⬜ Not used yet · 00:00:04:24 – 00:42:01:00 (41:56)
00:00:04:24 मैंने मेरी जो रिसर्च है उसमें मैंने पाया कि संपूर्ण माने जो जीवन दर्शन है अब तक चले आ रहे हैं जीवन में विभिन्न धर्मों के द्वारा या विभिन्न धार्मिक ग्रंथों के द्वारा उसमें मैंने बहुत सारी त्रुटियां पाई खासतौर से बेसिकल बेसिक रूप में मूल रूप में और उसी की वजह से आज तक कोई ऐसा समाधान क्रिएट नहीं हो पाया क्योंकि कोई भी व्यक्ति अंततः किसी न किसी दर्शन के अंतर्गत ही होके आगे की कोई प्लानिंग सोचता है या किसी चीज को समझता है या करता है तो क्योंकि मुझे दर्शन ही गलत जान पड़े तो इसलिए उस तरह की व्यवस्थाएं भी नहीं हुई और उनका परिणाम तो हमारे सामने है ही कि कोई भी ऐसी व्यवस्था अभी तक पूरी दुनिया में ऐसी कारगर नहीं दिखाई दी थी जितनी की हिस्ट्री है और अभी तक जो वह ऐसे परिणाम दे पाई हो जैसे परिणाम की अपेक्षा हम मनुष्य लोग सब करते हैं तो उसमें क्या खामियां रही और क्या वो रही वो मैंने उसमें सब एक्सप्लेन की है और एक संपूर्ण समाधान भी उस आधार पे दिया है कि अगर वो आ जाएगा तो उसके वैसे परिणाम होंगे जैसे परिणाम हम सब मनुष्य अपने जीवन में अपेक्षित करते हैं किसी भी व्यवस्था से किसी भी जीवन दर्शन से। जी
00:01:20:26 अच्छा तो हमारा वैसे आज का टॉपिक जो है वो ईश्वर का अस्तित्व है कि आपने अपना जो दर्शन दिया है उसमें ईश्वर का अस्तित्व किस तरह का आपने स्वीकार किया है तो उस पे आएंगे पर पहले आपने भी कुछ बातें जो कही है उस पे एक उसमें से एक बात मैं कहूंगा जैसे आपने कहा कि इतिहास में कोई भी ऐसा नहीं है जिसने ऐसा परफेक्ट एक सामाजिक व्यवस्था दी हुई हो है ना तो आपने रामायण का अध्ययन किया है जी लेकिन मुझे किसी ने नहीं बताया कि रामायण कोई इतिहास ग्रंथ है। ऐतिहासिक ग्रंथ है। वो तो ऐतिहासिक ग्रंथ के रूप में नहीं वो तो एक बात अलग है। मैं आप देखिए वो विश्वास करना और ना करना वो एक अलग परिपेक्ष हो गया। मगर रामायण का अध्ययन आपने किया होगा तो रामायण का अध्ययन करते समय हमें प्राप्त होता है कि हवा भी उतनी ही चलती थी जितनी चलनी चाहिए। धूप भी उतनी चलती। ऐसा करके अच्छा आपने नहीं मेरे मेरे मेरे पढ़ने मेरे पढ़ने में इस तरह से नहीं आया और रामायण एक आध नहीं है कई रामायण है जिनमें आपस में ही बहुत सारे अंतर है जो मूल रामायण है वाल्मीकि रामायण उसकी बात मैं करता हूं नहीं मूल रामायण वाल्मीकि रामायण है ऐसा भी कहीं नहीं लिखा हुआ अध्यात्म रामायण भी है तुलसीकृत भी है ठीक है ठीक है इस पर भी हम लोग इस
00:02:36:02 पर भी हम लोग बात कर लेंगे कि मूल उसे क्यों माना जाए हां मूल क्यों माना जाए सही बात है और और अगर मूल उसे से माना जाए तो बाकी क्यों लिखी गई है? उनको प्रिसाइड करना चाहिए। उनको पढ़ने देना नहीं चाहिए। नहीं नहीं ऐसा ऐसा नहीं है कि वो बाकी की लिखी गई साइड करने लायक है। जो उस रामायण में जो जो प्रकरण नहीं आ पाए बाकियों में आ गए। मगर मगर यदि कोई यदि कोई प्रकरण वाल्मीकि रामायण को कंट्राडिक्ट करेगा खंडित कर देगा वाल्मीकि रामायण के किसी तथ्य को तो उसे स्वीकार नहीं किया जाएगा। ठीक है? तो आप यदि रामायण के आधार पे बात करना चाहते हैं तो रामायण के आधार पर भी कर सकते हैं। मुझे दिक्कत नहीं है। नहीं नहीं रामायण के आधार पे नहीं पर मैं एक आपको तथ्य से अवगत करा रहा था कि हम उस दर्शन को मानते हैं। उन सिद्धांतों को मानते हैं जहां पर हमारा विश्वास ये है कि एक समय ऐसा आ गया था। ऐसी सामाजिक व्यवस्था थी राम राज्य में जहां पर हवा भी उतनी ही चलती थी जितनी चलनी चाहिए। धूप उतनी ही निकलती थी जितनी निकलनी चाहिए। कोई भी अकाल मृत्यु मरता नहीं था। कोई भी अनाथ होता नहीं था। कोई भी विधवा होती नहीं थी। ये है रामराज। अब मानने के लिए मुझे कोई मुझे कोई आपत्ति नहीं है। कोई क्या मानता है इसमें मेरी कोई आपत्ति नहीं है। कोई सोने
00:03:51:13 को लोहा लोहे को कांसा कुछ भी मानता रहे किसी के मानने में मेरी कोई आपत्ति नहीं है। वो सब स्वतंत्र है। कुछ भी चीज को कुछ भी मानने के लिए। वैसे ही मैं भी स्वतंत्र हूं। अब आपके अनुसार ईश्वर है। यह कैसे सिद्ध करते हैं आप? मैं कैसे सिद्ध करता हूं? सीधी सी बात है शब्दकोश में ईश्वर की जो परिभाषा है वैसा कहीं जान पड़ता है तो ईश्वर है वैसा कहीं नहीं जान पड़ता तो ईश्वर आप क्या मानते हैं ईश्वर है कि नहीं है हां ईश्वर है तो वो ईश्वर किस प्रकार से है वो सिद्ध करिए हां जैसा कि परिभाषा में ईश्वर का मतलब है जिसके पास ऐश्वर्य है जिसके पास जितना ऐश्वर्य है वो उतना ईश्वर आपकी और कैसे जानेंगे आपकी ईश्वर की परिभाषा क्या है पहले तो ये बताइए यह मेरी नहीं जो शब्दकोश में है भाषा के उसी परिभाषा को मैं भी फॉलो करता हूं। जी हां जो भी है जो आपने स्वीकारा हो ईश्वर के लिए वो क्या है? हां हां हां वही कि जिसके पास ऐश्वर्य हो और जितना ऐश्वर्य उसके पास है उतना ही वो ईश्वर है। यही परिभाषा है। मतलब ऐश्वर्य ऐसा ना हो जिसके बाद उसे किसी भी चीज की आवश्यकता ना पड़े।
00:05:06:21 ना ऐश्वर्य का मतलब है कि सुख सुविधाएं ऐश्वर्य असीमित्व असीमित ऐश्वर्य या फिर सीमित ऐश्वर्य सीमित होगा तो उसे सीमित ईश्वर बोलेंगे और असीमित ईश्वर होगा तो ऐश्वर्य होगा तो असीमित ईश्वर बोलेंगे आपने ईश्वर को सीमित सीमित माना है या असीमित माना है दोनों तरह का सीमित भी दिखाई पड़ता है असीमित भी दिखाई पड़ता है अच्छा आपने कहा कि ईश्वर सीमित भी है और असीमित हुई है। हां जैसे लोग हैं गरीब थोड़ा सा बताइए तो आपकी बात आपकी बात आपकी बात थोड़ी समझ में आ सके इस तरह से उसको एक्सप्लोर करिए थोड़ा व्याख्या करिए कि ईश्वर को आप कैसे सिद्ध करते हैं? हां जी अगर आप जैसे मान लीजिए कि मैं आपके सामने खड़ा हुआ हूं। जी और मैं आपसे पूछ रहा हूं ईश्वर है या सिद्ध करूं। तो अब आप मुझे सिद्ध करिए कि ईश्वर है। हां तो उसके पहले ईश्वर को समझना पड़ेगा कि ईश्वर मतलब क्या है और फिर उसे मैं आपको साक्षात दिखा दूंगा कि ये देखो ये दिख रहा है तो आपको समझ में आ जाएगा कि हां भाई ठीक बात है पर अगर मैं तो गलत हो जाएगी आपकी परिभाषा थोड़ी मैं आपको दिखाऊंगा जी मैं अपनी परिभाषा नहीं कह रहा हूं जो ईश्वर की एक सर्वमान्य परिभाषा है वही बात करूंगा और अगर वो नहीं है
00:06:22:04 अगर वो जो सर्वमान्य है अगर वो सर्वमान्य अगर वो अगर वो सर्वमान्य परिभाषा नहीं भी होगी तो मैं उसको भी सिद्ध करूंगा कि वो आपकी भी वही परिभाषा है। मैं उसको भी सिद्ध कर तो एक सर्वशक्तिमान सत्ता जो सब कुछ कर सकने में सक्षम है। सब कुछ का मतलब सब कुछ उसका नाम ईश्वर है। अब आप ऐसी सत्ता को सिद्ध करिए कि ऐसी सत्ता है दुनिया में। अगर आप यह मानते हैं कि ईश्वर ईश्वर सर्वशक्तिमान नहीं है तो फिर बात आगे बढ़े कि मैं आपको सिद्ध करूं कि ईश्वर सर्वशक्तिमान है। नहीं अब अभी तो अभी तो ऐसी कोई सत्ता मुझे तो नहीं दिखाई दे रही जो कुछ भी कर सके। ऐसी तो कोई सत्ता मुझे तो नहीं दिख रही। आप दिखाइए ऐसी कोई सत्ता हो। अच्छा मतलब आपने ईश्वर को सीमित ही सीमित ही स्वीकार किया। असीमित स्वीकार नहीं किया है। हां मतलब असीमित हो सकती है। कहीं पर कभी इन फ्यूचर स्वीकार क्या किया? आपके दर्शन का सिद्धांत क्या है? हो सकता है सिद्धांत थोड़ी ना होता है। हां अगर सिद्धांत पूछ रहे देखो आपने अभी तक ईश्वर की परिभाषा पूछी है। सिद्धांत पूछ रहे हैं। नहीं नहीं मैंने आपसे पूछा था आपके अनुसार ईश्वर असीमित है। तो आपने बोला
00:07:37:06 दोनों है। अब मैंने जब कहा कि ईश्वर सर्वशक्तिमान है। सब कुछ कर सकने वाला है। तो आपने कहा मुझे अभी तक ऐसा नहीं मिला है कि कोई भी सत्ता ऐसी हो जो सब कुछ कर सकती हो। बिल्कुल है ना तो फिर इसका मतलब है आपके अनुसार ईश्वर सीमित ही है। जी हां इस अर्थ में आप देखेंगे तो ईश्वर सीमित ही होगा। बिल्कुल फिर आप एक एक थोड़ी सी एक छोटी सी रेफरेंस होता है ना आप आप जिस रेफरेंस में पूछेंगे उसी रेफरेंस में बताऊंगा ना मैं रेफरेंस बिंदु होता है आपके सिद्धांत के अनुसार जो आपने दर्शन दिया है उसमें ईश्वर सीमित है या सीमित है मैं फिर पूछ रहा हूं उसमें सीमित ही है सीमित ईश्वर है अब अपने सीमित ईश्वर को आप सिद्ध करिए कि वो है सर हर चीज आप देख रहे हो कि ईश्वर का मैंने परिभाषा बताई कि जिस व्यक्ति के पास पास में जितना ऐश्वर्य है वो उतना ही ईश्वर है और अभी तक जितने भी व्यक्ति दिखाई पड़ते हैं किसी के पास तो ईश्वर जो आप कह रहे हो ना उतना मतलब सीमित ही हो गया ना उतना मतलब मैं ये नहीं कह रहा मैं ये कह रहा हूं इस दुनिया में कोई ऐसा है जो अल्टीमेट हो जो हम मनुष्यों से कम से कम ज्यादा हो वो सिद्ध करिए आप ईश्वर
00:08:52:07 दिखाई पड़ा मुझे नहीं दिखाई पड़ा कि मनुष्यों से ज्यादा कोई ईश्वर है ऐसा मुझे नहीं इसका मतलब आप इसका मतलब आप एक अप्रत्यक्ष रूप से कह रहे हैं कि इस दुनिया में कोई ईश्वर ही नहीं है। जो मनुष्य से ज्यादा नहीं है तो ईश्वर है ही नहीं। आपके हिसाब से कोई मनुष्य ही ईश्वर है। हां मेरे हिसाब से मनुष्य ही ईश्वर है। जितने भी है मतलब अच्छा ठीक है। तो अब अब बात ये आ गई कि अब कोई मनुष्य ही है जो आपका ईश्वर है। ईश्वर से आपका अर्थ है कि एक तरीके से वो जिसके पास ऐश्वर्य हो। सर मेरा ईश्वर नहीं ईश्वर मतलब आप ऐसा क्यों बोल रहे हो कि वो मेरा हो। वो आप वो वो अभी मैं बताऊंगा ना कि हम किस ईश्वर को मानते हैं। मैं वो बताऊंगा कि हमारा ईश्वर कैसे आ गया। जी फिलहाल अभी तक जो आपने ईश्वर को स्वीकार किया है वो वो ईश्वर है जिसके पास ऐश्वर्य हो। तो एक तरीके से आपका कहना यह है कि हर ऐश्वर्य ज्यादा वाला व्यक्ति हर ऐश्वर्य कम वाले व्यक्ति का ईश्वर है। जी बिल्कुल उस तरह से हां तो फिलहाल आपकी नजर में ऐसा कोई है जिसके पास सबसे ज्यादा ऐश्वर्य हो? हां अभी न्यूज़ के आधार पर तो देख सकते हैं। जी हां। जैसे अमेरिका में एक वो है क्या नाम है इसका टेस्ला वाले का तो उसकी संपत्ति सबसे
00:10:07:10 ज्यादा बताई जाती है। सबसे ज्यादा ऐश्वर्य तो वही है फिर सबका ईश्वर अभी। तो टेस्ला आपका ईश्वर है। टेस्ला नहीं उसका नाम मुझे याद नहीं आ रहा। क्या नाम है उसका जो टेस्ला कंपनी का आपने ईश्वर आप उसे ईश्वर मानते हैं कि नहीं मानते हैं? हां हां बिल्कुल ईश्वर ही है भाई। सही बात है आपको जानकारी एक होनी चाहिए ना कि हमारा ईश्वर है तो उसका ये है वो है थोड़ा बहुत कुछ भी तो तो बता तो दिए आदमी है नाम उसका अभी आप बोलेंगे तो मैं खोज के रहने दीजिए का मालिक है इतना इतना ऐसा आपका कहने का अर्थ है कि जिसके पास सबसे ज्यादा धन समृद्धि है वो ईश्वर है आप आपके अनुसार और बाकी अगर हम बात करें कि कोई अल्टीमेट कोई पावर है कोई अल्टीमेट इस मनुष्यों से अलग कोई एक शक्ति है सर्वशक्ति मान सत्ता है तो वो ऐसा कोई एक्सिस्ट नहीं करता है। ये कहना है आपका। मेरे मेरे अनुभव में नहीं है। आपके में होगी तो आप बताएंगे। हां मैं तो बताने ही वाला हूं। पहले एक विषय क्लियर कर रहा हूं मैं। हां जी जी बिल्कुल बिल्कुल बिल्कुल हां चलिए अब ठीक है। अब अब मैं जिस ईश्वर को हम मानते हैं। अब उसकी बात करते हैं। हम ईश्वर को कैसे देख अब यहां पर मैं उपनिषद का एक श्लोक पढूंगा। असतो मा
00:11:22:12 सगया तमसो मागया मृतया इसमें एक जीव की चाह बताई जा रही है जीव की चाह है कभी ना मरने की चाह ये प्रत्येक जीव के अंदर है कि नहीं आप मानते हैं कि नहीं जी हां बिल्कुल अच्छा दूसरी चाह बताई जा रही है तमसो मागमया वो दूसरी चाह बताई जा रही है कि प्रत्येक जीव के अंदर एक चाह है अखंड ज्ञानी बन जाने की इच्छा सब कुछ सारा ज्ञान प्राप्त कर लेने की इच्छा इसको आप स्वीकार ऐसा मुझे ऐसा मुझ में सभी के अंदर नहीं दिखाई पड़ता कुछ मनुष्यों के अंदर है इम्लीमेंटेशन हो या ना हो इंप्लीमेंटेशन हो या ना हो मगर सर चाहत की बात कर रहे हैं हम चाहत की बात कर रहे इंप्लीमेंटेशन की बात नहीं कर रहे अभी चाहत की बात हो रही है जैसे अभी अभी अभी इंप्लीमेंटेशन तो यह भी नहीं हुआ कि हम अमर हो गए लेकिन चाहत नहीं अमर होंगे अमर अमर हो गए नहीं अगर मैं आपके ऊपर हाथ हाथ घुमाऊं तो एट द एंड आपकी कितनी भी उम्र हो गई हो अगर आपको दिख रहा है कि मैं हाथ घुमा रहा हूं तो आपकी पलंग चिपक जाएगी। भय ये भय इसीलिए है क्योंकि मृत्यु का भय जो है इनबिल्ट है। ठीक है? जी जी बिल्कुल बिल्कुल सही बात है। अब जो आपका जो ईश्वर है जिसको आपने
00:12:37:22 ईश्वर कहा क्या वो मृत्यु से ग्रसित हो सकता है या नहीं हो सकता है? बिल्कुल हो सकता है। मगर आपके अंदर एक चाह आ रही है अमर हो जाने की चाह। जी तो अगर आपके अंदर चाह आ रही है तो और आप यह कह रहे हो आप अमर होना चाहते हो मगर आप यह कह रहे हो कि इस दुनिया में कोई अमर नहीं है अभी तक तो नहीं है जी नहीं है मगर आप चाहते हो तो इस हिसाब से तो आप मूर्मति सिद्ध हुए क्योंकि आप चाहते हो अमर होना मगर उसका सब्जेक्ट है नहीं इस दुनिया में जी हां बिल्कुल उसका ज्ञान नहीं है अभी तो ये माना जाए उसका ज्ञान नहीं है उस बारे में अज्ञानी है बिल्कुल सही बात है तो यह माना जाए कि आप मूढ़ मती हैं हां बिल्कुल इस मामले में मूड मत हो क्योंकि आप ऐसी चीज चाह रहे हैं आप ऐसी चीज चाह रहे हैं जिसका सब्जेक्ट इस दुनिया में मौजूद नहीं है। नहीं ऐसा नहीं कह सकते कि मौजूद ही नहीं है। उस पर रिसर्च जारी है। हो सकता है कि कभी अभी अभी राइट नाउ आपका क्या अभी राइट नाउ आपका क्या मानना है? मौजूद है कि नहीं है? मेरे ख्याल से होना चाहिए मौजूद। लेकिन अभी तक उसका ज्ञान नहीं है। यह बात है। आप दार्शनिक हैं। आप किसी स्टेज पर पहुंचे हैं। दुनिया को आप किताब छाप के दे रहे हैं। आप बता रहे हैं ईश्वर के बारे में। आप कह रहे हैं मेरे ख्याल से ऐसा होना चाहिए। नहीं तो ईश्वर का मतलब इस बात से कोई नहीं है कि वो अमर है कि
00:13:52:24 मर जा। मैं फिलहाल मैं फिलहाल आपसे मैं फिलहाल आपसे ये पूछ रहा हूं कि आपके अंदर इच्छा आ रही है कभी ना मरने की। मगर आप ये कह रहे हो इस दुनिया में अभी तक अभी तक ऐसा कोई नहीं है जो कभी ना मरे। जी जी बिल्कुल। अच्छा ठीक है। अब अखंड ज्ञानी वाली बात छोड़ दीजिए। तीसरी वाली बात करते हैं। तीसरी वाली बात कर लेते हैं कि दुनिया के प्रत्येक जीव में एक चाह विद्यमान है। कभी दुखी ना होने की। बिल्कुल। अनंत आनंद की। तो क्या आपकी नजर में आपका जो ईश्वर है उसको कभी भी कोई कष्ट नहीं होता है। किसी भी प्रकार का गैस तक नहीं बनती पेट में। बनती है। इसका मतलब है कि आप कह रहे हैं कि मैं ऐसा होना चाहता हूं जो कभी दुखी ना हो। मगर इस दुनिया में ऐसा कोई नहीं है जो कभी दुखी नहीं होता। जी अभी तक तो है नहीं। ठीक बात है। तो इसका अर्थ ये है जो हम जिस ईश्वर को मानते हैं अब मैं वो बता दूं आपको कि दुनिया के प्रत्येक जीव के अंदर तीन प्रकार की चाह विद्यमान है। कभी ना मरने की और अखंड ज्ञानी हो जाने की और कभी दुखी ना होने की। इन तीन प्रकार की चाह
00:15:08:00 को अगर हम मिक्स करके एक नजर में अगर देखें एट ए ग्लांस तो एक नास्तिक व्यक्ति भी जो ये कहता है कोई अल्टीमेट सत्ता नहीं है मनुष्यों से ऊपर की वो नास्तिक व्यक्ति भी कभी-कभी मन में ये सोचता है कि बारिश ज्यादा हो रही है तो कम हो जाए धूप ज्यादा पड़ रही है तो कम हो जाए आज ठंडी बहुत ज्यादा है कम हो जाए यानी कि वो मौसम को भी कंट्रोल करने वाला बनना चाहता है जी दूसरी बात ये आती है कि एक नास्तिक व्यक्ति भी कभी-कभी ऐसा सोच लेता है कि कल पाकिस्तान और इंडिया के मैच में कौन जीतने वाला है मुझे अभी पता चल जाए। यह हैित की प्यास और तीसरी अगर अगर तीसरी अगर देखें तो एक नास्तिक व्यक्ति भी कभी भी दुख को प्राप्त नहीं होना चाहता है। मेरे बाल कभी सफेद ना हो। मेरे माता पिता कभी मृत्यु को प्राप्त ना हो। मैं कभी मृत्यु को प्राप्त ना हो। मेरे झुर्रियां कभी ना आए। तो यह सारी चीजें एक नास्तिक व्यक्ति भी चाहता है। अब दूसरी बात आती है। अब दूसरी बात यह आती है कि इन सबको निचोड़ करके देख ले तो एक नास्तिक व्यक्ति सब कुछ कर सकने वाला बनना चाहता है। वो प्रकृति को भी कंट्रोल मुझे नहीं लगता। नहीं मतलब
00:16:23:08 मैंने नहीं देखा ऐसे किसी आदमी को जो सब कुछ करना चाहता हो। माने आप आप कुछ करना चाहता हो। नहीं आप मेरी बात सुनने मैंने बोला सब कुछ कर सकने वाला सब कुछ कर सकने वाला हां कर सकने की जैसे आपसे पूछूं सुनिए सुनिए कर सकने की क्षमता कर सकने की क्षमता जो उसके मन में आ जाए वो कर सके अरे सर वही बता रहा हूं कर सकने की आप कह रहे हैं करना चाहता है हो ऐसा मुझे नहीं हां करना चाहेगा क्षमता चाहेगा उसकी मैं ये नहीं कह रहा हूं कि क्षमता है कि नहीं मैं अभी बात कर रहा हूं एक मनुष्य के अंदर प्रकृति से प्राप्त भी सारे नियमों को तोड़ देने की इच्छा व्याप्त सर मेरे अंदर तो नहीं है। अगर आपको ऐसा लगता है मैं प्रकृति के किसी नियम को नहीं तोड़ना चाहता। नहीं नहीं ये ये ठीक है। तो मैं आपसे कह रहा हूं आप मुझे कोई अपनी ऐज ऐसी बताएंगे जिसमें जब मैं आपके ऊपर हाथ उठाऊं तो आपकी पलकें ना झपके। हां तो पलकें झपकेंगे क्योंकि मैं क्योंकि मैं जीवित रहना चाहता हूं। यानी कि आप प्रकृति का ये जो नियम है कि आपको मृत्यु प्राप्त होनी ही है। उसको तोड़ना चाहते हो। नहीं ये प्रकृति का नियम है ऐसा करके कोई सिद्ध नहीं है कहीं पर भी अभी के ये नियम है। अभी फिलहाल आपकी नजरों में कोई
00:17:38:12 अमर है। कोई नहीं है। तो फिर फिलहाल का नियम तो यही हुआ ना। अरे सर ऐसे करके नियम सिद्ध नहीं होते ना। नियम सिद्ध करने पड़ते है। ऐसे करके नियम नहीं सिद्ध होते के अभी अभी तक किसी ने हवाई जहाज नहीं उड़ाया तो हवाई जहाज नहीं उड़ेगा क्या भाई? ऐसे करके नहीं होता है। तो आपका कहने का मतलब है कि हां भाई एक दिन इस दुनिया में कोई होगा जो अमर हो सकता है। हां बिल्कुल और जो उस दिन बहुत लोग अमर हो जाएंगे। आप ये चाहते हैं कि नहीं हो एक दिन एक ना एक दिन ऐसा। हां बिल्कुल क्योंकि हम ऐसा चाहते हैं और उसमें लगे ही हुए हैं जिस दिन सफल हो जाएंगे। तो तो इसका अर्थ ये है कि आप भी अमरता को ढूंढ रहे हैं ना। बिल्कुल ढूंढ रहे हैं। ये सही बात है आपकी। आप भी दुखप्रद जीवन से दूर हटकर के सुखप्रद जीवन को ढूंढ रहे हैं ना? जी बिल्कुल ये बिल्कुल आपकी एकदम सुलेानी बात है। तो हमारा ईश्वर हम ईश्वर उसे ही मानते हैं जो नियम है जो सिद्धांत है वो ये है कि मनुष्य के अंदर ऐसी कोई डिजायर नहीं है जिसका अस्तित्व जिसका सब्जेक्ट मौजूद ना हो। जैसे कि हमारे अंदर भूख है तो भूख होने से ही यह सिद्ध हो गया कि इस दुनिया में खाना है। अगर अगर हमारे अंदर प्यास है तो प्यास होने से ही यह सिद्ध हो
00:18:53:15 गया कि इस दुनिया में जल है। अगर हमारे अंदर सुनने की क्षमता है तो उससे ही ये सिद्ध हो गया कि इस दुनिया में आवाज है। अगर हमारे अंदर देखने की क्षमता है तो उसी से ये सिद्ध हो गया कि इस दुनिया में दृश्य है। रूप है। हां। जी तो जिस प्रकार से नेत्रों का विषय दृश्य सिद्ध होता है। कानों का विषय आवाज सिद्ध होता है। भूख का विषय खाना सिद्ध होता है। उसी प्रकार से ये जो हमारे अंदर तीन तरह की प्यास है। कभी ना मरने की प्यास सत ऑल नोइंग बनने की प्यास चित्त और कभी दुख को प्राप्त ना करने की प्यास आनंद। तो जिस प्रकार से नेत्रों का विषय दृश्य भूख का विषय खाना प्यास का विषय पानी सिद्ध होता है। उसी प्रकार से एक नास्तिक के अंदर भी व्याप्त ये जो तीन सच्चित आनंद की चाल है इसका विषय सच्चिदानंद स्वरूप परमेश्वर सिद्ध होता है। तो हम उस परमेश्वर को मानते हैं। परमेश्वर परमेश्वर कैसे सिद्ध होता है? इससे तो इतना ही सिद्ध होता है। हम उसको परमेश्वर कहते हैं हमारी तीनों प्यास है। हम उसको परमेश्वर कहते हैं जो इसका प्यास का विषय है। जहां पे आप पहुंचना चाहते हैं। एक एक सेकंड एक सेकंड एक एक सेकंड माने आप कह रहे हैं कि अमरता का ज्ञान
00:20:09:03 और अ ज्ञान माने अमर होना और ज्ञान और तीसरा क्या बोला आपने? हम अनंत आनंद तीसरा क्या बोला अनंत आनंद ओके एक आनंद और एक अमर होना और तीसरा तीसरा क्या कहते हैं अखंड ज्ञान ओके एक अखंड ज्ञान हो गया हम हां तो ये तो हमारे अंदर ये जो तो हमारे अंदर ये जो प्यास है सवाल पूछूंगा ना एक मिनट तो ये तीन हमारे हमारे अंदर ये तीन प्यास हैं। अब आप इसको कह रहे हैं कि अमर जो है वो ईश्वर है। आनंद जो है वो ईश्वर है। वो ईश्वर है। एक पंक्ति दोबारा कहने दीजिए। हमारे अंदर यह जो तीन प्यास हैं इसी से ही सिद्ध होता है कि इस दुनिया में कोई है जो सत्य है। सत्य की प्यास से सिद्ध हो जाता है कि इस दुनिया में कोई है जो सत्य है चित्त की प्यास से सिद्ध हो जाता है एक एक सेकंड सत्य के सत्य की क्या परिभाषा सत माने मतलब किस किस बात को
00:21:24:07 सत्य बोल रहे हो? अमरता को यहां सत्य से रिप्रेजेंट कर रहे हैं। सत्य का ये आपने अर्थ कहां से लिया सतचितानंद को हटा दीजिए। वो ज्यादा डिटेल मैं आपको अरे भाई जैसे आपने अभी अभी आपने शुरू में यह बोला था कि मैं ईश्वर को सीमित और असीमित दोनों मानता हूं। बाद में आपने कहा सीमित मानता हूं। हां तो मैंने आपको बताया कि संदर्भ संदर्भ में आपको बता दिया कि अभी आप दोबारा क्लियर करिए। आपने जो बोला कि ईश्वर असीमित भी है, सीमित भी है। अभी आप कह रहे हैं कि सीमित है। हां उस उस रूप में मैं बता रहा था कि ऐश्वर्य है ऐश्वर्य के रूप में कि किसी व्यक्ति के पास में ऐश्वर्य उसकी जरूरत से ज्यादा भी हो सकता है। उस तरह क्योंकि मैं केवल बता रहा हूं कि ऐश्वर्य का मतलब है ईश्वर। तो मैं नहीं कह रहा कि अमर होना मतलब ईश्वर है। ज्ञान मतलब मैं आपसे पूछ रहा हूं कि आपने कहा आपका ईश्वर सीमित भी है। असीमित भी है। आपने सीमित ईश्वर को डिफाइन कर दिया। अब आप असीमित ईश्वर को डिफाइन करिए। हां असीमित ईश्वर है कि जिसके पास में उसको जितनी सुख सुविधाएं चाहिए उससे अधिक का ऐश्वर्य है। वो असीमित ईश्वर है। असीमित बताइए। किसी से अपेक्षाकृत अधिक होना असीमित नहीं है। डेफिनेशन क्लियर
00:22:39:15 करिए। नहीं नहीं हां ऐश्वर्य ऐश्वर्य है। ऐश्वर्य आपने बोला मैं ईश्वर को असीमित और सीमित दोनों मानता हूं। बता तो रहा हूं मैं आपको। सीमित का मतलब हो गया जैसे मेरे पास में उतने संसाधन उतना ऐश्वर्य नहीं है जितनी के मैं चाहता हूं कि मेरे पास हो। हम ठीक है? मतलब मेरी जो जितनी जरूरत है असीमित असीमित ईश्वर का मतलब यह हुआ कि कोई ऐसा है जिसके पास चीजें कोई असीमित है। असीमित अनलिमिटेड पास सर अर्थ तो बता रहा हूं ना मैं हां हां अनलिमिटेड वही बात है हां क्योंकि इसका पैमाना होगा ना कि किस पैमाने से चीजें सीमित होंगी जो पैमाना जिसमें पैमाना लग जाए वो असीमित असीमित कहां से रहा अरे सर पैमाना का मतलब है कि कोई क्राइटेरिया होगा ना जिससे सीमितता वही तो मैं कह रहा हूं जब क्राइटेरिया अगर लगा देंगे तो असीमित कहां से रहा कोई भी क्राइटेरिया लागू कर दिया तो असीमित कहां से रहा हां हां तो अगर आप बिना क्राइटेरिया के पूछ रहे हैं तो फिर सीमित ही है सब कुछ तो इसीलिए आपने जो वर्ड बोला था आपने जो वर्ड बोला था उस वर्ड को आपने बाद में छोड़ा ना इसीलिए आपको संदर्भ बता दिया आपने बिना क्राइटेरिया सुनिए तो अगर आप बिना क्राइटेरिया
00:23:54:24 के मैं सुन रहा हूं मैं आपकी बात सुन रहा हूं आपने एक वर्ड बोला असीमित उसको बाद में आपने छोड़ रहे हैं ना अब आप असीमित को हां छोड़ रहे इसका मतलब आपने पहले गलत बोला था ईश्वर सीमित असम मैंने समझा के छोड़ा है ना आप समझा के छोड़ो क्या समझाया आपने आप क्या बताइए ना फिर आप असीमित को आपने असीमित को क्यों छोड़ा बताइए हां मैंने इसलिए छोड़ा कि जब आप पूछने लगे कि अल्टी अल्टीमेटली बताइए मैं अल्टीमेट अल्टीमेट भी नहीं पूछ रहा मैं पूछ रहा हूं आपका असीमित ईश्वर आप डिफाइन करिए असीमित को डिफाइन करिए आप तो मैंने कर तो दिया डिफाइन कि जिसके पास उसकी जरूरत से ज्यादा जिसके पास उसकी चलिए असीमित की परिभाषा बताइए सर बता तो रहा हूं हां बता रहा हूं कि जिसके पास में उसकी जरूरत से ज्यादा ऐश्वर्य हो। नहीं नहीं अभी अभी अभी आप केवल केवल जो असीमित वर्ड है असीमित अनलिमिटेड इसको खोलिए केवल अभी ईश्वर के बारे में बात मत करिए। पहले असीमित वर्ड को खोलिए पहले इसको खोलिए। हां असीमित का हां असीमित का मतलब है कि जिसकी कोई सीमा ना हो। हां सीमा ना हो। असीमित की परिभाषा में क्या ये आ रहा है कि जिसके पास पहले से ज्यादा धन हो। तो इसीलिए मैंने आपको समझा के ये बात समझाया क्या है? आपका
00:25:10:00 वर्ड वो गलत हो रहा है। इसको आपको स्वीकार करना चाहिए तो तो हम आगे बढ़े। आपका वर्ड वो गलत हो रहा है। आपने समझाया थोड़ी ना है। आप मुझे असीमित की परिभाषा बताइए पहले। आपने बोला असीमित हां हां मैंने बता दिया ना इस तरह से देखेंगे तो वो किस तरह से किस तरह से देखेंगे? किस तरह से किस तरह से? किस तरह से? कि सीमित के सीमित और असीमित में अगर अल्टीमेटली देखेंगे तो असीमित कोई चीज होती नहीं दुनिया में। ईश्वर आपने क्यों कहा कि असीमित है ईश्वर। तो मैंने अपना अर्थ बता दिया कि मैं उन अर्थ में बोल रहा था और मैंने छोड़ दिया तो मतलब आप छोड़ दिया तो आप इसका मतलब अर्थ जो है वो गलत गलत लेते हैं क्या चीजों का आपको नहीं पता था असीमित का मतलब क्या होता है नहीं नहीं भाषा में संदर्भ के अनुसार भी अर्थ लिए जाते हैं। मैं आपसे पूछ रहा हूं आपको असीमित का सही एग्जजेक्टली अर्थ पता है कि नहीं पता है? पता है। तो असीमित का जब आपको अर्थ पता है तो आपने असीमित ईश्वर को स्वीकार क्यों किया? हां इसलिए किया कि जिस संदर्भ में बता रहा था उस संदर्भ में असीमित का दूसरा अर्थ होता है। किस संदर्भ में होता है असीमित का दूसरा अर्थ? आप समझाइए मुझे दोबारा समझना है। हां उसको आप दोबारा समझिए कि ऐश्वर्य का हमारे जीवन में एक स्थान होता है।
00:26:25:10 हम ठीक है? ऐश्वर्य एक चीज होती है। ऐश्वर्य का मतलब है कि जिससे हमारी इच्छाओं की पूर्ति होती है। वैसे तो ऐश्वर्य का कोई कनेक्शन नहीं है। मैं आपसे असीमितता का दूसरे संदर्भ में दूसरा अर्थ पूछ रहा हूं। अरे अरे सर ऐश्वर्य से ही तो पता चलेगा कि जिसे ईश्वर वो तो ईश्वर की बात हो रही है जब आप ईश्वर को असीमित से जोड़ रहे हैं तब अरे तो और किसकी बात कर रहे हैं पहले हम असीमित शब्द की मीमांसा कर रहे हैं ना असीमित शब्द को हम खोल रहे हैं आप असीमित का किस संदर्भ में दूसरा अर्थ लेते हैं जहां पे वो असीमित का अर्थ भी निकले कि वो क्या कहते हैं सीमित हो हां हां इसीलिए तो मैंने आपको बताया कि अगर केवल आप असीमित का अर्थ पूछ रहे हैं तो उसका मतलब है कि जिसकी सीमा ना हो। तो अब आपने जब असीमित ईश्वर कहा तो ऐसा ईश्वर हो गया जिसकी सीमा ना हो। हां। तो फिर आपने असीमित ईश्वर को स्वीकार क्यों किया? जबकि आप कहते हैं कि ईश्वर सीमित है। इसीलिए मैंने आपको वो वर्ड वापस ले लिया। अगर आप इस आधार अरे वापस ले लिया तो ये कह के लीजिए कि मैंने वो गलत कहा था। ये कह के लीजिए। ये मत कहिए। क्या? अरे तो आपको समझा तो दिया कि इस अर्थ में ये ये समझाया थोड़ी ना। आप कहां समझा रहे हो? आप जब मैं पूछ रहा हूं कि असीमित ईश्वर वो होगा जिसकी सीमा ना हो। आपने आपने कहा सुनिए
00:27:41:03 आपने असीमित ईश्वर जब कहा तो ईश्वर वो हो गया जिसकी सीमा ना हो। अब जब मैं आपसे पूछ रहा हूं आपका आप तो असीमित ईश्वर को मानते नहीं तो आप कह रहे हो कि मैंने आपको बता तो दिया वापस ले तो लिया। तो इसमें कहां से आपका ईश्वर लिया और ये बता के ले लिया कि जिस जिस अर्थ में आप पूछ रहे हैं उस अर्थ में वो गलत है। बोल तो दिया। किस अर्थ में असीमित ईश्वर सही है? अब आप अब आप बताइए कि जिस अर्थ में आप सत्य ले रहे हैं सत्य गलत है तो छोड़ दीजिए। मैं तो मना नहीं मैं गलत नहीं कह रहा हूं। मैं इसलिए उसपे बात नहीं कर रहा हूं क्योंकि मैं समझाऊंगा उसको समझाऊंगा। पहले आप मुझे ये बताइए कि आप असीमित ईश्वर को किस अर्थ में असीमित सिद्ध कर सकते हैं? किस अर्थ? सर आप अभी तो मैंने आपको बताया। फिर दोबारा से बताऊं क्या? एक भी बात नहीं बताया। एक भी बात मैं चलिए दोबारा से बता दीजिए। दोबारा से बता दीजिए। नहीं मैं हां मैं फिर बता देता हूं। ठीक। के ईश्वर का मतलब होता है कि जिसके पास ऐश्वर्य है। ये बात समझ में आ रही है? ठीक है? हां। अब जिसको ईश्वर बोल रहे हैं अगर उसके पास में उसकी जरूरत से ज्यादा ऐश्वर्य है तो वो उसके लिए असीमित हो जाएगा और उससे कम है तो वो उसके लिए सीमित हो जाएगा। अब ये आप मुझे लॉ बताइए कि जिसके पास जरूरत से ज्यादा हो कोई चीज तो वो असीमित कहलाएगा। इसके लिए क्या उसके
00:28:56:04 लिए? उसके लिए उसके लिए किसके लिए? किसके लिए? अरे जिसके लिए इसके लिए लॉ बताइए। इसके लिए सिद्धांत बताइए। जैसे अभी आपने कहा ना एक ऐसा कोई सिद्धांत नहीं है। क्योंकि वो आपकी क्योंकि वो आपकी सीमा के बाहर हो गया। क्योंकि जितने जितने की आपको जरूरत है वहां तक आपकी सीमा है। उसके बाहर की चीज आप इस्तेमाल ही नहीं कर सकते कभी भी। तो वो आपकी सीमा के बाहर हो गया। माने असीम हो गया आपके लिए। तो इस तरह से वो असीमित हो जाता है। जी। अरे भाई आप ये बताइए कि लॉ कहां पर है? जहां पर यह हो कि उसकी सीमा से जरा सा भी ज्यादा है तो असीमित है। यह बताएंगे असीमित का अर्थ यह नहीं था। सुनिए असीमित का अर्थ यह नहीं था। असीमित का अर्थ आपने असीमित का अर्थ आपने असीमित का अर्थ आपने असीमित का अर्थ आपने अभी मुझे बताया जिसकी कोई सीमा ना हो। तो असीमित ईश्वर का अर्थ असीमित ईश्वर का अर्थ हुआ जिसकी कोई सीमा ना हो। अब आप ये बता रहे हैं कि अपेक्षाकृत किसी के पास अगर ज्यादा है तो वो असीमित ईश्वर है। अपेक्षाकृत अपेक्षाकृत तो ये आपने तो यह परिभाषा आपने तब क्यों नहीं बताई जब मैंने आपसे पूछा असीमित का असीमित की जब परिभाषा पूछी सर इसको आप इस इस रिकॉर्डिंग को बाद में देख लीजिएगा पहले ही बता दिया मैंने आपने नहीं बताया है खैर मैं आपको मैं सच के ऊपर
00:30:11:13 मैं सच के ऊपर बात इसलिए नहीं कर रहा हूं क्योंकि वो विषयंतर हो जाएगा उसमें भी एक अलग चैप्टर खुलेगा उसको मुझे आपको लगाना पड़ेगा जबकि हम लोग एक मुख्य विषय पर जब चर्चा कर रहे हैं तो उसी पर रहना चाहता हूं विषयांतर ना हो इसलिए मैं कह रहा हूं अगर आप नहीं मान रहे हैं अमरता को सत्य तो ठीक है वो उस उस जगह छोड़ देते हैं। अब मैं कह रहा हूं इस दुनिया में कोई अमर नहीं है फिर भी आप अमरता को ढूंढ रहे हैं यह बात तो सत्य है हां ढूंढ रहे है तो फिर आप पागल सिद्ध हुए ना आज कैसे पागल सिद्ध हो गए आपके अंदर जो चाह है उसका कोई विषय है हां विषय तो है ना क्या है विषय यही के मैं मरूं ना विषय तो यह आप ढूंढ रहे है अमरता को कोई अमर है इस दुनिया में अरे सर अभी तक अमर नहीं है लेकिन मुझे नहीं लगता ऐसा कि आगे नहीं हो पाएगा आज के टाइम में सब्जेक्ट है आपकी और मैं ऐसी बातें और मैं ऐसी बातें सिद्ध कर दूं कि जो चीजें नहीं थी और उनको इमेजिन किया गया चाहा गया और बाद में वो प्राप्त हो गई चीजें नहीं मैं ये नहीं मैं ये नहीं कह रहा मैं ये नहीं कह रहा आज की तारीख में जो पागल कैसे कह रहे हैं भाई वैज्ञानिक पागल होते हैं क्या नहीं तो आप ढूंढ उसको आज रहे हो ना उस दिन ढूंढना जब वो हो जाए आप ढूंढ रहे हो
00:31:26:28 ना आप ढूंढ रहे हो अरे भाई साहब जब हो जाएगी तब ढूंढने की जरूरत क्या है? अरे जैसे कि आपको पता चल गया कि अब दुनिया में कोई है जो अमर हो गया है। ठीक है। अब आप ये कहो कि अब मुझे कोई अब आप अब आप मुझे ये कहो अब आप मुझे ये कहो अब आप अब आप मुझे ये कहो कि मुझे कोई मारने आएगा। मैं मरना नहीं चाहता क्योंकि भाई मैं उसके जैसा होना चाहता हूं। तो ये तो हो गया सही बात। किस किसके जैसा होना चाहते हो? जब ये सिद्ध हो गया कि हां भाई अमरता को ढूंढ लिया गया है। अरे भाई जब अमरता ढूंढ लिया जाएगा तब अमर हो जाऊंगा ना फिर काहे के लिए ढूंढूंगा? अरे भाई अमरता को आप ही ढूंढेंगे। आप साइंटिस्ट साइंस में काम कर रहे हैं आप अमरता को ढूंढने के लिए। हां मैं भी काम कर रहा हूं। और भी बहुत लोग काम कर रहे हैं। खाली बैंक कर रहे हैं क्या? और भी बहुत लोग कर रहे हैं क्या? मैं भी कर रहा हूं। क्या किया आपने? मैं भी कर रहा हूं। क्या किया आपने? अरे कर अरे कर रहा हूं। अभी तक सफल नहीं। बताइए ना क्या किया? थोड़ा सा। बताइए क्या किया? भाई कोई फार्मूला कोई फार्मूला कुछ बताइए। क्या कर रहे हैं अवस्था के लिए? भाई फार्मूला तब बताएंगे ना जब खोजने में आ जाएगा जब तक खोजने में नहीं आया तो क्या बताएं तो यानी कि खोजने में अभी आई नहीं उसके बारे में पहली बात तो है चलिए अभी तक की अभी तक की वो एक निष्कर्ष निकाल ले थोड़ा सा फिर
00:32:42:02 आगे बढ़ते हैं पहली बात तो ये है कि आपने ईश्वर को असीमित कहा फिर जब आपने सोचा कि भाई वो असीमित का अर्थ मैं कुछ और लूंगा तो आपने माना कि ईश्वर जो है आपका सीमित है। ठीक है जी बिल्कुल बिलकुल उसके बाद आपने ये माना कि आपके अंदर भी अमरता की प्यास है आपके अंदर भी कभी ना दुखी होने की प्यास है परंतु इस दुनिया में कोई नहीं है जो अमर हो जो दुखी हो अच्छा जो जो हिंदू धर्म है जो हमारा सनातन धर्म है उसके अनुसार हम ईश्वर उसको मानते हैं जो इस चाह का विषय है और इसीलिए उसको कहते हैं सच्चिदानंद स्वरूप परमेश्वर सत का मतलब यहां अमरता से ही है सनातन शास्त्रों के आधार पे वही आप मुझे भाषा में दिखाएंगे कि सच का मतलब सच्चिदानंद स्वरूप को छोड़ दीजिए। हिंदूज़्म का ईश्वर वही है जो कभी मरता नहीं है। सत्य का मतलब बताइए ना। अरे भाई सत्य का मतलब अरे मैं मैं कह रहा हूं ना भाई उस शब्द को छोड़ दो। मैं ये कह रहा हूं शब्द को छोड़ दो। उससे विषय होगा। उससे विषय होगा। ओके। आपकी ऐसी मान्यता है। आप ऐसा बता रहे हैं। सनातन धर्म शास्त्रों के अनुसार। अब मेरा अगला सवाल ये है। हां। सनातन धर्म में ऐसी मान्यता है और उसे आप भी मानते हैं। ऐसा आप कह रहे हैं। बिल्कुल बिल्कुल हां अब मैं आपसे एक बात पूछ रहा हूं कि ये जो दर्शन शास्त्र आपने
00:33:57:03 कब लिखा? किस आयु में लिखा? जी ये मैंने लिखा 2018 में मैंने इसको लिखना शुरू किया और 20 तक पूरा किया। तो आपकी आयु क्या रही थी तब तक? मेरी आयु अब 51 साल होने वाली है। तो आप तो आप समझ लीजिए कि तीन और 49 49 नहीं 51 है तो 46 की आयु में लिखना शुरू किया। अच्छा हां 2018 जी तो 46 के आसपास लिखा तो 46 की उम्र तक आप ईश्वर में यकीन रखते थे या किसी दर्शन में यकीन रखते थे या नहीं रखते थे? मैं खोज में था खोज पर था। किसी में मैं देखो मैं यकीन नहीं रखता हूं मैं खोजी आदमी हूं वो जो चीज़ खोजने में आती है वो है और किसी दर्शन को अपनाया था तब तक या जिस नहीं किसी दर्शन को नहीं अपनाया मैं उनकी स्टडी करता था ये जानने के लिए कुछ ऐसा है क्या आपका विवाह हो गया है अच्छा अच्छा जी तो मैं ये पूछना चाहता हूं कि 46 की उम्र तक आपने अपनी माता बहन और पत्नी में अंतर किस आधार पर किया? संबंधों के आधार पे। वो संबंध किसने बताया आपको? को कैसे पता लगे? भाषा से। अरे भाषा से बताया किसने?
00:35:13:13 मेरे माता ने, पिता ने क्या वो लोग भी ऐसे ही थे जिन्होंने जो ईश्वर को ना मानते हो खोजी हो? हां ऐसे कुछ थे खोजी वाले भी कुछ थे। मानने वाले भी दोनों तरह के लोग थे। तो ठीक है। तो अब मुझे आप बताइए कि माता को माता मानने का आपका आधार क्या था? 46 साल की उम्र तक और आज क्या है? आधार कोई आधार नहीं है। बस भाषा आधार है। कोई आधार नहीं है ना? भाषा आधार है। भाषा के अलावा भाषा आधार है। भाषा को जरा समझाएंगे नहीं फिर बाद में फिर आप कहेंगे मेरा उस संदर्भ में था ये सब। इसलिए क्लियर कर दीजिए। हां भाषा हां भाषा का मतलब है कि किसी स्त्री से अगर कोई पैदा होता है तो उस स्त्री को माता बोलते हैं भाषा में और उसको पुत्र या पुत्र माता बोलते हैं वो तो ठीक है। माता को किस दृष्टि से देखना है? मैंने अंतर पूछा। अंतर करने का आधार क्या है? दृष्टि से देखते हैं कि वो हमारा लालनपालन करती है। वो पोषण करती है। नहीं नहीं अभी अभी मुझे और जो थोड़ा सा खोलना पड़ेगा। एक पत्नी के साथ आप आप एक अपनी पत्नी के साथ कोई मनुष्य उसके साथ संभोग कर सकता है। करता है। माता के साथ नहीं करता है। तो आप आप क्या इस चीज को फॉलो करते थे? किस चीज को? जो
00:36:28:16 मैंने अभी सिद्धांत बताया। हां मैंने अभी तक तो फॉलो किया है। हां। तो इसका आधार क्या है आपका? अभी तक फॉलो किया आगे हो सकता है ना भी करें। अब आगे का किसको पता है भाई? मैं कोई भविष्यवक्ता तो हूं नहीं। तो आपकी भविष्यवाणी आपको आपके अपने जीवन के सिद्धांत नहीं है। जबकि आपने सार्वभौम सिद्धांत दिए दुनिया को। आपके अपने जीवन जीने के सिद्धांत है कि नहीं? तो हां तो ये कोई मेरा सिद्धांत नहीं है ना। ये तो स्वीारा है कि नहीं कोई सिद्धांत भाई साहब आपने कोई सिद्धांत स्वीकारा है कि नहीं आपने किताबें लिख दी दुनिया के लिए आपने सिद्धांत को स्वीकारा कि नहीं हां स्वीकारा भाषा स्वीकारी है मैंने नहीं नहीं भाषा नहीं माता के साथ गमन नहीं करना है इस सिद्धांत को आपने अपनाया हुआ है कि नहीं नहीं ये कोई सिद्धांत के रूप में मैंने कहीं पढ़ा नहीं है नहीं मैं अभी मैं आपसे पूछ रहा हूं माता के साथ आप पत्नी जैसा व्यवहार नहीं करते ना हां नहीं करता नहीं करते तो आगे भी नहीं करेंगे फिर हो सकता है आगे कर दें। आगे का पता नहीं लेकिन मेरी तो कोई योजना है नहीं करने का। मान नहीं योजना नहीं आप देखिए आपने एक वो दिया है कि भैया संपूर्ण समाधान ये लीजिए दुनिया को दे दिया आपने। बहुत अच्छी बात है। नहीं नहीं संपूर्ण संपूर्ण समाधान में अगर पूछ रहे हैं तो
00:37:43:18 संपूर्ण समाधान में कोई भी दो व्यक्ति जो देखिए मैं ये नहीं पूछ रहा हूं। ये विषयांतर हो रहा है। विषयांतर हो रहा है। मैं कुछ और बात कह रहा हूं। सुन लीजिए। तो मैं नहीं मैंने कहा आप दुनिया से चाहते हो आप स्पष्ट मैं नहीं चाहता दुनिया से मैं क्यों चाहूंगा दुनिया से भाई आपने एक सिद्धांत दिया है संपूर्ण समाधान आप अपने मन में ये भाव रखते हैं कि दुनिया उसको अगर फॉलो करे तो सुखी हो जाए हां अगर करें और ये सबको देखना है कि अगर करना है कि नहीं करना है हां तो आपके मन का भाव क्या है करें कि ना करें हां मेरे मन का भाव यह है कि क्योंकि मेरी जो स्टडी है उसमें हर आदमी आदमी सुखी होना चाहता है। जैसे आपने भी बताया कि हर आदमी सुखी होना चाहता है। मेरी भी स्टडी में यही निकल के आया। अरे सर वही तो बता आप कोई सिद्धांत है जो दुनिया को दे रहे हैं। ये तो मानते हैं ना। हां तो आपका अपना आपको नहीं पता कि आज आप माता के साथ माता जैसा व्यवहार कर रहे हैं। पर कल को करेंगे कि नहीं करेंगे ये नहीं पता आपको। देखो अगर कल को मेरी माता ने मुझसे रिक्वेस्ट की प्रार्थना की कि भाई उनकी ऐसी इच्छा है और वो इसके बिना सुखी नहीं हो सकती हैं तो मैं उनकी इच्छा पूर्ति कर सकता हूं उनको सुखी करने के लिए इसलिए
00:38:58:19 यह निर्णय मैं अकेला नहीं ले सकता है दो लोगों का निर्णय मुझे अकेले से पूछ रहे हैं गलत बात है ये नहीं नहीं नहीं नहीं देखिए तो इसका अर्थ ये है इसका इसका अर्थ ये है सुनिए अरे इसका अर्थ ये अरे सर सुनिए ना पहले एक सेकंड सुनिए जैसे मेरा और आपका आज क्या संबंध है और कल को हमारे और मेरे और आपके बीच में क्या संबंध होगा ये मैं और आप दोनों मिलके तय कर सकते हैं। मैं इसका मतलब है कि आपके अपने सिद्धांत परिवर्तनशील है। नहीं यही सिद्धांत दिया है मैंने। संपूर्ण जीवन दर्शन में भी यही सिद्धांत है और यही है। परिवर्तनशील है वो। के हां लोगों की इच्छा के ऊपर है परिवर्तनशील मतलब जब जिसको जिसके साथ सोने का मन करे जब जिसको जिसके साथ सोने का मन करे उसको सुख हो रहा है तो उसको दे देना चाहिए ये सिद्धांत है आपका अगर वो दोनों राजी है उस बात से तो बिल्कुल सही बात है हां यही अब ये बताइए कि जानवरों में और क्या है आपने अभी तो बोला सर इस मामले में कोई अंतर नहीं है जानवर भी सुखी होना चाहते हैं आदमी भी सुखी होना चाहता है इस मगर जानवर के पास मर्यादा नहीं है अरे जो है जिसको आप तोड़ रहे हैं तो अब बताइए जानवर में अब में अंतर क्या है? नहीं तो ये कहते ही है व्यवहार, निद्रा, भव, मैथुन ये चार चीजें इंसानों में जानवर में बराबर है।
00:40:13:27 एक ही चीज एक्स्ट्रा होती है धर्म। अब आप कह रहे हैं कि हमारे पास ये मर्यादा भी नहीं है। कल को अगर माता ने कहा सुखी होना चाहती है तो हम तोड़ भी सकते हैं। तो इसका मतलब है आपके पास कोई भी चीज एक्स्ट्रा है ही नहीं। तो जानवरों में आप में अंतर क्या है? फिर अरे भाई नहीं है। इस मामले में कोई अंतर बताया तो? इस मामले में क्या है? ये मर्यादा ही तो है जो जानवर से भिन्न बना रही है हमें ना ना बहुत सारी चीजें जो भिन्न बना रही है केवल ये केवल ये बताइए बताइए बताइए अरे जैसे जैसे मतलब कुल मिला के आपका कहने का मतलब ये है आपका सिद्धांत ये कहता है कि जब जिसका मन जिसके साथ आए उसके साथ गमन कर ले संभोग कर ले सुख को बस चाहिए बस सुख होना चाहिए कोई भी संबंध कोई भी संबंध दो लोग आपस में अपनी इच्छा के आधार पर बना सकते हैं यही सुख का सिद्धांत है बहुत बढ़िया अब आपसे मिलकर के हमें अच्छा लगा। अच्छा लगा आप यहां आए। आपको राम राम भैया दूर की आप राम-राम ले या ना ले वो भी मुझे नहीं पता है। अरे तो अभी अभी आप अपनी बात तो बताएं के मैंने अपनी बात बता दी ना भाई। देखिए आपने कोई जो दर्शन दिया है उसको आप अपने साथ ही लेकर के इस दुनिया से जाएंगे। और कुछ जो दो चार लोग होंगे अज्ञात खुद को मानेंगे। आप मानवों को आप सुनिए आप आप मनुष्य आप मानव उचित समाज को आप आप सिद्धांत दे रहे हो पशुओं
00:41:29:10 का कि जब चाहे तब किसी के अनुसार गमन कर लो नहीं एक एक सेकंड आप खाना खाते हैं मैंने बोला ना आहार निद्रा है तो ये चार चीजें समान है देखिए मुझे इस चर्चा को आगे नहीं बढ़ाना है जो माता के साथ गमन करना चाहे उससे मुझे बात ही नहीं करनी है खत्म हो गया आपका अब आप और सुनिए आपने जो शंकराचार्य जी के बारे में बोला है ना वो भी मैंने देखा है समय रहते समय मिलने पर उस पर कारवाई होगी आप याद रखिएगा धन्यवाद
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