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00:00:07:03 आप कौन भाई बोल रहे हो? हिमांश नारायण द्विवेदी नाम है मेरा। हां नमस्कार भाई। सुभाष [गला साफ़ करने की आवाज़] भाई मेरा ये सवाल है कि जो निराकार शक्ति है ठीक है। तो निराकार शक्ति सर्वशक्तिमान है या साकार सर्व शक्तिमान है। व्यवहार में ना आ सकने वाला जो ईश्वर होता है वही निराकार शक्ति भी उसको कहते हैं जो सर्वत्र व्याप्त है और वही ईश्वर जब व्यवहार में आ सकने वाला होता है तो वो साकार हो जाता है तो फिर जो व्यवहार में जो ईश्वर नहीं है क्या वह शक्तिमान कहा जाएगा
00:00:49:06 ये ठीक इस प्रकार से है कि जो पूर्ण होता है ना पूर्ण वो अपने हर रूप में पूर्ण ही होता है पूर्ण में समझ यानी कि वो शक्तिमान है। निराकार स्थिति में भी वो शक्तिमान है। आपका ये कहने का वो शक्तिमान का अर्थ पहले समझ लो क्या है? सभी कार्यों को करने में जिसकी गति हो वो सर्वशक्तिमान हो गया। तो जो वो जो साकार आपको दिखाई दे रहा है अगर आप उससे कहोगे कि भैया इसी समय आप अमेरिका में प्रकट होकर दिखाओ मुझे। तो वो दिखा देगा। अगर आप उससे कहोगे भैया पहाड़ को उठा के दिखाओ इसी समय कहीं दूसरी जगह पर पहाड़ को उठा के दिखाओ तो देगा इससे सिद्ध होगा कि वो सर्वशक्तिमान है तो निराकार जो शक्ति है निराकार रूप में जो परमात्मा है जो ईश्वर है क्या व्यवहार में ना आने वाले रूप व्यवहार में ना आने वाले
00:01:49:03 का विषय नहीं है व्यवहार में जो ना आने आने वाला जो ईश्वर है वो वो शक्तिमान है। आप इससे सहमत हो वो मौलिक स्वरूप है। कालिक स्वरूप है। मौलिक स्वरूप यानी प्रथम स्थिति परमात्मा की परमेश्वर की निराकार है। यही है ना? उसके बाद तो परमात्मा साकार में व्यवहार में न आ सकने वाला। मैं यही कह रहा हूं। प्रथम स्थिति ना निराकारी मान ले या कुछ उसके बाद सबसे पहले परमा
00:02:30:21 जब वो व्यवहार में ना आ सकने वाला प्रवचनीय हो गया ना अगर हम कुछ ये भी शब्द दे रहे हैं तो ये भी तो वचन दे रहे है ना उसको वचन वचन के व्यवहार में आ रहा है तो इसलिए उसको कहते हैं व्यवहार में ना आ सकने वाला इंद्रियोंत है जो इंद्रियों का विषय नहीं मैं आप मैं आपकी बात को सुन चुका हूं आप वही बात कह रहे हो मैं ये कह रहा हूं जो परमात्मा निराकार स्थिति में है। यानी कि उसकी प्रथम स्थिति मूल स्वरूप उसका निराकार है। ये बात दूसरी है कि वो अन्य रूप बनाकर वो व्यवहार में आ जाता है। वो तो सेकंड स्थिति होगी। तो प्रथम स्थिति निराकार स्थिति है ना। मैं ये पूछ रहा हूं आपसे। हां बिल्कुल है। तो प्रथम स्थिति निराकार शक्तिमान है। बिल्कुल है। तो मुझे ये बताइए शक्तिमान का अर्थ ये होता है वो सब कुछ कार्य कर सकता है। तो गीता ज्ञान दाता ने गीता ज्ञान दाता ने ये गीता जी ने बोला है कि मैं जब धर्म की हानि होती है तो मैं प्रकट होता हूं। राम के रूप में या श्री कृष्ण के रूप में। आप ये इस बात को मानते हो आप? हां हां तो मैं मैं ये सवाल आपसे मेरा यह सवाल है क्या
00:03:45:22 गीता ज्ञान दाता राम कृष्ण रूप में आकर वो अपनी शक्ति दिखा सकता है तो निराकार में क्यों नहीं दिखाई उसने इसका इसका सीधा सा अर्थ ये बनता है कि वो निराकार शक्ति समर्थ नहीं है क्योंकि उसको आकार में एक मिनट एक मिनट एक मिनट आपने आप देखो आप रिजल्ट मत दो आपने कहा क्यों नहीं दिखाई ठीक है क्यों नहीं दिखाई कहा है ना आपने वो क्यों क्यों नहीं क्यों नहीं दिखाई का मुझसे उत्तर ले लो क्यों नहीं दिखाई का उत्तर ले लो वो कैसे उन्होंने कहा मैं आपका प्रश्न मैं समझ गया आपका प्रश्न मैं समझ गया बार-ब आपका प्रश्न मैं समझ गया उत्तर ले लो पहली बात वो निराकार रहते हुए नहीं कर सकता ये कहां कहा उन्होंने निराकार रहते हुए नहीं कर सकता यह तो कहीं नहीं स्वीकार किया गया दूसरी कहीं पर दुष्टों का नाश हो रहा है, कहीं पर कुछ हो रहा है, किसी को हार्ट अटैक आ रहा है, कोई मर रहा है। कोई बच्चों का शोषण करने वाला मर गया। उसको ये हो गया, वो हो गया। ये कौन सी शक्ति ने किया? निराकार रह के तो वो लगातार काम कर ही रहा है भाई सारे जो उसके करने के हैं। तो दुष्टों के लिए उसका सगुण
00:05:01:06 साकार होकर प्रकट होना आवश्यक नहीं है। मगर वो धर्म की हानि के लिए सगुण साकार होकर प्रकट इसलिए होते हैं कि वो अपना एक ऐसा रूप प्रदान कर पाए जिस जो हमारी इंद्रियों की सीमा में आ पाए। मैंने कहा था ना व्यवहार में ना आ सकने वाला है पहला रूप तो तो हमारी इंद्रियों का जो विषय बन पाए जिसके कारण हम उसके प्रति आकर्षित हो पाए और जिसके कारण उसकी भक्ति करके हम मुक्ति पथ पे आगे बढ़ पाए तो साधु भक्तों के उद्धार के लिए उसमें क्या लिखा है अगली लाइन क्या लिखी है साधु भक्तों के उद्धार के लिए मैं प्रकट होता हूं तो वो जो अपना सगुण साकार स्वरूप बनाते हैं वो केवल यही नहीं है कि उससे किसी को किसी का अंत करना अंत तो वो केवल मन में शक्ति कर दे और हो जाए तब भी हो सकता है। केवल मन में संकल्प करे हो जाएगा। उसके लिए उसको प्रकट होने की जरूरत थोड़ी ना है। मगर वो ऐसी लीलात्मक गतिविधि में इनवॉल्व होता है जिससे कि व्यक्ति की चाह का विषय बन सके। इंद्रियों की सीमा में आ सके। जिससे कि व्यक्ति उसके बारे में बात कर सके। उसके बारे में सोच सके। उसके बारे में चिंतन कर सके। क्योंकि भगवत गीता में ही लिखा हुआ है कि जब हम किसी चीज का चिंतन करते हैं तो उसके प्रति हम आसक्त होते हैं और आसक्त होते हैं तो जब वो आसक्ति पूर्ण
00:06:16:09 नहीं होती है तो हमें क्रोध आता है। जब क्रोध आता है तो हमारी जो निर्णायक क्षमता है वो प्रभावित होती है। गलत निर्णय होते हैं जिसका परिणाम दुष्परिणाम हमारे जीवन में हमें झेलना पड़ता है। तो जब हम ईश्वर का चिंतन नहीं करेंगे तो हम किसका करेंगे? माया का भौतिक पदार्थों का। जिन पदार्थों का चिंतन करने के लिए गीता में मना किया गया है कि जिसको कहा गया है कि जो जो है त्रिगुण त्रिगुण तीन गुणों की जो भक्ति करते हैं जिसके नाम पर आपके जो गुरुदेव है वो ये कहते थे कि भैया यहां तो ब्रह्मा विष्णु महेश की भक्ति करने का मना कर दिया गया। वहां पर कहा गया जो भौतिक पदार्थ होते हैं सतज और तमोगुणी कुल मिलाकर के सत रज या तम से बने होते हैं। तो भौतिक पदार्थों की भक्ति जो करने हैं वो नहीं करनी चाहिए। तो ये यहां पर उसी चीज की काट है। काट क्या है? कि जब हम ईश्वर का चिंतन नहीं कर रहे हैं तो हम किसका कर रहे हैं? ईश्वर का चिंतन तो लगातार करेंगे। जैसे गीता में यह बात भी कही गई है कि भैया आप एक क्षण के लिए भी बिना कुछ कर्म किए नहीं रह सकते। इसलिए शास्त्र सम्मत कर्म सदैव करते रहो। ये क्यों कहा गया है? क्योंकि अगर हम चिंतन भी अगर ईश्वर का नहीं करेंगे तो हम किसी ना किसी का तो करेंगे। और यदि करेंगे तो फिर हम उसके प्रति
00:07:31:13 आकृष्ट होंगे, आकृष्ट होंगे, आसक्ति आएगी और प्राप्त ना हो पाने की स्थिति में क्रोध आएगा। क्रोध से निर्णायक क्षमता प्रभावित हो जाएगी। यह सारी चीजें हैं। इसलिए भगवान ऐसा स्वरूप धारण करते हैं जो कि हमारे चिंतन का विषय बन सके। हम उनकी घटनाएं याद कर सके। ऐसे मारा था, वैसे मारा था, ऐसे हुआ था, वैसे हुआ था। इस कारण से सत का चिंतन करने के कारण हमारी उसके प्रति आसक्ति हो। आसक्ति होने के कारण भौतिक पदार्थों के चिंतन से हम बचे और मुक्ति पथ पर आगे बढ़ सके। तो आप यह बताइए कि क्या हमें निराकार परमात्मा की भक्ति करनी चाहिए? उसमें श्रद्धा होनी चाहिए या साकार में होनी चाहिए? साकार निराकार में यदि श्रद्धा में फलदायक है या साकार में फलदायक है? वो गीता में आंसर दिया गया है निराकार की भक्ति कठिन है। फलदायक दोनों है। इंद्रियों इंद्रियातीत होने के कारण वो भक्ति कठिन है। फलदायक दोनों है। तो इसका मतलब ये बताइए गीता ज्ञान दाता ये कह रहा है कि परम शांति की खोज कर वो परम शांति यानी कि अरे यार पहले तुम सर्व शक्तिमान का सही करो ना। तुम क्या मानते हो? सर्वशक्तिमान सर्व शक्तिमान नहीं है। सर्व शक्तिमान
00:08:46:24 है। पहली बात तो हां पहले सही करो निराकार स्थिति में सिद्ध नहीं हो रहा बताओ ना शक्तिमान भाई मेरी बात सुनो सुनो निराकार शक्ति में वो सर्वशक्तिमान सिद्ध नहीं हो रहा क्योंकि उसको रूप बनाना पड़ रहा है और जो कि मुझे बनाना पड़ रहा है बिना बनाए भी तो मैं प्रकट हो रहा हूं बिना बनाया मैं प्रकट हो रहा हूं एक मिनट एक मिनट एक मिनट एक मिनट उसमें उसमें यह लिखा है क्या कि मैं जो है प्रकट हुए बिना कोई काम नहीं कर सकता भाई मैं जब देखता हूं धर्म की हानि देखता हूं तो मैं प्रकट होता हूं पूछ रहा हूं ना देखो मैं पूछ रहा हूं साकार रूप में आकर उन्होंने कार्य किए रामकृष्ण के रूप में राक्षसों को भी मारा और भक्तों का भी उद्धार किया तो मैं आपसे ये पूछ रहा हूं निराकार स्थिति में ऐसे कौन से कार्य किए जो हम भी माने कि हां ये कार्य निराकार स्थिति में भी कर सकता है। यानी कि वो सर्वशक्तिमान अर्जित हो सकता है। ये बताओ आज तक आज तक कोई व्यक्ति अपनी मौत मरा है क्या? दुष्ट व्यक्ति कोई व्यक्ति अपनी मौत मरा है क्या? आज तक
00:10:01:27 तुम्हारी जानकारी में जिसमें भगवान भगवान मौत नहीं मरा तो उसको मारने के लिए साकार उद्धारण तो करना पड़ा ना निराकार को। अरे मैं मैं पूछ तो रहा हूं। मैं पूछ रहा हूं ना भाई कि आज तक कोई व्यक्ति अपनी मौत मरा है क्या? बिना भगवान के आए। अरे भाई बिल्कुल मरा मरा है। कैसे मरा? वो कैसे मरा वो विषय अलग है। बात इसकी अरे अलग कैसे भाई? अलग कैसे हो गया? अलग कैसे हो गया? अलग कैसे? जब भगवान साकार स्वरूप में नहीं आए तब भी वो मरा ना। कोई दुष्ट व्यक्ति वो कैसे मरा? बताओ। कौन सी शक्ति थी वहां पे? तो वो भगवान आकर उसको मारे गया क्या? अरे तुम अब तुम बातें मत घुमाओ। मुझे ये बताओ कोई भी दुष्ट व्यक्ति आज तक मरा है भगवान के आए बिना साकार स्वरूप के बिना कि नहीं मरा है? बिल्कुल मैं अब हो गया आपका हो गया। अब हो गया इसका जवाब दो पहले।
00:11:03:01 अरे तुमने दुष्ट व्यक्ति अपने मरा। दुष्ट व्यक्ति जैसे उदाहरण ले लिए ना। रावण दुष्ट व्यक्ति था। मैं रावण की बात नहीं कर रहा हूं। रावण वगैरह को सबको छोड़ दो। मैं कह रहा हूं मैं कह रहा हूं। मैं कह रहा हूं तुम्हारी जानकारी में आधुनिक काल में आज के टाइम में कोई दुष्ट व्यक्ति बिना भगवान के प्रकट हुए मरा कि नहीं मरा? बहुत मरे भी है और नहीं भी मरे। मरे हैं तो जो मरे हैं उनमें कौन सी शक्ति से मरे हैं वो? तो यहां पर यहां पर परमात्मा को कैसे सिद्ध कर दिया कि उसे निराकार ने वो कार्य कर रहे हैं। अच्छा तो मतलब की अपने आप अपने आप को ही एक और शक्ति मानते हो तुम। एक और शक्ति मानते हो परमात्मा के अलावा उसका जो लोगों को मार रही है वो निराकार शक्ति जो आप कह रहे हो जिस शक्ति के आधार से वो दुष्ट व्यक्ति मर रहा है अब इनका हो गया इनका हो गया ये ये जो है अब ये कह रहे हैं कि हम लोग हम लोग जो जो दुनिया में और मौतें हो रही हैं जो कुछ हो रहा है जो संहार हो रहा है दुष्टों का पाप का अंत हो रहा है कर्मों के फल की सजा मिल रही है वह तो यह सिद्धि नहीं हो रहा कि भगवान कर रहे समझ गए? अरे भाई निराकार
00:12:15:08 मतलब इसका मतलब इसका मतलब एक मिनट एक मिनट एक मिनट इसका मतलब आप सर्वाधार नहीं मानते हो भगवान को। हेलो क्या? हां इसका मतलब मानते हो भगवान को। मैं कह रहा हूं मैंने मैंने अपना उत्तर दे दिया मैं पूछ रहा हूं अब मैं पूछ रहा हूं अरे मैं इसीलिए पूछ रहा हूं सर्धार है भगवान की नहीं है मतलब की दुनिया में होने वाली हवा उसका कंट्रोलर है उसका कंट्रोलर है जैसे का
00:13:01:08 राजा तो साकार हुआ ना यानी कैसे यानी कि जो दुष्ट मरा उसके कंट्रोल में मरा उसकी पाप से बिल्कुल मरा पर वो साकार में तो बैठा है ना तो निराकार कैसे करेगा अरे तुम तो कह रहे हो उससे नहीं मरा साबित कैसे होता है तुम कह रहे हो कि हो गया अब उसी से मारा नहीं अरे ये पागल हो गया है ये व्यक्ति पागल हो गया हटाओ इसको अभी कह रहा था कि ये सिद्ध कैसे होगा कि भगवान ने किया। अब खुद ही कह रहा था भगवान के कंट्रोल से हुआ। तो भगवान अपने सारे कार्य बिना सगुण साकार रूप में प्रकट होते हुए भी करते हैं। कर सकते हैं। और गीता में उन्होंने ये नहीं कहा मैं विवश हूं। धर्म की हानि होने के टाइम पर प्रकट होने के लिए मैं विवश हूं। मगर मैं मैं प्रकट होता हूं। साधु भक्तों के उद्धार के लिए जिससे कि उसका चिंतन करके व्यक्ति पद पर आगे बढ़ सके। इच्छा से प्रकट होता नहीं है वो मन में संकल्प ले लेंगे तब भी हो जाता
00:14:08:14 प्रेरणा भी करनी है ना लोगों को ये पगलू क्या है ये पगलू ये पगलू फस कहां पे रहे मालूम है इनका पागलपन क्या है इनका पागलपन यहां पे है कि ये कह रहे हैं कि कबीर की शक्ति सर्वत्र व्याप्त है जो काम करती रहती है अगर कबीर सगुण साकार में प्रकट हो भी ना तब भी मतलब कबीर अगर यहां पे नहीं है तो उसकी है। मगर वहीं पर अगर हम यह कहे कि भाई निराकार शक्ति के रूप में सारे काम कर रहा है तो ईश्वर का काम नहीं है। ये तो अपनी मौत मर गया। समझ रहे हो? ये पागलपन इनका और अगर हम ये कहेंगे कि उसकी शक्ति सब जगह फैली है और सब काम हो रहे हैं। तो ये कहेंगे हां ये कबीर का काम है। समझ रहे हो? भले ही अगर कबीर एक जगह बैठा हुआ है, तो फिर उसके आसपास की जगह किसने बनाई? अगर कबीर एक जगह बैठा हुआ है, क्या उसका पूरा नियंत्रण पूरे संसार पर नहीं है? बातों को रिपीट करने से बातें सही नहीं सिद्ध हो जाती है। जी बिल्कुल। जी।
00:15:24:26 [संगीत]
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सर्वशक्तिमान कौन? निराकार के सिद्धांत पर रामपाल के चेले की बोलती बंद
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