुझे एक बात बताइए पहले कि मुक्ति का मतलब क्या है भाई साहब? भाई साहब मुक्ति का मतलब भाई साहब क्या है? मेरे सवाल का जवाब दे दो गुरु आप एक मैंने दिया तो है। आप रिपीटेड कर रहे हो अलग-अलग तरीके से। सुनो आपने देखिए एक ही सवाल को अलग-अलग तरीके से रिपीट किया। मैं बता देता हूं। पहले आपने कहा पहले आपने कहा 12 बच्चे। ठीक? उसी तरह का दूसरा सवाल लड़की के साथ एक जो हत्याकांड हुआ था। ठीक? हां वही सवाल था बस उसमें जो पात्र थे पात्र बदल गए घटना का आपने बताया कि यह क्यों नहीं बचा पा रहा है ठीक अब तीसरा आ गया आपके हाथ में बार-बार मैं आप वही आपको उत्तर दे रहा हूं आप एक नई घटना लेकर के आ रहे हैं अभी आप अपना अंतिम प्रश्न पूछ लीजिए घटना नहीं ला रहा हूं मैं घटना नहीं ला रहा हूं आपको कैसे पता चला कि ईश्वर सर्वशक्तिमान ही है ये कहां से पता चला ये आपका

00:28:53:15 प्रश्न है हां यही प्रश्न है आपको कैसे पता चला कि ईश्वर सर्वशक्तिमान सुनिए असतो मा सदगमया तमसो मा ज्योतिर गमया मृत्यु मा मृतम गमय मुझे असत से सत की ओर ले चलो उपनिषद एक तीन 28 असतो मा सद्गमया भाई आप जिसका बोल रहे हो मैं उसका क्यों मानू उपनिषद को अरे मैं मान नहीं रहा हूं मैं नहीं कह रहा हूं उसको आप मान लो मैं मान नहीं रहा हूं मैं समय सिर्फ बोल रहा हूं मैं समय सिर्फ बोल रहा हूं श्लोक पे विश्वास नहीं ना भाई जो श्लोक आप बोल रहे हो मुझे बताओ आप विश्वास मत करना आप मना कर देना मुझे नहीं मानना है। ठीक है? मैं अपना अपनी जो बात कहूंगा तर्क और प्रमाण दोनों से कहूंगा। बिना तर्क के नहीं कहूंगा। वो कहां से आया? ये तो बताओ कि वो श्लोक कहां से आया? किसने लिखा? वो मैं वो मैं सब बताता जाऊंगा। मैं सब बताते जाऊंगा। ठीक है? अभी मैं तर्क और प्रमाण दोनों पे बात कर रहा हूं। ठीक? ठीक है। असतो मा सद्गमया तमसो मा ज्योतिर्गमया मृत्युमा मृतमया। एक नास्तिक व्यक्ति के अंदर भी कभी ना मरने की चाह विद्यमान है। नास्तिक भी है भगवान को नहीं मानता है। मगर वह कभी मरना नहीं चाहता है। एक नास्तिक व्यक्ति के अंदर भी समस्त समग्र ज्ञान अखंड ज्ञानी बन जाने की चाह विद्यमान है। सब कुछ जान लेना चाहता है।

00:30:09:03 और एक नास्तिक व्यक्ति के अंदर भी सदा आनंदित रहने की चाह विद्यमान है। सतचित आनंद। अब इसका निचोड़ अगर करें तो एक नास्तिक व्यक्ति के मन में भी कभी-कभी यह बातें आती हैं कि बारिश ज्यादा हो रही है तो कम हो जाए। धूप ज्यादा पड़ रही है तो कम हो जाए। यानी कि वो मौसम को भी कंट्रोल करने वाला बनना चाहता है। ठीक है? और इसी प्रकार से उसके मन में यह भी चाह कभी-कभी आती है कि कल भारत पाकिस्तान का अगर मैच है तो उसमें कौन जीते, कौन नहीं जीते, क्या हो, भविष्य देखना चाहता है। भविष्य देख लेना चाहता है। इसका अर्थ क्या है? वो प्रकृति के सभी जितने भी नियम उसे बाधित कर रहे हैं वो सभी पर पजेशन कब्जा कर लेना चाहता है। तो ये उसके अंदर की ऐसी इनबिल्ट चाह है नास्तिक के अंदर भी जो वो अपने से अलग नहीं कर सकता। उसके मां-बाप बूढ़े होंगे तो उसको दुख होगा जब वो भर्ती होंगे अस्पताल में। जब वो मरने के भाव उसके अंदर आएंगे तो वो डरेगा। चाहे उसको कितना भी बता दो कि इस दुनिया में कोई अमर नहीं है। फिर भी वो डरेगा। यानी कि वह विज्ञान के विरुद्ध अपनी जो अमरता की चाह है उससे अलग नहीं हो पा रहा है। ठीक है? तो विज्ञान के विरुद्ध जो प्रकृति पर कब्जा कर लेने की प्रकृति को अपने

00:31:24:09 अधीन कर लेने की चाह उसके अंदर जो विद्यमान है उसी से ये सिद्ध होता है कि इस दुनिया में कोई ऐसी सर्वशक्तिमान सत्ता है जिससे कि जिसके अधीन यह प्रकृति है। ठीक है? तो अरे भाई मेरे को पूरा कर लेने दो फिर तुम क्रॉस करना फिर तुम क्रॉस करना ठीक भाई हमको हमको भी सुनना यार इतने अच्छे से कभी दास बोले तो आप तो दो लाइन बोलेंगे सुनिए सुनिए सुनिए सुनिए क्या है मैंने आपके सारे वीडियो देखे ना तो आप सुनने की शक्ति बहुत अभी अभी सुनिए सुनिए अरे भाई साहब सुनिए तो इसका अर्थ ये है जैसे हमारे अंदर अगर भूख है तो उससे यह सिद्ध हो जाता है कि दुनिया दुनिया में भोजन है। हमारे अंदर प्यास है तो उससे यह सिद्ध हो जाता है कि दुनिया में पानी है। हमारे अंदर देखने की क्षमता है तो उससे ये सिद्ध हो जाता है कि दुनिया में दृश्य है। हमारे अंदर सुनने की क्षमता है तो उससे ये सिद्ध हो जाता है कि दुनिया में क्या है? ध्वनि आवाज स्वर। तो जिस प्रकार एक नास्तिक के अंदर भी व्याप्त भूख से भोजन का अस्तित्व सिद्ध होता है। प्यास से पानी का अस्तित्व सिद्ध होता है। उसी प्रकार एक नास्तिक व्यक्ति के अंदर भी व्याप्त ये जो

00:32:39:13 सतचित आनंद की चाह है उस चाह से सच्चिदानंद का स्वरूप परमेश्वर का अस्तित्व सिद्ध हो जाता है। ठीक है? तो अभी हमने यहां से जाना कि परमेश्वर का अस्तित्व कैसे आया? मनुष्य के अबाध्य बन जाने की चाह से। मनुष्य अबाध्य बनना चाहता है। उससे सिद्ध होता है कि इस दुनिया में कोई अबाध्य है। तो अब जब मनुष्य के अंदर अबाध्य बन जाने की चाह है तो इस अबाध्य बन जाने की चाह का जो सब्जेक्ट होगा वो कौन होगा? जो अबाध्य हो जो सर्वशक्तिमान हो। मनुष्य क्या बनना चाहता है? सर्वशक्तिमान मनुष्य बनना चाहता है। तो इस चाह का जो विषय होगा कौन होगा? जो इसकी पूर्ति कर सके। तो पूर्ति कर सके। मनुष्य सभी दो सभी दुखों से दूर हो जाना चाहता है। तो फिर इस चाह का विषय कौन होगा? वो ईश्वर जो किसी भी दुख से ग्रसित ना होता हो। सतचित आनंद हो। मनुष्य सच्चिदानंद बनना चाहता है तो उसका ईश्वर कौन होगा? जो सच्चिदानंद हो। मगर आप आप जो ईश्वर दे रहे हो संसार को वो सच्चिदानंद नहीं है। ये आपने खुद ही कहा। वो मनुष्य की चाह का विषय ही नहीं है। मनुष्य ढूंढ रहा है पानी। उसको दिया जा रहा है तेजाब। मनुष्य ढूंढ रहा है पानी उसको दिया जा रहा है अल्कोहल

00:33:55:18 तो प्यार दो ना अगर मनुष्य शांति ढूंढ रहा है और शांति के लिए भगवान को पुकारता है तो सर्वशक्तिमान ईश्वर तो आ ही नहीं पाते उस टाइम भाई साहब आपकी बातें मैं समझ गया हूं अब अब देखिए जो हमारी जनता देखिए आप वही रिपीट कर रहे हैं। मैंने आपकी सारी बातों का जवाब दिया है। आप रिपीट कर रहे हैं। तो सर्वी कर रहे हैं। आप सर्वसक्त प्रूफ ही नहीं कर पाए भाई। अच्छा हां वो अब अब आपने पूछा कि आप सुनिए ठीक है मैं प्रूव कर पाया नहीं कर पाया ये कौन देखेंगे जनता देखेगी अब हम चले आगे बढ़े ठीक है चलो आगे बढ़ते हैं अब मुझे बताइए आप वैदिक हैं कि नहीं रामपाल जी द्वारा जो ज्ञान दिया जाता है वो वेदाद शास्त्र सम्मत है कि नहीं वही बात है अब मेरा सवाल ये है कि वेद कहां से वेद का ज्ञान किसने लिखा वेद का ज्ञान किसने लिखा इस बारे में बात करूंगा वेद का ज्ञान वेद सुनिए सुनिए मैं बताता हूं वेद अरे भाई प्रश्न कर लिया मैं जवाब दे रहा हूं आपको जवाब दे रहा हूं बृहणक उपनिषद दो चार 10 उपनिषद ये तो बहुत बाद की बात है भैया ये किसने लिखा उपनिषद वाला जिसका कर रहे हो ठीक है ठीक है वेदा आदि जो शास्त्र है जो

00:35:10:19 शास्त्र जिनके ऊपर हमारे धर्म अधर्म का निर्णय होता है वो शास्त्र अपौरुषय है अपौरुषय अपौरुषय का मतलब समझते आप बताइए मैं नहीं समझता अपौष जिनकी रचना किसी ने नहीं की ईश्वर ने भी नहीं की और शास्त्र है तो उनको मत मानो अभी आप ये बताओ अभी आप ये बताओ मानो तब ना कि पता तो चले किसने लिखे किसका ज्ञान है वो ज्ञान अरे भाई वो अपशय है ना उनको किसी ने नहीं रचा तो हमारे पास कैसे आ गए जब किसी ने नहीं रचा तो आपके पीछे वो जो तपोबल से तपोबल से हमारे ऋषि गण मंत्र के दृष्टा बनते हैं। दृष्टा रचते नहीं है। मंत्र के दृष्टा बनते हैं और वो फिर पहले गुरु शिष्य परंपरा के द्वारा श्रुति स्थानांतरित होती है। फिर उसके बाद एक समय पर आकर के जब प्रज्ञा शक्ति और कम होने लगती है तो उनको लिखना शुरू कर दिया जाता है। [गला साफ़ करने की आवाज़] गुरु शिष्य परंपरा के द्वारा वो हम तक आते हैं। व्यास लिखे आप वही बोल रहे वेदव्यास ने वो अपने बुद्धि से लिखे मतलब जो उन्होंने दिव्य दृष्टि से वेदव्यास जी ने अपने दिव्य मेरे भाई पहले अब मैं देखिए आपने एक प्रश्न किया था मैंने उसका उत्तर आपको दे दिया वो उत्तर सही है कि गलत है वो उत्तर सही है कि गलत है जनता अभी मैं आपसे पूछ रहा हूं आप वैदिक हो कि नहीं आप

00:36:25:27 वैदिक हो कि नहीं मैं कैसे मैं वैदिक क्यों मानूंगा पहले मुझे बताओ ना वेद कहां से आए तो मैं बोलूंगा अरे मैं नहीं मनवा रहा हूं ना मैं एक-एक करके मनवाऊंगा पहले आप कहो तो की मैं वैदिक नहीं हूं तब तो मनवाऊ आप तो कहते वेदों में प्रमाण है। वेदों में प्रमाण है। क्यों कहते हो? क्यों है कहना? कह दो भैया हम तो अपने कबीर सागर से मानते हैं भगवान। हम वेदों से नहीं मानते। तो यानी रामपाल झूठ बोलते हैं। नहीं वो क्यों झूठ बोलेंगे भैया? भाई रामपाल कहते हैं सद ग्रंथ है। हां है। सद ग्रंथ कहते हैं। सद ग्रंथ का अर्थ क्या है? अब देखो कबीर जी ने बोला है जो कबीर जी को मैं ईश्वर मानता हूं। भाई सुनो मैं जो पूछ रहा हूं वो बताओ। सद ग्रंथ क्या है? सद ग्रंथ ऋष ऋषियों ने जो अपने जो सद ग्रंथ सद ग्रंथ सद सद का अर्थ बताओ पहले सद सद का अर्थ क्या है सद मतलब सच्चे सद्गुरु का अर्थ क्या है सच्चे सच्चे सद ग्रंथ सच्चे सच्चे ना तो फिर वेदों को मानते हो ना नहीं मानते दास तो नहीं मानता वेद नहीं मानते तो रामपाल को नहीं मानते रामपाल को नहीं मानते अरे तो अरे तो भाई तो वो जब कह रहे हैं कि सद ग्रंथ है वेद कह रहे हैं ना तो मानते हो कि नहीं मानते हो नहीं कबीर जी ने बोला है भ्रम गए जब

00:37:40:28 वेद पुराना वो बोल रहे वेद का ज्ञान भ्रम में हुआ है तो क्या ठीक है आपका आने के लिए बहुत-बहुत धन्यवाद भाई साहब हमें आपका कबीर पंथी नहीं सुननी हो गया हो गया ठीक है आप जा सकते हैं

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B: SARVASHAKTIMAAN DHARMA Video 38:07 · 10 Jun 2026

कबीरपंथ छोड़ राधास्वामी बना फिर रामपाल के मार्ग पर चला अब आया लाइव चर्चा के लिए

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A · Live क्या रामपाल का ज्ञान वैदिक है #rampaljimaharaj #satlokashram
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