1
00:00:01,960 --> 00:00:06,640
[घंटी की आवाज़] कहां से हो जाएगा? जैसे कि हमने यह जाना ना कि व्यक्ति

2
00:00:06,640 --> 00:00:10,720
जब अपने जो ये साइंस है, विज्ञान है, इससे

3
00:00:10,720 --> 00:00:14,720
जब वो पार नहीं पा पाता है अपने जीवन में सुख और इसकी तभी

4
00:00:14,720 --> 00:00:19,120
उसके जीवन में यहां पर आ रहा है कि भाई ईश्वर है। है ना?

5
00:00:19,120 --> 00:00:23,440
तो यहां से हुआ यह कि एक सर्वशक्तिमान सत्ता

6
00:00:23,440 --> 00:00:27,440
है। जहां सब कुछ फेल हो जाता है मगर वो सब कुछ भी कर सकती है।

7
00:00:27,440 --> 00:00:31,520
उसी के होने के कारण उसको एक संतोष रहता है कि मैं भाई ईश्वर को

8
00:00:31,520 --> 00:00:35,520
भज लूंगा तो मेरा जो है कल्याण चाहे बिल्कुल विपदा

9
00:00:35,520 --> 00:00:39,520
बिल्कुल खड़ी हो आपने आप प्रलय खड़ी हो सामने मगर उसको वो ईश्वर

10
00:00:39,520 --> 00:00:43,680
जो है वो इस प्रलय को भी रोक सकता है। है ना? इसीलिए आपने जैसे

11
00:00:43,680 --> 00:00:48,000
कहा कि उसको थैंक गॉड निकला निकल जीतने के बाद जैसे हम जो नास्तिक को संतुष्ट

12
00:00:48,000 --> 00:00:52,000
कर पाते तो इससे करते हैं कि तेरे अंदर भी सदा सुखी रहने की चाह

13
00:00:52,000 --> 00:00:56,000
विद्यमान है। तो इस अगर तेरे अंदर सतचित आनंद की

14
00:00:56,000 --> 00:01:00,000
चाह है तो इसका मतलब कोई दुनिया में सतचित आनंद है। अगर तेरे

15
00:01:00,000 --> 00:01:04,000
मन में भी ये आ रहा है कि बारिश थोड़ी कम हो जाए। नास्तिक के मन में भी आता है मुझे जाना है

16
00:01:04,000 --> 00:01:08,160
जल्दी तो बारिश थोड़ी कम हो जाए। यानी वो मौसम को भी कंट्रोल करने वाला बनना

17
00:01:08,160 --> 00:01:12,480
चाहता है। उसके मन में भी आता है धूप थोड़ी कम हो जाए। यानी वह धूप को भी कंट्रोल

18
00:01:12,480 --> 00:01:16,560
करने वाला बन कभी-कभी आता है मैं भविष्य देख लूं। नास्तिक भी सोचता है कल इंडिया

19
00:01:16,560 --> 00:01:17,060
पाकिस्तान

20
00:01:17,040 --> 00:01:21,200
में कौन जीतेगा? ऐसा नास्तिक भी सोच लेता है। यानी कि वो भविष्य देखने वाला ही बन

21
00:01:21,200 --> 00:01:25,200
बनना चाहता है। तो हम जब यह ईश्वर को ईश्वर के एकिस्टेंस को प्रूव ही

22
00:01:25,200 --> 00:01:29,520
इससे कर पा रहे हैं कि वो व्यक्ति हर तरह के प्राकृतिक

23
00:01:29,520 --> 00:01:33,520
नियमों से परे हो जाने का सोच रहा है। तो उसकी इस

24
00:01:33,520 --> 00:01:37,520
चाह का जो सब्जेक्ट है वो वही ईश्वर है जो सर्वशक्तिमान

25
00:01:37,520 --> 00:01:41,520
है। सच्चिदानंद स्वरूप परमेश्वर। तो जब

26
00:01:41,520 --> 00:01:45,520
हम कहते हैं कि ईश्वर सच्चिदानंद स्वरूप परमेश्वर है। सर्वशक्तिमान

27
00:01:45,520 --> 00:01:49,680
तो सर्वशक्तिमान है तो फिर बात आती है कि ईश्वर किसी भी प्रकार के नियम के

28
00:01:49,680 --> 00:01:53,920
नीचे नहीं है। वो सभी नियमों को बनाने वाला सर्व नियामक है। कुल

29
00:01:53,920 --> 00:01:58,000
मिलाकर के बात यही है ईश्वर वो है जो कुछ भी कर सकता है। उसकी कोई

30
00:01:58,000 --> 00:02:02,560
लिमिट नहीं है। अगर कोई लिमिट है तो वो ईश्वर नहीं है। तो

31
00:02:02,560 --> 00:02:06,800
क्या जो ब्रह्मा कुमारी के द्वारा प्रतिपादित होने वाला जो ईश्वर है

32
00:02:06,800 --> 00:02:11,440
क्या वो सर्वशक्तिमान है? क्या वो किसी भी नियम के नीचे ना आने वाला है

33
00:02:11,440 --> 00:02:15,440
या फिर वो नियम के नीचे है? वो सर्वशक्तिमान है लेकिन

34
00:02:15,440 --> 00:02:19,600
वो दुख उन्हें देते हैं। बुरा कुछ नहीं करते हैं। वो दुख

35
00:02:19,600 --> 00:02:23,840
हर्ता सुख करता है। वो दुख भी देते हैं नहीं। वो बुरा करते

36
00:02:23,840 --> 00:02:27,840
हैं नहीं। आज हमारे पास जो है एक आए भाई तो

37
00:02:27,840 --> 00:02:31,920
उनको बहुत मानते हैं भगवान को। बट उन्होंने ऐसे वो कुछ वो तंबाकू वंबवाकू

38
00:02:31,920 --> 00:02:32,420
खा

39
00:02:32,080 --> 00:02:36,560
रहे थे। मैंने कहा ऐसे क्यों कर रहे हैं आप? सेहत के लिए नुकसान करता है। अरे दीदी

40
00:02:36,560 --> 00:02:40,640
हम में भी भगवान है। आप में भी भगवान है। हम जो कर रहे हैं वो भी भगवान करा

41
00:02:40,640 --> 00:02:44,720
रहा है। सब कुछ भगवान करा रहा है। मैंने कहा नहीं भगवान ये तो बिल्कुल नहीं करा

42
00:02:44,720 --> 00:02:48,800
सकता है। भगवान कुछ गलत नहीं करा सकता। जो हमारी हमारी सेहत के लिए जो

43
00:02:48,800 --> 00:02:52,960
डॉक्टर्स मना कर रहे हैं तो भगवान के लिए कैसे हो जाएगा वो? तो ईश्वर हमारे

44
00:02:52,960 --> 00:02:57,200
हिसाब से दुख हर्ता सुख हर्ता। हमेशा सुख ही देते हैं। कोई

45
00:02:57,200 --> 00:03:01,280
गलत नहीं। एक्चुअली ईश्वर का एक वो वो है क्या कहते

46
00:03:01,280 --> 00:03:05,600
हैं? रूप जैसे कि पानी सब जगह है नमी

47
00:03:05,600 --> 00:03:09,760
के रूप में सब जगह है मगर हमारी प्यास पानी

48
00:03:09,760 --> 00:03:14,000
का वही रूप बुझा सकता है जो हमारे ग्लास में हो है ना तो ऐसे ही

49
00:03:14,000 --> 00:03:18,160
ईश्वर तो सर्वत्र समान रूप से व्याप्त है वो हर जगह

50
00:03:18,160 --> 00:03:22,400
अच्छाई में भी है सब कुछ जगह है मगर ईश्वर का वो रूप

51
00:03:22,400 --> 00:03:26,400
जो हमारे लिए मोक्षदायक हो जो हमारे लिए सुख करता हो

52
00:03:26,400 --> 00:03:30,560
दुख हर्ता हो उस वो रूप हमें हम उसकी पूजा

53
00:03:30,560 --> 00:03:34,560
करते हैं बाकी ईश्वर तो सब सब जगह है हर जगह है।

54
00:03:34,560 --> 00:03:39,200
देखिए भाई यही तो हम बताना चाहते हैं। ईश्वर सब जगह है। इसमें बहुत

55
00:03:39,200 --> 00:03:43,360
ईश्वर के लिए भावना छी हुई है। जब हम ये बोलते हैं ना भगवान सब जगह है।

56
00:03:43,360 --> 00:03:47,120
तो ये जो शब्द निकलते हैं सब जगह ये उन्हीं के

57
00:03:47,120 --> 00:03:51,120
लिए निकलता है जिनसे हमको बहुत प्यार होता है। हमारे घर में अगर एक नन्हा

58
00:03:51,120 --> 00:03:55,120
बच्चा खेलता रहता है और वह दो दिन के लिए कहीं चला जाता है। तो उसकी एब्सेंस

59
00:03:55,120 --> 00:03:59,120
में भी उसकी प्रेजेंस फील होती है। हमको उसकी आवाज आती है। उसकी किलकारियां आती है। क्या कहते हैं?

60
00:03:59,120 --> 00:04:03,360
वो है नहीं तब भी लग रहा है कि है तो ईश्वर सर्वव्यापक नहीं है। क्यों ऐसा

61
00:04:03,360 --> 00:04:07,600
हमने कहा? नहीं जैसे हमें फील होता है मगर वो बच्चा होता नहीं है हमारे आसपास।

62
00:04:07,600 --> 00:04:11,600
तो क्या ईश्वर भी ऐसा ही है? आप बताइए। जैसे अभी हमने कहा ईश्वर सब

63
00:04:11,600 --> 00:04:15,680
जगह है। है ना? कई बार हम कहते हैं ईश्वर हमारे दिल में है। आपके दिल में

64
00:04:15,680 --> 00:04:19,680
है। अभी हमारे और फैक्ट है ये। ये भी ये भी एक फेस

65
00:04:19,680 --> 00:04:23,680
में ये भी राइट है कि जब हम किसी को बहुत प्यार करते हैं तो हम क्या कहते हैं? आप तो मेरे दिल

66
00:04:23,680 --> 00:04:27,760
में रहते हो। ठीक है? ये दो चीजें हमने बोली। दिल में रहते हैं। सर्वव्यापी

67
00:04:27,760 --> 00:04:31,920
है बिकॉज़ कि मैं उसे बहुत प्यार करती हूं। लेकिन जब जब हमें हमारे हमें कोई

68
00:04:31,920 --> 00:04:36,000
परेशान करता है हमारे पास कोई दुख तकलीफ आती है आप बार-बार उस व्यक्ति उस समस्या

69
00:04:36,000 --> 00:04:40,080
के लिए पूछ रहे हो बताइए क्या हुआ बताओ क्या हुआ और वो समस्या भी हमारे कंट्रोल में नहीं

70
00:04:40,080 --> 00:04:44,080
है तो हम क्या कहते हैं भाई देखो अब हाथ जोड़ के तुमसे कह रहे हैं अब मेरे से उस समस्या के

71
00:04:44,080 --> 00:04:48,160
बारे में बात नहीं करो अब ऊपर वाले के हवाले छोड़ दो तो अब भगवान जी

72
00:04:48,160 --> 00:04:52,160
कहां चले गए कहां गए ये तो हमारी समझ के ऊपर

73
00:04:52,160 --> 00:04:56,640
है ना समझ के नहीं भैया सब कोई कहते नहीं मैं मैं ये जानना चाह रहा हूं ईश्वर

74
00:04:56,640 --> 00:05:00,640
हर जगह है कि नहीं अकॉर्डिंग टू सूरज सूरज कहां कहां है?

75
00:05:00,640 --> 00:05:02,160
सूरज आकाश में स्थित है।

76
00:05:02,160 --> 00:05:06,160
बस ऐसे ही सूरज एक ही जगह है ना लेकिन उसकी किरणें सब जगह है। यानी

77
00:05:06,160 --> 00:05:10,320
कि ईश्वर सब जगह नहीं है। उसकी शक्ति सब जगह है। शक्ति सब जगह है। पारबह्म

78
00:05:10,320 --> 00:05:14,320
परमेश्वर हमने तो गाया मतलब आप कहां रहने वाले? इसमें ब्रह्म तत्व से भी पार

79
00:05:14,320 --> 00:05:18,960
रहने वाले। जी। तो अभी दो चीजें आ गई। एक तो

80
00:05:18,960 --> 00:05:22,960
ईश्वर सब जगह अगर नहीं है उसकी शक्ति सब जगह है। शक्ति सब जगह है। तो फिर अब

81
00:05:22,960 --> 00:05:26,960
दिक्कत यह हो जाती है जैसे कि यहां पर हम लोग बैठे हैं। यहां पर ईश्वर

82
00:05:26,960 --> 00:05:31,040
की शक्ति नहीं है। वो ईश्वर की शक्ति है। ईश्वर नहीं है। तो जब

83
00:05:31,040 --> 00:05:35,040
दो तत्व हो गए। एक शक्ति हो गई एक हो गया एक हो गए

84
00:05:35,040 --> 00:05:39,200
ईश्वर। तो कहीं जब दो तत्व हैं तो कहीं

85
00:05:39,200 --> 00:05:43,360
ना कहीं इसमें और इसमें ईश्वर में और उसकी शक्ति में कुछ अंतर है। तभी तो वह अलग

86
00:05:43,360 --> 00:05:47,440
है। ईश्वर की शक्ति में और ईश्वर में

87
00:05:47,440 --> 00:05:51,600
भेद है। तभी तो वह दोनों अलग-अलग हैं। अगर भेद ही नहीं है तो अभेद

88
00:05:51,600 --> 00:05:56,240
है तो ईश्वर ही है शक्ति के रूप में। तो अभी देखिए हम क्या कहते हैं

89
00:05:56,240 --> 00:06:00,320
भगवान मेरे दिल में रहते हैं। क्यों? क्योंकि मैंने उनको पहचान लिया प्यार से लेकिन

90
00:06:00,320 --> 00:06:04,400
वो है ऊपर। नहीं वो तो हमारा वो हमारी समझ है जो जैसा बोल

91
00:06:04,400 --> 00:06:08,480
दे वो वैसा बोल दे। मगर जब हम बिल्कुल अच्छे से जानना जानने जाएंगे।

92
00:06:08,480 --> 00:06:12,640
जैसे हमने ये कहा कि ये जो जगह है टेबल ये

93
00:06:12,640 --> 00:06:16,800
ईश्वर हिला सकते हैं। ठीक है? अब हमारे आप कह रहे हैं कि ईश्वर तो

94
00:06:16,800 --> 00:06:17,300
यहां नहीं

95
00:06:17,200 --> 00:06:21,280
है तो फिर शक्ति है। उनकी शक्ति है। तो यहां पर ईश्वर की

96
00:06:21,280 --> 00:06:25,360
शक्ति है। ईश्वर नहीं है। यानी कि दो चीजें हो गई। एक ईश्वर हो गए। एक उनकी शक्ति हो

97
00:06:25,360 --> 00:06:29,520
गई। अब जब ये चीज है तो शक्ति कहीं ना कहीं ईश्वर से कम

98
00:06:29,520 --> 00:06:33,120
पावरफुल होनी चाहिए।

99
00:06:33,120 --> 00:06:37,200
प्रधानमंत्री जी दिल्ली में बैठे रहते हैं। राष्ट्रपति जी दिल्ली में बैठे रहते हैं। उनका एक

100
00:06:37,200 --> 00:06:41,360
फोन यहां काफी है या नहीं है? वो एक फोन कर दे हमारे लिए तो उनकी

101
00:06:41,360 --> 00:06:45,360
पावर ही तो काम कर रही है। हम हमें उनसे चाहिए क्या? नहीं मैं वो नहीं पूछ रहा

102
00:06:45,360 --> 00:06:49,440
हूं। मैं ये पूछ रहा हूं। बस सेम ऐसे ही भैया सेम ऐसे ही उनका स्थान वो

103
00:06:49,440 --> 00:06:53,440
है लेकिन उनकी पावर हमारे लिए जितनी हमको चाहिए वो उतनी

104
00:06:53,440 --> 00:06:57,440
हमको पूरी मिल जाती है। नहीं मैं पूछ कुछ और रहा हूं मैं। एक्चुअली

105
00:06:57,440 --> 00:07:01,520
अगर हम दो चीजें मान रहे हैं। पहली बात तो वह प्रकृति अलग है। मतलब आज तक

106
00:07:01,520 --> 00:07:05,600
मैंने ऐसा माना नहीं था। अभी आप ही ने दो क्वेश्चन कर दिए हैं। वरना मेरे लिए वही भगवान है। उसकी

107
00:07:05,600 --> 00:07:09,760
शक्ति मेरे पास है। उनकी शक्ति वही मैं कह रहा हूं। तो अगर हम ये

108
00:07:09,760 --> 00:07:13,760
कह रहे हैं ना कि उनकी शक्ति है वो नहीं है। वो तो अपनी जगह बैठे हैं। तो फिर

109
00:07:13,760 --> 00:07:17,760
हम भी भैया हम भी तो कहां से आए थे। हमने भी अपने अकेले क्या कहा? जब हम बहुत

110
00:07:17,760 --> 00:07:21,840
दुखी होते तो हम भी क्या कहते हैं? हे भगवान मुझे ऊपर उठा ले। मतलब हम अज्ञानी

111
00:07:21,840 --> 00:07:26,160
है ना। हम मुक्त नहीं है। नहीं नहीं सच्चिदानंद स्वरूप नहीं है। ज्ञानी नहीं ये सबके

112
00:07:26,160 --> 00:07:30,240
मुंह से निकल रहा है कि हे ईश्वर तू मुझे ऊपर क्यों नहीं उठा लेता? हम कभी ये नहीं

113
00:07:30,240 --> 00:07:32,400
कहते हे भगवान मुझे अध्याय करने बुला लेता। मुझे

114
00:07:32,400 --> 00:07:36,560
वृंदावन करने ऐसे विरक्त संत है कहते हैं क्या कहते हैं कि मैं

115
00:07:36,560 --> 00:07:40,720
हे भगवान तुम अपने में लीन कर लो। लीन कर लो। लेकिन फिर भी जाना कहां सबको

116
00:07:40,720 --> 00:07:44,800
जाना तो सबको ऊपर ही है। वो देखिए वो व्यवहार एक एक्सपेक्ट होता

117
00:07:44,800 --> 00:07:49,280
है। एक व्यवहारिक अंतर जैसे हम सब में ईश्वर है। फिर भी कोई मां है,

118
00:07:49,280 --> 00:07:53,360
कोई बहन है, कोई पिता है। सब में एक ही तत्व है। सब में आत्मा है।

119
00:07:53,360 --> 00:07:57,360
हां। आत्मा जी। परमात्मा ऊपर है। हां। जैसे हमारे रिश्ते नाते कुछ

120
00:07:57,360 --> 00:08:01,360
नहीं है। फिर भी हम रिश्ते नातों का वो कर रहे हैं। व्यवहार। जैसे हमने कहा कि ये

121
00:08:01,360 --> 00:08:05,680
ये इन चमड़ी का है ना। तो यह व्यवहारिक अंतर तो है। व्यवहारिक

122
00:08:05,680 --> 00:08:10,320
अंतर हम कर रहे हैं कि हमने व्यवहार के लिए कह दिया ईश्वर वहां है। जैसे कि मान लीजिए

123
00:08:10,320 --> 00:08:14,480
कि ईश्वर का एक्सिस्ट जैसे ईश्वर की शक्ति है वो यहां भी है। इसमें भी है तो ईश्वर

124
00:08:14,480 --> 00:08:18,720
की शक्ति इसमें भी है। मगर इसके साथ हमारा व्यवहार अलग होगा और इसके साथ व्यवहार

125
00:08:18,720 --> 00:08:22,720
अलग होगा क्योंकि इसमें फोटो बना है उनका। तो ये व्यवहारिक

126
00:08:22,720 --> 00:08:26,880
अंतर है कि वो ऊपर उठा ले या ये कर ले वो कर व्यवहारिक मगर जैसे अभी हमने कहा

127
00:08:26,880 --> 00:08:30,960
शक्ति का मतलब जब हम उनको याद कर रहे हैं याद के द्वारा हमारे पास में नहीं नहीं

128
00:08:30,960 --> 00:08:35,200
ये टेबल उनको याद नहीं कर रही है आप याद कर रहे हैं आप याद कर रहे हैं हम फील

129
00:08:35,200 --> 00:08:39,360
कर हम उनको हम उनके शक्ति को यूज़ करें जी जी मैं एक्चुअली जो

130
00:08:39,360 --> 00:08:43,600
प्रश्न है वो ये है कि जैसे हमने कहा ना ईश्वर सर्वव्यापी

131
00:08:43,600 --> 00:08:47,680
नहीं है अकॉर्डिंग टू ब्रह्मा कुमारी ईश्वर सब सर्वव्यापी नहीं है ईश्वर सर्वज्ञ

132
00:08:47,680 --> 00:08:51,680
है सर्वज्ञ तो सर्वज्ञाता हो गया सर्वों का सर्व चीज को ज्ञाता है

133
00:08:51,680 --> 00:08:56,160
और सर्वशक्तिमान है सर्वव्यापी नहीं है उसकी की शक्ति है पर वो सर्वव्यापी

134
00:08:56,160 --> 00:09:00,320
खुद स्वयं नहीं है। तो अब जब हम ये कहते हैं ना कि उसकी

135
00:09:00,320 --> 00:09:04,320
शक्ति है तो फिर दो चीजें हो गई तो एक तरीके से शक्ति कहीं ना कहीं ईश्वर

136
00:09:04,320 --> 00:09:08,560
के सामने कम है। ईश्वर के कंपैरेटिवली जब

137
00:09:08,560 --> 00:09:12,800
दूसरा तत्व है तो उस पे ईश्वर का कंट्रोल होगा। मतलब ये मैंने कभी सोचा ही नहीं भैया।

138
00:09:12,800 --> 00:09:17,040
मुझे कभी लगा ही नहीं कि दो चीजें डिफरेंट हो सकती हैं। ये मुझे लगा ईश्वर मतलब

139
00:09:17,040 --> 00:09:21,040
ईश्वर और मतलब उसकी शक्ति भी ईश्वर ही है। जब हम कहते

140
00:09:21,040 --> 00:09:25,040
हैं वो ऊपर है ना तो हमें आसान होता है उनसे कनेक्ट होना। व्यवहार वो सब जगह

141
00:09:25,040 --> 00:09:29,040
रहेंगे तो मुझसे हम फिर कहां मन वही वो व्यवहारिक भेद है। हम मन कहां लगाएं?

142
00:09:29,040 --> 00:09:33,120
फिर हम कहते हैं ना मेरा मन तो भगवान में लग ही नहीं रहा। मैं बता रहा हूं इसको। तो अगर वह सब जगह भगवान है तो फिर

143
00:09:33,120 --> 00:09:37,520
कहीं भी लगा लो मन। मैं बता रहा हूं इसको। जैसे कि अकॉर्डिंग टू साइंस

144
00:09:37,520 --> 00:09:41,680
मॉडर्न साइल पृथ्वी गोल है। ठीक है? मगर हम

145
00:09:41,680 --> 00:09:45,680
लोग उसके साथ व्यवहार कैसा करते हैं? अगर हम उसको गोल मानेंगे चल पाएंगे। किसी को

146
00:09:45,680 --> 00:09:50,160
रास्ता दिखाना है कि सर वो ये कौन सा कॉलेज है पास में? आई एम।

147
00:09:50,160 --> 00:09:54,160
हां। मुझे वहां जाना है। तो हम उसको यूं कहेंगे ये चले जाओ सीधे सीधे। तो हमने

148
00:09:54,160 --> 00:09:58,560
व्यवहार क्या किया? यह सीधा है जबकि वास्तविकता क्या है कि गोल है।

149
00:09:58,560 --> 00:10:02,800
अगर हम गोल मानेंगे तो हम व्यवहार नहीं कर पाएंगे। व्यवहार नहीं कर पाएंगे तो हम कभी इस चपटेपन

150
00:10:02,800 --> 00:10:06,960
से मुक्त नहीं हो पाएंगे। तो हमको इस व्यवहारिक भेद

151
00:10:06,960 --> 00:10:10,960
से मुक्ति पानी है। इसीलिए हमें ऐसा व्यवहार करना है जिससे हम मुक्ति पा

152
00:10:10,960 --> 00:10:15,040
सके। जैसे किसी को पृथ्वी को गोल देखना है वास्तविकता में। हम यहां से नहीं

153
00:10:15,040 --> 00:10:19,120
देख सकते। मगर स्पेसशिप बना सकते हैं। स्पेसशिपिप से जब बाहर जाएंगे

154
00:10:19,120 --> 00:10:23,200
तो वहां से अकॉर्डिंग टू साइंस हम देख सकते हैं। मगर

155
00:10:23,200 --> 00:10:27,360
उस स्पेसशिपिप को बनाने के लिए भी उतनी देर जितनी देर स्पेसशिपिप

156
00:10:27,360 --> 00:10:31,680
बना रहे हैं उतनी देर तो उसके उस चपटेपन को मानना ही पड़ेगा कि फ्लैट

157
00:10:31,680 --> 00:10:35,680
है। अब फ्लैट के अनुसार हम लोग व्यवहार करेंगे। तो ये तो ये हो

158
00:10:35,680 --> 00:10:39,840
गया। तो मगर मैं जो चलिए वो क्वेश्चन आपने कभी उस बारे में सोचा

159
00:10:39,840 --> 00:10:44,000
नहीं। मतलब आपको लगता है शक्ति के रूप में ईश्वर ही है। मगर

160
00:10:44,000 --> 00:10:48,160
सुनिए कई बार क्या होता है देखिए जैसे आपने यूथ्स की बात की थी शुरू किया था कि

161
00:10:48,160 --> 00:10:52,640
यूथ्स नास्तिक क्यों है? तो कई बार हम भगवान को भी इतना टिपिकल और इतना कॉम्प्लिकेटेड

162
00:10:52,640 --> 00:10:56,720
बना देते हैं ना मतलब जब वो हमारे पास आते हैं उनसे सिंपल बात करते हैं कि

163
00:10:56,720 --> 00:11:00,880
देखो आपने एक्सटर्नल साइंस यूज़ किया तो एक्सटर्नल

164
00:11:00,880 --> 00:11:05,040
डिस्टेंससेस खत्म हो गए। विदेश वालों से बात कर रहे हैं। इंटरनल साइंस दैट इज़

165
00:11:05,040 --> 00:11:09,120
स्पिरिचुअलिटी दैट इज रिलेटेड टू गॉड। अभी हमने वो नहीं किया तो

166
00:11:09,120 --> 00:11:13,440
हमारे अंदर के डिस्टेंस आएंगे। भगवान ने कहा सृष्टि के

167
00:11:13,440 --> 00:11:17,440
बताऊंगा। एक्चुअली क्या है कि बहुत सारे स्पिरिचुअल कुछ फेक टीचर्स भी हो

168
00:11:17,440 --> 00:11:18,000
गए हैं।

169
00:11:18,000 --> 00:11:22,000
उसकी वजह से क्या है कि ओरिजिनल जो स्पिरिचुअलिटी वो पहुंच नहीं पाती। अब

170
00:11:22,000 --> 00:11:26,000
जैसे जैसे आपने कहा ना इजी अब जैसे तुलसीदास जी कह गए

171
00:11:26,000 --> 00:11:30,720
कलयुग केवल नाम आधारा है ना और आज के टाइम में जैसे

172
00:11:30,720 --> 00:11:34,800
नाम जप अगर व्यक्ति करने लगे नाम जप वो जो आपने एक मिनट वाली बात बताई अपनी

173
00:11:34,800 --> 00:11:38,960
स्टाइल में तो ऐसा हमारे शास्त्रों ने भी व्यवस्था की है वो कोई जरूरी नहीं है आपकी वो

174
00:11:38,960 --> 00:11:43,280
टिपिकल चीज ही हो लेकिन बताते हम डिस्कस करते तो ऐसे डिस्कस करते हैं ना

175
00:11:43,280 --> 00:11:47,840
बच्चों को लगता है कि हमारे अंदर जा ही नहीं डिस्कस इसलिए कि

176
00:11:47,840 --> 00:11:51,920
यदि हम ईश्वर की सर्वशक्तिमत्ता को नहीं सिद्ध करेंगे तो

177
00:11:51,920 --> 00:11:56,400
ईश्वर का अस्तित्व ही नहीं होगा और नास्तिकता जीत जाएगी। एनिमलिज्म

178
00:11:56,400 --> 00:12:01,040
जीत जाएगा। ह्यूमनिटी हार जाएगी। इसलिए ईश्वर के अस्तित्व को

179
00:12:01,040 --> 00:12:05,200
दृढ़ता के साथ हमें आना चाहिए। भले ही

180
00:12:05,200 --> 00:12:09,280
भले ही उसका सबसे अच्छा प्रूफ हमारा अपना प्रैक्टिकल लाइफ है। आपकी अपनी प्रैक्टिकल

181
00:12:09,280 --> 00:12:13,280
जीवन है। हम कह सकते हैं भैया तुम मानो ना मानो। हमें तो पता है मेरा काम तो ईश्वर ही

182
00:12:13,280 --> 00:12:17,280
कर रहा है। सुनिए तो तो भले ही हम अपने स्टूडेंट्स को देख ले कि भाई हमें

183
00:12:17,280 --> 00:12:21,280
इस क्लास को ये पढ़ाना है ये ऐसी है। वो एक अलग एक्सपेक्ट मगर जब

184
00:12:21,280 --> 00:12:25,280
हम बात करेंगे कि भाई हमें स्पिरिचुअलिटी को एक खंभे की तरह गाड़ देना

185
00:12:25,280 --> 00:12:29,520
है। इम्युनिटी को बचाना ही है। जैसे हमारे जो देश के

186
00:12:29,520 --> 00:12:33,440
वो होते हैं जवान वो वहां पे अड़ जाते हैं कि हम नहीं आने देंगे

187
00:12:33,440 --> 00:12:37,440
आपको अंदर। यहां पर यह सब है। ब्रह्मा कुमारीज है। मुझे रक्षा करनी है।

188
00:12:37,440 --> 00:12:41,760
वहां से स्पिरिचुअलिटी चल रही है। बचाते हैं वो लोग अपनी जान पर खेल करके। इसलिए

189
00:12:41,760 --> 00:12:45,760
बचाते हैं क्योंकि उन्हें उस चीज को अड़े रहना है। तो ऐसे ही

190
00:12:45,760 --> 00:12:49,920
जो हम हमारा यह कार्य होता है जिस कि हम लोग

191
00:12:49,920 --> 00:12:54,080
ईश्वर के अस्तित्व को बताएं। अब जब ईश्वर की सर्वशक्तिमत्ता पर बात नहीं

192
00:12:54,080 --> 00:12:58,320
होगी। उसकी सर्वज्ञता पर सर्वव्यापकता पर बात नहीं होगी। तो

193
00:12:58,320 --> 00:13:02,320
वो जो हर स्थिति में ईश्वर पर डिपेंड होने वाला जो

194
00:13:02,320 --> 00:13:06,320
वो आपने बताया था पर्सेक्टिव वो कहीं ना कहीं फिर हिलने लगेगा कि भाई ये

195
00:13:06,320 --> 00:13:10,320
कैसा है भैया ईश्वर का एक गुण आपके पास और मेरे पास दोनों पास है

196
00:13:10,320 --> 00:13:14,640
प्यार का गुण है नास्तिक से नास्तिक व्यक्ति को भी क्या चाहिए प्यार चाहिए

197
00:13:14,640 --> 00:13:18,720
रिस्पेक्ट चाहिए तो हम क्या करते हैं जो ऐसे नास्तिक भी होते हैं ना हम कहते हैं ठीक है भगवान

198
00:13:18,720 --> 00:13:22,720
को मत मानो चलो ये काम कर लो चलो आप एक बार ट्राई करके देख लो हम कहां

199
00:13:22,720 --> 00:13:26,720
से जोड़ रहे हैं भगवान का ही कहा ना वो प्रेम के सागर है प्यार के सागर है

200
00:13:26,720 --> 00:13:30,880
वो अगर अगर उसको वो चीज नहीं समझ में आ रही है तो हम उनके गुण के द्वारा उनके उनके अंदर

201
00:13:30,880 --> 00:13:34,960
प्रवेश करेंगे। उनके भगवान जी के गुण के द्वारा हम ज्ञान की फिर

202
00:13:34,960 --> 00:13:39,040
इस तरह से तो फिर कोई वैल्यू ही नहीं रही ज्ञान की। देखिए भैया दोनों चीजें हैं।

203
00:13:39,040 --> 00:13:43,120
किसी को पहले ज्ञान बाद में वो तो वो पहले जो ज्ञान दे रहे हैं

204
00:13:43,120 --> 00:13:47,200
पहले ज्ञान वो होना चाहिए ना। ज्ञान से ही तो है सब कुछ। हमें ये लगता है भैया कि बस

205
00:13:47,200 --> 00:13:49,120
हमारे पास अगर आया है

206
00:13:49,120 --> 00:13:53,120
तो हम उसको जाने नहीं देंगे। अब ये जो बात आई

207
00:13:53,120 --> 00:13:57,440
थी कि क्या ब्रह्मा कुमारीज के द्वारा जो माना जाने

208
00:13:57,440 --> 00:14:02,000
जो पूजित होता है जो ईश्वर परिभाषित ईश्वर वो

209
00:14:02,000 --> 00:14:06,240
सर्वशक्तिमान यानी कि किसी भी नियम के नीचे ना आने वाला

210
00:14:06,240 --> 00:14:10,560
है या नहीं और क्योंकि ब्रह्मा कुमारी से ये कहता है कि वो अवतार

211
00:14:10,560 --> 00:14:14,800
नहीं लेता बल्कि वो किसी शरीर में आता है। वो स्वयं अवतार नहीं लेता। जैसे

212
00:14:14,800 --> 00:14:18,880
उसमें कहा गया कि मैं अपना सृजन करता हूं सजाम में हम

213
00:14:18,880 --> 00:14:22,880
तो इसको वो शायद ये मानता है कि वो आता है किसी और के शरीर में आता

214
00:14:22,880 --> 00:14:26,960
है। आपने शायद ये माना है। उनके लिए कहते हैं रूप में बिंदु गुणों

215
00:14:26,960 --> 00:14:30,960
में सिंधु हम अब वो सागर छलकेगा कैसे? कहते कि

216
00:14:30,960 --> 00:14:35,040
आपने भी टीका यहां लगाया है। आप भी एक आत्मा आप भी रूप में

217
00:14:35,040 --> 00:14:39,360
बिंदु हो। लेकिन आपको आपकी पेनड्राइव को ये वो मिल गया सिस्टम

218
00:14:39,360 --> 00:14:43,520
बॉडी। तो ये रथ मिला तो आप अपना सारा कुछ फ्लो कर रहे हो। जो

219
00:14:43,520 --> 00:14:47,840
आपके अंदर है वो आप छलका रहे हो। हम वह रूप में बिंदु लेकिन गुणों में सुन दो।

220
00:14:47,840 --> 00:14:51,840
वह अपना शरीर अगर लेंगे तो फिर वह सिस्टम में वह भी सिस्टम का हिस्सा

221
00:14:51,840 --> 00:14:56,560
बन जाएंगे। फिर हमको कौन चार्ज करेगा? तो इसीलिए पर काया प्रवेश

222
00:14:56,560 --> 00:15:00,560
दूसरे की काया में उनका अवतरण ही होता है। जन्म का मतलब

223
00:15:00,560 --> 00:15:04,480
गर्भ से जन्म लेना। अवतरण का मतलब ही यही होता है। दूसरे

224
00:15:04,480 --> 00:15:08,640
की गाड़ी बिल्कुल स्टार्ट है। आ के उस गाड़ी से अपना काम कराना। इसको

225
00:15:08,640 --> 00:15:12,640
कहते हैं अवतरण। तो यह अवतरण ही है। अवतरित होते हुए मतलब

226
00:15:12,640 --> 00:15:16,720
वो स्वयं किसी दूसरी बॉडी में ही आते हैं। वो स्वयं

227
00:15:16,720 --> 00:15:20,800
अवतार नहीं लेते। क्योंकि भैया वो रूप में बिंदु है। वो पेन ड्राइव है। उस पेन ड्राइव के अंदर

228
00:15:20,800 --> 00:15:24,880
क्या कंटेंट है हम उनको कैसे पता? नहीं वो ठीक है। मगर हमारा यहां पर ये बाधित हो गया कि

229
00:15:24,880 --> 00:15:29,600
वो सर्व जो ये वाली बात है ना सर्वशक्तिमान

230
00:15:29,600 --> 00:15:33,600
एक नास्तिक की चाह भी यही थी कि वो जो है प्रकृति के सभी

231
00:15:33,600 --> 00:15:37,600
नियमों से परे होना चाहता है। बचना चाहता है प्रकृति के नियमों

232
00:15:37,600 --> 00:15:41,840
से। तो यहां तो उसकी चाह का विषय वाले को बताते हैं

233
00:15:41,840 --> 00:15:46,000
एक ही पूरा कर लो बस तो यहां पर उसकी चाह का विषय

234
00:15:46,000 --> 00:15:50,320
ही वो है जो प्रकृति के सभी प्रकार के नियमों से परे हो वो

235
00:15:50,320 --> 00:15:54,560
कंट्रोल कर सकता हो तभी तो हम उस पर डिपेंड कर रहे हैं तभी एक नास्तिक को भी हम बनवा

236
00:15:54,560 --> 00:15:58,720
सकते हैं भाई ऐसी सत्ता है अगर जहां पे भी ईश्वर की जो सर्वशक्तिमत्ता

237
00:15:58,720 --> 00:16:02,800
है कहीं कॉम्प्रोमाइज होगी चलिए वो तो एक अलग एक्सपेक्ट है कि वो ईश्वर उसे माना जा

238
00:16:02,800 --> 00:16:06,880
सकता है कि नहीं जिसकी सर्वशक्तिमत्ता कंप्रोमाइज हो रही है मगर पहला सवाल

239
00:16:06,880 --> 00:16:10,960
तो यह आता है कि हम जब कह रहे हैं सर्वशक्तिमान तो या

240
00:16:10,960 --> 00:16:15,280
तो वह सब कुछ कर सकता है या फिर हमें उसे सर्वशक्तिमान ना कहकर शक्तिमान

241
00:16:15,280 --> 00:16:19,360
कहना चाहिए। सब कुछ अच्छा कर सकता है। सब कुछ अच्छा मतलब सब कुछ नहीं कर सकता।

242
00:16:19,360 --> 00:16:19,860
कुछ

243
00:16:19,600 --> 00:16:23,600
कार्य है जो वो नहीं कर सकता। बुरा नहीं ना बुरा कर सकता है ना बुरा करने देता है। अगर

244
00:16:23,600 --> 00:16:27,600
हम उनकी शरण में जाते हैं उनको याद करते हैं तो कम से कम हमारी मति

245
00:16:27,600 --> 00:16:31,760
को श्रेष्ठ रखता है। फिर हमने खुद को चार्ज नहीं किया होगा तो हम कर डालेंगे। नहीं

246
00:16:31,760 --> 00:16:35,760
कहने का मतलब यह है कि अगर वह कुछ कार्य हैं जो वह नहीं कर

247
00:16:35,760 --> 00:16:40,000
सकता है तो उसके आगे कर सकता नहीं है करता नहीं है वो मर्यादा नहीं है

248
00:16:40,000 --> 00:16:44,160
करता नहीं है करता नहीं है तो यानी कि करना चाहे तो कर सकता है अमर्यादित

249
00:16:44,160 --> 00:16:48,320
कर्म कोई नहीं करता है ना करवाना चाहे यानी कि वो करना चाहे तो कर सकता

250
00:16:48,320 --> 00:16:52,320
है मैं ये भी नहीं बोलूंगी करना चाहे वो चाहेंगे भी नहीं नहीं चाहेंगे

251
00:16:52,320 --> 00:16:56,960
की बात अलग है उसके पास क्षमता है कि नहीं करना है वो कर सकता है

252
00:16:56,960 --> 00:17:01,120
वो अवतार स्वयं का ले सकता है लेता नहीं है अच्छा अब

253
00:17:01,120 --> 00:17:05,280
आपने एक बात कही कि वो लेता नहीं है। जैसे आपने कहा कि वो बुरे कार्य नहीं करता है।

254
00:17:05,280 --> 00:17:09,520
तो इस दुनिया में जो बुराई एक्सिस्ट कर रही है वो

255
00:17:09,520 --> 00:17:13,680
कैसे उसको जन्म कौन दे रहा है? किसकी मर्जी से हो रही है? किसी की मर्जी

256
00:17:13,680 --> 00:17:18,560
से नहीं। कीड़े मकोड़े कैसे पैदा हो जाते हैं? मतलब ईश्वर की मर्जी से

257
00:17:18,560 --> 00:17:22,560
जैसे दही एक दही को भी अगर आप रख दो ना तीन चार दिन इकट्ठा हो जाता

258
00:17:22,560 --> 00:17:26,640
है। तो ईश्वर के पास ये छोटे-छोटे काम है वो कि पैदा करेंगे। ईश्वर ने ही तो सब

259
00:17:26,640 --> 00:17:30,640
कुछ बनाया। शक्ति इतनी ऊंची शक्ति है। मतलब ईश्वर ने सब कुछ नहीं बनाया। ईश्वर ने

260
00:17:30,640 --> 00:17:35,440
बनाया। आपको क्या लगता है? कीड़े मकोड़े भगवान मतलब ये सारे काम भगवान करते हैं। हर चीज

261
00:17:35,440 --> 00:17:39,520
नहीं ऐसा नहीं है। अगर ईश्वर ने बनाया हो तो तुम कीड़े खा भी तो लेते हो। क्यों खा नहीं खाते

262
00:17:39,520 --> 00:17:43,840
ना? तो हम तो बहुत सी चीजें ईश्वर ने बनाई तो नहीं खाते, लकड़ी नहीं खाते, लोहा नहीं खाते।

263
00:17:43,840 --> 00:17:47,840
नहीं वो तो कर रहे हैं ना कि उन चीजों से हमको गिन भी आ रही है। हम अपने बिस्तर पे भी नहीं रख

264
00:17:47,840 --> 00:17:52,000
रहे उनको। यहां तो हमने रख रखा है ना। हां। तो बहुत सी चीजें हैं जो हमने ईश्वर

265
00:17:52,000 --> 00:17:56,320
ने बनाई है। हम नहीं खाते। तो जो लोग चार दिन नहीं नहाते हैं, कई दिन नहीं नहाते

266
00:17:56,320 --> 00:18:00,800
उनके अंदर कीड़े पड़ जाते हैं। वो नहीं कीड़े वो भगवान ने थोड़ी बनाए।

267
00:18:00,800 --> 00:18:04,800
तो यानी कि इस दुनिया में जैसे हमने कहा था जन्म गंदगी से

268
00:18:04,800 --> 00:18:08,880
हो रहा है। यानी कि इस हमने ये कहा था कि ईश्वर ही सब कुछ

269
00:18:08,880 --> 00:18:12,960
कार्यों को करने वाला है। मगर अभी हम कह रहे हैं कुछ कार्य ऐसे हैं जो ईश्वर ने नहीं अपने

270
00:18:12,960 --> 00:18:16,960
आप हो रहे हैं। साथ जाना। अच्छा मैं एक उस पर आता हूं

271
00:18:16,960 --> 00:18:21,440
कि जैसे हमने यह कहा कि इस संसार में क्योंकि

272
00:18:21,440 --> 00:18:26,160
चीजें हो रही हैं कोई कार्य हो रहा है इससे सिद्ध होता है कि ईश्वर है

273
00:18:26,160 --> 00:18:30,480
क्योंकि ईश्वर नहीं है तो बाहरी फोर्स के बिना कोई भी चीज जो

274
00:18:30,480 --> 00:18:34,480
मूवमेंट नहीं हो सकता वो जो अरेंजमेंट है प्रकृति का तो

275
00:18:34,480 --> 00:18:38,480
अभी जो ब्रह्मा कुमारीज का आपने ईश्वर बताया कि उसमें कुछ चीजें ऐसी

276
00:18:38,480 --> 00:18:42,640
भी आपने मान ली जो दुनिया में हो रही है मगर उसका कारण ईश्वर नहीं है तो फिर

277
00:18:42,640 --> 00:18:46,800
अब ईश्वर का अस्तित्व तो ब्रह्मा कुमारी कैसे भगवान ने खुद ही आप तो यह खुद

278
00:18:46,800 --> 00:18:50,480
भी जानते हैं कि कहा जब धरती पर वो होने लगेगा जो नहीं

279
00:18:50,480 --> 00:18:54,720
होना चाहिए तब मैं आता हूं ठीक करने इसका मतलब वो नहीं करवा रहा है ना वो व्यवहारिक

280
00:18:54,720 --> 00:18:59,040
रूप से मतलब अब आपकी भाषा ना थोड़ी टफ हो जाती है मुझे ये बहुत नहीं आता

281
00:18:59,040 --> 00:19:03,280
मैं मैं बताता हूं एक ट्रुथ होता है बिहेविरियल एक होता है क्या

282
00:19:03,280 --> 00:19:07,360
कहते हैं पारमार्थिक पारमार्थिक मतलब ट्रुथ

283
00:19:07,360 --> 00:19:11,360
जो ईश्वर देख रहा है ईश्वर क्या देख रहा है कुछ नहीं है सब खेल

284
00:19:11,360 --> 00:19:15,360
है ईश्वर के लिए क्या है ईश्वर ईश्वर के लिए खेल है ईश्वर

285
00:19:15,360 --> 00:19:19,360
के लिए वो कोई दुखी नहीं है वो कोई सुखी नहीं है सब इक्वल

286
00:19:19,360 --> 00:19:23,440
है और यही दृष्टि की बात श्री कृष्ण ने भी कहा कि ना कोई मरता है ना

287
00:19:23,440 --> 00:19:27,520
कोई मारता है तू क्यों दुखी हो रहा है और हर स्थिति में तू

288
00:19:27,520 --> 00:19:31,600
समबुद्धि रख समत्व पुरुष बन जा ये कृष्ण भगवान ने भी कहा

289
00:19:31,600 --> 00:19:35,760
तो ईश्वर की दृष्टि हो गई वो पारमार्थिक दृष्टि है जैसे मान लीजिए कुछ आज

290
00:19:35,760 --> 00:19:39,920
तक ऐसी आत्माएं होंगी कुछ ना कुछ जो मुक्त हुई हो है ना

291
00:19:39,920 --> 00:19:43,920
तो वो जो मुक्त हुई जो यहां पर वो फील कर रही थी कि अच्छा

292
00:19:43,920 --> 00:19:47,920
हो रहा है, बुरा हो रहा है, ठंडी हो रही है, गर्मी हो रही है या मेरी मां की तबीयत खराब है। है

293
00:19:47,920 --> 00:19:52,000
ना? मगर अभी वो अगर वो वहां से देख रहा है वो व्यक्ति मुक्त

294
00:19:52,000 --> 00:19:56,320
होने के बाद तो अब उसको कोई फर्क नहीं पड़ रहा। तो जब उसको फर्क नहीं पड़ रहा तो ईश्वर को कहां से पड़ेगा?

295
00:19:56,320 --> 00:20:00,560
ईश्वर परम है। वो मरने के बाद तो छोड़ दीजिए। मुक्त होने के बाद हमको

296
00:20:00,560 --> 00:20:04,640
यही प्रैक्टिस तो कराई जा रही है कि इस बॉडी में रहते हुए रोल

297
00:20:04,640 --> 00:20:05,520
प्ले करते हुए

298
00:20:05,520 --> 00:20:09,520
जितना हम रोल से डिटच हो के सोल कॉन्शियस में प्ले करते हैं। तो हमें वो

299
00:20:09,520 --> 00:20:13,600
साक्षी भाव आ जाए। बस बस वही वही तो जो ईश्वर है वही सिखाने जो ईश्वर है

300
00:20:13,600 --> 00:20:17,600
वो डिटच है हर प्रकार की उससे वो जो हम जो रोल प्ले कर रहे

301
00:20:17,600 --> 00:20:21,920
हैं हम हम अटैच है और डिटच होने की प्रैक्टिस कर रहे हैं और ईश्वर कौन है जो डिटच

302
00:20:21,920 --> 00:20:25,920
है तो उसके लिए कुछ भी वो उसका पर्सेक्टिव है तो एक बिहेवियर लेकिन

303
00:20:25,920 --> 00:20:30,080
उसके लिए भी सही क्या है गलत क्या है उसको पता है ना वो बताने तो यही आया है ना तो उसने क्या कहा

304
00:20:30,080 --> 00:20:34,080
जब धरती पर गलत होता है तब मैं आता हूं तो वो डिटच दोनों से है

305
00:20:34,080 --> 00:20:38,320
लेकिन वो हम आत्माओं को गलत करते हुए या गलत दुख में देखना नहीं चाहते

306
00:20:38,320 --> 00:20:42,480
नहीं वो ठीक है वो वो वो ईश्वर का एक रूप हो सकता है।

307
00:20:42,480 --> 00:20:46,480
अगर हमने ईश्वर को ये कर दिया कि दुनिया में जो जो

308
00:20:46,480 --> 00:20:50,880
भी कीड़े जैसे आपने कहा कीड़े जन्म ले रहे हैं या दुनिया प्रलय आई सुनामी

309
00:20:50,880 --> 00:20:55,040
आई तो ये अब कोई बच्चा ये प्राकृतिक आपदाएं हैं। यानी कि ईश्वर

310
00:20:55,040 --> 00:20:59,040
की मर्जी से नहीं हुआ ना ये। तो अब हमने जो ईश्वर को नास्तिक के लिए कहा

311
00:20:59,040 --> 00:21:03,200
था कि दुनिया में हर कार्य का कोई ना कोई कारण है। है ना? तो

312
00:21:03,200 --> 00:21:07,200
क्योंकि इस दुनिया में सृष्टि में यह सब है। सृष्टि चल रही है। फूल पैदा

313
00:21:07,200 --> 00:21:11,440
हो रहा है। यह हो रहा है। वह हो रहा है। तो इसलिए इससे सिद्ध होता है कि इस दुनिया में उनको

314
00:21:11,440 --> 00:21:15,520
अरेंज करने वाला कोई ईश्वर भी है। ब्रह्माकुमारी का तो यही था ना शुरू में जो

315
00:21:15,520 --> 00:21:19,600
आपने बताया। तो अभी जब हम ये मान लेंगे कि दुनिया में जो कीड़े पैदा हो रहे हैं

316
00:21:19,600 --> 00:21:20,560
वो बिना ईश्वर की

317
00:21:20,560 --> 00:21:24,800
मर्जी के हो रहे हैं। देखिए हर चीज भगवान हमारे लिए भगवान हमको

318
00:21:24,800 --> 00:21:28,800
सिर्फ गाइड कर रहे हैं। कर हम लोग खुद ही रहे हैं। नहीं नहीं और वो हमें अच्छे के

319
00:21:28,800 --> 00:21:32,800
लिए गाइड मैंने ये बिल्कुल नहीं कहा कि सब कुछ भगवान कर रहा है। तो यानी कि ईश्वर

320
00:21:32,800 --> 00:21:37,120
निर्माता भी नहीं है। भगवान क्या कर भगवान श्रेष्ठ दुनिया का निर्माता है।

321
00:21:37,120 --> 00:21:41,120
भगवान श्रेष्ठ दुनिया का निर्माता है। श्रेष्ठ आत्माओं को गाइड करने वाला। तो अभी

322
00:21:41,120 --> 00:21:45,200
अभी ये कभी नहीं कहती भगवान तूने कहा दुनिया बनाई। ठीक है। ठीक है। अब बात ये आती

323
00:21:45,200 --> 00:21:49,440
है कि अब भगवान है। ये कैसे प्रूफ होता है? बताइए।

324
00:21:49,440 --> 00:21:53,520
मैंने कहा ना भैया ये क्वेश्चन ही अगर हम कहें कि मेरे माता-पिता है ये कैसे प्रूफ

325
00:21:53,520 --> 00:21:57,680
होता है? तो हम नहीं कर सकते ना प्रूफ। नहीं क्योंकि उसको उसने अपने माता-पिता को देखा ना। ऐसे

326
00:21:57,680 --> 00:22:02,000
ही ये हमारा जो मैंने कहा ना भैया हमारा जो चैप्टर है हम चैप्टर में दिखाते हैं आपको

327
00:22:02,000 --> 00:22:06,160
हम सिर्फ बातें नहीं करते हैं हम आपको सिर्फ हमने अपना बताया जो मैंने सीखा

328
00:22:06,160 --> 00:22:10,160
आप उसको एक्सपेरिमेंट करके देख लो और अच्छा एक बात बताइए कि

329
00:22:10,160 --> 00:22:14,160
दुनिया में मुझे 1000 स्पिरिचुअल लीडर्स मिलेंगे जो हर बार ये

330
00:22:14,160 --> 00:22:18,160
कहेंगे कि मेरी चीज करके देख लो तो पहले वो एक साल या छ

331
00:22:18,160 --> 00:22:22,320
महीने हर हर मैं इसके लिए यही कहती हूं भैया ये बहुत इंस्टेंट रिजल्ट्स देने

332
00:22:22,320 --> 00:22:26,400
वाला है एक साल नहीं सिर्फ दो या तीन दिन आप स्टेप बाय स्टेप हम फर्स्ट जो

333
00:22:26,400 --> 00:22:30,480
उसमें होता ना फर्स्ट, सेकंड, थर्ड स्टेप में आते हैं। बहुत इजीली हमको समझ में आती है।

334
00:22:30,480 --> 00:22:34,640
रिजल्ट का मतलब आप क्या कह रहे हैं? जैसे कि आपको फील हो जाएगा। क्या फील होगा? भैया जैसे

335
00:22:34,640 --> 00:22:35,760
हमारे पास हम लोग ऑनलाइन

336
00:22:35,760 --> 00:22:39,760
बच्चों की क्लास कराते हैं। उन बच्चों में क्या है? पांच सात साल के बच्चों से लेकर

337
00:22:39,760 --> 00:22:43,840
के 25 30 साल के बच्चे साथ में बैठते हैं। बहुत सारे बच्चे ऐसे हैं मम्मी हम भगवान को नहीं

338
00:22:43,840 --> 00:22:47,920
मानते। उनको मम्मी ने उनको जबरदस्ती लगा दिया। तो हम लोगों ने क्या कहा? पहले उनको

339
00:22:47,920 --> 00:22:51,920
थोड़ा सा समझाया। आज आप ये वाला काम भगवान जी से करके करना। दीदी मुझे तो

340
00:22:51,920 --> 00:22:56,000
कल तो मिरेकल हो गया। शिव बाबा ने मुझे ये सच में ऐसा करा। आपने तो शुरू में कहा

341
00:22:56,000 --> 00:23:00,080
था कि नहीं ईश्वर कोई मिरेकल वाली बात तो है नहीं ईश्वर की ईश्वर

342
00:23:00,080 --> 00:23:04,240
मिरेकल करवाता है कहने का मतलब ये है कि वो कौन सी चीज है जिस मतलब आपने

343
00:23:04,240 --> 00:23:08,320
कहा ना कि उनको फील हो जाएगा तो चमत्कार से हम ईश्वर को फील करा

344
00:23:08,320 --> 00:23:12,480
रहे हैं सिद्ध कर रहे क्या चमत्कार हमारे वैल्यूस जो दबे हुए थे वो बाहर आ गए

345
00:23:12,480 --> 00:23:16,640
जो हम सोच रहे थे हमसे होगा ही तो वो वो ये क्यों माने कि अगर मेरे वैल्यूस बाहर

346
00:23:16,640 --> 00:23:20,800
आएंगे तो उससे सिद्ध हो गया कि ईश्वर है अभी तक कोई नहीं निकाल पाया ना उसको

347
00:23:20,800 --> 00:23:24,960
बहुत लोगों ने टीचर्स ने कोशिश किया पेरेंट्स ने कोशिश किया यानी कि जो कोई नहीं कर सकता

348
00:23:24,960 --> 00:23:29,040
वह करने वाला ईश्वर है। तो वही तो मैं कह रहा हूं कि जो अवतार कोई नहीं ले सकता तो

349
00:23:29,040 --> 00:23:33,040
अवतार लेने वाला ईश्वर है। बस तो हमने बनाने तो मना ही नहीं तो सृष्टि

350
00:23:33,040 --> 00:23:37,280
में कीड़े को कोई नहीं बना सकता। कीड़े को बनाने वाला ईश्वर है। को कीड़े की बात अभी

351
00:23:37,280 --> 00:23:41,280
मुझे ऐसा लगता है कि मैंने भगवान जी से ये वाला चैप्टर नहीं समझा है। तो मैं इनको नहीं

352
00:23:41,280 --> 00:23:45,440
छोड़। अच्छा अच्छा आपने मतलब वो किया नहीं। ठीक है। चलिए

353
00:23:45,440 --> 00:23:49,520
खैर बहुत अच्छी बातचीत हुई हमारी दीदी के साथ और काफी चीजें

354
00:23:49,520 --> 00:23:50,880
मगर मैं एक बात और कहूंगा

355
00:23:50,880 --> 00:23:54,880
कि आप थोड़ा सा इस बारे में जरूर चिंतन करें कि नास्तिकता को

356
00:23:54,880 --> 00:23:59,040
हम कैसे हराएं इस ईश्वर को लेकर के जो कि सर्वव्यापक नहीं है जो कीड़ों

357
00:23:59,040 --> 00:24:03,040
को नहीं बनाता है या फिर जो आपने के लिए जरूर करते हैं। मैं आपको ही बता दूं हम लोग रोज

358
00:24:03,040 --> 00:24:07,040
एक काम करते हैं जो नास्तिक है संसार में जो नहीं भगवान नहीं वो नहीं

359
00:24:07,040 --> 00:24:11,040
कह रहा मैं उस मैं बस ये कह रहा हूं उसी उसके लिए हमें रोज करते आपने जो वो कहा ना कि मैंने

360
00:24:11,040 --> 00:24:15,040
अभी इस बारे में जाना नहीं है कि उसी ने सब कुछ बनाया है कि नहीं बनाया है। नहीं हमने कीड़े के

361
00:24:15,040 --> 00:24:19,040
लिए हमने ये तो कहा उसने नई दुनिया बनाई है। जो उसने बनाया हमको पता है। कीड़ों के

362
00:24:19,040 --> 00:24:23,120
बारे में मुझे मगर ये कीड़े हैं या जो भी कुछ ऐसी चीजें हो रही पता है ये भी मुझे पता है।

363
00:24:23,120 --> 00:24:27,280
जो कुछ ऐसी चीजें हो रही है जो नॉर्मली हम लोग नहीं कहेंगे ये ये पॉजिटिव

364
00:24:27,280 --> 00:24:31,360
चीज है। जैसे सुनामी आ गई। अब एक लड़का इसको हम लोग कहते

365
00:24:31,360 --> 00:24:35,360
हैं। इसको कहते हैं प्राकृतिक आपदाएं। ईश्वरी आपदाएं नहीं। तो वो ईश्वर की सत्ता से बाहर नहीं

366
00:24:35,360 --> 00:24:39,440
है ना। हम ही ने कहा कि ईश्वर वो है जो सब कुछ कर जब भगवान देखिए

367
00:24:39,440 --> 00:24:43,680
भगवान धरती पर कब आते हैं जब इंसान प्रकृति जीव सब अपनी

368
00:24:43,680 --> 00:24:47,840
सतो प्रधानता से खत्म हो जाते हैं जब प्रधान बनते तब भगवान मैं आपको बताऊं

369
00:24:47,840 --> 00:24:51,840
एक चीज हमारी जो बात शुरू हुई ईश्वर को हमने जो सिद्ध किया

370
00:24:51,840 --> 00:24:55,920
था वो सबसे पहली बात थी कि अगर इस दुनिया में कुछ भी हो रहा है तो इसका मतलब

371
00:24:55,920 --> 00:24:59,920
उसको करने वाला कुछ है कोई बाहरी फोर्स है। ठीक है? तो जब

372
00:24:59,920 --> 00:25:04,000
आंधी आ रही है, जब सुनामी आ रही है, तो इसका मतलब कोई बाहरी फोर्स हमें

373
00:25:04,000 --> 00:25:06,240
माननी पड़ेगी। तभी तो हो रहा है।

374
00:25:06,240 --> 00:25:10,400
वरना हम ये कह ही नहीं सकते कि दुनिया में कोई सर्वशक्तिमान सत्ता है। प्रकृति अपने

375
00:25:10,400 --> 00:25:14,400
आप कर रही है। उस पर कंट्रोल ही नहीं है ईश्वर का। जो ईश्वर ने

376
00:25:14,400 --> 00:25:18,560
बनाया वहां की प्रकृति भी सतो प्रधान। ईश्वरी दुनिया जो कौन सी थी? सतयुगी

377
00:25:18,560 --> 00:25:22,640
यानी सृष्टि। वही जहां मनुष्य प्रकृति दोनों में सामंजस्य था।

378
00:25:22,640 --> 00:25:26,800
मैं वही कह रहा हूं। दोनों एक दूसरे के लिए हेल्पर मैं वही कह रहा हूं कि इस संसार में सब

379
00:25:26,800 --> 00:25:30,800
कुछ ईश्वर ने नहीं बनाया है। कुछ चीजें ऐसी है जो प्रकृति अपने आप बना रही

380
00:25:30,800 --> 00:25:35,280
है। अभी का जो चल रहा है वो डाउनफॉल चल रहा है और डाउनफॉल ईश्वर नहीं कर सकता।

381
00:25:35,280 --> 00:25:39,520
तो डाउनफॉल ईश्वर की मर्जी के बिना हो रहा है।

382
00:25:39,520 --> 00:25:43,600
ईश्वर की सत्ता के बाहर है। सत्ता के बाहर नहीं है लेकिन मर्जी नहीं है। ईश्वर

383
00:25:43,600 --> 00:25:47,600
की मर्जी नहीं है। नहीं मर्जी नहीं। मेरा कहने का मतलब है जैसे जैसे मैं

384
00:25:47,600 --> 00:25:51,840
वो मोबाइल वहां पे गिर रहा है। मेरे अंदर इतनी शक्ति नहीं है कि मैं उस मोबाइल को गिरने

385
00:25:51,840 --> 00:25:55,920
से रोक दूं। आंखों से देख के क्या ईश्वर ऐसा ही है? नहीं

386
00:25:55,920 --> 00:26:00,080
भगवान क्या कह भगवान ये वाला एग्जांपल अलग है।

387
00:26:00,080 --> 00:26:04,720
मकान पुराना हो रहा है। बच्चा बूढ़ा हो रहा है। ये किसी के कंट्रोल में भगवान

388
00:26:04,720 --> 00:26:08,880
पिता आकर के बच्चे को बीच में जवान नहीं कर देंगे। व्यक्ति का एक नियम है। चक्र

389
00:26:08,880 --> 00:26:12,880
है। नहीं नहीं मैं वो कह रहा हूं जो प्रकृति सुनामी आई।

390
00:26:12,880 --> 00:26:16,880
बाढ़ आ गई। ये सब वर्तमान समय प्रकृति भी अपने तमो प्रधान रूप

391
00:26:16,880 --> 00:26:21,040
में जाने। तो मैं आपसे वही पूछ रहा हूं। इस पे ईश्वर का कंट्रोल है कि नहीं? ईश्वर

392
00:26:21,040 --> 00:26:21,600
क्या कंट्रोल

393
00:26:21,600 --> 00:26:25,760
करने आए हैं? तमो प्रधान प्रकृति को सतो प्रधान। भगवान सुनामी नहीं कर रहे हैं। भगवान

394
00:26:25,760 --> 00:26:29,920
आंधी नहीं ले। नहीं नहीं मेरा पूछना यह है कि अगर जैसे सुनामी फॉर एग्जांपल

395
00:26:29,920 --> 00:26:34,080
कि वहां से मोबाइल गिर रहा है। मेरे में इतनी ताकत नहीं है कि मैं उसको देख तो रहा हूं कि मोबाइल गिर

396
00:26:34,080 --> 00:26:38,160
रहा है और ना ही मैंने चाहा था कि वो गिरे। मगर मेरे में इतनी ताकत नहीं

397
00:26:38,160 --> 00:26:42,400
फिर भी मैं उसे रोक पाऊं। क्या ईश्वर में इतनी ताकत है कि वो सुनामी को रोक पाए?

398
00:26:42,400 --> 00:26:46,720
बिल्कुल। तो यानी कि दुनिया बना देंगे वो जहां पर सुनामी आएगी। नहीं नहीं सुनामी

399
00:26:46,720 --> 00:26:50,720
को रोक पाए। वर्तमान समय प्रकृति का तमो

400
00:26:50,720 --> 00:26:54,960
प्रधान रूप है। उसको ठीक करने भगवान आए। नहीं मैं पूछ रहा हूं। ओवर पूरी वो सुनामी

401
00:26:54,960 --> 00:26:59,200
को रोक सकते हैं कि नहीं? नहीं भगवान भगवान ने पता है क्या कहा? हमने कहा ड्रामा

402
00:26:59,200 --> 00:27:03,200
का ये राज है। तो लास्ट का सीन चल रहा है। फिर कुल मिला के बात वही

403
00:27:03,200 --> 00:27:07,280
आ गई ना हम ईश्वर को सिद्ध कैसे करेंगे? ईश्वर है ये कैसे सिद्ध होगा? ईश्वर को

404
00:27:07,280 --> 00:27:11,440
सिद्ध अपने लिए करना है। मुझे अपने आप आप जो यहां पे

405
00:27:11,440 --> 00:27:15,520
ये चला रहे हो आपके मन में तो ईश्वर सिद्ध है। मगर आप यहां इसलिए

406
00:27:15,520 --> 00:27:19,520
बैठे हो कि कोई आएगा तो हमको आपको ईश्वर के बारे में बताना है। तो आप

407
00:27:19,520 --> 00:27:23,680
कैसे सिद्ध करोगे ईश्वर को? हमने ये तो कहा ना भैया हम फर्स्ट ईश्वर को नहीं सिद्ध

408
00:27:23,680 --> 00:27:27,680
करने लगते। सामने वाले को देखते हैं। हम किस नर्व्स में है वो। मतलब कुछ

409
00:27:27,680 --> 00:27:31,680
नियम नहीं है। जो जैसा हो गया वैसा ही हम। नहीं सामने वाले को देखो भैया।

410
00:27:31,680 --> 00:27:35,840
हर व्यक्ति को एक क्लास में स्टूडेंट्स भी होते हैं 10 तो 10 वो एक जैसे

411
00:27:35,840 --> 00:27:36,880
नहीं होते। टीचर पढ़ाता

412
00:27:36,880 --> 00:27:40,960
तो एक ही चैप्टर है। लेकिन अगर हम उनके पक्के नब्स को पकड़ लेते हैं तो उनको समझ में आता है इनको हम

413
00:27:40,960 --> 00:27:45,040
कहां से भगवान का वो कर सकते हैं। इनको तो आप बताइए ना कि आप आप मैं

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00:27:45,040 --> 00:27:49,040
एक तरीके से मैं एक मिनट के लिए नास्तिक बन जाता हूं। आप मुझे बताइए ईश्वर को

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00:27:49,040 --> 00:27:53,360
सिद्ध करिए। हम बस यही कहते हैं कि देखो भैया आज हम आपको एक छोटी सी वो कमेंट्री

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00:27:53,360 --> 00:27:57,360
करा रहे हैं। मैं आपको आप कर फील कर लेना। अगर आपको ये चीज अच्छी लगे

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00:27:57,360 --> 00:28:01,360
तो कल आप फिर से अपने आप कर लेना। नहीं तो मुझे कुछ अच्छा फील हो रहा है। इससे यह मतलब

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00:28:01,360 --> 00:28:05,360
कहां है कि दुनिया में ईश्वर है। भैया हम ये बाद में भी कर सकते हैं

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00:28:05,360 --> 00:28:09,360
ना। हम अच्छा फील करने लगे, अच्छा करने लगे हमको समझ में आ जाएगा।

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00:28:09,360 --> 00:28:13,440
ईश्वर है। मुझे अच्छा फील हो रहा है इस समय। मैं बहुत अच्छा फील कर रहा हूं। अभी मैं मुझे

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00:28:13,440 --> 00:28:17,440
बताइए ईश्वर कहां है? कैसे है? आप तो ईश्वर को मानने वाले हो।

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00:28:17,440 --> 00:28:21,520
नहीं मैं अभी अभी मैं इस समय राइट नाउ मैं नास्तिक हूं। मैं पूछ रहा हूं। नहीं तो कोई बात नहीं।

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00:28:21,520 --> 00:28:25,760
हम कोई हम इसको क्या कहते हैं कि नहीं अभी आप चार्ज हो। अभी आपके अंदर वो पावर

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00:28:25,760 --> 00:28:29,920
है। भगवान की शक्ति आप लेकर के चल रहे हो। कुछ मतलब सिद्धांत नहीं है इसमें

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00:28:29,920 --> 00:28:34,080
मतलब वो हम जब तक अच्छे काम कर रहे हैं मतलब हम भगवान वो अच्छे काम

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00:28:34,080 --> 00:28:38,080
वो अच्छे काम अच्छे तब कहलाएंगे जब वो उसके अकॉर्डिंग हो जो ईश्वर है

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00:28:38,080 --> 00:28:42,720
और अभी हम ये सिद्ध कर रहे हैं कि वो ईश्वर ईश्वर है कि नहीं उसी पे दिक्कत है

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00:28:42,720 --> 00:28:47,040
भाई दुनिया में अच्छाई क्या है जो ईश्वर के करीब ले जाए वो अच्छा ही है जो ईश्वर से दूर

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00:28:47,040 --> 00:28:51,200
ले जाए वो बुरा ही है तो हम नास्तिक को भी हम नास्तिक को भी यही कहते हैं अगर

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00:28:51,200 --> 00:28:51,920
नास्तिक आ भी

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00:28:51,920 --> 00:28:56,080
गए हैं तो हम कहते हैं चलो ठीक है आप एक्सपेरिमेंट करते रहना भैया बिना एक्सपेरिमेंट के

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00:28:56,080 --> 00:29:00,080
कोई चीज नहीं एक्सपेरिमेंट में कौन सी ऐसी चीज है जिससे हम ये कह

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00:29:00,080 --> 00:29:04,160
देंगे कि नहीं भाई ये ईश्वर है। ये मान लो हम कहते हैं ना उसमें मैथमेटिक्स

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00:29:04,160 --> 00:29:08,480
में भी करते हैं कि कुछ चीजें हाइपोथेसिस है। भैया आप मान लो दिस इज इक्वल टू दिस।

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00:29:08,480 --> 00:29:12,480
आप यहां तक पहुंचने के लिए ये दो एक्सपेरिमेंट कर। जैसे मुझे कोई एग्जांपल

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00:29:12,480 --> 00:29:16,560
बताइए। जैसे मैं आपके पास आ गया हूं। अभी मुझे आप बताइए कि ईश्वर को आप मेरे सामने

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00:29:16,560 --> 00:29:20,720
क्या कौन सा एक्सपेरिमेंट देख? मैंने कहा मैंने कहा कि चलो देखो आप इतना आज के दिन

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00:29:20,720 --> 00:29:24,960
मान लो कि ईश्वर ऊपर रहते हैं। हम आपको लेकर के चल रहे हैं। आप

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00:29:24,960 --> 00:29:28,960
एक बार वहां फील करके देखना। आज मैं आपको लेकर फील वही मैं कह रहा

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00:29:28,960 --> 00:29:33,120
हूं ना मुझे वहां पे कुछ आपने जो बताया वो मुझे फील हो गया। जैसे मैंने कहा ना कि

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00:29:33,120 --> 00:29:37,120
यहां पे मुझे ठंडा-ठंडा फील होगा। मान लीजिए तो मुझे वहां ठंडा-ठंडा फील हो गया। मगर बात

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00:29:37,120 --> 00:29:41,120
ये है कि ठंडा फील होना अपने आप सामने वाला बोलता है भैया।

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00:29:41,120 --> 00:29:45,280
अपने आप बोलता है। एक ही दिन में ना एक्सपेरिमेंट। यानी कि कुल मिला के

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00:29:45,280 --> 00:29:49,360
जो फिक्स सिद्धांत नहीं है वो सामने वाले के ऊपर है। वो क्या

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00:29:49,360 --> 00:29:53,360
कर रहा है? हम तो अपना काम वही कर रहे हैं ना। हम थोड़ी बता रहे हैं कि यहां चले जाओ कि वहां। हम तो एक ही

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00:29:53,360 --> 00:29:57,360
भगवान बता रहे हैं। ईश्वर एक है। सामने वाले के समझने की कैपेसिटी कैसी

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00:29:57,360 --> 00:30:01,360
है? वो कैसे समझना चाहता है? वो ज्ञान सुनना चाहता है। वो फील करना चाहता है।

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00:30:01,360 --> 00:30:05,440
पहले एक्सपेरिमेंट करना चाहता है। तो उनको हम बताते हैं। दिस इज इक्वल टू दिस। आप ये

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00:30:05,440 --> 00:30:07,120
वाली चीज मिलेगी। आप ये वाला आज

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00:30:07,120 --> 00:30:11,200
करके देख लो। मैं उनको कमेंट्री करा के उनको मेडिटेशन कराया। आप एक दिन

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00:30:11,200 --> 00:30:15,280
और करके देख लेना। फील हो तो अच्छी बात है। खैर ठीक है।

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00:30:15,280 --> 00:30:19,280
बहुत लंबी चर्चा हो गई है। अभी मेरे ख्याल से एक घंटा हो गया होगा। 1

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00:30:19,280 --> 00:30:23,440
घंटे से ज्यादा ज्यादा हो गया। 1 घंटा 45 तो

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00:30:23,440 --> 00:30:27,680
काफी लंबी चर्चा हो गई। बहुत अच्छा लगा बात करके और आप लोगों ने भी देखा

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बहुत सारी चीजें हुई। बस यही है कि मैं यही कहूंगा कि ब्रह्मा कुमारीज

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00:30:32,080 --> 00:30:36,080
का अगर ईश्वर ये है जो सर्वव्यापक नहीं है या

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जो सब कुछ शक्तिमान है। सर्वशक्तिमान है। सर्वशक्तिमान

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00:30:40,480 --> 00:30:44,640
भी नहीं है क्योंकि वो सुनामी को रोक नहीं सकता। आपने कहा वो हमेशा

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के लिए रोकता है। एक ऐसी दुनिया बनाने भगवान वो सुनामी को नहीं रोक सकता। अगर

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वो एक इतनी सी चीज में भी करने में अगर उसको दिक्कत है वो सर्वशक्तिमान

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नहीं है। यह हमें मानना पड़ेगा। तो मैं मुझे लग रहा है कि आपने इस

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ओर चीजें नहीं की है तो आप करिए और

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आप लोगों को ये चर्चा कैसी लगी और दीदी के साथ अब आप लोग हमारी दोबारा

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चर्चा देखना चाहते हैं उस पर कमेंट करिए और सभी

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को जय श्री राम।

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[संगीत]
