1
00:00:01,960 --> 00:00:07,960
[घंटी की आवाज़]

2
00:00:09,170 --> 00:00:12,320
[संगीत]

3
00:00:12,320 --> 00:00:16,800
इस विषय में तुम्हारा क्या पक्ष है कि ये जो है ईश्वर

4
00:00:16,800 --> 00:00:18,400
सृष्टि बनाता कैसे है? जो

5
00:00:18,400 --> 00:00:22,560
पहाड़ उठाने में जो शक्ति लग रही है माटी का ढेला उठाने में तो दो पावर वाली लगेगी

6
00:00:22,560 --> 00:00:26,800
और अगर नहीं लगेगी तो वो अपनी निश्चित दूरी से ज्यादा आगे जाएगी। फिर अगर

7
00:00:26,800 --> 00:00:30,960
पहाड़ वाली ताकत उसमें लग जाएगी तो तो भेद तो लाना ही पड़ेगा तभी तो

8
00:00:30,960 --> 00:00:35,280
सृष्टि रचना हो पाएगी। मानते हैं उसमें कहते हैं कि बिल्कुल जैसे जो जीव है

9
00:00:35,280 --> 00:00:39,360
वो वो अपनी इच्छा से चाहे हाथ उठाए चाहे हाथ की उंगली उठाए है ना कंट्रोलोल्ड

10
00:00:39,360 --> 00:00:43,440
उसकी शक्ति है। उसी प्रकार से ईश्वर भी कंट्रोल है क्योंकि वो बुद्धिमान है। वो इस प्रकार की

11
00:00:43,440 --> 00:00:47,440
कि जो उंगली उठा सकता है। ठीक है? जी तो वो

12
00:00:47,440 --> 00:00:51,440
इसलिए उठा सकता है क्योंकि उसके पास भेद है। बल है बल है। हां बल

13
00:00:51,440 --> 00:00:55,520
भी है और भेद भी है। मतलब रेगुलेट मतलब उसको कंट्रोल है। उसको अपने

14
00:00:55,520 --> 00:00:59,680
बल के ऊपर कंट्रोल है। कंट्रोल है। चलो ठीक है। कंट्रोल है। मगर

15
00:00:59,680 --> 00:01:02,560
जो जो कंट्रोल करके वो जो

16
00:01:02,560 --> 00:01:06,560
जो बल लगा जी जी जी 10 नंबर और दो नंबर ये

17
00:01:06,560 --> 00:01:09,200
दोनों अलग-अलग बल है क्वांटिटी में।

18
00:01:09,200 --> 00:01:14,240
ठीक है। अब ये जो बल है ये उससे अलग नहीं है।

19
00:01:14,240 --> 00:01:18,400
ईश्वर से है ना? तो ये बल के रूप में ईश्वर में भेद है।

20
00:01:18,400 --> 00:01:24,400
यह कम बल है या ज्यादा भेद है। इसको मानते नहीं है अभी हम लोग।

21
00:01:27,770 --> 00:01:32,400
[संगीत]

22
00:01:32,400 --> 00:01:36,560
कि जैसे मैंने ये कहा कि ईश्वर स्वरूप से निर्बाद है। है

23
00:01:36,560 --> 00:01:40,880
ना? तो निर्बाद होना भी उसका स्वरूप है। और अगर आप इस

24
00:01:40,880 --> 00:01:44,880
उसके ईश्वर के एक गुण से जो उसका निर्द वाला पॉइंट है उससे उसके

25
00:01:44,880 --> 00:01:48,960
स्वरूप का खंडन कर देंगे तो ये चीज ठीक नहीं बैठेगी। अब परंतु यदि

26
00:01:48,960 --> 00:01:53,120
सृष्टि निर्माण करने करना पड़ेगा तो उनको कम ज्यादा होना

27
00:01:53,120 --> 00:01:57,280
पड़ेगा। वो मैंने फोर्स की बात बताई है ना कहीं पे ज्यादा हो रही

28
00:01:57,280 --> 00:02:01,360
शक्ति कहीं पे कम हो रही है। ये सगुण है। उसमें उसमें मैंने थोड़ा सा विचार

29
00:02:01,360 --> 00:02:05,440
किया तो मुझे क्या समझ में आया कि जैसे जो हम ईश्वर का जो बल है

30
00:02:05,440 --> 00:02:09,440
ठीक है? वास्तव में उसकी इच्छा ही है और उसका बल से हम अर्थ

31
00:02:09,440 --> 00:02:13,440
फोर्स नहीं ले सकते हैं। फॉर इसलिए नहीं कोइंसिडेंटली मैं एक बच्चे को पढ़ाता

32
00:02:13,440 --> 00:02:17,760
हूं चार से पांच मैं उसको ट्यूशन पढ़ाता हूं तो उसका वो उसमें

33
00:02:17,760 --> 00:02:22,000
चैप्टर था फोर्स वर्क एनर्जी वाला वो कल ही मैंने पढ़ाया उसको उसमें जब मैंने फोर्स

34
00:02:22,000 --> 00:02:24,480
देखा तो फोर्स की डेफिनेशन लिखी थी पुल या पुश

35
00:02:24,480 --> 00:02:28,560
है ना तो मेरे दिमाग में क्लिक किया कि यार पुश और पुल तो एक देसी चीज ही कर सकती

36
00:02:28,560 --> 00:02:32,560
है या एक ही साइड से पुश जो सर्व्यापक है उसके पुल पुश और पुल सिद्ध

37
00:02:32,560 --> 00:02:36,720
नहीं होता इसीलिए तो सगुण का तभी होगा जब वो अवतार लेंगे वही

38
00:02:36,720 --> 00:02:40,800
तो मैं कह रहा हूं नहीं नहीं उसमें पॉइंट ये आ जाए कि पॉइंट ये है कि जैसे ईश्वर तो बिना अवतार

39
00:02:40,800 --> 00:02:44,880
लिए ही सृष्टि निर्माण कर रहा है। तो यहां पे या तो यह करना पड़ेगा मैं बताऊं

40
00:02:44,880 --> 00:02:48,880
या तो यह मानना पड़ेगा कि फिर वही आप कह दो अचिंत। अब जैसे यहां पे

41
00:02:48,880 --> 00:02:53,040
अगर हम यह नहीं मानेंगे कि सगुण हुए भगवान है ना तो हमें

42
00:02:53,040 --> 00:02:57,280
यही यहीं पे अचिंत कह देना पड़ेगा कि भैया यहां अचिंत शक्ति से करते हैं।

43
00:02:57,280 --> 00:03:01,440
उसमें बात आएगी। उसमें बात आएगी कि जैसे जैसे इच्छा मात्र की

44
00:03:01,440 --> 00:03:05,440
बात आ गई ना? हां हां। तो अचिंत शक्ति हो गई। फिर वो वो कैसे हो रहा है। हम उसको

45
00:03:05,440 --> 00:03:09,680
डिफाइन नहीं कर सकते। मतलब जो प्रैक्टिकली हम डिफाइन कर रहे हैं चीजों

46
00:03:09,680 --> 00:03:14,080
को कि भाई वो कैसे हुआ वो डिफाइन नहीं अचिंत शक्ति से ही कर दिया उन्होंने

47
00:03:14,080 --> 00:03:17,040
लेकिन ये है कि फिर भी उस अचिंत शक्ति को

48
00:03:17,040 --> 00:03:21,200
अब उसकी व्याख्या उसमें हमें थोड़ी और गहराई से मुझे शास्त्रों में थोड़ी और गहराई में पढ़नी

49
00:03:21,200 --> 00:03:21,920
पड़ेगी कि

50
00:03:21,920 --> 00:03:26,000
ईश्वर का बल और मनुष्य के बल मतलब किस प्रकार से उन्होंने व्याख्या की है। बाकी ब्रह्म ने

51
00:03:26,000 --> 00:03:30,080
तो इच्छा मात्र की है। इधर से देख तो कहीं सूर्य कहीं पृथ्वी बन

52
00:03:30,080 --> 00:03:34,640
रही है तो हम हमारी दृष्टि से कहीं फोर्स का कम ज्यादा मानना पड़ेगा।

53
00:03:34,640 --> 00:03:38,880
हमारी ओर से तो यही हो रहा है कि भैया जो निर्गुण भगवान है सर्व

54
00:03:38,880 --> 00:03:43,040
जो ये क्या कहते हैं सर्वव्यापक जो व्यवहार में ना आ सकने वाला है

55
00:03:43,040 --> 00:03:47,440
वो फिर वो रहते हुए भी स्वरूप के विरुद्ध दूसरा अवतार

56
00:03:47,440 --> 00:03:51,520
लेते हैं। या तो मान ही रहे हैं कि वही एक ही ईश्वर है। वही व्यवहार में

57
00:03:51,520 --> 00:03:57,520
आता ही आता है। ऐसा अब उसमें बात ये थी कि अब जैसे तो फिर वो परिवर्तनशील हो गया।

58
00:04:01,040 --> 00:04:05,280
[संगीत]

59
00:04:05,280 --> 00:04:09,360
तो वो जो इफेक्ट है गति करने वाला या रुकने वाला सेफ चेंज उस

60
00:04:09,360 --> 00:04:13,360
इफेक्ट के कारण उन्होंने बोला कि यहां पे बल है रियल में बल जैसा कुछ नहीं होता बल एक फिनोमना

61
00:04:13,360 --> 00:04:17,600
मात्र है यानी एक रास्ता है चलो ठीक है ठीक है ईश्वर इसका

62
00:04:17,600 --> 00:04:21,920
मतलब तुम्हारा क्रियावान भी नहीं है इच्छा कर रहा है तो क्रियावान है ना

63
00:04:21,920 --> 00:04:26,000
वो इच्छा कर रहा हो या कुछ भी कर रहा हो पृथ्वी को घूमने के लिए

64
00:04:26,000 --> 00:04:32,000
धक्का मिलता है जिस कारण से वह घूम रही जिस कारण

65
00:04:32,960 --> 00:04:37,200
तो वही तो मैं कह रहा हूं कि एक देसी होके काम करता है वो सगुण तभी तो हो रहा है

66
00:04:37,200 --> 00:04:41,200
तुम कह रहे हो तुम सगुण की व्याख्या दे नहीं रहे हो तुम अपने ग्रंथ का प्रमाण दे नहीं रहे हो

67
00:04:41,200 --> 00:04:45,520
कि ईश्वर केवल इच्छा करता है बल नहीं है बल नहीं लगाता वो बल्कि

68
00:04:45,520 --> 00:04:49,600
मैं बताऊं हो क्या रहा है कि उसकी जो इच्छा है वो जो भौतिक पदार्थ

69
00:04:49,600 --> 00:04:54,240
है उनपे बल का काम कर रही है यही तो होगा बल का मानना पड़ेगा

70
00:04:54,240 --> 00:04:58,240
बल का काम नहीं कर रही है वो जब वो इच्छा करता है और फलाना फलाना एक्टिविटी होती

71
00:04:58,240 --> 00:05:03,440
है तो उस पर्टिकुलर चीज को उस फिनोमिना को हम लोग वो बोल देते हैं। बल बोल देते हैं।

72
00:05:03,440 --> 00:05:07,680
मतलब की मतलब कि क्या कहते हैं ईश्वर जो है

73
00:05:07,680 --> 00:05:12,080
वो बिना किसी चेतन वस्तु के वहां पर उसको घुमाने लगता है।

74
00:05:12,080 --> 00:05:14,480
कैसा बिना किसी चेतन वस्तु के मतलब? जैसे

75
00:05:14,480 --> 00:05:18,480
उसके अंदर चेतन तो है नहीं मटेरियल में। हां। मटेरियल थोड़ी चेतन

76
00:05:18,480 --> 00:05:22,560
है। हां। है ना। अब उसने केवल इच्छा की और वो घूमने लगा। उसकी क्या सूचना

77
00:05:22,560 --> 00:05:25,840
गई, क्या नहीं गई इसके इसको थोड़ा सा डिफाइन करोगे कैसे? वह

78
00:05:25,840 --> 00:05:30,080
घूमी कैसे क्या सूचना गई मतलब? इच्छा से कैसे घूम गई पृथ्वी

79
00:05:30,080 --> 00:05:34,160
यानी कि कार्य करने वाली जो फोर्स है उसके रूप में

80
00:05:34,160 --> 00:05:38,400
उसने अपनी इच्छा अनुसार कहीं पर कम फाॅर्स और कहीं पर ज्यादा फाॅर्स दी

81
00:05:38,400 --> 00:05:42,960
पंच भौतिक पदार्थों को ठीक है मतलब उसने जैसी इच्छा की वैसा काम हुआ सिंपल

82
00:05:42,960 --> 00:05:46,960
नहीं तुम यहां पे मिस कर रहे हो तुम यहां पे ये मिस कर रहे हो तुम शक्ति को मिस

83
00:05:46,960 --> 00:05:51,200
कर रहे हो ना पृथ्वी को प्राप्त हो रही है फाॅर्स अब वो ईश्वर ने उसकी

84
00:05:51,200 --> 00:05:55,280
इच्छा की है मगर पृथ्वी को फोर्स प्राप्त हो रही है अब ये फोर्स आई कहां से

85
00:05:55,280 --> 00:05:59,680
इसको हमने लौकिक भाषा में हमने इसको ऐसे बोल दिया कि इसको यहां पे फोर्स लगा तब ये वाल मूव करी कैसे

86
00:05:59,680 --> 00:06:04,000
परिणाम देख के अब इसमें अब इसमें अब इसमें आगे क्या आ रहा है कि अलौकिक

87
00:06:04,000 --> 00:06:06,880
भाषा से हम उसको फ़

88
00:06:06,880 --> 00:06:11,040
देता हूं अब इसमें ये आया अब ये जो ये जो मूव हुआ ये क्या था

89
00:06:11,040 --> 00:06:15,040
क्या ऐसा हो गया कौन सा तीर लग गया इसमें कि मूव हो गया तो पॉइंट यहां आया की ये

90
00:06:15,040 --> 00:06:19,120
इच्छा से ही मूव हुआ पृथ्वी घूमी तो उसके कोई

91
00:06:19,120 --> 00:06:23,520
ब्रेन है जिसमें उसको पता लगा कि ईश्वर की इच्छा ये है तो ये करना है उसको

92
00:06:23,520 --> 00:06:28,160
क्या प्राप्त हुआ उसको क्या प्राप्त

93
00:06:28,160 --> 00:06:32,400
भाई भाई तो इसका मतलब इच्छा प्राप्त हुई यानी कि मतलब तुम

94
00:06:32,400 --> 00:06:36,480
ये मान समझ सकते हैं ना इसका मतलब एक मिनट एक मिनट एक मिनट एक

95
00:06:36,480 --> 00:06:40,720
मिनट यानी कि तुम ये मान रहे हो वहां पे कोई बल नहीं लगा बस वो घूम गई कुल

96
00:06:40,720 --> 00:06:41,220
मिला

97
00:06:40,880 --> 00:06:44,960
के कहना ये जब वो घूमी तो उसी घूमने वाले जिस इच्छा को यानी जब

98
00:06:44,960 --> 00:06:48,960
ईश्वर ने इच्छा की नहीं कि तू घूम ठीक है यानी कि वो जो इच्छा है उसी

99
00:06:48,960 --> 00:06:53,120
इच्छा को हमने बल बोला अरे तो फिर बल लगा बल मिला ना ऐसे

100
00:06:53,120 --> 00:06:59,120
बोलो ना कि बल मिला उसको नहीं बल मिलना अलग बात हो हो गई

101
00:07:03,790 --> 00:07:06,640
[संगीत]

102
00:07:06,640 --> 00:07:10,960
वही थोड़ा सिद्धांत वगैरह सोच रहा था चर्चा करूं अगर आपके पास समय हो तो

103
00:07:10,960 --> 00:07:14,960
अरे हो तो गई अपने बीच में चर्चा वही पॉइंट अटक जाता है

104
00:07:14,960 --> 00:07:18,960
सगुण निराकार में तुम इच्छा कर देते हो सगुण

105
00:07:18,960 --> 00:07:23,040
निराकार में इच्छा हां तो वो तो सही पॉइंट है ना उसमें क्या उसके पास

106
00:07:23,040 --> 00:07:27,120
आर्गुमेंट क्या है आपके पास मतलब सही वहां पे वो संतुष्टिजनक नहीं ना तुम्हारा यह

107
00:07:27,120 --> 00:07:31,200
कहना बल नहीं है वो इच्छा है हम तो उसमें तो सही पॉइंट है उसमें आपके पास क्या फिर

108
00:07:31,200 --> 00:07:36,480
सर फिर उसको शक्तिमान क्यों कह रहे हो इच्छा कहो

109
00:07:36,480 --> 00:07:40,560
शक्ति का मतलब क्या होता है शक्ति का मतलब होता है सामर्थ्य

110
00:07:40,560 --> 00:07:44,800
हां और सामर्थ्य कैसे होता है सामर्थ्य ऐसे होता है इच्छा के रूप में धक्का

111
00:07:44,800 --> 00:07:48,880
है ही नहीं ईश्वर का इसमें इसमें ये होता है कि जैसे मान लीजिए मेरी

112
00:07:48,880 --> 00:07:53,280
इच्छा हुई तर्क की संगत नहीं लगी ना ये बात मैं इसका एक्सप्लेनेशन देता हूं ना मैं आपको एक्सप्लेनेशन

113
00:07:53,280 --> 00:07:56,080
देता हूं अरे वो लंबा हो चुका है काफी अपना उसको को

114
00:07:56,080 --> 00:08:00,880
कहो तो रिकॉर्डिंग पड़ी होगी मैं भेज देता हूं सुनो और

115
00:08:00,880 --> 00:08:05,120
ये मतलब लूप लूप टाइप से हुआ है उसमें कुछ बार-बार नहीं मेरी

116
00:08:05,120 --> 00:08:09,120
मेरी जानकारी में तो अभी देखिए मेरी जानकारी में तो जैसे तुम

117
00:08:09,120 --> 00:08:13,600
कह रहे हो ना कि स्वरूप से वो वो है क्या कहते हैं

118
00:08:13,600 --> 00:08:17,680
निराकार या स्वरूप से वो नित्य शाश्वत है। तो स्वरूप

119
00:08:17,680 --> 00:08:21,680
से वो निर्गुण भी है। एक रस भी है। उसका कार्य करने वाला

120
00:08:21,680 --> 00:08:25,760
होने के रूप में उसका सगुण होना ही आवश्यक है। तो वहीं से या तो यह मान

121
00:08:25,760 --> 00:08:30,000
लो अगर तुम अपने स्तर से अवतार का खंडन करोगे तो तुम्हें यह भी मानना पड़ेगा कि ईश्वर

122
00:08:30,000 --> 00:08:34,080
की सृष्टि की रचना ईश्वर ने नहीं की फिर क्योंकि ईश्वर तो एक रस है और

123
00:08:34,080 --> 00:08:38,160
वो कम ज्यादा हो रहा है यहां सगुण रूप में क्योंकि क्रियाशील है ना ईश्वर

124
00:08:38,160 --> 00:08:42,240
जब ईश्वर दोनों के अंदर है और वो हिलना चाहता है

125
00:08:42,240 --> 00:08:46,640
हिलने के रूप में अपनी शक्ति लगा रहा है तो वो अंदर भी हिलेगा बाहर भी हिलेगा

126
00:08:46,640 --> 00:08:50,720
नहीं हिलने से नहीं महाराज ये बताइए शरीर के अंदर जीव है तो क्या ही जीव हिल

127
00:08:50,720 --> 00:08:55,040
हिल के हाथों को उठाता है क्या तो आप वहां पे बताओ वह बल है कि क्या है वो

128
00:08:55,040 --> 00:08:59,760
जैसे जैसे जैसे मेरे शरीर में जीव है। ठीक है। मैंने चाहा

129
00:08:59,760 --> 00:09:03,920
तुम वहां से बताओ कि वो जो पृथ्वी का गोला है उसमें धक्का

130
00:09:03,920 --> 00:09:08,960
कैसे लगा? उसमें धक्का कहां धक्का लगने के लिए एक देसी चाहिए?

131
00:09:08,960 --> 00:09:11,440
तो क्या हुआ? तो क्या हुआ? मतलब वहां

132
00:09:11,440 --> 00:09:15,840
कुल मिला के वहां कुछ तो कुछ समझाने वाली बात नहीं। बस मान लो कि हुआ।

133
00:09:15,840 --> 00:09:20,000
यही तो है। ऐसा नहीं है ना। तो भगवान ने धक्का लगाया कि नहीं?

134
00:09:20,000 --> 00:09:24,080
और भगवान ये ये सब जो बातें लिखी हुई है तुम्हारे उसमें कि बिन उसके

135
00:09:24,080 --> 00:09:28,080
वो सब सुनता है बिन वो सब उसमें ये करता है वो करता है

136
00:09:28,080 --> 00:09:32,320
करने वाली कई बातें लिखी हुई है तो करने वाली जैसे ही क्रिया आएगी तो वहां पर वो

137
00:09:32,320 --> 00:09:36,400
फोर्स का ट्रांसफर ट्रांसफरिंग फोर्स तो दिखाई देगा ना उसी को तो

138
00:09:36,400 --> 00:09:40,560
सामर्थ्य बोलते हैं ना जैसे आंख आंख है तो कोई जैसे

139
00:09:40,560 --> 00:09:44,880
सामर्थ्य को ही तो मैं बल बोल रहा हूं बल ना बोले उसे तो

140
00:09:44,880 --> 00:09:49,920
बल उसमें देखिए मैं समझाता हूं जैसे एक तो जैसे हम उसे बोल रहे हैं कि सर्वशक्तिमान

141
00:09:49,920 --> 00:09:54,480
ठीक है? शक्ति का अर्थ तो सामर्थ बताया हुआ है शास्त्रों में। तो सामर्थ्य का एक्सजीक्यूशन

142
00:09:54,480 --> 00:09:58,640
तो बल के रूप में होगा ना। पत्ता हिलाना है। पत्ता हिलाना है तो इतना

143
00:09:58,640 --> 00:10:02,640
मात्र नहीं होता ना। अगर अगर नहीं है तो फिर वो जिस रूप में फिर

144
00:10:02,640 --> 00:10:07,200
वो बताओ। हां तो मैं वो रूप बताते नहीं वो इच्छा कह देते हो तुम बस।

145
00:10:07,200 --> 00:10:11,200
बताता रहूं। मैं बताता रहूं। हां। और खैर बताने

146
00:10:11,200 --> 00:10:15,760
से पहले जो मैं थोड़ा सा इसमें और ओवरव्यू इसमें उधर बात करना चाहता था।

147
00:10:15,760 --> 00:10:20,320
यह तो बिना अल्टीमेटम के आप विषय में घुस गए। तो

148
00:10:20,320 --> 00:10:20,820
इसमें

149
00:10:20,720 --> 00:10:24,720
जो टॉपिक रह रहे हैं हमारे सिद्धांतिक चर्चा के एक तो हम उस पे

150
00:10:24,720 --> 00:10:30,720
चर्चा कर रहे थे परंपरा पे

151
00:10:32,080 --> 00:10:36,720
[संगीत]

152
00:10:36,720 --> 00:10:40,720
से तुम कह रहे हो इच्छावान है बस फिर शक्तिमान भी मान रहे हो शक्ति का पूछ रहा

153
00:10:40,720 --> 00:10:44,800
हूं तो वो बस सामर्थ है उसके आगे आप पूछो मत आपने कहा उसके

154
00:10:44,800 --> 00:10:48,960
आगे पूछो मत सामर्थ्य के आगे वो क्या है पृथ्वी को धक्का लग

155
00:10:48,960 --> 00:10:52,960
रहा है कि नहीं लग रहा है वो क्या है साकार एक देसी वस्तु होनी

156
00:10:52,960 --> 00:10:57,680
चाहिए साकार एक बताओ ना पृथ्वी पृथ्वी सरकी कैसे मुझे बताओ थोड़ा प्रैक्टिकली

157
00:10:57,680 --> 00:11:01,920
नहीं आप मुझे आप मुझे बताइए आप सगुण ईश्वर को साकार एक देसी मानते हैं ऐसा लेकिन

158
00:11:01,920 --> 00:11:06,000
सर्वव्यापक होते हुए भी एक देसी है ऐसे है वो जैसे

159
00:11:06,000 --> 00:11:10,080
सगुण उदार सगुण है। मैं पूछ रहा हूं साकार एक

160
00:11:10,080 --> 00:11:14,080
देसी है कि नहीं है? क्योंकि धक्का लगा अगर कोई वस्तु किसी दूसरे वस्तु को धक्का दे

161
00:11:14,080 --> 00:11:18,320
रही है तो उसके लिए उसका साकार हो क्योंकि लक्षण में तो हमें ही दिख रहे हैं भाई जो भी हम देखते हैं कि या तो धक्का

162
00:11:18,320 --> 00:11:22,720
लगाने के लिए उसका साकार होना है और दूसरा उसके कांटेक्ट में साकार हो एक देश है तभी उसका धक्का लगा पाएगा।

163
00:11:22,720 --> 00:11:26,800
हम मानो बिल्कुल बिल्कुल बिल्कुल अपने को रेगुलेट करता है। ठीक है। ठीक है। आप इसी पे

164
00:11:26,800 --> 00:11:31,440
रुकिए इसी पे रुकिए। यानी आपने माना कि जो आपका ईश्वर है वो साकार एक देश है। व्यवहार वाला है ना?

165
00:11:31,440 --> 00:11:35,520
सर्व्यापक होते हुए भी व्यापक है अगर वही पॉइंट है ना

166
00:11:35,520 --> 00:11:39,680
यही बात है ना तुम ऐसे कह रहे हो देखो मैं बताऊं तुम क्या कह रहे हो जैसे मैंने कोई बुक उठाई

167
00:11:39,680 --> 00:11:43,760
तो तुम कह रहे हो कि आपने नहीं उठाई आपके हाथ ने उठाई तो मैं कह रहा हूं मैं होते हुए

168
00:11:43,760 --> 00:11:47,200
भी मेरे हाथ से बुक उठा रहा हूं उसी पे ही मैंने आपको धक्के वाले पे

169
00:11:47,200 --> 00:11:51,360
ही प्रश्न किया ना कि धक्का लगाने के लिए उसका सगुण एक साकार एक देसी होना जरूरी है तो क्या आप ईश्वर

170
00:11:51,360 --> 00:11:55,600
को तो क्या आप ईश्वर को साकार एकदेशी मानते हो अपना धक्का

171
00:11:55,600 --> 00:12:00,640
नहीं मानते ध्यान से सुनिए सर्वव्यापक होते हुए भी साकार एक देश

172
00:12:00,640 --> 00:12:05,120
पॉइंट सुनिए जो ईश्वर सृष्टि बना रहा है धक्का लगा के बना रहा है। है ना आपके

173
00:12:05,120 --> 00:12:09,440
मंतव्य में हां यानी जिस ईश्वर ने और धक्का लगाने के लिए उसका साकार

174
00:12:09,440 --> 00:12:13,440
एक देश होना जरूरी है। यानी आपके यानी आपके हिसाब से

175
00:12:13,440 --> 00:12:17,840
जिस ईश्वर ने सृष्टि की रचना की है वो साकार एक देश है। है

176
00:12:17,840 --> 00:12:21,840
ना? सर्वव्यापक होते हुए भी यही तो पॉइंट

177
00:12:21,840 --> 00:12:26,080
हो तो रहा है। हो तो रहा है। तभी तो तभी तो आपको वहां पे अवतार मानना

178
00:12:26,080 --> 00:12:30,160
पड़ेगा। वरना पृथ्वी पे धक्का सिद्ध कर दो आप। वहां पे आप सिद्ध नहीं कर रहे

179
00:12:30,160 --> 00:12:34,400
वहां आप इच्छा इच्छा बोल के हट जाते हो इच्छा है वहां बल नहीं अवतार मानना पड़ेगा नहीं मानना पड़ेगा

180
00:12:34,400 --> 00:12:38,560
बाद की बात है पहले मैं आपसे पूछ रहा हूं यही तो बात है वहां तुम वहां वाले मामले

181
00:12:38,560 --> 00:12:42,560
में तुम कमजोर हो वहां वो तुम खुल के बात नहीं मैं कमजोर नहीं हूं अभी उस पे बात ही नहीं

182
00:12:42,560 --> 00:12:46,880
हो रही है ये क्यों नहीं उसी पे तो बात हो रही है निर्गुण अभी तुम रिकॉर्डिंग सुन लो मैंने निर्गुण

183
00:12:46,880 --> 00:12:50,960
सगुण का मैं ये कह रहा हूं कि जितनी बार निर्गुण सगुण की बात अभी तक हमारे बीच

184
00:12:50,960 --> 00:12:55,040
में आई है तुमने वहां से मतलब वहां पे क्लियर कट

185
00:12:55,040 --> 00:12:59,040
जो निर्भय आर्य है जो निर्भय आर्य है जिस तरह से बात करने

186
00:12:59,040 --> 00:13:02,320
वाला निर्भय आर्य ने अपने स्वाभाविक लक्षण

187
00:13:02,320 --> 00:13:06,320
के अनुसार वहां पर प्रस्तुतीकरण नहीं दिया है। निर्गुण और सगुण वाले

188
00:13:06,320 --> 00:13:10,320
विषय में वहां वो बचता है। सबसे उसको खोलना चाहा था तो तुमने उसको

189
00:13:10,320 --> 00:13:14,720
बात को खत्म कर दिया था। मतलब उसमें बहुत ज्यादा क्लेरिटी नहीं थी। ठीक है। मैं

190
00:13:14,720 --> 00:13:19,520
ये पहली बार की बात है। फिर दोबारा हुआ तो तुमने कहा वो बल नहीं है। वो इच्छा है।

191
00:13:19,520 --> 00:13:23,600
अब रुकिए इच्छा जो है पृथ्वी को प्राप्त के रूप में हो रही है। दिखा देता हूं। आगे बढ़िएगा

192
00:13:23,600 --> 00:13:27,840
बाद में। पहले मैं सगुण निर्गुण वाला बोल देता हूं। हां खुला होगा तो तुम अभी

193
00:13:27,840 --> 00:13:32,800
फ्रेश व्याख्या दे दो निर्गुण सगुण की क्या है मैंने आपसे पहले ही बोला था कि जो विशिष्टा

194
00:13:32,800 --> 00:13:36,880
इसमें इसमें माना जाता है ना सगुण निर्गुण ठीक है कि उस

195
00:13:36,880 --> 00:13:41,040
उस दृष्टिकोण से मैंने कहा था कि अभी भी अभी भी तुम कुछ मत करो तुम अपनी फ्रेश

196
00:13:41,040 --> 00:13:45,120
व्याख्या दो वो छोड़ दो विशिष्टा सब कुछ को अपनी निर्गुण सगुण की व्याख्या

197
00:13:45,120 --> 00:13:49,200
दो अब उसमें देखिए मैंने तो आपको पहले बताया था कि निर्गुण सगुण हर वस्तु

198
00:13:49,200 --> 00:13:53,760
जो होती है निर्गुण सगुण होती है ठीक है तो अब इसमें जैसे यह पॉइंट है

199
00:13:53,760 --> 00:13:57,760
कि जैसे कोई भी जैसे अग्नि है ठीक है वो

200
00:13:57,760 --> 00:14:01,840
गर्म है लेकिन ठंडी नहीं है यानी उसमें गर्मी है लेकिन ठंडी नहीं

201
00:14:01,840 --> 00:14:07,200
तो ये वाला हां हट गया

202
00:14:07,200 --> 00:14:11,360
पेन पेन [नाक से की जाने वाली आवाज़] तो एक

203
00:14:11,360 --> 00:14:15,360
सेकंड तो अब जैसे अग्नि है वो गर्म है वो ठंडी नहीं है ठीक

204
00:14:15,360 --> 00:14:17,440
है इस वाले केस में क्या हो रहा है कि उसमें अग्नि

205
00:14:17,440 --> 00:14:21,600
उनमें गर्मी के गुण है लेकिन कुछ गुण नहीं भी है तो उसी प्रकार से दुनिया

206
00:14:21,600 --> 00:14:25,680
की हर वस्तु में जैसे ईश्वर सच्चिदानंद ंद है ठीक है लेकिन दुख

207
00:14:25,680 --> 00:14:29,840
ही नहीं है तो सच्चिदानंद का जो है उसके अंदर तो इस दृष्टिकोण

208
00:14:29,840 --> 00:14:34,160
से सगुण है और जो दुख राग आदि ये सब नहीं है तो इस दृष्टिकोण से निर्गुण

209
00:14:34,160 --> 00:14:38,160
अब वो एक रास्ता वाला पॉइंट ये आता है कि ईश्वर सर्व्यापक

210
00:14:38,160 --> 00:14:42,160
है और कहीं ऐसा तो नहीं कि लंदन वाला ईश्वर सच्चिदानंद है और भारत वाले ईश्वर सच्चिदानंद

211
00:14:42,160 --> 00:14:46,400
नहीं है तब उसकी एक रचता भंग होती है ऐसे भंग नहीं हो जाती कहते

212
00:14:46,400 --> 00:14:50,480
कोई गुण है कोई गुण नहीं है तो भंग हो गई ये कौन सी बात कौन से गुण है उसमें कौन से नहीं है

213
00:14:50,480 --> 00:14:54,480
हां तो वो तो आर्य समाज का जो दूसरा समुलास है उसमें मुख्य मुख्य मुख्य मेजर मेजर

214
00:14:54,480 --> 00:14:58,800
गुणों का अधिक दिया है। सर्वशक्तिमान सर्वमी अजर नित्य पवित्र सृष्टि करता

215
00:14:58,800 --> 00:15:02,800
आदि आदि जो है वो मेजर मेजर उसके गुण है। सर्वशक्तिमान से वो एक

216
00:15:02,800 --> 00:15:06,960
रस है ना। हां ठीक है। यानी कि

217
00:15:06,960 --> 00:15:11,600
फोर्स की दृष्टि से वो एक रस वाला है। फोर्स

218
00:15:11,600 --> 00:15:16,080
की दृष्टि से एक रस वो तो इच्छा हो गया ना। फोर्स क्या होता है? तो फिर शक्तिमान

219
00:15:16,080 --> 00:15:20,080
क्यों लिख रहे हो? इच्छा मान लिखो। अच्छा सर्वशक्तिमान का इच्छा अर्थ क्या होता

220
00:15:20,080 --> 00:15:24,160
है? सर्वशक्तिमान सब कुछ कर सकने वाला जो सब कुछ कर सकने का

221
00:15:24,160 --> 00:15:28,720
सामर्थ रखे जिसमें सब कुछ कर सकने की वो हो बल हो क्या

222
00:15:28,720 --> 00:15:32,720
ठीक है अब अब आपने बोला कि सर्वशक्तिमान का अर्थ होता है सब कुछ कर सकता है

223
00:15:32,720 --> 00:15:36,720
ठीक है अब मुझे ये बताइए कि आपको कैसे पता चला कि सर्वशक्तिमान अरे तुम देखो

224
00:15:36,720 --> 00:15:40,960
फिर टॉपिक चेंज कर रहे हो अब टॉपिक नहीं तुम अपनी व्याख्या क्यों नहीं दे रहे हो सर्वशक्तिमान पे लाइन

225
00:15:40,960 --> 00:15:44,960
मैंने क्या पूछा है मैंने पूछा क्या था तुमसे मैंने पूछा क्या था तुमसे अभी

226
00:15:44,960 --> 00:15:48,960
मैंने पूछा था क्या वो शक्ति के गुण से बिल्कुल एक रस है सभी जगह

227
00:15:48,960 --> 00:15:53,600
कि नहीं तुमने उसका जवाब आप बल शक्ति का मतलब क्या समझते

228
00:15:53,600 --> 00:15:58,080
ना जब वो बल मैंने आपको पहले तो मतलब कुल मिला के मुझे तुम्हें दिखा

229
00:15:58,080 --> 00:16:02,240
दो हां हां बोलो बोलो अब बात ये

230
00:16:02,240 --> 00:16:06,400
है कि जब मैंने आपको पहले ही बता दिया कि जो बल वाला जो विषय है वो तो इच्छा से संबंधित

231
00:16:06,400 --> 00:16:10,560
है अब आप उसे अब उसे सर्वशक्तिमान से जब अगर अगर मेरे भाई वो

232
00:16:10,560 --> 00:16:14,720
इच्छा से देखो दूसरी जगह चली जाएगी बात बात वही बात है अगर इच्छा

233
00:16:14,720 --> 00:16:18,960
से संबंधित भी है मैं कह रहा हूं क्या पृथ्वी के कण को कुछ

234
00:16:18,960 --> 00:16:23,200
प्राप्त हुआ या नहीं नहीं हुआ। बस ये बताओ कोई क्या प्राप्त हुआ उसे?

235
00:16:23,200 --> 00:16:27,360
एक सेकंड रुकिए।

236
00:16:27,360 --> 00:16:31,360
हां। हेलो हम हां तो अब बात ये आ जाती है कि

237
00:16:31,360 --> 00:16:35,360
जब मैं कह रहा हूं कि आपने बल वाला विषय छेड़ा। अब मेरे को जब मेरी जब

238
00:16:35,360 --> 00:16:39,440
मेरे अकॉर्डिंग वो बल से संबंधित उस टाइप से है नहीं क्योंकि सर्वशक्तिमान में बहुत सारी

239
00:16:39,440 --> 00:16:43,760
चीजें आ जाती है। इसीलिए तो मैं कह रहा हूं ना निर्भय शक्तिमान में देखना तो

240
00:16:43,760 --> 00:16:46,400
बल मानेंगे। मैं समझ गया। मैं यह कह रहा हूं

241
00:16:46,400 --> 00:16:50,560
कि तुम मुझे बस इतना बताओ अभी कि पृथ्वी को प्राप्त क्या हो रहा है? कुछ फोर्स सोर्स

242
00:16:50,560 --> 00:16:54,560
प्राप्त हो रही है उसे कि नहीं हो रही है? बस वह एक उसके अंदर कोई ऐसा भैया

243
00:16:54,560 --> 00:16:58,800
ये सारा विषय मैंने आपको पिछली बार भी इच्छा वाला पूरा कांसेप्ट अच्छे से बताया था।

244
00:16:58,800 --> 00:17:02,960
नहीं नहीं बताया था अच्छे से। तुम उसमें खिचड़ी पका रहे हो। सगुण निर्गुण

245
00:17:02,960 --> 00:17:07,200
में तुम्हारी खिचड़ी पक रही है। के दृष्टिकोण से पक रही है। लेकिन चलिए

246
00:17:07,200 --> 00:17:11,920
कोई बात नहीं। मैं उसमें ले लेता हूं। उसमें अपना भी मैं इशू ले लेता हूं। तो उसमें

247
00:17:11,920 --> 00:17:15,920
हम सॉल्यूशन की ओर बढ़ते हैं। इसमें वो क्लियर नहीं है सगुण निर्गुण और वहीं पे

248
00:17:15,920 --> 00:17:20,320
अवतार की सिद्धि होती है। क्योंकि अगर वह शक्ति शक्ति के उससे

249
00:17:20,320 --> 00:17:24,640
सर्व वो है सर्वव्यापक एक रस है तो जब वो

250
00:17:24,640 --> 00:17:28,720
पृथ्वी इत्यादि के लिए व्यवहारिक होगा तो वहां पर वो कहीं पे कम कहीं

251
00:17:28,720 --> 00:17:32,880
पे ज्यादा होगा। सिंपल तो ऐसी स्थिति में या तो यह मानना

252
00:17:32,880 --> 00:17:36,880
पड़ेगा कि निर्गुण ने अपने स्वरूप को बदला जो कि वो बदल नहीं सकता। बदला

253
00:17:36,880 --> 00:17:41,040
तो उसकी शाश्वतता भंग हो जाएगी। तो यहीं पर अवतार मानना पड़ेगा कि वो

254
00:17:41,040 --> 00:17:45,120
एक और अवतार लेता है। अपने उस रूप को सुरक्षित रखते हुए, नित्यता

255
00:17:45,120 --> 00:17:49,200
को सुरक्षित रखते हुए सगुण अवतार लेता है और अब वो जो है क्रियाशील

256
00:17:49,200 --> 00:17:50,240
होता है। क्रिया

257
00:17:50,240 --> 00:17:54,240
करने के लिए ही उसे कहीं कम कहीं ज्यादा होना पड़ेगा मेरे भाई। क्रिया हो

258
00:17:54,240 --> 00:17:58,240
ही नहीं सकती जब वो सही सब जगह है। हां उस दृष्टि से तत्व

259
00:17:58,240 --> 00:18:02,240
की दृष्टि से वो केवल इच्छा मात्र कर रहा है। मगर हमारी ओर से तो हमें कुछ ना

260
00:18:02,240 --> 00:18:06,240
कुछ उसका बल प्राप्त हुआ ना कि हम किसके। नहीं तो हमें मानना पड़ेगा केवल

261
00:18:06,240 --> 00:18:10,480
वो सोचता है उसके पास ना बल है ना कुछ है ना फोर्स है कुछ केवल सोचता है वो बस

262
00:18:10,480 --> 00:18:14,480
और वहां सोचने पर भी जब अगर आर्य समाज के अनुसार चलो एक बार वो अद्वैत के

263
00:18:14,480 --> 00:18:18,720
अनुसार तो केवल सोचता है चल भी जाएगा आर्य समाज के अनुसार तो वो चलेगा ही नहीं

264
00:18:18,720 --> 00:18:22,720
आपको क्या कहते हैं व्यवहारिक तौर पर उसकी वो सिद्धि करनी पड़ेगी कि

265
00:18:22,720 --> 00:18:26,720
वो बल लगा कि नहीं लगा ये इस तरह की बातें तो अद्वैत में है कि उसने केवल

266
00:18:26,720 --> 00:18:32,720
सोचा और हो गया क्योंकि माया है

267
00:18:32,800 --> 00:18:36,800
यह वाली बात है हम ठीक है। अब देखिए अब

268
00:18:36,800 --> 00:18:40,880
तो चलिए आपने अपनी व्याख्या कर दी ना। अब तो अब तुम इस पर और करो। इस पर और

269
00:18:40,880 --> 00:18:44,880
अध्ययन करो। मुझे जो मेरा पूरा हो चुका है। मेरे हिसाब से मैं

270
00:18:44,880 --> 00:18:48,880
एक बड़े भाई होने के नाते तुम्हें कह रहा हूं। तुम सगुण निर्गुण पे और

271
00:18:48,880 --> 00:18:52,960
वो करो क्योंकि यहां पे तुम जो है क्लियर नहीं हो। सगुण

272
00:18:52,960 --> 00:18:57,680
मेरा क्लियर है। वह इच्छा वाला पॉइंट खंडन करिए ना।

273
00:18:57,680 --> 00:19:01,920
कर तो दिया खंडन कि भैया यहां पर हमें प्राप्त क्या हो रहा है? जैसे हमें

274
00:19:01,920 --> 00:19:06,240
व्यवहार में क्या प्राप्त हो रहे हैं? इच्छा इच्छा मतलब इच्छा मतलब एक मानसिक

275
00:19:06,240 --> 00:19:07,680
सूचना।

276
00:19:07,680 --> 00:19:12,480
अब जैसे मैं उदाहरण देता हूं। मैंने इच्छा मतलब मानसिक

277
00:19:12,480 --> 00:19:16,720
समझिए समझिए। जैसे पॉइंट क्या है कि जैसे आप आप समझने के लिए मुझसे पूछ रहे ना समझने कांसेप्ट

278
00:19:16,720 --> 00:19:20,720
समझने के लिए कि मानसिक मानसिक तरंग है क्या? आपने समझने के लिए बोला। तो

279
00:19:20,720 --> 00:19:24,880
समझने के लिए ही मैं दृष्टांत दे रहा हूं अपनी तरफ से। दृष्टांत ये दे रहा हूं

280
00:19:24,880 --> 00:19:25,380
कि

281
00:19:25,120 --> 00:19:29,600
जैसे चेतन जीव है। ठीक है? तो जीव इच्छा करता है और

282
00:19:29,600 --> 00:19:33,920
मन में विचार आता है। इच्छा करता है और हाथ उठता है। है ना? तो चाहने

283
00:19:33,920 --> 00:19:38,000
मात्र से ऐसा तो नहीं कि जीव अलग से हाथ के नीचे आकर के धक्का मार रहा है। ये तो हो नहीं

284
00:19:38,000 --> 00:19:38,960
रहा।

285
00:19:38,960 --> 00:19:42,960
चाहने मात्र से क्या हुआ? जैसे जीव इच्छा कर रहा है। मैं इच्छा

286
00:19:42,960 --> 00:19:47,120
कर रहा हूं तो मेरे इच्छा करने से मेरे शब्द मन में हो रहे हैं। मुंह से निकल रहे हैं। हाथ पैर

287
00:19:47,120 --> 00:19:51,200
हिल रहे हैं इत्यादि। है ना? हम हम यह इच्छा मात्र से ही तो हो रहा है। मैं कोई

288
00:19:51,200 --> 00:19:55,440
जैसे मैंने हाथ उठाया मैंने हाथ तो क्या मैं हाथों तो मेरा जो जीव है शरीर

289
00:19:55,440 --> 00:19:59,920
के बाहर आकर के हाथों के नीचे से ऊपर कोई धक्का थोड़ी लगा। नहीं नहीं अब मैं बताता हूं

290
00:19:59,920 --> 00:20:04,240
हमारी जो वो होती है माइटोकांड्रिया जहां से एनर्जी प्रोड्यूस होती है हां

291
00:20:04,240 --> 00:20:07,840
हमारे चाहने मात्र से वो एनर्जी काम करती है

292
00:20:07,840 --> 00:20:11,840
हम और वो एनर्जी देती है कि हाथ वो जो हमारी जो हड्डियों पे

293
00:20:11,840 --> 00:20:16,160
चिपकी हुई वो है नर्व वो सूचना के द्वारा उस मसल

294
00:20:16,160 --> 00:20:20,320
को ये सूचना पहुंचाती है उस मसल को कि तुमको जो एनर्जी कहां

295
00:20:20,320 --> 00:20:24,320
से आ रही है माइट्रोकांड्रिया से है ना ठीक है अब तुम्हें जो है वो

296
00:20:24,320 --> 00:20:28,320
क्या कहते हैं अगर फैला हुआ है इलास्टिसिटी है तो अब तुम्हें है

297
00:20:28,320 --> 00:20:32,400
तो [गला साफ़ करने की आवाज़] मेरा जीव जो है वो उसकी सूचना जाती है मन

298
00:20:32,400 --> 00:20:36,720
को मस्तिष्क को मान लो मस्तिष्क के द्वारा नर्वस के द्वारा उस चिपाक को जो

299
00:20:36,720 --> 00:20:40,720
हड्डियों से चिपकी हुई है ठीक है और वो जब सिकुड़ती है तो हाथ मेरा

300
00:20:40,720 --> 00:20:43,600
मुड़ने लगता है और वो जब फैलती है तो हाथ मेरा सीधा होने लगता

301
00:20:43,600 --> 00:20:47,600
है लेकिन चाहने मात्र से हुआ ना ये चाहने मात्र से एनर्जी का यूज किया

302
00:20:47,600 --> 00:20:51,600
तुम ये बताओ एनर्जी का अस्तित्व तो मान रहे हो कि नहीं मान रहे हो मैं उस

303
00:20:51,600 --> 00:20:53,680
तरीके से नहीं समझ पा रहा ना भैया इसीलिए तो मैं ऐसे बोल रहा

304
00:20:53,680 --> 00:20:57,760
हूं तो इस मैं इसीलिए तुम्हें समझाने के लिए बोल रहा हूं एनर्जी का अस्तित्व मान रहे हो

305
00:20:57,760 --> 00:21:01,760
कि नहीं? मैं नहीं वह एनर्जी किस चीज की क्या एनर्जी वह मेरे को समझना तो पड़ेगा

306
00:21:01,760 --> 00:21:06,000
ना पहले कुछ हां ना बोलने के लिए बिना समझे मैं कैसे बोल दूं आप बताइए कैसे तो मैंने

307
00:21:06,000 --> 00:21:10,000
मैंने बताया था कि भैया मैं जो खाता पीता हूं वो जो कार्ब

308
00:21:10,000 --> 00:21:14,160
कार्ब इंटेक करता हूं आप एटीपी की बात कर रहे हैं चलो एटीपी मान

309
00:21:14,160 --> 00:21:18,320
लो चलो ठीक है एटीपी हां एटीपी तो स्थूल शरीर में आ गया ना जीव

310
00:21:18,320 --> 00:21:22,320
जो क्रिया करता है वह तो सूक्ष्म शरीर में क्रिया करता है अरे तो मेरे चिपाक को तो एटीपी

311
00:21:22,320 --> 00:21:26,640
मिली ना वो तो सूक्ष्म शरीर में आ गया ना तो एटीपी

312
00:21:26,640 --> 00:21:30,800
मिली स्थूल शरीर में आ गया ना वह भाई एटीपी का अस्तित्व है कि नहीं?

313
00:21:30,800 --> 00:21:35,680
मैंने कहा मना किया अस्तित्व है कि नहीं? एटीपी अलग-अलग है। आ गया।

314
00:21:35,680 --> 00:21:39,920
ठीक है? तो मैं और एटीपी तो अलग-अलग होता है वो तो सूक्ष्म शरीर पे होता है। तो यानी

315
00:21:39,920 --> 00:21:43,920
कि यानी कि सूक्ष्म शरीर पर नियंत्रण के कारण सूक्ष्म

316
00:21:43,920 --> 00:21:48,160
शरीर ने एटीपी को यूज किया। ये माने

317
00:21:48,160 --> 00:21:53,120
सूक्ष्म शरीर क्या करता है? जैसे जीव का नियंत्रण सूक्ष्म शरीर पे है।

318
00:21:53,120 --> 00:21:57,520
उसने उसने सूक्ष्म शरीर को आर्डर दिया और सूक्ष्म शरीर ने एटीपी

319
00:21:57,520 --> 00:22:01,520
को यूज़ कर अरे केवल सोचा उसने बस केवल इच्छा

320
00:22:01,520 --> 00:22:05,680
की इच्छा उसने इच्छा की हां उसने इच्छा की उस इच्छा के कारण

321
00:22:05,680 --> 00:22:08,800
जो मेरा सूक्ष्म शरीर है उसने एटीपी को यूज़ किया और

322
00:22:08,800 --> 00:22:12,960
मेरे स्थूल शरीर पे उसका जो है रिफ्लेक्शन दिखाई एटीपी एटीपी भी जो हो गया वो आपका

323
00:22:12,960 --> 00:22:16,960
इसी में स्थूल में ही आ गया। यह होता है। मैं इसको पूरा बोल देता हूं कि जैसे जीव ने

324
00:22:16,960 --> 00:22:21,040
चाहा और जीव का जीव के चाहने से जो है यह वो सूक्ष्म

325
00:22:21,040 --> 00:22:25,040
शरीर है। ठीक है? जिसमें मन, बुद्धि, चित अहंकार आ जाता है। इसमें प्रतिक्रिया

326
00:22:25,040 --> 00:22:29,360
होती है। जब इसमें प्रतिक्रिया होती है तो इसके प्रतिक्रिया के अनुकूल शरीर में क्रिया

327
00:22:29,360 --> 00:22:33,360
होती है। अरे मेरे भाई फिर भी एक एनर्जी का तत्व लिया ना

328
00:22:33,360 --> 00:22:37,440
क्रिया कराने के लिए तो वो जो वो जो सारा कुछ एनर्जी का बता रहे हो ये पूरे

329
00:22:37,440 --> 00:22:41,440
शरीर के वो स्थूल शरीर [संगीत] में होगा ना। तो प्रसिद्ध स्थूल नहीं है। नहीं है।

330
00:22:41,440 --> 00:22:45,520
उससे जीव का लेना देना नहीं होता। जो जीव का लेना देना नहीं होता। बिल्कुल सही

331
00:22:45,520 --> 00:22:47,200
कह रहे हो। बिल्कुल सही कह रहे हो। अब मुझे ये

332
00:22:47,200 --> 00:22:51,200
बता दो कि मेरी मसल्स चिपाक को सिकुड़ने अथवा

333
00:22:51,200 --> 00:22:56,000
इलास्टिसिटी होने के लिए एक तुमने एटीपी नामक वो मानी शक्ति

334
00:22:56,000 --> 00:23:00,000
वो ऑर्डर्स कहीं से भी आए हो मगर उस शक्ति का उपयोग [संगीत] हुआ। हां।

335
00:23:00,000 --> 00:23:04,080
ठीक। हां। तो जो शक्ति का

336
00:23:04,080 --> 00:23:08,400
उपयोग हो रहा है पृथ्वी को [संगीत] खिसकाने इत्यादि में वो और ईश्वर अलग-अलग

337
00:23:08,400 --> 00:23:12,640
है क्या? [संगीत] जिस शक्ति का प्रयोग हो रहा है

338
00:23:12,640 --> 00:23:17,120
नहीं वो इच्छा तो उसका गुण है ना देखा बस [नाक से की जाने वाली आवाज़] क्या अब तुम

339
00:23:17,120 --> 00:23:21,280
अब बस अभी अब फिर बात करेंगे हां क्यों क्या हुआ अब फिर बात करेंगे

340
00:23:21,280 --> 00:23:25,440
मुझे निकलना भी है और यहां पे तुम थोड़ा वैसा दे रहे हो धुंधला

341
00:23:25,440 --> 00:23:29,440
आंसर क्लियर नहीं कर रहे हो नहीं धुंधला मतलब कैसे मैं समझ अब यहां तुम इच्छा पे क्यों ले

342
00:23:29,440 --> 00:23:33,760
आए तुमने माना ना मेरी मसल्स को हिलाने के लिए एक एनर्जी [संगीत] नामक तत्व है जिसको तुमने एटीपी

343
00:23:33,760 --> 00:23:37,760
नाम दिया अब अब जैसे मैंने मैंने जो उदाहरण दिया था मैंने वो क्या दिया था मैंने

344
00:23:37,760 --> 00:23:41,760
उदाहरण ये दिया था कि जिस प्रकार इसीलिए मैंने उसमें दो तीन पॉइंट इसलिए

345
00:23:41,760 --> 00:23:45,920
रखे हुए थे। अब इसमें मैंने उसमें बोला था विचार का भी बोला था। है ना विचार। अब

346
00:23:45,920 --> 00:23:50,320
इसमें यह होता है कि जैसे हाथ हिलाने पर तो जीव का डायरेक्ट कंट्रोल नहीं होता है। वो जैसा चाहता है उसके अकॉर्डिंग

347
00:23:50,320 --> 00:23:54,320
वो ईश्वर ही उसमें सहायक होता है हाथ हिलाने में। ठीक है? खैर वो मैंने मोटे मोटे भाषा में बोला

348
00:23:54,320 --> 00:23:58,480
था। लेकिन मैंने इसीलिए मैंने जानबूझ के उसके साथ में ये शब्द भी बोला था कि इच्छा [संगीत] मतलब चाहता है विचार करता

349
00:23:58,480 --> 00:24:02,320
है। तो जीव के चाहने मात्र से मन में मतलब वो जो विचार होते

350
00:24:02,320 --> 00:24:06,320
हैं। [संगीत] ठीक है? और वो उसके खुद के सामर्थ्य से होते हैं। उसमें कोई ऐसा आप ये नहीं दिखा सकते कि अलग से कोई

351
00:24:06,320 --> 00:24:10,400
एनर्जी कुछ ऐसा हो ये गलत बात है फिर। फिर तो खाना खाने की जरूरत ही नहीं है। चाहने

352
00:24:10,400 --> 00:24:11,920
मात्र से हो जाना चाहिए।

353
00:24:11,920 --> 00:24:15,920
एनर्जी तत्व को विषय हो गया ना। तो भाई स्थूल पृथ्वी स्थूल है ना

354
00:24:15,920 --> 00:24:20,000
उसको एनर्जी चाहिए ना फिर हिलने के लिए। पूरी बात तो सुनिए। पूरी

355
00:24:20,000 --> 00:24:24,160
बात [संगीत] जब तुम जीव के चाहने मात्र से स्थूल शरीर के

356
00:24:24,160 --> 00:24:28,240
ऊपर एक एनर्जी का स्थूल नहीं कह रहा। सूक्ष्म कह रहा

357
00:24:28,240 --> 00:24:29,440
हूं। इसीलिए तो

358
00:24:29,440 --> 00:24:33,520
कह रहा हूं सुनते ही नहीं हो आप मेरी बात। तुम कितना भी घुमा हो उसमें अंत में आएगा कि

359
00:24:33,520 --> 00:24:37,680
एक तत्व मानना पड़ेगा एनर्जी के रूप में जो कि एक देसी हो रहा है। मान लीजिए कभी कि सिद्ध

360
00:24:37,680 --> 00:24:41,680
नहीं कर पाएंगे। इतना भी जेली भी बना लिया सिद्ध नहीं पाए। अच्छा ठीक है। ठीक है। तुम गुस्सा

361
00:24:41,680 --> 00:24:45,680
मत हो। गुस्सा मत दो। चलो चलो आगे बढ़ो। बताओ। मैं ये शब्द मैं भी बोल दूंगा। क्या होता

362
00:24:45,680 --> 00:24:50,320
है? बताओ बताओ। चलो बताओ। है ना? ऐसे नहीं बोलना चाहिए। खैर

363
00:24:50,320 --> 00:24:55,920
बताओ बताओ। क्या है? सुन तो लिया एक बार में।

364
00:24:55,920 --> 00:24:59,920
निर्मल मुझे थोड़ा पंप मारने दो। फिर बात करेंगे। हां। चलिए ठीक है [संगीत] भैया। फिर बात

365
00:24:59,920 --> 00:25:05,440
करते हैं। जय श्री राम। सुन लो। घर वालों की भी सुन लो। दिन भर इसी में ना रहो।

366
00:25:05,440 --> 00:25:07,920
हां। चलो ठीक ठीक ठीक

367
00:25:07,920 --> 00:25:13,720
नमस्ते

368
00:25:13,720 --> 00:25:17,720
[संगीत]
