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00:00:01:06 चलिए तो सभी को जय श्री राम। तो सबसे पहले आप थोड़ा सा ऋषभ जी अपने द्वारा अपना थोड़ा सा परिचय आप दे दीजिए। जी जी मेरा नाम ऋषभ पाटिल है। मैं महाराष्ट्र से मुंबई में रहता हूं। फिलहाल पढ़ाई के लिए। हम हमारा एक छोटा गांव है अंबलनेर करके जलगांव डिस्ट्रिक्ट में महाराष्ट्र में। तो मैं वहां से बिलोंग करता हूं। अभी पढ़ाई के लिए मुंबई में हूं फिलहाल। हम हम अभी बीटेक अभी बीटेक की पढ़ाई पढ़ रहे हैं लास्ट ईयर में कंप्यूटर साइंस में हम
00:00:38:14 हां और भाई जी और क्या पूछना है और ब्रह्मा कुमारी से कैसे जुड़े हैं आप? भाई जी मैं बचपन से इस ज्ञान में चल रहा हूं। मतलब मेरी उम्र हो गई फर्स्ट फर्स्ट सेकंड स्टैंडर्ड से मैं इस ब्रह्मकुमारी संस्थान से जुड़ा। मेरी माता के द्वारा हमारी माताजी ब्रह्मकुमारी में जाती है। उनके द्वारा मैं भी ज्ञान में जुड़ा इस ज्ञान से जुड़ा। इस ब्रह्मकुमारी संस्था से जुड़ा और अभी तक हमारा कंटीन्यूअस हमारे परिवार में मेरे पिताजी भी, मेरी माताजी भी और हम भी हम तीनों इस संस्थान से जुड़े हुए हैं। बहुत बढ़िया। तो आपने हमारी एक चर्चा देखी थी कुछ दिनों पहले ब्रह्मा कुमारीज की एक दीदी थी उनके साथ। अच्छा आप आप ये क्लास आप ये क्लासेस वगैरह भी लेते हैं क्या? ब्रह्मा कुमारी क्लासेस नहीं भाई जी लेकिन हम ये लेते हैं मींस काउंसलिंग लेते हैं मेंटल काउंसलिंग जो होता है हां मींस काउंसलिंग इन द सेंस हम ऐसे कोई स्पेशल बिजनेस थ्रू वैसे नहीं लेकिन ऐसे फ्री में अगर किसी को परेशानी हो किसी को कोई तकलीफ हो किसी को कोई सशन नहीं मिल रहा तब हम थोड़ी काउंसलिंग लेते हैं मेंटल अवेयरनेस के ऊपर लेते हैं बहुत सारी डी एडिक्शन के ऊपर
00:01:53:20 लेते हैं बहुत सारी ऐसी छोटी-छोटी जो है उनके ऊपर काउंसलिंग भी करते हैं और हमारा बाय साइड कंटेंट राइटर भी है। हम कंटेंट राइटिंग मींस इन द सेंस हम जो मेंटल हेल्थ आजकल बहुत जरूरी है यूथ के लिए उसके लिए हम लिखाई भी मींस उसके लिए हम राइटिंग भी करते हैं। कंटेंट बनाते हैं। मतलब कुल मिलाकर के कहीं ना कहीं जो ब्रह्माकुमारीज के जो अभियान है उनमें कहीं ना कहीं आप कार्यरत हैं। वर्किंग वर्किंग यस यस तो हमारी जो चर्चा हुई थी उसके मुख्य कुछ बिंदु है जिसके बारे में शायद आपने हमें कमेंट किया था और फिर कमेंट के बाद हमने आपको आमंत्रित किया और फिर आमंत्रित होने के बाद आप जो है आज यहां पर उपलब्ध है और मैं अपने दर्शकों को बता दूं कि इनकी थोड़ी सी टाइमिंग इश्यूज थे इस कारण से इनके साथ जो चर्चा है वो हमने शाम को ना रख के और आज दिन में रखी है और शाम को हम अगर वह आ सके जो जिनके साथ अभी हमारा अब हमारी चर्चा हुई है जो हमारा सेकंड चैनल है सर्वशक्तिमान धर्म वहां पर अभी रामपाल के फॉलोअर्स के फॉलोअ के साथ हमारी चर्चा हुई थी दो दिन
00:03:08:24 पहले और वो चर्चा यहां पर रुकी थी जब हमने ये कहा था कि पवित्र सद ग्रंथ कौन-कौन से हैं तो उसके बाद फिर वो कह के चले गए थे दो घंटे के बाद कि उनके पास अब समय खत्म हो रहा है तो उसके आगे की चर्चा आज शाम को जो है सर्वशक्तिमान धर्म शाम को हो सकती है। तो आप लोग वहां पर जो भी पहुंच सके पहुंचिएगा। तो हमारी जो चर्चा हुई थी वो जो दीदी हैं ब्रह्मा कुमारीज वाली उनके साथ तीन विषयों पर मुख्य हमारी बात हुई थी। एक थी कि प्रज्ञा ब्रह्मा कुमारीज का जो अनुसार कोई ऐसा हमारे पास फंडामेंटल है जिसके अनुसार हम नास्तिक को समझा सके कि ईश्वर इस दुनिया में है। हम है ना? जी और फिर दूसरी आगे बात आई थी कि क्या ईश्वर अ इस जगत को बनाने वाला है? सब कुछ उसी ने बनाया है और क्या ईश्वर सर्वशक्तिमान है? कुछ ये दो तीन टॉपिक पर हमारी बातें हुई थी। तो उन्हीं में से उन टॉपिक्स को लेकर के आपको आपने अपना भाव व्यक्त किया है कि वहां पर उत्तर जो है सही तरीके से प्रस्तुत नहीं हो पाए। ब्रह्मकुमारी का जो पक्ष था और वही
00:04:23:25 पक्ष आप प्रस्तुत करने आए। है ना? बिल्कुल बिल्कुल तो बिल्कुल मैं सबसे पहले इस पर ही आता हूं कि ब्रह्मा कुमारीज के अनुसार ईश्वर की सिद्धि कैसे होती है? सबसे पहले आपको ब्रह्मा कुमारीज के बारे में थोड़ा पता है भाई जी उसके बारे में थोड़ा बोल दिया जाए। ब्रह्मकुमारी के ब्रह्मा कुमारी के बारे में जो मैं जानता हूं वो यह है कि ब्रह्मा कुमारीज के बारे में जो बताया जाता है वो ये है कि आपके यहां पर कुछ दिव्य एक दिव्य शरीर वाले थे जिनका नाम था लेखराज हां उनके शरीर में ईश्वर आता है और वो जो बताता है उसको ब्रह्माकुमारी फॉलो करता है ना हम अब वो ईश्वर का जो नाम है वो सनातन और हिंदू धर्म ग्रंथों के नाम से मैच खाता है। बाकी फीचर वाइज अलग चीजें हैं। मगर सनातन में जो नाम दिए हैं उन नामों से वो मैच खाता है। तो इसलिए ये माना जा सकता है कि हिंदू धर्म से ओरिजिन
00:05:39:08 इसका है ब्रह्मा कुमारीज का। तो यह मुझे पता है और उसके बाद उनके जाने के बाद जो आज भी आपकी कोई ना कोई दीदी है जिनकी बॉडी को चुना है ईश्वर ने और फिर ईश्वर उसके अंदर आता है और अपनी दिव्य वाणी जिसको आप कहते हो मुरली मुरली जो वहां पर पहला प्रश्न किया था उसमें मैंने कि मुरली क्या है? तो यह हमें पता है कि आज भी आपकी कोई ना कोई दीदी है जिनके अंदर आपके अनुसार ईश्वर आता है और वो डेली कोई ना कोई एक बात बताता है और उस बात को पूरे वर्ल्ड में आपके द्वारा फैला लिया जाता है ब्रह्मा कुमारीज के द्वारा और उसको एज ए लॉ या एज ए डायरेक्शन सब लोग फॉलो करते हैं जो ब्रह्मा कुमारीज को मानते हैं या कहेंगे कि फॉलो करने का प्रयास करते हैं। जी जी तो अब इसमें सबसे पहली बात यह हो गई कि ईश्वर हम लोग अगर इधर से चलेंगे ना तो हम ज्यादा समझ पाएंगे कि आपके अनुसार ईश्वर सर्वशक्तिमान है अनंत सामर्थ्यवान है या नहीं है। ब्रह्मा कुमारी सबसे
00:06:54:09 पहली जी सबसे पहली बात यह जो ईश्वर है हम जिसकी बात कर रहे हैं उसका नाम पहले जानना जरूरी है। ठीक है? सबसे पहले यह जानना जरूरी है कि वो ईश्वर कौन है? उसका कर्तव्य क्या है? उसका मूलभूत सिद्धांत क्या है? उसके गुण क्या है? उसके कर्तव्य क्या है? सबसे पहली बात यह जानना जरूरी है। तो ब्रह्मकुमारी जिस ईश्वर की बात कर रहा है उसका नाम है परमपिता शिव परमात्मा जो जिसको हमने युगों युगों से ढूंढा है। जिस थोड़ा सा थोड़ा सा क्या है विषयंतर हो रहा है। मुझे क्षमा करिएगा। इंटरप्ट किया मैंने। एक्चुअली क्या है कि आपके द्वारा उसको कहा क्या जाता है? वो तो मालूम है ना। जैसे आप ब्रह्मा कुमारी से आए हैं। यह हमें मालूम है। उनका नाम लेख रास्ता है। यह हमें मालूम है। और मैंने आपको यह भी बताया कि आपके द्वारा जो ईश्वर का आना बताते हैं उस ईश्वर का जो नाम है वो हिंदू धर्म ग्रंथों से सनातन धर्म ग्रंथों से मैच करता है। मैंने ये भी कहा। तो हमें उस पर फोकस करने की आवश्यकता क्या है कि उसका नाम यही है। मैं मैं अपनी बात पूरी कर लूं। मैं
00:08:09:15 अपनी बात पूरी कर लूं। तो अब उसमें मामला यह है कि हम लोग यह डिस्कस कर रहे हैं किधर से भी शुरू कर सकते हैं। तीन चीजें हैं। ईश्वर सर्वशक्तिमान मानता है। ब्रह्मा कुमारीज ईश्वर ब्रह्मा कुमारीज के अनुसार जो ईश्वर है वो अनंत सामर्थ्यवान है कि नहीं सर्वशक्तिमान है कि नहीं। पहली बात या फिर हम यहां से चालू कर सकते हैं कि वह जो दीदी थी उन्होंने एक बात कही थी कि जो सभी धर्मों के द्वारा माना जाता है जो एक कॉमन चीज है सभी धर्मों के अंदर वो ईश्वर है। ईश्वर के बारे में जो कॉमन चीज है सभी धर्मों के द्वारा वो ईश्वर है। है ना? तो इस पर हम लोग वहां बात नहीं कर पाए थे क्योंकि काफी सारे विषय थे तो यह वाला विषय छूट गया था कि सभी धर्मों में जो कॉमन है वह ईश्वर कैसे तो वो वो है और एक तीसरा पक्ष और है कि अगर हम यह जान ले कि ईश्वर है यह कैसे सिद्ध होता है तो वो जानने के लिए जिस प्रकार के ईश्वर की आवश्यकता हमें पड़ेगी हमें पता चल जाएगा कि यही ईश्वर हो सकता है क्योंकि जो ईश्वर का सिद्ध हो सकता है जो ईश्वर स्थापित किया जा सकता है वही ईश्वर ईश्वर है। वरना हम अगर अपने
00:09:24:21 मन से ईश्वर के फीचर्स बता दे और उसको सिद्ध ही ना कर पाए तो वो ईश्वर ही ईश्वर नहीं है। तो इन तीन में से एक मुझे सबसे अच्छा जो लग रहा है वह यह है कि हम इस वाले को पकड़ लेते हैं। जो सभी धर्मों में एक कॉमन चीज है ईश्वर का वो गुण है। ईश्वर वो है। हम अब जैसे सभी धर्मों ने निराकार तो माना है ईश्वर को। कहीं ना कहीं। बिल्कुल। इसलिए आपने ईश्वर को निराकार माना। ठीक है? तो इसको ले लेते हैं हम लोग। अब इसमें क्या है? जब हम यह कहते हैं कि सभी धर्मों के अनुसार तो सबसे पहले हमें यह जानना पड़ेगा कि धर्म किसे कहते हैं? सभी धर्मों के अनुसार सबसे पहले हम सभी धर्मों के सबसे पहली बात धर्म जो है हम मतलब दुनिया में तो बहुत सारी फिलॉसोफीस है इसके ऊपर लेकिन हमारे ब्रह्मकुमारीज में जो बताया जाता है धर्म किसे कहते हैं उस अनुसार पे हम बताएंगे आपको। सबसे पहले धर्म अर्थात हमारे कर्म सत्य कर्म जब कर्म सत्य हो जाए तो वही सच्चा धर्म है और जब तक कर्म असत्य के मार्ग पर है वो धर्म नहीं हो सकता।
00:10:39:25 दूसरी बात हमारे कर्म जो है अगर किसी भी बात में किसी भी बात में विकर्म में की ओर जा रहे हैं वो धर्म नहीं हो सकता। धर्म हमें कर्म कैसे करना है, कहां करना है, कब करना है, किस जगह पर करना है, वह सब सीख देता है। और दूसरी बात कि धर्म जो है यह मानवता को एक सत्य के आधार पर स्थिर रखता है। अगर हम अगर कोई भी अगर कोई बात भी हो छोटा कर्म भी हो अगर वो असत्य के मार्ग से हो रहा है, विकर्म के मार्ग से हो रहा है, वहां पे धर्म नहीं हो सकता। स्वयं मैं यही कहूंगा हमारे ये यहां पे कि हमें जो सिखलाया जाता है जो हमें शिव सिखलाता है वो यही सिखलाता है कि सत्य कर्म ही सत्य धर्म है जब तक मैं समझ गया मैं समझ गया मैं समझ गया आपकी बात मैं आपकी बात समझ गया एक्चुअली क्योंकि हमारे पास टॉपिक्स बहुत है तो टाइम की अवेलेबिलिटी के लिए हमको थोड़ा सा संक्षिप्त में रहना पड़ेगा आपने कहा हां तो आपने कहा कि जो सत्य कर्म है वही धर्म है। यानी कि धर्म एक ही है। सत्य कर्म हम तो फिर इस
00:11:54:28 लाइन का मतलब क्या है कि सभी धर्मों में जो एक कॉमन बात है वो ईश्वर का वो मानना है प्रमाणित है। ये सभी धर्म कहां से आ गए? इसका मतलब सत्य के अलावा और भी कुछ धर्म है। या फिर यहां सभी धर्मों से मतलब है हिंदू, मुस्लिम, सिख, ईसाई या क्रिश्चियनिटी है ना? हिंदू मुस्लिम क्रिश्चियनिटी और इन सबके द्वारा ये सब धर्म इन सबको आपने धर्म कहा क्रिश्चियन को भी धर्म कहा हिंदू को भी धर्म कहा ईसाइयत को भी धर्म हो मुस्लिम इस्लाम को भी धर्म कहा तो क्योंकि वो जो आपने जो परिभाषा दी है ना सत्य कर्म धर्म है वो एक अलग चीज है मगर आप यहां फिर सत्य कर्म अगर धर्म है तो फिर धर्म एक हो जाएगा उसको बहुवचन नहीं लग सकता धर्म एक है सत्य जो भी आपको सत्य कर्म क्या है सत्य कर्म के द्वारा सत्य कर्म सत्य कर्म के द्वारा ईश्वर की प्राप्ति होती है। तो जो भी कर्म आपको ईश्वर के पास ले जाए वो कर्म सत्य हो गया। जो कर्म आपको ईश्वर से दूर ले जा रहा है वो कर्म विकर्म हो गया। असत्य हो गया। यानी धर्म एक ही है। सत्य बिल्कुल। तो जब ब्रह्मा कुमारीज कह रहा है कि सभी धर्मों के द्वारा जो फिलोसफी मान्य है वो हमें मान्य है। ठीक है?
00:13:10:04 तो इसका मतलब वो यहां इस वाली परिभाषा की बात नहीं कर रहा है कि सत्य कर्म ही धर्म है। वो बात कर रहा है कि जो हिंदू के द्वारा भी मान्य है, जो हिंदू के द्वारा भी मान्य है, जो मुस्लिम के द्वारा भी मान्य है, जो क्रिश्चियन के द्वारा भी मान्य है। तो इन सारे धर्मों से जो कॉमन चीज आएगी वो हमें मान्य है। सबसे पहली बात जितने भी धर्म है हम अगर किसी निष्पक्ष होकर अगर देखें जितने भी धर्म मैं आपको इंटरप्ट मुझे इसलिए करना पड़ता है मैं मुझे ऐसा लगने लगता है शायद मैं अपने प्रश्न को समझा नहीं पाया कि जब आपने ये कह दिया कि मुस्लिम धर्म है आपने कहा जितने भी धर्म है यानी अब अब हम लोग बात कर रहे हैं हिंदू मुस्लिम क्रिश्चियन की है ना नहीं की बात कर रहे ज्यादा डीप हमें ज्यादा उसमें डीप नहीं जाना है भाई जी क्योंकि अगर उसमें जाएंगे तो वो बहुत कांसेप्ट हो जाएगा नहीं नहीं हमें डीप नहीं जा रहा हूं। डीप मैं डीप नहीं जा रहा हूं। आप मैं अपने क्वेश्चन को रखने के लिए पहले आपकी जो मेंटालिटी है उसको मैं क्लियर करना चाह रहा हूं कि अ जब आप जब हमने कहा धर्म किसे कहते हैं? जो सत्यकर्म है वो धर्म है।
00:14:25:15 ठीक है? तो आपने फिर दूसरी जगह यह भी कहा है कि जितने भी धर्म यानी कि आप हिंदू, मुस्लिम, सिख, ईसाई इनको भी धर्म मानते हैं। हिंदू के अलावा जो चीजें हैं उनको भी आप धर्म कह रहे हैं। तभी बहुवचन आ रहा है। ठीक है? तो अब अब बात ये आती है कि जो मुस्लिम है, इस्लाम है, हम उसमें कई चीजें ऐसी है जो धर्म नहीं है। कई चीजें हैं जो मैच खाएंगी। कई चीजें हैं जो मैच खाएंगी। कई चीजें हैं जो मैच नहीं खाएंगी। तो आपने फिर मुस्लिम को धर्म कैसे कहा? सबसे पहली बात अगर हम ऐसे अगर मानने लगे अगर हम ऐसे इस दुनिया में मानने लगे कि वो धर्म नहीं या कुछ भी हो कुछ भी हो। वो जैसा है जैसा चल रहा है। उनकी अपनी मान्यता है। उनका अपना कुछ होगा। लेकिन हमें सबको बराबर तो रखना होगा ना भाई जी। अगर हम उनको ऐसे समझ मतलब ठीक है मतलब कहने का मतलब ये है मैं मैं समझ गया कहने का मतलब ये है कि हम जानते हैं कि उनके यहां कुछ कुछ चीजें हैं जो अधर्म है विकर्म है मगर फिर भी हम उनको ऐसा बोलते हैं कि हम डायरेक्ट साफ सुथरा ऐसे बोलते नहीं कि तुम गलत हो
00:15:40:16 हम तुमको भी धर्म ही कह रहे हैं। अच्छा जी तो आप मुझे एक बात बताइए कि कुछ लोग ऐसे हैं दुनिया में जो अपनी मां के साथ भी अफेयर करना चाहते हैं। हम उनको भी मनाने के लिए कहेंगे क्या कि तुम भी इंसान हो तुम भी मनुष्य हो। क्या कहेंगे वो? उनको नीच कहेंगे या उनको भी उनको भी कह देंगे कि नहीं तुम भी अच्छे हो। तुम भी बहुत बढ़िया हो। ये सब सबसे पहली बात उनको तो सजा दी जाएगी। उनको तो सजा जो मात्रद्रोही है उसको सजा तो मिलेगी ही ना। अगर वो चीज मिले देखिए अगर कोई गलत है और हम इसलिए कि उसको जो है बुरा ना लग जाए वो वो ना जाए तो उसकी सच्चाई से उसे वाक जी तब जी यहां पे यही पे यही एक चीज है भाई जी अगर वो कर्म तमो प्रधान है मतलब बहुत ऊंचे दर्जे का है तब कोई माफी नहीं है तब हम माफ नहीं कर सकते अगर अगर वो कर्म जिस कर्म से जिस विकर्म से इस दुनिया में गंदगी फैल रही है ना तो उस कर्म को हमेशा यही रूप दिया जाएगा कि उसके लिए वो सजा के पात्र होगा। उसके सिवा और कोई
00:16:55:25 संधानी नहीं दी जाएगी। मैं इसको अभी क्लियर कर लेता हूं। इस्लाम में एक आयत है। अह मैं उसका जो क्रम है वो भूल गया हूं। जी उसमें लिखा हुआ है यदि तुमने अपने मुंह जुबानी किसी को बहन बेटी मां इत्यादि कह भी दिया यही भाव है उसका तो मुंह बोले रिश्तों की कोई वो नहीं होती आप अपनी जुबान से पलट सकते हैं और पलट करके वो वो दूसरा व्यवहार कर सकते हैं आपका वॉइस क्रैक हो रहा है
00:17:34:09 बोलिए बोलिए सुनाई दे रहा है सुनाई दे रहा मैं ये कह रहा हूं कि उसमें एक जगह कहा गया है कुरान में कि आपने यदि अपनी मुंह जुबानी किसी से कोई रिश्ता बना लिया उसकी कोई वैल्यू नहीं है। आप जो है अपनी उस रिश्ते से पलट सकते हो और उसके साथ जैसे आपने किसी को बहन बोल दिया तो उस पर डटे रहना आवश्यक नहीं है। आप चाहो तो उससे विवाह कर सकते हो। दूसरा बहन के ठीक उलट वाला कार्य भी कर सकते हो। तो यह शिक्षा वहां दी गई है। तो यह शिक्षा धर्म तो नहीं है। बात से पलट जाना नहीं है। तो इसका मतलब कुरान के द्वारा जो शिक्षा मिली है वह धर्म नहीं है। हम एक बात के ऊपर से ये डिसाइड नहीं कर सकते भाई जी सबका अपना-अपना मान है। हम किसी को अमानित नहीं कर सकते। अगर हमें किसी को मान देना है तभी हमें मान मिलेगा। अगर हम किसी को ही किसी को भी मान नहीं देंगे। अगर एक बात बताइए हम एक बात एक एक बात बताइए कि आपके अनुसार मोक्ष क्या है? मुक्ति मुक्ति वो वो अवस्था है वो स्थिति है जहां पे आत्मा निर्बंधन हो जाती है आत्मा
00:18:49:10 को समझ गए समझ गए बंधनों से मुक्त हो जाती है तो क्या कुरान के अनुसार मुक्ति मिल रही है वहां कुरान के अनुसार वही मुक्ति है जो आपके अनुसार है हमें भाई जी सबसे पहली बात हम यहां किसकी चर्चा करने आए? हम तो ईश्वर की चर्चा करने आए ना। हम उस दिन का जो पॉइंट है वही डिस्कस आप समझे नहीं। मैं मैं उस चीज को क्यों क्लियर कर रहा हूं? आपने कुरान को धर्म क्यों कहा है? बात इसकी है। आपने क्रिश्चियन को धर्म क्यों कहा? बात इसकी है। इसलिए जब सुनिए सुनिए अब सुन लीजिए। इसमें क्या है कि जब हमने कहा कि उसकी कोई एक बात के आधार पर हम उसे नकार नहीं सकते। ठीक है? तो फिर अब हमारे पास परसेंटेज होनी चाहिए कि कितनी परसेंट बात सही होगी और कितनी परसेंट बात गलत होगी। उस रेशियो के आधार पर हम उसको प्रमाणिक मानेंगे और अगर वो रेशियो हमारे रेशियो से मैच नहीं खाया तो हम उसे अप्रामाणिक मानेंगे। तो ऐसा कोई रेश्यो है क्या आपका? सबसे पहले रेश्यो की बात अगर सभी धर्मों की पकड़ी जाए तो अगर सभी धर्म अगर हमें यह सिखलाता है कि हमारे कर्म जो है वो अच्छे सत्य और धर्म के आधार पर हो। अच्छे
00:20:05:06 मतलब वैल्यूस के आधार पर हो तो वो हमें मान्य करना होगा। अगर कोई भी धर्म हमें ये सिखलाता है हमारे कर्म के बारे में अगर वो नहीं सिखलाता है तो वो अधर्म ही होगा। उस चीज में अधर्म ही होगा। आप मैं ये जानना चाह रहा हूं। आपने किसी को भी धर्म किस आधार पर मानते हैं? धर्म हां वो आधार है जो सीख दे दी जाती है। फॉर एग्जांपल अलग-अलग धर्मों में अलग-अलग सीख दी जाती है। कुछ कुछ सीख अच्छी भी दी जाती है। ऐसे नहीं कि कोई बुरी हमेशा सब सब धर्मों में बुरी सीख है। बाकी धर्मों में भी अच्छी सीख दी गई है। ऐसे मतलब बहुत सारी हम देख सकते हैं। अगर प्रत्येक धर्म का मूल न्यू क्या है? अगर देखा जाए न्यू अगर देखा जाए न्यू मतलब रूट तो वो रूट है सबके लिए सद्भाव सबके लिए शुभ भावना सबके लिए शुभकामना अगर ये न्यू है हर एक धर्म की बाकी तो सब बाकी आगे जाके तो बहुत मतंतर है भाई जी बहुत मतंतर है अगर उस न्यू के आधार मैं ये नहीं कह रहा मतलब आप मानते हैं ना कि इस्लाम और क्रिश्चियनिटी भी धर्म है आप ये मानते हैं हां और उसका आधार ये है कि जो भी हमें सत्कर्म सिखा रहा
00:21:20:12 है तो वो धर्म है फिर फिर भले ही उसने हमको विकर्म भी सिखाया हो वो आत्मा के ऊपर है ना वो क्या सीख रही है वो क्या लेना चाहती है सच्चे ही नहीं नहीं अभी हम अभी हम उसकी बात कर रहे हैं कि कि कौन सी आईडियोलॉजी हमको सत्य सिखा रही है तो वो धर्म है कोई भी आईडियोलॉजी अगर हमको सत्य सिखा रही है तो वो धर्म है और भले ही वो साथ में थोड़ा बहुत हमें विकर्म भी सिखा रही हो आप हमारे अनुसार हो सकता उनके अनुसार वो विकर्म भी ना हो। जैसे कि यही बात अपनी जुबान से पलट जाना हो सकता है उनको लगे कि अच्छी बात है। ठीक है? मगर हमारे अनुसार वो विकर्म है। हमारी जानकारी के अनुसार वो विकर्म है। तो हमारे अनुसार हमारे अनुसार धर्म वो है जो कोई भी हमें सत्य कर्म सिखा रहा है। किसी एक एक अंश में फिर भले ही वो थोड़ा बहुत असत्य कर्म भी सिखा रहा हो हमारे अंदर। वो धर्म है। हम ठीक है? हम तो इसका अर्थ ये है कि अ मैं अगर अपनी एक बुक लिखूं और उसमें लिख दूं कि भगवान की भक्ति करो हम तो क्या मेरे द्वारा तैयार ये जो आईडियोलॉजी होगी इसको 101 लोग मानते भी होंगे आपके
00:22:35:18 लिए धर्म है क्या ये आप इसे धर्म कहोगे भगवान की भगवान की भक्ति करना ये तो थोड़ी ना गलत बात है भाई जी ये तो अच्छी बात है ना मैंने मैंने एक बुक लिख दी और मैंने उस बुक को नाम दिया शिवश कृत धर्म तो आप उसको धर्म के रूप में स्वीकार कर लोगे। अगर वो ईश्वर प्राप्ति की तरफ लेके जा रहा है तभी तो स्वीकार करेंगे। अगर उसमें ईश्वर ही नहीं है तो कहां से होगा भाई जी? नहीं मैंने दोनों बातें लिखी है। मैंने दोनों बातें लिखी है। तो वो वो आपका धर्म
00:23:09:25 किस आधार पर मतलब आधार आधार मेरे पास रात में फरिश्ता आता है वो आके बताता है खुदा का भेजा हुआ या मेरे पास रात में एंजल आता है वो बताता है। भाई आप अगर सबसे पहली बात धर्म आपने जो बात कही कि मैं अगर कुछ लिख दूं और वो धर्म हो जाए ऐसा कैसे हो सकता है? सबसे पहली बात उसका मूल इसका मतलब इसका मतलब केवल ईश्वर की बात करने वाला ही धर्म नहीं है। उसमें कुछ और भी ऐड करना पड़ेगा। हां अनुभव अनुभव मेन है भाई जी अनुभव इस संसार में सबसे बड़ी बात है हिंदुओं का सबसे आपको अगर हिंदू धर्म का देखा जाए सबसे पहले हमारे धर्म की चर्चा करते हैं। अभी अह सबसे पहले अगर हमें हिंदू धर्म में जितने भी शास्त्र है जितना भी है सभी आत्माओं को सभी जो भी है जो भी पढ़ता है उसे क्या फील होता है? अनुभव होता है ना किसका अनुभव होता है? समझ नहीं रहे भाई साहब। आप दूसरी जगह जा रहे हैं। प्रैक्टिकल पे चले जा रहे हैं आप। वो प्रैक्टिकल वाला हिस्से पे बात नहीं हो रही। अभी बात हम ये कर रहे हैं कि आपने कहा कि इस्लाम भी धर्म है, क्रिश्चियनिटी भी धर्म है। फिर मैंने आपसे ये पूछा कि अ इस्लाम और क्रिश्चियनिटी भी अगर धर्म है उसमें आप ये भी मान रहे हैं कि कुछ ऐसी चीजें
00:24:25:01 हैं जो सही नहीं है। मगर फिर भी आप उसको धर्म मान रहे हैं। वो लोग नहीं मानते कि वो चीजें गलत है। हम लोगों के अनुसार वो चीजें गलत है। फिर भी आप उसको धर्म मान रहे हैं। तो जब हम उसे धर्म मान रहे हैं तो फिर अह यह क्या कहते हैं? फिर मैंने आपसे पूछा कि फिर जब उसमें अच्छी और बुरी गलत बात दोनों है तो फिर आप उसे धर्म क्यों कह रहे हैं? तो आपने फिर बताया कि हां जिसमें विकर्म भी होगा और सत्यकर्म भी होगा तो उसको धर्म माना जाएगा। तो मैं वही कह रहा हूं कि इस बुक में इस बुक में मैंने भी जैसे मोहम्मद साहब को एक फरिश्ता आता था जो आकर के कहता था जिब्राइल और बाइबल के अनुसार ईसा वो ये कहते थे मैं उसका पुत्र हूं परमेश्वर का तो ऐसे ही मुझे भी लग रहा है कि मुझे ईश्वर की वाणी आ रही है और मैंने एक बुक लिख दी तो क्या आप इसको अपने धर्म की लिस्ट में ऐड कर लेंगे इस बुक को नहीं उसमें बहुत उसमें बहुत उसमें बहुत सारी गलत बातें भी है आपके अनुसार और बहुत सारी सही बातें भी है आपके अनुसार तो आप ऐड करेंगे उसमें नहीं वैसे तो बिल्कुल नहीं हो सकता वैसे तो बिल्कुल नहीं हो सकता क्या कारण है कि आपने इनको ऐड किया है? मेरी बुक ऐड नहीं करोगे?
00:25:41:08 सबसे पहली बात सबसे पहली बात न्यू क्या है? न्यू बहुत जरूरी है। अगर हमने कह दिया हां मुझे आता है। मुझे सब होता है। वो बुक पढ़ भी लिया जाए। वो बुक पढ़ भी लिया जाए। अगर मैं अगर वो बुक पढूं भी लेकिन उसमें वो किसी मनुष्य द्वारा फॉर एग्जांपल वो किसी मनुष्य ने लिखी है या मनुष्य ने बताई है या मनुष्य के द्वारा वो मनुष्य नहीं लिखे बात तो करनी फिर आप उसे धर्म कैसे कहते हैं सबसे पहली बात सबसे पहली बात हम किसी की अगर हम किसी को दोष दे रहे हैं ना फॉर एग्जांपल किसी को दोष दे रहे हैं किसी को तो आप मुझे दोष दे तो रहे हो आप मुझे दोष दे तो रहे हो आपने मना किया ना मेरी चीज को आप स्वीकार नहीं करेंगे आपने मना किया बात भाई सबसे पहली बात बुक को मना करना ये कोई ऐसी वैसी बात नहीं है कि हमने बस आया और बता लिख दिया। धर्म क्या इतनी सी बात के ऊपर तय होता है? धर्म इतनी सी बात पे देखिए हमारे पास टॉपिक बहुत सारे हैं और अगर हम लोग गोलगोल लंबा लंबा बात करेंगे तो चलेगा नहीं। तो ऐसा करिए कि आप जो है सीधी एक परिभाषा दीजिए। आप वो कारण बताइए कि आप किसी
00:26:56:14 भी आईडियोलॉजी को धर्म कब कहते हैं? वो एक बार में बता दीजिए जिससे कि फिर मैं उस पर क्वेश्चन कर सकूं। आप किसी भी आईडियोलॉजी को धर्म कब कहते हैं? किस कारण से कहते हैं? जब आत्माओं का जब मनुष्य का कल्याण हो किसी बात में कल्याण हो रहा हो। किसी बात की अभी फॉर एग्जांपल ये जब जब धर्म स्थापित हो ऐसा होता है। देखिए हो क्या रहा है? प्रॉब्लम यह आ रही है भाई कोई पांडे जी अगर देख रहे हो मॉडरेटर के लिए कोई आ जाए पांडे जी या फिर श्वेतांग जी या फिर नवीन जी कोई मॉडरेटर एज ए मॉडरेटर पहुंच जाए
00:27:37:25 कमेंट करके बता दे तो हम लिंक पहुंचवा देंगे आप तक देखिए आप मेरी बात आप समझ नहीं रहे हो मैं जैसे आपने कहा कि कोई भी जो आत्मा की बात करता है मैं मैंने कहा ना कि मैंने अपनी बुक में आत्मा की बात की है, भगवान की बात की है। तो फिर आप उसको नहीं स्वीकार कर रहे। इसका मतलब वो परिभाषा नहीं है आपकी धर्म के रूप में। तो मैं उस परिभाषा को जानना चाह रहा हूं कि आपने किसी को भी धर्म के रूप में स्वीकार किस आधार पर किया है। स्वीकार अर्थात हम उस धर्म को मान्यता दे रहे हैं। बस जैसे फॉर एग्जांपल वो बहुत सारे आजकल देखो बहुत सारे मठ पंत है। ठीक है? बहुत सारे मटपथ है। सब किसका रास्ता बता रहे हैं? भगवान का रास्ता बता रहे हैं ना। जो भगवान का रास्ता बता रहा हो जिसने यह बताया हो न्यू से कि भगवान को कैसे पाना है वो अगर न्यू हमें दे रहा हो तो हम उसे धर्म मानते हैं। अगर उस धर्म में कुछ ऐसी बातें भी है। फॉर एग्जांपल कुछ गलत बातें थे। कुछ बहुत मतलब हम कह सकते हैं कि जिसमें कोई तथ्य नहीं जिसमें कोई वो नहीं मतलब जिस्म का कोई उद्देश्य नहीं है अगर वो चीजें भी हो अगर वो चीजें हर धर्म में है हर धर्म में एक धर्म में नहीं हर
00:28:53:06 सारे धर्मों में कुछ ऐसी चीजें हैं जो केवल हिंदू हिंदू को छोड़कर के बात करें क्योंकि हिंदू का ऊपर अगर बात करेंगे तो सुनिए सुनिए अगर बात करेंगे तो मुझे वहां पर तुरंत उसको फिर आना पड़ेगा कि भाई मैं हिंदू धर्म में बताओ तो हमारा विषय अलग हो जाएगा। आप आप हिंदू को मत शामिल करिए। बाकी सबको आप कहिए कि हां कमी है और जो है जो फैक्ट है। बताइए आपने जो बोला आपने जो सारे धर्म के नाम लिए उनके बोल रहा हूं। बाकी हिंदू धर्म तो हमारा सर्वश्रेष्ठ धर्म है। सबसे पहली बात तो पहली बात कि जो भी उनमें विकर्म भी हो रहा हो या कुछ भी हो रहा हो तो वो उनका उनके धर्म के कुछ सिद्धांत होंगे। उनका कुछ होगा। लेकिन हम उनको अपमानित नहीं कर सकते। किसी चीज को अपमानित अगर करने लगे तो इस सुनो बुक को बुक को रिजेक्ट करना अपमान नहीं है ना ये है
00:29:56:07 आपका चला गया। आप एक बार जाकर के वापस आ जाइए। आप फ्रीज हो गए। फ्रीज हो गए आप। जी जी जी अगर हम मैं समझ गया आपने कहा कि जिसने नीव से ईश्वर को प्राप्त करने की विधि बताई हो फिर भले ही उसमें कुछ विकृतियां भी हो मगर हम उसे धर्म के रूप में स्वीकार करेंगे। ठीक है? अपमानित नहीं कर सकते ना। अपमानित नहीं कर सकते। किसी को अपमानित नहीं कर सकते। तो बुक को रिजेक्ट करना कि यह धर्म नहीं है क्या यह अपमान है? बुक को रिजेक्ट करना क्या ये धर्म मतलब कौन सी बुक पे वो पहले जरूरी कोई भी बुक कोई भी बुक कोई भी बुक कोई भी बुक जिसके लिए हमने कहा ये धर्म नहीं है। क्या ये अपमान है?
00:30:50:00 ये वो क्या बता रही है उसके ऊपर डिपेंड है। पहली बात वो मैं पूछ रहा हूं वो देख वो आपने जान लिया कि वो क्या बता रही है। उसके बाद आपने कहा एक मिनट एक मिनट भाई साहब एक मिनट मैं पूछ रहा हूं कि आपने जान लिया परखट लिया वो बुक में क्या कहा गया है। उसके बाद आपने कहा ये जो बुक है ये धर्म नहीं है। ये अपमान है कि नहीं है? सबसे पहली बात भाई जी अगर वो बुक हमें सही मार्ग नहीं बता रही कौन से कोई भी मार्ग नहीं बता रही तो कैसे मैं उसको भाई साहब क्वेश्चन ये नहीं है क्वेश्चन ये है क्या बुक को रिजेक्ट करना आप अपमान मानते हैं या नहीं मानते हैं? हां रिजेक्ट करूंगा क्योंकि उस चीज में सत्य नहीं कह रहा हूं भाई साहब देखिए मैं यह नहीं कह रहा हूं मैं पूछ रहा हूं कि बुक को रिजेक्ट करना आप अपमान मानते हैं कि नहीं मानते ये बताइए बुक को रिजेक्ट करना मतलब ये कैसा प्रश्न हुआ भाई जी बुक को रिजेक्ट उस बुक में मैं दोबारा बता देता हूं मैं अच्छे से बता देता हूं कि मैंने अगर किसी की बुक को कहा भाई ये जो तुम्हारी बुक है इसको हम धर्म नहीं मानते तो ये क्या सामने सामने वाले का जिसकी बुक को हमने रिजेक्ट किया है धर्म
00:32:05:10 ना मानते हुए क्या ये उसका अपमान है? अच्छा उसको तो अपमान ही होगा। ठीक है। ठीक है। ठीक है। ठीक है। तो आप अपमान नहीं करते। आप जो है कहते हो कि हां ये तो अब मैं अपनी एक बुक लिख रहा हूं जिसमें कि ईश्वर की नीव से मैंने एक मिनट मैडम एक मिनट। मैंने ईश्वर की नीव से बात की कि उसको प्राप्त कैसे करना है। सब कुछ करा और इसमें विकृतियां भी है और मैं दो-तीन दिन में इसको करके दे दूंगा। तो मेरा नाम जो होगा वो नाम लेते हुए आप उसको धर्म के रूप में स्वीकार करेंगे। उसकी पहली बात है अगर आप किस धर्म किस आधार पर वो मुख्य चीज है पहले किस भाई साहब फिर भाई साहब आपका डेफिनेशन है ना बदल रही है प्रॉब्लम ये है आपने डेफिनेशन ये दी कि नीव से जो ईश्वर प्राप्ति की बात करे ठीक है उसको हम धर्म के रूप में स्वीकार करते हैं। फिर भले ही उसमें विकृतियां भी हो तो मैं कह तो रहा हूं कि नीव से मैंने बात की है। ईश्वर ऐसा है वैसा है। आपके विरुद्ध है मगर नीव से बात की है। आप आपके विरुद्ध है। कुछ चीजें आपसे मेल खाएंगी, कुछ चीजें मेल नहीं खाएंगी। और फिर आप कल को इसका जो मैं एक निशान बनाऊंगा मैं इसमें कोई उड़ता हुआ तोता बना
00:33:20:16 दूंगा। उड़ता हुआ तोता और वो मेरे धर्म ये जो मैंने बनाया है और इस तोते को जो है वो धर्म के रूप में वो जो चिन्ह होता है ना जैसे हमारा स्वास्तिक है प्रणव है सूर्य है ये हमारा है उनका इस्लामिस्ट का वो चांद है और उनका वो क्रॉस है तो आपके पास जब जाते हैं तो वो सारे निशान होते हैं आपके पास ना है ना जहां तक मैं जानता हूं तो इसी तरीके से मैं भी एक तोता उड़ता हुआ तोता इसका निशान बना दूंगा ये मेरी आईडियोलॉजी का ये निशान है। निशानी है। तो इस निशान को आप धर्म के रूप में उसके साथ ऐड कर लेंगे। इस किताब को धर्म का नाम दे देंगे। धर्म के रूप में स्वीकार कर लेंगे। मैं पूछ रहा हूं आपसे। मैं तय करने वाला कोई नहीं है। मैं तय करने वाला वो धर्म है या अधर्म है। वो कौन सी है? भाई साहब मैंने मैंने मेरा प्रश्न क्या है? भाई साहब मैंने मेरा प्रश्न क्या है? प्रश्न आप मैंने आपसे पूछा है। सुनिए। तो मैंने आपसे पूछा है कि आप किसी को भी धर्म के रूप में स्वीकार कब करते हैं? मैंने नहीं पूछा कि दुनिया कैसे करती है? आपका सिद्धांत क्या है? ब्रह्मा कुमारीज का सिद्धांत क्या है? धर्म ब्रह्मा कुमारीज का सिद्धांत ये है इस संसार में जितने भी धर्म हो अभी मुख्य
00:34:35:18 बात कर रहा हूं। इस संसार में जितने भी धर्म है उनको बाकी पहले से जो धर्म है उसको आप धर्म कहेंगे। हां बस बाकी अपमानित हम किसको नहीं करना चाहते। बस इतना ही रखना चाहते हैं। सबको मान मिले। हम किसी को अपमानित नहीं कर सकते। ये धर्म है वो धर्म नहीं है। अगर उस बात पे चर्चा की जाए उसके बारे में हमें पूरा अगर नहीं पता हो। हम किस बात के आधार के ऊपर हम ये तय करने वाले हो जाते हैं? अगर हम किसी का अपमान करते जब आप ये तय करने वाले हो सकते हैं। एक मिनट जब आप यह तय करने वाले हो सकते हैं कि ये धर्म है तो आप यह तय करने वाले भी हो सकते हैं कि धर्म नहीं है। जब आप यह बताने वाले हो सकते हैं, जब आप यह बताने वाले हो सकते हैं कि बहन के साथ विवाह मत करो या यह बताने वाले हो सकते हैं कि इसके साथ विवाह कर लो तो यह बताने वाले भी हो सकते हैं कि इसके साथ विवाह मत करो। जैसे कि आपने कहा कि आईडियोलॉजी पहले से है। ठीक है? तो कितना पहले से होनी चाहिए वो आईडियोलॉजी तब आप धर्म के रूप में उसे स्वीकार करेंगे और फिर मैं अपना क्वेश्चन करूं कि कितना पहले से वो आईडियोलॉजी होनी चाहिए? वो आईडियोलॉजी उसके लिए कोई प्रमाण की आवश्यकता नहीं। अगर वो पहले से प्रमाणित है। पहले से इस संसार किसने प्रमाणित किया? कौन प्रमाणित? उनके
00:35:50:21 उनके अपनेप धर्मों के जो है फॉलोवर्स वो प्रमाण को मैंने प्रमाणित किया अपनेप अपनेप प्रमाणित करेंगे तो मैं इसको प्रमाणित करूंगा मेरे पांच 10 लोग इसको प्रमाणित कर देंगे अगर वैसा अगर होने लगा आज के संसार में तो हर कोई अपनी किताब निकाल लेगा ना भाई यही तो मैं कह रहा हूं हो रहा है वही तो हम सबको धर्म क्यों कह रहे हैं यही मेरा पॉइंट है हम क्यों कह रहे हैं सबको धर्म हर कोई दूसरे दिन ये कहने लगेगा अगर हर अगर यही कारण है कि उसको लोग मानने वाले हैं तो यह तो कोई धर्म का आधार नहीं है। हिरण्यकश्यप को मानने वाले ज्यादा थे। कौरवों को मानने वाले ज्यादा थे। तो कौरवों को क्योंकि मानने वाले हैं तो कौरव सही हो जाएंगे क्या? तो मानने वाले अगर हैं बहुत सारे तो उन्होंने क्योंकि उसको धर्म कह दिया। कौरवों को अच्छा कह दिया तो हम थोड़ी ना मान लेंगे कि कौरव अच्छे हैं। पांडव पांच
00:36:47:01 लेकिन भगवान हमें क्या सिखा रहा है वो तो पढ़िए एक बार भाई जी एक बार सुनिए तो ऋषभ जी हम एक एक करके चलेंगे अभी बात ये है हमने चैप्टर को क्लोजिंग हम डिबेट नहीं करना चाहते इस पर क्योंकि हमारा मूल सिद्धांत वही था सर्वशक्तिमान का उसके ऊपर ही हम चर्चा करने वाले थे अगर इस बार में अगर डिबेट होने लगे तो भगवान को सबसे पहली बात मेरे लिए तो बहुत बुरी बात है क्योंकि भगवान को पसंद भगवान जो है शिव जो हमें सिखाता है वो बस यही सिखाता है कि सर्व धर्म को किसी भी धर्म का किसी भी कुछ कुल का किसी भी मठ का किसी भी पंथ का किसी का भी अपमान ना करो तो आप मेरा क्यों कर रहे हैं आप मेरा क्यों कर रहे हैं मेरा मैंने कुछ डिसाइड ही नहीं किया भाई जी मैंने डिसाइड ही नहीं किया आपने कहा ना मैं इसको कभी नहीं करूंगा स्वीकार आपने कहा इतनी छोटी सी बात पे अगर मैं डिसाइड करने लग जाऊं तो इस संसार में तो कितनी सारी चीजें है भाई जी बहुत सारी चीजें है ना पहली बात मुझे उस बात भाई साहब आप समझ मैं इस चैप्टर को बंद कर रहा हूं मैं आपको यह भी बता दूंगा कि मैंने प्रश्न रखा क्यों है मगर मैं एक बात बता रहा हूं आप कह रहे हैं कि हम किसी भी धर्म को किसी का भी अपमान नहीं कर सकते मगर आपने मेरा
00:38:02:02 अपमान किया अब इसका जो नजर आता है वो यह है कि भाई मुझे फॉलो मेरे को फॉलो करने वाले उतने लोग नहीं जिससे आपको फर्क पड़े मगर जिनका ये तो फिर तो फिर आपका कारण आपने सुनिए तो आपने उचित कारण नहीं बताया मेरी बुक को डिसओन करने का। अब दूसरी बात यह है कि धर्म की वास्तविक जो परिभाषा है वह सर्वशक्तिमान ईश्वर से कनेक्ट होती है और वह ईश्वर की सिद्धि से भी कनेक्ट होती है जो हमारे मेन पॉइंट थे ईश्वर की सिद्धि ईश्वर सर्वशक्तिमान जो सनातन परिभाषा है धर्म की वो ये है कि अस्तो मा सद्गमया तमसो मा ज्योतिर्गमया मृत्युमा मृतम गमय एक नास्तिक व्यक्ति के अंदर भी कभी ना मरने की चाह विद्यमान है।
00:38:54:12 एक नास्तिक व्यक्ति के अंदर भी सदा सुखी रहने की चाह विद्यमान है। एक नास्तिक व्यक्ति के अंदर भी अखंड ज्ञानी बन जाने की चाह विद्यमान है। बिल्कुल। ठीक है? तो जिस प्रकार से हमारे अंदर जो इनबिल्ट इच्छाएं हैं भूख भूख से सिद्ध होता है कि दुनिया में भोजन है। प्यास से सिद्ध होता है कि दुनिया में पानी है। इसी प्रकार एक नास्तिक व्यक्ति के अंदर भी सतचित आनंद की चाह होने से ये सिद्ध होता है कि दुनिया में कोई सच्चिदानंद स्वरूप परमेश्वर है। तो तो ईश्वर यहां पे ईश्वर हमें सिद्ध हो गया। कैसे हुआ सिद्ध कि नास्तिक के अंदर भी ईश्वर को ही प्राप्त करने की चाह है। नास्तिक भी ईश्वर को ढूंढ रहा है। पर वो अपनी वर्बबली मना कर रहा है कि मैं ईश्वर को नहीं ढूंढ रहा। ठीक है? अब यहां पर एक बात आई कि वो जो सतचित आनंद होना चाहता है तो वो सच्चिदानंद जो होना चाहता है इसको अगर हम डिफाइन करेंगे तो इसमें आएगा कि वो अबाध्य होना चाहता है। आपने कहा मोक्ष क्या है? सभी बंधनों से मुक्ति। अबाध्य अबाध्य होना चाहता है तो ईश्वर कौन
00:40:09:20 है? ईश्वर कौन हो सकता है? इस चाह का सब्जेक्ट कौन हो सकता है? इस चाह का सब्जेक्ट वही हो सकता है जो अबाध्य हो। अबाध्य बन जाने की चाह का निराकरण कौन करेगा जो अबाध्य हो। है ना? तो ये अब बात ये आती है ये जो मैंने तो जो धर्म की परिभाषा मैं आपको बता रहा था कि जीव की चाह के वास्तविक विषय सच्चिदानंद स्वरूप परमेश्वर को परिभाषित कर सकने वाले शास्त्रों द्वारा सच्चिदानंद स्वरूप परमेश्वर को प्राप्त करने के निमित्त बताई जाने वाली विधि का नाम धर्म है। हमारे लिए धर्म नहीं है। ये जो क्रिश्चियन इस्लाम वगैरह है हम ये मक्खन नहीं लगाते कि आप लोगों में विकृति है तब भी हम आपको धर्म कहे। वो भी अपने आप को धर्म नहीं कहते हैं। उनके अपनेप अलग-अलग वर्ड है। उनका वर्ड है। वो मजहब है वो डीन है। वो उनका वर्ड है। रिलीजन है वो भी अपने आप को धर्म नहीं कहते। हम ये मक्खन नहीं लगाते तुम भी धर्म। क्यों? क्योंकि उनके द्वारा दिए गए ज्ञान विज्ञान के अनुसार ईश्वर की प्राप्ति नहीं है। मोक्ष है ही नहीं। ईश्वर है ही नहीं। ना तो वहां परम स्वतंत्र मोक्ष है। ना ही वहां पर सर्वशक्तिमान
00:41:24:26 ईश्वर है और ना ही वो धर्म शाश्वत है। तो इसलिए जहां पर ये तीन चीजें नहीं होंगी वो धर्म नहीं है। अकॉर्डिंग टू सनातन। ठीक है? यह धर्म की परिभाषा है। अब आपने धर्म की दूसरी दूसरी परिभाषा बताई कि कोई भी ईश्वर की बात कर रहा है, भले ही आधी सही कर रहा हो, आधी गलत कर रहा हो, वो भी धर्म है। तो ऐसे नहीं हमारी परिभाषा यही है कि धर्म वो है जो जिसकी अक्षरस एक एक बात आपको ईश्वर की प्राप्ति में काम आए। अक्षरस भाई जी अगर करना चाहता अपमानित नहीं करना चाहता मैं। बस उसके अपमानित नहीं करना चाहता। बस आपने मुझे अपमानित किया ना? वो चीज मैं अपमानित किसी और को अपमान ऐसे अपमान कहा कि नहीं कहा आपने मुझसे कहा कि नहीं कहा मैं आपको कभी नहीं स्वीकार करूंगा धर्म के रूप में धर्म के रूप में अगर इतना बड़ा सब्जेक्ट बुक के ऊपर मतलब आपने एक बुक लिख दिया और उसके ऊपर इतना बड़ा चर्चा का आप बता रहे हो कि आपने धर्म स्वीकार नहीं किया अगर ऐसे इस इस छोटी सी बात के ऊपर आप धर्म का है या नहीं वो मान वो प्रमाणित के ऊपर आ जाए भाई साहब क्योंकि आपने जो परिभाषा बताई है उसके अनुसार मेरी मेरी यह बुक भी धर्म मानना चाहिए था आपको।
00:42:40:09 आपकी या तो परिभाषा गलत है। किसी भी किसी भी आईडियोलॉजी को एक मिनट किसी भी आईडियोलॉजी को धर्म के रूप में स्वीकार करना करने के निमित्त जो आपने परिभाषा बताई है या तो वो परिभाषा अपना गलत आपकी परिभाषा कुछ और है। आपने दूसरी परिभाषा बता दी है। और अगर जो परिभाषा बताई है वो सही है। आप उसको मानते हो, फॉलो करते हो तो फिर आपको इसे स्वीकार करना चाहिए था। मगर आपने इसे स्वीकार नहीं किया। और जो आप यह कह रहे हो कि हम किसी का अपमान नहीं करते। हम इसलिए नहीं बोलते हैं कि तुम धर्म नहीं हो। तो यहां पे भी आपने उस चीज को फॉलो नहीं किया। आपने अपने ही सिद्धांत को तोड़ दिया दो बार। सिद्धांत को तोड़ा नहीं है भाई जी। सबसे पहले अभी पहली बात सुन लीजिए। बहुत हो गया। सबसे पहली बहुत बहुत इसके ऊपर इस टॉपिक के ऊपर बहुत हो गया। सबसे पहली बात भाई जी हम अपने आपके जो सिद्धांत थे उस दिन जो आपका प्रश्न था उस प्रश्न के ऊपर आते हैं। जो भी आपके प्रश्न थे उस दिन उस प्रश्न असल में देखिए मैं आज आ रहा हूं उसी पे आ रहा हूं। वो प्रश्न तो था तो ये धर्म की बात ही इसलिए की है कि धर्म वही है जिसके द्वारा सर्वशक्तिमान ईश्वर की प्राप्ति हो। मोक्ष हो। है ना? अब अब हम इस्लाम को भी धर्म कह रहे हैं।
00:43:55:18 वहां वो खुद चीख चीख के कह रहा है हमारा ईश्वर सर्वशक्तिमान नहीं है। कहीं पे कह रहा है दूसरी जगह कह रहा है वो फलाने नहीं कर सकता। वो ये नहीं कर सकता वो सर्वशक्तिमान नहीं है। उसका मोक्ष मोक्ष भी नहीं है। हां तो उनका अपना है तो हम उसे तो उनका अपना है तो हम उसे धर्म क्यों कहे? झूठ क्यों बोले? सत्य कर्म सुनिए। सत्य कर्म जो है वह हमें भगवान के पास ले जाता है। झूठ कर्म नहीं है। हम जानते हैं कि वह धर्म नहीं है। हम जानते हैं कि वो धर्म नहीं है। फिर भी हम उससे कह रहे हैं कि नहीं नहीं तुम धर्म हो। और यहां पे आपने मेरे साथ भेदभाव कर दिया। यहां पे भी ये धर्म नहीं है। मैं जानता हूं ये धर्म नहीं है। मैं जानता हूं। मगर आपने यहां पर तो मेरा वो नहीं रखा सम्मान। आपने आपने मुझसे कहा कि नहीं नहीं मैं इसको नहीं स्वीकार करूंगा। खैर अब हम उस पर आ जाते हैं। ईश्वर सर्वशक्तिमान पर बात कर लेते हैं। तो अब हमारे सामने एक बात आई है कि धर्म की परिभाषा यही है कि जो सभी बंधनों से मुक्त करा दे वो धर्म है। ठीक है? और सभी बंधनों से मुक्त करा दे तो सभी बंधनों से मुक्त कराने वाला है ईश्वर और ईश्वर को प्राप्त करने के निमित्त बताई गया बताया गया जो ज्ञान विज्ञान है वो धर्म तो सबसे पहली बात है कि क्या
00:45:10:19 ब्रह्मा कुमारी सभी बंधनों से मुक्त ईश्वर की बात करता है या ईश्वर पे कुछ बंधन है नहीं नहीं ईश्वर पे कोई बंधन बंधन मुक्त है वो सदा सदा शिव वो जन्म मरण के चक्र में भी नहीं आता। वो किसी बंधन के भी चक्र में नहीं आता। वो निराकार स्वरूप तेज जो शिव है उसको कोई बंधन नहीं हो सकता। उसको कोई बंधन नहीं। अच्छा शिव कभी भगवान कभी बंधन में नहीं बंधन नहीं हो सकता। यानी कि वो अनंत सामर्थ्यवान है। हम अनंत सामर्थ्यवान शक्तिमान सर्वशक्तिमान है सर्वशक्तिमान बिल्कुल सर्वशक्तिमान तो इसका मतलब वो सब कुछ कर सकने में सामर्थ्यशाली है। समर्थ वो रचयिता है। इस संसार का रचयिता है वो। ठीक है वो सबसे पहली बात और मात पिता भी है सबसे पहली बात तो भाव है वो भाव है वो भावी है हमारा ठीक है वो ओके शिव नहीं मैं आपकी बात को स्वीकार कर रहा हूं भाई साहब मैं आपकी बात को स्वीकार कर रहा हूं आप उस पर मत जाइए
00:46:26:21 तो जब हम ये कहते हैं कि ईश्वर किसी भी प्रकार के नियम के नीचे नहीं है वो सभी नियमों को बनाने वाला सर्व नियामक है वो सर्वशक्तिमान है अनंत सामर्थ्यवान है तो सबसे पहला पॉइंट आता कहता है कि क्या ब्रह्मा कुमारीज के द्वारा परिभाषित प्रतिपादित होने वाला जो ईश्वर है वह अवतार ले सकता है स्वयं साकार रूप में मनुष्यों के बीच में आ सकता है या नहीं आ सकता आ सकता है आ सकता है आया है आया आया है आया है किस रूप में आया है किस रूप में आया है रूप में उसने माध्यम चुना माध्यम नहीं माध्यम नहीं वो स्वयं है किसी और पर काया प्रवेश नहीं पर काया प्रवेश नहीं स्वयं स्वयं निराकार निराकार है ना निराकार है ना निराकार अगर निराकार को इसी माध्यम से आना होगा निराकार का जो रूप है निराकार ज्योति बिंदु स्वरूप हम जिसे कहते हैं शिव वो निराकार इस यहां पे आकर साकार माध्यम लेता है साकार माध्यम अर्थात साकार माध्यम से अपना जो ज्ञान है सत्य ज्ञान वो सिखाता है यानी
00:47:41:22 कि पर प्रवेश कर सकता है पर स्वयं अवतरित नहीं हो सकता नहीं हो सकता वो निराकार है जी तो अभी हम लोग बात कर लेंगे जो निराकार है वो साकार कैसे हो सकता है उसप बाद में पर पहले ये बात कर ले कि जब हमने कहा कि उसके ऊपर कोई नियम लागू नहीं होता तो ये नियम तो लागू हो गया ना कि वो नहीं आ सकता वो बंधन में आ गया ना वो ये काम नहीं कर पाता वो बंधन अगर उसने शरीर लिया उसने अगर शाकार शरीर ले भी लिया तो अर्थात क्या हुआ? इसका अर्थ क्या हुआ? आप समझिए अगर कोई शरीर लेता है इस इस संसार में अगर कोई शरीर ले रहा है वो खुद को बंधन में ला रहा है ना वो मतलब इसका अर्थ ये ईश्वर ईश्वर सुनिए ईश्वर उसका नाम है जो बंधन में होते हुए भी मुक्त है हां वही तो बोल रहा हूं मैं तो अगर वो साकार ले लेगा अगर वो साकार स्वरूप धारण कर लेगा तो ऐसा नहीं है कि उसकी जो सर्वव्यापकता खत्म हो गई वो बंधन में आ गया सबसे पहली बात उसको माध्यम चुनना होगा। वो माध्यम लेगा। तो यह देखिए यह आपका यह आपकी अपनी शिक्षा है कि आप यह मानते हो। मैंने एक बात कही कि यदि कारण कोई भी हो
00:48:57:01 कारण कोई भी हो दुनिया का एक चिंदी मात्र भी कोई एक कार्य है जो अगर ईश्वर नहीं कर पा रहा है तो उसे सर्वशक्तिमान नहीं कह सकते। अगर ईश्वर सर्वशक्तिमान नहीं होता वो रचयिता कैसे हो सकता है? रचयिता है ना रचयिता हमेशा मतलब सर्वशक्तिमान का अर्थ यह नहीं है कि वह सब कुछ कर सकता है वो सब कुछ कर सकता है लेकिन नियम है वो नियमों के ऊपर चलने वाला है वो नियम को तोड़कर किसी और चीज के ऊपर नहीं आ सकता वो अगर फॉर एग्जांपल यानी वो गलत काम नहीं करता है यानी वो गलत काम नहीं करता अपने नियमों को नहीं तोड़ता वो हमेशा पूरे ब्रह्मांड के नियमों के आधार पर सब कुछ करता है अगर वो चाहे तो सेकंड में अगर उसके पास क्षमता है लेकिन वो नहीं करेगा क्योंकि क्योंकि एक चीज है वो ब्रह्मांड के नियम को फॉलो करता है। ब्रह्मांड के जो नियम है, ब्रह्मांड के जो वसूल है, उन नियमों के आधार वह सीधा एक नियम अगर हम उसने नियम तोड़ दिया तो फिर हमारे और उसके अंदर क्या अंतर होगा फिर? नियम तो हम भी तोड़ रहे हैं ना बहुत सारे। तो हमारे और उसके अंदर कोई तो ये बहुत सारी बातें हो जाएंगी। हमारे उसके बीच में अंतर। चलिए इसको भी लिख और
00:50:12:02 बुरे काम नहीं करता और नियमों पे चलता है। ठीक है? ठीक है। अब इसमें बात ये आती है कारण मैंने क्या कहा? कारण कोई भी हो वह नियमों पर चलता है। वो अपने नियम नहीं तोड़ता है। ठीक है? आप ये कह रहे हैं। तो इसका मतलब है कि दुनिया में कुछ कार्य ऐसा है जो वो नहीं कर सकता। वो गुप्त रीति से करता है। उसका कार्य गुप्त भाई साहब भाई साहब आप बात को बात से बात का जवाब नहीं दे रहे। आपने कहा कि वह सिर्फ नियमों पर चलता है। तो क्या वो अपने नियमों के जो उसने अपने नियम बताए हैं आपको उस नियम के विरुद्ध जा सकता है? नहीं जाएगा वो नहीं जाएगा। नहीं जाएगा। मैं कह रहा हूं उसके अंदर कैपेबिलिटी है कि नहीं? उसके अंदर कैपेबिलिटी है लेकिन वो नहीं करेगा। वो करेगा ही नहीं। पहली बात तो अरे जब उसके अंदर कैपेबिलिटी है। जब उसके अंदर कैपेबिलिटी है तो आप यह कैसे कह सकते हैं कि वो नहीं करेगा। अगर आप यह कह रहे हैं कि वो नहीं करेगा तो इसका मतलब आपके आपको उसकी कैपेबिलिटी में वो है डाउट यह महसूस हो रहा है भाई ये विरोधहास हो रहा है भगवान के प्रति आप भगवान के प्रति आप वो डाउट ले रहे हो देखिए मैं आपको बात समझाऊं आपको आपकी बात समझाऊं
00:51:27:10 जैसे कि अ एक तरीके से जो ईश्वर है वो सिर्फ पॉजिटिव चीजें ही कर रहा है। नेगेटिव चीजें नहीं कर रहा है। नहीं करता है। आप एक बात बताइए आतंकवादी जो बम से उड़ाते हैं दुनिया इधर-उधर लोगों को मार देते हैं अ उसको इललीगल तौर पर बम बना करके कोई देता है बिल्कुल तो बम बनाने वाला बम को बनाने वाला वो बुरा काम कर रहा है कि नहीं कर रहा है बिल्कुल कर रहा है बिल्कुल कर रहा है तो दुनिया में जो बुराई कर रहे हैं उनको बनाने वाला ईश्वर है कि नहीं बनाने वाला ईश्वर है बिल्कुल बुराई करने वाला जो है वो उसके कर्मों के आधार पर उसके कर्म एक मिनट एक बात बुराई करने वाले को ईश्वर बना रहा है कि नहीं पहले मैं ये पूछ रहा हूं बुराई करने वाला पहली बात बुराई करने वाला कौन है वो बताइए पहले एक करने वाला कौन है एक मनुष्य मनुष्य कौन है मनुष्य कौन है एक आत्मा जिसने शरीर धारण किया है हां आत्मा पहले कौन सी स्टेट में होती है? कौन सी अवस्था में
00:52:42:14 होती है? सबसे पहले आप अपना जवाब दीजिए ना आप। मैं आपके अकॉर्डिंग हो सकता है सब कुछ ना बताऊं। वही तो मैं बस आत्मा जो होती है सबसे पहली बात हम मूल पे आते हैं। मूल पे आत्मा जो होती है सबसे पहली बात जी बोलिए बोलिए बोलिए। आत्मा जो आत्मा जो होती है सबसे पहली बात उसकी अवस्था सबसे पहले सतो प्रधान रहती है वो जो ऊपर से आती है वो बहुत स्वच्छ होती है सतो प्रधान रहती है सात्विक रहती है लेकिन जैसे जैसे वो जन्म ले लेती है आगे जाके उसके कर्म विकर्म बनने लगते हैं वो बुरे कर्म करने लगती है क्योंकि देहभान विकार जो है उससे बुरे कर्म कराता है वो जो वो जब आई थी मैं समझ गया मैं समझ गया ईश्वर ने तो पवित्र बनाया था वो फिर अपना खुद उसकी फ्री विल है ईश्वर ने उसको नहीं कहा आप एक बात बताइए आपका ईश्वर भविष्य देख सकता है या नहीं सर्वशक्तिमान वो आदि मध्य अंत का मालिक है भाई त्रिकालदर्शी भाई तो फिर आपके ईश्वर को आपके आपके ईश्वर को ये पता नहीं था कि वो गलत कार्य करेगा वो
00:53:57:18 पता है उसे उसे सबके बारे में पता इसका मतलब उसने जब उसको बनाया था तो उसको पता था ये वह आगे जाकर के बुराई करने वाला है। फिर भी उसने बनाया। बनाया मतलब आत्मा जो है वो अविनाशी है। अविनाशी अरे आत्मा नहीं जब उन्होंने उसको देह दी। जब उन्होंने उसको देह दी मनुष्य रूप में भेजा। हर एक का पार्ट है भाई जी। हर एक का अपना अपना पार्ट है। फॉर एग्जांपल जैसे आपका एक यूनिक पार्ट है। आप जैसे सारे यूथ को इंस्पायर करते हो। बहुत सारे यूथ को बताते हो। आपका एक खुद का पार्ट है बराबर मेरा अपना एक पार्ट है। मैं एज अ स्टूडेंट हूं किसी और का अपने माता-पिता का अपना एक पार्ट है। हर एक का पार्ट अलग-अलग है। उसमें भगवान बस हमें हमारी आत्मा को शुद्ध पवित्र बनाता है। बाकी जो भी है सब कर्मों के आधार पर ही होता है। हमारा जो भी देखिए वो बहुत लंबा बताने की आवश्यकता नहीं है। अगर हम लोग क्योंकि अभी डिस्कशन बहुत है ये तो एक छोटे से कुछ क्वेश्चन चल रहे हैं। अभी क्या है कि आपने कहा कि ईश्वर जो है सिर्फ पॉजिटिव चीजें करता है। मगर वह यह जानते हुए भी कि कौन बुराई कर रहा है। ईश्वर उसे बना रहा है। वो जानता है रेप करेगा पर वो रेपिस्ट को जन्म दे रहा है।
00:55:13:18 सबसे पहली बात वो जन्म नहीं दे रहा है। वो जन्म नहीं दे रहा है। वो सबसे पहली बात वो जो कर्म कर रहा है वो उसके खुद के कर्म है। उसमें भगवान का कोई हस्तक्षेप नहीं है। भगवान बस रचयिता है। वो ये नहीं इसके कर्म उसके वो सब कुछ जो भी आधारित कर रहा है उसके उसके अंदर हम भगवान को नहीं ला सकते अगर हम विकर्म को भगवान से जोड़ रहे हैं तो ये आपको यहां पर इंटरप्ट करना चाहूंगा मैंने आपसे पूछा है कि अगर भगवान भविष्य देख सकता है तो क्या उसको मालूम है कि नहीं कि वो व्यक्ति रेप करेगा मैं उसे बनाऊं या ना बनाऊं? सबसे पहली बात पहली बात भाई जी पहली बात वो रचयिता सबके बारे में जानता है लेकिन हम ये माने हम ये माने कि उसने सब कुछ बनाया है इसलिए वो ईश्वर है उसका हर चीज में हस्तक्षेप नहीं है उसकी सत्ता नहीं है वो सत्ता नहीं हस्तक्षेप बोल रहा हूं मैं हस्तक्षेप मतलब अगर मैं कोई कर्म कर रहा हूं जब कहीं पे कोई गलत कार्य हो रहा है जब कहीं पर कोई गलत कार्य हो रहा है तो उस वहां पर ईश्वर की सत्ता है कि नहीं है? ईश्वर की अगर सत्ता है होगी होती अगर फॉर एग्जांपल होती तो वो कर्म ही नहीं होता वहां पे। ईश्वर
00:56:28:21 की वहां पे सबसे पहली बात ईश्वर यानी ईश्वर की सत्ता सब जगह नहीं है। ईश्वर की सत्ता है भाई जी आप फॉर एग्जांपल ईश्वर की सत्ता का अर्थ पहले बताइए। ईश्वर की सत्ता का अर्थ क्या मतलब दुनिया में दुनिया में जो कहते हैं पत्ता भी हिलता है तो वो ईश्वर की सत्ता से हिलता है। भगवान ये खुद कह रहा है मैं कर्म भगवान मैं देखिए भगवान क्या कह रहे हैं सुनिए सुनिए सुनिए सुनिए देखिए भगवान सुनिए तो सुनिए सुनिए भगवान क्या कह रहे हैं ये प्रमाण हो गया अभी हम लोग केवल मैं आपकी आईडियोलॉजी जानना चाह रहा हूं। मुझे आपकी ये आवश्यकता नहीं है कि भगवान ने कहा है कि नहीं कहा। ब्रह्मा कुमारीज क्या मानता है क्या सोचता है क्या कहता है वो बताइए किसके क्योंकि जब आप जब आप प्रमाण देंगे जब आप प्रमाण देंगे तो मेरे पास भी अपने प्रमाण है फिर वो दूसरा क्लश चालू हो जाएगा और दूसरा क्लश चालू हो जाएगा फिर और ये टॉपिक रह जाएगा तो आप अपनी आईडियोलॉजी बताइए मैं आपसे प्रमाण नहीं मांग रहा हूं ठीक है ठीक है तो देखिए मैं आपको इसको सरल कर दूं जैसे आपने बताया फ्री विल होती है ठीक ठीक है। हम एक बच्चे ने अभी-अभी जन्म लिया।
00:57:44:14 ठीक है। निर्दोष उसने कुछ नहीं किया है। सुनामी आ गई हम तो सुनामी में वो बच्चा डेड हो गया। मृत्यु को प्राप्त हो गया। निर्दोष था। कुछ नहीं किया था उसने। यह बुरा कार्य है कि नहीं है? उसका मर जाना बेमौत। बेमौत अकाली मृत्यु जिसे कहा जाता है। अकाली मृत्यु कहते हैं। हम दुखद है कि नहीं जो अभी वो तो दुखद है दुखद दुखद है तो यह कार्य किसने किया ये कार्य किसने किया कार्य ये कार्य पहली बात सबसे पहली बात ये कार्य क्यों हुआ पहली बात वो जानना जरूरी है सुनामी क्यों आई वो जानना जरूरी है सुनामी इसलिए ये जो जितने भी कार्य हो रहे हैं ना प्रकृति में आजकल जैसे अभी कैलिफोर्निया में आ भाई साहब मैं कह रहा हूं उस बच्चे का दोष नहीं था वो अभी जन्मा है उसके अकॉर्डिंगली वो वो वो कार्य किसने? न्यू पे जा रहा हूं मैं। न्यू पे जा रहा हूं। मैं हमेशा मूल तत्व के आधार पे ही बात करता हूं। भाई जी मुझे बोलिए
00:58:52:00 जो प्रकृति इस जो प्रकृति आज जो जिसके बारे में जो सुनामी वगैरह जो कुछ आ रहा है वो क्यों हो रहा है? वह पहले जानना जरूरी है। हमने प्रकृति को बहुत दुख दिया है। प्रकृति इसके वजह से यह सारे कार्य जो हुए सुनामी वो इंसान देखिए प्रकृति के साथ बहुत बुरा हुआ। मैं समझ गया। प्रकृति के साथ बहुत बुरा हुआ। सुनामी आ गया। ठीक है? प्रकृति के साथ बहुत बुरा हुआ। सुनामी आ गया। सुनामी आ गया। उसमें एक निर्दोष उसमें एक निर्दोष बच्चा भी मरा। कहा पहली बात पहली बात वो आत्मा अभी की नहीं है। उसने अभी अभी जस्ट जन्म इस शरीर धारा लिया है। लेकिन उसकी यात्रा तो बहुत बड़ी है ना। इसका मैं आपकी बातें मैं पता है क्या मैं प्रेडिक्टेबल है। आप क्या आंसर दोगे? प्रेडिक्टेबल है। इसका अर्थ ये इसका अर्थ यह है कि जो कार्य हमको देखने में बुरे लग रहे हैं। वह कार्य जो हमको देखने में बुरे लग रहे हैं। वह कार्य भी बुरे नहीं होते हैं। उनका कार्य का पीछे कोई सिस्टम होता है। है इसका मतलब जो कार्य हमको देखने में बुरे लग रहे हैं उन कार्यों के रूप में वो तो
01:00:07:06 ईश्वर की सत्ता के रूप में ही रहा है मगर उन कार्यों के होने का भी एक कारण है जो हमें नहीं दिख रहा कारण है नहीं दिख रहा है इसका मतलब इसका मतलब ये है कि ईश्वर भी हमें बुराई करता हुआ दिख सकता है बुराई करता हुआ दिख सकता है मतलब जैसे आपने कहा कि वो जो बच्चा जो सुनामी के कारण मरा। आपने कहा कि उसने पूरा पिछले जन्म में कुछ ना कुछ किया होगा जिसके कारण उसकी ऐसी मृत्यु हुई। यही कहा ना? हम अब यहां से जब हम देख रहे हैं तो एक निर्दोष बच्चा मारा गया तो ये बुराई हो गई। वो बात और है। उसके पीछे का फैक्ट कुछ और है। वो बात और है। उसके पीछे का फैक्ट कुछ और है। तो जब वो बच्चा मारा गया तो इस तरीके से ये जो लीला है कि निर्दोष बच्चा मारा गया। इस रूप में भगवान हमें बुरा कर्म करते हुए दिख गया ना। भगवान कर्म करते हुए दिख गया। मतलब अरे भाई सुनामी किसकी मर्जी से आई? सुनामी प्रकृति के नियमों अनुसार हो रही है। प्रकृति भगवान उधर प्रकृति सुनामी हो जाए ऐसा कभी नहीं बोल सकता क्योंकि वो मात पिता है। वो अपने बच्चों का कभी दुख दर उनको नहीं दे सकता खुद होकर। मतलब पहली बात यह है कि प्रकृति के पास अपनी चेतना है।
01:01:23:06 नियम है। नियम प्राण शक्ति जिसे हम कह थे। प्राण शक्ति सारे संसार में व्यापक है। जिस प्राण शक्ति के आधार पर प्रकृति चलती है। प्रकृति ये सारे संसार में जो प्राण शक्ति है वो प्राण शक्ति ही सब कुछ कराती है प्रकृति के द्वारा। सबसे पहले यह बात जानना जरूरी है प्रभु कारण शक्ति है उसमें भगवान जो है मैं जो है इसको क्लियर मैं इसको क्लियर कर दूं थोड़ा कि ये जो प्रकृति जब उस निर्दोष बच्चे को मार रही है पहली बात तो ये बताइए कि वो जो बच्चे का मरना है वो बुरी बात है कि नहीं है पहले तो ये बता दीजिए वो बुरी वो बुरी बात मतलब वो दुखद घटना है ना कुछ भी हो तो बुरा ही दुख ही तो बुरा है। दुखद है। दुखद है। वो किसी मां के नहीं दुखद है। अब बात ये आती है कि वो जो जो बच्चा निर्दोष मारा गया और जिस भी तरीके से मारा गया वहां पे ईश्वर की सत्ता थी कि नहीं थी? वहां पे ईश्वर की सत्ता नहीं थी।
01:02:33:03 आपका नेट नेट की कोई प्रॉब्लम है आपको? आपकी वो नहीं आ रही वॉइस चिपक गया है। तो अब इनकी ईश्वर की सत्ता भी सब जगह नहीं है। ऐसा कुछ प्रतीत हो रहा है। ऐसा कुछ आने वाला है सामने कि ईश्वर की सत्ता हर जगह नहीं है। ठीक है?
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